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Detailed Chapter 6 ऊष्मागतिकी RBSE Solutions for Class 11 Chemistry
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Class 11 Chemistry Chapter 6 ऊष्मागतिकी RBSE Solutions PDF
Question 1. आदर्श गैस के समतापी प्रसार के समय इसकी -
(अ) आन्तरिक ऊर्जा बढ़ती है।
(ब) एन्थैल्पी घटती है।
(स) एन्थैल्पी अप्रभावित रहती है।
(द) एन्थैल्पी घटकर शून्य हो जाती है।
Answer: (द) एन्थैल्पी घटकर शून्य हो जाती है।
In simple words: जब आदर्श गैस समतापी रूप से फैलती है, तो उसकी आंतरिक ऊर्जा स्थिर रहती है। ऐसा इसलिए होता है क्योंकि तापमान स्थिर होता है, और एन्थैल्पी भी अप्रभावित रहती है।
🎯 Exam Tip: याद रखें कि एक आदर्श गैस के लिए आंतरिक ऊर्जा और एन्थैल्पी दोनों केवल तापमान पर निर्भर करते हैं। समतापी प्रक्रिया में तापमान स्थिर रहता है, इसलिए ये भी स्थिर रहते हैं।
Question 2. आन्तरिक ऊर्जा है -
(अ) आंशिक स्थितिज तथा आंशिक गतिज
(ब) पूरी तरह से गतिज
Answer: (अ) आंशिक स्थितिज तथा आंशिक गतिज
In simple words: आंतरिक ऊर्जा किसी पदार्थ के अंदर मौजूद सभी प्रकार की ऊर्जाओं का कुल योग है। इसमें अणुओं की गतिज ऊर्जा (उनके घूमने, कंपन और गति के कारण) और स्थितिज ऊर्जा (उनके बीच के आकर्षण और प्रतिकर्षण के कारण) दोनों शामिल होती हैं।
🎯 Exam Tip: आंतरिक ऊर्जा किसी निकाय की कुल ऊर्जा होती है, जो उसके परमाणुओं और अणुओं की स्थितिज और गतिज ऊर्जा का योग होती है। इसे अक्सर \( U \) से दर्शाया जाता है।
Question 4. एक कार्यों इंजन का स्रोत 500 K पर है तथा सिंक 300 K पर है। इस इंजन की दक्षता होगी –
(अ) 0.2
(ब) 0.4
(स) 0.6
(द) 0.3
Answer: (ब) 0.4
In simple words: कार्नो इंजन की दक्षता एक सरल सूत्र से निकाली जाती है, जो गर्म स्रोत और ठंडे सिंक के तापमान पर निर्भर करती है। यह बताती है कि इंजन कितनी गर्मी को काम में बदल सकता है।
🎯 Exam Tip: कार्नो इंजन की दक्षता का सूत्र \( \eta = 1 - \frac{T_c}{T_h} \) होता है, जहाँ \( T_c \) सिंक का तापमान और \( T_h \) स्रोत का तापमान होता है। तापमान हमेशा केल्विन में होना चाहिए।
Question 5. निम्नलिखित में किस अभिक्रिया में उदासीनीकरण ऊष्मा अधिकतम होगी
(अ) NH4OH तथा CH3COOH
(ब) NH4OH तथा HCI
(स) NaOH तथा CH3COOH
(द) NaOH तथा HCI
Answer: (द) NaOH तथा HCI
In simple words: जब एक प्रबल अम्ल (जैसे HCl) और एक प्रबल क्षार (जैसे NaOH) आपस में मिलते हैं, तो सबसे अधिक गर्मी निकलती है। ऐसा इसलिए होता है क्योंकि वे पूरी तरह से टूटते हैं और केवल पानी बनाते हैं।
🎯 Exam Tip: प्रबल अम्ल और प्रबल क्षार के उदासीनीकरण की ऊष्मा लगभग स्थिर होती है (लगभग 57.1 kJ/mol), क्योंकि इसमें केवल \( H^+ \) और \( OH^- \) आयनों का मिलकर पानी बनाना शामिल होता है। कमजोर अम्ल या क्षार के मामले में, आयनीकरण के लिए ऊर्जा खर्च होती है, जिससे निकलने वाली कुल ऊष्मा कम हो जाती है।
Question 6. क्या ब्रह्माण्ड की एन्ट्रॉपी स्थिर है?
Answer: नहीं, ब्रह्माण्ड की एन्ट्रॉपी स्थिर नहीं है। इसके बजाय, यह धीरे-धीरे बढ़ रही है। ब्रह्मांड में लगातार अव्यवस्था या रैंडमनेस बढ़ रही है।
In simple words: ब्रह्मांड की अव्यवस्था (एन्ट्रॉपी) स्थिर नहीं रहती है, बल्कि समय के साथ बढ़ती जाती है।
🎯 Exam Tip: ऊष्मागतिकी का दूसरा नियम बताता है कि एक विलगित निकाय की कुल एन्ट्रॉपी कभी घटती नहीं है; यह या तो बढ़ती है या स्थिर रहती है (एक आदर्श उत्क्रमणीय प्रक्रिया के लिए)। ब्रह्मांड को एक विलगित निकाय माना जाता है।
Question 8. किसी आदर्श गैस के एक मोल के लिए आन्तरिक ऊर्जा का मान क्या होगा?
Answer: एक आदर्श गैस के एक मोल के लिए आंतरिक ऊर्जा का मान निम्न प्रकार से दिया जाता है:
\( U = \frac{3}{2}NKT \)
यहां,
\( U = \) आन्तरिक ऊर्जा
\( N = \) गैस के परमाणुओं की संख्या
\( K = \) बोल्ट्जमान स्थिरांक
\( T = \) ताप
यह समीकरण बताता है कि आदर्श गैस की आंतरिक ऊर्जा मुख्य रूप से उसके तापमान पर निर्भर करती है।
In simple words: एक आदर्श गैस की कुल अंदरूनी ऊर्जा (U) उसके अणुओं की संख्या (N), बोल्ट्जमान स्थिरांक (K) और तापमान (T) पर निर्भर करती है, और इसे \( \frac{3}{2}NKT \) से दिखाते हैं।
🎯 Exam Tip: आदर्श गैसों के लिए, आंतरिक ऊर्जा केवल तापमान का एक कार्य है और आयतन या दबाव से प्रभावित नहीं होती है। यह आदर्श गैसों की एक महत्वपूर्ण विशेषता है।
Question 9. निर्वात में प्रसरण होने पर गैस द्वारा ऊर्जा का अवशोषण या उत्सर्जन क्यों नहीं होता?
Answer: आदर्श गैस में अणुओं के बीच अंतर-आणविक बल लगभग नगण्य होते हैं। इसलिए, जब गैस निर्वात में फैलती है, तो कोई बाहरी बल काम नहीं करता है और अणुओं को एक-दूसरे से दूर ले जाने में कोई ऊर्जा खर्च नहीं होती है। इस कारण से, निर्वात में फैलने पर आदर्श गैस न तो ऊर्जा को अवशोषित करती है और न ही उसका उत्सर्जन करती है।
In simple words: आदर्श गैस के अणु एक-दूसरे पर कोई बल नहीं लगाते, इसलिए जब यह खाली जगह में फैलती है, तो न तो गर्मी लेती है और न ही छोड़ती है।
🎯 Exam Tip: निर्वात में आदर्श गैस का मुक्त प्रसरण एक रुद्धोष्म और समतापी प्रक्रिया होती है, जहाँ आंतरिक ऊर्जा में कोई परिवर्तन नहीं होता (अर्थात, \( \Delta U = 0 \)), क्योंकि कोई कार्य नहीं होता (\( W = 0 \)) और कोई ऊष्मा का आदान-प्रदान नहीं होता (\( Q = 0 \))।
Question 10. बन्ध ऊर्जा, बन्ध वियोजन ऊर्जा के बराबर कब होगी?
Answer: द्विपरमाणुक अणुओं के लिए बन्ध ऊर्जा और बन्ध वियोजन ऊर्जा समान होती है। ऐसा इसलिए है क्योंकि द्विपरमाणुक अणु में केवल एक ही बंध होता है जिसे तोड़ने के लिए एक विशिष्ट ऊर्जा की आवश्यकता होती है।
In simple words: जब कोई अणु सिर्फ दो परमाणुओं से बना होता है, तो उस एक बंध को तोड़ने में लगने वाली ऊर्जा को बंध ऊर्जा या बंध वियोजन ऊर्जा कहते हैं, और ये दोनों हमेशा बराबर होती हैं।
🎯 Exam Tip: बहुपरमाणुक अणुओं में, अलग-अलग बंधों को तोड़ने के लिए अलग-अलग ऊर्जा की आवश्यकता हो सकती है, इसलिए औसत बंध ऊर्जा का उपयोग किया जाता है। लेकिन द्विपरमाणुक अणुओं के लिए ये मान हमेशा एक ही होते हैं।
Question 11. ऊष्मीय ऊर्जा में परिवर्तन से आन्तरिक ऊर्जा में परिवर्तन नहीं होता किन्तु एन्थैल्पी में परिवर्तन क्यों होता है?
Answer: आंतरिक ऊर्जा एक तंत्र की प्रारंभिक और अंतिम अवस्थाओं पर निर्भर करती है, न कि उस पथ पर जिस पर परिवर्तन होता है। इसलिए, ऊष्मीय ऊर्जा में परिवर्तन से आंतरिक ऊर्जा में परिवर्तन नहीं होता है। हालांकि, एन्थैल्पी आंतरिक ऊर्जा और दाब-आयतन ऊर्जा के योग के बराबर होती है (\( H = U + PV \))। इसलिए, ऊष्मीय ऊर्जा के कारण आयतन में परिवर्तन होता है, जिससे एन्थैल्पी में परिवर्तन होता है।
In simple words: आंतरिक ऊर्जा सिर्फ शुरुआत और अंत पर निर्भर करती है, इसलिए ऊष्मा बदलने से यह नहीं बदलती। एन्थैल्पी में आंतरिक ऊर्जा और आयतन दोनों होते हैं, इसलिए आयतन बदलने पर एन्थैल्पी बदल जाती है।
🎯 Exam Tip: यह समझना महत्वपूर्ण है कि आंतरिक ऊर्जा (U) और एन्थैल्पी (H) दोनों अवस्था फलन (State Functions) हैं, जिसका अर्थ है कि उनका मान केवल तंत्र की वर्तमान अवस्था पर निर्भर करता है, न कि उस पथ पर जिससे वह अवस्था प्राप्त हुई है।
Question 12. अस्वत:प्रवर्तित प्रक्रिया को स्वत: प्रवर्तित कैसे बनाया जा सकता है?
Answer: एक ऐसी अभिक्रिया जिसमें धनात्मक एन्ट्रॉपी परिवर्तन होता है, जो कम तापमान पर स्वतः प्रवर्तित नहीं होती, उसे उच्च तापमान पर स्वतः प्रवर्तित किया जा सकता है। तापमान बढ़ाकर हम ऐसी अभिक्रियाओं को स्वतः प्रवर्तित बना सकते हैं, जहाँ एन्ट्रॉपी में वृद्धि होती है।
In simple words: जो काम अपने आप नहीं होता, उसे ज़्यादा गर्मी देकर अपने आप होने वाला बनाया जा सकता है, खासकर अगर वह काम अव्यवस्था (एन्ट्रॉपी) बढ़ाता हो।
🎯 Exam Tip: गिब्स मुक्त ऊर्जा ( \( \Delta G = \Delta H - T\Delta S \) ) का उपयोग करके प्रक्रियाओं की स्वतः प्रवर्तितता का निर्धारण किया जाता है। यदि \( \Delta G \) ऋणात्मक है, तो प्रक्रिया स्वतः प्रवर्तित होती है। तापमान (T) बढ़ाकर, \( T\Delta S \) पद का प्रभाव बढ़ जाता है, जिससे \( \Delta G \) ऋणात्मक हो सकता है।
Question 14. आन्तरिक ऊर्जा में परिवर्तन अवस्था फलन है, किन्तु कार्य अवस्था फलन नहीं है, क्यों?
Answer: आंतरिक ऊर्जा एक निकाय की अवस्था पर निर्भर करती है, न कि इस बात पर कि वह अवस्था कैसे प्राप्त की गई। इसलिए, यह एक अवस्था फलन है। इसके विपरीत, कार्य (work) वह ऊर्जा है जो किसी प्रक्रिया के दौरान स्थानांतरित होती है और यह उस पथ पर निर्भर करती है जिस पर प्रक्रिया होती है। यही कारण है कि कार्य एक अवस्था फलन नहीं है। जब कोई निकाय कार्य करता है, तो उसकी ऊर्जा बदल जाती है।
In simple words: आंतरिक ऊर्जा सिर्फ निकाय की मौजूदा हालत बताती है, पर काम (कार्य) इस बात पर निर्भर करता है कि काम कैसे किया गया। इसलिए, आंतरिक ऊर्जा 'अवस्था फलन' है, जबकि काम 'अवस्था फलन' नहीं है।
🎯 Exam Tip: अवस्था फलन (State Function) केवल निकाय की प्रारंभिक और अंतिम अवस्थाओं पर निर्भर करते हैं, जबकि पथ फलन (Path Function) प्रारंभिक और अंतिम अवस्थाओं के बीच के पथ पर निर्भर करते हैं। कार्य और ऊष्मा दोनों पथ फलन के उदाहरण हैं।
Question 15. हीरे तथा ग्रेफाइट में से किसकी एन्ट्रॉपी अधिक होती है?
