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Detailed Chapter 7 भूकंप एवं ज्वालामुखी RBSE Solutions for Class 11 Geography
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Class 11 Geography Chapter 7 भूकंप एवं ज्वालामुखी RBSE Solutions PDF
RBSE Class 11 Physical Geography Chapter 7 वस्तुनिष्ठ प्रश्न
Question 1. इटली के एटना ज्वालामुखी को निम्न में से किस प्रकार में रखा जा सकता है?
(अ) सक्रिय
(ब) शान्त
(स) मृत
(द) सुषुप्त
Answer: (अ) सक्रिय
In simple words: इटली का एटना ज्वालामुखी हमेशा सक्रिय रहता है. इसका मतलब है कि इसमें से समय-समय पर लावा और गैसें निकलती रहती हैं.
🎯 Exam Tip: ज्वालामुखियों के विभिन्न प्रकारों (सक्रिय, शान्त, सुषुप्त) और उनके प्रमुख उदाहरणों को याद रखना महत्वपूर्ण है.
Question 3. म्यांमार का माउण्ट पोपा ज्वालामुखी निम्नलिखित में से किस प्रकार का है?
(अ) सक्रिय
(ब) शान्त
(स) मृत
(द) सुषुप्त
Answer: (द) सुषुप्त
In simple words: म्यांमार का माउण्ट पोपा ज्वालामुखी पहले सक्रिय था, लेकिन अब यह शांत है. यह कभी भी फिर से सक्रिय हो सकता है.
🎯 Exam Tip: सुषुप्त ज्वालामुखी उन ज्वालामुखियों को कहते हैं जो लम्बे समय से शांत हैं पर भविष्य में फिर से सक्रिय हो सकते हैं.
Question 4. जिन ज्वालामुखियों में उद्गार एक मुख से होता है उन्हें किस प्रकार के ज्वालामुखी की श्रेणी में रखा जा सकता है?
(अ) दरारी उद्गार
(ब) केन्द्रीय उद्गार
(स) मृत
(द) सुषुप्त
Answer: (ब) केन्द्रीय उद्गार
In simple words: जब ज्वालामुखी से लावा और गैसें एक ही बड़े छेद से बाहर आती हैं, तो उसे केन्द्रीय उद्गार ज्वालामुखी कहते हैं.
🎯 Exam Tip: केन्द्रीय उद्गार ज्वालामुखी में लावा और गैसें एक मुख्य निकास मार्ग से निकलती हैं, जबकि दरारी उद्गार में ये कई दरारों से निकलती हैं.
Question 5. भारत में 'दक्कन का पठार' किस प्रकार के ज्वालामुखी उद्गार से निर्मित पठार है?
(अ) दरारी उद्गार
(ब) केन्द्रीय उद्गार
(स) मृत
(द) सुषुप्त
Answer: (अ) दरारी उद्गार
In simple words: भारत का दक्कन का पठार बहुत पुराने समय में धरती पर बनी लंबी दरारों से निकले लावा से बना है, जिसमें लावा शांतिपूर्वक फैला था.
🎯 Exam Tip: दरारी उद्गार वाले ज्वालामुखी से निकला पतला लावा दूर तक फैलता है, जिससे पठार बनते हैं, जबकि केन्द्रीय उद्गार से शंकु आकार के पर्वत बनते हैं.
RBSE Class 11 Physical Geography Chapter 7 अतिलघूत्तात्मक प्रश्न
Question 6. भूकम्प को परिभाषित कीजिए।
Answer: भूकम्प पृथ्वी की सतह पर अचानक होने वाले कम्पन को कहते हैं, जो भूगर्भीय ऊर्जा के निकलने से उत्पन्न होता है. यह एक प्राकृतिक घटना है. पृथ्वी की ऊपरी सतह (भूपटल) में अचानक होने वाले झटकों या कम्पन को भूकम्प कहते हैं.
In simple words: भूकम्प धरती के हिलने को कहते हैं, जो पृथ्वी के अंदर से ऊर्जा निकलने के कारण होता है.
🎯 Exam Tip: भूकम्प की परिभाषा देते समय 'अचानक कम्पन' और 'भूगर्भीय ऊर्जा के निकलने' जैसे प्रमुख शब्दों का उपयोग करें.
Question 8. द्वितीयक तरंगें किसे कहते हैं?
Answer: एस तरंगों को द्वितीयक तरंगें भी कहते हैं. ये तरंगें प्राथमिक तरंगों (पी-तरंगों) के बाद पृथ्वी की सतह पर पहुँचती हैं. इनकी गति पी-तरंगों से कम होती है.
In simple words: एस तरंगों को द्वितीयक तरंगें कहते हैं. ये भूकम्प के बाद में पहुंचती हैं.
🎯 Exam Tip: भूकम्पीय तरंगों के प्रकार और उनके पहुँचने के क्रम (पहले पी-तरंगें, फिर एस-तरंगें) को याद रखें.
Question 9. दो सक्रिय ज्वालामुखियों के नाम बताइये।
Answer: दो सक्रिय ज्वालामुखियों के नाम एटना और स्ट्राम्बोली हैं. ये दोनों ज्वालामुखी लगातार सक्रिय रहते हैं.
In simple words: एटना और स्ट्राम्बोली दो ऐसे ज्वालामुखी हैं, जो हमेशा सक्रिय रहते हैं.
🎯 Exam Tip: सक्रिय ज्वालामुखियों के उदाहरणों को याद रखें क्योंकि ये अक्सर पूछे जाते हैं.
Question 10. दो शान्त ज्वालामुखियों के नाम बताइये।
Answer: दो शान्त ज्वालामुखियों के नाम म्यांमार का माउण्ट पोपा और ईरान का कोहे सुल्तान हैं. ये ज्वालामुखी लंबे समय से शांत हैं और भविष्य में इनके सक्रिय होने की संभावना कम है.
In simple words: म्यांमार का माउण्ट पोपा और ईरान का कोहे सुल्तान दो शांत ज्वालामुखी हैं.
🎯 Exam Tip: शांत या मृत ज्वालामुखियों के उदाहरणों को याद रखना सहायक होता है.
RBSE Class 11 Physical Geography Chapter 7 लघूत्तात्मक प्रश्न
Question 11. प्रत्यास्थ पुनश्चलन को समझाइये।
Answer: प्रो. एफ. एस. रीड ने प्रत्यास्थ पुनश्चलन सिद्धांत दिया था. इस सिद्धांत के अनुसार चट्टानें रबर की तरह लचीली होती हैं और खिंचने पर बढ़ती हैं. एक निश्चित सीमा तक खिंचने के बाद, वे टूट जाती हैं और टूटे हुए टुकड़े वापस अपनी जगह पर आ जाते हैं. चट्टानों के फैलने और फिर सिकुड़ने की इसी प्रक्रिया से पृथ्वी की सतह पर भूकम्प आते हैं.
In simple words: यह सिद्धांत बताता है कि चट्टानें खिंचती हैं, फिर टूटकर अपनी जगह वापस आती हैं, जिससे भूकम्प आते हैं.
🎯 Exam Tip: प्रत्यास्थ पुनश्चलन सिद्धांत को समझाते समय 'चट्टानों की लचीलता', 'टूटने' और 'पुनः अपनी स्थिति में आने' जैसे प्रमुख बिन्दुओं को शामिल करें.
Question 12. ज्वालामुखी क्रिया में भूकम्प कैसे आते हैं? समझाइये।
Answer: ज्वालामुखी क्रिया और भूकम्प आपस में जुड़े हुए हैं. जब ज्वालामुखी से तीव्र और वेगवान गैसें और भाप पृथ्वी के नीचे से बाहर निकलने के लिए जोर लगाती हैं, तो चट्टानों में कम्पन पैदा होता है. इससे भूकम्प आते हैं, जिन्हें ज्वालामुखी भूकम्प कहते हैं. यह दबाव और अचानक गैसों के निकलने से होता है.
In simple words: जब ज्वालामुखी से गैसें और भाप बाहर निकलने के लिए धरती के नीचे दबाव डालती हैं, तो धरती हिलती है और भूकम्प आते हैं.
🎯 Exam Tip: ज्वालामुखी और भूकम्प के बीच के संबंध को स्पष्ट करने के लिए 'गैसों और वाष्प का दबाव' तथा 'चट्टानों में कम्पन' जैसे शब्दों का प्रयोग करें.
Question 13. जलीय भार से भूकम्प कैसे आते हैं? समझाइये।
Answer: जब पृथ्वी की सतह पर बहुत अधिक पानी इकट्ठा हो जाता है (जैसे बड़े जलाशयों में), तो उसका भारी वजन और दबाव चट्टानों में हलचल पैदा करता है. अगर यह बदलाव तेजी से होता है, तो भूकम्प महसूस होता है. मानव द्वारा बनाए गए बड़े जलाशयों और बांधों के कारण भी ऐसा हो सकता है. उदाहरण के लिए, 1967 में महाराष्ट्र के कोयना में आया भूकम्प कोयना बांध के कारण ही माना जाता है.
In simple words: बड़े बांधों या जलाशयों में ज्यादा पानी इकट्ठा होने से चट्टानों पर दबाव पड़ता है, जिससे धरती हिलती है और भूकम्प आते हैं.
🎯 Exam Tip: 'जलीय भार', 'चट्टानों में हलचल', 'दबाव' और 'कोयना बांध का उदाहरण' जैसे मुख्य बिन्दुओं को शामिल करें.
Question 14. ज्वालामुखियों के प्रकार बताइये।
Answer: ज्वालामुखी से उद्गार की प्रक्रिया और समय में अंतर होता है. कुछ ज्वालामुखी तेजी से फटते हैं, जबकि कुछ शांत होते हैं. इन विभिन्नताओं के आधार पर ज्वालामुखियों को मुख्य रूप से दो आधारों पर बांटा गया है:
1. उद्गार की अवधि के आधार पर
2. उद्गार के स्वरूप के आधार पर
ज्वालामुखी के वर्गीकरण को नीचे दी गई तालिका में दर्शाया गया है:
| उद्गार की अवधि के आधार पर | उद्गार के स्वरूप के आधार पर |
|---|---|
| सक्रिय | केन्द्रीय उद्गार वाले |
| सुषुप्त | दरारी उद्गार वाले |
| शान्त | हवाई तुल्य |
| स्ट्राम्बोलीतुल्य | |
| वल्कैनो तुल्य | |
| पीलियन तुल्य |
In simple words: ज्वालामुखी को दो तरीकों से बांटा जाता है: एक तो यह कि वे कितनी देर तक फटते हैं (सक्रिय, सुषुप्त, शांत), और दूसरा यह कि वे कैसे फटते हैं (एक छेद से या दरार से).
🎯 Exam Tip: ज्वालामुखियों के वर्गीकरण के मुख्य आधारों और प्रत्येक श्रेणी के तहत आने वाले उप-प्रकारों को तालिका के रूप में प्रस्तुत करना अच्छे अंक दिलाता है.
Question 15. जाग्रत ज्वालामुखी के उदाहरण बताइये।
Answer: जाग्रत ज्वालामुखी के उदाहरण एटना और स्ट्राम्बोली हैं. ये दोनों ज्वालामुखी लगातार सक्रिय रहते हैं और इनसे उद्गार होता रहता है.
In simple words: एटना और स्ट्राम्बोली दो ऐसे ज्वालामुखी हैं जो हमेशा सक्रिय रहते हैं.
