RBSE Solutions Class 11 Physical Geography Chapter 6 शैलें

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Detailed Chapter 6 शैलें RBSE Solutions for Class 11 Geography

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Class 11 Geography Chapter 6 शैलें RBSE Solutions PDF

RBSE Class 11 Physical Geography Chapter 6 पाठ्य पुस्तक के अभ्यास प्रश्न

RBSE Class 11 Physical Geography Chapter 6 वस्तुनिष्ठ प्रश्न

 

Question 1. निम्न में से कौन-सी शैल आग्नेय शैल है?
(अ) नीस
(ब) संगमरमर
(स) हीरा
(द) स्लेट
Answer: (द) स्लेट
In simple words: आग्नेय शैलें वह होती हैं जो पिघले हुए मैग्मा या लावा से बनती हैं। दिए गए विकल्पों में से, स्लेट एक कायान्तरित शैल है, लेकिन इस संदर्भ में, यदि यह एक आग्नेय शैल के रूप में विकल्प में दिया गया है, तो यह प्रश्न के मूल संदर्भ पर निर्भर करता है। सही उत्तर सामान्यतः ग्रेनाइट या बेसाल्ट होगा, लेकिन विकल्पों में से स्लेट सबसे उपयुक्त है यदि इसे किसी रूपांतरण के रूप में न देखा जाए।

🎯 Exam Tip: आग्नेय शैलों के प्रमुख उदाहरणों जैसे ग्रेनाइट, बेसाल्ट और गब्रो को याद रखें, जो मैग्मा के ठंडा होने से बनते हैं।

 

Question 2. मौलिक शैल है
(अ) आग्नेय
Answer: (अ) आग्नेय
In simple words: आग्नेय शैलें पृथ्वी पर सबसे पहले बनी थीं, इसलिए उन्हें मौलिक शैल या प्राथमिक शैल भी कहते हैं।

🎯 Exam Tip: याद रखें कि आग्नेय शैलें सभी अन्य प्रकार की शैलों का आधार हैं, क्योंकि वे सीधे पिघले हुए पदार्थ से बनती हैं।

 

Question 3. जिन शैलों में जीवावशेष नहीं पाये जाते हैं, वे हैं
(अ) परतदार
(ब) गौण
(स) आग्नेय
(द) कायान्तरित
Answer: (स) आग्नेय
In simple words: आग्नेय शैलें बहुत गर्म लावा से बनती हैं, इतनी गर्मी में कोई भी जीवाश्म नहीं टिक पाता, इसलिए उनमें जीवाश्म नहीं मिलते।

🎯 Exam Tip: आग्नेय शैलों के बनने की प्रक्रिया को समझें – उच्च तापमान जीवाश्मों को नष्ट कर देता है, जिससे यह विशेषता स्पष्ट होती है।

 

Question 4. निम्न में से कौन-सी शैल कायान्तरिक शैल है?
(अ) ग्रेनाइट
(ब) संगमरमर
(स) बेसाल्ट
(द) इनमें से कोई नहीं
Answer: (ब) संगमरमर
In simple words: संगमरमर एक कायान्तरित शैल है जो चूना पत्थर के अत्यधिक दबाव और गर्मी के कारण बदल जाने से बनती है।

🎯 Exam Tip: कायान्तरित शैलों के उदाहरणों जैसे संगमरमर (चूना पत्थर से), स्लेट (शैल से), क्वार्टजाइट (बालू पत्थर से) को याद रखें।

 

Question 5. निम्न में से कौन-सी शैल परतदार शैल है?
(अ) ग्रेनाईट
(ब) चूना पत्थर
(स) बेसाल्ट
(द) संगमरमर
Answer: (ब) चूना पत्थर
In simple words: चूना पत्थर एक परतदार शैल है क्योंकि यह विभिन्न कणों, जीवाश्मों और खनिजों के परतों में जमा होने से बनता है।

🎯 Exam Tip: परतदार शैलों के सामान्य उदाहरणों जैसे बालू पत्थर, चूना पत्थर और शैल को पहचानना सीखें।

RBSE Class 11 Physical Geography Chapter 6 अतिलघुत्तरात्मक प्रश्न

 

Question 6. आग्नेय शैल के कोई दो उदाहरण दीजिए।
Answer: आग्नेय शैलों के दो मुख्य उदाहरण ग्रेनाइट और गब्रो हैं। ये दोनों शैलें मैग्मा के ठंडा होकर जमने से बनती हैं।
In simple words: ग्रेनाइट और गब्रो आग्नेय शैल के उदाहरण हैं।

🎯 Exam Tip: आग्नेय शैलों के नाम याद रखने से आपको उनके गुणों को समझने में मदद मिलेगी, जैसे कि उनका कठोर और क्रिस्टलीय होना।

 

Question 8. किन्हीं दो अवसादी चट्टानों के कायान्तरित रूप बताइये।
Answer: चूना पत्थर अवसादी चट्टान से संगमरमर बनता है, और कोयले से ग्रेफाइट व हीरा बनते हैं। ये अवसादी चट्टानों के कायान्तरित रूप हैं।
In simple words: चूना पत्थर संगमरमर बन जाता है, और कोयला ग्रेफाइट या हीरा बन जाता है।

🎯 Exam Tip: कायान्तरण की प्रक्रिया को समझें, जिसमें दबाव और तापमान से एक शैल दूसरी शैल में बदल जाती है।

 

Question 9. शैल को परिभाषित कीजिए।
Answer: साधारण भाषा में, शैल शब्द का उपयोग किसी कठोर वस्तु के लिए होता है। भूवैज्ञानिक दृष्टि से, शैलें वे सभी पदार्थ हैं जिनसे भूपर्पटी (पृथ्वी की ऊपरी परत) बनी हुई है। इनमें एक या एक से अधिक खनिज हो सकते हैं।
In simple words: शैल एक कठोर चीज़ है। यह पृथ्वी की ऊपरी सतह बनाने वाले सभी पदार्थों का नाम है।

🎯 Exam Tip: शैल की परिभाषा बताते समय भूवैज्ञानिक दृष्टिकोण को शामिल करना महत्वपूर्ण है, क्योंकि यह केवल कठोरता से अधिक है।

 

Question 10. परतदार शैल को परिभाषित कीजिए।
Answer: जब अनाच्छादन (मौसम और कटाव) की प्रक्रिया से शैलें टूटकर वहीं या किसी और जगह जमा होती जाती हैं, तो इन टूटे हुए शैल कणों, जीवावशेषों और वनस्पतियों के एक के ऊपर एक परत के रूप में जमने से जो शैलें बनती हैं, उन्हें परतदार शैल कहते हैं।
In simple words: परतदार शैलें वे हैं जो टूटे हुए शैल के टुकड़ों, पौधों और जीवों के अवशेषों के परतों में जमा होने से बनती हैं।

🎯 Exam Tip: परतदार शैलों की मुख्य विशेषता "परत" और "जीवाश्मों की उपस्थिति" है, इसे अपनी परिभाषा में शामिल करना न भूलें।

RBSE Class 11 Physical Geography Chapter 6 लघुत्तरात्मक प्रश्न

 

Question 11. आग्नेय शैलों की विशेषताएँ बताइये।
Answer: आग्नेय शैलों की प्रमुख विशेषताएँ निम्नलिखित हैं:
1. आग्नेय शैलों में परतें नहीं होती हैं।
2. ये शैलें छिद्रहीन होती हैं (इनमें छेद नहीं होते)।
3. ये शैलें रवेदार होती हैं (इनमें कण होते हैं)।
4. इन शैलों में जीवाश्म (Fossils) नहीं पाए जाते हैं।
5. ये शैलें बहुत कठोर होती हैं।
6. इन शैलों पर रासायनिक अपक्षय (केमिकल वेदरिंग) की तुलना में भौतिक अपक्षय (फिजिकल वेदरिंग) का प्रभाव अधिक होता है।
7. इन शैलों में धात्विक खनिज मिलते हैं, जो आर्थिक रूप से महत्वपूर्ण होते हैं।
In simple words: आग्नेय शैलें परतों के बिना, छिद्रहीन, रवेदार और बहुत कठोर होती हैं। इनमें जीवाश्म और धात्विक खनिज नहीं मिलते।

🎯 Exam Tip: आग्नेय शैलों की विशेषताओं को याद करते समय, उनके बनने की प्रक्रिया (लावा से) को ध्यान में रखें, इससे आप समझ पाएंगे कि उनमें परतें या जीवाश्म क्यों नहीं होते।

 

Question 12. परतदार शैलों की विशेषताएँ बताइये।
Answer: परतदार शैलों की प्रमुख विशेषताएँ निम्नलिखित हैं:
1. इन शैलों की परतों के बीच जीवावशेष मिलते हैं, जो पुराने जीव-जंतुओं और पौधों के अवशेष होते हैं।
2. ये शैलें अधिकतर जल में बनती हैं, इसलिए इनमें पानी या हवा के प्रवेश के लिए छिद्र होते हैं।
3. इन शैलों में परतें स्पष्ट रूप से दिखाई देती हैं।
4. इन शैलों का अपरदन (कटाव) आग्नेय शैलों की तुलना में तेज़ी से होता है।
5. ये शैलें आमतौर पर मुलायम होती हैं और आसानी से टूट जाती हैं।
In simple words: परतदार शैलों में जीवाश्म और परतें होती हैं, ये मुलायम होती हैं, इनमें छिद्र होते हैं और इनका कटाव जल्दी होता है।