Answer: ग्रेफाइट की एन्ट्रॉपी हीरे से अधिक होती है। ऐसा इसलिए है क्योंकि ग्रेफाइट में कार्बन परमाणु परतों में व्यवस्थित होते हैं जो एक-दूसरे पर आसानी से फिसल सकते हैं, जिससे हीरे की तुलना में अधिक अव्यवस्था होती है, जहाँ परमाणु एक कठोर, त्रिविमीय संरचना में कसकर बंधे होते हैं।
In simple words: ग्रेफाइट में हीरे से ज़्यादा अव्यवस्था (एन्ट्रॉपी) होती है, क्योंकि उसके कार्बन परमाणु कम कसकर जुड़े होते हैं और ज़्यादा हिल-डुल सकते हैं।
🎯 Exam Tip: पदार्थ की एन्ट्रॉपी उसकी अव्यवस्था या रैंडमनेस का माप है। अधिक व्यवस्थित संरचनाओं (जैसे हीरा) की एन्ट्रॉपी कम होती है, जबकि कम व्यवस्थित या अधिक लचीली संरचनाओं (जैसे ग्रेफाइट) की एन्ट्रॉपी अधिक होती है।
Question 16. E तथा H में क्या सम्बन्ध है?
Answer: E (आंतरिक ऊर्जा) और H (एन्थैल्पी) के बीच का संबंध निम्न प्रकार दिया जाता है:
\( H = E + P\Delta V \)
यहां,
\( H = \) एन्थैल्पी में परिवर्तन
\( E = \) आंतरिक ऊर्जा में परिवर्तन
\( P = \) दाब
\( \Delta V = \) आयतन में परिवर्तन
यह संबंध बताता है कि स्थिर दाब पर, एन्थैल्पी में परिवर्तन आंतरिक ऊर्जा में परिवर्तन और दाब-आयतन कार्य के योग के बराबर होता है।
In simple words: एन्थैल्पी (H) आंतरिक ऊर्जा (E) और दबाव (P) गुणा आयतन परिवर्तन ( \( \Delta V \) ) के योग के बराबर होती है, यानी \( H = E + P\Delta V \) ।
🎯 Exam Tip: स्थिर दाब पर होने वाली प्रक्रियाओं के लिए एन्थैल्पी (H) एक उपयोगी थर्मोडायनामिक फलन है, जबकि आंतरिक ऊर्जा (E) स्थिर आयतन पर होने वाली प्रक्रियाओं के लिए अधिक प्रासंगिक होती है।
Question 17. पदार्थ की अधिकतम एन्ट्रॉपी किस अवस्था में होगी?
Answer: पदार्थ की अधिकतम एन्ट्रॉपी गैस अवस्था में होती है। ऐसा इसलिए है क्योंकि गैस अवस्था में कणों के बीच की दूरी बहुत अधिक होती है और वे बहुत अधिक स्वतंत्रता से घूम सकते हैं, जिससे अधिकतम अव्यवस्था और रैंडमनेस उत्पन्न होती है।
In simple words: गैस के रूप में कोई भी पदार्थ सबसे ज़्यादा अव्यवस्थित (यानी सबसे ज़्यादा एन्ट्रॉपी वाला) होता है, क्योंकि उसके कण आज़ादी से घूमते हैं।
🎯 Exam Tip: पदार्थ की तीन सामान्य अवस्थाओं - ठोस, द्रव और गैस - में, कणों की व्यवस्था का क्रम ठोस से गैस की ओर जाने पर घटता जाता है, इसलिए एन्ट्रॉपी का क्रम \( \text{ठोस} < \text{द्रव} < \text{गैस} \) होता है।
Question 18. ऊष्माक्षेपी तथा ऊष्माशोषी अभिक्रिया के उदाहरण दीजिये।
Answer:
ऊष्माक्षेपी अभिक्रिया (Exothermic Reaction): यह वह अभिक्रिया होती है जिसमें ऊष्मा ऊर्जा बाहर निकलती है, यानी निकाय अपने परिवेश को ऊष्मा देता है। इसका \( \Delta H \) मान ऋणात्मक होता है।
उदाहरण:
\( CH_4(g) + 2O_2(g) \rightarrow CO_2(g) + 2H_2O(l) \)
\( \Delta H = -890.35 \text{ kJ} \)
इस अभिक्रिया में मीथेन का दहन होता है, जो ऊर्जा छोड़ता है।
ऊष्माशोषी अभिक्रिया (Endothermic Reaction): यह वह अभिक्रिया होती है जिसमें ऊष्मा ऊर्जा अवशोषित होती है, यानी निकाय अपने परिवेश से ऊष्मा लेता है। इसका \( \Delta H \) मान धनात्मक होता है।
उदाहरण:
बर्फ का पिघलना या पानी का वाष्पीकरण। रासायनिक अभिक्रियाओं में, जैसे कि नाइट्रोजन और ऑक्सीजन का मिलना।
In simple words: ऊष्माक्षेपी अभिक्रियाएँ गर्मी बाहर निकालती हैं (जैसे आग जलाना), और ऊष्माशोषी अभिक्रियाएँ गर्मी सोखती हैं (जैसे बर्फ पिघलना)।
🎯 Exam Tip: ऊष्माक्षेपी अभिक्रियाओं में उत्पाद की ऊर्जा अभिकारकों की ऊर्जा से कम होती है, जबकि ऊष्माशोषी अभिक्रियाओं में उत्पाद की ऊर्जा अभिकारकों की ऊर्जा से अधिक होती है।
Question 20. गिब्स हेल्मोल्ट्ज समीकरण लिखिये।
Answer: गिब्स-हेल्महोल्ट्ज समीकरण थर्मोडायनामिक्स में एक महत्वपूर्ण संबंध है जो गिब्स मुक्त ऊर्जा, एन्थैल्पी और एन्ट्रॉपी के बीच संबंध बताता है। यह समीकरण है:
\( \Delta G = \Delta H - T\Delta S \)
यहां,
\( \Delta G = \) गिब्स ऊर्जा में परिवर्तन
\( \Delta H = \) एन्थैल्पी में परिवर्तन
\( \Delta S = \) एन्ट्रॉपी में परिवर्तन
\( T = \) परमताप (केल्विन में)
यह समीकरण स्वतः प्रवर्तित प्रक्रियाओं को समझने और भविष्यवाणी करने में मदद करता है।
In simple words: गिब्स-हेल्महोल्ट्ज समीकरण बताता है कि किसी चीज़ के अपने आप होने की संभावना ( \( \Delta G \) ) उसकी गर्मी में बदलाव ( \( \Delta H \) ), तापमान (T) और अव्यवस्था में बदलाव ( \( \Delta S \) ) पर निर्भर करती है।
🎯 Exam Tip: गिब्स मुक्त ऊर्जा (\( \Delta G \)) किसी प्रक्रिया की स्वतः प्रवर्तितता का सबसे महत्वपूर्ण मानदंड है: यदि \( \Delta G < 0 \), तो प्रक्रिया स्वतः प्रवर्तित है; यदि \( \Delta G > 0 \), तो प्रक्रिया स्वतः प्रवर्तित नहीं है (लेकिन विपरीत प्रक्रिया स्वतः प्रवर्तित है); और यदि \( \Delta G = 0 \), तो प्रक्रिया संतुलन में है।
Question 21. यदि कायों इंजन का स्रोत 500k तथा सिंक 300 k पर है तो इस इंजन की दक्षता क्या होगी?
Answer:
हमें कार्नो इंजन की दक्षता (\( \eta \)) ज्ञात करनी है।
स्रोत का तापमान \( T_1 = 500 \text{ K} \)
सिंक का तापमान \( T_2 = 300 \text{ K} \)
दक्षता का सूत्र है:
\( \eta = \frac{T_1 - T_2}{T_1} \)
\( \eta = \frac{500 - 300}{500} \)
\( \eta = \frac{200}{500} \)
\( \implies \eta = 0.4 \)
तो, इस इंजन की दक्षता 0.4 होगी।
In simple words: इंजन की दक्षता निकालने के लिए, गर्म और ठंडे तापमान के अंतर को गर्म तापमान से भाग देते हैं, जिससे हमें 0.4 मिलता है।
🎯 Exam Tip: दक्षता की गणना करते समय, यह सुनिश्चित करें कि सभी तापमान केल्विन (K) में हों, क्योंकि कार्नो इंजन का सूत्र निरपेक्ष तापमान पर आधारित होता है।
Question 22. रुद्धोष्म प्रक्रम होने के लिए क्या परिस्थिति आवश्यक है?
Answer: रुद्धोष्म प्रक्रम होने के लिए यह आवश्यक है कि निकाय अपने परिवेश से न तो ऊष्मा ले सके और न ही उसे ऊष्मा दे सके। इसका अर्थ है कि इस प्रक्रिया में ऊष्मा स्थिर रहती है (\( q = 0 \))। यदि कोई परिवर्तन ऊष्माशोषी है, तो तंत्र का तापमान गिर जाएगा, और यदि कोई परिवर्तन ऊष्माक्षेपी है, तो तंत्र का तापमान बढ़ जाएगा। यह सुनिश्चित करने के लिए निकाय को ऊष्मारोधी दीवारों से घेरना पड़ता है।
In simple words: रुद्धोष्म प्रक्रिया तब होती है जब कोई चीज़ अपने आस-पास से गर्मी न ले सके और न दे सके, यानी गर्मी का आना-जाना बंद हो।
🎯 Exam Tip: रुद्धोष्म प्रक्रिया में, आंतरिक ऊर्जा में परिवर्तन (\( \Delta U \)) केवल किए गए कार्य (\( W \)) के बराबर होता है (\( \Delta U = W \)), क्योंकि ऊष्मा का आदान-प्रदान नहीं होता है।
Question 23. प्रबल अम्ल व अम्ल क्षार की उदासीनीकरण ऊष्मा निश्चित होती है, क्यों?
