Download RBSE Solutions for Class 11 Biology Chapter 02 जीवों का वर्गीकरण
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RBSE Class 11 Biology Chapter 2 वस्तुनिष्ठ प्रश्न
Question 1. जीवों के वर्गीकरण के वैज्ञानिक मापदण्डों का उपयोग सर्वप्रथम किस वैज्ञानिक ने किया –
(a) केरोलस लिनियस
(b) अरस्तू
(c) डार्विन
(d) व्हिटेकर
Answer: (b) अरस्तू
In simple words: अरस्तू पहले वैज्ञानिक थे जिन्होंने जीवों को वैज्ञानिक नियमों के आधार पर बाँटा था। उन्होंने जानवरों और पौधों को अलग-अलग समूहों में रखा था।
🎯 Exam Tip: वैज्ञानिक वर्गीकरण के इतिहास में अरस्तू के शुरुआती योगदान को याद रखें, जो बाद के जटिल वर्गीकरणों का आधार बना।
Question 2. द्विजगत पद्धति के अनुसार जीवों को वर्गीकृत किया गया –
(a) मोनेरा व प्रोटिस्टा में
(b) प्रोटिस्टा व प्लांटी में
Answer: (c) प्लाण्टी व ऐनिमेलिया में
In simple words: द्विजगत पद्धति में सभी जीवों को सिर्फ दो बड़े समूहों में बांटा गया था: प्लांटी (पेड़-पौधे) और ऐनिमेलिया (जानवर).
🎯 Exam Tip: द्विजगत पद्धति में केवल दो प्रमुख जगत-पादप और जंतु-शामिल थे, यह याद रखना महत्वपूर्ण है।
Question 3. कोपलेण्ड प्रतिपादित करने वाले थे -
(a) द्विजगत पद्धति
(b) त्रिजगत पद्धति
(c) चतुर्जगत पद्धति
(d) पंचजगत पद्धति
Answer: (c) चतुर्जगत पद्धति
In simple words: कोपलेण्ड वैज्ञानिक थे जिन्होंने जीवों को चार बड़े समूहों में बाँटने का तरीका बताया, जिसे चतुर्जगत पद्धति कहते हैं.
🎯 Exam Tip: विभिन्न वैज्ञानिकों द्वारा दी गई वर्गीकरण पद्धतियों और उनसे जुड़े जगतों के नाम याद रखें।
Question 4. निम्नलिखित में से कौनसा लक्षण मोनेरा जगत के जनन विधि से सम्बन्धित है –
(a) संयुग्मन
(b) युग्मक संलयन
(c) युग्मक संलयन एवं संयुग्मन
(d) निषेचन
Answer: (a) संयुग्मन
In simple words: मोनेरा जगत के जीव संयुग्मन विधि से प्रजनन करते हैं. इसमें दो जीवाणु सीधे संपर्क में आकर आनुवंशिक सामग्री बदलते हैं.
🎯 Exam Tip: मोनेरा जगत के जीवों की प्रजनन विधि की विशिष्टता पर ध्यान दें, क्योंकि यह उन्हें अन्य जगतों से अलग करती है।
RBSE Class 11 Biology Chapter 2 अतिलघूत्तरात्मक प्रश्न
Question 1. द्विजगत पद्धति का प्रतिपादन किसने किया ?
Answer: द्विजगत पद्धति का प्रतिपादन केरोलस लिनियस ने किया था. यह वर्गीकरण जीवों को दो मुख्य जगतों में बाँटता है.
In simple words: द्विजगत पद्धति केरोलस लिनियस ने शुरू की थी.
🎯 Exam Tip: वैज्ञानिक के नाम और उनके द्वारा प्रतिपादित वर्गीकरण पद्धति को सटीक रूप से याद करें. लिनियस को 'वर्गीकरण का जनक' भी कहा जाता है.
Question 2. त्रिजगत वर्गीकरण पद्धति क्या है ?
Answer: त्रिजगत वर्गीकरण पद्धति में जीवों को तीन मुख्य जगतों- प्रोटिस्टा, प्लाण्टी और ऐनिमेलिया में बाँटा गया है. यह पद्धति जीवों के बीच कुछ और अंतर को पहचानती है. प्रोटिस्टा जगत को अरनेस्ट हेकेल ने अलग किया.
In simple words: यह जीवों को प्रोटिस्टा, प्लाण्टी और ऐनिमेलिया इन तीन समूहों में बाँटती है.
