RBSE Solutions Class 11 Biology Chapter 42 भूमण्डलीय पर्यावरणीय परिवर्तन

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Detailed Chapter 42 भूमण्डलीय पर्यावरणीय परिवर्तन RBSE Solutions for Class 11 Biology

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Class 11 Biology Chapter 42 भूमण्डलीय पर्यावरणीय परिवर्तन RBSE Solutions PDF

RBSE Class 11 Biology Chapter 42 पाठ्यपुस्तक के प्रश्न

RBSE Class 11 Biology Chapter 42 वस्तुनिष्ठ प्रश्न

 

Question 1. वायु में कार्बन-डाइ-ऑक्साइड की सांद्रता है
(अ) 0.3 प्रतिशत
(ब) 0.03 प्रतिशत
(स) 0.003 प्रतिशत
(द) 33.00 प्रतिशत
Answer: (ब) 0.03 प्रतिशत
In simple words: वायुमंडल में कार्बन डाइऑक्साइड गैस बहुत कम मात्रा में मौजूद है, जो सिर्फ 0.03 प्रतिशत है। यह एक महत्वपूर्ण गैस है जो पौधों के लिए जरूरी है।

🎯 Exam Tip: याद रखें कि कार्बन डाइऑक्साइड की सांद्रता बहुत कम है, लेकिन इसका वैश्विक जलवायु पर बड़ा प्रभाव पड़ता है, इसलिए सटीक प्रतिशत मान महत्वपूर्ण है।

 

Question 4. ओजोन छिद्र से तात्पर्य है
(अ) ओजोन परत में छिद्र
(ब) ट्रोपोस्फीयर में ओजोन परत की कमी
(स) ट्रोपोस्फीयर में ओजोन परत की मोटाई में वृद्धि
(द) स्ट्रेटोस्फीयर की ओजोन परत की मोटाई में कमी
Answer: (द) स्ट्रेटोस्फीयर की ओजोन परत की मोटाई में कमी
In simple words: ओजोन छिद्र का मतलब ओजोन परत में एक असली छेद नहीं है, बल्कि स्ट्रेटोस्फीयर में ओजोन गैस की मात्रा का कम हो जाना है।

🎯 Exam Tip: ओजोन परत स्ट्रेटोस्फीयर में पाई जाती है, और इसके thinning को 'ओजोन छिद्र' कहा जाता है। ट्रोपोस्फीयर में ओजोन प्रदूषण है, जो हानिकारक है, जबकि स्ट्रेटोस्फीयर में ओजोन सुरक्षात्मक है।

 

Question 5. वातावरण में किसकी अधिकता से तेजाबी वर्षा होती है
(अ) \( O_3 \)
(ब) \( CO_2 \) व \( CO \)
(स) \( SO_3 \) वे \( CO \)
(द) \( SO_2 \)
Answer: (द) \( SO_2 \)
In simple words: जब हवा में सल्फर डाइऑक्साइड बहुत ज्यादा हो जाती है, तो यह बारिश के पानी के साथ मिलकर तेजाबी वर्षा बनाती है।

🎯 Exam Tip: तेजाबी वर्षा के मुख्य कारण सल्फर डाइऑक्साइड (\( SO_2 \)) और नाइट्रोजन ऑक्साइड (\( NO_x \)) हैं, जो उद्योगों और वाहनों से निकलते हैं।

 

RBSE Class 11 Biology Chapter 42 अतिलघूत्तरात्मक प्रश्न

 

Question 1. ओजोन गैस का रासायनिक सूत्र क्या है?
Answer: ओजोन गैस का रासायनिक सूत्र \( O_3 \) है।
In simple words: ओजोन गैस तीन ऑक्सीजन परमाणुओं से मिलकर बनी होती है, इसलिए इसका सूत्र \( O_3 \) है।

🎯 Exam Tip: ओजोन (\( O_3 \)) ऑक्सीजन (\( O_2 \)) का एक अलग रूप है, जिसमें एक अतिरिक्त ऑक्सीजन परमाणु होता है।

 

Question 3. ओजोन वायुमण्डल में कहां मिलती है?
Answer: ओजोन वायुमंडल के समताप मंडल (स्ट्रेटोस्फीयर) में पाई जाती है।
In simple words: ओजोन परत धरती से थोड़ी ऊंचाई पर वायुमंडल की एक खास परत में होती है, जिसे समताप मंडल कहते हैं।

🎯 Exam Tip: ओजोन परत स्ट्रेटोस्फीयर में होती है, जो पृथ्वी को सूरज की हानिकारक पराबैंगनी किरणों से बचाती है।

 

Question 4. हरित गृह गैसें कौनसी हैं?
Answer: हरित गृह गैसें मुख्य रूप से कार्बन डाइऑक्साइड (\( CO_2 \)), क्लोरोफ्लोरोकार्बन (CFCs), नाइट्रस ऑक्साइड (\( N_2O \)), कार्बन मोनोऑक्साइड (\( CO \)) और मीथेन (\( CH_4 \)) हैं।
In simple words: जिन गैसों के कारण पृथ्वी गर्म होती है, उनमें \( CO_2 \), CFCs, \( N_2O \), \( CO \) और \( CH_4 \) जैसी गैसें शामिल हैं।

🎯 Exam Tip: हरित गृह गैसों के नाम और उनके रासायनिक सूत्र याद रखें, क्योंकि ये वैश्विक तापन में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।

