RBSE Solutions Class 11 Economics Chapter 1 अर्थशास्त्र का अर्थ एवं परिभाषाएँ

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Class 11 Economics Chapter 1 अर्थशास्त्र का अर्थ एवं परिभाषाएँ RBSE Solutions PDF

RBSE Class 11 Economics Chapter 1 पाठ्यपुस्तक के प्रश्नोत्तर

RBSE Class 11 Economics Chapter 1 वस्तुनिष्ठ प्रश्न

 

Question 1. धन प्रधान परिभाषा किसने दी है?
(a) मार्शल
(b) सेम्युलसन
(c) एडम स्मिथ
(d) रॉबिन्स
Answer: (c) एडम स्मिथ
In simple words: एडम स्मिथ ने अर्थशास्त्र की परिभाषा धन को प्राथमिकता देकर दी है। उनका मानना था कि अर्थशास्त्र धन का अध्ययन है।

🎯 Exam Tip: अर्थशास्त्र की विभिन्न परिभाषाओं को उनके प्रतिपादकों के साथ याद रखें, खासकर एडम स्मिथ की 'धन प्रधान' परिभाषा.

 

Question 2. अर्थशास्त्र की आर्थिक कल्याण सम्बन्धी परिभाषा दी
(a) रॉबिन्स ने
(b) एडम स्मिथ ने
(c) मार्शल ने
(d) जे.के. मेहता ने
Answer: (c) मार्शल ने
In simple words: अर्थशास्त्र की आर्थिक कल्याण से जुड़ी परिभाषा मार्शल ने दी थी, जिसमें उन्होंने मानव कल्याण पर जोर दिया।

🎯 Exam Tip: कल्याण सम्बन्धी परिभाषा हमेशा मार्शल के साथ जोड़ी जाती है, क्योंकि उन्होंने मानव कल्याण को अर्थशास्त्र का मुख्य विषय माना था.

 

Question 3. “अर्थशास्त्र आर्थिक कल्याण का अध्ययन है।” यह परिभाषा सम्बन्धित है
(a) धन प्रधान परिभाषा से
(b) आर्थिक विकास सम्बन्by परिभाषा से
(c) कल्याण सम्बन्धी परिभाषा से
(d) दुर्लभता प्रधान परिभाषा से
Answer: (c) कल्याण सम्बन्धी परिभाषा से
In simple words: यह परिभाषा अर्थशास्त्र को मानव कल्याण के अध्ययन के रूप में देखती है।

🎯 Exam Tip: यह परिभाषा उन विचारों का प्रतिनिधित्व करती है जो अर्थशास्त्र को केवल धन के बजाय मानवीय भलाई से जोड़ते हैं.

 

Question 4. व्यक्ति की असीमित आवश्यकताओं का सीमित साधनों से सम्बन्ध स्थापित करने का प्रयत्न किससे सम्बन्धित है?
(a) धन प्रधान परिभाषा से
(b) आर्थिक विकास सम्बन्धी परिभाषा से
(c) दुर्लभता प्रधान परिभाषा से
(d) कल्याण सम्बन्धी परिभाषा से
Answer: (c) दुर्लभता प्रधान परिभाषा से
In simple words: यह दुर्लभता की परिभाषा से संबंधित है, जहाँ लोग अपनी असीमित जरूरतों को पूरा करने के लिए सीमित संसाधनों का सबसे अच्छा उपयोग करने की कोशिश करते हैं।

🎯 Exam Tip: दुर्लभता (scarcity) आर्थिक समस्या की जड़ है और यह हमेशा सीमित संसाधनों तथा असीमित इच्छाओं के बीच चुनाव से जुड़ी होती है.

 

Question 5. अर्थशास्त्र को वास्तविक विज्ञान किस अर्थशास्त्री ने माना है?
(a) मार्शल
(b) पीगू
(c) रॉबिन्स
(d) जे. एस. मिल
Answer: (c) रॉबिन्स
In simple words: रॉबिन्स ने अर्थशास्त्र को एक वास्तविक विज्ञान बताया, जिसका मतलब है कि यह सिर्फ तथ्यों का अध्ययन करता है, न कि क्या अच्छा है या बुरा।

🎯 Exam Tip: रॉबिन्स का विचार अर्थशास्त्र को तटस्थ और मूल्य-मुक्त अध्ययन के रूप में देखता है, जो सिर्फ यह बताता है कि चीजें कैसी हैं.

RBSE Class 11 Economics Chapter 1 अतिलघूत्तरात्मक प्रश्न

 

Question 1. अर्थशास्त्र के विषय में मार्शल के विचार बताइए।
Answer: मार्शल का मानना था कि अर्थशास्त्र का मुख्य विषय धन नहीं बल्कि मानव कल्याण है। उन्होंने धन को एक साधन माना जिसके द्वारा मनुष्य अपनी आवश्यकताओं को पूरा करके भौतिक कल्याण प्राप्त करता है।
In simple words: मार्शल का विचार था कि अर्थशास्त्र मानव कल्याण का अध्ययन है, जहाँ धन सिर्फ एक माध्यम है।

🎯 Exam Tip: मार्शल ने धन के बजाय मानव को केंद्र में रखा, इस बात पर जोर दें कि धन केवल कल्याण प्राप्त करने का एक साधन है.

 

Question 3. अर्थशास्त्र की दुर्लभता सम्बन्धी परिभाषा दीजिए।
Answer: अर्थशास्त्र वह विज्ञान है जो सीमित और कई उपयोग वाले साधनों से संबंधित मानव व्यवहार का अध्ययन करता है, ताकि व्यक्ति अपनी असीमित इच्छाओं में से चुनाव कर सके।
In simple words: यह परिभाषा बताती है कि अर्थशास्त्र कैसे सीमित साधनों से असीमित आवश्यकताओं को पूरा करने का अध्ययन करता है।

🎯 Exam Tip: दुर्लभता परिभाषा में 'सीमित साधन', 'असीमित आवश्यकताएँ' और 'चुनाव' जैसे मुख्य शब्दों का उल्लेख अवश्य करें.

 

Question 4. मार्शल ने अर्थशास्त्र को कैसा विज्ञान बताया है?
Answer: मार्शल ने अर्थशास्त्र को सामाजिक विज्ञान बताया है।
In simple words: मार्शल ने कहा कि अर्थशास्त्र समाज के लोगों के व्यवहार का अध्ययन करता है, इसलिए यह एक सामाजिक विज्ञान है।

🎯 Exam Tip: मार्शल की परिभाषा में सामाजिक पहलू पर जोर देना महत्वपूर्ण है.

 

Question 5. अर्थशास्त्र को चयन का विज्ञान किस अर्थशास्त्री ने परिभाषित किया?
Answer: अर्थशास्त्र को चयन का विज्ञान रॉबिन्स ने बताया है।
In simple words: रॉबिन्स ने बताया कि अर्थशास्त्र मूल रूप से सीमित संसाधनों के बीच चुनाव करने का विज्ञान है।

🎯 Exam Tip: चयन की समस्या दुर्लभता से उत्पन्न होती है; रॉबिन्स ने इसी पर अपना ध्यान केंद्रित किया.

 

Question 6. रॉबिन्स के अनुसार अर्थशास्त्र कैसा विज्ञान है?
Answer: रॉबिन्स के अनुसार अर्थशास्त्र चयनात्मक विज्ञान है।
In simple words: रॉबिन्स ने अर्थशास्त्र को चुनाव करने से जुड़ा विज्ञान कहा, जहाँ लोग सीमित साधनों के कई उपयोगों में से सबसे अच्छा चुनाव करते हैं।

🎯 Exam Tip: रॉबिन्स की 'चयन' या 'दुर्लभता' पर आधारित परिभाषा को याद रखना चाहिए.

 

Question 7. जे.के.मेहता की आवश्यकता विहीनता की परिभाषा क्या है?
Answer: जे.के. मेहता के अनुसार, अर्थशास्त्र वह विज्ञान है जो मनुष्य के ऐसे व्यवहार का अध्ययन करता है जिससे वह इच्छा-रहित अवस्था (वास्तविक सुख) में पहुँच सके।
In simple words: जे.के. मेहता ने कहा कि अर्थशास्त्र लोगों को ऐसी स्थिति तक पहुँचने में मदद करता है जहाँ उनकी कोई इच्छाएँ न हों और वे वास्तविक सुख प्राप्त कर सकें।

🎯 Exam Tip: जे.के. मेहता की परिभाषा भारतीय दर्शन से प्रभावित है, जो इच्छाओं को कम करने पर जोर देती है, यह एक महत्वपूर्ण अंतर है.

RBSE Class 11 Economics Chapter 1 लघूत्तरात्मक प्रश्न

 

Question 1. धन सम्बन्धी परिभाषा की दो आलोचना समझाइए।
Answer: धन सम्बन्धी परिभाषा की दो प्रमुख आलोचनाएँ निम्नलिखित हैं:
1. **धन पर अत्यधिक बल:** इन परिभाषाओं में धन की आवश्यकता से अधिक महत्व दिया गया है। धन को ही अंतिम लक्ष्य मान लिया गया, जबकि यह केवल मानवीय आवश्यकताओं को पूरा करने का एक साधन मात्र है।
2. **आर्थिक मानव की कल्पना अनुचित:** इन परिभाषाओं में मनुष्य को एक 'आर्थिक मानव' माना गया जो केवल धन कमाने और अपने स्वार्थ से प्रेरित होकर काम करता है। परन्तु वास्तव में, मनुष्य दया, प्रेम जैसी मानवीय भावनाओं से भी प्रेरित होकर काम करता है, इसलिए यह कल्पना गलत है।
In simple words: धन-आधारित परिभाषाओं की आलोचना इसलिए की गई क्योंकि उन्होंने धन को बहुत ज़्यादा महत्व दिया और यह माना कि लोग केवल अपने फायदे के लिए काम करते हैं।

🎯 Exam Tip: आलोचना करते समय स्पष्ट करें कि धन एक साधन है, साध्य नहीं, और मनुष्य के व्यवहार में सिर्फ स्वार्थ नहीं बल्कि अन्य भावनाएँ भी होती हैं.

 

Question 2. मार्शल के अनुसार, अर्थशास्त्र की प्रमुख विषय वस्तु धन न होकर मानव कल्याण है।" इसे स्पष्ट कीजिए।
Answer: मार्शल ने अपनी परिभाषा में स्पष्ट किया कि अर्थशास्त्र का मुख्य उद्देश्य केवल धन का विश्लेषण करना नहीं है। उनके अनुसार, धन का उपयोग करके मनुष्य अपनी आवश्यकताओं को संतुष्ट करता है और अपने भौतिक कल्याण को बढ़ाता है। इसलिए, मार्शल ने धन से ज्यादा मनुष्य के आर्थिक कल्याण को महत्वपूर्ण माना। उनका दृष्टिकोण मानव-केंद्रित था।
In simple words: मार्शल ने कहा कि अर्थशास्त्र सिर्फ पैसे का अध्ययन नहीं है, बल्कि यह देखना है कि कैसे पैसे का उपयोग करके लोग अपनी भलाई बढ़ा सकते हैं।

🎯 Exam Tip: इस उत्तर में मार्शल के 'मानव कल्याण' पर जोर देने की बात को प्रमुखता से लिखें, और यह भी स्पष्ट करें कि धन केवल एक माध्यम है.

