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Detailed Chapter 18 तना-बाह्य आकारिकी RBSE Solutions for Class 11 Biology
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Class 11 Biology Chapter 18 तना-बाह्य आकारिकी RBSE Solutions PDF
RBSE Class 11 Biology Chapter 18 पाठ्यपुस्तक के प्रश्न
RBSE Class 11 Biology Chapter 18 वस्तुनिष्ठ प्रश्न
Question 1. तने में शाखाओं की उत्पत्ति होती है -
(क) अन्तर्जात
(ख) बहिर्जात
(ग) पर्ण से
(घ) मूलशीर्ष से
Answer: (ख) बहिर्जात
In simple words: तने की शाखाएँ बाहर की तरफ से निकलती हैं। यह एक सामान्य प्रक्रिया है जिसमें नए हिस्से बाहर की सतह से बनते हैं।
🎯 Exam Tip: पादप विज्ञान में, बहिर्जात वृद्धि का मतलब है कि कोई संरचना बाहरी ऊतक से विकसित होती है, जो शाखाओं के लिए सही है।
Question 2. कुछ स्तम्भों पर मिलने वाली धागे सदृश्य संरचना है -
(क) शूल
(ख) प्रतान
(ग) नागफनी
(घ) पान
Answer: (ख) प्रतान
In simple words: कुछ पौधों में पतले, धागे जैसे हिस्से होते हैं जो सहारा लेने और ऊपर चढ़ने में मदद करते हैं। इन्हें प्रतान कहते हैं।
🎯 Exam Tip: प्रतान आमतौर पर कमजोर तने वाले पौधों में पाए जाते हैं, जैसे बेलें, जो दूसरे पौधों या संरचनाओं पर चढ़कर बढ़ती हैं।
Question 4. जलकुंभी उदाहरण है -
(क) भूस्तारी
(ख) अन्त: भूस्तारी
(ग) भूस्तारिका
(घ) उपरी भूस्तारी
Answer: (ग) भूस्तारिका
In simple words: जलकुंभी एक पानी का पौधा है जो भूस्तारिका तरीके से बढ़ता है। इसका मतलब है कि यह छोटे, मोटे, एक पर्व वाले तनों से फैलता है।
🎯 Exam Tip: भूस्तारिका जल पौधों में तेजी से प्रजनन करने का एक तरीका है, जिससे ये पानी में बहुत जल्दी फैल जाते हैं।
Question 5. नागफनी में प्रकाश संश्लेषी अंग है -
(क) तना
(ख) पत्ती
(ग) जड़
(घ) शूल
Answer: (क) तना
In simple words: नागफनी एक रेगिस्तानी पौधा है। इसमें पत्तियां काँटों में बदल जाती हैं, इसलिए इसका हरा, चपटा तना ही सूरज की रोशनी से भोजन बनाता है।
🎯 Exam Tip: रेगिस्तानी पौधों में, पत्तियां अक्सर पानी बचाने के लिए काँटों में बदल जाती हैं, और तना प्रकाश संश्लेषण का मुख्य काम संभालता है।
RBSE Class 11 Biology Chapter 18 अतिलघूत्तरात्मक प्रश्न
Question 1. वृक्ष कितने प्रकार के होते हैं ?
Answer: वृक्ष के तने की बनावट के आधार पर उन्हें चार मुख्य प्रकारों में बांटा जाता है। ये प्रकार पुच्छी (Caudex), आचूडाक्ष (Excurrent), लीनाक्ष (Deliquescent) और संघित (Culm) हैं। ये अलग-अलग पेड़ अलग-अलग तरह से बढ़ते हैं और दिखते हैं।
In simple words: पेड़ के तने की बनावट के हिसाब से चार तरह के वृक्ष होते हैं: पुच्छी, आचूडाक्ष, लीनाक्ष और संघित।
🎯 Exam Tip: इन चारों प्रकारों को याद रखें और प्रत्येक की एक छोटी सी विशेषता भी याद रखें ताकि आप उन्हें पहचान सकें।
RBSE Class 11 Biology Chapter 18 लघूत्तरात्मक प्रश्न
Question 1. तने के कार्य लिखिये।
Answer: तने के मुख्य काम इस प्रकार हैं:
1. यह शाखाओं, पत्तियों, फूलों और फलों को अपने ऊपर रखता है।
2. यह जड़ों से पानी और खनिज लवण को पौधे के बाकी हिस्सों तक पहुँचाने में मदद करता है, और पत्तियों में बने भोजन को भी नीचे ले जाता है।
3. कुछ खास हालातों में, तना भोजन जमा करने, ऊपर चढ़ने और पौधे को बचाने का काम भी करता है।
4. तना उन रसायनों को बनाता है जो पौधे की वृद्धि को नियंत्रित करते हैं।
In simple words: तना पत्तियों, फूलों और फलों को सहारा देता है। यह पानी और भोजन को पूरे पौधे में पहुँचाता है। कुछ तने भोजन जमा करते हैं, चढ़ने में मदद करते हैं या पौधे को बचाते हैं।
🎯 Exam Tip: तने के मुख्य कार्यों को बिंदुवार लिखें और प्रत्येक कार्य का एक छोटा विवरण दें ताकि पूर्ण अंक प्राप्त हों।
Question 2. तना एवं मूल में अन्तर बताइये।
Answer: तना या स्तम्भ और मूल (जड़) में अंतर इस प्रकार है:
| तना या स्तम्भ | मूल (जड़) |
|---|---|
| 1. यह गुरुत्वाकर्षण के विपरीत ऊपर बढ़ता है और प्रकाश की ओर जाता है। | 1. यह गुरुत्वाकर्षण की ओर नीचे बढ़ता है और प्रकाश से दूर जाता है। |
| 2. यह बीज के ऊपरी हिस्से (प्रांकुर) से विकसित होता है। | 2. यह बीज के निचले हिस्से (मूलांकुर) से विकसित होता है। |
| 3. नया तना आमतौर पर हरे रंग का होता है। | 3. यह आमतौर पर सफेद या भूरे रंग की होती है। |
| 4. तने पर पर्व (जोड़) और पर्वसन्धियाँ (गांठें) होती हैं। | 4. जड़ में पर्व और पर्वसन्धियाँ नहीं होती हैं। |
| 7. तने पर बहुत सारे कोशिका वाले रोम (बाल) पाए जाते हैं। | 7. जड़ के रोम सिर्फ एक कोशिका वाले होते हैं। |
| 8. तने के ऊपरी हिस्से (प्ररोह शीर्ष) पर शीर्षस्थ कलिका (apical bud) होती है। | 8. जड़ का ऊपरी हिस्सा (मूल शीर्ष) जड़ टोपी (root cap) से ढका होता है। |
In simple words: तना ऊपर बढ़ता है, हरा होता है और उसमें गांठें होती हैं। जड़ नीचे बढ़ती है, सफेद/भूरी होती है और उसमें गांठें नहीं होतीं।
🎯 Exam Tip: तना और जड़ के अंतरों को एक तालिका बनाकर स्पष्ट करें। गुरुत्वाकर्षण, प्रकाश की दिशा और विकास के स्थान जैसे मुख्य बिंदुओं पर ध्यान दें।
Question 3. पर्णाभ स्तम्भ व पर्णाभ पर्व में क्या अन्तर है ?
