Step-by-Step Textbook Solutions for Class 11 Biology Chapter 10 केन्द्रक एवं गुणसूत्र
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RBSE Class 11 Biology Chapter 10 वस्तुनिष्ठ प्रश्न
Question 1. सोलेनायड किस संरचना से सम्बन्धित है –
(अ) केन्द्रक
(ब) केन्द्रिका
(स) क्रोमेटिन
(द) न्यूक्लिओइड
Answer: (स) क्रोमेटिन
In simple words: सोलेनायड क्रोमेटिन की एक संरचना है, जो गुणसूत्रों को बनाने में मदद करती है।
🎯 Exam Tip: सोलेनायड संरचना क्रोमेटिन के संगठन का एक महत्वपूर्ण स्तर है, इसे ध्यान में रखें।
Question 2. क्रोमेटिन का उपयुक्त अभिरंजक है –
(अ) सेफ्रेनीन
(ब) एसीटोकारमीन
Answer: (ब) एसीटोकारमीन
In simple words: क्रोमेटिन को अच्छे से देखने के लिए एसीटोकारमीन नाम का रंग सबसे अच्छा होता है।
🎯 Exam Tip: कोशिका विज्ञान में विभिन्न संरचनाओं को देखने के लिए अलग-अलग अभिरंजक (रंग) उपयोग किए जाते हैं, जो उनकी रासायनिक प्रकृति पर निर्भर करता है। एसीटोकारमीन क्रोमेटिन के लिए विशेष रूप से प्रभावी है।
Question 4. संकोशिकी (Coenocyte) दशा का उदाहरण है –
(अ) वाउचेरिया शैवाल
(ब) रेखित पेशी की कोशिकाएँ
(स) एस्कैरिस की एपीथीलियल कोशिकाओं में
(द) उपरोक्त सभी
Answer: (अ) वाउचेरिया शैवाल
In simple words: वाउचेरिया शैवाल एक उदाहरण है जहाँ कोशिका में बहुत सारे केन्द्रक एक साथ होते हैं, इसे संकोशिकी कहते हैं।
🎯 Exam Tip: संकोशिकी (Coenocyte) और सिनसिटियम (Syncytium) के बीच अंतर को समझें, जहाँ संकोशिकी बहुकेन्द्रकीय पादप कोशिकाओं को संदर्भित करता है।
Question 5. केन्द्रक झिल्ली का उद्भव किस कोशिकीय अवयव से होता है –
(अ) माइटोकॉन्ड्रिया
(ब) गाल्जीकाय
(स) अंतर्द्रव्यी जालिका
(द) लाइसोसोम
Answer: (स) अंतर्द्रव्यी जालिका
In simple words: केन्द्रक झिल्ली अंतर्द्रव्यी जालिका नामक कोशिकांग से बनती है।
🎯 Exam Tip: केन्द्रक झिल्ली और अंतर्द्रव्यी जालिका एक-दूसरे से जुड़े होते हैं, जो कोशिका के अंदर प्रोटीन और अन्य अणुओं के परिवहन में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।
Question 6. राइबोसोम की उत्पत्ति किससे होती है –
(अ) केन्द्रिक
(ब) गुणसूत्र
(स) केन्द्रक झिल्ली
(द) केन्द्रक द्रव्य
Answer: (अ) केन्द्रिक
In simple words: राइबोसोम केन्द्रिक में बनते हैं, जो प्रोटीन बनाने में मदद करते हैं।
🎯 Exam Tip: केन्द्रिक का मुख्य कार्य राइबोसोमल आरएनए (rRNA) का संश्लेषण और राइबोसोम उप-इकाइयों का निर्माण करना है।
Question 7. आनुवंशिक रूप से अधिक सक्रिय भाग को कहते हैं –
(अ) क्रोमेटिन
(ब) यूक्रोमेटिन
(स) हैटरोक्रोमेटिन
(द) उपरोक्त में से कोई नहीं
Answer: (ब) यूक्रोमेटिन
In simple words: क्रोमोसोम का वह हिस्सा जो आनुवंशिक रूप से सबसे ज्यादा काम करता है, उसे यूक्रोमेटिन कहते हैं।
🎯 Exam Tip: यूक्रोमेटिन कोशिका विभाजन चक्र के दौरान कम संघनित रहता है और जीन अभिव्यक्ति (सक्रियता) के लिए महत्वपूर्ण है, जबकि हेटेरोक्रोमेटिन निष्क्रिय रहता है।
Question 9. गेहूं में आधारीय गुणसूत्र की संख्या है -
(अ) 42
(ब) 07
(स) 21
(द) 14
Answer: (ब) 07
In simple words: गेहूं में मूल गुणसूत्रों की संख्या 7 होती है।
🎯 Exam Tip: गुणसूत्रों की संख्या जीव के प्रकार के अनुसार भिन्न होती है, और यह कोशिका विज्ञान में एक महत्वपूर्ण विशेषता है।
Question 10. एक अर्धगुणसूत्र (Chromatid) में DNA के कितने अणु पाये जाते हैं –
(अ) एक
(ब) दो
(स) चार
(द) कई
Answer: (अ) एक
In simple words: एक अर्धगुणसूत्र में DNA का सिर्फ एक अणु होता है।
🎯 Exam Tip: कोशिका विभाजन के मेटाफेज चरण में, प्रत्येक गुणसूत्र में दो अर्धगुणसूत्र होते हैं, लेकिन हर अर्धगुणसूत्र में DNA का केवल एक अणु होता है।
RBSE Class 11 Biology Chapter 10 अतिलघूत्तरात्मक प्रश्न
Question 1. केन्द्रक की खोज किस वैज्ञानिक ने की ?
