RBSE Solutions Class 10 Science Chapter 9 प्रकाश

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Detailed Chapter 9 प्रकाश RBSE Solutions for Class 10 Science

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Class 10 Science Chapter 9 प्रकाश RBSE Solutions PDF

बहुचयनात्मक प्रश्न

 

Question 1. निम्न में से कौनसे दर्पण में वृहद दृष्टि क्षेत्र दिखेगा
(क) समतल दर्पण
(ख) उत्तल दर्पण
(ग) अवतल दर्पण
(घ) परवलियक दर्पण
Answer: (ख) उत्तल दर्पण
In simple words: उत्तल दर्पण से हमें पीछे का बहुत बड़ा इलाका एक साथ दिख जाता है क्योंकि यह सीधा और छोटा प्रतिबिंब बनाता है।

🎯 Exam Tip: वाहनों में पश्च-दृश्य दर्पण के रूप में उत्तल दर्पण के उपयोग का उल्लेख करते समय, वृहद दृष्टि क्षेत्र और सीधा प्रतिबिंब जैसे मुख्य बिंदुओं पर जोर दें।

 

Question 2. प्रकाश का वेग सर्वाधिक होगा
(क) पानी में
(ख) कांच में
(ग) निर्वात में
(घ) ग्लिसरीन में
Answer: (ग) निर्वात में
In simple words: प्रकाश सबसे तेज़ खाली जगह (निर्वात) में चलता है, जो कि लगभग \( 3 \times 10^8 \) मीटर प्रति सेकंड होता है।

🎯 Exam Tip: याद रखें कि प्रकाश का वेग निर्वात में अधिकतम होता है, जो विभिन्न माध्यमों में प्रकाश के अपवर्तन का आधार है।

 

Question 3. किस प्रभाव के कारण टंकी के पेंदे पर रखा सिक्का थोड़ा ऊपर उठा हुआ दिखाई देता है
(क) अपवर्तन
(ख) परावर्तन
(ग) पूर्ण आन्तरिक परावर्तन
(घ) इनमें से कोई नहीं
Answer: (क) अपवर्तन
In simple words: जब प्रकाश पानी से हवा में आता है तो मुड़ जाता है (अपवर्तन), इसलिए सिक्का अपनी असली जगह से थोड़ा ऊपर दिखता है।

🎯 Exam Tip: अपवर्तन के उदाहरणों को हमेशा याद रखें, जैसे पानी में डूबी पेंसिल का मुड़ा हुआ दिखना या तारों का टिमटिमाते दिखना।

 

Question 4. यदि एक दर्पण की फोकस दूरी + 60 सेमी. है तो यह दर्पण होगा
(क) अवतल दर्पण
(ख) परवलिय दर्पण
(ग) समतल दर्पण
(घ) उत्तल दर्पण
Answer: (घ) उत्तल दर्पण
In simple words: अगर दर्पण की फोकस दूरी धनात्मक (+ में) है, तो वह उत्तल दर्पण होता है।

🎯 Exam Tip: दर्पणों की फोकस दूरी के चिह्न (धनात्मक या ऋणात्मक) को याद रखें, यह दर्पण के प्रकार (उत्तल या अवतल) को पहचानने में मदद करता है।

 

Question 5. एक समतल दर्पण की फोकस दूरी होगी
(क) 0
(ख) 1
(ग) अनन्त
(घ) इनमें से कोई नहीं
Answer: (ग) अनन्त
In simple words: समतल दर्पण की फोकस दूरी बहुत-बहुत दूर होती है, जिसे अनन्त कहते हैं।

🎯 Exam Tip: समतल दर्पण के गुणों को समझना महत्वपूर्ण है, जैसे सीधा, आभासी प्रतिबिंब बनाना और फोकस दूरी का अनन्त होना।

 

Question 7. एक लेंस की क्षमता + 2 डायप्टर है तो उसकी फोकस दूरी होगी-
(क) 2 मीटर
(ख) 1 मीटर
(ग) 0.5 मीटर
(घ) 0.2 मीटर
Answer: (ग) 0.5 मीटर
In simple words: लेंस की क्षमता 2 डायोप्टर है, तो उसकी फोकस दूरी 0.5 मीटर होगी क्योंकि फोकस दूरी क्षमता का उलटा होती है।

🎯 Exam Tip: लेंस की क्षमता और फोकस दूरी के संबंध को याद रखें, कि क्षमता फोकस दूरी के व्युत्क्रम (उलटा) होती है और मीटर में व्यक्त की जाती है।

 

Question 8. दूर दृष्टि दोष में व्यक्ति को
(क) निकट की वस्तु स्पष्ट दिखाई देगी
(ख) दूर की वस्तु स्पष्ट दिखाई देगी
(ग) निकट व दूर दोनों ही वस्तुएं स्पष्ट दिखाई नहीं देंगी
(घ) इनमें से कोई नहीं
Answer: (ख) दूर की वस्तु स्पष्ट दिखाई देगी
In simple words: दूर दृष्टि दोष वाले व्यक्ति को पास की चीजें साफ़ नहीं दिखतीं, लेकिन दूर की चीजें स्पष्ट दिखाई देती हैं।

🎯 Exam Tip: 'दूर दृष्टि दोष' में 'दूर' शब्द का अर्थ है कि दूर की वस्तुएँ स्पष्ट दिखती हैं, और 'निकट दृष्टि दोष' में 'निकट' शब्द का अर्थ है कि निकट की वस्तुएँ स्पष्ट दिखती हैं।

 

Question 9. एक उत्तल लेंस की फोकस दूरी 15 cm. है तो बिम्ब को लेंस से कितनी दूरी पर रखा जाए कि प्रतिबिम्ब वास्तविक एवं बिम्ब के बराबर आकार का बने?
(क) 30 crm.
(ख) 15 cm.
(ग) 60 cm.
(घ) इनमें से कोई नहीं
Answer: (क) 30 cm.
In simple words: बिम्ब के बराबर प्रतिबिंब पाने के लिए, उत्तल लेंस से बिम्ब को फोकस दूरी के दोगुने पर रखते हैं, यानी 15 सेमी का दोगुना 30 सेमी पर।

🎯 Exam Tip: उत्तल लेंस द्वारा विभिन्न स्थितियों में बनने वाले प्रतिबिंबों की प्रकृति, स्थिति और आकार को किरण आरेखों के साथ याद करें।

 

Question 10. एक 20 cm. फोकस दूरी के अवतल लेंस के सम्मुख बिम्ब अनन्त पर रखा है। आभासी प्रतिबिम्ब की लेंस से दूरी कितनी होगी?
(क) 10 cm.
(ख) 15 cm
(ग) 20 cm.
(घ) अनन्त पर
Answer: (ग) 20 cm.
In simple words: अगर बिम्ब बहुत दूर रखा है तो अवतल लेंस उसका आभासी प्रतिबिंब अपनी फोकस दूरी पर बनाता है, जो यहां 20 सेमी है।

🎯 Exam Tip: अवतल लेंस हमेशा आभासी, सीधा और छोटा प्रतिबिंब बनाता है, चाहे बिम्ब कहीं भी रखा हो, और अनंत पर बिम्ब का प्रतिबिंब फोकस पर बनता है।

अतिलघूत्तरात्मक प्रश्न

 

Question 1. जब कोई वस्तु प्रकाश के सभी रंगों को अवशोषित कर लेती है तो वह वस्तु हमें किस रंग की दिखाई देगी?
Answer: जब कोई वस्तु प्रकाश के सभी रंगों को सोख लेती है, तो वह वस्तु हमें काली दिखाई देती है। काला रंग सभी रंगों के पूर्ण अवशोषण का परिणाम होता है।
In simple words: जो वस्तु सभी रंगों को सोख लेती है, वह काली दिखती है।

🎯 Exam Tip: याद रखें कि किसी वस्तु का रंग उसके द्वारा परावर्तित प्रकाश के रंग के कारण होता है; सभी रंगों को अवशोषित करने पर वस्तु काली दिखाई देती है।

 

Question 2. यदि हम समतल दर्पण में हमारा पूर्ण प्रतिबिम्ब देखना चाहें तो दर्पण की न्यूनतम लम्बाई कितनी होनी चाहिये ?
Answer: किसी व्यक्ति का पूरा प्रतिबिंब समतल दर्पण में देखने के लिए, दर्पण की न्यूनतम लंबाई उस व्यक्ति की लंबाई की आधी होनी चाहिए। यह प्रकाश के परावर्तन के नियमों पर आधारित है।
In simple words: अपना पूरा शरीर दर्पण में देखने के लिए, दर्पण अपनी हाइट से आधा होना चाहिए।

🎯 Exam Tip: समतल दर्पण से संबंधित प्रश्नों में व्यक्ति की लंबाई और आवश्यक दर्पण की न्यूनतम लंबाई के बीच संबंध को स्पष्ट रूप से समझाएं।

 

Question 3. एक समतल दर्पण पर प्रकाश की किरण 30° कोण पर आपतित हो रही है तो परावर्तित किरण एवं आपतित किरण के मध्य कितना कोण बनेगा?
Answer: एक समतल दर्पण पर प्रकाश की किरण 30° कोण पर आपतित होती है। परावर्तन के नियम के अनुसार, आपतन कोण \( (\angle i) \) परावर्तन कोण \( (\angle r) \) के बराबर होता है। इसलिए, परावर्तित किरण भी अभिलंब के साथ 30° का कोण बनाएगी।
\( \implies \) आपतित और परावर्तित किरण के मध्य कोण \( = 30° + 30° = 60° \).
In simple words: अगर लाइट 30 डिग्री पर आती है, तो 30 डिग्री पर ही वापस जाती है, तो कुल कोण 60 डिग्री बनता है।

🎯 Exam Tip: परावर्तन के नियम को अच्छी तरह से समझें, विशेषकर आपतन कोण और परावर्तन कोण की समानता को।

 

Question 4. उत्तल दर्पण के कोई दो उपयोग लिखिये।
Answer: उत्तल दर्पण का उपयोग वाहनों में पश्च-दृश्य दर्पण के रूप में किया जाता है, क्योंकि यह हमेशा सीधा, आभासी और छोटा प्रतिबिंब बनाता है, जिससे चालक को पीछे का एक बड़ा क्षेत्र दिखाई देता है। दूसरा, इसे सजावट के लिए भी उपयोग किया जा सकता है, जहाँ बड़ी वस्तुओं के छोटे प्रतिबिंब वांछित हों।
In simple words: उत्तल दर्पण गाड़ियों में पीछे देखने और सजाने के काम आता है क्योंकि यह बड़ा दृश्य दिखाता है।

🎯 Exam Tip: उत्तल दर्पण के उपयोगों को उसके गुणों (सीधा, छोटा और बड़ा दृष्टि क्षेत्र) से जोड़कर लिखें ताकि उत्तर अधिक प्रभावी हो।

 

Question 5. अवतल दर्पण के कोई दो उपयोग लिखिये।
Answer: अवतल दर्पण का उपयोग हजामत बनाने वाले दर्पणों में किया जाता है, क्योंकि यह चेहरे का आभासी, सीधा और बड़ा प्रतिबिंब बनाता है, जिससे दाढ़ी बनाने में आसानी होती है। दूसरा, इसका उपयोग सौर भट्टियों में भी प्रकाश को केंद्रित करने के लिए होता है।
In simple words: अवतल दर्पण का इस्तेमाल शेविंग करने वाले दर्पण में और सूरज की गर्मी इकट्ठा करने में होता है।

🎯 Exam Tip: अवतल दर्पण के उपयोगों को उसके गुणों (बड़ा और आभासी प्रतिबिंब, प्रकाश को केंद्रित करना) से जोड़कर याद करें।

 

Question 7. गोलीय दर्पण के लिये वक्रता त्रिज्या एवं फोकस दूरी में सम्बन्ध बताइये।
Answer: गोलीय दर्पण के लिए वक्रता त्रिज्या \( (R) \) फोकस दूरी \( (f) \) से दोगुनी होती है। इसे गणितीय रूप से \( R = 2f \) या \( f = \frac{R}{2} \) लिखा जा सकता है। यह संबंध दर्पण के निर्माण और उसकी ज्यामिति से आता है।
In simple words: गोलीय दर्पण में, फोकस दूरी वक्रता त्रिज्या की आधी होती है।

🎯 Exam Tip: फोकस दूरी और वक्रता त्रिज्या के बीच संबंध को सूत्र \( R = 2f \) या \( f = \frac{R}{2} \) के साथ याद रखें और उसका अनुप्रयोग सीखें।

 

Question 8. आवर्धनता का सूत्र दीजिये।।
Answer: आवर्धनता किसी प्रतिबिंब की ऊँचाई \( (h') \) और बिम्ब की ऊँचाई \( (h) \) के अनुपात को कहते हैं, यानी \( m = \frac{h'}{h} \). दर्पण के लिए, इसे बिम्ब की दूरी \( (u) \) और प्रतिबिंब की दूरी \( (v) \) के पदों में भी व्यक्त किया जा सकता है: \( m = -\frac{v}{u} \) (दर्पण के लिए) और \( m = \frac{v}{u} \) (लेंस के लिए)। यह हमें बताता है कि प्रतिबिंब बिम्ब से कितना बड़ा या छोटा बना है।
In simple words: आवर्धनता बताती है कि प्रतिबिंब, असल चीज़ से कितना बड़ा या छोटा दिखता है।

🎯 Exam Tip: आवर्धनता के सूत्र और उसके चिह्नों (धनात्मक या ऋणात्मक) को याद रखना महत्वपूर्ण है, क्योंकि यह प्रतिबिंब की प्रकृति (सीधा/उलटा) और आकार को दर्शाता है।

 

Question 9. स्नेल का नियम लिखिये ।।
Answer: स्नेल का नियम कहता है कि प्रकाश के अपवर्तन के दौरान, आपतन कोण \( (i) \) की ज्या \( (\sin i) \) और अपवर्तन कोण \( (r) \) की ज्या \( (\sin r) \) का अनुपात एक स्थिर मान होता है। इसे गणितीय रूप से \( \frac{\sin i}{\sin r} = \text{नियतांक} \) (अपवर्तनांक) के रूप में व्यक्त किया जाता है। यह नियतांक माध्यमों के युग्म और प्रकाश के रंग पर निर्भर करता है।
In simple words: स्नेल का नियम बताता है कि प्रकाश जब एक चीज़ से दूसरी चीज़ में जाता है, तो उसके मुड़ने का एक खास नियम होता है।

🎯 Exam Tip: स्नेल के नियम को हमेशा सूत्र और उसके घटकों (आपतन कोण, अपवर्तन कोण, नियतांक) के साथ याद रखें, यह अपवर्तन के आधारभूत सिद्धांतों में से एक है।

 

Question 10. लेंस सूत्र लिखिये।
Answer: लेंस सूत्र बिम्ब की दूरी \( (u) \), प्रतिबिंब की दूरी \( (v) \), और लेंस की फोकस दूरी \( (f) \) के बीच संबंध स्थापित करता है। उत्तल और अवतल दोनों लेंसों के लिए यह सूत्र \( \frac{1}{v} - \frac{1}{u} = \frac{1}{f} \) है। यह सूत्र लेंस के माध्यम से बनने वाले प्रतिबिंबों की स्थिति और प्रकृति की गणना करने में मदद करता है।
In simple words: लेंस सूत्र हमें बताता है कि चीज़ कितनी दूर है, उसका चित्र कितनी दूर बनेगा और लेंस की ताकत कितनी है, उनके बीच क्या संबंध है।

🎯 Exam Tip: लेंस सूत्र को याद रखें और चिह्न परिपाटी का सही ढंग से उपयोग करना सीखें, क्योंकि यह आंकिक प्रश्नों में बहुत महत्वपूर्ण है।

 

Question 11. एक वस्तु से समान्तर किरणें उत्तल लेंस पर आपतित होती हैं तो उस वस्तु का प्रतिबिम्ब कहाँ बनेगा?
Answer: जब एक वस्तु से समानांतर प्रकाश किरणें उत्तल लेंस पर पड़ती हैं, तो अपवर्तन के बाद वे सभी किरणें लेंस के मुख्य फोकस पर एक बिंदु पर मिल जाती हैं। इसलिए, प्रतिबिंब मुख्य फोकस पर बनता है।
In simple words: जब सीधी लाइट उत्तल लेंस पर पड़ती है, तो उसका चित्र लेंस के खास बिंदु पर बनता है जिसे मुख्य फोकस कहते हैं।

🎯 Exam Tip: उत्तल लेंस के लिए समानांतर किरणों के फोकस बिंदु पर प्रतिबिंब बनने के नियम को याद रखें, यह लेंस की बुनियादी विशेषताओं में से एक है।

 

Question 12. लेंस की क्षमता का मात्रक लिखिये।
Answer: लेंस की क्षमता का मात्रक 'डायोप्टर' (Dioptre) होता है, जिसे अक्षर 'D' से दर्शाया जाता है। यह लेंस की फोकस दूरी के व्युत्क्रम (उलटा) होती है, जहाँ फोकस दूरी मीटर में होनी चाहिए। उदाहरण के लिए, 1 मीटर फोकस दूरी वाले लेंस की क्षमता 1 डायोप्टर होती है।
In simple words: लेंस की ताकत को 'डायोप्टर' नामक इकाई में मापते हैं।

🎯 Exam Tip: लेंस की क्षमता का मात्रक और उसका फोकस दूरी से संबंध (\( P = \frac{1}{f} \)) याद रखना बहुत जरूरी है, खासकर जब \( f \) मीटर में हो।

