RBSE Solutions Class 11 Indian Geography Chapter 5 भारत का जल प्रवाह तंत्र

Official RBSE Solutions for Class 11 Geography: Chapter 05 भारत का जल प्रवाह तंत्र

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Chapter-wise Solutions for Geography: Chapter 05 भारत का जल प्रवाह तंत्र

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RBSE Class 11 Indian Geography Chapter 5 वस्तुनिष्ठ प्रश्न

 

Question 1. प्रायद्वीपीय पठार के झुकाव का प्रभाव जिस पहलू में देखने को मिलता है, वह है-
(अ) संरचना
(ब) पठार की आयु
(स) जल-प्रवाह की दिशा
(द) स्थलाकृतियाँ
Answer: (स) जल-प्रवाह की दिशा
In simple words: प्रायद्वीपीय पठार का ढलान जिस तरफ होता है, उसी दिशा में वहाँ की नदियाँ बहती हैं। इससे पता चलता है कि पठार का झुकाव नदियों के बहाव को तय करता है।

🎯 Exam Tip: ध्यान रखें कि किसी भी भू-आकृति का ढलान उसके ऊपर बहने वाले जल निकायों की दिशा को सीधे प्रभावित करता है, यह एक महत्वपूर्ण भौगोलिक सिद्धांत है।

 

Question 2. निम्नांकित नदियों के समूह में से उस समूह का चयन कीजिए जिसकी समस्त नदियाँ बंगाल की खाड़ी में गिरती हैं-
(अ) महानदी, कृष्णा, कावेरी एवं नर्मदा

🎯 Exam Tip: इस प्रकार के प्रश्नों में, आपको प्रत्येक विकल्प में दी गई नदियों के मुहानों को याद रखना होगा कि वे किस सागर या खाड़ी में गिरती हैं।

 

Question 3. निम्नांकित नदियों के समूह में से उस समूह का चयन कीजिए जिसकी समस्त नदियाँ डेल्टा बनाती हैं-
(अ) कावेरी, कृष्णा, नर्मदा तथा ताप्ती
(ब) गोदावरी, कृष्णा, कावेरी तथा गंगा
(स) महानदी, कृष्णा, कावेरी तथा नर्मदा
(द) गंगा, गोदावरी, कृष्णा, तथा नर्मदा
Answer: (ब) गोदावरी, कृष्णा, कावेरी तथा गंगा
In simple words: गोदावरी, कृष्णा, कावेरी और गंगा नदियाँ अपने मुहाने पर मिट्टी जमा करके डेल्टा बनाती हैं। ये नदियाँ धीमी गति से बहते हुए समुद्र में मिलने से पहले जमीन के बड़े क्षेत्र में फैल जाती हैं और उपजाऊ भूमि का निर्माण करती हैं।

🎯 Exam Tip: याद रखें कि बंगाल की खाड़ी में गिरने वाली अधिकांश बड़ी नदियाँ डेल्टा बनाती हैं, जबकि अरब सागर में गिरने वाली नदियाँ (जैसे नर्मदा और ताप्ती) एस्चुअरी (ज्वारनदमुख) बनाती हैं क्योंकि वे कठोर चट्टानी इलाकों से होकर गुजरती हैं।

 

RBSE Class 11 Indian Geography Chapter 5 अतिलघुत्तरात्मक प्रश्न

 

Question 4. ताप्ती किस अपवाह का अंग है?
Answer: ताप्ती नदी प्रायद्वीपीय भारत के उन जल प्रवाहों का हिस्सा है जो अरब सागर में जाकर मिलते हैं। यह पश्चिमी दिशा में बहने वाली एक प्रमुख नदी है।
In simple words: ताप्ती नदी पश्चिमी भारत की एक नदी है जो अरब सागर में गिरती है।

🎯 Exam Tip: भारत की दो प्रमुख पश्चिमी-प्रवाह वाली नदियाँ नर्मदा और ताप्ती हैं, ये दोनों प्रायद्वीपीय अपवाह तंत्र का हिस्सा हैं और अरब सागर में मिलती हैं।

 

Question 5. जल विभाजक किसे कहते हैं?
Answer: जल विभाजक एक ऊँचाई वाला क्षेत्र होता है, जैसे कोई पहाड़ या पहाड़ी श्रृंखला, जो किसी इलाके के जल प्रवाह को अलग-अलग दिशाओं में बाँट देता है। यह क्षेत्र दो अलग-अलग नदी बेसिनों को विभाजित करता है।
In simple words: जल विभाजक एक ऊँची जगह है जो नदियों के पानी को अलग-अलग दिशाओं में बहने के लिए बाँट देती है।

🎯 Exam Tip: भारत में अरावली पर्वतमाला और पश्चिमी घाट प्रमुख जल विभाजक के उदाहरण हैं, जो नदियों के बहाव को प्रभावित करते हैं।

 

Question 6. घग्घर नदी किस प्रवाह तंत्र का अंग है?
Answer: घग्घर नदी भारत के अन्तः प्रवाह तंत्र का एक हिस्सा है। इसका मतलब है कि यह नदी किसी समुद्र या बड़ी झील में नहीं मिलती, बल्कि ज़मीन के अंदर ही समाप्त हो जाती है। यह नदी अक्सर मौसमी होती है।
In simple words: घग्घर नदी एक ऐसी नदी है जिसका पानी किसी समुद्र तक नहीं पहुँचता, यह ज़मीन में ही सूख जाती है।

🎯 Exam Tip: अन्तः प्रवाह तंत्र वाली नदियाँ आमतौर पर रेगिस्तानी या शुष्क क्षेत्रों में पाई जाती हैं, जहाँ पानी की कमी के कारण वे समुद्र तक नहीं पहुँच पातीं।

 

RBSE Class 11 Indian Geography Chapter 5 लघुत्तरात्मक प्रश्न

 

Question 7. गंगा के बाएँ किनारे पर मिलने वाली प्रमुख सहायक नदियों के नाम बताइये।
Answer: गंगा नदी के बाएँ किनारे पर कई महत्वपूर्ण सहायक नदियाँ आकर मिलती हैं। इनमें रामगंगा, गोमती, घाघरा, गंडक, कोसी और महानंदा प्रमुख नदियाँ हैं। ये सभी नदियाँ हिमालयी क्षेत्र से निकलकर गंगा में मिलती हैं।
In simple words: गंगा के बाएँ तरफ से रामगंगा, गोमती, घाघरा, गंडक, कोसी और महानंदा नदियाँ मिलती हैं।

🎯 Exam Tip: गंगा की सहायक नदियों को याद रखने के लिए उन्हें बाएँ और दाएँ किनारे के आधार पर अलग-अलग समूहों में वर्गीकृत करना सहायक होता है।

 

