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Detailed Chapter 13 वायुदाब की पेटियाँ एवं पवनें RBSE Solutions for Class 11 Geography
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Class 11 Geography Chapter 13 वायुदाब की पेटियाँ एवं पवनें RBSE Solutions PDF
RBSE Solutions for Class 11 Physical Geography Chapter 13 वायुदाब की पेटियाँ एवं पवनें
Question 1. वायुदाब की खोज किसने की थी?
(अ) ट्रिवार्था
(ब) फेरल
(स) ग्यूरिक
(द) फिन्च
Answer: (स) ग्यूरिक
In simple words: ग्यूरिक नाम के वैज्ञानिक ने पता लगाया था कि हवा कितनी दबाव डालती है, जिसे हम वायुदाब कहते हैं।
🎯 Exam Tip: वैज्ञानिक खोजों और उनके खोजकर्ताओं को याद रखना महत्वपूर्ण है, खासकर जब वे एक ही विषय से संबंधित हों।
Question 3. उत्तरी भारत व पाकिस्तान के मैदानी भागों में चलने वाली गर्म व शुष्क पवन को क्या कहते हैं?
(अ) चिनूक
(ब) लू
(स) मिस्ट्रल
(द) बोरा
Answer: (ब) लू
In simple words: भारत और पाकिस्तान के उत्तरी मैदानों में गर्मियों में चलने वाली बहुत गर्म और सूखी हवा को 'लू' कहा जाता है।
🎯 Exam Tip: स्थानीय पवनों के नाम, वे कहाँ चलती हैं और उनकी विशेषताएँ हमेशा याद रखें, क्योंकि ये अक्सर पूछे जाते हैं।
Question 4. वे पवनें जो वर्ष भर निश्चित दिशा में चलती हैं, कहलाती हैं
(अ) अनिश्चित पवने
(ब) मौसमी पवने
(स) प्रचलित पवनें
(द) स्थानीय पवनें
Answer: (स) प्रचलित पवनें
In simple words: जो हवाएँ पूरे साल एक ही रास्ते पर चलती रहती हैं, उन्हें प्रचलित पवनें कहते हैं।
🎯 Exam Tip: पवन के प्रकारों को उनकी निरंतरता और दिशा के आधार पर वर्गीकृत करना सीखें।
Question 5. 'डोलड्रम' पेटी पाई जाती है-
(अ) भूमध्य रेखा के निकट
(ब) कर्क रेखा के निकट
(स) मकर रेखा के निकट
(द) आर्कटिक के निकट
Answer: (अ) भूमध्य रेखा के निकट
In simple words: डोलड्रम एक ऐसा क्षेत्र है जहाँ हवाएँ शांत रहती हैं, और यह भूमध्य रेखा के पास पाया जाता है।
🎯 Exam Tip: विभिन्न दाब पेटियों के अक्षांशीय विस्तार और उनकी विशेषताओं को मानचित्र पर देखें।
RBSE Class 11 Physical Geography Chapter 13 अति लघूत्तात्मक प्रश्न
Question 8. आल्पस पर्वतीय क्षेत्र में चलने वाली पवन कौन-सी है?
Answer: आल्पस पर्वतीय क्षेत्र में चलने वाली पवन फॉन है। यह फॉन पवन आल्पस पर्वत के दक्षिणी ढाल से ऊपर चढ़कर उत्तर की ओर ढाल के सहारे नीचे उतरती है। इन पवनों से बर्फ पिघलने में मदद मिलती है।
In simple words: आल्पस पहाड़ों पर फॉन नाम की हवा चलती है, जो पहाड़ों की ढलानों से नीचे उतरती है।
🎯 Exam Tip: विभिन्न पर्वतीय क्षेत्रों और उनसे संबंधित स्थानीय पवनों के बारे में जानकारी रखें।
Question 9. भूमध्यरेखीय निम्न दाब पेटी का विस्तार बताओ।
Answer: भूमध्यरेखीय निम्न दाब पेटी भूमध्य रेखा के 5° उत्तर से 5° दक्षिण अक्षांशों के बीच स्थित है। यह क्षेत्र साल भर गर्म रहता है।
In simple words: भूमध्यरेखीय निम्न दाब पेटी भूमध्य रेखा के 5 डिग्री उत्तर और 5 डिग्री दक्षिण के बीच फैली हुई है।
🎯 Exam Tip: दाब पेटियों के अक्षांशीय विस्तार को ठीक से याद करना परीक्षा में बहुत उपयोगी होता है।
Question 10. पवन किसे कहते हैं?
Answer: क्षैतिज रूप में गतिशील वायु को पवन कहते हैं। यह वायु का वह संचार होता है जो धरती के ऊपर किसी निश्चित दिशा में किसी गति से चलता है। पवनें हमेशा उच्च दबाव वाले क्षेत्रों से कम दबाव वाले क्षेत्रों की ओर चलती हैं।
In simple words: हवा के चलने को पवन कहते हैं। यह धरती पर एक जगह से दूसरी जगह चलती है।
🎯 Exam Tip: पवन की परिभाषा को सरल शब्दों में व्यक्त करना सीखें और इसके मूल सिद्धांत को समझें।
RBSE Class 11 Physical Geography Chapter 13 लघूत्तात्मक प्रश्न
Question 11. वायुदाब किसे कहते हैं?
Answer: हमारी पृथ्वी के चारों ओर वायुमंडल है, जो कई गैसों से बना हजारों किलोमीटर मोटा आवरण है। यह गैसीय आवरण धरती पर एक दबाव डालता है, जिसे वायुदाब कहते हैं। इसे आमतौर पर धरती की किसी खास जगह पर वायुमंडल के दबाव के रूप में बताया जाता है। समुद्र तल पर औसत वायुदाब लगभग \( 1013.25 \) मिलीबार होता है। धरती से ऊपर जाने पर वायुदाब कम होता जाता है। समुद्र तल से लगभग 540 मीटर की ऊँचाई पर वायुदाब की मात्रा समुद्र तल की तुलना में आधी पाई जाती है, क्योंकि हवा ऊपर कम घनी होती जाती है।
In simple words: वायुदाब का मतलब है कि हवा धरती पर कितना दबाव डालती है। ऊपर जाने पर हवा का दबाव कम होता जाता है।
🎯 Exam Tip: वायुदाब की परिभाषा और इसके ऊँचाई के साथ परिवर्तन को हमेशा याद रखें।
Question 12. डोलड्रम क्या है?
Answer: भूमध्यरेखीय पेटी का विस्तार भूमध्य रेखा से दोनों गोलार्धों में 5° अक्षांश वृत्तों तक मिलता है। इस पेटी में साल भर तापमान ऊँचा रहने के कारण वायु हल्की होकर ऊपर उठती है, जिससे धरातलीय क्षैतिज पवनें नहीं चलतीं। इस क्षेत्र में केन्द्रीय बल का सर्वाधिक प्रभाव पड़ता है।
In simple words: डोलड्रम भूमध्य रेखा के पास का वह क्षेत्र है जहाँ हवाएँ शांत रहती हैं और तापमान हमेशा ऊँचा रहता है।
🎯 Exam Tip: डोलड्रम को शांत पवन क्षेत्र या भूमध्यरेखीय शांत पेटी के रूप में भी जाना जाता है, इसे भी याद रखें।
Question 14. 'लू' किसे कहते हैं?
Answer: गर्मियों के मौसम में भारत के उत्तरी-पश्चिमी भागों और पाकिस्तान के मैदानी क्षेत्रों में आमतौर पर दोपहर के बाद बहुत गर्म और सूखी हवाएँ पश्चिम दिशा से चलती हैं। इन्हीं बहुत गर्म और सूखी हवाओं को 'लू' कहा जाता है। ये हवाएँ अक्सर मई-जून के महीनों में चलती हैं। इन हवाओं के कारण मौसम बहुत गर्म और असहज हो जाता है। इनके प्रभाव से गर्मियों की फसलें और घास सूख जाते हैं, जिससे कृषि को नुकसान होता है।
In simple words: 'लू' भारत और पाकिस्तान के गर्म इलाकों में गर्मियों में चलने वाली बहुत गर्म और सूखी हवा है, जो फसलें सुखा देती है।
🎯 Exam Tip: 'लू' जैसी स्थानीय पवनों की भौगोलिक स्थिति, समय और प्रभावों को विस्तार से याद रखें।
Question 15. वायुदाब को प्रभावित करने वाले कारकों के नाम बताइये।
Answer: वायुदाब को प्रभावित करने वाले मुख्य कारक तापमान, ऊँचाई, जलवाष्प और गतिक कारक हैं। इनका संक्षिप्त विवरण इस प्रकार है:
1. **तापमान:** तापमान और वायुदाब में अक्सर उलटा संबंध होता है। जहाँ गर्मी अधिक होती है, वहाँ वायुदाब कम होता है, जबकि ठंडे क्षेत्रों में वायुदाब अधिक होता है।
2. **जलवाष्प:** जितनी अधिक जलवाष्प हवा में होगी, वायुदाब उतना ही कम होगा। इसके विपरीत, सूखी हवा में वायुदाब अधिक मिलता है।
3. **ऊँचाई:** समुद्र तल से ऊँचाई बढ़ने के साथ-साथ वायुदाब कम होता जाता है। यह इसलिए होता है क्योंकि हवा ऊपर कम घनी होती जाती है।
4. **गतिक कारण:** पृथ्वी का घूमना (परिभ्रमण) धरती पर दबाव के अनुपात को नियंत्रित करता है।
In simple words: तापमान, ऊँचाई, हवा में पानी (जलवाष्प) और पृथ्वी का घूमना ही वायुदाब को घटाते या बढ़ाते हैं।
🎯 Exam Tip: इन कारकों को याद रखें और समझें कि प्रत्येक कारक वायुदाब को कैसे प्रभावित करता है।
RBSE Class 11 Physical Geography Chapter 13 निबन्धात्मक प्रश्न
Question 16. वायुदाब किसे कहते हैं? वायुदाब की पेटियों को वर्णन कीजिए।
Answer: हमारी पृथ्वी के चारों ओर वायुमंडल है, जो कई गैसों से बना हजारों किलोमीटर मोटा आवरण है। यह गैसीय आवरण धरती पर दबाव डालता है, जिसे वायुदाब कहते हैं। वायुदाब पेटियाँ विश्व में दो मुख्य प्रकार की वायुदाब पेटियाँ हैं, जो तापमान और पृथ्वी की गति से निर्धारित होती हैं।
वायुदाब पेटियों का वर्गीकरण निम्नानुसार है:
1. **तापजन्य वायुदाब पेटी (Thermal Pressure Belt):** इसमें भूमध्यरेखीय निम्न वायुदाब पेटी और ध्रुवीय उच्च वायुदाब पेटी शामिल हैं।
2. **गतिजन्य वायुदाब पेटी (Dynamic Pressure Belt):** इसमें उपोष्णकटिबंधीय उच्च वायुदाब पेटी और उपध्रुवीय निम्न वायुदाब पेटी शामिल हैं।
इन वायुदाब पेटियों का वर्णन इस प्रकार है:
(i) **भूमध्यरेखीय निम्नदाब पेटी:** यह पेटी भूमध्य रेखा के 5° उत्तर से 5° दक्षिण अक्षांशों तक फैली हुई है। यहाँ साल भर सूर्य की सीधी किरणें पड़ने से तापमान हमेशा ऊँचा रहता है और वायुदाब कम रहता है। इस क्षेत्र में वायुमंडल में जलवाष्प अधिक होती है और हवा का घनत्व कम होता है। भूमध्य रेखा पर पृथ्वी के घूमने की गति सबसे ज़्यादा होती है, जिससे यहाँ अपकेन्द्रीय बल सर्वाधिक होता है। इस पेटी में धरती पर क्षैतिज पवनें नहीं चलतीं, बल्कि अधिक तापमान के कारण हवा हल्की होकर ऊपर उठती है और संवहनीय धाराएँ बनती हैं। इसलिए इस कटिबंध को भूमध्यरेखीय शांत कटिबंध या डोलड्रम पेटी भी कहते हैं। यह एक तापजन्य पेटी है।
(ii) **उपोष्णकटिबंधीय उच्चदाब पेटी:** यह विषुवत रेखा के दोनों ओर 30° से 35° अक्षांशों के बीच स्थित है। यहाँ साल भर आमतौर पर उच्च तापमान, उच्च वायुदाब और बादलरहित आकाश मिलता है। इस पेटी की एक मुख्य विशेषता यह है कि विश्व के सभी गर्म रेगिस्तान इसी पेटी में महाद्वीपों के पश्चिमी किनारों पर स्थित हैं। वायुमंडल के ऊपरी भाग में घर्षण की कमी के कारण उत्तरी और दक्षिणी गोलार्ध में ये हवाएँ क्रमशः अपनी दाहिनी और बाईं ओर मुड़ जाती हैं। इन उच्चदाब क्षेत्रों को 'अश्व अक्षांश' भी कहते हैं। यह एक गतिजन्य पेटी है।
