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Detailed Chapter 13 हाइड्रोकार्बन RBSE Solutions for Class 11 Chemistry
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Class 11 Chemistry Chapter 13 हाइड्रोकार्बन RBSE Solutions PDF
RBSE Class 11 Chemistry Chapter 13 पाठ्यपुस्तक के अभ्यास प्रश्न
RBSE Class 11 Chemistry Chapter 13 वस्तुनिष्ठ प्रश्न
Question 1. आइसोपेन्टेन में 3°, 2° तथा 1° हाइड्रोजन की संख्या क्रमशः होगी –
(अ) 1, 9, 2
(ब) 9, 1, 2
(स) 2, 1,9
(द) 1, 2, 9
Answer: (द) 1, 2, 9
In simple words: आइसोपेंटेन में, 3 डिग्री हाइड्रोजन एक होता है, 2 डिग्री हाइड्रोजन दो होते हैं, और 1 डिग्री हाइड्रोजन नौ होते हैं।
🎯 Exam Tip: आइसोपेन्टेन की संरचना को ध्यान से देखें और प्रत्येक कार्बन परमाणु से जुड़े हाइड्रोजनों की संख्या और डिग्री (1°, 2°, 3°) को सही से पहचानें।
Question 2. 2 – ब्यूटीन व HBr के योग से प्राप्त उत्पाद की वुटुंज अभिक्रिया कराने पर प्राप्त ऐल्केन –
(अ) एकशाखित होगी
(ब) द्विशाखित होगी।
Answer: (ब) द्विशाखित होगी।
In simple words: जब 2-ब्यूटीन और HBr से बना उत्पाद वुर्त्ज़ अभिक्रिया करता है, तो बनने वाला ऐल्केन दो शाखाओं वाला होगा।
🎯 Exam Tip: मार्कोनीकॉफ के नियम का उपयोग करके योगज उत्पाद बनाएं, फिर वुर्त्ज़ अभिक्रिया के परिणाम को समझने के लिए कार्बन श्रृंखला की संरचना का विश्लेषण करें।
Question 3.
(अ) ऐल्केन
(ब) एल्काडाइईन
(स) साइक्लोएल्कीन
(द) कीटोन
Answer: (अ) ऐल्केन
In simple words: ऐल्केन संतृप्त हाइड्रोकार्बन होते हैं जिनमें सभी कार्बन-कार्बन एकल बंध होते हैं।
🎯 Exam Tip: यह प्रश्न अधूरा है जैसा कि दिया गया है, लेकिन सामान्यतः यह विभिन्न प्रकार के हाइड्रोकार्बन यौगिकों के वर्गीकरण से संबंधित होता है। अपने जवाब को हमेशा दिए गए विकल्पों के अनुसार तैयार करें।
Question 4. सामान्य दशा के अन्तर्गत मेथेन से कौन अभिक्रिया नहीं करेगा -
(अ) I2
(ब) Cl2
(स) Br2
(द) F2
Answer: (अ) I2
In simple words: मेथेन सामान्य परिस्थितियों में आयोडीन (I2) के साथ आसानी से अभिक्रिया नहीं करता है।
🎯 Exam Tip: ऐल्केनों की हैलोजनीकरण अभिक्रिया की क्रियाशीलता के क्रम (F2 > Cl2 > Br2 > I2) को याद रखें। आयोडीन के साथ अभिक्रिया बहुत धीमी होती है।
Question 5. एथीलीन व HX की क्रिया में एथिल कार्बोनियम आयन किसमें तीव्रता से बनता है
(अ) HI
(ब) HBr
(स) HCl
(द) उपरोक्त सभी
Answer: (अ) HI
In simple words: एथिलीन के साथ हाइड्रोजन हैलाइड (HX) की अभिक्रिया में, एथिल कार्बोनियम आयन सबसे तेजी से HI के साथ बनता है।
🎯 Exam Tip: HX अम्लों की अम्लीय शक्ति का क्रम याद रखें, क्योंकि यह कार्बोनियम आयन के बनने की दर को प्रभावित करता है। HI सबसे प्रबल अम्ल है और सबसे तेजी से प्रतिक्रिया करता है।
RBSE Class 11 Chemistry Chapter 13 अतिलघूत्तरात्मक प्रश्न
Question 6. पैराफिन और ओलिफिन किन्हें कहते हैं? प्रत्येक का एक - एक उदाहरण दीजिये और उनमें विभेद करने के रासायनिक परीक्षण लिखिये।
Answer: ऐल्केनों को पैराफिन कहते हैं क्योंकि 'Param' का अर्थ 'कम' और 'affins' का अर्थ 'क्रियाशील' होता है, जिसका मतलब है कि वे कम क्रियाशील होते हैं। उदाहरण: एथेन।
ऐल्कीनों को ओलिफिन कहा जाता है क्योंकि इस श्रेणी का पहला सदस्य (एथीन) क्लोरीन के साथ क्रिया करके तैलीय द्रव जैसे उत्पाद बनाता है। उदाहरण: एथीन।
विभेद करने के लिए रासायनिक परीक्षण:
1. ब्रोमीन जल परीक्षण: ओलिफिन (असंतृप्त) ब्रोमीन जल के नारंगी-भूरे रंग को रंगहीन कर देता है, जबकि पैराफिन (संतृप्त) नहीं करता।
2. बेयर अभिकर्मक (ठंडा, तनु, क्षारीय KMnO4) परीक्षण: ओलिफिन बेयर अभिकर्मक के बैंगनी रंग को रंगहीन कर देता है, क्योंकि यह ऑक्सीकृत हो जाता है, जबकि पैराफिन अभिक्रिया नहीं करता।
In simple words: पैराफिन ऐल्केन होते हैं जो कम क्रियाशील होते हैं, जैसे एथेन। ओलिफिन ऐल्कीन होते हैं जो तैलीय उत्पाद बनाते हैं, जैसे एथीन। आप उन्हें ब्रोमीन जल या बेयर अभिकर्मक से पहचान सकते हैं: ओलिफिन रंग बदल देते हैं, पैराफिन नहीं।
🎯 Exam Tip: पैराफिन और ओलिफिन की परिभाषाओं और उनके बीच अंतर करने वाले दो मुख्य परीक्षणों (ब्रोमीन जल और बेयर अभिकर्मक) को उनके अपेक्षित परिणामों के साथ याद रखें।
Question 8. निम्नलिखित से केवल एक पद में एथीन बनाने की समीकरण लिखिये
(क) एथेनॉल
(ख) एथिल ब्रोमाइड
(ग) एथाइन
(घ) एथिलीन डाइब्रोमाइड।
Answer:
(क) एथेनॉल से:
\( \text{CH}_3\text{-CH}_2\text{-OH} \xrightarrow{\text{सान्द्र } \text{H}_2\text{SO}_4\text{, } \Delta} \text{CH}_2\text{=CH}_2 + \text{H}_2\text{O} \)
(ख) एथिल ब्रोमाइड से:
\( \text{CH}_3\text{-CH}_2\text{-Br} \xrightarrow{\text{ऐल्को. KOH}\text{, } \Delta} \text{CH}_2\text{=CH}_2 + \text{HBr} \)
(ग) एथाइन से:
\( \text{CH}\equiv\text{CH} + \text{H}_2 \xrightarrow{\text{लिन्डलार उत्प्रेरक}} \text{CH}_2\text{=CH}_2 \)
(घ) एथिलीन डाइब्रोमाइड से:
\( \text{CH}_2\text{Br-CH}_2\text{Br} + \text{Zn} \longrightarrow \text{CH}_2\text{=CH}_2 + \text{ZnBr}_2 \)
In simple words: एथीन बनाने के लिए, एथेनॉल को गर्म करने पर पानी हटाते हैं। एथिल ब्रोमाइड से HBr हटाते हैं। एथाइन में हाइड्रोजन जोड़ते हैं। एथिलीन डाइब्रोमाइड से जिंक के साथ ब्रोमीन हटाते हैं।
🎯 Exam Tip: प्रत्येक अभिक्रिया के लिए सही अभिकर्मकों और स्थितियों को याद रखें। निर्जलीकरण, विहाइड्रोहैलोजेनीकरण और हाइड्रोजनीकरण जैसी प्रक्रियाओं को समझें।
Question 9. मार्कोनीकॉफ नियम की परिभाषा लिखिये तथा उपयुक्त उदाहरण दीजिये।
Answer: मार्कोनीकॉफ का नियम कहता है कि जब एक असममित अभिकर्मक (जैसे HX) एक असममित ऐल्कीन या ऐल्काइन से जुड़ता है, तो अभिकर्मक का ऋणात्मक भाग उस असंतृप्त कार्बन परमाणु से जुड़ता है जिस पर हाइड्रोजन परमाणुओं की संख्या कम होती है।
उदाहरण: प्रोपीन पर हाइड्रोजन आयोडाइड (HI) का योग।
\( \text{CH}_3\text{-CH=CH}_2 + \text{H-I} \longrightarrow \text{CH}_3\text{-CH(I)-CH}_3 \)
इस अभिक्रिया में आयोडीन (I) बीच वाले कार्बन से जुड़ता है, क्योंकि उस कार्बन पर हाइड्रोजन कम हैं।
In simple words: मार्कोनीकॉफ के नियम के अनुसार, जब कोई चीज़ दोहरी या तिहरी बंध वाले कार्बन से जुड़ती है, तो उसका नकारात्मक हिस्सा उस कार्बन पर जाता है जिसके पास कम हाइड्रोजन होते हैं। जैसे, प्रोपीन में HI जोड़ने पर I बीच वाले कार्बन पर जुड़ता है।
🎯 Exam Tip: मार्कोनीकॉफ के नियम को समझने के लिए असममित ऐल्कीन/ऐल्काइन और असममित अभिकर्मक के अर्थ को स्पष्ट रूप से समझें। उदाहरण के साथ नियम को समझाना महत्वपूर्ण है।
