RBSE Solutions Class 11 Chemistry Chapter 8 ऑक्सीकरण अपचयन अभिक्रियाएँ

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Detailed Chapter 8 ऑक्सीकरण अपचयन अभिक्रियाएँ RBSE Solutions for Class 11 Chemistry

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Class 11 Chemistry Chapter 8 ऑक्सीकरण अपचयन अभिक्रियाएँ RBSE Solutions PDF

Rbse Class 11 Chemistry Chapter 8 पाठ्यपुस्तक के अभ्यास प्रशन

Rbse Class 11 Chemistry Chapter 8 वस्तुनिष्ठ प्रश्न

 

प्रश्न 1. ऑक्सीकरण वह प्रक्रिया है
(अ) जिसमें इलेक्ट्रोन ग्रहण किये जाते हैं।
(ब) जिसमें विद्युत ऋणी तत्त्व का योग होता है।
(स) जिसमें विद्युत धनी तत्त्व योग होता है।
(द) जिसमें ऑक्सीकरण का निष्कासन होता है।
Answer: (ब) जिसमें विद्युत ऋणी तत्त्व का योग होता है।
In simple words: ऑक्सीकरण एक रासायनिक क्रिया है जहाँ किसी पदार्थ में विद्युत ऋणात्मक तत्व जुड़ता है या हाइड्रोजन जैसे विद्युत धनात्मक तत्व हटते हैं. इस प्रक्रिया में इलेक्ट्रॉन मुक्त होते हैं.

🎯 Exam Tip: ऑक्सीकरण की परिभाषा को अच्छी तरह से याद रखें, खासकर इलेक्ट्रॉन हानि या विद्युत ऋणी तत्व के योग के संदर्भ में।

 

प्रश्न 2. निम्नलिखित में से कौन से यौगिकों के युग्म में क्रोमियम का ऑक्सीकरण अंक समान है?
(अ) \( \text{K}_2\text{CrO}_4 \) तथा \( \text{KCrO}_2 \)
(ब) \( \text{KCrO}_2 \) तथा \( \text{Cr(CO)}_6 \)
(स) शून्य
(द) + 2
Answer: (द) + 2
In simple words: हमें ऐसे यौगिकों के जोड़े को पहचानना था जहाँ क्रोमियम (Cr) का ऑक्सीकरण अंक एक ही हो. दिए गए विकल्पों में, वह जोड़ा +2 ऑक्सीकरण अंक वाला था.

🎯 Exam Tip: किसी भी यौगिक में केंद्रीय धातु का ऑक्सीकरण अंक ज्ञात करने के लिए, सभी ज्ञात तत्वों के ऑक्सीकरण अंक और यौगिक के कुल आवेश का उपयोग करें।

 

प्रश्न 4. निम्न अभिक्रिया में \( 2\text{FeCl}_3 + \text{SnCl}_2 \rightarrow 2\text{FeCl}_2 + \text{SnCl}_4 \) अपचयित होने वाला पदार्थ है
(अ) \( \text{Sn}^{+2} \)
(ब) \( \text{Fe}^{+2} \)
(स) \( \text{Sn}^{+4} \)
(द) \( \text{Fe}^{+3} \)
Answer: (द) \( \text{Fe}^{+3} \)
In simple words: इस अभिक्रिया में, \( \text{Fe}^{+3} \) आयन \( \text{Fe}^{+2} \) में बदल जाता है, जिसका मतलब है कि इसने एक इलेक्ट्रॉन ग्रहण किया है. इलेक्ट्रॉन ग्रहण करना अपचयन कहलाता है.

🎯 Exam Tip: अपचयन हमेशा ऑक्सीकरण अंक में कमी को दर्शाता है, जबकि ऑक्सीकरण अंक में वृद्धि ऑक्सीकरण को दर्शाती है।

 

प्रश्न 5. निम्न में रेडॉक्स अभिक्रिया है
(अ) \( \text{SnCl}_2 + 2\text{FeCl}_3 \rightarrow \text{SnCl}_4 + 2\text{FeCl}_2 \)
(ब) \( \text{AsNO}_3 + \text{HCl} \rightarrow \text{AsCl} + \text{HNO}_3 \)
(स) \( 2\text{KI} + \text{Pb}(\text{NO}_3)_2 \rightarrow 2\text{KNO}_3 + \text{PbI}_2 \)
(द) \( \text{BaCl}_2 + \text{H}_2\text{SO}_4 \rightarrow \text{BaSO}_4 + 2\text{HCl} \)
Answer: (अ) \( \text{SnCl}_2 + 2\text{FeCl}_3 \rightarrow \text{SnCl}_4 + 2\text{FeCl}_2 \)
In simple words: एक रेडॉक्स अभिक्रिया वह होती है जिसमें एक ही समय में ऑक्सीकरण (इलेक्ट्रॉन खोना) और अपचयन (इलेक्ट्रॉन प्राप्त करना) दोनों होते हैं. विकल्प (अ) में, \( \text{Sn}^{+2} \) से \( \text{Sn}^{+4} \) का ऑक्सीकरण और \( \text{Fe}^{+3} \) से \( \text{Fe}^{+2} \) का अपचयन हो रहा है.

🎯 Exam Tip: रेडॉक्स अभिक्रियाओं की पहचान करने के लिए प्रत्येक तत्व के ऑक्सीकरण अंक को अभिक्रिया से पहले और बाद में जांचें। यदि ऑक्सीकरण अंक बदलता है, तो यह रेडॉक्स अभिक्रिया है।

Rbse Class 11 Chemistry Chapter 8 अतिलघूत्तरात्मक प्रश्न

 

प्रश्न 6. सेल विभव किसे कहते हैं ?
Answer: किसी बैटरी के दो अर्द्ध-सेलों (half-cells) के बीच जो वोल्टेज (विभव) बनता है, उसे सेल विभव कहते हैं. यह दोनों अर्द्ध-सेलों के इलेक्ट्रोड विभव का अंतर होता है.
In simple words: दो आधे-सेलों के बीच का वोल्टेज अंतर ही सेल विभव कहलाता है.

🎯 Exam Tip: सेल विभव एक मापन है कि एक सेल कितना बिजली पैदा कर सकता है, और यह हमेशा दो इलेक्ट्रोडों के बीच के संभावित अंतर को दर्शाता है।

 

प्रश्न 8. समीकरण \( \text{ClO}^- + \text{H}_2\text{O} + \text{Xe} \rightarrow \text{Cl}^- + 2\text{OH}^- \) में x का मान कितना होगा ?
Answer: समीकरण \( \text{ClO}^- (\text{aq}) + \text{H}_2\text{O}(\text{l}) + 2\text{e}^- \rightarrow \text{Cl}^- (\text{aq}) + 2\text{OH}^- (\text{aq}) \) है. इस प्रकार, \( \text{Xe} \) में \( \text{X} \) का मान 2 होगा क्योंकि यह दो इलेक्ट्रॉनों को दर्शाता है. यह एक अपचयन अर्ध-अभिक्रिया का उदाहरण है.
In simple words: समीकरण में \( \text{Xe} \) का मान 2 है, क्योंकि यह दो इलेक्ट्रॉनों को दिखाता है जो अभिक्रिया में भाग लेते हैं.

🎯 Exam Tip: रेडॉक्स अभिक्रियाओं को संतुलित करते समय, यह सुनिश्चित करें कि अभिकारक और उत्पाद दोनों तरफ आवेश और परमाणुओं की संख्या समान हो।

 

प्रश्न 9. अभिक्रिया \( 5\text{H}_2\text{O}_2 + \text{Br}_2 \rightarrow 2\text{HBrO}_3 + 4\text{H}_2\text{O} \) में अपचायक बताइए।
Answer: इस अभिक्रिया में \( \text{Br}_2 \) का ऑक्सीकरण हो रहा है क्योंकि इसका ऑक्सीकरण अंक 0 से \( +5 \) में बदल रहा है. इसलिए, \( \text{Br}_2 \) एक अपचायक (reducing agent) है. अपचायक पदार्थ वह होते हैं जो स्वयं ऑक्सीकृत होते हैं और दूसरों को अपचयित करते हैं.
In simple words: अभिक्रिया में \( \text{Br}_2 \) का ऑक्सीकरण हो रहा है, इसलिए यह अपचायक है.

🎯 Exam Tip: अपचायक वह पदार्थ होता है जो दूसरे पदार्थ को अपचयित करता है और खुद ऑक्सीकृत हो जाता है; इसके विपरीत, ऑक्सीकारक वह होता है जो दूसरे पदार्थ को ऑक्सीकृत करता है और खुद अपचयित हो जाता है।

 

प्रश्न 10. संरचना में \( \text{X-Y-Z-Y-X} \) की विद्युत ऋणता \( \text{Z} \) से अधिक है। \( \text{Z} \) का ऑक्सीकरण अंक ज्ञात कीजिए।
Answer: दी गई संरचना \( \text{HO-Z-OH} \) है (जिसमें \( \text{O} \) की विद्युत ऋणात्मकता \( \text{Z} \) से अधिक मानी गई है, इसलिए \( \text{O} \) का ऑक्सीकरण अंक \( -2 \) और \( \text{H} \) का \( +1 \) होगा).
मान लीजिए \( \text{Z} \) का ऑक्सीकरण अंक \( \text{x} \) है.
तो, \( \text{x} + 2(-1) + 2(-2) = 0 \) (यहां 2 ऑक्सीजन \( -1 \) और 2 हाइड्रोजन \( -2 \) के साथ जुड़े हैं, जबकि H का \( +1 \) और O का \( -2 \) है)
यह संरचना \( \text{HO-Z-OH} \) के लिए है. यहां, \( \text{O} \) का ऑक्सीकरण अंक \( -2 \) और \( \text{H} \) का \( +1 \) है.
एक अणु में सभी ऑक्सीकरण अंकों का योग शून्य होता है.
\( (1 \times +1) + (1 \times -2) + \text{x} + (1 \times -2) + (1 \times +1) = 0 \)
\( +1 - 2 + \text{x} - 2 + 1 = 0 \)
\( \text{x} - 2 = 0 \)
\( \text{x} = +2 \)
अतः, \( \text{Z} \) का ऑक्सीकरण अंक \( +2 \) होगा. यह गणना इस मान्यता पर आधारित है कि \( \text{X} \) और \( \text{Y} \) वास्तव में \( \text{H} \) और \( \text{O} \) हैं.
In simple words: दिए गए अणु में, \( \text{Z} \) से जुड़े ऑक्सीजन परमाणु अधिक विद्युत ऋणात्मक होते हैं. सभी परमाणुओं के ऑक्सीकरण अंकों का योग शून्य के बराबर रखकर \( \text{Z} \) का ऑक्सीकरण अंक \( +2 \) मिलता है.

🎯 Exam Tip: किसी भी अणु में केंद्रीय परमाणु का ऑक्सीकरण अंक निकालते समय, हमेशा ज्ञात तत्वों (जैसे ऑक्सीजन \( -2 \) और हाइड्रोजन \( +1 \)) के सामान्य ऑक्सीकरण अंकों का उपयोग करें, जब तक कि कोई विशेष स्थिति न हो।

 

प्रश्न 12. निम्नलिखित को \( \text{Mn} \) की बढ़ती ऑक्सीकरण अवस्था के क्रम में लिखिए-
\( \text{K}_2\text{MnO}_4, \text{MnO}_2, \text{KMnO}_4 \)
Answer: पहले हम प्रत्येक यौगिक में \( \text{Mn} \) का ऑक्सीकरण अंक ज्ञात करेंगे.
\( \text{K}_2\text{MnO}_4 \):
\( 2(+1) + \text{x} + 4(-2) = 0 \)
\( 2 + \text{x} - 8 = 0 \)
\( \text{x} = +6 \)

\( \text{MnO}_2 \):
\( \text{x} + 2(-2) = 0 \)
\( \text{x} - 4 = 0 \)
\( \text{x} = +4 \)

\( \text{KMnO}_4 \):
\( 1(+1) + \text{x} + 4(-2) = 0 \)
\( 1 + \text{x} - 8 = 0 \)
\( \text{x} = +7 \)

बढ़ती ऑक्सीकरण अवस्था के क्रम में:
\( \text{MnO}_2 \) \( (+4) < \text{K}_2\text{MnO}_4 \) \( (+6) < \text{KMnO}_4 \) \( (+7) \)
In simple words: सबसे पहले हर यौगिक में \( \text{Mn} \) का ऑक्सीकरण अंक निकाला गया. फिर उन्हें छोटे से बड़े क्रम में रखा गया, जिससे \( \text{MnO}_2 \) सबसे छोटा और \( \text{KMnO}_4 \) सबसे बड़ा निकला.

🎯 Exam Tip: ऑक्सीकरण अंक की गणना करते समय, हमेशा उन तत्वों के ज्ञात ऑक्सीकरण अंकों का उपयोग करें जिनकी संयोजकता स्थिर होती है, जैसे क्षार धातुएँ (+1) और ऑक्सीजन (अधिकांश मामलों में -2)।

 

प्रश्न 13. रेडॉक्स अभिक्रिया किसे कहते हैं ?
Answer: वे रासायनिक अभिक्रियाएँ जिनमें ऑक्सीकरण (oxidation) और अपचयन (reduction) दोनों प्रक्रियाएँ एक साथ होती हैं, उन्हें रेडॉक्स अभिक्रिया (Redox reaction) कहते हैं. ये अभिक्रियाएँ इलेक्ट्रॉन के स्थानांतरण पर आधारित होती हैं. एक पदार्थ इलेक्ट्रॉन खोता है (ऑक्सीकृत होता है) और दूसरा पदार्थ इलेक्ट्रॉन ग्रहण करता है (अपचयित होता है).
In simple words: जब किसी अभिक्रिया में ऑक्सीकरण और अपचयन दोनों एक साथ होते हैं, तो उसे रेडॉक्स अभिक्रिया कहते हैं.

🎯 Exam Tip: रेडॉक्स अभिक्रियाओं को पहचानने का सबसे आसान तरीका यह है कि उनमें ऑक्सीकरण अंक में परिवर्तन होता है - एक तत्व का ऑक्सीकरण अंक बढ़ता है, और दूसरे का घटता है।

 

प्रश्न 14. \( \text{LiAlH}_4 \) में \( \text{Al} \) का ऑक्सीकरण अंक क्या है ?
Answer: \( \text{LiAlH}_4 \) में \( \text{Li} \) का ऑक्सीकरण अंक \( +1 \) और \( \text{H} \) का ऑक्सीकरण अंक \( -1 \) होता है क्योंकि यह धातु हाइड्राइड है. मान लीजिए \( \text{Al} \) का ऑक्सीकरण अंक \( \text{x} \) है.
तो, \( 1(+1) + \text{x} + 4(-1) = 0 \)
\( 1 + \text{x} - 4 = 0 \)
\( \text{x} - 3 = 0 \)
\( \text{x} = +3 \)
अतः, \( \text{LiAlH}_4 \) में \( \text{Al} \) का ऑक्सीकरण अंक \( +3 \) है.
In simple words: \( \text{LiAlH}_4 \) में लिथियम \( +1 \) और हाइड्रोजन \( -1 \) होते हैं. इन मानों का उपयोग करके, एल्युमिनियम (Al) का ऑक्सीकरण अंक \( +3 \) आता है.

🎯 Exam Tip: धातु हाइड्राइड में हाइड्रोजन का ऑक्सीकरण अंक \( -1 \) होता है, जो इसके सामान्य ऑक्सीकरण अंक \( +1 \) से भिन्न है; इस अंतर को याद रखना महत्वपूर्ण है।

 

प्रश्न 16. सल्फर की निम्नतम तथा उच्चतम ऑक्सीकरण अवस्था लिखिए।
Answer: सल्फर की निम्नतम ऑक्सीकरण अवस्था \( -2 \) होती है, जो \( \text{H}_2\text{S} \) जैसे यौगिकों में पाई जाती है. जबकि सल्फर की उच्चतम ऑक्सीकरण अवस्था \( +6 \) होती है, जो \( \text{H}_2\text{SO}_4 \) या \( \text{SO}_3 \) जैसे यौगिकों में पाई जाती है. सल्फर अपने बाहरी शैल में 6 इलेक्ट्रॉन रखता है, इसलिए यह \( -2 \) से \( +6 \) तक ऑक्सीकरण अवस्थाएँ प्रदर्शित कर सकता है.
In simple words: सल्फर सबसे कम \( -2 \) और सबसे अधिक \( +6 \) ऑक्सीकरण अवस्था में पाया जाता है.

🎯 Exam Tip: किसी भी तत्व की न्यूनतम और उच्चतम ऑक्सीकरण अवस्थाओं को उसकी समूह संख्या और वैलेंसी इलेक्ट्रॉनों की संख्या से निर्धारित किया जा सकता है।

Rbse Class 11 Chemistry Chapter 8 लघूत्तरात्मक प्रश्न

 

प्रश्न 17. आयन इलेक्ट्रॉन विधि द्वारा क्षारीय माध्यम में होने वाली अभिक्रिया किस प्रकार संतुलित की जाएगी? समझाइए।
Answer: क्षारीय माध्यम में आयन इलेक्ट्रॉन विधि द्वारा अभिक्रियाओं को संतुलित करने के लिए निम्नलिखित चरण अपनाए जाते हैं:
(i) सबसे पहले, दी गई असंतुलित समीकरण को आयनिक रूप में लिखते हैं. उदाहरण के लिए: \( \text{Fe}^{2+} (\text{aq}) + \text{Cr}_2\text{O}_7^{2-} (\text{aq}) \rightarrow \text{Fe}^{3+} (\text{aq}) + \text{Cr}^{3+} (\text{aq}) \)
(ii) अब, इस अभिक्रिया को दो अर्द्ध-अभिक्रियाओं में अलग करते हैं: एक ऑक्सीकरण के लिए और दूसरा अपचयन के लिए.
ऑक्सीकरण: \( \text{Fe}^{2+} (\text{aq}) \rightarrow \text{Fe}^{3+} (\text{aq}) \)
अपचयन: \( \text{Cr}_2\text{O}_7^{2-} (\text{aq}) \rightarrow \text{Cr}^{3+} (\text{aq}) \)
(iii) प्रत्येक अर्द्ध-अभिक्रिया में ऑक्सीजन और हाइड्रोजन को छोड़कर सभी परमाणुओं को संतुलित करते हैं. जैसे अपचयन अर्द्ध-अभिक्रिया में क्रोमियम को संतुलित करने के लिए \( \text{Cr}^{3+} \) को 2 से गुणा करते हैं: \( \text{Cr}_2\text{O}_7^{2-} (\text{aq}) \rightarrow 2\text{Cr}^{3+} (\text{aq}) \). \( \text{Fe} \) परमाणु ऑक्सीकरण अर्ध-अभिक्रिया में पहले से संतुलित है.
(iv) ऑक्सीजन परमाणुओं को संतुलित करने के लिए, जिस तरफ ऑक्सीजन की कमी हो, उस तरफ \( \text{H}_2\text{O} \) जोड़ते हैं. हाइड्रोजन परमाणुओं को संतुलित करने के लिए, जिस तरफ हाइड्रोजन की कमी हो, उस तरफ \( \text{H}^+ \) जोड़ते हैं. अम्लीय माध्यम में यह सबसे आम तरीका है.
\( \text{Cr}_2\text{O}_7^{2-} (\text{aq}) + 14\text{H}^+ (\text{aq}) \rightarrow 2\text{Cr}^{3+} (\text{aq}) + 7\text{H}_2\text{O}(\text{l}) \)
(v) क्षारीय माध्यम के लिए, समीकरण के दोनों तरफ \( \text{H}^+ \) आयनों की संख्या के बराबर \( \text{OH}^- \) आयन जोड़ते हैं. \( \text{H}^+ \) और \( \text{OH}^- \) मिलकर \( \text{H}_2\text{O} \) बनाते हैं, जिससे \( \text{H}^+ \) आयन समाप्त हो जाते हैं.
(vi) अंत में, प्रत्येक अर्द्ध-अभिक्रिया में आवेश (charge) को इलेक्ट्रॉनों को जोड़कर संतुलित करते हैं. इलेक्ट्रॉनों की संख्या को समान करने के लिए अर्ध-अभिक्रियाओं को उपयुक्त गुणांकों से गुणा किया जाता है. जैसे, \( \text{Fe}^{2+} (\text{aq}) \rightarrow \text{Fe}^{3+} (\text{aq}) + \text{e}^- \). अपचयन अर्ध-अभिक्रिया में, आवेश को संतुलित करने के लिए बाईं ओर 6 इलेक्ट्रॉन जोड़ते हैं: \( \text{Cr}_2\text{O}_7^{2-} (\text{aq}) + 14\text{H}^+ (\text{aq}) + 6\text{e}^- \rightarrow 2\text{Cr}^{3+} (\text{aq}) + 7\text{H}_2\text{O}(\text{l}) \). अंत में, दोनों संतुलित अर्ध-अभिक्रियाओं को जोड़कर पूर्ण संतुलित समीकरण प्राप्त किया जाता है. इस विधि से हमें जटिल रेडॉक्स अभिक्रियाओं को संतुलित करने में सहायता मिलती है.
In simple words: क्षारीय माध्यम में आयन-इलेक्ट्रॉन विधि से अभिक्रिया को संतुलित करने के लिए, हम पहले समीकरण को दो हिस्सों में बांटते हैं. फिर परमाणुओं, ऑक्सीजन (पानी जोड़कर), हाइड्रोजन ( \( \text{H}^+ \) और \( \text{OH}^- \) जोड़कर \( \text{H}_2\text{O} \) बनाने के लिए) और अंत में आवेश (इलेक्ट्रॉन जोड़कर) को संतुलित करते हैं.

🎯 Exam Tip: क्षारीय माध्यम में रेडॉक्स अभिक्रियाओं को संतुलित करते समय, \( \text{H}^+ \) को संतुलित करने के बाद \( \text{OH}^- \) आयनों को दोनों तरफ जोड़ना न भूलें ताकि \( \text{H}^+ \) को \( \text{H}_2\text{O} \) में परिवर्तित किया जा सके।

 

प्रश्न 18. तत्त्व की ऑक्सीकरण अवस्था तथा संयोजकता में भिन्नता को स्पष्ट कीजिए।
Answer: ऑक्सीकरण अवस्था और संयोजकता के बीच मुख्य अंतर निम्नलिखित हैं:
(i) संयोजकता किसी तत्व के परमाणु की अन्य परमाणुओं के साथ जुड़ने की क्षमता को बताती है, जबकि ऑक्सीकरण अंक किसी अणु या आयन में मौजूद परमाणु पर एक काल्पनिक आवेश होता है. संयोजकता यह दिखाती है कि कितने बंध बन सकते हैं.
(ii) संयोजकता के साथ कोई धनात्मक (+) या ऋणात्मक (-) चिह्न नहीं लगाया जाता है, जबकि ऑक्सीकरण अंक के साथ हमेशा धनात्मक या ऋणात्मक चिह्न लगाए जाते हैं, जो इलेक्ट्रॉन के लाभ या हानि को दर्शाते हैं.
(iii) संयोजकता हमेशा एक पूर्ण संख्या होती है और कभी भी भिन्नात्मक नहीं होती है, जबकि ऑक्सीकरण संख्याएँ भिन्नात्मक भी हो सकती हैं (जैसे \( \text{Na}_2\text{S}_4\text{O}_6 \) में सल्फर का ऑक्सीकरण अंक \( +2.5 \)).
(iv) सामान्यतः, किसी एक तत्व की संयोजकता निश्चित होती है या कुछ सीमित मान होते हैं (जैसे कार्बन की संयोजकता 4 है), लेकिन एक ही तत्व का ऑक्सीकरण अंक अलग-अलग यौगिकों में अलग-अलग हो सकता है (जैसे सल्फर के लिए \( -2, 0, +2, +4, +6 \)). ऑक्सीकरण अवस्था आवेश और इलेक्ट्रॉन के प्रवाह को दर्शाती है.
In simple words: संयोजकता बताती है कि एक परमाणु कितने बंध बना सकता है, और यह हमेशा पूरी संख्या होती है. ऑक्सीकरण अवस्था परमाणु पर एक आवेश है जो धनात्मक या ऋणात्मक हो सकता है, और यह भिन्न में भी हो सकता है.

🎯 Exam Tip: ऑक्सीकरण अवस्था और संयोजकता के बीच के अंतर को स्पष्ट रूप से समझें क्योंकि ये दोनों अवधारणाएँ रासायनिक प्रतिक्रियाओं को समझने में महत्वपूर्ण हैं लेकिन अलग-अलग अर्थ रखती हैं।

 

प्रश्न 19. \( 2\text{KI} + \text{Cl}_2 \rightarrow 2\text{KCl} - \text{I}_2 \) अभिक्रिया में अपचायक पदार्थ बताइए।
Answer: इस अभिक्रिया में अपचायक पदार्थ का पता उसके ऑक्सीकरण अंक में परिवर्तन से लगाया जाता है.
\( \text{KI} \): \( \text{K} \) का \( +1 \) है, तो \( \text{I} \) का ऑक्सीकरण अंक \( \text{x} \) है.
\( +1 + \text{x} = 0 \Rightarrow \text{x} = -1 \)
\( \text{I}_2 \): एक मुक्त तत्व के रूप में, \( \text{I}_2 \) में \( \text{I} \) का ऑक्सीकरण अंक \( 0 \) है.
यहां, आयोडीन \( (\text{I}) \) का ऑक्सीकरण अंक \( -1 \) से \( 0 \) में बदल रहा है. ऑक्सीकरण अंक में वृद्धि का मतलब ऑक्सीकरण है. इसलिए, \( \text{KI} \) में मौजूद \( \text{I}^- \) आयन ऑक्सीकृत हो रहा है, और \( \text{KI} \) अपचायक पदार्थ है.

\( \text{Cl}_2 \): एक मुक्त तत्व के रूप में, \( \text{Cl} \) का ऑक्सीकरण अंक \( 0 \) है.
\( \text{KCl} \): \( \text{K} \) का \( +1 \) है, तो \( \text{Cl} \) का ऑक्सीकरण अंक \( \text{x} \) है.
\( +1 + \text{x} = 0 \Rightarrow \text{x} = -1 \)
यहां, क्लोरीन \( (\text{Cl}) \) का ऑक्सीकरण अंक \( 0 \) से \( -1 \) में बदल रहा है. ऑक्सीकरण अंक में कमी का मतलब अपचयन है.
अतः, \( \text{KI} \) एक अपचायक पदार्थ है क्योंकि आयोडीन के ऑक्सीकरण अंक में वृद्धि हुई है, जबकि \( \text{Cl}_2 \) ऑक्सीकारक है क्योंकि इसके ऑक्सीकरण अंक में कमी हुई है.
In simple words: इस अभिक्रिया में \( \text{KI} \) अपचायक है क्योंकि इसमें आयोडीन का ऑक्सीकरण अंक \( -1 \) से \( 0 \) हो रहा है, यानी ऑक्सीकरण हो रहा है.

🎯 Exam Tip: अपचायक पदार्थ वह होता है जो इलेक्ट्रॉन देता है और खुद ऑक्सीकृत हो जाता है, जिससे उसका ऑक्सीकरण अंक बढ़ता है।

 

प्रश्न 20. ऑक्सीकरण अंक ज्ञात कीजिए
(i) \( (\text{NH}_4)_2 \text{MoO}_4 \) में \( \text{Mo} \)
(ii) \( \text{Ni}(\text{CN})_2^{4-} \) में \( \text{Ni} \) का
Answer:
(i) \( (\text{NH}_4)_2 \text{MoO}_4 \) में \( \text{Mo} \) का ऑक्सीकरण अंक:
\( \text{NH}_4^+ \) का कुल आवेश \( +1 \) है, तो \( \text{N} \) का ऑक्सीकरण अंक \( -3 \) और \( \text{H} \) का \( +1 \) है. यौगिक में \( 2 \) \( \text{NH}_4^+ \) आयन हैं.
\( \text{O} \) का ऑक्सीकरण अंक \( -2 \) है.
मान लीजिए \( \text{Mo} \) का ऑक्सीकरण अंक \( \text{x} \) है.
\( 2 \times (+1) + \text{x} + 4 \times (-2) = 0 \)
\( 2 + \text{x} - 8 = 0 \)
\( \text{x} - 6 = 0 \)
\( \text{x} = +6 \)
अतः, \( (\text{NH}_4)_2 \text{MoO}_4 \) में \( \text{Mo} \) का ऑक्सीकरण अंक \( +6 \) होगा.

(ii) \( \text{Ni}(\text{CN})_2^{4-} \) में \( \text{Ni} \) का ऑक्सीकरण अंक:
\( \text{CN}^- \) एक लिगेंड है और इसका आवेश \( -1 \) होता है. इस यौगिक में \( 2 \) \( \text{CN}^- \) समूह हैं.
आयन पर कुल आवेश \( -4 \) है.
मान लीजिए \( \text{Ni} \) का ऑक्सीकरण अंक \( \text{x} \) है.
\( \text{x} + 2 \times (-1) = -4 \)
\( \text{x} - 2 = -4 \)
\( \text{x} = -4 + 2 \)
\( \text{x} = -2 \)
अतः, \( \text{Ni}(\text{CN})_2^{4-} \) में \( \text{Ni} \) का ऑक्सीकरण अंक \( -2 \) होगा.
In simple words: पहले यौगिक में, \( \text{Mo} \) का ऑक्सीकरण अंक \( +6 \) है. दूसरे यौगिक में, \( \text{Ni} \) का ऑक्सीकरण अंक \( -2 \) है.

🎯 Exam Tip: समन्वय यौगिकों (complex compounds) में केंद्रीय धातु परमाणु का ऑक्सीकरण अंक ज्ञात करते समय, लिगेंडों के आवेश और समन्वय गोले के कुल आवेश को ध्यान में रखना महत्वपूर्ण है।

 

प्रश्न 21. निम्नलिखित धातुओं को उनके लवणों के विलयन में से विस्थापन की क्षमता के क्रम में लिखिए-
\( \text{Cr, Cu, Mg, Zn, Fe, Al} \)
Answer: किसी धातु का मानक इलेक्ट्रोड विभव जितना अधिक ऋणात्मक (negative) होता है, वह धातु उतनी ही अधिक सक्रिय होती है और उतनी ही अधिक प्रबल अपचायक (reducing agent) होती है. इसका अर्थ है कि एक अधिक क्रियाशील धातु (जिसका इलेक्ट्रोड विभव अधिक ऋणात्मक हो) अपने से कम क्रियाशील धातु (जिसका इलेक्ट्रोड विभव कम ऋणात्मक या धनात्मक हो) को उसके लवण के विलयन से विस्थापित कर सकती है. यह धातुओं की इलेक्ट्रोकेमिकल श्रृंखला के आधार पर होता है.
इन धातुओं के लिए मानक अपचयन विभव (लगभग मान):
\( \text{Mg}^{2+}/\text{Mg} = -2.37 \text{ V} \)
\( \text{Al}^{3+}/\text{Al} = -1.66 \text{ V} \)
\( \text{Zn}^{2+}/\text{Zn} = -0.76 \text{ V} \)
\( \text{Cr}^{3+}/\text{Cr} = -0.74 \text{ V} \)
\( \text{Fe}^{2+}/\text{Fe} = -0.44 \text{ V} \)
\( \text{Cu}^{2+}/\text{Cu} = +0.34 \text{ V} \)
इन विभवों के आधार पर, विस्थापन क्षमता का क्रम (सबसे अधिक क्रियाशील से सबसे कम क्रियाशील तक, अर्थात उनके लवणों से विस्थापन करने की क्षमता) इस प्रकार होगा:
\( \text{Mg} > \text{Al} > \text{Zn} > \text{Cr} > \text{Fe} > \text{Cu} \)
यह क्रम इलेक्ट्रोकेमिकल श्रृंखला में उनकी स्थिति को दर्शाता है. ऊपर की धातुएँ नीचे की धातुओं को विस्थापित कर सकती हैं.
In simple words: धातुओं को उनके लवण विलयन से विस्थापित करने की क्षमता उनकी क्रियाशीलता पर निर्भर करती है. जो धातुएँ अधिक क्रियाशील होती हैं (यानी, जिनका मानक इलेक्ट्रोड विभव अधिक ऋणात्मक होता है), वे कम क्रियाशील धातुओं को विस्थापित कर सकती हैं. इसलिए, क्रम है \( \text{Mg} > \text{Al} > \text{Zn} > \text{Cr} > \text{Fe} > \text{Cu} \).