 

Question 5. हरित गृह प्रभाव से क्या होगा?
Answer: हरित गृह प्रभाव के कारण पृथ्वी का तापमान बढ़ जाएगा, जिससे कई बुरे परिणाम होंगे जैसे कि जलवायु परिवर्तन और समुद्री जलस्तर का बढ़ना।
In simple words: हरित गृह प्रभाव से धरती बहुत ज्यादा गर्म हो जाएगी, जिससे मौसम बदल जाएगा और कई समस्याएं होंगी।

🎯 Exam Tip: हरित गृह प्रभाव के कारण वैश्विक तापन होता है, जिसके दूरगामी परिणाम पर्यावरणीय संतुलन को बिगाड़ सकते हैं।

 

Question 6. हरित गृह प्रभाव को रोकने के लिए एक मुख्य उपाय बताइए।
Answer: हरित गृह प्रभाव को रोकने का एक मुख्य उपाय है अधिक से अधिक पेड़ लगाना (वृक्षारोपण), वनों की कटाई पर रोक लगाना और वातावरण में कार्बन डाइऑक्साइड (\( CO_2 \)) के उत्सर्जन को कम करना।
In simple words: हरित गृह प्रभाव को कम करने के लिए ज्यादा पेड़ लगाएं, जंगल न काटें और \( CO_2 \) को हवा में कम छोड़ें।

🎯 Exam Tip: वृक्षारोपण और ऊर्जा दक्षता हरित गृह गैसों को कम करने के लिए सबसे प्रभावी तरीकों में से हैं।

 

Question 7. वायुमण्डल तापन किसे कहते हैं?
Answer: वायुमंडल में कार्बन डाइऑक्साइड (\( CO_2 \)) की मात्रा बढ़ने से पृथ्वी का तापमान लगातार बढ़ रहा है। इसी तापमान वृद्धि को भूमंडलीय तापन या ग्लोबल वार्मिंग कहते हैं।
In simple words: जब हवा में कार्बन डाइऑक्साइड बहुत ज्यादा हो जाती है, तो धरती का तापमान बढ़ जाता है, इसी को ग्लोबल वार्मिंग कहते हैं।

🎯 Exam Tip: भूमंडलीय तापन कार्बन डाइऑक्साइड और अन्य हरित गृह गैसों के कारण होने वाली पृथ्वी के औसत तापमान में वृद्धि है।

 

Question 8. अलनीनो प्रभाव क्या है?
Answer: अलनीनो एक समुद्री घटना है जिसमें प्रशांत महासागर की सतह का पानी असामान्य रूप से गर्म हो जाता है। यह समुद्री धाराओं में उतार-चढ़ाव पैदा करता है और इस तरह वातावरण को प्रभावित करता है।
In simple words: अलनीनो एक मौसम बदलाव है जिसमें प्रशांत महासागर का पानी गर्म हो जाता है, जिससे दुनिया भर के मौसम पर असर पड़ता है।

🎯 Exam Tip: अलनीनो प्रशांत महासागर के पानी के तापमान से जुड़ा एक मौसमी पैटर्न है, जो अक्सर दुनिया भर में चरम मौसम की घटनाओं का कारण बनता है।

 

Question 9. ओजोन परत का क्या कार्य है?
Answer: ओजोन परत सूर्य से आने वाली हानिकारक पराबैंगनी (अल्ट्रावायलेट) किरणों को पृथ्वी तक पहुंचने से रोकती है। यह पृथ्वी पर जीवन को इन किरणों के बुरे प्रभावों से बचाती है, जैसे त्वचा कैंसर और आनुवांशिक क्षति।
In simple words: ओजोन परत धरती को सूरज की खतरनाक किरणों से बचाती है, जैसे एक छाता हमें धूप से बचाता है।

🎯 Exam Tip: ओजोन परत एक प्राकृतिक ढाल है जो पृथ्वी पर जीवों को पराबैंगनी विकिरण से बचाती है, जिससे पारिस्थितिकी तंत्र और मानव स्वास्थ्य दोनों सुरक्षित रहते हैं।

 

Question 10. CFC का पूरा नाम लिखिये।
Answer: CFC का पूरा नाम 'क्लोरोफ्लोरोकार्बन' है।
In simple words: CFC का मतलब क्लोरोफ्लोरोकार्बन है, जो एक प्रकार की गैस है।

🎯 Exam Tip: CFCs ओजोन परत को नुकसान पहुंचाने वाले प्रमुख रसायनों में से एक हैं, इसलिए इन्हें याद रखना महत्वपूर्ण है।

 

Question 11. CFC किन उद्योग में उपयोग में लाई जाती है?
Answer: CFCs का उपयोग मुख्य रूप से एयर कंडीशनर, रेफ्रिजरेटर (फ्रिज), प्लास्टिक फोम, पेंट (रंग) और विभिन्न प्रकार के एयरोसोल उत्पादों में किया जाता है।
In simple words: CFCs एयर कंडीशनर, फ्रिज और स्प्रे जैसी कई चीजों में इस्तेमाल होती हैं।

🎯 Exam Tip: CFCs का उपयोग अब काफी हद तक प्रतिबंधित कर दिया गया है क्योंकि वे ओजोन परत को गंभीर नुकसान पहुंचाते हैं।

 

