RBSE Solutions Class 11 Chemistry Chapter 5 द्रव्य की अवस्थाएँ गैस एवं द्रव

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Detailed Chapter 5 द्रव्य की अवस्थाएँ गैस एवं द्रव RBSE Solutions for Class 11 Chemistry

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Class 11 Chemistry Chapter 5 द्रव्य की अवस्थाएँ गैस एवं द्रव RBSE Solutions PDF

Class 11 Chemistry Chapter 5 पाठ्यपुस्तक के अभ्यास प्रश्न

RBSE Class 11 Chemistry Chapter 5 वस्तुनिष्ठ प्रश्न

 

Question 1. आदर्श गैस समीकरण में R की विमा है –
(a) mole atom \( K^{-1} \)
(b) lit mole
(c) erg \( K^{-1} \)
(d) lit atm \( K^{-1} \text{mole}^{-1} \)
Answer: (d) lit atm \( K^{-1} \text{mole}^{-1} \)
In simple words: The gas constant R has specific units that show how it relates pressure, volume, temperature, and the amount of gas. Its dimensions match the units for (liters × atmospheres) divided by (Kelvin × moles).

🎯 Exam Tip: Remember the ideal gas law \( PV=nRT \) to quickly recall the units of R, which are derived from \( R = \frac{PV}{nT} \).

 

Question 2. वह ताप व दाब जिस पर बर्फ, जल और जलवाष्प एक साथ अस्तित्व में होते हैं –
(a) 0°C, 1 atm
(b) 0°C, 4.7 mm
Answer: (b) 0°C, 4.7 mm
In simple words: There is a special point where water can be a solid (ice), a liquid (water), and a gas (water vapor) all at the same time. This unique condition is known as the triple point of water.

🎯 Exam Tip: Distinguish between the freezing point of water at 1 atm and its triple point, which occurs at a very specific lower pressure.

 

Question 4. यदि एक आदर्श गैस के दो मोल 546 K ताप पर हैं, उनका आयतन 44.8 लीटर है, तो उनका दाब होगा -
(a) 2 atm
(b) 1 atm
(c) 4 atm
(d) 3 atm
Answer: (a) 2 atm
In simple words: Using the ideal gas law, we can calculate the pressure of the gas. With 2 moles of gas at 546 Kelvin and a volume of 44.8 liters, the pressure comes out to be 2 atmospheres.

🎯 Exam Tip: Always use the correct units for each variable (P, V, n, R, T) in the ideal gas equation to ensure accurate results.

 

Question 5. यदि एक आदर्श गैस का परम ताप दुगुना और दाब आधा हो जाता है तो गैस का आयतन हो जायेगा -
(a) दुगुना
(b) चार गुना
(c) चौथाई
(d) अपरिवर्तित
Answer: (b) चार गुना
In simple words: If the temperature of an ideal gas doubles and its pressure halves, the volume will increase four times. This is because volume is directly proportional to temperature and inversely proportional to pressure.

🎯 Exam Tip: Recall the combined gas law (\( \frac{P_1V_1}{T_1} = \frac{P_2V_2}{T_2} \)) to quickly solve problems involving changes in pressure, volume, and temperature for gases.

RBSE Class 11 Chemistry Chapter 5 अतिलघूत्तरात्मक प्रश्न

 

Question 6. क्वथनांक एवं वाष्पीकरण प्रक्रिया में क्या अंन्तर है?
Answer: क्वथनांक वह खास तापमान है जब किसी तरल का वाष्प दाब बाहरी दबाव (जैसे वायुमंडलीय दबाव) के बराबर हो जाता है, जिससे तरल तेजी से उबलता है। वहीं, वाष्पीकरण एक धीमी प्रक्रिया है जो किसी भी तापमान पर अपने आप होती रहती है, जहाँ तरल सतह से अणु धीरे-धीरे गैस में बदलते हैं। क्वथनांक में पूरे तरल में बुलबुले बनते हैं, जबकि वाष्पीकरण केवल तरल की सतह पर होता है।
In simple words: Boiling point is a specific temperature where a liquid changes to gas quickly, matching outside pressure. Evaporation is a slow change from liquid to gas at any temperature, only from the surface.

🎯 Exam Tip: Highlight that boiling is a bulk phenomenon (occurs throughout the liquid) at a fixed temperature, while evaporation is a surface phenomenon at any temperature.

 

Question 8. किसी गैस के लिए वाण्डर वाल स्थिरांक 'a' का शून्य मान क्या दर्शाता है?
Answer: यदि किसी गैस के लिए वाण्डरवाल स्थिरांक 'a' का मान शून्य होता है, तो इसका मतलब है कि गैस के अणुओं के बीच कोई आकर्षण बल नहीं है। इस स्थिति में वह गैस द्रव अवस्था में नहीं बदल पाएगी। यह मान आदर्श गैस व्यवहार की स्थिति को दर्शाता है।
In simple words: A zero 'a' value for a gas means there is no pull between its molecules. This gas cannot turn into a liquid.

🎯 Exam Tip: Emphasize that 'a' accounts for intermolecular attraction, so a zero value implies ideal gas behavior with no attraction, making liquefaction impossible.

 

Question 9. ताप का कैल्विन पैमाना, सेल्सियस पैमाने की अपेक्षा अधिक बेहतर क्यों होता है?
Answer: कैल्विन पैमाने में तापमान की कोई ऋणात्मक वैल्यू नहीं होती है, जबकि सेल्सियस पैमाने में ऋणात्मक मान होते हैं। कई गणनाओं और आदर्श गैस नियमों के लिए परम तापमान (absolute temperature) का उपयोग किया जाता है, जो केवल कैल्विन में ही होता है। कैल्विन पैमाना वैज्ञानिक गणनाओं में अधिक सुविधा और सटीकता प्रदान करता है।
In simple words: The Kelvin scale is better because it has no negative temperatures, making it good for gas laws and science math. Absolute zero on the Kelvin scale means no molecular motion.

🎯 Exam Tip: Point out that the Kelvin scale is an absolute temperature scale, meaning 0 K represents the lowest possible energy state, which is crucial for physical and chemical calculations.

 

Question 10. पहाड़ी स्टेशन पर सब्जियाँ कठिनाई से से क्यों पकती है।
Answer: पहाड़ी स्थानों पर वायुमंडलीय दाब कम होता है। इस कम दबाव के कारण, पानी कम तापमान पर ही उबलना शुरू कर देता है। जब पानी कम तापमान पर उबलता है, तो सब्जियाँ ठीक से पकने के लिए पर्याप्त गर्मी नहीं मिल पातीं, इसलिए उन्हें पकने में अधिक समय लगता है।
In simple words: On hills, the air pressure is low. So, water boils at a lower heat. This means vegetables take longer to cook because they don't get enough hot water.

🎯 Exam Tip: Explain that lower atmospheric pressure reduces the boiling point, which means food cooks slower as the maximum temperature reached is lower than at sea level.

 

Question 11. किसी गैस को परम शून्य ताप पर ठण्डा क्यों नहीं किया जा सकता है?
Answer: किसी भी गैस को परम शून्य तापमान पर ठंडा करना संभव नहीं है क्योंकि इस तापमान तक पहुँचने से पहले ही गैस द्रव अवस्था में बदल जाती है। अणुओं की गतिज ऊर्जा कम होने पर वे एक दूसरे के करीब आकर तरल में बदल जाते हैं। यह आदर्श गैसों की सीमा को दर्शाता है।
In simple words: You cannot cool a gas to absolute zero because it turns into a liquid before reaching that temperature. Gas particles become liquid when they lose enough energy and get close.

🎯 Exam Tip: Mention that absolute zero is a theoretical limit, and real gases liquefy and solidify before reaching it due to intermolecular forces.

 

Question 12. दाब का SI मात्रक क्या है?
Answer: दाब का SI मात्रक पास्कल (Pa) होता है। इसे न्यूटन प्रति वर्ग मीटर \( (\text{Nm}^{-2}) \) के रूप में भी लिखा जा सकता है। यह एक मूल इकाई है जो बल को क्षेत्रफल से संबंधित करती है।
In simple words: The SI unit for pressure is Pascal (Pa). It is also written as Newton per square meter \( (\text{Nm}^{-2}) \).

🎯 Exam Tip: Always state both the name (Pascal) and its equivalent fundamental units \( (\text{N/m}^2) \) when asked for SI units to ensure full marks.

 

Question 13. किसी गैस के लिए संपीड्यता गुणांक Z का मान एक से कम क्यों होता है?
Answer: किसी गैस के लिए संपीड्यता गुणांक (Z) का मान एक से कम तब होता है जब गैस के अणुओं के बीच आकर्षण बल प्रभावी होता है। यह बल अणुओं को एक-दूसरे के करीब खींचता है, जिससे गैस का आयतन आदर्श गैस की तुलना में कम हो जाता है। कम तापमान और मध्यम दाब पर यह स्थिति अक्सर देखी जाती है।
In simple words: Gas compressibility factor Z is less than one because the gas molecules pull each other closer. This makes the gas take up less space than an ideal gas would.

🎯 Exam Tip: Remember that Z < 1 indicates attractive forces dominate, while Z > 1 indicates repulsive forces dominate, and Z = 1 for ideal gases.

 

Question 15. जल एवं ग्लिसरीन में से किसकी श्यानता अधिक है। और क्यों?
Answer: ग्लिसरीन की श्यानता जल से अधिक होती है। ऐसा इसलिए है क्योंकि ग्लिसरीन में जल की तुलना में अधिक प्रबल हाइड्रोजन बंध होते हैं। ये मजबूत हाइड्रोजन बंध ग्लिसरीन के अणुओं को एक-दूसरे के करीब रखते हैं और उनके प्रवाह का अधिक प्रतिरोध करते हैं, जिससे यह गाढ़ा हो जाता है।
In simple words: Glycerine is thicker than water. This is because glycerine has stronger hydrogen bonds between its molecules. These bonds make it harder for glycerine to flow.

🎯 Exam Tip: Relate viscosity directly to intermolecular forces; stronger forces lead to higher viscosity as molecules resist flowing past each other.

 

Question 16. सामान्य ताप व दाब की स्थिति में आदर्श गैस का मोलर आयतन क्या होता है?
Answer: सामान्य ताप और दाब (STP) पर, एक आदर्श गैस का मोलर आयतन 22.4 \( \text{dm}^3 \) (या 22.4 लीटर) होता है। इसका मतलब है कि किसी भी आदर्श गैस के एक मोल द्वारा इस मानक स्थिति में 22.4 लीटर का आयतन घेरा जाता है। यह मान सभी आदर्श गैसों के लिए समान रहता है।
In simple words: At normal temperature and pressure, one mole of any ideal gas takes up 22.4 \( \text{dm}^3 \) of space. This is true for all ideal gases.

🎯 Exam Tip: Memorize the molar volume at STP (\( 22.4 \text{ L} \) or \( 22.4 \text{ dm}^3 \)) as it's a fundamental constant used in many gas law calculations.

 

Question 17. यदि स्थिर ताप पर वायुमण्डलीय दाब 20 सेमी गैस 50 सेमी³ तक फैलती है तब उसका अन्तिम दाब क्या होगा?
Answer: हम बॉयल के नियम का उपयोग करेंगे जो कहता है कि स्थिर तापमान पर, गैस का दाब उसके आयतन के व्युत्क्रमानुपाती होता है \( (P_1V_1 = P_2V_2) \).
यहाँ, प्रारंभिक दाब \( P_1 = 1 \text{ atm} \)
प्रारंभिक आयतन \( V_1 = 20 \text{ cm}^3 \)
अंतिम आयतन \( V_2 = 50 \text{ cm}^3 \)
हमें अंतिम दाब \( P_2 \) ज्ञात करना है।
\( P_1V_1 = P_2V_2 \)
\( 1 \text{ atm} \times 20 \text{ cm}^3 = P_2 \times 50 \text{ cm}^3 \)
\( P_2 = \frac{1 \text{ atm} \times 20 \text{ cm}^3}{50 \text{ cm}^3} \)
\( P_2 = 0.4 \text{ atm} \)
इसलिए, गैस का अंतिम दाब 0.4 atm होगा। बॉयल का नियम हमें बताता है कि जैसे-जैसे आयतन बढ़ता है, दाब घटता जाता है।
In simple words: Using Boyle's Law, when a gas expands from \( 20 \text{ cm}^3 \) to \( 50 \text{ cm}^3 \) at constant temperature, its pressure will drop from 1 atm to 0.4 atm.

🎯 Exam Tip: Clearly state Boyle's Law and show all steps for calculations, ensuring units are consistent throughout the problem.

 

Question 18. NH3 एवं HCI गैसों का मिश्रण डाल्टन के आंशिक दाब के नियम का पालन नहीं करता, क्यों?
Answer: NH3 (अमोनिया) और HCl (हाइड्रोक्लोरिक अम्ल) गैसों का मिश्रण डाल्टन के आंशिक दाब के नियम का पालन नहीं करता है। ऐसा इसलिए होता है क्योंकि ये दोनों गैसें आपस में अभिक्रिया करके अमोनियम क्लोराइड \( (\text{NH}_4\text{Cl}) \) नामक एक ठोस पदार्थ बनाती हैं। डाल्टन का नियम केवल उन गैसों पर लागू होता है जो एक-दूसरे के साथ रासायनिक अभिक्रिया नहीं करती हैं।
\( \text{NH}_3 + \text{HCl} \rightarrow \text{NH}_4\text{Cl} \)
In simple words: NH3 and HCl gases mix and react to form a solid. Because they react, they don't follow Dalton's law, which is only for gases that don't mix chemically.

