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Detailed Chapter 19 पर्ण-बाह्य आकारिकी RBSE Solutions for Class 11 Biology
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Class 11 Biology Chapter 19 पर्ण-बाह्य आकारिकी RBSE Solutions PDF
RBSE Class 11 Biology Chapter 19 पाठ्यपुस्तक के प्रश्न
RBSE Class 11 Biology Chapter 19 वस्तुनिष्ठ प्रश्न
Question 1. मटर में फलक रूपान्तरित हो जाते हैं -
(क) कांटों में
(ख) शल्कों में
(ग) प्रतान में
(घ) तने में
Answer: (ग) प्रतान में
In simple words: मटर के पौधे में पत्ती का जो चौड़ा भाग होता है, वह एक पतली, घुमावदार संरचना में बदल जाता है जिसे प्रतान कहते हैं. यह पौधे को ऊपर चढ़ने में मदद करता है.
🎯 Exam Tip: याद रखें कि मटर में पत्ती के फलक (lamina) प्रतान में बदलते हैं, जबकि कुछ अन्य पौधों में तने या पत्ती के अन्य भाग प्रतान में बदल सकते हैं.
Question 2. फूला हुआ पर्णाधार कहलाता है -
(क) पर्णवृन्त तल्प
(ख) आच्छादी
(ग) गेहूं में
(घ) बरगद में
Answer: (क) पर्णवृन्त तल्प
In simple words: जब पत्ती का निचला आधार वाला हिस्सा फूलकर मोटा हो जाता है, तो उसे पर्णवृन्त तल्प या पुलविनस कहते हैं. यह पत्ती को हिलने-डुलने में मदद करता है, खासकर फलीदार पौधों में.
🎯 Exam Tip: पर्णवृन्त तल्प (Pulvinus) की पहचान उसकी फूली हुई संरचना से होती है, जो पत्तियों की गति में भूमिका निभाती है.
Question 4. घटपादप में घट पर्ण के किस भाग का रूपान्तरण है -
(क) पर्ण शीर्ष का
(ख) पर्णफलक का
(ग) पर्ण वृन्त का
(घ) अक्ष का
Answer: (ख) पर्णफलक का
In simple words: घटपादप में, पत्ती का जो चौड़ा हरा हिस्सा होता है, वह घड़े के आकार में बदल जाता है. इसी घड़े में कीट फंसते हैं.
🎯 Exam Tip: कीटभक्षी पौधों में विभिन्न पत्ती रूपांतरणों को याद रखें, जैसे घटपादप में पर्णफलक और वीनस फ्लाईट्रैप में पत्ती का पूरा भाग.
Question 5. पर्णाभवृन्त रूपान्तरण है -
(क) पर्णवृन्त का
(ख) पर्णाधार का
(ग) पर्ण शीर्ष का
(घ) शाखा का
Answer: (क) पर्णवृन्त का
In simple words: पर्णाभवृन्त तब बनता है जब पत्ती का डंठल (पर्णवृन्त) चपटा और हरा होकर पत्ती जैसा दिखना शुरू हो जाता है. यह असली पत्ती के छोटे होने या गिर जाने पर प्रकाश संश्लेषण का काम करता है.
🎯 Exam Tip: पर्णाभवृन्त (Phyllode) को याद रखने के लिए, इसे पत्ती के डंठल का रूपांतरण समझें जो पत्ती की तरह दिखता है और कार्य करता है.
Question 6. बहुपिच्छकी संयुक्त पर्ण का उदाहरण है -
(क) सहजन
(ख) बबूल
(ग) इमली
(घ) गाजर
Answer: (घ) गाजर
In simple words: बहुपिच्छकी संयुक्त पत्ती वह होती है जिसमें एक बड़ी पत्ती कई बार छोटे-छोटे पत्तों में बँटी होती है, जैसे गाजर की पत्ती में होता है.
🎯 Exam Tip: संयुक्त पत्तियों के विभिन्न प्रकारों को उनके उदाहरणों के साथ याद रखना महत्वपूर्ण है, जैसे पिच्छाकार (pinnate) और हस्ताकार (palmate) पत्तियां.
Question 7. पर्णक प्रतान का उदाहरण है -
(क) मटर
(ख) गोभी
(ग) गाजर
(घ) आलू
Answer: (क) मटर
In simple words: पर्णक प्रतान एक प्रकार का प्रतान होता है जो पत्ती के छोटे-छोटे हिस्सों (पर्णकों) के बदलने से बनता है. मटर के पौधे में ऐसा ही होता है, जिससे वह सहारे पर चढ़ सके.
