RBSE Solutions Class 11 Physical Geography Chapter 19 महासागर उच्चावच, तापमान एवं लवणत

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Class 11 Geography Chapter 19 महासागर उच्चावच, तापमान एवं लवणत RBSE Solutions PDF

RBSE Class 11 Physical Geography Chapter 19 पाठ्य पुस्तक के अभ्यास प्रश्न

RBSE Class 11 Physical Geography Chapter 19 वस्तुनिष्ठ प्रश्न

 

Question 1. पृथ्वी के लगभग कितने प्रतिशत भाग पर जल मौजूद है?
(a) 29
(b) 67
(c) 71
(d) 81
Answer: (c) 71
In simple words: पृथ्वी की सतह का करीब 71 प्रतिशत हिस्सा पानी से ढका हुआ है।

🎯 Exam Tip: इस तरह के संख्या-आधारित प्रश्नों के लिए, सटीक प्रतिशत याद रखना महत्वपूर्ण है, क्योंकि इसमें छोटे अंतर भी जवाब बदल सकते हैं।

 

Question 3. समुद्र के एक किलोग्राम जल में लवणता पाई जाती है-
(a) 35 ग्राम
(b) 45 ग्राम
(c) 15 ग्राम
(d) 25 ग्राम
Answer: (a) 35 ग्राम
In simple words: एक किलोग्राम समुद्री पानी में औसत 35 ग्राम नमक होता है।

🎯 Exam Tip: यह एक मानक मान है; इसे याद रखें क्योंकि यह समुद्री विज्ञान में एक बुनियादी तथ्य है।

 

Question 4. मेरियाना ट्रेन्च कहाँ पर स्थित है?
(a) प्रशान्त महासागर
(b) हिन्द महासागर
(c) अटलांटिक महासागर
(d) भूमध्य सागर
Answer: (a) प्रशान्त महासागर
In simple words: मेरियाना ट्रेन्च, जो दुनिया का सबसे गहरा समुद्री गर्त है, प्रशांत महासागर में स्थित है।

🎯 Exam Tip: भौगोलिक विशेषताओं और उनके स्थानों को याद करते समय मानचित्र का उपयोग करें, जिससे उनकी स्थिति को बेहतर ढंग से समझा जा सके।

 

Question 5. महासागरीय जल को उष्मा प्राप्त होती है-
(a) सूर्य से
(b) चन्द्रमा से
(c) गर्म धाराओं से
(d) स्वयं से
Answer: (a) सूर्य से
In simple words: महासागरों का पानी मुख्य रूप से सूर्य की रोशनी से गरम होता है।

🎯 Exam Tip: महासागरीय तापमान को प्रभावित करने वाले प्राथमिक स्रोत को पहचानना महत्वपूर्ण है।

RBSE Class 11 Physical Geography Chapter 19 अतिलघुत्तरात्मक प्रश्न

 

Question 6. मेरियाना ट्रेन्च किस महासागर में है?
Answer: मेरियाना ट्रेन्च प्रशांत महासागर में स्थित है। यह दुनिया का सबसे गहरा ज्ञात समुद्री गर्त है।
In simple words: मेरियाना ट्रेन्च प्रशांत महासागर में है, जो पृथ्वी पर सबसे गहरा समुद्री स्थान है।

🎯 Exam Tip: सबसे गहरे या सबसे ऊंचे स्थानों से जुड़े विशिष्ट महासागरों या महाद्वीपों को हमेशा याद रखें।

 

Question 8. उच्चावच किसे कहते हैं?
Answer: पृथ्वी की सतह पर मौजूद अलग-अलग प्राकृतिक आकृतियों, जैसे पहाड़, पठार और मैदान को उच्चावच कहते हैं। यह शब्द पृथ्वी की सतह पर आकार और बनावट में असमानताओं और विभिन्नताओं को बताने के लिए इस्तेमाल होता है।
In simple words: पृथ्वी की सतह पर दिखने वाली अलग-अलग प्राकृतिक आकृतियों, जैसे पहाड़ और मैदान को उच्चावच कहते हैं।

🎯 Exam Tip: उच्चावच की परिभाषा में मुख्य भौतिक विशेषताओं जैसे पहाड़, पठार और मैदान को शामिल करना सुनिश्चित करें।

 

Question 9. महासागरीय जल की औसत लवणता कितनी होती है?
Answer: महासागरीय जल की औसत लवणता लगभग 35 प्रति हजार होती है, जिसका मतलब है कि एक किलोग्राम समुद्री जल में 35 ग्राम लवण घुला हुआ होता है। यह एक महत्वपूर्ण समुद्री माप है।
In simple words: समुद्री पानी में औसत 35 ग्राम नमक प्रति किलोग्राम पानी होता है।

🎯 Exam Tip: "प्रति हजार" इकाई को "प्रतिशत" (%) के साथ भ्रमित न करें; यह समुद्री जल में लवणता को मापने की एक विशिष्ट इकाई है।

 

Question 10. महासागरीय जल में लवणता कहाँ से प्राप्त होती है?
Answer: महासागरीय जल में लवणता मुख्य रूप से नदियों से प्राप्त होती है, जो हर साल जमीन से लगभग 16 करोड़ टन नमक समुद्र में लाती हैं। इसके अलावा, लहरों, हवाओं और ज्वालामुखी के फटने से भी समुद्री जल में नमक मिलता है।
In simple words: समुद्री पानी में नमक नदियों, लहरों, हवाओं और ज्वालामुखी से आता है।

🎯 Exam Tip: लवणता के मुख्य स्रोतों को सूचीबद्ध करें, जिसमें नदियों का योगदान सबसे महत्वपूर्ण है।

RBSE Class 11 Physical Geography Chapter 19 लघुत्तरात्मक प्रश्न

 

Question 11. प्रशान्त महासागर की स्थलाकृतियाँ बताइए।
Answer: प्रशांत महासागर दुनिया का सबसे बड़ा महासागर है, जो पृथ्वी के लगभग एक तिहाई हिस्से पर फैला हुआ है। यह पूर्व से पश्चिम में 18000 किलोमीटर और उत्तर से दक्षिण में 16740 किलोमीटर तक फैला हुआ एक त्रिभुजाकार महासागर है। इसमें कई तरह की स्थलाकृतियाँ मिलती हैं, जैसे कि इसके किनारों पर ज्वालामुखी पर्वत श्रृंखलाएँ, भूकंप-प्रभावित क्षेत्र और द्वीपों के समूह। इस महासागर के लगभग 20 हजार द्वीपों को तीन मुख्य भागों में बांटा गया है: मेलानेशिया, माइक्रोनेशिया और पोलिनेशिया। प्रशांत महासागर में कई गहरे बेसिन, लंबी पर्वत श्रृंखलाएँ, पठार, ढलान और ऊंचे चबूतरे भी हैं।
In simple words: प्रशांत महासागर दुनिया का सबसे बड़ा है और इसमें कई भू-आकृतियाँ हैं, जैसे ज्वालामुखी, भूकंपीय क्षेत्र, द्वीप समूह (जैसे मेलानेशिया), और समुद्र के नीचे बेसिन, रिज और पठार।

🎯 Exam Tip: प्रशांत महासागर की प्रमुख विशेषताओं (आकार, आकार, मुख्य स्थलाकृतियाँ और द्वीप समूह) को शामिल करें।

 

Question 12. महासागरीय तली को कितने उच्चावंचों में बाँटा गया है?
Answer: महासागरीय तली को चार मुख्य उच्चावचों में बांटा गया है:
1. महाद्वीपीय मग्न तट (Continental Shelf)
2. महाद्वीपीय ढाल (Continental Slope)
3. गहरे सागरीय मैदान (Abyssal Plains)
4. महासागरीय गर्त (Oceanic Trenches)

इन उच्चावचों का वर्णन इस प्रकार है:
1. महाद्वीपीय मग्न तट: ये समुद्र के डूबे हुए किनारे होते हैं जो महाद्वीपों का हिस्सा हैं। इनकी अधिकतम गहराई आमतौर पर 100 फैदम होती है और ढलान 1° से 3° तक होता है। कम ढलान वाले तट चौड़े होते हैं, जबकि अधिक ढलान वाले तट पतले होते हैं। इनकी औसत चौड़ाई 75 किमी है। ये महासागरों के कुल क्षेत्रफल का 7.6% हिस्सा बनाते हैं। सूर्य की किरणें यहाँ आसानी से पहुँचती हैं, जिससे वनस्पति और जीवों का विकास होता है। नदियों द्वारा लाई गई गाद भी यहाँ जमा होती है, जिससे यह क्षेत्र मानव के लिए बहुत उपयोगी होता है। यहाँ कई खनिज, खाद्य पदार्थ, मछलियाँ, तेल और गैस पाए जाते हैं।
2. महाद्वीपीय ढाल: महाद्वीपीय मग्न तट के बाद समुद्री तल का ढलान अचानक तेज हो जाता है। इन ढलानों की खास बात यह है कि ये 3600 मीटर से 9100 मीटर तक गहरे होते हैं। यहाँ बारीक मिट्टी (कॉप मिट्टी) का जमाव बहुत कम होता है। प्रकाश की कमी और पोषक तत्वों के अभाव के कारण यहाँ वनस्पति और समुद्री जीवों की संख्या कम होती है। ये महासागरों के कुल क्षेत्रफल के 8.5% हिस्से पर फैले हैं और इनका ढलान 2° से 5° तक होता है।
3. गहरे सागरीय मैदान: महाद्वीपीय ढाल के खत्म होने के बाद ढलान बहुत कम हो जाता है और गहरे समुद्री मैदान शुरू हो जाते हैं, जिन्हें महासागरीय नितल भी कहते हैं। ये महासागरों के विशाल, समतल क्षेत्र होते हैं, जिनका ढलान बहुत हल्का होता है। यहाँ कटाव (अपरदन) की प्रक्रियाएं कम होती हैं।
4. महासागरीय गर्त: ये महासागरों के सबसे गहरे भाग होते हैं। आकार के आधार पर इन्हें दो वर्गों में बांटा गया है: 1. खाइयाँ और 2. द्रोणियाँ। समुद्री तल पर स्थित तेज ढलान वाले, लंबे, पतले और गहरे गर्तों को खाई या गर्त कहते हैं। ये वलन (फोल्डिंग) या भ्रंशन (फॉल्टिंग) से बनते हैं और इनकी औसत गहराई 5500 मीटर होती है। इन्हें सागरीय केनियन भी कहते हैं।
In simple words: महासागरीय तल को चार मुख्य भागों में बांटा गया है: महाद्वीपीय मग्न तट (जो डूबे हुए किनारे हैं), महाद्वीपीय ढाल (तेज ढलान), गहरे सागरीय मैदान (समतल गहराई वाले क्षेत्र), और महासागरीय गर्त (सबसे गहरे खाइयां)। हर भाग की अपनी बनावट और गहराई है।