Question 10. ऐल्कीनों में HBr का योग मार्कोनीकॉफ नियम के आधार पर समझाइये।
Answer: जब हाइड्रोजन ब्रोमाइड (HBr) को एक असममित ऐल्कीन में जोड़ा जाता है, तो ब्रोमीन परमाणु (जो HBr का ऋणात्मक भाग है) उस कार्बन परमाणु से जुड़ता है जिसमें पहले से ही कम हाइड्रोजन परमाणु होते हैं। यह मार्कोनीकॉफ के नियम के अनुसार होता है।
उदाहरण: 1-ब्यूटीन पर HBr का योग।
\( \text{CH}_3\text{-CH}_2\text{-CH=CH}_2 + \text{HBr} \longrightarrow \text{CH}_3\text{-CH}_2\text{-CH(Br)-CH}_3 \)
इस अभिक्रिया में ब्रोमीन दूसरे कार्बन परमाणु से जुड़ता है, जो 1-ब्यूटीन में असंतृप्त कार्बन परमाणुओं में से कम हाइड्रोजन वाला कार्बन है। इस तरह 2-ब्रोमोब्यूटेन मुख्य उत्पाद के रूप में बनता है।
In simple words: जब HBr को ऐल्कीन में मिलाते हैं, तो ब्रोमीन उस कार्बन से जुड़ता है जिसके पास पहले से ही कम हाइड्रोजन होते हैं। यह नियम मार्कोनीकॉफ ने दिया था। जैसे, 1-ब्यूटीन में HBr जोड़ने पर, ब्रोमीन बीच वाले कार्बन से जुड़कर 2-ब्रोमोब्यूटेन बनाता है।
🎯 Exam Tip: मार्कोनीकॉफ के नियम का उपयोग करते समय, सुनिश्चित करें कि आप असममित ऐल्कीन और अभिकर्मक के ऋणात्मक भाग की सही पहचान करें।
Question 11. ऐसीटीलीन श्रेणी के प्रथम तीन सदस्यों के सूत्र और नाम लिखिये।
Answer: ऐसीटीलीन श्रेणी के प्रथम तीन सदस्य निम्न प्रकार हैं:
1. \( \text{HC}\equiv\text{CH} \) (एथाइन या ऐसीटिलीन)
2. \( \text{CH}_3\text{C}\equiv\text{CH} \) (प्रोपाइन)
3. \( \text{CH}_3\text{-CH}_2\text{-C}\equiv\text{CH} \) (ब्यूट-1-आइन)
In simple words: ऐसीटिलीन परिवार के पहले तीन सदस्य एथाइन, प्रोपाइन और ब्यूट-1-आइन हैं।
🎯 Exam Tip: ऐसीटिलीन श्रेणी (ऐल्काइन) के सामान्य सूत्र \( \text{C}_n\text{H}_{2n-2} \) का उपयोग करके सदस्यों के सूत्र बनाएं, और उनके IUPAC नामकरण नियमों का पालन करें।
Question 13. 1°, 2° और 3° हाइड्रोजन किसे कहते हैं? उदाहरण द्वारा समझाइये।
Answer:
1. 1° हाइड्रोजन (प्राथमिक हाइड्रोजन): वे हाइड्रोजन परमाणु जो 1° (प्राथमिक) कार्बन परमाणु से जुड़े होते हैं, उन्हें 1° हाइड्रोजन कहते हैं। 1° कार्बन परमाणु वह होता है जो केवल एक अन्य कार्बन परमाणु से जुड़ा होता है।
2. 2° हाइड्रोजन (द्वितीयक हाइड्रोजन): वे हाइड्रोजन परमाणु जो 2° (द्वितीयक) कार्बन परमाणु से जुड़े होते हैं, उन्हें 2° हाइड्रोजन कहते हैं। 2° कार्बन परमाणु वह होता है जो दो अन्य कार्बन परमाणुओं से जुड़ा होता है।
3. 3° हाइड्रोजन (तृतीयक हाइड्रोजन): वे हाइड्रोजन परमाणु जो 3° (तृतीयक) कार्बन परमाणु से जुड़े होते हैं, उन्हें 3° हाइड्रोजन कहते हैं। 3° कार्बन परमाणु वह होता है जो तीन अन्य कार्बन परमाणुओं से जुड़ा होता है।
उदाहरण: आइसोपेन्टेन (2-मेथिलब्यूटेन) में
\( \text{CH}_3\text{(1^\circ)-CH(3^\circ)-CH}_2\text{(2^\circ)-CH}_3\text{(1^\circ)} \)
\( \text{|CH}_3\text{(1^\circ)} \)
आइसोपेन्टेन में 1° हाइड्रोजन परमाणुओं की संख्या = 9 (तीन \( \text{CH}_3 \) समूहों से)
आइसोपेन्टेन में 2° हाइड्रोजन परमाणुओं की संख्या = 2 (एक \( \text{CH}_2 \) समूह से)
आइसोपेन्टेन में 3° हाइड्रोजन परमाणुओं की संख्या = 1 (एक \( \text{CH} \) समूह से)
In simple words: 1° हाइड्रोजन उस कार्बन से जुड़े होते हैं जो केवल एक दूसरे कार्बन से जुड़ा हो। 2° हाइड्रोजन उस कार्बन से जुड़े होते हैं जो दो दूसरे कार्बन से जुड़े हों। 3° हाइड्रोजन उस कार्बन से जुड़े होते हैं जो तीन दूसरे कार्बन से जुड़े हों। उदाहरण के लिए, आइसोपेन्टेन में 9 प्राथमिक, 2 द्वितीयक और 1 तृतीयक हाइड्रोजन होते हैं।
🎯 Exam Tip: यह सुनिश्चित करने के लिए कि आप सही ढंग से डिग्री की पहचान कर रहे हैं, किसी भी दिए गए हाइड्रोकार्बन की संरचना को ध्यान से बनाएं और प्रत्येक कार्बन परमाणु से जुड़े अन्य कार्बन परमाणुओं की संख्या की गणना करें।
Question 14. मेथेन का चतुष्फलकीय चित्र खींचिये और H-C-H कोण का मान बताइये।
Answer: मेथेन अणु एक चतुष्फलकीय संरचना में होता है, जहाँ कार्बन परमाणु केंद्र में होता है और चार हाइड्रोजन परमाणु चतुष्फलक के चारों कोनों पर स्थित होते हैं।
मेथेन में H-C-H बंध कोण \( 109^\circ 28' \) (या \( 109.5^\circ \)) होता है।
In simple words: मेथेन अणु एक पिरामिड जैसी (चतुष्फलकीय) बनावट रखता है। कार्बन बीच में होता है और चार हाइड्रोजन इसके चारों ओर होते हैं। हर हाइड्रोजन-कार्बन-हाइड्रोजन का कोण लगभग 109.5 डिग्री होता है।
🎯 Exam Tip: मेथेन की चतुष्फलकीय संरचना को दर्शाने वाले चित्र को स्पष्ट रूप से बनाएं, और सटीक बंध कोण को याद रखें। यह VSEPR सिद्धांत का एक महत्वपूर्ण उदाहरण है।
Question 15. निम्नलिखित से केवल एक पद में ऐसीटिलीन बनाने की समीकरणे लिखिये -
1. एथिलीन डाइब्रोमाइड
2. ट्राइक्लोरोमेथेन
3. एथिलिडीन डाइक्लोराइड
4. ऐसीटिलीन टेट्राब्रोमाइड
Answer:
1. एथिलीन डाइब्रोमाइड से:
\( \text{CH}_2\text{Br-CH}_2\text{Br} + 2\text{Zn} \longrightarrow \text{HC}\equiv\text{CH} + 2\text{ZnBr}_2 \)
2. ट्राइक्लोरोमेथेन से: (संरचना सूत्र उपलब्ध नहीं है)
3. एथिलिडीन डाइक्लोराइड से:
\( \text{CH}_3\text{-CH(Cl)}_2 \xrightarrow{\text{(i) ऐल्को. KOH}\text{ (ii) NaNH}_2} \text{HC}\equiv\text{CH} + 2\text{HCl} \)
4. ऐसीटिलीन टेट्राब्रोमाइड से: (संरचना सूत्र उपलब्ध नहीं है)
In simple words: एथिलीन डाइब्रोमाइड से ऐसीटिलीन बनाने के लिए जिंक का उपयोग करते हैं। एथिलिडीन डाइक्लोराइड से ऐसीटिलीन बनाने के लिए अल्कोहॉली KOH और NaNH2 का उपयोग करते हैं। अन्य पदार्थों के लिए समीकरण उपलब्ध नहीं हैं।
🎯 Exam Tip: ऐसीटिलीन के निर्माण के लिए विहैलोजेनीकरण और विहाइड्रोहैलोजेनीकरण अभिक्रियाओं के लिए अभिकर्मकों और स्थितियों को याद रखें।
Question 16. कार्बनिक यौगिकों में असंतृप्तता पहचान करने के दो रासायनिक परीक्षण दीजिये।
Answer: कार्बनिक यौगिकों में असंतृप्तता (डबल या ट्रिपल बॉन्ड) को पहचानने के लिए दो मुख्य रासायनिक परीक्षण हैं:
1. बेयर अभिकर्मक परीक्षण: जब असंतृप्त यौगिक को बेयर अभिकर्मक (ठंडा, तनु, क्षारीय पोटैशियम परमैंगनेट, \( \text{KMnO}_4 \)) के गुलाबी रंग के विलयन में मिलाया जाता है, तो विलयन का गुलाबी रंग रंगहीन हो जाता है। यह ऑक्सीकरण के कारण होता है।
2. ब्रोमीन जल परीक्षण: जब असंतृप्त यौगिक को ब्रोमीन जल के नारंगी या लाल रंग के विलयन में मिलाया जाता है, तो ब्रोमीन का रंग गायब हो जाता है (विरंजित हो जाता है)। यह असंतृप्त यौगिक में ब्रोमीन के जुड़ने के कारण होता है।
