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Detailed Chapter 12 सूर्यातप एवं ऊष्मा बजट RBSE Solutions for Class 11 Geography
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Class 11 Geography Chapter 12 सूर्यातप एवं ऊष्मा बजट RBSE Solutions PDF
Rajasthan Board RBSE Class 11 Physical Geography Chapter 12 सूर्यातप एवं ऊष्मा बजट
RBSE Class 11 Physical Geography Chapter 12 पाठ्य पुस्तक के अभ्यास प्रश्न
RBSE Class 11 Physical Geography Chapter 12 वस्तुनिष्ठ प्रश्न
Question 1. सूर्यातप का मापन किया जाता है-
(अ) पाइरोहेलिया मीटर
(ब) थर्मामीटर
(स) बैरोमीटर
(द) सेन्टीमीटर
Answer: (अ) पाइरोहेलिया मीटर
In simple words: सूर्यातप को मापने के लिए जिस खास उपकरण का इस्तेमाल किया जाता है, उसे पाइरोहेलिया मीटर कहते हैं। यह सूर्य की सीधी किरणों की तीव्रता को मापता है।
🎯 Exam Tip: याद रखें कि पाइरोहेलिया मीटर सूर्य की सीधी किरणों की तीव्रता को मापने के लिए होता है, जो सूर्यातप का एक महत्वपूर्ण भाग है।
Question 2. सू क पहुँचने में कितना समय लगता है?
(द) 8 मिनट
Answer: (द) 8 मिनट
In simple words: सूर्य की रोशनी को पृथ्वी तक पहुँचने में लगभग आठ मिनट का समय लगता है। यह रोशनी बहुत तेज़ गति से यात्रा करती है।
🎯 Exam Tip: यह एक सामान्य ज्ञान का प्रश्न है; याद रखें कि प्रकाश की गति बहुत तेज़ होती है, इसलिए सूर्य से पृथ्वी तक पहुँचने में कम समय लगता है।
Question 3. पृथ्वी पर आने वाली सौर्मिक ऊर्जा को कहते हैं-
(अ) पार्थिव विकिरण
(ब) सौर विकिरण
(स) सूर्यातप
(द) ऊष्मा बजट
Answer: (स) सूर्यातप
In simple words: सूर्य से जो ऊर्जा पृथ्वी तक पहुँचती है, उसे सूर्यातप कहा जाता है। यही ऊर्जा पृथ्वी को गर्म करती है।
🎯 Exam Tip: सूर्यातप ही पृथ्वी के तापमान और मौसम को नियंत्रित करने वाली मुख्य ऊर्जा है।
Question 4. तापमान विलोमता से तात्पर्य है-
(अ) धरातल पर ताप का बढ़ना
(ब) तापमान में असमान गिरावट
(स) ऊँचाई के साथ तापमान बढ़ना
(द) ऊँचाई के साथ तापमान गिरना
Answer: (स) ऊँचाई के साथ तापमान बढ़ना
In simple words: आमतौर पर ऊँचाई बढ़ने पर तापमान कम होता है, लेकिन तापमान विलोमता में ऊँचाई के साथ तापमान घटने की बजाय बढ़ता है। यह एक विशेष मौसम की स्थिति है।
🎯 Exam Tip: तापमान विलोमता एक असामान्य घटना है जहाँ ठंडी हवा नीचे और गर्म हवा ऊपर रहती है, जिससे अक्सर कोहरा बनता है।
Question 5. पृथ्वी पर कुल सौर विकिरण का कितना भाग पहुँचता है?
(अ) 51
(ब) 48
(स) 35
(द) 17
Answer: (अ) 51
In simple words: सूर्य से आने वाली कुल ऊर्जा का लगभग 51% हिस्सा ही पृथ्वी की सतह तक पहुँच पाता है। बाकी ऊर्जा रास्ते में ही सोख ली जाती या वापस भेज दी जाती है।
🎯 Exam Tip: पृथ्वी का ऊष्मा बजट यह समझाता है कि सौर विकिरण का कितना हिस्सा वायुमंडल और बादलों द्वारा परावर्तित या अवशोषित होता है।
RBSE Class 11 Physical Geography Chapter 12 अतिलघुत्तरात्मक प्रश्न
Question 6. सौर विकिरण क्या है?
Answer: सूर्य की सतह से चारों ओर विकरित होकर फैलने वाले ताप को सौर विकिरण कहते हैं। यह ऊर्जा विभिन्न तरंगदैर्ध्य के रूप में अंतरिक्ष में फैलती है।
In simple words: सूर्य से जो गर्मी और रोशनी निकलकर फैलती है, उसे सौर विकिरण कहते हैं।
🎯 Exam Tip: सौर विकिरण को 'सूर्यातप' भी कहते हैं, और यह पृथ्वी पर जीवन के लिए बहुत ज़रूरी है।
Question 8. सूर्य से पृथ्वी की दूरी कितनी है?
Answer: सूर्य से पृथ्वी की औसत दूरी 15 करोड़ किलोमीटर है। यह दूरी पृथ्वी की कक्षा में थोड़ी बदलती रहती है।
In simple words: पृथ्वी सूर्य से लगभग 15 करोड़ किलोमीटर दूर है।
🎯 Exam Tip: यह दूरी इतनी ज़्यादा है कि सूर्य का प्रकाश पृथ्वी तक पहुँचने में लगभग 8 मिनट का समय लेता है।
Question 9. ताप कटिबन्ध किसे कहते हैं?
Answer: पृथ्वी की सतह पर ताप का वितरण हर जगह एक जैसा नहीं होता, बल्कि अलग-अलग होता है। ताप के आधार पर विभिन्न क्षेत्रों को ही 'ताप कटिबन्ध' कहते हैं। इन कटिबंधों को मुख्यतः उष्ण, शीतोष्ण और शीत कटिबंधों में बांटा गया है।
In simple words: पृथ्वी पर तापमान के अंतर के हिसाब से अलग-अलग गर्म या ठंडे इलाकों को ताप कटिबन्ध कहते हैं।
🎯 Exam Tip: ताप कटिबंध मुख्य रूप से सूर्य की किरणों के पृथ्वी पर पड़ने के कोण और पृथ्वी के अक्षीय झुकाव पर निर्भर करते हैं।
Question 10. वायुमण्डलीय ताप का मुख्य स्रोत क्या है?
Answer: वायुमण्डलीय ताप का मुख्य स्रोत सूर्य है। सूर्य से आने वाली ऊर्जा पृथ्वी की सतह को गर्म करती है, जिससे वायुमंडल भी गर्म होता है।
In simple words: हमारे वायुमंडल को सबसे ज़्यादा गर्मी सूर्य से मिलती है।
🎯 Exam Tip: सूर्य से मिलने वाली ऊर्जा ही पृथ्वी के वायुमंडल में तापमान, मौसम और जलवायु को नियंत्रित करती है।
RBSE Class 11 Physical Geography Chapter 12 लघुत्तरात्मक प्रश्न
Question 11. पृथ्वी का एल्बिडो क्या है?
Answer: जब प्रकाश की किरणें किसी सतह पर पड़ती हैं, तो उसका कुछ हिस्सा परावर्तन के नियमों के अनुसार वापस लौट जाता है। इस प्रक्रिया को प्रकाश का परावर्तन कहते हैं। परावर्तन की मात्रा सतह के चिकनेपन पर निर्भर करती है। पृथ्वी पर आने वाले सूर्यातप और अंतरिक्ष की ओर परावर्तित होने वाली विकिरण की मात्रा के अनुपात को पृथ्वी का एल्बिडो कहते हैं। सीधे शब्दों में, पृथ्वी की सतह द्वारा प्राप्त सूर्यताप को परावर्तित करने की प्रक्रिया ही एल्बिडो कहलाती है। बादलों और बर्फ से ढके क्षेत्र सबसे अधिक एल्बिडो दर्शाते हैं।
In simple words: पृथ्वी पर जितनी धूप आती है, उसमें से जितनी वापस अंतरिक्ष में चली जाती है, उसी के अनुपात को एल्बिडो कहते हैं।
🎯 Exam Tip: बर्फ से ढकी सतहों और बादलों का एल्बिडो सबसे ज़्यादा होता है, जिससे वे सूर्य की ज़्यादातर किरणों को वापस परावर्तित कर देते हैं।
Question 12. तापमान का व्युत्क्रमण क्या है?
Answer: वायुमंडल की निचली परत क्षोभमंडल में आमतौर पर धरातल से ऊँचाई की ओर जाने पर तापमान कम होता जाता है। लेकिन, कुछ खास परिस्थितियों में ऊँचाई के साथ तापमान घटने के बजाय बढ़ जाता है। ऊँचाई के साथ तापमान के बढ़ने की इस प्रक्रिया को तापमान व्युत्क्रमण या विलोमता कहते हैं। तापीय व्युत्क्रमण के लिए लंबी रातें, साफ आकाश, शांत हवा, सूखी हवा और बर्फ से ढकी सतह जैसी स्थितियाँ मुख्य रूप से ज़िम्मेदार होती हैं। यह अक्सर पहाड़ी घाटियों में देखा जाता है।
In simple words: तापमान व्युत्क्रमण का मतलब है कि जब आप ऊँचाई पर जाते हैं, तो तापमान कम होने की जगह बढ़ने लगता है।
🎯 Exam Tip: तापीय व्युत्क्रमण से अक्सर सुबह के समय कोहरा और धुआँ ज़मीन के पास जमा हो जाता है, क्योंकि ठंडी हवा भारी होकर नीचे बैठ जाती है।
Question 14. सूर्यातप को प्रभावित करने वाले कारक कौन-कौन से हैं?
