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Detailed Chapter 9 हाइड्रोजन RBSE Solutions for Class 11 Chemistry
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Class 11 Chemistry Chapter 9 हाइड्रोजन RBSE Solutions PDF
RBSE Class 11 Chemistry Chapter 9 वस्तुनिष्ठ प्रश्न
Question 1. अतिशुद्ध डाइहाइड्रोजन किसके विद्युत अपघटन से प्राप्त होती है।
(अ) \( \text{H}_2\text{SO}_4 \) युक्त जल
(ब) \( \text{NaOH} \) युक्त जल
(स) \( \text{Ba(OH)}_2 \)
(द) \( \text{KOH} \) युक्त जल
Answer: (स) \( \text{Ba(OH)}_2 \)
In simple words: शुद्ध डाइहाइड्रोजन बेरियम हाइड्रॉक्साइड \( (\text{Ba(OH)}_2) \) के घोल के विद्युत अपघटन से बनती है। यह विधि बहुत शुद्ध हाइड्रोजन बनाने के लिए उपयोग की जाती है।
🎯 Exam Tip: याद रखें कि औद्योगिक रूप से डाइहाइड्रोजन बनाने के लिए विभिन्न विधियाँ उपयोग की जाती हैं, लेकिन अतिशुद्ध रूप के लिए \( \text{Ba(OH)}_2 \) का विद्युत अपघटन सबसे उपयुक्त है।
Question 2. भारी जल का अणुभार होगा।
(अ) 10
(ब) 12
(स) 18
(द) 20
Answer: (द) 20
In simple words: भारी जल को ड्यूटेरियम ऑक्साइड \( (\text{D}_2\text{O}) \) कहते हैं। इसमें ऑक्सीजन का परमाणु भार 16 और ड्यूटेरियम का परमाणु भार 2 होता है। इसलिए, भारी जल का कुल अणुभार \( 2 \times 2 + 16 = 20 \) होगा।
🎯 Exam Tip: भारी जल में हाइड्रोजन के स्थान पर इसका समस्थानिक ड्यूटेरियम (D) होता है, जिसका परमाणु भार 1 के बजाय 2 होता है।
Question 3. ऑक्सीकरण अवस्था में डाइहाइड्रोजन कैसा व्यवहार करता है?
(अ) अपचायक
(ब) ऑक्सीकारक
(स) निर्जलीकारक
(द) विरंजक
Answer: (स) निर्जलीकारक
In simple words: ऑक्सीकरण अवस्था में डाइहाइड्रोजन अक्सर एक निर्जलीकारक के रूप में कार्य करता है। यह अभिक्रियाओं में पानी को हटाने में मदद करता है।
🎯 Exam Tip: डाइहाइड्रोजन की प्रकृति अभिक्रिया की शर्तों और अभिकारकों पर निर्भर करती है; यह अपचायक और ऑक्सीकारक दोनों के रूप में व्यवहार कर सकता है।
Question 4. ऑर्थों तथा पैरा हाइड्रोजन किस कारण एक-दूसरे से भिन्नता दर्शाते हैं –
(अ) प्रोटॉन की संख्या
(ब) अणुभार
(स) इलेक्ट्रॉन के चक्रण की दिशा में
(द) प्रोटॉन के चक्रण की दिशा में
Answer: (द) प्रोटॉन के चक्रण की दिशा में
In simple words: ऑर्थों और पैरा हाइड्रोजन में अंतर उनके नाभिकों (प्रोटॉनों) के चक्रण की दिशा के कारण होता है। ऑर्थों हाइड्रोजन में प्रोटॉन एक ही दिशा में घूमते हैं, जबकि पैरा हाइड्रोजन में वे विपरीत दिशा में घूमते हैं।
🎯 Exam Tip: यह आइसोमेरिज्म (समरूपता) नाभिकीय चक्रण के कारण होती है, न कि इलेक्ट्रॉनिक या आणविक संरचना के कारण, जो भौतिक गुणों को प्रभावित करती है।
Question 5. भारी जल है-
(अ) \( \text{D}_2\text{O} \)
(ब) \( \text{D}_2\text{O}_2 \)
(स) \( \text{H}_2\text{O} \)
(द) \( \text{H}_2\text{O}_2 \)
Answer: (अ) \( \text{D}_2\text{O} \)
In simple words: भारी जल का रासायनिक सूत्र \( \text{D}_2\text{O} \) है, जहाँ D ड्यूटेरियम को दर्शाता है। ड्यूटेरियम हाइड्रोजन का एक भारी समस्थानिक है।
🎯 Exam Tip: ध्यान रखें कि \( \text{D}_2\text{O} \) ड्यूटेरियम ऑक्साइड है, जबकि \( \text{H}_2\text{O} \) सामान्य जल है, और \( \text{H}_2\text{O}_2 \) हाइड्रोजन परॉक्साइड है।
RBSE Class 11 Chemistry Chapter 9 अतिलघूत्तरात्मक प्रश्न
Question 1. हाइड्रोजन की खोज किसने की थी ?
Answer: हाइड्रोजन की खोज हैनरी केवेण्डिश ने की थी। उन्होंने इसे "ज्वलनशील वायु" कहा था, क्योंकि यह जलने पर पानी बनाता है।
In simple words: हाइड्रोजन की खोज हैनरी केवेण्डिश ने की थी।
🎯 Exam Tip: वैज्ञानिक नामों और उनकी खोजों को याद रखने के लिए फ्लैशकार्ड का उपयोग करें।
Question 2. हाइड्रोजन को आवर्त सारणी में किस वर्ग में रखना चाहिए ?
Answer: हाइड्रोजन एक अद्वितीय तत्व है जिसे आवर्त सारणी में कोई निश्चित स्थान नहीं दिया गया है। इसे क्षार धातुओं (वर्ग 1) और हैलोजनों (वर्ग 17) दोनों के साथ रखा जा सकता है क्योंकि यह दोनों के गुणों को प्रदर्शित करता है। इसका इलेक्ट्रॉनिक विन्यास \( 1s^1 \) है, जो इसे वर्ग 1 के साथ जोड़ता है, लेकिन यह इलेक्ट्रॉन ग्रहण करके \( H^- \) आयन भी बना सकता है, जो हैलोजनों के समान है।
In simple words: हाइड्रोजन को आवर्त सारणी में कोई एक निश्चित स्थान नहीं मिला है। इसे पहले वर्ग (क्षार धातु) या सत्रहवें वर्ग (हैलोजन) दोनों में रखा जा सकता है, क्योंकि इसमें दोनों के गुण होते हैं।
🎯 Exam Tip: हाइड्रोजन के अद्वितीय गुणों को समझें, खासकर इसके इलेक्ट्रॉनिक विन्यास और आयन बनाने की क्षमता को, जो इसके विवादित स्थान का कारण है।
Question 3. हाइड्रोजन के समस्थानिक कौन-कौन से हैं और वे क्या हैं?
Answer: हाइड्रोजन के तीन समस्थानिक होते हैं:
(i) प्रोटियम \( (_1^1\text{H} \text{ या } \text{H}) \): इसमें 1 प्रोटॉन, 1 इलेक्ट्रॉन और 0 न्यूट्रॉन होते हैं। यह सबसे सामान्य समस्थानिक है।
(ii) ड्यूटीरियम \( (_1^2\text{H} \text{ या } \text{D}) \): इसमें 1 प्रोटॉन, 1 इलेक्ट्रॉन और 1 न्यूट्रॉन होता है। इसे भारी हाइड्रोजन भी कहते हैं।
(iii) ट्राइटियम \( (_1^3\text{H} \text{ या } \text{T}) \): इसमें 1 प्रोटॉन, 1 इलेक्ट्रॉन और 2 न्यूट्रॉन होते हैं। यह एक रेडियोसक्रिय समस्थानिक है।
In simple words: हाइड्रोजन के तीन प्रकार (समस्थानिक) होते हैं: प्रोटियम (सामान्य हाइड्रोजन), ड्यूटीरियम (भारी हाइड्रोजन), और ट्राइटियम (रेडियोसक्रिय हाइड्रोजन)। ये सभी परमाणु में न्यूट्रॉन की संख्या में अलग होते हैं।
🎯 Exam Tip: प्रत्येक समस्थानिक में प्रोटॉन और इलेक्ट्रॉन की संख्या समान रहती है, केवल न्यूट्रॉन की संख्या भिन्न होती है।
Question 4. आर्थों हाइड्रोजन किसे कहते हैं ?
Answer: जब प्रोटोन या नाभिक का चक्रण एक ही दिशा में हो तो इस प्रकार के हाइड्रोजन को आर्थों हाइड्रोजन कहते हैं। यह हाइड्रोजन का एक समन्यूक्लियर आइसोमर है, जिसमें नाभिकीय चक्रण समानांतर होते हैं।
In simple words: आर्थों हाइड्रोजन वह होता है जिसमें हाइड्रोजन परमाणु के नाभिक (प्रोटॉन) एक ही दिशा में घूमते हैं।
🎯 Exam Tip: आर्थों और पैरा हाइड्रोजन के बीच का अंतर केवल नाभिकीय स्पिन ओरिएंटेशन में है, जो उनके भौतिक गुणों जैसे ऊष्मीय चालकता को प्रभावित करता है।
Question 5. हाइड्रोजन का कौनसा समस्थानिक रेडियो सक्रिय है ?