In simple words: असंतृप्त यौगिकों को पहचानने के लिए, हम बेयर अभिकर्मक (गुलाबी रंग) या ब्रोमीन जल (नारंगी/लाल रंग) का उपयोग करते हैं। अगर यौगिक असंतृप्त है, तो ये रंग गायब हो जाएंगे।
🎯 Exam Tip: असंतृप्तता परीक्षणों (बेयर और ब्रोमीन जल) के लिए अभिकर्मकों के रंग और अभिक्रिया के बाद होने वाले रंग परिवर्तन को स्पष्ट रूप से याद रखें।
Question 17. समीकरण देते हुए बताइये क्या होता है? जब -
1. एथिल ऐल्कोहॉल को सान्द्र सल्फ्यूरिक अम्ल के आधिक्य के साथ 160°C पर गर्म करते हैं।
2. एथाइन को क्षारीय पोटेशियम परमैंगनेट के ठण्डे जलीय विलयन में प्रवाहित करते हैं।
3. एथिल ऐल्कोहॉल की वाष्प को गर्म ऐलुमिनियम ऑक्साइड में 360°C पर प्रवाहित करते हैं।
4. आइसोप्रोपिल ब्रोमाइड को ऐल्कोहॉलिक KOH के साथ गर्म करते हैं।
5. एथिलीन पर परॉक्साइड उत्प्रेरक की उपस्थिति में उच्च दाब पर लगाया जाता है।
6. प्रोपिलीन को पोटेशियम परमैंगनेट के गर्म जलीय विलयन में प्रवाहित करते हैं।
7. एथिलीन की हाइपोक्लोरस अम्ल से अभिक्रिया होती है।
8. ओजोन की एथिलीन से अभिक्रिया करायी जाती है।
Answer:
1. एथिल ऐल्कोहॉल को सान्द्र सल्फ्यूरिक अम्ल के आधिक्य के साथ 160°C पर गर्म करने पर:
एथीन बनती है।
\( \text{CH}_3\text{-CH}_2\text{-OH} \xrightarrow{\text{सान्द्र } \text{H}_2\text{SO}_4\text{ (आधिक्य), } 160^\circ\text{C}} \text{CH}_2\text{=CH}_2 + \text{H}_2\text{O} \)
2. एथाइन को क्षारीय पोटेशियम परमैंगनेट के ठण्डे जलीय विलयन में प्रवाहित करने पर:
ऑक्सेलिक अम्ल बनता है।
\( \text{HC}\equiv\text{CH} \xrightarrow{\text{KMnO}_4\text{ + तनु KOH (ठंडा)}} \text{COOH-COOH} \)
3. एथिल ऐल्कोहॉल की वाष्प को गर्म ऐलुमिनियम ऑक्साइड में 360°C पर प्रवाहित करने पर:
एथीन बनती है।
\( \text{CH}_3\text{-CH}_2\text{-OH} \xrightarrow{\text{Al}_2\text{O}_3\text{, } 360^\circ\text{C}} \text{CH}_2\text{=CH}_2 + \text{H}_2\text{O} \)
4. आइसोप्रोपिल ब्रोमाइड को ऐल्कोहॉलिक KOH के साथ गर्म करने पर:
प्रोपीन बनती है।
\( \text{CH}_3\text{-CH(Br)-CH}_3 \xrightarrow{\text{ऐल्को. KOH}} \text{CH}_3\text{-CH=CH}_2 + \text{HBr} \)
5. एथिलीन पर परॉक्साइड उत्प्रेरक की उपस्थिति में उच्च दाब पर लगाने पर:
पॉलिथीन बनती है।
\( \text{n(CH}_2\text{=CH}_2\text{)} \xrightarrow{\text{परॉक्साइड उत्प्रेरक, उच्च दाब}} \text{(-CH}_2\text{-CH}_2\text{-)}_n \)
6. प्रोपिलीन को पोटेशियम परमैंगनेट के गर्म जलीय विलयन में प्रवाहित करने पर:
ऑक्सीकरण होकर एथेनोइक अम्ल, \( \text{CO}_2 \) तथा \( \text{H}_2\text{O} \) बनते हैं।
\( \text{CH}_3\text{-CH=CH}_2 \xrightarrow{\text{KMnO}_4\text{, (OH)}^-, [\text{O}]} \text{CH}_3\text{COOH} + \text{CO}_2 + \text{H}_2\text{O} \)
7. एथिलीन की हाइपोक्लोरस अम्ल से अभिक्रिया होने पर:
एथिलीन क्लोरोहाइड्रिन बनता है।
\( \text{CH}_2\text{=CH}_2 + \text{HOCl} \longrightarrow \text{CH}_2\text{(OH)-CH}_2\text{Cl} \)
8. ओजोन की एथिलीन से अभिक्रिया कराने पर:
फॉर्मेल्डिहाइड (मेथेनैल) बनता है।
\( \text{CH}_2\text{=CH}_2 + \text{O}_3 \xrightarrow{\text{H}_2\text{O, Zn}} 2\text{HCHO} + \text{ZnO} \)
In simple words: एथेनॉल को गर्म करने पर एथीन और पानी बनता है। एथाइन को ठंडे परमैंगनेट से ऑक्सेलिक अम्ल मिलता है। गर्म एल्यूमिना पर एथिल ऐल्कोहॉल फिर से एथीन देता है। आइसोप्रोपिल ब्रोमाइड से प्रोपीन बनती है। एथिलीन से पॉलिथीन बनती है। प्रोपीन के ऑक्सीकरण से एथेनोइक अम्ल, CO2 और पानी बनते हैं। एथिलीन और हाइपोक्लोरस अम्ल मिलकर एथिलीन क्लोरोहाइड्रिन बनाते हैं। एथिलीन की ओजोन से फॉर्मेल्डिहाइड बनता है।
🎯 Exam Tip: प्रत्येक अभिक्रिया के अभिकर्मकों, स्थितियों और उत्पादों को याद रखें। यह भी ध्यान रखें कि प्रत्येक अभिक्रिया में कौन सा मुख्य उत्पाद बनता है।
Question 18. एथिलीन से निम्नलिखित कैसे बनायेंगे -
1. ऐसीटिलीन
2. फॉर्मेल्डिहाइड
3. एथिलीन ग्लाइकॉल
4. एथिलीन क्लोरोहाइड्रिन
5. एथिल ऐल्कोहॉल
6. एथिलीन ऑक्साइड
Answer:
1. एथिलीन से ऐसीटिलीन:
एथिलीन का ब्रोमीनीकरण करने पर एथिलीन डाइब्रोमाइड बनता है, फिर इसे ऐल्कोहॉली KOH के साथ गर्म करने पर ऐसीटिलीन बनता है।
\( \text{CH}_2\text{=CH}_2 + \text{Br}_2 \xrightarrow{\text{CCl}_4} \text{CH}_2\text{Br-CH}_2\text{Br} \xrightarrow{\text{ऐल्को. KOH}} \text{HC}\equiv\text{CH} + 2\text{HBr} \)
2. एथिलीन से फॉर्मेल्डिहाइड:
एथिलीन का ओजोनी अपघटन करके।
\( \text{CH}_2\text{=CH}_2 + \text{O}_3 \xrightarrow{\text{H}_2\text{O, Zn}} 2\text{HCHO} + \text{ZnO} \)
3. एथिलीन से एथिलीन ग्लाइकॉल:
एथिलीन का बेयर अभिकर्मक (तनु \( \text{KMnO}_4 \)) से ऑक्सीकरण करके।
\( \text{CH}_2\text{=CH}_2 + \text{H}_2\text{O} + [\text{O}] \xrightarrow{\text{तनु KMnO}_4\text{, } 273\text{ K}} \text{CH}_2\text{(OH)-CH}_2\text{OH} \)
4. एथिलीन से एथिलीन क्लोरोहाइड्रिन:
एथिलीन की हाइपोक्लोरस अम्ल से अभिक्रिया करके।
\( \text{CH}_2\text{=CH}_2 + \text{HOCl} \longrightarrow \text{CH}_2\text{(OH)-CH}_2\text{Cl} \)
5. एथिलीन से एथिल ऐल्कोहॉल:
एथिलीन का जलयोजन करके।
\( \text{CH}_2\text{=CH}_2 + \text{H}_2\text{O} \xrightarrow{\text{तनु H}_2\text{SO}_4} \text{CH}_3\text{-CH}_2\text{OH} \)
6. एथिलीन से एथिलीन ऑक्साइड:
एथिलीन का ऑक्सीजन से ऑक्सीकरण करके (सिल्वर उत्प्रेरक की उपस्थिति में)।
\( 2\text{CH}_2\text{=CH}_2 + \text{O}_2 \xrightarrow{300^\circ\text{C, Ag उत्प्रेरक}} 2\text{CH}_2\text{-CH}_2\text{-O} \)
In simple words: एथिलीन से ऐसीटिलीन बनाने के लिए पहले ब्रोमीन जोड़कर फिर हटाते हैं। फॉर्मेल्डिहाइड के लिए ओजोन से अभिक्रिया कराते हैं। एथिलीन ग्लाइकॉल के लिए ठंडे परमैंगनेट से ऑक्सीकृत करते हैं। एथिलीन क्लोरोहाइड्रिन के लिए हाइपोक्लोरस अम्ल मिलाते हैं। एथिल ऐल्कोहॉल के लिए पानी जोड़ते हैं। एथिलीन ऑक्साइड के लिए ऑक्सीजन से अभिक्रिया कराते हैं।
🎯 Exam Tip: एथिलीन से विभिन्न यौगिकों को बनाने के लिए प्रत्येक रूपांतरण के लिए विशिष्ट अभिकर्मकों और अभिक्रिया की स्थितियों को याद रखें।
Question 19. एथेन, एथिलीन और ऐसीटिलीन में कार्बन - कार्बन बन्ध की तुलना बन्धन दूरी, दृढ़ता और अभिक्रियाशीलता में कीजिये।
Answer: एथेन, एथिलीन और ऐसीटिलीन में कार्बन – कार्बन बंध के विभिन्न गुणों का क्रम इस प्रकार है:
1. बंध दूरी: एथेन > एथिलीन > ऐसीटिलीन
(एकल बंध की लंबाई सबसे अधिक, तिहरी बंध की सबसे कम होती है।)
2. दृढ़ता (बंध ऊर्जा): ऐसीटिलीन > एथिलीन > एथेन
(तिहरी बंध सबसे मजबूत होती है, एकल बंध सबसे कमजोर।)
3. क्रियाशीलता: एथिलीन > ऐसीटिलीन > एथेन