🎯 Exam Tip: सक्रिय या जाग्रत ज्वालामुखी वे होते हैं जिनमें से निरंतर उद्गार होता रहता है. इनके नाम याद रखना परीक्षा के लिए उपयोगी है.
Question 16. भूकम्प की उत्पत्ति के कारण बताते हुए विभिन्न भूकम्पीय तरंगों की व्याख्या कीजिए।
Answer: भूकम्प एक अचानक आने वाली प्राकृतिक आपदा है, जिसके कई कारण होते हैं. मुख्य कारण इस प्रकार हैं:
1. भ्रंशन
2. ज्वालामुखी क्रिया
3. जलीय भार
4. भूपटल का संकुचन
5. समस्थिति समायोजन
6. प्रत्यास्थ पुनश्चलन सिद्धान्त
7. प्लेट विवर्तनिकी
8. मानवीय कारण आदि
भूकम्पीय तरंगों की व्याख्या: भूकम्पीय लहरों को सिस्मोग्राफ नामक यंत्र से रिकॉर्ड किया जाता है. ये तरंगें मुख्य रूप से तीन प्रकार की होती हैं:
(i) पी-तरंगें (प्राथमिक तरंगें): ये तरंगें भूकम्प के केंद्र से निकलकर सबसे पहले पृथ्वी की सतह पर पहुँचती हैं. इनकी औसत गति 8-10 किमी प्रति सेकंड होती है. ये ठोस, द्रव और गैस तीनों माध्यमों से गुजर सकती हैं और ध्वनि तरंगों की तरह चलती हैं.
(ii) एस-तरंगें (द्वितीयक तरंगें): ये तरंगें पी-तरंगों के बाद सतह पर पहुँचती हैं और इनकी गति लगभग 5 किमी प्रति सेकंड होती है. ये केवल ठोस माध्यम से गुजरती हैं और तरल भागों में लुप्त हो जाती हैं. इन्हें आड़ी तरंगें भी कहते हैं.
(iii) एल-तरंगें (धरातलीय तरंगें): ये तरंगें सबसे लम्बा रास्ता तय करती हैं और भूकम्प के केंद्र से चारों ओर फैलती हैं. इनकी गति 3 किमी प्रति सेकंड होती है और ये भूकम्पीय क्षेत्र में सबसे ज्यादा नुकसान पहुँचाती हैं. ये धरातल पर सबसे बाद में पहुँचती हैं और अधिक गहराई पर लुप्त हो जाती हैं. ये जल से भी गुजर सकती हैं.
In simple words: भूकम्प कई कारणों से आते हैं, जैसे जमीन का टूटना, ज्वालामुखी फटना या पानी का ज्यादा वजन. भूकम्प की तीन तरह की तरंगें होती हैं: पी-तरंगें (जो सबसे तेज चलती हैं), एस-तरंगें (जो पी-तरंगों के बाद आती हैं) और एल-तरंगें (जो सतह पर सबसे ज्यादा नुकसान करती हैं).
🎯 Exam Tip: भूकम्प के कारणों को एक सूची के रूप में दें और प्रत्येक भूकम्पीय तरंग (पी, एस, एल) की गति, माध्यम और नुकसान करने की क्षमता को स्पष्ट रूप से समझाएं.
Question 17. भूकम्पों का वर्गीकरण देते हुए, उनका विश्व वितरण बताइए।
Answer: पृथ्वी की सतह पर आने वाले भूकम्प अपने स्वभाव और कारणों के आधार पर अलग-अलग होते हैं. इस आधार पर भूकम्पों को मुख्य रूप से निम्न भागों में बांटा गया है:
भूकम्पों का वर्गीकरण:
- कृत्रिम भूकम्प (मानवीय क्रियाओं से उत्पन्न)
- प्राकृतिक भूकम्प:
- ज्वालामुखी भूकम्प
- संतुलन मूलक भूकम्प
- प्लूटोनिक भूकम्प
- स्थलीय भूकम्प
- सामुद्रिक भूकम्प
- विवर्तनिकी भूकम्प
भूकम्पों का विश्व वितरण:
दुनिया के ज्यादातर भूकम्प नए मुड़े हुए पहाड़ों, ज्वालामुखी वाले क्षेत्रों और समुद्र के किनारे वाले इलाकों में आते हैं. ये वो जगहें हैं जहाँ धरती की संतुलन बिगड़ती है या ऊपरी परत कमजोर होती है. विश्व में भूकम्पों का वितरण इन मुख्य पट्टियों में मिलता है:
1. परिप्रशांत पेटी:
यह दुनिया का सबसे बड़ा भूकम्प क्षेत्र है, जहाँ लगभग 63% भूकम्प आते हैं. यह प्रशांत महासागर के चारों ओर एक वृत्त की तरह द्वीपों और महाद्वीपों पर फैला है. यहाँ भूकम्प आने के मुख्य कारण सागर और स्थल का मिलना, नए वलित पर्वत, ज्वालामुखी क्षेत्र और विनाशकारी प्लेटों का खिसकना हैं.
2. मध्य महाद्वीपीय पेटी:
यह पेटी पुर्तगाल से हिमालय, तिब्बत और दक्षिण पूर्वी द्वीप समूह तक फैली है. इसमें इटली, चीन, एशिया माइनर, हिन्दकुश, हिमालय, आल्पस और म्यांमार जैसे क्षेत्र शामिल हैं. भारत का भूकम्पीय क्षेत्र भी इसी पेटी में आता है.
3. मध्य अटलांटिक कटक पेटी:
यह पेटी मध्य अटलांटिक कटक के किनारे पर स्थित है, जो अटलांटिक महासागर के पश्चिमी द्वीप समूह से लेकर दक्षिण में बोवेट द्वीप तक फैली है. यहाँ भूकम्प मुख्य रूप से भ्रंशों के बनने, प्लेटों के खिसकने और ज्वालामुखी क्रिया के कारण आते हैं. भूमध्य रेखा पर इस पेटी में सबसे ज्यादा भूकम्प आते हैं.
In simple words: भूकम्पों को उनके आने के कारणों के आधार पर कई प्रकारों में बांटा जाता है. ये भूकम्प दुनिया में तीन बड़ी जगहों पर ज्यादा आते हैं: प्रशांत महासागर के चारों ओर, एशिया और यूरोप के बीच और अटलांटिक महासागर के बीच में.
🎯 Exam Tip: भूकम्प के वर्गीकरण को सूची या फ्लोचार्ट के रूप में दिखाएं और विश्व वितरण की तीनों प्रमुख पेटियों का नाम व उनकी मुख्य विशेषताओं को संक्षेप में बताएं.
Question 18. ज्वालामुखी के कारण बताते हुए, उनके वर्गीकरण की व्याख्या कीजिए।
Answer: ज्वालामुखी क्रिया के कई कारण होते हैं. मुख्य कारण इस प्रकार हैं:
1. भूगर्भिक असंतुलन
2. गैसों की उत्पत्ति
3. भूगर्भ में ताप वृद्धि
4. दाब में कमी
5. प्लेट विवर्तनिकी
ज्वालामुखियों का वर्गीकरण:
ज्वालामुखियों को मुख्य रूप से दो आधारों पर वर्गीकृत किया गया है:
(i) उद्गार की अवधि के आधार पर:
(अ) सक्रिय या जाग्रत ज्वालामुखी: ये ज्वालामुखी लगातार फटते रहते हैं, जैसे एटना और स्ट्राम्बोली.
(ब) सुषुप्त ज्वालामुखी: ये ज्वालामुखी कुछ समय शांत रहने के बाद फिर से फटते हैं, जैसे विसुवियस.
(स) शान्त या मृत ज्वालामुखी: इन ज्वालामुखियों में बहुत समय से कोई उद्गार नहीं हुआ और इनके मुख में पानी भर गया है, जैसे माउंट पोपा और कोहे सुल्तान.
(ii) उद्गार के स्वरूप के आधार पर ज्वालामुखियों के प्रकार:
(अ) केन्द्रीय उद्गार वाले ज्वालामुखी:
ये ज्वालामुखी एक नली या मुख्य मुख से फटते हैं. इन्हें आगे चार भागों में बांटा गया है:
1. हवाई तुल्य ज्वालामुखी: इनमें कम विस्फोटक उद्गार होता है क्योंकि लावा पतला और गैसें कम तीव्र होती हैं. उदाहरण: हवाई द्वीप के ज्वालामुखी.
2. स्ट्राम्बोली तुल्य ज्वालामुखी: इनमें लावा अपेक्षाकृत तेजी से निकलता है और गाढ़ा होता है, कभी-कभी विस्फोटक उद्गार भी होता है.
3. वल्कैनो तुल्य ज्वालामुखी: इनमें बहुत तीव्र विस्फोट होता है और राख, धूल और गैसों के काले बादल निकलते हैं.
4. पीलियन तुल्य ज्वालामुखी: ये वल्कैनो तुल्य ज्वालामुखी के समान ही होते हैं, जिनमें भयंकर विस्फोट होता है.
(ब) दरारी उद्गार वाले ज्वालामुखी:
इन ज्वालामुखियों में लावा दरारों के माध्यम से बिना विस्फोट के शांतिपूर्वक निकलता है. लावा पतला होता है, जिससे लावा पठार बनते हैं. उदाहरण: कोलंबिया का पठार और भारत में दक्कन का पठार.
In simple words: ज्वालामुखी फटने के कई कारण होते हैं, जैसे धरती के अंदर का संतुलन बिगड़ना या प्लेटों का खिसकना. ज्वालामुखी को दो तरीकों से बांटा जाता है: एक तो वे कितनी बार फटते हैं (सक्रिय, सुषुप्त, शांत), और दूसरा वे कैसे फटते हैं (एक छेद से या लंबी दरार से).
🎯 Exam Tip: ज्वालामुखी के कारणों की सूची दें और उनके वर्गीकरण को स्पष्ट रूप से परिभाषित करें, साथ ही प्रत्येक प्रकार के उदाहरण भी दें.
RBSE Class 11 Physical Geography Chapter 7 वस्तुनिष्ठ प्रश्न
Question 1. महाराष्ट्र के कोयना में आये भूकम्प का कारण था
(अ) भ्रंशन
(ब) जलीय भार
(स) भूपटल का संकुचन
(द) प्लेट विवर्तनिकी
Answer: (ब) जलीय भार
In simple words: कोयना भूकम्प एक बड़े बांध में जमा पानी के भारी वजन के कारण आया था.
🎯 Exam Tip: बड़े बांधों या जलाशयों के कारण उत्पन्न भूकम्प 'जलीय भार' की श्रेणी में आते हैं.
Question 2. प्रत्यास्थ पुनश्चलन सिद्धान्त के प्रतिपादक कौन है?
(अ) प्रो.एफ.एस.रीड
(ब) मार्गन
(स) जेफ्रीज
(द) वेगनर
Answer: (अ) प्रो.एफ.एस.रीड
In simple words: प्रत्यास्थ पुनश्चलन सिद्धांत प्रो. एफ.एस. रीड ने दिया था.
🎯 Exam Tip: महत्वपूर्ण सिद्धांतों और उनके प्रतिपादकों के नामों को याद रखना सीधे उत्तर देने में मदद करता है.
Question 3. भूकम्पीय तरंगों का आलेखन किस यंत्र से होता है?
(अ) क्लाइमोग्राफ
(ब) हीदरग्राफ
(स) अर्गोग्राफ
(द) सिस्मोग्राफ
Answer: (द) सिस्मोग्राफ
In simple words: भूकम्प की तरंगों को सिस्मोग्राफ नामक मशीन से मापा जाता है.