Answer: किसी खास जगह पर सूर्यातप की मात्रा मौसम और वायुमंडलीय स्थितियों के अनुसार कम या ज़्यादा होती रहती है। पृथ्वी पर सूर्य से मिलने वाली गर्मी की मात्रा को कई कारक प्रभावित करते हैं, जो नीचे दिए गए हैं:
1. **भूमध्य रेखा से दूरी:** सूर्य की किरणें भूमध्य रेखा पर लगभग सीधी पड़ती हैं, जबकि ध्रुवों की ओर जाने पर ये तिरछी हो जाती हैं। इससे सूर्यातप पर असर पड़ता है।
2. **समुद्र तल से ऊँचाई:** जैसे-जैसे ऊँचाई बढ़ती है, तापमान कम होता जाता है, क्योंकि हवा पतली हो जाती है।
3. **समुद्र तट से दूरी:** समुद्र के पास के इलाकों में तापमान कम बदलता है, जबकि समुद्र से दूर के अंदरूनी इलाकों में तापमान ज़्यादा होता है।
4. **समुद्री धाराएँ:** समुद्र की ठंडी और गर्म जल धाराएँ आसपास के तापमान को बढ़ाती या घटाती हैं।
5. **प्रचलित पवनें:** हवाएँ अपने ठंडे या गर्म स्वभाव के अनुसार तापमान को कम या ज़्यादा करती हैं।
6. **भूमि का ढाल:** सूर्य के सामने वाले और विपरीत ढालों पर तापमान अलग-अलग होता है।
7. **धरातल की प्रकृति:** ज़मीन का वनों या बर्फ से ढका होना तापमान पर असर डालता है।
8. **मेघ व वर्षा:** बादलों से घिरा मौसम तापमान को नियंत्रित करता है, क्योंकि बादल सूर्य की किरणों को वापस भेज देते हैं। यह सभी कारक मिलकर किसी स्थान पर सूर्यातप की प्राप्ति को तय करते हैं।
In simple words: सूर्यातप को प्रभावित करने वाले मुख्य कारक हैं भूमध्य रेखा से दूरी, ऊँचाई, समुद्र से दूरी, समुद्री हवाएँ, भूमि का ढाल और बादलों का होना।
🎯 Exam Tip: इस तरह के प्रश्नों में, प्रत्येक कारक को स्पष्ट रूप से बताना और उसके प्रभाव को संक्षिप्त में समझाना महत्वपूर्ण होता है।
Question 15. तापमान के क्षैतिज एवं लम्बवत् वितरण में क्या अन्तर है?
Answer: **तापमान का क्षैतिज वितरण:** इसका मतलब है पृथ्वी पर अलग-अलग अक्षांशों (भूमध्य रेखा से ध्रुवों तक) पर तापमान का बँटवारा। इसे मानचित्र पर समताप रेखाओं (एक समान तापमान वाले स्थानों को जोड़ने वाली रेखाएँ) से दिखाया जाता है। यह वितरण जनवरी और जुलाई के महीनों में अधिकतम और न्यूनतम तापमान के आधार पर समझा जाता है।
**तापमान का लम्बवत वितरण:** इसका मतलब है धरातल से ऊपर की ओर, यानी वायुमंडल की अलग-अलग परतों में ऊँचाई के साथ तापमान का बँटवारा। आमतौर पर ऊँचाई बढ़ने पर तापमान कम होता जाता है, लेकिन यह गिरावट सभी जगहों पर एक जैसी नहीं होती। वायुमंडल के क्षोभमंडल में यह गिरावट सबसे ज़्यादा महसूस होती है।
In simple words: क्षैतिज वितरण का मतलब है पृथ्वी पर पूर्व से पश्चिम या अक्षांशों के साथ तापमान कैसे बदलता है। लम्बवत् वितरण का मतलब है पृथ्वी की सतह से ऊपर जाने पर तापमान कैसे बदलता है।
🎯 Exam Tip: क्षैतिज वितरण मुख्य रूप से अक्षांशों और जल-थल वितरण पर निर्भर करता है, जबकि लम्बवत् वितरण वायुमंडलीय परतों और ऊँचाई के साथ बदलता है।
RBSE Class 11 Physical Geography Chapter 12 निबन्धात्मक प्रश्न
Question 16. सूयातपाकस कहत ह? तापमान के वितरण को प्रभावित करने वाले कारकों का वर्णन करें।
Answer: सूर्य से पृथ्वी तक पहुँचने वाली विकिरण ऊर्जा को सूर्यातप कहते हैं। पृथ्वी द्वारा सौर विकिरण का ग्रहण सूर्यातप की प्राप्ति है। पृथ्वी की सतह पर ताप का वितरण हर जगह समान नहीं होता है। तापमान के वितरण को प्रभावित करने वाले कई कारक हैं, जिनका वर्णन नीचे दिया गया है:
1. **भूमध्य रेखा से दूरी:** सूर्य की किरणें भूमध्य रेखा पर लगभग पूरे वर्ष सीधी पड़ती हैं, जिससे वहाँ सूर्यातप ज़्यादा मिलता है। ध्रुवों की ओर जाने पर किरणें तिरछी हो जाती हैं, जिससे सूर्यातप कम हो जाता है और ध्रुवों पर तापमान हिमांक से भी नीचे चला जाता है।
2. **समुद्र तल से ऊँचाई:** समुद्र तल पर तापमान सबसे अधिक होता है। ऊँचाई की ओर जाने पर तापमान घटता जाता है। आमतौर पर 165 मीटर की ऊँचाई पर 1°C या 1 किमी की ऊँचाई पर 6°C तापमान कम हो जाता है। इसलिए पर्वतीय क्षेत्र मैदानी क्षेत्रों की तुलना में ठंडे होते हैं।
3. **समुद्र तट से दूरी:** ज़मीन की तुलना में पानी देर से गर्म और देर से ठंडा होता है। इसलिए समुद्र के पास के स्थानों पर तापमान लगभग एक जैसा रहता है। इसके विपरीत, समुद्र से दूर स्थित स्थानों पर तापमान में ज़्यादा अंतर होता है।
4. **समुद्री धाराएँ:** समुद्री धाराएँ तटवर्ती क्षेत्रों के तापमान को बहुत प्रभावित करती हैं। जहाँ गर्म धाराएँ बहती हैं, वहाँ तापमान ज़्यादा होता है, और जहाँ ठंडी धाराएँ बहती हैं, वहाँ तापमान कम होता है। जैसे 'गल्फ स्ट्रीम' की गर्म धारा यूरोप के तटीय इलाकों का तापमान ऊँचा रखती है।
5. **प्रचलित पवनें:** जिन स्थानों पर गर्म हवाएँ चलती हैं, वहाँ का तापमान ज़्यादा होता है, और जहाँ ठंडी हवाएँ चलती हैं, वहाँ का तापमान कम रहता है। जैसे 'सिरोको' पवन सहारा मरुस्थल से आती है और 'चिनूक' उत्तरी अमेरिका के मैदानों में तापमान बढ़ाती है। उत्तरी भारत में गर्मियों में 'लू' से तापमान 45°C तक पहुँच जाता है।
6. **भूमि का ढाल:** सूर्य के सामने वाले ढालों पर ज़्यादा धूप पड़ती है, जिससे वे गर्म होते हैं, जबकि विपरीत ढालों पर कम धूप पहुँचती है और वे ठंडे रहते हैं।
7. **धरातल की प्रकृति:** जिन क्षेत्रों में बालू और काली मिट्टी होती है, वे ज़्यादा सूर्यातप सोख लेते हैं, जिससे वहाँ तापमान ज़्यादा होता है। जिन क्षेत्रों में वन या बर्फ होते हैं, वे कम सूर्यातप सोखते हैं।
8. **मेघ व वर्षा:** जिन क्षेत्रों में बादल छाए रहते हैं और बारिश ज़्यादा होती है, वहाँ का तापमान कम होता है, क्योंकि बादल सूर्य की किरणों को परावर्तित कर देते हैं। इस प्रकार ये सभी कारक मिलकर किसी स्थान पर सूर्यातप और तापमान के वितरण को तय करते हैं।
In simple words: सूर्यातप सूर्य से पृथ्वी पर आने वाली गर्मी है। इसे कई चीजें प्रभावित करती हैं, जैसे कि हम भूमध्य रेखा से कितने दूर हैं, कितनी ऊँचाई पर हैं, समुद्र से कितनी दूर हैं, हवाएँ कैसी चलती हैं, ज़मीन कैसी है और बादल कितने हैं।
🎯 Exam Tip: इस विस्तृत उत्तर में हर कारक का नाम और उसका संक्षिप्त विवरण देना ज़रूरी है ताकि यह स्पष्ट हो सके कि ये सूर्यातप और तापमान को कैसे प्रभावित करते हैं।
Question 17. पृथ्वी के ऊष्मा बजट की व्याख्या कीजिए।
Answer: **ऊष्मा बजट का भावार्थ:** पृथ्वी और वायुमंडल द्वारा प्राप्त गर्मी तथा उस गर्मी के नुकसान के बीच के संतुलन को ऊष्मा बजट कहते हैं। पृथ्वी जितनी ज़्यादा गर्मी लेती है, उतनी ही विकिरण के माध्यम से वापस अंतरिक्ष में लौटा देती है, जिससे एक संतुलन बना रहता है।
**ऊष्मा बजट की प्रक्रिया:**
सूर्य से पृथ्वी को छोटी तरंगों के रूप में सौर विकिरण मिलती है। पृथ्वी से टकराने के बाद, यह विकिरण परावर्तित होती है। पृथ्वी से लौटकर जाने वाली विकिरण को 'पार्थिव विकिरण' कहते हैं, जो लंबी तरंगों के रूप में होती है। इस तरह, पृथ्वी द्वारा प्राप्त सौर विकिरण और पृथ्वी द्वारा छोड़ी गई पार्थिव विकिरण की मात्रा लगभग समान रहती है।
**आने वाली सौर ऊर्जा का वितरण (100 इकाई मानकर):**
* कुल ऊर्जा का 27 इकाई बादलों द्वारा और 2 इकाई पृथ्वी की सतह द्वारा सीधे परावर्तित हो जाती है (कुल 29 इकाई)।
