RBSE Solutions Class 11 Hindi Chapter 3 खेल

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Detailed Chapter 3 खेल RBSE Solutions for Class 11 Hindi

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Class 11 Hindi Chapter 3 खेल RBSE Solutions PDF

RBSE Class 11 Hindi कथा धारा Chapter 3 पाठ्यपुस्तक के प्रश्न

RBSE Class 11 Hindi कथा धारा Chapter 3 वस्तुनिष्ठ प्रश्न

 

Question 1. सुरबाला के भाड़ को फोड़कर मनोहर को कैसा लगा
(क) जैसे उसने दौड़ जीत ली हो।
(ख) जैसे उसने किला फतह कर लिया हो।
(ग) जैसे उसने दौलत प्राप्त कर ली हो।
(घ) जैसे उसका सब कुछ लुट गया हो।
Answer: (ख) जैसे उसने किला फतह कर लिया हो।
In simple words: मनोहर को ऐसा लगा जैसे उसने कोई बड़ी जीत हासिल कर ली हो, जैसे उसने किसी किले को जीत लिया हो। यह एक खुशी और गर्व का एहसास था।

🎯 Exam Tip: इस तरह के प्रश्नों में पात्रों की भावनाओं को सही ढंग से समझना महत्वपूर्ण है। कहानी के प्रसंग को ध्यान में रखकर उत्तर दें।

 

Question 2. "सुरी... ओ सुरिया। मैं मनोहर हूँ............. मनोहर। मुझे मारती नहीं?” मनोहर के इस कथन से क्या भाव प्रकट होता है?
(क) खेद और ग्लानि
Answer: मनोहर के इस कथन से उसके मन में पश्चाताप, खेद और शर्मिंदगी का भाव प्रकट होता है। वह सुरबाला के प्रति सहानुभूति व्यक्त करता है और उसे अपने किए पर बहुत बुरा लगता है। वह यह भी समझ जाता है कि उसने सुरबाला का भाड़ तोड़कर बहुत बड़ी गलती की है।
In simple words: मनोहर को अपने किए पर बहुत पछतावा और शर्म महसूस होती है। उसे सुरबाला पर दया आती है और वह चाहता है कि सुरबाला उसे माफ कर दे।

🎯 Exam Tip: पात्रों के संवादों का विश्लेषण करते समय उनके शब्दों और लहजे पर ध्यान दें ताकि उनके आंतरिक भावों को ठीक से समझा जा सके।

 

Question 3. सुरौ रानी मूक खड़ी थी। उसके मुँह पर जहाँ अभी एक विशुद्ध रस था, वहाँ अब एक शून्य फैल गया। कारण थी
(क) मनोहर का झगड़ा
(ख) मनोहर द्वारा भाड़ को तोड़ डालना
(ग) मनोहर द्वारा चिढ़ाना
(घ) मनोहर के अपशब्द सुनना।
Answer: (ख) मनोहर द्वारा भाड़ को तोड़ डालना
In simple words: सुरबाला इसलिए दुखी और चुप थी क्योंकि मनोहर ने उसका बनाया हुआ भाड़ तोड़ दिया था। उसका भाड़ टूट जाने से उसके चेहरे पर मायूसी छा गई थी।

🎯 Exam Tip: कहानी में किसी घटना के बाद पात्र की प्रतिक्रिया को समझने के लिए उस घटना के महत्व को पहचानना जरूरी है।

RBSE Class 11 Hindi कथा धारा Chapter 3 अतिलघूत्तरात्मक प्रश्न

 

Question 1. सुरबाला और मनोहर की उम्र क्या थी?
Answer: सुरबाला की उम्र सात साल थी और मनोहर नौ साल का था। वे दोनों बच्चे थे जो गंगा किनारे खेल रहे थे।
In simple words: सुरबाला सात साल की थी और मनोहर नौ साल का बच्चा था।

🎯 Exam Tip: पात्रों की उम्र या अन्य बुनियादी जानकारी को सीधे और सटीक रूप से बताएं, जैसा कहानी में दिया गया है।

 

Question 2. सुरबाला ने मिट्टी से क्या बनाया था?
Answer: सुरबाला ने गंगा के किनारे की मिट्टी से एक सुंदर भाड़ बनाया था। भाड़ मिट्टी का एक बर्तन होता है जिसे बच्चे खेल-खेल में बनाते हैं।
In simple words: सुरबाला ने मिट्टी से एक भाड़ (मिट्टी का बर्तन) बनाया था।

🎯 Exam Tip: मुख्य घटनाओं और उनसे संबंधित वस्तुओं को याद रखना कहानी के प्रश्नों के उत्तर देने में सहायक होता है।

 

Question 3. “सुरबाला हँसी से नाच उठी। मनोहर उत्फुल्लता से कहकहा लगाने लगा।” दोनों की प्रसन्नता का क्या कारण था?
Answer: सुरबाला और मनोहर दोनों इसलिए खुश थे क्योंकि सुरबाला ने मनोहर द्वारा बनाए गए भाड़ को तोड़कर अपनी नाराजगी खत्म कर दी थी। इससे उनका गुस्सा दूर हो गया और वे फिर से दोस्त बन गए।
In simple words: वे दोनों खुश थे क्योंकि सुरबाला ने मनोहर का बनाया भाड़ तोड़कर अपना गुस्सा भूल गई थी।

🎯 Exam Tip: बच्चों के मनोविज्ञान को दर्शाने वाले वाक्यों में, उनकी भावनाओं के पीछे के कारण को स्पष्ट करना आवश्यक होता है।

 

Question 4. "कह दिया तुम से, तुम चुप रहो। हम नहीं बोलते।” यह वाक्य किसने, किसको और कब कहे?
Answer: यह वाक्य सुरबाला ने मनोहर से तब कहा था जब मनोहर ने उसका भाड़ तोड़ दिया था। सुरबाला तब बहुत नाराज होकर चुपचाप खड़ी हो गई थी और मनोहर उसे मनाने की कोशिश कर रहा था।
In simple words: सुरबाला ने यह बात मनोहर से तब कही जब वह मनोहर के भाड़ तोड़ने के बाद नाराज होकर चुपचाप खड़ी थी।

🎯 Exam Tip: संवाद आधारित प्रश्नों में, बोलने वाले, सुनने वाले और बातचीत के समय (संदर्भ) को सटीक रूप से पहचानना महत्वपूर्ण है।

RBSE Class 11 Hindi कथा धारा Chapter 3 लघूत्तरात्मक प्रश्न

 