🎯 Exam Tip: भूकम्प से संबंधित यंत्रों और शब्दावली को समझें, जैसे सिस्मोग्राफ (यंत्र) और सिस्मोग्राम (रिकॉर्ड).
Question 4. भूकम्प के समय सबसे पहले कौन सी तरंगें धरातल पर पहुँचती हैं?
(अ) P तरंगों को
(ब) S तरंगों को
(स) L तरंगों को
(द) गामा तरंगों को
Answer: (अ) P तरंगों को
In simple words: भूकम्प के दौरान, P तरंगें धरती पर सबसे पहले पहुंचती हैं क्योंकि वे सबसे तेज चलती हैं.
🎯 Exam Tip: P तरंगें प्राथमिक तरंगें होती हैं और भूकम्प के केंद्र से सबसे पहले रिकॉर्ड की जाती हैं, इसलिए इन्हें याद रखना महत्वपूर्ण है.
Question 5. सर्वाधिक क्षति कारक तरंगें कौन-सी हैं?
(अ) P तरंगें
(ब) S तरंगें
(स) L तरंगें
(द) अल्फा तरंगें
Answer: (स) L तरंगें
In simple words: भूकम्प की L तरंगें धरती की सतह पर सबसे ज्यादा नुकसान करती हैं.
🎯 Exam Tip: L तरंगें धरातलीय तरंगें होती हैं और इनकी धीमी गति व लम्बे पथ के कारण ये इमारतों को सबसे ज्यादा नुकसान पहुंचाती हैं.
Question 6. सुनामी किस भाषा का शब्द है?
(अ) फ्रेंच
(ब) अरबी
(स) हिन्दी
(द) जापानी
Answer: (द) जापानी
In simple words: सुनामी शब्द जापानी भाषा से आया है, जिसका मतलब होता है 'बंदरगाह की लहरें'.
🎯 Exam Tip: सुनामी का अर्थ और उसकी उत्पत्ति की भाषा (जापानी) को याद रखें. यह अक्सर सामान्य ज्ञान के प्रश्न के रूप में पूछा जाता है.
Question 7. सर्वाधिक भूकम्प किस पेटी में आते हैं?
(अ) मध्य महाद्वीपीय पेटी
(ब) मध्य अटलांटिक पेटी
(स) परिप्रशांत महासागरीय पेटी
(द) उपर्युक्त में से कोई नहीं
Answer: (स) परिप्रशांत महासागरीय पेटी
In simple words: दुनिया के सबसे ज्यादा भूकम्प प्रशांत महासागर के चारों ओर वाली पट्टी में आते हैं.
🎯 Exam Tip: परिप्रशांत महासागरीय पेटी को 'अग्नि वलय' (Ring of Fire) भी कहते हैं, जहाँ ज्वालामुखी और भूकम्प की घटनाएँ सबसे अधिक होती हैं.
Question 9. फूलगोभी के समान विशाल काले बादल किस ज्वालामुखी में बनते हैं?
(अ) हवाई तुल्य
(ब) स्ट्रोम्बोली तुल्य
(स) वलकैनो तुल्य
(द) पीलियन तुल्य
Answer: (स) वलकैनो तुल्य
In simple words: वलकैनो ज्वालामुखी के फटने पर फूलगोभी जैसे बड़े काले धुएँ के बादल बनते हैं.
🎯 Exam Tip: विभिन्न प्रकार के ज्वालामुखियों के उद्गार के तरीके और उनसे निकलने वाले पदार्थों की विशेषताओं को याद रखें.
Question 10. दरारी उद्गार वाले ज्वालमुखियों में लावा कैसा होता है?
(अ) गाढ़ा
(ब) पतला
(स) राख युक्त
(द) सिलिका प्रधान
Answer: (ब) पतला
In simple words: दरारों से निकलने वाला ज्वालामुखी लावा पतला होता है.
🎯 Exam Tip: पतले लावा के कारण यह आसानी से फैल जाता है और बड़े पठारों का निर्माण करता है, जैसे दक्कन का पठार.
सुमेलन सम्बन्धी प्रश्न
Question. निम्न में स्तम्भ अ को स्तम्भ ब से सुमेलित कीजिए,
| स्तम्भ अ (भूकम्प का कारण) | स्तम्भ ब (सम्बन्धित क्षेत्र) |
|---|---|
| (i) भ्रंशन | (अ) क्रोकाटोवा |
| (ii) ज्वालामुखी क्रिया | (ब) मानवीय कारण |
| (iii) जलीय भार | (स) दरार घाटियाँ |
| (द) कोयना |
Answer:
(i) भ्रंशन - (स) दरार घाटियाँ
(ii) ज्वालामुखी क्रिया - (अ) क्रोकाटोवा
(iii) जलीय भार - (द) कोयना
In simple words: भ्रंशन अक्सर दरार घाटियों में होता है. ज्वालामुखी फटने से क्राकाटोवा जैसे क्षेत्रों में भूकम्प आते हैं. जलीय भार से कोयना जैसे बांध क्षेत्रों में भूकम्प आते हैं.
🎯 Exam Tip: भूकम्प के कारणों को उनके विशिष्ट संबंधित क्षेत्रों के साथ याद रखना मिलान वाले प्रश्नों के लिए महत्वपूर्ण है.
Question. (ख) निम्न में स्तम्भ अ को स्तम्भ ब से सुमेलित कीजिए,
| स्तम्भ अ (भूकम्प का क्षेत्र) | स्तम्भ ब (भूकम्प का प्रकार) |
|---|---|
| (i) क्राकोटोवा का भूकम्प | (अ) संतुलन मूलक भूकम्प |
| (ii) कैलिफोर्निया का भूकम्प | (ब) ज्वालामुखी भूकम्प |
| (iii) हिंदुकश का भूकम्प | (स) सामुद्रिक भूकम्प |
| (iv) फुकुशिमा का नष्ट होना | (द) विर्वतनिक भूकम्प |
Answer:
(i) क्राकोटोवा का भूकम्प - (ब) ज्वालामुखी भूकम्प, (द) विर्वतनिक भूकम्प
(ii) कैलिफोर्निया का भूकम्प - (अ) संतुलन मूलक भूकम्प
(iv) फुकुशिमा का नष्ट होना - (स) सामुद्रिक भूकम्प
In simple words: क्राकाटोवा भूकम्प ज्वालामुखी और प्लेटों के खिसकने से जुड़ा है. कैलिफोर्निया में धरती के संतुलन बिगड़ने से भूकम्प आते हैं. फुकुशिमा का नुकसान समुद्री भूकम्प (सुनामी) के कारण हुआ था.
🎯 Exam Tip: भूकम्प के विभिन्न क्षेत्रों को उनके मुख्य प्रकारों से जोड़कर याद रखें, जैसे ज्वालामुखी भूकम्प ज्वालामुखी क्षेत्रों में और संतुलन मूलक भूकम्प असंतुलित भूगर्भीय क्षेत्रों में होते हैं.
Question 2. बहिर्जात बल किसे कहते हैं?
Answer: पृथ्वी के बाहरी भाग में उत्पन्न होने वाले बलों को बहिर्जात बल कहते हैं. ये बल पृथ्वी की सतह को बदलते रहते हैं, जैसे हवा, पानी और बर्फ से होने वाला कटाव और जमाव.
In simple words: जो बल पृथ्वी की बाहरी सतह पर काम करते हैं और उसे बदलते हैं, उन्हें बहिर्जात बल कहते हैं.
🎯 Exam Tip: बहिर्जात बल (Exogenic forces) के उदाहरणों में अपरदन, अपक्षय और निक्षेपण की प्रक्रियाएं शामिल हैं.
Question 3. मोंकहाऊस ने भूकम्प की क्या परिभाषा दी है?
Answer: मोंकहाऊस के अनुसार, "भूपटल की शैली में संचालन व समायोजन की क्रिया द्वारा बाहर की और सभी दिशाओं में होने वाले प्रघाती तरंगों के संचार को भूकम्प कहते हैं.” यह परिभाषा भूकम्प को पृथ्वी की ऊपरी परत में होने वाली हलचलों से उत्पन्न तरंगों के रूप में बताती है.
In simple words: मोंकहाऊस के हिसाब से, भूकम्प धरती की ऊपरी परत में हलचल से पैदा होने वाली तरंगें हैं.
🎯 Exam Tip: परिभाषाओं को उद्धरण चिह्नों में लिखें और लेखक का नाम याद रखें.
Question 4. धरातल की संतुलन व्यवस्था में असंतुलन उत्पन्न करने वाले कारक कौन-से हैं?
Answer: धरातल की संतुलन व्यवस्था में असंतुलन लाने वाले मुख्य कारक भ्रंशन (faulting), ज्वालामुखी क्रिया, जलीय भार (water load), भूपटल का संकुचन (contraction of earth's crust), समस्थिति समायोजन (isostatic adjustment), प्रत्यास्थ पुनश्चलन (elastic rebound) और प्लेट विवर्तनिकी (plate tectonics) हैं. ये सभी कारक पृथ्वी की सतह के संतुलन को बिगाड़ते हैं.
In simple words: धरती का संतुलन बिगड़ने के कारण जमीन का टूटना, ज्वालामुखी फटना, पानी का ज्यादा वजन, प्लेटों का खिसकना आदि हैं.
🎯 Exam Tip: संतुलन में असंतुलन पैदा करने वाले सभी कारकों की एक सूची बनाएं और उन्हें संक्षेप में समझें.
Question 5. भ्रंश से क्या तात्पर्य है?
Answer: भूगर्भिक शक्तियों द्वारा तनाव और सम्पीडन के कारण चट्टानों में चटकन या दरारें पड़ने से उनका अपनी जगह से खिसक जाना भ्रंश कहलाता है. इससे चट्टानों की परतों में विस्थापन होता है.
In simple words: जब धरती के अंदर के दबाव से चट्टानें टूटकर अपनी जगह से खिसक जाती हैं, तो उसे भ्रंश कहते हैं.
🎯 Exam Tip: भ्रंश की परिभाषा में 'चट्टानों में चटकन/दरार' और 'अव्यवस्थित होना/खिसकना' जैसे मुख्य बिन्दुओं को शामिल करें.
Question 6. प्लेट विवर्तनिकी क्या है?
Answer: पृथ्वी की कठोर स्थलीय परतों (भूखण्डों) को प्लेट कहते हैं. इन प्लेटों के अध्ययन और विश्लेषण करने वाले विज्ञान को प्लेट विवर्तनिकी कहते हैं. यह प्रक्रिया पृथ्वी की सतह पर बड़े बदलाव लाती है, जैसे पहाड़ों का बनना या भूकम्पों का आना.
In simple words: धरती की बड़ी-बड़ी चट्टानों की प्लेटों का अध्ययन करना और यह समझना कि वे कैसे चलती हैं, प्लेट विवर्तनिकी कहलाता है.
🎯 Exam Tip: प्लेट विवर्तनिकी को 'स्थलीय दृढ़ भूखण्डों का अध्ययन' और 'पृथ्वी तल पर परिवर्तन लाने वाली प्रक्रिया' के रूप में परिभाषित करें.
Question 7. सागरीय निक्षेप से क्या तात्पर्य है?
