RBSE Solutions Class 11 Biology Chapter 40 पारिस्थितिक तंत्र

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Detailed Chapter 40 पारिस्थितिक तंत्र RBSE Solutions for Class 11 Biology

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Class 11 Biology Chapter 40 पारिस्थितिक तंत्र RBSE Solutions PDF

 

Question 1. इकोसिस्टम शब्द को सर्वप्रथम किसने प्रतिपादित किया था?
(अ) आर. मिश्रा
(ब) ओडम
(स) क्लीमेन्टस
(द) टेन्सले
Answer: (द) टेन्सले
In simple words: सबसे पहले, टेन्सले नामक वैज्ञानिक ने 'इकोसिस्टम' शब्द का प्रयोग किया था ताकि प्रकृति के तंत्रों को समझाया जा सके।

🎯 Exam Tip: वैज्ञानिक के नाम और उनसे संबंधित महत्वपूर्ण अवधारणाओं को हमेशा याद रखें, क्योंकि ये अक्सर सीधे प्रश्नों में पूछे जाते हैं।

 

Question 2. उपभोक्ता स्तर पर कार्बनिक पदार्थों को स्वांगीकरण कहलाता है
(अ) प्राथमिक उत्पादक
(ब) सकल उत्पादक
(स) द्वितीयक उत्पादक
(द) उपरोक्त में से कोई नहीं
Answer: (स) द्वितीयक उत्पादक
In simple words: जब उपभोक्ता जीव भोजन खाते हैं और उससे अपने शरीर के लिए नए कार्बनिक पदार्थ बनाते हैं, तो इस प्रक्रिया को द्वितीयक उत्पादकता कहते हैं।

🎯 Exam Tip: प्राथमिक उत्पादकता पौधों द्वारा होती है, जबकि द्वितीयक उत्पादकता उपभोक्ताओं (जैसे जानवरों) द्वारा की जाती है। इन दोनों में अंतर स्पष्ट रखें।

 

Question 4. किसी भी घास स्थलीय अथवा सरोवर पारिस्थितिक तंत्र में ऊर्जा का स्तूप सदैव होता है
(अ) प्रतिलोमी
(ब) उल्टा तथा सीधा
(स) केवल सीधा
(द) उपरोक्त में से कोई नहीं
Answer: (स) केवल सीधा
In simple words: किसी भी घास के मैदान या झील के इकोसिस्टम में ऊर्जा का पिरामिड हमेशा सीधा बनता है। इसका मतलब है कि निचले स्तर पर ऊर्जा सबसे ज्यादा होती है और ऊपर के स्तरों पर धीरे-धीरे कम होती जाती है।

🎯 Exam Tip: ऊर्जा का पिरामिड हमेशा सीधा होता है क्योंकि हर पोषण स्तर पर ऊर्जा का स्थानांतरण केवल 10% होता है, बाकी ऊर्जा गर्मी के रूप में नष्ट हो जाती है।

 

Question 5. ऊर्जा के प्रवाह के वैकल्पिक परिपथ किनमें पाये जाते हैं
(अ) खाद्य जाल
(ब) खाद्य श्रृंखला
(स) पारिस्थितिक स्तूप
(द) जैव-भूरासायनिक चक्र
Answer: (अ) खाद्य जाल
In simple words: ऊर्जा को एक जीव से दूसरे जीव तक जाने के कई रास्ते एक साथ मिलकर खाद्य जाल बनाते हैं। यह खाद्य श्रृंखला से अधिक जटिल होता है।

🎯 Exam Tip: खाद्य जाल विभिन्न खाद्य श्रृंखलाओं का एक जटिल नेटवर्क होता है, जो एक पारिस्थितिक तंत्र में ऊर्जा प्रवाह के कई वैकल्पिक रास्ते प्रदान करता है।

RBSE Class 11 Biology Chapter 40 अतिलघूत्तरात्मक प्रश्न

 

Question 1. प्रो. आर. मिश्रा द्वारा पारिस्थितिक तंत्र के समतुल्य दिए शब्द को लिखिये।
Answer: इकोकोस्म (Ecocosm)
In simple words: प्रोफेसर आर. मिश्रा ने पारिस्थितिक तंत्र के लिए 'इकोकोस्म' शब्द का उपयोग किया था।

🎯 Exam Tip: विभिन्न वैज्ञानिकों द्वारा दिए गए महत्वपूर्ण शब्दों को याद रखना जीव विज्ञान में स्कोरिंग के लिए उपयोगी होता है।

 

Question 3. अलवण जलीय पारितंत्र को कितने भागों में बांटा जाता है? नाम लिखिये।
Answer: अलवण जलीय पारितंत्र को मुख्य रूप से दो भागों में बांटा जाता है:
(i) सरित या प्रवाहित जलीय (Lotic): इनमें वे जल निकाय आते हैं जिनमें पानी लगातार बहता रहता है, जैसे झरने, नदियाँ और नाले।
(ii) स्थिर जलीय (Lentic): इनमें वे जल निकाय आते हैं जिनमें पानी रुका हुआ रहता है, जैसे झीलें, तालाब और कुंड।
In simple words: ताजे पानी के इकोसिस्टम को दो तरह से बांटा जाता है: एक जहाँ पानी बहता है (नदी, झरना) और दूसरा जहाँ पानी रुका रहता है (झील, तालाब)।