* 6 इकाई ऊर्जा वायुमंडल द्वारा बिखेर दी जाती है। इस प्रकार, कुल 35 इकाई ऊर्जा पृथ्वी को गर्म करने में कोई भूमिका नहीं निभाती।
* शेष 65 इकाई ऊर्जा में से 14 इकाई वायुमंडल (जलवाष्प, धूलकण) द्वारा सोख ली जाती है।
* इस प्रकार, केवल 51 इकाई ऊर्जा ही पृथ्वी की सतह तक पहुँच पाती है। इस 51 इकाई में से 34 इकाई सीधे प्राप्त होती है और 17 इकाई विसरित दिवा प्रकाश के रूप में मिलती है।
**पृथ्वी से वापस जाने वाली ऊर्जा (पार्थिव विकिरण):**
पृथ्वी पर प्राप्त 51 इकाई ऊर्जा पार्थिव विकिरण के रूप में वापस लौट जाती है:
* 51 इकाई में से 23 इकाई ऊर्जा दीर्घ तरंगों के रूप में सीधे धरातल से अंतरिक्ष में विकिरित हो जाती है। इसमें से 17 इकाई सीधे शून्य में चली जाती है, जबकि 6 इकाई वायुमंडल को गर्म करती है।
* 9 इकाई ऊर्जा संवहन और विक्षोभ के रूप में खर्च होती है।
* बाकी बची 19 इकाई ऊर्जा पृथ्वी वाष्पीकरण और संघनन की प्रक्रिया में खर्च कर देती है।
जब तक सौर विकिरण और पार्थिव विकिरण की मात्रा बराबर रहती है, तब तक इसे संतुलित ऊष्मा बजट कहा जाता है। लेकिन, मानवीय गतिविधियों के कारण पार्थिव विकिरण की मात्रा में कमी आ रही है, जिससे पृथ्वी का तापमान धीरे-धीरे बढ़ रहा है, जिसे ग्लोबल वार्मिंग कहते हैं।
In simple words: पृथ्वी को सूर्य से जितनी गर्मी मिलती है और जितनी गर्मी वह वापस अंतरिक्ष में भेजती है, इन दोनों के हिसाब-किताब को ऊष्मा बजट कहते हैं। इससे पृथ्वी का तापमान स्थिर रहता है।
🎯 Exam Tip: ऊष्मा बजट को समझाते समय, आने वाली और जाने वाली ऊर्जा के विभिन्न घटकों (परावर्तन, अवशोषण, विकिरण) को स्पष्ट रूप से दर्शाना और उनके संतुलन पर जोर देना आवश्यक है।
Question 18. तापमान के वितरण को समझाते हुए भूमण्डल पर तापमान के क्षैतिज एवं ऊर्ध्वाधर वितरण को स्पष्ट कीजिए।
Answer: पृथ्वी की सतह पर तापमान का वितरण हर जगह एक समान नहीं होता है। तापमान के वितरण पर अक्षांश का सबसे ज़्यादा नियंत्रण होता है। तापमान के आधार पर विश्व को तीन कटिबंधों में बांटा गया है, और सूर्यातप तथा तापमान के बीच गहरा संबंध है। ताप के वितरण को मुख्य रूप से दो प्रकार से बांटा जाता है:
1. **तापमान का क्षैतिज वितरण:**
यह अक्षांशों के अनुसार तापमान का वितरण है, यानी भूमध्य रेखा से ध्रुवों तक तापमान में कैसे बदलाव आता है। मानचित्र पर तापमान के वितरण को समताप रेखाओं (समान तापमान वाले स्थानों को जोड़ने वाली रेखाएँ) से दर्शाया जाता है। विश्व के अधिकांश हिस्सों में न्यूनतम और अधिकतम तापमान जनवरी और जुलाई के महीनों में पाया जाता है, इसलिए इन्हीं महीनों को तापमान के विश्लेषण के लिए चुना जाता है।
* **जनवरी की समताप रेखाएँ:** जनवरी में सूर्य की किरणें दक्षिणी गोलार्ध में मकर रेखा पर सीधी पड़ती हैं, जिससे दक्षिणी गोलार्ध में गर्मी और उत्तरी गोलार्ध में सर्दी होती है। दक्षिणी गोलार्ध में तापमान ज़्यादा होता है, जबकि उत्तरी गोलार्ध में कम। साइबेरिया और ग्रीनलैंड जैसे सबसे ठंडे हिस्से में -25°C तक तापमान होता है। दक्षिणी महाद्वीपों पर 30°C और 10°C की समताप रेखाएँ अक्षांशों के समानांतर होती हैं, जबकि 20°C की समताप रेखाएँ महाद्वीपों और महासागरों के वितरण के अनुसार मुड़ी हुई होती हैं।
* **जुलाई की समताप रेखाएँ:** जुलाई में सूर्य की किरणें उत्तरी गोलार्ध में कर्क रेखा पर सीधी पड़ती हैं, जिससे उत्तरी गोलार्ध में गर्मी और दक्षिणी गोलार्ध में सर्दी होती है। जुलाई में 30°C की समताप रेखा उत्तरी अफ्रीका, दक्षिण-पश्चिमी और मध्य एशिया तथा उत्तरी अमेरिका के कोलंबिया पठार जैसे क्षेत्रों को घेरती है। जनवरी की तुलना में जुलाई में गर्मी का प्रभाव ज़्यादा क्षेत्रों पर होता है। अंटार्कटिका पर न्यूनतम तापमान रहता है और दक्षिणी गोलार्ध में समताप रेखाएँ ज़्यादातर अक्षांशों के समानांतर होती हैं।
2. **तापमान का ऊर्ध्वाधर वितरण:**
इसका मतलब है धरातल से ऊपर की ओर, यानी ऊँचाई के साथ वायुमंडल की अलग-अलग परतों में तापमान का वितरण। आमतौर पर धरातल से ऊँचाई पर जाने पर तापमान में कमी आती है। यह गिरावट हर जगह एक जैसी नहीं होती है, बल्कि अलग-अलग मिलती है।
In simple words: तापमान का क्षैतिज वितरण बताता है कि पृथ्वी पर अलग-अलग जगहों पर तापमान कैसे बँटा है (जैसे भूमध्य रेखा से ध्रुवों तक)। तापमान का ऊर्ध्वाधर वितरण बताता है कि ज़मीन से ऊपर जाने पर तापमान कैसे बदलता है।
🎯 Exam Tip: तापमान के क्षैतिज और ऊर्ध्वाधर वितरण की व्याख्या करते समय, प्रत्येक के लिए उदाहरण और विशिष्ट महीने (जनवरी, जुलाई) के पैटर्न को शामिल करें ताकि उत्तर पूर्ण हो।
RBSE Class 11 Physical Geography Chapter 12 अन्य महत्त्वपूर्ण प्रश्नोत्तर
RBSE Class 11 Physical Geography Chapter 12 वस्तुनिष्ठ प्रश्न
Question 1. सूर्य की सतह का तापमान कितना मिलता है?
(अ) 4000°C
(ब) 5000°C
(स) 6000°C
(द) 7000°C
Answer: (स) 6000°C
In simple words: सूर्य की ऊपरी सतह बहुत गर्म होती है, जहाँ का तापमान लगभग 6000 डिग्री सेल्सियस होता है।
🎯 Exam Tip: सूर्य के केंद्र का तापमान सतह से कहीं ज़्यादा होता है, लेकिन सतह का तापमान ही वह है जो पृथ्वी तक पहुँचने वाली ऊर्जा को प्रभावित करता है।
Question 2. सूर्य पृथ्वी से औसतन कितना दूर है?
(अ) 12 करोड़ किमी
(ब) 13 करोड़ किमी
(स) 14 करोड़ किमी
(द) 15 करोड़ किमी
Answer: (द) 15 करोड़ किमी
In simple words: सूर्य और पृथ्वी के बीच की औसत दूरी लगभग 15 करोड़ किलोमीटर है।
🎯 Exam Tip: यह दूरी बदलती रहती है क्योंकि पृथ्वी सूर्य के चारों ओर एक अंडाकार कक्षा में घूमती है।
Question 3. पृथ्वी पर ऊष्मा का मूल स्रोत क्या है?
(अ) चन्द्रमा
(ब) सूर्य
(स) उल्का
(द) तारे
Answer: (ब) सूर्य
In simple words: पृथ्वी पर गर्मी का सबसे बड़ा स्रोत सूर्य है।
🎯 Exam Tip: सूर्य से मिलने वाली ऊर्जा ही पृथ्वी के वायुमंडल, मौसम और जलवायु के लिए ज़िम्मेदार है।
Question 4. स ?
Answer: चिफील्ड के अनुसार, "सूर्य से पृथ्वी तक पहुँचने वाली विकिरण ऊर्जा को सूर्यातप कहते है।"
In simple words: सूर्यातप वह ऊर्जा है जो सूर्य से चलकर पृथ्वी तक पहुँचती है।
🎯 Exam Tip: सूर्यातप को कभी-कभी सौर विकिरण भी कहा जाता है, यह पृथ्वी पर सभी मौसम संबंधी घटनाओं का मूल है।
Question 5. पृथ्वी को कितने कटिबंधों में बाँटा गया है?
(अ) 2
(ब) 3
(स) 4
(द) 5
Answer: (ब) 3
In simple words: तापमान के आधार पर पृथ्वी को मुख्य रूप से तीन भागों में बांटा गया है: उष्णकटिबंध, शीतोष्ण कटिबंध और शीत कटिबंध।
🎯 Exam Tip: ये कटिबंध पृथ्वी पर सूर्य की किरणों के पड़ने के कोण के अनुसार निर्धारित होते हैं।
Question 6. दक्षिणी गोलार्द्ध में मकर रेखा पर सूर्य की किरणें कब लम्बवत चमकती हैं?
(अ) जनवरी में
(ब) मार्च में
(स) जून में
(द) सितम्बर में।
Answer: (अ) जनवरी में
In simple words: दक्षिणी गोलार्ध में मकर रेखा पर सूर्य की किरणें जनवरी में सीधी पड़ती हैं, जिससे वहाँ गर्मी होती है।
🎯 Exam Tip: यह घटना पृथ्वी के अक्षीय झुकाव के कारण होती है, जिससे सूर्य की स्थिति साल भर बदलती रहती है।
Question 7. अण्टार्कटिका पर न्यूनतम तापमान कब मिलता है?
