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RBSE Class 11 Economics Chapter 9 वस्तुनिष्ठ प्रश्न
Question 1. ऐसे तथ्य जिन्हें संख्या में व्यक्त नहीं किया जा सकता उनके लिए सर्वोत्तम माध्य है
(अ) समान्तर माध्य
(ब) मध्यका
(स) बहुलक
(द) हरात्मक माध्य
Answer: (ब) मध्यका
In simple words: जिन चीज़ों को हम संख्याओं में नहीं बता सकते, जैसे किसी की खुशी या दुख, उनके लिए 'मध्यका' सबसे अच्छा तरीका है बीच का माप निकालने का. यह हमें ऐसे डेटा का भी एक औसत अंदाज़ा देता है जिसे सीधे गिना नहीं जा सकता.
🎯 Exam Tip: गुणात्मक तथ्यों (जो संख्या में व्यक्त न हों) के लिए हमेशा मध्यका का चुनाव करें क्योंकि यह उनके बीच की स्थिति बताता है, जबकि समान्तर माध्य और हरात्मक माध्य संख्याओं पर आधारित होते हैं.
Question 2. निम्न श्रेणी में मध्यका है-8, 11, 12, 13, 15,18
Answer: दी गई श्रेणी पहले से ही आरोही क्रम (बढ़ते हुए क्रम) में है: 8, 11, 12, 13, 15, 18. यहाँ कुल 6 पद हैं, जो एक सम संख्या है. मध्यका ज्ञात करने के लिए, हम बीच के दो पदों का औसत लेते हैं. बीच के दो पद 12 और 13 हैं. अतः, मध्यका \( = \frac{12 + 13}{2} = \frac{25}{2} = 12.5 \). जब डेटा पहले से क्रम में हो और पदों की संख्या सम हो, तो मध्यका बीच के दो पदों का औसत होता है.
In simple words: जब संख्याएँ पहले से लाइन में हों और उनकी गिनती बराबर हो, तो बीच की दो संख्याओं को जोड़कर आधा कर दो. वही मध्यका होती है. इस लिस्ट में, 12 और 13 बीच में हैं, तो मध्यका 12.5 है.
🎯 Exam Tip: मध्यका निकालने से पहले हमेशा डेटा को आरोही या अवरोही क्रम में व्यवस्थित करें, और फिर पदों की संख्या (N) सम या विषम देखकर सही सूत्र का प्रयोग करें.
Question 3. श्रेणी के चार बराबर भागों में बाँटने वाले मूल्य को कहते हैं
(अ) औसत
(ब) मध्यका
(स) चतुर्थक
(द) पंचमक
Answer: (स) चतुर्थक
In simple words: जब आप डेटा की एक लिस्ट को चार बराबर टुकड़ों में बाँटते हैं, तो जो वैल्यू उसे बाँटती है उसे चतुर्थक कहते हैं. यह डेटा को अलग-अलग हिस्सों में देखने में मदद करता है.
🎯 Exam Tip: याद रखें, मध्यका श्रेणी को दो भागों में बांटती है, चतुर्थक चार भागों में, दशमक दस भागों में और शतमक सौ भागों में बांटता है.
Question 4. किसी श्रेणी के दूसरे चतुर्थक को कहते हैं
(अ) निम्न चतुर्थक
(ब) उच्च चतुर्थक
(स) माध्य
(द) मध्यका
Answer: (द) मध्यका
In simple words: दूसरा चतुर्थक ठीक बीच की वैल्यू होती है, जो डेटा को दो बराबर हिस्सों में बांटती है. यही मध्यका का काम भी है, इसलिए ये दोनों एक ही चीज़ हैं.
🎯 Exam Tip: चतुर्थक \( Q_1 \) (निचला चतुर्थक) 25% डेटा को नीचे रखता है, \( Q_2 \) (मध्यका) 50% डेटा को नीचे रखता है, और \( Q_3 \) (ऊपरी चतुर्थक) 75% डेटा को नीचे रखता है. इस संबंध को हमेशा याद रखें.
Question 5. यदि बहुलक 18 तथा समान्तर माध्य 20 है तो मध्यका होगी
(अ) 29.33
(ब) 19.33
(स) 18.66
(द) 9.33
Answer: (ब) 19.33
In simple words: बहुलक, समान्तर माध्य और मध्यका के बीच एक खास रिश्ता होता है. अगर बहुलक 18 है और समान्तर माध्य 20 है, तो हम एक सूत्र से मध्यका निकाल सकते हैं जो 19.33 आएगी.
🎯 Exam Tip: यह प्रश्न बहुलक, मध्यका और समान्तर माध्य के बीच अनुभवजन्य संबंध (Empirical Relationship) पर आधारित है: बहुलक \( = 3 \times \) मध्यका \( - 2 \times \) समान्तर माध्य. इस सूत्र का उपयोग करके आप दिए गए मानों से अज्ञात माध्य की गणना कर सकते हैं.
RBSE Class 11 Economics Chapter 9 अतिलघूत्तरात्मक प्रश्न
Question 3. मध्यका का प्रयोग कब श्रेष्ठ रहता है?
Answer: जब जानकारी गुणात्मक प्रकार की होती है, तब मध्यका का उपयोग सबसे अच्छा होता है. जैसे, किसी व्यक्ति की ईमानदारी या खुशी को संख्या में नहीं मापा जा सकता, वहाँ मध्यका काम आती है. यह ऐसी जानकारी का एक बेहतर केंद्रीय बिंदु देती है जिसे मापना मुश्किल हो.
In simple words: जब डेटा संख्याओं में नहीं होता, बल्कि गुणों के बारे में होता है, तब मध्यका का इस्तेमाल करना सबसे अच्छा होता है.
🎯 Exam Tip: गुणात्मक तथ्यों (जैसे रंग, धर्म, ग्रेड) के लिए समान्तर माध्य और बहुलक अक्सर अनुपयुक्त होते हैं, जबकि मध्यका इन मामलों में उपयोगी होती है, खासकर जब डेटा को क्रम में रखा जा सके.
Question 4. खुले सिरे वाले वर्गान्तरों के लिए कौन-से अधिक उपयुक्त माध्य हैं?
Answer: खुले सिरे वाले वर्गान्तरों के लिए मध्यका अधिक उपयुक्त माध्य है. खुले सिरे वाले वर्गान्तर वे होते हैं जहाँ श्रेणी का पहला या अंतिम वर्ग खुला होता है (जैसे '10 से कम' या '50 से अधिक'). ऐसे मामलों में समान्तर माध्य की गणना मुश्किल हो जाती है क्योंकि हम मध्य बिंदु तय नहीं कर पाते, लेकिन मध्यका को इससे फर्क नहीं पड़ता.
In simple words: जब डेटा में पहला या आखिरी ग्रुप पूरा न हो (जैसे 'से कम' या 'से ज़्यादा'), तब मध्यका का इस्तेमाल करना सबसे सही होता है.
🎯 Exam Tip: खुले सिरे वाली श्रेणियों में मध्यका और बहुलक की गणना संभव होती है, जबकि समान्तर माध्य की गणना तब तक नहीं की जा सकती जब तक खुले सिरे वाले वर्गान्तराल का अनुमान न लगाया जाए.
Question 5. विभाजन मूल्यों से आप क्या समझते हैं?
Answer: विभाजन मूल्य वे मान होते हैं जो किसी डेटा श्रेणी को कई बराबर हिस्सों में बांटते हैं. उदाहरण के लिए, मध्यका डेटा को दो बराबर हिस्सों में बांटती है, चतुर्थक चार हिस्सों में, पंचमक पांच हिस्सों में, और दशमक दस हिस्सों में. ये मूल्य डेटा के वितरण को समझने में मदद करते हैं, यह दिखाते हैं कि डेटा कैसे फैला हुआ है.
In simple words: विभाजन मूल्य वे संख्याएँ होती हैं जो डेटा की एक लिस्ट को बराबर-बराबर टुकड़ों में बाँट देती हैं. जैसे मध्यका दो टुकड़ों में बाँटती है.
🎯 Exam Tip: विभाजन मूल्यों का उपयोग अक्सर डेटा के वितरण (जैसे आय असमानता) का विश्लेषण करने के लिए किया जाता है, क्योंकि वे डेटा को छोटे, प्रबंधनीय खंडों में विभाजित करते हैं.
RBSE Class 11 Economics Chapter 9 लघूत्तरात्मक प्रश्न
Question 1. यदि चार अवलोकनों 3, 4, ग तथा 8 का मध्यका मूल्य 5 है, तो ग का मान निकालिए।
Answer:
दिए गए अवलोकन हैं: 3, 4, ग, 8.
इन्हें आरोही क्रम में व्यवस्थित करने पर, हम मान लेते हैं कि 'ग' का मान 4 और 8 के बीच है.
व्यवस्थित क्रम: 3, 4, ग, 8
पदों की संख्या \( N = 4 \) (सम संख्या).
मध्यका \( M = \frac{\left( \frac{N}{2} \right)\text{वाँ पद} + \left( \frac{N}{2} + 1 \right)\text{वाँ पद}}{2} \)
\( \implies M = \frac{\text{2वाँ पद} + \text{3वाँ पद}}{2} \)
हमें दिया गया है कि मध्यका \( M = 5 \).
तो, \( 5 = \frac{4 + \text{ग}}{2} \)
\( \implies 5 \times 2 = 4 + \text{ग} \)
\( \implies 10 = 4 + \text{ग} \)
\( \implies \text{ग} = 10 - 4 \)
\( \implies \text{ग} = 6 \)
इस प्रकार, अज्ञात मान 'ग' 6 है. यह मान 4 और 8 के बीच में है, जो हमारी प्रारंभिक धारणा को सही साबित करता है.
In simple words: हमारे पास कुछ संख्याएँ हैं जिनमें एक गायब है, और हमें बीच की संख्या (मध्यका) पता है. क्योंकि कुल 4 संख्याएँ हैं, बीच की दो संख्याओं (4 और ग) का औसत 5 होना चाहिए. जब हम इसे हल करते हैं, तो गायब संख्या 'ग' 6 निकलती है.
🎯 Exam Tip: ऐसे प्रश्नों में, पहले डेटा को आरोही क्रम में व्यवस्थित करने की कोशिश करें और सुनिश्चित करें कि अज्ञात मान उस क्रम में उचित स्थान पर है. यदि पदों की संख्या सम है, तो बीच के दो पदों का औसत मध्यका होता है.
Question 2. मध्यका ज्ञात करने के लिए खण्डित श्रेणी में \( \frac {N+1}{2} \) तथा सतत श्रेणी में \( \frac {N}{2} \) का प्रयोग किया जाता है। क्यों?
Answer:
खण्डित श्रेणी में, पद अलग-अलग होते हैं और गिनने योग्य होते हैं. इसलिए हम पदों की संख्या \( N \) में 1 जोड़कर 2 से भाग देते हैं, ताकि हमें मध्यका का ठीक-ठीक स्थान मिल सके \( \left( \frac{N+1}{2} \right) \). यह विधि हमें बताती है कि मध्यका किस पद पर स्थित होगी, खासकर जब पदों की संख्या विषम हो. यदि पदों की संख्या सम हो, तो भी यह विधि हमें बीच के दो पदों के ठीक बीच का मान देती है, जो उन दो पदों का औसत निकालने में मदद करता है.
सतत श्रेणी में, डेटा वर्गान्तरालों में होता है और हम हर एक पद को व्यक्तिगत रूप से नहीं गिनते. इसलिए, मध्यका का स्थान ज्ञात करने के लिए कुल आवृत्ति \( N \) को सीधा 2 से भाग दिया जाता है \( \left( \frac{N}{2} \right) \). यह हमें वह बिंदु देता है जहाँ से श्रेणी को दो बराबर हिस्सों में बांटा जाता है, और फिर उस वर्गान्तर में मध्यका की वास्तविक गणना की जाती है. सतत श्रेणी में, \( \frac{N}{2} \) पद का मूल्य ही मध्यका वर्ग की पहचान के लिए उपयोग किया जाता है. इससे यह सुनिश्चित होता है कि दोनों स्थितियों (आरोही और अवरोही क्रम) में मध्यका का मान समान आए. संचयी आवृत्ति वक्र (ओजाइव) से मध्यका निर्धारित करने के लिए भी \( \frac{N}{2} \) का प्रयोग केंद्र बिंदु के रूप में होता है.
In simple words: खण्डित श्रेणी में \( \frac{N+1}{2} \) इसलिए लगाते हैं क्योंकि हम गिनकर सही जगह पता करते हैं. सतत श्रेणी में \( \frac{N}{2} \) इसलिए लगाते हैं क्योंकि डेटा ग्रुप्स में होता है, और हम बीच का ग्रुप पहचानते हैं जहाँ मध्यका होगी.
🎯 Exam Tip: खण्डित श्रेणी (discrete series) और व्यक्तिगत श्रेणी (individual series) में मध्यका का स्थान \( \left( \frac{N+1}{2} \right)\text{वाँ पद} \) होता है, जबकि सतत श्रेणी (continuous series) में मध्यका वर्ग की पहचान के लिए \( \frac{N}{2}\text{वाँ पद} \) का उपयोग किया जाता है.
