RBSE Solutions Class 11 Biology Chapter 17 मूल-बाह्य आकारिकी

Official RBSE Solutions for Class 11 Biology: Chapter 17 मूल-बाह्य आकारिकी

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Chapter-wise Solutions for Biology: Chapter 17 मूल-बाह्य आकारिकी

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RBSE Class 11 Biology Chapter 17 वस्तुनिष्ठ प्रश्न

 

Question 1. मूल पादप के किस भाग से विकसित होती है -
(अ) प्रांकुर से
(ब) मूलांकुर से
(स) बीजपत्रों से
(द) बीजचोल से
Answer: (ब) मूलांकुर से
In simple words: जड़ें आमतौर पर पौधे के उस हिस्से से बनती हैं जिसे मूलांकुर कहते हैं। यह बीज के अंदर का पहला भाग होता है जो अंकुरण के बाद जड़ बनाता है।

🎯 Exam Tip: याद रखें कि मूल (जड़) मूलांकुर से विकसित होती है, जबकि तना प्रांकुर से बनता है।

 

Question 2. मूलांकुर के अतिरिक्त पादप के अन्य किसी भाग से विकसित होने वाली मूल को कहते हैं -
(अ) मूसला मूल
(ब) झकड़ी मूल
(स) अपस्थानिक मूल (Option text missing from source OCR)
(द) रेशेदार मूल (Option text missing from source OCR)
Answer: (द) रेशेदार मूल
In simple words: यदि जड़ें मूलांकुर के बजाय तने या पत्ती जैसे पौधे के किसी अन्य हिस्से से निकलें, तो उन्हें अपस्थानिक जड़ें या रेशेदार जड़ें कहते हैं। ये मुख्य जड़ के समानांतर एक जाल बनाती हैं।

🎯 Exam Tip: मूलांकुर से विकसित होने वाली जड़ों को प्राथमिक जड़ (मूसला मूल) कहते हैं, जबकि अन्य भागों से विकसित होने वाली जड़ें अपस्थानिक मूल कहलाती हैं।

 

Question 3. मूलशीर्ष के किस क्षेत्र में मूलरोम पाये जाते हैं –
(अ) स्थायी क्षेत्र
(ब) विभज्योजक क्षेत्र
(स) परिपक्कन क्षेत्र
(द) दीर्घाकरण क्षेत्र
Answer: (स) परिपक्कन क्षेत्र
In simple words: जड़ के सिरे पर, परिपक्कन क्षेत्र वह जगह है जहाँ से महीन मूलरोम निकलते हैं। ये रोम पानी और पोषक तत्वों को सोखने का काम करते हैं।

🎯 Exam Tip: मूलरोम केवल परिपक्कन क्षेत्र में पाए जाते हैं क्योंकि यहीं पर कोशिकाएं पूरी तरह से विकसित होकर अवशोषण के लिए तैयार होती हैं।

 

Question 4. गाजर की जड़ की आकृति है –
(अ) शंकुरूपी
(ब) कंदिल
(स) कुंभी रूपी
(द) तर्क रूपी
Answer: (अ) शंकुरूपी
In simple words: गाजर की जड़ ऊपर से मोटी और नीचे की तरफ पतली होती जाती है, जैसे एक शंकु (कोन)। इसे ही शंकुरूपी आकृति कहते हैं।

🎯 Exam Tip: विभिन्न पौधों की जड़ों की आकृति उनके द्वारा भोजन संग्रह करने के तरीके पर निर्भर करती है, जैसे गाजर में शंकुरूपी, मूली में तर्कुरूपी और शलजम में कुंभीरूपी।

 

Question 5. पाश्र्व मूल की उत्पत्ति होती है –
(अ) परिरंभ से
(ब) बाह्यत्वचा से
(स) एधा से
(द) जाइलम बंडल से
Answer: (अ) परिरंभ से
In simple words: जड़ के अंदर, परिरंभ नाम की एक परत होती है। इसी परत से नई शाखा वाली जड़ें (पाश्र्व मूल) निकलती हैं, जो मुख्य जड़ से बाहर की ओर बढ़ती हैं।

🎯 Exam Tip: पाश्र्व मूलों का विकास एंडोजेनस (अंतर्जात) होता है, जिसका अर्थ है कि वे जड़ के आंतरिक ऊतकों (परिरंभ) से उत्पन्न होती हैं, न कि बाहरी परत (बाह्यत्वचा) से।

