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Detailed Chapter 21 पुष्प RBSE Solutions for Class 11 Biology
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Class 11 Biology Chapter 21 पुष्प RBSE Solutions PDF
RBSE Class 11 Biology Chapter 21 पाठ्यपुस्तक के प्रश्न
RBSE Class 11 Biology Chapter 21 वस्तुनिष्ठ प्रश्न
Question 1. युक्तकोशी पुंकेसर पाए जाते हैं –
(अ) गुड़हल में
(ब) सूर्यमुखी में
(स) खीरा में
(द) सेमल में
Answer: (ब) सूर्यमुखी में
In simple words: जब पुंकेसरों के परागकोश आपस में जुड़े होते हैं, तो यह स्थिति युक्तकोशी पुंकेसर कहलाती है। यह सूर्यमुखी में देखी जाती है।
🎯 Exam Tip: विभिन्न पौधों में पुंकेसर की संरचना और संसंजन के प्रकारों को याद रखें, क्योंकि यह अक्सर उदाहरणों के साथ पूछा जाता है।
Question 2. ऐसा दलविन्यास जिसमें दलों के किनारे आपस में एक-दूसरे को छूते हैं, ढुकते नहीं, कहलाता है –
(अ) कोरस्पर्शी
(ब) व्यावर्तित
Answer: (अ) कोरस्पर्शी
In simple words: जब फूलों की कलियों में पंखुड़ियों या बाह्यदल एक-दूसरे को बस छूते हैं लेकिन एक-दूसरे के ऊपर नहीं चढ़ते, तो उसे कोरस्पर्शी दलविन्यास कहते हैं।
🎯 Exam Tip: दलविन्यास के प्रकारों और उनके विशिष्ट लक्षणों को समझना महत्वपूर्ण है, खासकर उदाहरणों के साथ।
RBSE Class 11 Biology Chapter 21 अतिलघूत्तरात्मक प्रश्न
Question 1. पुंकेसर के तीन भागों के नाम लिखिये ?
Answer: प्रत्येक पुंकेसर के तीन मुख्य भाग होते हैं:
1. पुतन्तु (filament) - यह पुंकेसर का पतला डंठल जैसा भाग होता है।
2. योजी (connective) - यह पुतन्तु को परागकोष से जोड़ता है।
3. परागकोष (anther) - यह पुंकेसर का ऊपरी भाग होता है, जिसके अंदर परागकण बनते हैं।
In simple words: पुंकेसर के तीन भाग होते हैं: पुतन्तु (नीचे का डंठल), योजी (जोड़ने वाला भाग), और परागकोष (ऊपरी भाग जहां पराग बनता है)।
🎯 Exam Tip: पुंकेसर के सभी भागों के नाम और उनके कार्यों को स्पष्ट रूप से याद रखें।
Question 2. पूर्ण पुष्प किसे कहते हैं ?
Answer: पूर्ण पुष्प उस फूल को कहते हैं जिसमें फूल के सभी चारों मुख्य चक्र मौजूद हों। ये चक्र बाह्यदलपुंज (बाहरी पत्तियां), दलपुंज (रंगीन पंखुड़ियां), पुमंग (नर प्रजनन भाग) और जायांग (मादा प्रजनन भाग) होते हैं। यदि ये सभी चक्र एक साथ मौजूद हों, तो फूल को पूर्ण पुष्प कहा जाता है।
In simple words: पूर्ण पुष्प वह फूल है जिसमें बाह्यदल, पंखुड़ियां, पुंकेसर और स्त्रीकेसर, ये चारों मुख्य भाग होते हैं।
🎯 Exam Tip: पूर्ण और अपूर्ण पुष्पों के बीच का अंतर याद रखें और उनके उदाहरणों को समझें।
Question 3. परिदलपुंज किसे कहते हैं ?