Answer: केन्द्रक की खोज राबर्ट ब्राउन ने 1831 में की थी। रॉबर्ट ब्राउन एक स्कॉटिश वनस्पतिशास्त्री थे जिन्होंने कोशिका में केन्द्रक की पहचान की।
In simple words: केन्द्रक की खोज रॉबर्ट ब्राउन ने 1831 में की थी।
🎯 Exam Tip: प्रमुख वैज्ञानिक खोजों और उनके वर्ष याद रखना जीव विज्ञान के लिए महत्वपूर्ण है।
Question 2. गुणसूत्र के किस भाग से केन्द्रिक (Nucleolus) बनता है?
Answer: केन्द्रिक गुणसूत्र के केन्द्रकीय संगठनी क्षेत्र (Nucleolar organizing region) से बनता है। यह क्षेत्र राइबोसोमल आरएनए (rRNA) के संश्लेषण के लिए आवश्यक है।
In simple words: केन्द्रिक, गुणसूत्र के उस हिस्से से बनता है जिसे केन्द्रकीय संगठनी क्षेत्र कहते हैं।
🎯 Exam Tip: केन्द्रकीय संगठनी क्षेत्र (NOR) राइबोसोम निर्माण के लिए महत्वपूर्ण है, और इसका स्थान गुणसूत्र पर स्थिर होता है।
Question 3. यूक्रोमेटिन एवं हेटरोक्रोमेटिन नाम किसने प्रतिपादित किये ?
Answer: हैट्ज ने यूक्रोमेटिन एवं हेटरोक्रोमेटिन नाम प्रतिपादित किये। ये शब्द क्रोमेटिन के दो मुख्य प्रकारों का वर्णन करते हैं जो उनकी संघनन की डिग्री और आनुवंशिक गतिविधि में भिन्न होते हैं।
In simple words: यूक्रोमेटिन और हेटरोक्रोमेटिन नाम हैट्ज ने दिए थे।
🎯 Exam Tip: याद रखें कि यूक्रोमेटिन सक्रिय और कम संघनित होता है, जबकि हेटेरोक्रोमेटिन निष्क्रिय और अधिक संघनित होता है।
Question 5. जीवों में सर्वाधिक अगुणित गुणसूत्र संख्या कितनी है ?
Answer: आलोकैन्था में सबसे अधिक अगुणित गुणसूत्र संख्या 800 होती है। यह संख्या जीव के विकास और प्रजनन में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है।
In simple words: आलोकैन्था नामक जीव में अगुणित गुणसूत्रों की सबसे ज्यादा संख्या 800 होती है।
🎯 Exam Tip: अगुणित गुणसूत्र संख्या (n) प्रजातियों के बीच भिन्न होती है और प्रजनन के लिए आवश्यक होती है।
Question 6. मध्यकेन्द्री गुणसूत्र से किस आकृति के गुणसूत्र बनेंगे ?
Answer: मध्यकेन्द्री गुणसूत्र से 'V' आकृति के गुणसूत्र बनते हैं। यह आकृति एनाफेज अवस्था के दौरान दिखाई देती है जब सेंट्रोमीयर मध्य में होता है।
In simple words: मध्यकेन्द्री गुणसूत्र से V-आकृति के गुणसूत्र बनते हैं।
🎯 Exam Tip: गुणसूत्र की आकृति उसके सेंट्रोमीयर की स्थिति पर निर्भर करती है, जैसे मेटासेन्ट्रिक V-आकृति बनाते हैं।
Question 7. गुणसूत्रों में पाये जाने वाले अम्लीय प्रकृति के प्रोटीन का नाम बताइये।
Answer: गुणसूत्रों में पाए जाने वाले अम्लीय प्रकृति के प्रोटीन का नाम नॉन-हिस्टोन्स (nonhistones) है। ये प्रोटीन जीन अभिव्यक्ति और गुणसूत्रों की संरचना को नियंत्रित करते हैं।
In simple words: गुणसूत्रों में जो अम्लीय प्रोटीन होते हैं, उन्हें नॉन-हिस्टोन्स कहते हैं।
🎯 Exam Tip: नॉन-हिस्टोन प्रोटीन गुणसूत्रों के संगठन और कार्य में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं, विशेष रूप से जीन विनियमन में।
Question 8. कोड कण (core particle) में कौनसी हिस्टोन प्रोटीन अनुपस्थित होती है ?