(अ) जनवरी में
(ब) मई में
(स) जुलाई में
(द) दिसम्बर में
Answer: (स) जुलाई में
In simple words: अंटार्कटिका पर सबसे कम तापमान जुलाई के महीने में होता है, जब दक्षिणी गोलार्ध में सर्दी अपने चरम पर होती है।
🎯 Exam Tip: जुलाई में, सूर्य की किरणें उत्तरी गोलार्ध में ज़्यादा सीधी पड़ती हैं, जिससे दक्षिणी ध्रुव पर बहुत कम सूर्यातप पहुँचता है।
Question 8. सामान्य ताप ह्रास दर कितनी होती है?
(अ) 165 मीटर पर 1°C
(ब) 265 मीटर पर 2°C
Answer: (अ) 165 मीटर पर 1°C
In simple words: सामान्य ताप ह्रास दर का मतलब है कि हर 165 मीटर ऊँचाई बढ़ने पर तापमान 1 डिग्री सेल्सियस कम हो जाता है।
🎯 Exam Tip: यह दर क्षोभमंडल में लागू होती है और वायुमंडलीय स्थिरता को समझने में मदद करती है।
Question. गल्फ स्ट्रीम धारा है-
(अ) गर्म
(ब) ठण्डी
(स) ध्रुवीय
(द) कोई नहीं
Answer: (अ) गर्म
In simple words: गल्फ स्ट्रीम एक गर्म समुद्री धारा है जो अटलांटिक महासागर में बहती है।
🎯 Exam Tip: गल्फ स्ट्रीम यूरोप के पश्चिमी तटों को गर्म रखने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है, जिससे वहाँ का मौसम अपेक्षाकृत हल्का रहता है।
Question 10. पार्थिव विकिरण का कितना भाग संवहन में विमुक्त होता है?
(अ) 17 इकाई
(ब) 6 इकाई
(स) 9 इकाई
(द) 19 इकाई
Answer: (स) 9 इकाई
In simple words: पृथ्वी से वापस जाने वाली गर्मी का 9 इकाई हिस्सा संवहन की प्रक्रिया से वायुमंडल में चला जाता है।
🎯 Exam Tip: संवहन वह प्रक्रिया है जिसमें गर्मी हवा के अणुओं के ऊपर उठने और फैलने से फैलती है।
सुमेलन सम्बन्धी प्रश्न
Question 1. निम में स्तम्भ अ को स्तम्भ ब से ससुमेलित कीजिए।
| स्तम्भ (अ) (रेखा का नाम) | स्तम्भ (ब) (अक्षांशीय मान) |
|---|---|
| (i) भूमध्य रेखा | (द) 0° अक्षांश रेखा |
| (ii) कर्क रेखा | (स) 23 \( \frac { 1 }{ 2 } \)° उत्तरी अक्षांश रेखा |
| (iii) मकर रेखा | (ब) 23 \( \frac { 1 }{ 2 } \)° दक्षिणी अक्षांश रेखा |
| (iv) आर्कटिक वृत्त | (अ) 66 \( \frac { 1 }{ 2 } \)° दक्षिणी अक्षांश रेखा |
(i) भूमध्य रेखा - (द) 0° अक्षांश रेखा
(ii) कर्क रेखा - (स) 23 \( \frac { 1 }{ 2 } \)° उत्तरी अक्षांश रेखा
(iii) मकर रेखा - (ब) 23 \( \frac { 1 }{ 2 } \)° दक्षिणी अक्षांश रेखा
(iv) आर्कटिक वृत्त - (अ) 66 \( \frac { 1 }{ 2 } \)° दक्षिणी अक्षांश रेखा
In simple words: इस प्रश्न में विभिन्न महत्वपूर्ण अक्षांशीय रेखाओं को उनके सही डिग्री मानों के साथ मिलाना था। भूमध्य रेखा पृथ्वी के बीचो-बीच 0 डिग्री पर है, कर्क रेखा उत्तरी गोलार्ध में 23.5 डिग्री पर है, मकर रेखा दक्षिणी गोलार्ध में 23.5 डिग्री पर है, और आर्कटिक वृत्त उत्तरी ध्रुवीय क्षेत्र में 66.5 डिग्री पर स्थित है।
🎯 Exam Tip: प्रमुख अक्षांशीय रेखाओं (भूमध्य रेखा, कर्क रेखा, मकर रेखा, आर्कटिक वृत्त, अंटार्कटिक वृत्त) और उनके अक्षांशीय मानों को याद रखना भूगोल के प्रश्नों के लिए महत्वपूर्ण है।
RBSE Class 11 Physical Geography Chapter 12 अतिलघुत्तरात्मक प्रश्न
Question 1. पृथ्वी को गर्मी से कौन बचाता है?
Answer: वायुमंडल का हज़ारों किलोमीटर का आवरण हमारी पृथ्वी को सूर्य की प्रचंड किरणों से उसकी असहनीय गर्मी से बचाता है। यह एक सुरक्षा कवच की तरह काम करता है।
In simple words: पृथ्वी का वायुमंडल सूर्य की बहुत ज़्यादा गर्मी से हमारी रक्षा करता है।
🎯 Exam Tip: वायुमंडल में ओजोन परत सूर्य की हानिकारक पराबैंगनी किरणों को सोखकर जीवन को बचाती है।
Question 2. सूर्य क्या है?
Answer: सूर्य एक दहकता हुआ गैसीय पिंड है, जिससे लगातार ऊर्जा का विकिरण होता रहता है। यह मुख्य रूप से हाइड्रोजन और हीलियम गैसों से बना है।
In simple words: सूर्य एक बहुत गर्म गैसों का गोला है, जो हमेशा रोशनी और गर्मी देता रहता है।
🎯 Exam Tip: सूर्य हमारे सौरमंडल का केंद्र है और इसकी ऊर्जा ही पृथ्वी पर जीवन का मुख्य स्रोत है।
Question 3. है?
Answer: चिफील्ड के अनुसार, "सूर्य से पृथ्वी तक पहुँचने वाली विकिरण ऊर्जा को सूर्यातप कहते है।" यह परिभाषा सूर्यातप के अर्थ को स्पष्ट करती है।
In simple words: सूर्यातप वह ऊर्जा है जो सूर्य से पृथ्वी तक आती है।
🎯 Exam Tip: परिभाषाएँ याद रखना महत्वपूर्ण है, खासकर जब उन्हें किसी विशेषज्ञ के नाम से उद्धृत किया गया हो।
Question 5. ताप के आधार पर पृथ्वी को किन कटिबंधों में बाँटा गया है?
Answer: ताप के आधार पर पृथ्वी को मुख्य रूप से उष्णकटिबंध, शीतोष्ण कटिबंध एवं शीत कटिबंधों के रूप में बांटा गया है। ये कटिबंध सूर्य की किरणों के पड़ने के कोण और तापमान की तीव्रता के आधार पर बनते हैं।
In simple words: पृथ्वी को गर्मी के हिसाब से तीन हिस्सों में बांटा गया है: गर्म, हल्का गर्म (शीतोष्ण) और ठंडा (शीत)।
🎯 Exam Tip: इन तीनों कटिबंधों की विशेषताओं और उनके अक्षांशीय विस्तार को जानना जलवायु को समझने के लिए महत्वपूर्ण है।
Question 6. तापमान से क्या आशय है?
Answer: तापमान सूर्यातप पर निर्भर करता है, अतः वायुमंडलीय ताप को तापमान से दर्शाया जाता है। यह किसी स्थान पर गर्मी या ठंड की डिग्री को बताता है।
In simple words: तापमान का मतलब है कि कोई जगह कितनी गर्म या ठंडी है, और यह सूर्य की गर्मी से तय होता है।
🎯 Exam Tip: तापमान एक महत्वपूर्ण जलवायु तत्व है जो वायुमंडलीय दाब, आर्द्रता और पवनों को प्रभावित करता है।
Question 7. तापमान के क्षैतिज वितरण से क्या तात्पर्य है?
Answer: तापमान के क्षैतिज वितरण का अर्थ तापमान के अक्षांशीय वितरण से है। इसमें अक्षांशीय आधार पर तापमान का विश्लेषण किया जाता है। यह दिखाता है कि भूमध्य रेखा से ध्रुवों तक तापमान कैसे बदलता है।
In simple words: तापमान का क्षैतिज वितरण मतलब है कि पृथ्वी पर पूरब-पश्चिम या अलग-अलग अक्षांशों पर तापमान कैसे अलग-अलग होता है।
🎯 Exam Tip: क्षैतिज वितरण को अक्सर समताप रेखाओं (isotherms) की मदद से मानचित्रों पर दिखाया जाता है।
Question 8. मानचित्र पर तापमान का वितरण किससे दर्शाया जाता है?
Answer: मानचित्र पर तापमान का वितरण समताप रेखाओं द्वारा दर्शाया जाता है। समताप रेखाएँ वे काल्पनिक रेखाएँ होती हैं जो मानचित्र पर समान तापमान वाले स्थानों को जोड़ती हैं।
In simple words: नक़्शे पर तापमान को एक जैसी गर्मी वाले जगहों को जोड़ने वाली रेखाओं (समताप रेखाओं) से दिखाते हैं।
🎯 Exam Tip: समताप रेखाएँ तापमान प्रवणता (temperature gradient) को समझने में मदद करती हैं, जहाँ वे पास-पास होती हैं, वहाँ तापमान में तेज़ी से बदलाव आता है।
Question 9. तापमान के विश्लेषण के लिए कौन-से महीने चुने गये हैं एवं क्यों?
Answer: तापमान के विश्लेषण के लिए जनवरी व जुलाई माह चुने गये हैं। क्योंकि इन महीनों में विश्व के अधिकांश भागों में न्यूनतम अथवा अधिकतम तापमान पाया जाता है। जनवरी में सबसे ज़्यादा सर्दी और जुलाई में सबसे ज़्यादा गर्मी पड़ती है।
In simple words: जनवरी और जुलाई महीने तापमान को समझने के लिए चुने गए हैं, क्योंकि इन महीनों में ज़्यादातर जगहों पर या तो सबसे कम या सबसे ज़्यादा गर्मी होती है।
🎯 Exam Tip: ये दोनों महीने मौसमी चरम सीमाओं को दर्शाते हैं, जिससे तापमान के वार्षिक चक्र और वितरण का अध्ययन आसान हो जाता है।
Question 10. जनवरी माह में सूर्य की किरणें कहाँ लम्बवत होती हैं?