 

Question 3. रॉबिन्स ने आर्थिक समस्या किसे कहा है?
Answer: रॉबिन्स के अनुसार, आर्थिक समस्या मनुष्य की असीमित आवश्यकताओं और उन्हें पूरा करने के लिए सीमित साधनों के बीच चुनाव की समस्या है। मनुष्य के पास समय और धन जैसे संसाधन सीमित होते हैं, और इनके कई वैकल्पिक उपयोग होते हैं। इस कारण मनुष्य को यह चुनना पड़ता है कि वह पहले किन आवश्यकताओं को पूरा करे और किन को बाद में। इसी चुनाव की समस्या को रॉबिन्स ने आर्थिक समस्या कहा।
In simple words: रॉबिन्स के लिए, आर्थिक समस्या तब पैदा होती है जब लोगों की इच्छाएँ बहुत ज़्यादा होती हैं लेकिन उन्हें पूरा करने के लिए चीज़ें कम होती हैं, इसलिए उन्हें चुनना पड़ता है।

🎯 Exam Tip: रॉबिन्स की आर्थिक समस्या की परिभाषा में 'असीमित आवश्यकताएँ', 'सीमित साधन', 'वैकल्पिक उपयोग' और 'चुनाव' इन चार मुख्य तत्वों को शामिल करें.

 

Question 4. मार्शल तथा रॉबिन्स की परिभाषा में कोई दो समानताएँ बताइए।
Answer: मार्शल और रॉबिन्स की परिभाषाओं में दो समानताएँ निम्नलिखित हैं:
1. **अंतिम उद्देश्य:** मार्शल ने अधिकतम कल्याण को केंद्र बिंदु माना, जबकि रॉबिन्स ने मितव्ययिता को। परन्तु, दोनों ही प्रवृत्तियाँ अंततः अधिकतम संतुष्टि के एक ही उद्देश्य की ओर ले जाती हैं।
2. **संसाधनों की सीमितता:** मार्शल ने अपनी परिभाषा में 'धन' शब्द का प्रयोग किया, जबकि रॉबिन्स ने 'सीमित साधनों' का। ये दोनों शब्द एक हद तक एक ही अर्थ में उपयोग होते हैं क्योंकि सीमितता धन का एक महत्वपूर्ण गुण है।
In simple words: दोनों अर्थशास्त्री अधिकतम संतुष्टि प्राप्त करने को महत्वपूर्ण मानते हैं, और वे यह भी मानते हैं कि धन या संसाधन सीमित होते हैं।

🎯 Exam Tip: समानताओं को स्पष्ट करते समय यह दिखाएँ कि कैसे अलग-अलग शब्दों का उपयोग करने के बावजूद उनके मूल विचार कुछ हद तक मेल खाते हैं.

 

Question 5. मार्शल तथा रॉबिन्स की परिभाषा में कोई तीन असमानताएँ बताइए।
Answer: मार्शल तथा रॉबिन्स की परिभाषाओं में तीन असमानताएँ निम्नलिखित हैं:
1. **अर्थशास्त्र का स्वरूप:** प्रो. मार्शल अर्थशास्त्र को एक सामाजिक विज्ञान मानते हैं, जिसमें समाज में रहने वाले मनुष्यों की आर्थिक क्रियाओं का अध्ययन होता है। इसके विपरीत, रॉबिन्स अर्थशास्त्र को मानव विज्ञान मानते हैं, जो चुनाव के पहलू का अध्ययन करता है।
2. **साधनों का वर्गीकरण:** मार्शल ने अर्थशास्त्र के अध्ययन में केवल भौतिक साधनों को शामिल किया, जबकि रॉबिन्स ने अपनी परिभाषा में उन सभी भौतिक और अभौतिक साधनों को सम्मिलित किया जिनकी दुर्लभता होती है।
3. **उद्देश्य:** प्रो. मार्शल ने स्पष्ट किया कि अर्थशास्त्र का उद्देश्य मानव कल्याण को बढ़ाना है। जबकि रॉबिन्स ने कहा कि अर्थशास्त्र उद्देश्यों के प्रति तटस्थ है, यानी इसका मनुष्य के कल्याण से कोई सीधा संबंध नहीं होता।
In simple words: मार्शल अर्थशास्त्र को सामाजिक विज्ञान और कल्याण से जोड़ते हैं, जबकि रॉबिन्स इसे मानव विज्ञान, चुनाव और सीमित साधनों से संबंधित मानते हैं।

🎯 Exam Tip: असमानताओं को बताते समय, उनके केंद्रीय विचारों (जैसे कल्याण बनाम दुर्लभता), उनके द्वारा माने गए विज्ञान के प्रकार (सामाजिक बनाम मानव), और साधनों के वर्गीकरण में अंतर को उजागर करें.

 

Question 6. अर्थशास्त्र की विकास आधारित परिभाषा के प्रमुख तत्त्व क्या हैं?
Answer: अर्थशास्त्र की विकास आधारित परिभाषा के प्रमुख तत्त्व निम्नलिखित हैं:
1. **मानव व्यवहार और साधनों की सीमितता को महत्व:** यह परिभाषा मनुष्य के चुनाव और सीमित साधनों की समस्या को अधिक महत्व देती है।
2. **साधनों के आवंटन की समस्या:** वस्तु विनिमय प्रणाली के तहत साधनों के बंटवारे की समस्या को यह महत्वपूर्ण मानती है।
3. **समावेशी दृष्टिकोण:** इस परिभाषा में मार्शल और रॉबिन्स दोनों की परिभाषाओं के मुख्य बिंदुओं को शामिल किया गया है।
4. **गत्यात्मक दृष्टिकोण:** विकास आधारित परिभाषा अर्थशास्त्र को एक गतिशील विषय के रूप में देखती है, जो समय के साथ बदलता रहता है।
In simple words: विकास आधारित परिभाषा में लोगों के चुनाव, सीमित संसाधनों का बंटवारा, पुरानी परिभाषाओं को शामिल करना और अर्थशास्त्र को हमेशा बदलते रहने वाला विषय मानना शामिल है।

🎯 Exam Tip: विकास आधारित परिभाषा को एक आधुनिक और समावेशी दृष्टिकोण के रूप में प्रस्तुत करें जो पहले की परिभाषाओं की कमियों को दूर करता है.

RBSE Class 11 Economics Chapter 1 निबन्धात्मक प्रश्न

 

Question 1. मार्शल तथा रॉबिन्स की परिभाषाओं की आलोचनात्मक व्याख्या कीजिए।
Answer: मार्शल और रॉबिन्स दोनों की परिभाषाओं की आलोचनाएँ इस प्रकार हैं:
**मार्शल की कल्याण-केंद्रित परिभाषा की आलोचनाएँ:**
* **साधनों का अनुचित वर्गीकरण:** मार्शल ने केवल भौतिक साधनों (जैसे सामान) पर ही ध्यान दिया और अभौतिक साधनों (जैसे डॉक्टर की सेवाएँ) को नजरअंदाज किया।
* **केवल सामाजिक विज्ञान नहीं:** अर्थशास्त्र के नियम समाज के बाहर रहने वाले लोगों पर भी लागू होते हैं, इसलिए इसे सिर्फ 'सामाजिक विज्ञान' कहना गलत है। यह एक 'मानव विज्ञान' भी है।
* **भौतिक कल्याण से संबंध:** मार्शल ने अर्थशास्त्र को भौतिक कल्याण से जोड़ा, जबकि रॉबिन्स के अनुसार कई ऐसी क्रियाएँ (जैसे मादक पदार्थों का उत्पादन) हैं जो कल्याणकारी नहीं होतीं, फिर भी उनका अध्ययन अर्थशास्त्र में होता है।
* **संकुचित क्षेत्र:** मार्शल ने अर्थशास्त्र में कुछ क्रियाओं (जैसे असामाजिक, अनार्थिक) के अध्ययन को छोड़ दिया, जिससे इसका क्षेत्र सीमित हो गया।
**रॉबिन्स की दुर्लभता-प्रधान परिभाषा की आलोचनाएँ:**
* **क्षेत्र का अत्यधिक विस्तार:** रॉबिन्स ने अर्थशास्त्र को मानव विज्ञान बताकर सभी मानवीय क्रियाओं के चुनाव संबंधी पहलुओं को शामिल किया, जिससे इसका अध्ययन क्षेत्र बहुत व्यापक और जटिल हो गया।
* **सामाजिक स्वभाव की उपेक्षा:** रॉबिन्स ने समाज के बाहर के व्यक्तियों की क्रियाओं को भी अध्ययन में शामिल किया, जबकि आर्थिक समस्याएँ अक्सर सामाजिक महत्व का रूप ले लेती हैं।
* **केवल मूल्य निर्धारण नहीं:** रॉबिन्स ने अर्थशास्त्र को केवल वस्तुओं के उत्पादन और साधनों के मूल्य निर्धारण तक सीमित रखा, जबकि इसका क्षेत्र साधनों के आवंटन से कहीं अधिक विस्तृत है।
* **उद्देश्यों के प्रति तटस्थता:** रॉबिन्स का विचार था कि अर्थशास्त्र उद्देश्यों के प्रति तटस्थ रहता है, लेकिन वर्तमान में आर्थिक योजनाओं के लिए उद्देश्यों की सही जानकारी होना महत्वपूर्ण है।
* **वास्तविक विज्ञान के साथ कला भी:** अर्थशास्त्र को केवल वास्तविक विज्ञान मानना गलत है, क्योंकि यह केवल सिद्धांतों का निर्माण नहीं करता, बल्कि उनके उपयोग की विधि पर भी प्रकाश डालता है, जो इसे कला भी बनाता है।
* **स्थैतिक परिभाषा:** रॉबिन्स ने साधनों और साध्यों को स्थिर मानकर अध्ययन किया, जबकि वास्तविक जीवन में लगातार परिवर्तन होता रहता है।
In simple words: मार्शल की परिभाषा की आलोचना इसलिए हुई क्योंकि उसने धन और कुछ मानवीय पहलुओं को नजरअंदाज किया। रॉबिन्स की परिभाषा की आलोचना इसलिए हुई क्योंकि उसने अर्थशास्त्र का दायरा बहुत बढ़ा दिया और सामाजिक व गतिशील पहलुओं पर कम ध्यान दिया।

🎯 Exam Tip: इस उत्तर में मार्शल और रॉबिन्स दोनों की परिभाषाओं की अलग-अलग आलोचनाओं को बिन्दुओं में स्पष्ट करें, उनके मुख्य तर्कों पर ध्यान दें.