🎯 Exam Tip: पर्णक प्रतान और पत्ती प्रतान के बीच का अंतर समझें; पर्णक प्रतान में पत्ती के छोटे भाग रूपांतरित होते हैं, जबकि पत्ती प्रतान में पूरी पत्ती.
RBSE Class 11 Biology Chapter 19 अतिलघूत्तरात्मक प्रश्न
Question 1. जालिकावत शिराविन्यास किन पौधों में मिलता है ?
Answer: जालिकावत शिराविन्यास मुख्य रूप से द्विबीजपत्री पौधों की पत्तियों में पाया जाता है. इन पत्तियों में शिराएँ एक जाल जैसा पैटर्न बनाती हैं, जैसे पीपल या आम में.
🎯 Exam Tip: जालिकावत शिराविन्यास द्विबीजपत्री पौधों की एक पहचान है, इसे समानांतर शिराविन्यास (जो एकबीजपत्री में होता है) से अलग करना सीखें.
Question 2. फूला हुआ स्पंजी पर्णवृन्त किस पादप में मिलता है?
Answer: फूला हुआ स्पंजी पर्णवृन्त जलकुम्भी (Eichhornia) जैसे जलीय पौधों में मिलता है. यह उन्हें पानी पर तैरने में मदद करता है क्योंकि इसमें हवा भरी होती है. जलकुम्भी अपने सुंदर फूलों के लिए जाना जाता है.
🎯 Exam Tip: जलीय पौधों के अनुकूलन को याद रखें, जैसे जलकुम्भी में स्पंजी पर्णवृन्त जो उत्प्लावन (तेरने में मदद) प्रदान करता है.
Question 3. प्याज में खाद्य संग्रह पौधे के किस भाग में होता है ?
Answer: प्याज में खाद्य संग्रह उसके मांसल पर्ण (fleshy leaves) में होता है. ये पत्तियां छोटी और मोटी होती हैं और भोजन को जमा करती हैं, जिससे प्याज बल्ब जैसा दिखाई देता है. प्याज का बल्ब असल में रूपांतरित पत्तियां और तना होता है.
🎯 Exam Tip: प्याज एक रूपांतरित तना और पत्ती का उदाहरण है, जहां भोजन का भंडारण मांसल पत्तियों में होता है.
Question 4. पर्ण के विभिन्न भागों को नामांकित चित्र से बताइये।
Answer: पर्ण के मुख्य भागों में पर्णाधार (leaf base), पर्णवृन्त (petiole) और पर्णफलक (leaf blade) शामिल हैं. पर्णाधार पत्ती को तने से जोड़ता है, पर्णवृन्त पत्ती को सहारा देता है, और पर्णफलक हरा, चपटा भाग होता है जो प्रकाश संश्लेषण करता है. कुछ पत्तियों में अनुपर्ण (stipules) भी होते हैं.In simple words: पत्ती के तीन मुख्य हिस्से होते हैं: सबसे नीचे का आधार जो तने से जुड़ता है, बीच में डंठल और ऊपर का चौड़ा, हरा पत्ती का भाग.
🎯 Exam Tip: एक पत्ती के सभी भागों के नाम और उनके कार्यों को याद रखें, विशेषकर पर्णाधार, पर्णवृन्त और पर्णफलक.
एक प्रारूपिक पर्ण के विभिन्न अंग।
Question 5. एकान्तर व सम्मुख प्रकार के पर्णविन्यास में मुख्य अन्तर क्या है ?
Answer:
एकान्तर पर्णविन्यास में, तने की प्रत्येक गाँठ (पर्णसंधि) पर केवल एक पत्ती लगती है. ये पत्तियाँ एक-दूसरे से उलट दिशा में, एक के बाद एक लगी होती हैं. जैसे, अगर एक पत्ती दाईं ओर है, तो अगली बाईं ओर होगी.
सम्मुख पर्णविन्यास में, तने की प्रत्येक गाँठ पर दो पत्तियाँ एक-दूसरे के ठीक सामने लगी होती हैं. ये दोनों पत्तियाँ एक ही स्तर पर होती हैं और एक-दूसरे के विपरीत होती हैं.In simple words: एकान्तर में एक गाँठ पर एक पत्ती होती है, जो दूसरी से अलग दिशा में होती है. सम्मुख में एक गाँठ पर दो पत्तियाँ एक-दूसरे के सामने होती हैं.
🎯 Exam Tip: पर्णविन्यास के प्रकारों को याद रखने के लिए, उनकी परिभाषाओं के साथ-साथ उदाहरणों पर भी ध्यान दें, जैसे एकान्तर में सूरजमुखी और सम्मुख में अमरूद.
