RBSE Solutions Class 11 Biology Chapter 9 कोशिकांगों की संरचना तथा कार्य

NCERT Solutions for Class 11 Biology: Chapter 09 कोशिकांगों की संरचना तथा कार्य

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Practice Class 11 Biology Solutions: Chapter 09 कोशिकांगों की संरचना तथा कार्य

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RBSE Class 11 Biology Chapter 9 वस्तुनिष्ठ प्रश्न

 

Question 1. इलियोप्लास्ट संग्रह करते हैं –
(अ) मण्ड को
(ब) प्रोटीन का
(स) ग्लाइकोजन का
(द) वसा का
Answer: (द) वसा का
In simple words: इलियोप्लास्ट एक प्रकार के लवक होते हैं जो पौधों में ऊर्जा के लिए वसा को जमा करते हैं। यह पौधों को बढ़ने और जीवित रहने में मदद करता है।

🎯 Exam Tip: विभिन्न प्रकार के प्लास्टिड्स (लवक) के कार्यों को याद रखें, जैसे इलियोप्लास्ट वसा, एमाइलोप्लास्ट स्टार्च, और प्रोटीनोप्लास्ट प्रोटीन जमा करते हैं।

 

Question 2. कोशिका की आत्मघाती थैलियाँ हैं -
(अ) माइटोकॉन्ड्रिया
(ब) लाइसोसोम
Answer: (ब) लाइसोसोम
In simple words: लाइसोसोम को कोशिका की 'आत्मघाती थैलियाँ' कहा जाता है क्योंकि उनमें ऐसे एंजाइम होते हैं जो कोशिका के खराब या अनावश्यक हिस्सों को पचा सकते हैं, और कभी-कभी पूरी कोशिका को भी।

🎯 Exam Tip: लाइसोसोम के कार्य और उनमें मौजूद पाचक एंजाइमों को हमेशा याद रखें।

 

Question 3. 70S राइबोसोम की दो उप-इकाइयाँ हैं -
(अ) 70S
(ब) 80S
(स) 50S
(द) 60S
Answer: (स) 50S
In simple words: 70S राइबोसोम दो छोटे हिस्सों से मिलकर बनता है: एक 50S उप-इकाई और एक 30S उप-इकाई। ये दोनों मिलकर प्रोटीन बनाने में मदद करते हैं।

🎯 Exam Tip: प्रोकैरियोटिक (70S) और यूकेरियोटिक (80S) राइबोसोम की उप-इकाइयों के आकार को याद रखना महत्वपूर्ण है।

 

Question 4. निम्न में से कौनसा कोशिकांग पादप कोशिका में नहीं पाया जाता है –
(अ) लवकें
(ब) सूक्ष्मनलिकाएँ
(स) स्फीरोसोम्स
(द) तारककाय
Answer: (द) तारककाय
In simple words: तारककाय आमतौर पर पशु कोशिकाओं में पाए जाते हैं और कोशिका विभाजन में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं, जबकि अधिकांश पौधों की कोशिकाओं में ये नहीं होते हैं।

🎯 Exam Tip: पौधों और पशु कोशिकाओं के बीच प्रमुख कोशिकांगों के अंतर को पहचानना सीखें।

 

Question 5. निम्न में से कौनसा कोशिकांग जन्तु कोशिका में नहीं पाया जाता है –
(अ) लवकें
(ब) सूक्ष्मनलिकाएँ
(स) लाइसोसोम
(द) तारककाय
Answer: (अ) लवकें
In simple words: लवक (प्लास्टिड) केवल पौधों की कोशिकाओं में पाए जाते हैं, जो भोजन बनाने (हरितलवक) या उसे जमा करने (ल्यूकोप्लास्ट) का काम करते हैं, जबकि पशु कोशिकाओं में इनकी जरूरत नहीं होती।

🎯 Exam Tip: याद रखें कि लवक (जैसे क्लोरोप्लास्ट) पौधों की कोशिकाओं की एक अनूठी विशेषता है जो उन्हें अपना भोजन स्वयं बनाने में सक्षम बनाती है।

 

RBSE Class 11 Biology Chapter 9 अतिलघूत्तरात्मक प्रश्न

 

Question 1. अल्टमान ने माइटोकॉन्ड्रियों को क्या नाम दिया था ?
Answer: अल्टमान ने माइटोकॉन्ड्रिया को बायोप्लास्ट (Bioplast) नाम दिया था। यह नाम कोशिका के अंदर जीवन के छोटे रूपों को दर्शाने के लिए दिया गया था।
In simple words: अल्टमान ने माइटोकॉन्ड्रिया को 'बायोप्लास्ट' कहा था।

🎯 Exam Tip: कोशिकांगों की खोज और नामकरण करने वाले वैज्ञानिकों के नाम याद रखना परीक्षा के लिए उपयोगी है।

 

Question 2. माइटोकॉन्ड्रिया को कोशिका का शक्तिगृह क्यों कहते हैं ?
Answer: माइटोकॉन्ड्रिया को कोशिका का शक्तिगृह इसलिए कहा जाता है क्योंकि इसमें आक्सीश्वसन की प्रक्रिया के दौरान ऊर्जा ATP (एडेनोसिन ट्राइफॉस्फेट) के रूप में संचित होती है। ATP कोशिका की सभी गतिविधियों के लिए ऊर्जा का मुख्य स्रोत है।
In simple words: माइटोकॉन्ड्रिया को कोशिका का 'शक्तिगृह' कहते हैं, क्योंकि यह भोजन से ऊर्जा (ATP) बनाता है, जिसका उपयोग कोशिका काम करने के लिए करती है।

🎯 Exam Tip: 'शक्तिगृह' शब्द को ATP उत्पादन से जोड़कर याद रखें, क्योंकि यह माइटोकॉन्ड्रिया का सबसे महत्वपूर्ण कार्य है।

 

Question 4. गॉल्जीकाय के घटकों के नाम लिखिए।
Answer: गॉल्जीकाय के मुख्य घटक निम्नलिखित हैं:
(1) सिस्टर्नी (Cisternae)
(2) वेसीकल्स (Vesicles)
(3) स्रावी पुटिकाएँ (Secretory Vesicles)
In simple words: गॉल्जीकाय तीन मुख्य हिस्सों से बना होता है: सिस्टर्नी (चपटी थैली), वेसीकल्स (छोटी थैली) और स्रावी पुटिकाएँ (बड़ी थैली)।

