RBSE Solutions Class 11 Biology Chapter 27 जीवन का अभिप्राय

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Detailed Chapter 27 जीवन का अभिप्राय RBSE Solutions for Class 11 Biology

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Class 11 Biology Chapter 27 जीवन का अभिप्राय RBSE Solutions PDF

RBSE Class 11 Biology Chapter 27 पाठ्यपुस्तक के प्रश्न

RBSE Class 11 Biology Chapter 27 वस्तुनिष्ठ प्रश्न

 

Question 1. जीवद्रव्य को 'जीवन का भौतिक आधार" किसने कहा?
(अ) परकिंजे ने
(ब) हक्सले ने
(स) वीजमान ने
(द) डार्विन ने
Answer: (ब) हक्सले ने
In simple words: हक्सले ने कहा था कि प्रोटोप्लाज्म (जीवद्रव्य) ही जीवन का मुख्य भौतिक आधार है, क्योंकि सभी जीवन की प्रक्रियाएं इसी में होती हैं।

🎯 Exam Tip: याद रखें कि 'जीवन का भौतिक आधार' शब्द किसके द्वारा गढ़ा गया था, यह अक्सर जीवविज्ञान के मूलभूत प्रश्नों में पूछा जाता है।

 

Question 2. दूध में निम्न में से कौन सी शर्करा पाई जाती है?
(अ) सुक्रोज
(ब) माल्टोज
(स) लैक्टोज
(द) उपरोक्त में से कोई नहीं
Answer: (स) लैक्टोज
In simple words: दूध में लैक्टोज नाम की चीनी पाई जाती है, जो इसे मीठा स्वाद देती है।

🎯 Exam Tip: दूध में पाई जाने वाली शर्करा 'लैक्टोज' होती है, जो डेयरी उत्पादों में महत्वपूर्ण होती है। इसे याद रखना चाहिए।

 

Question 3. कोशिका भित्ति का प्रमुख घटक है
(अ) ग्लाइकोजन
(ब) ग्लिसरीन
(स) काइटिन
(द) ग्लूकोज
Answer: (अ) ग्लाइकोजन
In simple words: पौधों में कोशिका भित्ति सेल्यूलोज की बनी होती है, जबकि जानवरों में यह ग्लाइकोजन के रूप में ऊर्जा भंडार होती है।

🎯 Exam Tip: कोशिका भित्ति के प्रमुख घटक के रूप में ग्लाइकोजन को याद रखें, खासकर जब यह जानवरों में ऊर्जा के भंडारण से जुड़ा हो।

 

Question 4. स्टेरॉइड्स होते हैं
(अ) सरल लिपिड
(ब) संयुक्त लिपिड
(स) व्युत्पन्न लिपिड
(द) उपरोक्त में से कोई नहीं
Answer: (स) व्युत्पन्न लिपिड
In simple words: स्टेरॉइड्स ऐसे खास तरह के वसा होते हैं जो सरल या संयुक्त वसा से बनते हैं, इन्हें व्युत्पन्न लिपिड कहते हैं।

🎯 Exam Tip: स्टेरॉइड्स को व्युत्पन्न लिपिड के रूप में वर्गीकृत किया जाता है क्योंकि वे अन्य लिपिड से बनते हैं, यह एक महत्वपूर्ण अंतर है।

 

Question 5. निम्न में से सरल गोलाकार प्रोटीन का उदाहरण है
(अ) हिस्टोन
(ब) किरेटिन
(स) एक्टिन
(द) फाइब्रिन
Answer: (अ) हिस्टोन
In simple words: हिस्टोन एक प्रकार का गोल प्रोटीन है जो DNA को पैक करने में मदद करता है, जिससे यह कोशिका के अंदर ठीक से फिट हो सके।

🎯 Exam Tip: हिस्टोन को डीएनए पैकेजिंग में उसकी भूमिका और गोलाकार प्रोटीन के रूप में उसकी प्रकृति के लिए याद रखें।

 

Question 6. प्रोटीन की इकाई (Monomer) है
(अ) ग्लूकोज
(ब) वसा अम्ल
(स) ग्लिसरीन
(द) अमीनो अम्ल
Answer: (द) अमीनो अम्ल
In simple words: प्रोटीन छोटे-छोटे अमीनो अम्ल से मिलकर बनते हैं, जैसे कि ईंटों से दीवार बनती है।

🎯 Exam Tip: प्रोटीन के मोनोमर के रूप में अमीनो अम्ल को पहचानना एक मौलिक जीवविज्ञान अवधारणा है।

 

Question 7. DNA में कौन सा क्षार नहीं पाया जाता है
(अ) एडिनीन
(ब) ग्वानीन
(स) यूरेसिल
Answer: (स) यूरेसिल
In simple words: DNA में यूरेसिल नहीं होता है; इसके बजाय थाइमीन पाया जाता है। यूरेसिल RNA में मिलता है।

🎯 Exam Tip: डीएनए और आरएनए के न्यूक्लियोटाइड आधारों के बीच अंतर जानना महत्वपूर्ण है, विशेष रूप से यूरेसिल और थाइमीन के संबंध में।

 

Question 8. ऊंट में कौन सा अनुकूलन नहीं होता है?
(अ) पैरों में चौड़ी गद्दियां होती हैं।
(ब) आमाशय के रुमेन में जल संचय होता है।
(स) सान्द्र मूत्र का उत्सर्जन होता है।
(द) ताप नियंत्रण
Answer: (ब) आमाशय के रुमेन में जल संचय होता है।
In simple words: ऊंट अपने रुमेन में पानी जमा नहीं करता है; यह एक गलत धारणा है। वे अन्य तरीकों से पानी बचाते हैं।

🎯 Exam Tip: ऊंट में पानी संरक्षण के सही अनुकूलन याद रखें, जैसे कि उनके शरीर का तापमान बदलना और गाढ़ा मूत्र निकालना।

 

Question 9. प्रकृति में ऊर्जा का प्रवाह होता है
(अ) एक दिशीय
(द) चक्रीय
(स) असंतुलित
(द) उपरोक्त में से कोई नहीं
Answer: (अ) एक दिशीय
In simple words: प्रकृति में ऊर्जा हमेशा एक ही दिशा में बहती है, जैसे सूरज से पौधों तक और फिर जानवरों तक, और वापस नहीं आती।

🎯 Exam Tip: ऊर्जा प्रवाह हमेशा एक दिशा में होता है, जो खाद्य श्रृंखला और पारिस्थितिकी तंत्र की एक मूलभूत अवधारणा है।

 

Question 10. मरुस्थलीय वातावरण का मुकाबला करने हेतु ऊंट में कौन सा अनुकूलन होता है
(अ) पैरों में चौड़ी गद्दियां होती हैं।
(ब) आमाशय के रुमेन में जल संचय होता है।
(स) सान्द्र मूत्र का उत्सर्जन होता है।
(द) उपरोक्त सभी।
Answer: (द) उपरोक्त सभी।
In simple words: ऊंट रेगिस्तान में रहने के लिए कई तरह से ढला हुआ है, जैसे चौड़े पैर, पानी बचाने के लिए गाढ़ा पेशाब और शरीर का तापमान नियंत्रित करना।

🎯 Exam Tip: ऊंट के सभी प्रमुख मरुस्थलीय अनुकूलन को याद रखें, क्योंकि यह जीव विज्ञान में एक सामान्य उदाहरण है।

RBSE Class 11 Biology Chapter 27 अतिलघूत्तरात्मक प्रश्न

 

Question 1. सजीव पदार्थ के संगठन में भाग लेने वाले दीर्घ मात्रिक तत्वों के नाम लिखिए
Answer: सजीव पदार्थ के संगठन में भाग लेने वाले दीर्घ मात्रिक तत्व इस प्रकार हैं:
• नाइट्रोजन (N)
• कार्बन (C)
• ऑक्सीजन (O)
• हाइड्रोजन (H)
• फॉस्फोरस (P)
• सल्फर (S)
In simple words: जीवित चीजों को बनाने के लिए बड़े तत्व नाइट्रोजन, कार्बन, ऑक्सीजन, हाइड्रोजन, फास्फोरस और सल्फर हैं।

🎯 Exam Tip: दीर्घ मात्रिक तत्वों के नाम याद रखें, जो जीवधारियों के लिए आवश्यक होते हैं और उनकी संरचना का बड़ा हिस्सा बनाते हैं।

 