🎯 Exam Tip: महासागरीय तली के चारों उच्चावचों के नाम और उनकी मुख्य विशेषताओं को याद रखना महत्वपूर्ण है, खासकर उनकी गहराई और ढलान के बारे में।

 

Question 13. महाद्वीपीय मग्न ढाल क्या हैं?
Answer: महाद्वीपीय मग्न ढाल वह क्षेत्र है जो महाद्वीपीय मग्न तट के ठीक आगे होता है, जहाँ समुद्री तल का ढलान अचानक बहुत तेज हो जाता है। इन ढलानों की एक खास विशेषता यह है कि ये 3600 मीटर से 9100 मीटर की गहराई तक फैले होते हैं। इन क्षेत्रों में बारीक मिट्टी का जमाव बहुत कम होता है। प्रकाश की कमी और पोषक तत्वों की अनुपलब्धता के कारण यहाँ वनस्पति और समुद्री जीवों की मात्रा कम पाई जाती है। ये ढलान महासागरों के कुल क्षेत्रफल का 8.5 प्रतिशत हिस्सा घेरते हैं और इनका ढलान 2° से 5° तक होता है।
In simple words: महाद्वीपीय मग्न ढाल, महाद्वीपीय मग्न तट के बाद का वो हिस्सा है जहाँ समुद्र का तल अचानक गहरा हो जाता है। यहाँ कम जीव-जंतु होते हैं और यह बहुत गहरा होता है।

🎯 Exam Tip: महाद्वीपीय ढाल की गहराई, ढलान और वहाँ जीवन की कमी जैसी विशिष्ट विशेषताओं पर ध्यान दें।

 

Question 14. तापमान को प्रभावित करने वाले कारक कौन-कौन से हैं?
Answer: महासागरीय तापमान को प्रभावित करने वाले मुख्य कारक इस प्रकार हैं:
1. अक्षांश
2. जल और स्थल के वितरण में असमानता
3. दिन की अवधि
4. वायुमंडल की स्वच्छता
5. सूर्य से पृथ्वी की दूरी
6. सौर कलंकों की संख्या
7. समुद्री धाराएँ
In simple words: समुद्र के पानी के तापमान को अक्षांश, जमीन और पानी का वितरण, दिन की लंबाई, हवा की सफाई, सूर्य से दूरी, सौर कलंक और समुद्री धाराएँ जैसे कारक प्रभावित करते हैं।

🎯 Exam Tip: महासागरीय तापमान को प्रभावित करने वाले सभी कारकों को सूचीबद्ध करें, और चाहें तो उनमें से प्रत्येक का एक-दो वाक्यों में संक्षिप्त विवरण भी दें।

 

Question 15. लवणता को प्रभावित करने वाले कारक बताइए।
Answer: महासागरीय लवणता को प्रभावित करने वाले कारक निम्नलिखित हैं:
1. वाष्पीकरण: वाष्पीकरण की मात्रा कम या ज्यादा होने से लवणता नियंत्रित होती है। जितना अधिक वाष्पीकरण होता है, लवणता उतनी ही बढ़ती है। इसके लिए हवा में नमी की कमी जरूरी है। कर्क और मकर रेखाओं के पास, जहाँ तापमान और वाष्पीकरण अधिक होता है, वहाँ लवणता अधिक होती है।
2. वर्षा द्वारा जल की आपूर्ति: साफ पानी की अधिक मात्रा से लवणता कम हो जाती है। जिन क्षेत्रों में बहुत अधिक वर्षा होती है, वहाँ लवणता कम पाई जाती है। भूमध्यरेखीय क्षेत्रों में उच्च तापमान के बावजूद भारी वर्षा के कारण लवणता कम होती है। इसके विपरीत, अयनवर्ती क्षेत्रों में कम वर्षा और उच्च तापमान के कारण लवणता अधिक होती है। ध्रुवीय और उपध्रुवीय क्षेत्रों में बर्फबारी के कारण बने ग्लेशियर समुद्रों में बर्फ पहुँचाते रहते हैं, जो शीतोष्ण क्षेत्रों में पिघलकर समुद्र की लवणता को कम कर देते हैं।
3. नदी के जल का आगमन: नदियाँ अपने साथ लवण लाती हैं, फिर भी वे इतना साफ पानी लाती हैं कि उनके मुहाने पर लवणता कम हो जाती है। उदाहरण के लिए, गंगा, कांगो, नाइजर, अमेज़न, और सेंट लॉरेंस जैसी नदियों के मुहाने पर लवणता कम होती है।
4. प्रचलित पवनें: गर्म और शुष्क क्षेत्रों में, महासागरों की ओर चलने वाली तेज हवाओं से वाष्पीकरण अधिक होता है। इसलिए, महासागरों के ऐसे हिस्सों में लवणता अधिक पाई जाती है। इसके विपरीत, ठंडी और नम हवाओं से वाष्पीकरण कम होता है, जिससे ऐसे क्षेत्रों में लवणता कम होती है।
5. महासागरीय धाराएँ: कम लवणता वाले क्षेत्रों से बहने वाली धाराएँ अपने साथ कम नमक वाला पानी लाती हैं और रास्ते में लवणता को कम करती हैं। इसके विपरीत, अधिक लवणता वाले क्षेत्रों से बहने वाली धाराएँ अपने मार्ग पर लवणता को बढ़ाती हैं।
6. महासागरीय जल का संचरण: महासागरीय जल का घूमना-फिरना भी लवणता को तय करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है।
In simple words: समुद्र के पानी की लवणता वाष्पीकरण, वर्षा, नदियों के पानी, हवाओं और समुद्री धाराओं जैसे कई कारकों से प्रभावित होती है। अधिक वाष्पीकरण और कम वर्षा से लवणता बढ़ती है, जबकि अधिक वर्षा और नदी का पानी लवणता को कम करता है।

🎯 Exam Tip: लवणता को प्रभावित करने वाले प्रत्येक कारक को संक्षेप में परिभाषित करें और बताएँ कि वे लवणता को कैसे बढ़ाते या घटाते हैं।

RBSE Class 11 Physical Geography Chapter 19 निबन्धात्मक प्रश्न

 

Question 16. उच्चावच को समझाते हुए महासागरीय तली के उच्चावचों का वर्णन कीजिए।
Answer: पृथ्वी की सतह पर मौजूद प्राकृतिक आकृतियाँ, जैसे पहाड़, पठार और मैदान, को उच्चावच कहते हैं। यह शब्द पृथ्वी की सतह की बनावट में मौजूद विभिन्नताओं और असमानताओं को समझाने के लिए इस्तेमाल किया जाता है। महासागरीय तली के उच्चावच भी महाद्वीपों की तरह ही मुख्य उच्चावच हैं। महासागरीय क्षेत्रों में पाए जाने वाले उच्चावचों को चार मुख्य भागों में बांटा गया है:
1. महाद्वीपीय मग्न तट (Continental Shelf): ये महाद्वीपों के डूबे हुए किनारे होते हैं जो समुद्र के अंदर होते हैं। इनकी अधिकतम गहराई आमतौर पर 100 फैदम होती है और ढलान 1° से 3° तक होता है। कम ढलान वाले मग्न तट चौड़े होते हैं, जबकि अधिक ढलान वाले तट पतले होते हैं। इनकी औसत चौड़ाई 75 किमी है। ये महासागरों के कुल क्षेत्रफल का 7.6% हिस्सा बनाते हैं। सूर्य की किरणें यहाँ आसानी से पहुँचती हैं, जिससे वनस्पति और समुद्री जीव तेजी से बढ़ते हैं। नदियों द्वारा लाई गई गाद भी यहीं जमा होती है, जिससे यह क्षेत्र मानव के लिए बहुत लाभदायक होता है। यहाँ कई तरह के खनिज, खाद्य पदार्थ, मछली, खनिज तेल और गैस पाए जाते हैं।
2. महाद्वीपीय ढाल (Continental Slope): महाद्वीपीय मग्न तट के आगे समुद्री तल का ढलान अचानक बहुत तेज हो जाता है। इन ढलानों की सबसे बड़ी विशेषता यह है कि ये 3600 मीटर से 9100 मीटर की गहराई तक फैले होते हैं। यहाँ महीन मिट्टी (कॉप मिट्टी) का जमाव बहुत कम होता है। प्रकाश की कमी और पोषक तत्वों की अनुपलब्धता के कारण यहाँ वनस्पति और समुद्री जीवों की मात्रा कम पाई जाती है। ये महासागरों के कुल क्षेत्रफल के 8.5% हिस्से पर फैले हैं और इनका ढलान 2° से 5° तक होता है।
3. गहरे सागरीय मैदान (Abyssal Plains): महाद्वीपीय ढाल के खत्म होने के बाद ढलान एकदम कम हो जाता है और गहरे समुद्री मैदान शुरू हो जाते हैं, जिन्हें महासागरीय नितल या मैदान भी कहते हैं। ये महासागरों के विशाल, समतल क्षेत्र होते हैं, जिनका ढलान बहुत हल्का होता है। यहाँ कटाव (अपरदन) की प्रक्रियाएं कम होती हैं।
4. महासागरीय गर्त (Oceanic Trenches): महासागरीय गर्त का मतलब है महासागरों के तल पर पाए जाने वाले सबसे गहरे हिस्से। आकार के आधार पर इन्हें दो वर्गों में बांटा गया है: खाइयाँ और द्रोणियाँ। समुद्री तल पर स्थित तेज ढलान वाले, लंबे, पतले और गहरे गर्तों को खाई या गर्त कहते हैं। ये वलन (फोल्डिंग) या भ्रंशन (फॉल्टिंग) से बनते हैं और इनकी औसत गहराई 5500 मीटर होती है। इन्हें सागरीय केनियन भी कहते हैं।
In simple words: उच्चावच पृथ्वी की सतह पर पहाड़ों, पठारों और मैदानों जैसी प्राकृतिक बनावट को कहते हैं। महासागरीय तल में चार मुख्य उच्चावच होते हैं: महाद्वीपीय मग्न तट (डूबे हुए किनारे जो जीवन से भरपूर होते हैं), महाद्वीपीय ढाल (तेज ढलान वाले गहरे क्षेत्र), गहरे सागरीय मैदान (समतल, विशाल क्षेत्र), और महासागरीय गर्त (सबसे गहरे खाइयां)।