Question 9. अन्तः प्रवाह क्षेत्र का आशये उदाहरण देकर स्पष्ट कीजिए।
Answer: अन्तः प्रवाह क्षेत्र उन नदियों से जुड़ा होता है जो किसी समुद्र या बड़े जल निकाय में नहीं मिलतीं। ये नदियाँ ज़मीन के अंदरूनी हिस्सों से निकलकर किसी झील या रेगिस्तानी इलाके में समाप्त हो जाती हैं। ऐसी नदियाँ अक्सर बारिश के मौसम में ही बहती हैं। उदाहरण के तौर पर, राजस्थान में ककनी, कांतली, साबी और मंथा नदियाँ अन्तः प्रवाह का अच्छा उदाहरण हैं।
In simple words: अन्तः प्रवाह क्षेत्र का मतलब है कि नदियाँ समुद्र में नहीं पहुँचतीं, बल्कि ज़मीन पर ही सूख जाती हैं या किसी झील में मिल जाती हैं। जैसे राजस्थान की ककनी नदी।

🎯 Exam Tip: अन्तः प्रवाह क्षेत्र आमतौर पर शुष्क या अर्ध-शुष्क क्षेत्रों में पाए जाते हैं जहाँ पानी की कमी के कारण नदियाँ लंबी दूरी तक प्रवाहित नहीं हो पातीं।

 

RBSE Class 11 Indian Geography Chapter 5 निबन्धात्मक प्रश्न

 

Question 10. भारतीय प्रवाह तंत्र का विस्तार से वर्णन कीजिए।
Answer: भारत में बहने वाली नदियाँ अपने क्षेत्रीय विशेषताओं के आधार पर अलग-अलग प्रकार की होती हैं। नदियों के बहने के तरीके को भौगोलिक स्थिति के अनुसार तीन मुख्य भागों में बाँटा गया है।

भारतीय प्रवाह तंत्र
हिमालयी प्रवाहप्रायद्वीपीय प्रवाहअन्तः प्रवाह
सिंधु अपवाह झीलों में गिरने वाली नदियाँ
ब्रह्मपुत्र अपवाहबंगाल की खाड़ी में गिरने वाली नदियाँमरुस्थल में समाप्त होने वाली नदियाँ
गंगा अपवाहअरब सागर में गिरने वाली नदियाँ 


(i) हिमालयी-प्रवाह: इसे उत्तरी भारतीय अपवाह तंत्र के नाम से भी जाना जाता है। इस प्रवाह की अधिकांश नदियाँ हिमालय पहाड़ों से निकलती हैं। यही कारण है कि ये नदियाँ साल भर पानी से भरी रहती हैं और सूखे मौसम में भी जल प्रदान करती हैं। इस अपवाह को फिर से तीन मुख्य भागों में बाँटा गया है: सिंधु अपवाह, गंगा अपवाह और ब्रह्मपुत्र अपवाह। हिमालयी नदियाँ भारत के बड़े मैदानी इलाकों का निर्माण करती हैं।
(ii) प्रायद्वीपीय प्रवाह: यह प्रवाह तंत्र भारत के दक्षिणी प्रायद्वीपीय पठारी भाग में पाया जाता है। इसे मुख्य रूप से दो भागों में बाँटा गया है।
(अ) बंगाल की खाड़ी में गिरने वाली नदियाँ – इस समूह में दामोदर, स्वर्णरेखा, ब्राह्मणी, महानदी, गोदावरी, भीमा, कृष्णा, तुंगभद्रा, पालार, कावेरी और वेगाई जैसी नदियाँ शामिल हैं। ये नदियाँ आमतौर पर पूर्व दिशा में बहती हैं और डेल्टा बनाती हैं।
(ब) अरब सागर में गिरने वाली नदियाँ – इस समूह में नर्मदा और ताप्ती सबसे लंबी और प्रमुख नदियाँ हैं। इनके अलावा लूनी, साबरमती, माही, सूकड़ी, बांडी और शरावती जैसी प्रमुख नदियाँ भी इस अपवाह क्षेत्र में शामिल हैं। ये नदियाँ अक्सर एस्चुअरी (ज्वारनदमुख) बनाती हैं।
(iii) अन्तः प्रवाह क्षेत्र – यह आन्तरिक प्रवाह के रूप में मुख्य रूप से झीलों में गिरने वाली नदियों को संदर्भित करता है। इसमें साबी, मंथा और घग्घर जैसी नदियाँ शामिल हैं जो रेगिस्तानी या शुष्क भागों में समाप्त हो जाती हैं। इन नदियों का पानी समुद्र तक नहीं पहुँचता है।
In simple words: भारत में नदियों के बहने के तीन मुख्य तरीके हैं: हिमालयी, प्रायद्वीपीय और अन्तः प्रवाह। हिमालयी नदियाँ बर्फ से पिघले पानी से साल भर बहती हैं, जैसे गंगा और ब्रह्मपुत्र। प्रायद्वीपीय नदियाँ बारिश पर निर्भर करती हैं, कुछ बंगाल की खाड़ी में गिरती हैं (जैसे गोदावरी) और कुछ अरब सागर में (जैसे नर्मदा)। अन्तः प्रवाह वाली नदियाँ समुद्र तक नहीं पहुँचतीं, जैसे राजस्थान की घग्घर।

🎯 Exam Tip: भारतीय अपवाह तंत्र के तीनों मुख्य भागों, उनकी प्रमुख नदियों और उनकी विशेषताओं को याद रखना महत्वपूर्ण है, खासकर वे किस सागर में गिरती हैं या डेल्टा/एस्चुअरी बनाती हैं।

 

Question 11. हिमालयी व प्रायद्वीपीय प्रवाह तंत्र का तुलनात्मक विवरण दीजिए।
अथवा
उत्तरी भारतीय एवं दक्षिणी भारतीय अपवाह तंत्र की तुलना कीजिए।
Answer: भारत के उत्तरी और दक्षिणी भारतीय भागों में जल के बहने के तरीकों की तुलना नीचे दिए गए बिंदुओं के आधार पर की गई है।

