RBSE Solutions Class 11 Hindi Chapter 2 तुलसीदास

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Detailed Chapter 2 तुलसीदास RBSE Solutions for Class 11 Hindi

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Class 11 Hindi Chapter 2 तुलसीदास RBSE Solutions PDF

Rbse Class 11 Hindi प्रज्ञा प्रवाह पद्य Chapter 2 वस्तुनिष्ठ प्रश्न

 

प्रश्न 1. तुलसीदास की प्रतिनिधि रचना जो करोड़ों लोगों के दिलों में बस गई है –
(क) कवितावली
(ख) रामाज्ञा प्रश्नावली
(ग) रामचरितमानस
(घ) गीतावली
Answer: (ग) रामचरितमानस
In simple words: तुलसीदास जी ने 'रामचरितमानस' नाम की किताब लिखी, जो लोगों को बहुत पसंद आई और सब इसे याद रखते हैं। यह उनकी सबसे महत्वपूर्ण किताब है।

🎯 Exam Tip: तुलसीदास की प्रमुख रचनाओं के नाम और उनकी मुख्य भाषा हमेशा याद रखें, यह अक्सर परीक्षाओं में पूछा जाता है।

 

प्रश्न 2. तुलसीदास जी ने अपनी कविताएँ किस भाषा में लिखी हैं?
(क) ब्रज
(ख) अवधी
(ग) खड़ीबोली
(घ) राजस्थानी
Answer: (ख) अवधी
In simple words: तुलसीदास जी ने अपनी बहुत सी कविताएं और कहानियाँ अवधी भाषा में लिखी हैं, खास करके 'रामचरितमानस'।

🎯 Exam Tip: ध्यान रखें कि तुलसीदास ने ब्रज और अवधी दोनों भाषाओं में लिखा है, लेकिन 'रामचरितमानस' जैसी प्रमुख रचनाएँ अवधी में हैं।

 

प्रश्न 3. सीताजी ने भगवान राम से रुकने के लिए क्या वजह बताई?
(क) लक्ष्मणजी जल लेने गये हैं।
(ख) सूर्य-ताप तीव्र हो गया है।
(ग) लक्ष्मणजी पीछे रह गये हैं।
(घ) लक्ष्मणजी नाराज हो गये हैं।
Answer: (क) लक्ष्मणजी जल लेने गये हैं।
In simple words: सीताजी ने राम से रुकने को कहा क्योंकि लक्ष्मण पानी लाने गए थे और वह थक चुकी थीं।

🎯 Exam Tip: इस तरह के प्रश्नों में पात्रों के संवादों को ध्यान से पढ़ें ताकि सही कारण का पता चल सके।

 

प्रश्न 4. गाँव की स्त्रियाँ रास्ते में सीताजी से क्या पूछ रही थीं?
(क) तुम्हारे साथ जो गौर वर्ण वाले कौन हैं?
(ख) श्याम वर्ण वाले कौन हैं?
(ग) तुम उदास क्यों हो?
(घ) तुम कहाँ से आ रही हो?
Answer: (ख) श्याम वर्ण वाले कौन हैं?
In simple words: गाँव की औरतें सीताजी से पूछ रही थीं कि उनके साथ के साँवले रंग के आदमी कौन हैं।

🎯 Exam Tip: वर्णनानुसार प्रश्नों में पात्रों के रूप-रंग और उनके परिचय से संबंधित बिंदुओं पर विशेष ध्यान दें।

 

Rbse Class 11 Hindi प्रज्ञा प्रवाह पद्य Chapter 2 अतिलघूत्तरात्मक प्रश्न

 

प्रश्न 1. 'पुर तें निकसी रघुवीर वधू' इस पंक्ति में 'रघुवीर वधू' शब्द किसके लिए इस्तेमाल किया गया है?
Answer: इस पंक्ति में 'रघुवीर वधू' शब्द माता सीता के लिए प्रयोग किया गया है। सीताजी भगवान राम की पत्नी हैं, इसलिए उन्हें 'रघुवीर वधू' कहा गया है। यह शब्द राम की पत्नी के रूप में उनकी पहचान बताता है।
In simple words: 'रघुवीर वधू' का मतलब सीताजी है, जो भगवान राम की पत्नी हैं।

🎯 Exam Tip: काव्य पंक्तियों में प्रयुक्त शब्दों के शाब्दिक और सांकेतिक अर्थ को समझने का प्रयास करें।

 

प्रश्न 2. 'पबि पाहन हू ते कठोर हियो है' इस पंक्ति में किसका हृदय पत्थर से भी ज़्यादा कठोर बताया गया है?
Answer: इस पंक्ति में गाँव की औरतों ने रानी कैकेयी के हृदय को पत्थर से भी अधिक कठोर बताया है। उन्होंने ऐसा इसलिए कहा क्योंकि कैकेयी ने ही भगवान राम को वनवास भेजा था, जिससे सभी को बहुत दुःख हुआ था।
In simple words: इस पंक्ति में रानी कैकेयी के दिल को पत्थर से भी ज़्यादा कठोर कहा गया है, क्योंकि उन्होंने राम को वनवास भेजा था।

🎯 Exam Tip: काव्य में जब किसी व्यक्ति या वस्तु की तुलना की जाती है, तो उसके पीछे के भाव और कारण को समझें।

 

प्रश्न 3. 'सुनि सुन्दर बैन सुधारस साने सयानी है जानकी जानी भली।' इन पंक्तियों में कौन-सा अलंकार इस्तेमाल हुआ है?
Answer: इन पंक्तियों में 'सवैया' छंद के साथ-साथ 'अनुप्रास' अलंकार का प्रयोग हुआ है, क्योंकि 'स' वर्ण की आवृत्ति कई बार हुई है। यहाँ 'सुधारस साने' में 'रूपक' अलंकार भी है, जहाँ वाणी को अमृत रस से सना हुआ बताया गया है। यह पंक्ति सीता की बुद्धिमत्ता को दर्शाती है।
In simple words: इन पंक्तियों में 'सवैया' छंद है, और 'स' अक्षर बार-बार आने से 'अनुप्रास' अलंकार है। वाणी को अमृत जैसा बताने के लिए 'रूपक' अलंकार भी है।

🎯 Exam Tip: अलंकार पहचानने के लिए वर्णों की आवृत्ति (अनुप्रास) और उपमेय-उपमान के अभेद (रूपक) जैसे नियमों को ध्यान में रखें।

 

Rbse Class 11 Hindi प्रज्ञा प्रवाह पद्य Chapter 2 लघूत्तरात्मक प्रश्न

 