Answer: ट्राइटियम समस्थानिक रेडियो सक्रिय है। इसका रासायनिक सूत्र \( _1^3\text{H} \) या \( \text{T} \) है। यह β-कण उत्सर्जित करके क्षय होता है।
In simple words: हाइड्रोजन का ट्राइटियम नामक समस्थानिक रेडियो सक्रिय होता है।
🎯 Exam Tip: याद रखें कि ट्राइटियम का उपयोग रेडियोधर्मी ट्रेसर के रूप में और परमाणु संलयन अनुसंधान में किया जाता है।
Question 6. हाइड्रोजन के स्थान पर गुब्बारों में हीलियम भरी जाती है, क्यों?
Answer: हीलियम का इलेक्ट्रॉनिक विन्यास \( _2\text{He}^4 (1s^2) \) होता है। यह एक अक्रिय गैस है, जबकि हाइड्रोजन ज्वलनशील होती है। इसलिए, गुब्बारों में हीलियम भरी जाती है क्योंकि यह हल्की और अक्रियाशील होती है, जिससे आग लगने का कोई खतरा नहीं होता। हीलियम की सुरक्षा इसे हाइड्रोजन से बेहतर विकल्प बनाती है।
In simple words: हीलियम गैस गुब्बारों में इसलिए भरी जाती है क्योंकि यह हल्की होने के साथ-साथ जलती नहीं है। हाइड्रोजन गैस हल्की तो है, पर वह बहुत ज्वलनशील होती है, जिससे खतरा होता है।
🎯 Exam Tip: सुरक्षा पहलू को प्राथमिकता दें; हीलियम का अक्रिय गुण इसे हाइड्रोजन की ज्वलनशीलता से अधिक सुरक्षित बनाता है।
Question 7. जल में ऑक्सीजन की संकरण अवस्था बताइए।
Answer: जल में ऑक्सीजन की संकरण अवस्था \( sp^3 \) होती है। ऑक्सीजन परमाणु दो हाइड्रोजन परमाणुओं के साथ सहसंयोजक बंध बनाता है और इसमें दो एकाकी इलेक्ट्रॉन युग्म भी होते हैं, जो इसे चतुष्फलकीय ज्यामिति प्रदान करते हैं।
In simple words: जल के अणु में ऑक्सीजन \( sp^3 \) संकरित होता है।
🎯 Exam Tip: जल की V-आकार की संरचना और उसके ध्रुवीय गुण ऑक्सीजन के \( sp^3 \) संकरण और एकाकी युग्मों की उपस्थिति के कारण होते हैं।
Question 8. जल के अणु में बंध कोण का मान क्या होता है ?
Answer: जल के अणु में बंध कोण का मान लगभग 104.5° होता है। यह आदर्श चतुष्फलकीय बंध कोण (109.5°) से थोड़ा कम होता है, क्योंकि ऑक्सीजन परमाणु पर मौजूद एकाकी इलेक्ट्रॉन युग्म बंध युग्मों को प्रतिकर्षित करते हैं।
In simple words: जल के अणु में हाइड्रोजन-ऑक्सीजन-हाइड्रोजन बंध के बीच का कोण लगभग 104.5 डिग्री होता है।
🎯 Exam Tip: \( \text{H}_2\text{O} \) की झुकी हुई संरचना और बंध कोण को वैलेंस शेल इलेक्ट्रॉन युग्म प्रतिकर्षण (VSEPR) सिद्धांत से समझा जा सकता है।
Question 10. जल का घनत्व किस ताप पर अधिकतम होता है ?
Answer: जल का घनत्व 4°C ताप पर अधिकतम होता है। इस तापमान पर जल के अणु सबसे पास-पास आ जाते हैं, जिससे प्रति इकाई आयतन में अधिकतम द्रव्यमान होता है।
In simple words: पानी सबसे भारी 4 डिग्री सेल्सियस तापमान पर होता है।
🎯 Exam Tip: यह अद्वितीय गुण जलीय जीवन के लिए महत्वपूर्ण है क्योंकि झीलों और तालाबों में पानी का तापमान 4°C होने पर नीचे जम जाता है, जिससे ऊपरी सतह पर बर्फ जमती है।
Question 11. कैल्सियम कार्बाइड पर जल की क्रिया से कौनसी गैस नहीं बनती है ?
Answer: कैल्सियम कार्बाइड \( (\text{CaC}_2) \) पर जल की क्रिया से एसीटिलीन गैस \( (\text{C}_2\text{H}_2) \) बनती है, जैसा कि निम्नलिखित अभिक्रिया में दर्शाया गया है:
\( \text{CaC}_2 + 2\text{H}_2\text{O} \rightarrow \text{Ca(OH)}_2 + \text{C}_2\text{H}_2 \)
इस प्रकार, एसीटिलीन गैस बनती है, और कोई अन्य गैस नहीं बनती है।
In simple words: जब कैल्सियम कार्बाइड पर पानी डाला जाता है, तो एसीटिलीन गैस बनती है। यह आमतौर पर बनने वाली एकमात्र गैस है।
🎯 Exam Tip: इस अभिक्रिया का उपयोग एसीटिलीन गैस के औद्योगिक उत्पादन के लिए किया जाता है, जिसका उपयोग वेल्डिंग और कटिंग में होता है।
Question 12. जल की अस्थाई कठोरता का क्या कारण है ?
Answer: जल की अस्थाई कठोरता कैल्सियम तथा मैग्नीशियम के बाइकार्बोनेटों \( (\text{Ca(HCO}_3)_2 \text{ और } \text{Mg(HCO}_3)_2) \) की उपस्थिति के कारण होती है। इन लवणों को उबालने पर अवक्षेपित करके दूर किया जा सकता है।
In simple words: पानी में अस्थाई कठोरता कैल्सियम और मैग्नीशियम के बाइकार्बोनेटों के कारण होती है।
🎯 Exam Tip: अस्थाई कठोरता को उबालकर आसानी से दूर किया जा सकता है क्योंकि बाइकार्बोनेट अघुलनशील कार्बोनेट में बदल जाते हैं।
Question 13. केलगॉन का रासायनिक सूत्र लिखिए।
Answer: केलगॉन का रासायनिक सूत्र सोडियम हेक्सा मेटाफॉस्फेट \( (\text{Na}_6\text{P}_6\text{O}_{18}) \) होता है। इसका उपयोग जल की कठोरता को दूर करने के लिए किया जाता है।
In simple words: केलगॉन का सूत्र \( \text{Na}_6\text{P}_6\text{O}_{18} \) है, जिसे सोडियम हेक्सा मेटाफॉस्फेट भी कहते हैं।
🎯 Exam Tip: केलगॉन कठोर जल के आयनों \( (\text{Ca}^{2+}, \text{Mg}^{2+}) \) के साथ संकुल बनाता है, जिससे वे घुलनशील रहते हैं और साबुन के साथ प्रतिक्रिया नहीं करते।
Question 14. \( \text{H}_2\text{O}_2 \) में ऑक्सीजन का ऑक्सीकरण अंक क्या होता है ?
Answer: \( \text{H}_2\text{O}_2 \) (हाइड्रोजन परॉक्साइड) में ऑक्सीजन का ऑक्सीकरण अंक -1 होता है। हाइड्रोजन का ऑक्सीकरण अंक +1 होता है। यदि हम इसे \( 2(+1) + 2\text{x} = 0 \) समीकरण में रखते हैं, तो \( 2 + 2\text{x} = 0 \implies 2\text{x} = -2 \implies \text{x} = -1 \) प्राप्त होता है।
In simple words: हाइड्रोजन परॉक्साइड \( (\text{H}_2\text{O}_2) \) में ऑक्सीजन का ऑक्सीकरण अंक -1 होता है।
🎯 Exam Tip: सामान्यतः ऑक्सीजन का ऑक्सीकरण अंक -2 होता है, लेकिन परॉक्साइडों में यह -1 होता है, और सुपरऑक्साइडों में -1/2 होता है।
Question 15. \( \text{H}_2\text{O}_2 \) की संरचना किस प्रकार की होती है ?
