RBSE Solutions Class 11 Biology Chapter 20 पुष्पक्रम

Official RBSE Solutions for Class 11 Biology: Chapter 20 पुष्पक्रम

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Chapter-wise Solutions for Biology: Chapter 20 पुष्पक्रम

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RBSE Class 11 Biology Chapter 20 वस्तुनिष्ठ प्रश्न

 

Question 1. असीमाक्षी पुष्पक्रम के पुष्पी अक्ष की वृद्धि होती है –
(क) सीमित
(ख) सतत
(ग) अनियमित
(घ) रुकरुककर
Answer: (ख) सतत
In simple words: असीमाक्षी पुष्पक्रम में फूल के डंठल का विकास लगातार होता रहता है, वह कभी रुकता नहीं है।

🎯 Exam Tip: असीमाक्षी पुष्पक्रम में, फूल तने के नीचे से ऊपर की ओर खुलते हैं (अग्राभिसारी क्रम), जबकि तने का शीर्ष लगातार बढ़ता रहता है।

 

Question 2. यौगिक असीमाक्ष पाया जाता है –
(क) शहतूत
(ख) गेहूँ
(ग) केटकिन
(घ) रेसीमोस रेसीम
Answer: (ग) केटकिन
In simple words: यौगिक असीमाक्ष एक प्रकार का फूल समूह है जो केटकिन नामक पौधों में मिलता है।

🎯 Exam Tip: यौगिक असीमाक्ष एक जटिल प्रकार का पुष्पक्रम होता है जिसमें कई सरल असीमाक्ष पुष्पक्रम एक साथ जुड़े होते हैं।

 

Question 4. कोलोकेसिया (अरबी) उदाहरण हैं –
(क) स्पेडिक्स
(ख) स्पाइक
(ग) नतकणिश
(घ) स्पाइकलेट
Answer: (क) स्पेडिक्स
In simple words: अरबी के पौधों में फूलों का समूह स्पेडिक्स प्रकार का होता है, जिसमें फूल एक मोटे, मांसल तने पर होते हैं और पत्ती जैसे आवरण से ढके रहते हैं।

🎯 Exam Tip: स्पेडिक्स पुष्पक्रम में एक बड़ा रंगीन सहपत्र (स्पैथ) फूलों के समूह को घेरता है, जो परागण के लिए कीटों को आकर्षित करता है।

 

Question 5. समशिख (कॉरिम्ब) पुष्पक्रम निम्न में से किसमें पाया जाता है –
(क) धनिया
(ख) सौंफ
(ग) मेथी
(घ) आइबेरिस
Answer: (घ) आइबेरिस
In simple words: समशिख पुष्पक्रम आइबेरिस जैसे पौधों में देखा जाता है, जहाँ फूल अलग-अलग जगहों से निकलते हैं लेकिन एक ही स्तर पर आकर एक सपाट गुच्छा बनाते हैं।

🎯 Exam Tip: समशिख पुष्पक्रम को पहचानने का मुख्य तरीका यह है कि इसमें निचले फूलों के डंठल लंबे होते हैं ताकि वे ऊपरी फूलों के साथ मिलकर एक समान ऊंचाई पर पहुंच सकें।

 

RBSE Class 11 Biology Chapter 20 अतिलघूत्तरात्मक प्रश्न

 

Question 1. पुष्पछत्र पुष्पक्रम किस पादप में पाया जाता है ?
Answer: पुष्पछत्र पुष्पक्रम धनिया, सौंफ, जीरा और ऐसी ही अन्य सब्जियों में पाया जाता है। इसमें सभी फूलों के डंठल लगभग एक ही बिंदु से निकलते हुए दिखते हैं और उनकी लंबाई भी एक जैसी होती है।
In simple words: पुष्पछत्र पुष्पक्रम धनिया, सौंफ और जीरा जैसे पौधों में मिलता है।

🎯 Exam Tip: पुष्पछत्र पुष्पक्रम में एक ही जगह से निकलने वाले सभी फूल एक समान आकार के डंठलों पर होते हैं।

 