प्रश्न 1. 'अँखियाँ अति चारु चलीं जल च्वै' - भगवान राम की आँखों से आँसू क्यों छलक पड़े?
Answer: जब श्रीराम, सीता और लक्ष्मण वनवास के लिए निकले, तो थोड़ी दूर चलने पर ही सीता थक गईं। उनके कदम लड़खड़ाने लगे, चेहरे पर पसीना आ गया और होंठ सूख गए। सीता अपनी थकान और रास्ते की जानकारी न होने के कारण बहुत परेशान थीं। उन्होंने राम से पूछा कि उन्हें अभी और कितना चलना है और कुटिया कहाँ बनानी है। अपनी प्रिय सीता की इस परेशानी और व्याकुलता को देखकर श्रीराम की आँखों से आँसू छलक पड़े। उनका सीता के प्रति गहरा प्रेम इस भाव से प्रकट हुआ।
In simple words: सीताजी रास्ते में बहुत थक गई थीं और परेशान थीं। उन्हें देखकर, रामजी की आँखों से आँसू आ गए क्योंकि वे सीताजी के कष्ट से बहुत दुखी थे।

🎯 Exam Tip: पात्रों के भावों का वर्णन करते समय उनके कार्यों और प्रतिक्रियाओं को कारण सहित प्रस्तुत करें।

 

प्रश्न 2. 'श्रम-सीकर साँवरि देह लसै मनो रासि महातम तारक मैं।' इन पंक्तियों का भाव-सौन्दर्य समझाइए।
Answer: कवि ने इन पंक्तियों में भगवान राम के साँवले शरीर पर पसीने की बूंदों का बहुत सुंदर वर्णन किया है। ऐसा लगता है, जैसे गहरे अंधकार में तारे चमक रहे हों। यहाँ कवि ने श्रीराम के साँवले शरीर को अंधकार का समूह और पसीने के कणों को चमकते तारे बताया है। कवि ने उत्प्रेक्षा अलंकार का प्रयोग करके बताया है कि पसीने से भीगा राम का साँवला शरीर कितना सुंदर लग रहा है। यह कल्पना मन को बहुत भाती है और दृश्य को जीवंत बनाती है।
In simple words: कवि कहते हैं कि राम के साँवले शरीर पर पसीने की बूंदें ऐसे चमक रही हैं, जैसे रात के अंधेरे में तारे टिमटिमाते हैं। यह बहुत सुंदर कल्पना है।

🎯 Exam Tip: भाव-सौंदर्य के प्रश्नों में अलंकारों का उल्लेख करना और उनका अर्थ समझाना आवश्यक है।

 

प्रश्न 3. सीताजी को थका हुआ देखकर श्रीराम ने क्या किया?
Answer: जब श्रीराम ने देखा कि सीताजी वन के रास्ते में बहुत थक गई हैं, और उन्होंने लक्ष्मण के लौटने तक रुकने का आग्रह किया, तो श्रीराम वहीं बैठ गए। वे अपने पैरों से कांटे निकालने का नाटक करने लगे। जबकि उनके पैरों में कोई कांटा नहीं चुभा था, वे काफी देर तक यही करते रहे। श्रीराम ऐसा इसलिए कर रहे थे ताकि सीताजी को थोड़ा आराम करने और थकान मिटाने का मौका मिल जाए। यह उनके प्रेम को दर्शाता है और उनकी चिंता को व्यक्त करता है।
In simple words: रामजी ने सीताजी को थका हुआ देखा तो वे बैठ गए और पैरों से कांटे निकालने का बहाना करने लगे। वे चाहते थे कि सीताजी को थोड़ा आराम मिल जाए।

🎯 Exam Tip: इस प्रकार के वर्णनात्मक प्रश्नों में पात्रों की भावनाओं और उनके कार्यों के पीछे के उद्देश्य को स्पष्ट करें।

 

प्रश्न 4. जब गाँव की औरतों ने पूछा कि 'हे सखी! ये साँवले रंग के आपके कौन लगते हैं?' तो सीताजी ने क्या जवाब दिया?
Answer: ग्रामवधुओं द्वारा राम के विषय में पूछने पर सीताजी ने सीधे तौर पर कुछ नहीं कहा। उन्होंने अपनी आँखें झुकाकर और मुस्कुराकर राम की ओर इशारा करके, बहुत चतुराई और प्रेम से अपना उत्तर दे दिया। उन्होंने संकेत में बताया कि ये साँवले पुरुष उनके पति हैं, जिससे गाँव की औरतों को उनका जवाब मिल गया और वे सीता की चतुराई से प्रभावित हुईं।
In simple words: गाँव की औरतों ने राम के बारे में पूछा तो सीताजी ने मुस्कुराते हुए आँखें झुकाकर राम की ओर इशारा कर दिया।

🎯 Exam Tip: सांकेतिक उत्तरों को समझाते समय पात्रों के हाव-भाव और उनके निहित अर्थ को भी स्पष्ट करें।

 

Rbse Class 11 Hindi प्रज्ञा प्रवाह पद्य Chapter 2 निबन्धात्मक प्रश्न

 

प्रश्न 1. अयोध्या से बाहर निकलते ही वन के रास्ते पर कुछ कदम चलने के बाद सीताजी की हालत कैसी हो गई थी? वर्णन कीजिए।
Answer: अयोध्या के महलों से बाहर निकलकर जब श्रीराम, लक्ष्मण और सीताजी वन के रास्ते पर चलने लगे, तो कुछ ही कदम चलते ही सीताजी के पैर लड़खड़ाने लगे। उन्हें कठोर पथरीले रास्ते पर चलने का अभ्यास नहीं था और उनका शरीर बहुत कोमल था। इस कारण सीताजी को तुरंत थकान महसूस हुई। उनके माथे पर पसीने के कण आ गए, थकान के मारे उनके होंठ सूख गए और वे बहुत उदास हो गईं। सीताजी बहुत अधीर और व्याकुल होकर श्रीराम से पूछने लगीं कि उन्हें अभी कितना और चलना है, कुटिया कहाँ बनेगी और उन्हें कहाँ आराम मिलेगा। सीताजी की इस हालत को देखकर श्रीराम को भी बहुत दुख हुआ और उनकी आँखों से आँसू आ गए। सीताजी इतनी थक गई थीं कि उन्हें आगे एक कदम भी बढ़ाना मुश्किल लग रहा था और वे वहीं बैठकर आराम करना चाहती थीं। यह वनवास की कठिनाई को दर्शाता है।
In simple words: अयोध्या से बाहर वन में चलते ही सीताजी के पैर डगमगा गए और वे बहुत थक गईं। उनके माथे पर पसीना आ गया और होंठ सूख गए। उन्होंने राम से पूछा कि अभी कितना चलना है और कहाँ आराम मिलेगा। सीताजी की यह हालत देखकर राम को भी दुख हुआ।

🎯 Exam Tip: विस्तृत वर्णन करते समय घटनाक्रम को क्रमानुसार और पात्रों की शारीरिक व मानसिक स्थिति को स्पष्ट रूप से लिखें।

 