Answer: \( \text{H}_2\text{O}_2 \) की संरचना एक खुली किताब जैसी होती है, जिसे 'गैर-समतलीय' संरचना कहा जाता है। इसमें दो ऑक्सीजन परमाणु एक एकल बंध से जुड़े होते हैं और प्रत्येक ऑक्सीजन परमाणु एक हाइड्रोजन परमाणु से जुड़ा होता है। दो तल होते हैं, एक में \( \text{H-O-O} \) और दूसरे में \( \text{O-O-H} \)।
In simple words: \( \text{H}_2\text{O}_2 \) (हाइड्रोजन परॉक्साइड) की संरचना खुली किताब जैसी होती है, मतलब यह एक ही समतल में नहीं होती है।
🎯 Exam Tip: \( \text{H}_2\text{O}_2 \) की गैर-समतलीय संरचना इसके अद्वितीय रासायनिक गुणों और ध्रुवीयता के लिए जिम्मेदार है।
Question 16. हाइड्रोजन की क्षार धातुओं से समानताएँ लिखिए।
Answer: हाइड्रोजन की क्षार धातुओं से निम्न समानताएँ होती हैं:
1. इलेक्ट्रॉनिक विन्यास: हाइड्रोजन \( (1s^1) \) और क्षार धातुओं \( (ns^1) \) दोनों के बाह्यतम कोश में एक इलेक्ट्रॉन होता है।
2. विद्युत धनात्मक प्रकृति: हाइड्रोजन \( (\text{H}^+) \) और क्षार धातु \( (\text{Na}^+) \) दोनों एक संयोजी धनायन बनाते हैं।
3. अधातुओं से अभिक्रिया: दोनों ही अधातुओं के साथ अभिक्रिया करके यौगिक बनाते हैं, जैसे \( \text{H}_2 + \text{Cl}_2 \rightarrow 2\text{HCl} \) और \( 2\text{Na} + \text{Cl}_2 \rightarrow 2\text{NaCl} \)।
4. ऑक्सीकरण अवस्था: हाइड्रोजन भी क्षार धातुओं के समान \( +1 \) ऑक्सीकरण अवस्था प्रदर्शित करता है, जैसे \( \text{HCl} \)।
In simple words: हाइड्रोजन क्षार धातुओं जैसा है क्योंकि दोनों के बाहरी कक्षा में एक इलेक्ट्रॉन होता है, दोनों धनात्मक आयन बना सकते हैं, और दोनों अधातुओं के साथ मिलकर यौगिक बनाते हैं।
🎯 Exam Tip: आवर्त सारणी में हाइड्रोजन के स्थान को समझने के लिए इसकी समानताएँ और भिन्नताएँ दोनों का अध्ययन करना महत्वपूर्ण है।
Question 17. हाइड्रोजन की हेलोजनों से समानताएँ लिखिए।
Answer: हाइड्रोजन की हैलोजनों से निम्न समानताएँ होती हैं:
(i) इलेक्ट्रॉनिक विन्यास: हाइड्रोजन \( (1s^1) \) एक इलेक्ट्रॉन ग्रहण करके उत्कृष्ट गैस हीलियम \( (1s^2) \) जैसा विन्यास प्राप्त कर सकता है, ठीक वैसे ही जैसे हैलोजन एक इलेक्ट्रॉन ग्रहण करके निकटतम उत्कृष्ट गैस का विन्यास प्राप्त करते हैं।
(ii) अधातु गुण: हैलोजनों के समान हाइड्रोजन भी एक अधातु है। यह विद्युत का कुचालक होता है।
(iii) आण्विक अवस्था: हैलोजनों के समान, हाइड्रोजन भी द्विपरमाणुक अणु \( (\text{H}_2) \) बनाता है, जैसे \( \text{F}_2, \text{Cl}_2 \) इत्यादि।
(iv) आयनन एन्थैल्पी: हाइड्रोजन की आयनन एन्थैल्पी भी हैलोजनों की आयनन एन्थैल्पी के समान उच्च होती है। \( (\Delta_i\text{H} = 1312 \text{ kJ mol}^{-1} \text{ तथा } \Delta_i\text{F} = 1680 \text{ kJmol}^{-1}) \)
(v) धातुओं तथा अधातुओं से क्रिया: हैलोजनों के समान हाइड्रोजन भी विभिन्न धातुओं तथा अधातुओं से क्रिया करके समान रससमीकरणमिति के यौगिक बनाती है। जैसे \( \text{CCl}_4 \), \( \text{SiCl}_4 \)।
In simple words: हाइड्रोजन हैलोजन जैसा है क्योंकि दोनों अधातु हैं, द्विपरमाणुक अणु बनाते हैं, और एक इलेक्ट्रॉन लेकर स्थायी होते हैं।
🎯 Exam Tip: हाइड्रोजन की हैलोजनों से समानताएँ इसके ऋणायन \( (\text{H}^-) \) बनाने की प्रवृत्ति और सहसंयोजक यौगिकों के निर्माण से संबंधित हैं।
Question 18. बर्फ पानी पर तैरती है। कारण स्पष्ट कीजिए।
Answer: बर्फ पानी पर तैरती है क्योंकि इसका घनत्व जल से कम होता है। बर्फ की संरचना में प्रत्येक ऑक्सीजन परमाणु चार हाइड्रोजन परमाणुओं से चतुष्फलकीय रूप से घिरा होता है, जिसमें दो सहसंयोजक बंध और दो हाइड्रोजन बंध होते हैं। यह एक खुली पिंजरे जैसी संरचना बनाती है जिसमें बड़े रिक्त स्थान होते हैं। इन रिक्त स्थानों के कारण बर्फ का आयतन अधिक हो जाता है, जिससे उसका घनत्व जल से कम हो जाता है। यही कारण है कि बर्फ जल की सतह पर तैरती है। यह जलीय जीवों के लिए महत्वपूर्ण है क्योंकि यह ठंड में झीलों को जमने से बचाती है।
In simple words: बर्फ पानी पर इसलिए तैरती है क्योंकि बर्फ का घनत्व पानी से कम होता है। बर्फ की बनावट में खुली जगहें होती हैं, जिससे वह पानी से हल्की हो जाती है।
🎯 Exam Tip: बर्फ की पिंजरे जैसी संरचना और हाइड्रोजन बंधन इसके कम घनत्व का मुख्य कारण हैं, जो पानी के कई अद्वितीय गुणों में से एक है।
Question 19. जल की स्थाई कठोरता को दूर करने के लिए धावन सोडा विधि का वर्णन कीजिए।
Answer: जल की स्थाई कठोरता को दूर करने के लिए धावन सोडा \( (\text{Na}_2\text{CO}_3) \) विधि का उपयोग किया जाता है। इस विधि में कठोर जल में धावन सोडा मिलाया जाता है। धावन सोडा जल में उपस्थित कैल्सियम और मैग्नीशियम के क्लोराइडों और सल्फेटों से अभिक्रिया करता है, जिससे अघुलनशील कार्बोनेट (कैल्सियम कार्बोनेट और मैग्नीशियम कार्बोनेट) अवक्षेपित हो जाते हैं। इन अवक्षेपों को छानकर अलग कर लिया जाता है, जिससे जल मृदु हो जाता है।
अभिक्रियाएँ इस प्रकार हैं:
\( \text{MgSO}_4 + \text{Na}_2\text{CO}_3 \rightarrow \text{MgCO}_3\downarrow + \text{Na}_2\text{SO}_4 \)
\( \text{MgCl}_2 + \text{Na}_2\text{CO}_3 \rightarrow \text{MgCO}_3\downarrow + 2\text{NaCl} \)
\( \text{CaSO}_4 + \text{Na}_2\text{CO}_3 \rightarrow \text{CaCO}_3\downarrow + \text{Na}_2\text{SO}_4 \)
\( \text{CaCl}_2 + \text{Na}_2\text{CO}_3 \rightarrow \text{CaCO}_3\downarrow + 2\text{NaCl} \)
In simple words: पानी की स्थाई कठोरता को हटाने के लिए धावन सोडा (सोडियम कार्बोनेट) मिलाया जाता है। यह कैल्सियम और मैग्नीशियम लवणों को अघुलनशील बनाता है, जो फिर पानी से अलग हो जाते हैं, जिससे पानी नरम हो जाता है।
🎯 Exam Tip: यह विधि आयन विनिमय सिद्धांत पर आधारित है, जहाँ \( \text{Na}^+ \) आयन \( \text{Ca}^{2+} \) और \( \text{Mg}^{2+} \) आयनों को विस्थापित करते हैं।
Question 20. हाइड्रोजन सामान्य ताप व दाब पर एक परमाण्विक की अपेक्षा द्विपरमाण्विक अवस्था में क्यों पाया जाता है ?