Question 3. यदि समान्तर माध्य 75 तथा बहुलक 60 है, तो मध्यका का मूल्य ज्ञात करो।
Answer:
बहुलक, मध्यका और समान्तर माध्य के बीच अनुभवजन्य संबंध (Empirical Relationship) का सूत्र है:
बहुलक \( Z = 3 \times \) मध्यका \( M - 2 \times \) समान्तर माध्य \( \overline{X} \)
हमें दिया गया है:
बहुलक \( Z = 60 \)
समान्तर माध्य \( \overline{X} = 75 \)
इन मानों को सूत्र में रखने पर:
\( 60 = 3M - 2 \times 75 \)
\( \implies 60 = 3M - 150 \)
अब, 150 को समीकरण के दूसरी ओर ले जाने पर:
\( 60 + 150 = 3M \)
\( \implies 210 = 3M \)
मध्यका \( M \) ज्ञात करने के लिए, 210 को 3 से भाग दें:
\( M = \frac{210}{3} \)
\( \implies M = 70 \)
तो, मध्यका का मूल्य 70 है.
In simple words: बहुलक, मध्यका और औसत (समान्तर माध्य) एक सूत्र से जुड़े होते हैं. अगर बहुलक 60 है और औसत 75 है, तो सूत्र का इस्तेमाल करके हमें मध्यका 70 मिलती है.
🎯 Exam Tip: यह सूत्र तब उपयोगी होता है जब आपको तीन केंद्रीय प्रवृत्ति के मापों में से दो ज्ञात हों और तीसरे की गणना करनी हो. यह विशेष रूप से असममित वितरणों में एक अच्छा अनुमान देता है.
Question 4. मध्यका के कोई चार लाभ बताइए।
Answer: मध्यका के चार प्रमुख लाभ इस प्रकार हैं:
1. **गणना में सरलता:** मध्यका की गणना करना बहुत आसान होता है. बस डेटा को क्रम में लगाएं और बीच का मान ढूंढें. यह आंकड़ों के जटिल विश्लेषण में एक सरल शुरुआती बिंदु प्रदान करता है.
2. **चरम मूल्यों से अप्रभावित:** मध्यका पर श्रेणी के सबसे छोटे या सबसे बड़े मूल्यों (चरम मूल्यों) का बहुत कम प्रभाव पड़ता है. यह समान्तर माध्य से अलग है, जो ऐसे मूल्यों से बहुत अधिक प्रभावित हो सकता है.
3. **गुणात्मक तथ्यों में उपयुक्त:** मध्यका का उपयोग उन गुणों या विशेषताओं को मापने के लिए किया जा सकता है जिन्हें संख्याओं में व्यक्त नहीं किया जा सकता, जैसे 'बुद्धिमत्ता का स्तर' या 'खुशी'.
4. **निश्चित एवं स्पष्ट:** मध्यका का मान हमेशा निश्चित होता है और उसे आसानी से समझा जा सकता है. यह बहुलक से अलग है, जिसमें कभी-कभी एक से अधिक बहुलक हो सकते हैं या कोई बहुलक नहीं भी हो सकता है.
In simple words: मध्यका को निकालना आसान है. यह सबसे छोटे-बड़े नंबरों से ज़्यादा प्रभावित नहीं होती. यह उन चीज़ों के लिए अच्छी है जिन्हें नंबरों में नहीं बता सकते, और इसका मान हमेशा तय होता है.
🎯 Exam Tip: मध्यका की गणना में डेटा को हमेशा आरोही या अवरोही क्रम में व्यवस्थित करना अनिवार्य होता है, यह इसके गुणों और उपयोगिता की कुंजी है.
Question 5. सतत श्रेणी में \( \{Q}_{1} \) तथा \( \{Q}_{3} \) ज्ञात करने के सूत्र लिखिए।
Answer: सतत श्रेणी (Continuous Series) में प्रथम चतुर्थक \( Q_1 \) और तृतीय चतुर्थक \( Q_3 \) ज्ञात करने के लिए निम्नलिखित सूत्रों का प्रयोग किया जाता है. ये सूत्र पहले चतुर्थक वर्ग की पहचान करते हैं और फिर उस वर्ग के भीतर मान की गणना करते हैं:
**प्रथम चतुर्थक \( Q_1 \) का सूत्र:**
\( Q_1 = L_1 + \frac{\frac{N}{4} - C}{f} \times i \)
**तृतीय चतुर्थक \( Q_3 \) का सूत्र:**
\( Q_3 = L_1 + \frac{\frac{3N}{4} - C}{f} \times i \)
जहाँ,
\( L_1 \) = चतुर्थक वर्ग की निम्न सीमा (Lower limit of the quartile class)
\( \frac{N}{4} \) = प्रथम चतुर्थक का स्थान (Position of first quartile)
\( \frac{3N}{4} \) = तृतीय चतुर्थक का स्थान (Position of third quartile)
\( C \) = चतुर्थक वर्ग से ठीक पहले वाले वर्ग की संचयी आवृत्ति (Cumulative frequency of the class preceding the quartile class)
\( f \) = चतुर्थक वर्ग की आवृत्ति (Frequency of the quartile class)
\( i \) = चतुर्थक वर्ग का वर्ग-विस्तार (Class interval of the quartile class)
यह सूत्र हमें सतत श्रेणी में डेटा के वितरण के 25% और 75% बिंदुओं को सटीक रूप से मापने में मदद करते हैं.
In simple words: सतत डेटा में, \( Q_1 \) और \( Q_3 \) निकालने के लिए खास सूत्र होते हैं. इन सूत्रों में हमें सबसे पहले \( N/4 \) या \( 3N/4 \) से यह पता करना होता है कि हमारा चतुर्थक किस ग्रुप में है. फिर उस ग्रुप की निचली सीमा, उसकी आवृत्ति और पहले वाले ग्रुप की कुल आवृत्ति का इस्तेमाल करके सही नंबर निकालते हैं.
🎯 Exam Tip: सतत श्रेणी में चतुर्थक ज्ञात करते समय, पहले चतुर्थक वर्ग को सही ढंग से पहचानना महत्वपूर्ण है, जिसके लिए संचयी आवृत्ति की गणना अनिवार्य है. सूत्र में प्रत्येक घटक का सही मान रखना सुनिश्चित करें.
RBSE Class 11 Economics Chapter 9 निबन्धात्मक प्रश्न
Question 1. निम्न सारणी से बहुलक एवं मध्यका ज्ञात कीजिए
| वर्गान्तर | आवृत्ति |
|---|---|
| 0-10 | 10 |
| 10-20 | 3 |
| 20-30 | 7 |
| 30-40 | 15 |
| 40-50 | 5 |
Answer: **मध्यका की गणना:**
सबसे पहले, हमें संचयी आवृत्ति (Cumulative Frequency) की गणना करनी होगी.
| वर्गान्तर | आवृत्ति (f) | संचयी आवृत्ति (cf) |
|---|---|---|
| 0-10 | 10 | 10 |
| 10-20 | 3 | 13 |
| 20-30 | 7 | 20 |
| 30-40 | 15 | 35 |
| 40-50 | 5 | 40 |
कुल आवृत्ति \( N = 40 \).
मध्यका संख्या \( = \frac{N}{2}\text{वाँ पद} = \frac{40}{2}\text{वाँ पद} = 20\text{वाँ पद} \)
20वाँ पद संचयी आवृत्ति 20 में शामिल है. इसलिए, मध्यका वर्ग 20-30 है.
यहाँ, \( L_1 = 20 \), \( C = 13 \) (मध्यका वर्ग से पहले की संचयी आवृत्ति), \( f = 7 \) (मध्यका वर्ग की आवृत्ति), \( i = 10 \) (वर्ग-विस्तार).
मध्यका \( M = L_1 + \frac{\frac{N}{2} - C}{f} \times i \)
\( M = 20 + \frac{20 - 13}{7} \times 10 \)
\( M = 20 + \frac{7}{7} \times 10 \)
\( M = 20 + 1 \times 10 \)
\( M = 20 + 10 \)
\( M = 30 \)
**बहुलक की गणना:**
इस सारणी में, सबसे अधिक आवृत्ति 15 है, जो वर्गान्तर 30-40 में है. इसलिए, बहुलक वर्ग 30-40 है.
यहाँ, \( L_1 = 30 \), \( f_1 = 15 \) (बहुलक वर्ग की आवृत्ति), \( f_0 = 7 \) (बहुलक वर्ग से पहले की आवृत्ति), \( f_2 = 5 \) (बहुलक वर्ग के बाद की आवृत्ति), \( i = 10 \) (वर्ग-विस्तार).
बहुलक \( Z = L_1 + \frac{f_1 - f_0}{2f_1 - f_0 - f_2} \times i \)
\( Z = 30 + \frac{15 - 7}{2 \times 15 - 7 - 5} \times 10 \)
\( Z = 30 + \frac{8}{30 - 12} \times 10 \)
\( Z = 30 + \frac{8}{18} \times 10 \)
\( Z = 30 + \frac{80}{18} \)
\( Z = 30 + 4.44 \)
\( Z = 34.44 \)
अतः, मध्यका 30 और बहुलक 34.44 है. बहुलक वह मान होता है जो श्रेणी में सबसे अधिक बार आता है.
In simple words: पहले हम कुल आवृत्तियाँ जोड़कर मध्यका की जगह पता करते हैं. फिर उस जगह के ग्रुप का इस्तेमाल करके मध्यका निकालते हैं, जो 30 आती है. बहुलक के लिए, हम सबसे ज़्यादा बार आने वाली संख्या का ग्रुप देखते हैं और फिर सूत्र लगाकर उसे निकालते हैं, जो 34.44 आता है.
🎯 Exam Tip: मध्यका और बहुलक की गणना करते समय, सतत श्रेणी में वर्गान्तरों को ध्यान से देखें. मध्यका के लिए संचयी आवृत्ति और बहुलक के लिए सबसे बड़ी आवृत्ति वाले वर्ग की पहचान सही होनी चाहिए.
Question 2. निम्न समंकमाला से प्रथम चतुर्थक \( (Q_1) \), तृतीय चतुर्थक \( (Q_3) \) तथा मध्यका \( (M) \) की गणना करो
| आकार | आवृत्ति f | cf |
|---|---|---|
| 10.5-15.5 | 7 | 7 |
| 15.5-20.5 | 10 | 17 |
| 20.5-25.5 | 13 | 30 |
| 25.5-30.5 | 26 | 56 |
| 30.5-35.5 | 35 | 91 |
| 35.5-40.5 | 22 | 113 |
| 40.5-45.5 | 11 | 124 |
| 45.5-50.5 | 5 | 129 |
Answer: **प्रथम चतुर्थक \( (Q_1) \) की गणना:**
कुल आवृत्ति \( N = 129 \).
प्रथम चतुर्थक का स्थान \( Q_1 = \frac{N}{4}\text{वाँ पद} = \frac{129}{4}\text{वाँ पद} = 32.25\text{वाँ पद} \)
32.25वाँ पद संचयी आवृत्ति 56 में शामिल है, जिसका वर्गान्तर 25.5-30.5 है. अतः, \( Q_1 \) वर्ग 25.5-30.5 है.
यहाँ, \( L_1 = 25.5 \), \( C = 30 \), \( f = 26 \), \( i = 5 \).
\( Q_1 = L_1 + \frac{\frac{N}{4} - C}{f} \times i \)
\( Q_1 = 25.5 + \frac{32.25 - 30}{26} \times 5 \)
\( Q_1 = 25.5 + \frac{2.25}{26} \times 5 \)
\( Q_1 = 25.5 + 0.0865 \times 5 \)
\( Q_1 = 25.5 + 0.4325 \)
\( Q_1 \approx 25.93 \)
**तृतीय चतुर्थक \( (Q_3) \) की गणना:**
तृतीय चतुर्थक का स्थान \( Q_3 = \frac{3N}{4}\text{वाँ पद} = \frac{3 \times 129}{4}\text{वाँ पद} = \frac{387}{4}\text{वाँ पद} = 96.75\text{वाँ पद} \)
96.75वाँ पद संचयी आवृत्ति 113 में शामिल है, जिसका वर्गान्तर 35.5-40.5 है. अतः, \( Q_3 \) वर्ग 35.5-40.5 है.
यहाँ, \( L_1 = 35.5 \), \( C = 91 \), \( f = 22 \), \( i = 5 \).
\( Q_3 = L_1 + \frac{\frac{3N}{4} - C}{f} \times i \)
\( Q_3 = 35.5 + \frac{96.75 - 91}{22} \times 5 \)
\( Q_3 = 35.5 + \frac{5.75}{22} \times 5 \)
\( Q_3 = 35.5 + 0.2614 \times 5 \)
\( Q_3 = 35.5 + 1.307 \)
\( Q_3 \approx 36.81 \)
**मध्यका \( (M) \) की गणना:**
मध्यका का स्थान \( M = \frac{N}{2}\text{वाँ पद} = \frac{129}{2}\text{वाँ पद} = 64.5\text{वाँ पद} \)
64.5वाँ पद संचयी आवृत्ति 91 में शामिल है, जिसका वर्गान्तर 30.5-35.5 है. अतः, मध्यका वर्ग 30.5-35.5 है.