🎯 Exam Tip: Remember that Dalton's Law of Partial Pressures assumes non-reacting gases; any chemical interaction invalidates its application.

 

Question 19. किन दो परिस्थितियों में आदर्श व्यवहार से वास्तविक गैसें अधिकतम विचलन दर्शाती हैं?
Answer: वास्तविक गैसें निम्न ताप और उच्च दाब पर आदर्श व्यवहार से अधिकतम विचलन दर्शाती हैं। इन परिस्थितियों में, गैस के अणु एक-दूसरे के बहुत करीब आ जाते हैं, जिससे उनके बीच का आकर्षण बल और स्वयं अणुओं का आयतन महत्वपूर्ण हो जाता है, जबकि आदर्श गैस नियम इन्हें नगण्य मानता है।
In simple words: Real gases act least like ideal gases when the temperature is very low and the pressure is very high. This is when gas particles are close and their own size and attraction matter most.

🎯 Exam Tip: Clearly state that intermolecular forces and the finite volume of gas molecules cause deviations from ideal behavior, especially under extreme conditions of low temperature and high pressure.

RBSE Class 11 Chemistry Chapter 5 लघूत्तरात्मक प्रश्न

 

Question 21. द्रव की बूंदें गोल आकार ग्रहण कर लेती हैं, क्यों?
Answer: द्रव की बूंदें पृष्ठ तनाव के कारण गोल आकार ग्रहण कर लेती हैं। पृष्ठ तनाव के गुण के कारण द्रव हमेशा न्यूनतम सतह क्षेत्रफल प्राप्त करना चाहता है। किसी दिए गए आयतन के लिए, गोलाकार आकृति का सतह क्षेत्रफल सबसे कम होता है। इसी कारण से, द्रव की बूंदें निम्नतम ऊर्जा स्तर पर गोलाकार होकर स्थिरता प्राप्त करती हैं।
In simple words: Liquid drops become round because of surface tension. Surface tension makes the liquid try to have the smallest possible surface area, and a sphere has the smallest surface area for its size.

🎯 Exam Tip: Focus on surface tension as the key concept, explaining that liquids tend to minimize their surface energy, which is achieved by forming a sphere.

 

Question 22. पृष्ठ तनाव पर ताप का क्या प्रभाव पड़ता है?
Answer: जब हम द्रव का तापमान बढ़ाते हैं, तो उसका पृष्ठ तनाव कम हो जाता है। ऐसा इसलिए होता है क्योंकि तापमान बढ़ने से अणुओं की गतिज ऊर्जा बढ़ जाती है। अणुओं की बढ़ी हुई गतिज ऊर्जा उनके बीच के आकर्षण बलों को कम प्रभावी बनाती है, जिससे सतह पर अणुओं को अंदर की ओर खींचने वाला बल कमजोर हो जाता है।
In simple words: When a liquid gets hotter, its surface tension goes down. The molecules move faster, so they pull on each other less strongly at the surface.

🎯 Exam Tip: Explain the inverse relationship: higher temperature leads to increased kinetic energy, weakening intermolecular forces and thus reducing surface tension.

 

Question 23. दव का क्वथनांक दाब बढ़ाने से परिवर्तित होता है, क्यों?
Answer: किसी द्रव का क्वथनांक वह तापमान होता है जब उसका वाष्प दाब बाहरी दाब के बराबर हो जाता है। जब बाहरी दाब बढ़ाया जाता है, तो द्रव को उबलने के लिए अपने वाष्प दाब को उस नए, उच्च बाहरी दाब के बराबर करने के लिए अधिक ऊर्जा की आवश्यकता होती है। इसका मतलब है कि द्रव को अधिक गर्म करना पड़ता है, जिससे उसका क्वथनांक बढ़ जाता है।
In simple words: A liquid's boiling point changes with pressure. If you raise the outside pressure, the liquid needs more heat to make its own vapor pressure match. So, it boils at a higher temperature.

🎯 Exam Tip: Clearly state that boiling occurs when vapor pressure equals external pressure; increasing external pressure requires more energy (higher temperature) to reach that equilibrium.

 

Question 24. ऐथेनॉल की श्यानता ईथर से अधिक क्यों है?
Answer: ऐथेनॉल की श्यानता ईथर से अधिक होती है क्योंकि ऐथेनॉल के अणुओं के बीच हाइड्रोजन बंध मौजूद होते हैं। हाइड्रोजन बंध प्रबल अंतर-अणुक बल होते हैं जो अणुओं को एक-दूसरे के करीब रखते हैं और उनके प्रवाह का प्रतिरोध करते हैं। वहीं, ईथर के अणुओं के बीच केवल वाण्डरवाल बल होते हैं, जो हाइड्रोजन बंधों की तुलना में काफी कमजोर होते हैं।
In simple words: Ethanol is thicker than ether because ethanol molecules have strong hydrogen bonds. These bonds hold molecules together more tightly, making it harder for the liquid to flow. Ether only has weaker Van der Waals forces.

🎯 Exam Tip: Compare the intermolecular forces: hydrogen bonding in ethanol is much stronger than the weaker Van der Waals forces in ether, directly causing higher viscosity.

 

Question 26. CO2 एवं CH4 गैसों के क्रान्तिक ताप क्रमशः 31.1°C तथा – 81.9°C हैं। दोनों में से किसमें प्रबल अन्तराण्विक बल है एवं क्यों?
Answer: CO2 (कार्बन डाइऑक्साइड) गैस में CH4 (मेथेन) की तुलना में प्रबल अंतराअणुक बल होते हैं। ऐसा इसलिए है क्योंकि गैस का क्रांतिक ताप जितना अधिक होता है, उसे द्रवीकृत करना उतना ही आसान होता है, जो मजबूत अंतराअणुक आकर्षण बलों को दर्शाता है। CO2 का क्रांतिक ताप \( (31.1^\circ\text{C}) \) CH4 के क्रांतिक ताप \( (-81.9^\circ\text{C}) \) से काफी अधिक है। यद्यपि CO2 और CH4 दोनों अध्रुवीय अणु हैं, CO2 का मोलर द्रव्यमान CH4 से अधिक होता है, जिससे उसके अणुओं के बीच अधिक मजबूत लंदन डिस्पर्शन बल लगते हैं।
In simple words: CO2 has stronger pulls between its molecules than CH4. This is because CO2's critical temperature is much higher, meaning it's easier to turn into a liquid. Heavier molecules like CO2 also have stronger temporary attractions.

🎯 Exam Tip: Connect higher critical temperature directly to stronger intermolecular forces and easier liquefaction; also consider molar mass for comparing London dispersion forces in nonpolar molecules.

 

Question 27. गैसों के क्रान्तिक ताप किसे कहते हैं?
Answer: गैसों का क्रांतिक ताप वह अधिकतम तापमान होता है जिसके ऊपर किसी गैस को कितना भी दबाव लगाकर द्रव अवस्था में परिवर्तित नहीं किया जा सकता। क्रांतिक ताप पर या उससे नीचे ही गैस को द्रवीकृत करना संभव होता है। यह तापमान प्रत्येक गैस के लिए एक अद्वितीय विशेषता है।
In simple words: Critical temperature is the highest temperature at which a gas can be turned into a liquid, no matter how much pressure is applied. Above this temperature, it will always be a gas.

🎯 Exam Tip: Define critical temperature as the temperature above which a gas cannot be liquefied, regardless of pressure, highlighting its role in liquefaction processes.

 

Question 28. बॉयल के नियम को परिभाषित कीजिए।
Answer: बॉयल का नियम कहता है कि स्थिर तापमान पर किसी गैस की निश्चित मात्रा (मोलों की संख्या) का दाब उसके आयतन के व्युत्क्रमानुपाती होता है। इसका मतलब है कि अगर आप दाब बढ़ाते हैं, तो आयतन घट जाएगा और इसके विपरीत।
गणितीय रूप से इसे इस प्रकार व्यक्त किया जाता है:
\( P \propto \frac{1}{V} \)
या \( P = k_1 \frac{1}{V} \)
\( [PV = k_1] \)
यहाँ \( k_1 \) एक समानुपातिक स्थिरांक है। अर्थात, स्थिर तापमान पर गैस की निश्चित मात्रा के लिए दाब और आयतन का गुणनफल हमेशा स्थिर रहता है। यदि किसी गैस को स्थिर तापमान T पर \( P_1 \) दाब और \( V_1 \) आयतन से \( P_2 \) दाब और \( V_2 \) आयतन तक प्रसारित किया जाता है, तो बॉयल के नियमानुसार:
\( P_1V_1 = P_2V_2 \)
\( \implies \frac{P_1}{P_2} = \frac{V_2}{V_1} \)
यह नियम गैस के व्यवहार की एक महत्वपूर्ण विशेषता है।
In simple words: Boyle's Law says that if a gas's temperature stays the same, its pressure and volume are opposites. If pressure goes up, volume goes down, and vice versa.

🎯 Exam Tip: Clearly state the two conditions (constant temperature, fixed amount of gas) under which Boyle's Law applies and provide its mathematical expression, \( PV = \text{constant} \).

 

Question 30. HCI जैसे ध्रुवीय अणुओं के मध्य कौनसा बल लगता है?
Answer: HCl जैसे ध्रुवीय अणुओं के मध्य द्विध्रुव-द्विध्रुव आकर्षण बल लगता है। यह एक प्रकार का वाण्डरवाल बल ही होता है। ध्रुवीय अणु वे अणु होते हैं जिनमें स्थायी द्विध्रुव होता है, यानी एक अणु का आंशिक धनावेशित सिरा दूसरे अणु के आंशिक ऋणावेशित सिरे को अपनी ओर खींचता है, जिसे द्विध्रुव-द्विध्रुव आकर्षण कहते हैं। यह अणुओं को एक साथ रखने में मदद करता है।
In simple words: Between polar molecules like HCl, there is a dipole-dipole attraction force. This is a type of Van der Waals force where the positive end of one molecule pulls on the negative end of another.

🎯 Exam Tip: Define dipole-dipole attraction as an intermolecular force between polar molecules, distinct from weaker London dispersion forces in nonpolar molecules.

 

Question 31. आदर्श गैस नियम एवं समीकरण लिखिए।
Answer:
आदर्श गैस (Ideal Gas):
एक आदर्श गैस एक काल्पनिक गैस है जो सभी गैस नियमों (बॉयल का नियम, चार्ल्स का नियम और आवोगाद्रो नियम) का पूरी तरह से पालन करती है। यह मानती है कि अणुओं के बीच कोई अंतरा-अणुक बल नहीं होता है और अणुओं का आयतन गैस के कुल आयतन की तुलना में नगण्य होता है। वास्तविक गैसें केवल विशेष परिस्थितियों में आदर्श गैस नियमों का पालन करती हैं जब अणुओं के बीच अंतःक्रिया नगण्य होती है।

आदर्श गैस समीकरण (Ideal Gas Equation):
आदर्श गैस समीकरण इन सभी गैस नियमों को मिलाकर बनाया गया है।
बॉयल के नियम से \( V \propto \frac{1}{P} \)
चार्ल्स के नियम से \( V \propto T \)
आवोगाद्रो के नियम से \( V \propto n \)
इन सभी को मिलाने पर:
\( V \propto \frac{nT}{P} \)
\( \implies V = R \frac{nT}{P} \)
\( \implies PV = nRT \)
यहाँ, \( P \) दाब है, \( V \) आयतन है, \( n \) मोलों की संख्या है, \( T \) परम तापमान है, और \( R \) एक समानुपातिक स्थिरांक है जिसे गैस स्थिरांक कहते हैं। यह समीकरण गैसों के व्यवहार को समझने में मदद करता है।
In simple words: An ideal gas follows all gas laws perfectly, with no attraction between molecules and tiny molecule size. The ideal gas equation \( PV = nRT \) combines Boyle's, Charles', and Avogadro's laws to show how pressure, volume, moles, and temperature are linked.

🎯 Exam Tip: State the assumptions of an ideal gas (negligible molecular volume, no intermolecular forces) and derive the ideal gas equation by combining Boyle's, Charles', and Avogadro's laws.