Answer: हाइड्रोजन सामान्य ताप और दाब पर एक परमाण्विक \( (\text{H}) \) की अपेक्षा द्विपरमाण्विक \( (\text{H}_2) \) अवस्था में पाया जाता है क्योंकि यह अपने निकटतम उत्कृष्ट गैस हीलियम \( (\text{He}) \) के समान स्थायी इलेक्ट्रॉनिक विन्यास प्राप्त करना चाहता है। इसे प्राप्त करने के लिए दो हाइड्रोजन परमाणु परस्पर संयोग करते हैं और एक-एक इलेक्ट्रॉन का साझा करके स्थायी सहसंयोजक बंध द्वारा द्वि-परमाण्विक अणु \( (\text{H-H}) \) बनाते हैं। इस प्रक्रिया में अधिक मात्रा में ऊर्जा निकलती है \( (\Delta\text{H} = -435.8 \text{ kJ mol}^{-1}) \), जिससे अणु अत्यधिक स्थायी हो जाता है।
\( \text{H(g)} + \text{H(g)} \rightarrow \text{H}_2\text{(g)}, \Delta\text{H} = -435.8 \text{ kJ mol}^{-1} \)
In simple words: हाइड्रोजन आमतौर पर दो परमाणुओं \( (\text{H}_2) \) के रूप में पाया जाता है, क्योंकि इस तरह यह हीलियम जैसी स्थायी अवस्था में आ जाता है। यह करते समय बहुत ऊर्जा निकलती है, जिससे यह बहुत मजबूत और स्थिर हो जाता है।
🎯 Exam Tip: यह प्रक्रिया रासायनिक बंध बनाने की स्थिरता और ऊर्जा के उत्सर्जन के सिद्धांत को दर्शाती है, जिससे अणु अधिक स्थायी हो जाते हैं।
Question 22. \( \text{H}_2\text{O}_2 \) के कोई चार उपयोग लिखिए।
Answer: \( \text{H}_2\text{O}_2 \) (हाइड्रोजन परॉक्साइड) के चार मुख्य उपयोग इस प्रकार हैं:
(i) इसका उपयोग मंद कीटनाशी के रूप में और बालों के विरंजन (ब्लीचिंग) में किया जाता है।
(ii) यह एक प्रतिरोधी (antiseptic) के रूप में कार्य करता है, जिसका उपयोग घावों को साफ करने में होता है।
(iii) इसे वस्त्र, कागज की लुगदी, चमड़ा, तेल, वसा आदि के विरंजन कारक के रूप में उपयोग किया जाता है।
(iv) इसे दूध, शराब इत्यादि के परिरक्षण (preservation) में प्रयुक्त किया जाता है ताकि उन्हें खराब होने से बचाया जा सके।
In simple words: \( \text{H}_2\text{O}_2 \) का उपयोग कीटाणु मारने, बाल ब्लीच करने, घावों को साफ करने, कपड़ों का रंग उड़ाने और खाने-पीने की चीजों को खराब होने से बचाने के लिए किया जाता है।
🎯 Exam Tip: \( \text{H}_2\text{O}_2 \) के ऑक्सीकारक और विरंजक गुण इसके विभिन्न अनुप्रयोगों का आधार हैं।
Question 23. डाइहाइड्रोजन बनाने की प्रयोगशाला विधि का वर्णन कीजिए।
Answer: प्रयोगशाला में डाइहाइड्रोजन गैस दानेदार जिंक की तनु सल्फ्यूरिक अम्ल \( (\text{H}_2\text{SO}_4) \) से अभिक्रिया द्वारा प्राप्त की जाती है। इस विधि में, दानेदार जिंक को वुल्फ बोतल में लेते हैं और तनु सल्फ्यूरिक अम्ल को फनल के माध्यम से बूंद-बूंद करके डालते हैं। उत्पन्न गैस को जल के निचले विस्थापन विधि द्वारा गैस जार में एकत्रित कर लिया जाता है।
अभिक्रिया इस प्रकार है:
\( \text{Zn} + \text{H}_2\text{SO}_4 \rightarrow \text{ZnSO}_4 + \text{H}_2 \)
In simple words: प्रयोगशाला में हाइड्रोजन गैस बनाने के लिए दानेदार जिंक में पतला सल्फ्यूरिक एसिड डालते हैं। इससे गैस निकलती है जिसे पानी के नीचे जार में इकट्ठा किया जाता है।
🎯 Exam Tip: इस विधि में जिंक का उपयोग उत्प्रेरक के रूप में नहीं, बल्कि अभिकारक के रूप में होता है; यह एक रेडॉक्स अभिक्रिया है।
Question 24. परम्युटिट किसे कहते हैं ?
Answer: परम्युटिट या जियोलाइट एक जलयुक्त सोडियम एलुमिनियम सिलिकेट है, जिसका रासायनिक सूत्र \( \text{Na}_2\text{Al}_2\text{Si}_2\text{O}_8\cdot6\text{H}_2\text{O} \) होता है। इसे अक्सर \( \text{NaZ} \) से प्रदर्शित करते हैं। इसका उपयोग जल की कठोरता दूर करने के लिए किया जाता है क्योंकि यह कठोरता पैदा करने वाले आयनों \( (\text{Ca}^{2+}, \text{Mg}^{2+}) \) को अपने सोडियम आयनों से बदल देता है।
In simple words: परम्युटिट एक खास तरह का पत्थर जैसा पदार्थ है, जिसे सोडियम एलुमिनियम सिलिकेट कहते हैं। इसका उपयोग पानी से कठोरता को हटाने के लिए किया जाता है।
🎯 Exam Tip: परम्युटिट विधि जल के मृदुकरण के लिए आयन विनिमय सिद्धांत पर आधारित है, जहाँ \( \text{Na}^+ \) आयन कठोरता पैदा करने वाले \( \text{Ca}^{2+} \) और \( \text{Mg}^{2+} \) आयनों से बदल जाते हैं।
Question 26. \( \text{H}_2\text{O}_2 \) के तनु विलयन का उपयोग पुरानी लैड पेंटिंग को साफ करने के लिए क्यों किया जाता है?
Answer: प्राचीन लैड पेंटिंग जब लंबे समय तक वातावरण में रहती हैं, तो वायुमंडल में मौजूद \( \text{H}_2\text{S} \) गैस के कारण उनमें मौजूद लैड ऑक्साइड \( (\text{PbO}) \) लैड सल्फाइड \( (\text{PbS}) \) में बदल जाता है, जिससे पेंटिंग काली पड़ जाती है। इस कालेपन को दूर करने के लिए, पेंटिंग को कुछ समय तक \( \text{H}_2\text{O}_2 \) के तनु विलयन में रखा जाता है। \( \text{H}_2\text{O}_2 \) लैड सल्फाइड \( (\text{PbS}) \) को लैड सल्फेट \( (\text{PbSO}_4) \) में ऑक्सीकृत कर देता है, जो सफेद होता है, जिससे पेंटिंग फिर से चमकदार हो जाती है।
अभिक्रिया इस प्रकार है:
\( \text{PbS(s)} + 4\text{H}_2\text{O}_2\text{(aq)} \rightarrow \text{PbSO}_4\text{(s)} + 4\text{H}_2\text{O(l)} \)
In simple words: पुरानी लैड पेंटिंग को \( \text{H}_2\text{O}_2 \) से साफ करते हैं क्योंकि हवा में मौजूद \( \text{H}_2\text{S} \) के कारण लैड सल्फाइड काला हो जाता है। \( \text{H}_2\text{O}_2 \) इस काले लैड सल्फाइड को सफेद लैड सल्फेट में बदल देता है, जिससे पेंटिंग फिर से साफ और चमकीली हो जाती है।
🎯 Exam Tip: यह अभिक्रिया \( \text{H}_2\text{O}_2 \) के ऑक्सीकारक गुणों को दर्शाती है, जिसका उपयोग कला संरक्षण में किया जाता है।
Question 27. \( \text{H}_2\text{O}_2 \) की विरंजक क्रिया को समझाइए।
Answer: \( \text{H}_2\text{O}_2 \) (हाइड्रोजन परॉक्साइड) एक मृदु विरंजक कारक है। यह अपघटित होकर नवजात ऑक्सीजन \( ([\text{O}]) \) देता है, जो अत्यधिक क्रियाशील होती है। यह नवजात ऑक्सीजन रंगीन पदार्थों को ऑक्सीकृत करके रंगहीन पदार्थों में बदल देती है। नम अवस्था में, इस प्रकार प्राप्त नवजात ऑक्सीजन रेशम, सिल्क, पुष्प, बाल, नरम लकड़ी इत्यादि का रंग उड़ाने में प्रयुक्त की जाती है।
अभिक्रिया इस प्रकार है:
\( \text{H}_2\text{O}_2 \rightarrow \text{H}_2\text{O} + [\text{O}] \)
रंगीन पदार्थ \( + [\text{O}] \rightarrow \) रंगहीन पदार्थ
In simple words: \( \text{H}_2\text{O}_2 \) रंग उड़ाने का काम करता है क्योंकि यह टूटकर नई ऑक्सीजन बनाता है। यह नई ऑक्सीजन रंगीन चीजों को बेजान कर देती है।
🎯 Exam Tip: विरंजन क्रिया हमेशा नवजात ऑक्सीजन के ऑक्सीकारक गुण के कारण होती है, जो स्थायी रंगीन यौगिकों को अस्थायी और रंगहीन यौगिकों में बदल देता है।
Question 28. कोल गैसीकरण किसे कहते हैं ?