Question 12. क्षोभ मण्डल की समुद्र तल से कितनी ऊंचाई है?
Answer: क्षोभ मंडल (ट्रोपोस्फीयर) की समुद्र तल से ऊंचाई लगभग 16 किलोमीटर तक है। यह मौसम संबंधी सभी घटनाओं का क्षेत्र है।
In simple words: क्षोभ मंडल धरती से ऊपर लगभग 16 किलोमीटर तक फैला हुआ है।

🎯 Exam Tip: क्षोभ मंडल वायुमंडल की सबसे निचली परत है जहां पृथ्वी का अधिकांश मौसम होता है।

 

Question 13. अलनीनो प्रभाव सामान्यतया साल के किस समय में उत्पन्न होता है?
Answer: अलनीनो प्रभाव सामान्यतया वर्ष के अंत में, यानी क्रिसमस के समय (दिसंबर के आसपास) उत्पन्न होता है।
In simple words: अलनीनो आमतौर पर साल के आखिर में, क्रिसमस के आसपास शुरू होता है।

🎯 Exam Tip: अलनीनो शब्द स्पेनिश में 'छोटा लड़का' या 'क्राइस्ट शिशु' का अर्थ है, जो क्रिसमस के मौसम में इसके आगमन से जुड़ा है।

 

Question 14. अम्लीय वर्षा को परिभाषित कीजिए।
Answer: अम्लीय वर्षा तब होती है जब उद्योगों और मोटर वाहनों से निकलने वाले धुएं में मौजूद कार्बन डाइऑक्साइड (\( CO_2 \)), सल्फर डाइऑक्साइड (\( SO_2 \)) और नाइट्रस ऑक्साइड (\( N_2O \)) जैसी गैसें वायुमंडल में जमा हो जाती हैं। ये गैसें वर्षा के पानी और वायुमंडलीय जलवाष्प के साथ प्रतिक्रिया करके अम्ल बनाती हैं। जब ये अम्ल वर्षा के पानी के साथ पृथ्वी पर गिरते हैं, तो इसे अम्लीय वर्षा कहते हैं।
In simple words: जब कारखानों और गाड़ियों से निकलने वाली गैसें बारिश के पानी से मिलकर अम्लीय हो जाती हैं, तो उसे तेजाबी वर्षा कहते हैं। यह पेड़ों और इमारतों को नुकसान पहुंचाती है।

🎯 Exam Tip: अम्लीय वर्षा मुख्य रूप से जीवाश्म ईंधन के जलने से निकलने वाले सल्फर डाइऑक्साइड (\( SO_2 \)) और नाइट्रोजन ऑक्साइड (\( NO_x \)) के कारण होती है।

 

Question 15. ओजोन परत के ह्रास से होने वाले मुख्य दुष्प्रभावों को लिखिए।
Answer: ओजोन परत के ह्रास के मुख्य दुष्प्रभाव हैं: त्वचा कैंसर का खतरा बढ़ना, पृथ्वी के तापमान में वृद्धि, जीवों में आनुवांशिक लक्षणों में परिवर्तन, पौधों में प्रकाश संश्लेषण की दर कम होना, अम्लीय वर्षा को बढ़ावा मिलना और मोतियाबिंद (कैटरेक्ट) जैसे आँखों के रोग उत्पन्न होना।
In simple words: ओजोन परत के कमजोर होने से त्वचा कैंसर, धरती का गर्म होना, पेड़-पौधों को नुकसान और आंखों की बीमारियां बढ़ सकती हैं।

🎯 Exam Tip: ओजोन परत का क्षरण हानिकारक पराबैंगनी विकिरण को पृथ्वी तक पहुंचने देता है, जिससे मानव स्वास्थ्य और पारिस्थितिकी तंत्र दोनों पर गंभीर नकारात्मक प्रभाव पड़ते हैं।

 

Question 5. वायुमण्डल क्या होता है?
Answer: वायुमंडल पृथ्वी की सतह से लगभग 800-1000 किलोमीटर की ऊंचाई तक फैला हुआ गैसों का एक विशाल आवरण है। इसे ही वायुमंडल कहते हैं। ऊंचाई के अनुसार वायु की सघनता कम होती जाती है, लेकिन पृथ्वी के पास वायु भारी और घनी होती है। वायुमंडल को पृथ्वी तल से ऊपर की ओर इसकी विशेषताओं के आधार पर निम्नलिखित परतों में विभाजित किया गया है:
(i) क्षोभमंडल (Troposphere): यह पृथ्वी की सबसे निचली परत है। वायुमंडल का अधिकांश द्रव्यमान इसी भाग में होता है। क्षोभमंडल में गैसें, जलवाष्प और धूल के कण पाए जाते हैं। इसकी ऊंचाई पृथ्वी तल से लगभग 16 किलोमीटर तक है। पृथ्वी पर वायुदाब इसी के कारण होता है। मौसम संबंधी सभी परिवर्तन (जैसे बादलों का बनना, वर्षा, हवाओं का चलना और आंधी-तूफान) इसी भाग में होते हैं। क्षोभमंडल को समतापमंडल से अलग करने वाले क्षेत्र को क्षोभसीमा कहते हैं। इसमें दोनों मंडलों के लक्षण पाए जाते हैं।
(ii) समतापमंडल (Stratosphere): यह समुद्र तल से 18 से 32 किलोमीटर की ऊंचाई तक फैला होता है। इसमें तापमान लगभग समान रहता है और हल्की गैसें होती हैं। इस परत में आंधी-तूफान और बादल नहीं होते हैं।
(iii) ओजोनमंडल (Ozonosphere): यह समुद्र तल से 32 से 80 किलोमीटर की ऊंचाई तक होता है। यह मंडल ओजोन गैस से भरपूर होता है और तापमान समान रहता है। यह परत सूर्य से आने वाली पराबैंगनी किरणों को सोखकर जीवों की रक्षा करती है।
(iv) आयनमंडल (Ionosphere): यह समुद्र तल से 80-640 किलोमीटर की ऊंचाई तक फैला होता है। यहां वायु हल्की और आवेशित कणों से युक्त होती है।
In simple words: वायुमंडल धरती के चारों ओर हवा की एक बड़ी चादर है, जो 800-1000 किमी तक फैली है। इसमें क्षोभमंडल, समतापमंडल, ओजोनमंडल और आयनमंडल जैसी परतें होती हैं। हर परत की अपनी खास विशेषताएं और कार्य होते हैं, जैसे क्षोभमंडल में मौसम बदलना और ओजोनमंडल का सूरज की हानिकारक किरणों से बचाव करना।