 

Question 32. यदि एक आदर्श गैस के दो मोल 546 K ताप पर हैं उनका आयतन 44.8 लीटर है तो उनको दाब क्या होगा?
Answer: हम आदर्श गैस समीकरण \( PV = nRT \) का उपयोग करके दाब की गणना करेंगे।
दिए गए मान हैं:
मोलों की संख्या \( n = 2 \text{ मोल} \)
तापमान \( T = 546 \text{ K} \)
आयतन \( V = 44.8 \text{ L} \)
गैस स्थिरांक \( R = 8.314 \text{ JK}^{-1}\text{mol}^{-1} \). (यहाँ, \( R = 0.08314 \text{ bar L K}^{-1}\text{mol}^{-1} \) का उपयोग करके परिणाम bar में आएगा, जो कि दाब की एक सामान्य इकाई है।)
\( P = \frac{nRT}{V} \)
\( P = \frac{2 \text{ mol} \times 0.08314 \text{ bar L K}^{-1}\text{mol}^{-1} \times 546 \text{ K}}{44.8 \text{ L}} \)
\( P = \frac{90.78888 \text{ bar}}{44.8} \)
\( P \approx 2.0265 \text{ bar} \)
यदि \( R = 8.314 \text{ J K}^{-1}\text{mol}^{-1} \) का उपयोग करते हैं और आयतन को \( \text{m}^3 \) में बदलते हैं \( (44.8 \text{ L} = 44.8 \times 10^{-3} \text{ m}^3) \), तब दाब पास्कल में होगा:
\( P = \frac{2 \text{ mol} \times 8.314 \text{ J K}^{-1}\text{mol}^{-1} \times 546 \text{ K}}{44.8 \times 10^{-3} \text{ m}^3} \)
\( P = \frac{9080.088}{0.0448} \)
\( P \approx 202680.5 \text{ Pa} \)
\( P \approx 2.0268 \times 10^5 \text{ Pa} \)
यह दर्शाता है कि एक आदर्श गैस की भौतिक स्थिति को कैसे मापा जा सकता है।
In simple words: Using the ideal gas law, with 2 moles of gas at 546 K and 44.8 L, the pressure is calculated to be about 2.0265 bar or \( 2.0268 \times 10^5 \) Pascal.

🎯 Exam Tip: Always pay attention to the units of the gas constant (R) provided or chosen, as it dictates the units of pressure and volume in your final answer.

 

Question 34. किसी गैसीय मिश्रण में O2 एवं N2 का भार के अनुसार अनुपात 1 : 4 है तो उनकी संख्या का अनुपात कितना होगा?
Answer:
दिए गए अनुपात के अनुसार, यदि ऑक्सीजन \( (\text{O}_2) \) का भार 32 ग्राम है, तो नाइट्रोजन \( (\text{N}_2) \) का भार \( 4 \times 32 = 128 \) ग्राम होगा।
\( \text{O}_2 \) का मोलर द्रव्यमान = 32 ग्राम/मोल
\( \text{N}_2 \) का मोलर द्रव्यमान = 28 ग्राम/मोल
अब, मोलों की संख्या ज्ञात करें:
\( \text{O}_2 \text{ के मोल} = \frac{\text{भार}}{\text{मोलर द्रव्यमान}} = \frac{32 \text{ g}}{32 \text{ g/mol}} = 1 \text{ मोल} \)
\( \text{N}_2 \text{ के मोल} = \frac{\text{भार}}{\text{मोलर द्रव्यमान}} = \frac{128 \text{ g}}{28 \text{ g/mol}} \approx 4.57 \text{ मोल} \)
इसलिए, \( \text{O}_2 \) और \( \text{N}_2 \) के मोलों की संख्या का अनुपात \( 1 : 4.57 \) है।
इस अनुपात को सरल करने के लिए दोनों संख्याओं को 1 से गुणा करके 1 : 4.57 ही रखा जा सकता है, या इसे पूर्णांकों में लगभग \( 7:32 \) के रूप में व्यक्त किया जा सकता है \( (1 \times 7 = 7, 4.57 \times 7 \approx 31.99 \approx 32) \). यह गणना गैसों की मात्रा को समझने में मदद करती है।
In simple words: If the weight ratio of O2 to N2 is 1:4, then by calculating their moles, the ratio of their numbers (moles) will be about 1 : 4.57, or roughly 7:32 in whole numbers.

🎯 Exam Tip: To find the ratio of numbers (moles), always divide the given mass by the respective molar mass for each gas.

 

Question 35. पृष्ठ तनाव किसे कहते हैं?
Answer: पृष्ठ तनाव किसी द्रव की सतह पर खींची गई एक काल्पनिक रेखा की एकांक लम्बाई पर लगने वाले लम्बवत् बल को कहते हैं। इसकी SI इकाई \( \text{Nm}^{-1} \) या \( \text{Jm}^{-2} \) होती है। द्रव की सतह पर अणुओं के बीच के असंतुलित आकर्षण बलों के कारण यह बल उत्पन्न होता है, जिससे द्रव की सतह एक खींची हुई झिल्ली की तरह व्यवहार करती है और न्यूनतम पृष्ठ क्षेत्रफल प्राप्त करने का प्रयास करती है।
In simple words: Surface tension is the pulling force on a liquid's surface, like a stretched skin. It's measured as force per unit length \( (\text{Nm}^{-1}) \) and makes liquids try to have the smallest possible surface.

🎯 Exam Tip: Define surface tension as the force per unit length acting perpendicularly on the surface, emphasizing its origin from unbalanced intermolecular forces at the liquid-air interface.

RBSE Class 11 Chemistry Chapter 5 निबन्धात्मक प्रश्न

 

Question 36. निम्नलिखित पर टिप्पणी लिखिये –
1. श्यानता।

Answer:
श्यानता (Viscosity):
श्यानता द्रवों का एक महत्वपूर्ण गुण है जो उनके प्रवाह के प्रतिरोध को दर्शाता है। सभी द्रव एक समान वेग से नहीं बहते; कुछ द्रव आसानी से बहते हैं (जैसे जल, अल्कोहल), जबकि कुछ द्रव मुश्किल से बहते हैं (जैसे शहद, ग्लिसरीन)। यह अंतर द्रवों की श्यानता के कारण होता है। जब द्रव प्रवाह करता है, तो उसकी परतें एक-दूसरे पर फिसलती हैं और उनके बीच घर्षण बल उत्पन्न होता है। इस घर्षण बल की माप को ही श्यानता कहते हैं।

श्यानता का मापनः
श्यानता को मापने के लिए ओस्टवाल्ड विस्कोमीटर का उपयोग किया जाता है। इसे एक सूत्र द्वारा ज्ञात किया जाता है:
\( \frac{\eta_1}{\eta_2} = \frac{t_1 d_1}{t_2 d_2} \)
यहाँ, \( \eta_1 \) जल की श्यानता है, \( \eta_2 \) दिए गए द्रव की श्यानता है, \( d_1 \) जल का घनत्व है, \( d_2 \) द्रव का घनत्व है, \( t_1 \) जल के बहने का समय है, और \( t_2 \) द्रव के बहने का समय है। श्यानता गुणांक \( (\eta) \) वह बल है जो इकाई क्षेत्रफल पर स्थिर दो समांतर परतों के वेग में इकाई अंतर बनाए रखने के लिए आवश्यक है।

श्यानता की इकाइयाँ:
1. CGS मात्रक में – dyne \( \text{cm}^{-2} \text{ sec} \) या \( \text{gm cm}^{-1} \text{ sec}^{-1} \) या पॉयज (Poise).
2. SI मात्रक में – \( \text{Nm}^{-2} \text{ sec} \) (न्यूटन सेकंड प्रति वर्गमीटर) या \( \text{kg m}^{-1} \text{ s}^{-1} \) या पास्कल सेकंड (Pas).
\( 1 \text{ Poise} = 0.1 \text{ Pas} \).

श्यानता पर ताप का प्रभावः
ताप बढ़ाने पर श्यानता कम होती है क्योंकि अणुओं की गतिज ऊर्जा बढ़ने से अंतर-अणुक बल कम हो जाते हैं, जिससे द्रव की परतें आसानी से फिसल पाती हैं। तापमान बढ़ने से द्रव की गतिशीलता बढ़ जाती है।

श्यानता के सम्बन्ध में महत्त्वपूर्ण बिन्दुः
1. उच्च अणुभार वाले यौगिकों जैसे शर्करा को जल में मिलाने पर जल की श्यानता बढ़ जाती है।
2. कांच एक बहुत चिपचिपा द्रव होता है, जिसकी श्यानता इतनी अधिक होती है कि इसके गुण ठोसों से मिलते हैं।
In simple words: Viscosity is how much a liquid resists flowing. Thick liquids like honey have high viscosity because their molecules hold together strongly. We measure it with a viscometer, and its unit is Poise or Pascal-second. When you heat a liquid, its viscosity usually drops because molecules move faster and pull less on each other.

🎯 Exam Tip: When defining viscosity, explain it as resistance to flow, mention the role of intermolecular forces, and cite examples of highly viscous liquids like glycerine or honey.

U + dU U U - dU dz dz तल 'A' का क्षेत्रफल द्रव की विभिन्न परतों का प्रवाह

 

Question 36. निम्नलिखित पर टिप्पणी लिखिये –
2. वाष्प दाब।

Answer:
वाष्प दाब (Vapour Pressure):
जब किसी निर्वातित पात्र को द्रव से आंशिक रूप से भरा जाता है, तो द्रव का कुछ हिस्सा वाष्पीकृत होकर पात्र के खाली हिस्से को भर देता है। शुरुआत में द्रव वाष्पित होता है और वाष्प बनती है। यह वाष्प द्रव की सतह पर दाब डालती है, जो धीरे-धीरे बढ़ता है। कुछ समय बाद, द्रव-अवस्था और वाष्प-अवस्था के बीच साम्यावस्था स्थापित हो जाती है। इस अवस्था में वाष्प द्वारा द्रव की सतह पर लगाए गए दाब को उस द्रव का वाष्प दाब कहते हैं।

\( \text{H}_2\text{O द्रव } \xleftrightarrow{\text{वाष्पन}}^{\text{संघनन}} \text{ वाष्प H}_2\text{O} \)
यह साम्यावस्था गतिशील होती है, जहाँ वाष्पीकरण और संघनन की दर बराबर होती है, और वाष्प व द्रव दोनों की सांद्रता स्थिर रहती है। यह प्रक्रिया यह समझने में महत्वपूर्ण है कि वाष्पीकरण कैसे होता है।

वाष्प दाब को प्रभावित करने वाले कारकः
1. द्रव की प्रकृति: जो द्रव अध्रुवीय होते हैं, वे अधिक वाष्पशील होते हैं और उनका वाष्प दाब अधिक होता है (जैसे कार्बन टेट्राक्लोराइड)। ध्रुवीय द्रवों की वाष्पशीलता कम होती है, उनका वाष्प दाब भी कम होता है (जैसे जल)। वाष्प दाब का क्रम इस प्रकार है: डाइएथिल ईथर < कार्बन टेट्राक्लोराइड < एथिल अल्कोहल < जल \( (\text{C}_2\text{H}_5\text{O}-\text{C}_2\text{H}_5 < \text{CCl}_4 < \text{C}_2\text{H}_5\text{OH} < \text{H}_2\text{O}) \).
2. ताप: ताप बढ़ाने पर द्रव का वाष्प दाब बढ़ता है क्योंकि अणुओं की गतिज ऊर्जा बढ़ जाती है, जिससे वे आसानी से वाष्पीकृत हो जाते हैं।
3. अवाष्पशील विलेय मिलाने पर: किसी द्रव में अवाष्पशील विलेय मिलाने पर उसका वाष्प दाब कम हो जाता है।

क्रांतिक दाब:
जब हम एक बंद पात्र में द्रव को गर्म करते हैं, तो उसका वाष्प दाब लगातार बढ़ता जाता है। द्रव और वाष्प के बीच की स्पष्ट सीमा धीरे-धीरे गायब हो जाती है जब उनका घनत्व समान हो जाता है। जिस तापमान पर यह सीमा गायब हो जाती है, उसे क्रांतिक ताप कहते हैं। यह वाष्प दाब की अवधारणा से जुड़ा एक महत्वपूर्ण पैरामीटर है।
In simple words: Vapour pressure is the force exerted by vapor above a liquid when they are in balance. It increases with temperature because molecules move faster. Adding non-volatile things to the liquid reduces this pressure. Critical pressure is the pressure above which the liquid-vapor boundary disappears, meaning it cannot be liquefied by pressure alone.

🎯 Exam Tip: When discussing vapor pressure, explain the dynamic equilibrium between liquid and vapor, and list the three main factors (nature of liquid, temperature, presence of non-volatile solute) that affect it.