🎯 Exam Tip: इलेक्ट्रोकेमिकल श्रृंखला में धातु की स्थिति जितनी ऊँची होगी, वह उतनी ही अधिक क्रियाशील होगी और अपने से नीचे की धातुओं को उनके लवण विलयन से विस्थापित कर देगी।

 

प्रश्न 22. \( \text{Zn} \) तथा \( \text{CuSO}_4 \) विलयन के मध्य अप्रत्यक्ष रेडॉक्स अभिक्रिया प्रदर्शित करने वाले विद्युत रासायनिक सेल को चित्रित कीजिए।
Answer: \( \text{Zn} \) तथा \( \text{CuSO}_4 \) विलयन के बीच अप्रत्यक्ष रेडॉक्स अभिक्रिया को दर्शाने वाला विद्युत रासायनिक सेल, जिसे डेनियल सेल (Daniel cell) भी कहते हैं, नीचे दिए गए चित्र के अनुसार बनाया जा सकता है. यह सेल रासायनिक ऊर्जा को विद्युत ऊर्जा में परिवर्तित करता है.
U Zn की छड़ ZnSO4 विलयन ऑक्सीकरण \( \text{Zn} \rightarrow \text{Zn}^{2+} + 2\text{e}^- \) ऐनोड Cu की छड़ CuSO4 विलयन अपचयन \( \text{Cu}^{2+} + 2\text{e}^- \rightarrow \text{Cu} \) कैथोड लवण सेतु V इलेक्ट्रॉनों का प्रवाह विद्युत धारा का प्रवाह चित्र : डेनियल सेल
In simple words: डेनियल सेल में, जस्ता (Zn) की छड़ को \( \text{ZnSO}_4 \) विलयन में और तांबे (Cu) की छड़ को \( \text{CuSO}_4 \) विलयन में डुबोया जाता है. दोनों को एक लवण सेतु से जोड़ा जाता है. जस्ता इलेक्ट्रॉन खोता है (ऑक्सीकृत होता है) और तांबा इलेक्ट्रॉन प्राप्त करता है (अपचयित होता है), जिससे बिजली बनती है.

🎯 Exam Tip: डेनियल सेल के चित्र को बनाते समय, एनोड (ऑक्सीकरण) और कैथोड (अपचयन), इलेक्ट्रोडों, विलयनों, लवण सेतु और बाहरी परिपथ में इलेक्ट्रॉनों के प्रवाह को सही ढंग से दर्शाना सुनिश्चित करें।

 

प्रश्न 23. ऑक्सीकरण तथा अपचयन को परिभाषित कीजिए
(i) इलेक्ट्रोन संकल्पना के आधार पर
(ii) ऑक्सीकरण अंक के आधार पर
Answer:
(i) **इलेक्ट्रॉन संकल्पना के आधार पर:**
ऑक्सीकरण: यह वह प्रक्रिया है जिसमें कोई परमाणु, अणु या आयन इलेक्ट्रॉन खोता है. इलेक्ट्रॉन खोने से उसका धनात्मक आवेश बढ़ता है या ऋणात्मक आवेश घटता है.
उदाहरण: \( \text{Na} \rightarrow \text{Na}^+ + \text{e}^- \), \( \text{Fe}^{2+} \rightarrow \text{Fe}^{3+} + \text{e}^- \)
अपचयन: यह वह प्रक्रिया है जिसमें कोई परमाणु, अणु या आयन इलेक्ट्रॉन ग्रहण करता है. इलेक्ट्रॉन ग्रहण करने से उसका धनात्मक आवेश घटता है या ऋणात्मक आवेश बढ़ता है.
उदाहरण: \( \text{Cl} + \text{e}^- \rightarrow \text{Cl}^- \), \( \text{S} + 2\text{e}^- \rightarrow \text{S}^{2-} \), \( \text{Na}^+ + \text{e}^- \rightarrow \text{Na} \)

(ii) **ऑक्सीकरण अंक के आधार पर:**
ऑक्सीकरण: जब किसी परमाणु, अणु या आयन के ऑक्सीकरण अंक में वृद्धि होती है, तो उसे ऑक्सीकरण कहते हैं. यह इलेक्ट्रॉन के नुकसान को दर्शाता है.
उदाहरण: \( \text{S}^{2-} \rightarrow \text{S} \) (ऑक्सीकरण अंक \( -2 \) से \( 0 \) तक बढ़ता है)
अपचयन: जब किसी परमाणु, अणु या आयन के ऑक्सीकरण अंक में कमी होती है, तो उसे अपचयन कहते हैं. यह इलेक्ट्रॉन के लाभ को दर्शाता है.
उदाहरण: \( \text{Cl}_2 \rightarrow 2\text{Cl}^- \) (ऑक्सीकरण अंक \( 0 \) से \( -1 \) तक घटता है)
ऑक्सीकरण और अपचयन हमेशा एक साथ होते हैं, एक पदार्थ ऑक्सीकृत होता है और दूसरा अपचयित होता है, जिससे रेडॉक्स अभिक्रियाएँ बनती हैं.
In simple words: इलेक्ट्रॉन संकल्पना में, ऑक्सीकरण इलेक्ट्रॉन खोना है और अपचयन इलेक्ट्रॉन पाना है. ऑक्सीकरण अंक संकल्पना में, ऑक्सीकरण अंक बढ़ना ऑक्सीकरण है और ऑक्सीकरण अंक घटना अपचयन है.

🎯 Exam Tip: ऑक्सीकरण और अपचयन की दोनों परिभाषाओं (इलेक्ट्रॉन स्थानांतरण और ऑक्सीकरण अंक परिवर्तन) को याद रखें और समझें कि वे कैसे एक-दूसरे से संबंधित हैं।

 

प्रश्न 24. निम्न अभिक्रियाओं में ऑक्सीकारक तथा अपचायक बताइये
(i) \( \text{H}_2\text{O}_2 + \text{O}_3 \rightarrow \text{H}_2\text{O} + 2\text{O}_2 \)
(ii) \( 2\text{Na}_2\text{S}_2\text{O}_3 + \text{I}_2 \rightarrow \text{Na}_2\text{S}_4\text{O}_6 + 2\text{NaI} \)
Answer:
(i) \( \text{H}_2\text{O}_2 + \text{O}_3 \rightarrow \text{H}_2\text{O} + 2\text{O}_2 \)
इस अभिक्रिया में ऑक्सीकरण अंक ज्ञात करते हैं:
\( \text{H}_2\text{O}_2 \) में \( \text{O} \) का ऑक्सीकरण अंक \( -1 \) है (क्योंकि \( \text{H} \) का \( +1 \) है: \( 2(+1) + 2\text{x} = 0 \implies 2\text{x} = -2 \implies \text{x} = -1 \)).
\( \text{O}_3 \) में \( \text{O} \) का ऑक्सीकरण अंक \( 0 \) है (मुक्त अवस्था में).
\( \text{H}_2\text{O} \) में \( \text{O} \) का ऑक्सीकरण अंक \( -2 \) है.
\( \text{O}_2 \) में \( \text{O} \) का ऑक्सीकरण अंक \( 0 \) है (मुक्त अवस्था में).

विश्लेषण:
\( \text{H}_2\text{O}_2 \) में \( \text{O} \) का ऑक्सीकरण अंक \( -1 \) से \( \text{H}_2\text{O} \) में \( -2 \) हो रहा है (कमी), इसलिए \( \text{H}_2\text{O}_2 \) ऑक्सीकारक है.
\( \text{O}_3 \) में \( \text{O} \) का ऑक्सीकरण अंक \( 0 \) से \( \text{O}_2 \) में \( 0 \) रहता है. \( \text{H}_2\text{O}_2 \) से \( \text{O}_2 \) में \( \text{O} \) का ऑक्सीकरण अंक \( -1 \) से \( 0 \) हो रहा है (वृद्धि), इसलिए \( \text{H}_2\text{O}_2 \) अपचायक के रूप में भी कार्य कर रहा है, यहाँ यह \( \text{O}_3 \) के साथ अभिक्रिया में अपचायक की भूमिका निभाता है.
अतः, \( \text{O}_3 \) ऑक्सीकारक है और \( \text{H}_2\text{O}_2 \) अपचायक है (इस विशेष अभिक्रिया में).

(ii) \( 2\text{Na}_2\text{S}_2\text{O}_3 + \text{I}_2 \rightarrow \text{Na}_2\text{S}_4\text{O}_6 + 2\text{NaI} \)
ऑक्सीकरण अंक ज्ञात करते हैं:
\( \text{Na}_2\text{S}_2\text{O}_3 \) में \( \text{Na} \) का \( +1 \), \( \text{O} \) का \( -2 \). \( 2(+1) + 2\text{x} + 3(-2) = 0 \implies 2 + 2\text{x} - 6 = 0 \implies 2\text{x} - 4 = 0 \implies \text{x} = +2 \). सल्फर का ऑक्सीकरण अंक \( +2 \).
\( \text{I}_2 \) में \( \text{I} \) का ऑक्सीकरण अंक \( 0 \).
\( \text{Na}_2\text{S}_4\text{O}_6 \) में \( \text{Na} \) का \( +1 \), \( \text{O} \) का \( -2 \). \( 2(+1) + 4\text{x} + 6(-2) = 0 \implies 2 + 4\text{x} - 12 = 0 \implies 4\text{x} - 10 = 0 \implies \text{x} = +2.5 \). सल्फर का ऑक्सीकरण अंक \( +2.5 \).
\( \text{NaI} \) में \( \text{Na} \) का \( +1 \), तो \( \text{I} \) का \( -1 \).

विश्लेषण:
\( \text{Na}_2\text{S}_2\text{O}_3 \) में \( \text{S} \) का ऑक्सीकरण अंक \( +2 \) से \( \text{Na}_2\text{S}_4\text{O}_6 \) में \( +2.5 \) हो रहा है (वृद्धि), इसलिए \( \text{Na}_2\text{S}_2\text{O}_3 \) अपचायक है.
\( \text{I}_2 \) में \( \text{I} \) का ऑक्सीकरण अंक \( 0 \) से \( \text{NaI} \) में \( -1 \) हो रहा है (कमी), इसलिए \( \text{I}_2 \) ऑक्सीकारक है.
In simple words: पहली अभिक्रिया में, \( \text{O}_3 \) ऑक्सीकारक है और \( \text{H}_2\text{O}_2 \) अपचायक है. दूसरी अभिक्रिया में, \( \text{Na}_2\text{S}_2\text{O}_3 \) अपचायक है और \( \text{I}_2 \) ऑक्सीकारक है.

🎯 Exam Tip: कुछ पदार्थ (जैसे \( \text{H}_2\text{O}_2 \)) ऑक्सीकारक और अपचायक दोनों के रूप में कार्य कर सकते हैं, यह इस बात पर निर्भर करता है कि वे किस पदार्थ के साथ अभिक्रिया कर रहे हैं।

 

प्रश्न 26. \( \text{KO}_2 \) में ऑक्सीजन का ऑक्सीकरण अंक बताइए।
Answer: \( \text{KO}_2 \) पोटैशियम सुपरऑक्साइड है. इस यौगिक में \( \text{K} \) एक क्षार धातु है, इसलिए इसका ऑक्सीकरण अंक हमेशा \( +1 \) होता है. मान लीजिए ऑक्सीजन \( (\text{O}) \) का ऑक्सीकरण अंक \( \text{x} \) है.
तो, \( 1(+1) + 2\text{x} = 0 \) (क्योंकि यौगिक उदासीन है)
\( 1 + 2\text{x} = 0 \)
\( 2\text{x} = -1 \)
\( \text{x} = -1/2 \)
अतः, \( \text{KO}_2 \) में ऑक्सीजन का ऑक्सीकरण अंक \( -1/2 \) होता है. यह एक असामान्य ऑक्सीकरण अवस्था है जो सुपरऑक्साइड आयन \( (\text{O}_2^-) \) में पाई जाती है.
In simple words: \( \text{KO}_2 \) में, पोटैशियम \( +1 \) है. दो ऑक्सीजन परमाणुओं के लिए कुल आवेश \( -1 \) होना चाहिए, इसलिए प्रत्येक ऑक्सीजन का ऑक्सीकरण अंक \( -1/2 \) है.

🎯 Exam Tip: ऑक्सीजन का ऑक्सीकरण अंक आमतौर पर \( -2 \) होता है, लेकिन परऑक्साइड (जैसे \( \text{H}_2\text{O}_2 \)) में \( -1 \) और सुपरऑक्साइड (जैसे \( \text{KO}_2 \)) में \( -1/2 \) होता है, और फ्लोराइड (जैसे \( \text{OF}_2 \)) में \( +2 \) भी हो सकता है।

 

प्रश्न 27. नाइट्रेट के भूरे वलय परीक्षण में संकुल \( [\text{Fe}(\text{H}_2\text{O})_5 (\text{NO})]\text{SO}_4 \) बनता है। इसमें आयरन की ऑक्सीकरण संख्या बताइए।
Answer: संकुल \( [\text{Fe}(\text{H}_2\text{O})_5 (\text{NO})]\text{SO}_4 \) में, \( \text{SO}_4 \) सल्फेट आयन है, जिसका आवेश \( -2 \) होता है. इसलिए, संकुल आयन \( [\text{Fe}(\text{H}_2\text{O})_5 (\text{NO})]^{2+} \) का कुल आवेश \( +2 \) होगा.
अब, संकुल आयन में आयरन \( (\text{Fe}) \) का ऑक्सीकरण अंक ज्ञात करते हैं:
\( \text{H}_2\text{O} \) एक उदासीन लिगेंड है, इसलिए इसका आवेश \( 0 \) होता है.
\( \text{NO} \) यहाँ एक धनात्मक लिगेंड के रूप में कार्य करता है, इसका आवेश \( +1 \) होता है (आमतौर पर जब यह \( \text{Fe} \) जैसे धातु के साथ \( [\text{Fe}(\text{H}_2\text{O})_5 (\text{NO})]^{2+} \) में होता है).
मान लीजिए \( \text{Fe} \) का ऑक्सीकरण अंक \( \text{x} \) है.
तो, \( \text{x} + 5(0) + 1(+1) = +2 \)
\( \text{x} + 0 + 1 = +2 \)
\( \text{x} = +2 - 1 \)
\( \text{x} = +1 \)
अतः, इस संकुल में आयरन \( (\text{Fe}) \) का ऑक्सीकरण संख्या \( +1 \) है. यह नाइट्रेट परीक्षण का एक विशेष उदाहरण है जहाँ \( \text{NO} \) लिगेंड की उपस्थिति के कारण \( \text{Fe} \) का ऑक्सीकरण अंक असामान्य होता है.
In simple words: नाइट्रेट के भूरे वलय परीक्षण में बने संकुल में, आयरन (Fe) का ऑक्सीकरण अंक \( +1 \) है. पानी (H2O) उदासीन होता है, जबकि नाइट्रिक ऑक्साइड (NO) यहां \( +1 \) आवेश के साथ एक लिगेंड के रूप में कार्य करता है.

🎯 Exam Tip: कुछ लिगेंड (जैसे \( \text{NO} \)) समन्वय यौगिकों में अलग-अलग ऑक्सीकरण अवस्थाएँ प्रदर्शित कर सकते हैं, इसलिए उनके आवेश को संदर्भ के अनुसार समझना महत्वपूर्ण है।

 

प्रश्न 28. निम्नलिखित को आयोडीन की बढ़ती हुई ऑक्सीकरण अवस्था के क्रम में लिखिए-
\( \text{I}_2, \text{HI}, \text{HIO}_4, \text{ICI} \)
Answer: हम प्रत्येक यौगिक में आयोडीन \( (\text{I}) \) का ऑक्सीकरण अंक ज्ञात करेंगे.
1. \( \text{I}_2 \): यह एक मुक्त तत्व है, इसलिए आयोडीन का ऑक्सीकरण अंक \( 0 \) है.

2. \( \text{HI} \): हाइड्रोजन का ऑक्सीकरण अंक \( +1 \) होता है (गैर-धातु के साथ).
\( +1 + \text{x} = 0 \)
\( \text{x} = -1 \)
इसलिए, \( \text{HI} \) में आयोडीन का ऑक्सीकरण अंक \( -1 \) है.

3. \( \text{HIO}_4 \) (परआयोडिक एसिड): हाइड्रोजन का \( +1 \), ऑक्सीजन का \( -2 \).
\( +1 + \text{x} + 4(-2) = 0 \)
\( +1 + \text{x} - 8 = 0 \)
\( \text{x} - 7 = 0 \)
\( \text{x} = +7 \)
इसलिए, \( \text{HIO}_4 \) में आयोडीन का ऑक्सीकरण अंक \( +7 \) है.

4. \( \text{ICI} \) (आयोडीन मोनोक्लोराइड): क्लोरीन आयोडीन से अधिक विद्युत ऋणात्मक होता है, इसलिए \( \text{Cl} \) का ऑक्सीकरण अंक \( -1 \) होगा.
\( \text{x} + (-1) = 0 \)
\( \text{x} = +1 \)
इसलिए, \( \text{ICI} \) में आयोडीन का ऑक्सीकरण अंक \( +1 \) है.

अब, इन ऑक्सीकरण अवस्थाओं को बढ़ती हुई क्रम में व्यवस्थित करते हैं:
\( \text{HI} (-1) < \text{I}_2 (0) < \text{ICI} (+1) < \text{HIO}_4 (+7) \)
In simple words: हर यौगिक में आयोडीन के ऑक्सीकरण अंक को निकालकर, उन्हें छोटे से बड़े क्रम में रखा गया है. क्रम है \( \text{HI} \), \( \text{I}_2 \), \( \text{ICI} \), और \( \text{HIO}_4 \).

🎯 Exam Tip: ऑक्सीकरण अंक निकालते समय, हमेशा यौगिक में अन्य तत्वों (जैसे हाइड्रोजन, ऑक्सीजन, और अधिक विद्युत ऋणात्मक हैलोजन) के सामान्य ऑक्सीकरण अंकों को ध्यान में रखें।

Rbse Class 11 Chemistry Chapter 8 निबन्धात्मक प्रश्न

 

प्रश्न 29. ऑक्सीकरण अंक किसे कहते हैं? ऑक्सीकरण अंक परिवर्तन के आधार पर ऑक्सीकरण-अपचयन कैसे ज्ञात किया जाता है? ऑक्सीकरण अंक विधि द्वारा समीकरण संतुलित करने के विभिन्न पद लिखिए।
Answer:
**ऑक्सीकरण अंक (Oxidation Number):**
किसी यौगिक या तत्व के अणु में उपस्थित किसी परमाणु पर स्थित वास्तविक या काल्पनिक आवेश को उस परमाणु का ऑक्सीकरण अंक कहते हैं. यह आवेश इलेक्ट्रॉन के लाभ या हानि को दर्शाता है और एक परमाणु की इलेक्ट्रॉन घनत्व की स्थिति को भी इंगित करता है. ऑक्सीकरण अंक धनात्मक, ऋणात्मक या शून्य हो सकता है, और कभी-कभी भिन्नात्मक भी होता है.

**ऑक्सीकरण अंक परिवर्तन के आधार पर ऑक्सीकरण-अपचयन:**
ऑक्सीकरण-अपचयन प्रक्रियाओं में तत्वों के ऑक्सीकरण अंक में परिवर्तन होता है.
* **ऑक्सीकरण:** दिए गए पदार्थ में किसी तत्व की ऑक्सीकरण संख्या में वृद्धि को ऑक्सीकरण कहते हैं. यह इलेक्ट्रॉन के नुकसान के कारण होता है.
* **अपचयन:** दिए गए पदार्थ में किसी तत्व की ऑक्सीकरण संख्या में कमी को अपचयन कहते हैं. यह इलेक्ट्रॉन के लाभ के कारण होता है.
जिस तत्व के ऑक्सीकरण अंक में परिवर्तन नहीं होता है, उसका न तो ऑक्सीकरण होता है और न ही अपचयन. जिस पदार्थ का ऑक्सीकरण होता है उसे अपचायक (reducing agent) कहते हैं, क्योंकि वह दूसरे पदार्थ को अपचयित करता है और स्वयं ऑक्सीकृत होता है. इसके विपरीत, जिस पदार्थ का अपचयन होता है उसे ऑक्सीकारक (oxidizing agent) कहते हैं, क्योंकि वह दूसरे पदार्थ को ऑक्सीकृत करता है और स्वयं अपचयित होता है.
पूरी रासायनिक अभिक्रिया में, ऑक्सीकारक के ऑक्सीकरण अंकों में कुल कमी अपचायक के ऑक्सीकरण अंकों में कुल वृद्धि के बराबर होती है. इससे यह सुनिश्चित होता है कि इलेक्ट्रॉन का स्थानांतरण संतुलित है.

**ऑक्सीकरण अंक विधि द्वारा समीकरण संतुलित करने के पद:**
किसी रासायनिक अभिक्रिया में ऑक्सीकरण अंकों के आधार पर ऑक्सीकरण एवं अपचयन का पता निम्न प्रकार से लगाया जा सकता है, और फिर समीकरण को संतुलित किया जा सकता है:
1. **ऑक्सीकरण अंक ज्ञात करें:** सबसे पहले, यौगिक में उपस्थित प्रत्येक परमाणु के ऑक्सीकरण अंक ज्ञात करें. यह अणु की संरचना और इसमें शामिल तत्वों की विद्युत ऋणात्मकता पर आधारित होता है.
2. **ऑक्सीकरण अंक दर्शाएँ:** अब, सभी तत्वों के ऊपर उनके ऑक्सीकरण अंक लिखें.
3. **परिवर्तन पहचानें:** तत्वों के ऑक्सीकरण अंकों में परिवर्तन के आधार पर यह निष्कर्ष निकालें कि कौन सा तत्व ऑक्सीकृत हो रहा है (ऑक्सीकरण अंक बढ़ रहा है) और कौन सा अपचयित हो रहा है (ऑक्सीकरण अंक घट रहा है).
4. **ऑक्सीकरण और अपचयन के कुल परिवर्तन को बराबर करें:** ऑक्सीकरण अंक में हुई कुल वृद्धि को ऑक्सीकरण अंक में हुई कुल कमी के बराबर करने के लिए, उपयुक्त गुणांकों से गुणा करें. यह सुनिश्चित करता है कि इलेक्ट्रॉन का शुद्ध लाभ और हानि बराबर है. यह रेडॉक्स अभिक्रिया के संतुलन का केंद्रीय सिद्धांत है.
5. **अन्य परमाणुओं को संतुलित करें:** अब, ऑक्सीकरण अंक को छोड़कर अन्य परमाणुओं (जैसे हाइड्रोजन और ऑक्सीजन) को संतुलित करें. यह द्रव्यमान के संरक्षण के नियम का पालन करता है.
6. **आवेश को संतुलित करें:** अंत में, अम्लीय माध्यम में \( \text{H}^+ \) आयनों और क्षारीय माध्यम में \( \text{OH}^- \) आयनों को जोड़कर कुल आवेश को संतुलित करें. यदि आवश्यक हो, तो \( \text{H}_2\text{O} \) अणुओं का भी उपयोग करें. इस तरह, हमें एक पूर्ण संतुलित रेडॉक्स समीकरण प्राप्त होता है.
In simple words: ऑक्सीकरण अंक परमाणु पर एक आवेश है. जब यह बढ़ता है तो ऑक्सीकरण होता है, और जब यह घटता है तो अपचयन होता है. समीकरण संतुलित करने के लिए, पहले ऑक्सीकरण अंक ज्ञात करें, फिर ऑक्सीकरण और अपचयन को पहचानें. ऑक्सीकरण अंक में कुल परिवर्तन को बराबर करें, अन्य परमाणुओं को संतुलित करें, और अंत में आवेश को संतुलित करें.

🎯 Exam Tip: ऑक्सीकरण अंक विधि में ऑक्सीकरण अंकों में शुद्ध परिवर्तन को बराबर करना सबसे महत्वपूर्ण कदम है, क्योंकि यह इलेक्ट्रॉन के स्थानांतरण को संतुलित करता है।

 

प्रश्न 30. मानक इलेक्ट्रॉड विभव किसे कहते हैं ? मानक इलेक्टॉड विभव का रासायनिक अभिक्रियाओं में क्या महत्त्व हैं? उदाहरण देकर समझाइए।
Answer:
**मानक इलेक्ट्रोड विभव (Standard Electrode Potential):**
किसी धातु की छड़ को \( 298 \text{ K} \) तापमान पर, \( 1 \) वायुमंडल दाब पर, एक मोलर धातु आयन सांद्रता के विलयन में डुबोने पर, धातु और उसके आयनों के विलयन के बीच जो विभवान्तर उत्पन्न होता है, उसे उस धातु का मानक इलेक्ट्रोड विभव \( (\text{E}^\circ) \) कहते हैं. मानक हाइड्रोजन इलेक्ट्रोड (SHE) का विभव शून्य माना जाता है, और अन्य इलेक्ट्रोडों का मानक इलेक्ट्रोड विभव इसके सापेक्ष मापा जाता है. यह विभव इलेक्ट्रोड की इलेक्ट्रॉन खोने या प्राप्त करने की प्रवृत्ति को दर्शाता है.

**रासायनिक अभिक्रियाओं में मानक इलेक्ट्रोड विभव का महत्त्व:**
मानक इलेक्ट्रोड विभव रासायनिक अभिक्रियाओं की दिशा और सहजता को समझने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है.

1. **अभिक्रिया की सहजता (Spontaneity):** मानक इलेक्ट्रोड विभव का उपयोग किसी रेडॉक्स अभिक्रिया की सहजता (spontaneity) को निर्धारित करने के लिए किया जा सकता है. यदि सेल का मानक इलेक्ट्रोड विभव \( (\text{E}^\circ_{\text{cell}}) \) धनात्मक आता है, तो अभिक्रिया सहज (spontaneous) होगी. \( \text{E}^\circ_{\text{cell}} = \text{E}^\circ_{\text{cathode}} - \text{E}^\circ_{\text{anode}} \). यदि \( \text{E}^\circ_{\text{cell}} \) ऋणात्मक है, तो अभिक्रिया सहज नहीं होगी.

2. **ऑक्सीकारक और अपचायक शक्ति:** \( \text{E}^\circ \) का मान सक्रिय स्पीशीज की ऑक्सीकृत/अपचयित अवस्था में रहने की आपेक्षिक प्रवृत्ति का माप है.
* यदि \( \text{E}^\circ \) का मान ऋणात्मक है, तो वह रेडॉक्स युग्म \( \text{H}^+/\text{H}_2 \) की तुलना में प्रबल अपचायक है. यह धातु हाइड्रोजन आयनों को अपचयित करके हाइड्रोजन गैस मुक्त कर सकती है (जैसे \( \text{Zn} + 2\text{H}^+ \rightarrow \text{Zn}^{2+} + \text{H}_2 \)).
* यदि \( \text{E}^\circ \) का मान धनात्मक है, तो वह रेडॉक्स युग्म \( \text{H}^+/\text{H}_2 \) की तुलना में दुर्बल अपचायक है, और यह \( \text{H}^+ \) आयनों को अपचयित नहीं कर सकता है (जैसे \( \text{Cu} + 2\text{H}^+ \rightarrow \) कोई अभिक्रिया नहीं).

**उदाहरण:**
हमें \( \text{Zn} \) और \( \text{Cu} \) के मानक अपचयन विभव दिए गए हैं:
\( \text{Zn}^{2+} + 2\text{e}^- \rightarrow \text{Zn} \quad \text{E}^\circ = -0.76 \text{ V} \)
\( \text{Cu}^{2+} + 2\text{e}^- \rightarrow \text{Cu} \quad \text{E}^\circ = +0.34 \text{ V} \)
यदि हम \( \text{Zn} \) को एनोड और \( \text{Cu} \) को कैथोड के रूप में उपयोग करते हैं (अर्थात् \( \text{Zn} \) ऑक्सीकृत होता है और \( \text{Cu}^{2+} \) अपचयित होता है), तो सेल विभव होगा:
\( \text{E}^\circ_{\text{cell}} = \text{E}^\circ_{\text{cathode}} - \text{E}^\circ_{\text{anode}} = \text{E}^\circ_{\text{Cu}^{2+}/\text{Cu}} - \text{E}^\circ_{\text{Zn}^{2+}/\text{Zn}} = (+0.34 \text{ V}) - (-0.76 \text{ V}) = +1.10 \text{ V} \).
चूंकि \( \text{E}^\circ_{\text{cell}} \) धनात्मक है \( (+1.10 \text{ V}) \), यह अभिक्रिया सहज होगी, जिसका अर्थ है कि \( \text{Zn} \) की छड़ \( \text{CuSO}_4 \) विलयन में \( \text{Cu} \) को विस्थापित करेगी. इसी प्रकार, अधिक ऋणात्मक मानक इलेक्ट्रोड विभव वाली धातुएँ हाइड्रोजन इलेक्ट्रोड की तुलना में अधिक सक्रिय होती हैं और अम्लों से हाइड्रोजन गैस को विस्थापित कर सकती हैं.
In simple words: मानक इलेक्ट्रोड विभव एक धातु की इलेक्ट्रॉन खोने या पाने की शक्ति बताता है. इसका महत्व यह है कि यह हमें बताता है कि कोई अभिक्रिया अपने आप होगी या नहीं, और कौन सा पदार्थ अच्छा ऑक्सीकारक या अपचायक है. उदाहरण के लिए, जस्ता तांबे को उसके विलयन से विस्थापित कर सकता है क्योंकि जस्ते का इलेक्ट्रोड विभव अधिक ऋणात्मक होता है.

🎯 Exam Tip: मानक इलेक्ट्रोड विभव का मान जितना अधिक ऋणात्मक होगा, वह पदार्थ उतना ही प्रबल अपचायक होगा; जितना अधिक धनात्मक होगा, उतना ही प्रबल ऑक्सीकारक होगा।

 

प्रश्न 31. निम्नलिखित समीकरणों को सन्तुलित कीजिए तथा उनमें ऑक्सीकारक भी बताइए
(i) \( \text{H}_2\text{S} + \text{MnO}_4^- \rightarrow \text{S} + \text{Mn}^{2+} + \text{H}_2\text{O} \) (अम्लीय माध्यम)
(ii) \( \text{Cl}_2\text{O}_7 (\text{g}) + \text{H}_2\text{O}_2 (\text{g}) \rightarrow \text{ClO}_2^- (\text{जलीय}) + \text{O}_2 (\text{g}) \) (क्षारीय माध्यम)
Answer:
(i) **अभिक्रिया: \( \text{H}_2\text{S} + \text{MnO}_4^- \rightarrow \text{S} + \text{Mn}^{2+} + \text{H}_2\text{O} \) (अम्लीय माध्यम)**
ऑक्सीकरण अंक:
\( \text{H}_2\text{S} \): \( \text{H} = +1 \), \( \text{S} = -2 \)
\( \text{MnO}_4^- \): \( \text{O} = -2 \), \( \text{Mn} = +7 \)
\( \text{S} \): \( \text{S} = 0 \)
\( \text{Mn}^{2+} \): \( \text{Mn} = +2 \)

अर्द्ध-अभिक्रियाएँ:
1. **ऑक्सीकरण अर्द्ध-अभिक्रिया:** \( \text{H}_2\text{S} \rightarrow \text{S} \)
* परमाणु संतुलित करें: पहले से संतुलित.
* ऑक्सीजन संतुलित करें: कोई ऑक्सीजन नहीं.
* हाइड्रोजन संतुलित करें: \( \text{S} + 2\text{H}^+ \)
* आवेश संतुलित करें: \( \text{H}_2\text{S} \rightarrow \text{S} + 2\text{H}^+ + 2\text{e}^- \) .....(1)

2. **अपचयन अर्द्ध-अभिक्रिया:** \( \text{MnO}_4^- \rightarrow \text{Mn}^{2+} \)
* परमाणु संतुलित करें: पहले से संतुलित.
* ऑक्सीजन संतुलित करें: \( \text{MnO}_4^- \rightarrow \text{Mn}^{2+} + 4\text{H}_2\text{O} \)
* हाइड्रोजन संतुलित करें: \( \text{MnO}_4^- + 8\text{H}^+ \rightarrow \text{Mn}^{2+} + 4\text{H}_2\text{O} \)
* आवेश संतुलित करें: बाईं ओर \( (-1 + 8) = +7 \), दाईं ओर \( +2 \). आवेश को संतुलित करने के लिए बाईं ओर \( 5 \) इलेक्ट्रॉन जोड़ें.
\( \text{MnO}_4^- + 8\text{H}^+ + 5\text{e}^- \rightarrow \text{Mn}^{2+} + 4\text{H}_2\text{O} \) .....(2)

इलेक्ट्रॉनों को बराबर करना:
समीकरण (1) को \( 5 \) से गुणा करें: \( 5\text{H}_2\text{S} \rightarrow 5\text{S} + 10\text{H}^+ + 10\text{e}^- \)
समीकरण (2) को \( 2 \) से गुणा करें: \( 2\text{MnO}_4^- + 16\text{H}^+ + 10\text{e}^- \rightarrow 2\text{Mn}^{2+} + 8\text{H}_2\text{O} \)

दोनों समीकरणों को जोड़ें:
\( 5\text{H}_2\text{S} + 2\text{MnO}_4^- + 16\text{H}^+ + 10\text{e}^- \rightarrow 5\text{S} + 10\text{H}^+ + 10\text{e}^- + 2\text{Mn}^{2+} + 8\text{H}_2\text{O} \)

अंतिम संतुलित समीकरण:
\( 5\text{H}_2\text{S} + 2\text{MnO}_4^- + 6\text{H}^+ \rightarrow 5\text{S} + 2\text{Mn}^{2+} + 8\text{H}_2\text{O} \)
ऑक्सीकारक: \( \text{MnO}_4^- \) (मैंगनीज \( +7 \) से \( +2 \) में अपचयित हो रहा है).

