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Detailed Chapter 2 परमाणु संरचना RBSE Solutions for Class 11 Chemistry
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Class 11 Chemistry Chapter 2 परमाणु संरचना RBSE Solutions PDF
RBSE Class 11 Chemistry Chapter 2 पाठ्यपुस्तक के अभ्यास प्रशन
RBSE Class 11 Chemistry Chapter 2 वस्तुनिष्ठ प्रश्न
Question 1. तत्व के परमाणु क्रमांक 25 तथा परमाणु भार 55 है, तो उसके नाभिक में होंगे -
(अ) 25 प्रोटॉन और 30 न्यूट्रॉन
(ब) 55 प्रोटॉन
(स) 25 न्यूट्रॉन और 30 प्रोटॉन
(द) 55 न्यूट्रॉन
Answer: (अ) 25 प्रोटॉन और 30 न्यूट्रॉन
In simple words: परमाणु में प्रोटॉनों की संख्या परमाणु क्रमांक के बराबर होती है, और न्यूट्रॉनों की संख्या परमाणु भार से प्रोटॉनों की संख्या घटाकर निकाली जाती है.
🎯 Exam Tip: परमाणु क्रमांक (Z) प्रोटॉनों की संख्या के बराबर होता है, और परमाणु भार (A) प्रोटॉनों व न्यूट्रॉनों की कुल संख्या होता है। न्यूट्रॉन की संख्या ज्ञात करने के लिए परमाणु भार में से परमाणु क्रमांक को घटा दें।
Question 2. H - स्पेक्ट्रम क्या दर्शाता है -
(अ) विवर्तन
(ब) ध्रुवण
Answer: (स) रेखा स्पेक्ट्रम
In simple words: हाइड्रोजन स्पेक्ट्रम वह है जो हाइड्रोजन परमाणु से निकलने वाली खास रंगों की पट्टियों को दिखाता है. यह एक प्रकार का रेखा स्पेक्ट्रम होता है, जिसमें अलग-अलग ऊर्जा स्तरों के बीच इलेक्ट्रॉन के कूदने से प्रकाश निकलता है.
🎯 Exam Tip: हाइड्रोजन स्पेक्ट्रम में विभिन्न श्रेणियाँ (जैसे लाइमैन, बामर, पाशन) होती हैं, जो इलेक्ट्रॉन के संक्रमण के आधार पर बनती हैं। इसे लाइन स्पेक्ट्रम भी कहा जाता है।
Question 4. यदि n = 3 हो, तो l के लिए कौनसा मान गलत है -
(अ) 0
(ब) 1
(स) 2
(द) 3
Answer: (द) 3
In simple words: किसी भी मुख्य क्वांटम संख्या (n) के लिए, दिगंशी क्वांटम संख्या (l) का मान 0 से (n-1) तक होता है. जब n 3 है, तो l का मान केवल 0, 1, और 2 हो सकता है.
🎯 Exam Tip: क्वांटम संख्याएं परमाणु में इलेक्ट्रॉन के ऊर्जा स्तर और व्यवहार को दर्शाती हैं। मुख्य क्वांटम संख्या (n) कोश को परिभाषित करती है, जबकि दिगंशी क्वांटम संख्या (l) उपकोश के आकार को दर्शाती है।
Question 5. किसी परमाणु के उपकोश में इलेक्ट्रॉनों की अधिकतम संख्या का निर्धारण निम्न के द्वारा किया जाता है -
(अ) \( 4l + 2 \)
(ब) \( 2l + 1 \)
(स) \( n^2 \)
(द) \( 2n^2 \)
Answer: (अ) \( 4l + 2 \)
In simple words: एक उपकोश में अधिकतम कितने इलेक्ट्रॉन आ सकते हैं, यह उसके दिगंशी क्वांटम संख्या (l) पर निर्भर करता है, जिसका सूत्र \( 2(2l+1) \) या \( 4l+2 \) होता है.
🎯 Exam Tip: किसी भी उपकोश में कक्षकों की संख्या \( (2l+1) \) होती है, और प्रत्येक कक्षक में अधिकतम दो इलेक्ट्रॉन होते हैं, इसलिए कुल इलेक्ट्रॉन \( 2 \times (2l+1) \) होते हैं।
RBSE Class 11 Chemistry Chapter 2 अतिलघूत्तरात्मक प्रश्न
Question 6. मानक ताप और दाब पर 34 mg NH3 में प्रोटॉनों की कुल संख्या बताइए।
Answer: सबसे पहले, अमोनिया (NH3) के एक अणु में प्रोटॉनों की संख्या निकालते हैं। नाइट्रोजन (N) का परमाणु क्रमांक 7 है, तो उसमें 7 प्रोटॉन होते हैं। हाइड्रोजन (H) का परमाणु क्रमांक 1 है, तो उसमें 1 प्रोटॉन होता है। अमोनिया में एक नाइट्रोजन और तीन हाइड्रोजन होते हैं।
NH3 के एक अणु में प्रोटॉनों की संख्या = 7 (N के लिए) + 3 \( \times \) 1 (H के लिए) = 10 प्रोटॉन।
अब, 34 mg अमोनिया का मोलर द्रव्यमान 17 g/mol है, इसलिए 34 mg (या 0.034 g) अमोनिया में मोलों की संख्या ज्ञात करते हैं।
अमोनिया के मोल = \( \frac{0.034 \text{ g}}{17 \text{ g/mol}} = 0.002 \) मोल।
एक मोल में \( 6.022 \times 10^{23} \) अणु होते हैं (आवोगाद्रो संख्या)।
इसलिए, 0.002 मोल अमोनिया में अणुओं की संख्या = \( 0.002 \times 6.022 \times 10^{23} = 1.2044 \times 10^{21} \) अणु।
प्रत्येक अणु में 10 प्रोटॉन होते हैं, तो कुल प्रोटॉनों की संख्या = \( 1.2044 \times 10^{21} \times 10 = 1.2044 \times 10^{22} \) प्रोटॉन।
In simple words: अमोनिया के एक अणु में 10 प्रोटॉन होते हैं. अगर आपके पास 34 मिलीग्राम अमोनिया है, तो उसमें 0.002 मोल अमोनिया होगी. इसका मतलब है कि उसमें कुल \( 1.2044 \times 10^{21} \) अमोनिया के अणु हैं. इन सभी अणुओं में कुल मिलाकर \( 1.2044 \times 10^{22} \) प्रोटॉन होंगे.
🎯 Exam Tip: ऐसे प्रश्नों को हल करते समय, पहले एक अणु में प्रोटॉन की संख्या निकालें, फिर दिए गए द्रव्यमान को मोल में बदलें और अंत में कुल प्रोटॉन की संख्या ज्ञात करने के लिए आवोगाद्रो संख्या और प्रति-अणु प्रोटॉन संख्या का उपयोग करें।
Question 7. मेथेन के एक मोल उपस्थित इलेक्ट्रॉनों की संख्या ज्ञात कीजिए।
Answer: मेथेन (CH4) का एक अणु 1 कार्बन (C) परमाणु और 4 हाइड्रोजन (H) परमाणुओं से बना होता है।
कार्बन का परमाणु क्रमांक 6 है, इसलिए उसमें 6 इलेक्ट्रॉन होते हैं।
हाइड्रोजन का परमाणु क्रमांक 1 है, इसलिए उसमें 1 इलेक्ट्रॉन होता है।
मेथेन के एक अणु में कुल इलेक्ट्रॉनों की संख्या = 6 (कार्बन के लिए) + 4 \( \times \) 1 (हाइड्रोजन के लिए) = 10 इलेक्ट्रॉन।
मेथेन के एक मोल में अणुओं की संख्या आवोगाद्रो संख्या के बराबर होती है, जो \( 6.022 \times 10^{23} \) होती है।
अतः मेथेन के एक मोल में कुल इलेक्ट्रॉनों की संख्या = (एक अणु में इलेक्ट्रॉनों की संख्या) \( \times \) (एक मोल में अणुओं की संख्या)
= \( 10 \times 6.022 \times 10^{23} = 6.022 \times 10^{24} \) इलेक्ट्रॉन।
In simple words: मेथेन के एक अणु में 10 इलेक्ट्रॉन होते हैं. एक मोल मेथेन में बहुत सारे अणु होते हैं (आवोगाद्रो संख्या के बराबर), इसलिए कुल इलेक्ट्रॉनों की संख्या \( 6.022 \times 10^{24} \) होगी.
🎯 Exam Tip: यह ध्यान रखें कि परमाणु में इलेक्ट्रॉनों की संख्या हमेशा परमाणु क्रमांक के बराबर होती है, और मोल की अवधारणा रासायनिक गणनाओं के लिए महत्वपूर्ण है।
Question 8. 4d और 4f में से कौनसा कक्षक उच्च प्रभावी नाभिकीय आवेश अनुभव करेगा?
Answer: प्रभावी नाभिकीय आवेश (Zeff) का अनुभव करने की क्षमता कक्षक के n+l मान पर निर्भर करती है। जिस कक्षक के लिए n+l मान कम होता है, वह नाभिक के अधिक पास होता है और इसलिए अधिक प्रभावी नाभिकीय आवेश अनुभव करता है। n मुख्य क्वांटम संख्या है और l दिगंशी क्वांटम संख्या है।
4d कक्षक के लिए: n = 4, l = 2. तो n+l = 4+2 = 6.
4f कक्षक के लिए: n = 4, l = 3. तो n+l = 4+3 = 7.
क्योंकि 4d कक्षक के लिए n+l का मान (6) 4f कक्षक के n+l मान (7) से कम है, इसलिए 4d कक्षक नाभिक के अधिक पास होगा और उच्च प्रभावी नाभिकीय आवेश अनुभव करेगा।
In simple words: 4d कक्षक 4f कक्षक से ज्यादा प्रभावी नाभिकीय आवेश महसूस करेगा. ऐसा इसलिए होता है क्योंकि 4d का n+l मान 4f से कम है, जिसका मतलब है कि 4d कक्षक नाभिक के ज्यादा करीब है.
🎯 Exam Tip: प्रभावी नाभिकीय आवेश और स्क्रीनिंग प्रभाव को समझने के लिए (n+l) नियम एक अच्छा अनुमान देता है; जिस कक्षक का (n+l) मान कम होता है, वह नाभिक के अधिक समीप होता है और अधिक ऊर्जावान होता है।
Question 9. n = 4 तथा m = \( -\frac{1}{2} \) वाले उपकोश में कितने इलेक्ट्रॉन उपस्थित होंगे?
Answer: यह सवाल थोड़ा अस्पष्ट है क्योंकि m को अक्सर चुंबकीय क्वांटम संख्या (ml) के रूप में प्रयोग किया जाता है, जो कक्षक के अभिविन्यास को दर्शाता है। यहाँ m को स्पिन क्वांटम संख्या (ms) के रूप में लिया गया है, जो इलेक्ट्रॉन के चक्रण को दर्शाता है, जिसका मान \( +\frac{1}{2} \) या \( -\frac{1}{2} \) होता है।
n = 4 मुख्य क्वांटम संख्या के लिए, l के संभावित मान 0, 1, 2, 3 होते हैं, जो क्रमशः 4s, 4p, 4d, 4f उपकोशों को दर्शाते हैं।
प्रत्येक कक्षक में अधिकतम दो इलेक्ट्रॉन हो सकते हैं, जिनमें से एक का चक्रण \( +\frac{1}{2} \) और दूसरे का \( -\frac{1}{2} \) होता है।
n = 4 के लिए कुल कक्षकों की संख्या = \( n^2 = 4^2 = 16 \) होती है।
चूंकि प्रत्येक कक्षक में \( -\frac{1}{2} \) स्पिन वाला एक इलेक्ट्रॉन होता है, इसलिए कुल 16 कक्षकों में 16 इलेक्ट्रॉन होंगे, जिनका स्पिन \( -\frac{1}{2} \) होगा।
In simple words: जब मुख्य क्वांटम संख्या n 4 होती है, तो कुल 16 कक्षक होते हैं. हर कक्षक में एक इलेक्ट्रॉन \( -\frac{1}{2} \) के स्पिन के साथ रह सकता है, इसलिए कुल 16 इलेक्ट्रॉन होंगे जिनका स्पिन \( -\frac{1}{2} \) होगा.
🎯 Exam Tip: क्वांटम संख्याएं इलेक्ट्रॉन की अवस्था को बताती हैं। स्पिन क्वांटम संख्या (ms) हमेशा \( +\frac{1}{2} \) या \( -\frac{1}{2} \) होती है, जो प्रत्येक कक्षक में दो इलेक्ट्रॉनों के चक्रण को दर्शाती है।
Question 10. Fe तथा Cr में अयुग्मित इलेक्ट्रॉनों की संख्या बताइए।
Answer: अयुग्मित इलेक्ट्रॉन वे होते हैं जो किसी कक्षक में अकेले होते हैं, यानी उनका कोई जोड़ा नहीं होता।
**क्रोमियम (Cr, परमाणु क्रमांक 24):**
क्रोमियम का इलेक्ट्रॉनिक विन्यास अपवाद स्वरूप होता है क्योंकि अर्ध-भरे हुए कक्षक अधिक स्थायी होते हैं।
विन्यास: \( 1s^2 2s^2 2p^6 3s^2 3p^6 3d^5 4s^1 \)
यहां, 3d उपकोश में 5 इलेक्ट्रॉन और 4s उपकोश में 1 इलेक्ट्रॉन है।
3d कक्षक: \( \uparrow \uparrow \uparrow \uparrow \uparrow \) (सभी 5 d-कक्षक एक-एक इलेक्ट्रॉन के साथ)
4s कक्षक: \( \uparrow \) (1 s-कक्षक एक इलेक्ट्रॉन के साथ)
कुल अयुग्मित इलेक्ट्रॉन = 5 (3d से) + 1 (4s से) = 6 अयुग्मित इलेक्ट्रॉन।
**आयरन (Fe, परमाणु क्रमांक 26):**
आयरन का इलेक्ट्रॉनिक विन्यास: \( 1s^2 2s^2 2p^6 3s^2 3p^6 3d^6 4s^2 \)
यहां, 3d उपकोश में 6 इलेक्ट्रॉन और 4s उपकोश में 2 इलेक्ट्रॉन है।
4s कक्षक में 2 इलेक्ट्रॉन हैं, जो युग्मित हैं (\( \uparrow\downarrow \)).
3d कक्षक: पहला 3d कक्षक युग्मित है, बाकी चार अयुग्मित हैं।
3d कक्षक: \( \uparrow\downarrow \uparrow \uparrow \uparrow \uparrow \)
कुल अयुग्मित इलेक्ट्रॉन = 4 अयुग्मित इलेक्ट्रॉन।
In simple words: क्रोमियम में 6 अकेले इलेक्ट्रॉन होते हैं, क्योंकि इसके 3d और 4s कक्षक आधे भरे होते हैं, जिससे स्थिरता मिलती है. आयरन में 4 अकेले इलेक्ट्रॉन होते हैं क्योंकि इसके 3d कक्षक में 6 इलेक्ट्रॉन होते हैं, जिनमें से एक जोड़ा बन जाता है और चार अकेले रह जाते हैं.