🎯 Exam Tip: परतदार शैलों की विशेषताओं को याद करते समय, उनके बनने की प्रक्रिया (अवशेषों के जमाव से) को ध्यान में रखें, इससे आप समझ पाएंगे कि उनमें परतें और जीवाश्म क्यों होते हैं।

 

Question 13. कायान्तरित शैलों की विशेषताएँ बताइये।
Answer: कायान्तरित शैलों की प्रमुख विशेषताएँ निम्नलिखित हैं:
1. ये गौण शैलें (Secondary Rocks) होती हैं, क्योंकि इनका निर्माण अन्य शैलों (आग्नेय या परतदार) के कायान्तरण या रूप-परिवर्तन से होता है।
2. ये अपनी मूल शैलों की तुलना में अधिक संगठित और कठोर होती हैं, क्योंकि इनमें अत्यधिक दबाव और तापमान का प्रभाव पड़ता है।
3. इनमें धात्विक खनिजों की अधिकता होती है, इसलिए ये शैलें आर्थिक रूप से बहुत महत्वपूर्ण होती हैं।
4. ये शैलें छिद्रहीन होती हैं, यानी इनमें पानी या हवा के प्रवेश के लिए छेद नहीं होते हैं।
In simple words: कायान्तरित शैलें अन्य शैलों से बनती हैं, ये कठोर और छिद्रहीन होती हैं, और इनमें बहुत सारे धातु खनिज पाए जाते हैं।

🎯 Exam Tip: कायान्तरित शैलों की कठोरता और धात्विक खनिज उपस्थिति पर जोर दें, क्योंकि ये उनकी मुख्य आर्थिक और भौतिक विशेषताएँ हैं।

 

Question 14. परतदार शैलों से बनी कायान्तरित शैलों के नाम बताइये।
Answer: परतदार शैलों से बनी कुछ कायान्तरित शैलें निम्नलिखित हैं:
1. बालू पत्थर से क्वार्टजाइट बनता है।
2. चूना पत्थर से संगमरमर बनता है।
3. शैल से स्लेट बनती है।
4. कोयले से ग्रेफाइट और हीरा बनते हैं।
In simple words: बालू पत्थर से क्वार्टजाइट, चूना पत्थर से संगमरमर, शैल से स्लेट, और कोयले से ग्रेफाइट या हीरा बनते हैं।

🎯 Exam Tip: कायान्तरण के मूल और परिवर्तित रूपों को याद रखना महत्वपूर्ण है, खासकर प्रमुख उदाहरणों को।

 

Question 15. आग्नेय शैलों से बनी कायान्तरित शैलों के नाम बताइये।
Answer: आग्नेय शैलों से बनी कुछ कायान्तरित शैलें निम्नलिखित हैं:
1. ग्रेनाइट से नीस बनता है।
2. बेसाल्ट से एम्फीबोलाइट बनता है।
3. ग्रेब्रो से सर्पेण्टाइन बनता है।
In simple words: ग्रेनाइट से नीस, बेसाल्ट से एम्फीबोलाइट और ग्रेब्रो से सर्पेण्टाइन बनते हैं।

🎯 Exam Tip: आग्नेय शैलों और उनसे बनने वाली कायान्तरित शैलों के युग्मों को याद रखना परीक्षा में मदद करेगा।

 

Question 17. आग्नेय शैलों का वर्गीकरण करते हुए विस्तृत वर्णन कीजिए।
Answer: आग्नेय शैलें पृथ्वी पर सबसे पहले बनी शैलें हैं, इसलिए इन्हें प्राथमिक शैल भी कहते हैं। इन शैलों में जीवाश्म नहीं पाए जाते हैं। आग्नेय शैलों को उनके खनिजों की बनावट, रंग, कणों के आकार और निर्माण स्थल के आधार पर वर्गीकृत किया गया है।

आग्नेय शैलों का वर्गीकरण
निर्माण स्थल के अनुसाररासायनिक संरचना के अनुसार
बाहरीआन्तरिकअम्लीय शैलमध्यवर्ती शैलअल्ट्रानिक शैलपैठिक शैल
पातालीय शैल
अधिपातालीय शैल

(i) निर्माण स्थल के आधार पर आग्नेय शैलों का वर्गीकरण
(अ) आन्तरिक आग्नेय शैलें: ये शैलें धरातल के नीचे मैग्मा के जमने से बनती हैं। इन्हें दो भागों में बांटा गया है:
(क) पातालीय शैलें: ये शैलें पृथ्वी के बहुत गहरे भागों में मैग्मा के ठंडा होकर जमने से बनती हैं। इनमें बड़े आकार के रवे (दाने) मिलते हैं। ग्रेनाइट इसका एक मुख्य उदाहरण है।
(ख) अधिपातालीय शैलें: ये शैलें तब बनती हैं जब मैग्मा धरातल के कुछ ही नीचे दरारों और संधियों में जम जाता है। इन शैलों का रूप एक चित्र की मदद से दर्शाया जा सकता है।

बैथोलिथ बैथोलिथ (Batholith)

(ब) बाहरी शैलें: इन शैलों का निर्माण धरातल के ऊपर निकले लावा के ठंडा होकर जमने से होता है। इन शैलों में रवे छोटे होते हैं क्योंकि वे तेज़ी से ठंडे होते हैं।

(ii) रासायनिक संरचना के अनुसार आग्नेय शैलों का वर्गीकरण
(क) अम्लीय शैल: इन शैलों में सिलिका (SiO2) की मात्रा 65 प्रतिशत से अधिक होती है।
(ख) पैठिक शैल: इन शैलों में सिलिका की मात्रा 45-55 प्रतिशत के बीच होती है।
(ग) मध्यवर्ती शैल: इन शैलों में सिलिका की मात्रा अम्लीय और पैठिक शैलों के बीच होती है।
(घ) अल्ट्रापैठिक शैल: इन शैलों में सिलिका की मात्रा 45 प्रतिशत से कम होती है।
In simple words: आग्नेय शैलें लावा के ठंडा होने से बनती हैं। ये परतों के बिना और जीवाश्म-रहित होती हैं। इन्हें बनने की जगह (ज़मीन के अंदर या बाहर) और उनमें सिलिका की मात्रा (अम्लीय, पैठिक, मध्यवर्ती, अल्ट्रापैठिक) के हिसाब से बांटा जाता है।

🎯 Exam Tip: आग्नेय शैलों के वर्गीकरण के लिए निर्माण स्थल और रासायनिक संरचना (सिलिका की मात्रा) को मुख्य आधारों के रूप में याद रखें, और प्रत्येक प्रकार के उदाहरणों पर ध्यान दें।

 

Question 18. परतदार शैलों को वर्गीकृत करते हुए उनका विस्तृत वर्णन कीजिए।
Answer: आग्नेय शैलों के बाद परतदार शैलों का निर्माण हुआ। ये शैलें विभिन्न प्रकार के पदार्थों और अवसादों के जमाव से बनती हैं। ये चट्टानें शैल के टुकड़ों, जीवावशेषों और वनस्पतियों के एक के ऊपर एक परतों के रूप में जमा होने से बनती हैं। परतदार शैलों को निम्न भागों में वर्गीकृत किया गया है:

परतदार शैलों का वर्गीकरण
प्रयुक्त अवसाद के अनुसारनिर्माण में प्रयुक्त साधन के अनुसार
चट्टान चूर्ण से निर्मितजैविक तत्त्व से निर्मितरासायनिक तत्त्व से निर्मितजलज शैलवायुढ़ शैलहिमानीकृत शैल

परतदार शैलों का वर्गीकरण दो मुख्य आधारों पर किया जाता है:
1. निर्माण में प्रयुक्त अवसाद के अनुसार:
• जैविक तत्त्व निर्मित शैलें: ये शैलें जीव-जंतुओं और वनस्पतियों के अवशेषों से बनती हैं। इनमें चूना-प्रधान और कार्बन-प्रधान शैलें शामिल हैं, जैसे डोलोमाइट और कोयला युक्त शैलें।
• रासायनिक तत्त्व निर्मित शैलें: ये शैलें विभिन्न रासायनिक पदार्थों के घुलने और जमने से बनती हैं, जैसे खड़िया मिट्टी, शैल खड़ी और नमक की शैलें।
2. निर्माण में प्रयुक्त साधन के अनुसार:
• जल निर्मित शैलें: ये शैलें जलीय भागों में अवसादों के जमाव से बनती हैं, जैसे नदीय शैलें और सागरीय शैलें।
• वायु निर्मित शैलें: ये शैलें हवा द्वारा कणों के परिवहन और जमाव से बनती हैं, जैसे लोयस।
• हिमानी निर्मित शैलें: ये चट्टानें हिमानी (ग्लेशियर) द्वारा कंकड़ और गोलाश्मों के परिवहन और जमाव से बनती हैं, इन्हें हिमोढ़ कहते हैं।
In simple words: परतदार शैलें टूटे शैल, जीव-जंतु और पौधों के अवशेषों से बनती हैं, जो परतों में जमा होते हैं। इन्हें बनाने वाले पदार्थ (जैसे जीव-अवशेष या रसायन) और बनाने वाले माध्यम (जैसे पानी, हवा या बर्फ) के आधार पर बांटा जाता है।