यहाँ, \( L_1 = 30.5 \), \( C = 56 \), \( f = 35 \), \( i = 5 \).
\( M = L_1 + \frac{\frac{N}{2} - C}{f} \times i \)
\( M = 30.5 + \frac{64.5 - 56}{35} \times 5 \)
\( M = 30.5 + \frac{8.5}{35} \times 5 \)
\( M = 30.5 + 0.2428 \times 5 \)
\( M = 30.5 + 1.214 \)
\( M \approx 31.71 \)
इस प्रकार, प्रथम चतुर्थक \( Q_1 \approx 25.93 \), तृतीय चतुर्थक \( Q_3 \approx 36.81 \) और मध्यका \( M \approx 31.71 \) है. इन गणनाओं से हमें डेटा के वितरण और केंद्रीय प्रवृत्ति की पूरी जानकारी मिलती है.
In simple words: इस डेटा के लिए, पहले हम \( Q_1 \) की जगह निकालते हैं, जो 32.25वाँ पद है, और फिर उसका मान 25.93 आता है. फिर \( Q_3 \) की जगह 96.75वाँ पद आती है और उसका मान 36.81 आता है. आखिर में, मध्यका की जगह 64.5वाँ पद है और उसका मान 31.71 आता है.
🎯 Exam Tip: चतुर्थक और मध्यका की गणना करते समय, संचयी आवृत्ति की सही गणना और चतुर्थक/मध्यका वर्ग की सही पहचान अत्यंत महत्वपूर्ण है. सूत्र में सभी मानों को ध्यान से रखें.
Question 3. केन्द्रीय प्रवृत्ति के महत्वपूर्ण मापों ओर उनके गुण व दोषों का आलोचनात्मक विवरण दीजिए।
Answer: केन्द्रीय प्रवृत्ति के महत्वपूर्ण माप वे सांख्यिकीय उपकरण हैं जो डेटा सेट के केंद्र को दर्शाते हैं. इनमें मुख्य रूप से समान्तर माध्य (Arithmetic Mean), मध्यका (Median) और बहुलक (Mode) शामिल हैं. इनका उपयोग डेटा को संक्षेप में समझने और उसकी विशेषताओं को दर्शाने के लिए किया जाता है.
**(1) समान्तर माध्य (Arithmetic Mean)**
**परिचय:** समान्तर माध्य या मध्यक सबसे आम और लोकप्रिय गणितीय माध्य है. यह सभी अवलोकनों के योग को उनकी संख्या से भाग देकर प्राप्त किया जाता है.
**गुण:**
* **सरल एवं बुद्धिगम्य:** इसकी गणना करना सरल है और इसे समझना आसान है.
* **सभी मूल्यों पर आधारित:** यह श्रेणी के सभी मानों पर आधारित होता है, जिससे यह डेटा का अच्छा प्रतिनिधित्व करता है.
* **निश्चित एवं स्पष्ट:** इसका मान हमेशा निश्चित होता है और इसे आसानी से समझा जा सकता है.
* **बीजगणितीय विवेचन सम्भव:** बीजगणितीय क्रियाओं में इसका उपयोग किया जा सकता है. जैसे, समान्तर माध्य से विचलनों का योग शून्य होता है.
* **निदर्शन के परिवर्तनों का न्यूनतम प्रभाव:** नमूने के चयन में छोटे-मोटे बदलावों का इस पर कम प्रभाव पड़ता है, जिससे यह अधिक स्थिर होता है.
**दोष:**
* **चरम मूल्यों का अधिक प्रभाव:** चरम मान (बहुत छोटे या बहुत बड़े मान) समान्तर माध्य को बहुत अधिक प्रभावित करते हैं, जिससे यह डेटा का सही प्रतिनिधित्व नहीं कर पाता.
* **गुणात्मक तथ्यों में अनुपयुक्त:** इसे गुणात्मक डेटा (जो संख्या में व्यक्त न हों) पर लागू नहीं किया जा सकता.
* **खुले सिरे वाली श्रेणी में गणना कठिन:** खुले सिरे वाले वर्गान्तरों में इसकी गणना करना मुश्किल होता है क्योंकि मध्य बिंदु तय नहीं हो पाते.
* **कभी-कभी अवास्तविक:** इसका मान कभी-कभी ऐसा हो सकता है जो डेटा सेट में मौजूद ही न हो (जैसे, 3.67 जूते का आकार).
**(2) बहुलक (Mode)**
**परिचय:** बहुलक वह मूल्य है जो किसी डेटा श्रेणी में सबसे अधिक बार आता है या जिसकी आवृत्ति सबसे अधिक होती है. यह सबसे आम या प्रचलित मूल्य को दर्शाता है.
**गुण:**
* **सरल व लोकप्रिय:** बहुलक को अक्सर निरीक्षण द्वारा ही पहचाना जा सकता है, जिससे इसकी गणना बहुत सरल हो जाती है. यह दैनिक जीवन में बहुत लोकप्रिय है (जैसे, कपड़ों का सबसे ज़्यादा बिकने वाला आकार).
* **चरम मूल्यों का न्यूनतम प्रभाव:** बहुलक पर श्रेणी के चरम मूल्यों का प्रभाव नहीं पड़ता. यह उन मूल्यों को अनदेखा करता है जो बहुत छोटे या बहुत बड़े हैं.
* **गुणात्मक तथ्यों में उपयुक्त:** यह गुणात्मक डेटा (जैसे किसी सर्वेक्षण में सबसे पसंदीदा रंग) के लिए भी उपयोगी है, जहाँ डेटा को संख्याओं में व्यक्त करना संभव नहीं होता.
* **बिन्दुरेखीय रीति द्वारा निर्धारण:** बहुलक को आवृत्ति आयतचित्र (Histogram) की मदद से ग्राफिक रूप से भी निर्धारित किया जा सकता है, जिससे इसका दृश्य प्रतिनिधित्व आसान हो जाता है.
**दोष:**
* **निश्चितता का अभाव:** कभी-कभी एक श्रेणी में एक से अधिक बहुलक हो सकते हैं (द्विबहुलकीय या बहुबहुलकीय), या कोई बहुलक नहीं भी हो सकता है, जिससे इसकी निश्चितता कम हो जाती है.
* **सभी मूल्यों पर आधारित नहीं:** यह श्रेणी के सभी मानों पर आधारित नहीं होता, केवल सबसे अधिक आवृत्ति वाले मानों पर ध्यान केंद्रित करता है.
* **बीजगणितीय विवेचन का अभाव:** बहुलक का उपयोग बीजगणितीय क्रियाओं में नहीं किया जा सकता, जिससे सांख्यिकीय विश्लेषण में इसकी सीमाएँ होती हैं.
* **स्थिरता का अभाव:** नमूने के चयन में छोटे-मोटे बदलावों से बहुलक का मान काफी बदल सकता है, जिससे यह कम स्थिर होता है.
**(3) माध्यिका (Median)**
**परिचय:** माध्यिका वह केंद्रीय मान है जो डेटा को आरोही या अवरोही क्रम में व्यवस्थित करने के बाद श्रेणी को दो बराबर हिस्सों में बांटता है, जहाँ एक ओर सभी मान उससे कम और दूसरी ओर सभी मान उससे अधिक होते हैं.
**गुण:**
* **गणना में सरलता:** इसकी गणना करना अपेक्षाकृत सरल है, खासकर व्यक्तिगत और खण्डित श्रेणियों में.
* **निश्चितता व स्पष्टता:** मध्यका का मान हमेशा निश्चित और स्पष्ट होता है, बहुलक की तरह अनिश्चित नहीं.
* **चरम मूल्यों का कम प्रभाव:** मध्यका चरम मूल्यों से बहुत कम प्रभावित होती है, क्योंकि यह केवल केंद्रीय स्थिति पर केंद्रित होती है, न कि मानों के परिमाण पर.
* **गुणात्मक तथ्यों में उपयुक्त:** इसे गुणात्मक डेटा के लिए भी प्रयोग किया जा सकता है, जैसे ईमानदारी या दक्षता के स्तर.
* **खुले सिरे वाली श्रेणी में उपयोगिता:** खुले सिरे वाले वर्गान्तरों वाली श्रेणियों में भी इसकी गणना आसानी से की जा सकती है.
**दोष:**
* **बीजगणितीय विवेचन का अभाव:** समान्तर माध्य की तरह, मध्यका का उपयोग बीजगणितीय क्रियाओं में नहीं किया जा सकता है.
* **सभी मूल्यों पर आधारित नहीं:** यह श्रेणी के सभी मानों पर आधारित नहीं होता, केवल केंद्रीय स्थिति पर ध्यान केंद्रित करता है. यह डेटा के बारे में पूरी जानकारी नहीं देता.
* **श्रेणी का क्रमबद्ध करने की समस्या:** मध्यका ज्ञात करने के लिए डेटा को हमेशा आरोही या अवरोही क्रम में व्यवस्थित करना पड़ता है, जो बड़े डेटा सेट के लिए समय लेने वाला हो सकता है.
* **प्रतिनिधित्व का अभाव:** कुछ समूहों में, जहाँ मानों में बहुत अधिक अंतर होता है, वहाँ मध्यका औसत का सही प्रतिनिधित्व नहीं कर पाती.
केंद्रीय प्रवृत्ति के इन तीनों मापों में से प्रत्येक की अपनी खूबियाँ और खामियाँ हैं. किस माप का उपयोग करना है, यह डेटा की प्रकृति और विश्लेषण के उद्देश्य पर निर्भर करता है. समान्तर माध्य सबसे शक्तिशाली है यदि चरम मान मौजूद न हों, बहुलक गुणात्मक डेटा और सबसे प्रचलित मान के लिए सबसे अच्छा है, जबकि मध्यका विषम वितरण और चरम मानों से प्रभावित डेटा के लिए आदर्श है.
In simple words: हम डेटा के बीच का मान जानने के लिए तीन मुख्य तरीके इस्तेमाल करते हैं - औसत (समान्तर माध्य), बहुलक और मध्यका. औसत सभी संख्याओं को जोड़कर निकालते हैं, यह सबसे आम है पर बड़े-छोटे नंबरों से बहुत बदल जाता है. बहुलक वह नंबर है जो सबसे ज़्यादा बार आता है, यह आसान है पर हमेशा एक नहीं होता. मध्यका बीच का नंबर है जब हम संख्याओं को लाइन से लगाते हैं, यह बड़े-छोटे नंबरों से ज़्यादा बदलता नहीं है और गुणों के लिए अच्छा है. हर तरीके के अपने फायदे और नुकसान हैं, हमें डेटा देखकर चुनना होता है.
🎯 Exam Tip: तीनों केंद्रीय प्रवृत्ति के मापों (समान्तर माध्य, मध्यका, बहुलक) के गुणों और दोषों को विस्तृत रूप से समझें. प्रश्न की प्रकृति के अनुसार, कभी-कभी तीनों का तुलनात्मक विश्लेषण भी पूछा जा सकता है.
RBSE Class 11 Economics Chapter 9 बहुचयनात्मक प्रश्न
Question 1. गुणात्मक मापन के लिए सर्वाधिक उपयुक्त माप है
(अ) समान्तर माध्य
(ब) माध्यिका
(स) बहुलक
(द) ज्यामितीय माध्य
Answer: (ब) माध्यिका
In simple words: जब हमें किसी चीज़ की गुणवत्ता मापनी हो, न कि उसकी संख्या, तो मध्यका सबसे अच्छा तरीका है क्योंकि यह गुणों के बीच का अंदाज़ा देती है.
🎯 Exam Tip: गुणात्मक डेटा को आमतौर पर क्रमबद्ध किया जा सकता है लेकिन मापा नहीं जा सकता, इसलिए मध्यका (जो क्रम पर निर्भर करती है) इन मामलों में सबसे प्रभावी केंद्रीय प्रवृत्ति का माप है.
Question 2. निम्नलिखित पद मूल्यों का माध्यिका मूल्य है- 15, 20, 16, 24, 18.
(अ) 16
(ब) 18
(स) 20
(द) 24
Answer: (ब) 18
In simple words: संख्याओं को छोटे से बड़े क्रम में लगाने पर (15, 16, 18, 20, 24), जो संख्या ठीक बीच में आती है, वही मध्यका होती है. यहाँ 18 बीच में है.
🎯 Exam Tip: हमेशा डेटा को पहले आरोही या अवरोही क्रम में व्यवस्थित करें. विषम संख्या के पदों के लिए, मध्यका ठीक बीच का पद होता है \( (\frac{N+1}{2})\text{वाँ पद} \).