🎯 Exam Tip: अयुग्मित इलेक्ट्रॉनों की संख्या ज्ञात करने के लिए हुण्ड के नियम और पाउली के अपवर्जन नियम को याद रखना महत्वपूर्ण है। क्रोमियम और कॉपर जैसे तत्वों के इलेक्ट्रॉनिक विन्यास अपवाद दिखाते हैं, जो अर्ध-भरे हुए या पूर्ण-भरे हुए कक्षकों की अतिरिक्त स्थिरता के कारण होता है।
Question 11. कक्षकों में इलेक्ट्रॉन की ऊर्जा, कौनसी कांटम संख्या के मान पर निर्भर करती है?
Answer: कक्षकों में इलेक्ट्रॉन की ऊर्जा मुख्य रूप से मुख्य क्वांटम संख्या (n) और दिगंशी क्वांटम संख्या (l) के मान पर निर्भर करती है। ये दोनों क्वांटम संख्याएं मिलकर (n+l) नियम का आधार बनती हैं, जो बहु-इलेक्ट्रॉन परमाणुओं में कक्षकों की ऊर्जा के क्रम को निर्धारित करता है। जिस कक्षक के लिए (n+l) का मान कम होता है, उसकी ऊर्जा कम होती है। यदि (n+l) का मान समान हो, तो कम n वाले कक्षक की ऊर्जा कम होती है।
In simple words: इलेक्ट्रॉन की ऊर्जा मुख्य रूप से दो संख्याओं पर निर्भर करती है: मुख्य क्वांटम संख्या (n) और दिगंशी क्वांटम संख्या (l). ये दोनों मिलकर तय करती हैं कि इलेक्ट्रॉन कितना ऊर्जावान है.
🎯 Exam Tip: एकल-इलेक्ट्रॉन परमाणु (जैसे हाइड्रोजन) में, इलेक्ट्रॉन की ऊर्जा केवल मुख्य क्वांटम संख्या (n) पर निर्भर करती है, जबकि बहु-इलेक्ट्रॉन परमाणुओं में, यह n और l दोनों पर निर्भर करती है।
Question 12. निम्न इलेक्ट्रॉनिक विन्यास का परमाणु कौनसे आवर्त का सदस्य होगा – \( 1s^2 2s^2 2p^6 3s^1 \)
Answer: किसी परमाणु का आवर्त (period) उसकी उच्चतम मुख्य क्वांटम संख्या (n) द्वारा निर्धारित होता है, जो उसके सबसे बाहरी कोश को दर्शाता है। दिए गए इलेक्ट्रॉनिक विन्यास \( 1s^2 2s^2 2p^6 3s^1 \) में सबसे बाहरी इलेक्ट्रॉन 3s कक्षक में है, जिसकी मुख्य क्वांटम संख्या n = 3 है।
इसलिए, यह परमाणु तीसरे आवर्त का सदस्य होगा। यह सोडियम (Na) परमाणु का इलेक्ट्रॉनिक विन्यास है, जो आवर्त सारणी में तीसरे आवर्त में स्थित है।
In simple words: परमाणु का आवर्त सबसे बड़ी मुख्य क्वांटम संख्या (n) से पता चलता है. यहाँ, सबसे बड़ा n 3 है, इसलिए यह परमाणु तीसरे आवर्त में होगा.
🎯 Exam Tip: किसी तत्व का आवर्त हमेशा उसके सबसे बाहरी इलेक्ट्रॉन कोश की मुख्य क्वांटम संख्या के बराबर होता है। यह नियम आवर्त सारणी में तत्वों की स्थिति निर्धारित करने में मदद करता है।
Question 13. एक ग्राम भार में इलेक्ट्रॉनों की संख्या ज्ञात कीजिए।
Answer: यह सवाल 'इलेक्ट्रॉनों की कुल संख्या ज्ञात कीजिए' के बजाय 'एक ग्राम भार में इलेक्ट्रॉनों की संख्या ज्ञात कीजिए' है, जिसका अर्थ है कि एक ग्राम इलेक्ट्रॉनों में कितने इलेक्ट्रॉन होते हैं।
एक इलेक्ट्रॉन का द्रव्यमान \( = 9.1 \times 10^{-28} \) g या \( 9.1 \times 10^{-31} \) kg होता है।
हम 1 ग्राम (g) इलेक्ट्रॉनों में इलेक्ट्रॉनों की संख्या ज्ञात करना चाहते हैं।
1 ग्राम = \( 1 \times 10^{-3} \) kg होता है।
इलेक्ट्रॉनों की संख्या = \( \frac{\text{कुल द्रव्यमान}}{\text{एक इलेक्ट्रॉन का द्रव्यमान}} \)
= \( \frac{1 \text{ g}}{9.1 \times 10^{-28} \text{ g}} \)
= \( \frac{1}{9.1} \times 10^{28} \)
लगभग \( = 0.10989 \times 10^{28} \)
= \( 1.0989 \times 10^{27} \) इलेक्ट्रॉन।
इसे लगभग \( 1.099 \times 10^{27} \) इलेक्ट्रॉन कह सकते हैं।
In simple words: एक इलेक्ट्रॉन बहुत हल्का होता है. अगर आपके पास कुल 1 ग्राम इलेक्ट्रॉन हैं, तो उसमें बहुत सारे इलेक्ट्रॉन होंगे. यह संख्या एक इलेक्ट्रॉन के द्रव्यमान से 1 ग्राम को भाग देकर मिलती है, जो लगभग \( 1.099 \times 10^{27} \) इलेक्ट्रॉन है.
🎯 Exam Tip: इलेक्ट्रॉन का द्रव्यमान बहुत छोटा होता है, इसलिए एक ग्राम में इलेक्ट्रॉनों की संख्या बहुत बड़ी होती है। मात्रकों का सही रूपांतरण (ग्राम से किलोग्राम) गणनाओं में महत्वपूर्ण है।
Question 14. एक मोल इलेक्ट्रॉन के आवेश को परिकलन कीजिए।
Answer: एक मोल इलेक्ट्रॉन का आवेश ज्ञात करने के लिए, हमें एक इलेक्ट्रॉन के आवेश को आवोगाद्रो संख्या से गुणा करना होता है।
एक इलेक्ट्रॉन पर आवेश = \( 1.60219 \times 10^{-19} \) कूलम्ब (C) होता है।
आवोगाद्रो संख्या = एक मोल में कणों की संख्या \( = 6.022 \times 10^{23} \)
एक मोल इलेक्ट्रॉनों पर कुल आवेश = (एक इलेक्ट्रॉन पर आवेश) \( \times \) (आवोगाद्रो संख्या)
= \( 1.60219 \times 10^{-19} \text{ C} \times 6.022 \times 10^{23} \)
= \( 9.648 \times 10^4 \) C
इसे लगभग \( 9.65 \times 10^4 \) C भी लिख सकते हैं, जिसे एक फैराडे (1 F) के रूप में जाना जाता है।
In simple words: एक इलेक्ट्रॉन पर जो छोटा सा चार्ज होता है, उसे बहुत सारे इलेक्ट्रॉनों (एक मोल में) के लिए जोड़ दिया जाए, तो कुल चार्ज \( 9.65 \times 10^4 \) कूलम्ब होता है. इस कुल चार्ज को एक फैराडे भी कहते हैं.
🎯 Exam Tip: यह गणना फैराडे स्थिरांक का आधार है, जो इलेक्ट्रोकेमिस्ट्री में बहुत महत्वपूर्ण है। एक मोल इलेक्ट्रॉन का आवेश हमेशा फैराडे स्थिरांक के बराबर होता है।
Question 15. पीले प्रकाश की तरंगदैर्ध्य (Å) 580 nm है, इसकी आवृत्ति ज्ञात कीजिए।
Answer: प्रकाश की आवृत्ति (v) ज्ञात करने के लिए, हमें प्रकाश की गति (c) और उसकी तरंगदैर्ध्य (\( \lambda \)) के बीच संबंध का उपयोग करना होगा: \( v = \frac{c}{\lambda} \).
प्रकाश की गति (c) \( = 3 \times 10^8 \) m/s होती है।
दी गई तरंगदैर्ध्य (\( \lambda \)) \( = 580 \) nm है। नैनोमीटर (nm) को मीटर (m) में बदलना होगा: \( 1 \) nm \( = 10^{-9} \) m.
तो, \( \lambda = 580 \times 10^{-9} \) m.
अब आवृत्ति की गणना करते हैं:
\( v = \frac{3 \times 10^8 \text{ m/s}}{580 \times 10^{-9} \text{ m}} \)
\( v = \frac{3}{580} \times 10^{17} \)
\( v \approx 0.005172 \times 10^{17} \)
\( v = 5.172 \times 10^{14} \text{ s}^{-1} \) या \( 5.172 \times 10^{14} \) Hz.
In simple words: प्रकाश की गति को उसकी तरंगदैर्ध्य से भाग देकर उसकी आवृत्ति निकाल सकते हैं. पीले प्रकाश की तरंगदैर्ध्य 580 नैनोमीटर है, तो इसकी आवृत्ति लगभग \( 5.172 \times 10^{14} \) हर्ट्ज होगी.
🎯 Exam Tip: प्रकाश की गति (c), आवृत्ति (v) और तरंगदैर्ध्य (\( \lambda \)) के बीच का संबंध \( c = v \lambda \) हमेशा याद रखें। मात्रकों का सही रूपांतरण, जैसे नैनोमीटर को मीटर में, गणनाओं में बहुत महत्वपूर्ण है।
Question 16. निम्नलिखित नाभिकों में इलेक्ट्रॉन व प्रोटॉन की संख्या बताइये –
\(_{6}^{13}\text{C} \), \(_{8}^{16}\text{O}\), \(_{12}^{24}\text{Mg}\), \(_{26}^{56}\text{Fe}\)
Answer: किसी उदासीन परमाणु में इलेक्ट्रॉनों की संख्या हमेशा उसके परमाणु क्रमांक (नाभिक में प्रोटॉनों की संख्या) के बराबर होती है।
परमाणु क्रमांक (Z) तत्व के प्रतीक के निचले बाईं ओर लिखा होता है, और परमाणु भार (A) ऊपरी बाईं ओर लिखा होता है।
**कार्बन (\(_{6}^{13}\text{C}\)):**
परमाणु क्रमांक (Z) = 6
प्रोटॉनों की संख्या = 6
इलेक्ट्रॉनों की संख्या = 6
**ऑक्सीजन (\(_{8}^{16}\text{O}\)):**
परमाणु क्रमांक (Z) = 8
प्रोटॉनों की संख्या = 8
इलेक्ट्रॉनों की संख्या = 8
**मैग्नीशियम (\(_{12}^{24}\text{Mg}\)):**
परमाणु क्रमांक (Z) = 12
प्रोटॉनों की संख्या = 12
इलेक्ट्रॉनों की संख्या = 12
**आयरन (\(_{26}^{56}\text{Fe}\)):**
परमाणु क्रमांक (Z) = 26
प्रोटॉनों की संख्या = 26
इलेक्ट्रॉनों की संख्या = 26
यहां एक सारणी में यह जानकारी दी गई है:
| नाभिक | इलेक्ट्रॉन की संख्या | प्रोटॉन की संख्या |
|---|---|---|
| \(_{6}^{13}\text{C}\) | 6 | 6 |
| \(_{8}^{16}\text{O}\) | 8 | 8 |
| \(_{12}^{24}\text{Mg}\) | 12 | 12 |
| \(_{26}^{56}\text{Fe}\) | 26 | 26 |
In simple words: किसी भी सामान्य परमाणु में, प्रोटॉन और इलेक्ट्रॉन की संख्या हमेशा बराबर होती है और यह उस परमाणु के क्रमांक (एटॉमिक नंबर) के बराबर होती है.
🎯 Exam Tip: यह याद रखना महत्वपूर्ण है कि परमाणु क्रमांक (Z) हमेशा प्रोटॉन की संख्या के बराबर होता है, और उदासीन परमाणु में इलेक्ट्रॉन की संख्या भी परमाणु क्रमांक के बराबर होती है। न्यूट्रॉन की संख्या परमाणु भार (A) से परमाणु क्रमांक (Z) घटाकर प्राप्त की जाती है।
Question 17. निम्न क्वांटम संख्याओं के सम्बद्ध कक्षक कौनसे हैं -
(i) n = 1, l = 0
(ii) n = 2, l = 2
(iii) n = 4, l = 3
(iv) n = 3, l = 2
Answer: क्वांटम संख्याएँ इलेक्ट्रॉन की ऊर्जा, आकार, आकृति और अभिविन्यास को बताती हैं। n मुख्य क्वांटम संख्या है और l दिगंशी क्वांटम संख्या है। l के मान 0 (s-कक्षक), 1 (p-कक्षक), 2 (d-कक्षक) और 3 (f-कक्षक) से संबंधित होते हैं।
(i) n = 1, l = 0: यह 1s कक्षक को दर्शाता है।
(ii) n = 2, l = 2: यह कक्षक संभव नहीं है। दिगंशी क्वांटम संख्या (l) का मान हमेशा मुख्य क्वांटम संख्या (n) से कम होना चाहिए (यानी, \( l < n \)). यहाँ \( l = n \) है, जो गलत है।
(iii) n = 4, l = 3: यह 4f कक्षक को दर्शाता है।
(iv) n = 3, l = 2: यह 3d कक्षक को दर्शाता है।
In simple words: क्वांटम संख्याएँ n और l मिलकर कक्षक का नाम बताती हैं. n=1, l=0 का मतलब 1s कक्षक है, जबकि n=2, l=2 जैसा कोई कक्षक नहीं हो सकता क्योंकि l का मान n से छोटा होना चाहिए. n=4, l=3 का मतलब 4f कक्षक है और n=3, l=2 का मतलब 3d कक्षक है.
🎯 Exam Tip: क्वांटम संख्या के नियम याद रखें: l का मान हमेशा 0 से लेकर \( (n-1) \) तक होता है। यदि l का मान n के बराबर या उससे अधिक हो, तो वह कक्षक संभव नहीं होता है।
Question 18. \( \text{H}_2^+ \), \( \text{O}_2^+ \) तथा \( \text{H}_2 \) में इलेक्ट्रॉन की संख्या दीजिए।
Answer: हमें इन आयनों और अणु में इलेक्ट्रॉनों की संख्या ज्ञात करनी है:
**\( \text{H}_2^+ \):**
एक हाइड्रोजन परमाणु में 1 इलेक्ट्रॉन होता है।
\( \text{H}_2 \) अणु में 2 हाइड्रोजन परमाणु होते हैं, तो कुल 2 इलेक्ट्रॉन होंगे।
\( \text{H}_2^+ \) का मतलब है कि इसमें से 1 इलेक्ट्रॉन निकल गया है, इसलिए इसमें \( 2 - 1 = 1 \) इलेक्ट्रॉन है।
**\( \text{O}_2^+ \):**
एक ऑक्सीजन परमाणु में 8 इलेक्ट्रॉन होते हैं।
\( \text{O}_2 \) अणु में 2 ऑक्सीजन परमाणु होते हैं, तो कुल \( 2 \times 8 = 16 \) इलेक्ट्रॉन होंगे।
\( \text{O}_2^+ \) का मतलब है कि इसमें से 1 इलेक्ट्रॉन निकल गया है, इसलिए इसमें \( 16 - 1 = 15 \) इलेक्ट्रॉन हैं।
**\( \text{H}_2 \):**
एक हाइड्रोजन परमाणु में 1 इलेक्ट्रॉन होता है।
\( \text{H}_2 \) अणु में 2 हाइड्रोजन परमाणु होते हैं, तो कुल \( 2 \times 1 = 2 \) इलेक्ट्रॉन हैं।
इस प्रकार, \( \text{H}_2^+ \), \( \text{O}_2^+ \) तथा \( \text{H}_2 \) में इलेक्ट्रॉनों की संख्या क्रमशः 1, 15 और 2 है।
In simple words: \( \text{H}_2^+ \) में 1 इलेक्ट्रॉन होता है क्योंकि उसमें से एक इलेक्ट्रॉन निकल गया है. \( \text{O}_2^+ \) में 15 इलेक्ट्रॉन होते हैं क्योंकि \( \text{O}_2 \) के 16 में से एक निकल गया. और \( \text{H}_2 \) में 2 इलेक्ट्रॉन होते हैं क्योंकि इसमें दो हाइड्रोजन परमाणु हैं, प्रत्येक में एक इलेक्ट्रॉन.
