RBSE Solutions Class 11 Chemistry Chapter 1 रसायन विज्ञान की मूल अवधारणाएँ

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Detailed Chapter 1 रसायन विज्ञान की मूल अवधारणाएँ RBSE Solutions for Class 11 Chemistry

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Class 11 Chemistry Chapter 1 रसायन विज्ञान की मूल अवधारणाएँ RBSE Solutions PDF

RBSE Class 11 Chemistry Chapter 1 पाठ्यपुस्तक के अभ्यास प्रश्न

RBSE Class 11 Chemistry Chapter 1 वस्तुनिष्ठ प्रश्न

 

Question 1. संख्या 0.0287 में सार्थक अंक है –
(अ) 5
(ब) 2
(स) 3
(द) 4
Answer: (स) 3
In simple words: जब किसी संख्या में दशमलव होता है, तो सार्थक अंकों की गिनती पहले गैर-शून्य अंक से शुरू होती है. यहाँ '2' पहला गैर-शून्य अंक है, और उसके बाद 8 और 7 हैं, तो कुल तीन सार्थक अंक हैं.

🎯 Exam Tip: सार्थक अंकों की पहचान करते समय, दशमलव वाली संख्याओं में शुरू के शून्य को नहीं गिना जाता है, लेकिन दशमलव के बाद के सभी गैर-शून्य अंक और उनके बीच के शून्य गिने जाते हैं.

 

Question 2. ग्लूकोस अणु का आणविक द्रव्यमान होगा -
(अ) 342 u
(ब) 110 u
Answer: ग्लूकोस (\( \text{C}_6\text{H}_{12}\text{O}_6 \)) का आणविक द्रव्यमान \( 6 \times 12 \text{ u} + 12 \times 1 \text{ u} + 6 \times 16 \text{ u} = 72 \text{ u} + 12 \text{ u} + 96 \text{ u} = 180 \text{ u} \) होता है. ग्लूकोस पौधों द्वारा प्रकाश संश्लेषण के दौरान बनाया जाने वाला एक महत्वपूर्ण सरल कार्बोहाइड्रेट है.
In simple words: ग्लूकोस का आणविक द्रव्यमान 180 u होता है, जिसे इसमें मौजूद कार्बन, हाइड्रोजन और ऑक्सीजन परमाणुओं के वजन को जोड़कर निकाला जाता है.

🎯 Exam Tip: अणुभार की गणना के लिए, यौगिक में प्रत्येक तत्व के परमाणु भार को उसकी संख्या से गुणा करें और फिर सभी मानों को जोड़ दें. आणविक द्रव्यमान की इकाई 'u' (एकीकृत परमाणु द्रव्यमान इकाई) होती है.

 

Question 4. मानक ताप व दाब पर किसी आदर्श गैस के 1 ml में उपस्थित अणुओं की संख्या होगी –
(अ) \( 6.023 \times 10^{23} \)
(ब) \( 2.69 \times 10^{19} \)
(स) \( 2.69 \times 10^{23} \)
(द) \( 4.58 \times 10^{26} \)
Answer: (ब) \( 2.69 \times 10^{19} \)
In simple words: मानक ताप और दाब (STP) पर, किसी भी आदर्श गैस के 22.4 लीटर (या 22400 मिलीलीटर) में आवोगाद्रो संख्या (\( 6.022 \times 10^{23} \)) के बराबर अणु होते हैं. इसलिए, 1 मिलीलीटर में अणुओं की संख्या निकालने के लिए, आवोगाद्रो संख्या को 22400 से भाग दिया जाता है.

🎯 Exam Tip: आवोगाद्रो संख्या और मानक मोलर आयतन (22.4 L at STP) को याद रखना इस तरह के गणना-आधारित प्रश्नों को हल करने के लिए महत्वपूर्ण है.

 

Question 5. निम्नलिखित में से किसका भार न्यूनतम है –
(अ) सिल्वर का 108 ग्राम
(ब) सल्फर का 1 मोल
(स) नाइट्रोजन का 1 ग्राम परमाणु
(द) कार्बन के \( 3.011 \times 10^{23} \) परमाणु
Answer: (द) कार्बन के \( 3.011 \times 10^{23} \) परमाणु
In simple words: हमें सभी विकल्पों में दिए गए पदार्थों का वजन ग्राम में निकालना होगा. सिल्वर का 108 ग्राम दिया ही है. सल्फर का 1 मोल (परमाणु भार 32u) 32 ग्राम के बराबर होगा. नाइट्रोजन का 1 ग्राम परमाणु 14 ग्राम होगा. कार्बन के \( 3.011 \times 10^{23} \) परमाणु, जो कि आवोगाद्रो संख्या का आधा है, कार्बन के 6 ग्राम के बराबर होंगे (क्योंकि कार्बन का परमाणु भार 12 है). इस प्रकार, कार्बन का वजन सबसे कम होगा.

🎯 Exam Tip: ऐसे प्रश्नों को हल करने के लिए, सभी विकल्पों को एक ही इकाई (ग्राम) में बदलना महत्वपूर्ण है. मोल, ग्राम परमाणु और परमाणुओं की संख्या को ग्राम में बदलने के लिए आवोगाद्रो संख्या और परमाणु/अणु भार का उपयोग करें.

RBSE Class 11 Chemistry Chapter 1 अतिलघूत्तरात्मक प्रश्न

 

Question 6. S.I. पद्धति में पदार्थ की मात्रा की इकाई तथा उसका संकेत क्या है?
Answer: S.I. पद्धति में पदार्थ की मात्रा की इकाई 'मोल' है. इसका संकेत 'mol' है. मोल रासायनिक गणनाओं के लिए एक मूलभूत इकाई है.
In simple words: पदार्थ की मात्रा को मापने के लिए S.I. सिस्टम में मोल (mol) का उपयोग किया जाता है.

🎯 Exam Tip: S.I. इकाइयों और उनके संकेतों को याद रखना महत्वपूर्ण है, क्योंकि वे वैज्ञानिक मापन के लिए मानक हैं.

 

Question 7. भार 8.0 ग्राम और 8.000 ग्राम में क्या अन्तर है?
Answer: संख्या 8.0 ग्राम में दो सार्थक अंक हैं, जिसका मतलब है कि यह माप दशमलव के बाद एक अंक तक सटीक है. वहीं, 8.000 ग्राम में चार सार्थक अंक हैं, जो यह दर्शाता है कि यह माप दशमलव के बाद तीन अंकों तक बहुत अधिक सटीक है. यह सटीकता मापने वाले उपकरण पर निर्भर करती है.
In simple words: 8.0 ग्राम का मतलब है कि माप एक दशमलव स्थान तक सही है, जबकि 8.000 ग्राम का मतलब है कि माप तीन दशमलव स्थानों तक बहुत अधिक सही है.

🎯 Exam Tip: सार्थक अंक माप की सटीकता को दर्शाते हैं. अधिक सार्थक अंक का अर्थ है अधिक सटीक माप, जो अक्सर अधिक संवेदनशील उपकरण से आता है.

 

Question 8. 3600 ग्राम को तीन सार्थक अंकों वाली संख्या में व्यक्त कीजिए।
Answer: 3600 ग्राम को तीन सार्थक अंकों वाली संख्या में व्यक्त करने के लिए इसे वैज्ञानिक संकेतन में \( 3.60 \times 10^3 \) ग्राम लिखा जाता है. यहाँ दशमलव के बाद का शून्य (0) भी सार्थक अंक के रूप में गिना जाता है.
In simple words: 3600 ग्राम को तीन सार्थक अंकों में दिखाने के लिए हम इसे \( 3.60 \times 10^3 \) ग्राम लिखते हैं.

🎯 Exam Tip: वैज्ञानिक संकेतन का उपयोग सार्थक अंकों की संख्या को स्पष्ट रूप से दर्शाने में मदद करता है, खासकर जब संख्या में अंत के शून्य होते हैं और वे सार्थक हों या नहीं, यह स्पष्ट न हो.

 

Question 9. 20 ग्राम हाइड्रोजन में हाइड्रोजन के कितने ग्राम अणु उपस्थित हैं?
Answer: हाइड्रोजन (\( \text{H}_2 \)) का अणुभार 2 ग्राम/मोल होता है. इसलिए, 20 ग्राम हाइड्रोजन में उपस्थित ग्राम अणुओं की संख्या को कुल द्रव्यमान को अणुभार से भाग देकर ज्ञात किया जाता है: \( \frac{20 \text{ ग्राम}}{2 \text{ ग्राम/मोल}} = 10 \text{ मोल} \). हाइड्रोजन अणु गैस के रूप में \( \text{H}_2 \) के रूप में मौजूद होती है.
In simple words: 20 ग्राम हाइड्रोजन में 10 मोल (\( \text{H}_2 \)) अणु होते हैं, क्योंकि एक \( \text{H}_2 \) अणु का वजन 2 ग्राम होता है.

🎯 Exam Tip: ग्राम अणुओं की संख्या (मोल) ज्ञात करने के लिए हमेशा दिए गए द्रव्यमान को पदार्थ के अणुभार से भाग दें.

 

Question 10. 64 ग्राम ऑक्सीजन में अणुओं की संख्या कितनी होगी?
Answer: ऑक्सीजन (\( \text{O}_2 \)) का अणुभार \( 2 \times 16 = 32 \) ग्राम/मोल होता है. 64 ग्राम ऑक्सीजन में मोलों की संख्या \( = \frac{64}{32} = 2 \) मोल होती है. इसलिए, अणुओं की संख्या मोलों की संख्या को आवोगाद्रो संख्या (\( 6.022 \times 10^{23} \)) से गुणा करके ज्ञात की जाती है: \( 2 \times 6.022 \times 10^{23} = 1.2044 \times 10^{24} \) अणु. यह संख्या बहुत बड़ी होती है क्योंकि मोल एक विशाल मात्रा का प्रतिनिधित्व करता है.
In simple words: 64 ग्राम ऑक्सीजन में 2 मोल होते हैं, और इसमें कुल \( 1.2044 \times 10^{24} \) अणु होते हैं, क्योंकि एक मोल में आवोगाद्रो संख्या के बराबर अणु होते हैं.

🎯 Exam Tip: अणुओं की संख्या ज्ञात करने के लिए, पहले दिए गए द्रव्यमान से मोलों की संख्या निकालें, फिर उसे आवोगाद्रो संख्या से गुणा करें.

 

Question 11. \( \text{H}_2\text{SO}_4 \) का तुल्यांकी भार ज्ञात करो, यदि इसका अणुभार 98 है।
Answer: अम्ल का तुल्यांकी भार उसके अणुभार को उसकी क्षारकता (कितने \( \text{H}^+ \) आयन दे सकता है) से भाग देकर निकाला जाता है. \( \text{H}_2\text{SO}_4 \) एक प्रबल अम्ल है जिसकी क्षारकता 2 है (क्योंकि यह दो \( \text{H}^+ \) आयन देता है). इसलिए, \( \text{H}_2\text{SO}_4 \) का तुल्यांकी भार \( = \frac{98}{2} = 49 \).
In simple words: \( \text{H}_2\text{SO}_4 \) का अणुभार 98 है और यह 2 हाइड्रोजन आयन देता है, इसलिए इसका तुल्यांकी भार 98 का आधा, यानी 49 होगा.

🎯 Exam Tip: अम्लों के लिए तुल्यांकी भार ज्ञात करते समय, अणुभार को अम्ल की क्षारकता (कितने \( \text{H}^+ \) आयन प्रति अणु प्रदान करता है) से भाग दें, और क्षारों के लिए अम्लता (कितने \( \text{OH}^- \) आयन प्रति अणु प्रदान करता है) से भाग दें.