Question 2. मुण्डक में कितने प्रकार के पुष्पक पाये जाते हैं ? उदाहरण भी दीजिये।
Answer: मुण्डक पुष्पक्रम में दो प्रकार के पुष्पक पाए जाते हैं: र पुष्पक (ray florets) और बिम्ब पुष्पक (disc florets)। इसका एक अच्छा उदाहरण सूर्यमुखी है।
In simple words: मुण्डक में दो तरह के फूल होते हैं – र पुष्पक और बिम्ब पुष्पक। जैसे सूर्यमुखी में होते हैं।

🎯 Exam Tip: मुण्डक पुष्पक्रम में, र पुष्पक आमतौर पर किनारों पर होते हैं और बिम्ब पुष्पक बीच में होते हैं, दोनों मिलकर एक बड़ा फूल जैसा दिखते हैं।

 

RBSE Class 11 Biology Chapter 20 लघूत्तरात्मक प्रश्न

 

Question 4. असीमाक्षी व ससीमाक्षी पुष्पक्रमों में क्या मूलभूत अन्तर है ?
Answer: असीमाक्षी पुष्पक्रम में फूल का मुख्य डंठल लगातार बढ़ता रहता है और फूल अग्रभिसारी क्रम में लगते हैं, मतलब नए फूल ऊपर और पुराने फूल नीचे होते हैं। वहीं, ससीमाक्षी पुष्पक्रम में मुख्य डंठल के शीर्ष पर फूल आने से उसकी वृद्धि रुक जाती है और फूल तलाभिसारी क्रम में लगते हैं, यानी नए फूल नीचे और पुराने फूल ऊपर होते हैं।
In simple words: असीमाक्षी में डंठल बढ़ता रहता है और फूल नए सिरे से निकलते हैं, जबकि ससीमाक्षी में डंठल की बढ़त रुक जाती है क्योंकि ऊपर फूल आ जाता है।

🎯 Exam Tip: असीमाक्षी पुष्पक्रम में केंद्रीय अक्ष की निरंतर वृद्धि होती है, जबकि ससीमाक्षी में केंद्रीय अक्ष की वृद्धि एक टर्मिनल फूल के कारण रुक जाती है।

 

Question 5. वृश्चिक व कुंडलिनी में विभेद कीजिए।
Answer: कुंडलिनी पुष्पक्रम में, मुख्य फूल के डंठल से निकलने वाली सभी शाखाएँ एक ही तरफ विकसित होती हैं। इसके विपरीत, वृश्चिक पुष्पक्रम में, मुख्य फूल के डंठल से शाखाएँ एक बार दायीं ओर और फिर अगली बार बायीं ओर निकलती हैं, जिससे यह सीढ़ीनुमा क्रम में दिखाई देता है।
In simple words: कुंडलिनी में सभी शाखाएँ एक ही दिशा में बढ़ती हैं, जबकि वृश्चिक में शाखाएँ बारी-बारी से दायीं और बायीं ओर निकलती हैं।

🎯 Exam Tip: कुंडलिनी (हेलिकॉइड) और वृश्चिक (स्कॉर्पिॉइड) दोनों ससीमाक्षी पुष्पक्रम के प्रकार हैं, जहाँ शाखाओं के निकलने की दिशा में अंतर होता है।

 

Question 1. एकशाखी ससीमाक्ष पुष्पक्रम कितने प्रकार का होता है ? प्रत्येक का उदाहरण भी दीजिये।
Answer: एकशाखी ससीमाक्ष पुष्पक्रम दो प्रकार का होता है:
1. कुण्डलिनी ससीमाक्ष (Helicoid cyme): इसमें मुख्य डंठल पर एक फूल आता है, और फिर उसके नीचे से एक ही पार्श्व शाखा निकलती है, जिसके शीर्ष पर भी एक फूल होता है। इस प्रकार में सभी पार्श्व शाखाएँ एक ही तरफ विकसित होती हैं। उदाहरण के लिए होलीओट्रोपियम् (Heliotropium)।
2. वृश्चिकी ससीमाक्ष (Scorpioid cyme): इसमें भी मुख्य डंठल पर एक फूल आता है, लेकिन पार्श्व शाखाएँ बारी-बारी से दायीं और बायीं ओर निकलती हैं, जिससे एक सीढ़ीनुमा क्रम बनता है। उदाहरण के लिए बिगोनिया (Begonia)।
In simple words: एकशाखी ससीमाक्ष दो तरह के होते हैं: कुण्डलिनी (जिसमें शाखाएँ एक ही तरफ निकलती हैं, जैसे होलीओट्रोपियम्) और वृश्चिकी (जिसमें शाखाएँ बारी-बारी से दायीं-बायीं निकलती हैं, जैसे बिगोनिया)।