Answer: कोड कण (core particle) में H₁ हिस्टोन प्रोटीन अनुपस्थित होती है। H₁ हिस्टोन न्यूक्लियोसोम के बाहर लिंकर DNA से जुड़ता है।
In simple words: कोड कण में H₁ हिस्टोन प्रोटीन नहीं होती है।
🎯 Exam Tip: न्यूक्लियोसोम कोर ऑक्टेमर H2A, H2B, H3 और H4 हिस्टोन से बना होता है, जबकि H1 लिंकर हिस्टोन के रूप में कार्य करता है।
Question 9. एक सोलेनाइड में कितने न्यूक्लिओसोम उपस्थित होते हैं?
Answer: एक सोलेनाइड में 6 न्यूक्लिओसोम उपस्थित होते हैं। सोलेनाइड क्रोमेटिन के संघनन का एक उच्च स्तर है।
In simple words: एक सोलेनाइड में 6 न्यूक्लिओसोम होते हैं।
🎯 Exam Tip: क्रोमेटिन संघनन के स्तरों को याद रखें: DNA से न्यूक्लियोसोम, फिर सोलेनाइड, और अंत में गुणसूत्र।
Question 10. पोलिटीन गुणसूत्रों का निर्माण किस कोशिका विभाजन के द्वारा होता है ?
Answer: अंत: पुनः द्विगुणन विभाजन द्वारा पोलीटीन गुणसूत्रों का निर्माण होता है। इस प्रक्रिया में DNA की कई बार प्रतिकृति होती है, लेकिन कोशिका विभाजन नहीं होता।
In simple words: पोलीटीन गुणसूत्र DNA के बार-बार दोगुना होने से बनते हैं, कोशिका बंटे बिना।
🎯 Exam Tip: पोलीटीन गुणसूत्र अंतःद्विगुणन (endomitosis) के माध्यम से बनते हैं और जीन अभिव्यक्ति के लिए अत्यधिक सक्रिय होते हैं।
RBSE Class 11 Biology Chapter 10 लघूत्तरात्मक प्रश्न
Question 1. गुणसूत्र पर संक्षिप्त टिप्पणी लिखिए।
Answer:
2. क्रोमोमीयर (Chromomere): प्रोफेज अवस्था में क्रोमोनिमेटा पर छोटे-छोटे बिंदु जैसी संरचनाएं पाई जाती हैं, जिन्हें क्रोमोमीयर कहते हैं। ये जीन के समान होते हैं और आनुवंशिकता के वाहक माने जाते हैं।
3. गुणसूत्र बिन्दु (Centromere): किसी गुणसूत्र की लंबाई में एक जगह पर दबा हुआ हिस्सा होता है, जिसे प्राथमिक संकीर्णन कहते हैं। इसी को गुणसूत्र बिन्दु कहते हैं।
4. द्वितीयक संकीर्णन (Secondary Constriction): केन्द्रक में कुछ गुणसूत्रों पर प्राथमिक संकीर्णन के अलावा एक और संकीर्णन मिलता है, जिसे द्वितीयक संकीर्णन कहते हैं।
5. अनुषंग या सेटेलाइट (Satellite): गुणसूत्र के द्वितीयक संकीर्णन से ऊपर का भाग सेटेलाइट कहलाता है। सेटेलाइट की जगह और आकार निश्चित होते हैं, इसलिए यह गुणसूत्र की एक खास पहचान है।
6. टीलोमीटर (Telomere): गुणसूत्र के दोनों सिरे टीलोमीयर कहलाते हैं। इनमें ध्रुवता पाई जाती है, जिसका मतलब है कि सिरे हमेशा अपनी जगह पर रहते हैं और आपस में नहीं चिपकते।
In simple words: गुणसूत्र डीएनए और प्रोटीन से बनी संरचनाएं हैं जो आनुवंशिक जानकारी को एक पीढ़ी से दूसरी पीढ़ी तक ले जाती हैं। इनमें क्रोमोमीयर, गुणसूत्र बिन्दु, द्वितीयक संकीर्णन और टीलोमीटर जैसे भाग होते हैं।
🎯 Exam Tip: गुणसूत्रों के विभिन्न भागों को याद रखें और उनकी भूमिका को समझें, क्योंकि ये आनुवंशिक सामग्री के संगठन और कार्य के लिए महत्वपूर्ण हैं।
Question 2. केन्द्रक के प्रमुख कार्य क्या हैं ?
