RBSE Solutions Class 11 Physical Geography Chapter 8 प्रमुख स्थलाकृति स्वरूप

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Detailed Chapter 8 प्रमुख स्थलाकृति स्वरूप RBSE Solutions for Class 11 Geography

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Class 11 Geography Chapter 8 प्रमुख स्थलाकृति स्वरूप RBSE Solutions PDF

RBSE Class 11 Physical Geography Chapter 8 पाठ्य पुस्तक के अभ्यास प्रश्न

RBSE Class 11 Physical Geography Chapter 8 वस्तुनिष्ठ प्रश्न

 

Question 1. प्रथम श्रेणी के उच्चावच कौन-से हैं?
(अ) डेल्टा व घाटियाँ
(ब) महाद्वीप व महासागर
(स) पर्वत व पठार
(द) मैदान व तट
Answer: (ब) महाद्वीप व महासागर
In simple words: पृथ्वी पर मौजूद सबसे बड़े प्राकृतिक आकार महाद्वीप और महासागर ही हैं. ये जमीन और पानी के विशाल खंड हैं जो धरती की सतह का पहला और सबसे बड़ा हिस्सा बनाते हैं.

🎯 Exam Tip: स्थलाकृतिक स्वरूपों को उनकी बनावट और आकार के आधार पर विभिन्न श्रेणियों में बांटा जाता है. पहली श्रेणी में सबसे बड़े और मौलिक स्वरूप आते हैं.

 

Question 3. निम्नलिखित में से कौन अंतः पर्वतीय पठार का उदाहरण है?
(अ) पेंटागोनिया का पठार
(ब) तिब्बत का पठार
(स) लोयस का पठार
(द) मालागासी का पठार
Answer: (द) मालागासी का पठार
In simple words: अंतः पर्वतीय पठार ऐसे पठार होते हैं जो चारों तरफ से पहाड़ों से घिरे होते हैं. मालागासी का पठार एक ऐसा ही उदाहरण है.

🎯 Exam Tip: विभिन्न प्रकार के पठारों को उनके भौगोलिक स्थान और आसपास की स्थलाकृति के आधार पर पहचानना महत्वपूर्ण है.

 

Question 4. निम्नलिखित में से कौन संग्रहित पर्वत का उदाहरण है?
(अ) हिमालये
(ब) जापान का फ्यूजीयामा
(स) यूराल
(द) एण्डीज
Answer: (ब) जापान का फ्यूजीयामा
In simple words: संग्रहित पर्वत वे होते हैं जो ज्वालामुखी से निकली राख और लावा या हवा-पानी द्वारा जमा की गई मिट्टी के ढेर से बनते हैं. जापान का माउंट फ्यूजी एक प्रसिद्ध ज्वालामुखी पर्वत है.

🎯 Exam Tip: पर्वतों के निर्माण के तरीकों को समझना आवश्यक है; वलित, ब्लॉक, संग्रहित और गुम्बदाकार पर्वत प्रमुख प्रकार हैं.

 

Question 5. निम्नलिखित में कौन-सा पठार आई पठार का उदाहरण है?
(अ) पोतवार का पठार
(ब) गोबी का पठार
(स) चेरापूंजी का पठार
(द) तारिम का पठार
Answer: (स) चेरापूंजी का पठार
In simple words: चेरापूंजी का पठार एक ऐसा पठार है जहाँ बहुत ज़्यादा बारिश होती है.

🎯 Exam Tip: पठारों को उनकी जलवायु विशेषताओं जैसे आर्द्र या शुष्क होने के आधार पर वर्गीकृत किया जा सकता है.

RBSE Class 11 Physical Geography Chapter 8 अतिलघुत्तरात्मक प्रश्न

 

Question 6. विश्व के नवीनतम पर्वत कौन-से हैं?
Answer: हिमालय, यूराल, और एण्डीज जैसे पर्वत विश्व के नवीनतम पर्वत हैं. ये पर्वत नए भूवैज्ञानिक कालों में बने हैं.
In simple words: दुनिया के सबसे नए पर्वत हिमालय, यूराल और एण्डीज हैं.

🎯 Exam Tip: नवीनतम पर्वत आमतौर पर वलित पर्वत होते हैं और अभी भी भूगर्भीय गतिविधियों के कारण ऊपर उठ रहे हैं.

 

Question 8. नर्मदा नदी किस प्रकार की घाटी में प्रवाहित होती है?
Answer: नर्मदा नदी एक भ्रंश घाटी में बहती है. यह पूर्व से पश्चिम दिशा में बहने वाली नदी है, और यह भूस्खलन (भ्रंशन) की प्रक्रिया से बनी हुई एक गहरी घाटी से होकर गुजरती है.
In simple words: नर्मदा नदी एक दरार वाली घाटी से होकर बहती है, जो जमीन के धंसने से बनी है.

🎯 Exam Tip: भ्रंश घाटी का निर्माण पृथ्वी की पपड़ी में तनाव बल के कारण दो समानांतर दरारों के बीच की भूमि के धंसने से होता है.

 

Question 9. अवशिष्ट पर्वत किसे कहते हैं?
Answer: अवशिष्ट पर्वत उन कठोर चट्टानी भू-भागों को कहते हैं जो आसपास के क्षेत्रों की तुलना में ऊँचे उठे रह जाते हैं, क्योंकि कटाव करने वाली बाहरी शक्तियाँ (जैसे हवा, पानी) उन्हें पूरी तरह से नहीं काट पातीं. ये पर्वत कटाव के बाद बचे हुए हिस्से होते हैं.
In simple words: अवशिष्ट पर्वत वे ऊँचे पहाड़ हैं जो हवा और पानी से कटने के बाद भी अपनी जगह पर टिके रहते हैं.

🎯 Exam Tip: अवशिष्ट पर्वत आमतौर पर पुराने पर्वत होते हैं जो लंबे समय तक अपरदन का सामना कर चुके होते हैं.

 

Question 10. पर्वतपदीय पठार किसे कहते हैं?
Answer: पर्वतपदीय पठार ऐसे पठार होते हैं जो पहाड़ों की तलहटी में स्थित होते हैं. इनके एक तरफ ऊँचे पहाड़ होते हैं और दूसरी तरफ समुद्र या कोई बड़ा मैदान होता है.
In simple words: पर्वतपदीय पठार पहाड़ों के नीचे पाए जाते हैं, जिनके एक तरफ पहाड़ और दूसरी तरफ मैदान या समुद्र होता है.

🎯 Exam Tip: पर्वतपदीय पठार अक्सर नदी घाटियों द्वारा काटे जाते हैं, जिससे उनका स्वरूप विषम हो सकता है.

RBSE Class 11 Physical Geography Chapter 8 लघुत्तरात्मक प्रश्न

 

Question 11. हर्सीनियन पर्वत के नाम लिखिए।
Answer: हर्सीनियन पर्वत निर्माण हलचलें लगभग 22 करोड़ वर्ष पहले हुई थीं. इस दौरान थ्यानशान, अल्टाई, खिंगन, नानशान, ऑस्ट्रेलिया के पूर्वी कार्डिलेरा पर्वत और यूरोप के पेनाइन हार्ज जैसे पर्वत बने थे.
In simple words: हर्सीनियन पर्वत वे हैं जो करोड़ों साल पहले एक बड़ी हलचल से बने थे, जैसे थ्यानशान और पेनाइन.

🎯 Exam Tip: हर्सीनियन पर्वत क्रम पुराने वलित पर्वतों में से एक है और अक्सर खनिज संसाधनों से भरपूर होते हैं.

 

Question 12. हिमानीकृत पठारों का उल्लेख कीजिए।
Answer: हिमानीकृत पठार वे होते हैं जिनका निर्माण ऊँचे पहाड़ी इलाकों या ठंडे क्षेत्रों में हिमनदियों (ग्लेशियरों) द्वारा कटाव से होता है. हिमनद ज़मीन को घिसकर सपाट बना देते हैं. गढ़वाल, लेब्रोडोर, स्केण्डिनेबिया, अलास्का, अंटार्कटिका, अफ्रीका का दक्षिणी-पूर्वी पठार, जर्मनी का प्रशा पठार और कश्मीर का गुलमर्ग का पठार इसी प्रकार के पठार हैं.
In simple words: हिमानीकृत पठार ग्लेशियरों द्वारा पहाड़ों को घिसकर सपाट बनाने से बनते हैं, जैसे अलास्का का पठार.

🎯 Exam Tip: हिमानीकृत पठार आमतौर पर उच्च अक्षांशों या अधिक ऊँचाई वाले क्षेत्रों में पाए जाते हैं जहाँ ग्लेशियरों की गतिविधि अधिक होती है.

 

Question 14. पूर्ववर्ती घाटी किसे कहते हैं?
Answer: पूर्ववर्ती घाटी उसे कहते हैं जब कोई नदी जमीन के ऊँचा उठने से पहले से मौजूद अपनी पुरानी घाटी में ही बहती रहती है, भले ही जमीन ऊपर उठ जाए. नदी अपनी तलहटी को काटकर अपनी पुरानी धारा बनाए रखती है.
In simple words: पूर्ववर्ती घाटी तब बनती है जब ज़मीन उठने पर भी नदी अपनी पुरानी घाटी में ही बहना जारी रखती है.

🎯 Exam Tip: पूर्ववर्ती घाटियाँ शक्तिशाली अपरदन क्षमता वाली नदियों द्वारा बनाई जाती हैं जो भूमि उत्थान की दर से भी तेज गति से कटाव कर सकती हैं.

 

Question 15. प्रौढ़ पठार किसे कहते हैं? उदाहरण दीजिए।
Answer: प्रौढ़ पठार ऐसे पठार होते हैं जिनकी सतह ऊबड़-खाबड़ और विषम होती है, जहाँ गुफाएँ और तेज़ ढलान वाली चट्टानी चोटियाँ (कटक) ज़्यादा फैली होती हैं. शुष्क और आर्द्र क्षेत्रों में इनकी संरचना अलग-अलग दिखती है, और इनके किनारे अक्सर सीढ़ीनुमा होते हैं. अप्लेशियन का पठार इसका एक उदाहरण है.
In simple words: प्रौढ़ पठार ऊबड़-खाबड़ और ढलान वाले होते हैं, जैसे अप्लेशियन का पठार.

🎯 Exam Tip: प्रौढ़ पठार अपनी गहरी घाटियों और तीव्र ढलानों के लिए जाने जाते हैं, जो अपरदन के मध्यम चरण को दर्शाते हैं.

