RBSE Solutions Class 11 Biology Chapter 11 कोशिका विभाजन

NCERT Solutions for Class 11 Biology: Chapter 11 कोशिका विभाजन

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Practice Class 11 Biology Solutions: Chapter 11 कोशिका विभाजन

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RBSE Class 11 Biology Chapter 11 वस्तुनिष्ठ प्रश्न

 

Question 1. कोशिका चक्र का किस प्रावस्था को डी.एन.ए. संश्लेषण प्रावस्था भी कहते हैं –
(a) G – प्रावस्था
(b) S - प्रावस्था
(c) G₁ – प्रावस्था
(d) M – प्रावस्था
Answer: (b) S - प्रावस्था
In simple words: कोशिका चक्र में, S प्रावस्था वह समय होता है जब DNA बनता है और अपनी मात्रा दोगुनी करता है. इसलिए इसे DNA संश्लेषण प्रावस्था भी कहते हैं.

🎯 Exam Tip: कोशिका चक्र की विभिन्न प्रावस्थाओं को याद रखें, खासकर S प्रावस्था को DNA संश्लेषण से जोड़कर।

 

Question 2. सामान्यतया जीवाणु कोशिका विभाजित होती है –
(a) असूत्री कोशिका विभाजन द्वारा
(b) समसूत्री कोशिका विभाजन द्वारा
Answer: (a) असूत्री कोशिका विभाजन द्वारा
In simple words: जीवाणु कोशिकाएँ आमतौर पर असूत्री विभाजन नामक एक सरल विधि से बँटती हैं. इस प्रक्रिया में, कोशिका सीधे दो हिस्सों में बँट जाती है, जिसमें कोई जटिल गुणसूत्र पुनर्व्यवस्था नहीं होती.

🎯 Exam Tip: याद रखें कि जीवाणु जैसी सरल कोशिकाओं में असूत्री विभाजन होता है, जबकि जटिल कोशिकाओं में समसूत्री या अर्धसूत्री विभाजन होता है।

 

Question 3. जायगोटिन उप-प्रावस्था में समजात गुणसूत्रों के युग्मन को कहते हैं –
(a) पेकाइटिन में
(b) जाइगोटिन में
(c) डिप्लोटिन में
(d) डायकाइनेसिस में
Answer: (b) जाइगोटिन में
In simple words: अर्धसूत्री विभाजन की जाइगोटिन अवस्था में, समान गुणसूत्र एक-दूसरे के साथ जोड़े बनाते हैं. इस प्रक्रिया को सूत्रयुग्मन (Synapsis) कहते हैं.

🎯 Exam Tip: अर्धसूत्री विभाजन की प्रोफेज़-I की विभिन्न उप-प्रावस्थाओं के विशिष्ट लक्षणों को याद रखें, जैसे जाइगोटिन में सूत्रयुग्मन होता है।

 

Question 4. कोशिका विभाजन का वह प्रकार जिसमें पुत्री कोशिकाओं में गुणसूत्रों की संख्या आधी रह जाती है, कहलाता है –
(a) अर्धसूत्री विभाजन
(b) समसूत्री विभाजन
(c) असूत्री विभाजन
(d) उपरोक्त सभी
Answer: (a) अर्धसूत्री विभाजन
In simple words: अर्धसूत्री विभाजन एक विशेष प्रकार का कोशिका विभाजन है जो जनन कोशिकाओं में होता है. इसमें मूल कोशिका के गुणसूत्रों की संख्या आधी हो जाती है, जिससे संतति कोशिकाओं में आधे गुणसूत्र होते हैं.

🎯 Exam Tip: अर्धसूत्री विभाजन का मुख्य कार्य युग्मकों में गुणसूत्रों की संख्या को आधा करना है, जो लैंगिक प्रजनन के लिए आवश्यक है।

 

RBSE Class 11 Biology Chapter 11 अतिलघुत्तरात्मक प्रश्न

 

Question 1. कोशिका चक्र का सर्वप्रथम वर्णन किसने व कब किया?
Answer: कोशिका चक्र का सर्वप्रथम वर्णन होवर्ड एवं पेल्क (Howard and Pelc) ने 1953 में किया था. उन्होंने बताया कि कोशिकाएँ एक नियमित चक्र में विभाजित होती हैं.
In simple words: हावर्ड और पेल्क ने 1953 में पहली बार कोशिका चक्र के बारे में बताया था.