🎯 Exam Tip: त्रिजगत पद्धति में शामिल तीन जगतों के नाम और उनकी मुख्य विशेषताएँ याद रखें.
Question 3. पंचजगत पद्धति में सम्मिलित जगतों के नाम लिखो।
Answer: पंचजगत पद्धति में मोनेरा, प्रोटिस्टा, फंजाई (कवक), प्लाण्टी (पादप) और ऐनिमेलिया (जंतु) नामक पाँच जगत शामिल हैं. यह वर्गीकरण सबसे व्यापक रूप से स्वीकार किया गया है.
In simple words: पंचजगत पद्धति में मोनेरा, प्रोटिस्टा, फंजाई, प्लाण्टी और ऐनिमेलिया शामिल हैं.
🎯 Exam Tip: पंचजगत वर्गीकरण के पाँच जगतों के नाम क्रम से और सही उच्चारण के साथ याद रखें.
Question 4. वर्गीकरण क्या है ?
Answer:
In simple words:
🎯 Exam Tip:
Question 1. वर्गीकरण की आवश्यकता को संक्षिप्त में बताइये।
Question 1. वर्गीकरण की आवश्यकता को संक्षिप्त में बताइये।
Answer: पृथ्वी पर बहुत सारे जीव हैं, जिनमें से 1.8 मिलियन से अधिक जातियों की पहचान की जा चुकी है. इन सभी जीवों का व्यवस्थित और वैज्ञानिक तरीके से वर्गीकरण करना बहुत ज़रूरी है, ताकि इनका अध्ययन करना आसान हो सके. वर्गीकरण के बिना, किसी भी वैज्ञानिक के लिए पौधों, जानवरों और सूक्ष्म जीवों पर रिसर्च करना या उसे जारी रखना मुश्किल हो जाता है. इसलिए, सभी सजीवों का अच्छे से अध्ययन करने के लिए, उन्हें उनके मुख्य लक्षणों के आधार पर सही समूहों में बाँटना बहुत आवश्यक है. वर्गीकरण की मदद से हम विभिन्न पौधों, जानवरों और सूक्ष्म जीवों की जातियों को पहचान सकते हैं.
In simple words: वर्गीकरण से लाखों जीवों को व्यवस्थित रूप से पहचानना और उनका अध्ययन करना आसान हो जाता है, जिससे वैज्ञानिक रिसर्च में मदद मिलती है और नामों की भ्रम को दूर किया जा सकता है.
🎯 Exam Tip: वर्गीकरण की मुख्य आवश्यकताएँ जैसे अध्ययन में आसानी, पहचान, नामकरण और भ्रम की समाप्ति पर जोर दें.
Question 2. पादपों के वर्गीकरण इतिहास पर संक्षिप्त टिप्पणी लिखिये।
Answer: पुराने समय में पौधों को उनकी उपयोगिता के आधार पर वर्गीकृत किया जाता था, और जानवरों को पाँच समूहों में बाँटा जाता था. बाद में अरस्तू ने वैज्ञानिक नियमों के आधार पर वर्गीकरण शुरू किया. उन्होंने पौधों को वृक्ष, झाड़ी और शाक में बाँटा और जानवरों को लाल रक्त की उपस्थिति या अनुपस्थिति के आधार पर वर्गीकृत किया. फिर, लीनियस ने सभी पौधों और जानवरों के लिए द्विजगत पद्धति बनाई, जिसमें सभी जीवों को प्लाण्टी (पौधे) और ऐनिमैलिया (जंतु) जगत में रखा गया. हालाँकि, यह वर्गीकरण आसान था, पर इसमें बहुत से जीवों को रखना संभव नहीं था. इसलिए, वर्गीकरण में जीवों की कोशिका संरचना, कोशिका भित्ति के गुण, पोषण विधि, आवास, प्रजनन के तरीके और विकास के संबंधों को भी शामिल करने की ज़रूरत महसूस हुई, जिससे वर्गीकरण की पद्धतियों में कई बदलाव आए.
In simple words: पौधों का वर्गीकरण पहले उपयोगिता के आधार पर होता था, फिर अरस्तू और लीनियस ने वैज्ञानिक तरीके दिए. समय के साथ, कोशिका संरचना और अन्य गुणों के आधार पर इसमें बदलाव आए.