🎯 Exam Tip: लोटिक (Lotic) और लेंटिक (Lentic) शब्द को उनके अर्थ (बहता हुआ या स्थिर पानी) के साथ याद रखें, यह वर्गीकरण समझने में मदद करेगा।

 

Question 4. पारिस्थितिक तंत्र के मुख्य घटकों के नाम लिखिये।
Answer: पारिस्थितिक तंत्र के दो मुख्य पहलू होते हैं: संरचना और कार्य। संरचना में दो मुख्य घटक शामिल होते हैं:
(i) जैविक घटक (जैसे पेड़-पौधे, जानवर, सूक्ष्मजीव)।
(ii) अजैविक घटक (जैसे सूर्य का प्रकाश, पानी, हवा, मिट्टी, तापमान)।
In simple words: एक इकोसिस्टम में दो मुख्य हिस्से होते हैं: उसका ढाँचा और वह कैसे काम करता है। ढाँचे में जीवित चीजें (पेड़-पौधे, जानवर) और निर्जीव चीजें (पानी, हवा, धूप) आती हैं।

🎯 Exam Tip: पारिस्थितिक तंत्र के जैविक और अजैविक घटकों को उदाहरण सहित याद रखें, क्योंकि ये किसी भी पारिस्थितिक तंत्र के मूल आधार होते हैं।

 

Question 5. उत्पादक के लिए परिवर्तक शब्द किसने दिया था?
Answer: उत्पादक के लिए परिवर्तक शब्द E.J. कोरमोन्डी (E.J. Kormondy) ने दिया था।
In simple words: कोरमोन्डी ने उत्पादकों को 'परिवर्तक' कहा था।

🎯 Exam Tip: जीव विज्ञान में वैज्ञानिकों द्वारा दिए गए विशेष शब्दों और अवधारणाओं को उनके नाम के साथ याद करना महत्वपूर्ण है।

 

Question 6. पारिस्थितिक स्तूप की संकल्पना सर्वप्रथम किसने दी थी?
Answer: पारिस्थितिक स्तूप (Ecological Pyramid) की संकल्पना सर्वप्रथम चार्ल्स एल्टन (Charles Elton) ने दी थी।
In simple words: पारिस्थितिक पिरामिड का विचार सबसे पहले चार्ल्स एल्टन ने दिया था।

🎯 Exam Tip: पारिस्थितिक पिरामिड की अवधारणा एक मूल सिद्धांत है, इसलिए इसके प्रतिपादक का नाम याद रखना आवश्यक है।

 

Question 7. पौधों के लिए प्रकाश संश्लेषी दक्षता का परास (PAR) बताइये।
Answer: पौधों के लिए प्रकाश संश्लेषी सक्रिय विकिरण (PAR) का परास सूर्य विकिरण का 390 nm से 760 nm तक का दृश्यमान वर्णक्रम होता है। प्रकाश संश्लेषण की क्रिया प्रकाश के नीले (430 से 470 nm) और लाल (650 से 760 nm) भाग में सबसे ज्यादा होती है। यह परास वह प्रकाश है जिसका उपयोग पौधे भोजन बनाने में करते हैं।
In simple words: PAR वह प्रकाश होता है जिसे पौधे भोजन बनाने के लिए इस्तेमाल करते हैं, इसकी रेंज 390 nm से 760 nm तक होती है, और यह नीले व लाल प्रकाश में सबसे अच्छे से काम करता है।

🎯 Exam Tip: PAR की परिभाषा, परास (रेंज) और प्रकाश के किन भागों में प्रकाश संश्लेषण सबसे अधिक होता है, इन सभी को याद रखें।

RBSE Class 11 Biology Chapter 40 लघूत्तरात्मक प्रश्न

 

Question 1. पारिस्थितिक तंत्र के कार्यात्मक पहलुओं का वर्णन कीजिए।
Answer: ऊर्जा का प्रवाह और खनिज पदार्थों का चक्रीकरण दो बहुत महत्वपूर्ण पारिस्थितिक प्रक्रियाएँ हैं। ये पारिस्थितिक तंत्र के कार्यों से जुड़े होते हैं। किसी भी पारिस्थितिक तंत्र का कार्यात्मक स्वरूप इन बिंदुओं से स्पष्ट किया जा सकता है:

  • पारिस्थितिक स्तूप (Ecological Pyramids)
  • खाद्य श्रृंखला एवं खाद्य जाल (Food chain and food web)
  • ऊर्जा प्रवाह (Energy flow)
  • खनिजों का चक्रीकरण (Cycling of minerals)
In simple words: एक इकोसिस्टम कैसे काम करता है, इसमें ऊर्जा का चलना, खनिज तत्वों का घूमना, खाने की चेन और पिरामिड जैसे कई हिस्से शामिल हैं।

🎯 Exam Tip: पारिस्थितिक तंत्र के कार्यात्मक पहलुओं को बिंदुवार तरीके से प्रस्तुत करें और प्रत्येक पहलू का संक्षिप्त विवरण दें।

 

Question 3. पारिस्थितिक दक्षता को परिभाषित कीजिये।
Answer: प्रत्येक पारिस्थितिक तंत्र में जीव अपना भोजन प्राप्त करते हैं और उसे जैवभार में बदल कर अगले पोषण स्तर के जीवों को उपलब्ध कराते हैं। खाद्य श्रृंखला के विभिन्न पोषण स्तरों के बीच प्रवाहित होने वाली ऊर्जा की मात्रा के अनुपात को प्रतिशत में व्यक्त करने पर इसे पारिस्थितिक दक्षता (Ecological efficiency) कहते हैं। यह दर्शाता है कि एक स्तर से दूसरे स्तर पर कितनी ऊर्जा का स्थानांतरण होता है।
In simple words: पारिस्थितिक दक्षता बताती है कि एक खाने के स्तर से दूसरे स्तर तक कितनी ऊर्जा आगे बढ़ती है, इसे प्रतिशत में मापा जाता है।