Answer: सागरीय निक्षेप का अर्थ उन पदार्थों से है जो समुद्र की तली में जमा होते हैं. ये निक्षेप जैविक (जीवों के अवशेष), अजैविक (चट्टानों के टुकड़े), स्थलीय (जमीन से आए), सामुद्रिक (समुद्र से उत्पन्न) या ब्रह्माण्डीय (अंतरिक्ष से आए) हो सकते हैं. ये धीरे-धीरे समुद्र के तल पर जमा होते रहते हैं.
In simple words: सागरीय निक्षेप वे पदार्थ हैं जो समुद्र के तल में जमा हो जाते हैं, जैसे रेत, मिट्टी या समुद्री जीवों के अवशेष.
🎯 Exam Tip: सागरीय निक्षेप के विभिन्न प्रकारों (जैविक, अजैविक, स्थलीय, सामुद्रिक, ब्रह्माण्डीय) को याद रखें.
Question 9. भूकम्प मूल किसे कहते हैं?
Answer: भूगर्भ में जिस स्थान पर भूकम्प की उत्पत्ति होती है, उसे भूकम्प मूल या फोकस कहते हैं. यहीं से भूकम्पीय तरंगें सभी दिशाओं में फैलना शुरू करती हैं.
In simple words: भूकम्प धरती के अंदर जिस जगह से शुरू होता है, उसे भूकम्प मूल कहते हैं.
🎯 Exam Tip: भूकम्प मूल (Hypocentre) और अधिकेन्द्र (Epicentre) के बीच का अंतर स्पष्ट रखें: मूल अंदर होता है, अधिकेन्द्र सतह पर ठीक उसके ऊपर होता है.
Question 10. अधिकेन्द्र किसे कहते हैं?
Answer: भूकम्प मूल के ठीक ऊपर, पृथ्वी की सतह पर वह केंद्र जहाँ भूकम्पीय लहरों का अनुभव सबसे पहले होता है, उसे अधिकेन्द्र या एपिसेंटर कहते हैं. यहीं पर भूकम्प का प्रभाव सबसे ज्यादा महसूस होता है.
In simple words: अधिकेन्द्र धरती की सतह पर वह जगह है जहाँ भूकम्प का झटका सबसे पहले और सबसे तेज महसूस होता है.
🎯 Exam Tip: अधिकेन्द्र (Epicentre) भूकम्प मूल (Hypocentre) के ठीक ऊपर सतह पर होता है.
Question 11. भूकम्पीय तरंगें किसे कहते हैं?
Answer: भूकम्प मूल पर आघात उत्पन्न होने से चट्टानों में कम्पन होता है जिससे जो तरंगें उत्पन्न होती हैं, उन्हें भूकम्पीय तरंगें कहते हैं. ये तरंगें पृथ्वी के अंदर और सतह पर यात्रा करती हैं.
In simple words: भूकम्प के कारण धरती के अंदर जो कंपन होता है और उससे जो लहरें बनती हैं, उन्हें भूकम्पीय तरंगें कहते हैं.
🎯 Exam Tip: भूकम्पीय तरंगें ही भूकम्प के प्रभाव को एक स्थान से दूसरे स्थान तक पहुँचाती हैं. इनकी गति और व्यवहार अलग-अलग होते हैं.
Question 12. प्राथमिक तरंगों की गति कितनी होती है?
Answer: प्राथमिक तरंगों (पी-तरंगों) की गति 8-10 किलोमीटर प्रति सेकंड होती है. ये भूकम्पीय तरंगों में सबसे तेज गति वाली तरंगें हैं.
In simple words: प्राथमिक भूकम्प तरंगें 8 से 10 किलोमीटर प्रति सेकंड की रफ्तार से चलती हैं.
🎯 Exam Tip: पी-तरंगें सबसे तेज होती हैं और सबसे पहले पहुंचती हैं, जबकि एल-तरंगें सबसे धीमी होती हैं लेकिन सबसे ज्यादा विनाशकारी होती हैं.
Question 13. धरातलीय तरंगें किसे कहते हैं?
Answer: एल-तरंगें धरातल पर सबसे लम्बा मार्ग तय करती हैं, इसलिए इन तरंगों को लम्बी व धरातलीय तरंगें कहते हैं. ये भूकम्प के अधिकेन्द्र से चारों ओर फैलती हैं और सर्वाधिक क्षति पहुँचाती हैं.
In simple words: एल-तरंगें धरती की सतह पर चलती हैं और सबसे ज्यादा नुकसान करती हैं, इसलिए इन्हें धरातलीय तरंगें कहते हैं.
🎯 Exam Tip: धरातलीय तरंगों (L-तरंगों) की विनाशकारी शक्ति पर ध्यान दें और उनके लम्बे मार्ग को भी याद रखें.
Question 14. कृत्रिम भूकम्पों से क्या तात्पर्य है?
Answer: ऐसे भूकम्प जो मानवीय क्रियाओं के कारण उत्पन्न होते हैं, उन्हें कृत्रिम भूकम्प कहते हैं. ये भूकम्प स्थानीय प्रभाव वाले होते हैं और इनकी तीव्रता सामान्यतः कम होती है. उदाहरण के लिए, खनन, परमाणु विस्फोट या बड़े जलाशयों के निर्माण से उत्पन्न भूकम्प.
In simple words: कृत्रिम भूकम्प वे होते हैं जो इंसानों की गतिविधियों जैसे खनन या विस्फोट से आते हैं.
🎯 Exam Tip: कृत्रिम भूकम्पों के उदाहरणों को याद रखें, जैसे बांध बनाना या परमाणु परीक्षण. ये भूकम्प आमतौर पर सीमित क्षेत्र में ही प्रभाव डालते हैं.
Question 17. विवर्तनिक भूकम्प किसे कहते हैं?
उत्तर: पृथ्वी के भीतर होने वाली विवर्तनिक गतिविधियों, जैसे तनाव और संकुचन के कारण आने वाले भूकम्पों को विवर्तनिक भूकम्प (Tectonic Earthquakes) कहा जाता है।
सरल शब्दों में: ये भूकम्प पृथ्वी के भीतर परतों के खिसकने और आपस में टकराने के कारण आते हैं।
📝 शिक्षक की नोट: छात्रों को समझाएं कि 'विवर्तनिक' शब्द पृथ्वी की बाहरी परत में होने वाली हलचल को दर्शाता है। इसे समझाने के लिए एक टूटे हुए बिस्किट के टुकड़ों को आपस में रगड़ने का उदाहरण दिया जा सकता है।
🎯 परीक्षा टिप: विवर्तनिक भूकम्प सबसे आम प्रकार के भूकम्प हैं; परीक्षा में 'प्लेट विवर्तनिकी' (Plate Tectonics) शब्द का उल्लेख करना अच्छे अंक दिला सकता है।
Question 17. प्लूटोनिक भूकम्प क्या है?
उत्तर: पृथ्वी की सतह से बहुत गहराई में आने वाले भूकम्पों को प्लूटोनिक (Plutonic) या 'गहन-केन्द्रित' भूकम्प कहा जाता है। इनके बारे में बहुत अधिक जानकारी उपलब्ध नहीं है।
सरल शब्दों में: ये पृथ्वी की बहुत गहराई में आने वाले भूकम्प हैं जिनके बारे में हमें बहुत कम पता है।
📝 शिक्षक की नोट: छात्रों को स्पष्ट करें कि प्लूटोनिक भूकम्प मेंटल के निचले हिस्सों में शुरू होते हैं, इसलिए इनका प्रभाव सतह पर कम महसूस होता है।
🎯 परीक्षा टिप: याद रखें कि प्लूटोनिक भूकम्प सामान्य सतही भूकम्पों की तुलना में बहुत अधिक गहराई पर उत्पन्न होते हैं।
Question 18. सुनामी से क्या तात्पर्य है? अथवा सुनामी किसे कहते हैं?
उत्तर: जब समुद्र के भीतर भूकम्प आता है, तो यह समुद्र में बहुत विशाल और विनाशकारी लहरें पैदा करता है। इन शक्तिशाली लहरों को सुनामी कहा जाता है। ये अक्सर तटीय क्षेत्रों में भारी नुकसान पहुँचाती हैं।
सरल शब्दों में: सुनामी समुद्र के नीचे आने वाले भूकम्प के कारण उठने वाली ऊँची और खतरनाक लहरें हैं।
📝 शिक्षक की नोट: छात्रों को बताएं कि सुनामी एक जापानी शब्द है जिसका अर्थ है 'बंदरगाह की लहरें'। सुनामी की शक्ति और उसकी ऊँचाई के बीच के अंतर को स्पष्ट करें।
🎯 परीक्षा टिप: परीक्षा में यह स्पष्ट करना जरूरी है कि सुनामी लहरें हवा के कारण नहीं बल्कि समुद्र तल की हलचल (भूकम्प) के कारण बनती हैं।
Question 19. भूकम्पों के विश्व वितरण को किन पेटियों में बाँटा गया है?
उत्तर: दुनिया भर में भूकम्पों को मुख्य रूप से तीन पेटियों (Belts) में बाँटा गया है: प्रशांत महासागरीय पेटी (Circum-Pacific Belt), मध्य-महाद्वीपीय पेटी (Mid-Continental Belt), और मध्य-अटलांटिक पेटी (Mid-Atlantic Ridge Belt)।
सरल शब्दों में: वैश्विक भूकम्प मुख्य रूप से तीन मुख्य क्षेत्रों में पाए जाते हैं: प्रशांत, मध्य-महाद्वीपीय और मध्य-अटलांटिक।
📝 शिक्षक की नोट: छात्रों को विश्व मानचित्र पर इन पेटियों को दिखाएं ताकि वे भौगोलिक स्थिति को बेहतर ढंग से समझ सकें।
🎯 परीक्षा टिप: इन तीनों पेटियों के नाम याद रखना महत्वपूर्ण है, क्योंकि विश्व वितरण पर अक्सर प्रश्न पूछे जाते हैं।
Question 20. विश्व के सर्वाधिक भूकम्प कहाँ आते हैं?
उत्तर: विश्व के सबसे अधिक भूकम्प प्रशांत महासागरीय पेटी (Circum-Pacific Belt) में आते हैं। दुनिया के लगभग 63% भूकम्प इसी क्षेत्र में दर्ज किए जाते हैं।
सरल शब्दों में: प्रशांत महासागरीय पेटी में सबसे अधिक भूकम्प आते हैं, जो कुल भूकम्पों का लगभग 63% है।
📝 शिक्षक की नोट: बताएं कि इस क्षेत्र को 'रिंग ऑफ फायर' (Ring of Fire) भी कहा जाता है क्योंकि यहाँ बहुत अधिक ज्वालामुखी गतिविधियाँ भी होती हैं।
🎯 परीक्षा टिप: '63%' का आँकड़ा याद रखें, यह उत्तर को अधिक प्रभावशाली बनाता है।
Question 21. परिशांत महासागरीय मेखला में अधिक भूकम्पों की उत्पत्ति क्यों होती है?
उत्तर: इस क्षेत्र में अधिक भूकम्प आते हैं क्योंकि यह वह जगह है जहाँ महासागर और स्थल मिलते हैं। यहाँ नए मुड़े हुए पर्वत, सक्रिय ज्वालामुखी और विवर्तनिक प्लेटों का विनाशकारी किनारा स्थित है।
सरल शब्दों में: यहाँ अधिक भूकम्प इसलिए आते हैं क्योंकि यहाँ नए पहाड़ बन रहे हैं, ज्वालामुखी सक्रिय हैं और जमीन के नीचे की प्लेटें आपस में टकरा रही हैं।
📝 शिक्षक की नोट: ज्वालामुखी, पर्वत निर्माण और प्लेटों की हलचल के बीच के संबंध को स्पष्ट करें ताकि छात्र समझ सकें कि ये गतिविधियाँ एक साथ क्यों होती हैं।
🎯 परीक्षा टिप: 'विनाशकारी प्लेट किनारा' (Destructive Plate Boundary) शब्द का प्रयोग करने से उत्तर की गुणवत्ता बढ़ती है।
Question 23. अटलांटिक कटक पेटी में भूकम्प क्यों आते हैं?