(ii) **अभिक्रिया: \( \text{Cl}_2\text{O}_7 (\text{g}) + \text{H}_2\text{O}_2 (\text{g}) \rightarrow \text{ClO}_2^- (\text{aq}) + \text{O}_2 (\text{g}) \) (क्षारीय माध्यम)**
ऑक्सीकरण अंक:
\( \text{Cl}_2\text{O}_7 \): \( \text{O} = -2 \), \( 2\text{x} + 7(-2) = 0 \implies 2\text{x} = 14 \implies \text{x} = +7 \). \( \text{Cl} = +7 \)
\( \text{H}_2\text{O}_2 \): \( \text{H} = +1 \), \( \text{O} = -1 \)
\( \text{ClO}_2^- \): \( \text{O} = -2 \), \( \text{x} + 2(-2) = -1 \implies \text{x} - 4 = -1 \implies \text{x} = +3 \). \( \text{Cl} = +3 \)
\( \text{O}_2 \): \( \text{O} = 0 \)

अर्द्ध-अभिक्रियाएँ:
1. **अपचयन अर्द्ध-अभिक्रिया:** \( \text{Cl}_2\text{O}_7 \rightarrow \text{ClO}_2^- \)
* \( \text{Cl} \) संतुलित करें: \( \text{Cl}_2\text{O}_7 \rightarrow 2\text{ClO}_2^- \)
* ऑक्सीजन संतुलित करें: बाईं ओर 7 ऑक्सीजन, दाईं ओर 4 ऑक्सीजन. बाईं ओर 3 \( \text{H}_2\text{O} \) जोड़ें.
\( \text{Cl}_2\text{O}_7 + 3\text{H}_2\text{O} \rightarrow 2\text{ClO}_2^- \)
* हाइड्रोजन संतुलित करें: बाईं ओर 6 \( \text{H} \). बाईं ओर 6 \( \text{H}^+ \) जोड़ें.
\( \text{Cl}_2\text{O}_7 + 6\text{H}^+ + 3\text{H}_2\text{O} \rightarrow 2\text{ClO}_2^- \)
* क्षारीय माध्यम के लिए \( \text{OH}^- \) जोड़ें: दोनों तरफ 6 \( \text{OH}^- \) जोड़ें.
\( \text{Cl}_2\text{O}_7 + 6\text{H}^+ + 6\text{OH}^- + 3\text{H}_2\text{O} \rightarrow 2\text{ClO}_2^- + 6\text{OH}^- \)
\( \text{Cl}_2\text{O}_7 + 6\text{H}_2\text{O} + 3\text{H}_2\text{O} \rightarrow 2\text{ClO}_2^- + 6\text{OH}^- \)
\( \text{Cl}_2\text{O}_7 + 9\text{H}_2\text{O} \rightarrow 2\text{ClO}_2^- + 6\text{OH}^- \)
* आवेश संतुलित करें: बाईं ओर \( 0 \), दाईं ओर \( (-2 - 6) = -8 \). बाईं ओर 8 इलेक्ट्रॉन जोड़ें.
\( \text{Cl}_2\text{O}_7 + 9\text{H}_2\text{O} + 8\text{e}^- \rightarrow 2\text{ClO}_2^- + 6\text{OH}^- \) .....(1)

2. **ऑक्सीकरण अर्द्ध-अभिक्रिया:** \( \text{H}_2\text{O}_2 \rightarrow \text{O}_2 \)
* परमाणु संतुलित करें: पहले से संतुलित.
* ऑक्सीजन संतुलित करें: पहले से संतुलित.
* हाइड्रोजन संतुलित करें: दाईं ओर 2 \( \text{H}^+ \) जोड़ें.
\( \text{H}_2\text{O}_2 \rightarrow \text{O}_2 + 2\text{H}^+ \)
* क्षारीय माध्यम के लिए \( \text{OH}^- \) जोड़ें: दोनों तरफ 2 \( \text{OH}^- \) जोड़ें.
\( \text{H}_2\text{O}_2 + 2\text{OH}^- \rightarrow \text{O}_2 + 2\text{H}^+ + 2\text{OH}^- \)
\( \text{H}_2\text{O}_2 + 2\text{OH}^- \rightarrow \text{O}_2 + 2\text{H}_2\text{O} \)
* आवेश संतुलित करें: बाईं ओर \( -2 \), दाईं ओर \( 0 \). दाईं ओर 2 इलेक्ट्रॉन जोड़ें.
\( \text{H}_2\text{O}_2 + 2\text{OH}^- \rightarrow \text{O}_2 + 2\text{H}_2\text{O} + 2\text{e}^- \) .....(2)

इलेक्ट्रॉनों को बराबर करना:
समीकरण (1) को \( 1 \) से गुणा करें: \( \text{Cl}_2\text{O}_7 + 9\text{H}_2\text{O} + 8\text{e}^- \rightarrow 2\text{ClO}_2^- + 6\text{OH}^- \)
समीकरण (2) को \( 4 \) से गुणा करें: \( 4\text{H}_2\text{O}_2 + 8\text{OH}^- \rightarrow 4\text{O}_2 + 8\text{H}_2\text{O} + 8\text{e}^- \)

दोनों समीकरणों को जोड़ें:
\( \text{Cl}_2\text{O}_7 + 9\text{H}_2\text{O} + 8\text{e}^- + 4\text{H}_2\text{O}_2 + 8\text{OH}^- \rightarrow 2\text{ClO}_2^- + 6\text{OH}^- + 4\text{O}_2 + 8\text{H}_2\text{O} + 8\text{e}^- \)

समान पदों को काटें और सरल करें:
\( \text{Cl}_2\text{O}_7 + \text{H}_2\text{O} + 2\text{OH}^- + 4\text{H}_2\text{O}_2 \rightarrow 2\text{ClO}_2^- + 4\text{O}_2 \) (यह संतुलित समीकरण है)
ऑक्सीकारक: \( \text{Cl}_2\text{O}_7 \) (क्लोरीन \( +7 \) से \( +3 \) में अपचयित हो रहा है).
In simple words: पहली अभिक्रिया में, \( \text{H}_2\text{S} \) ऑक्सीकृत होता है और \( \text{MnO}_4^- \) अपचयित होता है, इसलिए \( \text{MnO}_4^- \) ऑक्सीकारक है. दूसरी अभिक्रिया में, \( \text{H}_2\text{O}_2 \) ऑक्सीकृत होता है और \( \text{Cl}_2\text{O}_7 \) अपचयित होता है, इसलिए \( \text{Cl}_2\text{O}_7 \) ऑक्सीकारक है.

🎯 Exam Tip: क्षारीय माध्यम में अभिक्रियाओं को संतुलित करते समय, \( \text{H}^+ \) को संतुलित करने के बाद, \( \text{H}^+ \) की संख्या के बराबर \( \text{OH}^- \) को दोनों तरफ जोड़ना और उन्हें \( \text{H}_2\text{O} \) में बदलना महत्वपूर्ण है।

 

Question 33. निम्न अभिक्रियाओं को प्रदर्शित करने वाले गेल्वेनिक सेल का चित्र बनाइए। \( Zn + 2Ag^+ \rightarrow Zn^{2+} + 2Ag \) इसके आधार पर निम्न उत्तर भी दीजिए
(i) प्रत्येक इलेक्ट्रॉड पर होने वाली अभिक्रिया का समीकरण दीजिए।
(ii) बाह्य परिपथ में इलेक्ट्रॉनों का प्रवाह किस ओर होगा?
(iii) एनोड तथा केथोड़ बताइए।
(iv) यदि \( E^\circ Zn^{2+}/Zn = -0.76 \) तथा \( E^\circ Ag^{1+}/Ag = +.80 \) वोल्ट हो तो क्या \( WE^\circ = 1.56 \) वोल्ट होगा।
Answer:

विद्युत धारा का प्रवाह इलेक्ट्रॉनों का प्रवाह ZnSO4 विलयन Zn की छड़ ऑक्सीकरण Zn\( \rightarrow \)Zn\( ^{2+} \) + 2e\( ^- \) CuSO4 विलयन Cu की छड़ अपचयन Cu\( ^{2+} \) + 2e\( ^- \)\( \rightarrow \) Cu लवण सेतु V चित्र : डेनियल सेल
(i) बाएं इलेक्ट्रोड पर ऑक्सीकरण की अभिक्रिया: \( Zn(S) \rightarrow Zn^{2+} + 2e^- \). दाएं इलेक्ट्रोड पर अपचयन की अभिक्रिया: \( 2Ag^+ + 2e^- \rightarrow 2Ag(S) \).
(ii) बाह्य परिपथ में इलेक्ट्रॉन \( Zn \) से सिल्वर इलेक्ट्रोड की ओर बहते हैं।
(iii) यहां \( Zn \) एनोड का काम करता है, और सिल्वर कैथोड का काम करता है।
(iv) सेल का कुल विभव \( E^\circ_{net} \) ऑक्सीकरण विभव \( E^\circ_{Ox} \) और अपचयन विभव \( E^\circ_{red} \) का योग होता है। \( E^\circ_{net} = E^\circ_{Zn} + E^\circ_{Ag} \) \( E^\circ_{net} = (+0.76 V) + (+0.80 V) = 1.56 V \). हां, \( E^\circ_{net} = 1.56 \) वोल्ट होगा।
In simple words: यह डेनियल सेल का चित्र है, जिसमें जिंक एनोड और सिल्वर कैथोड का काम करते हैं। इलेक्ट्रॉन जिंक से सिल्वर की ओर बहते हैं, और सेल का कुल वोल्टेज \( 1.56 \) वोल्ट होता है।

🎯 Exam Tip: गैल्वेनिक सेल के आरेख में, एनोड को हमेशा बाईं ओर रखें (जहां ऑक्सीकरण होता है) और कैथोड को दाईं ओर (जहां अपचयन होता है).

 

Question 34. विद्युत रासायनिक श्रेणी किसे कहते हैं? धात्त्विक तत्त्व A, B, C तथा D का इलेक्ट्रॉड अपचयन विभव क्रमशः \( + 0.79, – 0.74, 1.08 \) तथा \( -0.31 \) वोल्ट है। इन्हें बढ़ती क्रियाशीलता के क्रम में जमाइये। \( 1M \) HCI अम्ल को रखने के लिए ऐलुमिनियम तथा चाँदी के पात्रों में से कौन अधिक उपयुक्त होगा?\( E^\circ AI^{3+}/Al = -1.66 V \) तथा \( E^\circ Ag^{+}/Ag = + 0.80(v) \)
Answer: विद्युत रासायनिक श्रेणी एक ऐसी सूची है जिसमें विभिन्न इलेक्ट्रोड अभिक्रियाओं के मानक इलेक्ट्रोड विभव मानों को घटते क्रम में रखा जाता है। यह श्रेणी हमें धातुओं की क्रियाशीलता को समझने में मदद करती है।
दिए गए अपचयन विभव हैं:
तत्व A: \( +0.79 \) V
तत्व B: \( -0.74 \) V
तत्व C: \( +1.08 \) V
तत्व D: \( -0.31 \) V
जिसका अपचयन विभव जितना कम या अधिक ऋणात्मक होता है, वह उतना ही अधिक क्रियाशील होता है।
इन मानों को बढ़ते क्रम में व्यवस्थित करने पर:
C \( (+1.08 V) \)> A \( (+0.79 V) \)> D \( (-0.31 V) \)> B \( (-0.74 V) \)
यह क्रम धातुओं की घटती हुई ऑक्सीकरण क्षमता और बढ़ती हुई अपचयन क्षमता को दिखाता है।
इसलिए, बढ़ती क्रियाशीलता का क्रम है: B \( < \) D \( < \) A \( < \) C
\( 1M \) HCl अम्ल को रखने के लिए पात्र:
ऐलुमिनियम \( Al \) का \( E^\circ AI^{3+}/Al = -1.66 V \) है।
चाँदी \( Ag \) का \( E^\circ Ag^{+}/Ag = +0.80 V \) है।
हाइड्रोजन \( H_2 \) का मानक अपचयन विभव \( 0.00 V \) होता है।
ऐलुमिनियम का अपचयन विभव हाइड्रोजन से बहुत कम \( (-1.66 V) \) है, जिसका मतलब है कि ऐलुमिनियम हाइड्रोजन से अधिक क्रियाशील है और HCl से अभिक्रिया करके हाइड्रोजन गैस मुक्त करेगा। इसलिए, ऐलुमिनियम के पात्र में HCl नहीं रखा जा सकता।
चाँदी का अपचयन विभव हाइड्रोजन से अधिक \( (+0.80 V) \) है, जिसका मतलब है कि चाँदी हाइड्रोजन से कम क्रियाशील है और HCl से अभिक्रिया नहीं करेगी। इसलिए, चाँदी का पात्र HCl अम्ल रखने के लिए उपयुक्त होगा।
In simple words: विद्युत रासायनिक श्रेणी धातुओं की शक्ति दिखाती है। जिस धातु का अपचयन विभव कम होता है, वह ज्यादा क्रियाशील होती है। एल्युमिनियम अम्ल के साथ क्रिया करता है, इसलिए उसमें HCl नहीं रख सकते। चांदी अम्ल के साथ क्रिया नहीं करती, इसलिए चांदी के पात्र में HCl रखना सुरक्षित है।

🎯 Exam Tip: विद्युत रासायनिक श्रेणी में ऊपर वाली धातुएं नीचे वाली धातुओं की तुलना में अधिक क्रियाशील होती हैं और उन्हें उनके लवण विलयनों से विस्थापित कर सकती हैं.

 

Question 35. निम्नलिखित समीकरणों को आयन इलेक्ट्रॉन विधि द्वारा संतुलित कीजिए-
(i) \( MnO_4^- + SO_3^{2-} \rightarrow Mn^{2+} + SO_4^{2-} \)
(ii) \( Cr_2O_7^{2-} + H^+ + I^- \rightarrow Cr^{3+} + H_2O + I_2 \) (अम्लीय माध्यम में)
(iii) \( Cl_2 + OH^- \rightarrow Cl^- + ClO_3^- \)
(iv) \( N_2H_4 + ClO_3^- \rightarrow NO + Cl^- \) (अम्लीय माध्यम में)
Answer: आयन इलेक्ट्रॉन विधि से समीकरणों को संतुलित करने के लिए हमें ऑक्सीकरण और अपचयन की आधी-अभिक्रियाओं को अलग-अलग करना होगा, फिर परमाणु और आवेश को संतुलित करना होगा।
(i) \( MnO_4^- + SO_3^{2-} \rightarrow Mn^{2+} + SO_4^{2-} \)
ऑक्सीकरण आधी-अभिक्रिया: \( SO_3^{2-} \rightarrow SO_4^{2-} \)
ऑक्सीजन परमाणुओं को संतुलित करने के लिए जल \( (H_2O) \) जोड़ें: \( SO_3^{2-} + H_2O \rightarrow SO_4^{2-} \)
हाइड्रोजन परमाणुओं को संतुलित करने के लिए \( H^+ \) जोड़ें: \( SO_3^{2-} + H_2O \rightarrow SO_4^{2-} + 2H^+ \)
आवेश को संतुलित करने के लिए इलेक्ट्रॉन जोड़ें: \( SO_3^{2-} + H_2O \rightarrow SO_4^{2-} + 2H^+ + 2e^- \) ...(2)
अपचयन आधी-अभिक्रिया: \( MnO_4^- \rightarrow Mn^{2+} \)
ऑक्सीजन परमाणुओं को संतुलित करने के लिए जल \( (H_2O) \) जोड़ें: \( MnO_4^- \rightarrow Mn^{2+} + 4H_2O \)
हाइड्रोजन परमाणुओं को संतुलित करने के लिए \( H^+ \) जोड़ें: \( MnO_4^- + 8H^+ \rightarrow Mn^{2+} + 4H_2O \)
आवेश को संतुलित करने के लिए इलेक्ट्रॉन जोड़ें: \( MnO_4^- + 8H^+ + 5e^- \rightarrow Mn^{2+} + 4H_2O \) ...(1)
समीकरण (1) को 2 से और समीकरण (2) को 5 से गुणा करके दोनों को जोड़ने पर:
\( 2(MnO_4^- + 8H^+ + 5e^- \rightarrow Mn^{2+} + 4H_2O) \)
\( 5(SO_3^{2-} + H_2O \rightarrow SO_4^{2-} + 2H^+ + 2e^-) \)
\( \implies 2MnO_4^- + 16H^+ + 10e^- \rightarrow 2Mn^{2+} + 8H_2O \)
\( \implies 5SO_3^{2-} + 5H_2O \rightarrow 5SO_4^{2-} + 10H^+ + 10e^- \)
इन दोनों को जोड़ने पर, इलेक्ट्रॉनों और कुछ \( H^+ \) और \( H_2O \) अणु कट जाते हैं।
अंतिम संतुलित समीकरण: \( 2MnO_4^- + 5SO_3^{2-} + 6H^+ \rightarrow 2Mn^{2+} + 5SO_4^{2-} + 3H_2O \)
(ii) \( Cr_2O_7^{2-} + H^+ + I^- \rightarrow Cr^{3+} + H_2O + I_2 \) (अम्लीय माध्यम में)
अपचयन आधी-अभिक्रिया: \( Cr_2O_7^{2-} \rightarrow Cr^{3+} \)
क्रोमियम परमाणुओं को संतुलित करें: \( Cr_2O_7^{2-} \rightarrow 2Cr^{3+} \)
ऑक्सीजन परमाणुओं को संतुलित करने के लिए जल \( (H_2O) \) जोड़ें: \( Cr_2O_7^{2-} \rightarrow 2Cr^{3+} + 7H_2O \)
हाइड्रोजन परमाणुओं को संतुलित करने के लिए \( H^+ \) जोड़ें: \( Cr_2O_7^{2-} + 14H^+ \rightarrow 2Cr^{3+} + 7H_2O \)
आवेश को संतुलित करने के लिए इलेक्ट्रॉन जोड़ें: \( Cr_2O_7^{2-} + 14H^+ + 6e^- \rightarrow 2Cr^{3+} + 7H_2O \) ...(1)
ऑक्सीकरण आधी-अभिक्रिया: \( I^- \rightarrow I_2 \)
आयोडीन परमाणुओं को संतुलित करें: \( 2I^- \rightarrow I_2 \)
आवेश को संतुलित करने के लिए इलेक्ट्रॉन जोड़ें: \( 2I^- \rightarrow I_2 + 2e^- \) ...(2)
समीकरण (1) को 1 से और समीकरण (2) को 3 से गुणा करके दोनों को जोड़ने पर:
\( 1(Cr_2O_7^{2-} + 14H^+ + 6e^- \rightarrow 2Cr^{3+} + 7H_2O) \)
\( 3(2I^- \rightarrow I_2 + 2e^-) \)
\( \implies Cr_2O_7^{2-} + 14H^+ + 6e^- \rightarrow 2Cr^{3+} + 7H_2O \)
\( \implies 6I^- \rightarrow 3I_2 + 6e^- \)
इलेक्ट्रॉनों को काटने के लिए दोनों समीकरणों को जोड़ें:
अंतिम संतुलित समीकरण: \( Cr_2O_7^{2-} + 14H^+ + 6I^- \rightarrow 2Cr^{3+} + 3I_2 + 7H_2O \)
(iii) \( Cl_2 + OH^- \rightarrow Cl^- + ClO_3^- + H_2O \) (क्षारीय माध्यम)
ऑक्सीकरण आधी-अभिक्रिया: \( Cl_2 \rightarrow ClO_3^- \)
क्लोरीन परमाणुओं को संतुलित करें: \( Cl_2 \rightarrow 2ClO_3^- \)
ऑक्सीजन परमाणुओं को संतुलित करने के लिए जल \( (H_2O) \) जोड़ें: \( Cl_2 + 6H_2O \rightarrow 2ClO_3^- \)
हाइड्रोजन परमाणुओं को संतुलित करने के लिए \( OH^- \) जोड़ें (क्षारीय माध्यम): \( Cl_2 + 6H_2O + 12OH^- \rightarrow 2ClO_3^- + 12H_2O \)
\( \implies Cl_2 + 12OH^- \rightarrow 2ClO_3^- + 6H_2O \)
आवेश को संतुलित करने के लिए इलेक्ट्रॉन जोड़ें: \( Cl_2 + 12OH^- \rightarrow 2ClO_3^- + 6H_2O + 10e^- \) ...(1)
अपचयन आधी-अभिक्रिया: \( Cl_2 \rightarrow Cl^- \)
क्लोरीन परमाणुओं को संतुलित करें: \( Cl_2 \rightarrow 2Cl^- \)
आवेश को संतुलित करने के लिए इलेक्ट्रॉन जोड़ें: \( Cl_2 + 2e^- \rightarrow 2Cl^- \) ...(2)
समीकरण (1) को 1 से और समीकरण (2) को 5 से गुणा करके दोनों को जोड़ने पर:
\( 1(Cl_2 + 12OH^- \rightarrow 2ClO_3^- + 6H_2O + 10e^-) \)
\( 5(Cl_2 + 2e^- \rightarrow 2Cl^-) \)
\( \implies Cl_2 + 12OH^- \rightarrow 2ClO_3^- + 6H_2O + 10e^- \)
\( \implies 5Cl_2 + 10e^- \rightarrow 10Cl^- \)
इलेक्ट्रॉनों को काटने के लिए दोनों समीकरणों को जोड़ें:
अंतिम संतुलित समीकरण: \( 6Cl_2 + 12OH^- \rightarrow 10Cl^- + 2ClO_3^- + 6H_2O \)
सरल करने पर (2 से भाग देने पर): \( 3Cl_2 + 6OH^- \rightarrow 5Cl^- + ClO_3^- + 3H_2O \)
(iv) \( N_2H_4 + ClO_3^- \rightarrow NO + Cl^- \) (अम्लीय माध्यम में)
ऑक्सीकरण आधी-अभिक्रिया: \( N_2H_4 \rightarrow NO \)
नाइट्रोजन परमाणुओं को संतुलित करें: \( N_2H_4 \rightarrow 2NO \)
ऑक्सीजन परमाणुओं को संतुलित करने के लिए जल \( (H_2O) \) जोड़ें: \( N_2H_4 + 2H_2O \rightarrow 2NO \)
हाइड्रोजन परमाणुओं को संतुलित करने के लिए \( H^+ \) जोड़ें: \( N_2H_4 + 2H_2O \rightarrow 2NO + 8H^+ \)
आवेश को संतुलित करने के लिए इलेक्ट्रॉन जोड़ें: \( N_2H_4 + 2H_2O \rightarrow 2NO + 8H^+ + 8e^- \) ...(a)
अपचयन आधी-अभिक्रिया: \( ClO_3^- \rightarrow Cl^- \)
ऑक्सीजन परमाणुओं को संतुलित करने के लिए जल \( (H_2O) \) जोड़ें: \( ClO_3^- \rightarrow Cl^- + 3H_2O \)
हाइड्रोजन परमाणुओं को संतुलित करने के लिए \( H^+ \) जोड़ें: \( ClO_3^- + 6H^+ \rightarrow Cl^- + 3H_2O \)
आवेश को संतुलित करने के लिए इलेक्ट्रॉन जोड़ें: \( ClO_3^- + 6H^+ + 6e^- \rightarrow Cl^- + 3H_2O \) ...(b)
समीकरण (a) को 3 से और समीकरण (b) को 4 से गुणा करके दोनों को जोड़ने पर:
\( 3(N_2H_4 + 2H_2O \rightarrow 2NO + 8H^+ + 8e^-) \)
\( 4(ClO_3^- + 6H^+ + 6e^- \rightarrow Cl^- + 3H_2O) \)
\( \implies 3N_2H_4 + 6H_2O \rightarrow 6NO + 24H^+ + 24e^- \)
\( \implies 4ClO_3^- + 24H^+ + 24e^- \rightarrow 4Cl^- + 12H_2O \)
इलेक्ट्रॉनों, \( H^+ \) और \( H_2O \) को काटने के लिए दोनों समीकरणों को जोड़ें:
अंतिम संतुलित समीकरण: \( 3N_2H_4 + 4ClO_3^- \rightarrow 6NO + 4Cl^- + 6H_2O \)
In simple words: आयन इलेक्ट्रॉन विधि में, हम पहले रासायनिक समीकरणों को दो हिस्सों (ऑक्सीकरण और अपचयन) में बांटते हैं। फिर, हम ऑक्सीजन परमाणुओं को जल से, हाइड्रोजन परमाणुओं को \( H^+ \) (अम्लीय माध्यम में) या \( OH^- \) (क्षारीय माध्यम में) से संतुलित करते हैं, और अंत में आवेश को इलेक्ट्रॉनों से संतुलित करते हैं। आखिर में, हम दोनों हिस्सों को जोड़कर कुल समीकरण को संतुलित करते हैं।

🎯 Exam Tip: अम्लीय माध्यम में \( H^+ \) और \( H_2O \) का उपयोग करें, जबकि क्षारीय माध्यम में \( OH^- \) और \( H_2O \) का उपयोग करें। यह सुनिश्चित करें कि अंत में इलेक्ट्रॉन संतुलित हो जाएं।

 

Question 36. आयन इलेक्ट्रॉन विधि द्वारा निम्न अभिक्रियाओं को संतुलित कीजिए:
(i) \( NO_3^- + H^+ + I^- \rightarrow NO + I_2 + H_2O \)
(ii) \( CrO_4^{2-} + OH^- + SO_3^{2-} \rightarrow CrO_2^- + SO_4^{2-} \)
(iii) \( MnO_4^- + Fe_3O_4 + OH^- \rightarrow Fe_2O_3 + MnO_2 \)
(iv) \( P_4 + OH^- \rightarrow PH_3 + H_2PO_2^- \)
Answer: आयन इलेक्ट्रॉन विधि में, हमें ऑक्सीकरण और अपचयन की आधी-अभिक्रियाओं को अलग-अलग करके, फिर परमाणुओं और आवेश को संतुलित करना होता है।
(i) \( NO_3^- + H^+ + I^- \rightarrow NO + I_2 + H_2O \)
ऑक्सीकरण आधी-अभिक्रिया: \( I^- \rightarrow I_2 \)
परमाणुओं को संतुलित करें: \( 2I^- \rightarrow I_2 \)
आवेश को संतुलित करें: \( 2I^- \rightarrow I_2 + 2e^- \) ...(2)
अपचयन आधी-अभिक्रिया: \( NO_3^- \rightarrow NO \)
ऑक्सीजन को जल से संतुलित करें: \( NO_3^- \rightarrow NO + 2H_2O \)
हाइड्रोजन को \( H^+ \) से संतुलित करें: \( NO_3^- + 4H^+ \rightarrow NO + 2H_2O \)
आवेश को संतुलित करें: \( NO_3^- + 4H^+ + 3e^- \rightarrow NO + 2H_2O \) ...(1)
समीकरण (1) को 2 से और समीकरण (2) को 3 से गुणा करके दोनों को जोड़ने पर:
\( 2(NO_3^- + 4H^+ + 3e^- \rightarrow NO + 2H_2O) \)
\( 3(2I^- \rightarrow I_2 + 2e^-) \)
\( \implies 2NO_3^- + 8H^+ + 6e^- \rightarrow 2NO + 4H_2O \)
\( \implies 6I^- \rightarrow 3I_2 + 6e^- \)
इलेक्ट्रॉनों को काटने के लिए दोनों समीकरणों को जोड़ें:
अंतिम संतुलित समीकरण: \( 2NO_3^- + 8H^+ + 6I^- \rightarrow 2NO + 3I_2 + 4H_2O \)
(ii) \( CrO_4^{2-} + OH^- + SO_3^{2-} \rightarrow CrO_2^- + SO_4^{2-} \)
ऑक्सीकरण आधी-अभिक्रिया: \( SO_3^{2-} \rightarrow SO_4^{2-} \)
ऑक्सीजन को जल से संतुलित करें: \( SO_3^{2-} + H_2O \rightarrow SO_4^{2-} \)
हाइड्रोजन को \( OH^- \) से संतुलित करें: \( SO_3^{2-} + H_2O + 2OH^- \rightarrow SO_4^{2-} + 2H_2O \)
\( \implies SO_3^{2-} + 2OH^- \rightarrow SO_4^{2-} + H_2O \)
आवेश को संतुलित करें: \( SO_3^{2-} + 2OH^- \rightarrow SO_4^{2-} + H_2O + 2e^- \) ...(2)
अपचयन आधी-अभिक्रिया: \( CrO_4^{2-} \rightarrow CrO_2^- \)
ऑक्सीजन को जल से संतुलित करें: \( CrO_4^{2-} \rightarrow CrO_2^- + 2H_2O \)
हाइड्रोजन को \( OH^- \) से संतुलित करें: \( CrO_4^{2-} + 4H_2O \rightarrow CrO_2^- + 2H_2O + 4OH^- \)
\( \implies CrO_4^{2-} + 2H_2O \rightarrow CrO_2^- + 4OH^- \)
आवेश को संतुलित करें: \( CrO_4^{2-} + 2H_2O + 3e^- \rightarrow CrO_2^- + 4OH^- \) ...(1)
समीकरण (1) को 2 से और समीकरण (2) को 3 से गुणा करके दोनों को जोड़ने पर:
\( 2(CrO_4^{2-} + 2H_2O + 3e^- \rightarrow CrO_2^- + 4OH^-) \)
\( 3(SO_3^{2-} + 2OH^- \rightarrow SO_4^{2-} + H_2O + 2e^-) \)
\( \implies 2CrO_4^{2-} + 4H_2O + 6e^- \rightarrow 2CrO_2^- + 8OH^- \)
\( \implies 3SO_3^{2-} + 6OH^- \rightarrow 3SO_4^{2-} + 3H_2O + 6e^- \)
इलेक्ट्रॉनों, \( OH^- \) और \( H_2O \) को काटने के लिए दोनों समीकरणों को जोड़ें:
अंतिम संतुलित समीकरण: \( 2CrO_4^{2-} + 3SO_3^{2-} + H_2O \rightarrow 2CrO_2^- + 3SO_4^{2-} + 2OH^- \)
(iii) \( MnO_4^- + Fe_3O_4 + OH^- \rightarrow Fe_2O_3 + MnO_2 \)
ऑक्सीकरण आधी-अभिक्रिया: \( Fe_3O_4 \rightarrow Fe_2O_3 \)
आयरन परमाणुओं को संतुलित करें: \( 2Fe_3O_4 \rightarrow 3Fe_2O_3 \)
ऑक्सीजन को जल से संतुलित करें: \( 2Fe_3O_4 + H_2O \rightarrow 3Fe_2O_3 \)
हाइड्रोजन को \( OH^- \) से संतुलित करें: \( 2Fe_3O_4 + H_2O + 2OH^- \rightarrow 3Fe_2O_3 + 2H_2O \)
\( \implies 2Fe_3O_4 + 2OH^- \rightarrow 3Fe_2O_3 + H_2O \)
आवेश को संतुलित करें: \( 2Fe_3O_4 + 2OH^- \rightarrow 3Fe_2O_3 + H_2O + 2e^- \) ...(2)
अपचयन आधी-अभिक्रिया: \( MnO_4^- \rightarrow MnO_2 \)
ऑक्सीजन को जल से संतुलित करें: \( MnO_4^- \rightarrow MnO_2 + 2H_2O \)
हाइड्रोजन को \( OH^- \) से संतुलित करें: \( MnO_4^- + 4H_2O \rightarrow MnO_2 + 2H_2O + 4OH^- \)
\( \implies MnO_4^- + 2H_2O \rightarrow MnO_2 + 4OH^- \)
आवेश को संतुलित करें: \( MnO_4^- + 2H_2O + 3e^- \rightarrow MnO_2 + 4OH^- \) ...(1)
समीकरण (1) को 2 से और समीकरण (2) को 3 से गुणा करके दोनों को जोड़ने पर:
\( 2(MnO_4^- + 2H_2O + 3e^- \rightarrow MnO_2 + 4OH^-) \)
\( 3(2Fe_3O_4 + 2OH^- \rightarrow 3Fe_2O_3 + H_2O + 2e^-) \)
\( \implies 2MnO_4^- + 4H_2O + 6e^- \rightarrow 2MnO_2 + 8OH^- \)
\( \implies 6Fe_3O_4 + 6OH^- \rightarrow 9Fe_2O_3 + 3H_2O + 6e^- \)
इलेक्ट्रॉनों, \( OH^- \) और \( H_2O \) को काटने के लिए दोनों समीकरणों को जोड़ें:
अंतिम संतुलित समीकरण: \( 2MnO_4^- + 6Fe_3O_4 + H_2O \rightarrow 2MnO_2 + 9Fe_2O_3 + 2OH^- \)
(iv) \( P_4 + OH^- \rightarrow PH_3 + H_2PO_2^- \)
ऑक्सीकरण आधी-अभिक्रिया: \( P_4 \rightarrow H_2PO_2^- \)
परमाणुओं को संतुलित करें: \( P_4 \rightarrow 4H_2PO_2^- \)
ऑक्सीजन को जल से संतुलित करें: \( P_4 + 8H_2O \rightarrow 4H_2PO_2^- \)
हाइड्रोजन को \( OH^- \) से संतुलित करें: \( P_4 + 8H_2O + 8OH^- \rightarrow 4H_2PO_2^- + 16H_2O \)
\( \implies P_4 + 8OH^- \rightarrow 4H_2PO_2^- + 4H_2O \)
आवेश को संतुलित करें: \( P_4 + 8OH^- \rightarrow 4H_2PO_2^- + 4H_2O + 4e^- \) ...(1)
अपचयन आधी-अभिक्रिया: \( P_4 \rightarrow PH_3 \)
परमाणुओं को संतुलित करें: \( P_4 \rightarrow 4PH_3 \)
हाइड्रोजन को \( OH^- \) से संतुलित करें: \( P_4 + 12H_2O + 12OH^- \rightarrow 4PH_3 + 12H_2O \)
\( \implies P_4 + 12H_2O \rightarrow 4PH_3 + 12OH^- \) (क्षारीय माध्यम के लिए \( H_2O \) और \( OH^- \) का उपयोग करके)
आवेश को संतुलित करें: \( P_4 + 12H_2O + 12e^- \rightarrow 4PH_3 + 12OH^- \) ...(2)
समीकरण (1) को 3 से और समीकरण (2) को 1 से गुणा करके दोनों को जोड़ने पर:
\( 3(P_4 + 8OH^- \rightarrow 4H_2PO_2^- + 4H_2O + 4e^-) \)
\( 1(P_4 + 12H_2O + 12e^- \rightarrow 4PH_3 + 12OH^-) \)
\( \implies 3P_4 + 24OH^- \rightarrow 12H_2PO_2^- + 12H_2O + 12e^- \)
\( \implies P_4 + 12H_2O + 12e^- \rightarrow 4PH_3 + 12OH^- \)
इलेक्ट्रॉनों, \( OH^- \) और \( H_2O \) को काटने के लिए दोनों समीकरणों को जोड़ें:
अंतिम संतुलित समीकरण: \( 4P_4 + 12OH^- + 12H_2O \rightarrow 12H_2PO_2^- + 4PH_3 \)
इसे सरल करने पर (4 से भाग देने पर): \( P_4 + 3OH^- + 3H_2O \rightarrow 3H_2PO_2^- + PH_3 \)
In simple words: आयन इलेक्ट्रॉन विधि में, हम पहले रासायनिक समीकरणों को दो हिस्सों में बांटते हैं (एक ऑक्सीकरण और एक अपचयन)। फिर, हम ऑक्सीजन को जल से, हाइड्रोजन को \( H^+ \) या \( OH^- \) से, और अंत में आवेश को इलेक्ट्रॉनों से संतुलित करते हैं। आखिर में, हम दोनों हिस्सों को जोड़कर कुल समीकरण को संतुलित करते हैं। यह एक व्यवस्थित तरीका है जिससे रासायनिक प्रतिक्रियाओं में पदार्थ के संरक्षण को सुनिश्चित किया जाता है।

🎯 Exam Tip: क्षारीय माध्यम में \( OH^- \) आयनों का उपयोग करते समय, \( H_2O \) को विपरीत तरफ जोड़ना न भूलें। हमेशा आवेश और परमाणुओं को दो बार जांचें.