🎯 Exam Tip: वायुमंडल की प्रत्येक परत की ऊंचाई, तापमान की विशेषताएँ, और उसमें होने वाली प्रमुख घटनाओं को याद रखना महत्वपूर्ण है।

 

Question 6. ओजोन परत को परिभाषित कीजिए।
Answer: ओजोन परत समतापमंडल में मौजूद ओजोन गैस (\( O_3 \)) की एक परत है। समतापमंडल में पराबैंगनी विकिरण ऑक्सीजन (\( O_2 \)) का प्रकाश विच्छेदन करके परमाणु ऑक्सीजन (O) बनाता है, जो फिर से \( O_2 \) से जुड़कर \( O_3 \) बनाता है। यह ओजोन परत पृथ्वी पर जीवों को तेज पराबैंगनी विकिरण के हानिकारक प्रभावों से बचाती है। इसे 'सुरक्षा छतरी' के नाम से भी जाना जाता है। इस परत की मोटाई मौसम के अनुसार बदलती रहती है; यह बसंत ऋतु (फरवरी से अप्रैल) में सबसे ज्यादा और वर्षा ऋतु (जुलाई से अक्टूबर) में सबसे कम रहती है। ओजोन परत की मोटाई को डॉबसन इकाई (Dobson unit) में मापा जाता है।
प्रक्रिया:
\( O_2 \)
\( \implies O+O \)
\( \implies O+O_2 \rightarrow O_3 \)
In simple words: ओजोन परत वायुमंडल में ओजोन गैस (\( O_3 \)) की एक ढाल है जो सूरज की हानिकारक पराबैंगनी किरणों से धरती पर जीवन को बचाती है। इसकी मोटाई मौसम के साथ बदलती है और इसे डॉबसन इकाई में मापते हैं।

🎯 Exam Tip: ओजोन परत के निर्माण और उसके क्षरण की रासायनिक प्रतिक्रियाओं को समझें, क्योंकि ये इसके सुरक्षात्मक कार्य के लिए महत्वपूर्ण हैं।

 

Question 7. समताप मण्डल को परिभाषित कीजिए।
Answer: समताप मंडल (स्ट्रेटोस्फीयर) क्षोभमंडल के ठीक ऊपर स्थित है। यह मंडल समुद्र तल से 18 से 32 किलोमीटर की ऊंचाई तक फैला होता है। इस परत में हल्की गैसें पाई जाती हैं, लेकिन बादल, आंधी-तूफान जैसी मौसमी घटनाएं इसमें नहीं होतीं। इसमें ओजोन परत भी होती है और यहां तापमान लगभग समान रहता है।
In simple words: समताप मंडल हवा की एक परत है जो क्षोभमंडल के ऊपर है। यह 18-32 किमी ऊंचाई पर है, यहां मौसम शांत रहता है और ओजोन परत भी यहीं पाई जाती है।

🎯 Exam Tip: समताप मंडल की मुख्य विशेषताएं इसकी मौसमी स्थिरता, ओजोन परत की उपस्थिति और ऊंचाई के साथ तापमान में वृद्धि हैं।

 

RBSE Class 11 Biology Chapter 41 निबन्धात्मक प्रश्न

 