🎯 Exam Tip: वैज्ञानिक के नाम और वर्ष को ठीक से याद रखें, यह महत्वपूर्ण जानकारी है।

 

Question 2. असूत्री कोशिका विभाजन का एक प्रमुख लक्षण लिखिए।
Answer: असूत्री कोशिका विभाजन का एक प्रमुख लक्षण यह है कि इसमें पुत्री कोशिकाओं में आनुवंशिक पदार्थ बराबर मात्रा में नहीं बँटता है. यह एक सरल विभाजन प्रक्रिया है.
In simple words: असूत्री विभाजन में, आनुवंशिक सामग्री बेटियों कोशिकाओं में समान रूप से नहीं बँटती है.

🎯 Exam Tip: असूत्री विभाजन की मुख्य विशेषताओं पर ध्यान दें, विशेषकर आनुवंशिक सामग्री के असमान वितरण पर।

 

Question 3. सिनेप्सिस क्या है ?
Answer: सिनेप्सिस (Synapsis) वह प्रक्रिया है जिसमें अर्धसूत्री विभाजन के दौरान दो समान या समजात गुणसूत्र एक-दूसरे के पास आकर युग्म या जोड़े बनाते हैं. यह गुणसूत्रों के बीच जीन विनिमय के लिए महत्वपूर्ण है.
In simple words: सिनेप्सिस वह प्रक्रिया है जब अर्धसूत्री विभाजन के दौरान एक जैसे गुणसूत्र आपस में जुड़कर जोड़े बनाते हैं.

🎯 Exam Tip: सिनेप्सिस की परिभाषा और इसका अर्धसूत्री विभाजन में महत्व समझें।

 

Question 4. काइज्मेटा क्या है ?
Answer:
In simple words:

🎯 Exam Tip: काइज्मेटा क्रॉसिंग ओवर के स्थल होते हैं, जहाँ गुणसूत्रों के खंडों का आदान-प्रदान होता है।

 

Question 1. असूत्री कोशिका विभाजन का संक्षेप में वर्णन कीजिए।
Answer: असूत्री विभाजन (Amitosis) को प्रत्यक्ष विभाजन भी कहते हैं. इस प्रक्रिया में, सबसे पहले कोशिका का केंद्रक सीधा विभाजित होता है, और फिर कोशिकाद्रव्य का विभाजन होता है. यह विभाजन प्रोटोजोआ जैसे जीवों और भ्रूणीय कलाओं की कोशिकाओं में देखा जाता है. विभाजन की शुरुआत में, केंद्रक लंबा हो जाता है और बीच में सिकुड़ना शुरू हो जाता है, जिससे यह डम्बल के आकार का दिखाई देता है. यह सिकुड़ना धीरे-धीरे गहरा होता जाता है और अंत में दो केंद्रक बन जाते हैं. इसी के साथ-साथ, कोशिकाद्रव्य भी सिकुड़कर विभाजित होता रहता है, जिससे अंत में दो पुत्री कोशिकाएँ बनती हैं. इस प्रकार के विभाजन का वर्णन सर्वप्रथम रॉबर्ट और मार्क ने 1885 में किया था, और फ्लेमिंग ने 1882 में इसे एमाइटोसिस नाम दिया था. यह पैरामीशियम के बड़े केंद्रक और रोगग्रस्त पुरानी कोशिकाओं में भी पाया जाता है. इस विभाजन के दौरान:
1. लंबे क्रोमेटिन तंतु संघनित होकर गुणसूत्र नहीं बनाते हैं.
2. लंबे क्रोमेटिन तंतु केंद्रक में सिकुड़न के दौरान टूट जाते हैं.
3. गुणसूत्रों के अलग होने और दोनों पुत्री कोशिकाओं में जाने के लिए समान रूप से विभाजन नहीं होता.
4. दोनों पुत्री कोशिकाओं में क्रोमेटिन पदार्थ का वितरण असमान होता है, जिससे कोशिकाओं में संरचनात्मक अंतर हो सकते हैं.
In simple words: असूत्री विभाजन एक सीधा कोशिका विभाजन है जिसमें पहले केंद्रक और फिर कोशिकाद्रव्य बँटते हैं. इसमें गुणसूत्र नहीं बनते और आनुवंशिक पदार्थ का वितरण बराबर नहीं होता है. यह सरल जीवों में होता है.