RBSE Class 11 Biology Chapter 19 लघूत्तरात्मक प्रश्न
Question 1. शाखा व संयुक्त पर्ण में विभेद बताइये।
Answer: शाखा और संयुक्त पत्ती में मुख्य अंतर नीचे दी गई तालिका में बताया गया है:
| शाखा (Branch) | संयुक्त पत्ती (Compound Leaf) |
|---|---|
| 1. प्रत्येक शाखा कक्षस्थ कलिका से निकलती है। | 1. संयुक्त पत्ती में रेकिस (मध्य शिरा) की कक्ष में कक्षस्थ कलिका पाई जाती है। |
| 2. शाखा कभी पत्ती में समाप्त नहीं होती है। | 2. संयुक्त पत्ती कभी-कभी पत्रक में समाप्त होती है, जैसे विषम पिच्छाकर पत्ती। |
| 3. शाखा के अन्त में अग्रस्थ कलिका होती है। | 3. संयुक्त पत्ती में अग्रस्थ कलिका नहीं होती है। |
| 4. शाखा में सरल पत्ती के कक्ष में कक्षस्थ कलिका होती है। | 4. संयुक्त पत्ती के पत्रक के कक्ष में कक्षस्थ कलिका नहीं मिलती है। |
| 5. शाखा में पर्व (internode) तथा पर्वसन्धियाँ मिलती हैं। | 5. संयुक्त पत्ती में पर्व अथवा पर्व सन्धियाँ नहीं मिलती हैं। |
| 9. शाखा पर पत्तियाँ अग्राभिसारी क्रम में नहीं लगती हैं। | 9. संयुक्त पत्ती में पत्रक अग्राभिसारी क्रम में लगती हैं, यानी नई पत्ती ऊपर की ओर होती है। |
🎯 Exam Tip: शाखा और संयुक्त पत्ती के मुख्य अंतरों को याद रखने के लिए, उन दोनों के बीच कक्षस्थ कलिका की उपस्थिति और पर्व व पर्वसन्धियों की पहचान पर ध्यान दें.
Question 2. विभिन्न प्रकार के पर्णों के नाम लिखिये।
Answer: पर्णों के कई प्रकार होते हैं, जिनमें से प्रमुख निम्नलिखित हैं:
- पर्णिल पर्ण (Foliage leaves): ये सामान्य हरे रंग की पत्तियां होती हैं जो प्रकाश संश्लेषण करती हैं, जैसे अधिकतर पेड़ों की पत्तियां.
- बीजपत्री पर्ण (Cotyledonary leaves): ये पत्तियां बीज में भ्रूण के साथ जुड़ी होती हैं और बीज के अंकुरण के समय सबसे पहले बाहर निकलती हैं.
- शल्क पर्ण (Scaly leaves or cataphylls): ये भूरे या झिल्लीदार पत्तियां होती हैं, जो अक्सर भूमिगत तनों पर मिलती हैं. इनका मुख्य काम कक्षस्थ कलिका को सुरक्षा देना होता है.
- सहपत्री पर्ण या सहपत्र (Bract leaves or Bract): इनके कक्ष में फूल विकसित होता है. ये हरे या रंगीन हो सकती हैं, जैसे बोगनवेलिया में.
- पुष्पी पर्ण (Floral leaves): ये पत्तियां फूलों के विभिन्न भागों, जैसे बाह्यदल (sepals), दल (petals), पुंकेसर (stamens) और स्त्रीकेसर (carpels) में बदल जाती हैं.
- बीजाणुपर्ण (Sporophylls): ये विशेष पत्तियां होती हैं जिन पर बीजाणु बनते हैं, जो पौधों के प्रजनन में मदद करते हैं.
🎯 Exam Tip: पत्ती के प्रत्येक प्रकार को उसके कार्य और एक उदाहरण के साथ याद रखें, यह वर्गीकरण को समझने में मदद करता है.
Question 3. हैटरोफिली किसे कहते हैं ? उदाहरण बताइये।
Answer: हैटरोफिली (Heterophylly) उस स्थिति को कहते हैं जब एक ही पौधे में दो या दो से अधिक अलग-अलग तरह की पत्तियां पाई जाती हैं. ये पत्तियां आकार, आकृति या यहाँ तक कि कार्य में भी भिन्न हो सकती हैं. उदाहरण के लिए, जलीय पादप रैननकुलस (Ranunculus) और सेजिटेरिया (Sagittaria) में ऐसा होता है, जहाँ पानी के अंदर और बाहर की पत्तियां अलग-अलग दिखती हैं.In simple words: हैटरोफिली मतलब एक ही पौधे पर अलग-अलग तरह की पत्तियां होना. जैसे, कुछ पौधों में पानी के अंदर और बाहर की पत्तियां अलग दिखती हैं.