Question 1. सुरबाला के चरित्र में निहित नारीत्व के भावों को स्पष्ट कीजिए।
Answer: सुरबाला के चरित्र में नारीत्व के भाव स्पष्ट रूप से दिखाई देते हैं। जब मनोहर भाड़ तोड़ देता है, तो वह पहले गुस्सा होती है, लेकिन बाद में मनोहर के मनाने पर उसका हृदय पिघल जाता है। वह मनोहर को माफ कर देती है और उसे फिर से भाड़ बनाने के लिए कहती है। इसके बाद वह खुद मनोहर के भाड़ को लात मारकर तोड़ देती है, जिससे मनोहर के मन का बोझ हल्का हो जाता है। यह उसका दयालु स्वभाव और दूसरों को माफ़ करने की क्षमता को दर्शाता है।
In simple words: सुरबाला का स्वभाव एक नारी जैसा था। वह गुस्सा होती है, फिर माफ़ कर देती है और मनोहर के दुःख को दूर करने के लिए खुद ही उसका भाड़ तोड़ देती है।

🎯 Exam Tip: पात्रों के गुणों को बताते समय, उनके व्यवहार और संवादों से उदाहरण देना चाहिए ताकि विश्लेषण अधिक विश्वसनीय लगे।

 

Question 2. मनोहर की काँपती हुई आवाज सुनकर सुरबाला पर क्या प्रतिक्रिया हुई?
Answer: मनोहर की काँपती हुई आवाज सुनकर सुरबाला का मन पिघल गया। उसका कोमल हृदय मनोहर को माफ़ कर चुका था। भाड़ टूटने से जो दुःख और गुस्सा उसके मन में था, वह पूरी तरह से खत्म हो गया। सुरबाला ने मनोहर से वैसा ही भाड़ बनवाया और आखिर में उसे लात मारकर तोड़ दिया। इस तरह सुरबाला ने बच्चों के स्वभाव के अनुसार अपनी भावनाओं को दिखाया।
In simple words: मनोहर की उदास आवाज सुनकर सुरबाला का गुस्सा खत्म हो गया। उसने मनोहर से नया भाड़ बनवाया और फिर उसे तोड़ दिया, जिससे मनोहर का मन हल्का हो गया।

🎯 Exam Tip: जब कोई पात्र किसी अन्य पात्र की प्रतिक्रिया पर प्रतिक्रिया दे, तो दोनों के भावों के बदलाव को स्पष्ट रूप से दर्शाना चाहिए।

 

Question 3. 'खेल' कहानी के आधार पर बच्चों की बदला लेने की प्रवृत्ति पर प्रकाश डालिए।
Answer: बच्चों में बदला लेने की स्वाभाविक आदत होती है। वे तब तक संतुष्ट नहीं होते जब तक वे बदला न ले लें। अगर कोई बच्चा किसी को मारता है, तो दूसरा बच्चा भी उसे तब तक मारता रहता है जब तक वह बदला नहीं ले लेता। इस कहानी में सुरबाला भी मनोहर के भाड़ तोड़ने का बदला मनोहर के बनाए भाड़ को तोड़कर लेती है और ऐसा करने पर उसे खुशी मिलती है। बच्चों को यह व्यवहार अपनी नाराजगी व्यक्त करने का एक तरीका लगता है।
In simple words: बच्चे स्वाभाविक रूप से बदला लेते हैं। सुरबाला भी मनोहर का भाड़ तोड़कर अपने भाड़ टूटने का बदला लेती है और फिर खुश होती है।

🎯 Exam Tip: बाल मनोविज्ञान से संबंधित प्रश्नों में, कहानी के उदाहरणों के साथ सामान्य बाल व्यवहार की तुलना करना प्रभावी होता है।

 

Question 4. 'बच्चे देर तक क्रोध को बनाये रखकर रूठे नहीं रहते।' खेल कहानी के आधार पर इस बाल मनोविज्ञान को समझाइये।
Answer: बच्चों का यह स्वाभाविक स्वभाव होता है कि वे अपने मन में गुस्से जैसी भावनाओं को लंबे समय तक नहीं रखते। कुछ ही समय बाद वे गुस्सा भूलकर खेलने-कूदने या बातचीत करने में व्यस्त हो जाते हैं। 'खेल' कहानी में सुरबाला के साथ भी यही होता है। जब मनोहर उसका भाड़ तोड़ता है, तो सुरबाला नाराज होती है और मनोहर भी दुखी हो जाता है। मनोहर के मनाने पर सुरबाला अपना गुस्सा भूल जाती है। इससे पता चलता है कि बच्चों का मन बहुत साफ होता है और वे जल्दी माफ कर देते हैं।
In simple words: बच्चे ज्यादा देर तक गुस्सा नहीं रहते। सुरबाला भी मनोहर के मनाने पर अपना गुस्सा भूल जाती है और फिर से खेलने लगती है।

🎯 Exam Tip: बाल मनोविज्ञान पर आधारित प्रश्नों के लिए, कहानी के भीतर से सटीक उदाहरणों का चयन करें जो दिए गए कथन को सही साबित करते हों।

 

Question 5. बच्चों में कल्पनाशीलता होती है।” सुरबाला के व्यवहार को आधार लेकर बताइये।
Answer: बच्चों का मन बहुत कल्पनाशील होता है। वे कई तरह के सपने देखते रहते हैं। इस कहानी में सुरबाला मिट्टी का भाड़ बनाती है और उस पर एक छोटी कुटिया बनाती है। वह मनोहर को कुटिया में रखने के बारे में बहुत कुछ सोचती है। जैसे, अगर मनोहर को कुटिया में गर्मी लगेगी तो वह उसे अंदर आने से मना कर देगी। अगर वह जिद करेगा तो उसे धक्का देकर कहेगी, 'अरे जलेगा। मूर्ख।' यह सब सुरबाला की कल्पना को दिखाता है। बच्चे अपनी दुनिया में खोए रहते हैं।
In simple words: सुरबाला अपने भाड़ पर कुटिया बनाकर मनोहर के बारे में बहुत कुछ सोचती है। यह उसकी कल्पना शक्ति को दिखाता है।

🎯 Exam Tip: कल्पनाशीलता को दर्शाते समय, पात्र के विचारों और क्रियाओं को स्पष्ट रूप से जोड़ना चाहिए, भले ही वे केवल मन में हों।