 

Question 16. पर्वतों का वर्गीकरण कीजिए।
Answer: पर्वत दूसरी श्रेणी के उच्चावच होते हैं जो पृथ्वी के अंदरूनी बलों के कारण बनते हैं. दुनिया में सभी पर्वत एक जैसे नहीं होते; उनकी बनावट, ऊँचाई, उम्र, स्थान और संरचना में अंतर होता है. इन विशेषताओं के आधार पर पर्वतों को मुख्य रूप से निम्न भागों में वर्गीकृत किया गया है:
मैदानों का वर्गीकरण

उत्पत्ति के आधार परऊँचाई के आधार परआयु के आधार पर
(i) वलित पर्वत(i) अधिक ऊँचे पर्वत(i) पर्मियन पर्वत
(ii) गुम्बदाकार पर्वत(ii) साधारण ऊँचे पर्वत(ii) कैलिडोनियन पर्वत
(iii) संग्रहित पर्वत(iii) कम ऊँचे पर्वत(iii) हर्मीनियन पर्वत
(iv) ब्लॉक पर्वत(iv) निम्न ऊँचे पर्वत(iv) अल्पाइन पर्वत
(v) अवशिष्ट पर्वत

(i) वलित पर्वत: जब पृथ्वी के भीतर के बलों के कारण चट्टानों में मोड़ या वलन पड़ जाते हैं, तो ये ऊँचे उठकर वलित पर्वत बन जाते हैं. हिमालय, यूराल और एण्डीज इसके उदाहरण हैं, जो दुनिया के सबसे नए पर्वत हैं और इनमें जीवाश्म नहीं पाए जाते. अपनति अभिनति
(ii) गुम्बदाकार पर्वत (Dome Shaped Mountain): जब पृथ्वी के अंदर गर्म लावा बाहर आने की कोशिश करता है, लेकिन पूरी तरह बाहर नहीं आ पाता, तो ऊपर की चट्टानें गुम्बद के आकार में ऊपर उठ जाती हैं. उत्तरी अमेरिका में हेनरी और यून्टा पर्वत इसके उदाहरण हैं.
(iii) संग्रहित पर्वत (Accumulated Mountain): ये पर्वत हवा, नदी, हिमनद, लहरों और ज्वालामुखी से जमा हुए पदार्थों और मलबे के बड़े ढेरों से बनते हैं. जापान का फ्यूजीयामा, इटली का विसूवियस और अफ्रीका का किलीमंजारो इसके उदाहरण हैं.
(iv) भ्रंशोत्थ अथवा ब्लॉक पर्वत (Faulted Or Block Mountain): जब दो समानांतर दरारों के बीच का हिस्सा ऊपर उठ जाता है या आसपास के हिस्से नीचे धंस जाते हैं, तो ब्लॉक पर्वत बनते हैं. इन्हें भ्रंशोत्थित पर्वत भी कहते हैं. ब्लॉक पर्वत
(v) अवशिष्ट पर्वत (Residual Mountain): जब नदी, पवन, लहर, हिमनद जैसे कटाव करने वाले कारक आसपास के क्षेत्र को काट देते हैं, लेकिन कठोर चट्टानी भू-भाग ऊँचा उठा रह जाता है, तो उसे अवशिष्ट पर्वत कहते हैं. ये पर्वत तब बनते हैं जब पठारी भूमि का कटाव होता है लेकिन बीच की चट्टानें नहीं कटतीं. अवशिष्ट पर्वत
(vi) मिश्रित पर्वत: ऐसे पर्वत जो कई प्रकार के पर्वतीय रूपों का मिश्रण होते हैं, उन्हें मिश्रित पर्वत कहा जाता है.
In simple words: पर्वतों को उनके बनने के तरीके, ऊँचाई और उम्र के हिसाब से बांटा गया है. इनमें वलित, गुम्बदाकार, संग्रहित, ब्लॉक और बचे हुए पर्वत शामिल हैं.

🎯 Exam Tip: वर्गीकरण के सभी आधारों और प्रत्येक प्रकार के पर्वतों के मुख्य उदाहरणों को याद रखना महत्वपूर्ण है, क्योंकि ये अक्सर सीधे प्रश्न के रूप में पूछे जाते हैं.

 

Question 17. उत्पत्ति के आधार पर पठारों का वर्गीकरण कीजिए।
Answer: पठार पृथ्वी की सतह पर दूसरे दर्जे के स्थलरूप हैं, जो पर्वतों के बाद आते हैं. उनकी स्थिति, बनने का तरीका, जलवायु और विकास की अवस्थाओं के आधार पर पठारों को बांटा गया है. उत्पत्ति के आधार पर पठारों को निम्न भागों में बांटा गया है:
(i) लावा निर्मित पठार: जब पृथ्वी के अंदर से लावा निकलकर बड़े क्षेत्र में फैल जाता है, तो लावा निर्मित पठार बनते हैं. ज्वालामुखी गतिविधियों का इसमें बड़ा योगदान होता है. लावा के प्रकार (तरल या गाढ़ा) के आधार पर पठार का विस्तार और ऊँचाई अलग-अलग हो सकती है. कोलम्बिया का पठार और दक्षिण भारत का पठार इसके मुख्य उदाहरण हैं.
(ii) हिमानीकृत पठार: ये पठार ऊँचे या ठंडे क्षेत्रों में हिमनदियों द्वारा कटाव के कारण बनते हैं. हिमनद पत्थरों को घिसकर पठारों को सपाट बनाते हैं. गढ़वाल, लेब्रोडोर, स्केण्डिनेबिया, अलास्का, ग्रीनलैण्ड, अफ्रीका का दक्षिणी-पूर्वी पठार, कनाडा, जर्मनी का प्रशा पठार और अंटार्कटिका के पठार इसके उदाहरण हैं.
(iii) वायुजनित पठार: ये पठार हवा द्वारा लाई गई मिट्टी (लोयस) के बहुत ज़्यादा जमा होने से बनते हैं. हवा इन पठारों के निर्माण में मिट्टी को दूर-दूर तक ले जाती है. पाकिस्तान में पोतवार का पठार, चीन में लोयस का पठार, उत्तरी अमेरिका और अफ्रीका के कुछ पठार इसके उदाहरण हैं.
(iv) जलज पठार: ऐसे पठार जो समुद्री भागों या झीलों में जमा हुए मलबे के लगातार जमा होने और कभी-कभी आंतरिक हलचलों से उनके ऊपर उठने से बनते हैं, उन्हें जलज पठार कहते हैं. यह तब होता है जब झीलें नदियों द्वारा लाए गए तलछट से भर जाती हैं, और उनकी तलहटी ऊपर उठकर मैदान बन जाती है. हंगरी का मैदान और अमेरिका का प्रेयरी प्रदेश इसके उदाहरण हैं.
In simple words: पठारों को उनके बनने के तरीके के आधार पर लावा, ग्लेशियर, हवा और पानी से बने पठारों में बांटा गया है.

🎯 Exam Tip: प्रत्येक प्रकार के पठार के निर्माण की प्रक्रिया और उसके प्रमुख भौगोलिक उदाहरणों को ध्यान में रखें.

 

Question 18. मैदानों के वर्गीकरण एवं महत्त्व पर प्रकाश डालिए।
Answer: मैदान समतल, धीरे ढलान वाले और कम ऊँचाई वाले भू-भाग होते हैं. दुनिया में मैदानों की स्थिति, बनावट और बनने के कारण अलग-अलग होते हैं, इसलिए वे कई प्रकार के होते हैं. मैदान मुख्य रूप से अपरदन (कटाव) और निक्षेपण (जमाव) की क्रियाओं से बनते हैं. इन दो क्रियाओं के आधार पर मैदानों को निम्न प्रकार से वर्गीकृत किया गया है:
मैदानों का वर्गीकरण
निर्माण प्रक्रिया के आधार पर

अपरदनात्मक मैदाननिक्षेपणात्मक मैदान
(i) नदीकृत मैदान(i) जलोढ़ मैदान
(ii) हिमानीकृत मैदान(ii) हिमोढ़ मैदान
(iii) वायु घर्षित मैदान(iii) लोयस मैदान
(iv) कार्स्ट मैदान(iv) लावा निर्मित मैदान
(v) झील निर्मित मैदान

(i) अपरदनात्मक मैदान: ये मैदान कटाव की प्रक्रिया के अंत में बनते हैं, जब सभी ऊँचे-नीचे हिस्से घिसकर लगभग समतल हो जाते हैं. - नदीकृत मैदान: नदियाँ अपने रास्ते में आने वाले ऊबड़-खाबड़ इलाकों को काटकर समतल मैदान बनाती हैं. इनमें कहीं-कहीं कठोर चट्टानें (मोनाडनॉक टीले) दिखती हैं. पेरिस और लन्दन बेसिन इसके उदाहरण हैं. - हिमानीकृत मैदान: ऊँचे पर्वतों पर बर्फ जमी रहती है. बर्फ के नीचे की ज़मीन रगड़ और घर्षण से सपाट होती जाती है. कनाडा, स्वीडन और फिनलैण्ड में हिमानीकृत मैदान पाए जाते हैं. - वायुघर्षित मैदान: हवा कमजोर चट्टानों के टुकड़ों को उड़ा ले जाती है और रास्ते में आने वाली कठोर चट्टानों को घिसती है, जिससे वायुघर्षित मैदान (पेडीप्लेन) बनते हैं. - कार्स्ट मैदान: चूने की चट्टानों वाले क्षेत्रों में ज़मीन के अंदर पानी के कटाव के बाद जब सतह की विषमताएँ खत्म हो जाती हैं, तो कार्स्ट मैदान बनते हैं. भारत में नैनीताल और अल्मोड़ा, यूगोस्लाविया और फ्रांस के चूना प्रदेश इसके उदाहरण हैं.
(ii) निक्षेपणात्मक मैदान: ये मैदान विभिन्न कारकों द्वारा लाए गए मलबे के जमा होने से बनते हैं. - जलोढ़ मैदान: नदियों द्वारा लाई गई उपजाऊ मिट्टी के जमाव से बनते हैं, जैसे गंगा-यमुना का मैदान. - हिमोढ़ मैदान: हिमनदियों द्वारा लाए गए कंकड़, पत्थर और मिट्टी के जमाव से बनते हैं. - लोयस मैदान: रेगिस्तानी इलाकों में हवा द्वारा लाई गई बारीक मिट्टी के जमाव से बनते हैं. चीन, अर्जेंटीना और कैस्पियन सागर के पास लोयस के मैदान हैं. - लावा निर्मित मैदान: ज्वालामुखी विस्फोट से निकले लावा, राख और चट्टानी कणों के बड़े क्षेत्र में जमा होने से बनते हैं. दक्षिण भारत में लावा निर्मित मैदान पाए जाते हैं. - झील निर्मित मैदान: जब झीलें नदियों द्वारा लाई गई तलछट से भर जाती हैं, तो वे उपजाऊ मैदान बन जाती हैं. हंगरी का मैदान और अमेरिका का प्रेयरी प्रदेश इसके उदाहरण हैं.
मैदानों का महत्त्व:
(i) मैदानी भाग बड़ी आबादी के रहने के लिए आदर्श हैं. दुनिया की लगभग 80 प्रतिशत आबादी मैदानों में रहती है.
(ii) मैदानों ने कई सभ्यताओं (जैसे सिंधु घाटी सभ्यता) के विकास में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है.
(iii) कृषि के लिए मैदान सबसे उपयुक्त स्थान होते हैं.
(iv) मैदानी इलाकों का समतल होना यातायात और परिवहन के लिए सुविधाजनक होता है.
(v) ये इंसानी गतिविधियों के लिए सबसे अच्छे स्थान हैं.
(vi) सिंचाई, चारागाह, घर बनाने, रेलमार्ग और सड़कमार्ग के लिए ये आदर्श स्थिति प्रदान करते हैं.
In simple words: मैदान सपाट ज़मीन होते हैं जो कटाव या जमाव से बनते हैं. वे इंसानों के रहने, खेती करने और यात्रा के लिए बहुत ज़रूरी हैं.

🎯 Exam Tip: मैदानों के विभिन्न प्रकारों को उनके बनने की प्रक्रिया (अपरदन या निक्षेपण) के आधार पर स्पष्ट करें और उनके महत्व को बिंदुओं में समझाएँ.

RBSE Class 11 Physical Geography Chapter 8 अन्य महत्वपूर्ण प्रश्नोत्तर

RBSE Class 11 Physical Geography Chapter 8 वस्तुनिष्ठ प्रश्न

 

Question 1. स्थलाकृतिक स्वरूपों को मुख्यतः कितने भागों में बांटा गया है?
(अ) 2
(ब) 3
(स) 4
(द) 5
Answer: (ब) 3
In simple words: धरती पर ज़मीन के मुख्य आकार तीन भागों में बांटे गए हैं.

🎯 Exam Tip: स्थलाकृतिक स्वरूपों की श्रेणियों को याद रखें: प्रथम (महाद्वीप, महासागर), द्वितीय (पर्वत, पठार, मैदान), तृतीय (घाटियाँ, डेल्टा).

