RBSE Solutions Class 11 Economics Chapter 19 भारत का विदेशी व्यापार

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Detailed Chapter 19 भारत का विदेशी व्यापार RBSE Solutions for Class 11 Economics

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Class 11 Economics Chapter 19 भारत का विदेशी व्यापार RBSE Solutions PDF

RBSE Class 11 Economics Chapter 19 पाठ्यपुस्तक के प्रश्नोत्तर

RBSE Class 11 Economics Chapter 19 वस्तुनिष्ठ प्रश्न

 

Question 1. वर्ष 2013-14 में भारत के विदेशी व्यापार के सन्दर्भ में कौन-सा कथन सत्य है?
(अ) माल निर्यातों का मूल्य आयातों के मूल्य से अधिक था
(ब) माल आयातों का मूल्य निर्यातों के मूल्य से अधिक था
(स) माल निर्यातों का मूल्य आयातों के मूल्य से समान था
(द) उपर्युक्त में से कोई नहीं
Answer: (ब) माल आयातों का मूल्य निर्यातों के मूल्य से अधिक था
In simple words: चीज़ें जो हमने खरीदीं (आयात), उनकी कीमत उन चीज़ों से ज़्यादा थी जो हमने बेचीं (निर्यात). यह बताता है कि देश में निर्यात से ज़्यादा आयात हुआ.

🎯 Exam Tip: विदेशी व्यापार संतुलन को समझने के लिए आयात और निर्यात के मूल्यों को ध्यान से देखें.

 

Question 2. वर्ष 2013-14 में भारत के निर्यातों का कुल मूल्य था। (बिलियन अमेरीकी डालर में)
(अ) 1.27
(ब) 8.5
(स) 44.6
(द) 314.4
Answer: (द) 314.4
In simple words: वर्ष 2013-14 में भारत ने कुल 314.4 बिलियन अमेरिकी डॉलर मूल्य का सामान दूसरे देशों को बेचा. यह आंकड़ा दिखाता है कि उस साल भारत ने कितनी चीजें बाहर भेजीं और कितनी कमाई की.

🎯 Exam Tip: आर्थिक आंकड़ों से जुड़े प्रश्नों में वर्ष और इकाई (जैसे बिलियन डॉलर) पर विशेष ध्यान दें.

 

Question 3. निम्न में से वर्तमान में भारत में आयात की जाने वाली प्रमुख वस्तु क्या है?
(अ) इलेक्ट्रोनिक वस्तुएँ
(ब) मोती व बहुमूल्य रत्न
(स) पैट्रोनियम उत्पाद
(द) गैर-विद्युतीय मशीनरी
Answer: (स) पैट्रोनियम उत्पाद
In simple words: भारत अभी अपनी ऊर्जा ज़रूरतों को पूरा करने के लिए सबसे ज़्यादा पेट्रोलियम उत्पाद दूसरे देशों से मंगवाता है.

🎯 Exam Tip: भारत के प्रमुख आयात आइटमों को याद रखें, खासकर ऊर्जा संबंधी उत्पादों को.

 

Question 4. वर्तमान में भारत में निर्यातों में किस वस्तु समूह का सबसे बड़ा हिस्सा है?
(अ) कृषि उत्पाद
(ब) खनिज उत्पाद
(स) विनिर्मित वस्तुएँ
(द) उपर्युक्त कोई नहीं
Answer: (स) विनिर्मित वस्तुएँ
In simple words: भारत दूसरे देशों को सबसे ज़्यादा फैक्ट्रियों में बनी हुई चीज़ें बेचता है, जो देश की औद्योगिक तरक्की को दिखाती है.

🎯 Exam Tip: भारत के निर्यात पैटर्न में 'विनिर्मित वस्तुओं' का महत्व याद रखें.

 

Question 5. निम्न में से कौनसा वर्तमान में प्रमुख आयात भागीदार देश समूह है?
(अ) ओ.ई.सी.डी देश
(ब) तेल निर्यातक देशों का संगठन
(स) पूर्वी यूरोप देश
(द) विकासशील देश
Answer: (ब) तेल निर्यातक देशों का संगठन
In simple words: भारत अपने तेल की ज़रूरत का बड़ा हिस्सा तेल निर्यातक देशों के संगठन (OPEC) से पूरा करता है.

🎯 Exam Tip: प्रमुख व्यापारिक साझीदार समूहों को जानें, खासकर उन वस्तुओं के लिए जो देश ज़्यादा आयात करता है.

 

Question 6. वर्तमान में निम्न में से किस देश समूह को भारत सर्वाधिक निर्यात करता है?
(अ) ओ.ई.सी.डी. देश
(ब) तेल निर्यातक देशों का संगठन
(स) पूर्वी यूरोप देश
(द) विकासशील देश
Answer: (अ) ओ.ई.सी.डी. देश
In simple words: भारत इन विकसित देशों को सबसे ज़्यादा सामान बेचता है, जो हमारे व्यापार के लिए महत्वपूर्ण हैं.

🎯 Exam Tip: भारत के प्रमुख निर्यात गंतव्य (destination) देशों के समूहों को याद रखें.

 

Question 7. विश्व व्यापार संगठन के अनुसार वर्ष 2013-14 में विश्व निर्यात में भारत का हिस्सा था?
(अ) 0.8 प्रतिशत
(ब) 1 प्रतिशत
(स) 1.7 प्रतिशत
(द) 2.5 प्रतिशत
Answer: (स) 1.7 प्रतिशत
In simple words: वर्ष 2013-14 में पूरे विश्व में जितना सामान बेचा-खरीदा गया, उसमें भारत का हिस्सा 1.7 प्रतिशत था.

🎯 Exam Tip: विश्व व्यापार संगठन के आंकड़ों से जुड़े प्रतिशत मानों को सटीक रूप से याद करें.

 

Question 8. निम्न में से कौनसी भारत का निर्यात प्रोत्साहन योजना थी?
(अ) नकद मुआवजा सहायता
(ब) शुल्क वापसी की व्यवस्था
(स) आयात पुनः पूर्ति योजना
(द) उपर्युक्त सभी
Answer: (द) उपर्युक्त सभी
In simple words: नकद मुआवजा सहायता, शुल्क वापसी की व्यवस्था और आयात पुनः पूर्ति योजना - ये सभी भारत के निर्यात को बढ़ाने और उसे मज़बूत बनाने के लिए बनाई गई थीं.

🎯 Exam Tip: निर्यात प्रोत्साहन योजनाओं के मुख्य नाम और उनके उद्देश्यों को समझें.

RBSE Class 11 Economics Chapter 19 अतिलघूत्तरात्मक प्रश्न

 

Question 1. वर्ष 2013-14 में भारत में माल आयात निर्यात व व्यापार अधिशेष को लिखिए।
Answer: वर्ष 2013-14 में भारत का आयात 450200 अमेरिकी मिलियन डॉलर था, जबकि निर्यात 314405 अमेरिकी मिलियन डॉलर था. इसका मतलब है कि भारत का व्यापार अधिशेष (ट्रेड सरप्लस) 135795 अमेरिकी मिलियन डॉलर था, जहाँ आयात निर्यात से ज़्यादा है, जिसे अक्सर व्यापार घाटा कहा जाता है.
In simple words: आयात 450200 अमेरिकी मिलियन डॉलर, निर्यात 314405 अमेरिकी मिलियन डॉलर और व्यापार अधिशेष 135795 अमेरिकी मिलियन डॉलर था.

🎯 Exam Tip: आयात, निर्यात और व्यापार अधिशेष (या घाटा) की परिभाषा और गणना को याद रखें.

 

Question 2. वर्तमान में निर्यात की जाने वाली (भारत द्वारा) पाँच शीर्ष मूल्यानुसार वस्तुओं के नाम लिखिए।
Answer: भारत से अभी सबसे ज़्यादा बेची जाने वाली पाँच चीज़ें ये हैं: 1. पेट्रोलियम उत्पाद (रिफाइंड) 2. रत्न और आभूषण 3. इंजीनियरिंग का सामान 4. दवाएं और रसायन 5. कृषि उत्पाद. भारत अब सिर्फ़ कच्चा माल नहीं, बल्कि तैयार चीज़ें भी ज़्यादा बेचता है, जो देश के औद्योगिक विकास को दर्शाती है.
In simple words: भारत के प्रमुख निर्यात में पेट्रोलियम उत्पाद, रत्न, इंजीनियरिंग सामान, रसायन और कृषि उत्पाद शामिल हैं.

🎯 Exam Tip: भारत के प्रमुख निर्यात और आयात वस्तुओं की सूची को याद रखना महत्वपूर्ण है, क्योंकि ये देश की आर्थिक स्थिति को दर्शाते हैं.

 

Question 3. भारत द्वारा वर्तमान में आयात की जाने वाली पाँच शीर्ष मूल्य वाली वस्तुओं के नाम लिखिए।
Answer: भारत अभी सबसे ज़्यादा जिन पाँच चीज़ों को दूसरे देशों से खरीदता है, वे ये हैं: 1. पेट्रोलियम तेल व लुब्रिकेन्ट 2. अलौह धातुएँ (सोना, चाँदी आदि) 3. इलेक्ट्रोनिक वस्तुएँ व गैर-विद्युत मशीनरी 4. मोती व बहुमूल्य रत्न 5. खाद्य पदार्थ व सम्बन्धित पदार्थ (अनाज, दालें, खाद्य तेल). ये चीज़ें देश की ज़रूरतों को पूरा करने के लिए बहुत ज़रूरी हैं और अर्थव्यवस्था का एक बड़ा हिस्सा बनाती हैं.
In simple words: भारत के मुख्य आयात आइटम पेट्रोलियम तेल, सोना-चाँदी, इलेक्ट्रॉनिक सामान, कीमती रत्न और खाद्य पदार्थ हैं.

🎯 Exam Tip: देश के मुख्य आयात आइटमों को याद रखें, ये अर्थव्यवस्था की ज़रूरतों को बताते हैं.

 

Question 4. भारत के प्रमुख आयात भागीदार कोई दो देश समूह का नाम लिखिए।
Answer: भारत के दो प्रमुख व्यापारिक समूह जिनसे वह ज़्यादा आयात करता है, वे हैं: 1. तेल निर्यातक देशों का संगठन (OPEC) 2. विकासशील देश. भारत अपनी ऊर्जा और अन्य ज़रूरतों के लिए इन समूहों पर बहुत निर्भर करता है, जिससे इन देशों के साथ उसके व्यापारिक संबंध महत्वपूर्ण होते हैं.
In simple words: भारत के प्रमुख आयात भागीदार तेल निर्यातक देशों का संगठन (OPEC) और विकासशील देश हैं.

🎯 Exam Tip: भारत के मुख्य आयात साझीदार देशों के समूहों को जानना ज़रूरी है, क्योंकि ये व्यापारिक संबंधों को दर्शाते हैं.

 

Question 5. नई व्यापार नीति (2015-20) के दो प्रमुख लक्ष्य लिखिए।
Answer: नई व्यापार नीति (2015-20) के दो मुख्य लक्ष्य ये थे: 1. देश के निर्यात को 466 बिलियन डॉलर से बढ़ाकर 2019-20 तक 900 बिलियन डॉलर तक करना. 2. विश्व के कुल निर्यात में भारत की हिस्सेदारी को 2 प्रतिशत से बढ़ाकर 5 प्रतिशत तक करना. ये लक्ष्य भारत की वैश्विक व्यापारिक भूमिका को बढ़ाने और उसे अधिक प्रतिस्पर्धी बनाने के लिए निर्धारित किए गए थे.
In simple words: नई व्यापार नीति का लक्ष्य निर्यात को 900 बिलियन डॉलर तक बढ़ाना और विश्व व्यापार में भारत का हिस्सा 5 प्रतिशत तक करना था.