(असंतृप्त यौगिक (एथिलीन, ऐसीटिलीन) संतृप्त यौगिक (एथेन) से अधिक क्रियाशील होते हैं। एथिलीन में पाई बंध अधिक आसानी से टूटती है।)
In simple words: एथेन, एथिलीन और ऐसीटिलीन में, बंध की लंबाई एथेन में सबसे ज्यादा और ऐसीटिलीन में सबसे कम होती है। बंध की मजबूती ऐसीटिलीन में सबसे ज्यादा और एथेन में सबसे कम होती है। क्रियाशीलता एथिलीन में सबसे ज्यादा होती है, फिर ऐसीटिलीन में, और एथेन सबसे कम क्रियाशील होता है।
🎯 Exam Tip: कार्बन-कार्बन बंध की लंबाई, शक्ति और क्रियाशीलता को उसकी बंध क्रम (एकल, दोहरा, तिहरा) के आधार पर संबंधित करें। बंध क्रम बढ़ने पर बंध छोटा और मजबूत होता है।
Question 20. निम्नलिखित पर टिप्पणी लिखिये –
1. एथिलीन का ब्रोमीनीकरण
2. एथिलीन का बहुलकीकरण
3. मार्कोनीकॉफ का नियम
Answer:
1. एथिलीन का ब्रोमीनीकरण:
एथिलीन ब्रोमीन (\( \text{Br}_2 \)) के साथ कार्बन टेट्राक्लोराइड (\( \text{CCl}_4 \)) जैसे विलायक की उपस्थिति में अभिक्रिया करके 1,2-डाइब्रोमोएथेन बनाता है। यह अभिक्रिया ब्रोमीन जल के लाल-भूरे रंग को रंगहीन कर देती है और असंतृप्तता का परीक्षण है।
\( \text{CH}_2\text{=CH}_2 + \text{Br}_2 \xrightarrow{\text{CCl}_4} \text{CH}_2\text{Br-CH}_2\text{Br} \)
2. एथिलीन का बहुलकीकरण:
एथिलीन को उच्च दाब, उच्च ताप (जैसे 350-570 K) और उत्प्रेरक (जैसे परॉक्साइड) की उपस्थिति में गरम करने पर, एथिलीन के कई अणु आपस में जुड़कर एक लंबी श्रृंखला वाला बहुलक बनाते हैं जिसे पॉलिएथिलीन (पॉलिथीन) कहते हैं।
\( \text{n(CH}_2\text{=CH}_2\text{)} \xrightarrow{\text{उच्च दाब/ताप, उत्प्रेरक}} \text{(-CH}_2\text{-CH}_2\text{-)}_n \)
3. मार्कोनीकॉफ का नियम:
यह नियम बताता है कि जब एक असममित अभिकर्मक (जैसे \( \text{H-X} \)) एक असममित ऐल्कीन या ऐल्काइन पर जुड़ता है, तो अभिकर्मक का ऋणात्मक भाग उस असंतृप्त कार्बन परमाणु से जुड़ता है जिस पर हाइड्रोजन परमाणुओं की संख्या कम होती है।
उदाहरण: प्रोपीन पर हाइड्रोजन आयोडाइड (HI) का योग।
\( \text{CH}_3\text{-CH=CH}_2 + \text{H-I} \longrightarrow \text{CH}_3\text{-CH(I)-CH}_3 \)
4. ऐल्कीनों की ओजोनी अपघटन:
ऐल्कीन ओजोन (\( \text{O}_3 \)) से क्रिया करके पहले ओजोनाइड बनाते हैं, जिसकी जिंक की उपस्थिति में जल (\( \text{H}_2\text{O} \)) से क्रिया कराने पर कार्बोनिल यौगिक (ऐल्डिहाइड या कीटोन) बनते हैं। इस अभिक्रिया का उपयोग ऐल्कीनों की स्थिति और डबल बॉन्ड की प्रकृति को जानने के लिए किया जाता है।
उदाहरण: प्रोपीन का ओजोनी अपघटन
\( \text{CH}_3\text{-CH=CH}_2 + \text{O}_3 \longrightarrow \text{प्रोपिलीन ओजोनाइड} \xrightarrow{\text{H}_2\text{O, Zn}} \text{CH}_3\text{CHO (एथेनैल)} + \text{HCHO (मेथेनैल)} \)
In simple words: एथिलीन के ब्रोमीनीकरण में ब्रोमीन जुड़कर 1,2-डाइब्रोमोएथेन बनाता है। बहुलकीकरण में एथिलीन के कई अणु मिलकर पॉलिथीन बनाते हैं। मार्कोनीकॉफ का नियम कहता है कि विषम जोड़ में नकारात्मक हिस्सा कम हाइड्रोजन वाले कार्बन पर जाता है। ऐल्कीन का ओजोनी अपघटन कार्बोनिल यौगिक (जैसे ऐल्डिहाइड) बनाता है।
🎯 Exam Tip: प्रत्येक टिप्पणी के लिए संबंधित अभिक्रियाओं के समीकरणों, परिस्थितियों और उत्पादों को याद रखें। मार्कोनीकॉफ के नियम के लिए असममित अभिकर्मक और असममित ऐल्कीन को पहचानना महत्वपूर्ण है।
Question 21. निम्नलिखित के संरचना सूत्र लिखिये –
1. एथिलीन ग्लाइकॉल
2. एथिलिडीन डाइब्रोमाइड
3. एथिलीन डाइब्रोमाइड
4. आइसोप्रोपिल ब्रोमाइड
5. 2 – मेथिल – 3 – हेक्सीन
Answer:
1. एथिलीन ग्लाइकॉल: \( \text{HO-CH}_2\text{-CH}_2\text{-OH} \)
2. एथिलिडीन डाइब्रोमाइड: \( \text{CH}_3\text{-CHBr}_2 \)
3. एथिलीन डाइब्रोमाइड: \( \text{CH}_2\text{Br-CH}_2\text{Br} \)
4. आइसोप्रोपिल ब्रोमाइड: \( \text{CH}_3\text{-CH(Br)-CH}_3 \)
5. 2 – मेथिल – 3 – हेक्सीन: \( \text{CH}_3\text{-CH(CH}_3\text{)-CH=CH-CH}_2\text{-CH}_3 \)
In simple words: यहाँ विभिन्न यौगिकों के रासायनिक सूत्र दिए गए हैं: एथिलीन ग्लाइकॉल में दो OH समूह होते हैं, एथिलिडीन डाइब्रोमाइड में एक ही कार्बन पर दो ब्रोमीन होते हैं, एथिलीन डाइब्रोमाइड में अलग-अलग कार्बन पर ब्रोमीन होते हैं, आइसोप्रोपिल ब्रोमाइड में ब्रोमीन बीच वाले कार्बन पर होता है, और 2-मेथिल-3-हेक्सीन एक छह कार्बन श्रृंखला है जिसमें दूसरे कार्बन पर मेथिल समूह और तीसरे कार्बन पर डबल बॉन्ड होता है।
🎯 Exam Tip: IUPAC नामकरण नियमों का उपयोग करके यौगिकों के संरचनात्मक सूत्रों को सही ढंग से लिखने का अभ्यास करें। आइसो और नियोग्रुप के अंतर को समझें।
RBSE Class 11 Chemistry Chapter 13 लघूत्तरात्मक प्रश्न
Question 22. परॉक्साइड प्रभाव किसे कहते हैं? एक उदाहरण देकर समझाइए।
Answer: परॉक्साइड प्रभाव (जिसे खराश प्रभाव या प्रति-मार्कोनीकॉफ नियम भी कहते हैं) तब होता है जब एक असममित ऐल्कीन पर हाइड्रोजन ब्रोमाइड (\( \text{HBr} \)) का योग परॉक्साइड की उपस्थिति में होता है। इस स्थिति में, \( \text{HBr} \) का ब्रोमीन मुक्त मूलक उस असंतृप्त कार्बन परमाणु से जुड़ता है जिस पर हाइड्रोजन परमाणुओं की संख्या अधिक होती है, जो मार्कोनीकॉफ के नियम के विपरीत है।
उदाहरण: प्रोपीन पर \( \text{HBr} \) का योग परॉक्साइड की उपस्थिति में।
\( \text{CH}_3\text{-CH=CH}_2 + \text{HBr} \xrightarrow{\text{(C}_6\text{H}_5\text{CO)}_2\text{O}_2\text{ (परॉक्साइड)}} \text{CH}_3\text{-CH}_2\text{-CH}_2\text{Br} \)
इस अभिक्रिया में 1-ब्रोमोप्रोपेन मुख्य उत्पाद के रूप में बनता है। सामान्य मार्कोनीकॉफ नियम के अनुसार, 2-ब्रोमोप्रोपेन बनता।
In simple words: परॉक्साइड प्रभाव तब होता है जब HBr को किसी डबल बॉन्ड वाले कार्बन यौगिक में जोड़ा जाता है और परॉक्साइड मौजूद हो। तब ब्रोमीन उस कार्बन से जुड़ता है जिसके पास पहले से ही ज्यादा हाइड्रोजन होते हैं, जो सामान्य नियम का उलटा है। जैसे, प्रोपीन में HBr जोड़ने पर, परॉक्साइड होने पर 1-ब्रोमोप्रोपेन बनता है।
🎯 Exam Tip: परॉक्साइड प्रभाव केवल HBr के साथ होता है, HCl और HI के साथ नहीं। यह मुक्त मूलक क्रियाविधि के माध्यम से होता है।
Question 23. सिस – 2 – ब्यूटीन की ब्रोमीन से अभिक्रिया कराने पर बने त्रिविम – समावयवियों की संरचनाएँ लिखिये।
Answer: सिस-2-ब्यूटीन की ब्रोमीन (\( \text{Br}_2 \)) से अभिक्रिया करने पर तीन त्रिविम समावयवी बनते हैं। यह एक एंटी-योग अभिक्रिया है, जिससे रेसिमिक मिश्रण और मेसो-यौगिक बनता है।
उत्पाद: 2,3-डाइब्रोमोब्यूटेन के त्रिविम समावयवी।
1. d-समावयवी: यह एक दक्षिणावर्त घूर्णक होता है।