Question 3. माध्यिका समंकमाला को कितने भागों में विभक्त करती है?
(अ) 2
(ब) 4
(स) 10
(द) इनमें से कोई नहीं
Answer: (अ) 2
In simple words: मध्यका हमेशा डेटा की एक लिस्ट को ठीक दो बराबर हिस्सों में बांटती है, एक हिस्सा उससे छोटा होता है और दूसरा हिस्सा उससे बड़ा.
🎯 Exam Tip: मध्यका को एक ऐसा विभाजन मूल्य माना जाता है जो डेटा को 50% पर विभाजित करता है. यह सीधे तौर पर विभाजन मूल्यों के सिद्धांत से संबंधित है.
Question 4. चतुर्थक समंकमाला को कितने बराबर भागों में विभक्त करते हैं?
(अ) 2
(ब) 4
(स) 10
(द) 100
Answer: (ब) 4
In simple words: चतुर्थक डेटा को चार बराबर हिस्सों में बांटते हैं. जैसे मध्यका दो हिस्सों में बांटती है, चतुर्थक उसे चार चौथाई हिस्सों में बांटते हैं.
🎯 Exam Tip: 'चतुर्थक' शब्द स्वयं 'चतुर्थ' या 'चौथा' से बना है, जो सीधे तौर पर चार बराबर हिस्सों में विभाजन को इंगित करता है.
Question 5. निम्न में से कौन-सा स्थिति सम्बन्धी माध्य है?
(अ) माध्यिका
(ब) समान्तर माध्य
(स) गुणोत्तर माध्य
(द) हरात्मक माध्य
Answer: (अ) माध्यिका
In simple words: मध्यका एक ऐसा माध्य है जो संख्याओं के बीच की जगह (स्थिति) पर निर्भर करता है, न कि उनके मानों के जोड़ या गुणा पर.
🎯 Exam Tip: स्थिति सम्बन्धी माध्य वे होते हैं जिनकी गणना डेटा के क्रम (रैंक) पर आधारित होती है, न कि उनके वास्तविक मानों पर. माध्यिका और बहुलक स्थिति सम्बन्धी माध्य हैं, जबकि समान्तर माध्य, गुणोत्तर माध्य और हरात्मक माध्य गणितीय माध्य हैं.
Question 6. अविछिन्न या संतत श्रेणी में माध्यिका होती है
(अ) \( (\frac {N+1}{2})\text{वें पद का मूल्य} \)
(ब) \( (\frac {N}{2})\text{वें पद का मूल्य} \)
(स) \( (\frac {N+1}{2})\text{वें पद का मूल्य} \)
(द) इनमें से कोई नहीं
Answer: (ब) \( (\frac {N}{2})\text{वें पद का मूल्य} \)
In simple words: जब डेटा ग्रुप्स में दिया होता है (अविछिन्न श्रेणी), तो मध्यका की जगह पता करने के लिए हम कुल डेटा को दो से भाग देते हैं, और फिर उस जगह वाले ग्रुप में मध्यका ढूंढते हैं.
🎯 Exam Tip: व्यक्तिगत और खण्डित श्रेणियों के लिए मध्यका का स्थान \( (\frac{N+1}{2})\text{वाँ पद} \) होता है, जबकि सतत श्रेणी (अविछिन्न श्रेणी) में मध्यका वर्ग की पहचान के लिए \( \frac{N}{2}\text{वाँ पद} \) का उपयोग किया जाता है. यह अंतर याद रखना महत्वपूर्ण है.
Question 7. अविछिन्न या संतत श्रेणी में निम्न चतुर्थक \( (Q_1) \) होता है
(अ) \( (\frac {N+1}{4})\text{वें पद का मूल्य} \)
(ब) \( (\frac {N}{4})\text{वें पद का मूल्य} \)
(स) \( (\frac {N}{2})\text{वें पद का मूल्य} \)
(द) इनमें से कोई नहीं
Answer: (ब) \( (\frac {N}{4})\text{वें पद का मूल्य} \)
In simple words: अविछिन्न डेटा में, पहले चतुर्थक \( (Q_1) \) की जगह जानने के लिए हम कुल डेटा को चार से भाग देते हैं. यह हमें बताता है कि \( Q_1 \) किस ग्रुप में होगा.
🎯 Exam Tip: सतत श्रेणी में \( Q_1 \) की गणना के लिए \( \frac{N}{4}\text{वाँ पद} \), \( Q_2 \) (मध्यका) के लिए \( \frac{N}{2}\text{वाँ पद} \) और \( Q_3 \) के लिए \( \frac{3N}{4}\text{वाँ पद} \) का स्थान ज्ञात किया जाता है. यह विभाजन मूल्यों का एक मूलभूत नियम है.
Question 8. कौन-सा केन्द्रीय प्रवृत्ति का माप है?
(अ) माध्यिका
(ब) माध्य विचलन
(स) प्रमाप विचलन
(द) सह-सम्बन्ध
Answer: (अ) माध्यिका
In simple words: केन्द्रीय प्रवृत्ति का माप वह होता है जो डेटा के बीच के मान को दर्शाता है. माध्यिका ठीक बीच का मान होती है, इसलिए यह केन्द्रीय प्रवृत्ति का माप है.
🎯 Exam Tip: केन्द्रीय प्रवृत्ति के मुख्य माप समान्तर माध्य, मध्यका और बहुलक हैं. माध्य विचलन और प्रमाप विचलन अपकिरण के माप हैं, जबकि सह-सम्बन्ध दो चरों के बीच संबंध का माप है. यह अंतर स्पष्ट रखें.
RBSE Class 11 Economics Chapter 9 अतिलघूत्तरात्मक प्रश्न
Question 1. माध्यिका से क्या आशय है?
Answer: माध्यिका वह मान है जो किसी डेटा सेट को आरोही (बढ़ते हुए) या अवरोही (घटते हुए) क्रम में व्यवस्थित करने के बाद ठीक बीच में आता है. यह डेटा को दो बराबर हिस्सों में बांटता है, जहाँ आधे मान उससे कम होते हैं और आधे मान उससे अधिक होते हैं. यह केंद्रीय प्रवृत्ति का एक स्थिति-संबंधी माप है. यह डेटा के बीच की स्थिति को दर्शाता है.
In simple words: मध्यका का मतलब है वह बीच की संख्या जो डेटा को छोटे से बड़े या बड़े से छोटे क्रम में लगाने पर ठीक बीच में आती है.
🎯 Exam Tip: माध्यिका की सबसे महत्वपूर्ण विशेषता यह है कि यह चरम मूल्यों से अप्रभावित रहती है, क्योंकि इसकी गणना डेटा के क्रम पर आधारित होती है, न कि उसके परिमाण पर.
Question 2. आरोही क्रम क्या है?
Answer: आरोही क्रम का मतलब है जब डेटा मूल्यों को सबसे छोटे से सबसे बड़े की ओर व्यवस्थित किया जाता है, जैसे 1, 2, 3, 4, आदि. यह डेटा को एक बढ़ते हुए क्रम में दिखाता है. यह क्रम माध्यिका और चतुर्थक जैसी केंद्रीय प्रवृत्ति के मापों की गणना के लिए महत्वपूर्ण है.
In simple words: आरोही क्रम का मतलब है संख्याओं को छोटे से बड़े क्रम में लगाना, जैसे 1, 2, 3, 4.
🎯 Exam Tip: आरोही और अवरोही क्रम सांख्यिकीय डेटा को व्यवस्थित करने के दो मौलिक तरीके हैं. माध्यिका और चतुर्थक जैसी स्थिति-संबंधी गणनाओं के लिए यह व्यवस्था आवश्यक है.
Question 3. अवरोही क्रम क्या है?
Answer: अवरोही क्रम का मतलब है जब डेटा मूल्यों को सबसे बड़े से सबसे छोटे की ओर व्यवस्थित किया जाता है, जैसे 4, 3, 2, 1, आदि. यह डेटा को एक घटते हुए क्रम में दिखाता है. माध्यिका और चतुर्थक की गणना करते समय डेटा को इस क्रम में भी व्यवस्थित किया जा सकता है, क्योंकि दोनों क्रमों में बीच का मान समान रहता है.
In simple words: अवरोही क्रम का मतलब है संख्याओं को बड़े से छोटे क्रम में लगाना, जैसे 4, 3, 2, 1.
🎯 Exam Tip: आरोही और अवरोही दोनों क्रमों में डेटा को व्यवस्थित करने से माध्यिका के मान में कोई परिवर्तन नहीं आता, क्योंकि यह केवल केंद्रीय स्थिति पर आधारित होती है.
Question 5. मध्यका का कोई एक गुण लिखिए।
Answer: मध्यका का एक प्रमुख गुण यह है कि यह स्पष्ट और पूर्ण रूप से परिभाषित माध्य है. इसका मतलब है कि इसकी गणना का तरीका हमेशा निश्चित होता है और इसका एक ही मान होता है, जिससे किसी भी भ्रम की संभावना नहीं रहती. यह सांख्यिकीय विश्लेषण में इसकी विश्वसनीयता को बढ़ाता है.
In simple words: मध्यका हमेशा एक खास और साफ-सुथरा नंबर होता है, इसे निकालने का तरीका पक्का होता है.
🎯 Exam Tip: बहुलक के विपरीत, मध्यका हमेशा एक अनूठा मान होता है और कभी भी अस्पष्ट नहीं होता, जिससे यह उन स्थितियों के लिए अधिक विश्वसनीय होता है जहाँ एक निश्चित केंद्रीय बिंदु की आवश्यकता होती है.
Question 6. मध्यका का कोई एक दोष लिखिए।
Answer: मध्यका का एक दोष यह है कि इसमें चरम मूल्यों (सबसे छोटे और सबसे बड़े मानों) की पूरी तरह से अवहेलना की जाती है. यह केवल केंद्रीय स्थिति पर ध्यान केंद्रित करता है और डेटा के अन्य मानों के परिमाण को महत्व नहीं देता. इससे डेटा के पूर्ण वितरण की जानकारी अधूरी रह जाती है.
In simple words: मध्यका का एक नुकसान यह है कि यह बहुत छोटे या बहुत बड़े नंबरों को ध्यान नहीं देती, सिर्फ बीच के नंबर पर ध्यान देती है.
🎯 Exam Tip: यह याद रखें कि हालांकि चरम मूल्यों की अवहेलना मध्यका का एक गुण भी है (क्योंकि यह चरम मानों से प्रभावित नहीं होती), यह एक दोष भी हो सकता है क्योंकि यह डेटा के सभी मानों पर आधारित नहीं होती, जिससे कभी-कभी प्रतिनिधित्व अधूरा रह जाता है.
Question 7. \( Q_1 \) कैसा चतुर्थक है?
Answer: \( Q_1 \) एक निम्न चतुर्थक (Lower Quartile) है. यह वह मान है जो डेटा को आरोही क्रम में व्यवस्थित करने के बाद पहले 25% मानों को शेष 75% मानों से अलग करता है. यह डेटा के निचले भाग की केंद्रीय प्रवृत्ति को दर्शाता है.
In simple words: \( Q_1 \) सबसे निचले 25% डेटा को बाकी डेटा से अलग करने वाली संख्या है, इसे निचला चतुर्थक कहते हैं.
🎯 Exam Tip: \( Q_1 \) डेटा के वितरण के निचले सिरे को इंगित करता है, जबकि \( Q_2 \) (मध्यका) बीच को और \( Q_3 \) (उच्च चतुर्थक) ऊपरी सिरे को इंगित करता है. इन तीनों चतुर्थकों के संबंध को समझना महत्वपूर्ण है.
Question 8. \( Q_2 \) क्या कहलाता है?
Answer: \( Q_2 \) को द्वितीय चतुर्थक या मध्यक (Median) कहते हैं. यह वह मान है जो डेटा को आरोही या अवरोही क्रम में व्यवस्थित करने के बाद ठीक बीच में आता है, जिससे डेटा दो बराबर हिस्सों में बंट जाता है. यह डेटा के 50% बिंदु को दर्शाता है.
In simple words: \( Q_2 \) को दूसरा चतुर्थक या मध्यका कहते हैं, क्योंकि यह डेटा को ठीक आधा-आधा बांटता है.
🎯 Exam Tip: \( Q_2 \) का मान और मध्यका का मान हमेशा समान होता है. यह केंद्रीय प्रवृत्ति का एक महत्वपूर्ण माप है जो डेटा के बीच के मान को दर्शाता है.
Question 9. श्रेणी के चार बराबर हिस्से को क्या कहते
Answer: श्रेणी के चार बराबर हिस्से को चतुर्थक (Quartiles) कहते हैं. ये तीन बिंदु होते हैं जो डेटा सेट को चार समान भागों में विभाजित करते हैं. ये डेटा के वितरण और फैलाव को समझने में मदद करते हैं. प्रत्येक हिस्से में कुल डेटा का 25% होता है.
In simple words: जब डेटा को चार बराबर टुकड़ों में बाँटा जाता है, तो उन टुकड़ों को चतुर्थक कहते हैं.