🎯 Exam Tip: व्यापार नीति के लक्ष्यों को याद रखें, क्योंकि ये सरकार की भविष्य की व्यापारिक रणनीति को दर्शाते हैं.

RBSE Class 11 Economics Chapter 19 लघूत्तरात्मक प्रश्न

 

Question 1. नकद मुआवजा सहायता (Cash Compensatory Scheme) का अर्थ बताइए।
Answer: नकद मुआवजा सहायता (Cash Compensatory Scheme) का मतलब है कि जब निर्यातक कोई चीज़ बनाने के लिए कच्चा माल खरीदते हैं और उस पर टैक्स देते हैं, तो सरकार उन्हें उस टैक्स के बदले नकद पैसे वापस कर देती है. इस योजना की शुरुआत 1966 में हुई थी ताकि निर्यातकों को फ़ायदा हो और वे ज़्यादा निर्यात कर सकें, जिससे उनकी लागत कम हो जाती है.
In simple words: यह एक योजना है जहाँ निर्यातक को कच्चे माल पर दिए गए टैक्स का पैसा सरकार वापस कर देती है ताकि निर्यात बढ़े.

🎯 Exam Tip: नकद मुआवजा सहायता जैसी योजनाओं का उद्देश्य और लागू होने का वर्ष महत्वपूर्ण है.

 

Question 2. भारत से वस्तु निर्यात योजना (MEIS) से क्या तात्पर्य है?
Answer: भारत से वस्तु निर्यात योजना (MEIS) का उद्देश्य विशिष्ट उत्पादों और बाजारों के लिए निर्यात को बढ़ावा देना था, जिसके तहत निर्यातकों को निर्यात पर प्रोत्साहन के रूप में 'स्क्रिप्ट' दी जाती थी. ये स्क्रिप्ट्स करों का भुगतान करने के लिए इस्तेमाल की जा सकती थीं, जिससे निर्यातकों की लागत कम होती थी और वे वैश्विक बाजार में अधिक प्रतिस्पर्धी बनते थे. यह योजना भारत की निर्यात प्रतिस्पर्धात्मकता बढ़ाने में सहायक थी.
In simple words: MEIS एक सरकारी योजना थी जहाँ निर्यातकों को कुछ खास सामान निर्यात करने पर टैक्स छूट वाले सर्टिफिकेट मिलते थे.

🎯 Exam Tip: निर्यात प्रोत्साहन योजनाओं जैसे MEIS के मुख्य लाभ और वे कैसे काम करते हैं, समझना महत्वपूर्ण है.

 

Question 3. निर्यात प्रोत्साहन पूँजीगत वस्तु योजना क्या है?
Answer: निर्यात प्रोत्साहन पूँजीगत वस्तु योजना (EPCG Scheme) एक ऐसी योजना है जहाँ उत्पादकों को निर्यात के लिए सामान बनाने वाली मशीनें (पूँजीगत वस्तुएँ) बिना किसी आयात शुल्क के खरीदने की इजाज़त मिलती है. विदेश व्यापार नीति 2009-14 के तहत, इस योजना से इंजीनियरिंग, इलेक्ट्रॉनिक, रसायन, वस्त्र, प्लास्टिक, हस्तशिल्प और चमड़े जैसे उद्योगों को फ़ायदा हुआ. इसका लक्ष्य घरेलू उत्पादन क्षमता को बढ़ाना और निर्यात को प्रोत्साहित करना था.
In simple words: इस योजना में निर्यात के लिए मशीनें (पूँजीगत वस्तुएँ) बिना टैक्स के आयात करने की अनुमति मिलती है.

🎯 Exam Tip: पूँजीगत वस्तु योजना (EPCG) का मुख्य उद्देश्य और यह किन उद्योगों को लाभ पहुँचाती है, इसे याद रखें.

 

Question 4. निर्यात प्रोत्साहन की प्रमुख स्कीमों का नाम लिखिए।
Answer: निर्यात को बढ़ावा देने वाली मुख्य योजनाएँ ये हैं: 1. नकद मुआवजा सहायता (Cash Compensatory Scheme), जहाँ निर्यातकों को कच्चे माल पर दिए गए टैक्स का पैसा वापस मिल जाता है. 2. शुल्क वापसी योजना (Duty Drawback Scheme), जहाँ निर्यात किए गए उत्पादों पर लगे आयात शुल्क को वापस कर दिया जाता है. 3. आयात पुनः पूर्ति योजना (Import Replenishment Scheme), जो निर्यातकों को प्रतिबंधित वस्तुएँ आयात करने की अनुमति देती है. 4. ब्लैंकेट विनिमय अनुमति योजना (Blanket Exchange Permit Scheme), जो निर्यातकों को अपनी विदेशी मुद्रा आय का एक हिस्सा निर्यात संवर्धन में उपयोग करने की छूट देती है. ये सभी योजनाएँ निर्यातकों को मदद करती हैं और भारत के निर्यात को बढ़ाती हैं.
In simple words: मुख्य निर्यात प्रोत्साहन योजनाएँ हैं: नकद मुआवजा, शुल्क वापसी, आयात पुनः पूर्ति और ब्लैंकेट विनिमय अनुमति योजना.

🎯 Exam Tip: भारत की विभिन्न निर्यात प्रोत्साहन योजनाओं के नाम और उनके मूल कार्य को समझें.

RBSE Class 11 Economics Chapter 19 निबंधात्मक प्रश्न

 

Question 1. भारत के माल निर्यात आयात की संरचना में परिवर्तन को लिखिए।
Answer: आज़ादी के बाद से भारत के निर्यात और आयात में बड़े बदलाव आए हैं, जिससे देश की अर्थव्यवस्था का विकास दिखाई देता है. पहले भारत मुख्य रूप से कच्चे माल जैसे जूट, चाय, सूती वस्त्र, अभ्रक, मैंगनीज और खालें निर्यात करता था. 1960 में कुल निर्यात में कृषि और उससे जुड़ी चीज़ों का हिस्सा 44.2 प्रतिशत था, जो 2013-14 तक घटकर 13.7 प्रतिशत रह गया. अयस्क और खनिजों का निर्यात भी 1960-61 में 8.1 प्रतिशत था, जो 2013-14 में 1.8 प्रतिशत हो गया. वहीं, तैयार माल (विनिर्मित वस्तुएँ) का निर्यात 1960-61 में 45.3 प्रतिशत से बढ़कर 2013-14 में 61.3 प्रतिशत हो गया. यह दर्शाता है कि भारत अब फैक्ट्रियों में बनी चीज़ें ज़्यादा बेच रहा है, जो देश की औद्योगिक प्रगति को दर्शाता है.
आयातों की संरचना में भी परिवर्तन हुए हैं. पहले भारत मशीनरी और उपकरण जैसी पूँजीगत वस्तुओं का आयात ज़्यादा करता था.

वस्तु समूह1960-611980-811990-912013-14
पेट्रोलियम तेल व लुब्रिकेन्ट6.141.925.036.6
अलौह धातुएँ (सोना-चाँदी आदि)4.23.82.58.6
इलेक्ट्रोनिक वस्तुएँ गैर-विद्युत मशीनरी18.18.79.85.2
मोती व बहुमूल्य रत्न0.13.38.75.3
कुल आयात (मिलियन डॉलर में)23531586924075450200

वर्तमान में पेट्रोलियम तेल और चिकनाई वाले पदार्थ प्रमुख आयात मद बन गए हैं. 1960-61 में पेट्रोलियम तेल का हिस्सा 6.1 प्रतिशत था, जो 2013-14 में बढ़कर 36.6 प्रतिशत हो गया. इसके अलावा, सोने और चांदी जैसी अलौह धातुओं और कीमती रत्नों का आयात भी बढ़ा है. ये बदलाव देश की बढ़ती ऊर्जा ज़रूरतों और बदलती उपभोक्ता मांग को दर्शाते हैं.
In simple words: पहले भारत कच्चा माल ज़्यादा बेचता था, अब तैयार माल ज़्यादा बेचता है. आयात में पहले मशीनें ज़्यादा होती थीं, अब तेल और सोना ज़्यादा होता है.

🎯 Exam Tip: भारत के निर्यात और आयात संरचना में समय के साथ हुए परिवर्तनों को प्रमुखता से लिखें, जैसे कि कृषि से विनिर्मित वस्तुओं की ओर बदलाव.

 

Question 2. भारत के माल निर्यात आयात की दिशा में लिखिए।
Answer: भारत के विदेशी व्यापार की दिशा में समय के साथ बड़े बदलाव आए हैं, जो वैश्विक आर्थिक परिदृश्य में भारत की बदलती भूमिका को दर्शाते हैं. आज़ादी के बाद, 1950-51 में, ब्रिटेन और अमेरिका हमारे मुख्य व्यापारिक साझेदार थे, जहाँ कुल निर्यात का 42 प्रतिशत और कुल आयात का 39.1 प्रतिशत इन्हीं दोनों देशों के साथ था.
वर्तमान में व्यापारिक साझेदार देशों को चार मुख्य समूहों में बांटा जाता है:
1. आर्थिक सहयोग संगठन (OECD) के देश: इस समूह में यूरोपीय संघ, अमेरिका, जापान और स्विट्जरलैंड जैसे विकसित देश आते हैं.
2. तेल निर्यातक देशों का संगठन (OPEC): इसमें संयुक्त अरब अमीरात, सऊदी अरब और ईरान जैसे तेल उत्पादक देश शामिल हैं.
3. पूर्वी यूरोप के देश: इस समूह में रूस और अन्य पूर्वी यूरोपीय देश आते हैं.
4. विकासशील देश: इनमें चीन, हांगकांग, दक्षिणी कोरिया, सिंगापुर और मलेशिया जैसे तेजी से उभरते देश शामिल हैं.
भारत के निर्यातों की दिशा में भी महत्वपूर्ण बदलाव हुए हैं.

देश समूह1960-611990-912012-13
ओ.ई.सी.डी देश (OECD)66.153.534.2
तेल निर्यातक देशों का संगठन (OPEC)4.15.620.8
पूर्वी यूरोप7.017.91.3
विकासशील देश14.917.141.5
अन्य देश8.02.93.5

पहले हम ज़्यादातर OECD देशों को सामान बेचते थे, लेकिन अब विकासशील देशों के साथ हमारा निर्यात बहुत बढ़ गया है. तेल निर्यातक देशों को निर्यात भी बढ़ा है. आयातों की दिशा में भी परिवर्तन देखा गया है.
देश समूह1960-611990-912012-13
ओ.ई.सी.डी. देश78.054.027.8
तेल निर्यातक देशों का संगठन4.616.338.6
पूर्वी यूरोप3.47.81.8
विकासशील देश11.818.631.33
अन्य देश2.20.00.5

1960-61 में कुल आयातों का 78 प्रतिशत हिस्सा OECD देशों से आता था, जो 2012-13 में घटकर 27.8 प्रतिशत रह गया. वहीं, तेल निर्यातक देशों से आयात 4.6 प्रतिशत से बढ़कर 38.6 प्रतिशत तक हो गया है, जो देश की बढ़ती ऊर्जा निर्भरता को दर्शाता है. विकासशील देशों से आयात भी बढ़ा है. ये बदलाव वैश्विक अर्थव्यवस्था और भारत की अपनी नीतियों के कारण हुए हैं, जिससे भारत ने अपने व्यापारिक संबंधों में विविधता लाई है.
In simple words: भारत का व्यापार पहले ज़्यादातर ब्रिटेन और अमेरिका से होता था. अब भारत विकासशील देशों और तेल निर्यातक देशों के साथ ज़्यादा व्यापार करता है.

