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Detailed Chapter 22 पारिस्थितिकीय तंत्र की संकल्पना RBSE Solutions for Class 11 Geography
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Class 11 Geography Chapter 22 पारिस्थितिकीय तंत्र की संकल्पना RBSE Solutions PDF
RBSE Class 11 Physical Geography Chapter 22 वस्तुनिष्ठ प्रश्न
Question 1. जैवविविधता शब्द सर्वप्रथम किसने प्रतिपादित किया?
(अ) ई. ओ. विल्सन
(ब) डेसिड टिलमेन
(स) नोरमन मेयर्स
(द) कोई नहीं
Answer: (अ) ई. ओ. विल्सन
In simple words: जैवविविधता शब्द को सबसे पहले ई. ओ. विल्सन ने इस्तेमाल किया था। उन्होंने इस शब्द को पौधों और जानवरों की अलग-अलग किस्मों को समझाने के लिए दिया था।
🎯 Exam Tip: महत्वपूर्ण वैज्ञानिक शब्दों और उनके जनक को याद रखें। यह प्रश्न अक्सर प्रतियोगी परीक्षाओं में पूछा जाता है।
Question 3. भारत में राष्ट्रीय उद्यानों की संख्या है-
(अ) 103
(ब) 72
(स) 89
(द) 96
Answer: (स) 89
In simple words: भारत में कुल 89 राष्ट्रीय उद्यान हैं। ये उद्यान वन्यजीवों और प्रकृति को बचाने के लिए बनाए गए हैं।
🎯 Exam Tip: नवीनतम रिपोर्टों के अनुसार राष्ट्रीय उद्यानों की संख्या बदल सकती है, इसलिए परीक्षा से पहले सबसे नई जानकारी की जाँच करें।
Question 4. पारिस्थितिक तंत्र शब्द के प्रवर्तक हैं-
(अ) ए. जी. टांसले
(ब) फांसवर्ग
(स) ई.पी. ओडम
(द) पीटर हेगेट
Answer: (अ) ए. जी. टांसले
In simple words: पारिस्थितिक तंत्र का विचार सबसे पहले ए. जी. टांसले ने दिया था। उन्होंने बताया कि कैसे जीव और उनका पर्यावरण एक साथ काम करते हैं।
🎯 Exam Tip: विभिन्न वैज्ञानिक अवधारणाओं और उनके प्रणेताओं को जानना भूगोल और पर्यावरण विज्ञान में महत्वपूर्ण है।
Question 5. पारिस्थितिकी के सम्बन्ध में कौन-सा कथन सत्य है?
(अ) पारिस्थितिकी जीवों पर पर्यावरण के प्रभावों का अध्ययन है।
(ब) पारिस्थितिकी वायु, जल और मृदा के प्रदूषण का अध्ययन है।
(स) पारिस्थितिकी मानव पर्यावरण का अध्ययन है।
(द) पारिस्थितिकी जीवों एवं पर्यावरण के पारस्परिक सम्बन्धों का अध्ययन है।
Answer: (द) पारिस्थितिकी जीवों एवं पर्यावरण के पारस्परिक सम्बन्धों का अध्ययन है।
In simple words: पारिस्थितिकी यह बताती है कि जीव-जंतु और पेड़-पौधे अपने आसपास के माहौल से कैसे जुड़े होते हैं। यह उनके आपसी रिश्तों का अध्ययन है।
🎯 Exam Tip: पारिस्थितिकी की सही परिभाषा को समझें, क्योंकि यह इस विषय की नींव है। यह जीवों और उनके पर्यावरण के बीच जटिल संबंधों पर केंद्रित है।
RBSE Class 11 Physical Geography Chapter 22 अतिलघुत्तरात्मक प्रश्न
Question 8. हमारे देश में सम्पूर्ण विश्व की कितनी प्रतिशत पादप विविधता पाई जाती है?
Answer: हमारे देश में पूरे विश्व की 8 प्रतिशत पादप विविधता मिलती है।
In simple words: भारत में दुनिया भर के कुल पौधों की किस्मों का 8 प्रतिशत हिस्सा पाया जाता है।
🎯 Exam Tip: भारत की जैवविविधता से जुड़े आँकड़ों को याद रखें, क्योंकि यह इसकी जैविक संपन्नता को दर्शाता है।
Question 9. पौधों में पाये जाने वाले हरे रंग के द्रव्य का नाम बताइए।
Answer: पौधों में क्लोरोफिल नामक हरे रंग का द्रव्य पाया जाता है। यही द्रव्य पौधों को सूर्य की रोशनी से भोजन बनाने में मदद करता है।
In simple words: पौधों में हरा रंग क्लोरोफिल की वजह से होता है। यह पौधों को सूरज की रोशनी से खाना बनाने में मदद करता है।
🎯 Exam Tip: क्लोरोफिल प्रकाश संश्लेषण की प्रक्रिया में एक प्रमुख भूमिका निभाता है, यह पौधों के हरे रंग का कारण है।
Question 10. ओडम के अनुसार सूर्यातप से औसतन प्रतिदिन प्रति वर्गमीटर कितनी ऊर्जा प्राप्त होती है?
Answer: ओडम के अनुसार, सूर्य की गर्मी से औसतन हर दिन प्रति वर्गमीटर में लगभग 3000 किलोकैलोरी ऊर्जा प्राप्त होती है। यह ऊर्जा पारिस्थितिक तंत्र में जीवन के लिए बहुत महत्वपूर्ण है।
In simple words: ओडम के हिसाब से, हर दिन एक वर्गमीटर जगह पर सूरज से लगभग 3000 किलोकैलोरी ऊर्जा मिलती है।
🎯 Exam Tip: पर्यावरण वैज्ञानिकों के अनुसार ऊर्जा प्राप्ति के विशिष्ट आँकड़े महत्वपूर्ण होते हैं। इन्हें सही ढंग से याद रखना चाहिए।
RBSE Class 11 Physical Geography Chapter 22 लघुत्तरात्मक प्रश्न
Question 11. जैव मण्डल की परिभाषा दीजिए।
Answer: जैवमंडल वह जगह है जहाँ पृथ्वी पर जीवन पाया जाता है, इसमें जमीन, हवा और पानी के वे हिस्से शामिल हैं जहाँ जीव रहते हैं। यह जैविक और अजैविक चीज़ों के बीच एक जटिल संबंध का नतीजा है। स्टालर के अनुसार, "पृथ्वी के सभी जीवित जीव और उनका पर्यावरण, जिनसे इन जीवों की आपसी क्रिया होती है, मिलकर जीवमंडल बनाते हैं।"
In simple words: जैवमंडल पृथ्वी का वह हिस्सा है जहाँ जीवन मौजूद है। इसमें जमीन, पानी और हवा के वे सभी भाग आते हैं जहाँ जीव रहते हैं और एक-दूसरे से जुड़े होते हैं।
🎯 Exam Tip: जैवमंडल की परिभाषा में स्थलमंडल, वायुमंडल और जलमंडल के बीच जीवों के संबंधों को शामिल करना महत्वपूर्ण है।
Question 12. भारत में जैवविविधता पर टिप्पणी लिखिए।
Answer: भारत ब्राजील के बाद सबसे अधिक जैव विविधता वाला देश है। हमारे देश में भौगोलिक अंतरों और मौसम की भिन्नताओं के कारण बहुत विविधता पाई जाती है। भारत में दुनिया की लगभग 6.5 प्रतिशत जीव प्रजातियाँ और 8 प्रतिशत पेड़-पौधों की प्रजातियाँ पाई जाती हैं।
In simple words: भारत में बहुत सारी अलग-अलग तरह की जीव-जंतु और पेड़-पौधे पाए जाते हैं। यह ब्राजील के बाद दूसरा सबसे विविध देश है, जिसमें दुनिया की 6.5% जीवों और 8% पौधों की प्रजातियाँ हैं।
🎯 Exam Tip: भारत की जैवविविधता के महत्व को उजागर करने के लिए उसके प्रतिशत आँकड़ों और भौगोलिक कारकों का उल्लेख करें।
Question 14. टांसले के अनुसार पारिस्थितिक तंत्र की परिभाषा लिखिए।
Answer: ए.जी. टांसले के अनुसार, "पारिस्थितिक तंत्र वह प्रणाली है जिसमें पर्यावरण के जीवित और निर्जीव घटक एक-दूसरे से जुड़े होते हैं।" टांसले ने जीवमंडल के अध्ययन में पारिस्थितिक तंत्र शब्द का उपयोग करके दुनिया का ध्यान इस ओर खींचा था।
In simple words: टांसले ने कहा कि पारिस्थितिक तंत्र एक ऐसा सिस्टम है जहाँ जीवित चीजें और आसपास की बेजान चीजें एक साथ काम करती हैं।
🎯 Exam Tip: परिभाषाएँ देते समय वैज्ञानिक का नाम और उनकी दी गई सटीक परिभाषा का उल्लेख करना महत्वपूर्ण है।
Question 15. ऊर्जा प्रवाह को परिभाषित कीजिए।
Answer: एक पारिस्थितिक तंत्र में, जीवित और निर्जीव घटक पर्यावरण की पारिस्थितिकी के हिसाब से काम करते हैं। उन्हें काम करने के लिए ऊर्जा की जरूरत होती है, जो पूरे तंत्र को गतिशील बनाए रखती है। इस पूरी प्रक्रिया को ऊर्जा प्रवाह कहते हैं। प्रकृति इस ऊर्जा प्रवाह को अपने आप नियंत्रित करती है, जिससे तंत्र में संतुलन बना रहता है।
In simple words: ऊर्जा प्रवाह का मतलब है कि एक सिस्टम में ऊर्जा कैसे एक हिस्से से दूसरे हिस्से में जाती है, जिससे सब कुछ ठीक से चलता रहे।
🎯 Exam Tip: ऊर्जा प्रवाह की अवधारणा में "गतिशीलता", "संतुलन" और "प्राकृतिक नियंत्रण" जैसे प्रमुख शब्दों का उपयोग करें।
RBSE Class 11 Physical Geography Chapter 22 निबन्धात्मक प्रश्न
Question 16. पारिस्थितिक तंत्र की अवधारणा पर लेख लिखिए।
Answer: पारिस्थितिक तंत्र की अवधारणा-एक भौगोलिक क्षेत्र में रहने वाले जीवों और उनके पर्यावरण के बीच समयबद्ध और व्यवस्थित अध्ययन को पारिस्थितिक तंत्र कहते हैं। ए.जी. टांसले (1935) के अनुसार, "यह वह तंत्र है जिसमें पर्यावरण के सभी जीवित और निर्जीव घटक एक-दूसरे से संबंधित होते हैं, उसे पारिस्थितिक तंत्र कहते हैं।" इस अवधारणा को कई विद्वानों ने अलग-अलग तरह से परिभाषित किया है।
आर.एल. लिंडमैन (1942) ने कहा कि "वह तंत्र जो किसी भी आकार के एक निश्चित समय में भौतिक-रासायनिक-जैविक प्रक्रियाओं से बनता है, उसे पारिस्थितिक तंत्र कहते हैं।"