🎯 Exam Tip: एकशाखी ससीमाक्ष में, हर बार केवल एक ही नई शाखा निकलती है, और शाखाओं के निकलने की दिशा के आधार पर यह कुण्डलिनी या वृश्चिकी कहलाता है।

 

Question 2. द्विशाखी वे बहुशाखी ससीमाक्ष में क्या अन्तर है ? प्रत्येक का उदाहरण भी दीजिये।
Answer: द्विशाखी और बहुशाखी दोनों ससीमाक्षी पुष्पक्रम के प्रकार हैं, जहाँ मुख्य डंठल का विकास एक फूल पर आकर रुक जाता है।
1. द्विशाखी ससीमाक्ष (Dichasial cyme): इसमें मुख्य फूल के नीचे एक ही तल पर दो पार्श्व फूल एक-दूसरे के सामने निकलते हैं। उदाहरण के लिए जिप्सोफिला (Gypsophila), डाएन्थस (Dianthus) और हारसिंगार (Nyctanthes arbortristis)।
2. बहुशाखी ससीमाक्ष (Polychasial cyme): इसमें मुख्य फूल के नीचे एक ही तल पर दो से ज़्यादा पार्श्व फूल निकलते हैं। उदाहरण के लिए आक (Calotropis procera)।
In simple words: द्विशाखी में मुख्य फूल के नीचे दो फूल निकलते हैं (जैसे जिप्सोफिला), जबकि बहुशाखी में दो से ज़्यादा फूल निकलते हैं (जैसे आक)।

🎯 Exam Tip: द्विशाखी ससीमाक्ष में दो पार्श्व शाखाएं होती हैं, जबकि बहुशाखी ससीमाक्ष में दो से अधिक पार्श्व शाखाएं होती हैं, जो एक ही स्तर से निकलती हैं।

नतकणिश व स्पेडिक्स में अंतर -

स्पेडिक्स (Spadix)नतकणिश (Catkin)
1. पुष्पावली वृन्त मोटा व मांसल होता है।1. मोटा व मांसल न होकर पतला, लम्बा व लटका हुआ होता है।
2. पुष्प एक या अनेक विशेष रंगीन सहपत्रों अर्थात् स्पेथ से ढके होते हैं।2. पुष्प ढके नहीं होते व न ही स्पेथ होता है।
3. पुष्प अवृन्ती, उभयलिंगाश्रयी होते हैं।3. अवृन्ती व एकलिंगाश्रयी होते हैं।
4. मांसल अक्ष पर नर पुष्प ऊपर तथा मादा पुष्प नीचे होते हैं। उदाहरण – केला।4. अक्ष पर नर या मादा पुष्प होते हैं। उदाहरण – शहतूत।

 

Question 4. समशिख व पुष्पछत्र में अंतर स्पष्ट कीजिए।
Answer: समशिख और पुष्पछत्र में मुख्य अंतर यह है:

समशिख (Corymb)पुष्पछत्र (Umbel)
1. पुष्पाक्ष (Floral axis) छोटा होता है।1. पुष्पाक्ष निरुद्ध (Suppressed) होता है।
2. पुष्पाक्ष से पुष्प अलग-अलग स्थानों से निकलते हैं।2. पुष्पाक्ष के एक स्थान से सभी पुष्प निकलते प्रतीत होते हैं।
3. नीचे वाले पुष्पों के वृन्त लम्बे व ऊपर वालों के छोटे होते हैं जिससे सभी पुष्प ऊपर से एक तल में दिखाई देते हैं। उदाहरण – कैडिटफ्ट।3. सभी पुष्पों के वृन्त समान लम्बाई के होते हैं तथा बराबर दिखाई देते हैं। उदाहरण – ब्राह्मीबूटी।