Answer: सिन्गैस (कोल गैस) का निर्माण कोल तथा जलवाष्प से बॉश (Bosch Process) विधि द्वारा किया जाता है, इसे कोल गैसीकरण कहते हैं। इस क्रिया में रक्त तप्त कोयले पर 1270K ताप पर जलवाष्प डालते हैं, जिससे कार्बन मोनोऑक्साइड \( (\text{CO}) \) और हाइड्रोजन \( (\text{H}_2) \) का मिश्रण प्राप्त होता है। इस मिश्रण को सिन्गैस या जल गैस कहते हैं।
(i) \( \text{C(s)} + \text{H}_2\text{O(g)} \xrightarrow{1270K, Ni} \text{CO(g)} + \text{H}_2\text{(g)} \)
जल गैस के मिश्रण में उपस्थित \( \text{CO} \) से \( \text{H}_2\text{O} \) की क्रिया द्वारा \( \text{H}_2 \) का उत्पादन बढ़ाया जा सकता है। यह क्रिया आयरन क्रोमेट \( (\text{FeCrO}_4) \) उत्प्रेरक द्वारा तीव्रता से होती है। इसे भाप अंगार गैस सृति अभिक्रिया (water gas shift reaction) कहते हैं।
(ii) \( \text{CO(g)} + \text{H}_2\text{O(g)} \xrightarrow{673K, FeCrO_4} \text{CO}_2\text{(g)} + \text{H}_2\text{(g)} \)
In simple words: कोल गैसीकरण वह तरीका है जिसमें कोयले और पानी की भाप को बहुत गर्म करके सिन्गैस (कार्बन मोनोऑक्साइड और हाइड्रोजन का मिश्रण) बनाई जाती है।
🎯 Exam Tip: यह प्रक्रिया हाइड्रोजन उत्पादन के लिए एक महत्वपूर्ण औद्योगिक विधि है और ऊर्जा उत्पादन में इसका व्यापक उपयोग होता है।
Question 29. जल की अस्थायी और स्थायी कठोरता के क्या कारण हैं ?
Answer: जल एक सार्वभौमिक विलायक है। वर्षा का जल शुद्ध होता है, परन्तु जब यह जमीन पर गिरता है, तो यह कई लवणों को घोल लेता है, जिससे जल कठोर हो जाता है।
1. अस्थायी कठोरता: यह जल में कैल्सियम \( (\text{Ca}^{2+}) \) और मैग्नीशियम \( (\text{Mg}^{2+}) \) के बाइकार्बोनेटों \( (\text{HCO}_3^-) \) की उपस्थिति के कारण होती है। इसे उबालकर दूर किया जा सकता है।
2. स्थायी कठोरता: यह जल में कैल्सियम \( (\text{Ca}^{2+}) \) और मैग्नीशियम \( (\text{Mg}^{2+}) \) के क्लोराइडों \( (\text{Cl}^-) \) और सल्फेटों \( (\text{SO}_4^{2-}) \) की उपस्थिति के कारण होती है। इसे उबालकर दूर नहीं किया जा सकता है।
In simple words: पानी की अस्थायी कठोरता उसमें कैल्सियम और मैग्नीशियम के बाइकार्बोनेटों के कारण होती है। स्थायी कठोरता कैल्सियम और मैग्नीशियम के क्लोराइडों और सल्फेटों के कारण होती है।
🎯 Exam Tip: कठोरता का मुख्य कारण जल में बहुसंयोजी धातु आयनों \( (\text{Ca}^{2+}, \text{Mg}^{2+}) \) की उपस्थिति है, जो साबुन के साथ अघुलनशील अवक्षेप बनाते हैं।
Question 30. \( \text{H}_2\text{O}_2 \) को विघटन से बचाने के लिए क्या किया जाता है?
Answer: \( \text{H}_2\text{O}_2 \) को विघटन से बचाने के लिए अंधेरे में, मोम की परत युक्त प्लास्टिक या कठोर काँच के पात्र में भण्डारित करते हैं। इसमें कुछ मात्रा में यूरिया जैसे स्थायीकारक मिलाया जाता है। इसे धूल के कणों से दूर रखा जाता है क्योंकि धूल से \( \text{H}_2\text{O}_2 \) का विस्फोटन हो सकता है। \( \text{H}_2\text{O}_2 \) को हमेशा ठंडी और अंधेरी जगह पर रखना चाहिए ताकि यह ऑक्सीजन और पानी में न टूट जाए।
In simple words: \( \text{H}_2\text{O}_2 \) को खराब होने से बचाने के लिए, इसे अंधेरे में प्लास्टिक या कांच की बोतल में रखा जाता है और इसमें थोड़ा यूरिया मिलाया जाता है, साथ ही धूल से दूर रखा जाता है।
🎯 Exam Tip: प्रकाश, गर्मी और अशुद्धियाँ \( \text{H}_2\text{O}_2 \) के अपघटन को तेज करती हैं, इसलिए इन कारकों से बचाव आवश्यक है।
RBSE Class 11 Chemistry Chapter 9 निबन्धात्मक प्रश्न
Question 31. आवर्त सारणी में हाइड्रोजन को एक पृथक् स्थान देना तर्कसंगत है। इस कथन को स्पष्ट कीजिए।
Answer: आवर्त सारणी में हाइड्रोजन को एक पृथक् स्थान देना तर्कसंगत है क्योंकि यह क्षार धातुओं (वर्ग 1) और हैलोजनों (वर्ग 17) दोनों से समानताएँ और भिन्नताएँ प्रदर्शित करता है।
**क्षार धातुओं से समानताएँ:**
(1) इलेक्ट्रॉनिक विन्यास: हाइड्रोजन \( (1s^1) \) और क्षार धातु \( (ns^1) \) दोनों के बाह्यतम कोश में एक इलेक्ट्रॉन होता है।
(2) ऑक्सीकरण संख्या: हाइड्रोजन और क्षार धातु दोनों \( +1 \) ऑक्सीकरण अवस्था प्रदर्शित करते हैं \( (\text{H}^+, \text{Na}^+) \)।
(3) अधातुओं से क्रिया: हाइड्रोजन और क्षार धातु दोनों विभिन्न अधातुओं से क्रिया करके यौगिक बनाते हैं \( (\text{H}_2 + \text{Cl}_2 \rightarrow 2\text{HCl}, 2\text{Na} + \text{Cl}_2 \rightarrow 2\text{NaCl}) \)।
**क्षार धातुओं से भिन्नताएँ:**
1. आयनन एन्थैल्पी: हाइड्रोजन की आयनन एन्थैल्पी क्षार धातुओं से बहुत अधिक होती है, जिससे यह अधातु प्रकृति का होता है।
2. धनायन का अस्तित्व: \( \text{H}^+ \) आयन का स्वतंत्र अस्तित्व नहीं होता है, जबकि क्षार धातुओं के धनायन \( (\text{Li}^+, \text{Na}^+) \) आयनिक क्रिस्टलों में पाए जाते हैं।
3. यौगिकों की प्रकृति: क्षार धातुओं के यौगिक आयनिक होते हैं, जबकि हाइड्रोजन सामान्यतः सहसंयोजक यौगिक बनाता है।
4. परमाण्विकता: हाइड्रोजन द्विपरमाण्विक \( (\text{H}_2) \) होता है, जबकि क्षार धातुएँ एक परमाण्विक \( (\text{Li}, \text{Na}, \text{K}, \text{Rb}, \text{Cs}) \) होती हैं।
**हैलोजनों से समानताएँ:**
1. इलेक्ट्रॉनिक विन्यास: हाइड्रोजन एक इलेक्ट्रॉन ग्रहण करके \( (\text{H}^-) \) हैलोजनों के समान उत्कृष्ट गैस विन्यास प्राप्त कर सकता है।
2. अधातु गुण: हाइड्रोजन हैलोजनों के समान एक अधातु है।
3. द्विपरमाण्विक अणु: हाइड्रोजन \( (\text{H}_2) \) हैलोजनों \( (\text{F}_2, \text{Cl}_2) \) के समान द्विपरमाण्विक अणु बनाता है।
4. ऑक्सीकरण अवस्था: हाइड्रोजन कुछ यौगिकों में \( -1 \) ऑक्सीकरण अवस्था \( (\text{NaH}) \) भी प्रदर्शित करता है, जो हैलोजनों के समान है।
इन गुणों के कारण हाइड्रोजन को आवर्त सारणी में एक विशेष स्थान दिया जाना चाहिए, जो इसकी अद्वितीय प्रकृति को दर्शाता है।
In simple words: हाइड्रोजन को आवर्त सारणी में एक अलग जगह देना सही है, क्योंकि इसमें क्षार धातुओं और हैलोजनों दोनों के गुण मिलते हैं, लेकिन यह पूरी तरह से किसी से भी मेल नहीं खाता। यह कभी-कभी एक इलेक्ट्रॉन देता है और कभी लेता है।
🎯 Exam Tip: हाइड्रोजन के इलेक्ट्रॉनिक विन्यास, आयनन एन्थैल्पी और रासायनिक बंध बनाने की प्रवृत्ति को ध्यान में रखते हुए इसके अद्वितीय स्थान की व्याख्या करें।
Question 32. हाइड्राइड किसे कहते हैं ? वे कितने प्रकार के होते हैं ? उदाहरण सहित समझाइए।