प्रश्न 2. 'जल को गये लक्खन हैं लरिका' सवैया में सीता-राम के पवित्र प्रेम की सुंदर झलक कैसे मिलती है? समझाइए।
Answer: इस सवैया में सीताजी ने वन के रास्ते में थकान महसूस होने पर राम से बहाना बनाकर कहा कि लक्ष्मण अभी बालक हैं और पानी लेने गए हैं, इसलिए हमें पेड़ की छाया में रुककर उनकी प्रतीक्षा करनी चाहिए। उन्होंने राम को हवा करने और उनके धूल सने पैर पोंछने का आग्रह किया, जबकि वे खुद भी थकी हुई थीं। यह उनका प्रेम भरा आग्रह था। श्रीराम यह बात समझ गए कि सीताजी थक गई हैं और आराम करना चाहती हैं। इसलिए उन्होंने भी पैरों से कांटे निकालने का बहाना किया, जबकि उनके पैरों में कोई कांटा नहीं था। वे ऐसा बहुत देर तक करते रहे ताकि सीताजी को थोड़ा आराम मिल सके। सीताजी भी श्रीराम के इस प्रेम भरे व्यवहार को समझ गईं, और उनकी आँखों से प्रेम के आँसू बहने लगे। इस तरह उनके पवित्र और निस्वार्थ प्रेम की सुंदर झलक देखने को मिलती है।
In simple words: थकी हुई सीता ने राम से रुकने का आग्रह किया और राम ने भी सीता को आराम देने के लिए कांटे निकालने का बहाना किया। दोनों का एक-दूसरे के प्रति यह प्रेम इस सवैया में साफ दिखता है।

🎯 Exam Tip: प्रेम संबंधों का वर्णन करते समय पात्रों के एक-दूसरे के प्रति त्याग, समझ और देखभाल के भावों को उभारें।

 

प्रश्न 4. पढ़े हुए पाठ के आधार पर भगवान श्रीराम के सौंदर्य का वर्णन कीजिए।
Answer: तुलसीदास जी द्वारा लिखी 'कवितावली' में वनवास जाते हुए श्रीराम के सौंदर्य का बहुत सुंदर वर्णन किया गया है। श्रीराम के सौंदर्य को इन बिन्दुओं से समझा जा सकता है:
1. **सुंदर रूप और रंग:** श्रीराम का शरीर साँवला है। उन्होंने वनवास के लिए मुनियों जैसे वस्त्र पहने हैं। उनके सिर पर जटाएँ हैं, हाथों में धनुष-बाण और पीठ पर तरकस है। इस रूप में वे कामदेव से भी अधिक सुंदर लगते हैं। उन्हें देखकर गाँव की स्त्रियाँ मोहित हो जाती हैं।
2. **कोमल स्वभाव:** श्रीराम का शरीर जितना सुंदर है, उतना ही सुंदर उनका मन और हृदय भी है। सीताजी को थका हुआ देखकर वे देर तक कांटे निकालने का बहाना करते हैं। वे सीताजी और लक्ष्मण दोनों की चिंता करते हैं, और अपने पिता के वचनों को निभाना अपना कर्तव्य मानते हैं। उनका यह व्यक्तित्व बहुत प्रशंसनीय है।
3. **प्यारा स्वभाव:** इस पाठ में श्रीराम के प्यारे स्वभाव को भी बताया गया है। वन के रास्ते पर चलते समय वे बार-बार सीताजी की ओर देखते हैं और जंगल के कष्टों के बारे में सोचते हैं। उनके इस प्रेमपूर्ण स्वभाव को देखकर गाँव की स्त्रियाँ उन पर मोहित हो जाती हैं।
In simple words: श्रीराम का साँवला शरीर, धनुष-बाण और जटाएँ उन्हें बहुत सुंदर बनाती हैं। वे कोमल स्वभाव के हैं और सीता-लक्ष्मण की बहुत चिंता करते हैं। उनका प्रेमपूर्ण व्यवहार गाँव की स्त्रियों को बहुत भाता है।

🎯 Exam Tip: सौंदर्य वर्णन करते समय शारीरिक विशेषताओं के साथ-साथ गुणों और प्रभावों का भी उल्लेख करें।

व्याख्यात्मक प्रश्न

1. रानी मैं जानी
2. पुर ते निकसी रघुवीर
3. वनिता बनी स्यामल

उक्त सभी अंशों की व्याख्या पूर्व में दी गई सप्रसंग व्याख्या में देखिए ।

Rbse Class 11 Hindi प्रज्ञा प्रवाह पद्य Chapter 2 अन्य महत्त्वपूर्ण प्रश्न

 

प्रश्न 1. तुलसीदास जी की भक्ति-भावना में इनमें से कौन-सा भाव मुख्य है?
(ख) भ्रातृ भाव
(ग) दास्य भाव
(घ) माधुर्य भाव
Answer: (ग) दास्य भाव
In simple words: तुलसीदास जी भगवान राम के दास (सेवक) बनकर उनकी भक्ति करते थे। वे भगवान की सेवा को ही अपना धर्म मानते थे।

🎯 Exam Tip: भक्ति-भावना के प्रकारों और प्रमुख कवियों से उनके जुड़ाव को याद रखें।

 

प्रश्न 2. “साँवरे से सखि, रावरे को है?" यह सवाल किसने किससे पूछा था?
(क) वन-मार्ग में ग्रामीणों ने राम से
(ख) ग्रामवधुओं ने सीताजी से
(ग) वृद्ध ग्रामीण ने सीताजी से।
(घ) पथिकों ने ग्रामवधुओं से।
Answer: (ख) ग्रामवधुओं ने सीताजी से
In simple words: गाँव की औरतों ने सीताजी से पूछा था कि साँवले रंग के पुरुष उनके कौन लगते हैं।

🎯 Exam Tip: संवाद आधारित प्रश्नों में पात्रों और उनके द्वारा कही गई बातों पर विशेष ध्यान दें।

 

प्रश्न 3. “बनिता बनी स्यामल गौर के बीच, बिलोकहु री सखी मोहि सी है।” इस बात से गाँव की औरत का कौन-सा भाव पता चलता है?
(क) आश्चर्य
(ख) हर्ष
(ग) मोह
(घ) अधीरता
Answer: (क) आश्चर्य
In simple words: गाँव की औरत राम, सीता और लक्ष्मण को देखकर बहुत हैरान थी।

🎯 Exam Tip: काव्य पंक्तियों के माध्यम से पात्रों के मन के भावों को समझने के लिए पंक्तियों के अर्थ पर गौर करें।

 

प्रश्न 4. "फिरि बूझति है चलनो अब केतिक, पर्णकुटी करिहौ कित है।” इस बात से सीताजी के मन का कौन-सा भाव पता चलता है?
(क) आतुरता
(ख) उत्सुकता
(ग) चिन्ता
(घ) संवेदना
Answer: (क) आतुरता
In simple words: सीताजी यह सवाल पूछकर अपनी बेचैनी दिखा रही थीं, क्योंकि वे थक चुकी थीं और आगे के रास्ते के बारे में जानना चाहती थीं।