Answer: परिदलपुंज तब बनता है जब फूल में बाह्यदलपुंज (हरे रंग के बाह्यदल) और दलपुंज (रंगीन पंखुड़ियां) दोनों एक जैसे दिखते हैं। यानी, उनके रंग और आकार में कोई स्पष्ट अंतर नहीं होता है, जिससे उन्हें अलग-अलग पहचानना मुश्किल हो जाता है।
In simple words: परिदलपुंज तब होता है जब फूल में हरी पत्तियां और रंगीन पंखुड़ियां दोनों एक जैसी दिखती हैं।
🎯 Exam Tip: परिदलपुंज की परिभाषा को स्पष्ट रूप से समझें और उन फूलों के उदाहरणों को याद रखें जिनमें यह विशेषता पाई जाती है।
Question 4. गुडहल में एकसंघी स्थिति को स्पष्ट कीजिए।
Answer: गुड़हल में पुंकेसर एकसंघी स्थिति में होते हैं, जिसका अर्थ है कि सभी पुंकेसरों के पुतन्तु (डंठल) आपस में जुड़कर एक ही बंडल या ट्यूब बनाते हैं। हालांकि, उनके परागकोष (ऊपरी भाग जहाँ परागकण बनते हैं) स्वतंत्र रहते हैं। यह पुंकेसरी नली जायांग को घेरे रहती है।
In simple words: गुड़हल के फूल में, सभी पुंकेसरों के डंठल एक साथ जुड़कर एक नली बनाते हैं, लेकिन उनके पराग बनाने वाले सिरे अलग रहते हैं।
🎯 Exam Tip: पौधों में पुंकेसर के संसंजन के विभिन्न प्रकारों को उनके विशिष्ट उदाहरणों के साथ याद रखना महत्वपूर्ण है।
Question 6. ऐसा पुष्प जिसमें वृन्त या डन्ठल का अभाव हो क्या कहलाता है?
Answer: ऐसा पुष्प जिसमें वृन्त या डंठल का अभाव होता है, उसे अंवृन्ती पुष्प (Sessile flower) कहते हैं। ये फूल सीधे तने या शाखा से जुड़े होते हैं।
In simple words: जिस फूल का कोई डंठल नहीं होता और वह सीधे तने से जुड़ा होता है, उसे अंवृन्ती पुष्प कहते हैं।
🎯 Exam Tip: फूलों के वृंत की उपस्थिति या अनुपस्थिति के आधार पर उनके वर्गीकरण को याद रखें।
Question 7. स्त्रीकेसरी पुष्प किसे कहते हैं ?
Answer: स्त्रीकेसरी पुष्प वह फूल होता है जो एकलिंगी होता है, यानी उसमें केवल मादा प्रजनन भाग (स्त्रीकेसर) ही उपस्थित होता है। इसमें नर प्रजनन भाग (पुंकेसर) अनुपस्थित होता है।
In simple words: स्त्रीकेसरी पुष्प वह फूल है जिसमें केवल मादा भाग (स्त्रीकेसर) होता है और नर भाग नहीं होता।
🎯 Exam Tip: फूलों के लिंग के आधार पर वर्गीकरण को समझें और स्त्रीकेसरी और पुंकेसरी फूलों में अंतर करें।
Question 8. दलाभ परिदलपुंज किसे कहते हैं ?
Answer: दलाभ परिदलपुंज तब कहलाता है जब परिदलपुंज का रंग और रूप पंखुड़ियों (दलपुंज) जैसा ही हो। इसका मतलब है कि परिदलपुंज के सदस्य रंगीन और पंखुड़ी जैसे होते हैं, न कि हरे और बाह्यदल जैसे।
In simple words: जब फूल की परिदलपुंज पंखुड़ियों जैसी दिखती है, तो उसे दलाभ परिदलपुंज कहते हैं।
🎯 Exam Tip: परिदलपुंज के प्रकारों को याद रखें और समझें कि दलाभ और बाह्यदलीय परिदलपुंज में क्या अंतर है।
RBSE Class 11 Biology Chapter 21 लघूत्तरात्मक प्रश्न
Question 1. सीमान्त बीजाण्डन्यास को सचित्र समझाइये ?