🎯 Exam Tip: भारत के व्यापारिक साझेदार देशों के समूहों को पहचानें और समय के साथ निर्यात व आयात की दिशा में हुए बदलावों को समझाएं.

भारत के विदेशी व्यापार की वर्तमान प्रवृत्तियाँ (Current Trends of India's Foreign Trade) :

 

Question 4. भारत की नवीन व्यापार नीति (2015-20) के प्रमुख प्रावधानों का ब्यौरा दीजिये।
Answer: भारत की नई व्यापार नीति (2015-20) का मुख्य लक्ष्य 'मेक इन इंडिया', 'डिजिटल इंडिया' और 'स्किल इंडिया' जैसी सरकारी योजनाओं को बढ़ावा देना था. इस नीति के तहत कई नए नियम बनाए गए ताकि देश से निर्यात बढ़े और व्यापार करना आसान हो. नई व्यापार नीति के प्रमुख प्रावधान निम्न प्रकार हैं:
1. कृषि और खाद्य पदार्थों के प्रसंस्करण और पैकेजिंग को 'वस्तु निर्यात योजना' के तहत उच्च स्तरीय समर्थन मिलेगा.
2. भारत से सेवा निर्यात योजना (SEIS) का लाभ अब 'भारत में अव्यवस्थित सेवा प्रदाताओं' पर भी लागू होगा.
3. जिन वस्तुओं के निर्यात में भारत को पारंपरिक रूप से दक्षता प्राप्त है, उनके निर्यात को बढ़ावा देने के लिए 'ब्रांडिंग' अभियान चलाए जाएँगे.
4. घरेलू विनिर्माण को बढ़ावा देने के लिए, नई नीति में निर्यात की बाध्यता को 25 प्रतिशत कम कर दिया गया है.
5. ड्यूटी क्रेडिट स्क्रिप्ट्स स्वतंत्र रूप से हस्तांतरणीय होंगी और उनका उपयोग कस्टम ड्यूटी, एक्साइज ड्यूटी और सेवाकर के भुगतान में किया जा सकेगा.
6. निर्यात प्रोत्साहन पूँजीगत वस्तु योजना (EPCG Scheme) के तहत घरेलू वसूली के लिए निर्यात की बाध्यता को घटाकर 75 प्रतिशत कर दिया गया है.
7. डिजिटल सिग्नेचर के लिए ऑनलाइन प्रक्रिया होगी और विभिन्न लाइसेंस जारी करने के लिए अंतर-मंत्रालयी परामर्श ऑनलाइन किया जाएगा.
8. निर्यात अधिकरण (Authorisation) की वैध अवधि को 12 माह से बढ़ाकर 24 माह कर दिया गया है.
9. रक्षा उत्पाद, कृषि उत्पाद और पर्यावरण-मित्र उत्पादों के निर्यात के लिए उच्च स्तरीय समर्थन रहेगा.
यह नीति व्यापार को बढ़ावा देने, प्रक्रिया को सरल बनाने और वैश्विक प्रतिस्पर्धा में भारत की स्थिति को मज़बूत करने में सहायक थी.
In simple words: नई व्यापार नीति का लक्ष्य निर्यात बढ़ाना, व्यापार को आसान बनाना और 'मेक इन इंडिया' जैसे कार्यक्रमों का समर्थन करना था.

🎯 Exam Tip: नई व्यापार नीति के प्रमुख प्रावधानों को याद रखें और वे 'मेक इन इंडिया' जैसे राष्ट्रीय कार्यक्रमों से कैसे जुड़े हैं, यह भी बताएं.

 

Question 5. स्वदेशी की अवधारणा (Concept of Swadeshi) से क्या तात्पर्य है? लेख लिखिए।
Answer: स्वदेशी का मतलब सिर्फ अपने देश में बनी चीज़ों का इस्तेमाल करना नहीं है, बल्कि यह एक गहरी सोच है जो आत्मनिर्भरता और समुदाय को मज़बूत करने पर ज़ोर देती है.
महात्मा गांधी के अनुसार, स्वदेशी का अर्थ है "हमारी वह भावना, जो हमें दूर को छोड़कर अपने समीपवर्ती प्रदेश का ही उपयोग और सेवा करना सिखाती है." इसका मतलब है कि हमें अपनी तुरंत उपलब्ध चीज़ों और सेवाओं को प्राथमिकता देनी चाहिए, चाहे वह धर्म, राजनीति या अर्थशास्त्र के क्षेत्र में हो. गांधीजी ने कहा कि हमें अपने पड़ोसियों द्वारा बनाई गई वस्तुओं का ही उपयोग करना चाहिए और उनकी कमियाँ दूर करके उन्हें बेहतर बनाना चाहिए.
पंडित दीनदयाल उपाध्याय ने कहा कि हमें पश्चिम के ज्ञान-विज्ञान को अपनाना चाहिए, लेकिन उनके रहन-सहन, बोलचाल और खान-पान जैसी रीति-रिवाजों को अपनाते समय यह सोचना चाहिए कि क्या वे हमारे लिए उपयुक्त हैं. यदि नहीं, तो उनका त्याग करना श्रेयकर होगा.
गोपाल कृष्ण गोखले के अनुसार, स्वदेशी विचारधारा मातृभूमि के लिए त्याग करने का सबक देती है. इससे देश समृद्ध होता है और भाईचारे की भावना बढ़ती है.
स्वतंत्रता आंदोलन के दौरान, स्वदेशी सिर्फ विदेशी शासन का विरोध करने का प्रतीक नहीं था, बल्कि देश की खराब आर्थिक दशा को सुधारने का एक समाधान भी था. आर.सी. दत्त की पुस्तक 'Economic History of India' के प्रकाशन के बाद स्वदेशी को देश की आर्थिक समस्याओं के समाधान के रूप में देखा जाने लगा.
महर्षि अरविन्द ने कहा कि "स्वदेशी का अभिप्राय राष्ट्र की अस्मिता और राष्ट्र की इच्छा शक्ति की पहचान से है. राष्ट्र के लिए समाज की त्याग करने की तत्परता स्वदेशी से झलकती है."
कुल मिलाकर, स्वदेशी हमें आत्मनिर्भर बनने, अपने स्थानीय उद्योगों और समुदायों को समर्थन देने और अपनी सांस्कृतिक पहचान को बनाए रखने की प्रेरणा देता है.
In simple words: स्वदेशी का मतलब अपने देश की चीज़ों और सेवाओं को प्राथमिकता देना है, ताकि देश आत्मनिर्भर और मज़बूत बने.

🎯 Exam Tip: स्वदेशी की अवधारणा को विभिन्न विचारकों के दृष्टिकोण के साथ समझाएं, जैसे गांधीजी, गोखले, दीनदयाल उपाध्याय, और अरविन्द.

RBSE Class 11 Economics Chapter 19 अन्य महत्त्वपर्ण प्रश्नोत्तर

RBSE Class 11 Economics Chapter 19 बहुचयनात्मक प्रश्न

 

Question 1. निर्यातों का मूल्य आयातों के मूल्य से अधिक होने पर व्यापार शेष होता है
(अ) ऋणात्मक
(ब) धनात्मक
(स) न ऋणात्मक न धनात्मक
(द) इनमें से कोई नहीं
Answer: (ब) धनात्मक
In simple words: जब देश का निर्यात, आयात से ज़्यादा होता है, तो व्यापार शेष धनात्मक होता है, जो अर्थव्यवस्था के लिए अच्छा माना जाता है.

🎯 Exam Tip: व्यापार शेष धनात्मक और ऋणात्मक होने की स्थितियों को स्पष्ट रूप से समझें.

 

Question 2. वर्ष 1950-51 में भारत के वस्तु निर्यातों का कुल मूल्य था (विलियन अमेरिकी डॉलर में)
(अ) 1.27
(ब) 8.5
(स) 44.6
(द) 314.4
Answer: (अ) 1.27
In simple words: आज़ादी के तुरंत बाद, वर्ष 1950-51 में भारत ने कुल 1.27 बिलियन अमेरिकी डॉलर मूल्य का सामान दूसरे देशों को निर्यात किया.

🎯 Exam Tip: भारत के शुरुआती व्यापार आंकड़ों को याद रखें, क्योंकि ये आर्थिक विकास के आधार को दर्शाते हैं.

 

Question 4. आधारभूत उद्योगों की स्थापना हुई
(अ) पाँचवीं पंचवर्षीय योजना में
(ब) प्रथम पंचवर्षीय योजना में
(स) द्वितीय पंचवर्षीय योजना में
(द) सातवीं पंचवर्षीय योजना में
Answer: (स) द्वितीय पंचवर्षीय योजना में
In simple words: द्वितीय पंचवर्षीय योजना में भारत में बड़े और आधारभूत उद्योगों को स्थापित किया गया ताकि देश औद्योगिक रूप से मज़बूत बन सके.

🎯 Exam Tip: भारत की पंचवर्षीय योजनाओं के मुख्य उद्देश्यों और उनके लागू होने के समय को याद रखें.

 

Question 5. आजादी से पूर्व प्रमुख रूप से भारत का विदेशी व्यापार था
(अ) जापान से
(ब) चीन से
(स) स्विटजरलैण्ड से
(द) ब्रिटेन से
Answer: (द) ब्रिटेन से
In simple words: आज़ादी से पहले, भारत ब्रिटेन का उपनिवेश था, और इसलिए हमारा ज़्यादातर व्यापार ब्रिटेन के साथ ही होता था.

🎯 Exam Tip: औपनिवेशिक काल के दौरान भारत के व्यापारिक संबंधों को समझें, विशेषकर ब्रिटेन के साथ.

 

Question 6. तेल निर्यातक देशों के संगठन (OPEC) में सम्मिलित नहीं है
(अ) संयुक्त अरब अमीरात
(ब) अमेरिका
(स) सऊदी अरब
(द) ईरान
Answer: (ब) अमेरिका
In simple words: तेल निर्यातक देशों का संगठन (OPEC) मुख्य रूप से तेल उत्पादक देशों का समूह है, और अमेरिका तेल का आयातक देश है, इसलिए वह इसका सदस्य नहीं है.

🎯 Exam Tip: OPEC जैसे अंतर्राष्ट्रीय संगठनों के सदस्य देशों को पहचानें और जानें कि कौन से देश उनके सदस्य नहीं हैं.

 

Question 8. आयात प्रतिबन्ध व आयात की सीमाओं के कारण आयात उदारीकरण को अपनाया गया था
(अ) 1950 के दशक में
(ब) 1970 के दशक में
(स) 1980 के दशक में
(द) इनमें से कोई नहीं
Answer: (स) 1980 के दशक में
In simple words: भारत ने 1980 के दशक में आयात उदारीकरण को अपनाया ताकि व्यापार को आसान बनाया जा सके और अर्थव्यवस्था को और अधिक खोला जा सके.

🎯 Exam Tip: भारत की आर्थिक नीतियों में प्रमुख बदलावों का समय याद रखें, जैसे आयात उदारीकरण का दौर.

 

Question 9. निर्यात प्रोत्साहन हेतु चलायी गयी योजना है
(अ) नकद मुआवजा सहायता योजना
(ब) शुल्क वापसी योजना
(स) ब्लैंकेट विनिमय अनुमति योजना
(द) ये सभी
Answer: (द) ये सभी
In simple words: नकद मुआवजा सहायता, शुल्क वापसी और ब्लैंकेट विनिमय अनुमति योजना - ये सभी सरकार ने निर्यात को बढ़ावा देने और निर्यातकों को मदद देने के लिए शुरू की थीं.

