NCERT Solutions for Class 11 Biology: Chapter 03 विषाणु या वाइरस
Explore reliable textbook solutions for Chapter 03 विषाणु या वाइरस tailored for Class 11 learners. Utilizing these Biology answers ensures thorough preparation and strengthens foundational knowledge before final RBSE evaluations.
Practice Class 11 Biology Solutions: Chapter 03 विषाणु या वाइरस
Access the complete solution PDF for Class 11 Biology below. Regular practice with these targeted textbook answers builds familiarity with standard question patterns and helps secure higher marks in final school evaluations.
प्रश्न 1. वाइरस होते हैं -
(अ) कणिकामय या अकोशिक
(ब) एककोशिक
(स) बहुकोशिक
(द) उपरोक्त कोई नहीं
Answer: (अ) कणिकामय या अकोशिक
In simple words: वाइरस बहुत छोटे कण होते हैं और इनमें अपनी कोई कोशिका नहीं होती है, इसलिए इन्हें अकोशिक कहा जाता है।
🎯 Exam Tip: वाइरस की मूल प्रकृति को समझना महत्वपूर्ण है, क्योंकि वे जीवित और निर्जीव दोनों के गुण दिखाते हैं, लेकिन अपनी कोशिका संरचना नहीं रखते।
प्रश्न 2. जीवाणुभोजी बने होते हैं –
(अ) न्यूक्लिक अम्ल के
(ब) केवल प्रोटीन के
(स) न्यूक्लिक अम्ल व प्रोटीन के
(द) केप्सिड
Answer: (स) न्यूक्लिक अम्ल व प्रोटीन के
In simple words: जीवाणुभोजी वाइरस न्यूक्लिक अम्ल (DNA या RNA) और प्रोटीन से मिलकर बनते हैं।
🎯 Exam Tip: वाइरस की मूल संरचना में न्यूक्लिक अम्ल (आनुवंशिक सामग्री) और उसे घेरे हुए प्रोटीन का आवरण (कैप्सिड) होता है, जो सभी प्रकार के वाइरस में पाया जाता है।
प्रश्न 3. न्यूक्लिक अम्ल तथा प्रोटीन आवरण को कहते हैं -
(अ) कोशिका झिल्ली
(ब) कोशिका भित्ति
(स) क्यूटिकल
(द) केप्सिड
Answer: (द) केप्सिड
In simple words: वाइरस में न्यूक्लिक अम्ल को घेरने वाले प्रोटीन के आवरण को कैप्सिड कहते हैं, जो उसे सुरक्षा देता है।
🎯 Exam Tip: कैप्सिड वाइरस की बाहरी प्रोटीन परत होती है जो उसके आनुवंशिक पदार्थ को बचाती है और उसे मेजबान कोशिका से जुड़ने में मदद करती है।
प्रश्न 4. निम्न में से वाइरस जनित रोग है –
(अ) टाइफाइड
(ब) टी.बी.
(स) पोलियो
(द) डिप्थीरिया
Answer: (स) पोलियो
In simple words: पोलियो एक बीमारी है जो वाइरस के कारण होती है, जबकि टाइफाइड, टी.बी. और डिप्थीरिया बैक्टीरिया से होने वाली बीमारियाँ हैं।
🎯 Exam Tip: वाइरस से होने वाली बीमारियों और बैक्टीरिया से होने वाली बीमारियों के बीच अंतर को याद रखना महत्वपूर्ण है।
RBSE Class 11 Biology Chapter 3 अतिलघुत्तरात्मक प्रश्न
प्रश्न 1. उस विषाणु का नाम लिखिये जिसमें एकल रज्जुकी DNA पाया जाता है।
Answer: \( \phi X 174 \) जीवाणुभोजी वाइरस में एकल रज्जुकी DNA पाया जाता है। यह एक ऐसा वाइरस है जो सिर्फ बैक्टीरिया पर हमला करता है।
In simple words: \( \phi X 174 \) नाम के वाइरस में केवल एक धागे वाला DNA होता है।
🎯 Exam Tip: वाइरस में एकल रज्जुकी DNA या RNA पाया जा सकता है, जो उनके वर्गीकरण का आधार है।