 

Question 2. मार्शल तथा रॉबिन्स की परिभाषाओं में समानताओं तथा असमानताओं की व्याख्या कीजिए।
Answer: मार्शल तथा रॉबिन्स की परिभाषाओं में समानताएँ तथा असमानताएँ इस प्रकार हैं:
**समानताएँ:**
1. **लक्ष्य की समानता:** मार्शल ने 'अधिकतम कल्याण' को केंद्र बिंदु माना, जबकि रॉबिन्स ने 'मितव्ययिता' को। हालाँकि, दोनों का अंतिम उद्देश्य मानव को अधिकतम संतुष्टि दिलाना ही है।
2. **संसाधनों की प्रकृति:** मार्शल ने 'धन' शब्द का प्रयोग किया और रॉबिन्स ने 'सीमित साधनों' का। एक सीमा तक ये दोनों शब्द एक ही अर्थ में उपयोग होते हैं क्योंकि धन की प्रकृति ही सीमित होना है।
3. **उत्पादन क्षमता का उपयोग:** प्रो. रॉबिन्स ने कहा कि सीमित साधनों का उपयोग कुशलता से करना चाहिए ताकि अर्थव्यवस्था में अधिकतम उत्पादन और उपभोक्ता को अधिकतम संतुष्टि मिल सके।
**असमानताएँ:**
1. **परिभाषा का स्वरूप:** मार्शल की परिभाषा को 'वर्गीकरणात्मक' माना जाता है, जबकि रॉबिन्स की परिभाषा 'विश्लेषणात्मक' है। मार्शल ने मनुष्य की विभिन्न क्रियाओं (भौतिक, अभौतिक, आर्थिक, अनार्थिक) का अध्ययन किया, वहीं रॉबिन्स ने मानव व्यवहार के चुनाव संबंधी पहलुओं पर ध्यान केंद्रित किया।
2. **विषय-सामग्री:** मार्शल की परिभाषा धन कमाने और खर्च करने से संबंधित क्रियाओं पर केंद्रित है। रॉबिन्स ने मानव व्यवहार के चुनाव संबंधी दृष्टिकोण का अध्ययन किया।
3. **अर्थशास्त्र का स्वरूप:** मार्शल ने अर्थशास्त्र को एक सामाजिक विज्ञान बताया, जो समाज में रहने वाले लोगों की आर्थिक क्रियाओं का अध्ययन करता है। रॉबिन्स ने इसे मानव विज्ञान कहा, जो चुनाव करने के पहलू पर केंद्रित है।
4. **साधनों का वर्गीकरण:** मार्शल ने केवल भौतिक साधनों को अध्ययन में शामिल किया, जबकि रॉबिन्स ने उन सभी भौतिक और अभौतिक साधनों को शामिल किया जिनमें दुर्लभता होती है।
5. **अर्थशास्त्र की प्रकृति:** मार्शल ने अर्थशास्त्र को वास्तविक के साथ-साथ आदर्शात्मक विज्ञान और कला भी माना। रॉबिन्स ने इसे केवल वास्तविक विज्ञान माना।
6. **उद्देश्यों में भिन्नता:** मार्शल ने मानव कल्याण को अर्थशास्त्र का उद्देश्य माना। रॉबिन्स ने कहा कि अर्थशास्त्र उद्देश्यों के प्रति तटस्थ है, जिसका मानव कल्याण से सीधा संबंध नहीं होता।
In simple words: मार्शल और रॉबिन्स दोनों संतुष्टि और सीमित संसाधनों पर सहमत थे, लेकिन वे अर्थशास्त्र के स्वरूप, अध्ययन क्षेत्र, साधनों के प्रकार और अंतिम उद्देश्य जैसे कई महत्वपूर्ण बिंदुओं पर असहमत थे।

🎯 Exam Tip: इस प्रकार के तुलनात्मक प्रश्नों में, समानताओं और असमानताओं को अलग-अलग उपशीर्षकों के तहत बिन्दुवार प्रस्तुत करें ताकि उत्तर स्पष्ट और संक्षिप्त रहे.

 

Question 4. अर्थशास्त्र की विकास आधारित परिभाषाओं का आलोचनात्मक परीक्षण कीजिए। इस सन्दर्भ में भारतीय दृष्टिकोण की व्याख्या कीजिए।
Answer: **अर्थशास्त्र की विकास आधारित परिभाषाओं का आलोचनात्मक परीक्षण:**
विकास आधारित परिभाषाएँ अर्थशास्त्र के आधुनिक विचारों को दर्शाती हैं, जो मार्शल और रॉबिन्स की परिभाषाओं की कमियों को दूर करने का प्रयास करती हैं। इनकी आलोचनाएँ इस प्रकार हैं:
* **नवीनता का अभाव:** कुछ आलोचकों का मानना है कि इन परिभाषाओं में कोई पूरी तरह से नई बात नहीं कही गई, बल्कि यह पिछली परिभाषाओं का ही एक मिश्रण है।
* **संसाधनों पर अधिक जोर:** के.जी. सेठ जैसे अर्थशास्त्रियों ने भी सैमुअलसन की तरह साधनों के विकास पर अधिक जोर दिया, न कि धन या आर्थिक कल्याण पर।
* **कल्याण से दूरी:** इन परिभाषाओं ने मानव कल्याण, भौतिक कल्याण या आर्थिक कल्याण से कोई सीधा संबंध नहीं रखा, जिससे उनका दायरा सीमित हो गया।
**भारतीय दृष्टिकोण:**
भारतीय दर्शन और संस्कृति पर आधारित प्रो. जे.के. मेहता की परिभाषा पश्चिमी दृष्टिकोण से काफी भिन्न है।
* **पश्चिमी दृष्टिकोण:** पश्चिमी विकासवादी अर्थशास्त्री आवश्यकताओं की अधिकतम संतुष्टि पर जोर देते हैं।
* **भारतीय दृष्टिकोण:** भारतीय दृष्टिकोण इसके विपरीत, आवश्यकताओं को कम करने या उन्हें समाप्त करने पर जोर देता है। भारतीय विचार यह मानता है कि इच्छाएँ असीमित होती हैं और उन्हें पूरी तरह से संतुष्ट करना असंभव है। इसलिए, इच्छाओं को कम करके या समाप्त करके ही वास्तविक संतुष्टि प्राप्त की जा सकती है। प्रो. मेहता ने 'आवश्यकता विहीनता' की अवधारणा दी, जहाँ वास्तविक सुख इच्छाओं से मुक्त अवस्था में है।
In simple words: विकास आधारित परिभाषाओं की आलोचना इसलिए हुई क्योंकि उनमें कोई नई बात नहीं थी और उन्होंने कल्याण को अनदेखा किया। भारतीय दृष्टिकोण पश्चिमी दृष्टिकोण से अलग है क्योंकि यह इच्छाओं को कम करके संतुष्टि पाने पर जोर देता है, न कि उन्हें पूरा करने पर।

🎯 Exam Tip: इस उत्तर में विकास आधारित परिभाषा की आलोचना के मुख्य बिंदुओं को स्पष्ट करें, और भारतीय दृष्टिकोण को पश्चिमी विचारों से भिन्नता के साथ समझाएँ.

 

Question 5. “अर्थशास्त्र धन का विज्ञान है, अब वह मानव का विज्ञान है।” इस कथन को स्पष्ट कीजिए।
Answer: यह कथन अर्थशास्त्र की परिभाषा के ऐतिहासिक विकास को दर्शाता है।
**प्रारंभिक धन प्रधान दृष्टिकोण:**
प्रो. एडम स्मिथ ने 1776 में अपनी पुस्तक "An Enquiry into the Nature and Causes of Wealth of Nations" में अर्थशास्त्र को 'धन का विज्ञान' माना। संस्थापनवादी अर्थशास्त्री भी मानते थे कि मनुष्य की आर्थिक गतिविधियों का मुख्य उद्देश्य धन कमाना है। धन के अध्ययन पर अत्यधिक बल देने के कारण कुछ भ्रम पैदा हुए, जैसे अर्थशास्त्र को केवल धन से मोह करने वाला विषय समझा जाने लगा। हालाँकि, 19वीं शताब्दी में अर्थशास्त्रियों ने यह मानना शुरू कर दिया कि धन केवल मानव जीवन का एक साधन है।
**मानव विज्ञान का दृष्टिकोण:**
समय के साथ, अर्थशास्त्र की परिभाषा विकसित हुई। प्रो. रॉबिन्स ने अर्थशास्त्र को 'मानव विज्ञान' बताया। उन्होंने जोर दिया कि अर्थशास्त्र मनुष्य की असीमित इच्छाओं और सीमित साधनों के बीच चुनाव की समस्या का अध्ययन करता है। मानवीय आवश्यकताएँ असीमित होती हैं और उन्हें पूरा करने के लिए साधन (समय और धन) सीमित होते हैं। ऐसे में मनुष्य को चुनाव करना पड़ता है, और यही चुनाव मानव व्यवहार का अध्ययन है। अतः, समय के साथ अर्थशास्त्र 'धन के विज्ञान' से विकसित होकर 'मानव विज्ञान' बन गया, जो मानवीय व्यवहार और चुनाव पर केंद्रित है।
In simple words: शुरुआत में, एडम स्मिथ ने अर्थशास्त्र को धन का अध्ययन माना। बाद में, रॉबिन्स जैसे अर्थशास्त्रियों ने कहा कि यह सिर्फ धन नहीं, बल्कि मनुष्य के व्यवहार और सीमित साधनों से असीमित इच्छाओं को पूरा करने के लिए किए गए चुनाव का विज्ञान है।

🎯 Exam Tip: इस उत्तर में एडम स्मिथ के धन-प्रधान दृष्टिकोण से लेकर रॉबिन्स के मानव-केंद्रित (चुनाव-प्रधान) दृष्टिकोण तक की यात्रा को क्रमबद्ध तरीके से समझाएँ, जो अर्थशास्त्र की परिभाषा का विकास दर्शाता है.

 

Question 6. अर्थशास्त्र की “सीमितता” की परिभाषा की आलोचनात्मक व्याख्या कीजिए।
Answer: रॉबिन्स की दुर्लभता या सीमितता की परिभाषा की मुख्य आलोचनाएँ निम्नलिखित हैं:
* **क्षेत्र का अत्यधिक विस्तार:** प्रो. रॉबिन्स ने अर्थशास्त्र को मानव विज्ञान बताते हुए सभी प्रकार की मानवीय क्रियाओं के चुनाव संबंधी पहलुओं को इसमें शामिल किया। इससे अर्थशास्त्र का अध्ययन क्षेत्र इतना व्यापक हो गया कि सिद्धांतों का प्रतिपादन और समस्याओं का विश्लेषण जटिल हो गया।
* **सामाजिक स्वभाव पर ध्यान न देना:** रॉबिन्स के अनुसार, अर्थशास्त्र में समाज के बाहर रहने वाले व्यक्तियों की क्रियाओं का भी अध्ययन किया जाता है। हालाँकि, आर्थिक समस्याएँ अक्सर सामाजिक महत्व का रूप ले लेती हैं और सामूहिक क्रियाएँ एक-दूसरे को प्रभावित करती हैं।
* **केवल मूल्य निर्धारण नहीं:** रॉबिन्स की परिभाषा ने केवल यह अध्ययन किया कि वस्तुओं के उत्पादन में साधनों का वितरण कैसे होता है और इनके मूल्य कैसे निर्धारित होते हैं। परन्तु, अर्थशास्त्र का क्षेत्र साधनों के आवंटन और मूल्य निर्धारण से कहीं अधिक विस्तृत है।
* **उद्देश्यों के प्रति तटस्थता:** रॉबिन्स का मानना था कि अर्थशास्त्र उद्देश्यों के निर्धारण के प्रति तटस्थ होता है। आलोचकों का तर्क है कि यदि हमें उद्देश्यों की सही जानकारी नहीं है, तो सीमित साधनों का अधिकतम उपयोग नहीं किया जा सकता, और इससे वर्तमान आर्थिक योजनाओं का महत्व कम हो जाता है।
* **केवल वास्तविक विज्ञान नहीं, कला भी:** अर्थशास्त्र को केवल वास्तविक विज्ञान मानना गलत है। आलोचकों का कहना है कि अर्थशास्त्र का कार्य केवल उपकरण बनाना नहीं, बल्कि उनके उपयोग की विधि पर भी प्रकाश डालना चाहिए, जो इसे कला भी बनाता है।
* **स्थैतिक परिभाषा:** प्रो. रॉबिन्स ने साध्यों को स्थिर मानकर अध्ययन किया और साधनों का समन्वय बिठाया, जबकि वास्तविक जीवन में लगातार परिवर्तन होता रहता है।
* **आर्थिक समस्या का कारण:** रॉबिन्स का यह कहना कि आर्थिक समस्या केवल दुर्लभता के कारण उत्पन्न होती है, सही नहीं है। कभी-कभी यह विपुलता (अधिकता) के कारण भी उत्पन्न हो सकती है।
In simple words: रॉबिन्स की सीमितता की परिभाषा की आलोचना इसलिए हुई क्योंकि उसने अर्थशास्त्र का दायरा बहुत बढ़ा दिया, सामाजिक पहलुओं को अनदेखा किया, और सिर्फ सिद्धांतों पर ध्यान दिया, यह नहीं माना कि यह कला भी है और गतिशील भी।

🎯 Exam Tip: रॉबिन्स की आलोचनाओं को लिखते समय, 'क्षेत्र का विस्तार', 'सामाजिक पहलू की अनदेखी', 'स्थैतिक दृष्टिकोण', और 'उद्देश्यों के प्रति तटस्थता' जैसे प्रमुख बिंदुओं को याद रखें.