Answer: पर्णाभ स्तम्भ (Phylloclade) और पर्णाभ पर्व (Cladode) में अंतर इस प्रकार है:
| पर्णाभ स्तम्भ | पर्णाभ पर्व |
|---|---|
| 1. इसमें कई पर्व और पर्वसन्धियाँ होती हैं। | 1. इसमें सिर्फ एक पर्व होता है। |
| 2. यह चपटा या गोल पत्ती जैसा दिखता है। | 2. ये भी पत्ती जैसे दिखते हैं। |
| 3. यह प्रकाश-संश्लेषण का काम करता है, और पत्तियां छोटे कांटों में बदल जाती हैं। उदाहरण - नागफनी, रसकस। | 3. यह भी प्रकाश-संश्लेषण करता है लेकिन इस पर कोई दूसरी रचना नहीं होती। उदाहरण - शतावर। |
In simple words: पर्णाभ स्तम्भ में कई गांठें होती हैं और पत्तियां कांटों में बदल जाती हैं, जैसे नागफनी में। पर्णाभ पर्व में केवल एक गांठ होती है और पत्ती जैसा दिखता है, जैसे शतावर में।
🎯 Exam Tip: दोनों के अंतर को स्पष्ट करने के लिए मुख्य बिंदु (पर्वसन्धियां, पत्तियों का रूपांतरण, और उदाहरण) जरूर शामिल करें।
RBSE Class 11 Biology Chapter 18 निबन्धात्मक प्रश्न
Question 1. तने के वायव रूपान्तरणों का वर्णन कीजिये।
Answer: तने के वायवीय रूपान्तरण (Aerial modification) निम्न प्रकार के होते हैं:
1. **स्तम्भीय प्रतान (Stem tendril):** जब तने की शाखा बनाने वाली कलिका मुड़कर एक कुंडलित धागे जैसी संरचना बन जाती है, तो यह पौधे को ऊपर चढ़ने में मदद करती है। जैसे, पेसन फ्लावर (Passion flower) में।
5. **पर्णाभ पर्व (Cladode):** एक पत्ती वाला पर्णाभ स्तम्भ पर्णाभ पर्व कहलाता है। यह पत्ती जैसा दिखता है। जैसे, शतावर (Asparagus) में।
6. **पत्र प्रकलिका (Bulbil):** इसमें पौधे की कलिका या फूल की कलिका भोजन इकट्ठा करके मोटी हो जाती है। यह कलिका मुख्य पौधे से अलग होकर नया पौधा बनाती है और प्रजनन में मदद करती है। जैसे, धींकवार या ग्वारपाठा (Aloe) और अगेव (Agave) में।
In simple words: तने के कुछ हिस्से हवा में बदलकर अलग-अलग काम करते हैं। जैसे, कुछ तने धागे जैसे प्रतान बनकर पौधे को ऊपर चढ़ाते हैं। कुछ पत्ती जैसे दिखते हैं और भोजन बनाते हैं। कुछ मोटी कलिकाएँ बनकर नए पौधे उगाते हैं।
🎯 Exam Tip: प्रत्येक प्रकार के वायवीय रूपांतरण का नाम, उसकी विशेषता और एक उदाहरण जरूर लिखें।
Question 2. तने के दो वायव व दो अर्द्धवायव उदाहरणों का वर्णन कीजिये।
Answer:
**वायवीय रूपान्तरण (Aerial modification):**
1. **स्तम्भीय प्रतान (Stem tendril):** जब शाखा बनाने वाली कलिका एक कुंडलित धागे जैसी संरचना में बदल जाती है और पौधे को ऊपर चढ़ने में मदद करती है। उदाहरण – पेसन फ्लावर (Passion flower)।
**अर्द्धवायवीय अथवा भूपृष्ठीय रूपान्तरण (Sub-aerial modifications):**
इन तनों की शाखाएँ जमीन के समानांतर, जमीन के नीचे या ऊपर विकसित होती हैं। ये निम्न प्रकार के होते हैं:
1. **उपरिभूस्तारी या भू-प्रसारी (Runner):** ये तने जमीन पर रेंगते हुए बढ़ते हैं। इनमें लंबे पर्व होते हैं और पर्वसन्धियों से जड़ें नीचे और शाखाएँ ऊपर निकलती हैं। इन पर छोटे शल्क पर्ण भी होते हैं। जैसे – ऑक्जेलिस (Oxalis), मार्सीलिया (Marsilea)। इनकी शाखाएँ टूटकर नए पौधे बना सकती हैं।
2. **भूस्तारी या विरोहक (Stolon):** मुख्य तने के निचले हिस्से से शाखाएँ निकलती हैं जो जमीन के अंदर या बाहर समानांतर बढ़ती हैं। ये शाखाएँ अंत में जमीन को छूकर नए पौधे बनाती हैं। जैसे – कचालू (Colocasia), ड्रेसिना (Dracaena)।
In simple words: वायवीय रूपांतरण में, तने के कुछ हिस्से हवा में बदलकर ऊपर चढ़ने में मदद करते हैं, जैसे पेसन फ्लावर में प्रतान। अर्द्धवायवीय रूपांतरण में, तने जमीन पर रेंगते हैं या उनके नीचे बढ़ते हैं, जैसे ऑक्जेलिस में रनर और कचालू में स्टोलन।
🎯 Exam Tip: प्रत्येक प्रकार के रूपांतरण के लिए एक स्पष्ट परिभाषा और एक उचित उदाहरण देना आवश्यक है।
Question 3. विभिन्न प्रकार के दुर्बल तनों का वर्णन कीजिये।
Answer: दुर्बल तने (Weak stem) वे होते हैं जो सीधे खड़े नहीं रह पाते। ये कई प्रकार के होते हैं:
(i) **तलसर्प (Trailing):** ये दुर्बल तने जमीन पर फैलते हैं और इनकी गांठों से जड़ें नहीं बनतीं। ये भी कई प्रकार के होते हैं:
* **शयान (Prostrate or procumbent):** तलसर्प तना जो जमीन पर पड़ा रहता है और चारों ओर फैलता है, लेकिन इसकी शाखाओं के ऊपरी सिरे ऊपर नहीं उठते। उदाहरण – शंखपुष्पी।