🎯 Exam Tip: पादप वर्गीकरण के इतिहास में अरस्तू और लीनियस के योगदान को प्रमुखता से लिखें और पद्धतियों में आए बदलावों के कारणों को भी समझाएँ.
Question 3. पंचजगत वर्गीकरण पद्धति को संक्षिप्त में समझाइये।
Answer: पंचजगत वर्गीकरण पद्धति को व्हिटेकर ने दिया था. इस पद्धति में मोनेरा, प्रोटिस्टा, फंजाई (कवक), प्लाण्टी (पौधे) और ऐनिमेलिया (जंतु) नामक पाँच जगत शामिल हैं. इस वर्गीकरण में जीवों की कोशिका संरचना, थैलस संरचना, कोशिका भित्ति, केंद्रक झिल्ली, पोषण विधि और जनन विधि जैसे लक्षणों को देखा गया. सभी प्रोकैरियोटिक जीवों को "मोनेरा" जगत में रखा गया, और एककोशिकीय यूकैरियोटिक जीवों को "प्रोटिस्टा" जगत में रखा गया. इस वर्गीकरण के अनुसार मोनेरा, प्रोटिस्टा, फंजाई, प्लाण्टी और ऐनिमेलिया पाँच मुख्य जगत हैं.
In simple words: व्हिटेकर की पंचजगत पद्धति में मोनेरा, प्रोटिस्टा, फंजाई, प्लाण्टी और ऐनिमेलिया ये पाँच जगत हैं, जिन्हें जीवों की संरचना और पोषण के आधार पर बाँटा गया है.
🎯 Exam Tip: पंचजगत वर्गीकरण पद्धति के प्रतिपादक (व्हिटेकर) और इसमें शामिल पाँच जगतों के नामों को याद रखें. साथ ही, जीवों को इन जगतों में बाँटने के मुख्य आधारों पर भी ध्यान दें.
Question 4. चतुर्जगत वर्गीकरण पद्धति त्रिजगत वर्गीकरण पद्धति से किस प्रकार भिन्न थी ?
Answer: चतुर्जगत वर्गीकरण पद्धति में मोनेरा, प्रोटिस्टा, प्लाण्टी और ऐनिमेलिया नामक चार जगत थे. त्रिजगत पद्धति में सिर्फ तीन जगत (प्रोटिस्टा, प्लाण्टी, ऐनिमेलिया) थे, लेकिन चतुर्जगत पद्धति में जीवाणुओं और नीलहरित शैवालों के लिए एक नया जगत "मोनेरा" जोड़ा गया था. यह मोनेरा जगत प्रोकैरियोटिक जीवों को अलग पहचान देता था, जो त्रिजगत पद्धति में संभव नहीं था. इस प्रकार, चतुर्जगत पद्धति ने जीवों के वर्गीकरण को अधिक स्पष्ट और विस्तृत बनाया. मोनेरा को जोड़ने से वर्गीकरण और भी सटीक हो गया.
In simple words: चतुर्जगत पद्धति में त्रिजगत पद्धति से एक नया समूह 'मोनेरा' जोड़ा गया था. इसमें कुल चार जगत- मोनेरा, प्रोटिस्टा, प्लाण्टी, ऐनिमेलिया थे.
🎯 Exam Tip: विभिन्न वर्गीकरण पद्धतियों के बीच के मुख्य अंतर को स्पष्ट रूप से बताएँ, खासकर नए जोड़े गए जगतों पर ध्यान दें.
RBSE Class 11 Biology Chapter 2 निबन्धात्मक प्रश्न
Question 1. पादप वर्गीकरण का संक्षिप्त इतिहास बताइये।
Answer: पादप वर्गीकरण का संक्षिप्त इतिहास:
शुरुआत में, वर्गीकरण भोजन, कपड़े, दवा और आवास जैसी सामान्य जरूरतों के आधार पर किया जाता था. एक और पुराने वर्गीकरण के अनुसार, जानवरों को पालतू, जंगली, रेंगने वाले, उड़ने वाले और समुद्री जीवों जैसे पाँच समूहों में बाँटा गया था. सबसे पहले ग्रीक दार्शनिक अरस्तू ने वैज्ञानिक नियमों का उपयोग करके वर्गीकरण प्रस्तुत किया. उन्होंने पौधों को उनके सरल आकार के गुणों के आधार पर वृक्ष, झाड़ी और शाक में वर्गीकृत किया था, लेकिन जानवरों को लाल रक्त की उपस्थिति या अनुपस्थिति के आधार पर वर्गीकृत किया. साथ ही, जानवरों को उनकी गति के आधार पर उड़ने वाले, चलने वाले और तैरने वाले समूहों में भी बाँटा गया था.