Answer: सीमान्त बीजाण्डन्यास में, बीजाण्ड एक ही अण्डप वाले जायांग में व्यवस्थित होते हैं, जिसमें केवल एक कोष्ठक होता है। बीजाण्डासन अण्डप के जुड़े हुए किनारों (उदर सीवन) पर स्थित होता है, जहाँ से बीजाण्ड विकसित होते हैं।
उदाहरण: मटर, चना, और सेम जैसे पौधों में यह बीजाण्डन्यास पाया जाता है।
In simple words: सीमान्त बीजाण्डन्यास में, बीज एक कतार में अंडाशय के किनारे पर लगे होते हैं, जैसे मटर की फली में।
🎯 Exam Tip: बीजाण्डन्यास के प्रकारों के साथ उनके आरेखों और विशिष्ट उदाहरणों को याद रखना बहुत महत्वपूर्ण है।
Question 2. व्यावर्तित और कोरछादी दलविन्यास में चित्र व उदाहरण सहित अन्तर स्पष्ट कीजिए।
Answer: दलविन्यास फूल की कली अवस्था में पंखुड़ियों या बाह्यदल के एक-दूसरे के सापेक्ष व्यवस्था को संदर्भित करता है।
1. **व्यावर्तित दलविन्यास (Twisted Aestivation):** इसमें एक पंखुड़ी का एक किनारा अगली पंखुड़ी के एक किनारे को ढक लेता है, और यह क्रम सभी पंखुड़ियों में एक ही दिशा में चलता रहता है। यह एक घुमावदार पैटर्न बनाता है।
उदाहरण: गुड़हल, कपास, भिण्डी।
2. **कोरछादी दलविन्यास (Imbricate Aestivation):** इसमें पंखुड़ियों के किनारे एक-दूसरे को अनियमित तरीके से ढकते हैं, जिसमें कोई निश्चित पैटर्न नहीं होता। यह दो प्रकार का होता है:
a. **आरोही कोरछादी:** एक बाहरी पंखुड़ी दो भीतरी पंखुड़ियों को ढकती है, और बाकी पंखुड़ियां एक-दूसरे को ढकती हैं। उदाहरण: गुलमोहर।
b. **अवरोही कोरछादी (ध्वजिक):** सबसे बड़ी पंखुड़ी (मानक) दो छोटी पंखुड़ियों (पंख) को ढकती है, और पंख दो सबसे भीतरी पंखुड़ियों (कील) को ढकते हैं। उदाहरण: मटर।
In simple words: व्यावर्तित में पंखुड़ियां एक-दूसरे को एक दिशा में ढकती हैं, जैसे कि एक घूमती हुई सीढ़ी। कोरछादी में, पंखुड़ियां बिना किसी खास पैटर्न के एक-दूसरे को ढकती हैं, जैसे मटर के फूल में।
🎯 Exam Tip: दलविन्यास के प्रकारों को याद रखें और प्रत्येक प्रकार के लिए कम से कम एक उदाहरण दें। आरेख स्पष्ट और लेबल युक्त होने चाहिए।
Question 3. पंचाण्डपी, युक्ताण्डपी एवं पंचकोष्ठीय अण्डाशय जिसमें प्रत्येक कोष्ठ में एक बीजाण्ड हो, इस स्थिति को चित्र द्वारा दर्शाइये ?