🎯 Exam Tip: असूत्री विभाजन की परिभाषा, प्रक्रिया के मुख्य बिंदु और उदाहरण (जैसे प्रोटोजोआ) याद रखें।

 

Question 2. समसूत्री विभाजन का महत्त्व बताइए।
Answer: समसूत्री विभाजन का महत्त्व निम्नलिखित है:
1. यह एक ऐसा विभाजन है जिससे बनने वाली संतति कोशिकाएँ (पुत्री कोशिकाएँ) गुणों और संरचना में अपनी मातृ कोशिका (मूल कोशिका) के समान होती हैं. पुत्री कोशिकाओं में गुणसूत्रों की संख्या और उनकी खास विशेषताएँ मातृ कोशिका जैसी ही रहती हैं.
2. इस विभाजन से बहुकोशिकीय संरचनाएँ बनती हैं, जबकि हर जीव का जीवन एक कोशिका से शुरू होता है.
3. एककोशिकीय जीवों में यह विभाजन प्रजनन का तरीका है.
4. वृद्धि के लिए, यदि कोशिका बहुत बड़ी हो जाती है, तो उसके कोशिकाद्रव्य की सक्रियता कम हो सकती है. इसलिए, कोशिका विभाजन जीव के आकार को बढ़ाते हुए भी उसकी सक्रियता को कम नहीं होने देता, यानी यह पुरानी कोशिकाओं की जगह नई, सक्रिय कोशिकाएँ बनाता है.
In simple words: समसूत्री विभाजन से शरीर की वृद्धि होती है, टूटे-फूटे अंगों की मरम्मत होती है, और एककोशिकीय जीवों में यह प्रजनन का काम करता है. इससे बनी कोशिकाएँ मूल कोशिका जैसी ही होती हैं.

🎯 Exam Tip: समसूत्री विभाजन के महत्व को वृद्धि, मरम्मत, प्रजनन, और आनुवंशिक स्थिरता के संदर्भ में याद रखें।

 

Question 3. जीवों के जीवन में अर्धसूत्री विभाजन क्यों महत्त्वपूर्ण है ?
Answer: जीवों के जीवन में अर्धसूत्री विभाजन निम्न कारणों से महत्त्वपूर्ण है:
1. इस विभाजन से जीवों की संततियों में पीढ़ी दर पीढ़ी गुणसूत्रों की संख्या निश्चित बनी रहती है, क्योंकि यह गुणसूत्रों की संख्या को आधा कर देता है.
2. इस विभाजन की पैकीटीन और डिप्लोटीन अवस्थाओं में होने वाले जीन विनिमय (आनुवंशिक सामग्री का आदान-प्रदान) के कारण संततियों में आनुवंशिक विविधताएँ आती हैं. ये विविधताएँ नई जातियों के विकास का आधार बनती हैं, जिससे नई और अधिक विकसित जातियों की उत्पत्ति संभव होती है.
3. यह विभाजन लैंगिक जनन करने वाले जीवों में लैंगिक चक्र को पूरा करने के लिए बहुत ज़रूरी है, क्योंकि इसी विभाजन से युग्मक (अंडाणु और शुक्राणु) बनते हैं.
4. यदि यह विभाजन नहीं होता है, तो कोशिकाओं में गुणसूत्रों की संख्या दोगुनी होती जाएगी, जिससे बहुगुणिता (पॉलीप्लॉइडी) उत्पन्न होगी.
In simple words: अर्धसूत्री विभाजन इसलिए ज़रूरी है क्योंकि यह गुणसूत्रों की संख्या को स्थिर रखता है, विविधता लाता है, और लैंगिक प्रजनन के लिए युग्मक बनाता है. इसके बिना, गुणसूत्रों की संख्या बढ़ती रहेगी.