🎯 Exam Tip: विभिन्न निर्यात प्रोत्साहन योजनाओं के नामों और उनके सामूहिक उद्देश्य को समझें.

 

Question 10. “स्वदेशी का अभिप्राय राष्ट्र की अस्मिता और राष्ट्र की इच्छा शक्ति की पहचान से है। राष्ट्र के लिये समाज की त्याग करने की तत्परता स्वदेशी से झलकती है।” यह कथन है
(अ) गोपाल कृष्ण गोखले
(ब) महर्षि अरविन्द
(स) पं० दीनदयाल उपाध्याय
(द) इनमें से कोई नहीं
Answer: (ब) महर्षि अरविन्द
In simple words: महर्षि अरविन्द ने स्वदेशी को राष्ट्र की पहचान और उसकी आंतरिक शक्ति से जोड़ा था.

🎯 Exam Tip: स्वदेशी से जुड़े प्रमुख व्यक्तियों और उनके विचारों को याद रखें, विशेषकर महर्षि अरविन्द के दृष्टिकोण को.

 

Question 2. एडम स्मिथ के अनुसार देश को किस प्रकार की वस्तुओं का निर्यात करना चाहिए।
Answer: एडम स्मिथ के अनुसार, किसी देश को उन चीज़ों का निर्यात करना चाहिए जिन्हें वह दूसरे देशों की तुलना में सबसे कम लागत में और सबसे अच्छी तरह से बना सकता है, यानी निरपेक्ष लाभ वाली वस्तुएँ. ऐसा करने से सभी देशों को व्यापार में ज़्यादा फ़ायदा होता है और संसाधनों का कुशल उपयोग होता है.
In simple words: एडम स्मिथ ने कहा कि देश को वह सामान बेचना चाहिए जिसे वह सबसे अच्छे से और सबसे सस्ता बना सके.

🎯 Exam Tip: एडम स्मिथ के 'निरपेक्ष लाभ' सिद्धांत को समझें और यह क्यों व्यापार के लिए महत्वपूर्ण है.

 

Question 3. रिकार्डों के अनुसार देश को किस प्रकार की वस्तुओं का निर्यात करना चाहिए?
Answer: रिकार्डो के अनुसार, एक देश को उन चीज़ों का निर्यात करना चाहिए जिनमें उसे तुलनात्मक लाभ हो. इसका मतलब है कि भले ही वह किसी और देश से बेहतर न हो, लेकिन उसे उन चीज़ों को बनाने में दूसरों से कम नुकसान होता हो या कम अवसर लागत आती हो. यह सिद्धांत बताता है कि कैसे देश व्यापार से लाभ कमा सकते हैं, भले ही उनमें निरपेक्ष लाभ न हो.
In simple words: रिकार्डो के अनुसार, देश को वह सामान बेचना चाहिए जिसमें उसे दूसरे देशों की तुलना में कम नुकसान या कम अवसर लागत हो.

🎯 Exam Tip: रिकार्डो के 'तुलनात्मक लाभ' सिद्धांत को एडम स्मिथ के 'निरपेक्ष लाभ' सिद्धांत से अलग करके समझें.

 

Question 4. व्यापार शेष धनात्मक एवं शेष ऋणात्मक से क्या आशय है?
Answer: जब निर्यातों का मूल्य आयातों के मूल्य से अधिक होता है तो व्यापार शेष धनात्मक होता है. वहीं, जब आयातों का मूल्य निर्यातों के मूल्य से अधिक होने पर व्यापार शेष ऋणात्मक होता है. धनात्मक व्यापार शेष देश के लिए फायदेमंद होता है, जबकि ऋणात्मक व्यापार शेष देश के लिए एक वित्तीय चुनौती हो सकती है.
In simple words: अगर निर्यात ज़्यादा है तो व्यापार शेष धनात्मक है, और अगर आयात ज़्यादा है तो व्यापार शेष ऋणात्मक है.

🎯 Exam Tip: व्यापार शेष की परिभाषा और धनात्मक या ऋणात्मक होने की स्थिति को स्पष्ट रूप से याद रखें, यह देश की वित्तीय स्थिति को दर्शाता है.

 

Question 5. आजादी के समय जूट का आयात क्यों करना पड़ा?
Answer: आज़ादी के समय भारत को जूट का आयात इसलिए करना पड़ा क्योंकि देश में खाने के सामान की कमी थी और देश का विभाजन भी हुआ था. विभाजन के बाद, जूट के कई उत्पादन क्षेत्र पाकिस्तान में चले गए थे, जबकि जूट मिलें भारत में रह गईं, जिससे कच्चे जूट की गंभीर कमी हो गई और भारत को उसे आयात करना पड़ा.
In simple words: देश के बँटवारे और अनाज की कमी के कारण आज़ादी के समय भारत को जूट का आयात करना पड़ा.

🎯 Exam Tip: भारत के विभाजन और खाद्य संकट जैसे ऐतिहासिक कारणों का व्यापार पर पड़े प्रभाव को समझें.

 

Question 6. द्वितीय पंचवर्षीय योजना के पश्चात पूँजीगत उपकरणों, मशीनरी व तकनीकी के आयात में वृद्धि क्यों हुई?
Answer: द्वितीय पंचवर्षीय योजना के बाद पूँजीगत उपकरण, मशीनरी और नई तकनीकें ज़्यादा आयात की गईं क्योंकि भारत बड़े-बड़े उद्योग स्थापित करना चाहता था और अपने औद्योगिक विकास को तेज़ करना चाहता था. इस योजना का मुख्य लक्ष्य आत्मनिर्भरता प्राप्त करना और अर्थव्यवस्था को आधुनिक बनाना था, जिसके लिए उन्नत मशीनों और तकनीकों की ज़रूरत थी.
In simple words: बड़े उद्योग लगाने और देश को औद्योगिक रूप से विकसित करने के लिए ज़्यादा मशीनें और नई तकनीकें बाहर से मंगाई गईं.

🎯 Exam Tip: द्वितीय पंचवर्षीय योजना के औद्योगिक लक्ष्यों और उसके आयात पैटर्न पर पड़े प्रभाव को जानें.

 

Question 7. विकासशील देश मुख्य रूप से किस प्रकार के उत्पादों का निर्यात करते हैं?
Answer: विकासशील देश मुख्य रूप से कच्चा माल, खनिज और कृषि उत्पादों का निर्यात करते हैं. ऐसा इसलिए होता है क्योंकि इन देशों में अक्सर बड़े उद्योग और ज़्यादा तकनीकी उत्पादन क्षमता की कमी होती है, जिससे वे तैयार माल की बजाय प्राकृतिक संसाधनों पर ज़्यादा निर्भर करते हैं.
In simple words: विकासशील देश ज़्यादातर कच्चा माल, खनिज और खेती के उत्पाद ही बेचते हैं.

🎯 Exam Tip: विकासशील देशों के व्यापार पैटर्न को समझें और जानें कि उनकी निर्यात संरचना विकसित देशों से कैसे अलग है.

 

Question 9. वर्ष 1960 में देश के कुल निर्यातों में कृषि व सम्बद्ध उत्पादों का हिस्सा कितना था?
Answer: वर्ष 1960 में देश के कुल निर्यातों में कृषि और उससे जुड़े उत्पादों का हिस्सा 44.2 प्रतिशत था। यह आंकड़ा उस समय कृषि क्षेत्र के महत्व को दर्शाता है, क्योंकि खेती से जुड़े उत्पाद देश के निर्यात का एक बड़ा भाग बनाते थे।
In simple words: 1960 में भारत के कुल निर्यात में खेती और उससे जुड़े सामान का हिस्सा 44.2% था।

🎯 Exam Tip: आर्थिक डेटा से जुड़े प्रश्नों में संख्याएँ और प्रतिशत बिल्कुल सही लिखें।

 

Question 10. 2013-14 में खाद्य तेल का आयात कुल आयात का कितने प्रतिशत था?
Answer: साल 2013-14 में भारत के कुल आयात में खाद्य तेल का हिस्सा 2.1 प्रतिशत था। यह दर्शाता है कि खाद्य तेल भारत के आयात का एक छोटा लेकिन महत्वपूर्ण हिस्सा था, जो देश की घरेलू मांग को पूरा करने के लिए आवश्यक था।
In simple words: 2013-14 में, भारत के कुल आयात में खाद्य तेल का आयात 2.1% था।

🎯 Exam Tip: आयात-निर्यात से संबंधित डेटा को याद करते समय वर्षों और प्रतिशत को सही ढंग से जोड़ना सुनिश्चित करें।

 

Question 11. देश के आयात की मदों में पूँजीगत वस्तुओं के अन्तर्गत कौन-कौन सी वस्तुएँ आती हैं?
Answer: देश के आयात की प्रमुख पूंजीगत वस्तुओं में बिजली मशीनरी, अन्य प्रकार की मशीनरी, परिवहन के उपकरण और बड़ी परियोजनाओं से संबंधित वस्तुएँ शामिल हैं। ये वस्तुएँ देश के औद्योगिक विकास और आधारभूत संरचना के निर्माण के लिए बहुत ज़रूरी होती हैं।
In simple words: भारत में आयात की जाने वाली मुख्य पूंजीगत वस्तुएँ बिजली मशीनरी, दूसरी मशीनरी, परिवहन के सामान और बड़े प्रोजेक्ट की चीजें हैं।

🎯 Exam Tip: पूंजीगत वस्तुओं की सूची को याद करते समय, उन वस्तुओं पर ध्यान दें जो उत्पादन और विकास में मदद करती हैं।

 

Question 12. आजादी से पूर्व भारत किसका उपनिवेश था?
Answer: आजादी से पहले भारत ब्रिटेन का उपनिवेश था। ब्रिटेन ने भारत पर लगभग दो सौ वर्षों तक शासन किया, जिससे भारत की अर्थव्यवस्था और समाज पर गहरा असर पड़ा।
In simple words: आजादी से पहले भारत ब्रिटेन के अधीन था।

🎯 Exam Tip: ऐतिहासिक प्रश्नों के उत्तर में सही देश का नाम और संदर्भ देना महत्वपूर्ण है।

 

Question 13. आर्थिक सहयोग संगठन के देश (OECD) वर्ग में कौन-कौन से देश आते हैं?
Answer: आर्थिक सहयोग और विकास संगठन (OECD) वर्ग में यूरोपीय संघ के देश, अमेरिका, जापान और स्विट्जरलैंड जैसे विकसित राष्ट्र शामिल हैं। यह संगठन उन देशों का समूह है जो लोकतंत्र और बाजार अर्थव्यवस्था के सिद्धांतों में विश्वास रखते हैं।
In simple words: OECD में यूरोपीय संघ के देश, अमेरिका, जापान और स्विट्जरलैंड जैसे देश आते हैं।

🎯 Exam Tip: प्रमुख अंतर्राष्ट्रीय संगठनों और उनके सदस्य देशों के बारे में जानकारी स्पष्ट रखें।

 

Question 14. तेल निर्यातक देशों का संगठन (OPEC) में कौन-कौन से देश सम्मिलित हैं?
Answer: तेल निर्यातक देशों के संगठन (OPEC) में सऊदी अरब, संयुक्त अरब अमीरात और ईरान जैसे प्रमुख तेल उत्पादक देश शामिल हैं। यह संगठन दुनिया भर में तेल की कीमतों और उत्पादन को नियंत्रित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है।
In simple words: OPEC में सऊदी अरब, संयुक्त अरब अमीरात और ईरान जैसे तेल उत्पादक देश हैं।