 

Question 3. निम्न में से जो वलित पर्वत का उदाहरण है, वह है
(अ) अरावली
(ब) फ्यूजीयामा
(स) यून्टा
(द) हिमालय
Answer: (द) हिमालय
In simple words: हिमालय पर्वत वलित पर्वतों का एक अच्छा उदाहरण है, जो ज़मीन के मुड़ने से बने हैं.

🎯 Exam Tip: वलित पर्वत वे होते हैं जिनकी चट्टानें पृथ्वी के अंदरूनी दबाव के कारण मुड़कर ऊपर उठ जाती हैं.

 

Question 4. किलीमंजारो पर्वत कहाँ स्थित है?
(अ) भारत में
(ब) अमेरिका में
(स) अफ्रीका में
(द) यूरोप में
Answer: (स) अफ्रीका में
In simple words: किलीमंजारो पर्वत अफ्रीका महाद्वीप में है.

🎯 Exam Tip: विश्व के प्रमुख पर्वतों और उनके स्थानों को भौगोलिक दृष्टि से याद रखना महत्वपूर्ण है.

 

Question 5. अल्पाइन पर्वत काल में जो शामिल नहीं है, वह है
(अ) कुनलुन
(ब) अल्टाई
(स) आल्प्स
(द) पिरेनीज
Answer: (ब) अल्टाई
In simple words: अल्टाई पर्वत अल्पाइन काल में नहीं बने थे, जबकि कुनलुन, आल्प्स और पिरेनीज इसी काल के हैं.

🎯 Exam Tip: विभिन्न पर्वत निर्माण कालों और उनसे संबंधित पर्वतों की सूची को याद करें.

 

Question 7. हिमालय व कुनलुन पर्वत के बीच कौन-सा पठार स्थित है?
(अ) तिब्बत का पठार का
(ब) अनातोलिया का पठार
(स) सैदाम का पठार
(द) पेंटागोनिया का पठार
Answer: (अ) तिब्बत का पठार का
In simple words: हिमालय और कुनलुन पहाड़ों के बीच तिब्बत का बहुत ऊँचा पठार है.

🎯 Exam Tip: अंतः पर्वतीय पठारों की स्थिति अक्सर दो पर्वत श्रृंखलाओं के बीच होती है, जैसे तिब्बत का पठार.

 

Question 8. अप्लेशियन का पठार किस प्रकार का पठार है?
(अ) नवीन पठार
(ब) प्रौढ़ पठार
(स) वृद्धावस्था का पठारं
(द) पुनर्युवनित पठार
Answer: (ब) प्रौढ़ पठार
In simple words: अप्लेशियन का पठार एक प्रौढ़ पठार है, जिसका मतलब है कि यह लंबे समय तक कटाव झेल चुका है.

🎯 Exam Tip: पठारों के विकास की अवस्थाएँ (नवीन, प्रौढ़, वृद्धावस्था, पुनर्युवनित) उनकी आयु और अपरदन के स्तर पर निर्भर करती हैं.

 

Question 9. कास्टै मैदान निर्मित होते है
(अ) नदी से
(ब) हिमानी से
(स) वायु से
(द) भूमिगत जल से
Answer: (द) भूमिगत जल से
In simple words: कार्स्ट मैदान ज़मीन के नीचे के पानी से बनते हैं जो चूने की चट्टानों को घोलता है.

🎯 Exam Tip: कार्स्ट स्थलाकृति चूना पत्थर जैसे घुलनशील चट्टानों वाले क्षेत्रों में विकसित होती है, जहाँ भूमिगत जल की क्रिया प्रमुख होती है.

 

Question 10. सम्भ्यताओं का पालना किसे कहा गया है?
(अ) पर्वतों को
(ब) पठारों को
(स) मैदानों को
Answer: (स) मैदानों को
In simple words: मैदानों को सभ्यताओं का पालना कहा जाता है क्योंकि शुरुआती सभ्यताएँ यहीं पर पनपी थीं.

🎯 Exam Tip: मैदानों की उपजाऊ मिट्टी, समतल भूमि और जल उपलब्धता ने प्राचीन सभ्यताओं के विकास को आसान बनाया.

 

Question 11. निम्नलिखित का मिलान कीजिए:

स्तम्भ अ (स्थलाकृति)स्तम्भ ब (सम्बन्ध)
(i) महाद्वीप(अ) तृतीय श्रेणी का उच्चावच
(ii) पर्वत(ब) वायुजनित पठार
(iii) डेल्टा(स) हिमानीकृत पठार
(iv) लेब्रोडोर का पठार(द) प्रथम श्रेणी का उच्चावच
(v) लोयस का पठार(य) द्वितीय श्रेणी का उच्चावच

Answer: (i)(द) (ii)(य) (iii)(अ) (iv)(स) (v)(ब)
In simple words: महाद्वीप सबसे बड़े भू-आकार (प्रथम श्रेणी) हैं, पर्वत दूसरे बड़े आकार (द्वितीय श्रेणी) हैं, डेल्टा छोटे आकार (तृतीय श्रेणी) हैं, लेब्रोडोर का पठार ग्लेशियर से बना है और लोयस का पठार हवा से बनी मिट्टी से बना है.

🎯 Exam Tip: स्थलाकृतियों के प्रकार और उनके निर्माण या श्रेणी के बीच सही संबंध को याद रखें.

 

Question 12. निम्नलिखित का मिलान कीजिए:

स्तम्भ अ (पर्वत का नाम)स्तम्भ ब (पर्वतकाल क्रम)
(i) अरावली पर्वत(अ) अल्पाइन पर्वत क्रम
(ii) अप्लेशियन पर्वत(ब) हर्सिनियन पर्वत क्रम
(iii) नानशान पर्वत(स) कैलिडोनियन पर्वत क्रम
(iv) वाल्कन पर्वत(द) आर्कियन पर्वत क्रम

Answer: (i)(द) (ii)(स) (iii)(ब) (iv)(अ)
In simple words: अरावली पर्वत आर्कियन काल के हैं, अप्लेशियन पर्वत कैलिडोनियन काल के हैं, नानशान पर्वत हर्सिनियन काल के हैं और वाल्कन पर्वत अल्पाइन काल के हैं.

🎯 Exam Tip: विभिन्न पर्वत निर्माण कालों और उनसे संबंधित पर्वतों के नामों को याद रखना महत्वपूर्ण है, क्योंकि यह भूवैज्ञानिक इतिहास को समझने में मदद करता है.

 

Question 13. निम्नलिखित का मिलान कीजिए:

(iii) तारीय का पठार(स) भूमिगत जलजात घाटी
(iv) U आकार की घाटी(द) प्रत्यानुवर्ती घाटी
(v) अन्धी घाटी(य) वायु निर्मित पठार
(vi) विपरीत दिशा में बहने वाली नदी(र) आर्द्र पठार
(vii) सागरतल से नीचे चले जाने पर निर्मित घाटी(ल) शुष्क पठार

Answer: (i)(य) (i) (र) (iii) (ल) (iv)(ब) (v) (स) (vi) (द) (vi) (अ)
In simple words: यह मिलान स्थलाकृतियों को उनकी विशेषताओं या बनने के कारणों से जोड़ता है. तारीय पठार हवा से बनते हैं, U-आकार की घाटी हिमानी से, अंधी घाटी भूमिगत जल से, विपरीत दिशा में बहने वाली नदी प्रत्यानुवर्ती घाटी है, और सागरतल से नीचे बनी घाटी पुनर्युवनित घाटी है.

🎯 Exam Tip: विभिन्न भू-आकृतियों और उनके निर्माण के कारकों या विशेषताओं के बीच संबंध को समझने के लिए प्रत्येक जोड़ी पर ध्यान दें.

RBSE Class 11 Physical Geography Chapter 8 अतिलघूत्तात्मक प्रश्न

 

Question 1. स्थलाकृतिक स्वरूपों को किन-किन भागों में बांटा गया है?
Answer: स्थलाकृतिक स्वरूपों को मुख्य रूप से तीन भागों में बांटा गया है:
- प्रथम श्रेणी के उच्चावच: जैसे महाद्वीप और महासागर.
- द्वितीय श्रेणी के उच्चावच: जैसे पर्वत, पठार और मैदान.
- तृतीय श्रेणी के उच्चावच: जैसे घाटियाँ और डेल्टा.
In simple words: ज़मीन के आकार को तीन बड़े हिस्सों में बांटा गया है: सबसे बड़े आकार (महाद्वीप), दूसरे बड़े आकार (पर्वत, पठार), और छोटे आकार (घाटियाँ, डेल्टा).

🎯 Exam Tip: स्थलाकृतिक स्वरूपों का वर्गीकरण उनकी सापेक्षिक ऊँचाई और विस्तार पर आधारित होता है.

 

Question 2. भूपटल पर स्थलरूपों का निर्माण क्यों होता है?
Answer: भूपटल पर विभिन्न स्थलरूपों का निर्माण पृथ्वी के अंदरूनी (जैसे ज्वालामुखी, भूकंप) और बाहरी (जैसे हवा, पानी) बलों के आपसी क्रियाकलापों के कारण होता है. ये बल लगातार काम करते रहते हैं, जिससे ज़मीन की सतह बदलती रहती है.
In simple words: ज़मीन के आकार पृथ्वी के अंदर और बाहर की शक्तियों के मिलने से बनते हैं.

🎯 Exam Tip: अंतर्जात (पृथ्वी के भीतर) और बहिर्जात (पृथ्वी की सतह पर) बल स्थलरूपों के निर्माण और परिवर्तन में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं.

 

Question 3. फिन्च ने पर्वतों की क्या परिभाषा दी है?
Answer: फिन्च के अनुसार, "पर्वत समुद्रतल से 600 मीटर या उससे अधिक ऊँचे होते हैं, और उनकी ढलान 260° से 350° के बीच होती है." इसका मतलब है कि पर्वत ऊँचे, खड़े ढलान वाले भू-भाग होते हैं.
In simple words: फिन्च ने कहा कि पर्वत 600 मीटर से ज़्यादा ऊँचे और बहुत ढलान वाले होते हैं.

🎯 Exam Tip: परिभाषाओं को सटीक रूप से याद करें, खासकर जब किसी विशेष विद्वान का नाम उल्लेखित हो.

 

Question 4. वलित पर्वत किसे कहते हैं?
Answer: वलित पर्वत ऐसे पहाड़ होते हैं जिनमें पृथ्वी के भीतर उत्पन्न दबाव के कारण चट्टानों में मोड़ या वलन पड़ जाते हैं. ये लहरदार पर्वत पृथ्वी की सतह पर बनते हैं.
In simple words: वलित पर्वत वे होते हैं जो ज़मीन के मुड़ने या दबने से बनते हैं.

🎯 Exam Tip: वलित पर्वत आमतौर पर टेक्टोनिक प्लेटों के टकराने से बनते हैं, जिससे चट्टानें ऊपर उठ जाती हैं और मुड़ जाती हैं.

 

Question 6. अपनति किसे कहते हैं?
Answer: जब दबाव के कारण चट्टानें घुमावदार रूप में बदल जाती हैं, तो चट्टानों की लहरों में जो हिस्सा ऊपर की ओर उठा हुआ होता है, उसे अपनति कहते हैं. यह एक पहाड़ी की तरह ऊपर उठा हुआ भाग होता है.
In simple words: अपनति चट्टानों का वह हिस्सा है जो दबाव से मुड़कर ऊपर उठ जाता है.

🎯 Exam Tip: अपनति और अभिनति दोनों वलन (फोल्डिंग) के परिणाम हैं; अपनति ऊपर की ओर उत्तल होती है.

