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Detailed Chapter 7 कोशिका भित्ति एवं कोशिका झिल्ली-संरचना एवं क RBSE Solutions for Class 11 Biology
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Class 11 Biology Chapter 7 कोशिका भित्ति एवं कोशिका झिल्ली-संरचना एवं क RBSE Solutions PDF
Rbse Class 11 Biology Chapter 7 पाठ्यपुस्तक के प्रश्न
Rbse Class 11 Biology Chapter 7 वस्तुनिष्ठ प्रश्न
Question 1. मध्य पट्टलिका किसकी बनी होती है ?
(अ) लिग्निन
(ब) पेक्टिन
(स) कैल्शियम एवं मैग्नीशियम पेक्टेट
(द) सेलूलोस
Answer: (स) कैल्शियम एवं मैग्नीशियम पेक्टेट
In simple words: मध्य पट्टलिका (मिडिल लेमेला) पौधों की कोशिकाओं के बीच की परत होती है, जो मुख्य रूप से कैल्शियम और मैग्नीशियम पेक्टेट से बनी होती है. यह परत कोशिकाओं को एक साथ जोड़ने का काम करती है.
🎯 Exam Tip: मध्य पट्टलिका का संघटन याद रखें, खासकर कैल्शियम और मैग्नीशियम पेक्टेट के योगदान पर ध्यान दें, क्योंकि यह अक्सर पूछा जाता है.
Question 2. कोशिका भित्ति के निर्माण में जो पदार्थ सर्वाधिक पाया जाता है, वह है -
(अ) प्रोटीन
(ब) वसा
(स) सेल्यूलोज
(द) लिग्निन
Answer: (स) सेल्यूलोज
In simple words: पौधों की कोशिका भित्ति मुख्य रूप से सेल्यूलोज से बनी होती है. यह एक जटिल कार्बोहाइड्रेट है जो कोशिका भित्ति को उसकी कठोरता और संरचना देता है.
🎯 Exam Tip: कोशिका भित्ति के प्राथमिक घटक के रूप में सेल्यूलोज की पहचान महत्वपूर्ण है, क्योंकि यह इसकी संरचना और कार्यक्षमता का आधार है.
Question 3. कोशिका भित्ति के निर्माण में जो पदार्थ सर्वाधिक पाया जाता है, वह है -
(अ) साइक्लोसिस
(ब) एक्सोसाइटोसिस
(स) एंडोसाइटोसिस
(द) उपरोक्त तीनों
Answer: (स) एंडोसाइटोसिस
In simple words: एंडोसाइटोसिस वह प्रक्रिया है जहाँ कोशिका बाहरी पदार्थों को अपनी झिल्ली के अंदर ले जाती है, उन्हें घेरकर एक थैली (वेसिकल) बनाती है. यह कोशिका के लिए पोषक तत्व प्राप्त करने का एक महत्वपूर्ण तरीका है.
🎯 Exam Tip: एंडोसाइटोसिस, एक्सोसाइटोसिस और साइक्लोसिस के बीच के अंतर को स्पष्ट रूप से समझें; प्रत्येक प्रक्रिया के कार्य और दिशा को याद रखें.
Question 4. सेलूलोस के एक अणु का निर्माण होता है -
(अ) तीन हजार ग्लूकोज अणुओं से
(ब) तीस हजार ग्लूकोज अणुओं से
(स) तीस हजार फुक्टोज अणुओं से
(द) तीस हजार ग्लेक्टोस अणुओं से
Answer: (अ) तीन हजार ग्लूकोज अणुओं से
In simple words: सेल्यूलोज एक बड़ा अणु है, जो कई छोटी इकाइयों से मिलकर बनता है. सेल्यूलोज का एक अणु लगभग तीन हजार ग्लूकोज इकाइयों से बनता है.
🎯 Exam Tip: सेल्यूलोज एक पॉलीसेकेराइड है, जिसका मतलब है कि यह कई मोनोसेकेराइड (ग्लूकोज) इकाइयों से बना होता है. इसकी जटिल संरचना को समझने के लिए यह संख्या याद रखना उपयोगी है.
Question 5. सरल गर्त पाये जाते हैं -
(अ) दृढ़ोतक में
(ब) स्थूलकोण ऊतक में
(स) चालनी नलिका में
(द) वाहिकाओं में
Answer: (द) वाहिकाओं में
In simple words: सरल गर्त कोशिका भित्ति में पतले क्षेत्र होते हैं जो आस-पास की कोशिकाओं के बीच संचार की अनुमति देते हैं. ये विशेष रूप से वाहिकाओं में पाए जाते हैं.
🎯 Exam Tip: सरल गर्त और परिवेशित गर्त के बीच के अंतर को समझना महत्वपूर्ण है, जिसमें उनके स्थान और संरचनात्मक विशेषताएं शामिल हैं.
Rbse Class 11 Biology Chapter 7 अतिलघूत्तरात्मक प्रश्न
Question 1. एक कला सिद्धान्त किसने प्रस्तुत किया था ?
Answer: एक कला सिद्धान्त रॉबर्टसन ने प्रस्तुत किया था। इस सिद्धांत ने बताया कि सभी जैविक झिल्लियाँ एक मूल इकाई झिल्ली संरचना साझा करती हैं. रॉबर्टसन का मॉडल त्रिस्तरीय संरचना पर आधारित था, जिसमें प्रोटीन की दो परतों के बीच एक लिपिड की परत होती है.
In simple words: सेल मेम्ब्रेन का एक जैसा होने का विचार रॉबर्टसन ने दिया था.
🎯 Exam Tip: रॉबर्टसन के 'एक कला सिद्धान्त' के प्रतिपादक का नाम और इस सिद्धांत की मुख्य अवधारणा को याद रखें.
Question 2. कोशिका भित्ति किससे बनी होती है ?
Answer: कोशिका भित्ति सेल्यूलोज, काइटिन, पेक्टिन आदि से बनी होती है। पौधों में यह मुख्य रूप से सेल्यूलोज की बनी होती है, जबकि कवक में यह काइटिन से बनी होती है. यह कोशिका को संरचनात्मक सहायता और सुरक्षा प्रदान करती है.
In simple words: कोशिका भित्ति सेल्यूलोज, काइटिन और पेक्टिन जैसी चीजों से बनती है.
🎯 Exam Tip: कोशिका भित्ति के मुख्य घटकों को याद रखें और यह भी कि ये घटक विभिन्न जीवों (जैसे पौधे और कवक) में कैसे भिन्न होते हैं.
Question 3. लिग्निन कोशिका में सर्वाधिक कहाँ पाया जाता है?
Answer: लिग्निन कोशिका में सर्वाधिक दृढ़ोतक (Sclerenchyma) ऊतक की कोशिकाओं में पाया जाता है, खासकर जाइलम वाहिकाओं और ट्रेकीड्स में। यह पौधों को यांत्रिक शक्ति और कठोरता प्रदान करता है, जिससे वे खड़े रह पाते हैं. लिग्निन लकड़ी का एक प्रमुख घटक है.
In simple words: लिग्निन पौधों की कोशिकाओं को मजबूत बनाने वाला पदार्थ है, यह जाइलम जैसी मजबूत कोशिकाओं में सबसे ज्यादा मिलता है.
🎯 Exam Tip: लिग्निन की उपस्थिति वाले ऊतकों और उसके कार्य (जैसे यांत्रिक सहायता) को याद रखना महत्वपूर्ण है.
Question 5. एंडोसाइटोसिस किसे कहते हैं ?
Answer: कोशिका झिल्ली द्वारा बाहरी पदार्थों को घेरकर पाचन करने को एंडोसाइटोसिस कहा जाता है। यह वह प्रक्रिया है जिसमें कोशिकाएं अपनी झिल्ली का उपयोग करके कणों या तरल पदार्थों को अंदर लेती हैं, एक वेसिकल बनाकर. यह कोशिका के लिए पोषक तत्वों को ग्रहण करने और प्रतिरक्षा प्रतिक्रियाओं में महत्वपूर्ण है.
In simple words: जब कोशिका बाहर की चीजों को अपनी झिल्ली से घेरकर अंदर लेती है, तो उसे एंडोसाइटोसिस कहते हैं.
🎯 Exam Tip: एंडोसाइटोसिस की परिभाषा और इसके प्रकार (जैसे पिनोसाइटोसिस और फेगोसाइटोसिस) को अच्छी तरह से समझें.
RBSE Class 11 Biology Chapter 7 लघूत्तरात्मक प्रश्न
Question 1. गर्त किसे कहते हैं ? ये कितने प्रकार के होते हैं ?
Answer: कोशिकाओं में स्थूलन सभी स्थानों पर समान मोटाई का होता है परन्तु किन्हीं स्थानों पर यह स्थूलन छूट जाता है। ऐसे स्थल जहाँ पर लिग्निन जमा नहीं हुई तो उसे गर्त (Pits) कहते हैं। ये दो प्रकार के होते हैं –
1. सरल गर्त (Simple Pits)
2. निवेशित गर्त (Bordered Pits)
ये गर्त आसन्न कोशिकाओं के बीच पदार्थों के आदान-प्रदान के लिए मार्ग प्रदान करते हैं, जिससे उनके बीच संचार संभव होता है.
In simple words: गर्त कोशिका भित्ति में पतले या बिना लिग्निन वाले हिस्से होते हैं, जो दो तरह के होते हैं - सरल गर्त और निवेशित गर्त.
🎯 Exam Tip: गर्त की परिभाषा, उनके प्रकार और आसन्न कोशिकाओं के बीच संचार में उनकी भूमिका को स्पष्ट रूप से समझें.
Question 2. प्लाज्मोडेस्मैटा किसे कहते हैं ?
Answer: प्लाज्मोडेस्मैटा (Plasmodesmata) को जीवद्रव्य तंतु भी कहते हैं। इसकी खोज टैग्ली ने 1879 में की थी। इसका विस्तारपूर्वक अध्ययन स्ट्रासबर्गर (1901) द्वारा किया गया था। जीवद्रव्य तंतु या साइटोप्लामिक स्ट्रेण्ड गर्त में उपस्थित होते हैं। जिसके द्वारा एक कोशिका का कोशिकाद्रव्य दूसरी कोशिका के कोशिकाद्रव्य के सम्पर्क में रहता है। जीवद्रव्य तन्तु (Plasmodesmata) की उत्पत्ति में अन्तःप्रदव्यी जालिका (Endoplasmic reticulum) महत्त्वपूर्ण भूमिका निभाता है। प्लाज्मोडेस्मेटा के द्वारा कोशिकाद्रव्य की निरन्तरता बनी रहती है। ऐसी स्थिति में कोशिकाद्रव्य को प्रायः संदव्य (Symplasm) कहते हैं। इसके विपरीत अन्तराकोशिकीय स्थल जिनमें अजैव पदार्थ विद्यमान होते हैं, अपद्रव्य (Apoplasm) कहलाता है। ये पौधे की कोशिकाओं में पाए जाने वाले सूक्ष्म चैनल हैं जो उनके कोशिका द्रव्य को जोड़ते हैं, जिससे पानी, छोटे अणु और मैक्रोमोलेक्यूल्स के सीधे संचार और परिवहन की अनुमति मिलती है.
In simple words: प्लाज्मोडेस्मैटा पौधों की कोशिकाओं के बीच छोटे-छोटे रास्ते होते हैं, जो कोशिकाद्रव्य को आपस में जोड़ते हैं, जिससे वे एक-दूसरे से जुड़कर काम कर सकें.
🎯 Exam Tip: प्लाज्मोडेस्मैटा की परिभाषा, इसके कार्य (संचार और परिवहन), और इससे संबंधित सिम्प्लाज्म और एपोप्लाज्म की अवधारणाओं को समझें.
Question 3. पिनोसाइटोसिस एवं फेगोसाइटोसिस से आप क्या समझते हैं ?
Answer:
1. पिनासाइटाासस (Pinocytosis): कोशिका झिल्ली द्वारा तरल पदार्थों को ग्रहण करना पिनोसाइटोसिस कहलाता है। यह कोशिका 'पीना' या सेल ड्रिंकिंग भी कहलाती है, क्योंकि इसमें कोशिका बाहरी तरल पदार्थों को छोटे वेसिकल्स के रूप में अंदर लेती है. इस प्रक्रिया में, कोशिका अपनी बाहरी झिल्ली को मोड़कर एक छोटी थैली बनाती है जिसमें तरल पदार्थ और उसमें घुले हुए अणु होते हैं. यह थैली फिर कोशिका के अंदर टूटकर मिल जाती है.