* **उर्वशीर्षी (Decumbent):** तलसर्प तना जो जमीन पर पड़ा रहता है, लेकिन इसका ऊपरी सिरा जमीन से थोड़ा ऊपर उठा रहता है। उदाहरण – पोर्चुलाका (Portulaca)।
* **विसरित (Diffuse):** इसकी शाखाएँ जमीन पर फैली रहती हैं और चारों तरफ फैलती हैं। उदाहरण – कोरोनोपस (Coronopus)।
(ii) **विसर्प (Creeping):** तना कमजोर होता है और जमीन पर रेंगता है। इसकी गांठों से जड़ें निकलती हैं। ये कई प्रकार के होते हैं, जैसे उपरिभूस्तारी (runner), भूस्तारी (stolon), भूस्तारिका (offset) और अंत:भूस्तारी (sucker)।
(iii) **आरोही (Climbers):** ये दुर्बल तने होते हैं जो किसी सहारे या दूसरे पौधे पर खास संरचनाओं की मदद से ऊपर चढ़ते हैं। आरोहण अंग की मौजूदगी और प्रकार के आधार पर ये आरोही पौधे निम्न प्रकार के होते हैं:
* **(a) मूल आरोही (Rootclimber):** इन लताओं के तने की गांठों से अपस्थानिक जड़ें निकलती हैं। इन जड़ों के सिरे से एक चिपचिपा पदार्थ निकलता है, जो उन्हें सहारे से चिपका रहने में मदद करता है। इस तरह, जड़ें लताओं को ऊपर चढ़ने में मदद करती हैं। उदाहरण – पोथोस (Pothos), पान, आइवी।
* **(b) प्रतान आरोही (Tendril climber):** कुछ पौधों में तने और शाखाओं से मुलायम, पतले, बेलनाकार, धागे जैसी संरचनाएँ बनती हैं, जिन्हें प्रतान कहते हैं। प्रतान छूने के प्रति संवेदनशील होते हैं। जैसे ही प्रतान किसी सहारे के संपर्क में आता है, वह कुंडलीदार होकर पौधे को ऊपर चढ़ने में मदद करता है। तना, शाखा, पत्ती, कलिका, या फूल की कलिका - पौधे का कोई भी हिस्सा प्रतान में बदल सकता है।
* **(c) अंकुश आरोही (Hook climbers):** कुछ आरोही पौधों में तने पर कठोर, नुकीले, नीचे की ओर मुड़े हुए अंकुश या कांटे मिलते हैं। अंकुश आसपास के पौधों में उलझकर चढ़ने में मदद करते हैं। बिगोनिया में पत्ती के आखिर के तीन हिस्से अंकुश बनाते हैं, जबकि कंटीली चम्पा, बोगेनविलिया और गुलाब में कांटे हुक जैसे होते हैं। शतावर में नुकीले शूल (spines), और बेंत में पत्ती का आवरण एक लंबी डंठल जैसा होता है जिस पर कई छोटे अंकुश (hooklets) होते हैं जो चढ़ने में मदद करते हैं।
* **(d) वल्लरियाँ (Twiners):** कुछ आरोही पौधों में कोई खास अंग नहीं होता। इनके तने मुलायम और पतले होते हैं। ऐसे तने सहारे के संपर्क में आते ही चारों ओर लिपटकर चढ़ने में मदद करते हैं। उदाहरण – रेल्वे क्रीपर (Ipomoea palmata), सेम (Dolichos lablab)।
* **(e) कंठलतायें (Lianas):** इनका तना मोटा, लकड़ी जैसा और मजबूत होता है, और ये कई साल तक जीवित रहते हैं। ये अक्सर जंगलों में पाए जाते हैं। कंठलताएँ दूसरे लंबे पेड़ों के तनों के सहारे ऊपर चढ़कर रोशनी लेती हैं। उदाहरण – फाईकस (Ficus) की कुछ प्रजातियाँ, बाहिनिआ वाहिलाई (Bauhinia vahlii)।
In simple words: दुर्बल तने सीधे खड़े नहीं हो पाते। कुछ जमीन पर फैलते हैं (जैसे शयान, उर्वशीर्षी), कुछ जमीन पर रेंगते हैं (जैसे रनर), और कुछ सहारे से ऊपर चढ़ते हैं (जैसे प्रतान, अंकुश या लताएँ)।
🎯 Exam Tip: दुर्बल तनों के हर प्रकार और उपप्रकार का नाम, उनकी मुख्य विशेषता और एक उदाहरण विस्तार से लिखें। चित्रों की अनुपस्थिति में वर्णन को स्पष्ट बनाने के लिए हर प्रकार की कार्यप्रणाली को समझाना महत्वपूर्ण है।
Question 4. तने के कार्य व लक्षणों का वर्णन कीजिये।
Answer:
**तने के सामान्य लक्षण:**
1. तना गुरुत्वाकर्षण के विपरीत (नकारात्मक गुरुत्वानुवर्ती) और प्रकाश की ओर (सकारात्मक प्रकाशानुवर्ती) बढ़ता है।
2. नया तना अक्सर हरे रंग का होता है, लेकिन बाद में लकड़ी जैसा और गहरे भूरे रंग का हो जाता है।
3. तने पर पर्व (जोड़) और पर्वसन्धियाँ (गांठें) पाई जाती हैं।
4. तने पर आमतौर पर शाखाएँ, कलिकाएँ और फूल जैसे अंग लगे होते हैं।
5. ये सभी मिलकर प्ररोह तंत्र (shoot system) बनाते हैं।
6. तने पर शाखाओं और अन्य अंगों की उत्पत्ति बाहरी रूप से (बहिर्जात) होती है।
7. तने पर मौजूद रोम कई कोशिकाओं वाले होते हैं।
**तने के कार्य:**
1. यह शाखाओं, पत्तियों, फूलों और फलों को अपने ऊपर रखता है और उन्हें सहारा देता है।