क्र.सं.तुलना का आधारहिमालयी प्रवाह (उत्तरी भारतीय)प्रायद्वीपीय प्रवाह (दक्षिणी भारतीय)
3.जल की प्राप्तिउत्तरी भारतीय नदियों को मुख्य रूप से बर्फ के पिघलने से पानी मिलता है।दक्षिणी भारतीय नदियों को मुख्य रूप से बारिश से पानी मिलता है।
4.प्रवाह की दिशाइस समूह की अधिकांश नदियाँ उत्तर से दक्षिण की ओर बहती हैं।इस समूह की अधिकांश नदियाँ पश्चिम से पूर्व/दक्षिण-पूर्व की ओर बहती हैं।
5.विभाजनइस समूह की नदियों को सिंधु, गंगा और ब्रह्मपुत्र नदी तंत्रों में बाँटा गया है।इस समूह की नदियों को बंगाल की खाड़ी और अरब सागर में गिरने वाली नदियों के रूप में बाँटा गया है।
6.भौतिक लक्षणये नदियाँ उत्तर के विशाल मैदानी भागों का निर्माण करती हैं।इन नदियों से मुख्य रूप से डेल्टाई क्षेत्र और ज्वारनदमुखों (एस्चुअरी) का निर्माण होता है।
7.क्रियाएँइस अपवाह समूह की नदियों में पानी से होने वाला परिवहन ज़्यादा होता है।इस प्रवाह समूह की नदियों में मुख्य रूप से मछली पालन का काम ज़्यादा होता है।
8.सांस्कृतिक भूदृश्यइस अपवाह समूह की नदियों के संगम पर और आसपास कई धार्मिक स्थल बने हुए हैं।इस अपवाह समूह की नदियों में झरने और जलप्रपात अधिक पाए जाते हैं।
9.शामिल नदियाँइस अपवाह समूह में मुख्य रूप से गंगा, यमुना, घाघरा, गंडक, कोसी, सतलज, सिंधु, रावी, झेलम, चिनाब, व्यास, ब्रह्मपुत्र, दिवांग, मानस, लोहित, रामगंगा, सोन, सबनसीरी जैसी नदियाँ शामिल हैं।इस अपवाह समूह में मुख्य रूप से नर्मदा, ताप्ती, गोदावरी, कृष्णा, कावेरी, दामोदर, ब्राह्मणी, हुगली, स्वर्णरेखा, खोरकोई, पैनार, वेगाई, शरावती, भीमा, भद्रा जैसी नदियाँ शामिल हैं।

In simple words: हिमालयी नदियाँ हिमालय से निकलती हैं, बर्फ से पानी पाती हैं, साल भर बहती हैं और उत्तरी मैदान बनाती हैं। प्रायद्वीपीय नदियाँ बारिश पर निर्भर करती हैं, ज़्यादातर पूर्व की ओर बहती हैं और डेल्टा या एस्चुअरी बनाती हैं।

🎯 Exam Tip: तुलनात्मक विवरण लिखते समय, हमेशा स्पष्ट बिंदुओं का उपयोग करें और दोनों प्रणालियों की विशेषताओं को विपरीत तरीके से प्रस्तुत करें, जैसा कि तालिका में दिखाया गया है।

 

Question 12. भारत के रूपरेखा मानचित्र में प्रमुख नदियों के मार्ग दर्शाइए।
Answer: इस प्रश्न का उत्तर एक मानचित्र पर भारत की प्रमुख नदियों के मार्गों को दर्शाकर दिया जाता है। एक मानचित्र पर सिंधु, गंगा, ब्रह्मपुत्र, नर्मदा, ताप्ती, गोदावरी, कृष्णा और कावेरी जैसी नदियों को चिह्नित करना होगा।
In simple words: इस सवाल का जवाब देने के लिए आपको भारत के नक्शे पर उसकी मुख्य नदियों को दिखाना होगा।

🎯 Exam Tip: मानचित्र-आधारित प्रश्नों में, हमेशा नदियों के उद्गम स्थान, बहाव की दिशा और उनके मुहानों को सही ढंग से दर्शाने का अभ्यास करें।

 

RBSE Class 11 Indian Geography Chapter 5 वस्तुनिष्ठ प्रश्न

 

Question 1. राजस्थान में कौन-सी श्रेणी जल विभाजक का कार्य करती है?
(अ) अरावली
(ब) विन्ध्याचल
(स) सतपुड़ा
(द) कामेट
Answer: (अ) अरावली
In simple words: राजस्थान में अरावली पहाड़ियाँ नदियों के पानी को अलग-अलग दिशाओं में बहने के लिए बाँट देती हैं।

🎯 Exam Tip: भारत में अरावली पर्वतमाला एक प्राचीन और महत्वपूर्ण जल विभाजक है जो राजस्थान में कई नदियों के प्रवाह को प्रभावित करती है।

 

Question 2. गंगा नदी का उद्गम कहाँ से होता है?
(ब) गंगोत्री हिमनद से
Answer: (ब) गंगोत्री हिमनद से
In simple words: गंगा नदी हिमालय के गंगोत्री नाम के बर्फ के पहाड़ से शुरू होती है।

🎯 Exam Tip: याद रखें कि गंगोत्री हिमनद से निकलने वाली मुख्य धारा भागीरथी कहलाती है, जो देवप्रयाग में अलकनंदा से मिलकर गंगा बनती है।

 

Question 3. बिहार का शोक किसे कहते हैं?
(अ) सरयू को
(ब) सोन को
(स) कोसी को
(द) हुगली को
Answer: (स) कोसी को
In simple words: कोसी नदी को बिहार का शोक कहते हैं क्योंकि इसमें हर साल बहुत बाढ़ आती है।

🎯 Exam Tip: कोसी नदी अपने मार्ग बदलने और विनाशकारी बाढ़ लाने की प्रवृत्ति के कारण बिहार के लिए एक बड़ी समस्या बनी हुई है।

 

Question 4. सांपो के नाम से किस नदी को जाना जाता है?
(अ) गंगा को
(ब) यमुना को
(स) घाघरा
(द) ब्रह्मपुत्र को
Answer: (द) ब्रह्मपुत्र को
In simple words: ब्रह्मपुत्र नदी को तिब्बत में 'सांगपो' नाम से भी जाना जाता है।

🎯 Exam Tip: विभिन्न क्षेत्रों में नदियों के अलग-अलग नाम होते हैं, जैसे ब्रह्मपुत्र को तिब्बत में सांगपो, अरुणाचल प्रदेश में दिहांग और बांग्लादेश में जमुना के नाम से जाना जाता है।

 

Question 5. ब्रह्मपुत्र के दाहिने किनारे पर मिलने वाली नदी है-
(अ) दिवांग
(ब) भारेली
(स) कपिली
(द) लुहित
Answer: (ब) भारेली
In simple words: भारेली नदी ब्रह्मपुत्र के दाहिने तरफ से आकर मिलती है।

🎯 Exam Tip: ब्रह्मपुत्र की सहायक नदियों को बाएँ और दाएँ किनारे के आधार पर याद रखना महत्वपूर्ण है क्योंकि यह अक्सर परीक्षा में पूछा जाता है।

 

Question 6. बंगाल का शोक किसे कहा जाता है?
(अ) हुगली को
(ब) पैनर को
(स) भीमा को

🎯 Exam Tip: प्रश्न 13 में दिया गया है कि दामोदर को बंगाल का शोक कहते हैं। यह जानकारी आपको इस प्रश्न का सही उत्तर पहचानने में मदद करेगी।

 