🎯 Exam Tip: अर्धसूत्री विभाजन के मुख्य कार्यों को याद रखें: गुणसूत्र संख्या की स्थिरता, आनुवंशिक विविधता और युग्मक निर्माण।

 

Question 4. अर्धसूत्री विभाजन प्रथम की प्रोफेज प्रथम की विभिन्न प्रावस्थाओं के नाम लिखिए।
Answer: अर्धसूत्री विभाजन प्रथम की प्रोफेज प्रथम की प्रावस्थाओं के नाम निम्न हैं:
1. तनुसूत्रावस्था या लेप्टोटीन (Leptotene)
2. युग्मसूत्रावस्था या जाइगोटिन (Zygotene)
3. स्थूल सूत्रावस्था या पेकाइटिन (Pachytene)
4. द्विसूत्रावस्था या डिप्लोटिन (Diplotene)
5. पारगतिक्रम या डाइकाइनेसिस (Diakinesis)
In simple words: अर्धसूत्री विभाजन की प्रोफेज-I में पाँच अलग-अलग चरण होते हैं: लेप्टोटीन, जाइगोटिन, पेकाइटिन, डिप्लोटिन और डाइकाइनेसिस.

🎯 Exam Tip: अर्धसूत्री विभाजन की प्रोफेज-I की सभी पाँच उप-प्रावस्थाओं को क्रम से याद रखें।

 

RBSE Class 11 Biology Chapter 11 निबन्धात्मक प्रश्न

 

Question 1. कोशिका चक्र से आप क्या समझते हैं? कोशिका चक्र का सचित्र वर्णन कीजिए।
Answer: कोशिका के एक विभाजन के अंत से अगले विभाजन के अंत तक के चक्रीय क्रम को कोशिका चक्र कहते हैं. इसका विस्तार से अध्ययन हावर्ड और पेल्क (Howard and Pelc, 1953) ने प्रस्तुत किया. कोशिका चक्र में लगने वाले समय को 'एक पीढ़ीकाल' (one generation) कहा जाता है. कोशिका चक्र की शुरुआत नई बनी हुई कोशिका से होती है, जो जनक कोशिका से छोटी होती है.
कोशिका चक्र में मुख्य रूप से दो प्रमुख अवस्थाएँ होती हैं:
1. अन्तरावस्था (Interphase)
2. M-प्रावस्था (Miotic Phase)

1. **अन्तरावस्था (Interphase):** यह दो लगातार विभाजनों के बीच का वह समय होता है जब कोशिका विभाजित नहीं हो रही होती, बल्कि अपनी तैयारी कर रही होती है. कोशिकाएँ अपने जीवन का अधिकांश समय इसी अवस्था में बिताती हैं. इस दौरान तेजी से जैवसंश्लेषण होता है, जिससे कोशिका का आकार दोगुना हो जाता है. इसे विश्राम अवस्था भी कहते हैं, लेकिन यह कोशिका चक्र की सबसे सक्रिय अवस्था है. इसे निर्माणात्मक अवस्था भी कहते हैं. इस प्रावस्था में निम्न घटनाएँ होती हैं:
• विभिन्न पदार्थों के संश्लेषण से केंद्रक और कोशिकाद्रव्य का आकार बढ़ता है.
• तारककाय (Centrosome) के विभाजन से दो पुत्री तारककायों का निर्माण होता है.
• DNA में प्रतिकृतिकरण (replication) होने से उसकी मात्रा दोगुनी हो जाती है.
• ऊर्जायुक्त यौगिकों (ATP) का संश्लेषण होता है.