2. यह पानी, खनिज लवण और पत्तियों में बने भोजन को पूरे पौधे में पहुँचाने में मदद करता है।
3. कुछ खास परिस्थितियों में, तना भोजन जमा करने, सहारा देने, पौधे की रक्षा करने और नए पौधे उगाने (कायिक प्रवर्धन) का काम भी करता है।
In simple words: तना ऊपर की ओर बढ़ता है, इसमें गांठें और पत्तियां होती हैं, और यह अक्सर हरा होता है। इसका मुख्य काम पौधे को सहारा देना, पानी और भोजन पहुँचाना है। कुछ तने भोजन जमा करने या पौधे को बचाने जैसे खास काम भी करते हैं।
🎯 Exam Tip: तने के लक्षणों और कार्यों को अलग-अलग शीर्षकों के तहत बिंदुवार लिखें। हर बिंदु को संक्षेप में स्पष्ट करें।
Question 5. विभिन्न प्रकार के भूमिगत रूपान्तरित तनों का वर्णन कीजिए।
Answer:
**भूमिगत रूपान्तरण (Underground modifications):**
ये तने जमीन के अंदर बढ़ते हैं और इनका मुख्य काम भोजन जमा करना और बुरे मौसम में जीवित रहना (चिरकालिता) होता है। ये हरे नहीं होते और जड़ों जैसे दिखते हैं। इन्हें पर्व (जोड़), पर्वसन्धियों (गांठों), शल्कपर्णों (छोटे पत्तों) और कलिकाओं (अंकुरों) की मौजूदगी से पहचाना जा सकता है। ये निम्न प्रकार के होते हैं:
1. **प्रकन्द (Rhizome):** यह मोटा, गूदेदार, अनियमित आकार का होता है और जमीन के समानांतर बढ़ता है। पर्व, पर्वसन्धियाँ, शल्क पर्ण और कलिकाएँ इसमें साफ दिखती हैं। सही परिस्थितियों में कलिकाएँ नए पौधे बनाती हैं। उदाहरण – अदरक, हल्दी।
2. **कंद (Tuber):** ये भूमिगत शाखाओं के सिरे के फूल जाने से बनते हैं। इन पर गड्ढे होते हैं जिनमें कलिकाएँ होती हैं, जिन्हें "आँखें" (eyes) कहते हैं। उदाहरण – आलू।
3. **घनकन्द (Corm):** यह मुख्य तने के निचले हिस्से के फूलने से बनता है। उदाहरण – केसर (Crocus), जमीकंद (Gladiolus)।
4. **शल्ककंद (Bulb):** इसमें तना बहुत छोटा होता है और शल्कपर्णों से ढका रहता है। भोजन इन्हीं शल्कपत्रों में जमा रहता है। तने के निचले हिस्से से अपस्थानिक जड़ें निकलती हैं। उदाहरण – प्याज, लहसुन।
In simple words: भूमिगत तने जमीन के अंदर उगते हैं और भोजन इकट्ठा करते हैं। ये जड़ों जैसे दिखते हैं लेकिन इनमें गांठें होती हैं। इनके प्रकार हैं: प्रकन्द (अदरक), कंद (आलू), घनकन्द (केसर) और शल्ककंद (प्याज)।
🎯 Exam Tip: प्रत्येक प्रकार के भूमिगत रूपांतरण का नाम, उसकी संरचना और कार्य की विशेषताएँ तथा कम से कम एक उदाहरण जरूर दें।
RBSE Class 11 Biology Chapter 18 पाठ्यपुस्तक के प्रश्न
RBSE Class 11 Biology Chapter 18 वस्तुनिष्ठ प्रश्न
Question 1. तने में शाखाओं की उत्पत्ति होती है –
(क) अन्तर्जात
(ख) बहिर्जात
(ग) पर्ण से
(घ) मूलशीर्ष से
Answer: (ख) बहिर्जात
In simple words: तने में शाखाएँ बाहर की तरफ से निकलती हैं। यह एक सामान्य तरीका है जिससे पौधे बढ़ते हैं और फैलते हैं।
🎯 Exam Tip: पौधे के विभिन्न भागों की उत्पत्ति के तरीके को समझना महत्वपूर्ण है, जैसे शाखाओं का बहिर्जात विकास और जड़ों का अन्तर्जात विकास।
Question 2. कुछ स्तम्भों पर मिलने वाली धागे सदृश्य संरचना है -
(क) शूल
(ख) प्रतान
(ग) नींबू
(घ) पान
Answer: (ख) प्रतान
In simple words: कुछ पौधों के तने पर पतली, धागे जैसी चीज़ें होती हैं जिन्हें प्रतान कहते हैं। ये पौधे को ऊपर चढ़ने में मदद करती हैं, जैसे बेल वाले पौधे करते हैं।
🎯 Exam Tip: प्रतान और शूल के बीच का अंतर याद रखें; प्रतान चढ़ने में मदद करते हैं जबकि शूल रक्षा करते हैं।
Question 3. नागफनी में प्रकाश संश्लेषी अंग है –
(क) तना
(ख) पत्ती
(ग) जड़
(घ) शूल
Answer: (क) तना
In simple words: नागफनी में, पत्तियाँ काँटों में बदल जाती हैं और इसका मोटा, हरा तना सूरज की रोशनी से भोजन बनाता है। यह तना पत्ती जैसा काम करता है।
🎯 Exam Tip: यह याद रखना महत्वपूर्ण है कि मरुस्थलीय पौधों में पत्तियाँ अक्सर काँटों में रूपांतरित हो जाती हैं, और तना प्रकाश संश्लेषण का मुख्य अंग बन जाता है ताकि पानी का नुकसान कम हो सके।
Question 4. जलकुंभी उदाहरण है –
(क) भूस्तारी
(ख) अन्त: भूस्तारी
(ग) भूस्तारिका
(घ) उपरी भूस्तारी
Answer: (ग) भूस्तारिका
In simple words: जलकुंभी पानी में तैरने वाला एक पौधा है जो भूस्तारिका नामक खास तरीके से फैलता है। इसमें छोटे, मोटे तने होते हैं और हर जोड़ से नए पौधे बनते हैं।