Question 7. निम्न में से जो नदी अरब सागर में नहीं गिरती है, वह है-
(अ) लूनी
(ब) माही
(स) कावेरी
(द) साबरमती
Answer: (स) कावेरी
In simple words: कावेरी नदी बंगाल की खाड़ी में गिरती है, जबकि बाकी नदियाँ अरब सागर में मिलती हैं।

🎯 Exam Tip: भारत की प्रायद्वीपीय नदियों को उनके मुहाने (अरब सागर या बंगाल की खाड़ी) के आधार पर वर्गीकृत करना सीखें।

 

Question 8. नर्मदा का उद्गम कहाँ से होता है?
(अ) मैकाल पर्वत से
(ब) अरावली श्रेणी से
(स) अमरकंटक से
(द) महाबलेश्वर से
Answer: (अ) मैकाल पर्वत से
In simple words: नर्मदा नदी मैकाल पर्वत से निकलती है, खासकर अमरकंटक पठार से।

🎯 Exam Tip: नर्मदा और सोन नदी अमरकंटक पठार से निकलती हैं, लेकिन अलग-अलग दिशाओं में बहती हैं, जो दर्शाता है कि अमरकंटक एक महत्वपूर्ण जल विभाजक भी है।

 

Question 9. सांभर झील किस राज्य में है?
(अ) पंजाब में
(ब) हरियाणा में
(स) राजस्थान में
(द) गुजरात में
Answer: (स) राजस्थान में
In simple words: सांभर झील राजस्थान राज्य में है और यह भारत की सबसे बड़ी खारे पानी की झील है।

🎯 Exam Tip: सांभर झील एक महत्वपूर्ण अंतर्देशीय खारे पानी की झील है, जो अपने नमक उत्पादन और प्रवासी पक्षियों के लिए प्रसिद्ध है।

 

Question 10. निम्न में से जो अन्तः प्रवाह का अंग है, वह है-
(अ) भीमा
(ब) कृष्णा
(स) लूना
(द) कांकनी
Answer: (द) कांकनी
In simple words: कांकनी नदी एक अन्तः प्रवाह वाली नदी है जो समुद्र में नहीं मिलती है।

🎯 Exam Tip: अन्तः प्रवाह की नदियाँ अक्सर शुष्क या अर्ध-शुष्क क्षेत्रों में पाई जाती हैं और स्थानीय जल संसाधनों के लिए महत्वपूर्ण होती हैं।

 

Question 12. कपिलधारा निम्न में से जो है, बताइये
(अ) नदी
(ब) गार्ज
(स) जलप्रपात
(द) कैनियन
Answer: (स) जलप्रपात
In simple words: कपिलधारा नर्मदा नदी पर एक झरना है।

🎯 Exam Tip: नर्मदा नदी पर कई महत्वपूर्ण जलप्रपात हैं, जैसे कपिलधारा और धुआँधार, जो पर्यटकों के आकर्षण का केंद्र हैं।

 

सुमेलन सम्बन्धी प्रश्न

 

Question. स्तम्भ अ को स्तम्भ ब से सुमेलित कीजिए-
(क)

स्तम्भ अ
(नदी का नाम)
स्तम्भ ब
(उद्गम स्थल)
(i) गंगा(य) गंगोत्री
(ii) यमुना(अ) यमुनोत्री
(iii) नर्मदा(द) अमर कण्टक चोटी
(iv) सतलज(स) राक्षस ताल
(v) ब्रह्मपुत्र(ब) कैलाश पर्वत


Answer:
(i) गंगा - (य) गंगोत्री
(ii) यमुना - (अ) यमुनोत्री
(iii) नर्मदा - (द) अमर कण्टक चोटी
(iv) सतलज - (स) राक्षस ताल
(v) ब्रह्मपुत्र - (ब) कैलाश पर्वत
In simple words: यह मिलान नदियों को उनके उद्गम स्थानों से जोड़ता है। जैसे गंगा गंगोत्री से, यमुना यमुनोत्री से, नर्मदा अमरकंटक चोटी से, सतलज राक्षस ताल से और ब्रह्मपुत्र कैलाश पर्वत से निकलती है।

🎯 Exam Tip: नदियों और उनके उद्गम स्थलों का सही मिलान करने के लिए उन्हें मानचित्र पर देखकर याद करना सबसे अच्छा तरीका है।

 

Question. स्तम्भ अ को स्तम्भ ब से सुमेलित कीजिए-

स्तम्भ अ
(नदी)
स्तम्भ ब
(अपवाह तंत्र)
(i) झेलम(स) सिंधु अपवाह
(ii) यमुना(द) गंगा अपवाह
(iii) मानस(य) ब्रह्मपुत्र अपवाह
(iv) कृष्णा(अ) बंगाल की खाड़ी
(v) शरावती(ब) अरब सागरीय


Answer: (i) (स), (ii) (द), (iii) (य), (iv) (अ), (v) (ब)।
In simple words: यह मिलान नदियों को उनके अपवाह तंत्र से जोड़ता है। झेलम सिंधु तंत्र का हिस्सा है, यमुना गंगा तंत्र का, मानस ब्रह्मपुत्र तंत्र का, कृष्णा बंगाल की खाड़ी में गिरती है और शरावती अरब सागर में।

🎯 Exam Tip: नदियों को उनके प्रमुख अपवाह तंत्रों (जैसे सिंधु, गंगा, ब्रह्मपुत्र) या उनके मुहानों (बंगाल की खाड़ी, अरब सागर) के आधार पर याद रखना मानचित्र अध्ययन में सहायक होता है।

 

RBSE Class 11 Indian Geography Chapter 5 अतिलघुत्तरात्मक प्रश्न

 

Question 1. भारतीय सभ्यता व संस्कृति का विकास कहाँ हुआ है?
Answer: भारतीय सभ्यता और संस्कृति का विकास मुख्य रूप से नदी-घाटियों में हुआ है। प्राचीन समय से ही नदियाँ जीवन का आधार रही हैं, जिससे बस्तियाँ और संस्कृतियाँ पनपी हैं।
In simple words: भारत की पुरानी सभ्यता और संस्कृति नदियों के किनारे ही विकसित हुई।

🎯 Exam Tip: विश्व की अधिकांश प्राचीन सभ्यताएँ, जैसे सिंधु घाटी सभ्यता, मेसोपोटामियाई सभ्यता और मिस्र की सभ्यता, नदी घाटियों में ही विकसित हुईं क्योंकि नदियाँ पानी, उपजाऊ भूमि और परिवहन प्रदान करती थीं।

 

Question 2. भारत के अधिकांश धार्मिक नगर कहाँ बसे हुए हैं?
Answer: भारत के ज़्यादातर धार्मिक नगर नदियों के किनारों पर बसे हुए हैं। नदियों को पवित्र माना जाता है, और उनके तटों पर पूजा-पाठ और त्योहार मनाए जाते हैं।
In simple words: भारत के बहुत से पवित्र शहर नदियों के पास बने हैं।