स्वीडन के वैज्ञानिक केरोलस लिनियस ने सभी पौधों और जानवरों के वर्गीकरण के लिए द्विजगत पद्धति (Two-kingdom system) विकसित की. इसमें जीवों को क्रमशः प्लाण्टी (पौधे) और ऐनिमैलिया (जंतु) जगत में बाँटा गया था. इस पद्धति के अनुसार प्रोकैरियोटिक (असीमकेन्द्रकी) और यूकैरियोटिक (ससीमकेन्द्रकी), एककोशिकीय और बहुकोशिकीय, तथा प्रकाश-संश्लेषी (हरे शैवाल) और अप्रकाश-संश्लेषी (कवक) के बीच अंतर करना संभव नहीं था. हालाँकि यह वर्गीकरण सरल था, लेकिन इसमें बहुत से जीवों को रखना संभव नहीं था. इस वजह से यह पद्धति अधूरी साबित हुई. वर्गीकरण में जीव के आकार के गुणों के अलावा कोशिका संरचना, कोशिका भित्ति के गुण, पोषण विधि, आवास, प्रजनन के तरीके और विकासवादी संबंधों को भी शामिल करने की ज़रूरत पड़ी. इसके परिणामस्वरूप वर्गीकरण की पद्धतियों में कई बदलाव आए.
19वीं शताब्दी में, वर्गीकरण पद्धतियाँ जीवों के आकार के गुणों के साथ-साथ शारीरिक और भौगोलिक वितरण के लक्षणों पर आधारित थीं. डार्विन के विकासवाद के बाद, जातिवृत्तीय (Phylogenetic) पद्धतियाँ आईं. इन वर्गीकरण पद्धतियों में पौधों के जातिवृत्तीय संबंधों और जीवों के आपसी आनुवंशिक समानताओं के साथ-साथ कोशिकानुवंशिक गुणों को विशेष महत्व दिया जाता था. सन् 1960 के बाद, वर्गीकरण के दो मुख्य क्षेत्रों- रसायन वर्गिकी (Chemotaxonomy) और संख्यात्मक वर्गिकी या टेक्सोमेट्रिक्स (Numerical taxonomy or Taxometrics) का विकास हुआ.
In simple words: पौधों का वर्गीकरण पहले उपयोगिता पर आधारित था, फिर अरस्तू और लिनियस ने वैज्ञानिक आधार दिए. बाद में, कोशिका संरचना, विकास और आनुवंशिक संबंधों को भी शामिल किया गया, जिससे रसायन और संख्यात्मक वर्गिकी जैसे नए तरीके विकसित हुए.
🎯 Exam Tip: वर्गीकरण के प्रमुख चरणों और उनमें योगदान देने वाले वैज्ञानिकों के नाम याद रखें. द्विजगत पद्धति की सीमाओं और उसके बाद के विकास को भी समझाएँ.
Question 2. वर्गीकरण के प्रकार एवं विभिन्न वैज्ञानिकों द्वारा दिये। गये वर्गीकरणों की विस्तृत विवेचना कीजिए।
Answer: वर्गीकरण के प्रकार और विभिन्न वैज्ञानिकों द्वारा दिए गए वर्गीकरणों का संक्षिप्त इतिहास:
**(i) द्विजगत पद्धति (Two kingdom system):**
केरोलस लिनियस ने यह पद्धति विकसित की थी. इसमें जीवों को दो जगतों में बाँटा गया था: प्लाण्टी (Plantae) या पादप जगत और ऐनिमेलिया (Animalia) या जंतु जगत. यह पद्धति सरल थी लेकिन प्रोकैरियोटिक और यूकैरियोटिक, एककोशिकीय और बहुकोशिकीय, तथा प्रकाश-संश्लेषी और अप्रकाश-संश्लेषी जीवों के बीच अंतर नहीं कर पाई.
**(ii) त्रिजगत पद्धति (Three kingdom system):**
जर्मन जीवविज्ञानी अर्नेस्ट हेकेल ने त्रिजगत पद्धति प्रस्तुत की, जिसमें "प्रोटिस्टा" (Protista) को तीसरा जगत बनाया, जो न तो पादप था और न ही जंतु. इस पद्धति के अनुसार, प्रोटिस्टा, प्लाण्टी और ऐनिमेलिया तीन जगत थे.