🎯 Exam Tip: उच्चावच की परिभाषा को स्पष्ट रूप से समझाएँ और महासागरीय तली के चार मुख्य भागों का वर्णन उनकी गहराई, ढलान और प्रमुख विशेषताओं के साथ करें।

 

Question 17. महासागरीय जल के तापमान को प्रभावित करने वाले कारकों का वर्णन करें।
Answer: महासागरीय जल के तापमान को नियंत्रित करने वाले कारक इस प्रकार हैं:
1. अक्षांश: भूमध्य रेखा से ध्रुवों की ओर जाने पर समुद्री सतह का तापमान कम होता जाता है। ऐसा इसलिए होता है क्योंकि सूर्य की किरणें ध्रुवों की ओर तिरछी पड़ती हैं, जिससे वहाँ सूर्यताप (सूर्य से मिलने वाली गर्मी) की मात्रा कम हो जाती है।
2. जल और स्थल के वितरण में असमानता: उत्तरी गोलार्ध में जमीन की अधिकता और दक्षिणी गोलार्ध में पानी की अधिकता के कारण तापमान के वितरण में भिन्नता पाई जाती है।
3. दिन की अवधि: दिन की लंबाई अधिक होने पर सूर्यताप ज्यादा मिलता है, जिससे समुद्री जल अपेक्षाकृत अधिक गरम होता है। इसके विपरीत, दिन की अवधि कम होने पर समुद्री जल को कम सूर्यताप मिलता है।
4. वायुमंडल की स्वच्छता: जब वायुमंडल साफ होता है, तो सूर्यताप ज्यादा मात्रा में समुद्री तल तक पहुँचता है और समुद्री जल को अधिक गरम करता है। जब वायुमंडल में धूलकण या अन्य कण होते हैं, तो सूर्यताप कम मिलता है क्योंकि वे सूर्य की गर्मी को सोख लेते हैं।
5. सूर्य से पृथ्वी की दूरी: जब पृथ्वी सूर्य के सबसे करीब होती है, तो सूर्यताप अधिक मिलता है, जिससे महासागरीय जल भी अधिक गरम होता है।
6. सौर कलंकों की संख्या: जब सूर्य पर सौर कलंकों की संख्या अधिक होती है, तो सूर्यताप भी अधिक मिलता है; जब ये संख्या कम होती है, तो सूर्यताप भी कम मिलता है। सौर कलंकों का संबंध सूर्य की चुंबकीय शक्ति से है।
7. समुद्री धाराएँ: समुद्री धाराएँ अपने बहाव क्षेत्र के समुद्री तापमान को प्रभावित करती हैं। ठंडी धाराएँ अपने रास्ते में समुद्री जल के तापमान को कम करती हैं, जबकि गर्म धाराएँ तापमान को बढ़ाती हैं।
In simple words: समुद्र के पानी का तापमान कई चीजों से बदलता है, जैसे आप भूमध्य रेखा से कितने दूर हैं (अक्षांश), जमीन और पानी कितनी मात्रा में हैं, दिन कितना लंबा है, हवा कितनी साफ है, पृथ्वी सूर्य से कितनी दूर है, सूर्य पर कितने धब्बे हैं, और समुद्री धाराएँ कितनी गर्म या ठंडी हैं।

🎯 Exam Tip: महासागरीय तापमान को प्रभावित करने वाले प्रत्येक कारक का वर्णन संक्षिप्त और स्पष्ट वाक्यों में करें, जिससे उनके प्रभाव को आसानी से समझा जा सके।

 

Question 18. लवणता को समझाते हुए महासागरीय जल में लवणता को प्रभावित करने वाले कारकों को स्पष्ट कीजिए।
Answer: महासागरीय जल में विभिन्न प्रकार के नमक और खनिज पदार्थ घुले होते हैं, जिससे समुद्र का पानी खारा होता है। इसी घुले हुए नमक की मात्रा को लवणता कहते हैं। महासागरीय जल की औसत लवणता लगभग 35 प्रति हजार होती है, जिसका मतलब है कि एक किलोग्राम समुद्री पानी में लगभग 35 ग्राम नमक होता है।

महासागरीय जल में लवणता को प्रभावित करने वाले कारक इस प्रकार हैं:
1. वाष्पीकरण: वाष्पीकरण और लवणता की मात्रा के बीच सीधा संबंध होता है। जितना अधिक वाष्पीकरण होता है, उतनी ही लवणता बढ़ती है। इसके लिए हवा में नमी की कमी जरूरी है। कर्क और मकर रेखाओं के पास, जहाँ तापमान और वाष्पीकरण अधिक होता है, वहाँ लवणता अधिक होती है।
2. वर्षा द्वारा जल की आपूर्ति: साफ पानी की अधिक मात्रा से लवणता कम हो जाती है। जिन क्षेत्रों में बहुत अधिक वर्षा होती है, वहाँ लवणता कम पाई जाती है। भूमध्यरेखीय क्षेत्रों में उच्च तापमान के बावजूद भारी वर्षा के कारण लवणता कम होती है। इसके विपरीत, अयनवर्ती क्षेत्रों में कम वर्षा और उच्च तापमान के कारण लवणता अधिक होती है। ध्रुवीय और उपध्रुवीय क्षेत्रों में बर्फबारी के कारण बने ग्लेशियर समुद्रों में बर्फ पहुँचाते रहते हैं, जो शीतोष्ण क्षेत्रों में पिघलकर समुद्र की लवणता को कम कर देते हैं।
3. नदी के जल का आगमन: नदियाँ अपने साथ लवण लाती हैं, फिर भी वे इतना साफ पानी लाती हैं कि उनके मुहाने पर लवणता कम हो जाती है। उदाहरण के लिए, गंगा, कांगो, नाइजर, अमेज़न, और सेंट लॉरेंस जैसी नदियों के मुहाने पर लवणता कम पाई जाती है।
4. प्रचलित पवनें: गर्म और शुष्क क्षेत्रों में, महासागरों की ओर चलने वाली तेज हवाओं से वाष्पीकरण अधिक होता है। इसलिए, महासागरों के ऐसे हिस्सों में लवणता अधिक पाई जाती है। इसके विपरीत, ठंडी और नम हवाओं से वाष्पीकरण कम होता है, जिससे ऐसे क्षेत्रों में लवणता कम होती है।
5. महासागरीय धाराएँ: कम लवणता वाले क्षेत्रों से बहने वाली धाराएँ अपने साथ कम नमक वाला पानी लाती हैं और रास्ते में लवणता को कम करती हैं। इसके विपरीत, अधिक लवणता वाले महासागरीय क्षेत्रों से चलने वाली धाराएँ अपने मार्ग पर लवणता को बढ़ाती हैं।
6. महासागरीय जल का संचरण: महासागरीय जल का घूमना-फिरना भी लवणता को तय करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है।
In simple words: लवणता का मतलब है समुद्र के पानी में घुले नमक की मात्रा, जो उसे खारा बनाती है। इसे वाष्पीकरण (पानी का भाप बनना), वर्षा (ताजे पानी की आपूर्ति), नदियों का पानी, हवाएं और समुद्री धाराएं जैसे कारक प्रभावित करते हैं।

🎯 Exam Tip: लवणता की परिभाषा को स्पष्ट करें और फिर उसे प्रभावित करने वाले प्रत्येक कारक (जैसे वाष्पीकरण, वर्षा, नदी जल, पवन, और समुद्री धाराएँ) का संक्षिप्त विवरण दें।

RBSE Class 11 Physical Geography Chapter 19 वस्तुनिष्ठ प्रश्न

 

Question 1. सौरमंडल का एक मात्र ग्रह जिस पर जल मौजूद है।
(a) पृथ्वी
(b) बुध
(c) बृहस्पति
(d) शनि
Answer: (a) पृथ्वी
In simple words: पृथ्वी सौरमंडल का एकमात्र ऐसा ग्रह है जहाँ पानी तरल रूप में पाया जाता है।

🎯 Exam Tip: इस तरह के अद्वितीय गुणों वाले ग्रहों के बारे में सामान्य ज्ञान के तथ्य याद रखना महत्वपूर्ण है।

 

Question 2. माउंट एवरेस्ट की ऊँचाई कितनी है?
(a) 6000 मीटर
(b) 7000 मीटर
(c) 8200 मीटर
(d) 8850 मीटर
Answer: (d) 8850 मीटर
In simple words: माउंट एवरेस्ट की ऊंचाई 8850 मीटर है, जो इसे पृथ्वी का सबसे ऊंचा पर्वत शिखर बनाती है।

🎯 Exam Tip: प्रमुख भौगोलिक विशेषताओं की सटीक ऊँचाई या गहराई जैसे संख्या-आधारित तथ्य याद रखें।

 

Question 3. मेरियाना ड्रेन्च की गहराई कितनी है?
(a) 9990 मीटर
(b) 10430 मीटर
(c) 11035 मीटर
(d) 12315 मीटर
Answer: (c) 11035 मीटर
In simple words: मेरियाना ड्रेन्च की गहराई 11035 मीटर है, जो इसे समुद्र का सबसे गहरा हिस्सा बनाती है।

🎯 Exam Tip: सबसे गहरे समुद्री गर्त की सटीक गहराई को याद रखना महत्वपूर्ण है।

 

Question 4. महासागरों की औसत गहराई कितनी है?
(a) 2808 मीटर
(b) 3808 मीटर
(c) 4808 मीटर
Answer: (b) 3808 मीटर
In simple words: दुनिया के सभी महासागरों की औसत गहराई लगभग 3808 मीटर है।

🎯 Exam Tip: महासागरों की औसत गहराई जैसे महत्वपूर्ण संख्यात्मक डेटा को याद रखें।

 

Question 5. विश्व का सबसे बड़ा महासागर कौन-सा है?
(a) प्रशान्त महासागर
(b) आन्ध्र महासागर
(c) हिन्द महासागर
(d) आर्कटिक महासागर
Answer: (a) प्रशान्त महासागर
In simple words: प्रशांत महासागर दुनिया का सबसे बड़ा और सबसे गहरा महासागर है।

🎯 Exam Tip: सबसे बड़े महासागर के नाम और उसके प्रमुख गुणों को याद रखना महत्वपूर्ण है।

 