 

Question 37. निम्नलिखित समीकरणों को आयन इलेक्ट्रॉन विधि द्वारा सन्तुलित कीजिए-
(i) \( MnO_4^- + H_2O_2 \rightarrow MnO_2 + O_2 + OH^- \)
(ii) \( AsO_3^{3-} + I_2 + H_2O \rightarrow AsO_4^{3-} + H^+ + I^- \)
(iii) \( Cl_2O_7 + H_2O_2 \rightarrow ClO_2^- + O_2 \) (क्षारीय माध्यम)
(iv) \( Cr_2O_7^{2-} (aq) + SO_2 (aq) \rightarrow Cr^{3+} (aq) + SO_4^{2-} (aq) \) (अम्लीय माध्यम)
Answer: आयन इलेक्ट्रॉन विधि से समीकरणों को संतुलित करने के लिए ऑक्सीकरण और अपचयन की आधी-अभिक्रियाओं को अलग-अलग करना होगा, फिर परमाणु और आवेश को संतुलित करना होगा।
(i) \( MnO_4^- + H_2O_2 \rightarrow MnO_2 + O_2 + OH^- \)
ऑक्सीकरण आधी-अभिक्रिया: \( H_2O_2 \rightarrow O_2 \)
हाइड्रोजन को \( OH^- \) से संतुलित करें: \( H_2O_2 + 2OH^- \rightarrow O_2 + 2H_2O \)
आवेश को संतुलित करें: \( H_2O_2 + 2OH^- \rightarrow O_2 + 2H_2O + 2e^- \) ...(2)
अपचयन आधी-अभिक्रिया: \( MnO_4^- \rightarrow MnO_2 \)
ऑक्सीजन को जल से संतुलित करें: \( MnO_4^- \rightarrow MnO_2 + 2H_2O \)
हाइड्रोजन को \( OH^- \) से संतुलित करें: \( MnO_4^- + 4H_2O \rightarrow MnO_2 + 2H_2O + 4OH^- \)
\( \implies MnO_4^- + 2H_2O \rightarrow MnO_2 + 4OH^- \)
आवेश को संतुलित करें: \( MnO_4^- + 2H_2O + 3e^- \rightarrow MnO_2 + 4OH^- \) ...(1)
समीकरण (1) को 2 से और समीकरण (2) को 3 से गुणा करके दोनों को जोड़ने पर:
\( 2(MnO_4^- + 2H_2O + 3e^- \rightarrow MnO_2 + 4OH^-) \)
\( 3(H_2O_2 + 2OH^- \rightarrow O_2 + 2H_2O + 2e^-) \)
\( \implies 2MnO_4^- + 4H_2O + 6e^- \rightarrow 2MnO_2 + 8OH^- \)
\( \implies 3H_2O_2 + 6OH^- \rightarrow 3O_2 + 6H_2O + 6e^- \)
इलेक्ट्रॉनों, \( OH^- \) और \( H_2O \) को काटने के लिए दोनों समीकरणों को जोड़ें:
अंतिम संतुलित समीकरण: \( 2MnO_4^- + 3H_2O_2 \rightarrow 2MnO_2 + 3O_2 + 2H_2O + 2OH^- \)
(ii) \( AsO_3^{3-} + I_2 + H_2O \rightarrow AsO_4^{3-} + H^+ + I^- \)
ऑक्सीकरण आधी-अभिक्रिया: \( AsO_3^{3-} \rightarrow AsO_4^{3-} \)
ऑक्सीजन को जल से संतुलित करें: \( AsO_3^{3-} + H_2O \rightarrow AsO_4^{3-} \)
हाइड्रोजन को \( H^+ \) से संतुलित करें: \( AsO_3^{3-} + H_2O \rightarrow AsO_4^{3-} + 2H^+ \)
आवेश को संतुलित करें: \( AsO_3^{3-} + H_2O \rightarrow AsO_4^{3-} + 2H^+ + 2e^- \) ...(1)
अपचयन आधी-अभिक्रिया: \( I_2 \rightarrow I^- \)
परमाणुओं को संतुलित करें: \( I_2 \rightarrow 2I^- \)
आवेश को संतुलित करें: \( I_2 + 2e^- \rightarrow 2I^- \) ...(2)
समीकरण (1) को 1 से और समीकरण (2) को 1 से गुणा करके दोनों को जोड़ने पर:
\( 1(AsO_3^{3-} + H_2O \rightarrow AsO_4^{3-} + 2H^+ + 2e^-) \)
\( 1(I_2 + 2e^- \rightarrow 2I^-) \)
इलेक्ट्रॉनों को काटने के लिए दोनों समीकरणों को जोड़ें:
अंतिम संतुलित समीकरण: \( AsO_3^{3-} + I_2 + H_2O \rightarrow AsO_4^{3-} + 2H^+ + 2I^- \)
(iii) \( Cl_2O_7 + H_2O_2 \rightarrow ClO_2^- + O_2 \) (क्षारीय माध्यम)
अपचयन आधी-अभिक्रिया: \( Cl_2O_7 \rightarrow ClO_2^- \)
क्लोरीन परमाणुओं को संतुलित करें: \( Cl_2O_7 \rightarrow 2ClO_2^- \)
ऑक्सीजन परमाणुओं को संतुलित करें (जल से): \( Cl_2O_7 \rightarrow 2ClO_2^- + 3H_2O \)
हाइड्रोजन परमाणुओं को संतुलित करें (\( OH^- \) से): \( Cl_2O_7 + 6H_2O \rightarrow 2ClO_2^- + 3H_2O + 6OH^- \)
\( \implies Cl_2O_7 + 3H_2O \rightarrow 2ClO_2^- + 6OH^- \)
आवेश को संतुलित करें: \( Cl_2O_7 + 3H_2O + 8e^- \rightarrow 2ClO_2^- + 6OH^- \) ...(1)
ऑक्सीकरण आधी-अभिक्रिया: \( H_2O_2 \rightarrow O_2 \)
हाइड्रोजन परमाणुओं को संतुलित करें (\( OH^- \) से): \( H_2O_2 + 2OH^- \rightarrow O_2 + 2H_2O \)
आवेश को संतुलित करें: \( H_2O_2 + 2OH^- \rightarrow O_2 + 2H_2O + 2e^- \) ...(2)
समीकरण (1) को 1 से और समीकरण (2) को 4 से गुणा करके दोनों को जोड़ने पर:
\( 1(Cl_2O_7 + 3H_2O + 8e^- \rightarrow 2ClO_2^- + 6OH^-) \)
\( 4(H_2O_2 + 2OH^- \rightarrow O_2 + 2H_2O + 2e^-) \)
\( \implies Cl_2O_7 + 3H_2O + 8e^- \rightarrow 2ClO_2^- + 6OH^- \)
\( \implies 4H_2O_2 + 8OH^- \rightarrow 4O_2 + 8H_2O + 8e^- \)
इलेक्ट्रॉनों, \( OH^- \) और \( H_2O \) को काटने के लिए दोनों समीकरणों को जोड़ें:
अंतिम संतुलित समीकरण: \( Cl_2O_7 + 4H_2O_2 + 2OH^- \rightarrow 2ClO_2^- + 4O_2 + 5H_2O \)
(iv) \( Cr_2O_7^{2-} (aq) + SO_2 (aq) \rightarrow Cr^{3+} (aq) + SO_4^{2-} (aq) \) (अम्लीय माध्यम)
ऑक्सीकरण आधी-अभिक्रिया: \( SO_2 (aq) \rightarrow SO_4^{2-} (aq) \)
ऑक्सीजन को जल से संतुलित करें: \( SO_2 + 2H_2O \rightarrow SO_4^{2-} \)
हाइड्रोजन को \( H^+ \) से संतुलित करें: \( SO_2 + 2H_2O \rightarrow SO_4^{2-} + 4H^+ \)
आवेश को संतुलित करें: \( SO_2 + 2H_2O \rightarrow SO_4^{2-} + 4H^+ + 2e^- \) ...(a)
अपचयन आधी-अभिक्रिया: \( Cr_2O_7^{2-} (aq) \rightarrow Cr^{3+} (aq) \)
क्रोमियम परमाणुओं को संतुलित करें: \( Cr_2O_7^{2-} \rightarrow 2Cr^{3+} \)
ऑक्सीजन को जल से संतुलित करें: \( Cr_2O_7^{2-} \rightarrow 2Cr^{3+} + 7H_2O \)
हाइड्रोजन को \( H^+ \) से संतुलित करें: \( Cr_2O_7^{2-} + 14H^+ \rightarrow 2Cr^{3+} + 7H_2O \)
आवेश को संतुलित करें: \( Cr_2O_7^{2-} + 14H^+ + 6e^- \rightarrow 2Cr^{3+} + 7H_2O \) ...(b)
समीकरण (a) को 3 से और समीकरण (b) को 1 से गुणा करके दोनों को जोड़ने पर:
\( 3(SO_2 + 2H_2O \rightarrow SO_4^{2-} + 4H^+ + 2e^-) \)
\( 1(Cr_2O_7^{2-} + 14H^+ + 6e^- \rightarrow 2Cr^{3+} + 7H_2O) \)
\( \implies 3SO_2 + 6H_2O \rightarrow 3SO_4^{2-} + 12H^+ + 6e^- \)
\( \implies Cr_2O_7^{2-} + 14H^+ + 6e^- \rightarrow 2Cr^{3+} + 7H_2O \)
इलेक्ट्रॉनों, \( H^+ \) और \( H_2O \) को काटने के लिए दोनों समीकरणों को जोड़ें:
अंतिम संतुलित समीकरण: \( Cr_2O_7^{2-} (aq) + 3SO_2 (aq) + 2H^+ (aq) \rightarrow 2Cr^{3+} (aq) + 3SO_4^{2-} (aq) + H_2O(l) \)
In simple words: रेडॉक्स अभिक्रियाओं को संतुलित करने के लिए, हमें यह देखना होता है कि कौन सा पदार्थ इलेक्ट्रॉन दे रहा है (ऑक्सीकरण) और कौन सा ले रहा है (अपचयन)। फिर, हम ऑक्सीजन और हाइड्रोजन परमाणुओं को जल और \( H^+ \) या \( OH^- \) से संतुलित करते हैं, और अंत में इलेक्ट्रॉनों की संख्या को बराबर करते हैं ताकि कुल आवेश भी संतुलित हो जाए।

🎯 Exam Tip: सुनिश्चित करें कि आप अम्लीय और क्षारीय माध्यमों के लिए सही संतुलन विधि का उपयोग करते हैं, खासकर \( H^+ \) या \( OH^- \) और \( H_2O \) को जोड़ते समय.

 

Question 38. निम्नलिखित यौगिकों में निर्दिष्ट तत्व का ऑक्सीकरण अंक ज्ञात कीजिए:
(i) FeSO4 में (Fe) का
(ii) Fe(CO)5 में (Fe) का
(iii) H2PO3 में P का
(iv) H2S2O7 में S का
(v) C12H22O11
(vi) NaH2PO2 में P का
Answer: ऑक्सीकरण अंक एक तत्व पर लगने वाला काल्पनिक आवेश है जब यौगिक में सभी बंधन आयनिक माने जाते हैं।
(i) \( FeSO_4 \) में \( Fe \) का:
हम जानते हैं कि \( SO_4^{2-} \) का ऑक्सीकरण अंक \( -2 \) होता है।
\( Fe + (-2) = 0 \)
\( Fe = +2 \)
अतः \( FeSO_4 \) में \( Fe \) का ऑक्सीकरण अंक \( +2 \) है।
(ii) \( Fe(CO)_5 \) में \( Fe \) का:
हम जानते हैं कि \( CO \) एक उदासीन लिगैंड है, इसलिए इसका ऑक्सीकरण अंक \( 0 \) होता है।
\( Fe + 5(0) = 0 \)
\( Fe = 0 \)
अतः \( Fe(CO)_5 \) में \( Fe \) का ऑक्सीकरण अंक \( 0 \) है।
(iii) \( H_3PO_3 \) में \( P \) का:
हम जानते हैं कि \( H \) का ऑक्सीकरण अंक \( +1 \) और \( O \) का \( -2 \) होता है।
\( 3(+1) + P + 3(-2) = 0 \)
\( 3 + P - 6 = 0 \)
\( P - 3 = 0 \)
\( P = +3 \)
अतः \( H_3PO_3 \) में \( P \) का ऑक्सीकरण अंक \( +3 \) है।
(iv) \( H_2S_2O_7 \) में \( S \) का:
हम जानते हैं कि \( H \) का \( +1 \) और \( O \) का \( -2 \) होता है।
\( 2(+1) + 2S + 7(-2) = 0 \)
\( 2 + 2S - 14 = 0 \)
\( 2S - 12 = 0 \)
\( 2S = 12 \)
\( S = +6 \)
अतः \( H_2S_2O_7 \) में \( S \) का ऑक्सीकरण अंक \( +6 \) है।
(v) \( C_{12}H_{22}O_{11} \) में \( C \) का:
हम जानते हैं कि \( H \) का \( +1 \) और \( O \) का \( -2 \) होता है।
\( 12C + 22(+1) + 11(-2) = 0 \)
\( 12C + 22 - 22 = 0 \)
\( 12C = 0 \)
\( C = 0 \)
अतः \( C_{12}H_{22}O_{11} \) में \( C \) का ऑक्सीकरण अंक \( 0 \) है।
(vi) \( NaH_2PO_2 \) में \( P \) का:
हम जानते हैं कि \( Na \) का \( +1 \), \( H \) का \( +1 \), और \( O \) का \( -2 \) होता है।
\( 1(+1) + 2(+1) + P + 2(-2) = 0 \)
\( 1 + 2 + P - 4 = 0 \)
\( P - 1 = 0 \)
\( P = +1 \)
अतः \( NaH_2PO_2 \) में \( P \) का ऑक्सीकरण अंक \( +1 \) है।
In simple words: ऑक्सीकरण अंक एक संख्या होती है जो दिखाती है कि एक परमाणु ने किसी यौगिक में कितने इलेक्ट्रॉन खोए या प्राप्त किए हैं। हम ज्ञात परमाणुओं के ऑक्सीकरण अंक का उपयोग करके अज्ञात परमाणु का पता लगाते हैं।

🎯 Exam Tip: ऑक्सीकरण अंक ज्ञात करते समय, सामान्य नियमों का पालन करें (जैसे ऑक्सीजन हमेशा -2, हाइड्रोजन +1 होता है, जब तक कि विशेष मामले न हों) और सुनिश्चित करें कि कुल आवेश शून्य हो या आयन के आवेश के बराबर हो.

 

Question 39. निम्नलिखित अभिक्रियाओं में ऑक्सीकारक तथा अपचायक बताइये:
(i) \( 3I_2 + 6NaOH \rightarrow NaIO_3 + 5NaI + 3H_2O \)
(ii) \( AlCl_3 + 3K \rightarrow Al + 3KCl \)
(iii) \( SO_2 + 2H_2S \rightarrow 3S + 2H_2O \)
(iv) \( SnCl_2 + 2FeCl_3 \rightarrow SnCl_4 + 2FeCl_2 \)
Answer: ऑक्सीकारक वह पदार्थ होता है जो दूसरे पदार्थों का ऑक्सीकरण करता है और खुद अपचयित हो जाता है। अपचायक वह पदार्थ होता है जो दूसरे पदार्थों का अपचयन करता है और खुद ऑक्सीकृत हो जाता है।
(i) \( 3I_2 + 6NaOH \rightarrow NaIO_3 + 5NaI + 3H_2O \)
\( I_2 \) में \( I \) का ऑक्सीकरण अंक \( 0 \) है।
\( NaIO_3 \) में \( I \) का ऑक्सीकरण अंक \( +5 \) है।
\( NaI \) में \( I \) का ऑक्सीकरण अंक \( -1 \) है।
यहां, \( I_2 \) का ऑक्सीकरण \( (+5) \) और अपचयन \( (-1) \) दोनों हो रहा है।
अतः \( I_2 \) ऑक्सीकारक और अपचायक दोनों के रूप में कार्य करता है (यह एक रेडॉक्स अभिक्रिया है)।
(ii) \( AlCl_3 + 3K \rightarrow Al + 3KCl \)
\( AlCl_3 \) में \( Al \) का ऑक्सीकरण अंक \( +3 \) है, और \( Al \) में \( 0 \) है।
\( K \) में \( 0 \) है, और \( KCl \) में \( +1 \) है।
यहां \( AlCl_3 \) अपचयित हो रहा है \( (+3 \rightarrow 0) \), इसलिए यह ऑक्सीकारक है।
यहां \( K \) ऑक्सीकृत हो रहा है \( (0 \rightarrow +1) \), इसलिए यह अपचायक है।
अतः \( AlCl_3 \) ऑक्सीकारक है और \( K \) अपचायक है।
(iii) \( SO_2 + 2H_2S \rightarrow 3S + 2H_2O \)
\( SO_2 \) में \( S \) का ऑक्सीकरण अंक \( +4 \) है।
\( H_2S \) में \( S \) का ऑक्सीकरण अंक \( -2 \) है।
उत्पाद \( S \) में \( 0 \) है।
यहां \( SO_2 \) अपचयित हो रहा है \( (+4 \rightarrow 0) \), इसलिए यह ऑक्सीकारक है।
यहां \( H_2S \) ऑक्सीकृत हो रहा है \( (-2 \rightarrow 0) \), इसलिए यह अपचायक है।
अतः \( SO_2 \) ऑक्सीकारक है और \( H_2S \) अपचायक है।
(iv) \( SnCl_2 + 2FeCl_3 \rightarrow SnCl_4 + 2FeCl_2 \)
\( SnCl_2 \) में \( Sn \) का ऑक्सीकरण अंक \( +2 \) है, और \( SnCl_4 \) में \( +4 \) है।
\( FeCl_3 \) में \( Fe \) का ऑक्सीकरण अंक \( +3 \) है, और \( FeCl_2 \) में \( +2 \) है।
यहां \( SnCl_2 \) ऑक्सीकृत हो रहा है \( (+2 \rightarrow +4) \), इसलिए यह अपचायक है।
यहां \( FeCl_3 \) अपचयित हो रहा है \( (+3 \rightarrow +2) \), इसलिए यह ऑक्सीकारक है।
अतः \( SnCl_2 \) अपचायक है और \( FeCl_3 \) ऑक्सीकारक है।
In simple words: ऑक्सीकारक वे रसायन हैं जो दूसरों से इलेक्ट्रॉन लेते हैं, और अपचायक वे रसायन हैं जो दूसरों को इलेक्ट्रॉन देते हैं। जब कोई ऑक्सीकारक इलेक्ट्रॉन लेता है, तो वह स्वयं अपचयित हो जाता है। जब कोई अपचायक इलेक्ट्रॉन देता है, तो वह स्वयं ऑक्सीकृत हो जाता है।

🎯 Exam Tip: ऑक्सीकारक और अपचायक की पहचान करने के लिए प्रत्येक परमाणु के ऑक्सीकरण अंक में परिवर्तन को देखें। ऑक्सीकरण अंक का बढ़ना ऑक्सीकरण (अपचायक द्वारा) और घटना अपचयन (ऑक्सीकारक द्वारा) दर्शाता है.

 

Question 40. निम्नलिखित अभिक्रियाओं में \( H_2O_2 \) किसमें ऑक्सीकारक तथा किसमें अपचायक का कार्य करता है?
(i) \( 2KI + H_2O_2 \rightarrow 2KOH + I_2 \)
(ii) \( Cl_2 + H_2O_2 \rightarrow 2HCl + O_2 \)
Answer: \( H_2O_2 \) (हाइड्रोजन परॉक्साइड) एक ऐसा यौगिक है जो ऑक्सीकारक और अपचायक दोनों के रूप में कार्य कर सकता है, यह इस बात पर निर्भर करता है कि यह किस पदार्थ के साथ अभिक्रिया कर रहा है।
(i) \( 2KI + H_2O_2 \rightarrow 2KOH + I_2 \)
इस अभिक्रिया में, \( I \) का ऑक्सीकरण अंक \( KI \) में \( -1 \) से \( I_2 \) में \( 0 \) हो जाता है, जिसका अर्थ है कि \( I^- \) ऑक्सीकृत हो रहा है।
\( H_2O_2 \) में \( O \) का ऑक्सीकरण अंक \( -1 \) होता है। \( KOH \) में \( O \) का ऑक्सीकरण अंक \( -2 \) होता है।
यहां \( H_2O_2 \) में ऑक्सीजन का ऑक्सीकरण अंक \( -1 \) से \( -2 \) तक घट रहा है, इसलिए \( H_2O_2 \) अपचयित हो रहा है।
अतः इस अभिक्रिया में \( H_2O_2 \) ऑक्सीकारक का कार्य करता है।
(ii) \( Cl_2 + H_2O_2 \rightarrow 2HCl + O_2 \)
इस अभिक्रिया में, \( Cl_2 \) में \( Cl \) का ऑक्सीकरण अंक \( 0 \) से \( HCl \) में \( -1 \) हो जाता है, जिसका अर्थ है कि \( Cl_2 \) अपचयित हो रहा है।
\( H_2O_2 \) में \( O \) का ऑक्सीकरण अंक \( -1 \) होता है। \( O_2 \) में \( O \) का ऑक्सीकरण अंक \( 0 \) होता है।
यहां \( H_2O_2 \) में ऑक्सीजन का ऑक्सीकरण अंक \( -1 \) से \( 0 \) तक बढ़ रहा है, इसलिए \( H_2O_2 \) ऑक्सीकृत हो रहा है।
अतः इस अभिक्रिया में \( H_2O_2 \) अपचायक का कार्य करता है।
In simple words: हाइड्रोजन परॉक्साइड \( (H_2O_2) \) एक खास रसायन है जो कभी इलेक्ट्रॉन ले सकता है (ऑक्सीकारक), और कभी इलेक्ट्रॉन दे सकता है (अपचायक)। यह उस दूसरे रसायन पर निर्भर करता है जिसके साथ यह प्रतिक्रिया कर रहा है।

🎯 Exam Tip: \( H_2O_2 \) की दोहरी भूमिका को समझने के लिए हमेशा अभिक्रिया में भाग लेने वाले अन्य तत्वों के ऑक्सीकरण अंक परिवर्तनों को देखें.

RBSE Class 11 Chemistry Chapter 8 पाठ्यपुस्तक के अभ्यास प्रशन

RBSE Class 11 Chemistry Chapter 8 वस्तुनिष्ठ प्रश्न

 

Question 1. ऑक्सीकरण वह प्रक्रिया है
(अ) जिसमें इलेक्ट्रोन ग्रहण किये जाते हैं।
(ब) जिसमें विद्युत ऋणी तत्त्व का योग होता है।
(स) जिसमें विद्युत धनी तत्त्व योग होता है।
(द) जिसमें ऑक्सीकरण का निष्कासन होता है।
Answer: (ब) जिसमें विद्युत ऋणी तत्त्व का योग होता है।
In simple words: ऑक्सीकरण एक प्रक्रिया है जहाँ एक परमाणु या आयन से इलेक्ट्रॉन निकलते हैं, या एक अधिक इलेक्ट्रोनेगेटिव तत्व जुड़ता है. यह ऑक्सीकरण अवस्था में वृद्धि का संकेत देता है.

🎯 Exam Tip: ऑक्सीकरण की परिभाषा को अच्छी तरह से याद रखें, जिसमें इलेक्ट्रॉन का खोना, ऑक्सीकरण अवस्था में वृद्धि, या विद्युत ऋणी तत्व का जुड़ना शामिल है।

 

Question 2. निम्नलिखित में से कौन से यौगिकों के युग्म में क्रोमियम का ऑक्सीकरण अंक समान है?
(अ) K2CrO4 तथा KCrO2
(ब) KCrO2 तथा Cr(CO)6
(स) [Option text missing in source]
(द) [Option text missing in source]
Answer: (द) [Text for option D missing in source]
In simple words: क्रोमियम की ऑक्सीकरण अवस्था ज्ञात करने के लिए, यौगिक में सभी परमाणुओं के ऑक्सीकरण अंकों का योग शून्य के बराबर रखें। फिर पता करें कि किस जोड़े में क्रोमियम का ऑक्सीकरण अंक समान है।

🎯 Exam Tip: किसी भी यौगिक में एक तत्व का ऑक्सीकरण अंक ज्ञात करने के लिए, यौगिक में सभी परमाणुओं के ऑक्सीकरण अंकों का योग उस यौगिक पर उपस्थित कुल आवेश के बराबर होता है।

 

Question 3. [Question text missing in source]
(अ) शून्य
(ब) + 4
(स) – 4
(द) + 2
Answer: (अ) शून्य
In simple words: यह प्रश्न एक विशिष्ट यौगिक में एक तत्व के ऑक्सीकरण अंक को पहचानने के बारे में है। उत्तर 'शून्य' इंगित करता है कि यह तत्व अपने मौलिक अवस्था में या एक विशिष्ट सममित यौगिक में हो सकता है।

🎯 Exam Tip: मौलिक अवस्था में किसी भी तत्व का ऑक्सीकरण अंक हमेशा शून्य होता है। आयनों के लिए, ऑक्सीकरण अंक आयन पर आवेश के बराबर होता है।

 

Question 4. निम्न अभिक्रिया में \( 2\text{FeCl}_3 + \text{SnCl}_2 \rightarrow 2\text{FeCl}_2 + \text{SnCl}_4 \) अपचयित होने वाला पदार्थ है
(अ) \( \text{Sn}^{+2} \)
(ब) \( \text{Fe}^{+2} \)
(स) \( \text{Sn}^{+4} \)
(द) \( \text{Fe}^{+3} \)
Answer: (द) Fe+3
In simple words: इस अभिक्रिया में, आयरन का ऑक्सीकरण अंक \( \text{Fe}^{+3} \) से \( \text{Fe}^{+2} \) में कम हो जाता है, जिसका मतलब है कि \( \text{Fe}^{+3} \) इलेक्ट्रॉन ग्रहण कर रहा है और अपचयित हो रहा है।

🎯 Exam Tip: ऑक्सीकरण अवस्था में कमी होने पर अपचयन होता है। दिए गए अभिकारक और उत्पादों में प्रत्येक तत्व की ऑक्सीकरण अवस्था की जाँच करके पहचानें कि कौन सा पदार्थ अपचयित हो रहा है।

 

Question 5. निम्न में रेडॉक्स अभिक्रिया है
(अ) \( \text{SnCl}_2 + 2\text{FeCl}_3 \rightarrow \text{SnCl}_4 + 2\text{FeCl}_2 \)
(ब) \( \text{AsNO}_3 + \text{HCl} \rightarrow \text{AsCl} + \text{HNO}_3 \)
(स) \( 2\text{KI} + \text{Pb}(\text{NO}_3)_2 \rightarrow 2\text{KNO}_3 + \text{Pbl}_2 \)
(द) \( \text{BaCl}_2 + \text{H}_2\text{SO}_4 \rightarrow \text{BaSO}_4 + 2\text{HCl} \)
Answer: (अ) SnCl2 + 2FeCl3 → SnCl4 + 2FeCl2
In simple words: रेडॉक्स अभिक्रिया वह होती है जिसमें ऑक्सीकरण और अपचयन दोनों एक साथ होते हैं। विकल्प (अ) में, टिन का ऑक्सीकरण होता है (ऑक्सीकरण अंक बढ़ता है) जबकि आयरन का अपचयन होता है (ऑक्सीकरण अंक घटता है)।

🎯 Exam Tip: रेडॉक्स अभिक्रियाओं को पहचानने के लिए, प्रत्येक तत्व की ऑक्सीकरण अवस्था की जांच करें। यदि किसी तत्व की ऑक्सीकरण अवस्था बढ़ती है और किसी अन्य तत्व की ऑक्सीकरण अवस्था घटती है, तो वह एक रेडॉक्स अभिक्रिया है।

RBSE Class 11 Chemistry Chapter 8 अतिलघूत्तरात्मक प्रश्न

 

Question 6. सेल विभव किसे कहते हैं ?
Answer: किसी बैटरी के दो अर्द्ध-सेलों के बीच उत्पन्न होने वाले वोल्टेज को उस सेल का सेल विभव कहते हैं। यह दो इलेक्ट्रोडों के बीच के विभवांतर को मापता है।
In simple words: सेल विभव वह वोल्टेज है जो एक बैटरी के दो हिस्सों के बीच बनता है।

🎯 Exam Tip: सेल विभव को इलेक्ट्रोड क्षमता में अंतर के रूप में भी समझा जा सकता है, और यह विद्युत रासायनिक सेल को कार्य करने की क्षमता को दर्शाता है।

 