Answer: केन्द्रक के कार्य (Functions of Nucleus):
1. केन्द्रक कोशिका का सिर्फ एक अंग नहीं है, बल्कि यह कोशिका का नियंत्रण केंद्र है, जो सभी गतिविधियों को नियंत्रित करता है।
2. सम्पूर्ण आनुवंशिकी का केंद्र केन्द्रक ही है, जिसमें गुणसूत्र, जीन और डीएनए पाए जाते हैं, जो आनुवंशिक जानकारी रखते हैं।
3. यह कोशिकाद्रव्य की सामान्य क्रियाओं को संचालित करने में मदद करता है।
4. यह आनुवंशिक सूचनाओं को एक पीढ़ी से दूसरी पीढ़ी तक स्थानांतरित करता है।
5. जीव को पूरे समय जीवित रखने के लिए केन्द्रक आवश्यक होता है, क्योंकि यह कोशिका के कार्यों को नियंत्रित करता है।
6. समसूत्री विभाजन में सक्रिय योगदान देता है, जिससे नई कोशिकाओं का निर्माण होता है।
7. राइबोसोम को जीवित बनाता है, जो प्रोटीन संश्लेषण के लिए जरूरी हैं।
8. राइबोसोमल आरएनए (rRNA) और प्रोटीन का निर्माण करता है।
9. कोशिका की सभी उपापचयी क्रियाओं का नियंत्रण केन्द्रक द्वारा किया जाता है।
10. डीएनए की पुनरावृत्ति और अनुलेखन क्रियाएं केन्द्रक में ही होती हैं।
In simple words: केन्द्रक कोशिका का मुख्य नियंत्रक है। यह आनुवंशिक जानकारी रखता है, कोशिका की सभी क्रियाओं को नियंत्रित करता है, डीएनए की कॉपी बनाता है और प्रोटीन बनाने में मदद करता है।
🎯 Exam Tip: केन्द्रक के कार्यों को याद रखना कोशिका जीव विज्ञान में उसकी केंद्रीय भूमिका को समझने के लिए महत्वपूर्ण है।
Question 3. सेटेलाइट गुणसूत्र क्या है ?
Answer: गुणसूत्र के सिरे पर एक लगभग गोलाकार संरचना पाई जाती है, जिसे सेटेलाइट (Satellite) कहते हैं। यह गुणसूत्र के बाकी हिस्सों से द्वितीयक संकीर्णन (Secondary constriction) से अलग होता है। जिन गुणसूत्रों में सेटेलाइट पाया जाता है, उन्हें सेटेलाइट गुणसूत्र (Satellite Chromosome) या सैट-गुणसूत्र (SAT-Chromosome) कहते हैं। सेटेलाइट का स्थान और आकार निश्चित होने के कारण यह भी गुणसूत्र (Chromosome) का एक खास लक्षण माना जाता है।
In simple words: सेटेलाइट गुणसूत्र वे होते हैं जिनके एक सिरे पर एक गोलाकार संरचना (सेटेलाइट) होती है। यह द्वितीयक संकीर्णन से अलग होती है और गुणसूत्र की एक खास पहचान है।
🎯 Exam Tip: सेटेलाइट गुणसूत्रों की पहचान में द्वितीयक संकीर्णन और सेटेलाइट की निश्चित स्थिति महत्वपूर्ण है।
Question 5. दो विशाल गुणसूत्रों के नाम एवं उनके कार्य बताओ।
Answer:
1. पोलीटीन गुणसूत्र (Polytene Chromosome)
2. लैम्पब्रुश गुणसूत्र (Lampbrush Chromosome)
(1) पोलीटीन गुणसूत्र के कार्य (Functions of Polytene Chromosome):
• इन गुणसूत्रों का मुख्य कार्य इनके स्थान निर्धारण करने वाले गुणसूत्र के संरचनात्मक परिवर्तनों को पहचानना है।
• यह m RNA का निर्माण भी करते हैं।
(2) लैम्पब्रुश गुणसूत्र के कार्य (Functions of Lampbrush Chromosome):
• इनका मुख्य कार्य पीतक (Yolk) के निर्माण में मदद करना है।
• यह प्रोटीन और RNA का संश्लेषण भी करते हैं।
In simple words: दो बड़े गुणसूत्र पोलीटीन और लैम्पब्रुश हैं। पोलीटीन गुणसूत्र संरचनात्मक बदलावों को पहचानने और m-RNA बनाने में मदद करते हैं, जबकि लैम्पब्रुश गुणसूत्र पीतक बनाने और प्रोटीन-RNA संश्लेषण में सहायक होते हैं।
🎯 Exam Tip: विशाल गुणसूत्रों जैसे पोलीटीन और लैम्पब्रुश गुणसूत्रों की विशिष्ट भूमिकाओं और कार्यों को याद रखना महत्वपूर्ण है।
Question 6. संकोशिका (Coenocyte) एवं सिनसियम (Syncytium) में अन्तर बताइये।