Answer: प्रबल अम्ल और प्रबल क्षार के उदासीनीकरण की ऊष्मा निश्चित होती है क्योंकि इन अभिक्रियाओं में प्राप्त लवण जल में पूरी तरह से आयनित हो जाते हैं। उदासीनीकरण प्रक्रिया में केवल एक ही मुख्य क्रिया होती है: हाइड्रोजन आयन (\( H^+ \)) और हाइड्रॉक्साइड आयन (\( OH^- \)) का मिलकर अनआयनीकृत जल (\( H_2O \)) का बनना। चूंकि यह मूल प्रक्रिया सभी प्रबल अम्ल-प्रबल क्षार उदासीनीकरणों में समान होती है, इसलिए उत्सर्जित ऊष्मा की मात्रा भी लगभग स्थिर होती है (लगभग 57.1 kJ/mol)।
In simple words: जब मज़बूत तेज़ाब और मज़बूत क्षार मिलते हैं, तो हमेशा एक ही तरह की क्रिया होती है - पानी का बनना। इसलिए, इसमें हमेशा एक जैसी गर्मी निकलती है।
🎯 Exam Tip: कमजोर अम्ल या क्षार के उदासीनीकरण में, उनके आयनीकरण के लिए ऊर्जा की आवश्यकता होती है, जिसके कारण निकलने वाली शुद्ध ऊष्मा प्रबल अम्ल-प्रबल क्षार की तुलना में कम होती है।
Question 24. NaCl का जल में घुलना एक ऊष्माशोषी प्रक्रम है, फिर भी यह पानी में घुल जाता है। समझाइये।
Answer: सोडियम क्लोराइड (NaCl) का जल में घुलना एक ऊष्माशोषी प्रक्रिया है, जिसका अर्थ है कि यह ऊर्जा को अवशोषित करती है। फिर भी, यह पानी में आसानी से घुल जाता है क्योंकि इस प्रक्रिया में एन्ट्रॉपी (अव्यवस्था) में काफी वृद्धि होती है। एन्ट्रॉपी में यह वृद्धि प्रक्रिया को स्वतः प्रवर्तित होने के लिए प्रेरित करती है। किसी आयनिक यौगिक (\( AB_{(s)} \)) को जल में घोलने पर होने वाले विभिन्न परिवर्तनों को निम्न प्रकार दर्शाया जा सकता है:
\[ \text{आयनिक यौगिक} \quad AB_{(s)} \quad \xrightarrow{\Delta_{\text{sol}}H^\ominus} \quad A_{(aq)}^+ + B_{(aq)}^- \]
इस प्रक्रिया को दो मुख्य चरणों में देखा जा सकता है:
1. जालक एन्थैल्पी (\( \Delta_{\text{lattice}}H^\ominus \)): इसमें ठोस आयनिक जालक को उसके गैसीय आयनों में तोड़ने के लिए आवश्यक ऊर्जा होती है। यह हमेशा धनात्मक (\( +ve \)) होती है।
2. जलयोजन एन्थैल्पी (\( \Delta_{\text{hyd}}H^\ominus \)): इसमें गैसीय आयनों के जल के अणुओं से घिरने पर निकलने वाली ऊर्जा होती है। यह हमेशा ऋणात्मक (\( -ve \)) होती है।
हेस के नियम के अनुसार, विलयन की मानक एन्थैल्पी है:
\( \Delta_{\text{sol}}H^\ominus = \Delta_{\text{lattice}}H^\ominus + \Delta_{\text{hyd}}H^\ominus \)
\( NaCl_{(s)} \) के लिए, \( \Delta_{\text{lattice}}H^\ominus = +788 \text{ kJ mol}^{-1} \) और \( \Delta_{\text{hyd}}H^\ominus = -784 \text{ kJ mol}^{-1} \)।
\( \implies \Delta_{\text{sol}}H^\ominus = +788 \text{ kJ mol}^{-1} - 784 \text{ kJ mol}^{-1} = +4 \text{ kJ mol}^{-1} \)
चूंकि \( \Delta_{\text{sol}}H^\ominus \) धनात्मक है, यह एक ऊष्माशोषी प्रक्रिया है। हालांकि, \( \Delta_{\text{sol}}H^\ominus \) का मान बहुत कम है, और एन्ट्रॉपी में भारी वृद्धि इस ऊष्माशोषी प्रक्रिया को स्वतः प्रवर्तित बना देती है। आयनिक यौगिकों की जल में विलेयता अक्सर तापमान बढ़ाने पर बढ़ती है।
In simple words: NaCl पानी में घुलने पर थोड़ी गर्मी सोखता है, लेकिन फिर भी घुल जाता है क्योंकि उसके कण पानी में बहुत फैल जाते हैं, जिससे अव्यवस्था (एन्ट्रॉपी) बढ़ती है और यह काम अपने आप होने लगता है।
🎯 Exam Tip: किसी प्रक्रिया की स्वतः प्रवर्तितता केवल एन्थैल्पी परिवर्तन (\( \Delta H \)) पर ही नहीं, बल्कि गिब्स मुक्त ऊर्जा (\( \Delta G \)) पर निर्भर करती है, जो एन्ट्रॉपी परिवर्तन (\( \Delta S \)) और तापमान (T) को भी ध्यान में रखती है। यदि \( \Delta G \) ऋणात्मक है, तो प्रक्रिया स्वतः प्रवर्तित होती है।
Question 25. निम्न अभिक्रिया में NH3 गैस की मानक विरचन एन्थैल्पी ज्ञात कीजिये। N2 (g) + H2 (g) → 2NH3 (g) यदि (H°₁ = − 92.4 kJ mol⁻¹)
Answer:
हमें अभिक्रिया में \( NH_3 \) गैस की मानक विरचन एन्थैल्पी ज्ञात करनी है।
दी गई अभिक्रिया है:
\( N_2(g) + 3H_2(g) \rightarrow 2NH_3(g) \)
इस अभिक्रिया के लिए एन्थैल्पी परिवर्तन \( \Delta H^\circ = -92.4 \text{ kJ mol}^{-1} \) दिया गया है।
यह अभिक्रिया 2 मोल \( NH_3 \) गैस बनाती है। मानक विरचन एन्थैल्पी (standard enthalpy of formation) एक मोल पदार्थ के बनने के लिए परिभाषित की जाती है।
इसलिए, 1 मोल \( NH_3 \) के लिए मानक विरचन एन्थैल्पी होगी:
\( \Delta_f H^\circ (NH_3)(g) = \frac{\Delta H^\circ}{2} \)
\( = \frac{-92.4 \text{ kJ mol}^{-1}}{2} \)
\( \implies = -46.2 \text{ kJ mol}^{-1} \)
तो, \( NH_3 \) गैस की मानक विरचन एन्थैल्पी \( -46.2 \text{ kJ mol}^{-1} \) है।
In simple words: दी गई अभिक्रिया में दो मोल \( NH_3 \) बनते हैं और कुल \( -92.4 \text{ kJ} \) ऊर्जा निकलती है। एक मोल \( NH_3 \) बनाने के लिए, इसका आधा, यानी \( -46.2 \text{ kJ} \) ऊर्जा निकलेगी।
🎯 Exam Tip: मानक विरचन एन्थैल्पी हमेशा एक मोल पदार्थ के लिए परिभाषित की जाती है, जो उसके सबसे स्थिर तत्वों से बनता है। इसलिए, अभिक्रिया के समीकरण को ध्यान से संतुलित करें और मोलों की संख्या के आधार पर \( \Delta H^\circ \) को विभाजित करें।
Question 27. एक प्रक्रम में निकाय द्वारा 701 J ऊष्मा अवशोषित होती है एवं 394 J कार्य किया जाता है। इस प्रक्रम में आन्तरिक ऊर्जा में कितना परिवर्तन होगा?
Answer:
दिया गया है:
निकाय द्वारा अवशोषित ऊष्मा \( q = +701 \text{ J} \) (अवशोषण के लिए धनात्मक)
निकाय द्वारा किया गया कार्य \( W = -394 \text{ J} \) (कार्य करने के लिए ऋणात्मक)
ऊष्मागतिकी के प्रथम नियमानुसार, आंतरिक ऊर्जा में परिवर्तन (\( \Delta U \)) है:
\( \Delta U = q + W \)
\( \Delta U = 701 \text{ J} + (-394 \text{ J}) \)
\( \implies \Delta U = 307 \text{ J} \)
तो, इस प्रक्रम में आंतरिक ऊर्जा में परिवर्तन \( 307 \text{ J} \) होगा।
In simple words: जब एक चीज़ गर्मी लेती है और काम करती है, तो उसकी अंदरूनी ऊर्जा बदल जाती है। यहाँ, 701 जूल गर्मी ली और 394 जूल काम किया, तो अंदरूनी ऊर्जा 307 जूल बढ़ गई।
🎯 Exam Tip: ऊष्मागतिकी के प्रथम नियम को लागू करते समय, ऊष्मा (q) और कार्य (W) के चिह्नों पर विशेष ध्यान दें: निकाय द्वारा ऊष्मा का अवशोषण \( +q \) है, ऊष्मा का उत्सर्जन \( -q \) है; निकाय पर कार्य \( +W \) है, निकाय द्वारा कार्य \( -W \) है।
Question 28. एक विलगित निकाय के लिए U = 0 है। इसके लिए S क्या होगा?
Answer: एक विलगित निकाय के लिए, यदि आंतरिक ऊर्जा में परिवर्तन (\( \Delta U \)) शून्य है, तो एन्ट्रॉपी (\( S \)) का परिवर्तन शून्य से अधिक (\( \Delta S > 0 \)) होगा। इसका मतलब है कि अभिक्रिया स्वतः प्रवर्तित होगी। उदाहरण के लिए, गैसों का आपस में मिलना एक स्वतः प्रवर्तित प्रक्रिया है, जहाँ \( \Delta U = 0 \) होता है, लेकिन \( \Delta S > 0 \) होता है क्योंकि गैसों के मिलने पर अव्यवस्था (एन्ट्रॉपी) बढ़ती है।
In simple words: एक अकेले निकाय में अगर ऊर्जा नहीं बदलती (\( U = 0 \)), तो उसकी अव्यवस्था ( \( S \) ) हमेशा बढ़ती है (\( S > 0 \)), जिसका मतलब है कि प्रक्रिया अपने आप होगी।
🎯 Exam Tip: ऊष्मागतिकी के दूसरे नियम के अनुसार, एक विलगित निकाय में स्वतः प्रवर्तित प्रक्रिया के लिए एन्ट्रॉपी हमेशा बढ़ती है। यह सिद्धांत ब्रह्मांड के एन्ट्रॉपी के लगातार बढ़ने की अवधारणा का आधार है।
Question 29. एक निकाय 5 kJ ऊष्मा अवशोषित करता है और 1 kJ कार्य करता है। निकाय में आन्तरिक ऊर्जा में परिवर्तन की गणना कीजिए।
Answer:
दिया गया है:
निकाय द्वारा अवशोषित ऊष्मा \( q = +5 \text{ kJ} \)
निकाय द्वारा किया गया कार्य \( W = -1 \text{ kJ} \)
ऊष्मागतिकी के प्रथम नियमानुसार, आंतरिक ऊर्जा में परिवर्तन (\( \Delta U \)) है:
\( \Delta U = q + W \)
\( \Delta U = 5 \text{ kJ} + (-1 \text{ kJ}) \)
\( \implies \Delta U = 4 \text{ kJ} \)
तो, इस प्रक्रिया में आंतरिक ऊर्जा में परिवर्तन \( 4 \text{ kJ} \) होगा।
In simple words: एक चीज़ ने 5 किलोजूल गर्मी ली और 1 किलोजूल काम किया। उसकी कुल अंदरूनी ऊर्जा में 4 किलोजूल की बढ़ोतरी हुई।
🎯 Exam Tip: यह पिछले प्रश्न (Q27) के समान है, बस इकाइयों का ध्यान रखें (जूल बनाम किलोजूल)। सुनिश्चित करें कि सभी इकाइयाँ एक ही हों या उन्हें परिवर्तित करें।
Question 31. एक विलगित निकाय का उदाहरण दें।
Answer: विलगित निकाय वह निकाय होता है जो अपने परिवेश से ऊर्जा और द्रव्यमान दोनों का आदान-प्रदान नहीं करता है।
उदाहरण: एक अच्छी तरह से बंद थर्मस में रखा गर्म जल एक विलगित निकाय का अच्छा उदाहरण है। यह न तो ऊर्जा और न ही द्रव्यमान का अपने परिवेश से विनिमय कर पाता है, इसलिए इसे एक विलगित निकाय माना जाता है।
In simple words: एक विलगित निकाय ऐसा होता है जो अपने आस-पास से न तो गर्मी लेता है और न ही कोई चीज़ देता है, जैसे बंद थर्मस में रखा गर्म पानी।
🎯 Exam Tip: यह याद रखना महत्वपूर्ण है कि एक पूर्णतः विलगित निकाय वास्तविक जीवन में प्राप्त करना बहुत मुश्किल है, लेकिन यह थर्मोडायनामिक्स में एक महत्वपूर्ण सैद्धांतिक अवधारणा है।
Question 32. निकाय के कौनसे प्रक्रम में ताप में कमी होती है?