(iii) **उपध्रुवीय निम्नदाब पेटी:** यह पेटी 60° से 65° उत्तरी और दक्षिणी अक्षांशों के बीच स्थित है। इन अक्षांशों में तापमान कम होता है। लेकिन यहाँ उच्चदाब के बजाय निम्न वायुदाब मिलता है, जिसका मुख्य कारण पृथ्वी की घूमने की गति है। इन क्षेत्रों में गर्म जलधाराएँ चलने के कारण तापमान अधिक होने से हवा का भार कम पाया जाता है। यह भी एक गतिजन्य पेटी है।
(iv) **ध्रुवीय उच्च वायुदाब पेटी:** ध्रुवों के पास कम तापमान के कारण हमेशा उच्च वायुदाब रहता है। दोनों गोलार्धों में स्थित ये दोनों पेटियाँ तापमान से बनी हैं। यहाँ साल भर तापमान कम रहने के कारण ध्रुवों और उनके पास के क्षेत्रों की धरती हमेशा बर्फ से ढकी रहती है। इसलिए धरती के पास की हवा बहुत ठंडी और भारी रहती है। इसी कारण से यहाँ धरती के दबाव से जुड़े आँकड़े बहुत ज़्यादा मात्रा में नहीं मिल पाते हैं।
In simple words: वायुदाब धरती पर हवा का दबाव है। पृथ्वी पर मुख्य रूप से चार वायुदाब पेटियाँ हैं: भूमध्यरेखीय निम्न, उपोष्णकटिबंधीय उच्च, उपध्रुवीय निम्न और ध्रुवीय उच्च। ये तापमान और पृथ्वी की गति से बनते हैं।
🎯 Exam Tip: प्रत्येक वायुदाब पेटी के स्थान, निर्माण के कारण (तापजन्य या गतिजन्य) और प्रमुख विशेषताओं को याद रखना चाहिए।
Question 17. पवन क्या है? पवनों के कितने प्रकार होते हैं? वर्णन कीजिए।
Answer: क्षैतिज रूप में गतिशील वायु को पवन कहते हैं। पवनें उच्च वायुदाब क्षेत्र से निम्न वायुदाब क्षेत्र की ओर बहती हैं। यह वायुदाब के अंतर को संतुलित करने का प्राकृतिक प्रयास है। यदि पृथ्वी स्थिर होती और इसका धरातल एक समान समतल होता तो पवनें उच्च वायुदाब से निम्न वायुदाब वाले स्थानों की ओर, समदाब रेखाओं पर समकोण बनाते हुए, सीधी चलतीं। किंतु असल में ऐसा नहीं होता है, क्योंकि पवनों की दिशा और गति को कई कारक प्रभावित करते हैं।
पवनों को उनके प्रभाव क्षेत्र और अवधि के आधार पर मुख्य रूप से तीन भागों में बाँटा गया है:
(i) **स्थायी पवनें:** जो पवनें पूरे साल एक निश्चित दिशा और निश्चित क्रम में चलती हैं, उन्हें स्थायी पवनें कहते हैं। इन्हें प्रचलित पवनें, ग्रहीय पवनें, भूमंडलीय पवनें और सनातनी पवनें भी कहा जाता है। ये पवनें वायुदाब की पेटियों से जुड़ी होती हैं। इनमें मुख्य रूप से व्यापारिक पवनें, पछुआ पवन और ध्रुवीय पवनें शामिल हैं।
(ii) **सामयिक पवनें:** जिन हवाओं की दिशा मौसम या समय के अनुसार बदलती है, उन्हें सामयिक पवनें कहते हैं। इनमें मानसूनी पवनें, स्थल समीर और सागर समीर, और पर्वत समीर और घाटी समीर शामिल हैं।
(iii) **स्थानीय पवनें:** जो हवाएँ किसी खास जगह के तापमान और वायुदाब में अंतर के कारण चलती हैं, उन्हें स्थानीय पवनें कहते हैं। ये हवाएँ अक्सर वहाँ चलने वाली प्रचलित हवाओं के विपरीत स्वभाव वाली होती हैं। ये हवाएँ स्थानीय विशेषताओं के अनुसार गर्म, ठंडी, बर्फ से भरी, धूल से युक्त आदि कई प्रकार की हो सकती हैं। ये प्रभावित क्षेत्रों में लाभकारी या हानिकारक प्रभाव डालती हैं। मुख्य स्थानीय पवनों में चिनूक, फॉन, बोरा, सिराको, हरमट्टान, खमसिन, मिस्ट्रल, ब्लिजार्ड, ब्रिक फिल्डर, विली-विली आदि शामिल हैं।
In simple words: पवन चलती हुई हवा है। इसके तीन मुख्य प्रकार हैं: स्थायी पवनें (जो हमेशा एक दिशा में चलती हैं), सामयिक पवनें (जो मौसम के साथ बदलती हैं), और स्थानीय पवनें (जो किसी खास जगह पर चलती हैं)।
🎯 Exam Tip: पवनों के प्रकार, उनके उदाहरण और उनकी विशेषताओं को तालिका बनाकर याद करें।
Question 18. मानसून पवनों की उत्पत्ति से सम्बन्धित सिद्धान्तों का वैज्ञानिक परीक्षण कीजिए।
Answer: मानसून शब्द अरबी भाषा के 'मौसिम' शब्द से आया है, जिसका अर्थ 'मौसम' होता है। मानसूनी पवनें वे हवाएँ हैं जो मौसम के अनुसार अपनी दिशा बदल लेती हैं। इन पवनों की उत्पत्ति के लिए मुख्य रूप से तीन संकल्पनाएँ प्रस्तुत की गई हैं:
(i) **तापीय संकल्पना:** यह संकल्पना मानती है कि मानसून हवाएँ धरती और समुद्र के तापमान में अंतर के कारण बनती हैं। गर्मियों में जब सूरज की किरणें उत्तरी गोलार्ध में सीधी पड़ती हैं, तो जमीन समुद्र से ज़्यादा गर्म हो जाती है। इससे जमीन पर कम दबाव का क्षेत्र बन जाता है, और समुद्र से जमीन की ओर हवाएँ चलने लगती हैं। इन्हें ग्रीष्मकालीन मानसून कहते हैं, जो दक्षिण-पश्चिम दिशा से आते हैं और बारिश लाते हैं। इसके उलट, सर्दियों में जब सूरज दक्षिणी गोलार्ध में चला जाता है, तो जमीन समुद्र से ज़्यादा ठंडी हो जाती है। इससे जमीन पर ज़्यादा दबाव और समुद्र पर कम दबाव का क्षेत्र बनता है, और हवाएँ जमीन से समुद्र की ओर चलती हैं। इन्हें शीतकालीन मानसून या उत्तरी-पूर्वी मानसून कहते हैं, जो सूखी हवाएँ होती हैं।
(ii) **फूलॉन की गतिक संकल्पना:** फूलॉन ने मानसून की उत्पत्ति को तापमान से नहीं, बल्कि हवाओं की पेटियों के खिसकने से जोड़ा है। उनके अनुसार, विषुवत रेखा के पास व्यापारिक पवनें मिलती हैं, जिससे अंतः उष्णकटिबंधीय अभिसरण क्षेत्र (ITC) बनता है। इसकी उत्तरी सीमा को NITC और दक्षिणी सीमा को SITC कहते हैं। इस ITC के बीच डोलड्रम का क्षेत्र होता है, जहाँ विषुवतीय पछुआ हवाएँ चलती हैं। जब सूरज उत्तरी गोलार्ध में जाता है, तो NITC खिसककर 30° उत्तरी अक्षांश तक फैल जाता है, जिससे दक्षिण-पूर्वी एशिया इस क्षेत्र में आ जाता है। तब यहाँ डोलड्रम की विषुवतीय पछुआ हवाएँ स्थापित हो जाती हैं, जो गर्मी की दक्षिण-पश्चिमी मानसून हवाएँ होती हैं। इसी तरह, जब सूरज दक्षिणी गोलार्ध में जाता है, तो NITC हट जाता है और उत्तरी-पूर्वी व्यापारिक हवाएँ फिर से स्थापित हो जाती हैं, जो शीतकालीन उत्तरी-पूर्वी मानसून होता है।
(iii) **आधुनिक संकल्पना (जेट स्ट्रीम संकल्पना):** इसे 'जेट स्ट्रीम' संकल्पना के नाम से भी जाना जाता है। दक्षिणी एशिया में यह जेट स्ट्रीम नाम की तेज़ हवा क्षोभमंडल में लगभग 12 किमी की ऊँचाई पर पश्चिम से पूर्व की ओर चलती है। इसे उपोष्णकटिबंधीय पछुआ जेट स्ट्रीम कहते हैं। 60° उत्तरी अक्षांश पर इसकी ऊँचाई 9 से 10 किमी और ध्रुवों पर कम होती है। उत्तरी गोलार्ध में सर्दियों में, हिमालय और तिब्बत पठार के कारण यह जेट स्ट्रीम दो शाखाओं में बँट जाती है: उत्तरी शाखा तिब्बत पठार के उत्तर में और मुख्य शाखा तिब्बत पठार और हिमालय के दक्षिण में पश्चिम से पूर्व की ओर बहती है। ईरान के उत्तरी भाग और अफगानिस्तान के ऊपर यह जेट स्ट्रीम एक चक्रवातीय वक्र (घड़ी की सूई के विपरीत) के रूप में बहती है, जिससे क्षोभमंडल में गतिक निम्नदाब और चक्रवातीय स्थिति बनती है। यह उच्च तलीय निम्न दाब उत्तर-पश्चिमी भारत और पाकिस्तान तक फैला होता है। इसके नीचे धरती पर पहले से ही तापजन्य निम्न दाब होता है। इससे धरती के निम्न दाब से हवाएँ ऊपर उठती हैं और उच्च तलीय निम्न दाब इन हवाओं को और ऊपर खींचता है, जिससे दक्षिण-पश्चिम मानसून की अचानक बौछार (प्रस्फोट) होती है।
In simple words: मानसून हवाएँ मौसम के अनुसार दिशा बदलती हैं। इनके बनने के तीन मुख्य कारण हैं: धरती और समुद्र के तापमान का अंतर (तापीय), हवा की पेटियों का खिसकना (गतिक), और ऊँचाई पर चलने वाली तेज़ हवाएँ, जिन्हें जेट स्ट्रीम कहते हैं (आधुनिक)।
🎯 Exam Tip: मानसून की उत्पत्ति से जुड़ी सभी तीन संकल्पनाओं को उनके मुख्य बिंदुओं और वैज्ञानिक आधार के साथ तैयार करें।
RBSE Class 11 Physical Geography Chapter 13 अन्य महत्वपूर्ण प्रश्नोत्तर
RBSE Class 11 Physical Geography Chapter 13 वस्तुनिष्ठ प्रश्न
Question 1. सर्वाधिक वायुदाब मिलता है-
(अ) पृथ्वी तल के निकट
(ब) समताप मण्डल में
(स) पृथ्वी के ऊपरी भाग में
(द) इनमें से कोई नहीं
Answer: (अ) पृथ्वी तल के निकट
In simple words: हवा का सबसे ज़्यादा दबाव धरती के बिलकुल पास होता है, क्योंकि यहाँ सबसे ज़्यादा हवा होती है।
🎯 Exam Tip: वायुमंडल में ऊँचाई के साथ वायुदाब कैसे बदलता है, यह समझने के लिए ग्राफ का अभ्यास करें।
Question 2. पृथ्वी का घूर्णन वेग सर्वाधिक कहाँ मिलता है?
(अ) कर्क रेखा पर
(ब) भूमध्य रेखा पर
(स) मकर रेखा पर
(द) ध्रुवों पर
Answer: (ब) भूमध्य रेखा पर
In simple words: पृथ्वी सबसे तेज़ भूमध्य रेखा पर घूमती है, जहाँ दिन और रात बराबर होते हैं।
🎯 Exam Tip: पृथ्वी के घूर्णन और उसके प्रभावों, जैसे कोरिओलिस बल, को समझना महत्वपूर्ण है।
Question 5. निम्न में से जो गतिजन्य पेटी है, वह है-
(अ) भूमध्यरेखीय निम्नदाब पेटी
(ब) ध्रुवीय उच्च वायुदाब पेटी
(स) उपध्रुवीय निम्नदाब पेटी
(द) इनमें से कोई नहीं
Answer: (स) उपध्रुवीय निम्नदाब पेटी
In simple words: उपध्रुवीय निम्नदाब पेटी पृथ्वी के घूमने के कारण बनती है, इसलिए यह गतिजन्य पेटी है।
🎯 Exam Tip: वायुदाब पेटियों को तापजन्य और गतिजन्य श्रेणियों में वर्गीकृत करना सीखें।
Question 6. वायुदाब के वितरण हेतु मुख्यतः किन महीनों को चुना गया है?