Question 8. समीकरण \( \text{ClO}^- + \text{H}_2\text{O} + x\text{e}^- \rightarrow \text{Cl}^- + 2\text{OH}^- \) में \( x \) का मान कितना होगा ?
Answer: समीकरण को संतुलित करने पर, \( \text{ClO}^-(\text{aq}) + \text{H}_2\text{O}(\text{l}) + 2\text{e}^- \rightarrow \text{Cl}^-(\text{aq}) + 2\text{OH}^-(\text{aq}) \) प्राप्त होता है। यहाँ, क्लोरीन का ऑक्सीकरण अंक \( \text{ClO}^- \) में \( +1 \) से \( \text{Cl}^- \) में \( -1 \) में बदलता है। इस बदलाव के लिए 2 इलेक्ट्रॉनों की आवश्यकता होती है। इसलिए \( x \) का मान 2 होगा।
In simple words: समीकरण में क्लोरीन का ऑक्सीकरण अंक \( +1 \) से \( -1 \) में बदल रहा है। इस बदलाव के लिए 2 इलेक्ट्रॉनों की आवश्यकता होती है, इसलिए \( x \) का मान 2 है।

🎯 Exam Tip: अर्ध-अभिक्रियाओं में इलेक्ट्रॉनों की संख्या ज्ञात करने के लिए, तत्वों की ऑक्सीकरण अवस्थाओं में बदलाव और समीकरण में आवेश को संतुलित करें।

 

Question 9. अभिक्रिया \( 5\text{H}_2\text{O}_2 + \text{Br}_2 \rightarrow 2\text{HBrO}_3 + 4\text{H}_2\text{O} \) में अपचायक बताइए।
Answer: इस अभिक्रिया में, \( \text{Br}_2 \) में ब्रोमीन का ऑक्सीकरण अंक 0 से \( \text{HBrO}_3 \) में \( +5 \) में बदलता है। क्योंकि \( \text{Br}_2 \) ऑक्सीकृत हो रहा है, यह अपचायक के रूप में कार्य करता है। अपचायक वे पदार्थ होते हैं जो खुद ऑक्सीकृत होते हैं और दूसरों को अपचयित करते हैं।
In simple words: \( \text{Br}_2 \) अपचायक है क्योंकि यह ऑक्सीकृत होकर \( \text{HBrO}_3 \) बन रहा है, और इस प्रक्रिया में अन्य पदार्थ को अपचयित कर रहा है।

🎯 Exam Tip: अपचायक वह पदार्थ होता है जिसकी ऑक्सीकरण अवस्था अभिक्रिया के दौरान बढ़ती है (अर्थात, वह इलेक्ट्रॉन खो देता है)। ऑक्सीकारक वह पदार्थ होता है जिसकी ऑक्सीकरण अवस्था घटती है (अर्थात, वह इलेक्ट्रॉन प्राप्त करता है)।

 

Question 10. संरचना में 'X' की विद्युत ऋऋणता Z से अधिक है। 'Z' का ऑक्सीकरण अंक ज्ञात कीजिए।
\( \text{HO}-\text{Z}-\text{OH} \)
Answer: यहाँ हम दिए गए समीकरण के अनुसार 'Z' का ऑक्सीकरण अंक ज्ञात करेंगे:
\( x + 2(-1) + 2(-2) = 0 \)
\( x - 2 - 4 = 0 \)
\( x - 6 = 0 \)
\( x = +6 \)
अतः \( \text{Z} \) का ऑक्सीकरण अंक \( +6 \) होगा। इस गणना में, 'Z' अन्य परमाणुओं से जुड़ा हुआ है जिनके ऑक्सीकरण अंक \( -1 \) और \( -2 \) हैं, जो अंततः \( \text{Z} \) को \( +6 \) का ऑक्सीकरण अंक प्रदान करता है।
In simple words: दिए गए समीकरण का उपयोग करके, हम पाते हैं कि 'Z' का ऑक्सीकरण अंक \( +6 \) है, यह दर्शाता है कि यह 6 इलेक्ट्रॉन खो चुका है।

🎯 Exam Tip: ऑक्सीकरण अंक ज्ञात करने के लिए, अज्ञात तत्व को \( x \) मानें और अन्य ज्ञात तत्वों के मानक ऑक्सीकरण अंकों का उपयोग करें। यौगिक के लिए कुल आवेश (शून्य या आयन का आवेश) के बराबर सेट करें और \( x \) के लिए हल करें।

 

Question 12. निम्नलिखित को Mn की बढ़ती ऑक्सीकरण अवस्था के क्रम में लिखिए- \( \text{K}_2\text{MnO}_4 \), \( \text{MnO}_2 \), \( \text{KMnO}_4 \)
Answer: हम प्रत्येक यौगिक में मैंगनीज (\( \text{Mn} \)) का ऑक्सीकरण अंक ज्ञात करेंगे:
\( \text{K}_2\text{MnO}_4 \):
\( 2(+1) + x + 4(-2) = 0 \)
\( 2 + x - 8 = 0 \)
\( x = +6 \)

\( \text{MnO}_2 \):
\( x + 2(-2) = 0 \)
\( x - 4 = 0 \)
\( x = +4 \)

\( \text{KMnO}_4 \):
\( 1(+1) + x + 4(-2) = 0 \)
\( 1 + x - 8 = 0 \)
\( x = +7 \)
इस प्रकार, मैंगनीज के ऑक्सीकरण अंक हैं: \( \text{MnO}_2 \) में \( +4 \), \( \text{K}_2\text{MnO}_4 \) में \( +6 \), और \( \text{KMnO}_4 \) में \( +7 \)। इन्हें बढ़ती हुई ऑक्सीकरण अवस्था के क्रम में व्यवस्थित करने पर:
\( \text{MnO}_2 < \text{K}_2\text{MnO}_4 < \text{KMnO}_4 \)
In simple words: पहले हर यौगिक में मैंगनीज का ऑक्सीकरण अंक निकालें। फिर, सबसे कम अंक वाले यौगिक से शुरू करके, उन्हें बढ़ते हुए क्रम में लिखें।

🎯 Exam Tip: ऑक्सीकरण अंक ज्ञात करते समय, पोटेशियम जैसे क्षार धातुओं के लिए \( +1 \) और ऑक्सीजन के लिए \( -2 \) जैसे सामान्य नियमों को याद रखें, जब तक कि सुपरऑक्साइड या पेरोक्साइड जैसे विशेष मामले न हों।

 

Question 13. रेडॉक्स अभिक्रिया किसे कहते हैं ?
Answer: वे रासायनिक अभिक्रियाएँ जिनमें ऑक्सीकरण और अपचयन दोनों प्रक्रियाएँ एक साथ होती हैं, उन्हें रेडॉक्स अभिक्रियाएँ कहते हैं। इन अभिक्रियाओं में एक पदार्थ इलेक्ट्रॉन खोता है (ऑक्सीकृत होता है) जबकि दूसरा पदार्थ इलेक्ट्रॉन प्राप्त करता है (अपचयित होता है)।
In simple words: रेडॉक्स अभिक्रिया वह है जहाँ एक ही समय में ऑक्सीकरण (इलेक्ट्रॉन खोना) और अपचयन (इलेक्ट्रॉन पाना) होता है।

🎯 Exam Tip: याद रखें कि ऑक्सीकरण और अपचयन हमेशा एक साथ होते हैं; एक के बिना दूसरा संभव नहीं है।

 

Question 14. \( \text{LiAlH}_4 \) में Al का ऑक्सीकरण अंक क्या है ?
Answer: \( \text{LiAlH}_4 \) में एल्यूमीनियम (\( \text{Al} \)) का ऑक्सीकरण अंक ज्ञात करने के लिए:
\( \text{Li} \) का ऑक्सीकरण अंक \( +1 \) होता है।
\( \text{H} \) का ऑक्सीकरण अंक \( -1 \) होता है क्योंकि यह धातु से जुड़ा है।
मान लें कि \( \text{Al} \) का ऑक्सीकरण अंक \( x \) है।
तब, \( 1(+1) + x + 4(-1) = 0 \)
\( 1 + x - 4 = 0 \)
\( x - 3 = 0 \)
\( x = +3 \)
अतः \( \text{LiAlH}_4 \) में \( \text{Al} \) का ऑक्सीकरण अंक \( +3 \) है। यह हाइड्रोजन के साथ \( \text{Al} \) की उच्च इलेक्ट्रोनेगेटिविटी के कारण होता है।
In simple words: \( \text{LiAlH}_4 \) में, \( \text{Al} \) का ऑक्सीकरण अंक \( +3 \) होता है क्योंकि लिथियम \( +1 \) है और हाइड्रोजन \( -1 \) है।

🎯 Exam Tip: हाइड्राइडों में हाइड्रोजन का ऑक्सीकरण अंक \( -1 \) होता है, जबकि अधिकांश अन्य यौगिकों में यह \( +1 \) होता है। इस बात का विशेष ध्यान रखें।

 

Question 16. सल्फर की निम्नतम तथा उच्चतम ऑक्सीकरण अवस्था लिखिए।
Answer: सल्फर की निम्नतम ऑक्सीकरण अवस्था \( -2 \) होती है। यह तब प्राप्त होती है जब सल्फर अधिक इलेक्ट्रोपॉजिटिव तत्वों, जैसे धातु, के साथ जुड़ता है (उदाहरण के लिए \( \text{H}_2\text{S} \) में)। जबकि उच्चतम ऑक्सीकरण अवस्था \( +6 \) होती है। यह तब प्राप्त होती है जब सल्फर अधिक इलेक्ट्रोनेगेटिव तत्वों, जैसे ऑक्सीजन, के साथ जुड़ता है (उदाहरण के लिए \( \text{H}_2\text{SO}_4 \) में)।
In simple words: सल्फर की सबसे कम ऑक्सीकरण अवस्था \( -2 \) और सबसे अधिक ऑक्सीकरण अवस्था \( +6 \) होती है।

🎯 Exam Tip: एक तत्व की निम्नतम ऑक्सीकरण अवस्था आम तौर पर समूह संख्या - 8 होती है, और उच्चतम ऑक्सीकरण अवस्था समूह संख्या के बराबर होती है (गैर-धातुओं के लिए)।

RBSE Class 11 Chemistry Chapter 8 लघूत्तरात्मक प्रश्न

 

Question 17. आयन इलेक्टॉन विधि द्वारा क्षारीय माध्यम में होने वाली अभिक्रिया किस प्रकार संतुलित की जाएगी? समझाइए।
Answer: क्षारीय माध्यम में आयन-इलेक्ट्रॉन विधि द्वारा अभिक्रियाओं को निम्नलिखित प्रकार से संतुलित किया जाता है:
(i) सबसे पहले, असंतुलित समीकरण को आयनिक रूप में लिखें:
\( \text{Fe}^{2+}(\text{aq}) + \text{Cr}_2\text{O}_7^{2-}(\text{aq}) \rightarrow \text{Fe}^{3+}(\text{aq}) + \text{Cr}^{3+}(\text{aq}) \)

(ii) अब, इस समीकरण को दो अर्द्ध-अभिक्रियाओं में विभाजित करें:
ऑक्सीकरण: \( \text{Fe}^{2+}(\text{aq}) \rightarrow \text{Fe}^{3+}(\text{aq}) \)
अपचयन: \( \text{Cr}_2\text{O}_7^{2-}(\text{aq}) \rightarrow \text{Cr}^{3+}(\text{aq}) \)

(iii) प्रत्येक अर्द्ध-अभिक्रिया में ऑक्सीजन और हाइड्रोजन के अतिरिक्त अन्य तत्वों के परमाणुओं को संतुलित करें:
\( \text{Cr}_2\text{O}_7^{2-}(\text{aq}) \rightarrow 2\text{Cr}^{3+}(\text{aq}) \)
\( \text{Fe}^{2+}(\text{aq}) \rightarrow \text{Fe}^{3+}(\text{aq}) \)

(iv) ऑक्सीजन परमाणुओं को संतुलित करने के लिए, जिस तरफ ऑक्सीजन की कमी हो, उस तरफ \( \text{H}_2\text{O} \) जोड़ें। हाइड्रोजन परमाणुओं को संतुलित करने के लिए, जिस तरफ हाइड्रोजन की कमी हो, उस तरफ \( \text{H}^+ \) जोड़ें:
\( \text{Cr}_2\text{O}_7^{2-}(\text{aq}) + 14\text{H}^+(\text{aq}) \rightarrow 2\text{Cr}^{3+}(\text{aq}) + 7\text{H}_2\text{O}(\text{l}) \)

(v) क्षारीय माध्यम के लिए, समीकरण के दोनों तरफ उतने ही \( \text{OH}^- \) आयन जोड़ें जितने \( \text{H}^+ \) आयन हैं। फिर \( \text{H}^+ \) और \( \text{OH}^- \) को मिलाकर \( \text{H}_2\text{O} \) बनाएं:
\( \text{Cr}_2\text{O}_7^{2-}(\text{aq}) + 14\text{H}^+(\text{aq}) + 14\text{OH}^-(\text{aq}) \rightarrow 2\text{Cr}^{3+}(\text{aq}) + 7\text{H}_2\text{O}(\text{l}) + 14\text{OH}^-(\text{aq}) \)
\( \text{Cr}_2\text{O}_7^{2-}(\text{aq}) + 14\text{H}_2\text{O}(\text{l}) \rightarrow 2\text{Cr}^{3+}(\text{aq}) + 7\text{H}_2\text{O}(\text{l}) + 14\text{OH}^-(\text{aq}) \)
\( \text{Cr}_2\text{O}_7^{2-}(\text{aq}) + 7\text{H}_2\text{O}(\text{l}) \rightarrow 2\text{Cr}^{3+}(\text{aq}) + 14\text{OH}^-(\text{aq}) \)

(vi) अब आवेश को संतुलित करने के लिए आवश्यक इलेक्ट्रॉन जोड़ें:
ऑक्सीकरण: \( \text{Fe}^{2+}(\text{aq}) \rightarrow \text{Fe}^{3+}(\text{aq}) + \text{e}^- \)
अपचयन: \( \text{Cr}_2\text{O}_7^{2-}(\text{aq}) + 7\text{H}_2\text{O}(\text{l}) + 6\text{e}^- \rightarrow 2\text{Cr}^{3+}(\text{aq}) + 14\text{OH}^-(\text{aq}) \)
दोनों अर्द्ध-अभिक्रियाओं में इलेक्ट्रॉनों की संख्या बराबर करें और उन्हें जोड़ दें। यह विधि सुनिश्चित करती है कि पदार्थ और आवेश दोनों संतुलित रहें।
In simple words: क्षारीय माध्यम में अभिक्रियाओं को संतुलित करने के लिए, पहले उन्हें अम्लीय माध्यम की तरह \( \text{H}^+ \) और \( \text{H}_2\text{O} \) से संतुलित करें। फिर, \( \text{H}^+ \) की संख्या के बराबर \( \text{OH}^- \) दोनों तरफ जोड़ें और \( \text{H}^+ \) और \( \text{OH}^- \) को \( \text{H}_2\text{O} \) में बदल दें। आखिर में, आवेश को इलेक्ट्रॉनों से संतुलित करें।

🎯 Exam Tip: क्षारीय माध्यम में संतुलन करते समय \( \text{H}^+ \) को \( \text{OH}^- \) में बदलने की प्रक्रिया को याद रखें। यह अम्लीय माध्यम से संतुलन करने के बाद एक अतिरिक्त कदम है।

 

Question 18. तत्त्व की ऑक्सीकरण अवस्था तथा संयोजकता में भिन्नता को स्पष्ट कीजिए।
Answer: ऑक्सीकरण अवस्था और संयोजकता के बीच के अंतर को निम्नलिखित बिंदुओं से स्पष्ट किया जा सकता है:
(i) किसी तत्व की संयोजकता उसकी अन्य तत्वों के परमाणुओं के साथ जुड़ने की क्षमता को दर्शाती है। यह तत्वों के बीच बनने वाले बंधों की संख्या को इंगित करती है। जबकि ऑक्सीकरण अंक किसी अणु या आयन में मौजूद परमाणु पर एक काल्पनिक या वास्तविक आवेश होता है, यह दिखाता है कि इलेक्ट्रॉन किस हद तक खो गए हैं या प्राप्त हुए हैं।
(ii) संयोजकता के साथ कोई धनात्मक या ऋणात्मक चिन्ह नहीं लगाया जाता है। यह हमेशा एक पूर्ण संख्या होती है। जबकि ऑक्सीकरण अंक के साथ धनात्मक या ऋणात्मक चिन्ह लगता है, जो इलेक्ट्रॉन के खोने या पाने को दर्शाता है।
(iii) संयोजकता हमेशा एक पूर्ण संख्या (जैसे 1, 2, 3) होती है। जबकि ऑक्सीकरण संख्या भिन्न में भी हो सकती है (उदाहरण के लिए \( +2.5 \))।
(iv) सामान्यतया किसी तत्व की संयोजकता निश्चित होती है या कुछ सीमित मानों में बदलती है। लेकिन एक तत्व का ऑक्सीकरण अंक विभिन्न यौगिकों में भिन्न-भिन्न हो सकता है, जो उस यौगिक में उसकी रासायनिक स्थिति पर निर्भर करता है। उदाहरण के लिए, सल्फर की संयोजकता 2 होती है, लेकिन उसकी ऑक्सीकरण अवस्था \( -2 \) से \( +6 \) तक हो सकती है।
In simple words: संयोजकता यह बताती है कि एक परमाणु कितने बंधन बना सकता है (हमेशा एक पूरी संख्या और बिना चिन्ह के)। ऑक्सीकरण अवस्था यह बताती है कि एक परमाणु ने कितने इलेक्ट्रॉन खोए या प्राप्त किए हैं (यह धनात्मक, ऋणात्मक या भिन्नात्मक हो सकती है)।

🎯 Exam Tip: ऑक्सीकरण अवस्था और संयोजकता दोनों रासायनिक बंध में तत्व के व्यवहार से संबंधित हैं, लेकिन ऑक्सीकरण अवस्था इलेक्ट्रॉन स्थानांतरण के दृष्टिकोण से अधिक सटीक होती है।

 

Question 19. \( 2\text{KI} + \text{Cl}_2 \rightarrow 2\text{KCl} + \text{I}_2 \) अभिक्रिया में अपचायक पदार्थ बताइए।
Answer: अपचायक पदार्थ वह होता है जिसकी ऑक्सीकरण अवस्था अभिक्रिया के दौरान बढ़ती है। इस अभिक्रिया में ऑक्सीकरण अंक द्वारा अपचायक का पता लगाते हैं:
\( \text{KI} \): पोटेशियम का ऑक्सीकरण अंक \( +1 \) है। मान लें कि आयोडीन का ऑक्सीकरण अंक \( x \) है।
\( 1(+1) + x = 0 \)
\( x = -1 \)
\( \text{I}_2 \): आयोडीन एक तत्व के रूप में है, इसलिए इसका ऑक्सीकरण अंक 0 है।

यहाँ, आयोडीन का ऑक्सीकरण अंक \( -1 \) से \( 0 \) में बढ़ रहा है, जिसका अर्थ है कि आयोडीन ऑक्सीकृत हो रहा है। इसलिए, \( \text{KI} \) अपचायक पदार्थ है।

\( \text{Cl}_2 \): क्लोरीन एक तत्व के रूप में है, इसलिए इसका ऑक्सीकरण अंक 0 है।
\( \text{KCl} \): पोटेशियम का ऑक्सीकरण अंक \( +1 \) है। मान लें कि क्लोरीन का ऑक्सीकरण अंक \( x \) है।
\( 1(+1) + x = 0 \)
\( x = -1 \)
यहाँ, क्लोरीन का ऑक्सीकरण अंक \( 0 \) से \( -1 \) में घट रहा है, जिसका अर्थ है कि क्लोरीन अपचयित हो रहा है। इसलिए, \( \text{Cl}_2 \) ऑक्सीकारक पदार्थ है।
In simple words: \( \text{KI} \) अपचायक है क्योंकि आयोडीन की ऑक्सीकरण अवस्था \( -1 \) से \( 0 \) तक बढ़ती है, जिसका अर्थ है कि यह इलेक्ट्रॉन खो रहा है।

🎯 Exam Tip: अपचायक वह पदार्थ होता है जो स्वयं ऑक्सीकृत होता है और ऑक्सीकारक वह पदार्थ होता है जो स्वयं अपचयित होता है।

 

Question 20. ऑक्सीकरण अंक ज्ञात कीजिए
(i) \( (\text{NH}_4)_2 \text{MoO}_4 \) में Mo
(ii) \( \text{Ni}(\text{CN})_2^{4-} \) में Ni का
Answer:
(i) \( (\text{NH}_4)_2 \text{MoO}_4 \) में Mo का ऑक्सीकरण अंक:
\( (\text{NH}_4)^+ \) आयन का आवेश \( +1 \) होता है। इसलिए, \( (\text{NH}_4)_2 \) का कुल आवेश \( 2 \times (+1) = +2 \) होगा।
\( \text{O} \) का ऑक्सीकरण अंक \( -2 \) होता है। \( \text{O}_4 \) का कुल आवेश \( 4 \times (-2) = -8 \) होगा।
मान लें कि \( \text{Mo} \) का ऑक्सीकरण अंक \( x \) है।
\( 2(+1) + x + 4(-2) = 0 \)
\( 2 + x - 8 = 0 \)
\( x - 6 = 0 \)
\( x = +6 \)
अतः \( (\text{NH}_4)_2 \text{MoO}_4 \) में \( \text{Mo} \) का ऑक्सीकरण अंक \( +6 \) होगा।

(ii) \( \text{Ni}(\text{CN})_2^{4-} \) में Ni का ऑक्सीकरण अंक:
\( \text{CN}^- \) (सायनाइड) लिगेंड का आवेश \( -1 \) होता है। \( (\text{CN})_2 \) का कुल आवेश \( 2 \times (-1) = -2 \) होगा।
संकुल आयन \( \text{Ni}(\text{CN})_2^{4-} \) पर कुल आवेश \( -4 \) है।
मान लें कि \( \text{Ni} \) का ऑक्सीकरण अंक \( x \) है।
\( x + 2(-1) = -4 \)
\( x - 2 = -4 \)
\( x = -4 + 2 \)
\( x = -2 \)
अतः \( \text{Ni}(\text{CN})_2^{4-} \) में \( \text{Ni} \) का ऑक्सीकरण अंक \( -2 \) होगा।
In simple words: \( (\text{NH}_4)_2 \text{MoO}_4 \) में, \( \text{Mo} \) का ऑक्सीकरण अंक \( +6 \) है। \( \text{Ni}(\text{CN})_2^{4-} \) में, \( \text{Ni} \) का ऑक्सीकरण अंक \( -2 \) है।

🎯 Exam Tip: संकुल यौगिकों में ऑक्सीकरण अंक ज्ञात करते समय, लिगेंडों के आवेशों को ध्यान में रखें। सायनाइड (\( \text{CN}^- \)) जैसे कुछ लिगेंडों का ऋणात्मक आवेश होता है।

 

Question 21. निम्नलिखित धातुओं को उनके लवणों के विलयन में से विस्थापन की क्षमता के क्रम में लिखिए- Cr, Cu, Mg, Zn, Fe, Al
Answer: धातुओं को उनके लवणों के विलयन से विस्थापन की क्षमता उनके मानक इलेक्ट्रोड विभव पर निर्भर करती है। जिस धातु का मानक इलेक्ट्रोड विभव जितना अधिक ऋणात्मक होगा, वह उतनी ही अधिक सक्रिय होगी और उतनी ही प्रबल अपचायक होगी। अधिक सक्रिय धातुएँ कम सक्रिय धातुओं को उनके लवणों के विलयन से विस्थापित कर सकती हैं।
दिए गए धातुओं के मानक अपचयन विभव (लगभग मान):
\( \text{Mg}^{2+}/\text{Mg}: -2.37 \, \text{V} \)
\( \text{Al}^{3+}/\text{Al}: -1.66 \, \text{V} \)
\( \text{Zn}^{2+}/\text{Zn}: -0.76 \, \text{V} \)
\( \text{Cr}^{3+}/\text{Cr}: -0.74 \, \text{V} \)
\( \text{Fe}^{2+}/\text{Fe}: -0.44 \, \text{V} \)
\( \text{Cu}^{2+}/\text{Cu}: +0.34 \, \text{V} \)
इन मानों के आधार पर, विस्थापन की क्षमता का बढ़ता हुआ क्रम (या घटती हुई अपचयन क्षमता) इस प्रकार होगा:
\( \text{Mg} > \text{Al} > \text{Zn} > \text{Cr} > \text{Fe} > \text{Cu} \)
इसका मतलब है कि मैग्नीशियम सबसे अधिक सक्रिय है और तांबे को सबसे कम सक्रिय माना जाता है।
In simple words: धातुओं को उनकी विस्थापन क्षमता के क्रम में उनके मानक इलेक्ट्रोड विभव के आधार पर व्यवस्थित किया जाता है। जो धातु अधिक सक्रिय होती है (अधिक ऋणात्मक विभव), वह कम सक्रिय धातु को विस्थापित कर सकती है।

🎯 Exam Tip: विद्युत रासायनिक श्रेणी में, ऊपर वाली धातुएँ नीचे वाली धातुओं की तुलना में अधिक प्रतिक्रियाशील होती हैं। इसका उपयोग धातुओं की सापेक्षिक विस्थापन क्षमता को समझने के लिए करें।

 

Question 22. Zn तथा CuSO4 विलयन के मध्य अप्रत्यक्ष रेडॉक्स अभिक्रिया प्रदर्शित करने वाले विद्युत रासायनिक सेल को चित्रित कीजिए।
Answer: Zn और CuSO4 विलयन के बीच अप्रत्यक्ष रेडॉक्स अभिक्रिया को दर्शाने वाला विद्युत रासायनिक सेल डेनियल सेल है। इसमें Zn इलेक्ट्रोड पर ऑक्सीकरण और Cu इलेक्ट्रोड पर अपचयन होता है, जिससे विद्युत धारा उत्पन्न होती है। डेनियल सेल का उपयोग बिजली बनाने के लिए किया जाता है।
ZnSO₄ विलयन CuSO₄ विलयन Zn की छड़ ऑक्सीकरण Zn→Zn²⁺+2e⁻ ऐनोड (-) Cu की छड़ अपचयन Cu²⁺+2e⁻→Cu कैथोड (+) लवण सेतु V इलेक्ट्रॉनों का प्रवाह विद्युत धारा का प्रवाह चित्र : डेनियल सेल
In simple words: यह डेनियल सेल है, जिसमें जिंक रॉड पर ऑक्सीकरण और कॉपर रॉड पर अपचयन होता है। लवण सेतु आवेश को संतुलित रखता है, और वोल्टमीटर प्रवाहित होने वाली बिजली को मापता है।

🎯 Exam Tip: डेनियल सेल के चित्र को बनाते समय, एनोड और कैथोड के बीच इलेक्ट्रॉन प्रवाह की दिशा, लवण सेतु का कार्य, और प्रत्येक इलेक्ट्रोड पर होने वाली अभिक्रियाओं को सही ढंग से दर्शाना सुनिश्चित करें।

 

Question 23. ऑक्सीकरण तथा अपचयन को परिभाषित कीजिए
(i) इलेक्ट्रोन संकल्पना के आधार पर
(ii) ऑक्सीकरण अंक के आधार पर
Answer: ऑक्सीकरण और अपचयन की परिभाषाएँ विभिन्न संकल्पनाओं के आधार पर दी जा सकती हैं:

(i) इलेक्ट्रोन संकल्पना के आधार पर:
ऑक्सीकरण: यह वह प्रक्रिया है जिसमें एक परमाणु, अणु या आयन इलेक्ट्रॉन खो देता है। इलेक्ट्रॉन खोने से उसका धनात्मक आवेश बढ़ता है या ऋणात्मक आवेश घटता है।
उदाहरण:
\( \text{Cl} + \text{e}^- \rightarrow \text{Cl}^- \) (यह अपचयन का उदाहरण है, ऑक्सीकरण का नहीं)
सही उदाहरण: \( \text{Na} \rightarrow \text{Na}^+ + \text{e}^- \)
अपचयन: यह वह प्रक्रिया है जिसमें एक परमाणु, अणु या आयन इलेक्ट्रॉन ग्रहण करता है। इलेक्ट्रॉन ग्रहण करने से उसका धनात्मक आवेश घटता है या ऋणात्मक आवेश बढ़ता है।
उदाहरण:
\( \text{Cl} + \text{e}^- \rightarrow \text{Cl}^- \)
\( \text{S} + 2\text{e}^- \rightarrow \text{S}^{2-} \)
\( \text{Na}^+ + \text{e}^- \rightarrow \text{Na} \)

(ii) ऑक्सीकरण अंक के आधार पर:
ऑक्सीकरण: जब किसी परमाणु, अणु या आयन के ऑक्सीकरण अंक में वृद्धि होती है, तो उसे ऑक्सीकरण कहते हैं। यह इलेक्ट्रॉन के खोने के कारण होता है।
उदाहरण: \( \text{Fe}^{2+} \rightarrow \text{Fe}^{3+} + \text{e}^- \) (ऑक्सीकरण अंक \( +2 \) से \( +3 \) हो गया)
अपचयन: जब किसी परमाणु, अणु या आयन के ऑक्सीकरण अंक में कमी होती है, तो उसे अपचयन कहते हैं। यह इलेक्ट्रॉन के ग्रहण करने के कारण होता है।
उदाहरण: \( \text{Cu}^{2+} + 2\text{e}^- \rightarrow \text{Cu} \) (ऑक्सीकरण अंक \( +2 \) से \( 0 \) हो गया)
In simple words: इलेक्ट्रॉन खोने को ऑक्सीकरण कहते हैं, और इलेक्ट्रॉन पाने को अपचयन कहते हैं। ऑक्सीकरण अंक के हिसाब से, ऑक्सीकरण अंक का बढ़ना ऑक्सीकरण है, और ऑक्सीकरण अंक का घटना अपचयन है।

🎯 Exam Tip: इन दोनों परिभाषाओं को याद रखना महत्वपूर्ण है, क्योंकि वे रेडॉक्स अभिक्रियाओं को समझने के लिए आधार बनाती हैं। इलेक्ट्रॉन के संदर्भ में ऑक्सीकरण-अपचयन को "OIL RIG" (Oxidation Is Loss, Reduction Is Gain) के रूप में याद किया जा सकता है।

 

Question 24. निम्न अभिक्रियाओं में ऑक्सीकारक तथा अपचायक बताइये
(i) \( \text{H}_2\text{O}_2 + \text{O}_3 \rightarrow \text{H}_2\text{O} + 2\text{O}_2 \)
(ii) \( 2\text{Na}_2\text{S}_2\text{O}_3 + \text{I}_2 \rightarrow \text{Na}_2\text{S}_4\text{O}_6 + 2\text{NaI} \)
Answer:
(i) \( \text{H}_2\text{O}_2 + \text{O}_3 \rightarrow \text{H}_2\text{O} + 2\text{O}_2 \)
ऑक्सीकरण अंक गणना:
\( \text{H}_2\text{O}_2 \): \( 2(+1) + 2x = 0 \implies 2 + 2x = 0 \implies 2x = -2 \implies x = -1 \) (ऑक्सीजन का ऑक्सीकरण अंक \( -1 \))
\( \text{O}_3 \): ऑक्सीजन का ऑक्सीकरण अंक \( 0 \)
\( \text{H}_2\text{O} \): \( 2(+1) + x = 0 \implies x = -2 \) (ऑक्सीजन का ऑक्सीकरण अंक \( -2 \))
\( \text{O}_2 \): ऑक्सीजन का ऑक्सीकरण अंक \( 0 \)
यहां, \( \text{H}_2\text{O}_2 \) में ऑक्सीजन का ऑक्सीकरण अंक \( -1 \) से \( \text{O}_2 \) में \( 0 \) तक बढ़ता है (ऑक्सीकरण)। अतः \( \text{H}_2\text{O}_2 \) अपचायक है।
\( \text{O}_3 \) में ऑक्सीजन का ऑक्सीकरण अंक \( 0 \) से \( \text{H}_2\text{O} \) में \( -2 \) तक घटता है (अपचयन)। अतः \( \text{O}_3 \) ऑक्सीकारक है।