Question 6. समुद्र की गहराई को मापा जाता है-
(a) नॉटिकल मील में
(b) फैदम में
(c) मीटर में
(d) बैरल में
Answer: (b) फैदम में
In simple words: समुद्र की गहराई को मापने के लिए फैदम नामक इकाई का इस्तेमाल किया जाता है।

🎯 Exam Tip: माप की इकाइयों को सही ढंग से पहचानना महत्वपूर्ण है, खासकर भौगोलिक और समुद्री संदर्भों में।

 

Question 7. सागरीय जल में सर्वाधिक मात्रा में लवणीय पदार्थ मिलता है।
(a) मैग्नेशियम सल्फेट
(b) कैल्शियम सल्फेट
(c) सोडियम क्लोराइड
(d) मैग्नेशियम क्लोराइड
Answer: (c) सोडियम क्लोराइड
In simple words: समुद्र के पानी में सबसे ज्यादा नमक सोडियम क्लोराइड होता है, जिसे हम खाने में इस्तेमाल करते हैं।

🎯 Exam Tip: समुद्री जल में सबसे प्रचुर मात्रा में पाए जाने वाले लवण का नाम याद रखें।

 

Question 8. विश्व में सर्वाधिक लवणता कहाँ मिलती है?
(a) भूमध्य सागर में
(b) मृत सागर में
(c) वॉन झील में
(d) बाल्टिक सागर में
Answer: (c) वॉन झील में
In simple words: तुर्की की वॉन झील में दुनिया में सबसे ज्यादा नमक वाला पानी पाया जाता है।

🎯 Exam Tip: अत्यधिक लवणता वाले स्थानों के बारे में विशिष्ट भौगोलिक तथ्यों को याद रखना महत्वपूर्ण है।

 

Question 10. अटलांटिक महासागर में सतही लवणता कितनी मिलती है?
(a) 33%
(b) 35%
(c) 37%
(d) 40%
Answer: (a) 33%
In simple words: अटलांटिक महासागर में सतह पर पानी का खारापन लगभग 33 प्रति हजार होता है।

🎯 Exam Tip: विभिन्न महासागरों और उनकी सतह लवणता के विशिष्ट आंकड़े याद रखें।

सुमेलन सम्बन्धी प्रश्न

 

Question 1. निम्न में स्तम्भ अ को स्तम्भ ब से सुमेलित कीजिए-

स्तम्भ-अ
(उच्चावच का नाम)
स्तम्भ-ब
(महासागर)
(i) मेरियाना(अ) अटलांटिक महासागर
(ii) रोमांशे(ब) हिन्द महासागर
(iii) सुण्डा(स) आर्कटिक महासागर
(iv) नार्वे सागर(द) प्रशान्त महासागर
Answer: (i) द, (ii) अ, (iii) ब, (iv) स।
In simple words: मेरियाना गर्त प्रशांत महासागर में है, रोमांशे गर्त अटलांटिक महासागर में है, सुण्डा गर्त हिन्द महासागर में है, और नार्वे सागर आर्कटिक महासागर में स्थित है।

🎯 Exam Tip: विशिष्ट समुद्री गर्तों और सागरों को उनके संबंधित महासागरों के साथ सही ढंग से मिलान करना सीखें।

 

Question 2. निम्न में स्तम्भ अ को स्तम्भ ब से सुमेलित कीजिए-

स्तम्भ-अस्तम्भ-ब
(i) काला सागर(अ) 37.5%
(ii) बाल्टिक सागर(ब) 40%
(iii) लाल सागर(स) 238%
(iv) मृत सागर(द) 15%
(v) भूमध्य सागर(य) 18%
Answer: (i) य, (ii) द, (iii) अ, (iv) स, (v) ब।
In simple words: काला सागर की लवणता 18% है, बाल्टिक सागर की 15%, लाल सागर की 37.5%, मृत सागर की 238%, और भूमध्य सागर की 40% है।

🎯 Exam Tip: विभिन्न सागरों की लवणता के प्रतिशत को सही ढंग से मिलान करना सीखें, क्योंकि ये मान अक्सर पूछे जाते हैं।

RBSE Class 11 Physical Geography Chapter 19 अतिलघुत्तरात्मक प्रश्न

 

Question 1. जलमंडल किसे कहते हैं?
Answer: पृथ्वी की सतह का लगभग 71 प्रतिशत हिस्सा पानी से ढका हुआ है। यह पानी सागरों, महासागरों, झीलों और नदियों के रूप में मौजूद है। पृथ्वी पर पाए जाने वाले पानी के इस विशाल भंडार को ही जलमंडल कहते हैं।
In simple words: पृथ्वी पर मौजूद सभी पानी, जैसे समुद्र, झीलें और नदियां, मिलकर जलमंडल बनाते हैं।

🎯 Exam Tip: जलमंडल की परिभाषा में पृथ्वी पर पानी के वितरण (सागर, झील, नदियाँ) और उसके कुल प्रतिशत को शामिल करें।

 

Question 2. जलीय ग्रह किसे व क्यों कहा जाता है?
Answer: पृथ्वी को जलीय ग्रह कहा जाता है क्योंकि यह सौरमंडल का एकमात्र ऐसा ग्रह है जहाँ अब तक पानी के ज्ञात भंडार मिले हैं। पानी जीवन के लिए आवश्यक है, इसलिए पृथ्वी पर जीवन संभव हो पाया है।
In simple words: पृथ्वी को जलीय ग्रह कहते हैं क्योंकि यह सौरमंडल का अकेला ग्रह है जहाँ पानी पाया जाता है।

🎯 Exam Tip: पृथ्वी को "जलीय ग्रह" कहने का कारण स्पष्ट करें, यानी पानी की उपस्थिति और जीवन के लिए उसका महत्व।

 

Question 3. पृथ्वीतल पर सबसे ऊँचा व सबसे नीचा स्थान कौन-सा है?
Answer: पृथ्वी पर सबसे ऊँचा स्थान माउंट एवरेस्ट है, जिसकी ऊँचाई 8850 मीटर है। सबसे नीचा स्थान मेरियाना ट्रेन्च है, जिसकी गहराई 11035 मीटर है।
In simple words: पृथ्वी पर सबसे ऊँचा स्थान माउंट एवरेस्ट है और सबसे गहरा स्थान मेरियाना ट्रेन्च है।

🎯 Exam Tip: पृथ्वी के सबसे ऊँचे और सबसे नीचे स्थान दोनों के नाम और उनकी सटीक ऊँचाई या गहराई को याद रखें।

 

Question 4. क्षेत्रफल के अनुसार महासागरों के बड़े-से-छोटे क्रम में नाम लिखिए।
Answer: क्षेत्रफल के अनुसार महासागरों का बड़े से छोटे क्रम इस प्रकार है:
1. प्रशांत महासागर
2. अटलांटिक महासागर
3. हिंद महासागर
4. दक्षिणी महासागर
5. आर्कटिक महासागर
In simple words: क्षेत्रफल के हिसाब से सबसे बड़े से छोटे महासागर हैं: प्रशांत, अटलांटिक, हिंद, दक्षिणी और आर्कटिक।

🎯 Exam Tip: महासागरों को उनके आकार के अनुसार सही क्रम में याद रखें, यह एक बुनियादी भौगोलिक तथ्य है।

 

Question 6. प्रशान्त महासागर के द्वीपों को किन भागों में बाँटा गया है?
Answer: प्रशांत महासागर में लगभग 20000 द्वीप पाए जाते हैं, जिन्हें मुख्य रूप से तीन भागों में बांटा गया है: मेलानेशिया, माइक्रोनेशिया और पोलिनेशिया। ये तीनों क्षेत्र अपनी सांस्कृतिक और भौगोलिक विशेषताओं के लिए जाने जाते हैं।
In simple words: प्रशांत महासागर के द्वीपों को तीन मुख्य हिस्सों में बांटा गया है: मेलानेशिया, माइक्रोनेशिया और पोलिनेशिया।

🎯 Exam Tip: प्रशांत महासागर के द्वीप समूहों के मुख्य विभाजनों के नाम याद रखें।

 

Question 7. अटलांटिक महासागर की मुख्य विशेषता क्या है?
Answer: अटलांटिक महासागर विश्व का सबसे व्यस्त महासागर है। इसकी मुख्य विशेषता यह है कि इसके दोनों किनारों पर दुनिया के समृद्ध और विकसित देश स्थित हैं, जिससे यह व्यापार और समुद्री गतिविधियों के लिए महत्वपूर्ण बन जाता है।
In simple words: अटलांटिक महासागर दुनिया का सबसे व्यस्त महासागर है क्योंकि इसके दोनों किनारों पर अमीर देश हैं।

🎯 Exam Tip: अटलांटिक महासागर की प्रमुख विशेषता को स्पष्ट करें, खासकर इसके व्यावसायिक महत्व और पड़ोसी देशों के संबंध में।

 

Question 8. अटलांटिक महासागर में शामिल सागर व खाडियों के नाम लिखिए।
Answer: अटलांटिक महासागर में कई महत्वपूर्ण सागर और खाड़ियाँ शामिल हैं। इनमें भूमध्य सागर, उत्तरी सागर, बाल्टिक सागर, कैरेबियन सागर, काला सागर, मैक्सिको की खाड़ी और बिस्के की खाड़ी प्रमुख हैं।
In simple words: अटलांटिक महासागर में भूमध्य सागर, उत्तरी सागर, बाल्टिक सागर, कैरेबियन सागर, काला सागर, मैक्सिको की खाड़ी और बिस्के की खाड़ी जैसी कई सागर और खाड़ियाँ हैं।

🎯 Exam Tip: अटलांटिक महासागर के मुख्य सहायक सागरों और खाड़ियों के नामों को याद रखें।

 

Question 9. अटलांटिक महासागर का उत्तरी व दक्षिणी भाग कितना चौड़ा है?
Answer: अटलांटिक महासागर का उत्तरी भाग लगभग 5400 किलोमीटर चौड़ा है, जबकि इसका दक्षिणी भाग लगभग 9600 किलोमीटर चौड़ा है।
In simple words: अटलांटिक महासागर का उत्तरी हिस्सा 5400 किमी चौड़ा है और दक्षिणी हिस्सा 9600 किमी चौड़ा है।

🎯 Exam Tip: अटलांटिक महासागर के उत्तरी और दक्षिणी भागों की चौड़ाई के विशिष्ट माप याद रखना महत्वपूर्ण है।

 