'खेल' कहानी बाल मनोविज्ञान पर आधारित एक अच्छी कहानी है। जैनेन्द्र कुमार ने इस कहानी में बच्चों के कोमल मन और उनके शुद्ध भावों को बहुत अच्छे से दिखाया है। बच्चों के स्वाभाविक खेल का वर्णन भी लेखक ने बहुत सुंदर तरीके से किया है। लेखक ने बच्चों के बदला लेने की प्रवृत्ति को भी मनोहर और सुरबाला द्वारा एक-दूसरे के भाड़ को तोड़कर खुशी महसूस करने की घटना से व्यक्त किया है। बच्चों का रूठना और मनाना भी स्वाभाविक होता है जिसे लेखक ने बहुत अच्छे से दिखाया है। इस प्रकार कहानीकार का उद्देश्य बच्चों की कल्पनाशीलता, बाल-सुलभ मस्ती, उनका आपस में रूठना व मनाना, खेल-खेल में बदला लेना और अनजान होते हुए भी भविष्य के बारे में सोचना आदि बच्चों के सहज व्यवहार को चित्रित करना रहा है। इस हिसाब से यह कहानी पूरी तरह से सफल रही है।

 

Question 2. सिद्ध कीजिए कि जैनेन्द्र की 'खेल' कहानी बाल मनोविज्ञान का निदर्शन कराती है।
Answer: जैनेन्द्र कुमार की सबसे बड़ी खासियत यह है कि उनकी कहानियों में मनोविज्ञान होता है। वे अपने पात्रों की छोटी-छोटी आम घटनाओं को कहानी का रूप देते हैं और उनकी भावनाओं को व्यक्त करते हैं। 'खेल' कहानी में मनोहर और सुरबाला के माध्यम से बच्चों के मन की गहराई को छुआ गया है। गंगा किनारे रेत पर भाड़ बनाते हुए, सुरबाला मनोहर के बारे में कई मीठी कल्पनाएं करती है और मन ही मन खुश होती रहती है। जब मनोहर उसका भाड़ तोड़ देता है तो वह दुखी और गुस्से से भर जाती है। मनोहर उसे मनाने के लिए रोने लगता है तो सुरबाला का गुस्सा खत्म हो जाता है। मनोहर के बनाए भाड़ को तोड़कर वह बदला लेती है और फिर खुश हो जाती है। इस प्रकार, इस कहानी में बच्चों की कई भावनाएं दिखाई गई हैं।
In simple words: जैनेन्द्र कुमार की 'खेल' कहानी बच्चों के मन को बहुत अच्छे से दिखाती है। यह कहानी बच्चों के खेलने, गुस्सा होने, मनाने और बदला लेने के मनोविज्ञान को बहुत ही सुंदर ढंग से प्रस्तुत करती है।

🎯 Exam Tip: बाल मनोविज्ञान पर आधारित कहानी के विश्लेषण में, बच्चों की भावनाओं, उनके आपसी व्यवहार और कल्पनाओं के उदाहरणों को शामिल करना आवश्यक है।

 

Question 3. घर लौटते समय सुरबाला और मनोहर के मध्य क्या बातचीत हुई। होगी, कल्पना के आधार पर उत्तर दीजिए।
Answer: घर लौटते समय सात साल की सुरबाला और नौ साल का मनोहर बात कर रहे होंगे। वे सोच रहे होंगे कि उन्होंने दिन बहुत हंसी-खुशी और आनंद से बिताया। सुरबाला ने मनोहर से शिकायत की होगी कि उसने इतनी मेहनत से जो अद्भुत और सुंदर भाड़ बनाया था, उस पर सुंदर कुटिया बनाई थी, पर मनोहर ने उसकी तारीफ करने के बजाय उसे तोड़ दिया। मनोहर ने जवाब में कहा होगा कि सुरबाला भाड़ बनाने में इतनी खोई थी कि उसकी तरफ देख ही नहीं रही थी, इसलिए उसे भाड़ से ईर्ष्या हो गई। फिर दोनों ने कहा होगा कि कल वे उससे भी सुंदर चीज बनाएंगे, लेकिन उसे तोड़ेंगे नहीं। यह बच्चों के मन की सादगी को दर्शाता है।
In simple words: घर लौटते समय सुरबाला ने मनोहर से शिकायत की कि उसने उसका सुंदर भाड़ क्यों तोड़ दिया। मनोहर ने कहा कि सुरबाला उसकी तरफ देख नहीं रही थी, इसलिए उसे गुस्सा आ गया। फिर दोनों ने वादा किया कि कल और सुंदर भाड़ बनाएंगे, पर तोड़ेंगे नहीं।

🎯 Exam Tip: कल्पना-आधारित प्रश्नों में, पात्रों के स्वभाव और कहानी के माहौल के अनुरूप रचनात्मक और यथार्थवादी संवाद लिखने चाहिए।

 

Question 4. 'खेल' कहानी के आधार पर सुरबाला और मनोहर के चरित्र की विशेषताएँ लिखते हुए उनकी तुलना कीजिए।
Answer: 'खेल' कहानी में सात साल की सुरबाला और नौ साल का मनोहर ही दो मुख्य पात्र हैं। उनके चरित्र की खास बातें इस प्रकार हैं:
दोनों के चरित्र की तुलना या अंतर - दोनों पात्र कई बातों में एक जैसे हैं, लेकिन कुछ बातों में अलग भी हैं।
1. सुरबाला कल्पनाशील और रचनात्मक स्वभाव की है, जबकि मनोहर कुछ शरारती और नटखट बच्चा लगता है।
2. सुरबाला के स्वभाव में नारीत्व का भाव साफ झलकता है, जबकि मनोहर में मजबूत पुरुषार्थ के गुण दिखाई देते हैं। यह बच्चों के स्वभाव की गहराई को दिखाता है।
In simple words: सुरबाला और मनोहर दोनों प्यारे और मासूम हैं। सुरबाला कल्पनाशील और दयालु है, जबकि मनोहर थोड़ा शरारती और मजबूत इरादों वाला है।

🎯 Exam Tip: चरित्र-चित्रण के प्रश्नों में, पात्रों के गुणों को सूचीबद्ध करते हुए उनकी तुलना या विपरीतता को स्पष्ट करना चाहिए, साथ ही कहानी से उदाहरण भी देने चाहिए।

RBSE Class 11 Hindi कथा धारा Chapter 3 अन्य महत्त्वपूर्ण प्रश्न

RBSE Class 11 Hindi कथा धारा Chapter 3 वस्तुनिष्ठ प्रश्न

 

Question 1. 'प्रकृति इन निर्दोष परमात्म-खण्डों को निस्तब्ध और निर्निमेष निहार रही थी।' यहाँ परमात्म-खण्डों से आशय है.
(क) नदी-तट पर पड़े पत्थर के खण्ड
(ख) गंगा-तट पर खड़े वृक्ष
(ग) सुरबाला और मनोहर
(घ) गंगा-तट के छोटे-छोटे घरौंदे
Answer: (ग) सुरबाला और मनोहर
In simple words: 'परमात्म-खण्डों' का मतलब सुरबाला और मनोहर जैसे मासूम बच्चे हैं, जिन्हें प्रकृति शांति से देख रही थी।