🎯 Exam Tip: गॉल्जीकाय की संरचना के तीनों प्रमुख घटकों के नाम और उनकी पहचान याद रखना महत्वपूर्ण है।

 

Question 5. अन्तःद्रव्यी जालिका कितने प्रकार की रचनाओं से बनी होती है? उनके नाम बताइए।
Answer: अन्तःद्रव्यी जालिका तीन प्रकार की रचनाओं से बनी होती है, जो निम्न हैं:
1. सिस्टर्नी (Cisternae)
2. वेसीकल्स (Vesicles)
3. नलिकाएँ (Tubules)
In simple words: अन्तःद्रव्यी जालिका तीन तरह की संरचनाओं से बनी होती है: सिस्टर्नी (चपटी थैलियाँ), वेसीकल्स (छोटी गोल थैलियाँ) और नलिकाएँ (ट्यूब)।

🎯 Exam Tip: अन्तःद्रव्यी जालिका की संरचना में सिस्टर्नी, वेसीकल्स और नलिकाओं की भूमिका को स्पष्ट रूप से समझें।

 

Question 6. 70S राइबोसोम किन दो उपइकाइयों से बना होता है ?
Answer: 70S राइबोसोम 50S एवं 30S दो उपइकाइयों से बना होता है। यह संयोजन प्रोटीन संश्लेषण के लिए महत्वपूर्ण है।
In simple words: 70S राइबोसोम दो हिस्सों, 50S और 30S, से मिलकर बनता है।

🎯 Exam Tip: राइबोसोम के आकार (जैसे 70S और 80S) और उनकी उप-इकाइयों के आकार को कभी न भूलें।

 

Question 7. तारककाय की खोज किसने की थी ?
Answer: टी. बावेरी (T. Boveri) ने 1888 में तारककाय की खोज की थी। उन्होंने इसे कोशिका विभाजन में इसकी भूमिका के कारण पहचाना।
In simple words: तारककाय की खोज टी. बावेरी ने 1888 में की थी।

🎯 Exam Tip: कोशिकांगों और उनके खोजकर्ताओं के नाम याद रखें, खासकर वे जो महत्वपूर्ण कोशिका प्रक्रियाओं में शामिल हैं।

 

Question 8. अंत:कोशिकीय पाचन हेतु कौनसा कोशिकांग उत्तरदायी होता है?
Answer: लाइसोसोम (Lysosome) अंत:कोशिकीय पाचन हेतु उत्तरदायी होता है। इनमें कई पाचक एंजाइम होते हैं जो कोशिका के अंदर खराब या अनावश्यक पदार्थों को तोड़ने में मदद करते हैं।
In simple words: लाइसोसोम कोशिका के अंदर चीजों को पचाने का काम करता है।

🎯 Exam Tip: लाइसोसोम के मुख्य कार्य के रूप में 'अंत:कोशिकीय पाचन' और 'आत्मघाती थैली' को हमेशा याद रखें।

 

RBSE Class 11 Biology Chapter 9 लघूत्तरात्मक प्रश्न

 

Question 2. रंग के आधार पर लवक कितने प्रकार के होते हैं ? उनके नाम लिखिए।
Answer: रंग के आधार पर लवक तीन प्रकार के होते हैं, जो निम्न हैं:
1. अवर्णीलवक या ल्यूकोप्लास्ट (Leucoplast): ये रंगहीन होते हैं और भोजन (स्टार्च, वसा, प्रोटीन) को जमा करते हैं।
2. वर्णीलवक या क्रोमोप्लास्ट (Chromoplast): ये रंगीन होते हैं (हरे के अलावा) और फलों, फूलों को रंग प्रदान करते हैं।
3. हरितलवक या क्लोरोप्लास्ट (Chloroplast): ये हरे होते हैं और प्रकाश संश्लेषण करते हैं।
In simple words: रंग के अनुसार लवक तीन तरह के होते हैं: अवर्णीलवक (रंगहीन), वर्णीलवक (रंगीन, हरे नहीं) और हरितलवक (हरे)।

🎯 Exam Tip: विभिन्न प्रकार के लवक और उनके विशिष्ट कार्यों को याद रखें, खासकर रंग और उनके द्वारा जमा किए गए पदार्थ के संदर्भ में।

 

Question 3. इकहरी झिल्ली वाले कोशिकाओं के नाम बताओ तथा इनके एक-एक मुख्य कार्य बताइये।
Answer: एकल कलाबद्ध कोशिकांग (Single membrane bound organelles) निम्नलिखित हैं –

कोशिकांग का नाम (Name of Organelles)कोशिकांग का कार्य (Function of Organelles)
1. अंतःद्रव्यी जालिका (Endoplasmic reticulum)यह कोशिका का अन्तःकंकाल बना कर उसे निश्चित आकृति, आकार एवं दृढ़ता प्रदान करती है।
2. गॉल्जी उपकरण (Golgi apparatus)शुक्रजनन के समय शुक्राणु के एक्रोसोम (Acrosome) का निर्माण गॉल्जीकाय से होता है।
3. ग्लाइऑक्सीसोम्स (Glyoxysomes)ये एंजाइम द्वारा वसीय अम्ल का कार्बोहाइड्रेट्स में बदलने का कार्य करते हैं।
4. स्फीरोसोम्स (Spherosomes)वसीय पदार्थों का एकत्रण (collection), परिवहन तथा संश्लेषण करना।


In simple words: एकल झिल्ली वाले कोशिकांगों में अन्तःद्रव्यी जालिका (कोशिका को आकार देना), गॉल्जी उपकरण (प्रोटीन पैक करना), ग्लाइऑक्सीसोम (वसा को चीनी में बदलना) और स्फीरोसोम्स (वसा जमा करना) शामिल हैं।

🎯 Exam Tip: कोशिकांगों को उनकी झिल्ली की संख्या (एकल, दोहरी, या झिल्ली रहित) के आधार पर वर्गीकृत करना सीखें और प्रत्येक के मुख्य कार्य याद रखें।

 