Question 10. हिन्द महासागर किन स्थलीय भागों से घिरा है?
Answer: हिंद महासागर उत्तर में भारत, पश्चिम में अफ्रीका और दक्षिण-पूर्व में ऑस्ट्रेलिया जैसे स्थलीय भागों से घिरा हुआ है। ये भू-भाग हिंद महासागर के आकार और उसके जल के संचलन को प्रभावित करते हैं।
In simple words: हिंद महासागर उत्तर में भारत, पश्चिम में अफ्रीका और दक्षिण-पूर्व में ऑस्ट्रेलिया से घिरा है।

🎯 Exam Tip: हिंद महासागर की सीमाओं पर स्थित मुख्य महाद्वीपों और देशों को याद रखें।

 

Question 11. आर्कटिक महासागर के बारे में अधिक जानकारी क्यों नहीं मिल पाई है?
Answer: आर्कटिक महासागर के बारे में अधिक जानकारी इसलिए नहीं मिल पाई है क्योंकि यह अत्यधिक ठंडी और बर्फ से ढकी परिस्थितियों के कारण दुर्गम है। यहाँ तक पहुंचना मुश्किल होता है और कम मानवीय गतिविधियां होती हैं, जिससे खोज और अध्ययन में बाधा आती है।
In simple words: आर्कटिक महासागर के बारे में कम जानकारी उसकी अत्यधिक ठंड, बर्फ और कठिन पहुंच के कारण है।

🎯 Exam Tip: आर्कटिक जैसे ध्रुवीय क्षेत्रों में अनुसंधान की चुनौतियों को स्पष्ट करें, खासकर अत्यधिक मौसम और दुर्गमता के संदर्भ में।

 

Question 13. महासागरीय नितल में मिलने वाले उच्चावचों के लिए कौन-सी क्रियाएँ उत्तरदायी हैं?
Answer: महासागरीय नितल (समुद्री तल) में मिलने वाले उच्चावचों के लिए विवर्तनिक क्रियाएँ (प्लेट टेक्टोनिक्स), ज्वालामुखी क्रियाएँ, अपरदन (कटाव) और निक्षेपण (जमाव) की क्रियाओं का आपसी स्वरूप उत्तरदायी है। ये सभी भूगर्भीय प्रक्रियाएं मिलकर समुद्री तल की बनावट को आकार देती हैं।
In simple words: समुद्री तल पर पहाड़ों और खाइयों जैसी आकृतियाँ प्लेटों के हिलने, ज्वालामुखी फटने, पानी के कटाव और मिट्टी जमा होने से बनती हैं।

🎯 Exam Tip: महासागरीय उच्चावचों के निर्माण में शामिल मुख्य भूगर्भीय प्रक्रियाओं (विवर्तनिक, ज्वालामुखी, अपरदन, निक्षेपण) को सूचीबद्ध करें।

 

Question 14. महासागरीय तली से क्या आशय है?
Answer: महासागरीय तली से हमारा मतलब महासागरों में पानी के नीचे की भूमि की बनावट से है। इसका मतलब है कि समुद्र के तल पर कितनी ऊँचाईयाँ और गहराईयाँ (जैसे पहाड़, मैदान और गर्त) फैली हुई हैं। यह पृथ्वी की सतह का एक महत्वपूर्ण हिस्सा है।
In simple words: महासागरीय तली का मतलब है समुद्र के नीचे की जमीन की बनावट, जिसमें उसकी ऊँचाईयां और गहराईयां शामिल हैं।

🎯 Exam Tip: महासागरीय तली की परिभाषा को स्पष्ट करें, जिसमें समुद्र के नीचे की भू-आकृतियों (ऊँचाई और गहराई) का उल्लेख हो।

 

Question 15. महाद्वीपीय मग्न तटों से क्या अभिप्राय है?
Answer: महाद्वीपीय मग्न तट उन महाद्वीपों के डूबे हुए भागों को कहते हैं जो समुद्र में डूबे रहते हैं। इनकी अधिकतम गहराई आमतौर पर 100 फैदम होती है और ढलान 1° से 3° तक होता है। ये तट समुद्री जीवन और खनिजों के लिए महत्वपूर्ण होते हैं।
In simple words: महाद्वीपीय मग्न तट समुद्र में डूबे हुए महाद्वीपों के किनारे होते हैं, जो आमतौर पर 100 फैदम तक गहरे और हल्के ढलान वाले होते हैं।

🎯 Exam Tip: महाद्वीपीय मग्न तट की परिभाषा, उसकी गहराई और ढलान जैसे विशिष्ट गुणों को याद रखें।

 

Question 16. महाद्वीपीय मग्न तट कितने भाग पर फैले हैं?
Answer: महाद्वीपीय मग्न तट महासागरों के कुल क्षेत्रफल के लगभग 7.6 प्रतिशत भाग पर फैले हुए हैं। यह समुद्री जीवन और आर्थिक गतिविधियों के लिए एक महत्वपूर्ण क्षेत्र है।
In simple words: महाद्वीपीय मग्न तट महासागरों के कुल क्षेत्रफल का लगभग 7.6 प्रतिशत हिस्सा घेरते हैं।

🎯 Exam Tip: महाद्वीपीय मग्न तट द्वारा कवर किए गए महासागरीय क्षेत्रफल के प्रतिशत को याद रखें।

 

Question 17. महाद्वीपीय ढाल कितने क्षेत्र पर फैले हुए हैं?
Answer: महाद्वीपीय ढाल महासागरों के कुल क्षेत्रफल के लगभग 8.5 प्रतिशत क्षेत्र पर फैले हुए हैं। ये महाद्वीपीय मग्न तट के आगे तीव्र ढलान वाले गहरे क्षेत्र होते हैं।
In simple words: महाद्वीपीय ढाल महासागरों के कुल क्षेत्रफल के करीब 8.5 प्रतिशत भाग पर फैले हुए हैं।

🎯 Exam Tip: महाद्वीपीय ढाल द्वारा कवर किए गए महासागरीय क्षेत्रफल के प्रतिशत को याद रखें।

 

Question 19. महासागरीय गर्त किसे कहते हैं?
Answer: महासागरों के सबसे गहरे भागों को महासागरीय गर्त कहते हैं, जो महासागरों के तल पर पाए जाते हैं। ये सबसे गहरी जगहें होती हैं.
In simple words: समुद्र में सबसे गहरे हिस्से को महासागरीय गर्त कहा जाता है.

🎯 Exam Tip: जब भी "किसे कहते हैं" वाला प्रश्न आए, उसकी सटीक परिभाषा दें.

 

Question 20. भूमध्य रेखा से ध्रुवों की ओर जाने पर सतही जल का ताप कम क्यों हो जाता है?
Answer: भूमध्य रेखा से ध्रुवों की ओर बढ़ने पर समुद्री सतह के जल का तापमान घटता जाता है. इसका मुख्य कारण यह है कि सूर्य की किरणें ध्रुवों की ओर तिरछी होती जाती हैं, जिससे वहां गर्मी कम पहुँचती है.
In simple words: जैसे-जैसे हम भूमध्य रेखा से ध्रुवों की ओर जाते हैं, समुद्र का पानी ठंडा होता जाता है क्योंकि सूरज की किरणें वहां सीधी नहीं पड़तीं.

🎯 Exam Tip: तापमान परिवर्तन के कारणों को बताते समय हमेशा सूर्य के किरणों के कोण और उनकी तीव्रता पर ध्यान दें.

 

Question 21. सूर्यातप से क्या तात्पर्य है?
Answer: सूर्यातप का अर्थ है सूर्य से प्राप्त होने वाली ऊष्मा या ऊर्जा. यही ऊर्जा पृथ्वी और उसके महासागरों को गरम करती है.
In simple words: सूर्यातप मतलब सूरज से मिलने वाली गर्मी या ऊर्जा है.

🎯 Exam Tip: सूर्यातप की परिभाषा सीधे और सरल शब्दों में दें, जिसमें मुख्य अवधारणा स्पष्ट हो.

 

Question 22. समुद्री धाराएँ महासागरीय जल के ताप को कैसे प्रभावित करती हैं?
Answer: समुद्री धाराएँ अपने बहाव क्षेत्र के समुद्री जल के तापमान को प्रभावित करती हैं. ठंडी धाराएँ अपने रास्ते में समुद्री जल का तापमान कम कर देती हैं, जबकि गर्म धाराएँ तापमान को बढ़ा देती हैं. इससे विभिन्न क्षेत्रों में जल का तापमान बदलता रहता है.
In simple words: समुद्र की धाराएँ पानी को गर्म या ठंडा करती हैं. ठंडी धाराएँ पानी को ठंडा करती हैं और गर्म धाराएँ उसे गर्म करती हैं.

🎯 Exam Tip: समुद्री धाराओं के प्रभाव को बताते समय ठंडी और गर्म दोनों धाराओं के प्रभावों का उल्लेख करें.

 

Question 23. महासागरीय जल के क्षैतिज ताप वितरण से क्या तात्पर्य है?
Answer: महासागरीय जल के तापमान का क्षैतिज वितरण का मतलब है कि जब हम अक्षांश के आधार पर समुद्री जल के तापमान का अध्ययन करते हैं, तो यह सतह पर पूर्व-पश्चिम या उत्तर-दक्षिण दिशा में कैसे बदलता है.
In simple words: समुद्री पानी का तापमान दुनिया भर में अक्षांश के हिसाब से कैसे बदलता है, इसे क्षैतिज ताप वितरण कहते हैं.

🎯 Exam Tip: क्षैतिज वितरण को स्पष्ट करते समय अक्षांशीय आधार पर परिवर्तन को प्रमुखता दें.

 

Question 24. महासागरीय जल के ताप का लम्बवत वितरण किस पर निर्भर करता है?
Answer: महासागरीय जल के तापमान का लम्बवत् वितरण (गहराई के साथ परिवर्तन) ताप अवशोषण की मात्रा, जल धाराओं द्वारा उसके क्षैतिज विस्थापन और जल की लम्बवत् गति पर निर्भर करता है. यह बताता है कि गहराई में पानी कितना ठंडा होता है.
In simple words: समुद्र में गहराई के साथ पानी का तापमान कैसे बदलता है, यह कितनी गर्मी सोखता है, धाराएँ इसे कितना हिलाती हैं और पानी ऊपर-नीचे कैसे चलता है, इन सब पर निर्भर करता है.

🎯 Exam Tip: लम्बवत वितरण के कारकों को याद रखें, खासकर ताप अवशोषण और जल संचलन को.