फासबर्ट (1963) के अनुसार, "पारिस्थितिक तंत्र एक क्रियाशील और परस्पर क्रिया करने वाला तंत्र है, जिसका गठन एक या अधिक जीवों और उनके प्रभावी पर्यावरण से होता है।" ओडम (1971) के अनुसार, "पारिस्थितिक तंत्र ऐसे जीव और उनके पर्यावरण की कार्यात्मक इकाई है, जो दूसरे पारिस्थितिक तंत्रों से और अपने घटकों के बीच लगातार क्रिया करते रहते हैं।"
एक पारिस्थितिक तंत्र पारिस्थितिक अध्ययन की मूल इकाई होती है, जिसका आकार अलग-अलग हो सकता है। उदाहरण के लिए, एक पारिस्थितिक तंत्र पूरी पृथ्वी जितना बड़ा हो सकता है, या चिड़ियाघर के पिंजरे जितना छोटा या किसी झील तक सीमित हो सकता है। पारिस्थितिक तंत्र प्राकृतिक भी हो सकता है और मानव निर्मित भी हो सकता है।
In simple words: पारिस्थितिक तंत्र एक ऐसी जगह है जहाँ जीव और बेजान चीजें आपस में मिलकर काम करती हैं। यह बड़ा या छोटा हो सकता है और प्रकृति में या इंसानों द्वारा बनाया जा सकता है।
🎯 Exam Tip: विभिन्न वैज्ञानिकों द्वारा दी गई परिभाषाओं को उद्धृत करते हुए पारिस्थितिक तंत्र की अवधारणा को विस्तार से समझाएँ। इसके प्रकार और आकार का उल्लेख करना भी जरूरी है।
Question 17. पारिस्थितिक तंत्र में ऊर्जा प्रवाह पर लेख लिखिए।
Answer: एक पारिस्थितिक तंत्र में, जीवित और निर्जीव घटक पर्यावरण की पारिस्थितिकी के अनुसार एक निश्चित प्रक्रिया में काम करते रहते हैं। उन्हें सक्रिय रहने के लिए ऊर्जा की आवश्यकता होती है, जो तंत्र को गतिशील बनाए रखती है। इस पूरी प्रक्रिया को ऊर्जा प्रवाह कहा जाता है। प्रकृति इस ऊर्जा प्रवाह को अपने आप नियंत्रित रखती है, जिससे पारिस्थितिक तंत्र में संतुलन बना रहता है। अगर मानवीय या प्राकृतिक कारणों से इसमें थोड़ा भी बदलाव आता है, तो पारिस्थितिक तंत्र खतरे में पड़ सकता है।
किसी भी पारिस्थितिक तंत्र को ठीक से चलाने के लिए ऊर्जा का लगातार प्रवाह जरूरी है। पृथ्वी पर ऊर्जा का मुख्य स्रोत सूर्य है, लेकिन सौर ऊर्जा का बहुत कम हिस्सा ही पारिस्थितिक तंत्रों में इस्तेमाल हो पाता है। उदाहरण के लिए, सौर ऊर्जा का केवल 0.02 प्रतिशत हिस्सा ही पौधों द्वारा रासायनिक ऊर्जा में बदल जाता है और कुछ हिस्सा पारिस्थितिक तंत्र के दूसरे कामों में उपयोग होता है। सौर ऊर्जा का यही छोटा सा हिस्सा एक पारिस्थितिक तंत्र को गतिशील बनाए रखने में सक्षम होता है।
पौधों में पाया जाने वाला हरा रंग (क्लोरोफिल) सौर ऊर्जा को सोखकर उसे कार्बनिक जैव कणों में बदल देता है। इस प्रक्रिया को प्रकाश संश्लेषण कहते हैं। पौधे कार्बन डाइऑक्साइड और पानी की मदद से सौर ऊर्जा का उपयोग करके प्रकाश संश्लेषण विधि द्वारा भोजन बनाते हैं। इस प्रकार प्रकाश संश्लेषण के लिए सौर ऊर्जा, कार्बन डाइऑक्साइड और पानी पौधों की पत्तियों में मौजूद क्लोरोफिल द्वारा सोख लिए जाते हैं, और रासायनिक क्रिया से ऑक्सीजन, ग्लूकोज और कार्बोहाइड्रेट्स में बदल दिए जाते हैं। ग्लूकोज और कार्बोहाइड्रेट्स से पौधे बढ़ते हैं, और ऑक्सीजन तथा जलवाष्प पौधों की साँस लेने की प्रक्रिया से हवा में छोड़ दिए जाते हैं।
पौधों में जमा रासायनिक ऊर्जा को शाकाहारी जीव भोजन के रूप में प्राप्त करते हैं। जब ऊर्जा पौधों से शाकाहारी जीवों में जाती है, तो कुछ ऊर्जा कम हो जाती है। इसके बाद जब मांसाहारी जीव शाकाहारी जीवों को खाते हैं, तब भी ऊर्जा कम होती है। इस तरह, ऊर्जा एक पोषण स्तर से दूसरे पोषण स्तर में लगातार प्रवाहित होती रहती है, और इस स्थानांतरण में ऊर्जा की मात्रा कम होती जाती है। इसलिए, हर उपभोक्ता स्तर पर ऊर्जा की मात्रा लगातार घटती जाती है।
ओडम के अनुसार, औसतन हर दिन प्रति वर्गमीटर 3000 किलो कैलोरी सौर ऊर्जा मिलती है। इसमें से 1500 किलो कैलोरी ऊर्जा पौधों द्वारा सोखी जाती है, जिसका केवल 1 प्रतिशत (15 किलो कैलोरी) रासायनिक ऊर्जा में बदलता है, और फिर यह क्रमशः 15 किलो कैलोरी और 0.3 किलो कैलोरी रह जाती है।
In simple words: पारिस्थितिक तंत्र में ऊर्जा सूर्य से पौधों तक और फिर जानवरों तक जाती है। हर बार जब ऊर्जा एक जीव से दूसरे में जाती है, तो उसका कुछ हिस्सा कम हो जाता है। यह प्रक्रिया तंत्र को सक्रिय रखती है और प्रकृति द्वारा नियंत्रित होती है।
🎯 Exam Tip: ऊर्जा प्रवाह को समझाते समय प्रकाश संश्लेषण, पोषण स्तर और ऊर्जा के क्षय को विस्तार से बताना चाहिए। ओडम के आँकड़ों का उल्लेख करना उत्तर को मजबूत बनाता है।
RBSE Class 11 Physical Geography Chapter 22 वस्तुनिष्ठ प्रश्न
Question 1. इकोलॉजी शब्द की रचना किस भाषा से हुई है?
(अ) फ्रांस भाषा से
(ब) ग्रीक भाषा से
(स) जर्मन भाषा से
(द) हिन्दी भाषा से
Answer: (ब) ग्रीक भाषा से
In simple words: इकोलॉजी शब्द यूनानी भाषा से बना है।
🎯 Exam Tip: महत्वपूर्ण वैज्ञानिक शब्दों की उत्पत्ति को याद रखना शब्दावली और अवधारणाओं को समझने में मदद करता है।
Question 3. वे जीव जो अपने जीवन निर्वाह हेतु दूसरे जीवों पर आश्रित होते हैं, कहलाते हैं-
(अ) प्राणी समभोजी
(ब) मृतजीवी
(स) परजीवी
(द) उपभोक्ता
Answer: (स) परजीवी
In simple words: जो जीव जिंदा रहने के लिए दूसरे जीवों पर निर्भर रहते हैं, उन्हें परजीवी कहते हैं।
🎯 Exam Tip: परजीवी, मृतजीवी और उपभोक्ता जैसे जैविक घटकों के बीच अंतर को स्पष्ट रूप से समझें।
Question 4. निम्न में से जो अन्य तीन से भिन्न है, वह है-
(अ) बाज
(ब) मेढ़क
(स) लोमड़ी
(द) कुत्ता
Answer: (अ) बाज
In simple words: बाज अन्य तीनों से अलग है क्योंकि बाज एक शिकारी पक्षी है।
🎯 Exam Tip: ऐसे प्रश्नों में, दिए गए विकल्पों के वर्गीकरण (जैसे मांसाहारी, शाकाहारी) पर विचार करें।
Question 5. निम्न में जो अजैविक घटक है, वह है-
(अ) गाय
(ब) शेर
(स) मछली
(द) वर्षा
Answer: (द) वर्षा
In simple words: वर्षा एक अजैविक घटक है, जबकि गाय, शेर और मछली जीवित जीव हैं।
🎯 Exam Tip: जैविक (जीवित) और अजैविक (निर्जीव) घटकों के बीच अंतर को स्पष्ट रूप से समझें।
Question 7. वन रिपोर्ट 2015 के अनुसार भारत में वनों का कुल भौगालिक क्षेत्र है-
(अ) 19.02 प्रतिशत
(ब) 20.15 प्रतिशत
(स) 22.02 प्रतिशत
(द) 24 प्रतिशत
Answer: (स) 22.02 प्रतिशत
In simple words: 2015 की वन रिपोर्ट के अनुसार, भारत में कुल वन क्षेत्र 22.02 प्रतिशत था।
🎯 Exam Tip: सरकारी रिपोर्टों से संबंधित नवीनतम आँकड़ों को याद रखना महत्वपूर्ण है, क्योंकि ये अक्सर परीक्षा में पूछे जाते हैं।
Question 8. जल उपकर अधिनियम लागू किया गया था-
(अ) 1971 में
(ब) 1981 में
(स) 1977 में
(द) 1986 में
Answer: (स) 1977 में
In simple words: जल उपकर अधिनियम 1977 में लागू किया गया था।
🎯 Exam Tip: पर्यावरण से संबंधित महत्वपूर्ण कानूनों और उनके लागू होने के वर्ष याद रखें।
Question 9. भारत सरकार ने क्लाइमेट चेंज पर पहली नेशनल कम्यूनिकेशन रिपोर्ट कब जारी की?
(अ) 2000 में
(ब) 2003 में
(स) 2004 में
(द) 2006 मे
Answer: (स) 2004 में
In simple words: भारत सरकार ने 2004 में जलवायु परिवर्तन पर अपनी पहली नेशनल कम्यूनिकेशन रिपोर्ट जारी की थी।
🎯 Exam Tip: जलवायु परिवर्तन से संबंधित राष्ट्रीय और अंतर्राष्ट्रीय रिपोर्टों की तारीखें और मुख्य बिंदु याद रखें।
Question 1. निम्न में स्तम्भ अ को स्तम्भ ब से सुमेलित कीजिए
(क)
| स्तम्भ-अ (जीव प्रजाति) | स्तम्भ-ब (सम्बन्ध) |
|---|---|
| (i) शैवाल | (अ) माँसाहारी |
| (ii) बकरी | (ब) अपघटक |
| (iii) बिल्ली | (स) शाकाहारी |
| (iv) कवक | (द) स्वपोषी घटक |
Answer: (i) द, (ii) स, (iii) अ, (iv) ब
(i) शैवाल - स्वपोषी घटक
(ii) बकरी - शाकाहारी
(iii) बिल्ली - मांसाहारी
(iv) कवक - अपघटक
In simple words: शैवाल खुद अपना खाना बनाते हैं। बकरी पेड़-पौधे खाती है। बिल्ली मांस खाती है। कवक मरे हुए जीवों को सड़ाते हैं।
🎯 Exam Tip: पारिस्थितिक तंत्र में जीवों की विभिन्न श्रेणियों (स्वपोषी, शाकाहारी, मांसाहारी, अपघटक) को उनके कार्यों के साथ सही ढंग से समझें।
RBSE Class 11 Physical Geography Chapter 22 अतिलघुत्तरात्मक प्रश्न
Question 1. पारिस्थितिकी शब्द का प्रयोग किसने व किसके लिए किया था?