 

Question 12. आवोगाद्रो नियम क्या है?
Answer: आवोगाद्रो नियम बताता है कि समान ताप और दाब पर, सभी भिन्न-भिन्न गैसों के समान आयतन में अणुओं की संख्या समान होती है. यह नियम गैसों के व्यवहार को समझने में बहुत महत्वपूर्ण है.
In simple words: अगर गैसों का तापमान, दबाव और आयतन समान हो, तो उनमें अणुओं की संख्या भी बराबर होती है, चाहे गैस कोई भी हो.

🎯 Exam Tip: आवोगाद्रो नियम गैसों के मोल-आयतन संबंध को समझने में मदद करता है और यह आदर्श गैस समीकरण का एक महत्वपूर्ण हिस्सा है.

 

Question 13. 0.1 मोल \( \text{C}_6\text{H}_{12}\text{O}_6 \) में कार्बन के कितने परमाणु होंगे?
Answer: ग्लूकोस (\( \text{C}_6\text{H}_{12}\text{O}_6 \)) के एक अणु में 6 कार्बन परमाणु होते हैं. 0.1 मोल \( \text{C}_6\text{H}_{12}\text{O}_6 \) में कार्बन परमाणुओं की संख्या ज्ञात करने के लिए, मोलों की संख्या को प्रति अणु कार्बन परमाणुओं की संख्या और आवोगाद्रो संख्या से गुणा किया जाता है: \( 0.1 \times 6 \times 6.022 \times 10^{23} = 3.6132 \times 10^{23} \) परमाणु. यह गणना हमें किसी यौगिक में विशिष्ट परमाणुओं की कुल संख्या बताती है.
In simple words: 0.1 मोल ग्लूकोस में कार्बन के कुल \( 3.6132 \times 10^{23} \) परमाणु होते हैं, क्योंकि ग्लूकोस के एक अणु में 6 कार्बन परमाणु होते हैं और एक मोल में आवोगाद्रो संख्या के बराबर अणु होते हैं.

🎯 Exam Tip: किसी यौगिक में विशिष्ट परमाणुओं की संख्या ज्ञात करते समय, यौगिक के प्रति अणु में उस परमाणु की संख्या को मोलों की संख्या और आवोगाद्रो संख्या से गुणा करना न भूलें.

 

Question 15. गैस की परमाणुकता किसे कहते हैं?
Answer: किसी तात्विक गैस के एक अणु में जितने परमाणु उपस्थित होते हैं, उन परमाणुओं की संख्या को उसकी परमाणुकता कहते हैं. उदाहरण के लिए, हाइड्रोजन की परमाणुकता दो है (\( \text{H}_2 \)). परमाणुकता से हमें पता चलता है कि एक अणु में कितने परमाणु जुड़े हुए हैं.
In simple words: किसी गैस के एक अणु में जितने एटम (परमाणु) होते हैं, उसे उसकी परमाणुकता कहते हैं. जैसे हाइड्रोजन में दो एटम होते हैं, तो उसकी परमाणुकता 2 है.

🎯 Exam Tip: परमाणुकता गैसों को वर्गीकृत करने में मदद करती है (जैसे एकपरमाण्विक, द्विपरमाण्विक, बहुपरमाण्विक) और उनके रासायनिक व्यवहार को समझने के लिए महत्वपूर्ण है.

 

Question 16. 36 ग्राम जल में उपस्थित इलेक्ट्रॉनों की संख्या ज्ञात कीजिए।
Answer: जल (\( \text{H}_2\text{O} \)) का अणुभार \( 2 \times 1 + 16 = 18 \) ग्राम/मोल होता है. इसलिए, 36 ग्राम जल में \( \frac{36}{18} = 2 \) मोल जल उपस्थित है. जल के एक अणु (\( \text{H}_2\text{O} \)) में इलेक्ट्रॉनों की संख्या: 2 हाइड्रोजन परमाणु में \( 2 \times 1 = 2 \) इलेक्ट्रॉन और 1 ऑक्सीजन परमाणु में 8 इलेक्ट्रॉन होते हैं, तो कुल \( 2 + 8 = 10 \) इलेक्ट्रॉन होते हैं. अतः, 36 ग्राम जल में कुल इलेक्ट्रॉनों की संख्या \( = 2 \text{ मोल} \times 10 \text{ इलेक्ट्रॉन/अणु} \times 6.022 \times 10^{23} \text{ अणु/मोल} = 1.2044 \times 10^{25} \) इलेक्ट्रॉन. यह गणना अणुओं और परमाणुओं के भीतर के कणों की विशाल संख्या को उजागर करती है.
In simple words: 36 ग्राम जल में 2 मोल जल होता है. जल के एक अणु में 10 इलेक्ट्रॉन होते हैं. तो कुल इलेक्ट्रॉनों की संख्या 2 मोल को 10 और आवोगाद्रो संख्या से गुणा करके निकाली जाती है, जो कि \( 1.2044 \times 10^{25} \) है.

🎯 Exam Tip: किसी पदार्थ में इलेक्ट्रॉनों की संख्या ज्ञात करने के लिए, पहले मोलों की संख्या और फिर प्रति अणु इलेक्ट्रॉनों की संख्या ज्ञात करें, अंत में उसे आवोगाद्रो संख्या से गुणा करें.

 

Question 17. अणुभार से आपका क्या तात्पर्य है?
Answer: अणुभार किसी पदार्थ के एक अणु में उपस्थित सभी परमाणुओं के सापेक्षिक परमाणु द्रव्यमानों का योग होता है. यह बताता है कि कोई अणु कार्बन-12 परमाणु के द्रव्यमान के 1/12वें भाग से कितने गुना भारी है. यह एक इकाईविहीन राशि है, जिसे अक्सर 'u' (एकीकृत परमाणु द्रव्यमान इकाई) में व्यक्त किया जाता है.
In simple words: अणुभार का मतलब है किसी अणु में मौजूद सभी एटम (परमाणु) के वजन का कुल जोड़. यह बताता है कि एक अणु कितना भारी है.

🎯 Exam Tip: अणुभार की गणना के लिए, यौगिक में प्रत्येक तत्व के परमाणु भार को उसके परमाणुओं की संख्या से गुणा करें और फिर सभी तत्वों के मानों को जोड़ दें.

 

Question 18. एक मोल जल जिसमें 50% भारी पानी (\( \text{D}_2\text{O} \)) है, का द्रव्यमान कितना होगा?
Answer: सामान्य जल (\( \text{H}_2\text{O} \)) का मोलर द्रव्यमान \( 2 \times 1 + 16 = 18 \) ग्राम/मोल होता है. भारी पानी (\( \text{D}_2\text{O} \)) का मोलर द्रव्यमान \( 2 \times 2 + 16 = 20 \) ग्राम/मोल होता है (क्योंकि ड्यूटेरियम (D) का परमाणु भार 2 होता है). चूंकि एक मोल जल के नमूने में 50% \( \text{H}_2\text{O} \) और 50% \( \text{D}_2\text{O} \) है, तो इसका वास्तविक द्रव्यमान दोनों के द्रव्यमान का औसत होगा: \( \frac{18 \text{ ग्राम} + 20 \text{ ग्राम}}{2} = 19 \) ग्राम. यह मिश्रण के औसत द्रव्यमान को समझने में मदद करता है.
In simple words: सामान्य पानी का वजन 18 ग्राम और भारी पानी का वजन 20 ग्राम होता है. अगर एक मोल पानी में आधा सामान्य पानी और आधा भारी पानी हो, तो उसका कुल वजन दोनों के वजन का औसत होगा, जो कि 19 ग्राम है.

🎯 Exam Tip: जब किसी नमूने में अलग-अलग समस्थानिक या प्रकार के अणु मिश्रण में होते हैं, तो औसत द्रव्यमान की गणना उनके प्रतिशत बहुलता के आधार पर की जाती है.

 

Question 19. मानक ताप और दाब से क्या तात्पर्य है?
Answer: मानक ताप और दाब (STP) से तात्पर्य 273 केल्विन (0°C) तापमान और एक वायुमंडलीय दाब (1 atm या 1.01325 बार) से है. यह स्थितियों का एक मानक सेट है जिसका उपयोग गैसों के गुणों और प्रतिक्रियाओं की तुलना करने के लिए किया जाता है. ये परिस्थितियाँ कई रासायनिक गणनाओं के लिए संदर्भ बिंदु के रूप में कार्य करती हैं.
In simple words: मानक ताप और दाब का मतलब है 0 डिग्री सेल्सियस (273 केल्विन) का तापमान और हवा का एक सामान्य दबाव.

🎯 Exam Tip: STP की स्थितियों को याद रखना महत्वपूर्ण है क्योंकि कई गैसीय गणनाएँ (जैसे मोलर आयतन) इन मानक स्थितियों पर आधारित होती हैं.

 

Question 20. मानक ताप और दाब पर x मिली \( \text{N}_2 \) गैस तथा x मिली \( \text{O}_2 \) गैस पूर्णतः क्रिया कर गैस A बनाती है। यदि क्रिया के पश्चात् आयतन अणुसूत्र क्या होगा?
Answer: मानक ताप और दाब पर, यदि समान आयतन (x मिली) की \( \text{N}_2 \) और \( \text{O}_2 \) गैसें पूर्णतः क्रिया करती हैं, तो गैलुसेक के गैसीय आयतन संबंधी नियम के अनुसार उनके बीच सरल अनुपात में अभिक्रिया होगी. सबसे आम अभिक्रिया जहाँ समान आयतन की \( \text{N}_2 \) और \( \text{O}_2 \) प्रतिक्रिया करती हैं, वह है नाइट्रिक ऑक्साइड (\( \text{NO} \)) का निर्माण: \( \text{N}_2(\text{g}) + \text{O}_2(\text{g}) \rightarrow 2\text{NO}(\text{g}) \). इस अभिक्रिया में, 1 आयतन \( \text{N}_2 \) 1 आयतन \( \text{O}_2 \) से क्रिया कर 2 आयतन \( \text{NO} \) बनाती है. अतः गैस A का अणुसूत्र \( \text{NO} \) होगा. अभिक्रिया के बाद कुल आयतन में कोई शुद्ध परिवर्तन नहीं होता है, क्योंकि 2x मिली अभिकारक से 2x मिली उत्पाद बनता है.
In simple words: जब \( \text{N}_2 \) और \( \text{O}_2 \) गैसें बराबर मात्रा में क्रिया करती हैं, तो वे नाइट्रिक ऑक्साइड (\( \text{NO} \)) बनाती हैं. तो, गैस A का सूत्र \( \text{NO} \) होगा.

🎯 Exam Tip: गैलुसेक के गैसीय आयतन संबंधी नियम का उपयोग गैसों की रासायनिक अभिक्रियाओं के आयतन संबंधों को निर्धारित करने में मदद करता है. यह नियम बताता है कि अभिकारक गैसों और गैसीय उत्पादों के आयतन सरल अनुपात में होते हैं.