Answer: एक बंद निकाय में ताप में कमी हो सकती है। यह निकाय अपने परिवेश से ऊर्जा का आदान-प्रदान कर सकता है, लेकिन द्रव्यमान का आदान-प्रदान नहीं कर सकता है। जब कोई बंद निकाय ऊष्माक्षेपी प्रक्रिया के दौरान काम करता है और परिवेश को गर्मी देता है, या जब कोई ऊष्माशोषी प्रक्रिया होती है और गर्मी अवशोषित होती है, तो उसका तापमान कम हो सकता है।
उदाहरण: एक बंद पात्र में रखा गर्म जल धीरे-धीरे अपने आसपास को गर्मी देता है, जिससे उसका तापमान कम हो जाता है।
In simple words: एक बंद निकाय में, जब गर्मी बाहर निकलती है या काम होता है, तो उसका तापमान गिर सकता है।
🎯 Exam Tip: यह ध्यान दें कि रुद्धोष्म प्रसरण के दौरान भी तापमान में कमी होती है, क्योंकि गैस परिवेश पर कार्य करती है और इसकी आंतरिक ऊर्जा (और तापमान) कम हो जाती है।
Question 33. 267 और 276 k ताप पर बर्फ के गलने के लिए G का चिह्न क्या होगा? (बर्फ का गलनांक = 273 k)
Answer:
बर्फ का गलनांक \( T_m = 273 \text{ K} \) है।
गिब्स मुक्त ऊर्जा (\( \Delta G \)) का सूत्र है: \( \Delta G = \Delta H - T\Delta S \)
जब बर्फ पिघलती है, तो यह ऊर्जा ग्रहण करती है (\( \Delta H > 0 \)) और अणुओं की अव्यवस्था (एन्ट्रॉपी, \( \Delta S \)) बढ़ जाती है (\( \Delta S > 0 \))।
गलनांक से नीचे (\( T < 273 \text{ K} \)): इस तापमान पर, \( T\Delta S \) का मान \( \Delta H \) से कम होता है, इसलिए \( \Delta G > 0 \) होगा। इस स्थिति में बर्फ का गलना स्वतः प्रवर्तित नहीं होता है।
गलनांक पर (\( T = 273 \text{ K} \)): \( \Delta G = 0 \) होता है, जो संतुलन की स्थिति है।
गलनांक से ऊपर (\( T > 273 \text{ K} \)): जब तापमान बढ़ता है, तो \( T\Delta S \) का मान \( \Delta H \) से अधिक हो जाता है, जिससे \( \Delta G \) का मान ऋणात्मक हो जाता है (\( \Delta G < 0 \))।
इसलिए, 267 K (जो 273 K से कम है) पर, \( \Delta G \) धनात्मक होगा (बर्फ नहीं पिघलेगी)।
और 276 K (जो 273 K से अधिक है) पर, \( \Delta G \) ऋणात्मक होगा (बर्फ अपने आप पिघलेगी)।
In simple words: बर्फ पिघलने पर गर्मी लेती है और अव्यवस्था बढ़ाती है। अगर तापमान गलनांक (273 K) से ज़्यादा होगा, तो यह अपने आप पिघलेगी (\( G \) ऋणात्मक होगा)। अगर तापमान गलनांक से कम होगा, तो यह अपने आप नहीं पिघलेगी (\( G \) धनात्मक होगा)।
🎯 Exam Tip: गिब्स मुक्त ऊर्जा का चिह्न (\( \Delta G \)) किसी प्रक्रिया की स्वतः प्रवर्तितता का निर्धारण करता है। \( \Delta G < 0 \) स्वतः प्रवर्तित प्रक्रिया को इंगित करता है, जबकि \( \Delta G > 0 \) गैर-स्वतः प्रवर्तित प्रक्रिया को इंगित करता है, और \( \Delta G = 0 \) संतुलन को दर्शाता है।
Question 34. 25°C पर 4 ग्राम गैसीय हाइड्रोजन को मुक्त गैसीय परमाणु में वियोजित करने के लिए आवश्यक ऊर्जा 208 Kcal है। तो H-H बन्ध की बन्ध ऊर्जा क्या होगी?
Answer:
दिया गया है:
हाइड्रोजन का द्रव्यमान \( = 4 \text{ ग्राम} \)
हाइड्रोजन (\( H_2 \)) का मोलर द्रव्यमान \( = 2 \text{ ग्राम/मोल} \)
हाइड्रोजन के मोलों की संख्या \( = \frac{\text{गैस का भार gm}}{\text{गैस का अणु भार}} = \frac{4 \text{ ग्राम}}{2 \text{ ग्राम/मोल}} = 2 \text{ मोल} \)
4 ग्राम \( H_2 \) को मुक्त गैसीय परमाणु में वियोजित करने के लिए आवश्यक ऊर्जा \( = 208 \text{ Kcal} \)
चूंकि 2 मोल \( H_2 \) के लिए 208 Kcal ऊर्जा की आवश्यकता है, तो 1 मोल \( H_2 \) के लिए आवश्यक ऊर्जा (यानी \( H-H \) बंध ऊर्जा) होगी:
\( \text{H-H बन्ध ऊर्जा} = \frac{208 \text{ Kcal}}{2 \text{ मोल}} \)
\( \implies = 104 \text{ Kcal/मोल} \)
तो, H-H बंध की बंध ऊर्जा \( 104 \text{ Kcal/मोल} \) होगी।
In simple words: 4 ग्राम हाइड्रोजन को तोड़ने में 208 Kcal ऊर्जा लगती है। क्योंकि 4 ग्राम हाइड्रोजन में 2 मोल होते हैं, इसलिए एक मोल हाइड्रोजन (यानी एक H-H बंध) को तोड़ने में 104 Kcal ऊर्जा लगेगी।
🎯 Exam Tip: बंध ऊर्जा हमेशा प्रति मोल बंध के लिए व्यक्त की जाती है। इसलिए, दी गई कुल ऊर्जा को अभिक्रिया में टूटने वाले बंधों के मोलों की संख्या से विभाजित करना महत्वपूर्ण है।
Question 36. ऊष्मागतिकी के प्रथम नियम की व्याख्या कीजिए तथा इसकी कमियां बताइये।
Answer:
ऊष्मागतिकी का प्रथम नियम (First Law of Thermodynamics):
यह नियम ऊर्जा संरक्षण के सिद्धांत पर आधारित है, जिसे रॉबर्ट मेयर और हेल्महोल्ट्ज ने प्रतिपादित किया था। इस नियम के अनुसार, ऊर्जा को न तो उत्पन्न किया जा सकता है और न ही नष्ट किया जा सकता है। यद्यपि ऊर्जा एक रूप से दूसरे रूप में परिवर्तित हो सकती है। इस नियम का कोई अपवाद नहीं है।
ऊष्मागतिकी के प्रथम नियम के अन्य कथन निम्नलिखित हैं:
- ब्रह्मांड की कुल ऊर्जा निश्चित होती है, अर्थात् किसी निकाय और उसके परिवेश की कुल ऊर्जा स्थिर रहती है।
- किसी प्रक्रम में यदि ऊर्जा के किसी रूप की निश्चित मात्रा लुप्त होती है, तो उसके समतुल्य मात्रा में ऊर्जा दूसरे रूप में उत्पन्न हो जाती है।
- एक विलगित निकाय की ऊर्जा स्थिर होती है।
- एक ऐसा शाश्वत गति यंत्र का निर्माण संभव नहीं है जो बिना ऊर्जा खर्च किए काम कर सके।
किसी निकाय की आंतरिक ऊर्जा में वृद्धि दो तरीकों से की जा सकती है: निकाय को ऊष्मा देकर और निकाय पर कार्य करके।
मान लीजिए कि किसी गैसीय निकाय की प्रारंभिक अवस्था में आंतरिक ऊर्जा \( U_1 \) है। यह निकाय ऊष्मा \( q \) की कुछ मात्रा अवशोषित करता है और इस पर कार्य \( w \) किया जाता है। इसकी आंतरिक ऊर्जा \( U_2 \) हो जाती है।
तो, निकाय की ऊर्जा में वृद्धि (\( \Delta U \)) \( = U_2 - U_1 \)
जब आंतरिक ऊर्जा में परिवर्तन दोनों प्रकार के कार्य (ऊष्मा और स्थानांतरण) द्वारा होता है, तो आंतरिक ऊर्जा में परिवर्तन दोनों कार्य और ऊष्मा के योग के समान होगा, जिसे निम्न प्रकार से व्यक्त किया जा सकता है:
\( \Delta U = q + w \)
यह समीकरण ऊष्मागतिकी के प्रथम नियम का गणितीय रूप है। यहाँ \( q \) और \( w \) अवस्था फलन नहीं हैं, लेकिन \( \Delta U \) एक अवस्था फलन है।
- यदि आयतन स्थिर है (\( \Delta V = 0 \)), तो \( \Delta U = q_v \)।
- यदि दाब स्थिर है, तो \( \Delta H = q_p \)।
प्रथम नियम ऊर्जा संरक्षण के बारे में बताता है, लेकिन इसकी कुछ सीमाएँ हैं:
- प्रक्रिया की दिशा: यह नियम यह नहीं बताता कि कोई प्रक्रिया किस दिशा में होगी (जैसे, ऊष्मा हमेशा गर्म से ठंडी वस्तु की ओर क्यों बहती है)।
- स्वतः प्रवर्तितता: यह नियम किसी प्रक्रिया की स्वतः प्रवर्तितता (spontaneity) की भविष्यवाणी नहीं करता है, यानी कोई प्रक्रिया अपने आप होगी या नहीं।
- ऊर्जा रूपांतरण की सीमा: यह नियम यह नहीं बताता कि ऊष्मा ऊर्जा को पूरी तरह से कार्य में कितनी कुशलता से परिवर्तित किया जा सकता है। यह नहीं बताता कि कुछ ऊर्जा हमेशा व्यर्थ क्यों चली जाती है।
In simple words: ऊष्मागतिकी का पहला नियम कहता है कि ऊर्जा न तो बनती है न नष्ट होती है, बस रूप बदलती है (जैसे \( \Delta U = q + w \) )। लेकिन यह नहीं बताता कि कोई काम अपने आप क्यों होता है या किस दिशा में होता है, और न ही यह बताता कि गर्मी को काम में कितनी अच्छी तरह बदला जा सकता है।
🎯 Exam Tip: प्रथम नियम ऊर्जा की मात्रा से संबंधित है, जबकि द्वितीय नियम ऊर्जा की गुणवत्ता और प्रक्रियाओं की दिशा से संबंधित है। कमियों को समझने के लिए द्वितीय नियम की अवधारणाओं, जैसे एन्ट्रॉपी और गिब्स मुक्त ऊर्जा, को जानना महत्वपूर्ण है।
RBSE Class 11 Chemistry Chapter 6 निबन्धात्मक प्रश्न
Question 38. कार्बो इंजन की दक्षता द्वारा ऊष्मागतिकी के द्वितीय नियम को समझाइये। मुक्त ऊर्जा परिवर्तन किस प्रकार स्वतः प्रवर्तित प्रक्रम की कसौटी है?