Question 4. सूक्ष्मकाय क्या है ? ये कितने प्रकार के होते हैं ?
Answer: सूक्ष्मकाय (Microbodies) एक थैली के समान रचना होती है जो एकल झिल्ली द्वारा आवरित होती है। इनका निर्माण अंतःद्रव्यी जालिका से होता है। ये तीन प्रकार के होते हैं –
(1) स्फेरोसोम्स (Sphaerosomes): इनकी खोज पेरनर (1952) ने की थी। ये पादप कोशिकाओं में पाए जाते हैं और लिपिड संश्लेषण एवं संग्रहण में मदद करते हैं। इनका मुख्य कार्य वसीय पदार्थों का एकत्रीकरण, परिवहन तथा संश्लेषण करना है। इन्हें पादप लाइसोसोम भी कहा जाता है।
(2) परऑक्सीसोम (Peroxisome): ये सूक्ष्म गोलाकार कोशिकांग हैं जो जन्तुओं की यकृत और वृक्क कोशिकाओं तथा सभी पादप कोशिकाओं में पाए जाते हैं। ये प्रकाशीय श्वसन में भाग लेते हैं और उपापचयी क्रियाओं से उत्पन्न \(H_2O_2\) का विघटन करते हैं। ये कोशिका में आने वाले अन्य विषैले पदार्थों के प्रभाव को कम करते हैं।
(3) ग्लाइऑक्सीसोम (Glyoxysome): ये वसा बहुल पादप कोशिकाओं में पाए जाते हैं। इनमें ग्लाइऑक्सीलेट चक्र संचालित होता है, जो वसीय अम्ल को कार्बोहाइड्रेट्स में बदलने का कार्य करता है। बीवर्स (1961) ने इनकी खोज की थी और ये अंकुरण वाले वसीय बीजों में पाए जाते हैं।
In simple words: सूक्ष्मकाय छोटी थैलियाँ होती हैं जिनकी एक झिल्ली होती है। ये तीन प्रकार के होते हैं: स्फेरोसोम्स (वसा जमा करते हैं), परऑक्सीसोम (जहरीले पदार्थों को तोड़ते हैं) और ग्लाइऑक्सीसोम (वसा को चीनी में बदलते हैं)।

🎯 Exam Tip: सूक्ष्मकाय के तीनों प्रकारों को उनके मुख्य कार्यों और उन कोशिकाओं में जहाँ वे पाए जाते हैं, के साथ याद रखें।

 

Question 5. कोशिका इंजन अथवा ऊर्जा घर किसे कहते हैं ? इसकी उत्पत्ति व वितरण पर प्रकाश डालिए।
Answer: कोशिका इंजन अथवा ऊर्जा घर राइबोसोम (Ribosome) को कहते हैं। राइबोसोम की दोनों उपइकाइयों का संयोजन एवं वियोजन \(Mg^{+2}\) की सान्द्रता पर निर्भर करता है। सामान्य अवस्था में ये उपइकाइयाँ कोशिकाद्रव्य में अलग-अलग पायी जाती हैं। प्रोटीन संश्लेषण के समय राइबोसोम \(mRNA\) पर जुड़कर सम्पूर्ण राइबोसोम बनाती है। प्रोटीन संश्लेषण के समय राइबोसोम गति करते हैं।
वितरण: राइबोसोम यूकैरियोटिक कोशिका में खुरदरी अन्तद्रव्यी जालिका पर, कोशिकाद्रव्य, माइटोकॉन्ड्रिया, केन्द्रक एवं हरितलवक में पाये जाते हैं। ये कोशिका में प्रोटीन बनाने का मुख्य स्थान होते हैं।
In simple words: राइबोसोम को कोशिका का 'इंजन' या 'ऊर्जा घर' कहते हैं क्योंकि ये प्रोटीन बनाते हैं। ये कोशिका के अंदर कई जगहों पर मिलते हैं और \(Mg^{+2}\) आयन की मदद से इनके छोटे हिस्से जुड़ते और अलग होते हैं।

🎯 Exam Tip: राइबोसोम को 'प्रोटीन फैक्ट्री' के रूप में याद रखें और \(Mg^{+2}\) आयनों की भूमिका को भी समझें।

 

RBSE Class 11 Biology Chapter 9 निबन्धात्मक प्रश्न

 

Question 1. माइटोकॉन्ड्रिया के इतिहास को बताते हुए इसकी संरचना तथा कार्यों का वर्णन कीजिए। आवश्यक नामांकित चित्र बनाइये।
Answer:
माइटोकॉन्ड्रिया (Mitochondria):
इतिहास: फ्लेमिंग (Flemming, 1882) ने इन्हें फायला (Fila) नाम दिया, अल्टमैन (Altmann, 1894) ने इन्हें बायोप्लास्ट (Bioplast) कहा और बेन्डा (Benda, 1897) ने इन्हें माइटोकॉन्ड्रिया नाम दिया। इन्हें कोन्ड्रियोसोम (Chondriosome) भी कहते हैं। एक कोशिका के सभी माइटोकॉन्ड्रिया को सामूहिक रूप से कॉन्ड्रियोम (Chondriome) कहा जाता है। परिपक्व लाल रक्त कोशिकाओं और प्रोकैरियोटिक कोशिकाओं में ये नहीं पाए जाते हैं। उपापचयी रूप से सक्रिय कोशिकाओं में इनकी संख्या अधिक होती है।

संरचना (Structure):
इनकी आकृति छड़दार (Rod Shaped), गोलाकार (Spherical) या सूत्री (Filamentous) प्रकार की होती है, जो 1.0 – 4.1 माइक्रोमीटर लम्बी और 0.2 - 1 माइक्रोमीटर (औसत 0.5 माइक्रोमीटर) व्यास की होती है। प्रत्येक माइटोकॉन्ड्रिया दोहरी परत वाली झिल्ली से घिरी रहती है। इन परतों को बाहरी झिल्ली (Outer membrane) व अन्दर वाली झिल्ली (Inner membrane) कहते हैं। इन दोनों झिल्लियों के बीच के स्थान को परिसूत्रकणिकीय स्थल (Perimitochondrial Space) कहते हैं। यह स्थान 60Å से 100Å तक का होता है और एंजाइम्स युक्त तरल द्रव्य से भरा होता है। माइटोकॉन्ड्रिया के अन्दर प्रोटीन युक्त समांग (Homogeneous) जलीय (Gell like) पदार्थ भरा रहता है जिसे माइटोकॉन्ड्रिया का मैट्रिक्स (Mitochondrial Matrix) कहते हैं।