Question 2. प्रकृति में मिलने वाली किन्हीं दो डाइसैकेराइड शर्कराओं के नाम व उनके प्राकृतिक स्रोत बताइये।
Answer: प्रकृति में मिलने वाली दो डाइसैकेराइड शर्कराएँ उनके प्राकृतिक स्रोतों के साथ इस प्रकार हैं:
1. माल्टोज: यह अंकुरित बीजों में पाया जाता है।
2. सुक्रोज: यह गन्ने में पाया जाता है।
In simple words: माल्टोज अंकुरित बीजों में और सुक्रोज गन्ने में मिलती है।

🎯 Exam Tip: प्रत्येक डाइसैकेराइड और उसके मुख्य प्राकृतिक स्रोत को याद रखना महत्वपूर्ण है, क्योंकि यह खाद्य पदार्थों के स्रोतों से संबंधित है।

 

Question 3. कीटों में बाह्य कंकाल किसका बना होता है?
Answer: कीटों में बाह्य कंकाल काइटिन (Chitin) का बना होता है। यह एक मजबूत और सुरक्षात्मक परत है।
In simple words: कीटों का बाहरी ढांचा काइटिन नाम के पदार्थ से बना होता है।

🎯 Exam Tip: काइटिन को कीटों के बाह्य कंकाल के मुख्य घटक के रूप में याद रखें, जो उनकी सुरक्षा और समर्थन प्रदान करता है।

 

Question 4. संयुक्त लिपिड्स के कोई दो उदाहरण दीजिये।
Answer: संयुक्त लिपिड्स के दो उदाहरण इस प्रकार हैं:
• फास्फोलिपिड्स (जैसे लेसिथीन, सिफैलिन)
• ग्लाइकोलिपिड्स (जैसे सिरेनिन, फ्रेनोलिन)
In simple words: फास्फोलिपिड्स और ग्लाइकोलिपिड्स संयुक्त वसा के उदाहरण हैं।

🎯 Exam Tip: फास्फोलिपिड्स और ग्लाइकोलिपिड्स को कोशिका झिल्ली में उनकी भूमिका के कारण याद रखना महत्वपूर्ण है।

 

Question 5. रक्त के थक्के में पाई जाने वाली प्रोटीन का नाम बताइये।
Answer: रक्त के थक्के में पाई जाने वाली प्रोटीन फाइब्रिनोजन (Fibronogen) है। यह प्रोटीन रक्त को गाढ़ा करने में मदद करती है।
In simple words: रक्त के थक्के जमने में फाइब्रिनोजन नाम की प्रोटीन मदद करती है।

🎯 Exam Tip: रक्त स्कंदन में फाइब्रिनोजन की भूमिका को याद रखें, जो चोट लगने पर रक्तस्राव को रोकने के लिए आवश्यक है।

 

Question 6. प्रोटीन्स के अपूर्ण जल अपघटन से बनी छोटी पोलीपेप्टाइड श्रृंखलाएं क्या कहलाती हैं?
Answer: प्रोटीन्स के अपूर्ण जल अपघटन से बनी छोटी पोलीपेप्टाइड श्रृंखलाएं प्रोटिओजैज एवं पेप्पटोन्स कहलाती हैं। ये प्रोटीन के छोटे टुकड़े होते हैं।
In simple words: प्रोटीन के छोटे टुकड़े, जो पूरी तरह से नहीं टूटे होते, प्रोटिओजैज और पेप्पटोन्स कहलाते हैं।

🎯 Exam Tip: प्रोटीन के आंशिक टूटने से बनने वाले पदार्थों के नाम याद रखें, जो प्रोटीन पाचन में मध्यवर्ती चरण होते हैं।

 

Question 7. न्यूक्लिओटाइड्स के घटकों के नाम बताइये।
Answer: न्यूक्लिओटाइड्स के घटक डिऑक्सीराइवो न्यूक्लिक अम्ल हैं। यह DNA का मुख्य घटक है।
In simple words: न्यूक्लियोटाइड्स के घटक डीऑक्सीराइबोन्यूक्लिक एसिड बनाते हैं।

🎯 Exam Tip: न्यूक्लियोटाइड्स के प्रमुख घटक के रूप में डीऑक्सीराइबोन्यूक्लिक एसिड (DNA) को याद रखें।

 

Question 9. ऊर्जा प्रवाह के सम्बन्ध में हरे पौधों को क्या कहते हैं?
Answer: ऊर्जा प्रवाह के संबंध में हरे पौधों को उत्पादक (Producer) कहते हैं। वे सूर्य की रोशनी से अपना भोजन स्वयं बनाते हैं।
In simple words: हरे पौधे उत्पादक कहलाते हैं क्योंकि वे ऊर्जा बनाते हैं।

🎯 Exam Tip: हरे पौधों को 'उत्पादक' के रूप में पहचानें क्योंकि वे खाद्य श्रृंखला में ऊर्जा के प्राथमिक स्रोत होते हैं।

 

Question 10. समस्थापन का एक उदाहरण दीजिए।
Answer: जब हम सीढ़ियों पर चलते हैं, तो हमारी टांगों की मांसपेशियों को ज़्यादा काम करना पड़ता है। इस वजह से, हमारे दिल की धड़कन (हृदय स्पंदन दर) कुछ समय के लिए बढ़ जाती है ताकि मांसपेशियों को ज़्यादा खून और ऊर्जा मिल सके। यह शरीर का खुद को बदलती ज़रूरतों के हिसाब से ढालने का एक उदाहरण है।
In simple words: सीढ़ियां चढ़ने पर दिल की धड़कन बढ़ना समस्थापन का एक उदाहरण है।

🎯 Exam Tip: शरीर में आंतरिक संतुलन बनाए रखने के लिए होने वाले शारीरिक परिवर्तनों का एक उदाहरण याद रखें।

 

Question 11. ऊंट में किस प्रकार का अनुकूलन पाया जाता है?
Answer: ऊंट में मरुस्थलीय अनुकूलन (Desert adaptation) पाया जाता है। इसमें पानी बचाने और रेगिस्तानी वातावरण में जीवित रहने के लिए कई शारीरिक और व्यवहारिक बदलाव शामिल हैं।
In simple words: ऊंट में रेगिस्तान में रहने के लिए खास अनुकूलन होते हैं।

🎯 Exam Tip: ऊंट के मरुस्थलीय अनुकूलन की विशेषताओं को ध्यान में रखें, जो उसे सूखे वातावरण में जीवित रहने में मदद करती हैं।

 

Question 12. मस्तिष्क का कौन सा भाग शरीर के तापमान नियमन पर नियंत्रण करता है?
Answer: मस्तिष्क का हाइपोथैलेमस भाग शरीर के तापमान पर नियंत्रण करता है। यह एक थर्मोस्टेट की तरह काम करता है।
In simple words: हाइपोथैलेमस दिमाग का वो हिस्सा है जो शरीर का तापमान ठीक रखता है।

🎯 Exam Tip: शरीर के तापमान नियमन में हाइपोथैलेमस की केंद्रीय भूमिका को याद रखना महत्वपूर्ण है।

 

Question 13. शरीर की वृद्धि और नई कोशिकाओं के निर्माण के लिए सबसे अधिक आवश्यक पदार्थ कौनसा है?
Answer: शरीर की वृद्धि और नई कोशिकाओं के निर्माण के लिए सबसे अधिक आवश्यक पदार्थ प्रोटीन (Protein) होता है। प्रोटीन शरीर के निर्माण खंड होते हैं।
In simple words: शरीर को बढ़ने और नई कोशिकाएं बनाने के लिए प्रोटीन सबसे ज़रूरी है।

🎯 Exam Tip: प्रोटीन को शरीर के निर्माण और मरम्मत के लिए आवश्यक पोषक तत्व के रूप में समझें।

 

Question 14. ATP को पूरा नाम लिखिए।
Answer: ATP का पूरा नाम एडिनोसिन ट्राइफॉस्फेट (Adenosine Triphosphate) है। यह कोशिकाओं में ऊर्जा का मुख्य स्रोत है।
In simple words: ATP का मतलब है एडिनोसिन ट्राइफॉस्फेट।

🎯 Exam Tip: ATP के पूर्ण रूप और कोशिकाओं में इसकी ऊर्जा-भंडारण भूमिका को याद रखें।

RBSE Class 11 Biology Chapter 27 लघूत्तरात्मक प्रश्न

 

