Official RBSE Solutions for Class 11 Hindi: Chapter 04 गाँधीजी
Review structured textbook solutions for Class 11 Hindi Chapter 04 गाँधीजी. Built according to RBSE guidelines for the 2026-27 academic year, these downloadable answers support daily revision and problem-solving accuracy.
Chapter-wise Solutions for Hindi: Chapter 04 गाँधीजी
Access the complete solution PDF for Class 11 Hindi below. Regular practice with these targeted textbook answers builds familiarity with standard question patterns and helps secure higher marks in final school evaluations.
RBSE Class 11 Hindi आलोक Chapter 4 पाठ्यपुस्तक के प्रश्नोत्तर
प्रश्न 1. गुजराती में 'शु' अर्थ होता है -
(क) कौन
(ख) कब
(ग) क्यों
(घ) किसे?
(च) क्या प्रश्न
Answer: (च) क्या प्रश्न
In simple words: 'शु' शब्द गुजराती भाषा में 'क्या' पूछने के लिए इस्तेमाल होता है। यह किसी चीज के बारे में जानने या प्रश्न करने का तरीका है।
🎯 Exam Tip: ऐसे प्रश्नों में, सही उत्तर चुनने के लिए अन्य विकल्पों के अर्थ को भी समझना महत्वपूर्ण है।
प्रश्न 2. माखनलाल चतुर्वेदी ने 'मस्तक-भंजन' किसे कहा है –
(क) लाठी।
(ख) हॉकी स्टिक
Answer: (ख) हॉकी स्टिक
In simple words: माखनलाल चतुर्वेदी ने गांधीजी के पास रखी हॉकी स्टिक को 'मस्तक-भंजन' नाम दिया था। यह एक मज़ाकिया नाम था।
🎯 Exam Tip: कहानी के ऐसे छोटे-छोटे विवरणों पर ध्यान दें, क्योंकि वे अक्सर पात्रों के स्वभाव या लेखक की शैली को दर्शाते हैं।
प्रश्न 3. विलायती संवाददाता के प्रश्न का गाँधीजी ने क्या जवाब दिया ?
Answer: एक विदेशी पत्रकार ने गांधीजी से पूछा, "क्या आप में हास्य की प्रवृत्ति भी है?" गांधीजी ने तुरंत जवाब दिया कि अगर मुझमें हास्य की प्रवृत्ति नहीं होती, तो मैं बहुत पहले आत्महत्या कर चुका होता। गांधीजी मानते थे कि जीवन की मुश्किलों में भी हँसते रहना बहुत ज़रूरी है।
In simple words: पत्रकार ने गांधीजी से पूछा कि क्या उनमें हास्य की भावना है। गांधीजी ने कहा कि अगर उनमें हास्य न होता, तो वे कब के आत्महत्या कर चुके होते।
🎯 Exam Tip: गांधीजी के जीवन से जुड़े ऐसे प्रसंगों को याद रखें, जो उनके मानवीय गुणों और हास्य-विनोद की समझ को दर्शाते हैं।
प्रश्न 4. बापू की स्वाभाविक कोमलता के साथ-साथ कौन-सी वृत्ति काम करती थी?
Answer: बापू की स्वाभाविक कोमलता के साथ-साथ एक कठोर नियंत्रण वृत्ति भी काम करती थी। गांधीजी बहुत दयालु और नरम दिल के थे, लेकिन वे अपने सिद्धांतों और नियमों को लेकर बहुत सख्त भी थे।
In simple words: बापू की कोमलता के साथ-साथ एक सख्त नियंत्रण वाली आदत भी थी। वे नरम दिल के होते हुए भी नियमों के पक्के थे।
🎯 Exam Tip: गांधीजी के व्यक्तित्व के विभिन्न पहलुओं को जानें, जैसे उनकी कोमलता और दृढ़ता, जो उन्हें एक महान नेता बनाती थी।
प्रश्न 5. लेखक को गाँधीजी के समक्ष लज्जित क्यों होना पड़ा?
Answer: एक बार गांधीजी ने लेखक को बातचीत के लिए सुबह सवा सात बजे का समय दिया था। लेखक उन दिनों आश्रम में नए थे और उन्होंने सोचा कि गांधीजी शायद कहीं जाते नहीं हैं, इसलिए दो-चार मिनट की देरी हो जाए तो कोई बात नहीं। जब वह सात बजकर दस-बारह मिनट पर पहुँचे, तो गांधीजी मुस्कुराकर बोले, "आपका समय तो बीत चुका है। अब चले जाइए। फिर कभी समय तय करके आना।" इस घटना से लेखक को समय की पाबंदी न रखने के कारण शर्मिंदा होना पड़ा।
In simple words: लेखक देर से गांधीजी से मिलने पहुँचे। गांधीजी ने उन्हें बताया कि उनका समय निकल गया है, जिससे लेखक को बहुत शर्मिंदगी महसूस हुई।
🎯 Exam Tip: समय का महत्व गांधीजी के जीवन का एक महत्वपूर्ण हिस्सा था। इस उदाहरण को याद रखें जो उनकी पाबंदी को दर्शाता है।
प्रश्न 6. गाँधीजी के संस्मरणों के आधार पर बतलाइए कि जीवन में हास्य की प्रवृत्ति का क्या महत्व है?