माइटोकॉन्ड्रिया की अन्दर वाली झिल्ली की दो सतह होती है: बाहरी या परिसूत्रकणिकीय स्थल की ओर की सतह जिसे साइटोसोल (Cytosol) या C - Face कहते हैं तथा अन्दर की ओर या मैट्रिक्स वाली सतह को मैट्रिक्स (Matrix face) या M – Face कहते हैं। माइटोकॉन्ड्रिया की अन्दर वाली झिल्ली से अंगुलियों के समान उभार निकले रहते हैं, इन्हें क्रिस्टी (Cristae) कहते हैं। क्रिस्टी की सतह पर अनेक टेनिस के रैकिट के आकार के 85Å व्यास की लम्बाई के सूक्ष्म कण पाये जाते हैं। ये कण एक-दूसरे से 100Å की दूरी पर स्थित होते हैं। इन कणों को F1 कण (F1 Particle) या ऑक्सीसोम (Oxysome) कहते हैं। ऑक्सीसोम के तीन भाग होते हैं जिन्हें शीर्ष (Head), वृन्त (Stalk) तथा आधार (Base) कहते हैं। F1 कणों में अथवा ऑक्सीसोम में ATP ऐज (ATPase) या ABP सिन्थेटेज (ATP Synthetase) एंजाइम होते हैं जो ऑक्सीकरण (Oxidation) व फॉस्फोरीकरण (Phosphorylation) में भाग लेते हैं।
क्रियाशील रूप में माइटोकॉन्ड्रिया एक जटिल संरचना है जो ऊर्जा उत्पादन में मदद करती है।

कार्यों (Functions of Mitochondria):
1. माइटोकॉन्ड्रिया को कोशिका का शक्तिगृह (Power House) कहा जाता है, क्योंकि इसके द्वारा ATP का संश्लेषण होता है।
2. माइटोकॉन्ड्रिया वसा उपापचय से भी सम्बन्धित है। ऑक्सीकरण की क्रिया भी माइटोकॉन्ड्रिया मैट्रिक्स में ही होती है।
3. स्पर्मेटिड के शुक्राणु (Sperm) के रूपान्तरण के समय माइटोकॉन्ड्रिया शुक्राणु के मध्य भाग में अक्षीय तन्तु (Axial Filament) के चारों ओर एक सर्पिल आवरण (Spiral sheath) बनाते हैं। यह शुक्राणु को गति करते समय ऊर्जा प्रदान करता है।
4. अण्डजनन क्रिया में पीतक निर्माण (Yolk formation) में सहायक होता है।
5. माइटोकॉन्ड्रिया की बाहरी झिल्ली विभिन्न पदार्थों के लिए पारगम्य होती है।
6. माइटोकॉन्ड्रिया कोशिकाद्रव्यी जीन्स की तरह कार्य करते हैं। इनमें उपस्थित लक्षण आनुवंशिकता की सततता में सहायता करते हैं।
7. माइटोकॉन्ड्रिया ऊतक जनन (Histogenesis) में मदद करते हैं। तंत्रिका तन्तु (Neurofibrils) एवं पेशीय पर्त (Muscle Layer) का निर्माण भी इनके द्वारा होता है।
8. पेशियों में संकुचन हेतु अधिक ऊर्जा की आवश्यकता होती है, अतः इनमें माइटोकॉन्ड्रिया अधिक संख्या में उपस्थित रहते हैं।

माइटोकॉन्ड्रिया की संरचना बाह्य झिल्ली आन्तरिक झिल्ली मैट्रिक्स क्रिस्टी राइबोसोम्स DNA प्रारम्भिक कणिकाएँ

 

माइटोकॉन्ड्रिया की दीवार से संलग्न कणिकाएँ बाह्य झिल्ली के कण आन्तरिक झिल्ली के कण सिर वृन्त आधार एक कणिका क्रिस्टा

 


In simple words: माइटोकॉन्ड्रिया एक महत्वपूर्ण कोशिकांग है जो कोशिका को ऊर्जा देता है। इसकी दो झिल्लियां होती हैं, और अंदर की झिल्ली मुड़कर क्रिस्टी बनाती है। इन क्रिस्टी पर ऊर्जा बनाने वाले कण (F1 कण) होते हैं। यह वसा उपापचय और पीतक निर्माण जैसे कई अन्य काम भी करता है।

🎯 Exam Tip: माइटोकॉन्ड्रिया की बाहरी और आंतरिक झिल्लियों, क्रिस्टी, मैट्रिक्स और F1 कणों की संरचना और कार्य को विस्तार से समझें। आनुवंशिकता और ऊतक जनन में इसकी भूमिका भी याद रखें।

 

Question 2. उच्च वर्ग के पादपों में पाये जाने वाले हरितलवक की सचित्र संरचना का वर्णन करते हुए इसके कार्य भी समझाइये।
Answer:
हरितलवक (Chloroplast):
इसकी खोज शिम्पर ने 1885 में की थी। ये क्लोरोफिल युक्त हरे रंगों के लवक होते हैं, और इसी कारण पादपों का रंग हरा होता है। ये प्रकाश-संश्लेषण की क्रिया करते हैं। अधिकांशतः ये पत्ती की पर्णमध्योतक (Mesophyll) व स्तम्भ के हरिम् ऊतक (Chlorenchyma) की कोशिकाओं में पाए जाते हैं। ये लवक लेंस के आकार के, अंडाकार, गोलाकार, चक्रिक, चपटे या दीर्घ वृत्ताकार होते हैं जबकि शैवालों में भिन्न-भिन्न आकृति के होते हैं, जैसे – यूलोप्रिम्स में मेखलाकार (Girdleshaped) क्लेमाइडोमोनास में प्यालेनुमा (cuplike), स्पाइरोगारा में सर्पिल रिबन के समान (ribbonlike) एवं जिग्नीमा में तारेनुमा (starshaped) होती है।