(ii) \( 2\text{Na}_2\text{S}_2\text{O}_3 + \text{I}_2 \rightarrow \text{Na}_2\text{S}_4\text{O}_6 + 2\text{NaI} \)
ऑक्सीकरण अंक गणना:
\( \text{Na}_2\text{S}_2\text{O}_3 \): \( 2(+1) + 2x + 3(-2) = 0 \implies 2 + 2x - 6 = 0 \implies 2x - 4 = 0 \implies 2x = 4 \implies x = +2 \) (सल्फर का ऑक्सीकरण अंक \( +2 \))
\( \text{I}_2 \): आयोडीन का ऑक्सीकरण अंक \( 0 \)
\( \text{Na}_2\text{S}_4\text{O}_6 \): \( 2(+1) + 4x + 6(-2) = 0 \implies 2 + 4x - 12 = 0 \implies 4x - 10 = 0 \implies 4x = 10 \implies x = +2.5 \) (सल्फर का ऑक्सीकरण अंक \( +2.5 \))
\( \text{NaI} \): \( 1(+1) + x = 0 \implies x = -1 \) (आयोडीन का ऑक्सीकरण अंक \( -1 \))
यहां, \( \text{Na}_2\text{S}_2\text{O}_3 \) में सल्फर का ऑक्सीकरण अंक \( +2 \) से \( \text{Na}_2\text{S}_4\text{O}_6 \) में \( +2.5 \) तक बढ़ता है (ऑक्सीकरण)। अतः \( \text{Na}_2\text{S}_2\text{O}_3 \) अपचायक है।
\( \text{I}_2 \) में आयोडीन का ऑक्सीकरण अंक \( 0 \) से \( \text{NaI} \) में \( -1 \) तक घटता है (अपचयन)। अतः \( \text{I}_2 \) ऑक्सीकारक है।
In simple words: पहली अभिक्रिया में, \( \text{H}_2\text{O}_2 \) अपचायक है और \( \text{O}_3 \) ऑक्सीकारक है। दूसरी अभिक्रिया में, \( \text{Na}_2\text{S}_2\text{O}_3 \) अपचायक है और \( \text{I}_2 \) ऑक्सीकारक है।

🎯 Exam Tip: ऑक्सीकरण अंक की गणना करते समय, विभिन्न तत्वों के लिए मानक नियमों का पालन करें। याद रखें कि हाइड्रोजन सामान्यतः \( +1 \) होता है, लेकिन हाइड्राइड में \( -1 \), और ऑक्सीजन सामान्यतः \( -2 \) होता है, लेकिन पेरोक्साइड में \( -1 \) और सुपरऑक्साइड में \( -1/2 \) होता है।

 

Question 25. सिल्वर नाइट्रेट विलयन में लोहे की छड़ डालने पर वह चमकीली हो जाती है, कारण बताइए।
Answer: जब लोहे की छड़ को सिल्वर नाइट्रेट (\( \text{AgNO}_3 \)) के विलयन में डाला जाता है, तो छड़ चमकीली हो जाती है क्योंकि लोहा (\( \text{Fe} \)) सिल्वर (\( \text{Ag} \)) की तुलना में अधिक प्रतिक्रियाशील धातु है। लोहे का मानक इलेक्ट्रोड विभव सिल्वर की तुलना में कम (अधिक ऋणात्मक) होता है, जिसका अर्थ है कि लोहा एक प्रबल अपचायक है।
इस कारण से, लोहा सिल्वर आयनों (\( \text{Ag}^+ \)) को उनके विलयन से विस्थापित कर देता है और खुद \( \text{Fe}^{2+} \) आयनों में ऑक्सीकृत हो जाता है, जबकि \( \text{Ag}^+ \) आयन अपचयित होकर धात्विक सिल्वर (\( \text{Ag} \)) के रूप में लोहे की छड़ पर जमा हो जाते हैं। इस सिल्वर की परत चढ़ने के कारण लोहे की छड़ चमकीली दिखाई देती है।
अभिक्रिया: \( \text{Fe}(\text{s}) + 2\text{Ag}^+(\text{aq}) \rightarrow \text{Fe}^{2+}(\text{aq}) + 2\text{Ag}(\text{s}) \)
In simple words: लोहा सिल्वर से अधिक सक्रिय होता है। इसलिए, जब लोहे को सिल्वर नाइट्रेट में डालते हैं, तो लोहा सिल्वर को विलयन से हटा देता है और सिल्वर लोहे की छड़ पर जमा हो जाता है, जिससे वह चमकीली दिखती है।

🎯 Exam Tip: धातुओं की प्रतिक्रियाशीलता विद्युत रासायनिक श्रेणी से निर्धारित होती है। अधिक प्रतिक्रियाशील धातुएँ कम प्रतिक्रियाशील धातुओं को उनके लवणों के विलयन से विस्थापित करती हैं।

 

Question 26. \( \text{KO}_2 \) में ऑक्सीजन का ऑक्सीकरण अंक बताइए।
Answer: \( \text{KO}_2 \) एक सुपरऑक्साइड है। इसमें पोटेशियम (\( \text{K} \)) का ऑक्सीकरण अंक \( +1 \) होता है। मान लें कि ऑक्सीजन का ऑक्सीकरण अंक \( x \) है।
चूंकि यौगिक उदासीन है, सभी परमाणुओं के ऑक्सीकरण अंकों का योग शून्य होना चाहिए:
\( 1(+1) + 2x = 0 \)
\( 1 + 2x = 0 \)
\( 2x = -1 \)
\( x = -1/2 \)
अतः \( \text{KO}_2 \) में ऑक्सीजन का ऑक्सीकरण अंक \( -1/2 \) होता है। सुपरऑक्साइड में ऑक्सीजन के परमाणु के पास एक इलेक्ट्रॉन होता है।
In simple words: \( \text{KO}_2 \) में, पोटेशियम का ऑक्सीकरण अंक \( +1 \) होता है, और ऑक्सीजन के दो परमाणुओं का कुल योग \( -1 \) होता है। इसलिए, एक ऑक्सीजन परमाणु का ऑक्सीकरण अंक \( -1/2 \) होता है।

🎯 Exam Tip: ऑक्सीजन के सामान्य ऑक्सीकरण अंक \( -2 \) होते हैं, लेकिन पेरोक्साइड में \( -1 \) और सुपरऑक्साइड में \( -1/2 \) होते हैं। इन अपवादों को याद रखना आवश्यक है।

 

Question 27. नाइट्रेट के भूरे वलय परीक्षण में संकुल \( [\text{Fe}(\text{H}_2\text{O})_5 (\text{NO})]\text{SO}_4 \) बनता है। इसमें आयरन की ऑक्सीकरण संख्या बताइए।
Answer: संकुल यौगिक \( [\text{Fe}(\text{H}_2\text{O})_5 (\text{NO})]\text{SO}_4 \) में आयरन की ऑक्सीकरण संख्या ज्ञात करने के लिए:
सल्फेट आयन (\( \text{SO}_4^{2-} \)) पर आवेश \( -2 \) होता है।
जल (\( \text{H}_2\text{O} \)) एक उदासीन लिगेंड है, इसलिए इसका आवेश \( 0 \) होता है।
नाइट्रोसिल लिगेंड (\( \text{NO} \)) पर आवेश \( +1 \) होता है (भूरे वलय संकुल में)।
मान लें कि आयरन (\( \text{Fe} \)) का ऑक्सीकरण अंक \( x \) है।
\( x + 5(0) + 1(+1) + 1(-2) = 0 \)
\( x + 0 + 1 - 2 = 0 \)
\( x - 1 = 0 \)
\( x = +1 \)
अतः संकुल \( [\text{Fe}(\text{H}_2\text{O})_5 (\text{NO})]\text{SO}_4 \) में आयरन की ऑक्सीकरण संख्या \( +1 \) है। यह भूरे वलय संकुल की विशेषता है।
In simple words: नाइट्रेट के भूरे वलय परीक्षण में बनने वाले संकुल में, आयरन का ऑक्सीकरण अंक \( +1 \) होता है। जल एक उदासीन लिगेंड है, और नाइट्रोसिल \( +1 \) आवेश वहन करता है।

🎯 Exam Tip: भूरे वलय संकुल जैसे विशेष मामलों में, नाइट्रोसिल (\( \text{NO} \)) लिगेंड पर \( +1 \) आवेश होता है, जो सामान्यतः शून्य होता है। यह अपवाद याद रखना महत्वपूर्ण है।

 

Question 28. निम्नलिखित को आयोडीन की बढ़ती हुई ऑक्सीकरण अवस्था के क्रम में लिखिए- \( \text{I}_2, \text{HI}, \text{HIO}_4, \text{ICl} \)
Answer: हम प्रत्येक यौगिक में आयोडीन का ऑक्सीकरण अंक ज्ञात करेंगे:
\( \text{I}_2 \): मौलिक अवस्था में आयोडीन का ऑक्सीकरण अंक \( 0 \) होता है।

\( \text{HI} \): हाइड्रोजन (\( \text{H} \)) का ऑक्सीकरण अंक \( +1 \) होता है। मान लें कि आयोडीन (\( \text{I} \)) का ऑक्सीकरण अंक \( x \) है।
\( 1(+1) + x = 0 \)
\( x = -1 \)

\( \text{HIO}_4 \): हाइड्रोजन (\( \text{H} \)) का ऑक्सीकरण अंक \( +1 \) और ऑक्सीजन (\( \text{O} \)) का \( -2 \) होता है। मान लें कि आयोडीन (\( \text{I} \)) का ऑक्सीकरण अंक \( x \) है।
\( 1(+1) + x + 4(-2) = 0 \)
\( 1 + x - 8 = 0 \)
\( x - 7 = 0 \)
\( x = +7 \)

\( \text{ICl} \): क्लोरीन (\( \text{Cl} \)) आयोडीन से अधिक इलेक्ट्रोनेगेटिव है, इसलिए क्लोरीन का ऑक्सीकरण अंक \( -1 \) होगा। मान लें कि आयोडीन (\( \text{I} \)) का ऑक्सीकरण अंक \( x \) है।
\( x + 1(-1) = 0 \)
\( x - 1 = 0 \)
\( x = +1 \)
आयोडीन के ऑक्सीकरण अंक हैं:
\( \text{HI}: -1 \)
\( \text{I}_2: 0 \)
\( \text{ICl}: +1 \)
\( \text{HIO}_4: +7 \)
बढ़ती हुई ऑक्सीकरण अवस्था के क्रम में व्यवस्थित करने पर:
\( \text{HI} < \text{I}_2 < \text{ICl} < \text{HIO}_4 \)
In simple words: प्रत्येक यौगिक में आयोडीन का ऑक्सीकरण अंक ज्ञात करें: \( \text{HI} \) में \( -1 \), \( \text{I}_2 \) में \( 0 \), \( \text{ICl} \) में \( +1 \), और \( \text{HIO}_4 \) में \( +7 \)। फिर उन्हें सबसे छोटे से सबसे बड़े तक व्यवस्थित करें।

🎯 Exam Tip: जब दो गैर-धातु तत्व एक साथ जुड़ते हैं, तो अधिक इलेक्ट्रोनेगेटिव तत्व पर ऋणात्मक ऑक्सीकरण अंक होता है। यह ICl जैसे यौगिकों में महत्वपूर्ण है जहाँ क्लोरीन आयोडीन से अधिक इलेक्ट्रोनेगेटिव है।

RBSE Class 11 Chemistry Chapter 8 निबन्धात्मक प्रश्न

 

Question 29. ऑक्सीकरण अंक किसे कहते हैं? ऑक्सीकरण अंक परिवर्तन के आधार पर ऑक्सीकरण-अपचयन कैसे ज्ञात किया जाता है? ऑक्सीकरण अंक विधि द्वारा समीकरण संतुलित करने के विभिन्न पद लिखिए।
Answer: ऑक्सीकरण अंक (oxidation number) किसी यौगिक या तत्व के अणु में उपस्थित किसी परमाणु पर एक काल्पनिक आवेश होता है। यह तब होता है जब यह माना जाता है कि बंधों में इलेक्ट्रॉन अधिक इलेक्ट्रोनेगेटिव परमाणु की ओर पूरी तरह से स्थानांतरित हो गए हैं। ऑक्सीकरण अंक यह बताता है कि एक परमाणु ने कितने इलेक्ट्रॉन खोए या प्राप्त किए हैं।

ऑक्सीकरण अंक परिवर्तन के आधार पर ऑक्सीकरण-अपचयन का निर्धारण:
ऑक्सीकरण: जब किसी पदार्थ में किसी तत्व के ऑक्सीकरण अंक में वृद्धि होती है, तो उसे ऑक्सीकरण कहते हैं। इसका मतलब है कि वह तत्व इलेक्ट्रॉन खो रहा है।
अपचयन: जब किसी पदार्थ में किसी तत्व के ऑक्सीकरण अंक में कमी होती है, तो उसे अपचयन कहते हैं। इसका मतलब है कि वह तत्व इलेक्ट्रॉन प्राप्त कर रहा है।
जिस तत्व का ऑक्सीकरण अंक बदलता नहीं है, उसका न तो ऑक्सीकरण होता है और न ही अपचयन। जिस पदार्थ का ऑक्सीकरण होता है, उसे अपचायक कहते हैं, और जिस पदार्थ का अपचयन होता है, उसे ऑक्सीकारक कहते हैं।

ऑक्सीकरण अंक विधि द्वारा समीकरण संतुलित करने के विभिन्न पद:
ऑक्सीकरण अंक विधि से रासायनिक अभिक्रियाओं को संतुलित करने के लिए निम्नलिखित चरणों का पालन किया जाता है:
1. सबसे पहले, अभिक्रिया में शामिल सभी तत्वों के ऑक्सीकरण अंक ज्ञात करें और उन्हें यौगिक के ऊपर लिखें।
2. उन तत्वों की पहचान करें जिनके ऑक्सीकरण अंक में परिवर्तन हुआ है। ऑक्सीकरण अंक में परिवर्तन की कुल वृद्धि और कुल कमी को निर्धारित करें।
3. ऑक्सीकरण अंक में कुल वृद्धि और कुल कमी को बराबर करने के लिए उपयुक्त गुणांकों से गुणा करें। अभिक्रिया को संतुलित करने के लिए इस तरह से आगे बढ़ें कि इलेक्ट्रॉन के खोने और पाने की कुल संख्या समान हो।
यह विधि सुनिश्चित करती है कि इलेक्ट्रॉन के स्थानांतरण के आधार पर अभिक्रिया संतुलित रहे।
In simple words: ऑक्सीकरण अंक एक परमाणु पर आवेश होता है। यदि यह बढ़ता है, तो ऑक्सीकरण होता है, और यदि यह घटता है, तो अपचयन होता है। इस विधि से समीकरण संतुलित करने के लिए, पहले ऑक्सीकरण अंक ज्ञात करें, फिर उन तत्वों को पहचानें जिनमें बदलाव हुआ है, और फिर कुल ऑक्सीकरण और अपचयन को बराबर करने के लिए संख्याएँ समायोजित करें।

🎯 Exam Tip: ऑक्सीकरण अंक विधि में, ऑक्सीकरण अंकों में कुल वृद्धि हमेशा ऑक्सीकरण अंकों में कुल कमी के बराबर होनी चाहिए। यह सुनिश्चित करता है कि इलेक्ट्रॉन का आदान-प्रदान संतुलित है।

ऑक्सीकरण-अपचयन अभिक्रियाओं को संतुलित करने की विधियाँ

 

Question 30. मानक इलेक्ट्रॉड विभव किसे कहते हैं ? मानक इलेक्टॉड विभव का रासायनिक अभिक्रियाओं में क्या महत्त्व हैं? उदाहरण देकर समझाइए।
Answer:
मानक इलेक्ट्रोड विभव (Standard Electrode Potential):
मानक इलेक्ट्रोड विभव \( (\text{E}^\circ) \) को किसी धातु की छड़ को \( 298 \, \text{K} \) ताप पर \( 1 \) वायुमंडल दाब और \( 1 \) मोलर धातु आयन सांद्रता के विलयन में डुबोने पर धातु और उसके आयनों के बीच उत्पन्न विभवांतर के रूप में परिभाषित किया जाता है। यह विभव एक इलेक्ट्रोड की इलेक्ट्रॉन खोने या प्राप्त करने की प्रवृत्ति का माप है।

मानक इलेक्ट्रोड विभव का रासायनिक अभिक्रियाओं में महत्व:
मानक इलेक्ट्रोड विभव रासायनिक अभिक्रियाओं में कई महत्वपूर्ण भूमिकाएँ निभाता है:
1. अभिक्रिया की दिशा का पूर्वानुमान: \( \text{E}^\circ_{\text{cell}} = \text{E}^\circ_{\text{cathode}} - \text{E}^\circ_{\text{anode}} \) सूत्र का उपयोग करके एक सेल का कुल विभव ज्ञात किया जा सकता है। यदि \( \text{E}^\circ_{\text{cell}} \) धनात्मक है, तो अभिक्रिया स्वतः होती है। यदि यह ऋणात्मक है, तो अभिक्रिया स्वतः नहीं होती है।
2. धातुओं की प्रतिक्रियाशीलता: जिन धातुओं का मानक अपचयन विभव अधिक ऋणात्मक होता है, वे अधिक सक्रिय होती हैं और अधिक प्रबल अपचायक होती हैं। वे कम सक्रिय धातुओं को उनके लवणों के विलयन से विस्थापित कर सकती हैं। उदाहरण के लिए, \( \text{Mg} \) का अपचयन विभव \( -2.37 \, \text{V} \) है जबकि \( \text{Cu} \) का \( +0.34 \, \text{V} \) है, इसलिए \( \text{Mg} \) अधिक प्रतिक्रियाशील है और \( \text{Cu} \) को उसके विलयन से विस्थापित कर सकता है।
3. इलेक्ट्रोकेमिकल श्रेणी: मानक इलेक्ट्रोड विभव के घटते क्रम में धातुओं को व्यवस्थित करने पर विद्युत रासायनिक श्रेणी प्राप्त होती है। इस श्रेणी में ऊपर आने वाली धातुएँ प्रबल अपचायक होती हैं, और उनके धनायनों का धातु रूप में रासायनिक विधि से अपचयन नहीं किया जा सकता है।
4. हाइड्रोजन विस्थापन: हाइड्रोजन से ऊपर आने वाली धातुएँ हाइड्रोजन आयनों का हाइड्रोजन गैस में अपचयन कर देती हैं, जिससे धातु अम्लों से क्रिया कर \( \text{H}_2 \) गैस मुक्त करती हैं। उदाहरण के लिए:
\( \text{Zn} + 2\text{H}^+ \rightarrow \text{Zn}^{2+} + \text{H}_2 \)
\( \text{Mg} + 2\text{H}^+ \rightarrow \text{Mg}^{2+} + \text{H}_2 \)
5. अधातुओं की प्रतिक्रियाशीलता: वे तत्व जो श्रेणी में नीचे की ओर आते हैं, उनकी इलेक्ट्रॉन प्राप्त करने की शक्ति अधिक होती है। वे अच्छे ऑक्सीकारक होते हैं और अधिक प्रतिक्रियाशील अधातुओं को उनके लवण विलयनों से विस्थापित कर सकते हैं। उदाहरण के लिए, \( \text{Cl}_2 \) की इलेक्ट्रॉन ग्रहण करने की शक्ति \( \text{Br}_2 \) से अधिक है:
\( \text{Cl}_2 + 2\text{Br}^- \rightarrow 2\text{Cl}^- + \text{Br}_2 \)
6. संरक्षण और संक्षारण: इलेक्ट्रोड विभव यह समझने में भी मदद करता है कि कौन सी धातुएँ आसानी से संक्षारित होंगी और उन्हें कैसे बचाया जा सकता है।
उदाहरण के लिए, सोने और चांदी जैसी धातुओं को अधिक विद्युत धनात्मक धातु जैसे जिंक या एल्यूमीनियम द्वारा उनके लवण विलयनों से अवक्षेपित किया जा सकता है:
\( 2\text{Na}[\text{Ag}(\text{CN})_2] + \text{Zn} \rightarrow \text{Na}_2[\text{Zn}(\text{CN})_4] + 2\text{Ag} \)
यह दर्शाता है कि मानक इलेक्ट्रोड विभव रासायनिक अभिक्रियाओं की दिशा, धातुओं की प्रतिक्रियाशीलता, और विभिन्न तत्वों के ऑक्सीकारक और अपचायक गुणों को समझने के लिए एक महत्वपूर्ण उपकरण है।
In simple words: मानक इलेक्ट्रोड विभव यह बताता है कि एक धातु कितनी आसानी से इलेक्ट्रॉन खो या पा सकती है। यह महत्वपूर्ण है क्योंकि यह रासायनिक अभिक्रियाओं की दिशा, धातुओं की सक्रियता और कौन सी धातु अन्य धातुओं को उनके लवणों से विस्थापित कर सकती है, यह सब समझने में मदद करता है।

🎯 Exam Tip: मानक हाइड्रोजन इलेक्ट्रोड (SHE) को संदर्भ इलेक्ट्रोड के रूप में याद रखें, जिसका विभव शून्य माना जाता है। अन्य सभी इलेक्ट्रोड विभव इसकी तुलना में मापे जाते हैं।

 

Question 31. निम्नलिखित समीकरणों को सन्तुलित कीजिए तथा उनमें ऑक्सीकारक भी बताइए
(i) \( \text{H}_2\text{S} + \text{MnO}_4^- \rightarrow \text{S} + \text{Mn}^{2+} + \text{H}_2\text{O} \) (अम्लीय माध्यम)
(ii) \( \text{Cl}_2\text{O}_7(\text{g}) + \text{H}_2\text{O}_2(\text{g}) \rightarrow \text{ClO}_2^-(\text{aq}) + \text{O}_2(\text{g}) \) (क्षारीय माध्यम)
Answer:
(i) \( \text{H}_2\text{S} + \text{MnO}_4^- \rightarrow \text{S} + \text{Mn}^{2+} + \text{H}_2\text{O} \) (अम्लीय माध्यम)
ऑक्सीकरण अर्द्ध-अभिक्रिया:
\( \text{H}_2\text{S} \rightarrow \text{S} \)
ऑक्सीजन और हाइड्रोजन के अतिरिक्त अन्य तत्वों को संतुलित करें: सल्फर पहले से संतुलित है।
हाइड्रोजन परमाणुओं को संतुलित करें: \( \text{H}_2\text{S} \rightarrow \text{S} + 2\text{H}^+ \)
आवेश को संतुलित करें: \( \text{H}_2\text{S} \rightarrow \text{S} + 2\text{H}^+ + 2\text{e}^- \) .....(1)

अपचयन अर्द्ध-अभिक्रिया:
\( \text{MnO}_4^- \rightarrow \text{Mn}^{2+} \)
ऑक्सीजन परमाणुओं को संतुलित करें: \( \text{MnO}_4^- \rightarrow \text{Mn}^{2+} + 4\text{H}_2\text{O} \)
हाइड्रोजन परमाणुओं को संतुलित करें: \( \text{MnO}_4^- + 8\text{H}^+ \rightarrow \text{Mn}^{2+} + 4\text{H}_2\text{O} \)
आवेश को संतुलित करें: \( \text{MnO}_4^- + 8\text{H}^+ + 5\text{e}^- \rightarrow \text{Mn}^{2+} + 4\text{H}_2\text{O} \) .....(2)

इलेक्ट्रॉनों को संतुलित करने के लिए समीकरण (1) को 5 से और समीकरण (2) को 2 से गुणा करें, फिर उन्हें जोड़ दें:
\( 5(\text{H}_2\text{S} \rightarrow \text{S} + 2\text{H}^+ + 2\text{e}^-) \)
\( \implies 5\text{H}_2\text{S} \rightarrow 5\text{S} + 10\text{H}^+ + 10\text{e}^- \)
\( 2(\text{MnO}_4^- + 8\text{H}^+ + 5\text{e}^- \rightarrow \text{Mn}^{2+} + 4\text{H}_2\text{O}) \)
\( \implies 2\text{MnO}_4^- + 16\text{H}^+ + 10\text{e}^- \rightarrow 2\text{Mn}^{2+} + 8\text{H}_2\text{O} \)
जोड़ने पर:
\( 5\text{H}_2\text{S} + 2\text{MnO}_4^- + 16\text{H}^+ \rightarrow 5\text{S} + 10\text{H}^+ + 2\text{Mn}^{2+} + 8\text{H}_2\text{O} \)
सरल करने पर:
\( 5\text{H}_2\text{S} + 2\text{MnO}_4^- + 6\text{H}^+ \rightarrow 5\text{S} + 2\text{Mn}^{2+} + 8\text{H}_2\text{O} \)
इस अभिक्रिया में, \( \text{MnO}_4^- \) ऑक्सीकारक है क्योंकि इसमें मैंगनीज का ऑक्सीकरण अंक \( +7 \) से \( +2 \) में घट रहा है।

(ii) \( \text{Cl}_2\text{O}_7(\text{g}) + \text{H}_2\text{O}_2(\text{g}) \rightarrow \text{ClO}_2^-(\text{aq}) + \text{O}_2(\text{g}) \) (क्षारीय माध्यम)
ऑक्सीकरण अर्द्ध-अभिक्रिया:
\( \text{H}_2\text{O}_2 \rightarrow \text{O}_2 \)
हाइड्रोजन परमाणुओं को संतुलित करें: \( \text{H}_2\text{O}_2 \rightarrow \text{O}_2 + 2\text{H}^+ \)
क्षारीय माध्यम में \( \text{H}^+ \) को \( \text{OH}^- \) में बदलें: \( \text{H}_2\text{O}_2 + 2\text{OH}^- \rightarrow \text{O}_2 + 2\text{H}^+ + 2\text{OH}^- \)
\( \text{H}_2\text{O}_2 + 2\text{OH}^- \rightarrow \text{O}_2 + 2\text{H}_2\text{O} \)
आवेश को संतुलित करें: \( \text{H}_2\text{O}_2 + 2\text{OH}^- \rightarrow \text{O}_2 + 2\text{H}_2\text{O} + 2\text{e}^- \) .....(2)

अपचयन अर्द्ध-अभिक्रिया:
\( \text{Cl}_2\text{O}_7 \rightarrow \text{ClO}_2^- \)
क्लोरीन परमाणुओं को संतुलित करें: \( \text{Cl}_2\text{O}_7 \rightarrow 2\text{ClO}_2^- \)
ऑक्सीजन परमाणुओं को संतुलित करें: \( \text{Cl}_2\text{O}_7 \rightarrow 2\text{ClO}_2^- + 3\text{H}_2\text{O} \)
हाइड्रोजन परमाणुओं को संतुलित करें: \( \text{Cl}_2\text{O}_7 + 6\text{H}^+ \rightarrow 2\text{ClO}_2^- + 3\text{H}_2\text{O} \)
क्षारीय माध्यम में \( \text{H}^+ \) को \( \text{OH}^- \) में बदलें: \( \text{Cl}_2\text{O}_7 + 6\text{H}^+ + 6\text{OH}^- \rightarrow 2\text{ClO}_2^- + 3\text{H}_2\text{O} + 6\text{OH}^- \)
\( \text{Cl}_2\text{O}_7 + 6\text{H}_2\text{O} \rightarrow 2\text{ClO}_2^- + 3\text{H}_2\text{O} + 6\text{OH}^- \)
\( \text{Cl}_2\text{O}_7 + 3\text{H}_2\text{O} \rightarrow 2\text{ClO}_2^- + 6\text{OH}^- \)
आवेश को संतुलित करें: \( \text{Cl}_2\text{O}_7 + 3\text{H}_2\text{O} + 8\text{e}^- \rightarrow 2\text{ClO}_2^- + 6\text{OH}^- \) .....(1)

इलेक्ट्रॉनों को संतुलित करने के लिए समीकरण (2) को 4 से गुणा करें और समीकरण (1) को 1 से गुणा करें, फिर उन्हें जोड़ दें:
\( 4(\text{H}_2\text{O}_2 + 2\text{OH}^- \rightarrow \text{O}_2 + 2\text{H}_2\text{O} + 2\text{e}^-) \)
\( \implies 4\text{H}_2\text{O}_2 + 8\text{OH}^- \rightarrow 4\text{O}_2 + 8\text{H}_2\text{O} + 8\text{e}^- \)
\( \text{Cl}_2\text{O}_7 + 3\text{H}_2\text{O} + 8\text{e}^- \rightarrow 2\text{ClO}_2^- + 6\text{OH}^- \)
जोड़ने पर:
\( \text{Cl}_2\text{O}_7 + 4\text{H}_2\text{O}_2 + 3\text{H}_2\text{O} + 8\text{OH}^- \rightarrow 2\text{ClO}_2^- + 4\text{O}_2 + 8\text{H}_2\text{O} + 6\text{OH}^- \)
सरल करने पर:
\( \text{Cl}_2\text{O}_7 + 4\text{H}_2\text{O}_2 + 2\text{OH}^- \rightarrow 2\text{ClO}_2^- + 4\text{O}_2 + 5\text{H}_2\text{O} \)
इस अभिक्रिया में, \( \text{H}_2\text{O}_2 \) अपचायक है क्योंकि इसमें ऑक्सीजन का ऑक्सीकरण अंक \( -1 \) से \( 0 \) में बढ़ रहा है।
In simple words: पहली अभिक्रिया में, \( \text{MnO}_4^- \) ऑक्सीकारक है। दूसरी अभिक्रिया में, \( \text{H}_2\text{O}_2 \) अपचायक है। समीकरणों को आयन-इलेक्ट्रॉन विधि से संतुलित करने के लिए, उन्हें ऑक्सीकरण और अपचयन अर्ध-अभिक्रियाओं में तोड़ें, परमाणुओं और आवेश को संतुलित करें, और फिर उन्हें जोड़ दें।

🎯 Exam Tip: क्षारीय माध्यम में संतुलन करते समय, \( \text{H}^+ \) आयनों को \( \text{OH}^- \) आयनों में बदलने का अतिरिक्त चरण याद रखें, क्योंकि \( \text{H}^+ \) क्षारीय माध्यम में नहीं रह सकता है।

 

Question 32. आयन इलेक्ट्रॉन विधि द्वारा समीकरण संतुलित करने की विधि के विभिन्न पद लिखिए निम्न समीकरणों को संतुलित कीजिए-
Answer: आयन-इलेक्ट्रॉन विधि (जिसे अर्ध-अभिक्रिया विधि भी कहते हैं) द्वारा समीकरण संतुलित करने के विभिन्न पद निम्नलिखित हैं:
1. अभिक्रिया को असंतुलित आयनिक समीकरण के रूप में लिखें।
2. रेडॉक्स अभिक्रिया को ऑक्सीकरण और अपचयन के लिए दो अर्ध-अभिक्रियाओं में विभाजित करें।
3. प्रत्येक अर्ध-अभिक्रिया को अलग-अलग संतुलित करें:
a. ऑक्सीजन और हाइड्रोजन के अलावा अन्य सभी परमाणुओं को संतुलित करें।
b. ऑक्सीजन परमाणुओं को संतुलित करने के लिए, जिस तरफ ऑक्सीजन की कमी हो, उस तरफ \( \text{H}_2\text{O} \) अणु जोड़ें।
c. हाइड्रोजन परमाणुओं को संतुलित करने के लिए, जिस तरफ हाइड्रोजन की कमी हो, उस तरफ \( \text{H}^+ \) आयन जोड़ें (अम्लीय माध्यम के लिए)। क्षारीय माध्यम के लिए, \( \text{H}^+ \) को \( \text{OH}^- \) में बदलें।
d. आवेश को संतुलित करने के लिए, जिस तरफ आवश्यक हो, इलेक्ट्रॉन (\( \text{e}^- \)) जोड़ें।
4. दोनों अर्ध-अभिक्रियाओं में इलेक्ट्रॉनों की संख्या को बराबर करने के लिए उपयुक्त पूर्णांकों से गुणा करें।
5. दोनों संतुलित अर्ध-अभिक्रियाओं को जोड़ें और दोनों तरफ से समान प्रजातियों को रद्द करें।
6. अंत में, यह सत्यापित करें कि परमाणु और आवेश दोनों संतुलित हैं।

निम्न समीकरण को संतुलित करना (उदाहरण):
\( \text{N}_2\text{H}_4(\text{l}) + \text{ClO}_3^-(\text{aq}) \rightarrow \text{NO}(\text{g}) + \text{Cl}^-(\text{aq}) + \text{H}_2\text{O}(\text{l}) \) (क्षारीय माध्यम में) **(नोट: यह प्रश्न में अम्लीय माध्यम में दिया है, लेकिन उत्तर में क्षारीय माध्यम की प्रक्रिया का पालन किया गया है। हम दिए गए समाधान के चरणों का पालन करेंगे। )**
ऑक्सीकरण अर्ध-अभिक्रिया:
\( \text{N}_2\text{H}_4 \rightarrow \text{NO} \)
नाइट्रोजन को संतुलित करें: \( \text{N}_2\text{H}_4 \rightarrow 2\text{NO} \)
ऑक्सीजन को संतुलित करें: \( \text{N}_2\text{H}_4 + 2\text{H}_2\text{O} \rightarrow 2\text{NO} \)
हाइड्रोजन को संतुलित करें: \( \text{N}_2\text{H}_4 + 2\text{H}_2\text{O} \rightarrow 2\text{NO} + 8\text{H}^+ \)
क्षारीय माध्यम के लिए \( \text{OH}^- \) जोड़ें: \( \text{N}_2\text{H}_4 + 2\text{H}_2\text{O} + 8\text{OH}^- \rightarrow 2\text{NO} + 8\text{H}^+ + 8\text{OH}^- \)
\( \text{N}_2\text{H}_4 + 2\text{H}_2\text{O} + 8\text{OH}^- \rightarrow 2\text{NO} + 8\text{H}_2\text{O} \)
सरल करने पर: \( \text{N}_2\text{H}_4 + 8\text{OH}^- \rightarrow 2\text{NO} + 6\text{H}_2\text{O} \)
आवेश को संतुलित करें: \( \text{N}_2\text{H}_4 + 8\text{OH}^- \rightarrow 2\text{NO} + 6\text{H}_2\text{O} + 8\text{e}^- \) .....(a)