2. फेगोसाइटोसिस (Phagocytosis): कोशिका झिल्ली द्वारा ठोस पदार्थों को ग्रहण करना फेगोसाइटोसिस कहलाता है। इसे कोशिका 'खाना' या सेल ईटिंग भी कहते हैं, क्योंकि इसमें कोशिका बड़े ठोस कणों जैसे बैक्टीरिया या सेलुलर मलबे को अंदर लेती है. इसमें कोशिका झिल्ली ठोस कणों के चारों ओर सूडोपोडिया (झूठे पैर) बनाकर उसे पूरी तरह से घेर लेती है, जिससे एक बड़ी वेसिकल (फेगोसोम) बन जाती है जो कोशिका के अंदर चली जाती है. यह प्रतिरक्षा प्रणाली की कोशिकाओं में विशेष रूप से महत्वपूर्ण है.
In simple words: पिनोसाइटोसिस में कोशिका तरल पदार्थों को अंदर लेती है, जबकि फेगोसाइटोसिस में ठोस पदार्थों को अंदर लेती है.
🎯 Exam Tip: पिनोसाइटोसिस और फेगोसाइटोसिस की परिभाषाएँ, दोनों के बीच के अंतर (तरल बनाम ठोस), और प्रत्येक के उदाहरणों को याद रखें.
Question 5. स्थूलन किसे कहते हैं ?
Answer: प्रारम्भिक भित्ति की आन्तरिक सतह पर द्वितीयक भित्ति बनती है तब स्थूलन (thickening) प्रारम्भ होता है। सभी कोशिकाओं में यह क्रिया नहीं पाई जाती है बल्कि केवल उन कोशिकाओं में ही होती है जिनको या तो संवहन का कार्य करना होता है या पादप को दृढ़ता (mechanical strength) प्रदान करनी होती है। कोशिका भित्ति का स्थूलन सामान्यतया लिग्निन (Lignin), सेल्यूलोज, हेमीसेल्यूलोज, सुबेरिन आदि पदार्थों के जमाव के कारण होता है। स्थूलन के कारण कोशिकाएँ विभिन्न प्रकार के आकार बना लेती हैं, जैसे-सर्पिल, सोपानवत्, जालिकारूपी, छल्लेदार या वलयदार, सपाट गर्तमय आदि। यह प्रक्रिया कोशिका भित्ति को अतिरिक्त शक्ति और सुरक्षा प्रदान करती है.
In simple words: स्थूलन वह प्रक्रिया है जिसमें कोशिका भित्ति पर लिग्निन या सेल्यूलोज जैसे पदार्थ जमा होकर उसे मोटा और मजबूत बनाते हैं, जिससे उसे संरचनात्मक सहायता मिलती है.
🎯 Exam Tip: स्थूलन की परिभाषा, इसमें शामिल पदार्थ (जैसे लिग्निन) और इससे बनने वाले विभिन्न आकारों को समझना महत्वपूर्ण है.
Question 6. कोशिका भित्ति के दो कार्य बताइए।
Answer: कोशिका भित्ति के कार्य –
1. कोशिका को निश्चित आकृति एवं आकार प्रदान करती है।
2. कोशिका को यांत्रिक शक्ति प्रदान करती है।
इसके अतिरिक्त, कोशिका भित्ति कोशिका को बाहरी तनाव और रोगों से बचाती है, साथ ही कोशिका के अंदर पानी के दबाव को नियंत्रित करती है.
In simple words: कोशिका भित्ति कोशिका को एक खास आकार देती है और उसे मजबूत बनाती है.
🎯 Exam Tip: कोशिका भित्ति के प्रमुख कार्यों को याद रखें, जैसे कि कोशिका का आकार बनाए रखना और उसे यांत्रिक सहायता प्रदान करना.
Question 7. कोशिका झिल्ली के दो प्रमुख कार्य बताइए।
Answer: कोशिका झिल्ली के कार्य -
(1) कोशिका झिल्ली चयनात्मक झिल्ली की तरह कार्य करती है, इसके द्वारा पदार्थों का संवहन दो विधियों से होता है –
(2) कोशिकांगों की सुरक्षा करती है, प्लाज्मा झिल्ली से अन्त:प्रद्रव्यी जालिका का निर्माण होता है।
कोशिका झिल्ली कोशिका के आंतरिक वातावरण को बाहरी वातावरण से अलग करती है और कोशिका के अंदर और बाहर पदार्थों की गति को नियंत्रित करती है. यह कोशिका की अखंडता बनाए रखने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है.
In simple words: कोशिका झिल्ली चीजों को अंदर-बाहर आने से रोकती है और कोशिका के अंगों को बचाती है.
🎯 Exam Tip: कोशिका झिल्ली के कार्यों को याद रखें, खासकर इसकी चयनात्मक पारगम्यता (selective permeability) और कोशिकांगों की सुरक्षा में इसकी भूमिका.
RBSE Class 11 Biology Chapter 7 निबन्धात्मक प्रश्न
Question 1. कोशिका भित्ति की संरचना का सचित्र वर्णन करो।
Answer: कोशिका भित्ति की संरचना:
इलेक्ट्रॉन सूक्ष्मदर्शी द्वारा देखने पर सभी परतों की सूक्ष्मतम संरचना का ज्ञान प्राप्त किया जा सकता है। इसके अनुसार कोशिका भित्ति में दो प्रमुख भाग पाये जाते हैं –
1. तन्तुक या फाइब्रिल्स (Fibrils)
2. मैट्रिक्स (Matrix)
(i) तन्तुक (Fibrils):
ये सेल्यूलोज से बने तन्तु होते हैं। एक सेल्यूलोज \( \text{(C}_6\text{H}_{10}\text{O}_5\text{)} \) अणु का निर्माण तीन हजार ग्लूकोज अणुओं से मिलकर बना होता है। सेल्यूलोज के लगभग 100 अणु मिलकर एक माइसिली (Micelle) या मिसेल बनाते हैं। लगभग 20 माइसिली से एक सूक्ष्मतंतुक (Microfibril) तथा लगभग 250 सूक्ष्मतंतुओं से एक गुरुतंतुक (Macrofibril) बनता है। जिसका व्यास 250 Å होता है। इन तन्तुककों (Fibrils) के बीच मैट्रिक्स (Matrix) भरा होता है। ये तन्तुक प्राथमिक भित्ति (Primary Wall) में अनुप्रस्थ (Transverse) तथा द्वितीयक भित्ति (Secondary Wall) में अक्ष के समानान्तर होते है।
(ii) मैट्रिक्स (Matrix):
कोशिका भित्ति का यह आधारीय भाग है। इसमें हेमीसेल्यूलोज, पेक्टिन ग्लाइकोप्रोटीन्स लिपिड जल आदि पदार्थ पाये जाते हैं। यह प्राथमिक एवं द्वितीयक कोशिका भित्ति के मध्य पाया जाता है। यह अक्रिस्टलीय एवं जैली के समान होता है। इसके अतिरिक्त इसमें सिलिका, टैनिन, रेजिन, गोंद एवं मोम आदि भी हो सकते हैं। मैट्रिक्स एक गैर-सेल्यूलोज पदार्थ है जो तंतुओं के बीच के स्थान को भरता है, जिससे कोशिका भित्ति को अतिरिक्त शक्ति और लचीलापन मिलता है.
In simple words: कोशिका भित्ति में रेशेदार तंतु होते हैं जो सेल्यूलोज से बनते हैं, और एक मैट्रिक्स होता है जो इन तंतुओं को जोड़े रखता है और अन्य पदार्थों से बना होता है.
🎯 Exam Tip: कोशिका भित्ति के प्रमुख घटक (तंतु और मैट्रिक्स) और प्रत्येक की संरचनात्मक इकाइयों को याद रखें. आरेख को सरल रूप में बनाने का अभ्यास करें.
Question 2. जीवद्रव्य तन्तु की संरचना को समझाइए।
Answer: इनको जीवद्रव्यी तन्तु (Plasmodesmata) कहते हैं। इनमें प्लाज्मा झिल्ली का स्तर तथा डेस्मोट्यूब्यूल के रूप में अन्तःप्रद्रव्य जालिका (Endoplasmic reticulum) पाई जाती है। जीवद्रव्यी तन्तु (Plasmodesmata) के द्वारा कोशिका द्रव्य की निरन्तरता बनी रहती है। ऐसी स्थिति में कोशिकाद्रव्य को प्रायः संद्रव्य (Symplasm) कहते हैं। इसके विपरीत अन्तराकोशिकीय स्थल (Intra cellular space) जिनमें अजैव पदार्थ उपस्थित होते हैं उसे अपद्रव्य (apoplasm) कहते हैं। जीवद्रव्य तन्तु (Plasmodesmata) की खोज टैग्ली ने 1879 में की थी। इसका विस्तारपूर्वक अध्ययन स्ट्रासबर्गर द्वारा 1901 में किया गया था। जीवद्रव्य तन्तु की उत्पत्ति में अन्तःप्रदव्यी जालिका महत्त्वपूर्ण भूमिका निभाती है। प्लाज्मोडेस्मैटा दो आसन्न पादप कोशिकाओं के कोशिकाद्रव्य को जोड़ने वाले सूक्ष्म चैनल होते हैं. ये चैनल कोशिका भित्ति से होकर गुजरते हैं और कोशिका झिल्ली से घिरे होते हैं, जिनमें डेस्मोट्यूब्यूल (एंडोप्लाज्मिक रेटिकुलम का एक संशोधित हिस्सा) मौजूद होता है. यह संरचना कोशिका-से-कोशिका संचार और पदार्थों के परिवहन को संभव बनाती है.
In simple words: जीवद्रव्य तन्तु या प्लाज्मोडेस्मैटा छोटे रास्ते होते हैं जो पौधों की दो पास की कोशिकाओं के बीच होते हैं, जिससे उनका कोशिकाद्रव्य आपस में जुड़ा रहता है.
🎯 Exam Tip: प्लाज्मोडेस्मैटा की संरचना और कार्य को समझें, विशेष रूप से कोशिका-से-कोशिका संचार और सिम्प्लाज्म/एपोप्लाज्म अवधारणाओं में इसकी भूमिका को याद रखें.
Question 3. स्थूलन से क्या अभिप्राय है ? इसके विभिन्न प्रकारों का वर्णन कीजिए।
Answer: जब कोशिका अपना पूरा आकार व परिमाप प्राप्त कर चुकी होती है तब कोशिका भित्ति का स्थूलन (Thickening) प्रारम्भ होता है। सभी कोशिकाओं में यह क्रिया नहीं पाई जाती है बल्कि केवल उन कोशिकाओं में ही होती है जिनको या तो संवहन का कार्य करना होता है या पादप को दृढ़ता (mechanical strength) प्रदान करनी होती है। स्थूलन कोशिका भित्ति के पदार्थों, जैसे लिग्निन, सेल्यूलोज या सुबेरिन के जमाव की प्रक्रिया है, जिससे भित्ति मोटी और मजबूत हो जाती है। यह कोशिका को यांत्रिक शक्ति और सहारा प्रदान करता है, जिससे पौधे खड़े रह पाते हैं.