 

Question 7. अभिनति किसे कहते हैं?
Answer: जब दबाव के कारण चट्टानें घुमावदार रूप में बदल जाती हैं, तो चट्टानों की लहरों में जो हिस्सा नीचे की ओर धंसा हुआ होता है, उसे अभिनति कहते हैं. यह एक घाटी की तरह नीचे धंसा हुआ भाग होता है.
In simple words: अभिनति चट्टानों का वह हिस्सा है जो दबाव से मुड़कर नीचे धंस जाता है.

🎯 Exam Tip: अभिनति और अपनति भूगर्भीय संरचनाएं हैं जो वलित पर्वतों में पाई जाती हैं, जिनमें अभिनति नीचे की ओर अवतल होती है.

 

Question 8. गुम्बदाकार पर्वत किसे कहते हैं?
Answer: गुम्बदाकार पर्वत तब बनते हैं जब पृथ्वी के भीतर का गर्म मैग्मा ज़मीन की सतह पर आने की कोशिश करता है, लेकिन बाहर नहीं निकल पाता. इसके बजाय, वह ऊपर की चट्टानों को धकेलकर गुम्बद के आकार में ऊपर उठा देता है. ऐसे पर्वतों को गुम्बदाकार पर्वत कहते हैं.
In simple words: गुम्बदाकार पर्वत तब बनते हैं जब धरती के नीचे से मैग्मा चट्टानों को ऊपर उठाकर गुम्बद जैसा आकार बना देता है.

🎯 Exam Tip: गुम्बदाकार पर्वत ज्वालामुखी से सीधे नहीं बनते, बल्कि मैग्मा के सतह के नीचे ही ठंडा होने और चट्टानों को ऊपर धकेलने से बनते हैं.

 

Question 9. विश्व के प्रमुख संग्रहित पर्वतों के नाम लिखिए।
Answer: विश्व के प्रमुख संग्रहित पर्वतों में जापान का फ्यूजीयामा, इटली का विसूवियस और अफ्रीका का किलीमंजारो शामिल हैं.
In simple words: दुनिया के कुछ बड़े संग्रहित पर्वत जापान का फ्यूजीयामा, इटली का विसूवियस और अफ्रीका का किलीमंजारो हैं.

🎯 Exam Tip: संग्रहित पर्वत अक्सर ज्वालामुखी गतिविधियों या अपरदन और निक्षेपण की प्रक्रियाओं से बनते हैं.

 

Question 10. ब्लॉक पर्वत से क्या अभिप्राय है?
अथवा
भ्रंशोत्थ पर्वत किसे कहते हैं?
Answer: ब्लॉक पर्वत या भ्रंशोत्थ पर्वत तब बनते हैं जब दो समानांतर दरारों (भ्रंशों) के बीच का ज़मीन का हिस्सा ऊपर उठ जाता है, या उन दरारों के दोनों ओर के हिस्से नीचे धंस जाते हैं. इस प्रक्रिया से ये पहाड़ बनते हैं.
In simple words: ब्लॉक पर्वत तब बनते हैं जब ज़मीन की दरारों के बीच का हिस्सा ऊपर उठ जाए या आसपास के हिस्से नीचे धंस जाएं.

🎯 Exam Tip: ब्लॉक पर्वतों का निर्माण पृथ्वी की पपड़ी में तनाव बलों के कारण होता है, जो बड़े खंडों को ऊपर या नीचे धकेलते हैं.

 

प्रश्न 12. अल्पाइन पर्वतों के नाम लिखिए।
अथवा
अल्पाइन पर्वत निर्माणकारी हलचल में कौन-कौन से पर्वत बने? नाम लिखिए।
उत्तर: अल्पाइन पर्वत काल में हिमालय, अराकानयोमा, एल्बुरुज, हिन्दुकुश, रॉकीज, एण्डीज, आल्पस, बाल्कन एवं पिरेनीज पर्वतों का मुख्य रूप से निर्माण हुआ था। ये सभी पर्वत एक बड़ी भूगर्भीय गतिविधि के दौरान बने थे।
In simple words: अल्पाइन पर्वत हिमालय, रॉकीज और आल्पस जैसे बड़े पर्वत हैं जो एक ही समय में एक बड़ी भूगर्भीय हलचल से बने थे।

🎯 Exam Tip: याद रखें कि अल्पाइन पर्वत नवीनतम वलित पर्वत श्रृंखलाओं का एक उदाहरण हैं, और इनके नाम अक्सर मानचित्रों पर पूछे जाते हैं।

 

प्रश्न 13. ऊँचाई के आधार पर पर्वतों को कितने भागों में बाँटा गया है?
उत्तर: ऊँचाई के आधार पर पर्वतों को चार मुख्य भागों में बाँटा गया है: अधिक ऊँचाई वाले पर्वत, साधारण ऊँचाई वाले पर्वत, कम ऊँचे पर्वत और निम्न ऊँचाई वाले पर्वत। यह वर्गीकरण उनकी समुद्र तल से ऊँचाई पर आधारित है।
In simple words: पर्वतों को उनकी ऊँचाई के हिसाब से चार ग्रुप में बाँटा जाता है: बहुत ऊँचे, सामान्य ऊँचे, थोड़े कम ऊँचे, और सबसे कम ऊँचे।

🎯 Exam Tip: पर्वतों का वर्गीकरण करते समय, यह स्पष्ट करें कि वर्गीकरण का आधार क्या है (जैसे यहाँ ऊँचाई), और फिर उसके सभी मुख्य प्रकारों का उल्लेख करें।

 

प्रश्न 14. अधिक ऊँचे पर्वतों से क्या अभिप्राय है?
उत्तर: जिन पर्वतों की ऊँचाई 6000 फीट या 2000 मीटर से अधिक होती है, उन्हें अधिक ऊँचे पर्वत कहा जाता है। ये पर्वत आमतौर पर बहुत विशाल और प्रभावशाली होते हैं।
In simple words: 6000 फीट या 2000 मीटर से ज़्यादा ऊँचे पहाड़ों को 'अधिक ऊँचे पर्वत' कहते हैं।

🎯 Exam Tip: अधिक ऊँचे पर्वतों की परिभाषा में न्यूनतम ऊँचाई (फिट और मीटर दोनों में) का उल्लेख करना महत्वपूर्ण है।

 

प्रश्न 15. पठार से क्या तात्पर्य है?
अथवा
पठार को परिभाषित कीजिए।
उत्तर: पठार आस-पास के धरातल से ऊँचे उठे हुए ऐसे भाग होते हैं जिनका ऊपरी हिस्सा समतल, चौड़ा होता है और किनारों पर ढाल अधिक होता है। इन्हें अक्सर 'टेबल लैंड' भी कहते हैं।
In simple words: पठार ज़मीन का उठा हुआ हिस्सा है जो ऊपर से सपाट और चौड़ा होता है, और जिसके किनारे ढलान वाले होते हैं।

🎯 Exam Tip: पठार की परिभाषा में 'समतल शीर्ष' और 'उच्च स्थान' दो प्रमुख शब्द हैं, जिन्हें शामिल करना आवश्यक है।

 

प्रश्न 16. उत्पत्ति के आधार पर पठारों को कितने भागों में बाँटा गया है?
उत्तर: उत्पत्ति के आधार पर पठारों को चार मुख्य भागों में बाँटा गया है: लावा निर्मित पठार, वायु निर्मित पठार, हिमानी निर्मित पठार एवं जलज पठार। ये सभी पठार अलग-अलग प्राकृतिक प्रक्रियाओं से बनते हैं।
In simple words: पठार कैसे बने, इस आधार पर उन्हें लावा पठार, हवा से बने पठार, बर्फ से बने पठार, और पानी से बने पठार में बाँटा गया है।

🎯 Exam Tip: पठारों के प्रकारों को याद रखने के लिए, उनकी निर्माण प्रक्रिया (जैसे लावा, हवा, बर्फ, पानी) को आधार बनाना सहायक होता है।

 

प्रश्न 18. जलज पठार क्या होते हैं?
उत्तर: जलज पठार वे होते हैं जो समुद्री इलाकों या भू-सन्नतियों में लगातार जमा हुए अवसादों से बनते हैं। कभी-कभी ज़मीन की अंदरूनी हलचलों से ये समुद्री तल से ऊपर उठ जाते हैं, जिससे इनका निर्माण होता है।
In simple words: जलज पठार समुद्र में जमा मिट्टी और पत्थरों से बनते हैं, जो ज़मीन की हलचल से ऊपर उठकर पठार बन जाते हैं।

🎯 Exam Tip: जलज पठार की परिभाषा में 'समुद्री अवसादों के जमाव' और 'आंतरिक भूगर्भीय हलचल' जैसे मुख्य बिन्दुओं को शामिल करें।

 

प्रश्न 19. स्थिति के आधार पर पठारों को कितने भागों में बाँटा गया है?
उत्तर: स्थिति के आधार पर पठारों को तीन मुख्य भागों में बाँटा गया है: अन्तर्पवतीय पठार (पर्वतों के बीच), पर्वतपदीय पठार (पर्वतों की तलहटी में) एवं महाद्वीपीय पठार (महाद्वीप के बड़े हिस्से पर)।
In simple words: पठार कहाँ स्थित हैं, इस हिसाब से उन्हें तीन तरह से बाँटा जाता है: पहाड़ों के बीच में, पहाड़ों के पास नीचे, और महाद्वीप के बड़े हिस्से पर।

🎯 Exam Tip: पठारों के स्थिति-आधारित वर्गीकरण में तीनों प्रकारों (अन्तर्पवतीय, पर्वतपदीय, महाद्वीपीय) के नाम और उनकी मुख्य विशेषताएँ बताएँ।

 

प्रश्न 20. महाद्वीपीय पठार किसे कहते हैं?
उत्तर: महाद्वीपीय पठार उन पठारों को कहते हैं जो किसी देश या महाद्वीप के बहुत बड़े हिस्से पर फैले होते हैं। ये अक्सर समतल और विशाल होते हैं, जो महाद्वीप के केंद्र में पाए जाते हैं।
In simple words: जो पठार किसी बड़े देश या महाद्वीप के बहुत बड़े हिस्से पर फैले होते हैं, उन्हें महाद्वीपीय पठार कहते हैं।

🎯 Exam Tip: महाद्वीपीय पठार की पहचान उसके बड़े भौगोलिक विस्तार से होती है, इस बिन्दु को अपनी परिभाषा में अवश्य रखें।

 

प्रश्न 21. जलवायु के आधार पर पठारों को कितने भागों में बाँटा गया है?
उत्तर: जलवायु के आधार पर पठारों को तीन मुख्य भागों में बाँटा गया है: आर्द्र पठार (जहाँ नमी और बारिश ज़्यादा होती है), शुष्क पठार (सूखे रेगिस्तानी इलाके) एवं हिममण्डित पठार (बर्फ से ढके हुए)।
In simple words: पठारों को उनकी जलवायु के हिसाब से तीन ग्रुप में बाँटा जाता है: गीले पठार, सूखे पठार और बर्फीले पठार।

🎯 Exam Tip: जलवायु के आधार पर पठारों का वर्गीकरण करते समय, प्रत्येक प्रकार के पठार की मुख्य जलवायु विशेषता को स्पष्ट करें।

 

प्रश्न 22. हिममण्डित पठार किसे कहते हैं?
उत्तर: हिममण्डित पठार वे होते हैं जहाँ बहुत ज़्यादा ठंड के कारण साल भर का ज़्यादातर हिस्सा बर्फ से ढका रहता है। ऐसे पठार अक्सर ध्रुवीय क्षेत्रों या बहुत ऊँचे पहाड़ों पर पाए जाते हैं।
In simple words: बहुत ज़्यादा ठंड होने के कारण जो पठार साल भर बर्फ से ढके रहते हैं, उन्हें हिममण्डित पठार कहते हैं।

🎯 Exam Tip: हिममण्डित पठार की परिभाषा में 'अत्यधिक ठंड' और 'वर्ष भर बर्फ से ढका रहना' जैसे मुख्य शब्दों का प्रयोग करें।