RBSE Class 11 Economics Chapter 1 अन्य मेहत्त्वपूर्ण प्रश्नोत्तर

RBSE Class 11 Economics Chapter 1 बहुचयनात्मक प्रश्न

 

Question 1. अर्थशास्त्र को सामाजिक विज्ञान की रानी किसने कहा है?
(a) एडम स्मिथ
(b) मार्शल
(c) सेम्युलसन
(d) रॉबिन्स
Answer: (d) रॉबिन्स
In simple words: रॉबिन्स ने अर्थशास्त्र को सामाजिक विज्ञानों में सबसे महत्वपूर्ण बताया, इसलिए उसे 'रानी' की उपाधि दी।

🎯 Exam Tip: अर्थशास्त्रियों के विचारों को याद रखें, विशेषकर उनके प्रमुख उद्धरणों और उपमाओं को.

 

Question 2. अर्थशास्त्र की दृष्टि से साधन हैं
(a) सीमित
(b) असीमित
(c) बराबर
(d) अधिक
Answer: (a) सीमित
In simple words: अर्थशास्त्र में, उत्पादन के लिए उपलब्ध संसाधन हमेशा कम होते हैं, जबकि लोगों की जरूरतें ज्यादा होती हैं।

🎯 Exam Tip: 'सीमित साधन' और 'असीमित आवश्यकताएँ' अर्थशास्त्र की मूल समस्या को परिभाषित करते हैं.

 

Question 3. अर्थशास्त्र की दृष्टि से आवश्यकताएँ हैं
(a) सीमित
(b) असीमित
(c) बराबर
(d) अधिक
Answer: (b) असीमित
In simple words: लोगों की इच्छाएँ और जरूरतें कभी खत्म नहीं होतीं, वे हमेशा बढ़ती रहती हैं।

🎯 Exam Tip: अर्थशास्त्र की केंद्रीय समस्या को समझने के लिए आवश्यकताओं की असीमित प्रकृति को समझना महत्वपूर्ण है.

 

Question 4. “जहाँ छः अर्थशास्त्री होते हैं वहाँ सात मत होते हैं।” किसने कहा है?
(a) मार्शल
(b) पीगू
(c) श्रीमती बारबरा बूटन
(d) सेम्युलसन
Answer: (c) श्रीमती बारबरा बूटन
In simple words: श्रीमती बारबरा बूटन ने यह कहावत अर्थशास्त्रियों के बीच विचारों की भिन्नता को दर्शाने के लिए कही थी।

🎯 Exam Tip: यह उद्धरण अर्थशास्त्र में विचारों की विविधता और असहमति को दर्शाता है, जिसे याद रखना चाहिए.

 

Question 5. "An enquiry into the nature and causes of wealth of nations” नामक पुस्तक किसने लिखा है?
(a) मार्शल
(b) सेम्युलसन
(c) एडम स्मिथ
(d) पीगू
Answer: (c) एडम स्मिथ
In simple words: यह प्रसिद्ध पुस्तक एडम स्मिथ ने लिखी थी, जिसे अक्सर अर्थशास्त्र का आधार ग्रंथ माना जाता है।

🎯 Exam Tip: यह एडम स्मिथ की सबसे महत्वपूर्ण रचना है और आधुनिक अर्थशास्त्र के उद्भव से जुड़ी है, इसलिए इसे याद रखना महत्वपूर्ण है.

 

Question 7. एडम स्मिथ की पुस्तक "An enquiry into the nature and causes of wealth of nations” कब प्रकाशित हुई?
(a) 1776
(b) 1881
(c) 1907
(d) 1700
Answer: (a) 1776
In simple words: एडम स्मिथ की यह महत्वपूर्ण पुस्तक 1776 में प्रकाशित हुई थी, जिसने अर्थशास्त्र को एक अलग विषय के रूप में स्थापित किया।

🎯 Exam Tip: अर्थशास्त्र के महत्वपूर्ण कार्यों की प्रकाशन तिथियाँ याद रखना परीक्षा के लिए उपयोगी होता है.

 

Question 8. धन के स्थान पर मनुष्य के आर्थिक कल्याण (Economic welfare) पर अधिक जोर किस अर्थशास्त्री ने दिया?
(a) स्मिथ
(b) पीगू
(c) मार्शल
(d) रॉबिन्स
Answer: (c) मार्शल
In simple words: मार्शल ने धन की जगह मानवीय कल्याण को अर्थशास्त्र का मुख्य विषय माना, उनके अनुसार धन केवल कल्याण का एक साधन है।

🎯 Exam Tip: मार्शल की परिभाषा का मुख्य केंद्र हमेशा 'मानव कल्याण' रहा है, इस बात को स्पष्ट करें.

 

Question 9. "An essay on the nature and significance of economic source" किसकी पुस्तक है?
(a) स्मिथ
(b) रॉबिन्स
(c) पीगू
(d) मार्शल
Answer: (b) रॉबिन्स
In simple words: रॉबिन्स ने यह पुस्तक लिखी थी, जिसमें उन्होंने दुर्लभता और चुनाव के महत्व पर जोर दिया।

🎯 Exam Tip: रॉबिन्स की यह पुस्तक अर्थशास्त्र की दुर्लभता-प्रधान परिभाषा का आधार है, इसे याद रखें.

 

Question 10. अर्थशास्त्र का स्वरूप कैसा है?
(a) आदर्शात्मक विज्ञान
(b) वास्तविक विज्ञान
(c) भौतिक विज्ञान
(d) ये सभी
Answer: (b) वास्तविक विज्ञान
In simple words: अर्थशास्त्र को वास्तविक विज्ञान माना जाता है क्योंकि यह केवल तथ्यों और वास्तविक स्थितियों का अध्ययन करता है, न कि नैतिक मूल्यों का।

🎯 Exam Tip: वास्तविक विज्ञान का अर्थ है 'क्या है' का अध्ययन करना, जबकि आदर्शात्मक विज्ञान 'क्या होना चाहिए' का अध्ययन करता है.

RBSE Class 11 Economics Chapter 1 अति लघूत्तरात्मक प्रश्न

 

Question 1. अर्थशास्त्र का ढाँचा किन दो आधारों पर टिका हुआ है?
Answer: अर्थशास्त्र का ढाँचा मुख्य रूप से दो आधारों पर टिका हुआ है:
1. साधन (संसाधन)
2. आवश्यकताएँ (इच्छाएँ)
In simple words: अर्थशास्त्र मुख्य रूप से सीमित संसाधनों और असीमित इच्छाओं के इर्द-गिर्द घूमता है।

🎯 Exam Tip: ये दोनों आधार आर्थिक समस्या के मूल कारण हैं और अर्थशास्त्र के सभी सिद्धांतों की नींव बनाते हैं.

 

Question 2. “जहाँ छः अर्थशास्त्री होते हैं वहाँ सात मत होते है” यह किसने लिखा है?
Answer: यह कथन श्रीमती बारबरा बूटन ने कहा था।
In simple words: श्रीमती बारबरा बूटन ने यह टिप्पणी अर्थशास्त्रियों के बीच विचारों की भिन्नता को दर्शाने के लिए की थी।

🎯 Exam Tip: अर्थशास्त्र में विभिन्न विचारधाराओं और मतभेदों को दर्शाने के लिए यह एक महत्वपूर्ण और अक्सर उद्धृत कथन है.

 

Question 3. धन केन्द्रित परिभाषाएँ किन अर्थशास्त्रियों ने दी हैं?
Answer: धन केन्द्रित परिभाषाएँ देने वाले प्रमुख अर्थशास्त्री प्रो. एडम स्मिथ, जे. बी. से, और वॉकर हैं।
In simple words: एडम स्मिथ, जे. बी. से, और वॉकर जैसे अर्थशास्त्रियों ने अर्थशास्त्र को मुख्य रूप से धन के अध्ययन से जोड़ा।

🎯 Exam Tip: 'धन केंद्रित परिभाषा' हमेशा एडम स्मिथ और उनके समकालीन विचारकों से जुड़ी होती है.

 

Question 4. एडम स्मिथ की पुस्तक का नाम लिखो।
Answer: एडम स्मिथ की पुस्तक का नाम "An enquiry into the nature and causes of wealth of nations” है।
In simple words: एडम स्मिथ की प्रसिद्ध किताब का नाम 'राष्ट्रों का धन' है, जो अर्थशास्त्र की नींव है।

🎯 Exam Tip: इस पुस्तक का पूरा नाम और लेखक का नाम सही-सही याद रखें क्योंकि यह अर्थशास्त्र के इतिहास में एक मील का पत्थर है.

 

Question 5. एडम स्मिथ द्वारा दी गई अर्थशास्त्र की परिभाषा दीजिए?
Answer: एडम स्मिथ द्वारा दी गई अर्थशास्त्र की परिभाषा है: "अर्थशास्त्र धन का विज्ञान है।”
In simple words: एडम स्मिथ ने अर्थशास्त्र को केवल धन के अध्ययन के रूप में परिभाषित किया।

🎯 Exam Tip: एडम स्मिथ की यह परिभाषा अर्थशास्त्र के प्रारंभिक दौर के विचारों को दर्शाती है.

 

Question 7. संस्थापनवादी सभी अर्थशास्त्री क्या मानते थे?
Answer: संस्थापनवादी सभी अर्थशास्त्री मानते थे कि मनुष्य की आर्थिक क्रियाओं का अंतिम उद्देश्य धन अर्जित करना है।
In simple words: उनका मानना था कि लोगों की हर आर्थिक गतिविधि का आखिरी मकसद पैसा कमाना होता है।

🎯 Exam Tip: संस्थापनवादी अर्थशास्त्रियों का विचार 'धन केंद्रित' परिभाषाओं से जुड़ा है, जहाँ धन ही अंतिम लक्ष्य होता है.

 

Question 8. मार्शल ने अपनी परिभाषा में किस पर अधिक जोर दिया?
Answer: मार्शल ने अपनी परिभाषा में आर्थिक कल्याण पर अधिक जोर दिया।
In simple words: मार्शल ने कहा कि लोगों की भलाई सबसे महत्वपूर्ण है, न कि सिर्फ पैसा।

🎯 Exam Tip: मार्शल को 'कल्याणवादी अर्थशास्त्री' के रूप में याद रखें, जिन्होंने धन के उपयोग से होने वाले लाभों पर ध्यान दिया.

 

Question 9. किनके अनुसार अर्थशास्त्र “भौतिक कल्याण का अध्ययन है?
Answer: मार्शल, पीगू आदि अर्थशास्त्रियों के अनुसार अर्थशास्त्र भौतिक कल्याण का अध्ययन है।
In simple words: मार्शल और पीगू जैसे अर्थशास्त्रियों ने माना कि अर्थशास्त्र यह देखता है कि कैसे लोग भौतिक चीजों से अपनी भलाई बढ़ाते हैं।

🎯 Exam Tip: यह परिभाषा मार्शल के कल्याण-केंद्रित दृष्टिकोण का एक हिस्सा है, जो भौतिक वस्तुओं से मिलने वाले कल्याण पर केंद्रित है.

 

Question 10. “धन मनुष्य के लिए है न कि मनुष्य धन के लिए” यह किसने कहा है।
Answer: यह कथन मार्शल ने कहा है।
In simple words: मार्शल ने यह कहकर समझाया कि धन सिर्फ मानव आवश्यकताओं को पूरा करने का साधन है, मानव जीवन का उद्देश्य नहीं।

🎯 Exam Tip: यह उद्धरण मार्शल के कल्याण-प्रधान दृष्टिकोण का सार है, जो धन को मानव सेवा में एक उपकरण के रूप में देखता है.