🎯 Exam Tip: किसी आयन में इलेक्ट्रॉनों की संख्या ज्ञात करने के लिए, उदासीन परमाणु या अणु के इलेक्ट्रॉनों की संख्या में से धनात्मक आवेश के लिए उतनी संख्या घटा दें, या ऋणात्मक आवेश के लिए उतनी संख्या जोड़ दें।
Question 20. मूलभूत कण कौनसे हैं?
Answer: परमाणु के मूलभूत कण वे होते हैं जिनसे परमाणु का निर्माण होता है। मुख्य रूप से, परमाणु के तीन मूलभूत कण होते हैं: इलेक्ट्रॉन, प्रोटॉन और न्यूट्रॉन।
इलेक्ट्रॉन ऋण आवेशित कण होते हैं जो नाभिक के चारों ओर चक्कर लगाते हैं। प्रोटॉन धन आवेशित कण होते हैं और न्यूट्रॉन उदासीन कण होते हैं, ये दोनों नाभिक में स्थित होते हैं।
In simple words: परमाणु के सबसे छोटे हिस्से जो उसे बनाते हैं, वे इलेक्ट्रॉन, प्रोटॉन और न्यूट्रॉन कहलाते हैं.
🎯 Exam Tip: यह याद रखना महत्वपूर्ण है कि प्रोटॉन और न्यूट्रॉन को आगे क्वार्क में विभाजित किया जा सकता है, लेकिन परमाणु के संदर्भ में, वे अक्सर 'मूलभूत' कण माने जाते हैं।
RBSE Class 11 Chemistry Chapter 2 लघूत्तरात्मक प्रश्न
Question 21. हाइड्रोजन परमाणु के पांचवें बोर कक्ष की त्रिज्या ज्ञात कीजिए।
Answer: हाइड्रोजन परमाणु के nवें बोर कक्ष की त्रिज्या (rn) ज्ञात करने का सूत्र है:
\( r_n = 0.529 \times n^2 \) Å (एंगस्ट्रॉम में)
जहाँ n मुख्य क्वांटम संख्या है।
हमें पांचवें बोर कक्ष की त्रिज्या ज्ञात करनी है, इसलिए n = 5.
\( r_5 = 0.529 \times 5^2 \)
\( r_5 = 0.529 \times 25 \)
\( r_5 = 13.225 \) Å
यदि इसे नैनोमीटर (nm) में बदलना हो, तो \( 1 \) Å \( = 0.1 \) nm.
\( r_5 = 13.225 \times 0.1 \) nm
\( r_5 = 1.3225 \) nm
In simple words: हाइड्रोजन परमाणु के लिए, किसी भी कक्षक की त्रिज्या को एक खास सूत्र से निकाला जाता है. पांचवें कक्षक के लिए, यह त्रिज्या लगभग 13.225 एंगस्ट्रॉम या 1.3225 नैनोमीटर होगी.
🎯 Exam Tip: बोर मॉडल के अनुसार हाइड्रोजन परमाणु के लिए त्रिज्या का सूत्र \( r_n = 0.529 \times n^2 \) Å हमेशा याद रखें। नैनोमीटर में बदलने के लिए 10 से भाग करें।
Question 22. यदि इलेक्ट्रॉन n = 3 से n = 2 में जाता है, तब विसर्जित ऊर्जा कितनी होगी?
Answer: हाइड्रोजन परमाणु में nवें ऊर्जा स्तर (कक्षक) में इलेक्ट्रॉन की ऊर्जा (En) का सूत्र है:
\( E_n = -\frac{13.6}{n^2} \) eV (इलेक्ट्रॉन वोल्ट में)
जब इलेक्ट्रॉन n = 3 से n = 2 में जाता है, तो उत्सर्जित ऊर्जा \( \Delta E \) दोनों ऊर्जा स्तरों के ऊर्जा अंतर के बराबर होगी।
\( \Delta E = E_3 - E_2 \)
पहले n = 3 के लिए ऊर्जा \( E_3 \) ज्ञात करें:
\( E_3 = -\frac{13.6}{3^2} = -\frac{13.6}{9} = -1.511 \) eV
अब n = 2 के लिए ऊर्जा \( E_2 \) ज्ञात करें:
\( E_2 = -\frac{13.6}{2^2} = -\frac{13.6}{4} = -3.4 \) eV
उत्सर्जित ऊर्जा \( \Delta E \):
\( \Delta E = E_3 - E_2 = -1.511 \text{ eV} - (-3.4 \text{ eV}) \)
\( \Delta E = -1.511 \text{ eV} + 3.4 \text{ eV} \)
\( \Delta E = 1.889 \) eV
इसे लगभग \( 1.89 \) eV या \( 1.9 \) eV कह सकते हैं। यह ऊर्जा फोटॉन के रूप में उत्सर्जित होती है।
In simple words: जब एक इलेक्ट्रॉन हाइड्रोजन परमाणु में तीसरे ऊर्जा स्तर से दूसरे ऊर्जा स्तर पर कूदता है, तो वह ऊर्जा छोड़ता है. इस छोड़ी गई ऊर्जा की मात्रा लगभग 1.89 इलेक्ट्रॉन वोल्ट होती है, जो ऊर्जा के दो स्तरों के बीच का अंतर है.
🎯 Exam Tip: बोर के परमाणु मॉडल में, इलेक्ट्रॉन जब उच्च ऊर्जा स्तर से निम्न ऊर्जा स्तर में आता है तो ऊर्जा उत्सर्जित होती है, और जब निम्न ऊर्जा स्तर से उच्च ऊर्जा स्तर में जाता है तो ऊर्जा अवशोषित होती है। उत्सर्जित या अवशोषित ऊर्जा हमेशा दो स्तरों के ऊर्जा अंतर के बराबर होती है।
Question 24. 100 ms\(^{-1}\) वेग से चलित वस्तु की द ब्रोग्ली तरंग दैर्ध्य 6.62 \( \times 10^{-35} \) m है, अतः m का मान क्या होगा?
Answer: डी ब्रोग्ली संबंध बताता है कि तरंगदैर्ध्य (\( \lambda \)) वस्तु के संवेग (p) से कैसे संबंधित है:
\( \lambda = \frac{h}{p} \) या \( \lambda = \frac{h}{mv} \)
जहाँ:
\( h \) = प्लांक स्थिरांक \( = 6.626 \times 10^{-34} \) Js
\( m \) = वस्तु का द्रव्यमान (kg में)
\( v \) = वस्तु का वेग (m/s में)
हमें द्रव्यमान (m) ज्ञात करना है, इसलिए सूत्र को \( m \) के लिए पुनर्व्यवस्थित करते हैं:
\( m = \frac{h}{\lambda v} \)
दिए गए मान:
\( \lambda = 6.62 \times 10^{-35} \) m
\( v = 100 \) m/s
अब मानों को सूत्र में रखते हैं:
\( m = \frac{6.626 \times 10^{-34} \text{ Js}}{ (6.62 \times 10^{-35} \text{ m}) \times (100 \text{ m/s})} \)
\( m = \frac{6.626 \times 10^{-34}}{6.62 \times 10^{-35} \times 10^2} \)
\( m = \frac{6.626 \times 10^{-34}}{6.62 \times 10^{-33}} \)
\( m \approx 1 \times 10^{-1} \) kg
\( m = 0.1 \) kg
In simple words: डी ब्रोग्ली के नियम का उपयोग करके, हम वस्तु का द्रव्यमान पता लगा सकते हैं. अगर एक वस्तु 100 मीटर प्रति सेकंड की गति से चल रही है और उसकी तरंगदैर्ध्य \( 6.62 \times 10^{-35} \) मीटर है, तो उसका द्रव्यमान 0.1 किलोग्राम होगा.
🎯 Exam Tip: डी ब्रोग्ली तरंगदैर्ध्य के सूत्र \( \lambda = \frac{h}{mv} \) का उपयोग करते समय, सभी मात्रकों को SI इकाइयों (मीटर, किलोग्राम, सेकंड) में रखना सुनिश्चित करें। प्लांक स्थिरांक का सही मान याद रखना भी महत्वपूर्ण है।
Question 25. इलेक्ट्रॉन की संवेग में अनिश्चितता \( 1 \times 10^{-5} \) kgmS\(^{-1}\) है तो स्थिति में अनिश्चितता ज्ञात करो।
Answer: हाइजेनबर्ग का अनिश्चितता सिद्धांत बताता है कि किसी कण की स्थिति (\( \Delta x \)) और संवेग (\( \Delta p \)) को एक साथ अत्यधिक सटीकता के साथ मापना संभव नहीं है। इसका संबंध इस सूत्र द्वारा दिया जाता है:
\( \Delta x \times \Delta p \ge \frac{h}{4\pi} \)
जहाँ:
\( \Delta x \) = स्थिति में अनिश्चितता
\( \Delta p \) = संवेग में अनिश्चितता
\( h \) = प्लांक स्थिरांक \( = 6.626 \times 10^{-34} \) Js
\( \pi \approx 3.14159 \)
हमें \( \Delta x \) ज्ञात करना है, और \( \Delta p = 1 \times 10^{-5} \) kg m/s दिया गया है।
इसलिए, \( \Delta x \ge \frac{h}{4\pi \Delta p} \)
\( \Delta x \ge \frac{6.626 \times 10^{-34} \text{ Js}}{4 \times 3.14159 \times (1 \times 10^{-5} \text{ kg m/s})} \)
\( \Delta x \ge \frac{6.626 \times 10^{-34}}{12.56636 \times 10^{-5}} \)
\( \Delta x \ge \frac{6.626}{12.56636} \times 10^{-34 - (-5)} \)
\( \Delta x \ge 0.52729 \times 10^{-29} \)
\( \Delta x \ge 5.27 \times 10^{-30} \) m
In simple words: हाइजेनबर्ग के नियम के अनुसार, यदि हमें इलेक्ट्रॉन के संवेग में अनिश्चितता पता है, तो हम उसकी स्थिति में न्यूनतम अनिश्चितता ज्ञात कर सकते हैं. इस स्थिति में, इलेक्ट्रॉन की स्थिति में अनिश्चितता कम से कम \( 5.27 \times 10^{-30} \) मीटर होगी.
🎯 Exam Tip: हाइजेनबर्ग का अनिश्चितता सिद्धांत क्वांटम यांत्रिकी का एक मौलिक नियम है, जो बताता है कि कुछ युग्मित गुणों (जैसे स्थिति और संवेग) को एक साथ पूर्ण सटीकता के साथ नहीं मापा जा सकता है। यह सूक्ष्म कणों पर ही लागू होता है।
Question 26. क्रोमियम परमाणु का मूल अवस्था में इलेक्ट्रॉनिक विन्यास क्या है?
Answer: क्रोमियम (Cr) का परमाणु क्रमांक 24 है, जिसका अर्थ है कि एक उदासीन क्रोमियम परमाणु में 24 इलेक्ट्रॉन होते हैं। इसका इलेक्ट्रॉनिक विन्यास एक अपवाद है जो अर्ध-भरे हुए d-कक्षक की अतिरिक्त स्थिरता के कारण होता है।
सामान्य (अपेक्षित) विन्यास: \( 1s^2 2s^2 2p^6 3s^2 3p^6 3d^4 4s^2 \)
लेकिन वास्तव में, एक इलेक्ट्रॉन 4s कक्षक से 3d कक्षक में चला जाता है ताकि 3d कक्षक अर्ध-भरे (5 इलेक्ट्रॉन) हो जाए और 4s कक्षक भी अर्ध-भरे (1 इलेक्ट्रॉन) हो जाए। अर्ध-भरे और पूर्ण-भरे कक्षक बहुत अधिक स्थायी होते हैं।
इसलिए, क्रोमियम का मूल अवस्था में सही इलेक्ट्रॉनिक विन्यास है:
\( 1s^2 2s^2 2p^6 3s^2 3p^6 3d^5 4s^1 \)
In simple words: क्रोमियम में 24 इलेक्ट्रॉन होते हैं. इसका इलेक्ट्रॉनिक विन्यास थोड़ा अलग होता है ताकि इसके d-कक्षक में आधे इलेक्ट्रॉन (5) और s-कक्षक में भी आधे इलेक्ट्रॉन (1) हों. ऐसा होने से परमाणु ज्यादा स्थिर हो जाता है.
🎯 Exam Tip: क्रोमियम (Cr) और कॉपर (Cu) जैसे तत्वों के इलेक्ट्रॉनिक विन्यास अपवाद होते हैं, जहां d-कक्षक के अर्ध-भरे या पूर्ण-भरे होने के लिए 4s कक्षक से इलेक्ट्रॉन स्थानांतरित हो जाते हैं। यह उनकी बढ़ी हुई स्थिरता के कारण होता है।
Question 27. रूबीडियम (z = 37) के संयोजी इलेक्ट्रॉन के लिए चारों क्वांटम संख्या के मान लिखिए।
Answer: रूबीडियम (Rb) का परमाणु क्रमांक (Z) 37 है। इसका इलेक्ट्रॉनिक विन्यास लिखने पर हम इसके संयोजी इलेक्ट्रॉन (सबसे बाहरी इलेक्ट्रॉन) की पहचान कर सकते हैं।
रूबीडियम का इलेक्ट्रॉनिक विन्यास है: \( 1s^2 2s^2 2p^6 3s^2 3p^6 4s^2 3d^{10} 4p^6 5s^1 \)
इसका सबसे बाहरी या संयोजी इलेक्ट्रॉन 5s कक्षक में है। अब हम इस इलेक्ट्रॉन के लिए चारों क्वांटम संख्याएँ लिखेंगे:
1. मुख्य क्वांटम संख्या (n): यह इलेक्ट्रॉन के कोश को दर्शाती है। 5s कक्षक के लिए, \( n = 5 \).
2. दिगंशी क्वांटम संख्या (l): यह कक्षक के आकार को दर्शाती है। s-कक्षक के लिए, \( l = 0 \).
3. चुंबकीय क्वांटम संख्या (\( m_l \)): यह कक्षक के अभिविन्यास को दर्शाती है। \( l = 0 \) के लिए, \( m_l \) का एकमात्र संभव मान \( 0 \) होता है।
4. चक्रण क्वांटम संख्या (\( m_s \)): यह इलेक्ट्रॉन के चक्रण को दर्शाती है। 5s कक्षक में केवल एक इलेक्ट्रॉन है, इसलिए हम इसे \( m_s = +\frac{1}{2} \) मान सकते हैं (हालांकि \( -\frac{1}{2} \) भी हो सकता है, लेकिन परंपरा के अनुसार पहले इलेक्ट्रॉन को \( +\frac{1}{2} \) दिया जाता है)।
अतः, रूबीडियम के संयोजी इलेक्ट्रॉन के लिए चारों क्वांटम संख्याओं के मान हैं: \( n = 5, l = 0, m_l = 0, s = +\frac{1}{2} \).