🎯 Exam Tip: पारिस्थितिक दक्षता की परिभाषा स्पष्ट रूप से लिखें और यह भी बताएँ कि यह ऊर्जा के स्थानांतरण से संबंधित है।

 

Question 4. प्राथमिक उत्पादन तथा द्वितीयक उत्पादन में अन्तर स्पष्ट कीजिये।
Answer: प्राथमिक उत्पादन तथा द्वितीयक उत्पादन में अंतर निम्न प्रकार है:

प्राथमिक उत्पादन (Primary Productivity)द्वितीयक उत्पादन (Secondary Productivity)
1. हरे पौधे प्राथमिक उत्पादक होते हैं। यह एक निश्चित समय में किसी इकाई क्षेत्र द्वारा उत्पन्न किए गए जैव पदार्थ (कार्बनिक पदार्थ) की मात्रा या ऊर्जा की दर को प्राथमिक उत्पादकता कहते हैं। इसे भार g/m² या ऊर्जा (Kcal/m²) के रूप में मापा जा सकता है।एक पारिस्थितिक तंत्र की सकल प्राथमिक उत्पादकता (GPP) वह दर है जिससे प्रकाश संश्लेषण के दौरान कार्बनिक तत्व बनते हैं। पौधे अपनी जैविक क्रियाओं के लिए कार्बनिक भोजन का उपयोग करते हैं। GPP में से इस मात्रा को घटाने पर नेट प्राथमिक उत्पादकता (NPP) मिलती है, जो प्राथमिक उपभोक्ता को उपलब्ध होती है। इसी NPP को द्वितीयक उत्पादकता कहते हैं।

In simple words: प्राथमिक उत्पादन पौधों द्वारा भोजन बनाने की दर है, जबकि द्वितीयक उत्पादन उपभोक्ताओं द्वारा उस भोजन को अपने शरीर में बदलने की दर है।

🎯 Exam Tip: प्राथमिक और द्वितीयक उत्पादन के बीच अंतर को स्पष्ट करते हुए उनकी परिभाषा और माप की इकाइयों को भी स्पष्ट करें।

RBSE Class 11 Biology Chapter 40 निबन्धात्मक प्रश्न

 

Question 1. पारिस्थितिक स्तूप से आप क्या समझते हैं? वृक्ष पारिस्थितिक तंत्र में जीवसंख्या तथा जैवभार स्तूप का सचित्र वर्णन कीजिये।
Answer: पारिस्थितिक स्तूप या पिरामिड (Ecological Pyramid):
ब्रिटेन के प्रसिद्ध वैज्ञानिक चार्ल्स एल्टन (Charles Elton, 1927) ने सबसे पहले पारिस्थितिक स्तूप या पिरामिड की अवधारणा दी थी। इसलिए इन्हें एल्टोनियन पिरामिड भी कहते हैं। जब किसी पारिस्थितिक तंत्र के विभिन्न पोषण स्तरों (Trophic levels) को देखा जाता है, तो वे एक के बाद एक सोपानों में व्यवस्थित दिखते हैं। यदि पहले पोषण स्तर को आधार मानकर, क्रम से सभी पोषण स्तरों को चित्र में दिखाया जाए, तो एक पिरामिड जैसा ढाँचा बनता है, जिसे पारिस्थितिक स्तूप या पिरामिड कहते हैं। जैसे-जैसे पिरामिड में निचले पोषण स्तर से ऊपर की ओर बढ़ते हैं, जीवों की संख्या कम होती जाती है। अंत में, सबसे ऊपरी उपभोक्ता (Top consumers) की संख्या बहुत कम रह जाती है। ये पारिस्थितिक स्तूप मुख्य रूप से तीन प्रकार के होते हैं।

(क) जीवभार के पिरामिड (Pyramid of Biomass):
यह पिरामिड भोजन श्रृंखला के जीवों के पारस्परिक संबंध को दर्शाता है, जिसमें इकाई क्षेत्र में जीवों का शुष्क भार (Dry Weight) दिखाया जाता है। जलीय तालाबों के अध्ययन से पता चलता है कि जीवभार पिरामिड उल्टे होते हैं। इसका कारण यह है कि उत्पादक (छोटे जीव) का जीवभार कम होता है, जबकि जैसे-जैसे उपभोक्ता स्तरों की ओर बढ़ते हैं, जीवभार बढ़ता जाता है। हालांकि, घास स्थल का जीवभार पिरामिड सीधा होता है। एक विशाल वृक्ष के पारिस्थितिक तंत्र में भी जीवभार पिरामिड सीधा बनता है, जिसमें वृक्ष आधार पर सबसे अधिक जीवभार वाला होता है।