अन्तरावस्था में होने वाली संश्लेषी क्रियाओं के आधार पर होवार्ड एवं पेल्क (Howard and Pelc, 1953) ने इसे तीन अवधियों में बाँटा है:
(a) **G₁ प्रावस्था (Gap - 1 Phase):** यह कोशिका विभाजन के तुरंत बाद शुरू होती है और कोशिका चक्र में सबसे अधिक समय लेती है. इस अवस्था में गुणसूत्र लंबे और पतले होते हैं, और ट्रांसक्रिप्शन के लिए सक्रिय होते हैं. वे आपस में लिपटकर क्रोमेटिन जाल बनाते हैं. इस प्रावस्था में कई उपापचयी क्रियाएँ होती हैं, जो DNA के द्विगुणन के लिए ज़रूरी हैं. इसमें प्रोटीन, RNA, DNA संश्लेषण के लिए आवश्यक एंजाइम और नाइट्रोजन क्षारों का संश्लेषण और संग्रह होता है. यह कोशिका चक्र की एक महत्वपूर्ण अवस्था है.
(b) **S प्रावस्था (Synthesis Phase):** यह प्रावस्था G₁ के बाद आती है. इसमें DNA, RNA और हिस्टोन प्रोटीन्स का संश्लेषण होता है, इसलिए इसे DNA संश्लेषण प्रावस्था भी कहते हैं. DNA की प्रतिकृति से DNA की मात्रा दोगुनी हो जाती है (जैसे यदि DNA 2C है तो 4C हो जाता है). इस प्रावस्था में 6 से 9 घंटे लगते हैं.
(c) **G₂ प्रावस्था (Gap - II Phase):** यह प्रावस्था S प्रावस्था के बाद आती है. इसे पश्च DNA संश्लेषी अवस्था भी कहते हैं. इस दौरान विभाजन के लिए आवश्यक RNA (mRNA, tRNA, rRNA) और प्रोटीन का संश्लेषण होता है. तर्क तंतुओं (स्पिंडल फाइबर्स) के निर्माण में आवश्यक प्रोटीन्स भी इसी प्रावस्था में बनते हैं. इसमें DNA का संश्लेषण नहीं होता है.

II. **M – प्रावस्था (M – Phase):** इसे विभाजनकारी अवस्था भी कहते हैं. यह M अक्षर द्वारा दर्शाई जाती है (M माइटोसिस को दर्शाता है). सूत्री विभाजन (माइटोसिस) होने से क्रोमेटिड अलग-अलग होकर संतति क्रोमोसोम बनाते हैं. ये संतति क्रोमोसोम संतति केंद्रकों में चले जाते हैं और कोशिकाद्रव्य बँटकर दो एक समान संतति कोशिकाओं का निर्माण करता है.

M G1 S G2 कोशिका चक्र अन्तरावस्था (इन्टरफेज)


In simple words: कोशिका चक्र वह प्रक्रिया है जिसमें एक कोशिका विभाजित होकर नई कोशिकाएँ बनाती है, और फिर वे नई कोशिकाएँ बड़ी होकर दोबारा विभाजित होती हैं. इसमें दो मुख्य चरण होते हैं: तैयारी का चरण (अन्तरावस्था) और विभाजन का चरण (M-प्रावस्था).

🎯 Exam Tip: कोशिका चक्र की सभी प्रावस्थाओं और उनके प्रमुख घटनाओं को क्रम से याद रखें। डायग्राम में लेबलिंग और तीरों का सही प्रयोग करें।

 