Answer: जनवरी माह में सूर्य की किरणें दक्षिणी गोलार्द्ध में स्थित मकर रेखा पर लम्बवत् होती हैं। इससे दक्षिणी गोलार्ध में ग्रीष्म ऋतु होती है।
In simple words: जनवरी में सूर्य की किरणें दक्षिणी गोलार्ध की मकर रेखा पर सीधी पड़ती हैं।
🎯 Exam Tip: मकर रेखा पर सूर्य के लम्बवत् होने से दक्षिणी गोलार्ध में गर्मी बढ़ जाती है, जबकि उत्तरी गोलार्ध में सर्दी होती है।
Question 12. तापमान का लम्बवत वितरण क्या होता हैं?
Answer: तापमान का लम्बवत् वितरण का मतलब है कि धरती से ऊपर की तरफ, अलग-अलग ऊँचाई पर, वायुमंडल की अलग-अलग परतों में तापमान कैसे बँटा हुआ है। यह बताता है कि पृथ्वी की सतह से ऊपर जाने पर तापमान किस तरह बदलता है।
In simple words: इसका मतलब है कि जमीन से ऊपर जाने पर अलग-अलग ऊँचाई पर हवा का तापमान कैसा होता है।
🎯 Exam Tip: तापमान के क्षैतिज और लंबवत वितरण में अंतर को स्पष्ट रूप से समझें, क्योंकि दोनों अलग-अलग भौगोलिक स्थितियों को दर्शाते हैं।
Question 13. सामान्य ताप ह्रास दर किसे कहते हैं?
Answer: क्षोभमंडल में, जैसे-जैसे हम धरती से ऊपर जाते हैं, हर 165 मीटर की ऊँचाई पर तापमान \( 1^\circ C \) कम हो जाता है। इसी को तापमान की सामान्य ह्रास दर कहते हैं। यह दर वायुमंडल में तापमान के घटने की औसत गति बताती है।
In simple words: जब हम जमीन से ऊपर जाते हैं, तो हर 165 मीटर पर तापमान \( 1^\circ C \) घट जाता है। इसे ही सामान्य ताप ह्रास दर कहते हैं।
🎯 Exam Tip: यह दर केवल क्षोभमंडल में लागू होती है और इसकी निश्चित मूल्य \( 1^\circ C \) प्रति 165 मीटर को याद रखना महत्वपूर्ण है।
Question 14. तापीय व्युत्क्रमण के लिए आर्दश दशाएँ कौन-सी हैं?
Answer: तापीय व्युत्क्रमण के लिए अच्छी स्थितियाँ लंबी रातें, साफ़ आसमान, शांत हवा, सूखी हवा और बर्फ से ढकी जगहें हैं। ये सभी दशाएँ धरती की सतह को तेज़ी से ठंडा होने में मदद करती हैं, जिससे निचली हवा अधिक ठंडी हो जाती है।
In simple words: तापीय व्युत्क्रमण तब होता है जब रात लंबी हो, आसमान साफ हो, हवा शांत और सूखी हो, और चारों ओर बर्फ जमी हो।
🎯 Exam Tip: इन आदर्श दशाओं के कारकों को याद रखना तापीय व्युत्क्रमण की अवधारणा को समझने में सहायक होगा।
Question 15. पर्वतीय घाटियों में बस्तियाँ व बगीचे ऊपरी भाग में क्यों विकसित किए जाते हैं?
Answer: पहाड़ी घाटियों के ऊपरी हिस्से को नीचे के हिस्सों से ज़्यादा गर्मी मिलती है। इसी वजह से ऊपरी हिस्सों में रहने और खेती करने के लिए अच्छी स्थितियाँ होती हैं, क्योंकि वहाँ तापमान अधिक अनुकूल रहता है। इसलिए वहाँ बस्तियाँ और बगीचे बनाए जाते हैं।
In simple words: पहाड़ी घाटियों के ऊपर के हिस्से नीचे के हिस्सों से गर्म रहते हैं। इसलिए, लोग वहाँ रहना और बगीचे लगाना पसंद करते हैं।
🎯 Exam Tip: तापीय व्युत्क्रमण के प्रभावों में से एक है कि घाटी के ऊपरी ढलान निचले हिस्सों की तुलना में गर्म रहते हैं, जो मानव बस्तियों और कृषि के लिए फायदेमंद होता है।
Question 16. भूमध्य रेखा से दूरी तापमान को कैसे प्रभावित करती है?
Answer: भूमध्य रेखा के जितने पास कोई जगह होती है, वहाँ सूरज की किरणें उतनी ही सीधी पड़ती हैं, जिससे ज़्यादा गर्मी मिलती है। वहीं, भूमध्य रेखा से ध्रुवों की ओर जाने पर सूरज की किरणें तिरछी हो जाती हैं, जिससे कम गर्मी पहुँचती है। इसी दूरी के कारण तापमान में बदलाव आता है और ध्रुवों की ओर ठंड बढ़ती है।
In simple words: भूमध्य रेखा के पास सूरज की किरणें सीधी पड़ती हैं, इसलिए वहाँ ज़्यादा गर्मी होती है। ध्रुवों की तरफ किरणें तिरछी हो जाती हैं, जिससे ठंड बढ़ती है।
🎯 Exam Tip: सूर्य के कोण का तापमान पर सीधा प्रभाव पड़ता है; भूमध्य रेखा पर सीधा कोण अधिकतम ताप का कारण बनता है।
Question 17. ध्रुवों पर बर्फ क्यों जम जाती है?
Answer: ध्रुवों पर सूरज की किरणें बहुत तिरछी पड़ती हैं, जिससे वहाँ बहुत कम गर्मी पहुँचती है। इसी कम गर्मी के कारण तापमान इतना नीचे चला जाता है कि पानी जम कर बर्फ बन जाता है और पूरे साल बर्फ जमी रहती है।
In simple words: ध्रुवों पर सूरज की किरणें सीधी नहीं पड़तीं, इसलिए वहाँ बहुत कम गर्मी पहुँचती है और हमेशा बर्फ जमी रहती है।
🎯 Exam Tip: ध्रुवों पर सूर्य की किरणों का निम्न कोण ही स्थायी बर्फ और ठंडे तापमान का मुख्य कारण है।
Question 19. समुद्र से दूर स्थित स्थानों के ताप में अधिक असमानता क्यों पायी जाती है?
Answer: समुद्र से दूर की जगहें दिन में सूरज की गर्मी से जल्दी गर्म हो जाती हैं और रात में जल्दी ठंडी भी हो जाती हैं। ऐसा इसलिए होता है क्योंकि ज़मीन पानी की तुलना में तेज़ी से गर्म और ठंडी होती है। इसी कारण वहाँ के तापमान में दिन और रात के बीच बहुत फर्क आता है, यानी असमानता दिखती है।
In simple words: समुद्र से दूर वाली जगहें दिन में बहुत गर्म और रात में बहुत ठंडी हो जाती हैं, इसलिए वहाँ तापमान हमेशा बदलता रहता है।
🎯 Exam Tip: जल की विशिष्ट ऊष्मा (Specific Heat) अधिक होती है, जिससे वह धीरे-धीरे गर्म और ठंडा होता है, जबकि भूमि तेज़ी से गर्म और ठंडी होती है, यही तापमान असमानता का कारण है।
Question 10. पवनें किस प्रकार ताप को नियंत्रित करती हैं?
Answer: हवाओं के चलने से तापमान नियंत्रित होता है। जिन जगहों पर गर्म हवाएँ चलती हैं, वहाँ का तापमान बढ़ जाता है, और जहाँ ठंडी हवाएँ चलती हैं, वहाँ का तापमान कम हो जाता है। इस तरह हवाएँ गर्मी को एक जगह से दूसरी जगह ले जाकर तापमान को बदलती हैं और संतुलन बनाए रखती हैं।
In simple words: हवाएँ जहाँ गर्म होती हैं, वहाँ गर्मी बढ़ाती हैं, और जहाँ ठंडी होती हैं, वहाँ ठंडक बढ़ाती हैं। ऐसे हवाएँ तापमान को नियंत्रित करती हैं।
🎯 Exam Tip: पवनें संवहन (convection) के माध्यम से ताप का स्थानांतरण करती हैं, जो वैश्विक तापमान वितरण में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है।
Question 21. मेघ तापमान को कैसे नियंत्रित करते हैं?
Answer: जिन जगहों पर बादल छाए रहते हैं और बारिश होती है, वहाँ तापमान ज़्यादा नहीं बढ़ता। ऐसा इसलिए होता है क्योंकि बादल सूरज की किरणों को वापस अंतरिक्ष में भेज देते हैं या उन्हें धरती तक पहुँचने से रोकते हैं। वहीं, जिन जगहों पर बादल नहीं होते, वहाँ ज़्यादा गर्मी पहुँचती है।
In simple words: बादल सूरज की किरणों को वापस भेज देते हैं, इसलिए जहाँ बादल होते हैं, वहाँ कम गर्मी पड़ती है।
🎯 Exam Tip: बादल अल्बेडो (Albedo) प्रभाव के माध्यम से सूर्य के प्रकाश को परावर्तित करके धरती के तापमान को कम करते हैं।
Question 22. ऊष्मा बजट से क्या तात्पर्य है?
Answer: ऊष्मा बजट का मतलब है कि धरती और उसके वायुमंडल को जितनी गर्मी सूरज से मिलती है, और जितनी गर्मी वापस अंतरिक्ष में जाती है, उन दोनों के बीच संतुलन बना रहना। यह संतुलन धरती के तापमान को स्थिर बनाए रखने में मदद करता है।
In simple words: ऊष्मा बजट बताता है कि पृथ्वी को जितनी गर्मी मिलती है और जितनी वह वापस भेजती है, उनका हिसाब बराबर रहना चाहिए।
🎯 Exam Tip: ऊष्मा बजट पृथ्वी के तापमान संतुलन के लिए एक महत्वपूर्ण अवधारणा है; याद रखें कि यह आय और व्यय के संतुलन का प्रतीक है।
Question 23. सूर्य का पूरा ताप धरातल पर क्यों नहीं पहुँच पाता है?