RBSE Class 11 Chemistry Chapter 1 लघूत्तरात्मक प्रश्न

 

Question 21. निम्नलिखित में प्रत्येक के 1 मोल का भार क्या है?
(i) NaCl
(ii) \( \text{CaCO}_3 \)
Answer:
(i) \( \text{NaCl} \) (सोडियम क्लोराइड) के 1 मोल का भार: \( \text{Na} \) का परमाणु भार 23.0 u और \( \text{Cl} \) का परमाणु भार 35.5 u है. अतः, \( 23.0 + 35.5 = 58.5 \) ग्राम/मोल. यह नमक का रासायनिक सूत्र है.
(ii) \( \text{CaCO}_3 \) (कैल्शियम कार्बोनेट) के 1 मोल का भार: \( \text{Ca} \) का परमाणु भार 40.0 u, \( \text{C} \) का परमाणु भार 12.0 u और \( \text{O} \) का परमाणु भार 16.0 u है. अतः, \( 40.0 + 12.0 + (3 \times 16.0) = 40.0 + 12.0 + 48.0 = 100.0 \) ग्राम/मोल. यह चूना पत्थर का मुख्य घटक है.
In simple words: किसी भी पदार्थ के 1 मोल का वजन उसके सभी परमाणुओं के वजन को जोड़कर निकाला जाता है. \( \text{NaCl} \) का 1 मोल 58.5 ग्राम और \( \text{CaCO}_3 \) का 1 मोल 100 ग्राम होता है.

🎯 Exam Tip: मोलर द्रव्यमान की गणना के लिए, यौगिक में प्रत्येक तत्व के परमाणु भार को उसकी संख्या से गुणा करें और फिर सभी मानों को जोड़ दें. इकाई हमेशा ग्राम/मोल होती है.

 

Question 22. निम्नलिखित के सार्थक अंक ज्ञात करो –
(i) 0.00468
(ii) 753
Answer:
(i) 0.00468 में सार्थक अंक: दशमलव के बाद के शुरुआती शून्य सार्थक नहीं होते हैं. इसलिए, 4, 6 और 8 सार्थक अंक हैं, कुल 3 सार्थक अंक हैं. ये अंक माप की सटीकता को दर्शाते हैं.
(ii) 753 में सार्थक अंक: सभी गैर-शून्य अंक सार्थक होते हैं. इसलिए, 7, 5 और 3 सार्थक अंक हैं, कुल 3 सार्थक अंक हैं.
In simple words: 0.00468 में 3 सार्थक अंक हैं (आगे के शून्य नहीं गिने जाते). 753 में भी 3 सार्थक अंक हैं (सभी अंक गिने जाते हैं).

🎯 Exam Tip: सार्थक अंकों के नियमों को याद रखें: गैर-शून्य अंक हमेशा सार्थक होते हैं; अग्रणी शून्य (जैसे 0.004 में) सार्थक नहीं होते; दो गैर-शून्य अंकों के बीच के शून्य सार्थक होते हैं; और अंत के शून्य दशमलव बिंदु के साथ सार्थक होते हैं.

 

Question 23. निम्नलिखित में प्रत्येक के 2 मोल का भार क्या है?
(i) \( \text{MgSO}_4 \)
(ii) \( \text{KCl} \)
Answer:
(i) \( \text{MgSO}_4 \) (मैग्नीशियम सल्फेट) के 2 मोल का भार: \( \text{Mg} \) का परमाणु भार 24, \( \text{S} \) का परमाणु भार 32, \( \text{O} \) का परमाणु भार 16 है. \( \text{MgSO}_4 \) का मोलर द्रव्यमान \( 24 + 32 + (4 \times 16) = 24 + 32 + 64 = 120 \) ग्राम/मोल. इसलिए, 2 मोल का भार \( 2 \times 120 = 240 \) ग्राम. यह उर्वरकों में एक सामान्य घटक है.
(ii) \( \text{KCl} \) (पोटैशियम क्लोराइड) के 2 मोल का भार: \( \text{K} \) का परमाणु भार 39, \( \text{Cl} \) का परमाणु भार 35.5 है. \( \text{KCl} \) का मोलर द्रव्यमान \( 39 + 35.5 = 74.5 \) ग्राम/मोल. इसलिए, 2 मोल का भार \( 2 \times 74.5 = 149 \) ग्राम. यह एक महत्वपूर्ण इलेक्ट्रोलाइट है.
In simple words: पहले पदार्थ के 1 मोल का वजन निकालो, फिर उसे 2 से गुणा कर दो. \( \text{MgSO}_4 \) के 2 मोल का वजन 240 ग्राम और \( \text{KCl} \) के 2 मोल का वजन 149 ग्राम होगा.

🎯 Exam Tip: किसी भी संख्या में मोलों का द्रव्यमान ज्ञात करने के लिए, पदार्थ के मोलर द्रव्यमान को मोलों की संख्या से गुणा करें.

 

Question 24. निम्नलिखित में से प्रत्येक में कितने सार्थक अंक हैं?
Answer: सार्थक अंक वे अंक होते हैं जो किसी माप की सटीकता को दर्शाते हैं. इन्हें ज्ञात करने के सामान्य नियम इस प्रकार हैं: सभी गैर-शून्य अंक सार्थक होते हैं. दो गैर-शून्य अंकों के बीच के शून्य भी सार्थक होते हैं. दशमलव बिंदु के साथ अंत के शून्य सार्थक होते हैं, लेकिन दशमलव बिंदु के बिना अंत के शून्य अस्पष्ट हो सकते हैं. दशमलव बिंदु से पहले के अग्रणी शून्य सार्थक नहीं होते हैं. इन नियमों का पालन करके, किसी भी संख्या में सार्थक अंकों की संख्या निर्धारित की जा सकती है.
In simple words: सार्थक अंक बताते हैं कि एक संख्या कितनी सटीक है. उन्हें गिनने के कुछ नियम होते हैं, जैसे गैर-शून्य अंक हमेशा गिने जाते हैं और दशमलव के बाद के शून्य भी.

🎯 Exam Tip: सार्थक अंकों के नियमों को अच्छी तरह समझ लें, क्योंकि वे वैज्ञानिक गणनाओं और मापों की रिपोर्टिंग में महत्वपूर्ण होते हैं. अभ्यास के लिए विभिन्न प्रकार की संख्याओं का उपयोग करें.

 

Question 25. मोल किसे कहते हैं? समझाइए।
Answer: मोल किसी पदार्थ की वह मात्रा होती है जिसमें कणों (परमाणु, अणु, आयन, या अन्य कण) की संख्या उतनी ही होती है जितनी 0.012 किलोग्राम (12 ग्राम) कार्बन-12 समस्थानिक में उपस्थित कार्बन परमाणुओं की संख्या होती है. इस संख्या को आवोगाद्रो संख्या (\( 6.022 \times 10^{23} \)) कहते हैं. मोल पदार्थ की मात्रा की S.I. इकाई है. यह परमाणुओं और अणुओं को गणना योग्य इकाई में बदलने का एक तरीका है.
In simple words: मोल एक ऐसा तरीका है जिससे हम बहुत सारे छोटे कणों (जैसे परमाणु या अणु) को एक साथ गिन सकते हैं. एक मोल में हमेशा \( 6.022 \times 10^{23} \) कण होते हैं.

🎯 Exam Tip: मोल की परिभाषा और आवोगाद्रो संख्या को याद रखना रासायनिक गणनाओं के लिए मूलभूत है. मोल अवधारणा स्टोइकियोमेट्री (stoichiometry) के लिए आधार है.

 

Question 26. सीमान्त अभिकर्मक किसे कहते हैं? उदाहरण सहित समझाइए।
Answer: किसी रासायनिक अभिक्रिया में, सीमान्त अभिकर्मक वह अभिकारक होता है जो सबसे पहले पूरी तरह से उपयोग हो जाता है और अभिक्रिया को रोक देता है. यह अभिकर्मक उत्पाद की मात्रा को निर्धारित करता है, क्योंकि इसकी मात्रा सीमित होती है. उदाहरण के लिए, \( 2\text{H}_2(\text{g}) + \text{O}_2(\text{g}) \rightarrow 2\text{H}_2\text{O}(\text{l}) \) अभिक्रिया में, यदि 2 मोल \( \text{H}_2 \) और 2 मोल \( \text{O}_2 \) को मिलाया जाए, तो \( \text{H}_2 \) पूरी तरह से उपयोग हो जाएगी जबकि \( \text{O}_2 \) का 1 मोल बच जाएगा. इस स्थिति में \( \text{H}_2 \) सीमान्त अभिकर्मक होगा क्योंकि यह उत्पादित जल की मात्रा को नियंत्रित कर रहा है. सीमान्त अभिकर्मक को पहचानना महत्वपूर्ण है ताकि अभिक्रिया की दक्षता और उत्पाद की अपेक्षित मात्रा का निर्धारण किया जा सके.
In simple words: रासायनिक अभिक्रिया में, जो चीज पहले खत्म हो जाती है और रिएक्शन को रोक देती है, उसे सीमान्त अभिकर्मक कहते हैं. यह तय करता है कि कितना नया पदार्थ बनेगा.

🎯 Exam Tip: सीमान्त अभिकर्मक की पहचान करने के लिए, प्रत्येक अभिकारक के मोलों की संख्या को स्टोइकियोमेट्रिक अनुपात से भाग देकर देखें कि कौन सा सबसे कम है. जो सबसे कम होता है, वही सीमान्त अभिकर्मक होता है.

 

Question 27. यौगिक के तुल्यांकी भार ज्ञात करने के सूत्र दीजिए।
Answer: विभिन्न प्रकार के यौगिकों के तुल्यांकी भार ज्ञात करने के लिए निम्नलिखित सूत्र उपयोग किए जाते हैं:
1. **तत्त्व का तुल्यांकी भार** \( = \frac{\text{तत्त्व का परमाणु भार}}{\text{संयोजकता}} \)
2. **मूलक का तुल्यांकी भार** \( = \frac{\text{मूलक का सूत्र भार}}{\text{मूलक की संयोजकता}} \)
3. **अम्ल का तुल्यांकी भार** \( = \frac{\text{अणु भार}}{\text{प्रतिस्थापनीय हाइड्रोजन परमाणुओं की संख्या (क्षारकता)}} \)
4. **क्षार का तुल्यांकी भार** \( = \frac{\text{अणु भार}}{\text{प्रतिस्थापनीय OH की संख्या (अम्लता)}} \). तुल्यांकी भार किसी पदार्थ की रासायनिक सक्रियता का एक माप है.
In simple words: किसी भी पदार्थ का तुल्यांकी भार निकालने के लिए, उसके वजन को उसकी सक्रियता (जैसे संयोजकता या कितने \( \text{H}^+ \) या \( \text{OH}^- \) आयन दे सकता है) से भाग देते हैं.

🎯 Exam Tip: तुल्यांकी भार की गणना करते समय, यह सुनिश्चित करें कि आप सही 'संयोजकता', 'क्षारकता', या 'अम्लता' का उपयोग कर रहे हैं जो दिए गए पदार्थ के लिए उपयुक्त है.

 

Question 28. मोलरता को परिभाषित कीजिए।
Answer: मोलरता (Molarity) किसी विलयन के प्रति लीटर आयतन में घुले हुए विलेय के मोलों की संख्या होती है. इसे \( \text{M} \) से दर्शाया जाता है और इसकी इकाई मोल/लीटर (मोल/L) होती है. यह विलयन की सांद्रता को व्यक्त करने का एक महत्वपूर्ण तरीका है. मोलरता तापमान के साथ बदलती है क्योंकि आयतन तापमान पर निर्भर करता है.
In simple words: मोलरता बताती है कि एक लीटर घोल में कितनी मात्रा में कोई चीज घुली हुई है.

🎯 Exam Tip: मोलरता की गणना के लिए, विलेय के मोलों की संख्या को विलयन के कुल आयतन (लीटर में) से भाग दें. तापमान बढ़ने पर मोलरता घट सकती है.