इसके विभिन्न प्रकार निम्नलिखित हैं:
(i) जालिकावत (Reticulate): इसमें स्थूलन की प्लेट्स कोशिका भित्ति की भीतरी स्तर पर जालीदार व्यवस्था बनाती है और बीच-बीच में अस्फूलित स्थानों पर अनियमित गड्ढे पाये जाते हैं।
(ii) सर्पिल (Spiral): इसमें स्थूलन की एक या अधिक पट्टी कोशिका भित्ति की भीतरी सतह पर सर्पिल ढंग से नीचे से ऊपर तक चढ़ती है। कोशिका में अन्य स्थानों पर स्थूलन नहीं पाया जाता है। यह आदिदास (Protoxylem) की कोशिकाओं में पाया जाता है।
(iii) सोपानवत् (Scalariform): इसमें स्थूलन सीढ़ी के डण्डों की तरह अनुप्रस्थ दिशा में होता है। यह जाइलम दो वाहिकाओं एवं वाहिनिकाओं में पाया जाता है।
(iv) छल्लेदार (Annular): इसमें लिग्निन का जमाव छल्ले या वलय के रूप में होता है, यह स्थूलन प्रोटोजाइलम की वाहिन एवं वाहिनिकाओं में पाया जाता है।
(v) सपाट (Uniform Smooth): इस प्रकार का स्थूलन सभी स्थानों पर समान मोटाई का होता है। कोशिकाओं में स्थूलन सभी स्थानों पर समान मोटाई का होता है। परन्तु किन्हीं स्थानों पर यह स्थूलन छूट जाता है। ऐसे स्थल जहाँ लिग्निन जमा नहीं हुई तो उसे गर्त (Pit) कहते हैं। ये गर्त (Pits) दो प्रकार के होते हैं –
(अ) सरल गर्त (Simple Pits): ये किसी कोशिका भित्ति पर देखने में गोल एवं लम्बाई में बेलनाकार दिखाई देते हैं। ये जिस भित्ति पर बनते हैं उसके साथ की कोशिका की भित्ति पर भी बनते हैं अर्थात् ये जोड़ों (pairs) के रूप में होते हैं। दोनों कोशिकाओं की कोशिका भित्तियों पर उपस्थित् इन गर्त युग्मों (Pits pairs) को केवल मध्य पटलिका (middle laminella) तथा प्राथमिक भित्ति (primary wall) को ही अलग-अलग करती है। अतः इन दोनों को यहाँ सम्मिलित रूप में गर्त कला (pit membrane) कहते हैं। इस गर्त कला के माध्यम से जल एवं मृदूतक, चालनी नलिका, सहकोशिकाओं में इस प्रकार के गर्त पाये जाते हैं।
(ब) परिवेशित गर्त (Bordered Pits): इस प्रकार के गर्गों में पास वाली कोशिकाओं की द्वितीयक भित्ति फूलंकर गर्त के चारों ओर गोल गुम्बद या फनल के समान उठी रहती है। इस उठे हुए भाग को बार्डर (border) कहते हैं। इसके केन्द्रक में गोल या लैन्स के आकार का छिद्र होता है, जिसे गर्त छिद्र (pits pore) कहते हैं। आमने-सामने से गर्तों के बीच एक गर्त-झिल्ली (pit membrane) होती है। इसका केन्द्रीय भाग कुछ स्थूलता लिए हुए होता है। इसे टोरस (torus) कहते हैं। सतही दृश्य में इस गर्त के दो घेरे दिखाई देते हैं। छोटा घेरा गर्त को प्रदर्शित करता है और बड़ा घेरा गर्त के चारों ओर के स्थान को प्रदर्शित करता है। टोरस (torus) द्रव्यों के विसरण को नियंत्रित करता है। जब द्रव का दबाव टोरस के दोनों ओर समान होता है तब दोनों छिद्र खुले रहते हैं परन्तु दबाव में परिवर्तन होने पर यह टोरस खिसककर एक ओर छिद्र को ढककर बंद कर देता है। इस तरह टोरस एक कपाट (valve) का कार्य करता है।
In simple words: स्थूलन कोशिका भित्ति को मजबूत बनाने की प्रक्रिया है, जिसमें लिग्निन जैसे पदार्थ जमा होते हैं. यह कई तरह का होता है, जैसे जालीदार, सर्पिल, सोपानवत् और छल्लेदार.
🎯 Exam Tip: स्थूलन की परिभाषा और प्रत्येक प्रकार के स्थूलन की मुख्य विशेषताओं को याद रखना महत्वपूर्ण है, साथ ही उनके आरेखीय निरूपण को भी समझना चाहिए.
Question 4. कोशिका झिल्ली के विभिन्न कार्यों का विस्तार से उल्लेख करो।
Answer: कोशिका झिल्ली के विभिन्न कार्य निम्नलिखित हैं:
1. कोशिका झिल्ली, कोशिका को निश्चित आकृति एवं आकार प्रदान करती है। यह कोशिका के आंतरिक वातावरण को बनाए रखने में मदद करती है.
2. कोशिकांगों की सुरक्षा करती है, प्लाज्मा झिल्ली से ER का निर्माण होता है। यह कोशिका के महत्वपूर्ण अंगों को बाहरी नुकसान से बचाती है.
3. परासरण क्रिया को नियंत्रित करती है। कोशिका झिल्ली पानी और विलेय पदार्थों की गति को नियंत्रित करके कोशिका के अंदर और बाहर संतुलन बनाए रखती है.
4. जीवाणु कोशिकाओं में कोशिका झिल्ली पर श्वसन एंजाइम पाये जाते हैं। यह जीवाणुओं में ऊर्जा उत्पादन के लिए एक महत्वपूर्ण स्थल है.
5. यह कोशिका आसंजन में सहायता करती है। कोशिकाएं एक-दूसरे से जुड़ने और ऊतक बनाने के लिए कोशिका झिल्ली का उपयोग करती हैं.
6. एंडोसाइटोसिस (Endocytosis): जब बाहरी पदार्थ को कोशिका द्वारा अन्तर्ग्रहण किया जाता है तो इसे पिनेकोसाइटोसिस (Pinacocytosis) तथा ठोस पदार्थों का अन्तर्ग्रहण हो तो फेगोसाइटोसिस (Phagocytosis) कहते हैं। यह कोशिका को पोषक तत्व ग्रहण करने और अवांछित पदार्थों को हटाने में मदद करती है.
7. एक्सोसाइटोसिस (Exocytosis): कोशिका द्वारा अनावश्यक पदार्थों को कोशिका झिल्ली से बाहर निकालना एक्सोसाइटोसिस कहलाता है। यह क्रिया स्रावी कोशिकाओं (Secretory cells) में पायी जाती है। यह कोशिका से अपशिष्ट और स्रावी पदार्थों को बाहर निकालने का तरीका है.
कोशिका झिल्ली चयनात्मक झिल्ली की तरह कार्य करती है। इसके द्वारा पदार्थों का संवहन निम्न दो विधियों से होता है –
(i) निष्क्रिय अभिगमन (Passive Transport): जब विभिन्न प्रकार के आयन कोशिका कला के द्वारा अपने अधिक सान्द्रता के स्थान से कम सान्द्रता क्षेत्र की तरफ जाते हैं, परन्तु यह गति रासायनिक या विद्युत प्रवणता (Gradient) पर निर्भर होती है तथा इसमें ऊर्जा की आवश्यकता नहीं होती है। जैसे-परासरण और विसरण।
यह कोशिका झिल्ली कोशिका के अस्तित्व और कार्यप्रणाली के लिए आवश्यक है, क्योंकि यह कोशिका के अंदर और बाहर के वातावरण के बीच एक महत्वपूर्ण बाधा और संचार माध्यम के रूप में कार्य करती है.
In simple words: कोशिका झिल्ली कोशिका को आकार देती है, अंदर के अंगों को बचाती है, पानी और पदार्थों को अंदर-बाहर जाने देती है, और कोशिका के लिए खाना लेने या बेकार चीजें निकालने में मदद करती है.
🎯 Exam Tip: कोशिका झिल्ली के प्रमुख कार्यों को बिन्दुवार याद रखें, खासकर इसकी चयनात्मक पारगम्यता, परिवहन (सक्रिय और निष्क्रिय), और कोशिका पहचान में इसकी भूमिका.
RBSE Class 11 Biology Chapter 7 वस्तुनिष्ठ प्रश्न
Question 1. कोशिका झिल्ली को प्लाज्मालेमा नाम किसने दिया ?
(अ) पोर्टर
(ब) नागेली
(स) क्रोमर
(द) जे.क्यू. प्लोव
Answer: (द) जे.क्यू. प्लोव
In simple words: कोशिका झिल्ली को 'प्लाज्मालेमा' नाम जे.क्यू. प्लोव ने दिया था, जो कोशिका झिल्ली का एक वैकल्पिक नाम है.
🎯 Exam Tip: कोशिका झिल्ली से संबंधित प्रमुख वैज्ञानिकों के नामों और उनके योगदानों को याद रखें, खासकर विभिन्न नामों के लिए.
Question 2. कोशिका झिल्ली में सर्वाधिक मात्रा में पाया जाने वाला लिपिड है -
(अ) फास्फोलिपिड
(ब) स्टार्च
(स) तेल
(द) सल्फोलिपिड
Answer: (अ) फास्फोलिपिड
In simple words: कोशिका झिल्ली मुख्य रूप से फास्फोलिपिड्स से बनी होती है, जो एक दोहरी परत बनाते हैं और झिल्ली की मूल संरचना का निर्माण करते हैं.
🎯 Exam Tip: कोशिका झिल्ली के रासायनिक संघटन को समझें, विशेष रूप से फास्फोलिपिड्स की प्रचुरता और उनकी द्वि-परत संरचना को याद रखें.
Question 3. पादप कोशिकाओं में प्लाज्मा झिल्ली की निकटतम परत है -
(अ) द्वितीयक भित्ति
(ब) मध्य पटलिका
(स) प्राथमिक भित्ति
(द) टोनोप्लास्ट
Answer: (अ) द्वितीयक भित्ति
In simple words: पौधों की कोशिकाओं में, प्लाज्मा झिल्ली के ठीक बाहर द्वितीयक भित्ति होती है, जो कोशिका को और अधिक सहायता देती है.
🎯 Exam Tip: पादप कोशिका में कोशिका भित्ति की विभिन्न परतों का क्रम याद रखें, जैसे प्राथमिक, द्वितीयक और मध्य पटलिका, ताकि आप प्लाज्मा झिल्ली के निकटतम परत को पहचान सकें.
Question 4. डेस्मोसोम्स का किससे सम्बन्ध है -
(अ) कोशिका विभाजन
(ब) कोशिकीय उत्सर्जन
(स) साइटोलाइसिस
(द) कोशिका आसंजन
Answer: (द) कोशिका आसंजन
In simple words: डेस्मोसोम्स कोशिका आसंजन से जुड़े होते हैं, जिसका मतलब है कि वे कोशिकाओं को एक साथ कसकर जोड़ने में मदद करते हैं.
🎯 Exam Tip: डेस्मोसोम्स के कार्य और कोशिका आसंजन में उनकी भूमिका को समझें, विशेष रूप से उन ऊतकों में जहाँ कोशिकाएँ एक-दूसरे से मजबूती से जुड़ी होती हैं.
Question 5. जब एक कोशिका किसी कण को घेर लेती है तथा उसके चारों ओर एक वेसीकल बना लेती है तब यह घटना कहलाती है -
(अ) एक्सोसाइटोसिस
(ब) पीनोसाइटोसिस
(स) सायक्लोसिस
(द) परासरण
Answer: (ब) पीनोसाइटोसिस
In simple words: जब कोशिका किसी तरल या छोटे कण को घेरकर एक थैली बनाती है और उसे अंदर लेती है, तो इसे पीनोसाइटोसिस कहते हैं.
🎯 Exam Tip: कोशिका द्वारा पदार्थों के अंतर्ग्रहण की प्रक्रियाओं (एंडोसाइटोसिस, फेगोसाइटोसिस, पीनोसाइटोसिस) को अच्छी तरह से समझें और उनके बीच के अंतर को याद रखें.
Question 6. कोशिकीय सतह द्वारा तरल द्रव्य के चूसने की प्रक्रिया को कहते हैं -
(अ) फेगोसाइटोसिस
(ब) पीनोसाइटोसिस
(स) सायक्लोसिस
(द) परासरण
Answer: (ब) पीनोसाइटोसिस
In simple words: कोशिका की सतह द्वारा तरल पदार्थों को अंदर लेने की प्रक्रिया को पीनोसाइटोसिस कहते हैं, जिसे 'सेल ड्रिंकिंग' भी कहा जाता है.
🎯 Exam Tip: पीनोसाइटोसिस की परिभाषा और यह फेगोसाइटोसिस से कैसे भिन्न है, इसे स्पष्ट रूप से जानें, खासकर तरल पदार्थ के सेवन पर ध्यान दें.