In simple words: समशिख में फूल अलग-अलग ऊंचाइयों से निकलते हैं लेकिन एक ही स्तर पर आते हैं, जबकि पुष्पछत्र में सभी फूल एक ही जगह से एक समान लंबाई के डंठलों पर निकलते हैं।

🎯 Exam Tip: इन दोनों पुष्पक्रमों को पहचानने के लिए फूलों के डंठल की लंबाई और उनके उद्गम बिंदु पर ध्यान दें।

 

हाइपैन्थोडियम (Hypanthodium) तथा साएथियम (Cyathium) में अंतर -

हाइपैन्थोडियम (Hypanthodium)साएथियम (Cyathium)
1. पुष्पासन मांसल छोटा, नाशपती दार, अधिक संकरे मुखवाला, खोखले प्यालेनुमा संरचना होती है।1. सभी पुष्पों के सहपत्र मिलकर एक प्यालेनुमा संरचना बनाते है जिसे सहपत्रचक्र (involucre) कहते हैं।
2. मकरन्द ग्रन्थि नहीं होती है।2. मकरन्द ग्रन्थि होती है।
3. प्याले के केन्द्र में एक लम्बा वृतयुक्त मादा पुष्प बाहर निकला होता है, इसके चारों ओर अनेक एकलिंगी नर पुष्प (वृत युक्त एक पुंकेसर ही नर पुष्प होता है।) होते हैं।3. प्याले में एकलिंगी पुष्प होते हैं। पुष्प छोटे जो छिद्र के पास होते हैं वे नर पुष्प तथा आधार की ओर मादा पुष्प होते हैं।
4. पुष्प सवृन्ति होते हैं।4. अवृन्ति होते हैं।

RBSE Class 11 Biology Chapter 20 निबन्धात्मक प्रश्न

 

Question 1. पुष्पक्रम की परिभाषा दीजिये। असीमाक्ष व ससीमाक्ष प्रकार के पुष्पक्रमों पर विस्तृत प्रकाश डालिये।
Answer:
पादप में पुष्पों के क्रम या व्यवस्था को पुष्पक्रम कहते हैं। जिस अक्ष पर पुष्प व्यवस्थित होते हैं उसे पुष्पावली वृन्त (peduncle) कहते हैं। पुष्पक्रम मुख्य रूप से दो प्रकार के होते हैं:

असीमाक्ष पुष्पक्रम (Racemose Inflorescence):
इस पुष्पक्रम में पुष्पावली वृन्त की वृद्धि असीमित होती है। इसका मतलब है कि मुख्य अक्ष पर नए फूल लगातार बनते रहते हैं और शीर्षस्थ फूल इसकी वृद्धि को नहीं रोकता। फूल हमेशा अग्रभिसारी क्रम (acropetal succession) में व्यवस्थित होते हैं, यानी नए फूल ऊपर (शीर्षक के पास) और पुराने फूल नीचे (आधार के पास) होते हैं। यह पुष्पक्रम आगे दिए गए मुख्य प्रकारों में वर्गीकृत किया जा सकता है:

1. पुष्पक्रम जिनमें पुष्पावलीवृन्त लम्बा होता है (Racemose inflorescence with elongated peduncle):
इनमें मुख्य डंठल लंबा होता है और उस पर फूल अलग-अलग तरीके से व्यवस्थित होते हैं।

  • कणिश या शूकी (Spike): इसमें लंबे डंठल पर बिना डंठल वाले फूल अग्रभिसारी क्रम में लगते हैं। उदाहरण: चौलाई, लटजीरा, पालक, काली मिर्च।
  • कणिशिका या अनुशूकी (Spikelet): जब पुष्पावलीवृन्त शाखित हो और प्रत्येक शाखा पर कणिश जैसा पुष्पक्रम हो, तो ऐसी छोटी शाखा को कणिशिका कहते हैं। उदाहरण: गेहूँ, जौ, घास।