 

Question 6. निम्न में से कौन सा पादप भाग मूल का उदाहरण नहीं है –
(अ) मूली
(ब) अरवी
(स) शकरकंद
(द) डहेलिया कंद
Answer: (ब) अरवी
In simple words: मूली, शकरकंद और डहेलिया की जड़ें भोजन जमा करने के लिए बदल जाती हैं। अरवी असल में एक तना होता है जो जमीन के अंदर बढ़ता है और भोजन जमा करता है।

🎯 Exam Tip: पौधों के भूमिगत भागों को पहचानते समय, यह जानना महत्वपूर्ण है कि कौन सा भाग जड़ है और कौन सा तना, क्योंकि दोनों में भोजन संग्रह हो सकता है लेकिन उनकी संरचना और उत्पत्ति अलग होती है।

 

Question 7. बरगद में पायी जाती हैं –
(अ) अवस्तम्भ मूलें
(ब) जटा मूलें।
(स) कवक मूलें
(द) परजीवी मूलें
Answer: (अ) अवस्तम्भ मूलें
In simple words: बरगद के पेड़ में ऊपर से मोटी-मोटी जड़ें नीचे लटकती हैं और जमीन में घुस जाती हैं। ये जड़ें पेड़ को सहारा देती हैं, जिन्हें अवस्तम्भ मूलें कहते हैं।

🎯 Exam Tip: अवस्तम्भ मूलें बरगद जैसे विशाल वृक्षों को यांत्रिक सहारा प्रदान करती हैं, जिससे वे अपनी बड़ी शाखाओं का भार संभाल पाते हैं।

 

Question 9. आर्द्रताग्राही मूलें पायी जाती हैं –
(अ) मैंग्रोव पादपों में
(ब) अधिपादपों में
(स) जलीय पादपों में
(द) मरुभिद पादपों में
Answer: (ब) अधिपादपों में
In simple words: अधिपादप वे पौधे होते हैं जो दूसरे पेड़ों पर उगते हैं, हवा में लटके होते हैं। उनकी जड़ें हवा से नमी सोखने के लिए बनी होती हैं, जिन्हें आर्द्रताग्राही मूलें कहते हैं।

🎯 Exam Tip: आर्किड्स जैसे अधिपादपों में वेलमेन ऊतक वाली आर्द्रताग्राही जड़ें होती हैं, जो हवा से पानी और पोषक तत्वों को अवशोषित करने में मदद करती हैं।

 

Question 10. परजीवी मूलें पायी जाती हैं –
(अ) मक्का में
(ब) आलू में
(स) अमरबेल में
(द) चीड़ में
Answer: (स) अमरबेल में
In simple words: अमरबेल एक ऐसा पौधा है जो दूसरे पौधों पर उगता है। इसकी जड़ें दूसरे पौधे के अंदर जाकर उसका खाना और पानी चूसती हैं, इसलिए इन्हें परजीवी मूलें कहते हैं।

🎯 Exam Tip: परजीवी मूलें, जिन्हें चूषक मूलें (haustoria) भी कहते हैं, परपोषी पौधे के संवहन ऊतकों (जाइलम और फ्लोएम) में प्रवेश करके पोषण प्राप्त करती हैं।

 

RBSE Class 11 Biology Chapter 17 अतिलघूत्तरात्मक प्रश्न

 

Question 1. श्वसन मूलें किस प्रकार के पादपों में पायी जाती हैं ?
Answer: श्वसन मूलें जलीय पौधों जैसे जूसीया में और दलदली स्थानों पर उगने वाले पौधों जैसे राइजोफोरा में पाई जाती हैं। ये मूलें मिट्टी के अंदर की ऑक्सीजन की कमी को पूरा करने में मदद करती हैं। ये पौधों को ऑक्सीजन लेने में सहायता करती हैं।
In simple words: दलदली और पानी वाले पौधों को सांस लेने वाली जड़ें होती हैं। ये जड़ें पानी या कीचड़ से बाहर निकलकर हवा से ऑक्सीजन लेती हैं।