🎯 Exam Tip: भूस्तारिका जलीय पौधों में पाए जाने वाले एक विशेष प्रकार के रूपांतरित तने को संदर्भित करती है, जो तेजी से वानस्पतिक प्रजनन में मदद करता है।
Question 5. नागफनी में प्रकाश संश्लेषी अंग है –
(क) तना
(ख) पत्ती
(ग) जड़
(घ) शूल
Answer: (क) तना
In simple words: नागफनी में पत्तियाँ काँटों में बदल जाती हैं, इसलिए इसका मोटा, हरा तना ही भोजन बनाने का काम करता है। यह पानी बचाने में भी मदद करता है।
🎯 Exam Tip: मरुस्थलीय पौधों में प्रकाश संश्लेषण के लिए तने का अनुकूलन वाष्पोत्सर्जन को कम करने की एक महत्वपूर्ण रणनीति है।
RBSE Class 11 Biology Chapter 18 अतिलघूत्तरात्मक प्रश्न
Question 1. वृक्ष कितने प्रकार के होते हैं ?
Answer: वृक्ष के तने की प्रकृति के आधार पर इन्हें चार मुख्य प्रकारों में बांटा जा सकता है: पुच्छी (Caudex), आचूडाक्ष (Excurrent), लीनाक्ष (Deliquescent) और संघित (Culm)। ये अलग-अलग पेड़-पौधों के तने के खास रूपों को दिखाते हैं।
In simple words: पेड़ चार मुख्य प्रकार के होते हैं, जो उनके तने की बनावट पर निर्भर करते हैं। ये पुच्छी, आचूडाक्ष, लीनाक्ष और संघित हैं।
🎯 Exam Tip: वृक्षों के प्रकारों को याद रखें और प्रत्येक प्रकार के तने की विशेषता को समझें ताकि आप उदाहरणों से उनकी पहचान कर सकें।
Question 2. दो ऐसे तनों के नाम बताइये जो खाने के काम आते हैं ?
Answer: अदरक और आलू दो ऐसे तने हैं जिन्हें हम खाने के लिए उपयोग करते हैं। अदरक एक प्रकन्द है जो जमीन के नीचे क्षैतिज रूप से बढ़ता है, जबकि आलू एक कंद है जिसमें भोजन जमा होता है।
In simple words: अदरक और आलू खाने वाले तने हैं। अदरक जमीन के नीचे फैलता है, और आलू में भोजन इकट्ठा होता है।
🎯 Exam Tip: याद रखें कि अदरक और आलू दोनों ही तने के रूपांतरित रूप हैं, न कि जड़ें, और वे भोजन भंडारण के लिए उपयोग किए जाते हैं।
RBSE Class 11 Biology Chapter 18 लघूत्तरात्मक प्रश्न
Question 1. तने के कार्य लिखिये।
Answer: तने के मुख्य कार्य इस प्रकार हैं:
1. यह शाखाओं, पत्तियों, फूलों और फलों को सहारा देता है।
2. यह जड़ों से पानी और खनिज लवण को पत्तियों तक पहुंचाता है, और पत्तियों में बने भोजन को पौधे के बाकी हिस्सों तक ले जाता है।
3. कुछ तने खास स्थितियों में बदल जाते हैं और भोजन इकट्ठा करते हैं, ऊपर चढ़ने में मदद करते हैं, या पौधे को बचाते हैं।
4. यह पौधे की वृद्धि को नियंत्रित करने वाले रसायन भी बनाता है।
In simple words: तना पत्तियों, फूलों और फलों को सहारा देता है। यह पानी और भोजन को पौधे में फैलाता है। कुछ तने भोजन जमा करते हैं या पौधे को चढ़ने और बचाव करने में मदद करते हैं।
🎯 Exam Tip: तने के मुख्य कार्यों को बिन्दुओं में याद रखें, विशेषकर संवहन (जल और भोजन), सहारा, और रूपांतरण (भोजन भंडारण, आरोहण, सुरक्षा) के संदर्भ में।
Question 2. तना एवं मूल में अन्तर बताइये।
Answer: तना (स्तम्भ) और मूल (जड़) में मुख्य अंतर इस प्रकार हैं:
| तना या स्तम्भ | मूल |
|---|---|
| 1. यह ऋणात्मक गुरुत्वानुवर्ती व धनात्मक प्रकाशानुवर्ती होता है। | 1. यह धनात्मक गुरुत्वानुवर्ती व ऋणात्मक प्रकाशानुवर्ती होती है। |
| 2. यह प्रांकुर से विकसित होता है। | 2. यह मूलांकुर से विकसित होती है। |
| 3. तरुण तना सामान्यतः हरे रंग का होता है। | 3. यह सामान्यतः सफेद या भूरे रंग की होती है। |
| 4. तने पर पर्व व पर्वसन्धियाँ उपस्थित होती हैं। | 4. इनका अभाव होता है। |
| 7. तने पर बहुकोशिकीय रोम पाए जाते हैं। | 7. मूल रोम एककोशिकीय होते हैं। |
| 8. प्ररोह शीर्ष (shoot apex) पर शीर्षस्थ कलिका (apical bud) होती है। | 8. मूल शीर्ष मूल गोप (root cap) द्वारा ढका होता है। |
In simple words: तना ऊपर की ओर और रोशनी की तरफ बढ़ता है, जबकि जड़ें नीचे जमीन में बढ़ती हैं। तने में पत्तियाँ और शाखाएँ निकलती हैं, जबकि जड़ों में नहीं।
🎯 Exam Tip: तने और जड़ के बीच के मुख्य विकासात्मक, संरचनात्मक और कार्यात्मक अंतरों को याद रखें, खासकर गुरुत्वाकर्षण और प्रकाश के प्रति उनकी प्रतिक्रिया को।
Question 3. पर्णाभ स्तम्भ व पर्णाभ पर्व में क्या अन्तर है ?