उत्तर: मध्य-अटलांटिक पेटी में भूकम्प मुख्य रूप से ट्रांसफॉर्म फॉल्ट (Transform Faults) के बनने, विवर्तनिक प्लेटों के अलग होने और ज्वालामुखी गतिविधियों के कारण आते हैं।
सरल शब्दों में: यहाँ भूकम्प इसलिए आते हैं क्योंकि प्लेटें एक-दूसरे से दूर जा रही हैं, जिससे दरारें पड़ती हैं और ज्वालामुखी विस्फोट होते हैं।
📝 शिक्षक की नोट: समझाएं कि कैसे प्लेटों के दूर जाने से नई जमीन बनती है और इस प्रक्रिया में ऊर्जा निकलने से भूकम्प आते हैं।
🎯 परीक्षा टिप: याद रखें कि यह एक 'अपसारी पेटी' (Divergent Belt) है जहाँ प्लेटें दूर हटती हैं।
Question 24. भूकम्प की तीव्रता किस पर मापी जाती है?
उत्तर: भूकम्प की तीव्रता 'रिक्टर स्केल' (Richter scale) पर मापी जाती है। इस स्केल पर 0 से 9 तक के अंक होते हैं, जहाँ ऊँचे अंक अधिक शक्तिशाली भूकम्प दर्शाते हैं।
सरल शब्दों में: भूकम्प की शक्ति रिक्टर स्केल द्वारा 0 से 9 के बीच मापी जाती है।
📝 शिक्षक की नोट: छात्रों को समझाएं कि यह स्केल 'लॉगरिदमिक' है, जिसका मतलब है कि अंक 5 का भूकम्प अंक 4 से 10 गुना ज्यादा शक्तिशाली होता है।
🎯 परीक्षा टिप: रिक्टर स्केल और मरकैली स्केल के बीच अंतर याद रखें—रिक्टर ऊर्जा मापता है, जबकि मरकैली होने वाली तबाही को।
Question 25. ज्वालामुखी किसे कहते हैं? अथवा ज्वालामुखी क्रिया से क्या तात्पर्य है?
उत्तर: ज्वालामुखी पृथ्वी के भीतर की शक्तियों के कारण होने वाली एक अचानक भौगोलिक प्रक्रिया है। इसमें पृथ्वी की पपड़ी में बने छिद्रों या दरारों से गैसें, राख, पत्थर और गर्म मैग्मा (लावा) बाहर निकलता है।
सरल शब्दों में: ज्वालामुखी जमीन में एक ऐसा छेद है जिससे गर्म गैसें, राख और पिघली हुई चट्टानें बाहर निकलती हैं।
📝 शिक्षक की नोट: ज्वालामुखी की संरचना को समझाने के लिए एक जलते हुए प्रेशर कुकर का उदाहरण दें जहाँ दबाव बढ़ने पर भाप और पानी अचानक बाहर निकलता है।
🎯 परीक्षा टिप: उत्तर में 'मैग्मा' (जमीन के अंदर) और 'लावा' (जमीन के ऊपर) के बीच का अंतर जरूर स्पष्ट करें।
Question 26. ओल्डिन व मोर्गन ने ज्वालामुखी की क्या परिभाषा दी है?
उत्तर: ओल्डिन और मोर्गन के अनुसार, "ज्वालामुखी एक ऐसी प्रक्रिया है जिसमें वे सभी गतिविधियाँ शामिल होती हैं जो पृथ्वी की सतह के भीतर और बाहर दोनों जगह होती हैं।" इसमें ज्वालामुखी विस्फोट से संबंधित सभी घटनाएँ आती हैं।
सरल शब्दों में: इनके अनुसार, ज्वालामुखी से जुड़ी जमीन के अंदर और बाहर की सभी हलचलों को ज्वालामुखी प्रक्रिया कहा जाता है।
📝 शिक्षक की नोट: जब किसी विशेष भूगोलवेत्ता की परिभाषा पूछी जाए, तो उसे यथासंभव सटीक शब्दों में लिखने का अभ्यास कराएं।
🎯 परीक्षा टिप: परिभाषा को उद्धरण चिह्नों (" ") के अंदर लिखें ताकि वह उत्तर में अलग से दिखाई दे।
Question 27. ज्वालामुखी का वर्गीकरण किन-किन आधारों पर किया गया है?
उत्तर: ज्वालामुखियों का वर्गीकरण मुख्य रूप से दो मानदंडों पर किया जाता है: (1) उनके विस्फोट की अवधि और (2) उनके विस्फोट की प्रकृति या स्वरूप।
सरल शब्दों में: ज्वालामुखियों को इस आधार पर बाँटा जाता है कि वे कितने समय तक फटते हैं और फटने पर वे कैसे दिखते हैं।
📝 शिक्षक की नोट: वर्गीकरण के महत्व को समझाएं कि कैसे यह वैज्ञानिकों को भविष्य के विस्फोटों का अनुमान लगाने में मदद करता है।
🎯 परीक्षा टिप: वर्गीकरण के इन दोनों आधारों को स्पष्ट रूप से लिखना न भूलें।
Question 28. उद्गार की अवधि के आधार ज्वालामुखियों को किन भागों में बाँटा गया है?
उत्तर: विस्फोट की अवधि के आधार पर ज्वालामुखियों को तीन मुख्य श्रेणियों में बाँटा गया है: सक्रिय (Active), प्रसुप्त (Dormant), और शांत या विलुप्त (Extinct) ज्वालामुखी।
सरल शब्दों में: ज्वालामुखियों को सक्रिय, सोए हुए और पूरी तरह बंद श्रेणियों में बाँटा गया है।
📝 शिक्षक की नोट: प्रत्येक प्रकार के लिए वास्तविक विश्व उदाहरण दें, जैसे सक्रिय के लिए 'एटना' और शांत के लिए 'किलिमंजारो'।
🎯 परीक्षा टिप: तीनों प्रकारों के नाम हिंदी और अंग्रेजी दोनों में लिखने से उत्तर बेहतर बनता है।
Question 30. केन्द्रीय उद्गार वाले ज्वालामुखियों को किन-किन भागों में बाँटा गया है?
उत्तर: केंद्रीय उद्गार वाले ज्वालामुखियों को हवाईयन तुल्य, स्ट्रोमबोलियन तुल्य, वल्केनियन तुल्य और पीलियन तुल्य प्रकारों में बाँटा गया है। प्रत्येक की विशेषताएँ अलग-अलग होती हैं।
सरल शब्दों में: केंद्रीय विस्फोट वाले ज्वालामुखी अपने फटने के तरीके के आधार पर चार मुख्य प्रकार के होते हैं।
📝 शिक्षक की नोट: विस्फोट की तीव्रता और लावे के गाढ़ेपन (viscosity) के आधार पर इन अंतरों को समझाएं।
🎯 परीक्षा टिप: इन चारों प्रकारों के नामों को सही वर्तनी के साथ याद रखें।
Question 31. ज्वालामुखी क्रिया के लिए कौन-कौन से कारण उत्तरदायी हैं?
उत्तर: ज्वालामुखी क्रिया के मुख्य कारण भूगर्भीय असंतुलन, गैसों का निकलना, पृथ्वी के भीतर अत्यधिक गर्मी, दबाव में कमी और विवर्तनिक प्लेटों की हलचल हैं।
सरल शब्दों में: पृथ्वी के अंदर दबाव और गर्मी बढ़ने तथा गैसों के कारण लावा ऊपर की ओर आने लगता है।
📝 शिक्षक की नोट: दबाव में कमी से चट्टानों के पिघलने की प्रक्रिया को भौतिक विज्ञान के नियमों के साथ जोड़कर समझाएं।
🎯 परीक्षा टिप: 'प्लेट विवर्तनिकी' (Plate Tectonics) को ज्वालामुखी क्रिया का एक प्रमुख कारण जरूर लिखें।
Question 32. सक्रिय ज्वालामुखी से क्या तात्पर्य है?
उत्तर: सक्रिय ज्वालामुखी वे हैं जिनसे लगातार लावा, राख और गैसें निकलती रहती हैं। इनमें लगातार या बहुत कम समय के अंतराल पर विस्फोट होते रहते हैं।
सरल शब्दों में: ये वे ज्वालामुखी हैं जो हर समय या अक्सर फटते रहते हैं।
📝 शिक्षक की नोट: छात्रों को बताएं कि सक्रिय ज्वालामुखी अक्सर प्लेट सीमाओं पर स्थित होते हैं और उनकी सुरक्षा के लिए कड़ी निगरानी की जाती है।
🎯 परीक्षा टिप: सिसली का स्ट्रोमबोली ज्वालामुखी (भूमध्य सागर का प्रकाश स्तंभ) इसका सबसे अच्छा उदाहरण है।
Question 33. सुसुप्त ज्वालामुखी से क्या आशय है?
उत्तर: सुसुप्त (Dormant) ज्वालामुखी वे हैं जो कुछ समय से शांत हैं लेकिन भविष्य में उनके फिर से फटने की संभावना बनी रहती है। वे वर्तमान में सक्रिय नहीं हैं लेकिन कभी भी सक्रिय हो सकते हैं।
सरल शब्दों में: ये सोए हुए ज्वालामुखी हैं जो अचानक कभी भी फट सकते हैं।
📝 शिक्षक की नोट: समझाएं कि सोए हुए ज्वालामुखी ज्यादा खतरनाक हो सकते हैं क्योंकि लोग उनके पास बस जाते हैं और अचानक विस्फोट भारी तबाही लाता है।
🎯 परीक्षा टिप: याद रखें कि सुसुप्त ज्वालामुखी शांत दिखने के बावजूद एक बड़ा खतरा होते हैं।
Question 34. शांत ज्वालामुखी किसे कहते हैं?
उत्तर: शांत या विलुप्त ज्वालामुखी वे हैं जिनमें बहुत लंबे समय से विस्फोट नहीं हुआ है और जिनके फिर से फटने की कोई संभावना नहीं है। इनके क्रेटर अक्सर पानी या अन्य सामग्री से भर जाते हैं।
सरल शब्दों में: ये वे ज्वालामुखी हैं जो लंबे समय से नहीं फटे हैं और अब इनके भविष्य में फटने की कोई उम्मीद नहीं है।
📝 शिक्षक की नोट: बताएं कि ऐसे ज्वालामुखियों की मैग्मा आपूर्ति पूरी तरह कट चुकी होती है, जिससे वे भविष्य के लिए सुरक्षित मान लिए जाते हैं।
🎯 परीक्षा टिप: शांत ज्वालामुखियों के क्रेटर में अक्सर झीलें बन जाती हैं, जिन्हें 'क्रेटर झील' कहते हैं।
Question 35. ज्वालामुखियों की कौन-कौन सी पेटियाँ मिलती हैं?