🎯 Exam Tip: श्वसन मूलें (न्यूमेटोफोर) अक्सर नकारात्मक भू-अनवर्तनी होती हैं, जिसका अर्थ है कि वे गुरुत्वाकर्षण के विपरीत, मिट्टी से ऊपर की ओर बढ़ती हैं ताकि ऑक्सीजन प्राप्त कर सकें।

 

Question 2. अधिपादपों में आर्द्रताग्राही जड़े क्यों आवश्यक है ?
Answer: अधिपादप घने जंगलों और नमी वाले क्षेत्रों में मिलते हैं। वे अक्सर दूसरे पेड़ों की शाखाओं पर ऊँचाई पर उगते हैं। इनकी जड़ें जमीन से नहीं जुड़ी होतीं और हवा में लटकती रहती हैं। इसलिए, वायुमंडल की नमी को सोखने के लिए इनकी जड़ें आर्द्रताग्राही स्वभाव की होती हैं। इसका एक अच्छा उदाहरण वांडा है। ये जड़ें खास तरह के ऊतकों से बनी होती हैं जो हवा से पानी सोखते हैं।
In simple words: अधिपादप हवा में लटके रहते हैं और उनकी जड़ें जमीन से नहीं जुड़तीं। इसलिए, उन्हें हवा से पानी सोखना पड़ता है, जिसके लिए उन्हें आर्द्रताग्राही जड़ों की ज़रूरत होती है।

🎯 Exam Tip: अधिपादप की आर्द्रताग्राही जड़ों में वेलमेन नामक एक विशेष स्पंजी ऊतक होता है, जो हवा से नमी को अवशोषित करने में बहुत प्रभावी होता है।

 

RBSE Class 11 Biology Chapter 17 लघूत्तरात्मक प्रश्न

 

Question 1. मूल कितने प्रकार की होती हैं ? उनके नाम लिखिये।
Answer: मूल (जड़) मुख्य रूप से दो प्रकार की होती हैं: मूसला मूल (Tap root) और झकड़ा मूल (Fibrous root)।
1. मूसला मूल (Tap root): इस प्रकार की मूल में, मूलांकुर बढ़ता है और प्राथमिक मूल बनाता है। इस प्राथमिक मूल से द्वितीयक और तृतीयक जड़ें निकलती हैं। इन सभी जड़ों को मिलाकर मूसला मूल तंत्र कहा जाता है। यह अक्सर द्विबीजपत्री पौधों में पाया जाता है।
2. झकड़ा मूल (Fibrous root): इनमें प्राथमिक मूल कुछ समय के लिए ही रहती है। यह तने के आधार से विकसित होती हैं। ये जड़ें मिलकर एक झकड़ा जड़ तंत्र बनाती हैं। यह अक्सर एकबीजपत्री पौधों में पाया जाता है। झकड़ा मूलें मिट्टी में ज्यादा गहराई तक नहीं जातीं, बल्कि सतही तौर पर फैलती हैं।
In simple words: जड़ें दो तरह की होती हैं: मूसला जड़ें जो सीधे नीचे बढ़ती हैं और शाखाएँ बनाती हैं, और झकड़ा जड़ें जो तने के नीचे से एक गुच्छे में निकलती हैं।

🎯 Exam Tip: मूसला मूल गहराई में जाकर पानी और पोषक तत्व ढूंढती हैं, जबकि झकड़ा मूलें सतही मिट्टी से पानी और पोषक तत्व अवशोषित करती हैं।

 