 

Question 13. निकट दृष्टि दोष में व्यक्ति को कौनसी स्थिति में वस्तुएं स्पष्ट नहीं दिखाई देती हैं ?
Answer: निकट दृष्टि दोष (मायोपिया) में व्यक्ति को पास की वस्तुएँ तो स्पष्ट दिखाई देती हैं, लेकिन 1.2 मीटर से अधिक दूर रखी वस्तुएँ उसे धुंधली या अस्पष्ट दिखाई देती हैं। इसका कारण यह है कि दूर की वस्तुओं का प्रतिबिंब रेटिना से पहले ही बन जाता है।
In simple words: निकट दृष्टि दोष में पास की चीजें तो साफ दिखती हैं, लेकिन दूर की चीजें धुंधली दिखती हैं, खासकर 1.2 मीटर से ज्यादा दूर की।

🎯 Exam Tip: निकट दृष्टि दोष के लक्षणों को स्पष्ट रूप से याद रखें - पास की दृष्टि ठीक और दूर की दृष्टि खराब होती है।

 

Question 14. उचित क्षमता का उत्तल लेंस लगा कर कौनसा दृष्टि दोष दूर किया जाता है?
Answer: दीर्घ दृष्टि दोष (हाइपरमेट्रोपिया) को दूर करने के लिए उचित क्षमता वाले उत्तल लेंस का उपयोग किया जाता है। यह उत्तल लेंस प्रकाश किरणों को नेत्र में प्रवेश करने से पहले अभिसरित करता है, जिससे प्रतिबिंब रेटिना पर सही ढंग से बनता है।
In simple words: दूर की नज़र खराब होने पर उसे ठीक करने के लिए उत्तल लेंस वाले चश्मे पहने जाते हैं।

🎯 Exam Tip: याद रखें कि दीर्घ दृष्टि दोष को उत्tal लेंस (अभिसारी लेंस) से ठीक किया जाता है, जबकि निकट दृष्टि दोष को अवतल लेंस (अपसारी लेंस) से ठीक किया जाता है।

 

Question 15. मोतियाबिन्द क्या है?
Answer: मोतियाबिंद एक ऐसी स्थिति है जिसमें उम्र बढ़ने के साथ व्यक्ति के नेत्र लेंस की पारदर्शिता कम होने लगती है और उसका लचीलापन भी घट जाता है। इस कारण लेंस प्रकाश को परावर्तित करने लगता है, जिससे वस्तुएँ स्पष्ट दिखाई नहीं देती हैं। यह दृष्टि दोष धीरे-धीरे बढ़ता है और सर्जरी से ही इसका इलाज संभव है।
In simple words: मोतियाबिंद में आंख का लेंस धुंधला हो जाता है, जिससे हमें चीजें साफ नहीं दिखतीं।

🎯 Exam Tip: मोतियाबिंद की परिभाषा और उसके मुख्य लक्षण (लेंस की पारदर्शिता में कमी, अस्पष्ट दृष्टि) को याद रखें।

 

Question 16. एक शेविंग दर्पण में हमें अपना प्रतिबिम्ब कैसा दिखता है?
Answer: एक शेविंग दर्पण (अवतल दर्पण) में हमें अपना प्रतिबिंब आभासी, सीधा और बिम्ब से बड़ा दिखाई देता है। यह अवतल दर्पण की एक विशेषता है जब वस्तु को फोकस और ध्रुव के बीच रखा जाता है।
In simple words: शेविंग दर्पण में हमारा चेहरा बड़ा और सीधा दिखता है।

🎯 Exam Tip: अवतल दर्पण के उस उपयोग को याद रखें जिसमें यह बड़ा और सीधा प्रतिबिंब बनाता है, जो हजामत बनाने और मेकअप के लिए उपयोगी होता है।

 

Question 2. पार्श्व परावर्तन क्या है? समझाइये।
Answer: समतल दर्पण में बनने वाला प्रतिबिंब आभासी और सीधा होता है। यह दर्पण के पीछे उतनी ही दूरी पर बनता है, जितनी दूरी पर वस्तु दर्पण के सामने होती है, और इसका आकार भी वस्तु के बराबर होता है। जब हम समतल दर्पण में खुद को देखते हैं, तो हमारा दायां भाग प्रतिबिंब का बायां भाग बन जाता है, और बायां भाग दायां भाग बन जाता है। इसी परिवर्तन को 'पार्श्व परावर्तन' (Lateral Inversion) कहते हैं। उदाहरण के लिए, यदि आप 'p' अक्षर को दर्पण के सामने रखें, तो वह 'q' जैसा दिखाई देगा।
In simple words: समतल दर्पण में हमारी उल्टी साइड दिखती है, जैसे दायां हाथ बायां दिखे। इसी को पार्श्व परावर्तन कहते हैं।

🎯 Exam Tip: पार्श्व परावर्तन की परिभाषा को उदाहरण के साथ स्पष्ट करें, जैसे 'p' का 'q' दिखना, और याद रखें कि यह केवल समतल दर्पण में ही होता है।

 

Question 4. गोलीय दर्पणों के लिए कार्तीय चिह्न परिपाटी को समझाइये।।
Answer: गोलीय दर्पणों के लिए कार्तीय चिह्न परिपाटी एक नियम है जिसमें दर्पण के ध्रुव को मूल बिंदु माना जाता है और मुख्य अक्ष को X-अक्ष के रूप में लिया जाता है। इसके मुख्य नियम इस प्रकार हैं:
1. सभी दूरियाँ दर्पण के ध्रुव से मापी जाती हैं।
2. बिम्ब हमेशा दर्पण के बाईं ओर रखा जाता है, ताकि प्रकाश किरणें हमेशा बाईं ओर से आपतित हों।
3. ध्रुव के बाईं ओर (-X अक्ष की दिशा में) मापी गई दूरियाँ ऋणात्मक होती हैं, जबकि दाईं ओर (+X अक्ष की दिशा में) मापी गई दूरियाँ धनात्मक होती हैं।
4. मुख्य अक्ष के ऊपर की ओर (+Y अक्ष की दिशा में) मापी गई ऊँचाई धनात्मक होती है, जबकि नीचे की ओर (-Y अक्ष की दिशा में) मापी गई ऊँचाई ऋणात्मक होती है। इन नियमों का पालन करके हम प्रतिबिंब की स्थिति और प्रकृति को निर्धारित करते हैं।
In simple words: कार्तीय चिह्न परिपाटी में, दर्पण के बीच को 'शून्य' मानते हैं। बाईं तरफ की दूरियां माइनस, दाईं तरफ की प्लस, ऊपर की हाइट प्लस और नीचे की हाइट माइनस होती है।

🎯 Exam Tip: कार्तीय चिह्न परिपाटी के नियमों को अच्छी तरह से याद करें, क्योंकि यह दर्पण और लेंस से संबंधित आंकिक प्रश्नों को हल करने का आधार है।

 

Question 6. उत्तल लेंस व अवतल लेंस के विभिन्न प्रकार बताइये।
Answer: उत्तल लेंस (अभिसारी लेंस) तीन प्रकार के होते हैं: 1. उभयोत्तल लेंस, जिसमें दोनों सतहें उत्तल होती हैं; 2. समतलोत्तल लेंस, जिसमें एक सतह उत्तल और एक समतल होती है; और 3. अवतलोत्तल लेंस, जिसमें एक सतह अवतल और एक उत्तल होती है। इसी प्रकार, अवतल लेंस (अपसारी लेंस) भी तीन प्रकार के होते हैं: 1. उभयावतल लेंस, जिसमें दोनों सतहें अवतल होती हैं; 2. समतलावतल लेंस, जिसमें एक सतह समतल और एक अवतल होती है; और 3. उत्तलावतल लेंस, जिसमें एक सतह उत्तल और एक अवतल होती है। इन विभिन्न प्रकारों की संरचना उनके प्रकाश को मोड़ने की क्षमता को प्रभावित करती है।
In simple words: उत्तल लेंस और अवतल लेंस दोनों के तीन-तीन प्रकार होते हैं, जो उनकी सतहों के आकार पर निर्भर करते हैं (जैसे दोनों उत्तल, एक उत्तल-एक समतल आदि)।

🎯 Exam Tip: उत्तल और अवतल लेंसों के प्रत्येक प्रकार के नाम और उनकी सतहों की विशेषताओं को याद रखें, क्योंकि यह लेंस के व्यवहार को समझने में मदद करता है।

 

Question 8. गोलीय लेंस के लिए वक्रता त्रिज्या एवं वक्रता केन्द्र किसे कहते
Answer: गोलीय लेंस के लिए वक्रता त्रिज्या लेंस के वक्र पृष्ठों की त्रिज्या होती है। लेंस के दो वक्र पृष्ठ होते हैं, इसलिए दो वक्रता त्रिज्याएँ होती हैं (प्रथम और द्वितीय पृष्ठ के लिए)। वक्रता केंद्र (C) उस खोखले गोले का केंद्र होता है जिसका लेंस का वक्र पृष्ठ एक हिस्सा होता है। यदि लेंस के दोनों पृष्ठ वक्र हैं, तो उसके दो वक्रता केंद्र \( C_1 \) और \( C_2 \) होते हैं। ये लेंस की ज्यामितीय संरचना को परिभाषित करते हैं।
In simple words: वक्रता त्रिज्या लेंस के घुमावदार हिस्से की गोलाई होती है, और वक्रता केंद्र उस बड़े गोले का केंद्र होता है जिसका लेंस एक टुकड़ा है।

🎯 Exam Tip: वक्रता त्रिज्या और वक्रता केंद्र की परिभाषाओं को लेंस की वक्रित सतहों से जोड़कर याद रखें, क्योंकि ये लेंस के निर्माण में मूलभूत पद हैं।

 

Question 10. अवतल लेंस से प्रतिबिम्ब निर्माण को किरण चित्रों द्वारा समझाइये।
Answer: अवतल लेंस हमेशा आभासी, सीधा और छोटा प्रतिबिंब बनाता है, चाहे बिम्ब कहीं भी रखा हो (अनंत और प्रकाशिक केंद्र के बीच)। जब बिम्ब अनंत पर होता है, तो प्रतिबिंब फोकस \( (F_1) \) पर बनता है और बहुत छोटा होता है। जब बिम्ब अनंत और प्रकाशिक केंद्र के बीच होता है, तो प्रतिबिंब \( F_1 \) और प्रकाशिक केंद्र के बीच बनता है, जो आभासी, सीधा और बिम्ब से छोटा होता है। जैसे-जैसे बिम्ब लेंस के पास आता है, प्रतिबिंब का आकार बढ़ता है लेकिन हमेशा बिम्ब से छोटा ही रहता है।

क्र.सं.बिम्ब की स्थितिप्रतिबिम्ब की स्थितिप्रतिबिम्ब का स्वरूपप्रतिबिम्ब का आकार
1.अनन्त परफोकस \( F_1 \) परआभासी व सीधाअत्यधिक छोटा
2.अनन्त व प्रकाशिक केन्द्र के बीचफोकस \( F_1 \) तथा प्रकाशिक केन्द्र के बीचआभासी व सीधाबिम्ब से छोटा


In simple words: अवतल लेंस हमेशा चीज़ों का छोटा, सीधा और आभासी चित्र बनाता है।

🎯 Exam Tip: अवतल लेंस द्वारा बनने वाले प्रतिबिंबों की विशेषताओं (हमेशा आभासी, सीधा, छोटा) को याद रखें और विभिन्न बिम्ब स्थितियों के लिए किरण आरेख बनाने का अभ्यास करें।

 

Question 11. लेंस की क्षमता से आप क्या समझते हैं?
Answer: लेंस की क्षमता (Power of a lens, \( P \)) किसी लेंस द्वारा प्रकाश किरणों को अभिसरित (एकत्रित करना) या अपसरित (फैलाना) करने की मात्रा को बताती है। इसे लेंस की फोकस दूरी \( (f) \) के व्युत्क्रम के रूप में परिभाषित किया जाता है, यानी \( P = \frac{1}{f} \). यदि फोकस दूरी मीटर में हो, तो क्षमता का मात्रक डायोप्टर (D) होता है। एक डायोप्टर उस लेंस की क्षमता होती है जिसकी फोकस दूरी 1 मीटर हो। यह क्षमता जितनी अधिक होती है, लेंस उतना ही अधिक प्रकाश किरणों को मोड़ता है।
In simple words: लेंस की क्षमता बताती है कि लेंस प्रकाश को कितना मोड़ सकता है। इसे फोकस दूरी के उलटे रूप में नापते हैं, और इसकी इकाई डायोप्टर होती है।

🎯 Exam Tip: लेंस की क्षमता और फोकस दूरी के बीच संबंध को सूत्र (\( P = \frac{1}{f} \)) के साथ याद रखें और ध्यान दें कि फोकस दूरी हमेशा मीटर में होनी चाहिए।

 

Question 12. निकट दृष्टि दोष से आप क्या समझते हैं? इसे कैसे दूर किया जाता है?
Answer: निकट दृष्टि दोष (मायोपिया) में व्यक्ति को पास की वस्तुएँ तो स्पष्ट दिखाई देती हैं, लेकिन दूर की वस्तुएँ (अनंत पर स्थित बिंदु) धुंधली दिखाई देती हैं। इसका मुख्य कारण नेत्र लेंस की वक्रता का बढ़ जाना या नेत्रगोलक का लंबा हो जाना है, जिससे दूर की वस्तुओं का प्रतिबिंब रेटिना से पहले ही बन जाता है। इस दोष को दूर करने के लिए उचित क्षमता वाले अवतल लेंस का उपयोग किया जाता है, जो प्रकाश किरणों को अपसरित करके प्रतिबिंब को रेटिना पर सही ढंग से बनाता है। आजकल लेज़र तकनीक का भी उपयोग होता है।
In simple words: निकट दृष्टि दोष में पास का साफ दिखता है, दूर का धुंधला। इसे ठीक करने के लिए अवतल लेंस का चश्मा लगाते हैं।

🎯 Exam Tip: निकट दृष्टि दोष के कारणों (लेंस की वक्रता बढ़ना, नेत्रगोलक का लंबा होना) और उसके निवारण (अवतल लेंस) को याद रखना महत्वपूर्ण है।

 

Question 13. दूर दृष्टि दोष क्या है? इसका निवारण कैसे किया जाता है? .
Answer: दूर दृष्टि दोष (हाइपरमेट्रोपिया) में व्यक्ति को दूर की वस्तुएँ तो स्पष्ट दिखाई देती हैं, लेकिन पास की वस्तुएँ स्पष्ट दिखाई नहीं देतीं। सामान्य निकट बिंदु (25 सेमी) से वस्तुएँ धुंधली दिखती हैं, और जैसे-जैसे वस्तु को 25 सेमी से दूर ले जाया जाता है, वह स्पष्ट होती जाती है। इसका मुख्य कारण नेत्र लेंस की फोकस दूरी का कम होना या नेत्रगोलक का छोटा हो जाना है, जिससे पास की वस्तुओं का प्रतिबिंब रेटिना के पीछे बनता है। इस दोष को ठीक करने के लिए उचित क्षमता वाले उत्तल लेंस का उपयोग किया जाता है, जो प्रकाश किरणों को नेत्र में प्रवेश करने से पहले अभिसरित करता है।
In simple words: दूर दृष्टि दोष में दूर का साफ दिखता है, पास का धुंधला। इसे ठीक करने के लिए उत्तल लेंस का चश्मा लगाते हैं।

🎯 Exam Tip: दूर दृष्टि दोष के कारणों (लेंस की फोकस दूरी का कम होना, नेत्रगोलक का छोटा होना) और उसके निवारण (उत्तल लेंस) को याद रखना महत्वपूर्ण है।

 

Question 14. जरा-दृष्टि दोष एवं दृष्टि वैषम्य दोष क्या हैं?
Answer: जरा दृष्टि दोष (प्रेस्बायोपिया) उम्र बढ़ने के साथ होता है, जिसमें नेत्र लेंस का लचीलापन कम हो जाता है और समंजन क्षमता घट जाती है, जिससे व्यक्ति को निकट और दूर दोनों की वस्तुएँ स्पष्ट दिखाई नहीं देतीं। इसे ठीक करने के लिए द्विफोकसी (bifocal) लेंस का उपयोग किया जाता है, जिसमें ऊपर अवतल (दूर के लिए) और नीचे उत्तल (पास के लिए) भाग होता है।
दृष्टि वैषम्य दोष (एस्टिग्मेटिज्म) कॉर्निया की गोलाई में अनियमितता के कारण होता है, जिससे व्यक्ति को समान दूरी पर रखी ऊर्ध्वाधर और क्षैतिज रेखाएँ एक साथ स्पष्ट नहीं दिखाई देतीं। इसे ठीक करने के लिए बेलनाकार लेंस का उपयोग किया जाता है।
In simple words: जरा दृष्टि दोष में उम्र के साथ पास और दूर दोनों का धुंधला दिखना होता है, जिसके लिए द्विफोकसी लेंस का उपयोग करते हैं। दृष्टि वैषम्य दोष में आंख की सतह की गोलाई ठीक न होने से सीधी लाइनें ठीक से नहीं दिखतीं, इसे बेलनाकार लेंस से ठीक करते हैं।

🎯 Exam Tip: जरा दृष्टि दोष और दृष्टि वैषम्य दोष के कारण, लक्षण और उनके निवारण के लिए उपयोग किए जाने वाले लेंस (द्विफोकसी और बेलनाकार) को स्पष्ट रूप से याद रखें।

 

Question 15. नेत्र की समंजन क्षमता व दृष्टि परास से क्या अभिप्राय है?
Answer: नेत्र की समंजन क्षमता वह क्षमता है जिसके कारण अभिनेत्र लेंस की फोकस दूरी, उससे जुड़ी मांसपेशियों की सहायता से स्वतः समायोजित हो जाती है। यह नेत्र को निकट और दूर दोनों जगह स्थित वस्तुओं को रेटिना पर स्पष्ट रूप से केंद्रित करने में सक्षम बनाती है। सामान्यतः एक स्वस्थ नेत्र की समंजन क्षमता 4 डायोप्टर तक होती है। यह एक महत्वपूर्ण क्रिया है जो हमें विभिन्न दूरियों पर स्पष्ट दृष्टि प्रदान करती है।
In simple words: आंख की समंजन क्षमता मतलब आंख का अपने आप फोकस बदलना, ताकि हम पास और दूर की चीज़ें साफ देख सकें।

🎯 Exam Tip: नेत्र की समंजन क्षमता की परिभाषा को याद रखें और समझें कि यह कैसे नेत्र को विभिन्न दूरियों पर स्पष्ट रूप से देखने में मदद करती है।

 

निबन्धात्मक प्रश्न

 

Question 1. अवतल दर्पण के लिये बिम्ब की निम्न स्थितियों में प्रतिबिम्ब की स्थिति व प्रकृति के बारे में किरण चित्र बनाकर समझाइये-
1. जब बिम्ब अनन्त व वक्रता केन्द्र के बीच हो
2. जब बिम्ब वक्रता केन्द्र पर हो
3. जब बिम्ब वक्रता केन्द्र व फोकस के बीच हो
4. जब बिम्ब फोकस पर हो
5. जब बिम्ब फोकस व ध्रुव के बीच हो
Answer:
1. जब बिम्ब अनन्त व वक्रता केन्द्र के बीच होता है, प्रतिबिम्ब फोकस \( F \) व वक्रता केन्द्र \( C \) के बीच बनता है। यह प्रतिबिम्ब वास्तविक, उल्टा और बिम्ब से छोटा होता है।
Concave mirror ray diagram with object between infinity and C, image between F and C, real, inverted, smaller.
In simple words: When an object is placed far away, but not at infinity, and before the center of curvature of a concave mirror, its image forms between the focus and the center of curvature. This image will be real, upside-down, and smaller than the object.