 

Question 11. रॉबिन्स की पुस्तक का क्या नाम है?
Answer: रॉबिन्स की पुस्तक का नाम "An essay on nature and significance of economic source” है।
In simple words: रॉबिन्स की किताब का नाम 'आर्थिक विज्ञान की प्रकृति और महत्व पर एक निबंध' है।

🎯 Exam Tip: इस पुस्तक ने अर्थशास्त्र को दुर्लभता और चुनाव के विज्ञान के रूप में परिभाषित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई.

 

Question 12. कल्याण प्रधान परिभाषा को किसने संकुचित एवं भ्रामक बताया था।
Answer: कल्याण प्रधान परिभाषा को रॉबिन्स ने संकुचित एवं भ्रामक बताया था।
In simple words: रॉबिन्स ने कहा कि कल्याण पर आधारित परिभाषाएँ अर्थशास्त्र को पूरी तरह से नहीं समझातीं, और कभी-कभी भ्रम पैदा करती हैं।

🎯 Exam Tip: रॉबिन्स ने कल्याण-प्रधान परिभाषा की आलोचना इस आधार पर की कि वह अर्थशास्त्र को नैतिक विचारों से जोड़ती है.

 

Question 13. मार्शल तथा उनके समर्थक अर्थशास्त्रियों द्वारा दी गई परिभाषा की आलोचना किसने की थी?

 

Question 15. चयन की समस्या का कारण बताइए।
Answer: चयन की समस्या का मुख्य कारण आर्थिक संसाधनों का सीमित होना है। मानव की आवश्यकताएँ असीमित होती हैं, परन्तु उन्हें पूरा करने के लिए उपलब्ध साधन जैसे धन और समय सीमित होते हैं। इसके साथ ही, इन सीमित साधनों के कई वैकल्पिक उपयोग भी होते हैं, जिससे यह चुनना पड़ता है कि पहले कौन सी आवश्यकता पूरी की जाए।
In simple words: चुनाव की समस्या इसलिए आती है क्योंकि हमारी ज़रूरतें बहुत ज़्यादा हैं, लेकिन हमारे पास उन्हें पूरा करने के साधन (जैसे पैसा या समय) कम हैं।

🎯 Exam Tip: आर्थिक समस्या के दो मुख्य कारणों - सीमित संसाधन और असीमित आवश्यकताएँ - को स्पष्ट रूप से लिखें।

 

Question 16. मार्शल ने अपनी परिभाषा में केन्द्र बिन्दु क्या माना है?
Answer: मार्शल ने अपनी परिभाषा में 'अधिकतम कल्याण' को केन्द्र बिन्दु माना है। उनके अनुसार, अर्थशास्त्र का मुख्य उद्देश्य सिर्फ धन कमाना नहीं, बल्कि धन के उपयोग द्वारा मानव के भौतिक कल्याण को बढ़ाना है।
In simple words: मार्शल ने अर्थशास्त्र का मुख्य उद्देश्य लोगों का ज़्यादा से ज़्यादा भला करना माना।

🎯 Exam Tip: मार्शल की परिभाषा में 'मानव कल्याण' या 'अधिकतम कल्याण' जैसे कीवर्ड्स का उल्लेख करना ज़रूरी है।

 

Question 17. मार्शल ने कैसे साधनों को अर्थशास्त्र के अध्ययन में शामिल किया है?
Answer: मार्शल ने अर्थशास्त्र के अध्ययन में केवल भौतिक साधनों को शामिल किया है। इसका अर्थ है कि उन्होंने उन वस्तुओं और सेवाओं पर ध्यान केंद्रित किया जिनका भौतिक अस्तित्व होता है और जिन्हें देखा या छुआ जा सकता है।
In simple words: मार्शल ने अर्थशास्त्र में सिर्फ ऐसी चीज़ों को शामिल किया जो भौतिक हैं, जैसे सामान।

🎯 Exam Tip: 'भौतिक साधन' शब्द का उपयोग करके स्पष्ट करें कि मार्शल ने किस प्रकार के संसाधनों को महत्व दिया।

 

Question 18. प्रो. मार्शल के अनुसार अर्थशास्त्र कैसा विज्ञान है?
Answer: प्रो. मार्शल के अनुसार, अर्थशास्त्र एक सामाजिक विज्ञान है। उन्होंने इसे ऐसा विज्ञान माना जो मानव के सामान्य व्यावसायिक जीवन और समाज में उनकी आर्थिक गतिविधियों का अध्ययन करता है।
In simple words: प्रो. मार्शल के हिसाब से, अर्थशास्त्र एक सामाजिक विज्ञान है जो समाज में लोगों के आर्थिक काम-काज को पढ़ता है।

🎯 Exam Tip: मार्शल के दृष्टिकोण से 'सामाजिक विज्ञान' की प्रकृति को रेखांकित करें।

 

Question 19. रॉबिन्स ने अर्थशास्त्र को कैसा विज्ञान माना है?
Answer: रॉबिन्स ने अर्थशास्त्र को मानव विज्ञान माना है। उनके अनुसार, अर्थशास्त्र वह विज्ञान है जो मानवीय व्यवहार का अध्ययन करता है, खासकर तब जब मनुष्य को असीमित इच्छाओं और सीमित संसाधनों के बीच चुनाव करना होता है।
In simple words: रॉबिन्स ने अर्थशास्त्र को मानव विज्ञान कहा, क्योंकि यह दिखाता है कि लोग अपनी असीमित इच्छाओं के लिए सीमित संसाधनों का चुनाव कैसे करते हैं।

🎯 Exam Tip: रॉबिन्स की परिभाषा में 'मानव विज्ञान' और 'चुनाव' के महत्व को उजागर करें।

 

Question 20. चुनाव की क्रिया को रॉबिन्सने क्या कहा है?
Answer: रॉबिन्स ने चुनाव की क्रिया को 'आर्थिक समस्या' कहा है। उनका मानना था कि जब मनुष्य को अपनी असीमित आवश्यकताओं को सीमित संसाधनों से पूरा करने के लिए प्राथमिकताएँ तय करनी पड़ती हैं, तो यह चुनाव ही आर्थिक समस्या है।
In simple words: रॉबिन्स ने चुनाव करने की प्रक्रिया को आर्थिक समस्या कहा।

🎯 Exam Tip: 'आर्थिक समस्या' को परिभाषित करते समय, चुनाव और सीमित संसाधनों के बीच के संबंध को स्पष्ट करें।

 

Question 22. अर्थशास्त्र की परिभाषा के सम्बन्ध में अर्थशास्त्री एकमत क्यों नहीं हैं?
Answer: अर्थशास्त्र की परिभाषा के संबंध में अर्थशास्त्री एकमत नहीं हैं क्योंकि आर्थिक क्रियाओं की प्रकृति लगातार बदलती रहती है और इसमें निरंतर नए परिवर्तन होते रहते हैं। विभिन्न अर्थशास्त्रियों ने अलग-अलग समय पर और अलग-अलग परिस्थितियों में अर्थशास्त्र के विभिन्न पहलुओं पर जोर दिया है, जिससे अनेक परिभाषाएँ सामने आई हैं।
In simple words: अर्थशास्त्री अर्थशास्त्र की एक ही परिभाषा पर सहमत नहीं हैं क्योंकि आर्थिक गतिविधियाँ हमेशा बदलती रहती हैं, और अलग-अलग अर्थशास्त्रियों ने अलग-अलग बातें ज़रूरी मानी हैं।

🎯 Exam Tip: इस प्रश्न के उत्तर में 'आर्थिक क्रियाओं की बदलती प्रकृति' और 'अर्थशास्त्रियों के विभिन्न दृष्टिकोण' को मुख्य बिंदु के रूप में शामिल करें।

 

Question 23. अर्थशास्त्र की परिभाषा को कितने क्षेत्रों में बाँटा गया है।
Answer: अध्ययन की सरलता के लिए अर्थशास्त्र की परिभाषाओं को पाँच बड़े भागों में बाँटा गया है। ये भाग अलग-अलग समय पर और अलग-अलग अर्थशास्त्रियों के विचारों को दर्शाते हैं, जैसे धन-केन्द्रित, कल्याण-केन्द्रित, दुर्लभता-केन्द्रित, आदि।
In simple words: अर्थशास्त्र की परिभाषाओं को समझने में आसानी के लिए उन्हें पाँच मुख्य हिस्सों में बाँटा गया है।

🎯 Exam Tip: यह एक तथ्यात्मक प्रश्न है, जिसमें 'पाँच' संख्या का उल्लेख करना आवश्यक है।

 

Question 24. एडम स्मिथ के विचारों से सहमत दो अर्थशास्त्रियों के नाम बताओ।
Answer: एडम स्मिथ के धन-केन्द्रित विचारों से सहमत होने वाले दो अर्थशास्त्री वॉकर और जे.बी. से थे। ये दोनों अर्थशास्त्री भी धन को अर्थशास्त्र के अध्ययन का मुख्य विषय मानते थे।
In simple words: वॉकर और जे.बी. से दो अर्थशास्त्री थे जो एडम स्मिथ के धन से जुड़े विचारों से सहमत थे।

🎯 Exam Tip: एडम स्मिथ के समर्थकों के नाम याद रखें, खासकर वॉकर और जे.बी. से।

 

Question 25. संस्थापनवादी अर्थशास्त्री क्या मानते हैं?
Answer: संस्थापनवादी अर्थशास्त्री मानते थे कि मनुष्य की आर्थिक क्रियाओं का अंतिम उद्देश्य धन अर्जित करना है। उनके अनुसार, आर्थिक गतिविधियों का मूल प्रेरणा धन कमाना और उसे संचित करना होता है।
In simple words: संस्थापनवादी अर्थशास्त्री मानते थे कि लोग आर्थिक काम इसलिए करते हैं ताकि वे पैसा कमा सकें।

🎯 Exam Tip: संस्थापनवादी अर्थशास्त्रियों के लिए 'धन अर्जित करना' ही आर्थिक क्रियाओं का मुख्य लक्ष्य है।

 

Question 26. रॉबिन्स अर्थशास्त्र को वास्तविक विज्ञान क्यों मानते हैं?
Answer: रॉबिन्स अर्थशास्त्र को वास्तविक विज्ञान मानते हैं क्योंकि यह अच्छाई और बुराई के संबंध में कोई नैतिक निर्णय नहीं देता। उनका मानना है कि अर्थशास्त्र का काम सिर्फ यह अध्ययन करना है कि स्थिति जैसी है, वैसी ही क्यों है, न कि यह बताना कि क्या होना चाहिए। यह केवल तथ्यों का विश्लेषण करता है।
In simple words: रॉबिन्स अर्थशास्त्र को एक 'वास्तविक विज्ञान' कहते हैं क्योंकि यह अच्छा-बुरा नहीं बताता, बल्कि सिर्फ चीज़ों को वैसे ही समझाता है जैसी वे हैं।

🎯 Exam Tip: 'वास्तविक विज्ञान' का अर्थ स्पष्ट करें – यह नैतिकता पर निर्णय नहीं देता, बल्कि 'क्या है' का अध्ययन करता है।

 

Question 27. अर्थशास्त्र को केवल सामाजिक विज्ञान मानना अनुचित है। क्यों?
Answer: अर्थशास्त्र को केवल सामाजिक विज्ञान मानना अनुचित है क्योंकि आर्थिक नियम ऐसे होते हैं जो समाज में रहने वाले मनुष्यों पर उसी प्रकार लागू होते हैं जिस प्रकार समाज से बाहर रहने वाले व्यक्तियों पर। आर्थिक व्यवहार सार्वभौमिक होता है, यह किसी विशेष सामाजिक समूह तक सीमित नहीं है।
In simple words: अर्थशास्त्र को सिर्फ सामाजिक विज्ञान कहना गलत है क्योंकि इसके नियम सभी लोगों पर लागू होते हैं, चाहे वे समाज में रहें या अकेले।