🎯 Exam Tip: चतुर्थकों की अवधारणा से जुड़े अन्य विभाजन मूल्य दशमक (deciles) और शतमक (percentiles) हैं, जो डेटा को क्रमशः 10 और 100 बराबर भागों में विभाजित करते हैं.
Question 10. सामाजिक समस्याओं के विश्लेषण में किस माध्य का प्रयोग किया जाता है।
Answer: सामाजिक समस्याओं के विश्लेषण में प्राय: मध्यका (Median) का प्रयोग किया जाता है. ऐसा इसलिए है क्योंकि सामाजिक-आर्थिक डेटा (जैसे आय, धन) अक्सर विषम रूप से वितरित होता है और इसमें चरम मूल्य (अत्यधिक उच्च या निम्न आय) हो सकते हैं. मध्यका ऐसे चरम मूल्यों से कम प्रभावित होती है और डेटा के एक अधिक प्रतिनिधि केंद्रीय मान को दर्शाती है. यह सामाजिक समानता या असमानता का विश्लेषण करने में मदद करती है.
In simple words: सामाजिक समस्याओं को समझने के लिए ज़्यादातर मध्यका का इस्तेमाल करते हैं क्योंकि यह बड़े-छोटे नंबरों से ज़्यादा बदलती नहीं है, और सही बीच का मान बताती है.
🎯 Exam Tip: सामाजिक विज्ञान में डेटा अक्सर असममित (skewed) होता है. ऐसे मामलों में, समान्तर माध्य चरम मानों से अत्यधिक प्रभावित हो सकता है, जबकि मध्यका एक अधिक विश्वसनीय केंद्रीय प्रवृत्ति का माप प्रदान करती है.
Question 11. सूत्र लिखिए।
Answer: यह प्रश्न सामान्य रूप से सूत्र लिखने के लिए कहता है, बिना किसी विशिष्ट माप का उल्लेख किए. संदर्भ को देखते हुए, यह मध्यका या चतुर्थक से संबंधित कोई सूत्र हो सकता है. यहाँ, हम सतत श्रेणी में मध्यका का सूत्र लिख रहे हैं, जो इस अध्याय के लिए केंद्रीय है:
**माध्यका \( (M) \) का सूत्र (सतत श्रेणी में):**
\( M = L_1 + \frac{\frac{N}{2} - C}{f} \times i \)
जहाँ,
\( L_1 \) = मध्यका वर्ग की निम्न सीमा
\( N \) = कुल आवृत्ति
\( C \) = मध्यका वर्ग से ठीक पहले वाले वर्ग की संचयी आवृत्ति
\( f \) = मध्यका वर्ग की आवृत्ति
\( i \) = मध्यका वर्ग का वर्ग-विस्तार
यह सूत्र सतत डेटा सेट में मध्यका की गणना करने के लिए इस्तेमाल किया जाता है, जहाँ डेटा वर्गान्तरों में दिया होता है. यह पहले मध्यका वर्ग की पहचान करता है और फिर उस वर्ग के भीतर मध्यका के सटीक मान की गणना करता है.
In simple words: सूत्र वह तरीका है जिससे हम कुछ निकालते हैं. यहाँ, मध्यका का सूत्र बताया गया है जो ग्रुप में दिए गए डेटा के बीच का मान निकालने में मदद करता है.
🎯 Exam Tip: सूत्रों को याद रखना महत्वपूर्ण है, लेकिन उनके पीछे की अवधारणा और प्रत्येक प्रतीक के अर्थ को समझना अधिक आवश्यक है ताकि उन्हें सही संदर्भ में लागू किया जा सके.
RBSE Class 11 Economics Chapter 9 लघुत्तरात्मक प्रश्न
प्रश्न 1. माध्यिका के चार दोष बतलाइए।
Answer: माध्यिका के चार मुख्य दोष इस प्रकार हैं:
1. इसका गणितीय रूप से विश्लेषण करना मुश्किल है, इसलिए बीजगणितीय गणनाओं में इसका उपयोग नहीं किया जा सकता।
2. इसे निकालने के लिए संख्याओं को हमेशा सही क्रम (बढ़ते या घटते) में लगाना पड़ता है, जो समय लेने वाला हो सकता है।
3. यदि कुल संख्याएँ सम हों, तो इसका सही मान सीधे नहीं मिल पाता, बल्कि दो मध्य पदों के औसत से निकालना पड़ता है।
4. अगर डेटा में संख्याएँ ठीक से वितरित न हों या अनियमित हों, तो माध्यिका पर भरोसा करना मुश्किल हो जाता है, जिससे यह अविश्वसनीय हो सकती है। माध्यिका अक्सर औसत मूल्य को अच्छी तरह से नहीं दिखा पाती है, खासकर जब डेटा बहुत अलग हो।
In simple words: माध्यिका को गणना में कठिनाई होती है, उसे हमेशा क्रम में लगाना पड़ता है, सम संख्याओं के लिए इसका सही मान नहीं मिलता, और अनियमित डेटा में यह अविश्वसनीय हो सकती है।
🎯 Exam Tip: माध्यिका के दोषों को बताते समय, गणना की जटिलता और चरम मूल्यों के प्रभाव पर ध्यान केंद्रित करें, क्योंकि ये मुख्य बिंदु हैं।
प्रश्न 2. माध्यिका के उपयोग को समझाइये?
Answer: माध्यिका के उपयोग इस प्रकार हैं:
माध्यिका को निकालना बहुत आसान होता है, इसलिए यह रोज़मर्रा के कामों में बहुत काम आती है। इसका उपयोग यह देखने के लिए किया जाता है कि धन और संपत्ति लोगों में कैसे बंटी हुई है। सामाजिक समस्याओं जैसे गरीबी या शिक्षा स्तर को समझने में भी माध्यिका बहुत मददगार होती है। माध्यिका गुणात्मक तथ्यों का विश्लेषण करने में भी उपयोगी है, जैसे लोगों की राय या स्वास्थ्य की स्थिति का औसत। यह हमें समूह के बीच के हिस्से को समझने में मदद करती है, जो सबसे आम राय या स्थिति को दर्शाता है।
In simple words: माध्यिका को निकालना आसान है और यह धन वितरण, सामाजिक समस्याओं और गुणात्मक डेटा को समझने में उपयोगी होती है, क्योंकि यह बीच के मूल्य को बताती है।
🎯 Exam Tip: माध्यिका के उपयोगों को लिखते समय, इसके सरल होने और विषम वितरणों में इसकी उपयोगिता पर जोर दें।
RBSE Class 11 Economics Chapter 9 निबंधात्मक प्रश्न
प्रश्न 1. व्यक्तिगत श्रेणी में माध्यिका का निर्धारण किस प्रकार किया जाता है? उदाहरण द्वारा स्पष्ट कीजिए।
Answer: व्यक्तिगत श्रेणी में माध्यिका का निर्धारण:
व्यक्तिगत श्रेणी में माध्यिका निकालने के लिए, पहले सभी संख्याओं को छोटे से बड़े (आरोही) या बड़े से छोटे (अवरोही) क्रम में लगाना पड़ता है। इसके बाद, नीचे दिए गए सूत्र का उपयोग करके माध्यिका निकाली जाती है:
माध्यिका \( (M) = (\frac {N+1}{2}) \) वें पद का मूल्य
यहाँ, \( N = \) पदों की संख्या (कुल संख्याएँ)
उदाहरण 1: निम्नलिखित समंकों का माध्यिका मूल्य ज्ञात कीजिए
50, 42, 48, 52, 47, 58, 60, 40, 51
हल: इसका हल करने के लिए, सबसे पहले संख्याओं को बढ़ते क्रम में जमाना होगा।
| क्रम संख्या | पद मूल्य |
|---|---|
| 1 | 40 |
| 2 | 42 |
| 3 | 47 |
| 7 | 52 |
| 8 | 58 |
| 9 | 60 |
माध्यिका \( (M) = (\frac {N+1}{2}) \) वें पद का मूल्य
\( = (\frac {9+1}{2}) \) वें पद का मूल्य
\( = 5 \) वें पद का मूल्य
5वें पद का मूल्य = 50
इसलिए, माध्यिका = 50
यदि संख्याओं की कुल संख्या सम हो, तो तरीका थोड़ा अलग होता है, जिसे अगले उदाहरण से समझाया गया है।
उदाहरण 2: नीचे 10 परिवारों की मासिक आय (Rs में) दी गई है। माध्यिका ज्ञात करें:
परिवार: A, B, C, D, E, F, G, H, I, J
मासिक आय (Rs में): 2000, 2200, 1800, 1700, 1100, 3100, 1500, 4000, 3600, 800
हल: हल करने के लिए, सबसे पहले संख्याओं को बढ़ते क्रम में लगाना होगा।
| क्रम संख्या | मासिक आय (Rs में) |
|---|---|
| 1 | 800 |
| 5 | 1800 |
| 6 | 2000 |
| 7 | 2200 |
| 8 | 3100 |
| 9 | 3600 |
| 10 | 4000 |
माध्यिका \( (M) = \frac {N+1}{2} \) वें पद का मान
\( = \frac {10+1}{2} \) वें पद का मान
\( = 5.5 \) वें पद का मान
\( 5.5 \) वें पद का मान \( = 5 \) वें पद का मान \( + \frac {छःवें पद का मान - पाँच वें पद का मान}{2} \)
\( = 1800 + \frac {2000 - 1800}{2} \)
\( = 1800 + 100 = 1900 \)
माध्यिका = Rs 1900
In simple words: व्यक्तिगत श्रेणी में माध्यिका निकालने के लिए, पहले सभी संख्याओं को क्रम से लगाते हैं। अगर कुल संख्याएँ विषम हों, तो बीच वाली संख्या माध्यिका होती है। अगर कुल संख्याएँ सम हों, तो बीच की दो संख्याओं का औसत माध्यिका होती है। व्यक्तिगत श्रेणी में माध्यिका मध्य मूल्य को पहचानना आसान बनाती है, क्योंकि यह चरम मानों से प्रभावित नहीं होती।
🎯 Exam Tip: व्यक्तिगत श्रेणी में माध्यिका निकालते समय, संख्याओं को सही आरोही या अवरोही क्रम में व्यवस्थित करना सबसे पहला और सबसे महत्वपूर्ण कदम है।
प्रश्न 2. खण्डित श्रेणी में माध्यिका की गणना किस प्रकार की जाती है? उदाहरण द्वारा समझाइए।
Answer: खंडित श्रेणी में माध्यिका की गणना:
खंडित श्रेणी में माध्यिका निकालने के लिए, सबसे पहले संचयी आवृत्ति (cumulative frequency) की गणना की जाती है। इसके बाद, माध्यिका निकालने के लिए नीचे दिए गए सूत्र का उपयोग करते हैं:
माध्यिका \( (M) = (\frac {N+1}{2}) \) पद का मान
| पद मूल्य | आवृत्ति | संचयी आवृत्ति |
|---|---|---|
| 2 | 5 | 5 |
| 4 | 7 | 12 |
| 6 | 12 | 24 |
| 8 | 18 | 42 |
| 10 | 11 | 53 |
| 12 | 6 | 59 |
| 14 | 4 | 63 |
माध्यिका \( (M) = \frac {N+1}{2} \)
\( = \frac {63+1}{2} \) वें पद का मान
\( = 32 \) वें पद का मान
32वाँ पद संचयी आवृत्ति 42 में आता है। इसलिए 42 के सामने वाला मूल्य 8 ही माध्यिका होगी। माध्यिका 8 है। संचयी आवृत्ति हमें बताती है कि किसी निश्चित बिंदु तक कुल कितनी बारंबारताएँ जमा हुई हैं, जो माध्यिका का स्थान खोजने में मदद करती है।
In simple words: खंडित श्रेणी में माध्यिका निकालने के लिए, पहले संचयी आवृत्ति निकालते हैं। फिर, \( (\frac {N+1}{2}) \) वें पद का मान ज्ञात करते हैं और देखते हैं कि यह किस संचयी आवृत्ति में आता है। उस आवृत्ति के सामने वाला पद ही माध्यिका होता है।
🎯 Exam Tip: खंडित श्रेणी में, संचयी आवृत्ति की सही गणना माध्यिका के लिए सबसे महत्वपूर्ण है; एक भी गलती पूरे उत्तर को बदल सकती है।
प्रश्न 3. अविछिन्न अथवा संतत श्रेणी में माध्यिका निर्धारण की प्रक्रिया को उदाहरण द्वारा स्पष्ट कीजिए।
Answer: सतत या अखंडित श्रेणी में माध्यिका निकालने का तरीका नीचे दिया गया है:
1. यदि सतत श्रेणी सामान्य आवृत्ति (frequency) के रूप में दी गई है, तो पहले संचयी आवृत्ति (cumulative frequency) ज्ञात करते हैं। यदि श्रेणी पहले से ही संचयी आवृत्ति के रूप में है, तो उसे पहले सामान्य आवृत्ति में बदलकर फिर से संचयी आवृत्ति निकालते हैं।
2. केंद्रीय पद या माध्यिका की संख्या निकालने के लिए यह सूत्र इस्तेमाल होता है:
माध्यिका संख्या \( = \frac {N}{2 } \) वाँ पद
3. जिस संचयी आवृत्ति में माध्यिका संख्या पहली बार आती है, उस आवृत्ति के सामने वाले वर्ग को माध्यिका वर्ग कहते हैं।
4. इस माध्यिका वर्ग में माध्यिका निकालने के लिए यह सूत्र इस्तेमाल होता है:
माध्यिका \( (M) = L_{1}+\frac{{N}/{2}-C }{f} \times i \)
उदाहरण: निम्न पदमाला से माध्यिका की गणना कीजिए:
| प्राप्तांक | विद्यार्थियों की संख्या (f) | संचयी बारम्बारता (cf) |
|---|---|---|
| 0-10 | 4 | 4 |
| 10-20 | 6 | 10 |
| 20-30 | 9 | 19 |
| 30-40 | 7 | 26 |
| 40-50 | 5 | 31 |
माध्यिका संख्या \( = \frac {N}{2} \) वाँ पद
\( = \frac {31}{2} = 15.5 \) वाँ पद
15.5वाँ पद संचयी आवृत्ति 19 में आता है। इसलिए इसके सामने वाला वर्ग 20-30 माध्यिका वर्ग है।
माध्यिका \( (M) = L_{1}+\frac{N/2-c}{f} \times i \)
\( = 20 + \frac{15.5-10}{9} \times 10 \)
\( = 20 + \frac{5.5 \times 10}{9} = 20 + \frac{55}{9} = 20+6.11 = 26.11 \) अंक
माध्यिका \( = 26.11 \) अंक
जब वर्ग अवरोही (घटते) क्रम में दिए गए हों, तो आप उन्हें आरोही (बढ़ते) क्रम में लिखकर ऊपर दिए गए तरीके से हल कर सकते हैं। यदि आप अवरोही क्रम में ही प्रश्न हल करना चाहते हैं, तो नीचे दिए गए सूत्र का उपयोग करेंगे:
माध्यिका \( = L_{2}-\frac{N/2-C}{f} \times i \)
उदाहरण 2: निम्न सारणी से माध्यिका ज्ञात करें:
| वेतन (Rs में) | कर्मचारियों की संख्या (f) | संचयी बारम्बारता (cf) |
|---|---|---|
| 40-50 | 20 | 20 |
| 30-40 | 35 | 55 |
| 20-30 | 46 | 101 |
| 10-20 | 38 | 139 |
| 0-10 | 22 | 161 |
माध्यिका संख्या \( = \frac {N}{2} \) वाँ पद
\( = \frac {161}{2} = 80.5 \) वाँ पद
80.5वाँ पद संचयी आवृत्ति 101 में आता है। इसलिए माध्यिका वर्ग 20-30 है।
माध्यिका \( = L_{2}-\frac{N/2-c}{f} \times i \)
\( = 30 - \frac{80.5-55}{46} \times 10 \)
\( = 30 - \frac{25.5 \times 10}{46} = 30 - \frac{255}{46} \)
\( = 30-5.54 = 24.46 \)
माध्यिका = Rs 24.46
इस प्रश्न को संख्याओं को बढ़ते क्रम में लिखकर भी पहले वाले सूत्र की मदद से हल किया जा सकता है।
बढ़ते क्रम में:
| वेतन (Rs में) | कर्मचारियों की संख्या (f) | संचयी बारम्बारता (cf) |
|---|---|---|
| 0-10 | 22 | 22 |
| 10-20 | 38 | 60 |
| 20-30 | 46 | 106 |
| 30-40 | 35 | 141 |
| 40-50 | 20 | 161 |
माध्यिका संख्या \( = \frac {N}{2} \) वाँ पद
\( = \frac {161}{2} = 80.5 \) वाँ पद
यह पद संचयी आवृत्ति 106 में आता है। इसलिए माध्यिका वर्ग 20-30 है। माध्यिका \( = 24.46 \)
In simple words: सतत श्रेणी में माध्यिका निकालने के लिए, पहले संचयी आवृत्ति निकालते हैं। फिर, \( N/2 \) वें पद का मान ज्ञात करते हैं और देखते हैं कि यह किस संचयी आवृत्ति में आता है। उस आवृत्ति के सामने वाला वर्ग ही माध्यिका वर्ग होता है। फिर एक विशेष सूत्र का उपयोग करके माध्यिका की गणना की जाती है। सतत श्रेणी में माध्यिका वर्ग को ढूंढना महत्वपूर्ण है, क्योंकि माध्यिका का सही मान उसी वर्ग के भीतर होता है।
🎯 Exam Tip: सतत श्रेणी में माध्यिका की गणना करते समय, \( N/2 \) का सही स्थान और माध्यिका वर्ग की पहचान त्रुटिहीन होनी चाहिए। \( L_1 \) और \( C \) मानों को सटीक रूप से चुनें।
समावेशी श्रेणी में माध्यिका निर्धारण :
Answer: यदि श्रेणी समावेशी प्रकार की है, तो माध्यिका ज्ञात करने से पहले इसे अपवर्जी श्रेणी में बदलना पड़ता है। अपवर्जी श्रेणी में, एक वर्ग की ऊपरी सीमा अगले वर्ग की निचली सीमा होती है। इसके बाद, ऊपर बताए गए तरीके से माध्यिका की गणना की जाती है। समावेशी श्रेणी को अपवर्जी में बदलने से वर्ग सीमाओं में कोई भ्रम नहीं रहता और माध्यिका की गणना सटीक होती है।
In simple words: समावेशी श्रेणी की माध्यिका निकालने के लिए, पहले उसे अपवर्जी श्रेणी में बदलते हैं (जहाँ एक वर्ग की ऊपरी सीमा अगले वर्ग की निचली सीमा होती है)। फिर सामान्य माध्यिका गणना विधि का पालन करते हैं।
🎯 Exam Tip: समावेशी श्रेणी को अपवर्जी में बदलते समय, यह सुनिश्चित करें कि आप सभी वर्ग सीमाओं को सही ढंग से समायोजित कर रहे हैं, ताकि कोई डेटा अंतराल या ओवरलैप न हो।
उदाहरण 3. निम्नलिखित से माध्यिका ज्ञात कीजिए :
| प्राप्तांक | छात्रों की संख्या |
|---|---|
| 1-5 | 5 |
| 6-10 | 7 |
| 11-15 | 8 |
| 16-20 | 6 |
| 21-25 | 4 |
| 26-30 | 2 |
Answer: हल:
सबसे पहले समावेशी श्रेणी को अपवर्जी श्रेणी में बदला जाएगा:
| प्राप्तांक | छात्रों की संख्या (f) | संचयी बारम्बारता (cf) |
|---|---|---|
| 0.5-5.5 | 5 | 5 |
| 5.5-10.5 | 7 | 12 |
| 10.5-15.5 | 8 | 20 |
| 15.5-20.5 | 6 | 26 |
| 20.5-25.5 | 4 | 30 |
| 25.5-30.5 | 2 | 32 |
माध्यिका संख्या \( = \frac {N}{2} \)
\( = \frac {32}{2} = 16 \) वाँ पद
16वाँ पद संचयी आवृत्ति 20 में आता है। इसलिए माध्यिका वर्ग 10.5-15.5 है।
माध्यिका \( = L_1 + \frac{N/2-c}{f} \times i \)
\( = 10.5 + \frac{16-12}{8} \times 5 \)
\( = 10.5 + \frac{4 \times 5}{8} = 10.5+2.5 = 13 \)
माध्यिका \( = 13 \)
In simple words: समावेशी श्रेणी को अपवर्जी श्रेणी में बदलने के बाद, माध्यिका निकालने के लिए \( N/2 \) वें पद का मान निकालते हैं। फिर, माध्यिका वर्ग की पहचान करते हैं और माध्यिका सूत्र का उपयोग करके गणना करते हैं।
🎯 Exam Tip: समावेशी श्रेणी को अपवर्जी श्रेणी में बदलने का पहला चरण सटीक होना चाहिए, क्योंकि यह माध्यिका की बाद की सभी गणनाओं को प्रभावित करता है।
प्रश्न 4. संचयी आवृत्ति में मध्यका का निर्धारण कैसे होता है? उदाहरण द्वारा समझाइये।
Answer: संचयी आवृत्ति से माध्यिका निकालने के लिए: यदि संचयी आवृत्ति दी गई हो, तो पहले उसे सामान्य आवृत्ति वितरण में बदलना चाहिए। इसके बाद, माध्यिका की गणना की जा सकती है। संचयी आवृत्ति को सामान्य आवृत्ति में बदलना, हमें प्रत्येक वर्ग की वास्तविक बारंबारता जानने में मदद करता है, जो माध्यिका की गणना के लिए ज़रूरी है।
उदाहरण: निम्न सारणी से माध्यिका ज्ञात कीजिए
| वर्ग (C.I.) | आवृत्ति (f) | संचयी आवृत्ति (cf) |
|---|---|---|
| 5-15 | 5 | 5 |
| 15-25 | 8 | 13 |
| 25-35 | 7 | 20 |
| 35-45 | 6 | 26 |
| 45-55 | 4 | 30 |
| 55-65 | 5 | 35 |
माध्यिका संख्या \( = \frac {N}{2} \)
\( = \frac {35}{2} = 17.5 \) वाँ पद
17.5वाँ पद संचयी आवृत्ति 20 में आता है। इसलिए माध्यिका वर्ग 25-35 है।
माध्यिका \( = L_1 + \frac{N/2-c}{f} \times i \)
\( = 25 + \frac{17.5-13}{7} \times 10 \)
\( = 25 + \frac{4.5 \times 10}{7} = 25 + \frac{45}{7} = 25+6.43 = 31.43 \)
माध्यिका \( = 31.43 \)
उदाहरण 2: निम्न तालिका में 65 छात्रों द्वारा किसी परीक्षा में प्राप्त अंक दिए गए हैं। माध्यिका की गणना कीजिए:
| प्राप्तांक (से ज्यादा) | छात्रों की संख्या |
|---|---|
| 70 | 7 |
| 60 | 18 |
| 50 | 40 |
| 40 | 40 |
| 30 | 63 |
| 20 | 65 |
हल: इस 'से ज्यादा' श्रृंखला को पहले सामान्य आवृत्ति वितरण में बदला जाएगा।
| वर्गान्तर | आवृत्ति (f) | संचयी आवृत्ति (cf) |
|---|---|---|
| 20-30 | 2 | 2 |
| 30-40 | 23 | 25 |
| 40-50 | 0 | 25 |
| 50-60 | 22 | 47 |
| 60-70 | 11 | 58 |
| 70-80 | 7 | 65 |
माध्यिका संख्या \( = \frac {N}{2} \)
\( = \frac {65}{2} = 32.5 \) वाँ पद
32.5वाँ पद संचयी आवृत्ति 47 में आता है। इसलिए माध्यिका वर्ग 50-60 है।
माध्यिका \( = L_1 + \frac{N/2-c}{f} \times i \)
\( = 50 + \frac{32.5-25}{22} \times 10 \)
\( = 50 + \frac{7.5 \times 10}{22} = 50 + \frac{75}{22} \)
\( = 50+3.41 = 53.41 \)
माध्यिका \( = 53.41 \) अंक
In simple words: संचयी आवृत्ति से माध्यिका निकालने के लिए, पहले दी गई आवृत्ति को सामान्य आवृत्ति वितरण में बदलते हैं। फिर माध्यिका संख्या \( (N/2) \) ज्ञात करते हैं, माध्यिका वर्ग पहचानते हैं और सूत्र का उपयोग करके माध्यिका की गणना करते हैं।
🎯 Exam Tip: जब 'से ज्यादा' या 'से कम' प्रकार की आवृत्तियाँ दी हों, तो उन्हें पहले सामान्य आवृत्ति वितरण में बदलना अनिवार्य है। यह सुनिश्चित करें कि आप सीमाओं और आवृत्तियों को सही ढंग से बदलें।
प्रश्न 5. असमान वितरण में माध्यिका का निर्धारण कैसे होता है? उदाहरण द्वारा स्पष्ट कीजिए।
Answer: असमान वितरण में माध्यिका निर्धारण:
असमान वितरण में माध्यिका निकालने के लिए, वर्गों का आकार समान होना ज़रूरी नहीं है। यदि वर्गों का आकार अलग-अलग है, तो माध्यिका निकालने से पहले उन्हें जहाँ तक हो सके, समान आकार का बना लेना चाहिए। यदि ऐसा करना संभव न हो, तो असमान वर्गों के आधार पर ही माध्यिका की गणना कर सकते हैं। वर्गों का आकार समान करने से गणना आसान और सटीक हो जाती है, लेकिन असमान वर्गों में भी माध्यिका निकाली जा सकती है।