🎯 Exam Tip: प्रतीकात्मक शब्दों का अर्थ समझने के लिए उन्हें कहानी के संदर्भ से जोड़कर देखना चाहिए।

 

Question 2. 'वह किसी एक को उसकी एक-एक मनोरमता और स्वर्गीयता का दर्शन कराना चाहती थी।' सुरबाला किसको दर्शन कराना चाहती थी
(क) मनोहर को
(ख) परमात्मा को
(ग) गंगा के निर्मल जल को
(घ) सुन्दर वन प्रान्त को
Answer: (क) मनोहर को
In simple words: सुरबाला चाहती थी कि मनोहर उसकी बनाई हुई सुंदर रचना (भाड़) को देखे।

🎯 Exam Tip: पात्रों के आंतरिक विचारों और इच्छाओं को समझने के लिए उनके कार्यों और कथनों पर ध्यान केंद्रित करें।

 

Question 3. 'यह कुछ और भाव था। यह एक उल्लास था जो व्याजकोप का रूप धर रहा था।' सुरबाला का यह कौन सा भाव था
(क) बचपना था
(ख) नारीत्व का भाव था
(ग) अनन्य प्रेम का भाव था
(घ) तिरस्कारे का भाव था।
Answer: (ख) नारीत्व का भाव था
In simple words: यह सुरबाला के नारी स्वभाव को दिखाता है, जिसमें गुस्सा होते हुए भी दया और खुशी छिपी थी।

🎯 Exam Tip: भावनाओं की पहचान करते समय, कथन के पीछे छिपे अर्थ और पात्र के स्वभाव को समझने का प्रयास करें।

 

Question 3. 'खेल' कहानी में मुख्य रूप से किसका चित्रण किया गया है?
(क) प्रकृति चित्रण
(ख) बाल्य क्रीड़ाओं का चित्रण
(ग) प्रेम की अभिव्यक्ति
(घ) बालमनोविज्ञान की अभिव्यक्ति
Answer: (घ) बालमनोविज्ञान की अभिव्यक्ति
In simple words: यह कहानी बच्चों के मन के भावों और उनके स्वभाव को बहुत अच्छे से दिखाती है।

🎯 Exam Tip: कहानी के मुख्य विषय या उद्देश्य को पहचानने के लिए, कहानी की प्रमुख घटनाओं और पात्रों के व्यवहार पर ध्यान दें।

RBSE Class 11 Hindi कथा धारा Chapter 3 लघूत्तरात्मक प्रश्न

 

Question 1. उसे क्या मालूम कि यहाँ अकारण ही उस पर रोष और अनुग्रह किया जा रहा है।' यहाँ कौन, किस पर और क्यों अकारण ही रोष और अनुग्रह कर रहा है?
Answer: यहाँ सुरबाला मनोहर पर बिना वजह गुस्सा और मेहरबानी कर रही थी। सुरबाला भाड़ बनाते हुए अपनी कल्पनाओं में खोई हुई थी। वह सोच रही थी कि भाड़ के ऊपर एक कुटिया बनाएगी जो उसकी अपनी होगी। मनोहर उसमें नहीं रहेगा। वह बाहर खड़ा होकर भाड़ में पत्ते डालेगा। जब वह थक जाएगा और बहुत ज्यादा विनती करेगा, तो वह उसे कुटिया के अंदर ले लेगी। इस तरह सुरबाला मनोहर पर गुस्सा और दया दोनों कर रही थी, जबकि मनोहर गंगा के किनारे पानी से खेल रहा था और इन बातों से अनजान था।
In simple words: सुरबाला मनोहर पर गुस्सा और दया दोनों दिखा रही थी, क्योंकि वह अपने मन में मनोहर के बारे में बहुत कुछ सोच रही थी। मनोहर को इन बातों का पता नहीं था और वह अपने खेल में मग्न था।

🎯 Exam Tip: 'कौन', 'किस पर' और 'क्यों' जैसे प्रश्नों का उत्तर देते समय, कहानी के पात्रों के विचारों और उनके कार्यों के पीछे की प्रेरणा को स्पष्ट करना चाहिए।

 

Question 2. बालिका सुरबाला मनोहर के बारे में अपने मन में क्या सोचती थी?
Answer: सुरबाला अपने मन में सोचती थी कि मनोहर वैसे तो एक अच्छा लड़का है, लेकिन बहुत शरारती भी है। वह हमेशा बहुत झगड़ा करता रहता है और उसे छेड़ता रहता है। उसने मन ही मन फैसला कर लिया था कि अगर मनोहर फिर से झगड़ा करेगा तो वह उसे अपनी कुटिया में पार्टनर नहीं बनाएगी। अगर वह पार्टनर बनने को कहेगा तो सुरबाला पहले ही तय कर लेगी कि वह फिर से ऐसा न करे। इसी शर्त पर वह उसे अपनी कुटिया में रखेगी।
In simple words: सुरबाला सोचती थी कि मनोहर अच्छा है, पर शरारती है। उसने तय किया था कि अगर मनोहर फिर से परेशान करेगा, तो वह उसे अपनी कुटिया में शामिल नहीं करेगी।

🎯 Exam Tip: पात्रों के मन के विचारों को व्यक्त करते समय, उनकी मासूमियत और उनके बाल-स्वभाव को दर्शाना चाहिए।

 

Question 3. भाड़ बनाकर अपना पैर निकालकर सुरबाला के मन में क्या भाव और विचार उत्पन्न हुए?
Answer: भाड़ बनाकर उसमें से अपना पैर निकालते ही सुरबाला खुशी से झूम उठी। एक पल के लिए वह अपनी इस सुंदर और अनोखी रचना को दिखाने के लिए मनोहर को खींचने को तैयार हो गई थी। उसके लिए वह भाड़ दुनिया की सबसे अद्भुत कला थी। वह सोच रही थी कि यह मनोहर बेकार ही पानी से क्यों उलझ रहा है। उसे यह सुंदर कलाकृति दिखाई क्यों नहीं दे रही है। उसने अपने जीवन में इतना शानदार भाड़ कभी देखा भी नहीं होगा। इसका मतलब है कि सुरबाला अपनी बनाई हुई उस चीज को देखकर बहुत खुश और भावुक हो रही थी।
In simple words: अपना सुंदर भाड़ देखकर सुरबाला बहुत खुश हो गई। वह सोच रही थी कि यह दुनिया की सबसे अच्छी चीज है और मनोहर को भी इसे देखना चाहिए था।