 

प्रश्न 23. विकास की अवस्था के आधार पर पठारों को कितने भागों में बाँटा गया है?
उत्तर: विकास की अवस्था के आधार पर पठारों को चार मुख्य भागों में बाँटा गया है: नवीन पठार (जो अभी बन रहे हैं), प्रौढ़ पठार (विकसित हो चुके), वृद्धावस्था के पठार (जो घिस चुके हैं) एवं पुनर्युवनित पठार (जो फिर से नए हो रहे हैं)।
In simple words: पठार कितने पुराने हैं और कितने बदले हैं, इस हिसाब से उन्हें चार तरह से बाँटा जाता है: नए, पूरे बने हुए, पुराने और फिर से नए हुए पठार।

🎯 Exam Tip: पठारों के विकास की अवस्थाओं का वर्गीकरण करते समय, प्रत्येक प्रकार की पहचान के लिए उसकी मुख्य विशेषता को संक्षेप में बताएँ।

 

प्रश्न 25. मैदान किसे कहते हैं? इसके कितने प्रकार होते हैं?
उत्तर: मैदान धरातल के ऐसे भाग होते हैं जो अपेक्षाकृत समतल, थोड़े ढालू और कम ऊँचाई वाले होते हैं। निर्माण प्रक्रिया के आधार पर ये दो मुख्य प्रकार के होते हैं: अपरदनात्मक मैदान (कटाव से बने) और निक्षेपणात्मक मैदान (जमाव से बने)।
In simple words: मैदान ज़मीन के सपाट, हल्के ढलान वाले और कम ऊँचे हिस्से होते हैं। ये कटाव या जमाव से बनते हैं।

🎯 Exam Tip: मैदान की परिभाषा में उसकी मुख्य भौतिक विशेषताओं (समतलता, ढाल) और निर्माण के मुख्य प्रकारों (अपरदन, निक्षेपण) का उल्लेख करें।

 

प्रश्न 26. निक्षेपणात्मक मैदानों को किन-किन भागों में बाँटा गया है?
उत्तर: निक्षेपणात्मक मैदानों को मुख्यतः जलोढ़ निर्मित मैदान (नदियों से), हिमोढ़ मैदान (हिमनद से), लोयस मैदान (हवा से), लावा निर्मित मैदान (ज्वालामुखी से) एवं झील निर्मित मैदान (झीलों में जमाव से) जैसे भागों में बाँटा गया है।
In simple words: जो मैदान चीज़ों के जमा होने से बनते हैं, उन्हें नदियों, बर्फ, हवा, लावा या झीलों से बने मैदानों में बाँटा जाता है।

🎯 Exam Tip: निक्षेपणात्मक मैदानों के प्रकारों को याद रखने के लिए, उनकी निर्माण करने वाली भूगर्भीय शक्ति (नदी, हिमनद, वायु, लावा, झील) को जोड़कर याद करें।

 

प्रश्न 27. पेडीप्लेन किसे कहते हैं?
उत्तर: पेडीप्लेन ऐसे मैदान होते हैं जो यांत्रिक अपक्षय के कारण ढीले और टूटे हुए शैल कणों को हवा द्वारा उड़ा ले जाने से बनते हैं। हवा, रास्ते में पड़ने वाली ऊँची चट्टानों को भी घिसकर समतल करती है। इसी प्रक्रिया से बने मैदानों को पेडीप्लेन कहते हैं।
In simple words: पेडीप्लेन वह सपाट ज़मीन होती है जो हवा के चलने और चट्टानों को घिसने से बनती है, जहाँ ढीले पत्थर उड़ जाते हैं।

🎯 Exam Tip: पेडीप्लेन की परिभाषा में 'यांत्रिक अपक्षय', 'हवा द्वारा कटाव', और 'समतल मैदान' जैसे कीवर्ड्स का उपयोग करें।

 

प्रश्न 28. पर्वतपदीय मैदान से क्या तात्पर्य है?
अथवा
गिरिपदीय मैदान क्या होता है?
उत्तर: जब नदियाँ ऊँचे पहाड़ी इलाकों से काटे गए मलबे को बहाकर पर्वतों के निचले हिस्सों में जमा कर देती हैं, तो इससे बने मैदानों को पर्वतपदीय या गिरिपदीय मैदान कहते हैं। ये पर्वतों की तलहटी में स्थित होते हैं।
In simple words: जब नदियाँ पहाड़ों से लाई मिट्टी को पहाड़ों के नीचे जमा कर देती हैं, तो उससे बने मैदानों को पर्वतपदीय या गिरिपदीय मैदान कहते हैं।

🎯 Exam Tip: पर्वतपदीय मैदान की पहचान 'पहाड़ों की तलहटी में नदियों द्वारा लाए गए मलबे के जमाव' से होती है, इसे स्पष्ट रूप से बताएँ।

 

प्रश्न 29. बट्टड़-मृतिका व अवक्षेप मैदान क्या होते हैं?
उत्तर: बट्टड़-मृतिका मैदान वे होते हैं जो हिमरेखा के नीचे हिमनदों द्वारा लाए गए कंकड़, पत्थर और बजरी के जमा होने से बनते हैं। हिमनदों के पिघले जल द्वारा बारीक मिट्टी के जमा होने से बने मैदानों को अवक्षेप मैदान कहते हैं। ये दोनों बर्फ और पानी के जमाव से जुड़े हैं।
In simple words:">बट्टड़-मृतिका मैदान बर्फ के नीचे जमे पत्थरों से बनते हैं, और अवक्षेप मैदान बर्फ के पिघले पानी से आई बारीक मिट्टी के जमा होने से बनते हैं।

🎯 Exam Tip: बट्टड़-मृतिका और अवक्षेप मैदान की परिभाषा में 'हिमानी जमाव' और 'हिमनद पिघले जल के निक्षेपण' का उल्लेख करें, क्योंकि यही इनके निर्माण का मुख्य कारण है।

 

प्रश्न 31. झील निर्मित मैदानों के नाम लिखिए।
उत्तर: झील निर्मित मैदानों में हंगरी का मैदान और अमेरिका के प्रेयरी प्रदेश के मैदान शामिल हैं। ये मैदान उन झीलों के सूखने या भरने से बने हैं जहाँ पहले पानी जमा होता था।
In simple words: हंगरी का मैदान और अमेरिका का प्रेयरी प्रदेश झील से बने मैदानों के उदाहरण हैं।

🎯 Exam Tip: झील निर्मित मैदानों के उदाहरण के रूप में कम से कम दो प्रमुख भौगोलिक क्षेत्रों का नाम याद रखें।

 

प्रश्न 32. मैदानों को सभ्यताओं का पालना क्यों कहा गया है?
उत्तर: मैदानी भागों में विश्व की प्रमुख सभ्यताएँ जैसे सिंधु घाटी सभ्यता, दजला-फरात की बेबिलोनियन सभ्यता और नील घाटी सभ्यता विकसित हुईं। इन मैदानों की समतल और उपजाऊ भूमि कृषि और जीवन-यापन के लिए आदर्श थी, इसलिए इन्हें सभ्यताओं का पालना कहा गया है।
In simple words: पुरानी सभ्यताएँ जैसे सिंधु घाटी और नील नदी की सभ्यताएँ मैदानों में ही बनी थीं क्योंकि वहाँ खेती करना आसान था, इसलिए मैदानों को 'सभ्यताओं का पालना' कहते हैं।

🎯 Exam Tip: इस प्रश्न के उत्तर में प्रमुख सभ्यताओं के नाम और कृषि योग्य उपजाऊ भूमि का उल्लेख करना आवश्यक है।

 

प्रश्न 33. भ्रंश घाटी किसे कहते हैं?
उत्तर: भ्रंश घाटी तब बनती है जब पृथ्वी पर दो समानांतर भ्रंशों (दरारों) के बीच का ज़मीन का हिस्सा नीचे धँस जाता है। यह एक लम्बी और गहरी घाटी होती है।
In simple words: जब ज़मीन में दो बड़ी दरारें पड़ती हैं और उनके बीच का हिस्सा नीचे धँस जाता है, तो उसे भ्रंश घाटी कहते हैं।

🎯 Exam Tip: भ्रंश घाटी की परिभाषा में 'दो समानांतर भ्रंश' और 'मध्यवर्ती स्थल-भाग का धँसना' जैसे कीवर्ड्स महत्वपूर्ण हैं।

 

प्रश्न 34. आनुवांशिक आधार पर घाटियों को कितने भागों में बाँटा गया है?
उत्तर: आनुवांशिक आधार पर घाटियों को मुख्यत: पाँच भागों में बाँटा गया है: अनुवर्ती घाटी, परिवर्ती घाटी, प्रत्यानुवर्ती घाटी, नवानुवर्ती घाटी एवं अक्रमवर्ती घाटी। यह वर्गीकरण उनके विकास और भूगर्भीय संरचना से जुड़ा है।
In simple words: घाटियों को वे कैसे बनी हैं, इस हिसाब से पाँच तरह से बाँटा जाता है: अनुवर्ती, परिवर्ती, प्रत्यानुवर्ती, नवानुवर्ती और अक्रमवर्ती घाटी।

🎯 Exam Tip: घाटियों के आनुवांशिक वर्गीकरण के सभी पाँच प्रकारों के नाम याद रखें और उन्हें सूची में प्रस्तुत करें।

 

प्रश्न 35. अनुवर्ती घाटी क्या होती है?
अथवा
नति घाटी क्या है?
उत्तर: अनुवर्ती घाटी या नति घाटी उस घाटी को कहते हैं जो ज़मीन के ढाल की दिशा के साथ-साथ बनती है। इसका मतलब है कि नदी उसी दिशा में बहती है जिस दिशा में ज़मीन की परतें झुकी हुई होती हैं।
In simple words: अनुवर्ती घाटी वह है जो ज़मीन के ढाल के साथ उसी दिशा में बहती है, जहाँ ज़मीन झुकी होती है।

🎯 Exam Tip: अनुवर्ती घाटी की परिभाषा में 'ढाल की नति के सहारे' या 'ज़मीन की झुकी परतों के अनुरूप' जैसे शब्दों का प्रयोग करें।

 

प्रश्न 36. परिवर्ती घाटी से क्या तात्पर्य है?
अथवा
अनुदैर्ध्य घाटी किसे कहते हैं?
उत्तर: परिवर्ती घाटी या अनुदैर्ध्य घाटी वह घाटी होती है जो अनुवर्ती घाटी के निर्माण के बाद, ढाल के नतिलम्ब (ढाल की दिशा के लंबवत) के सहारे बनती है। ये घाटियाँ अक्सर नरम चट्टानों वाले क्षेत्रों में विकसित होती हैं।
In simple words: परिवर्ती घाटी वह है जो अनुवर्ती घाटी बनने के बाद, ढाल के लंबवत दिशा में बनती है, खासकर नरम चट्टानों वाली जगह पर।

🎯 Exam Tip: परिवर्ती घाटी को 'नतिलम्ब के सहारे' बनने वाली घाटी के रूप में परिभाषित करें और इसका संबंध अनुवर्ती घाटी से स्पष्ट करें।

 

प्रश्न 38. भू-प्लेट विवर्तनिक संकल्पना से किन समस्याओं के निराकरण में सहायता मिली है?
उत्तर: भू-प्लेट विवर्तनिक संकल्पना से पर्वतों के बनने, भूकंप, ज्वालामुखी और महाद्वीपों के एक जगह से दूसरी जगह खिसकने जैसी बड़ी भूगर्भीय समस्याओं को समझने और उनका हल निकालने में बहुत मदद मिली है।
In simple words: भू-प्लेट की कहानी से हमें पहाड़ क्यों बनते हैं, भूकंप क्यों आते हैं, ज्वालामुखी क्यों फटते हैं और महाद्वीप कैसे हिलते हैं, ये सब समझने में मदद मिली है।