🎯 Exam Tip: पात्रों के कथनों से उनके आंतरिक भावों को पहचानना सीखें, खासकर जब वे थकान या अनिश्चितता व्यक्त कर रहे हों।

 

Rbse Class 11 Hindi प्रज्ञा प्रवाह पद्य Chapter 2 अतिलघूत्तरात्मक प्रश्न

 

प्रश्न 1. 'बनिता बनि स्यामल गौर के बीच' इस पंक्ति में 'स्यामल गौर' शब्द किसके लिए इस्तेमाल किया गया है?
Answer: इस पंक्ति में 'स्यामल' शब्द साँवले रंग वाले भगवान श्रीराम के लिए प्रयोग हुआ है, और 'गौर' शब्द गोरे रंग वाले लक्ष्मण के लिए कहा गया है। यह उनकी शारीरिक सुंदरता को दर्शाता है।
In simple words: 'स्यामल' राम के लिए और 'गौर' लक्ष्मण के लिए कहा गया है।

🎯 Exam Tip: विशेषण शब्दों के माध्यम से पात्रों की पहचान और उनके गुणों को समझने का प्रयास करें।

 

प्रश्न 2. 'फिरि बूझति है, चलनो अब केतिक, पर्णकुटी करिहौ कित है।' सीताजी ने श्रीराम से ये सवाल क्यों पूछे?
Answer: सीताजी का शरीर बहुत कोमल था, इसलिए थोड़ी दूर चलते ही वे थक गईं। वे जंगल के रास्तों से अनजान भी थीं। इसी वजह से थकने के कारण और आगे के रास्ते तथा रुकने के स्थान के बारे में जानने की बेचैनी में सीताजी ने श्रीराम से ये सवाल पूछे। यह उनकी कठिनाई और चिंता को दर्शाता है।
In simple words: सीताजी बहुत कोमल थीं और जंगल के रास्ते से अनजान थीं। थक जाने के कारण उन्होंने राम से ये सवाल पूछे।

🎯 Exam Tip: प्रश्नों के पीछे के कारणों को समझाने के लिए पात्रों की शारीरिक स्थिति और मानसिक स्थिति दोनों पर ध्यान दें।

 

प्रश्न 3. 'पिय की अँखियाँ अति चारु चली जल च्वै।' श्रीराम की आँखों से आँसू क्यों बहने लगे?
Answer: सीताजी की थकी हुई और परेशान हालत देखकर श्रीराम की आँखों से आँसू बहने लगे। सीताजी थोड़ी ही दूर चलने पर थक गई थीं और लगातार पूछ रही थीं कि उन्हें अभी कितना और चलना है। राम सीता के कष्ट से दुखी थे और उनका प्रेम भाव उनकी आँखों में दिख रहा था।
In simple words: सीताजी को थका हुआ और परेशान देखकर रामजी की आँखों में आँसू आ गए।

🎯 Exam Tip: किसी पात्र के आँसू आने के पीछे के भावनात्मक कारण को स्पष्ट करें, खासकर प्रेम और करुणा के प्रसंग में।

 

प्रश्न 4. "पयोदेहिं क्यों चलिहैं? सकुचात हियो है।” श्रीराम, सीता एवं लक्ष्मण को देखकर गाँव की औरतों का दिल क्यों दुख रहा था?
Answer: गाँव की औरतों का हृदय श्रीराम, सीता और लक्ष्मण के कोमल शरीरों को देखकर दुख रहा था। वे सोच रही थीं कि इतने कोमल शरीर वाले लोग नंगे पैर कठोर वन के रास्ते पर कैसे चलेंगे। यह उनके प्रति ग्रामवधुओं की सहानुभूति और चिंता को दर्शाता है। उन्हें यह देखकर दुःख हुआ कि ये राजकुमार वनवास झेल रहे हैं।
In simple words: गाँव की औरतों का दिल राम, सीता और लक्ष्मण के कोमल शरीर और उनके नंगे पैर चलने की मजबूरी देखकर दुख रहा था।

🎯 Exam Tip: सामाजिक प्रतिक्रियाओं और सहानुभूति को समझाने के लिए ग्रामीण परिवेश और उनकी मानसिकता को ध्यान में रखें।

 

प्रश्न 5. "अनुराग-तड़ाग में भानु उदै बिगसीं मनो मंजुल कंज-कली।” इस पंक्ति का भाव-सौन्दर्य समझाइए।
Answer: इस पंक्ति में कवि ने बताया है कि प्रेम रूपी तालाब में जब सूर्य रूपी राम उदय हुए, तो मन रूपी कमल की कलियाँ खिल गईं। यहाँ 'अनुराग-तड़ाग', 'भानु', 'कंज-कली' में रूपक अलंकार का सुंदर प्रयोग किया गया है। यह पंक्ति प्रेम और आनंद से भरी एक भावुक बात है, जो सीताजी के मन की खुशी को दर्शाती है। यह दृश्य पाठक के मन में भी प्रसन्नता भर देता है।
In simple words: यह पंक्ति बताती है कि प्रेम रूपी तालाब में सूर्य रूपी राम के आने से मन रूपी कमल खिल गया। इसमें रूपक अलंकार का सुंदर प्रयोग हुआ है।

🎯 Exam Tip: उपमा, रूपक और उत्प्रेक्षा जैसे अलंकारों के भाव-सौंदर्य को समझाते समय तुलनात्मक तत्वों को स्पष्ट करें।

 

Rbse Class 11 Hindi प्रज्ञा प्रवाह पद्य Chapter 2 लघूत्तरात्मक प्रश्न

 

प्रश्न 1. तुलसीदास जी की रचना 'कवितावली' का मुख्य विषय क्या है? बताइए।
Answer: 'कवितावली' का मुख्य विषय भगवान राम की प्रसिद्ध कथा है। इसमें 'रामचरितमानस' की तरह ही सात खंडों में कहानी को बांटा गया है। इसमें रामकथा के सिर्फ भावुक और खास हिस्सों का ही वर्णन किया गया है। तुलसीदास जी ने 'कवितावली' में अलग-अलग रस और शैलियों का इस्तेमाल किया है, और इसमें ब्रजभाषा की मिठास साफ दिखती है। इसके उत्तरकाण्ड में श्रीराम के स्वरूप का वर्णन बहुत ही सुंदर तरीके से किया गया है। यह भावनाओं को व्यक्त करने वाली एक बहुत ही मधुर रचना है, जिसमें ज़्यादातर 'सवैया' छंद का इस्तेमाल हुआ है।
In simple words: 'कवितावली' में भगवान राम की कहानी के खास और भावुक प्रसंगों का वर्णन है। इसमें ब्रजभाषा का इस्तेमाल हुआ है और यह भावनाओं को अच्छे से दिखाती है।

🎯 Exam Tip: किसी भी रचना का परिचय देते समय उसके मुख्य विषय, भाषा-शैली और प्रमुख विशेषताओं को उजागर करें।

 