प्रश्न 2. उस विषाणु का नाम लिखिये जिसमें द्विरज्जुकी RNA पाया जाता है।
Answer: पादप विषाणु Reo virus (wound tumor virus) में द्विरज्जुकी RNA पाया जाता है। यह वाइरस पौधों में घाव वाले ट्यूमर का कारण बनता है।
In simple words: रीओ वाइरस एक ऐसा पौधा वाइरस है जिसमें दो धागे वाला RNA होता है।
🎯 Exam Tip: सामान्यतः RNA वाइरस एकल रज्जुकी होते हैं, लेकिन रीओ वाइरस जैसे कुछ अपवाद भी होते हैं जिनमें द्विरज्जुकी RNA पाया जाता है।
प्रश्न 3. टी.एम.वी. (T.M.V.) का पूरा नाम लिखिये।
Answer: टी.एम.वी. (T.M.V.) का पूरा नाम तम्बाकू मोजैक वाइरस (Tobacco mosaic virus) है। यह वाइरस तम्बाकू के पौधों को संक्रमित करता है।
In simple words: टी.एम.वी. का मतलब है "तम्बाकू मोजैक वाइरस"।
🎯 Exam Tip: टी.एम.वी. पहला खोजा गया वाइरस था और इसने वाइरस विज्ञान के अध्ययन की नींव रखी।
प्रश्न 4. दो विषाणु जनित प्राणि रोगों के नाम बताइये।
Answer: दो वाइरस जनित प्राणि रोग हैं: चेचक-पॉक्स वाइरस और पोलियो। चेचक एक संक्रामक रोग है, जबकि पोलियो तंत्रिका तंत्र को प्रभावित करता है।
In simple words: चेचक और पोलियो दो बीमारियाँ हैं जो वाइरस से जानवरों और मनुष्यों को होती हैं।
🎯 Exam Tip: कई गंभीर बीमारियाँ वाइरस के कारण होती हैं, और उनके कारक वाइरस को याद रखना आवश्यक है।
प्रश्न 2. पादप व जन्तु विषाणु में क्या अन्तर है ?
Answer: पादप व जन्तु वाइरस में दो मुख्य अंतर नीचे दिए गए हैं:
1. **आवरण:** सभी पादप वाइरस में बाहरी आवरण नहीं होता है। जबकि जन्तु वाइरस में यह आवरण हो सकता है (जैसे इन्फ्लूएंजा वाइरस, मम्पस वाइरस) या नहीं भी हो सकता है (जैसे पोलियो वाइरस)। यह आवरण उन्हें मेजबान कोशिका में प्रवेश करने में मदद करता है।
2. **आनुवंशिक पदार्थ:** सभी पादप वाइरस में आनुवंशिक पदार्थ RNA होता है। जबकि जन्तु वाइरस में RNA या DNA दोनों में से कोई भी हो सकता है। पौधों के वाइरस अक्सर पौधों में रोग फैलाते हैं (जैसे तम्बाकू मोजैक रोग), जबकि प्राणि वाइरस केवल जानवरों और मनुष्यों में रोग फैलाते हैं (जैसे HIV, इन्फ्लूएंजा)।
In simple words: पादप वाइरस में अक्सर बाहरी कवच नहीं होता और उनमें RNA होता है, जबकि जन्तु वाइरस में कवच हो सकता है और उनमें RNA या DNA दोनों हो सकते हैं।
🎯 Exam Tip: पादप और जन्तु वाइरस के बीच आनुवंशिक सामग्री और बाहरी आवरण की उपस्थिति या अनुपस्थिति प्रमुख अंतर हैं।
प्रश्न 3. किसी भी विषाणु की संरचना समझाइये।
Answer: सभी वाइरस बहुत छोटे, अकोशिकीय कणों जैसे होते हैं। इनकी संरचना मुख्य रूप से न्यूक्लिक अम्ल (DNA या RNA) और प्रोटीन से बनी होती है। न्यूक्लिक अम्ल वाइरस का केंद्रीय भाग बनाता है। इस न्यूक्लिक अम्ल के चारों ओर एक प्रोटीन का आवरण होता है जिसे कैप्सिड कहते हैं। कैप्सिड न्यूक्लिक अम्ल की रक्षा करता है और वाइरस की आकृति तय करता है। कैप्सिड छोटी-छोटी इकाइयों से मिलकर बना होता है जिन्हें कैप्सोमियर्स कहते हैं। प्रत्येक कैप्सोमियर कई प्रोटीन अणुओं से बनता है। केंद्रीय भाग (न्यूक्लिक अम्ल) और कैप्सिड मिलकर न्यूक्लियोकैप्सिड कहलाते हैं। कुछ वाइरस में न्यूक्लियोकैप्सिड के ऊपर एक और बाहरी परत होती है जिसे आवरण (envelope) कहते हैं, जो लिपिड या लिपोप्रोटीन से बनी होती है।