🎯 Exam Tip: गंगा नदी के किनारे बसे हरिद्वार, वाराणसी और प्रयागराज जैसे शहर भारतीय संस्कृति और धर्म में नदियों के महत्व का एक बड़ा उदाहरण हैं।

 

Question 3. नदियों का सबसे रोचक मार्ग परिवर्तन कौन-सा है?
Answer: सिंधु-ब्रह्मपुत्र नदियों में सबसे रोचक मार्ग परिवर्तन देखा गया है। इन नदियों ने भूगर्भीय गतिविधियों के कारण समय के साथ अपने बहाव की दिशा में बड़े बदलाव किए हैं।
In simple words: सिंधु और ब्रह्मपुत्र नदियाँ अपने रास्ते सबसे ज़्यादा बदलती हैं।

🎯 Exam Tip: हिमालयी नदियाँ अक्सर अपने मार्ग बदलती रहती हैं, खासकर मैदानी इलाकों में, जिससे कभी-कभी बाढ़ और नए नदी-घाटियों का निर्माण होता है।

 

Question 5. अरब सागरीय प्रवाह क्षेत्र किसे कहते हैं?
Answer: जल विभाजक रेखा का वह भाग, जहाँ से बहने वाला सारा पानी अरब सागर में जाकर मिलता है, उसे अरब सागरीय प्रवाह क्षेत्र कहा जाता है। इसमें मुख्य रूप से पश्चिमी दिशा में बहने वाली नदियाँ शामिल होती हैं।
In simple words: जिस तरफ का पानी अरब सागर में जाता है, उस क्षेत्र को अरब सागरीय प्रवाह क्षेत्र कहते हैं।

🎯 Exam Tip: भारत की नर्मदा और ताप्ती जैसी पश्चिमी घाट की नदियाँ अरब सागरीय प्रवाह तंत्र का हिस्सा हैं और ये नदियाँ एस्चुअरी बनाती हैं।

 

Question 6. भौगोलिक दृष्टि से भारत के प्रवाह को कितने भागों में बाँटा गया है?
Answer: भौगोलिक नज़रिए से भारत के जल प्रवाह को तीन मुख्य भागों में बाँटा गया है: हिमालयी प्रवाह, प्रायद्वीपीय प्रवाह और अन्तः प्रवाह। ये विभाजन नदियों के उद्गम, बहाव और उनकी विशेषताओं पर आधारित हैं।
In simple words: भारत में नदियों के बहने के तरीके को तीन मुख्य भागों में बाँटा गया है: हिमालयी, प्रायद्वीपीय और अन्तः प्रवाह।

🎯 Exam Tip: तीनों प्रकार के प्रवाह तंत्रों की मुख्य विशेषताओं और उनमें शामिल नदियों के नाम याद रखना परीक्षा के लिए उपयोगी होगा।

 

Question 7. सतलज नदी का उद्गम कहाँ से होता है?
Answer: सतलज नदी का उद्गम तिब्बत में मानसरोवर झील के पास 'राक्षस ताल' नाम की जगह से होता है। यह एक महत्वपूर्ण सिंधु नदी प्रणाली की सहायक नदी है।
In simple words: सतलज नदी तिब्बत में मानसरोवर झील के पास राक्षस ताल से निकलती है।

🎯 Exam Tip: सिंधु नदी तंत्र की सभी प्रमुख नदियाँ (सिंधु, झेलम, चिनाब, रावी, ब्यास, सतलज) हिमालय या उसके आसपास से निकलती हैं।

 

Question 8. गंगा नदी का निर्माण कैसे होता है?
Answer: गंगा नदी का निर्माण देवप्रयाग नामक स्थान पर होता है, जहाँ दो मुख्य जल धाराएँ, अलकनंदा और भागीरथी, आपस में मिलती हैं। भागीरथी गंगोत्री हिमनद से निकलती है।
In simple words: गंगा नदी तब बनती है जब अलकनंदा और भागीरथी नदियाँ देवप्रयाग में आपस में मिल जाती हैं।

🎯 Exam Tip: 'पंच प्रयाग' (विष्णुप्रयाग, नंदप्रयाग, कर्णप्रयाग, रुद्रप्रयाग, देवप्रयाग) उन स्थानों को संदर्भित करते हैं जहाँ अलकनंदा विभिन्न हिमालयी नदियों से मिलती है, और देवप्रयाग अंतिम संगम है जहाँ गंगा नाम दिया जाता है।

 

Question 9. कोसी को बिहार का शोक क्यों कहते हैं?
Answer: कोसी नदी को बिहार का शोक इसलिए कहते हैं क्योंकि यह अक्सर अपना रास्ता बदलती रहती है। इसके कारण बिहार में हर साल भयंकर बाढ़ आती है, जिससे भारी मात्रा में जान-माल का नुकसान होता है।
In simple words: कोसी नदी को बिहार का शोक कहते हैं क्योंकि यह अपना रास्ता बदलकर हर साल बाढ़ और तबाही लाती है।

🎯 Exam Tip: "शोक" कही जाने वाली नदियाँ (जैसे दामोदर-बंगाल का शोक, हुआंग हे-चीन का शोक) आमतौर पर उन नदियों को कहते हैं जो अपने बाढ़ और मार्ग परिवर्तन से बड़े पैमाने पर विनाश करती हैं।

 

Question 10. ब्रह्मपुत्र नदी में बायें किनारे से कौन-सी नदियाँ आकर मिलती हैं?
Answer: ब्रह्मपुत्र नदी में बायें किनारे से दिवांग, लुहित, कपिली, धनसिरी, बूढ़ी दिहिंग आदि नदियाँ आकर मिलती हैं। ये सभी नदियाँ असम और आसपास के क्षेत्रों से ब्रह्मपुत्र में समाहित होती हैं।
In simple words: ब्रह्मपुत्र में बायें किनारे से दिवांग, लुहित, कपिली, धनसिरी और बूढ़ी दिहिंग नदियाँ मिलती हैं।

🎯 Exam Tip: ब्रह्मपुत्र नदी की सहायक नदियों को दिशा (बाएँ या दाएँ किनारे से मिलने वाली) के आधार पर याद रखना मानचित्र अध्ययन में महत्वपूर्ण है।

 

Question 11. ब्रह्मपुत्र नदी के दायें किनारे से कौन-सी नदियाँ आकर मिलती हैं?
Answer: ब्रह्मपुत्र नदी के दायें किनारे से सुबनसिरी, कामेंग (जिया भारेली), मानस, संकोष और तीस्ता जैसी नदियाँ आकर मिलती हैं। ये नदियाँ हिमालय के उत्तरी ढलानों से निकलकर ब्रह्मपुत्र में समाहित होती हैं।
In simple words: ब्रह्मपुत्र के दाहिने तरफ से सुबनसिरी, कामेंग, मानस, संकोष और तीस्ता नदियाँ मिलती हैं।