प्रश्न 2. "तिय की लखि आतुरता पिय की अँखियाँ अति चारु चलीं जल च्वे।" इसमें किसकी बेचैनी के बारे में कहा गया है और उसकी क्या प्रतिक्रिया हुई?
Answer: इस पंक्ति में सीताजी की बेचैनी (आतुरता) के बारे में कहा गया है। जब श्रीराम, सीता और लक्ष्मण वन के रास्ते पर चल रहे थे, तब सीताजी, जो बहुत कोमल थीं, थोड़ी दूर चलते ही थक गईं और पसीने से भीग गईं। वे जल्दी से अपनी मंजिल तक पहुँचना चाहती थीं, लेकिन उन्हें वनवास की मुश्किलों का अंदाज़ा नहीं था। उनकी इस परेशानी और बेचैनी को देखकर श्रीराम की आँखों में आँसू भर आए। श्रीराम ने उस समय कुछ कहा तो नहीं, पर उनके चेहरे के भावों से साफ पता चल रहा था कि वे सोच रहे थे कि सीता और लक्ष्मण चौदह साल का वनवास कैसे बिताएँगे। यह उनके गहरे प्रेम को दर्शाता है।
In simple words: यहाँ सीताजी की बेचैनी बताई गई है, क्योंकि वे वन में चलने से थक गई थीं। उनकी यह हालत देखकर राम की आँखों में आँसू आ गए।

🎯 Exam Tip: भावनात्मक दृश्यों का वर्णन करते समय पात्रों के आंतरिक और बाहरी दोनों प्रकार के भावों को विस्तार से समझाएँ।

 

प्रश्न 3. 'रानी मैं जानी अजानी महा' इस कथन में किसे और क्यों अज्ञानी कहा गया है?
Answer: वनवास के दौरान रास्ते में गाँव की स्त्रियों को जब पता चला कि राम और लक्ष्मण अयोध्या के राजकुमार हैं और उन्हें रानी कैकेयी ने चौदह साल का वनवास दिया है, तो वे आपस में बात करने लगीं। उन्होंने कहा कि रानी कैकेयी बहुत अज्ञानी (नासमझ) हैं। इतनी सुंदर और सुशील राजकुमारों को वनवास भेजना कहाँ की समझदारी है? ऐसी क्रूर और गलत हरकत करने वाला व्यक्ति पूरी तरह मूर्ख और नासमझ ही हो सकता है। उन्हें कैकेयी का हृदय पत्थर जैसा कठोर और निर्दयी लगा।
In simple words: गाँव की स्त्रियों ने रानी कैकेयी को अज्ञानी कहा, क्योंकि उन्होंने इतने सुंदर राजकुमारों को वनवास भेज दिया था। उन्हें कैकेयी का दिल पत्थर जैसा कठोर लगा।

🎯 Exam Tip: किसी पात्र के कथन का विश्लेषण करते समय उसके निहित अर्थ और सामाजिक टिप्पणी को भी स्पष्ट करें।

 

प्रश्न 4. “बिलोकहु री सखी! मोहि सी है।” इस कथन से ग्रामवधू का खास मतलब क्या है?
Answer: इस कथन से गाँव की औरत का खास मतलब यह था कि वह सीताजी को अपनी दोस्त मानकर उनसे सहजता से बात करना चाहती थी। वह सीताजी के प्रति प्यार और हमदर्दी का भाव रखती थी और उनसे राम के बारे में जानना चाहती थी। यह कहकर उसने सीताजी से अपने मन की बात आसानी से पूछ ली और एक आत्मीय संबंध स्थापित करने का प्रयास किया।
In simple words: गाँव की औरत ने सीताजी को अपनी सहेली मानकर उनसे प्यार से राम के बारे में जानना चाहा।

🎯 Exam Tip: संवादों के पीछे की मंशा और पात्रों के रिश्तों को समझने के लिए कथनों के गहरे अर्थ पर विचार करें।

 

प्रश्न 5. “सयानी है जानकी जानी भली” - सीताजी ने कैसे समझा कि सवाल पूछने वाली गाँव की औरत समझदार है?
Answer: जब श्रीराम, सीता और लक्ष्मण वन के रास्ते पर चल रहे थे, तो कुछ गाँव की औरतें उत्सुकतावश उनके साथ चलने लगीं। उनमें से एक औरत ने देखा कि साँवले राजकुमार (श्रीराम) बार-बार सीताजी को प्यार भरी नजरों से देख रहे थे। उस औरत ने यह अनुमान लगा लिया कि ये राजकुमार सीताजी के पति ही हैं। इसी आधार पर उसने सीताजी से सवाल पूछा। सीताजी ने यह समझते हुए कि सवाल पूछने वाली औरत बहुत समझदार है, क्योंकि उसने श्रीराम के हाव-भाव देखकर ही उनके रिश्ते को पहचान लिया था, अपने मन में उसे 'सयानी' कहा।
In simple words: राम और सीता को साथ देखकर एक गाँव की औरत ने समझ लिया कि वे पति-पत्नी हैं। सीताजी ने यह देखकर समझ लिया कि वह औरत बहुत समझदार है।

🎯 Exam Tip: पात्रों की बुद्धिमत्ता को दर्शाने वाले दृश्यों में उनके अवलोकन और निष्कर्ष निकालने की क्षमता को रेखांकित करें।

 

प्रश्न 6. 'वन-गमन' शीर्षक वाली कविता के हिस्से के आधार पर श्रीराम के चरित्र की खास बातें बताइए।
Answer: 'वन-गमन' कविता के हिस्से में भगवान श्रीराम के चरित्र की ये महत्वपूर्ण विशेषताएँ बताई गई हैं:
1. **आज्ञाकारी पुत्र:** वे अपने माता-पिता की हर आज्ञा का पालन करते थे।
2. **कर्तव्यनिष्ठ:** वे अपने पिता के वचनों को निभाना अपना सबसे बड़ा कर्तव्य मानते थे।
3. **पत्नी से प्रेम:** श्रीराम अपनी पत्नी सीता से बहुत प्यार करते थे और उनकी हर सुख-सुविधा का ध्यान रखते थे।
4. **भाई से स्नेह:** वे अपने छोटे भाई लक्ष्मण से भी बहुत ज़्यादा प्रेम करते थे।
5. **विवेकशील और मर्यादित:** उनका स्वभाव सभी अच्छे गुणों से भरा हुआ था। वे हमेशा सही निर्णय लेते थे और मर्यादा (सही आचरण) का पालन करते थे।
6. **वीर और कुशल योद्धा:** वे धैर्यवान, बहादुर थे और हथियारों को चलाने में बहुत माहिर थे। यह सब उनके आदर्श चरित्र को दर्शाता है।
In simple words: श्रीराम माता-पिता की बात मानने वाले, कर्तव्य निभाने वाले, पत्नी और भाई से प्रेम करने वाले थे। वे समझदार, मर्यादित और बहादुर योद्धा भी थे।

🎯 Exam Tip: पात्रों के चरित्र-चित्रण में उनके गुणों, मूल्यों और संबंधों को क्रमबद्ध तरीके से प्रस्तुत करें।