In simple words: वाइरस एक छोटे कण जैसे होते हैं जिनमें अंदर आनुवंशिक पदार्थ (DNA या RNA) होता है और बाहर प्रोटीन की एक परत (कैप्सिड) होती है। कुछ वाइरस के बाहर एक और परत (आवरण) भी होती है।
🎯 Exam Tip: वाइरस की संरचना के मुख्य घटक न्यूक्लिक अम्ल और कैप्सिड हैं, और कुछ में एक आवरण भी होता है; ये सभी घटक संक्रमण में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।
प्रश्न 1. विषाणुओं की प्रकृति एवं लक्षण का वर्णन कीजिए।
Answer: वाइरस में जीवित और निर्जीव दोनों के गुण होते हैं। उनकी प्रकृति और लक्षण नीचे दिए गए हैं:
**वाइरस के जैविक गुण (Living characters of viruses):**
1. वाइरस केवल जीवित कोशिकाओं के अंदर ही अपनी संख्या बढ़ा सकते हैं।
2. वाइरस जिस मेजबान कोशिका को संक्रमित करते हैं, उसके लिए बहुत खास होते हैं।
3. वे बैक्टीरिया, कवक या किसी भी स्वस्थ पौधे को संक्रमित कर सकते हैं।
4. इनमें न्यूक्लिक अम्ल (DNA या RNA) होता है और ये प्रतिजन (antigen) के गुण दिखाते हैं।
5. वे विकिरण, प्रकाश, रसायन, अम्ल, क्षार और तापमान जैसे बाहरी प्रभावों के प्रति प्रतिक्रिया करते हैं।
6. वाइरस में आनुवंशिक पदार्थ की नकल (replication) होती है, जो जीवित जीवों का एक महत्वपूर्ण लक्षण है।
7. इनमें बदलाव (mutation) होते रहते हैं, जो जीवों का एक खास गुण है।
**वाइरस के निर्जीव गुण (Non-living characters of viruses):**
1. इनमें कोशिका भित्ति, प्लाज्मा झिल्ली और कोशिकांग (cell organelles) नहीं होते हैं।
2. इनमें सांस लेना, बढ़ना या कोई और जैविक क्रिया नहीं होती है।
3. वाइरस को क्रिस्टल के रूप में इकट्ठा किया जा सकता है, जो केवल निर्जीव चीजों में ही संभव है।
4. वे अपने खास मेजबान ऊतक के बाहर निष्क्रिय (inert) रहते हैं।
5. वे खुद की नकल तो करते हैं (autocatalytic) लेकिन उनमें काम करने की अपनी आज़ादी (functional autonomy) नहीं होती है।
6. इनमें कोई एंजाइम नहीं होता है। इन्हें प्रोटीन की तरह नीचे बिठाया (sedimented) जा सकता है।
7. विभिन्न रसायनों की मदद से इन्हें पानी में घोला (precipitation) जा सकता है।
In simple words: वाइरस जीवित और निर्जीव दोनों तरह के लक्षण दिखाते हैं। वे जीवित कोशिकाओं में बढ़ते हैं और बदल सकते हैं, लेकिन उनमें अपनी कोशिकाएं या जीवन की बुनियादी क्रियाएं नहीं होती हैं।
🎯 Exam Tip: वाइरस को "जीवित और निर्जीव के बीच की कड़ी" के रूप में समझना महत्वपूर्ण है, क्योंकि वे दोनों के गुण साझा करते हैं।
प्रश्न 2. विषाणु की संरचना एवं रासायनिक संगठन का वर्णन कीजिए।
Answer:
**विषाणुओं की संरचना (Structure of Viruses):**
**आमाप (size):** वाइरस अलग-अलग आकार और आमाप के होते हैं। संक्रमित पौधों के रस से वाइरस को निकालकर इलेक्ट्रॉन सूक्ष्मदर्शी से देखा जाता है। वाइरस कणों को विरिऑन (Virions) कहते हैं। विरिऑन इतने छोटे होते हैं कि उन्हें नैनोमीटर (nm) में मापा जाता है। इनका आकार आमतौर पर 10 nm से 300 nm तक होता है। पौधों के वाइरस अक्सर जानवरों के वाइरस से छोटे होते हैं।
**रासायनिक संगठन (Chemical composition):** सभी वाइरस का रासायनिक बनावट एक जैसी होती है। हर वाइरस में न्यूक्लिक अम्ल (RNA या DNA) का एक केंद्रीय भाग (Central core) होता है, जो प्रोटीन के आवरण (Capsid) से ढका होता है। कैप्सिड छोटी-छोटी इकाइयों से बनता है जिन्हें कैप्सोमियर्स (capsomeres) कहते हैं। केंद्रीय भाग और कैप्सिड मिलकर न्यूक्लियोकैप्सिड (nucleocapsid) कहलाते हैं। कभी-कभी न्यूक्लियोकैप्सिड के ऊपर एक बाहरी आवरण (envelope) भी होता है, लेकिन यह सभी वाइरस में ज़रूरी नहीं होता। पौधों के वाइरस में आमतौर पर आवरण नहीं होता, लेकिन जानवरों के वाइरस में यह हो भी सकता है और नहीं भी। स्तनधारियों में पाए जाने वाले कई वाइरस में कैप्सिड के बाहर लिपिड या लिपोप्रोटीन से बना आवरण होता है। ऐसे वाइरस को लिपोवाइरस (Lipovirus) कहते हैं। पौधों के वाइरस में आमतौर पर RNA पाया जाता है, जबकि जानवरों के वाइरस में RNA या DNA दोनों में से कोई एक न्यूक्लिक अम्ल होता है। हर वाइरस में आनुवंशिक पदार्थ का सिर्फ एक अणु होता है, जिसमें 1000 से 2,50,000 न्यूक्लियोटाइड जोड़े होते हैं। न्यूक्लियोटाइडों की संख्या हर वाइरस में निश्चित होती है, जो वाइरस का एक खास लक्षण है। वाइरस का एक और महत्वपूर्ण लक्षण यह है कि उनका प्रोटीन भाग हानिकारक नहीं होता है। वाइरस के संक्रामक लक्षण उसके न्यूक्लिक अम्ल में होते हैं। इसलिए संक्रमण के लिए मेजबान कोशिका में वाइरस के न्यूक्लिक अम्ल का प्रवेश ज़रूरी है।
In simple words: वाइरस बहुत छोटे होते हैं। उनकी बनावट में बीच में DNA या RNA होता है, जिसके चारों ओर प्रोटीन का कवच (कैप्सिड) होता है। कुछ वाइरस में इस कवच के बाहर एक और परत भी होती है।
🎯 Exam Tip: वाइरस की संरचना के प्रमुख घटक (आकार, न्यूक्लिक अम्ल का प्रकार और कैप्सिड/आवरण की उपस्थिति) को समझना उनके कार्य को समझने में मदद करता है।
RBSE Class 11 Biology Chapter 3 वस्तुनिष्ठ प्रश्न
प्रश्न 1. वायरसों में आनुवंशिक पदार्थ होता है -
(अ) केवल डी एन ए
(ब) केवल आर एन ए
(स) डी एन ए अथवा आर एन ए
(द) हिस्टोन प्रोटीन
Answer: (स) डी एन ए अथवा आर एन ए
In simple words: वाइरस में आनुवंशिक जानकारी या तो DNA या RNA के रूप में होती है, कभी दोनों एक साथ नहीं।
🎯 Exam Tip: वाइरस के वर्गीकरण का एक महत्वपूर्ण आधार उनका आनुवंशिक पदार्थ है, चाहे वह DNA हो या RNA।
प्रश्न 2. वायरस के प्रोटीन चोल को कहते हैं –
(अ) केप्सिड
(ब) केप्सोमीयर
(स) वायरॉन
(द) संलयन
Answer: (अ) केप्सिड
In simple words: वाइरस के आनुवंशिक पदार्थ को घेरने वाली प्रोटीन की परत को कैप्सिड कहते हैं।
🎯 Exam Tip: कैप्सिड वाइरस के लिए सुरक्षात्मक आवरण के रूप में कार्य करता है और उसकी आकृति को बनाए रखने में मदद करता है।