🎯 Exam Tip: हैटरोफिली को याद रखने के लिए, इसके उदाहरणों पर ध्यान दें जो पर्यावरणीय अनुकूलन दिखाते हैं, जैसे पानी के अंदर और बाहर पत्तियों का अलग होना.
Question 4. सम्मुख अध्यारोपित व सम्मुख क्रॉसित में अन्तर बताइये।
Answer: सम्मुख अध्यारोपित और सम्मुख क्रॉसित दोनों ही प्रकार के पर्णविन्यास में प्रत्येक गाँठ (पर्वसन्धि) पर दो पत्तियां एक-दूसरे के सामने (सम्मुख) लगी होती हैं. लेकिन उनमें मुख्य अंतर यह है:
सम्मुख क्रॉसित (Decussate) में, पत्तियों के जोड़े एक-दूसरे से 90° का कोण बनाते हैं. इसका मतलब है कि एक गाँठ पर लगी पत्तियों का जोड़ा, उससे ठीक ऊपर या नीचे वाली गाँठ पर लगे पत्तियों के जोड़े से समकोण पर होता है. अगर ऊपर से देखें तो पत्तियां चार खड़ी कतारों में दिखती हैं, जैसे तुलसी में.
सम्मुख अध्यारोपित (Superposed) में, पत्तियों के ऊपरी और निचले जोड़े एक ही सीधी रेखा में होते हैं. यानी, ऊपर की गाँठ पर लगी पत्तियां ठीक नीचे वाली गाँठ पर लगी पत्तियों के ऊपर सीधी आती हैं.In simple words: दोनों में दो पत्तियां आमने-सामने होती हैं. सम्मुख क्रॉसित में हर अगली जोड़ी पत्तियां पिछली जोड़ी से 90 डिग्री घूम जाती हैं, जबकि सम्मुख अध्यारोपित में पत्तियां एक-दूसरे के ठीक ऊपर सीधी कतार में होती हैं.
🎯 Exam Tip: सम्मुख पर्णविन्यास के उपप्रकारों को समझने के लिए, पत्तियों के जोड़ों के बीच के कोण पर ध्यान दें; क्रॉसित में 90° का घुमाव और अध्यारोपित में सीधी कतार होती है.
RBSE Class 11 Biology Chapter 19 निबन्धात्मक प्रश्न
Question 1. पर्णवृन्त के विभिन्न रूपान्तरणों का चित्र सहित वर्णन कीजिये।
Answer: पर्णवृन्त (पत्ती का डंठल) पौधे की ज़रूरतों के हिसाब से कई तरह से बदल सकता है. इसके कुछ मुख्य रूपांतरण (modification) इस प्रकार हैं:
- पक्षवत पर्णवृन्त (Winged Petiole): इस प्रकार में, पर्णवृन्त पंख जैसा चपटा और हरा हो जाता है. यह पत्ती के भाग जैसा दिखता है और प्रकाश संश्लेषण में मदद करता है. उदाहरण: नींबू, नारंगी, चकोतरा.
- प्रतानीय पर्णवृन्त (Tendrillar Petiole): पर्णवृन्त पतला और कुंडलित (coiled) होकर प्रतान में बदल जाता है. यह पौधे को सहारे पर चढ़ने में मदद करता है. उदाहरण: क्लीमेटिस (Clematis), कलश पादप (Pitcher plant), उद्यान नैस्टरनियम (Garden nasturtium).
पर्णवृन्त के रूपान्तरण - A. स्पंजी पर्णवृन्त, B. पक्षवत् पर्णवृन्त तथा C. प्रतानीय पर्णवृन्त ।
- स्पंजी पर्णवृन्त (Spongy Petiole): पर्णवृन्त फूलकर मोटा और स्पंजी हो जाता है. इसमें हवा भरी होने के कारण यह जलीय पौधों को पानी पर तैरने में मदद करता है. उदाहरण: सिंघाड़ा (Trapa bispinosa), जलकुम्भी.
- पर्णाभवृन्त (Phyllode): पर्णवृन्त चपटा, हरा और पत्ती जैसा दिखने वाला हो जाता है, खासकर जब असली पत्तियां छोटी या गिर जाती हैं. यह प्रकाश संश्लेषण करता है और पानी के वाष्पीकरण को कम करता है. उदाहरण: ऑस्ट्रेलियन अकेसिया (Australian Acacia = Acacia melanoxylon).