Question 1. जैव ऊर्जा प्राप्त करने के लिए कोशिकाएं मुख्यतः किस 'ईधन पदार्थ' का उपयोग करती हैं? इसकी विभिन्न श्रेणियों का संक्षिप्त वर्णन दीजिये।
Answer: जैव ऊर्जा प्राप्त करने के लिए कोशिकाएं मुख्यतः कार्बोहाइड्रेट का ईंधन पदार्थ के रूप में उपयोग करती हैं। ये शरीर की संरचना बनाने में भी मदद करते हैं। इन्हें निम्न तीन मुख्य श्रेणियों में बांटा गया है:

(क) मोनोसैकेराइड्स (Monosaccharides):
ये सबसे सरल, घुलनशील और मीठे कार्बोहाइड्रेट होते हैं, इसलिए इन्हें शर्करा भी कहते हैं। इनके अणुओं में 3 से 7 तक कार्बन परमाणु हो सकते हैं। 6 कार्बन वाले शर्करा, जैसे ग्लूकोज, फ्रक्टोज और गैलेक्टोज, शहद और मीठे फलों में ज़्यादा मिलते हैं। इनका रासायनिक सूत्र \( C_6H_{12}O_6 \) होता है। ये समावयवी होते हैं, मतलब इनके सूत्र एक जैसे होते हैं लेकिन संरचना अलग होती है। ग्लूकोज सबसे महत्वपूर्ण शर्करा है। राइबोस (\( C_5H_{10}O_5 \)) और डीऑक्सीराइबोस (\( C_5H_{10}O_4 \)) जैसी पंच-कार्बन शर्कराएँ RNA और DNA बनाने के लिए बहुत महत्वपूर्ण हैं।

(ख) डाइसैकेराइड्स एवं ओलिगोसैकेराइड्स (Disaccharides and Oligosaccharides):
ये तब बनते हैं जब समान या अलग-अलग मोनोसैकेराइड्स के दो अणु ग्लाइकोसाइडिक बंध से जुड़ते हैं, और इस प्रक्रिया में जल का एक अणु निकलता है। इसे संघनन संश्लेषण कहते हैं।
\[ C_6H_{12}O_6 \text{ (ग्लूकोज)} + C_6H_{12}O_6 \text{ (फ्रक्टोज)} \rightarrow C_{12}H_{22}O_{11} \text{ (सुक्रोज)} + H_2O \text{ (जल)} \]
डाइसैकेराइड्स मीठे होते हैं और जल में घुलते हैं। उदाहरण के लिए, पौधों में माल्टोज और सुक्रोज, तथा जानवरों में लैक्टोज। माल्टोज ग्लूकोज के दो अणुओं से, सुक्रोज ग्लूकोज और फ्रक्टोज से, और लैक्टोज ग्लूकोज और गैलेक्टोज से बनती है। माल्टोज अंकुरित बीजों में, लैक्टोज दूध में (मां के दूध में सबसे ज़्यादा), और सुक्रोज गन्ने में पाया जाता है। तीन से दस मोनोसैकेराइड अणुओं के जुड़ने से बने कार्बोहाइड्रेट्स को ओलिगोसैकेराइड्स कहते हैं।

(ग) पॉलीसैकेराइड्स (Polysaccharides):
ये जटिल संरचना वाले होते हैं और 10 से हजारों मोनोसैकेराइड शर्करा अणुओं से बनते हैं। ये मोनोसैकेराइड्स के बहुलक होते हैं और जल अपघटन द्वारा फिर से मोनोसैकेराइड्स में बदल सकते हैं। ये सीधी या शाखित श्रृंखलाओं में पाए जाते हैं। पादपों में मंड (स्टार्च) और जन्तुओं में ग्लाइकोजन पॉलीसैकेराइड के उदाहरण हैं। ये ग्लूकोज के बहुलीकरण से बनते हैं। सेल्यूलोज पौधों में सबसे ज़्यादा पाया जाने वाला कार्बनिक पदार्थ है और कोशिका भित्ति बनाता है। काइटिन, जो नाइट्रोजन युक्त होता है, कीटों और अन्य आर्थोपोड्स के बाहरी कंकाल में पाया जाता है।
In simple words: कोशिकाएं ऊर्जा के लिए कार्बोहाइड्रेट का उपयोग करती हैं। यह तीन मुख्य प्रकार के होते हैं: मोनोसैकेराइड (जैसे ग्लूकोज), डाइसैकेराइड (जैसे सुक्रोज), और पॉलीसैकेराइड (जैसे स्टार्च)।

🎯 Exam Tip: कार्बोहाइड्रेट की तीनों मुख्य श्रेणियों को उनके उदाहरणों और संरचनात्मक विशेषताओं के साथ याद रखें, यह जैव रसायन का एक महत्वपूर्ण आधार है।

 

Question 2. लिपिड्स किस प्रकार के पदार्थ हैं? इनके तीन उदाहरण दीजिये।
Answer: लिपिड्स या वसा कार्बन, हाइड्रोजन और ऑक्सीजन से बने जटिल कार्बनिक यौगिक होते हैं। ये कार्बोहाइड्रेट के समान होते हैं, लेकिन इनकी संरचना अलग होती है। ग्लिसरॉल और वसा अम्ल इनके मुख्य घटक हैं। लिपिड्स चिकने होते हैं और पानी में नहीं घुलते, लेकिन ये एसीटोन, ऐल्कोहॉल, ईथर और क्लोरोफार्म जैसे विलायकों में घुलनशील होते हैं।
लिपिड्स के तीन उदाहरण हैं:
1. फास्फोलिपिड्स
2. ग्लाइकोलिपिड्स
3. लेसिथिन
In simple words: लिपिड्स, या वसा, कार्बन, हाइड्रोजन और ऑक्सीजन से बने होते हैं। वे पानी में नहीं घुलते। फास्फोलिपिड्स, ग्लाइकोलिपिड्स और लेसिथिन इनके उदाहरण हैं।

🎯 Exam Tip: लिपिड्स की अघुलनशील प्रकृति और उनके प्रमुख उदाहरणों को याद रखें, जो कोशिका झिल्ली जैसे महत्वपूर्ण संरचनाओं का हिस्सा होते हैं।

 

Question 3. गोलाकार एवं तन्तुमय प्रोटीन में अन्तर स्पष्ट करो।
Answer:

गोलाकार प्रोटीन (Globular Protein)तन्तुमय प्रोटीन (Fibrous Protein)
1. इस प्रकार की प्रोटीन के अणु द्वितीयक विन्यास वाली प्रोटीन के अणुओं पर अध्यारोपित (Superimposed) होते हैं। इस प्रकार की प्रोटीन के अणु घुमावदार होकर गोलाकार हो जाते हैं।1. द्वितीयक विन्यास (Secondary Configuration) वाली प्रोटीन के अणु में अमीनो अम्ल एक लम्बी सर्पिलाकार (spiral) में संघनित होकर तन्तुमय प्रोटीन का निर्माण करते हैं।
2. गोलाकार प्रोटीन के अणु तीन प्रकार के बंधकों से बंधे रहते हैं। हाइड्रोजन, आयनिक एवं डाइसल्फाइड बंधक। उदाहरण- एन्टीजन एवं एन्जाइम।2. तन्तुमय प्रोटीन के अणुओं की आकृति कुंडलाकार (helical) हो जाती है जो कि हाइड्रोजन बंधकों (hydrogen bonds) से जुड़े होते हैं। उदाहरण किरेटिन, मायोसीन एवं कॉलेजन।

In simple words: गोलाकार प्रोटीन गोल होते हैं और पानी में घुल जाते हैं, जैसे एंजाइम। तंतुमय प्रोटीन लंबे और धागे जैसे होते हैं, जैसे बाल और मांसपेशियां।

🎯 Exam Tip: गोलाकार और तंतुमय प्रोटीन के बीच प्रमुख संरचनात्मक और कार्यात्मक अंतरों को याद रखें, खासकर उनके घुलनशीलता और आकार के संबंध में।

 