प्रश्न 3. सबसे छोटा रोगकारक कौनसा है –
(अ) वायरस
(ब) जीवाणु
(स) माइकोप्लाज्मा
(द) स्टार्च, प्रोटीन व लिपिड
Answer: (अ) वायरस
In simple words: वाइरस सबसे छोटे जीव हैं जो बीमारियाँ फैला सकते हैं।
🎯 Exam Tip: वाइरस अपनी अत्यंत सूक्ष्मता के कारण अन्य सूक्ष्मजीवों जैसे बैक्टीरिया या माइकोप्लाज्मा से भी छोटे होते हैं।
प्रश्न 4. वायरस का निम्न भाग उसे आनुवंशिकता का गुण प्रदान करता है -
(अ) आर एन ए अथवा डी एन ए
(ब) केप्सिङ
(स) केप्सोमीयर
(द) प्रोटीन चोल
Answer: (अ) आर एन ए अथवा डी एन ए
In simple words: वाइरस में जो DNA या RNA होता है, वही उसकी सारी आनुवंशिक जानकारी रखता है और उसे अगली पीढ़ी तक पहुंचाता है।
🎯 Exam Tip: आनुवंशिक पदार्थ (न्यूक्लिक अम्ल) ही वाइरस के सभी लक्षणों को निर्धारित करता है और संक्रमण के लिए जिम्मेदार होता है।
प्रश्न 5. वायरस का निम्न भाग उसे आनुवंशिकता का गुण प्रदान करता है -
(अ) आर एन ए अथवा डी एन ए
(ब) केप्सिङ
(स) केप्सोमीयर
(द) प्रोटीन चोल
Answer: (अ) आर एन ए अथवा डी एन ए
In simple words: वाइरस में जो DNA या RNA होता है, वही उसकी सारी आनुवंशिक जानकारी रखता है और उसे अगली पीढ़ी तक पहुंचाता है।
🎯 Exam Tip: आनुवंशिक पदार्थ (न्यूक्लिक अम्ल) ही वाइरस के सभी लक्षणों को निर्धारित करता है और संक्रमण के लिए जिम्मेदार होता है।
RBSE Class 11 Biology Chapter 3 अतिलघुत्तरात्मक प्रश्न
प्रश्न 1. वाइरस का शाब्दिक अर्थ क्या है ?
Answer: वाइरस का शाब्दिक अर्थ "विष अणु" है। यह इस तथ्य को दर्शाता है कि वाइरस अत्यंत छोटे होते हैं और अक्सर बीमारियाँ फैलाते हैं।
In simple words: वाइरस का मतलब "ज़हर" या "विष" होता है।
🎯 Exam Tip: वाइरस शब्द उसके हानिकारक प्रभाव और सूक्ष्म आकार को दर्शाता है।
प्रश्न 2. विषाणु तथा विषाणुभोजी के खोजकर्ता कौन थे ?
Answer: वाइरस के खोजकर्ता इवानोवस्की (Ivanovsky) थे, जिन्होंने 1892 में तम्बाकू मोजैक रोग का अध्ययन करते समय इसकी खोज की थी। विषाणुभोजी (बैक्टीरियोफेज) के खोजकर्ता फ्रेडरिक ट्वोर्ट (Frederick Twort) और फेलिक्स डी'हेरेल (Félix d'Hérelle) थे।
In simple words: वाइरस को इवानोवस्की ने और जीवाणुभोजी को ट्वोर्ट और डी'हेरेल ने खोजा था।
🎯 Exam Tip: वैज्ञानिक इवानोवस्की ने सबसे पहले वाइरस की खोज करके जीव विज्ञान में एक नया क्षेत्र खोला था।
प्रश्न 3. सर्वप्रथम वाइरस का क्रिस्टलीकरण करने वाले कौन थे ?
Answer: सर्वप्रथम वाइरस का क्रिस्टलीकरण करने वाले वैज्ञानिक स्टैनले (Stanley) थे। उन्होंने 1935 में तम्बाकू मोजैक वाइरस (TMV) का क्रिस्टलीकरण किया, जिससे यह साबित हुआ कि वाइरस को क्रिस्टल के रूप में भी रखा जा सकता है।
In simple words: स्टैनले ने सबसे पहले वाइरस को क्रिस्टल के रूप में बनाया था।
🎯 Exam Tip: वाइरस का क्रिस्टलीकरण यह दर्शाता है कि यह निर्जीव गुणों वाला एक कण है, जिसे प्रयोगशाला में क्रिस्टल के रूप में संग्रहीत किया जा सकता है।
प्रश्न 4. बीजलेख या क्रिप्टोग्राम (Cryptogram) किसे कहते है ?