\( \begin{matrix} \text{H} & - & \text{C} & - & \text{Br} \\ \text{Br} & - & \text{C} & - & \text{H} \\ & & \text{CH}_3 & & \end{matrix} \) और \( \begin{matrix} \text{CH}_3 \\ \text{H} & - & \text{C} & - & \text{Br} \\ \text{Br} & - & \text{C} & - & \text{H} \\ & & \text{CH}_3 \end{matrix} \)
2. l-समावयवी: यह एक वामावर्त घूर्णक होता है। यह d-समावयवी का दर्पण प्रतिबिंब होता है।
\( \begin{matrix} \text{H} & - & \text{C} & - & \text{Br} \\ \text{Br} & - & \text{C} & - & \text{H} \\ & & \text{CH}_3 & & \end{matrix} \) (यहाँ \( \text{CH}_3 \) ऊपर और \( \text{Br} \) और \( \text{H} \) का कॉन्फ़िगरेशन उलट दिया गया है)
3. मेसो-समावयवी: यह एक अक्रियाशील यौगिक है जिसमें एक आंतरिक समरूपता तल होता है।
\( \begin{matrix} & & \text{CH}_3 \\ \text{H} & - & \text{C} & - & \text{Br} \\ \text{H} & - & \text{C} & - & \text{Br} \\ & & \text{CH}_3 \end{matrix} \) (यहाँ बीच में एक समरूपता तल है)
In simple words: जब सिस-2-ब्यूटीन में ब्रोमीन मिलाते हैं, तो हमें तीन अलग-अलग तरह के अणु मिलते हैं जिन्हें स्टीरियोआइसोमर कहते हैं। इनमें से दो d और l रूप होते हैं जो एक दूसरे के दर्पण प्रतिबिंब होते हैं, और तीसरा मेसो-रूप होता है जो अपनी आंतरिक बनावट के कारण प्रकाश को नहीं घुमाता।
🎯 Exam Tip: ब्रोमीन योग एक एंटी-योग अभिक्रिया है। सिस-ऐल्कीन पर एंटी-योग से रेसिमिक मिश्रण (d और l रूप) और मेसो-यौगिक दोनों बन सकते हैं, जो स्टीरियोकेमिस्ट्री का एक महत्वपूर्ण पहलू है।
Question 24. 1 - ब्यूटीन की ब्रोमीन (\( \text{Br}_2 \)) से अभिक्रिया कराने पर बने उत्पादों की संरचनाएँ और उनके नाम लिखिये।
Answer: 1-ब्यूटीन की ब्रोमीन (\( \text{Br}_2 \)) से अभिक्रिया करने पर 1,2-डाइब्रोमोब्यूटेन बनता है। यह एक योगज अभिक्रिया है जिसमें ब्रोमीन अणु डबल बॉन्ड पर जुड़ जाता है।
\( \text{CH}_3\text{-CH}_2\text{-CH=CH}_2 + \text{Br}_2 \longrightarrow \text{CH}_3\text{-CH}_2\text{-CH(Br)-CH}_2\text{Br} \)
उत्पाद 1,2-डाइब्रोमोब्यूटेन में दो चिरल केंद्र होते हैं, जिससे दो त्रिविम समावयवी (एनान्टियोमर) बनते हैं: d-समावयवी और l-समावयवी।
1. d-समावयवी:
\( \begin{matrix} \text{CH}_3\text{-CH}_2 \\ \text{H} & - & \text{C}^* & - & \text{Br} \\ \text{Br} & - & \text{C}^* & - & \text{H} \\ & & \text{CH}_3 & & \end{matrix} \)
2. l-समावयवी:
\( \begin{matrix} \text{CH}_3\text{-CH}_2 \\ \text{Br} & - & \text{C}^* & - & \text{H} \\ \text{H} & - & \text{C}^* & - & \text{Br} \\ & & \text{CH}_3 & & \end{matrix} \)
ये d तथा l समावयवी एक दूसरे के दर्पण प्रतिबिंब होते हैं और रेसिमिक मिश्रण बनाते हैं।
In simple words: जब 1-ब्यूटीन में ब्रोमीन मिलाते हैं, तो 1,2-डाइब्रोमोब्यूटेन बनता है। इस उत्पाद के दो रूप होते हैं जिन्हें d और l आइसोमर कहते हैं, क्योंकि इसमें दो खास कार्बन परमाणु होते हैं।
🎯 Exam Tip: 1-ब्यूटीन जैसे असममित ऐल्कीन पर ब्रोमीन के योग से रेसिमिक मिश्रण बनता है। चिरल केंद्रों की पहचान करें और सुनिश्चित करें कि आप d और l रूपों को अलग कर सकते हैं।
Question 25. 1, 3 – ब्यूटाडाइईन में केन्द्रीय कार्बन – कार्बन आबन्ध, n – ब्यूटेन के सम्बन्धित आबन्ध से छोटा होता है। क्यों?
Answer: 1,3-ब्यूटाडाइईन में केंद्रीय कार्बन-कार्बन बंध (C2-C3) n-ब्यूटेन के संबंधित एकल बंध से छोटा होता है, क्योंकि 1,3-ब्यूटाडाइईन में केंद्रीय बंध \( \text{sp}^2 \)-\( \text{sp}^2 \) अतिव्यापन से बना होता है, जबकि n-ब्यूटेन में यह बंध \( \text{sp}^3 \)-\( \text{sp}^3 \) अतिव्यापन से बना होता है।
\( \text{H}_2\text{C=CH-CH=CH}_2 \) (1,3-ब्यूटाडाइईन) - केंद्रीय बंध \( \text{sp}^2 \)-\( \text{sp}^2 \)
\( \text{CH}_3\text{-CH}_2\text{-CH}_2\text{-CH}_3 \) (n-ब्यूटेन) - सभी एकल बंध \( \text{sp}^3 \)-\( \text{sp}^3 \)
\( \text{sp}^2 \) संकरित ऑर्बिटल में 's' लक्षण \( 33.3\% \) होता है, जबकि \( \text{sp}^3 \) संकरित ऑर्बिटल में 's' लक्षण \( 25\% \) होता है। 's' लक्षण बढ़ने से ऑर्बिटल नाभिक के करीब आ जाता है, जिससे बंध छोटा और मजबूत हो जाता है। इसलिए, 1,3-ब्यूटाडाइईन में \( \text{sp}^2 \)-\( \text{sp}^2 \) बंध n-ब्यूटेन के \( \text{sp}^3 \)-\( \text{sp}^3 \) बंध से छोटा होता है।
In simple words: 1,3-ब्यूटाडाइईन में बीच वाला कार्बन-कार्बन बंध n-ब्यूटेन के बंध से छोटा होता है। ऐसा इसलिए है क्योंकि 1,3-ब्यूटाडाइईन में कार्बन \( \text{sp}^2 \) हाइब्रिड होते हैं, जबकि n-ब्यूटेन में कार्बन \( \text{sp}^3 \) हाइब्रिड होते हैं। \( \text{sp}^2 \) हाइब्रिड में 's' गुण ज्यादा होता है, जिससे बंध छोटा और मजबूत बनता है।
🎯 Exam Tip: संकरण और 's' लक्षण का बंध लंबाई और शक्ति पर पड़ने वाले प्रभाव को याद रखें। 's' लक्षण बढ़ने से बंध लंबाई घटती है और बंध ऊर्जा बढ़ती है।
Question 26. रासायनिक समीकरण देते हुए बताइये क्या होता है। जब –
(1) ऐसीटिलीन की ब्रोमीन जल से क्रिया होती है।
(2) ऐसीटिलीन में हाइड्रोजन ब्रोमाइड का योग होता है।
(3) ऐसीटिलीन ठण्डे तनु क्षारीय पोटेशियम परमैंगनेट विलयन में प्रवाहित की जाती है।
(4) कार्बन टेट्राक्लोराइड विलायक में एसीटिलीन की ओजोन से अभिक्रिया कराकर उत्पाद को जल द्वारा अपघटित किया जाता है।
Answer:
(1) जब ऐसीटिलीन की ब्रोमीन जल से क्रिया होती है, तो 1,1,2,2 - टेट्राब्रोमो एथेन बनता है और ब्रोमीन विलयन का रंग उड़ जाता है।
\[ HC \equiv CH + 2Br_2 \xrightarrow{CCl_4} CHBr_2-CHBr_2 \]
(2) जब ऐसीटिलीन में हाइड्रोजन ब्रोमाइड का योग होता है, तो एथिलीडीन डाइब्रोमाइड (1,1-डाइब्रोमोएथेन) बनता है।
\[ HC \equiv CH + 2HBr \rightarrow CH_3-CHBr_2 \]
(3) जब ऐसीटिलीन को ठण्डे तनु क्षारीय पोटेशियम परमैंगनेट विलयन में प्रवाहित किया जाता है, तो ऑक्सेलिक अम्ल बनता है।
\[ HC \equiv CH + 4[O] \xrightarrow{KMnO_4/\text{KOH}} COOH-COOH \]
(4) जब ऐसीटिलीन की कार्बन टेट्राक्लोराइड विलायक में ओजोन से अभिक्रिया कराकर उत्पाद को जल द्वारा अपघटित किया जाता है, तो मेथेनोइक अम्ल बनता है।
\[ HC \equiv CH + O_3 \xrightarrow{CCl_4} \text{Intermediate Ozonide} \xrightarrow{H_2O} 2HCOOH \]In simple words: Acetylene reacts differently with various chemicals. With bromine water, it forms tetrabromoethane and the bromine color disappears. With hydrogen bromide, it forms ethylidene dibromide. With cold potassium permanganate, it forms oxalic acid. And with ozone in carbon tetrachloride followed by water, it forms methanoic acid.