Question 4. न्यूक्लिओटाइड्स क्या होते हैं? इनकी रासायनिक संरचना लिखिए।
Answer: न्यूक्लियोटाइड्स वे अणु हैं जो न्यूक्लिक एसिड, जैसे DNA और RNA, के निर्माण खंड होते हैं। इनकी रासायनिक संरचना में तीन मुख्य घटक होते हैं:
न्यूक्लियोसाइड \( + \) फॉस्फोरिक अम्ल \( \rightarrow \) न्यूक्लियोटाइड \( + H_2O \)
यहां दो प्रकार की पेण्टोज शर्कराएँ पाई जाती हैं: DNA में राइबोज और RNA में डीऑक्सीराइबोज शर्करा। न्यूक्लियोटाइड्स कोशिका के घटकों का लगभग 2 प्रतिशत हिस्सा बनाते हैं। इनमें दो प्रकार के क्षार होते हैं जो न्यूक्लिक अम्लों में पाए जाते हैं:
• प्यूरिन: ये 9 सदस्ययुक्त, दो वलय वाले नाइट्रोजिनस क्षार होते हैं। इनमें नाइट्रोजन 1', 3', 7' और 9' स्थिति पर पाई जाती है। एडीनीन (A) और ग्वानीन (G) इसके उदाहरण हैं।
• पिरिमिडिन: ये प्यूरिन से छोटे अणु होते हैं और 6 सदस्य युक्त, एकल वलय वाले नाइट्रोजिनस क्षार होते हैं। इनमें नाइट्रोजन 1' और 3' स्थिति पर पाई जाती है। साइटोसिन (C), थायमीन (T) और यूरेसिल (U) इसके उदाहरण हैं। DNA में एडीनीन दो हाइड्रोजन बंध द्वारा थायमीन के साथ जुड़ता है, जबकि साइटोसिन तीन हाइड्रोजन बंध द्वारा ग्वानीन के साथ जुड़ता है।
एक न्यूक्लियोटाइड में एक, दो या तीन फॉस्फेट समूह हो सकते हैं, जैसे AMP (एडीनोसिन मोनोफॉस्फेट) में एक, ADP (एडीनोसिन डाइफॉस्फेट) में दो फॉस्फेट। फॉस्फेट बंधों को उच्च ऊर्जा बंध कहते हैं, जिनसे लगभग 8 किलो कैलोरी ऊर्जा मुक्त होती है। ATP की खोज कार्ल लोहमन (1929) ने की थी। ATP का निर्माण एक एण्डरगोनिक क्रिया है।
In simple words: न्यूक्लियोटाइड्स DNA और RNA के छोटे-छोटे हिस्से होते हैं। इनमें एक चीनी, एक फॉस्फेट और एक नाइट्रोजन बेस होता है। बेस दो तरह के होते हैं: प्यूरिन (जैसे A, G) और पिरिमिडिन (जैसे C, T, U)।

🎯 Exam Tip: न्यूक्लियोटाइड की संरचना, उसके घटकों (शर्करा, फॉस्फेट, नाइट्रोजिनस बेस) और DNA-RNA में बेस के अंतर को विस्तार से समझें।

 

Question 5. DNA अणु का रेखाचित्र बनाइये
Answer: DNA अणु का रेखाचित्र इस प्रकार है:
A T G C चित्र 27.1 : डीएनए की संरचना एक घुमाव 3.4 nm (10.5 bp) A T G C
In simple words: DNA का चित्र एक घुमावदार सीढ़ी जैसा दिखता है, जिसमें दो धागे एक-दूसरे के चारों ओर लिपटे होते हैं। बीच में 'A, T, G, C' जैसे अक्षर जुड़े होते हैं।

🎯 Exam Tip: DNA की डबल हेलिक्स संरचना, इसके घटकों और आयामों को स्पष्ट रूप से दर्शाने का अभ्यास करें, क्योंकि यह जीव विज्ञान का एक मौलिक चित्र है।

 

Question 6. DNA व RNA में अन्तर स्पष्ट कीजिये।
Answer: DNA और RNA में अंतर इस प्रकार है:

डी.एन.ए.आर.एन.ए.
1. डी.एन.ए. मुख्यतः केन्द्रक में मिलता है।1. आर.एन.ए. मुख्यतः कोशिकाद्रव्य में मिलता है परन्तु इसकी कुछ मात्रा केन्द्रक में भी मिलती है।
2. इसमें डी-ऑक्सीराइबोज शर्करा होती है।2. इसमें राईबोज शर्करा होती है।
3. इसमें थायमीन नामक नाइट्रोजिनस क्षारक मिलता है।3. इसमें थायमीन के स्थान पर यूरेसिल पाया जाता है।
4. यह द्विकुण्डल का निर्माण करता है।4. यह एक रज्जु का निर्माण करता है।

In simple words: DNA मुख्य रूप से केंद्रक में होता है और इसमें डीऑक्सीराइबोज चीनी और थायमीन होता है। RNA कोशिकाद्रव्य में होता है, इसमें राइबोज चीनी और थायमीन की जगह यूरेसिल होता है।

🎯 Exam Tip: डीएनए और आरएनए के बीच इन प्रमुख अंतरों को याद रखें, खासकर उनके स्थान, शर्करा और नाइट्रोजिनस बेस के संबंध में।

 

Question 7. पॉलीसैकेराइड्स क्या होते हैं और कैसे बनते हैं?
Answer: पॉलीसैकेराइड्स (Polysaccharides) जटिल कार्बोहाइड्रेट होते हैं। ये 10 से हजारों मोनोसैकेराइड शर्करा अणुओं से मिलकर बनते हैं। पॉलीसैकेराइड्स मोनोसैकेराइड्स के बहुलक होते हैं, जिन्हें जल अपघटन द्वारा फिर से मोनोसैकेराइड्स में परिवर्तित किया जा सकता है। ये सीधी या शाखित श्रृंखलाओं में पाए जाते हैं। इनका मूलानुपाती सूत्र \( (C_6H_{10}O_5)_n \) होता है, जहां \( n \) मोनोसैकेराइडों की संख्या है। इन्हें आमतौर पर ग्लाइकेन्स (Glycans) भी कहते हैं। पॉलीसैकेराइड शर्कराएं मीठी नहीं होती हैं।
पादपों में मंड (स्टार्च) और जन्तुओं में ग्लाइकोजन पॉलीसैकेराइड के उदाहरण हैं। मंड और ग्लाइकोजन ग्लूकोज के बहुलीकरण से बनते हैं। इनूलिन एक अन्य पॉलीसैकेराइड है जो फ्रक्टोज के बहुलीकरण से बनता है।
In simple words: पॉलीसैकेराइड्स कई छोटी चीनी इकाइयों से मिलकर बनने वाले बड़े और जटिल कार्बोहाइड्रेट होते हैं। स्टार्च और ग्लाइकोजन इसके उदाहरण हैं, और ये मीठे नहीं होते।

🎯 Exam Tip: पॉलीसैकेराइड की जटिल संरचना, उनके निर्माण और प्रमुख उदाहरणों जैसे स्टार्च और ग्लाइकोजन को याद रखें।

 

Question 8. शरीर में लिपिड्स के कार्य लिखिये।
Answer: शरीर में लिपिड्स (वसा) के प्रमुख कार्य इस प्रकार हैं:
• लिपिड्स शरीर के तापमान को नियंत्रित करने और सुरक्षा देने में सहायता करते हैं।
• ये स्नेहक (Lubricant) के रूप में कार्य करते हैं।
• ये संचित और आरक्षित भोजन के रूप में कार्य करते हैं।
• ऊर्जा उत्पादन के लिए भी ईंधन का कार्य करते हैं।
• कई लिपिड्स हार्मोन और विटामिन के संयोजन में भाग लेते हैं।
• प्राकृतिक वसाओं से घी बनाया जाता है।
• कुछ फास्फोलिपिड्स (जैसे सिफेलिन) रक्त स्कंदन (खून जमने) को शुरू करने वाले कारकों में से एक होते हैं।
• कोशिकाओं और कोशिकीय अंगकों की बाहरी झिल्ली बनाने का कार्य करते हैं।
• ये कार्बोहाइड्रेट और प्रोटीन की तुलना में दोगुनी से भी ज्यादा ऊर्जा देते हैं।
• वास्तविक वसाओं के साबुनीकरण से साबुन बनता है।
In simple words: लिपिड्स शरीर को गर्मी देते हैं, ऊर्जा जमा करते हैं, अंगों को चिकना रखते हैं और कोशिका झिल्ली बनाते हैं।

🎯 Exam Tip: लिपिड्स के विविध कार्यों को याद रखें, जो ऊर्जा भंडारण से लेकर हार्मोन उत्पादन और तापमान नियंत्रण तक होते हैं।

 