Question 2. मूल के प्रमुख कार्य क्या हैं ?
Answer: मूल (जड़) के मुख्य कार्य इस प्रकार हैं:
1. स्थिरीकरण: मूल पौधे को जमीन में मज़बूती से टिकाए रखती है। प्राथमिक जड़ और उसकी शाखाएँ मिट्टी में फैलकर उसे स्थिर करती हैं।
2. अवशोषण: मूल और मूलरोम पानी और खनिज लवणों को मिट्टी से सोखते हैं।
3. संवहन: मूल में मौजूद जाइलम, सोखे हुए पानी और खनिज लवणों को तने और शाखाओं तक पहुँचाते हैं। यह जड़ों का एक महत्वपूर्ण कार्य है जो पूरे पौधे को पोषण देता है।
4. खाद्य संग्रह: कुछ जड़ें भोजन जमा करके फूल जाती हैं। यह भोजन पौधे को मुश्किल समय में मदद करता है।
5. विशिष्ट कार्य: कुछ पौधे ऊपर बताए गए कार्यों के अलावा कुछ खास कार्य भी करते हैं:
    • हवा से नमी सोखना, जैसे आर्किड्स में।
    • पौधे को अतिरिक्त सहारा देना, जैसे मक्का, बरगद, गन्ना में।
    • ऊपर चढ़ने में मदद करना, जैसे मनीप्लांट में।
    • सांस लेना (श्वसन), जैसे जूसीया और राइजोफोरा में न्यूमेटोफोर।
    • प्रकाश-संश्लेषण करना, जैसे सिंघाड़ा और टिनोस्पोरा में।
    • नए पौधे बनाना (कायिक प्रजनन), जैसे पत्थरचट्टा में।
In simple words: जड़ें पौधे को ज़मीन में पकड़े रखती हैं, पानी और खाना सोखती हैं, और उसे ऊपर भेजती हैं। कुछ जड़ें खाना जमा करती हैं, और कुछ खास जड़ें हवा से नमी लेती हैं या पेड़ को सहारा देती हैं।

🎯 Exam Tip: जड़ों के कार्यों को याद रखने का एक अच्छा तरीका है उन्हें '3S + 2F + V' के रूप में सोचना: स्थिरीकरण (Stability), अवशोषण (Absorption), संवहन (Transport), खाद्य संग्रह (Food storage) और विभिन्न विशिष्ट कार्य (Various functions)।

मूसला मूल व अपस्थानिक मूल में अन्तर

मूसला मूल (Tap root)अपस्थानिक मूल (Adventitious root)
1. यह मूलांकुर से उत्पन्न होती है।1. यह मूलांकुर के अलावा पौधे के अन्य भागों जैसे तना, पत्ती आदि से उत्पन्न होती है।
2. इससे प्राथमिक, द्वितीयक तथा तृतीयक मूलें निकलती हैं।2. इसमें से इस प्रकार की कोई मुख्य मूलें नहीं निकलती हैं।
3. प्राथमिक जड़ और उसकी शाखाओं को मूसला मूल तंत्र (tap root system) कहते हैं।3. अपस्थानिक मूल और इसकी शाखाओं को रेशेदार तंत्र (fibrous system) कहते हैं।
4. ये भूमि में अधिक गहराई तक जा सकती हैं।4. ये भूमि में अधिक गहराई तक नहीं जा सकती हैं।
5. सामान्यतः द्विबीजपत्री पौधों में मिलती हैं।5. सामान्यतः ये एकबीजपत्री पौधों में मिलती हैं।
6. ये हमेशा भूमिगत होती हैं।6. ये भूमिगत और वायवीय दोनों प्रकार की हो सकती हैं।

 

RBSE Class 11 Biology Chapter 17 निबन्धात्मक प्रश्न

 

Question 1. अपस्थानिक मूलों को यांत्रिक कार्यों के लिए होने वाले रूपान्तरणों का सचित्र वर्णन करें।
Answer: अपस्थानिक मूलें पौधे को यांत्रिक सहारा देने के लिए अलग-अलग तरह से बदल जाती हैं। नीचे कुछ प्रमुख रूपान्तरण दिए गए हैं (इस वर्णन में मूलों की आकृतियों को दर्शाने वाले चित्र शामिल हैं, जैसा कि अक्सर पाठ्यपुस्तकों में मिलते हैं):
1. अवस्तम्भ मूल (Prop root): ये जड़ें पौधे की वायवीय शाखाओं से नीचे लटकती हैं। इन पर मूल गोप होता है और ये बढ़ते हुए जमीन में घुस जाती हैं। ये पौधे को एक मज़बूत खंभे की तरह सहारा देती हैं। उदाहरण - बरगद।
2. जटा मूल (Stilt root): ये जड़ें तने के निचले हिस्से से तिरछी दिशा में बढ़ती हुई जमीन में प्रवेश करती हैं। ये तने को आधार देती हैं और उसे सीधा खड़ा रखने में मदद करती हैं। उदाहरण - मक्का, गन्ना, केवड़ा।
3. आरोही मूल (Climbing root): ये जड़ें पर्वसन्धियों से निकलती हैं और पौधे को ऊपर चढ़ने में मदद करती हैं। उदाहरण - पान। ये जड़ें पौधे को सतहों से चिपकने में सहायता करती हैं।
4. वप्रमूल (Buttress root): कुछ बड़े पेड़ों में, तने के निचले हिस्से से तख्ते जैसी जड़ें निकलकर अलग-अलग दिशाओं में फैलती हैं। ये असल में तने और जड़ों दोनों का एक हिस्सा होती हैं। उदाहरण - सेमल, टर्मिनेलिया। ये जड़ें पेड़ों को तेज़ हवाओं और तूफानों से बचाती हैं।
In simple words: अपस्थानिक जड़ें पेड़ को सहारा देने के लिए कई रूप लेती हैं। कुछ लटकती हैं (बरगद), कुछ तिरछी निकलती हैं (मक्का), कुछ चढ़ने में मदद करती हैं (पान), और कुछ बड़े पेड़ को मजबूत बनाती हैं (सेमल)।