Answer: डाइहाइड्रोजन निश्चित परिस्थितियों में लगभग सभी तत्वों के साथ संयोग करके द्विअंगी यौगिक बनाते हैं, जिन्हें हाइड्राइड कहते हैं। इन्हें \( \text{EH}_x \) या \( \text{E}_m\text{H}_n \) द्वारा प्रदर्शित किया जा सकता है। उदाहरण के लिए \( \text{MgH}_2, \text{B}_2\text{H}_6 \) आदि। IUPAC के अनुसार, वे तत्व जिनकी विद्युत ऋणता हाइड्रोजन से कम होती है, हाइड्रोजन के साथ मिलकर हाइड्राइड बनाते हैं, जैसे \( \text{NaH}, \text{CaH}_2 \)।
**हाइड्राइडों का वर्गीकरण:** हाइड्राइडों में उपस्थित बंध की प्रकृति के आधार पर इन्हें मुख्यतः तीन भागों में वर्गीकृत किया जाता है:
1. **सहसंयोजक या आण्विक हाइड्राइड (Covalent or Molecular Hydrides):** अधिकतर p-ब्लॉक के तत्व हाइड्रोजन के साथ इलेक्ट्रॉनों का साझा करके सहसंयोजक हाइड्राइड बनाते हैं। ये अणु के रूप में पाए जाते हैं। उदाहरण: \( \text{CH}_4, \text{NH}_3, \text{H}_2\text{O}, \text{HF} \)। ये वाष्पशील होते हैं और इनके गलनांक व क्वथनांक कम होते हैं।
इन्हें इलेक्ट्रॉनों की संख्या और बंधों के आधार पर पुनः तीन प्रकारों में वर्गीकृत किया गया है:
* **इलेक्ट्रॉन न्यून हाइड्राइड:** इनमें लुइस संरचना के लिए आवश्यक इलेक्ट्रॉनों से कम संख्या में इलेक्ट्रॉन होते हैं। ये इलेक्ट्रॉन युग्म ग्राही होते हैं (लुइस अम्ल)। उदाहरण: \( \text{B}_2\text{H}_6 \)।
* **इलेक्ट्रॉन परिशुद्ध हाइड्राइड:** इनमें केंद्रीय परमाणु पर पर्याप्त संख्या में इलेक्ट्रॉन उपलब्ध होते हैं। उदाहरण: \( \text{CH}_4, \text{SiH}_4 \)।
* **इलेक्ट्रॉन समृद्ध हाइड्राइड:** इनमें केंद्रीय परमाणु पर एकाकी इलेक्ट्रॉन युग्म पाए जाते हैं। ये इलेक्ट्रॉन युग्म दाता होते हैं (लुइस-क्षार)। उदाहरण: \( \text{NH}_3, \text{H}_2\text{O}, \text{HF} \)।
2. **आयनिक या लवणीय हाइड्राइड (Ionic or Saline Hydrides):** अधिक विद्युतधनी प्रकृति के तत्व (क्षार धातु, क्षारीय मृदा धातु) हाइड्रोजन के साथ मिलकर रससमीकरणमितीय हाइड्राइड बनाते हैं। इनमें आयनिक गुण होता है। उदाहरण: \( \text{NaH}, \text{CaH}_2 \)। ये ठोस, क्रिस्टलीय, अवाष्पशील और कुचालक होते हैं।
अभिक्रिया:
\( 2\text{Na} + \text{H}_2 \xrightarrow{650K} 2\text{NaH} \)
\( \text{Ca} + \text{H}_2 \xrightarrow{423K} \text{CaH}_2 \)
आयनिक हाइड्राइड गलित अवस्था में विद्युत का चालन करते हैं और विद्युत-अपघटन से एनोड पर \( \text{H}_2 \) मुक्त होती है।
\( 2\text{H}^- \text{ (गलित)} \xrightarrow{\text{एनोड}} \text{H}_2\text{(g)} + 2\text{e}^- \)
ये जल के साथ अभिक्रिया करके विस्फोट के साथ हाइड्रोजन गैस देते हैं।
3. **धात्विक या अरससमीकरणमितीय या अन्तराकाशी हाइड्राइड (Metallic or Non-stoichiometric or Interstitial Hydrides):** ये d-ब्लॉक और f-ब्लॉक के तत्वों द्वारा बनाए जाते हैं। ये अरससमीकरणमितीय होते हैं, यानी इनमें स्थिर संघटन नहीं होता है। उदाहरण: \( \text{LaH}_{2.87}, \text{TiH}_{1.5-1.8} \)। ये ऊष्मा तथा विद्युत के सुचालक होते हैं और प्रबल अपचायक भी होते हैं।
In simple words: हाइड्राइड वे यौगिक होते हैं जो हाइड्रोजन अन्य तत्वों के साथ मिलकर बनाते हैं। ये तीन प्रकार के होते हैं: सहसंयोजक (जैसे \( \text{CH}_4 \)), आयनिक (जैसे \( \text{NaH} \)), और धात्विक (जैसे \( \text{LaH}_{2.87} \))।
🎯 Exam Tip: प्रत्येक हाइड्राइड के प्रकार के मुख्य अंतरों को याद रखें, जैसे कि बंध की प्रकृति, तत्वों के प्रकार जिनसे वे बनते हैं, और उनके भौतिक व रासायनिक गुण।
Question 33. जल की कठोरता से क्या तात्पर्य है ? जल की स्थायी कठोरता को दूर करने के लिए परम्युटिट विधि का सचित्र वर्णन कीजिए।
Answer: **जल की कठोरता:** जल की कठोरता उसमें घुले हुए कैल्सियम \( (\text{Ca}^{2+}) \) और मैग्नीशियम \( (\text{Mg}^{2+}) \) आयनों के कारण होती है। ये आयन साबुन के साथ प्रतिक्रिया करके झाग नहीं बनने देते और सफेद अवक्षेप बनाते हैं।
**स्थायी कठोरता:** यह जल में कैल्सियम तथा मैग्नीशियम के क्लोराइडों \( (\text{CaCl}_2, \text{MgCl}_2) \) और सल्फेटों \( (\text{CaSO}_4, \text{MgSO}_4) \) की उपस्थिति के कारण होती है। इसे उबालकर दूर नहीं किया जा सकता है।
**परम्युटिट विधि द्वारा स्थायी कठोरता दूर करना:**
परम्युटिट विधि (आयन विनिमय विधि) में परम्युटिट \( (\text{Na}_2\text{Al}_2\text{Si}_2\text{O}_8\cdot6\text{H}_2\text{O} \text{ या } \text{NaZ}) \) नामक एक जलयुक्त सोडियम एलुमिनियम सिलिकेट का उपयोग किया जाता है। कठोर जल को परम्युटिट बिस्तर से गुजारा जाता है। परम्युटिट अपने सोडियम आयनों \( (\text{Na}^+) \) का विनिमय जल में मौजूद कठोरता उत्पन्न करने वाले कैल्सियम \( (\text{Ca}^{2+}) \) और मैग्नीशियम \( (\text{Mg}^{2+}) \) आयनों के साथ करता है, जिससे जल मृदु हो जाता है।
**अभिक्रियाएँ:**
\( \text{Na}_2\text{Al}_2\text{Si}_2\text{O}_8\cdot6\text{H}_2\text{O} + \text{Ca}^{2+} \rightarrow \text{CaAl}_2\text{Si}_2\text{O}_8\cdot6\text{H}_2\text{O} + 2\text{Na}^+ \)
या, सरलता के लिए:
\( 2\text{NaZ(s)} + \text{M}^{2+}\text{(aq)} \rightarrow \text{MZ}_2\text{(s)} + 2\text{Na}^+\text{(aq)} \text{ (जहाँ } \text{M} = \text{Ca, Mg}) \)
जब परम्युटिट में सोडियम आयन समाप्त हो जाते हैं, तो इसे 5-10% \( \text{NaCl} \) विलयन द्वारा उपचारित करके पुनर्जीवित किया जाता है:
\( \text{MZ}_2\text{(s)} + 2\text{NaCl(aq)} \rightarrow 2\text{NaZ(s)} + \text{MCl}_2\text{(aq)} \)
In simple words: जल की कठोरता घुले हुए कैल्सियम और मैग्नीशियम आयनों के कारण होती है। परम्युटिट विधि में, कठोर पानी को परम्युटिट नामक पदार्थ से गुजारा जाता है। परम्युटिट पानी से कठोरता वाले आयनों को हटाकर उनकी जगह सोडियम आयन डाल देता है, जिससे पानी नरम हो जाता है।
🎯 Exam Tip: परम्युटिट विधि आयन विनिमय का एक प्रमुख उदाहरण है। डायग्राम को साफ और सही ढंग से लेबल करना सुनिश्चित करें।
Question 33. जल की कठोरता से क्या तात्पर्य है ? जल की स्थायी कठोरता को दूर करने के लिए परम्युटिट विधि का सचित्र वर्णन कीजिए।
Answer: जल में विभिन्न खनिज लवणों, खासकर कैल्शियम (\( \text{Ca}^{2+} \)) और मैग्नीशियम (\( \text{Mg}^{2+} \)) के बाइकार्बोनेट, सल्फेट और क्लोराइड घुले होने के कारण, यह साबुन के साथ झाग नहीं देता और कपड़े धोने या औद्योगिक उपयोग के लिए अनुपयुक्त हो जाता है। इसी गुण को जल की कठोरता कहते हैं। वर्षा का जल आमतौर पर शुद्ध होता है, लेकिन जब यह पृथ्वी की सतह से होकर गुजरता है, तो इसमें कई लवण घुल जाते हैं, जिससे यह कठोर हो जाता है।