🎯 Exam Tip: Remember the specific reagents and conditions for each reaction of alkynes, as they determine the final products. Pay attention to the number of molecules reacting, especially for addition reactions.
Question 27. निम्नलिखित के बीच कैसे विभेद कीजियेगा? रासायनिक परीक्षण दीजिये –
(1) एथिलीन और ऐसीटिलीन
(2) एथेन और एथाइन
(3) संतृप्त और असंतृप्त हाइड्रोकार्बन
(4) 1 – ब्यूटीन और 1 – ब्यूटाइन
(5) 2 – ब्यूटाइन और 1 – ब्यूटाइन
(6) CH4 और C2H2
(7) एथिलीन और ऐसीटिलीन
Answer:
(1) एथिलीन सोडामाइड तथा अमोनियामय क्यूप्रस क्लोराइड से क्रिया नहीं करती लेकिन ऐसीटिलीन इनसे क्रिया करके धातु व्युत्पन्न बनाती है क्योंकि इसमें सक्रिय हाइड्रोजन उपस्थित है।
(2) एथेन (संतृप्त हाइड्रोकार्बन) या ऐल्केन की ब्रोमीन विलयन से क्रिया नहीं होती जबकि एथाइन (असंतृप्त हाइड्रोकार्बन) ब्रोमीन विलयन को विरंजित कर देती है।
(3) एथेन (संतृप्त हाइड्रोकार्बन) या ऐल्केन की ब्रोमीन विलयन से क्रिया नहीं होती जबकि एथाइन (असंतृप्त हाइड्रोकार्बन) ब्रोमीन विलयन को विरंजित कर देती है।
(4) 1 – ब्यूटीन अमोनियामय सिल्वर नाइट्रेट विलयन से क्रिया नहीं करती जबकि 1 – ब्यूटाइन इससे क्रिया करके श्वेत अवक्षेप देती है।
(5) 2 – ब्यूटाइन की अमोनियामय सिल्वर नाइट्रेट विलयन से क्रिया नहीं होती लेकिन 1 - ब्यूटाइन इससे क्रिया करके श्वेत अवक्षेप देती है।
(6) इस प्रश्न का उत्तर स्रोत में उपलब्ध नहीं है।
(7) एथिलीन सोडामाइड तथा अमोनियामय क्यूप्रस क्लोराइड से क्रिया नहीं करती लेकिन ऐसीटिलीन इनसे क्रिया करके धातु व्युत्पन्न बनाती है क्योंकि इसमें सक्रिय हाइड्रोजन उपस्थित है।
In simple words: To tell the difference between these compounds, we use chemical tests. Acetylene reacts with soda amide and cuprous chloride to form metal derivatives, which ethylene does not. Alkanes like ethane do not react with bromine water, but alkynes like ethyne do, making the bromine solution colorless. For butynes, 1-butyne reacts with ammoniacal silver nitrate to form a white precipitate, while 1-butene and 2-butyne do not. The source did not provide an answer for differentiating between methane and acetylene.
🎯 Exam Tip: Focus on unique functional group reactions for differentiation. Terminal alkynes (like 1-butyne and acetylene) have acidic hydrogens, allowing them to react with ammoniacal silver nitrate or cuprous chloride, which non-terminal alkynes and alkenes cannot.
Question 28. ऐसीटिलीन बनाने की औद्योगिक विधि का वर्णन कीजिये। आवश्यक रासायनिक समीकरण दीजिये।
Answer: ऐसीटिलीन को औद्योगिक रूप से कैल्शियम कार्बाइड के जल अपघटन (पानी से क्रिया) द्वारा बनाया जाता है।
In simple words: Acetylene is made in factories by reacting calcium carbide with water. This process helps produce large amounts of acetylene for various uses.
🎯 Exam Tip: For industrial methods, always state the main raw materials and the key reaction step clearly. While not provided in the source, the reaction is \( CaC_2 + 2H_2O \rightarrow Ca(OH)_2 + HC \equiv CH \).
Question 29. ऐसीटिलीन अणु की ज्यामितीय आकृति चित्र द्वारा प्रदर्शित कीजिये और अणु में उपस्थित विभिन्न बन्धों की प्रकृति बताइये।
Answer: एथाइन में कार्बन परमाणु sp संकरित होते हैं तथा प्रत्येक कार्बन परमाणु के पास दो sp संकरित कक्षक होते हैं। इन दोनों कार्बन परमाणुओं के sp संकरित कक्षकों के समाक्ष अतिव्यापन से C - C बन्ध बनता है तथा प्रत्येक कार्बन के शेष sp संकरित कक्षक अंतरनाभिकीय अक्ष पर हाइड्रोजन के 1s कक्षक के साथ समाक्ष अतिव्यापन करके दो C - H बन्ध बनाते हैं।
C = C की आबंध लम्बाई (120 pm), C = C द्विआबंध (133 pm) तथा C – C एकल आबंध (154pm) की अपेक्षा कम होती है। दो कार्बन परमाणुओं के मध्य इलेक्ट्रॉन अभ्र अंतरानाभिकीय अक्ष पर बेलनाकार सममित होते हैं। अतः एथाइन एक रेखीय अणु है। एथाइन में C - H बन्ध दूरी 106 pm होती है तथा यह बन्ध लम्बाई एथेन > एथीन > एथाइन क्रम में घटती है क्योंकि \( \sigma \) बन्ध बनाने में प्रयुक्त कक्षकों के s – लक्षण कार्बन परमाणु की sp³, sp², sp- संकरित अवस्था के क्रम में बढ़ता है।
ऐसीटिलीन अणु की संरचना
(a) एथाइन का कक्षीय आरेख (समाक्ष अतिव्यापन )
(b) सम्पाश्विक अतिव्यापन
In simple words: The acetylene molecule is linear, meaning all its atoms are in a straight line. The carbon atoms in acetylene are sp-hybridized. This forms one strong sigma bond between the two carbons and two sigma bonds each between carbon and hydrogen. There are also two pi bonds between the carbon atoms, making it a triple bond. The carbon-carbon bond length in acetylene is shorter than in ethene or ethane, and the carbon-hydrogen bond is also shorter.
🎯 Exam Tip: When drawing molecular structures, correctly representing hybridization and bond types (sigma and pi) is crucial. A linear geometry is characteristic of sp-hybridized carbon atoms.
Question 30. रासायनिक समीकरण देते हुए बताइये क्या होता है। जब –
(1) ऐसीटिलीन की ब्रोमीन जल से क्रिया होती है।
(2) ऐसीटिलीन में हाइड्रोजन ब्रोमाइड का योग होता है।
(3) ऐसीटिलीन ठण्डे तनु क्षारीय पोटेशियम परमैंगनेट विलयन में प्रवाहित की जाती है।
(4) कार्बन टेट्राक्लोराइड विलायक में एसीटिलीन की ओजोन से अभिक्रिया कराकर उत्पाद को जल द्वारा अपघटित किया जाता है।
Answer:
(1) जब ऐसीटिलीन की ब्रोमीन जल से क्रिया होती है, तो 1,1,2,2 - टेट्राब्रोमो एथेन बनता है और ब्रोमीन विलयन का रंग उड़ जाता है।
\[ HC \equiv CH + 2Br_2 \xrightarrow{CCl_4} CHBr_2-CHBr_2 \]
(2) जब ऐसीटिलीन में हाइड्रोजन ब्रोमाइड का योग होता है, तो एथिलीडीन डाइब्रोमाइड (1,1-डाइब्रोमोएथेन) बनता है।
\[ HC \equiv CH + 2HBr \rightarrow CH_3-CHBr_2 \]
(3) जब ऐसीटिलीन को ठण्डे तनु क्षारीय पोटेशियम परमैंगनेट विलयन में प्रवाहित किया जाता है, तो ऑक्सेलिक अम्ल बनता है।
\[ HC \equiv CH + 4[O] \xrightarrow{KMnO_4/\text{KOH}} COOH-COOH \]
(4) जब ऐसीटिलीन की कार्बन टेट्राक्लोराइड विलायक में ओजोन से अभिक्रिया कराकर उत्पाद को जल द्वारा अपघटित किया जाता है, तो मेथेनोइक अम्ल बनता है।
\[ HC \equiv CH + O_3 \xrightarrow{CCl_4} \text{Intermediate Ozonide} \xrightarrow{H_2O} 2HCOOH \]In simple words: Acetylene reacts differently with various chemicals. With bromine water, it forms tetrabromoethane and the bromine color disappears. With hydrogen bromide, it forms ethylidene dibromide. With cold potassium permanganate, it forms oxalic acid. And with ozone in carbon tetrachloride followed by water, it forms methanoic acid. This is a duplicate of Question 26.
🎯 Exam Tip: Pay close attention to the specific products formed in addition reactions of alkynes, as the stoichiometry and reagents can lead to different outcomes.
Question 31. n – पेन्टेन का क्वथनांक नियोपेन्टेन से ज्यादा है। कारण बताइये।
Answer: जैसे-जैसे अणु का भार बढ़ता है, ऐल्केनों के क्वथनांक भी बढ़ते हैं, क्योंकि अणु का आकार और सतह का क्षेत्रफल बढ़ता है, जिससे उनके बीच का अंतर-आणविक आकर्षण बल (वैंडरवाल्स बल) मजबूत होता है। शाखित श्रृंखला वाले ऐल्केनों में, अणु की आकृति लगभग गोल हो जाती है, जिससे सतह का क्षेत्रफल कम हो जाता है। इस कारण उनमें कमजोर अंतर-आणविक बल होते हैं, जिससे उनका क्वथनांक कम हो जाता है। यही कारण है कि n-पेंटेन (सीधी श्रृंखला) का क्वथनांक नियो-पेंटेन (दोहरी शाखित श्रृंखला) से अधिक होता है।
In simple words: n-pentane has a higher boiling point than neopentane because n-pentane has a straight chain structure, giving it a larger surface area for strong attractions between molecules. Neopentane is more spherical, which reduces its surface area and weakens these attractions, so it boils at a lower temperature.