 

Rbse Class 11 Hindi प्रज्ञा प्रवाह पद्य Chapter 2 निबन्धात्मक प्रश्न

 

प्रश्न 1. तुलसीदास जी की भक्ति-भावना के बारे में संक्षेप में बताइए।
Answer: गोस्वामी तुलसीदास जी की भक्ति को दास्य-भाव या सेवा-सेवक भाव की भक्ति माना जाता है। उन्होंने अपनी सभी रचनाओं में खुद को भगवान का सेवक या दास और अपने आराध्य श्रीराम को अपना स्वामी बताया है। वे अपने भगवान राम के साथ बहुत ही मर्यादित व्यवहार रखते थे और एक दास की तरह उनकी सेवा करके उन्हें खुश करते थे। उनके दास्य-भाव के सबसे बड़े उदाहरण हनुमान जी हैं, जो सिर्फ सेवा करके ही अपने प्रभु को हमेशा खुश रखते थे। तुलसीदास जी ने अपनी 'रामचरितमानस' में इसी सेवा-भाव को भक्ति और मोक्ष पाने का रास्ता माना है। यह भक्ति का एक अनुपम उदाहरण है।
In simple words: तुलसीदास जी भगवान राम के दास (सेवक) बनकर उनकी भक्ति करते थे। वे राम को अपना स्वामी और खुद को उनका सेवक मानते थे, जैसे हनुमान जी राम के सेवक थे।

🎯 Exam Tip: भक्ति के विभिन्न भावों और कवियों के योगदान को याद करें, विशेष रूप से दास्य-भाव के संदर्भ में।

 

प्रश्न 2. “तुलसीदास जी के काव्य में भावुक प्रसंगों का सुंदर चित्रण हुआ है।” पढ़े हुए हिस्से के आधार पर समझाइए।
Answer: गोस्वामी तुलसीदास जी की कविताओं में भावुक प्रसंगों की कोई कमी नहीं है। उनकी रचना 'रामचरितमानस' में भी शुरुआत से अंत तक कई भावुक जगहों का सुंदर वर्णन मिलता है। जैसे, पुष्पवाटिका में राम-सीता का मिलन, केवट प्रसंग, भरत-मिलाप और लक्ष्मण को शक्ति लगने जैसे प्रसंग। इन सभी जगहों पर तुलसीदास जी ने अपने दिल के भावों को बहुत स्वाभाविक तरीके से दिखाया है। 'कवितावली' इस मामले में और भी खास है, क्योंकि इसमें पूरी रामकथा के बजाय सिर्फ कुछ खास और भावुक प्रसंगों को ही दिखाया गया है। उदाहरण के लिए, 'अयोध्याकांड' में वन-गमन का प्रसंग 'कवितावली' में बहुत भावुकता और मिठास के साथ दिखाया गया है। ऐसे जगहों पर इंसानी भावनाएँ, दया, कोमलता और दुख को इस तरह दिखाया गया है कि पूरा प्रसंग करुणा और वेदना से भरा लगता है। इस तरह यह साफ है कि 'कवितावली' में तुलसीदास जी ने भावुक प्रसंगों को बहुत खूबसूरती से सजाया है, जिससे उनकी रचना का साहित्यिक सौंदर्य और निखर गया है।
In simple words: तुलसीदास जी ने अपनी किताबों में भगवान राम की कहानी के भावुक हिस्सों को बहुत सुंदर तरीके से बताया है। 'कवितावली' में उन्होंने खास तौर पर भावनाओं और दुखों को बहुत गहराई से दिखाया है।

🎯 Exam Tip: किसी भी कवि की शैली का विश्लेषण करते समय उसके द्वारा चित्रित भावुक दृश्यों और उनके प्रभाव को स्पष्ट करें।

 

रचनाकार का परिचय सम्बन्धी प्रश्न

 

प्रश्न 1. तुलसीदास जी के जीवन और उनकी रचनाओं के बारे में संक्षेप में बताइए।
Answer: गोस्वामी तुलसीदास जी, हिंदी साहित्य की रामभक्ति शाखा के प्रमुख कवि थे। उनका जन्म उत्तर प्रदेश के बाँदा जिले के राजापुर गाँव में विक्रम संवत् 1554 में हुआ था। उनके पिता का नाम आत्माराम दुबे और माता का नाम हुलसी था। बचपन में ही माता-पिता का देहांत हो जाने पर उनके गुरु नरहरिदास ने उन्हें पाला-पोसा। युवा होने पर उन्होंने शादी की, लेकिन कुछ समय बाद उन्होंने वैराग्य अपना लिया। फिर वे चित्रकूट, अयोध्या और काशी जैसे स्थानों पर रहकर भगवान श्रीराम की भक्ति में लीन हो गए और समाज कल्याण के काम करते हुए काशी में ही उनका स्वर्गवास हुआ।
**उनकी रचनाएँ:** तुलसीदास जी ने अपने आराध्य राम के चरित्र पर कई किताबें लिखीं। इनमें 'रामचरितमानस' सबसे महान महाकाव्य है और इसे भारतीय संस्कृति का पवित्र ग्रंथ माना जाता है। उनकी प्रमुख प्रमाणित रचनाएँ हैं: 'रामचरितमानस', 'रामललानहछू', 'बरवै रामायण', 'वैराग्य सन्दीपनी', 'पार्वतीमंगल', 'जानकीमंगल', 'रामाज्ञा प्रश्न', 'गीतावली', 'कवितावली', 'कृष्ण गीतावली', 'विनयपत्रिका' और 'दोहावली'। तुलसीदास जी की रचनाओं में भक्ति का पूरा और सुंदर रूप दिखता है। उनकी रचनाओं का मुख्य उद्देश्य हमेशा लोगों का भला करना रहा है।
In simple words: तुलसीदास जी रामभक्ति शाखा के बड़े कवि थे। उनका जन्म बाँदा में हुआ था। उन्होंने 'रामचरितमानस' सहित कई किताबें लिखीं, जिनमें राम की भक्ति और लोगों की भलाई की बात है।

🎯 Exam Tip: किसी भी साहित्यकार के जीवन परिचय में उनके जन्म, माता-पिता, गुरु, प्रमुख रचनाएँ और साहित्यिक योगदान को शामिल करें।

पाठ परिचय

पाठ्यक्रम में गोस्वामी तुलसीदास द्वारा रचित 'कवितावली' के 'अयोध्याकाण्ड' का अंश संकलित है। संकलित अंश में सीता व लक्ष्मण सहित श्रीराम के वन-गमन का प्रसंग अत्यन्त रोचक, सहज एवं मार्मिक रूप में चित्रित हुआ है। अयोध्या के महलों से वन-मार्ग पर चलने में सीता की जो दशा हुई, पथ पर महिलाओं ने जो उपालम्भ दिये और जो जिज्ञासा व्यक्त की, मुनिवेष में कंटकाकीर्ण वन-पथ पर चलने में जो स्थिति बनी, उन सभी प्रसंगों को इसमें चित्रात्मक तथा हृदय-स्पर्शी चित्रण सवैया छन्द में हुआ है।