संरचना (Structure):
(i) पीठिका (Stroma): हरितलवक के अन्दर प्रोटीनयुक्त तरल पारदर्शी पदार्थ भरा होता है जिसे पीठिका (stroma) कहते हैं। इसमें स्टार्च, प्लास्टोग्लोब्युली, 70S प्रकार के राइबोस, DNA व जल आदि पाये जाते हैं। पीठिका में प्रकाश संश्लेषण की अप्रकाशिक अभिक्रिया (Dark reaction) होती है।
(ii) ग्रेना (Grana): स्ट्रोमा में अनेक पटलिकाएँ (Lamellae) कुछ स्थानों पर एकत्रित होकर सिक्कों के ढेर जैसी संरचना बनाती हैं। चपटी, थैलीनुमा झिल्लीयुक्त प्रत्येक पटलिका (Lamella) को मेन्के (Menke, 1962) ने थाइलैकायड (Thylakoid) कहा तथा अनेक थाइलैकॉइड से बने एक ढेर को ग्रेनम (Granum) कहते हैं। थाइलैकॉइड को ग्रेनम पटलिका (granum lamella) भी कहा जाता है। प्रत्येक ग्रेनम में 2 - 100 तक थाईलैकायड मिलती है। दो पास के ग्रैना एक-दूसरे से पटलिका के द्वारा जुड़े होते हैं। इन पटलिकाओं को अन्तराग्रेनम पटलिका (Intergranum lamellae) कहते हैं। एक हरितलवक में 40 से 60 तक ग्रेना होते हैं। ग्रैना में प्रकाश संश्लेषण की प्रकाशीय अभिक्रिया (Light reaction) होती है। प्रत्येक ग्रैनम पटलिका की दो प्रोटीन परतों के मध्य लिपिड वर्णक की द्विआण्विक (bimolecular) परत होती है। इस लिपिड वर्णक (Lipo-pigments) की परत में क्लोरोफिल तथा कैरोटिनाइड वर्णक व फास्फोलिपिड व्यवस्थित रहते हैं। प्रत्येक परत में क्लोरोफिल के अणुओं को पोरफायरिन जलरागी सिर (Porphyrin hydrophilic head) प्रोटीन की बाहरी परत के बाहर स्थित फाइटोल चेन (phytol chain) वसा रागी (Lipophilic) अन्दर की ओर स्थित लिपिड की परत के भीतर व्यवस्थित होते हैं। इसमें कैरोटिनॉइड (1 – 2%), DNA, RNA, 70S प्रकार के राइबोसोम्स, कुछ खनिज तत्व (Cu, Fe, Mg, Mn) इत्यादि होते हैं। इसमें DNA वलयाकार मिलता है। इन्हें कोशिका में कोशिका भी कहते हैं। क्लोरोप्लास्ट की उत्पत्ति प्राक् लवक (Proplastid) से होती है।
 

क्लोरोप्लास्ट की आन्तरिक संरचना स्ट्रोमा ग्रेनम ग्रेनम स्ट्रोमा लेमिला थाइलैकोइड क्वाण्टासोम मण्ड वसा बूँद

लवकों के कार्य (Functions of Plastids):
1. क्लोरोप्लास्ट में प्रकाश संश्लेषण की क्रियाविधि के द्वारा कार्बोहाइड्रेट के रूप में भोज्य पदार्थों का निर्माण होता है। प्रकाश संश्लेषण की प्रकाशिक अभिक्रिया ग्रेनम में तथा अप्रकाशिक अभिक्रिया स्ट्रोमा में सम्पन्न होती है।
2. हरितलवक प्रकाश श्वसन के स्थल भी हैं। प्रकाश श्वसन के लिए हरितलवक, परऑक्सीसोम एवं माइटोकॉन्ड्रिया तीनों ही आवश्यक होते हैं।
3. ये वायुमण्डलीय \(CO_2\) को ग्रहण करके जल के अणु के अपघटन से \(O_2\) का निकास करते हैं जिससे वायुमण्डल का शुद्धीकरण होता है।
4. अवर्णीलवकों द्वारा भोजन संचय करना; इनमें मंडलवक (Amyloplast), ते लदलवक (Elaiplast) तथा प्रोटीनलवक (Aleuroplast) प्रमुख हैं। इसी प्रकार वर्णीलवकों में क्लोरोफिल के अतिरिक्त अन्य प्रकार के वर्णक उपस्थित होते हैं।
In simple words: हरितलवक पौधों में भोजन बनाने वाला कोशिकांग है। इसकी संरचना में दो मुख्य भाग होते हैं: स्ट्रोमा (अंदर का तरल जहाँ अप्रकाशिक अभिक्रिया होती है) और ग्रेना (सिक्कों जैसी थैलियों के ढेर जहाँ प्रकाशिक अभिक्रिया होती है)। हरितलवक प्रकाश संश्लेषण, \(CO_2\) लेना और \(O_2\) छोड़ना जैसे काम करता है।

 

🎯 Exam Tip: हरितलवक की झिल्लियों, स्ट्रोमा, ग्रेना और थाइलैकॉइड की भूमिकाओं को विस्तार से जानें। प्रकाश संश्लेषण की प्रकाशिक और अप्रकाशिक अभिक्रियाएँ कहाँ होती हैं, यह समझना महत्वपूर्ण है।

 