🎯 Exam Tip: किसी रचना या कलाकृति के प्रति पात्र की भावनाओं को व्यक्त करते समय, उसकी सुंदरता और उसके प्रति पात्र के लगाव को दर्शाना चाहिए।

 

Question 5. 'सुरों रानी मूक खड़ी थी।' सुरबाला की यह स्थिति क्यों थी? स्पष्ट कीजिए।
Answer: सुरबाला ने बड़े प्यार, लगन और मेहनत से बालू रेत को अपने पैर पर रखकर भाड़ बनाया था। उसके लिए वह संसार की सबसे अद्भुत, अनोखी और भव्य रचना थी। उसे देखकर वह भाव-विभोर हो गई थी। वह इस सुंदर रचना को अपने दोस्त मनोहर को दिखाकर अपनी खुशी बढ़ाना चाहती थी, लेकिन मनोहर ने निर्दयतापूर्वक उसे लात मारकर तोड़ दिया था। यह देखकर सुरबाला का मन बहुत दुखी हो गया और वह गहरे दुःख से भरकर चुपचाप खड़ी रह गई थी। वह इतनी हैरान थी कि कुछ बोल भी नहीं पाई।
In simple words: सुरबाला चुपचाप खड़ी थी क्योंकि मनोहर ने उसके सुंदर भाड़ को तोड़ दिया था। वह अपने भाड़ के टूटने से बहुत दुखी और हैरान थी।

🎯 Exam Tip: पात्र की मानसिक स्थिति का वर्णन करते समय, उस घटना को स्पष्ट करें जिसने ऐसी स्थिति पैदा की है।

 

Question 6. सुरबाला ने रूठकर मनोहर से बात नहीं की, तब मनोहर की क्या प्रतिक्रिया थी?
Answer: जब सुरबाला अपना भाड़ टूटने से दुखी होकर चुपचाप खड़ी रही और उसके चेहरे पर उदासी छा गई, तब मनोहर का मन भी बेचैन हो उठा। उसे लगा जैसे कोई अंदर ही अंदर उसे निचोड़ रहा हो। उसे महसूस हुआ जैसे उसकी जीवन शक्ति कम हो गई हो। वह दिखावटी गुस्सा दिखाकर उसे मनाना चाहता था, लेकिन सुरबाला पहले की तरह ही खड़ी रही। मनोहर अपनी भावनाओं को संभाल नहीं पाया, उसकी आवाज काँपने लगी और वह एकदम रुआँसा हो गया था। उसे बहुत बुरा लगा था कि सुरबाला उससे बात नहीं कर रही थी।
In simple words: जब सुरबाला गुस्सा होकर चुपचाप खड़ी रही, तो मनोहर बहुत बेचैन हो गया। उसे अपने किए पर पछतावा हुआ, उसकी आवाज काँपने लगी और वह लगभग रोने लगा।

🎯 Exam Tip: एक पात्र के व्यवहार के जवाब में दूसरे पात्र की प्रतिक्रिया का वर्णन करते समय, उनकी भावनाओं के बदलाव और उनके शारीरिक संकेतों को शामिल करना चाहिए।

 

Question 7. "हम नहीं बोलते।” बालिका से बिना बोले रहा न गया। इस वाक्य में निहित भाव को समझाइये।
Answer: जब मनोहर रूठी हुई सुरबाला को भावुक होकर मनाने लगा, तब सुरबाला का मन भी व्याकुल हो उठा। वह अपने नारी स्वभाव के कारण अपने स्वाभिमान को बनाए रखते हुए भी बिना बोले नहीं रह सकी और मनोहर से बोल पड़ी कि 'हम नहीं बोलते।' इस वाक्य का मतलब है कि सुरबाला जो अब तक चुप रहकर मनोहर की बातों का कोई जवाब नहीं दे रही थी, अब बोलने लगी थी, भले ही उसने यह कहकर शुरुआत की कि 'हमें नहीं बोलते।' इससे यह बात भी साफ हो जाती है कि बच्चे ज्यादा देर तक गुस्सा नहीं रह पाते हैं।
In simple words: सुरबाला मनोहर के मनाने पर आखिर बोल पड़ी, "हम नहीं बोलते।" इससे पता चलता है कि वह गुस्सा भूल गई थी और बच्चों का गुस्सा ज्यादा देर नहीं रहता।

🎯 Exam Tip: किसी विशेष संवाद के अंतर्निहित अर्थ को समझाते समय, पात्र के स्वभाव, प्रसंग और उसके बाद के परिणामों को जोड़ना चाहिए।

 

Question 8. "कह दिया तुमसे, तुम चुप रहो। हम नहीं बोलते।” सुरबाला के इस कथन भाव को स्पष्ट कीजिए।
Answer: सुरबाला के इस कथन से यह भाव झलकता है कि वह मनोहर को माफ़ कर चुकी है। उसके मन का दुःख और क्रोध का भाव खत्म हो चुका है। उसका हृदय नारी सुलभ दया और कोमलता से भर गया है। अब उसका मन खुशी से भरा है। वह केवल गुस्सा होने का दिखावा कर रही है। दरअसल, यह उसके नारीत्व को दर्शाता है।
In simple words: सुरबाला ने यह कहकर मनोहर को माफ़ कर दिया था। उसके मन से गुस्सा और दुःख दूर हो गया था और वह अब खुश थी, बस नाटक कर रही थी।

🎯 Exam Tip: एक ही पात्र के दो अलग-अलग संवादों के बीच के अंतर को स्पष्ट करते हुए, उसके मन के बदलते भावों को समझाना चाहिए।

 

Question 10. सुरबाला खुशी से नाच उठी। मनोहर उत्फुल्लता से कहकहा लगाने लगा।' यहाँ दोनों की खुशी का कारण स्पष्ट कीजिए।
Answer: सुरबाला के कहने पर मनोहर ने नया भाड़ बनाया। जब सुरबाला ने उस भाड़ को लात मारकर तोड़ दिया, तो दोनों मासूम बच्चों के दिलों में खुशी की हंसी फूट पड़ी। अब तक उनके बीच का रूठने-मनाने से भरा माहौल पूरी तरह से हल्का और आनंददायक हो गया था। दोनों निर्मल और पवित्र दिल वाले बच्चे खुलकर जोर-जोर से हंसने लगे। भाड़ बनाकर तोड़ने की घटना बच्चों के मन के बिल्कुल अनुकूल थी, जिससे दोनों के मन में खुशी और उत्साह भर गया था। वे अपने खेल में फिर से मग्न हो गए थे।
In simple words: सुरबाला और मनोहर दोनों खुश थे क्योंकि सुरबाला के कहने पर मनोहर ने भाड़ बनाया, और जब सुरबाला ने उसे तोड़ दिया, तो उनके बीच का गुस्सा खत्म हो गया और वे फिर से हंसने लगे।