Answer:
ऊष्मागतिकी का द्वितीय नियम (Second Law of Thermodynamics):
प्रथम नियम ऊर्जा संरक्षण के बारे में बताता है, लेकिन यह प्रक्रियाओं की दिशा या स्वतः प्रवर्तितता के बारे में कोई जानकारी नहीं देता। द्वितीय नियम इन कमियों को दूर करता है। यह ऊर्जा स्थानांतरण की दिशा और ऊष्मा ऊर्जा को कार्य में बदलने की सीमा को परिभाषित करता है।
द्वितीय नियम के विभिन्न कथन इस प्रकार हैं:
- सभी स्वतः प्रवर्तित (या प्राकृतिक) प्रक्रम अनुत्क्रमणीय होते हैं।
- किसी भी स्वतः प्रवर्तित प्रक्रम को बिना बाहरी सहायता के विपरीत दिशा में नहीं ले जाया जा सकता है (जैसे, ऊष्मा अपने आप ठंडी वस्तु से गर्म वस्तु की ओर प्रवाहित नहीं हो सकती)।
- सभी स्वतः प्रवर्तित प्रक्रमों में ब्रह्मांड की कुल एन्ट्रॉपी बढ़ती है, यानी कुल एन्ट्रॉपी परिवर्तन (\( \Delta S_{\text{कुल}} = \Delta S_{\text{निकाय}} + \Delta S_{\text{परिवेश}} \)) धनात्मक होता है (\( \Delta S_{\text{कुल}} > 0 \))।
- ब्रह्मांड की एन्ट्रॉपी लगातार बढ़ रही है।
- किसी विलगित निकाय में अधिकतम एन्ट्रॉपी की अवस्था में स्थायित्व अधिक होता है।
कार्नो इंजन एक आदर्श ऊष्मा इंजन है जो अधिकतम संभव दक्षता पर काम करता है। कार्नो चक्र दर्शाता है कि ऊष्मा का पूरी तरह से कार्य में बदलना असंभव है। हमेशा कुछ ऊष्मा ठंडे सिंक में निकल जाती है। यह द्वितीय नियम की पुष्टि करता है कि कोई भी ऊष्मा इंजन 100% कुशल नहीं हो सकता। इसकी दक्षता निम्न सूत्र द्वारा दी जाती है:
\( \eta = 1 - \frac{T_c}{T_h} \)
जहाँ \( T_c \) ठंडे सिंक का तापमान है और \( T_h \) गर्म स्रोत का तापमान है। यदि \( T_c > 0 \), तो \( \eta < 1 \) (या 100% से कम) होगा, जो यह बताता है कि कुछ ऊष्मा हमेशा बर्बाद होती है।
मुक्त ऊर्जा परिवर्तन स्वतः प्रवर्तित प्रक्रम की कसौटी (Criterion for Spontaneity using Free Energy Change):
मुक्त ऊर्जा (गिब्स मुक्त ऊर्जा, \( \Delta G \)) किसी प्रक्रिया की स्वतः प्रवर्तितता का सबसे महत्वपूर्ण मानदंड है। इसका संबंध एन्थैल्पी, एन्ट्रॉपी और तापमान से है:
\( \Delta G = \Delta H - T\Delta S \)
जहाँ \( \Delta G \) गिब्स मुक्त ऊर्जा में परिवर्तन, \( \Delta H \) एन्थैल्पी में परिवर्तन, \( T \) परमताप और \( \Delta S \) एन्ट्रॉपी में परिवर्तन है।
स्वतः प्रवर्तितता के लिए मानदंड इस प्रकार हैं:
- यदि \( \Delta G < 0 \) (ऋणात्मक), तो प्रक्रिया स्वतः प्रवर्तित होती है।
- यदि \( \Delta G > 0 \) (धनात्मक), तो प्रक्रिया स्वतः प्रवर्तित नहीं होती है (लेकिन विपरीत प्रक्रिया स्वतः प्रवर्तित होती है)।
- यदि \( \Delta G = 0 \), तो प्रक्रिया संतुलन में होती है।
उदाहरण:
जब जल पहाड़ी से नीचे गिरता है या गैसें उच्च दाब से निम्न दाब की ओर फैलती हैं, तो निकाय की स्थितिज ऊर्जा में कमी होती है। रासायनिक अभिक्रियाएँ उस दिशा में स्वतः प्रवर्तित होंगी जिसमें ऊर्जा की कमी होती है, जैसा कि ऊष्माक्षेपी अभिक्रियाओं में होता है।
ऊष्माक्षेपी अभिक्रिया का एन्थैल्पी-आरेख:
यह आरेख दिखाता है कि ऊष्माक्षेपी अभिक्रिया में उत्पाद की एन्थैल्पी अभिकारकों की एन्थैल्पी से कम होती है, जिससे ऊर्जा उत्सर्जित होती है। हालांकि, सभी स्वतः प्रवर्तित अभिक्रियाएँ ऊष्माक्षेपी नहीं होती हैं; कुछ ऊष्माशोषी अभिक्रियाएँ भी स्वतः प्रवर्तित हो सकती हैं यदि एन्ट्रॉपी में पर्याप्त वृद्धि हो।
In simple words: ऊष्मागतिकी का दूसरा नियम बताता है कि कोई काम अपने आप किस दिशा में होगा। यह गिब्स मुक्त ऊर्जा ( \( \Delta G \) ) के ज़रिए पता चलता है - अगर \( \Delta G \) ऋणात्मक है, तो काम अपने आप होगा। कार्नो इंजन दिखाता है कि कोई भी मशीन पूरी तरह से कुशल नहीं हो सकती, हमेशा कुछ गर्मी बेकार जाती है।
🎯 Exam Tip: गिब्स मुक्त ऊर्जा (\( \Delta G \)) सबसे महत्वपूर्ण थर्मोडायनामिक मानदंड है जो किसी रासायनिक या भौतिक प्रक्रिया की स्वतः प्रवर्तितता का निर्धारण करता है, और यह तापमान, एन्थैल्पी और एन्ट्रॉपी के प्रभावों को संतुलित करता है।
Question 39. निम्न की व्याख्या कीजिए –
Answer:
1. संभवन एन्थैल्पी (Formation Enthalpy):
यह एक विशेष प्रकार की मानक अभिक्रिया एन्थैल्पी है, जिसमें एक मोल यौगिक अपने तत्वों से बनता है। इसलिए इसे विरचन एन्थैल्पी भी कहते हैं। किसी यौगिक के एक मोल को उसके सबसे स्थायी तत्वों से बनाने पर एन्थैल्पी में होने वाले मानक परिवर्तन को उसकी मानक मोलर विरचन एन्थैल्पी या मानक संभवन एन्थैल्पी कहते हैं। यह हमें बताता है कि यौगिक कितना स्थिर है।
उदाहरण:
\( \text{N}_2 \text{(g)} + \text{O}_2 \text{(g)} \rightarrow 2\text{NO(g)} \)
\( \Delta\text{H}^\circ = + 180 \text{ kJ} \)
इस अभिक्रिया में 2 मोल \( \text{NO} \) बनाने के लिए \( +180 \text{ kJ} \) ऊष्मा अवशोषित होती है। \( \text{NO} \) के एक मोल के लिए अवशोषित ऊष्मा उसकी विरचन एन्थैल्पी है।
\( \text{C(s)} + 2\text{H}_2 \text{(g)} \rightarrow \text{CH}_4\text{(g)} \)
\( \Delta\text{H}_\text{f}^\circ = -74.8 \text{ kJ/mol} \)
\( \Delta\text{H}^\circ = +90 \text{ kJ/mol} \)
\( \Delta\text{H}^\circ = 2\Delta\text{H}_\text{f}^\circ \)
\( \text{HBr (g)} \) के लिए –
\( \frac{1}{2}\text{H}_2 \text{(g)} + \frac{1}{2}\text{Br}_2 \text{(l)} \rightarrow \text{HBr (g)} \)
\( \Delta\text{H}_\text{f}^\circ = -36.4 \text{ kJ/mol} \)
प्रत्येक मुक्त तत्व (जैसे \( \text{C, S} \)) की एन्थैल्पी \( 25^\circ\text{C} \) ताप और 1 वायुमंडलीय दाब पर शून्य मानी जाती है, जिससे यौगिक की एन्थैल्पी के मान उनकी मानक संभवन ऊष्माओं के समान हो जाते हैं। संभवन एन्थैल्पी का मान हमें यौगिकों के स्थायित्व की तुलना करने में मदद करता है।
\( \text{C (s)} + \text{O}_2 \text{(g)} \rightarrow \text{CO}_2 \text{(g)} \)
\( \Delta\text{H}_\text{f}^\circ = -393.15 \text{ kJ} \)
\( \Delta\text{H}_\text{f}^\circ (\text{CO}_2) = \text{Enthalpy of } \text{CO}_2 - (\text{Enthalpy of } \text{C} + \text{Enthalpy of } \text{O}_2) \)
\( \Delta\text{H}_\text{f}^\circ = \text{उत्पादों की एन्थैल्पी} - \text{अभिकारकों की एन्थैल्पी} \)
किसी यौगिक की एन्थैल्पी का ऋणात्मक मान दर्शाता है कि अभिक्रिया ऊष्माक्षेपी है। जिस यौगिक की एन्थैल्पी सबसे कम (ऋणात्मक) होती है, वह यौगिक उतना ही अधिक स्थायी होता है। जिन यौगिकों की संभवन ऊष्मा का मान धनात्मक होता है, वे यौगिक ऊष्माशोषी कहलाते हैं और वे कम स्थायी होते हैं।
\( \frac{1}{2}\text{H}_2 \text{(g)} + \frac{1}{2}\text{I}_2 \text{(g)} \rightarrow \text{HI (g)} \)
\( \Delta\text{H}_\text{f}^\circ = +26.49 \text{ kJ} \)
\( \text{H-I} \) बंध, \( \text{H-H} \) और \( \text{I-I} \) बंध की तुलना में कमजोर बंध होते हैं।
| पदार्थ | मान |
|---|---|
| \( \text{HCl(g)} \) | \( -92.31 \) |
| \( \text{HBr(g)} \) | \( -36.40 \) |
| \( \text{HI(g)} \) | \( +26.48 \) |
| \( \text{Br}_2\text{(l)} \) | \( 0 \) |
| \( \text{Br}_2\text{(g)} \) | \( +30.91 \) |
| \( \text{Cl}_2\text{(g)} \) | \( 0 \) |
| \( \text{C (हीरा)} \) | \( +1.89 \) |
| \( \text{C (ग्रेफाइट)} \) | \( 0 \) |
| \( \text{CaO(s)} \) | \( -635.09 \) |
| \( \text{CH}_4\text{(g)} \) | \( -74.81 \) |
| \( \text{C}_2\text{H}_4\text{(g)} \) | \( -84.68 \) |
| \( \text{C}_3\text{H}_8\text{(g)} \) | \( -103.85 \) |
| \( \text{C}_2\text{H}_6\text{(g)} \) | \( -52.26 \) |
| \( \text{CH}_3\text{OH(l)} \) | \( -238.86 \) |
| \( \text{C}_2\text{H}_5\text{OH(l)} \) | \( -277.69 \) |
| \( \text{C}_6\text{H}_6\text{(l)} \) | \( +49.03 \) |
| \( \text{CO(g)} \) | \( -110.525 \) |
| \( \text{CO}_2\text{(g)} \) | \( -393.51 \) |
| \( \text{SO}_2\text{(g)} \) | \( -296.83 \) |
| \( \text{SO}_3\text{(g)} \) | \( -395.72 \) |
| \( \text{NH}_3\text{(g)} \) | \( -46.11 \) |
| \( \text{HNO}_3\text{(l)} \) | \( -174.1 \) |
| \( \text{H}_2\text{SO}_4\text{(l)} \) | \( -811.3 \) |
2. प्रावस्था परिवर्तन एन्थैल्पी (Phase Transition Enthalpy):
किसी गैसीय सहसंयोजक द्विपरमाणुक अणु के एक मोल में उपस्थित सभी बंधों के टूटने और गैसीय उत्पाद बनने में होने वाले एन्थैल्पी परिवर्तन को आबंध वियोजन एन्थैल्पी या बंध वियोजन ऊर्जा कहते हैं। यह ऊर्जा परमाणुओं को अलग करने के लिए आवश्यक होती है।
\( \text{H}_2 \text{(g)} \rightarrow 2\text{H (g)} \)
\( \Delta\text{H}_\text{b}^\circ = 435.0 \text{ kJ/mol} \)
इस अभिक्रिया में एक मोल हाइड्रोजन में सभी आबंध टूट जाते हैं, और इस प्रकार बंध वियोजन में \( 435.0 \text{ kJ} \) एन्थैल्पी परिवर्तन होता है। यह हाइड्रोजन की कणन एन्थैल्पी के बराबर है। सभी द्विपरमाणुक अणुओं के लिए बंध वियोजन में एन्थैल्पी परिवर्तन उसकी कणन एन्थैल्पी के समान होता है।
\( \text{Cl}_2 \text{(g)} \rightarrow 2\text{Cl (g)} \)
\( \Delta\text{H}_\text{b}^\circ = 242 \text{ kJ/mol} \)
\( \text{O}_2 \text{(g)} \rightarrow 2\text{O (g)} \)
\( \Delta\text{H}_\text{b}^\circ = 428 \text{ kJ/mol} \)
बहुपरमाणुक अणु:
बहुपरमाणुक अणुओं में एक ही प्रकार के सभी बंधों की बंध ऊर्जा अलग-अलग होती है, इसलिए औसत बंध ऊर्जा ली जाती है। जैसे \( \text{CH}_4 \) में चारों \( \text{C-H} \) बंध समान होते हैं, और उनकी बंध ऊर्जा भी समान होती है। लेकिन प्रत्येक \( \text{C-H} \) बंध को तोड़ने के लिए आवश्यक ऊर्जा अलग-अलग होती है, इसलिए औसत बंध ऊर्जा ली जाती है।