Answer: पंचाण्डपी, युक्ताण्डपी और पंचकोष्ठीय अण्डाशय का अर्थ है कि अण्डाशय में पाँच अण्डप होते हैं, जो आपस में जुड़े हुए होते हैं (युक्ताण्डपी), और अण्डाशय पाँच कोष्ठों (चैम्बरों) में बँटा होता है। प्रत्येक कोष्ठ में एक बीजाण्ड होता है। इस प्रकार के अण्डाशय में सामान्यतः स्तम्भीय (Axile) बीजाण्डन्यास पाया जाता है।
In simple words: यह एक अंडे जैसा फूल का निचला भाग है जिसमें पाँच कमरे होते हैं, जो आपस में जुड़े होते हैं, और हर कमरे में एक बीज होता है।
🎯 Exam Tip: अण्डाशय के प्रकारों को उनके विशेषताओं और आरेखों के साथ याद रखें, खासकर जब कोष्ठों और बीजाण्डों की संख्या का उल्लेख हो।
Question 4. पुमंगधर (androphore) स्थिति को स्पष्ट कीजिए।
Answer: पुमंगधर वह स्थिति है जब दलपुंज (पंखुड़ियों) और पुमंग (पुंकेसर) के बीच का डंठल जैसा भाग (पर्व) सामान्य से अधिक लंबा हो जाता है। यह लंबा पर्व पुंकेसर को पंखुड़ियों के ऊपर उठा देता है, जिससे वे फूल में अधिक प्रमुख दिखते हैं।
उदाहरण: झुमका या पैशन पुष्प (Passiflora), हुरहुर (Cleome gynandra)।
In simple words: पुमंगधर तब होता है जब पुंकेसर (नर भाग) पंखुड़ियों (दलपुंज) से एक लंबे डंठल पर ऊपर की ओर उठे होते हैं।
🎯 Exam Tip: पुंकेसर के निवेश के विभिन्न प्रकारों और उनके उदाहरणों को याद रखें।
Question 5. सहपत्र क्या है ? इसके प्रकारों के नाम लिखिए।
Answer: सहपत्र (bract) एक विशेष पत्ती होती है, जिसके कक्ष (जिस कोण में पत्ती तने से जुड़ती है) से फूल या फूल का डंठल निकलता है। सहपत्र अक्सर सामान्य पत्तियों से भिन्न होते हैं, कभी-कभी रंगीन या छोटे होते हैं।
सहपत्र के प्रकार (उदाहरण):
1. **पर्णिल सहपत्र (Foliaceous bracts):** ये सामान्य पत्तियों जैसे बड़े और हरे होते हैं। उदाहरण: मटर।
2. **शल्कीय सहपत्र (Scaly bracts):** ये छोटे, सूखे, और झिल्लीदार होते हैं। उदाहरण: सूरजमुखी।
3. **पुष्पदलीय सहपत्र (Petaloid bracts):** ये रंगीन और पंखुड़ियों जैसे होते हैं। उदाहरण: बोगनवेलिया।
In simple words: सहपत्र एक खास पत्ती होती है जिसके पास से फूल उगता है। यह पत्ती हरी, छोटी, या रंगीन हो सकती है।
🎯 Exam Tip: सहपत्र की परिभाषा और उसके विभिन्न प्रकारों को उनके उदाहरणों के साथ अच्छी तरह से याद करें।
Question 7. पुष्प चित्र को परिभाषित कीजिए ? मातृ अक्ष को कौनसे चिन्ह द्वारा निरूपित किया जाता है ?
Answer: पुष्प चित्र (floral diagram) वास्तव में एक पुष्प कलिका (फूल की कली) का अनुप्रस्थ काट होता है। यह फूल के विभिन्न भागों जैसे बाह्यदल, पंखुड़ियां, पुंकेसर और जायांग की संख्या, व्यवस्था और एक-दूसरे के सापेक्ष स्थिति को एक वृत्त में ग्राफिक रूप से दर्शाता है। यह चित्र हमेशा गोलाकार होता है।
मातृ अक्ष (mother axis) वह मुख्य तना या शाखा होती है जिससे फूल निकलता है। पुष्प चित्र बनाते समय मातृ अक्ष को सबसे ऊपर एक भरी हुई बिन्दु (•) या वृत्त से दर्शाया जाता है।
In simple words: पुष्प चित्र एक फूल की कली का कटा हुआ हिस्सा होता है जो उसके सभी भागों की व्यवस्था दिखाता है। मातृ अक्ष को एक भरे हुए बिंदु से दिखाते हैं।
🎯 Exam Tip: पुष्प चित्र के महत्व को समझें और मातृ अक्ष के प्रतीक को याद रखें। पुष्प सूत्र और पुष्प चित्र दोनों को बनाने का अभ्यास करें।
Question 9. सहपत्री और असहपत्री पुष्प को उदाहरण सहित समझाइये ?