🎯 Exam Tip: भू-प्लेट विवर्तनिक संकल्पना के महत्व को समझाने के लिए, जिन प्रमुख भूगर्भीय घटनाओं की व्याख्या यह करती है, उनका उल्लेख करना महत्वपूर्ण है।

 

प्रश्न 39. तीसरी कोटि के स्थलरूपों के विकास की समस्याओं का किसने निराकरण किया है?
उत्तर: भू-आकृति चक्र और अपरदन चक्र की संकल्पनाओं ने तीसरी कोटि के अनेक स्थलरूपों (जैसे घाटियाँ, डेल्टा) के बनने और उनके विकास से जुड़ी समस्याओं को समझने और सुलझाने में मदद की है।
In simple words: भू-आकृति और अपरदन चक्र की पढ़ाई से हमें यह समझ आया कि ज़मीन पर तीसरी तरह के छोटे-बड़े रूप कैसे बनते और बदलते हैं।

🎯 Exam Tip: 'भू-आकृति चक्र' और 'अपरदन चक्र' जैसे कीवर्ड्स इस प्रश्न के उत्तर के लिए केंद्रीय हैं।

RBSE Class 11 Physical Geography Chapter 8 लघुत्तरात्मक प्रश्न Type I

 

प्रश्न 1. स्थलरूपों का निर्माण करने वाले बलों को तालिका के माध्यम से दर्शाइए।
उत्तर:

स्थलरूपों का निर्माण करने वाले बल
अन्तर्जात बलबहिर्जात बल
पटल विरूपण बलअपक्षय
आकस्मिक बलअपरदन
महादेशजनक बलसामूहिक स्थानांतरण
पर्वतनिर्माणक बल
ज्वालामुखी
भूकम्प

In simple words: ज़मीन के अलग-अलग रूप दो तरह की शक्तियों से बनते हैं: अंदर की ताकतें (जैसे भूकंप, ज्वालामुखी) और बाहर की ताकतें (जैसे हवा, पानी, बर्फ से कटाव)।

🎯 Exam Tip: स्थलरूप निर्माणकारी बलों को वर्गीकृत करते समय, अन्तर्जात और बहिर्जात बलों के तहत उनके सभी मुख्य उप-प्रकारों को सूचीबद्ध करें।

 

प्रश्न 2. गुम्बदाकार एवं भ्रंशोत्थ पर्वतों में क्या अन्तर है?
उत्तर: गुम्बदाकार एवं भ्रंशोत्थ पर्वतों में प्रमुख अंतर नीचे दी गई तालिका में बताया गया है:

गुम्बदाकार पर्वतभ्रंशोत्थ पर्वत
(ii) इसमें भू-भाग गुम्बद के आकार में ऊपर उठता है।(ii) इन भू-भाग के ऊपर उठने या धंसने का कोई निश्चित आकार नहीं होता है।
(iii) इसमें एक लम्बा भाग ऊपर की ओर उठता है।(iii) इन पर्वतों में प्राय: उठने वाले या धंसने वाले भाग कम लम्बे होते हैं।

In simple words: गुम्बदाकार पर्वत तब बनते हैं जब ज़मीन अंदर से उठकर गुम्बद जैसी बन जाती है, जबकि भ्रंशोत्थ पर्वत तब बनते हैं जब ज़मीन की दरारों के बीच का हिस्सा ऊपर उठ या नीचे धँस जाता है, और इनका आकार गुम्बद जैसा नहीं होता।

🎯 Exam Tip: दोनों प्रकार के पर्वतों के बीच के अंतर को स्पष्ट करने के लिए, उनकी निर्माण प्रक्रिया और विशिष्ट आकार पर ध्यान केंद्रित करें।

 

प्रश्न 3. पर्वतों के निर्माण की कितनी हलचलें मिलती हैं? स्पष्ट कीजिए।
उत्तर: पर्वतों का निर्माण एक झटके में नहीं होता, बल्कि यह एक बहुत लंबी प्रक्रिया का नतीजा है। विश्व में पर्वत निर्माण के चार प्रमुख कालक्रम माने गए हैं:
1. आर्कियन पर्वत काल - यह घटना लगभग 40 करोड़ साल पहले कैम्ब्रियन काल में हुई थी।
2. कैलेडोनियन पर्वत काल - यह हलचल लगभग 32 करोड़ साल पहले हुई थी।
3. हर्सिनियन पर्वत काल - यह हलचल लगभग 22 करोड़ साल पहले हुई थी।
4. अल्पाइन पर्वत काल - यह हलचल लगभग 3 करोड़ साल पहले हुई थी, और यह सबसे नवीनतम है।
In simple words: पहाड़ एक साथ नहीं बने, बल्कि बहुत पहले से चार बड़े समय में बने हैं। सबसे पहले आर्कियन, फिर कैलेडोनियन, फिर हर्सिनियन और सबसे आखिर में अल्पाइन पर्वत बने।

🎯 Exam Tip: पर्वत निर्माण के प्रमुख कालक्रमों (आर्कियन, कैलेडोनियन, हर्सिनियन, अल्पाइन) को उनके अनुमानित समय-सीमा के साथ याद रखें।

 

प्रश्न 4. पठारों के महत्त्व को स्पष्ट कीजिए।
उत्तर: पठारों का बहुत अधिक महत्व है, जिसे हम निम्न बिन्दुओं से समझ सकते हैं:
1. पठारों पर उपजाऊ मिट्टी मिलती है जहाँ अच्छी खेती होती है।
2. पठार कीमती खनिजों के बड़े भंडार होते हैं।
3. इनके कठोर धरातल पर पानी रोकने के लिए जलाशय बनाए जाते हैं।
4. पठारों के तेज ढालों से बहने वाली नदियाँ झरने बनाती हैं, जिनसे बिजली बनाई जा सकती है।
5. पर्वतों की तुलना में पठारों पर यातायात के साधन ज़्यादा विकसित होते हैं।
6. ये आबादी के हिसाब से पर्वतों से ज़्यादा आबाद होते हैं, क्योंकि यहाँ जीवन जीना आसान होता है।
In simple words: पठार खेती के लिए अच्छे होते हैं, उनमें खनिज होते हैं, पानी जमा होता है, बिजली बन सकती है, आने-जाने के रास्ते अच्छे होते हैं और ज़्यादा लोग रहते हैं।

🎯 Exam Tip: पठारों के महत्व को समझाते समय, आर्थिक, सामाजिक और पर्यावरणीय पहलुओं को शामिल करें, जैसे कृषि, खनिज, जलविद्युत और जनसंख्या घनत्व।

 

प्रश्न 5. घाटियों के निर्माण को स्पष्ट कीजिए।
उत्तर: बाहरी अपरदनकारी शक्तियों द्वारा निर्मित घाटियों को निम्न भागों में बाँटा गया है:
1. नदी घाटी - नदियाँ अपने बहने से ज़मीन को काटती हैं और गहराई में कटाव करके घाटियाँ बनाती हैं।
2. हिमनदी घाटी - हिमाच्छादित ऊँचे पर्वतों से सरकने वाली बर्फ चौड़ी और खड़े ढाल वाली U-आकार की घाटी का निर्माण करती है। बड़ी हिमनदी में ऊँचाई से आकर मिलने वाली सहायक हिमनदी लटकती हुई घाटी का निर्माण करती है।
3. अन्धी घाटी - इस प्रकार की घाटियों का निर्माण चूना प्रदेशों में धरातल पर बहने वाली नदी द्वारा गहराई में कटाव करते हुए चूने की चट्टानों में बने घोल रन्ध्र में समा जाने से होता है। रन्ध्र के बाद बची शुष्क घाटी को, अन्धी घाटी कहा जाता है।
In simple words: बाहर की ताकतें जैसे नदी, बर्फ और पानी के कटाव से तीन तरह की घाटियाँ बनती हैं: नदी घाटी (V-आकार), बर्फ की नदी से बनी घाटी (U-आकार) और अन्धी घाटी (चूना पत्थर वाले इलाकों में जहाँ नदी ज़मीन में समा जाती है)।

🎯 Exam Tip: बाह्य शक्तियों द्वारा निर्मित घाटियों की व्याख्या करते समय, प्रत्येक प्रकार (नदी, हिमनदी, अन्धी) के निर्माण में शामिल मुख्य अपरदनकारी कारक को स्पष्ट करें।

 

प्रश्न 6. विवर्तनिक घटनाओं द्वारा निर्मित घाटियों को स्पष्ट कीजिए।
उत्तर: पृथ्वी के अंदरूनी बलों की हलचलों से बनी घाटियाँ विवर्तनिक श्रेणी में आती हैं। इन घाटियों को दो मुख्य भागों में बाँटा गया है:
1. अभिनति घाटी - जब विवर्तनिक क्रियाओं से चट्टानों में लहरदार मोड़ पड़ते हैं, तो अभिनति (नीचे धँसा हुआ मोड़) वाले हिस्से में अभिनति घाटी बनती है।
2. भ्रंश घाटी - जब दो समानांतर दरारों (भ्रंशों) के बीच का ज़मीन का हिस्सा नीचे धँस जाता है, तो भ्रंश घाटी बनती है। नर्मदा नदी की घाटी इसी का एक उदाहरण है।
In simple words: विवर्तनिक घाटियाँ ज़मीन के अंदर की हलचल से बनती हैं। इनमें अभिनति घाटी (चट्टानों के मोड़ में) और भ्रंश घाटी (ज़मीन की दरारों के बीच) शामिल हैं।

🎯 Exam Tip: विवर्तनिक घाटियों की व्याख्या करते समय, 'अभिनति' और 'भ्रंश' की अवधारणाओं को स्पष्ट करें और उनके निर्माण की प्रक्रिया बताएँ।

 

प्रश्न 7. अवस्था के आधार पर घाटियों के वर्गीकरण को स्पष्ट कीजिए।
उत्तर: घाटियाँ अपने बनने से लेकर अंत तक कई अवस्थाओं से गुज़रती हैं। इन अवस्थाओं में कटाव की प्रक्रिया और ढाल की स्थिति अलग-अलग होती है। इस आधार पर घाटियों को निम्न भागों में बाँटा गया है:
1. युवा घाटी - इस अवस्था में घाटी का ढाल बहुत तेज़ होता है, और नदियाँ गहराई में ज़्यादा काटती हैं, जिससे गहरी घाटियाँ बनती हैं।
2. प्रौढ़ घाटी - इस अवस्था में घाटी का ढाल धीमा हो जाता है, और नदियाँ किनारे की ओर ज़्यादा काटती हैं, जिससे घाटियाँ चौड़ी हो जाती हैं।
3. वृद्ध घाटी - यह घाटी की सबसे अंतिम अवस्था होती है, जहाँ ढाल बहुत कम हो जाता है और घाटी लगभग समतल हो जाती है।
In simple words: घाटियों को उनकी उम्र के हिसाब से तीन तरह से बाँटा जाता है: युवा (गहरी, तेज़ ढाल), प्रौढ़ (चौड़ी, कम ढाल) और वृद्ध (सपाट, बहुत कम ढाल)।

🎯 Exam Tip: घाटियों की विकास अवस्थाओं को समझाते समय, प्रत्येक अवस्था की विशिष्ट विशेषताओं, जैसे ढाल, कटाव की प्रकृति और घाटी की चौड़ाई पर प्रकाश डालें।

 