Answer: सामान्यतः हर कोशिका में एक ही केन्द्रक होता है। लेकिन कुछ कोशिकाओं में कई केन्द्रक पाए जाते हैं, ऐसी स्थिति को बहुकेन्द्रकीय (Multinucleated) अवस्था कहते हैं। जन्तुओं में बहुकेन्द्रकीय अवस्था को सिनसियम (Syncytium) कहते हैं, जैसे रेखित पेशी कोशिका और उपास्थि कोशिका। पादपों में बहुकेन्द्रकीय अवस्था को सीनोसाइट (Coenocyte) कहते हैं, जैसे नारियल का भ्रूणपोष और वाउचेरिया शैवाल।
In simple words: संकोशिका और सिनसियम दोनों में एक कोशिका में कई केन्द्रक होते हैं। सिनसियम जन्तुओं में होता है (जैसे मांसपेशियां), जबकि संकोशिका पौधों में होता है (जैसे शैवाल)।
🎯 Exam Tip: संकोशिका और सिनसियम के बीच मुख्य अंतर उनके जीवों का प्रकार है (संकोशिका पौधों में, सिनसियम जन्तुओं में)।
Question 7. केन्द्रिका (Nucleolus) की संरचना का संक्षिप्त वर्णन कीजिए।
Answer: केन्द्रिका (Nucleolus) की खोज फोन्टाना ने 1781 में की थी। यह एक झिल्ली रहित संरचना है जो केन्द्रक में एक या अनेक संख्या में हो सकती है। केन्द्रिका का निर्माण गुणसूत्रों के द्वितीयक संकीर्णन क्षेत्र से होता है, इसलिए इसे केन्द्रिक संघटक कहते हैं। केन्द्रिक में मुख्य रूप से प्रोटीन, राइबोन्यूक्लिओप्रोटीन के कण और रवाहीन मैट्रिक्स पाए जाते हैं। यह राइबोसोम की फैक्ट्री के रूप में कार्य करता है, जहां rRNA का संश्लेषण और राइबोसोम का निर्माण होता है।
In simple words: केन्द्रिका केन्द्रक के अंदर की एक झिल्ली रहित संरचना है, जो फोन्टाना ने खोजी थी। यह गुणसूत्रों के द्वितीयक संकीर्णन से बनती है और राइबोसोम बनाने का मुख्य केंद्र है।
🎯 Exam Tip: केन्द्रिका की झिल्ली रहित प्रकृति और राइबोसोम निर्माण में इसकी भूमिका पर विशेष ध्यान दें।
Question 8. न्यूक्लिओसोम पर संक्षिप्त टिप्पणी लिखिए।
Answer: गुणसूत्र न्यूक्लिओप्रोटीन से बने होते हैं, जिनमें DNA, RNA, हिस्टोन प्रोटीन और अन्य प्रोटीन होते हैं। वुडकोक (1973) की खोज के अनुसार, क्रोमेटिन में गोल दानों जैसी संरचनाएं होती हैं, जिन्हें न्यूक्लिओसोम (nucleosome) या नु-बॉडी कहा जाता है। न्यूक्लिओसोम अर्धबेलनाकार हिस्टोन प्रोटीन (कुल 8 प्रोटीन अणु) के बने होते हैं, जिनके चारों तरफ DNA की दो कुंडलियाँ लिपटी रहती हैं। न्यूक्लिओसोम का मध्य या क्रोड (core) चार हिस्टोन – H2A, H2B, H3 और H4 (प्रत्येक हिस्टोन के दो अणु, कुल आठ प्रोटीन अणु) से बना होता है। क्रोड पर द्विरज्जुक DNA लगभग \( 140 \) क्षारक युग्म लंबा होता है और \( 1 \frac {3}{4} \) चक्कर (turns) बनाता हुआ लिपटा रहता है। जब ऐसे 6 न्यूक्लिओसोम कुंडलित होकर पास-पास में व्यवस्थित होते हैं, तो इस इकाई को सोलेनाइड कहते हैं। दो न्यूक्लिओसोम को जोड़ने वाले DNA को लिंकर DNA या स्पेसर DNA कहते हैं, जिसमें लगभग 80 क्षारक जोड़ियाँ होती हैं।
In simple words: न्यूक्लिओसोम DNA और हिस्टोन प्रोटीन का एक छोटा गोलाकार पैकेज है। इसमें DNA, 8 हिस्टोन प्रोटीन के कोर के चारों ओर लिपटा होता है, जो गुणसूत्रों को बनाने में मदद करता है।
🎯 Exam Tip: न्यूक्लिओसोम क्रोमेटिन की मूल संरचनात्मक इकाई है; इसके घटकों (हिस्टोन प्रोटीन और लिंकर डीएनए) को याद रखना महत्वपूर्ण है।
Question 9. विषमपिक्नोसिस (Heteropycnosis) क्या है ? इसके प्रकार बताइये।
Answer: विषमपिक्नोसिस (Heteropycnosis): पादपों और जन्तुओं की अधिकतर प्रजातियों में, कोशिका विभाजन के समय कुछ गुणसूत्रों के खंड अधिक या कम संघनित दिखाई देते हैं। इस घटना को विषमपिक्नोसिस (Heteropycnosis) कहते हैं। विषमपिक्नोसिस दो प्रकार के हो सकते हैं – धनात्मक विषमपिक्नोसिस और ऋणात्मक विषमपिक्नोसिस। धनात्मक विषमपिक्नोसिस अधिक संघनन के कारण होता है, और ऋणात्मक विषमपिक्नोसिस कम संघनन के कारण होता है। यदि क्रोमेटिन पदार्थ पूरे कोशिका विभाजन चक्र के दौरान बहुत अधिक संघनित रहता है, तो इसे हेटेरोक्रोमेटिन (Heterochromatin) कहते हैं, और यदि कम संघनित क्रम कुंडलित या फैला हुआ रहता है, तो यूक्रोमेटिन (Euchromatin) कहलाता है।