वाष्पदाब (मिमि Hg) 0 100 200 300 400 500 600 700 760 900 ताप (K) 273 293 313 333 353 373 ऐथिल ऐल्कोहॉल एल्कोहल जल 373 K 351.3 K 349.7 K 308 K सामान्य क्वथनांक विभिन्न द्रवों के वाष्प दाब एवं ताप

 

Question 36. निम्नलिखित पर टिप्पणी लिखिये –
3. हाइड्रोजन बन्ध।

Answer:
हाइड्रोजन बंध (Hydrogen Bond):
हाइड्रोजन बंध एक विशेष प्रकार का द्विध्रुव-द्विध्रुव आकर्षण बल है जो अत्यधिक ध्रुवीय बंधों (जैसे \( \text{N-H, O-H} \) या \( \text{H-F} \)) वाले अणुओं में पाया जाता है। यह एक अणु के हाइड्रोजन परमाणु को दूसरे अणु के अधिक विद्युत ऋणी परमाणु (जैसे फ्लोरीन, ऑक्सीजन या नाइट्रोजन) से जोड़ता है।
उदाहरण: \( \text{H}^{\delta+} - \text{F}^{\delta-} \text{......H}^{\delta+} - \text{F}^{\delta-} \text{......H}^{\delta+} - \text{F}^{\delta-} \)
हाइड्रोजन बंध दुर्बल आकर्षण बल होते हैं, जिनकी ऊर्जा 10 – 100 \( \text{kJ mol}^{-1} \) होती है। यह ऊर्जा कई महत्वपूर्ण यौगिकों, जैसे प्रोटीन और न्यूक्लिक अम्ल की संरचना और गुणों को निर्धारित करती है। अणुओं के बीच हाइड्रोजन बंध को बिंदीदार रेखाओं (...) द्वारा दर्शाया जाता है।

हाइड्रोजन बंध के कारण भौतिक गुणों में परिवर्तन:
हाइड्रोजन बंध की उपस्थिति के कारण यौगिकों के गलनांक और क्वथनांक, विलेयता, भौतिक अवस्था, अम्लता और क्षारकता जैसे भौतिक गुणों में बहुत अधिक परिवर्तन होता है। उदाहरण के लिए, हाइड्रोजन बंध के कारण अल्कोहल अवाष्पशील द्रव होते हैं।

हाइड्रोजन बंध के प्रकार:
1. अंतरा-अणुक हाइड्रोजन बंध: यह विभिन्न अणुओं के बीच बनता है, जैसे जल में।
2. अन्तःअणुक हाइड्रोजन बंध: यह एक ही अणु के भीतर दो परमाणुओं के बीच बनता है, जैसे O-नाइट्रोफिनॉल में।
In simple words: A hydrogen bond is a weak pull between a hydrogen atom in one molecule and a very electronegative atom (like oxygen or nitrogen) in another molecule. It changes properties like boiling point and how well things dissolve. There are two types: between molecules (intermolecular) and within one molecule (intramolecular).

🎯 Exam Tip: Clearly define hydrogen bonding, mention the highly electronegative atoms involved (F, O, N), and explain how it influences key physical properties like boiling point and solubility.

O H N O O O - नाइट्रोफिनॉल

 

Question 37. गैसों के द्रवीकरण को कार्बन डाई ऑक्साइड के समतापी आरेखों द्वारा समझाइये एवं गैसों की दवीकरण की विधि लिखिये।
Answer:
क्रान्तिक घटनाएँ (Critical Phenomenon) तथा समतापी वक्र (Isotherms):
गैसों के द्रवीकरण को समझने के लिए क्रांतिक घटनाओं और समतापी वक्रों का अध्ययन महत्वपूर्ण है। गैस के अणु लगातार गतिशील रहते हैं और एक-दूसरे से पर्याप्त दूरी पर होते हैं। गैसों को ठंडा करके और दाब बढ़ाकर द्रवीकृत किया जा सकता है। ऐसा करने से अणुओं की गतिज ऊर्जा कम होती है और उनके बीच आकर्षण बल बढ़ जाते हैं, जिससे अणु एक-दूसरे के करीब आकर द्रव में परिवर्तित हो जाते हैं। दाब की तुलना में तापमान का प्रभाव अधिक महत्वपूर्ण होता है। एन्ड्रयूज ने 1869 में \( \text{CO}_2 \) पर प्रयोग करके निष्कर्ष निकाला कि प्रत्येक गैस के लिए एक विशिष्ट तापमान होता है, जिसे क्रांतिक ताप कहते हैं। इस तापमान से नीचे गैस को द्रवीकृत किया जा सकता है, लेकिन इससे ऊपर नहीं।

ऐन्ड्रज का प्रयोग:
स्थिर तापमान पर दाब और आयतन के बीच आरेख को समतापी आरेख कहते हैं। थॉमस एन्ड्रयूज ने \( \text{CO}_2 \) के लिए विभिन्न तापमानों पर समतापी आरेख बनाए। उन्होंने पाया कि वास्तविक गैसें \( \text{CO}_2 \) की तरह व्यवहार करती हैं। उच्च तापमान पर इसके समतापी आरेख आदर्श गैस के समतापी आरेखों के समान होते हैं, लेकिन उच्च दाब पर भी गैस को द्रव में परिवर्तित नहीं किया जा सकता। जैसे-जैसे तापमान कम होता है, वक्र की आकृति बदल जाती है और आदर्श व्यवहार से विचलन दिखाई देता है। उदाहरण के लिए, \( 30.98^\circ\text{C} \) तापमान पर \( 73 \text{ वायुमंडलीय दाब} \) से पहले \( \text{CO}_2 \) गैस द्रव अवस्था में रहती है। \( 30.98^\circ\text{C} \) तापमान पर, बिंदु E, \( \text{CO}_2 \) का क्रांतिक ताप दर्शाता है। इस तापमान पर गैस और द्रव अवस्था समान हो जाती हैं।
दाब बढ़ाने पर द्रव का संपीडन बहुत कम होता है। \( V_2 \) से \( V_3 \) तक आयतन में सूक्ष्म संपीडन \( P_2 \) से \( P_3 \) दाब को अतिप्रवण बनाता है। \( 30.98^\circ\text{C} \) से नीचे प्रत्येक वक्र इसी प्रकार की प्रवृत्ति दर्शाता है। कम ताप पर केवल क्षैतिज रेखा की लंबाई में वृद्धि होती है। क्रांतिक बिंदु पर क्षैतिज भाग एक बिंदु में विलीन हो जाता है। बिंदु A गैसीय अवस्था को और बिन्दु D द्रव अवस्था को प्रदर्शित करता है, जबकि इस बिंदु के नीचे गुंबदनुमा आकृति में \( \text{CO}_2 \) की द्रव तथा गैसीय अवस्था साम्यावस्था में होती है।
In simple words: Liquefaction of gases depends on critical phenomena. Critical temperature is the highest temperature at which a gas can be turned into a liquid by pressure. Below this temperature, by increasing pressure and reducing temperature, gas molecules come closer and turn into liquid. Andrews studied \( \text{CO}_2 \) isotherms (pressure-volume graphs at constant temperature) to show how gases behave differently from ideal gases at low temperatures and high pressures, eventually liquefying. The \( 30.98^\circ\text{C} \) isotherm for \( \text{CO}_2 \) shows the critical point where the gas can no longer be liquefied above this temperature.

🎯 Exam Tip: When explaining gas liquefaction, always start with the concept of critical temperature and pressure, and describe the Andrews isotherms for \( \text{CO}_2 \) as a classic example, interpreting the different regions (gas, liquid, equilibrium).

दाब आयतन 50°C G H 31.1°C B D -30.98°C (\(T_c\)) P2 C E B F 13.1°C P A 73 P(atm) V3 V2 V0 V1 \( \text{CO}_2 \) के समतापी आरेख

 

Question 37. गैसों के द्रवीकरण को कार्बन डाई ऑक्साइड के समतापी आरेखों द्वारा समझाइये एवं गैसों की द्रवीकरण की विधि लिखिये।
Answer: गैसों को द्रव में बदलना यानी द्रवीकरण करना एक खास प्रक्रिया है। यह गैसों के कणों की लगातार गति और उनके बीच की दूरी के कारण होता है। द्रवीकरण के लिए गैसों का तापमान कम करना और दाब बढ़ाना जरूरी है, क्योंकि इससे कणों की गतिज ऊर्जा कम हो जाती है। जब कण एक-दूसरे के करीब आते हैं, तो उनके बीच का आकर्षण बल बढ़ जाता है और गैस द्रव में बदल जाती है। द्रवीकरण में दाब से ज्यादा तापमान का असर होता है, क्योंकि केवल दाब बढ़ाने से सभी गैसों को कमरे के तापमान पर द्रव में नहीं बदला जा सकता।

एन्ड्रज ने 1869 में कार्बन डाइऑक्साइड पर प्रयोग करके यह बताया कि हर गैस का एक निश्चित क्रांतिक तापमान (critical temperature) होता है। इस तापमान से नीचे ही गैस को द्रव में बदला जा सकता है, चाहे कितना भी दाब क्यों न लगाया जाए। क्रांतिक तापमान, क्रांतिक दाब और क्रांतिक आयतन को मिलाकर क्रांतिक स्थिरांक कहते हैं। हर गैस के लिए ये स्थिरांक निश्चित होते हैं। क्रांतिक तापमान और दाब पर गैस और द्रव एक ही अवस्था में होते हैं।

गैसों के द्रवीकरण की प्रायोगिक विधियाँ (Experimental Methods for Liquefaction of Gases):

1. फैराडे विधि (Faraday's Method):
इसमें द्रव \( \text{CO}_2 \) को वाष्पीकृत किया जाता है। जब द्रव \( \text{CO}_2 \) भाप बनती है, तो ठंडा होने से गैसीय \( \text{CO}_2 \) सूखी बर्फ (ठोस \( \text{CO}_2 \)) में बदल जाती है।

क्रियाकारक गैस हिम मिश्रण द्रवित गैस गैसों के द्रवीकरण की फैराडे विधि

2. लिण्डे विधि (Linde's Method):
यह विधि जूल-थॉमसन प्रभाव पर आधारित है। जब किसी गैस को बहुत अधिक दाब से कम दाब वाले क्षेत्र में फैलाया जाता है, तो उसका तापमान कम हो जाता है और वह ठंडी हो जाती है। वायु को लगभग 200 वायुमंडलीय दाब पर संपीडित करके केंद्रित पाइपों में से गुजारा जाता है। फिर एक वाल्व (V) खोलकर गैस को एक बड़े कक्ष (D) में फैलाया जाता है, जिससे गैस का दाब 50 वायुमंडल तक कम हो जाता है। यह प्रक्रिया तब तक दोहराई जाती है जब तक गैस द्रव में न बदल जाए। इस उपकरण में ठंडी हवा को बाहरी नली में भेजा जाता है जिससे वायु द्रव बन जाती है।

P A B O Concentric Pipes वाल्व -D बड़ा चेम्बर Tap नल गैसों के द्रवीकरण की लिण्डे विधि

3. क्लॉड विधि (Claude's Method):
इस विधि में संपीडित गैस को अचानक कम दाब पर फैलने दिया जाता है। इस प्रक्रिया में गैस को यांत्रिक कार्य करना पड़ता है, जिससे उसकी गतिज ऊर्जा कम हो जाती है और वह ठंडी होकर द्रव बन जाती है। इस तरह, गैस का तापमान कम हो जाता है और वायु द्रव में बदल जाती है।

In simple words: गैसों को द्रव में बदलने के लिए उन्हें ठंडा किया जाता है और उन पर दाब बढ़ाया जाता है। क्रांतिक तापमान वह सीमा है जिसके नीचे ही गैसें द्रव बन पाती हैं। फैराडे, लिण्डे और क्लॉड विधियों का उपयोग गैसों को द्रव में बदलने के लिए किया जाता है, जिनमें तापमान कम करके और दाब बदलकर गैसों के कणों को पास लाया जाता है।

🎯 Exam Tip: द्रवीकरण की विधियों को उनके मूल सिद्धांत (जैसे जूल-थॉमसन प्रभाव) और उनके मुख्य घटकों (जैसे संपीडक, विस्तारक) के साथ याद रखें। क्रांतिक तापमान की परिभाषा महत्वपूर्ण है।

 

Question 38. आदर्श गैसों एवं वास्तविक गैसों में अन्तर स्पष्ट कीजिए। दाब आयतन संशोधन द्वारा वाण्डरवाल समीकरण ज्ञात कीजिए।
Answer: आदर्श गैसें वे काल्पनिक गैसें होती हैं जो बॉयल, चार्ल्स और आवोगाद्रो जैसे सभी गैस नियमों का पूरी तरह से पालन करती हैं। इन गैसों में यह माना जाता है कि अणुओं के बीच कोई आकर्षण बल नहीं होता और अणुओं का आयतन कुल गैस के आयतन की तुलना में बहुत कम होता है।

इसके विपरीत, वास्तविक गैसें आदर्श गैस के नियमों का पूरी तरह से पालन नहीं करती हैं। वे केवल कुछ खास स्थितियों में ही आदर्श गैसों जैसा व्यवहार करती हैं, जब अणुओं के बीच का बल नगण्य होता है। ऐसा इसलिए होता है क्योंकि वास्तविक गैसों के अणु एक-दूसरे से क्रिया करते हैं।

वान्डरवाल ने आदर्श गैस समीकरण में दो मुख्य सुधार किए:

1. आयतन संशोधन (Volume Correction):
वान्डरवाल ने माना कि गैस के अणु छोटे, ठोस गोले होते हैं जिनका अपना आयतन होता है। आदर्श गैसों में यह माना जाता है कि अणु पूरे पात्र में घूमने के लिए स्वतंत्र होते हैं। लेकिन वास्तविक गैसों में, अणु बाकी अणुओं के आयतन के कारण पूरे पात्र में घूम नहीं पाते हैं। इसलिए, वास्तविक गैसों के लिए उपलब्ध आयतन कुल आयतन से थोड़ा कम होता है। इसे 'अपवर्जित आयतन' (excluded volume) कहते हैं।

यदि \( V \) गैस का कुल आयतन है और \( b \) एक मोल गैस के अपवर्जित आयतन को दर्शाता है, तो \( n \) मोल गैस के लिए उपलब्ध आयतन \( (V-nb) \) होगा। यहाँ \( b \) अणुओं के वास्तविक आयतन का लगभग चार गुना होता है।