अपचयन अर्ध-अभिक्रिया:
\( \text{ClO}_3^- \rightarrow \text{Cl}^- \)
ऑक्सीजन को संतुलित करें: \( \text{ClO}_3^- \rightarrow \text{Cl}^- + 3\text{H}_2\text{O} \)
हाइड्रोजन को संतुलित करें: \( \text{ClO}_3^- + 6\text{H}^+ \rightarrow \text{Cl}^- + 3\text{H}_2\text{O} \)
क्षारीय माध्यम के लिए \( \text{OH}^- \) जोड़ें: \( \text{ClO}_3^- + 6\text{H}^+ + 6\text{OH}^- \rightarrow \text{Cl}^- + 3\text{H}_2\text{O} + 6\text{OH}^- \)
\( \text{ClO}_3^- + 6\text{H}_2\text{O} \rightarrow \text{Cl}^- + 3\text{H}_2\text{O} + 6\text{OH}^- \)
सरल करने पर: \( \text{ClO}_3^- + 3\text{H}_2\text{O} \rightarrow \text{Cl}^- + 6\text{OH}^- \)
आवेश को संतुलित करें: \( \text{ClO}_3^- + 3\text{H}_2\text{O} + 6\text{e}^- \rightarrow \text{Cl}^- + 6\text{OH}^- \) .....(b)

इलेक्ट्रॉनों को बराबर करने के लिए समीकरण (a) को 3 से और समीकरण (b) को 4 से गुणा करें, फिर उन्हें जोड़ दें:
\( 3(\text{N}_2\text{H}_4 + 8\text{OH}^- \rightarrow 2\text{NO} + 6\text{H}_2\text{O} + 8\text{e}^-) \)
\( \implies 3\text{N}_2\text{H}_4 + 24\text{OH}^- \rightarrow 6\text{NO} + 18\text{H}_2\text{O} + 24\text{e}^- \)
\( 4(\text{ClO}_3^- + 3\text{H}_2\text{O} + 6\text{e}^- \rightarrow \text{Cl}^- + 6\text{OH}^-) \)
\( \implies 4\text{ClO}_3^- + 12\text{H}_2\text{O} + 24\text{e}^- \rightarrow 4\text{Cl}^- + 24\text{OH}^- \)
जोड़ने पर:
\( 3\text{N}_2\text{H}_4 + 24\text{OH}^- + 4\text{ClO}_3^- + 12\text{H}_2\text{O} + 24\text{e}^- \rightarrow 6\text{NO} + 18\text{H}_2\text{O} + 24\text{e}^- + 4\text{Cl}^- + 24\text{OH}^- \)
सरल करने पर:
\( 3\text{N}_2\text{H}_4(\text{l}) + 4\text{ClO}_3^-(\text{aq}) \rightarrow 6\text{NO}(\text{g}) + 4\text{Cl}^-(\text{aq}) + 6\text{H}_2\text{O}(\text{l}) \)
In simple words: आयन-इलेक्ट्रॉन विधि से समीकरण संतुलित करने के लिए, अभिक्रिया को ऑक्सीकरण और अपचयन के अर्ध-अभिक्रियाओं में बांटते हैं। फिर प्रत्येक अर्ध-अभिक्रिया में परमाणुओं और आवेश को संतुलित करते हैं, और अंत में इलेक्ट्रॉनों को बराबर करके दोनों अर्ध-अभिक्रियाओं को जोड़ देते हैं।

🎯 Exam Tip: इस विधि का अभ्यास करते समय, प्रत्येक चरण को सावधानीपूर्वक करें, खासकर हाइड्रोजन, ऑक्सीजन और आवेश को संतुलित करते समय। अम्लीय और क्षारीय माध्यम के लिए नियमों में अंतर को याद रखें।

 

Question 33. निम्न अभिक्रियाओं को प्रदर्शित करने वाले गेल्वेनिक सेल का चित्र बनाइए। \( \text{Zn} + 2\text{Ag}^+ \rightarrow \text{Zn}^{2+} + 2\text{Ag} \) इसके आधार पर निम्न उत्तर भी दीजिए
(i) प्रत्येक इलेक्ट्रॉड पर होने वाली अभिक्रिया का समीकरण दीजिए।
(ii) बाह्य परिपथ में इलेक्ट्रॉनों का प्रवाह किस ओर होगा?
(iii) एनोड तथा केथोड़ बताइए।
(iv) यदि \( \text{E}^\circ_{\text{Zn}^{2+}/\text{Zn}} = -0.76 \, \text{V} \) तथा \( \text{E}^\circ_{\text{Ag}^+/\text{Ag}} = +0.80 \, \text{V} \) हो तो क्या \( \text{E}^\circ_{\text{cell}} = 1.56 \, \text{V} \) होगा।
Answer: दिए गए अभिक्रिया \( \text{Zn} + 2\text{Ag}^+ \rightarrow \text{Zn}^{2+} + 2\text{Ag} \) को प्रदर्शित करने वाले गेल्वेनिक सेल को निम्नानुसार चित्रित किया जा सकता है:
Zn²⁺ विलयन Ag⁺ विलयन Zn रॉड एनोड (-) Ag रॉड कैथोड (+) लवण सेतु V इलेक्ट्रॉनों का प्रवाह Zn(S) | Zn²⁺(aq) || Ag⁺(aq) | Ag(S)

(i) प्रत्येक इलेक्ट्रोड पर होने वाली अभिक्रिया का समीकरण:
बायें इलेक्ट्रोड पर (एनोड, ऑक्सीकरण): \( \text{Zn}(\text{S}) \rightarrow \text{Zn}^{2+}(\text{aq}) + 2\text{e}^- \)
दायें इलेक्ट्रोड पर (कैथोड, अपचयन): \( 2\text{Ag}^+(\text{aq}) + 2\text{e}^- \rightarrow 2\text{Ag}(\text{S}) \)

(ii) बाह्य परिपथ में इलेक्ट्रॉनों का प्रवाह:
इलेक्ट्रॉनों का प्रवाह एनोड (\( \text{Zn} \)) से कैथोड (\( \text{Ag} \)) इलेक्ट्रोड की तरफ होगा।

(iii) एनोड तथा कैथोड:
यहाँ \( \text{Zn} \) एनोड का कार्य करता है (जहाँ ऑक्सीकरण होता है)।
और \( \text{Ag} \) कैथोड का कार्य करता है (जहाँ अपचयन होता है)।

(iv) सेल विभव की गणना:
ऑक्सीकरण विभव \( \text{E}^\circ_{\text{oxidation}} = \text{E}^\circ_{\text{Zn}/\text{Zn}^{2+}} = - \text{E}^\circ_{\text{Zn}^{2+}/\text{Zn}} = -(-0.76 \, \text{V}) = +0.76 \, \text{V} \)
अपचयन विभव \( \text{E}^\circ_{\text{reduction}} = \text{E}^\circ_{\text{Ag}^+/\text{Ag}} = +0.80 \, \text{V} \)
नेट सेल विभव \( \text{E}^\circ_{\text{cell}} = \text{E}^\circ_{\text{oxidation}} + \text{E}^\circ_{\text{reduction}} \)
\( \text{E}^\circ_{\text{cell}} = (+0.76 \, \text{V}) + (+0.80 \, \text{V}) = 1.56 \, \text{V} \)
हां, सेल का मानक विभव \( 1.56 \, \text{V} \) होगा। यह एक धनात्मक मान है, जो दर्शाता है कि अभिक्रिया स्वतः है।
In simple words: सेल में, जिंक रॉड एनोड है और सिल्वर रॉड कैथोड है। इलेक्ट्रॉन जिंक से सिल्वर की ओर बहते हैं। प्रत्येक इलेक्ट्रोड पर अभिक्रियाएँ ऑक्सीकरण (जिंक) और अपचयन (सिल्वर) होती हैं। दिए गए मानों के साथ सेल विभव \( 1.56 \, \text{V} \) होगा।

🎯 Exam Tip: एनोड पर हमेशा ऑक्सीकरण (इलेक्ट्रॉन का नुकसान) होता है, और कैथोड पर हमेशा अपचयन (इलेक्ट्रॉन का लाभ) होता है। इलेक्ट्रॉन बाहरी सर्किट में एनोड से कैथोड की ओर बहते हैं।

 

Question 34. विद्युत रासायनिक श्रेणी किसे कहते हैं? धात्त्विक तत्त्व A, B, C तथा D का इलेक्ट्रॉड अपचयन विभव क्रमशः \( + 0.79 \), \( – 0.74 \), \( 1.08 \) तथा \( -0.31 \) वोल्ट है। इन्हें बढ़ती क्रियाशीलता के क्रम में जमाइये। 1M HCI अम्ल को रखने के लिए ऐलुमिनियम तथा चाँदी के पात्रों में से कौन अधिक उपयुक्त होगा? \( \text{E}^\circ_{\text{Al}^{3+}/\text{Al}} = -1.66 \, \text{V} \) तथा \( \text{E}^\circ_{\text{Ag}^+/\text{Ag}} = +0.80 \, \text{V} \)
Answer: विद्युत रासायनिक श्रेणी विभिन्न तत्वों के मानक अपचयन विभवों को घटते क्रम में व्यवस्थित करने पर प्राप्त होने वाली एक सूची है। यह श्रेणी तत्वों की सापेक्षिक ऑक्सीकारक और अपचायक क्षमता को दर्शाती है।

धात्त्विक तत्त्वों को बढ़ती क्रियाशीलता के क्रम में जमाना:
धातु की क्रियाशीलता उसके मानक अपचयन विभव के व्युत्क्रमानुपाती होती है। जितना अधिक ऋणात्मक अपचयन विभव होगा, उतनी ही अधिक क्रियाशीलता होगी।
दिए गए अपचयन विभव:
\( \text{A}: +0.79 \, \text{V} \)
\( \text{B}: -0.74 \, \text{V} \)
\( \text{C}: +1.08 \, \text{V} \)
\( \text{D}: -0.31 \, \text{V} \)
इन मानों को आरोही क्रम में व्यवस्थित करने पर:
\( \text{C} (+1.08 \, \text{V}) > \text{A} (+0.79 \, \text{V}) > \text{D} (-0.31 \, \text{V}) > \text{B} (-0.74 \, \text{V}) \)
क्रियाशीलता का क्रम (बढ़ते क्रम में, अर्थात् घटते अपचयन विभव के क्रम में):
सबसे कम सक्रिय \( \text{C} < \text{A} < \text{D} < \text{B} \) सबसे अधिक सक्रिय

1M HCl अम्ल को रखने के लिए उपयुक्त पात्र:
हमें यह निर्धारित करना है कि \( \text{Al} \) या \( \text{Ag} \) में से कौन सा पात्र 1M \( \text{HCl} \) अम्ल को रखने के लिए अधिक उपयुक्त होगा। इसके लिए हम इन धातुओं के मानक अपचयन विभव की तुलना हाइड्रोजन के मानक अपचयन विभव \( (0.00 \, \text{V}) \) से करेंगे।
\( \text{E}^\circ_{\text{Al}^{3+}/\text{Al}} = -1.66 \, \text{V} \)
\( \text{E}^\circ_{\text{Ag}^+/\text{Ag}} = +0.80 \, \text{V} \)
चूंकि \( \text{Al} \) का अपचयन विभव \( (-1.66 \, \text{V}) \) हाइड्रोजन के अपचयन विभव \( (0.00 \, \text{V}) \) से अधिक ऋणात्मक है, \( \text{Al} \) हाइड्रोजन से अधिक सक्रिय है। इसलिए \( \text{Al} \) अम्ल से अभिक्रिया करके \( \text{H}_2 \) गैस मुक्त करेगा और संक्षारित हो जाएगा।
अभिक्रिया: \( 2\text{Al}(\text{s}) + 6\text{HCl}(\text{aq}) \rightarrow 2\text{AlCl}_3(\text{aq}) + 3\text{H}_2(\text{g}) \)
चूंकि \( \text{Ag} \) का अपचयन विभव \( (+0.80 \, \text{V}) \) हाइड्रोजन के अपचयन विभव \( (0.00 \, \text{V}) \) से अधिक धनात्मक है, \( \text{Ag} \) हाइड्रोजन से कम सक्रिय है। इसलिए \( \text{Ag} \) अम्ल से अभिक्रिया नहीं करेगा।
अतः 1M \( \text{HCl} \) अम्ल को रखने के लिए चाँदी (\( \text{Ag} \)) का पात्र अधिक उपयुक्त होगा।
In simple words: विद्युत रासायनिक श्रेणी तत्वों को उनके अपचयन विभव के अनुसार व्यवस्थित करती है। तत्वों को बढ़ती क्रियाशीलता के क्रम में \( \text{C} < \text{A} < \text{D} < \text{B} \) है। 1M \( \text{HCl} \) अम्ल को रखने के लिए चाँदी का पात्र बेहतर है क्योंकि एल्यूमीनियम अम्ल से अभिक्रिया करेगा, जबकि चाँदी नहीं करेगी।

🎯 Exam Tip: एक धातु जो हाइड्रोजन से कम सक्रिय होती है (यानी, जिसका मानक अपचयन विभव \( 0.00 \, \text{V} \) से अधिक धनात्मक होता है), वह अम्ल से अभिक्रिया करके हाइड्रोजन गैस मुक्त नहीं करेगी। इसलिए, ऐसे अम्लों को ऐसी कम सक्रिय धातुओं के पात्रों में सुरक्षित रूप से रखा जा सकता है।

 

Question 35. निम्नलिखित समीकरणों को आयन इलेक्ट्रॉन विधि द्वारा संतुलित कीजिए-
(i) \( \text{MnO}_4^- + \text{SO}_3^{2-} \rightarrow \text{Mn}^{2+} + \text{SO}_4^{2-} \)
(ii) \( \text{Cr}_2\text{O}_7^{2-} + \text{H}^+ + \text{I}^- \rightarrow \text{Cr}^{3+} + \text{H}_2\text{O} + \text{I}_2 \) (अम्लीय माध्यम में)
(iii) \( \text{Cl}_2 + \text{OH}^- \rightarrow \text{Cl}^- + \text{ClO}_3^- \)
(iv) \( \text{N}_2\text{H}_4 + \text{ClO}_3^- \rightarrow \text{NO} + \text{Cl}^- \) (अम्लीय माध्यम में)
Answer:
(i) \( \text{MnO}_4^- + \text{SO}_3^{2-} \rightarrow \text{Mn}^{2+} + \text{SO}_4^{2-} \)
ऑक्सीकरण अर्द्ध-अभिक्रिया:
\( \text{SO}_3^{2-} \rightarrow \text{SO}_4^{2-} \)
ऑक्सीजन को संतुलित करें: \( \text{SO}_3^{2-} + \text{H}_2\text{O} \rightarrow \text{SO}_4^{2-} \)
हाइड्रोजन को संतुलित करें: \( \text{SO}_3^{2-} + \text{H}_2\text{O} \rightarrow \text{SO}_4^{2-} + 2\text{H}^+ \)
आवेश को संतुलित करें: \( \text{SO}_3^{2-} + \text{H}_2\text{O} \rightarrow \text{SO}_4^{2-} + 2\text{H}^+ + 2\text{e}^- \) .....(2)

अपचयन अर्द्ध-अभिक्रिया:
\( \text{MnO}_4^- \rightarrow \text{Mn}^{2+} \)
ऑक्सीजन को संतुलित करें: \( \text{MnO}_4^- \rightarrow \text{Mn}^{2+} + 4\text{H}_2\text{O} \)
हाइड्रोजन को संतुलित करें: \( \text{MnO}_4^- + 8\text{H}^+ \rightarrow \text{Mn}^{2+} + 4\text{H}_2\text{O} \)
आवेश को संतुलित करें: \( \text{MnO}_4^- + 8\text{H}^+ + 5\text{e}^- \rightarrow \text{Mn}^{2+} + 4\text{H}_2\text{O} \) .....(1)

इलेक्ट्रॉनों को संतुलित करने के लिए समीकरण (1) को 2 से और समीकरण (2) को 5 से गुणा करके जोड़ें:
\( 2(\text{MnO}_4^- + 8\text{H}^+ + 5\text{e}^- \rightarrow \text{Mn}^{2+} + 4\text{H}_2\text{O}) \)
\( \implies 2\text{MnO}_4^- + 16\text{H}^+ + 10\text{e}^- \rightarrow 2\text{Mn}^{2+} + 8\text{H}_2\text{O} \)
\( 5(\text{SO}_3^{2-} + \text{H}_2\text{O} \rightarrow \text{SO}_4^{2-} + 2\text{H}^+ + 2\text{e}^-) \)
\( \implies 5\text{SO}_3^{2-} + 5\text{H}_2\text{O} \rightarrow 5\text{SO}_4^{2-} + 10\text{H}^+ + 10\text{e}^- \)
जोड़ने पर:
\( 2\text{MnO}_4^- + 16\text{H}^+ + 5\text{SO}_3^{2-} + 5\text{H}_2\text{O} \rightarrow 2\text{Mn}^{2+} + 8\text{H}_2\text{O} + 5\text{SO}_4^{2-} + 10\text{H}^+ \)
सरल करने पर:
\( 2\text{MnO}_4^- + 5\text{SO}_3^{2-} + 6\text{H}^+ \rightarrow 2\text{Mn}^{2+} + 5\text{SO}_4^{2-} + 3\text{H}_2\text{O} \)

(ii) \( \text{Cr}_2\text{O}_7^{2-} + \text{H}^+ + \text{I}^- \rightarrow \text{Cr}^{3+} + \text{H}_2\text{O} + \text{I}_2 \) (अम्लीय माध्यम में)
ऑक्सीकरण अर्द्ध-अभिक्रिया:
\( \text{I}^- \rightarrow \text{I}_2 \)
आयोडीन परमाणुओं को संतुलित करें: \( 2\text{I}^- \rightarrow \text{I}_2 \)
आवेश को संतुलित करें: \( 2\text{I}^- \rightarrow \text{I}_2 + 2\text{e}^- \) .....(2)

अपचयन अर्द्ध-अभिक्रिया:
\( \text{Cr}_2\text{O}_7^{2-} \rightarrow \text{Cr}^{3+} \)
क्रोमियम परमाणुओं को संतुलित करें: \( \text{Cr}_2\text{O}_7^{2-} \rightarrow 2\text{Cr}^{3+} \)
ऑक्सीजन परमाणुओं को संतुलित करें: \( \text{Cr}_2\text{O}_7^{2-} \rightarrow 2\text{Cr}^{3+} + 7\text{H}_2\text{O} \)
हाइड्रोजन परमाणुओं को संतुलित करें: \( \text{Cr}_2\text{O}_7^{2-} + 14\text{H}^+ \rightarrow 2\text{Cr}^{3+} + 7\text{H}_2\text{O} \)
आवेश को संतुलित करें: \( \text{Cr}_2\text{O}_7^{2-} + 14\text{H}^+ + 6\text{e}^- \rightarrow 2\text{Cr}^{3+} + 7\text{H}_2\text{O} \) .....(1)

इलेक्ट्रॉनों को संतुलित करने के लिए समीकरण (1) को 1 से और समीकरण (2) को 3 से गुणा करके जोड़ें:
\( \text{Cr}_2\text{O}_7^{2-} + 14\text{H}^+ + 6\text{e}^- \rightarrow 2\text{Cr}^{3+} + 7\text{H}_2\text{O} \)
\( 3(2\text{I}^- \rightarrow \text{I}_2 + 2\text{e}^-) \)
\( \implies 6\text{I}^- \rightarrow 3\text{I}_2 + 6\text{e}^- \)
जोड़ने पर:
\( \text{Cr}_2\text{O}_7^{2-} + 14\text{H}^+ + 6\text{I}^- \rightarrow 2\text{Cr}^{3+} + 3\text{I}_2 + 7\text{H}_2\text{O} \)

(iii) \( \text{Cl}_2 + \text{OH}^- \rightarrow \text{Cl}^- + \text{ClO}_3^- \) (क्षारीय माध्यम)
ऑक्सीकरण अर्द्ध-अभिक्रिया:
\( \text{Cl}_2 \rightarrow \text{ClO}_3^- \)
क्लोरीन परमाणुओं को संतुलित करें: \( \text{Cl}_2 \rightarrow 2\text{ClO}_3^- \)
ऑक्सीजन परमाणुओं को संतुलित करें: \( \text{Cl}_2 + 6\text{H}_2\text{O} \rightarrow 2\text{ClO}_3^- \)
हाइड्रोजन परमाणुओं को संतुलित करें: \( \text{Cl}_2 + 6\text{H}_2\text{O} \rightarrow 2\text{ClO}_3^- + 12\text{H}^+ \)
क्षारीय माध्यम के लिए \( \text{OH}^- \) जोड़ें: \( \text{Cl}_2 + 6\text{H}_2\text{O} + 12\text{OH}^- \rightarrow 2\text{ClO}_3^- + 12\text{H}^+ + 12\text{OH}^- \)
\( \text{Cl}_2 + 6\text{H}_2\text{O} + 12\text{OH}^- \rightarrow 2\text{ClO}_3^- + 12\text{H}_2\text{O} \)
सरल करने पर: \( \text{Cl}_2 + 12\text{OH}^- \rightarrow 2\text{ClO}_3^- + 6\text{H}_2\text{O} \)
आवेश को संतुलित करें: \( \text{Cl}_2 + 12\text{OH}^- \rightarrow 2\text{ClO}_3^- + 6\text{H}_2\text{O} + 10\text{e}^- \) .....(1)

अपचयन अर्द्ध-अभिक्रिया:
\( \text{Cl}_2 \rightarrow \text{Cl}^- \)
क्लोरीन परमाणुओं को संतुलित करें: \( \text{Cl}_2 \rightarrow 2\text{Cl}^- \)
आवेश को संतुलित करें: \( \text{Cl}_2 + 2\text{e}^- \rightarrow 2\text{Cl}^- \) .....(2)

इलेक्ट्रॉनों को संतुलित करने के लिए समीकरण (1) को 1 से और समीकरण (2) को 5 से गुणा करके जोड़ें:
\( \text{Cl}_2 + 12\text{OH}^- \rightarrow 2\text{ClO}_3^- + 6\text{H}_2\text{O} + 10\text{e}^- \)
\( 5(\text{Cl}_2 + 2\text{e}^- \rightarrow 2\text{Cl}^-) \)
\( \implies 5\text{Cl}_2 + 10\text{e}^- \rightarrow 10\text{Cl}^- \)
जोड़ने पर:
\( \text{Cl}_2 + 12\text{OH}^- + 5\text{Cl}_2 \rightarrow 2\text{ClO}_3^- + 6\text{H}_2\text{O} + 10\text{Cl}^- \)
सरल करने पर:
\( 6\text{Cl}_2 + 12\text{OH}^- \rightarrow 2\text{ClO}_3^- + 10\text{Cl}^- + 6\text{H}_2\text{O} \)
(सभी गुणांकों को 2 से भाग देने पर)
\( 3\text{Cl}_2 + 6\text{OH}^- \rightarrow \text{ClO}_3^- + 5\text{Cl}^- + 3\text{H}_2\text{O} \)

(iv) \( \text{N}_2\text{H}_4 + \text{ClO}_3^- \rightarrow \text{NO} + \text{Cl}^- \) (अम्लीय माध्यम में) **(नोट: यह समाधान ऑक्सीकरण अंक विधि का उपयोग करता है जैसा कि स्रोत में दिया गया है।)**
ऑक्सीकरण अंक गणना:
\( \text{N}_2\text{H}_4 \): \( 2x + 4(+1) = 0 \implies 2x = -4 \implies x = -2 \) (प्रत्येक \( \text{N} \) के लिए)
\( \text{NO} \): \( x + (-2) = 0 \implies x = +2 \) (प्रत्येक \( \text{N} \) के लिए)
नाइट्रोजन के ऑक्सीकरण अंक में परिवर्तन: \( -2 \) से \( +2 \), प्रति \( \text{N} \) परमाणु \( 4 \) की वृद्धि। \( \text{N}_2 \) के लिए कुल वृद्धि \( 2 \times 4 = 8 \)

\( \text{ClO}_3^- \): \( x + 3(-2) = -1 \implies x - 6 = -1 \implies x = +5 \) (क्लोरीन के लिए)
\( \text{Cl}^- \): \( -1 \) (क्लोरीन के लिए)
क्लोरीन के ऑक्सीकरण अंक में परिवर्तन: \( +5 \) से \( -1 \), \( 6 \) की कमी।

कुल वृद्धि और कुल कमी को बराबर करने के लिए:
नाइट्रोजन के ऑक्सीकरण अंक में कुल वृद्धि \( 8 \) है। क्लोरीन के ऑक्सीकरण अंक में कुल कमी \( 6 \) है।
इन्हें बराबर करने के लिए, \( \text{N}_2\text{H}_4 \) को 3 से और \( \text{ClO}_3^- \) को 4 से गुणा करें:
\( 3\text{N}_2\text{H}_4 + 4\text{ClO}_3^- \rightarrow 6\text{NO} + 4\text{Cl}^- \)

अन्य परमाणुओं को संतुलित करें:
ऑक्सीजन को संतुलित करें (दाहिनी ओर \( 6\text{H}_2\text{O} \) जोड़ें):
\( 3\text{N}_2\text{H}_4 + 4\text{ClO}_3^- \rightarrow 6\text{NO} + 4\text{Cl}^- + 6\text{H}_2\text{O} \)
यह समीकरण परमाणुओं और आवेश दोनों के लिए संतुलित है।
In simple words: प्रत्येक समीकरण को आयन-इलेक्ट्रॉन विधि का उपयोग करके चरणों में संतुलित करें, ऑक्सीकरण और अपचयन अर्ध-अभिक्रियाओं को अलग करें, परमाणुओं और आवेश को संतुलित करें, और फिर दोनों अर्ध-अभिक्रियाओं को जोड़ दें। **(भाग iv के लिए ऑक्सीकरण अंक विधि का उपयोग किया गया है।)**

🎯 Exam Tip: अम्लीय माध्यम में ऑक्सीकरण और हाइड्रोजन परमाणुओं को संतुलित करने के लिए \( \text{H}_2\text{O} \) और \( \text{H}^+ \) का उपयोग करें। क्षारीय माध्यम में \( \text{H}^+ \) को \( \text{OH}^- \) में बदल दें।

 

Question 36. आयन इलेक्ट्रॉन विधि द्वारा निम्न अभिक्रियाओं को संतुलित कीजिए
(i) \( \text{NO}_3^- + \text{H}^+ + \text{I}^- \rightarrow \text{NO} + \text{I}_2 + \text{H}_2\text{O} \)
(ii) \( \text{CrO}_4^{2-} + \text{OH}^- + \text{SO}_3^{2-} \rightarrow \text{CrO}_2^- + \text{SO}_4^{2-} \)
(iii) \( \text{MnO}_4^- + \text{Fe}_3\text{O}_4 + \text{OH}^- \rightarrow \text{Fe}_2\text{O}_3 + \text{MnO}_2 \)
(iv) \( \text{P}_4 + \text{OH}^- \rightarrow \text{PH}_3 + \text{H}_2\text{PO}_2^- \)
Answer:
(i) \( \text{NO}_3^- + \text{H}^+ + \text{I}^- \rightarrow \text{NO} + \text{I}_2 + \text{H}_2\text{O} \)
ऑक्सीकरण अर्द्ध-अभिक्रिया:
\( \text{I}^- \rightarrow \text{I}_2 \)
आयोडीन परमाणुओं को संतुलित करें: \( 2\text{I}^- \rightarrow \text{I}_2 \)
आवेश को संतुलित करें: \( 2\text{I}^- \rightarrow \text{I}_2 + 2\text{e}^- \) .....(2)

अपचयन अर्द्ध-अभिक्रिया:
\( \text{NO}_3^- \rightarrow \text{NO} \)
ऑक्सीजन को संतुलित करें: \( \text{NO}_3^- \rightarrow \text{NO} + 2\text{H}_2\text{O} \)
हाइड्रोजन को संतुलित करें: \( \text{NO}_3^- + 4\text{H}^+ \rightarrow \text{NO} + 2\text{H}_2\text{O} \)
आवेश को संतुलित करें: \( \text{NO}_3^- + 4\text{H}^+ + 3\text{e}^- \rightarrow \text{NO} + 2\text{H}_2\text{O} \) .....(1)

इलेक्ट्रॉनों को संतुलित करने के लिए समीकरण (1) को 2 से और समीकरण (2) को 3 से गुणा करके जोड़ें:
\( 2(\text{NO}_3^- + 4\text{H}^+ + 3\text{e}^- \rightarrow \text{NO} + 2\text{H}_2\text{O}) \)
\( \implies 2\text{NO}_3^- + 8\text{H}^+ + 6\text{e}^- \rightarrow 2\text{NO} + 4\text{H}_2\text{O} \)
\( 3(2\text{I}^- \rightarrow \text{I}_2 + 2\text{e}^-) \)
\( \implies 6\text{I}^- \rightarrow 3\text{I}_2 + 6\text{e}^- \)
जोड़ने पर:
\( 2\text{NO}_3^- + 8\text{H}^+ + 6\text{I}^- \rightarrow 2\text{NO} + 3\text{I}_2 + 4\text{H}_2\text{O} \)

(ii) \( \text{CrO}_4^{2-} + \text{OH}^- + \text{SO}_3^{2-} \rightarrow \text{CrO}_2^- + \text{SO}_4^{2-} \)
ऑक्सीकरण अर्द्ध-अभिक्रिया:
\( \text{SO}_3^{2-} \rightarrow \text{SO}_4^{2-} \)
ऑक्सीजन को संतुलित करें: \( \text{SO}_3^{2-} + \text{H}_2\text{O} \rightarrow \text{SO}_4^{2-} \)
हाइड्रोजन को संतुलित करें: \( \text{SO}_3^{2-} + \text{H}_2\text{O} \rightarrow \text{SO}_4^{2-} + 2\text{H}^+ \)
क्षारीय माध्यम के लिए \( \text{OH}^- \) जोड़ें: \( \text{SO}_3^{2-} + \text{H}_2\text{O} + 2\text{OH}^- \rightarrow \text{SO}_4^{2-} + 2\text{H}^+ + 2\text{OH}^- \)
\( \text{SO}_3^{2-} + \text{H}_2\text{O} + 2\text{OH}^- \rightarrow \text{SO}_4^{2-} + 2\text{H}_2\text{O} \)
सरल करने पर: \( \text{SO}_3^{2-} + 2\text{OH}^- \rightarrow \text{SO}_4^{2-} + \text{H}_2\text{O} \)
आवेश को संतुलित करें: \( \text{SO}_3^{2-} + 2\text{OH}^- \rightarrow \text{SO}_4^{2-} + \text{H}_2\text{O} + 2\text{e}^- \) .....(2)

अपचयन अर्द्ध-अभिक्रिया:
\( \text{CrO}_4^{2-} \rightarrow \text{CrO}_2^- \)
ऑक्सीजन को संतुलित करें: \( \text{CrO}_4^{2-} \rightarrow \text{CrO}_2^- + 2\text{H}_2\text{O} \)
हाइड्रोजन को संतुलित करें: \( \text{CrO}_4^{2-} + 4\text{H}^+ \rightarrow \text{CrO}_2^- + 2\text{H}_2\text{O} \)
क्षारीय माध्यम के लिए \( \text{OH}^- \) जोड़ें: \( \text{CrO}_4^{2-} + 4\text{H}^+ + 4\text{OH}^- \rightarrow \text{CrO}_2^- + 2\text{H}_2\text{O} + 4\text{OH}^- \)
\( \text{CrO}_4^{2-} + 4\text{H}_2\text{O} \rightarrow \text{CrO}_2^- + 2\text{H}_2\text{O} + 4\text{OH}^- \)
सरल करने पर: \( \text{CrO}_4^{2-} + 2\text{H}_2\text{O} \rightarrow \text{CrO}_2^- + 4\text{OH}^- \)
आवेश को संतुलित करें: \( \text{CrO}_4^{2-} + 2\text{H}_2\text{O} + 3\text{e}^- \rightarrow \text{CrO}_2^- + 4\text{OH}^- \) .....(1)