Question 9. एन्टोपी (Entropy) किसे कहते हैं?
Answer: एन्ट्रॉपी (Entropy) ऊष्मागतिकी का दूसरा नियम बताता है कि ब्रह्माण्ड में मुक्त ऊर्जा की कुल मात्रा लगातार कम हो रही है। इसका मतलब है कि ऊर्जा का प्रत्येक स्थानांतरण या रूपांतरण ब्रह्मांड में अव्यवस्था को बढ़ाता है। दूसरे शब्दों में, कोई भी भौतिक या रासायनिक क्रिया शत-प्रतिशत सक्षम नहीं होती है। कुछ ऊर्जा अव्यवस्था के रूप में निकल जाती है। वैज्ञानिकों ने इस अव्यवस्था या बेतरतीबी की माप को एन्ट्रॉपी कहा है।
In simple words: एन्ट्रॉपी का मतलब है किसी सिस्टम में गड़बड़ी या अव्यवस्था की माप। जब चीजें अधिक फैलती हैं या बेतरतीब होती हैं, तो एन्ट्रॉपी बढ़ जाती है।

🎯 Exam Tip: एन्ट्रॉपी की परिभाषा को याद रखें कि यह ब्रह्मांड में अव्यवस्था या बेतरतीबी की माप है, और यह ऊर्जा के स्थानांतरण के साथ बढ़ती है।

 

Question 10. मनुष्य में ताप नियंत्रण कैसे होता है?
Answer: शरीर के आंतरिक और बाहरी वातावरण की प्रतिक्रिया में शारीरिक ऊष्मा का नियंत्रण ताप नियमन (Thermoregulation) कहलाता है। प्रत्येक जीव एक्सरगोनिक अभिक्रियाओं से शारीरिक ऊष्मा उत्पन्न करता है। मानव एक समतापी प्राणी है, जिसका अर्थ है कि शरीर का तापमान समान रहता है। समतापी प्राणियों को गर्म रुधिर प्राणी भी कहते हैं, जिनका शारीरिक ताप पर्यावरणीय तापमान पर निर्भर नहीं होता है।
मनुष्य के शरीर का तापमान 37°C या 96°F होता है, जो हमेशा एक समान रहता है। गर्मी के मौसम में या ज़्यादा व्यायाम करने पर शरीर का तापमान बढ़ जाता है, जिससे त्वचा में स्थित स्वेद ग्रंथियों (Sweat glands) से पसीना निकलने लगता है। इसके वाष्पीकरण से शरीर का तापमान कम हो जाता है और हमें राहत मिलती है। इसी तरह, ठंड के मौसम में रक्त वाहिनियां सिकुड़ जाती हैं और रोम खड़े हो जाते हैं, जिससे शरीर का तापक्रम बढ़ जाता है। ताप नियमन की यह क्रिया मस्तिष्क के हाइपोथैलेमस के नियंत्रण में होती है।
In simple words: मनुष्य का शरीर अपने तापमान को खुद नियंत्रित करता है। गर्मी में पसीना निकलकर और ठंड में रोम खड़े होकर शरीर का तापमान ठीक रहता है। दिमाग का हाइपोथैलेमस यह काम करता है।

🎯 Exam Tip: थर्मोरेगुलेशन की प्रक्रिया और इसमें हाइपोथैलेमस की भूमिका को याद रखें, साथ ही पसीना निकलने और रक्त वाहिनियों के सिकुड़ने जैसे तंत्र भी।

 

Question 11. समस्थापन (Homeostasis) किसे कहते हैं?
Answer: समस्थापन या होमियोस्टेसिस शब्द सर्वप्रथम अमेरिकन फिजियोलॉजिस्ट वाल्टर ब्रेडफोर्ड कैनन द्वारा 1932 में दिया गया था। जीवधारियों में वातावरण और भौतिक रासायनिक दशाओं में लगातार होने वाले परिवर्तनों के अनुसार अपने आप को एक नियमित दशा में बनाए रखने की प्राकृतिक या जन्मजात क्षमता होती है। जीवधारियों की इस क्षमता को समस्थापन अथवा होमियोस्टेसिस कहते हैं।
निम्न श्रेणी के जन्तुओं की कोशिकाएं वातावरण के सीधे संपर्क में रहती हैं। इन जन्तुओं में समस्थापन कोशिकीय स्तर पर होती है। उच्च स्तर के जन्तुओं में शरीर की कोशिकाएं ऊतकों (Tissues), अंगों (Organs), और अंग तंत्र (Organ system) में संगठित होती हैं, और इनका बाहरी वातावरण से सीधा संपर्क नहीं होता है। इसलिए वातावरण से पदार्थों का आदान-प्रदान शरीर के विशिष्ट अंग तंत्र द्वारा होता है। ये कोशिकाएं और अंग तंत्र वातावरण की बदलती भौतिक-रासायनिक दशाओं के अनुसार खुद को नियमित करते हैं। समस्थापन नियमन हमेशा सक्रिय रहता है ताकि शरीर का क्रियात्मक संतुलन लगातार बना रहे।
In simple words: समस्थापन वह प्रक्रिया है जिसमें जीवित चीजें अपने शरीर के अंदर के वातावरण को बाहरी बदलावों के बावजूद स्थिर रखती हैं।

🎯 Exam Tip: होमियोस्टेसिस की अवधारणा और शरीर के आंतरिक वातावरण को स्थिर बनाए रखने में इसकी भूमिका को समझें, विशेष रूप से विभिन्न स्तरों पर इसके तंत्रों के साथ।

 

Question 13. अनुकूलन (Adaptation) किसे कहते हैं?
Answer: अनुकूलन (Adaptation) प्रत्येक प्राणी में जीवित रहने के लिए वातावरण से तालमेल बनाए रखने का गुण होता है। इसके लिए इन जन्तुओं में संरचनात्मक (Structural), कार्यिकी (physiological) और व्यवहारिक (behavioral) परिवर्तन आते हैं, जिनकी सहायता से वे वातावरण में खुद को अनुकूलित कर लेते हैं। इन परिवर्तनों या विशेषताओं को अनुकूलन कहते हैं।
अनुकूलन के परिणामस्वरूप जीवों और उनके वातावरण में सामंजस्य बना रहता है। जैसे जलीय प्राणियों का शरीर धारा के जैसा होता है, उनमें गिल्स, पंख, शल्क, और वायु ब्लेडर विकसित हो जाते हैं। इसी प्रकार, हवा में उड़ने वाले जन्तुओं का शरीर हल्का होता है और उनके आगे के हाथ पंखों में बदल गए होते हैं जो उड़ने में सहायता करते हैं।
In simple words: अनुकूलन का मतलब है कि जीव अपने पर्यावरण में अच्छी तरह से रहने के लिए अपने शरीर और व्यवहार में बदलाव करते हैं।

🎯 Exam Tip: अनुकूलन की परिभाषा और इसके विभिन्न प्रकारों (संरचनात्मक, कार्यिकी, व्यवहारिक) को याद रखें, साथ ही पर्यावरण में जीवित रहने के लिए इसके महत्व को भी।

 

Question 14. जन्तुओं में पाये जाने वाले दो मरुस्थलीय व जलीय अनुकूलन लिखिये।
Answer: जन्तुओं में पाये जाने वाले मरुस्थलीय और जलीय अनुकूलन निम्न हैं:

मरुस्थलीय अनुकूलन:
• ये अर्धठोस यूरिक अम्ल के रूप में मूत्र त्याग कर जल को बचाते हैं, जैसे सरीसृप (Reptiles)।
• ऊंट अपने आमाशय के रुमेन (Rumen) में जल संचित करता है। रुमेन की दीवारों में विशेष प्रकार की जल कोशिकाएं होती हैं।

जलीय अनुकूलन:
• इनका शरीर धारारेखित होता है, जिससे पानी में तैरते समय कम प्रतिरोध का सामना करना पड़ता है।
• मछलियों में पाश्र्वरेखा तंत्र होता है, जिसकी सहायता से वे पानी में विभिन्न वस्तुओं का ज्ञान कर पाती हैं।
In simple words: रेगिस्तानी जानवर पानी बचाने के लिए गाढ़ा पेशाब करते हैं और ऊंट पानी जमा करते हैं। पानी में रहने वाले जानवर धारा के आकार के होते हैं ताकि तैरने में आसानी हो।

🎯 Exam Tip: जानवरों में मरुस्थलीय और जलीय अनुकूलन के विशिष्ट उदाहरणों और उनके पीछे के कारणों को याद रखें।

 