Answer: पारिस्थितिकी शब्द का प्रयोग सबसे पहले हैकल (1869) ने वनस्पति के क्षेत्रों के अध्ययन के लिए किया था। उन्होंने जीवों और उनके पर्यावरण के संबंधों को समझने में इस शब्द को महत्वपूर्ण बताया।
In simple words: पारिस्थितिकी शब्द हैकल ने दिया था, ताकि पौधों के बारे में पढ़ाई की जा सके।
🎯 Exam Tip: प्रमुख वैज्ञानिक शब्दों के जनक और उनके उपयोग के संदर्भ को याद रखना महत्वपूर्ण है।
Question 2. इकोलॉजी शब्द की रचना कैसे हुई है?
Answer: इकोलॉजी (Ecology) शब्द ग्रीक भाषा के दो शब्दों से मिलकर बना है: 'Oikos' जिसका अर्थ है आवास, और 'Logos' जिसका अर्थ है अध्ययन। इस प्रकार, इकोलॉजी का मतलब है आवास का अध्ययन।
In simple words: इकोलॉजी शब्द ग्रीक के 'Oikos' (घर) और 'Logos' (अध्ययन) से मिलकर बना है, मतलब रहने की जगह का अध्ययन।
🎯 Exam Tip: किसी भी वैज्ञानिक शब्द की व्युत्पत्ति को समझना उसकी मूल अवधारणा को स्पष्ट करता है।
Question 3. रिटर ने पारिस्थितिकी के बारे में क्या लिखा था?
Answer: रिटर ने कहा था कि पृथ्वी पर अलग-अलग चीजों का वितरण एक साथ चलता है। ये चीजें इतनी जुड़ी हुई हैं कि वे उस क्षेत्र को एक खास पहचान देती हैं।
In simple words: रिटर ने कहा कि पृथ्वी पर चीजें एक साथ बंटी हुई हैं और एक-दूसरे से जुड़ी हैं, जिससे हर जगह की अपनी खासियत होती है।
🎯 Exam Tip: महत्वपूर्ण वैज्ञानिकों के विचारों को उनके मूल शब्दों में याद रखना चाहिए, खासकर जब उनकी परिभाषा पूछी जाए।
Question 4. आर डजोज के अनुसार पारिस्थितिकी को परिभाषित कीजिए।
Answer: आर डजोज के अनुसार, "पारिस्थितिकी एक ऐसा विज्ञान है, जिसका संबंध जीवों के जीवन की स्थितियों और जिस पर्यावरण में वे रहते हैं, उस पर्यावरण तथा उन जीवों के बीच के आपसी संबंधों के अध्ययन से है।"
In simple words: डजोज के मुताबिक, पारिस्थितिकी वह विज्ञान है जो यह पढ़ता है कि जीव कैसे अपने आसपास के माहौल से जुड़े होते हैं।
🎯 Exam Tip: विभिन्न वैज्ञानिकों की परिभाषाओं को सटीक रूप से प्रस्तुत करें। इससे आपके उत्तर में प्रामाणिकता आती है।
Question 5. पारिस्थितिक तंत्र से क्या तात्पर्य है?
Answer: एक भौगोलिक इकाई में रहने वाले जीवों और उस जगह के पर्यावरण के बीच के समयबद्ध और व्यवस्थित अध्ययन को पारिस्थितिक तंत्र कहते हैं। यह जीव और उनके आसपास के बेजान तत्वों के बीच के संबंधों को दर्शाता है।
In simple words: पारिस्थितिक तंत्र का मतलब है किसी एक जगह पर रहने वाले जीवों और उनके पर्यावरण के आपसी संबंधों का अध्ययन।
🎯 Exam Tip: पारिस्थितिक तंत्र की अवधारणा में 'भौगोलिक इकाई', 'जीव', 'पर्यावरण', 'समयबद्ध' और 'क्रमबद्ध अध्ययन' जैसे प्रमुख शब्द शामिल करें।
Question 6. ओडम ने पारिस्थितिक तंत्र की क्या परिभाषा दी है?
Answer: ओडम के अनुसार, "पारिस्थितिक तंत्र ऐसे जीव और उनके पर्यावरण की मूल कार्यात्मक इकाई है, जो दूसरे पारिस्थितिक तंत्रों से और अपने घटकों के बीच लगातार क्रिया करते रहते हैं।"
In simple words: ओडम ने कहा कि पारिस्थितिक तंत्र जीव और पर्यावरण की बुनियादी इकाई है जो लगातार एक-दूसरे से जुड़ी रहती है।
🎯 Exam Tip: परिभाषाओं को याद करते समय प्रमुख शब्दों और वैज्ञानिक के नाम को महत्व दें।
Question 8. प्राकृतिक पारिस्थितिक तंत्र किसे कहते हैं?
Answer: प्राकृतिक अवस्थाओं में खुद से विकसित हुए पारिस्थितिक तंत्र को प्राकृतिक पारिस्थितिक तंत्र कहा जाता है। ये तंत्र बिना किसी मानवीय हस्तक्षेप के प्रकृति में बनते और विकसित होते हैं।
In simple words: जो पारिस्थितिक तंत्र प्रकृति में अपने आप बनते हैं, उन्हें प्राकृतिक पारिस्थितिक तंत्र कहते हैं।
🎯 Exam Tip: प्राकृतिक और मानव निर्मित पारिस्थितिक तंत्रों के बीच अंतर को स्पष्ट रूप से समझें।
Question 9. सबसे बड़ा और स्थायी पारिस्थितिक तंत्र कौन-सा है?
Answer: सबसे बड़ा और स्थायी पारिस्थितिक तंत्र सामुद्रिक पारिस्थितिक तंत्र होता है। महासागरों में बहुत बड़ी मात्रा में जीव और निर्जीव घटक मौजूद हैं, जो इसे एक स्थिर तंत्र बनाते हैं।
In simple words: समुद्र का पारिस्थितिक तंत्र सबसे बड़ा और सबसे स्थिर होता है।
🎯 Exam Tip: महासागरों की विशालता और उनकी जैवविविधता के कारण उन्हें सबसे बड़ा और स्थायी पारिस्थितिक तंत्र माना जाता है।
Question 10. मानव निर्मित पारिस्थितिक तंत्र कौन-सा है? अथवा कृत्रिम पारिस्थितिक तंत्र क्या होता है?
Answer: मानव द्वारा बनाए गए और देखभाल किए गए तंत्र को कृत्रिम पारिस्थितिक तंत्र कहा जाता है। इसमें खेत, बगीचे और चिड़ियाघर जैसे उदाहरण शामिल हैं।
In simple words: इंसानों द्वारा बनाए और संभाले जाने वाले पारिस्थितिक तंत्र को कृत्रिम पारिस्थितिक तंत्र कहते हैं।
🎯 Exam Tip: कृत्रिम पारिस्थितिक तंत्र के उदाहरणों को याद रखें, जैसे खेत, पार्क, आदि।
Question 11. विकास के आधार पर पारिस्थितिक तंत्र को कितने भागों में बाँटा गया है?
Answer: विकास के आधार पर पारिस्थितिक तंत्र को चार भागों में बाँटा गया है: 1. प्रौढ़ पारिस्थितिक तंत्र, 2. अपूर्ण पारिस्थितिक तंत्र, 3. मिश्रित पारिस्थितिक तंत्र, 4. निष्क्रिय पारिस्थितिक तंत्र।
In simple words: विकास के हिसाब से पारिस्थितिक तंत्र चार तरह के होते हैं: प्रौढ़, अपूर्ण, मिश्रित और निष्क्रिय।
🎯 Exam Tip: पारिस्थितिक तंत्रों के विभिन्न वर्गीकरणों और उनके आधारों को स्पष्ट रूप से याद रखें।
Question 12. पारिस्थितिक तंत्र की संरचना किसके द्वारा निर्मित होती है?
Answer: पारिस्थितिक तंत्र की संरचना जैविक और अजैविक घटकों की आपसी क्रियाओं द्वारा बनती है। यह जीवित (पौधे, जानवर) और निर्जीव (मिट्टी, पानी, हवा) तत्वों के बीच के संबंधों पर आधारित है।
In simple words: पारिस्थितिक तंत्र जीवित और निर्जीव चीजों के एक साथ काम करने से बनता है।
🎯 Exam Tip: पारिस्थितिक तंत्र के मूल घटक (जैविक और अजैविक) और उनके परस्पर संबंध इसकी संरचना के लिए महत्वपूर्ण हैं।
Question 14. पोषण क्षमता के आधार पर जैविक घटकों को किन-किन भागों में बाँटा गया है?
Answer: पोषण क्षमता के आधार पर जैविक घटकों को स्वपोषी घटक (जो अपना भोजन खुद बनाते हैं) और परपोषी घटक (जो दूसरों पर निर्भर रहते हैं) के रूप में विभाजित किया गया है।
In simple words: पोषण के आधार पर, जैविक घटकों को दो भागों में बांटा गया है: स्वपोषी (खुद का खाना बनाने वाले) और परपोषी (दूसरों पर निर्भर रहने वाले)।
🎯 Exam Tip: स्वपोषी और परपोषी घटकों की परिभाषा और उदाहरणों को स्पष्ट रूप से समझें।
Question 15. स्वपोषी घटक किसे कहते हैं?
Answer: ऐसे घटक जो सूर्य की ऊर्जा से प्रकाश संश्लेषण करके या मिट्टी से जड़ों द्वारा अपना भोजन खुद बनाते हैं, और दूसरे शाकाहारी जीवों के लिए भोजन देते हैं, उन्हें स्वपोषी घटक कहते हैं। उदाहरण के लिए, हरे पौधे।
In simple words: स्वपोषी वे जीव होते हैं जो सूरज की रोशनी या मिट्टी से खुद अपना खाना बनाते हैं और दूसरों को भी खाना देते हैं।
🎯 Exam Tip: स्वपोषी घटकों का मुख्य कार्य ऊर्जा को खाद्य ऊर्जा में बदलना है, जो खाद्य श्रृंखला का आधार है।
Question 16. परपोषी घटक से क्या तात्पर्य है?