🎯 Exam Tip: दाहिने किनारे की सहायक नदियाँ अक्सर उत्तर-पूर्व हिमालय से निकलती हैं, जबकि बाएँ किनारे की सहायक नदियाँ दक्षिण-पूर्व हिमालय से निकलती हैं।

 

Question 13. दामोदर को बंगाल का शोक क्यों कहते हैं?
Answer: दामोदर नदी को 'बंगाल का शोक' इसलिए कहा जाता है क्योंकि यह नदी बाढ़ लाती है और अपना मार्ग बदलती रहती है। इन कारणों से बंगाल में हर साल बहुत जान-माल का नुकसान होता है, खासकर कृषि और जीवन पर इसका बुरा असर पड़ता है।
In simple words: दामोदर नदी बंगाल में बाढ़ और तबाही लाती है, इसलिए इसे बंगाल का शोक कहते हैं।

🎯 Exam Tip: दामोदर नदी घाटी परियोजना को इसी नदी के विनाशकारी प्रभावों को नियंत्रित करने के लिए शुरू किया गया था।

 

Question 14. भ्रंश घाटी में होकर कौन-कौनसी नदियाँ बहती हैं?
Answer: भ्रंश घाटी में होकर नर्मदा, ताप्ती, चम्बल और दामोदर जैसी नदियाँ बहती हैं। ये नदियाँ पृथ्वी की सतह पर बनी दरारों या खाइयों से होकर प्रवाहित होती हैं।
In simple words: नर्मदा, ताप्ती, चम्बल और दामोदर नदियाँ भ्रंश घाटी से होकर बहती हैं।

🎯 Exam Tip: भ्रंश घाटियों में बहने वाली नदियाँ आमतौर पर सीधे मार्ग का अनुसरण करती हैं और अक्सर एस्चुअरी (ज्वारनदमुख) बनाती हैं, खासकर पश्चिमी भारत में।

 

Question 15. अरब सागर में गिरने वाली नदियों के नाम लिखिए।
Answer: अरब सागर में गिरने वाली प्रमुख नदियाँ नर्मदा, ताप्ती, लूनी, साबरमती, माही, सूकड़ी, बांडी और शरावती हैं। ये नदियाँ पश्चिमी दिशा में बहते हुए अरब सागर में मिलती हैं।
In simple words: अरब सागर में गिरने वाली मुख्य नदियाँ नर्मदा, ताप्ती, लूनी, साबरमती, माही, सूकड़ी, बांडी और शरावती हैं।

🎯 Exam Tip: पश्चिमी घाट से निकलने वाली और अरब सागर में गिरने वाली नदियाँ अक्सर छोटी और तेज़ होती हैं, जो झरने और एस्चुअरी बनाती हैं।

 

Question 16. नर्मदा द्वारा निर्मित प्रपातों के नाम लिखिए।
Answer: नर्मदा नदी अपनी संकीर्ण भ्रंश घाटी में बहते समय कई सुंदर झरने बनाती है। इनमें कपिल धारा, दूध धारा, सहस्त्र धारा, धुँआधार, घाघरी और हिरन प्रपात प्रमुख हैं। ये सभी प्रपात पर्यटकों के बीच बहुत प्रसिद्ध हैं।
In simple words: नर्मदा नदी पर कपिल धारा, दूध धारा, सहस्त्र धारा, धुँआधार, घाघरी और हिरन जैसे झरने हैं।

🎯 Exam Tip: नर्मदा नदी अपने विशिष्ट भ्रंश घाटी प्रवाह और उस पर बनने वाले जलप्रपातों के लिए जानी जाती है, जो भूवैज्ञानिक रूप से महत्वपूर्ण हैं।

 

Question 17. अन्तः प्रवाह क्षेत्र कहाँ विस्तृत मिलता है?
Answer: अन्तः प्रवाह क्षेत्र मुख्य रूप से राजस्थान के सांभर झील से लेकर हरियाणा में घग्घर नदी के प्रवाह तक फैला हुआ है। यह इलाका शुष्क और अर्ध-शुष्क होता है जहाँ नदियाँ समुद्र तक नहीं पहुँच पातीं।
In simple words: अन्तः प्रवाह क्षेत्र राजस्थान की सांभर झील से लेकर हरियाणा में घग्घर नदी तक फैला हुआ है।

🎯 Exam Tip: राजस्थान का मरुस्थलीय क्षेत्र भारत में अन्तः प्रवाह तंत्र का सबसे अच्छा उदाहरण है, जहाँ कई छोटी नदियाँ रेत में ही समाप्त हो जाती हैं।

 

Question 18. नर्मदा नदी पर बने प्रमुख जल प्रपातों के नाम बताइये।
Answer: नर्मदा नदी पर कई महत्वपूर्ण जल प्रपात बनते हैं, जिनमें कपिल धारा, दूध धारा, सहस्त्र धारा, धुँआधार, घाघरी और हिरन प्रपात शामिल हैं। ये सभी प्रपात नदी के बहाव के कारण बनने वाली प्राकृतिक सुंदरता को दर्शाते हैं।
In simple words: नर्मदा नदी पर कपिल धारा, दूध धारा, सहस्त्र धारा, धुँआधार, घाघरी और हिरन जैसे प्रमुख झरने हैं।

🎯 Exam Tip: जलप्रपात नदी के मार्ग में कठोर और नरम चट्टानों के अंतर के कारण बनते हैं, जहाँ नरम चट्टानें जल्दी कट जाती हैं और कठोर चट्टानें ऊपर रह जाती हैं।

 