 

Question 29. निम्नलिखित के सूत्र लिखकर उनके अणुभार ज्ञात कीजिए –
(i) कैल्शियम कार्बोनेट
(ii) मैग्नीशियम फॉस्फेट
(iii) फैरिक क्लोराइड।
Answer:
(i) कैल्शियम कार्बोनेट का सूत्र \( \text{CaCO}_3 \) होता है. इसका अणुभार: \( \text{Ca} \) (40) + \( \text{C} \) (12) + \( (3 \times \text{O} (16)) = 40 + 12 + 48 = 100 \) ग्राम/मोल. यह चूना पत्थर में पाया जाने वाला एक खनिज है.
(ii) मैग्नीशियम फॉस्फेट का सूत्र \( \text{Mg}_3(\text{PO}_4)_2 \) होता है. इसका अणुभार: \( (3 \times \text{Mg} (24)) + 3[\text{P} (31) + (4 \times \text{O} (16))] = 72 + 3(31 + 64) = 72 + 3(95) = 72 + 285 = 357 \) ग्राम/मोल. मैग्नीशियम फॉस्फेट हड्डियों और दांतों में पाया जाता है.
(iii) फैरिक क्लोराइड का सूत्र \( \text{FeCl}_3 \) होता है. इसका अणुभार: \( \text{Fe} \) (56) + \( (3 \times \text{Cl} (35.5)) = 56 + 106.5 = 162.5 \) ग्राम/मोल. इसका उपयोग जल उपचार में किया जाता है.
In simple words: कैल्शियम कार्बोनेट का सूत्र \( \text{CaCO}_3 \) और वजन 100 ग्राम है. मैग्नीशियम फॉस्फेट का सूत्र \( \text{Mg}_3(\text{PO}_4)_2 \) और वजन 357 ग्राम है. फैरिक क्लोराइड का सूत्र \( \text{FeCl}_3 \) और वजन 162.5 ग्राम है.

🎯 Exam Tip: यौगिकों के अणुभार की गणना करते समय, हमेशा उनके सही रासायनिक सूत्र का उपयोग करें और प्रत्येक परमाणु के परमाणु भार को ध्यान से जोड़ें, खासकर जब यौगिक में कोष्ठक हों.

 

Question 30. निम्नलिखित में प्रत्येक के कितने मोल हैं?
(i) 100g \( \text{CaCO}_3 \)
(ii) 80g \( \text{O}_2 \)
(iii) 10g \( \text{C}_{12}\text{H}_{22}\text{O}_{11} \)
Answer: मोलों की संख्या ज्ञात करने के लिए, दिए गए द्रव्यमान को पदार्थ के मोलर द्रव्यमान से भाग दिया जाता है.
(i) 100g \( \text{CaCO}_3 \) (कैल्शियम कार्बोनेट): \( \text{CaCO}_3 \) का मोलर द्रव्यमान 100 ग्राम/मोल है. अतः मोल \( = \frac{100 \text{ ग्राम}}{100 \text{ ग्राम/मोल}} = 1 \) मोल. यह रासायनिक प्रतिक्रियाओं में एक मानक मात्रा है.
(ii) 80g \( \text{O}_2 \) (ऑक्सीजन गैस): \( \text{O}_2 \) का मोलर द्रव्यमान \( 2 \times 16 = 32 \) ग्राम/मोल है. अतः मोल \( = \frac{80 \text{ ग्राम}}{32 \text{ ग्राम/मोल}} = 2.5 \) मोल. ऑक्सीजन जीवन के लिए महत्वपूर्ण है.
(iii) 10g \( \text{C}_{12}\text{H}_{22}\text{O}_{11} \) (सुक्रोज): \( \text{C}_{12}\text{H}_{22}\text{O}_{11} \) का मोलर द्रव्यमान \( (12 \times 12) + (22 \times 1) + (11 \times 16) = 144 + 22 + 176 = 342 \) ग्राम/मोल है. अतः मोल \( = \frac{10 \text{ ग्राम}}{342 \text{ ग्राम/मोल}} \approx 0.029 \) मोल. सुक्रोज एक सामान्य चीनी है.
In simple words: मोल निकालने के लिए, दिए गए वजन को पदार्थ के प्रति मोल वजन से भाग दें. 100 ग्राम \( \text{CaCO}_3 \) में 1 मोल, 80 ग्राम \( \text{O}_2 \) में 2.5 मोल और 10 ग्राम \( \text{C}_{12}\text{H}_{22}\text{O}_{11} \) में लगभग 0.029 मोल होते हैं.

🎯 Exam Tip: मोलों की संख्या की गणना में सटीकता के लिए, यौगिकों के मोलर द्रव्यमान को सही ढंग से ज्ञात करना महत्वपूर्ण है. हमेशा इकाईयों का ध्यान रखें (ग्राम/मोल).

 

Question 31. निम्नलिखित के सूत्र लिखकर उनके अणुभार ज्ञात कीजिए –
(i) अमोनियम ऑक्सेलेट
(ii) सोडियम सल्फेट
(iii) एल्यूमिनियम नाइट्रेट।
Answer:
(i) अमोनियम ऑक्सेलेट का सूत्र \( (\text{NH}_4)_2\text{C}_2\text{O}_4 \) होता है. इसका अणुभार: \( 2[\text{N}(14) + 4\text{H}(1)] + 2\text{C}(12) + 4\text{O}(16) = 2[14+4] + 24 + 64 = 2[18] + 88 = 36 + 88 = 124 \) ग्राम/मोल. यह एक कार्बनिक नमक है.
(ii) सोडियम सल्फेट का सूत्र \( \text{Na}_2\text{SO}_4 \) होता है. इसका अणुभार: \( 2\text{Na}(23) + \text{S}(32) + 4\text{O}(16) = 46 + 32 + 64 = 142 \) ग्राम/मोल. इसका उपयोग डिटर्जेंट में किया जाता है.
(iii) एल्यूमिनियम नाइट्रेट का सूत्र \( \text{Al}(\text{NO}_3)_3 \) होता है. इसका अणुभार: \( \text{Al}(27) + 3[\text{N}(14) + 3\text{O}(16)] = 27 + 3[14+48] = 27 + 3[62] = 27 + 186 = 213 \) ग्राम/मोल. यह एक अजैविक यौगिक है.
In simple words: अमोनियम ऑक्सेलेट का सूत्र \( (\text{NH}_4)_2\text{C}_2\text{O}_4 \) (वजन 124 ग्राम), सोडियम सल्फेट का सूत्र \( \text{Na}_2\text{SO}_4 \) (वजन 142 ग्राम), और एल्यूमिनियम नाइट्रेट का सूत्र \( \text{Al}(\text{NO}_3)_3 \) (वजन 213 ग्राम) है.

🎯 Exam Tip: जटिल यौगिकों के अणुभार की गणना करते समय, सुनिश्चित करें कि आप सभी परमाणुओं की संख्याओं को सही ढंग से गुणा कर रहे हैं, विशेषकर जब कोष्ठक का उपयोग किया गया हो.

 

Question 32. ऑक्सीजन गैस के 32 ग्राम और नाइट्रोजन के 14 ग्राम में उपस्थित अणुओं की संख्या कितनी होगी?
Answer: अणुओं की संख्या ज्ञात करने के लिए, पहले मोलों की संख्या और फिर उसे आवोगाद्रो संख्या से गुणा किया जाता है.
(i) ऑक्सीजन गैस (\( \text{O}_2 \)): \( \text{O}_2 \) का अणुभार 32 ग्राम/मोल है. 32 ग्राम \( \text{O}_2 \) में मोल \( = \frac{32}{32} = 1 \) मोल. अतः अणुओं की संख्या \( = 1 \times 6.022 \times 10^{23} = 6.022 \times 10^{23} \) अणु. ऑक्सीजन श्वसन के लिए आवश्यक है.
(ii) नाइट्रोजन गैस (\( \text{N}_2 \)): \( \text{N}_2 \) का अणुभार \( 2 \times 14 = 28 \) ग्राम/मोल है. 14 ग्राम \( \text{N}_2 \) में मोल \( = \frac{14}{28} = 0.5 \) मोल. अतः अणुओं की संख्या \( = 0.5 \times 6.022 \times 10^{23} = 3.011 \times 10^{23} \) अणु. नाइट्रोजन हवा का सबसे बड़ा हिस्सा है.
In simple words: 32 ग्राम ऑक्सीजन में \( 6.022 \times 10^{23} \) अणु होते हैं. 14 ग्राम नाइट्रोजन में \( 3.011 \times 10^{23} \) अणु होते हैं.

🎯 Exam Tip: यह याद रखें कि \( \text{O}_2 \) और \( \text{N}_2 \) दोनों द्विपरमाण्विक गैसें हैं, इसलिए मोलर द्रव्यमान की गणना करते समय दो परमाणुओं के भार को गुणा करना होगा.

 

Question 33. निम्नलिखित के लिए मोलर द्रव्यमान का परिकलन कीजिए –
(i) \( \text{HNO}_3 \)
(ii) \( \text{CO}_2 \)
(iii) \( \text{C}_2\text{H}_6 \)
Answer: मोलर द्रव्यमान की गणना यौगिक में उपस्थित सभी परमाणुओं के परमाणु द्रव्यमानों को जोड़कर की जाती है.
(i) \( \text{HNO}_3 \) (नाइट्रिक अम्ल) का मोलर द्रव्यमान: \( \text{H} \) का परमाणु द्रव्यमान 1, \( \text{N} \) का 14, और \( \text{O} \) का 16 है. अतः, \( 1(\text{H}) + 1(\text{N}) + 3(\text{O}) = 1 + 14 + (3 \times 16) = 1 + 14 + 48 = 63 \) ग्राम/मोल. नाइट्रिक अम्ल एक प्रबल अम्ल है.
(ii) \( \text{CO}_2 \) (कार्बन डाइऑक्साइड) का मोलर द्रव्यमान: \( \text{C} \) का परमाणु द्रव्यमान 12, और \( \text{O} \) का 16 है. अतः, \( 1(\text{C}) + 2(\text{O}) = 12 + (2 \times 16) = 12 + 32 = 44 \) ग्राम/ मोल. यह एक ग्रीनहाउस गैस है.
(iii) \( \text{C}_2\text{H}_6 \) (एथेन) का मोलर द्रव्यमान: \( \text{C} \) का परमाणु द्रव्यमान 12, और \( \text{H} \) का 1 है. अतः, \( 2(\text{C}) + 6(\text{H}) = (2 \times 12) + (6 \times 1) = 24 + 6 = 30 \) ग्राम/मोल. एथेन एक हाइड्रोकार्बन है.
In simple words: \( \text{HNO}_3 \) का वजन 63 ग्राम/मोल, \( \text{CO}_2 \) का वजन 44 ग्राम/मोल और \( \text{C}_2\text{H}_6 \) का वजन 30 ग्राम/मोल है. हर एक का वजन उसके सभी परमाणुओं के वजन को जोड़कर निकाला जाता है.

🎯 Exam Tip: मोलर द्रव्यमान की गणना करते समय, प्रत्येक तत्व के परमाणुओं की सही संख्या और उनके सटीक परमाणु द्रव्यमान का उपयोग करना महत्वपूर्ण है. यह गणना रासायनिक प्रतिक्रियाओं में द्रव्यमान संबंधों को समझने में मदद करती है.