Answer: ऐसे घटक जो स्वपोषित प्राथमिक उत्पादकों द्वारा बनाए गए भोजन को खाते हैं, उन्हें परपोषी घटक कहते हैं। वे अपना भोजन खुद नहीं बना सकते और जीवित रहने के लिए दूसरों पर निर्भर रहते हैं।
In simple words: परपोषी वे जीव होते हैं जो अपना खाना खुद नहीं बनाते, बल्कि पौधों या दूसरे जीवों को खाकर जिंदा रहते हैं।
🎯 Exam Tip: परपोषी घटक खाद्य श्रृंखला में उपभोक्ता की भूमिका निभाते हैं, जो प्राथमिक उत्पादकों पर निर्भर होते हैं।
Question 17. परपोषी घटकों को कितने भागों में बाँटा गया है?
Answer: परपोषी घटकों को मुख्य रूप से तीन भागों में बांटा गया है: मृतजीवी (जो मृत पदार्थों पर निर्भर करते हैं), परजीवी (जो दूसरे जीवित जीवों पर निर्भर करते हैं) और प्राणी समभोजी (जो भोजन को ठोस रूप में खाते हैं)।
In simple words: परपोषी घटक तीन तरह के होते हैं: मृतजीवी, परजीवी और प्राणी समभोजी।
🎯 Exam Tip: परपोषी घटकों के विभिन्न प्रकारों को उनके पोषण के तरीकों के साथ याद रखें।
Question 18. मृत जीवी घटक क्या होते हैं?
Answer: मृतजीवी घटक वे जीव होते हैं जो पौधों और जानवरों से मिले कार्बनिक यौगिकों को घोल के रूप में सोखकर जीवित रहते हैं। ये मृत और सड़े-गले पदार्थों को तोड़कर पोषक तत्वों को मिट्टी में वापस मिलाते हैं।
In simple words: मृतजीवी घटक मरे हुए पेड़-पौधों और जानवरों से अपना खाना लेते हैं।
🎯 Exam Tip: मृतजीवी घटक पारिस्थितिक तंत्र में अपघटन की प्रक्रिया में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं, जिससे पोषक तत्वों का पुनर्चक्रण होता है।
Question 19. क्रियाशीलता के आधार पर जैविक घटकों को किन-किन भागों में बाँटा गया है?
Answer: क्रियाशीलता के आधार पर जैविक घटकों को तीन मुख्य भागों में बाँटा गया है: उत्पादक (जो भोजन बनाते हैं), उपभोक्ता (जो भोजन खाते हैं) और अपघटक (जो मृत पदार्थों को तोड़ते हैं)।
In simple words: काम के हिसाब से जैविक घटक उत्पादक, उपभोक्ता और अपघटक में बांटे गए हैं।
🎯 Exam Tip: क्रियाशीलता के आधार पर जैविक घटकों का वर्गीकरण पारिस्थितिक तंत्र के ऊर्जा प्रवाह और पोषक तत्व चक्रण को समझने में मदद करता है।
Question 21. अपघटक से क्या तात्पर्य है?
Answer: सूक्ष्म जीवाणु और कवक जैसे जीव जो मृत पौधों और जानवरों सहित जैविक पदार्थों को सड़ा-गलाकर उनका अपघटन कर देते हैं, उन्हें अपघटक कहते हैं। ये पोषक तत्वों को मिट्टी में वापस मिलाते हैं।
In simple words: अपघटक छोटे जीव होते हैं जो मरे हुए पौधों और जानवरों को गलाकर मिट्टी में मिला देते हैं।
🎯 Exam Tip: अपघटक पारिस्थितिक तंत्र में महत्वपूर्ण होते हैं क्योंकि वे पोषक तत्वों के पुनर्चक्रण में मदद करते हैं।
Question 22. अजैविक घटक के कितने प्रकार होते हैं?
Answer: अजैविक घटक मुख्य रूप से तीन प्रकार के होते हैं: 1. जलवायु तत्व (जैसे सूर्य का प्रकाश, तापमान, वर्षा), 2. कार्बनिक पदार्थ (जैसे प्रोटीन, कार्बोहाइड्रेट), और 3. अकार्बनिक पदार्थ (जैसे ऑक्सीजन, जल, खनिज)।
In simple words: अजैविक घटक तीन तरह के होते हैं: मौसम की चीजें, कार्बनिक चीजें और अकार्बनिक चीजें।
🎯 Exam Tip: अजैविक घटकों के विभिन्न प्रकारों और उनके उदाहरणों को याद रखें, क्योंकि ये पारिस्थितिक तंत्र के कामकाज के लिए महत्वपूर्ण हैं।
Question 23. खाद्य श्रृंखला किसे कहते हैं?
Answer: पारिस्थितिक तंत्र में सभी जीव, जो उत्पादक और उपभोक्ता की श्रेणी में आते हैं, एक क्रम या श्रृंखला में व्यवस्थित रहते हैं। जीवों की इस व्यवस्थित श्रृंखला को खाद्य श्रृंखला कहते हैं, जिसके द्वारा खाद्य ऊर्जा और पोषक पदार्थों का एक जीव से दूसरे जीव में स्थानांतरण होता है।
In simple words: खाद्य श्रृंखला वह रास्ता है जिससे ऊर्जा और खाना एक जीव से दूसरे जीव तक जाता है, जैसे घास को हिरण खाता है और हिरण को शेर।
🎯 Exam Tip: खाद्य श्रृंखला को समझाते समय उत्पादक, प्राथमिक उपभोक्ता, द्वितीयक उपभोक्ता और तृतीयक उपभोक्ता के क्रम को शामिल करें।
Question 24. पोष स्तर से क्या तात्पर्य है?
Answer: खाद्य श्रृंखला के प्रत्येक स्तर या कड़ी को पोषण स्तर कहते हैं। यह वह स्थिति है जहाँ कोई जीव खाद्य श्रृंखला में स्थित होता है, जैसे उत्पादक पहले पोषण स्तर पर होते हैं।
In simple words: पोषण स्तर का मतलब है कि कोई जीव खाने की चेन में किस जगह पर है, जैसे पौधा पहला स्तर है।
🎯 Exam Tip: पोषण स्तर को खाद्य श्रृंखला के विभिन्न चरणों के रूप में स्पष्ट करें, जैसे उत्पादक, प्राथमिक उपभोक्ता आदि।
Question 25. खाद्य जाल किसे कहते हैं?
Answer: प्रत्येक पारिस्थितिक तंत्र में एक साथ कई खाद्य श्रृंखलाएँ काम करती रहती हैं। शाकाहारी और मांसाहारी जीवों को भोजन के कई विकल्प उपलब्ध होते हैं, जिससे खाद्य श्रृंखलाएँ आपस में मिल जाती हैं और एक जटिल खाद्य जाल का निर्माण करती हैं।
In simple words: खाद्य जाल तब बनता है जब खाने की कई चेनें आपस में जुड़ जाती हैं, क्योंकि जीवों के पास खाने के कई विकल्प होते हैं।
🎯 Exam Tip: खाद्य जाल की अवधारणा को खाद्य श्रृंखला से अलग करें, यह दिखाते हुए कि इसमें अधिक जटिल और परस्पर जुड़े हुए संबंध होते हैं।
Question 27. पारिस्थितिकी तंत्र पर मानव के प्रभाव किन-किन रूपों में दृष्टिगत होते हैं?
Answer: पारिस्थितिक तंत्र पर मानव के प्रभाव मुख्य रूप से कृषि कार्यों, पेड़ों की कटाई, खनन, औद्योगीकरण, जलवायु परिवर्तन और प्राकृतिक आपदाओं के रूप में दिखाई देते हैं। इन गतिविधियों से पर्यावरण को नुकसान पहुंचता है।
In simple words: इंसान खेती, पेड़ काटने, खदान, कारखाने, मौसम बदलने और प्राकृतिक आपदाओं से पारिस्थितिक तंत्र को प्रभावित करता है।
🎯 Exam Tip: मानव गतिविधियों के नकारात्मक प्रभावों को सूचीबद्ध करते समय 'वनोन्मूलन' और 'औद्योगीकरण' जैसे प्रमुख कारकों पर जोर दें।
Question 28. जलवायु परिवर्तन के लिए मानव की कौन-सी क्रियाएँ उत्तरदायी हैं?
Answer: जलवायु परिवर्तन के लिए मुख्य रूप से मानव द्वारा की गई पेड़ों की कटाई (वनोन्मूलन), औद्योगीकरण और परमाणु शक्ति के आविष्कार को जिम्मेदार माना जाता है। ये सभी क्रियाएँ वातावरण में ग्रीनहाउस गैसों को बढ़ाती हैं।
In simple words: इंसान द्वारा पेड़ों को काटना, कारखाने लगाना और परमाणु बम जैसे हथियार बनाना जलवायु बदलने के मुख्य कारण हैं।
🎯 Exam Tip: जलवायु परिवर्तन के मानव-जनित कारणों को पहचानना और उनका उल्लेख करना महत्वपूर्ण है।
Question 29. प्राकृतिक संतुलन क्या है?
Answer: दुनिया में कई तरह के जीवधारी पाए जाते हैं। किसी भी पारिस्थितिक समुदाय में किसी भी प्राणी जाति की संख्या तब तक स्थिर रहती है जब तक कोई प्राकृतिक आपदा या व्यवधान उसकी स्थिरता को खत्म न कर दे। पारिस्थितिकी के क्षेत्र में इसी स्थिरता को प्रकृति में संतुलन कहते हैं।
In simple words: प्राकृतिक संतुलन का मतलब है कि प्रकृति में हर जीव की संख्या एक बराबर बनी रहे, जब तक कोई बड़ी गड़बड़ी न हो।
🎯 Exam Tip: प्राकृतिक संतुलन की परिभाषा में 'जीवधारी विविधता', 'स्थिरता' और 'प्राकृतिक प्रकोप' जैसे शब्दों को शामिल करें।
Question 30. जैविक समुदाय एवं पर्यावरण के मध्य संतुलन करने हेतु कौन-सी व्यवस्थाएँ होती हैं?
Answer: जैविक समुदाय और पर्यावरण के बीच संतुलन बनाए रखने के लिए प्रतिस्पर्धा, पारिस्थितिक तंत्र/पारितंत्र की आपसी क्रियाएं और जीवों का व्यवहार जैसी व्यवस्थाएँ होती हैं। ये सब मिलकर संतुलन बनाए रखने में मदद करते हैं।
In simple words: जीव और पर्यावरण के बीच संतुलन के लिए प्रतिस्पर्धा, पारिस्थितिक तंत्र और जीवों का व्यवहार मुख्य चीजें हैं।
🎯 Exam Tip: संतुलन बनाए रखने में जैविक और अजैविक कारकों की भूमिका को स्पष्ट करें, खासकर प्रतिस्पर्धा और पारिस्थितिक तंत्र के माध्यम से।
Question 31. कुंजी-शिला जातियाँ क्या हैं? अथवा की- स्टोन जातियाँ क्या होती है?