(ख) जीवों की संख्या के स्तूप (Pyramid of Numbers of Organisms):
यह पिरामिड किसी पारिस्थितिक तंत्र के उत्पादकों और प्राथमिक, द्वितीयक या तृतीयक श्रेणी के उपभोक्ताओं की संख्या को दर्शाता है। इसमें जैसे-जैसे उत्पादक से उपभोक्ताओं की ओर बढ़ते हैं, जीवों की संख्या कम होती जाती है। इसका मतलब है कि उत्पादकों की संख्या सबसे ज्यादा होती है, और उच्चतम उपभोक्ताओं की संख्या सबसे कम होती है। यह पिरामिड सामान्यतः सीधा (Upright) होता है। हालांकि, यह हमेशा सीधा नहीं होता है, जैसे परजीवी खाद्य श्रृंखला वाले तंत्र में या एक विशाल वृक्ष के पारिस्थितिक तंत्र में यह पिरामिड उल्टा (Inverted) होता है। घास स्थलीय पारिस्थितिक तंत्र में घास (उत्पादक) संख्या में सबसे अधिक होती है, और उसके बाद उपभोक्ताओं की संख्या लगातार कम होती जाती है, इसलिए इसका पिरामिड सीधा होता है।

(ग) ऊर्जा के पिरामिड (Pyramid of energy):
तीनों प्रकार के पारिस्थितिक पिरामिडों में से ऊर्जा के पिरामिड एक पारिस्थितिक तंत्र की प्रकृति को सबसे स्पष्ट रूप से दर्शाते हैं। भोजन श्रृंखला में भोजन उत्पादकों से उपभोक्ताओं तक जाता है, यानी ऊर्जा एक स्तर से दूसरे स्तर की ओर प्रवाहित होती है। यह निश्चित है कि ऊर्जा एक पोषण स्तर से दूसरे पोषण स्तर पर जाने पर कम होती जाती है। एक पोषण स्तर में संचित ऊर्जा का केवल 10% ही जीवभार के रूप में परिवर्तित होता है। इसलिए, उत्पादकों में ऊर्जा सबसे ज्यादा होती है, और प्राथमिक, द्वितीयक, तृतीयक व उच्चतम उपभोक्ताओं में ऊर्जा धीरे-धीरे कम होती जाती है। ऊर्जा के आधार पर बने पिरामिड हमेशा सीधे बनते हैं, जिनका आधार बड़ा और शीर्ष छोटा होता है। ऊर्जा प्रवाह हमेशा एक दिशा में होता है।
In simple words: पारिस्थितिक स्तूप दिखाते हैं कि इकोसिस्टम में ऊर्जा, जीवभार या संख्या कैसे एक स्तर से दूसरे स्तर तक जाती है। जीवभार और संख्या के पिरामिड सीधे या उल्टे हो सकते हैं, लेकिन ऊर्जा का पिरामिड हमेशा सीधा होता है क्योंकि ऊर्जा हर स्तर पर कम होती जाती है।

🎯 Exam Tip: पारिस्थितिक स्तूपों के तीनों प्रकार (संख्या, जीवभार, ऊर्जा) की परिभाषा, उनके आकार (सीधे या उल्टे) और उदाहरणों को याद रखें। ऊर्जा पिरामिड का हमेशा सीधा होना एक महत्वपूर्ण तथ्य है।

 

Question 2. खाद्य श्रृंखला तथा खाद्य जाल का उदाहरण सहित वर्णन कीजिये।
Answer:
(i) खाद्य श्रृंखला (Food Chain):
पारिस्थितिक तंत्र में उत्पादक सूर्य की ऊर्जा का उपयोग करके भोजन बनाते हैं। इस भोजन का उपयोग प्राथमिक उपभोक्ता (शाकाहारी) करते हैं। प्राथमिक उपभोक्ता को द्वितीयक उपभोक्ता खाते हैं, और द्वितीयक उपभोक्ता को तृतीयक उपभोक्ता खाते हैं। इसका मतलब है कि पारिस्थितिक तंत्र में उत्पादक और उपभोक्ता एक क्रम में व्यवस्थित रहते हैं, जिसे खाने और खाए जाने का क्रम भी कहते हैं। इस श्रृंखला को ही खाद्य श्रृंखला कहते हैं। प्रकृति में एक खाद्य श्रृंखला में आमतौर पर पाँच-छह से अधिक कड़ियाँ नहीं होती हैं, क्योंकि ऊर्जा के एक पोषण स्तर से दूसरे में जाने पर 90% ऊर्जा गर्मी के रूप में नष्ट हो जाती है। सबसे ऊपरी पोषण स्तरों पर बहुत कम ऊर्जा बचती है। इस श्रृंखला के हर स्तर को पोषण स्तर कहते हैं। एक छोर पर उत्पादक (हरे पौधे) होते हैं, और दूसरे छोर पर अपघटक (decompose) होते हैं।
उदाहरण के लिए घास के मैदान, जलीय और वन पारिस्थितिक तंत्र में खाद्य श्रृंखलाएँ इस प्रकार होती हैं:

  • घास स्थल में खाद्य श्रृंखला: घास → टिड्डा → मेंढक → साँप → मोर (इसमें घास उत्पादक है, टिड्डा प्राथमिक उपभोक्ता, मेंढक द्वितीयक, साँप तृतीयक, और मोर उच्चतम उपभोक्ता है।)
  • जलीय पारिस्थितिक तंत्र में खाद्य श्रृंखला: पादप प्लवक → जन्तु प्लवक → छोटी मछली → बड़ी मछली → मनुष्य
  • वन पारिस्थितिक तंत्र में खाद्य श्रृंखला: पादप → हिरन → भेड़िया → शेर