🎯 Exam Tip: पर्णवृन्त के प्रत्येक रूपांतरण को उसके कार्य और विशिष्ट उदाहरण के साथ याद रखें. यह पौधों के अनुकूलन को समझने में मदद करेगा.
Question 2. शिराविन्यास किसे कहते हैं ? विभिन्न प्रकार के शिराविन्यासों को समझाइये।
Answer: शिराविन्यास (Venation) पत्ती के पर्णफलक (leaf blade) में शिराओं और शिराकाओं (veinlets) के जमने के तरीके को कहते हैं. यह शिराएं पानी और खनिजों को पहुंचाती हैं और भोजन को पत्तियों से बाहर ले जाती हैं. शिराविन्यास मुख्य रूप से दो प्रकार का होता है:
(अ) जालिकावत शिराविन्यास (Reticulate Venation):
इस शिराविन्यास में शिराएं एक जाल जैसा पैटर्न बनाती हैं. यह मुख्य रूप से द्विबीजपत्री पौधों में पाया जाता है और दो प्रकार का होता है:
- एकशिरीय जालिकावत (Unicostate Reticulate): इसमें केवल एक मुख्य शिरा (मध्य शिरा) होती है जिससे बाकी सभी शाखाएं निकलती हैं और एक जाल बनाती हैं. उदाहरण: पीपल, आम.
- बहुशिरीय जालिकावत (Multicostate Reticulate): इसमें पत्ती के आधार से दो या दो से अधिक मुख्य शिराएं निकलती हैं. यह भी दो प्रकार का होता है:
- बहुशिरीय जालिकावत अभिसारी (Multicostate Reticulate Convergent): मुख्य शिराएं निकलने के बाद पहले बाहर की ओर बढ़ती हैं और फिर पत्ती के ऊपरी सिरे पर एक-दूसरे के पास आ जाती हैं. उदाहरण: बेर (Zizyphus).
- बहुशिरीय जालिकावत अपसारी (Reticulate Multicostate Divergent): सभी शिराएं एक-दूसरे से दूर बाहर की ओर बढ़ती हैं. उदाहरण: अरण्डी (Castor), खीरा (Cucurbita).
एकशिरीय शिराविन्यास : A. समानान्तर (parallel), B. जालिका-रूपी (reticulate)।
(ब) समानान्तर शिराविन्यास (Parallel Venation):
इस शिराविन्यास में शिराएं एक-दूसरे के समानांतर चलती हैं और जाल नहीं बनाती हैं. यह मुख्य रूप से एकबीजपत्री पौधों में पाया जाता है. यह भी दो प्रकार का होता है:
- एकशिरीय समानान्तर (Unicostate Parallel): इसमें एक मुख्य शिरा होती है जिससे कई पार्श्व शिराएं निकलकर एक-दूसरे के समानांतर चलती हैं. उदाहरण: केला.
- बहुशिरीय समानान्तर (Multicostate Parallel): इसमें पत्ती के आधार से कई मुख्य शिराएं निकलती हैं और एक-दूसरे के समानांतर चलती हैं. यह भी दो प्रकार का होता है:
- बहुशिरीय समानान्तर अभिसारी (Multicostate Parallel Convergent): शिराएं पत्ती के ऊपरी सिरे पर मिलती हैं. उदाहरण: बाँस, घास.
- बहुशिरीय समानान्तर अपसारी (Multicostate Parallel Divergent): शिराएं पत्ती के किनारे की ओर बढ़ती हैं. उदाहरण: फैन पाम (fan palm).
🎯 Exam Tip: शिराविन्यास के प्रकारों को याद रखें और प्रत्येक का एक उदाहरण भी दें. शिराओं के पैटर्न से आप पौधे के प्रकार (एकबीजपत्री या द्विबीजपत्री) को पहचान सकते हैं.