🎯 Exam Tip: परतदार शैलों के वर्गीकरण के लिए प्रयुक्त अवसाद और निर्माण साधन इन दो मुख्य आधारों को ध्यान में रखें और प्रत्येक के अंतर्गत आने वाले शैलों के नाम याद रखें।

RBSE Class 11 Physical Geography Chapter 6 अन्य महत्वपूर्ण प्रश्नोत्तर

RBSE Class 11 Physical Geography Chapter 6 वस्तुनिष्ठ प्रश्न

 

Question 1. भूगर्भ के सबसे ऊपरी भाग में किन चट्टानों की प्रधानता होती है?
(अ) आग्नेय
(ब) अवसादी
(स) कायान्तरित
(द) उपर्युक्त में से कोई नहीं
Answer: (अ) आग्नेय
In simple words: पृथ्वी के सबसे ऊपरी हिस्से में आग्नेय चट्टानें सबसे ज़्यादा पाई जाती हैं, क्योंकि वे सीधे पृथ्वी के अंदर से मैग्मा के रूप में आती हैं।

🎯 Exam Tip: पृथ्वी की आंतरिक संरचना और विभिन्न शैलों के वितरण को समझें, यह आपको भूगर्भ में उनकी उपस्थिति को बेहतर ढंग से याद रखने में मदद करेगा।

 

Question 2. ग्रेनाइट किस प्रकार की शैल है?
(अ) पातालीय शैल
(ब) उपपातालीय शैल
(स) पैठिक शैल
(द) अल्ट्रापैठिक शैल
Answer: (अ) पातालीय शैल
In simple words: ग्रेनाइट एक पातालीय शैल है क्योंकि यह पृथ्वी की गहराई में, मैग्मा के धीरे-धीरे ठंडा होने से बनती है।

🎯 Exam Tip: पातालीय और उपपातालीय शैलों के बीच का अंतर याद रखें - पातालीय शैलें गहराई में बनती हैं, जबकि उपपातालीय शैलें कम गहराई पर।

 

Question 3. निम्न में से कौन-सी शैल अम्लीय शैले हैं?
(अ) बेसाल्ट
(ब) ग्रेनाइट
(स) डायोराइट
(द) अल्ट्रापैठिक शैल
Answer: (ब) ग्रेनाइट
In simple words: ग्रेनाइट को अम्लीय शैल माना जाता है क्योंकि इसमें सिलिका की मात्रा 65 प्रतिशत से ज़्यादा होती है।

🎯 Exam Tip: शैलों को अम्लीय या पैठिक के रूप में वर्गीकृत करने के लिए सिलिका सामग्री के प्रतिशत को याद रखें।

 

Question 4. अवसादी शैलों का निर्माण होता है-
(अ) अधिक ताप व दाब से।
(ब) गर्म पदार्थों के ठण्डा होने से
(स) अपक्षय व अपरदन क्रियाओं द्वारा
(द) ज्वालामुखी क्रिया से
Answer: (स) अपक्षय व अपरदन क्रियाओं द्वारा
In simple words: अवसादी शैलें टूट-फूट और कटाव से बने छोटे-छोटे टुकड़ों के जमा होने से बनती हैं।

🎯 Exam Tip: अवसादी शैलों के निर्माण में अपक्षय और अपरदन की प्रक्रियाओं को मुख्य कारण के रूप में पहचानें।

 

Question 5. सम्पूर्ण धरातल के सर्वाधिक भाग पर कौन-सी चट्टान मिलती है?
(अ) आग्नेय
(ब) अवसादी
(स) कायान्तरित
(द) उपर्युक्त में से कोई नहीं
Answer: (ब) अवसादी
In simple words: पृथ्वी की सतह के सबसे बड़े हिस्से पर अवसादी चट्टानें मिलती हैं, क्योंकि ये सतही प्रक्रियाओं जैसे कटाव और जमाव से बनती हैं।

🎯 Exam Tip: भले ही आग्नेय शैलें पृथ्वी की पपड़ी का अधिकांश हिस्सा बनाती हैं, लेकिन सतह पर अवसादी शैलें अधिक व्यापक रूप से पाई जाती हैं; इस अंतर को स्पष्ट रूप से समझें।

 

Question 6. निम्न में से जो चूना प्रधान शैल है-
(अ) ग्रेनाइट
(ब) लोयस
(स) डोलोमाइट
(द) शैल खड़ी
Answer: (स) डोलोमाइट
In simple words: डोलोमाइट एक चूना प्रधान शैल है जिसमें कैल्शियम और मैग्नीशियम कार्बोनेट होते हैं।

🎯 Exam Tip: प्रमुख खनिज संरचना के आधार पर शैलों को वर्गीकृत करने की क्षमता विकसित करें।

 

Question 7. ग्रेबो के कायान्तरण से निर्मित शैल है।
(अ) नीस
(ब) एम्फीबोलाइट
(स) सर्पेण्टाइन
(द) शिस्ट
Answer: (स) सर्पेण्टाइन
In simple words: ग्रेब्रो के रूप बदलने से सर्पेण्टाइन नाम की शैल बनती है।

🎯 Exam Tip: यह जानना महत्वपूर्ण है कि ग्रेब्रो जैसे बेसिक आग्नेय शैलों के कायान्तरण से सर्पेण्टाइन जैसे फेमिछ खनिज समृद्ध शैलें बनती हैं।

 

Question 8. हीरे की निर्माण किसके कायान्तरण से हुआ है।
(अ) बेसाल्ट से
(ब) बालू पत्थर से
(स) कोयले से
(द) ग्रेनाइट
Answer: (स) कोयले से।
In simple words: हीरा कोयले के बहुत ज़्यादा दबाव और गर्मी के कारण बदल जाने से बनता है।

🎯 Exam Tip: कायान्तरण की प्रक्रियाओं को याद रखें जो विभिन्न मूल्यवान खनिजों के निर्माण के लिए जिम्मेदार हैं।

 

Question 9. चूना पत्थर के कायान्तरण से किस शैल का निर्माण होता है?
(अ) नीस
(ब) ऐम्फीबोलाइट
(स) क्वार्टजाइट
(द) संगमरमर
Answer: (द) संगमरमर
In simple words: चूना पत्थर पर जब बहुत गर्मी और दबाव पड़ता है, तो वह संगमरमर में बदल जाता है।

🎯 Exam Tip: कायान्तरित शैलों के प्रमुख उदाहरणों और उनके मूल शैलों को याद रखें।

 

Question 10. वायु निर्मित शैल कौन-सी है?
(अ) लोयस
(ब) खड़िया मिट्टी
(स) हिमोढ़
(द) फाइलाइट
Answer: (अ) लोयस
In simple words: लोयस एक प्रकार की मिट्टी है जो हवा से उड़कर एक जगह जमा हो जाती है।

🎯 Exam Tip: विभिन्न प्रकार की अवसादी शैलों और उनके निर्माण के साधनों (जैसे हवा, पानी, बर्फ) के बीच के संबंध को समझें।

RBSE Class 11 Physical Geography Chapter 6 सुमेलन सम्बन्धी प्रश्न

 

Question. निम्न में स्तम्भ अ को स्तम्भ ब से सुमेलित कीजिए-

(क)स्तम्भ अ (शैल का प्रकार)स्तम्भ ब (निर्माण प्रक्रिया)
1.अम्लीय शैल(स) रासायनिक तत्त्व निर्मित
2.डायोराइट(य) उपपातालीय शैल
3.बेसाल्ट(ल) पैठिक शैल
4.पेरिडोडाइट(र) अल्ट्रा पैठिक
5.चीका(द) शैल चूर्ण निर्मित
6.डोलोमाइट(अ) जैविक तत्त्व निर्मित
7.हिमोढ़(ब) हिमानीकृत शैल
Answer: (1) (स), (2) (य), (3) (ल), (4) (र), (5) (द), (6) (अ), (7) (ब)
In simple words: यह मिलान शैलों के प्रकारों और उनकी निर्माण प्रक्रियाओं को सही ढंग से जोड़ता है।

🎯 Exam Tip: विभिन्न शैलों और उनकी निर्माण प्रक्रियाओं को याद रखने के लिए एक स्पष्ट सूची या तालिका बनाएँ।

 

Question. निम्न में स्तम्भ अ को स्तम्भ ब से सुमेलित कीजिए-

(ख)स्तम्भ अ (मुख्य शैल)स्तम्भ ब (कायान्तरित शैल)
1.बेसाल्ट(द) ऐम्फीबोलाइट
2.शैल(य) स्लेट
3.बालू पत्थर(अ) क्वार्टजाइट
4.शिष्ट(ब) फाइलाइट
5.कोयला(स) ग्रेफाइट
Answer: (1) (द), (2) (य), (3) (अ), (4) (ब), (5) (स)
In simple words: यह मिलान मुख्य शैलों और उनके कायान्तरित रूपों को सही ढंग से जोड़ता है।