Answer: कुंजी-शिला जातियाँ ऐसी जातियाँ हैं जो किसी खास क्षेत्र के पारिस्थितिक तंत्र को सबसे ज्यादा प्रभावित करती हैं। उनकी उपस्थिति से पूरे तंत्र पर गहरा असर पड़ता है, और उनके बिना तंत्र बदल सकता है या कमजोर हो सकता है।
In simple words: कुंजी-शिला जातियाँ वे प्रजातियाँ हैं जो किसी जगह के पर्यावरण के लिए बहुत जरूरी होती हैं और उनके होने से पूरा माहौल ठीक रहता है।
🎯 Exam Tip: कुंजी-शिला जातियों के महत्व को उनके 'सर्वाधिक प्रभाव' और 'तंत्र की स्थिरता' पर उनके असर के संदर्भ में स्पष्ट करें।
Question 1. पारिस्थितिकी की संकल्पना का उदय कैसे हुआ? अथवा पारिस्थितिकी की प्रक्रिया का भारत के संदर्भ में वर्णन कीजिए।
Answer: पारिस्थितिकी शब्द भले ही 19वीं शताब्दी में आया हो, लेकिन भारतीय संस्कृति में इसकी संकल्पना बहुत पुरानी है। पुराने समय से ही भारतीय ऋषि-मुनियों ने प्रकृति और जीवों के आपसी रिश्तों को धर्म, सामाजिक नियमों और व्यवहार से जोड़ा था, जैसे गाय को माता मानना। हजारों सालों से इंसान और पर्यावरण के बीच अच्छे संबंध रहे हैं। लेकिन आधुनिक युग में, इंसान ने प्रकृति पर राज करने की कोशिश की, जिससे इन पुराने नियमों को छोड़ दिया गया और सिर्फ भौतिक सुख को जीवन का आधार मान लिया गया। इस कारण प्रकृति और जीवों के संबंधों में खराबी आ गई, और इसी से पारिस्थितिकी की नई सोच सामने आई।
In simple words: भारत में पारिस्थितिकी का विचार बहुत पुराना है, जो हमारी संस्कृति में जुड़ा है। पर आधुनिक समय में इंसानों ने प्रकृति का बहुत शोषण किया, जिससे संतुलन बिगड़ गया।
🎯 Exam Tip: जब भी सांस्कृतिक या ऐतिहासिक संदर्भों से जुड़े प्रश्न आएं, तो वर्तमान परिप्रेक्ष्य से तुलना करके उत्तर को अधिक प्रभावशाली बनाएं।
Question 2. पारिस्थितिकी की व्यवस्था को स्पष्ट कीजिए।
Answer: पारिस्थितिकी एक ऐसी व्यवस्था है जो जीवों और पर्यावरण की आपस की क्रियाओं का नतीजा है। यह व्यवस्था प्राकृतिक नियमों के तहत विकसित होती है। इसलिए, पारिस्थितिकी के अध्ययन में इसी व्यवस्था के रहस्यों को समझने की कोशिश की जाती है। यह व्यवस्था इतनी जटिल है कि जैसे-जैसे वैज्ञानिक इसके रहस्यों को खोजते हैं, वैसे-वैसे नए रहस्य सामने आते जाते हैं। हालांकि, वैज्ञानिक तरक्की के नशे में इंसान यह मानने लगा है कि वह प्रकृति का गुलाम नहीं है। वह अपनी इच्छा से प्रकृति का उपयोग कर सकता है। लेकिन इंसान की इसी सोच का बुरा नतीजा यह हुआ है कि पर्यावरण को कई तरह से नुकसान पहुँच रहा है।
In simple words: पारिस्थितिकी एक प्राकृतिक व्यवस्था है जहाँ जीव और पर्यावरण एक-दूसरे से जुड़े होते हैं। इंसान की विकास की चाहत ने इस व्यवस्था को नुकसान पहुँचाया है।
🎯 Exam Tip: पारिस्थितिकी एक जटिल व्यवस्था है; उत्तर में इसके प्राकृतिक नियमों और मानवीय हस्तक्षेप के परिणामों को स्पष्ट करें।
Question 3. पारिस्थितिकी तंत्र की मुख्य विशेषता बताइए।
Answer: पारिस्थितिकी तंत्र की मुख्य विशेषताएँ इस प्रकार हैं-
1. एक पारिस्थितिकी तंत्र पर्यावरण के अध्ययन की सबसे मूल इकाई होता है।
2. पारिस्थितिकी तंत्र का आकार और फैलाव अलग-अलग हो सकता है।
3. पारिस्थितिकी तंत्र प्राकृतिक भी हो सकता है और इंसान द्वारा बनाया गया भी हो सकता है।
4. पारिस्थितिकी तंत्र पूरी धरती पर फैला हो सकता है या चिड़ियाघर के पिंजरे जितना छोटा या किसी झील तक सीमित भी हो सकता है।
In simple words: पारिस्थितिकी तंत्र पर्यावरण को समझने की एक इकाई है, जो किसी भी आकार का हो सकता है और प्राकृतिक या मानव निर्मित दोनों तरह का हो सकता है।
🎯 Exam Tip: पारिस्थितिकी तंत्र की विशेषताओं को स्पष्ट और संक्षिप्त बिंदुओं में लिखें, जिससे परीक्षक को समझने में आसानी हो।
Question 5. जैविक एवं अजैविक घटकों में क्या अन्तर होता है?
Answer: जैविक और अजैविक घटकों में नीचे दिए गए अंतर पाए जाते हैं:
| जैविक घटक | अजैविक घटक |
|---|---|
| 1. किसी पारिस्थितिकी तंत्र के सभी जीवित जीव उसके जैविक घटक होते हैं। | 1. किसी पारिस्थितिकी तंत्र के सभी निर्जीव घटक उसके अजैविक घटक होते हैं। |
| 2. जैविक घटक आपस में एक-दूसरे से जुड़े होते हैं। | 2. अजैविक घटकों के बीच कोई आपसी क्रिया नहीं होती है। |
| 3. जैविक घटकों में इंसान, जीव-जंतु और पेड़-पौधे शामिल हैं। | 3. अजैविक घटकों में मौसम के तत्व, कार्बनिक और अकार्बनिक पदार्थ शामिल हैं। |
| 4. जैविक घटक बदलने वाले घटक होते हैं। | 4. अजैविक घटक अक्सर बदलने वाले घटक होते हैं। |
In simple words: जैविक घटक जीवित होते हैं जैसे पेड़-पौधे और जानवर, जबकि अजैविक घटक निर्जीव होते हैं जैसे पानी और हवा। दोनों एक पारिस्थितिकी तंत्र में मिलकर काम करते हैं।
🎯 Exam Tip: जैविक और अजैविक घटकों के बीच अंतर को स्पष्ट करने के लिए हमेशा उदाहरणों का उपयोग करें और उनकी परस्पर निर्भरता को समझाएं।
Question 7. प्रत्येक उपभोक्ता स्तर पर ऊर्जा की मात्रा में निरन्तर कमी क्यों आती है?
Answer: पौधों में जमा रासायनिक ऊर्जा को शाकाहारी जीव भोजन के रूप में लेते हैं। पौधों से शाकाहारी जीवों में ऊर्जा के जाने पर कुछ ऊर्जा कम हो जाती है। इसके बाद, जब मांसाहारी जीव शाकाहारी जीवों को खाते हैं, तब भी ऊर्जा में कमी आती है। इस तरह, ऊर्जा एक पोषण स्तर से दूसरे पोषण स्तर में लगातार जाती रहती है, लेकिन इस प्रक्रिया में ऊर्जा का कुछ हिस्सा हमेशा कम होता रहता है। इसलिए, हर उपभोक्ता स्तर पर ऊर्जा की मात्रा धीरे-धीरे घटती जाती है।
In simple words: ऊर्जा हर पोषण स्तर पर कम होती जाती है क्योंकि जब ऊर्जा एक जीव से दूसरे जीव में जाती है, तो कुछ ऊर्जा का नुकसान होता है।
🎯 Exam Tip: ऊर्जा प्रवाह में होने वाली कमी को समझाते हुए, ऊर्जा के दस प्रतिशत नियम का उल्लेख करना प्रभावी रहता है।
Question 8. पारिस्थितिकी तंत्र पर मानव के अनुकूल प्रभावों को स्पष्ट कीजिए। अथवा मानव के कौन-से प्रभाव पारिस्थितिक तंत्र पर अनुकूल प्रभाव डालते हैं?
