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Detailed Chapter 31 कशेरुकी जन्तुओं का वर्गीकरण RBSE Solutions for Class 11 Biology
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Class 11 Biology Chapter 31 कशेरुकी जन्तुओं का वर्गीकरण RBSE Solutions PDF
RBSE Class 11 Biology Chapter 31 पाठ्यपुस्तक के प्रश्न
RBSE Class 11 Biology Chapter 31 वस्तुनिष्ठ प्रश्न
Question 1. क्लोम छिद्रों के बाहर गिल आच्छद उपस्थित नहीं होता है
(a) डिप्नोई
(b) कोण्ड्रिक्थीन्स
(c) आस्टीक्थीज
(d) होलोसिफेलाई
Answer: (b) कोण्ड्रिक्थीन्स
कोण्ड्रिक्थीन्स वर्ग की मछलियों में क्लोम छिद्रों के बाहर गिल आच्छद (ऑपरकुलम) उपस्थित नहीं होता है। इसका मतलब है कि उनके गलफड़े सीधे बाहर की ओर खुले होते हैं, जो उन्हें अन्य मछली वर्गों से अलग करता है।
In simple words: कोण्ड्रिक्थीन्स (उपास्थि मछलियों) के गलफड़ों पर कोई ढकना नहीं होता।
🎯 Exam Tip: इस तरह के प्रश्नों में, प्रत्येक विकल्प को ध्यान से समझें और संबंधित वर्ग की मुख्य विशेषताओं को याद रखें, जैसे कि ऑपरकुलम की उपस्थिति या अनुपस्थिति।
Question 2. शिशुधानी कौनसे वर्ग के प्राणियों में होती है?
(a) मैटाथीरिया
(b) यूथीरिया
Answer: (a) मैटाथीरिया
मैटाथीरिया वर्ग के प्राणियों में शिशुधानी (मार्सूपियम) पाई जाती है, जिसका उपयोग वे अपने अविकसित शिशुओं को पोषण देने और सुरक्षित रखने के लिए करते हैं। कंगारू इसका एक प्रसिद्ध उदाहरण है।
In simple words: मैटाथीरिया जैसे प्राणियों में बच्चों को रखने के लिए एक विशेष थैली (शिशुधानी) होती है।
🎯 Exam Tip: मैटाथीरिया और यूथीरिया के बीच मुख्य अंतर को याद रखें, खासकर उनके प्रजनन और शिशु विकास के तरीकों को।
Question 4. समुद्री घोड़ा किस वर्ग का प्राणी है?
(a) स्तनी वर्ग
(b) मत्स्य वर्ग
(c) पक्षी वर्ग
(d) सरीसृप वर्ग
Answer: (b) मत्स्य वर्ग
समुद्री घोड़ा मत्स्य वर्ग (पिसीज) का एक प्राणी है। यह एक अनोखी मछली है जो अपनी सीधी मुद्रा और नर द्वारा अंडे सेने के लिए जानी जाती है।
In simple words: समुद्री घोड़ा मछली के समूह से आता है।
🎯 Exam Tip: कुछ जीव अपने सामान्य नाम के कारण भ्रमित कर सकते हैं, जैसे समुद्री घोड़ा जो वास्तव में एक मछली है। ऐसे जीवों के वैज्ञानिक वर्गीकरण को ध्यान में रखें।
Question 5. शल्क उपस्थित होते हैं
(a) पिसीज में
(b) रेप्टाइल्स में
(c) एवीज में
(d) उपर्युक्त सभी में
Answer: (a) पिसीज में
शल्क मुख्य रूप से पिसीज (मछलियों) में उपस्थित होते हैं। ये शल्क उनके शरीर को सुरक्षा प्रदान करते हैं और जल में गति करने में सहायता करते हैं।
In simple words: मछलियों के शरीर पर शल्क पाए जाते हैं।
🎯 Exam Tip: विभिन्न वर्गों के प्राणियों के बाहरी आवरण (जैसे शल्क, पंख, बाल) की विशिष्टताओं को याद करना महत्वपूर्ण है।
Question 6. राजस्थान का राज्य पक्षी है
(a) गजेला-गजेला
(b) गोडावन
(c) मोर
(d) उपर्युक्त सभी
Answer: (b) गोडावन
गोडावन (ग्रेट इंडियन बस्टर्ड) राजस्थान का राज्य पक्षी है। यह एक बड़ा और गंभीर रूप से लुप्तप्राय पक्षी है जो शुष्क घास के मैदानों में पाया जाता है।
In simple words: गोडावन राजस्थान का राज्य पक्षी है।
🎯 Exam Tip: सामान्य ज्ञान के प्रश्न अक्सर राज्य पशु, पक्षी, वृक्ष आदि से संबंधित होते हैं। इन्हें याद रखना उपयोगी है।
Question 2. पिसीज वर्ग में कपालीय तंत्रिकाएँ कितनी होती हैं?
Answer: पिसीज वर्ग की मछलियों में 12 जोड़ी कपाल तंत्रिकाएँ होती हैं। ये तंत्रिकाएं मस्तिष्क से निकलकर सिर और शरीर के विभिन्न हिस्सों को जोड़ती हैं, जिससे संवेदी और मोटर कार्य नियंत्रित होते हैं।
In simple words: मछलियों (पिसीज) में मस्तिष्क से जुड़ी 12 जोड़ी मुख्य तंत्रिकाएं होती हैं।
🎯 Exam Tip: विभिन्न जन्तु वर्गों में कपाल तंत्रिकाओं की संख्या एक महत्वपूर्ण वर्गीकरण विशेषता है।
Question 3. जन्तुओं में स्पष्ट सिर एवं कपाल की उपस्थिति वाले समूह को क्या कहते हैं?
Answer: जन्तुओं के उस समूह को, जिनमें स्पष्ट सिर और कपाल (खोपड़ी) उपस्थित होता है, क्रेनियेटा (Craniata) कहते हैं। इस समूह में सभी कशेरुकी जन्तु शामिल हैं।
In simple words: जिन जन्तुओं का सिर और खोपड़ी स्पष्ट होती है, उन्हें क्रेनियेटा कहा जाता है।
🎯 Exam Tip: 'क्रेनियेटा' शब्द 'क्रेनियम' (खोपड़ी) से बना है, जो इसकी परिभाषा को समझने में मदद करता है।
Question 4. यूरोकाउंटा उपसंघ के जन्तुओं में शरीर के चारों ओर आवरण किसका बना होता है?
Answer: यूरोकॉर्डेटा उपसंघ के जन्तुओं के शरीर के चारों ओर ट्यूनिसिन (tunicin) नामक पदार्थ का बना आवरण पाया जाता है। इस आवरण को ट्यूनिक या टेस्ट भी कहते हैं, जो शरीर को सुरक्षा देता है।
In simple words: यूरोकॉर्डेटा जन्तुओं का शरीर ट्यूनिसिन नामक एक परत से ढका होता है।
🎯 Exam Tip: ट्यूनिसिन एक विशेष प्रकार का कार्बोहाइड्रेट है जो यूरोकॉर्डेटा के बाहरी आवरण में पाया जाता है।
Question 5. जैव प्रतिदीप्त जन्तु का नाम बताइये।।
Answer: पाइरोसोमा (Pyrosoma) एक जैव प्रतिदीप्त जन्तु है। यह समुद्र में पाया जाने वाला एक औपनिवेशिक जीव है जो प्रकाश उत्पन्न करने की क्षमता रखता है।
In simple words: पाइरोसोमा वह जन्तु है जो अपना खुद का प्रकाश पैदा कर सकता है।
🎯 Exam Tip: जैव प्रतिदीप्ति कई समुद्री जीवों में पाई जाने वाली एक विशेषता है, जो उन्हें शिकारियों से बचने या शिकार को आकर्षित करने में मदद करती है।
Question 6. एग्नैथा वर्ग के किसी एक विलुप्त प्राणी का नाम बताइये।
Answer: एग्नैथा वर्ग का एक विलुप्त प्राणी सिफैलेस्पिस (Cephalaspis) है। यह एक प्राचीन जबड़ा रहित मछली थी जो अब पृथ्वी पर नहीं पाई जाती।
In simple words: सिफैलेस्पिस एग्नैथा समूह का एक विलुप्त जीव है।
🎯 Exam Tip: विलुप्त प्राणियों के नाम और उनके वर्गों को याद रखना जीवविज्ञान के अध्ययन के लिए महत्वपूर्ण है।
Question 7. सबसे बड़ा स्थलीय स्तनी कौनसा है?