(अ) फरवरी में अप्रैल
(ब) मार्च व अगस्त
(स) मई व सितम्बर
(द) जनवरी व जुलाई
Answer: (द) जनवरी व जुलाई
In simple words: वैज्ञानिक आमतौर पर जनवरी और जुलाई के महीनों को देखते हैं ताकि पता चल सके कि वायुदाब साल भर में कैसे बदलता है।
🎯 Exam Tip: मौसमी वायुदाब परिवर्तनों को समझने के लिए इन दो महीनों का अध्ययन महत्वपूर्ण है।
Question 7. जुलाई में सूर्य लम्बवत होता है-
(अ) भूमध्य रेखा पर
(ब) कर्क रेखा पर
(स) मकर रेखा पर
(द) आर्कटिक वृत्त पर
Answer: (ब) कर्क रेखा पर
In simple words: जुलाई के महीने में सूरज की किरणें कर्क रेखा पर सीधी पड़ती हैं, जिससे उत्तरी गोलार्ध में गर्मी बढ़ जाती है।
🎯 Exam Tip: संक्रांति की तिथियाँ और सूर्य की लंबवत किरणों के अक्षांशों को हमेशा याद रखें।
Question 9. गरजती चालीसा का संचरण क्षेत्र है-
(अ) दक्षिणी गोलार्द्ध में 40°-50° अक्षांश के मध्य
(ब) दक्षिणी गोलार्द्ध में 50° अक्षांश के पास
(स) दक्षिणी गोलार्द्ध में 60° अक्षांश के पास
(द) उत्तरी गोलार्द्ध में 50° अक्षांश के पास
Answer: (अ) दक्षिणी गोलार्द्ध में 40°-50° अक्षांश के मध्य
In simple words: 'गरजती चालीसा' दक्षिणी गोलार्ध में 40 से 50 डिग्री अक्षांशों के बीच चलने वाली बहुत तेज़ हवाएँ हैं।
🎯 Exam Tip: दक्षिणी गोलार्ध में पछुआ पवनों के विभिन्न नामों और उनके अक्षांशीय विस्तार को याद रखें।
Question 10. साइबेरिया में चलने वाली ठण्डी पवनें कहलाती हैं-
(अ) बोरा
(ब) मिस्ट्रल
(स) बुरान
(द) जोण्डा
Answer: (स) बुरान
In simple words: साइबेरिया में चलने वाली ठंडी हवाओं को 'बुरान' कहते हैं।
🎯 Exam Tip: विभिन्न क्षेत्रों की स्थानीय ठंडी और गर्म पवनों के नाम और उनकी विशेषताओं का अध्ययन करें।
सुमेलन सम्बन्धी प्रश्न
Question 1. निम्न में स्तम्भ अ को स्तम्भ ब से सुमेलित कीजिए
Answer:
| स्तम्भ (अ) (वायुदाब पेटी) | स्तम्भ (ब) (अक्षांशीय विस्तार) |
|---|---|
| (i) भूमध्य रेखीय निम्न दाब पेटी | (द) भूमध्य रेखा के दोनों ओर 5°-10° अक्षांशों के मध्य |
| (ii) उपोष्ण उच्च दाब पेटी | (स) दोनों गोलार्धों में 30°-35° अक्षांशों के मध्य |
| (iii) उपध्रुवीय निम्न दाब पेटी | (अ) दोनों गोलार्धों में 60°- 65° अक्षांशों के मध्य |
| (iv) ध्रुवीय उच्च दाब पेटी | (ब) दोनों गोलार्धों में ध्रुवों के निकट |
In simple words: प्रत्येक वायुदाब पेटी को उसके सही अक्षांशीय क्षेत्र से मिलाया गया है, जैसे भूमध्यरेखीय पेटी भूमध्य रेखा के पास होती है।
🎯 Exam Tip: वायुदाब पेटियों के अक्षांशीय विस्तार को ध्यान से समझें और याद रखें।
Question 2. निम्न में स्तम्भ अ को स्तम्भ ब से सुमेलित कीजिए
Answer:
| क्र.सं. | स्तम्भ (अ) (पवन का नाम) | स्तम्भ (ब) (संचरण क्षेत्र) |
|---|---|---|
| (i) | चिनूक | (ब) उत्तरी अमेरिका में रॉकीज के पूर्वी ढाल पर |
| (ii) | सिराको | (स) सहारा रेगिस्तान से भूमध्य सागर की ओर |
| (iii) | हरमट्टान | (य) सहारा रेगिस्तान के पूर्वी भाग में |
| (iv) | मिस्ट्रल | (र) फ्रांस व स्पेन |
| (v) | लू | (द) उत्तरी भारत व पाकिस्तान के मैदानी भाग |
| (vi) | बोरा | (अ) एड्रियाटिक सागर के पूर्वी किनारे पर |
In simple words: इस सारणी में अलग-अलग पवनों को उनके चलने वाले खास इलाकों से मिलाया गया है।
🎯 Exam Tip: स्थानीय पवनों के नाम, उनके प्रकार (गर्म/ठंडी) और वे किन क्षेत्रों में चलती हैं, इन सभी को अच्छी तरह याद करें।
RBSE Class 11 Physical Geography Chapter 13 अतिलघूत्तात्मक प्रश्न
Question 1. वायुदाब क्यों घटता है?
Answer: वायुमंडल में दबाव हमेशा एक जैसा नहीं रहता। यह हवा के तापमान से बदलता है। जब हवा गरम होती है, तो वह फैलती है और हल्की हो जाती है, जिससे उसका दबाव (वायुदाब) कम हो जाता है।
In simple words: हवा गर्म होने पर फैलती है और हल्की होकर ऊपर उठती है, जिससे वायुदाब घट जाता है।
🎯 Exam Tip: वायुदाब और तापमान के बीच के विपरीत संबंध को हमेशा ध्यान में रखें।
Question 4. वायुदाब पेटियों का निर्धारण किस आधार पर किया गया है?
Answer: वायुदाब पेटियों का निर्धारण मुख्य रूप से तापमान और पृथ्वी को एक ही प्रकार का धरातल (जैसे स्थल या जल) मानकर किया गया है। पृथ्वी के घूमने की गति भी इसमें एक महत्वपूर्ण कारक है।
In simple words: वायुदाब पेटियाँ तापमान और पृथ्वी के घूमने के तरीके के आधार पर बनाई गई हैं।
🎯 Exam Tip: तापजन्य और गतिजन्य वायुदाब पेटियों के निर्माण के कारणों को समझना आवश्यक है।
Question 5. वायुदाब में भिन्नता क्यों मिलती है?
Answer: भूमंडल पर वायुदाब में भिन्नता इसलिए मिलती है क्योंकि वायुदाब को नियंत्रित करने वाले कारकों में क्षेत्रीय अंतर पाए जाते हैं। ये कारक हवा के तापमान, ऊँचाई और नमी की मात्रा होते हैं, जो हर जगह अलग-अलग होते हैं।
In simple words: वायुदाब हर जगह एक जैसा नहीं होता क्योंकि तापमान, ऊँचाई और हवा में पानी की मात्रा हर जगह अलग होती है।
🎯 Exam Tip: वायुदाब में भिन्नता के कारणों और उनके प्रभावों को ध्यान से पढ़ें।
Question 6. पृथ्वीतल (ग्लोब) पर कितनी वायुदाब पेटियाँ मिलती हैं?
Answer: पृथ्वीतल (ग्लोब) पर मुख्य रूप से चार प्रकार की वायुदाब पेटियाँ मिलती हैं:
1. भूमध्यरेखीय निम्न वायुदाब पेटी
2. उपोष्णकटिबंधीय उच्च वायुदाब पेटी (उत्तरी एवं दक्षिणी)
3. उपध्रुवीय निम्न वायुदाब पेटी
4. उत्तरी एवं दक्षिणी ध्रुवीय उच्च वायुदाब पेटी
ये पेटियाँ पृथ्वी के विभिन्न अक्षांशों पर स्थित हैं।
In simple words: ग्लोब पर मुख्य रूप से चार वायुदाब पेटियाँ होती हैं: भूमध्यरेखा के पास निम्न, उपोष्णकटिबंधीय उच्च, उपध्रुवीय निम्न और ध्रुवों पर उच्च।
🎯 Exam Tip: सभी चार वायुदाब पेटियों के नाम और उनके अक्षांशीय स्थान को याद रखें।
Question 7. भूमध्य रेखा पर सदैव निम्न वायुदाब क्यों मिलता है?
Answer: भूमध्य रेखा पर साल भर तापमान ऊँचा बना रहता है क्योंकि यहाँ अधिकांश समय सूर्य की किरणें सीधी पड़ती हैं। इससे उच्च ताप की स्थिति बनती है और हवा गर्म होकर फैल जाती है, जिससे वायुदाब कम मिलता है।
In simple words: भूमध्य रेखा पर सूरज की रोशनी सीधी पड़ने से गर्मी ज़्यादा होती है, जिससे हवा फैलकर हल्की हो जाती है और वायुदाब कम रहता है।
🎯 Exam Tip: भूमध्यरेखीय क्षेत्र की उच्च ताप और निम्न वायुदाब की विशेषताओं को समझें।
Question 8. भूमध्य रेखा पर अपकेन्द्रीय बल सर्वाधिक क्यों मिलता है?
Answer: भूमध्यरेखा पर वायुमंडल में जलवाष्प की अधिकता रहती है और हवा का घनत्व कम रहता है। साथ ही, भूमध्य रेखा पर पृथ्वी के घूमने की गति (भू-घूर्णन का वेग) सर्वाधिक होती है, जिससे यहाँ अपकेन्द्रीय बल सबसे ज़्यादा होता है।
In simple words: भूमध्य रेखा पर पृथ्वी बहुत तेज़ घूमती है, जिससे चीज़ों को बाहर की ओर धकेलने वाला बल (अपकेन्द्रीय बल) सबसे ज़्यादा होता है।
🎯 Exam Tip: पृथ्वी के घूर्णन और अपकेन्द्रीय बल के बीच के संबंध को स्पष्ट रूप से समझें।
Question 10. उपोष्ण कटिबन्धीय उच्चदाब पेटी मुख्यतः क्यों जानी जाती है?
Answer: उपोष्ण कटिबन्धीय उच्चदाब पेटी मुख्य रूप से विश्व के सभी गर्म रेगिस्तानी क्षेत्रों के लिए जानी जाती है, जो इसी पेटी में महाद्वीपों के पश्चिमी किनारों पर स्थित हैं। यहाँ हवा नीचे उतरती है और शुष्क होती है।
In simple words: उपोष्णकटिबंधीय उच्चदाब पेटी अपने गर्म और सूखे मौसम के कारण दुनिया के बड़े रेगिस्तानों के लिए प्रसिद्ध है।
🎯 Exam Tip: उपोष्णकटिबंधीय उच्चदाब पेटी और रेगिस्तानों के बीच के संबंध को हमेशा याद रखें।
Question 11. अश्व अक्षांश से क्या तात्पर्य है?
Answer: विषुवत रेखा के दोनों ओर 30°-35° अक्षांशों के मध्य उपोष्णकटिबंधीय उच्चदाब पेटी मिलती है। इन उच्चदाब के क्षेत्रों को 'अश्व अक्षांश' भी कहते हैं। पुराने समय में नाविकों को यहाँ शांत हवाओं के कारण घोड़ों को समुद्र में फेंकना पड़ता था।
In simple words: अश्व अक्षांश 30-35 डिग्री अक्षांशों के पास का वह क्षेत्र है जहाँ हवाएँ शांत रहती हैं।
🎯 Exam Tip: 'अश्व अक्षांश' शब्द की उत्पत्ति और इसके भौगोलिक महत्व को समझें।
Question 12. उपध्रुवीय पेटी में ताप कम होते हुए भी वायुदाब कम मिलता है क्यों?
Answer: उपध्रुवीय निम्न वायुदाब पेटी में तापमान कम होता है, लेकिन इस स्थिति के होते हुए भी यहाँ उच्च वायुदाब के स्थान पर निम्न वायुदाब मिलता है। इसका प्रमुख कारण पृथ्वी की घूर्णन गति है, जिसके कारण यहाँ से हवाएँ ऊपर की ओर उठती हैं। हवा के ऊपर उठने से सतह पर दबाव कम हो जाता है।
In simple words: उपध्रुवीय पेटी में ठंडी होने के बावजूद, पृथ्वी के घूमने के कारण हवाएँ ऊपर उठती हैं, जिससे वायुदाब कम हो जाता है।
🎯 Exam Tip: तापमान और वायुदाब के बीच सामान्य संबंध के अपवादों (जैसे उपध्रुवीय पेटी) को समझें।
Question 13. ध्रुवीय क्षेत्रों में दाब सम्बन्धी आंकड़े प्रचुर मात्रा में क्यों नहीं प्राप्त किए जा सके हैं?
Answer: ध्रुवीय क्षेत्रों में साल भर तापमान बहुत कम रहने के कारण वहाँ बर्फ की मोटी परतें जमी रहती हैं। इसलिए धरती के पास की वायु बहुत ठंडी और भारी रहती है। इन कठिन मौसम स्थितियों और दुर्गम इलाकों के कारण धरातलीय दाब संबंधी आँकड़े ज़्यादा मात्रा में प्राप्त नहीं किए जा सके हैं।
In simple words: ध्रुवीय इलाकों में हमेशा बर्फ जमी रहती है और बहुत ठंड होती है, इसलिए वहाँ वायुदाब के आंकड़े इकट्ठा करना मुश्किल होता है।
🎯 Exam Tip: चरम भौगोलिक परिस्थितियों का मौसम संबंधी डेटा संग्रह पर पड़ने वाले प्रभावों को समझें।
Question 14. समभार रेखाओं से क्या तात्पर्य है? अथवा समदाब रेखाएँ क्या है?
Answer: मानचित्र पर वायुदाब का वितरण समभार (समदाब) रेखाओं द्वारा दिखाया जाता है। समदाब रेखाएँ वे रेखाएँ होती हैं जो धरती पर या समुद्र तल पर समान दबाव वाले स्थानों को मिलाती हुई खींची जाती हैं। ये रेखाएँ वायुदाब के पैटर्न को दर्शाती हैं।
In simple words: समभार रेखाएँ नक्शे पर ऐसी लाइनें होती हैं जो उन जगहों को जोड़ती हैं जहाँ हवा का दबाव एक जैसा होता है।
🎯 Exam Tip: समदाब रेखाओं की परिभाषा और उनका उपयोग वायुदाब मानचित्रों को पढ़ने में कैसे किया जाता है, इसे जानें।
Question 17. वायुदाब के घटने की दर समान क्यों नहीं होती है?