इस प्रकार के पुष्पक्रम में, फूल एक बड़े रंगीन या हरे रंग के सहपत्र (bract) से ढके होते हैं, जिसे शूकीछद (spathe) कहते हैं। शूकीछद फूलों की रक्षा करने और परागण के लिए कीटों को आकर्षित करने में मदद करता है। उदाहरण: अरबी (Colocasia), केला (Musa), मक्का (Zea mays)।

2. पुष्पक्रम जिनमें पुष्पावलीवृन्त अपेक्षाकृत छोटा होता है (Racemose inflorescence with comparatively short peduncle):
इनमें मुख्य डंठल छोटा होता है और फूल विभिन्न तरीकों से व्यवस्थित होते हैं।

 

  • समशिख (Corymb): पुष्पावलीवृन्त छोटा होता है। इसमें निचले फूलों के डंठल ऊपर वाले फूलों की तुलना में अधिक लंबे होते हैं, जिससे सभी फूल लगभग एक ही तल पर आ जाते हैं। उदाहरण: कैन्डीटफ्ट (Iberis amara)।
  • पुष्पछत्र (Umbel): पुष्पावलीवृन्त छोटा होता है, परन्तु इसके शीर्ष पर से अनेक डंठल वाले फूल निकलते हैं। इनके डंठल की लंबाई लगभग समान होती है, जिससे सभी फूल एक ही तल में रहते हैं। इनमें प्रत्येक फूल के उद्गम स्थान पर सहपत्र (bract) होते हैं।
  • मुंडक या केपिटुलम (Head or Capitulum): पुष्पावली वृन्त की लंबाई की वृद्धि रुक जाती है और यह चपटा, तश्तरीनुमा, अवतल या उत्तल हो जाता है। इस पर अनेक छोटे फूल सघन रूप से व्यवस्थित रहते हैं। इन छोटे फूलों को पुष्पक (florets) कहते हैं। व्यवस्था में नए फूल केंद्र में तथा पुराने फूल परिधि की ओर खिले होते हैं (अभिकेन्द्रीयक्रम - centripetal order)। केन्द्रीय फूलों को बिम्ब पुष्पक (disc florets) तथा परिधि वालों को र पुष्पक (ray florets) कहते हैं।


ससीमाक्षी पुष्पक्रम (Cymose Inflorescences):
इस पुष्पक्रम में मुख्य अक्ष पुष्प में समाप्त हो जाता है, जिससे इसकी वृद्धि रुक जाती है। इसमें पुराने फूल ऊपर की तरफ तथा नई कलियाँ नीचे की तरफ लगी होती हैं। इस प्रकार के क्रम को तलाभिसारी क्रम (basipetal succession) कहते हैं। यह पुष्पक्रम निम्न प्रकार के होते हैं:

1. एकंशाखी ससीमाक्ष (Uniparous or monochasial cymose):
इसमें पुष्पावली वृन्त के शीर्ष पर एक फूल होता है और उसके नीचे से केवल एक पार्श्व शाखा विकसित होती है, जिसके शीर्ष पर भी एक फूल होता है।

 

 

  • कुंडलिनी ससीमाक्ष (Helicoid cyme): यदि सभी शाखाएँ एक ही तरफ विकसित हों तो इसे कुंडलनी ससीमाक्ष कहते हैं। उदाहरण: हीलियोट्रोपियम (Heliotropium)।
  • वृश्चिकी ससीमाक्ष (Scorpioid cyme): यदि शाखाएँ बारी-बारी से दायीं ओर फिर बायीं ओर निकलती रहें तो इसे वृश्चिकी ससीमाक्ष कहते हैं। उदाहरण: बिगोनिया (Begonia), हेमीलिया (Hamelia)।


2. द्विशाखी ससीमाक्ष (Biparous or dichasial cymose):
इसमें मुख्य फूल के नीचे एक ही तल पर दो पार्श्व शाखाएँ एक-दूसरे के विपरीत निकलती हैं, जिनके शीर्ष पर भी फूल होते हैं। उदाहरण: बोहरेविया (Boerhavia), आक (Calotropis)।