Answer: बीजलेख या क्रिप्टोग्राम वाइरस के गुणों का एक संक्षिप्त कोडित वर्णन होता है। यह एक मानक तरीका है जिससे वाइरस की मुख्य विशेषताओं, जैसे उसके आनुवंशिक पदार्थ का प्रकार, उसका आकार, और मेजबान की जानकारी को छोटे अक्षरों और संख्याओं के रूप में दर्शाया जाता है।
In simple words: क्रिप्टोग्राम वाइरस के खास गुणों को छोटे कोड में बताता है ताकि उसे आसानी से पहचाना जा सके।
🎯 Exam Tip: क्रिप्टोग्राम वाइरस के वर्गीकरण और पहचान में उपयोगी होते हैं, जिससे वैज्ञानिकों को एक समान तरीके से जानकारी साझा करने में मदद मिलती है।
RBSE Class 11 Biology Chapter 3 लघूत्तरात्मक प्रश्न
प्रश्न 1. विषाणुओं को संचरण किसके द्वारा होता है ?
Answer: वाइरस का संचरण तब होता है जब एक बीमार पौधे या जानवर से वाइरस स्वस्थ मेजबान तक पहुंचते हैं, जिससे संक्रमण होता है। वाइरस के फैलने के कई तरीके हैं:
1. **रोपण (graft):** पौधों में, जब संक्रमित पौधे का हिस्सा स्वस्थ पौधे पर ग्राफ्ट किया जाता है, तो वाइरस फैल सकता है।
2. **अंतःक्षेपण (injection):** मनुष्यों और जानवरों में, सुइयों या कीटों द्वारा संक्रमण।
3. **घर्षण (friction or rubbing):** शारीरिक संपर्क या रगड़ने से वाइरस फैल सकते हैं।
4. **छिड़काव द्वारा:** खांसने, छींकने या बोलने से निकली बूंदों द्वारा वाइरस हवा में फैलते हैं।
5. **मिट्टी तथा बीजों:** कुछ वाइरस मिट्टी में जीवित रह सकते हैं और बीज के माध्यम से पौधों में फैल सकते हैं।
6. **कायिक प्रवर्धों (vegetative propagules):** पौधों के प्रवर्ध जैसे कंद, प्रकंद आदि के माध्यम से।
7. **परागकणों:** कुछ वाइरस परागकणों द्वारा एक पौधे से दूसरे पौधे में जा सकते हैं।
8. **कवकों:** कुछ कवक वाइरस को एक पौधे से दूसरे पौधे तक ले जाने में मदद करते हैं।
जल तथा कीटों द्वारा भी वाइरस का संचरण होता है।
In simple words: वाइरस बीमार जीव से स्वस्थ जीव तक कई तरीकों से फैलते हैं, जैसे छूने से, हवा से, पानी से, कीटों से या पौधों के हिस्सों से।
🎯 Exam Tip: वाइरस के संचरण के विभिन्न तरीकों को समझना बीमारियों को फैलने से रोकने के लिए महत्वपूर्ण है।
प्रश्न 2. विषाणुओं के लाभदायक प्रभाव बताइये।
Answer: वाइरस केवल हानिकारक नहीं होते, बल्कि उनके कुछ लाभदायक प्रभाव भी होते हैं, जो नीचे दिए गए हैं:
**(i) लाभदायक प्रभाव (Useful effects):**
1. **जैविक नियंत्रण (Biological control):** कई वाइरस का उपयोग फसलों को नुकसान पहुँचाने वाले कीटों और जीवों को नियंत्रित करने के लिए किया जाता है। जैसे, बैक्यूलोवाइरस (Baculovirus) का उपयोग कुछ खास कीटों को प्राकृतिक तरीके से नियंत्रित करने में होता है।
2. **वैक्सीन का उत्पादन:** वाइरस के विशिष्ट प्रकारों को प्रयोगशाला में विकसित करके टीके (vaccines) बनाए जाते हैं, जो कई गंभीर बीमारियों (जैसे पोलियो, चेचक) से बचाव करते हैं।
3. **जल प्रदूषण नियंत्रण:** साइनोफॉज LPP-1 और SM-1 जैसे वाइरस का उपयोग जल प्रस्फुटन (water bloom) को नियंत्रित करने में किया जाता है, जो पानी में शैवाल की अत्यधिक वृद्धि के कारण होता है।
4. **आनुवंशिक इंजीनियरिंग:** वाइरस का उपयोग आनुवंशिक इंजीनियरिंग में जीनों को कोशिकाओं में डालने के लिए वाहक (vectors) के रूप में किया जाता है।