🎯 Exam Tip: बच्चों की खुशी का कारण बताते समय, उनकी मासूमियत और उनके सरल स्वभाव को ध्यान में रखें।

 

Question 11. " 'खेल' कहानी में वातावरण-सृष्टि में प्रकृति का बड़ा योगदान बन पड़ा है।” स्पष्ट कीजिए।
Answer: कहानी में वातावरण सजीवता और विश्वसनीयता बढ़ाने में मदद करता है। 'खेल' कहानी में प्रकृति का बहुत बड़ा योगदान है। कहानीकार ने शांत और मनमोहक शाम के समय गंगा के रेत वाले किनारे, सुनसान जगह पर लंबे-ऊँचे पेड़ों का वर्णन किया है, जो दार्शनिक पंडितों की तरह लगते थे। शाम को लाल-लाल मुंह से गुलाबी हंसी हंसता सूर्य जैसे प्राकृतिक रूपों को कहानी में शामिल करके वातावरण को सजीव बनाया है। यह प्राकृतिक सुंदरता कहानी को और भी जीवंत बना देती है।
In simple words: 'खेल' कहानी में प्रकृति का बहुत बड़ा हाथ है। गंगा का किनारा, पेड़ और डूबता सूरज जैसी चीजें कहानी के माहौल को बहुत सुंदर और सच्चा बना देती हैं।

🎯 Exam Tip: वातावरण-सृष्टि के महत्व को समझाते समय, कहानी से सीधे उदाहरण लेकर यह दर्शाना चाहिए कि कैसे प्राकृतिक चित्रण कहानी को प्रभावी बनाता है।

RBSE Class 11 Hindi कथा धारा Chapter 3 निबन्धात्मक प्रश्न

 

Question 1. “स्वयं कष्ट सहकर अपनों को उनसे दूर रखना नारी के स्वभाव का नैसर्गिक गुण है।” सुरबाला के चरित्र को दृष्टिगत रखते हुए इस कथन पर प्रकाश डालिए।
Answer: नारी की प्रकृति में ही यह खास बात होती है कि वह खुद तकलीफ सहकर भी अपनों को दूर रखती है। 'खेल' कहानी में सुरबाला में यह गुण बचपन से ही देखा जा सकता है। वह भाड़ पर कुटिया बनाकर अपने और मनोहर के लिए उसमें रहने की सोचती है, तब उसके मन में विचार आता है कि भाड़ की छत तो गर्म होगी। मनोहर उसमें कैसे रह पाएगा? वह कल्पना करती है, "मैं तो रह जाऊँगी, पर मनोहर बेचारा कैसे सहेगा? मैं कहूँगी भई छत बहुत तप रही है, तुम जलोगे, तुम मत जाओ।" इस कल्पना में यह भाव साफ दिखाई देता है। वह खुद तो उस गर्म छत पर बनी कुटिया में रह सकती है, पर उसका अपना मनोहर कल्पना में भी उस कष्ट को नहीं उठा सकता। यही त्याग और कष्ट सहने की प्रवृत्ति नारीत्व का स्वाभाविक गुण है।
In simple words: सुरबाला का स्वभाव दिखाता है कि स्त्रियाँ खुद कष्ट सहकर भी अपनों को बचाती हैं। वह सोचती है कि मनोहर गर्म कुटिया में नहीं रह पाएगा, इसलिए वह उसे आने से मना करती है।

🎯 Exam Tip: नारीत्व जैसे जटिल भावों को समझाते समय, कहानी के पात्र के व्यवहार और विचारों से स्पष्ट उदाहरण दें, जो कथन की पुष्टि करते हों।

 

Question 2. “सृजनशीलता सुरबाला के चरित्र की महत्त्वपूर्ण विशेषता है।” उक्त कथन को उदाहरण देकर स्पष्ट कीजिए।
Answer: सुरबाला के स्वभाव में रचनात्मकता का गुण स्वाभाविक रूप से मौजूद है। वह रेत का भाड़ बनाती है और उस पर कुटिया बनाकर उसे अपने छोटे से संसार की सबसे सुंदर रचना मानकर खुशी से झूम उठती है। यह सब दिखाता है कि सुरबाला बहुत कल्पनाशील और रचनात्मक है। वह अपनी बनाई हुई चीजों से बहुत जुड़ाव महसूस करती है।
In simple words: सुरबाला रेत से सुंदर भाड़ और कुटिया बनाती है, जिसे वह अपनी सबसे अच्छी रचना मानकर खुश होती है। यह उसकी रचनात्मकता को दिखाता है।

🎯 Exam Tip: सृजनशीलता को दर्शाते समय, पात्र के रचनात्मक कार्यों और उनके प्रति उसकी भावनाओं का वर्णन करना चाहिए।

 

Question 3. अपनी अलौकिक रचना भाड़ को देखकर सुरबाला के मन में उत्पन्न भावों को व्यक्त कीजिए।
Answer: अपनी अद्भुत रचना भाड़ को देखकर सुरबाला खुशी से झूम उठी। उसके लिए यह भाड़ पूरे ब्रह्मांड की सबसे बड़ी दौलत और दुनिया की सबसे सुंदर कृति थी। वह इसे देखकर हैरान और खुश हो रही थी। यदि कोई उससे पूछता कि भगवान कहाँ रहते हैं, तो वह बताती कि इस भाड़ के जादू में। वह इस अनोखी कलाकृति को अपने शरारती दोस्त मनोहर को दिखाने के लिए दौड़कर खींचने को तैयार थी। वह सोच रही थी कि वह मूर्ख लड़का पानी से क्यों उलझ रहा है, यहाँ कैसी जबरदस्त कलाकारी हुई है जिसे वह नहीं देख रहा है। इस प्रकार, सुरबाला का बालमन अपनी अनोखी और अद्भुत रचना को देखकर आनंद में डूबा था और अपने मनोहर को इसके दर्शन कराने को उत्सुक था।
In simple words: सुरबाला अपने बनाए भाड़ को देखकर बहुत खुश और हैरान थी। वह उसे दुनिया की सबसे सुंदर चीज मानती थी और चाहती थी कि मनोहर भी उसे देखे।

🎯 Exam Tip: किसी वस्तु के प्रति पात्र की भावनाओं को व्यक्त करते समय, उसके महत्व और उस वस्तु के साथ पात्र के भावनात्मक जुड़ाव को गहराई से समझाएं।

 