3. बहुशाखी ससीमाक्ष (Polychasial):
इसमें मुख्य फूल के नीचे एक ही तल पर दो से अधिक पार्श्व शाखाएँ निकलती हैं, जिनके शीर्ष पर भी फूल होते हैं।

In simple words: पुष्पक्रम फूलों के खिलने के तरीके को कहते हैं। असीमाक्षी में मुख्य तना बढ़ता रहता है और नए फूल ऊपर आते रहते हैं। ससीमाक्षी में मुख्य तना एक फूल पर खत्म हो जाता है, और नए फूल नीचे से निकलते हैं।

🎯 Exam Tip: पुष्पक्रम के प्रकारों को याद रखने के लिए, मुख्य अक्ष की वृद्धि की दिशा (असीमित या सीमित) और फूलों के खुलने के क्रम (अग्रभिसारी या तलाभिसारी) पर ध्यान दें।

 

Question 2. विशेष प्रकार के पुष्पक्रमों को चित्र व उदाहरणों के माध्यम से समझाइये।
Answer: विशेष प्रकार के पुष्पक्रम ऐसे होते हैं जो सामान्य असीमाक्ष या ससीमाक्ष प्रकारों में फिट नहीं होते। ये आमतौर पर कुछ खास पौधों में मिलते हैं और इनकी बनावट बहुत अनूठी होती है।

1. साएथियम (Cyathium):
यह पुष्पक्रम मुख्य रूप से यूफोर्बियेसी कुल (Euphorbiaceae family) के पौधों में पाया जाता है। इसमें पूरा पुष्पक्रम एक फूल जैसा दिखता है। इसके प्रत्येक फूल में सहपत्र होते हैं। सभी सहपत्र मिलकर एक प्यालेनुमा संरचना बनाते हैं जिसे सहपत्रचक्र (involucre) कहते हैं। सहपत्रचक्र के बाहर किनारों पर मकरन्द ग्रंथि (nectar gland) होती है, जिससे शहद निकलता है।
सहपत्रचक्र के अंदर केंद्र में एक लंबा डंठल वाला मादा पुष्प होता है। मादा पुष्प बहुत छोटा होता है। पुष्पावली वृन्त की वृद्धि के कारण यह प्यालेनुमा संरचना से बाहर निकल आता है। मादा पुष्प में तीन अंडाशय, जुड़े हुए अंडाशय, तीन कोष्ठक, अक्षीय बीजाण्डन्यास, जायांगध्र होता है। इसमें वर्तिका की संख्या अंडाशयों के बराबर होती है या प्रत्येक वर्तिका शाखित होकर दो वर्तिकाग्र पालियाँ बनाती हैं। मादा पुष्प के चारों ओर अनेक नर पुष्पों का समूह होता है। प्रत्येक नर पुष्प के आधार पर एक शल्की सहपत्र (scaly bract) होता है। नर पुष्प में भी डंठल होता है, और डंठल व पुंकेसर का जुड़ाव स्थान साफ दिखाई देता है। नर पुष्प भी छोटा होता है क्योंकि केवल पुंकेसर के अलावा बाकी हिस्से अनुपस्थित होते हैं। पुंकेसर में पुतन्तु (filament), परागकोष (anther lobe) और योजी (connective) होता है।
सायथियम में नर व मादा पुष्प तलाभिसारी क्रम (basipetal order) में व्यवस्थित रहते हैं, मतलब मादा पुष्प पहले और नर पुष्प बाद में परिपक्व होते हैं। इसी तरह, केंद्र में स्थित नर पुष्प पहले और परिधि वाले नर पुष्प बाद में परिपक्व होते हैं। इसलिए, सायथियम पुष्पक्रम वास्तव में ससीमाक्ष (cymose) पुष्पक्रम का एक बदला हुआ रूप है। उदाहरण: यूफोर्बिया (Euphorbia)।