🎯 Exam Tip: यांत्रिक सहारा देने वाली जड़ों के उदाहरणों को उनके कार्य के साथ याद रखें, जैसे बरगद की जड़ें पेड़ को ऊपर से सहारा देती हैं, जबकि मक्का की जड़ें नीचे से सहारा देती हैं।

 

Question 2. खाद्य संग्रहण के लिए मूसला मूलों व अपस्थानिक मूलों के रूपान्तरण का सचित्र वर्णन कीजिए।
Answer: खाद्य संग्रहण के लिए मूसला मूलों और अपस्थानिक मूलों दोनों में खास तरह के बदलाव आते हैं। ये जड़ें अतिरिक्त भोजन जमा करके मोटी और मांसल हो जाती हैं (इन जड़ों को दर्शाने वाले चित्र अक्सर पाठ्यपुस्तकों में देखे जाते हैं, जो उनकी विशिष्ट आकृतियों को दिखाते हैं)।
**मूसला मूल के रूपान्तरण (Modifications of tap root):**
ये जड़ें भोजन जमा करके मांसल हो जाती हैं। आकृति के आधार पर ये निम्न प्रकार की होती हैं:
1. तर्कुरूपी (Fusiform): ये जड़ें बीच में फूली हुई होती हैं और दोनों सिरों पर पतली होती जाती हैं। उदाहरण - मूली।
2. कुंभीरूपी (Napiform): इनका ऊपरी भाग काफी फूला हुआ होता है और निचला भाग एकदम से पतला हो जाता है। उदाहरण - शलजम और चुकंदर।
3. शंकुरूपी (Conical): इसका ऊपरी हिस्सा चौड़ा होता है और नीचे की ओर धीरे-धीरे पतला होता जाता है। उदाहरण - गाजर।
4. कंदिल (Tuberous): इसमें मूल फूली हुई होती है और इसकी आकृति निश्चित नहीं होती। उदाहरण - गुलअबास।
**अपस्थानिक मूलों के रूपान्तरण (Modifications of adventitious roots):**
ये जड़ें भी भोजन संग्रह के लिए बदल जाती हैं और कई तरह की होती हैं (इन जड़ों की आकृतियों को दर्शाने वाले चित्र आमतौर पर शकरकंद, डहेलिया आदि के लिए देखे जाते हैं):
1. कंदिल जड़ें (Tuberous roots): कुछ पौधों में, तने की पर्वसन्धियों से जड़ें निकलती हैं। ये भोजन संग्रह के कारण मोटी और पतली हो जाती हैं और इनकी आकृति निश्चित नहीं होती। उदाहरण - शकरकंद।
2. कंदिल गुच्छ मूल (Fasciculated root): अपस्थानिक जड़ें गुच्छों में निकलती हैं और सभी फूली हुई होती हैं। उदाहरण - शतावर (Asparagus), डहेलिया (Dahlia)।
3. ग्रन्थिमय मूल (Nodulose root): अपस्थानिक मूल का आखिरी सिरा या शीर्ष भोजन जमा होने के कारण फूलकर गोल हो जाता है। उदाहरण - आम्बा हल्दी।
4. मालाकार मूल (Moniliform root): ये जड़ें एकान्तर क्रम में फूली और पिचकी हुई होती हैं, जिससे एक माला जैसी संरचना बनती है। उदाहरण - करेला।
5. वलयाकार मूल (Annulated root): भूमिगत अपस्थानिक मूल में भोजन जमा होकर फूले हुए भागों में वलयों की श्रृंखला बन जाती है। उदाहरण - आइपिकाक (Ipecac)। ये सभी रूपान्तरण पौधे को जीवित रहने और ऊर्जा प्रदान करने में मदद करते हैं।
In simple words: जड़ें खाना जमा करने के लिए मोटी हो जाती हैं। मूसला जड़ें गाजर (शंकु), मूली (तर्कु) और शलजम (कुंभी) जैसी दिखती हैं। अपस्थानिक जड़ें शकरकंद (कंदिल), डहेलिया (गुच्छेदार) और करेला (माला जैसी) जैसी होती हैं।