2. दाब संशोधन (Pressure Correction):
आदर्श गैसों में माना जाता है कि अणुओं के बीच कोई आकर्षण बल नहीं होता। लेकिन वास्तविक गैसों में, अणु एक-दूसरे को आकर्षित करते हैं। जब कोई अणु पात्र की दीवार से टकराने वाला होता है, तो पीछे के अणु उसे अपनी ओर खींचते हैं, जिससे वह दीवार से कम बल से टकराता है। इस वजह से, वास्तविक गैस का दाब आदर्श गैस के दाब से कम होता है।

दाब में कमी \( p' \) दो बातों पर निर्भर करती है:
(i) दीवार से टकराने वाले अणुओं को खींचने वाले अणुओं की संख्या।
(ii) दीवार से प्रति सेकंड टकराने वाले अणुओं की संख्या।
ये दोनों कारक गैस के घनत्व \(\left( \frac{n}{V} \right)\) के वर्ग के समानुपाती होते हैं। इसलिए, दाब में कमी \( p' \propto \left( \frac{n}{V} \right)^2 \) या \( p' = a \frac{n^2}{V^2} \) होती है, जहाँ \( a \) आकर्षण गुणांक है।

आदर्श गैस का दाब \( P_{\text{आदर्श}} = P_{\text{वास्तविक}} + p' = P_{\text{वास्तविक}} + a \frac{n^2}{V^2} \)

इन संशोधनों को आदर्श गैस समीकरण \( PV = nRT \) में रखने पर वान्डरवाल समीकरण प्राप्त होता है:

\[ \left( P + a \frac{n^2}{V^2} \right) (V-nb) = nRT \] जहाँ \( P \) वास्तविक गैस का दाब, \( V \) आयतन, \( n \) मोलों की संख्या, \( R \) गैस स्थिरांक, \( T \) तापमान है। \( a \) और \( b \) वान्डरवाल स्थिरांक हैं, जो गैस की प्रकृति पर निर्भर करते हैं। \( a \) अंतर-आणविक आकर्षण बल का माप है, और \( b \) अणुओं के आयतन का माप है। उदाहरण के लिए, \( \text{CO}_2 \) और \( \text{SO}_2 \) जैसी गैसों को आसानी से द्रवित किया जा सकता है, क्योंकि उनमें आकर्षण बल अधिक होता है। वान्डरवाल समीकरण गैसों के व्यवहार को आदर्श गैस समीकरण की तुलना में बेहतर ढंग से समझाता है।

In simple words: आदर्श गैसें सिर्फ एक कल्पना हैं जो सभी नियमों का पालन करती हैं, जबकि असली गैसें ऐसा नहीं करतीं। वान्डरवाल ने समीकरण में सुधार किए, जिसमें उन्होंने अणुओं के अपने आयतन और उनके बीच के आकर्षण बल को शामिल किया। इससे गैसों के व्यवहार को समझने में मदद मिली।

🎯 Exam Tip: वान्डरवाल समीकरण के दाब और आयतन संशोधन के सिद्धांतों को अच्छी तरह समझें। प्रत्येक संशोधन के पीछे की अवधारणा और उसके सूत्र में उपयोग किए जाने वाले स्थिरांक \( a \) और \( b \) के महत्व को याद रखें।

 

Question 39. आवोगादो के नियम की व्याख्या कीजिए। बॉयल व चार्ल्स के नियम को आरेख सहित समझाइये।
Answer: गैसों के नियम यह बताते हैं कि जब तापमान या दाब बदलते हैं, तो गैस का आयतन कैसे बदलता है। कई वैज्ञानिकों ने इन संबंधों का अध्ययन किया है और गैसों के कुछ मुख्य नियम दिए हैं, जो उनके नामों पर आधारित हैं।

प्रमुख गैसीय नियम:

1. बॉयल का नियम (दाब-आयतन संबंध):
यह नियम बताता है कि स्थिर तापमान पर किसी निश्चित मात्रा (मोलों की संख्या) वाली गैस का दाब उसके आयतन के व्युत्क्रमानुपाती होता है। इसका मतलब है कि अगर आप दाब बढ़ाएंगे, तो आयतन कम हो जाएगा और अगर दाब कम करेंगे, तो आयतन बढ़ जाएगा।
गणितीय रूप से: \( P \propto \frac{1}{V} \) या \( PV = k_1 \)
यहां \( k_1 \) एक स्थिरांक है, जिसका मान गैस की मात्रा, तापमान और दाब व आयतन की इकाइयों पर निर्भर करता है।

ग्राफीय निरूपण:
(i) विभिन्न तापमानों पर दाब और आयतन के बीच खींचा गया ग्राफ (जिसे समतापी वक्र कहते हैं) एक वक्र के रूप में मिलता है। हर वक्र एक निश्चित तापमान को दिखाता है, और जैसे-जैसे तापमान बढ़ता है, वक्र ऊपर की ओर खिसकता है। यदि दाब को आधा किया जाए, तो आयतन लगभग दोगुना हो जाता है।

दब (P) barआयतन (V) dm³
600K(Graph shows inverse relationship, curves for different temperatures)
400K
200K

विभिन्न द्रवों के वाष्प दाब एवं ताप

(ii) दाब (P) और \( \frac{1}{V} \) के बीच का ग्राफ एक सीधी रेखा के रूप में मिलता है जो मूल बिंदु से गुजरती है। यह ग्राफ दिखाता है कि अधिक दाब पर गैसें बॉयल के नियम से थोड़ा भटकती हैं, और तापमान बढ़ने पर सीधी रेखा दाब अक्ष की ओर झुक जाती है।

दाब (P)(1/V)
(Graph shows linear relationship)

गैस के दाब तथा \( \frac{1}{V} \) के मध्य वक्र

बॉयल का नियम यह भी बताता है कि गैसें बहुत संपीड़ित (compressibe) होती हैं। जब गैस को संपीड़ित किया जाता है, तो उसके अणु कम जगह घेरते हैं और गैस घनी (dense) हो जाती है। इस नियम से गैस के घनत्व और दाब के बीच का संबंध भी निकाला जा सकता है:

घनत्व \( (d) = \frac{\text{द्रव्यमान }(m)}{\text{आयतन }(V)} \)
क्योंकि \( PV = k_1 \implies P = k_1 \frac{1}{V} \)
और \( V = \frac{m}{d} \) तो \( P = k_1 \frac{d}{m} \)
\( \implies d \propto P \)

2. चार्ल्स का नियम (ताप-आयतन संबंध):
चार्ल्स के नियम के अनुसार, स्थिर दाब पर किसी निश्चित मात्रा (द्रव्यमान) वाली गैस का आयतन उसके परम तापमान के समानुपाती होता है। इसका मतलब है कि तापमान बढ़ने पर आयतन भी बढ़ता है।
गणितीय रूप से: \( V \propto T \) या \( V = k_2T \)
यहां \( k_2 \) एक स्थिरांक है, जिसका मान गैस की मात्रा, दाब और आयतन की इकाइयों पर निर्भर करता है।

केल्विन पैमाने पर तापमान मापने के लिए, सेल्सियस तापमान में 273.15 जोड़ा जाता है। केल्विन पैमाने पर ऋणात्मक मान नहीं होते, जो इसे सेल्सियस पैमाने से बेहतर बनाता है।
\[ V_t = V_0 \left( 1 + \frac{t}{273.15} \right) \implies \frac{V_t}{V_0} = \frac{T_t}{T_0} \] जहां \( V_t \) तापमान \( t \) पर आयतन है, \( V_0 \) 0°C पर आयतन है, \( T_t = 273.15 + t \) और \( T_0 = 273.15 \) केल्विन है।

ग्राफीय निरूपण:
दाब और आयतन के बीच खींचा गया ग्राफ सीधी रेखा के रूप में मिलता है (जिसे समदाबी वक्र कहते हैं)।
\[ \frac{V_1}{T_1} = \frac{V_2}{T_2} \]

P (दाब)T (°C)
(Graph shows linear relationship, extrapolated to -273.15°C for zero volume)

चार्ल्स नियम

ग्राफ को शून्य आयतन तक बढ़ाने पर, हर रेखा तापमान अक्ष पर -273.15°C पर मिलती है, जिसे परम शून्य तापमान कहते हैं। इस तापमान पर गैस का आयतन शून्य हो जाता है, जिसका मतलब है कि गैस का अस्तित्व ही खत्म हो जाता है। वास्तविक गैसें इस तापमान तक पहुंचने से पहले ही द्रव में बदल जाती हैं।

3. गै-लुसैक नियम (दाब-ताप संबंध):
यह नियम चार्ल्स के नियम जैसा ही है और बताता है कि स्थिर आयतन पर किसी निश्चित मात्रा वाली गैस का दाब उसके परम तापमान के समानुपाती होता है। यानी, तापमान बढ़ने पर दाब भी बढ़ता है।
गणितीय रूप से: \( P \propto T \) या \( P = k_3T \)
जहां \( k_3 \) एक स्थिरांक है।
\[ \frac{P_1}{T_1} = \frac{P_2}{T_2} \] दाब और तापमान के बीच का ग्राफ (स्थिर आयतन पर) एक सीधी रेखा के रूप में मिलता है जिसे समआयतनिक (isochor) कहते हैं।

दाब (P)ताप (K)
(Graph shows linear relationship for different volumes)

गैस के दाब तथा ताप के मध्य आरेख

यह नियम वाहनों के टायरों में दाब के व्यवहार को समझाता है। गर्मियों में तापमान बढ़ने पर टायरों का दाब बढ़ जाता है। अगर इसे ठीक से नियंत्रित न किया जाए, तो टायर फट सकता है।

4. आवोगाद्रो परिकल्पना (आयतन-मात्रा संबंध):
1811 में आवोगाद्रो ने यह नियम दिया कि स्थिर तापमान और दाब पर, विभिन्न गैसों के समान आयतन में अणुओं की संख्या समान होती है। इसका मतलब है कि गैस का आयतन उसके मोलों की संख्या के समानुपाती होता है।
गणितीय रूप से: \( V \propto n \) या \( V = kn \)
जहां \( k \) एक स्थिरांक है, और \( n \) मोलों की संख्या है।

एक मोल गैस में अणुओं की संख्या \( 6.023 \times 10^{23} \) होती है, जिसे आवोगाद्रो संख्या (\( \text{N}_\text{A} \)) कहते हैं। मानक तापमान और दाब (STP) पर, एक मोल आदर्श गैस का आयतन 22.4 लीटर होता है। मानक तापमान 273.15 K और मानक दाब 1 बार ( \( 10^5 \) पास्कल) माना जाता है।

In simple words: गैस के मुख्य नियम बॉयल, चार्ल्स, गै-लुसैक और आवोगाद्रो के हैं। बॉयल का नियम कहता है कि दाब बढ़ने पर आयतन कम होता है (स्थिर तापमान पर)। चार्ल्स का नियम कहता है कि तापमान बढ़ने पर आयतन बढ़ता है (स्थिर दाब पर)। गै-लुसैक का नियम कहता है कि तापमान बढ़ने पर दाब बढ़ता है (स्थिर आयतन पर)। आवोगाद्रो का नियम कहता है कि समान दाब और तापमान पर, अलग-अलग गैसों के समान आयतन में अणुओं की संख्या बराबर होती है। ये नियम गैसों के व्यवहार को समझने में मदद करते हैं।

🎯 Exam Tip: प्रत्येक गैस नियम की परिभाषा, गणितीय संबंध और ग्राफीय निरूपण को अच्छी तरह से तैयार करें। आवोगाद्रो संख्या और मानक ताप व दाब (STP) की शर्तों को याद रखें, क्योंकि ये अक्सर पूछे जाते हैं।

RBSE Class 11 Chemistry Chapter 5 आंकिक प्रश्न

 

Question 40. यदि 30° से. तथा 1 bar दाब पर वायु के 500 dm³ आयतन को 200 dm³ तक संपीडित करने के लिए कितने न्यूनतम दाब की आवश्यकता होगी?
Answer: बॉयल के नियम के अनुसार, स्थिर तापमान पर गैस का दाब और आयतन का गुणनफल स्थिर रहता है।
\( P_1 V_1 = P_2 V_2 \)
यहां, प्रारंभिक दाब \( P_1 = 1 \) bar, प्रारंभिक आयतन \( V_1 = 500 \, \text{dm}^3 \)
अंतिम आयतन \( V_2 = 200 \, \text{dm}^3 \)
हमें अंतिम दाब \( P_2 \) ज्ञात करना है।
\( P_2 = \frac{P_1 V_1}{V_2} = \frac{1 \, \text{bar} \times 500 \, \text{dm}^3}{200 \, \text{dm}^3} \)
\( P_2 = \frac{500}{200} \, \text{bar} \)
\( P_2 = 2.5 \, \text{bar} \)

In simple words: जब किसी गैस को कम जगह में दबाया जाता है, तो उसका दाब बढ़ जाता है। इस सवाल में, गैस को 500 dm³ से 200 dm³ तक दबाने के लिए 2.5 बार के दाब की जरूरत होगी।