\( \text{CH}_4\text{(g)} \rightarrow \dot{\text{C}}\text{H}_3\text{(g)} + \text{H(g)}; \Delta_\text{bond}\text{H}^\circ = +427 \text{ kJ mol}^{-1} \)
\( \dot{\text{C}}\text{H}_3\text{(g)} \rightarrow \ddot{\text{C}}\text{H}_2\text{(g)} + \text{H(g)}; \Delta_\text{bond}\text{H}^\circ = +439 \text{ kJ mol}^{-1} \)
\( \ddot{\text{C}}\text{H}_2\text{(g)} \rightarrow \dot{\text{C}}\text{H(g)} + \text{H(g)}; \Delta_\text{bond}\text{H}^\circ = +452 \text{ kJ mol}^{-1} \)
\( \dot{\text{C}}\text{H(g)} \rightarrow \text{C(g)} + \text{H(g)}; \Delta_\text{bond}\text{H}^\circ = +347 \text{ kJ mol}^{-1} \)
तथा
\( \text{CH}_4 \text{(g)} \rightarrow \text{C (g)} + 4\text{H (g)}; \)
\( \Delta\text{H}^\circ = 1665 \text{ kJ mol}^{-1} \)
\( \text{C-H} \) की औसत बंध ऊर्जा \( (\Delta_\text{C-H}\text{H}^\circ) = \frac{1}{4} (1665 \text{ kJ mol}^{-1}) \)
अतः औसत बंध ऊर्जा \( = \frac{497.8+428.5}{2} = 463.2 \text{ kJ} \)
विभिन्न यौगिकों जैसे \( \text{CH}_3-\text{CH}_2\text{Cl}, \text{CH}_3-\text{CH}_2-\text{NO}_2 \) इत्यादि में \( \text{C-H} \) बंध की औसत बंध ऊर्जा एक-दूसरे से थोड़ी अलग होती है।
आबन्ध एन्थैल्पी (Bond Enthalpy):
यह किसी अभिक्रिया में बंधों के टूटने और बनने में होने वाला ऊर्जा परिवर्तन है। यदि हमें किसी अभिक्रिया के विभिन्न आबंध एन्थैल्पी पता हों, तो हम गैसीय अवस्था में उस अभिक्रिया की एन्थैल्पी ज्ञात कर सकते हैं। यह हमें बताता है कि बंधों को तोड़ने में कितनी ऊर्जा लगती है या बंध बनने पर कितनी ऊर्जा निकलती है।
\( \Delta\text{H}^\circ = \sum (\text{अभिकारकों की आबंध एन्थैल्पी}) - \sum (\text{उत्पादों की आबंध एन्थैल्पी}) \)
किसी अभिक्रिया की कुल अभिक्रिया एन्थैल्पी, उस अभिक्रिया में अभिकारक अणुओं के सभी आबंधों के वियोजन के लिए आवश्यक ऊर्जा और उत्पाद अणुओं के सभी आबंधों के बनने के लिए आवश्यक ऊर्जा का अंतर होता है। बंध ऊर्जा को \( \text{kJ mol}^{-1} \) में व्यक्त किया जाता है। नीचे दी गई सारणी में एकल तथा बहुआबंधों की बंध एन्थैल्पी के मान दिए गए हैं:
| बंध | बंध एन्थैल्पी (kJ mol-1) | बंध | बंध एन्थैल्पी (kJ mol-1) |
|---|---|---|---|
| \( \text{H-H} \) | \( 435.1 \) | \( \text{H-F} \) | \( 546.8 \) |
| \( \text{F-F} \) | \( 154.8 \) | \( \text{H-Cl} \) | \( 430.9 \) |
| \( \text{Cl-Cl} \) | \( 242.7 \) | \( \text{H-Br} \) | \( 368.2 \) |
| \( \text{I-I} \) | \( 150.0 \) | \( \text{H-I} \) | \( 297.9 \) |
| \( \text{O-O} \) | \( 138.1 \) | \( \text{C-C (हीरा)} \) | \( 355.9 \) |
| \( \text{N-N} \) | \( 159.0 \) | \( \text{C-H} \) | \( 416.2 \) |
| \( \text{C-C} \) | \( 347.3 \) | \( \text{C-O} \) | \( 351.4 \) |
| \( \text{C-N} \) | \( 292.9 \) | \( \text{C-F} \) | \( 439.3 \) |
| \( \text{C-S} \) | \( 259.4 \) | \( \text{C-Cl} \) | \( 330.5 \) |
| \( \text{N-H} \) | \( 389.1 \) | \( \text{C-Br} \) | \( 276.1 \) |
| \( \text{O-H} \) | \( 464.4 \) |
| बंध | मान | बंध | मान |
|---|---|---|---|
| \( \text{C=O} \) | \( 741 \) | \( \text{C=N} \) | \( 615 \) |
| \( \text{C}\equiv\text{O} \) | \( 1070 \) | \( \text{C}\equiv\text{N} \) | \( 891 \) |
| \( \text{O=O} \) | \( 498 \) |
3. एन्ट्रॉपी (Entropy):
सभी स्वतः प्रवर्तित प्रक्रियाओं के पूरे होने पर किसी सिस्टम में अव्यवस्था बढ़ती है। एन्ट्रॉपी इस बात का माप है कि किसी सिस्टम के अंदर कितनी अव्यवस्था या बेतरतीबी है। यह हमें बताता है कि सिस्टम कितनी बेतरतीब है।
उदाहरण:
- जब किसी धातु के एक सिरे को गर्म करते हैं, तो ऊष्मा के प्रवाह से धातु का एक सिरा गर्म और दूसरा सिरा ठंडा होता है। इस समय थोड़ी व्यवस्था होती है क्योंकि गर्म अणु एक सिरे पर और ठंडे अणु दूसरे सिरे पर रहते हैं। लेकिन जैसे ही गर्म सिरे से ठंडे सिरे की तरफ ऊष्मा जाती है, इलेक्ट्रॉन हिलने लगते हैं और अव्यवस्था बढ़ती है।
- अधिक सांद्रता वाले घोल के अणुओं का कम सांद्रता वाले घोल की ओर फैलने पर सिस्टम की अव्यवस्था बढ़ती है।
- किसी ठोस पदार्थ के पिघलने पर और द्रव पदार्थ के वाष्पीकरण से सिस्टम की अव्यवस्था बढ़ने के कारण एन्ट्रॉपी बढ़ती है। ठोस पदार्थों में एक निश्चित क्रिस्टल संरचना होती है, इसलिए उनके अणुओं की एक निश्चित व्यवस्था होती है। अतः उनकी एन्ट्रॉपी कम होती है। परन्तु द्रव और गैस पदार्थों में उनके अणुओं में अव्यवस्था उत्पन्न होती है, अतः उनकी एन्ट्रॉपी बढ़ती है।
ठोस \( < \) द्रव \( < \) गैस (एन्ट्रॉपी)
- अणुओं की संख्या या सांद्रता बढ़ने के साथ-साथ एन्ट्रॉपी बढ़ती है।
- तापमान बढ़ाने पर अणुओं के ऊर्जा स्तर बढ़ने के साथ-साथ एन्ट्रॉपी बढ़ती जाती है।
- जब किसी पदार्थ को किसी विलायक में घोला जाता है, तो उसकी एन्ट्रॉपी बढ़ती है, क्योंकि पदार्थ के कण अव्यवस्थित हो जाते हैं।
- विभिन्न गैसों को मिश्रित करने पर एन्ट्रॉपी बढ़ती है।
- किसी रासायनिक अभिक्रिया में गैसीय उत्पादों की संख्या बढ़ने पर एन्ट्रॉपी बढ़ेगी, लेकिन इसके विपरीत होने पर एन्ट्रॉपी कम होगी।
\( (\text{NH}_4)_2\text{S (s)} \rightarrow 2\text{NH}_3 \text{(g)} + \text{H}_2\text{S (g)} \) (एन्ट्रॉपी में वृद्धि)
\( \text{NH}_3 \text{(g)} + \text{HCl (g)} \rightarrow \text{NH}_4\text{Cl (s)} \) (एन्ट्रॉपी में कमी)
- अंडे को उबालने पर एन्ट्रॉपी बढ़ती है, क्योंकि इससे अंडे में मौजूद प्रोटीन की संरचना बिगड़ जाती है।
- रबर को खींचने पर एन्ट्रॉपी कम हो जाती है, क्योंकि इसमें मौजूद बहुलक श्रृंखलाएँ व्यवस्थित हो जाती हैं।
एन्ट्रॉपी से संबंधित महत्वपूर्ण तथ्य –
- किसी अभिक्रिया के लिए एन्ट्रॉपी में परिवर्तन \( (\Delta\text{S}) = \) उत्पादों की कुल एन्ट्रॉपी \( - \) अभिकारकों की कुल एन्ट्रॉपी
- किसी उत्क्रमणीय अभिक्रिया में साम्यावस्था पर एन्ट्रॉपी सबसे अधिक होती है, लेकिन एन्ट्रॉपी में परिवर्तन \( (\Delta\text{S}) = 0 \) होता है।
- स्वतःप्रवर्तित प्रक्रियाओं में एन्ट्रॉपी परिवर्तन हमेशा धनात्मक होता है, यानी इन प्रक्रियाओं में एन्ट्रॉपी बढ़ती है।
\( \Delta\text{S}_\text{कुल} > 0 \) अर्थात् \( \Delta\text{S}_\text{निकाय} + \Delta\text{S}_\text{परिवेश} > 0 \)
- सिस्टम द्वारा ऊष्मा का अवशोषण करने पर \( \Delta\text{S} \) का मान बढ़ता है \( (\Delta\text{S} = +\text{ve}) \), और सिस्टम द्वारा ऊष्मा का उत्सर्जन करने पर \( \Delta\text{S} \) का मान कम होता है \( (\Delta\text{S} = -\text{ve}) \)।
- रुद्धोष्म उत्क्रमणीय प्रक्रिया में \( \text{q}_\text{rev} = 0 \) होने के कारण एन्ट्रॉपी परिवर्तन भी शून्य होता है \( (\Delta\text{S} = 0) \).
4. विलायकन एन्थैल्पी (Solvation Enthalpy):
जब किसी विलेय (solute) के एक मोल को विलायक की एक निश्चित मात्रा में घोलते हैं, तो एन्थैल्पी में होने वाले परिवर्तन को उस पदार्थ की विलायकन एन्थैल्पी कहते हैं। जब किसी पदार्थ को विलायक की अनंत मात्रा में घोलते हैं, तब विलेय के अणुओं के बीच की क्रिया बहुत कम होती है। इस प्रकार का एन्थैल्पी परिवर्तन जो बहुत पतला करने पर होता है, उसे विलयन एन्थैल्पी कहते हैं। यह प्रक्रिया घोलने के दौरान होने वाले ऊर्जा परिवर्तन को मापती है।
जब किसी आयनिक यौगिक को किसी विलायक में घोलते हैं, तो उसके आयनीकरण के लिए आवश्यक एन्थैल्पी को जालक (Lattice) एन्थैल्पी कहते हैं। क्रिस्टल जालक में आयन अपनी नियमित जगह छोड़ देते हैं और घोल में अधिक स्वतंत्र रहते हैं। यदि विलायक के रूप में जल लेते हैं, तो इन आयनों का जलयोजन होता है, यानी आयनिक यौगिक के घुलने में इन दोनों एन्थैल्पी का योगदान होता है। किसी आयनिक यौगिक \( [\text{AB(s)}] \) को जल में घोलने पर हुए विभिन्न परिवर्तनों को नीचे दिए गए तरीके से दर्शाया जा सकता है –
\( \Delta\text{H}_\text{sol} = \Delta\text{H}_\text{lattice} + \Delta\text{H}_\text{hyd} \)
एक मोल निर्जल पदार्थ के पहले जलयोजन पर उत्सर्जित ऊष्मा को जलयोजन एन्थैल्पी कहते हैं। यह बताता है कि किसी पदार्थ को पानी में घोलने पर कितनी ऊर्जा निकलती है।
उदाहरण –
\( \text{BaCl}_2 + 2\text{H}_2\text{O (l)} \rightarrow \text{BaCl}_2 \cdot 2\text{H}_2\text{O (s)} \)
\( \Delta\text{H}_\text{hyd}^\circ = -29.4 \text{ kJ/mol} \)
\( \text{ZnSO}_4 \text{(s)} + 5\text{H}_2\text{O (l)} \rightarrow \text{ZnSO}_4 \cdot 5\text{H}_2\text{O} \)
\( \Delta\text{H}^\circ = -30.0 \text{ kJ} \)
सामान्यतया आयनिक यौगिकों के लिए \( \text{H} \) का मान धनात्मक होता है। अतः अधिकांश यौगिकों की जल में घुलनशीलता तापमान बढ़ाने पर बढ़ती है। परन्तु यदि जालक एन्थैल्पी बहुत अधिक है, तो वह यौगिक जल में नहीं घुलेगा। इसी कारण अधिकतर फ्लोराइड, कार्बोनेट और सल्फेट जल में बहुत कम घुलनशील होते हैं। किसी सांद्रता का घोल बनाने के लिए एक मोल विलेय को शुद्ध विलायक में घोलने पर जो एन्थैल्पी परिवर्तन होता है, उसे मानक विलयन एन्थैल्पी कहते हैं।
In simple words: ऊष्मागतिकी के विभिन्न महत्वपूर्ण गुणों जैसे संभवन एन्थैल्पी, प्रावस्था परिवर्तन एन्थैल्पी, बंध एन्थैल्पी, एन्ट्रॉपी और विलायकन एन्थैल्पी को समझाया गया है। ये सभी गुण बताते हैं कि रासायनिक प्रक्रियाएं कैसे ऊर्जा और अव्यवस्था के संदर्भ में व्यवहार करती हैं।
🎯 Exam Tip: इन सभी अवधारणाओं को उनके परिभाषा, उदाहरण और सूत्रों के साथ याद रखना महत्वपूर्ण है, क्योंकि वे रासायनिक प्रक्रियाओं की ऊर्जा और स्व-प्रवर्तिता को समझने की नींव हैं।