Question 7. प्लाज्मा झिल्ली की रचना प्रदर्शित करने के लिए सबसे बाद में कौनसा मॉडल प्रदर्शित किया गया –
(अ) तरल मोजाइक मॉडल
(ब) पॉलीम्यूलर मॉडल
(स) एक कला मॉडल
(द) उपरोक्त में से कोई नहीं
Answer: (अ) तरल मोजाइक मॉडल
In simple words: तरल मोजाइक मॉडल कोशिका झिल्ली की संरचना को समझाने वाला सबसे नया और सबसे स्वीकृत मॉडल है.
🎯 Exam Tip: कोशिका झिल्ली के विभिन्न मॉडलों (जैसे सैंडविच मॉडल, एक कला मॉडल, और तरल मोजाइक मॉडल) के विकास क्रम और उनकी प्रमुख विशेषताओं को याद रखें.
Question 8. निम्न में से कौन पारगम्यता नियंत्रक है -
(अ) कोशिका झिल्ली
(ब) कोशिका भित्ति
(स) जीवद्रव्य
(द) कोशिका द्रव्य
Answer: (अ) कोशिका झिल्ली
In simple words: कोशिका झिल्ली कोशिका में अंदर-बाहर जाने वाले पदार्थों को नियंत्रित करती है, इसलिए इसे पारगम्यता नियंत्रक कहते हैं.
🎯 Exam Tip: कोशिका झिल्ली की चयनात्मक पारगम्यता (selective permeability) और पदार्थों की गति को नियंत्रित करने की उसकी क्षमता पर विशेष ध्यान दें.
Question 9. प्लाज्मा झिल्ली का प्रमुख कार्य है -
(अ) कोशिका में आने-जाने वाले पदार्थों का नियमन
(ब) खाद्य पदार्थों का संग्रह
(स) कोशिका की आकृति व अमाप बनाना
(द) कोशिका की क्रिया विधि पर नियंत्रण
Answer: (अ) कोशिका में आने-जाने वाले पदार्थों का नियमन
In simple words: प्लाज्मा झिल्ली का मुख्य काम है कोशिका के अंदर और बाहर जाने वाली चीजों को नियंत्रित करना.
🎯 Exam Tip: प्लाज्मा झिल्ली के सबसे महत्वपूर्ण कार्य के रूप में 'पदार्थों के नियमन' पर ध्यान दें, क्योंकि यह कोशिका की अखंडता और कार्यप्रणाली के लिए केंद्रीय है.
Question 10. 250 माइक्रो फाइब्रिल से बना होता है -
(अ) मिसेल
(ब) सूक्ष्मतन्तुक
(स) माइसिली
(द) मैक्रोफाइब्रिल
Answer: (द) मैक्रोफाइब्रिल
In simple words: मैक्रोफाइब्रिल एक बड़ी संरचना होती है जो लगभग 250 छोटे-छोटे माइक्रोफाइब्रिल से मिलकर बनती है.
🎯 Exam Tip: सेल्यूलोज संगठन की पदानुक्रमिक संरचना को याद रखें: सेल्यूलोज अणु से मिसेल, माइक्रोफाइब्रिल और अंत में मैक्रोफाइब्रिल तक.
Question 12. कोशिका भित्ति की सामर्थ्य और दृढ़ता जिस पदार्थ के कारण होती है, उसे कहते हैं -
(अ) सुबेरिन
(ब) सेल्यूलोज
(स) लिग्निन
(द) पैक्टिन
Answer: (स) लिग्निन
In simple words: लिग्निन वह पदार्थ है जो पौधों की कोशिका भित्ति को बहुत मजबूत और कठोर बनाता है, जिससे उसे सहारा मिलता है.
🎯 Exam Tip: लिग्निन के कार्य को याद रखें, जो पौधों की कोशिका भित्ति को दृढ़ता और यांत्रिक शक्ति प्रदान करता है.
Question 13. कार्क कोशिकाओं की भित्ति पर जमा हुआ पदार्थ होता है -
(अ) सेल्यूलोज
(ब) सुबेरिन
(स) क्यूटिन
(द) लिग्निन
Answer: (ब) सुबेरिन
In simple words: कार्क कोशिकाओं की दीवारों पर सुबेरिन नाम का एक पदार्थ जमा होता है, जो उन्हें पानी के लिए अभेद्य बना देता है.
🎯 Exam Tip: सुबेरिन की भूमिका को याद रखें, जो कार्क कोशिकाओं की भित्ति पर जमा होकर उन्हें जलरोधी और सुरक्षात्मक बनाता है.
Question 14. सेल्यूलोज अणुओं की संख्या की श्रृंखलाओं के बंडल को माइसेल कहते हैं। .... माइसेली मिलकर एक माइक्रोफाइब्रिल बनाते हैं।
(अ) 200, 10
(ब) 20, 100
(स) 10, 100
(द) 100, 20
Answer: (द) 100, 20
In simple words: लगभग 100 सेल्यूलोज अणु एक साथ मिलकर माइसेल बनाते हैं, और लगभग 20 माइसेली मिलकर एक माइक्रोफाइब्रिल बनाते हैं.
🎯 Exam Tip: सेल्यूलोज से माइक्रोफाइब्रिल तक की संरचनात्मक पदानुक्रम में अणुओं और माइसेली की संख्या को याद रखें.
Question 15. डेस्मोसोम किसका रूपान्तरण है -
(अ) प्लाज्मा झिल्ली का
(ब) केन्द्रक का
(स) गॉल्जीकाय का ।
(द) ER – न्यूक्लियस काम्पलेक्स का
Answer: (अ) प्लाज्मा झिल्ली का
In simple words: डेस्मोसोम प्लाज्मा झिल्ली में हुए बदलाव होते हैं, जो कोशिकाओं को एक साथ जोड़ने में मदद करते हैं.
🎯 Exam Tip: डेस्मोसोम की पहचान प्लाज्मा झिल्ली के रूपांतरण के रूप में करें और कोशिका आसंजन में उनकी भूमिका को याद रखें.
Question 16. सक्रिय अभिगमन (Active Transport) में -
(अ) ऊर्जा व्यय होती है
(ब) ऊर्जा व्यय नहीं होती है
(स) वाहक नहीं होते हैं
(द) उपरोक्त में से कोई नहीं
Answer: (अ) ऊर्जा व्यय होती है
In simple words: सक्रिय अभिगमन में, कोशिका को पदार्थों को एक जगह से दूसरी जगह ले जाने के लिए ऊर्जा खर्च करनी पड़ती है, खासकर जब उन्हें कम सांद्रता से अधिक सांद्रता की ओर ले जाना हो.
🎯 Exam Tip: सक्रिय अभिगमन और निष्क्रिय अभिगमन के बीच मुख्य अंतर को समझें, विशेष रूप से ऊर्जा की आवश्यकता के संबंध में.
Question 17. अधिचर्म पर किसके जमाव के कारण यह जल के लिए अपारगम्य हो जाती है।
(अ) सुबेरिन
(ब) क्यूटिन
(स) सिलिका
(द) कैल्सियम कार्बोनेट
Answer: (ब) क्यूटिन
In simple words: अधिचर्म पर क्यूटिन जमा होने से यह परत पानी के लिए अभेद्य हो जाती है, जिससे पौधों में पानी का नुकसान कम होता है.
🎯 Exam Tip: क्यूटिन की भूमिका को याद रखें, जो पौधों में पानी के नुकसान को कम करने के लिए एक जलरोधी परत बनाता है.
Question 18. कोशिका के बाह्यतम आवरण को “प्लाज्मा कला” नाम देने वाले वैज्ञानिक थे -
(अ) नोगली
(ब) सिंगर
(स) ओवरटोन
(द) जे.क्यू. एलोव
Answer: (द) जे.क्यू. एलोव
In simple words: जे.क्यू. एलोव वह वैज्ञानिक थे जिन्होंने कोशिका के बाहरी आवरण को "प्लाज्मा कला" नाम दिया था.
🎯 Exam Tip: विभिन्न वैज्ञानिकों और उनके द्वारा कोशिका झिल्ली को दिए गए नामों को याद रखना महत्वपूर्ण है.
Question 19. राबर्टसन द्वारा प्रस्तुत अवधारणा कहलाती है -
(अ) जालक मॉडल
(ब) तरल मोजेक मॉडल
(स) मिलेसर मॉडल
(द) एकल कला सिद्धान्त
Answer: (द) एकल कला सिद्धान्त
In simple words: रॉबर्टसन ने 'एकल कला सिद्धान्त' दिया था, जिसमें कहा गया था कि सभी जैविक झिल्लियाँ एक जैसी बुनियादी संरचना रखती हैं.
🎯 Exam Tip: रॉबर्टसन के एकल कला सिद्धान्त की मुख्य अवधारणा और अन्य झिल्ली मॉडलों से इसकी तुलना को समझें.
Question 20. सूक्ष्मांकुर किन कोशिकाओं में पाये जाते हैं -
(अ) पादप कोशिकाएँ
(ब) प्राणि कोशिकाएँ
(स) पादप व प्राणि कोशिकाएँ
(द) इनमें से कोई नहीं
Answer: (ब) प्राणि कोशिकाएँ
In simple words: सूक्ष्मांकुर (माइक्रोविलाई) मुख्य रूप से प्राणि कोशिकाओं में पाए जाते हैं, विशेषकर उन कोशिकाओं में जो अवशोषण का काम करती हैं.
🎯 Exam Tip: सूक्ष्मांकुर की उपस्थिति और कार्य (जैसे अवशोषण क्षेत्र बढ़ाना) को याद रखें और उन्हें पादप कोशिकाओं से अलग करें.
Question 21. सिंगर व निकॉल्सन द्वारा प्रस्तुत मॉडल में कौन से अणु अर्द्धतरल में पाये जाते हैं -
(अ) वसा
(ब) शर्करा
(स) प्रोटीन
(द) किण्वक
Answer: (अ) वसा
In simple words: सिंगर और निकॉल्सन के तरल मोजाइक मॉडल में, लिपिड (वसा) अणु एक अर्ध-तरल अवस्था में होते हैं, जिससे प्रोटीन इसमें तैरते रहते हैं.
🎯 Exam Tip: तरल मोजाइक मॉडल की मुख्य विशेषताओं को याद रखें, जिसमें लिपिड द्वि-परत की अर्ध-तरल प्रकृति और उसमें प्रोटीन की गतिशीलता शामिल है.
उत्तरमाला
| 1. (द) | 2: (अ) | 3. (अ) | 4. (द) | 5. (ब) |
|---|---|---|---|---|
| 6. (ब) | 7. (अ) | 8. (अ) | 9. (अ) | 10. (द) |
| 11. (ब) | 12. (स) | 13. (ब) | 14. (द) | 15. (अ) |
| 16. (अ) | 17. (ब) | 18. (द) | 19. (द) | 20. (ब) |
| 21. (अ) | 22. (द) |
RBSE Class 11 Biology Chapter 7 अतिलघूत्तरात्मक प्रश्न
Question 1. द्रव मोजेक मत का प्रतिपादन किस वैज्ञानिक ने किया ?
Answer: द्रव मोजेक मत का प्रतिपादन सिंगर और निकोल्सन नामक वैज्ञानिकों ने किया था। यह मॉडल कोशिका झिल्ली की संरचना को समझने में बहुत महत्वपूर्ण है।
In simple words: सिंगर और निकोल्सन ने द्रव मोजेक मॉडल दिया था।
🎯 Exam Tip: वैज्ञानिक के नाम और उनके द्वारा प्रतिपादित सिद्धांत को हमेशा याद रखें, क्योंकि यह अक्सर सीधे प्रश्न के रूप में पूछा जाता है।
Question 2. निष्क्रिय अभिगमन के कोई दो उदाहरण दीजिए।
Answer: निष्क्रिय अभिगमन के दो उदाहरण हैं:
(i) विसरण
(ii) परासरण
ये दोनों प्रक्रियाएं ऊर्जा का उपयोग किए बिना होती हैं, जिससे कोशिकाएं संतुलन बनाए रखती हैं।
In simple words: विसरण और परासरण निष्क्रिय अभिगमन के दो उदाहरण हैं।
🎯 Exam Tip: निष्क्रिय अभिगमन में ऊर्जा खर्च नहीं होती, जबकि सक्रिय अभिगमन में ऊर्जा लगती है। इस अंतर को समझना महत्वपूर्ण है।
Question 3. शैवालों की कोशिका भित्ति किसकी बनी होती है ?