**(iii) चतुर्जगत पद्धति (Four kingdom system):**
इलेक्ट्रॉन माइक्रोस्कोप के आने के बाद यह स्पष्ट हो गया कि जिन जीवों की कोशिकाओं में स्पष्ट केंद्रक नहीं होता, वे प्रोकैरियोट (Prokaryote) कहलाते हैं, और जिनमें स्पष्ट केंद्रक होता है, वे यूकैरियोट्स (Eukaryaryotes) कहलाते हैं. एच.एफ. कॉपलेण्ड ने यह पद्धति दी, जिसमें जीवाणुओं और नीलहरित शैवालों के लिए एक नया जगत "मोनेरा" (Monera) बनाया गया. इस पद्धति के चार जगत थे- मोनेरा, प्रोटिस्टा, प्लाण्टी और ऐनिमेलिया.
**(iv) पंच जगत पद्धति (Five Kingdom system):**
आर.एच. व्हिटेकर (R.H. Whittaker, 1969) ने वर्गीकरण की पंच-जगत प्रणाली प्रस्तुत की. इस प्रणाली में जीवों को वर्गीकृत करने का मुख्य आधार कोशिका संरचना की जटिलता (प्रोकैरियोटिक और यूकैरियोटिक कोशिकाएँ), पोषण विधि, जीवन-चक्र, शारीरिक संगठन की जटिलता (एककोशिकीय और बहुकोशिकीय) तथा जातिवृत्तीय संबंध था. यह पद्धति सबसे ज़्यादा स्वीकार्य है.
वर्गीकरण से जुड़ी कुछ और महत्वपूर्ण अवधारणाएँ:
1. **जातिवृत्त (Phylogeny):** किसी भी जाति की उत्पत्ति से लेकर आज तक की उसकी विकास यात्रा को जातिवृत्त कहा जाता है.
2. **रसायन वर्गिकी (Chemotaxonomy):** इसमें पौधों में पाए जाने वाले विभिन्न महत्वपूर्ण रासायनिक पदार्थों और पौधों द्वारा दिखाए गए रासायनिक गुणों का अध्ययन किया जाता है.
3. **संख्यात्मक वर्गिकी (Numerical taxonomy or Taxometries):** यह एक पादप वर्गीकरण पद्धति है जिसमें पौधों के विभिन्न गुणों को कंप्यूटर की मदद से संख्यात्मक आधार पर विश्लेषण करके उनकी आपसी समानताओं का तुलनात्मक अध्ययन किया जाता है. इसका उपयोग वर्गीकरण के लिए किया जाता है.
In simple words: विभिन्न वैज्ञानिकों ने जीवों को अलग-अलग तरीकों से बांटा: लिनियस ने 2 जगत, हेकेल ने 3 जगत, कॉपलेण्ड ने 4 जगत और व्हिटेकर ने 5 जगत (मोनेरा, प्रोटिस्टा, फंजाई, प्लाण्टी, ऐनिमेलिया) दिए. यह वर्गीकरण कोशिका, पोषण और विकास जैसे गुणों पर आधारित था.
🎯 Exam Tip: प्रत्येक वर्गीकरण पद्धति के मुख्य प्रस्तावक, उसमें शामिल जगतों की संख्या और प्रमुख आधारों को स्पष्ट करें. विभिन्न पद्धतियों के बीच के अंतर को भी बताएँ.