Answer: 'गांधीजी' संस्मरण में महात्मा गांधी के जीवन-आदर्शों के साथ-साथ उनके हास्य-विनोद के कई खास किस्से बताए गए हैं। ये किस्से युवाओं को अनुशासन की प्रेरणा देते हैं। इनसे यह भी पता चलता है कि जीवन में कितनी भी व्यस्तता और बड़ी जिम्मेदारियां क्यों न हों, उनके बीच भी अनुशासन, मूल्यों की रक्षा और हास्य-विनोद के लिए जगह बनाई जा सकती है। महात्मा गांधी इतने व्यस्त होते हुए भी हास्य-विनोद को बराबर महत्व देते थे, इसलिए हमें भी इस आदत का सही इस्तेमाल करके जीवन को खुशहाल बनाए रखना चाहिए।
In simple words: गांधीजी के किस्से दिखाते हैं कि हास्य-विनोद जीवन में बहुत ज़रूरी है। कितनी भी परेशानी क्यों न हो, हँसते-हँसते हम अनुशासन और मूल्यों को बनाए रख सकते हैं।
🎯 Exam Tip: गांधीजी के जीवन से हास्य के महत्व को जोड़ते हुए, उनके उदाहरणों को अपने उत्तर में शामिल करें।
प्रश्न 7. समय की नियमितता के संबंध में गाँधीजी का क्या दृष्टिकोण था? उदाहरण सहित उत्तर दीजिए।
Answer: गांधीजी समय के बहुत पाबंद थे। उनके लिए समय का पालन करना बहुत महत्वपूर्ण था। जब लेखक नियत समय पर नहीं पहुँचा, तो उन्होंने लेखक को बातचीत का अवसर नहीं दिया। गांधीजी का मानना था कि समय का सदुपयोग करना ही जीवन की सफलता की कुंजी है।
In simple words: गांधीजी समय के बहुत पक्के थे। उन्होंने लेखक को देर से आने पर बात करने का मौका नहीं दिया, यह दिखाता है कि वे समय को कितना महत्व देते थे।
🎯 Exam Tip: गांधीजी की समय पाबंदी उनके दृढ़ संकल्प और अनुशासन का प्रमाण थी। इस बात को हमेशा ध्यान रखें।
प्रश्न 9. निम्नलिखित विषयों पर गाँधीजी की दृष्टि से टिप्पणियाँ लिखिए :
1. छुआ-छूत
2. चाय-कॉफी
3. स्वदेशी वस्तुओं का उपयोग
4. अस्त्र-शस्त्र
Answer:
1. छुआ-छूत – गांधीजी छुआ-छूत को बिलकुल गलत मानते थे। एक बार जब उनकी गोद ली हुई लड़की को रसोई सिखाने से आश्रम की सभी महिलाओं ने मना कर दिया, तो उन्होंने अपने भतीजे मगनलाल गांधी की पत्नी को मायके चले जाने का आदेश दिया। उन्होंने कहा कि उन्हें ऐसी बहू नहीं चाहिए जो उनकी लड़की को रसोई में घुसने न दे। गांधीजी छुआ-छूत के खिलाफ लंबी लड़ाई लड़ने को तैयार थे।
2. चाय-कॉफी – गांधीजी खुद चाय-कॉफी नहीं पीते थे, लेकिन मेहमानों के लिए हमेशा प्रबंध करते थे। वे बातों-बातों में चाय-कॉफी के नुकसान के बारे में भी बताते थे। उन्होंने मिस आगेथा हैरिसन से कहा था, "आप चिंता मत कीजिए। मैंने आपके लिए आधा-पौंड जहर रख लिया है।" यह उनके हास्य-विनोद का एक उदाहरण था।
3. स्वदेशी वस्तुओं का उपयोग – गांधीजी विदेश में बनी कितनी भी आकर्षक वस्तुएं क्यों न हों, उनका उपयोग नहीं करना चाहते थे। जब डच-गयाना से प्रवासी उनके घर आए, तो उन्होंने हाथ से बने कागज, नेजे की कलम और घर की स्याही से संदेश लिखा। यह उनकी स्वदेशी की भावना का एक मजबूत प्रमाण था।
4. अस्त्र-शस्त्र – गांधीजी अहिंसा को सबसे प्रभावी हथियार मानते थे। वे स्थायी दुश्मनी के बजाय हृदय परिवर्तन पर जोर देते थे। वे किसी भी हाल में हिंसा को बर्दाश्त नहीं कर सकते थे। उनका जीवन-संघर्ष इस बात का सबूत है कि उन्होंने भारतीय स्वतंत्रता संग्राम अहिंसा के शक्तिशाली हथियार से लड़ा।
In simple words: गांधीजी छुआ-छूत को गलत मानते थे। वे खुद चाय-कॉफी नहीं पीते थे पर मेहमानों को देते थे। वे हमेशा स्वदेशी चीजें इस्तेमाल करने को कहते थे। उन्होंने अहिंसा को सबसे बड़ा हथियार माना था।
🎯 Exam Tip: गांधीजी के विचारों को अलग-अलग बिंदुओं में याद रखें। हर बिंदु पर उनके दृष्टिकोण का एक छोटा उदाहरण देना उत्तर को और प्रभावी बनाता है।
RBSE Class 11 Hindi आलोक Chapter 4 लघूत्तरीय प्रश्नोत्तर
प्रश्न 2. “तब मुझे अभी लंबी लड़ाई लड़नी पड़ेगी।” बापू ने यह कथन किस संदर्भ में कहा?