**स्थायी कठोरता को दूर करने की विधियाँ:**
जल की स्थायी कठोरता को दूर करने के लिए कई विधियाँ हैं, जिनमें से एक परम्यूटिट विधि है। स्थायी कठोरता पानी को उबालने से दूर नहीं होती।
**1. धावन सोडा (सोडियम कार्बोनेट) विधि:**
इस विधि में कठोर जल में धावन सोडा (\( \text{Na}_2\text{CO}_3 \)) मिलाया जाता है। यह कठोरता उत्पन्न करने वाले विलेय कैल्शियम और मैग्नीशियम लवणों को अविलेय कार्बोनेट में बदल देता है, जो अवक्षेपित हो जाते हैं। इन अवक्षेपों को छानकर पानी से अलग कर लिया जाता है, जिससे पानी नरम हो जाता है।
\( \text{MgSO}_4 + \text{Na}_2\text{CO}_3 \rightarrow \text{MgCO}_3\downarrow + \text{Na}_2\text{SO}_4 \)
\( \text{CaCl}_2 + \text{Na}_2\text{CO}_3 \rightarrow \text{CaCO}_3\downarrow + 2\text{NaCl} \)
**2. परम्यूटिट विधि या आयन विनिमय विधि:**
परम्यूटिट या जियोलाइट एक जलयुक्त सोडियम एलुमिनियम सिलिकेट है (\( \text{Na}_2\text{Al}_2\text{Si}_2\text{O}_8 \cdot 6\text{H}_2\text{O} \)) जिसे \( \text{NaZ} \) से दर्शाते हैं। यह विधि कठोर पानी में मौजूद \( \text{Ca}^{2+} \) और \( \text{Mg}^{2+} \) आयनों को \( \text{Na}^+ \) आयनों से बदलकर पानी को नरम करती है।
\( \text{Na}_2\text{Al}_2\text{Si}_2\text{O}_8 \cdot 6\text{H}_2\text{O} + \text{Ca}^{2+} \rightarrow \text{CaAl}_2\text{Si}_2\text{O}_8 \cdot 6\text{H}_2\text{O} + 2\text{Na}^{+} \)
\( \implies \) \( \text{Na}_2\text{Z(s)} + \text{M}^{2+}(\text{aq}) \rightarrow \text{MZ}_2(\text{s}) + 2\text{Na}^{+}(\text{aq}) \) (यहाँ \( \text{M} = \text{Mg, Ca} \))
जब परम्यूटिट में मौजूद सोडियम आयन खत्म हो जाते हैं, तो उसे 5-10% \( \text{NaCl} \) विलयन से धोकर फिर से सक्रिय किया जाता है।
**3. कैलगॉन विधि (Calgon's Method):**
इस विधि में सोडियम हेक्सामेटाफॉस्फेट (\( \text{Na}_2\text{P}_6\text{O}_{18} \)), जिसे कैलगॉन कहते हैं, का उपयोग किया जाता है। इसका सामान्य सूत्र \( \text{Na}_2[\text{Na}_4(\text{PO}_3)_6] \) है। कैलगॉन कठोर पानी में मौजूद \( \text{Ca}^{2+} \) और \( \text{Mg}^{2+} \) लवणों के साथ मिलकर स्थायी और घुलनशील संकुल बनाता है, जिससे पानी की कठोरता दूर हो जाती है।
\( \text{Na}_2\text{P}_6\text{O}_{18} \rightarrow 2\text{Na}^{+} + \text{Na}_4\text{P}_6\text{O}_{18}^{2-} \)
\( \text{M}^{2+} + \text{Na}_4\text{P}_6\text{O}_{18}^{2-} \rightarrow [\text{Na}_2\text{MP}_6\text{O}_{18}]^{2-} + 2\text{Na}^{+} \) (यहाँ \( \text{M} = \text{Ca, Mg} \))
यह विधि बॉयलर के पानी को शुद्ध करने के लिए एक आधुनिक और प्रभावी तरीका है।
**4. आयन विनिमयक संश्लेषित रेजिन विधि (Synthetic Ion Exchange Resins):**
यह कठोर पानी को शुद्ध करने की एक नई, सस्ती और आसान विधि है। इसमें धनायन विनिमय रेजिन (\( \text{SO}_3\text{H} \) समूह वाले) और ऋणायन विनिमय रेजिन का उपयोग किया जाता है।
धनायन विनिमय रेजिन पानी में \( \text{Ca}^{2+} \) और \( \text{Mg}^{2+} \) आयनों को \( \text{H}^+ \) आयनों से बदल देता है, जिससे पानी अम्लीय हो जाता है।
\( 2\text{RH(s)} + \text{M}^{2+}(\text{aq}) \rightarrow \text{R}_2\text{M}(\text{s}) + 2\text{H}^{+}(\text{aq}) \) (यहाँ \( \text{M}^{2+} = \text{Ca}^{2+}/\text{Mg}^{2+} \))
इसके बाद, पानी को ऋणायन विनिमय रेजिन से गुजारा जाता है, जो \( \text{Cl}^- \) और \( \text{SO}_4^{2-} \) जैसे ऋणायनों को \( \text{OH}^- \) आयनों से बदलता है।
\( \text{RNH}_2(\text{s}) + \text{H}_2\text{O(l)} \rightarrow \text{RNH}_3^{+}\text{OH}^{-}(\text{aq}) \)
\( \text{RNH}_3^{+}\text{OH}^{-}(\text{s}) + \text{X}^{-}(\text{aq}) \rightarrow \text{RNH}_3^{+}\text{X}^{-}(\text{s}) + \text{OH}^{-}(\text{aq}) \)
अंत में, \( \text{H}^+ \) और \( \text{OH}^- \) आयन मिलकर पानी बनाते हैं, जिससे पानी पूरी तरह से विखनिजित और विआयनित (demineralised) हो जाता है।
\( \text{H}^{+}(\text{aq}) + \text{OH}^{-}(\text{aq}) \rightarrow \text{H}_2\text{O(l)} \)
यह विधि प्रयोगशालाओं और उद्योगों में उच्च शुद्धता वाले पानी की आवश्यकता को पूरा करने के लिए बहुत महत्वपूर्ण है।
In simple words: जल की कठोरता उसमें कैल्शियम और मैग्नीशियम जैसे खनिजों के घुले होने के कारण होती है। परम्यूटिट विधि में, हम एक खास पदार्थ (जियोलाइट) का उपयोग करते हैं जो पानी से इन कठोरता पैदा करने वाले आयनों को हटाकर पानी को नरम बना देता है। इस तरह, पानी शुद्ध और उपयोग के लायक हो जाता है।
🎯 Exam Tip: जल की कठोरता के विभिन्न कारणों और उन्हें दूर करने की विधियों को उनके रासायनिक समीकरणों के साथ याद रखें, खासकर परम्यूटिट और कैलगॉन विधि।
Question 34. जल में आण्विक संगठन से क्या तात्पर्य है ? जल के अणु की संरचना को सचित्र समझाइए। बर्फ के साधारण रूप की संरचना का भी उल्लेख कीजिए।
Answer: जल सभी जीवों के लिए बहुत ज़रूरी है और यह पृथ्वी पर सबसे महत्वपूर्ण विलायकों में से एक है। मानव शरीर का लगभग 65% हिस्सा और पौधों का लगभग 95% हिस्सा पानी से बना होता है।
**जल की आण्विक संरचना (Structure of Water):**
जल (\( \text{H}_2\text{O} \)) के अणु में ऑक्सीजन परमाणु पर \( \text{sp}^3 \) संकरण होता है। इसमें ऑक्सीजन पर दो एकाकी इलेक्ट्रॉन युग्म होते हैं। इसलिए, जल के अणु की आकृति V-जैसी या कोणीय (bent) होती है। ऑक्सीजन की विद्युतऋणात्मकता अधिक होने के कारण, \( \text{O-H} \) बंध ध्रुवीय होते हैं, और जल का अणु एक द्विध्रुव के रूप में काम करता है। इसी वजह से जल के अणुओं के बीच हाइड्रोजन बंध बनते हैं, जिससे जल के अणु आपस में जुड़ते रहते हैं। यह हाइड्रोजन बंध जल के उच्च हिमांक, क्वथनांक और वाष्पन ऊष्मा का कारण है। यह हाइड्रोजन बंध ही जल को विशेष गुण प्रदान करते हैं, जैसे कि इसका उच्च विशिष्ट ऊष्मा और सतह तनाव।
**बर्फ की संरचना (Structure of Ice):**
जल का ठोस रूप बर्फ होता है। X-किरण अध्ययनों से पता चला है कि बर्फ के क्रिस्टल में हर ऑक्सीजन परमाणु चार हाइड्रोजन परमाणुओं से घिरा होता है, जो एक चतुष्फलकीय संरचना बनाते हैं। हाइड्रोजन बंधों के कारण, बर्फ की संरचना एक खुले हुए पिंजरे जैसी होती है जिसमें बहुत सारे खाली स्थान या छिद्र होते हैं। इसी कारण बर्फ का घनत्व पानी से कम होता है और यह पानी पर तैरती है। यह जलीय जीवों के लिए महत्वपूर्ण है क्योंकि सर्दियों में झीलों की सतह पर बर्फ की परत पानी को जमने से बचाती है। कम तापमान पर बर्फ घनीय आकृति में भी संघनित होती है। बर्फ की यह सुव्यवस्थित, रंध्रयुक्त और त्रिविमीय हाइड्रोजन बंधित संरचना इसे अद्वितीय बनाती है।