Answer: सूरज से पृथ्वी तक आने के रास्ते में, सूरज की किरणें वायुमंडल में हवा और धूल के कणों द्वारा सोख ली जाती हैं, कुछ वापस उछल जाती हैं, और कुछ बिखर जाती हैं। इसी वजह से सूरज की पूरी गर्मी धरती तक नहीं पहुँच पाती और इसका केवल एक अंश ही पहुँचता है।
In simple words: सूरज की किरणें धरती तक पहुँचने से पहले हवा में सोख ली जाती हैं, वापस चली जाती हैं या बिखर जाती हैं, इसलिए पूरी गर्मी नहीं पहुँच पाती।
🎯 Exam Tip: वायुमंडल द्वारा सौर विकिरण का अवशोषण, परावर्तन और प्रकीर्णन वे मुख्य प्रक्रियाएँ हैं जो धरती तक पहुँचने वाली सूर्यातप की मात्रा को कम करती हैं।
Question 24. पार्थिव विकिरण किन-किन रूपों में लौटती हैं?
Answer: पार्थिव विकिरण मुख्य रूप से धरती से लंबी तरंगों के रूप में वापस लौटती है। यह विकिरण सीधे अंतरिक्ष में भी जाती है, कुछ वायुमंडल को गर्म करती है, और कुछ संवहन (हवा के ऊपर उठने) तथा वाष्पीकरण (पानी के भाप बनने) के रूप में ऊर्जा छोड़ती है। ये सभी प्रक्रियाएँ धरती की गर्मी को वापस अंतरिक्ष में भेजती हैं।
In simple words: धरती से निकलने वाली गर्मी लंबी तरंगों में, हवा को गर्म करके, और पानी के भाप बनने से वापस जाती है।
🎯 Exam Tip: पार्थिव विकिरण दीर्घ तरंगों के रूप में होता है, जो वायुमंडल द्वारा अवशोषित होकर ग्रीनहाउस प्रभाव में योगदान देता है।
Question 1. वायुमण्डल की उपयोगिता को स्पष्ट कीजिए।
Answer: वायुमंडल पृथ्वी के लिए बहुत ज़रूरी है। इसके मुख्य फायदे ये हैं:
1. यह सूरज की बहुत तेज़ किरणों से पृथ्वी को उनकी असहनीय गर्मी से बचाता है।
2. रात में यह गर्मी को कंबल की तरह रोककर हमें ठंड से बचाता है।
3. वायुमंडल में मौजूद गैसें (जैसे ऑक्सीजन) इंसानों और अन्य जीवों के लिए काम आती हैं।
4. ओजोन गैस सूरज की हानिकारक पराबैंगनी किरणों को रोककर हमारी रक्षा करती है।
ये सभी कार्य पृथ्वी पर जीवन को बनाए रखने में महत्वपूर्ण हैं।
In simple words: वायुमंडल हमें सूरज की तेज़ गर्मी और हानिकारक किरणों से बचाता है। रात में यह हमें ठंड से बचाता है और इसमें जीवन के लिए ज़रूरी गैसें होती हैं।
🎯 Exam Tip: वायुमंडल के प्रमुख कार्यों (जैसे सुरक्षा, तापमान नियंत्रण, जीवन के लिए गैसों की उपलब्धता) को याद रखना इस प्रश्न का उत्तर देने के लिए महत्वपूर्ण है।
Question 2. ताप प्राप्ति के आधार पर विश्व को किन कटिबंधों में बाँटा गया है?
Answer: पृथ्वी पर सूरज से मिलने वाली गर्मी हर जगह एक जैसी नहीं होती। इसी कारण दुनिया को मुख्य रूप से तीन गर्मी के कटिबंधों में बाँटा गया है:
1. **उष्ण कटिबंध:** यह भूमध्य रेखा के दोनों तरफ \( 23\frac{1}{2}^\circ \) अक्षांशों तक फैला है। यहाँ सूरज की किरणें सीधी पड़ती हैं, इसलिए सबसे ज़्यादा गर्मी मिलती है।
2. **शीतोष्ण कटिबंध:** यह दोनों गोलार्धों में \( 23\frac{1}{2}^\circ \) से \( 66\frac{1}{2}^\circ \) अक्षांशों तक फैला है। यहाँ का तापमान मध्यम रहता है और मौसम में बदलाव आता है।
3. **शीत कटिबंध:** यह दोनों गोलार्धों में \( 66\frac{1}{2}^\circ \) अक्षांशों से ध्रुवों तक फैला है। यहाँ सूरज की किरणें बहुत तिरछी पड़ती हैं, इसलिए सबसे कम गर्मी होती है और ठंड ज़्यादा होती है।
In simple words: सूरज की गर्मी के हिसाब से दुनिया को तीन हिस्सों में बांटा गया है: उष्ण (सबसे गर्म), शीतोष्ण (बीच का), और शीत (सबसे ठंडा) कटिबंध।
🎯 Exam Tip: प्रत्येक कटिबंध की अक्षांशीय सीमाएँ और प्रमुख तापमान विशेषताएँ याद रखें, क्योंकि यह वितरण भूमध्य रेखा से ध्रुवों की ओर सूर्य के कोण के बदलने पर आधारित है।
Question 3. जनवरी माह में उत्तरी गोलार्द्ध की समताप रेखाओं की स्थिति को स्पष्ट कीजिए।
Answer: जनवरी के महीने में सूरज दक्षिणी गोलार्ध में मकर रेखा पर सीधी किरणें डालता है, इसलिए दक्षिणी गोलार्ध में गर्मी का मौसम होता है और उत्तरी गोलार्ध में ठंड का मौसम होता है। इस समय उत्तरी गोलार्ध में समताप रेखाएँ कम तापमान दिखाती हैं। एशिया के साइबेरियाई हिस्से में \( -30^\circ C \) तक की ठंड पड़ती है। उत्तरी अमेरिका के दक्षिणी हिस्सों, दक्षिणी यूरोप और दक्षिणी एशियाई हिस्सों में तापमान \( 10^\circ C \) से \( 20^\circ C \) के बीच होता है, जिसे समताप रेखाओं से दिखाया जाता है। यह ठंड का व्यापक प्रभाव दर्शाता है।
In simple words: जनवरी में उत्तरी गोलार्ध में ठंड होती है क्योंकि सूरज दक्षिणी गोलार्ध में चमकता है। साइबेरिया में बहुत ठंड (\( -30^\circ C \)) होती है, जबकि उत्तरी अमेरिका और दक्षिणी यूरोप के कुछ हिस्सों में \( 10^\circ C \) से \( 20^\circ C \) तापमान होता है।
🎯 Exam Tip: जनवरी में सूर्य की स्थिति (दक्षिणी गोलार्ध में) उत्तरी गोलार्ध में शीत ऋतु और निम्न समताप रेखाओं का मुख्य कारण है, इसे मानचित्र पर दर्शाना अभ्यास करें।
Question 5. दक्षिणी गोलार्द्ध की अपेक्षा उत्तरी गोलार्द्ध में समताप रेखाएँ अनियमित क्यों होती हैं?
Answer: उत्तरी गोलार्ध को 'स्थल गोलार्ध' भी कहते हैं क्योंकि यहाँ ज़मीन ज़्यादा है। यहाँ ज़मीन और पानी दोनों होते हैं, और ये दोनों गर्मी को अलग-अलग तरह से सोखते हैं। ज़मीन तेज़ी से गर्म और ठंडी होती है, जबकि पानी धीरे-धीरे। इसी वजह से उत्तरी गोलार्ध में तापमान दिखाने वाली समताप रेखाएँ सीधी नहीं होतीं, बल्कि ज़्यादा अनियमित होती हैं। दक्षिणी गोलार्ध में पानी ज़्यादा है और ज़मीन कम, इसलिए वहाँ समताप रेखाएँ ज़्यादा सीधी और नियमित होती हैं, जो अक्षांश रेखाओं के लगभग समानांतर चलती हैं। संक्षेप में, ज़मीन और पानी के अलग-अलग वितरण के कारण ही समताप रेखाएँ प्रभावित होती हैं।
In simple words: उत्तरी गोलार्ध में ज़मीन और पानी दोनों होते हैं, जो अलग-अलग तरीके से गर्म होते हैं। इसलिए वहाँ तापमान रेखाएँ सीधी नहीं होतीं। दक्षिणी गोलार्ध में पानी ज़्यादा होने के कारण तापमान रेखाएँ ज़्यादा सीधी होती हैं।
🎯 Exam Tip: महाद्वीपों और महासागरों का असमान वितरण समताप रेखाओं की अनियमितता का मुख्य कारण है; उत्तरी गोलार्ध में भूमि का अधिक अनुपात इस असमानता को बढ़ाता है।
Question 6. पृथ्वी पर तापमान का असमान वितरण किस प्रकार जलवायु और मौसम को प्रभावित करता है?
Answer: धरती पर तापमान हर जगह एक जैसा नहीं होता, इसी वजह से दुनिया में अलग-अलग तरह की जलवायु पाई जाती है। उष्ण कटिबंध में सूरज की किरणें सीधी पड़ने से हमेशा गर्मी रहती है और वहाँ की जलवायु भी गर्म होती है। शीतोष्ण कटिबंध में तापमान कम होता है और मौसम में बदलाव आता रहता है। उच्च अक्षांशों (ध्रुवीय क्षेत्रों) में बहुत कम तापमान होता है और साल भर बर्फ जमी रहती है, इसलिए वहाँ की जलवायु ध्रुवीय होती है। इस तरह, धरती पर तापमान का असमान वितरण मौसम और जलवायु को सबसे ज़्यादा प्रभावित करता है और विभिन्न जलवायु प्रदेशों का निर्माण करता है।
In simple words: धरती पर अलग-अलग तापमान होने से दुनिया में अलग-अलग मौसम और जलवायु बनते हैं। जैसे, गर्म जगहों पर हमेशा गर्मी रहती है, ठंडी जगहों पर ठंड रहती है, और जहाँ मौसम बदलता है, वहाँ शीतोष्ण जलवायु होती है।
🎯 Exam Tip: तापमान वितरण के आधार पर तीन प्रमुख जलवायु कटिबंध (उष्ण, शीतोष्ण, शीत) और उनकी विशेषताओं को याद रखना इस प्रश्न के लिए आवश्यक है।
Question 7. सीधी किरणें तिरछी किरणों की अपेक्षा ज्यादा सूर्यातप प्रदान करती हैं। क्यों?