Answer: शैवालों की कोशिका भित्ति सेल्यूलोज और पेक्टिन से बनी होती है। सेल्यूलोज एक प्रमुख घटक है जो पौधों में भी पाया जाता है।
In simple words: शैवालों की कोशिका भित्ति सेल्यूलोज और पेक्टिन से बनती है।
🎯 Exam Tip: विभिन्न जीवों की कोशिका भित्ति की रासायनिक संरचना को याद रखना चाहिए, क्योंकि यह उनके वर्गीकरण में सहायक होता है।
Question 4. प्राथमिक कोशिका भित्ति की मोटाई क्या होती है ?
Answer: प्राथमिक कोशिका भित्ति की मोटाई 3 से 15 \( \mu \) होती है। यह भित्ति कोशिका के शुरुआती विकास में बनती है।
In simple words: प्राथमिक कोशिका भित्ति 3 से 15 \( \mu \) मोटी होती है।
🎯 Exam Tip: कोशिका भित्ति की विभिन्न परतों की मोटाई के संख्यात्मक मान याद रखें, यह सीधा प्रश्न बन सकता है।
Question 6. कोशिका भित्ति के कितने प्रमुख भाग होते हैं ? नाम लिखिए।
Answer: कोशिका भित्ति के दो प्रमुख भाग होते हैं:
1. फाइब्रिल्स
2. मैट्रिक्स
ये दोनों मिलकर कोशिका भित्ति को संरचनात्मक मजबूती प्रदान करते हैं।
In simple words: कोशिका भित्ति के दो मुख्य भाग होते हैं: फाइब्रिल्स और मैट्रिक्स।
🎯 Exam Tip: कोशिका भित्ति के प्रमुख भागों को उनके कार्यों के साथ याद रखें ताकि उत्तर को और प्रभावी बनाया जा सके।
Question 7. एक मिसेल या माइसिली कितने सेल्यूलोज अणुओं से मिलकर बनाते हैं ?
Answer: लगभग 100 सेल्यूलोज अणु मिलकर एक मिसेल या माइसिली बनाते हैं। यह संरचना कोशिका भित्ति के निर्माण में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है।
In simple words: एक मिसेल 100 सेल्यूलोज अणुओं से बनता है।
🎯 Exam Tip: संख्यात्मक मान जैसे 100 सेल्यूलोज अणु या 20 माइसिली जैसे तथ्य याद रखें, क्योंकि ये सीधे प्रश्न के रूप में आ सकते हैं।
Question 8. रेशक या फाइब्रिल्स प्राथमिक भित्ति तथा द्वितीयक भित्ति में किस प्रकार व्यवस्थित होते हैं ?
Answer: प्राथमिक भित्ति में रेशक या फाइब्रिल्स अनुप्रस्थ (आड़े) दिशा में व्यवस्थित होते हैं, जबकि द्वितीयक भित्ति में वे अक्ष के समानांतर (लंबे) होते हैं। यह व्यवस्था भित्ति को उसकी विशेष ताकत देती है।
In simple words: प्राथमिक भित्ति में फाइब्रिल्स आड़े होते हैं और द्वितीयक भित्ति में वे सीधे होते हैं।
🎯 Exam Tip: प्राथमिक और द्वितीयक भित्ति में फाइब्रिल्स की व्यवस्था का अंतर उनके कार्य और यांत्रिक गुणों को प्रभावित करता है।
Question 9. टोरस का कार्य लिखिए।
Answer: टोरस द्रव्यों के वितरण पर नियंत्रण रखता है। यह एक कपाट (valve) की तरह कार्य करता है, जो आवश्यकतानुसार छिद्र को बंद या खोलता है।
In simple words: टोरस द्रव्यों के आने-जाने को नियंत्रित करता है।
🎯 Exam Tip: टोरस की भूमिका को एक वाल्व के रूप में समझें, यह पादपों में जल परिवहन के विनियमन के लिए महत्वपूर्ण है।
Question 10. कोशिका भित्ति की वृद्धि कितने प्रकार से होती है ? नाम लिखिए।
Answer: कोशिका भित्ति की वृद्धि दो प्रकार से होती है:
1. कणाधान (Intussusception)
2. स्तराधान (by apposition)
ये दोनों प्रक्रियाएं कोशिका भित्ति को बढ़ने और मजबूत बनाने में मदद करती हैं।
In simple words: कोशिका भित्ति कणाधान और स्तराधान से बढ़ती है।
🎯 Exam Tip: कणाधान और स्तराधान के बीच के अंतर को स्पष्ट रूप से समझें- एक में पदार्थ अंदर जमा होते हैं और दूसरे में परतें बाहर जुड़ती हैं।
Question 11. इन्टरडीजीटेशन से क्या तात्पर्य है ?
Answer: इन्टरडीजीटेशन का अर्थ है कि कभी-कभी प्राणी कोशिकाओं में पास वाली कोशिकाओं की प्लाज्मा झिल्ली कई स्थानों पर प्रवर्ध (उभार) जैसी रचनाएँ बना लेती है। ये रचनाएँ कोशिकाओं को एक-दूसरे के करीब और मजबूती से जोड़े रखने में मदद करती हैं।
In simple words: इन्टरडीजीटेशन में कोशिका झिल्ली में उभार बनते हैं जो कोशिकाओं को पास रखते हैं।
🎯 Exam Tip: इन्टरडीजीटेशन, डेस्मोसोम्स और माइक्रोविलाई जैसे संरचनात्मक अनुकूलन कोशिकाओं के आसंजन और कार्य में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।
Question 12. कवकों में कोशिका भित्ति किसकी बनी होती है ?
Answer: कवकों में कोशिका भित्ति पोलिसैकेराइड काइटिन या कवक सेल्यूलोज से बनी होती है। काइटिन एक कठोर पदार्थ है जो कीटों के बाह्यकंकाल में भी पाया जाता है।
In simple words: कवकों की कोशिका भित्ति काइटिन या कवक सेल्यूलोज से बनी होती है।
🎯 Exam Tip: कवक कोशिका भित्ति काइटिन की बनी होती है, जबकि पौधों की सेल्यूलोज की- यह एक महत्वपूर्ण अंतर है जिसे याद रखना चाहिए।
Question 13. क्या कारण है कि पके फल कोमल होते हैं ?
Answer: पके फल इसलिए कोमल होते हैं क्योंकि मध्य पटलिका में पाया जाने वाला पदार्थ, कैल्सियम और मैग्नीशियम के पेक्टेट, फल पकने के समय घुल जाते हैं। यह प्रक्रिया फलों की संरचनात्मक अखंडता को कमजोर करती है।
In simple words: फल पकने पर मध्य पटलिका में मौजूद पेक्टेट घुल जाते हैं, जिससे फल कोमल हो जाते हैं।
🎯 Exam Tip: मध्य पटलिका की संरचना और उसके घटकों को समझना फलों के पकने की प्रक्रिया को समझाने में मदद करता है।
Question 14. प्राथमिक गर्त क्या है ?
Answer: पादप कोशिकाओं की स्थूल (मोटी) भित्ति में कुछ जगहों पर सेल्यूलोज की परत नहीं होती है। इन जगहों पर भित्ति में छोटे गर्त (गड्ढे) बन जाते हैं, जिन्हें प्राथमिक गर्त कहते हैं। ये कोशिकाओं के बीच संचार में सहायक होते हैं।
In simple words: प्राथमिक गर्त वे छोटे गड्ढे होते हैं जहाँ मोटी कोशिका भित्ति में सेल्यूलोज की परत नहीं होती।
🎯 Exam Tip: गर्त कोशिका संचार के महत्वपूर्ण मार्ग हैं; प्राथमिक और परिवेशित गर्त के बीच के अंतर को समझना महत्वपूर्ण है।
Question 15. सरल गर्त (Simple Pits) किस आकार के होते हैं ?
Answer: सरल गर्त लम्बाई में बेलनाकार और गोल आकार के होते हैं। उनका आकार कोशिका भित्ति की मोटाई और कोशिका के प्रकार पर निर्भर करता है।
In simple words: सरल गर्त बेलनाकार और गोल आकार के होते हैं।
🎯 Exam Tip: सरल गर्तों के आकार को याद रखना उन्हें परिवेशित गर्तों से अलग करने में मदद करता है।
Question 16. कणाधान (Intususseption) किसे कहते हैं ?
Answer: प्राथमिक कोशिका भित्ति पर तंतुओं के बीच-बीच में नए पदार्थों का जमा होना कणाधान कहलाता है। यह प्रक्रिया कोशिका भित्ति की मोटाई और मजबूती बढ़ाने में सहायक होती है।
In simple words: कणाधान में कोशिका भित्ति के तंतुओं के बीच नए पदार्थ जमा होते हैं।
🎯 Exam Tip: कणाधान और स्तराधान, कोशिका भित्ति वृद्धि की दो अलग-अलग विधियाँ हैं; उनके अंतर और प्रक्रियाओं को स्पष्ट रूप से समझें।
Question 17. कोशिका भित्ति में होने वाला कोई एक रासायनिक परिवर्तन लिखिए।
Answer: स्थूल कोण ऊतक कोशिकाओं की भित्ति पर सेल्यूलोज और पेक्टिन का जमाव होना कोशिका भित्ति में होने वाला एक रासायनिक परिवर्तन है। यह जमाव कोशिका को अतिरिक्त यांत्रिक शक्ति प्रदान करता है।
In simple words: स्थूल कोण ऊतक की भित्ति पर सेल्यूलोज और पेक्टिन जमा होते हैं।
🎯 Exam Tip: कोशिका भित्ति में लिग्निन, सुबेरिन और क्यूटिन जैसे पदार्थों का जमाव उसे कठोरता और जल के प्रति अपारगम्यता प्रदान करता है।
Question 18. प्लाज्मा झिल्ली के रूपान्तरण के कोई दो उदाहरण दीजिए।
Answer: प्लाज्मा झिल्ली के दो रूपान्तरण हैं:
1. माइक्रोविलाई (Microvilli): ये छोटी उँगलियों जैसी संरचनाएँ होती हैं जो अवशोषण के लिए सतह क्षेत्र बढ़ाती हैं।
2. डेस्मोसोम्स (Desmosomes): ये कोशिकाओं को आपस में मजबूती से जोड़े रखने वाली संरचनाएँ होती हैं।
ये रूपान्तरण कोशिका के विशिष्ट कार्यों में सहायक होते हैं।
In simple words: माइक्रोविलाई और डेस्मोसोम्स प्लाज्मा झिल्ली के दो बदलाव हैं।
🎯 Exam Tip: कोशिका झिल्ली के विभिन्न रूपान्तरणों को उनके कार्यों के साथ याद रखें, जैसे माइक्रोविलाई अवशोषण के लिए होते हैं।
Question 19. डेस्मोसोम में पाये जाने वाले तन्तुओं को टोनोफाइब्रिल कहते हैं।
Answer: डेस्मोसोम में पाए जाने वाले तंतुओं को टोनोफाइब्रिल कहते हैं। ये तंतु कोशिका को यांत्रिक सहायता प्रदान करते हैं।
In simple words: डेस्मोसोम में टोनोफाइब्रिल नामक तंतु होते हैं।
🎯 Exam Tip: विभिन्न कोशिका संरचनाओं के विशिष्ट घटकों और उनके नामों को याद रखना आवश्यक है।
Question 20. प्लाजमोडेस्मैटा या जीवद्रव्य तन्तुओं का कार्य लिखिए।
Answer: पादपों में प्लाज्मोडेस्मेटा या जीवद्रव्य तंतुओं के द्वारा आसन्न (पड़ोसी) कोशिकाओं में पदार्थों का आदान-प्रदान होता है। ये कोशिका द्रव के निरंतरता को बनाए रखते हैं।
In simple words: प्लाज्मोडेस्मेटा पौधों की कोशिकाओं के बीच चीजों को आर-पार भेजता है।
🎯 Exam Tip: प्लाज्मोडेस्मेटा पादप कोशिकाओं में संचार और पदार्थ परिवहन के लिए महत्वपूर्ण होते हैं, जो जंतु कोशिकाओं के गैप जंक्शन के समान होते हैं।
Question 21. कोशिका झिल्ली किसकी बनी होती है ?