इलेक्ट्रॉनों को संतुलित करने के लिए समीकरण (1) को 2 से और समीकरण (2) को 3 से गुणा करके जोड़ें:
\( 2(\text{CrO}_4^{2-} + 2\text{H}_2\text{O} + 3\text{e}^- \rightarrow \text{CrO}_2^- + 4\text{OH}^-) \)
\( \implies 2\text{CrO}_4^{2-} + 4\text{H}_2\text{O} + 6\text{e}^- \rightarrow 2\text{CrO}_2^- + 8\text{OH}^- \)
\( 3(\text{SO}_3^{2-} + 2\text{OH}^- \rightarrow \text{SO}_4^{2-} + \text{H}_2\text{O} + 2\text{e}^-) \)
\( \implies 3\text{SO}_3^{2-} + 6\text{OH}^- \rightarrow 3\text{SO}_4^{2-} + 3\text{H}_2\text{O} + 6\text{e}^- \)
जोड़ने पर:
\( 2\text{CrO}_4^{2-} + 4\text{H}_2\text{O} + 3\text{SO}_3^{2-} + 6\text{OH}^- \rightarrow 2\text{CrO}_2^- + 8\text{OH}^- + 3\text{SO}_4^{2-} + 3\text{H}_2\text{O} \)
सरल करने पर:
\( 2\text{CrO}_4^{2-} + 3\text{SO}_3^{2-} + \text{H}_2\text{O} \rightarrow 2\text{CrO}_2^- + 3\text{SO}_4^{2-} + 2\text{OH}^- \)

(iii) \( \text{MnO}_4^- + \text{Fe}_3\text{O}_4 + \text{OH}^- \rightarrow \text{Fe}_2\text{O}_3 + \text{MnO}_2 \)
ऑक्सीकरण अर्द्ध-अभिक्रिया:
\( \text{Fe}_3\text{O}_4 \rightarrow \text{Fe}_2\text{O}_3 \)
आयरन परमाणुओं को संतुलित करें: \( 2\text{Fe}_3\text{O}_4 \rightarrow 3\text{Fe}_2\text{O}_3 \)
ऑक्सीजन परमाणुओं को संतुलित करें: \( 2\text{Fe}_3\text{O}_4 \rightarrow 3\text{Fe}_2\text{O}_3 \)
हाइड्रोजन परमाणुओं को संतुलित करें: \( 2\text{Fe}_3\text{O}_4 \)
आवेश को संतुलित करें: (इस अभिक्रिया में ऑक्सीकरण अंक विधि का उपयोग किया गया है)
\( \text{Fe}_3\text{O}_4 \) में \( \text{Fe} \) का ऑक्सीकरण अंक \( +8/3 \)
\( \text{Fe}_2\text{O}_3 \) में \( \text{Fe} \) का ऑक्सीकरण अंक \( +3 \)
\( 2\text{Fe}_3\text{O}_4 \rightarrow 3\text{Fe}_2\text{O}_3 \)
ऑक्सीकरण अंक में कुल परिवर्तन: \( 2 \times 3 \times (+3 - 8/3) = 2 \times 3 \times (1/3) = +2 \)
इलेक्ट्रॉनों को संतुलित करें: \( 2\text{Fe}_3\text{O}_4 \rightarrow 3\text{Fe}_2\text{O}_3 + 2\text{e}^- \) .....(2)

अपचयन अर्द्ध-अभिक्रिया:
\( \text{MnO}_4^- \rightarrow \text{MnO}_2 \)
ऑक्सीजन परमाणुओं को संतुलित करें: \( \text{MnO}_4^- \rightarrow \text{MnO}_2 + 2\text{H}_2\text{O} \)
हाइड्रोजन परमाणुओं को संतुलित करें: \( \text{MnO}_4^- + 4\text{H}^+ \rightarrow \text{MnO}_2 + 2\text{H}_2\text{O} \)
क्षारीय माध्यम के लिए \( \text{OH}^- \) जोड़ें: \( \text{MnO}_4^- + 4\text{H}^+ + 4\text{OH}^- \rightarrow \text{MnO}_2 + 2\text{H}_2\text{O} + 4\text{OH}^- \)
\( \text{MnO}_4^- + 4\text{H}_2\text{O} \rightarrow \text{MnO}_2 + 2\text{H}_2\text{O} + 4\text{OH}^- \)
सरल करने पर: \( \text{MnO}_4^- + 2\text{H}_2\text{O} \rightarrow \text{MnO}_2 + 4\text{OH}^- \)
आवेश को संतुलित करें: \( \text{MnO}_4^- + 2\text{H}_2\text{O} + 3\text{e}^- \rightarrow \text{MnO}_2 + 4\text{OH}^- \) .....(1)

इलेक्ट्रॉनों को संतुलित करने के लिए समीकरण (1) को 2 से और समीकरण (2) को 3 से गुणा करके जोड़ें:
\( 2(\text{MnO}_4^- + 2\text{H}_2\text{O} + 3\text{e}^- \rightarrow \text{MnO}_2 + 4\text{OH}^-) \)
\( \implies 2\text{MnO}_4^- + 4\text{H}_2\text{O} + 6\text{e}^- \rightarrow 2\text{MnO}_2 + 8\text{OH}^- \)
\( 3(2\text{Fe}_3\text{O}_4 \rightarrow 3\text{Fe}_2\text{O}_3 + 2\text{e}^-) \)
\( \implies 6\text{Fe}_3\text{O}_4 \rightarrow 9\text{Fe}_2\text{O}_3 + 6\text{e}^- \)
जोड़ने पर:
\( 2\text{MnO}_4^- + 4\text{H}_2\text{O} + 6\text{Fe}_3\text{O}_4 \rightarrow 2\text{MnO}_2 + 8\text{OH}^- + 9\text{Fe}_2\text{O}_3 \)
सरल करने पर:
\( 2\text{MnO}_4^- + 6\text{Fe}_3\text{O}_4 + \text{H}_2\text{O} \rightarrow 2\text{MnO}_2 + 9\text{Fe}_2\text{O}_3 + 2\text{OH}^- \)

(iv) \( \text{P}_4 + \text{OH}^- \rightarrow \text{PH}_3 + \text{H}_2\text{PO}_2^- \)
यह एक असमानुपातन अभिक्रिया है, जहाँ एक ही तत्व ऑक्सीकृत और अपचयित होता है।
ऑक्सीकरण अर्द्ध-अभिक्रिया:
\( \text{P}_4 \rightarrow \text{H}_2\text{PO}_2^- \)
फॉस्फोरस को संतुलित करें: \( \text{P}_4 \rightarrow 4\text{H}_2\text{PO}_2^- \)
ऑक्सीजन को संतुलित करें: \( \text{P}_4 + 8\text{H}_2\text{O} \rightarrow 4\text{H}_2\text{PO}_2^- \)
हाइड्रोजन को संतुलित करें: \( \text{P}_4 + 8\text{H}_2\text{O} \rightarrow 4\text{H}_2\text{PO}_2^- + 8\text{H}^+ \)
क्षारीय माध्यम के लिए \( \text{OH}^- \) जोड़ें: \( \text{P}_4 + 8\text{H}_2\text{O} + 8\text{OH}^- \rightarrow 4\text{H}_2\text{PO}_2^- + 8\text{H}^+ + 8\text{OH}^- \)
\( \text{P}_4 + 8\text{H}_2\text{O} + 8\text{OH}^- \rightarrow 4\text{H}_2\text{PO}_2^- + 8\text{H}_2\text{O} \)
सरल करने पर: \( \text{P}_4 + 8\text{OH}^- \rightarrow 4\text{H}_2\text{PO}_2^- \)
आवेश को संतुलित करें: \( \text{P}_4 + 8\text{OH}^- \rightarrow 4\text{H}_2\text{PO}_2^- + 4\text{e}^- \) .....(1)

अपचयन अर्द्ध-अभिक्रिया:
\( \text{P}_4 \rightarrow \text{PH}_3 \)
फॉस्फोरस को संतुलित करें: \( \text{P}_4 \rightarrow 4\text{PH}_3 \)
हाइड्रोजन को संतुलित करें: \( \text{P}_4 + 12\text{H}^+ \rightarrow 4\text{PH}_3 \)
क्षारीय माध्यम के लिए \( \text{OH}^- \) जोड़ें: \( \text{P}_4 + 12\text{H}^+ + 12\text{OH}^- \rightarrow 4\text{PH}_3 + 12\text{OH}^- \)
\( \text{P}_4 + 12\text{H}_2\text{O} \rightarrow 4\text{PH}_3 + 12\text{OH}^- \)
आवेश को संतुलित करें: \( \text{P}_4 + 12\text{H}_2\text{O} + 12\text{e}^- \rightarrow 4\text{PH}_3 + 12\text{OH}^- \) .....(2)

इलेक्ट्रॉनों को संतुलित करने के लिए समीकरण (1) को 3 से और समीकरण (2) को 1 से गुणा करके जोड़ें:
\( 3(\text{P}_4 + 8\text{OH}^- \rightarrow 4\text{H}_2\text{PO}_2^- + 4\text{e}^-) \)
\( \implies 3\text{P}_4 + 24\text{OH}^- \rightarrow 12\text{H}_2\text{PO}_2^- + 12\text{e}^- \)
\( \text{P}_4 + 12\text{H}_2\text{O} + 12\text{e}^- \rightarrow 4\text{PH}_3 + 12\text{OH}^- \)
जोड़ने पर:
\( 3\text{P}_4 + 24\text{OH}^- + \text{P}_4 + 12\text{H}_2\text{O} \rightarrow 12\text{H}_2\text{PO}_2^- + 4\text{PH}_3 + 12\text{OH}^- \)
सरल करने पर:
\( 4\text{P}_4 + 12\text{OH}^- + 12\text{H}_2\text{O} \rightarrow 12\text{H}_2\text{PO}_2^- + 4\text{PH}_3 \)
(सभी गुणांकों को 4 से भाग देने पर)
\( \text{P}_4 + 3\text{OH}^- + 3\text{H}_2\text{O} \rightarrow 3\text{H}_2\text{PO}_2^- + \text{PH}_3 \)
In simple words: आयन-इलेक्ट्रॉन विधि का उपयोग करके इन सभी समीकरणों को संतुलित करने के लिए, उन्हें ऑक्सीकरण और अपचयन अर्ध-अभिक्रियाओं में तोड़ें, परमाणुओं और आवेश को संतुलित करें, और फिर उन्हें जोड़ दें। असमानुपातन अभिक्रियाओं में, एक ही तत्व ऑक्सीकृत और अपचयित दोनों होता है।

🎯 Exam Tip: जटिल असमानुपातन अभिक्रियाओं (जैसे \( \text{P}_4 \)) को संतुलित करते समय, यह समझना महत्वपूर्ण है कि एक ही तत्व दो अलग-अलग उत्पादों में विभिन्न ऑक्सीकरण अवस्थाओं में बदलता है। प्रत्येक अर्ध-अभिक्रिया को अलग से संतुलित करें।

 

Question 37. निम्नलिखित समीकरणों को आयन इलेक्ट्रॉन विधि द्वारा सन्तुलित कीजिए-
(i) \( \text{MnO}_4^- + \text{H}_2\text{O}_2 \rightarrow \text{MnO}_2 + \text{O}_2 + \text{OH}^- \)
(ii) \( \text{AsO}_3^{3-} + \text{I}_2 + \text{H}_2\text{O} \rightarrow \text{AsO}_4^{3-} + \text{H}^+ + \text{I}^- \)
Answer:
(i) \( \text{MnO}_4^- + \text{H}_2\text{O}_2 \rightarrow \text{MnO}_2 + \text{O}_2 + \text{OH}^- \) (क्षारीय माध्यम)
ऑक्सीकरण अर्द्ध-अभिक्रिया:
\( \text{H}_2\text{O}_2 \rightarrow \text{O}_2 \)
हाइड्रोजन परमाणुओं को संतुलित करें: \( \text{H}_2\text{O}_2 \rightarrow \text{O}_2 + 2\text{H}^+ \)
क्षारीय माध्यम के लिए \( \text{OH}^- \) जोड़ें: \( \text{H}_2\text{O}_2 + 2\text{OH}^- \rightarrow \text{O}_2 + 2\text{H}^+ + 2\text{OH}^- \)
\( \text{H}_2\text{O}_2 + 2\text{OH}^- \rightarrow \text{O}_2 + 2\text{H}_2\text{O} \)
आवेश को संतुलित करें: \( \text{H}_2\text{O}_2 + 2\text{OH}^- \rightarrow \text{O}_2 + 2\text{H}_2\text{O} + 2\text{e}^- \) .....(2)

अपचयन अर्द्ध-अभिक्रिया:
\( \text{MnO}_4^- \rightarrow \text{MnO}_2 \)
ऑक्सीजन परमाणुओं को संतुलित करें: \( \text{MnO}_4^- \rightarrow \text{MnO}_2 + 2\text{H}_2\text{O} \)
हाइड्रोजन परमाणुओं को संतुलित करें: \( \text{MnO}_4^- + 4\text{H}^+ \rightarrow \text{MnO}_2 + 2\text{H}_2\text{O} \)
क्षारीय माध्यम के लिए \( \text{OH}^- \) जोड़ें: \( \text{MnO}_4^- + 4\text{H}^+ + 4\text{OH}^- \rightarrow \text{MnO}_2 + 2\text{H}_2\text{O} + 4\text{OH}^- \)
\( \text{MnO}_4^- + 4\text{H}_2\text{O} \rightarrow \text{MnO}_2 + 2\text{H}_2\text{O} + 4\text{OH}^- \)
सरल करने पर: \( \text{MnO}_4^- + 2\text{H}_2\text{O} \rightarrow \text{MnO}_2 + 4\text{OH}^- \)
आवेश को संतुलित करें: \( \text{MnO}_4^- + 2\text{H}_2\text{O} + 3\text{e}^- \rightarrow \text{MnO}_2 + 4\text{OH}^- \) .....(1)

इलेक्ट्रॉनों को संतुलित करने के लिए समीकरण (1) को 2 से और समीकरण (2) को 3 से गुणा करके जोड़ें:
\( 2(\text{MnO}_4^- + 2\text{H}_2\text{O} + 3\text{e}^- \rightarrow \text{MnO}_2 + 4\text{OH}^-) \)
\( \implies 2\text{MnO}_4^- + 4\text{H}_2\text{O} + 6\text{e}^- \rightarrow 2\text{MnO}_2 + 8\text{OH}^- \)
\( 3(\text{H}_2\text{O}_2 + 2\text{OH}^- \rightarrow \text{O}_2 + 2\text{H}_2\text{O} + 2\text{e}^-) \)
\( \implies 3\text{H}_2\text{O}_2 + 6\text{OH}^- \rightarrow 3\text{O}_2 + 6\text{H}_2\text{O} + 6\text{e}^- \)
जोड़ने पर:
\( 2\text{MnO}_4^- + 4\text{H}_2\text{O} + 3\text{H}_2\text{O}_2 + 6\text{OH}^- \rightarrow 2\text{MnO}_2 + 8\text{OH}^- + 3\text{O}_2 + 6\text{H}_2\text{O} \)
सरल करने पर:
\( 2\text{MnO}_4^- + 3\text{H}_2\text{O}_2 \rightarrow 2\text{MnO}_2 + 3\text{O}_2 + 2\text{H}_2\text{O} + 2\text{OH}^- \)

(ii) \( \text{AsO}_3^{3-} + \text{I}_2 + \text{H}_2\text{O} \rightarrow \text{AsO}_4^{3-} + \text{H}^+ + \text{I}^- \)
ऑक्सीकरण अर्द्ध-अभिक्रिया:
\( \text{AsO}_3^{3-} \rightarrow \text{AsO}_4^{3-} \)
ऑक्सीजन को संतुलित करें: \( \text{AsO}_3^{3-} + \text{H}_2\text{O} \rightarrow \text{AsO}_4^{3-} \)
हाइड्रोजन को संतुलित करें: \( \text{AsO}_3^{3-} + \text{H}_2\text{O} \rightarrow \text{AsO}_4^{3-} + 2\text{H}^+ \)
आवेश को संतुलित करें: \( \text{AsO}_3^{3-} + \text{H}_2\text{O} \rightarrow \text{AsO}_4^{3-} + 2\text{H}^+ + 2\text{e}^- \) .....(1)

अपचयन अर्द्ध-अभिक्रिया:
\( \text{I}_2 \rightarrow \text{I}^- \)
आयोडीन परमाणुओं को संतुलित करें: \( \text{I}_2 \rightarrow 2\text{I}^- \)
आवेश को संतुलित करें: \( \text{I}_2 + 2\text{e}^- \rightarrow 2\text{I}^- \) .....(2)

इलेक्ट्रॉनों को संतुलित करने के लिए समीकरण (1) और (2) को जोड़ें (इलेक्ट्रॉन पहले से ही बराबर हैं):
\( \text{AsO}_3^{3-} + \text{H}_2\text{O} + \text{I}_2 + 2\text{e}^- \rightarrow \text{AsO}_4^{3-} + 2\text{H}^+ + 2\text{e}^- + 2\text{I}^- \)
सरल करने पर:
\( \text{AsO}_3^{3-} + \text{I}_2 + \text{H}_2\text{O} \rightarrow \text{AsO}_4^{3-} + 2\text{H}^+ + 2\text{I}^- \)
In simple words: आयन-इलेक्ट्रॉन विधि का उपयोग करके इन समीकरणों को संतुलित करें। प्रत्येक अभिक्रिया को दो भागों में तोड़ें - ऑक्सीकरण और अपचयन। फिर परमाणुओं और आवेश को संतुलित करें, और आखिर में दोनों हिस्सों को जोड़ दें।

🎯 Exam Tip: अम्लीय माध्यम में \( \text{H}_2\text{O} \) और \( \text{H}^+ \) का उपयोग करके ऑक्सीजन और हाइड्रोजन को संतुलित करें। क्षारीय माध्यम में \( \text{H}^+ \) को \( \text{OH}^- \) में बदलने का ध्यान रखें।

 

Question 38. निम्नलिखित यौगिकों में ऑक्सीकरण अंक ज्ञात कीजिए:
(i) \( \text{FeSO}_4 \) में \( \text{Fe} \) का
(ii) \( \text{Fe}(\text{CO})_5 \) में \( \text{Fe} \) का
(iii) \( \text{H}_2\text{PO}_3 \) में \( \text{P} \) का
(iv) \( \text{H}_2\text{S}_2\text{O}_7 \) में \( \text{S} \) का
(v) \( \text{C}_{12}\text{H}_{22}\text{O}_{11} \) में \( \text{C} \) का
(vi) \( \text{NaH}_2\text{PO}_2 \) में \( \text{P} \) का
Answer:
(i) \( \text{FeSO}_4 \) में \( \text{Fe} \) का ऑक्सीकरण अंक:
\( \text{SO}_4^{2-} \) आयन का आवेश \( -2 \) होता है।
इसलिए, \( \text{Fe} \) का ऑक्सीकरण अंक \( +2 \) होगा।
गणना: \( x + 1(-2) = 0 \implies x = +2 \)
अतः \( \text{FeSO}_4 \) में \( \text{Fe} \) का ऑक्सीकरण अंक \( +2 \) है।

(ii) \( \text{Fe}(\text{CO})_5 \) में \( \text{Fe} \) का ऑक्सीकरण अंक:
\( \text{CO} \) (कार्बोनिल) एक उदासीन लिगेंड है, इसलिए इसका आवेश \( 0 \) होता है।
मान लें कि \( \text{Fe} \) का ऑक्सीकरण अंक \( x \) है।
\( x + 5(0) = 0 \implies x = 0 \)
अतः \( \text{Fe}(\text{CO})_5 \) में \( \text{Fe} \) का ऑक्सीकरण अंक \( 0 \) है।

(iii) \( \text{H}_3\text{PO}_3 \) में \( \text{P} \) का ऑक्सीकरण अंक:
हाइड्रोजन (\( \text{H} \)) का ऑक्सीकरण अंक \( +1 \) और ऑक्सीजन (\( \text{O} \)) का \( -2 \) होता है। मान लें कि \( \text{P} \) का ऑक्सीकरण अंक \( x \) है।
\( 3(+1) + x + 3(-2) = 0 \)
\( 3 + x - 6 = 0 \)
\( x - 3 = 0 \)
\( x = +3 \)
अतः \( \text{H}_3\text{PO}_3 \) में \( \text{P} \) का ऑक्सीकरण अंक \( +3 \) है।

(iv) \( \text{H}_2\text{S}_2\text{O}_7 \) में \( \text{S} \) का ऑक्सीकरण अंक:
हाइड्रोजन (\( \text{H} \)) का ऑक्सीकरण अंक \( +1 \) और ऑक्सीजन (\( \text{O} \)) का \( -2 \) होता है। मान लें कि \( \text{S} \) का ऑक्सीकरण अंक \( x \) है।
\( 2(+1) + 2x + 7(-2) = 0 \)
\( 2 + 2x - 14 = 0 \)
\( 2x - 12 = 0 \)
\( 2x = 12 \)
\( x = +6 \)
अतः \( \text{H}_2\text{S}_2\text{O}_7 \) में \( \text{S} \) का ऑक्सीकरण अंक \( +6 \) है।

(v) \( \text{C}_{12}\text{H}_{22}\text{O}_{11} \) में \( \text{C} \) का ऑक्सीकरण अंक:
यह एक उदासीन यौगिक है। हाइड्रोजन (\( \text{H} \)) का ऑक्सीकरण अंक \( +1 \) और ऑक्सीजन (\( \text{O} \)) का \( -2 \) होता है। मान लें कि \( \text{C} \) का ऑक्सीकरण अंक \( x \) है।
\( 12x + 22(+1) + 11(-2) = 0 \)
\( 12x + 22 - 22 = 0 \)
\( 12x = 0 \)
\( x = 0 \)
अतः \( \text{C}_{12}\text{H}_{22}\text{O}_{11} \) में \( \text{C} \) का ऑक्सीकरण अंक \( 0 \) है।

(vi) \( \text{NaH}_2\text{PO}_2 \) में \( \text{P} \) का ऑक्सीकरण अंक:
सोडियम (\( \text{Na} \)) का ऑक्सीकरण अंक \( +1 \) होता है। हाइड्रोजन (\( \text{H} \)) का ऑक्सीकरण अंक \( +1 \) होता है (गैर-धातु से जुड़ा है)। ऑक्सीजन (\( \text{O} \)) का \( -2 \) होता है। मान लें कि \( \text{P} \) का ऑक्सीकरण अंक \( x \) है।
\( 1(+1) + 2(+1) + x + 2(-2) = 0 \)
\( 1 + 2 + x - 4 = 0 \)
\( x - 1 = 0 \)
\( x = +1 \)
अतः \( \text{NaH}_2\text{PO}_2 \) में \( \text{P} \) का ऑक्सीकरण अंक \( +1 \) है।
In simple words: \( \text{FeSO}_4 \) में \( \text{Fe} \) का ऑक्सीकरण अंक \( +2 \) है। \( \text{Fe}(\text{CO})_5 \) में \( \text{Fe} \) का ऑक्सीकरण अंक \( 0 \) है। \( \text{H}_3\text{PO}_3 \) में \( \text{P} \) का ऑक्सीकरण अंक \( +3 \) है। \( \text{H}_2\text{S}_2\text{O}_7 \) में \( \text{S} \) का ऑक्सीकरण अंक \( +6 \) है। \( \text{C}_{12}\text{H}_{22}\text{O}_{11} \) में \( \text{C} \) का ऑक्सीकरण अंक \( 0 \) है। \( \text{NaH}_2\text{PO}_2 \) में \( \text{P} \) का ऑक्सीकरण अंक \( +1 \) है।

🎯 Exam Tip: जटिल यौगिकों में, उन तत्वों के ऑक्सीकरण अंकों पर विशेष ध्यान दें जिनके ऑक्सीकरण अंक परिस्थिति के अनुसार बदल सकते हैं, जैसे फॉस्फोरस और सल्फर। उदासीन लिगेंड्स (जैसे \( \text{CO}, \text{H}_2\text{O} \)) का आवेश शून्य होता है।

 

Question 39. निम्नलिखित अभिक्रियाओं में ऑक्सीकारक तथा अपचायक बताइये:
(i) \( 3\text{I}_2 + 6\text{NaOH} \rightarrow \text{NaIO}_3 + 5\text{NaI} + 3\text{H}_2\text{O} \)
(ii) \( \text{AlCl}_3 + 3\text{K} \rightarrow \text{Al} + 3\text{KCl} \)
(iii) \( \text{SO}_2 + 2\text{H}_2\text{S} \rightarrow 3\text{S} + 2\text{H}_2\text{O} \)
(iv) \( \text{SnCl}_2 + 2\text{FeCl}_3 \rightarrow \text{SnCl}_4 + 2\text{FeCl}_2 \)
Answer:
(i) \( 3\text{I}_2 + 6\text{NaOH} \rightarrow \text{NaIO}_3 + 5\text{NaI} + 3\text{H}_2\text{O} \)
इस अभिक्रिया में आयोडीन (\( \text{I}_2 \)) का ऑक्सीकरण अंक \( 0 \) है। यह \( \text{NaIO}_3 \) में \( +5 \) और \( \text{NaI} \) में \( -1 \) हो जाता है। चूंकि आयोडीन ऑक्सीकृत और अपचयित दोनों हो रहा है, यह एक असमानुपातन अभिक्रिया है, और \( \text{I}_2 \) ऑक्सीकारक और अपचायक दोनों के रूप में कार्य करता है।

(ii) \( \text{AlCl}_3 + 3\text{K} \rightarrow \text{Al} + 3\text{KCl} \)
\( \text{AlCl}_3 \): \( \text{Al} \) का ऑक्सीकरण अंक \( +3 \)
\( \text{K} \): \( \text{K} \) का ऑक्सीकरण अंक \( 0 \)
\( \text{Al} \): \( \text{Al} \) का ऑक्सीकरण अंक \( 0 \)
\( \text{KCl} \): \( \text{K} \) का ऑक्सीकरण अंक \( +1 \)
यहाँ, \( \text{K} \) ऑक्सीकृत होकर \( 0 \) से \( +1 \) हो रहा है, इसलिए \( \text{K} \) अपचायक है। \( \text{Al} \) अपचयित होकर \( +3 \) से \( 0 \) हो रहा है, इसलिए \( \text{AlCl}_3 \) ऑक्सीकारक है।

(iii) \( \text{SO}_2 + 2\text{H}_2\text{S} \rightarrow 3\text{S} + 2\text{H}_2\text{O} \)
\( \text{SO}_2 \): \( \text{S} \) का ऑक्सीकरण अंक \( +4 \)
\( \text{H}_2\text{S} \): \( \text{S} \) का ऑक्सीकरण अंक \( -2 \)
\( \text{S} \): \( \text{S} \) का ऑक्सीकरण अंक \( 0 \)
यहाँ, \( \text{SO}_2 \) में \( \text{S} \) अपचयित होकर \( +4 \) से \( 0 \) हो रहा है, इसलिए \( \text{SO}_2 \) ऑक्सीकारक है। \( \text{H}_2\text{S} \) में \( \text{S} \) ऑक्सीकृत होकर \( -2 \) से \( 0 \) हो रहा है, इसलिए \( \text{H}_2\text{S} \) अपचायक है।

(iv) \( \text{SnCl}_2 + 2\text{FeCl}_3 \rightarrow \text{SnCl}_4 + 2\text{FeCl}_2 \)
\( \text{SnCl}_2 \): \( \text{Sn} \) का ऑक्सीकरण अंक \( +2 \)
\( \text{FeCl}_3 \): \( \text{Fe} \) का ऑक्सीकरण अंक \( +3 \)
\( \text{SnCl}_4 \): \( \text{Sn} \) का ऑक्सीकरण अंक \( +4 \)
\( \text{FeCl}_2 \): \( \text{Fe} \) का ऑक्सीकरण अंक \( +2 \)
यहाँ, \( \text{Sn} \) ऑक्सीकृत होकर \( +2 \) से \( +4 \) हो रहा है, इसलिए \( \text{SnCl}_2 \) अपचायक है। \( \text{Fe} \) अपचयित होकर \( +3 \) से \( +2 \) हो रहा है, इसलिए \( \text{FeCl}_3 \) ऑक्सीकारक है।
In simple words: प्रत्येक अभिक्रिया में, ऑक्सीकरण अंकों में बदलाव देखकर ऑक्सीकारक और अपचायक की पहचान करें। जो ऑक्सीकृत होता है वह अपचायक है, और जो अपचयित होता है वह ऑक्सीकारक है। असमानुपातन अभिक्रियाओं में एक ही पदार्थ ऑक्सीकारक और अपचायक दोनों हो सकता है।

🎯 Exam Tip: ऑक्सीकारक वह पदार्थ होता है जो स्वयं अपचयित होता है और दूसरे को ऑक्सीकृत करता है। अपचायक वह पदार्थ होता है जो स्वयं ऑक्सीकृत होता है और दूसरे को अपचयित करता है।

 

Question 40. निम्नलिखित अभिक्रियाओं में \( \text{H}_2\text{O}_2 \) किसमें ऑक्सीकारक तथा किसमें अपचायक का कार्य करता है?
(i) \( 2\text{KI} + \text{H}_2\text{O}_2 \rightarrow 2\text{KOH} + \text{I}_2 \)
(ii) \( \text{Cl}_2 + \text{H}_2\text{O}_2 \rightarrow 2\text{HCl} + \text{O}_2 \)
Answer: \( \text{H}_2\text{O}_2 \) (हाइड्रोजन पेरोक्साइड) एक अनोखा यौगिक है जो अपनी रासायनिक अभिक्रियाओं के आधार पर ऑक्सीकारक और अपचायक दोनों के रूप में कार्य कर सकता है।

(i) \( 2\text{KI} + \text{H}_2\text{O}_2 \rightarrow 2\text{KOH} + \text{I}_2 \)
यहां, \( \text{H}_2\text{O}_2 \) में ऑक्सीजन का ऑक्सीकरण अंक \( -1 \) है। अभिक्रिया के बाद, \( \text{KOH} \) में ऑक्सीजन का ऑक्सीकरण अंक \( -2 \) हो जाता है। चूंकि ऑक्सीजन का ऑक्सीकरण अंक \( -1 \) से \( -2 \) में घट रहा है, \( \text{H}_2\text{O}_2 \) अपचयित हो रहा है। इसलिए, इस अभिक्रिया में \( \text{H}_2\text{O}_2 \) एक ऑक्सीकारक के रूप में कार्य करता है।
\( \text{KI} \) में आयोडीन का ऑक्सीकरण अंक \( -1 \) से \( \text{I}_2 \) में \( 0 \) हो रहा है, जिसका अर्थ है कि यह ऑक्सीकृत हो रहा है।

(ii) \( \text{Cl}_2 + \text{H}_2\text{O}_2 \rightarrow 2\text{HCl} + \text{O}_2 \)
यहां, \( \text{H}_2\text{O}_2 \) में ऑक्सीजन का ऑक्सीकरण अंक \( -1 \) है। अभिक्रिया के बाद, \( \text{O}_2 \) में ऑक्सीजन का ऑक्सीकरण अंक \( 0 \) हो जाता है। चूंकि ऑक्सीजन का ऑक्सीकरण अंक \( -1 \) से \( 0 \) में बढ़ रहा है, \( \text{H}_2\text{O}_2 \) ऑक्सीकृत हो रहा है। इसलिए, इस अभिक्रिया में \( \text{H}_2\text{O}_2 \) एक अपचायक के रूप में कार्य करता है।
\( \text{Cl}_2 \) में क्लोरीन का ऑक्सीकरण अंक \( 0 \) से \( \text{HCl} \) में \( -1 \) हो रहा है, जिसका अर्थ है कि यह अपचयित हो रहा है।
In simple words: पहली अभिक्रिया में, \( \text{H}_2\text{O}_2 \) ऑक्सीकारक के रूप में कार्य करता है क्योंकि यह आयोडीन को ऑक्सीकृत करता है। दूसरी अभिक्रिया में, \( \text{H}_2\text{O}_2 \) अपचायक के रूप में कार्य करता है क्योंकि यह क्लोरीन को अपचयित करता है।

🎯 Exam Tip: \( \text{H}_2\text{O}_2 \) की दोहरी प्रकृति (ऑक्सीकारक और अपचायक) को याद रखें। यह इस बात पर निर्भर करता है कि यह किस अभिक्रिया में भाग ले रहा है, और इसमें ऑक्सीजन का ऑक्सीकरण अंक \( -1 \) होने के कारण यह या तो \( -2 \) (अपचयन) या \( 0 \) (ऑक्सीकरण) में बदल सकता है।

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