Question 3. सूक्ष्मकाय क्या है ? ये कितने प्रकार के होते हैं ?
Answer: सूक्ष्मकाय (Microbodies): सूक्ष्मकाय एक थैली समान रचना होती है जो इकहरी झिल्ली द्वारा आवरित होती है। सूक्ष्मकाय का निर्माण अंतःद्रव्यी जालिका से होता है। ये तीन प्रकार के होते हैं –
1. स्फेरोसोम्स (Sphaerosomes): इनका अवलोकन सर्वप्रथम हैन्सटीन (1850) ने किया किन्तु इसकी खोज पेरनर (1952) ने की। शब्द स्फीरोसोम डेन्जीयार्ड ने दिया। स्फीरोसोम अन्तद्रव्यी जालिका (E.R.) से उत्पन्न होते हैं। यह सभी पादप कोशिकाओं में पाये जाते हैं। जो लिपिड के संश्लेषण एवं संग्रहण में सम्मिलित होते हैं। जैसे एण्डोस्पर्म, तेलीय बीजों के बीज पत्र (मूंगफली, सरसों, तिल आदि)। इनकी आकृति गोलाकार एवं अण्डाकार होती है। जिनका व्यास लगभग 0.5 - 2.5um होता है। इसमें हाइड्रोलेज एन्जाइम, जैसे प्रोटियेज, राइबोन्यूक्लियेज, फास्फेटेज, एस्टेरेज आदि पाये जाते हैं। ये एकल इकाई कला द्वारा घिरे रहते हैं। स्फेरोसोम्स का मुख्य कार्य वसीय पदार्थों का एकत्रीकरण, परिवहन तथा संश्लेषण करना है। स्फेरोसोम को पादप लाइसोसोम के रूप में भी जाना जाता है।
2. परऑक्सीसोम (Peroxisome): इनका आकार लगभग 1.5um होता है। ये एकल इकाई कला से घिरे रहते हैं। इनकी कला अमीनो अम्लों, यूरिक अम्लों आदि के लिए पारगम्य होती है। इसमें \(H_2O_2\) उपापचय के लिए 4 एन्जाइम होते हैं। ये एन्जाइम हैं-यूरेट ऑक्सीडेज, अमीनो आक्सीडेज, h-हाइड्रोक्सी एसिड, आक्सीडेज जो \(H_2O_2\) का उत्पादन करते हैं जबकि कैटालेज \(H_2O_2\) को नष्ट करने में एक महत्त्वपूर्ण सुरक्षात्मक भूमिका निभाता है क्योंकि \(H_2O_2\) कोशिका के लिए विषैला होता है।
कार्य:
• कोशिकाद्रव्य में आने वाले अन्य विषैले पदार्थों के प्रभाव को कम करते हैं।
• प्रकाशीय श्वसन की क्रिया परऑक्सीसोम, हरितलवक एवं माइटोकॉन्ड्रियो तीनों में संयुक्त रूप से होती है।
• जन्तु कोशिकाओं में वसा उपापचय का कार्य करते हैं।
• इनमें उपस्थित कैटेलेज एंजाइम, उपापचयी क्रियाओं से उत्पन्न \(H_2O_2\) का विघटन करते हैं।
3. ग्लाइऑक्सीसोम (Glyoxysome): बीवर्स (1961) ने इनकी खोज की थी। ये कवकों, कुछ प्रोस्टिय एवं अंकुरण वाले वसीय बीजों में पाये जाते हैं। जहाँ अघुलनशील लिपिड के रूप में संचित भोज्य पदार्थ घुलनशील शर्करा में बदल जाता है। ये जन्तु कोशिका में अनुपस्थित होते हैं। इनकी आकृति गोलाकार होती है। इनका आकार लगभग 0.51µm होता है। इसमें ग्लाइऑक्सीलेट चक्र के ग्लाइकोलिक अम्ल के उपापचय के एंजाइम पाये जाते हैं। ये इकाई कला द्वारा घिरे होते हैं। इनमें वसा अम्लों के B - आक्सीकरण के लिए भी एन्जाइम पाये जाते हैं। एसिटाइल CoÅ उत्पन्न होता है। इसका ग्लाइऑक्सीलेट चक्र में बेहतर उपापचय होने से कार्बोहाइड्रेट उत्पन्न होता है। वसा का कार्बोहाइड्रेट में परिवर्तन ग्लाइऑक्सीसोम का मुख्य कार्य है।
In simple words: सूक्ष्मकाय एकल झिल्ली वाले छोटे कोशिकांग होते हैं, जो अंतःद्रव्यी जालिका से बनते हैं। ये तीन प्रकार के होते हैं: स्फेरोसोम्स (वसा संश्लेषण और संग्रहण), परऑक्सीसोम (\(H_2O_2\) को तोड़ना और विषैले पदार्थों को कम करना), और ग्लाइऑक्सीसोम (वसा को कार्बोहाइड्रेट में बदलना)।

🎯 Exam Tip: सूक्ष्मकाय के प्रत्येक प्रकार के विशिष्ट कार्यों और उन कोशिकाओं में जहाँ वे पाए जाते हैं, को ध्यान से याद रखें, विशेषकर परऑक्सीसोम में \(H_2O_2\) के उपापचय को।

 

Question 4. राइबोसोम की संरचना व प्रकार बताओ। राइबोसोम की उपइकाइयों का संयोजन व वियोजन को विस्तार से बताइये।
Answer:
राइबोसोम (Ribosome):
रोबिन्सन एवं ब्राउन (1953) ने सेम की जड़ों की कोशिकाओं (पादप कोशिकाओं) व पेलेड (Palade) ने प्राणी कोशिकाओं में देखा। ए. क्लाड (A. Claude) ने इन्हें माइक्रोसोम (Microsome) कहा, फिर रॉबर्ट (Robert, 1958) ने राइबोसोम नाम दिया। इनकी उपस्थिति सभी प्राणी व पादप कोशिकाओं में होती है। प्रोकैरियोटिक कोशिकाओं में ये कोशिका-द्रव्य में स्वतंत्र रहते हैं परन्तु यूकेरियोटिक कोशिकाओं में कोशिकाद्रव्य में मुक्त रहने के साथ-साथ अन्तःप्रद्रव्य जालिका (Endoplasmic Reticulum) की झिल्लियों पर संलग्न रहते हैं।
राइबोसोम पर इकाई झिल्ली (Unit Membrane) नहीं पायी जाती है। प्रत्येक राइबोसोम दो इकाइयों से निर्मित होता है। एक इकाई छोटी और दूसरी बड़ी होती है। छोटी इकाई टोपीनुमा संरचना बनाती है जबकि बड़ी इकाई गुम्बदाकार (Dome shaped) होती है।
राइबोसोम की सूक्ष्म संरचना-एक 70S राइबोसोम जिसमें दो इकाइयाँ दिखाई गयी हैं।

राइबोसोम की सूक्ष्म संरचना-एक 70S राइबोसोम जिसमें दो इकाइयाँ दिखाई गयी हैं। 50S बड़ा उपइकाई गुम्बदाकार 30S छोटी उपइकाई टोपीनुमा

 