उत्तर: विश्व में ज्वालामुखी पेटियों में प्रशांत महासागरीय पेटी, मध्य-महाद्वीपीय पेटी, मध्य-अटलांटिक पेटी और पूर्वी अफ्रीकी भ्रंश पेटी शामिल हैं। ये क्षेत्र अत्यधिक विवर्तनिक गतिविधियों वाले हैं।
सरल शब्दों में: ज्वालामुखी भी उन्हीं क्षेत्रों में पाए जाते हैं जहाँ भूकम्प आते हैं, मुख्य रूप से प्रशांत और अटलांटिक क्षेत्रों में।
📝 शिक्षक की नोट: ज्वालामुखी और भूकम्प पेटियों के बीच समानता पर चर्चा करें और छात्रों को समझाएं कि दोनों प्रक्रियाएं प्लेट हलचलों से जुड़ी हैं।
🎯 परीक्षा टिप: विश्व मानचित्र पर इन पेटियों को पहचानना और उनके नाम याद रखना जरूरी है।
Question 2. भू-पटल का संकुचन भूकम्प की उत्पत्ति में कैसे सहायक है? स्पष्ट कीजिए।
उत्तर: पृथ्वी के निर्माण के समय से ही यह ठंडी हो रही है, जिससे इसकी पपड़ी (crust) लगातार सिकुड़ती है। यह संकुचन अचानक और तीव्र गति से होने पर भूकम्प उत्पन्न करता है। दाना, ब्यूमोंट जैसे विद्वानों ने इस विचार का समर्थन किया है।
सरल शब्दों में: जैसे-जैसे पृथ्वी ठंडी होती है, इसकी ऊपरी परत सिकुड़ती है। जब यह सिकुड़न अचानक होती है, तो जमीन काँपने लगती है।
📝 शिक्षक की नोट: संकुचन सिद्धांत को समझाने के लिए एक सूखते हुए फल (जैसे अंगूर से किशमिश बनना) का उदाहरण दें, जिसकी सतह सिकुड़कर झुर्रीदार हो जाती है।
🎯 परीक्षा टिप: यह पुराना सिद्धांत है, लेकिन आज भी इसे पुराने और स्थिर महाद्वीपीय क्षेत्रों में आने वाले भूकम्पों के लिए एक कारण माना जाता है।
Question 3. समस्थिति समायोजन भूकम्प की उत्पत्ति में कैसे सहायक है? स्पष्ट कीजिए।
उत्तर: पृथ्वी की सतह के पर्वत, मैदान और समुद्र आमतौर पर संतुलित रहते हैं। लेकिन जब कटाव (erosion) के कारण पहाड़ों से मिट्टी समुद्र में जमा होती है, तो भार में असंतुलन पैदा होता है, जिससे भूकम्प आते हैं। हिमालय क्षेत्र में अक्सर इसी कारण भूकम्प आते हैं।
सरल शब्दों में: जब पृथ्वी की सतह का वजन मिट्टी के जमा होने से बिगड़ने लगता है, तो खुद को संतुलित करने की प्रक्रिया में भूकम्प आते हैं।
📝 शिक्षक की नोट: 'आइसोस्टैसी' (Isostasy) शब्द को एक तराजू के माध्यम से समझाएं जहाँ एक तरफ वजन बढ़ने पर दूसरा हिस्सा हिल जाता है।
🎯 परीक्षा टिप: 'समस्थिति' (Isostasy) शब्द का उल्लेख करने से उत्तर वैज्ञानिक और सटीक लगता है।
Question 4. धरातलीय तरंगों की विशेषताएँ बताइए।
उत्तर: धरातलीय तरंगों (L-waves) की विशेषताएँ निम्नलिखित हैं:
(i) ये सबसे धीमी गति से चलने वाली भूकम्प तरंगें हैं।
(ii) ये तरंगें भूकम्प प्रभावित क्षेत्रों में सबसे अधिक विनाश करती हैं।
(iii) ये पृथ्वी की सतह पर सबसे लंबी दूरी तय करती हैं।
(iv) ये सतह पर ही अधिक प्रभावी होती हैं और इनका वेग लगभग 3 किमी प्रति सेकंड होता है।
सरल शब्दों में: ये तरंगें धीमी होती हैं लेकिन सबसे ज्यादा तबाही मचाती हैं और बहुत दूर तक महसूस की जाती हैं।
📝 शिक्षक की नोट: छात्रों को समझाएं कि P और S तरंगें पृथ्वी के अंदर चलती हैं, जबकि L तरंगें सतह पर चलती हैं, इसलिए वे सबसे अधिक नुकसान पहुँचाती हैं।
🎯 परीक्षा टिप: L-तरंगों को उनकी लंबी अवधि और बड़े आयाम के कारण सबसे विनाशकारी माना जाता है।
Question 5. सामुद्रिक भूकम्प क्या होते हैं?
उत्तर: पृथ्वी की सतह का 71% हिस्सा महासागरों से ढका है। इन महासागरों के नीचे आने वाले भूकम्पों को समुद्री भूकम्प (Marine earthquakes) कहा जाता है। ये अक्सर सुनामी जैसी खतरनाक लहरें पैदा करते हैं।
सरल शब्दों में: महासागरों के तल में आने वाले भूकम्प समुद्री भूकम्प कहलाते हैं जो सुनामी का मुख्य कारण हैं।
📝 शिक्षक की नोट: समुद्री भूकम्पों के प्रभाव को सुनामी के साथ जोड़कर समझाएं कि कैसे ऊर्जा पानी के माध्यम से लहरों में बदल जाती है।
🎯 परीक्षा टिप: समुद्री भूकम्प सुनामी का प्राथमिक कारण हैं, जो पूरे महासागर को पार कर तटीय इलाकों में तबाही ला सकते हैं।
Question 7. भूकम्पों से होने वाली हानियों को स्पष्ट कीजिए।
उत्तर: भूकम्प से होने वाली मुख्य हानियाँ इस प्रकार हैं:
1. जान-माल की भारी हानि होती है। लाखों लोग मर सकते हैं और इमारतें, बाँध, जलाशय नष्ट हो जाते हैं।
2. समुद्र में आने वाले भूकम्पों से सुनामी आती है जो तटीय क्षेत्रों में बाढ़ और तबाही लाती है।
3. परिवहन मार्ग (सड़कें, रेल) बुरी तरह क्षतिग्रस्त हो जाते हैं।
4. नदियाँ अपना रास्ता बदल सकती हैं, जिससे अचानक बाढ़ आ सकती है।
5. पूरे के पूरे शहर खंडहर बन सकते हैं।
सरल शब्दों में: भूकम्प जीवन और संपत्ति को नष्ट करते हैं, सुनामी लाते हैं, यातायात रोक देते हैं और नदियों का रास्ता बदल देते हैं।
📝 शिक्षक की नोट: हानियों को वर्गीकृत करके सिखाएं, जैसे मानवीय हानि, ढाँचागत हानि और पर्यावरणीय हानि। इससे उत्तर व्यवस्थित रहता है।
🎯 परीक्षा टिप: उत्तर में बुलेट पॉइंट्स का प्रयोग करें और 'सुनामी' व 'नदियों का मार्ग बदलना' जैसे महत्वपूर्ण बिंदुओं को रेखांकित करें।
Question 8. सक्रिय एवं शान्त ज्वालामुखी में क्या अन्तर है?
Answer: Differences between active and quiet volcanoes are:
| सक्रिय ज्वालामुखी | शान्त ज्वालामुखी |
|---|---|
| (i) ये ज्वालामुखी निरन्तर उद्गारित होते रहते हैं। | (i) ये ज्वालामुखी एक लम्बी दीर्घावधि से कोई उद्गार नहीं होने को दर्शाते हैं। |
| (ii) ये ज्वालामुखी विवर्तनिक दृष्टि से सक्रिय क्षेत्रों में मिलते हैं। | (ii) ऐसे ज्वालामुखियों की स्थिति प्रायः वर्तमान में विवर्तनिक दृष्टि से निष्क्रिय क्षेत्रों में मिलती है। |
| (iii) इन ज्वालामुखियों की मुख्य नाली स्वच्छ एवं क्रियाशील रहती है। | (iii) इन ज्वालामुखियों की नाली में प्राय: जलादि भर जाते हैं या ये अवरुद्ध हो जाती है। |
In simple words: Active volcanoes erupt constantly and are in active tectonic zones, with clear vents. Quiet volcanoes haven't erupted in a long time, are in inactive zones, and their vents might be blocked.
🎯 Exam Tip: Clearly distinguish between active, dormant, and extinct volcanoes based on their eruption history and geological context for full marks.
Question 9. हवाई तुल्य ज्वालामुखी एवं स्ट्राम्बोली तुल्य ज्वालामुखी में क्या अन्तर है?
Answer: Differences between Hawaiian type and Strombolian type volcanoes are:
| हवाई तुल्य ज्वालामुखी | स्ट्राम्बोली तुल्य ज्वालामुखी |
|---|---|
| 1. इन ज्वालामुखियों में विस्फोट की क्रिया कम होती है। | 1. इन ज्वालामुखियों में उद्गार तीव्रता से होता है। |
| 2. इन ज्वालामुखियों में निकलने वाला लावा पतला होता है। | 2. इन ज्वालामुखियों में निकलने वाला लावा गाढ़ा होता है। |
| 3. ये ज्वालामुखी मुख्यत: हवाई द्वीप में देखने को मिलते हैं। | 3. ये ज्वालामुखी स्ट्राम्बोली द्वीप में देखने को मिलते हैं। |
| 4. इसमें लावा अधिक दूरी तक फैलता है। | 4. इन ज्वालामुखियों से निकला लावा गाढ़ा होने से कम फैलता है। |
In simple words: Hawaiian volcanoes have quiet eruptions with thin lava that spreads far. Strombolian volcanoes have stronger eruptions with thick lava that doesn't spread as much.
🎯 Exam Tip: Focus on lava viscosity and eruption intensity as key differentiating factors between these two types of central eruption volcanoes.
Question 10. वलकैनो तुल्य ज्वालामुखी एवं पीलियन तुल्य ज्वालामुखी में अन्तर स्पष्ट कीजिए।
Answer: Differences between Vulcanian type and Pelean type volcanoes are:
| वलकैनो तुल्य ज्वालामुखी | पीलियन तुल्य ज्वालामुखी |
|---|---|
| 1. इस प्रकार के ज्वालामुखी में ज्वालामुखी पदार्थ भयंकर विस्फोट के साथ बाहर निकलते हैं। | 1. इस प्रकार के ज्वालामुखियों में सर्वाधिक तीव्र विस्फोट होता है। |
| 2. इनमें निकलने वाले पदार्थ, गैसें पीलियन की तुलना में कम ऊँचाई पर जाते हैं। | 2. इनमें निकलने वाले पदार्थ, गैस सर्वाधिक ऊँचाई तक जाते हैं। |
| 3. इन ज्वालामुखियों का नामकरण वलकैनो ज्वालामुखी के आधार पर किया गया है। | 3. इन ज्वालामुखियों का नामकरण पीलि ज्वालामुखियों के आधार पर किया गया है। |
In simple words: Vulcanian volcanoes have violent explosions, but their ejected materials and gases don't go as high as Pelean volcanoes. Pelean volcanoes are known for the most intense explosions, sending materials and gases to extreme heights.
🎯 Exam Tip: Note that Pelean eruptions are often associated with extremely viscous lava and the formation of deadly pyroclastic flows, making them very dangerous.
Question 11. ज्वालामुखी की गौण पेटी में कौन-कौन से क्षेत्र आते हैं?