Answer: पुष्पों को सहपत्रों की उपस्थिति या अनुपस्थिति के आधार पर दो मुख्य प्रकारों में वर्गीकृत किया जाता है:
1. **सहपत्री पुष्प (Bracteate flower):** ऐसे पुष्प जिनके डंठल के आधार पर एक सहपत्र (विशेष पत्ती) मौजूद होता है, उन्हें सहपत्री पुष्प कहते हैं। यह सहपत्र फूल की रक्षा करता है।
उदाहरण: गुड़हल।
2. **असहपत्री पुष्प (Ebracteate flower):** ऐसे पुष्प जिनके डंठल के आधार पर कोई सहपत्र उपस्थित नहीं होता, उन्हें असहपत्री पुष्प कहते हैं।
उदाहरण: सरसों।
In simple words: सहपत्री फूल में नीचे एक छोटी पत्ती (सहपत्र) होती है, जैसे गुड़हल में। असहपत्री फूल में यह पत्ती नहीं होती, जैसे सरसों में।
🎯 Exam Tip: सहपत्री और असहपत्री पुष्प के बीच के अंतर को उनके स्पष्ट उदाहरणों के साथ याद रखें।
Question 10. पुंकेसरों के संसंजन के आधार पर गुडहल वे मटर में स्थिति को सचित्र समझाइये।
Answer: पुंकेसरों का संसंजन (cohesion of stamens) तब होता है जब एक ही पुष्पचक्र के पुंकेसर आपस में जुड़ जाते हैं। गुड़हल और मटर में संसंजन की स्थिति इस प्रकार है:
1. **एकसंघी पुंकेसर (Monadelphous):** यह स्थिति गुड़हल (Hibiscus) में पाई जाती है। इसमें सभी पुंकेसरों के पुतन्तु (डंठल) आपस में जुड़कर एक ही बंडल या ट्यूब बनाते हैं। हालांकि, उनके परागकोष (anthers) स्वतंत्र रहते हैं। यह पुंकेसरी नली जायांग के चारों ओर एक सुरक्षात्मक आवरण बनाती है।
उदाहरण: गुड़हल, कपास, भिंडी।
2. **द्विसंघी पुंकेसर (Diadelphous):** यह स्थिति मटर (Pea) में पाई जाती है। इसमें पुंकेसरों के पुतन्तु दो समूहों में जुड़ जाते हैं। मटर के फूल में 10 पुंकेसर होते हैं, जिनमें से 9 पुंकेसर एक साथ जुड़कर एक बंडल बनाते हैं और 1 पुंकेसर स्वतंत्र रहता है, जिससे दो अलग-अलग बंडल बनते हैं। परागकोष इस स्थिति में भी स्वतंत्र रहते हैं।
उदाहरण: मटर, चना, सेम।
In simple words: गुड़हल में सभी पुंकेसर एक साथ जुड़े होते हैं, जबकि मटर में पुंकेसर दो समूहों में बंटे होते हैं, अक्सर 9 एक साथ और 1 अकेला।
🎯 Exam Tip: पुंकेसर के संसंजन के विभिन्न प्रकारों के बीच के अंतर को उनके संबंधित आरेखों और प्रतिनिधि उदाहरणों के साथ अच्छी तरह से याद करें।
Question 1. जायांगधर, परिजायांगी व जायांगोपरिक पुष्पा का नामांकित चित्र की सहायता से वर्णन कीजिए ?