Question 15. जैव तंत्र में ऊर्जा प्रवाह का आलेख बनाइये।
Answer: प्रकृति में ऊर्जा प्रवाह का आलेख इस प्रकार है:
उत्पादक उपभोक्ता अकार्बनिक पोषक तत्व अपघटक सूर्य उष्मा उष्मा उष्मा चित्र 27.4 : प्रकृति में ऊर्जा का प्रवाह
In simple words: प्रकृति में ऊर्जा सूर्य से पौधों (उत्पादकों) तक जाती है, फिर पौधों से खाने वाले जीवों (उपभोक्ताओं) तक। मरे हुए जीवों को अपघटक तोड़ देते हैं, और इस पूरी प्रक्रिया में कुछ ऊर्जा गर्मी (उष्मा) के रूप में निकल जाती है। ऊर्जा हमेशा एक दिशा में बहती है।

🎯 Exam Tip: ऊर्जा प्रवाह के आरेख को उसके सभी घटकों (सूर्य, उत्पादक, उपभोक्ता, अपघटक) और ऊर्जा के एक-दिशीय संचलन के साथ ठीक से चित्रित करना सीखें।

RBSE Class 11 Biology Chapter 27 निबन्धात्मक प्रश्न

 

Question 1. कार्बोहाइड्रेट्स की विभिन्न श्रेणियों का उदाहरण सहित वर्णन कीजिये।
Answer: कार्बोहाइड्रेट्स ऊर्जा के मुख्य स्रोत हैं और शरीर की संरचना के निर्माण में भी भाग लेते हैं। ये कार्बन, हाइड्रोजन और ऑक्सीजन के यौगिक होते हैं। अधिकांश कार्बोहाइड्रेट्स में हाइड्रोजन और ऑक्सीजन का अनुपात जल (\( 2:1 \)) के समान होता है। कार्बोहाइड्रेट का सामान्य सूत्र \( (CH_2O)_n \) है। ये पॉलीहाइड्रॉक्सी एल्डिहाइड या पॉलीहाइड्रॉक्सी कीटोन होते हैं, जिनमें एक एल्डिहाइड (\( -CHO \)) या कीटोन (\( >C=O \)) क्रियात्मक समूह पाया जाता है। सबसे सरलतम कार्बोहाइड्रेट्स को शर्करा कहते हैं, जो मीठी होती हैं। फ्रक्टोज (Fructose) सबसे मीठी शर्करा है। कार्बोहाइड्रेट्स को सैकेराइड अणुओं की संख्या के आधार पर तीन मुख्य भागों में वर्गीकृत किया जाता है:

(1) मोनोसैकेराइड्स (Monosaccharides):
ये सरलतम शर्कराएँ हैं और इनका जलीय अपघटन संभव नहीं है। इनका मूलानुपाती सूत्र (empirical formula) \( C_n(H_2O)_n \) होता है। इन शर्कराओं के नाम के अंत में 'ओज' (Ose) आता है, जैसे ग्लूकोज, फ्रक्टोज और गैलेक्टोज। ये सरल सीधी श्रृंखला या वलय (ring) के रूप में पाए जाते हैं। यदि वलय में 6 सदस्य होते हैं तो इसे पायरेनोज (Pyranose) कहते हैं, और यदि वलय में 5 सदस्य होते हैं तो इसे फुरेनोज (Furanose) कहते हैं। कार्बन परमाणुओं की संख्या के आधार पर इन्हें निम्न श्रेणियों में वर्गीकृत किया गया है:
• ट्रायोजेज (Trioses) – इनमें तीन कार्बन परमाणु होते हैं। रासायनिक सूत्र \( C_3H_6O_3 \)। उदाहरण: ग्लिसरल्डिहाइड।
• टेट्रोज (Tetrose) – इनमें चार कार्बन परमाणु होते हैं। उदाहरण: इरिथ्रोज (Erythrose)। इसका रासायनिक सूत्र \( C_4H_8O_4 \)।
ग्लूकोज को अंगूर शर्करा (grape sugar) कहते हैं। यह डेक्सटोरोटेटरी (dextrorotatory) होता है, इसलिए इसे डी-ग्लूकोज या डेक्सट्रोज (Dextrose) कहते हैं। इसमें एल्डिहाइड समूह पाया जाता है, अतः इसे एल्डोलेज शर्करा (Aldolase sugar) कहते हैं। फ्रक्टोज (Fructose) को फल शर्करा (Fruit sugar) भी कहते हैं। इसे लेव्यूलोज (Laevulose) कहते हैं। इसमें कीटोन समूह पाया जाता है, अतः कीटोज शर्करा (ketose sugar) कहते हैं। मोनोसैकेराइड्स के कुछ व्युत्पन्न भी जीवद्रव्य में पाए जाते हैं, जो निम्न प्रकार हैं:
• फॉस्फेट शर्कराएं जैसे ग्लूकोज 6 फॉस्फेट।
• एमिनो शर्कराएं (Amino sugar) उदाहरण-ग्लूकोसअमाइन (Glucosamine)।

(2) ऑलिगोसैकेराइड्स (Oligosaccharides):
ये 2-10 मोनोसैकेराइड अणुओं के संघनन (condensation) से बनते हैं। मोनोसैकेराइड इनके एकलक होते हैं। ऑलिगोसैकेराइड को जलीय अपघटन द्वारा मोनोसैकेराइडों में परिवर्तित किया जा सकता है। दो मोनोसैकेराइडों के अणुओं के बीच पाए जाने वाले बंध को ग्लाइकोसाइडिक बंध (Glycosidic bond) कहते हैं। इनमें उपस्थित अणुओं की संख्या के आधार पर निम्न प्रकार से वर्गीकरण किया जा सकता है:
• डाइसैकेराइड (Disaccharides) – ये दो अणु मोनोसैकेराइड्स के मिलने पर बनती है। उदाहरण: माल्टोज, सुक्रोज, लैक्टोज।
माल्टोज – यह प्रकृति में नहीं पायी जाती है। इसका निर्माण स्टार्च व ग्लाइकोजन के अपघटन द्वारा होता है।
सुक्रोज – इसे केन शुगर (cane sugar) कहते हैं। यह चुकंदर, गन्ना, गाजर व फलों में पाई जाती है।
लैक्टोज – दुग्ध में पाई जाती है, अतः दुग्ध शर्करा (milk sugar) भी कहते हैं।
• ट्राइसैकेराइड्स (Trisaccharides) – यह तीन मोनोसैकेराइड्स अणुओं के मिलने पर बनती है। उदाहरण: रेबीनोज, रेफिनोज एवं मैनोट्राइओज।
• टेट्रासैकेराइड्स (Tetrasaccharides) – यह चार मोनोसैकेराइड्स अणुओं के मिलने पर बनती है। उदाहरण: सारकोडोज व स्टेकियोज।
• पेन्टासैकेराइड्स (Pentasaccharides) – ये पांच मोनोसैकेराइड्स अणुओं के संघनन से बनते हैं, जैसे: वरबेकॉज (verbacose)।

(3) पॉलीसेकेराइड्स (Polysaccharides):
ये संरचना में जटिल होते हैं। ये 10 से हजारों मोनोसैकेराइड्स शर्करा के अणुओं के बने होते हैं। ये मोनोसैकेराइड्स के बहुलक होते हैं। इन्हें जलीय अपघटन द्वारा पुनः मोनोसैकेराइड्स में परिवर्तित किया जा सकता है। ये सीधी श्रृंखला (straight chains) या शाखित श्रृंखला में पाए जाते हैं।
In simple words: कार्बोहाइड्रेट्स शरीर को ऊर्जा देते हैं। इनके तीन मुख्य प्रकार हैं: मोनोसैकेराइड (सरल चीनी), ओलिगोसैकेराइड (कुछ सरल चीनी का जोड़) और पॉलीसैकेराइड (बहुत सारी सरल चीनी का जोड़, जैसे स्टार्च)।

🎯 Exam Tip: कार्बोहाइड्रेट के प्रत्येक वर्ग को उनके रासायनिक सूत्र, उदाहरणों और जैविक महत्व के साथ विस्तार से याद रखें।

RBSE Class 11 Biology Chapter 27 लघूत्तरात्मक प्रश्न

 