 

Question 1. 3. जब बिम्ब वक्रता केन्द्र व फोकस के बीच हो
Answer: जब बिम्ब को वक्रता केन्द्र \( C \) और फोकस \( F \) के बीच रखा जाता है, तो प्रतिबिम्ब वक्रता केन्द्र \( C \) से दूर बनता है। यह प्रतिबिम्ब वास्तविक, उल्टा और बिम्ब से बड़ा होता है।
Concave mirror ray diagram with object between F and C, image beyond C, real, inverted, larger.
In simple words: When an object is placed between the focus and the center of curvature of a concave mirror, the image forms beyond the center of curvature. This image is real, inverted, and larger than the object.

 

Question 1. 4. जब बिम्ब फोकस पर हो
Answer: जब बिम्ब फोकस \( F \) पर होता है, तो प्रतिबिम्ब अनन्त पर बनता है। यह प्रतिबिम्ब वास्तविक, उल्टा और बिम्ब से बहुत बड़ा होता है।
Concave mirror ray diagram with object at F, image at infinity, real, inverted, highly magnified.
In simple words: If an object is placed exactly at the focus of a concave mirror, its image will form at a very far distance (infinity). This image is real, inverted, and extremely large.

 

Question 1. 5. जब बिम्ब फोकस व ध्रुव के बीच हो
Answer: जब बिम्ब फोकस \( F \) और ध्रुव \( P \) के बीच होता है, तो प्रतिबिम्ब दर्पण के पीछे बनता है। यह प्रतिबिम्ब आभासी, सीधा और बिम्ब से बड़ा होता है।
Concave mirror ray diagram with object between F and P, image behind mirror, virtual, erect, larger.
In simple words: When an object is placed between the focus and the pole of a concave mirror, the image forms behind the mirror. This image is virtual (cannot be caught on a screen), upright, and magnified (larger than the object).

🎯 Exam Tip: Remember that concave mirrors produce real and inverted images when the object is beyond the focus, but a virtual and erect image when the object is between the pole and the focus. Pay close attention to these critical points.

 

Question 2. अपवर्तन से आप क्या समझते हैं? अपवर्तन के नियम लिखिये एवं कांच के स्लैब की सहायता से प्रकाश किरण के अपवर्तन को समझाइये।
Answer: अपवर्तन तब होता है जब एक प्रकाश किरण एक माध्यम से दूसरे माध्यम में जाती है। जब ऐसा होता है, तो किरण अपने रास्ते से मुड़ जाती है। इस प्रक्रिया को प्रकाश का अपवर्तन कहते हैं। प्रकाश के एक पारदर्शी माध्यम से दूसरे माध्यम में जाने पर उसकी चाल (गति) बदल जाती है, जिससे यह मुड़ती है। प्रकाश के अलग-अलग माध्यमों में अलग-अलग गति से चलने के कारण ही अपवर्तन होता है। एक अतिरिक्त जानकारी के रूप में, यह प्रक्रिया इंद्रधनुष जैसे प्राकृतिक चमत्कारों के लिए जिम्मेदार है।

अपवर्तन के नियम:
1. प्रथम नियम: आपतित किरण (जो किरण आती है), अपवर्तित किरण (जो किरण मुड़ती है), और दोनों माध्यमों को अलग करने वाली सतह के आपतन बिंदु पर खींचा गया अभिलम्ब (एक सीधी काल्पनिक रेखा) - ये तीनों हमेशा एक ही तल में होते हैं।
2. द्वितीय नियम (स्नेल का अपवर्तन नियम): प्रकाश के किसी निश्चित रंग और निश्चित माध्यमों के जोड़े के लिए, आपतन कोण \( (i) \) की ज्या \( (\sin i) \) और अपवर्तन कोण \( (r) \) की ज्या \( (\sin r) \) का अनुपात हमेशा स्थिर रहता है। इसे अपवर्तनांक \( (\mu) \) कहते हैं।
\[ \frac { \sin i }{ \sin r } = \text{नियतांक} (\mu) \] यह अपवर्तन का दूसरा नियम है। इसे माध्यम 2 का माध्यम 1 के सापेक्ष अपवर्तनांक \( \mu_{21} \) कहते हैं।

काँच की स्लैब की सहायता से प्रकाश किरण का अपवर्तन:
अपवर्तन के प्रथम नियम को समझने के लिए, हम एक आयताकार काँच की स्लैब \( ABCD \) लेते हैं और इसे सफेद कागज पर रखते हैं। एक प्रकाश किरण \( PQ \) स्लैब के फलक \( AB \) पर टकराती है। जब यह बिंदु \( Q \) पर काँच में प्रवेश करती है, तो यह अपनी मूल दिशा से मुड़कर \( OR \) दिशा में अपवर्तित होती है। फिर यह स्लैब से \( RS \) दिशा में बाहर निकल जाती है। \( QR \) को अपवर्तित किरण और \( RS \) को निर्गत किरण कहते हैं। हम देखते हैं कि आपतित किरण \( PQ \), अपवर्तित किरण \( OR \), और अभिलम्ब \( ON \) तीनों एक ही तल में होते हैं। यह अपवर्तन का पहला नियम सिद्ध करता है।

किरण \( Q \) को \( R \) से मिलाने पर अपवर्तित किरण \( QR \) मिलती है। अब स्लैब की सतह पर \( Q \) बिंदु से अभिलम्ब खींचकर आपतन कोण \( i \) और अपवर्तन कोण \( r \) का मान ज्ञात करते हैं। जब स्लैब पर प्रकाश की किरणें अलग-अलग कोणों पर आपतित होती हैं और \( i \) तथा \( r \) के विभिन्न मान ज्ञात करते हैं, तो गणना करने पर हम पाते हैं कि \( \frac { \sin i }{ \sin r } \) का मान हमेशा निश्चित रहता है। इसे स्थिरांक \( \mu \) कहते हैं। यही अपवर्तन का दूसरा नियम है, जिसे स्नेल का नियम कहते हैं। इसे माध्यम 2 का माध्यम 1 के सापेक्ष अपवर्तनांक \( \mu_{21} \) कहते हैं।
In simple words: अपवर्तन वह प्रक्रिया है जब प्रकाश एक माध्यम से दूसरे माध्यम में जाते हुए मुड़ जाता है, क्योंकि उसकी गति बदल जाती है। स्नेल का नियम बताता है कि प्रकाश के लिए, आपतन कोण की ज्या और अपवर्तन कोण की ज्या का अनुपात हमेशा एक ही होता है।

🎯 Exam Tip: जब भी अपवर्तन के नियम पूछे जाएं, स्नेल के नियम का सूत्र (\( \sin i / \sin r = \text{constant} \)) लिखना और दोनों नियमों को स्पष्ट रूप से परिभाषित करना न भूलें।

 

Question 3. एक उत्तल दर्पण के लिये बिम्ब की निम्न स्थितियों में प्रतिबिम्ब की स्थिति व प्रकृति के बारे में किरण चित्र बनाकर समझाइये
Answer:
जब बिम्ब अनन्त पर हो: इस स्थिति में प्रतिबिम्ब दर्पण के पीछे फोकस \( F \) पर बनता है। प्रतिबिम्ब का स्वरूप आभासी व सीधा होता है, और इसका आकार अत्यधिक छोटा (बिंदुवत) होता है।
Convex mirror ray diagram with object at infinity, image at F, virtual, erect, point-sized.
जब बिम्ब किसी निश्चित दूरी पर हो: इस स्थिति में प्रतिबिम्ब दर्पण के पीछे, ध्रुव \( P \) और फोकस \( F \) के बीच बनता है। प्रतिबिम्ब का स्वरूप आभासी व सीधा होता है, और यह बिम्ब से काफी छोटा होता है।

In simple words: उत्तल दर्पण हमेशा वस्तु का सीधा और छोटा प्रतिबिम्ब बनाता है। यह वाहनों में पीछे का दृश्य देखने के लिए बहुत उपयोगी होता है।

🎯 Exam Tip: उत्तल दर्पण के लिए हमेशा आभासी, सीधा और छोटा प्रतिबिम्ब बनता है। किरण आरेख बनाते समय, यह दिखाएँ कि प्रकाश किरणें कहाँ से आ रही हैं और कहाँ जा रही हैं।

 

Question 5. किरण चित्र बनाते हुए उत्तल लेंस द्वारा बनने वाले प्रतिबिम्ब की प्रकृति एवं स्थिति बताइये जबकि बिम्ब
Answer:
1. फोकस एवं प्रकाशिक केन्द्र के मध्य हो: इस स्थिति में प्रतिबिम्ब लेंस के उसी तरफ बिम्ब की ओर बनता है। प्रतिबिम्ब का स्वरूप आभासी व सीधा होता है और प्रतिबिम्ब का आकार बिम्ब से बड़ा बनता है।

2. फोकस पर हो: इस स्थिति में प्रतिबिम्ब अनन्त पर बनता है। प्रतिबिम्ब का स्वरूप वास्तविक व उल्टा होता है और प्रतिबिम्ब का आकार अत्यधिक आवर्धित (बहुत बड़ा) होता है।

3. बिम्ब \( 2F_1 \) व \( F_1 \) के बीच हो: इस स्थिति में प्रतिबिम्ब \( 2F_2 \) व अनन्त के बीच बनता है। प्रतिबिम्ब का स्वरूप वास्तविक व उल्टा होता है और प्रतिबिम्ब का आकार बिम्ब से बड़ा होता है

4. \( 2F_1 \) पर हो: इस स्थिति में प्रतिबिम्ब \( 2F_2 \) पर बनता है। प्रतिबिम्ब का स्वरूप वास्तविक व उल्टा होता है और प्रतिबिम्ब का आकार बिम्ब के आकार के बराबर बनता है।

5. \( 2F_1 \) एवं अनन्त के बीच हो: इस स्थिति में प्रतिबिम्ब \( F_2 \) व \( 2F_2 \) के बीच बनता है। प्रतिबिम्ब का स्वरूप वास्तविक व उल्टा होता है और प्रतिबिम्ब का आकार बिम्ब से छोटा होता है।

In simple words: उत्तल लेंस में, बिम्ब की स्थिति के आधार पर प्रतिबिम्ब की प्रकृति और स्थिति बदलती रहती है। यह लेंस फोकस दूरी के अनुसार प्रकाश किरणों को मोड़कर प्रतिबिम्ब बनाता है।

🎯 Exam Tip: उत्तल लेंस के लिए किरण आरेख बनाते समय, हमेशा तीन मुख्य किरणों का उपयोग करें: मुख्य अक्ष के समानांतर, ऑप्टिकल केंद्र से गुजरने वाली, और फोकस से गुजरने वाली।

 

Question 6. नेत्र दृष्टि दोषों के बारे में विस्तार से समझाते हुए उन्हें दूर करने के उपाय बताइए।
Answer: आँखों के दोष कई कारणों से हो सकते हैं, जैसे उम्र बढ़ने से मांसपेशियों की समंजन क्षमता कम होना, चोट लगना, या आँखों पर बहुत ज्यादा दबाव पड़ना। यह सब आँखों की देखने की क्षमता को कमजोर कर सकते हैं।

दृष्टि दोष के कारण:
• नेत्र लेंस की वक्रता का बहुत अधिक होना
• नेत्र गोलक का लम्बा होना

1. निकट दृष्टि दोष (Myopia or Nearsightedness): इस दोष में व्यक्ति पास की चीजें तो साफ देख सकता है, लेकिन दूर की चीजें धुंधली दिखाई देती हैं। इसका मुख्य कारण नेत्र लेंस की वक्रता का बढ़ जाना या नेत्र गोलक का लंबा हो जाना है। इससे दूर रखी वस्तुओं का प्रतिबिम्ब रेटिना के सामने बनता है। इस दोष को दूर करने के लिए सही क्षमता वाले अवतल लेंस का उपयोग किया जाता है। आजकल इसे लेजर तकनीक से भी ठीक किया जाता है।

2. दूर दृष्टि दोष (Hypermetropia or Farsightedness): इस दोष में व्यक्ति दूर की चीजें साफ देख सकता है, लेकिन पास की चीजें धुंधली दिखाई देती हैं। इसका कारण नेत्र लेंस की फोकस दूरी का अधिक होना या नेत्र गोलक का छोटा हो जाना है। इससे पास रखी वस्तुओं का प्रतिबिम्ब रेटिना के पीछे बनता है। इस दोष को दूर करने के लिए सही क्षमता वाले उत्तल लेंस का उपयोग किया जाता है।

3. जरा दृष्टि दोष (Presbyopia): यह दोष उम्र बढ़ने के साथ आता है, जब नेत्र लेंस की लचीलापन कम हो जाती है और उसकी समंजन क्षमता घट जाती है। इससे व्यक्ति को पास और दूर दोनों की वस्तुएं साफ दिखाई नहीं देती हैं। इस दोष को दूर करने के लिए द्विफोकसी लेंस (bifocal lens) का उपयोग किया जाता है। इन लेंसों में ऊपर का हिस्सा अवतल (दूर की चीजों के लिए) और नीचे का हिस्सा उत्तल (पास की चीजों के लिए) होता है।

4. दृष्टि वैषम्य दोष (Astigmatism): यह दोष कॉर्निया की गोलाई में अनियमितता के कारण होता है। इसमें व्यक्ति को समान दूरी पर रखी ऊर्ध्वाधर (खड़ी) और क्षैतिज (लेटी) रेखाएं एक साथ साफ दिखाई नहीं देती हैं। इस दोष को दूर करने के लिए बेलनाकार लेंस का उपयोग किया जाता है।

5. मोतियाबिन्द (Cataract): उम्र बढ़ने के साथ नेत्र लेंस की पारदर्शिता कम होने लगती है और उसका लचीलापन भी घट जाता है। इससे प्रकाश का परावर्तन होने लगता है और वस्तुएं स्पष्ट दिखाई नहीं देती हैं। इस दोष को मोतियाबिन्द कहते हैं। इसे ठीक करने के लिए लेंस को हटाकर कृत्रिम लेंस (इन्ट्राआक्युलर लेंस) लगाया जाता है।
In simple words: दृष्टि दोष तब होते हैं जब आंखें ठीक से देख नहीं पातीं। उन्हें चश्मे, लेंस या सर्जरी से ठीक किया जा सकता है। मायोपिया में दूर की चीजें धुंधली दिखती हैं, हाइपरमेट्रोपिया में पास की चीजें धुंधली दिखती हैं। प्रेस्बायोपिया में पास और दूर दोनों धुंधले हो जाते हैं।

🎯 Exam Tip: प्रत्येक दृष्टि दोष का नाम, उसके कारण और निवारण के लिए उपयोग किए जाने वाले लेंस का प्रकार याद रखें। चित्र बनाकर समझाना उत्तर को और प्रभावी बनाता है।

 

आंकिक प्रश्न

 