 

Question 34. निम्न में अणुओं की अधिकतम संख्या किसमें उपस्थित –
(i) 36 g जल
(ii) 28 g कार्बन मोनो ऑक्साइड।
Answer: अणुओं की संख्या ज्ञात करने के लिए, हम प्रत्येक पदार्थ के मोलों की संख्या ज्ञात करते हैं और फिर उसे आवोगाद्रो संख्या से गुणा करते हैं. अधिक मोल का मतलब अधिक अणु होता है.
(i) 36 g जल (\( \text{H}_2\text{O} \)): जल का अणुभार 18 ग्राम/मोल है. मोल \( = \frac{36}{18} = 2 \) मोल. इसलिए, इसमें \( 2 \times 6.022 \times 10^{23} = 1.2044 \times 10^{24} \) अणु हैं.
(ii) 28 g कार्बन मोनो ऑक्साइड (\( \text{CO} \)): \( \text{CO} \) का अणुभार \( 12 + 16 = 28 \) ग्राम/मोल है. मोल \( = \frac{28}{28} = 1 \) मोल. इसलिए, इसमें \( 1 \times 6.022 \times 10^{23} = 6.022 \times 10^{23} \) अणु हैं.
चूंकि 36 ग्राम जल में 2 मोल अणु हैं जबकि 28 ग्राम कार्बन मोनो ऑक्साइड में 1 मोल अणु है, इसलिए 36 ग्राम जल में अणुओं की संख्या अधिकतम होगी. जल पृथ्वी पर जीवन के लिए आवश्यक है.
In simple words: 36 ग्राम जल में 2 मोल अणु होते हैं, जबकि 28 ग्राम कार्बन मोनो ऑक्साइड में 1 मोल अणु होता है. इसलिए, जल में अणुओं की संख्या सबसे ज्यादा है.

🎯 Exam Tip: अणुओं की संख्या की तुलना करते समय, हमेशा पहले प्रत्येक पदार्थ के मोलों की संख्या की गणना करें, क्योंकि मोल सीधे अणुओं की संख्या से संबंधित होते हैं.

 

Question 35. निम्न में अणुओं की न्यूनतम संख्या किसमें उपस्थित है –
(i) 46g एथिल ऐल्कोहॉल
(ii) 54g नाइट्रोजन पेन्टाक्साइड।
Answer: अणुओं की न्यूनतम संख्या ज्ञात करने के लिए, हमें प्रत्येक पदार्थ के मोलों की संख्या की गणना करनी होगी. जिस पदार्थ के मोल सबसे कम होंगे, उसमें अणुओं की संख्या भी न्यूनतम होगी.
(i) 46g एथिल ऐल्कोहॉल (\( \text{C}_2\text{H}_5\text{OH} \)): \( \text{C}_2\text{H}_5\text{OH} \) का अणुभार \( (2 \times 12) + (6 \times 1) + (1 \times 16) = 24 + 6 + 16 = 46 \) ग्राम/मोल है. मोल \( = \frac{46}{46} = 1 \) मोल. यह एक सामान्य कार्बनिक विलायक है.
(ii) 54g नाइट्रोजन पेन्टाक्साइड (\( \text{N}_2\text{O}_5 \)): \( \text{N}_2\text{O}_5 \) का अणुभार \( (2 \times 14) + (5 \times 16) = 28 + 80 = 108 \) ग्राम/मोल है. मोल \( = \frac{54}{108} = 0.5 \) मोल. यह एक शक्तिशाली ऑक्सीकारक है.
चूंकि 54 ग्राम \( \text{N}_2\text{O}_5 \) में 0.5 मोल हैं जबकि 46 ग्राम \( \text{C}_2\text{H}_5\text{OH} \) में 1 मोल है, इसलिए 54 ग्राम \( \text{N}_2\text{O}_5 \) में अणुओं की संख्या न्यूनतम होगी. कम मोल का मतलब कम अणु होता है.
In simple words: 46 ग्राम एथिल ऐल्कोहॉल में 1 मोल अणु हैं, जबकि 54 ग्राम नाइट्रोजन पेन्टाक्साइड में 0.5 मोल अणु हैं. इसलिए, नाइट्रोजन पेन्टाक्साइड में सबसे कम अणु हैं.

🎯 Exam Tip: हमेशा दिए गए द्रव्यमान को मोलर द्रव्यमान से भाग देकर मोलों की संख्या ज्ञात करें. मोलों की संख्या की तुलना करके ही अणुओं की संख्या की सही तुलना की जा सकती है.

RBSE Class 11 Chemistry Chapter 1 निबन्धात्मक प्रश्न

 

Question 36. सोडियम सल्फेट में विभिन्न तत्त्वों के द्रव्यमान प्रतिशत का परिकलन कीजिए।
Answer: सोडियम सल्फेट (\( \text{Na}_2\text{SO}_4 \)) का मोलर द्रव्यमान: \( 2(\text{Na}) + 1(\text{S}) + 4(\text{O}) = 2(23.0) + 32.0 + 4(16.0) = 46.0 + 32.0 + 64.0 = 142.0 \) ग्राम/मोल. द्रव्यमान प्रतिशत ज्ञात करने के लिए, प्रत्येक तत्व के कुल द्रव्यमान को यौगिक के कुल मोलर द्रव्यमान से भाग देकर 100 से गुणा किया जाता है.
\( \text{सोडियम (Na) का द्रव्यमान प्रतिशत} = \frac{46}{142} \times 100 \approx 32.39\% \)
\( \text{सल्फर (S) का द्रव्यमान प्रतिशत} = \frac{32}{142} \times 100 \approx 22.54\% \)
\( \text{ऑक्सीजन (O) का द्रव्यमान प्रतिशत} = \frac{64}{142} \times 100 \approx 45.07\% \)
इन सभी प्रतिशतताओं का योग लगभग 100% होता है, जो यह दर्शाता है कि गणना सही है.
In simple words: सोडियम सल्फेट में, सोडियम लगभग 32.39% होता है, सल्फर लगभग 22.54% होता है, और ऑक्सीजन लगभग 45.07% होता है. यह प्रतिशत बताता है कि कुल वजन में हर तत्व का कितना हिस्सा है.

🎯 Exam Tip: द्रव्यमान प्रतिशत की गणना करते समय, सुनिश्चित करें कि आप यौगिक के कुल मोलर द्रव्यमान को सही ढंग से गणना कर रहे हैं, और प्रत्येक तत्व के कुल परमाणु द्रव्यमान का उपयोग कर रहे हैं.

 

Question 37. सीमान्त अभिकर्मक किसे कहते हैं? 3.0 ग्राम \( \text{H}_2 \) 29.0 ग्राम \( \text{O}_2 \) से क्रिया में सीमांत अभिकर्मक की पहचान करो।
Answer: सीमान्त अभिकर्मक वह अभिकारक होता है जो रासायनिक अभिक्रिया में सबसे पहले समाप्त हो जाता है और अभिक्रिया की प्रगति को नियंत्रित करता है. इसके लिए, हम \( \text{H}_2 \) और \( \text{O}_2 \) के बीच जल बनाने वाली अभिक्रिया को देखते हैं: \( 2\text{H}_2(\text{g}) + \text{O}_2(\text{g}) \rightarrow 2\text{H}_2\text{O}(\text{g}) \). यहां, 2 मोल \( \text{H}_2 \) (या \( 2 \times 2 = 4 \) ग्राम) 1 मोल \( \text{O}_2 \) (या 32 ग्राम) से क्रिया करके 2 मोल \( \text{H}_2\text{O} \) (या \( 2 \times 18 = 36 \) ग्राम) बनाता है. दी गई मात्राएँ: 3.0 ग्राम \( \text{H}_2 \) और 29.0 ग्राम \( \text{O}_2 \). \( \text{H}_2 \) के मोल \( = \frac{3.0 \text{ ग्राम}}{2 \text{ ग्राम/मोल}} = 1.5 \) मोल. \( \text{O}_2 \) के मोल \( = \frac{29.0 \text{ ग्राम}}{32 \text{ ग्राम/मोल}} \approx 0.906 \) मोल. अभिक्रिया के स्टोइकियोमेट्री अनुपात के अनुसार, \( \text{H}_2 \) के 1.5 मोल के लिए \( \text{O}_2 \) के \( \frac{1.5}{2} = 0.75 \) मोल की आवश्यकता होगी. चूंकि हमारे पास 0.906 मोल \( \text{O}_2 \) है, जो आवश्यक 0.75 मोल से अधिक है, इसलिए \( \text{H}_2 \) सीमान्त अभिकर्मक है. \( \text{H}_2 \) पहले खत्म हो जाएगी. अतः इस अभिक्रिया में \( \text{H}_2 \) सीमान्त अभिकर्मक है. सीमान्त अभिकर्मक की पहचान करना उत्पाद की संभावित मात्रा का अनुमान लगाने के लिए महत्वपूर्ण है.
In simple words: 3.0 ग्राम हाइड्रोजन (1.5 मोल) और 29.0 ग्राम ऑक्सीजन (0.906 मोल) के साथ जल बनाने की अभिक्रिया में, हाइड्रोजन पहले खत्म हो जाएगी. इसलिए, हाइड्रोजन सीमान्त अभिकर्मक है.

🎯 Exam Tip: सीमान्त अभिकर्मक की पहचान करने के लिए, प्रत्येक अभिकारक के मोलों की संख्या को उसके स्टोइकियोमेट्रिक गुणांक से विभाजित करें; जिसका अनुपात सबसे कम हो, वही सीमान्त अभिकर्मक होता है.

 

Question 38. कार्बन और ऑक्सीजन से दो यौगिक बनते हैं। इनमें से एक में कार्बन की मात्रा 42.9% तथा दूसरे में 27.3% है तो गुणित अनुपात के नियम की पुष्टि करिए।
Answer: गुणित अनुपात का नियम कहता है कि जब दो तत्व मिलकर एक से अधिक यौगिक बनाते हैं, तो एक तत्व के निश्चित द्रव्यमान से संयुक्त होने वाले दूसरे तत्व के द्रव्यमान सरल पूर्णांक अनुपात में होते हैं. यहां दो कार्बन ऑक्साइड दिए गए हैं:
**यौगिक I:** कार्बन 42.9%, ऑक्सीजन \( (100 - 42.9) = 57.1\% \)
**यौगिक II:** कार्बन 27.3%, ऑक्सीजन \( (100 - 27.3) = 72.7\% \)

**निश्चित कार्बन द्रव्यमान के सापेक्ष ऑक्सीजन द्रव्यमान की गणना:**
**यौगिक I के लिए:** 42.9 ग्राम कार्बन से संयुक्त ऑक्सीजन \( = 57.1 \) ग्राम.
1 ग्राम कार्बन से संयुक्त ऑक्सीजन \( = \frac{57.1}{42.9} \approx 1.33 \) ग्राम.
**यौगिक II के लिए:** 27.3 ग्राम कार्बन से संयुक्त ऑक्सीजन \( = 72.7 \) ग्राम.
1 ग्राम कार्बन से संयुक्त ऑक्सीजन \( = \frac{72.7}{27.3} \approx 2.66 \) ग्राम.

**ऑक्सीजन द्रव्यमानों का अनुपात:**
\( \frac{\text{यौगिक II में ऑक्सीजन द्रव्यमान}}{\text{यौगिक I में ऑक्सीजन द्रव्यमान}} = \frac{2.66}{1.33} \approx 2 \).
यह अनुपात 2:1 के एक सरल पूर्णांक अनुपात में है. अतः, यह गुणित अनुपात के नियम की पुष्टि करता है. यह नियम रासायनिक संयोजन के मूलभूत सिद्धांतों में से एक है.
In simple words: जब कार्बन और ऑक्सीजन मिलकर दो अलग-अलग चीजें बनाते हैं, तो एक निश्चित मात्रा में कार्बन से जुड़ने वाली ऑक्सीजन की मात्राओं का अनुपात 2:1 होता है. यह दिखाता है कि गुणित अनुपात का नियम सही है.