Answer: एक बार महात्मा गांधीजी ने अपने कमरे में आश्रम की सभी महिलाओं की मीटिंग बुलाई। बातचीत का विषय था - उनकी गोद ली गई अछूत लड़की को अपने रसोईघर में बैठकर खाना बनाना कौन सिखाएगा। डेढ़ घंटे तक गंभीर चर्चा चलती रही। वहाँ मौजूद स्त्रियों में से कोई भी इस पुण्य काम के लिए तैयार नहीं हुई। सभी ने एक स्वर में 'नहीं' कहा। इस गंभीर माहौल में गांधीजी ने कहा, इसका मतलब है कि अछूतोद्धार का उनका संकल्प इतनी आसानी से पूरा नहीं होगा और उन्हें अभी लंबी लड़ाई लड़नी पड़ेगी।
In simple words: गांधीजी ने यह बात तब कही जब आश्रम की महिलाओं ने उनकी गोद ली हुई अछूत बेटी को रसोई बनाना सिखाने से मना कर दिया। इससे उन्हें लगा कि छुआ-छूत के खिलाफ अभी बहुत काम करना है।
🎯 Exam Tip: गांधीजी के कथन के पीछे के संदर्भ को समझना ज़रूरी है। यह वाक्य छुआ-छूत के खिलाफ उनके दृढ़ संकल्प को दिखाता है।
प्रश्न 3. “आप अपने मायके चली जाएँ ।” उक्त वाक्य किसने, किसको और क्यों कहे?
Answer: यह वाक्य बापू ने अपने भतीजे मगनलाल गांधी की पत्नी से कहे थे। उन्होंने यह इसलिए कहा, क्योंकि मगनलाल गांधी की पत्नी अछूत बालिका को रसोई में घुसने नहीं देना चाहती थी। गांधीजी को यह छोटा-सा विचार भी पसंद नहीं आया। उनका मानना था कि अगर उनके अपने घर में ही उनके अच्छे विचारों का सम्मान नहीं होगा, तो वे समाज को क्या संदेश दे पाएँगे? इसलिए उन्होंने कहा, "आप अपने मायके चली जाएँ, पर बच्चों को यहीं छोड़ती जाएँ। मुझे ऐसी बहू नहीं चाहिए, जो मेरी लड़की को रसोई में घुसने न दे।"
In simple words: गांधीजी ने यह बात अपने भतीजे की पत्नी से कही थी। उन्होंने ऐसा इसलिए कहा क्योंकि वह अछूत लड़की को रसोई में घुसने नहीं दे रही थी, जो गांधीजी को गलत लगा।
🎯 Exam Tip: गांधीजी के सिद्धांतों को उजागर करने वाले ऐसे प्रसंगों को याद रखें। यह उदाहरण उनकी अस्पृश्यता विरोधी भावना को दर्शाता है।
प्रश्न 4. "आप फिक्र ना कीजिए। मैंने आपके लिए आधा-पौंड जहर रख लिया है।” कथन की विशिष्टता बताइए।
Answer: यह कथन हास्य-विनोद के साथ एक गहरा संदेश भी देता है। दरअसल, बापू चाय को सेहत के लिए बहुत हानिकारक मानते थे, पर जिन्हें चाय पीने की आदत थी, उनके लिए वे चाय का पूरा प्रबंध ज़रूर करते थे। एक बार मिस आगेथा हैरिसन नाम की एक अंग्रेज महिला उनके साथ यात्रा कर रही थीं और उन्हें अपनी सुबह की चाय की चिंता थी। जब महात्माजी को यह बात पता चली, तो वे हँसते हुए बोले, "आप फिक्र न कीजिए। मैंने आपके लिए आधा-पौंड जहर रख लिया है।" यह उनकी हाज़िर-जवाबी और हास्य-विनोद का अनोखा तरीका था।
In simple words: यह बात गांधीजी ने हँसी-मज़ाक में कही थी जब एक महिला को सुबह की चाय की चिंता थी। इसका मतलब था कि वे चाय को ज़हर जैसा मानते थे, पर मेहमानों का ध्यान भी रखते थे।
🎯 Exam Tip: गांधीजी के हास्य-विनोद और उनकी बातों में छिपे गहरे अर्थों पर ध्यान दें। यह उद्धरण उनकी विनोदप्रियता को दर्शाता है।
प्रश्न 5. हॉकी-स्टिक का नाम 'मस्तक-भंजन' किसने रखा था? गाँधीजी ने इस पर क्या प्रतिक्रिया दी?