🎯 Exam Tip: खाद्य संग्राहक जड़ों के विभिन्न प्रकारों को उनके उदाहरणों और विशिष्ट आकृतियों के साथ याद रखें, क्योंकि यह अक्सर चित्रात्मक प्रश्नों में पूछा जाता है।

 

Question 3. मूलशीर्ष के विभिन्न क्षेत्रों को चित्र की सहायता से समझाइये।
Answer: मूल (जड़) के सिरे के विभिन्न क्षेत्रों को समझने के लिए एक अंकुरित बीज की मूल सबसे अच्छा उदाहरण है। मूलशीर्ष में मुख्य रूप से निम्नलिखित क्षेत्र होते हैं (इन क्षेत्रों को एक सरल आरेख में स्पष्ट रूप से दिखाया जाता है):
(i) मूल गोप क्षेत्र (Root cap region): मूल के सबसे ऊपरी सिरे पर एक टोपी जैसी संरचना होती है, जिसे मूल गोप कहते हैं। इसका मुख्य काम मूल के वृद्धि क्षेत्र यानी सिरे को सुरक्षा देना है। जब मूल ज़मीन के अंदर बढ़ती है, तो मूल गोप की कोशिकाएँ घर्षण से घिस जाती हैं, लेकिन विभज्योतक ऊतक से बनी नई कोशिकाएँ इसकी पूर्ति करती रहती हैं। इस तरह, मूल गोप बना रहता है। जलीय पौधों में मूल गोप की जगह मूल कोटरिकाएँ या पॉकेट पाए जाते हैं, जैसे लेम्ना और पिस्टिया में।
(iii) दीर्घाकरण क्षेत्र (Region of elongation): यह क्षेत्र विभज्योतक क्षेत्र के ठीक ऊपर 1 से 5 मिलीमीटर तक होता है। इस क्षेत्र में, विभज्योतक क्षेत्र से बनी कोशिकाएँ लंबाई में बढ़ती हैं, जिससे मूल की लंबाई बढ़ती है। कोशिकाओं की लंबाई बढ़ने से जड़ मिट्टी में गहराई तक जा पाती है।
(iv) परिपक्कन क्षेत्र (Region of maturation): दीर्घाकरण क्षेत्र के ऊपर का कुछ मिलीमीटर से लेकर कुछ सेंटीमीटर तक का क्षेत्र परिपक्कन क्षेत्र कहलाता है। इस क्षेत्र में कोशिकाएँ अपना पूरा आकार लेती हैं और ऊतकों में बदल जाती हैं। इस क्षेत्र की अधिचर्म की कोशिकाओं से कई मूलरोम निकलते हैं। मूलरोम पौधों को मिट्टी में मज़बूती से टिकाए रखने और पानी व खनिज पदार्थों को सोखने का काम करते हैं। इन सभी क्षेत्रों के बाद, ऊपर वाले हिस्से में पार्श्व जड़ें क्रमबद्ध तरीके से विकसित होती हैं।
In simple words: जड़ के सिरे पर कई हिस्से होते हैं: सबसे ऊपर मूल गोप जो सुरक्षा देता है; फिर लंबा होने वाला क्षेत्र जहाँ कोशिकाएँ बड़ी होती हैं; और सबसे ऊपर परिपक्कन क्षेत्र जहाँ मूलरोम पानी सोखते हैं।

🎯 Exam Tip: मूलशीर्ष के प्रत्येक क्षेत्र के कार्य को उसकी स्थिति के साथ जोड़कर याद रखें, जैसे मूल गोप सुरक्षा के लिए, दीर्घाकरण क्षेत्र लंबाई बढ़ाने के लिए, और परिपक्कन क्षेत्र अवशोषण के लिए।

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