In simple words: विषमपिक्नोसिस वह स्थिति है जब कोशिका विभाजन के दौरान गुणसूत्रों के कुछ हिस्से ज्यादा या कम सघन दिखाई देते हैं। यह दो तरह का होता है - धनात्मक (अधिक सघन) और ऋणात्मक (कम सघन)।
🎯 Exam Tip: विषमपिक्नोसिस, हेटेरोक्रोमेटिन और यूक्रोमेटिन के बीच के संबंध को समझें, क्योंकि यह जीन गतिविधि को प्रभावित करता है।
(क) यूकैरियोटिक एवं प्रोकैरियोटिक कोशिका के केन्द्रक में अन्तर
| यूकैरियोटिक कोशिका का केन्द्रक | प्रोकैरियोटिक कोशिका का केन्द्रक |
|---|---|
| 1. केन्द्रीय पदार्थ, केन्द्रीय आवरण द्वारा घिरा होता है। | केन्द्रकीय पदार्थ, केन्द्रीय आवरण द्वारा घिरा नहीं होता है। |
| 2. केन्द्रक कोशिकाद्रव्य से पृथक् होता है। | यह कोशिकाद्रव्य में पड़ा रहता है। इन्हें केन्द्रकाभ (Nucleoid) कहते हैं। |
| 3. केन्द्रिका उपस्थित। | केन्द्रिका अनुपस्थित। |
🎯 Exam Tip: यूकैरियोटिक और प्रोकैरियोटिक कोशिकाओं के बीच केन्द्रक की संरचनात्मक अंतर उनकी जटिलता और कार्य में भिन्नता को दर्शाते हैं।
(ख) हेटरोक्रोमेटिन एवं यूक्रोमेटिन में अन्तर
| हेटरोक्रोमेटिन (Heterochromatin) | यूक्रोमेटिन (Euchromatin) |
|---|---|
| 1. यह गहरा अभिरंजित (Stained) होता है। | हल्का अभिरंजित होता है। |
| 2. यह अधिक संघनित एवं कुण्डलित होता है। | यह कम संघनित एवं कुण्डलित होता है। |
| 3. ये भाग आनुवंशिक रूप से निष्क्रिय होते हैं। | ये सक्रिय होते हैं। |
| 4. अन्तरावस्था में इनके DNA की प्रतिकृतिकरण विलम्ब से होती है। | इनमें पाये जाने वाले DNA का प्रतिकृतिकरण पहले होता है। |
🎯 Exam Tip: हेटेरोक्रोमेटिन और यूक्रोमेटिन की विशेषताएं उनकी जीन गतिविधि और प्रतिकृति के समय के लिए महत्वपूर्ण हैं।
(ग) गुणसूत्र एवं अर्धगुणसूत्र में अन्तर
| गुणसूत्र (Chromosome) | अर्धगुणसूत्र (Chromatid) |
|---|---|
| गुणसूत्र में कई भुजायें होती हैं। | जबकि इसमें दो भुजायें होती हैं। |
🎯 Exam Tip: कोशिका विभाजन के संदर्भ में गुणसूत्र और अर्धगुणसूत्र के बीच संबंध को समझें, विशेषकर मेटाफेज और एनाफेज के दौरान।
(घ) प्राथमिक संकीर्णन एवं द्वितीयक संकीर्णन में अन्तर
| प्राथमिक संकीर्णन (Primary Constriction) | द्वितीयक संकीर्णन (Secondary Constriction) |
|---|---|
| 1. गुणसूत्रों की लम्बाई में किसी एक स्थान पर दबा हुआ भाग प्राथमिक संकीर्णन कहलाता है। | प्राथमिक संकीर्णन के अतिरिक्त पाया जाने वाला संकीर्णन द्वितीयक संकीर्णन कहलाता है। |
| 2. इसे सेन्ट्रोमीयर कहते हैं। कोशिका विभाजन के साथ तर्क तन्तु इससे जुड़ते हैं। | ये केन्द्रिका से सम्बन्धित हैं इसलिए इन्हें केन्द्रिक संघटक क्षेत्र कहते हैं। |
| 3. सेन्ट्रोमीयर के दोनों पार्श्वों पर प्रोटीन की तश्तरीनुमा रचनाएँ पाई जाती हैं जिन्हें काईनेटोकोर कहते हैं। | इसमें ऐसी कोई रचना नहीं पायी जाती है। |
🎯 Exam Tip: प्राथमिक और द्वितीयक संकीर्णन के बीच संरचनात्मक और कार्यात्मक अंतरों को समझें, क्योंकि ये गुणसूत्र की पहचान और व्यवहार के लिए महत्वपूर्ण हैं।
RBSE Class 11 Biology Chapter 10 निबन्धात्मक प्रश्न
Question 1. केन्द्रक की संरचना का सचित्र वर्णन कीजिए।