(ii) खाद्य जाल (Food Web):
खाद्य श्रृंखलाओं में ऊर्जा एक स्तर से दूसरे स्तर पर प्रवाहित होती है। जलीय पारिस्थितिक तंत्र में चारण खाद्य श्रृंखला (Grazing food chain = GFC) ऊर्जा प्रवाह का महत्वपूर्ण साधन है। पारिस्थितिक तंत्र में सभी जीव एक समुदाय में अन्य जीवों के साथ रहते हैं और अपने भोजन स्रोत के आधार पर खाद्य श्रृंखला में एक विशेष स्थान पर होते हैं, जिसे पोषण स्तर कहते हैं। प्रकृति में सरल खाद्य श्रृंखलाएँ नहीं पाई जाती हैं, बल्कि विभिन्न खाद्य श्रृंखलाएँ आपस में जुड़कर एक बहुत जटिल खाद्य जाल बनाती हैं। इसका कारण यह है कि एक ही प्राणी कई तरह के जीवों को अपना भोजन बना सकता है। उदाहरण के लिए, एक घास स्थल पारिस्थितिक तंत्र में प्राथमिक उत्पादकों को टिड्डी और चूहों के अलावा खरगोश, गाय, बकरी जैसे अन्य शाकाहारी भी खा सकते हैं। इसी तरह, चूहों को साँप और साँप को गिद्ध खा सकते हैं, लेकिन इन साँपों और गिद्धों को अन्य जानवर भी खा सकते हैं। यह जटिलता ऊर्जा प्रवाह के कई वैकल्पिक रास्ते बनाती है।
In simple words: खाद्य श्रृंखला बताती है कि ऊर्जा सीधे एक जीव से दूसरे जीव तक कैसे जाती है, जबकि खाद्य जाल दिखाता है कि ऊर्जा प्रवाह के कई रास्ते आपस में कैसे जुड़े हुए हैं, जिससे यह अधिक जटिल हो जाता है।

🎯 Exam Tip: खाद्य श्रृंखला और खाद्य जाल की परिभाषाओं को स्पष्ट करें और उनके बीच के अंतर को उदाहरणों के साथ समझाएँ।

 

Question 3. पारिस्थितिक तंत्र से आप क्या समझते हैं? इसके संरचनात्मक पहलू का वर्णन कीजिये।
Answer: पारिस्थितिक तंत्र (Ecosystem) एक ऐसा समुदाय है जिसमें जीवित जीव (जैविक घटक) और उनके आसपास का निर्जीव वातावरण (अजैविक घटक) एक दूसरे के साथ मिलकर काम करते हैं। वे आपस में ऊर्जा और पदार्थ का आदान-प्रदान करते हैं। यह एक खुला तंत्र होता है, जिसका मतलब है कि इसमें बाहर से ऊर्जा (सूर्य का प्रकाश) आती है और ऊर्जा व पदार्थ इसमें से बाहर भी जा सकते हैं।
पारिस्थितिक तंत्र के संरचनात्मक पहलू:
पारिस्थितिक तंत्र की संरचना में दो मुख्य भाग होते हैं:
1. जैविक घटक: इनमें सभी जीवित जीव शामिल होते हैं, जैसे:

  • उत्पादक: हरे पौधे जो सूर्य के प्रकाश से अपना भोजन बनाते हैं (जैसे घास, पेड़)।
  • उपभोक्ता: जो अपना भोजन खुद नहीं बनाते बल्कि उत्पादकों या अन्य उपभोक्ताओं को खाते हैं (जैसे शाकाहारी, मांसाहारी)।
  • अपघटक: सूक्ष्मजीव जो मृत जीवों और कार्बनिक पदार्थों को तोड़ते हैं (जैसे बैक्टीरिया, कवक)।
2. अजैविक घटक: इनमें सभी निर्जीव कारक शामिल होते हैं, जैसे:
  • प्रकाश: सूर्य का प्रकाश, जो पौधों के लिए ऊर्जा का मुख्य स्रोत है।
  • तापमान: किसी क्षेत्र का तापमान, जो जीवों के जीवन को प्रभावित करता है।
  • पानी: जल, जो सभी जीवित चीजों के लिए आवश्यक है।
  • वायु: हवा में मौजूद गैसें, जैसे ऑक्सीजन और कार्बन डाइऑक्साइड।
  • मिट्टी: मिट्टी के खनिज और पोषक तत्व।
ये सभी घटक आपस में मिलकर एक पारिस्थितिक तंत्र को स्थिर और कार्यात्मक बनाते हैं।
In simple words: पारिस्थितिक तंत्र में जीवित और निर्जीव चीजें एक साथ मिलकर काम करती हैं। इसमें पेड़-पौधे, जानवर और सूक्ष्मजीव (जैविक) और धूप, पानी, हवा, मिट्टी (अजैविक) जैसे हिस्से होते हैं जो एक-दूसरे पर निर्भर करते हैं।

🎯 Exam Tip: पारिस्थितिक तंत्र की परिभाषा को उसके जैविक और अजैविक घटकों के साथ समझाएँ और प्रत्येक घटक के कुछ उदाहरण दें।

 