Question 1. हरित गृह प्रभाव को परिभाषित कर इससे होने वाले दुष्प्रभाव तथा नियंत्रण के उपाय लिखिए।
Answer:
हरित गृह प्रभाव की परिभाषा और क्रियाविधि:
हरित गृह प्रभाव एक प्राकृतिक प्रक्रिया है जिसके कारण पृथ्वी की सतह और वायुमंडल गर्म हो जाते हैं। यदि यह प्रभाव नहीं होता, तो पृथ्वी की सतह का औसत तापमान 15°C के बजाय -18°C रहता। फ्रांस के वैज्ञानिक जेफोरियर ने 1827 में इसे 'हरित गृह प्रभाव' नाम दिया था। इस प्रभाव के तहत, सूर्य से आने वाला सौर विकिरण का लगभग एक-चौथाई भाग बादलों और गैसों द्वारा परावर्तित हो जाता है। दूसरा एक-चौथाई भाग वायुमंडलीय गैसों द्वारा अवशोषित हो जाता है। लगभग आधा आने वाला सौर विकिरण पृथ्वी की सतह पर पड़ता है और उसे गर्म करता है, जिसका कुछ भाग वापस परावर्तित होकर लौट जाता है। पृथ्वी की सतह अंतरिक्ष में अवरक्त विकिरण (ऊष्मा) के रूप में उत्सर्जित करती है। लेकिन इसका बहुत छोटा हिस्सा ही अंतरिक्ष में जा पाता है, क्योंकि इसका अधिकांश भाग वायुमंडलीय गैसों (जैसे कार्बन डाइऑक्साइड (\( CO_2 \)), मीथेन (\( CH_4 \)), जलवाष्प, नाइट्रस ऑक्साइड (\( N_2O \)) और क्लोरोफ्लोरोकार्बन (CFCs)) द्वारा अवशोषित हो जाता है। ये गैसें ऊष्मा ऊर्जा को विकिरित करती हैं और इसका अधिकतर भाग पृथ्वी की सतह पर वापस आ जाता है, जिससे पृथ्वी फिर से गर्म हो जाती है। यह चक्र कई बार दोहराया जाता है, जिससे पृथ्वी की सतह और निचले वायुमंडल का तापमान बढ़ता रहता है। इन गैसों को हरित गृह गैसें कहा जाता है क्योंकि इनके कारण ही हरित गृह प्रभाव होता है।
वायुमंडल में कार्बन डाइऑक्साइड की मात्रा केवल 0.03 प्रतिशत है, लेकिन यह प्रकाश संश्लेषण के अलावा पृथ्वी के तापमान को भी नियंत्रित करती है। वायुमंडल का घेरा पृथ्वी पर हरित गृह के कांच की दीवार की तरह काम करता है।

पृथ्वी वायुमण्डल ग्रीन हाउस गैसें सूर्य सूर्य प्रकाश-ऊर्जा परावर्तित अवरक्त विकिरण पुनः उत्सर्जित
60% कार्बन डाइऑक्साइड 20% मीथेन 14% सीएफसीज 6% NO

हरित गृह प्रभाव के मुख्य कारण:
वैश्विक उष्णता मुख्य रूप से बढ़ती मानव आबादी और उसकी गतिविधियों के कारण हो रही है। मानव द्वारा संसाधनों का दुरुपयोग, जैव ईंधन के भंडारों का ह्रास, वातावरण में \( CO_2 \) और अन्य हरित गृह गैसों की मात्रा में बढ़ोतरी, और समताप मंडल की ओजोन परत का ह्रास इसके प्रमुख कारण हैं। हरे पौधे प्रकाश संश्लेषण द्वारा भोजन बनाने के लिए \( CO_2 \) का उपयोग करते हैं। जंगलों की कटाई से वायुमंडल में \( CO_2 \) की मात्रा बढ़ रही है, जिससे हरित गृह प्रभाव और बढ़ता है। बढ़ती आबादी के साथ औद्योगीकरण भी तेजी से हो रहा है, जिससे वायुमंडल में \( CO_2 \) की मात्रा लगातार बढ़ रही है।

हरित गृह प्रभाव के दुष्प्रभाव:
हरित गृह प्रभाव से पृथ्वी का तापमान बढ़ेगा, जिससे तटवर्ती इलाकों में भारी वर्षा और बाढ़ की संभावनाएं बढ़ेंगी। औसत वर्षा वाले क्षेत्रों में सूखे की स्थिति बनेगी। यदि तापमान इसी प्रकार बढ़ता रहा तो सन् 2100 तक औसतन 3.60° सेल्सियस की वृद्धि हो सकती है। इसके परिणामस्वरूप भीषण बाढ़, सूखा, चक्रवात और दावाग्नि (जंगल की आग) का सिलसिला शुरू हो जाएगा, जिससे मानवता को खतरा उत्पन्न होगा। ताप बढ़ने के साथ ही भारत और अन्य विकासशील देशों में अनाज और विभिन्न फसलों के उत्पादन में कमी आएगी, साथ ही मछलियों के उत्पादन में भी कमी आएगी। तापमान में वृद्धि से ध्रुवों की बर्फ पिघलने लगेगी, जिससे समुद्र का जलस्तर ऊपर उठ सकता है और तटवर्ती इलाके समुद्र के पानी में डूब जाएंगे। अंटार्कटिका की बर्फ भी पूरी तरह पिघल जाएगी।

हरित गृह प्रभाव को नियंत्रित करने के उपाय:
हरित गृह प्रभाव को नियंत्रित करने के लिए निम्नलिखित उपाय किए जा सकते हैं:

  • वायुमंडल में कार्बन डाइऑक्साइड (\( CO_2 \)), मीथेन (\( CH_4 \)), क्लोरोफ्लोरोकार्बन (CFCs) जैसे यौगिकों की मात्रा को कम करना।
  • औद्योगिक प्रतिष्ठानों में ऐसे संयंत्र लगाना जो कार्बन के यौगिकों और अन्य गैसों का कम उत्सर्जन करें, और उत्सर्जित होने से पहले उन्हें वायुमंडल में जाने से पूर्व ही विघटित कर दें।
  • जीवाश्म ईंधनों का प्रयोग कम करना।
  • वनों का संरक्षण और विस्तार करना ताकि हरित गृह प्रभाव वाली गैसों का अधिक से अधिक शोषण हो सके।
  • जीवाश्म ईंधनों के स्थान पर सौर ऊर्जा जैसे पारंपरिक ऊर्जा स्रोतों का उपयोग करना चाहिए जिससे हरित गृह प्रभाव गैसों की मात्रा कम हो सके।
  • बढ़ती जनसंख्या पर नियंत्रण करना ताकि प्राकृतिक संसाधनों का उपयोग कम हो सके।
  • जैविक खादों का अधिकाधिक प्रयोग करना चाहिए।