Answer: सबसे बड़ा स्थलीय स्तनी जन्तु हाथी है। ये अपनी विशाल शारीरिक संरचना और लंबी आयु के लिए जाने जाते हैं।
In simple words: हाथी पृथ्वी पर रहने वाला सबसे बड़ा स्तनधारी है।
🎯 Exam Tip: स्थलीय और जलीय दोनों प्रकार के सबसे बड़े जीवों के उदाहरण याद रखना सामान्य ज्ञान के लिए उपयोगी है।
Question 9. टेडपोल लार्वा अवस्था कौनसे वर्ग के जन्तुओं में पायी जाती है?
Answer: टेडपोल लार्वा अवस्था एम्फीबिया वर्ग के जन्तुओं में पाई जाती है। यह मेढ़क और टोड जैसे उभयचरों के जीवन चक्र का प्रारंभिक चरण है।
In simple words: मेढ़क जैसे उभयचरों के बच्चों को टेडपोल कहते हैं।
🎯 Exam Tip: एम्फीबिया में कायांतरण (metamorphosis) की प्रक्रिया को समझना महत्वपूर्ण है, जिसमें टेडपोल लार्वा वयस्क रूप में बदलता है।
Question 10. तीन वेश्मी हृदय किस वर्ग के जन्तुओं में पाया जाता है?
Answer: तीन वेश्मी हृदय एम्फीबिया वर्ग के जन्तुओं में पाया जाता है। इस हृदय में दो आलिंद और एक निलय होते हैं।
In simple words: एम्फीबिया के दिल में तीन कक्ष होते हैं।
🎯 Exam Tip: विभिन्न कशेरुकी वर्गों में हृदय के कक्षों की संख्या एक महत्वपूर्ण शारीरिक विशेषता है।
Question 11. देहगुहा में पेशीय तनु पट्ट की उपस्थिति कौनसे वर्ग का लक्षण है?
Answer: देहगुहा में पेशीय तनु पट्ट (डायफ्राम) की उपस्थिति मैमेलिया वर्ग (स्तनधारियों) का एक विशिष्ट लक्षण है। यह श्वसन में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है।
In simple words: स्तनधारियों में शरीर के अंदर डायफ्राम नामक एक मांसपेशी होती है।
🎯 Exam Tip: डायफ्राम स्तनधारियों का एक अद्वितीय लक्षण है जो उन्हें अन्य कशेरुकी जीवों से अलग करता है।
Question 12. किस वर्ग के जन्तुओं की गर्दन में सात ग्रीवा कशेरुकायें पायी जाती हैं?
Answer: मैमेलिया वर्ग के जन्तुओं की गर्दन में सात ग्रीवा कशेरुकाएं पाई जाती हैं। यह विशेषता अधिकांश स्तनधारियों में समान होती है, चाहे उनका आकार कुछ भी हो।
In simple words: स्तनधारियों की गर्दन में सात हड्डियाँ होती हैं।
🎯 Exam Tip: यह संख्या स्तनधारियों के बीच काफी स्थिर रहती है और वर्गीकरण में एक महत्वपूर्ण संदर्भ बिंदु है।
Question 13. रेप्टाइल के समान अण्डे देने वाले स्तनधारी का कौनसा वर्ग है?
Answer: रेप्टाइल के समान अण्डे देने वाले स्तनधारी का वर्ग प्रोटोथीरिया है। ये आदिम स्तनधारी होते हैं जो अंडे देते हैं, लेकिन अपने बच्चों को दूध भी पिलाते हैं।
In simple words: प्रोटोथीरिया स्तनधारी अंडे देते हैं, जैसे सरीसृप करते हैं।
🎯 Exam Tip: प्रोटोथीरिया स्तनधारियों और सरीसृपों के बीच एक "योजक कड़ी" के रूप में माने जाते हैं, क्योंकि उनमें दोनों के लक्षण पाए जाते हैं।
Question 14. भारत के राष्ट्रीय जन्तु का नाम बताइये ।
Answer: भारत का राष्ट्रीय जन्तु बाघ (Tiger) है। यह भारत की समृद्ध जैव विविधता का प्रतीक है और वन्यजीव संरक्षण के लिए एक महत्वपूर्ण प्रजाति है।
In simple words: भारत का राष्ट्रीय पशु बाघ है।
🎯 Exam Tip: राष्ट्रीय प्रतीकों, जैसे राष्ट्रीय पशु, पक्षी, वृक्ष आदि को याद रखना अक्सर प्रतियोगी परीक्षाओं में पूछा जाता है।
Question 1. मैमेलिया वर्ग के चार प्रमुख लक्षण बताइये।
Answer: मैमेलिया वर्ग के चार प्रमुख लक्षण निम्नलिखित हैं:
1. शरीर पर बालों का पाया जाना। यह उन्हें ठंड से बचाने और संवेदी कार्य में मदद करता है।
2. बाह्य कर्ण (कान के बाहरी हिस्से) उपस्थित होते हैं।
3. मादाओं में विकसित स्तन ग्रंथियाँ पाई जाती हैं, जो शिशुओं को दूध पिलाने के लिए दूध का उत्पादन करती हैं।
4. मस्तिष्क में कार्पस कैलोसम उपस्थित होता है, जो मस्तिष्क के दोनों गोलार्द्धों को जोड़ता है।
5. गर्दन में 7 ग्रीवा कशेरुक (गर्दन की हड्डियाँ) पाई जाती हैं।
In simple words: स्तनधारियों के शरीर पर बाल होते हैं, बाहरी कान होते हैं, मादाओं में स्तन ग्रंथियाँ होती हैं, मस्तिष्क में कार्पस कैलोसम होता है और गर्दन में सात हड्डियाँ होती हैं।
🎯 Exam Tip: स्तनधारियों के ये लक्षण उन्हें अन्य जन्तु समूहों से स्पष्ट रूप से अलग करते हैं, खासकर स्तन ग्रंथियों और बालों की उपस्थिति।
Question 2. पृष्ठवंशियों के वर्गीकरण का क्या आधार है?
Answer: कार्डेटा संघ के वर्गीकरण के प्रमुख आधार निम्नलिखित हैं:
1. कपाल (Cranium) की उपस्थिति।
2. जबड़े और जोड़ीदार उपांग (Jaws & Paired appendages) का विकास।
3. उपांगों (limbs) का प्रकार, जैसे पंख या पैर।
4. बाह्य भ्रूणीय झिल्लियों (Extra embryonic membranes) जैसे एमनियन और कोरियन की उपस्थिति।
5. त्वचा की संरचना (Structure of skin), जैसे शल्क, पंख या बाल। इन आधारों पर कशेरुकियों को विभिन्न वर्गों में बांटा जाता है।
In simple words: कार्डेटा को उनके कपाल, जबड़े और अंगों, भ्रूणीय झिल्ली और त्वचा के आधार पर बांटा जाता है।
🎯 Exam Tip: ये वर्गीकरण आधार कशेरुकी जन्तुओं के विकासवादी संबंधों और उनकी शारीरिक अनुकूलन को समझने में मदद करते हैं।
Question 3. पृष्ठवंशी एवं अपृष्ठवंशी में पाँच अन्तर लिखिये।
Answer: पृष्ठवंशी और अपृष्ठवंशी में पाँच प्रमुख अंतर निम्नलिखित हैं:
| पृष्ठवंशी (Vertebrates) | अपृष्ठवंशी (Invertebrates) |
|---|---|
| 1. इनमें द्विपार्श्व समिति (bilateral symmetry) पायी जाती है। | इनमें अरीय (radial), द्विपार्श्व (bilateral), द्विअक्षीय (biradial) सममिति पायी जाती है अथवा असममित होते हैं। |
| 2. इनमें अंग तंत्र स्तर (organ system level) पाया जाता है। | इसमें जीवद्रव्य स्तर (protoplasmic level) या ऊतक स्तर (tissue level) या अंग तंत्र स्तर पाया जाता है। |
| 3. यह सीलोमेट्स (coelomates) जन्तु हैं, जिनमें वास्तविक देहगुहा होती है। | यह एसीलोमेट (acoelomate) या स्यूडोसीलोमेट्स (pseudocoelomate) या सोलोमेट्स (coelomate) जन्तु हैं। |
| 4. पृष्ठवंशियों में पृष्ठरज्जु (notochord) या कशेरुक दण्ड (vertebral column) पाया जाता है। | अपृष्ठवंशियों में पृष्ठरज्जु या कशेरुक दण्ड अनुपस्थित होता है। |
| 5. इनमें तंत्रिका रज्जु (nerve cord) पृष्ठीय और खोखली होती है। | इनमें तंत्रिका रज्जु अधरीय और ठोस होती है। |