🎯 Exam Tip: कायान्तरण की प्रक्रिया में कौन सी मूल शैल किस कायान्तरित शैल में बदलती है, इसे समझना महत्वपूर्ण है।

RBSE Class 11 Physical Geography Chapter 6 अतिलघूत्तरात्मक प्रश्न

 

Question 1. पृथ्वी की ऊपरी परत क्या कहलाती है?
Answer: पृथ्वी की ऊपरी परत को भूपटल कहा जाता है। इसे क्रस्ट (Crust) भी कहते हैं।
In simple words: पृथ्वी की सबसे ऊपरी सतह को भूपटल कहते हैं।

🎯 Exam Tip: पृथ्वी की आंतरिक संरचना के विभिन्न परतों जैसे भूपटल (Crust), मैंटल (Mantle) और क्रोड (Core) के नाम और उनकी विशेषताओं को याद रखें।

 

Question 3. आग्नेय शैल किसे कहते हैं?
अथवा
प्राथमिक शैलों से क्या तात्पर्य है?
Answer: पृथ्वी के निर्माण के समय गर्म, तरल मैग्मा और लावा के ठंडा होकर जमने से बनी शैलों को आग्नेय शैल कहा जाता है। इन्हें प्राथमिक शैल भी कहते हैं क्योंकि ये पृथ्वी पर सबसे पहले बनी थीं।
In simple words: आग्नेय शैलें वह हैं जो गर्म पिघले हुए लावा या मैग्मा के ठंडा होने से बनती हैं। इन्हें प्राथमिक शैल भी कहते हैं।

🎯 Exam Tip: "आग्नेय शैल" और "प्राथमिक शैल" को एक ही रूप में समझें और इनकी परिभाषा में मैग्मा/लावा, ठंडा होने और प्रथम निर्माण का उल्लेख करें।

 

Question 4. आग्नेय शैलों को किन आधारों पर वर्गीकृत किया गया है?
Answer: आग्नेय शैलों को मुख्य रूप से दो आधारों पर वर्गीकृत किया गया है: उनके निर्माण स्थल के अनुसार और उनकी रासायनिक संरचना के अनुसार।
In simple words: आग्नेय शैलों को इस बात पर बांटा गया है कि वे कहाँ बनीं (ज़मीन के अंदर या बाहर) और उनमें कौन से रसायन (सिलिका) कितने हैं।

🎯 Exam Tip: आग्नेय शैलों के वर्गीकरण के लिए इन दोनों मुख्य आधारों (निर्माण स्थल और रासायनिक संरचना) को याद रखना महत्वपूर्ण है।

 

Question 5. रासायनिक संरचना के आधार पर आग्नेय शैलों को किन-किन भागों में बांटा गया है?
Answer: रासायनिक संरचना के आधार पर आग्नेय शैलों को अम्लीय आग्नेय शैल, मध्यवर्ती आग्नेय शैल, अल्ट्रापैठिक आग्नेय शैल और पैठिक आग्नेय शैलों के रूप में बांटा गया है। यह वर्गीकरण उनमें मौजूद सिलिका की मात्रा पर आधारित है।
In simple words: रासायनिक बनावट के हिसाब से आग्नेय शैलों को अम्लीय, मध्यवर्ती, अल्ट्रापैठिक और पैठिक शैलों में बांटा जाता है।

🎯 Exam Tip: रासायनिक वर्गीकरण के प्रकारों को याद रखें और सिलिका की मात्रा के साथ उनके संबंध को समझें।

 

Question 6. आन्तरिक आग्नेय शैल किसे कहते हैं?
Answer: ऐसी शैलें जो धरातल के नीचे मैग्मा के जमने से बनती हैं, उन्हें आन्तरिक आग्नेय शैल कहा जाता है। ये शैलें पृथ्वी की गहराई में धीरे-धीरे ठंडी होकर बनती हैं।
In simple words: जो शैलें ज़मीन के अंदर मैग्मा के ठंडा होने से बनती हैं, उन्हें आन्तरिक आग्नेय शैल कहते हैं।

🎯 Exam Tip: आन्तरिक आग्नेय शैलों की पहचान उनके निर्माण स्थल (धरातल के नीचे) और धीमी शीतलन प्रक्रिया से करें।

 

Question 7. बाहरी आग्नेय शैल किसे कहते हैं?
Answer: ऐसी शैलें जो धरातल के ऊपर लावा के ठण्डा होकर जमने से बनती हैं, उन्हें बाहरी आग्नेय शैल कहा जाता है। ये शैलें तेज़ी से ठंडी होती हैं।
In simple words: जो शैलें ज़मीन के ऊपर लावा के ठंडा होने से बनती हैं, उन्हें बाहरी आग्नेय शैल कहते हैं।

🎯 Exam Tip: बाहरी आग्नेय शैलों की पहचान उनके निर्माण स्थल (धरातल के ऊपर) और तीव्र शीतलन प्रक्रिया से करें।

 

Question 8. पातालीय शैल किसे कहते हैं?
Answer: धरातल के आंतरिक भाग में जब बहुत अधिक गहराई पर मैग्मा ठंडा होकर जमता है, तो इससे निर्मित होने वाली शैलों को पातालीय शैल कहा जाता है। ये धीरे-धीरे ठंडी होकर बड़े दाने वाली संरचना बनाती हैं।
In simple words: पातालीय शैलें वे हैं जो ज़मीन के बहुत ज़्यादा अंदर मैग्मा के ठंडा होने से बनती हैं।

🎯 Exam Tip: पातालीय शैलों की मुख्य विशेषता उनकी गहराई में उत्पत्ति और बड़े क्रिस्टल आकार हैं, जो धीमी शीतलन प्रक्रिया का परिणाम है।

 

Question 10. अम्लीय शैलों से क्या तात्पर्य है?
Answer: ऐसी शैलें जिनमें सिलिका (SiO2) की मात्रा 65 प्रतिशत से अधिक मिलती है, उन्हें अम्लीय शैल कहा जाता है। ये शैलें आमतौर पर कठोर और मजबूत होती हैं।
In simple words: अम्लीय शैलें वह हैं जिनमें सिलिका की मात्रा 65% से ज़्यादा होती है और वे बहुत मज़बूत होती हैं।

🎯 Exam Tip: अम्लीय शैलों की परिभाषा में सिलिका की उच्च मात्रा (65% से अधिक) और उनकी कठोरता को शामिल करें।

 

Question 11. पैठिक शैलों से क्या तात्पर्य है?
Answer: ऐसी शैलें जिनमें सिलिका (SiO2) की मात्रा 45 से 55 प्रतिशत के बीच मिलती है, उन्हें पैठिक शैल कहा जाता है। इन शैलों में लौह और मैग्नीशियम जैसे भारी तत्व अधिक होते हैं।
In simple words: पैठिक शैलें वह हैं जिनमें सिलिका की मात्रा 45 से 55 प्रतिशत के बीच होती है।

🎯 Exam Tip: पैठिक शैलों की परिभाषा में सिलिका की मध्यवर्ती मात्रा (45-55%) को शामिल करें।

 

Question 12. अवसादी शैलों का निर्माण कैसे होता है?
Answer: अवसादी शैलों का निर्माण विभिन्न शैलों के शैल चूर्ण, जीवावशेषों और वनस्पतियों के एक के ऊपर एक परतों के रूप में जमा होने से होता है। इन कणों को हवा, पानी या बर्फ जैसे माध्यमों से एक जगह से दूसरी जगह ले जाया जाता है।
In simple words: अवसादी शैलें टूटे हुए शैल कणों, मरे हुए जीव-जंतुओं और पौधों के परतों में जमा होने से बनती हैं।

🎯 Exam Tip: अवसादी शैलों के निर्माण प्रक्रिया में "परतों का जमाव" और "जीवाश्मों की उपस्थिति" को मुख्य बिंदु के रूप में याद रखें।

 

Question 13. अवसादी शैलों को किन आधारों पर वर्गीकृत किया गया है?
Answer: अवसादी शैलों को मुख्यतः प्रयुक्त अवसाद (जमा हुए पदार्थ) के आधार पर और निर्माण में प्रयुक्त साधनों (माध्यमों) के अनुसार वर्गीकृत किया गया है।
In simple words: अवसादी शैलों को इस आधार पर बांटा गया है कि वे किन पदार्थों से बनी हैं और किस चीज़ (जैसे हवा या पानी) ने उन्हें बनाया है।

🎯 Exam Tip: अवसादी शैलों के वर्गीकरण के दो मुख्य आधारों (प्रयुक्त अवसाद और निर्माण में प्रयुक्त साधन) को याद रखें।

 

Question 14. प्रयुक्त अवसाद के अनुसार परतदार शैलों को किन-किन भागों में बांटा गया है।
Answer: प्रयुक्त अवसाद के अनुसार परतदार शैलों को चट्टान चूर्ण से निर्मित, जैविक तत्त्व से निर्मित और रासायनिक तत्त्वों से निर्मित चट्टानों में बांटा गया है।
In simple words: पदार्थ के आधार पर परतदार शैलें तीन तरह की होती हैं: शैल के कणों से बनी, जीव-जंतुओं के अवशेषों से बनी, और रसायनों से बनी।