🎯 Exam Tip: गुणित अनुपात के नियम को सत्यापित करने के लिए, पहले एक तत्व के निश्चित द्रव्यमान से जुड़े दूसरे तत्व के द्रव्यमानों की गणना करें, फिर उन द्रव्यमानों का सरल पूर्णांक अनुपात ज्ञात करें.

 

Question 39. निम्नलिखित पर संक्षिप्त टिप्पणियाँ लिखिए
(i) डाल्टन का परमाणु सिद्धान्त
(ii) गैलुसेक का गैसीय आयतन सम्बन्धी नियम
(iii) आवोगाद्रो परिकल्पना के अनुप्रयोग।
Answer:
(i) **डाल्टन का परमाणु सिद्धान्त:** जॉन डाल्टन ने 1803 में यह सिद्धान्त दिया था, जिसके मुख्य बिन्दु इस प्रकार हैं:
1. द्रव्य छोटे-छोटे अविभाज्य कणों से मिलकर बना होता है जिन्हें परमाणु कहते हैं.
2. किसी तत्व के सभी परमाणु समान होते हैं और उनके सभी गुण (आकार, भार, रंग) भी समान होते हैं.
3. भिन्न-भिन्न तत्वों के परमाणु भिन्न-भिन्न होते हैं और उनके गुण भी भिन्न होते हैं.
4. परमाणु पदार्थ की सबसे छोटी इकाई है जो रासायनिक अभिक्रिया में भाग लेती है.
5. दो या अधिक भिन्न-भिन्न तत्व सरल अनुपात में संयोग करके यौगिक परमाणु (अणु) बनाते हैं.
6. किसी भी भौतिक या रासायनिक अभिक्रिया में परमाणु न तो उत्पन्न होते हैं और न ही नष्ट होते हैं. यह सिद्धान्त रासायनिक संयोजन के नियमों की व्याख्या करता है.
हालांकि, बाद में हुए आविष्कारों (जैसे उप-परमाणु कण, समस्थानिक) ने डाल्टन के सिद्धान्त में कुछ संशोधन किए:
- परमाणु अविभाज्य नहीं होता, यह प्रोटॉन, इलेक्ट्रॉन और न्यूट्रॉन में विभाजित किया जा सकता है.
- समस्थानिकों के कारण एक ही तत्व के सभी परमाणु समान नहीं होते हैं क्योंकि उनके द्रव्यमान संख्याएँ भिन्न हो सकती हैं.
डाल्टन का सिद्धान्त रसायन विज्ञान की नींव रखने में महत्वपूर्ण था, जिसने परमाणु संरचना की आधुनिक समझ का मार्ग प्रशस्त किया.
(ii) **गैलुसेक का गैसीय आयतन सम्बन्धी नियम:** 1808 में गै-लूसैक ने यह नियम दिया था. इसके अनुसार, समान ताप और दाब पर जब गैसें आपस में अभिक्रिया करती हैं, तो उनके आयतन सरल पूर्णांक अनुपात में होते हैं. यदि उत्पाद भी गैस हो, तो उसका आयतन भी क्रियाकारी गैसों के आयतन के साथ सरल पूर्णांक अनुपात में होता है. उदाहरण: हाइड्रोजन और ऑक्सीजन की क्रिया से जल का बनना: \( 2\text{H}_2(\text{g}) + \text{O}_2(\text{g}) \rightarrow 2\text{H}_2\text{O}(\text{g}) \). यहां 2 आयतन \( \text{H}_2 \) (100 ml) 1 आयतन \( \text{O}_2 \) (50 ml) से क्रिया करके 2 आयतन \( \text{H}_2\text{O} \) (100 ml) बनाते हैं. आयतन अनुपात \( 100 : 50 : 100 \) या \( 2 : 1 : 2 \) है, जो एक सरल पूर्णांक अनुपात है. यह नियम गैसों के बीच आयतन संबंधों को समझने के लिए महत्वपूर्ण है.
(iii) **आवोगाद्रो परिकल्पना के अनुप्रयोग:** आवोगाद्रो की परिकल्पना (1811) के रसायन विज्ञान में कई महत्वपूर्ण अनुप्रयोग हैं:
1. **परमाणु तथा अणु की स्पष्ट परिभाषा:** इसने डाल्टन के परमाणु सिद्धान्त को संशोधित करके परमाणु और अणु के बीच अंतर को स्पष्ट किया.
2. **परमाणुकता का निर्धारण:** यह किसी तात्विक गैस के एक अणु में उपस्थित परमाणुओं की संख्या (परमाणुकता) को ज्ञात करने में मदद करता है. जैसे हाइड्रोजन (\( \text{H}_2 \)), ऑक्सीजन (\( \text{O}_2 \)), और क्लोरीन (\( \text{Cl}_2 \)) की परमाणुकता दो है. यह समझने के लिए कि जल वाष्प कैसे बनती है, हम हाइड्रोजन और ऑक्सीजन की अभिक्रिया को देखते हैं:
नियमानुसार (यदि n=1 हो तो)

2 अणु1 अणु2 अणु
या\( \text{H}_2 \)\( \text{O}_2 \)\( \text{H}_2\text{O} \)
या1 अणु1/2 अणु1 अणु
इससे स्पष्ट होता है कि जल वाष्प के 1 अणु में \( \frac{1}{2} \) अणु ऑक्सीजन उपस्थित है. डाल्टन के परमाणु सिद्धान्त के विपरीत, जहाँ परमाणु अविभाज्य माने जाते थे, आवोगाद्रो की परिकल्पना यह मानने की अनुमति देती है कि ऑक्सीजन का अणु दो परमाणुओं से बना हो सकता है. इस प्रकार, ऑक्सीजन की परमाणुकता दो है. यह हमें अणुओं के रासायनिक सूत्र लिखने में मदद करता है, जैसे जल वाष्प का सूत्र \( \text{H}_2\text{O} \) है.
3. **मोलर आयतन की अवधारणा:** आवोगाद्रो नियम का एक महत्वपूर्ण परिणाम यह है कि मानक ताप और दाब (STP) पर, किसी भी आदर्श गैस के एक मोल का आयतन 22.4 लीटर होता है.
4. **गैलुसेक के नियम की व्याख्या:** इसने गैलुसेक के गैसीय आयतन संबंधी नियम की सही ढंग से व्याख्या की. यह परिकल्पना रासायनिक समीकरणों को संतुलित करने और गैसीय प्रतिक्रियाओं की स्टोइकियोमेट्री को समझने के लिए महत्वपूर्ण है.
In simple words: डाल्टन का परमाणु सिद्धान्त कहता है कि पदार्थ परमाणुओं से बने हैं, जो अविभाज्य हैं, लेकिन इसमें बाद में कुछ बदलाव किए गए. गैलुसेक का नियम बताता है कि गैसें सरल आयतन अनुपात में क्रिया करती हैं. आवोगाद्रो का नियम कहता है कि समान ताप और दाब पर समान आयतन की गैसों में समान अणु होते हैं, जो परमाणु और अणु की परिभाषा और गैसों की परमाणुकता जानने में मदद करता है.

🎯 Exam Tip: डाल्टन का परमाणु सिद्धान्त, गैलुसेक का नियम और आवोगाद्रो की परिकल्पना रसायन विज्ञान के मूलभूत नियम हैं. इनकी परिभाषाओं, उदाहरणों और अनुप्रयोगों को अच्छी तरह से समझें.

 

Question 40. रासायनिक संयोजन के नियम के अन्तर्गत आने वाले नियमों को संक्षिप्त में लिखिए।
Answer: रसायनज्ञों ने रासायनिक परिवर्तनों के मात्रात्मक अध्ययन के आधार पर निम्नलिखित निश्चित सामान्य एवं मूलभूत नियम प्रतिपादित किए हैं:
(1) **द्रव्यमान संरक्षण का नियम (Law of Conservation of Mass):** यह नियम एंटोनी लेवोसिए द्वारा 1789 में प्रतिपादित किया गया था. इसके अनुसार, रासायनिक अभिक्रिया में द्रव्यमान को न तो उत्पन्न किया जा सकता है और न ही नष्ट किया जा सकता है. अर्थात्, अभिक्रिया से पहले अभिकारकों का कुल द्रव्यमान अभिक्रिया के बाद उत्पादों के कुल द्रव्यमान के बराबर होता है. इसे द्रव्य की अविनाशिता का नियम भी कहते हैं. यह नियम ब्रह्मांड में द्रव्य की कुल मात्रा के स्थिर रहने के सिद्धांत को दर्शाता है.
उदाहरण: कार्बन का दहन: \( \text{C} + \text{O}_2 \rightarrow \text{CO}_2 \). यहां 12 ग्राम कार्बन 32 ग्राम ऑक्सीजन से क्रिया करके 44 ग्राम कार्बन डाइऑक्साइड बनाता है. (12 + 32 = 44). इस नियम का प्रायोगिक सत्यापन लेण्डोल्ट के प्रयोग से किया गया, जिसमें सिल्वर नाइट्रेट (\( \text{AgNO}_3 \)) और सोडियम क्लोराइड (\( \text{NaCl} \)) के विलयनों को एक ट्यूब में मिलाकर अभिक्रिया कराई गई. अभिक्रिया के बाद भी कुल द्रव्यमान अपरिवर्तित पाया गया, जिससे यह सिद्ध हुआ कि द्रव्यमान संरक्षित रहता है.
अभिक्रिया: \( \text{AgNO}_{3}(\text{aq}) + \text{NaCl}(\text{aq}) \rightarrow \text{NaNO}_{3}(\text{aq}) + \text{AgCl}(\text{s}) \). यह सुनिश्चित करता है कि रासायनिक प्रतिक्रियाओं में कोई द्रव्यमान खोया या प्राप्त नहीं होता है.
(2) **स्थिर अनुपात (संघटन) का नियम (Law of Constant Proportion):** यह नियम 1799 में जोसेफ प्राऊट द्वारा दिया गया था. इस नियम के अनुसार, किसी शुद्ध रासायनिक यौगिक में तत्व हमेशा एक निश्चित द्रव्यमान अनुपात में मौजूद होते हैं, चाहे वह यौगिक किसी भी स्रोत या विधि से प्राप्त किया गया हो. इसे निश्चित संघटन का नियम भी कहते हैं.
उदाहरण:
(i) शुद्ध \( \text{CO}_2 \) को किसी भी विधि से प्राप्त किया जाए (जैसे चूना पत्थर को गर्म करके या कोक को वायु में जलाकर), कार्बन और ऑक्सीजन का द्रव्यमान अनुपात हमेशा \( 12 : 32 \) या \( 3 : 8 \) ही रहेगा. (a) चूना पत्थर को गर्म करके: \( \text{CaCO}_3 \rightarrow \text{CaO} + \text{CO}_2 \)
(b) कोक को वायु में जलाकर: \( \text{C} + \text{O}_2 \rightarrow \text{CO}_2 \)
(c) कैल्शियम कार्बोनेट पर तनु \( \text{HCl} \) की क्रिया से: \( \text{CaCO}_3 + 2\text{HCl} \rightarrow \text{CaCl}_2 + \text{H}_2\text{O} + \text{CO}_2 \)
(ii) शुद्ध जल (\( \text{H}_2\text{O} \)) को किसी भी स्रोत (नदी, कुआँ) से प्राप्त किया जाए या रासायनिक विधि से संश्लेषित किया जाए, हाइड्रोजन और ऑक्सीजन का द्रव्यमान अनुपात हमेशा \( 1 : 8 \) ही रहेगा. प्राऊट के प्रयोग ने क्यूप्रिंक कार्बोनेट (\( \text{CuCO}_3 \)) के प्राकृतिक और संश्लेषित नमूनों में कॉपर, ऑक्सीजन और कार्बन के प्रतिशत का अध्ययन किया, और पाया कि दोनों में इन तत्वों का संघटन समान था.