In simple words: रूबीडियम का आखिरी इलेक्ट्रॉन 5s कक्षक में होता है. इसके लिए मुख्य संख्या (n) 5 है, आकार वाली संख्या (l) 0 है, दिशा वाली संख्या (\( m_l \)) 0 है, और घूमने वाली संख्या (s) \( +\frac{1}{2} \) है.
🎯 Exam Tip: संयोजी इलेक्ट्रॉन के लिए क्वांटम संख्याएँ ज्ञात करने के लिए, पहले तत्व का पूरा इलेक्ट्रॉनिक विन्यास लिखें, फिर सबसे बाहरी (उच्चतम n) इलेक्ट्रॉन की पहचान करें और उसके कक्षक के आधार पर n, l, \( m_l \), और \( m_s \) के मान निर्धारित करें।
Question 28. तीन क्वांटम संख्या n, l, m मुख्य रूप से परमाणु के किस गुण को दर्शाती हैं?
Answer: क्वांटम संख्याएँ n, l, और m मुख्य रूप से परमाणु में इलेक्ट्रॉन की ऊर्जा, आकार, और कक्षक के स्थानिक अभिविन्यास (space orientation) को दर्शाती हैं।
1. **मुख्य क्वांटम संख्या (n):** यह इलेक्ट्रॉन के मुख्य ऊर्जा कोश और कक्षक के आकार को दर्शाती है। n का मान जितना अधिक होता है, कक्षक उतना ही बड़ा होता है और इलेक्ट्रॉन की ऊर्जा भी उतनी ही अधिक होती है।
2. **दिगंशी क्वांटम संख्या (l):** यह कक्षक के आकार (shape) और उपकोश को दर्शाती है। l के मान (0, 1, 2, 3...) क्रमशः s, p, d, f कक्षकों को दर्शाते हैं।
3. **चुंबकीय क्वांटम संख्या (\( m_l \)):** यह कक्षक के स्थानिक अभिविन्यास को दर्शाती है। यह बताता है कि एक उपकोश के भीतर कितने कक्षक संभव हैं और वे अंतरिक्ष में कैसे उन्मुख हैं।
ये तीनों क्वांटम संख्याएं मिलकर परमाणु में एक विशिष्ट कक्षक को परिभाषित करती हैं, जिसमें एक इलेक्ट्रॉन के पाए जाने की अधिकतम संभावना होती है।
In simple words: क्वांटम संख्या n, l और m हमें बताती हैं कि इलेक्ट्रॉन परमाणु में कहाँ है, उसका कक्षक कितना बड़ा है, कैसा दिखता है, और अंतरिक्ष में किस दिशा में है.
🎯 Exam Tip: क्वांटम संख्याएं परमाणु में इलेक्ट्रॉन की अद्वितीय "एड्रेस" होती हैं। n ऊर्जा स्तर (कोश), l कक्षक का आकार (उपकोश), और \( m_l \) कक्षक का अभिविन्यास बताता है। \( m_s \) इलेक्ट्रॉन के चक्रण की दिशा बताता है।
Question 29. हुण्ड के नियम के अनुसार किस तत्व में छः अयुग्मित इलेक्ट्रॉन उपस्थित होते हैं?
Answer: हुण्ड के अधिकतम बहुलता के नियम के अनुसार, एक उपकोश में कक्षकों में इलेक्ट्रॉन तब तक युग्मित नहीं होते जब तक कि प्रत्येक कक्षक में एक इलेक्ट्रॉन न भर जाए और सभी अकेले इलेक्ट्रॉनों का चक्रण एक ही दिशा में हो। हमें उस तत्व की पहचान करनी है जिसमें 6 अयुग्मित इलेक्ट्रॉन होते हैं।
क्रोमियम (Cr) का परमाणु क्रमांक (Z) 24 है। इसका इलेक्ट्रॉनिक विन्यास अपवाद स्वरूप होता है क्योंकि अर्ध-भरे हुए d-कक्षक अत्यधिक स्थायी होते हैं।
क्रोमियम का इलेक्ट्रॉनिक विन्यास है: \( [Ar] 3d^5 4s^1 \).
इसका मतलब है कि 3d उपकोश में 5 इलेक्ट्रॉन हैं, और 4s उपकोश में 1 इलेक्ट्रॉन है।
3d कक्षक में 5 अयुग्मित इलेक्ट्रॉन: \( \uparrow \uparrow \uparrow \uparrow \uparrow \)
4s कक्षक में 1 अयुग्मित इलेक्ट्रॉन: \( \uparrow \)
तो, क्रोमियम में कुल अयुग्मित इलेक्ट्रॉनों की संख्या = 5 (3d से) + 1 (4s से) = 6 होती है।
In simple words: क्रोमियम वह तत्व है जिसमें हुण्ड के नियम के हिसाब से 6 अकेले इलेक्ट्रॉन होते हैं. इसके 3d कक्षक में 5 और 4s कक्षक में 1 अकेला इलेक्ट्रॉन होता है, जिससे कुल 6 इलेक्ट्रॉन अयुग्मित हो जाते हैं.
🎯 Exam Tip: क्रोमियम एक महत्वपूर्ण अपवाद है जहां अर्ध-भरे हुए 3d और 4s उपकोशों की स्थिरता के कारण यह 6 अयुग्मित इलेक्ट्रॉन दर्शाता है। हुण्ड का नियम सुनिश्चित करता है कि इलेक्ट्रॉन पहले एक-एक करके कक्षकों में भरें, फिर युग्मित हों।
Question 30. d इलेक्ट्रॉन के लिए कक्षक कोणीय संवेग क्या होगा?
Answer: किसी इलेक्ट्रॉन का कक्षक कोणीय संवेग दिगंशी क्वांटम संख्या (l) पर निर्भर करता है। इसका सूत्र इस प्रकार है:
कक्षक कोणीय संवेग \( = \frac{h}{2\pi} \sqrt{l(l+1)} \)
जहाँ \( h \) प्लांक स्थिरांक है।
d इलेक्ट्रॉन के लिए, दिगंशी क्वांटम संख्या (l) का मान 2 होता है (क्योंकि s के लिए \( l=0 \), p के लिए \( l=1 \), d के लिए \( l=2 \), और f के लिए \( l=3 \))।
अब l के मान को सूत्र में रखते हैं:
कक्षक कोणीय संवेग \( = \frac{h}{2\pi} \sqrt{2(2+1)} \)
कक्षक कोणीय संवेग \( = \frac{h}{2\pi} \sqrt{2 \times 3} \)
कक्षक कोणीय संवेग \( = \frac{h}{2\pi} \sqrt{6} \)
या, कक्षक कोणीय संवेग \( = \frac{\sqrt{6}h}{2\pi} \).
In simple words: एक d इलेक्ट्रॉन के कक्षक का कोणीय संवेग निकालने के लिए, हमें दिगंशी क्वांटम संख्या (जो d के लिए 2 है) को एक खास सूत्र में डालना होगा. इससे पता चलता है कि d इलेक्ट्रॉन का कोणीय संवेग \( \frac{\sqrt{6}h}{2\pi} \) के बराबर होगा.
🎯 Exam Tip: यह सूत्र याद रखना महत्वपूर्ण है कि कक्षक कोणीय संवेग केवल दिगंशी क्वांटम संख्या (l) पर निर्भर करता है, न कि मुख्य क्वांटम संख्या (n) पर। विभिन्न उपकोशों (s, p, d, f) के लिए l के मान याद रखें।
Question 31. तत्व \( _{89}^{231}Y \) में प्रोटॉन, न्यूट्रॉन तथा इलेक्ट्रॉन की संख्या कितनी होगी?
Answer: दिए गए तत्व का प्रतीक \( _{89}^{231}Y \) है। यहाँ:
निचला बाईं ओर का अंक परमाणु क्रमांक (Z) होता है, जो प्रोटॉनों की संख्या को दर्शाता है।
ऊपरी बाईं ओर का अंक परमाणु भार (A) होता है, जो प्रोटॉनों और न्यूट्रॉनों की कुल संख्या को दर्शाता है।
तत्व \( Y \) (जो एक्टिनियम या यूरेनियम से संबंधित हो सकता है, लेकिन यहाँ सामान्य प्रतीक Y का उपयोग किया गया है) के लिए:
**प्रोटॉनों की संख्या:** परमाणु क्रमांक 89 है, इसलिए प्रोटॉनों की संख्या = 89.
**इलेक्ट्रॉनों की संख्या:** यदि परमाणु उदासीन है (जिस पर कोई आवेश नहीं दिखाया गया है), तो इलेक्ट्रॉनों की संख्या प्रोटॉनों की संख्या के बराबर होती है। इसलिए, इलेक्ट्रॉनों की संख्या = 89.
**न्यूट्रॉनों की संख्या:** न्यूट्रॉनों की संख्या परमाणु भार (A) में से प्रोटॉनों की संख्या (Z) घटाकर निकाली जाती है।
न्यूट्रॉनों की संख्या = परमाणु भार (A) - प्रोटॉनों की संख्या (Z)
न्यूट्रॉनों की संख्या = \( 231 - 89 = 142 \).
अतः, इस तत्व में 89 प्रोटॉन, 89 इलेक्ट्रॉन और 142 न्यूट्रॉन हैं।
In simple words: इस परमाणु में, नीचे वाला नंबर (89) बताता है कि उसमें 89 प्रोटॉन और 89 इलेक्ट्रॉन हैं. ऊपर वाले नंबर (231) में से प्रोटॉन की संख्या घटाने पर न्यूट्रॉन की संख्या (142) मिल जाती है.
🎯 Exam Tip: परमाणु प्रतीक में परमाणु क्रमांक (Z) और परमाणु भार (A) की स्थिति को हमेशा याद रखें। Z प्रोटॉन और इलेक्ट्रॉन की संख्या (उदासीन परमाणु में) को दर्शाता है, जबकि A न्यूट्रॉन की संख्या ज्ञात करने में मदद करता है।
Question 32. द्वितीय कक्षा और प्रथम कक्षा द्वारा घेरे गये क्षेत्रफल का अनुपात क्या है?
Answer: बोर के परमाणु मॉडल के अनुसार, इलेक्ट्रॉन नाभिक के चारों ओर निश्चित वृत्ताकार कक्षाओं में घूमते हैं। किसी वृत्ताकार कक्षा का क्षेत्रफल \( \pi r^2 \) होता है, जहाँ r कक्षा की त्रिज्या है।
हाइड्रोजन परमाणु के लिए, nवीं कक्षा की त्रिज्या (rn) का सूत्र है:
\( r_n = a_0 n^2 \)
जहाँ \( a_0 \) बोर त्रिज्या है (प्रथम कक्षा की त्रिज्या)।
**प्रथम कक्षा (n = 1) के लिए:**
त्रिज्या \( r_1 = a_0 \times 1^2 = a_0 \)
क्षेत्रफल \( A_1 = \pi r_1^2 = \pi (a_0)^2 \)
**द्वितीय कक्षा (n = 2) के लिए:**
त्रिज्या \( r_2 = a_0 \times 2^2 = 4a_0 \)
क्षेत्रफल \( A_2 = \pi r_2^2 = \pi (4a_0)^2 = \pi (16a_0^2) = 16 \pi a_0^2 \)
अब द्वितीय कक्षा और प्रथम कक्षा के क्षेत्रफल का अनुपात ज्ञात करते हैं:
\( \frac{A_2}{A_1} = \frac{16 \pi a_0^2}{\pi a_0^2} = 16 \)
इसलिए, अनुपात 16:1 है।
In simple words: बोर मॉडल के अनुसार, कक्षाओं की त्रिज्या मुख्य क्वांटम संख्या (n) के वर्ग के अनुसार बढ़ती है. चूँकि क्षेत्रफल त्रिज्या के वर्ग पर निर्भर करता है, इसलिए दूसरी कक्षा का क्षेत्रफल पहली कक्षा के क्षेत्रफल का \( 2^2 \times 2^2 \) यानी 16 गुना होगा. इसलिए अनुपात 16:1 होगा.
🎯 Exam Tip: त्रिज्या के लिए \( r_n \propto n^2 \) और क्षेत्रफल के लिए \( A_n \propto r_n^2 \propto n^4 \) संबंध याद रखना इस प्रकार के अनुपात वाले प्रश्नों के लिए बहुत उपयोगी है।
Question 33. N परमाणु में तीन अयुग्मित इलेक्ट्रॉन की उपस्थिति का क्या कारण है?
Answer: नाइट्रोजन (N) परमाणु में तीन अयुग्मित इलेक्ट्रॉन (unpaired electrons) हुण्ड के अधिकतम बहुलता के नियम (Hund's Rule of Maximum Multiplicity) के कारण होते हैं।
नाइट्रोजन का परमाणु क्रमांक 7 है, इसलिए इसमें 7 इलेक्ट्रॉन होते हैं। इसका इलेक्ट्रॉनिक विन्यास इस प्रकार है:
\( 1s^2 2s^2 2p^3 \)
यहाँ, 1s और 2s कक्षक पूर्ण रूप से भरे हुए हैं (प्रत्येक में 2 इलेक्ट्रॉन युग्मित अवस्था में)।
1s कक्षक: \( \uparrow\downarrow \)
2s कक्षक: \( \uparrow\downarrow \)
2p उपकोश में तीन कक्षक होते हैं: \( 2p_x, 2p_y, 2p_z \)। हुण्ड के नियम के अनुसार, इलेक्ट्रॉन इन तीन कक्षकों में तब तक अकेले-अकेले भरते हैं जब तक कि प्रत्येक कक्षक में एक इलेक्ट्रॉन न आ जाए और उन सभी का चक्रण (spin) एक ही दिशा में हो।
तो, 2p उपकोश के 3 इलेक्ट्रॉन इस प्रकार भरेंगे:
\( 2p_x \uparrow, 2p_y \uparrow, 2p_z \uparrow \)
चूंकि 2p उपकोश में तीनों कक्षक एक-एक इलेक्ट्रॉन से भरे हुए हैं, इसलिए नाइट्रोजन परमाणु में तीन अयुग्मित इलेक्ट्रॉन होते हैं। यह व्यवस्था अधिकतम बहुलता प्रदान करती है और परमाणु को अधिक स्थायी बनाती है।
In simple words: नाइट्रोजन परमाणु में 7 इलेक्ट्रॉन होते हैं. हुण्ड का नियम कहता है कि इलेक्ट्रॉन पहले हर कक्षक में अकेले-अकेले भरते हैं और फिर जोड़े बनाते हैं. इसलिए, नाइट्रोजन के 2p कक्षक में तीन इलेक्ट्रॉन तीनों अलग-अलग कक्षकों में अकेले-अकेले बैठते हैं, जिससे तीन अकेले (अयुग्मित) इलेक्ट्रॉन बनते हैं.