🎯 Exam Tip: अर्थशास्त्र के नियमों की 'सार्वभौमिकता' को दर्शाएँ ताकि यह सिद्ध हो सके कि यह केवल सामाजिक विज्ञान नहीं है।

 

Question 29. सुप्रसिद्ध अर्थशास्त्री प्रो. जे. के. मेहता किस विश्वविद्यालय में कार्यरत थे।
Answer: सुप्रसिद्ध अर्थशास्त्री प्रो. जे. के. मेहता इलाहाबाद विश्वविद्यालय में प्रोफेसर के रूप में कार्यरत थे। उन्होंने भारतीय दर्शन के आधार पर अर्थशास्त्र की आवश्यकता विहीनता की अवधारणा को विकसित किया।
In simple words: मशहूर अर्थशास्त्री प्रो. जे. के. मेहता इलाहाबाद विश्वविद्यालय में प्रोफेसर थे।

🎯 Exam Tip: प्रो. जे.के. मेहता और इलाहाबाद विश्वविद्यालय का संबंध महत्वपूर्ण है।

 

Question 30. किसने अर्थशास्त्र को मानव के भौतिक कल्याण का अध्ययन माना है?
Answer: मार्शल ने अर्थशास्त्र को मानव के भौतिक कल्याण का अध्ययन माना है। उनके अनुसार, अर्थशास्त्र का मुख्य उद्देश्य उन मानवीय गतिविधियों का विश्लेषण करना है जो भौतिक सुख की प्राप्ति और उपभोग से संबंधित हैं।
In simple words: मार्शल ने कहा कि अर्थशास्त्र को लोगों के भौतिक कल्याण का अध्ययन करना चाहिए।

🎯 Exam Tip: 'मार्शल' और 'भौतिक कल्याण' का सीधा संबंध याद रखें।

 

Question 31. कल्याण केन्द्रित परिभाषाओं के समर्थक कौन थे?
Answer: मार्शल, पीगू और स्टुअर्ट मिल जैसे अर्थशास्त्री कल्याण केन्द्रित परिभाषाओं के मुख्य समर्थक थे। इन सभी ने अर्थशास्त्र को मानव के कल्याण और भौतिक सुख से जुड़ा माना।
In simple words: मार्शल, पीगू और स्टुअर्ट मिल जैसे अर्थशास्त्री कल्याण पर आधारित अर्थशास्त्र की परिभाषाओं का समर्थन करते थे।

🎯 Exam Tip: कल्याण-केन्द्रित परिभाषाओं के प्रमुख समर्थकों के नाम याद रखें।

 

Question 32. प्रो.मेहता के अर्थशास्त्र के प्रति दृष्टिकोण की दो आलोचना लिखिए।
Answer: प्रो. मेहता के अर्थशास्त्र के प्रति दृष्टिकोण की दो प्रमुख आलोचनाएँ निम्नलिखित हैं:
1. इच्छा रहित मानव की कल्पना भी मुश्किल है: आलोचकों का मानना है कि आज के भौतिकवादी युग में किसी भी सामान्य मनुष्य के लिए आवश्यकताओं में कमी करके अधिकतम सुख प्राप्त करने की सोचना कठिन है। इच्छाओं को पूरी तरह खत्म करना संभव नहीं लगता।
2. अधिकतम सुख की धारणा सही नहीं है: कुछ आलोचक प्रो. मेहता की धारणा को विरोधाभासी मानते हैं। उनके अनुसार, प्रो. मेहता एक ओर तो आवश्यकताओं में कमी की बात करते हैं, वहीं दूसरी ओर अधिकतम सुख की धारणा को व्यक्त करते हैं, जो एक साथ संभव नहीं दिखती।
In simple words: प्रो. मेहता के विचारों की दो कमियाँ हैं: पहली, इच्छाओं से मुक्त इंसान की कल्पना करना मुश्किल है; दूसरी, अधिकतम सुख का उनका विचार ठीक नहीं लगता।

🎯 Exam Tip: प्रो. मेहता की आलोचना में 'इच्छा रहित मानव' की अव्यावहारिकता और 'अधिकतम सुख' की अवधारणा में विरोधाभास को स्पष्ट करें।

 

Question 33. जे.बी. से के अनुसार अर्थशास्त्र की परिभाषा दीजिए।
Answer: जे.बी. से के अनुसार, “अर्थशास्त्र वह विज्ञान है जो धन का अध्ययन करता है।” यह परिभाषा धन को अर्थशास्त्र का केंद्रीय विषय मानती है, जिसके चारों ओर आर्थिक गतिविधियाँ घूमती हैं।
In simple words: जे.बी. से के हिसाब से, अर्थशास्त्र वह विज्ञान है जो पैसे (धन) का अध्ययन करता है।

🎯 Exam Tip: जे.बी. से की परिभाषा में 'धन का अध्ययन' कीवर्ड को अवश्य शामिल करें।

RBSE Class 11 Economics Chapter 1 लघूत्तरात्मक प्रश्न

 

Question 1. अर्थशास्त्र की धन केन्द्रित परिभाषा की आलोचना क्यों की गई?
Answer: अर्थशास्त्र की धन-केन्द्रित परिभाषा की आलोचना इसलिए की गई क्योंकि धन पर अत्यधिक बल देने से इस विषय में कई भ्रम पैदा हो गए। आलोचकों का मानना था कि धन की अवधारणा पर अधिक जोर देने से अर्थशास्त्र का क्षेत्र संकुचित हो गया और यह मानवीय भावनाओं व वास्तविक उद्देश्यों की अनदेखी करता है। इसमें धन को ही साध्य मान लिया गया, जबकि यह आवश्यकताओं की पूर्ति का केवल एक साधन है। साथ ही, इसने आर्थिक मानव की अनुचित कल्पना की, जिसमें मनुष्य को केवल स्वार्थ और धन से प्रेरित माना जाता था, जबकि मनुष्य दया और प्रेम जैसी भावनाओं से भी प्रभावित होता है।
In simple words: अर्थशास्त्र की धन-केन्द्रित परिभाषा की आलोचना हुई क्योंकि इसने पैसे पर बहुत ज़्यादा ज़ोर दिया, जिससे गलतफहमियाँ पैदा हुईं और मानवीय भावनाओं को नज़रअंदाज़ किया गया।

🎯 Exam Tip: धन-केन्द्रित परिभाषा की आलोचना के मुख्य बिंदुओं, जैसे 'धन को साध्य मानना' और 'आर्थिक मानव की गलत कल्पना', पर ध्यान दें।

 

Question 2. धन सम्बन्धी परिभाषा की दो आलोचना समझाइए।
Answer: धन सम्बन्धी परिभाषा की दो प्रमुख आलोचनाएँ निम्नलिखित हैं:
1. धन पर आवश्यकता से अधिक बल: इन परिभाषाओं में धन को साध्य मान लिया गया था, जबकि धन मनुष्य की आवश्यकताओं की पूर्ति का केवल एक साधन है। धन की प्राप्ति अपने आप में लक्ष्य नहीं होनी चाहिए।
2. आर्थिक मानव की कल्पना अनुचित: प्राचीन अर्थशास्त्रियों ने मनुष्य को केवल धन की प्रेरणा और अपने स्वार्थ से प्रेरित होकर कार्य करने वाला माना। यह सोचना गलत है, क्योंकि वास्तव में मनुष्य धन की प्रेरणा के अलावा दया और प्रेम जैसी मानवीय भावनाओं से भी प्रेरित होकर कार्य करता है।
In simple words: धन से जुड़ी परिभाषा की दो कमियाँ हैं: पहला, इसने पैसे को ज़रूरत से ज़्यादा ज़रूरी माना, जबकि यह सिर्फ़ एक ज़रिया है; दूसरा, इसने माना कि लोग सिर्फ़ अपने फ़ायदे के लिए काम करते हैं, जो सही नहीं है।

🎯 Exam Tip: धन-केन्द्रित परिभाषाओं की आलोचना करते समय 'धन का साध्य नहीं, साधन होना' और 'मानवीय प्रेरणाओं की विविधता' को प्रमुखता से लिखें।

 

Question 3. मार्शल की कल्याण केन्द्रित अर्थशास्त्र की परिभाषा दीजिए।
Answer: मार्शल के अनुसार, “अर्थशास्त्र मानव जीवन के सामान्य व्यवसाय का अध्ययन है। इसमें व्यक्तिगत तथा सामाजिक क्रियाओं के उस भाग की जाँच की जाती है जो भौतिक सुख के साधनों की प्राप्ति एवं उपभोग से घनिष्ठ रूप से सम्बन्धित है।” यह परिभाषा धन के बजाय मानव कल्याण पर अधिक जोर देती है, मानती है कि धन केवल कल्याण का एक माध्यम है।
In simple words: मार्शल कहते हैं कि अर्थशास्त्र इस बात का अध्ययन है कि लोग अपनी रोज़मर्रा की ज़िंदगी में भौतिक सुख की चीज़ें कैसे प्राप्त करते और इस्तेमाल करते हैं।

🎯 Exam Tip: मार्शल की परिभाषा में 'मानव जीवन का सामान्य व्यवसाय' और 'भौतिक सुख' जैसे मुख्य शब्दों को शामिल करें।

 

Question 4. आर्थिक समस्या से क्या आशय है? अथवा चयन की समस्या का कारण बताइए।
Answer: आर्थिक समस्या अथवा चयन की समस्या का आशय उस स्थिति से है जहाँ मनुष्य को अपनी असीमित आवश्यकताओं को सीमित संसाधनों से पूरा करने के लिए चुनाव करना पड़ता है। मनुष्य की एक आवश्यकता पूरी होते ही दूसरी उत्पन्न हो जाती है, जिससे आवश्यकताएँ कभी खत्म नहीं होतीं। साथ ही, संसाधनों के कई वैकल्पिक उपयोग होते हैं, जिसके कारण यह तय करना मुश्किल हो जाता है कि पहले किस आवश्यकता को पूरा किया जाए और किसे बाद के लिए छोड़ा जाए। एडम स्मिथ ने इसी को आर्थिक समस्या या चयन की समस्या कहा है।
In simple words: आर्थिक समस्या तब आती है जब हमारी ज़रूरतें बहुत ज़्यादा होती हैं, पर उन्हें पूरा करने के लिए साधन (जैसे पैसा और समय) कम होते हैं, और हमें यह चुनना पड़ता है कि पहले क्या पूरा करें।

🎯 Exam Tip: आर्थिक समस्या को स्पष्ट करते समय 'असीमित आवश्यकताएँ', 'सीमित साधन' और 'वैकल्पिक उपयोग' तीनों तत्वों को शामिल करें।

 

Question 5. साधनों की सीमितता से क्या आशय है?
Answer: साधनों की सीमितता का आशय यह है कि उत्पादन के साधन जैसे-भूमि, श्रम, पूँजी, और उद्यमिता की मात्रा हमेशा मनुष्य की माँग से कम होती है। यह सीमितता तब और भी बढ़ जाती है जब इन संसाधनों के कई वैकल्पिक उपयोग होते हैं। इस स्थिति में व्यक्ति को यह सोचना पड़ता है कि अपने सीमित साधनों का उपयोग वह पहले किस आवश्यकता को पूरा करने में करे और किस आवश्यकता को बाद में पूरा करने के लिए छोड़ दे, क्योंकि सभी आवश्यकताओं को एक साथ पूरा करना संभव नहीं होता।
In simple words: साधनों की कमी का मतलब है कि हमारे पास ज़मीन, मज़दूर और पैसा जैसी चीज़ें उतनी नहीं हैं जितनी हमें चाहिए, खासकर जब इन चीज़ों का इस्तेमाल कई अलग-अलग कामों के लिए हो सकता है।