वितरणः राइबोसोम यूकैरियोटिक कोशिका में खुरदरी अन्तद्रव्यी जालिका पर, कोशिकाद्रव्य, माइटोकॉन्ड्रिया, केन्द्रक एवं हरितलवक में पाये जाते हैं।
राइबोसोम की उपइकाइयों का संयोजन व वियोजन: आयनों की अधिकता होने पर दो राइबोसोम भी जुड़ जाते हैं। इन जुड़े हुए आकार को डायमर (Dimer) कहते हैं। राइबोसोम्स को पराकेन्द्रावसारीकरण (Ultra-centrifugation) के द्वारा पृथक् किया जा सकता है। सेन्ट्रीफ्यूज को एक निश्चित रफ्तार पर घुमाया जाता है। निश्चित रफ्तार को अवसादन गुणांक कहते हैं। अवसादन (Sedimenting) गुणांक को स्वेडबर्ग इकाई (Swedberg's unit) में मापा जाता है। राइबोसोम्स की संहति (Mass) को स्वेडबर्ग इकाई में व्यक्त करते हैं। स्वेडबर्ग इकाई स्वीडन के वैज्ञानिक T. Swedberg के सम्मान में रखा गया है, जिन्होंने पराअपकेन्द्रित (Ultracentrifuge) का आविष्कार किया था। अवसादन विधि से दो मूल प्रकार के राइबोसोम्स प्राप्त किये जा सकते हैं।

प्रकार:
1. 70S राइबोसोम: ये आकार में छोटे तथा अवसाद गुणांक 70S होता है। इनके सबयूनिट 50S तथा 30S होते हैं। ये जीवाणु, माइटोकॉन्ड्रिया, क्लोरोप्लास्ट तथा अन्य प्रोकैरियोटिक कोशिकाओं में पाये जाते हैं।
2. 80S राइबोसोम: ये राइबोसोम बड़े होते हैं तथा अवसाद गुणांक 80S होता है। इनके सब-यूनिट 60S तथा 40S होते हैं। ये राइबोसोम सभी यूकेरियोटिक कोशिकाओं में पाये जाते हैं। राइबोसोम के रूप 30S 50S 70S 40S 60S 80S डायमर mRNA पॉली राइबोसोम

 

 


पॉलीसोम्स (Polysomes) या पॉलीराइबोसोम: प्रोटीन-संश्लेषण के समय 4-5 या अधिक राइबोसोम अन्य प्रकार के RNA के ऊपर एकत्रित होकर एक जटिल संरचना बना लेते हैं। इन संरचनाओं को पॉलीसोम्स (Polysomes) या पालीराइबोसोम कहते हैं।
In simple words: राइबोसोम प्रोटीन बनाने वाले छोटे कण होते हैं। ये दो हिस्सों (उपइकाइयों) से बने होते हैं, जिनका जुड़ना और अलग होना \(Mg^{+2}\) आयनों पर निर्भर करता है। ये दो मुख्य प्रकार के होते हैं: 70S (छोटे, प्रोकैरियोटिक में) और 80S (बड़े, यूकेरियोटिक में)।

🎯 Exam Tip: राइबोसोम की संरचना, 70S और 80S प्रकारों के बीच के अंतर, और उनकी उप-इकाइयों के संयोजन-वियोजन को \(Mg^{+2}\) आयन की भूमिका के साथ समझना महत्वपूर्ण है। पॉलीसोम की अवधारणा भी याद रखें।

 

Question 5. निम्नलिखित पर संक्षिप्त टिप्पणी लिखो –
(अ) तारक केन्द्र
(ब) रिक्तिका
(स) सूक्ष्म नलिका
Answer:
(अ) तारक केन्द्र (Centrosome):
टी. बावेरी (T. Boveri) ने सर्वप्रथम 1888 में सेन्ट्रोसोम शब्द का प्रयोग किया था। साधारणतया यह केन्द्रक के पास पाया जाता है। इसे कोशिका केन्द्र (Cell centre) भी कहते हैं।
संरचना (Structure): यह दो बेलनाकार संरचनाओं से मिलकर बना होता है जिसे तारक केन्द्र (Centriole) कहते हैं। इसलिए इसे तर काय (Centrosome) या डिप्लोसोम (Diplosome) कहते हैं। यह झिल्ली रहित रचना है। एक तारककाय (Centrosome) में दो तारक केन्द्र के बीच 90° का कोण होता है व यह 'L' की आकृति में व्यवस्थित होती है। तारक केन्द्र अक्रिस्टलीय कोशिकाद्रव्य द्वारा घिरा होता है, जिसे सेन्ट्रोस्फीयर (Centrosphere) कहते हैं।

तारक केन्द्र की संरचना केन्द्रीय छड़ (हब) स्पोक्स (छड़ें) ABC Y-कणिका X-कणिका

इस प्रकार B व C उपतन्तु के बीच 2 ग्लोब्यूलर इकाइयाँ कॉमन होती हैं। प्रत्येक त्रिक (Triplet) का A उपतन्तु पड़ोसी त्रिंक के उपतन्तु से सघन पदार्थ (Dense Material) द्वारा जुड़ा रहता है, इसे C - A कनेक्टिव (Connective) कहते हैं। तारक केन्द्र के केन्द्र में 25Å मोटाई की एक केन्द्रीय छड़ (Central Rod) पायी जाती है जिसे हब (Hub) भी कहते हैं। जिससे 9 छड़े/तन्तु (Spokes) निकलकर त्रिक के A उपतन्तु से जुड़ जाते हैं। इस प्रकार बैलगाड़ी की एक पहिये के समान रचना का निर्माण होता है। इसे कोर्ट व्हील संरचना (Cort Wheel Structure) कहते हैं। प्रत्येक छड़ (Spoke) के बाहरी सिरे पर A उपतन्तु के नीचे एक कणिका पायी जाती है, जिसे X-कणिका (X-granule) कहते हैं। दो X-कणिकाओं के बीच एक Y-कणिका पायी जाती है। X व Y कणिकाएँ एक सघन पदार्थ से जुड़कर वृत्ताकार आकृति का निर्माण करती है।
रासायनिक संगठन (Chemical Composition): इसमें ट्यूब्यूलिन नामक संरचनात्मक प्रोटीन पायी जाती है। तारक केन्द्र में DNA व RNA की उपस्थिति के प्रमाण भी प्राप्त हुए हैं।
कार्य (Functions):
1. तारक केन्द्र (Centriole) द्वारा जन्तु कोशिका में विभाजन आरम्भ होता है। इस दौरान पूर्ववर्ती तारक केन्द्र के विभाजन द्वारा पुत्री तारक केन्द्र का निर्माण होता है। विभाजन के समय तारक केन्द्र द्वारा तर्क तन्तुओं (Spindle Fibres) का निर्माण होता है।
2. तारक केन्द्र द्वारा सिलिया (Cilia) व फ्लेजिला (Flagella) की आधार कणिका का निर्माण किया जाता है। इसे अनेक नामों से जैसे ब्लैफेरोप्लास्ट (Blepheroplast) भी जाना जाता है।
In simple words: तारक केन्द्र एक कोशिकांग है जो कोशिका विभाजन और सिलिया व फ्लेजिला के निर्माण में मदद करता है। इसकी संरचना एक बैलगाड़ी के पहिए जैसी होती है, जिसमें 9 समूह में माइक्रोटीब्यूल और बीच में एक हब होता है। इसमें ट्यूब्यूलिन प्रोटीन, DNA और RNA होते हैं।