Answer: कोशिका झिल्ली मुख्य रूप से फास्फोलिपिड्स और प्रोटीन की बनी होती है। इसमें थोड़ी मात्रा में कार्बोहाइड्रेट भी होते हैं।
In simple words: कोशिका झिल्ली फास्फोलिपिड्स और प्रोटीन से बनी होती है।
🎯 Exam Tip: कोशिका झिल्ली की रासायनिक संरचना- प्रोटीन, लिपिड और कार्बोहाइड्रेट का अनुपात- को हमेशा याद रखें।
Question 22. कोशिका झिल्ली द्वारा तरल पदार्थ को ग्रहण करना क्या कहलाता है ?
Answer: कोशिका झिल्ली द्वारा तरल पदार्थों को ग्रहण करना पिनोसाइटोसिस कहलाता है। इस प्रक्रिया को 'कोशिका पेय' (cell drinking) भी कहते हैं।
In simple words: कोशिका झिल्ली द्वारा तरल पदार्थ लेने को पिनोसाइटोसिस कहते हैं।
🎯 Exam Tip: एंडोसाइटोसिस के विभिन्न प्रकारों- पिनोसाइटोसिस (तरल पदार्थ) और फेगोसाइटोसिस (ठोस पदार्थ)- को स्पष्ट रूप से समझें।
Question 23. कोशिका भित्ति को परिभाषित कीजिए।
Answer: पादप कोशिका की सबसे बाहरी, दृढ़, सुरक्षात्मक, अजीवित और सहारा देने वाली सतह को कोशिका भित्ति (cell wall) कहते हैं। यह कोशिका को निश्चित आकार और यांत्रिक सहायता प्रदान करती है।
In simple words: कोशिका भित्ति पौधों की कोशिका की सबसे बाहरी, मजबूत और अजीवित परत होती है।
🎯 Exam Tip: कोशिका भित्ति की विशेषताओं (दृढ़, अजीवित, सुरक्षात्मक) और उसके प्रमुख कार्यों को याद रखें।
RBSE Class 11 Biology Chapter 7 लघूत्तरात्मक प्रश्न
Question 1. जीवद्रव्य कला के कोई तीन रूपान्तरण लिखिए।
Answer: जीवद्रव्य कला के तीन रूपान्तरण निम्नलिखित हैं:
(i) डेस्मोसोम्स (Desmosomes): ये कोशिकाओं को आपस में जोड़े रखने वाली संरचनाएँ हैं। इनमें प्लाज्मा झिल्ली से बनी धागेनुमा संरचनाएँ होती हैं, जिन्हें टोनोफाइब्रिल कहते हैं।
(ii) माइक्रोविलाई (Microvilli): ये प्राणी कोशिकाओं में प्लाज्मा झिल्ली पर अंगुलियों जैसे छोटे उभार होते हैं, जो अवशोषण के लिए सतह क्षेत्र बढ़ाते हैं।
(iii) इन्टरडीजीटेशन (Interdigitation): कभी-कभी प्राणी कोशिकाओं में संपर्कित कोशिकाओं की प्लाज्मा झिल्ली कई स्थानों पर प्रवर्ध (उभार) जैसी रचनाएँ बना लेती हैं, जिससे कोशिकाएँ निकटतम बनी रहती हैं।
In simple words: जीवद्रव्य कला के तीन मुख्य रूपान्तरण डेस्मोसोम्स, माइक्रोविलाई और इन्टरडीजीटेशन हैं, जो विभिन्न कार्यों में मदद करते हैं।
🎯 Exam Tip: प्रत्येक रूपांतरण की संरचना और कार्य को स्पष्ट रूप से समझें और याद रखें, विशेषकर उनके प्रमुख भूमिकाओं पर ध्यान दें।
Question 2. कोशिका कला-सेण्डविच संरचना का नामांकित चित्र बनाइए।
Answer: कोशिका कला की सैंडविच संरचना में प्रोटीन की दो परतें होती हैं जिनके बीच में फास्फोलिपिड की एक द्विपरत होती है। इस मॉडल को डेनियली और डेवसन ने प्रस्तावित किया था।
In simple words: कोशिका झिल्ली एक सैंडविच जैसी दिखती है, जिसमें दो प्रोटीन परतें होती हैं और उनके बीच में लिपिड की दो परतें होती हैं।
🎯 Exam Tip: कोशिका झिल्ली के विभिन्न मॉडलों (जैसे सैंडविच मॉडल और तरल मोजेक मॉडल) और उनके प्रस्तावित वैज्ञानिकों के नाम को ध्यान में रखें।
Question 3. सरल गर्त तथा परिवेशित गर्त में चार अन्तर लिखिए।
Answer: सरल गर्त और परिवेशित गर्त में चार मुख्य अंतर निम्नलिखित हैं:
| सरल गर्त (Simple Pits) | परिवेशित गर्त (Bordered Pits) |
|---|---|
| 1. टोरस नहीं पाया जाता है। | 1. टोरस पाया जाता है जो कपाट (Valve) की तरह कार्य करता है। |
| 2. गर्त की गुहा साधारण होती है। | 2. गर्त की गुहा परिवेशित (Bordered) होती है। |
| 3. गर्त साधारण होते हैं। | 3. जबकि गर्त ढकी होती है। |
| 4. ये प्राय: मृदूतक, मेड्यूलरी के जाइलम वाहिनिकाओं, आदि में मिलते हैं। | 4. ये आवृत्तबीजियों की जाइलम वाहिकाओं तथा अनावृतबीजियों की वाहिनिकाओं पर मिलते हैं। |
In simple words: सरल गर्त में टोरस नहीं होता और यह खुला होता है, जबकि परिवेशित गर्त में टोरस होता है और वह ढका होता है।
🎯 Exam Tip: गर्तों के प्रकार, उनकी संरचनात्मक विशेषताओं (जैसे टोरस की उपस्थिति) और विभिन्न पादप ऊतकों में उनके वितरण पर विशेष ध्यान दें।
मध्य पट्टलिका (Middle Layer)
मध्य पट्टलिका सबसे बाहरी स्तर होता है जो दो कोशिकाओं के बीच एक सीमेंट परत के रूप में कार्य करती है। बाहरी स्वतंत्र सतह पर यह अनुपस्थित होती है। यह टूटकर अंतराकोशिकीय स्थान बनाती है। मध्य पट्टलिका कैल्सियम तथा मैग्नीशियम पेक्टेट के द्वारा निर्मित होती है। कैल्सियम पेक्टेट मध्य पट्टलिका का मुख्य घटक होता है। मध्य पटलिका के पेक्टिक यौगिकों के घुलने के कारण फल मुलायम हो जाते हैं। पेक्टिन का उपयोग व्यावसायिक रूप से जैली के एजेंट के रूप में किया जाता है, जो कि प्राथमिक भित्ति के बाहर की ओर स्थित होती है। यह परत पौधों में कोशिकाओं को आपस में जोड़े रखने में मदद करती है, जैसे कि ईंटों को जोड़ने वाला सीमेंट।
Question 5. एंडोसाइटोसिस को परिभाषित कीजिए तथा पिनोसाइटोसिस को समझाइए।
Answer: एंडोसाइटोसिस वह प्रक्रिया है जिसमें कोशिका झिल्ली बाहरी पदार्थों को घेरकर कोशिका के अंदर ले जाती है। जब अंदर लिए गए पदार्थ तरल अवस्था में होते हैं, तो यह प्रक्रिया पिनोसाइटोसिस (Pinocytosis) कहलाती है, जिसे 'कोशिका पेय' (cell drinking) भी कहते हैं। इस दौरान कोशिका झिल्ली अंदर की ओर मुड़कर एक थैली (वेसिकल) बनाती है जो पदार्थ को अंदर ले जाती है। यह प्रक्रिया कोशिकाओं को आवश्यक पोषक तत्व प्राप्त करने में मदद करती है।
In simple words: एंडोसाइटोसिस में कोशिका बाहरी चीजों को अंदर लेती है; जब यह तरल पदार्थ लेती है तो उसे पिनोसाइटोसिस कहते हैं।
🎯 Exam Tip: एंडोसाइटोसिस के प्रकार (पिनोसाइटोसिस और फेगोसाइटोसिस) और वे किन पदार्थों को ग्रहण करते हैं, इसे स्पष्ट रूप से समझें।
Question 6. एण्डोसाइटोसिस और एक्सोसाइटोसिस में अन्तर स्पष्ट कीजिए।
Answer: एण्डोसाइटोसिस और एक्सोसाइटोसिस में मुख्य अंतर निम्नलिखित हैं:
| एण्डोसाइटोसिस (Endocytosis) | एक्सोसाइटोसिस (Exocytosis) |
|---|---|
| 1. यह बाह्य कोशिकीय पदार्थों के भीतर ग्रहण करने की विधि है। | 1. यह अंत-कोशिकीय पदार्थों को बाहर निकालने की विधि है। |
| 2. इसमें पदार्थ कोशिका के अंदर आते हैं। | 2. इसमें पदार्थ कोशिका से बाहर जाते हैं। |
| 3. कोशिका झिल्ली अंदर की ओर मुड़कर वेसिकल बनाती है। | 3. वेसिकल कोशिका झिल्ली से मिलकर बाहर खुलता है। |
| 4. पोषक तत्वों के ग्रहण या रोगाणुओं को निगलने में होता है। | 4. अपशिष्ट पदार्थों के निष्कासन या हार्मोन के स्राव में होता है। |
In simple words: एंडोसाइटोसिस में कोशिका चीजें अंदर लेती है, जबकि एक्सोसाइटोसिस में कोशिका चीजें बाहर निकालती है।
🎯 Exam Tip: इन दोनों प्रक्रियाओं की परिभाषा, दिशा और उदाहरणों को याद रखें, क्योंकि ये कोशिका परिवहन के महत्वपूर्ण पहलू हैं।
Question 7. कोशिका भित्ति की उत्पत्ति पर टिप्पणी लिखिए।
Answer: कोशिका भित्ति की उत्पत्ति कोशिका विभाजन की टेलोफेज अवस्था के दौरान होती है। कोशिका भित्ति के तल और स्थान का निर्धारण सूक्ष्म नलिकाओं (Microtubules) द्वारा होता है। अंत:प्रद्रव्यी जालिका के टुकड़े और गॉल्जीबॉडी के वेसिकल मिलकर मध्य रेखा (इक्वेटर) पर जुड़ते हैं, जिसे फ्रेग्मोप्लास्ट कहते हैं। बाद में यह फ्रेग्मोप्लास्ट कोशिका प्लेट का निर्माण करता है, जिससे नई कोशिका भित्ति बनती है। सेल्यूलोज का संश्लेषण प्लाज्मा झिल्ली में मौजूद एंजाइम सेल्यूलोज सिंथेटेस की मदद से होता है।
In simple words: कोशिका भित्ति कोशिका विभाजन के अंत में बनती है, जहाँ सूक्ष्म नलिकाएँ और गॉल्जीबॉडी के टुकड़े मिलकर फ्रेग्मोप्लास्ट बनाते हैं जो नई भित्ति का आधार होता है।
🎯 Exam Tip: कोशिका भित्ति के निर्माण के चरणों और इसमें शामिल संरचनाओं (जैसे फ्रेग्मोप्लास्ट और सूक्ष्म नलिकाएँ) को क्रम से याद रखें।
Question 8. कोशिका भित्ति के कोई चार कार्य लिखिए।
Answer: कोशिका भित्ति के चार मुख्य कार्य निम्नलिखित हैं:
1. यह पादप कोशिका के आकार को नियंत्रित करती है और यांत्रिक क्षति से कोशिकाओं की रक्षा करती है।
2. यह रोगजनकों (जैसे वायरस, जीवाणु, कवक) के आक्रमण से कोशिका की रखवाली करती है।
3. यह गुरुत्वाकर्षण के विपरीत यांत्रिक शक्ति प्रदान करती है, जिससे पादपों के वायवीय भाग सीधे खड़े रह पाते हैं।
4. यह कोशिका के अधिक विस्तार को रोकती है और परासरण द्वारा जल के प्रवेश के बावजूद कोशिका को फटने से बचाती है।
कोशिका भित्ति पौधों के लिए एक मजबूत बाहरी कवच का काम करती है।
In simple words: कोशिका भित्ति कोशिका को आकार देती है, रोगों से बचाती है, सहारा देती है और उसे फटने से रोकती है।