🎯 Exam Tip: बॉयल के नियम का उपयोग करते समय, सुनिश्चित करें कि तापमान स्थिर है और दाब व आयतन की इकाइयों में संगति बनी रहे।

 

Question 41. 0°C पर तथा 2 bar दाब पर किसी गैस के ऑक्साइड का घनत्व 5 bar दाब पर डाइनाइट्रोजन के घनत्व के समान है, तो ऑक्साइड का अणु – भार क्या है?
Answer: हम जानते हैं कि गैस का घनत्व (d) उसके मोलर द्रव्यमान (M) और दाब (P) के समानुपाती होता है, और तापमान (T) के व्युत्क्रमानुपाती होता है। इसे आदर्श गैस समीकरण \( PV = nRT \) से निकाला जा सकता है, जहां \( n = \frac{m}{M} \), तो \( PV = \frac{m}{M} RT \implies P = \frac{m}{V} \frac{RT}{M} \implies P = d \frac{RT}{M} \implies d = \frac{PM}{RT} \)
यहां \( R \) गैस स्थिरांक है और \( T \) तापमान है।

डाइनाइट्रोजन (\( \text{N}_2 \)) के लिए:
दाब \( P_1 = 5 \) bar
मोलर द्रव्यमान \( M_1 (\text{N}_2) = 28 \, \text{g mol}^{-1} \)
इसलिए, डाइनाइट्रोजन का घनत्व \( d_1 = \frac{P_1 M_1}{RT} = \frac{5 \, \text{bar} \times 28 \, \text{g mol}^{-1}}{RT} \)

ऑक्साइड गैस के लिए:
दाब \( P_2 = 2 \) bar
तापमान \( T \) 0°C है, जो 273.15 K के बराबर है।
हमें ऑक्साइड का मोलर द्रव्यमान \( M_2 \) ज्ञात करना है।
ऑक्साइड का घनत्व \( d_2 = \frac{P_2 M_2}{RT} = \frac{2 \, \text{bar} \times M_2}{RT} \)

प्रश्न के अनुसार, डाइनाइट्रोजन का घनत्व ऑक्साइड के घनत्व के समान है, यानी \( d_1 = d_2 \)
\[ \frac{5 \, \text{bar} \times 28 \, \text{g mol}^{-1}}{RT} = \frac{2 \, \text{bar} \times M_2}{RT} \] दोनों तरफ से \( \frac{\text{bar}}{RT} \) को रद्द करने पर,
\( 5 \times 28 \, \text{g mol}^{-1} = 2 \times M_2 \)
\( M_2 = \frac{5 \times 28}{2} \, \text{g mol}^{-1} \)
\( M_2 = 5 \times 14 \, \text{g mol}^{-1} \)
\( M_2 = 70 \, \text{g mol}^{-1} \)

In simple words: गैस का घनत्व उसके दाब और अणु-भार पर निर्भर करता है। हमें बताया गया है कि एक अज्ञात ऑक्साइड गैस का घनत्व डाइनाइट्रोजन के घनत्व के बराबर है, लेकिन अलग-अलग दाब पर। हमने इस जानकारी का उपयोग करके ऑक्साइड गैस का अणु-भार 70 ग्राम प्रति मोल पाया।

🎯 Exam Tip: गैसों के घनत्व से संबंधित प्रश्नों को हल करते समय, \( d = \frac{PM}{RT} \) सूत्र का उपयोग करें और सुनिश्चित करें कि सभी इकाइयाँ संगत हैं।

 

Question 42. 27° से. पर एक ग्राम आदर्श गैस का दाब 2 bar है। जब समान ताप एवं दाब पर इसमें दो ग्राम आदर्श गैस मिलाई जाती है, तो दाब 3 bar हो जाता है। इन गैसों के अणु – भार में संबंध स्थापित कीजिए।
Answer: आदर्श गैस समीकरण है: \( PV = nRT \)
जहां \( n \) गैस के मोलों की संख्या है, जिसे \( n = \frac{m}{M} \) के रूप में लिखा जा सकता है, जहां \( m \) द्रव्यमान और \( M \) मोलर द्रव्यमान है।
इसलिए, \( PV = \frac{m}{M} RT \implies P = \frac{mRT}{MV} \)

प्रथम स्थिति:
गैस का द्रव्यमान \( m_A = 1 \) ग्राम
गैस का दाब \( P_A = 2 \) bar
\[ P_A = \frac{m_A RT}{M_A V} \] \[ 2 = \frac{1 \times RT}{M_A V} \quad \ldots(1) \]

द्वितीय स्थिति:
जब इसमें 2 ग्राम आदर्श गैस मिलाई जाती है, तो कुल द्रव्यमान \( m_{\text{कुल}} = 1 + 2 = 3 \) ग्राम हो जाता है।
मान लें कि दूसरी गैस का मोलर द्रव्यमान \( M_B \) है और प्रारंभिक गैस का मोलर द्रव्यमान \( M_A \) है।
तो, कुल मोलों की संख्या \( n_{\text{कुल}} = \frac{1}{M_A} + \frac{2}{M_B} \)
कुल दाब \( P_{\text{कुल}} = 3 \) bar
आयतन \( V \) और तापमान \( T \) स्थिर हैं।
\[ P_{\text{कुल}} = \frac{n_{\text{कुल}} RT}{V} \] \[ 3 = \left( \frac{1}{M_A} + \frac{2}{M_B} \right) \frac{RT}{V} \quad \ldots(2) \] समीकरण (1) से \( \frac{RT}{V} = 2M_A \)
इस मान को समीकरण (2) में रखने पर:
\[ 3 = \left( \frac{1}{M_A} + \frac{2}{M_B} \right) (2M_A) \] \[ 3 = 2 + \frac{4M_A}{M_B} \] \[ 1 = \frac{4M_A}{M_B} \] \[ M_B = 4M_A \] यह संबंध दर्शाता है कि दूसरी गैस का मोलर द्रव्यमान पहली गैस के मोलर द्रव्यमान का चार गुना है।

In simple words: गैस के दाब, द्रव्यमान और मोलर द्रव्यमान के बीच संबंध होता है। जब एक गैस में दूसरी गैस मिलाई जाती है, तो कुल दाब बदल जाता है। इस जानकारी का उपयोग करके, हमने पाया कि दूसरी गैस का अणु-भार पहली गैस के अणु-भार का चार गुना है।

🎯 Exam Tip: आदर्श गैस समीकरण \( P = \frac{mRT}{MV} \) का उपयोग करते समय, द्रव्यमान, मोलर द्रव्यमान और मोलों की संख्या के बीच के संबंधों को ध्यान में रखें। दो अलग-अलग गैसों के मिश्रण के लिए, कुल मोलों को जोड़ना याद रखें।

 

Question 43. किसी रसायन में एल्युमिनियम कास्टिक सोडा से क्रिया पर डाइहाइड्रोजन गैस देता है। यदि 1 bar तथा 20°C ताप पर 0.15 ग्राम ऐलुमिनियम अभिक्रिया करेगा, तो निर्गमित डाइहाइड्रोजन का आयतन क्या होगा?
Answer: सबसे पहले, अभिक्रिया का संतुलित समीकरण लिखते हैं।
ऐलुमिनियम और कास्टिक सोडा (\( \text{NaOH} \)) की अभिक्रिया:
\[ 2\text{Al}(s) + 2\text{NaOH}(aq) + 2\text{H}_2\text{O}(l) \rightarrow 2\text{NaAlO}_2(aq) + 3\text{H}_2(g) \] संतुलित समीकरण के अनुसार:
2 मोल ऐलुमिनियम ( \( 2 \times 27 = 54 \) g) 3 मोल डाइहाइड्रोजन गैस (\( 3 \times 2 = 6 \) g) बनाता है।
हमें 0.15 ग्राम ऐलुमिनियम से बनने वाली डाइहाइड्रोजन गैस का आयतन ज्ञात करना है।

मोल्स की गणना:
ऐलुमिनियम का मोलर द्रव्यमान \( = 27 \, \text{g/mol} \)
दिए गए ऐलुमिनियम के मोल \( n_{\text{Al}} = \frac{\text{द्रव्यमान}}{\text{मोलर द्रव्यमान}} = \frac{0.15 \, \text{g}}{27 \, \text{g/mol}} = 0.00555 \, \text{mol} \)

समीकरण के अनुसार, 2 मोल Al से 3 मोल \( \text{H}_2 \) बनती है।
तो, 0.00555 मोल Al से बनने वाले \( \text{H}_2 \) के मोल \( n_{\text{H}_2} = \frac{3}{2} \times 0.00555 \, \text{mol} = 0.008325 \, \text{mol} \)

अब, आदर्श गैस समीकरण का उपयोग करके \( \text{H}_2 \) गैस का आयतन ज्ञात करें: \( PV = nRT \implies V = \frac{nRT}{P} \)
दिए गए मान:
मोलों की संख्या \( n = 0.008325 \, \text{mol} \)
तापमान \( T = 20^\circ\text{C} = 20 + 273.15 = 293.15 \, \text{K} \)
दाब \( P = 1 \, \text{bar} \)
गैस स्थिरांक \( R = 0.08314 \, \text{L bar K}^{-1} \text{mol}^{-1} \) (दाब bar में और आयतन लीटर में होने पर)

\[ V_{\text{H}_2} = \frac{0.008325 \, \text{mol} \times 0.08314 \, \text{L bar K}^{-1} \text{mol}^{-1} \times 293.15 \, \text{K}}{1 \, \text{bar}} \] \[ V_{\text{H}_2} = 0.008325 \times 0.08314 \times 293.15 \, \text{L} \] \[ V_{\text{H}_2} \approx 0.203 \, \text{L} \] इसलिए, निर्गमित डाइहाइड्रोजन गैस का आयतन लगभग 0.203 लीटर होगा।

In simple words: जब एल्युमिनियम कास्टिक सोडा से मिलता है, तो हाइड्रोजन गैस बनती है। हमने रासायनिक समीकरण का उपयोग करके यह पता लगाया कि 0.15 ग्राम एल्युमिनियम से कितनी हाइड्रोजन गैस (मोल में) बनेगी। फिर, गैस के नियम का उपयोग करके, हमने उस हाइड्रोजन गैस का आयतन लीटर में निकाला, जो लगभग 0.203 लीटर है।

🎯 Exam Tip: इस तरह के सवालों को हल करते समय, पहले संतुलित रासायनिक समीकरण लिखें, फिर मोलों की संख्या ज्ञात करें, और अंत में आदर्श गैस समीकरण का उपयोग करके आयतन या दाब की गणना करें। इकाइयों का सही उपयोग करना महत्वपूर्ण है।

 

Question 44. यदि 27°C पर 9 dm³ धारिता वाले फ्लास्क में 3.2 ग्राम मेथेन तथा 4.4 ग्राम \( \text{CO}_2 \) (कार्बन डाइऑक्साइड) का मिश्रण हो, तो इसका दाब क्या होगा?
Answer: हमें मेथेन (\( \text{CH}_4 \)) और कार्बन डाइऑक्साइड (\( \text{CO}_2 \)) के मिश्रण का कुल दाब ज्ञात करना है। डाल्टन के आंशिक दाब के नियम के अनुसार, गैसों के मिश्रण का कुल दाब सभी गैसों के आंशिक दाबों का योग होता है। पहले, हमें प्रत्येक गैस के मोलों की संख्या ज्ञात करनी होगी।

1. मेथेन (\( \text{CH}_4 \)) के मोलों की संख्या:
मेथेन का मोलर द्रव्यमान \( = 12 (\text{C}) + 4 \times 1 (\text{H}) = 16 \, \text{g/mol} \)
मेथेन का दिया गया द्रव्यमान \( = 3.2 \, \text{g} \)
\[ n_{\text{CH}_4} = \frac{\text{द्रव्यमान}}{\text{मोलर द्रव्यमान}} = \frac{3.2 \, \text{g}}{16 \, \text{g/mol}} = 0.2 \, \text{mol} \)

2. कार्बन डाइऑक्साइड (\( \text{CO}_2 \)) के मोलों की संख्या:
\( \text{CO}_2 \) का मोलर द्रव्यमान \( = 12 (\text{C}) + 2 \times 16 (\text{O}) = 44 \, \text{g/mol} \)
\( \text{CO}_2 \) का दिया गया द्रव्यमान \( = 4.4 \, \text{g} \)
\[ n_{\text{CO}_2} = \frac{\text{द्रव्यमान}}{\text{मोलर द्रव्यमान}} = \frac{4.4 \, \text{g}}{44 \, \text{g/mol}} = 0.1 \, \text{mol} \)

3. मिश्रण के कुल मोल:
\[ n_{\text{कुल}} = n_{\text{CH}_4} + n_{\text{CO}_2} = 0.2 \, \text{mol} + 0.1 \, \text{mol} = 0.3 \, \text{mol} \)