Answer: सूरज की किरणें किस कोण पर धरती पर पड़ रही हैं, यह सूर्यातप की मात्रा पर बहुत असर डालता है। सीधी किरणें तिरछी किरणों की तुलना में ज़्यादा गर्मी देती हैं, ऐसा दो कारणों से होता है:
1. सीधी किरणें वायुमंडल की कम मोटी परत से होकर गुज़रती हैं, इसलिए उनकी कम ऊर्जा वायुमंडल में ख़त्म होती है और ज़्यादा गर्मी धरती तक पहुँचती है।
2. तिरछी किरणें वायुमंडल के ज़्यादा मोटे हिस्से से गुज़रती हैं, जिससे उनकी ज़्यादा ऊर्जा वायुमंडल में ही ख़त्म हो जाती है और धरती तक कम गर्मी पहुँच पाती है।
इस प्रकार सूर्य के कोण का सूर्यातप की मात्रा पर सीधा प्रभाव पड़ता है।
In simple words: सीधी किरणें वायुमंडल के छोटे रास्ते से गुज़रती हैं, इसलिए उनमें कम गर्मी बर्बाद होती है और धरती को ज़्यादा गर्मी मिलती है। तिरछी किरणें बड़े रास्ते से गुज़रती हैं, तो ज़्यादा गर्मी हवा में ही ख़त्म हो जाती है।
🎯 Exam Tip: सूर्य की किरणों के नति कोण (angle of incidence) का सूर्यातप पर सीधा संबंध है; सीधा कोण कम वायुमंडलीय यात्रा और अधिक ताप प्राप्ति सुनिश्चित करता है।
Question 9. सूर्यातप एवं पार्थिव विकिरण में अन्तर स्पष्ट कीजिए।
Answer: सूर्यातप और पार्थिव विकिरण में ये अंतर हैं:
**सूर्यातप:** यह सूरज से आने वाली गर्मी है जो धरती और वायुमंडल को गरम करती है। यह सौर ऊर्जा छोटी तरंगों के रूप में बहुत तेज़ गति से धरती तक पहुँचती है। इसका मुख्य स्रोत सूर्य है।
**पार्थिव विकिरण:** धरती सूरज से गर्मी लेकर गरम होती है। गरम होने के बाद धरती से भी गर्मी निकलती है, जिसे पार्थिव विकिरण कहते हैं। यह गर्मी लंबी तरंगों के रूप में निकलती है। वायुमंडल सीधे सूरज की गर्मी से गरम नहीं होता, बल्कि धरती से निकलने वाली पार्थिव विकिरण से गरम होता है। यह धरती द्वारा उत्सर्जित ऊर्जा है।
In simple words: सूर्यातप सूरज से आने वाली गर्मी है जो धरती को गरम करती है। पार्थिव विकिरण वह गर्मी है जो गरम होने के बाद धरती से वापस अंतरिक्ष में जाती है।
🎯 Exam Tip: सूर्यातप लघु तरंगों के रूप में और पार्थिव विकिरण दीर्घ तरंगों के रूप में होता है; यह अंतर ऊर्जा के अवशोषण और उत्सर्जन को समझने के लिए महत्वपूर्ण है।
Question 1. सूर्यातप के महत्व को स्पष्ट कीजिए।
Answer: सूरज धरती पर गर्मी पाने का अकेला मुख्य स्रोत है। इसकी गर्मी के महत्व को इन बातों से समझा जा सकता है:
1. अगर धरती को सूरज से गर्मी न मिलती, तो यह पूरी तरह बर्फ से ढका हुआ ग्रह होता। अभी गर्मी मिलने से ऐसी स्थिति नहीं है।
2. सूरज की गर्मी ही धरती पर सभी जीवों के जीवन का आधार है। अगर ऐसा न होता, तो धरती पर कोई जीवन नहीं होता।
3. धरती पर अलग-अलग तरह की वनस्पतियों का उगना और बढ़ना भी सूर्यातप के कारण ही संभव हो पाया है।
इस प्रकार, सूर्यातप पृथ्वी के पर्यावरण और जीवन चक्र के लिए अनिवार्य है।
In simple words: सूरज की गर्मी धरती के लिए बहुत ज़रूरी है। यह धरती को बर्फ का गोला बनने से बचाती है, सभी जीवों को जीवन देती है, और पेड़-पौधों को उगने में मदद करती है।
🎯 Exam Tip: सूर्यातप पृथ्वी पर जीवन, जलवायु और पारिस्थितिकी तंत्र के लिए मूलभूत ऊर्जा स्रोत है; इसके बिना पृथ्वी एक बंजर ग्रह होगी।
Question 2. ग्लोब पर मिलने वाले ताप कटिबन्धों का अक्षांशीय आधार पर वर्णन कीजिए।
Answer: धरती पर तापमान हर जगह एक जैसा नहीं होता। अक्षांश तापमान को सबसे ज़्यादा नियंत्रित करते हैं। अक्षांशों के आधार पर ग्लोब को मुख्य रूप से तीन ताप कटिबंधों में बांटा गया है:
1. **उष्ण कटिबंध:** यह भूमध्य रेखा के दोनों ओर \( 23\frac{1}{2}^\circ \) उत्तरी और दक्षिणी अक्षांशों के बीच फैला है। यहाँ का औसत तापमान \( 24 - 26^\circ C \) होता है।
2. **शीतोष्ण कटिबंध:** यह दोनों गोलार्धों में \( 23\frac{1}{2}^\circ \) से \( 66\frac{1}{2}^\circ \) उत्तरी और दक्षिणी अक्षांशों के बीच फैला है। यहाँ तापमान \( 24^\circ C \) से कम और ध्रुवों के पास \( -7^\circ C \) तक गिर जाता है।
3. **शीत कटिबंध:** यह दोनों गोलार्धों में \( 66\frac{1}{2}^\circ \) से \( 90^\circ \) उत्तरी और दक्षिणी ध्रुव के बीच फैला है। यहाँ का औसत तापमान आमतौर पर \( -7^\circ C \) से भी कम रहता है।
इन कटिबंधों का वितरण मुख्य रूप से सूर्य की किरणों के कोण पर आधारित है।
In simple words: ग्लोब पर गर्मी को तीन बड़े हिस्सों में बांटा गया है: उष्ण (सबसे गर्म, भूमध्य रेखा के पास), शीतोष्ण (बीच का, जहाँ मौसम बदलता है), और शीत (सबसे ठंडा, ध्रुवों के पास)। यह बाँट अक्षांशों पर आधारित है।
🎯 Exam Tip: ताप कटिबंधों की सीमाओं को सही अक्षांशों के साथ याद रखना महत्वपूर्ण है, क्योंकि यह वितरण सूर्य के प्रकाश की तीव्रता से जुड़ा है।
Question 3. जुलाई माह में समताप रेखाओं का वितरण कैसा मिलता है?