Answer: इंसान ने शुरू से ही अपनी बुद्धि, ज्ञान और तकनीक का उपयोग करके प्राकृतिक संसाधनों को इस्तेमाल और नियंत्रित करने की कोशिश की है। इंसान ने अपने ज्ञान से अपनी समस्याओं को हल करने के लिए जमीन का उपयोग, खेती का विकास, जंगल, वन्यजीव प्रबंधन आदि में सफलता पाई है। उदाहरण के लिए, दुनिया की तेजी से बढ़ती आबादी के कारण जमीन और खाने की कमी, और अलग-अलग बीमारियों जैसी समस्याएं पैदा हुईं। इंसान ने इन समस्याओं के समाधान के लिए जमीन का बेहतर उपयोग किया, खेती बढ़ाने के लिए रासायनिक खाद, अच्छे बीज, आधुनिक कृषि उपकरण विकसित किए, और बीमारियों को रोकने के लिए कई दवाइयाँ बनाईं। इन प्रयासों से इंसान ने सफलता पाई है।
In simple words: इंसान ने अपनी बुद्धि और तकनीक का उपयोग करके प्राकृतिक संसाधनों का प्रबंधन किया है, जिससे खेती, वन और वन्यजीव संरक्षण में सुधार हुआ है।
🎯 Exam Tip: मानवीय प्रभावों को सकारात्मक और नकारात्मक दोनों पहलुओं में समझाना महत्वपूर्ण है; उत्तर में अनुकूल प्रभावों को स्पष्ट उदाहरणों के साथ प्रस्तुत करें।
Question 9. प्रकृति संतुलन में वन्य जीवों के योगदान को स्पष्ट कीजिए।
Answer: वन्य जीव प्रकृति में संतुलन बनाने में बहुत महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। वे प्रकृति में पारिस्थितिकीय संतुलन बनाए रखते हैं। उदाहरण के लिए, शिकारी जीव शाकाहारी जीवों की संख्या को नियंत्रित करते हैं, जिससे पेड़-पौधों को अधिक नुकसान नहीं होता। अगर शिकारी कम हो जाएं, तो शाकाहारी जीव बहुत बढ़ जाएंगे और सारे पेड़-पौधों को खा जाएंगे, जिससे जंगल खत्म हो सकते हैं और अंततः पूरी पारिस्थितिकी बिगड़ सकती है। इस तरह, वन्य जीव खाद्य श्रृंखला का हिस्सा बनकर पर्यावरण को स्थिर और स्वस्थ बनाए रखने में मदद करते हैं।
In simple words: वन्य जीव प्रकृति में संतुलन बनाए रखते हैं। शिकारी जीव अन्य जीवों की संख्या को नियंत्रित करते हैं, जिससे पूरा पर्यावरण स्वस्थ रहता है।
🎯 Exam Tip: वन्य जीवों के योगदान को समझाते समय, खाद्य श्रृंखला और खाद्य जाल की अवधारणाओं का उल्लेख करें ताकि उनकी भूमिका स्पष्ट हो सके।
RBSE Class 11 Physical Geography Chapter 22 लघुत्तरात्मक प्रश्न Type II
Question 1. पारिस्थितिक तंत्र के प्रकार को स्पष्ट कीजिए।
Answer: पारिस्थितिक तंत्र को अलग-अलग आधारों पर कई भागों में बांटा गया है, जैसा कि नीचे दिए गए फ्लोचार्ट से स्पष्ट है:
- ऊर्जा के स्रोत के आधार पर:
- प्राकृतिक पारिस्थितिक तंत्र
- मानवीय पारिस्थितिक तंत्र
- आवास के आधार पर:
- स्थलीय पारिस्थितिक तंत्र
- जलीय पारिस्थितिक तंत्र
- उपयोग के आधार पर:
- कृषित पारिस्थितिक तंत्र
- अकृषित पारिस्थितिक तंत्र
- विकास के आधार पर:
- प्रौढ़ पारिस्थितिक तंत्र
- अपूर्ण पारिस्थितिक तंत्र
- मिश्रित पारिस्थितिक तंत्र
- निष्क्रिय पारिस्थितिक तंत्र
इन्हें विस्तार से समझाते हैं:
ऊर्जा के स्रोत के आधार पर – पारिस्थितिक तंत्र दो प्रकार के होते हैं:
(i) प्राकृतिक पारिस्थितिक तंत्र – ये वे पारिस्थितिक तंत्र हैं जो प्राकृतिक अवस्थाओं में विकसित होते हैं। ये स्थलीय (जैसे जंगल, घास के मैदान, रेगिस्तान, पर्वतीय क्षेत्र) और जलीय (जैसे तालाब, नदी, समुद्र) दोनों तरह के हो सकते हैं। समुद्री पारिस्थितिक तंत्र सबसे बड़ा और स्थायी होता है।
(ii) मानव निर्मित या कृत्रिम पारिस्थितिक तंत्र – ये वे तंत्र हैं जिन्हें इंसान बनाता और उनका रखरखाव करता है। उदाहरण हैं खेत, पार्क, रसोई-उद्यान, चिड़ियाघर और एक्वेरियम।
(ब) आवास के आधार पर- (i) स्थलीय पारिस्थितिक तंत्र, (ii) जलीय पारिस्थितिक तंत्र।
(स) उपयोग के आधार पर- (i) कृषि पारिस्थितिक तंत्र, (ii) अकृषित पारिस्थितिक तंत्र।
(द) विकास के आधार पर- (i) प्रौढ़ पारिस्थितिक तंत्र, (ii) अपूर्ण पारिस्थितिक तंत्र, (iii) मिश्रित पारिस्थितिक तंत्र, (iv) निष्क्रिय पारिस्थितिक तंत्र।
In simple words: पारिस्थितिक तंत्रों को ऊर्जा के स्रोत, आवास, उपयोग और विकास जैसे कई तरीकों से बांटा जा सकता है। इसमें प्राकृतिक जंगल से लेकर मानव निर्मित खेतों तक सब शामिल हैं।
🎯 Exam Tip: पारिस्थितिक तंत्रों के विभिन्न वर्गीकरणों को स्पष्ट करने के लिए फ्लोचार्ट या सूची का उपयोग करें और प्रत्येक प्रकार का एक-दो उदाहरण दें।
Question 3. पारिस्थितिक तंत्र पर मानवीय प्रभाव को स्पष्ट कीजिए।
Answer: पारिस्थितिक तंत्र एक भौगोलिक इकाई में रहने वाले जीवों और उनके पर्यावरण के बीच की आपसी क्रियाओं का नतीजा है। इंसान ही एकमात्र ऐसा जीव है जो अपनी अलग-अलग गतिविधियों से पर्यावरण को सबसे ज़्यादा प्रभावित करता है, ताकि उसे ज़्यादा से ज़्यादा फ़ायदा मिल सके। दरअसल, इंसान की सभ्यता का विकास प्रकृति के शोषण पर आधारित रहा है। प्रकृति कुछ चीजों को खुद-ब-खुद ठीक कर लेती है, लेकिन कुछ ऐसी चीजें भी होती हैं जिन्हें वह दोबारा ठीक नहीं कर पाती। इससे पारिस्थितिक तंत्र में असंतुलन पैदा हो जाता है, जो इंसान और पर्यावरण दोनों के लिए हानिकारक है। पारिस्थितिक तंत्र पर इंसान के प्रभाव अच्छे और बुरे दोनों तरह के हो सकते हैं। अच्छे प्रभावों से इंसान और पर्यावरण दोनों को फायदा होता है, लेकिन बुरे प्रभावों से किसी न किसी तरह का नुकसान होता है।
In simple words: इंसान अपनी ज़रूरतों के लिए प्रकृति का उपयोग करता है, जिससे पारिस्थितिकी तंत्र पर अच्छे और बुरे दोनों तरह के प्रभाव पड़ते हैं। कुछ प्रभावों से संतुलन बिगड़ जाता है और नुकसान होता है।
🎯 Exam Tip: मानवीय प्रभावों को समझाते समय, अच्छे और बुरे दोनों पहलुओं को संतुलित रूप से प्रस्तुत करें और संतुलन बिगड़ने के परिणामों को उजागर करें।
Question 4. पारिस्थितिक तंत्र पर कृषि क्रियाओं के प्रतिकूल प्रभाव को स्पष्ट कीजिए।
Answer: जनसंख्या बढ़ने के कारण पैदा हुई समस्याओं को हल करने के लिए इंसान ने खेती की जमीन बढ़ाई है और रासायनिक खाद, अच्छे बीज, कृषि यंत्र और उपकरण विकसित किए हैं। लेकिन इसके कारण पारिस्थितिक तंत्र पर कई बुरे प्रभाव पड़े हैं। जैसे, इंसान ने खेती की जमीन बढ़ाने के लिए जंगल और घास के मैदान साफ किए हैं, जिससे वन्य जीवों, चारागाहों और समुद्री पारिस्थितिक तंत्र पर बुरा असर पड़ा है। इसी तरह, ज़्यादा अनाज पैदा करने के लिए रासायनिक खाद और कीटनाशक दवाओं का उपयोग करके न केवल जमीन को खेती के लिए बेकार किया है, बल्कि इन रसायनों को लगातार ज़मीन के नीचे के पानी में मिलाकर उसे दूषित भी किया है। फसलों के ज़्यादा उत्पादन के लिए लगातार ज़मीन के नीचे के पानी का उपयोग करने से भूजल का स्तर गिर गया है, जिससे राजस्थान, मध्यप्रदेश जैसे कई इलाकों में पीने के पानी की कमी हो गई है।
इंसान द्वारा खेती के लिए जंगलों की अंधाधुंध कटाई और अन्य आर्थिक गतिविधियों का पारिस्थितिक तंत्र की जलवायु, मिट्टी, वन्य जीवों और पक्षियों पर बुरा असर साफ देखा जा सकता है। जंगल काटने से जलवायु गर्म होने लगती है, बारिश कम हो जाती है, मिट्टी का कटाव होता है और वन्य जीव खत्म होने लगते हैं। जंगलों की अंधाधुंध कटाई के कारण आज दुनिया के कई हिस्सों, जिसमें भारत भी शामिल है, में कई वन्यजीव प्रजातियाँ खत्म हो चुकी हैं या खत्म होने वाली हैं। इससे वानिकी पारिस्थितिक तंत्र असंतुलित हो गया है, क्योंकि प्राकृतिक वनस्पति ही वानिकी पारिस्थितिक तंत्र का मुख्य आधार है।
In simple words: खेती बढ़ाने के लिए जंगलों की कटाई और रासायनिक खाद के उपयोग से जमीन, पानी और वन्य जीवों को नुकसान हुआ है, जिससे पारिस्थितिकी तंत्र का संतुलन बिगड़ गया है।
🎯 Exam Tip: कृषि के प्रतिकूल प्रभावों को बताते समय, मृदा अपरदन, जल प्रदूषण, और जैव विविधता के नुकसान जैसे प्रमुख बिंदुओं पर ध्यान केंद्रित करें।
Question 6. कुँजी-शिला जातियों की प्रकृति-सन्तुलन में भूमिका को स्पष्ट कीजिए। अथवा किसी क्षेत्र विशेष के पारितंत्र को कुंजी-शिला जातियाँ कैसे प्रभावित करती हैं? अथवा की-स्टोन जातियों की पारितंत्र नियंत्रण में भूमिका को वर्णित कीजिए।
Answer: कुंजी-शिला जातियाँ ऐसी प्रजातियाँ हैं जो किसी खास क्षेत्र के पारिस्थितिकी तंत्र को सबसे ज़्यादा प्रभावित करती हैं। ये प्रजातियाँ पारिस्थितिकी तंत्र को स्थिरता देती हैं और इनकी अनुपस्थिति में ऐसे बदलाव होते हैं जिससे पारिस्थितिकी तंत्र का स्वरूप पूरी तरह बदल जाता है और उसके खत्म होने की संभावना भी बनी रहती है। इस तरह, पारिस्थितिकी तंत्र में कुंजी-शिला जातियों की भूमिका बहुत महत्वपूर्ण होती है।