Question 40. अभिक्रिया X - Y के लिए 298 k ताप पर मानक एन्ट्रॉपी क्या होगी? जब साम्यावस्था स्थिरांक \( 1.8 \times 10^{-7} \) है।
Answer:
हम जानते हैं –
\( \Delta\text{G}^\circ = -2.303 \text{ RT log K}_\text{sp} \)
\( = -2.303 \times (8.314 \text{ JK}^{-1} \text{ mol}^{-1}) (298 \text{ k}) (\text{log } 1.8 \times 10^{-7}) \)
\( = -2.303 \times 8.314 \times 298 \times (-6.745) \)
\( = 38.484 \text{ kJ mol}^{-1} \)
\( \Delta\text{G}^\circ = \Delta\text{H}^\circ - \text{T}\Delta\text{S}^\circ \)
\( \Delta\text{S}^\circ = \frac{\Delta\text{H}^\circ - \Delta\text{G}^\circ}{\text{T}} \)
\( = \frac{28.40 \text{ kJ mol}^{-1} - 38.498 \text{ kJ mol}^{-1}}{298\text{k}} \)
\( = \frac{-10.098 \text{ kJ mol}^{-1}}{298\text{k}} \)
\( = -0.0338 \text{ kJ mol}^{-1}\text{k}^{-1} \)
\( = -33.8 \text{ Jk}^{-1} \text{ mol}^{-1} \)
In simple words: मानक एन्ट्रॉपी की गणना करने के लिए, हमने पहले गिब्स मुक्त ऊर्जा परिवर्तन (\( \Delta\text{G}^\circ \)) को साम्यावस्था स्थिरांक से निकाला। फिर, एन्थैल्पी परिवर्तन (\( \Delta\text{H}^\circ \)) के मान का उपयोग करके, हमने मानक एन्ट्रॉपी (\( \Delta\text{S}^\circ \)) का मान प्राप्त किया।
🎯 Exam Tip: गिब्स मुक्त ऊर्जा और एन्ट्रॉपी के सूत्रों को याद रखें। ध्यान दें कि साम्यावस्था स्थिरांक और तापमान का उपयोग करके \( \Delta\text{G}^\circ \) की गणना कैसे की जाती है, और फिर एन्थैल्पी परिवर्तन के साथ \( \Delta\text{S}^\circ \) कैसे निकाली जाती है।
Question 42. एक गैस का STP पर आयतन 2 लीटर है। इसको 300 जूल ऊष्मा दी जाती है, जिससे गैस का आयतन एक वायुमण्डल दाब पर 2.5 लीटर हो जाता है। गैस की आन्तरिक ऊर्जा में हुए परिवर्तन की गणना कीजिए।
Answer:
प्रारंभिक आयतन \( \text{V}_1 = 2 \) लीटर
अंतिम आयतन \( \text{V}_2 = 2.5 \) लीटर
दबाव \( \text{P} = 1 \) atm
दी गई ऊष्मा \( \text{q} = 300 \text{ J} \)
आयतन में परिवर्तन \( \Delta\text{V} = \text{V}_2 - \text{V}_1 = 2.5 - 2.0 = 0.5 \) लीटर
गैस द्वारा किया गया कार्य \( \text{W} = -\text{P}\Delta\text{V} \)
\( = -1 \text{ atm} \times 0.5 \text{ L} = -0.5 \text{ L atm} \)
हम जानते हैं कि \( 1 \text{ L atm} \approx 101.3 \text{ J} \)
इसलिए, \( \text{W} = -0.5 \times 101.3 \text{ J} = -50.65 \text{ J} \)
ऊष्मागतिकी के प्रथम नियम के अनुसार, आन्तरिक ऊर्जा में परिवर्तन \( \Delta\text{U} = \text{q} + \text{W} \)
\( \Delta\text{U} = 300 \text{ J} + (-50.65 \text{ J}) \)
\( \Delta\text{U} = 249.35 \text{ J} \)
In simple words: गैस के आयतन में बदलाव और उसे दी गई ऊष्मा का उपयोग करके हमने गैस की आंतरिक ऊर्जा में कितना बदलाव हुआ, यह पता किया। कार्य को दाब और आयतन में परिवर्तन से निकाला जाता है, और फिर ऊष्मागतिकी के पहले नियम से आंतरिक ऊर्जा का परिवर्तन निकालते हैं।
🎯 Exam Tip: ऊष्मागतिकी के प्रथम नियम (\( \Delta\text{U} = \text{q} + \text{W} \)) का सही उपयोग करें। कार्य (\( \text{W} = -\text{P}\Delta\text{V} \)) की गणना करते समय इकाइयों (लीटर-एटम को जूल में) का सही रूपांतरण करना न भूलें।
Question 43. 0°C और 1 वायुमण्डलीय दाब पर जब 1 मोल बर्फ पिघलती है तो निकाय के द्वारा \( 6.05 \text{ kJ mol}^{-1} \) ऊष्मा अवशोषित होती है। बर्फ एवं जल के मोलर आयतन क्रमशः 0.0196 और 0.0180 लीटर है। \( \Delta\text{H} \) और \( \Delta\text{U} \) की गणना कीजिये।
Answer:
तापमान \( \text{T} = 0^\circ\text{C} = 273.15 \text{ K} \)
दबाव \( \text{P} = 1 \) atm
बर्फ के पिघलने पर अवशोषित ऊष्मा \( \text{q}_\text{p} = \Delta\text{H} = 6.05 \text{ kJ mol}^{-1} = 6050 \text{ J mol}^{-1} \)
बर्फ का मोलर आयतन \( \text{V}_\text{बर्फ} = 0.0196 \text{ L mol}^{-1} \)
जल का मोलर आयतन \( \text{V}_\text{जल} = 0.0180 \text{ L mol}^{-1} \)
आयतन में परिवर्तन \( \Delta\text{V} = \text{V}_\text{जल} - \text{V}_\text{बर्फ} = 0.0180 - 0.0196 = -0.0016 \text{ L mol}^{-1} \)
दाब-आयतन कार्य \( \text{P}\Delta\text{V} = 1 \text{ atm} \times (-0.0016 \text{ L mol}^{-1}) = -0.0016 \text{ L atm mol}^{-1} \)
हम जानते हैं कि \( 1 \text{ L atm} \approx 24.20 \text{ cal} \) या \( 1 \text{ L atm} \approx 101.3 \text{ J} \)
इसलिए, \( \text{P}\Delta\text{V} = -0.0016 \times 101.3 \text{ J mol}^{-1} = -0.162 \text{ J mol}^{-1} \)
ऊष्मागतिकी के प्रथम नियम के अनुसार, \( \Delta\text{H} = \Delta\text{U} + \text{P}\Delta\text{V} \)
इससे, \( \Delta\text{U} = \Delta\text{H} - \text{P}\Delta\text{V} \)
\( \Delta\text{U} = 6050 \text{ J mol}^{-1} - (-0.162 \text{ J mol}^{-1}) \)
\( \Delta\text{U} = 6050 + 0.162 = 6050.162 \text{ J mol}^{-1} \)
\( \Delta\text{U} \approx 6.05 \text{ kJ mol}^{-1} \)
In simple words: हमने बर्फ के पिघलने पर हुई एन्थैल्पी और आंतरिक ऊर्जा में परिवर्तन की गणना की। क्योंकि बर्फ पिघलकर पानी में बदलती है, तो आयतन में थोड़ा बदलाव होता है, जिससे कार्य होता है। यह कार्य एन्थैल्पी को आंतरिक ऊर्जा से अलग करता है, लेकिन इस मामले में अंतर बहुत कम है।
🎯 Exam Tip: पिघलने की प्रक्रिया में \( \Delta\text{H} \) और \( \Delta\text{U} \) की गणना करते समय \( \text{P}\Delta\text{V} \) कार्य को ध्यान में रखें। आयतन में परिवर्तन अक्सर छोटा होता है, जिससे \( \Delta\text{H} \) और \( \Delta\text{U} \) के मान बहुत करीब होते हैं, लेकिन उन्हें अभी भी अलग से गणना करना महत्वपूर्ण है।
Question 44. जब 1 मोल \( \text{H}_2\text{O (l)} \) को मानक परिस्थितियों में विरचित किया जाता है तब परिवेश में एन्ट्रॉपी परिवर्तन की गणना कीजिए।
Answer:
मानक परिस्थितियों में, \( \text{T} = 298 \text{ K} \)
\( \text{H}_2\text{O (l)} \) के मानक विरचन की एन्थैल्पी \( \Delta\text{H}^\circ_\text{f} (\text{H}_2\text{O, l}) = -286.0 \text{ kJ mol}^{-1} \)
यह मान दर्शाता है कि \( \text{H}_2\text{O} \) बनने की अभिक्रिया ऊष्माक्षेपी है, यानी ऊष्मा सिस्टम से बाहर निकलकर परिवेश में जाती है।
इसलिए, परिवेश द्वारा अवशोषित ऊष्मा \( \text{q}_\text{surr} = -\Delta\text{H}^\circ_\text{f} \)
\( \text{q}_\text{surr} = -(-286.0 \text{ kJ mol}^{-1}) = +286.0 \text{ kJ mol}^{-1} \)
परिवेश में एन्ट्रॉपी परिवर्तन \( \Delta\text{S}_\text{surr} = \frac{\text{q}_\text{surr}}{\text{T}} \)
\( \Delta\text{S}_\text{surr} = \frac{+286.0 \times 10^3 \text{ J mol}^{-1}}{298 \text{ K}} \)
\( \Delta\text{S}_\text{surr} = 959.73 \text{ J K}^{-1} \text{ mol}^{-1} \)
In simple words: पानी के बनने पर जो ऊर्जा निकलती है, वह परिवेश में चली जाती है। परिवेश में गई इस ऊर्जा को तापमान से भाग करके हम यह पता लगा सकते हैं कि परिवेश की अव्यवस्था कितनी बढ़ी है।
🎯 Exam Tip: परिवेश की एन्ट्रॉपी परिवर्तन (\( \Delta\text{S}_\text{surr} \)) की गणना करते समय, यह याद रखें कि \( \text{q}_\text{surr} \) हमेशा सिस्टम के एन्थैल्पी परिवर्तन (\( -\Delta\text{H} \)) के विपरीत होता है। तापमान को हमेशा केल्विन में व्यक्त करें।
Question 45. एक बम कैलोरीमीटर में \( \text{NH}_2\text{CN (s)} \) की अभिक्रिया डाइ ऑक्सीजन के साथ की गई एवं \( \Delta\text{U} \) का मान \( - 742.7 \text{ kJ mol}^{-1} \) पाया गया। निम्न अभिक्रिया के लिए \( 298\text{K} \) पर एन्थैल्पी परिवर्तन ज्ञात कीजिए। \( \text{NH}_2\text{CN(s)} + \frac{3}{2} \text{O}_2 \text{(g)} \rightarrow \text{N}_2 \text{(g)} + \text{CO}_2 \text{(g)} + \text{H}_2\text{O (l)} \)
Answer:
दिए गए मान:
\( \Delta\text{U} = -742.7 \text{ kJ mol}^{-1} \)
तापमान \( \text{T} = 298 \text{ K} \)
गैस स्थिरांक \( \text{R} = 8.314 \times 10^{-3} \text{ kJ K}^{-1} \text{ mol}^{-1} \)
अभिक्रिया में गैसीय मोलों में परिवर्तन \( \Delta\text{n}_\text{g} = (\text{उत्पाद गैसों के मोल}) - (\text{अभिकारक गैसों के मोल}) \)
उत्पाद गैसें: \( 1 \text{ मोल } \text{N}_2 \text{(g)} + 1 \text{ मोल } \text{CO}_2 \text{(g)} = 2 \text{ मोल} \)
अभिकारक गैसें: \( \frac{3}{2} \text{ मोल } \text{O}_2 \text{(g)} = 1.5 \text{ मोल} \)
\( \Delta\text{n}_\text{g} = 2 - 1.5 = 0.5 \text{ मोल} \)
एन्थैल्पी परिवर्तन (\( \Delta\text{H} \)) और आंतरिक ऊर्जा परिवर्तन (\( \Delta\text{U} \)) के बीच संबंध है:
\( \Delta\text{H} = \Delta\text{U} + \Delta\text{n}_\text{g}\text{RT} \)
\( \Delta\text{H} = -742.7 \text{ kJ mol}^{-1} + (0.5 \text{ mol} \times 8.314 \times 10^{-3} \text{ kJ K}^{-1} \text{ mol}^{-1} \times 298 \text{ K}) \)
\( \Delta\text{H} = -742.7 \text{ kJ mol}^{-1} + (1.2387 \text{ kJ mol}^{-1}) \)
\( \Delta\text{H} = -742.7 + 1.239 \text{ kJ mol}^{-1} \)
\( \Delta\text{H} = -741.461 \text{ kJ mol}^{-1} \)
\( \Delta\text{H} \approx -741.46 \text{ kJ mol}^{-1} \)
In simple words: हमने एक रासायनिक अभिक्रिया के लिए एन्थैल्पी परिवर्तन का पता लगाया। यह आंतरिक ऊर्जा परिवर्तन, गैसीय मोलों के बदलाव, तापमान और गैस स्थिरांक का उपयोग करके किया गया। यह सूत्र हमें बताता है कि स्थिर आयतन और स्थिर दाब पर ऊर्जा परिवर्तन कैसे संबंधित हैं।