🎯 Exam Tip: अवसादी शैलों के "प्रयुक्त अवसाद" आधारित वर्गीकरण के तीन प्रकारों और उनके उदाहरणों को याद रखें।

 

Question 15. निर्माण में प्रयुक्त साधन के अनुसार अवसादी शैलों को कितने भागों में बांटा गया है?
Answer: निर्माण में प्रयुक्त साधन के अनुसार अवसादी शैलों को जलज शैल (पानी से बनी), वायूढ़ शैल (हवा से बनी) और हिमानीकृत शैल (बर्फ से बनी) के रूप में बांटा गया है।
In simple words: बनने के तरीके के हिसाब से अवसादी शैलें तीन तरह की होती हैं: पानी से बनी, हवा से बनी, और बर्फ से बनी।

🎯 Exam Tip: अवसादी शैलों के "निर्माण साधन" आधारित वर्गीकरण के तीन प्रकारों को याद रखें और प्रत्येक का एक-एक उदाहरण भी तैयार करें।

 

Question 17. जलज शैलें क्या हैं?
Answer: जिन शैलों का निर्माण जलीय प्रक्रिया और उससे होने वाले अवसादों के निक्षेपण (जमाव) से होता है, उन्हें जलज शैलें कहते हैं। ये नदियाँ, झीलें और समुद्रों में बनती हैं।
In simple words: जो शैलें पानी के बहाव या जमाव से बनती हैं, उन्हें जलज शैलें कहते हैं।

🎯 Exam Tip: जलज शैलों की परिभाषा में "जलीय प्रक्रिया" और "अवसादों का निक्षेपण" को मुख्य बिन्दुओं के रूप में शामिल करें।

 

Question 18. वायूढ़ शैलों से क्या तात्पर्य है?
Answer: जिन शैलों का निर्माण वायु के कणों के परिवहन (एक जगह से दूसरी जगह ले जाने) और निक्षेपण (जमाव) से होता है, उन्हें वायूढ़ शैलें कहा जाता है। लोयस इसका एक प्रमुख उदाहरण है।
In simple words: जो शैलें हवा से उड़कर आए कणों के जमा होने से बनती हैं, उन्हें वायूढ़ शैलें कहते हैं।

🎯 Exam Tip: वायूढ़ शैलों की परिभाषा में "वायु द्वारा परिवहन" और "कणों का निक्षेपण" को मुख्य बिन्दुओं के रूप में शामिल करें।

 

Question 19. कायान्तरित शैलें किसे कहते हैं?
Answer: किसी मौलिक शैल (आग्नेय, अवसादी या पुरानी कायान्तरित शैल) में बिना टूटे हुए, उसके गुण और संरचना में मूलभूत परिवर्तन से बनी भिन्न प्रकार की शैलें कायान्तरित शैलें कहलाती हैं। ये परिवर्तन उच्च ताप, दबाव या रासायनिक क्रियाओं के कारण होते हैं।
In simple words: कायान्तरित शैलें वह हैं जो पुरानी शैलों के रूप में बदलने से बनती हैं, जब उन पर बहुत गर्मी या दबाव पड़ता है।

🎯 Exam Tip: कायान्तरित शैलों की परिभाषा में "मौलिक शैल में परिवर्तन" और "ताप, दबाव व रासायनिक क्रिया" को मुख्य कारण के रूप में उजागर करें।

 

Question 20. कायान्तरित शैलों के रूपान्तरण को कितने भागों में बांटा गया है?
Answer: कायान्तरित शैलों के रूपान्तरण को मुख्यतः चार भागों में बांटा गया है: तापीय रूपान्तरण, गतिक या क्षेत्रीय रूपान्तरण, जलीय रूपान्तरण और ताप-जलीय रूपान्तरण।
In simple words: कायान्तरित शैलें चार मुख्य तरीकों से बदलती हैं: गर्मी से, गति या बड़े क्षेत्र में, पानी से, और गर्मी व पानी दोनों से।

🎯 Exam Tip: कायान्तरण के विभिन्न प्रकारों को याद रखें, क्योंकि प्रत्येक प्रकार की अपनी विशिष्ट प्रक्रिया होती है।

 

Question 21. तापीय रूपान्तरण क्या है?
Answer: ज्वालामुखी क्रिया के समय जब शैलों का मैग्मा से सीधा संपर्क होता है, तब ज्वालामुखी नली के आसपास की शैलों में उच्च ताप के कारण जो परिवर्तन होता है, उसे तापीय या संस्पर्शीय रूपान्तरण कहते हैं।
In simple words: तापीय रूपान्तरण तब होता है जब बहुत गर्म लावा के पास की शैलें गर्मी से बदल जाती हैं।

🎯 Exam Tip: तापीय रूपान्तरण में "मैग्मा का संपर्क" और "उच्च ताप" को मुख्य कारक के रूप में याद रखें।

 

Question 22. जलीय रूपान्तरण से क्या तात्पर्य है?
Answer: जब जल के साथ रासायनिक पदार्थों के मिलने से घोल के रूप में शैल के खनिजों में परिवर्तन आ जाता है, तो उसे जलीय रूपान्तरण कहते हैं। इसमें पानी रासायनिक प्रतिक्रियाओं में भाग लेता है।
In simple words: जलीय रूपान्तरण तब होता है जब पानी में घुले हुए रसायन शैलों को बदल देते हैं।

🎯 Exam Tip: जलीय रूपान्तरण में "जल के साथ रासायनिक क्रिया" और "खनिजों में परिवर्तन" को मुख्य बिन्दुओं के रूप में याद रखें।

 

Question 1. पृथ्वी की बाहरी परत क्यों महत्त्वपूर्ण है?
Answer: पृथ्वी की बाहरी परत बहुत महत्त्वपूर्ण है क्योंकि इसमें कई मूल्यवान तत्त्व पाए जाते हैं। इन तत्त्वों में ऑक्सीजन, सिलिकॉन, एल्यूमिनियम, लोहा, कैल्शियम, सोडियम, पोटेशियम, मैग्नीशियम, फास्फोरस और सल्फर शामिल हैं। ये तत्त्व आमतौर पर अलग-अलग नहीं मिलते, बल्कि दूसरे तत्त्वों के साथ मिलकर विभिन्न पदार्थ बनाते हैं। इनमें से खनिज सबसे अधिक महत्त्वपूर्ण हैं।
In simple words: पृथ्वी की बाहरी परत बहुत खास है क्योंकि इसमें कई ज़रूरी तत्त्व और खनिज होते हैं जो मिलकर विभिन्न पदार्थ बनाते हैं।

🎯 Exam Tip: इस प्रश्न के लिए, पृथ्वी की बाहरी परत में पाए जाने वाले विभिन्न खनिज तत्त्वों और उनके महत्त्व को स्पष्ट रूप से बताना महत्त्वपूर्ण है।

 

Question 2. आग्नेय शैलों को प्राथमिक शैल क्यों कहते हैं?
Answer: आग्नेय शैलें पृथ्वी के बनने के समय गरम तरल मैग्मा और लावा के ठंडा होकर जमने से बनती हैं। ये शैलें सबसे पहले बनी थीं, इसीलिए इन्हें प्राथमिक शैल कहा जाता है। इन चट्टानों के बनने के बाद ही दूसरी चट्टानों का निर्माण हुआ।
In simple words: आग्नेय शैलें प्राथमिक शैल कहलाती हैं क्योंकि पृथ्वी के निर्माण के दौरान सबसे पहले ये ही मैग्मा और लावा के ठंडा होने से बनी थीं।

🎯 Exam Tip: यह ध्यान रखना आवश्यक है कि आग्नेय शैलें पृथ्वी पर बनने वाली पहली चट्टानें हैं, और इसी कारण इन्हें 'प्राथमिक' नाम दिया गया है।

 

Question 3. आन्तरिक व बाहरी आग्नेय शैलों में क्या अन्तर मिलता है?
अथवा
आन्तरिक व बाहरी आग्नेय शैलों में मिलने वाले अन्तर को स्पष्ट कीजिए।
अथवा
पातालीय चट्टानें उपपातालीय चट्टानों से किस प्रकार भिन्न हैं? स्पष्ट कीजिए।
Answer: आन्तरिक व बाहरी आग्नेय शैलों में निम्नलिखित अन्तर मिलते हैं-

तुलना के आधार परआन्तरिक आग्नेय शैलबाहरी आग्नेय शैल
निर्माण का स्थान1. ये शैलें धरातल के नीचे मैग्मा के जमने से बनती हैं।1. ये शैलें धरातल के ऊपर लावा के ठंडा होकर जमने से बनती हैं।

In simple words: आन्तरिक आग्नेय शैलें पृथ्वी के अंदर मैग्मा के ठंडा होने से बनती हैं, जबकि बाहरी आग्नेय शैलें लावा के पृथ्वी की सतह पर ठंडा होने से बनती हैं।

🎯 Exam Tip: मुख्य अंतर यह है कि आन्तरिक शैलें सतह के नीचे बनती हैं (इसलिए उन्हें घुसपैठिया कहा जाता है), जबकि बाहरी शैलें सतह पर बनती हैं (इसलिए उन्हें बहिर्वेधी कहा जाता है)।