Answer: वायु के घनत्व, तापमान और जलवाष्प की मात्रा हर जगह अलग-अलग होती है. इसके साथ ही, पृथ्वी की गुरुत्वाकर्षण शक्ति भी हर जगह भिन्न होती है. इन सब अंतरों के कारण, वायुदाब के घटने की दर हर जगह एक जैसी नहीं होती है. वायुमंडल में दबाव लगातार बदलता रहता है.
In simple words: वायुदाब के घटने की दर एक समान नहीं होती क्योंकि हवा का घनत्व, तापमान और पानी की भाप की मात्रा अलग-अलग होती है, और पृथ्वी की खींचने की शक्ति भी हर जगह अलग है।
🎯 Exam Tip: जब भी कारकों से संबंधित प्रश्न आएँ, मुख्य कारकों को स्पष्ट रूप से लिखें और संक्षेप में समझाएँ कि वे कैसे प्रभाव डालते हैं।
Question 18. ऊँची पर्वत चोटियों पर चढ़ते समय मानव ऑक्सीजन के सिलेण्डरों व विशेष सूट का उपयोग क्यों करते हैं?
Answer: जैसे-जैसे हम ऊँचाई पर जाते हैं, हवा में गैसें कम घनी और हल्की होती जाती हैं. इसका मतलब है कि वायुदाब बहुत कम हो जाता है. कम वायुदाब के कारण साँस लेना मुश्किल हो जाता है. इसलिए, ऊँची पर्वत चोटियों पर चढ़ने वाले लोग ऑक्सीजन सिलेंडर और विशेष सूट का उपयोग करते हैं, ताकि उन्हें पर्याप्त ऑक्सीजन मिल सके और वे सुरक्षित रह सकें.
In simple words: ऊँचे पहाड़ों पर हवा पतली और हल्की होती है, जिससे वायुदाब कम हो जाता है. इसलिए, पर्वतारोही ऑक्सीजन सिलेंडर और विशेष सूट पहनते हैं ताकि उन्हें साँस लेने में दिक्कत न हो.
🎯 Exam Tip: अपने उत्तर में ऑक्सीजन की कमी और वायुदाब के संबंध को स्पष्ट करें, साथ ही सुरक्षा उपकरणों के उपयोग का कारण भी बताएँ।
Question 19. पवनें कहाँ से कहाँ की ओर चलती हैं?
Answer: पवनें हमेशा उच्च वायुदाब वाले क्षेत्रों से निम्न वायुदाब वाले क्षेत्रों की ओर चलती हैं. यह हवा का प्राकृतिक बहाव है जो वायुदाब के अंतर को संतुलित करने की कोशिश करता है.
In simple words: हवा हमेशा वहाँ से चलती है जहाँ दबाव ज़्यादा होता है, और उस जगह जाती है जहाँ दबाव कम होता है.
🎯 Exam Tip: वायुदाब के अंतर को पवनों की दिशा का प्राथमिक कारण बताएँ।
Question 20. दाब प्रवणता से क्या तात्पर्य है?
Answer: दाब प्रवणता का मतलब है कि किन्हीं भी दो जगहों के बीच वायुदाब में कितना अंतर है. इस अंतर को बैरोमैट्रिक ढाल भी कहते हैं. यह वायुदाब का अंतर ही है जो हवा को एक जगह से दूसरी जगह धकेलता है.
In simple words: दाब प्रवणता का मतलब है दो जगहों के वायुदाब के बीच का अंतर.
🎯 Exam Tip: दाब प्रवणता की परिभाषा देते समय 'वायुदाब में अंतर' और 'बैरोमैट्रिक ढाल' जैसे शब्दों का उपयोग करें।
Question 21. कारिऑलिस प्रभाव किसे कहते हैं?
Answer: पृथ्वी के अपने अक्ष पर घूमने के कारण, हवाएँ अपनी सीधी दिशा से भटक जाती हैं. इस भटकने वाले बल को कारिऑलिस बल कहते हैं, और इस बल के कारण होने वाले बदलाव को कारिऑलिस प्रभाव कहा जाता है. यह प्रभाव उत्तरी गोलार्द्ध में हवा को दाहिनी ओर और दक्षिणी गोलार्द्ध में बाईं ओर मोड़ देता है.
In simple words: पृथ्वी के घूमने के कारण हवाएँ सीधी न जाकर मुड़ जाती हैं. इसी मोड़ को कारिऑलिस प्रभाव कहते हैं.
🎯 Exam Tip: कारिऑलिस प्रभाव को पृथ्वी के घूर्णन और पवनों के विक्षेपण से जोड़कर समझाएँ, साथ ही दोनों गोलार्द्धों में दिशा परिवर्तन का उल्लेख करें।
Question 23. महासागरीय भागों की तुलना में स्थलीय भागों पर पवनों की गति धीमी क्यों हो जाती है?
Answer: महासागर की सतह पर हवा का घर्षण (टक्कर) कम होता है, जिससे हवाएँ बहुत तेज़ चलती हैं. इसके उलट, ज़मीनी इलाकों में घर्षण ज़्यादा होता है क्योंकि यहाँ पहाड़, पेड़ और इमारतें होती हैं. इस ज़्यादा घर्षण के कारण ज़मीनी भागों पर हवा की गति धीमी हो जाती है.
In simple words: समुद्र पर घर्षण कम होता है, इसलिए हवा तेज़ चलती है. ज़मीन पर पेड़ और इमारतें घर्षण बढ़ाती हैं, जिससे हवा धीमी हो जाती है.
🎯 Exam Tip: 'घर्षण' (friction) को गति के अंतर का मुख्य कारण बताएँ और समुद्री और स्थलीय सतह के बीच के अंतर को समझाएँ।
Question 24. पछुआ व पुरवा पवनों से क्या तात्पर्य है?
Answer: वे हवाएँ जो पश्चिम दिशा से आती हैं, उन्हें पछुआ पवन कहते हैं. वहीं, जो हवाएँ पूर्व दिशा से आती हैं, उन्हें पुरवा पवन कहते हैं. ये हवाएँ पृथ्वी पर अलग-अलग वायुदाब पेटियों के कारण चलती हैं.
In simple words: पश्चिम से आने वाली हवा को पछुआ पवन कहते हैं, और पूर्व से आने वाली हवा को पुरवा पवन कहते हैं.
🎯 Exam Tip: पवनों की दिशा के आधार पर उनके नाम स्पष्ट करें।
Question 25. पवनों को उनके प्रभाव क्षेत्र व अवधि के आधार पर किन भागों में बाँटा गया है?
Answer: पवनों को उनके प्रभाव क्षेत्र और चलने की अवधि के आधार पर मुख्य रूप से तीन भागों में बाँटा गया है: स्थाई पवनें, सामयिक पवनें और स्थानीय पवनें. ये तीनों प्रकार की पवनें धरती पर अलग-अलग तरह से मौसम को प्रभावित करती हैं.
In simple words: हवाओं को उनके चलने की जगह और समय के हिसाब से स्थाई, सामयिक और स्थानीय पवनों में बाँटा गया है.
🎯 Exam Tip: पवनों के वर्गीकरण के इन तीनों मुख्य प्रकारों को स्पष्ट रूप से सूचीबद्ध करें।
Question 26. व्यापारिक पवनें किसे कहते हैं?
Answer: व्यापारिक पवनें वे हवाएँ हैं जो दोनों गोलार्द्धों में उपोष्ण उच्च वायुदाब पेटियों से विषुवतीय निम्न वायुदाब पेटी की ओर चलती हैं. ये पवनें लगातार एक ही दिशा में बहती हैं. पुराने समय में इनका उपयोग पाल वाली नावों से व्यापार करने के लिए किया जाता था, इसलिए इन्हें 'व्यापारिक पवनें' कहा जाता है.
In simple words: व्यापारिक पवनें वे हवाएँ हैं जो उपोष्ण कटिबंध से भूमध्य रेखा की ओर लगातार चलती हैं, और पहले इनका इस्तेमाल समुद्री व्यापार के लिए होता था.
🎯 Exam Tip: व्यापारिक पवनों की उत्पत्ति के स्थान (उपोष्ण उच्च वायुदाब) और दिशा (विषुवतीय निम्न वायुदाब की ओर) का उल्लेख करें, साथ ही नामकरण का ऐतिहासिक कारण भी बताएँ।
Question 27. पछुआ पवनों से क्या तात्पर्य है?
Answer: पछुआ पवनें वे हवाएँ हैं जो दोनों गोलार्द्धों में उपोष्ण उच्च वायुदाब पेटियों से उपध्रुवीय निम्न वायुदाब पेटियों की ओर बहती हैं. ये मुख्य रूप से पश्चिमी दिशा से चलती हैं और मध्य अक्षांशों में पाई जाती हैं. समुद्री इलाकों में इनकी गति बहुत तेज़ होती है.
In simple words: पछुआ पवनें उपोष्ण कटिबंध से उपध्रुवीय क्षेत्रों की ओर पश्चिम दिशा में चलने वाली हवाएँ हैं.
🎯 Exam Tip: पछुआ पवनों की उत्पत्ति और दिशा को उपोष्ण उच्च वायुदाब पेटी और उपध्रुवीय निम्न वायुदाब पेटी से जोड़कर समझाएँ।
Question 28. ध्रुवीय पवनों से क्या तात्पर्य है?
Answer: ध्रुवीय पवनें वे हवाएँ हैं जो दोनों गोलार्द्धों में ध्रुवीय उच्च वायुदाब पेटी से उपध्रुवीय निम्न वायुदाब पेटी की ओर चलती हैं. ये पवनें बहुत ठंडी और शुष्क होती हैं क्योंकि ये ध्रुवीय ठंडे क्षेत्रों से आती हैं.
In simple words: ध्रुवीय पवनें ठंडे ध्रुवों से उपध्रुवीय क्षेत्रों की ओर चलने वाली हवाएँ हैं.
🎯 Exam Tip: ध्रुवीय पवनों की उत्पत्ति (ध्रुवीय उच्च वायुदाब) और उनकी विशेषताओं (ठंडी व शुष्क) का उल्लेख करें।
Question 30. मानसूनी पवनों से क्या अभिप्राय है?
Answer: 'मानसून' शब्द अरबी भाषा के 'मौसिम' शब्द से आया है, जिसका मतलब 'मौसम' होता है. मानसूनी पवनें उन हवाओं को कहते हैं जो मौसम के अनुसार अपनी दिशा बदल लेती हैं. ये हवाएँ खास तौर पर दक्षिणी एशिया में मौसम को बहुत प्रभावित करती हैं, जिससे बारिश होती है.
In simple words: मानसूनी पवनें वे हवाएँ हैं जो मौसम के हिसाब से अपनी दिशा बदलती हैं.
🎯 Exam Tip: मानसूनी पवनों की परिभाषा में उनके नाम के अर्थ और मौसमी दिशा परिवर्तन को स्पष्ट करें।
Question 31. स्थलीय समीर किसे कहते है?
Answer: रात के समय ज़मीनी भाग पानी की तुलना में तेज़ी से ठंडा हो जाता है. इससे ज़मीनी भाग पर उच्च वायुदाब बन जाता है, जबकि समुद्र पर निम्न वायुदाब होता है. इसी वायुदाब के अंतर के कारण हवाएँ ज़मीन से समुद्र की ओर चलती हैं. इन हवाओं को स्थलीय समीर कहते हैं.
In simple words: रात में ज़मीन के जल्दी ठंडा होने से हवा ज़मीन से समुद्र की ओर चलती है, जिसे स्थलीय समीर कहते हैं.
🎯 Exam Tip: स्थलीय समीर की प्रक्रिया में भूमि और जल के तापमान के अंतर और वायुदाब के निर्माण को समझाएँ।
Question 32. स्थानीय पवनें क्या होती हैं?
Answer: स्थानीय पवनें वे हवाएँ होती हैं जो किसी खास जगह के तापमान और वायुदाब में अंतर के कारण चलती हैं. ये पवनें बहुत छोटे इलाके में ही असर करती हैं और अक्सर उस जगह की खास भौगोलिक और जलवायु विशेषताओं से जुड़ी होती हैं. उदाहरण के लिए, लू भारत में एक स्थानीय पवन है.
In simple words: स्थानीय पवनें वे हवाएँ हैं जो किसी खास जगह के तापमान और दबाव के अंतर से चलती हैं.
🎯 Exam Tip: स्थानीय पवनों की परिभाषा में 'विशेष स्थान' और 'तापमान व वायुदाब में अंतर' पर ज़ोर दें।
Question 33. कुछ मुख्य स्थानीय पवनों के नाम लिखिए।
Answer: दुनिया में कई मुख्य स्थानीय पवनें हैं, जिनमें चिनूक, ब्लिजार्ड, बोरा, फॉन, हरमट्टान, काराबुरान, लू, गिबली, पम्पेरो, जोण्डा, ब्रिकफिल्डर, खमसिन, सिरोको और विली-विली शामिल हैं. ये सभी पवनें अपने-अपने क्षेत्रों में विशेष मौसम प्रभाव डालती हैं.
In simple words: कुछ मुख्य स्थानीय हवाएँ हैं चिनूक, ब्लिजार्ड, बोरा, फॉन, हरमट्टान, लू, और सिरोको.
🎯 Exam Tip: प्रमुख स्थानीय पवनों के कम से कम 5-7 नाम याद रखें।
Question 34. किन पवनों को हिम-भक्षिणी पवन कहा जाता है व क्यों?