🎯 Exam Tip: For boiling point comparisons in isomers, always consider the molecular shape and its effect on surface area, which directly influences the strength of intermolecular forces.
Question 32. 1 – ब्रोमोप्रोपेन तथा 2 – ब्रोमोप्रोपेन की ईथर की उपस्थिति में सोडियम से अभिक्रिया कराने पर प्राप्त विभिन्न ऐल्केनों के संरचना सूत्र तथा आई.यू.पी.ए.सी. नाम लिखिये। इस अभिक्रिया का नाम क्या है?
Answer: इस अभिक्रिया में तीन ऐल्केनों का मिश्रण प्राप्त होता है –
1-ब्रोमोप्रोपेन (\( CH_3CH_2CH_2Br \)) और 2-ब्रोमोप्रोपेन (\( CH_3CHBrCH_3 \)) की सोडियम के साथ ईथर की उपस्थिति में अभिक्रिया कराने पर निम्नलिखित तीन ऐल्केन बनते हैं:
(i) 1-ब्रोमोप्रोपेन के दो अणु आपस में जुड़कर हेक्सेन बनाते हैं:
\[ CH_3-CH_2-CH_2-Br + 2Na + Br-CH_2-CH_2-CH_3 \xrightarrow{\text{शुष्क ईथर}} CH_3-CH_2-CH_2-CH_2-CH_2-CH_3 + 2NaBr \]
संरचना: \( CH_3CH_2CH_2CH_2CH_2CH_3 \), IUPAC नाम: हेक्सेन
(ii) 2-ब्रोमोप्रोपेन के दो अणु आपस में जुड़कर 2,3-डाइमेथिल ब्यूटेन बनाते हैं:
\[ CH_3-CHBr-CH_3 + 2Na + Br-CH-CH_3 \xrightarrow{\text{शुष्क ईथर}} CH_3-CH(CH_3)-CH(CH_3)-CH_3 + 2NaBr \]
संरचना: \( CH_3-CH(CH_3)-CH(CH_3)-CH_3 \), IUPAC नाम: 2,3-डाइमेथिल ब्यूटेन
(iii) 1-ब्रोमोप्रोपेन और 2-ब्रोमोप्रोपेन के अणु आपस में जुड़कर 2-मेथिलपेन्टेन बनाते हैं:
\[ CH_3-CH_2-CH_2-Br + 2Na + Br-CH-CH_3 \xrightarrow{\text{शुष्क ईथर}} CH_3-CH_2-CH_2-CH(CH_3)-CH_3 + 2NaBr \]
संरचना: \( CH_3-CH_2-CH_2-CH(CH_3)-CH_3 \), IUPAC नाम: 2-मेथिलपेन्टेन
यह अभिक्रिया **वुर्ट्ज अभिक्रिया** कहलाती है। इसमें हैलोऐल्केन की सोडियम से शुष्क ईथर में क्रिया करवाने पर उच्च ऐल्केन बनते हैं, जिनमें कार्बन परमाणुओं की संख्या सम होती है, या मिश्रित हैलोऐल्केनों से विषम संख्या वाले ऐल्केन भी बनते हैं। इस विधि से कार्बन श्रृंखला की लम्बाई बढ़ती है। वुर्ट्ज अभिक्रिया द्वारा मेथेन नहीं बनाया जा सकता है। यह अभिक्रिया मुक्त मूलक क्रियाविधि एवं आयनिक क्रियाविधि दोनों द्वारा सम्पन्न होती है।
मुक्त मूलक क्रियाविधि:
\( Na+R:X \rightarrow NaX+R\cdot \)
\( R\cdot +R\cdot \rightarrow R-R \)
आयनिक क्रियाविधि:
\( 2Na + R-X \rightarrow NaX+R^-Na^+ \)
\( R^-Na^+ + R'X \rightarrow R-R' + NaX \)
In simple words: When 1-bromopropane and 2-bromopropane react with sodium in dry ether, it's called the Wurtz reaction. This reaction creates a mix of three different alkanes: hexane, 2,3-dimethylbutane, and 2-methylpentane. The Wurtz reaction is useful for making bigger alkanes from smaller haloalkanes. It works through both free radical and ionic steps.
🎯 Exam Tip: When dealing with mixed Wurtz reactions, remember all possible combinations of haloalkanes to correctly predict the mixture of alkane products and their IUPAC names. The main product from coupling identical R groups is often emphasized, but mixtures are common.
Question 35. ऐल्केन रासायनिक रूप से निष्क्रिय क्यों होती हैं? ऐल्केनों की सामान्य अभिक्रियाओं का वर्णन कीजिये।
Answer: ऐल्केन रासायनिक रूप से निष्क्रिय होती हैं क्योंकि उनमें केवल कार्बन-कार्बन एकल आबंध (\( \sigma \)-आबंध) होते हैं, जो बहुत मजबूत होते हैं। ये आबंध रासायनिक अभिकर्मकों जैसे अम्लों (\( \text{HCl, H}_2\text{SO}_4, \text{HNO}_3 \)), क्षारों (\( \text{KOH, NaOH} \)), और ऑक्सीकारकों (\( \text{KMnO}_4, \text{K}_2\text{Cr}_2\text{O}_7 \)) के साथ आसानी से क्रिया नहीं करते हैं। इसलिए इन्हें 'पैराफिन' भी कहा जाता है, जिसका अर्थ है 'कम क्रियाशीलता'।
हालाँकि, कुछ खास स्थितियों में ऐल्केन कुछ अभिक्रियाएँ दर्शाते हैं, जैसे:
(a) **प्रतिस्थापन अभिक्रियाएँ:**
ऐल्केनों में हाइड्रोजन परमाणु को हैलोजन, नाइट्रो या सल्फोनिक अम्ल समूह जैसे अन्य परमाणुओं या समूहों से बदलने की प्रक्रिया को प्रतिस्थापन अभिक्रिया कहते हैं। यह अभिक्रिया मुक्त मूलक क्रियाविधि द्वारा होती है।
हाइड्रोजन परमाणुओं के प्रतिस्थापन की सुगमता का क्रम: तृतीयक H > द्वितीयक H > प्राथमिक H > मेथेन H.
(1) **हैलोजनीकरण:**
उच्च तापमान (\( 573 - 773 \text{ K} \)) या पराबैंगनी प्रकाश की उपस्थिति में ऐल्केन हैलोजन के साथ क्रिया करके हाइड्रोजन परमाणुओं को हैलोजन परमाणुओं से बदल देते हैं। इस अभिक्रिया को हैलोजनीकरण कहते हैं।
\[ \text{R - H} + \text{X}_2 \xrightarrow{\text{hv}} \text{R - X} + \text{HX} \]
विभिन्न हैलोजनों के साथ ऐल्केनों की क्रियाशीलता का क्रम: \( \text{F}_2 \gg \text{Cl}_2 \gg \text{Br}_2 > \text{I}_2 \)।
हाइड्रोजन प्रतिस्थापन की दर का क्रम: \( 3^\circ > 2^\circ > 1^\circ \)।
फ्लुओरीनीकरण बहुत तेज़ और अनियंत्रित होता है, जबकि आयोडीनीकरण बहुत धीमा होता है और यह एक उत्क्रमणीय अभिक्रिया है। इसे ऑक्सीकारक (\( \text{HIO}_3 \) या \( \text{HNO}_3 \)) की उपस्थिति में करवाया जाता है ताकि \( \text{HI} \) से क्रिया करके \( \text{I}_2 \) वापस बन जाए।
\[ \text{CH}_4 + \text{I}_2 \longrightarrow \text{CH}_3\text{I} + \text{HI} \]
\[ \text{HIO}_3 + 5\text{HI} \longrightarrow 3\text{I}_2 + 3\text{H}_2\text{O} \]
उदाहरण - मेथेन के क्लोरीनीकरण से विभिन्न उत्पाद प्राप्त होते हैं जब क्लोरीन अधिक मात्रा में ली जाती है।
\[ \text{CHCl}_3 + \text{Cl}_2 \xrightarrow{\text{hv}} \text{CCl}_4 + \text{HCl} \]
**(क्रियाविधि - मुक्त मूलक प्रतिस्थापन)**
(i) **श्रृंखला प्रारम्भन पद:** \( \text{Cl - Cl} \xrightarrow{\text{समांश विखण्डन}} \dot{\text{Cl}}_{(g)} + \dot{\text{Cl}}_{(g)} \)
(ii) **श्रृंखला संचरण पद:**
\[ \text{CH}_4 + \dot{\text{Cl}} \xrightarrow{} \dot{\text{CH}}_3 + \text{HCl} \]
\[ \dot{\text{CH}}_3 + \text{Cl}_2 \xrightarrow{} \text{CH}_3\text{Cl} + \dot{\text{Cl}} \]
आगे अभिक्रिया से अधिक हैलोजन वाले उत्पाद बनते हैं:
\[ \text{CH}_3\text{Cl} + \dot{\text{Cl}} \longrightarrow \dot{\text{CH}}_2\text{Cl} + \text{HCl} \]
\[ \dot{\text{CH}}_2\text{Cl} + \text{Cl}_2 \longrightarrow \text{CH}_2\text{Cl}_2 + \dot{\text{Cl}} \]
\[ \text{CH}_2\text{Cl}_2 + \dot{\text{Cl}} \longrightarrow \dot{\text{CHCl}}_2 + \text{HCl} \]
\[ \dot{\text{CHCl}}_2 + \text{Cl}_2 \longrightarrow \text{CHCl}_3 + \dot{\text{Cl}} \]
\[ \text{CHCl}_3 + \dot{\text{Cl}} \longrightarrow \dot{\text{CCl}}_3 + \text{HCl} \]
\[ \dot{\text{CCl}}_3 + \text{Cl}_2 \longrightarrow \text{CCl}_4 + \dot{\text{Cl}} \]
(iii) **श्रृंखला समापन पद:**