In simple words: जल के अणु में ऑक्सीजन और हाइड्रोजन मिलकर एक मुड़ी हुई संरचना बनाते हैं, जिसे V-आकृति कहते हैं। पानी के अणु आपस में हाइड्रोजन बंधों से जुड़े होते हैं। बर्फ, पानी का ठोस रूप है, जिसकी संरचना भी हाइड्रोजन बंधों के कारण पिंजरे जैसी खुली होती है। इस खुली संरचना के कारण बर्फ पानी से हल्की होती है और उस पर तैरती है।
🎯 Exam Tip: जल और बर्फ की संरचना का वर्णन करते समय \( \text{sp}^3 \) संकरण, V-आकृति, ध्रुवीय बंध, और हाइड्रोजन बंध जैसे महत्वपूर्ण कीवर्ड्स का उपयोग करें। चित्र बनाते समय ऑक्सीजन और हाइड्रोजन परमाणुओं की स्थिति स्पष्ट रूप से दिखाएं।
Question 35. H2O2 के संदर्भ में निम्नलिखित अभिक्रियाओं को समझाइए:
(अ) ऑक्सीकारक एवं अपचायक गुण
(ब) योगात्मक अभिक्रियाएँ
(स) परॉक्साइड का निर्माण
(द) विघटन।
Answer: हाइड्रोजन परॉक्साइड (\( \text{H}_2\text{O}_2 \)) के प्रमुख रासायनिक गुण निम्नलिखित हैं:
**(द) विघटन (Decomposition):**
शुद्ध हाइड्रोजन परॉक्साइड (\( \text{H}_2\text{O}_2 \)) स्थिर नहीं होता है और धीरे-धीरे पानी (\( \text{H}_2\text{O} \)) और ऑक्सीजन (\( \text{O}_2 \)) में टूट जाता है। यह प्रक्रिया ऊष्माक्षेपी होती है, जिसका मतलब है कि इसमें गर्मी निकलती है। यह विघटन अभिक्रिया हाइड्रोजन परॉक्साइड के भंडारण में एक महत्वपूर्ण चुनौती है, जिसके कारण इसे गहरे रंग की बोतलों में रखा जाता है।
\( 2\text{H}_2\text{O}_2 \rightarrow 2\text{H}_2\text{O} + \text{O}_2 \)
\( \Delta\text{H} = -196 \text{ kJ/mol} \)
प्लैटिनम (\( \text{Pt} \)), सोना (\( \text{Au} \)), कोबाल्ट (\( \text{Co} \)), तांबा (\( \text{Cu} \)) जैसे उत्प्रेरकों की उपस्थिति में \( \text{H}_2\text{O}_2 \) का विघटन तेज हो जाता है। इस विघटन को रोकने के लिए थोड़ी मात्रा में अम्ल, अल्कोहल या एसीटेनिलाइड मिलाया जा सकता है।
**(अ) ऑक्सीकारक और अपचायक गुण (Redox Reactions):**
हाइड्रोजन परॉक्साइड (\( \text{H}_2\text{O}_2 \)) अम्लीय और क्षारीय दोनों माध्यमों में ऑक्सीकारक और अपचायक दोनों की तरह काम करता है। यह दोहरी प्रकृति \( \text{H}_2\text{O}_2 \) में ऑक्सीजन के ऑक्सीकरण अवस्था के कारण होती है, जो \( -1 \) पर होती है और \( 0 \) (ऑक्सीकरण) या \( -2 \) (अपचयन) में जा सकती है।
**ऑक्सीकारक गुण (Oxidizing Property):**
क्षारीय माध्यम में: \( \text{H}_2\text{O}_2 \) \( \text{Fe}^{2+} \) को \( \text{Fe}^{3+} \) में और \( \text{Mn}^{2+} \) को \( \text{Mn}^{4+} \) में ऑक्सीकृत करता है। यह \( \text{Cr}^{3+} \) आयन को \( \text{CrO}_4^{2-} \) आयन में भी ऑक्सीकृत करता है। हाइड्रोजन परॉक्साइड एक हल्का विरंजक (ब्लीचिंग) पदार्थ भी है। इसकी विरंजन क्रिया ऑक्सीकरण के कारण होती है, जहाँ यह नवजात ऑक्सीजन (\( [\text{O}] \)) देता है, जो रंगीन पदार्थों को रंगहीन कर देता है।
\( 2\text{Fe}^{2+}(\text{aq}) + \text{H}_2\text{O}_2(\text{aq}) \rightarrow 2\text{Fe}^{3+}(\text{aq}) + 2\text{OH}^{-}(\text{aq}) \)
\( \text{Mn}^{2+}(\text{aq}) + \text{H}_2\text{O}_2(\text{aq}) \rightarrow \text{Mn}^{4+}(\text{aq}) + 2\text{OH}^{-}(\text{aq}) \)
\( 2\text{Cr}^{3+}(\text{aq}) + 3\text{H}_2\text{O}_2(\text{aq}) + 10\text{OH}^{-}(\text{aq}) \rightarrow 2\text{CrO}_4^{2-}(\text{aq}) + 8\text{H}_2\text{O(l)} \)
\( \text{H}_2\text{O}_2 \rightarrow \text{H}_2\text{O} + [\text{O}] \)
रंगीन पदार्थ \( + [\text{O}] \rightarrow \) रंगहीन
**अपचायक गुण (Reducing Property):**
अम्लीय माध्यम में: \( \text{H}_2\text{O}_2 \) \( \text{MnO}_4^- \) को \( \text{Mn}^{2+} \) में और \( \text{HOCl} \) को \( \text{Cl}^- \) और \( \text{O}_2 \) में अपचयित करता है।
\( 2\text{MnO}_4^{-}(\text{aq}) + 6\text{H}^{+}(\text{aq}) + 5\text{H}_2\text{O}_2(\text{aq}) \rightarrow 2\text{Mn}^{2+}(\text{aq}) + 8\text{H}_2\text{O(l)} + 5\text{O}_2(\text{g}) \)
\( \text{HOCl}(\text{aq}) + \text{H}_2\text{O}_2(\text{aq}) \rightarrow \text{H}_3\text{O}^{+}(\text{aq}) + \text{Cl}^{-}(\text{aq}) + \text{O}_2(\text{g}) \)
क्षारीय माध्यम में: \( \text{H}_2\text{O}_2 \) \( \text{I}_2 \) को \( \text{I}^- \) में और \( \text{MnO}_4^- \) को \( \text{MnO}_2 \) में अपचयित कर देता है।
\( \text{I}_2(\text{s}) + \text{H}_2\text{O}_2(\text{aq}) + 2\text{OH}^{-}(\text{aq}) \rightarrow 2\text{I}^{-}(\text{aq}) + 2\text{H}_2\text{O(l)} + \text{O}_2(\text{g}) \)
\( 2\text{MnO}_4^{-}(\text{aq}) + 3\text{H}_2\text{O}_2(\text{aq}) \rightarrow 2\text{MnO}_2(\text{s}) + 3\text{O}_2(\text{g}) + 2\text{H}_2\text{O(l)} + 2\text{OH}^{-}(\text{aq}) \)
**(ब) योगात्मक अभिक्रियाएँ (Addition Reactions):**
हाइड्रोजन परॉक्साइड असंतृप्त कार्बनिक यौगिकों, जैसे एथिलीनिक श्रृंखलाओं के साथ सीधे जुड़ सकता है। इस अभिक्रिया में \( \text{H}_2\text{O}_2 \) एथीन के डबल बॉन्ड पर जुड़कर एथिलीन ग्लाइकॉल जैसे डायोल बनाता है, जो कार्बनिक संश्लेषण में महत्वपूर्ण हैं।
\[
\text{CH}_2=\text{CH}_2 + \text{H}_2\text{O}_2 \rightarrow \underset{\text{एथिलीन ग्लाइकॉल}}{\text{CH}_2\text{-OH} \\ |\text{ } \\ \text{CH}_2\text{-OH}}
\]
(स) परॉक्साइड का निर्माण: यह भाग दिए गए स्रोत में विस्तृत रूप से वर्णित नहीं है।
In simple words: हाइड्रोजन परॉक्साइड (\( \text{H}_2\text{O}_2 \)) खुद टूटकर पानी और ऑक्सीजन बनाता है। यह कुछ चीजों को ऑक्सीकृत (इलेक्ट्रॉन हटाना) कर सकता है और कुछ को अपचयित (इलेक्ट्रॉन देना) कर सकता है, जो इसके दोहरे गुणों को दर्शाता है। यह एथीन जैसे यौगिकों के साथ मिलकर नए पदार्थ भी बना सकता है।
🎯 Exam Tip: \( \text{H}_2\text{O}_2 \) की ऑक्सीकारक और अपचायक दोनों गुणों को अम्लीय और क्षारीय माध्यमों के साथ स्पष्ट रूप से याद रखें। रासायनिक समीकरणों को सही ढंग से लिखें और संतुलन पर ध्यान दें।
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