Answer: जब लेखक ने गांधीजी के हाथ में हॉकी-स्टिक देखी, तो गांधीजी हँसते हुए बोले, "यह लाठी आपने बहुत मजबूत बाँधी है।" तब लेखक ने उन्हें बताया कि माखनलाल चतुर्वेदी ने इस हॉकी-स्टिक का नाम 'मस्तक-भंजन' रखा था। बापू ने यह सुनकर कहा, "हाँ, और सत्याग्रह आश्रम में 'मस्तक-भंजन' रखनी ही चाहिए।" यह घटना दर्शाती है कि हास्य-विनोद गांधीजी के जीवन का एक महत्वपूर्ण हिस्सा था।
In simple words: माखनलाल चतुर्वेदी ने हॉकी-स्टिक का नाम 'मस्तक-भंजन' रखा था। गांधीजी ने इस पर हँसते हुए कहा कि ऐसा नाम सत्याग्रह आश्रम में सही है।
🎯 Exam Tip: गांधीजी के हास्य-विनोद को दर्शाने वाले ऐसे किस्से याद रखें। यह उनके सहज और विनोदपूर्ण स्वभाव को उजागर करता है।
प्रश्न 7. लेखक के पास फाउन्टेन पेन देखकर गाँधीजी ने किस तरह प्रतिक्रिया दी? इसमें क्या भाव निहित था? स्पष्ट कीजिए।
Answer: लेखक के पास फाउंटेन पेन देखकर बापू को अच्छा नहीं लगा। उन्होंने कहा कि दक्षिण अफ्रीका में उनके पास भी फाउंटेन पेन था, लेकिन अब वे कलम से लिखते हैं। उन्होंने पूछा, "डच-गयाना वाले भी क्या कहेंगे कि इनके पास घर की कलम भी नहीं?" तुरंत चाकू और कलम मंगवाए गए। संदेश स्वदेशी कागज पर लिखा गया और स्याही भी घर की बनी हुई थी। इस घटना से गांधीजी का स्वदेशी वस्तुओं के प्रति गहरा विश्वास प्रकट होता है। यह दर्शाता है कि वे हर छोटी चीज़ में भी स्वदेशी को महत्व देते थे।
In simple words: गांधीजी ने लेखक के फाउंटेन पेन को पसंद नहीं किया। उन्होंने स्वदेशी कलम-स्याही मंगवाई और स्वदेशी कागज पर संदेश लिखा। यह उनकी स्वदेशी चीजों के प्रति आस्था दिखाता है।
🎯 Exam Tip: गांधीजी के स्वदेशी प्रेम को दर्शाने वाले ऐसे प्रसंगों को याद रखें। यह उनकी सोच और व्यवहार में स्वदेशी को कितना महत्व देते थे, यह बताता है।
प्रश्न 8. “बापू, मेरी वोट बढ़ रही है।” कथन पर बापू ने क्या टिप्पणी दी?
Answer: जब श्री पद्मजा नायडू के लिए 'कॉफी' का सारा सामान लाया गया, तो लेखक ने गांधीजी से कहा, "बापू, मेरी वोट बढ़ रही है।" इसका मतलब था कि महादेव भाई चाय पीते हैं, बा कॉफी पीती हैं, पद्मजा जी भी कॉफी पीती हैं और लेखक स्वयं चाय पीता है। यानी लेखक के पक्ष में चाय और कॉफी पीने वालों की संख्या बढ़ रही थी। इस पर गांधीजी ने कहा, "बुरी चीजों के प्रचार के लिए वोटों की ज़रूरत थोड़ी ही पड़ती है, वे तो अपने आप फैलती हैं।" यह गांधीजी का हास्य-विनोद और उनकी समझ दिखाता है कि अच्छी चीजों को स्थापित करने में मेहनत लगती है, पर बुरी चीजें खुद ही लोकप्रिय हो जाती हैं।
In simple words: लेखक ने कहा कि चाय-कॉफी पीने वालों में उनकी "वोट" बढ़ रही है। गांधीजी ने हँसकर जवाब दिया कि बुरी चीजें तो अपने आप फैल जाती हैं, उनके लिए प्रचार की ज़रूरत नहीं पड़ती।
🎯 Exam Tip: गांधीजी की हाज़िर-जवाबी और उनकी बातों में छिपे व्यंग्य को समझें। यह उनके बुद्धिमान और विनोदपूर्ण स्वभाव को दर्शाता है।
प्रश्न 9. विद्यापीठ के प्रिंसीपल ने बापू से क्या कहा? बापू ने किस प्रकार हाजिर-जवाबी का परिचय दिया?