बहुशिरीय शिराविन्यास : A. समानान्तर अभिसारी (parallel convergent), B. समानान्तर अपसारी (parallel divergent), C. जालिकारूपी अभिसारी (reticulate convergent), D. जालिकारूपी अपसारी (reticulate divergent)।
Question 3. सरल पर्ण व संयुक्त पर्ण में अन्तर बताइये। विभिन्न प्रकार के संयुक्त पर्यो को चित्र सहित समझाइये।
Answer: सरल पत्ती और संयुक्त पत्ती में अंतर:
| सरल पत्ती (Simple Leaf) | संयुक्त पत्ती (Compound Leaf) |
|---|---|
| 1. इसमें केवल एक पर्णफलक (leaf blade) होता है. | 1. इसमें कई पर्णफलक, जिन्हें पत्रक (leaflet) कहते हैं, मिलते हैं. |
| 2. पत्ती के कक्ष (axil) में कक्षस्थ कलिका (axillary bud) मिलती है. | 2. रेकिस (rachis) के कक्ष में कक्षस्थ कलिका होती है, लेकिन पत्रकों के कक्ष में नहीं मिलती है. |
| 3. इसके आधार पर अनुपर्ण (stipule) मिल सकते हैं. | 3. इसमें अनुपर्ण नहीं मिलते हैं. |
संयुक्त पत्तियां दो मुख्य प्रकार की होती हैं:
(अ) हस्ताकार संयुक्त पत्तियाँ (Palmately Compound Leaves):
इनमें सभी पत्रक एक ही बिंदु से निकलते हैं, जैसे हथेली से उंगलियां निकलती हैं. ये कई तरह की होती हैं:
- एकपर्णी (Unifoliate): इसमें केवल एक पत्रक होता है जो पर्णवृन्त से जुड़ा होता है. उदाहरण: सिट्रस (citrus).
- द्विपर्णी (Bifoliate): पर्णवृन्त के साथ केवल दो पत्रक जुड़े होते हैं. उदाहरण: प्रिंसेपिया (prinsepia).
- त्रिपर्णी (Trifoliate): पर्णवृन्त के साथ तीन पत्रक जुड़े होते हैं. उदाहरण: मैडिकागो (Medicago).
- चतुष्पर्णी (Quadrifoliate): पर्णवृन्त के साथ चार पत्रक जुड़े होते हैं. उदाहरण: मार्सीलिया (Marsilea).
- बहुपर्णी (Multifoliate): इसमें पाँच या इससे अधिक पत्रक पर्णवृन्त के साथ जुड़कर उंगलियों की तरह फैले रहते हैं. उदाहरण: सिमल (silk cotton tree), बॉम्बेक्स (Bombax).
हस्ताकार संयुक्त पत्तियाँ (palmately compound leaves) : A. एकपर्णी (unifoliate), B. द्विपर्णी (bifoliate), C. त्रिपर्णी (trifoliate), D. चतुष्पर्णी (quadrifoliate), E. बहुपर्णी (multifoliate)।
(ब) पिच्छाकार संयुक्त पत्ती (Pinnately Compound Leaf):
इनमें पत्रक मध्य शिरा (जिसे रेकिस कहते हैं) के दोनों ओर लगे होते हैं, जैसे इमली में. ये निम्न प्रकार की होती हैं:
- एकपिच्छकी (Unipinnate): इसमें पत्रक सीधे मध्यशिरा के दोनों ओर जुड़े होते हैं. यह दो प्रकार की हो सकती है:
- समपिच्छकी (Paripinnate): इसमें पत्रकों की संख्या सम (even) होती है. उदाहरण: अमलतास (Cassia fistula).
- विषमपिच्छकी (Imparipinnate): इसमें पत्रकों की संख्या विषम (odd) होती है. उदाहरण: गेन्दा (Tagetus).
- द्विपिच्छकी (Bipinnate): इसमें मध्य शिरा दो बार विभाजित होती है, और पत्रक द्वितीयक अक्षों पर लगे होते हैं. उदाहरण: बबूल (Acacia), छुईमुई (Mimosa).
- त्रिपिच्छकी (Tripinnate): इसमें मध्य शिरा तीन बार विभाजित होती है, और पत्रक तृतीयक अक्षों पर लगे होते हैं. उदाहरण: मोरिंगा (Moringa).
- पुनर्विभाजित (Decompound): एक ऐसी पिच्छाकार संयुक्त पत्ती जो तीन से अधिक बार विभाजित हो जाती है. उदाहरण: धनिया (Coriandrum).
पिच्छाकार संयुक्त पत्तियाँ (pinnately compound leaves) : A. एकपिच्छकी समपिच्छकी (unipinnate paripinnate), B. एकपिच्छकी विषमपिच्छकी (unipinnate imparipinnate), C. द्विपिच्छकी (bipinnate), D. त्रिपिच्छकी (tripinnate), E. पुनर्विभाजित (decompound)।
In simple words: सरल पत्ती में एक ही पूरा पत्ता होता है, जबकि संयुक्त पत्ती में कई छोटे-छोटे पत्ते (पत्रक) होते हैं. संयुक्त पत्तियां दो तरह की होती हैं: हस्ताकार (हथेली जैसी) जहाँ सारे छोटे पत्ते एक जगह से निकलते हैं, और पिच्छाकार (पंख जैसी) जहाँ छोटे पत्ते एक सीधी डंडी पर दोनों तरफ लगे होते हैं.