Question 4. 'हमारी रानी व्यथा से भर गई।' कहानीकार के इस कथन में निहित भावों को अभिव्यक्त कीजिए।
Answer: कहानीकार कहता है कि हमारी रानी सुरबाला अपनी अद्भुत कलाकृति, बालू-रेत के भाड़ को, एकटक निहारती हुई उसकी अनुपम रचना के जादू को समझने और सराहने में लगी हुई थी। वह अपनी इस रचना की एक-एक सुंदरता और दिव्यता को अपने प्रिय बाल सखा मनोहर को दिखाना चाहती थी। लेकिन बड़े दुःख की बात है कि वही मनोहर आया और उसने अपनी लात से उसे तोड़-फोड़ कर नष्ट कर दिया। इस अकल्पनीय और हैरान कर देने वाली घटना ने सुरबाला के कोमल हृदय को दुःख से भर दिया था। वह अपनी सुंदर कृति को जिस व्यक्ति को दिखाकर खुश करना चाहती थी और उसके मुँह से उसकी प्रशंसा सुनना चाहती थी, उसी ने जब निर्दयतापूर्वक सुंदर भाड़ को तोड़ डाला तो सुरबाला बहुत दुःख से भरकर चुप और हैरान खड़ी रह गई। यह बच्चों की मासूम भावनाओं पर चोट को दर्शाता है।
In simple words: कहानीकार कहते हैं कि सुरबाला बहुत दुखी थी क्योंकि मनोहर ने उसके सुंदर भाड़ को तोड़ दिया था। वह अपनी बनाई चीज को मनोहर को दिखाना चाहती थी, पर मनोहर ने उसे नष्ट कर दिया, जिससे उसे गहरा दुःख हुआ।

🎯 Exam Tip: कहानीकार के कथनों का विश्लेषण करते समय, उनमें निहित भावनाओं और उनके पीछे की कहानी को स्पष्ट करना चाहिए।

 

Question 5. 'अब बनना न हो सका। मनोहर की आवाज हठात् कॅपी सी निकली। मनोहर की स्थिति को अपने शब्दों में व्यक्त कीजिए।
Answer: मनोहर ने सुरबाला के हाथों से बनाए भाड़ को तोड़ दिया तो सुरबाला का दुःख इतना बढ़ गया कि उसकी कोई सीमा न रही। वह चुपचाप खड़ी रही, न उसने मनोहर से कुछ कहा और न उसकी तरफ देखा। तब मनोहर का मन भी न जाने कैसी निराशा से भर गया। उसे लगा कोई अंदर ही अंदर उसके मन को मसोसकर निचोड़ रहा है। लेकिन अपने भावों को छिपाकर उसने चेहरे पर बनावटी गुस्सा लाकर कहा-'सुरो, तुम पगली रूठती हो?' उसने मनाने की कोशिश की, बार-बार उसका नाम लेकर पुकारा, लेकिन वह थोड़ी भी नहीं हिली, नहीं बोली। यह देखकर मनोहर अपने दुखी मन के भावों को ज्यादा देर छिपा नहीं सका और उसकी आवाज काँपने लगी, वह रुआँसा हो गया। सुरबाला मुँह फेर कर खड़ी हो गई। मनोहर चाहता था कि सुरबाला उसे डांटे, उसे सजा दे, लेकिन उसका चुपचाप और स्थिर खड़े रहना मनोहर के मन पर बहुत भारी गुजर रहा था। मनोहर का हृदय पिघल जाता है। वह स्थिति को संभालती है और बोझिल वातावरण को हल्का करने के लिए बोल उठती है। वह बनावटी क्रोध का भाव लाकर कहती है “हमारा भाड़ क्यों तोड़ा जी? हमारा भाड़ बना के दो।” इस प्रकार मनोहर भी बड़ी खुशी के साथ भाड़ बनाने लगता है। सुरबाला निर्देश देती रहती है, कुछ आवश्यक सुधार कराकर भाड़ बनवाती है और पूरा होते ही लात मार कर भाड़ को फोड़ डालती है। दोनों मासूम हृदय खुलकर हँसते हैं और पुनः आनंदमग्न हो जाते हैं। इस प्रकार सुरबाला स्थिति के अनुसार अपना व्यवहार बदलकर मनोहर के मन का भार दूर कर देती है।
In simple words: मनोहर ने सुरबाला का भाड़ तोड़ा तो वह बहुत दुखी हुई और चुप रही। मनोहर को पछतावा हुआ, उसकी आवाज काँपने लगी और वह रुआँसा हो गया। जब सुरबाला ने उसे नया भाड़ बनाने को कहा और फिर खुद तोड़ दिया, तो दोनों का मन हल्का हो गया।

🎯 Exam Tip: पात्रों के आंतरिक संघर्ष और भावनाओं को स्पष्ट करने के लिए, उनके शारीरिक संकेतों (जैसे आवाज काँपना) और उनके मन के विचारों को जोड़कर लिखना चाहिए।

 

Question 7. "खेल कहानी में संवाद बहुत ही मार्मिक और पात्रानुकूल बन पड़े हैं।” इस कथन की समीक्षा कीजिए।
Answer: संवाद योजना या कथोपकथन कहानी विधा का एक बहुत महत्वपूर्ण हिस्सा है। 'खेल' कहानी में जैनेन्द्र कुमार की संवाद योजना बहुत अच्छी है। इसे कुछ खास बातों से समझा जा सकता है:
1. पात्रों के अनुसार संवाद – सुरबाला और मनोहर के मासूम और पवित्र मन के भाव संवादों के जरिए साफ दिखाई देते हैं।
2. चरित्र को उजागर करने वाले संवाद – यहाँ संवाद पात्रों की खासियतों को दिखाते हैं।
3. छोटे संवाद – इस कहानी के संवाद छोटे, सारपूर्ण, चुस्त और भावनाओं से भरे हुए हैं।
4. सरल संवाद – संवाद की भाषा सरल, सीधी और भावनाओं के हिसाब से पात्रों के अनुकूल है।
5. उद्देश्यपूर्ण संवाद – 'खेल' कहानी के संवाद बच्चों के मन के अनुकूल और बहुत प्रभावशाली बन पड़े हैं।
In simple words: 'खेल' कहानी में बातचीत बहुत अच्छी है। संवाद बच्चों के मन के भावों, उनके स्वभाव और कहानी के उद्देश्य को साफ दिखाते हैं।

🎯 Exam Tip: संवादों की समीक्षा करते समय, उन्हें कहानी के विषय, पात्रों के व्यक्तित्व और कहानी के संदेश से जोड़कर विश्लेषण करना चाहिए।

 