Answer: एक बार विद्यापीठ के प्रिंसिपल कृपलानी जी ने गांधीजी से कहा, "जब तक हम लोग आपसे दूर रहते हैं, हमारी बुद्धि ठीक रहती है, लेकिन आपके पास आते ही खराब हो जाती है।" तब बापू ने हाज़िर-जवाबी का परिचय देते हुए कहा, "तब तो मैं आपकी खराब बुद्धि का ज़िम्मेदार रहा।" इस तरह बापू ने अपनी हाज़िर-जवाबी से कृपलानी जी को चुप कर दिया।
In simple words: प्रिंसिपल कृपलानी ने कहा कि गांधीजी के पास आकर उनकी बुद्धि खराब हो जाती है। गांधीजी ने जवाब दिया कि फिर तो वे ही उनकी खराब बुद्धि के लिए जिम्मेदार हैं।
🎯 Exam Tip: गांधीजी की हाज़िर-जवाबी के उदाहरणों को याद रखें। यह उनके तीव्र बुद्धि और वाक्पटुता का प्रमाण है।
प्रश्न 10. मुनिश्री जिनविजय ने बापू का कौन-सा किस्सा सुनाया?
Answer: मुनिश्री जिनविजय ने बापू का एक किस्सा सुनाया कि एक बार बापू पहले मोटर से निकले, लेकिन थोड़ी दूर चलकर अपनी मोटर किनारे खड़ी कर ली। इसके दो मिनट बाद ही पंडित मोतीलाल नेहरू और मुनि जी की मोटर निकली। मोतीलाल जी ने मुनि से कहा, "देखा आपने? महात्माजी ने मेरे अंदाज़ से अपनी मोटर रोक रखी है, चलकर उनसे कारण पूछें।" जब पंडितजी ने पूछा, तो महात्माजी बोले, "मैं यह नहीं चाहता था कि आपको धूल फाँकनी पड़े। मैं तो आपको ज्यादा दिन जिंदा देखना चाहता हूँ।" इस प्रकार यह उनकी हाज़िर-जवाबी का एक और उदाहरण था। यह दिखाता है कि वे दूसरों का कितना सम्मान करते थे।
In simple words: मुनिश्री जिनविजय ने बताया कि एक बार गांधीजी ने अपनी मोटर रोक ली ताकि मोतीलाल नेहरू और मुनि जी को धूल न खानी पड़े। गांधीजी ने कहा कि वे उन्हें ज्यादा दिन जिंदा देखना चाहते हैं।
🎯 Exam Tip: गांधीजी के हास्य-विनोद और दूसरों के प्रति उनकी संवेदनशीलता को दर्शाने वाले ऐसे किस्से याद रखें।
प्रस्तुत संस्मरण में बनारसीदास चतुर्वेदी ने गाँधीजी के किन पहलुओं को उजागर किया है? लिखिए।
Answer: 'गांधीजी' संस्मरण में बनारसीदास चतुर्वेदी ने राष्ट्रपिता महात्मा गांधी के महान जीवन-आदर्शों के साथ-साथ उनके हास्य-व्यंग्य के खास प्रसंगों को भी उजागर किया है, जिनसे महत्वपूर्ण संदेश मिलते हैं। गांधीजी के व्यक्तित्व की कुछ मुख्य विशेषताएँ इस प्रकार हैं:
1. **हास्य-विनोदी** – इस संस्मरण में तीन-चार ऐसे मौके हैं जहाँ गांधीजी को हास्य-विनोदी के रूप में दिखाया गया है। वे खुद इसकी अहमियत को मानते थे। जब उन्होंने एक विदेशी पत्रकार से कहा कि अगर उनमें हास्य की भावना न होती तो वे कब के आत्महत्या कर चुके होते, तो यह उनकी हास्य-विनोदी प्रकृति को दर्शाता है। चाय को ज़हर कहना, 'मस्तक-भंजन' को आश्रम में रखना, और मुनि जिनविजय का किस्सा उनकी विनोदप्रियता को दिखाता है।
2. **अछूतोद्धार हेतु प्रयासरत** – अस्पृश्यता को खत्म करने के लिए गांधीजी का गंभीर प्रयास भी सामने आता है। जब उन्होंने आश्रम की महिलाओं से पूछा कि उनकी गोद ली हुई अछूत लड़की को रसोई में खाना बनाना कौन सिखाएगा और सभी ने 'नहीं' कहा, तो बापू ने कहा, "तब मुझे अभी लंबी लड़ाई लड़नी पड़ेगी।" यह उनका एक बहुत गंभीर बयान था।
3. **दृढ़-निश्चयी** – अपने संकल्प के प्रति उनकी सजगता तब दिखती है जब वे अपने भतीजे की पत्नी को मायके चले जाने के लिए कहते हैं, क्योंकि उसने भी अछूत कन्या को रसोई में ले जाने से मना कर दिया था। वे अपने लक्ष्य के प्रति बहुत दृढ़ थे और अपने संकल्प को पूरा करने के लिए कठोर निर्णय लेने से पीछे नहीं हटते थे।
4. **समय के पाबंद** – लेखक के साथ दो बार ऐसी घटनाएँ हुईं, जहाँ उन्हें केवल एक या दो मिनट की देरी के लिए शर्मिंदा होना पड़ा। वे समय के महत्व को समझते थे। उनका यह कथन बहुत महत्वपूर्ण है - "मैं तो मिनट भर से आपका इंतज़ार कर रहा हूँ।"