विश्वव्यापी उष्णता को नियंत्रित करने के लिए जीवाश्म ईंधन का उपयोग कम करना, ऊर्जा दक्षता में सुधार करना, वनोन्मूलन को कम करना और वृक्षारोपण करना तथा मनुष्य की बढ़ती हुई जनसंख्या को नियंत्रित करना होगा। वायुमंडल में हरित गृह गैसों के उत्सर्जन को कम करने के लिए अंतरराष्ट्रीय प्रयास भी किए जा रहे हैं।
In simple words: हरित गृह प्रभाव वह प्रक्रिया है जिससे धरती का तापमान बढ़ता है क्योंकि कुछ गैसें सूरज की गर्मी को रोक लेती हैं। इसके कारण धरती ज्यादा गर्म होती है, बाढ़, सूखा और फसलें खराब होती हैं। इसे रोकने के लिए हमें पेड़ लगाने चाहिए, जंगल काटने से बचना चाहिए, कम प्रदूषण फैलाना चाहिए और साफ ऊर्जा का इस्तेमाल करना चाहिए।

🎯 Exam Tip: इस निबंध प्रश्न के लिए, हरित गृह प्रभाव की सटीक परिभाषा, इसके कारणों (मानवीय गतिविधियों और गैसों), प्रभावों (पर्यावरण, कृषि, जलस्तर) और नियंत्रण उपायों (वृक्षारोपण, ऊर्जा दक्षता, उत्सर्जन में कमी) को बिंदुवार और स्पष्ट रूप से समझाना महत्वपूर्ण है।

 

Question 2. ओजोन परत के ह्रास से होने वाले दुष्प्रभाव तथा इसको कैसे नियंत्रित किया जा सकता है?
Answer:
ओजोन परत के ह्रास से होने वाले दुष्प्रभाव (Harmful effects of Ozone layer depletion):
ओजोन परत का ह्रास (या ओजोन छिद्र) वास्तव में वायु प्रदूषण का एक परिणाम है। इसके मानव स्वास्थ्य पर कई दुष्प्रभाव होते हैं, जैसे त्वचा कैंसर का खतरा बढ़ना और उत्परिवर्तन (म्यूटेशन) की सामान्य दर में वृद्धि होना। वर्तमान में, एयरोसोल स्प्रे से निकलने वाली फ्रियोन गैसें और वायुमंडलीय नाइट्रोजन ऑक्साइड के क्षार समतापमंडल में ओजोन के स्तर को कम करके मानव स्वास्थ्य को खतरे में डाल रहे हैं। पौधों पर भी ओजोन विषाक्तता के कारण पत्तियां पीली पड़ जाती हैं, प्रकाश संश्लेषण की दर कम हो जाती है और उत्पादन घट जाता है। ओजोन परत में कमी से पराबैंगनी किरणें धरती पर अधिक पहुंचती हैं, जिससे त्वचा कैंसर, ऊतक निर्माण में रुकावट, अल्बुमिन स्कंदन और पारिस्थितिक असंतुलन होता है, साथ ही जलवायु भी प्रभावित होती है। कॉर्निया और लेंस द्वारा अवशोषित पराबैंगनी किरणों के कारण फोटोकेराटाइटिस और मोतियाबिंद जैसे रोग उत्पन्न हो जाते हैं।

ओजोन परत के ह्रास को रोकने के उपाय (Control measures of Ozone layer depletion):
भूमंडल के उत्तरी भारत में 4-5% ओजोन परत मानव निर्मित गैसों के कारण पिछले वर्षों में नष्ट हो चुकी है। ओजोन परत को सर्वाधिक क्षति पश्चिम और पूर्वी यूरोप के मध्य क्षेत्र, सोवियत संघ के दक्षिणी भाग, उत्तरी चीन और दक्षिणी कनाडा में हुई है। क्लोरोफ्लोरोकार्बन (CFCs) का उपयोग और उत्पादन, जैसे कार्बन टेट्राक्लोराइड (\( CCl_4 \)), मेथिल क्लोरोफार्म (MCF), पर प्रतिबंध लगाना चाहिए, क्योंकि ये ओजोन को उच्च शक्ति से नुकसान पहुंचाते हैं। वायुमंडल में क्लोरीन का स्तर कम किया जाना चाहिए और यह सुनिश्चित करना चाहिए कि वायुमंडल में नाइट्रोजन और क्लोरीन के ऑक्साइड न बनें। वृक्षारोपण को बढ़ावा देना चाहिए और पेड़ों की कटाई पर रोक लगानी चाहिए। इस संबंध में शिखर सम्मेलन आयोजित होने चाहिए और वायु प्रदूषण की रोकथाम के लिए सशक्त उपाय आवश्यक हैं। सभी लोगों को इसके प्रति जागरूक होना चाहिए ताकि विषाक्त गैसों का निर्माण बंद हो।