Question 1. दिया है दर्पण की फोकस दूरी \( f = - 30 \) cm, (.:. अवतल दर्पण है) बिम्ब की दूरी \( u = - 40 \) cm. प्रतिबिम्ब की स्थिति \( v = ? \) \( m = ? \)
Answer: दिया गया है कि दर्पण की फोकस दूरी \( f = -30 \) cm (क्योंकि यह अवतल दर्पण है)। बिम्ब की दूरी \( u = -40 \) cm है। हमें प्रतिबिम्ब की स्थिति \( v \) और आवर्धन \( m \) ज्ञात करना है।

दर्पण सूत्र से:
\[ \frac { 1 }{ v } + \frac { 1 }{ u } = \frac { 1 }{ f } \]
मान रखने पर:
\[ \frac { 1 }{ v } + \frac { 1 }{ -40 } = \frac { 1 }{ -30 } \]
\( \implies \frac { 1 }{ v } = \frac { 1 }{ -30 } - \frac { 1 }{ -40 } \)
\( \implies \frac { 1 }{ v } = - \frac { 1 }{ 30 } + \frac { 1 }{ 40 } \)
\( \implies \frac { 1 }{ v } = \frac { -4 + 3 }{ 120 } \)
\( \implies \frac { 1 }{ v } = \frac { -1 }{ 120 } \)
\( \implies v = -120 \text{ cm} \) अतः प्रतिबिम्ब दर्पण के सामने 120 cm की दूरी पर बनेगा और प्रतिबिम्ब वास्तविक होगा।

आवर्धनता:
\[ m = - \frac { v }{ u } \] मान रखने पर:
\[ m = - \frac { (-120) }{ (-40) } \]
\( \implies m = -3 \) अर्थात् प्रतिबिम्ब वास्तविक, उल्टा होगा व बिम्ब से 3 गुना बड़ा होगा। यह आवर्धन यह भी बताता है कि प्रतिबिम्ब वस्तु की तुलना में कितना बड़ा दिखेगा।
In simple words: अवतल दर्पण के लिए, वस्तु 40 cm पर है और फोकस 30 cm है। प्रतिबिम्ब 120 cm पर दर्पण के सामने बनेगा और वस्तु से 3 गुना बड़ा और उल्टा होगा।

🎯 Exam Tip: दर्पण सूत्र और आवर्धन सूत्र का सही उपयोग करें। अवतल दर्पण के लिए \( f \) और \( u \) हमेशा ऋणात्मक होते हैं, जबकि उत्तल दर्पण के लिए \( f \) धनात्मक होता है।

 

Question 2. एक बिम्ब का उत्तल दर्पण से प्रतिबिम्ब दर्पण से 8 cm. पर दिखाई देता है। यदि दर्पण की फोकस दूरी 16 cm. हो तो दर्पण से बिम्ब की दूरी ज्ञात कीजिये।
Answer: दिया गया है: उत्तल दर्पण की फोकस दूरी \( f = 16 \) cm (उत्तल दर्पण के लिए फोकस दूरी धनात्मक होती है)। प्रतिबिम्ब की दूरी \( v = 8 \) cm है (उत्तल दर्पण में प्रतिबिम्ब हमेशा आभासी और दर्पण के पीछे बनता है, इसलिए \( v \) धनात्मक है)। हमें बिम्ब की दूरी \( u \) ज्ञात करनी है।

दर्पण सूत्र से:
\[ \frac { 1 }{ v } + \frac { 1 }{ u } = \frac { 1 }{ f } \]
मान रखने पर:
\[ \frac { 1 }{ 8 } + \frac { 1 }{ u } = \frac { 1 }{ 16 } \]
\( \implies \frac { 1 }{ u } = \frac { 1 }{ 16 } - \frac { 1 }{ 8 } \)
\( \implies \frac { 1 }{ u } = \frac { 1 - 2 }{ 16 } \)
\( \implies \frac { 1 }{ u } = \frac { -1 }{ 16 } \)
\( \implies u = -16 \text{ cm} \) अतः बिम्ब दर्पण से बाईं ओर 16 cm की दूरी पर है। यह बताता है कि वस्तु दर्पण के सामने 16 cm की दूरी पर स्थित है।
In simple words: उत्तल दर्पण में, यदि प्रतिबिम्ब 8 cm पर और फोकस 16 cm पर है, तो वस्तु दर्पण से 16 cm की दूरी पर रखी है।

🎯 Exam Tip: उत्तल दर्पण के लिए फोकस दूरी \( f \) और प्रतिबिम्ब दूरी \( v \) हमेशा धनात्मक होती है, जबकि बिम्ब दूरी \( u \) ऋणात्मक होती है।

 

Question 3. एक 30 cm. फोकस दूरी के उत्तल लेंस से बिम्ब 60 cm. दूरी पर रखा है। यदि बिम्ब की ऊँचाई 3 cm. है तो प्रतिबिम्ब की स्थिति तथा स्वरूप ज्ञात कीजिये।
Answer: दिया गया है: उत्तल लेंस की फोकस दूरी \( f = +30 \) cm (उत्तल लेंस के लिए फोकस दूरी धनात्मक होती है)। बिम्ब की दूरी \( u = -60 \) cm (बिम्ब हमेशा बाईं ओर रखा जाता है, इसलिए ऋणात्मक)। बिम्ब की ऊँचाई \( h = 3 \) cm है। हमें प्रतिबिम्ब की स्थिति \( v \) और आवर्धन \( m \) (जिससे स्वरूप पता चलेगा) ज्ञात करना है।

लेंस सूत्र से:
\[ \frac { 1 }{ v } - \frac { 1 }{ u } = \frac { 1 }{ f } \]
मान रखने पर:
\[ \frac { 1 }{ v } - \frac { 1 }{ (-60) } = \frac { 1 }{ 30 } \]
\( \implies \frac { 1 }{ v } + \frac { 1 }{ 60 } = \frac { 1 }{ 30 } \)
\( \implies \frac { 1 }{ v } = \frac { 1 }{ 30 } - \frac { 1 }{ 60 } \)
\( \implies \frac { 1 }{ v } = \frac { 2 - 1 }{ 60 } \)
\( \implies \frac { 1 }{ v } = \frac { 1 }{ 60 } \)
\( \implies v = 60 \text{ cm} \) अतः प्रतिबिम्ब लेंस से दायीं ओर 60 cm की दूरी पर बनेगा।

आवर्धनता:
\[ m = \frac { h' }{ h } = \frac { v }{ u } \] मान रखने पर:
\[ \frac { h' }{ 3 } = \frac { 60 }{ (-60) } \]
\( \implies \frac { h' }{ 3 } = -1 \)
\( \implies h' = -3 \text{ cm} \) प्रतिबिम्ब वास्तविक एवं उल्टा है। प्रतिबिम्ब का आकार बिम्ब के समान 3 cm का बनेगा। ऋणात्मक चिह्न बताता है कि प्रतिबिम्ब मुख्य अक्ष के नीचे बनेगा।
In simple words: उत्तल लेंस के लिए, वस्तु 60 cm पर और फोकस 30 cm पर है। प्रतिबिम्ब लेंस के दूसरी ओर 60 cm पर बनेगा। यह वास्तविक, उल्टा और वस्तु के आकार (3 cm) का ही होगा।

🎯 Exam Tip: उत्तल लेंस के लिए, जब वस्तु \( 2F \) पर होती है (जो यहाँ \( 2 \times 30 \text{ cm} = 60 \text{ cm} \) है), तो प्रतिबिम्ब भी \( 2F \) पर, वास्तविक, उल्टा और समान आकार का बनता है।

 

Question 5. एक अवतल दर्पण की फोकस दूरी 30 cm. है। यदि एक बिम्ब 20 cm. पर रखा जाता है तो प्रतिबिम्ब की स्थिति व स्वरूप ज्ञात कीजिये।
Answer: दिया गया है: अवतल दर्पण की फोकस दूरी \( f = -30 \) cm (अवतल दर्पण के लिए फोकस दूरी ऋणात्मक होती है)। बिम्ब की दूरी \( u = -20 \) cm है। हमें प्रतिबिम्ब की दूरी \( v \) और आवर्धन \( m \) ज्ञात करना है।

दर्पण सूत्र से:
\[ \frac { 1 }{ v } + \frac { 1 }{ u } = \frac { 1 }{ f } \]
मान रखने पर:
\[ \frac { 1 }{ v } + \frac { 1 }{ (-20) } = \frac { 1 }{ (-30) } \]
\( \implies \frac { 1 }{ v } = - \frac { 1 }{ 30 } + \frac { 1 }{ 20 } \)
\( \implies \frac { 1 }{ v } = \frac { -2 + 3 }{ 60 } \)
\( \implies \frac { 1 }{ v } = \frac { 1 }{ 60 } \)
\( \implies v = 60 \text{ cm} \) अतः प्रतिबिम्ब दर्पण के पीछे 60 cm की दूरी पर बनेगा।

आवर्धनता:
\[ m = - \frac { v }{ u } \] मान रखने पर:
\[ m = - \frac { (60) }{ (-20) } \]
\( \implies m = +3 \) यहाँ धनात्मक चिह्न दर्शाता है कि प्रतिबिम्ब आभासी व सीधा है। प्रतिबिम्ब बिम्ब का 3 गुना बड़ा होगा। इस प्रकार, प्रतिबिम्ब की प्रकृति आभासी, सीधा और आवर्धित है।
In simple words: अवतल दर्पण के लिए, वस्तु 20 cm पर और फोकस 30 cm पर है। प्रतिबिम्ब दर्पण के पीछे 60 cm पर बनेगा, जो आभासी, सीधा और वस्तु से 3 गुना बड़ा होगा।

🎯 Exam Tip: जब अवतल दर्पण के लिए वस्तु फोकस और ध्रुव के बीच रखी जाती है, तो प्रतिबिम्ब हमेशा आभासी, सीधा और आवर्धित बनता है। चिन्ह परिपाटी का सही उपयोग महत्वपूर्ण है।

 

Question 6. अवतल लेंस के सम्मुख रखे बिम्ब का प्रतिबिम्ब 10 cm. पर बनता है। यदि अवतल लेंस की फोकस दूरी 15cm. हो तो लेंस से बिम्ब की दूरी ज्ञात कीजिये।
Answer: दिया गया है: अवतल लेंस में प्रतिबिम्ब की दूरी \( v = -10 \) cm (अवतल लेंस हमेशा आभासी प्रतिबिम्ब बनाता है और यह लेंस के सामने बनता है, इसलिए ऋणात्मक)। फोकस दूरी \( f = -15 \) cm (अवतल लेंस के लिए फोकस दूरी ऋणात्मक होती है)। हमें बिम्ब की दूरी \( u \) ज्ञात करनी है।

लेंस सूत्र से:
\[ \frac { 1 }{ v } - \frac { 1 }{ u } = \frac { 1 }{ f } \]
मान रखने पर:
\[ \frac { 1 }{ (-10) } - \frac { 1 }{ u } = \frac { 1 }{ (-15) } \]
\( \implies - \frac { 1 }{ 10 } - \frac { 1 }{ u } = - \frac { 1 }{ 15 } \)
\( \implies - \frac { 1 }{ u } = - \frac { 1 }{ 15 } + \frac { 1 }{ 10 } \)
\( \implies - \frac { 1 }{ u } = \frac { -2 + 3 }{ 30 } \)
\( \implies - \frac { 1 }{ u } = \frac { 1 }{ 30 } \)
\( \implies u = -30 \text{ cm} \) अतः बिम्ब लेंस से बाईं ओर 30 cm की दूरी पर है। यह दर्शाता है कि वस्तु लेंस के सामने 30 cm पर रखी है।
In simple words: अवतल लेंस में यदि प्रतिबिम्ब 10 cm पर और फोकस 15 cm पर है, तो वस्तु लेंस से 30 cm की दूरी पर रखी है।

🎯 Exam Tip: अवतल लेंस के लिए, फोकस दूरी \( f \), प्रतिबिम्ब दूरी \( v \) और बिम्ब दूरी \( u \) सभी ऋणात्मक होती हैं, क्योंकि ये सभी लेंस के सामने स्थित होती हैं।

 

Question 7. 10 cm फोकस दूरी वाले उत्तल लेंस की आवर्धनता ज्ञात कीजिये जबकि लेंस से वस्तु का सीधा प्रतिबिम्ब स्पष्ट दृष्टि की न्यूनतम दूरी (25 cm) पर बनता है।
Answer: दिया गया है: उत्तल लेंस की फोकस दूरी \( f = +10 \) cm (उत्तल लेंस के लिए धनात्मक)। स्पष्ट दृष्टि की न्यूनतम दूरी पर सीधा प्रतिबिम्ब बन रहा है, इसलिए प्रतिबिम्ब की दूरी \( v = -25 \) cm (लेंस के उसी तरफ, इसलिए ऋणात्मक)। हमें बिम्ब की दूरी \( u \) और आवर्धन \( m \) ज्ञात करना है।

लेंस सूत्र से:
\[ \frac { 1 }{ v } - \frac { 1 }{ u } = \frac { 1 }{ f } \]
मान रखने पर:
\[ \frac { 1 }{ (-25) } - \frac { 1 }{ u } = \frac { 1 }{ 10 } \]
\( \implies - \frac { 1 }{ 25 } - \frac { 1 }{ u } = \frac { 1 }{ 10 } \)
\( \implies - \frac { 1 }{ u } = \frac { 1 }{ 10 } + \frac { 1 }{ 25 } \)
\( \implies - \frac { 1 }{ u } = \frac { 5 + 2 }{ 50 } \)
\( \implies - \frac { 1 }{ u } = \frac { 7 }{ 50 } \)
\( \implies u = - \frac { 50 }{ 7 } \text{ cm} \)
\( \implies u \approx -7.14 \text{ cm} \) यह बिम्ब की दूरी है।

आवर्धनता:
\[ m = \frac { v }{ u } \] मान रखने पर:
\[ m = \frac { (-25) }{ (-50/7) } \]
\( \implies m = \frac { 25 \times 7 }{ 50 } \)
\( \implies m = \frac { 7 }{ 2 } \)
\( \implies m = 3.5 \) चूंकि आवर्धन धनात्मक है, प्रतिबिम्ब सीधा और आभासी है। यह आवर्धन बताता है कि प्रतिबिम्ब वस्तु से 3.5 गुना बड़ा होगा।
In simple words: 10 cm फोकस दूरी वाले उत्तल लेंस में, यदि वस्तु का सीधा प्रतिबिम्ब 25 cm पर बनता है, तो उस लेंस की आवर्धनता 3.5 होगी।

🎯 Exam Tip: उत्तल लेंस द्वारा सीधा और आभासी प्रतिबिम्ब तभी बनता है जब वस्तु फोकस और ऑप्टिकल केंद्र के बीच रखी हो। स्पष्ट दृष्टि की न्यूनतम दूरी \( (v) \) को \( -25 \text{ cm} \) लेना न भूलें।

 

अन्य महत्त्वपूर्ण प्रश्नोत्तर

वस्तुनिष्ठ प्रश्न

 

Question 1. किसी बिंब का अवतल दर्पण द्वारा बना प्रतिबिंब आभासी, सीधा तथा बिंब से बड़ा पाया गया। वस्तु की स्थिति कहाँ होनी चाहिए?
(अ) मुख्य फोकस तथा वक्रता केन्द्र के बीच
(ब) वक्रता केन्द्र पर
(स) वक्रता केन्द्र से परे
(द) दर्पण के ध्रुव तथा मुख्य फोकस के बीच
Answer: (द) दर्पण के ध्रुव तथा मुख्य फोकस के बीच
In simple words: अवतल दर्पण में बड़ा और सीधा प्रतिबिम्ब पाने के लिए वस्तु को दर्पण के फोकस और ध्रुव के बीच रखना चाहिए।

🎯 Exam Tip: अवतल दर्पण में आभासी, सीधा और आवर्धित प्रतिबिम्ब तभी बनता है जब वस्तु को फोकस (F) और ध्रुव (P) के बीच रखा जाए।

 

Question 2. किसी बिंब का वास्तविक तथा समान साइज का प्रतिबिंब प्राप्त करने के लिए बिंब को उत्तल लेंस के सामने कहाँ रखें?
(अ) लेंस के मुख्य फोकस पर
(ब) फोकस दूरी की दोगुनी दूरी पर
Answer: (ब) फोकस दूरी की दोगुनी दूरी पर
In simple words: उत्तल लेंस से वास्तविक और वस्तु के समान आकार का प्रतिबिम्ब प्राप्त करने के लिए वस्तु को फोकस दूरी की दोगुनी दूरी पर रखना चाहिए।

🎯 Exam Tip: उत्तल लेंस में, जब वस्तु \( 2F_1 \) पर होती है, तो प्रतिबिम्ब \( 2F_2 \) पर, वास्तविक, उल्टा और वस्तु के समान आकार का बनता है।

 

अन्य महत्त्वपूर्ण प्रश्नोत्तर

 

Question 1. किसी बिंब का अवतल दर्पण द्वारा बना प्रतिबिंब आभासी, सीधा तथा बिंब से बड़ा पाया गया। वस्तु की स्थिति कहाँ होनी चाहिए?
(अ) मुख्य फोकस तथा वक्रता केन्द्र के बीच
(ब) वक्रता केन्द्र पर
(स) वक्रता केन्द्र से परे
(द) दर्पण के ध्रुव तथा मुख्य फोकस के बीच
Answer: (द) दर्पण के ध्रुव तथा मुख्य फोकस के बीच
In simple words: अवतल दर्पण के साथ जब वस्तु को दर्पण के बहुत पास, यानी ध्रुव और मुख्य फोकस के बीच रखा जाता है, तो हमें वस्तु का एक बड़ा, सीधा और आभासी चित्र मिलता है।