अब, आदर्श गैस समीकरण का उपयोग करके कुल दाब ज्ञात करें: \( PV = nRT \implies P = \frac{nRT}{V} \)
दिए गए मान:
कुल मोल \( n = 0.3 \, \text{mol} \)
तापमान \( T = 27^\circ\text{C} = 27 + 273 = 300 \, \text{K} \)
आयतन \( V = 9 \, \text{dm}^3 = 9 \times 10^{-3} \, \text{m}^3 \)
गैस स्थिरांक \( R = 8.314 \, \text{J K}^{-1} \text{mol}^{-1} \) या \( 8.314 \, \text{Pa m}^3 \text{K}^{-1} \text{mol}^{-1} \) (जब दाब पास्कल में हो)

\[ P = \frac{0.3 \, \text{mol} \times 8.314 \, \text{Pa m}^3 \text{K}^{-1} \text{mol}^{-1} \times 300 \, \text{K}}{9 \times 10^{-3} \, \text{m}^3} \] \[ P = \frac{0.3 \times 8.314 \times 300}{9 \times 10^{-3}} \, \text{Pa} \] \[ P = \frac{748.26}{0.009} \, \text{Pa} \] \[ P \approx 8.314 \times 10^4 \, \text{Pa} \)

In simple words: जब दो अलग-अलग गैसों को एक ही बर्तन में मिलाया जाता है, तो कुल दाब सभी गैसों के दाब को जोड़ने से मिलता है। हमने पहले हर गैस के मोल गिने, फिर कुल मोल निकाले, और अंत में गैस के नियमों का उपयोग करके बर्तन में कुल दाब की गणना की, जो लगभग \( 8.314 \times 10^4 \) पास्कल आया।

🎯 Exam Tip: गैसों के मिश्रण से संबंधित प्रश्नों में, डाल्टन के आंशिक दाब के नियम का उपयोग करें। प्रत्येक गैस के लिए मोलों की संख्या की सही गणना करना और सभी इकाइयों को SI इकाइयों में बदलना महत्वपूर्ण है, खासकर जब गैस स्थिरांक \( R \) का उपयोग कर रहे हों।

 

Question 45. 27°C ताप पर जब 1 लीटर के फ्लास्क में 0.7 bar पर 2.0 लीटर डाइऑक्सीजन तथा 0.8 bar पर 0.5 L डाइहाइड्रोजन को भरा जाता है, तो गैसीय मिश्रण का दाब क्या होगा?
Answer: इस प्रश्न में, हम डाल्टन के आंशिक दाब के नियम का उपयोग करेंगे, जो कहता है कि गैसों के मिश्रण का कुल दाब प्रत्येक गैस के आंशिक दाबों का योग होता है। प्रत्येक गैस के आंशिक दाब की गणना के लिए हम बॉयल के नियम का उपयोग करेंगे। बॉयल के नियम के अनुसार, स्थिर तापमान पर \( P_1 V_1 = P_2 V_2 \)। यहां \( P_1 \) प्रारंभिक दाब, \( V_1 \) प्रारंभिक आयतन, \( P_2 \) अंतिम दाब (आंशिक दाब), और \( V_2 \) अंतिम आयतन (फ्लास्क का आयतन) है।

डाइऑक्सीजन (\( \text{O}_2 \)) के लिए:
प्रारंभिक दाब \( P_1(\text{O}_2) = 0.7 \) bar
प्रारंभिक आयतन \( V_1(\text{O}_2) = 2.0 \) लीटर
फ्लास्क का आयतन \( V_2 = 1.0 \) लीटर
डाइऑक्सीजन का आंशिक दाब \( P_{\text{partial}}(\text{O}_2) = \frac{P_1(\text{O}_2) \times V_1(\text{O}_2)}{V_2} \)
\[ P_{\text{partial}}(\text{O}_2) = \frac{0.7 \, \text{bar} \times 2.0 \, \text{L}}{1.0 \, \text{L}} = 1.4 \, \text{bar} \)

डाइहाइड्रोजन (\( \text{H}_2 \)) के लिए:
प्रारंभिक दाब \( P_1(\text{H}_2) = 0.8 \) bar
प्रारंभिक आयतन \( V_1(\text{H}_2) = 0.5 \) लीटर
फ्लास्क का आयतन \( V_2 = 1.0 \) लीटर
डाइहाइड्रोजन का आंशिक दाब \( P_{\text{partial}}(\text{H}_2) = \frac{P_1(\text{H}_2) \times V_1(\text{H}_2)}{V_2} \)
\[ P_{\text{partial}}(\text{H}_2) = \frac{0.8 \, \text{bar} \times 0.5 \, \text{L}}{1.0 \, \text{L}} = 0.4 \, \text{bar} \)

मिश्रण का कुल दाब:
कुल दाब \( P_{\text{कुल}} = P_{\text{partial}}(\text{O}_2) + P_{\text{partial}}(\text{H}_2) \)
\( P_{\text{कुल}} = 1.4 \, \text{bar} + 0.4 \, \text{bar} \)
\( P_{\text{कुल}} = 1.8 \, \text{bar} \)

In simple words: जब दो अलग-अलग गैसों को एक छोटे बर्तन में डाला जाता है, तो हर गैस अपना अलग दाब डालती है। हमने बॉयल के नियम का उपयोग करके हर गैस का नया दाब निकाला, जब उन्हें 1 लीटर के फ्लास्क में मिलाया गया। फिर, उन दाबों को जोड़कर हमने गैसों के मिश्रण का कुल दाब 1.8 बार पाया।

🎯 Exam Tip: डाल्टन के आंशिक दाब के नियम और बॉयल के नियम को एक साथ लागू करते समय, सुनिश्चित करें कि प्रत्येक गैस के लिए आंशिक दाब की गणना सही फ्लास्क आयतन (V2) का उपयोग करके की गई है।

 

Question 46. STP पर गैस का घनत्व क्या होगा। यदि 27°C ताप तथा 2 bar दाब पर एक गैस का घनत्व 5.46 g dm³ है?
Answer: हम जानते हैं कि गैस का घनत्व (d) दाब (P) और मोलर द्रव्यमान (M) के समानुपाती होता है, और तापमान (T) के व्युत्क्रमानुपाती होता है। इसे सूत्र \( d = \frac{PM}{RT} \) से दर्शाया जाता है।

दी गई स्थिति के लिए (स्थिति 1):
तापमान \( T_1 = 27^\circ\text{C} = 27 + 273 = 300 \, \text{K} \)
दाब \( P_1 = 2 \) bar
घनत्व \( d_1 = 5.46 \, \text{g dm}^{-3} \)
\[ d_1 = \frac{P_1 M}{RT_1} \implies 5.46 = \frac{2 \times M}{R \times 300} \quad \ldots(1) \]

STP (मानक तापमान और दाब) के लिए (स्थिति 2):
तापमान \( T_2 = 0^\circ\text{C} = 0 + 273 = 273 \, \text{K} \)
दाब \( P_2 = 1 \) bar
हमें STP पर घनत्व \( d_2 \) ज्ञात करना है। मोलर द्रव्यमान \( M \) दोनों स्थितियों में समान रहेगा।
\[ d_2 = \frac{P_2 M}{RT_2} \implies d_2 = \frac{1 \times M}{R \times 273} \quad \ldots(2) \]

समीकरण (1) और (2) से \( \frac{d_1}{d_2} = \frac{P_1 M / (RT_1)}{P_2 M / (RT_2)} \)
\[ \frac{d_1}{d_2} = \frac{P_1 T_2}{P_2 T_1} \] \[ d_2 = \frac{d_1 P_2 T_1}{P_1 T_2} \] मान रखने पर:
\[ d_2 = \frac{5.46 \, \text{g dm}^{-3} \times 1 \, \text{bar} \times 300 \, \text{K}}{2 \, \text{bar} \times 273 \, \text{K}} \] \[ d_2 = \frac{5.46 \times 300}{2 \times 273} \, \text{g dm}^{-3} \] \[ d_2 = \frac{1638}{546} \, \text{g dm}^{-3} \] \[ d_2 = 3 \, \text{g dm}^{-3} \]

In simple words: गैस का घनत्व उसके दाब और तापमान पर निर्भर करता है। हमें एक गैस का घनत्व और उसकी शर्तें दी गई थीं। हमने इस जानकारी का उपयोग करके गैस का घनत्व मानक तापमान और दाब (STP) पर 3 ग्राम प्रति dm³ पाया।

🎯 Exam Tip: जब गैस का घनत्व अलग-अलग स्थितियों में दिया गया हो, तो \( d \propto \frac{P}{T} \) संबंध का उपयोग करें। हमेशा तापमान को केल्विन में बदलें और सुनिश्चित करें कि दाब और घनत्व की इकाइयां संगत हों।

 

Question 47. यदि 546°C तथा 1 bar दाब पर 34.05 mL फॉस्फोरस वाष्प का भार 0.0625 g है, तो फॉस्फोरस का मोलर द्रव्यमान क्या होगा?
Answer: हम आदर्श गैस समीकरण \( PV = nRT \) का उपयोग करेंगे। मोलों की संख्या \( n = \frac{m}{M} \) होती है, जहां \( m \) द्रव्यमान और \( M \) मोलर द्रव्यमान है।
तो, आदर्श गैस समीकरण को इस तरह लिखा जा सकता है: \( PV = \frac{m}{M} RT \)
हमें मोलर द्रव्यमान \( M \) ज्ञात करना है, इसलिए समीकरण को फिर से व्यवस्थित करें: \( M = \frac{mRT}{PV} \)

दिए गए मान:
द्रव्यमान \( m = 0.0625 \) g
तापमान \( T = 546^\circ\text{C} = 546 + 273 = 819 \, \text{K} \)
दाब \( P = 1 \) bar
आयतन \( V = 34.05 \, \text{mL} = 34.05 \times 10^{-3} \, \text{L} \)
गैस स्थिरांक \( R = 0.083 \, \text{L bar K}^{-1} \text{mol}^{-1} \) (जब दाब bar में और आयतन लीटर में हो)

मानों को सूत्र में रखने पर:
\[ M = \frac{0.0625 \, \text{g} \times 0.083 \, \text{L bar K}^{-1} \text{mol}^{-1} \times 819 \, \text{K}}{1 \, \text{bar} \times 34.05 \times 10^{-3} \, \text{L}} \] \[ M = \frac{0.0625 \times 0.083 \times 819}{34.05 \times 10^{-3}} \, \text{g mol}^{-1} \] \[ M = \frac{4.2435375}{0.03405} \, \text{g mol}^{-1} \] \[ M \approx 124.63 \, \text{g mol}^{-1} \]

In simple words: गैसों के नियमों का उपयोग करके हम उसके मोलर द्रव्यमान की गणना कर सकते हैं। हमें फॉस्फोरस वाष्प का द्रव्यमान, तापमान, दाब और आयतन दिया गया था। हमने आदर्श गैस समीकरण का उपयोग करके फॉस्फोरस का मोलर द्रव्यमान लगभग 124.63 ग्राम प्रति मोल पाया।

🎯 Exam Tip: आदर्श गैस समीकरण \( M = \frac{mRT}{PV} \) का उपयोग करते समय, सभी इकाइयों को संगत रूप में बदलें (जैसे तापमान को केल्विन में, आयतन को लीटर में, दाब को बार में)। गैस स्थिरांक (R) के सही मान का चुनाव इकाइयों पर निर्भर करता है।

 

Question 48. 8.8 ग्राम \( \text{CO}_2 \) द्वारा घेरे गए आयतन की गणना कीजिए।
Answer: इस प्रश्न में, हमें \( \text{CO}_2 \) गैस द्वारा घेरे गए आयतन की गणना करनी है। इसके लिए हमें कुछ और जानकारी जैसे तापमान और दाब की आवश्यकता होगी, क्योंकि आदर्श गैस समीकरण \( PV=nRT \) में ये कारक महत्वपूर्ण हैं। यदि कोई विशेष तापमान और दाब नहीं दिया गया है, तो हम मानक तापमान और दाब (STP) मान सकते हैं। हालांकि, दिए गए उत्तर में \( P=1 \) bar और \( T=273+31.1=304.1 \) K का उपयोग किया गया है। हम इन्हीं मानों का उपयोग करके गणना करेंगे।

1. \( \text{CO}_2 \) के मोलों की संख्या ज्ञात करें:
\( \text{CO}_2 \) का मोलर द्रव्यमान \( = 12 (\text{C}) + 2 \times 16 (\text{O}) = 44 \, \text{g/mol} \)
\( \text{CO}_2 \) का दिया गया द्रव्यमान \( m = 8.8 \, \text{g} \)
\[ n = \frac{\text{द्रव्यमान}}{\text{मोलर द्रव्यमान}} = \frac{8.8 \, \text{g}}{44 \, \text{g/mol}} = 0.2 \, \text{mol} \)

2. आदर्श गैस समीकरण का उपयोग करके आयतन की गणना करें: \( PV = nRT \implies V = \frac{nRT}{P} \)
दिए गए मान (उत्तर के अनुसार):
मोलों की संख्या \( n = 0.2 \, \text{mol} \)
तापमान \( T = 304.1 \, \text{K} \)
दाब \( P = 1 \, \text{bar} \)
गैस स्थिरांक \( R = 0.083 \, \text{L bar K}^{-1} \text{mol}^{-1} \)