🎯 Exam Tip: \( \Delta\text{H} \) और \( \Delta\text{U} \) के संबंध \( \Delta\text{H} = \Delta\text{U} + \Delta\text{n}_\text{g}\text{RT} \) को याद रखें। \( \Delta\text{n}_\text{g} \) की गणना करते समय, केवल गैसीय उत्पादों और अभिकारकों के मोलों को ही शामिल करें। इकाइयों का सही रूपांतरण (विशेषकर जूल से किलोजूल में) महत्वपूर्ण है।
Question 47. 10°C पर 1 मोल जल की बर्फ – 10°C पर जमाने पर एन्थैल्पी परिवर्तन की गणना कीजिए।
Answer:
इस प्रक्रिया में एन्थैल्पी परिवर्तन की गणना करने के लिए, हमें तीन चरणों में एन्थैल्पी परिवर्तनों को जोड़ना होगा:
1. 1 मोल बर्फ को \( -10^\circ\text{C} \) से \( 0^\circ\text{C} \) तक गर्म करना।
2. 1 मोल बर्फ को \( 0^\circ\text{C} \) पर पिघलाना।
3. 1 मोल जल को \( 0^\circ\text{C} \) से \( -10^\circ\text{C} \) तक ठंडा करना।
बर्फ के लिए मोलर ऊष्मा धारिता \( \text{C}_\text{p} (\text{बर्फ}) = 36.8 \text{ J mol}^{-1}\text{K}^{-1} \)
पानी के लिए मोलर ऊष्मा धारिता \( \text{C}_\text{p} (\text{जल}) = 75.3 \text{ J mol}^{-1}\text{K}^{-1} \)
बर्फ के गलने की एन्थैल्पी \( \Delta\text{H}_\text{fus} = 6.03 \text{ kJ mol}^{-1} = 6030 \text{ J mol}^{-1} \) (\( 0^\circ\text{C} \) पर)
हम \( -10^\circ\text{C} \) पर जल के जमने की एन्थैल्पी \( \Delta\text{H}_\text{freezing} \) ज्ञात करना चाहते हैं।
किरचॉफ समीकरण का उपयोग करके, हम \( \Delta\text{H}_\text{freezing} \) को विभिन्न तापमानों पर निकाल सकते हैं:
\( \Delta\text{H}_\text{freezing} (\text{T}_2) - \Delta\text{H}_\text{freezing} (\text{T}_1) = \Delta\text{C}_\text{p} (\text{T}_2 - \text{T}_1) \)
यहाँ, \( \Delta\text{H}_\text{freezing} (\text{T}_1) = -\Delta\text{H}_\text{fus} = -6030 \text{ J mol}^{-1} \) (\( \text{T}_1 = 0^\circ\text{C} = 273.15 \text{ K} \) पर)
हमें \( \Delta\text{H}_\text{freezing} (\text{T}_2) \) चाहिए, जहाँ \( \text{T}_2 = -10^\circ\text{C} = 263.15 \text{ K} \)
और \( \Delta\text{C}_\text{p} = \text{C}_\text{p} (\text{बर्फ}) - \text{C}_\text{p} (\text{जल}) = 36.8 - 75.3 = -38.5 \text{ J mol}^{-1}\text{K}^{-1} \)
\( \Delta\text{H}_\text{freezing} (263.15\text{ K}) - (-6030 \text{ J mol}^{-1}) = (-38.5 \text{ J mol}^{-1}\text{K}^{-1}) \times (263.15 - 273.15 \text{ K}) \)
\( \Delta\text{H}_\text{freezing} (263.15\text{ K}) + 6030 \text{ J mol}^{-1} = (-38.5) \times (-10) \text{ J mol}^{-1} \)
\( \Delta\text{H}_\text{freezing} (263.15\text{ K}) + 6030 \text{ J mol}^{-1} = 385 \text{ J mol}^{-1} \)
\( \Delta\text{H}_\text{freezing} (263.15\text{ K}) = 385 - 6030 \text{ J mol}^{-1} \)
\( \Delta\text{H}_\text{freezing} (263.15\text{ K}) = -5645 \text{ J mol}^{-1} \)
\( \Delta\text{H}_\text{freezing} (263.15\text{ K}) = -5.645 \text{ kJ mol}^{-1} \)
In simple words: हमने बर्फ के बनने की एन्थैल्पी को अलग-अलग तापमानों पर गिना। जब पानी बर्फ बनता है, तो ऊर्जा बाहर निकलती है। किरचॉफ समीकरण का उपयोग करके, हम यह पता लगा सकते हैं कि तापमान बदलने पर इस ऊर्जा में कितना बदलाव आता है।
🎯 Exam Tip: किरचॉफ समीकरण का उपयोग करते समय, एन्थैल्पी परिवर्तन को एक तापमान से दूसरे तापमान पर सही ढंग से समायोजित करने के लिए \( \Delta\text{C}_\text{p} \) और तापमान अंतर का ध्यान रखें। पिघलने और जमने की एन्थैल्पी का चिन्ह विपरीत होता है।
Question 48. \( \text{CO (g), CO}_2 \text{ (g), N}_2\text{O (g)} \) एवं \( \text{N}_2\text{O}_4 \text{ (g)} \) की विरचन एन्थैल्पी क्रमशः \( -110, -393, 81 \) तथा \( 9.8 \text{ kJ mol}^{-1} \) है। अभिक्रिया - \( \text{N}_2\text{O}_4 \text{ (g)} + 3 \text{ CO (g)} \rightarrow \text{N}_2\text{O (g)} +3 \text{ CO}_2 \text{ (g)} \) के लिए \( \Delta\text{H} \) का मान ज्ञात कीजिये।
Answer:
किसी अभिक्रिया के लिए मानक एन्थैल्पी परिवर्तन (\( \Delta\text{H}^\circ \)) की गणना उत्पादों और अभिकारकों की मानक विरचन एन्थैल्पी का उपयोग करके की जा सकती है:
\( \Delta\text{H}^\circ = \sum \Delta\text{H}^\circ_\text{f} (\text{उत्पाद}) - \sum \Delta\text{H}^\circ_\text{f} (\text{अभिकारक}) \)
दी गई अभिक्रिया है: \( \text{N}_2\text{O}_4 \text{ (g)} + 3 \text{ CO (g)} \rightarrow \text{N}_2\text{O (g)} + 3 \text{ CO}_2 \text{ (g)} \)
उत्पाद: \( 1 \text{ मोल } \text{N}_2\text{O (g)} + 3 \text{ मोल } \text{CO}_2 \text{ (g)} \)
अभिकारक: \( 1 \text{ मोल } \text{N}_2\text{O}_4 \text{ (g)} + 3 \text{ मोल } \text{CO (g)} \)
दिए गए विरचन एन्थैल्पी के मान हैं:
\( \Delta\text{H}^\circ_\text{f} (\text{CO (g)}) = -110 \text{ kJ mol}^{-1} \)
\( \Delta\text{H}^\circ_\text{f} (\text{CO}_2 \text{ (g)}) = -393 \text{ kJ mol}^{-1} \)
\( \Delta\text{H}^\circ_\text{f} (\text{N}_2\text{O (g)}) = 81 \text{ kJ mol}^{-1} \)
\( \Delta\text{H}^\circ_\text{f} (\text{N}_2\text{O}_4 \text{ (g)}) = 9.8 \text{ kJ mol}^{-1} \)
\( \Delta\text{H}^\circ = [1 \times \Delta\text{H}^\circ_\text{f} (\text{N}_2\text{O}) + 3 \times \Delta\text{H}^\circ_\text{f} (\text{CO}_2)] - [1 \times \Delta\text{H}^\circ_\text{f} (\text{N}_2\text{O}_4) + 3 \times \Delta\text{H}^\circ_\text{f} (\text{CO})] \)
\( \Delta\text{H}^\circ = [1 \times 81 + 3 \times (-393)] - [1 \times 9.8 + 3 \times (-110)] \)
\( \Delta\text{H}^\circ = [81 - 1179] - [9.8 - 330] \)
\( \Delta\text{H}^\circ = [-1098] - [-320.2] \)
\( \Delta\text{H}^\circ = -1098 + 320.2 \)
\( \Delta\text{H}^\circ = -777.8 \text{ kJ mol}^{-1} \)
In simple words: किसी रासायनिक अभिक्रिया में कुल ऊर्जा परिवर्तन को निकालने के लिए, हम उत्पादों को बनाने में लगी ऊर्जा में से अभिकारकों को बनाने में लगी ऊर्जा को घटाते हैं। इससे हमें पता चलता है कि अभिक्रिया कितनी ऊष्मा बाहर निकालती है या अवशोषित करती है।
🎯 Exam Tip: अभिक्रिया की मानक एन्थैल्पी परिवर्तन (\( \Delta\text{H}^\circ \)) की गणना करते समय, स्टोइकियोमेट्रिक गुणांकों को विरचन एन्थैल्पी के मानों से गुणा करना न भूलें। उत्पादों की कुल एन्थैल्पी में से अभिकारकों की कुल एन्थैल्पी घटाएं।
Question 49. अभिक्रिया \( 2\text{A (g)} + \text{B (g)} \rightarrow 2\text{D (g)} \) के लिए \( \Delta\text{U}^\circ = -10.5 \text{ kJ} \), \( \Delta\text{S}^\circ = 44.1 \text{ JK}^{-1} \) अभिक्रिया के लिए \( \Delta\text{G}^\circ \) की गणना कीजिये। क्या यह अभिक्रिया स्वतः प्रवर्तित होगी?
Answer:
दिए गए मान:
मानक आंतरिक ऊर्जा परिवर्तन \( \Delta\text{U}^\circ = -10.5 \text{ kJ} \)
मानक एन्ट्रॉपी परिवर्तन \( \Delta\text{S}^\circ = 44.1 \text{ JK}^{-1} = 0.0441 \text{ kJ K}^{-1} \)
तापमान \( \text{T} = 298 \text{ K} \) (मानक परिस्थितियाँ)
गैस स्थिरांक \( \text{R} = 8.314 \times 10^{-3} \text{ kJ K}^{-1} \text{ mol}^{-1} \)
सबसे पहले, हम मानक एन्थैल्पी परिवर्तन (\( \Delta\text{H}^\circ \)) की गणना करेंगे:
अभिक्रिया में गैसीय मोलों में परिवर्तन \( \Delta\text{n}_\text{g} = (\text{उत्पाद गैसों के मोल}) - (\text{अभिकारक गैसों के मोल}) \)
उत्पाद गैसें: \( 2 \text{ मोल } \text{D (g)} \)
अभिकारक गैसें: \( 2 \text{ मोल } \text{A (g)} + 1 \text{ मोल } \text{B (g)} = 3 \text{ मोल} \)
\( \Delta\text{n}_\text{g} = 2 - 3 = -1 \text{ मोल} \)
एन्थैल्पी और आंतरिक ऊर्जा के बीच संबंध है:
\( \Delta\text{H}^\circ = \Delta\text{U}^\circ + \Delta\text{n}_\text{g}\text{RT} \)
\( \Delta\text{H}^\circ = -10.5 \text{ kJ} + (-1 \text{ mol} \times 8.314 \times 10^{-3} \text{ kJ K}^{-1} \text{ mol}^{-1} \times 298 \text{ K}) \)
\( \Delta\text{H}^\circ = -10.5 \text{ kJ} - 2.476 \text{ kJ} \)
\( \Delta\text{H}^\circ = -12.976 \text{ kJ} \)
अब, हम गिब्स-हेल्महोल्ट्ज समीकरण का उपयोग करके \( \Delta\text{G}^\circ \) की गणना करेंगे:
\( \Delta\text{G}^\circ = \Delta\text{H}^\circ - \text{T}\Delta\text{S}^\circ \)
\( \Delta\text{G}^\circ = -12.976 \text{ kJ} - (298 \text{ K} \times 0.0441 \text{ kJ K}^{-1}) \)
\( \Delta\text{G}^\circ = -12.976 \text{ kJ} - 13.166 \text{ kJ} \)
\( \Delta\text{G}^\circ = -26.142 \text{ kJ} \)
चूँकि \( \Delta\text{G}^\circ \) ऋणात्मक है (\( -26.142 \text{ kJ} < 0 \)), अतः अभिक्रिया स्वतः प्रवर्तित होगी।
In simple words: हमने एक रासायनिक अभिक्रिया के लिए गिब्स मुक्त ऊर्जा परिवर्तन का पता लगाया। सबसे पहले, हमने आंतरिक ऊर्जा परिवर्तन और गैसीय मोलों के बदलाव का उपयोग करके एन्थैल्पी परिवर्तन निकाला। फिर, एन्थैल्पी और एन्ट्रॉपी का उपयोग करके गिब्स मुक्त ऊर्जा निकाली। गिब्स मुक्त ऊर्जा का ऋणात्मक मान दर्शाता है कि अभिक्रिया अपने आप हो सकती है।
🎯 Exam Tip: गिब्स मुक्त ऊर्जा (\( \Delta\text{G}^\circ \)) की गणना में सभी चरणों को सही ढंग से करें: पहले \( \Delta\text{n}_\text{g} \) निकालें, फिर \( \Delta\text{H}^\circ \), और अंत में \( \Delta\text{G}^\circ \)। याद रखें कि \( \Delta\text{G}^\circ < 0 \) होने पर अभिक्रिया स्वतः प्रवर्तित होती है। सभी इकाइयों को सुसंगत (जैसे जूल या किलोजूल) रखें।
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