🎯 Exam Tip: हुण्ड का नियम बताता है कि एक उपकोश में इलेक्ट्रॉनों को भरने के दौरान, अधिकतम बहुलता (यानी, अधिकतम अयुग्मित इलेक्ट्रॉन) प्राप्त करने के लिए उन्हें पहले एक-एक करके समान ऊर्जा वाले कक्षकों में भरा जाता है, फिर युग्मित किया जाता है।
Question 34. 3s तथा 2p कक्षकों के रेडियल नोडों की संख्या बताइए।
Answer: रेडियल नोड (या त्रिज्य नोड) ऐसे बिंदु होते हैं जहाँ इलेक्ट्रॉन घनत्व शून्य होता है, यानी इलेक्ट्रॉन के पाए जाने की प्रायिकता शून्य होती है। रेडियल नोडों की संख्या ज्ञात करने का सूत्र है:
रेडियल नोडों की संख्या \( = n - l - 1 \)
जहाँ n मुख्य क्वांटम संख्या है और l दिगंशी क्वांटम संख्या है।
**3s कक्षक के लिए:**
n = 3 (मुख्य क्वांटम संख्या)
l = 0 (s-कक्षक के लिए दिगंशी क्वांटम संख्या)
रेडियल नोडों की संख्या \( = 3 - 0 - 1 = 2 \).
**2p कक्षक के लिए:**
n = 2 (मुख्य क्वांटम संख्या)
l = 1 (p-कक्षक के लिए दिगंशी क्वांटम संख्या)
रेडियल नोडों की संख्या \( = 2 - 1 - 1 = 0 \).
इस प्रकार, 3s कक्षक में 2 रेडियल नोड होते हैं और 2p कक्षक में 0 रेडियल नोड होते हैं।
In simple words: रेडियल नोड वे जगहें होती हैं जहाँ इलेक्ट्रॉन नहीं मिलते. 3s कक्षक में 2 रेडियल नोड होते हैं, और 2p कक्षक में कोई रेडियल नोड नहीं होता है.
🎯 Exam Tip: रेडियल नोडों की संख्या का सूत्र \( n - l - 1 \) याद रखें। यह सूत्र किसी भी कक्षक में इलेक्ट्रॉन घनत्व के वितरण को समझने के लिए महत्वपूर्ण है। कोणीय नोडों की संख्या l के बराबर होती है।
Question 35. यदि \( (n + l) = 6 \) है तो उपकोशों की कुल संभावित संख्या क्या होगी?
Answer: हमें उन सभी संभावित उपकोशों को खोजना है जिनके लिए \( (n + l) = 6 \) है। हम n और l के विभिन्न मानों का पता लगाएंगे जो इस शर्त को पूरा करते हैं, यह ध्यान रखते हुए कि \( l \) का मान हमेशा \( n-1 \) से कम या उसके बराबर होता है और \( l \ge 0 \) होता है।
1. **यदि \( l = 0 \):** \( n + 0 = 6 \implies n = 6 \). यह 6s उपकोश है। (मान्य है क्योंकि \( l=0 < n=6 \))
2. **यदि \( l = 1 \):** \( n + 1 = 6 \implies n = 5 \). यह 5p उपकोश है। (मान्य है क्योंकि \( l=1 < n=5 \))
3. **यदि \( l = 2 \):** \( n + 2 = 6 \implies n = 4 \). यह 4d उपकोश है। (मान्य है क्योंकि \( l=2 < n=4 \))
4. **यदि \( l = 3 \):** \( n + 3 = 6 \implies n = 3 \). यह 3f उपकोश है। (मान्य नहीं है क्योंकि \( l=3 \) होना चाहिए \( l < n \), यानी \( l < 3 \). लेकिन यहाँ \( l=3 \), तो यह संभव नहीं है।)
इसलिए, \( (n+l) = 6 \) के लिए तीन संभावित उपकोश हैं: 6s, 5p, और 4d।
यहां एक सारणी में यह जानकारी दी गई है:
| \( n+l \) | उपकोश |
|---|---|
| 60 | 6s |
| 51 | 5p |
| 42 | 4d |
| 33 | (3f) - अमान्य |
अतः कुल संभावित उपकोश = तीन।
In simple words: जब \( n+l = 6 \) होता है, तो ऐसे तीन ही उपकोश संभव हैं. ये 6s, 5p और 4d उपकोश हैं. 3f उपकोश संभव नहीं है क्योंकि l का मान n से बड़ा नहीं हो सकता.
🎯 Exam Tip: \( (n+l) \) नियम का उपयोग कक्षकों की ऊर्जा के क्रम को निर्धारित करने के लिए किया जाता है। यह सुनिश्चित करना महत्वपूर्ण है कि \( l \) का मान हमेशा \( n-1 \) से कम या उसके बराबर हो।
RBSE Class 11 Chemistry Chapter 2 निबन्धात्मक प्रश्न
Question 1. परमाणु में इलेक्ट्रॉन, नाभिक के चारों ओर निश्चित त्रिज्या तथा निश्चित ऊर्जा युक्त वृत्ताकार पथों में गति करता है। इन वृत्ताकार पथों को कक्षा या कक्ष (orbit or class) या स्थायी अवस्था या अनुमत ऊर्जा स्तर (Energy level) या कोश (Shell) कहते हैं। ये कक्षाएँ नाभिक के चारों ओर संकेन्द्रीय रूप में व्यवस्थित होती हैं। किसी इलेक्ट्रॉन के लिए स्थायी अवस्थाएँ n = 1, 2, 3...........(मुख्य क्वांटम संख्या) होती हैं। किसी स्थायी ऊर्जा स्तर में गति करते समय इलेक्ट्रॉन की ऊर्जा निश्चित रहती है। इस स्थिति में नाभिक तथा इलेक्ट्रॉन के मध्य स्थिर वैद्युत आकर्षण बल (नाभिक की ओर) तथा इलेक्ट्रॉन का अपकेन्द्रीय बल (centrifugal force) (बाहर की तरफ) समान होता है।
Answer: बोर के परमाणु मॉडल के अनुसार, इलेक्ट्रॉन नाभिक के चारों ओर कुछ खास वृत्ताकार रास्तों पर घूमते हैं, जिन्हें कक्षाएँ या कोश कहते हैं। इन कक्षाओं की ऊर्जा तय होती है और इलेक्ट्रॉन के लिए ये स्थायी अवस्थाएँ होती हैं, जिन्हें मुख्य क्वांटम संख्या (n=1, 2, 3...) से दिखाया जाता है। इन कक्षाओं में घूमते समय इलेक्ट्रॉन की ऊर्जा बदलती नहीं है। नाभिक और इलेक्ट्रॉन के बीच जो आकर्षण बल होता है, वह इलेक्ट्रॉन को कक्षा में बनाए रखता है, और इलेक्ट्रॉन पर लगने वाला अपकेन्द्रीय बल उसे बाहर धकेलता है। ये दोनों बल बराबर होते हैं, जिससे इलेक्ट्रॉन अपनी कक्षा में स्थिर रहता है। यह अवधारणा सौरमंडल के ग्रहों की गति के समान है, जहाँ सूर्य नाभिक का और ग्रह इलेक्ट्रॉन का काम करते हैं।
**परमाणु में वृत्ताकार पथ में गतिशील इलेक्ट्रॉन का वर्णन:**
एक इलेक्ट्रॉन (जिसका द्रव्यमान m और आवेश e है) r त्रिज्या की वृत्ताकार कक्षा में v वेग से घूमता है, जिसके केंद्र में नाभिक (जिसका आवेश +ze है) होता है।
नाभिक और इलेक्ट्रॉन के बीच स्थिर वैद्युत आकर्षण बल (कूलाम के नियम के अनुसार):
\( F_{आकर्षण} = \frac{z e \times e}{r^2} = \frac{ze^2}{r^2} \)
इलेक्ट्रॉन पर लगने वाला अपकेन्द्रीय बल:
\( F_{अपकेन्द्रीय} = \frac{mv^2}{r} \)
स्थिर कक्षा में, ये दोनों बल बराबर होते हैं:
\( \frac{mv^2}{r} = \frac{ze^2}{r^2} \)
इस समीकरण से इलेक्ट्रॉन के वेग और त्रिज्या के बीच का संबंध पता चलता है। यह दर्शाता है कि एक परमाणु में इलेक्ट्रॉन नाभिक के चारों ओर एक निश्चित और नियंत्रित तरीके से घूमते हैं।
In simple words: इलेक्ट्रॉन परमाणु में नाभिक के चारों ओर खास गोल रास्तों पर घूमते हैं, जिन्हें कक्षाएँ कहते हैं. इन कक्षाओं की ऊर्जा तय होती है. इलेक्ट्रॉन पर नाभिक का खिंचाव बल और उसे बाहर धकेलने वाला बल बराबर होते हैं, जिससे वह अपनी जगह पर टिका रहता है.
🎯 Exam Tip: बोर मॉडल की प्रमुख अभिधारणाओं को याद रखें: इलेक्ट्रॉन स्थिर कक्षाओं में घूमते हैं, इन कक्षाओं में ऊर्जा तय होती है, और नाभिकीय आकर्षण बल तथा अपकेन्द्रीय बल एक-दूसरे को संतुलित करते हैं।
Question 2. एक इलेक्ट्रॉन का कोणीय संवेग दी गयी स्थायी अवस्था में निम्नलिखित समीकरण के द्वारा प्रदर्शित किया जा सकता है \( mevr = \frac{n{h}}{{2}\Pi} \) यहाँ n = 1, 2, 3.... तथा h = प्लांक स्थिरांक अतः एक इलेक्ट्रॉन केवल उन्हीं कक्षों में गति करता है, जिनमें कोणीय संवेग का मान \( \frac{h}{2\pi} \) का पूर्ण गुणक होता है। यही कारण है कि कुछ निश्चित कक्ष ही अनुमत होते हैं।
Answer: बोर के परमाणु मॉडल की दूसरी मुख्य बात यह है कि इलेक्ट्रॉन नाभिक के चारों ओर केवल उन्हीं कक्षाओं में घूम सकता है जिनके लिए उसका कोणीय संवेग \( \frac{h}{2\pi} \) का एक पूरा गुणक हो। इसे बोहर की क्वांटमीकरण शर्त कहते हैं।
कोणीय संवेग \( mvr = n \frac{h}{2\pi} \)
जहाँ,
\( m \) = इलेक्ट्रॉन का द्रव्यमान
\( v \) = इलेक्ट्रॉन का वेग
\( r \) = कक्षा की त्रिज्या
\( n \) = मुख्य क्वांटम संख्या (1, 2, 3,...)
\( h \) = प्लांक स्थिरांक
यह बताता है कि इलेक्ट्रॉन सभी संभावित त्रिज्याओं पर नहीं घूम सकते, बल्कि केवल कुछ खास निश्चित कक्षाओं में ही रह सकते हैं। इन कक्षाओं को स्थायी अवस्थाएँ या अनुमत ऊर्जा स्तर कहते हैं।
**बोर कक्ष की त्रिज्या का परिकलन:**
बोर मॉडल की पहली अभिधारणा से: \( mv^2 = \frac{ze^2}{r^2} \) (i)
बोर मॉडल की दूसरी अभिधारणा से: \( mvr = \frac{nh}{2\pi} \implies v = \frac{nh}{2\pi mr} \) (ii)
समीकरण (ii) से \( v \) का मान समीकरण (i) में रखने पर:
\( m (\frac{nh}{2\pi mr})^2 = \frac{ze^2}{r^2} \)
\( m \frac{n^2 h^2}{4\pi^2 m^2 r^2} = \frac{ze^2}{r^2} \)
\( \frac{n^2 h^2}{4\pi^2 m r^2} = \frac{ze^2}{r^2} \)
अब \( r \) के लिए हल करें:
\( r_n = \frac{n^2 h^2}{4\pi^2 m z e^2} \)
हाइड्रोजन परमाणु के लिए \( z = 1 \) होता है। h, \( \pi \), m और e स्थिरांक हैं। इन स्थिरांकों का मान रखने पर:
\( r_n = 0.529 \times \frac{n^2}{z} \times 10^{-10} \) m
या \( r_n = 0.529 \times \frac{n^2}{z} \) Å
हाइड्रोजन परमाणु के प्रथम कोश (n=1, z=1) के लिए \( r_1 = 0.529 \) Å होता है, जिसे बोर त्रिज्या (\( a_0 \)) कहते हैं।
**बोर कक्ष में इलेक्ट्रॉन की ऊर्जा का परिकलन:**
कुल ऊर्जा \( E_n \) गतिज ऊर्जा (KE) और स्थितिज ऊर्जा (PE) का योग होती है:
\( E_n = KE + PE \)
गतिज ऊर्जा \( KE = \frac{1}{2} mv^2 \)
स्थितिज ऊर्जा \( PE = -\frac{ze^2}{r} \)
पहले के समीकरण \( mv^2 = \frac{ze^2}{r} \) से, \( \frac{1}{2} mv^2 = \frac{1}{2} \frac{ze^2}{r} \)
तो \( KE = \frac{ze^2}{2r} \)
कुल ऊर्जा \( E_n = \frac{ze^2}{2r} - \frac{ze^2}{r} = -\frac{ze^2}{2r} \)
अब r का मान \( r_n = \frac{n^2 h^2}{4\pi^2 m z e^2} \) रखने पर:
\( E_n = -\frac{z e^2}{2} \times \frac{4\pi^2 m z e^2}{n^2 h^2} \)
\( E_n = -\frac{2\pi^2 m z^2 e^4}{n^2 h^2} \)
स्थिरांकों के मान रखने पर:
\( E_n = -2.18 \times 10^{-18} \frac{z^2}{n^2} \) जूल प्रति परमाणु
या \( E_n = -13.6 \times \frac{z^2}{n^2} \) eV प्रति परमाणु
**हाइड्रोजन परमाणु के रेखीय स्पेक्ट्रम की व्याख्या:**
बोर मॉडल ने हाइड्रोजन परमाणु के रेखीय स्पेक्ट्रम की सफलतापूर्वक व्याख्या की। मॉडल के अनुसार:
1. इलेक्ट्रॉन केवल विशिष्ट ऊर्जा स्तरों में ही रहते हैं।
2. इलेक्ट्रॉन जब उच्च ऊर्जा स्तर से निम्न ऊर्जा स्तर में आता है, तो ऊर्जा उत्सर्जित करता है (फोटॉन के रूप में)।
3. इलेक्ट्रॉन जब निम्न ऊर्जा स्तर से उच्च ऊर्जा स्तर में जाता है, तो ऊर्जा अवशोषित करता है।
उत्सर्जित/अवशोषित ऊर्जा का मान दोनों ऊर्जा स्तरों के ऊर्जा अंतर के बराबर होता है:
\( \Delta E = E_f - E_i \)
जहाँ \( E_f \) अंतिम ऊर्जा और \( E_i \) प्रारंभिक ऊर्जा है।
\( E_n = -\frac{R_H}{n^2} \) (जहाँ \( R_H \) रिडबर्ग स्थिरांक से संबंधित है)
तो \( \Delta E = R_H (\frac{1}{n_i^2} - \frac{1}{n_f^2}) \)
या \( \Delta E = 2.18 \times 10^{-18} (\frac{1}{n_i^2} - \frac{1}{n_f^2}) \) J
यह स्पेक्ट्रम में विभिन्न रेखाओं की ऊर्जा की व्याख्या करता है, जिससे हाइड्रोजन के रेखा स्पेक्ट्रम की पुष्टि होती है।
In simple words: इलेक्ट्रॉन केवल कुछ खास कक्षाओं में ही घूम सकते हैं, जहाँ उनका कोणीय संवेग प्लांक स्थिरांक (h) और \( 2\pi \) के अनुपात का पूरा गुणक होता है. बोर ने यह भी दिखाया कि इन कक्षाओं की त्रिज्या और इलेक्ट्रॉन की ऊर्जा कैसे निकाली जाती है. उनके मॉडल से यह भी पता चला कि जब इलेक्ट्रॉन अलग-अलग ऊर्जा स्तरों के बीच कूदते हैं, तो प्रकाश क्यों निकलता है या अवशोषित होता है, जिससे हाइड्रोजन का रंगीन स्पेक्ट्रम बनता है.