Question 1. भारत में नदियों के महत्व को स्पष्ट कीजिए।
Answer: भारत में नदियों का बहुत बड़ा योगदान रहा है, और वे देश के लिए अद्वितीय महत्व रखती हैं। नदियों का महत्व इन बिंदुओं से स्पष्ट होता है:
1. भारतीय नदियों ने मध्य भाग में उपजाऊ मैदानी भागों का निर्माण किया है।
2. नदियों द्वारा लाई गई मिट्टी (कॉप/जलोढ़) के जमाव से खेती को बहुत बढ़ावा मिला है।
3. नदियाँ कृषि कार्यों के लिए सिंचाई की सुविधा प्रदान करती हैं।
4. नदियों में मछली पालन का काम खूब होता है।
5. मछली पालन से बहुत से लोगों को रोज़गार मिलता है।
6. नदियाँ देश के अंदर जल परिवहन में सहायक रही हैं।
7. नदियों के किनारे कई धार्मिक, ऐतिहासिक, व्यापारिक और औद्योगिक नगरों का विकास हुआ है।
8. नदियों ने कई उद्योगों की स्थापना में महत्वपूर्ण योगदान दिया है।
9. नदियों ने प्राचीन सभ्यताओं के विकास में मुख्य भूमिका निभाई थी।
10. नदियों पर बने जलप्रपातों से बिजली बनाई जाती है।
11. नदियों के संगमों पर कई धार्मिक केंद्र विकसित हुए हैं।
12. नदियों ने पर्यटन को बढ़ावा देने के साथ-साथ नए प्राकृतिक दृश्यों का निर्माण किया है।
13. नदियों के किनारे पेड़ लगाने से वन संसाधनों का विकास हुआ है।
14. नदियों ने जैव विविधता (जीवों की अलग-अलग प्रजातियाँ) बढ़ाने में महत्वपूर्ण योगदान दिया है।
15. नदियों से कई प्रकार के जैविक और अजैविक संसाधन मिलते हैं।
16. नदियों के कारण विभिन्न संस्कृतियों का मिलन और सांस्कृतिक एकजुटता स्थापित हुई है।
17. नदियों से ज़मीन के नीचे के पानी (भूमिगत जल) का स्तर बढ़ता है।
18. नदियाँ घर बनाने के लिए कच्ची सामग्री और कारखानों के लिए पानी देती हैं।
In simple words: नदियाँ भारत के लिए बहुत महत्वपूर्ण हैं। वे खेती, परिवहन, बिजली बनाने में मदद करती हैं, शहरों और सभ्यताओं को बसाती हैं, और लोगों को रोज़गार देती हैं।

🎯 Exam Tip: नदियों के बहुआयामी महत्व को याद रखने के लिए उनके आर्थिक, सामाजिक, सांस्कृतिक और पर्यावरणीय योगदानों को अलग-अलग बिंदुओं में सूचीबद्ध करें।

 

Question 2. सिंधु-ब्रह्मपुत्र प्रवाह में क्या परिवर्तन आया है?
Answer: सिंधु-ब्रह्मपुत्र प्रवाह में बड़े बदलाव आए हैं। पहले यह प्रवाह असम के उत्तरी-पूर्वी हिस्से से निकलकर हिमालय के समानांतर पश्चिमी दिशा में बहता हुआ सुलेमान-किरथर श्रेणियों तक पहुँचता था, और फिर दक्षिण की ओर मुड़कर अरब सागर में गिरता था। बाद में, धरती के अंदर हुई बड़ी हलचलों के कारण, यह 'इंडो-ब्रह्म' या 'शिवालिक' नदी उत्तर-पश्चिमी हिस्से में सिंधु नदी के रूप में और पूर्वी हिस्से में ब्रह्मपुत्र नदी के रूप में अलग हो गई। यह भूगर्भीय परिवर्तन का एक महत्वपूर्ण उदाहरण है।
In simple words: पहले सिंधु और ब्रह्मपुत्र एक ही नदी थी, जो हिमालय के पास बहती थी। धरती में बदलाव के कारण यह दो अलग-अलग नदियों, सिंधु और ब्रह्मपुत्र, में बँट गई।

🎯 Exam Tip: भूगर्भीय हलचलें जैसे प्लेट टेक्टोनिक्स, नदियों के मार्ग और उनके प्रवाह पैटर्न को बड़े पैमाने पर प्रभावित कर सकती हैं।

 

Question 3. भारतीय जल-विभाजक रेखा कहाँ से कहाँ तक फैली हुए है?
Answer: भारतीय जल-विभाजक रेखा हिमालय के पास मानसरोवर झील से शुरू होती है। यह रेखा कामेत पर्वत से होती हुई शिमला के पूर्व तक, फिर अरावली पर्वतमाला के साथ-साथ उदयपुर तक जाती है। इसके बाद, यह दक्षिण में इंदौर के पास से नर्मदा और ताप्ती नदियों की घाटियों को अरब सागरीय प्रवाह क्षेत्र में शामिल करती हुई, पश्चिमी घाट के किनारे-किनारे कन्याकुमारी तक पहुँचती है। यह रेखा भारत के विभिन्न नदी तंत्रों को अलग करती है।
In simple words: भारत की जल-विभाजक रेखा मानसरोवर झील से शुरू होकर अरावली, नर्मदा-ताप्ती घाटियों से होती हुई कन्याकुमारी तक जाती है।

🎯 Exam Tip: भारतीय जल-विभाजक रेखा को समझने से देश के प्रमुख नदी बेसिनों और उनकी प्रवाह दिशाओं को समझने में मदद मिलती है।

 

Question 4. ब्रह्मपुत्र अपवाह का संक्षिप्त वर्णन कीजिए।
Answer: ब्रह्मपुत्र नदी तिब्बत में मानसरोवर झील के पास कैलाश पर्वत से निकलती है। यह पूर्व दिशा में हिमालय के पूर्वी छोर तक बहती है, जहाँ इसे 'सांगपो' नदी कहा जाता है। इसके बाद यह दक्षिण और फिर पश्चिम की ओर मुड़कर असम में प्रवेश करती है। असम से यह बांग्लादेश में जाकर गंगा नदी में मिल जाती है। ब्रह्मपुत्र अपने साथ बहुत मिट्टी बहाकर लाती है। इसके डेल्टाई भाग में गंगा-ब्रह्मपुत्र नदियाँ कई जलधाराओं में बँट जाती हैं, जैसे मधुमती, पद्मा, सरस्वती, हुगली और भागीरथी।
In simple words: ब्रह्मपुत्र नदी कैलाश पर्वत से निकलकर तिब्बत, असम और बांग्लादेश से होकर बहती है, जहाँ यह गंगा से मिलती है और एक बड़ा डेल्टा बनाती है।

🎯 Exam Tip: ब्रह्मपुत्र एक ट्रांस-बाउंड्री नदी है जो तीन देशों (चीन, भारत, बांग्लादेश) से होकर गुजरती है, और इसकी सहायक नदियाँ तथा मुहाने के नाम अलग-अलग क्षेत्रों में बदलते रहते हैं।

 

RBSE Class 11 Indian Geography Chapter 5 लघुत्तरात्मक प्रश्न Type II

 

Question 1. सिंधु व गंगा अपवाह में अन्तर स्पष्ट कीजिए।
अथवा
सिंधु व गंगा अपवाह में मिलने वाली भिन्नताओं को स्पष्ट कीजिए।
Answer: सिंधु और गंगा अपवाह तंत्रों के बीच के अंतर को नीचे दिए गए बिंदुओं से समझा जा सकता है।