Answer: जुलाई के महीने में सूरज की किरणें उत्तरी गोलार्ध में कर्क रेखा पर सीधी पड़ती हैं, इसलिए उत्तरी गोलार्ध में गर्मी का मौसम होता है, और दक्षिणी गोलार्ध में ठंड का मौसम होता है। जुलाई में \( 30^\circ C \) की समताप रेखा उत्तरी अफ्रीका, दक्षिणी-पश्चिमी और मध्य एशिया के साथ-साथ उत्तरी अमेरिका में कोलंबिया पठार जैसे इलाकों को घेरती है। जनवरी की तुलना में जुलाई में गर्मी का असर ज़्यादा बड़े क्षेत्र पर होता है। इस दौरान अंटार्कटिका में सबसे कम तापमान रिकॉर्ड किया जाता है। दक्षिणी गोलार्ध में समताप रेखाएँ आमतौर पर अक्षांश रेखाओं के समानांतर ही होती हैं, जबकि उत्तरी गोलार्ध में भूमि और जल के प्रभाव से वे अधिक अनियमित होती हैं।
In simple words: जुलाई में उत्तरी गोलार्ध में गर्मी और दक्षिणी गोलार्ध में ठंड होती है। \( 30^\circ C \) की गर्मी अफ़्रीका, एशिया और अमेरिका के कुछ हिस्सों में होती है। अंटार्कटिका में सबसे कम तापमान होता है और दक्षिणी गोलार्ध में तापमान रेखाएँ सीधी रहती हैं।
🎯 Exam Tip: जुलाई में सूर्य की स्थिति (उत्तरी गोलार्ध में) और महाद्वीप-महासागर वितरण उत्तरी गोलार्ध की समताप रेखाओं की अनियमितता का कारण बनते हैं।
Question 4. तापीय विलोमता को स्पष्ट कीजिए।
Answer: आमतौर पर, क्षोभमंडल में जैसे-जैसे हम ऊँचाई पर जाते हैं, तापमान कम होता जाता है। लेकिन कुछ खास स्थितियों में, ऊँचाई बढ़ने पर तापमान घटने के बजाय बढ़ जाता है। ऊँचाई के साथ तापमान के बढ़ने की इस प्रक्रिया को तापीय व्युत्क्रमण या विलोमता कहते हैं। लंबी रातें, साफ़ आसमान, शांत और सूखी हवा, और बर्फ से ढकी जगहें इसके लिए सबसे अच्छी स्थितियाँ हैं। ऐसी जगहों पर, धरती और हवा की निचली परतें तेज़ी से गर्मी छोड़ती हैं, जिससे निचली हवा ठंडी और भारी हो जाती है। ऊपर की हवा, जो धीरे-धीरे गर्मी छोड़ती है, गर्म रहती है। इसी वजह से ऊँचाई पर तापमान बढ़ने लगता है।
In simple words: सामान्य तौर पर, ऊपर जाने पर हवा ठंडी होती है। लेकिन तापीय विलोमता में, कुछ खास मौसम में, ऊपर जाने पर हवा गर्म होने लगती है। यह लंबी रातों, साफ आसमान और शांत हवा में होता है।
🎯 Exam Tip: तापीय विलोमता तब होती है जब ठंडी हवा ज़मीन के पास फंस जाती है और गर्म हवा उसके ऊपर रहती है; यह सामान्य तापमान प्रवृत्ति का उल्टा है।
Question 5. पर्वतीय घाटियों में होने वाले व्युत्क्रमण को स्पष्ट कीजिए।
Answer: पहाड़ी घाटियों में तापीय व्युत्क्रमण अक्सर भूमध्य रेखा के पास वाले क्षेत्रों में ज़्यादा होता है। दिन में तो पूरी घाटी गर्म रहती है, लेकिन रात में गर्म हवा हल्की होकर ऊपर उठ जाती है। उसकी जगह, घाटी की ढलानों से ठंडी और भारी हवा नीचे घाटी के तल की ओर उतरने लगती है। यह प्रक्रिया आधी रात के बाद शुरू होती है और काफी देर तक चलती रहती है। इसे हवा के बहाव से होने वाला तापीय विलोमता भी कहते हैं। इसी वजह से, सर्दियों में घाटी के निचले हिस्सों में पाला पड़ता है, जबकि मध्यवर्ती ढलान पाले से बचे रहते हैं।
In simple words: पहाड़ी घाटियों में, रात में गर्म हवा ऊपर चली जाती है और ठंडी हवा ढलानों से नीचे घाटी में उतर आती है। इससे घाटी के नीचे ज़्यादा ठंड होती है और ऊपर थोड़ी गर्मी रहती है। इसी को घाटी में तापीय व्युत्क्रमण कहते हैं।
🎯 Exam Tip: घाटी व्युत्क्रमण में ठंडी, सघन हवा ढलानों से नीचे उतरकर घाटी के तल पर जमा हो जाती है, जिससे निचले क्षेत्रों में अत्यधिक ठंड पड़ती है।
Question 6. तापीय विलोमता के आर्थिक प्रभाव को स्पष्ट कीजिए।
Answer: तापीय विलोमता के कारण धरती पर कई आर्थिक और पर्यावरणीय बदलाव देखने को मिलते हैं:
1. तापीय विलोमता की वजह से धरती पर घना कोहरा छा जाता है, जिससे सड़क, रेल और हवाई यातायात बाधित होता है।
2. घाटियों के ऊपर और बीच के ढलानों पर ज़्यादा तापमान होने के कारण वहाँ बस्तियाँ बनाने और रहने के लिए अच्छी जगहें बन जाती हैं।
3. सर्दियों में, बड़े शहरों में धुआँ और नमी मिलकर बहुत घना कोहरा बनाते हैं, जिससे हवाई जहाजों और समुद्री जहाजों के लिए उड़ान भरना या चलना मुश्किल हो जाता है।
4. घाटी के निचले हिस्सों में बहुत ज़्यादा ठंड होने के कारण फसलें खराब हो जाती हैं और कृषि को नुकसान होता है।
5. पहाड़ी घाटियों के ऊपरी हिस्से फलों, बगीचों, मेवों और बागवानी के लिए बहुत फायदेमंद होते हैं, क्योंकि वे पाले के प्रभाव से बचे रहते हैं।
In simple words: तापीय विलोमता से घना कोहरा छा जाता है, शहरों में प्रदूषण से कोहरा बनता है, जिससे जहाजों को परेशानी होती है। घाटियों के निचले हिस्से में फसलें खराब हो जाती हैं, जबकि ऊपरी हिस्से खेती के लिए अच्छे होते हैं।
🎯 Exam Tip: तापीय विलोमता के नकारात्मक आर्थिक प्रभावों में यातायात में बाधा और कृषि को नुकसान शामिल है, जबकि सकारात्मक प्रभाव पहाड़ी ढलानों पर कृषि विकास में देखे जाते हैं।
Question 7. पृथ्वी तथा वायुमण्डल के ऊष्मा बजट को संक्षेप में दर्शाइए।
Answer: पृथ्वी और वायुमंडल का ऊष्मा बजट यह बताता है कि उन्हें सूरज से कितनी गर्मी मिलती है और कितनी गर्मी वे वापस अंतरिक्ष में भेजते हैं, ताकि संतुलन बना रहे।
कुल सौर विकिरण का 35% हिस्सा वायुमंडल और बादलों द्वारा परावर्तित हो जाता है। 14% वायुमंडल सोख लेता है, और बाकी 51% धरती तक पहुँचता है। धरती इस 51% गर्मी को अलग-अलग तरीकों से वापस अंतरिक्ष में भेजती है – जैसे सीधे विकिरण, संवहन, वाष्पीकरण और वायुमंडल द्वारा अवशोषण। इस तरह, धरती और वायुमंडल को जितनी गर्मी मिलती है, उतनी ही वे वापस भेज देते हैं, जिससे तापमान का संतुलन बना रहता है। यह संतुलन पृथ्वी के दीर्घकालिक तापमान को स्थिर रखता है।
In simple words: ऊष्मा बजट मतलब है कि पृथ्वी को सूरज से जितनी गर्मी मिलती है, उतनी ही वह वापस भेजती है, जिससे तापमान स्थिर रहता है। कुछ गर्मी बादल वापस कर देते हैं, कुछ हवा सोख लेती है, और बाकी धरती तक पहुँचती है। धरती फिर इस गर्मी को कई तरीकों से अंतरिक्ष में लौटा देती है।
🎯 Exam Tip: ऊष्मा बजट सौर ऊर्जा के आगमन और पार्थिव ऊर्जा के बहिर्गमन के बीच के संतुलन को दर्शाता है, जो पृथ्वी पर तापमान स्थिरता के लिए महत्वपूर्ण है।
Question 1. तापमान की विलोमता हेतु उत्तरदायी दशाओं का वर्णन कीजिए।
Answer: आमतौर पर, क्षोभमंडल में ऊँचाई बढ़ने पर तापमान कम होता है। लेकिन कुछ विशेष स्थितियों में, तापमान घटने के बजाय बढ़ जाता है, जिसे तापीय विलोमता या तापीय व्युत्क्रमण कहते हैं। इसके लिए ज़िम्मेदार मुख्य दशाएँ इस प्रकार हैं:
1. **शुष्क वायु:** जब हवा शुष्क होती है (यानी उसमें पानी की भाप कम होती है), तो वह धरती से निकलने वाली गर्मी को अच्छे से सोख नहीं पाती। इससे धरती तेज़ी से ठंडी हो जाती है, जिससे तापमान में बदलाव आता है।
2. **बर्फ से ढकी सतह:** ध्रुवीय और बर्फ से ढके इलाकों में धरती लगातार अपनी गर्मी छोड़ती रहती है। बर्फ की सतह गर्मी को अच्छी तरह से परावर्तित करती है, जिससे वहाँ की हवा तेज़ी से ठंडी होती है और तापीय विलोमता बनती है।
3. **स्थिर मौसम:** जब मौसम स्थिर होता है और हवा नहीं चलती, तो गर्मी का विकिरण बिना रुके होता रहता है। मौसम में कोई बदलाव न होने से ऐसी स्थितियाँ लंबे समय तक बनी रहती हैं, जिससे तापीय विलोमता पैदा होती है।
4. **ठंडी और लंबी रातें:** सर्दियों में रातें लंबी होती हैं। ऐसी लंबी रातों के आखिरी घंटों में धरती की सतह से गर्मी की जगह ठंडक ज़्यादा निकलती है। इससे धरती के पास की हवा तेज़ी से ठंडी होती जाती है, जबकि उसके ठीक ऊपर की हवा थोड़ी गर्म रहती है।
5. **शांत और साफ़ आसमान:** शांत और साफ़ आसमान होने पर धरती की गर्मी आसानी से अंतरिक्ष में चली जाती है, जिससे निचली हवा तेज़ी से ठंडी हो जाती है और तापीय विलोमता पैदा होती है।
6. **ढाल वाली घाटियाँ:** गहरी और ढाल वाली घाटियों में, रात में ठंडी और भारी हवा ढलानों से नीचे की ओर तेज़ी से बहकर घाटी के तल पर जमा हो जाती है। इससे घाटी के तल पर तापमान बहुत कम हो जाता है, जबकि ऊपर के ढलान अपेक्षाकृत गर्म रहते हैं, जिससे तापीय व्युत्क्रमण होता है।
7. **ठंडी हवा का प्रवेश:** जब ठंडी हवा की एक राशि किसी गर्म हवा की राशि के क्षेत्र में घुसकर उसे ऊपर उठा देती है, तो भी तापीय विलोमता की स्थिति बन जाती है।
ये सभी कारक मिलकर धरती की सतह के पास के तापमान को प्रभावित करते हैं, जिससे तापीय विलोमता उत्पन्न होती है।
In simple words: तापीय विलोमता तब होती है जब ऊपर जाने पर हवा ठंडी होने के बजाय गर्म होने लगती है। इसके कई कारण हैं: सूखी हवा, बर्फ से ढकी ज़मीन, स्थिर मौसम, लंबी और ठंडी रातें, साफ़ आसमान, ढाल वाली घाटियाँ जहाँ ठंडी हवा नीचे बैठ जाती है, और जब ठंडी हवा गर्म हवा को ऊपर धकेल देती है। ये सभी स्थितियाँ मिलकर धरती के पास की हवा को बहुत ठंडा कर देती हैं, जबकि ऊपर की हवा थोड़ी गर्म रहती है।
🎯 Exam Tip: तापीय विलोमता के लिए जिम्मेदार प्रत्येक भौगोलिक दशा को विस्तार से समझें, क्योंकि ये स्थितियाँ अक्सर एक साथ काम करती हैं।
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