🎯 Exam Tip: सरल और संयुक्त पत्ती के बीच के अंतर को स्पष्ट रूप से समझें. संयुक्त पत्तियों के उपप्रकारों और उनके उदाहरणों को याद रखना बहुत महत्वपूर्ण है.
Question 4. पर्णों के कार्यों पर विस्तृत टिप्पणी लिखिये।
Answer: पत्तियाँ पौधों के लिए बहुत महत्वपूर्ण अंग हैं और कई तरह के कार्य करती हैं:
- प्रकाश-संश्लेषण (Photosynthesis): पत्तियों का सबसे मुख्य काम प्रकाश संश्लेषण द्वारा भोजन बनाना है. पत्तियों में हरा रंगद्रव्य (क्लोरोफिल) होता है जो सूर्य के प्रकाश को सोखता है, और हवा से कार्बन डाइऑक्साइड व जड़ों से पानी लेकर अपना भोजन बनाती हैं.
- गैसों का आदान-प्रदान (Exchange of Gases): पत्तियों की सतह पर छोटे-छोटे छेद होते हैं जिन्हें पर्ण रंध्र (stomata) कहते हैं. इन्हीं रंध्रों से पौधे ऑक्सीजन लेते और कार्बन डाइऑक्साइड छोड़ते हैं, और प्रकाश संश्लेषण के दौरान कार्बन डाइऑक्साइड लेते और ऑक्सीजन छोड़ते हैं.
- दीप्तिकालिक संवेदन (Photoperiodic Sensing): पत्तियां प्रकाश की अवधि (photoperiod) को महसूस करने वाले अंग के रूप में काम करती हैं. ये प्रकाश उद्दीपनों को ग्रहण करती हैं और पुष्पीय हार्मोन (फ्लोरीजन) का निर्माण करती हैं, जो फूलों के खिलने को नियंत्रित करता है.
- वाष्पोत्सर्जन (Transpiration): पर्ण रंध्रों से पानी वाष्प के रूप में बाहर निकलता है. यह प्रक्रिया पौधों के तापमान को नियंत्रित करने में मदद करती है और जड़ों से पानी ऊपर खींचने (रसारोहण) में भी सहायक होती है.
- विशिष्ट कार्य (Specialized Functions): कुछ पत्तियां विशेष कार्यों के लिए रूपांतरित हो जाती हैं, जैसे:
- खाद्य संग्रह: प्याज की मांसल पत्तियां भोजन का भंडारण करती हैं.
- सुरक्षा: नागफनी की पत्तियां कांटों में बदलकर पौधे की जानवरों से रक्षा करती हैं.
- आरोहण: मटर में पत्ती के प्रतान पौधे को चढ़ने में मदद करते हैं.
- कीट पकड़ना: घटपादप और वीनस फ्लाईट्रैप की पत्तियां कीटों को पकड़कर अपना पोषण करती हैं.
- कायिक प्रवर्धन: अजूबा (Bryophyllum) की पत्तियों के किनारों से नए पौधे निकल सकते हैं.
🎯 Exam Tip: पत्तियों के सभी प्रमुख कार्यों को एक-एक करके याद करें और प्रत्येक कार्य का एक संक्षिप्त उदाहरण भी दें. यह आपको पूर्ण अंक दिलाने में मदद करेगा.
Question 5. कीटहारी पादपों का सचित्र वर्णन कीजिये।
Answer: कीटहारी पादप ऐसे पौधे होते हैं जो अपने पोषण के लिए कीटों को पकड़ते और पचाते हैं, खासकर जब उन्हें मिट्टी से नाइट्रोजन नहीं मिल पाती. यहाँ दो कीटहारी पादपों का वर्णन है:
(अ) घटपादप (Pitcher Plant - Nepenthes):
घटपादप एक कीटभक्षी पौधा है जो प्रोटीन की कमी को पूरा करने के लिए कीटों को फंसाता है. इसमें पत्तियां घड़े या कलश जैसी संरचना में बदल जाती हैं. पत्ती का पर्णफलक (leaf blade) घड़े का रूप ले लेता है, और पत्ती का शीर्ष भाग ढक्कन में बदल जाता है जो घड़े को ढक लेता है. पर्णवृन्त (petiole) प्रतान में रूपांतरित होकर घड़े को सहारा देता है. पत्ती का आधार भाग हरा और चपटा होता है, जो प्रकाश संश्लेषण का काम करता है.