Answer: उत्तरी अमेरिका में रॉकी पर्वतों को पार करके पूर्व की ओर चलने वाली चिनूक पवन को हिम-भक्षिणी पवन कहते हैं. इन्हें ऐसा इसलिए कहा जाता है क्योंकि सर्दियों के मौसम में जब ये गर्म और शुष्क पवनें अमेरिकी मैदानों में जमी बर्फ पर पहुँचती हैं, तो यह बर्फ पिघलने लगती है.
In simple words: चिनूक पवन को हिम-भक्षिणी पवन कहते हैं क्योंकि यह गर्म हवा सर्दियों में अमेरिकी मैदानों की बर्फ पिघला देती है.
🎯 Exam Tip: हिम-भक्षिणी पवन के नामकरण का कारण (बर्फ पिघलाना) और उदाहरण (चिनूक) स्पष्ट रूप से बताएँ।
Question 35. रक्त वर्षा से क्या तात्पर्य है?
Answer: रक्त वर्षा एक ऐसी घटना है जब हवा में लाल रेत के कण मिले होते हैं, और जब बारिश होती है तो पानी लाल रंग का दिखाई देता है. यह अक्सर तब होता है जब सिराको जैसी गर्म और शुष्क पवनें सहारा रेगिस्तान से लाल रेत उड़ाकर ले जाती हैं और फिर भूमध्य सागर के ऊपर नमी धारण करके बारिश करती हैं. इस अनोखी घटना को रक्त वर्षा कहते हैं.
In simple words: रक्त वर्षा तब होती है जब लाल धूल भरी हवा बारिश करती है, जिससे बारिश का पानी लाल दिखता है.
🎯 Exam Tip: रक्त वर्षा की परिभाषा में लाल रेत और सिराको पवन के संबंध को स्पष्ट करें।
Question 36. हरमट्टान पवनें क्या हैं?
Answer: हरमट्टान पवनें अफ्रीका के सहारा रेगिस्तान के पूर्वी हिस्से में उत्तर-पूर्व और पूर्व दिशा से पश्चिम दिशा में चलने वाली गर्म और शुष्क हवाएँ हैं. इनकी गति तेज़ होती है. अफ्रीका के पश्चिमी तट पर ये हवाएँ मौसम को शुष्क और सुहावना बना देती हैं, इसलिए इन्हें 'डॉक्टर हवा' भी कहा जाता है. इस प्रकार की गर्म और शुष्क हवाएँ ऑस्ट्रेलिया के विक्टोरिया प्रांत में भी चलती हैं, जिन्हें 'ब्रिकफिल्डर' कहते हैं.
In simple words: हरमट्टान सहारा रेगिस्तान से चलने वाली गर्म और सूखी हवाएँ हैं, जो मौसम को सुहावना बनाती हैं.
🎯 Exam Tip: हरमट्टान पवनों की उत्पत्ति (सहारा रेगिस्तान) और उनके प्रभावों (मौसम शुष्क और सुहावना) का उल्लेख करें, साथ ही उनके दूसरे नाम 'डॉक्टर हवा' को भी बताएँ।
Question 37. बोरा पवन कहाँ चलती हैं?
Answer: बोरा पवन एक बहुत शुष्क और ठंडी हवा है जो एड्रियाटिक सागर के पूर्वी किनारों पर चलती है. यह विशेष रूप से उत्तरी इटली के हिस्से को प्रभावित करती है. इन हवाओं के कारण तापमान बहुत कम हो जाता है और कभी-कभी हिमांक से नीचे भी चला जाता है. इसकी तेज़ गति से कई बार इमारतों की छतें उड़ जाती हैं और पेड़-पौधे गिर जाते हैं.
In simple words: बोरा पवन एड्रियाटिक सागर के पूर्वी किनारों पर चलने वाली ठंडी और सूखी हवा है.
🎯 Exam Tip: बोरा पवन के क्षेत्र (एड्रियाटिक सागर के पूर्वी किनारे) और उसकी मुख्य विशेषताएँ (शुष्क, ठंडी, तेज़ गति) पर ध्यान दें।
RBSE Class 11 Physical Geography Chapter 13 लघुत्तरात्मक प्रश्न Type I
Question 1. वायुदाब के स्वरूप को स्पष्ट कीजिए।
Answer: पृथ्वी की सतह से हज़ारों किलोमीटर ऊपर तक हवा का एक बहुत बड़ा आवरण है जिसे वायुमंडल कहते हैं. यह वायुमंडल अपने वज़न के कारण पृथ्वी की सतह पर दबाव डालता है, जिसे वायुदाब कहते हैं. पृथ्वी की सतह के पास वायुदाब सबसे ज़्यादा होता है और जैसे-जैसे हम ऊपर जाते हैं, यह कम होता जाता है. वायुदाब और पवन जलवायु के बहुत महत्वपूर्ण तत्व हैं जो मौसम के दूसरे तत्वों को गहराई से प्रभावित करते हैं. किसी एक जगह का वायुदाब लगातार बदलता रहता है. वायुमंडल में दबाव हमेशा एक जैसा नहीं रहता; यह तापमान से नियंत्रित होता है. वायुदाब का ऊपर से नीचे की ओर वितरण भी बहुत महत्वपूर्ण होता है.
In simple words: वायुदाब पृथ्वी पर हवा के वज़न के कारण पड़ने वाला दबाव है. यह सतह पर ज़्यादा होता है और ऊपर जाने पर कम होता जाता है, और यह लगातार बदलता रहता है.
🎯 Exam Tip: वायुदाब की परिभाषा में वायुमंडल के वज़न, ऊँचाई के साथ बदलाव और जलवायु महत्व को शामिल करें।
Question 2. वायुदाब व पवन संचार में क्या सम्बन्ध है?
Answer: वायुदाब और पवन संचार का आपस में बहुत गहरा संबंध है. पवनों की उत्पत्ति का मुख्य कारण वायुदाब में अंतर ही होता है. अगर कहीं पर वायुदाब ज़्यादा है और कहीं पर कम, तो हवा ज़्यादा दबाव वाले क्षेत्र से कम दबाव वाले क्षेत्र की ओर चलने लगती है. वायुदाब का यह अंतर बारिश और तापमान को भी प्रभावित करता है. पवनें निम्न अक्षांशों (भूमध्य रेखा के पास) और उच्च अक्षांशों (ध्रुवों के पास) के बीच गर्मी को एक जगह से दूसरी जगह ले जाती हैं, जिससे पृथ्वी पर तापमान संतुलित रहता है. पवनों के कारण ही महासागरों से ज़मीन तक नमी पहुँचती है, जिससे बारिश होती है.
In simple words: वायुदाब का अंतर ही हवा को चलाता है. यह अंतर बारिश और तापमान पर भी असर डालता है, और हवा गर्मी व नमी को एक जगह से दूसरी जगह ले जाती है.
🎯 Exam Tip: वायुदाब के अंतर को पवनों की उत्पत्ति का मूल कारण बताएँ, और तापमान संतुलन तथा वर्षा में उनकी भूमिका का उल्लेख करें।
Question 3. भूमध्य रेखीय निम्न वायुदाब पेटी की विशेषता बताइये।
Answer: भूमध्य रेखीय निम्न वायुदाब पेटी की मुख्य विशेषताएँ इस प्रकार हैं:
1. यह पेटी भूमध्य रेखा के 5° उत्तर से 5° दक्षिण अक्षांशों के बीच फैली हुई है.
2. यहाँ पूरे साल सूर्य की किरणें सीधी पड़ती हैं, इसलिए तापमान हमेशा ज़्यादा रहता है और वायुदाब कम होता है.
3. इस क्षेत्र में हवा में जलवाष्प ज़्यादा होती है और हवा का घनत्व कम होता है.
4. भूमध्य रेखा पर पृथ्वी के घूमने की गति सबसे तेज़ होती है, जिससे अपकेन्द्रीय बल भी सबसे ज़्यादा होता है.
5. इस पेटी में ज़मीन पर हवाएँ सीधे नहीं चलतीं, बल्कि ज़्यादा तापमान के कारण हवा हल्की होकर ऊपर उठती है और संवहन धाराएँ पैदा करती है. इस क्षेत्र को 'भूमध्य रेखीय शांत कटिबंध' या 'डोलड्रम' पेटी भी कहते हैं.
6. यह एक तापजन्य पेटी है, जिसका मतलब है कि इसका निर्माण मुख्य रूप से तापमान के कारण होता है.
In simple words: भूमध्य रेखीय निम्न वायुदाब पेटी भूमध्य रेखा के पास 5° उत्तर से 5° दक्षिण तक फैली है. यहाँ पूरे साल ज़्यादा गर्मी और कम दबाव होता है, हवा हल्की होकर ऊपर उठती है, और इसे डोलड्रम भी कहते हैं.
🎯 Exam Tip: भूमध्य रेखीय निम्न वायुदाब पेटी की स्थिति, तापमान, वायुदाब की स्थिति और 'डोलड्रम' नाम को स्पष्ट रूप से समझाएँ।
Question 4. उपध्रुवीय निम्न दाब पेटी की विशेषता बताइए।
Answer: उपध्रुवीय निम्न दाब पेटी की मुख्य विशेषताएँ इस प्रकार हैं:
1. यह पेटी दोनों गोलार्द्धों में 60°- 65° उत्तरी और दक्षिणी अक्षांशों के बीच स्थित है.
2. इन अक्षांशों में तापमान कम पाया जाता है.
3. कम तापमान के बावजूद, यहाँ उच्च वायुदाब के बजाय निम्न वायुदाब मिलता है. इसका मुख्य कारण पृथ्वी की घूमने की गति है. यहाँ से हवाएँ ऊपर की ओर उठती हैं.
4. इस वायुदाब पेटी में गर्म समुद्री धाराएँ चलने के कारण तापमान अधिक होता है, जिससे वायुभार कम पाया जाता है.
5. यह एक गतिजन्य पेटी है, जिसका निर्माण मुख्य रूप से पृथ्वी की घूमने की गति के कारण होता है.
In simple words: उपध्रुवीय निम्न दाब पेटी 60°-65° अक्षांशों के बीच है, जहाँ तापमान कम होने पर भी निम्न वायुदाब होता है क्योंकि पृथ्वी के घूमने की गति के कारण हवाएँ ऊपर उठती हैं.
🎯 Exam Tip: उपध्रुवीय निम्न दाब पेटी की स्थिति, कम तापमान के बावजूद निम्न वायुदाब का कारण (पृथ्वी का घूर्णन) और उसके गतिजन्य स्वरूप पर ध्यान दें।
Question 5. जनवरी में वायुदाब की स्थिति कैसी होती है?
Answer: जनवरी के महीने में सूर्य दक्षिणी गोलार्द्ध में मकर रेखा पर लगभग सीधा चमकता है. इस वजह से दक्षिणी गोलार्द्ध में तापमान ज़्यादा होता है और वायुभार कम होता है. इस समय दक्षिणी अमेरिका, दक्षिणी अफ्रीका और ऑस्ट्रेलिया के अंदरूनी हिस्सों में निम्न वायुदाब के क्षेत्र बन जाते हैं. वहीं, उत्तरी गोलार्द्ध में पूरी तरह से विकसित उपोष्ण उच्च वायुदाब क्षेत्र महाद्वीपों पर मिलते हैं. इससे हवाएँ ठंडे और ज़्यादा दबाव वाले क्षेत्रों से गर्म और कम दबाव वाले क्षेत्रों की ओर चलती हैं.
In simple words: जनवरी में सूर्य दक्षिणी गोलार्द्ध में होता है, जिससे वहाँ ज़्यादा गर्मी और कम दबाव होता है. उत्तरी गोलार्द्ध में ज़्यादा दबाव वाले क्षेत्र बनते हैं.
🎯 Exam Tip: जनवरी में सूर्य की स्थिति (दक्षिणी गोलार्द्ध), तापमान और वायुदाब के प्रभावों को स्पष्ट करें, साथ ही दोनों गोलार्द्धों में प्रमुख वायुदाब क्षेत्रों का उल्लेख करें।
Question 6. पृथ्वी की परिभ्रमण गति का पवनों पर क्या प्रभाव पड़ता है?
Answer: पृथ्वी के अपने अक्ष पर घूमने के कारण हवाएँ अपनी सीधी दिशा से भटक जाती हैं. इस बल को कारिऑलिस बल कहते हैं और इसके प्रभाव को कारिऑलिस प्रभाव कहा जाता है. इस प्रभाव के कारण उत्तरी गोलार्द्ध में हवाएँ अपनी दाहिनी ओर और दक्षिणी गोलार्द्ध में अपनी बाईं ओर मुड़ जाती हैं. इस प्रभाव को फेरल नामक वैज्ञानिक ने सिद्ध किया था, इसलिए इसे फेरल का नियम भी कहते हैं. यह विक्षेपण पवनों की गति और दिशा दोनों को प्रभावित करता है.
In simple words: पृथ्वी के घूमने से हवाएँ मुड़ जाती हैं, जिसे कारिऑलिस प्रभाव कहते हैं. उत्तरी गोलार्द्ध में हवा दाईं ओर और दक्षिणी गोलार्द्ध में बाईं ओर मुड़ती है, यह फेरल का नियम है.