5. **अनुसंधान:** वाइरस आनुवंशिकी, आणविक जीव विज्ञान और रोगविज्ञान जैसे क्षेत्रों में अनुसंधान के लिए महत्वपूर्ण उपकरण हैं।
7. **प्रतिजैविक उत्पादन रोकना:** कुछ वाइरस सूक्ष्मजीवों द्वारा प्रतिजैविक पदार्थों के उत्पादन को रोकते हैं, जिसका उपयोग दवाओं के विकास में किया जा सकता है।
In simple words: वाइरस का उपयोग कीट नियंत्रण, वैक्सीन बनाने, पानी को साफ करने और वैज्ञानिक रिसर्च में किया जाता है।
🎯 Exam Tip: यह समझना महत्वपूर्ण है कि वाइरस के नकारात्मक प्रभावों के अलावा, उनके कुछ पारिस्थितिक और चिकित्सा अनुप्रयोगों में भी महत्वपूर्ण भूमिकाएँ हैं।
प्रश्न 3. विषाणुजनित पादप व मानव रोग तथा उनके कारक बताइये।
Answer: वाइरस से होने वाले कुछ महत्वपूर्ण मानव रोग और उनके कारक वाइरस नीचे दिए गए हैं:
| रोग (Disease) | रोग पैदा करने वाले जीव (Causal organism) |
|---|---|
| चेचक (Small pox) | पाक्स विषाणु (Pox virus) |
| इन्फ्लूएंजा (Influenza) | ऑर्थोमिक्सोवाइरस (Orthomyxovirus) |
| खसरा (Measles) | मिक्सो वाइरस (Myxo virus) |
| पोलियो (Polio) | पोलियो वाइरस (Polio virus) |
| रेबीज (Rabies) | रैब्डो वाइरस (Rhabdo virus) |
| हेपेयइटिस (Hepatitis) | हेपेयइटिस वाइरस (Hepatitis virus) |
| जुकाम (Cold) | राइनो वाइरस (Rhino virus) |
| पीला बुखार (Yellow fever) | कॉक्सेकिया वाइरस (Coxsackie virus) |
| एड्स (AIDS) | ह्यूमन टी लिम्फोट्रोफिक वाइरस I-II (HLV III), HIV या AIDS संबंधित स्ट्रोवाइरस (ARV) या लिम्फाडीनोपेथी संबंधित वाइरस (LAV) |
In simple words: कई बीमारियाँ जैसे चेचक, इन्फ्लूएंजा, पोलियो और एड्स वाइरस के कारण होती हैं, और हर बीमारी का अपना एक खास वाइरस होता है।
🎯 Exam Tip: मानव और पादप रोगों के लिए जिम्मेदार विशिष्ट वाइरस के नाम याद रखना जीव विज्ञान में महत्वपूर्ण है।
RBSE Class 11 Biology Chapter 3 निबन्धात्मक प्रश्न
प्रश्न 1. जीवाणुभोजी की संरचना को सचित्र समझाइये।
Answer: जीवाणुभोजी (Bacteriophage) ऐसे वाइरस होते हैं जो सिर्फ बैक्टीरिया को संक्रमित करते हैं। वे मिट्टी, गंदे पानी, नालियों, जानवरों और मनुष्यों की आंतों, थूक, लार, रक्त, मवाद, दूध, सब्जियों, फलों आदि में पाए जाते हैं। ये जानवरों, पक्षियों, गोबर, खाद और समुद्र में भी मिलते हैं। कुछ जीवाणुभोजी यीस्ट (Zymophage) और नीलहरित शैवाल (Cyanophage) पर भी परजीवी के रूप में पाए जाते हैं।
**जीवाणुभोजी की संरचना (Structure of Bacteriophage):**
जीवाणुभोजी इतने छोटे होते हैं कि उन्हें जीवाणु फिल्टर से भी अलग नहीं किया जा सकता। इनकी संरचना का अध्ययन केवल इलेक्ट्रॉन माइक्रोस्कोप से ही संभव है। एक सामान्य जीवाणुभोजी टैडपोल (tadpole) की तरह दिखता है, जिसमें सिर (head) और पूंछ (tail) होते हैं।
अधिकांश जीवाणुभोजियों (जैसे T1, T2, T6) का सिर प्रिज्म के आकार का होता है, लेकिन T3 और T4 जीवाणुभोजियों में यह षटकोणीय होता है। कुछ जीवाणुभोजी तन्तुमय (filamentous) भी होते हैं जिनमें सिर और पूंछ अलग नहीं होते। T₂ जीवाणुभोजी के प्रिज्म के आकार के सिर का माप 950 x 650Å होता है। सिर और पूंछ के नीचे का भाग कॉलर (collar) कहलाता है। पूंछ की लंबाई लगभग सिर की लंबाई (950Å) के बराबर होती है और इसका व्यास लगभग 80Å होता है। यह प्रोटीन की परत से ढका होता है। पूंछ के पास एक षटकोणीय प्लेट होती है जिसे पूंछ प्लेट (tail plate) या आधार प्लेट (basal plate) कहते हैं। इसकी मोटाई लगभग 200Å होती है। इस प्लेट की निचली सतह पर छह पुच्छ तंतु (tail fibres) जुड़े होते हैं। प्रत्येक पुच्छ तंतु की लंबाई 1500Å होती है। पुच्छ तंतु के दो मुख्य कार्य हैं:
1. जीवाणुभोजी को जीवाणु की सतह पर चिपकने में मदद करना।
2. यह संक्रमण का मुख्य वाहक होता है और मेजबान कोशिका को अधिक से अधिक वाइरस बनाने के लिए प्रेरित करता है।
In simple words: जीवाणुभोजी बैक्टीरिया को संक्रमित करने वाले वाइरस हैं। इनमें एक सिर और एक पूंछ होती है। सिर में आनुवंशिक पदार्थ होता है और पूंछ बैक्टीरिया से जुड़ने में मदद करती है।
🎯 Exam Tip: जीवाणुभोजी की हेड-टेल संरचना, न्यूक्लिक अम्ल की सामग्री और पूंछ तंतुओं का कार्य जीवाणुभोजी के जीवन चक्र को समझने के लिए महत्वपूर्ण हैं।
Free study material for Biology
Step-by-Step Textbook Answers: Class 11 Biology Chapter 03 विषाणु या वाइरस
Accessing Chapter 03 विषाणु या वाइरस Solutions
Access structured RBSE textbook solutions for Chapter 03 विषाणु या वाइरस. Designed in alignment with the latest academic curriculum for Class 11 Biology, these answers cover all end-of-chapter exercises to support daily learning and homework completion.
Concept-Driven Answers for Class 11 Biology
Clear, methodical explanations accompany every challenging problem within the Class 11 Biology text. Engaging with these detailed answers lays a solid foundation for advanced learning and improves foundational clarity for upcoming assessments.
Maximizing Study Efficiency
Frequent review of these structured answers builds strong analytical capabilities and response efficiency. Maximize your academic readiness by combining these textbook solutions with our curated study materials and mock evaluations for Class 11 Biology.
FAQs
The complete and updated RBSE Solutions Class 11 Biology Chapter 3 विषाणु या वाइरस is available for free on StudiesToday.com. These solutions for Class 11 Biology are as per latest RBSE curriculum.
Yes, our experts have revised the RBSE Solutions Class 11 Biology Chapter 3 विषाणु या वाइरस as per 2026 exam pattern. All textbook exercises have been solved and have added explanation about how the Biology concepts are applied in case-study and assertion-reasoning questions.
Toppers recommend using RBSE language because RBSE marking schemes are strictly based on textbook definitions. Our RBSE Solutions Class 11 Biology Chapter 3 विषाणु या वाइरस will help students to get full marks in the theory paper.
Yes, we provide bilingual support for Class 11 Biology. You can access RBSE Solutions Class 11 Biology Chapter 3 विषाणु या वाइरस in both English and Hindi medium.
Yes, you can download the entire RBSE Solutions Class 11 Biology Chapter 3 विषाणु या वाइरस in printable PDF format for offline study on any device.