Question 3. वर्गीकरण की पंचजगत पद्धति क्या है ? इस पद्धति के अन्तर्गत आने वाले पाँच जगतों के प्रमुख लक्षण लिखिये।
Answer: पंचजगत पद्धति (Five Kingdom system):
आर.एच. व्हिटेकर (R.H. Whittaker, 1969) ने वर्गीकरण की पंच-जगत प्रणाली प्रस्तुत की थी. इस प्रणाली में जीवों को वर्गीकृत करने का मुख्य आधार कोशिका संरचना की जटिलता (प्रोकैरियोटिक और यूकैरियोटिक कोशिकाएँ), पोषण विधि, जीवन-चक्र, शारीरिक संगठन की जटिलता (एककोशिकीय और बहुकोशिकीय) तथा जातिवृत्तीय संबंध थे. नीचे तालिका 2.1 में इन सभी जगतों के विभिन्न लक्षणों का एक तुलनात्मक विवरण दिया गया है –
| लक्षण (Character) | मॉनेरा (Monera) | प्रोटिस्टा (Protista) | फंजाई (Fungi) | प्लांटी (Plantae) | ऐनिमेलिया (Animalia) |
|---|---|---|---|---|---|
| 1. कोशिका का प्रकार | प्रोकैरियोटिक | यूकैरियोटिक | यूकैरियोटिक | यूकैरियोटिक | यूकैरियोटिक |
| 2. कोशिका भित्ति | सेलूलोज रहित (बहुशर्कराइड) + एमीनो अम्ल | कुछ में उपस्थित | उपस्थित (सेल्युलोस रहित) काइटिन | उपस्थित (सेल्युलोस सहित) | अनुपस्थित |
| 3. केन्द्रक झिल्ली | अनुपस्थित | उपस्थित | उपस्थित | उपस्थित | उपस्थित |
| 4. काय संरचना | एक कोशिक | एक कोशिक | बहुकोशिक/अदृढ़ ऊतक | ऊतक/अंग | ऊतक/अंग/अंग तंत्र |
| 5. पोषण की विधि | स्वपोषी (रसायन-संश्लेषी एवं प्रकाशसंश्लेषी) तथा परपोषी (मृतपोषी एवं परजीवी) | स्वपोषी (प्रकाश परपोषी संश्लेषी) तथा परपोषी | परपोषी (मृतपोषी एवं परजीवी) | स्वपोषी (प्रकाशसंश्लेषी) | परपोषी (प्राणि समभोजी, मृतपोषी इत्यादि) |
| 6. प्रजनन की विधि | संयुग्मन | युग्मक संलयन एवं संयुग्मन | निषेचन | निषेचन | निषेचन |
जातिवृत्त (phylogeny): किसी भी जाति की उत्पत्ति से लेकर आज तक की उसकी विकास यात्रा (evolutionary trends) को जातिवृत्त (phylogeny) कहा जाता है. यह वर्गीकरण का एक महत्वपूर्ण पहलू है.
रसायन वर्गिकी (Chemotaxonomy): रसायन वर्गिकी के अन्तर्गत पौधों में पाए जाने वाले विभिन्न महत्त्वपूर्ण रासायनिक पदार्थों एवं पौधों के द्वारा अभिव्यक्त समग्र रासायनिक लक्षणों का अध्ययन किया जाता है. यह पौधों की पहचान में मदद करता है.
संख्यात्मक वर्गिकी या टेक्सोमेट्रिक्स: यह पादप वर्गीकरण पद्धति है जिसमें पौधों के विभिन्न मानदंडों के अनुरूप मात्रात्मक (Quantitative) लक्षणों को कम्प्यूटर की सहायता से संख्यात्मक (numerical) एवं सांख्यिकी (statistical) आधार पर विश्लेषित करके उनकी आपसी समानताओं का तुलनात्मक अध्ययन किया जाता है. इसका उपयोग वर्गिकी के लिये किया जाता है.
In simple words: व्हिटेकर की पंचजगत पद्धति में मोनेरा, प्रोटिस्टा, फंजाई, प्लाण्टी और ऐनिमेलिया शामिल हैं. यह पद्धति जीवों की कोशिका, शरीर की बनावट, पोषण और प्रजनन जैसे गुणों को देखकर उन्हें अलग-अलग समूहों में रखती है.
🎯 Exam Tip: पंचजगत वर्गीकरण के प्रत्येक जगत के मुख्य लक्षणों को तालिका के रूप में प्रस्तुत करना प्रभावी होता है. इससे तुलना करना और याद रखना आसान होता है.
RBSE Class 11 Biology Chapter 2 अन्य महत्त्वपूर्ण प्रश्न
RBSE Class 11 Biology Chapter 2 वस्तुनिष्ठ प्रश्न
Question 1. वर्गिकी (Taxonomy) शब्द की उत्पत्ति हुई है -
(a) लेटिन भाषा से
Answer: (b) ग्रीक भाषा से
In simple words: 'टैक्सोनॉमी' शब्द ग्रीक भाषा से आया है, जिसका मतलब है जीवों को नियमों के अनुसार बाँटना.
🎯 Exam Tip: वैज्ञानिक शब्दों की व्युत्पत्ति (जैसे टैक्सोनॉमी, बायोलॉजी) को याद रखें, क्योंकि यह अक्सर सीधे पूछे जाते हैं.