Answer: पर्णाभ स्तम्भ (Phylloclade) और पर्णाभ पर्व (Cladode) में अंतर इस प्रकार हैं:
| पर्णाभ स्तम्भ | पर्णाभ पर्व |
|---|---|
| 1. इसमें अनेक पर्व व पर्वसन्धियाँ होती हैं। | 1. इसमें केवल एक पर्व होता है। |
| 2. यह चपटा या गोलाकार पत्ती जैसा होता है। | 2. ये भी पत्ती जैसे होते हैं। |
| 3. यह प्रकाश-संश्लेषण का काम करता है तथा पत्तियाँ छोटे काँटों के रूप में बदल जाती हैं। उदाहरण – नागफनी, रसकस। | 3. यह भी प्रकाश-संश्लेषण करता है परन्तु इस पर अन्य रचनायें नहीं होती हैं। उदाहरण – शतावर। |
In simple words: पर्णाभ स्तम्भ में कई जोड़ होते हैं और पत्तियाँ काँटों में बदल जाती हैं (जैसे नागफनी)। पर्णाभ पर्व में केवल एक जोड़ होता है और यह पत्ती जैसा दिखता है (जैसे शतावर)। दोनों ही भोजन बनाने का काम करते हैं।
🎯 Exam Tip: पर्णाभ स्तम्भ और पर्णाभ पर्व दोनों तने के रूपांतरण हैं जो पत्ती की तरह प्रकाश संश्लेषण करते हैं, लेकिन उनके पर्वों की संख्या में अंतर होता है। उदाहरणों को याद रखना महत्वपूर्ण है।
RBSE Class 11 Biology Chapter 18 निबन्धात्मक प्रश्न
Question 1. तने के वायव रूपान्तरणों का वर्णन कीजिये।
Answer: वायवीय रूपांतरण (Aerial modification) वे बदलाव हैं जो तने के उन हिस्सों में होते हैं जो हवा में होते हैं। ये विभिन्न प्रकार के होते हैं:
1. **स्तम्भीय प्रतान (Stem tendril):** यह तब होता है जब शाखा बनाने वाली कलिका एक मुड़ा हुआ धागे जैसा हिस्सा बन जाती है। यह पौधे को ऊपर चढ़ने में मदद करती है। जैसे: पेसन फ्लावर (Passion flower)।
2. **शूल (Thorn):** ये कठोर, नुकीली और सीधी संरचनाएँ होती हैं जो पौधे को जानवरों से बचाती हैं। ये तने के अग्र भाग से विकसित होते हैं। जैसे: बोगेनविलिया, गुलाब, नींबू में ये कांटे होते हैं।
3. **पर्णाभ स्तम्भ (Phylloclade):** यह एक चपटा या गोलाकार हरा तना होता है जो पत्तियों की तरह भोजन बनाता है। इसकी पत्तियाँ काँटों में बदल जाती हैं। इसमें कई पर्व और पर्वसन्धियाँ होती हैं। जैसे: नागफनी (Opuntia), कोकोलोबा (Cocoloba) और एपीफिल्लम (Epiphyllum)।
4. **पर्णाभ पर्व (Cladode):** यह एक पर्ण वाला पर्णाभ स्तम्भ है जो पत्ती जैसा दिखता है। इसमें केवल एक पर्व होता है और यह प्रकाश संश्लेषण करता है। जैसे: शतावर (Asparagus)।
5. **पत्र प्रकलिका (Bulbil):** इसमें एक कायिक कलिका या पुष्प कलिका भोजन जमा करके फूल जाती है। यह पौधा से अलग होकर नया पौधा बनाती है और पौधे के जनन में मदद करती है। जैसे: धींकवार या ग्वारपाठा (Aloe), अगेव (Agave)।
In simple words: पौधे के तने के जो हिस्से हवा में होते हैं, वे अलग-अलग काम करने के लिए बदल जाते हैं। ये प्रतान, कांटे, पत्ती जैसे तने (पर्णाभ स्तम्भ/पर्व) या नए पौधे बनाने वाली कलिकाएँ (पत्र प्रकलिका) हो सकते हैं।
🎯 Exam Tip: तने के वायवीय रूपांतरणों के विभिन्न प्रकारों, उनके कार्यों और उदाहरणों को याद रखें। प्रत्येक रूपांतरण के पीछे के कारण (जैसे रक्षा, चढ़ाई, प्रकाश संश्लेषण) को समझना भी महत्वपूर्ण है।
Question 2. तने के दो वायव व दो अर्द्धवायव उदाहरणों का वर्णन कीजिये।
Answer: यहाँ तने के वायवीय और अर्द्धवायवीय रूपांतरणों के उदाहरण दिए गए हैं:
**वायवीय रूपांतरण (Aerial modification):** ये तने के वे भाग होते हैं जो हवा में होते हैं और विशेष कार्यों के लिए बदल जाते हैं।
1. **स्तम्भीय प्रतान (Stem tendril):** जब तने की शाखा बनाने वाली कलिका एक मुड़ा हुआ धागे जैसा हिस्सा बन जाती है, तो यह पौधे को ऊपर चढ़ने में मदद करती है। **उदाहरण:** पेसन फ्लावर (Passion flower)।
2. **शूल (Thorn):** ये कठोर, नुकीली संरचनाएँ होती हैं जो पौधे को जानवरों से बचाने का काम करती हैं। **उदाहरण:** बोगेनविलिया, गुलाब।
**अर्द्धवायवीय अथवा भूपृष्ठीय रूपांतरण (Sub-aerial modifications):** इन तनों की शाखाएँ जमीन के समानांतर या ऊपर की ओर बढ़ती हैं।
1. **उपरिभूस्तारी या भू-प्रसारी (Runner):** ये तने जमीन पर रेंगते हुए बढ़ते हैं। इनके पर्वों से नीचे जड़ें और ऊपर शाखाएँ निकलती हैं। हर शाखा अलग होकर नया पौधा बना सकती है। **उदाहरण:** ऑक्जेलिस (Oxalis), मार्सीलिया (Marsilea)।