🎯 Exam Tip: याद रखें कि अवतल दर्पण आभासी और बड़ा प्रतिबिंब केवल तभी बनाता है जब वस्तु ध्रुव और फोकस के बीच हो। अन्य सभी स्थितियों में यह वास्तविक और उलटा प्रतिबिंब बनाता है।

 

Question 2. किसी बिंब का वास्तविक तथा समान साइज का प्रतिबिंब प्राप्त करने के लिए बिंब को उत्तल लेंस के सामने कहाँ रखें?
(अ) लेंस के मुख्य फोकस पर
(ब) फोकस दूरी की दोगुनी दूरी पर
(स) अनंत पर
(द) प्रकाशिक केंद्र तथा मुख्य फोकस के बीच
Answer: (ब) फोकस दूरी की दोगुनी दूरी पर
In simple words: उत्तल लेंस का उपयोग करके वास्तविक और वस्तु के समान आकार का प्रतिबिंब बनाने के लिए, वस्तु को लेंस की फोकस दूरी की दोगुनी दूरी पर रखना चाहिए। इस बिंदु को \(2F_1\) भी कहते हैं।

🎯 Exam Tip: उत्तल लेंस में, जब वस्तु \(2F_1\) पर होती है, तो प्रतिबिंब \(2F_2\) पर बनता है, जो वास्तविक, उल्टा और वस्तु के समान आकार का होता है।

 

Question 4. किसी समतल दर्पण पर प्रकाश की किरण अभिलम्बवत् आपतित होती है तो परावर्तन कोण का मान होता है
(अ) 90°
(ब) 180°
(स) 0°
(द) 45°
Answer: (स) 0°
In simple words: जब प्रकाश की किरण किसी समतल दर्पण पर सीधी (90 डिग्री पर) पड़ती है, तो वह उसी रास्ते से वापस लौट जाती है। इसलिए, आपतन कोण और परावर्तन कोण दोनों का मान शून्य होता है।

🎯 Exam Tip: अभिलंब पर आपतित किरण का मतलब है कि किरण अभिलंब के साथ 0 डिग्री का कोण बनाती है, इसलिए परावर्तन कोण भी 0 डिग्री होता है।

 

Question 5. अवतल लेंस के सामने रखी वस्तु का प्रतिबिम्ब सदैव होता है
(अ) आभासी व सीधा
(ब) वास्तविक एवं सीधा
(स) काल्पनिक एवं उल्टा
(द) वास्तविक एवं उल्टा
Answer: (अ) आभासी व सीधा
In simple words: अवतल लेंस हमेशा किसी भी वस्तु का छोटा, सीधा और आभासी प्रतिबिंब बनाता है। यह प्रतिबिंब लेंस और वस्तु के बीच बनता है।

🎯 Exam Tip: अवतल लेंस हमेशा वस्तु को छोटी करके दिखाता है और कभी भी वास्तविक या उलटा प्रतिबिंब नहीं बनाता है, यह हमेशा आभासी और सीधा होता है।

 

Question 6. डायप्टर मात्रक है
(अ) फोकस दूरी का
(ब) आवर्धन का
(स) लेंस की शक्ति का
(द) विभेदन क्षमता का
Answer: (स) लेंस की शक्ति का
In simple words: डायप्टर लेंस की शक्ति (या क्षमता) को मापने की इकाई है। यह बताता है कि लेंस प्रकाश किरणों को कितना मोड़ सकता है।

🎯 Exam Tip: लेंस की शक्ति फोकस दूरी के व्युत्क्रम के बराबर होती है, और इसका मात्रक डायप्टर है।

 

Question 7. एक जरा दृष्टि दोष वाला मनुष्य दो लेंसों वाला चश्मा लगाता है, इनमें-
(अ) ऊपर वाला उत्तल लेंस एवं नीचे वाला अवतल लेंस होगा।
(ब) नीचे वाला उत्तल लेंस एवं ऊपर वाला अवतल लेंस होगा।
(स) दोनों उत्तल लेंस लेकिन भिन्न-भिन्न फोकस दूरी के।।
(द) दोनों अवतल लेंस लेकिन भिन्न-भिन्न फोकस दूरी के।।
Answer: (ब) नीचे वाला उत्तल लेंस एवं ऊपर वाला अवतल लेंस होगा।
In simple words: जरा दृष्टि दोष में व्यक्ति को पास और दूर दोनों की वस्तुएं स्पष्ट नहीं दिखतीं। इसे ठीक करने के लिए द्विफोकसी लेंस का उपयोग किया जाता है, जिसमें दूर देखने के लिए ऊपर अवतल लेंस और पास देखने के लिए नीचे उत्तल लेंस होता है।

🎯 Exam Tip: द्विफोकसी लेंस का डिज़ाइन इसलिए होता है ताकि उपयोगकर्ता को दूर और पास, दोनों प्रकार की दृष्टि के लिए अलग-अलग लेंस न बदलने पड़ें।

 

Question 8. आँख का वह भाग जहाँ वस्तु का प्रतिबिम्ब बनता है, वह है
(अ) रक्तक पटल
(ब) कॉर्निया
(स) रेटिना
(द) परितारिका
Answer: (स) रेटिना
In simple words: रेटिना आँख के पीछे की वह संवेदनशील परत है जहाँ प्रकाश वस्तु की छवि बनाता है। यह छवि फिर दिमाग को भेजी जाती है ताकि हम उसे देख सकें।

🎯 Exam Tip: रेटिना में प्रकाश-संवेदनशील कोशिकाएँ होती हैं जो प्रकाश को विद्युत संकेतों में बदलती हैं, जिन्हें मस्तिष्क द्वारा संसाधित किया जाता है।

 

Question 9. मानव आँख विभिन्न दूरियों पर स्थित वस्तुओं के प्रतिबिम्ब नेत्र लेंस की फोकस दूरी बदल कर रैटिना पर स्पष्ट बता सकती है। यह कार्य सम्पन्न किया जाता है
(अ) दूर दृष्टि द्वारा
(ब) निकट दृष्टि द्वारा
(स) दृष्टि स्थिरता
(द) समंजन द्वारा
Answer: (अ) दूर दृष्टि द्वारा
In simple words: मानव आँख अपनी लेंस की फोकस दूरी को बदलकर अलग-अलग दूरियों पर रखी वस्तुओं पर ध्यान केंद्रित कर सकती है। यह क्षमता आँखों को दूर की वस्तुओं को साफ देखने में मदद करती है।

🎯 Exam Tip: आँख की इस क्षमता को समंजन क्षमता कहते हैं, जो वस्तु की दूरी के अनुसार लेंस की वक्रता को समायोजित करती है।

 

Question 10. मानव आँख विभिन्न दूरियों पर स्थित वस्तुओं के प्रतिबिम्ब नेत्र लेंस की फोकस दूरी बदल कर रैटिना पर स्पष्ट बता सकती है। यह कार्य सम्पन्न किया जाता है
(अ) दूर दृष्टि द्वारा
(ब) निकट दृष्टि द्वारा
(स) दृष्टि स्थिरता
(द) समंजन द्वारा
Answer: (द) समंजन द्वारा
In simple words: आँख की लेंस अपनी वक्रता को बदलकर अपनी फोकस दूरी को समायोजित करती है, ताकि पास और दूर दोनों तरह की वस्तुओं का स्पष्ट प्रतिबिंब रेटिना पर बन सके। इस प्रक्रिया को समंजन कहते हैं।

🎯 Exam Tip: समंजन क्षमता ही आँखों को अलग-अलग दूरियों पर मौजूद वस्तुओं को साफ देखने में सक्षम बनाती है, जिससे हमें आसपास की दुनिया स्पष्ट दिखती है।

 

अतिलघूत्तरात्मक प्रश्न

 

Question 1. वस्तु और वस्तु के रंग हमें किस प्रकार से दिखाई पड़ते हैं ?
Answer: जब प्रकाश किसी वस्तु पर पड़ता है, तो वस्तु प्रकाश के कुछ रंगों को सोख लेती है और बाकी रंगों को वापस उछाल देती है। हमें वस्तु वैसी ही दिखती है जैसा रंग वह प्रकाश वापस उछालती है। उदाहरण के लिए, एक लाल गुलाब लाल दिखता है क्योंकि यह लाल रंग के प्रकाश को परावर्तित करता है और बाकी रंगों को सोख लेता है।
In simple words: वस्तुएं हमें वैसी दिखती हैं जैसा रंग वे प्रकाश को वापस उछालती हैं, और बाकी रंग सोख लेती हैं।

🎯 Exam Tip: याद रखें कि वस्तु का रंग वही होता है जो वह परावर्तित करती है; यदि वह सभी रंग सोख लेती है तो काली दिखती है, और यदि सभी रंग परावर्तित करती है तो सफेद दिखती है।

 

Question 2. परावर्तन कितने प्रकार से होता है? उनके नाम भी लिखिए।
Answer: परावर्तन दो मुख्य प्रकार के होते हैं:
1. नियमित परावर्तन (Regular Reflection): जब प्रकाश एक चिकनी और समतल सतह से टकराता है, तो वह एक निश्चित दिशा में वापस लौटता है। जैसे कि एक दर्पण से होने वाला परावर्तन।
2. विसरित परावर्तन (Diffuse Reflection): जब प्रकाश एक खुरदरी सतह से टकराता है, तो वह अलग-अलग दिशाओं में बिखर जाता है। जैसे कि दीवार या कागज से होने वाला परावर्तन। इससे वस्तु का रंग सभी कोणों से दिखाई देता है।
In simple words: परावर्तन दो तरह का होता है: चिकनी सतह से नियमित परावर्तन और खुरदरी सतह से विसरित परावर्तन।

🎯 Exam Tip: नियमित परावर्तन में प्रकाश की किरणें समानांतर रहती हैं, जबकि विसरित परावर्तन में वे विभिन्न दिशाओं में फैल जाती हैं।

 

Question 3. यदि कोई आपतित किरण अभिलम्ब के साथ 40° का कोण बनाती है, तो परावर्तित किरण अभिलम्ब के साथ कितने डिग्री का कोण बनायेगी?
Answer: परावर्तन के नियम के अनुसार, आपतन कोण (अभिलम्ब और आपतित किरण के बीच का कोण) हमेशा परावर्तन कोण (अभिलम्ब और परावर्तित किरण के बीच का कोण) के बराबर होता है। यदि आपतित किरण अभिलम्ब के साथ 40° का कोण बनाती है, तो परावर्तन कोण भी 40° ही होगा। यह नियम प्रकाश के व्यवहार का एक मौलिक सिद्धांत है।
In simple words: आपतन कोण 40° है, तो परावर्तन कोण भी 40° होगा क्योंकि ये दोनों हमेशा बराबर होते हैं।

🎯 Exam Tip: परावर्तन के नियम को याद रखें: आपतन कोण हमेशा परावर्तन कोण के बराबर होता है (\( \angle i = \angle r \))।

 

Question 4. उत्तल दर्पण किसे कहते हैं ?
Answer: उत्तल दर्पण वह गोलीय दर्पण होता है जिसकी परावर्तक सतह बाहर की ओर उभरी हुई होती है। यह प्रकाश किरणों को फैलाने का काम करता है (अपसारी दर्पण)। इसका उपयोग वाहनों में पीछे का दृश्य देखने के लिए किया जाता है क्योंकि यह एक बड़ा क्षेत्र दिखाता है।
In simple words: उत्तल दर्पण वह दर्पण होता है जिसकी चमकने वाली सतह बाहर की ओर उभरी होती है।

🎯 Exam Tip: उत्तल दर्पण हमेशा आभासी, सीधा और छोटा प्रतिबिंब बनाता है, और इसका दृष्टि क्षेत्र बड़ा होता है।

 

Question 5. किस दर्पण द्वारा आवर्धन धनात्मक परन्तु 1 से कम होता है?
Answer: उत्तल दर्पण द्वारा आवर्धन धनात्मक परन्तु 1 से कम होता है। धनात्मक आवर्धन का मतलब है कि प्रतिबिंब सीधा और आभासी बनता है। आवर्धन का 1 से कम होने का मतलब है कि प्रतिबिंब वस्तु से छोटा बनता है। उत्तल दर्पण हमेशा इसी तरह के प्रतिबिंब बनाता है, जिससे ड्राइवर को पीछे का बड़ा क्षेत्र देखने में मदद मिलती है।
In simple words: उत्तल दर्पण में प्रतिबिंब सीधा और वस्तु से छोटा बनता है, इसलिए आवर्धन धनात्मक और 1 से कम होता है।

🎯 Exam Tip: आवर्धन का मान (m) प्रतिबिंब के आकार और प्रकृति को दर्शाता है: m > 0 (धनात्मक) = सीधा और आभासी प्रतिबिंब; m < 0 (ऋणात्मक) = उल्टा और वास्तविक प्रतिबिंब; |m| < 1 = छोटा प्रतिबिंब; |m| > 1 = बड़ा प्रतिबिंब; |m| = 1 = समान आकार का प्रतिबिंब।

 

Question 6. कार्तीय चिह्न परिपाटी के कोई दो बिन्दु लिखिए।
Answer: गोलीय दर्पणों के लिए कार्तीय चिह्न परिपाटी के दो मुख्य बिंदु निम्नलिखित हैं:

  • मुख्य अक्ष के समानांतर सभी दूरियाँ दर्पण के ध्रुव (मूल बिन्दु) से मापी जाती हैं। ध्रुव को निर्देशांक प्रणाली का केंद्र माना जाता है।
  • बिम्ब हमेशा दर्पण के बाईं ओर रखा जाता है, जिसका मतलब है कि बिम्ब से आने वाली किरणें हमेशा दर्पण पर बाईं ओर से आपतित होती हैं। यह एक मानक तरीका है जिससे गणनाएं आसान हो जाती हैं।


In simple words: सभी दूरियां दर्पण के बीच से मापी जाती हैं, और वस्तु हमेशा दर्पण के बाईं ओर रखी जाती है।

🎯 Exam Tip: यह परिपाटी (नियम) सुनिश्चित करती है कि सभी गणनाएं एक समान और सही तरीके से की जा सकें, जिससे गलतियों से बचा जा सके।

 

Question 7. अवतल दर्पण के मुख्य फोकस की परिभाषा लिखिए।
Answer: अवतल दर्पण का मुख्य फोकस (F) मुख्य अक्ष पर स्थित वह बिंदु है जहाँ मुख्य अक्ष के समानांतर आने वाली प्रकाश किरणें परावर्तन के बाद मिलती हैं या एक बिंदु पर अभिसरित होती हैं। यह बिंदु दर्पण के सामने स्थित होता है। यह एक महत्वपूर्ण बिंदु है क्योंकि यह दर्पण द्वारा प्रतिबिंब बनाने के तरीके को प्रभावित करता है।
In simple words: अवतल दर्पण के मुख्य फोकस वह बिंदु है जहाँ समांतर प्रकाश किरणें टकराकर मिलती हैं।

🎯 Exam Tip: अवतल दर्पण का फोकस वास्तविक होता है और दर्पण के सामने स्थित होता है, जबकि उत्तल दर्पण का फोकस आभासी होता है और दर्पण के पीछे स्थित होता है।

 

Question 8. एक गोलीय दर्पण की वक्रता त्रिज्या 20 cm है। इसकी फोकस दूरी क्या होगी?
Answer: एक गोलीय दर्पण की वक्रता त्रिज्या (R) और फोकस दूरी (f) के बीच एक सीधा संबंध होता है: फोकस दूरी वक्रता त्रिज्या की आधी होती है, यानी \( f = \frac{R}{2} \)।
यहाँ, वक्रता त्रिज्या \( R = 20 \text{ cm} \)।
तो, फोकस दूरी \( f = \frac{20 \text{ cm}}{2} = 10 \text{ cm} \)।
इसलिए, दर्पण की फोकस दूरी 10 cm होगी। यह संबंध सभी गोलीय दर्पणों पर लागू होता है।
In simple words: फोकस दूरी वक्रता त्रिज्या की आधी होती है। तो, 20 cm वक्रता त्रिज्या वाले दर्पण की फोकस दूरी 10 cm होगी।

🎯 Exam Tip: वक्रता त्रिज्या और फोकस दूरी का संबंध \( R = 2f \) या \( f = R/2 \) हमेशा याद रखें, यह गोलीय दर्पणों के लिए एक बुनियादी सूत्र है।

 

Question 9. एक समतल दर्पण द्वारा उत्पन्न आवर्धन + है, इसका क्या अर्थ है ?
Answer: एक समतल दर्पण द्वारा उत्पन्न आवर्धन \( m = \frac{h'}{h} = +1 \) का अर्थ है कि प्रतिबिंब का आकार वस्तु के आकार के बराबर है, क्योंकि आवर्धन का संख्यात्मक मान 1 है। धनात्मक चिह्न (+1) यह दर्शाता है कि प्रतिबिंब आभासी और सीधा बनता है। यह महत्वपूर्ण है क्योंकि समतल दर्पण हमेशा वस्तु के समान आकार का और सीधा प्रतिबिंब बनाता है।
In simple words: समतल दर्पण में आवर्धन +1 का मतलब है कि प्रतिबिंब वस्तु के बराबर आकार का और सीधा है।