🎯 Exam Tip: साधनों की सीमितता को समझाते हुए प्रमुख संसाधनों (भूमि, श्रम, पूँजी) के उदाहरण दें और उनके 'अनेकों उपयोग' पर जोर दें।

 

Question 7. मार्शल की परिभाषा के दो बिन्दु लिखो।
Answer: मार्शल की परिभाषा के दो मुख्य बिन्दु निम्नलिखित हैं:
1. धन की तुलना में मनुष्य का महत्त्व अधिक: मार्शल ने धन के बजाय मनुष्य के कल्याण पर अधिक बल दिया। उनके अनुसार धन मनुष्य के लिए एक साधन है, न कि स्वयं में लक्ष्य। मनुष्य का कल्याण ही सबसे महत्त्वपूर्ण है।
2. सामाजिक, सामान्य एवं वास्तविक मनुष्य के रूप में अध्ययन: अर्थशास्त्र में सामाजिक, सामान्य तथा वास्तविक मनुष्य द्वारा की जाने वाली आर्थिक क्रियाओं का अध्ययन किया जाता है। यह उन लोगों पर केंद्रित है जो समाज में रहकर काम करते हैं।
In simple words: मार्शल की परिभाषा के दो मुख्य बिन्दु हैं: पहला, मनुष्य धन से ज़्यादा महत्वपूर्ण है; दूसरा, अर्थशास्त्र समाज में रहने वाले लोगों के आर्थिक कामों को पढ़ता है।

🎯 Exam Tip: मार्शल के दो मुख्य बिंदुओं में 'मानव कल्याण' की प्रधानता और 'सामाजिक मनुष्य' के अध्ययन पर ध्यान दें।

 

Question 8. भौतिक कल्याण पर आधारित परिभाषाओं की दो आलोचानाओं की व्याख्या करो।
Answer: भौतिक कल्याण पर आधारित परिभाषाओं की दो आलोचनाएँ इस प्रकार हैं:
1. साधनों का भौतिक और अभौतिक वर्गीकरण अनुचित: मार्शल ने अर्थशास्त्र के अध्ययन को केवल भौतिक साधनों की प्राप्ति और उपभोग तक सीमित रखा। परन्तु वास्तव में डॉक्टर, इंजीनियर, मजदूर, वकील आदि की सेवाएँ भी महत्वपूर्ण अभौतिक साधन हैं जो धन के समान ही उपयोगी होती हैं। इस वर्गीकरण ने अर्थशास्त्र के दायरे को संकुचित कर दिया।
2. अर्थशास्त्र केवल सामाजिक विज्ञान नहीं है: अर्थशास्त्र को केवल सामाजिक विज्ञान मानना अनुचित है, क्योंकि आर्थिक नियम समाज में रहने वाले और समाज से बाहर रहने वाले दोनों प्रकार के व्यक्तियों पर समान रूप से लागू होते हैं। इसलिए, अर्थशास्त्र को केवल सामाजिक विज्ञान के बजाय एक मानव विज्ञान मानना अधिक उचित है।
In simple words: भौतिक कल्याण पर आधारित परिभाषा की दो कमियाँ हैं: पहला, इसमें सिर्फ़ भौतिक चीज़ों को शामिल किया गया, जबकि सेवाएँ भी ज़रूरी हैं; दूसरा, इसे सिर्फ़ सामाजिक विज्ञान मानना ठीक नहीं, क्योंकि इसके नियम सभी इंसानों पर लागू होते हैं।

🎯 Exam Tip: भौतिक कल्याण की आलोचना में 'अभौतिक साधनों की अनदेखी' और 'अर्थशास्त्र की सार्वभौमिकता' को मुख्य रूप से शामिल करें।

 

Question 9. अर्थशास्त्र मानव विज्ञान है। कैसे?
Answer: अर्थशास्त्र को मानव विज्ञान इसलिए माना जाता है क्योंकि आर्थिक नियम समाज में रहने वाले मनुष्यों पर उसी प्रकार लागू होते हैं जिस प्रकार समाज से बाहर रहने वाले व्यक्तियों पर। यह मानव व्यवहार और उसकी आर्थिक गतिविधियों का अध्ययन करता है, चाहे वे किसी भी सामाजिक या भौगोलिक संदर्भ में हों। इसका फोकस व्यक्ति के चुनाव और संसाधनों के प्रबंधन पर होता है, जो मानवीय प्रकृति का हिस्सा है।
In simple words: अर्थशास्त्र को मानव विज्ञान कहते हैं क्योंकि इसके आर्थिक नियम सभी इंसानों पर लागू होते हैं, चाहे वे समाज में रहें या कहीं और।

🎯 Exam Tip: अर्थशास्त्र के 'मानव विज्ञान' होने के पीछे 'आर्थिक नियमों की सार्वभौमिकता' का तर्क दें।

 

Question 10. रॉबिन्स ने किन आधारों पर कल्याण सम्बन्धी विचारधारा को दोषपूर्ण माना है?
Answer: रॉबिन्स ने निम्नलिखित आधारों पर कल्याण सम्बन्धी विचारधारा को दोषपूर्ण माना है: उनके अनुसार, अर्थशास्त्र का संबंध केवल साधनों से है, न कि उद्देश्यों के निर्धारण से। वे मानते थे कि कल्याण एक व्यक्तिपरक और नैतिक अवधारणा है, जिसका वैज्ञानिक रूप से मापन संभव नहीं है। रॉबिन्स ने तर्क दिया कि अर्थशास्त्र को एक तटस्थ विज्ञान होना चाहिए जो अच्छाई या बुराई पर कोई निर्णय न दे, बल्कि केवल आर्थिक व्यवहार का विश्लेषण करे।
In simple words: रॉबिन्स ने कल्याण से जुड़े विचारों को गलत माना क्योंकि उनके हिसाब से कल्याण को मापा नहीं जा सकता और अर्थशास्त्र को किसी नैतिक बात पर राय नहीं देनी चाहिए।

🎯 Exam Tip: रॉबिन्स की आलोचना में 'नैतिक तटस्थता' और 'कल्याण के मापन की असंभवता' जैसे बिंदुओं को उल्लेख करें।

 

Question 11. रॉबिन्स की दुर्लभता प्रधान परिभाषा की व्याख्या कीजिए।
Answer: रॉबिन्स की दुर्लभता प्रधान परिभाषा के निम्नलिखित चार महत्त्वपूर्ण बिन्दु हैं:
1. मनुष्य की आवश्यकताएँ अनन्त एवं असीमित हैं: मनुष्य की इच्छाएँ कभी खत्म नहीं होतीं; एक आवश्यकता पूरी होने पर दूसरी तुरंत उत्पन्न हो जाती है।
2. आवश्यकताओं की पूर्ति के लिए मनुष्य के पास साधन सीमित हैं: मनुष्य के पास समय और धन जैसे संसाधन असीमित नहीं होते, जिसके कारण उसे अपनी विभिन्न आवश्यकताओं के बीच चुनाव करना पड़ता है।
3. इन साधनों के वैकल्पिक प्रयोग हो सकते हैं: सीमित संसाधनों का उपयोग केवल एक ही उद्देश्य के लिए नहीं, बल्कि कई अलग-अलग उद्देश्यों के लिए किया जा सकता है, जिससे उनकी सीमितता और भी बढ़ जाती है।
4. आवश्यकताओं की तीव्रता में भी भिन्नता होती है: मनुष्य की सभी आवश्यकताएँ एक समान तीव्र नहीं होतीं। कुछ बहुत ज़रूरी होती हैं, जबकि कुछ कम ज़रूरी। आवश्यकताओं की तीव्रता में यह भिन्नता मनुष्य को चुनाव करने में सहायता करती है।
In simple words: रॉबिन्स की दुर्लभता परिभाषा कहती है कि लोगों की ज़रूरतें कभी खत्म नहीं होतीं, पर उन्हें पूरा करने के साधन कम होते हैं और उनके कई इस्तेमाल भी होते हैं। साथ ही, कुछ ज़रूरतें दूसरों से ज़्यादा ज़रूरी होती हैं, जिससे लोगों को यह चुनना पड़ता है कि पहले क्या पूरा करें।

🎯 Exam Tip: रॉबिन्स की परिभाषा के चार बिंदुओं को क्रमबद्ध और स्पष्ट रूप से समझाएँ: असीमित इच्छाएँ, सीमित साधन, वैकल्पिक उपयोग, और आवश्यकताओं की तीव्रता में भिन्नता।

 

Question 12. रॉबिन्स की दुर्लभता प्रधान परिभाषा की किन्हीं दो आलोचना व्याख्या करो।
Answer: रॉबिन्स की दुर्लभता प्रधान परिभाषा की दो प्रमुख आलोचनाएँ निम्नलिखित हैं:
1. अर्थशास्त्र के क्षेत्र को आवश्यकता से अधिक व्यापक बनाया: प्रो. रॉबिन्स ने अर्थशास्त्र को मानव विज्ञान बताते हुए सभी प्रकार की मानवीय क्रियाओं के चयनात्मक पहलू को अर्थशास्त्र की विषय वस्तु माना। इससे अर्थशास्त्र का अध्ययन क्षेत्र बहुत व्यापक हो गया, जिससे आर्थिक सिद्धांतों का प्रतिपादन और समस्याओं का विश्लेषण जटिल हो गया।
2. अर्थशास्त्र केवल मूल्य निर्धारण नहीं: रॉबिन्स की परिभाषा में केवल यह अध्ययन किया गया कि विभिन्न वस्तुओं के उत्पादन में साधनों का वितरण कैसे होता है और साधनों का मूल्य या कीमत कैसे निर्धारित होती है। आलोचकों का मानना था कि अर्थशास्त्र का क्षेत्र साधनों के आवंटन और मूल्य निर्धारण से कहीं अधिक विस्तृत है।
In simple words: रॉबिन्स की परिभाषा की दो कमियाँ हैं: पहला, इसने अर्थशास्त्र का दायरा बहुत ज़्यादा बढ़ा दिया, जिससे सब कुछ पढ़ना मुश्किल हो गया; दूसरा, यह सिर्फ़ चीज़ों के दाम तय करने तक सीमित रह गई, जबकि अर्थशास्त्र का काम इससे ज़्यादा है।

🎯 Exam Tip: रॉबिन्स की आलोचना में 'क्षेत्र का अत्यधिक व्यापक होना' और 'मूल्य निर्धारण पर अत्यधिक फोकस' को मुख्य बिंदु के रूप में लिखें।

 

Question 13. रॉबिन्स तथा मार्शल की परिभाषाओं में चार समानताएँ लिखिए।
Answer: रॉबिन्स तथा मार्शल की परिभाषाओं में निम्नलिखित समानताएँ हैं:
1. मार्शल तथा रॉबिन्स दोनों ने अपनी परिभाषाओं में अर्थशास्त्र को एक विज्ञान माना है। दोनों ने आर्थिक घटनाओं के व्यवस्थित अध्ययन पर जोर दिया।
2. मार्शल तथा रॉबिन्स दोनों अर्थशास्त्रियों ने अर्थशास्त्र के अध्ययन में मानव को प्रधान मानकर साधनों को गौण स्थान दिया है। दोनों के लिए मनुष्य का व्यवहार केंद्रीय था।
3. मार्शल ने अपनी परिभाषा में केन्द्र बिन्दु 'अधिकतम कल्याण' माना है जबकि रॉबिन्स ने 'मितव्ययिता' को परिभाषा में प्रमुखता दी है। परन्तु मानव की ये दोनों प्रवृत्तियाँ एक ही अन्तिम उद्देश्य 'अधिकतम सन्तुष्टि' की ओर ले जाती हैं।
In simple words: रॉबिन्स और मार्शल की परिभाषाओं में तीन समानताएँ हैं: दोनों ने अर्थशास्त्र को विज्ञान माना, दोनों ने इंसान को मुख्य और साधनों को दूसरा माना, और दोनों का लक्ष्य आखिर में ज़्यादा से ज़्यादा संतुष्टि दिलाना था।