Question 8. "जैनेन्द्र की कहानियों में घटनाओं का महत्त्वं नहीं है, मानव के सामान्य व्यवहार की अभिव्यक्ति ही महत्त्वपूर्ण है।” स्पष्ट कीजिए।
Answer: यह सच है कि जैनेन्द्र कुमार की कहानियों में घटनाओं का कोई खास महत्व नहीं होता है। देखा जाए तो उनकी ज्यादातर कहानियों में कोई घटनाक्रम नहीं होता, बल्कि वे मानव व्यवहार के किसी एक पहलू या उसकी कुछ खासियतों को लेकर कहानी लिखते हैं। इस कहानी 'खेल' में भी यह बात पूरी तरह से दिखाई देती है। यहाँ घटनाओं का कोई क्रम न होकर केवल पात्रों के मन के भाव, उनका व्यवहार और उनका चरित्र-चित्रण ही मुख्य है। सुरबाला और मनोहर के व्यवहार का मनोवैज्ञानिक विश्लेषण, मासूम और पवित्र बालमन की विशेषताओं को उजागर करना और उनके व्यवहार का सही चित्रण ही 'खेल' कहानी में दिखता है।
In simple words: जैनेन्द्र कुमार की कहानियों में कहानी की घटनाएं इतनी खास नहीं होतीं, बल्कि वे बच्चों के मन के भावों और उनके आम व्यवहार को बहुत अच्छे से दिखाती हैं।

🎯 Exam Tip: लेखक की लेखन शैली या विशेषताओं का वर्णन करते समय, कहानी के उदाहरणों के साथ उसके सिद्धांत को स्पष्ट करना चाहिए।

 

Question 9. कहानी के तत्त्वों के आधार पर खेल कहानी की समीक्षा कीजिए।
Answer: कहानी के तत्त्वों के आधार पर 'खेल' कहानी पूरी तरह से सफल और दिल को छूने वाली कहानी है। इसको कुछ खास बातों में समझा जा सकता है:
5. उद्देश्य – इसमें बच्चों के मन की हरकतों और कल्पनाशीलता को बाल-मनोविज्ञान के आधार पर दिखाया गया है।
अतः कहा जा सकता है कि 'खेल' कहानी कथा-तत्त्वों के आधार पर एक श्रेष्ठ कहानी है।
In simple words: 'खेल' कहानी, बच्चों के मन और उनके खेल को बहुत अच्छे से दिखाती है, इसलिए यह एक सफल और प्रभावशाली कहानी है।

🎯 Exam Tip: किसी कहानी की समीक्षा करते समय, उसके मुख्य तत्वों (जैसे उद्देश्य, पात्र, कथानक) को संक्षेप में बताते हुए कहानी की सफलता पर टिप्पणी करें।

खेल लेखक परिचय

कहानीकार जैनेन्द्र कुमार का जन्म सन 1905 ई. में अलीगढ़ के कौड़ियागंज में हुआ था। प्रेमचन्द के बाद जैनेन्द्र कुमार ने कहानी को एक नई दिशा दी। उनकी रचनाओं में बाल मनोविज्ञान, दर्शनशास्त्र और संवेदनशीलता जैसे गुण पाए जाते हैं। उन्होंने अंदरूनी संघर्षों के माध्यम से मानवीय उच्च भावनाओं को व्यक्त किया है। उनकी कहानियों में व्यक्ति या चरित्र चित्रण को ज्यादा महत्व दिया गया है। इनमें व्यक्ति का सत्य के साथ अहंकार का त्याग और सहज मानवीय प्रवृत्तियां भी दिखाई देती हैं। उनकी प्रमुख कहानियाँ हैं - खेल, एक कैदी, पाजेब, जाह्नवी, अपना-अपना भाग्य, नीलम देश की राजकन्या, एक गो आदि। जैनेन्द्र की सभी कहानियाँ 'जैनेन्द्र की कहानियाँ' नामक सात भागों में संकलित हैं। उन्होंने 'परख', 'सुनीता', 'त्यागपत्र' जैसे उपन्यास और कई निबंध भी लिखे हैं।

पाठ-सार

  • 1. सुरबाला का भाड़ बनाना-जैनेन्द्र कुमार की 'खेल' कहानी बाल मनोविज्ञान पर आधारित एक अच्छी कहानी है। कहानी में सात साल की सुरबाला और नौ साल का मनोहर शाम के सुंदर माहौल में गंगा के किनारे खेल रहे थे। मनोहर एक लकड़ी से नदी के पानी को उछाल रहा था और सुरबाला किनारे की रेत से एक पैर पर थपथपाकर भाड़ बना रही थी। भाड़ बनाते हुए वह सोच रही थी कि भाड़ के ऊपर एक छोटी कुटिया बनाएगी जो उसकी होगी। मनोहर को उसमें नहीं रखेगी। अगर वह बहुत जिद करेगा तो उसे कुटिया के अंदर ले लेगी।
  • 2. सुरबाला की कल्पना- अपनी कल्पनाओं में खोई हुई सुरबाला सोचती है कि मनोहर वैसे तो बहुत अच्छा है, लेकिन वह बहुत झगड़ा करता है। उसे कुटिया में तभी आने देगी जब वह झगड़ा न करने का वादा करे। इस प्रकार खुद से बातें करते हुए सुरबाला ने बहुत लगन और मेहनत से भाड़ बनाया।
  • 3. भाड़ की सुन्दरता पर सुरबाला का मुग्ध होना-सुरबाला ने अपने हाथों से बने मिट्टी के भाड़ को देखा तो वह भावुक हो उठी। उसी समय मनोहर आया और सुरबाला को भाड़ को निहारते देख मनोहर ने हँसते हुए भाड़ को लात मारकर तोड़ दिया।
  • 4. सुरबाला का दुखी होना तथा रूठना-अपनी स्वर्ग जैसी सुंदर रचना को इस तरह टूटते देख सुरबाला बहुत दुःख से भरकर हैरान और चुपचाप खड़ी रह जाती है। मनोहर सुरबाला को चुपचाप खड़ा देखकर कुछ ही देर में बेचैन हो उठता है और उसे मनाने तथा बोलने की कोशिश करता है, लेकिन सुरबाला थोड़ी भी नहीं हिलती।
  • 5. मनोहर का दुःखी मन से रोना और सुरबाला का मान जाना-मनोहर सुरबाला को मनाने के लिए सुरी, ओ सुरी, सुरी कहकर पुकारता है। कुछ देर चुप रहकर सुरबाला कहती है-'हमारा भाड़ क्यों फोड़ा जी?' 'हमारा भाड़ बनाकर दो।' मनोहर तुरंत बोल उठता है-'लो अभी लो, सुरबाला-'हम वैसा ही लेंगे।' मनोहर-वैसा ही लो, उससे भी अच्छा।'

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