🎯 Exam Tip: समतल दर्पण हमेशा वस्तु के समान आकार का, सीधा, आभासी और पार्श्व-उलटा प्रतिबिंब बनाता है।

 

Question 10. उस दर्पण का नाम बताइये जो बिंब का सीधा तथा आवर्धित प्रतिबिम्ब बना सके?
Answer: अवतल दर्पण एक ऐसा दर्पण है जो वस्तु का सीधा और आवर्धित (बड़ा) प्रतिबिंब बना सकता है। यह तब होता है जब वस्तु को दर्पण के ध्रुव और मुख्य फोकस के बीच रखा जाता है। उदाहरण के लिए, शेविंग दर्पण और दंत चिकित्सकों द्वारा उपयोग किए जाने वाले दर्पण अवतल दर्पण ही होते हैं।
In simple words: अवतल दर्पण वस्तु का सीधा और बड़ा प्रतिबिंब बनाता है, खासकर जब वस्तु उसके फोकस के अंदर हो।

🎯 Exam Tip: उत्तल दर्पण भी सीधा प्रतिबिंब बनाता है, लेकिन वह हमेशा छोटा होता है, जबकि अवतल दर्पण ही आवर्धित (बड़ा) सीधा प्रतिबिंब बना सकता है।

 

Question 11. हम वाहनों में उत्तल दर्पण को पश्च-दृश्य दर्पण के रूप में वरीयता क्यों देते हैं ?
Answer: हम वाहनों में उत्तल दर्पण को पश्च-दृश्य (rear-view) दर्पण के रूप में प्राथमिकता देते हैं क्योंकि:

  • यह सदैव वस्तु का सीधा प्रतिबिंब बनाता है, जिससे ड्राइवर को पीछे की वस्तुओं को सही दिशा में देखने में आसानी होती है।
  • यह वस्तु का अपेक्षाकृत छोटा प्रतिबिंब बनाता है, जिससे इसका दृष्टि क्षेत्र बढ़ जाता है। इससे चालक एक छोटे से दर्पण में सड़क का संपूर्ण क्षेत्र आसानी से देख पाता है और दुर्घटनाओं से बचता है।


In simple words: उत्तल दर्पण को पीछे देखने के लिए इस्तेमाल किया जाता है क्योंकि यह हमेशा सीधा और छोटा प्रतिबिंब बनाता है, जिससे ड्राइवर को पीछे का बड़ा इलाका दिख जाता है।

🎯 Exam Tip: उत्तल दर्पणों का बड़ा दृष्टि क्षेत्र उनके बाहरी रूप से घुमावदार (उभरी हुई) सतह के कारण होता है, जो प्रकाश को बाहर की ओर फैलाता है।

 

Question 12. उपग्रहों से प्राप्त संकेतों को एकत्रित करके अभिग्राही (Receiver) तक किसके द्वारा पहुँचाया जाता है ?
Answer: उपग्रहों से प्राप्त संकेतों को एकत्रित करके अभिग्राही (रिसीवर) तक अवतल दर्पण द्वारा पहुँचाया जाता है। अवतल दर्पण, जिन्हें परवलयिक दर्पण भी कहते हैं, संकेतों को एक बिंदु पर केंद्रित करने की क्षमता रखते हैं। इससे कमजोर संकेतों को भी मजबूती से प्राप्त किया जा सकता है।
In simple words: उपग्रहों से आने वाले संकेत अवतल दर्पण की मदद से रिसीवर तक पहुँचाए जाते हैं।

🎯 Exam Tip: अवतल दर्पण अपनी अभिसारी प्रकृति के कारण डिश एंटेना और सोलर कुकर में भी उपयोग होते हैं, जहाँ उन्हें प्रकाश या तरंगों को एक बिंदु पर केंद्रित करना होता है।

 

Question 13. परावर्तक टेलिस्कोप में कौनसा दर्पण प्रयोग किया जाता है?
Answer: परावर्तक टेलिस्कोप में अवतल दर्पण का प्रयोग किया जाता है। ये दर्पण दूर की वस्तुओं से आने वाले प्रकाश को एक बिंदु पर केंद्रित करते हैं, जिससे खगोलीय पिंडों के स्पष्ट और आवर्धित (बड़े) प्रतिबिंब बनते हैं। यह टेलिस्कोप प्रकाश को इकट्ठा करने के लिए दर्पण का उपयोग करता है।
In simple words: परावर्तक टेलिस्कोप में अवतल दर्पण का उपयोग होता है ताकि दूर की चीजों से आने वाली रोशनी को एक जगह इकट्ठा करके बड़ा चित्र बनाया जा सके।

🎯 Exam Tip: अवतल दर्पण प्रकाश को इकट्ठा करने की अपनी क्षमता के कारण खगोलीय अनुप्रयोगों जैसे टेलिस्कोप और सर्चलाइट में महत्वपूर्ण होते हैं।

 

Question 15. हम वाहनों में उत्तल दर्पण को पश्च-दृश्य दर्पण के रूप में वरीयता क्यों देते हैं?
Answer: हम वाहनों में उत्तल दर्पण को पश्च-दृश्य (rear-view) दर्पण के रूप में प्राथमिकता देते हैं क्योंकि यह दर्पण हमेशा वस्तु का सीधा और आभासी प्रतिबिंब बनाता है। साथ ही, इसका दृष्टि क्षेत्र बहुत बड़ा होता है क्योंकि इसकी बाहरी घुमावदार सतह प्रकाश को फैलाती है। यह ड्राइवर को पीछे के एक बड़े क्षेत्र को देखने में मदद करता है।
In simple words: उत्तल दर्पण वाहनों में पीछे देखने के लिए उपयोग होता है क्योंकि यह सीधा, छोटा प्रतिबिंब बनाता है और एक बड़ा दृश्य क्षेत्र देता है।

🎯 Exam Tip: उत्तल दर्पण का यह गुण (बड़ा दृश्य क्षेत्र) सुरक्षा के लिए महत्वपूर्ण है क्योंकि यह ड्राइवर को सड़क पर पीछे से आ रहे अन्य वाहनों को स्पष्ट रूप से देखने में सक्षम बनाता है।

 

Question 16. आवर्धन किसे कहते हैं?
Answer: आवर्धन (Magnification) प्रतिबिंब की ऊँचाई और वस्तु (बिम्ब) की ऊँचाई के अनुपात को कहते हैं। यह बताता है कि प्रतिबिंब वस्तु से कितना गुना बड़ा या छोटा है। इसे \( m \) से दर्शाया जाता है। गोलीय दर्पण से उत्पन्न आवर्धन का सूत्र है \( m = \frac{\text{प्रतिबिंब की ऊँचाई}}{\text{बिंब की ऊँचाई}} = \frac{h'}{h} \)। यह हमें प्रतिबिंब के आकार और प्रकृति के बारे में जानकारी देता है।
In simple words: आवर्धन हमें बताता है कि किसी वस्तु का प्रतिबिंब उससे कितना बड़ा या छोटा है।

🎯 Exam Tip: आवर्धन का मान 1 से अधिक होने पर प्रतिबिंब बड़ा, 1 से कम होने पर छोटा, और 1 के बराबर होने पर समान आकार का होता है। धनात्मक मान सीधा प्रतिबिंब और ऋणात्मक मान उलटा प्रतिबिंब दर्शाता है।

 

Question 17. आपको किरोसिन, तारपीन को तेल तथा जल दिए गए हैं। इनमें से किसमें प्रकाश सबसे अधिक तीव्र गति से चलता है?
Answer: प्रकाश की गति किसी माध्यम में उसके अपवर्तनांक पर निर्भर करती है। जिस माध्यम का अपवर्तनांक जितना कम होता है, प्रकाश उसमें उतनी ही तीव्र गति से चलता है। दिए गए मानों के अनुसार: जल का अपवर्तनांक 1.33, मिट्टी के तेल (किरोसिन) का अपवर्तनांक 1.44, और तारपीन तेल का अपवर्तनांक 1.47 है। चूंकि जल का अपवर्तनांक सबसे कम है, इसलिए प्रकाश जल में सबसे अधिक तीव्र गति से चलेगा।
In simple words: प्रकाश सबसे तेज़ उस चीज़ में चलता है जिसका अपवर्तनांक सबसे कम होता है। पानी का अपवर्तनांक सबसे कम है, तो प्रकाश पानी में सबसे तेज़ चलेगा।

🎯 Exam Tip: अपवर्तनांक जितना अधिक होगा, प्रकाश की गति उतनी ही धीमी होगी और वह माध्यम उतना ही सघन माना जाएगा।

 

Question 18. हीरे का अपवर्तनांक 2.42 है। इस कथन का क्या अभिप्राय है?
Answer: हीरे का अपवर्तनांक 2.42 होने का अभिप्राय यह है कि हीरे में प्रकाश की चाल निर्वात (वैक्यूम) में प्रकाश की चाल की 2.42 गुना कम है। यानी, यदि प्रकाश निर्वात में \(c\) चाल से चलता है, तो हीरे में उसकी चाल \( \frac{c}{2.42} \) होगी। यह उच्च अपवर्तनांक हीरे की चमक और उसके जगमगाने के लिए जिम्मेदार है।
In simple words: हीरे का अपवर्तनांक 2.42 है, इसका मतलब है कि हीरे के अंदर प्रकाश की गति हवा या खाली जगह में प्रकाश की गति से 2.42 गुना धीमी होती है।

🎯 Exam Tip: किसी भी माध्यम का अपवर्तनांक निर्वात में प्रकाश की चाल और उस माध्यम में प्रकाश की चाल का अनुपात होता है।

 

Question 20. 2 मीटर फोकस दूरी वाले किसी अवतल लेंस की क्षमता ज्ञात कीजिए।
Answer: लेंस की क्षमता (P) उसकी फोकस दूरी (f) के व्युत्क्रम के बराबर होती है, जब फोकस दूरी मीटर में हो। यानी, \( P = \frac{1}{f} \)।
दिए गए अवतल लेंस की फोकस दूरी \( f = -2 \text{ मीटर} \) है (अवतल लेंस की फोकस दूरी हमेशा ऋणात्मक होती है)।
क्षमता \( P = \frac{1}{-2} = -0.5 \text{ D} \)।
इसलिए, इस अवतल लेंस की क्षमता -0.5 डायप्टर है। ऋणात्मक चिह्न दर्शाता है कि यह एक अवतल या अपसारी लेंस है।
In simple words: अवतल लेंस की फोकस दूरी -2 मीटर है, तो उसकी क्षमता \( P = 1 / (-2) = -0.5 \) डायप्टर होगी।

🎯 Exam Tip: अवतल लेंस की क्षमता हमेशा ऋणात्मक होती है जबकि उत्तल लेंस की क्षमता हमेशा धनात्मक होती है।

 

Question 21. मुख्य अक्ष को परिभाषित कीजिए।
Answer: मुख्य अक्ष वह काल्पनिक सीधी रेखा है जो किसी लेंस या गोलीय दर्पण के दोनों वक्रता केन्द्रों \( C_1 \) और \( C_2 \) को मिलाती है और ध्रुव या प्रकाशिक केंद्र से होकर गुजरती है। यह दर्पण या लेंस के केंद्र से सीधी गुजरने वाली एक महत्वपूर्ण रेखा होती है, जो प्रतिबिंब निर्माण के नियमों को समझने में मदद करती है।
In simple words: मुख्य अक्ष एक सीधी रेखा है जो दर्पण या लेंस के बीच से होकर गुजरती है और उसके वक्रता केंद्रों को जोड़ती है।

🎯 Exam Tip: मुख्य अक्ष प्रतिबिंबों के स्थान और प्रकृति को निर्धारित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है और यह दर्पण या लेंस के केंद्र से लंबवत होती है।

 

Question 22. फोकस दूरी को परिभाषित कीजिए।
Answer: फोकस दूरी (f) किसी लेंस या गोलीय दर्पण के मुख्य फोकस बिंदु (F) और उसके प्रकाशिक केंद्र (लेंस के लिए) या ध्रुव (दर्पण के लिए) के बीच की दूरी होती है। यह दूरी बताती है कि लेंस या दर्पण प्रकाश किरणों को कितना केंद्रित या फैला सकता है। यह लेंस या दर्पण की शक्ति का एक महत्वपूर्ण माप है।
In simple words: फोकस दूरी वह दूरी है जो लेंस या दर्पण के बीच वाले बिंदु से मुख्य फोकस बिंदु तक होती है।

🎯 Exam Tip: फोकस दूरी जितनी कम होती है, लेंस या दर्पण की क्षमता उतनी ही अधिक होती है। उत्तल लेंस और अवतल दर्पण की फोकस दूरी धनात्मक ली जाती है, जबकि अवतल लेंस और उत्तल दर्पण की फोकस दूरी ऋणात्मक ली जाती है।

 

Question 23. वाहनों के साइड मिरर के रूप में कौनसा दर्पण प्रयोग होता है?
Answer: वाहनों के साइड मिरर (या पश्च-दृश्य दर्पण) के रूप में उत्तल दर्पण का प्रयोग होता है। उत्तल दर्पण हमेशा सीधा और छोटा प्रतिबिंब बनाते हैं, और इनका दृष्टि क्षेत्र (फील्ड ऑफ व्यू) बहुत बड़ा होता है। यह ड्राइवर को पीछे से आ रहे वाहनों और सड़क के एक बड़े हिस्से को देखने में मदद करता है, जिससे सुरक्षित ड्राइविंग में आसानी होती है।
In simple words: वाहनों में पीछे देखने के लिए उत्तल दर्पण का उपयोग होता है क्योंकि यह एक बड़ा क्षेत्र दिखाता है और सीधा प्रतिबिंब बनाता है।

🎯 Exam Tip: उत्तल दर्पण अपनी अपसारी प्रकृति (प्रकाश को फैलाने) के कारण बड़े क्षेत्र के दृश्य को छोटे आकार में समेट कर दिखा पाता है।

 

Question 24. नीचे दिए गए आरेख को अपनी उत्तर-पुस्तिका में खींचकर किरण पथ की पूर्ति कीजिए
Answer: इस प्रश्न में एक आरेख दिया गया है जिसमें एक उत्तल लेंस के सामने एक वस्तु रखी है और किरणों का पथ अपूर्ण है। इस प्रश्न का उत्तर देने के लिए, छात्रों को अपनी उत्तर-पुस्तिका में आरेख बनाना होगा और प्रकाश के अपवर्तन के नियमों का पालन करते हुए किरणों के पथ को पूरा करना होगा। किरणों के पथ को पूरा करने के बाद, प्रतिबिंब की स्थिति और प्रकृति का निर्धारण किया जा सकता है। यह एक ड्राइंग अभ्यास है और इसका SVG कोड सीधे उत्पन्न नहीं किया जा सकता।
In simple words: यह एक चित्र बनाने का सवाल है जहाँ आपको लेंस से प्रकाश की किरणों का रास्ता पूरा करना है और दिखाना है कि वस्तु का प्रतिबिंब कहाँ बनेगा।

🎯 Exam Tip: किरण आरेख बनाते समय, हमेशा तीन प्रमुख किरणों का उपयोग करें: एक मुख्य अक्ष के समानांतर, दूसरी प्रकाशिक केंद्र से गुजरती हुई, और तीसरी फोकस से गुजरती हुई। इन किरणों के प्रतिच्छेदन से प्रतिबिंब बनता है।

 

Question 25. यदि प्रकाश की किरण काँच की पट्टिका पर लम्बवत् आपतित होती है तो अपवर्तन कोण का मान कितना होगा ?
Answer: यदि प्रकाश की किरण काँच की पट्टिका पर लम्बवत् (सीधी 90 डिग्री पर) आपतित होती है, तो यह बिना मुड़े सीधे गुजर जाती है। इस स्थिति में, आपतित किरण और अभिलंब के बीच का कोण (आपतन कोण) शून्य होता है। अपवर्तन के नियम के अनुसार, यदि आपतन कोण शून्य है, तो अपवर्तन कोण का मान भी शून्य ही होगा।
In simple words: अगर प्रकाश की किरण कांच पर सीधी गिरती है, तो वह सीधी निकल जाती है और अपवर्तन कोण शून्य होता है।

🎯 Exam Tip: जब प्रकाश की किरण किसी सतह पर अभिलंब के अनुदिश (यानी 90 डिग्री पर) आपतित होती है, तो वह बिना किसी विचलन के सीधी गुजर जाती है।

 

Question 26. प्रकाश की किरणों को फैलाने वाले लेंस का नाम बताओ।
Answer: प्रकाश की किरणों को फैलाने वाले लेंस को अवतल लेंस (Concave lens) कहते हैं। इसे अपसारी लेंस भी कहा जाता है। जब समांतर प्रकाश किरणें इस लेंस पर पड़ती हैं, तो वे लेंस से गुजरने के बाद बाहर की ओर फैल जाती हैं।
In simple words: अवतल लेंस प्रकाश की किरणों को फैलाता है।

🎯 Exam Tip: अवतल लेंस दूर दृष्टि दोष को ठीक करने में मदद करता है और हमेशा आभासी, सीधा और छोटा प्रतिबिंब बनाता है।

 

Question 27. उस दर्पण का नाम लिखिये जो वस्तु का बड़ा एवं कल्पित प्रतिबिम्ब बनाता है?
Answer: अवतल दर्पण वह दर्पण है जो वस्तु का बड़ा और कल्पित (आभासी) प्रतिबिंब बनाता है। यह तब होता है जब वस्तु को दर्पण के ध्रुव और मुख्य फोकस के बीच रखा जाता है। यही कारण है कि शेविंग दर्पण और दंत चिकित्सक के दर्पण में इसका उपयोग होता है।
In simple words: अवतल दर्पण वस्तु का बड़ा और आभासी प्रतिबिंब बना सकता है।