उदाहरण 1: निम्न तालिका से माध्यिका ज्ञात कीजिए :
| आयु | लड़कों की संख्या (f) | संचयी आवृत्ति (cf) |
|---|---|---|
| 0-2 | 2 | 2 |
| 2-4 | 4 | 6 |
| 4-6 | 4 | 10 |
| 6-8 | 7 | 17 |
| 8-10 | 5 | 22 |
हल:
माध्यिका संख्या \( = \frac {N}{2} \)
\( = \frac {22}{2} = 11 \) वाँ पद
11वाँ पद संचयी आवृत्ति 17 में आता है। इसलिए माध्यिका वर्ग 6-8 है।
माध्यिका \( = L_1 + \frac{N/2-c}{f} \times i \)
\( = 6 + \frac{11-10}{7} \times 2 \)
\( = 6 + \frac{1 \times 2}{7} = 6 + \frac{2}{7} = 6+0.29 = 6.29 \)
माध्यिका \( = 6.29 \) वर्ष
उदाहरण 2: निम्नलिखित श्रेणी से माध्यिका ज्ञात कीजिए :
| वर्गान्तर | आवृत्तियाँ (f) | संचयी आवृत्तियाँ (cf) |
|---|---|---|
| 0-5 | 12 | 12 |
| 5-10 | 15 | 27 |
| 10-20 | 25 | 52 |
| 20-30 | 40 | 92 |
| 30-40 | 42 | 134 |
| 40-50 | 14 | 148 |
| 50-60 | 8 | 156 |
हल:
माध्यिका संख्या \( = \frac {N}{2} \)
\( = \frac {156}{2} = 78 \) वाँ पद
78वाँ पद संचयी आवृत्ति 92 में आता है। इसलिए माध्यिका वर्ग 20-30 है।
माध्यिका \( = L_1 + \frac{N/2-c}{f} \times i \)
\( = 20 + \frac{78-52}{40} \times 10 \)
\( = 20 + \frac{26 \times 10}{40} = 20 + \frac{260}{40} = 20+6.5 = 26.5 \)
माध्यिका \( = 26.5 \)
In simple words: असमान वितरण में माध्यिका निकालने के लिए, हम या तो वर्ग अंतरालों को समान आकार का बनाने की कोशिश करते हैं, या यदि संभव न हो तो दिए गए असमान अंतरालों के साथ ही माध्यिका की गणना करते हैं।
🎯 Exam Tip: असमान वर्ग अंतरालों वाले वितरण में, वर्ग विस्तार 'i' का मान प्रत्येक संबंधित वर्ग के लिए सटीक रूप से पहचानना महत्वपूर्ण है।
प्रश्न 6. चतुर्थक से क्या आशय है? चतुर्थकों की गणना किस प्रकार की जाती है? उदाहरण की सहायता से समझाइए।
Answer: चतुर्थक से आशय:
चतुर्थक वे मान होते हैं जो किसी श्रेणी या डेटा सेट को चार बराबर हिस्सों में बाँटते हैं। जब किसी डेटा समूह को चार बराबर भागों में बांटा जाता है, तो प्रत्येक भाग के अंत में मिलने वाले मान को चतुर्थक कहते हैं। चतुर्थक तीन होते हैं: पहला चतुर्थक (\( Q_1 \)) वह मान है जिसके नीचे 25% डेटा और ऊपर 75% डेटा होता है। दूसरा चतुर्थक (\( Q_2 \)) माध्यिका के समान होता है, जिसके नीचे और ऊपर 50% डेटा होता है। तीसरा चतुर्थक (\( Q_3 \)) वह मान है जिसके नीचे 75% डेटा और ऊपर 25% डेटा होता है। इस तरह, \( Q_1 \) और \( Q_3 \) के बीच डेटा का 50% हिस्सा होता है। चतुर्थक हमें डेटा के फैलाव और केंद्रीय प्रवृत्ति को बेहतर ढंग से समझने में मदद करते हैं, जिससे हम विषम डेटा सेटों का भी विश्लेषण कर पाते हैं।
चतुर्थकों की गणना विधि:
विभिन्न प्रकार की सांख्यिकीय श्रेणियों के लिए चतुर्थक मान अलग-अलग तरीकों से निकाले जाते हैं:
(i) व्यक्तिगत एवं खंडित श्रेणी:
व्यक्तिगत और खंडित श्रेणी में चतुर्थक मान निकालने के लिए नीचे दिए गए सूत्रों का उपयोग करते हैं:
\( Q_1 = (\frac {N+1}{4}) \) वें पद का मूल्य
\( Q_3 = 3 (\frac {N+1}{4}) \) वें पद का मूल्य
व्यक्तिगत श्रेणी में \( N \) का मतलब कुल संख्याओं की संख्या है, और खंडित श्रेणी में \( N \) का मतलब कुल आवृत्तियों का जोड़ है।
(ii) सतत या अखंडित श्रेणी:
ऐसी श्रेणियों में, पहले \( Q_1 \) और \( Q_3 \) के पद ज्ञात किए जाते हैं, जिसके लिए नीचे दिए गए सूत्रों का उपयोग करते हैं:
\( Q_1 = \frac {N}{4} \) वें पद का मूल्य
\( Q_3 = 3 \frac {N}{4} \) वें पद का मूल्य
इसके बाद यह देखा जाता है कि ऊपर दिए गए सूत्र से जो पद निकलता है, वह किस संचयी आवृत्ति में आता है। उस संचयी आवृत्ति के सामने वाला वर्ग ही \( Q_1 \) या \( Q_3 \) वर्ग होता है। फिर, इस सूत्र की मदद से \( Q_1 \) और \( Q_3 \) का मान निकाला जाता है:
\( Q_1 = L_1 + \frac {N/4-c}{f} \times i \)
\( Q_3 = L_1 + \frac {3N/4-c}{f} \times i \)
उदाहरण द्वारा स्पष्टीकरण:
(i) व्यक्तिगत श्रेणी में गणना:
| क्रम संख्या | उत्पादन (टनों में) |
|---|---|
| 1 | 10 |
| 2 | 12 |
| 3 | 13 |
| 4 | 14 |
| 5 | 15 |
| 6 | 17 |
| 7 | 18 |
| 8 | 20 |
\( Q_1 = \frac {N+1}{4} \) वें पद का मूल्य \( = \frac {8+1}{4} \) वें पद का मूल्य \( = 2.25 \) वें पद का मूल्य
\( 2.25 \) वें पद का मूल्य \( = \) दूसरे पद का मूल्य \( + 0.25 \) (तीसरे पद का मूल्य \( - \) दूसरे पद का मूल्य)
\( = 12 + 0.25(13 - 12) = 12 + 0.25 \times 1 = 12.25 \)
\( Q_1 = 12.25 \) टन
\( Q_3 = 3 (\frac {N+1}{4}) \) वें पद का मूल्य \( = 3 (\frac {8+1}{4}) \) वें पद का मूल्य \( = \frac {3 \times 9}{4} = \frac {27}{4} = 6.75 \) वें पद का मूल्य
\( 6.75 \) वें पद का मूल्य \( = \) छठे पद का मूल्य \( + 0.75 \) (सातवें पद का मूल्य \( - \) छठे पद का मूल्य)
\( = 17 + 0.75 (18-17) = 17 + 0.75 \times 1 = 17.75 \)
\( Q_3 = 17.75 \) टन
(ii) खंडित श्रेणी में गणना:
इस श्रेणी में गणना करने के लिए सबसे पहले यह देखते हैं कि मान क्रम में हैं या नहीं। यदि वे क्रम में नहीं हैं, तो उन्हें बढ़ते या घटते क्रम में लगाकर संचयी आवृत्ति निकाली जाती है।
In simple words: चतुर्थक डेटा को चार बराबर हिस्सों में बांटते हैं: \( Q_1 \) (25%), \( Q_2 \) (50% - माध्यिका), और \( Q_3 \) (75%)। उनकी गणना डेटा श्रेणी (व्यक्तिगत, खंडित या सतत) के आधार पर अलग-अलग सूत्रों से की जाती है।
🎯 Exam Tip: चतुर्थकों की गणना करते समय, \( N \) का सही अर्थ (पदों की संख्या या आवृत्तियों का योग) और \( Q_1 \) और \( Q_3 \) के लिए सही सूत्र का चुनाव बहुत महत्वपूर्ण है।
Question. 3. निम्न आवृत्ति वितरण में प्रथम एवं तृतीय चतुर्थक की गणना कीजिए :
| मूल्य (C.I.) | आवृत्ति \((f)\) | संचयी आवृत्ति \((cf)\) |
|---|---|---|
| 4-8 | 6 | 6 |
| 8-12 | 10 | 16 |
| 12-16 | 18 | 34 |
| 16-20 | 30 | 64 |
| 20-24 | 15 | 79 |
| 24-28 | 12 | 91 |
| 28-32 | 10 | 101 |
| 32-36 | 6 | 107 |
| 36-40 | 2 | 109 |
Answer: प्रथम चतुर्थक \((Q_1)\) के लिए: \( Q_1 \) पद = \( \frac{N}{4} \) वाँ पद = \( \frac{109}{4} \) वाँ पद = \( 27.25 \) वाँ पद \( 27.25 \) वाँ पद संचयी आवृत्ति 34 में शामिल है, जिसका वर्गान्तर \( 12-16 \) है। इसलिए, \( L_1 = 12 \), \( C = 16 \), \( f = 18 \), \( i = 4 \) \( Q_1 = L_1 + \frac{\frac{N}{4}-C}{f} \times i \) \( Q_1 = 12 + \frac{27.25-16}{18} \times 4 \) \( Q_1 = 12 + \frac{11.25}{18} \times 4 \) \( Q_1 = 12 + \frac{45}{18} \) \( Q_1 = 12 + 2.5 \) \( Q_1 = 14.5 \) तृतीय चतुर्थक \((Q_3)\) के लिए: \( Q_3 \) पद = \( \frac{3N}{4} \) वाँ पद = \( \frac{3 \times 109}{4} \) वाँ पद = \( \frac{327}{4} \) वाँ पद = \( 81.75 \) वाँ पद \( 81.75 \) वाँ पद संचयी आवृत्ति 91 में शामिल है, जिसका वर्गान्तर \( 24-28 \) है। इसलिए, \( L_1 = 24 \), \( C = 79 \), \( f = 12 \), \( i = 4 \) \( Q_3 = L_1 + \frac{\frac{3N}{4}-C}{f} \times i \) \( Q_3 = 24 + \frac{81.75-79}{12} \times 4 \) \( Q_3 = 24 + \frac{2.75}{12} \times 4 \) \( Q_3 = 24 + \frac{11}{12} \) \( Q_3 = 24 + 0.916 \) \( Q_3 = 24.916 \) \( Q_3 = 24.92 \) In simple words: हमने पहले कुल संख्या को 4 से भाग देकर पहले चतुर्थक की स्थिति जानी, फिर सूत्र लगाकर उसका मान निकाला. इसी तरह, कुल संख्या को तीन-चौथाई करके तीसरे चतुर्थक की स्थिति जानी और फिर सूत्र से उसका मान निकाला.
🎯 Exam Tip: चतुर्थक गणना करते समय, संचयी आवृत्ति तालिका को सही ढंग से बनाना और \( Q_1 \) तथा \( Q_3 \) के लिए सही वर्गान्तर पहचानना बहुत महत्वपूर्ण है. सूत्र में मानों को सावधानी से रखें.
Question 2. निम्न समंकों से माध्यिका ज्ञात कीजिए
| दैनिक वेतन (Rs में) | 10 | 11 | 12 | 13 | 14 | 15 | 16 | 17 | 18 |
|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|
| मजदूरों की संख्या | 2 | 5 | 6 | 8 | 10 | 12 | 7 | 4 | 1 |
Answer: सबसे पहले, दिए गए डेटा को आरोही क्रम में व्यवस्थित करें और संचयी आवृत्ति की गणना करें:
| दैनिक वेतन (Rs में) | मजदूरों की संख्या \((f)\) | संचयी आवृत्ति \((cf)\) |
|---|---|---|
| 10 | 2 | 2 |
| 11 | 5 | 7 |
| 12 | 6 | 13 |
| 13 | 8 | 21 |
| 14 | 10 | 31 |
| 15 | 12 | 43 |
| 16 | 7 | 50 |
| 17 | 4 | 54 |
| 18 | 1 | 55 |
कुल पदों की संख्या \( N = 55 \) माध्यिका \( (M) \) = \( \left(\frac{N+1}{2}\right) \) वाँ पद \( M = \left(\frac{55+1}{2}\right) \) वाँ पद \( M = \frac{56}{2} \) वाँ पद \( M = 28 \) वाँ पद \( 28 \) वाँ पद संचयी आवृत्ति 31 में शामिल है, जिसके सामने का वेतन \( 14 \) Rs है। अतः माध्यिका \( M = 14 \) Rs है। In simple words: हमने डेटा को छोटे से बड़े क्रम में लगाया और फिर हर वेतन के लिए कुल मजदूरों की संख्या (संचयी आवृत्ति) निकाली. कुल मजदूरों की संख्या को 2 से भाग करके हमने माध्यिका की जगह ढूंढी. 28वीं जगह पर 14 Rs का वेतन है, इसलिए माध्यिका 14 Rs है.