Answer: केन्द्रक (Nucleus) कोशिका का एक महत्वपूर्ण अंग है। इसकी खोज 1831 में रॉबर्ट ब्राउन ने की थी। केन्द्रक की संरचना में मुख्य रूप से केन्द्रक झिल्ली, केन्द्रक द्रव्य, क्रोमेटिन और केन्द्रिका शामिल हैं।
केन्द्रक झिल्ली (Nuclear membrane): इसे केन्द्रक आवरण या न्यूक्लियोलेमा भी कहते हैं। इरक्लेव ने 1845 में इसकी खोज की थी। केन्द्रक कला एक दोहरी इकाई झिल्ली (double unit membrane) से बनी होती है। इसकी बाहरी झिल्ली (Outer nuclear membrane) और भीतरी झिल्ली (Inner Nuclear Membrane) होती है, जो केन्द्रक को घेरे रहती हैं। दोनों झिल्लियों के बीच लगभग 75Å की दूरी होती है, जिसे परिकेन्द्रकीय अवकाश (Perinuclear Space) कहते हैं। बाहरी केन्द्रक झिल्ली पर राइबोसोम होते हैं, इसलिए इसे एक्टोकेरियाथिक कहते हैं। भीतरी झिल्ली पर राइबोसोम नहीं होते, इसलिए इसे एण्डोकोरियोथिका कहते हैं। केन्द्रक झिल्ली छिद्रयुक्त होती है, जिसमें 300 से 400 Å व्यास के वृत्ताकार या अष्टकोणीय केन्द्रक छिद्र (Nuclear pore) होते हैं। ये छिद्र एक-दूसरे से 1500 Å की दूरी पर पाए जाते हैं। ये छिद्र तथा वलयिका (annulus) दोनों मिलकर रंध्र सम्मिश्र (pore complex) बनाते हैं। इन छिद्रों द्वारा अनेक पदार्थों का आदान-प्रदान कोशिका द्रव्य व केन्द्रकीय द्रव्य के मध्य होता रहता है। कोशिका विभाजन की टीलोफेज (Telophase) अवस्था के दौरान अन्तर्द्रव्यी जालिका (ER) के तत्वों के संयोजन द्वारा इनका निर्माण होता है।
केन्द्रक द्रव्य (Nucleoplasm): यह केन्द्रक के अंदर मौजूद तरल पदार्थ है, जिसमें क्रोमेटिन, केन्द्रिका, प्रोटीन और अन्य अणु होते हैं।
क्रोमेटिन (Chromatin): यह डीएनए और प्रोटीन का एक जटिल नेटवर्क है जो गुणसूत्रों को बनाता है।
केन्द्रिका (Nucleolus): यह केन्द्रक के अंदर एक झिल्ली रहित संरचना है, जो राइबोसोम के निर्माण के लिए जिम्मेदार है।
केन्द्रक की संरचना
In simple words: केन्द्रक कोशिका का मुख्य नियंत्रक है। यह एक दोहरी झिल्ली से घिरा होता है जिसमें छेद होते हैं। इसके अंदर तरल पदार्थ (केन्द्रक द्रव्य), डीएनए (क्रोमेटिन) और एक छोटी केन्द्रिका होती है, जो राइबोसोम बनाती है।
🎯 Exam Tip: केन्द्रक की झिल्ली की दोहरी प्रकृति, केन्द्रक छिद्रों का कार्य, और क्रोमेटिन व केन्द्रिका की भूमिका को समझाना महत्वपूर्ण है।
Question 2. गुणसूत्र की संरचना का नामांकित चित्र बनाकर वर्णन कीजिए।
Answer: अन्तरावस्था (Interphase) के दौरान, क्रोमेटिन धागे जाल (Network) के रूप में उपस्थित होते हैं, जिसे क्रोमेटिन जालिका (Chromatin network) कहते हैं। कोशिका विभाजन के समय क्रोमेटिन के धागे जैसी संरचनाएं स्वतंत्र रूप में दिखाई देती हैं, जिन्हें गुणसूत्र (Chromosome) कहते हैं। गुणसूत्र की खोज स्टॉसबरजर ने 1875 में की थी। डब्ल्यू. वाल्डेयर (W. Waldeyer) ने 1888 में क्रोमोसोम नाम दिया था।
गुणसूत्र की संरचना जटिल होती है और इसमें डीएनए, प्रोटीन (हिस्टोन और नॉन-हिस्टोन) और कुछ आरएनए होते हैं। बेन्डेन और बावेरी (1902) के अनुसार, प्रत्येक जीव में गुणसूत्रों की संख्या निश्चित होती है। गुणसूत्र हमेशा जोड़ों में होते हैं, और प्रत्येक प्रकार के दो गुणसूत्र समान होते हैं। इनमें से एक माता से और दूसरा पिता से आता है। इस प्रकार, मनुष्य में 46 गुणसूत्र होते हैं, जिनमें 23 माता से और 23 पिता से प्राप्त होते हैं। मनुष्य में 23 जोड़ी गुणसूत्र होते हैं। गुणसूत्रों के इस अगुणित समुच्चय (23) को जीनोम कहते हैं।
In simple words: गुणसूत्र डीएनए और प्रोटीन से बनी धागे जैसी संरचनाएं हैं, जो कोशिका विभाजन के दौरान दिखाई देती हैं। इनमें आनुवंशिक जानकारी होती है और प्रत्येक जीव में इनकी संख्या निश्चित होती है।