🎯 Exam Tip: यह तालिका जीव विज्ञान में सबसे मौलिक विभाजनों में से एक को दर्शाती है। प्रत्येक अंतर को समझना उनके विकासवादी संबंधों को स्पष्ट करता है।
Question 4. उड़ने वाले प्राणियों के चार विशेष लक्षण लिखिये।
Answer: उड़ने वाले प्राणियों के चार विशेष लक्षण निम्नलिखित हैं:
1. उनके अग्रपाद (आगे के पैर) पंखों में बदल गए हैं, जो उन्हें उड़ने में मदद करते हैं। यह हवा में गति के लिए एक महत्वपूर्ण अनुकूलन है।
2. उनकी हड्डियाँ वातवीय (Pneumatic) होती हैं, जिसका अर्थ है कि वे खोखली और हवा से भरी होती हैं। यह उनके शरीर को हल्का बनाता है।
3. उनमें 12 जोड़ी कपाल तंत्रिकाएँ पाई जाती हैं।
4. उनमें आमतौर पर मूत्राशय (मूत्र को इकट्ठा करने वाला अंग) का अभाव होता है, जिससे शरीर का वजन कम रहता है। (शुतुरमुर्ग इसका अपवाद है)।
5. उनकी चोंच पाई जाती है, लेकिन चोंच में दांत नहीं होते हैं।
In simple words: उड़ने वाले प्राणियों के पंख होते हैं, उनकी हड्डियां हल्की होती हैं, उनके पास 12 जोड़ी कपाल तंत्रिकाएं होती हैं, और आमतौर पर मूत्राशय नहीं होता है।
🎯 Exam Tip: उड़ने वाले जीवों में ये शारीरिक अनुकूलन उड़ने की क्षमता को संभव बनाते हैं और उनके जीवनशैली के लिए महत्वपूर्ण हैं।
Question 5. एम्नियोट्स से क्या तात्पर्य है ? इस समूह में आने वाले वर्गों के नाम लिखिये।
Answer: एम्नियोट्स वे जन्तु होते हैं जिनमें भ्रूण के विकास के दौरान एमनियन नामक बाहरी भ्रूणीय झिल्ली पाई जाती है। यह झिल्ली भ्रूण को सूखे और यांत्रिक आघात से बचाती है। एम्निओटा समूह में आने वाले वर्ग निम्न हैं:
1. रेप्टीलिया (सरीसृप)
2. एवीज (पक्षी)
3. मैमेलिया (स्तनधारी)
In simple words: एम्नियोट्स उन जन्तुओं को कहते हैं जिनके भ्रूण के चारों ओर एक विशेष झिल्ली (एमनियन) होती है। सरीसृप, पक्षी और स्तनधारी इस समूह में आते हैं।
🎯 Exam Tip: एमनियन झिल्ली स्थलीय वातावरण में प्रजनन करने वाले कशेरुकी जीवों के लिए एक महत्वपूर्ण विकासवादी अनुकूलन है।
एक्रेनियेटी (Acrania): इस समूह के प्राणियों में सिर और कपाल नहीं पाया जाता है। ये साधारण रूप से विकसित जीव होते हैं।
उदाहरण:
1. हर्डमानिया
2. पाइरोसोमा
Question 7. द्विबारदन्ती से क्या तात्पर्य है? कौनसे वर्ग के जन्तुओं में यह गुण पाया जाता है?
Answer: द्विबारदन्ती (Diphyodont) का अर्थ है कि किसी जन्तु के जीवनकाल में दांत केवल दो बार निकलते हैं। पहले दूध के दांत और फिर स्थायी दांत। यह गुण मैमेलिया वर्ग (स्तनधारियों) के जन्तुओं में पाया जाता है।
In simple words: द्विबारदन्ती का मतलब है कि जीवन में दांत दो बार उगते हैं। यह स्तनधारियों में होता है।
🎯 Exam Tip: दांतों की संरचना और उनकी वृद्धि का तरीका विभिन्न जन्तु समूहों के वर्गीकरण में महत्वपूर्ण लक्षण होता है।
Question 8. काण्ड्रिक्थीज मछलियों के प्रमुख लक्षण लिखो।
Answer: कॉन्ड्रिक्थीज मछलियों (उपास्थि-मछलियों) के प्रमुख लक्षण निम्नलिखित हैं:
1. इस वर्ग के सदस्य समुद्री जीव होते हैं।
2. इनका अंत:कंकाल उपास्थि (cartilage) का बना होता है, जो इन्हें लचीला बनाता है।
3. बाह्य कंकाल प्लेकॉयड शल्कों (placoid scales) का बना होता है।
4. इनमें 5-7 जोड़ी गिल दरारें (gill slits) पाई जाती हैं।
5. गिल दरारों पर आपरकुलम (gill cover) अनुपस्थित होता है, जिससे गलफड़े सीधे बाहर खुले रहते हैं।
6. इनमें 'J' आकृति का अमाशय और आंत्र में सर्पिल कपाट (spiral valve) पाया जाता है, जो भोजन को धीरे-धीरे पचाने में मदद करता है।
7. नर प्राणी में क्लेस्पर (clasper) मैथुनी अंग के रूप में पाए जाते हैं। अवस्कर भी उपस्थित होता है।
8. इन मछलियों के सिर के पृष्ठ भाग पर लोरेंजिनी तुम्बिकाएँ (ampulla of lorenzini) नामक तापग्राही संवेदांग पाए जाते हैं।
9. हृदय में दो वेश्म (एक आलिंद और एक निलय) पाया जाता है। इनके हृदय में शिराकोटर और कोनस आर्टिरियोस भी होते हैं।
10. निषेचन आंतरिक होता है। ये अंडे देने वाले (oviparous) या बच्चे देने वाले (viviparous/ovoviviparous) होते हैं।
उदाहरण: स्कोलिओड्रोन, स्फिरना।
In simple words: कॉन्ड्रिक्थीज समुद्री जीव होते हैं जिनकी हड्डियां उपास्थि की बनी होती हैं, इनके गलफड़ों पर ढकना नहीं होता, और नर में क्लेस्पर होते हैं।
🎯 Exam Tip: उपास्थि-मछलियों के ये लक्षण उन्हें अस्थि-मछलियों से अलग करते हैं। उनके कंकाल की संरचना और गिल कवर की अनुपस्थिति महत्वपूर्ण अंतर हैं।
Question 10. मछलियों में मौसम के अनुसार स्थानान्तरण को उदाहरण सहित समझाइये?
Answer: कुछ मछलियों में निश्चित मौसम में एक स्थान से दूसरे स्थान पर जाना मौसमी स्थानान्तरण (seasonal migration) कहलाता है। यह मुख्य रूप से प्रजनन या भोजन की तलाश के लिए होता है और दो प्रकार का होता है:
1. **केटाड्रोमस स्थानान्तरण:** जब मछलियाँ अलवणीय जल (ताजे पानी) से समुद्री जल (खारे पानी) में प्रजनन के लिए जाती हैं।
**उदाहरण:** एन्गुइला (ईल मछली)।
2. **एनाड्रोमस स्थानान्तरण:** जब मछलियाँ समुद्री जल से अलवणीय जल में प्रजनन के लिए जाती हैं।
**उदाहरण:** सालमन (Salmon), हिल्सा (Hilsa) और ट्राउट (Trout) आदि।
In simple words: मछलियां खास मौसम में एक जगह से दूसरी जगह जाती हैं। इसे मौसमी प्रवास कहते हैं। कुछ ताजे पानी से समुद्र में जाती हैं (जैसे ईल), और कुछ समुद्र से ताजे पानी में आती हैं (जैसे सालमन)।
🎯 Exam Tip: कैटाड्रोमस और एनाड्रोमस माइग्रेशन के बीच के अंतर को उनके गंतव्य और प्रवास के उद्देश्य के आधार पर याद रखें।
Question 11. द्विकन्दीय कपाल कौन-कौनसे वर्गों का लक्षण है? नाम बताइये।
Answer: द्विकन्दीय कपाल (dicondylic skull), जिसमें कपाल के निचले भाग में दो अस्थिकंद (occipital condyles) होते हैं, निम्नलिखित वर्गों का लक्षण है:
1. वर्ग- एम्फीबिया (Amphibia)
2. वर्ग- मैमेलिया (Mammalia)
यह दो अस्थिकंद कशेरुक दण्ड के साथ जुड़ते हैं।
In simple words: दो अस्थिकंद वाला कपाल एम्फीबिया और स्तनधारियों में पाया जाता है।
🎯 Exam Tip: कपाल के प्रकार (मोनोकन्डिली या द्विकन्डिली) कशेरुकी जन्तुओं के वर्गीकरण में एक महत्वपूर्ण विशेषता है।
Question 12. यूथिरिया वर्ग के चार लक्षण लिखिये?