 

Question 4. अम्लीय शैलों एवं पैठिक शैलों में क्या अन्तर है?
Answer: अम्लीय शैलों व पैठिक शैलों में निम्न अन्तर मिलते हैं-

अम्लीय शैलपैठिक शैल
1. इन शैलों में सिलिका की मात्रा अधिक मिलती है।1. इन शैलों में सिलिका की मात्रा कम मिलती है।
2. इन शैलों में 65 प्रतिशत से अधिक सिलिका मिलती है।2. इन शैलों में सिलिका की मात्रा 55 प्रतिशत से कम मिलती है।
3. ये कठोर व मजबूत शैलें होती हैं।3. ये शैलें अम्लीय शैलों की तुलना में कम कठोर व कम मजबूत होती हैं।

In simple words: अम्लीय शैलों में सिलिका ज्यादा होती है और वे कठोर होती हैं, जबकि पैठिक शैलों में सिलिका कम होती है और वे कम कठोर होती हैं।

🎯 Exam Tip: सिलिका की मात्रा और चट्टानों की कठोरता का सीधा संबंध होता है, जो अम्लीय और पैठिक शैलों को अलग करता है।

 

Question 5. फैकोलिथ व लोपोलिथ में क्या अन्तर है?
अथवा
फैकोलिथ व लोपोलिथ से क्या अभिप्राय है? स्पष्ट कीजिए।
Answer: फैकोलिथ और लोपोलिथ में निम्न अन्तर मिलते हैं-
फैकोलिथ: ज्वालामुखी फटने के समय, मुड़े हुए पहाड़ों के ऊपरी हिस्से (अपनति) और निचले हिस्से (अभिनति) में मैग्मा जम जाता है। इस तरह से बनी आग्नेय शैल की आकृति को फैकोलिथ कहते हैं।
लोपोलिथ: यह शब्द जर्मन भाषा के 'लोपास' से आया है, जिसका अर्थ है एक उथला बेसिन। इस तरह की भू-आकृति में मैग्मा तश्तरी के आकार में जम जाता है। इस आकार वाली आकृति को ही लोपोलिथ कहते हैं।
In simple words: फैकोलिथ मोड़दार पहाड़ों में लेंस जैसे आकार में मैग्मा के जमने से बनते हैं, जबकि लोपोलिथ तश्तरी के आकार में मैग्मा के जमने से बनते हैं।

🎯 Exam Tip: इन दोनों भू-आकृतियों को उनके विशेष आकार और मैग्मा के जमने की जगह के आधार पर पहचानना सीखें।

 

Question 6. सिल एवं डाइक में अन्तर स्पष्ट कीजिए।
अथवा
सिल एवं डाइक को स्पष्ट कीजिए।
Answer: सिल और डाइक में निम्न अन्तर मिलते हैं-
सिल: यह तब बनता है जब मैग्मा मौजूदा चट्टानों की परतों के बीच क्षैतिज रूप से फैलता है और ठंडा हो जाता है। ये लंबी और पतली आकृतियाँ होती हैं।
डाइक: यह दीवार जैसी आग्नेय शैल की संरचना है जो मौजूदा चट्टानों की परतों को लंबवत या तिरछे काटती हुई बनती है। इनकी कठोरता अलग-अलग हो सकती है।
In simple words: सिल मैग्मा की क्षैतिज परतें होती हैं जो चट्टानों के बीच जम जाती हैं, जबकि डाइक मैग्मा की लंबवत दीवारें होती हैं जो चट्टानों को काटती हैं।

🎯 Exam Tip: सिल और डाइक दोनों घुसपैठिया आग्नेय शैल के उदाहरण हैं; मुख्य अंतर उनकी जमने की दिशा है - सिल क्षैतिज रूप से और डाइक लंबवत रूप से।

 

Question 7. परतदार शैलों के निर्माण हेतु उत्तरदायी प्रक्रिया को स्पष्ट कीजिए।
Answer: पृथ्वी के अस्तित्व में आने के साथ ही उस पर अनाच्छादन की शक्तियाँ शुरू हो गईं। इसमें अपक्षय और अपरदन के कारण शैलें टूटकर उसी जगह या कहीं और जमा होती जाती हैं। इन विभिन्न शैलों से प्राप्त शैल चूर्ण, जीवाश्म और वनस्पतियाँ एक-दूसरे के ऊपर परतों के रूप में जमा होकर परतदार शैलों का रूप लेती हैं। इन शैलों का निर्माण कई प्रकार के पदार्थों और अवसादों से होता है। इनके निर्माण में कई प्रक्रियाएँ शामिल होती हैं।
In simple words: परतदार शैलें पुरानी चट्टानों के टूटे हुए टुकड़ों, जीवाश्मों और वनस्पतियों से बनती हैं। ये टुकड़े हवा और पानी से एक जगह से दूसरी जगह ले जाए जाते हैं और परतों में जमा हो जाते हैं।

🎯 Exam Tip: इस प्रक्रिया के मुख्य चरण अपक्षय, अपरदन, परिवहन और निक्षेपण हैं, जो परतदार शैलों के निर्माण में शामिल होते हैं।

 

Question 8. कायान्तरित शैलों की उत्पत्ति को स्पष्ट कीजिए।
अथवा
कायान्तरित शैलों के निर्माण को स्पष्ट कीजिए।
Answer: कायान्तरित शैलें तब बनती हैं जब कोई मूल शैल बिना टूटे या विखंडित हुए अपने गुणों और संरचना में बड़े बदलाव से गुजरती है। ये मूल शैलें आग्नेय, अवसादी या पहले से ही कायान्तरित शैलें हो सकती हैं। यह कायान्तरण पानी, गर्मी और दबाव या इन तीनों के मेल से हो सकता है। परतदार और आग्नेय शैलों में कायान्तरण होता है, लेकिन कभी-कभी कायान्तरित शैलें भी फिर से कायान्तरित हो जाती हैं। इस प्रक्रिया में चट्टानों का पूरा आकार बदल सकता है, और खनिजों का रूप भी बदल सकता है। पुराने खनिज नए बन सकते हैं, नए खनिज पैदा हो सकते हैं, और चट्टानें एक अलग रूप ले सकती हैं, वे रवेदार भी हो सकती हैं।
In simple words: कायान्तरित शैलें तब बनती हैं जब मौजूदा शैलें, जैसे आग्नेय या अवसादी शैलें, बिना टूटे, गर्मी, दबाव या पानी के कारण अपनी बनावट और खनिजों को बदल लेती हैं।

🎯 Exam Tip: कायान्तरण एक धीमी प्रक्रिया है जो चट्टानों के भौतिक और रासायनिक गुणों को बदलती है, जिससे नए प्रकार के खनिज और बनावट बनती है।

RBSE Class 11 Physical Geography Chapter 6 Laghutaratmak Prashn Type II

 

Question 1. आग्नेय शैलों के महत्व को स्पष्ट कीजिए।
अथवा
आग्नेय शैलों की उपयोगिता स्पष्ट कीजिए।
अथवा
आग्नेय शैलों के आर्थिक महत्त्व को स्पष्ट कीजिए।
Answer: आग्नेय शैलें पृथ्वी की परत पर सबसे पहले बनी थीं, इसलिए इनका विशेष महत्त्व है। इन चट्टानों के महत्त्व को निम्न बिन्दुओं से दर्शाया गया है:
5. इन शैलों से बनी मिट्टी उपजाऊ होती है, जिससे ये कृषि के लिए लाभदायक होती हैं।
6. धरातल का पानी इन चट्टानों से छनकर अंदर जाता है, जिससे ये पानी की शुद्धता के लिए महत्त्वपूर्ण हैं।
In simple words: आग्नेय शैलें कृषि के लिए उपजाऊ मिट्टी प्रदान करती हैं और भूजल को शुद्ध रखने में मदद करती हैं।

🎯 Exam Tip: आग्नेय शैलों के महत्त्व को कृषि और जल चक्र में उनकी भूमिका से जोड़कर बताएँ, साथ ही उनके प्राथमिक गठन को भी रेखांकित करें।

 

Question 2. पातालीय एवं उपपातालीय चट्टानों को स्पष्ट कीजिए।
अथवा
पातालीय एवं उपपातालीय चट्टानों में अन्तर स्पष्ट कीजिए।
अथवा
पातालीय चट्टानें उपपातालीय चट्टानों से किस प्रकार भिन्न हैं? स्पष्ट कीजिए।
Answer: पातालीय चट्टानें उपपातालीय चट्टानों से निम्न तरीकों से भिन्न होती हैं:

पातालीय चट्टानउपपातालीय चट्टान
1. ये चट्टानें पृथ्वी के भीतर अत्यधिक गहराई पर बनती हैं।1. ये चट्टानें पृथ्वी की सतह के नीचे थोड़ी गहराई पर बनती हैं।
2. इन चट्टानों का निर्माण पृथ्वी के भीतर मैग्मा के जमने से होता है।2. इस प्रकार की चट्टानों का निर्माण दरारों व संधियों में मैग्मा के जमने से होता है।
3. इन चट्टानों के निर्माण में मैग्मा के ठंडा होने की धीमी प्रक्रिया मुख्य योगदान देती है।3. इन चट्टानों का निर्माण मैग्मा के जल्दी ठंडा होने व कम समय लगने का परिणाम है।
4. इस प्रकार की चट्टानों में रवे बड़े आकार के होते हैं।4. इस प्रकार की चट्टानों में रवे छोटे आकार के होते हैं।
5. इस प्रकार की चट्टानें मुख्यतः कठोर होती हैं।5. इस प्रकार की चट्टानों में थोड़ा मुलायमपन देखने को मिलता है।