🎯 Exam Tip: बोर मॉडल की तीन मुख्य अभिधारणाएँ, त्रिज्या और ऊर्जा के सूत्र, और हाइड्रोजन स्पेक्ट्रम की व्याख्या याद रखना दीर्घ उत्तरीय प्रश्नों के लिए महत्वपूर्ण है। ऊर्जा का ऋणात्मक मान दर्शाता है कि इलेक्ट्रॉन नाभिक से बंधा हुआ है।
Question 37. प्लांक के क्वांटम सिद्धान्त की विस्तृत व्याख्या कीजिए।
Answer: प्लांक का क्वांटम सिद्धांत कहता है कि परमाणु और अणु ऊर्जा को लगातार नहीं, बल्कि कुछ खास, छोटी मात्राओं में छोड़ते या सोखते हैं. इन छोटी मात्राओं को क्वांटम कहते हैं. ऊर्जा की सबसे छोटी मात्रा जो इस तरह से निकलती या सोखी जाती है, उसे क्वांटम कहते हैं. विकिरण के एक क्वांटम की ऊर्जा (E) उसकी आवृत्ति (v) के सीधे समानुपाती होती है, जिसे E = hv लिखा जाता है, जहाँ 'h' प्लांक स्थिरांक है. इसका मान \( 6.626 \times 10^{-34} \) Js होता है. इस सिद्धांत से ब्लैक बॉडी रेडिएशन, विवर्तन और व्यतिकरण जैसी घटनाओं को समझाया जा सकता है.
विवर्तन (Diffraction): यह तब होता है जब कोई तरंग किसी बाधा के चारों ओर मुड़ जाती है.
व्यतिकरण (Interference): जब एक जैसी आवृत्ति वाली दो तरंगें मिलकर एक नई तरंग बनाती हैं, जहाँ हर बिंदु पर गड़बड़ी (disturbance) दोनों तरंगों की गड़बड़ी का जोड़ होती है.
कृष्णिका विकिरण (Black Body Radiation): मैक्स प्लांक ने 1990 में बताया कि एक आदर्श वस्तु जो सभी तरह की आवृत्तियों के विकिरणों को उत्सर्जित और अवशोषित करती है, उसे कृष्णिका (Black Body) कहते हैं. यह वस्तु जब गर्म होती है, तो यह अलग-अलग तरंगों वाले विकिरण छोड़ती है. जैसे, लोहे की छड़ को गर्म करने पर उसका रंग पहले हल्का लाल होता है, फिर गहरा लाल, सफेद और अंत में नीला हो जाता है. इससे पता चलता है कि तापमान बढ़ने पर उत्सर्जित विकिरण की आवृत्ति बढ़ती है. दिए गए तापमान पर, उत्सर्जित विकिरण की तीव्रता तरंगदैर्ध्य के बढ़ने पर पहले बढ़ती है और फिर घटती जाती है.
प्लांक का क्वांटम सिद्धान्त: इस सिद्धांत के अनुसार, परमाणु और अणु केवल निश्चित और छोटी मात्रा में ऊर्जा छोड़ते या सोखते हैं, न कि लगातार. इसे ही प्लांक का क्वांटम सिद्धांत कहते हैं.
प्रकाश विद्युत प्रभाव (Photo Electric Effect): 1887 में हर्ट्ज़ ने बताया कि जब पोटैशियम, रूबीडियम, सीज़ियम जैसी सक्रिय धातुओं पर खास आवृत्ति का प्रकाश डाला जाता है, तो उनकी सतह से इलेक्ट्रॉन बाहर निकलते हैं. इन इलेक्ट्रॉनों को प्रकाश इलेक्ट्रॉन कहते हैं. इस प्रभाव के कुछ मुख्य बिंदु हैं:
1. प्रकाश पड़ते ही इलेक्ट्रॉन तुरंत बाहर निकल जाते हैं, कोई समय नहीं लगता.
2. बाहर निकलने वाले इलेक्ट्रॉनों की संख्या प्रकाश की तीव्रता पर निर्भर करती है.
3. हर धातु के लिए एक न्यूनतम आवृत्ति होती है, जिसे देहली आवृत्ति कहते हैं. अगर प्रकाश की आवृत्ति इससे कम हो, तो प्रकाश-विद्युत प्रभाव नहीं होता. यदि आवृत्ति देहली आवृत्ति से ज़्यादा हो, तो इलेक्ट्रॉनों की गतिज ऊर्जा होती है, जो प्रकाश की आवृत्ति बढ़ने पर बढ़ती है.
4. बाहर निकलने वाले इलेक्ट्रॉनों की गतिज ऊर्जा प्रकाश की तीव्रता पर निर्भर नहीं करती, बल्कि प्रकाश की आवृत्ति पर निर्भर करती है.
प्रकाश से टकराने वाले फोटॉन की ऊर्जा (hv) इलेक्ट्रॉनों को बाहर निकालने के लिए ज़रूरी ऊर्जा (कार्य फलन, \( h\nu_0 \)) और इलेक्ट्रॉनों की गतिज ऊर्जा में बदल जाती है. यानी, \( \text{KE} = h\nu - h\nu_0 = h(\nu - \nu_0) \).
प्रकाश विद्युत प्रभाव से यह पता चलता है कि प्रकाश में कण (फोटॉन) जैसे गुण भी होते हैं, न कि केवल तरंग जैसे.
In simple words: प्लांक का क्वांटम सिद्धांत बताता है कि ऊर्जा हमेशा छोटे-छोटे पैकेटों (क्वांटम) में ही निकलती या सोखी जाती है. प्रकाश विद्युत प्रभाव दिखाता है कि जब प्रकाश धातु से टकराता है, तो उससे इलेक्ट्रॉन निकलते हैं. इससे पता चलता है कि प्रकाश में कण और तरंग दोनों के गुण होते हैं.
🎯 Exam Tip: क्वांटम सिद्धांत के मुख्य बिंदुओं को याद रखें, जैसे ऊर्जा का पैकेटों में होना और E=hv सूत्र. प्रकाश विद्युत प्रभाव में देहली आवृत्ति और कार्य फलन की परिभाषाएँ महत्वपूर्ण हैं.
Question 38. रदरफोर्ड परमाणु मॉडल क्या था? इसकी असफलता के कारण लिखिये।
Answer: रदरफोर्ड का परमाणु मॉडल, जिसे नाभिकीय परमाणु मॉडल भी कहते हैं, परमाणु की संरचना को समझाने के लिए बनाया गया था. इस मॉडल के अनुसार, परमाणु के केंद्र में एक बहुत छोटा और घना धनावेशित भाग होता है, जिसे नाभिक कहते हैं. परमाणु का लगभग सारा द्रव्यमान इसी नाभिक में होता है. इलेक्ट्रॉन नाभिक के चारों ओर बहुत तेजी से गोलाकार कक्षाओं में घूमते हैं, जैसे सूर्य के चारों ओर ग्रह घूमते हैं. इसे सौरमंडल मॉडल भी कहते हैं. इलेक्ट्रॉन और नाभिक के बीच स्थिर वैद्युत आकर्षण बल होता है.
रदरफोर्ड मॉडल के दोष (Drawbacks of Rutherford's Model):
1. **परमाणु के स्थायित्व की व्याख्या:** मैक्सवेल के विद्युत चुम्बकीय सिद्धांत के अनुसार, जब कोई आवेशित कण (जैसे इलेक्ट्रॉन) त्वरण के साथ घूमता है, तो वह लगातार ऊर्जा का उत्सर्जन करता है. यदि इलेक्ट्रॉन नाभिक के चारों ओर घूमते हुए ऊर्जा छोड़ेंगे, तो उनकी ऊर्जा कम होती जाएगी और वे धीरे-धीरे नाभिक के करीब आते हुए अंत में सर्पिलाकार मार्ग में नाभिक में गिर जाएंगे. ऐसा 10-8 सेकंड में हो जाना चाहिए, जिससे परमाणु अस्थिर हो जाएगा. लेकिन वास्तव में परमाणु स्थिर होते हैं. रदरफोर्ड का मॉडल इस स्थायित्व को नहीं समझा पाया.
2. **रेखीय स्पेक्ट्रम की व्याख्या:** रदरफोर्ड मॉडल के अनुसार, इलेक्ट्रॉन लगातार ऊर्जा का उत्सर्जन करते हैं, जिससे एक सतत स्पेक्ट्रम (continuous spectrum) मिलना चाहिए. लेकिन प्रयोगों से पता चला है कि परमाणुओं का स्पेक्ट्रम रेखीय होता है, यानी इसमें केवल कुछ निश्चित तरंगदैर्ध्य की रेखाएँ होती हैं. रदरफोर्ड का मॉडल इस रेखीय स्पेक्ट्रम को भी नहीं समझा पाया.
3. **इलेक्ट्रॉनिक संरचना की व्याख्या:** यह मॉडल इलेक्ट्रॉनों के वितरण और उनकी ऊर्जा स्तरों के बारे में कोई जानकारी नहीं देता था, जिससे परमाणु की इलेक्ट्रॉनिक संरचना स्पष्ट नहीं हो पाती थी.
In simple words: रदरफोर्ड मॉडल ने बताया कि परमाणु के बीच में एक छोटा, भारी नाभिक होता है और इलेक्ट्रॉन उसके चारों ओर घूमते हैं. यह मॉडल परमाणु के स्थिर होने और उसके रेखीय स्पेक्ट्रम को नहीं समझा पाया, क्योंकि घूमते हुए इलेक्ट्रॉन को ऊर्जा छोड़नी चाहिए और नाभिक में गिर जाना चाहिए.
🎯 Exam Tip: रदरफोर्ड के मॉडल के मुख्य बिंदुओं (नाभिक, इलेक्ट्रॉन की गति) को याद रखें और इसकी दो प्रमुख कमियाँ (परमाणु का स्थायित्व और रेखीय स्पेक्ट्रम की व्याख्या न कर पाना) जरूर लिखें.
Question 39. निम्न पर टिप्पणी लिखो
1. द – ब्रॉग्ली का द्रव्य का द्वैत व्यवहार
2. हाइजेनबर्ग का अनिश्चितता का सिद्धान्त
Answer:
**1. द-ब्रॉग्ली का द्रव्य का द्वैत व्यवहार (De Broglie's Dual Behavior of Matter):**
द-ब्रॉग्ली ने यह विचार दिया कि प्रकाश की तरह, द्रव्य (जैसे इलेक्ट्रॉन, प्रोटॉन, न्यूट्रॉन आदि) भी दो तरह का व्यवहार दिखाता है – कण और तरंग दोनों का. इसका मतलब है कि सूक्ष्म कणों में संवेग (momentum) और तरंगदैर्ध्य (wavelength) दोनों होते हैं. उन्होंने बताया कि द्रव्य कणों से जुड़ी तरंग की तरंगदैर्ध्य \( \lambda \) उसके संवेग (p) के व्युत्क्रमानुपाती होती है. यह संबंध \( \lambda = \frac{h}{p} = \frac{h}{mv} \) है, जहाँ 'h' प्लांक स्थिरांक है, 'm' कण का द्रव्यमान है, और 'v' कण का वेग है. इस सूत्र को द-ब्रॉग्ली समीकरण कहते हैं. प्रयोगों से यह सिद्ध हुआ है कि इलेक्ट्रॉन पुंज विवर्तन (diffraction) दिखाता है, जो तरंग प्रकृति का प्रमाण है. द-ब्रॉग्ली सिद्धांत के आधार पर इलेक्ट्रॉन सूक्ष्मदर्शी बनाए गए हैं. बड़े द्रव्यमान वाली वस्तुओं के लिए, यह तरंगदैर्ध्य इतनी छोटी होती है कि इसे मापना असंभव होता है, इसलिए उनका तरंग गुण दिखाई नहीं देता.
**द-ब्रॉग्ली संबंध की व्युत्पत्ति:** आइंस्टीन के ऊर्जा समीकरण \( E = mc^2 \) और प्लांक के ऊर्जा समीकरण \( E = h\nu \) को मिलाकर यह संबंध निकाला गया है.
\( \implies h\nu = mc^2 \)
चूंकि \( \nu = \frac{c}{\lambda} \),
\( \implies \frac{hc}{\lambda} = mc^2 \)
\( \implies \lambda = \frac{h}{mc} \)
प्रकाश के लिए c की जगह कण के वेग v को रखने पर, \( \lambda = \frac{h}{mv} = \frac{h}{p} \). यह सूत्र द्रव्य कणों के तरंग गुण को दर्शाता है.
**2. हाइजेनबर्ग का अनिश्चितता का सिद्धान्त (Heisenberg's Uncertainty Principle):**
हाइजेनबर्ग ने 1927 में यह सिद्धांत दिया कि परमाणु में किसी इलेक्ट्रॉन की सही स्थिति (position) और सही संवेग (momentum) या वेग (velocity) को एक ही समय में बिल्कुल सही-सही मापना असंभव है. यदि हम इलेक्ट्रॉन की स्थिति को बहुत सटीकता से मापते हैं, तो उसके संवेग को मापने में बहुत अनिश्चितता आ जाएगी, और यदि हम संवेग को बहुत सटीकता से मापते हैं, तो स्थिति में अनिश्चितता बढ़ जाएगी. इसका गणितीय रूप \( \Delta x \times \Delta p \geq \frac{h}{4\pi} \) है, जहाँ \( \Delta x \) स्थिति में अनिश्चितता है, \( \Delta p \) संवेग में अनिश्चितता है, और 'h' प्लांक स्थिरांक है.
**अनिश्चितता के सिद्धांत का महत्त्व:** यह सिद्धांत बताता है कि इलेक्ट्रॉन जैसे सूक्ष्म कणों का कोई निश्चित मार्ग या प्रक्षेप पथ नहीं होता है. यह क्वांटम यांत्रिकी का एक मूलभूत सिद्धांत है. यह बड़े कणों पर लागू नहीं होता है क्योंकि उनका द्रव्यमान अधिक होने के कारण अनिश्चितता बहुत कम होती है, जिसे मापा नहीं जा सकता. लेकिन इलेक्ट्रॉन जैसे छोटे कणों के लिए यह अनिश्चितता वास्तविक होती है.
In simple words: द-ब्रॉग्ली का द्वैत व्यवहार कहता है कि बहुत छोटे कण, जैसे इलेक्ट्रॉन, तरंग और कण दोनों की तरह व्यवहार करते हैं. हाइजेनबर्ग का अनिश्चितता का सिद्धांत कहता है कि हम किसी इलेक्ट्रॉन की जगह और उसकी चाल को एक ही समय में पूरी तरह सही-सही नहीं बता सकते.