Answer: यूथीरिया वर्ग (प्लेसेंटल स्तनधारियों) के चार प्रमुख लक्षण निम्नलिखित हैं:
1. इसके सदस्य पूर्ण विकसित शिशुओं (mature infants) को जन्म देते हैं। ये पूरी तरह से जरायुज (viviparous) जन्तु होते हैं।
2. स्तन ग्रंथियाँ पूर्ण रूप से विकसित होती हैं और चूचक (निप्पल) युक्त होती हैं, जिनसे शिशु दूध पीते हैं।
3. इनमें वास्तविक एलेन्टोइक प्लेसेंटा (allantoic placenta) पाया जाता है, जो माँ और भ्रूण के बीच पोषण और अपशिष्ट विनिमय को संभव बनाता है।
4. अंडे अपीतकी (alecithal) होते हैं, अर्थात उनमें पीतक बहुत कम होता है। ये पूर्णतः समतापी (warm-blooded) होते हैं।
5. मस्तिष्क में कार्पस कैलोसम अच्छी तरह से विकसित होता है।
6. नर में एक शिश्न होता है।
7. मादा में योनि और गर्भाशय एकल होते हैं।
In simple words: यूथीरिया विकसित बच्चे पैदा करते हैं, उनके पास अच्छी स्तन ग्रंथियां और निप्पल होते हैं, एक सच्चा प्लेसेंटा होता है, और उनके अंडों में कम पीतक होता है।
🎯 Exam Tip: यूथीरिया को उनके जटिल प्रजनन प्रणाली और अच्छी तरह से विकसित शिशुओं को जन्म देने की क्षमता के लिए जाना जाता है, जो स्तनधारियों के विकास में एक महत्वपूर्ण कदम है।
वर्ग-स्तनी या मैमेलिया (Class-Mammalia)
मैमेलिया शब्द ग्रीक भाषा के मैमी (स्तन ग्रंथि) से लिया गया है अर्थात् इस वर्ग के सभी जन्तुओं में स्तन ग्रन्थियाँ (mammary glands) पाई जाती हैं। स्तनी जन्तु जगत के सर्वश्रेष्ठ विकसित जन्तु हैं। वे संरचना, कार्यिकी एवं बुद्धिमत्ता की दृष्टि से अधिक विकसित हैं। ये स्थलीय, जलीय एवं वायुवीय आवासों में पाये जाते हैं। सीनोजॉइक (Coenozoic) काल को "स्तनधारी काल (age of mammals)" कहा जाता है।
मुख्य लक्षण (Important Characteristics)
1. इनके शरीर का तापमान निश्चित होता है अतः ये समतापी (warm blooded or Homeothermal) जन्तु कहलाते हैं। ये अपनी शारीरिक गर्मी को स्थिर रख पाते हैं।
2. त्वचा पर बालों का आवरण (pelage) पाया जाता है। बाल सम्पूर्ण शरीर पर या कुछ भागों तक सीमित होते हैं। सीटेशिया के सदस्यों में रोम अनुपस्थित होते हैं।
3. स्तनधारियों की त्वचा मोटी जलरोधी होती है। त्वचा में अनेक प्रकार की ग्रंथियाँ पायी जाती हैं, जैसे- स्वेद ग्रंथियाँ (sweat glands), तेल ग्रंथियाँ (sebaceous glands) व स्तन ग्रंथियाँ (mammary glands).
4. स्तन ग्रंथियाँ (mammary glands) पायी जाती हैं जो मादा में क्रियाशील होकर दुग्ध का स्रावण करती हैं जिससे शिशुओं का पोषण किया जाता है।
5. बाह्य कर्ण पल्लव (earpinna) पाये जाते हैं। कर्ण पल्लव मोनोट्रिमेटा (monotremata) में अनुपस्थित होते हैं।
6. मध्य कर्ण (middle ear) में तीन कर्ण अस्थिकाएँ (ear ossicles) पायी जाती हैं: (i) मेलियस (malleus), (ii) इन्कस (Incus), (iii) स्टेपीज (Stapes).
7. इनमें टिम्पैनिक बुला (tympanic bulla) पाया जाता है। यह ऑटिक व पेरीऑटिक अस्थि के आपस में मिलने से बनता है।
8. अधिकांश सदस्यों का शरीर सिर (head), ग्रीवा (neck), धड़ (trunk) व पूंछ (tail) में विभक्त होता है।
9. धड़ पर दो जोड़ी पाद (limbs) पाये जाते हैं। इनमें पंचांगुलिक पाद (pentadactyl) पाये जाते हैं। अंगुलियों पर नाखून (nails) या पंजे (claws) या खुर (hoofs) पाये जाते हैं।
10. स्तनधारियों में दांत मसूड़ों में स्थित होते हैं, अतः इसे गर्तदन्ती (thecodont) अवस्था कहते हैं। इनमें चार प्रकार के दांत पाये जाते हैं अतः इसे विषमदन्ती (heterodont) अवस्था कहते हैं। इनके जीवन में दो बार दांत आते हैं इसे द्विवारदन्ती (diphyodont) अवस्था कहते हैं।
11. स्तनधारियों में वक्ष व उदर गुहा के बीच पेशीय तनुपट्ट (diaphragm) पाया जाता है। डायफ्राम द्वारा निम्न कार्यों में सहायता की जाती है- संवातन (breathing), मूत्र त्याग (micturition), मल त्याग (defaecation) व प्रसव (parturition).
12. स्तनधारियों में पूर्ण चार कोष्ठीय (completely four chambered) हृदय पाया जाता है। इसमें दो आलिन्द (auricles) व दो निलय (ventricles) पाये जाते हैं। इसके हृदय में शिराकोटर (sinus venosus) नहीं पाया जाता है।
13. इनमें दोहरा रक्त संचरण (double blood circulation) पाया जाता है। वयस्क में केवल बायीं ग्रीवा दैहिक चाप (left caroticosystemic arch) पायी जाती है।
14. स्तनधारियों की लाल रक्त कणिकाएं (RBC) केन्द्रकविहीन (non-nucleated) और उभयावतल (biconcave) होती हैं। अपवादस्वरूप ऊंट (camel) व लामा (lama) का RBC में केन्द्रक पाया जाता है।
15. मस्तिष्क सुविकसित होता है। प्रमस्तिष्क गोलार्द्ध बड़े होते हैं। मस्तिष्क में कार्पस केलोसम (corpus callosum) पाया जाता है। (कार्पस केलोसम एक तंत्रिकीय पट्टिका है जो दोनों प्रमस्तिष्क गोलार्द्ध (cerebral hemispheres) को आपस में जोड़ती है।)
16. कपाल द्विकन्दी (dicondylic) होता है। इसमें दो कपाल अस्थिकंद (occipital condyle) पाये जाते हैं।
17. निचला जबड़ा (lower jaw) केवल डेन्टरी (dentary) नामक अस्थि द्वारा निर्मित होता है। प्रिमैक्सीला (premaxilla), मैक्सीला (maxilla) व पैलेटाइन (palatine) अस्थियों द्वारा तालु (palate) का निर्माण होता है जो नासा मार्ग को मुख गुहा से पृथक् करती है। नासा मार्ग में टरबाइनल अस्थियाँ पायी जाती हैं।
18. ग्रीवा में सात (seven) ग्रैव कशेरुक (cervical vertebrae) पायी जाती हैं।
19. इनमें अगर्ती या एसीलस कशेरुक पाये जाते हैं। कशेरुक के सेन्ट्रम पर एपिफाइसिस (epiphysis) पाये जाते हैं।
20. पसलियाँ दो सिर युक्त होती हैं। इनके शीर्षों को केपिटुलम व हुबरकुलम कहते हैं।
21. मस्तिष्क में चार दृकपिण्ड (optic lobes) पाये जाते हैं। इन्हें कॉरपोरा काड्रीजेमिना (corpora quadrigemina) कहते हैं।
22. इनमें 12 जोड़ी कपालीय तंत्रिकाएँ (cranial nerves) पायी जाती हैं।
23. इनके अन्त:कर्ण में कुण्डलित व सर्पिलाकार कोकलिया (cochlea) पाया जाता है।