ओजोन के क्षरण के हानिकारक प्रभावों को देखते हुए, 1987 में मॉन्ट्रियल (कनाडा) में एक अंतरराष्ट्रीय संधि पर हस्ताक्षर किए गए थे, जिसे मॉन्ट्रियल प्रोटोकॉल कहा जाता है। यह संधि 1989 से प्रभावी हुई। इसके तहत ओजोन को नुकसान पहुंचाने वाली गैसों के उत्सर्जन पर नियंत्रण के लिए प्रतिबंध लगाए गए और अधिक अन्य प्रयास किए गए। प्रोटोकॉल में विकसित और विकासशील देशों के लिए अलग-अलग निश्चित दिशा-निर्देश दिए गए ताकि CFCs और अन्य ओजोन-क्षयकारी रसायनों के उत्सर्जन को कम किया जा सके।

ओजोन परत का क्षरण निम्न कारणों से होता है:

  • क्लोरोफ्लोरोकार्बन और अपक्षय (Decay by CFC): रेफ्रिजरेटर, एयर कंडीशनर, फोम निर्माण और एयरोसोल आदि में क्लोरोफ्लोरोकार्बन (जैसे फ्रीऑन-11 और फ्रीऑन-12) का उपयोग होता है। ये यौगिक हल्के और कम क्वथनांक वाले होते हैं, जिससे ये जल्दी ओजोन परत तक पहुंच जाते हैं और मुक्त मूलक उत्पन्न करके ओजोन परत का क्षरण करते हैं।
    \( CFCl_3 + \text{पराबैंगनी किरणें} = CFCl_2 + Cl \)(मुक्त मूलक)
    \( Cl + O_3 = O_2 + CIO \)(मुक्त मूलक)
    \( CIO + O_3 = ClO_2 + O_2 \)
  • नाइट्रिक ऑक्साइड द्वारा अपक्षय (Decay by Nitric Oxide): पराध्वनिक वायुयानों द्वारा वायु में नाइट्रिक ऑक्साइड छोड़े जाते हैं। ये निम्नलिखित प्रकार से ओजोन परत का क्षरण करते हैं:
    \( NO + O_3 = NO_2 + O_2 \) (नाइट्रोजन डाइऑक्साइड + ऑक्सीजन)

In simple words: ओजोन परत के पतला होने से लोगों को त्वचा कैंसर, आंखों की बीमारियां और पौधों को नुकसान हो सकता है। इसे रोकने के लिए हमें CFCs और नाइट्रिक ऑक्साइड जैसी गैसों का इस्तेमाल कम करना चाहिए, पेड़ लगाने चाहिए और अंतरराष्ट्रीय समझौते (जैसे मॉन्ट्रियल प्रोटोकॉल) का पालन करना चाहिए।

🎯 Exam Tip: ओजोन परत के ह्रास के कारणों (मुख्य रूप से CFCs और नाइट्रिक ऑक्साइड) और उनके प्रभावों (स्वास्थ्य, पर्यावरण) को स्पष्ट रूप से बताएं। नियंत्रण उपायों में अंतरराष्ट्रीय समझौतों और व्यक्तिगत कार्रवाई दोनों का उल्लेख करें।

 

Question 4. अलनीनो प्रभाव को समझाइये।
Answer:
अलनीनो एक भूगोलीय और मौसमी प्रभाव है। 'अलनीनो' नाम दक्षिणी अमेरिकी मछुआरों ने दिया है, और यह शब्द स्पेनिश भाषा से लिया गया है, जिसका अर्थ 'क्राइस्ट शिशु' है, क्योंकि यह आमतौर पर साल के अंत में, क्रिसमस के आसपास उत्पन्न होता है।
समुद्र की धाराएं पानी में उतार-चढ़ाव पैदा करती हैं, जिससे वातावरण प्रभावित होता है। अलनीनो प्रभाव के कारण समुद्र का जल असामान्य रूप से गर्म हो जाता है। यह प्रभाव दक्षिण और मध्य अमेरिका के समुद्री किनारों पर वर्ष के अंत में देखा गया। इससे समुद्र की मछलियां प्रभावित होती हैं और मौसम में भी परिवर्तन आने लगता है। सामान्य रूप से, पश्चिमी वायु प्रशांत क्षेत्र में समुद्री गर्म जल को ऑस्ट्रेलिया की ओर ले जाती है, जबकि ठंडा जल अमेरिकी समुद्री किनारों की ओर रहता है, जिससे समुद्री मछलियों को पोषण मिलता है। लेकिन हर 3 से 7 वर्षों के बाद यह वायु की दिशा बदल जाती है, जिससे गर्म जल दक्षिणी अमेरिका की ओर स्थानांतरित हो जाता है।
अलनीनो प्रभाव समुद्री वायुमंडल तंत्र के उष्णकटिबंधीय प्रशांत क्षेत्र में परिवर्तन लाता है, जिससे मौसम में असामान्य परिवर्तन होते हैं। इसके परिणामस्वरूप दक्षिणी अमेरिका और पेरू क्षेत्र में अधिक वर्षा होकर बाढ़ आ जाती है, और पश्चिमी प्रशांत क्षेत्र में सूखा पड़ता है, जिससे ऑस्ट्रेलिया में विनाशकारी 'बुश फायर' (जंगल की आग) का संकट उत्पन्न हो जाता है।
अब यह स्पष्ट है कि पेरू तट के पास (उत्तर से दक्षिण दिशा में) 30° से 60° दक्षिणी अक्षांशों के बीच एक गर्म धारा बहती है, जिसे अलनीनो धारा कहते हैं। शरद ऋतु में विषुवत रेखा के विपरीत धारा दक्षिण की ओर अलनीनो प्रभाव उत्पन्न करती है। अलनीनो के ठीक विपरीत प्रभावों वाला तंत्र लानीना होता है, जिसमें समुद्री सतह का तापमान सामान्य से नीचे चला जाता है। अलनीनो प्रभाव वास्तव में पूरे विश्व के मौसमी बदलाव का परिणाम है। वनों के विनाश, हरित गृह प्रभाव और पृथ्वी पर बढ़ते तापमान, ओजोन परत के विनाश आदि ने पर्यावरण को असंतुलित कर दिया है। 1982-83 में जब प्रशांत महासागर अचानक अधिक गर्म हो गया, तो इसके विश्वव्यापी प्रभाव देखे गए थे।
In simple words: अलनीनो प्रशांत महासागर के पानी का गर्म होना है, जो हर कुछ साल में होता है। यह दुनिया भर के मौसम को बदल देता है, जैसे कुछ जगह बाढ़ आती है और कुछ जगह सूखा पड़ता है। यह आमतौर पर क्रिसमस के आसपास शुरू होता है।