Question 4. पारिस्थितिक तंत्र में ऊर्जा के प्रवाह को सार्वत्रिक प्रारूप सहित वर्णन कीजिये।
Answer: पारिस्थितिक तंत्र में ऊर्जा प्रवाह (Energy flow in an ecosystem):
पारिस्थितिक तंत्र में ऊर्जा का प्रवेश, उसका एक रूप से दूसरे रूप में बदलना, उसका आगे बढ़ना और वितरण ऊष्मागतिकी के दो मूल नियमों के अनुसार होता है। कार्य करने की क्षमता को ही ऊर्जा कहते हैं। हर जीव को अपनी जैविक क्रियाओं के लिए ऊर्जा की जरूरत होती है। किसी भी पारिस्थितिक तंत्र में ऊर्जा का मुख्य और अंतिम स्रोत सूर्य है। पृथ्वी पर आने वाली कुल प्रकाश ऊर्जा का केवल 1 प्रतिशत भाग प्रकाश संश्लेषण द्वारा भोजन ऊर्जा (रासायनिक ऊर्जा) में बदल पाता है। वनों में यह दक्षता 5 प्रतिशत तक हो सकती है। बची हुई ऊर्जा गर्मी के रूप में नष्ट हो जाती है। पृथ्वी पर कुल प्रकाश संश्लेषण का लगभग 90 प्रतिशत भाग जलीय पौधों (खासकर समुद्री डायटमों और शैवालों) द्वारा होता है, और बाकी हिस्सा स्थलीय पौधों द्वारा होता है।
शाकाहारी (प्राथमिक उपभोक्ता) और मांसाहारी (द्वितीयक उपभोक्ता) में केवल थोड़ी ऊर्जा ही जमा हो पाती है, जैसे 0.1 कैलोरी। अपघटकों तक यह बहुत कम मात्रा में पहुँचती है। असल में, ऊर्जा का एक पोषण स्तर से दूसरे पोषण स्तर में स्थानांतरण और रूपांतरण होता है।
सभी पारिस्थितिक तंत्रों के लिए सूर्य ही एकमात्र ऊर्जा का स्रोत है (समुद्र के जलतापीय पारिस्थितिक तंत्रों को छोड़कर)। सूर्य से आने वाले प्रकाश विकिरण का 50 प्रतिशत भाग ही प्रकाश संश्लेषण में उपयोग होता है। हरे पौधे और रसायन संश्लेषी जीवाणु सूर्य की ऊर्जा का उपयोग करके अकार्बनिक पदार्थों से भोजन बनाते हैं। पौधे प्रकाश संश्लेषी सक्रिय विकिरण (PAR) का केवल 2 से 10 प्रतिशत ही उपयोग करते हैं, और यही ऊर्जा सभी जीवों का पोषण करती है। पृथ्वी पर सभी जीव आहार के लिए सीधे या अप्रत्यक्ष रूप से उत्पादकों (हरे पौधों) पर निर्भर करते हैं। पौधों द्वारा ग्रहण की गई सौर ऊर्जा एक पारिस्थितिक तंत्र के विभिन्न जीवों के माध्यम से प्रवाहित होती है। ऊष्मागतिकी के पहले नियम के अनुसार, ऊर्जा को न तो बनाया जा सकता है और न ही नष्ट किया जा सकता है; इसे केवल एक रूप से दूसरे रूप में बदला जा सकता है। सौर ऊर्जा उत्पादक पौधों को मिलती है, और इनसे ऊर्जा उपभोक्ताओं की ओर एक दिशा में प्रवाहित होती है।
सूर्य के उत्पादक पादप
\( \implies \) जन्तु उपभोक्ता
\( \implies \) अपघटनकर्ता
पारिस्थितिक तंत्र ऊष्मागतिकी के दूसरे नियम का भी पालन करता है। इसके अनुसार, पारिस्थितिक तंत्र को लगातार ऊर्जा की आपूर्ति की आवश्यकता होती है, ताकि वह पौधों और प्राणियों के लिए आवश्यक अणुओं का लगातार संश्लेषण कर सके। पारिस्थितिक तंत्र में हरे पौधे उत्पादक होते हैं। स्थलीय पारिस्थितिक तंत्र में शाक (जड़ी-बूटियाँ), झाड़ियाँ और वृक्ष मुख्य उत्पादक हैं, जबकि जलीय पारिस्थितिक तंत्र में पादप प्लवक (Phytoplankton) और बड़े जलीय पादप प्राथमिक उत्पादक होते हैं।

चित्र 40.8 और 40.9 विभिन्न पोषण स्तरों में ऊर्जा के प्रवाह को दर्शाते हैं। एक सामान्य रैखिक खाद्य श्रृंखला में, ऊर्जा उत्पादक से प्राथमिक उपभोक्ता, फिर द्वितीयक उपभोक्ता और फिर तृतीयक उपभोक्ता तक जाती है। इस प्रक्रिया में प्रत्येक स्तर पर ऊर्जा का कुछ हिस्सा उपयोग (उपापचय) होता है और कुछ हिस्सा गर्मी (ऊष्मा ऊर्जा) के रूप में वातावरण में चला जाता है।