24. स्तनधारियों में मेटानेफ्रिक (metanephric) प्रकार के वृक्क पाये जाते हैं। उत्सर्जन के आधार पर प्राणी यूरियोटेलिक हैं क्योंकि ये यूरिया का उत्सर्जन करते हैं।
25. प्रोटोथिरिया (Prototheria) के सदस्यों में अवस्कर (cloaca) पाया जाता है, लेकिन मेटाथिरिया व यूथीरिया में अनुपस्थित होता है।
26. एकलिंगी (unisexual) होते हैं। नर व मादा जन्तु अलग-अलग होते हैं। लैंगिक द्विरूपता (dimorphism) पायी जाती है।
27. नर में वृषण (testes) उदरगुहा के बाहर वृषण कोष (scrotalsac) में पाये जाते हैं। लेकिन एकिडना, प्लेटीपस, हाथी, व्हेल, राइनो, हिप्पो आदि में वृषण उदरगुहा में स्थित होते हैं।
28. नर में मैथुनी अंग के रूप में शिश्न (Penis) पाया जाता है। इस वर्ग के अधिकांश सदस्य अण्डज (oviparous) व कुछ अण्डजरायुज (ovoviviparous) प्रकार के होते हैं। मादा में हासित शिश्न समान क्लाइटोरिस (clitoris) पाया जाता है।
29. इस वर्ग के सदस्यों में अपीतकी (alecithal) अण्डे पाये जाते हैं। प्रोटोथिरिया में अतिपीतकी (polylecithal) अण्डे पाये जाते हैं।
30. सभी सदस्यों में अन्तःनिषेचन (internal fertilization) पाया जाता है। इनमें अण्डवाहिनी (oviduct) में निषेचन पाया जाता है।
31. स्तनधारियों में निषेचन के समय शुक्राणु के एक्रोसोम (acrosome) द्वारा हाएलोयूरो नाइडेज (Hyalouronidase) एन्जाइम का स्रावण होता है।
32. स्तनधारियों से पूर्णभंजी समान विदलन (holoblastic equal cleavage) पाया जाता है। परिवर्धन के दौरान चार प्रकार की बाह्य भ्रूणीय झिल्लियों (extra embryonic membrane) का निर्माण होता है, जैसे- कोरियोन (Chorion), एमनियोन (Amnion), एलेनटॉइस (allantois) व योक सेक (yolk sac) I
33. परिवर्धन मादा के गर्भाशय (uterus) में होता है। गर्भाशय भ्रूण के बीच अपरा (placenta) का निर्माण होता है। Parental care पाया जाता है।
1. उपवर्ग- प्रोटोथीरिया (Subclass- Prototheria)
• ये आदिम (Primitive) प्रकार के अण्डे देने वाले (Oviparous) स्तनधारी हैं। ये प्रजनन के लिए अंडे देते हैं, जो उन्हें अन्य स्तनधारियों से अलग करता है।
• इनके अण्डे अतिपीतकी (Polylecithal) एवं कवचयुक्त (Shelled) होते हैं।
• स्तन ग्रंथियों (Mammary glands) में चूचुकों (nipples) का अभाव होता है।
• कर्णपल्लव (Earpinna) अनुपस्थित होता है। अन्त:कर्ण का कोकलिया (Cochlea) कम कुण्डलित होता है।
• वयस्क जन्तु में दन्तविहीन श्रृंगी चोंच (teethless horny beak) पायी जाती है। लेकिन शिशु अवस्था में दांत उपस्थित होते हैं।
• मस्तिष्क में कार्पस केलोसम (Corpus callosum) अनुपस्थित होता है।
• नर में वृषण उदरगुहा में होते हैं।
• अवस्कर पाया जाता है।
• मादा में अण्ड वाहिनियाँ पश्च भाग में समेकित होकर गर्भाशय तथा योनि नहीं बनाते हैं।
• ये आंशिक समतापी (Partially homothermal) होते हैं। ये शरीर के ताप को आंशिक रूप में स्थिर रख पाते हैं।
• इस उपवर्ग के सदस्य आस्ट्रेलिया (Australia), तस्मानिया (Tasmania) व न्यूगुइना (Newguinea) में पाये जाते हैं।
• इस उपवर्ग में एक ही गण आता है जिसे मोनोट्रिमेटा (Monotremata) कहते हैं।
उदाहरण-
1. टैकीग्लोसस या इकीडना। इसे कंटकीय चींटीखोर (Spiny anteater) भी कहते हैं।
2. आर्निथोरिंकस या डक बिल्ड प्लेटीपस। ये रेप्टीलिया एवं मैमेलिया वर्ग की योजक कड़ी (Connecting Link) है।
2. उपवर्ग थीरिया (Subclass- Theria)
• ये स्तनधारी जरायुज (viviparous) होते हैं, जो शिशुओं को जन्म देते हैं। इनका विकास माँ के गर्भ के अंदर होता है।
• बाह्य कर्ण या कर्ण पल्लव (pinna) उपस्थित होता है।
• शिशु तथा वयस्क दोनों में दांत (teeth) पाये जाते हैं।
• समतापी (homothermal) होते हैं।
• गुदा (anus) व मूत्रजनन छिद्र (urinogenital aperture) अलग-अलग होते हैं।
• नर में वृषण (testis) वृषण कोषों (scrotal sacs) में स्थित होते हैं।
• मादा में गर्भाशय (uterus) व योनि (vagina) उपस्थित होते हैं।
• भ्रूण (embryo) प्लैसेन्टा द्वारा गर्भाशय से जुड़ा रहता है।
• उपवर्ग थीरिया को दो अधोवर्गों (infraclasses) में वर्गीकृत किया गया है।
(अ) अधोवर्ग- मैटाथीरिया (Infraclass-Metatheria)
1. ये प्रारम्भिक प्रकार के स्तनधारी हैं। इनके शिशु अपरिपक्व अवस्था में पैदा होते हैं। इनका शेष परिवर्धन मादा के उदर पर स्थित मासूपियम में पूर्ण होता है। यह एक अनूठा अनुकूलन है जो उनके शिशुओं को बाहरी वातावरण से बचाता है।
2. इनके स्तनग्रंथियों में चूचक (nipples) पाये जाते हैं। ये भी मासूपियम (शिशुधानी) के अन्दर स्थित होते हैं।
3. कार्पस केलोसम (Corpus Callosum) कम विकसित या अनुपस्थित होता है।
4. दांत जीवन में एक बार निकलते हैं अर्थात् एकबारदन्ती (monophyodont) होते हैं।
5. इनकी श्रोणी मेखला (Pelvic Girdle) में एपीप्यूबिक या मार्क्सपियल अस्थि पायी जाती हैं।
6. गर्भाशय एवं योनि दोनों युग्मित रचनाएं होती हैं।
7. इनमें योक सेक (Yolk Sac) प्लैसेन्टा पाया जाता है। इस अधोवर्ग में सिर्फ एक गण मासूपियेलिया होता है। इसके लक्षण मेटाथीरिया के समान ही हैं।
उदाहरण: मेक्रोपस (कंगारू), ओपोसम (डाइडेलिफिस)।
(ब) अधोवर्ग- यूथीरिया (Infraclass-Eutheria)
यूथीरिया समूह के जीवित सदस्यों को उनके करोटि (खोपड़ी) दांतों आदि लक्षणों के आधार पर 16 गणों में बांटा गया है। इनके कुछ उदाहरण निम्नलिखित हैं: एरीनेसियस (हेजहॉक-झाऊ चूहा), टेरोपस (फलभक्षी चमगादड़ या उड़न लोमड़ी), राइनोपोमा (कीटभक्षी चमगादड़), रेटस (घरेलू चूहा), व्हेल, डॉल्फिन, कुत्ता (कैनिस फैमिलियारिस)। शेर (पैंथेरा लियो), बाघ (पैंथेरा टाइग्रिस – भारत का राष्ट्रीय जन्तु), हाथी, भेड़, भैंस, घोड़ा, गधा, हिरन, चिंपैंजी बंदर और मनुष्य (होमो सेपियन्स)। सोरेक्स (श्रू-सबसे छोटा स्तनधारी), चिंकारा (गजेला) जो राजस्थान का राज्य पशु है, और फैलिस डोमेस्टिका (घरेलू बिल्ली) भी इसमें शामिल हैं।
Question 2. रेप्टीलिया वर्ग के प्रमुख लक्षणों को उदाहरण सहित समझाइये?