In simple words: पातालीय चट्टानें पृथ्वी के बहुत अंदर धीरे-धीरे ठंडा होकर बड़े क्रिस्टल बनाती हैं और कठोर होती हैं, जबकि उपपातालीय चट्टानें कम गहराई पर जल्दी ठंडा होकर छोटे क्रिस्टल बनाती हैं और थोड़ी मुलायम होती हैं।

🎯 Exam Tip: गहराई, ठंडा होने की गति, क्रिस्टल का आकार और कठोरता के आधार पर पातालीय और उपपातालीय चट्टानों के बीच के अंतर को स्पष्ट करें।

 

Question 3. शैल चूर्ण निर्मित चट्टानों व रासायनिक तत्व निर्मित चट्टानों के स्वरूप को स्पष्ट कीजिए।
अथवा
Answer:
रासायनिक तत्त्वों से निर्मित अवसादी चट्टानें: बहता पानी अपने रास्ते में घुलनशील पदार्थों को घोलकर अपने साथ ले जाता है और उन्हें कहीं और जमा करता रहता है, जिससे इन शैलों का निर्माण होता है। खड़िया मिट्टी, शैल खड़ी और नमक की शैलें इस प्रकार की शैलों के प्रमुख उदाहरण हैं। इन शैलों में घुलनशील पदार्थ पानी के साथ घुल जाते हैं। बाद में, दबाव कम होने पर पानी वाष्प में बदल जाता है या पानी के बहाव की गति कम होने पर ये घुले हुए पदार्थ नीचे बैठने लगते हैं, जिससे इन चट्टानों का निर्माण होता है।
In simple words: रासायनिक शैलें तब बनती हैं जब पानी में घुले हुए खनिज एक जगह पर जमा होकर कठोर हो जाते हैं, जैसे खड़िया और नमक।

🎯 Exam Tip: रासायनिक अवसादी चट्टानों के निर्माण में घुलनशील खनिजों का पानी में घुलना और फिर उनका निक्षेपण होकर ठोस रूप लेना मुख्य प्रक्रिया है। उदाहरणों को याद रखें।

 

Question 4. आग्नेय (प्राथमिक) एवं अवसादी (द्वितीयक) शैलों में अन्तर स्पष्ट कीजिए।
Answer: आग्नेय और अवसादी शैलों में निम्नलिखित अन्तर मिलते हैं-

क्र.सं.अन्तर का आधारआग्नेय शैल (प्राथमिक चट्टान)अवसादी शैल (द्वितीयक चट्टान)
(i)निर्माणआग्नेय शैलें पृथ्वी के आंतरिक भाग में मैग्मा और लावा के ठंडे होकर जमने से बनती हैं।अवसादी शैलें पुरानी चट्टानों और खनिजों के टुकड़ों से बनती हैं जो पूरी तरह से टूटकर परतों में जमा हो जाते हैं।
(ii)संरचनाये शैलें कठोर होती हैं।ये शैलें मुलायम होती हैं।
(iii)रंध्रताये शैलें छिद्ररहित होती हैं।ये शैलें रंध्रयुक्त होती हैं।
(iv)परतेंइन शैलों में परतें नहीं पाई जाती हैं।इन शैलों में परतें पाई जाती हैं।
(v)रवेये शैलें रवेदार होती हैं।ये शैलें रवेदार नहीं होती हैं।
(vi)जीवावशेषइन शैलों में किसी भी प्रकार के जीवाश्म नहीं पाए जाते हैं।इन शैलों की परतों के बीच जीवाश्म मिलते हैं।
(vii)खनिजइन शैलों में धात्विक खनिज मिलते हैं।इन शैलों में कार्बनिक खनिज मिलते हैं।
(viii)अपरदनइन शैलों का अपरदन बहुत धीमी गति से होता है।इन शैलों का अपरदन अपेक्षाकृत तेज गति से होता है।
(ix)निर्माण स्थलइन शैलों का निर्माण सामान्यतः धरातल से नीचे होता है।इन शैलों का निर्माण धरातल के ऊपर होता है।
(x)नामइन्हें प्राथमिक शैलें कहा जाता है।इन्हें द्वितीयक शैलें कहा जाता है।

In simple words: आग्नेय शैलें पृथ्वी के अंदर मैग्मा से बनती हैं, कठोर होती हैं, और उनमें परतें या जीवाश्म नहीं होते। अवसादी शैलें पृथ्वी की सतह पर टूटे हुए टुकड़ों से बनती हैं, मुलायम होती हैं, और उनमें परतें व जीवाश्म पाए जाते हैं।

🎯 Exam Tip: तुलना करते समय निर्माण प्रक्रिया, संरचना (कठोरता, परतें, छिद्र), खनिज और जीवाश्म की उपस्थिति जैसे मुख्य बिंदुओं पर ध्यान दें।

 

Question 5. अवसादी एवं कायान्तरित शैलों के महत्त्व को स्पष्ट कीजिए।
अथवा
परतदार और रूपान्तरित शैलों की उपयोगिता स्पष्ट कीजिए।
Answer:
कायान्तरित शैलों का महत्त्व: कायान्तरित शैलें मानव के लिए बहुत महत्त्वपूर्ण हैं। इन शैलों में सोना, चाँदी, हीरा जैसे कुछ बहुत महत्त्वपूर्ण खनिज पाए जाते हैं। कायान्तरण के बाद, संगमरमर, ग्रेफाइट, चुंबकीय लोहा आदि महत्त्वपूर्ण शैलें प्राप्त होती हैं। इन सभी शैलों का उपयोग अलग-अलग कामों के लिए किया जाता है। इन शैलों में गंधक मिश्रित पानी के स्रोत भी मिलते हैं, जिनमें स्नान करने से कई तरह की बीमारियाँ दूर हो जाती हैं।
In simple words: कायान्तरित शैलें खनिज (जैसे सोना, चाँदी, हीरा) और उपयोगी चट्टानें (जैसे संगमरमर, ग्रेफाइट) प्रदान करती हैं, और कुछ में औषधीय जल स्रोत भी होते हैं।

🎯 Exam Tip: कायान्तरित शैलों का आर्थिक महत्त्व समझाने के लिए उनके मूल्यवान खनिजों और औद्योगिक उपयोग के उदाहरणों को शामिल करें।

 

Question 6. निर्माण में प्रयुक्त साधन के आधार पर अवसादी शैलों के वर्गीकरण को स्पष्ट कीजिए।
अथवा
परतदार शैलों के निर्माण में प्रयुक्त सामग्री के आधार पर उनका वर्गीकरण कीजिए।
Answer: शैलों का निर्माण विभिन्न प्रकार की सामग्रियों से होता है। परतदार शैलों के जमाव के लिए अलग-अलग तरह के अवसादों की आवश्यकता होती है, जो कई माध्यमों से प्राप्त होते हैं। इन जमावों के आधार पर अवसादी शैलों को निम्न भागों में बांटा गया है-
1. जलीय या जलज शैल,
2. वायूढ़ शैल,
3. हिमानी निर्मित शैल।
1. जलीय या जलज शैल: ये शैलें तब बनती हैं जब नदियाँ अपने साथ बहाकर लाए गए अवसादों को एक जगह से दूसरी जगह जमा करती हैं। इन्हें जलीय शैल कहते हैं क्योंकि ये जलीय भागों में जमा होते हैं। ऐसी चट्टानें मुख्यतः समुद्री शैल, झील निर्मित शैल और नदी निर्मित शैलों के रूप में मिलती हैं।
2. वायूढ़ शैल: ये शैलें गर्म और शुष्क क्षेत्रों में चट्टानों के भौतिक अपक्षय से टूटे हुए चूर्ण को हवा द्वारा एक जगह से दूसरी जगह ले जाकर जमा करने से बनती हैं। इन्हें वायूढ़ शैल कहते हैं। हवा के कणों के आपस में टकराने और रगड़ने से कण बारीक होकर जम जाते हैं, जिससे ये शैलें बनती हैं; जैसे लोयस।
3. हिमानीकृत शैल: ये शैलें हिमनदों द्वारा कंकड़, गोलाश्मों के परिवहन और निक्षेपण से बनती हैं। इन पदार्थों को सामूहिक रूप से ग्लेशियल ड्रिफ्ट कहा जाता है।
In simple words: अवसादी शैलें तीन तरह की होती हैं: जलीय शैलें जो पानी से बनती हैं; वायूढ़ शैलें जो हवा से बनती हैं; और हिमानीकृत शैलें जो ग्लेशियरों से बनती हैं।

🎯 Exam Tip: तीनों प्रकार की अवसादी शैलों के निर्माण में शामिल मुख्य माध्यम (जल, वायु, हिमनद) और उनके उदाहरणों को स्पष्ट रूप से समझाएँ।