🎯 Exam Tip: अवतल दर्पण एकमात्र दर्पण है जो वस्तु से बड़ा और सीधा (आभासी) प्रतिबिंब बना सकता है, जिससे इसे कई व्यावहारिक अनुप्रयोगों में उपयोग किया जाता है।

 

Question 28. यदि कोई वस्तु उत्तल दर्पण के ध्रुव तथा अनन्त के मध्य रखी जाये तब उसका प्रतिबिम्ब कहाँ बनेगा?
Answer: यदि किसी वस्तु को उत्तल दर्पण के ध्रुव (Pole) और अनंत के बीच कहीं भी रखा जाता है, तो उसका प्रतिबिंब हमेशा दर्पण के पीछे, ध्रुव और फोकस बिंदु (F) के बीच बनेगा। यह प्रतिबिंब हमेशा आभासी, सीधा और वस्तु से छोटा होता है। यह उत्तल दर्पण की एक विशेष गुणधर्म है।
In simple words: उत्तल दर्पण के सामने कहीं भी रखी वस्तु का प्रतिबिंब दर्पण के पीछे, ध्रुव और फोकस के बीच बनता है, जो छोटा और सीधा होता है।

🎯 Exam Tip: उत्तल दर्पण हमेशा आभासी, सीधा और छोटा प्रतिबिंब बनाता है, चाहे वस्तु कहीं भी रखी हो।

 

Question 29. उस दर्पण का क्या नाम है जिसका प्रयोग दन्त चिकित्सक अपने रोगी के दाँत देखने के लिए करता है?
Answer: दंत चिकित्सक अपने रोगी के दाँत देखने के लिए अवतल दर्पण का प्रयोग करते हैं। अवतल दर्पण वस्तु का बड़ा और सीधा (आवर्धित) प्रतिबिंब बनाता है जब वस्तु को उसके फोकस के अंदर रखा जाता है। इससे दांतों की छोटी-से-छोटी समस्या भी स्पष्ट रूप से दिखाई देती है।
In simple words: दंत चिकित्सक अवतल दर्पण का उपयोग करते हैं ताकि दांतों को बड़ा और स्पष्ट देख सकें।

🎯 Exam Tip: अवतल दर्पण का उपयोग शेविंग दर्पण और खगोलीय दूरबीनों में भी किया जाता है, जहाँ वस्तुओं के बड़े और केंद्रित प्रतिबिंबों की आवश्यकता होती है।

 

Question 30. अवतल दर्पण के मुख्य अक्ष पर कोई वस्तु किस स्थान पर रखी जाये जिससे इस वस्तु का वास्तविक प्रतिबिम्ब प्राप्त हो सके, जिसकी माप वस्तु की लम्बाई के बराबर है?
Answer: अवतल दर्पण के मुख्य अक्ष पर किसी वस्तु का वास्तविक प्रतिबिंब वस्तु की लम्बाई के बराबर प्राप्त करने के लिए वस्तु को दर्पण के वक्रता केंद्र (Centre of Curvature) पर रखा जाना चाहिए। इस स्थिति में, प्रतिबिंब भी वक्रता केंद्र पर ही बनता है, जो वास्तविक, उल्टा और वस्तु के समान आकार का होता है।
In simple words: अवतल दर्पण में वस्तु का समान आकार का वास्तविक प्रतिबिंब पाने के लिए उसे वक्रता केंद्र पर रखना चाहिए।

🎯 Exam Tip: यह एक महत्वपूर्ण किरण आरेख स्थिति है जहां वस्तु और प्रतिबिंब दोनों वक्रता केंद्र पर स्थित होते हैं, जिससे प्रतिबिंब का आकार वस्तु के समान होता है।

 

Question 32. अपवर्तन का प्रथम नियम लिखो।
Answer: अपवर्तन का प्रथम नियम (स्नेल का नियम भी) कहता है कि आपतित किरण, अपवर्तित किरण और दोनों माध्यमों को अलग करने वाली सतह के आपतन बिंदु पर खींचा गया अभिलंब, ये तीनों एक ही तल (प्लेन) में होते हैं। यह नियम बताता है कि प्रकाश किरणें एक माध्यम से दूसरे माध्यम में जाने पर कैसे मुड़ती हैं।
In simple words: प्रकाश की आने वाली किरण, मुड़ी हुई किरण और बीच वाली सीधी लाइन (अभिलंब) सब एक ही जगह पर होते हैं।

🎯 Exam Tip: अपवर्तन के दोनों नियम प्रकाश के व्यवहार को समझने के लिए मौलिक हैं और अक्सर किरण आरेख बनाने में उपयोग होते हैं।

 

Question 33. जब आप एक पारदर्शी काँच के पेपर वेट को किसी लिखित पृष्ठ पर रखते हैं तो क्या अनुभव पाते हैं?
Answer: जब हम एक पारदर्शी काँच के पेपर वेट को किसी लिखित पृष्ठ पर रखते हैं, तो हमें यह अनुभव होता है कि पृष्ठ पर लिखे अक्षर थोड़े ऊपर उठे हुए या बड़े दिखाई देते हैं। यह घटना प्रकाश के अपवर्तन के कारण होती है, क्योंकि प्रकाश अक्षरों से निकलकर काँच और फिर हवा में प्रवेश करता है, जिससे उसकी दिशा बदल जाती है।
In simple words: कांच के पेपर वेट के नीचे रखे अक्षर ऊपर उठे हुए और थोड़े बड़े दिखते हैं क्योंकि प्रकाश मुड़ जाता है।

🎯 Exam Tip: यह घटना अपवर्तन का एक सामान्य उदाहरण है, जो दैनिक जीवन में पानी में डूबी हुई वस्तुओं के मुड़े हुए दिखने जैसी स्थितियों में भी देखी जाती है।

 

Question 34. प्रकाश की किरणों को केन्द्रित करने के लिए कौनसा लेंस प्रयुक्त किया जाता है?
Answer: प्रकाश की किरणों को केन्द्रित करने के लिए उत्तल लेंस का प्रयोग किया जाता है। उत्तल लेंस को अभिसारी लेंस भी कहते हैं क्योंकि यह समांतर प्रकाश किरणों को लेंस से गुजरने के बाद एक बिंदु पर इकट्ठा करता है। इसका उपयोग मैग्नीफाइंग ग्लास और चश्मों में किया जाता है।
In simple words: उत्तल लेंस प्रकाश की किरणों को एक बिंदु पर इकट्ठा करता है।

🎯 Exam Tip: उत्तल लेंस का उपयोग अक्सर दूरदर्शी, सूक्ष्मदर्शी और कैमरा जैसे ऑप्टिकल उपकरणों में किया जाता है, जहाँ प्रकाश को केंद्रित करने की आवश्यकता होती है।

 

Question 35. प्रकाश की किरण का सघन से विरल माध्यम में प्रवेश करने पर उसके वेग पर क्या प्रभाव पड़ेगा?
Answer: जब प्रकाश की किरण सघन माध्यम से विरल माध्यम में प्रवेश करती है, तो उसके वेग पर यह प्रभाव पड़ता है कि प्रकाश की चाल बढ़ जाती है। सघन माध्यम में कण पास-पास होते हैं, जिससे प्रकाश धीमा हो जाता है, जबकि विरल माध्यम में कण दूर होते हैं, जिससे प्रकाश तेज़ी से चलता है और अभिलंब से दूर मुड़ता है।
In simple words: जब प्रकाश घने माध्यम से हल्के माध्यम में जाता है, तो उसकी गति बढ़ जाती है।

🎯 Exam Tip: सघन माध्यम में प्रकाश की चाल कम होती है और विरल माध्यम में अधिक होती है। इसी कारण प्रकाश एक माध्यम से दूसरे माध्यम में जाने पर मुड़ता है।

 

Question 36. जब प्रकाश की किरण विरल माध्यम से सघन माध्यम में जाती है। तब आपतन और अपवर्तन कोण में से किस कोण का मान अधिक होता है?
Answer: जब प्रकाश की किरण विरल माध्यम (जैसे हवा) से सघन माध्यम (जैसे पानी या काँच) में जाती है, तो वह अभिलम्ब की ओर मुड़ जाती है। इस स्थिति में, आपतन कोण का मान अपवर्तन कोण के मान से अधिक होता है। प्रकाश का यह व्यवहार माध्यम के अपवर्तनांक में अंतर के कारण होता है।
In simple words: जब प्रकाश हल्के से घने माध्यम में जाता है, तो आपतन कोण अपवर्तन कोण से बड़ा होता है।

🎯 Exam Tip: याद रखें: विरल से सघन में जाने पर किरण अभिलंब की ओर मुड़ती है (\( \angle i > \angle r \)); सघन से विरल में जाने पर किरण अभिलंब से दूर मुड़ती है (\( \angle i < \angle r \)).

 

Question 37. सघन व विरल माध्यम में क्या अन्तर है?
Answer: सघन और विरल माध्यम प्रकाशिकी में दो प्रकार के माध्यम होते हैं जिनके बीच मुख्य अंतर प्रकाश की चाल का होता है:

  • सघन माध्यम (Denser Medium): जिस माध्यम में प्रकाश की चाल निर्वात की अपेक्षा कम होती है, उसे सघन माध्यम कहते हैं। इसमें कण अपेक्षाकृत पास-पास होते हैं। जैसे पानी की तुलना में काँच सघन माध्यम है।
  • विरल माध्यम (Rarer Medium): जिस माध्यम में प्रकाश की चाल सघन माध्यम की अपेक्षा अधिक होती है, उसे विरल माध्यम कहते हैं। इसमें कण अपेक्षाकृत दूर-दूर होते हैं। जैसे काँच की तुलना में हवा विरल माध्यम है।


In simple words: सघन माध्यम में प्रकाश धीमा चलता है, जबकि विरल माध्यम में प्रकाश तेज़ चलता है।

🎯 Exam Tip: यह सापेक्षिक अवधारणा है; एक माध्यम दूसरे के सापेक्ष सघन या विरल हो सकता है। उदाहरण के लिए, पानी हवा के लिए सघन है, लेकिन काँच के लिए विरल है।

 

Question 39. एक उत्तल लेंस किसी वस्तु का वास्तविक तथा बहुत बड़ा प्रतिबिम्ब बनाता है। मुख्य अक्ष पर वस्तु की क्या स्थिति होनी चाहिये?
Answer: एक उत्तल लेंस द्वारा किसी वस्तु का वास्तविक तथा बहुत बड़ा प्रतिबिंब प्राप्त करने के लिए, वस्तु को लेंस के मुख्य फोकस (F1) पर स्थित होना चाहिए। इस स्थिति में, प्रकाश किरणें लेंस से अपवर्तन के बाद समांतर हो जाती हैं और अनंत पर मिलती हुई प्रतीत होती हैं, जिससे एक अत्यंत बड़ा और वास्तविक प्रतिबिंब बनता है।
In simple words: उत्तल लेंस से बहुत बड़ा वास्तविक प्रतिबिंब पाने के लिए, वस्तु को लेंस के मुख्य फोकस पर रखना चाहिए।

🎯 Exam Tip: जब वस्तु फोकस पर होती है, तो प्रतिबिंब अनंत पर बनता है; जब वस्तु फोकस और \(2F\) के बीच होती है, तो प्रतिबिंब \(2F\) से परे बनता है और बड़ा होता है।

 

Question 40. उस भौतिक राशि का नाम बताइये जो प्रकाश के एक माध्यम से दूसरे माध्यम में प्रवेश करने पर अपरिवर्तित रहती है।
Answer: प्रकाश की आवृत्ति (Frequency) वह भौतिक राशि है जो प्रकाश के एक माध्यम से दूसरे माध्यम में प्रवेश करने पर अपरिवर्तित रहती है। हालांकि प्रकाश की चाल और तरंगदैर्ध्य माध्यम बदलने पर बदल जाते हैं, लेकिन उसकी आवृत्ति हमेशा समान रहती है। यह घटना क्वांटम सिद्धांत पर आधारित है।
In simple words: प्रकाश की आवृत्ति एक माध्यम से दूसरे में जाने पर नहीं बदलती है।

🎯 Exam Tip: प्रकाश की चाल (\(v\)) और तरंगदैर्ध्य (\(\lambda\)) बदलती हैं, लेकिन आवृत्ति (\(\nu\)) स्थिर रहती है, जिसका संबंध \( v = \nu \lambda \) सूत्र से होता है।

 

Question 41. अभिसारी लेंस की क्षमता धनात्मक होती है या ऋणात्मक?
Answer: अभिसारी लेंस (जैसे उत्तल लेंस) की क्षमता धनात्मक होती है। ऐसा इसलिए है क्योंकि अभिसारी लेंस की फोकस दूरी धनात्मक होती है। लेंस की क्षमता फोकस दूरी के व्युत्क्रम के बराबर होती है (\(P = 1/f\))। धनात्मक क्षमता यह दर्शाती है कि लेंस प्रकाश किरणों को अभिसरित कर रहा है।
In simple words: अभिसारी लेंस की क्षमता धनात्मक होती है क्योंकि उसकी फोकस दूरी भी धनात्मक होती है।

🎯 Exam Tip: उत्तल लेंस अभिसारी होता है और इसकी फोकस दूरी धनात्मक होती है; अवतल लेंस अपसारी होता है और इसकी फोकस दूरी ऋणात्मक होती है।

 

Question 42. प्रकाश तन्तु (optical fibre) किस घटना के प्रभाव से संचार में प्रयुक्त होते हैं ?
Answer: प्रकाश तन्तु (ऑप्टिकल फाइबर) पूर्ण आन्तरिक परावर्तन (Total Internal Reflection) की घटना के प्रभाव से संचार में प्रयुक्त होते हैं। इस घटना में प्रकाश की किरण सघन माध्यम से विरल माध्यम की ओर जाती है, और यदि आपतन कोण क्रांतिक कोण से अधिक हो, तो प्रकाश उसी सघन माध्यम में वापस परावर्तित हो जाता है। इससे प्रकाश सिग्नल बिना ऊर्जा हानि के लंबी दूरी तय कर पाते हैं।
In simple words: ऑप्टिकल फाइबर में प्रकाश पूर्ण आन्तरिक परावर्तन के कारण एक जगह से दूसरी जगह जाता है।

🎯 Exam Tip: पूर्ण आन्तरिक परावर्तन के लिए दो शर्तें होती हैं: प्रकाश को सघन से विरल माध्यम में जाना चाहिए और आपतन कोण क्रांतिक कोण से अधिक होना चाहिए।

 

Question 43. क्रान्तिक कोण से आप क्या समझते हैं ?
Answer: क्रान्तिक कोण (Critical Angle) आपतन कोण का वह विशेष मान है जिसके लिए प्रकाश की किरण जब सघन माध्यम से विरल माध्यम में प्रवेश करती है, तो अपवर्तन कोण का मान 90° हो जाता है। इस कोण पर अपवर्तित किरण दोनों माध्यमों को पृथक करने वाली सतह के समानांतर चलती है। यह पूर्ण आन्तरिक परावर्तन की सीमा को दर्शाता है।
In simple words: क्रान्तिक कोण वह खास आपतन कोण है जिस पर प्रकाश की किरण मुड़कर सतह के समानांतर चलती है (अपवर्तन कोण 90° होता है)।

🎯 Exam Tip: यदि आपतन कोण क्रान्तिक कोण से अधिक हो जाता है, तो प्रकाश विरल माध्यम में प्रवेश करने के बजाय उसी सघन माध्यम में पूरी तरह से परावर्तित हो जाता है, जिसे पूर्ण आन्तरिक परावर्तन कहते हैं।

 

Question 44. प्रकाश स्पेक्ट्रम में पाये जाने वाले वर्षों को क्रम में लिखिए।
Answer: प्रकाश स्पेक्ट्रम में पाए जाने वाले रंगों को उनके तरंगदैर्ध्य या आवृत्ति के अनुसार क्रम में लिखा जा सकता है। आमतौर पर, दृश्य प्रकाश के रंगों का क्रम बैंगनी से लाल की ओर होता है, जिसे VIBGYOR (वायलेट, इंडिगो, ब्लू, ग्रीन, येलो, ऑरेंज, रेड) से याद रखा जाता है। यह क्रम सबसे कम तरंगदैर्ध्य से सबसे अधिक तरंगदैर्ध्य की ओर होता है।
बैंगनी (violet), जामुनी (indigo), नीला (blue), हरा (green), पीला (yellow), नारंगी (orange), लाल (red)।
In simple words: प्रकाश के रंगों का क्रम बैंगनी, जामुनी, नीला, हरा, पीला, नारंगी, लाल होता है।

🎯 Exam Tip: यह क्रम इंद्रधनुष के रंगों के समान होता है, और यह सफेद प्रकाश के वर्ण विक्षेपण के परिणामस्वरूप होता है जब वह एक प्रिज्म से गुजरता है।

 