5. **स्वदेशी की भावना** – डच-गयाना से आए प्रवासियों को हाथ से बने कागज पर संदेश लिखना, नेजे की कलम का उपयोग करना और घर पर बनी स्याही का इस्तेमाल करना - ये सब उनकी स्वदेशी वस्तुओं के प्रति सोच को दिखाते हैं। लेखक का फाउंटेन पेन इस्तेमाल करना भी उन्हें पसंद नहीं आया।
6. **कठोर परिश्रमी** – दिन भर मेहनत करना, रात ढाई बजे उठना, देर रात तक काम करना और बीच में 15-20 मिनट का भी आराम न कर पाना इस बात का प्रमाण है कि वे बहुत परिश्रमी थे।
7. **प्रत्युत्पन्नमति** – हाज़िर-जवाबी में उनका कोई मुकाबला नहीं था। कुलपति कृपलानी जी, स्वयं लेखक, पं. मोतीलाल नेहरू को जिस तरह मज़ाक करते हुए तुरंत जवाब दिया, यह उनकी तीव्र बुद्धि को उजागर करता है। इस प्रकार यह संस्मरण लेखक ने बापू के कई अनछुए पहलुओं को सामने लाया है, जिससे उनके महान व्यक्तित्व की अभिव्यक्ति मिलती है।
In simple words: बनारसीदास चतुर्वेदी ने गांधीजी के कई अच्छे गुणों को बताया है। उन्होंने गांधीजी को हास्य-विनोदी, अछूतों के लिए लड़ने वाले, पक्के इरादे वाले, समय के पाबंद, स्वदेशी पसंद करने वाले, बहुत मेहनती और हाज़िर-जवाबी इंसान के रूप में दिखाया है।
🎯 Exam Tip: इस तरह के विस्तृत उत्तर के लिए, गांधीजी के हर पहलू को एक स्पष्ट बिंदु में लिखें और एक छोटा उदाहरण या तर्क ज़रूर दें।
प्रश्न 2. निम्न पंक्तियों का निहितार्थ स्पष्ट कीजिए
1. “तब मुझे अभी लंबी लड़ाई लड़नी पड़ेगी।'
2. 'मैं तो मिनट भर से आपका इन्तजार कर रहा हूँ।'
3. “मेरा संदेश स्वदेशी कागज पर लिखो।'
Answer:
1. **"तब मुझे अभी लंबी लड़ाई लड़नी पड़ेगी।"** - इस कथन का मतलब है कि गांधीजी को अभी भी अस्पृश्यता (छुआ-छूत) को समाज से खत्म करने के लिए बहुत संघर्ष करना होगा। जब आश्रम की महिलाओं ने उनकी गोद ली हुई अछूत कन्या को रसोई में खाना बनाना सिखाने से मना कर दिया, तो गांधीजी को यह महसूस हुआ कि यह बुराई समाज में कितनी गहराई तक फैली हुई है। उन्हें लगा कि इस बड़ी समस्या से लड़ने के लिए उन्हें अभी बहुत लंबा रास्ता तय करना है।
2. **"मैं तो मिनट भर से आपका इंतजार कर रहा हूँ।"** - इस वाक्य में गांधीजी की समय की पाबंदी और अनुशासन का भाव छिपा है। वे यह दिखाना चाहते थे कि हर व्यक्ति के समय का महत्व होता है और तय समय पर काम करना कितना ज़रूरी है। गांधीजी का यह कटाक्ष लेखक को अपनी गलती का एहसास कराता है और समय के प्रति अधिक जिम्मेदार बनने का संदेश देता है।
3. **"मेरा संदेश स्वदेशी कागज पर लिखो।"** - इस पंक्ति से गांधीजी की स्वदेशी वस्तुओं के प्रति गहरी आस्था और प्रेम प्रकट होता है। वे यह संदेश देना चाहते थे कि हमें विदेशी वस्तुओं पर निर्भर नहीं रहना चाहिए और अपने देश में बनी चीजों का ही इस्तेमाल करना चाहिए। यह आत्मनिर्भरता और राष्ट्र प्रेम का प्रतीक है। गांधीजी हर काम में स्वदेशी को बढ़ावा देते थे।
In simple words: 'लंबी लड़ाई' का मतलब छुआ-छूत के खिलाफ बड़ा संघर्ष है। 'इंतजार' वाला वाक्य समय के महत्व को बताता है। 'स्वदेशी कागज' वाला वाक्य स्वदेशी चीज़ों के इस्तेमाल पर ज़ोर देता है।
🎯 Exam Tip: किसी भी पंक्ति का निहितार्थ स्पष्ट करते समय, पहले उसका सीधा अर्थ बताएँ, फिर उसके पीछे छिपे गहरे अर्थ या गांधीजी के विचार को समझाएँ।
प्रश्न 3. चाय को हानिकारक बताने वाली दोनों घटनाओं का उल्लेख कीजिए, जो इस संस्मरण में प्रस्तुत की गई हैं।
Answer: गांधीजी चाय को स्वास्थ्य के लिए बहुत हानिकारक मानते थे, पर जिन्हें चाय पीने की आदत थी, उनके लिए वे चाय का उचित प्रबंध ज़रूर करते थे। इस संस्मरण में चाय से जुड़ी दो घटनाएँ इस प्रकार हैं:
1. **मिस आगेथा हैरिसन का किस्सा:** एक बार मिस आगेथा हैरिसन नाम की एक अंग्रेज महिला गांधीजी के साथ यात्रा पर आ रही थीं। उन्हें अपनी सुबह की चाय की बहुत चिंता थी। जब महात्माजी को यह बात पता चली, तो वे हँसते हुए बोले, "आप फिक्र न कीजिए। मैंने आपके लिए आधा-पौंड जहर रख लिया है।" यह दर्शाता है कि वे चाय को ज़हर जैसा मानते थे, पर मेहमानों का ख्याल रखते थे।