 

Question 26. सागरीय जल में मिलने वाले मुख्य लवणों के नाम लिखिए।
Answer: सागरीय जल में पाए जाने वाले प्रमुख लवणीय पदार्थों में सोडियम क्लोराइड, मैग्नेशियम क्लोराइड, मैग्नेशियम सल्फेट, कैल्शियम सल्फेट, पोटेशियम सल्फेट, कैल्शियम कार्बोनेट और मैग्नेशियम ब्रोमाइड शामिल हैं. ये सभी मिलकर समुद्र के पानी को खारा बनाते हैं.
In simple words: समुद्री पानी में सोडियम क्लोराइड, मैग्नेशियम क्लोराइड, मैग्नेशियम सल्फेट, कैल्शियम सल्फेट, पोटेशियम सल्फेट, कैल्शियम कार्बोनेट और मैग्नेशियम ब्रोमाइड जैसे कई नमक पाए जाते हैं.

🎯 Exam Tip: इन लवणों के नाम को सटीकता से लिखें, क्योंकि यह मुख्य रासायनिक संरचना को दर्शाता है.

 

Question 27. भूमध्य रेखीय क्षेत्रों में अधिक ताप होते हुए भी लवणता कम मिलती है। क्यों?
Answer: भूमध्य रेखीय क्षेत्रों में अधिक तापमान होने के बावजूद लवणता कम मिलती है. इसका मुख्य कारण इन क्षेत्रों में हर दिन होने वाली संवहनीय वर्षा है. अधिक वर्षा के कारण समुद्र में मीठे पानी की आपूर्ति बढ़ जाती है, जिससे सागरीय लवणता कम हो जाती है.
In simple words: भूमध्य रेखा पर गर्मी बहुत होती है, फिर भी पानी कम खारा होता है क्योंकि वहां रोज़ बहुत बारिश होती है, जो समुद्र में मीठा पानी मिला देती है.

🎯 Exam Tip: भूमध्यरेखीय क्षेत्रों में कम लवणता का कारण बताते समय 'दैनिक संवहनीय वर्षा' को मुख्य बिंदु के रूप में याद रखें.

 

Question 28. प्रचलित पवनें लवणता को कैसे प्रभावित करती हैं?
Answer: गर्म और शुष्क क्षेत्रों में, महासागरों की ओर चलने वाली तेज हवाओं से वाष्पीकरण अधिक होता है. इसलिए ऐसे समुद्री भागों में लवणता अधिक मिलती है. इसके विपरीत, ठंडी और आर्द्र तथा धीमी गति वाली हवाओं से वाष्पीकरण कम होता है, जिससे ऐसे क्षेत्रों में लवणता कम पाई जाती है.
In simple words: तेज और गर्म हवाएं समुद्र से ज्यादा पानी सुखा देती हैं, जिससे पानी ज्यादा खारा हो जाता है. ठंडी और धीमी हवाएं कम पानी सुखाती हैं, इसलिए पानी कम खारा रहता है.

🎯 Exam Tip: हवाओं के प्रकार (गर्म/ठंडी, शुष्क/आर्द्र, तेज/धीमी) और उनके वाष्पीकरण पर पड़ने वाले प्रभाव के आधार पर लवणता का संबंध समझाएं.

 

Question 29. अयनरेखीय क्षेत्रों में लवणता की मात्रा सर्वाधिक क्यों मिलती है?
Answer: अयनरेखीय क्षेत्रों में उच्च तापमान, लगातार चलने वाली गर्म और शुष्क हवाएँ, बहुत अधिक वाष्पीकरण, बारिश की कमी और ताजे पानी की कम आपूर्ति जैसे कारणों से लवणता की मात्रा सबसे अधिक मिलती है.
In simple words: अयनरेखीय इलाकों में बहुत गर्मी, सूखी हवाएं, ज्यादा वाष्पीकरण और कम बारिश होती है, जिससे पानी बहुत खारा हो जाता है.

🎯 Exam Tip: अयनरेखीय क्षेत्रों में सर्वाधिक लवणता के सभी प्रमुख कारणों को संक्षेप में बताएं.

 

Question 30. सारगैसो सागर में उच्च लवणता क्यों मिलती है?
Answer: सारगैसो सागर में उच्च लवणता का मुख्य कारण यह है कि यहां मिलने वाली महासागरीय धाराओं के चक्रीय प्रवाह के कारण मध्यवर्ती जल का मिश्रण अन्य क्षेत्रों के जल से नहीं हो पाता है. यह पानी को एक जगह इकट्ठा रखता है और वाष्पीकरण से नमक की मात्रा बढ़ती जाती है.
In simple words: सारगैसो सागर में बहुत खारा पानी होता है क्योंकि समुद्री धाराएं उसे घेर लेती हैं, जिससे वहां का पानी दूसरे पानी से मिलता नहीं और वाष्पीकरण से नमक बढ़ जाता है.

🎯 Exam Tip: सारगैसो सागर की उच्च लवणता के लिए 'महासागरीय धाराओं के चक्रीय प्रवाह' और 'जल मिश्रण की कमी' को प्रमुख कारण के रूप में उजागर करें.

 

Question 31. समलवण रेखाएँ क्या हैं?
Answer: समलवण रेखाएँ (आइसोहेलाइन) वे काल्पनिक रेखाएँ होती हैं जो मानचित्र पर समान लवणता वाले स्थानों को जोड़ती हैं. ये रेखाएँ समुद्री जल की खारेपन के वितरण को दर्शाती हैं.
In simple words: समलवण रेखाएँ नक्शे पर उन जगहों को जोड़ती हैं जहां समुद्र के पानी में नमक की मात्रा एक जैसी होती है.

🎯 Exam Tip: 'समलवण रेखा' की परिभाषा को स्पष्ट करते हुए उसके कार्य को भी बताएं.

 

Question 32. फारस की खाड़ी में उच्च लवणता क्यों मिलती है?
Answer: फारस की खाड़ी में उच्च लवणता मिलने के कई कारण हैं, जैसे वहां बारिश की कमी, ताजे पानी की कम आपूर्ति, उच्च तापमान और वाष्पीकरण की अधिकता. ये सभी कारक मिलकर खाड़ी के पानी को अत्यधिक खारा बना देते हैं.
In simple words: फारस की खाड़ी में कम बारिश, कम मीठा पानी, ज्यादा गर्मी और ज्यादा वाष्पीकरण के कारण पानी बहुत खारा होता है.

🎯 Exam Tip: किसी विशिष्ट क्षेत्र में उच्च लवणता के कारणों को सूचीबद्ध करते हुए, प्रमुख भौगोलिक और जलवायु कारकों पर जोर दें.

 

Question 33. ध्रुवीय क्षेत्रों में सतह पर लवणता कम क्यों मिलती है?
Answer: ध्रुवीय क्षेत्रों में सतह पर लवणता कम मिलती है क्योंकि हिम (बर्फ) के पिघलने से लगातार मीठे पानी की आपूर्ति होती रहती है. यह पिघला हुआ पानी समुद्री सतह के खारे पानी को पतला कर देता है.
In simple words: ध्रुवों पर बर्फ पिघलने से समुद्र में मीठा पानी मिलता रहता है, जिससे सतह का पानी कम खारा होता है.

🎯 Exam Tip: ध्रुवीय क्षेत्रों में कम लवणता का मुख्य कारण 'बर्फ का पिघलना' है, इसे प्रमुखता से बताएं.

RBSE Class 11 Physical Geography Chapter 19 लघुत्तरात्मक प्रश्न Type

 

Question 1. अटलांटिक महासागर की स्थलाकृतियों का वर्णन कीजिए।
अथवा
आन्ध्र महासागर में कौन-कौन-सी स्थलाकृतियाँ मिलती हैं?
Answer: अटलांटिक महासागर अंग्रेजी वर्णमाला के 'S' अक्षर की तरह फैला हुआ है. इसमें कई सागर और खाड़ियाँ हैं, जैसे मैक्सिको की खाड़ी, भूमध्य सागर, उत्तरी सागर, बिस्के की खाड़ी, बाल्टिक सागर, कैरेबियन सागर और काला सागर. यह महासागर भूमध्य रेखा से दो भागों में बंटा है. उत्तरी भाग 5400 किमी और दक्षिणी भाग 9600 किमी चौड़ा है. इसमें ब्राजील द्रोणी, कनारी द्रोणी, गिनी द्रोणी और उत्तरी अमेरिका द्रोणी जैसी कई गहरी द्रोणियाँ हैं. इसके अलावा, प्यूटोरिको, रोमांशे गर्त, नरेश गर्त, भोसले गर्त, चुन गर्त और बुचानन गर्त जैसे गहरे गर्त भी पाए जाते हैं. वालविस कटक, दक्षिण मध्य अटलांटिक कटक, उत्तरी मध्य अटलांटिक कटक और विविल टोमसन कटक जैसे समुद्री कटक भी इस महासागर में हैं.
In simple words: अटलांटिक महासागर 'S' आकार का है, जिसमें कई छोटे सागर और खाड़ियाँ हैं. इसमें गहरे बेसिन (द्रोणियाँ) और खाई (गर्त) भी हैं, और कई पहाड़ी श्रृंखलाएं (कटक) भी हैं.

🎯 Exam Tip: अटलांटिक महासागर की स्थलाकृतियों का वर्णन करते समय उसके आकार, प्रमुख सागरों/खाड़ियों, द्रोणियों, गर्तों और कटकों का उल्लेख करें.

 

Question 2. हिन्द महासागर की स्थलाकृतियों का वर्णन कीजिए।
Answer: हिन्द महासागर के उत्तर में गोंडवाना लैंड के हिस्से, जैसे प्रायद्वीपीय भारत, अफ्रीका का पठार और ऑस्ट्रेलिया का पश्चिमी भाग, महाद्वीपीय मग्न स्थल के रूप में मिलते हैं. इस महासागर में सोडमाली द्रोणी, अरेबियन द्रोणी, मॉरीशस द्रोणी, अण्डमान द्रोणी, ओमान द्रोणी और नैटाल द्रोणी जैसी कई द्रोणियाँ हैं. यहां सोकोत्रा चैगोस कटक, चैगोस कटक, सेचलीस कटक, सेण्ट पाल कटक, एमस्टरडम कटक, मैडागास्कर कटक और भारत अण्टार्कटिका कटक जैसे कटक भी पाए जाते हैं. बंगाल की खाड़ी, अदन की खाड़ी, फारस की खाड़ी और थाईलैंड की खाड़ी जैसी कई खाड़ियाँ भी इसमें शामिल हैं. लक्षद्वीप समूह, अण्डमान निकोबार द्वीप समूह, मैडागास्कर द्वीप, जंजीबार और रियूनीयन जैसे द्वीप भी मिलते हैं. सुण्डा गर्त इस महासागर की एक प्रमुख गहरी खाई है.
In simple words: हिन्द महासागर भारत, अफ्रीका और ऑस्ट्रेलिया के हिस्सों से घिरा है. इसमें कई गहरे बेसिन, समुद्र के नीचे की पहाड़ियां (कटक), खाड़ियाँ और द्वीप हैं. सुण्डा गर्त यहाँ की सबसे गहरी खाई है.