🎯 Exam Tip: द-ब्रॉग्ली के समीकरण (\( \lambda = h/p \)) और हाइजेनबर्ग के अनिश्चितता सिद्धांत (\( \Delta x \times \Delta p \geq h/4\pi \)) के सूत्रों को याद रखें. उनके अर्थ और महत्व को सरल भाषा में समझाएँ.
3. क्वांटम संख्याएँ तथा कक्षकः
Answer: किसी परमाणु में इलेक्ट्रॉन की स्थिति, ऊर्जा, कक्षकों का आकार, आकृति, अभिविन्यास और चक्रण को बताने के लिए जिन संख्याओं का उपयोग किया जाता है, उन्हें क्वांटम संख्याएँ कहते हैं. ये चार प्रकार की होती हैं:
**(1) मुख्य क्वांटम संख्या (Principal Quantum Number) (n):**
यह क्वांटम संख्या इलेक्ट्रॉन के कोश (Shell) या कक्षा (Orbit) को दर्शाती है. यह कक्षक के आकार और ऊर्जा को भी बताती है. इसका मान 1, 2, 3... कोई भी पूर्ण संख्या हो सकता है (जैसे K, L, M, N...). n का मान बढ़ने पर कक्षक का आकार और ऊर्जा बढ़ती है, जिससे इलेक्ट्रॉन नाभिक से दूर होते जाते हैं और परमाणु की स्थिरता कम होती जाती है. n का मान कभी शून्य नहीं होता. किसी कोश में इलेक्ट्रॉनों की अधिकतम संख्या \( 2n^2 \) होती है.
**(2) दिगंशीय या कक्षक कोणीय संवेग या भौम क्वांटम संख्या (Azimuthal or Orbital Angular Momentum or Subsidiary Quantum Number) (l):**
यह क्वांटम संख्या उपकोश (Subshell) को दर्शाती है और बहु-इलेक्ट्रॉन परमाणु की ऊर्जा भी बताती है. यह कक्षक की त्रिविमीय आकृति निर्धारित करती है. 'l' का मान 0 से \( n-1 \) तक कुछ भी हो सकता है. 'l' के अलग-अलग मानों के लिए उपकोशों को s (l=0), p (l=1), d (l=2), f (l=3) अक्षरों से दर्शाया जाता है. s उपकोश गोलाकार, p उपकोश डम्बलाकार और d उपकोश डबल-डम्बलाकार होते हैं. 'l' का मान कभी भी 'n' के बराबर या उससे अधिक नहीं होता.
| मुख्य क्वांटम संख्या (n) | दिगंशी क्वांटम संख्या (l) | उपकोश |
|---|---|---|
| n = 1 | l = 0 | 1s |
| n = 2 | l = 0 | 2s |
| l = 1 | 2p | |
| n = 3 | l = 0 | 3s |
| l = 1 | 3p | |
| l = 2 | 3d | |
| n = 4 | l = 0 | 4s |
| l = 1 | 4p | |
| l = 2 | 4d | |
| l = 3 | 4f |
**(3) चुम्बकीय क्वांटम संख्या (Magnetic Quantum Number) (m_l):**
यह क्वांटम संख्या किसी उपकोश में कक्षकों की संख्या और उनके त्रिविमीय अभिविन्यास को बताती है. जब परमाणु को बाहरी चुंबकीय क्षेत्र में रखा जाता है, तो उपकोश के कक्षक अलग-अलग भागों में बँट जाते हैं. m_l का मान \( -l \) से \( +l \) तक होता है (शून्य सहित). किसी उपकोश में कक्षकों की कुल संख्या \( 2l+1 \) होती है.
| l का मान | उपकोश | ml के मान | कक्षकों की संख्या तथा उनका नाम |
|---|---|---|---|
| 0 | s | 0 | एक s कक्षक |
| 1 | p | -1, 0, +1 | तीन p कक्षक (px, py तथा pz) |
| 2 | d | -2, -1, 0, +1, +2 | पाँच d कक्षक (dxy, dyz, dzx, dx2-y2, dz2) |
| 3 | f | -3, -2, -1, 0, +1, +2, +3 | सात f कक्षक |
**(4) चक्रण क्वांटम संख्या (Spin Quantum Number) (m_s):**
यह क्वांटम संख्या इलेक्ट्रॉन के अपने अक्ष पर चक्रण (घूमने) की दिशा को बताती है. एक इलेक्ट्रॉन नाभिक के चारों ओर घूमने के साथ-साथ अपने अक्ष पर भी घूमता है, जैसे पृथ्वी सूर्य के चारों ओर घूमते हुए अपने अक्ष पर घूमती है. इस चक्रण से एक कमजोर चुंबकीय क्षेत्र बनता है. m_s के दो संभावित मान होते हैं: \( +1/2 \) (ऊपरी चक्रण, \( \uparrow \)) और \( -1/2 \) (नीचे चक्रण, \( \downarrow \)). ये मान दर्शाते हैं कि एक ही कक्षक में अधिकतम दो इलेक्ट्रॉन विपरीत चक्रण के साथ रह सकते हैं, जो पाऊली अपवर्जन सिद्धांत का आधार है. यह क्वांटम संख्या किसी अन्य क्वांटम संख्या पर निर्भर नहीं करती, बल्कि स्वतंत्र होती है.
In simple words: क्वांटम संख्याएँ इलेक्ट्रॉनों की पहचान होती हैं. मुख्य संख्या (n) बताती है कि इलेक्ट्रॉन किस ऊर्जा स्तर (कक्षा) में है. दिगंशी संख्या (l) बताती है कि उपकोश कैसा है (s, p, d, f) और उसका आकार क्या है. चुंबकीय संख्या (m_l) बताती है कि कक्षक किस दिशा में है. चक्रण संख्या (m_s) बताती है कि इलेक्ट्रॉन अपनी धुरी पर कैसे घूम रहा है (घड़ी की दिशा में या विपरीत).
🎯 Exam Tip: प्रत्येक क्वांटम संख्या का अर्थ और उसके संभावित मानों को याद रखें. 'n' से कोश, 'l' से उपकोश, 'm_l' से कक्षक का अभिविन्यास, और 'm_s' से इलेक्ट्रॉन का चक्रण याद रखें.
| कोश (Shell) | मुख्य क्वांटम संख्या (n) | द्विगंशी क्वांटम संख्या (l) | उपकोश | कक्षकों की संख्या | उपकोश में अधिकतम इलेक्ट्रॉन | कोश में अधिकतम इलेक्ट्रॉन |
|---|---|---|---|---|---|---|
| K | 1 | 0 | 1s | 1 | 2 | 2 |
| L | 2 | 0 | 2s | 1 | 2 | 8 |
| 1 | 2p | 3 | 6 | |||
| M | 3 | 0 | 3s | 1 | 2 | 18 |
| 1 | 3p | 3 | 6 | |||
| 2 | 3d | 5 | 10 | |||
| N | 4 | 0 | 4s | 1 | 2 | 32 |
| 1 | 4p | 3 | 6 | |||
| 2 | 4d | 5 | 10 | |||
| 3 | 4f | 7 | 14 |
4. कक्षकों की आकृति:
एक इलेक्ट्रॉन तरंग फलन \((\Psi)\), परमाणु कक्षक कहलाता है। \((\Psi)\) का कोई भौतिक अर्थ नहीं होता है, यह केवल इलेक्ट्रॉन के निर्देशांकों (coordinate) का गणितीय फलन होता है। यद्यपि विभिन्न कक्षकों के लिए नाभिक से कक्षक की दूरी \( (r) \) के फलन के रूप में संगत, तरंग फलन आरेख भिन्न-भिन्न कक्षकों के लिए भिन्न होते हैं। \(1s\) तथा \(2s\) कक्षकों के लिए आरेख दिए गए हैं। मैक्सबोर्न के अनुसार किसी बिन्दु पर \( \Psi^2 \) उस बिन्दु पर इलेक्ट्रॉन घनत्व की प्रायिकता को दर्शाता है।
प्रायिकता घनत्व \( [\Psi^2(r)] \) में परिवर्तन के आरेख। उपर्युक्त चित्र से ज्ञात होता है कि \( 1s \) कक्षक के लिए प्रायिकता घनत्व \( \Psi^2(r) \) नाभिक पर अधिकतम है जो कि नाभिक से दूरी के साथ घटता जाता है तथा \( 2s \) कक्षक के लिए प्रायिकता घनत्व पहले तेजी से घटता है फिर शून्य होने के पश्चात् बढ़ना प्रारम्भ होता है। \( r \) का मान बढ़ने पर पहले प्रायिकता घनत्व बढ़ता है तथा एक छोटे अधिकतम (small maxima) के बाद पुनः कम होता जाता है एवं लगभग शून्य हो जाता है। यह ग्राफ इलेक्ट्रॉन के नाभिक से दूरी के साथ उसके पाए जाने की संभावना को दर्शाते हैं।
कक्षकों की आकृति को स्थिर प्रायिकता घनत्व वाले सीमा सतह आरेखों द्वारा प्रदर्शित किया जाता है। इसमें किसी कक्षक के लिए ऐसी परिसीमा सतह को आरेखित किया जाता है, जिस पर प्रायिकता घनत्व \( |\Psi|^2 \) का मान स्थिर हो। सैद्धांतिक रूप में, किसी कक्षक के लिए ऐसे कई परिसीमा सतह आरेख सम्भव हैं लेकिन वे आरेख ही कक्षक की आकृति माने जाते हैं, जिनके द्वारा निर्धारित क्षेत्र में इलेक्ट्रॉन के पाए जाने की प्रायिकता बहुत अधिक (लगभग 90%) होती है। किन्तु निश्चित आकार के परिसीमा सतह आरेख बनाना संभव नहीं है जिनमें इलेक्ट्रॉन के पाए जाने की प्रायिकता 100 प्रतिशत हो। \( s \)-कक्षकों की आकृति (Shape of s-orbitals) \( s \)-कक्षक के लिए परिसीमा सतह आरेख गोलीय होता है जिसके केन्द्र में नाभिक होता है। द्विविमीय रूप में यह गोला एक वृत्त की भाँति दिखाई देता है। इस प्रकार \( s \)-कक्षक अदिशात्मक तथा गोलाकार सममित होते हैं अतः इनमें नाभिक के चारों ओर प्रत्येक दिशा में इलेक्ट्रॉन के पाए जाने की प्रायिकता समान होती है। नाभिक के पास इलेक्ट्रॉन को ढूंढने की संभावना सबसे ज्यादा होती है। \( n \) का मान बढ़ने पर \( s \)-कक्षक को आकार भी बढ़ता जाता है अर्थात् \( 4s > 3s > 2s > 1s \)
p - कक्षक की आकृतियाँ (Shapes of p - orbitals):
\( p \)-कक्षक की आकृति डम्बलाकार (dumb-bell shape) होती है जिसमें नाभिक मूल बिन्दु पर स्थित होता है। \( p \)-कक्षक दिशात्मक होते हैं तथा प्रत्येक \( p \)-कक्षक के दो भाग होते हैं, जिन्हें 'पालियाँ' (lobes) कहते हैं। इन दोनों पालियों में इलेक्ट्रॉन के पाए जाने की प्रायिकता बराबर होती है। ये पालियाँ नाभिक से गुजरने वाले तल के दोनों ओर स्थित होती हैं। जहाँ ये दोनों पालियाँ एक-दूसरे से दूर होती हैं, वहाँ तल पर प्रायिकता घनत्व फलन शून्य होता है। सभी \( p \)-कक्षकों की आकृति व ऊर्जा समान होती है, लेकिन वे विभिन्न दिशाओं में उन्मुख होते हैं।
d - कक्षकों की आकृतियाँ (Shapes of d - orbitals):
\( d \)-कक्षक के लिए \( l=2 \) होता है तथा इसके लिए \( n \) का न्यूनतम मान 3 होता है। \( l=2 \) के लिए \( m_l \) के पाँच मान होते हैं (\(-2, -1, 0, +1\) तथा \(+2\)) अतः \( d \)-कक्षक पाँच होते हैं, जिन्हें \( d_{xy}, d_{yz}, d_{zx}, d_{x^2-y^2} \) तथा \( d_{z^2} \) नाम दिया गया है। पहले चार \( d \)-कक्षकों की आकृति द्विडम्बेल होती है जिनमें चार पॉलियाँ होती हैं लेकिन \( d_{z^2} \)-कक्षक की आकृति भिन्न होती है। पाँचों \( d \)-कक्षकों की ऊर्जा बराबर होती है। भिन्न-भिन्न कक्षों के \( d \)-कक्षकों की आकृतियाँ तो समान होती हैं। लेकिन उनकी ऊर्जा तथा आकार भिन्न होते हैं। \( d_{xy}, d_{yz}, \) तथा \( d_{zx} \).