Question 2. समसूत्री विभाजन की विभिन्न प्रावस्थाओं को केवल नामांकित चित्र की सहायता से समझाइए।
Answer: समसूत्री विभाजन (Mitosis) कायिक कोशिकाओं में होता है. डब्ल्यू. फ्लेमिंग (W. Fleming) ने 1882 में इसका पता लगाया. यह मुख्य रूप से वृद्धि वाले क्षेत्रों या विभज्योतक कोशिकाओं में होता है. इस विभाजन से एक मातृ कोशिका से दो पुत्री केंद्रक बनते हैं, जिनमें गुणसूत्रों की संख्या और सभी गुण मातृ कोशिका के समान होते हैं. यह प्रक्रिया एक सतत प्रक्रिया है. सूत्री विभाजन का अध्ययन निम्न चरणों में किया जाता है:
**केन्द्रक विभाजन (Karyokinesis):** केंद्रक विभाजन में लगातार चलने वाली क्रियाओं को अध्ययन के लिए निम्न प्रावस्थाओं में बाँटा जा सकता है:
1. **पूर्वावस्था (Prophase):** अंतरावस्था के बाद यह विभाजन की पहली अवस्था है. इसमें क्रोमेटिन जाल संघनित होकर छोटे और मोटे गुणसूत्रों में बदल जाते हैं. प्रत्येक गुणसूत्र लंबाई में दो पतले धागेनुमा संरचनाओं में टूटता है, जिन्हें क्रोमेटिड कहते हैं, जो सेंट्रोमियर से जुड़े रहते हैं. केंद्रक कला और केंद्रिका इस अवस्था के अंत तक विलुप्त हो जाती हैं.
2. **मध्यावस्था (Metaphase):** इस अवस्था में गुणसूत्र मध्य रेखा (मेटाफेज प्लेट) पर व्यवस्थित हो जाते हैं. सेंट्रिओल से तर्क तंतु बनते हैं और ध्रुवों पर पहुँच जाते हैं. गुणसूत्र सेंट्रोमियर से तर्क तंतुओं से जुड़ते हैं. कुछ समय बाद, सेंट्रोमियर बीच से दो भागों में विभाजित हो जाता है.
3. **पश्चावस्था (Anaphase):** इस अवस्था में दोनों क्रोमेटिड प्रतिकर्षण बल के कारण एक-दूसरे से अलग होकर विपरीत ध्रुवों की ओर बढ़ने लगते हैं. गुणसूत्र V, J या I आकार ले लेते हैं. इस प्रकार, एक क्रोमोसोम से बने समान क्रोमेटिड दो विपरीत ध्रुवों पर पहुँच जाते हैं.
4. **अन्त्यावस्था (Telophase):** इस अवस्था में दोनों ध्रुवों पर गुणसूत्रों का मैट्रिक्स समाप्त होकर फिर क्रोमेटिन जाल बन जाता है. केंद्रक कला और केंद्रिका फिर से बन जाते हैं. अंत में, एक कोशिका में दो पुत्री केंद्रक दिखाई देते हैं.
**कोशिकाद्रव्य विभाजन (Cytokinesis):** केंद्रक विभाजन के बाद कोशिकाद्रव्य का विभाजन होता है, जिससे दो स्वतंत्र पुत्री कोशिकाएँ बनती हैं. पादप कोशिकाओं में कोशिका पट्टिका विधि (Cell plate method) द्वारा और जंतु कोशिकाओं में कोशिका खाँच विधि (Cell furrow method) द्वारा कोशिकाद्रव्य विभाजन होता है.

पूर्वावस्था मध्यावस्था पश्चावस्था अन्त्यावस्था केन्द्रक विभाजन (Karyokinesis) कोशिकाद्रव्य विभाजन कोशिका खाँच विधि (Cell furrow method) कोशिका पट्टिका विधि (Cell plate method) कोशिका चक्र की अवस्थाएँ


In simple words: समसूत्री विभाजन में कोशिका चार मुख्य चरणों में बँटती है: पूर्वावस्था, मध्यावस्था, पश्चावस्था और अन्त्यावस्था. इन चरणों में केंद्रक और गुणसूत्र व्यवस्थित रूप से बँटते हैं. अंत में, कोशिकाद्रव्य भी बँटकर दो नई कोशिकाएँ बनाता है.

🎯 Exam Tip: समसूत्री विभाजन की प्रत्येक प्रावस्था के प्रमुख घटनाक्रम और डायग्राम को ध्यान से पढ़ें और नामांकित करें। कोशिकाद्रव्य विभाजन के दोनों तरीकों को भी याद रखें।

 

Question 4. समसूत्री व अर्धसूत्री विभाजन में अन्तर बताइए।
Answer: समसूत्री और अर्धसूत्री विभाजन में अंतर निम्नलिखित तालिका में दिए गए हैं:

सूत्री विभाजन (Mitosis)अर्द्धसूत्री विभाजन (Meiosis)
1. कोशिका एक बार विभाजित होती है।कोशिका दो बार विभाजित होती है।
2. यह कायिक कोशिकाओं में होता है।केवल जनन कोशिकाओं में होता है।
3. अलैंगिक व लैंगिक दोनों तरह की कोशिकाओं में पाया जाता है।केवल लैंगिक जनन में होता है।
4. DNA का द्विगुणन अन्तरावस्था में होता है। परन्तु द्वितीय अन्तरावस्था में नहीं होता है।DNA का द्विगुणन प्रथम अन्तरावस्था में होता है।
5. एक बार विभाजन के लिए DNA में द्विगुणन एक बार होता है।दो बार विभाजन के लिए DNA का द्विगुणन एक बार होता है।
6. प्रावस्था बहुत छोटी होती है।प्रावस्था एक सबसे लम्बी अवस्था होती है। इसमें लेप्टोटीन, जाइगोटीन, पैकीटीन, डिप्लोटीन तथा डाइकाइनेसिस आदि अवस्थाएँ मिलती हैं।
10. गुणसूत्र युग्म (pair) नहीं बनते हैं। कुण्डली प्लेक्टोनीमिक (Plectonemic) होती है।गुणसूत्र युग्मी (Paired) होते हैं तथा कुण्डली पेरानीमिक (Paranemic) होती है।
11. क्रॉसिंग ओवर नहीं होता है तथा काइऐज्मा नहीं बनता है।क्रॉसिंग ओवर होने तथा काइऐज्मा बनने से गुणसूत्र खण्डों का विनिमय होता है।
12. कोशिका विभाजन तथा गुणसूत्र विभाजन एक ही बार होता है।कोशिका विभाजन दो बार परन्तु गुणसूत्र विभाजन एक बार होता है।
13. मध्यावस्था में सभी सेन्ट्रोमियर मध्य रेखा पर आ जाते हैं तथा एक रेखा में व्यवस्थित होते हैं।मध्यावस्था I में सेन्ट्रोमियर दो रेखाओं में व्यवस्थित रहते हैं तथा भुजाएँ मध्य रेखा पर होती हैं।
14. मध्यावस्था में सेन्ट्रोमियर विभाजित हो जाता है।मध्यावस्था I में सेन्ट्रोमियर विभाजित नहीं होता है परन्तु समजात गुणसूत्र अलग-अलग हो जाते हैं।
15. पश्चावस्था में दोनों हिस्से गुणसूत्र के अलग-अलग ध्रुवों की ओर चलते हैं।पश्चावस्था I में पहले छोटे कम काइऐज्मा वाले गुणसूत्र तथा फिर लम्बे अधिक काइऐज्मा वाले गुणसूत्र अलग होते हैं।
16. अन्त्यावस्था में तर्क तन्तु लुप्त हो जाते हैं, केन्द्रिक फिर से बन जाता है।अन्त्यावस्था में केन्द्रिक फिर से नहीं बनता है।
17. केन्द्रक विभाजन के पश्चात् कोशिकाद्रव्य विभाजित होता है।केन्द्रक विभाजन के पश्चात् कोशिकाद्रव्य का विभाजित होना निश्चित नहीं होता है।
18. विभाजन के पश्चात् गुणसूत्र संख्या पुत्री कोशिका में मातृ कोशिका के समान होती है।विभाजन के पश्चात् पुत्री कोशिका में गुणसूत्र संख्या मातृ कोशिका की आधी होती है।
19. पुत्री कोशिका तथा मातृ कोशिका के लक्षण समान होते हैं।पुत्री कोशिका में मातृ व पितृ लक्षणों का मिश्रण मिलता है।
20. दूसरा विभाजन नहीं होता है।पुत्री कोशिका में एक बार फिर विभाजन होता है। यह विभाजन समसूत्री विभाजन होता है अर्थात् प्रावस्था II, मध्यावस्था II,
22. अन्त में एक कोशिका से दो पुत्री कोशिकाएँ समान गुणसूत्र संख्या की बनती हैं।एक कोशिका से चार कोशिकाएँ आधी गुणसूत्र संख्या की बनती हैं।


In simple words: समसूत्री विभाजन से दो एक जैसी कोशिकाएँ बनती हैं, जबकि अर्धसूत्री विभाजन से चार अलग-अलग कोशिकाएँ बनती हैं जिनमें गुणसूत्रों की संख्या आधी होती है. समसूत्री विभाजन वृद्धि और मरम्मत के लिए होता है, जबकि अर्धसूत्री विभाजन प्रजनन के लिए होता है.

🎯 Exam Tip: तालिका का उपयोग करके दोनों विभाजनों के बीच के सभी मुख्य अंतरों को याद रखें, विशेषकर विभाजन की संख्या, कोशिकाओं के प्रकार, गुणसूत्रों की संख्या और आनुवंशिक विविधता के संदर्भ में।

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