Question 2. रासायनिक रूप से लिपिड्स (Lipids) क्या है? ये कितने प्रकार के होते हैं। वर्णन कीजिये।
Answer: लिपिड्स को वसा भी कहते हैं. ये कार्बन, हाइड्रोजन और ऑक्सीजन से मिलकर बनने वाले जटिल कार्बनिक यौगिक होते हैं. ये ऊर्जा का एक महत्वपूर्ण स्रोत हैं. इन्हें मुख्यतः तीन श्रेणियों में बांटा गया है:
(1) सरल लिपिड्स (Simple lipids): ये सबसे साधारण वसाएं हैं. इनमें ग्लिसरॉल के एक अणु और वसीय अम्लों के तीन अणु 'ईस्टर बंधों' से जुड़कर बनते हैं, इसलिए इन्हें ट्राइग्लिसराइड्स भी कहते हैं. उदाहरण: घी, तेल, मक्खन (संतृप्त वसा) और मूंगफली, सरसों, तिल, सूरजमुखी का तेल (असंतृप्त वसा). ये कार्बोहाइड्रेट्स से दोगुनी से अधिक ऊर्जा देते हैं.
(2) संयुक्त या जटिल लिपिड्स (Compound or complex lipids): इनमें वसीय अम्लों के साथ फॉस्फेट समूह और एक कार्बनिक क्षार भी होता है. ये जटिल संरचना वाले होते हैं. उदाहरण: फॉस्फोलिपिड्स (जैसे लेसिथिन, सिफैलिन) और ग्लाइकोलिपिड्स. ये कोशिका भित्ति और तंत्रिका ऊतकों का निर्माण करते हैं.
(3) व्युत्पन्न लिपिड्स (Derived Lipids): ये सरल और संयुक्त वसाओं के जलीय अपघटन से बनते हैं और पानी में अघुलनशील होते हैं. इन्हें लाइपोलिपिड्स भी कहते हैं. उदाहरण: स्टेरॉइड्स (लिंग हार्मोन, पित्त अम्ल) और स्टेरॉल्स (कोलेस्ट्रॉल, विटामिन 'डी').

लिपिड्स के कार्य:
• जब जरूरत पड़ती है तो ये कार्बोहाइड्रेट्स में बदल सकते हैं.
• ये शरीर में जमा भोजन के रूप में रहते हैं.
• वसीय ऊतक शरीर का तापमान नियंत्रित करते हैं और उसे सुरक्षा देते हैं.
• कुछ फॉस्फोलिपिड रक्त जमने (स्कन्धन) में मदद करते हैं.
• ये शरीर को ऊर्जा देते हैं, तापमान नियंत्रित करते हैं, और सुरक्षा प्रदान करते हैं. वसा की जरूरत पड़ने पर ये ऊर्जा में बदल जाते हैं.
In simple words: लिपिड्स, जिन्हें वसा भी कहते हैं, कार्बनिक यौगिक हैं जो ऊर्जा देते हैं और शरीर की संरचना बनाते हैं. ये तीन तरह के होते हैं: सरल, संयुक्त और व्युत्पन्न. ये शरीर के तापमान को नियंत्रित करने, भोजन जमा करने और कोशिकाएं बनाने जैसे कई काम करते हैं.

🎯 Exam Tip: लिपिड्स के प्रकारों को उनके रासायनिक घटकों और शरीर में उनके मुख्य कार्यों के साथ याद रखें. प्रत्येक प्रकार का एक-दो उदाहरण देना महत्वपूर्ण है.

 

Question 3. प्रोटीन्स की विभिन्न श्रेणियों एवं उपश्रेणियों का उदाहरण देकर वर्णन कीजिये।
Answer: प्रोटीन शब्द सबसे पहले मुल्डर ने 1837-38 में दिया था. प्रोटीन मुख्य रूप से कार्बन, हाइड्रोजन, ऑक्सीजन और नाइट्रोजन से मिलकर बनते हैं. इनमें थोड़ी मात्रा में सल्फर, फास्फोरस, आयोडीन और लोहा भी होता है. प्रोटीन अमीनो अम्लों के आपस में पेप्टाइड बंधों से जुड़ने पर बनते हैं.

रासायनिक संरचना के आधार पर प्रोटीन को तीन मुख्य भागों में बांटा गया है:
(1) सरल प्रोटीन (Simple Proteins): ये केवल अमीनो अम्लों से बने होते हैं. इन्हें जलीय अपघटन करने पर सिर्फ अमीनो अम्ल ही मिलते हैं. इन्हें दो श्रेणियों में बांटा गया है:
• तंतुमय प्रोटीन (Fibrous Proteins): ये पानी में अघुलनशील होते हैं. इनकी आणविक संरचना धागे जैसी होती है. उदाहरण: कोलेजन, इलास्टिन, मायोसिन, ओसिने, किरेटिन.
• गोलाकार प्रोटीन (Globular Protein): ये गोल, अंडाकार या लंबे अंडाकार आकार के होते हैं. ये पानी में घुलनशील होते हैं. उदाहरण: एल्ब्यूमिन, ग्लोब्यूलिन, हिस्टोन, प्रोलैमिन.

(2) संयुग्मी प्रोटीन (Conjugated Protein): जब प्रोटीन के साथ कोई और अप्रोटीन पदार्थ (Non Protein Substance) जुड़ जाता है, तो इसे संयुग्मी या जटिल प्रोटीन कहते हैं. अप्रोटीन भाग को प्रोस्थेटिक समूह कहते हैं. संयुग्मी प्रोटीन को कई प्रकारों में बांटा जा सकता है:
• क्रोमोप्रोटीन (Chromoprotein): इनमें प्रोस्थेटिक समूह रंग के रूप में होता है. उदाहरण: हीमोग्लोबिन, हीमोसायनिन, हीमइरीथ्रिन, साइटोक्रोम.
• ग्लाइकोप्रोटीन (Glycoprotein): ये ऐसे सरल प्रोटीन हैं जिनसे कार्बोहाइड्रेट समूह जुड़े होते हैं. उदाहरण: म्यूसिन, हिपेरिन, एल्ब्यूमिन.
• न्यूक्लियोप्रोटीन (Nucleoprotein): ये सरल प्रोटीन और न्यूक्लिक अम्ल से मिलकर बनते हैं. उदाहरण: हिस्टोन और प्रोटेमिन, जो केंद्रक में न्यूक्लिक अम्ल के साथ पाए जाते हैं.
• लाइपोप्रोटीन (Lipoprotein): जब प्रोटीन के साथ वसा जुड़ी होती है, तो इन्हें लिपो प्रोटीन कहते हैं. उदाहरण: दूध का प्रोटीन, रक्त प्लाज्मा के प्रोटीन.

प्रोटीन्स के कार्य:
• प्रोटीन सभी कोशिकाओं की संरचनात्मक इकाई है.
• प्रोटीन कोशिका झिल्ली का हिस्सा होते हैं और अंदर-बाहर आयनों की गति को नियंत्रित करते हैं.
• प्रोटीन प्रत्येक कोशिका की क्रियात्मक इकाई भी है, क्योंकि एंजाइम (जो प्रोटीन होते हैं) के बिना कोशिका कोई काम नहीं कर पाती.
• हार्मोन प्रोटीन के बने होते हैं और मेटाबॉलिक क्रियाओं को नियंत्रित करते हैं.
• प्रोटीन प्रतिजन (Antigen) और प्रतिरक्षी (Antibody) बनाते हैं.
• कुछ प्रोटीन, जैसे फाइब्रिनोजन और प्रोथ्रोम्बिन, रक्त के थक्के जमने में मदद करते हैं.
• मनुष्यों और अन्य जानवरों में रक्त समूह भी प्रोटीन पर आधारित होते हैं.
• प्रोटीन सजीवों में ऊर्जा का स्रोत भी होते हैं.
• हीमोग्लोबिन शरीर में ऑक्सीजन ले जाने का काम करता है.
• किरेटिन, फाइब्रिन, कोलेजन, इलास्टिन जैसे संयोजी ऊतक और किरेटिन सिल्क फाइब्रोइन जैसी संरचनाएं प्रोटीन से बनती हैं.
• सींग, नाखून आदि किरेटिन से बनते हैं और सुरक्षा या हमले के लिए हथियार के रूप में काम करते हैं.
• शरीर की वृद्धि और ऊतकों की मरम्मत के लिए प्रोटीन जरूरी हैं.
• पेशियों में सिकुड़ने की क्षमता प्रोटीन (एक्टिन और मायोसिन) के कारण होती है.
In simple words: प्रोटीन अमीनो अम्लों से बनते हैं और शरीर के लिए बहुत जरूरी हैं. इन्हें सरल, संयुग्मी और व्युत्पन्न प्रोटीन में बांटा जाता है. प्रोटीन शरीर की संरचना बनाने, हार्मोन बनाने, ऊर्जा देने और बीमारियों से लड़ने जैसे कई काम करते हैं.

🎯 Exam Tip: प्रोटीन के प्रत्येक प्रकार और उपप्रकार को उनके प्रमुख उदाहरणों के साथ स्पष्ट करें. कार्यों को बुलेट पॉइंट में लिखना और मुख्य तकनीकी शब्दों का प्रयोग करना अच्छे अंक दिलाता है.