नमूना\( \text{Cu} \) का प्रतिशतऑक्सीजन का प्रतिशतकार्बन का प्रतिशत
प्राकृतिक \( \text{CuCO}_3 \)51.359.7438.91
संश्लेषित \( \text{CuCO}_3 \)51.359.7438.91
यह नियम शुद्ध यौगिकों के लिए सत्य है. समस्थानिकों की खोज के बाद इसमें संशोधन किया गया, कि शुद्ध यौगिक में तत्वों के भारों का अनुपात स्थिर रहता है, जिससे उनमें तत्वों की संख्या भी स्थिर होती है. उदाहरण के लिए, अमोनिया के अणु में एक नाइट्रोजन और तीन हाइड्रोजन होते हैं, और जल के अणु में दो हाइड्रोजन और एक ऑक्सीजन होते हैं.
In simple words: द्रव्यमान संरक्षण का नियम कहता है कि रासायनिक क्रियाओं में द्रव्यमान न तो बनता है न ही नष्ट होता है. स्थिर अनुपात का नियम कहता है कि किसी भी शुद्ध चीज में तत्व हमेशा एक निश्चित अनुपात में होते हैं, चाहे वह कहीं से भी आई हो.

🎯 Exam Tip: रासायनिक संयोजन के नियम मूलभूत हैं. इन नियमों को परिभाषाओं, उदाहरणों और उनके प्रायोगिक सत्यापन के साथ याद रखें.

 

RBSE Class 11 Chemistry Chapter 1 अतिलघूत्तरात्मक प्रश्न

 

प्रश्न 41. एक कार्बनिक यौगिक में 40% कार्बन, 6.66% हाइड्रोजन तथा शेष ऑक्सीजन है, इसका वाष्प घनत्व 30 है। यौगिक के मूलानुपाती सूत्र तथा आणविक सूत्र को ज्ञात कीजिए।
Answer:
पहले हम यौगिक में ऑक्सीजन का प्रतिशत ज्ञात करते हैं:
ऑक्सीजन का प्रतिशत = \( 100\% - (40\% + 6.66\%) = 100\% - 46.66\% = 53.34\% \)
अब, मूलानुपाती सूत्र ज्ञात करने के लिए निम्नलिखित सारणी बनाते हैं:

तत्त्वप्रतिशत संघटनपरमाणु भारसापेक्षिक मोल संख्यामोलों का सरल अनुपातपूर्ण संख्या अनुपात
कार्बन (C)4012\( \frac {40}{12} = 3.33 \)\( \frac {3.33}{3.33} = 1 \)1
हाइड्रोजन (H)6.661\( \frac {6.66}{1} = 6.66 \)\( \frac {6.66}{3.33} = 2 \)2
ऑक्सीजन (O)53.3416\( \frac {53.34}{16} = 3.33 \)\( \frac {3.33}{3.33} = 1 \)1

यौगिक में तत्त्वों का सरलतम अनुपात = 1:2:1
अतः यौगिक का मूलानुपाती सूत्र = \( \text{CH}_2\text{O} \). मूलानुपाती सूत्र किसी यौगिक में परमाणुओं के सबसे सरल अनुपात को दर्शाता है।
मूलानुपाती सूत्र द्रव्यमान = \( 12 (\text{C}) + 2 \times 1 (\text{H}) + 16 (\text{O}) = 12 + 2 + 16 = 30 \) ग्राम
यौगिक का वाष्प घनत्व = 30, इसलिए अणुभार = \( 2 \times \text{वाष्प घनत्व} = 2 \times 30 = 60 \)
अणुसूत्र ज्ञात करने के लिए 'n' का मान निकालते हैं:
\( n = \frac{\text{अणुभार}}{\text{मूलानुपाती सूत्र द्रव्यमान}} = \frac{60}{30} = 2 \)
अतः यौगिक का आण्विक सूत्र = \( (\text{CH}_2\text{O})_2 = \text{C}_2\text{H}_4\text{O}_2 \).
In simple words: हमने पहले ऑक्सीजन का प्रतिशत निकाला। फिर, सभी तत्त्वों के प्रतिशत, परमाणु भार और सापेक्षिक मोलों का उपयोग करके मूलानुपाती सूत्र (\( \text{CH}_2\text{O} \)) ज्ञात किया। अणुभार को वाष्प घनत्व से गुणा करके, हमने आणविक सूत्र (\( \text{C}_2\text{H}_4\text{O}_2 \)) प्राप्त किया।

🎯 Exam Tip: मूलानुपाती सूत्र और अणुसूत्र ज्ञात करते समय गणनाओं को सावधानी से करें, खासकर जब वाष्प घनत्व से अणुभार निकालना हो। सरलतम पूर्ण संख्या अनुपात का ध्यान रखें।

 

प्रश्न 42. एक कार्बनिक यौगिक में C, H, N को भारात्मक अनुपात 9 : 1 : 3.5 है तथा यौगिक का अणुभार 108 है। यौगिक का मूलानुपाती सूत्र और अणुसूत्र क्या है?
Answer:
C, H तथा N के भारात्मक अनुपात का योग = \( 9 + 1 + 3.5 = 13.5 \)
प्रत्येक तत्त्व का प्रतिशत संघटन ज्ञात करते हैं:
कार्बन (C) की % मात्रा = \( \frac {9}{13.5} \times 100 = 66.67\% \)
हाइड्रोजन (H) की % मात्रा = \( \frac {1}{13.5} \times 100 = 7.41\% \)
नाइट्रोजन (N) की % मात्रा = \( \frac {3.5}{13.5} \times 100 = 25.92\% \)
अब, मूलानुपाती सूत्र ज्ञात करने के लिए निम्नलिखित सारणी बनाते हैं:

तत्त्वप्रतिशत संघटनपरमाणु भारसापेक्षिक मोल संख्यामोलों का सरल अनुपातपूर्ण संख्या अनुपात
कार्बन (C)66.6712\( \frac {66.67}{12} = 5.56 \)\( \frac {5.56}{1.85} \approx 3 \)3
हाइड्रोजन (H)7.411\( \frac {7.41}{1} = 7.41 \)\( \frac {7.41}{1.85} \approx 4 \)4
नाइट्रोजन (N)25.9214\( \frac {25.92}{14} = 1.85 \)\( \frac {1.85}{1.85} = 1 \)1

यौगिक में तत्त्वों का सरलतम अनुपात = 3:4:1
अतः यौगिक का मूलानुपाती सूत्र = \( \text{C}_3\text{H}_4\text{N} \).
मूलानुपाती सूत्र द्रव्यमान = \( (3 \times 12) + (4 \times 1) + 14 = 36 + 4 + 14 = 54 \)
यौगिक का अणुभार = 108
अणुसूत्र ज्ञात करने के लिए 'n' का मान निकालते हैं:
\( n = \frac{\text{अणुभार}}{\text{मूलानुपाती सूत्र द्रव्यमान}} = \frac{108}{54} = 2 \)
अतः यौगिक का आण्विक सूत्र = \( (\text{C}_3\text{H}_4\text{N})_2 = \text{C}_6\text{H}_8\text{N}_2 \). इस यौगिक का अणुसूत्र यह दर्शाता है कि इसमें कार्बन, हाइड्रोजन और नाइट्रोजन के परमाणु किस निश्चित संख्या में मौजूद हैं।
In simple words: हमने दिए गए भार अनुपात को प्रतिशत में बदला। फिर, इन प्रतिशत मानों से मूलानुपाती सूत्र (\( \text{C}_3\text{H}_4\text{N} \)) प्राप्त किया। अंत में, अणुभार का उपयोग करके हमने आणविक सूत्र (\( \text{C}_6\text{H}_8\text{N}_2 \)) निकाला।

🎯 Exam Tip: भारात्मक अनुपात से प्रतिशत संघटन निकालते समय, सभी अनुपातों का योग करके उसे कुल मान के रूप में उपयोग करना याद रखें।

 

प्रश्न 43. रासायनिक विश्लेषण में ज्ञात हुआ कि किसी यौगिक में 10 ग्राम आयरन क्लोराइड में 3.438 ग्राम आयरन और 6.560 ग्राम क्लोरीन है। आयरन क्लोराइड का मूलानुपाती सूत्र ज्ञात कीजिये। (Fe = 55.8, Cl = 35.5)
Answer:
आयरन (Fe) का भार % = \( \frac {3.438}{10} \times 100 = 34.38\% \)
क्लोरीन (Cl) का भार % = \( \frac {6.560}{10} \times 100 = 65.60\% \)
आयरन (Fe) के मोलर अनुपात = \( \frac {34.38}{55.8} = 0.616 \)
क्लोरीन (Cl) के मोलर अनुपात = \( \frac {65.60}{35.5} = 1.847 \)
अब, Fe व Cl का सरलतम मोलर अनुपात निकालते हैं:
\( \frac {0.616}{0.616} : \frac {1.847}{0.616} = 1 : 2.99 \approx 1 : 3 \)
अतः आयरन क्लोराइड का मूलानुपाती सूत्र = \( \text{FeCl}_3 \). यह सूत्र दर्शाता है कि आयरन के एक परमाणु के साथ क्लोरीन के तीन परमाणु जुड़े हुए हैं।
In simple words: हमने पहले यौगिक में आयरन और क्लोरीन का प्रतिशत निकाला। फिर, हमने दोनों के मोलर अनुपात ज्ञात किए और उन्हें सरलतम अनुपात में बदल दिया। इससे हमें आयरन क्लोराइड का मूलानुपाती सूत्र \( \text{FeCl}_3 \) मिला।

🎯 Exam Tip: मूलानुपाती सूत्र की गणना करते समय, यह सुनिश्चित करें कि आप सबसे छोटी मोल संख्या से सभी मोलों को विभाजित कर रहे हैं ताकि सरलतम पूर्ण संख्या अनुपात प्राप्त हो सके।

 

प्रश्न 44. परमाणुओं की संख्या ज्ञात करो। समान ऑक्सीजन परमाणुओं की संख्या से युक्त CO का द्रव्यमान ज्ञात।
Answer:
मान लीजिए हमारे पास 2 मोल \( \text{CO}_2 \) है।
\( \text{CO}_2 \) के एक अणु में ऑक्सीजन के दो परमाणु होते हैं।
इसलिए, 2 मोल \( \text{CO}_2 \) में ऑक्सीजन परमाणुओं की कुल संख्या = \( 2 \times 6.022 \times 10^{23} \times 2 = 2.4088 \times 10^{24} \) परमाणु। यह संख्या आवोगाद्रो संख्या का चार गुना है।
अब, हमें उस \( \text{CO} \) का द्रव्यमान ज्ञात करना है जिसमें ऑक्सीजन परमाणुओं की संख्या \( 2.4088 \times 10^{24} \) हो।
\( \text{CO} \) के एक अणु में केवल एक ऑक्सीजन परमाणु होता है।
अतः, समान संख्या में ऑक्सीजन परमाणुओं के लिए, \( \text{CO} \) के मोल = \( \text{CO}_2 \) के मोल \( \times \) 2 (क्योंकि \( \text{CO}_2 \) में प्रति मोल \( \text{CO} \) की तुलना में दोगुने ऑक्सीजन परमाणु होते हैं)
\( \text{CO} \) के मोल = \( 2 \times 2 = 4 \) मोल
\( \text{CO} \) का अणुभार = \( 12 (\text{C}) + 16 (\text{O}) = 28 \)
\( \text{CO} \) का द्रव्यमान = मोल \( \times \) अणुभार = \( 4 \times 28 = 112 \) ग्राम।
In simple words: हमने \( \text{CO}_2 \) में कुल ऑक्सीजन परमाणु गिने। फिर, चूंकि \( \text{CO} \) के हर अणु में एक ऑक्सीजन परमाणु होता है, हमने उतनी ही ऑक्सीजन के लिए \( \text{CO} \) के मोल निकाले। अंत में, मोलों को अणुभार से गुणा करके \( \text{CO} \) का कुल द्रव्यमान निकाला।