🎯 Exam Tip: अलनीनो की परिभाषा, इसके कारणों (समुद्री धाराओं का बदलना), प्रभावों (मौसम, मत्स्य पालन, कृषि) और लानीना से इसके अंतर को स्पष्ट करें।

 

Question 5. एक आदर्श वातावरण किस प्रकार बनाये रखा जा सकता है। इस पर एक एक वैज्ञानिक निबन्ध लिखिए।
Answer:
एक आदर्श वातावरण तभी बनाए रखा जा सकता है जब सभी प्रकार के प्रदूषण, जैसे वायु, जल, मृदा, शोर और नाभिकीय प्रदूषण, न हों। वायुमंडल में विभिन्न प्रकार की गैसें, जैसे कार्बन डाइऑक्साइड (\( CO_2 \)), कार्बन मोनोऑक्साइड (\( CO \)), नाइट्रोजन डाइऑक्साइड (\( NO_2 \)), सल्फर डाइऑक्साइड (\( SO_2 \)), क्लोरोफ्लोरोकार्बन (CFCs) और मीथेन (\( CH_4 \)) मानक मात्रा में होनी चाहिए।
आदर्श वातावरण के लिए निम्नलिखित कदम उठाए जा सकते हैं:

  • अधिक से अधिक उद्योगों को शहरों से बाहर स्थानांतरित करना चाहिए, और उनमें पर्याप्त उपकरण लगे होने चाहिए ताकि कम से कम उत्सर्जित पदार्थ या धुआं पर्यावरण में प्रदूषण न फैलाए।
  • ईंधन के रूप में CNG (संपीड़ित प्राकृतिक गैस) का उपयोग करना चाहिए, बड़े शहरों में मेट्रो ट्रेन का प्रचलन बढ़ाना चाहिए, और विद्युत से चलने वाले वाहनों का उपयोग करना चाहिए। सौर ऊर्जा जैसे नवीकरणीय ऊर्जा स्रोतों के उपयोग को बढ़ावा देना चाहिए।
  • पुराने और खराब वाहनों को सड़क से हटा देना चाहिए।
  • शौचालयों का निर्माण, स्वच्छता के प्रति जागरूकता और जलाशयों में अनावश्यक पदार्थों को न डालने पर ध्यान देना आवश्यक है।
  • नाभिकीय परीक्षणों पर रोक लगानी चाहिए और उनके अपशिष्टों के निपटान की पर्याप्त व्यवस्था होनी चाहिए।
  • जंगलों की कटाई पर प्रतिबंध लगाना चाहिए, अधिक वृक्षारोपण करना चाहिए और लकड़ी या कोयले को नहीं जलाना चाहिए।
  • ओजोन परत को नुकसान पहुंचाने वाले कारकों पर गंभीरता से विचार करना चाहिए और इसकी रक्षा करनी चाहिए।
  • अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर परियोजनाओं को लागू करना आवश्यक है। एक आदर्श पर्यावरण प्रदूषण रहित होना चाहिए। प्रत्येक नागरिक का यह एक नैतिक कर्तव्य है। जब तक नैतिक बोध नहीं होगा तब तक इस समस्या का समाधान असंभव होगा।

In simple words: एक अच्छे वातावरण के लिए हमें सभी तरह के प्रदूषण (हवा, पानी, मिट्टी, शोर) को रोकना होगा। इसमें ज्यादा पेड़ लगाना, साफ ऊर्जा का इस्तेमाल करना, फैक्ट्रियों से कम गंदगी निकालना, गाड़ियां कम चलाना और स्वच्छता बनाए रखना शामिल है। हर इंसान को पर्यावरण को बचाने के लिए अपनी जिम्मेदारी समझनी चाहिए।

🎯 Exam Tip: एक आदर्श वातावरण पर निबंध लिखते समय, प्रदूषण के विभिन्न प्रकारों, उनके प्रभावों और उन्हें रोकने के लिए व्यावहारिक समाधानों को व्यवस्थित रूप से प्रस्तुत करें। इसमें व्यक्तिगत, सामुदायिक और अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर की जाने वाली कार्रवाइयां शामिल होनी चाहिए।

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