 

Question 4. प्रकृति में ऊर्जा प्रवाह (Energy Flow) का विस्तृत वर्णन कीजिये।
Answer: प्रकृति में ऊर्जा का प्रवाह एक दिशा में होता है. हरे पौधे सूर्य की सौर ऊर्जा को रासायनिक ऊर्जा में बदलते हैं. इन्हें उत्पादक (Producer) कहते हैं. प्राथमिक उपभोक्ता (शाकाहारी) इन उत्पादकों का उपयोग करते हैं. प्राथमिक उपभोक्ताओं को द्वितीयक उपभोक्ता (मांसाहारी) और द्वितीयक उपभोक्ताओं को तृतीयक श्रेणी के उपभोक्ता भोजन के रूप में ऊर्जा लेते हैं.

थर्मोडायनामिक्स का पहला नियम कहता है कि ऊर्जा को न तो बनाया जा सकता है और न ही नष्ट किया जा सकता है, बल्कि इसे एक रूप से दूसरे रूप में बदला जा सकता है. इसका मतलब है कि एक अलग सिस्टम में ऊर्जा की कुल मात्रा स्थिर रहती है. इसे ऊर्जा संरक्षण का नियम कहते हैं.

थर्मोडायनामिक्स का दूसरा नियम बताता है कि ब्रह्मांड में मुक्त ऊर्जा की कुल मात्रा कम हो रही है. इसका मतलब है कि ऊर्जा का हर रूपांतरण ब्रह्मांड में अव्यवस्था (एन्ट्रोपी) बढ़ाता है. कोई भी भौतिक या रासायनिक क्रिया 100% कुशल नहीं होती. कुछ ऊर्जा अव्यवस्था में खो जाती है. वैज्ञानिकों ने इस अव्यवस्था को एन्ट्रोपी कहा है. अंतरिक्ष की एन्ट्रोपी ऊर्जा के हर बदलाव के साथ बढ़ती है. इसका मतलब है कि अंतरिक्ष में ऊर्जा कम होती जा रही है, क्योंकि एन्ट्रोपी बढ़ते तापमान की आणविक गतिज ऊर्जा लेती है.
सूर्य उत्पादक उपभोक्ता अकार्बनिक पोषक तत्व अपघटक ऊष्मा ऊष्मा

In simple words: ऊर्जा प्रकृति में हमेशा एक दिशा में बहती है. सूरज की रोशनी पौधों में जाती है, फिर जानवर पौधों को खाते हैं. हर कदम पर कुछ ऊर्जा गर्मी के रूप में खो जाती है. ऊर्जा को बनाया या नष्ट नहीं किया जा सकता, बस बदला जा सकता है.

🎯 Exam Tip: ऊर्जा प्रवाह के नियम (थर्मोडायनामिक्स के नियम) और खाद्य श्रृंखला में विभिन्न स्तरों के बीच ऊर्जा के स्थानांतरण को स्पष्ट रूप से समझाएं. आरेख बनाकर दर्शाना उत्तर को प्रभावी बनाता है.

 

Question 5. अनुकूलन किसे कहते हैं? जन्तुओं में पाये जाने वाले विभिन्न प्रकार अनुकूलनों पर विस्तृत लेख लिखिए।
Answer: अनुकूलन (Adaptation): यह किसी भी जीव का अपने वातावरण में जीवित रहने और तालमेल बिठाने का एक गुण है. इसके लिए जानवरों में शारीरिक बनावट (Structural), काम करने के तरीके (Physiological) या व्यवहार (Behavioral) में बदलाव आते हैं, जो उन्हें अपने पर्यावरण के अनुकूल बनाते हैं. इन बदलावों या विशेषताओं को अनुकूलन कहते हैं.

अनुकूलन के कारण जीव और उनका वातावरण एक-दूसरे से तालमेल बिठाते हैं. हम यहां दो प्रकार के अनुकूलनों का अध्ययन करेंगे:
(1) मरुस्थलीय अनुकूलन (Desert adaptation):
• मरुस्थल में रहने वाले जानवरों की त्वचा में पसीना ग्रंथियां कम होती हैं और वे मोटे आवरण वाली जगहों पर रहते हैं, जिससे पसीना कम निकलता है.
• उनकी त्वचा मोटी और अपारगम्य (पानी न सोखने वाली) होती है, जिस पर शल्क या कांटे हो सकते हैं.
• उनमें गर्मी सहन करने की अच्छी क्षमता होती है.
• वे सांद्रित मूत्र या अर्ध-ठोस यूरिक अम्ल का उत्सर्जन करते हैं, जिससे पानी की बचत होती है (जैसे सरीसृप- Reptiles).
• ऊंट के पैरों में गद्दे होते हैं जिससे वह रेतीली मिट्टी पर आसानी से चल पाता है. ऊंट को रेगिस्तान का जहाज भी कहा जाता है.
• ऊंट के पेट में रुमेन (Rumen) होता है, जिसमें पानी जमा होता है. रुमेन की दीवारों में विशेष पानी कोशिकाएं होती हैं.
• ऊंट एक बार में बहुत पानी पीकर एक-दो हफ्ते तक बिना पानी के रह सकता है.
• ऊंट के नथुनों पर मांसल संरचनाएं होती हैं जो नथुनों को बंद करके गर्म हवा को अंदर जाने से रोकती हैं.
• मरुस्थलीय जानवर आंखें बंद होने पर भी देख सकते हैं.
आँख आँख मुख नथुने गरदन पैर पैर चित्र 27.5 : ऊँट (Camel)

(2) जलीय अनुकूलन (Aquatic adaptation):
• जलीय जीवों का शरीर तुर्करूप (spindle shaped) या नाव जैसा होता है. यह आकृति पानी में गति करते समय उनके शरीर पर कम दबाव डालती है (Least Resistance). उदाहरण: मछलियां.
• उनके शरीर पर तैरने के लिए पंख (fins) होते हैं. ये शरीर का संतुलन बनाए रखने में मदद करते हैं. उदाहरण: मछलियां.
• जलीय जीव श्वसन के लिए गिल्स (gills) का उपयोग करते हैं, जिनसे पानी में गैसों का आदान-प्रदान होता है.
• कई मछलियों में वायु मूत्राशय (Air bladder) होता है, जिसमें हवा भरी रहती है. यह उन्हें पानी में ऊपर-नीचे तैरने में मदद करता है.
• जलीय प्राणियों का कंकाल हल्का और स्पंजी होता है. उनका शरीर कमजोर और मुलायम होता है.
• व्हेल में आगे के पैर फ्लिपर में बदल जाते हैं जो तैरने में मदद करते हैं.
• कुछ समुद्री जीवों में बिजली पैदा करने की क्षमता होती है, जैसे विद्युत मछली (Electric ray).
नेत्र मुख ऑपरकुलम पृष्ठीय पंख पुच्छीय पंख पूंछ अंस पंख श्रोणि पंख अधर पंख शल्क नासा छिद्र चित्र 27.6 : लेबियो (रोहू)
In simple words: अनुकूलन का मतलब है कि जीव अपने आसपास के हिसाब से खुद को बदल लेते हैं ताकि वे जीवित रह सकें. मरुस्थल में रहने वाले जानवरों में पानी बचाने के लिए और जलीय जीवों में पानी में तैरने और सांस लेने के लिए खास बदलाव होते हैं.

🎯 Exam Tip: अनुकूलन की परिभाषा स्पष्ट करें और मरुस्थलीय व जलीय अनुकूलन के कम से कम दो-दो उदाहरण विस्तार से समझाएं. आरेखों का प्रयोग उत्तर को अधिक स्पष्ट बनाता है.

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Toppers recommend using RBSE language because RBSE marking schemes are strictly based on textbook definitions. Our RBSE Solutions Class 11 Biology Chapter 27 जीवन का अभिप्राय will help students to get full marks in the theory paper.

Do you offer RBSE Solutions Class 11 Biology Chapter 27 जीवन का अभिप्राय in multiple languages like Hindi and English?

Yes, we provide bilingual support for Class 11 Biology. You can access RBSE Solutions Class 11 Biology Chapter 27 जीवन का अभिप्राय in both English and Hindi medium.

Is it possible to download the Biology RBSE solutions for Class 11 as a PDF?

Yes, you can download the entire RBSE Solutions Class 11 Biology Chapter 27 जीवन का अभिप्राय in printable PDF format for offline study on any device.