🎯 Exam Tip: पृथ्वी की परिभ्रमण गति, कारिऑलिस बल, और फेरल के नियम को जोड़कर समझाएँ, साथ ही पवनों की दिशा में होने वाले विक्षेपण को स्पष्ट करें।
Question 7. व्यापारिक पवनों का नामकरण कैसे हुआ हैं? स्पष्ट कीजिए।
Answer: पुराने समय में, जब लोग समुद्री यात्रा करते थे, तो पाल वाले जहाजों को इन पवनों से व्यापार करने में बहुत मदद मिलती थी. ये हवाएँ एक निश्चित दिशा में लगातार चलती थीं, जिससे जहाजों को दूर के देशों तक आसानी से पहुँचने में सहायता मिलती थी. इसी वजह से इन पवनों को 'व्यापारिक पवनें' कहा जाने लगा. उत्तरी गोलार्द्ध में इन्हें उत्तरी-पूर्वी व्यापारिक पवनें और दक्षिणी गोलार्द्ध में दक्षिणी-पूर्वी व्यापारिक पवनें कहते हैं.
In simple words: व्यापारिक पवनों का नाम इसलिए पड़ा क्योंकि पुराने समय में ये हवाएँ पाल वाले जहाजों को समुद्री व्यापार में मदद करती थीं.
🎯 Exam Tip: व्यापारिक पवनों के नामकरण के पीछे के ऐतिहासिक कारण को स्पष्ट करें और उनके उपयोग का वर्णन करें।
Question 9. दक्षिणी गोलार्द्ध में पछुआ पवनों को किन-किन नामों से जाना जाता है?
Answer: दक्षिणी गोलार्द्ध में महासागरीय क्षेत्र ज़्यादा फैला हुआ है, इसलिए पछुआ पवनें ज़्यादा नियमित और स्थिर होती हैं. इनकी गति भी बहुत तेज़ होती है. इनकी तेज़ गति के कारण दक्षिणी गोलार्द्ध में इन्हें अलग-अलग अक्षांशों पर अलग-अलग नामों से जाना जाता है:
1. 40°-50° दक्षिणी अक्षांशों के बीच: गरजती चालीसा
2. 50° दक्षिणी अक्षांश के पास: भयंकर पचासा
3. 60° दक्षिणी अक्षांश के पास: चीखती साठा
ये सभी नाम इन पवनों की तेज़ गति और उनसे उत्पन्न होने वाली आवाज़ के कारण दिए गए हैं.
In simple words: दक्षिणी गोलार्द्ध में पछुआ पवनों को उनकी तेज़ गति के कारण 'गरजती चालीसा', 'भयंकर पचासा' और 'चीखती साठा' जैसे नामों से जाना जाता है.
🎯 Exam Tip: दक्षिणी गोलार्द्ध में पछुआ पवनों के विभिन्न नामों को सही अक्षांशीय विस्तार के साथ याद रखें।
Question 10. ध्रुवीय पवनों की विशेषताएं बताइये।
Answer: ध्रुवीय पवनों की मुख्य विशेषताएँ इस प्रकार हैं:
1. ये पवनें ध्रुवीय क्षेत्रों (उच्च वायुदाब) से उपध्रुवीय क्षेत्रों (निम्न वायुदाब) की ओर चलती हैं.
2. उत्तरी गोलार्द्ध में इनकी दिशा उत्तर-पूर्व से दक्षिण-पश्चिम की ओर होती है, और दक्षिणी गोलार्द्ध में दक्षिण-पूर्व से उत्तर-पश्चिम की ओर होती है.
3. ध्रुवीय ठंडे क्षेत्रों से आने के कारण ये हवाएँ बहुत ठंडी और शुष्क होती हैं.
4. तापमान कम होने के कारण इनकी जलवाष्प धारण करने की क्षमता भी कम होती है.
5. उत्तरी गोलार्द्ध में तेज़ गति से चलने वाली ध्रुवीय पवनों को 'नारईस्टर' कहा जाता है.
In simple words: ध्रुवीय पवनें ठंडे ध्रुवीय क्षेत्रों से आती हैं, इसलिए वे बहुत ठंडी और सूखी होती हैं. ये ध्रुवीय उच्च दबाव से उपध्रुवीय निम्न दबाव की ओर चलती हैं.
🎯 Exam Tip: ध्रुवीय पवनों की उत्पत्ति, दिशा, तापमान और नमी की विशेषताओं पर ध्यान दें, साथ ही उत्तरी गोलार्द्ध में उनके विशिष्ट नाम को भी याद रखें।
Question 11. उत्तरी-पूर्वी मानसून किसे कहते हैं? अथवा शीतकालीन मानसून से क्या तात्पर्य है?
Answer: सर्दियों के मौसम में सूर्य दक्षिणी गोलार्द्ध की ओर होता है. इस वजह से ज़मीनी भाग पर उच्च वायुदाब के क्षेत्र बन जाते हैं, और समुद्री भागों पर निम्न वायुदाब के क्षेत्र बनते हैं. इस स्थिति के कारण हवाएँ ज़मीनी भाग से समुद्री भागों की ओर चलती हैं. इन पवनों को ही शीतकालीन मानसून या उत्तरी-पूर्वी मानसून कहते हैं. ये पवनें आमतौर पर शुष्क होती हैं क्योंकि ये ज़मीन से आती हैं.
In simple words: सर्दियों में जब हवाएँ ज़मीन से समुद्र की ओर चलती हैं, तो उन्हें शीतकालीन या उत्तरी-पूर्वी मानसून कहते हैं.
🎯 Exam Tip: शीतकालीन मानसून को सूर्य की स्थिति (दक्षिणी गोलार्द्ध), वायुदाब पैटर्न (ज़मीन पर उच्च, समुद्र पर निम्न) और पवनों की दिशा (ज़मीन से समुद्र की ओर) से जोड़कर समझाएँ।
Question 12. आधुनिक संकल्पना के अनुसार शरदकालीन मानसून कैसे उत्पन्न होता है?
Answer: आधुनिक संकल्पना के अनुसार, शरदकालीन मानसून 'जेट स्ट्रीम' नामक तेज़ हवा के प्रवाह से संबंधित है. दक्षिणी एशिया में यह जेट स्ट्रीम क्षोभमंडल में लगभग 12 किमी की ऊँचाई पर पश्चिम से पूर्व की ओर चलती है. सर्दियों में, इस उच्च तलीय पछुआ जेट स्ट्रीम का हिमालय और तिब्बत के पठार के कारण दो भागों में बँटवारा हो जाता है. उत्तरी शाखा तिब्बत के पठार के उत्तर में चापाकार रूप में चलती है, और मुख्य शाखा तिब्बत के पठार तथा हिमालय के दक्षिण में पश्चिम से पूर्व की ओर बहती है. जब सूर्य दक्षिणी गोलार्द्ध में होता है, तो ये जेट स्ट्रीम और वायुदाब पेटियाँ दक्षिण की ओर खिसक जाती हैं, जिससे शीतकालीन मानसून की उत्पत्ति होती है.
In simple words: आधुनिक सिद्धांत के अनुसार, शरदकालीन मानसून जेट स्ट्रीम और वायुदाब पेटियों के मौसमी बदलाव के कारण उत्पन्न होता है, जब सूर्य दक्षिणी गोलार्द्ध में होता है.
🎯 Exam Tip: शरदकालीन मानसून को जेट स्ट्रीम, हिमालय के अवरोध, और वायुदाब पेटियों के मौसमी खिसकाव से जोड़कर समझाएँ।
Question 13. सिराको पवनों के लक्षणों को स्पष्ट कीजिए। अथवा सिराको पवनों के प्रभावों को स्पष्ट कीजिए।
Answer: सिराको पवनों के मुख्य लक्षण और प्रभाव इस प्रकार हैं:
1. यह एक गर्म, शुष्क और रेत से भरी हवा है जो सहारा रेगिस्तान से उत्तर दिशा में भूमध्य सागर की ओर चलती है.
2. यह पवन 'रक्त वर्षा' के लिए ज़िम्मेदार होती है, जहाँ रेत के कारण बारिश लाल दिखाई देती है.
3. एटलस पर्वत के उत्तरी ढलान से नीचे उतरते समय इसकी शुष्कता और तापमान बढ़ जाता है.
4. इन हवाओं को अलग-अलग जगहों पर अलग-अलग नामों से जाना जाता है. जैसे- इटली में सिराको, लीबिया में गिबली, स्पेन में लेवेश, आदि.
5. इन हवाओं का पेड़-पौधों, खेती और फलों के बागों पर विनाशकारी प्रभाव पड़ता है क्योंकि ये शुष्क और गर्म होती हैं.
In simple words: सिराको सहारा से आने वाली गर्म, सूखी और रेतीली हवा है जो 'रक्त वर्षा' करती है और फसलों को नुकसान पहुँचाती है.
🎯 Exam Tip: सिराको पवनों की उत्पत्ति, विशेषताएँ (गर्म, शुष्क, रेतीली) और प्रभावों (रक्त वर्षा, कृषि पर नकारात्मक असर) को स्पष्ट रूप से बताएँ।
Question 14. ब्लिजार्ड पवनों की विशेषताएँ बताइये।
Answer: ब्लिजार्ड पवनों की मुख्य विशेषताएँ इस प्रकार हैं:
1. ये पवनें बर्फीले तूफ़ान होते हैं जो बहुत ठंडी और तेज़ गति वाली हवाओं के साथ बर्फ़ और हिम-कणों को उड़ाते हैं.
2. इन पवनों में बर्फ़ के कण बहुत ज़्यादा होते हैं, जिससे दृश्यता पूरी तरह से ख़त्म हो जाती है और कुछ भी दिखाई नहीं देता.
3. इन पवनों के आने से तापमान अचानक बहुत ज़्यादा गिर जाता है, अक्सर हिमांक से भी नीचे चला जाता है.
4. इन पवनों के कारण ज़मीन की सतह बर्फ़ से ढक जाती है, जिससे आवागमन और रोज़मर्रा के काम मुश्किल हो जाते हैं.
In simple words: ब्लिजार्ड बहुत ठंडी और बर्फीली हवाएँ होती हैं जो दृश्यता कम कर देती हैं, तापमान अचानक गिरा देती हैं, और ज़मीन को बर्फ़ से ढक देती हैं.
🎯 Exam Tip: ब्लिजार्ड पवनों की मुख्य विशेषताओं में उनकी ठंडक, बर्फ़ीले कण, दृश्यता पर प्रभाव और तापमान गिरावट को शामिल करें।
RBSE Class 11 Physical Geography Chapter 13 लघुत्तरात्मक प्रश्न Type II
Question 1. उपोष्ण कटिबन्धीय उच्चदाब पेटी को स्पष्ट कीजिए।
Answer: उपोष्ण कटिबन्धीय उच्चदाब पेटी दोनों गोलार्द्धों में 30°-35° अक्षांशों के बीच पाई जाती है. इस पेटी में पूरे साल तापमान उच्च रहता है, वायुदाब भी ज़्यादा होता है और आसमान साफ़ रहता है (मेघ-रहित). इस वायुदाब पेटी की एक मुख्य विशेषता यह है कि दुनिया के सभी उष्ण मरुस्थलीय क्षेत्र इसी पेटी में महाद्वीपों के पश्चिमी किनारों पर स्थित हैं. वायुमंडल के ऊपरी हिस्से में घर्षण कम होने के कारण उत्तरी और दक्षिणी गोलार्द्ध में हवाएँ अपनी दाहिनी और बाईं ओर मुड़ जाती हैं. इन उच्चदाब क्षेत्रों को 'अश्व अक्षांश' भी कहते हैं. यह एक गतिजन्य पेटी है. इस पेटी में, सर्दियों को छोड़कर बाकी समय तापमान अधिक रहता है.
In simple words: उपोष्ण कटिबन्धीय उच्चदाब पेटी 30°-35° अक्षांशों के बीच है, जहाँ साल भर ज़्यादा तापमान और ज़्यादा दबाव रहता है. यहाँ दुनिया के रेगिस्तान भी मिलते हैं और इसे 'अश्व अक्षांश' भी कहते हैं.
🎯 Exam Tip: उपोष्ण कटिबन्धीय उच्चदाब पेटी की स्थिति, तापमान-वायुदाब की स्थिति, मरुस्थलों से संबंध और 'अश्व अक्षांश' नाम को स्पष्ट करें।
Question 2. वायुदाब पेटियों में होने वाले खिसकाव का वर्णन कीजिए। अथवा वायुदाब पेटियों के ऋतुगत परिवर्तन के स्वरूप को बताइये।
Answer: वायुदाब पेटियों का वितरण हमेशा एक जैसा नहीं रहता. सूर्य की उत्तरायण और दक्षिणायन की स्थितियाँ, ज़मीन और पानी की प्रकृति में अंतर, और अन्य कारक वायुदाब में रोज़ाना और सालाना बदलाव लाते हैं.
गर्मियों में जब सूर्य उत्तरी गोलार्द्ध में होता है, तो ये पेटियाँ अपनी औसत स्थिति से 5° उत्तर की ओर खिसक जाती हैं. सर्दियों में जब सूर्य दक्षिणी गोलार्द्ध में सीधा चमकता है, तो ये पेटियाँ अपनी औसत स्थिति से 5° दक्षिण की ओर खिसक जाती हैं. इनकी आदर्श स्थिति 21 मार्च और 23 सितंबर को होती है, जब सूर्य विषुवत रेखा पर सीधा होता है.