2. **भूस्तारी या विरोहक (Stolon):** मुख्य तने के निचले हिस्से से शाखाएँ निकलकर जमीन के अंदर या बाहर समानांतर बढ़ती हैं। ये शाखाएँ अंत में जमीन को छूकर नए पौधों का निर्माण करती हैं। **उदाहरण:** कचालू (Colocasia), ड्रेसिना (Dracaena)।
In simple words: वायवीय रूपांतरण हवा में होते हैं, जैसे चढ़ने वाले प्रतान या बचाव के लिए कांटे। अर्द्धवायवीय रूपांतरण जमीन के पास बढ़ते हैं, जैसे भू-प्रसारी (रेंगने वाले तने) या भूस्तारी (जो नए पौधे बनाने के लिए फैलते हैं)।
🎯 Exam Tip: वायवीय और अर्द्धवायवीय रूपांतरणों के बीच अंतर को स्पष्ट रूप से समझें। प्रत्येक प्रकार के लिए कम से कम दो उदाहरण और उनके कार्य याद रखें।
Question 3. विभिन्न प्रकार के दुर्बल तनों का वर्णन कीजिये।
Answer: दुर्बल तने (Weak stem) वे तने होते हैं जो सीधे खड़े नहीं हो सकते और उन्हें सहारा या जमीन पर रेंगना पड़ता है। ये निम्न प्रकार के होते हैं:
**I. तलसर्पी (Trailing) दुर्बल तने:** ये तने भूमि पर फैलते हैं और इनकी पर्वसन्धियों से जड़ें नहीं निकलती हैं।
* **शयान (Prostrate or procumbent):** तलसर्पी तना जो भूमि पर पड़ा रहकर चारों ओर फैलता है। इसकी शाखाओं के शीर्ष ऊपर उठे हुए नहीं होते हैं। **उदाहरण:** शंखपुष्पी।
* **उर्वशीर्षी (Decumbent):** तलसर्पी तना जो भूमि पर पड़ा रहता है परन्तु इसका शीर्ष भूमि से ऊपर उठा रहता है। **उदाहरण:** पोर्चुलाका (Portulaca)।
* **विसरित (Diffuse):** शाखाएँ भूमि पर फैली रहती हैं और इनमें कई शाखाएँ होती हैं जो चारों तरफ फैलती हैं। **उदाहरण:** कोरोनोपस (Coronopus)।
**II. विसर्प (Creeping):** ये दुर्बल तने होते हैं जो धरती पर रेंगते हुए बढ़ते हैं और इनकी पर्वसन्धियों से जड़ें निकलती हैं। ये कई प्रकार के होते हैं:
* **उपरिभूस्तारी (Runner):** ये भूमि पर रेंगते हुए बढ़ते हैं। पर्व लम्बे होते हैं और पर्वसन्धियों से नीचे जड़ें व ऊपर शाखाएँ निकलती हैं। **उदाहरण:** ऑक्जेलिस, मार्सीलिया।
* **भूस्तारी या विरोहक (Stolon):** मुख्य तने के आधारीय भाग से शाखाएँ निकलकर भूमि के अंदर या बाहर समानांतर बढ़ती हैं। ये शाखाएँ अंत में भूमि को छूकर नए पौधों का निर्माण करती हैं। **उदाहरण:** कचालू, ड्रेसिना।
* **भूस्तारिका (Offset):** ये सामान्यतः जलीय पौधों में मिलते हैं। ये उपरिभूस्तारी जैसे होते हैं परन्तु इनमें शाखाएँ छोटी, मोटी व एक पर्व वाली होती हैं। **उदाहरण:** पिस्टिआ (Pistia), जलकुम्भी।
* **अंत: भूस्तारी (Sucker):** मुख्य तने के निचले भाग से शाखाएँ निकलकर भूमि के अंदर कुछ दूरी तक बढ़ने के बाद वापस बाहर निकल आती हैं। पर्वसन्धियों पर नए पौधों का जन्म होता है। **उदाहरण:** पोदीना।
**III. आरोही (Climbers):** ये दुर्बल तने होते हैं जो किसी सहारे या अन्य पौधे पर विशेष संरचनाओं की मदद से ऊपर चढ़ते हैं। आरोहण अंग की उपस्थिति व प्रकार के आधार पर ये निम्न प्रकार के होते हैं:
* **मूल आरोही (Rootclimber):** इन लताओं के तने की पर्वसन्धियों से अपस्थानिक जड़ें निकलती हैं। ये जड़ें सहारे से चिपकने वाला पदार्थ छोड़ती हैं, जिससे वे ऊपर चढ़ पाती हैं। **उदाहरण:** पोथोस, पान, आइवी।
* **प्रतान आरोही (Tendril climber):** कुछ पौधों के तने तथा शाखाओं से कोमल, पतली, बेलनाकार, धागे जैसी संरचनाएँ बनती हैं, जिन्हें प्रतान कहते हैं। प्रतान छूने पर संवेदनशील होते हैं और सहारे से लिपटकर ऊपर चढ़ने में मदद करते हैं। **उदाहरण:** पेसीफ्लोरा, जंगली मटर।
* **अंकुश आरोही (Hook climbers):** कुछ आरोही पौधों में तने पर कठोर, नुकीले, नीचे की ओर मुड़े हुए अंकुश या कांटे मिलते हैं। ये अंकुश आस-पास के पौधों में उलझकर ऊपर चढ़ने में मदद करते हैं। **उदाहरण:** कंटीली चम्पा, बेंत, गुलाब।
* **वल्लरियाँ (Twiners):** कुछ आरोही पौधों में कोई खास चढ़ने वाला अंग नहीं होता। इनके तने कोमल व पतले होते हैं। ऐसे तने सहारे के संपर्क में आते ही उसके चारों ओर लिपटकर ऊपर चढ़ते हैं। **उदाहरण:** रेल्वे क्रीपर, सेम।