 सिंधु अपवाहगंगा अपवाह
1. जलग्रहण क्षेत्रइस अपवाह तंत्र का कुल जलग्रहण क्षेत्र 11.50 लाख वर्ग किमी है, जिसमें से केवल 3.25 लाख वर्ग किमी क्षेत्र भारत में है।इस अपवाह तंत्र का जलग्रहण क्षेत्र 8.6 लाख वर्ग किमी में फैला हुआ है।
2. नदियों का गिरनाइस अपवाह क्षेत्र की नदियाँ मुख्य रूप से अरब सागरीय क्षेत्र में गिरती हैं।इस अपवाह क्षेत्र की नदियाँ मुख्य रूप से बंगाल की खाड़ी में गिरती हैं।
3. भौतिक लक्षणइस अपवाह क्षेत्र की नदियाँ गहरी खाइयाँ (गॉर्ज) बनाती हैं।इस अपवाह क्षेत्र की नदियाँ विशाल मैदानी भाग का निर्माण करती हैं।
4.इस अपवाह क्षेत्र में दोआब (दो नदियों के बीच की भूमि) मिलते हैं।इस अपवाह क्षेत्र में संगम (नदियों का मिलन स्थान) पाए जाते हैं।


In simple words: सिंधु अपवाह तंत्र का पानी अरब सागर में गिरता है, जबकि गंगा अपवाह तंत्र का पानी बंगाल की खाड़ी में। सिंधु नदियाँ गॉर्ज बनाती हैं और दोआब होते हैं, जबकि गंगा नदियाँ बड़े मैदान और कई संगम बनाती हैं।

🎯 Exam Tip: सिंधु और गंगा अपवाह तंत्र भारत के दो सबसे बड़े और महत्वपूर्ण नदी तंत्र हैं; उनके जलग्रहण क्षेत्र, मुहाने और भू-आकृतिक प्रभावों को याद रखना आवश्यक है।

 

Question 2. बंगाल की खाड़ी व अरब सागरीय नदियों की तुलना कीजिए।
अथवा
बंगाल की खाड़ी की नदियाँ अरब सागरीय नदियों से किस प्रकार भिन्न हैं? स्पष्ट कीजिए।
Answer: बंगाल की खाड़ी और अरब सागरीय अपवाह के बीच विभिन्न विशेषताओं की तुलना नीचे दिए गए बिंदुओं के आधार पर की गई है।

क्र.सं.तुलना का आधारअरब सागरीय अपवाहबंगाल की खाड़ी का अपवाह
1.बहाव का कारणयह अपवाह प्रायद्वीपीय पठार के पश्चिमी घाट के ऊँचे पश्चिमी भाग और अरब सागर की ओर के ढलान के कारण विकसित हुआ है।यह अपवाह प्रायद्वीपीय पठार के पूर्व की ओर झुकाव के कारण विकसित हुआ है।
2.नदियों की गतिअधिक ढलान के कारण नदियों की गति तेज़ होती है।इस अपवाह में नदियों की गति कम होती है क्योंकि ढलान मंद होता है।
3.भौतिक लक्षणइसमें ज्वारनदमुख (एस्चुअरी) का निर्माण होता है।इसमें डेल्टाओं का निर्माण होता है।


In simple words: अरब सागर में गिरने वाली नदियाँ तेज़ बहती हैं, एस्चुअरी बनाती हैं और पश्चिमी ढलान के कारण हैं। बंगाल की खाड़ी में गिरने वाली नदियाँ धीमी बहती हैं, डेल्टा बनाती हैं और पूर्वी ढलान के कारण हैं।

🎯 Exam Tip: बंगाल की खाड़ी और अरब सागर में गिरने वाली नदियों की तुलना करते समय, ढलान की दिशा, नदियों की गति और उनके द्वारा निर्मित भू-आकृतियों (डेल्टा बनाम एस्चुअरी) पर ध्यान देना महत्वपूर्ण है।

 

Question 1. भारतीय अपवाह की उपयोगिता का वर्णन कीजिए।
Answer: भारतीय नदियों का देश के विकास में बहुत महत्वपूर्ण योगदान रहा है। इन नदियों के कई फायदे इस प्रकार हैं:

  1. भारत की नदियों ने बीच के मैदानी इलाकों में उपजाऊ भूभाग बनाए हैं।
  2. नदियाँ अपने साथ लाई गई उपजाऊ मिट्टी जमा करके फसलों की पैदावार को बहुत बढ़ावा देती हैं।
  3. नदियाँ कृषि कार्यों के लिए सिंचाई की सुविधा प्रदान करती हैं।
  4. नदियों में मछली पालन का काम अच्छी तरह से होता है।
  5. मछली पालन के कारण कई लोगों को रोजगार मिलता है।
  6. नदियाँ देश के अंदर जल परिवहन के रूप में सहायक रही हैं।
  7. नदियों के किनारों पर कई धार्मिक, ऐतिहासिक, व्यापारिक और औद्योगिक शहर विकसित हुए हैं।
  8. नदियों ने अनेक उद्योगों की स्थापना में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है।
  9. नदियाँ प्राचीन सभ्यताओं के विकास में मुख्य योगदान देती थीं।
  10. नदियों पर बने जलप्रपातों से बिजली बनाने की प्रक्रिया को बढ़ावा मिलता है।
  11. नदियों के मिलने की जगहों पर कई धार्मिक केंद्र बने हुए हैं।
  12. नदियाँ पर्यटन को बढ़ावा देती हैं और एक नया प्राकृतिक दृश्य बनाती हैं।
  13. नदियों के किनारे पेड़-पौधों की पट्टियाँ विकसित होने से वन संसाधन बढ़े हैं।
  14. नदियों ने जीव-जंतुओं और पौधों की विविधता (जैव विविधता) को बढ़ाने में महत्वपूर्ण योगदान दिया है।
  15. नदियों से कई तरह के जैविक और अजैविक संसाधन प्राप्त होते हैं।
  16. नदियों के कारण विभिन्न संस्कृतियों का मेलजोल हुआ और सांस्कृतिक एकता स्थापित हुई है।
  17. नदियाँ भूमिगत जल के स्तर को बढ़ाती हैं।
  18. नदियाँ भवन निर्माण के लिए कच्चा माल और कारखानों के लिए पानी उपलब्ध करवाती हैं। भारत में नदियों को अक्सर जीवनदायिनी माना जाता है क्योंकि वे हर क्षेत्र में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती हैं।

In simple words: भारत की नदियाँ देश के लिए बहुत उपयोगी हैं। वे खेती, उद्योगों, परिवहन और संस्कृति को बढ़ावा देती हैं। नदियाँ पानी, उपजाऊ मिट्टी और रोजगार के अवसर प्रदान करती हैं।

🎯 Exam Tip: निबंधात्मक प्रश्नों में सभी महत्वपूर्ण बिन्दुओं को क्रमबद्ध तरीके से लिखें और प्रत्येक बिन्दु की संक्षिप्त व्याख्या करें। मुख्य शब्दों का प्रयोग करना न भूलें।

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