2. **लेखक के साथ मजाक:** एक बार गांधीजी ने लेखक के साथ भी चाय के बारे में कई मज़ाक किए। लेखक कलकत्ते से चलकर वर्धा उनकी सेवा में उपस्थित हुआ था। रात के साढ़े आठ से नौ बजे तक का समय लेखक को दिया गया था। लेखक ठीक समय पर पहुँचा और आधे घंटे बातचीत होती रही। चलते वक्त बापू ने कहा, "खूब आराम से चाय पीना।" लेखक ने पूछा, "बापू, क्या आपको मेरी चाय पीने का पता लग गया है?" उन्होंने कहा, "हाँ, काकासाहब ने मुझे बता दिया है कि तुम कलकत्ते में चाय पीने लगे हो।" गांधीजी यह पूछकर अपनी जानकारी और विनोदप्रियता दिखाते थे। गांधीजी के लिए चाय एक हानिकारक आदत थी।
इसके बाद एक और हास्य-विनोदी प्रसंग हुआ। लेखक ने गांधीजी से पूछा, "बापू, आप मि. एंड्रयूज़ को अपना छोटा भाई मानते हैं?" गांधीजी ने "हाँ" कहा। लेखक ने फिर पूछा, "और वे आपको बड़ा भाई मानते हैं?" गांधीजी ने फिर "हाँ" कहा। तब लेखक ने तुरंत कहा, "तो मैं बड़े भाई की बात न मानकर छोटे भाई की बात मानता हूँ।" बापू हँसकर बोले, "तब तो मैं एंड्रयूज़ को लिख दूँगा कि तुमको अच्छा शिष्य मिल गया है।" यह बातचीत गांधीजी की हास्यप्रियता और सहजता को दर्शाती है।
In simple words: गांधीजी चाय को सेहत के लिए बुरा मानते थे। एक बार उन्होंने एक महिला से कहा कि उनके लिए 'आधा-पौंड ज़हर' रख लिया है (चाय के लिए)। दूसरी बार, उन्होंने लेखक से मज़ाक किया कि उन्हें पता है वह कलकत्ते में चाय पीने लगा है।
🎯 Exam Tip: जब दो घटनाओं का उल्लेख करने को कहा जाए, तो प्रत्येक घटना को अलग-अलग बिंदु में स्पष्ट करें और गांधीजी के दृष्टिकोण को भी ज़रूर बताएँ।
गाँधीजी पाठ-सारांश
राष्ट्रपिता महात्मा गांधी के महान जीवन-आदर्शों के साथ-साथ हास्य-विनोद और व्यंग्य-विनोद के खास प्रसंगों को इस संस्मरण में शामिल किया गया है।
पाठ का सारांश
हास्य-विनोद प्रवृत्ति – महात्मा गांधी बहुत मेहनती व्यक्ति थे। काम के बोझ और चिंता से घिरे रहने के कारण हँसना-हँसाना उनके लिए बहुत ज़रूरी था। एक बार एक विदेशी पत्रकार ने हँसी के बारे में पूछा, तो उन्होंने जवाब दिया कि अगर उनमें हास्य की प्रवृत्ति न होती तो वे कब के आत्महत्या कर चुके होते।
अछूतोद्धार का दृढ़ संकल्प – एक बार महात्माजी ने आश्रम की सभी महिलाओं की मीटिंग ली। विषय था – उनकी गोद ली गई अछूत कन्या को अपने रसोईघर में खाना बनाना कौन सिखाएगा। डेढ़ घंटे तक गंभीर बातचीत के बाद भी जब कोई स्त्री इस काम के लिए तैयार नहीं हुई, तो गांधीजी ने कहा कि उन्हें अभी लंबी लड़ाई लड़नी पड़ेगी।
समय के पाबंद – एक बार महात्माजी ने लेखक को सुबह सवा सात बजे का समय दिया। लेखक दो-चार मिनट देर से पहुँचा, तो वे मुस्कुराकर बोले, "आपका समय तो बीत गया। अब चले जाओ। फिर कभी समय तय करके आना।" लेखक बहुत लज्जित हुआ। गांधीजी ने एक बार एक राजा को शाम तीन बजे का समय दिया था। उन्हें अहमदाबाद से आना था। एक मिनट देरी पर पहुँचने पर गांधीजी ने कहा, "मैं तो मिनट भर से आपका इंतज़ार कर रहा हूँ।" यह समय की कीमत पहचानने का संदेश था।
चाय को हानिकारक मानना – गांधीजी चाय को स्वास्थ्य के लिए हानिकारक मानते थे, पर घर आए मेहमान के लिए प्रबंध ज़रूर करते थे। एक बार मिस आगेथा हैरिसन की सुबह की चाय के संदर्भ में उन्होंने कहा, "आप फिक्र न कीजिए। मैंने आपके लिए आधा-पौंड ज़हर रख लिया है।" कलकत्ते में मेरी चाय पीने की आदत के बारे में भी गांधीजी को पता चल गया था।
कठोर परिश्रमी – दिनभर मेहनत करने के बाद भी गांधीजी तरोताजा और फुर्तीले रहते थे। लेखक को एक बार उन्होंने कहा, "रात को ढाई बजे से उठा हूँ और अब नौ बज रहे हैं, दिन में बस बीस मिनट आराम मिला है।" अठारह घंटे के बाद भी बापू की सक्रियता उनके कठोर परिश्रमी व्यक्तित्व का प्रमाण थी।