* **कंठलतायें (Lianas):** इनका तना मोटा, काष्ठीय व कठोर होता है और ये पौधे कई साल तक जीते हैं। ये अक्सर जंगलों में मिलते हैं और दूसरे लंबे पेड़ों के तनों के सहारे ऊपर प्रकाश पाने के लिए बढ़ते हैं। **उदाहरण:** फाईकस की कुछ प्रजातियाँ, बाहिनिआ वाहिलाई।
In simple words: दुर्बल तने सीधे खड़े नहीं हो पाते। ये या तो जमीन पर रेंगते हैं (तलसर्पी, विसर्प) या किसी सहारे पर चढ़ते हैं (आरोही)। इनमें अलग-अलग तरीके होते हैं जैसे प्रतान, जड़ें या कांटे, जो उन्हें बढ़ने में मदद करते हैं।
🎯 Exam Tip: दुर्बल तनों के प्रत्येक प्रकार, उनके विशिष्ट रूपांतरणों और उदाहरणों को याद रखें। ध्यान दें कि जड़ें निकलती हैं या नहीं, और पौधे चढ़ने के लिए किस संरचना का उपयोग करते हैं।
Question 4. तने के कार्य व लक्षणों का वर्णन कीजिये।
Answer: **तने के सामान्य लक्षण:**
1. तना जमीन से ऊपर की ओर (ऋणात्मक गुरुत्वानुवर्ती) और प्रकाश की ओर (धनात्मक प्रकाशानुवर्ती) बढ़ता है।
2. जवान तना आमतौर पर हरे रंग का होता है, लेकिन बाद में यह कठोर और गहरे भूरे रंग का हो जाता है।
3. तने पर पर्व और पर्वसन्धियाँ पाई जाती हैं।
4. तने पर सामान्यतः कलिकाएँ और फूल जैसे पाश्र्व अंग लगे रहते हैं।
5. ये सभी मिलकर प्ररोह तन्त्र (shoot system) बनाते हैं।
6. तने पर पाश्र्व अंगों की उत्पत्ति बाहर से (बहिर्जात) होती है।
7. तने पर मौजूद रोम बहुकोशिकीय होते हैं।
**तने के मुख्य कार्य:**
तना शाखाओं को फैलाता है और पत्ती, फूल तथा फल को सहारा देता है। यह जल, खनिज लवण और पत्तियों में बने भोजन को पौधे के विभिन्न भागों तक पहुंचाता है। कुछ तने भोजन इकट्ठा करने, पौधे को सहारा देने, सुरक्षा प्रदान करने और नए पौधे उगाने (कायिक प्रवर्धन) का काम भी करते हैं।
In simple words: तना आमतौर पर ऊपर की ओर और रोशनी की तरफ बढ़ता है। इसमें जोड़ (पर्व) और शाखाएँ होती हैं। इसका मुख्य काम पत्तों, फूलों, फलों को सहारा देना और पानी व भोजन को पौधे में फैलाना है। यह भोजन भी जमा कर सकता है या पौधे को बचा सकता है।
🎯 Exam Tip: तने के संरचनात्मक लक्षणों (जैसे पर्व, कलिकाएँ) और उसके कार्यों (जैसे सहारा, संवहन, भंडारण) को बिंदुवार याद रखें। गुरुत्वाकर्षण और प्रकाश के प्रति तने की प्रतिक्रिया को भी स्पष्ट रूप से समझें।
Question 5. विभिन्न प्रकार के भूमिगत रूपान्तरित तनों का वर्णन कीजिए।
Answer: भूमिगत रूपांतरण (Underground modifications) वे तने होते हैं जो जमीन के अंदर रहते हैं और मुख्य रूप से भोजन जमा करने और प्रतिकूल परिस्थितियों में जीवित रहने (चिरकालिता) का काम करते हैं। ये हरे नहीं होते और जड़ जैसे दिखते हैं। इन्हें पर्व, पर्वसन्धियों, शल्कपर्णों और कक्षस्थ व अंतस्थ कलिकाओं की मौजूदगी से पहचाना जा सकता है। ये निम्न प्रकार के होते हैं:
1. **प्रकन्द (Rhizome):** यह मोटा, गूदेदार, और अनियमित आकार का होता है जो जमीन में समानांतर बढ़ता है। इसमें पर्व, पर्वसन्धियाँ, शल्क पर्ण और कक्षस्थ कलिकाएँ साफ दिखती हैं। अनुकूल परिस्थितियों में कक्षस्थ कलिकाएँ नए पौधे बनाती हैं। **उदाहरण:** अदरक, हल्दी।
2. **कंद (Tuber):** ये भूमिगत शाखाओं के सिरे फूल जाने से बनते हैं। इन पर गड्ढे होते हैं जिनमें कलिकाएँ होती हैं, जिन्हें 'आँखें' (eyes) कहते हैं। **उदाहरण:** आलू।
3. **घनकन्द (Corm):** यह मुख्य तने के आधारिक भाग के फूलने से बनता है। यह केसर (Crocus) और जमीकंद (Cladiolus) में पाया जाता है।
4. **शल्ककंद (Bulb):** इसमें तना बहुत छोटा होता है और शल्कपर्णों से ढका रहता है। भोजन इन्हीं शल्कपर्णों में जमा होता है। तने के निचले भाग से अपस्थानिक जड़ें निकलती हैं। **उदाहरण:** प्याज, लहसुन।
In simple words: कुछ तने जमीन के अंदर बढ़ते हैं और भोजन जमा करते हैं ताकि पौधा जीवित रह सके। इनमें प्रकन्द (अदरक), कंद (आलू), घनकन्द (केसर), और शल्ककंद (प्याज) शामिल हैं। इन सभी में नए पौधे उगाने की क्षमता होती है।
🎯 Exam Tip: तने के भूमिगत रूपांतरणों के प्रत्येक प्रकार, उनके विशिष्ट लक्षणों, और उनके उदाहरणों को याद रखें। पहचान के मुख्य बिंदु पर्व, पर्वसन्धियाँ और भोजन भंडारण की विधि हैं।
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