वायुदाब पेटियों के खिसकाव के समय, विषुवत् रेखीय पेटी 5° अक्षांश की जगह 0°-10° अक्षांशों के बीच ऋतु के अनुसार उत्तरी और दक्षिणी गोलार्द्ध में स्थित हो जाती है. इसी तरह, उपोष्ण पेटी 30°-35° अक्षांशों की जगह 30°-40° अक्षांशों के बीच और उपध्रुवीय पेटी 60°-65° अक्षांशों की जगह 60°-70° अक्षांशों के बीच पाई जाती है. ध्रुवीय प्रदेशों में, खासकर उत्तरी ध्रुवीय प्रदेश में, महाद्वीपीय विस्तार के कारण इसका ज़्यादा प्रभाव पड़ता है, क्योंकि यहाँ गर्मियों में ध्रुवीय पेटी बहुत संकरी हो जाती है. दक्षिणी ध्रुवीय प्रदेश में ज़मीन कम होने और महासागरीय विस्तार ज़्यादा होने के कारण इनमे ज़्यादा बदलाव नहीं दिखता है.
In simple words: वायुदाब पेटियाँ सूर्य की स्थिति के अनुसार उत्तर या दक्षिण की ओर खिसकती रहती हैं. गर्मियों में 5° उत्तर और सर्दियों में 5° दक्षिण की ओर खिसकती हैं. यह बदलाव ज़मीन और पानी के अलग-अलग गर्म होने के कारण होता है, जिससे मौसम में परिवर्तन आता है.
🎯 Exam Tip: वायुदाब पेटियों के खिसकाव को सूर्य की उत्तरायण-दक्षिणायन गति, ज़मीन-पानी के स्वभाव, और दोनों गोलार्द्धों में खिसकाव की मात्रा से जोड़कर समझाएँ।
Question 3. वायुमण्डलीय दाब के ऊर्ध्वाधर वितरण को स्पष्ट कीजिए। अथवा समुद्र तल से ऊँचाई में जाने पर वायुदाब में होने वाले परिवर्तनों की प्रक्रिया को स्पष्ट कीजिए।
Answer: पास्कल ने सबसे पहले बताया था कि वायुमंडल में ऊँचाई के साथ वायुदाब कम होता जाता है. वायुमंडल की निचली परतों का घनत्व ज़्यादा होता है, क्योंकि ऊपर की हवा का दबाव उन पर पड़ता है. इस वजह से निचली परतों की हवा का घनत्व और दबाव दोनों ज़्यादा होते हैं. इसके उलट, ऊपरी परतों की हवा कम घनी होती है, इसलिए उनका घनत्व और दबाव दोनों कम होते हैं. यही कारण है कि ऊँचाई के साथ वायुदाब हमेशा घटता रहता है, लेकिन इसके घटने की दर हमेशा एक जैसी नहीं होती है.
यह हवा के घनत्व, तापमान, जलवाष्प की मात्रा और पृथ्वी की गुरुत्वाकर्षण शक्ति पर निर्भर करता है. इन सभी कारकों के बदलते रहने के कारण ऊँचाई और वायुदाब के बीच कोई सीधा संबंध नहीं होता. फिर भी, आमतौर पर क्षोभमंडल में वायुदाब घटने की औसत दर प्रति 300 मीटर की ऊँचाई पर लगभग 34 मिलीबार होती है. ज़्यादा ऊँचाई पर गैसें तेज़ी से विरल और हल्की होती जाती हैं. परिणामस्वरूप वायुदाब बहुत ज़्यादा कम हो जाता है. इसीलिए इंसान ऊँची पर्वत चोटियों पर चढ़ते समय ऑक्सीजन के सिलेंडर और विशेष सूट का उपयोग करता है.
In simple words: ऊँचाई बढ़ने पर वायुदाब कम होता जाता है, लेकिन यह हर जगह एक समान दर से नहीं घटता. यह हवा के घनत्व, तापमान और गुरुत्वाकर्षण पर निर्भर करता है.
🎯 Exam Tip: वायुदाब के ऊर्ध्वाधर वितरण को समझाते हुए 'पास्कल के नियम', घनत्व के महत्व, और वायुदाब घटने की दर के कारकों (घनत्व, तापमान, जलवाष्प, गुरुत्वाकर्षण) का उल्लेख करें।
Question 4. स्थलीय समीर और सागरीय समीर में मिलने वाले अन्तर को स्पष्ट कीजिए।
Answer: स्थलीय समीर और सागरीय समीर के बीच मुख्य अंतर इस प्रकार हैं:
| क्र.सं. | अन्तर का आधार | स्थलीय समीर | सागरीय समीर |
|---|---|---|---|
| 1. | चलने की स्थिति | स्थल से सागर की ओर चलती हैं। | सागर से स्थल की ओर चलती हैं। |
| 2. | चलने का कारण | स्थलीय भाग पर उच्चदाब विकसित होने व सागरों पर निम्न दाब की स्थिति के कारण चलती हैं। | सागरीय भागों पर उच्चदाब व स्थलीय भाग पर न्यून वायुदाब विकसित होने के कारण चलती हैं। |
| 3. | चलने की अवधि | रात्रि के समय, स्थलीय भाग में जल की अपेक्षा तीव्र गति से ऊष्मा के अधिक ह्रास के परिणामस्वरूप चलती हैं। | दिन के समय, सूर्य की किरणों से स्थलीय भाग के जल की तुलना में शीघ्र गर्म हो जाने के कारण चलती हैं। |
| 4. | नमी की स्थिति | स्थल से चलने के कारण प्रायः शुष्क होती हैं। | समुद्रों से चलने के कारण नमी से युक्त होती हैं। |
| 5. | तापमान की स्थिति | प्रायः ताप वृद्धि करती हैं। | प्रायः ताप को कम करती हैं। |
| 6. | जलवायु पर प्रभाव | समुद्र तटीय भागों की जलवायु सम बनी रहती है। | मौसम सुहावना व स्वास्थ्यप्रद हो जाता है। |
| 7. | संचार | वर्ष में अधिकांश समय चलती हैं। | केवल गर्मियों में दिन के समय ही हो पाता है। |
🎯 Exam Tip: स्थलीय और सागरीय समीर के अंतर को स्पष्ट करने के लिए तालिका का उपयोग करें, जिसमें उत्पत्ति के समय, दिशा, नमी और तापमान के प्रभावों को शामिल किया गया हो।
Question 5. सागरीय पवनों की स्थिति को स्पष्ट कीजिए। अथवा सागरीय समीरों के स्वरूप को स्पष्ट कीजिए।
Answer: दिन के समय, सूर्य की किरणों से ज़मीन का भाग पानी की तुलना में जल्दी गर्म हो जाता है. इससे तट के पास ज़मीनी इलाकों में निम्न वायुदाब बन जाता है, जबकि समुद्री भागों पर उच्च वायुदाब रहता है. इस वायुदाब के अंतर के कारण हवाएँ समुद्र से ज़मीन की ओर चलने लगती हैं, जिन्हें सागरीय समीर कहते हैं. इन हवाओं का चलना सुबह 10-11 बजे शुरू होता है और दोपहर 1-2 बजे के बीच इनकी गति सबसे तेज़ होती है, फिर रात 8 बजे तक ये ख़त्म हो जाती हैं. उष्ण कटिबंधीय क्षेत्रों में, इन हवाओं के आने से तटीय इलाकों का तापमान 15-20 मिनट के अंदर 5-7°C तक गिर जाता है. परिणामस्वरूप मौसम सुहावना और स्वास्थ्य के लिए अच्छा हो जाता है. ये हवाएँ आगे चलकर तटीय इलाकों में बारिश भी करती हैं. इन हवाओं का संचार केवल गर्मियों में दिन के समय ही हो पाता है.
In simple words: सागरीय पवनें दिन में समुद्र से ज़मीन की ओर चलती हैं क्योंकि ज़मीन जल्दी गर्म हो जाती है. ये हवाएँ मौसम को ठंडा और सुहावना बनाती हैं और बारिश भी लाती हैं.
🎯 Exam Tip: सागरीय समीर की उत्पत्ति (दिन में भूमि का ज़्यादा गर्म होना), दिशा (समुद्र से ज़मीन), समय-अवधि और जलवायु प्रभावों (तापमान कम होना, वर्षा) को समझाएँ।
Question 6. पर्वतीय समीर व घाटी समीर में अन्तर स्पष्ट कीजिए।
Answer: पर्वतीय समीर और घाटी समीर के बीच मुख्य अंतर इस प्रकार हैं:
| क्र.सं. | अन्तर का आधार | पर्वतीय समीर | घाटी समीर |
|---|---|---|---|
| 1. | समय | रात्रि कालीन अवधि के दौरान चलती हैं। | दिन के समय चलती हैं। |
| 2. | दाब की स्थिति | पर्वतीय ढालों पर उच्च दाब और घाटी तल में निम्न दाब मिलता है। | पर्वतीय ढालों पर निम्न दाब व घाटी के तल में उच्च वायुदाब मिलता है। |
| 3. | तापमान | सूर्यास्त के बाद पर्वतीय ढालों पर विकिरण द्वारा ताप ह्रास अधिक होता है। जिससे ऊपरी भाग में कम ताप व घाटी तली में अधिक ताप मिलता है। | दिन के समय सूर्य की किरणों से पर्वतों के ढाल घाटी तल की अपेक्षा अधिक गर्म हो जाते हैं। जबकि घाटी तल तक किरणें नहीं पहुँचने से कम दाब मिलता है। |
| 4. | नामकरण | इन उतरती हुई पवनों को केटबिटिक समीर भी कहते हैं। | इस प्रकार की पवनें ऊपर की ओर चढ़ती हैं इन्हें एनाबेटिक हवायें कहा जाता है। |
| 5. | प्रारम्भ | इन पवनों का प्रारम्भ सूर्यास्त के बाद होता है। | इन पवनों का प्रारम्भ दिन में 9-10 बजे से होता है। |
🎯 Exam Tip: पर्वतीय और घाटी समीर के बीच अंतर को समय, दिशा, तापमान और वायुदाब के आधार पर समझाएँ, और उनके स्थानीय नामों का भी उल्लेख करें।
Question 7. हरमट्टान व मिस्ट्रल पवनों के अन्तर को स्पष्ट कीजिए। अथवा हरमट्टान व मिस्ट्रल पवनें एक-दूसरे से किस प्रकार भिन्न हैं?
Answer: हरमट्टान और मिस्ट्रल पवनों के बीच मुख्य अंतर इस प्रकार हैं:
| क्र.सं. | अन्तर | हरमट्टान पवन | मिस्ट्रल पवन |
|---|---|---|---|
| 1. | संचरण क्षेत्र | अफ्रीका के सहारा रेगिस्तान के पूर्वी भाग में उत्तर-पूर्व तथा पूर्व दिशा से पश्चिम दिशा में चलती हैं। | भूमध्य सागर के उत्तरी-पश्चिमी भाग, विशेषकर स्पेन तथा फ्रांस में चलती हैं। |
| 2. | प्रकृति | गर्म व शुष्क होती हैं। | ठंडी व शुष्क होती हैं। |
| 3. | प्रभाव | मौसम शुष्क हो जाने के कारण सुहावना व स्वास्थ्यप्रद हो जाता है। | तापमान हिमांक से नीचे चला जाता है। |
| 4. | प्रबन्धन | लाभप्रद होने के कारण कोई विशेष प्रबन्धन नहीं किया जाता है। | इनकी प्रवाह-दिशा के समकोण पर बाग तथा झाड़ियाँ लगाई जाती हैं। |
| 5. | तापमान | तापमान सदैव 0°C से अधिक पाया जाता है। | तापमान सदैव 0°C से कम पाया जाता है। |
🎯 Exam Tip: हरमट्टान और मिस्ट्रल पवनों के बीच अंतर को उनके उत्पत्ति क्षेत्र, तापमान, नमी और प्रभावों के आधार पर स्पष्ट करें।
Question 8. बोरा एवं लू पवनों को स्पष्ट कीजिए। अथवा बोरा पवन व लू पवन किस प्रकार आपस में भिन्न हैं?
Answer:
बोरा: यह एक बहुत शुष्क और ठंडी हवा है जो एड्रियाटिक सागर के पूर्वी किनारों पर चलती है. यह विशेष रूप से उत्तरी इटली के हिस्से को प्रभावित करती है. इसकी तेज़ गति के कारण कई बार इमारतों की छतें उड़ जाती हैं और पेड़-पौधे गिर जाते हैं. यह कभी-कभी कई दिनों तक लगातार चलती रहती है. नमीयुक्त होने के कारण इससे वर्षा भी हो जाती है.
लू: उत्तरी भारत और पाकिस्तान के मैदानी क्षेत्रों में गर्मियों के दौरान, आमतौर पर दोपहर के बाद, बहुत गर्म और शुष्क हवाएँ पश्चिम दिशा से चलती हैं. इन्हें ही लू कहते हैं. इनका तापमान 40° से 50° सेल्सियस के बीच रहता है. इस मौसम में घर से बाहर निकलने वाले लोगों को लू लगने का खतरा रहता है. इन हवाओं के कारण प्रभावित क्षेत्र का मौसम बहुत कष्टदायक हो जाता है.
In simple words: बोरा एड्रियाटिक सागर की ठंडी, सूखी हवा है, जबकि लू उत्तरी भारत और पाकिस्तान की गर्म, सूखी हवा है जो गर्मियों में चलती है.