कुंजी-शिला जातियों में मुख्य रूप से परभक्षी (शिकारी) प्रजातियाँ शामिल होती हैं। ये प्रजातियाँ पारिस्थितिक समुदाय पर अपना प्रभाव डालती हैं। शिकारियों की संख्या में बढ़ोतरी यह बताती है कि वे शिकार की प्रजातियों को भोजन के रूप में उपयोग करके उनकी संख्या को नियंत्रित रखती हैं। शिकारियों की कमी होने पर शिकार की प्रजातियों की संख्या बढ़ जाएगी और इस स्थिति में पूरे पारिस्थितिकी तंत्र के नष्ट होने की संभावना बनी रहती है। इस तरह की-स्टोन जातियाँ ही समुदाय में अन्य प्रजातियों की संख्या को तय करती हैं। हाथी और मेंढक ऐसी ही कुंजी-शिला जातियाँ हैं जो पारिस्थितिकी तंत्र को संतुलित बनाए रखती हैं।
In simple words: कुंजी-शिला जातियाँ वे महत्वपूर्ण प्रजातियाँ हैं जो पारिस्थितिकी तंत्र को स्थिर रखती हैं। शिकारी जीव इसका एक उदाहरण हैं, जो अन्य प्रजातियों की संख्या को नियंत्रित करके संतुलन बनाए रखते हैं।
🎯 Exam Tip: कुंजी-शिला जातियों की भूमिका को समझाते समय, उनके महत्व को उदाहरणों और उनके अभाव में होने वाले नकारात्मक प्रभावों के साथ स्पष्ट करें।
RBSE Class 11 Physical Geography Chapter 22 निबन्धात्मक प्रश्न
Question 1. पारिस्थितिक तंत्र की संरचना को स्पष्ट कीजिए। अथवा पारिस्थितिक तन्त्र विभिन्न घटकों का अन्तर्सम्बन्धित स्वरूप है, कैसे? स्पष्ट कीजिए।
Answer: एक पारिस्थितिक तंत्र की संरचना पर्यावरण के जैविक और अजैविक घटकों की आपस की क्रियाओं का नतीजा है। पारिस्थितिक तंत्र की इस संरचना को नीचे दिए गए चित्र और विवरण द्वारा समझाया गया है:
- पोषण क्षमता के आधार पर:
- स्वपोषी (प्राथमिक उत्पादक)
- परपोषी (उपभोक्ता)
- मृतजीवी
- परजीवी
- प्राणी समभोजी
- क्रियाशीलता के आधार पर:
- उत्पादक
- उपभोक्ता
- अपघटक
- अजैविक घटक:
- जलवायु तत्व
- कार्बनिक पदार्थ
- अकार्बनिक पदार्थ
इन सभी घटकों का संक्षिप्त विवरण इस प्रकार है:
जैविक घटक – किसी पारिस्थितिक तंत्र के सभी जीवित जीव उसके जैविक घटक कहलाते हैं। ये सभी जीव आपस में एक-दूसरे से जुड़े होते हैं। जैविक घटकों को उनकी पोषण क्षमता और कार्यशैली के आधार पर नीचे दिए गए प्रकारों में बांटा जा सकता है:
1. पोषण क्षमता के आधार पर जैविक घटकों का वर्गीकरण
पोषण क्षमता के आधार पर जैविक घटकों को दो भागों में बांटा गया है:
(i) स्वपोषी घटक – ये घटक, जिन्हें प्राथमिक उत्पादक भी कहते हैं, सूरज की रोशनी से प्रकाश संश्लेषण की प्रक्रिया द्वारा और जड़ों द्वारा मिट्टी से अपना भोजन खुद बनाते हैं। ये अन्य शाकाहारी जीवों को भोजन भी देते हैं।
(ii) परपोषी घटक – ये वे जीवित घटक हैं जो स्वपोषी प्राथमिक उत्पादकों द्वारा बनाया गया भोजन खाते हैं। परपोषी घटक स्वपोषियों द्वारा बनाए गए भोजन का उपयोग करते हैं, इसलिए इन्हें उपभोक्ता भी कहते हैं। भोजन ग्रहण करने के तरीके के आधार पर इन्हें तीन भागों में बांटा जा सकता है:
(अ) मृत जीवी – ये घटक पौधों और जानवरों से मिलने वाले कार्बनिक यौगिकों को घोल के रूप में लेकर जीवित रहते हैं।
(ब) परजीवी – ये घटक अपने भोजन और जीवन के लिए दूसरे जीवित जीवों पर निर्भर रहते हैं।
(स) प्राणी समभोजी – ये घटक अपने मुंह से भोजन ग्रहण करते हैं। इंसान सहित सभी बड़े जानवर इस श्रेणी में आते हैं।
2. कार्यशीलता के आधार पर जैविक घटकों को तीन भागों में बांटा जाता है:
(i) उत्पादक – इनमें वे पौधे आते हैं जो सूरज की रोशनी से प्रकाश संश्लेषण की प्रक्रिया द्वारा और जड़ों द्वारा मिट्टी से अपना भोजन खुद बनाते हैं। इन्हें प्राथमिक उत्पादक कहते हैं। इन स्वपोषी पौधों पर निर्भर जीव-जंतु और इंसान को द्वितीयक उत्पादक कहते हैं।
(ii) उपभोक्ता – ये परपोषी जीव होते हैं जो स्वपोषी पौधों द्वारा बनाया गया भोजन खाते हैं। ये तीन प्रकार के होते हैं: प्राथमिक उपभोक्ता (शाकाहारी) जैसे खरगोश, हिरण, बकरी; द्वितीयक उपभोक्ता (मांसाहारी) जैसे मेंढक, बिल्ली, लोमड़ी; तृतीयक उपभोक्ता (सर्वाहारी) जैसे इंसान, बाज, शेर।
(iii) अपघटक – इनमें मुख्य रूप से छोटे जीव, बैक्टीरिया और कवक शामिल हैं, जो मरे हुए पौधों और जानवरों सहित जैविक पदार्थों को सड़ाकर उन्हें तोड़ देते हैं। ये जीव अपघटन की प्रक्रिया में अपना भोजन लेते हैं और जैविक तत्वों को फिर से व्यवस्थित करते हैं, जिससे प्राथमिक उत्पादकों के लिए वे फिर से उपलब्ध हो जाते हैं। ये सभी घटक मिलकर पारिस्थितिक तंत्र के संतुलन में मदद करते हैं।
अजैविक घटक – अजैविक घटक तीन प्रकार के होते हैं:
- जलवायु तत्व; जैसे सूरज की रोशनी, तापमान, बारिश, नमी, जलवाष्प आदि।
- कार्बनिक पदार्थ; जैसे प्रोटीन, कार्बोहाइड्रेट, वसा, तरल पदार्थ आदि। इन्हें शरीर बनाने वाले पदार्थ कहते हैं।
- अकार्बनिक पदार्थ; जैसे ऑक्सीजन, कार्बन डाइऑक्साइड, नाइट्रोजन, हाइड्रोजन, जल, कार्बन, सल्फर, कैल्शियम, खनिज, लवण आदि। ये तत्व पारिस्थितिक तंत्र में पदार्थों के चक्र में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं और जीवों को ऊर्जा देते हैं।
In simple words: पारिस्थितिक तंत्र में जीवित (पौधे, जानवर) और निर्जीव (पानी, हवा, मिट्टी) चीजें शामिल होती हैं। ये सभी मिलकर काम करते हैं और एक-दूसरे पर निर्भर रहते हैं, जिससे प्रकृति का संतुलन बना रहता है।
🎯 Exam Tip: पारिस्थितिक तंत्र की संरचना को समझाते समय, जैविक और अजैविक घटकों को अलग-अलग वर्गीकृत करें और उनके बीच के संबंध को स्पष्ट करें।
Question 2. पारिस्थितिक तंत्र पर मानव के प्रतिकूल प्रभावों को स्पष्ट कीजिए। अथवा मानव किस प्रकार पारिस्थितिक तंत्र को प्रभावित कर रहा है?
Answer: पारिस्थितिक तंत्र पर इंसान के अच्छे प्रभावों की तुलना में बुरे प्रभाव बहुत ज़्यादा और महत्वपूर्ण हैं, जिनके कारण आज पर्यावरण की समस्याएँ बहुत बढ़ गई हैं। अगर इन समस्याओं को समय रहते नियंत्रित नहीं किया गया, तो एक दिन धरती से इंसान का जीवन खत्म हो सकता है। पारिस्थितिक तंत्र पर इंसान के बुरे प्रभावों को नीचे दिए गए मुख्य बिंदुओं में समझाया जा सकता है:
1. कृषि क्रियाओं के प्रतिकूल प्रभाव
2. वनोन्मूलन के प्रतिकूल प्रभाव
3. खनन क्रियाओं के प्रतिकूल प्रभाव
4. औद्योगीकरण के प्रतिकूल प्रभाव
5. जलवायु परिवर्तन के प्रतिकूल प्रभाव
6. प्राकृतिक आपदाओं के प्रतिकूल प्रभाव
1. कृषि क्रियाओं के प्रतिकूल प्रभाव – इंसान ने कृषि भूमि को बढ़ाने के लिए न केवल जंगलों और घास के मैदानों को साफ किया है, बल्कि समुद्र से भी जमीन निकालने की कोशिश की है, जिसका सीधा और बुरा असर वन्य जीवों, चारागाहों और समुद्री पारिस्थितिक तंत्र पर पड़ता है। ज़्यादा अनाज पैदा करने के लिए रासायनिक खाद और कीटनाशक दवाओं का उपयोग करके न केवल जमीन को खेती के लिए बेकार किया है, बल्कि इन रसायनों को लगातार ज़मीन के नीचे के पानी में मिलाकर उसे दूषित भी किया है। फसलों के ज़्यादा उत्पादन के लिए लगातार ज़मीन के नीचे के पानी का उपयोग करने से भूजल का स्तर गिर गया है, जिससे राजस्थान, मध्यप्रदेश जैसे कई इलाकों में पीने के पानी की कमी हो गई है।
3. खनन क्रियाओं के प्रतिकूल प्रभाव – औद्योगिक और तकनीकी तरक्की के साथ खनन की प्रक्रिया भी बढ़ी है, लेकिन इससे कई पर्यावरणीय संकट पैदा हुए हैं। खनन की प्रक्रिया में बड़े इलाके में जमीन खोदी जाती है, जिससे जमीन की सतह पर बड़े गड्ढे बन जाते हैं और उस क्षेत्र की प्राकृतिक वनस्पति और जीव-जंतु खत्म हो जाते हैं। लाखों वर्ग किलोमीटर जमीन बेकार हो जाती है। भू-स्खलन की घटनाएँ भी बढ़ जाती हैं। खनन के लिए ज़मीन के नीचे किए जाने वाले विस्फोटों से हवा में धूल के कणों की मात्रा बढ़ जाती है, जिसका सीधा और बुरा असर वहाँ के निवासियों के स्वास्थ्य पर पड़ता है। इससे ऐसे क्षेत्रों के पारिस्थितिक तंत्र में असंतुलन पैदा हो जाता है।
4. प्राकृतिक आपदाओं के प्रतिकूल प्रभाव – इंसान की गतिविधियों के कारण बाढ़, सूखा, अकाल, भूस्खलन जैसी प्राकृतिक आपदाएँ बढ़ गई हैं। नदियों पर बड़े बांध बनाने से भूकंपीय गतिविधियाँ बढ़ी हुई देखी गई हैं। महाराष्ट्र में आए लातूर भूकंप के लिए कोयना बांध को भी जिम्मेदार माना गया है। 1980 के दशक में दुनिया में प्राकृतिक आपदाओं के कारण औसतन दो अरब डॉलर की संपत्ति का नुकसान हुआ, जबकि 1990 के दशक में यह औसत बढ़कर 12 अरब डॉलर हो गया। 26 दिसंबर, 2004 को सुनामी लहरों के कारण दो लाख से ज़्यादा लोग मारे गए। अंडमान-निकोबार तट पर समुद्र तल की ऊँचाई बढ़ गई है। इसलिए, यह साफ है कि प्राकृतिक आपदाओं से पारिस्थितिक तंत्र में असंतुलन पैदा होता है।