सप्रसंग व्याख्याएँ

वन-गमन

सवैया (1)

पुर ते निकसी रघुबीर-बधू, धरि धीर दये मग में डग है।
झलक भरि भाल कनी जल की, पुट सूखि गए मधुराधर वै॥
फिरि बूझति है 'चलनो अब केतिक, पर्न-कुटी करिहौ कित है?"।
तिय की लखि आतुरता पिय की अँखियाँ अति चारु चलीं जल च्वै॥

कठिन शब्दार्थ-पुर = नगर, ग्राम। निकसी = निकली। डग = कदम। केतिक = कितना। कित = कहाँ। भाल = मस्तक। बूझति = पूछती है। पिय = पति। तिय = नारी। लखि = देखकर। चारु = सुन्दर। च्वै = चूना, बहना॥

प्रसंग-यह अवतरण तुलसीदास द्वारा रचित 'कवितावली' के 'अयोध्या काण्ड' के 'वन-गमन' शीर्षक से उद्धृत है। वन-मार्ग में चलने से सीता को कितनी व्याकुलता एवं परेशानी हुई, इसका इसमें अतीव भावपूर्ण चित्रण किया गया है।

व्याख्या-गोस्वामी तुलसीदास कहते हैं कि वनगमन के लिए सीता श्रीराम के साथ अयोध्या नगर से बाहर निकलीं। यद्यपि वे पैदल चलने में अनुभवहीन और वनमार्ग से अपरिचित थीं, फिर भी उन्होंने धैर्यपूर्वक दोनों कदम आगे बढ़ाये। तब वे कुछ ही कदम आगे चल पायीं कि अत्यधिक कोमलता के कारण अल्प श्रम से ही उनके मुख पर पसीने के कणः झलकने लगे और थकान व ताप के कारण उनके होंठ सूख गए। तब सीताजी ने राम से पूछा कि अभी कितना चलना है और पर्णकुटी (पत्ते की कुटिया) कहाँ बनानी है। अपनी प्रिय सीता की इस बेचैनी को देखकर पति श्रीराम की सुंदर आँखों से आँसू छलक पड़े।

विशेष-

  • (1) सीता की कोमलता एवं आतुरता का मार्मिक चित्रण हुआ है।
  • (2) वन-गमन का वर्णन भावुकतापूर्ण है।
  • (3) कोमल शब्द-चित्र एवं सवैया छन्द है।

सवैया (2)

“जल को गए लक्खन हैं लरिका, परिखौ, पिय! छाँह घरीक है ठाढ़े।
पछि पसेउ बयारि करौं, अरु पार्दै पखारिह भूभुरि डाढ़े॥
तुलसी रघुबीर प्रिया स्रम जानि कै बैठि विलंब ल कंटक काढ़े।
जानकी नाह को नेह लख्यौ, पुलको तन, वारि विलोचन बाढ़े॥”

कठिन शब्दार्थ-परिखौ = प्रतीक्षा कीजिए। घरीक = एकाध घड़ी, थोड़ी देर। पसेउ = पसीना। बयारि = हवा। पखारिहौं = पोंछूँगी, साफ करूंगी। भूभुरि = गर्म। धूल या रेत। स्रम = थकान। नाह = स्वामी। लख्यौ = देखा। विलोचन = नेत्र॥

प्रसंग-प्रस्तुत अवतरण तुलसीदास द्वारा रचित 'कवितावली' के 'अयोध्या काण्ड' के 'वन-गमन' प्रसंग से उद्धृत है। वन मार्ग में लक्ष्मण जल लेने गये, तो थकी हुई सीता ने राम से छाया में खड़े होकर लक्ष्मण की प्रतीक्षा का अनुरोध किया। तब सीता को व्यथित देखकर राम को दुःख हुआ। इसी सवैया में सीता-राम के पवित्र प्रेम की सुन्दर झलक मिलती है।

व्याख्या-वन-मार्ग पर चलते हुए सीताजी ने कहा कि हे प्रिय ! लक्ष्मण पानी लेने गये हैं, वे अभी बालक हैं, अर्थात् छोटी अवस्था होने से उन्हें वन-मार्ग में अकेला छोड़ना उचित नहीं है, इसलिए छाया में खड़े होकर एकाध घड़ी उनकी प्रतीक्षा कीजिए। तब तक मैं आपका पसीना पोंछ कर हवा कर देंगी और गर्म धूल से सने हुए आपके पैरों को पोंछूँगी या साफ करूंगी। तुलसीदासजी उस स्थिति का वर्णन करते हुए बताते हैं कि श्रीराम ने उस समय यह जान लिया कि सीता थक गई हैं, अतः वे वहीं पर बैठ गये और काफी देर तक पैर से काँटे निकालते रहे। अर्थात् पैर में काँटे न होने पर भी काँटे निकालने के बहाने काफी देर तक बैठे रहे। तब सीता ने स्वामी का अपने प्रति प्रेमपूर्ण व्यवहार देखा तो उनका शरीर पुलकित हो उठा, रोमांचित हो उठा और उनकी आँखों में आँसू उमड़ आये।

विशेष-

  • (1) लक्ष्मण की प्रतीक्षा करने और पति के पैर पोंछने के कथन से सीता को भारतीय नारी के आदर्शों से मण्डित बताया गया है।
  • (2) पैर से काँटे निकालने के बहाने श्रीराम का बैठे रहना भी पत्नी-प्रेम का व्यंजक है।

सवैया (3)

ठाढ़े हैं तो द्रुम डार गहे, धनु कांधे धरे, कर सायक लै।
विकटी भ्रकुटी बड़ी अँखियाँ, अनमोल कपोलन की छबि है।
तुलसी असि मूरति आनि हिये जड़ डारिह प्रान निछावरि कै।
स्रम-सीकर साँवरि देह लसै मनो रासि महातम तारक मै॥

व्याख्या-राम कंधे पर धनुष और हाथ में बाण लिए हुए पेड़ की झुकी हुई हरी-भरी डाल को पकड़ कर खड़े हैं। उनकी टेढ़ी भौंहों, बड़ी आँखों और गालों की अनुपम शोभा है। तुलसीदासजी कहते हैं कि राम की ऐसी मूर्ति हृदय में गड़ जाए तो मैं उस पर अपने प्राण भी न्यौछावर कर दूँ। राम के साँवले शरीर पर परिश्रम के कारण झलकी पसीने की स्वच्छ बूंदें ऐसी सुन्दर लगती हैं मानो महा अंधकार में सुन्दर तारे चमक रहे हों।

विशेष-

  • (1) कवि ने अपनी भावना के अनुसार श्रीराम के सौन्दर्य का वर्णन किया है।
  • (2) कवि-कल्पना का चमत्कार दर्शनीय है।