उत्तर: ज्वालामुखी की गौण पेटी (Secondary Volcanic Belt) में हिंद महासागर के कई द्वीप शामिल हैं, जैसे कि मॉरीशस, कोमोरोस और रीयूनियन। इसके साथ ही, कुछ छोटे ज्वालामुखीय क्षेत्र भी हैं जो मुख्य पेटियों का हिस्सा नहीं हैं। ये क्षेत्र अलग-थलग ज्वालामुखी गतिविधि प्रदर्शित करते हैं।
सरल शब्दों में: मुख्य ज्वालामुखी क्षेत्रों के अलावा, मॉरीशस और कोमोरोस जैसे द्वीपों पर भी छोटे ज्वालामुखी क्षेत्र पाए जाते हैं जिन्हें 'गौण पेटी' कहा जाता है।
📝 शिक्षक की नोट: छात्रों को समझाएं कि जबकि मुख्य पेटियों में निरंतर गतिविधि होती है, गौण पेटियों में 'हॉटस्पॉट' के कारण कभी-कभार ही हलचल होती है।
🎯 परीक्षा टिप: गौण पेटियों के उदाहरण के रूप में हिंद महासागर के द्वीपों के नाम याद रखना उत्तर को प्रभावी बनाता है।
Question 1. भूकम्प की उत्पत्ति में प्लेट विवर्तनिकी एवं मानवीय कारणों के योगदान की विवेचना कीजिए। अथवा मानव क्रियाएँ एवं प्लेट विवर्तनिकी भूकम्प की उत्पत्ति में सहायक होते हैं। स्पष्ट कीजिए।
उत्तर:
प्लेट विवर्तनिकी का योगदान: पृथ्वी की सतह विभिन्न विवर्तनिकी प्लेटों (Tectonic Plates) से बनी है जो लगातार गति करती रहती हैं। इन प्लेटों के किनारों पर जब वे आपस में टकराती हैं, एक-दूसरे से दूर जाती हैं या एक-दूसरे के पास से खिसकती हैं, तो भारी तनाव पैदा होता है। इस तनाव के अचानक मुक्त होने से पृथ्वी की परतों में हलचल होती है, जो भूकम्प का कारण बनती है।
मानवीय कारणों का योगदान: मानवीय गतिविधियाँ भी महत्वपूर्ण भूकम्पीय घटनाएँ पैदा कर सकती हैं। परमाणु विस्फोट, गहरी ड्रिलिंग, खनन कार्य और बड़े बाँधों का निर्माण (जो भारी मात्रा में जल संचय करते हैं) भूकम्प की संभावना को बढ़ा देते हैं। बाँधों के दबाव से या खानों के धसने से स्थानीय स्तर पर भूकम्प महसूस किए जा सकते हैं।
सरल शब्दों में: भूकम्प आने के दो मुख्य कारण हैं: एक तो जमीन के नीचे की बड़ी प्लेटों का आपस में टकराना, और दूसरा इंसानी काम जैसे परमाणु परीक्षण, पहाड़ों में खुदाई या बड़े बाँध बनाना।
📝 शिक्षक की नोट: प्लेटों की गति को समझाने के लिए आपस में टकराती हुई दो किताबों का उपयोग करें। मानवीय कारणों के लिए कोयला खदानों के धसने की खबरों का उदाहरण दें।
🎯 परीक्षा टिप: उत्तर लिखते समय प्राकृतिक (प्लेट विवर्तनिकी) और कृत्रिम (मानवीय) कारणों के बीच स्पष्ट अंतर दिखाएं।
Question 2. स्थिति के अनुसार भूकम्पों को वर्गीकृत कीजिए। अथवा स्थिति को आधार मानकर भूकम्पों को किन भागों में बाँटा गया है?
उत्तर: स्थान या स्थिति के आधार पर भूकम्पों को मुख्य रूप से दो भागों में बाँटा गया है:
1. **स्थलीय भूकम्प (Terrestrial Earthquakes):** ये वे भूकम्प हैं जो जमीन या महाद्वीपों पर आते हैं। अधिकांश भूकम्प इसी श्रेणी के होते हैं, जैसे कि मध्य-महाद्वीपीय पेटी में आने वाले भूकम्प।
2. **समुद्री भूकम्प (Marine Earthquakes):** ये भूकम्प समुद्र के नीचे आते हैं। इनके कारण समुद्र में विनाशकारी लहरें पैदा होती हैं, जिन्हें जापानी भाषा में 'सुनामी' कहा जाता है। उदाहरण के लिए, 2011 में जापान के होंशू द्वीप के पास आए समुद्री भूकम्प ने भारी तबाही मचाई थी।
सरल शब्दों में: भूकम्प दो जगह आते हैं—जमीन पर आने वाले 'स्थलीय' और समुद्र के नीचे आने वाले 'समुद्री' भूकम्प। समुद्र वाले भूकम्प से ही सुनामी आती है।
📝 शिक्षक की नोट: सुनामी के प्रभाव को समझाने के लिए जापान की 2011 की घटना का चित्र या वीडियो दिखाएं।
🎯 परीक्षा टिप: समुद्री भूकम्प के साथ 'सुनामी' शब्द का उपयोग करना बहुत महत्वपूर्ण है।
Question 4. केन्द्रीय उद्गार वाले ज्वालामुखी एवं दरारी उद्गार वाले ज्वालामुखियों में क्या अन्तर है?
उत्तर:
| केन्द्रीय उद्गार वाले ज्वालामुखी | दरारी उद्गार वाले ज्वालामुखी |
|---|---|
| इन ज्वालामुखियों में उद्गार एक नली मार्ग एवं एक मुख से होता है। | इन ज्वालामुखियों में उद्गार अनेक नलियों (दरारों) के माध्यम से होता है। |
| इस प्रकार के ज्वालामुखियों में प्रायः विस्फोट की प्रक्रिया होती है। | इन ज्वालामुखियों में दबाव कम होने से विस्फोट का अभाव मिलता है। |
| ऐसे ज्वालामुखियों की ऊँचाई में प्रवणता मिलती है। | ऐसे ज्वालामुखियों की प्रायः कमी मिलती है। |
| इन ज्वालामुखियों में प्रायः शंकु विकसित शंकु दृष्टिगत होता है। | इन ज्वालामुखियों में शंकु का अधिक विकास नहीं हो पाता है। |
सरल शब्दों में: केंद्रीय ज्वालामुखी एक पाइप की तरह धमाके के साथ फटते हैं और पहाड़ जैसा शंकु बनाते हैं, जबकि दरारी ज्वालामुखी जमीन की दरारों से शांति से बहते हैं और मैदान या पठार बनाते हैं।
📝 शिक्षक की नोट: शंकु (Cone) और पठार (Plateau) के बीच का भौतिक अंतर समझाएं। दरारी उद्गार के उदाहरण के लिए भारत के दक्कन के पठार का जिक्र करें।
🎯 परीक्षा टिप: अंतर वाले प्रश्नों को हमेशा तालिका (Table) के रूप में लिखें, इससे परीक्षक को समझने में आसानी होती है।
Question 4. भूकम्प के क्या-क्या लाभ हैं? अथवा भूकम्प से होने वाले लाभों का विवेचन कीजिए अथवा भूकम्प एक प्राकृतिक आपदा होते हुए भी कभी-कभी लाभकारी सिद्ध होता है। कैसे? स्पष्ट कीजिए।
उत्तर: हालांकि भूकम्प विनाशकारी होते हैं, लेकिन इनके कुछ सकारात्मक लाभ भी हैं:
1. भूकम्प के कारण कभी-कभी नए भू-भाग या द्वीप समुद्र से बाहर आ जाते हैं।
2. तटीय क्षेत्रों के धसने से गहरी बंदरगाहें (harbors) बन जाती हैं, जो जहाजों के लिए उपयुक्त होती हैं।
3. समुद्र के नीचे की जमीन ऊपर आने से उपजाऊ मैदान बनते हैं, जो कृषि के लिए अच्छे होते हैं।
4. भूकम्प की तरंगों का अध्ययन करके वैज्ञानिक पृथ्वी की आंतरिक संरचना के बारे में जानकारी प्राप्त करते हैं।
5. भूकम्प से कभी-कभी भूजल स्तर बदल जाता है, जिससे सूखे क्षेत्रों में पानी के नए सोते निकल आते हैं।
6. भूकम्प से जमीन में दरारें पड़ने से कीमती खनिज ऊपर आ सकते हैं।
सरल शब्दों में: भूकम्प से नई जमीन और उपजाऊ मिट्टी मिल सकती है, समुद्र में बंदरगाह बन सकते हैं और हमें जमीन के अंदर छिपे पानी और खनिजों का पता चल सकता है।
📝 शिक्षक की नोट: यह समझाना जरूरी है कि 'लाभ' केवल भौगोलिक दृष्टि से हैं, जबकि जान-माल के लिए यह हमेशा एक आपदा ही है।
🎯 परीक्षा टिप: उत्तर में कम से कम 4-5 स्पष्ट बिंदु लिखें और 'बंदरगाहों का निर्माण' वाला बिंदु जरूर शामिल करें।
Question 5. ज्वालामुखी क्रिया हेतु उत्तरदायी कारकों की विवेचना कीजिए।
उत्तर: ज्वालामुखी विस्फोट के पीछे कई भौगोलिक कारण जिम्मेदार होते हैं:
1. **भूगर्भीय असंतुलन:** पृथ्वी के भीतर परतों के बीच वजन का असंतुलन होने से मैग्मा ऊपर आने का प्रयास करता है।
2. **गैसों का निर्माण:** जमीन के नीचे का पानी गर्म होकर भाप और गैस में बदल जाता है, जिससे भारी दबाव बनता है।
3. **पृथ्वी के भीतर तापमान में वृद्धि:** रेडियोधर्मी तत्वों के कारण जमीन के अंदर गर्मी बढ़ती है, जो चट्टानों को पिघलाकर मैग्मा बनाती है।
4. **दबाव में कमी:** ऊपर की परतों का दबाव कम होने से नीचे की गर्म चट्टानें पिघलने लगती हैं और बाहर निकलने का रास्ता ढूँढती हैं।
5. **प्लेट विवर्तनिकी:** प्लेटों के आपस में टकराने या दूर जाने से मैग्मा को बाहर आने के लिए रास्ता मिल जाता है।
सरल शब्दों में: जमीन के अंदर बहुत गर्मी और गैसें जमा हो जाती हैं। जब यह दबाव बहुत बढ़ जाता है या जमीन की परतें खिसकती हैं, तो यह सब एक धमाके के साथ बाहर निकलता है।
📝 शिक्षक की नोट: गैसों और भाप के दबाव को समझाने के लिए 'प्रेशर कुकर' का उदाहरण दें, जहाँ सीटी के माध्यम से दबाव कम होता है।
🎯 परीक्षा टिप: प्रत्येक कारक को एक छोटी हेडिंग के साथ समझाएं ताकि उत्तर पढ़ने में आसान रहे।
Question 6. उद्गार की अवधि के आधार पर ज्वालामुखी कितने प्रकार के होते हैं? स्पष्ट कीजिए। अथवा ज्वालामुखियों को उद्गार की अवधि के आधार पर कितने भागों में बाँटा गया है?