ई.पी. ओडम (E.P. Odum, 1983) ने Y-आकार का या Z-चैनल ऊर्जा प्रवाह मॉडल दिया, जो स्थलीय और जलीय दोनों पारिस्थितिक तंत्रों पर लागू होता है। इस सार्वत्रिक मॉडल (universal model) में, छायादार डिब्बा 'B' जीविय घटक के जीवभार को दर्शाता है। कुल ऊर्जा निवेश या 'I' से दर्शाया गया है। Y-आकार का मॉडल एक शाकवर्ती खाद्य श्रृंखला (grazing food chain) और एक अपरदी खाद्य श्रृंखला (detritus food chain) को दर्शाता है।
यहां इस्तेमाल किए गए प्रतीकों का अर्थ इस प्रकार है:
I = अन्तर्ग्रहित ऊर्जा या निवेश (Total energy input)
LA = पादप आवरण द्वारा अवशोषित प्रकाश (Light absorbed by vegetation)
PG = कुल प्राथमिक उत्पादन (Gross Primary Production)
A = कुल स्वांगीकरण (Total assimilation)
PN = नेट प्राथमिक उत्पादन (Net Primary Production)
P = द्वितीयक (उपभोक्ता) उत्पादन (Secondary Production)
NU = अनुपयोगी ऊर्जा (संचित या निर्यातित) (Unused or exported energy)
NA = उपभोक्ताओं द्वारा अस्वांगीकृत ऊर्जा (बहिक्षेपित) (Non-assimilated energy by consumers)
R = श्वसन (Respiration)
G = वृद्धि (Growth)
E = उत्सर्जी ऊर्जा (Excreted energy)
B = जैव भार (Biomass)
In simple words: इकोसिस्टम में ऊर्जा हमेशा सूर्य से आती है और एक ही दिशा में बहती है, हर खाने के स्तर पर इसका कुछ हिस्सा कम होता जाता है। वैज्ञानिक ओडम ने इसे समझाने के लिए एक खास Y-आकार का मॉडल भी दिया है।

🎯 Exam Tip: ऊर्जा प्रवाह के नियमों, 10% नियम, और ओडम के Y-आकार मॉडल को अच्छी तरह समझें। ऊर्जा पिरामिड हमेशा सीधा क्यों होता है, यह समझाना महत्वपूर्ण है।

 

Question 4. पारिस्थितिक तंत्र में ऊर्जा के प्रवाह को सार्वत्रिक प्रारूप सहित वर्णन कीजिये।
Answer: पारिस्थितिक तंत्र में ऊर्जा का प्रवाह बहुत महत्वपूर्ण है। इसमें ऊर्जा एक रूप से दूसरे रूप में बदलती है और एक जीव से दूसरे जीव तक जाती है। यह प्रक्रिया ऊष्मागतिकी के दो मुख्य नियमों का पालन करती है। ऊर्जा किसी कार्य को करने की क्षमता है, और सभी जीवों को अपनी जैविक क्रियाओं के लिए ऊर्जा चाहिए।

सूर्य ही ऊर्जा का मुख्य स्रोत:
पृथ्वी पर ऊर्जा का एकमात्र और अंतिम मुख्य स्रोत सूर्य है। सूर्य से आने वाली कुल प्रकाश ऊर्जा का केवल 1 प्रतिशत भाग ही प्रकाश संश्लेषण द्वारा भोजन ऊर्जा या रासायनिक ऊर्जा में बदल पाता है। बड़े वनों में यह दक्षता 5 प्रतिशत तक हो सकती है। बाकी ऊर्जा गर्मी के रूप में वातावरण में चली जाती है। पृथ्वी पर होने वाले कुल प्रकाश संश्लेषण का लगभग 90 प्रतिशत भाग जलीय पौधे, खासकर समुद्री डायटम और शैवाल, करते हैं। बाकी स्थलीय पौधे और घास जातियां प्रकाश-संश्लेषण करती हैं।

प्राथमिक उपभोक्ता (शाकाहारी) और द्वितीयक उपभोक्ता (मांसाहारी) बहुत कम ऊर्जा ही अपने अंदर जमा कर पाते हैं, उदाहरण के लिए, द्वितीयक उपभोक्ता में केवल 0.1 कैलोरी ऊर्जा ही संग्रहित होती है। अपघटकों तक भी यह बहुत कम मात्रा में पहुँचती है। असल में, ऊर्जा का एक पोष स्तर से दूसरे पोष स्तर में लगातार स्थानांतरण और रूपांतरण होता रहता है।

ऊर्जा प्रवाह का सामान्य मॉडल (चित्र 40.8):
यह मॉडल दिखाता है कि सौर विकिरण (सूर्य की ऊर्जा) उत्पादकों (हरे पौधों) द्वारा ली जाती है। उत्पादक इस ऊर्जा को रासायनिक ऊर्जा में बदलते हैं। फिर यह ऊर्जा उपभोक्ताओं (जो उत्पादकों को खाते हैं) और अपघटकों (जो मृत जीवों को विघटित करते हैं) तक जाती है। हर स्तर पर ऊर्जा का कुछ हिस्सा उपापचय और यांत्रिक क्रियाओं में इस्तेमाल होता है और कुछ ऊष्मा ऊर्जा के रूप में बाहर निकल जाता है।

ऊर्जा दक्षता और खाद्य श्रृंखला:
हरे पौधे और रसायन संश्लेषी जीवाणु सौर ऊर्जा का उपयोग करके अकार्बनिक पदार्थों से भोजन बनाते हैं। पौधे प्रकाश संश्लेषी सक्रिय विकिरण (PAR) का केवल 2 से 10 प्रतिशत उपयोग करते हैं, और यही ऊर्जा सभी जीवों का पोषण करती है। पृथ्वी पर सभी जीव प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष रूप से उत्पादकों (हरे पौधों) पर निर्भर करते हैं। पौधों द्वारा ग्रहण की गई सौर ऊर्जा एक पारिस्थितिक तंत्र में विभिन्न जीवों के माध्यम से प्रवाहित होती है।