🎯 Exam Tip: बोरा और लू पवनों के उत्पत्ति क्षेत्र, तापमान की विशेषताओं और उनके प्रभावों को स्पष्ट रूप से समझाएँ।
RBSE Class 11 Physical Geography Chapter 13 निबन्धात्मक प्रश्न
Question 1. वायुदाब को परिभाषित करते हुए जनवरी व जुलाई की वायुदाबीय स्थिति को स्पष्ट कीजिए। अथवा वायुदाब की स्थिति में भिन्न-भिन्न स्वरूप को स्पष्ट कीजिए।
Answer: वायुदाब पृथ्वी पर हवा के वज़न के कारण पड़ने वाला दबाव है. इसे मानचित्रों पर समभार रेखाओं (समान दबाव वाले स्थानों को जोड़ने वाली रेखाएँ) द्वारा दर्शाया जाता है. तापमान की तरह, वायुदाब भी साल के दो महीनों (जनवरी और जुलाई) में अपनी स्थिति बदलता है.
जनवरी में वायुदाब की स्थिति: जनवरी में सूर्य दक्षिणी गोलार्द्ध में मकर रेखा पर लगभग सीधा चमकता है. इस कारण दक्षिणी गोलार्द्ध में तापमान ज़्यादा होता है और वायुभार कम होता है. इस समय दक्षिणी अमेरिका, दक्षिणी अफ्रीका और ऑस्ट्रेलिया के अंदरूनी हिस्सों में निम्न वायुदाब के क्षेत्र बन जाते हैं. वहीं, उत्तरी गोलार्द्ध में पूरी तरह से विकसित उपोष्ण उच्च वायुदाब क्षेत्र महाद्वीपों पर मिलते हैं. इससे हवाएँ ठंडे और ज़्यादा दबाव वाले क्षेत्रों से गर्म और कम दबाव वाले क्षेत्रों की ओर चलती हैं.
जुलाई में वायुदाब की स्थिति: जुलाई में सूर्य उत्तरी गोलार्द्ध में कर्क रेखा पर लगभग सीधा चमकता है. यह बदलाव एशिया में सबसे ज़्यादा देखा जाता है. उत्तरी गोलार्द्ध में ज़मीनी भाग के ज़्यादा गर्म होने के कारण वहाँ निम्न वायुदाब का क्षेत्र बन जाता है, जबकि दक्षिणी गोलार्द्ध में उच्च वायुदाब की पेटी विकसित होती है. इससे हवाएँ समुद्र से ज़मीन की ओर चलती हैं और बारिश लाती हैं.
In simple words: वायुदाब हवा का दबाव है. जनवरी में सूर्य दक्षिणी गोलार्द्ध में होता है, जिससे वहाँ ज़्यादा गर्मी और कम दबाव होता है. जुलाई में सूर्य उत्तरी गोलार्द्ध में होता है, जिससे उत्तरी गोलार्द्ध में ज़्यादा गर्मी और कम दबाव होता है.
🎯 Exam Tip: वायुदाब की परिभाषा दें, और फिर जनवरी व जुलाई में सूर्य की स्थिति, तापमान और परिणामस्वरूप दोनों गोलार्द्धों में विकसित होने वाले वायुदाब क्षेत्रों को अलग-अलग समझाएँ।
Question 2. पवनों को प्रभावित करने वाले कारकों का वर्णन कीजिए। अथवा पवनों की स्थिति किन दशाओं के द्वारा नियन्त्रित होती है? स्पष्ट कीजिए।
Answer: पवनों की दिशा और गति को प्रभावित करने वाले मुख्य कारक इस प्रकार हैं:
1. दाब प्रवणता: यह दो स्थानों के बीच वायुदाब का अंतर है. वायुदाब में जितना ज़्यादा अंतर होता है, पवनें उतनी ही तेज़ चलती हैं. पवनें हमेशा उच्च वायुदाब से निम्न वायुदाब की ओर चलती हैं.
2. पृथ्वी की परिभ्रमण गति (कारिऑलिस बल): पृथ्वी के अपने अक्ष पर घूमने के कारण हवाएँ अपनी सीधी दिशा से भटक जाती हैं. इस बल को कारिऑलिस बल कहते हैं. उत्तरी गोलार्द्ध में यह हवा को दाईं ओर और दक्षिणी गोलार्द्ध में बाईं ओर मोड़ देता है. इस प्रभाव को फेरल का नियम कहते हैं.
3. धरातलीय स्वरूप (घर्षण): पृथ्वी की सतह पर असमानताएँ (पहाड़, जंगल, इमारतें) हवा के रास्ते में बाधा डालती हैं. महासागरों जैसी चिकनी सतहों पर घर्षण कम होता है, इसलिए हवाएँ तेज़ चलती हैं. वहीं, ज़मीनी इलाकों में घर्षण ज़्यादा होता है, जिससे हवा की गति धीमी हो जाती है. यही कारण है कि दक्षिणी गोलार्द्ध में समुद्री विस्तार ज़्यादा होने के कारण पछुआ पवनें तेज़ और निश्चित दिशा में चलती हैं, जबकि उत्तरी गोलार्द्ध में ज़मीनी भागों के कारण उनकी गति धीमी होती है.
In simple words: हवा की दिशा और गति को वायुदाब में अंतर, पृथ्वी का घूमना (कारिऑलिस बल), और ज़मीन की बनावट (घर्षण) प्रभावित करते हैं.
🎯 Exam Tip: पवनों को प्रभावित करने वाले तीनों मुख्य कारकों (दाब प्रवणता, कारिऑलिस बल, घर्षण) को स्पष्ट रूप से समझाएँ और प्रत्येक के प्रभाव को विस्तृत करें।
Question 3. स्थायी पवनों को परिभाषित करते हुए इनके प्रकारों को स्पष्ट कीजिए। अथवा व्यापारिक, पछुआ व ध्रुवीय पवनों की स्थिति को स्पष्ट कीजिए।
Answer: जो पवनें पूरे साल एक निश्चित दिशा और क्रम में चलती हैं, उन्हें स्थायी पवनें कहते हैं. इन्हें प्रचलित पवनें, ग्रहीय पवनें या भूमंडलीय पवनें भी कहा जाता है. स्थायी पवनों को मुख्य रूप से तीन प्रकारों में बाँटा गया है:
1. व्यापारिक पवनें: ये पवनें दोनों गोलार्द्धों में उपोष्ण उच्च वायुदाब पेटियों से भूमध्य रेखीय निम्न वायुदाब पेटी की ओर चलती हैं. फेरल के नियम के अनुसार, उत्तरी गोलार्द्ध में ये अपनी दाहिनी ओर और दक्षिणी गोलार्द्ध में अपनी बाईं ओर मुड़ जाती हैं. इसलिए, उत्तरी गोलार्द्ध में इन्हें 'उत्तरी-पूर्वी व्यापारिक पवनें' और दक्षिणी गोलार्द्ध में 'दक्षिणी-पूर्वी व्यापारिक पवनें' कहते हैं. पुराने समय में पाल वाले जहाजों को इनसे व्यापार में मदद मिलती थी. ये हवाएँ उपोष्ण उच्च वायुदाब के पास शुष्क और शांत होती हैं, लेकिन विषुवत रेखा के पास पहुँचते-पहुँचते जलवाष्प ग्रहण कर लेती हैं और भारी बारिश करती हैं.
2. पछुआ पवनें: ये पवनें दोनों गोलार्द्धों में उपोष्ण उच्च वायुदाब पेटियों से उपध्रुवीय निम्न वायुदाब पेटियों की ओर चलती हैं. ये मुख्य रूप से पश्चिम से पूर्व की ओर बहती हैं. दक्षिणी गोलार्द्ध में, महासागरीय विस्तार के कारण ये पवनें ज़्यादा तेज़ और नियमित होती हैं, जिन्हें उनकी गति के अनुसार 'गरजती चालीसा' (40°-50° दक्षिणी अक्षांश), 'भयंकर पचासा' (50° दक्षिणी अक्षांश) और 'चीखती साठा' (60° दक्षिणी अक्षांश) कहते हैं. ध्रुवों की ओर पछुआ पवनों की सीमा अस्थिर होती है और ये हवाएँ मौसम में बदलाव लाती हैं.
3. ध्रुवीय पवनें: ये पवनें दोनों गोलार्द्धों में ध्रुवीय उच्च वायुदाब से उपध्रुवीय निम्न वायुदाब की ओर चलती हैं. उत्तरी गोलार्द्ध में इनकी दिशा उत्तर-पूर्व से दक्षिण-पश्चिम की ओर और दक्षिणी गोलार्द्ध में दक्षिण-पूर्व से उत्तर-पश्चिम की ओर होती है. ये पवनें ध्रुवीय ठंडे क्षेत्रों से आने के कारण बहुत ठंडी और शुष्क होती हैं. तापमान कम होने के कारण इनकी जलवाष्प धारण करने की क्षमता भी कम होती है. उत्तरी गोलार्द्ध में तेज़ गति से चलने वाली ध्रुवीय पवनों को 'नारईस्टर' कहते हैं. इसका सबसे ज़्यादा प्रभाव उत्तरी-पूर्वी कनाडा और यू.एस.ए. पर पड़ता है.
In simple words: स्थायी पवनें पूरे साल एक ही दिशा में चलने वाली हवाएँ हैं. ये तीन प्रकार की होती हैं: व्यापारिक पवनें (भूमध्य रेखा की ओर), पछुआ पवनें (मध्य अक्षांशों में पश्चिम से पूर्व), और ध्रुवीय पवनें (ध्रुवों से उपध्रुवीय क्षेत्रों की ओर ठंडी हवाएँ).
🎯 Exam Tip: स्थायी पवनों को परिभाषित करें और फिर तीनों प्रकारों (व्यापारिक, पछुआ, ध्रुवीय) की उत्पत्ति, दिशा, प्रमुख विशेषताएँ और उनके स्थानीय नामों को विस्तार से समझाएँ।
Question 4. स्थानीय पवनों से क्या अभिप्राय है? विश्व की प्रमुख स्थानीय पवनों का वर्णन कीजिए। अथवा क्षेत्रीय आधार पर पवनों का स्वरूप व स्वभाव भिन्न-भिन्न मिलता है, कैसे? स्पष्ट कीजिए।
Answer: स्थानीय पवनें वे हवाएँ हैं जो किसी खास जगह के तापमान और वायुदाब में अंतर के कारण चलती हैं. ये पवनें उस क्षेत्र की भौगोलिक और जलवायु विशेषताओं से जुड़ी होती हैं. ये हवाएँ वहां की प्रचलित हवाओं के विपरीत स्वभाव वाली भी हो सकती हैं और गर्म, ठंडी, बर्फीली या धूल भरी हो सकती हैं. ये प्रभावित क्षेत्रों में लाभकारी या हानिकारक प्रभाव डालती हैं.
विश्व की प्रमुख स्थानीय पवनें इस प्रकार हैं:
1. चिनूक: उत्तरी अमेरिका में रॉकी पर्वतों के ढलानों पर चलने वाली गर्म और शुष्क हवाएँ हैं. ये सर्दियों में बर्फ पिघलाकर मैदानों को खेती के लिए तैयार करती हैं, इसलिए इन्हें 'हिम-भक्षिणी पवन' भी कहते हैं.
2. फॉन: आल्पस पर्वत के दक्षिणी ढलान से उतरने वाली गर्म और शुष्क हवा है. ये स्विट्ज़रलैंड में बर्फ पिघलाकर घास उगाने और खेती में मदद करती हैं.
3. सिराको: सहारा रेगिस्तान से भूमध्य सागर की ओर चलने वाली गर्म, शुष्क और रेतीली हवा है. यह 'रक्त वर्षा' के लिए ज़िम्मेदार होती है और कृषि को नुकसान पहुँचाती है.
4. हरमट्टान: अफ्रीका के सहारा रेगिस्तान के पूर्वी भाग में चलने वाली गर्म और शुष्क हवा है. यह पश्चिमी तट के मौसम को शुष्क और सुहावना बनाती है, इसलिए इसे 'डॉक्टर हवा' भी कहते हैं.
5. मिस्ट्रल: भूमध्य सागर के उत्तरी-पश्चिमी भाग में, खासकर स्पेन और फ्रांस में चलने वाली ठंडी, शुष्क और तेज़ हवाएँ हैं. ये तापमान को हिमांक से नीचे ले आती हैं.
6. ब्लिजार्ड: बर्फीले तूफ़ान होते हैं जो बहुत ठंडी, तेज़ हवाओं और बर्फ़ के कणों के साथ चलते हैं, जिससे दृश्यता ख़त्म हो जाती है और तापमान अचानक गिर जाता है.
7. बोरा: एड्रियाटिक सागर के पूर्वी किनारों पर चलने वाली ठंडी और शुष्क हवा है जो उत्तरी इटली को प्रभावित करती है.
8. लू: उत्तरी भारत और पाकिस्तान के मैदानी क्षेत्रों में गर्मियों में दोपहर बाद चलने वाली अत्यधिक गर्म और शुष्क हवा है.
In simple words: स्थानीय पवनें किसी खास जगह के तापमान और दबाव के अंतर से चलने वाली हवाएँ हैं, जैसे चिनूक (गर्म, बर्फ पिघलाने वाली), फॉन (गर्म, स्विट्ज़रलैंड में), सिराको (रेतीली, रक्त वर्षा), हरमट्टान (डॉक्टर हवा), मिस्ट्रल (ठंडी), ब्लिजार्ड (बर्फीली), बोरा (ठंडी) और लू (गर्म).
🎯 Exam Tip: स्थानीय पवनों की परिभाषा दें, और फिर विश्व की प्रमुख स्थानीय पवनों (कम से कम 5-7) के नाम, उनके उत्पत्ति क्षेत्र, प्रकृति (गर्म/ठंडी, शुष्क/नम) और मुख्य प्रभावों को स्पष्ट रूप से समझाएँ।
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