स्वदेशी को महत्व देना – लेखक के पास फाउंटेन पेन देखकर गांधीजी ने कहा, "दक्षिण अफ्रीका में मेरे पास फाउंटेन पेन था, परंतु अब कलम से लिखता हूँ।" अच्छा कागज देखकर उन्होंने कहा, "यह अच्छा कागज हमें कहाँ से मिल सकता है? यह तो तुम्हारे ऑफिस वालों को ही मिलता है, जहाँ चाय भी मिलती है। हम तो केवल पानी पीने वाले गरीब आदमी ठहरे।" गांधीजी का कथन स्वदेशी की भावना जगाने वाला था। उन्होंने फिर कहा, "मेरा संदेश स्वदेशी कागज पर लिखो।" लेखक लज्जित हो गया।
हाज़िर-जवाबी – गांधीजी अपने लोगों से मज़ाक-मज़ाक में ही संदेश दे देते थे। लेखक ने कहा कि महादेव भाई चाय पीते हैं, बा कॉफी पीती है और पद्मजा भी कॉफी पीती है और मैं चाय। हमारे वोट बढ़ गए हैं। गांधीजी ने तुरंत जवाब दिया, "बुरी चीजों के प्रचार के लिए वोटों की ज़रूरत नहीं पड़ती, वे तो अपने आप फैलती हैं।" कृपलानी जी को भी हाज़िर-जवाबी से जवाब दिया, "तब तो मैं आपकी खराब बुद्धि का ज़िम्मेदार ठहरा।" ऐसे कई प्रसंग हैं जो उनकी विनोद-प्रियता को उजागर करते हैं।
कठिन शब्दार्थ
विलायती = विदेशी। आत्मघात = आत्महत्या, खुद को नुकसान पहुँचाना। वार्तालाप = बातचीत। निगाह = नज़र डालना। दिल्लगी = मज़ाक। बाल काढ़ना = केश सँवारना।
शु = क्या (गुजराती शब्द)। हुक्म = आदेश। सुपुर्द = सौंपना। अछूत = जिसे छुआ न जाए। धृष्टता = दुस्साहस। मस्तक-भंजन = सिर फोड़ना। पौंड = वजन नापने की इकाई।
Free study material for Hindi
Free RBSE Textbook Explanations: Class 11 Hindi Chapter 04 गाँधीजी
Textbook Solutions for Class 11 Hindi Chapter 04 गाँधीजी
Review comprehensive exercise answers for Class 11 Hindi Chapter 04 गाँधीजी. Fully updated to match current RBSE syllabus guidelines, these textbook solutions help students verify their work and maintain accurate study notes.
Mastering Theoretical and Practical Questions
Each solution includes detailed reasoning to foster genuine comprehension of Chapter 04 गाँधीजी concepts. Reviewing these step-by-step breakdowns allows learners to master both analytical and descriptive questions expected in school evaluations.
Effective Self-Study and Homework Assistance
Frequent review of these structured answers builds strong analytical capabilities and response efficiency. Maximize your academic readiness by combining these textbook solutions with our curated study materials and mock evaluations for Class 11 Hindi.
FAQs
The complete and updated RBSE Solutions Class 11 Hindi Chapter 4 गाँधीजी is available for free on StudiesToday.com. These solutions for Class 11 Hindi are as per latest RBSE curriculum.
Yes, our experts have revised the RBSE Solutions Class 11 Hindi Chapter 4 गाँधीजी as per 2026 exam pattern. All textbook exercises have been solved and have added explanation about how the Hindi concepts are applied in case-study and assertion-reasoning questions.
Toppers recommend using RBSE language because RBSE marking schemes are strictly based on textbook definitions. Our RBSE Solutions Class 11 Hindi Chapter 4 गाँधीजी will help students to get full marks in the theory paper.
Yes, we provide bilingual support for Class 11 Hindi. You can access RBSE Solutions Class 11 Hindi Chapter 4 गाँधीजी in both English and Hindi medium.
Yes, you can download the entire RBSE Solutions Class 11 Hindi Chapter 4 गाँधीजी in printable PDF format for offline study on any device.