प्रश्न 8. संरचना की दिशा के अनुसार घाटियों का वर्गीकरण कीजिए।
उत्तर: घाटियों की संरचना में अलग-अलग विविधताएँ देखने को मिलती हैं। घाटी के विकास के समय को आधार मानकर घाटियों को दो मुख्य भागों में बाँटा गया है:
1. अनुवर्ती घाटी - ढाल की दिशा के अनुरूप बहने वाली घाटी।
2. अध्यारोपित घाटी - ऊपरी परतों पर बनी घाटी जब निचली कठोर चट्टानों पर भी उसी दिशा में बहती है।
In simple words: घाटियों को उनकी बनावट के हिसाब से दो तरह से बाँटा जाता है: अनुवर्ती घाटी (जो ढाल के साथ चलती है) और अध्यारोपित घाटी (जो ऊपर की चट्टानों के साथ-साथ नीचे की कठोर चट्टानों पर भी उसी दिशा में बहती है)।

🎯 Exam Tip: संरचना के आधार पर घाटियों का वर्गीकरण करते समय, प्रत्येक प्रकार (अनुवर्ती, अध्यारोपित) की परिभाषा और उसके निर्माण की प्रक्रिया को स्पष्ट करें।

 

प्रश्न 9. आधारतल परिवर्तन के अनुसार घाटियों के वर्गीकरण को स्पष्ट कीजिए।
उत्तर: घाटियों में उनके शुरुआती विकास से लेकर अंत तक उनकी निचली सतह (आधारतल) में बदलाव आता है। आधारतल में इसी परिवर्तन के आधार पर घाटियों को निम्न भागों में बाँटा गया है:
1. निमग्न घाटी - जब सागरतल ऊपर उठता है, तो घाटियों के मुहाने पानी में डूब जाते हैं, जिससे निमग्न घाटी बनती है।
2. पुनर्युवनित घाटी - जब सागरतल नीचे चला जाता है, तो नदियाँ फिर से गहराई में काटना शुरू कर देती हैं, जिससे पुनर्युवनित घाटी बनती है।
In simple words: घाटियों को आधारतल में बदलाव के हिसाब से दो तरह से बाँटा जाता है: निमग्न घाटी (जब समुद्र का पानी बढ़ने से मुहाने डूब जाते हैं) और पुनर्युवनित घाटी (जब समुद्र का पानी घटने से नदियाँ फिर से गहराई में काटती हैं)।

🎯 Exam Tip: आधारतल परिवर्तन के आधार पर घाटियों के वर्गीकरण में, 'निमग्न' और 'पुनर्युवनित' घाटियों की विशेषताओं को सागरतल के उठने-गिरने से जोड़कर समझाएँ।

RBSE Class 11 Physical Geography Chapter 8 लघुत्तरात्मक प्रश्न Type II

 

प्रश्न 1. ऊँचाई के अनुसार पर्वतों का वर्गीकरण कीजिए।
अथवा
फिन्च के अनुसार वर्गीकृत पर्वतों को स्पष्ट कीजिए।
उत्तर: पर्वतों की ऊँचाई पूरे विश्व में एक जैसी नहीं होती है। पर्वतों की इसी ऊँचाई को आधार मानकर उन्हें चार मुख्य भागों में बाँटा गया है:
1. अधिक ऊँचे पर्वत - ऐसे पर्वत जिनकी ऊँचाई 6000 फीट या 2000 मीटर से ज़्यादा होती है।
2. साधारण ऊँचाई वाले पर्वत - ऐसे पर्वत जिनकी ऊँचाई 4500 फीट से 6000 फीट या 1500 से 2000 मीटर के बीच होती है।
3. कम ऊँचे पर्वत - ऐसे पर्वत जिनकी ऊँचाई 3000-4500 फीट या 1000-1500 मीटर तक होती है।
4. निम्न पर्वत - ऐसे पर्वत जिनकी ऊँचाई 1000-3000 फीट या 300-1000 मीटर तक होती है।
In simple words: पहाड़ों को उनकी ऊँचाई के हिसाब से चार हिस्सों में बाँटा जाता है: बहुत ऊँचे (6000+ फीट), सामान्य ऊँचे (4500-6000 फीट), कम ऊँचे (3000-4500 फीट) और छोटे पर्वत (1000-3000 फीट)।

🎯 Exam Tip: ऊँचाई के आधार पर पर्वतों का वर्गीकरण करते समय, प्रत्येक श्रेणी की ऊँचाई सीमा को फीट और मीटर दोनों में देना सटीकता के लिए महत्वपूर्ण है।

 

प्रश्न. पर्वत मानव जीवन पर क्या प्रभाव डालते हैं?
उत्तर: पर्वतों की स्थिति मानव जीवन पर कई तरह से प्रभाव डालती है, जिसमें सामाजिक स्थिति, पर्यटन और जल की उपलब्धता शामिल है। पर्वतों के मानव जीवन के लिए उपयोगी प्रभाव इस प्रकार हैं:
1. पर्वतों में अनेक पर्यटन केंद्र विकसित होते हैं, जो पर्यटन को बढ़ावा देते हैं।
2. पर्वतों से मनोरंजन, स्वास्थ्य लाभ और साहसिक पर्वतारोहण की सुविधा मिलती है।
3. पर्वत प्राकृतिक सीमाओं का निर्धारण करते हैं।
4. पर्वत जलवायु को नियंत्रित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।
5. पर्वत सुरक्षा और कूटनीति के लिए महत्वपूर्ण स्थान रखते हैं।
6. पर्वतों से निकलने वाली नदियाँ जल संसाधनों का स्रोत बनती हैं।
7. पर्वतीय क्षेत्रों में विभिन्न प्रकार की औषधियाँ प्राप्त होती हैं।
8. पर्वतीय क्षेत्रों के निवासी साहसी, निर्भीक, मेहनती, स्वस्थ और सुशील होते हैं।
9. पर्वत धार्मिक और आध्यात्मिक दृष्टि से महत्वपूर्ण होते हैं।
10. पर्वतों से अनेक प्रकार के संसाधन प्राप्त होते हैं।
11. पर्वत शांत और एकांत स्थल होने के कारण प्राचीनकाल से ही ऋषि-मुनियों की तपोभूमि एवं आध्यात्मिक केंद्र रहे हैं।
12. पर्वतों में अनेक तीर्थ स्थल विकसित हुए हैं।
In simple words: पहाड़ हमें घूमने, रोमांच करने, और स्वस्थ रहने में मदद करते हैं। वे सीमाएँ बनाते हैं, मौसम को नियंत्रित करते हैं, पानी देते हैं, दवाइयाँ देते हैं, और धार्मिक जगहें भी होते हैं।

🎯 Exam Tip: मानव जीवन पर पर्वतों के प्रभावों को बताते समय, उनके आर्थिक, सामाजिक, सांस्कृतिक और पर्यावरणीय योगदानों को स्पष्ट करें।

 

प्रश्न 3. स्थिति के आधार पर पठारों का वर्गीकरण कीजिए।
उत्तर: पूरे विश्व में पाए जाने वाले पठारों की स्थिति अलग-अलग होती है। पठारों की स्थिति को आधार मानकर उन्हें तीन मुख्य भागों में बाँटा गया है:
1. अन्तर्पवतीय पठार - ऐसे पठार जो पर्वतों के बीच स्थित होते हैं, जिनके चारों ओर पहाड़ होते हैं। इनकी उत्पत्ति अक्सर पृथ्वी के अंदरूनी बलों से होती है। जैसे हिमालय और कुनलुन के बीच तिब्बत का पठार, बोलिविया का पठार, पेरू का पठार, मैक्सिको का पठार और कोलम्बिया का पठार।
2. पर्वतपदीय पठार - ऐसे पठार जो पहाड़ों की तलहटी में स्थित होते हैं, जिनके एक ओर पर्वत और दूसरी ओर समुद्र या मैदान होता है।
3. महाद्वीपीय पठार - ऐसे पठार जो किसी देश या महाद्वीप के एक बड़े हिस्से पर फैले होते हैं। ऐसे पठारों का विस्तार कई लाख वर्ग किमी क्षेत्र में होता है। इनमें मुख्यत: भारत का दक्कन का पठार, ग्रीनलैण्ड का पठार, अण्टार्कटिका का पठार, दक्षिणी अफ्रीका का पठार, अरब का पठार एवं ऑस्ट्रेलिया का पठार शामिल हैं।
In simple words: पठार कहाँ हैं, इस आधार पर उन्हें तीन हिस्सों में बाँटा जाता है: पहाड़ों के बीच वाले पठार (जैसे तिब्बत), पहाड़ों के नीचे वाले पठार, और बड़े महाद्वीप पर फैले पठार (जैसे दक्कन का पठार)।

🎯 Exam Tip: स्थिति के आधार पर पठारों के वर्गीकरण में, प्रत्येक प्रकार (अन्तर्पवतीय, पर्वतपदीय, महाद्वीपीय) की भौगोलिक स्थिति को उदाहरणों के साथ स्पष्ट करें।

 

प्रश्न 4. जलवायु के आधार पर पठारों का वर्गीकरण कीजिए।
उत्तर: विश्व में पाए जाने वाले पठारों पर जलवायु का एक महत्वपूर्ण प्रभाव होता है। जलवायु की स्थितियों के अनुसार ही पठारों का स्वरूप देखने को मिलता है। विश्व की जलवायु दशाओं को आधार मानकर पठारों को निम्न भागों में बाँटा गया है:
1. आर्द्र पठार - ऐसे पठार जहाँ अक्सर 50 प्रतिशत से ज़्यादा नमी और अच्छी बारिश होती है। इन पठारों में नदियाँ तेज़ गति से बहती हैं और गहराई में कटाव करती हैं। चेरापूँजी का पठार, मालागासी का पठार और ऑस्ट्रेलिया का पूर्वी पठार इसके उदाहरण हैं।
2. शुष्क पठार - ऐसे पठार जहाँ वाष्पीकरण की दर बारिश से ज़्यादा होती है। ये पठार अक्सर कर्क और मकर रेखाओं के पास महाद्वीपों के पश्चिमी किनारों पर पाए जाते हैं। तारीम का पठार, पोतवार का पठार, गोबी का पठार और सैदाम का पठार इसके उदाहरण हैं।
3. हिममण्डित पठार - ऐसे पठार जो ऊँचे प्रदेशों या उच्च अक्षांशों में बहुत ज़्यादा ठंड के कारण साल भर ज़्यादातर बर्फ से ढके रहते हैं। ग्रीनलैण्ड का पठार, अंटार्कटिका के पठार और पेंटागोनिया के पठार का दक्षिणी भाग इसके उदाहरण हैं।
In simple words: पठारों को मौसम के हिसाब से तीन तरह से बाँटा जाता है: गीले पठार (जहाँ बारिश ज़्यादा होती है), सूखे पठार (जहाँ गर्मी ज़्यादा होती है) और बर्फीले पठार (जहाँ हमेशा बर्फ रहती है)।

🎯 Exam Tip: जलवायु के आधार पर पठारों के वर्गीकरण में, प्रत्येक प्रकार (आर्द्र, शुष्क, हिममण्डित) की जलवायु विशेषताओं और उनके प्रमुख उदाहरणों का उल्लेख करें।

 

प्रश्न 5. बाह्य शक्तियों द्वारा निर्मित घाटियों को स्पष्ट कीजिए।
उत्तर: बाहरी अपरदनकारी शक्तियों द्वारा निर्मित घाटियों को निम्न भागों में बाँटा गया है:
1. नदी घाटी - नदियाँ अपने बहने से ज़मीन को काटती हैं और गहराई में कटाव करके घाटियाँ बनाती हैं।
2. हिमनदी घाटी - हिमाच्छादित ऊँचे पर्वतों से सरकने वाली बर्फ चौड़ी और खड़े ढाल वाली U-आकार की घाटी का निर्माण करती है। बड़ी हिमनदी में ऊँचाई से आकर मिलने वाली सहायक हिमनदी लटकती हुई घाटी का निर्माण करती है।
3. अन्धी घाटी - इस प्रकार की घाटियों का निर्माण चूना प्रदेशों में धरातल पर बहने वाली नदी द्वारा गहराई में कटाव करते हुए चूने की चट्टानों में बने घोल रन्ध्र में समा जाने से होता है। रन्ध्र के बाद बची शुष्क घाटी को, अन्धी घाटी कहा जाता है।
In simple words: बाहर की ताकतें जैसे नदी, बर्फ और पानी के कटाव से तीन तरह की घाटियाँ बनती हैं: नदी घाटी (V-आकार), बर्फ की नदी से बनी घाटी (U-आकार) और अन्धी घाटी (चूना पत्थर वाले इलाकों में जहाँ नदी ज़मीन में समा जाती है)।