सवैया (4)

बनिता बनी स्यामल गौर के बीच, बिलोकहु, री सखी! मोहिं सी है।
मग जोग न, कोमल, क्यों चलि हैं? सकुचात मही पदपंकज छै॥
तुलसी सुनि ग्रामबधू बिथक, पुलकीं तन औ चले लोचन च्वै।
सब भाँति मनोहर मोहन रूप, अनूप हैं भूप के बालक द्वै॥

कठिन शब्दार्थ-बनिता = महिला, स्त्री। जोग = योग्य। मही = पृथ्वी । अनूप = उपमारहित। भूप राजा। बिथक = रुक गईं, मोहित हो गईं। अनूप = अनुपम ।

प्रसंग-प्रस्तुत अवतरण महाकवि तुलसीदास द्वारा रचित 'कवितावली' के अयोध्याकाण्ड के 'वन-गमन' प्रसंग से उद्धृत है। इसमें वन-मार्ग में नंगे पैर जा रहे श्रीराम और लक्ष्मण को देखकर कोई ग्रामवधू दूसरी से कह रही है।

व्याख्या-तुलसीदास के वर्णनानुसार कोई ग्रामवधू कहती है कि हे सखी! तुम मेरी तरह अर्थात् मानवीय संवेदना एवं नारी-हृदय की सुकोमल भावना से श्यामल और गौरवर्ण वाले राजकुमारों के बीच चलती हुई उस स्त्री अर्थात् सीता को देखो। ये लोग कठोर वनमार्ग पर चलने योग्य नहीं हैं, फिर भी पैदल ही क्यों चल रहे हैं? ये कोमल शरीर वाले हैं। धरती भी इनके चरण-कमलों का स्पर्श पाकर संकोच का अनुभव कर रही है। तुलसीदासजी ग्रामवधुओं पर हुई प्रतिक्रिया का वर्णन करते हैं कि एक सखी की ये बातें सुनकर ग्रामवधुएँ चलने वालों को देखकर मोहित हो गईं और रोमांचित हुईं। उनकी आँखों में आँसू आ गये। वे कहने लगीं कि राजा दशरथ के दोनों बालक सब प्रकार से सुन्दर और आकर्षक रूप वाले हैं। इनकी अन्य कोई उपमा नहीं हो सकती।

विशेष-

  • (1) नारी-हृदय की कोमलता, करुणा तथा मानवीय सहानुभूति की व्यंजना हुई है।
  • (2) वन-मार्ग में मिली ग्रामवधुओं का शब्द-चित्र आकर्षक है।

सवैया (5)

कठिन शब्दार्थ-मैन = कामदेव। निषंग = तरकश, तूणीर। विधु = चन्द्रमा। बैनी। = वचने वाली। रति = कामदेव की पत्नी। रंचक = कुछ कम। पनहीं = जूती। पयोदेहिं = पैदल ।

प्रसंग-प्रस्तुत अवतरण गोस्वामी तुलसीदास द्वारा रचित 'कवितावली' के 'वनगमन' प्रसंग से उद्धृत है। इसमें कवि ने वर्णन किया है कि ग्रामवधुएँ वनमार्ग में जाते हुए श्रीराम, लक्ष्मण एवं सीता के सौन्दर्य और उनको पैदल चलते देखकर संकोच को व्यक्त कर रही हैं।

व्याख्या-गोस्वामी तुलसीदास के वर्णनानुसार ग्रामवधुएँ आपस में कहती हैं कि राम साँवले और लक्ष्मण गौर वर्ण के हैं, इनका स्वभाव सुहावना है। अपने सौन्दर्य से इन्होंने मानो कामदेव को भी जीत लिया है। बाण, धनुष और तरकश लिए हुए ये अपनी जटाओं के कारण सुन्दर लगते हैं। इन्होंने मुनियों का-सा वेष बना रखा है। इनके साथ में चन्द्रमा के समान मुख और मधुर बोलने वाली बहू है जो इतनी सुन्दर है मानो कामदेव की पत्नी रति का सौन्दर्य तो उसके सौन्दर्य के एक छोटे से भाग से बना है। वनमार्ग पर चलते हुए इनके पैरों में जूते नहीं हैं। फिर ये कोमल चरणों वाले राजकुमार पैदल ही क्यों चल रहे हैं- यह सोचकर हृदय उनका हृदय भर आया।

विशेष-

  • (1) वन-मार्ग पर पैदल नंगे पैर चलते हुए राम-लक्ष्मण, सीता को देखकर ग्रामवधुओं की संवेदना का वर्णन किया गया है।
  • (2) रूप-सौन्दर्य को शब्द-चित्र सुन्दर बन पड़ा है।

सवैया (6)

रानी मैं जानी अजानी महा, पबि पाहन हैं ते कठोर हियो है।
राजहु काज अकाज न जान्यो, कह्यो तिय को जिन कान कियो है।
ऐसी मनोहर मूरति ये, बिछुरे कैसे प्रीतम लोग जियो है?
आँखिन में, सखि! राखिबे जोग, इन्हें किमि कै बनबास दियो है।

कठिन शब्दार्थ-अजानी = अज्ञानी। पवि = इन्द्र का अस्त्र, वज्र। पाहन = पत्थर। राजेहु = राजा ने भी। काज अकाज = कार्य-अकार्य। कह्यो = कथन, बात॥ तिय = पत्नी। प्रीतम = प्रियतम्। किमि = कैसे, क्यों।

प्रसंग-प्रस्तुत अवतरण गोस्वामी तुलसीदास द्वारा रचित 'कवितावली' के 'वन-गमन' प्रसंग से उद्धृत है। श्रीराम को वनमार्ग पर जाते देखकर ग्रामवधुएँ अपनी जो दुःखपूर्ण प्रतिक्रिया व्यक्त करने लगीं, इसमें उसी का वर्णन किया गया है।

व्याख्या-ग्रामवधुओं में से एक कहने लगी कि मुझे तो रानी कैकेयी बहुत अज्ञानी प्रतीत होती है। उसका हृदय तो इन्द्र के अस्त्र वज्र और पत्थर से भी कठोर है। राजा दशरथ ने भी नहीं जाना कि कौन-सा कार्य करने योग्य है और कौनसा करने योग्य नहीं है। उन्होंने भी कमजोर स्वभाव की पत्नी की बात मानकर अर्थात् उसके कहने पर इन्हें वन में भेज दिया है। ऐसी सुन्दर मूर्तियों से बिछुड़ने पर इनके प्रिय लोग भला कैसे जीवित रहेंगे? आशय यह है कि ये बहुत सुन्दर हैं। जिन्हें ये प्रिय हैं वे इनसे अलग होने पर कैसे जीवित रह पाएँगे। वे तो बहुत दुःखी होंगे। हे सखी! ये वन भेजने के नहीं, आँखों में बसा लेने योग्य हैं। इन्हें वनवास जैसा कष्ट क्यों दिया गया है?

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