Question 2. कोपलेण्ड प्रतिपादित करने वाले थे -
(a) द्विजगत पद्धति
(b) त्रिजगत पद्धति
(c) चतुर्जगत पद्धति
(d) पंचजगत पद्धति
Answer: (c) चतुर्जगत पद्धति
In simple words: वैज्ञानिक कोपलेण्ड ने जीवों के वर्गीकरण के लिए चतुर्जगत पद्धति को प्रस्तुत किया था.
🎯 Exam Tip: वर्गीकरण पद्धतियों और उनके संबंधित वैज्ञानिकों के नाम को सही ढंग से याद करें.
Question 3. डार्विन के विकासवाद पश्चात् कौन-सी पद्धतियाँ प्रतिपादित की गईं –
(a) कृत्रिम
(b) प्राकृतिक
(c) लैंगिक
(d) जातिवृत्तीय
Answer: (d) जातिवृत्तीय
In simple words: डार्विन के विकासवाद के बाद, जीवों के विकासवादी संबंधों पर आधारित जातिवृत्तीय वर्गीकरण पद्धतियाँ आईं.
🎯 Exam Tip: विकासवाद के सिद्धांत और उसके बाद विकसित हुई वर्गीकरण पद्धतियों के बीच के संबंध को समझें.
Question 4. तटस्थजीव जो न तो पादप हैं व न जन्तु हैं, उन्हें किसमें रखा गया
(a) मोनेरा में
(b) प्रोटिस्टा में
(c) प्लाण्टी में
(d) ऐनिमेलिया में
Answer: (b) प्रोटिस्टा में
In simple words: वे जीव जो न पौधे हैं और न जानवर, उन्हें प्रोटिस्टा जगत में रखा गया है.
🎯 Exam Tip: प्रोटिस्टा जगत के जीवों की मुख्य विशेषताओं को याद रखें, जैसे कि उनका एककोशिकीय होना और वे न तो पूरी तरह से पौधे होते हैं और न ही जानवर.
Question 5. जीवाणुओं तथा नील हरित शैवालों को किस जगत में रखा गया है।
(a) प्रोटिस्टा
(b) मोनेरा
(c) प्रोकैरियोटी
(d) प्लांटी
Answer: (b) मोनेरा
In simple words: जीवाणु और नील हरित शैवाल, जो प्रोकैरियोटिक होते हैं, मोनेरा जगत में आते हैं.
🎯 Exam Tip: मोनेरा जगत के जीवों के प्रमुख उदाहरणों को याद रखें, जैसे जीवाणु और नील हरित शैवाल, क्योंकि वे प्रोकैरियोटिक होते हैं.
RBSE Class 11 Biology Chapter 2 अतिलघूत्तरात्मक प्रश्न
Question 1. पादपों के वर्गिकी समूह बताइये।
Answer: पादपों के वर्गिकी समूह में डिवीजन (प्रभाग), वर्ग, गण, कुल, वंश और जाति शामिल हैं. ये समूह जीवों को एक व्यवस्थित क्रम में बाँटते हैं.
In simple words: पौधों के वर्गीकरण समूह हैं: प्रभाग, वर्ग, गण, कुल, वंश और जाति.
🎯 Exam Tip: वर्गीकरण के पदानुक्रम को सही क्रम में याद रखें, यह बुनियादी जीव विज्ञान अवधारणा है.
Question 3. समुद्री घोड़ा क्या होता है ?
Answer: समुद्री घोड़ा एक जलीय जीव है जो समुद्री जल में तैरने वाली एक प्रकार की मछली होती है. यह अपनी अनोखी आकृति और प्रजनन विधि के लिए जाना जाता है.
In simple words: समुद्री घोड़ा समुद्र में तैरने वाली एक खास तरह की मछली है.
🎯 Exam Tip: समुद्री घोड़े की मुख्य पहचान (मछली होना) और उसके आवास (समुद्री जल) पर ध्यान दें.
Question 4. सन् 1960 के पश्चात् वर्गिकी के दो प्रमुख क्षेत्र कौनकौन से हैं?
Answer: सन् 1960 के बाद वर्गिकी के दो प्रमुख क्षेत्र निम्नलिखित हैं:
1. रसायन वर्गिकी (Chemotaxonomy)
2. संख्यात्मक वर्गिकी या टेक्सोमेट्रिक्स (Numerical taxonomy or Taxometrics)
ये दोनों क्षेत्र वर्गीकरण में रासायनिक गुणों और संख्यात्मक डेटा के विश्लेषण पर जोर देते हैं.