🎯 Exam Tip: OPEC के प्रमुख सदस्य देशों को याद रखें क्योंकि ये वैश्विक ऊर्जा बाजार को प्रभावित करते हैं।

 

Question 15. किन-किन समितियों द्वारा सिफारिश की गई?
Answer: भारतीय निर्यात साख एवं गारंटी निगम द्वारा सिफारिश की गई। यह निगम निर्यातकों को ऋण बीमा और संबंधित सेवाएं प्रदान करके भारतीय निर्यात को बढ़ावा देने में मदद करता है।
In simple words: भारतीय निर्यात साख एवं गारंटी निगम ने सिफारिश की।

🎯 Exam Tip: ऐसी संस्थाओं के नाम याद रखें जो भारत के व्यापार और निर्यात को प्रभावित करती हैं।

 

Question 17. निर्यात प्रोत्साहन हेतु स्थापित दो सरकारी एजेन्सियों के नाम बताइए।
Answer: निर्यात को बढ़ावा देने के लिए स्थापित दो सरकारी एजेंसियां हैं: 1. राज्य व्यापार निगम, और 2. खनिज व धातु व्यापार निगम। ये एजेंसियां विभिन्न वस्तुओं के निर्यात में सहायता करती हैं और अंतर्राष्ट्रीय बाजारों तक पहुंच बनाने में मदद करती हैं।
In simple words: निर्यात को बढ़ावा देने वाली दो सरकारी एजेंसियां राज्य व्यापार निगम और खनिज व धातु व्यापार निगम हैं।

🎯 Exam Tip: निर्यात प्रोत्साहन से संबंधित सरकारी निकायों के नाम याद रखें।

 

Question 18. राज्य व्यापार निगम सरकारी एजेन्सी द्वारा किन-किन वस्तुओं का निर्यात किया जाता है?
Answer: राज्य व्यापार निगम जैसी सरकारी एजेंसियां कई तरह की वस्तुओं का निर्यात करती हैं, जिनमें कपड़ा, विनिर्मित वस्तुएँ, कॉफी, सीमेंट और नमक आदि प्रमुख हैं। ये निर्यात देश की अर्थव्यवस्था में महत्वपूर्ण योगदान देते हैं।
In simple words: राज्य व्यापार निगम कपड़ा, बनी हुई चीजें, कॉफी, सीमेंट और नमक जैसी चीजें निर्यात करता है।

🎯 Exam Tip: सरकारी व्यापार एजेंसियों द्वारा निर्यात की जाने वाली प्रमुख वस्तुओं की सूची याद रखना सहायक होता है।

 

Question 19. निर्यात प्रोत्साहन के लिये चलायी गयी किन्ही दो योजनाओं के नाम बताइए?
Answer: निर्यात को बढ़ावा देने के लिए चलाई गई दो महत्वपूर्ण योजनाएँ हैं: 1. नकद मुआवजा सहायता योजना, और 2. शुल्क वापसी योजना। ये योजनाएँ निर्यातकों को वित्तीय लाभ और करों में छूट देकर उन्हें अधिक निर्यात करने के लिए प्रोत्साहित करती हैं।
In simple words: निर्यात बढ़ाने के लिए नकद मुआवजा सहायता योजना और शुल्क वापसी योजना चलाई गई हैं।

🎯 Exam Tip: निर्यात प्रोत्साहन योजनाओं के नाम और उनके मुख्य उद्देश्य जानना महत्वपूर्ण है।

 

Question 20. निर्यात प्रोत्साहन हेतु “नकद मुआवजा सहायता योजना” को कब लागू किया गया था?
Answer: निर्यात प्रोत्साहन के लिए "नकद मुआवजा सहायता योजना" को सन् 1966 में लागू किया गया था। इस योजना का उद्देश्य निर्यातकों को कच्चा माल आयात करने पर भुगतान किए गए करों के बदले नकद मुआवजा देना था।
In simple words: नकद मुआवजा सहायता योजना 1966 में शुरू हुई थी।

🎯 Exam Tip: महत्वपूर्ण आर्थिक योजनाओं के नाम और उनके लागू होने की तारीखें सटीक रूप से याद रखें।

 

Question 21. 'Economic History of India' पुस्तक के लेखक कौन हैं?
Answer: 'Economic History of India' पुस्तक के लेखक आर. सी. दत्त हैं। यह पुस्तक भारत के आर्थिक इतिहास और ब्रिटिश शासन के दौरान देश की आर्थिक स्थिति का विस्तृत वर्णन करती है।
In simple words: 'Economic History of India' किताब आर. सी. दत्त ने लिखी है।

🎯 Exam Tip: महत्वपूर्ण पुस्तकों के लेखक और उनके योगदान को याद रखना परीक्षा में मदद कर सकता है।

 

Question 22. वस्तु का आयात-निर्यात करना चाहिए।
Answer: देश को उन वस्तुओं का आयात-निर्यात करना चाहिए जिनमें उसे तुलनात्मक लाभ हो। इसका मतलब है कि देश को उन चीजों का निर्यात करना चाहिए जिन्हें वह दूसरों से सस्ता और बेहतर बना सकता है, और उन चीजों का आयात करना चाहिए जिन्हें दूसरे देश बेहतर या सस्ते बना सकते हैं। ऐसा करने से अंतर्राष्ट्रीय व्यापार से सभी को फायदा होता है।
In simple words: देश को उन चीजों का निर्यात करना चाहिए जो वह बेहतर बना सकता है, और उन चीजों का आयात करना चाहिए जो दूसरे बेहतर बनाते हैं।

🎯 Exam Tip: व्यापार सिद्धांत में तुलनात्मक लाभ की अवधारणा को समझें, क्योंकि यह व्यापार निर्णय लेने का आधार है।

 

Question 23. रिकार्डों के अनुसार देश को किस प्रकार की वस्तु का आयात-निर्यात करना चाहिए?
Answer: रिकार्डो के तुलनात्मक लाभ के सिद्धांत के अनुसार, एक देश को उन वस्तुओं का निर्यात करना चाहिए जिनमें उसे तुलनात्मक लाभ हो, और उन वस्तुओं का आयात करना चाहिए जिनमें उसे तुलनात्मक अलाभ हो। इसका मतलब है कि देश को अपनी सबसे कुशल वस्तुओं के उत्पादन पर ध्यान देना चाहिए और बाकियों के लिए व्यापार करना चाहिए।
In simple words: रिकार्डो के मुताबिक, देश को वह चीज निर्यात करनी चाहिए जिसमें उसे ज्यादा फायदा हो, और वह चीज आयात करनी चाहिए जिसमें उसे कम फायदा हो।

🎯 Exam Tip: रिकार्डो के तुलनात्मक लाभ के सिद्धांत को परिभाषित करते समय "तुलनात्मक लाभ" और "तुलनात्मक अलाभ" शब्दों का सही प्रयोग करें।

 

Question 24. व्यापार का शेष धनात्मक एवं शेष ऋणात्मक से क्या आशय है?
Answer: व्यापार शेष धनात्मक तब होता है जब एक देश के निर्यात का मूल्य उसके आयात के मूल्य से अधिक होता है, यानी देश ने बेचने से ज्यादा कमाया है। इसके विपरीत, व्यापार शेष ऋणात्मक तब होता है जब आयात का मूल्य निर्यात के मूल्य से अधिक होता है, यानी देश ने खरीदने पर ज्यादा खर्च किया है। इसे व्यापार घाटा भी कहते हैं।
In simple words: जब देश ज्यादा बेचता है तो व्यापार शेष धनात्मक होता है, और जब ज्यादा खरीदता है तो यह ऋणात्मक होता है।

🎯 Exam Tip: व्यापार शेष की परिभाषा देते समय निर्यात और आयात के मूल्यों की तुलना को स्पष्ट करें।

 

Question 25. भारत के व्यापार शेष में घाटा बढ़ने के कोई दो कारण बताइए।
Answer: भारत के व्यापार शेष में घाटा बढ़ने के दो मुख्य कारण हैं: 1. आयातित तेल की कीमतों में वृद्धि और आयात शुल्कों में कमी, और 2. आयात उदारीकरण की नीतियों के कारण आयातों में वृद्धि। इन दोनों कारकों से देश के कुल आयात बढ़ जाते हैं, जिससे व्यापार घाटा बढ़ता है।
In simple words: तेल के दाम बढ़ने और आयात पर रोक घटने से भारत का व्यापार घाटा बढ़ गया।

🎯 Exam Tip: व्यापार घाटे के कारणों का उल्लेख करते समय, स्पष्ट और संक्षिप्त कारण बताएं जो सीधे आयात या निर्यात को प्रभावित करते हैं।

 

Question 26. व्यापार की संरचना का क्या तात्पर्य है?
Answer: व्यापार की संरचना का मतलब यह है कि एक देश कौन सी वस्तुओं का आयात करता है और कौन सी वस्तुओं का निर्यात करता है। यह किसी देश के आर्थिक विकास के स्तर को समझने के लिए महत्वपूर्ण जानकारी देता है, क्योंकि विकसित देश अक्सर मूल्यवर्धित वस्तुओं का व्यापार करते हैं, जबकि विकासशील देश कच्चे माल का।
In simple words: व्यापार की संरचना बताती है कि कोई देश कौन सा सामान आयात और निर्यात करता है।

🎯 Exam Tip: व्यापार की संरचना को स्पष्ट करते समय आयातित और निर्यातित वस्तुओं के प्रकार पर ध्यान केंद्रित करें।

 

Question 27. विकासशील देशों में मुख्य रूप से कच्चे माल, खनिज व कृषि उत्पादों का ही निर्यात क्यों किया जाता है?
Answer: विकासशील देशों में मुख्य रूप से कच्चे माल, खनिज और कृषि उत्पादों का निर्यात इसलिए होता है क्योंकि उनका औद्योगिक विकास और विनिर्माण क्षेत्र का ढाँचा अभी भी बहुत कमजोर है। वे इन प्राथमिक वस्तुओं को संसाधित करने के लिए पर्याप्त तकनीकी या बुनियादी ढाँचा नहीं रखते हैं, इसलिए उन्हें इन्हें कच्चे रूप में ही निर्यात करना पड़ता है।
In simple words: विकासशील देश ज्यादातर कच्चा माल, खनिज और कृषि उत्पाद निर्यात करते हैं क्योंकि उनका उद्योग अभी कमजोर है।

🎯 Exam Tip: विकासशील देशों के निर्यात पैटर्न को उनके औद्योगिक विकास और विनिर्माण क्षमताओं के संदर्भ में समझाएं।

 

Question 28. आजादी के समय भारत की प्रमुख आयात की मदें क्या थीं?
Answer: [Answer not provided in source]

🎯 Exam Tip: यदि किसी प्रश्न का उत्तर सीधे स्रोत में नहीं दिया गया है, तो यह बताएं कि जानकारी उपलब्ध नहीं है।

 

Question 30. आयात प्रतिबन्ध से क्या तात्पर्य है?
Answer: आयात प्रतिबंध का अर्थ है कि देश में गैर-आवश्यक वस्तुओं के आयात पर सरकार द्वारा रोक लगा दी जाती है। ऐसा इसलिए किया जाता है ताकि देश की विदेशी मुद्रा का उपयोग केवल आवश्यक आयातों के लिए ही किया जा सके और विदेशी मुद्रा भंडार बचा रहे।
In simple words: आयात प्रतिबंध मतलब ज़रूरी न होने वाली चीजों के आयात पर रोक लगाना, ताकि विदेशी पैसा बचे।