5. औद्योगीकरण के प्रतिकूल प्रभाव – औद्योगीकरण के कारण पर्यावरण प्रदूषण ज़्यादा बढ़ा है। औद्योगिक इकाइयों से जल और वायु प्रदूषण में वृद्धि हो रही है। इन इकाइयों से कई तरह की जहरीली गैसें लगातार हवा में मिल रही हैं। औद्योगिक इकाइयों से निकलने वाला रासायनिक कचरा और तरल पदार्थ नदियों और भूजल को दूषित कर रहा है। औद्योगिक क्षेत्रों से निकलने वाली जहरीली गैसों के प्रभाव से ओजोन परत में कमी और अम्लीय वर्षा जैसी स्थितियाँ पैदा हो गई हैं।
6. जलवायु परिवर्तन के प्रतिकूल प्रभाव – इंसान द्वारा की गई जंगलों की कटाई, औद्योगीकरण और परमाणु शक्ति के उपयोग के कारण जलवायु परिवर्तन की प्रक्रिया हो रही है। बारिश की अनियमितता, तापमान में वृद्धि, ओजोन परत में कमी आदि जलवायु परिवर्तन के अलग-अलग रूप हैं।
In simple words: इंसान की गतिविधियों जैसे खेती, खनन, उद्योग और जंगलों की कटाई से प्रदूषण, प्राकृतिक आपदाएं और जलवायु परिवर्तन बढ़ गया है, जिससे पारिस्थितिकी तंत्र को बहुत नुकसान हो रहा है।
🎯 Exam Tip: मानव द्वारा पर्यावरण को प्रभावित करने वाले मुख्य कारकों को सूचीबद्ध करें और प्रत्येक कारक के नकारात्मक प्रभावों को उदाहरणों के साथ समझाएं।
Question 3. जलवायु परिवर्तन के प्रतिकूल प्रभाव को स्पष्ट कीजिए।
Answer: जलवायु किसी भी पारिस्थितिक तंत्र को नियंत्रित करती है। औद्योगिक क्रांति के बाद से इंसान की कई गतिविधियों के कारण जलवायु में बदलाव हो रहे हैं।
(ii) औद्योगीकरण – औद्योगिक इकाइयों से निकलने वाली जहरीली गैसें न केवल हवा को प्रदूषित करती हैं, बल्कि इनके प्रभावों से ओजोन परत पतली होने लगती है। ओजोन परत सूरज से आने वाली खतरनाक पराबैंगनी और अवरक्त किरणों को पृथ्वी की सतह तक पहुँचने से रोकती है। जहरीली गैसों के कारण दुनिया में त्वचा और साँस के रोगियों की संख्या में बहुत ज़्यादा वृद्धि हुई है।
(iii) अणुशक्ति का आविष्कार – इंसान का सबसे विनाशकारी वैज्ञानिक आविष्कार परमाणु बम की खोज है, जिसके ज़मीन के नीचे या समुद्र में किए जाने वाले विस्फोटों से जलवायु प्रभावित होती है। पोकरण में हुए विस्फोट के बाद बाड़मेर क्षेत्र में ज़्यादा बारिश होना इसका साफ सबूत है।
इंसान वैज्ञानिक तरक्की के नाम पर जो कुछ कर रहा है, उससे जलवायु तंत्र सीधे तौर पर और पारिस्थितिक तंत्र पर अप्रत्यक्ष तौर पर प्रभावित हो रहा है।
6 से 17 दिसंबर 2004 तक ब्यूनस आयर्स में जलवायु परिवर्तन से जुड़ी एक बैठक में मौसम में हो रहे परिवर्तनों और इनके कारणों को पता करके उन्हें नियंत्रित करने के प्रयासों पर कोई सहमति नहीं बन पाई। इसके पीछे विकसित देश जैसे संयुक्त राज्य अमेरिका, सोवियत संघ, इटली आदि जिम्मेदार हैं। यही नहीं, सऊदी अरब, ओमान, कतर जैसे देश भी कार्बन उत्सर्जन को रोकने के खिलाफ हैं, क्योंकि ऐसा करने से उनकी अर्थव्यवस्था को नुकसान हो सकता है।
आज दुनिया के हर देश में मौसम का व्यवहार असामान्य हो रहा है। ऐसा लगता है जैसे बारिश का कोई तय मौसम नहीं रहा। बर्फबारी के लिए कोई तय जगह नहीं रही, क्योंकि दुबई में बर्फबारी हो चुकी है। फूलों के खिलने का कोई तय मौसम नहीं रहा है, गर्मी का मौसम कब शुरू होगा और तापमान कितनी ऊँचाई तक जाएगा, यह तय करना भी संभव नहीं हो पा रहा है। मौसम के इस असामान्य व्यवहार का मुख्य कारण वैश्विक तापमान में वृद्धि है। इंटरगवर्नमेंटल मैनुअल ऑन क्लाइमेट चेंज ने ग्लोबल वार्मिंग को लेकर गंभीर चेतावनी दी है कि अगर इसे नहीं रोका गया तो बड़ी संख्या में तूफान और बाढ़ आएंगे। गर्मी बढ़ेगी और लू व गर्म हवा के थपेड़ों से मरने वालों की संख्या भी बढ़ेगी। इसे कम करने का एक ही तरीका है कि ग्रीनहाउस गैसों का उत्सर्जन 1990 के स्तर से 50 से 70 प्रतिशत तक कम किया जाए।
जून 2004 में भारत सरकार ने क्लाइमेट चेंज पर पहली राष्ट्रीय संचार रिपोर्ट जारी की, जिसमें पहली बार ग्रीनहाउस गैसों के उत्सर्जन और उनके प्रभाव के बारे में ज़्यादा जानकारी दी गई। इस रिपोर्ट के अनुसार, पिछले 100 सालों में औसत तापमान में 0.4 डिग्री सेल्सियस की दर से वृद्धि के कारण देश के पश्चिमी, उत्तरी-पश्चिमी भाग और उत्तरी आंध्र प्रदेश में बारिश में 10-12 प्रतिशत की बढ़ोतरी हुई है।
In simple words: औद्योगीकरण और परमाणु शक्ति के कारण जलवायु परिवर्तन हो रहा है, जिससे ओजोन परत पतली हो रही है, तापमान बढ़ रहा है और मौसम असामान्य हो गया है।
🎯 Exam Tip: जलवायु परिवर्तन के कारणों (मानवीय गतिविधियों) और परिणामों (असामान्य मौसम, आपदाएं) को स्पष्ट रूप से बताएं।
Question 4. पारिस्थितिकीय संतुलन के लिए आवश्यक स्थितियों का वर्णन कीजिए। अथवा पारिस्थितिकीय संतुलन को बनाये रखने हेतु किन दशाओं का संतुलित होना आवश्यक है? स्पष्ट कीजिए।
Answer: पारिस्थितिकीय संतुलन के लिए आवश्यक स्थितियाँ निम्नानुसार हैं:
(ii) प्रकृति में संतुलन की व्यवस्था - प्रकृति में जैविक समुदाय और पर्यावरण के बीच संतुलन बनाए रखने के लिए नीचे दी गई व्यवस्थाएँ होती हैं:
(क) प्रतिस्पर्धा – जीवों के बीच प्रतिस्पर्धा उनकी आबादी को नियंत्रित करने में मदद करती है। आमतौर पर, पारिस्थितिक तंत्र में भोजन के स्रोत सीमित होते हैं। भोजन पाने के लिए जीवों में आपसी संघर्ष होता है। शिकारी, अपने शिकार की संख्या को नियंत्रित करते हैं। इसी तरह, शिकार भी अपनी उपलब्धता के आधार पर शिकारियों की संख्या को नियंत्रित करता है।
(ख) पारिस्थितिक तंत्र/परितंत्र – यह अजैविक (जैसे जल, वायु, भूमि और मौसम) और जैविक (जीवित जीव) घटकों से मिलकर बनता है। पारिस्थितिक तंत्र के ये अजैविक और जैविक घटक आपस में जुड़े रहते हैं और तंत्र का संतुलन बनाए रखते हैं। हर जीव प्रजाति अपनी जीवनशैली से एक खास भूमिका निभाती है, जिसे निकेत कहते हैं। संक्षेप में, निकेत किसी प्रजाति की पारिस्थितिक भूमिका होती है और पारिस्थितिक तंत्रों के बीच ऊर्जा और पदार्थों के स्थानांतरण में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। प्रजाति अपनी कार्यशैली से पारिस्थितिक तंत्र को स्थिरता/संतुलन प्रदान करती है। चाहे प्रजाति पौधों की हो या जानवरों की, पारिस्थितिक तंत्र के लिए उसका काम महत्वपूर्ण होता है। हर प्रजाति खाद्य-जाल और ऊर्जा प्रवाह के माध्यम से प्राकृतिक संतुलन बनाए रखती है। हर उच्च क्रम का उपभोक्ता अपने से निचले क्रम के जीवों को खाकर जैव भार और संख्या के पिरामिड को संतुलित रखता है, जिससे जैव नियंत्रण के माध्यम से पारिस्थितिकीय व्यवस्था अपने आप नियंत्रित होती है।
(ग) व्यवहार – कुछ जीवों की जनसंख्या उनके व्यवहार से प्रभावित होती है।
(iv) कुंजी-शिला (की स्टोन) जातियों की प्रकृति संतुलन में भूमिका – "कुंजी-शिला जातियाँ, ऐसी प्रजातियाँ हैं जो किसी खास क्षेत्र के पारिस्थितिकी तंत्र (Ecosystem) को सबसे ज़्यादा प्रभावित करती हैं।"
कुंजी-शिला जातियाँ पारिस्थितिकी तंत्र को स्थिरता देती हैं और इनकी अनुपस्थिति में ऐसे बदलाव होते हैं जिससे पारिस्थितिकी तंत्र का स्वरूप पूरी तरह बदल जाता है और उसके खत्म होने की संभावना भी बनी रहती है। इस तरह, पारिस्थितिकी तंत्र में कुंजी-शिला जातियों की भूमिका बहुत महत्वपूर्ण होती है।
मुख्य शिकारी जातियाँ कुंजी-शिला जातियाँ होती हैं और ये पारिस्थितिक समुदाय पर अपना प्रभाव डालती हैं। शिकारियों की संख्या में बढ़ोतरी यह बताती है कि वे शिकार (Prey) प्रजातियों को अपने भोजन के रूप में उपयोग करके उनकी संख्या को नियंत्रित रखती हैं। अगर शिकारियों को खत्म कर दिया जाए तो शाकाहारी वन्य जीवों की संख्या इतनी ज़्यादा बढ़ जाएगी कि वे जंगल के सभी पेड़-पौधों को खा जाएंगे और अंततः जंगल पूरी तरह से खत्म हो जाएंगे। इसके परिणामस्वरूप बारिश कम होगी, फसलें खराब होंगी और इंसानों को आर्थिक नुकसान होगा। इस तरह, यह तथ्य उजागर होता है कि वन्य जीव प्रकृति के संतुलन में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।
In simple words: प्रकृति में संतुलन बनाए रखने के लिए जीवों के बीच प्रतिस्पर्धा, पारिस्थितिक तंत्र के जैविक-अजैविक घटकों का आपसी तालमेल, जीवों का व्यवहार और कुंजी-शिला प्रजातियों की उपस्थिति जरूरी है।
🎯 Exam Tip: पारिस्थितिक संतुलन की स्थितियों को समझाते समय, प्रत्येक स्थिति की परिभाषा और पारिस्थितिक तंत्र में उसकी भूमिका को स्पष्ट करें।
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