In simple words: 1960 के बाद रसायन वर्गिकी और संख्यात्मक वर्गिकी, वर्गीकरण के मुख्य क्षेत्र बन गए.
🎯 Exam Tip: वर्गिकी के आधुनिक क्षेत्रों, जैसे रसायन और संख्यात्मक वर्गिकी, और उनके महत्व को समझें.
Question 5. प्रोकैरियोट तथा यूकैरियोट से आप क्या समझते हैं ?
Answer: **प्रोकैरियोट** वे जीव होते हैं जिनकी कोशिकाओं में स्पष्ट केंद्रक नहीं होता है, यानि उनका आनुवंशिक पदार्थ कोशिकाद्रव्य में फैला रहता है. जैसे- जीवाणु. **यूकैरियोट** वे जीव होते हैं जिनकी कोशिकाओं में एक स्पष्ट और झिल्ली-बद्ध केंद्रक पाया जाता है, जिसमें उनका आनुवंशिक पदार्थ सुरक्षित रहता है. जैसे- पौधे, जानवर और कवक.
In simple words: प्रोकैरियोट में कोशिका का केंद्रक स्पष्ट नहीं होता, जबकि यूकैरियोट में स्पष्ट केंद्रक होता है.
🎯 Exam Tip: प्रोकैरियोट और यूकैरियोट के बीच का मुख्य अंतर, यानि केंद्रक झिल्ली की उपस्थिति या अनुपस्थिति, को स्पष्ट रूप से समझाएँ.
Question 6. सबसे छोटा टैक्सॉन का नाम बताइये।
Answer: सबसे छोटा टैक्सॉन जाति (species) होती है. जाति वर्गीकरण की सबसे बुनियादी इकाई है, जिसमें आपस में प्रजनन करने वाले और उर्वर संतान पैदा करने वाले जीव शामिल होते हैं.
In simple words: जाति (species) वर्गीकरण की सबसे छोटी इकाई है.
🎯 Exam Tip: वर्गीकरण के पदानुक्रम में जाति (species) की स्थिति और उसके महत्व को याद रखें.
RBSE Class 11 Biology Chapter 2 लघूत्तरात्मक प्रश्न
Question 1. केरोलस लिनियस ने वर्गीकरण की किस पद्धति को बताया तथा इसमें क्या कमी थी ?
Answer: केरोलस लिनियस ने द्विजगत पद्धति (Two-Kingdom System) का प्रतिपादन किया था. इस पद्धति में उन्होंने सभी पौधों और प्राणियों को उनकी शारीरिक समानता के आधार पर दो मुख्य जगतों- प्लाण्टी (पौधे) और ऐनिमेलिया (जंतु) में बाँटा था. उनकी पद्धति सरल थी, लेकिन इसमें कई कमियाँ थीं. यह प्रोकैरियोटिक (जैसे जीवाणु) और यूकैरियोटिक (जैसे पौधे और जानवर) जीवों के बीच अंतर नहीं कर पाई थी. साथ ही, यह एककोशिकीय और बहुकोशिकीय जीवों को भी अलग नहीं करती थी. इसके अलावा, यह प्रकाश-संश्लेषी (जैसे शैवाल) और अप्रकाश-संश्लेषी (जैसे कवक) जीवों के बीच भी कोई भेद नहीं करती थी. हालाँकि यह वर्गीकरण सरल था, लेकिन इसकी सीमाओं के कारण कई जीवधारियों को इन दो में से किसी भी वर्ग में ठीक से रखना संभव नहीं हो पाता था.
In simple words: केरोलस लिनियस ने द्विजगत पद्धति दी, जिसमें पौधे और जंतु थे. इसकी कमी यह थी कि यह प्रोकैरियोट, यूकैरियोट, एककोशिकीय, बहुकोशिकीय, प्रकाश-संश्लेषी और अप्रकाश-संश्लेषी जीवों को अलग नहीं करती थी.
🎯 Exam Tip: लिनियस की द्विजगत पद्धति के प्रतिपादक के रूप में उनका नाम और उस पद्धति की मुख्य कमियों को विस्तार से समझाएँ.
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FAQs
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Yes, we provide bilingual support for Class 11 Biology. You can access RBSE Solutions Class 11 Biology Chapter 2 जीवों का वर्गीकरण in both English and Hindi medium.
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