🎯 Exam Tip: व्यक्तिगत या खंडित श्रेणी में माध्यिका निकालते समय, सबसे पहले डेटा को आरोही या अवरोही क्रम में व्यवस्थित करना महत्वपूर्ण है. संचयी आवृत्ति की गणना सही होनी चाहिए.
Question 3. निम्न समंक से माध्यिका ज्ञात कीजिए
| वर्गान्तर | 0-10 | 10-20 | 20-30 | 30-40 | 40-50 |
|---|---|---|---|---|---|
| आवृत्ति | 3 | 5 | 8 | 5 | 3 |
Answer: माध्यिका ज्ञात करने के लिए संचयी आवृत्ति की गणना करें:
| वर्गान्तर | आवृत्ति \((f)\) | संचयी आवृत्ति \((cf)\) |
|---|---|---|
| 0-10 | 3 | 3 |
| 10-20 | 5 | 8 |
| 20-30 | 8 | 16 |
| 30-40 | 5 | 21 |
| 40-50 | 3 | 24 |
कुल आवृत्ति \( N = 24 \) माध्यिका संख्या = \( \frac{N}{2} \) वाँ पद = \( \frac{24}{2} \) वाँ पद = \( 12 \) वाँ पद \( 12 \) वाँ पद संचयी बारम्बारता 16 में शामिल है, जो कि वर्गान्तर \( 20-30 \) में है। इसलिए, \( L_1 = 20 \), \( C = 8 \), \( f = 8 \), \( i = 10 \) माध्यिका \( (M) = L_1 + \frac{\frac{N}{2}-C}{f} \times i \) \( M = 20 + \frac{12-8}{8} \times 10 \) \( M = 20 + \frac{4}{8} \times 10 \) \( M = 20 + \frac{1}{2} \times 10 \) \( M = 20 + 5 \) \( M = 25 \) In simple words: हमने हर वर्ग के लिए कुल आवृत्तियाँ (संचयी आवृत्ति) निकालीं. फिर कुल आवृत्तियों को 2 से भाग करके माध्यिका की जगह ढूंढी. 12वीं जगह पर 20-30 वर्ग आया, तो सूत्र का इस्तेमाल करके माध्यिका का सही मान 25 निकाला.
🎯 Exam Tip: सतत श्रेणी में माध्यिका ज्ञात करते समय, पहले माध्यिका वर्ग का पता लगाना महत्वपूर्ण है. यह वर्ग वह होता है जिसमें \( N/2 \) वाँ पद आता है. उसके बाद ही माध्यिका के सूत्र में सही मान रखें.
Question 5. निम्न सारणी से माध्यिका ज्ञात कीजिए
| वर्गान्तर | 1-5 | 6-10 | 11-15 | 16-20 | 21-25 | 26-30 |
|---|---|---|---|---|---|---|
| आवृत्ति | 5 | 7 | 8 | 6 | 4 | 2 |
Answer: सबसे पहले, समावेशी श्रेणी को अपवर्जी श्रेणी में बदला जाएगा और संचयी आवृत्ति की गणना की जाएगी:
| प्राप्तांक | विद्यार्थियों की संख्या \((f)\) | संचयी आवृत्ति \((cf)\) |
|---|---|---|
| 0.5-5.5 | 5 | 5 |
| 5.5-10.5 | 7 | 12 |
| 10.5-15.5 | 8 | 20 |
| 15.5-20.5 | 6 | 26 |
| 20.5-25.5 | 4 | 30 |
| 25.5-30.5 | 2 | 32 |
कुल आवृत्ति \( N = 32 \) माध्यिका संख्या = \( \frac{N}{2} \) वाँ पद = \( \frac{32}{2} \) वाँ पद = \( 16 \) वाँ पद \( 16 \) वाँ पद संचयी आवृत्ति 20 में शामिल है, जिसका वर्गान्तर \( 10.5-15.5 \) है। इसलिए, \( L_1 = 10.5 \), \( C = 12 \), \( f = 8 \), \( i = 5 \) माध्यिका \( (M) = L_1 + \frac{\frac{N}{2}-C}{f} \times i \) \( M = 10.5 + \frac{16-12}{8} \times 5 \) \( M = 10.5 + \frac{4}{8} \times 5 \) \( M = 10.5 + \frac{1}{2} \times 5 \) \( M = 10.5 + 2.5 \) \( M = 13 \) In simple words: पहले, हमने दिए गए वर्गों को ऐसे बदल दिया कि वे एक-दूसरे से जुड़ें (अपवर्जी श्रेणी). फिर हर वर्ग की कुल आवृत्ति निकाली. कुल आवृत्तियों को 2 से भाग करके माध्यिका की जगह ढूंढी. 16वीं जगह पर 10.5-15.5 वर्ग आया, तो सूत्र का इस्तेमाल करके माध्यिका का सही मान 13 निकाला.
🎯 Exam Tip: जब डेटा समावेशी श्रेणी में दिया हो, तो माध्यिका की गणना से पहले उसे अपवर्जी श्रेणी में बदलना अनिवार्य है. ऐसा न करने पर परिणाम गलत हो सकता है.
Question 6. निम्न वितरण में माध्यिका की गणना कीजिए
| मध्य मूल्य | 10 | 20 | 30 | 40 | 50 |
|---|---|---|---|---|---|
| आवृत्ति | 5 | 8 | 7 | 6 | 4 |
Answer: सबसे पहले, मध्य मूल्य से वर्गान्तर और फिर संचयी आवृत्ति की गणना करें: मध्य मूल्यों के बीच का अंतर 10 है, इसलिए वर्गान्तर \(\pm 5\) होगा (यानी \( \frac{10}{2} \)).
| मध्य मूल्य | वर्गान्तर | आवृत्ति \((f)\) | संचयी आवृत्ति \((cf)\) |
|---|---|---|---|
| 10 | 5-15 | 5 | 5 |
| 20 | 15-25 | 8 | 13 |
| 30 | 25-35 | 7 | 20 |
| 40 | 35-45 | 6 | 26 |
| 50 | 45-55 | 4 | 30 |
कुल आवृत्ति \( N = 30 \) माध्यिका संख्या = \( \frac{N}{2} \) वाँ पद = \( \frac{30}{2} \) वाँ पद = \( 15 \) वाँ पद \( 15 \) वाँ पद संचयी आवृत्ति 20 में शामिल है, जिसका वर्गान्तर \( 25-35 \) है। इसलिए, \( L_1 = 25 \), \( C = 13 \), \( f = 7 \), \( i = 10 \) माध्यिका \( (M) = L_1 + \frac{\frac{N}{2}-C}{f} \times i \) \( M = 25 + \frac{15-13}{7} \times 10 \) \( M = 25 + \frac{2}{7} \times 10 \) \( M = 25 + \frac{20}{7} \) \( M = 25 + 2.86 \) \( M = 27.86 \) In simple words: जब मध्य मूल्य दिए हों, तो हमने पहले उनसे वर्गान्तर बनाए. फिर संचयी आवृत्ति निकाली. कुल आवृत्तियों को 2 से भाग करके माध्यिका की जगह ढूंढी. 15वीं जगह पर 25-35 वर्ग आया, तो सूत्र का इस्तेमाल करके माध्यिका का मान 27.86 निकाला.
🎯 Exam Tip: मध्य मूल्य से वर्गान्तर बनाते समय, वर्ग अन्तराल की चौड़ाई पर ध्यान दें. यह सुनिश्चित करें कि बनाए गए वर्गान्तर सही हों ताकि आगे की गणना सटीक हो.
Question 7. निम्न सारणी से माध्यिका ज्ञात कीजिए
| पद मूल्य (से कम) | 10 | 20 | 30 | 40 | 50 | 60 |
|---|---|---|---|---|---|---|
| आवृत्ति | 5 | 20 | 70 | 90 | 98 | 100 |
Answer: यह "से कम" श्रेणी है, इसलिए दी गई आवृत्तियाँ संचयी आवृत्तियाँ हैं। हमें पहले सामान्य आवृत्ति वितरण में बदलना होगा:
| पद मूल्य (से कम) | वर्गान्तर | संचयी आवृत्ति \((cf)\) | आवृत्ति \((f)\) |
|---|---|---|---|
| 10 | 0-10 | 5 | 5 |
| 20 | 10-20 | 20 | \(20-5=15\) |
| 30 | 20-30 | 70 | \(70-20=50\) |
| 40 | 30-40 | 90 | \(90-70=20\) |
| 50 | 40-50 | 98 | \(98-90=8\) |
| 60 | 50-60 | 100 | \(100-98=2\) |
कुल आवृत्ति \( N = 100 \) माध्यिका संख्या = \( \frac{N}{2} \) वाँ पद = \( \frac{100}{2} \) वाँ पद = \( 50 \) वाँ पद \( 50 \) वाँ पद संचयी आवृत्ति 70 में शामिल है, जिसका वर्गान्तर \( 20-30 \) है। इसलिए, \( L_1 = 20 \), \( C = 20 \), \( f = 50 \), \( i = 10 \) माध्यिका \( (M) = L_1 + \frac{\frac{N}{2}-C}{f} \times i \) \( M = 20 + \frac{50-20}{50} \times 10 \) \( M = 20 + \frac{30}{50} \times 10 \) \( M = 20 + \frac{3}{5} \times 10 \) \( M = 20 + 6 \) \( M = 26 \) In simple words: हमें "से कम" वाली जानकारी मिली थी, इसलिए हमने पहले इसे सामान्य वर्गों और आवृत्तियों में बदला. फिर संचयी आवृत्ति निकाली. कुल आवृत्तियों को 2 से भाग करके माध्यिका की जगह ढूंढी. 50वीं जगह पर 20-30 वर्ग आया, तो सूत्र का इस्तेमाल करके माध्यिका का मान 26 निकाला.
🎯 Exam Tip: जब डेटा "से कम" या "से अधिक" संचयी आवृत्ति वितरण के रूप में दिया हो, तो माध्यिका की गणना से पहले उसे सामान्य आवृत्ति वितरण में परिवर्तित करना महत्वपूर्ण है. इससे सही आवृत्ति और वर्गान्तर की पहचान होती है.
Question. 2. निम्न तालिका में 65 छात्रों द्वारा किसी परीक्षा में प्राप्त अंक दिए गए हैं। माध्यिका की गणना कीजिए :
| प्राप्तांक (से ज्यादा) | 70 | 60 | 50 | 40 | 30 | 20 |
|---|---|---|---|---|---|---|
| छात्रों की संख्या | 7 | 18 | 40 | 40 | 63 | 65 |
Answer: यह "से ज्यादा" श्रेणी है। इसे पहले आरोही क्रम में सामान्य आवृत्ति वितरण में बदलना होगा:
| वर्गान्तर | छात्रों की संख्या \((f)\) | संचयी आवृत्ति \((cf)\) |
|---|---|---|
| 0-10 | \(65-65=0\) | 0 |
| 10-20 | \(65-63=2\) | 2 |
| 20-30 | \(63-40=23\) | 25 |
| 30-40 | \(40-40=0\) | 25 |
| 40-50 | \(40-18=22\) | 47 |
| 50-60 | \(18-7=11\) | 58 |
| 60-70 | \(7-0=7\) | 65 |
कुल आवृत्ति \( N = 65 \) माध्यिका संख्या = \( \frac{N}{2} \) वाँ पद = \( \frac{65}{2} \) वाँ पद = \( 32.5 \) वाँ पद \( 32.5 \) वाँ पद संचयी आवृत्ति 47 में शामिल है, जिसका वर्गान्तर \( 40-50 \) है। इसलिए, \( L_1 = 40 \), \( C = 25 \), \( f = 22 \), \( i = 10 \) माध्यिका \( (M) = L_1 + \frac{\frac{N}{2}-C}{f} \times i \) \( M = 40 + \frac{32.5-25}{22} \times 10 \) \( M = 40 + \frac{7.5}{22} \times 10 \) \( M = 40 + \frac{75}{22} \) \( M = 40 + 3.41 \) \( M = 43.41 \) In simple words: हमने "से ज्यादा" वाली जानकारी को पहले सामान्य वर्गों और उनकी आवृत्तियों में बदला. फिर संचयी आवृत्ति निकाली. कुल आवृत्तियों को 2 से भाग करके माध्यिका की जगह ढूंढी. 32.5वीं जगह पर 40-50 वर्ग आया, तो सूत्र का इस्तेमाल करके माध्यिका का मान 43.41 निकाला.
🎯 Exam Tip: "से अधिक" संचयी आवृत्ति वितरण को सामान्य आवृत्ति वितरण में बदलते समय, आवृत्ति की गणना पिछले संचयी आवृत्ति से वर्तमान संचयी आवृत्ति को घटाकर की जाती है. यह सुनिश्चित करें कि आप सही वर्गान्तर चुनें और गणना सावधानी से करें.
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