Answer:
वर्ग-रेष्प्टीलिया/सरीसृप (Reptilia)
मीसोजोइक युग को इस वर्ग के लिए सरीसृपों (Reptiles) का स्वर्ण युग (Golden periods of Reptiles) कहा जाता है। रेप्टिलिया वर्ग के प्राणियों के अध्ययन को हरपेटोलोजी (Herpetology) कहते हैं।
यहां सरीसृपों के प्रमुख लक्षण दिए गए हैं:
1. इस वर्ग के अधिकांश जन्तु रेंगकर चलने वाले या बिलवासी होते हैं। ये जमीन पर रेंगते हुए चलते हैं।
2. शरीर स्पष्ट रूप से चार भागों में विभक्त होता है- सिर, गर्दन, धड़ तथा पूंछ।।
3. दो जोड़ी पाद (two pair limbs) पाये जाते हैं, जिन पर प्रारूपिक रूप से 5-5 नखरित (clawed) अंगुलियाँ होती हैं। सर्पों में पाद का अभाव होता है।
4. त्वचा शुष्क (dry), शल्कयुक्त व ग्रंथिविहीन होती है। इनमें किरेटिन द्वारा निर्मित एपिडर्मल शल्क पाये जाते हैं। कुछ जन्तुओं में अस्थिमय प्लेट्स (bony plates) पाये जाते हैं।
5. अंत:कंकाल अस्थियों का बना होता है।
6. खोपड़ी में केवल एक ऑक्सीपिटल कन्द (occipital condyle) पाया जाता है। इसे मोनोकाण्डाइली अवस्था कहते हैं।
7. मुख शीर्षस्थ होता है व जबड़ों पर दांत पाये जाते हैं। कछुओं में दांत अनुपस्थित होते हैं व इनके स्थान पर श्रृंगीय चोंच (horny beak) पायी जाती है।
8. हृदय अपूर्ण रूप से चारवेश्मी (incompletely four chambered) होता है। इसमें दो आलिन्द तथा अपूर्ण निलय होते हैं। लेकिन मगरमच्छ में निलय का भी पूर्ण विभाजन हो जाता है।
9. इसमें 12 जोड़ी कपाल तंत्रिकाएं (cranial nerves) पायी जाती है।
10. लाल रक्त कणिकाएं उभयोतल (biconvex), अण्डाकार (oval) तथा केन्द्रकयुक्त (nucleated) होती है।
11. एम्फीबिया की भांति असमतापी अर्थात् शीत रुधिर (coldblooded) जन्तु जो सुप्तावस्था का सहारा लेते हैं।
12. इनमें अवस्कर (cloaca) पाया जाता है। जननवाहिनियाँ मलाशय का मूत्रवानिहियाँ अवस्कर में खुलती हैं।
In simple words: सरीसृप रेंगकर चलने वाले जीव होते हैं, जिनकी त्वचा सूखी और शल्कों वाली होती है। इनके शरीर में हड्डियां होती हैं और दिल में आमतौर पर तीन कक्ष होते हैं (मगरमच्छ को छोड़कर जिसके चार होते हैं)। ये ठंडे खून वाले होते हैं।
🎯 Exam Tip: सरीसृपों के विशिष्ट लक्षण जैसे शुष्क त्वचा, शल्क, और श्वसन प्रणाली का अनुकूलन, उन्हें स्थलीय जीवन के लिए बेहतर बनाते हैं।
आर्थिक महत्व (Economic Importance of Reptilia)
लाभदायक जन्तु
विनाशकारी जन्तुओं का भक्षण-
साँप उन जन्तुओं को खाते हैं जो हमारी फसलों को नुकसान पहुंचाते हैं, जैसे चूहे, गिलहरी और टिड्डे. इस तरह वे हमारी फसलों को बचाने में मदद करते हैं. खाद्य श्रृंखला में साँपों का एक महत्वपूर्ण रोल होता है, क्योंकि वे शिकार और शिकारी दोनों का हिस्सा होते हैं.
औषधि
साँपों से मिलने वाला जहर कई बीमारियों के इलाज के लिए बहुत उपयोगी होता है.
1. हीमोफिलिया के मरीज, जिन्हें रक्तस्राव रोकने के लिए दवा की जरूरत होती है, उनके लिए एक आयुर्वेदिक दवा रसेल वाइपर नामक साँप के जहर से बनाई जाती है. यह रक्त को जमने में मदद करती है.
2. दमा, तंत्रिका कमजोरी और मिर्गी जैसी बीमारियों के लिए होम्योपैथिक दवाएँ रैटल साँप के जहर से बनाई जाती हैं.
3. कोबरा साँप का जहर भी तंत्रिका संबंधी बीमारियों, दर्द कम करने वाली गोलियों और इंजेक्शन बनाने में इस्तेमाल होता है. यह हृदय रोगों के लिए होम्योपैथिक दवाओं में भी उपयोग होता है. साँप का जहर उचित तरीके से इस्तेमाल होने पर जीवन रक्षक हो सकता है.
प्रयोगशाला में प्रादर्श एवं सूक्ष्म अध्ययन हेतु उपयोग-
जीव विज्ञान के छात्र प्रयोगशालाओं में इन प्राणियों का अध्ययन करते हैं. इन्हें फॉर्मेलिन के घोल में सुरक्षित रखा जाता है ताकि छात्र इनकी आंतरिक संरचना को समझ सकें. ये जीव विज्ञान के अध्ययन के लिए महत्वपूर्ण नमूने होते हैं.
हानिकारक महत्व-
कुछ साँपों का जहर शरीर में तंत्रिकाओं और मांसपेशियों को लकवा मार देता है, जिससे सांस रुक जाती है और अंततः मृत्यु हो सकती है. इसलिए, जहरीले साँपों से दूर रहना हमेशा सुरक्षित होता है.
🎯 Exam Tip: आर्थिक महत्व के प्रश्नों में हमेशा सकारात्मक (लाभदायक) और नकारात्मक (हानिकारक) दोनों पहलुओं को संतुलित तरीके से बताएं, साथ ही उदाहरण भी दें.
Question 3. ऐम्फीबिया वर्ग के प्रमुख लक्षणों को लिखिए?
Answer: ऐम्फीबिया वर्ग के प्रमुख लक्षण इस प्रकार हैं:
• इस वर्ग के जीव पानी और जमीन दोनों पर रहते हैं, इसलिए इन्हें उभयचर कहा जाता है. इस दोहरे आवास के कारण इनके शरीर में विशेष अनुकूलन होते हैं.
• इनके शरीर में सिर स्पष्ट होता है और धड़ लंबा होता है. कुछ में पूँछ होती है, जबकि कुछ में नहीं होती.
• इनमें दो जोड़ी पंचअंगुली पाद होते हैं. आगे के पैरों में चार और पीछे के पैरों में पांच उंगलियां होती हैं. कुछ एपोडा वर्ग में पैर नहीं होते हैं.
• इनकी त्वचा नम और ग्रंथिल होती है, जिस पर बहुकोशकीय श्लेष्मा ग्रंथियां पाई जाती हैं. इनमें शल्क नहीं होते, लेकिन कुछ में विष ग्रंथियां हो सकती हैं.
• इनके मुंह में समदंती (सभी दांत एक जैसे), बहुवारदंती (कई बार निकलने वाले) और शिखदंती (नुकीले) दांत होते हैं.
• ये असमतापी (ठंडे रक्त वाले) प्राणी होते हैं, जिसका मतलब है कि इनके शरीर का तापमान बाहरी वातावरण के तापमान के साथ बदलता रहता है.
• श्वसन फेफड़ों, त्वचा और मुखगुहा द्वारा होता है. लार्वा अवस्था में श्वसन गलफड़ों द्वारा होता है. प्रोटियस और साइरन जैसे जीवों में जीवन भर गलफड़े रहते हैं.
• इनका हृदय तीन कक्षीय होता है, जिसमें दो आलिंद और एक निलय होता है. एक बड़ा शिरापात्र (sinus venosus) दाहिने आलिंद में खुलता है.
• यकृत और वृक्क में निवाहिक उपतंत्र मौजूद होता है. इनकी लाल रक्त कणिकाएं केंद्रकयुक्त होती हैं.
• उत्सर्जन के आधार पर ये यूरियोटेलिक प्राणी होते हैं, यानी ये यूरिया उत्सर्जित करते हैं. इनके वृक्क मीसोनेफ्रिक प्रकार के होते हैं.
• इनके सदस्यों में अवस्कर (cloaca) पाया जाता है, जिसमें मूत्राशय, मूत्र वाहिनियां, जनन वाहिनियां और मलाशय खुलते हैं.
• इनमें दो नासा छिद्र होते हैं, लेकिन बाहरी कान नहीं होते. मध्य कान में केवल एक कर्ण अस्थिका (कॉल्यूमेला) होती है. इनमें पलकें होती हैं.
• इनका कपाल आटोस्टाइलिक प्रकार का होता है और इसमें दो ऑक्सीपिटल कोंडाइल होते हैं.
• त्वचा में रंग बदलने की क्षमता होती है, जिसे मेटाक्रोसिस कहते हैं. त्वचा के नीचे लसीका स्थान (lymph space) पाए जाते हैं.
In simple words: उभयचर पानी और जमीन दोनों पर रहते हैं, इनकी त्वचा गीली होती है, और इनके शरीर का तापमान बाहर के तापमान के साथ बदलता रहता है. इनमें तीन चैंबर वाला दिल होता है और ये कीड़े खाते हैं.