🎯 Exam Tip: गुणसूत्रों की खोज के इतिहास, उनके घटकों (डीएनए, हिस्टोन) और गुणसूत्र संख्या के महत्व पर ध्यान दें।
Question 3. पोलीटीन गुणसूत्र क्या है ? इसकी संरचना एवं कार्य बताइये।
Answer: पोलीटीन या लारग्रन्थि गुणसूत्र (Polytene or Salivary gland chromosome): पॉलीटीन गुणसूत्र डिप्टेरॉन लार्वा (Dipteron Larvae) की लार ग्रंथियों में पाए जाते हैं। इसी कारण इन्हें लार ग्रंथि गुणसूत्र (Salivary gland chromosome) कहते हैं। लार ग्रंथियों की कोशिकाएं और केन्द्रक भी बड़े आकार के होते हैं। इनमें सामान्य गुणसूत्रों की अपेक्षा 50 से 200 गुना बड़े गुणसूत्र पाए जाते हैं। इन गुणसूत्रों को महागुणसूत्र (giant chromosomes) भी कहते हैं।
इस प्रकार के महागुणसूत्र लार ग्रंथियों के अतिरिक्त गुहीय उपकला, मैलपीगी नलिकाओं की उपकला, आहारनाल व श्वासनली की उपकला और वसा काय की कोशिकाओं में भी पाए जाते हैं। अनावृतबीजी पादपों के बीजाण्ड के भीतर भी महागुणसूत्र पाए जाते हैं। ये सामान्यतः अन्तरावस्था (Interphase) में दिखाई देते हैं। सबसे पहले 1881 में ई.जी. बालबियानी (E.G. Balbiani) ने काइरोनोमॉस (Chironomaus) लार्वा की लार ग्रंथियों में देखा था।
संरचनात्मक दृष्टि से पॉलीटीन गुणसूत्र, सूत्रों द्वारा निर्मित एक गट्ठर (Bundle) के रूप में दिखाई देते हैं, जिनका निर्माण बिना कोशिका विभाजन के, क्रोमेटिड सूत्र के बारम्बार अंत:द्विगुणन होने से होता है। परिणामस्वरूप प्रत्येक गुणसूत्र में क्रोमोनिमेटा की संख्या निरंतर बढ़ती जाती है। इस बढ़ोतरी में क्रोमोनिमेटो की संख्या 2000 तक अथवा इससे भी अधिक हो सकती है। इसलिए ये गुणसूत्र पोलीटीन गुणसूत्र कहलाते हैं।
इन गुणसूत्रों की परासंरचना के अध्ययन से ज्ञात होता है कि इनमें दो प्रकार के अनुप्रस्थ एकांतरित बैंड्स (पट्टियाँ) होते हैं:
(1) गहरे बैंड्स (Dark bands) हेटेरोक्रोमेटिक भाग होते हैं।
(2) हल्के इंटर बैंड्स (Light Interbands) यूक्रोमेटिक भाग होते हैं।
गहरे बैंड्स वाले भाग में RNA की मात्रा कम और DNA की मात्रा अधिक पाई जाती है। इसके विपरीत हल्के इंटर बैंड्स वाले भाग में RNA की मात्रा अधिक और DNA बहुत कम मात्रा में पाया जाता है। गहरे बैंड्स वाले क्षेत्र में DNA सूत्र अत्यधिक कुंडलित और संघनित होता है, जिसे क्रोमोमीयर्स कहते हैं। बाद में किए गए अध्ययनों से ज्ञात हुआ कि गहरे बैंड्स बहुजीनी (Polygenic) क्षेत्र हैं और औसतन 30,000 क्षारक जोड़ों द्वारा निर्मित होते हैं, जबकि इंटरबैंड वाले भाग में DNA सूत्र एक-दूसरे से समानांतर होते हैं। कुछ स्थानों पर ये इंटर बैंड्स फैलकर विशेष प्रकार की रिंग्स (Rings) बनाते हैं, जिन्हें पफ (Puffs or Swellings) अथवा बालबियानी रिंग्स (Balbiani Rings) कहते हैं। पफ बनने की प्रक्रिया जीन अभिव्यक्ति से संबंधित होती है। पफ mRNA संश्लेषण हेतु स्थल होते हैं। ये गुणसूत्र के अकुंडलित भाग हैं जहां सक्रिय रूप से अनुलेखन की क्रिया होती रहती है।
In simple words: पॉलीटीन गुणसूत्र बड़े, कई डीएनए स्ट्रैंड्स वाले गुणसूत्र होते हैं जो लार ग्रंथियों में पाए जाते हैं। इनमें गहरे (निष्क्रिय) और हल्के (सक्रिय) बैंड्स होते हैं। ये जीन की अभिव्यक्ति और कोशिका के कार्यों को नियंत्रित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।
🎯 Exam Tip: पॉलीटीन गुणसूत्रों के अंतःद्विगुणन की प्रक्रिया, गहरे और हल्के बैंड्स के बीच का अंतर, और बालबियानी रिंग्स की भूमिका को याद रखें।
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