उत्तर: विस्फोट के समय के आधार पर ज्वालामुखियों को तीन श्रेणियों में बाँटा गया है:
1. **सक्रिय या जाग्रत ज्वालामुखी (Active Volcanoes):** जिनसे हमेशा लावा और गैसें निकलती रहती हैं। उदाहरण: एटना और स्ट्रोमबोली।
2. **प्रसुप्त या सोए हुए ज्वालामुखी (Dormant Volcanoes):** जो लंबे समय से फटे नहीं हैं, लेकिन कभी भी अचानक फट सकते हैं। उदाहरण: वेसुवियस (इटली)।
3. **शांत या विलुप्त ज्वालामुखी (Extinct Volcanoes):** जिनमें अब भविष्य में कभी विस्फोट होने की कोई संभावना नहीं है। उदाहरण: म्यांमार का माउंट पोपा।
सरल शब्दों में: ज्वालामुखी तीन तरह के होते हैं—एक जो हमेशा फटते हैं (सक्रिय), दूसरे जो सो रहे हैं पर कभी भी जाग सकते हैं (प्रसुप्त), और तीसरे जो पूरी तरह बंद हो चुके हैं (शांत)।
📝 शिक्षक की नोट: सक्रिय ज्वालामुखी के उदाहरण के लिए 'स्ट्रोमबोली' को 'भूमध्य सागर का प्रकाश स्तंभ' क्यों कहते हैं, यह बताएं।
🎯 परीक्षा टिप: प्रत्येक प्रकार के साथ कम से कम एक प्रसिद्ध ज्वालामुखी का नाम जरूर लिखें।
Question 7. ज्वालामुखी से निःसृत पदार्थों का वर्णन कीजिए। अथवा ज्वालामुखी से निकले पदार्थों को कितने भागों में बाँटा गया है?
उत्तर: ज्वालामुखी विस्फोट के दौरान मुख्य रूप से तीन प्रकार के पदार्थ निकलते हैं:
1. **गैसें और जलवाष्प:** इनमें कार्बन डाइऑक्साइड, सल्फर डाइऑक्साइड और बड़ी मात्रा में भाप शामिल होती है।
2. **ठोस पदार्थ:** इनमें बारीक राख से लेकर बड़े-बड़े चट्टान के टुकड़े (जिन्हें ज्वालामुखी बम कहा जाता है) शामिल हैं।
3. **तरल पदार्थ:** पिघली हुई गर्म चट्टान को 'मैग्मा' कहा जाता है। जब यह सतह पर आता है, तो इसे 'लावा' कहते हैं।
सरल शब्दों में: ज्वालामुखी से गरम गैसें, भाप, राख, पत्थर के टुकड़े और पिघली हुई लाल चट्टान (लावा) बाहर निकलती है।
📝 शिक्षक की नोट: 'मैग्मा' और 'लावा' के बीच के अंतर को स्पष्ट करें—जमीन के अंदर मैग्मा, जमीन के बाहर लावा।
🎯 परीक्षा टिप: उत्तर में गैसों के नाम जैसे \( CO_{2} \) और \( SO_{2} \) लिखने से विज्ञान के प्रति आपकी समझ अच्छी दिखती है।
Question 8. ज्वालामुखी क्रिया के प्रभावों को स्पष्ट कीजिए। अथवा ज्वालामुखी प्रक्रिया रचनात्मक एवं ध्वंसात्मक प्रभावों का सम्मिश्रण है। कैसे? स्पष्ट कीजिए। अथवा ज्वालामुखी के लाभदायक वह हानिकारक प्रभावों को स्पष्ट कीजिए।
उत्तर: ज्वालामुखी के दोनों प्रकार के प्रभाव होते हैं:
1. **रचनात्मक (लाभदायक) प्रभाव:** लावा के जमने से बहुत उपजाऊ काली मिट्टी बनती है (जैसे भारत का दक्कन पठार)। इससे बहुमूल्य खनिज मिलते हैं और कभी-कभी सुंदर पर्यटन स्थल और गर्म पानी के सोते भी बन जाते हैं।
2. **ध्वंसात्मक (हानिकारक) प्रभाव:** ज्वालामुखी विस्फोट से भारी तबाही होती है। लावा और राख खेती की जमीन, जंगलों और बस्तियों को जलाकर खाक कर देते हैं। जहरीली गैसों से प्रदूषण फैलता है और कभी-कभी सुनामी भी आ सकती है।
सरल शब्दों में: ज्वालामुखी एक तरफ तबाही मचाता है और जान-माल का नुकसान करता है, तो दूसरी तरफ यह उपजाऊ मिट्टी और कीमती पत्थर भी देता है।
📝 शिक्षक की नोट: काली मिट्टी (Regur soil) के उदाहरण से इसके कृषि लाभ को समझाएं। साथ ही, पोम्पेई जैसे ऐतिहासिक विनाश का भी जिक्र करें।
🎯 परीक्षा टिप: उत्तर को 'रचनात्मक' और 'ध्वंसात्मक'—इन दो अलग शीर्षकों के तहत लिखें।
Question 1. भूकम्प की उत्पत्ति के कारणों को स्पष्ट कीजिए। अथवा भूकम्पीय प्रक्रिया किन कारकों की देन है? वर्णन कीजिए। अथवा पृथ्वीतल पर भूकम्पीय प्रक्रिया हेतु उत्तरदायी कारकों का विस्तृत विवेचन कीजिए। अथवा भूकम्पों की उत्पत्ति के कारणों का उदाहरण सहित स्पष्टीकरण दीजिए।
उत्तर: भूकम्प आने के मुख्य भौगोलिक कारण निम्नलिखित हैं:
(i) **भ्रंशन (Faulting):** जमीन के अंदर की चट्टानों में अचानक दरार पड़ने या खिसकने से भारी ऊर्जा निकलती है, जो भूकम्प का कारण बनती है।
(ii) **ज्वालामुखी क्रिया (Volcanism):** जब जमीन के अंदर से मैग्मा बहुत जोर से बाहर निकलता है, तो आसपास की जमीन काँपने लगती है। एटना और वेसुवियस जैसे विस्फोट इसके उदाहरण हैं।
(iii) **जलभार (Waterload):** बड़े बाँधों में बहुत ज्यादा पानी भरने से नीचे की चट्टानों पर भारी दबाव पड़ता है, जिससे असंतुलन पैदा होता है और भूकम्प आते हैं (जैसे 1967 का कोयना भूकम्प)।
(iv) **पृथ्वी का संकुचन:** पृथ्वी के धीरे-धीरे ठंडा होकर सिकुड़ने से उसकी सतह में हलचल होती है।
(v) **समस्थिति समायोजन (Isostatic Adjustments):** पहाड़ों और मैदानों के बीच वजन के संतुलन को बनाए रखने के लिए पृथ्वी के अंदर जो समायोजन होता है, उससे भी झटके महसूस होते हैं।
सरल शब्दों में: जमीन के नीचे दरारें पड़ना, ज्वालामुखी का फटना, बाँधों में भारी पानी का दबाव और पृथ्वी की परतों का अपना संतुलन ठीक करना—इन वजहों से भूकम्प आते हैं।
📝 शिक्षक की नोट: प्रत्येक कारण को एक छोटे चित्र या रेखाचित्र के माध्यम से समझाएं, खासकर 'भ्रंशन' (Faulting) को।
🎯 परीक्षा टिप: भारत के संदर्भ में 'कोयना भूकम्प' और 'हिमालय क्षेत्र' का उदाहरण देना बहुत प्रभावशाली रहता है।
Question 2. भूकम्प के प्रकारों का विस्तृत वर्णन कीजिए। अथवा भूकम्पों को किन-किन भागों में बाँटा गया है? अथवा विभिन्न आधारों पर भूकम्पों का वर्गीकरण करते हुए उनका वर्णन कीजिए। अथवा भिन्न-भिन्न कारणों से अलग-अलग प्रकार के भूकम्प उत्पन्न होते हैं। कैसे? स्पष्ट कीजिए।
उत्तर: भूकम्पों को उनके कारणों और प्रकृति के आधार पर निम्न प्रकारों में बाँटा गया है:
(i) **कृत्रिम या मानवीय भूकम्प:** ये इंसानी कामों जैसे कि परमाणु परीक्षण, बड़े धमाके या खदानों में खुदाई के कारण आते हैं। इनकी तीव्रता आमतौर पर कम होती है।
(ii) **प्रत्यास्थ पुनश्चलन भूकम्प (Elastic Rebound):** जब चट्टानें रबड़ की तरह खिंचती हैं और फिर टूटकर अपनी जगह वापस आती हैं, तो तेज झटके लगते हैं।
(iii) **विवर्तनिक भूकम्प (Plate Tectonics):** पृथ्वी की प्लेटों के खिसकने या टकराने से आने वाले ये सबसे आम और शक्तिशाली भूकम्प होते हैं।
(iv) **अन्य कारण:** ज्वालामुखी विस्फोट, जमीन का धसना, या पहाड़ों से बड़ी चट्टानों के गिरने (landslide) से भी स्थानीय भूकम्प आते हैं।
सरल शब्दों में: भूकम्प इंसानी धमाकों से भी आ सकते हैं और कुदरती कारणों जैसे प्लेटों के टकराने या ज्वालामुखी के फटने से भी।
📝 शिक्षक की नोट: 'इलास्टिक रिबाउंड' को समझाने के लिए एक रबड़ बैंड को खींचकर तोड़ने का उदाहरण दें।
🎯 परीक्षा टिप: विवर्तनिक भूकम्प (Plate Tectonic Earthquakes) को सबसे महत्वपूर्ण प्रकार के रूप में रेखांकित करें।
Question 2. ज्वालामुखियों के विश्व वितरण का सचित्र वर्णन कीजिए।
उत्तर: विश्व में ज्वालामुखियों का वितरण मुख्य रूप से इन चार पेटियों में पाया जाता है:
(i) **प्रशांत महासागरीय पेटी:** इसे 'रिंग ऑफ फायर' कहा जाता है। दुनिया के दो-तिहाई से अधिक ज्वालामुखी यहीं हैं। यह क्षेत्र अंटार्कटिका से लेकर जापान और अलास्का तक फैला है। प्रसिद्ध उदाहरण: फुजीयामा (जापान)।
(ii) **मध्य-महाद्वीपीय पेटी:** यह पेटी यूरोप के आल्प्स से लेकर हिमालय तक फैली है। इसमें वेसुवियस और एटना जैसे प्रसिद्ध ज्वालामुखी आते हैं।
(iii) **मध्य-अटलांटिक पेटी:** यह महासागर के बीच में स्थित है जहाँ प्लेटें एक-दूसरे से दूर जा रही हैं।
(iv) **पूर्वी अफ्रीकी पेटी:** यह अफ्रीका की बड़ी दरार घाटी (Rift Valley) के पास स्थित है, जिसमें किलिमंजारो जैसे पर्वत आते हैं।
सरल शब्दों में: दुनिया के ज्यादातर ज्वालामुखी समुद्रों के किनारे या उन जगहों पर हैं जहाँ जमीन की प्लेटें आपस में मिल रही हैं या दूर जा रही हैं। प्रशांत महासागर के चारों तरफ सबसे ज्यादा ज्वालामुखी पाए जाते हैं।
📝 शिक्षक की नोट: छात्रों को एक विश्व मानचित्र पर इन पेटियों को चिह्नित करना सिखाएं। 'रिंग ऑफ फायर' के महत्व को विशेष रूप से समझाएं।
🎯 परीक्षा टिप: पेटियों के नाम के साथ कम से कम दो ज्वालामुखियों के नाम लिखना जरूरी है। यदि संभव हो तो एक छोटा सा विश्व मानचित्र बनाकर ये पेटियाँ दिखाएं।
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