कक्षकों में इलेक्ट्रॉन के पाए जाने की संभावना अक्षों के मध्य अधिक होती है क्योंकि इनकी पॉलियाँ अक्षों के मध्य होती हैं, जबकि \( d_{x^2-y^2} \) तथा \( d_{z^2} \) कक्षकों में इलेक्ट्रॉन के पाए जाने की संभावना अक्षों पर अधिक होती है क्योंकि इनकी पॉलियाँ अक्षों पर होती हैं। ये कक्षकों की अलग-अलग दिशाओं में इलेक्ट्रॉन घनत्व के वितरण को दर्शाते हैं।
त्रिज्य नोडों के अतिरिक्त, \( np \) तथा \( nd \) कक्षकों के लिए प्रायिकता घनत्व फलन उस तल पर भी शून्य होते हैं जो कि नाभिक से गुजरता है, इन्हें कोणीय नोड या नोडल तल कहते हैं तथा कोणीय नोडों की संख्या \( l \) के बराबर होती है। अतः \( p \)-कक्षकों के लिए एक तथा \( d \)-कक्षकों के लिए दो कोणीय नोड होते हैं। यह दर्शाता है कि इलेक्ट्रॉन को कुछ विशेष स्थानों पर नहीं पाया जा सकता।
उदाहरण:
\( px \) कक्षक के लिए नोडल तल \( = yz \),
\( py \) कक्षक के लिए नोडल तल \( = xz \),
\( pz \) कक्षक के लिए नोडल तल \( = xy \),
\( dxy \) कक्षक के लिए नोडल तल \( = yz, zx \), एक नाभिक से गुजरते हुए तथा दूसरा \( z \) अक्ष पर \( xy \) तल को भेदते हुए।
\( dyz \) कक्षक के लिए नोडल तल \( = xy, zx \),
\( dzx \) कक्षक के लिए नोडल तल \( = xy, yz \)
लेकिन \( d_{x^2-y^2} \) तथा \( d_{z^2} \) कक्षक का कोई नोडल तल नहीं होता है।
अतः नोडों की कुल संख्या \( = n-1 \) जिनमें कोणीय नोड \( = l \) तथा त्रिज्य नोड \( = (n-l-1) \)
RBSE Class 11 Chemistry Chapter 2 आंकिक प्रश्न
प्रश्न 40. पीले प्रकाश की तरंगदैर्ध्य \( 580nm \) है। इसकी आवृत्ति \( (v) \) तथा तरंग संख्या \( (\overline{v}) \) का परिकलन कीजिए।
Answer: तरंगदैर्ध्य \( \lambda = 580 \, nm = 580 \times 10^{-9} \, m \)
प्रकाश की गति \( c = 3 \times 10^8 \, m/s \)
आवृत्ति \( v = \frac{c}{\lambda} \)
\( v = \frac{3 \times 10^8 \, m/s}{580 \times 10^{-9} \, m} \)
\( v = \frac{3 \times 10^8}{5.8 \times 10^{-7}} = 0.5172 \times 10^{15} \)
\( v = 5.172 \times 10^{14} \, s^{-1} \)
तरंग संख्या \( \overline{v} = \frac{1}{\lambda} \)
\( \overline{v} = \frac{1}{580 \times 10^{-9} \, m} \)
\( \overline{v} = 0.001724 \times 10^9 \, m^{-1} \)
\( \overline{v} = 1.724 \times 10^6 \, m^{-1} \)
\( \overline{v} = 1.724 \times 10^4 \, cm^{-1} \)
In simple words: पीले प्रकाश की तरंगदैर्ध्य दी गई है। आवृत्ति निकालने के लिए प्रकाश की गति को तरंगदैर्ध्य से भाग करें। तरंग संख्या निकालने के लिए तरंगदैर्ध्य का व्युत्क्रम करें।
🎯 Exam Tip: तरंगदैर्ध्य को हमेशा मानक इकाई मीटर में बदलें, तभी प्रकाश की गति के मान का सही उपयोग हो पाएगा।
प्रश्न 41. \( 3 \times 10^{15} \, Hz \) आवृत्ति वाले प्रकाश के संगत फोटॉन की ऊर्जा ज्ञात कीजिये। यदि प्रकाश की तरंगदैर्ध्य \( \lambda \, (0.50 \, \text{Å}) \) हो तो उसकी ऊर्जा \( E \) ज्ञात कीजिये।
Answer:
(i) फोटॉन की ऊर्जा \( (E) = hv \)
यहाँ \( h \) प्लांक स्थिरांक है \( (6.626 \times 10^{-34} \, Js) \)
\( v = 3 \times 10^{15} \, s^{-1} \)
\( E = 6.626 \times 10^{-34} \, Js \times 3 \times 10^{15} \, s^{-1} \)
\( E = 19.878 \times 10^{-19} \, J \)
\( E = 1.988 \times 10^{-18} \, J \)
(ii) ऊर्जा \( (E) = hv = \frac{hc}{\lambda} \)
यहाँ \( c = 3 \times 10^8 \, ms^{-1} \)
\( \lambda = 0.50 \, \text{Å} = 0.5 \times 10^{-10} \, m \)
\( E = \frac{6.626 \times 10^{-34} \, Js \times 3 \times 10^8 \, ms^{-1}}{0.5 \times 10^{-10} \, m} \)
\( E = 39.756 \times 10^{-16} \, J \)
\( E = 3.98 \times 10^{-15} \, J \)
In simple words: फोटॉन की ऊर्जा निकालने के लिए प्लांक के सूत्र \( E=hv \) का उपयोग करें। यदि आवृत्ति दी गई है, तो सीधे मान रखें। यदि तरंगदैर्ध्य दी गई है, तो \( v \) की जगह \( c/\lambda \) रखें।
🎯 Exam Tip: प्लांक स्थिरांक और प्रकाश की गति के मानों को याद रखना इस तरह के प्रश्नों को हल करने में मदद करता है।
प्रश्न 43. \( 25 \) वॉट का एक बल्ब \( 0.57 \, \mu m \) तरंगदैर्ध्य वाला पीले रंग का एकवर्णी प्रकाश उत्पन्न करता है। इससे प्रति सैकण्ड कांटा के उत्सर्जन की दर ज्ञात कीजिये।
Answer: बल्ब की क्षमता (Power) \( P = 25 \, W = 25 \, Js^{-1} \)
प्रकाश की तरंगदैर्ध्य \( \lambda = 0.57 \, \mu m = 0.57 \times 10^{-6} \, m \)
फोटॉन की ऊर्जा \( (E) = \frac{hc}{\lambda} \)
\( E = \frac{6.626 \times 10^{-34} \, Js \times 3 \times 10^8 \, ms^{-1}}{0.57 \times 10^{-6} \, m} \)
\( E = 3.487 \times 10^{-19} \, J \)
उत्सर्जित फोटॉनों की संख्या प्रति सेकंड \( (N) = \frac{\text{बल्ब की क्षमता}}{\text{एक फोटॉन की ऊर्जा}} \)
\( N = \frac{25 \, J/s}{3.487 \times 10^{-19} \, J} \)
\( N = 7.169 \times 10^{19} \, s^{-1} \)
In simple words: बल्ब की कुल ऊर्जा को एक फोटॉन की ऊर्जा से भाग करके यह पता लगा सकते हैं कि बल्ब एक सेकंड में कितने फोटॉन छोड़ रहा है।
🎯 Exam Tip: सुनिश्चित करें कि सभी इकाइयाँ SI प्रणाली में हों, जैसे मीटर, जूल और सेकंड, ताकि गणना सही हो।
प्रश्न 44. \( 6800 \, \text{Å} \) तरंगदैर्ध्य वाले विकिरण किसी धातु की सतह पर डालने से शून्य वेग वाले इलेक्ट्रॉन उत्सर्जित होते हैं। धातु की देहली आवृत्ति \( (v_0) \) और कार्यफलन \( (W_0) \) ज्ञात कीजिए।
Answer: दिया गया विकिरण का तरंगदैर्ध्य \( \lambda = 6800 \, \text{Å} = 6800 \times 10^{-10} \, m \)
शून्य वेग वाले इलेक्ट्रॉन उत्सर्जित होते हैं, इसका मतलब है कि यह देहली तरंगदैर्ध्य \( (\lambda_0) \) के बराबर है।
इसलिए, देहली तरंगदैर्ध्य \( \lambda_0 = 6800 \times 10^{-10} \, m \)
देहली आवृत्ति \( v_0 = \frac{c}{\lambda_0} \)
\( v_0 = \frac{3 \times 10^8 \, m/s}{6800 \times 10^{-10} \, m} \)
\( v_0 = 4.411 \times 10^{14} \, s^{-1} \)
कार्यफलन \( W_0 = hv_0 \)
\( W_0 = 6.626 \times 10^{-34} \, Js \times 4.411 \times 10^{14} \, s^{-1} \)
\( W_0 = 2.923 \times 10^{-19} \, J \)
In simple words: जब इलेक्ट्रॉन शून्य गति से निकलते हैं, तो दी गई तरंगदैर्ध्य देहली तरंगदैर्ध्य बन जाती है। इससे हम देहली आवृत्ति और फिर धातु का कार्यफलन निकाल सकते हैं।
🎯 Exam Tip: याद रखें कि कार्यफलन \( W_0 = hv_0 \) है, जहाँ \( v_0 \) न्यूनतम आवृत्ति है जो इलेक्ट्रॉन को धातु की सतह से निकालने के लिए चाहिए।
प्रश्न 45. हाइड्रोजन परमाणु के ऊर्जा स्तर \( n = 4 \) से ऊर्जा स्तर \( n = 2 \) में इलेक्ट्रॉन जाता है, तो किस तरंगदैर्ध्य का प्रकाश उत्सर्जित होगा?
Answer: हाइड्रोजन के लिए उत्सर्जित प्रकाश की तरंग संख्या \( (\overline{v}) \) रिडबर्ग सूत्र द्वारा दी जाती है:
\( \overline{v} = R_H \left( \frac{1}{n_1^2} - \frac{1}{n_2^2} \right) \)
यहाँ, \( R_H \) रिडबर्ग स्थिरांक \( = 1.09677 \times 10^7 \, m^{-1} \)
\( n_1 = 2 \) (निम्न ऊर्जा स्तर)
\( n_2 = 4 \) (उच्च ऊर्जा स्तर)
\( \overline{v} = 1.09677 \times 10^7 \left( \frac{1}{2^2} - \frac{1}{4^2} \right) \)
\( \overline{v} = 1.09677 \times 10^7 \left( \frac{1}{4} - \frac{1}{16} \right) \)
\( \overline{v} = 1.09677 \times 10^7 \left( \frac{4-1}{16} \right) \)
\( \overline{v} = 1.09677 \times 10^7 \times \frac{3}{16} \)
\( \overline{v} = 2.05644 \times 10^6 \, m^{-1} \)
उत्सर्जित प्रकाश की तरंगदैर्ध्य \( \lambda = \frac{1}{\overline{v}} \)
\( \lambda = \frac{1}{2.05644 \times 10^6 \, m^{-1}} \)
\( \lambda = 4.862 \times 10^{-7} \, m \)
\( \lambda = 486.2 \, nm \)
In simple words: जब इलेक्ट्रॉन एक उच्च ऊर्जा स्तर से निम्न ऊर्जा स्तर में कूदता है, तो यह प्रकाश छोड़ता है। हम रिडबर्ग सूत्र का उपयोग करके उत्सर्जित प्रकाश की तरंग संख्या निकाल सकते हैं, और फिर तरंग संख्या का व्युत्क्रम लेकर तरंगदैर्ध्य ज्ञात कर सकते हैं।
🎯 Exam Tip: रिडबर्ग सूत्र को सही ढंग से लागू करना और \( n_1 \) और \( n_2 \) के मानों को ध्यान से रखना महत्वपूर्ण है, क्योंकि \( n_1 \) हमेशा निम्न ऊर्जा स्तर को दर्शाता है।
प्रश्न 46. हाइड्रोजन परमाणु के प्रथम कक्षक से सम्बन्धित ऊर्जा \( -2.18 \times 10^{-18} \, J \, atm^{-1} \) है, तो पांचवें कक्षक से सम्बन्धित ऊर्जा का मान क्या होगा?
Answer: हाइड्रोजन में \( n \)वें कक्ष की ऊर्जा \( (E_n) \) का सूत्र है:
\( E_n = \frac{-2.18 \times 10^{-18}}{n^2} \, J \)
प्रथम कक्षक के लिए \( n = 1 \) और ऊर्जा \( E_1 = -2.18 \times 10^{-18} \, J \)
पांचवें कक्षक के लिए \( n = 5 \) होगा।
\( E_5 = \frac{-2.18 \times 10^{-18}}{5^2} \, J \)
\( E_5 = \frac{-2.18 \times 10^{-18}}{25} \, J \)
\( E_5 = -0.0872 \times 10^{-18} \, J \)
\( E_5 = -8.72 \times 10^{-20} \, J \)
In simple words: हाइड्रोजन परमाणु के लिए ऊर्जा का मान मुख्य क्वांटम संख्या \( (n) \) के वर्ग के व्युत्क्रमानुपाती होता है। दिए गए सूत्र में \( n \) का मान बदलकर हम किसी भी कक्ष की ऊर्जा निकाल सकते हैं।
🎯 Exam Tip: इस तरह के प्रश्नों में \( n \) के सही मानों का उपयोग करना और गणना में \( n^2 \) का ध्यान रखना महत्वपूर्ण है।
प्रश्न 47. किसी इलेक्ट्रॉन की तरंगदैर्ध्य की गणना कीजिये। यदि वह \( 2.05 \times 10^7 \, ms^{-1} \) वेग से गति कर रहा है।
Answer: इलेक्ट्रॉन की तरंगदैर्ध्य (डी ब्रॉग्ली तरंगदैर्ध्य) का सूत्र है:
\( \lambda = \frac{h}{mv} \)
जहाँ \( h \) प्लांक स्थिरांक \( = 6.626 \times 10^{-34} \, Js \)
\( m \) इलेक्ट्रॉन का द्रव्यमान \( = 9.1 \times 10^{-31} \, kg \)
\( v \) इलेक्ट्रॉन का वेग \( = 2.05 \times 10^7 \, ms^{-1} \)
\( \lambda = \frac{6.626 \times 10^{-34} \, Js}{9.1 \times 10^{-31} \, kg \times 2.05 \times 10^7 \, ms^{-1}} \)
\( \lambda = \frac{6.626 \times 10^{-34}}{18.655 \times 10^{-24}} \)
\( \lambda = 0.3551 \times 10^{-10} \, m \)
\( \lambda = 3.55 \times 10^{-11} \, m \)
In simple words: डी ब्रॉग्ली के नियम के अनुसार, हर गतिमान कण में तरंग प्रकृति होती है। इस तरंगदैर्ध्य को कण के द्रव्यमान और वेग के आधार पर प्लांक स्थिरांक का उपयोग करके निकाला जा सकता है।
🎯 Exam Tip: डी ब्रॉग्ली समीकरण का उपयोग करते समय, सुनिश्चित करें कि सभी मान (प्लांक स्थिरांक, द्रव्यमान, वेग) SI इकाइयों में हों।
प्रश्न 48. किसी इलेक्ट्रॉन को \( n = 2 \) से पूरी तरह निकालने के लिये आवश्यक ऊर्जा की गणना कीजिये। हाइड्रोजन परमाणु में इलेक्ट्रॉन ऊर्जा \( E = \frac{-2.18 \times 10^{-18}}{n^2} \, J \) है। प्रकाश की सबसे लम्बी तरंगदैर्ध्य ज्ञात करिये। जिसका उपयोग इस संक्रमण में किया जा सके।
Answer: इलेक्ट्रॉन को पूरी तरह निकालने का मतलब है कि इलेक्ट्रॉन को अनंत \( (n = \infty) \) तक ले जाना।
इसलिए, \( n_1 = 2 \) (प्रारंभिक ऊर्जा स्तर) और \( n_2 = \infty \) (अंतिम ऊर्जा स्तर)
हाइड्रोजन परमाणु में ऊर्जा का सूत्र है: \( E_n = \frac{-2.18 \times 10^{-18}}{n^2} \, J \)
\( E_2 = \frac{-2.18 \times 10^{-18}}{2^2} = \frac{-2.18 \times 10^{-18}}{4} = -0.545 \times 10^{-18} \, J \)
\( E_{\infty} = \frac{-2.18 \times 10^{-18}}{\infty^2} = 0 \, J \)
आवश्यक ऊर्जा \( \Delta E = E_{\infty} - E_2 \)
\( \Delta E = 0 - (-0.545 \times 10^{-18} \, J) \)
\( \Delta E = 0.545 \times 10^{-18} \, J \)
अब, प्रकाश की तरंगदैर्ध्य \( \lambda = \frac{hc}{\Delta E} \)
\( \lambda = \frac{6.626 \times 10^{-34} \, Js \times 3 \times 10^8 \, ms^{-1}}{0.545 \times 10^{-18} \, J} \)
\( \lambda = \frac{1.9878 \times 10^{-25}}{0.545 \times 10^{-18}} \)
\( \lambda = 3.647 \times 10^{-7} \, m \)
\( \lambda = 364.7 \, nm \)
यह आवश्यक ऊर्जा है और संगत तरंगदैर्ध्य \( 3.647 \times 10^{-7} \, m \) होगी।
In simple words: इलेक्ट्रॉन को किसी स्तर से पूरी तरह बाहर निकालने के लिए, उसे अनंत ऊर्जा स्तर तक ले जाना होता है। दोनों ऊर्जा स्तरों के बीच के अंतर से हम आवश्यक ऊर्जा और प्रकाश की तरंगदैर्ध्य निकाल सकते हैं।
🎯 Exam Tip: याद रखें कि जब इलेक्ट्रॉन को पूरी तरह से परमाणु से निकाला जाता है, तो अंतिम ऊर्जा स्तर \( n=\infty \) होता है, और उस स्तर पर ऊर्जा शून्य मानी जाती है।
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