घड़े की भीतरी सतह पर नीचे की ओर झुके हुए रोम होते हैं जो कीटों को बाहर निकलने से रोकते हैं. अंदर की चिकनी सतह पर पाचक ग्रंथियां होती हैं. जैसे ही कोई कीट ढक्कन पर बैठता है, वह फिसलकर घड़े में गिर जाता है और ढक्कन बंद हो जाता है. कीट बाहर निकलने की कोशिश करता है, लेकिन रोम उसे फंसा लेते हैं. पाचक ग्रंथियां रस निकालती हैं जो कीट का पाचन कर देता है.
A. घटपादप (Nepenthes) तथा B. एक कलश Pitcher)।
(ब) यूट्रीकुलेरिया या ब्लेडरवर्ट (Utricularia or Bladderwort):
यूट्रीकुलेरिया एक जलीय कीटभक्षी पौधा है जो पानी की सतह के नीचे तैरता है. इसकी पत्तियां कटी-फटी होती हैं. इन पत्तियों के कुछ खंड फूलकर छोटे गुब्बारे जैसी संरचना (ब्लेडर) बन जाते हैं. ब्लेडर के अगले भाग में नुकीले रोम के साथ एक छोटा छेद होता है, जो संवेदनशील रोम (sensitive hairs) से ढका रहता है. जैसे ही कोई छोटा कीट या पानी में रहने वाला जीव इन रोमों को छूता है, ब्लेडर का छेद खुल जाता है और पानी के साथ कीट अंदर खींच लिया जाता है. छेद तुरंत बंद हो जाता है ताकि कीट बाहर न निकल पाए, और ब्लेडर के अंदर उसका पाचन हो जाता है.
कीटहारी पादप युट्रीकुलेरिया ।
In simple words: कीटहारी पौधे ऐसे होते हैं जो कीटों को खाते हैं. घटपादप में पत्तियां घड़े जैसी बन जाती हैं और कीट उसमें फंस जाते हैं. यूट्रीकुलेरिया में पत्तियां छोटे गुब्बारों जैसी होती हैं जो पानी के जीवों को अंदर खींच लेती हैं.
🎯 Exam Tip: कीटहारी पौधों के प्रत्येक उदाहरण को उसकी विशेष कीट पकड़ने वाली संरचना और वह कैसे काम करती है, के साथ याद रखें. उनके अनुकूलन पर विशेष ध्यान दें.
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RBSE Solutions Class 11 Biology Chapter 19 पर्ण-बाह्य आकारिकी
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Detailed Explanations for Chapter 19 पर्ण-बाह्य आकारिकी
Our expert teachers have provided step-by-step explanations for all the difficult questions in the Class 11 Biology chapter. Along with the final answers, we have also explained the concept behind it to help you build stronger understanding of each topic. This will be really helpful for Class 11 students who want to understand both theoretical and practical questions. By studying these RBSE Questions and Answers your basic concepts will improve a lot.
Benefits of using Biology Class 11 Solved Papers
Using our Biology solutions regularly students will be able to improve their logical thinking and problem-solving speed. These Class 11 solutions are a guide for self-study and homework assistance. Along with the chapter-wise solutions, you should also refer to our Revision Notes and Sample Papers for Chapter 19 पर्ण-बाह्य आकारिकी to get a complete preparation experience.
FAQs
The complete and updated RBSE Solutions Class 11 Biology Chapter 19 पर्ण-बाह्य आकारिकी is available for free on StudiesToday.com. These solutions for Class 11 Biology are as per latest RBSE curriculum.
Yes, our experts have revised the RBSE Solutions Class 11 Biology Chapter 19 पर्ण-बाह्य आकारिकी as per 2026 exam pattern. All textbook exercises have been solved and have added explanation about how the Biology concepts are applied in case-study and assertion-reasoning questions.
Toppers recommend using RBSE language because RBSE marking schemes are strictly based on textbook definitions. Our RBSE Solutions Class 11 Biology Chapter 19 पर्ण-बाह्य आकारिकी will help students to get full marks in the theory paper.
Yes, we provide bilingual support for Class 11 Biology. You can access RBSE Solutions Class 11 Biology Chapter 19 पर्ण-बाह्य आकारिकी in both English and Hindi medium.
Yes, you can download the entire RBSE Solutions Class 11 Biology Chapter 19 पर्ण-बाह्य आकारिकी in printable PDF format for offline study on any device.