🎯 Exam Tip: जब भी किसी वर्ग के लक्षणों का वर्णन करें, तो उन गुणों को शामिल करें जो उसके आवास, शारीरिक संरचना, श्वसन, परिसंचरण और प्रजनन को परिभाषित करते हैं.
आर्थिक महत्व (Economic Importance of Amphibia)
1. भोजन की दृष्टि-
मेंढक की टांगों में बहुत ज्यादा प्रोटीन होता है. इनमें ओमेगा-3, फैटी एसिड, विटामिन ए और पोटेशियम भी पाया जाता है. इनका स्वाद मछली और चिकन के बीच का होता है. अमेरिका, जापान, ब्रिटेन, चीन और पणजी गोवा जैसे देशों में मेंढक का मांस खाया जाता है, क्योंकि यह स्वादिष्ट और पौष्टिक होता है. इसमें थायमीन, राइबोफ्लेविन, आयरन और फास्फोरस जैसे पोषक तत्व भी होते हैं जो शरीर के लिए अच्छे होते हैं. नेक्टयूरस और ऐक्सोलोटल्स जैसे उभयचर जीव भी अमेरिका और जापान में भोजन के रूप में खाए जाते हैं. मेंढक का मांस कई संस्कृतियों में एक पसंदीदा भोजन है, जिसे विभिन्न तरीकों से तैयार किया जाता है.
In simple words: मेंढक की टांगों में बहुत प्रोटीन और अन्य पोषक तत्व होते हैं, इसलिए कई देशों में इन्हें खाने के लिए इस्तेमाल किया जाता है. कुछ दूसरे उभयचर जीव भी भोजन के रूप में खाए जाते हैं.
🎯 Exam Tip: किसी भी जीव के आर्थिक महत्व को बताते समय, उसके उपयोग के विभिन्न पहलुओं (जैसे भोजन, औषधि, कीट नियंत्रण) और उनसे होने वाले लाभों को स्पष्ट रूप से समझाएं.
Question 4. पिसीज वर्ग के वर्गीकरण को उदाहरण सहित समझाइये?
Answer: पिसीज वर्ग (मछलियां) के वर्गीकरण के मुख्य आधार और लक्षण इस प्रकार हैं:
1. सभी मछलियां जलीय जीव होती हैं, जो खारे पानी (समुद्री) और मीठे पानी (ताजे पानी) दोनों में पाई जाती हैं. ये अपने जल-आधारित जीवन के लिए पूरी तरह से अनुकूलित होती हैं.
2. इनका शरीर धुरी के आकार का होता है, जो सिर, धड़ और पूँछ में बंटा होता है. यह संरचना उन्हें पानी में आसानी से तैरने में मदद करती है.
3. इनका शरीर सुव्यवस्थित (streamlined) होता है, जिससे इन्हें तैरने में आसानी होती है और पानी का प्रतिरोध कम होता है.
4. इनका शरीर शल्कों से ढका रहता है, जो उन्हें सुरक्षा प्रदान करते हैं. इनमें श्रोणी पंख (pelvic fins), मध्य पृष्ठीय पंख (median dorsal) और पूंछ पंख (caudal fin) भी होते हैं. ये पंख तैरने और संतुलन बनाए रखने में मदद करते हैं.
5. मछलियों में रक्त हृदय से गलफड़ों में जाता है और वहां से शुद्ध होकर सीधे शरीर के विभिन्न अंगों में चला जाता है. इसे एक-परिपथ परिसंचरण (unicircuit) कहते हैं.
6. इनकी लाल रक्त कणिकाएं (RBC) में केंद्रक होता है. शिरा कोटर (sinus venosus) और वृक्क निवाहिका उपतंत्र इनमें पाए जाते हैं.
7. ये असमतापी (poliothermal) जीव होते हैं, यानी इनके शरीर का तापमान बाहरी वातावरण के तापमान के साथ बदलता रहता है.
8. इनमें 10 जोड़ी क्रेनियल तंत्रिकाएं होती हैं.
9. इनमें बाहरी और मध्य कान नहीं होते, केवल आंतरिक कान ही पाए जाते हैं.
10. मछलियों के वृक्क मीसोनेफ्रोस प्रकार के होते हैं. उपास्थि वाली मछलियां यूरिया उत्सर्जित करती हैं, जबकि समुद्री अस्थि वाली मछलियां ट्राइमिथाइल अमीन उत्सर्जित करती हैं.
11. मछलियां एकलिंगी होती हैं, यानी नर और मादा अलग-अलग होते हैं.
12. निषेचन आंतरिक या बाहरी दोनों प्रकार का हो सकता है.
13. इनके अंडे मध्यपीतकी (mesolecithal) या अतिपीतकी (megalecithal) प्रकार के होते हैं.
14. ये अंडज (oviparous) या अंडजरायुज (ovoviviparous) हो सकते हैं.
15. विदलन असमान पूर्णभंजी (holoblastic unequal) या चक्रीय अंशमंजी (meroblastic discoidal) प्रकार का होता है.
16. इनमें बाहरी भ्रूणीय झिल्लियां (extra embryonic membrane) नहीं होती हैं, इसलिए इन्हें एनएम्नीओटा (anamniota) समूह में रखा जाता है.
17. मछलियां एक निश्चित मौसम में एक जगह से दूसरी जगह जाती हैं (seasonal migration). यह दो प्रकार का होता है:
(अ) केटाड्रोमस स्थानान्तरण: जब मीठे पानी से समुद्री पानी में स्थानांतरण होता है, जैसे एन्गुइला.
(ब) एनाड्रोमस स्थानान्तरण: जब समुद्री पानी से मीठे पानी में स्थानांतरण होता है, जैसे सालमन, हिल्सा और ट्राऊट.
In simple words: मछलियां पानी में रहने वाले जीव हैं, इनका शरीर तैरने के लिए बना होता है और शल्कों से ढका होता है. इनके शरीर का तापमान बाहर के तापमान के साथ बदलता रहता है. ये अलग-अलग तरह के पानी में पाए जाते हैं और अंडे या बच्चे देते हैं.
🎯 Exam Tip: वर्गीकरण के आधार बताते समय, प्रत्येक लक्षण को स्पष्ट रूप से परिभाषित करें और यदि संभव हो तो उसके कार्यात्मक महत्व को भी बताएं. उदाहरणों का उपयोग करना महत्वपूर्ण है.
वर्गीकरण (Classification)
रोमर (1959) और पार्कर एवं हेजवेल (1960) के अनुसार महावर्ग-पिसीज को तीन वर्गों में बांटा गया है:
1. प्लैकोडर्मी (Placodermi)
2. कॉन्डिक्थीज (Chondrichthyes)
3. ओस्टिक्थीज (Osteichthyes)
🎯 Exam Tip: वर्गीकरण के वर्गों को सूचीबद्ध करते समय, उनके सही वैज्ञानिक नामों का उल्लेख करें.
2. वर्ग- कॉण्ड्रिक्थीज (Chondrichthyes)
Answer: कॉण्ड्रिक्थीज वर्ग की मछलियों के प्रमुख लक्षण इस प्रकार हैं:
• इस वर्ग के सदस्य मुख्य रूप से समुद्री होते हैं. ये समुद्री वातावरण में रहने के लिए अनुकूलित होते हैं.
• इनका आंतरिक कंकाल उपास्थि (cartilage) का बना होता है, जो इन्हें लचीलापन प्रदान करता है.
• बाहरी कंकाल प्लेकॉयड शल्कों से ढका होता है. ये शल्क छोटे, दांतेदार और सख्त होते हैं.
• इनमें 5-7 जोड़ी गलफड़े (gill slits) पाए जाते हैं, जो सीधे बाहर खुलते हैं. गलफड़ों पर ऑपरकुलम (गिल आवरण) नहीं होता है.
• इनके अमाशय का आकार J-आकृति का होता है और आंत में सर्पिल कपाट (spiral valve) पाया जाता है, जो पाचन में मदद करता है.
• नर प्राणियों में मैथुनी अंग के रूप में क्लेस्पर (clasper) पाए जाते हैं. इनमें अवस्कर (cloaca) भी होता है.
• इस वर्ग की मछलियों के सिर के पीछे के हिस्से पर लोरेंजिनी तुम्बिकाएं (ampulla of lorenzini) नामक तापग्राही संवेदी अंग पाए जाते हैं, जो तापमान में बदलाव का पता लगाते हैं.
• हृदय में दो कक्ष होते हैं - एक आलिंद और एक निलय. इनके अलावा हृदय में शिराकोटर (sinus venosus) और कोनस आर्टिरियोस (conus arteriosus) भी होता है.