मुक्त मूलक आपस में मिलकर अभिक्रिया को समाप्त कर देते हैं।
**प्रोपेन का क्लोरीनीकरण:** प्रोपेन के क्लोरीनीकरण से 2-क्लोरोप्रोपेन मुख्य उत्पाद के रूप में बनता है क्योंकि \( 2^\circ \) हाइड्रोजन की क्रियाशीलता \( 1^\circ \) हाइड्रोजन से अधिक होती है।
\[ \text{CH}_3-\text{CH}_2-\text{CH}_3 + \text{Cl}_2 \xrightarrow{\text{hv}} \text{CH}_3-\text{CH}(\text{Cl})-\text{CH}_3 (55\%) + \text{CH}_3-\text{CH}_2-\text{CH}_2\text{Cl} (45\%) \]
(2) **नाइट्रीकरण:**
वाष्प अवस्था में ऐल्केन और सांद्र \( \text{HNO}_3 \) को \( 400 - 500^\circ\text{C} \) पर गर्म करने पर नाइट्रोऐल्केन बनते हैं।
उदाहरण: \( \text{CH}_3\text{CH}_3 + \text{HNO}_3 \xrightarrow{\text{High T}} \text{CH}_3\text{NO}_2 + \text{CH}_3\text{CH}_2\text{NO}_2 \)
(3) **सल्फोनीकरण:**
उच्च और शाखित ऐल्केन सधूम सल्फ्यूरिक अम्ल (\( \text{H}_2\text{SO}_4 + \text{SO}_3 \)) से क्रिया करके ऐल्केन सल्फोनिक अम्ल देते हैं।
\[ \text{R-H} + \text{H}_2\text{SO}_4 (\text{सधूम}) \xrightarrow{} \text{R-SO}_2\text{-OH} + \text{H}_2\text{O} \]
(4) **क्लोरोसल्फोनीकरण (रीड अभिक्रिया):**
पराबैंगनी प्रकाश की उपस्थिति में \( \text{SO}_2 \) और \( \text{Cl}_2 \) के मिश्रण को ऐल्केनों से क्रिया कराने पर ऐल्केनसल्फोनिल क्लोराइड बनता है।
\[ \text{C}_3\text{H}_8 + \text{SO}_2 + \text{Cl}_2 \xrightarrow{\text{hv}} \text{C}_3\text{H}_7\text{SO}_2\text{Cl} + \text{HCl} \]
(b) **मेथिलीन समूह (\( >\text{CH}_2 \)) का समावेशन:**
पराबैंगनी प्रकाश की उपस्थिति में डाइएजोमेथेन (\( \text{CH}_2\text{N}_2 \)) या कीटोन (\( \text{CH}_2=\text{C}=\text{O} \)) की ऐल्केन से क्रिया कराने पर उच्च ऐल्केन बनते हैं।
\[ \text{CH}_2\text{N}_2 \xrightarrow{\text{hv}} :\text{CH}_2 + \text{N}_2 \]
\[ \text{CH}_3-\text{CH}_2-\text{CH}_3 + :\text{CH}_2 \longrightarrow \text{CH}_3-\text{CH}_2-\text{CH}_2-\text{CH}_3 \]
(c) **समावयवीकरण:**
सीधी श्रृंखला वाले ऐल्केनों को निर्जल \( \text{AlCl}_3/\text{HCl} \) जैसे उत्प्रेरकों की उपस्थिति में गर्म करने पर शाखित श्रृंखला वाले ऐल्केनों में बदला जा सकता है।
\[ \text{n-पेन्टेन} \xrightarrow{\text{निर्जल AlCl}_3 + \text{HCl}} \text{आइसोपेन्टेन} + \text{नियोपेन्टेन} \]
(d) **ऐरोमैटीकरण:**
उच्च तापमान (\( 723 - 873 \text{ K} \)) पर \( \text{Cr, Mo, V} \) के ऑक्साइड उत्प्रेरकों की उपस्थिति में \( 6 \) या अधिक कार्बन परमाणुओं वाले ऐल्केन चक्रीकृत होकर ऐरोमैटिक यौगिक बनाते हैं।
\[ \text{n-हेक्सेन} \xrightarrow[\text{10-20 वायु-दाब}]{\text{V}_2\text{O}_3/\text{Mo}_2\text{O}_3/\text{Cr}_2\text{O}_3, \Delta, 773\text{K}} \text{बेन्जीन} + 4\text{H}_2 \]
(e) **ताप अपघटन (क्रैकिंग):**
उच्च तापमान पर ऐल्केन, छोटे ऐल्केन, ऐल्कीन और हाइड्रोजन के मिश्रण में टूट जाते हैं।
\[ \text{C}_3\text{H}_8 \xrightarrow{773\text{K}} \text{C}_2\text{H}_4 + \text{CH}_4 \]
(f) **दहन:**
ऐल्केन वायु या ऑक्सीजन की उपस्थिति में जलने पर \( \text{CO}_2 \), \( \text{H}_2\text{O} \) और बड़ी मात्रा में ऊष्मा व प्रकाश उत्सर्जित करते हैं।
\[ \text{C}_{\text{n}}\text{H}_{2\text{n}+2} + \left(\frac{3\text{n}+1}{2}\right)\text{O}_2 \longrightarrow \text{nCO}_2 + (\text{n}+1)\text{H}_2\text{O} \]
(g) **नियंत्रित ऑक्सीकरण:**
ऑक्सीजन या वायु को उपयुक्त उत्प्रेरकों की उपस्थिति में उच्च दाब पर ऐल्केनों से गुजारने पर विभिन्न उत्पाद प्राप्त होते हैं।
\[ 2\text{CH}_4 + \text{O}_2 \xrightarrow{\text{Cu उत्प्रेरक}/200^\circ\text{C}/100 \text{ atm}} 2\text{CH}_3\text{OH} \]In simple words: ऐल्केन बहुत स्थिर होते हैं क्योंकि उनमें मजबूत एकल कार्बन बॉन्ड होते हैं और वे आसानी से प्रतिक्रिया नहीं करते। लेकिन, वे कुछ खास परिस्थितियों में प्रतिक्रिया कर सकते हैं, जैसे कि उनके हाइड्रोजन परमाणुओं को दूसरे परमाणुओं से बदलना, छोटे अणुओं में टूटना, या जलना और ऊर्जा छोड़ना।
🎯 Exam Tip: जब रासायनिक निष्क्रियता पूछी जाए, तो सिग्मा बॉन्ड की मजबूती और अभिकर्मकों के प्रति अप्रतिक्रियाशीलता पर जोर दें। अभिक्रियाओं का वर्णन करते समय, प्रत्येक चरण की विधि (जैसे मुक्त मूलक क्रियाविधि) और महत्वपूर्ण शर्तें (तापमान, उत्प्रेरक) शामिल करें।
Question 36. रासायनिक समीकरण देते हुए बताइये क्या होता है। जब?
Answer:
1. **शुष्क सोडियम ऐसीटेट को सोडालाइम के साथ गर्म करते हैं।**
जब शुष्क सोडियम ऐसीटेट को सोडालाइम (सोडियम हाइड्रॉक्साइड और कैल्सियम ऑक्साइड का मिश्रण) के साथ गर्म किया जाता है, तो मेथेन गैस बनती है। यह विकार्बोक्सिलीकरण अभिक्रिया है, जिसमें कार्बोक्सिलिक अम्ल से कार्बन डाइऑक्साइड निकल जाती है।
\[ \text{CH}_3\text{COONa} + \text{NaOH} \xrightarrow[\text{शुष्क आसवन}]{\text{CaO}} \text{CH}_4 + \text{Na}_2\text{CO}_3 \]
2. **ईथर विलयन में मेथिल आयोडाइड की सोडियम से क्रिया करायी जाती है।**
जब मेथिल आयोडाइड की सोडियम के साथ शुष्क ईथर में अभिक्रिया कराई जाती है, तो एथेन बनता है। यह वुर्ट्ज़ अभिक्रिया कहलाती है, जिसमें कार्बन श्रृंखला की लंबाई बढ़ जाती है।
\[ \text{CH}_3\text{I} + 2\text{Na} + \text{CH}_3\text{I} \xrightarrow{\text{ईथर}} \text{CH}_3 - \text{CH}_3 + 2\text{NaI} \]
3. **पोटेशियम ऐसीटेट के सान्द्र जलीय विलयन का विद्युत अपघटन करते हैं।**
पोटेशियम ऐसीटेट के सांद्र जलीय विलयन का विद्युत अपघटन करने पर एनोड पर एथेन बनता है। यह कोल्बे की विद्युत अपघटनी संश्लेषण विधि है।
\[ 2\text{CH}_3\text{COO}^-\text{K}^+ + 2\text{H}_2\text{O} \xrightarrow{\text{विद्युत-अपघटन}} \text{CH}_3 - \text{CH}_3 + 2\text{CO}_2 + \text{H}_2 + 2\text{KOH} \]
4. **ऐलुमिनियम कार्बाइड जल से अभिक्रिया करता है।**
ऐलुमिनियम कार्बाइड की जल से अभिक्रिया करने पर मेथेन गैस बनती है।
\[ \text{Al}_4\text{C}_3 + 12\text{H}_2\text{O} \xrightarrow{\text{तनु HCl}} 3\text{CH}_4 + 4\text{Al(OH)}_3 \]In simple words: इन सवालों में पूछा गया है कि जब कुछ रसायन आपस में मिलते हैं या गरम होते हैं तो क्या होता है। उत्तर में रासायनिक समीकरण दिए गए हैं जो दिखाते हैं कि कौन से नए पदार्थ बनते हैं। ये अभिक्रियाएँ अलग-अलग तरीकों से नए यौगिक बनाती हैं, जैसे मेथेन या एथेन।
🎯 Exam Tip: रासायनिक अभिक्रियाओं के प्रश्नों में, अभिकारकों, उत्पादों और अभिक्रिया की शर्तों (जैसे तापमान, उत्प्रेरक, विलायक) को सही ढंग से लिखना महत्वपूर्ण है। प्रत्येक समीकरण को संतुलित करना सुनिश्चित करें।
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