🎯 Exam Tip: हिन्द महासागर की स्थलाकृतियों का वर्णन करते समय उसके आसपास के स्थलीय भागों, प्रमुख द्रोणियों, कटकों, खाड़ियों और द्वीपों को शामिल करें.

 

Question 4. महाद्वीपीय मग्न तट हमारे लिए किस प्रकार उपयोगी सिद्ध होते हैं?
Answer: महाद्वीपीय मग्न तट हमारे लिए कई तरह से उपयोगी होते हैं:
1. इन तटों पर सूर्य की किरणें आसानी से पहुँच जाती हैं, जिससे वनस्पति और जीव-जन्तुओं का विकास होता है.
2. नदियों द्वारा लाई गई तलछट यहीं जमा होती है, जिससे यह समुद्री हिस्सा मानव के लिए बहुत लाभदायक बन जाता है.
3. महाद्वीपीय मग्न तटों पर विभिन्न प्रकार के खाद्य पदार्थ, मछली और अन्य समुद्री जीव मिलते हैं.
4. इन महाद्वीपीय मग्न तटों पर कई महत्वपूर्ण खनिज, खनिज तेल और गैस भी पाए जाते हैं.
In simple words: महाद्वीपीय मग्न तट हमें मछली, भोजन, तेल और गैस जैसे कई जरूरी संसाधन देते हैं, और यहां समुद्री जीवन भी खूब फलता-फूलता है.

🎯 Exam Tip: महाद्वीपीय मग्न तटों की उपयोगिता बताते समय आर्थिक और पारिस्थितिक दोनों पहलुओं पर ध्यान दें.

 

Question 5. महासागरीय जल में तापमान का क्या महत्व होता है?
Answer: महासागरीय जल का तापमान वनस्पति और जीव-जन्तुओं के लिए बहुत महत्वपूर्ण है. यह न केवल महासागरों में रहने वाले जीवों और वनस्पतियों को प्रभावित करता है, बल्कि तटवर्ती स्थलीय भागों की जलवायु (और परिणामस्वरूप, वहां के जीव-जन्तुओं और वनस्पतियों) को भी प्रभावित करता है. इसलिए समुद्री जल के तापमान का अध्ययन बहुत जरूरी हो जाता है. समुद्री जल के तापमान का सबसे बड़ा स्रोत सूर्य है. सूर्य के अलावा, कुछ मात्रा में तापमान समुद्र के तल के नीचे पृथ्वी के अंदरूनी भाग और जल के दबाव की प्रक्रिया से भी प्राप्त होता है, लेकिन यह मात्रा बहुत कम होती है.
In simple words: समुद्र के पानी का तापमान समुद्री जीवन और आसपास की जमीन के मौसम के लिए बहुत जरूरी है. सूरज की गर्मी इसका मुख्य कारण है.

🎯 Exam Tip: महासागरीय जल के तापमान के महत्व को स्पष्ट करते समय उसके पारिस्थितिक और जलवायु संबंधी प्रभावों को शामिल करें.

 

Question 6. महासागरीय जल के तापमान का संचरण कैसे होता है?
Answer: महासागरीय जल में सूर्य की किरणें लगभग 25 मीटर की गहराई तक प्रवेश करके गर्मी देती हैं. इस गहराई के बाद सूर्य की विकिरण का प्रभाव बहुत कम हो जाता है. इसलिए, सूर्यातप के कारण महासागरों की सतह का पानी अधिक गर्म होता है. ध्रुवीय क्षेत्रों में ठंडा पानी भारी होने के कारण नीचे बैठता है और भूमध्यरेखीय क्षेत्रों का गर्म पानी हल्का होने के कारण सतही धाराओं के रूप में ध्रुवीय क्षेत्रों की ओर बहता रहता है. इस प्रकार, महासागरीय जल के तापमान का संचरण लगातार होता रहता है.
In simple words: सूरज की किरणें समुद्र की ऊपरी सतह को गर्म करती हैं. ठंडा, भारी पानी नीचे जाता है और गर्म, हल्का पानी ऊपर रहता है, जिससे पानी लगातार घूमता रहता है.

🎯 Exam Tip: महासागरीय जल के तापमान संचरण को समझाते समय सतही जल के गर्म होने और ध्रुवीय व भूमध्यरेखीय क्षेत्रों के बीच जल के आवागमन के सिद्धांत पर ध्यान दें.

 

Question 7. सागरीय जल में मिलने वाले लवणीय पदार्थों व उनकी मात्रा को स्पष्ट कीजिए।
Answer: महासागरीय जल में कई लवणीय पदार्थ पाए जाते हैं. इन लवणीय पदार्थों, उनकी मात्रा और प्रतिशत को नीचे दी गई तालिका में दर्शाया गया है:

मैग्नेशियम सल्फेट1.6584.7
3मैग्नेशियम सल्फेट1.6584.7
4कैल्शियम सल्फेट1.2603.6
5पोटेशियम सल्फेट0.8632.5
6कैल्शियम कार्बोनेट0.1230.3
7मैग्नेशियम ब्रोमाइड0.0760.2
कुल35.000100

In simple words: समुद्री पानी में कई तरह के नमक घुले होते हैं, जिनकी मात्रा अलग-अलग होती है, जैसे सोडियम क्लोराइड और मैग्नेशियम सल्फेट.

🎯 Exam Tip: तालिका को सही ढंग से प्रस्तुत करें और विभिन्न लवणों के नामों और उनके प्रतिशत को याद रखें.

 

Question 8. वर्षा द्वारा जल की आपूर्ति किस प्रकार लवणता को प्रभावित करती है? स्पष्ट कीजिए।
अथवा
वर्षा की मात्रा लवणता का नियंत्रक कारक होती है। कैसे?
Answer: स्वच्छ जल की अधिक मात्रा के कारण लवणता कम हो जाती है. जिन क्षेत्रों में बहुत अधिक बारिश होती है, वहां लवणता कम पाई जाती है. उदाहरण के लिए, भूमध्यरेखीय प्रदेशों में उच्च तापमान के बावजूद भारी वर्षा के कारण लवणता कम होती है. इसके विपरीत, अयनरेखीय भागों में कम वर्षा होने पर उच्च तापमान के कारण लवणता अधिक पाई जाती है. ध्रुवीय और उपध्रुवीय क्षेत्रों में अत्यधिक हिम वर्षा से बने हिमनद समुद्रों में पिघलकर पानी पहुंचाते रहते हैं, जो शीतोष्ण प्रदेशों में पहुंचकर सागर की लवणता को कम कर देते हैं.
In simple words: बारिश का पानी समुद्र की खारेपन को कम करता है. ज्यादा बारिश यानी कम खारा पानी, और कम बारिश यानी ज्यादा खारा पानी. बर्फ पिघलने से भी पानी कम खारा होता है.

🎯 Exam Tip: वर्षा और लवणता के संबंध को स्पष्ट करते समय विभिन्न अक्षांशीय क्षेत्रों (भूमध्यरेखीय, अयनरेखीय, ध्रुवीय) के उदाहरण दें.

 

Question 9. आंतरिक सागरों में लवणता के वितरण को स्पष्ट कीजिए।
अथवा
लवणता का स्वरूप आंतरिक सागरों में किस प्रकार भिन्न मिलता है?
Answer: आंतरिक सागर और झीलें पूरी तरह से जमीन से घिरी होती हैं. इनमें लवणता का वितरण स्थानीय परिस्थितियों पर निर्भर करता है. उच्च तापमान, अत्यधिक गर्म और शुष्क हवाएँ, वाष्पीकरण की अधिकता और बारिश की कमी जैसे कारकों से मृत सागर में लवणता की मात्रा 238 प्रति हजार पाई जाती है. कैस्पियन सागर के दक्षिणी भाग में लवणता 170 प्रति हजार और उत्तरी भाग में केवल 14 प्रति हजार मिलती है. कैस्पियन सागर के उत्तरी भाग में यूराल और वोल्गा जैसी नदियाँ ताजे पानी की आपूर्ति करती हैं. विश्व में सबसे अधिक लवणता तुर्की की वॉन झील में 330 प्रति हजार मिलती है.
In simple words: जमीन से घिरे हुए सागरों और झीलों में नमक की मात्रा अलग-अलग होती है. कुछ बहुत खारे होते हैं (जैसे मृत सागर), जबकि नदियों से मीठा पानी मिलने पर कुछ कम खारे होते हैं (जैसे कैस्पियन सागर का उत्तरी भाग).

🎯 Exam Tip: आंतरिक सागरों की लवणता को स्पष्ट करते समय उन कारकों को बताएं जो लवणता को प्रभावित करते हैं और विभिन्न उदाहरणों के साथ तुलना करें.

RBSE Class 11 Physical Geography Chapter 19 लघुत्तरात्मक प्रश्न Type I

 

Question 1. महाद्वीपीय मग्न तटों व महाद्वीपीय ढालों में क्या अन्तर मिलता है?
Answer: महाद्वीपीय मग्न तटों और महाद्वीपीय ढालों में निम्नलिखित अंतर मिलते हैं:

विशेषतामहाद्वीपीय मग्न तटमहाद्वीपीय ढाल
गहराईअधिकतम 100 फैदम तक3600 मीटर से 9100 मीटर तक
ढाल1° से 3° के बीच2° से 5° तक
सागरों का प्रतिशतकुल महासागरीय क्षेत्रफल का 7.6 प्रतिशतकुल महासागरीय क्षेत्रफल का 8.5 प्रतिशत
सूर्य का प्रकाशआसानी से पहुंचता हैगहराई के कारण कमी मिलती है
जीव-जन्तुवनस्पति एवं जीव-जन्तुओं की बहुलतावनस्पति व जीव-जन्तुओं की कमी
मृदा का जमावअधिक निक्षेप, काँप मृदा का जमावनिक्षेपों की कमी, काँप मृदा का कम जमाव

In simple words: महाद्वीपीय मग्न तट समुद्र के किनारे का उथला हिस्सा होता है जहां सूर्य की रोशनी पहुंचती है और जीवन खूब पनपता है. महाद्वीपीय ढाल मग्न तट के बाद का गहरा और तेज ढलान वाला हिस्सा होता है जहां प्रकाश कम पहुंचता है और जीवन भी कम होता है.