• ये असमतापी (poikilothermal) होते हैं, यानी इनके शरीर का तापमान नियंत्रित नहीं होता और बाहरी तापमान के साथ बदलता रहता है.
• इस वर्ग के प्राणियों में वायुकोष (air bladder) नहीं होता है, इसलिए इन्हें डूबने से बचने के लिए लगातार तैरते रहना पड़ता है.
• इनका मुंह सिर के निचले हिस्से पर स्थित होता है. इनके जबड़े मजबूत होते हैं और दांत भी होते हैं. कुछ मछलियों में विद्युत अंग (electric organ) होते हैं, जैसे टॉरपीडो, और कुछ में विष दंश होते हैं, जैसे ट्राइगोन.
• नर और मादा अलग-अलग होते हैं (एकलिंगी). निषेचन आंतरिक होता है.
• ये अंडज (oviparous) या शिशुप्रजक (viviparous) होते हैं, यानी अंडे देते हैं या सीधे बच्चे को जन्म देते हैं. उदाहरण- स्कॉलियोडोन (कुत्ता मछली), प्रिस्टिस (आरा मछली), कारकेरोडोन (विशाल सफेद शार्क), ट्राइगोन (व्हेल शार्क).
In simple words: कॉण्ड्रिक्थीज मछलियां समुद्र में रहती हैं, इनकी हड्डियां नरम (उपास्थि) होती हैं और इनके गलफड़ों पर ढक्कन नहीं होता. इन्हें हमेशा तैरते रहना पड़ता है ताकि ये डूबें नहीं.
🎯 Exam Tip: कॉन्ड्रेइक्थीस मछलियों को उनके उपास्थि कंकाल और गलफड़ों पर ऑपरकुलम की अनुपस्थिति जैसे विशिष्ट लक्षणों के आधार पर याद रखें.
3. वर्ग- ओस्टिक्थीज (Osteichthyes)
Answer: ओस्टिक्थीज वर्ग (अस्थि वाली मछलियां) सबसे विकसित मानी जाती हैं. इनके मुख्य लक्षण इस प्रकार हैं:
• इस वर्ग की मछलियां समुद्री (खारे पानी) और अलवणीय (मीठे पानी) दोनों प्रकार के जल में पाई जाती हैं. ये विभिन्न जलीय वातावरणों में रहने के लिए अनुकूलित होती हैं.
• इनका आंतरिक कंकाल अस्थि (हड्डी) का बना होता है, जो इन्हें कठोरता प्रदान करता है. इनकी त्वचा पर साइक्लॉइड (cycloid) और गैनोयड (Ganoid) शल्क पाए जाते हैं, जो उनकी बाहरी सुरक्षा करते हैं.
• इनका मुंह आमतौर पर अग्र सिरे के अंत में होता है. इनमें दांत और जबड़े मौजूद होते हैं, जिससे ये शिकार पकड़ सकती हैं. इनका शरीर सुव्यवस्थित (streamlined) होता है, जो इन्हें पानी में आसानी से तैरने में मदद करता है.
• इनमें चार जोड़ी गलफड़े होते हैं, जो दोनों तरफ ऑपरकुलम (गिल आवरण) से ढके होते हैं. ऑपरकुलम गलफड़ों को सुरक्षा प्रदान करता है.
• इनमें वायु कोष (air bladder) उपस्थित होता है, जो इन्हें उत्प्लावन (पानी में ऊपर-नीचे तैरने की क्षमता) में सहायता करता है.
• हृदय में दो कक्ष होते हैं - एक आलिंद और एक निलय. यह इनके परिसंचरण तंत्र का हिस्सा है.
• ये सभी असमतापी (polykothermal) होते हैं, यानी इनके शरीर का तापमान बाहरी वातावरण के तापमान के साथ बदलता रहता है.
• ये एकलिंगी (unisexual) होते हैं, जनद जोड़ीदार होते हैं, और अधिकांश अंडे देते हैं (अंडज).
• निषेचन बाहरी प्रकार का होता है और विकास प्रत्यक्ष होता है, यानी लार्वा अवस्था नहीं होती है. अस्थि वाली मछलियां अपने वातावरण में बहुत विविधता दिखाती हैं.
In simple words: अस्थि वाली मछलियां हड्डी का कंकाल रखती हैं, इनके गलफड़ों पर ढक्कन होता है और इनके पास वायुकोष होता है जो इन्हें तैरने में मदद करता है.
🎯 Exam Tip: ओस्टिक्थीज मछलियों को उनके अस्थि कंकाल, गलफड़ों पर ऑपरकुलम और वायुकोष की उपस्थिति के आधार पर याद रखें, क्योंकि ये उनके मुख्य विशिष्ट लक्षण हैं.
वर्ग-पिसीज का आर्थिक महत्व
Answer: पिसीज वर्ग (मछलियां) का आर्थिक महत्व बहुत अधिक है, और इसी कारण मत्स्य पालन एक महत्वपूर्ण व्यवसाय है:
• **भोजन के रूप में:** कोचीन के केंद्रीय मत्स्य उद्योग संस्थान (IFT) ने मछली का आटा (fish flour) तैयार किया है. मछलियों से प्राप्त भोजन में अन्य भोजनों की तुलना में अधिक प्रोटीन होता है और यह आसानी से पच जाता है. इसे बिस्कुट, डबलरोटी, केक, मिठाई और सूप बनाने में इस्तेमाल किया जाता है. कुछ मछलियों में हीमोग्लोबिन की मात्रा अधिक होती है, जैसे वैलेगा अट्टू (wallagoattu). इनमें थायमीन, क्रिएटिन, यैरोसीन और विटामिन B जैसे पोषक तत्व भी होते हैं, साथ ही विटामिन D, C और E भी पाए जाते हैं. यह सब आसानी से पच जाता है. उदाहरण के लिए, लेबियो रोहिता, कतला और लेबियो कालवासू जैसी मछलियां खाई जाती हैं.
• **मत्स्य पालन:** मछलियों को स्वादिष्ट और पौष्टिक मांस के लिए पाला जाता है. उदाहरण- टिन्का टिन्का, क्रसियन कार्प, केरेसियस और साइप्रिन्स जैसी मछलियां पाली जाती हैं. मछली पालन से लोगों को रोजगार मिलता है और खाद्य सुरक्षा भी बढ़ती है.
• **उद्योग की दृष्टि से:**
1. **शरीर का तेल:** चमड़ा उद्योग में मछली के तेल को चामोसिग के लिए इस्तेमाल किया जाता है. मछली के शरीर का तेल मोमबत्ती, स्नेहक, सौंदर्य प्रसाधनों, पेंट और वार्निश बनाने में उपयोग होता है. मछली का गोंद उसकी पूंछ से प्राप्त किया जाता है.
2. **मछली की त्वचा:** जापान में मछली की त्वचा से लालटेन बनाई जाती है. इसकी त्वचा से ताश के डिब्बे, आभूषण के डिब्बे, तलवार की म्यान, जूते, महिलाओं के पर्स और तंबाकू रखने वाले थैले भी बनते हैं. शार्क और रे मछली इसकी अच्छी उदाहरण हैं. कुछ मछलियों के अवशेषों से हनीकॉम्ब और रिबन जैसी चीजें भी बनाई जाती हैं. इस प्रकार, मछली उद्योग विभिन्न उत्पादों का स्रोत है.
• **मत्स्य चूर्ण:** मत्स्य चूर्ण डिब्बाबंदी या मछली के तेल उद्योग से बचे हुए हिस्सों से या बिना तेल वाली मछलियों से बनाया जाता है. कॉड उद्योग में इसे सफेद मत्स्य चूर्ण कहा जाता है. मत्स्य चूर्ण का उपयोग पालतू जानवरों जैसे सूअर, मुर्गीपालन और मवेशियों के लिए बड़े पैमाने पर भोजन के रूप में होता है, क्योंकि इसमें आसानी से पचने वाला प्रोटीन, कैल्शियम और फास्फोरस होता है.
• **उर्वरक के रूप में:** मत्स्य चूर्ण तैयार करते समय बचे हुए पदार्थों का उपयोग कॉफी, चाय और तंबाकू की खेती में उर्वरक के रूप में किया जाता है, जिससे मिट्टी की उर्वरता बढ़ती है.
In simple words: मछलियां हमारे लिए भोजन, दवाएं और कई उपयोगी चीजें बनाने में मदद करती हैं. मछली पालन से लोगों को रोजगार भी मिलता है.
🎯 Exam Tip: मत्स्य उद्योग के महत्व पर चर्चा करते समय, केवल मछली के मांस के बारे में ही नहीं, बल्कि उसके तेल, त्वचा, चूर्ण और उर्वरक के रूप में उपयोग जैसे विभिन्न पहलुओं को भी शामिल करें.
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