 

🎯 Exam Tip: तारक केन्द्र की "कार्टव्हील" संरचना (9+0 व्यवस्था) को याद रखें और कोशिका विभाजन तथा सिलिया/फ्लेजिला के निर्माण में इसकी भूमिका पर ध्यान दें।

 

Question 6. गॉल्जीकाय की सचित्र संरचना व कार्य बताओ।
Answer: गॉल्जी उपकरण को केमिलो गॉल्जी ने 1898 में उल्लू की तंत्रिका कोशिकाओं में खोजा था। इसलिए इसका नाम उनके नाम पर गॉल्जीकाय पड़ा। यह प्रोकैरियोटिक कोशिकाओं में नहीं पाया जाता है, लेकिन यूकेरियोटिक कोशिकाओं में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। गॉल्जीकाय की आकृति एक जैसी नहीं रहती, यह जरूरत के हिसाब से बदलती रहती है, इसलिए इसे बहुरूपीय भी कहते हैं। गॉल्जीकाय में सिस्टर्नी, वेसीकल और स्रावी पुटिकाएँ जैसे मुख्य भाग होते हैं। इसकी एक उत्तल सतह होती है जिसे 'सिस फेस' (निर्माणकारी सिरा) कहते हैं, और एक अवतल सतह होती है जिसे 'ट्रांस फेस' (परिपक्वन सिरा) कहते हैं। सिस फेस केन्द्रक की ओर होता है, जबकि ट्रांस फेस प्लाज्मा झिल्ली की ओर होता है। गॉल्जीकाय लिपिड और वसा से भरपूर होता है, इसलिए इसे लाइपोकोंड्रिया भी कहते हैं। यह कोशिका में पदार्थों को छाँटने, पैक करने और भेजने का काम करता है, जो कोशिका के लिए बहुत जरूरी है। मैट्रिक्स M-site रिक्तिका लैमिली वेसिकल F-site गॉल्जीकाय **गॉल्जीकाय के कार्य (Functions of Golgibody):**
1. **स्रवण (Secretion):** गॉल्जीकाय का मुख्य कार्य पदार्थों को स्रावित करना है। यह अग्न्याशय, श्लेष्मिल, स्तन ग्रंथि और थाइरोक्सिन कोशिकाओं जैसी स्रावी कोशिकाओं में अधिक संख्या में पाया जाता है। यह विशेषकर प्रोटीन को पैक करके कोशिका से बाहर भेजने में मदद करता है। 2. **कोशिका पट्टी निर्माण (Cell Plate Formation):** कोशिका विभाजन के दौरान, यह स्रावी पुटिकाओं को जोड़कर कोशिका पट्टी बनाने में सहायक होता है। 3. **हार्मोन निर्माण (Hormone Formation):** कोशिका के भीतर कुछ हार्मोनों का निर्माण गॉल्जीकाय में होता है। 4. **लाइसोसोम निर्माण व संग्रह (Lysosome Formation and Storage):** यह लाइसोसोम बनाने और विभिन्न पदार्थों को इकट्ठा करने, पैक करने और एक जगह से दूसरी जगह भेजने का काम करता है। 5. **पॉलीसैकेराइड संश्लेषण (Polysaccharide Synthesis):** गॉल्जीकाय श्लेष्मा, गोंद, एंजाइम और पॉलीसैकेराइड जैसे जटिल कार्बोहाइड्रेट्स को बनाने में भी शामिल होता है। 6. **प्रोटीन व वसा का संग्रह (Protein and Fat Storage):** यह वेसीकल्स के अंदर प्रोटीन और वसा को जमा करता है। 7. **ग्लाइकोप्रोटीन निर्माण (Glycoprotein Formation):** यह कार्बोहाइड्रेट को प्रोटीन के साथ जोड़कर ग्लाइकोप्रोटीन बनाता है। 8. **उत्सर्जी पदार्थों का निष्कासन (Excretion of Waste Products):** यह कोशिका से बेकार पदार्थों को बाहर निकालने में मदद करता है। 9. **शुक्राणु एक्रोसोम निर्माण (Sperm Acrosome Formation):** शुक्राणु में एक्रोसोम नामक संरचना के निर्माण में गॉल्जीकाय की भूमिका महत्वपूर्ण है। 10. **कोशिका झिल्ली निर्माण (Cell Membrane Formation):** यह कोशिका झिल्ली बनाने के लिए आवश्यक लाइपोप्रोटीन को स्रावित करता है।
In simple words: गॉल्जीकाय एक कोशिकांग है जो कोशिका के अंदर चीजों को पैक करने और एक जगह से दूसरी जगह भेजने का काम करता है। यह कोशिका की बाहरी परत बनाने और शुक्राणु के सिर जैसे खास हिस्से बनाने में भी मदद करता है। यह कोशिका के लिए एक पोस्ट ऑफिस की तरह काम करता है।

🎯 Exam Tip: गॉल्जीकाय के "सिस" और "ट्रांस" फेस के कार्यों को हमेशा याद रखें, क्योंकि यह प्रोटीन और लिपिड को संशोधित और पैक करने की इसकी क्षमता के लिए महत्वपूर्ण है।

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