🎯 Exam Tip: समानताएँ बताते समय 'विज्ञान', 'मानव केंद्रित' और 'अधिकतम संतुष्टि' के साझा उद्देश्य पर जोर दें।

 

Question 15. आवश्यकता विहीन परिभाषा किसने दी? परिभाषा भी लिखिए।
Answer: आवश्यकता विहीन परिभाषा भारत के सुप्रसिद्ध अर्थशास्त्री एवं इलाहाबाद विश्वविद्यालय के प्रोफेसर जे. के. मेहता ने दी है। प्रो. मेहता के अनुसार "अर्थशास्त्र वह विज्ञान है जो मानवीय आचरण का इच्छा रहित अवस्था में पहुँचने के लिए साधन के रूप में अध्ययन करता है।" इस परिभाषा में उन्होंने बताया कि वास्तविक सुख आवश्यकताओं की पूर्ति में नहीं, बल्कि उन्हें कम करने या खत्म करने में है।
In simple words: आवश्यकता विहीन परिभाषा प्रो. जे.के. मेहता ने दी। उनके अनुसार, अर्थशास्त्र उस मानव व्यवहार को पढ़ता है जो इच्छाओं से मुक्त स्थिति तक पहुँचने के लिए साधनों का उपयोग करता है।

🎯 Exam Tip: परिभाषा देने वाले का नाम और उनकी परिभाषा का मूल विचार ('इच्छा रहित अवस्था') स्पष्ट रूप से उल्लेख करें।

 

Question 16. प्रो मेहता की आवश्यकता विहीन परिभाषा की आलोचना के दो बिन्दु लिखो।
Answer: प्रो. मेहता की आवश्यकता विहीन परिभाषा की दो प्रमुख आलोचनाएँ निम्नलिखित हैं:
1. इच्छा रहित मानव की कल्पना भी मुश्किल है: आज के भौतिकवादी युग में यह कल्पना करना कठिन है कि कोई सामान्य मनुष्य अधिकतम सुख प्राप्त करने के लिए अपनी आवश्यकताओं को कम करने की सोचे। आधुनिक समाज में इच्छाओं को पूरी तरह समाप्त करना व्यावहारिक नहीं लगता।
2. अधिकतम सुख की धारणा सही नहीं है: आलोचक प्रो. मेहता की धारणा को विरोधाभासी मानते हैं। उनके अनुसार, प्रो. मेहता एक ओर तो आवश्यकताओं में कमी करने की बात करते हैं, वहीं दूसरी ओर अधिकतम सुख की धारणा को व्यक्त करते हैं। ये दोनों अवधारणाएँ एक साथ स्वाभाविक रूप से लागू नहीं होतीं।
In simple words: प्रो. मेहता की परिभाषा की दो कमियाँ हैं: पहली, इच्छाओं से मुक्त इंसान की कल्पना करना मुश्किल है; दूसरी, ज़्यादा से ज़्यादा सुख का उनका विचार थोड़ा विरोधासी लगता है।

🎯 Exam Tip: आलोचना करते समय 'इच्छा रहित मानव' की अव्यावहारिकता और 'अधिकतम सुख' की धारणा में मौजूद विरोधाभास को स्पष्ट करें।

 

Question 18. आर्थिक समस्या अथवा चयन की समस्या के दो कारण बताइए।
Answer: आर्थिक समस्या अथवा चयन की समस्या के दो मुख्य कारण निम्नलिखित हैं:
1. आर्थिक संसाधनों का सीमित होना: मानव के पास उपलब्ध आर्थिक संसाधन जैसे भूमि, श्रम, पूँजी और समय सीमित होते हैं। ये संसाधन मानव की असीमित आवश्यकताओं को पूरा करने के लिए पर्याप्त नहीं होते।
2. असीमित आवश्यकताएँ: मनुष्य की आवश्यकताएँ असीमित होती हैं और कभी खत्म नहीं होतीं। जब एक आवश्यकता पूरी होती है, तो तुरंत दूसरी उत्पन्न हो जाती है। उदाहरण के लिए, जिसके पास पंखा नहीं है उसे पंखे की आवश्यकता होती है, जिसके पास पंखा होता है उसे कूलर की आवश्यकता होती है, और जिसके पास कूलर होता है उसे एयर कंडीशनर की आवश्यकता होती है। इस तरह, आवश्यकताएँ हमेशा असीमित बनी रहती हैं।
In simple words: चुनाव की समस्या के दो कारण हैं: पहला, हमारे पास चीज़ें (संसाधन) सीमित हैं; दूसरा, हमारी ज़रूरतें कभी खत्म नहीं होतीं, एक पूरी होते ही दूसरी आ जाती है।

🎯 Exam Tip: 'सीमित संसाधन' और 'असीमित आवश्यकताएँ' को स्पष्ट उदाहरणों के साथ समझाएँ, क्योंकि ये आर्थिक समस्या के मूल हैं।

 

Question 19. मार्शल तथा रॉबिन्स की परिभाषाओं की कोई दो समानताएँ बताइए।
Answer: मार्शल तथा रॉबिन्स की परिभाषाओं की दो मुख्य समानताएँ निम्नलिखित हैं:
1. मानव को प्रधान मानना: दोनों ही अर्थशास्त्रियों ने अर्थशास्त्र के अध्ययन में मानव को प्रधान माना है और संसाधनों को गौण स्थान दिया है। उनका ध्यान मानव व्यवहार और उसकी आर्थिक गतिविधियों पर केंद्रित रहा।
2. अधिकतम संतुष्टि का उद्देश्य: मार्शल ने अपनी परिभाषा में 'अधिकतम कल्याण' को केन्द्र बिन्दु माना है, जबकि रॉबिन्स ने 'मितव्ययिता' (साधनों का विवेकपूर्ण उपयोग) पर जोर दिया है। परन्तु मानव की ये दोनों ही प्रवृत्तियाँ अंततः 'अधिकतम सन्तुष्टि' के एक ही उद्देश्य से प्रेरित होती हैं।
In simple words: मार्शल और रॉबिन्स की परिभाषाओं में दो समानताएँ हैं: दोनों ने इंसान को मुख्य माना और साधनों को दूसरा, और दोनों का आख़िरी लक्ष्य ज़्यादा से ज़्यादा संतुष्टि दिलाना था।

🎯 Exam Tip: समानताएँ बताते समय 'मानव केंद्रित' दृष्टिकोण और 'अधिकतम संतुष्टि' के साझा लक्ष्य को उजागर करें।

 

Question 20. प्रो. मेहता के अनुसार अर्थशास्त्र का उद्देश्य वास्तविक सुख में वृद्धि करना है। इस कथन को स्पष्ट कीजिए।
Answer: प्रो. मेहता के अनुसार, अर्थशास्त्र का उद्देश्य केवल तात्कालिक संतुष्टि में वृद्धि करना नहीं, बल्कि 'वास्तविक सुख' में वृद्धि करना है। वे मानते थे कि इच्छाएँ असीमित होती हैं और उन्हें पूरी तरह से संतुष्ट करना संभव नहीं है। इसलिए, वास्तविक सुख इच्छाओं को कम करके या उन्हें समाप्त करके प्राप्त किया जा सकता है। प्रो. मेहता ने इस स्थिति को 'मानसिक सन्तुलन' कहा है, जहाँ इच्छाओं के भार से मुक्त होकर स्थायी शांति और सुख मिलता है।
In simple words: प्रो. मेहता का मानना था कि अर्थशास्त्र का असली काम ज़्यादा सुख बढ़ाना है, सिर्फ़ संतुष्टि नहीं। उनके हिसाब से, सच्चा सुख तब मिलता है जब हमारी इच्छाएँ कम होती हैं, और इसे ही उन्होंने 'मानसिक संतुलन' कहा।

🎯 Exam Tip: प्रो. मेहता के कथन को स्पष्ट करते समय 'वास्तविक सुख' को 'इच्छाओं में कमी' और 'मानसिक संतुलन' से जोड़ें।

RBSE Class 11 Economics Chapter 1 निबंधात्मक प्रश्न

 

Question 2. रॉबिन्स की दुर्लभता प्रधान परिभाषा की व्याख्या कीजिए।
Answer: प्रो. रॉबिन्स ने अर्थशास्त्र को एक नया और क्रांतिकारी दृष्टिकोण प्रदान किया। उन्होंने धन या मानव कल्याण पर जोर देने के बजाय, व्यक्ति की असीमित आवश्यकताओं को सीमित साधनों से पूरा करने के प्रयासों पर ध्यान केंद्रित किया। रॉबिन्स के अनुसार, “अर्थशास्त्र वह विज्ञान है जिसमें साध्यों तथा सीमित और अनेक उपयोग वाले साधनों से सम्बन्धित मानव व्यवहार का अध्ययन किया जाता है।” उनकी दुर्लभता प्रधान परिभाषा के मुख्य बिन्दु इस प्रकार हैं:
1. मनुष्य की आवश्यकताएँ अनन्त एवं असीमित हैं: मनुष्य की इच्छाएँ कभी खत्म नहीं होतीं; एक आवश्यकता पूरी होने पर दूसरी उत्पन्न हो जाती है।
2. आवश्यकताओं की पूर्ति के लिए मनुष्य के पास साधन सीमित हैं: मनुष्य के पास समय और धन जैसे संसाधन असीमित नहीं होते, जिसके कारण उसे अपनी विभिन्न आवश्यकताओं के बीच चुनाव करना पड़ता है।
3. इन साधनों के वैकल्पिक प्रयोग हो सकते हैं: सीमित संसाधनों का उपयोग कई अलग-अलग उद्देश्यों के लिए किया जा सकता है, जिससे उनकी सीमितता और भी बढ़ जाती है। मनुष्य को यह चुनाव करना पड़ता है कि इन साधनों का उपयोग किस उद्देश्य के लिए किया जाए।
4. आवश्यकताओं की तीव्रता में भी भिन्नता होती है: मनुष्य की सभी आवश्यकताएँ एक समान तीव्र नहीं होतीं। कुछ बहुत ज़रूरी होती हैं, जबकि कुछ कम ज़रूरी। आवश्यकताओं की तीव्रता में यह भिन्नता मनुष्य को चुनाव करने में सहायता करती है। एक विवेकशील व्यक्ति अपनी आवश्यकताओं को उनकी प्राथमिकता के क्रम में रखता है।
इन सभी कारणों से, मनुष्य को अपनी असीमित आवश्यकताओं और सीमित, वैकल्पिक उपयोग वाले साधनों के बीच चुनाव करना पड़ता है। रॉबिन्स ने इस चुनाव की प्रक्रिया को ही 'आर्थिक समस्या' कहा है।
In simple words: रॉबिन्स ने बताया कि अर्थशास्त्र इस बात का अध्ययन है कि लोग अपनी कभी न खत्म होने वाली इच्छाओं को सीमित साधनों (जो कई तरह से इस्तेमाल हो सकते हैं) से कैसे पूरा करते हैं। उनकी परिभाषा के अनुसार, हमारी ज़रूरतें endless हैं, साधन limited हैं, साधनों के कई इस्तेमाल हैं, और कुछ ज़रूरतें दूसरों से ज़्यादा ज़रूरी होती हैं, इसलिए हमें हमेशा चुनाव करना पड़ता है। इस चुनाव की समस्या को ही रॉबिन्स ने 'आर्थिक समस्या' कहा।

🎯 Exam Tip: रॉबिन्स की परिभाषा में 'चुनाव', 'सीमित साधन', 'असीमित आवश्यकताएँ', और 'साधनों के वैकल्पिक उपयोग' जैसे कीवर्ड्स को विस्तार से समझाएँ।

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