🎯 Exam Tip: बाह्य शक्तियों द्वारा निर्मित घाटियों की व्याख्या करते समय, प्रत्येक प्रकार (नदी, हिमनदी, अन्धी) के निर्माण में शामिल मुख्य अपरदनकारी कारक को स्पष्ट करें।

 

प्रश्न 6. घाटियों का आनुवांशिक वर्गीकरण कीजिए।
अथवा
आनुवांशिक आधार पर घाटियों का वर्गीकरण कीजिए।
उत्तर: आनुवांशिक आधार पर घाटियों को निम्न भागों में बाँटा गया है:
1. अनुवर्ती घाटी - ऐसी घाटियाँ जिनका निर्माण ढाल की नति के सहारे होता है। ये नवनिर्मित भागों, ज्वालामुखीय क्षेत्रों और तटीय मैदानों में विकसित होती हैं।
2. परिवर्ती घाटी - अनुवर्ती घाटी के निर्माण के बाद ढाल के नतिलम्ब के सहारे बनने वाली घाटी को परिवर्ती या अनुदैर्ध्य घाटी कहते हैं। ये प्रायः मुलायम शैलों वाले क्षेत्रों में मिलती हैं।
3. प्रत्यानुवर्ती घाटी - मुख्य अनुवर्ती के विपरीत दिशा में बहने वाली परिवर्ती नदी की सहायक नदी प्रत्यानुवर्ती घाटी का निर्माण करती है। सरिता अपहरण के द्वारा भी ऐसी घाटियों का निर्माण होता है।
4. नवानुवर्ती घाटी - अनुवर्ती नदी की दिशा के अनुरूप बहने वाली परिवर्ती नदी की सहायक नदी नवानुवर्ती घाटी का निर्माण करती है।
5. अक्रमवर्ती घाटी - ऐसी नदी घाटी जो क्षेत्रीय संरचना पर आधारित न होकर उससे स्वतंत्र होती है और ढाल व भू-संरचना का अनुसरण नहीं करती, उसे अक्रमवर्ती घाटी कहते हैं।
In simple words: घाटियों को वे कैसे बनी हैं, इस हिसाब से पाँच तरह से बाँटा जाता है: अनुवर्ती (ढाल के साथ), परिवर्ती (ढाल के लंबवत), प्रत्यानुवर्ती (उल्टी दिशा में), नवानुवर्ती (नई सहायक नदियाँ) और अक्रमवर्ती (जो ढाल या ज़मीन की बनावट को नहीं मानती)।

🎯 Exam Tip: आनुवांशिक आधार पर घाटियों के पाँचों प्रकारों (अनुवर्ती, परिवर्ती, प्रत्यानुवर्ती, नवानुवर्ती, अक्रमवर्ती) की परिभाषा और उनकी निर्माण प्रक्रिया को स्पष्ट करें।

 

प्रश्न. पर्वतों के निर्माण में उत्तरदायी पर्वत निर्माणकारी हलचलों का वर्णन कीजिए।
उत्तर: पर्वत ज़मीन के वे ऊँचे उठे भाग होते हैं जिनका शिखर नुकीला और ढाल तेज़ होता है। फिन्च के अनुसार, "पर्वत समुद्रतल से 600 मीटर या उससे अधिक ऊँचे और 260°-350° के ढाल वाले होते हैं।" पर्वतों का निर्माण एक साथ नहीं बल्कि एक लंबी प्रक्रिया के तहत हुआ है। विश्व में पर्वत निर्माण के चार प्रमुख कालक्रम माने गए हैं:
1. आर्कियन कालक्रम - यह सबसे पुरानी पर्वत निर्माण की घटना है, जो लगभग 40 करोड़ साल पहले कैम्ब्रियन काल में हुई थी। इस काल में भारत में अरावली पर्वत, धारवाड़ और पूर्वी घाट जैसे पर्वतों का निर्माण हुआ।
2. कैलेडोनियन कालक्रम - यह हलचल लगभग 32 करोड़ साल पहले हुई थी। इस काल में अमेरिका में अप्लेशियन, यूरोप में स्कॉटिश अपलैंड और आयरलैंड के पर्वतों का निर्माण हुआ।
3. हर्सिनियन कालक्रम - यह पर्वत निर्माणकारी हलचल लगभग 22 करोड़ साल पहले हुई थी। इस काल में एशिया के थ्यानशान, अल्टाईशान और यूरोप के पेनाइन व हार्ज जैसे पर्वतों का निर्माण हुआ।
4. अल्पाइन कालक्रम - यह सबसे नवीनतम पर्वत निर्माणकारी कालक्रम है, जो लगभग 3 करोड़ साल पहले हुआ था। इस हलचल से हिमालय, कुनलुन, एण्डीज और आल्पस जैसे मोड़दार पर्वतों का निर्माण हुआ।
In simple words: पहाड़ बहुत समय पहले, ज़मीन की बड़ी हलचलों से बने थे। चार बड़े समय में पहाड़ बने: आर्कियन (सबसे पुराने), कैलेडोनियन, हर्सिनियन और अल्पाइन (सबसे नए, जैसे हिमालय)।

🎯 Exam Tip: पर्वत निर्माणकारी हलचलों की व्याख्या करते समय, प्रत्येक कालक्रम (आर्कियन, कैलेडोनियन, हर्सिनियन, अल्पाइन) के समय, प्रमुख विशेषताएं और निर्मित पर्वतों के उदाहरणों का उल्लेख करें।

 

प्रश्न. पठारों को परिभाषित करते हुए, विकास की अवस्था के आधार पर पठारों का वर्गीकरण कीजिए।
उत्तर: पठार ऐसे भू-भाग होते हैं जो आसपास की ज़मीन से ऊँचे होते हैं, जिनका ऊपरी भाग समतल होता है और किनारे ढलान वाले होते हैं। पूरे विश्व में पाए जाने वाले पठारों के स्वरूप अलग-अलग होते हैं, और उन्हें विभिन्न आधारों पर वर्गीकृत किया गया है। विकास की अवस्था के आधार पर पठारों का वर्गीकरण निम्न प्रकार है:

उत्पत्ति के आधार परस्थिति के आधार परजलवायु के आधार परविकास की अवस्था के आधार पर
(i) लावा निर्मित पठार(i) अन्तर्पवतीय पठार(i) आर्द्र पठार(i) नवीन पठार
(ii) हिमानीकृत पठार(ii) पर्वतपदीय पठार(ii) शुष्क पठार(ii) प्रौढ़ पठार
(iii) वायुजनित पठार(iii) महाद्वीपीय पठार(iii) हिममण्डित पठार(iii) वृद्धावस्था पठार
(iv) जलज पठार(iv) पुनर्युवनित पठार

पठारों का विकास एक लंबी समय अवधि का परिणाम होता है। इनकी उत्पत्ति से लेकर वर्तमान समय तक को आधार मानकर इन्हें निम्न भागों में बाँटा गया है:
1. नवीन पठार - ये पठार आसपास के मैदान से तेज़ी से ऊपर उठे होते हैं। इन पर बहने वाली नदियाँ गहरी घाटियाँ बनाती हैं। कोलो का पठार इसका उदाहरण है।
2. प्रौढ़ पठार - ये पठार ऊबड़-खाबड़ होते हैं, जिनमें कन्दराएँ और कटक तीव्र ढाल वाले होते हैं। इनके किनारे सीढ़ीनुमा दिखाई देते हैं, जैसे अप्लेशियन का पठार।
3. वृद्धावस्था के पठार - पठार के ऊँचे-नीचे भाग लगभग समतल मैदान में बदल जाते हैं, जैसे राँची का पठार। यहाँ नदियाँ उथली घाटियों से होकर बहती हैं।
4. पुनर्युवनित पठार - आंतरिक हलचलों के कारण वृद्धावस्था प्राप्त कर चुके पठार का फिर से उत्थान हो जाता है। मिसौरी का पठार इसका मुख्य उदाहरण है।
In simple words: पठार ऊँचे और सपाट होते हैं। वे कैसे बने और कितने पुराने हैं, इसके हिसाब से उन्हें बांटा गया है। विकास के आधार पर, वे नए, पूरे बने हुए, पुराने और फिर से नए हुए पठार होते हैं, जिनमें हर पठार की अपनी अलग पहचान होती है।

🎯 Exam Tip: पठारों के वर्गीकरण में, उत्पत्ति, स्थिति, जलवायु और विकास की अवस्था-चारों आधारों को स्पष्ट करें और प्रत्येक श्रेणी के तहत मुख्य उदाहरण दें।

 

प्रश्न. स्थलरूप रूप विकास की संकल्पना क्या है?
उत्तर: धरातल पर महाद्वीप और महासागर सबसे बड़े स्थलरूप हैं। पर्वत, पठार और मैदान दूसरी श्रेणी के स्थलरूप हैं, और इन पर बाहरी बलों द्वारा बने अनगिनत छोटे भू-रूप तीसरी श्रेणी के स्थलरूप हैं। इनमें से कोई भी स्थलरूप ज़मीन पर हमेशा एक जैसा नहीं रहता। पृथ्वी के अंदरूनी बलों से जैसे ही कोई स्थलरूप बनता है, बाहरी बल उसे धीरे-धीरे तोड़ना शुरू कर देते हैं। जहाँ आज हिमालय पर्वत खड़ा है, वहाँ कभी टेथीस सागर लहराता था। पर्वत घिसकर पठार और मैदान बन जाते हैं, और मैदान पानी में डूबकर समुद्र बन सकते हैं। इस तरह स्थलरूपों का विकास एक लगातार चलने वाला चक्र है। स्थलाकृतियों के विकास में काफी जटिलताएँ होती हैं।
सभी महाद्वीप और महासागर छोटी-बड़ी 20 भू-प्लेटों (Tectonic Plates) से बने हैं। इन प्लेटों के खिसकने से इनके किनारों पर भूगर्भीय क्रियाएँ होती हैं, जिनसे विभिन्न प्रकार के स्थलरूप बनते हैं। भू-प्लेट विवर्तनिक संकल्पना (Concept of Plate) से पर्वत निर्माण, भूकंप, ज्वालामुखी और महाद्वीपों के खिसकने (Continental drift) जैसी समस्याओं को समझने में मदद मिली है। इसी तरह, भू-आकृति चक्र (Geomorphic Cycle) और अपरदन चक्र (Cycle of Erosion) की संकल्पनाओं ने तीसरी श्रेणी के असंख्य स्थलरूपों के विकास की समस्याओं को सुलझाने में मार्ग प्रशस्त किया है।
In simple words: ज़मीन पर पहाड़, पठार और मैदान जैसे रूप हमेशा बदलते रहते हैं। ये ज़मीन की अंदरूनी और बाहरी ताकतों से बनते और टूटते रहते हैं, जैसे प्लेटों के खिसकने से पहाड़ बनते हैं और हवा-पानी से टूटते हैं। यह एक चलता रहने वाला बदलाव है।

🎯 Exam Tip: स्थलरूप विकास की संकल्पना में 'अन्तर्जात' और 'बहिर्जात' बलों, 'भू-प्लेट विवर्तनिकी' और 'भू-आकृति चक्र' जैसे मुख्य सिद्धांतों को स्पष्ट रूप से समझाएँ।

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