Answer: पुष्पासन पर फूल के अंगों (पुष्प-पत्रों) की व्यवस्था को निवेश कहते हैं, और यह जायांग (मादा प्रजनन भाग) और बाकी तीन चक्रों (बाह्यदल, पंखुड़ियां, पुंकेसर) के बीच एक विशेष संबंध को दर्शाता है। यह तीन प्रकार का होता है:
1. **जायांगधर या अधोजायांगी (Hypogynous):** इस प्रकार के फूल में जायांग पुष्पासन के सबसे ऊपर स्थित होता है, और अन्य सभी पुष्पचक्र (बाह्यदल, पंखुड़ियां, पुंकेसर) जायांग के नीचे से निकलते हैं। इसलिए, अंडाशय को उर्ध्ववर्ती (superior) कहा जाता है।
उदाहरण: सरसों, गुड़हल।
2. **परिजायांगी (Perigynous):** इसमें पुष्पासन एक कप या प्याले के आकार का होता है। जायांग इस प्याले के आधार पर स्थित होता है, और अन्य पुष्पचक्र प्याले के किनारे से निकलते हैं। इस स्थिति में, अंडाशय को अर्द्ध-उर्ध्ववर्ती (half-superior) कहा जाता है।
उदाहरण: गुलाब, प्रिमरोज।
3. **जायांगोपरिक (Epigynous):** इस स्थिति में पुष्पासन ऊपर की ओर बढ़कर अंडाशय को पूरी तरह से घेर लेता है और उससे जुड़ जाता है। अन्य पुष्पचक्र अंडाशय के ऊपर से निकलते हैं। इसलिए, अंडाशय को अधोवर्ती (inferior) कहा जाता है।
उदाहरण: सूरजमुखी।
In simple words: जायांगधर में फूल का मादा भाग सबसे ऊपर होता है, परिजायांगी में यह कप जैसे पुष्पासन के अंदर होता है, और जायांगोपरिक में मादा भाग फूल के बाकी हिस्सों के नीचे छिपा होता है।
🎯 Exam Tip: तीनों प्रकार के अंडाशय की स्थिति (उर्ध्ववर्ती, अर्द्ध-उर्ध्ववर्ती, अधोवर्ती) और उनके उदाहरणों को याद रखें, साथ ही आरेखों को बनाना सीखें।
Question 2. दलविन्यास से क्या अभिप्राय है ? इसके विभिन्न प्रकारों को चित्र व उदाहरण सहित समझाइये।
Answer: दलविन्यास (Aestivation) का अर्थ है कि फूल की कली अवस्था में बाह्यदल (sepals), पंखुड़ियों (petals) या परिदल (perianth) के एक-दूसरे के सापेक्ष कैसे व्यवस्थित होते हैं। यह फूल के खिलने से पहले उनके संरक्षण का तरीका है। यह कई प्रकार का होता है:
1. **कोरस्पर्शी (Valvate):** इसमें बाह्यदल या पंखुड़ियों के किनारे एक-दूसरे को सिर्फ छूते हैं, लेकिन एक-दूसरे के ऊपर नहीं चढ़ते।
उदाहरण: आक, बबूल।
2. **व्यावर्तित (Twisted):** इसमें एक पंखुड़ी का एक किनारा अगली पंखुड़ी के किनारे को ढक लेता है, और यह क्रम सभी पंखुड़ियों में एक ही दिशा में चलता रहता है, जिससे एक घुमावदार पैटर्न बनता है।
उदाहरण: गुड़हल, कपास।
3. **कोरछादी (Imbricate):** इस प्रकार के दलविन्यास में पंखुड़ियों के किनारे एक-दूसरे को अनियमित तरीके से ढकते हैं, जिसमें कोई निश्चित पैटर्न नहीं होता। यह दो प्रकार का होता है:
a. **आरोही कोरछादी (Ascending Imbricate):** इसमें एक बाहरी पंखुड़ी दो भीतरी पंखुड़ियों को ढकती है, और बाकी पंखुड़ियां एक-दूसरे को ढकती हैं। उदाहरण: गुलमोहर।
b. **अवरोही कोरछादी या ध्वजिक (Vexillary):** इसमें सबसे बड़ी पंखुड़ी (मानक) दो छोटी पंखुड़ियों (पंख) को ढकती है, और पंख दो सबसे भीतरी पंखुड़ियों (कील) को ढकते हैं। उदाहरण: मटर।
4. **क्किनकन्शियल (Quincuncial):** इसमें पाँच पंखुड़ियों में से दो पूरी तरह से बाहर होती हैं, दो पूरी तरह से अंदर होती हैं, और बची हुई एक पंखुड़ी का एक किनारा अंदर और दूसरा बाहर होता है।
उदाहरण: अमरूद।
In simple words: दलविन्यास यह बताता है कि फूल की कलियों में पंखुड़ियां एक-दूसरे के ऊपर कैसे लगी होती हैं। इसके अलग-अलग तरीके हैं, जैसे सिर्फ छूना, एक-दूसरे को घुमावदार तरीके से ढकना, या अलग-अलग पैटर्न में एक-दूसरे के ऊपर चढ़ना।
🎯 Exam Tip: दलविन्यास के सभी प्रकारों को उनके विशिष्ट आरेखों और प्रतिनिधि उदाहरणों के साथ याद रखना महत्वपूर्ण है। प्रत्येक प्रकार को स्पष्ट रूप से परिभाषित करें।
Question 3. बीजाण्डन्यास से क्या अभिप्राय है ? विभिन्न प्रकार के बीजाण्डन्यास को सचित्र, सोदाहरण समझाइये ?