🎯 Exam Tip: आयात प्रतिबंध की परिभाषा देते समय "गैर-आवश्यक वस्तुओं" और "विदेशी मुद्रा की उपलब्धता" जैसे प्रमुख शब्दों का उपयोग करें।

 

Question 31. आयात प्रतिस्थापन की नीति का क्या तात्पर्य है?
Answer: आयात प्रतिस्थापन की नीति का अर्थ यह है कि जिन वस्तुओं का विदेशों से आयात किया जाता है, उनका उत्पादन देश के भीतर ही शुरू कर दिया जाए। इसका उद्देश्य आयात पर निर्भरता कम करना, विदेशी मुद्रा बचाना और देश को उन वस्तुओं के उत्पादन में आत्मनिर्भर बनाना है।
In simple words: आयात प्रतिस्थापन मतलब आयात की जाने वाली चीजें अपने देश में ही बनाना, ताकि आयात कम हो और देश आत्मनिर्भर बने।

🎯 Exam Tip: आयात प्रतिस्थापन के मुख्य उद्देश्यों-निर्भरता कम करना और आत्मनिर्भरता-को स्पष्ट रूप से बताएं।

 

Question 32. आयात प्रतिस्थापन की नीति को कितने चरणों में क्रियान्वित किया गया?
Answer: आयात प्रतिस्थापन की नीति को तीन मुख्य चरणों में लागू किया गया था। ये चरण थे: 1. उपभोग वस्तुओं का आयात प्रतिस्थापन, 2. पूंजीगत वस्तुओं का आयात प्रतिस्थापन, और 3. तकनीक का आयात प्रतिस्थापन। इन चरणों से देश ने धीरे-धीरे विभिन्न क्षेत्रों में आत्मनिर्भरता हासिल की।
In simple words: आयात प्रतिस्थापन नीति तीन चरणों में लागू की गई थी: उपभोग, पूंजीगत और तकनीकी वस्तुओं के लिए।

🎯 Exam Tip: आयात प्रतिस्थापन के तीनों चरणों को सही क्रम में और उनके प्रकार के साथ याद रखें।

 

Question 33. आयात प्रतिस्थापन नीति के कारण देश की उत्पादन संरचना में क्या परिवर्तन हुआ?
Answer: आयात प्रतिस्थापन नीति के कारण 1980 के दशक में आयात उदारीकरण को अपनाया गया। इस नीति ने आयातों पर लगे मात्रात्मक प्रतिबंधों को खत्म कर दिया और निर्यात को बढ़ावा देने के लिए कई रियायतें और छूटें दी गईं। इससे देश की उत्पादन संरचना में महत्वपूर्ण बदलाव आए, क्योंकि घरेलू उद्योगों को अधिक सुरक्षा और प्रोत्साहन मिला।
In simple words: आयात प्रतिस्थापन नीति के कारण 1980 के दशक में आयात उदारीकरण हुआ, जिससे आयात पर प्रतिबंध हटे और निर्यात को बढ़ावा मिला।

🎯 Exam Tip: आयात प्रतिस्थापन के प्रभावों को उदारीकरण और निर्यात प्रोत्साहन के संदर्भ में स्पष्ट करें।

 

Question 35. आयात उदारीकरण के लिये किये गए किन्हीं दो प्रयासों को बताइए।
Answer: आयात उदारीकरण के लिए दो मुख्य प्रयास किए गए: 1. अग्रिम लाइसेंस नीति के तहत, प्रति वर्ष 10 करोड़ रुपये से अधिक विदेशी मुद्रा कमाने वाले निर्यातकों को एक साल के लिए आयात की अनुमति दी गई। 2. सरकारी एजेंसियों के माध्यम से आयात करने की शर्त को हटा दिया गया। इन कदमों से आयात प्रक्रिया सरल हुई और व्यापार को बढ़ावा मिला।
In simple words: आयात उदारीकरण के लिए दो बड़े कदम उठाए गए: ज़्यादा कमाने वाले निर्यातकों को आयात की छूट और सरकारी एजेंसियों से आयात की शर्त हटाना।

🎯 Exam Tip: आयात उदारीकरण के प्रयासों को सूचीबद्ध करते समय, प्रत्येक प्रयास का संक्षेप में वर्णन करें।

 

Question 36. अवमूल्यन का क्या तात्पर्य है?
Answer: अवमूल्यन का अर्थ है जब कोई देश जानबूझकर अपनी मुद्रा (जैसे भारतीय रुपया) का मूल्य विश्व की अन्य मुद्राओं की तुलना में कम कर देता है। इससे निर्यात की वस्तुएं सस्ती हो जाती हैं और आयात की वस्तुएं महंगी हो जाती हैं, जिससे निर्यात को बढ़ावा मिलता है और आयात कम होता है।
In simple words: अवमूल्यन मतलब अपने देश की मुद्रा का दाम दूसरे देशों की मुद्रा के मुकाबले कम करना।

🎯 Exam Tip: अवमूल्यन की परिभाषा में "अपनी मुद्रा का मूल्य कम करना" और "अन्य मुद्राओं की तुलना में" जैसे वाक्यांशों का उपयोग करें।

 

Question 37. भारतीय निर्यात संवर्धन संगठन क्या है?
Answer: भारतीय निर्यात संवर्धन संगठन एक ऐसी संस्था है जो विभिन्न वस्तुओं के निर्यातकों, उनके बाजारों और खरीददारों के बीच तालमेल बिठाने का काम करती है। यह संगठन भारतीय निर्यात को बढ़ाने के लिए विदेशों में भारतीय उत्पादों की प्रदर्शनियों और मेलों का आयोजन भी करता है।
In simple words: भारतीय निर्यात संवर्धन संगठन निर्यातकों और बाजारों को जोड़ता है, और विदेशों में भारतीय उत्पादों को दिखाता है।

🎯 Exam Tip: इस संगठन के मुख्य कार्यों-समन्वय और प्रदर्शनियों के आयोजन-पर ध्यान दें।

 

Question 38. निर्यात के लिये स्थापित सरकारी एजेन्सियों के नाम बताइए तथा इनके द्वारा किन-किन वस्तुओं का निर्यात किया जाता है।
Answer: निर्यात के लिए राज्य व्यापार निगम और खनिज व धातु व्यापार निगम जैसी सरकारी एजेंसियां स्थापित की गई हैं। राज्य व्यापार निगम कपड़ा, विनिर्मित वस्तुएं, कॉफी, सीमेंट और नमक जैसी चीजों का निर्यात करता है, जबकि खनिज व धातु व्यापार निगम खनिज और धातुओं के निर्यात का काम करता है।
In simple words: राज्य व्यापार निगम और खनिज व धातु व्यापार निगम निर्यात के लिए बनी सरकारी एजेंसियां हैं, जो कपड़ा, कॉफी, खनिज आदि बेचती हैं।

🎯 Exam Tip: प्रत्येक एजेंसी द्वारा निर्यात की जाने वाली प्रमुख वस्तुओं की सूची अलग-अलग याद रखें।

 

Question 40. ब्लैंकेट विनिमय अनुमति योजना क्या है? बताइए।
Answer: ब्लैंकेट विनिमय अनुमति योजना निर्यातकों को यह छूट देती है कि वे अपनी निर्यात आय का एक निश्चित प्रतिशत निर्यात को बढ़ावा देने के लिए उपयोग कर सकें। यह योजना 1987 में शुरू की गई थी और इसका उद्देश्य निर्यातकों को अपने विवेक से निर्यात संवर्धन गतिविधियों में निवेश करने की स्वतंत्रता देना था।
In simple words: ब्लैंकेट विनिमय अनुमति योजना निर्यातकों को अपनी कमाई का कुछ हिस्सा निर्यात बढ़ाने के लिए इस्तेमाल करने की छूट देती है।

🎯 Exam Tip: योजना के मुख्य प्रावधान-निर्यात आय का उपयोग-और उसके लागू होने का वर्ष याद रखें।

 

Question 41. वर्ष 2004-09 की आयात-निर्यात नीति में प्रक्रिया सरलीकरण करने के लिये कौन-कौन से कदम उठाये गए?
Answer: 2004-09 की आयात-निर्यात नीति में प्रक्रियाओं को सरल बनाने के लिए कई कदम उठाए गए थे। इनमें निर्यातकों द्वारा भरे जाने वाले फॉर्मों की संख्या को कम करना, निर्यात की जाने वाली वस्तुओं को सेवाकर से मुक्त करना, पाँच करोड़ से अधिक की बिक्री करने वाले निर्यातकों को बैंक गारंटी से छूट देना, और पुरानी मशीनों के आयात की छूट देना शामिल था।
In simple words: 2004-09 की नीति में निर्यात के फॉर्म कम किए गए, निर्यातित चीजों को सेवाकर से मुक्त किया गया, बैंक गारंटी से छूट मिली और पुरानी मशीनें आयात करने की छूट दी गई।

🎯 Exam Tip: नीति सरलीकरण के मुख्य उपायों को बिंदुवार याद रखें, खासकर उन कदमों को जो निर्यातकों को सीधे लाभ पहुंचाते हैं।

 

Question 42. विदेश व्यापार नीति 2009-14 के अल्पकालीन एवं दीर्घकालीन उद्देश्यों को बताइए। अथवा विदेशी व्यापार नीति 2009-14 के उद्देश्यों को बताइए।
Answer: विदेश व्यापार नीति 2009-14 के अल्पकालीन उद्देश्य थे निर्यात में गिरावट की प्रवृत्ति को रोकना, आर्थिक मंदी से प्रभावित निर्यात क्षेत्रों की मदद करना और निर्यात वृद्धि को फिर से स्थापित करना। इस नीति का दीर्घकालीन उद्देश्य वर्ष 2020 तक विश्व व्यापार में भारत के हिस्से को दोगुना करना था।
In simple words: 2009-14 की व्यापार नीति का लक्ष्य कम समय में निर्यात बढ़ाना और लंबे समय में 2020 तक विश्व व्यापार में भारत का हिस्सा दोगुना करना था।

🎯 Exam Tip: अल्पकालीन और दीर्घकालीन उद्देश्यों को अलग-अलग और स्पष्ट रूप से बताएं, खासकर उनके समय-सीमा के साथ।

 

Question 43. विदेश व्यापार नीति 2009-14 के किन्हीं दो प्रावधानों को बताइए।
Answer: विदेश व्यापार नीति 2009-14 के दो प्रमुख प्रावधान थे: 1. नाशवान कृषि उत्पादों के निर्यात के लिए एकल खिड़की योजना शुरू की गई। 2. विदेशों में प्रदर्शनियों में भाग लेने वाले निर्यातकों को अपने साथ 5 लाख डॉलर तक का माल ले जाने की छूट दी गई। ये प्रावधान निर्यातकों को सुविधा देने और वैश्विक बाजारों तक उनकी पहुंच बढ़ाने के लिए थे।
In simple words: 2009-14 की व्यापार नीति के दो मुख्य प्रावधान थे: कृषि उत्पादों के निर्यात के लिए एक विंडो और विदेशों में प्रदर्शनियों के लिए डॉलर ले जाने की छूट।

🎯 Exam Tip: व्यापार नीति के प्रावधानों को याद करते समय, उन उपायों पर ध्यान दें जो निर्यात को सीधे प्रभावित करते हैं।

 