🎯 Exam Tip: कोशिका भित्ति के कार्यों को सुरक्षा, आकार और सहायता जैसे मुख्य बिंदुओं में वर्गीकृत करके याद रखें।
Question 10. पिनोसाइटोसिस व फेगोसाइटोसिस में कोई चार अन्तर लिखिए।
Answer: पिनोसाइटोसिस और फेगोसाइटोसिस में चार मुख्य अंतर निम्नलिखित हैं:
| पिनोसाइटोसिस (Pinocytosis) | फेगोसाइटोसिस (Phagocytosis) |
|---|---|
| 1. यह बाह्य कोशिकीय तरल और इसके विलेयों को आशयों द्वारा ग्रहण करने की क्रिया है। | 1. यह दीर्घ आमाप के ठोस कणों को आशयों या फेगोसोम द्वारा अंतर्ग्रहण करने की क्रिया है। |
| 2. ग्राही या अधिशोषण स्थल उपस्थित या अनुपस्थित हो सकते हैं। | 2. कोशिका पर ग्राही स्थलों का कणों को पहचानना आवश्यक होता है। |
| 3. तरल बूंद के चारों ओर या अधिशोषित अणुओं के चारों ओर बहिर्वलन नहीं बनाये जाते हैं। | 3. कोशिका कला कूटपाद जैसे-बहिर्वलन बनाकर ठोस अणुओं को निगल लेती है। |
| 4. कोशिका सतह पर गर्त बाह्य तरलों को ग्रहण करने या पहचानने हेतु अक्सर पाये जाते हैं। | 4. गर्त सामान्यत: अनुपस्थित रहते हैं। |
In simple words: पिनोसाइटोसिस में कोशिका तरल लेती है जबकि फेगोसाइटोसिस में बड़े ठोस कण लेती है।
🎯 Exam Tip: पिनोसाइटोसिस को 'कोशिका पेय' और फेगोसाइटोसिस को 'कोशिका भक्षण' के रूप में याद रखें, जो उनके बीच के मौलिक अंतर को दर्शाता है।
Question 11. द्वितीयक भित्ति और तृतीयक भित्ति में कोई चार विभेद कीजिए।
Answer: द्वितीयक भित्ति और तृतीयक भित्ति में चार मुख्य अंतर निम्नलिखित हैं:
| द्वितीयक भित्ति (Secondary Cell Wall) | तृतीयक भित्ति (Tertiary Cell Wall) |
|---|---|
| 1. इसमें लिग्निन पाया जाता है। | 1. इसमें जाइलन पाया जाता है। |
| 2. इसमें हेमीसेल्यूलोज की 25% मात्रा मिलती है। | 2. इसमें हेमीसेल्यूलोज का अभाव होता है। |
| 3. यह सरल होती है। | 3. इसमें विभिन्न प्रकार के स्थूलन या उभार पाये जाते हैं। |
| 4. इसमें सेल्यूलोज 50 – 94% पाया जाता है। | 4. इसमें सेल्यूलोज नहीं पाया जाता है। |
| 5. इसमें माइक्रोफाइब्रिल अक्ष के समानान्तर व्यवस्थित रहते हैं। | 5. इसमें माइक्रोफाइब्रिल का अभाव होता है। |
| 6. यह भित्ति कुछ मोटी, सख्त तथा अपारगम्य होती है। | 6. यह भित्ति द्वितीयक भित्ति से अधिक मोटी तथा अपारगम्य होती है। |
In simple words: द्वितीयक भित्ति में लिग्निन और हेमीसेल्यूलोज होते हैं, जबकि तृतीयक भित्ति में जाइलन होता है और यह ज़्यादा मोटी होती है।
🎯 Exam Tip: कोशिका भित्ति की विभिन्न परतों- प्राथमिक, द्वितीयक और तृतीयक- की संरचनात्मक और रासायनिक विशेषताओं को विस्तार से याद रखें।
Question 12. सेन्डविच मॉडल क्या है ? समझाइए।
Answer: सैंडविच मॉडल को डेवसन और डेनियली (1935) ने प्रस्तावित किया था। इस मॉडल के अनुसार, कोशिका झिल्ली एक सैंडविच की तरह होती है, जिसमें दो घनी प्रोटीन परतों के बीच एक हल्की द्वि-आण्विक लिपिड परत स्थित होती है। यह मॉडल झिल्ली की संरचना को समझाने का एक प्रारंभिक प्रयास था, जो कोशिका कला को एक स्थिर, बहु-परत संरचना के रूप में दर्शाता है।
In simple words: सैंडविच मॉडल कहता है कि कोशिका झिल्ली में प्रोटीन की दो परतें होती हैं जिनके बीच में लिपिड की एक दोहरी परत होती है।
🎯 Exam Tip: सैंडविच मॉडल के प्रमुख वैज्ञानिकों और इसकी बुनियादी संरचना को याद रखना महत्वपूर्ण है, क्योंकि यह कोशिका झिल्ली के विकासवादी सिद्धांतों का हिस्सा है।
Question 13. कोशिका भित्ति का गठन कितने प्रकार से होता है ? नाम लिखिए एवं तृतीयक भित्ति का वर्णन कीजिए।
Answer: कोशिका भित्ति का गठन चार मुख्य प्रकार से होता है:
1. मध्य पटलिका
2. प्राथमिक भित्ति
3. द्वितीयक भित्ति
4. तृतीयक भित्ति
**तृतीयक भित्ति (Tertiary Wall):** यह भित्ति द्वितीयक भित्ति के अंदर की ओर पाई जाती है और जाइलन (Xylon) से बनी होती है। यह विशेष रूप से जिम्नोस्पर्म की वाहिनिकाओं (ट्रेकीड्स) में बहुत कम मात्रा में पाई जाती है। तृतीयक भित्ति कोशिका में जीवद्रव्य के सूखे स्तर को दर्शाती है और इसे कोशिका भित्ति की अंतिम परत माना जाता है।
In simple words: कोशिका भित्ति के चार प्रकार हैं: मध्य पटलिका, प्राथमिक, द्वितीयक और तृतीयक भित्ति। तृतीयक भित्ति सबसे अंदर की ओर होती है, जो जाइलन से बनी होती है और जिम्नोस्पर्म में कम पाई जाती है।
🎯 Exam Tip: कोशिका भित्ति के प्रत्येक प्रकार की परत को उसके संगठन और विशिष्ट उदाहरणों के साथ याद रखना चाहिए।
Question 14. सक्रिय परिवहन व निष्क्रिय परिवहन में विभेद कीजिए।
Answer: सक्रिय परिवहन और निष्क्रिय परिवहन में मुख्य अंतर निम्नलिखित हैं:
| सक्रिय परिवहन (Active Transport) | निष्क्रिय परिवहन (Passive Transport) |
|---|---|
| 1. इस परिवहन में ऊर्जा व्यय होती है। | 1. इस परिवहन में ऊर्जा की आवश्यकता नहीं पड़ती। |
| 2. यह वैद्युत रासायनिक सांद्रता प्रवणता के विपरीत क्रियाशील होता है। | 2. यह वैद्युत रासायनिक सांद्रता प्रवणता के अनुरूप क्रियाशील होता है। |
| 3. यह सजीव या जैव रासायनिक क्रिया है। | 3. यह एक प्रकार से भौतिक क्रिया है। |
| 4. यह क्रिया वाहकों की सहायता से सम्पन्न होती है। | 4. निष्क्रिय परिवहन में वाहक भाग नहीं लेते। |
| 5. यह तीव्र गति से होने वाली क्रिया है। | 5. यह अपेक्षाकृत धीमी गति से होने वाली क्रिया है। |
| 6. यह विधि चयनित पदार्थों हेतु प्रयुक्त की जाने वाली चयनित क्रिया है। | 6. सामान्यत: यह अचयनित क्रिया है। |
| 7. यह एकदिशीय क्रिया होती है। | 7. जबकि यह द्विदिशीय क्रिया है। |
| 8. इस विधि के कारण ही कोशिका के भीतर एवं बाह्य तरल में निश्चित परासरणी सांद्रता को बनाये रखा जाता है। | 8. यह कोशिका के भीतर एवं बाह्य तरल में परासरणी सांद्रता को बनाये रखने में सहायक नहीं होता। |
In simple words: सक्रिय परिवहन में ऊर्जा खर्च होती है और यह वाहकों की मदद से होता है, जबकि निष्क्रिय परिवहन में ऊर्जा नहीं लगती और यह सांद्रता प्रवणता के अनुसार होता है।
🎯 Exam Tip: सक्रिय और निष्क्रिय परिवहन के प्रत्येक बिंदु को उदाहरणों के साथ याद रखें, जैसे सक्रिय परिवहन में सोडियम-पोटेशियम पंप और निष्क्रिय परिवहन में विसरण।
RBSE Class 11 Biology Chapter 7 निबन्धात्मक प्रश्न
Question 1. कोशिका भित्ति किसे कहते हैं ? कोशिका भित्ति के गठन का सचित्र वर्णन कीजिए।
Answer: सर्वप्रथम रॉबर्ट हुक ने 1665 में कोशिका भित्ति का अध्ययन किया था। पादप कोशिका एक कठोर, मोटी तथा दृढ़ भित्ति से घिरी होती है जो जीवद्रव्य के बाहर स्थित होती है। यह जीवद्रव्य का स्रावित भाग है, जो कोशिका को सुरक्षा और सहारा प्रदान करता है।
कोशिका भित्ति के विभिन्न स्तर:
(i) मध्य पटलिका (Middle Lamella): यह सबसे बाहरी स्तर है जो दो कोशिकाओं के बीच एक सीमेंट परत के रूप में काम करती है। यह कैल्शियम और मैग्नीशियम पेक्टेट से बनी होती है, जो फलों के पकने पर घुल जाती है जिससे फल नरम हो जाते हैं।
(ii) प्राथमिक भित्ति (Primary Wall): यह तरुण पादप कोशिकाओं में एक परत के रूप में बनती है और पतली, लचीली होती है। यह कणाधान (Intussusception) द्वारा बढ़ती है और इसमें सेल्यूलोज कम और हेमीसेल्यूलोज अधिक होता है। इसकी मोटाई 4 से 15 \( \mu \) होती है।
(iii) द्वितीयक भित्ति (Secondary Wall): यह परिपक्व कोशिकाओं में, प्राथमिक भित्ति के अंदर की ओर बनती है। यह लिग्निन, सुबेरिन, कार्बोहाइड्रेट्स, अकार्बनिक लवण, टैनिन, गोंद, मोम, कैल्शियम लवण, सिलिका और क्यूटिन से समृद्ध होती है। यह भित्ति मोटी और दृढ़ होती है, जो वाहिका, वाहिनिका और दृढ़ोतकों को लिग्निन युक्त बनाती है।
(iv) तृतीयक भित्ति (Tertiary Wall): यह द्वितीयक भित्ति के अंदर की ओर पाई जाने वाली भित्ति है जो जाइलन से बनी होती है। यह विशेष रूप से जिम्नोस्पर्म की वाहिनिकाओं में मिलती है। यह कोशिका में जीवद्रव्य के सूखे स्तर को दर्शाती है।
In simple words: कोशिका भित्ति एक मजबूत बाहरी परत है जिसमें मध्य पटलिका, प्राथमिक, द्वितीयक और कभी-कभी तृतीयक भित्ति जैसे स्तर होते हैं, जो कोशिका को आकार और सुरक्षा देते हैं।
🎯 Exam Tip: कोशिका भित्ति के प्रत्येक स्तर (मध्य पटलिका, प्राथमिक, द्वितीयक, तृतीयक) की स्थिति, संरचना और प्रमुख घटकों को विस्तार से याद रखें।
Question 2. निम्न पर टिप्पणी लिखिए –
(i) कोशिका भित्ति की उत्पत्ति
(ii) कोशिका भित्ति की वृद्धि
(iii) कोशिका भित्ति का रासायनिक परिवर्तन।
Answer:
(i) कोशिका भित्ति की उत्पत्ति:
कोशिका भित्ति कोशिका विभाजन की टेलोफेज अवस्था के दौरान उत्पन्न होती है। इसके निर्माण का स्थान और तल सूक्ष्म नलिकाओं (Microtubules) द्वारा तय किया जाता है। अंत:प्रद्रव्यी जालिका के खंड और गॉल्जीबॉडी के वेसिकल कोशिका के मध्य में जुड़कर फ्रेग्मोप्लास्ट बनाते हैं, जो बाद में कोशिका प्लेट का निर्माण करते हैं। सेल्यूलोज का संश्लेषण प्लाज्मा झिल्ली में मौजूद एंजाइम सेल्यूलोज सिंथेटेस की सहायता से होता है। इस प्रकार, कोशिका प्लेट ही कोशिका भित्ति का निर्माण करती है।
(ii) कोशिका भित्ति की वृद्धि:
कोशिका भित्ति की वृद्धि दो प्रकार से होती है:
1. कणाधान (Intussusception): इसमें पहले से मौजूद पदार्थों के बीच-बीच के खाली स्थानों में नए कणों का जमा होना शामिल है।
2. स्तराधान (by apposition): इसमें पहले से मौजूद स्तरों के ऊपर नए स्तरों का जमा होना शामिल है।
प्राथमिक कोशिका भित्ति मुख्य रूप से कणाधान द्वारा बढ़ती है, जबकि द्वितीयक और तृतीयक भित्तियाँ दोनों विधियों से बढ़ती हैं। उदाहरण के लिए, प्राथमिक भित्ति के निर्माण के दौरान पेक्टोज और सेल्यूलोज के कण कैल्शियम पेक्टेट के कणों के बीच कणाधान विधि से जमा होते हैं। जब भी एक स्तर पर एक नया स्तर जुड़ता है, तो उसे स्तराधान कहते हैं, लेकिन यदि एक ही स्तर पर वृद्धि होती है, तो उसे कणाधान कहते हैं।
(iii) कोशिका भित्ति का रासायनिक परिवर्तन:
कोशिका भित्ति में कई प्रकार के रासायनिक परिवर्तन हो सकते हैं जो इसे विशेष गुण प्रदान करते हैं:
1. सुबेरिन (Suberin): यह वसीय अम्ल का एक जटिल मिश्रण है जो कॉर्क कोशिकाओं में जमा होने पर भित्ति को जल के लिए पूर्ण रूप से अपारगम्य बना देता है।
2. क्यूटिन (Cutin): यह वसीय पदार्थ के समान एक मोम है जो उपत्वचा (Cuticle) के रूप में अधिचर्म कोशिकाओं पर जमा होकर जल की हानि को रोकता है।
3. सिलिका (Silica), कैल्शियम कार्बोनेट और कैल्शियम ऑक्सलेट: ये खनिज लवण कोशिका भित्ति में जमा होकर उसे दृढ़ता प्रदान करते हैं। घास की पत्तियों में सिलिका अधिक मात्रा में होती है।
4. लिग्निन (Lignin): यह एक विशिष्ट पॉलिसेकेराइड है जो जाइलम कोशिकाओं में जमा होकर उन्हें कठोर और लिग्नीफाइड बनाता है, जिससे जाइलम ट्रेकीड्स विभिन्न रूप ले लेते हैं।
5. म्यूसीलेज (Mucilage): कुछ विशेष अवस्थाओं में सेल्यूलोज एक लसलसे पदार्थ (म्यूसीलेज) में टूट जाता है, जो जल को एकत्रित कर गाढ़ा तरल बनाता है। यह गुडहल के फूलों, भिंडी के फलों और ईसबगोल के बीजों में पाया जाता है।
6. सेल्यूलोज और पेक्टिन का जमाव: स्थूलकोण ऊतक कोशिकाओं की भित्ति पर सेल्यूलोज और पेक्टिन का जमाव होता है, जिससे उन्हें अतिरिक्त यांत्रिक शक्ति मिलती है।
In simple words: कोशिका भित्ति कोशिका विभाजन के अंत में बनती है, कणाधान और स्तराधान से बढ़ती है, और इसमें सुबेरिन, क्यूटिन, लिग्निन जैसे पदार्थ जमा होकर इसे खास गुण देते हैं।
🎯 Exam Tip: कोशिका भित्ति की उत्पत्ति, वृद्धि और रासायनिक संरचना को अलग-अलग बिंदुओं में याद रखें, क्योंकि यह एक विस्तृत उत्तर वाला प्रश्न है।
Question 3. कोशिका झिल्ली क्या है ? सेंडविच मॉडल का चित्र बनाकर वर्णन कीजिए।
Answer: प्रत्येक कोशिका एक पतली झिल्ली (membrane) द्वारा घिरी होती है जो कोशिकाद्रव्य को सीमित करती है और बाहरी वातावरण से अलग करती है। इस झिल्ली को जीव कला (Plasma membrane) कहते हैं। यह एक बहुत ही पतली, लचीली, पारगम्य और जीवित संरचना होती है। जीवाणुओं और पादप कोशिकाओं में यह कोशिका भित्ति और कोशिकाद्रव्य के बीच स्थित होती है। सी. नैगेली और सी. क्रेमर (1885) ने इसे कोशिका कला नाम दिया था, जिसे बाद में प्लोव (1931) ने जीवद्रव्य कला (Plasma lemma) कहा।
**लाइपोप्रोटीन मॉडल (सैंडविच मॉडल):** डेनियली और डेवसन ने 1938 में इस मॉडल को प्रस्तावित किया था। उनके अध्ययन के अनुसार, कोशिका झिल्ली में फास्फोलिपिड की द्वि-आण्विक परत प्रोटीन की दो परतों के बीच एक सैंडविच की तरह होती है। इस मॉडल में प्रोटीन परतें झिल्ली के बाहर और अंदर की सतह पर होती हैं, और लिपिड परत बीच में होती है। यह मॉडल कोशिका झिल्ली को स्थिर और दृढ़ संरचना के रूप में वर्णित करता है, जिसमें प्रोटीन वलित बीटा श्रृंखला के रूप में होते हैं। फास्फोलिपिड के अध्रुवीय जल विरोधी सिरे एक-दूसरे के सामने होते हैं, जबकि जलस्नेही सिरे विद्युत बलों से जुड़े होते हैं।
In simple words: कोशिका झिल्ली कोशिका को घेरने वाली एक पतली, लचीली परत है। सैंडविच मॉडल बताता है कि इसमें लिपिड की दो परतों के बीच प्रोटीन की दो परतें होती हैं।
🎯 Exam Tip: कोशिका झिल्ली की परिभाषा के साथ, उसके विभिन्न मॉडलों (जैसे सैंडविच मॉडल) के मुख्य बिंदुओं और प्रस्तावित वैज्ञानिकों के नाम को याद रखना महत्वपूर्ण है।
Question 4. तरल मोजेक प्रतिरूप का नामांकित चित्र बनाकर वर्णन कीजिए।
Answer: तरल मोजेक मॉडल (Fluid Mosaic Model) को सिंगर और निकोल्सन (1972) ने प्रस्तावित किया था, और यह कोशिका झिल्ली का सर्वाधिक मान्य मॉडल है। इस मॉडल के अनुसार, कोशिका झिल्ली एक द्वि-आण्विक लिपिड परत से बनी होती है जिसमें प्रोटीन अणु मोजेक (पच्चीकारी) के रूप में धंसे रहते हैं। कुछ प्रोटीन सतह पर होते हैं (परिधीय प्रोटीन), जबकि कुछ लिपिड परत में पूरी तरह से धंसे होते हैं (समाकल प्रोटीन)। लिपिड और प्रोटीन के अणु झिल्ली में पार्श्व (Lateral) गति करने के लिए स्वतंत्र होते हैं, जिससे झिल्ली को एक 'अर्ध-तरल संरचना' मिलती है। यह झिल्ली में पदार्थों के संचलन और कार्यों के लिए महत्वपूर्ण है।
In simple words: तरल मोजेक मॉडल बताता है कि कोशिका झिल्ली एक बहते हुए समुद्र की तरह है जिसमें प्रोटीन अणु लिपिड की दो परतों में तैरते या धंसे हुए होते हैं।
🎯 Exam Tip: तरल मोजेक मॉडल को कोशिका झिल्ली का सबसे स्वीकृत मॉडल माना जाता है। इसकी मुख्य विशेषताओं (तरलता, मोजेक व्यवस्था) और इसमें शामिल अणुओं (प्रोटीन, लिपिड) को याद रखें।
प्रश्न 2. निम्न पर टिप्पणी लिखिए –
(i) कोशिका झिल्ली के कार्य
(ii) कोशिका भित्ति के कार्य
(iii) निष्क्रिय व सक्रिय परिवहन।
Answer:
(i) कोशिका झिल्ली के कार्य:
1. कोशिका झिल्ली कोशिका को एक निश्चित आकृति और आकार देती है।
2. यह कोशिकांगों की सुरक्षा करती है, और प्लाज्मा झिल्ली से एंडोप्लाज्मिक रेटिकुलम (ER) बनता है।
3. यह परासरण क्रिया को नियंत्रित करती है।
4. जीवाणु कोशिकाओं में कोशिका झिल्ली पर श्वसन एंजाइम पाए जाते हैं। यह ऊर्जा उत्पादन में मदद करता है।
5. यह कोशिका आसंजन (कोशिकाओं को एक-दूसरे से जोड़ना) में मदद करती है।
6. एंडोसाइटोसिस (Endocytosis): जब कोशिका बाहरी पदार्थों को अंदर लेती है, तो इसे पिनोकोसाइटोसिस (तरल पदार्थ के लिए) या फेगोसाइटोसिस (ठोस पदार्थों के लिए) कहते हैं।
7. एक्सोसाइटोसिस (Exocytosis): कोशिका द्वारा अनावश्यक पदार्थों को कोशिका झिल्ली से बाहर निकालना एक्सोसाइटोसिस कहलाता है। यह क्रिया स्रावी कोशिकाओं में देखी जाती है।
8. कोशिका झिल्ली चयनात्मक झिल्ली की तरह काम करती है, जिसका मतलब है कि यह सिर्फ कुछ खास पदार्थों को ही अंदर-बाहर जाने देती है।
(ii) कोशिका भित्ति के कार्य:
1. कोशिका भित्ति कोशिकाओं को बाहरी झटकों और नुकसान से बचाती है।
2. यह कोशिका को एक तय आकार देती है और उसे फैलने से रोकती है।
3. यह कोशिका को मजबूत यांत्रिक शक्ति प्रदान करती है।
4. अंतरकोशिकीय पदार्थों का संवहन प्लाज्मोडेस्मेटा द्वारा होता है। यह कोशिकाओं के बीच संचार में सहायक है।
5. यह कोशिका के भीतर और बाहर के वातावरण के बीच परासरणी संतुलन बनाए रखती है।
6. पौधों में कोई कंकाल नहीं होता, इसलिए कोशिका भित्ति पौधों को सीधा खड़ा रखने और दृढ़ता प्रदान करने में मदद करती है।
(iii) निष्क्रिय व सक्रिय परिवहन:
1. निष्क्रिय अभिगमन (Passive Transport):
जब आयन कोशिका झिल्ली के माध्यम से अधिक सांद्रता वाले क्षेत्र से कम सांद्रता वाले क्षेत्र की ओर बढ़ते हैं, तो यह गति रासायनिक या विद्युत प्रवणता (Gradient) पर निर्भर करती है और इसमें किसी ऊर्जा की आवश्यकता नहीं होती है। उदाहरण के लिए, परासरण और विसरण।
In simple words: कोशिका झिल्ली कोशिका को आकार देती है, उसकी रक्षा करती है, और पदार्थों को अंदर-बाहर आने-जाने देती है। कोशिका भित्ति पौधों को सहारा और सुरक्षा देती है। निष्क्रिय परिवहन में ऊर्जा नहीं लगती, जबकि सक्रिय परिवहन में ऊर्जा खर्च होती है।
🎯 Exam Tip: कोशिका झिल्ली और भित्ति के कार्यों को उनके स्थान और संरचना से जोड़कर याद रखें, और सक्रिय-निष्क्रिय परिवहन के ऊर्जा संबंधी अंतर पर ध्यान दें।
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