Answer: बीजाण्डन्यास (Placentation) का अर्थ है कि अंडाशय के अंदर बीजाण्डासन (placenta) पर बीजाण्ड (ovules) कैसे व्यवस्थित होते हैं। बीजाण्डासन अंडाशय की भीतरी दीवार से बना एक गद्देदार ऊतक होता है जिस पर बीजाण्ड लगते हैं। यह विभिन्न प्रकार का होता है:
1. **सीमान्त (Marginal):** इस प्रकार में, बीजाण्ड एक ही अण्डप वाले और एककोष्ठकी (एक चैम्बर वाले) अंडाशय में, अण्डप के जुड़े हुए किनारों (वेंट्रल सिवनी) पर पंक्तिबद्ध तरीके से लगे होते हैं।
उदाहरण: मटर।
2. **भित्तिय (Parietal):** यह दो या दो से अधिक अण्डपों वाले युक्ताण्डपी, एककोष्ठकी अंडाशय में पाया जाता है। बीजाण्ड अंडाशय की भीतरी दीवार पर लगे होते हैं जहाँ अण्डपों के किनारे जुड़ते हैं।
उदाहरण: सरसों, आर्जीमोन।
3. **स्तम्भीय (Axile):** इस प्रकार के बीजाण्डन्यास में, जुड़े हुए अण्डपों के किनारे अंदर की ओर बढ़ते हैं और अंडाशय के केंद्र में मिलकर एक अक्ष बनाते हैं। अंडाशय कई कोष्ठकों में बँट जाता है, और बीजाण्ड इस केंद्रीय अक्ष पर हर कोष्ठक में लगे होते हैं।
उदाहरण: गुड़हल, नींबू, प्याज।
4. **मुक्त स्तम्भीय (Free Central):** इस प्रकार में, अंडाशय एककोष्ठकी होता है और बीजाण्ड अंडाशय के केंद्र में एक केंद्रीय अक्ष पर लगे होते हैं। इसमें कोष्ठकों को विभाजित करने वाली दीवारें अनुपस्थित होती हैं।
उदाहरण: डायन्थस, प्रिमरोज।
5. **आधारलग्न (Basal):** इस प्रकार में, अंडाशय एककोष्ठकी होता है, और केवल एक बीजाण्ड अंडाशय के आधार से विकसित होता है।
उदाहरण: सूरजमुखी, गेंदा।
6. **परिभित्तिय (Superficial):** यह युक्ताण्डपी, बहुकोष्ठकी अंडाशय में मिलता है। बीजाण्ड कोष्ठों की भीतरी भित्तियों पर लगे होते हैं।
उदाहरण: जल-लिली (Nymphaea)।
In simple words: बीजाण्डन्यास यह बताता है कि फूल के अंडे (बीजाण्ड) अंडाशय के अंदर कैसे व्यवस्थित होते हैं। यह किनारों पर, बीच में, या नीचे जैसे अलग-अलग तरीकों से हो सकता है।
🎯 Exam Tip: बीजाण्डन्यास के सभी प्रकारों को उनके आरेखों और उदाहरणों के साथ अच्छी तरह से याद करें। प्रत्येक प्रकार की मुख्य विशेषताओं को स्पष्ट रूप से समझें।
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