2. कूटचक्र (Verticillaster):
यह द्विशाखी ससीमाक्ष (biparous cymose) पुष्पक्रम का एक सघन रूप है जो तुलसी कुल (Lamiaceae) के पौधों में पाया जाता है। इसमें तने पर पत्तियाँ आमने-सामने (opposite) व्यवस्थित होती हैं और प्रत्येक पत्ती के कक्ष से एक पुष्पक्रम निकलता है। इन पत्तियों को सहपत्र कहा जा सकता है। पुष्पक्रम में प्रथम अक्ष के अंत में फूल लगता है। पुष्पक्रम में शुरुआत में द्विशाखी ससीमाक्ष होता है, लेकिन बाद में एकशाखी वृश्चिकी (Uniparous scorpioid) फूलों के लगने की प्रवृत्ति होती है। पुष्पक्रम में सभी फूल बिना डंठल वाले, छोटे और पास-पास होते हैं। उदाहरण: पोदीना, तुलसी।

3. हाइपैन्थोडियम (Hypanthodium):
यह पुष्पक्रम फाइकस (Ficus) जाति के पौधों जैसे बरगद, अंजीर, पीपल और गूलर आदि में पाया जाता है। हाइपैन्थोडियम में पुष्पासन (thalamus) एक मोटा, छोटा, नाशपाती के आकार का, संकरा मुख वाला, खोखला प्यालेनुमा संरचना वाला होता है। ऊपरी भाग में स्थित छोटे छिद्र द्वारा यह बाहर खुलता है। अंदर की सतह पर नर और मादा फूल एकलिंगी होते हैं। छिद्र के पास नर फूल होते हैं और मादा फूल आधार की ओर होते हैं। नर पुष्प बहुत छोटे होते हैं।

In simple words: विशेष पुष्पक्रम वो होते हैं जो सामान्य से अलग दिखते हैं। सायथियम में फूल एक कप में छिपे होते हैं और शहद निकालते हैं (जैसे यूफोर्बिया)। कूटचक्र में फूल पत्तों के पास झुंड में लगते हैं (जैसे तुलसी)। हाइपैन्थोडियम में फूल एक नाशपाती जैसी संरचना के अंदर छिपे होते हैं (जैसे अंजीर)।

🎯 Exam Tip: विशेष पुष्पक्रमों को उनके विशिष्ट आकारों और संरचनाओं से पहचानें, और उनके सामान्य पौधों के उदाहरणों को याद रखें।

असीमाक्षी (Racemose)
(मुख्य अक्ष वृद्धि करता रहता है।)
ससीमाक्षी (Cymose)
(मुख्य अक्ष पर पुष्प लगने से वृद्धि अवरुद्ध हो जाती है।)
विशेष प्रकार (Special type)
- मुख्य अक्ष लम्बा
असीमाक्ष (Raceme)
पुष्पवृन्ती
कणिश या शूकी (Spike)
पुष्प अवृन्ती
मंजरी या नतकणिश (Catkin)
पुष्प अवृन्ती, एकलिंगी
स्पेडिक्स (Spadix)
पुष्प अवृन्ती सहपत्र से ढके हुए
- एकलपुष्पी (Solitary)
केवल एक कक्षस्थ या अग्रस्थ पुष्प होता है।
- एकशाखी (Monochasial)
मुख्य अक्ष के शीर्ष पर केवल एक पुष्प
- द्विशाखी (Dichasial)
अन्तःपुष्प बनने के बाद दो पुष्प बनते हैं।
- बहुशाखी (Polychasial)
अन्तःपुष्प बनने के बाद अनेक पुष्प बनते हैं।
साएथियम (Cyathium)
कूटचक्रक (Verticillaster)
हाइमैन्थोडियम (Hypanthodium)
- मुख्य अक्ष छोटा
(कुछ संघनित)
समशिख (Corymb)
पुष्प वृन्त असमान
पुष्प समान तल पर
छत्रक (Umbel)
पुष्पवृन्त एक ही स्थान से निकलते हैं, मुख्य अक्ष संघनित
  
- मुख्य अक्ष संघनित होकर चपटा हो जाता है, पुष्पक पाये जाते हैं।  

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