🎯 Exam Tip: ऐसे प्रश्नों में, पहले अणुओं में परमाणुओं की संख्या का अनुपात समझें, फिर मोलों की गणना करें और अंत में द्रव्यमान निकालें।

 

प्रश्न 45. परमाणु भार, अणु भार एवं तुल्यांकी भार को परिभाषित करो। 500 मिलि. विलयन जिसमें, 20.7 ग्राम पोटैशियम कार्बोनेट घुला हुआ है, की मोलरता ज्ञात करो। (K2CO3 का अणु भार = 138)
Answer:
परमाणु भार: किसी तत्त्व का परमाणु भार वह संख्या है जो यह दर्शाती है कि उस तत्त्व का एक परमाणु, कार्बन-12 परमाणु के 12वें भाग से कितने गुना भारी है। यह एक संदर्भ मानक के रूप में उपयोग किया जाता है।
अणु भार: किसी पदार्थ का अणु भार वह संख्या है जो यह दर्शाती है कि उस पदार्थ का एक अणु, कार्बन-12 परमाणु के 12वें भाग से कितने गुना भारी है। यह सभी परमाणुओं के परमाणु भारों का योग होता है।
तुल्यांकी भार: किसी पदार्थ का तुल्यांकी भार वह संख्या है जो यह दर्शाती है कि भार की दृष्टि से उसके कितने भाग, हाइड्रोजन के 1.008 भाग या ऑक्सीजन के 8 भाग या क्लोरीन के 35.5 भाग या सिल्वर (Ag) के 108 भाग से प्रत्यक्ष या परोक्ष रूप से संयुक्त होते हैं, अथवा उन्हें यौगिकों में से विस्थापित करते हैं। यह प्रतिक्रिया में एक मोल इलेक्ट्रॉन के साथ प्रतिक्रिया करने की मात्रा है।

मोलरता की गणना:
विलेय का भार (पोटैशियम कार्बोनेट, \( \text{K}_2\text{CO}_3 \)) = 20.7 ग्राम
\( \text{K}_2\text{CO}_3 \) का अणुभार = 138
विलयन का आयतन = 500 मिली = \( \frac {500}{1000} \) लीटर = 0.5 लीटर
मोलरता (M) = \( \frac{\text{विलेय का भार}}{\text{विलेय का अणुभार}} \times \frac{1}{\text{विलयन का आयतन (लीटर में)}} \)
\( \text{M} = \frac {20.7}{138} \times \frac {1}{0.5} \)
\( \text{M} = 0.15 \times 2 \)
\( \text{M} = 0.3 \) M
In simple words: हमने परमाणु भार, अणु भार और तुल्यांकी भार को परिभाषित किया। मोलरता निकालने के लिए, हमने पोटैशियम कार्बोनेट के ग्राम और उसके अणुभार का उपयोग करके मोलों की संख्या ज्ञात की, फिर इसे विलयन के लीटर में आयतन से विभाजित किया।

🎯 Exam Tip: परिभाषाओं को याद करते समय मुख्य शब्दों पर ध्यान दें। मोलरता की गणना में, आयतन को हमेशा लीटर में बदलना याद रखें और अणुभार सही ढंग से उपयोग करें।

 

प्रश्न 46. नाइट्रिक अम्ल के व्यावसायिक उत्पादन में 7.33 मोल HNO3 उत्पन्न करने के लिए NO2 के कितने मोल आवश्यक होंगे यदि अभिक्रिया है – NO2 (गैस) + H2O (दव) = 2HNO3 (जलीय) + NO (गैस)
Answer:
सबसे पहले, दी गई रासायनिक अभिक्रिया को संतुलित करते हैं:
\( \text{NO}_2(\text{g}) + \text{H}_2\text{O}(\text{l}) \rightarrow \text{HNO}_3(\text{aq}) + \text{NO}(\text{g}) \)
संतुलित अभिक्रिया: \( 3\text{NO}_2(\text{g}) + \text{H}_2\text{O}(\text{l}) \rightarrow 2\text{HNO}_3(\text{aq}) + \text{NO}(\text{g}) \). इस संतुलित अभिक्रिया में परमाणुओं की संख्या दोनों तरफ बराबर होती है।
संतुलित समीकरण से पता चलता है कि 2 मोल \( \text{HNO}_3 \) उत्पन्न करने के लिए 3 मोल \( \text{NO}_2 \) की आवश्यकता होती है।
इसलिए, 1 मोल \( \text{HNO}_3 \) उत्पन्न करने के लिए आवश्यक \( \text{NO}_2 \) के मोल = \( \frac {3}{2} \) मोल
7.33 मोल \( \text{HNO}_3 \) उत्पन्न करने के लिए आवश्यक \( \text{NO}_2 \) के मोल = \( 7.33 \times \frac {3}{2} \)
= \( 7.33 \times 1.5 \)
= \( 10.995 \) मोल
अतः, लगभग 11.0 मोल \( \text{NO}_2 \) की आवश्यकता होगी।
In simple words: पहले हमने दी गई अभिक्रिया को संतुलित किया। संतुलित समीकरण से, हमें पता चला कि \( \text{HNO}_3 \) के हर 2 मोल के लिए \( \text{NO}_2 \) के 3 मोल चाहिए होते हैं। फिर, इस अनुपात का उपयोग करके हमने 7.33 मोल \( \text{HNO}_3 \) बनाने के लिए आवश्यक \( \text{NO}_2 \) के मोल ज्ञात किए।

🎯 Exam Tip: ऐसे प्रश्नों में, सबसे पहला और सबसे महत्वपूर्ण कदम रासायनिक अभिक्रिया को सही ढंग से संतुलित करना है, क्योंकि गलत संतुलन से पूरी गणना गलत हो सकती है।

 

प्रश्न 48. CaCO3 जलीय HCl के साथ पूर्णतः अभिक्रिया कर CaCl2 और CO2 बनाता है। CaCO3(s) + 2HCl(g) → CaCl2(aq) + CO2(g) + H2O(l) 0.75M HCl के 25ml के साथ पूर्णतः अभिक्रिया करने के लिए CaCO3 की कितनी मात्रा की आवश्यकता होगी?
Answer:
पहले HCl के मोलों की संख्या ज्ञात करते हैं:
HCl विलयन की मोलरता (M) = 0.75 M
HCl विलयन का आयतन (V) = 25 ml = \( \frac {25}{1000} \) लीटर = 0.025 लीटर
HCl के मोल = मोलरता \( \times \) आयतन (लीटर में) = \( 0.75 \times 0.025 = 0.01875 \) मोल

दी गई संतुलित अभिक्रिया है:
\( \text{CaCO}_3(\text{s}) + 2\text{HCl}(\text{g}) \rightarrow \text{CaCl}_2(\text{aq}) + \text{CO}_2(\text{g}) + \text{H}_2\text{O}(\text{l}) \)
अभिक्रिया के अनुसार, 2 मोल HCl, 1 मोल \( \text{CaCO}_3 \) के साथ अभिक्रिया करते हैं।
तो, 1 मोल HCl के लिए आवश्यक \( \text{CaCO}_3 \) के मोल = \( \frac {1}{2} \) मोल
0.01875 मोल HCl के लिए आवश्यक \( \text{CaCO}_3 \) के मोल = \( 0.01875 \times \frac {1}{2} = 0.009375 \) मोल

\( \text{CaCO}_3 \) का अणुभार = \( 40 (\text{Ca}) + 12 (\text{C}) + 3 \times 16 (\text{O}) = 40 + 12 + 48 = 100 \)
आवश्यक \( \text{CaCO}_3 \) का द्रव्यमान = मोल \( \times \) अणुभार
= \( 0.009375 \times 100 \)
= \( 0.9375 \) ग्राम
अतः लगभग 0.94 ग्राम \( \text{CaCO}_3 \) की आवश्यकता होगी। यह सुनिश्चित करता है कि सभी HCl पूरी तरह से उपयोग हो जाए।
In simple words: हमने HCl के मोल निकाले। फिर, रासायनिक समीकरण का उपयोग करके, हमने देखा कि 2 मोल HCl को 1 मोल \( \text{CaCO}_3 \) की जरूरत होती है। इस अनुपात से हमने \( \text{CaCO}_3 \) के मोल निकाले और उसे ग्राम में बदल दिया।

🎯 Exam Tip: मोलरता वाले प्रश्नों में, मोलों की गणना करते समय आयतन को लीटर में बदलना न भूलें। हमेशा संतुलित रासायनिक समीकरण का उपयोग करके मोल-अनुपात ज्ञात करें।

 

प्रश्न 50. द्रव्यमान की दृष्टि से व्यावसायिक हाइड्रोक्लोरिक अम्ल 38% होता है। यदि इस विलयन का घनत्व 1.19 ग्राम सेमी हो तो विलयन की मोलरता ज्ञात करो।
Answer:
मान लीजिए विलयन का कुल द्रव्यमान = 100 ग्राम
चूंकि हाइड्रोक्लोरिक अम्ल 38% (द्रव्यमान के अनुसार) है, तो 100 ग्राम विलयन में HCl का द्रव्यमान = 38 ग्राम होगा। यह विलेय की मात्रा है।

विलयन का घनत्व = 1.19 ग्राम/सेमी\(^3\) (या ग्राम/मिली)
विलयन का आयतन = \( \frac{\text{विलयन का द्रव्यमान}}{\text{विलयन का घनत्व}} \)
= \( \frac {100 \text{ ग्राम}}{1.19 \text{ ग्राम/मिली}} = 84.03 \) मिली
इसे लीटर में बदलने पर: \( \frac {84.03}{1000} = 0.08403 \) लीटर

HCl का अणुभार = \( 1 (\text{H}) + 35.5 (\text{Cl}) = 36.5 \)

मोलरता (M) = \( \frac{\text{विलेय का भार (ग्राम में)}}{\text{विलेय का अणुभार}} \times \frac{1}{\text{विलयन का आयतन (लीटर में)}} \)
\( \text{M} = \frac {38}{36.5} \times \frac {1}{0.08403} \)
\( \text{M} = 1.041 \times 11.90 \) (लगभग)
\( \text{M} = 12.38 \) M
अतः व्यावसायिक हाइड्रोक्लोरिक अम्ल की मोलरता लगभग 12.4 M होगी। यह उच्च सांद्रता दर्शाता है।
In simple words: हमने माना कि हमारे पास 100 ग्राम विलयन है। इसमें 38 ग्राम HCl है। विलयन का आयतन घनत्व से ज्ञात किया। फिर, HCl के ग्राम और उसके अणुभार का उपयोग करके मोलों की संख्या ज्ञात की और अंत में मोलरता निकालने के लिए इसे विलयन के लीटर में आयतन से भाग दिया।

🎯 Exam Tip: द्रव्यमान प्रतिशत और घनत्व वाले प्रश्नों में, अक्सर 100 ग्राम विलयन मानकर चलना सबसे आसान तरीका होता है। आयतन को हमेशा लीटर में बदलें और अणुभार की सही गणना करें।

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