🎯 Exam Tip: इन दोनों स्थलाकृतियों के बीच के अंतर को तालिका के रूप में प्रस्तुत करना स्पष्ट और पूरे अंक प्राप्त करने में सहायक होता है.

 

Question 2. महासागरीय लवणता के स्वरूप को समझाइए।
Answer: महासागरीय जल में उपस्थित लवणता के कारण समुद्र का पानी खारा होता है. लगभग 4.10 करोड़ टन नमक एक घन किलोमीटर समुद्री जल में पाया जाता है. अगर पूरी पृथ्वी पर समुद्र के नमक को समान रूप से बिछाया जाए तो 150 मीटर मोटी नमक की परत बिछ जाएगी. सागरीय लवणता को प्रति हजार ग्राम जल में स्थित लवण की मात्रा (%) में व्यक्त किया जाता है. समुद्री जल की औसत लवणता लगभग 35 प्रति हजार (%) होती है, जिसका मतलब है कि एक हजार ग्राम जल में लगभग 35 ग्राम लवण होता है. महासागरीय लवणता का मुख्य स्रोत पृथ्वी ही है, और यह नदियों, समुद्री लहरों, हवाओं और ज्वालामुखी विस्फोटों से समुद्र में पहुंचता है. डिटमार (1884) के अनुसार समुद्र के जल में 47 विभिन्न प्रकार के लवण होते हैं, और इनकी मात्रा में भिन्नता के बावजूद इनका सापेक्षिक अनुपात लगभग एक जैसा रहता है.
In simple words: समुद्र का पानी खारा होता है क्योंकि इसमें नमक घुला होता है. इस खारेपन को ग्राम प्रति हजार में नापते हैं, और इसकी औसत मात्रा 35 ग्राम प्रति हजार होती है. यह नमक धरती और नदियों, हवाओं व ज्वालामुखियों से आता है.

🎯 Exam Tip: महासागरीय लवणता के स्वरूप को बताते समय उसकी परिभाषा, मापन इकाई, औसत मात्रा और स्रोतों का उल्लेख करें.

 

Question 3. आंशिक रूप से घिरे सागरों में लवणता के वितरण को स्पष्ट कीजिए।
Answer: आंशिक रूप से घिरे सागरों में लवणता का वितरण वहां की स्थानीय परिस्थितियों पर निर्भर करता है. भूमध्य सागर में लवणता का वितरण काफी अलग होता है. इसके उत्तरी-पूर्वी भाग में लवणता 39 प्रति हजार ग्राम और दक्षिणी-पूर्वी भाग में 41 प्रति हजार ग्राम मिलती है. लाल सागर के उत्तरी भाग में 41 प्रति हजार ग्राम और दक्षिणी भाग में 36 प्रति हजार ग्राम लवणता है. फारस की खाड़ी में लवणता 48 प्रति हजार ग्राम मिलती है. यह बारिश की कमी, ताजे पानी की कम आपूर्ति, उच्च तापमान और वाष्पीकरण की अधिकता के कारण होता है. काला सागर में लवणता 18 प्रति हजार ग्राम, बाल्टिक सागर में 15 प्रति हजार, बोथानिया की खाड़ी में 8 प्रति हजार और फिनलैंड की खाड़ी में केवल 2 प्रति हजार ही मिलती है. इसका कारण नदियों द्वारा बहुत अधिक ताजे पानी की आपूर्ति, बर्फ से पिघले पानी की आपूर्ति, निम्न तापमान और कम वाष्पीकरण दर है.
In simple words: जो सागर थोड़े बंद होते हैं, उनमें नमक की मात्रा अलग-अलग होती है. कुछ (जैसे फारस की खाड़ी) बहुत खारे होते हैं क्योंकि पानी ज्यादा सूखता है और मीठा पानी कम आता है. दूसरे (जैसे बाल्टिक सागर) कम खारे होते हैं क्योंकि उनमें नदियों से मीठा पानी आता है.

🎯 Exam Tip: आंशिक रूप से घिरे सागरों की लवणता समझाते समय विभिन्न उदाहरणों (भूमध्य सागर, लाल सागर, फारस की खाड़ी, काला सागर, बाल्टिक सागर) और उनके विशिष्ट भौगोलिक-जलवायु कारणों पर जोर दें.

RBSE Class 11 Physical Geography Chapter 19 निबन्धात्मक प्रश्न

 

Question 1. महासागरीय जल के तापमान के क्षैतिज व लम्बवत वितरण को स्पष्ट कीजिए।
अथवा
सागरीय जल का तापमान क्षैतिज एवं लम्बवंत रूप में किस प्रकार मिलता है?
Answer: महासागरीय जल में तापमान आमतौर पर बढ़ते अक्षांशों के साथ-साथ घटता जाता है. महासागरीय जल के तापमान का क्षैतिज वितरण को तालिका में दर्शाया गया है:

अक्षांशअटलांटिक महासागरप्रशांत महासागरहिंद महासागर
30-20 उत्तरी24.1626.1423.38
20-10 उत्तरी25.8127.2326.42
10-0 उत्तरी26.6627.8827.20
0-10 दक्षिणी25.1827.4126.01
10-20 दक्षिणी23.1625.8525.11
20-30 दक्षिणी21.2025.5321.53
30-40 दक्षिणी16.9017.0016.98
40-50 दक्षिणी8.688.6711.16
50-60 दक्षिणी1.761.635.00
60-70 दक्षिणी1.301.531.03

इस तालिका से स्पष्ट है कि तापमान सामान्यतः ध्रुवों की ओर घटता जाता है. अटलांटिक महासागर में 20° से 30° उत्तरी अक्षांशों के बीच तापमान में थोड़ी वृद्धि होकर फिर से गिरावट का क्रम जारी रहता है. हिंद महासागर में 20 से 30 डिग्री अक्षांशों तक विस्तार कम होने के कारण तापमान की गिरावट की दर काफी कम रहती है, लगभग आधा डिग्री सेल्सियस प्रति अक्षांश. मोटे तौर पर, ध्रुवों की ओर तापमान कम होता जाता है.

तापमान का लम्बवत् वितरण महासागरीय जल में तापमान का लम्बवत् वितरण ताप अवशोषण की मात्रा, जल धारा द्वारा उसके क्षैतिज विस्थापन और जल की लम्बवत् गति पर निर्भर करता है. महासागरीय जल में सूर्य की किरणें 25 मीटर तक प्रवेश करके गर्मी देती हैं. इस गहराई के बाद सूर्य की विकिरण का प्रभाव नगण्य हो जाता है. इस प्रकार, सूर्यातप के कारण महासागरीय सतही जल अधिक गर्म होता है. ध्रुवीय क्षेत्रों में ठंडा जल भारी होने के कारण नीचे बैठता है और भूमध्यरेखीय क्षेत्रों का गर्म जल हल्का होने के कारण सतही धाराओं के रूप में ध्रुवीय क्षेत्रों की ओर प्रवाहित होता रहता है. महासागरीय जल की सतह से गहराई की ओर तापमान 2000 मीटर की गहराई तक तेजी से गिरता है. उस गहराई के बाद तापमान की गिरावट दर काफी कम हो जाती है. यह बात खुले महासागरों में देखी जाती है. आंशिक रूप से घिरे हुए महासागरों (जैसे भूमध्य सागर और लाल सागर) में तापमान की गिरावट पास के खुले महासागरों की तुलना में कम होती है.
In simple words: समुद्र का पानी भूमध्य रेखा से ध्रुवों की ओर ठंडा होता जाता है. गहराई में भी तापमान घटता है, क्योंकि सूरज की रोशनी केवल ऊपरी सतह तक ही पहुंचती है, और समुद्र की धाराएं गर्म-ठंडे पानी को मिलाती रहती हैं.

🎯 Exam Tip: तापमान वितरण का वर्णन करते समय क्षैतिज (अक्षांशीय) और लम्बवत् (गहराई के साथ) दोनों पहलुओं को शामिल करें, और इसे प्रभावित करने वाले प्रमुख कारकों का उल्लेख करें.

 

Question 2. खुले क्षेत्रों में लवणता के क्षैतिज वितरण को स्पष्ट कीजिए।
Answer: खुले क्षेत्रों में लवणता का क्षैतिज वितरण अलग-अलग अक्षांशीय क्षेत्रों में भिन्न होता है. अयनरेखीय क्षेत्रों में लवणता की मात्रा सर्वाधिक (36 प्रति हजार) पाई जाती है. यहां उच्च तापमान, प्रचलित गर्म और शुष्क हवाएँ, वाष्पीकरण की अधिकता, वर्षा की कमी और ताजे पानी की कम आपूर्ति के कारण लवणता अधिक होती है. अयनरेखीय क्षेत्रों से भूमध्य रेखा और ध्रुवों की ओर जाने पर लवणता की मात्रा कम होती जाती है. हालांकि, भूमध्यरेखीय क्षेत्रों की अपेक्षा ध्रुवीय क्षेत्रों में लवणता कम पाई जाती है. इसका कारण यह है कि ध्रुवीय प्रदेशों में बर्फ पिघलने से ताजे पानी की अधिक आपूर्ति होती है और वाष्पीकरण कम होता है. भूमध्यरेखीय क्षेत्रों में ताजे पानी की आपूर्ति और वाष्पीकरण दोनों ही अधिक रहते हैं.
In simple words: खुले समुद्र में नमक की मात्रा अक्षांश के हिसाब से बदलती है. अयनरेखीय क्षेत्रों में यह सबसे ज्यादा होती है क्योंकि वहां गर्मी और वाष्पीकरण ज्यादा होता है. ध्रुवों और भूमध्य रेखा पर यह कम होती है क्योंकि वहां मीठा पानी ज्यादा मिलता है.

🎯 Exam Tip: खुले सागरों में लवणता के क्षैतिज वितरण को समझाते समय विभिन्न अक्षांशीय क्षेत्रों (अयनरेखीय, भूमध्यरेखीय, ध्रुवीय) में लवणता के कारणों पर ध्यान दें.

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