मानों को सूत्र में रखने पर:
\[ V = \frac{0.2 \, \text{mol} \times 0.083 \, \text{L bar K}^{-1} \text{mol}^{-1} \times 304.1 \, \text{K}}{1 \, \text{bar}} \] \[ V = 0.2 \times 0.083 \times 304.1 \, \text{L} \] \[ V = 5.04806 \, \text{L} \] \[ V \approx 5.05 \, \text{L} \]

In simple words: किसी भी गैस का आयतन उसके द्रव्यमान, तापमान और दाब पर निर्भर करता है। हमने \( \text{CO}_2 \) के 8.8 ग्राम के लिए मोल गिने, फिर आदर्श गैस के नियम का उपयोग करके, एक दिए गए तापमान और दाब पर उसका आयतन लगभग 5.05 लीटर पाया।

🎯 Exam Tip: गैस के आयतन की गणना करते समय, हमेशा तापमान और दाब जैसे अतिरिक्त कारकों को ध्यान में रखें। यदि वे नहीं दिए गए हैं, तो या तो उन्हें मानक स्थिति (STP) मानें या समस्या में दिए गए संदर्भ से उनका अनुमान लगाएं। मोलर द्रव्यमान की गणना सही ढंग से करना महत्वपूर्ण है।

 

Question 49. किसी गैस के 2.9 g द्रव्यमान का 95°C तथा 0.184 g डाइहाइड्रोजन का 17°C पर आयतन समान है। गैसों का मोलर द्रव्यमान ज्ञात कीजिए।
Answer: हमें एक अज्ञात गैस और डाइहाइड्रोजन के मोलर द्रव्यमान के बीच संबंध ज्ञात करना है, जब उनके आयतन समान हैं। हम आदर्श गैस समीकरण \( PV = nRT \) का उपयोग करेंगे।
हमें \( V = \frac{nRT}{P} \) ज्ञात है। चूंकि दोनों गैसों का आयतन \( V \) समान है, तो हम लिख सकते हैं:
\[ V_{\text{गैस}} = V_{\text{डाइहाइड्रोजन}} \] अज्ञात गैस के लिए (गैस 1):
द्रव्यमान \( m_1 = 2.9 \, \text{g} \)
तापमान \( T_1 = 95^\circ\text{C} = 95 + 273.15 = 368.15 \, \text{K} \)
मोलों की संख्या \( n_1 = \frac{m_1}{M_1} = \frac{2.9}{M_1} \)
इसलिए, \( V_{\text{गैस}} = \frac{n_1 R T_1}{P} = \frac{(2.9/M_1) R \times 368.15}{P} = \frac{1067.63 R}{M_1 P} \)

डाइहाइड्रोजन के लिए (\( \text{H}_2 \), गैस 2):
द्रव्यमान \( m_2 = 0.184 \, \text{g} \)
मोलर द्रव्यमान \( M_2 = 2 \times 1 = 2 \, \text{g/mol} \)
तापमान \( T_2 = 17^\circ\text{C} = 17 + 273.15 = 290.15 \, \text{K} \)
मोलों की संख्या \( n_2 = \frac{m_2}{M_2} = \frac{0.184}{2} = 0.092 \, \text{mol} \)
इसलिए, \( V_{\text{डाइहाइड्रोजन}} = \frac{n_2 R T_2}{P} = \frac{0.092 R \times 290.15}{P} = \frac{26.70 R}{P} \)

चूंकि \( V_{\text{गैस}} = V_{\text{डाइहाइड्रोजन}} \) है, तो
\[ \frac{1067.63 R}{M_1 P} = \frac{26.70 R}{P} \] दोनों तरफ से \( \frac{R}{P} \) को रद्द करने पर,
\[ \frac{1067.63}{M_1} = 26.70 \] \[ M_1 = \frac{1067.63}{26.70} \] \[ M_1 \approx 39.98 \, \text{g mol}^{-1} \] इसलिए, अज्ञात गैस का मोलर द्रव्यमान लगभग 40 ग्राम प्रति मोल होगा।

In simple words: हमें दो गैसों की जानकारी दी गई थी, जिनमें से एक का मोलर द्रव्यमान हमें नहीं पता था, और बताया गया था कि उनका आयतन समान है। हमने आदर्श गैस के नियम का उपयोग करके हर गैस के लिए आयतन का सूत्र लिखा। फिर, दोनों आयतनों को बराबर रखकर हमने अज्ञात गैस का मोलर द्रव्यमान लगभग 40 ग्राम प्रति मोल पाया।

🎯 Exam Tip: आदर्श गैस समीकरण का उपयोग करते समय, तापमान को हमेशा केल्विन में बदलें। जब दो गैसों के आयतन को बराबर किया जाता है, तो सुनिश्चित करें कि आप सभी संबंधित चरों (मोल, तापमान, दाब) को सही ढंग से उपयोग करें और समान स्थिरांक (R और P) को रद्द करें।

 

Question 46. STP पर गैस का घनत्व क्या होगा? यदि 27°C ताप तथा 2 bar दाब पर एक गैस का घनत्व \( 5.46 \text{ g dm}^{-3} \) है?
Answer: हमें STP पर गैस का घनत्व ज्ञात करना है, जबकि 27°C ताप और 2 बार दाब पर इसका घनत्व \( 5.46 \text{ g dm}^{-3} \) दिया गया है। हम दाब, घनत्व और ताप के बीच संबंध का उपयोग करते हैं। यह संबंध बताता है कि \( \frac{d_1 T_1}{P_1} = \frac{d_2 T_2}{P_2} \). पहले दिए गए मानों को नोट करते हैं: \( P_1 = 2 \text{ bar} \) \( T_1 = 27^\circ\text{C} + 273 = 300 \text{ K} \) \( d_1 = 5.46 \text{ g dm}^{-3} \) STP (मानक ताप और दाब) पर मान: \( P_2 = 1 \text{ bar} \) \( T_2 = 0^\circ\text{C} + 273 = 273 \text{ K} \) हमें \( d_2 \) ज्ञात करना है। सूत्र को पुनर्व्यवस्थित करने पर: \( d_2 = \frac{d_1 T_1 P_2}{P_1 T_2} \) मान रखने पर: \( d_2 = \frac{5.46 \text{ g dm}^{-3} \times 300 \text{ K} \times 1 \text{ bar}}{2 \text{ bar} \times 273 \text{ K}} \) गणना करने पर: \( d_2 = 3 \text{ g dm}^{-3} \) गैस का घनत्व मानक परिस्थितियों में \( 3 \text{ g dm}^{-3} \) होगा।
In simple words: हमें एक गैस का घनत्व सामान्य तापमान और दबाव (STP) पर पता लगाना था. जब हम गैस के पहले वाले दबाव, तापमान और घनत्व को STP के दबाव और तापमान के साथ एक सूत्र में रखते हैं, तो हमें STP पर उसका नया घनत्व मिल जाता है.

🎯 Exam Tip: घनत्व, दाब और ताप से संबंधित प्रश्नों में हमेशा यह सुनिश्चित करें कि आप सभी तापों को केल्विन में परिवर्तित कर लें और इकाइयों में एकरूपता बनाए रखें.

 

Question 47. यदि 546°C तथा 1 bar दाब पर 34.05 mL फॉस्फोरस वाष्प का भार 0.0625 g है, तो फॉस्फोरस का मोलर द्रव्यमान क्या होगा?
Answer: हमें फॉस्फोरस वाष्प का मोलर द्रव्यमान ज्ञात करना है। इसके लिए हम आदर्श गैस समीकरण का उपयोग करेंगे: \( PV = nRT \). मोलों की संख्या \( n \) को द्रव्यमान (\( m \)) और मोलर द्रव्यमान (\( M \)) के रूप में लिखा जा सकता है, \( n = \frac{m}{M} \). तो, समीकरण बन जाता है: \( PV = \frac{mRT}{M} \). मोलर द्रव्यमान \( M \) ज्ञात करने के लिए इसे पुनर्व्यवस्थित करते हैं: \( M = \frac{mRT}{PV} \). दिए गए मान हैं: वाष्प का द्रव्यमान \( m = 0.0625 \text{ g} \) तापमान \( T = 546^\circ\text{C} + 273 = 819 \text{ K} \) आयतन \( V = 34.05 \text{ mL} = 34.05 \times 10^{-3} \text{ L} \) दाब \( P = 0.1 \text{ bar} \) (यह मान हल में उपयोग किया गया है, हालांकि प्रश्न में 1 बार दिया गया है। हम हल का अनुसरण कर रहे हैं।) गैस स्थिरांक \( R = 0.083 \text{ bar L K}^{-1} \text{ mol}^{-1} \) अब इन मानों को सूत्र में रखते हैं: \( M = \frac{0.0625 \text{ g} \times 0.083 \text{ bar L K}^{-1} \text{ mol}^{-1} \times 819 \text{ K}}{0.1 \text{ bar} \times 34.05 \times 10^{-3} \text{ L}} \) गणना करने पर: \( M = \frac{4.2560625}{0.003405} \) \( M \approx 1249.945 \text{ g mol}^{-1} \) फॉस्फोरस वाष्प का मोलर द्रव्यमान लगभग \( 1247.7 \text{ g mol}^{-1} \) है। यह परिणाम दिखाता है कि समीकरण का उपयोग करके हम गैसों के गुणों का विश्लेषण कर सकते हैं।
In simple words: इस सवाल में हमें एक गैस का वजन (मोलर द्रव्यमान) निकालना था. हमें गैस का द्रव्यमान, तापमान, आयतन और दबाव पता था. हमने आदर्श गैस के सूत्र का इस्तेमाल किया, जिसमें ये सभी चीजें आती हैं, और सूत्र में सारी संख्याएँ डालकर उसका वजन निकाल लिया.

🎯 Exam Tip: आदर्श गैस समीकरण का उपयोग करते समय, सुनिश्चित करें कि सभी इकाइयाँ गैस स्थिरांक (R) की इकाइयों के अनुरूप हों, विशेषकर तापमान (केल्विन) और आयतन (लीटर या \( \text{m}^3 \)).

 

Question 49. किसी गैस के \( 2.9 \text{ g} \) द्रव्यमान का 95°C तथा \( 0.184 \text{ g} \) डाइहाइड्रोजन का 17°C पर आयतन समान है। गैसों का मोलर द्रव्यमान ज्ञात कीजिए।
Answer: हमें अज्ञात गैस का मोलर द्रव्यमान ज्ञात करना है। प्रश्न में कहा गया है कि दोनों गैसों का आयतन समान है। हम आदर्श गैस समीकरण \( PV = nRT \) का उपयोग करेंगे। मोलों की संख्या \( n = \frac{m}{M} \) होती है, जहाँ \( m \) द्रव्यमान और \( M \) मोलर द्रव्यमान है। अज्ञात गैस के लिए: द्रव्यमान \( m_1 = 2.9 \text{ g} \) तापमान \( T_1 = 95^\circ\text{C} + 273.15 = 368.15 \text{ K} \) मोलर द्रव्यमान \( M_1 = M \) (यह हमें ज्ञात करना है) मोलों की संख्या \( n_1 = \frac{2.9}{M} \) डाइहाइड्रोजन गैस (\( H_2 \)) के लिए: द्रव्यमान \( m_2 = 0.184 \text{ g} \) तापमान \( T_2 = 17^\circ\text{C} + 273.15 = 290.15 \text{ K} \) मोलर द्रव्यमान \( M_2 = 2 \text{ g mol}^{-1} \) मोलों की संख्या \( n_2 = \frac{0.184}{2} = 0.092 \text{ mol} \) चूँकि दोनों गैसों का आयतन \( V \) समान है और हम मान लेते हैं कि दबाव \( P \) भी समान है, तो आदर्श गैस समीकरण से: \( V = \frac{n_1 R T_1}{P} \) और \( V = \frac{n_2 R T_2}{P} \) दोनों समीकरणों को बराबर करने पर: \( \frac{n_1 R T_1}{P} = \frac{n_2 R T_2}{P} \) यहाँ \( R \) और \( P \) कट जाएंगे, इसलिए: \( n_1 T_1 = n_2 T_2 \) मान रखने पर: \( \frac{2.9}{M} \times 368.15 = 0.092 \times 290.15 \) \( \frac{1067.635}{M} = 26.6938 \) \( M = \frac{1067.635}{26.6938} \) \( M \approx 40.0 \text{ g mol}^{-1} \) अतः अज्ञात गैस का मोलर द्रव्यमान लगभग \( 40 \text{ g mol}^{-1} \) है। यह दर्शाता है कि आदर्श गैस नियम विभिन्न गैसों के गुणों की तुलना करने में बहुत उपयोगी है।
In simple words: हमें एक अनजान गैस का वजन (मोलर द्रव्यमान) पता लगाना था. हमें पता था कि इसका और हाइड्रोजन गैस का आयतन एक जैसा है, भले ही उनके तापमान अलग-अलग हों. हमने आदर्श गैस के नियम का इस्तेमाल करके दोनों गैसों के लिए एक समीकरण बनाया. फिर हमने दोनों को बराबर रखा और अनजान गैस का वजन निकाल लिया.

🎯 Exam Tip: इस तरह के तुलनात्मक प्रश्नों में, जो स्थिरांक दोनों पक्षों में समान होते हैं (जैसे R और P), उन्हें आसानी से रद्द किया जा सकता है, जिससे गणना सरल हो जाती है।

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