Question 45. गोपाल कृष्ण गोखले के अनुसार स्वदेशी विचारधारा को बताइए।
Answer: गोपाल कृष्ण गोखले के अनुसार, स्वदेशी विचारधारा हमें अपनी मातृभूमि के लिए त्याग करने का सबक सिखाती है। उनका मानना था कि स्वदेशी अपनाने से देश समृद्ध होता है और भाईचारे की भावना बढ़ती है। गोखले के लिए स्वदेशी का विचार भारत में बहुत प्राचीन काल से चला आ रहा एक महत्वपूर्ण सिद्धांत था।
In simple words: गोखले के अनुसार, स्वदेशी मतलब देश के लिए त्याग करना, जिससे देश समृद्ध होता है और भाईचारा बढ़ता है।

🎯 Exam Tip: स्वदेशी विचारधारा पर आधारित प्रश्नों में प्रमुख विचारकों के नामों और उनके मुख्य संदेशों को याद रखें।

 

RBSE Class 11 Economics Chapter 19 लघूत्तरात्मक प्रश्न

 

Question 1. “भारतीय अर्थव्यवस्था में विनिर्माण (Manufacturing) क्षेत्र का विकास तेजी से हुआ है।” स्पष्ट कीजिए।
Answer: पंचवर्षीय योजना शुरू होने से पहले, जूट, चाय, सूती वस्त्र, अभ्रक, मैंगनीज और खालें भारत की प्रमुख निर्यात मदें थीं। हालांकि, योजना काल के दौरान कृषि और खनिज उत्पादों का कुल निर्यात में हिस्सा कम हो गया, जबकि विनिर्मित वस्तुओं का हिस्सा बढ़ गया। 1960 में देश के कुल निर्यात में कृषि और संबद्ध उत्पादों का हिस्सा 44.2 प्रतिशत था, जो 2013-14 में घटकर 13.7 प्रतिशत रह गया। अयस्क और खनिज का हिस्सा 1960-61 में 8.1 प्रतिशत था, जो 2013-14 में 1.8 प्रतिशत हो गया, जबकि विनिर्मित वस्तुओं का कुल निर्यात 1960-61 में 45.3 प्रतिशत से बढ़कर 2013-14 में 61.3 प्रतिशत हो गया। इससे स्पष्ट होता है कि भारतीय अर्थव्यवस्था में विनिर्माण क्षेत्र का विकास बहुत तेज़ी से हुआ है।
In simple words: पहले कृषि और खनिज निर्यात मुख्य थे, लेकिन बाद में विनिर्माण का हिस्सा बहुत बढ़ गया, जिससे पता चलता है कि भारतीय उद्योग तेजी से बढ़ा।

🎯 Exam Tip: विनिर्माण क्षेत्र के विकास को दर्शाने के लिए आंकड़ों का उपयोग करें और कृषि व खनिज उत्पादों के साथ उसकी तुलना करें।

 

Question 2. वर्ष 2013-14 में भारत की प्रमुख निर्यातक मदों को बताइए।
Answer: वर्ष 2013-14 में भारत की प्रमुख निर्यातक मदें इस प्रकार थीं: 1. कृषि व संबद्ध वस्तुएँ- इनमें चाय, कॉफी, अनाज, मसाले, काजू, फल व सब्जियाँ, समुद्री उत्पाद और कपास आदि शामिल थे। 2. विनिर्मित वस्तुएँ- इसमें दवाइयाँ, रत्न व आभूषण, रसायन धातुओं के उत्पाद, चमड़ा व चमड़े से बने उत्पाद, मशीनरी व उपकरण, परिवहन उपकरण, इलेक्ट्रॉनिक वस्तुएँ और सिले हुए वस्त्र आदि शामिल थे।
In simple words: 2013-14 में भारत मुख्य रूप से खेती के सामान (जैसे चाय, कॉफी) और बनी हुई चीजें (जैसे दवाइयाँ, कपड़े) निर्यात करता था।

🎯 Exam Tip: निर्यातक मदों को वर्गीकृत करके याद रखें, जैसे 'कृषि उत्पाद' और 'विनिर्मित वस्तुएं', ताकि जानकारी व्यवस्थित रहे।

 

Question 3. व्यापार भागीदार देशों को कितने समहों में विभाजित किया जाता है?
Answer: व्यापार भागीदार देशों को चार समूहों में विभाजित किया जाता है। ये समूह भौगोलिक स्थिति और आर्थिक विशेषताओं के आधार पर बनाए गए हैं।
In simple words: व्यापार भागीदार देशों को चार ग्रुप में बांटा जाता है।

🎯 Exam Tip: ऐसे प्रश्नों में जहां एक संख्या पूछी जाए, सटीक संख्या और यदि संभव हो तो उनके वर्गीकरण का उल्लेख करें।

 

Question 4. वर्ष 2013-14 में भारत के राज्यवार निर्यात संरचना को तालिका द्वारा स्पष्ट कीजिए।
Answer: वर्ष 2013-14 में भारत की राज्यवार निर्यात संरचना को निम्नलिखित तालिका में दर्शाया गया है। यह तालिका बताती है कि किस राज्य से कितना निर्यात हुआ और कुल निर्यात में उसका कितना हिस्सा था।

राज्यमूल्य (मिलियन यू.एस. डॉलर) 2013-14हिस्सा 2013-14
गुजरात7349823.5
महाराष्ट्र7166122.9
तमिलनाडु269378.6
कर्नाटक178215.7
आन्ध्र प्रदेश153534.9
उत्तर प्रदेश133094.3
हरियाणा106573.4
पश्चिम बंगाल104963.4
दिल्ली93293.0
पंजाब70632.3
राजस्थान59151.9
मध्य प्रदेश43741.4
केरल42851.4
उड़ीसा40051.3
कुल निर्यात313610100

In simple words: यह टेबल दिखाती है कि 2013-14 में भारत के अलग-अलग राज्यों से कितना निर्यात हुआ था। गुजरात और महाराष्ट्र सबसे आगे थे।

🎯 Exam Tip: तालिका-आधारित प्रश्नों में डेटा को सही ढंग से प्रस्तुत करें और सबसे बड़े व सबसे छोटे योगदानकर्ताओं पर ध्यान दें।

 

Question 5. द्वितीय पंचवर्षीय योजना में कल आयातों को तीन श्रेणी में क्यों विभाजित किया गया?
Answer: भारत ने द्वितीय पंचवर्षीय योजना में उद्योगों को बढ़ावा देने पर विशेष ध्यान दिया। इस कारण, पूंजीगत मशीनरी और तकनीकी का आयात करना ज़रूरी था। उस समय विदेशी मुद्रा बहुत कम थी, इसलिए कुल आयातों को 1956-57 में तीन श्रेणियों में बांटा गया। इसमें वे वस्तुएँ शामिल थीं जिनके आयात पर पूरी तरह प्रतिबंध था, यानी उन्हें आयात नहीं किया जा सकता था, और दूसरे वर्ग की वस्तुएँ।
In simple words: दूसरी पंचवर्षीय योजना में उद्योग बढ़ाने के लिए पूंजीगत सामान आयात करना था, लेकिन विदेशी पैसा कम था, इसलिए आयात को तीन हिस्सों में बांटा गया। कुछ पर तो पूरी तरह रोक थी।

🎯 Exam Tip: पंचवर्षीय योजनाओं के उद्देश्यों और उनके परिणामस्वरूप हुई नीतियों को स्पष्ट रूप से समझाएं।

 

Question 7. “शुल्क वापसी योजना” को समझाइये।
Answer: शुल्क वापसी योजना (Duty Drawback Scheme) के तहत निर्यातकों को उन करों का पैसा वापस मिल जाता है जो उन्होंने निर्यात के लिए उत्पादन में उपयोग किए गए कच्चे माल पर चुकाए थे। यह योजना निर्यातकों को वैश्विक बाजार में प्रतिस्पर्धी बने रहने में मदद करती है, क्योंकि इससे उनकी निर्यात वस्तुओं की लागत कम हो जाती है।
In simple words: शुल्क वापसी योजना में, निर्यातकों को निर्यात का सामान बनाने में लगे कच्चे माल पर दिए गए टैक्स का पैसा वापस मिल जाता है।

🎯 Exam Tip: शुल्क वापसी योजना के उद्देश्य-लागत कम करना और प्रतिस्पर्धा बढ़ाना-को स्पष्ट करें।

 

Question 8. वर्ष 2001 में कृषि निर्यात क्षेत्रों (Agriculture Export Zones) की स्थापना क्यों की गई?
Answer: वर्ष 2001 में कृषि निर्यात को बढ़ावा देने के लिए कृषि निर्यात क्षेत्रों (AEZs) की स्थापना की गई थी। इन क्षेत्रों का उद्देश्य उन विशिष्ट कृषि उत्पादों की पहचान करना था जिनका निर्यात किया जा सकता है और उनके उत्पादन पर विशेष ध्यान देना था। कृषि निर्यात क्षेत्रों में कृषि उत्पादन की पूरी प्रक्रिया को, शुरुआती चरण से लेकर बाजार तक, एक साथ लाया गया था।
In simple words: 2001 में कृषि निर्यात बढ़ाने के लिए कृषि निर्यात क्षेत्र बनाए गए, ताकि खास कृषि उत्पादों के निर्यात को बढ़ावा मिले।

🎯 Exam Tip: कृषि निर्यात क्षेत्रों की स्थापना के कारणों और उनके कार्यों को समझाएं, खासकर "एकीकृत प्रक्रिया" पर ध्यान दें।

 

Question 9. विदेश व्यापार नीति 2015-20 के किन्हीं पाँच प्रावधानों को बताइए।
Answer: विदेश व्यापार नीति 2015-20 के पाँच प्रमुख प्रावधान इस प्रकार थे: 1. घरेलू विनिर्माण को बढ़ावा देने के लिए निर्यात बाध्यता को 25 प्रतिशत कम कर दिया गया। 2. निर्यात प्रोत्साहन पूंजीगत वस्तु योजना के तहत घरेलू वसूली के लिए निर्यात बाध्यता को 75 प्रतिशत घटाया गया। 3. डिजिटल हस्ताक्षर के लिए ऑनलाइन प्रक्रिया शुरू की गई। 4. निर्यात प्राधिकरण की वैध अवधि को 12 महीने से बढ़ाकर 24 महीने कर दिया गया। 5. ड्यूटी क्रेडिट स्क्रिप्ट को स्वतंत्र रूप से हस्तांतरणीय बनाया गया, और इसका उपयोग सीमा शुल्क, उत्पाद शुल्क और सेवा कर के भुगतान के लिए किया जा सकेगा।
In simple words: 2015-20 की विदेश व्यापार नीति में निर्यात को आसान बनाने के लिए कई नियम बदले गए, जैसे निर्यात की शर्तें कम करना और कागजी काम को डिजिटल करना।

🎯 Exam Tip: व्यापार नीति के प्रावधानों को याद करते समय, उन बदलावों पर ध्यान दें जो व्यापार को सरल और अधिक कुशल बनाते हैं।

 

उदारीकरण:

आर्थिक गतिविधियों पर लगाए गए प्रतिबंधों को हटाकर अर्थव्यवस्था के विभिन्न क्षेत्रों को 'मुक्त' करने की नीति को उदारीकरण कहा जाता है।
In simple words: उदारीकरण मतलब, देश में व्यापार के नियमों को ढीला करके अर्थव्यवस्था को खोलना।

🎯 Exam Tip: उदारीकरण की परिभाषा में "प्रतिबंधों को हटाना" और "अर्थव्यवस्था को मुक्त करना" जैसे वाक्यांशों का उपयोग करें।

 

आयात उदारीकरण के लिये प्रयास:
आयात उदारीकरण की दिशा में निम्नलिखित प्रयास किए गए:

  • पुन:निर्यात व्यापार को उदार बनाने के लिए निर्यातकों को बिना किसी रुकावट के कच्चा माल आयात करने की छूट दी गई।
  • अग्रिम लाइसेंस नीति के तहत, प्रति वर्ष 10 करोड़ रुपये से अधिक विदेशी मुद्रा कमाने वाले निर्यातकों को एक वर्ष के लिए आयात की अनुमति दी गई।
  • औद्योगीकरण के लिए पूंजीगत वस्तुओं और कच्चे माल की आवश्यकता को पूरा करने के लिए वस्तुओं को खुले सामान्य लाइसेंस में शामिल किया गया।
  • निर्यात गृह, व्यापार गृह, स्टार व्यापार गृह और सुपर स्टार व्यापार गृह के लिए आयात सुविधा को और उदार बनाया गया।
  • भारतीय वस्तुओं को अंतर्राष्ट्रीय बाजार में प्रतिस्पर्धी बनाने के लिए तकनीकी आयात को उदार बनाया गया।
  • जिन वस्तुओं का आयात सरकारी एजेंसियों के माध्यम से किया जाता था, उनकी सूची कम कर दी गई।

In simple words: आयात उदारीकरण के लिए, कच्चे माल के आयात को आसान बनाया गया, लाइसेंस नियमों को सरल किया गया और कुछ आयात को सरकारी नियंत्रण से मुक्त किया गया।

🎯 Exam Tip: आयात उदारीकरण के प्रयासों को सूचीबद्ध करते समय, प्रत्येक प्रयास का संक्षिप्त विवरण देना महत्वपूर्ण है।

 

Question 2. निर्यात प्रोत्साहन के लिये चलायी गयी विभिन्न योजनाओं का वर्णन कीजिए। अथवा निम्न पर टिप्पणी लिखिए 1. नकद मुआवजा सहायता 2. शुल्क वापसी योजना 3. आयात पुनः पूर्ति योजना 4. ब्लैंकेट विनिमय अनुमति योजना 5. विशेष आर्थिक सेल।
Answer: निर्यात को बढ़ावा देने के लिए भारत सरकार द्वारा कई योजनाएं चलाई गई हैं:

(1) नकद मुआवजा सहायता (Cash Compensatory Scheme): इस योजना में निर्यातकों द्वारा उपयोग किए गए कच्चे माल पर भुगतान किए गए करों के बदले उन्हें नकद मुआवजा दिया जाता था। इसे 1966 में लागू किया गया था। यह योजना निर्यातकों को अपनी लागत कम करने और अंतर्राष्ट्रीय बाजार में प्रतिस्पर्धी बने रहने में मदद करती थी।

(2) शुल्क वापसी योजना (Duty Drawback Scheme): इस योजना के तहत निर्यातकों को निर्यात के लिए उत्पादन में इस्तेमाल किए गए इनपुट पर चुकाए गए शुल्कों को वापस कर दिया जाता है। यह निर्यात की लागत को कम करके निर्यात की प्रतिस्पर्धा शक्ति को बनाए रखने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है।

(3) आयात पुनः पूर्ति योजना (Import Replenishment Scheme): इस योजना में निर्यातकों को उन वस्तुओं के आयात की अनुमति दी जाती है जिन पर सामान्यतः प्रतिबंध होता है, लेकिन उनका उपयोग निर्यात के लिए आवश्यक इनपुट के रूप में होता है। यह योजना निर्यातकों को आवश्यक कच्चे माल और घटकों की उपलब्धता सुनिश्चित करती है।

(4) ब्लैंकेट विनिमय अनुमति योजना (Blanket Exchange Permit Scheme): यह योजना 1987 में शुरू की गई थी, जिसके तहत निर्यातकों को अपनी निर्यात आय का एक निश्चित प्रतिशत निर्यात संवर्धन गतिविधियों पर खर्च करने की छूट मिलती है। इससे वे अपने उत्पादों का विज्ञापन और बाजार विकास कर सकते हैं।

(5) विशेष आर्थिक क्षेत्र (Special Economic Zones - SEZ): चीन की तर्ज पर निर्यात को प्रोत्साहित करने के लिए 2000 में SEZ की नीति अपनाई गई। इन क्षेत्रों में निर्यातकों को विश्व स्तरीय सुविधाएं, विदेशी वाणिज्यिक ऋण और प्रत्यक्ष विदेशी निवेश की अनुमति, तथा आयकर में छूट जैसे लाभ मिलते हैं। ये क्षेत्र निर्यात-उन्मुख इकाइयों के लिए एक अनुकूल वातावरण प्रदान करते हैं।
In simple words: निर्यात बढ़ाने के लिए कई योजनाएं थीं, जैसे सामान बनाने में लगे टैक्स का पैसा वापस करना, ज़रूरी कच्चा माल आयात करने की छूट देना, निर्यात के प्रचार के लिए पैसा खर्च करने की अनुमति देना और SEZ बनाकर व्यापार के लिए खास सुविधाएं देना।

🎯 Exam Tip: निर्यात प्रोत्साहन योजनाओं की व्याख्या करते समय, प्रत्येक योजना का नाम, उसका उद्देश्य और उसके मुख्य लाभों को स्पष्ट रूप से बताएं।

 

Question 3. विदेश व्यापार नीति 2009-14 के उद्देश्य तथा इसके प्रमुख प्रावधानों का वर्णन कीजिए।
Answer:
विदेश व्यापार नीति 2009-14 के उद्देश्य (Object of Foreign Trade Policy 2009-14):

विदेश व्यापार नीति 2009-14 का दीर्घकालीन उद्देश्य वर्ष 2020 तक विश्व व्यापार में भारत के हिस्से को दोगुना करना था। इसके अल्पकालीन उद्देश्य थे निर्यात में गिरावट की प्रवृत्ति को रोकना, आर्थिक मंदी से प्रभावित निर्यात क्षेत्रों की अतिरिक्त मदद करना और निर्यात वृद्धि को फिर से स्थापित करना। यह नीति वैश्विक आर्थिक मंदी के प्रभाव से निपटने और भारत के निर्यात को बढ़ावा देने के लिए तैयार की गई थी।

विदेश व्यापार नीति 2009-14 के प्रावधान (Provision of Foreign Trade Policy 2009-14):

विदेश व्यापार नीति 2009-14 के उद्देश्यों को प्राप्त करने के लिए निम्नलिखित प्रमुख प्रावधान किए गए थे:

  1. निर्यात बाजार के विविधीकरण की दिशा में प्रयास हेतु फोकस बाजार योजना में 16 लैटिन अमेरिकी और 10 एशिया-ओशिनिया के नए बाजारों को शामिल किया गया।
  2. फोकस बाजार प्रेरणा को बढ़ाकर 3 प्रतिशत और फोकस उत्पाद योजना में प्रेरणा को बढ़ाकर 2 प्रतिशत कर दिया गया।
  3. निर्यात उन्मुख इकाइयों को अपने उत्पादन का 90 प्रतिशत तक घरेलू प्रशुल्क क्षेत्र में विक्रय की अनुमति दी गई।

In simple words: 2009-14 की व्यापार नीति का लक्ष्य लंबे समय में भारत का निर्यात हिस्सा दोगुना करना था। इसके खास नियमों में नए बाजारों को जोड़ना, निर्यात पर मिलने वाली प्रेरणा बढ़ाना और निर्यात करने वाली कंपनियों को अपना कुछ सामान देश में भी बेचने की छूट देना शामिल था।

🎯 Exam Tip: व्यापार नीति के उद्देश्यों (अल्पकालीन और दीर्घकालीन) और प्रावधानों को अलग-अलग उपशीर्षकों के तहत स्पष्ट रूप से बताएं।

 

Question 4. भारत को निर्यात वृद्धि के लिये कौन-कौन से प्रयास अपेक्षित हैं? अथवा भारत के निर्यात संवर्धन हेतु सुझाव बताइए।
Answer:
निर्यात संवर्धन के लिये सुझाव (Suggestions for Export Promotion):

विकसित देशों में आयात वस्तुओं की कम मांग, चीन की तेज़ विनिर्माण क्षमता, विदेशों में राजनीतिक अस्थिरता और जलवायु परिवर्तन से जुड़ी चिंताएं भारतीय निर्यात वृद्धि के सामने प्रमुख चुनौतियां हैं। भारत में अभी भी दुनिया के देशों की तुलना में पर्याप्त आधारभूत संरचना का विकास न होने के कारण निर्यात की लागत अधिक आती है, जिससे विश्व निर्यात में भारत की प्रतिस्पर्धा शक्ति कमजोर होती है। निर्यात वृद्धि के लिए भारत को निम्नलिखित प्रयास करने चाहिए:

  1. बेहतर आधारभूत संरचना: देश में आयात और निर्यात में लागत और समय कम करने के लिए सड़कों, रेल परिवहन, जल परिवहन और बिजली जैसी आधारभूत संरचना को बेहतर बनाना ज़रूरी है।
  2. लागत कम करना: जटिल श्रम कानून, ऊंची ब्याज दरें, ऊंची लागत और कच्चे माल की देर से उपलब्धता भारत के निर्यात को नुकसान पहुंचाती है। भारत में कच्चा माल, मध्यवर्ती उत्पाद, श्रम और पूंजीगत इनपुट की समय पर और कम लागत पर आपूर्ति सुनिश्चित करनी चाहिए। पूंजी पर ब्याज दरें विकसित देशों के बराबर होनी चाहिए।
  3. बाजारों का विविधीकरण: भारत को अपनी वस्तुओं के निर्यात के लिए कुछ ही देशों पर निर्भर नहीं रहना चाहिए। भारतीय निर्यात वस्तुओं और क्षेत्रों के अनुसार नए बाजारों का अध्ययन करना चाहिए, ताकि निर्यात में वृद्धि हो और वार्षिक अनिश्चितता कम हो।
  4. संरक्षणवादी उपायों का विरोध: विकसित देश विकासशील देशों के निर्यात के प्रति संरक्षणवादी रवैया अपना रहे हैं। विश्व व्यापार संगठन (WTO) की विवाद निपटान प्रणाली इसे रोकने में नाकाम रही है। विकसित देशों के इन संरक्षणवादी उपायों को रोकना आवश्यक है।
  5. घरेलू उपभोग नियंत्रण: देश में निर्यात की जाने वाली कृषि उत्पादन और विनिर्माण क्षेत्र के उत्पादन पर अधिक ध्यान देने की आवश्यकता है। इन वस्तुओं के घरेलू उपभोग को नियंत्रित करना चाहिए, जिससे अधिक से अधिक निर्यात हो सके।
  6. वित्तीय प्रोत्साहन और कर सुधार: निर्यातकों को प्रोत्साहन हेतु साख व्यवस्था और आयात-उत्पादन शुल्क की बेहतर व्यवस्था होनी चाहिए। देश में कर सुधारों को तेज़ी से लागू करना चाहिए।

In simple words: भारत को निर्यात बढ़ाने के लिए सड़कें, बंदरगाह जैसी सुविधाएं सुधारनी चाहिए, कच्चे माल की लागत कम करनी चाहिए, नए देशों में सामान बेचना चाहिए, विकसित देशों के गलत व्यापार नियमों का विरोध करना चाहिए, निर्यात के लिए चीज़ें ज्यादा बनानी चाहिए और निर्यातकों को पैसों से मदद देनी चाहिए।

🎯 Exam Tip: निर्यात संवर्धन के सुझावों को व्यावहारिक और नीति-उन्मुख बिंदुओं के रूप में प्रस्तुत करें, जो अर्थव्यवस्था के विभिन्न पहलुओं को छूते हों।

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