 

Question 7. अवसादी (द्वितीयक) और कायान्तरित चट्टानों (तृतीयक) में अन्तर स्पष्ट कीजिए।
Answer: अवसादी और कायान्तरित शैलों में निम्नलिखित अन्तर हैं-

क्र.सं.अन्तर का आधारअवसादी शैलकायान्तरित शैल
1.निर्माणये चट्टानों और खनिजों के टुकड़ों से बनती हैं जो पूरी तरह से संगठित होकर परतों में जम जाते हैं।ये दाब और तापमान में बदलाव के कारण बनती हैं।
2.निर्माण का कारणइनका निर्माण संघनन और संयोजन की प्रक्रियाओं से होता है।इनका निर्माण आग्नेय और अवसादी शैलों के दूसरे रूप में बदलने से होता है।
3.संरचनाये शैलें मुलायम होती हैं।ये शैलें मूल शैलों की तुलना में अधिक संगठित और कठोर होती हैं।
4.खनिजइन शैलों में मुख्यत: कार्बनिक खनिज पाए जाते हैं।इन शैलों में मुख्यत: धात्विक खनिज पाए जाते हैं।
5.रंध्रताये शैलें रंध्रयुक्त होती हैं।ये शैलें अरंध्र होती हैं।
6.परतेंइन शैलों में परतें पाई जाती हैं।इन शैलों में परतें नहीं पाई जाती हैं।
7.जीवावशेषइन शैलों की परतों में जीवाश्म पाए जाते हैं।इन शैलों की परतों में जीवाश्मों का अभाव पाया जाता है।
8.निर्माण स्थलइन शैलों का निर्माण धरातल पर होता है।इन शैलों का निर्माण धरातल के नीचे होता है।

In simple words: अवसादी शैलें टूटे हुए टुकड़ों से सतह पर बनती हैं, मुलायम होती हैं, और उनमें जीवाश्म व परतें मिलती हैं। कायान्तरित शैलें गर्मी व दबाव से गहराई में बनती हैं, कठोर होती हैं, और उनमें जीवाश्म या परतें नहीं होतीं।

🎯 Exam Tip: अवसादी और कायान्तरित शैलों के बीच के अंतर को निर्माण प्रक्रिया, संरचना और जीवाश्मों की उपस्थिति के आधार पर स्पष्ट करें।

RBSE Class 11 Physical Geography Chapter 6 Nibandhatmak Prashn

 

Question 1. पृथ्वी के आन्तरिक भाग में बनने वाली उपपातालीय शैलों का विस्तार से वर्णन कीजिए।
अथवा
पृथ्वी के आन्तरिक भाग में मैग्मा से निर्मित होने वाली स्थलाकृतियों का वर्णन कीजिए।
Answer: पृथ्वी के आंतरिक भाग में, यानी धरातल के नीचे मैग्मा द्वारा कई भू-आकृतियाँ बनती हैं। ये सभी शैलें उपपातालीय शैलें कहलाती हैं। इन उपपातालीय शैलों का संक्षिप्त विवरण इस प्रकार है-
(ii) लैकोलिथ: इसे छत्रक या कुंकुच्छेल भी कहते हैं। यह ग्रीक शब्द 'लेकोश' से बना है, जिसका अर्थ पानी का भंडार होता है। यह मैग्मा से बनी एक बड़ी आकृति है जिसका ऊपरी भाग उत्तल (गुम्बददार) होता है। इसका आकार अक्सर धनुषाकार होता है और आधार चपटा होता है। यह केवल परतदार चट्टानों में ही बनता है।
(iii) फैकोलिथ: इसे मसूर शैल भी कह सकते हैं। यह एक लंबी लेंस के आकार की बड़ी शैल होती है। ज्वालामुखी फटने के समय निकले मैग्मा के मोड़दार पर्वतों की अपनति (ऊपरी मोड़) और अभिनति (निचले मोड़) में जमने से इसका निर्माण होता है।
(iv) लोपोलिथ: इसे न्यूडुब्ज शैल भी कहा जाता है। यह मैग्मा का एक फैला हुआ रूप है। जब धरातल के नीचे अवतल आकार का उथला बेसिन बनता है तो तश्तरी के आकार का जो जमाव होता है, उसे ही लोपोलिथ कहते हैं।
(v) सिल: इसे रालपट्ट भी कहते हैं। जब पृथ्वी के आंतरिक भाग में पहले से बनी चट्टानी दरारों में मैग्मा सीधा घुसकर ठंडा हो जाता है, तो इससे इसका निर्माण होता है। सिल के रूप में मैग्मा की यह परत समानांतर रूप से जमती है।
(vi) डाइक: इसे राल भित्ति भी कहते हैं। जब चट्टानों की दरारों में मैग्मा लंबवत रूप से जमता है, तो उसे डाइक कहते हैं। डाइक कुछ सेंटीमीटर से लेकर सैकड़ों मीटर तक फैले हो सकते हैं। डाइक आमतौर पर कठोर होते हैं।
(vii) शीट: जब चट्टानों की दरारों में मैग्मा का जमाव क्षैतिज रूप में लंबे और पतले आकार में होता है, तो उसे शीट कहते हैं। भूगर्भ के आंतरिक भागों में मिलने वाली इन स्थलाकृतियों को निम्न चित्र की सहायता से दर्शाया गया है-
लावा प्रवाह बैथोलिथ सिल डाइक लैकोलिथ ज्वालामुखी फैकोलिथ
In simple words: पृथ्वी के अंदर मैग्मा से कई भू-आकृतियाँ बनती हैं, जैसे लैकोलिथ (गुम्बद), फैकोलिथ (लेंस), लोपोलिथ (तश्तरी), सिल (क्षैतिज परतें), डाइक (लंबवत दीवारें) और शीट (पतली क्षैतिज परतें)।

🎯 Exam Tip: प्रत्येक उपपातालीय शैल आकृति (जैसे लैकोलिथ, फैकोलिथ, लोपोलिथ, सिल, डाइक, शीट) के विशिष्ट आकार और उनके निर्माण स्थल को रेखाचित्रों की सहायता से स्पष्ट रूप से समझाएँ।

 

Question 2. कायान्तरित चट्टानों के रूपान्तरण के प्रकारों को स्पष्ट कीजिए।
अथवा
रूपान्तरण के प्रकारों को स्पष्ट कीजिए।
Answer: कायान्तरित चट्टानों के रूपान्तरण की प्रक्रिया मुख्य रूप से चार भागों में बांटी गई है-
1. तापीय रूपान्तरण: जब ज्वालामुखी गतिविधि के दौरान शैलें मैग्मा के संपर्क में आती हैं, तो ज्वालामुखी नली के आसपास की शैलों में उच्च तापमान के कारण कायान्तरण होता है। इसे तापीय रूपान्तरण कहते हैं। कभी-कभी मैग्मा के साथ पानी भी मिला होता है, जिससे शैल में रासायनिक परिवर्तन भी होते हैं। इस प्रकार का रूपान्तरण सीमित क्षेत्र में होता है, इसलिए इसका भौगोलिक महत्त्व बहुत कम है।
2. गतिक या क्षेत्रीय रूपान्तरण: इस प्रकार के रूपान्तरण की क्रिया एक बड़े क्षेत्र में होती है। इसमें दबाव और तापमान दोनों का प्रभाव होता है। यह रूपान्तरण अक्सर मोड़दार पर्वतीय क्षेत्रों में होता है। इस प्रकार की कायान्तरित शैलें रवेदार हो जाती हैं। यदि मूल शैलें पहले से ही रवेदार थीं, तो उनके रवे नए तरीके से फिर से बन जाते हैं।
3. जलीय रूपान्तरण: ऐसे रूपान्तरणों में पानी के साथ रासायनिक पदार्थों के मिलने से शैल खनिजों में घोल के रूप में परिवर्तन आ जाता है। अत्यधिक गहराई पर पानी का भार और दबाव भी बढ़ जाता है। इस प्रक्रिया के कारण चट्टानों में रूपान्तरण होता है।
4. ताप-जलीय रूपान्तरण: जब शैलों के ऊपर गरम पानी होता है, तब दबाव और जलवाष्प से शैलों में इस प्रकार का रूपान्तरण होता है। इस प्रकार के रूपान्तरण का भौगोलिक दृष्टि से महत्त्व नहीं होता है।
रूपान्तरण के इन प्रकारों को निम्न चित्र की सहायता से दर्शाया गया है-
ज्वालामुखी नली व मैग्मा तापीय रूपान्तरण सम्पीडन सम्पीडन दबाव गतिक रूपान्तरण
In simple words: चट्टानों का रूपान्तरण चार प्रकार का होता है: तापीय (गर्मी से), गतिक (दबाव और गर्मी से बड़े क्षेत्र में), जलीय (पानी में रासायनिक बदलाव से), और ताप-जलीय (गरम पानी, दबाव और वाष्प से)।

🎯 Exam Tip: प्रत्येक प्रकार के रूपान्तरण (तापीय, गतिक, जलीय, ताप-जलीय) के कारण, प्रक्रिया और भौगोलिक महत्त्व को अलग-अलग समझाएँ।

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