ऊष्मागतिकी के पहले नियम के अनुसार, ऊर्जा को न तो बनाया जा सकता है और न ही नष्ट किया जा सकता है, इसे केवल एक रूप से दूसरे रूप में बदला जा सकता है। सौर ऊर्जा उत्पादक पौधों द्वारा प्राप्त की जाती है और इनसे उपभोक्ताओं की ओर ऊर्जा का प्रवाह एक ही दिशा में होता है। ऊर्जा का प्रवाह इस प्रकार होता है: उत्पादक पादप
\( \implies \) जन्तु उपभोक्ता
\( \implies \) अपघटनकर्ता।

पारिस्थितिक तंत्र ऊष्मागतिकी के दूसरे नियम का भी पालन करता है। इसके अनुसार, पारिस्थितिक तंत्र को लगातार ऊर्जा मिलती रहनी चाहिए ताकि वह पौधों और प्राणियों के लिए आवश्यक अणुओं का लगातार संश्लेषण कर सके। पारिस्थितिक तंत्र में हरे पौधे उत्पादक होते हैं। स्थलीय पारिस्थितिक तंत्र में शाक (जड़ी-बूटियाँ), झाड़ियाँ और वृक्ष मुख्य उत्पादक हैं, जबकि जलीय पारिस्थितिक तंत्र में पादप प्लवक (फाइटोप्लैंकटन) और बड़े जलीय पौधे आदि प्राथमिक उत्पादक होते हैं।

चित्र 40.9 एक रैखिक खाद्य श्रृंखला में ऊर्जा प्रवाह दिखाता है। इसकी व्याख्या नीचे दिए गए प्रतीकों से समझी जा सकती है:

  • I = पूर्ण ऊर्जा निवेश (कुल ऊर्जा जो सिस्टम में आती है)
  • LA = पादप आवरण द्वारा अवशोषित प्रकाश (पौधों द्वारा अवशोषित सूर्य का प्रकाश)
  • PG = कुल प्राथमिक उत्पादन (पौधों द्वारा कुल भोजन बनाना)
  • A = कुल स्वांगीकरण (जीवों द्वारा कुल ऊर्जा का उपयोग)
  • PN = नेट प्राथमिक उत्पादन (पौधों द्वारा बनाया गया शुद्ध भोजन)
  • P = द्वितीयक (उपभोक्ता) उत्पादन (उपभोक्ताओं द्वारा बनाया गया उत्पादन)
  • NU = अनुपयोगी ऊर्जा (वह ऊर्जा जो इस्तेमाल नहीं हुई या बाहर चली गई)
  • NA = उपभोक्ताओं द्वारा अस्वांगीकृत ऊर्जा (वह ऊर्जा जो उपभोक्ता पचा नहीं पाए)
  • R = श्वसन (जीवों द्वारा ऊर्जा के लिए साँस लेना)

ई.पी. ओडम (E.P. Odum, 1983) ने ऊर्जा प्रवाह के लिए एक Y-आकार या Z-चैनल मॉडल दिया, जो स्थलीय और जलीय दोनों पारिस्थितिक तंत्रों पर लागू होता है। चित्र 40.10 को सार्वत्रिक मॉडल कहते हैं। यह किसी भी जीवित घटक- चाहे वह पौधा, जानवर, सूक्ष्म जीव, या किसी जनसंख्या या समूह पर लागू होता है। इस चित्र में, छायांकित बॉक्स 'B' किसी जैविक घटक के जीवभार को दर्शाता है। कुल ऊर्जा निवेश को 'I' से दिखाते हैं। प्रत्येक Y-आकार मॉडल में एक शाकवर्ती खाद्य श्रृंखला (जो पौधे खाते हैं) और एक अपरदी खाद्य श्रृंखला (जो सड़े-गले पदार्थ खाते हैं) शामिल होती है। ऊर्जा प्रवाह की यह व्याख्या चित्र 40.11 में भी दिखाई गई है। चित्र 40.10 की व्याख्या नीचे दिए गए प्रतीकों से समझी जा सकती है:
  • I = अन्तर्ग्रहित ऊर्जा या निवेश (वह ऊर्जा जो सिस्टम में प्रवेश करती है)
  • NU = अप्रयुक्त ऊर्जा (वह ऊर्जा जिसका उपयोग नहीं किया गया)
  • R = श्वसन (जीवों द्वारा ऊर्जा प्राप्त करने के लिए की गई क्रिया)
  • G = वृद्धि (जीवों का विकास)
  • E = उत्सर्जी ऊर्जा (शरीर से बाहर निकली ऊर्जा)
  • A = स्वांगीकृत ऊर्जा (जीवों द्वारा अवशोषित ऊर्जा)
  • P = उत्पादन (नई जैविक सामग्री का निर्माण)
  • B = जैव भार (जीवों का कुल द्रव्यमान)

In simple words: पारिस्थितिक तंत्र में सूर्य की ऊर्जा पौधों द्वारा ली जाती है और फिर भोजन के रूप में एक जीव से दूसरे जीव तक जाती है। हर कदम पर कुछ ऊर्जा गर्मी के रूप में खो जाती है, इसलिए ऊर्जा का स्तर हर अगले पोष स्तर पर कम होता जाता है। ऊर्जा कभी खत्म नहीं होती, बस रूप बदलती रहती है।

🎯 Exam Tip: ऊर्जा प्रवाह के मुख्य स्रोत, उसके नियमों (ऊष्मागतिकी), और विभिन्न पोष स्तरों पर ऊर्जा हस्तांतरण की दक्षता को समझाना महत्वपूर्ण है।

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