Question 46. अभिनेत्र लेंस की वह क्षमता जिसके कारण वह अपनी फोकस दूरी को समायोजित कर लेता है, क्या कहलाती है?
Answer: अभिनेत्र लेंस की वह क्षमता जिसके कारण वह अपनी फोकस दूरी को स्वतः ही समायोजित कर लेता है, ताकि विभिन्न दूरियों पर रखी वस्तुओं का स्पष्ट प्रतिबिंब रेटिना पर बन सके, उसे समंजन क्षमता (Power of Accommodation) कहते हैं। यह क्षमता आँखों को दूर और पास दोनों तरह की वस्तुओं को साफ देखने में मदद करती है।
In simple words: आँख की वह शक्ति जिससे वह लेंस की फोकस दूरी को बदल कर अलग-अलग दूरी की चीजें साफ देख पाती है, उसे समंजन क्षमता कहते हैं।

🎯 Exam Tip: मानव नेत्र की समंजन क्षमता उम्र के साथ घटती जाती है, जिससे वृद्धावस्था में पास की वस्तुओं को देखने में कठिनाई होती है, जिसे जरा-दृष्टि दोष कहते हैं।

 

Question 47. निकट दृष्टि दोष का कोई व्यक्ति दूरी पर रखी वस्तुओं को सुस्पष्ट नहीं देख सकता। इस दोष को दूर करने के लिए प्रयुक्त संशोधक लेंस किस प्रकार का होना चाहिये?
Answer: निकट दृष्टि दोष (Myopia) से पीड़ित व्यक्ति को दूर की वस्तुएँ स्पष्ट दिखाई नहीं देती हैं क्योंकि प्रतिबिंब रेटिना के सामने बनता है। इस दोष को दूर करने के लिए उचित क्षमता के अवतल लेंस का उपयोग किया जाता है। अवतल लेंस प्रकाश किरणों को फैलाकर रेटिना पर सही फोकस बनाने में मदद करता है।
In simple words: निकट दृष्टि दोष वाले व्यक्ति को दूर की चीजें साफ नहीं दिखतीं, इसे ठीक करने के लिए अवतल लेंस का चश्मा पहनना चाहिए।

🎯 Exam Tip: अवतल लेंस एक अपसारी लेंस होता है, जो प्रकाश किरणों को फैलाता है, जिससे फोकस बिंदु पीछे हट जाता है और रेटिना पर सही प्रतिबिंब बनता है।

 

Question 48. मानव नेत्र की सामान्य दृष्टि के लिये दूर बिन्दु तथा निकट बिन्दु नेत्र से कितनी दूरी पर होते हैं?
Answer: मानव नेत्र की सामान्य दृष्टि के लिए दूर बिंदु अनंत (Infinity) पर होता है। इसका मतलब है कि एक सामान्य आँख अनंत पर रखी वस्तुओं को स्पष्ट रूप से देख सकती है। निकट बिंदु नेत्र से लगभग 25 cm की दूरी पर होता है। इसका मतलब है कि एक सामान्य आँख 25 cm की दूरी पर रखी वस्तुओं को बिना किसी तनाव के स्पष्ट रूप से देख सकती है।
In simple words: सामान्य आँख दूर की चीजें अनंत पर और पास की चीजें 25 cm की दूरी पर साफ देख सकती है।

🎯 Exam Tip: ये दूर बिंदु और निकट बिंदु आँखों की समंजन क्षमता की सीमाओं को परिभाषित करते हैं।

 

Question 49. निकट बिन्दु से क्या तात्पर्य है?
Answer: निकट बिंदु वह अधिकतम दूरी है जिस पर रखी वस्तु का स्पष्ट प्रतिबिंब मानव नेत्र के रेटिना पर बन सके, वह बिंदु निकट बिंदु कहलाता है। सामान्य आँख के लिए यह दूरी लगभग 25 cm होती है। 25 cm से कम दूरी पर रखी वस्तुओं को देखने के लिए आँख को अधिक तनाव लेना पड़ता है, और वे स्पष्ट दिखाई नहीं देती हैं।
In simple words: निकट बिंदु आँख के सबसे पास की वह जगह है जहाँ रखी वस्तु को आँख साफ देख सकती है, जो आमतौर पर 25 cm होती है।

🎯 Exam Tip: 25 cm की दूरी को स्पष्ट दृष्टि की न्यूनतम दूरी भी कहा जाता है, जो पढ़ने और बारीक काम करने के लिए महत्वपूर्ण है।

 

Question 50. न्यूनतम दूरी किसे कहते हैं?
Answer: न्यूनतम दूरी (Least Distance of Distinct Vision) वह सबसे कम दूरी होती है जिस पर रखी किसी वस्तु को एक सामान्य आँख बिना किसी तनाव के स्पष्ट रूप से देख सकती है। एक सामान्य स्वस्थ आँख के लिए यह दूरी लगभग 25 सेमी. होती है। इस दूरी से कम पर रखी वस्तुएं धुंधली दिखाई देती हैं।
In simple words: न्यूनतम दूरी वह सबसे पास की दूरी है जहाँ आँख बिना किसी परेशानी के किसी चीज को साफ-साफ देख सकती है, जो 25 सेमी. होती है।

🎯 Exam Tip: यह 25 सेमी. की दूरी किताबों को पढ़ने और हाथ से किए जाने वाले बारीक काम के लिए एक मानक और आरामदायक दूरी मानी जाती है।

 

Question 51. दृष्टि परास किसे कहते हैं?
Answer: दृष्टि परास (Range of Vision) एक सामान्य आँख के लिए निकट बिंदु और दूर बिंदु के बीच की दूरी को कहते हैं। एक स्वस्थ मानव आँख के लिए, यह परास 25 cm (निकट बिंदु) से लेकर अनंत (दूर बिंदु) तक होता है। यह सीमा हमें यह बताती है कि आँख कितनी दूरी तक की वस्तुओं को स्पष्ट रूप से देख सकती है।
In simple words: दृष्टि परास वह पूरी दूरी है जिसके भीतर हमारी आँखें चीजों को साफ-साफ देख सकती हैं, यानी 25 सेमी. से लेकर बहुत दूर तक।

🎯 Exam Tip: आँखों के दोष जैसे निकट दृष्टि दोष या दूर दृष्टि दोष में यह दृष्टि परास बदल जाता है, जिससे व्यक्ति को कुछ दूरियों पर देखने में समस्या होती है।

लघूत्तरात्मक प्रश्न

 

Question 1. अवतल दर्पण के मुख्य फोकस को परिभाषित कीजिए। उत्तल दर्पण के दो उपयोग लिखिए।
Answer:
अवतल दर्पण का मुख्य फोकस: यह मुख्य अक्ष पर स्थित वह बिंदु है जहाँ मुख्य अक्ष के समानांतर आने वाली प्रकाश किरणें परावर्तन के बाद मिलती हैं या अभिसरित होती हैं। इसे \(F\) से दर्शाया जाता है।

उत्तल दर्पण के उपयोग:

  • यह वाहनों में पश्च-दृश्य (rear-view) दर्पणों के रूप में उपयोगी है। यह एक बड़ा दृश्य क्षेत्र प्रदान करता है और हमेशा सीधा, छोटा प्रतिबिंब बनाता है।
  • यह नए ATM मशीनों के पास सुरक्षा की दृष्टि से लगाए जाते हैं ताकि ग्राहक को पीछे का पूरा दृश्य दिखाई दे सके और वह सुरक्षित महसूस करे।


In simple words: अवतल दर्पण का मुख्य फोकस वह जगह है जहाँ समांतर किरणें टकराकर मिलती हैं। उत्तल दर्पण का उपयोग गाड़ियों के साइड मिरर और ATM मशीनों पर सुरक्षा के लिए होता है।

🎯 Exam Tip: अवतल दर्पण के फोकस को वास्तविक फोकस कहते हैं, जबकि उत्तल दर्पण के फोकस को आभासी फोकस कहते हैं क्योंकि किरणें वास्तव में नहीं मिलतीं बल्कि मिलती हुई प्रतीत होती हैं।

 

Question 2. वाहन की हैडलाइट में कैसे दर्पण का प्रयोग किया जाता है?
Answer: वाहन की हैडलाइट में अवतल दर्पण का प्रयोग किया जाता है। हैडलाइट में बल्ब अवतल दर्पण के मुख्य फोकस पर स्थित होता है। जब बल्ब से प्रकाश निकलता है, तो वह अवतल दर्पण से परावर्तन के बाद मुख्य अक्ष के समानांतर होकर सड़क पर पड़ता है। इससे सड़क का एक बड़ा क्षेत्र प्रकाशित होता है और ड्राइवर को रात में बेहतर दृश्यता मिलती है।
In simple words: गाड़ियों की हेडलाइट में अवतल दर्पण का उपयोग होता है। बल्ब को दर्पण के फोकस पर रखा जाता है ताकि रोशनी सीधी और दूर तक जाए।

🎯 Exam Tip: अवतल दर्पण की यह क्षमता, प्रकाश को समांतर बीम में परिवर्तित करने की, सर्चलाइट और टॉर्च में भी उपयोग की जाती है।

 

Question 3. प्रकाश के परावर्तन से क्या तात्पर्य है? इस नियम को चित्र की सहायता से लिखिए।
Answer:
प्रकाश का परावर्तन: जब प्रकाश की किरण किसी माध्यम से चलकर दूसरे माध्यम की सतह से टकराकर वापस उसी माध्यम में लौट जाती है, तो इस घटना को प्रकाश का परावर्तन कहते हैं।

प्रकाश के परावर्तन के नियम:

  • आपतित किरण, परावर्तित किरण तथा दर्पण के आपतन बिंदु पर अभिलंब तीनों एक ही तल में होते हैं।
  • आपतन कोण \( \angle i \), परावर्तन कोण \( \angle r \) के बराबर होता है (\( \angle i = \angle r \))।


In simple words: प्रकाश जब किसी सतह से टकराकर वापस उसी जगह लौटता है, तो उसे परावर्तन कहते हैं। इसमें प्रकाश की आने वाली और जाने वाली किरणें तथा बीच की सीधी रेखा सब एक ही जगह पर होते हैं, और आने का कोण जाने के कोण के बराबर होता है।

🎯 Exam Tip: परावर्तन के नियम चिकनी (दर्पण) और खुरदरी (दीवार) दोनों सतहों पर लागू होते हैं, हालांकि चिकनी सतहों पर यह अधिक स्पष्ट होता है।

 

Question 4. वाहनों में पीछे का दृश्य देखने के लिए कौनसा दर्पण प्रयोग में लाया जाता है और क्यों?
Answer: वाहनों में पीछे का दृश्य देखने के लिए उत्तल दर्पण का प्रयोग किया जाता है। इसके मुख्य कारण निम्नलिखित हैं:

  • यह सदैव वस्तु का सीधा प्रतिबिंब बनाता है, जिससे ड्राइवर को पीछे की वस्तुओं को सही दिशा और स्थिति में समझने में आसानी होती है।
  • यह वस्तु का अपेक्षाकृत छोटा प्रतिबिंब बनाता है, जिससे इसका दृष्टि क्षेत्र (Field of View) बहुत बढ़ जाता है। इससे चालक एक छोटे से दर्पण में सड़क का संपूर्ण क्षेत्र आसानी से देख पाता है, जिससे सड़क सुरक्षा बढ़ती है।


In simple words: गाड़ियों में पीछे देखने के लिए उत्तल दर्पण का उपयोग होता है क्योंकि यह सीधा और छोटा प्रतिबिंब बनाता है, जिससे ड्राइवर को पीछे का बड़ा इलाका दिख जाता है।

🎯 Exam Tip: उत्तल दर्पण की घुमावदार सतह प्रकाश को फैलाती है, जिससे यह एक बड़े क्षेत्र की वस्तुओं को समेट कर दिखा पाता है, जो सुरक्षा के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण है।

 

Question 5. (A) किसी एक माध्यम से दूसरे माध्यम में जाने पर प्रकाश की किरण क्यों मुड़ जाती है?
(B) एक लेंस की शक्ति - 4.0D है। इस लेंस की प्रकृति क्या होगी?

Answer:
(A) प्रकाश की किरण एक माध्यम से दूसरे माध्यम में जाने पर इसलिए मुड़ जाती है क्योंकि दोनों माध्यमों में प्रकाश की चाल अलग-अलग होती है। जब प्रकाश एक माध्यम से दूसरे में प्रवेश करता है, तो उसकी चाल में परिवर्तन होता है, जिससे उसकी दिशा भी बदल जाती है। इसी घटना को अपवर्तन कहते हैं।
(B) लेंस की शक्ति (क्षमता) -4.0D है। चूंकि लेंस की शक्ति ऋणात्मक है, इसलिए यह एक अवतल लेंस (Concave lens) होगा। अवतल लेंस की फोकस दूरी भी ऋणात्मक होती है, और यह प्रकाश किरणों को फैलाता है।
In simple words: (A) प्रकाश एक माध्यम से दूसरे में जाने पर मुड़ जाता है क्योंकि उसकी गति बदल जाती है। (B) -4.0D शक्ति वाला लेंस अवतल लेंस होता है क्योंकि उसकी शक्ति ऋणात्मक है।

🎯 Exam Tip: ऋणात्मक क्षमता वाला लेंस हमेशा अपसारी (अवतल) होता है और सकारात्मक क्षमता वाला लेंस हमेशा अभिसारी (उत्तल) होता है।

 

Question 6. एक उत्तल लेंस की फोकस दूरी 20 सेमी. है। लेंस की क्षमता कितनी होगी?
Answer: लेंस की क्षमता (P) उसकी फोकस दूरी (f) के व्युत्क्रम के बराबर होती है, बशर्ते फोकस दूरी मीटर में हो। उत्तल लेंस की फोकस दूरी धनात्मक होती है।
दी गई फोकस दूरी \( f = 20 \text{ सेमी.} \)
इसे मीटर में बदलने पर, \( f = \frac{20}{100} = 0.20 \text{ मीटर} \)
लेंस की क्षमता \( P = \frac{1}{f} = \frac{1}{0.20} = 5 \text{ डायप्टर} \)।
चूंकि यह एक उत्तल लेंस है, इसकी क्षमता धनात्मक होगी। अतः, लेंस की क्षमता \( +5 \text{ D} \) होगी।
In simple words: 20 सेमी. फोकस दूरी वाले उत्तल लेंस की क्षमता \( P = 1 / 0.20 = +5 \) डायप्टर होगी।

🎯 Exam Tip: क्षमता की गणना करते समय फोकस दूरी को हमेशा मीटर में परिवर्तित करना सुनिश्चित करें; यदि सेंटीमीटर में है, तो \( P = \frac{100}{f(\text{cm})} \)।

 

Question 8. गोलीय दर्पण द्वारा परावर्तन के नियमों का उल्लेख कीजिए।
Answer: गोलीय दर्पण द्वारा परावर्तन के नियम वही होते हैं जो समतल दर्पण के लिए होते हैं। ये नियम निम्नलिखित हैं:

  • मुख्य अक्ष के समांतर कोई भी प्रकाश किरण गोलीय दर्पण पर आपतित होती है तो परावर्तन के पश्चात् मुख्य फोकस से जाती है या जाती हुई प्रतीत होती है।
  • गोलीय दर्पण पर कोई किरण वक्रता केंद्र से गुजरती हुई आपतित होती है तो परावर्तन के बाद अपने ही मार्ग में लौट आती है। ऐसा इसलिए होता है क्योंकि वक्रता केंद्र से गुजरने वाली किरणें दर्पण पर अभिलंब होती हैं।
  • गोलीय दर्पण में फोकस में से होती हुई कोई किरण आपतित होती है तो परावर्तन के पश्चात् वह मुख्य अक्ष के समांतर हो जाती है।
  • इन नियमों के आधार पर किरणें खींच कर दर्पण द्वारा किसी वस्तु का प्रतिबिंब बनाया जाता है।

In simple words: गोलीय दर्पण में प्रकाश के परावर्तन के मुख्य नियम ये हैं: समांतर किरणें फोकस से गुजरती हैं, वक्रता केंद्र से जाने वाली किरणें वापस लौटती हैं, और फोकस से जाने वाली किरणें समांतर हो जाती हैं।

🎯 Exam Tip: प्रतिबिंब निर्माण के लिए आमतौर पर इनमें से किन्हीं दो नियमों का उपयोग करके किरण आरेख खींचे जाते हैं, जिससे प्रतिबिंब की स्थिति, आकार और प्रकृति का पता चलता है।

 

Question 9. वास्तविक तथा कल्पित (आभासी) प्रतिबिम्ब में अन्तर लिखिये।
Answer: वास्तविक और कल्पित (आभासी) प्रतिबिंब के बीच मुख्य अंतर निम्नलिखित हैं:

विशेषतावास्तविक प्रतिबिंब (Real Image)कल्पित (आभासी) प्रतिबिंब (Virtual Image)
पर्दे पर प्राप्तइसे पर्दे पर प्राप्त किया जा सकता है।इसे पर्दे पर प्राप्त नहीं किया जा सकता।
दर्पण/लेंस के संबंध में स्थितियह दर्पण के सामने या लेंस के पीछे (जहां किरणें वास्तव में मिलती हैं) बनता है।यह दर्पण के पीछे या लेंस के सामने (जहां किरणें मिलती हुई प्रतीत होती हैं) बनता है।
प्रकृतियह सदैव उल्टा बनता है।यह सदैव सीधा बनता है।


In simple words: वास्तविक प्रतिबिंब को पर्दे पर देख सकते हैं और यह उल्टा होता है, जबकि आभासी प्रतिबिंब को पर्दे पर नहीं देख सकते और यह सीधा होता है।

🎯 Exam Tip: वास्तविक प्रतिबिंब प्रकाश किरणों के वास्तविक प्रतिच्छेदन से बनता है, जबकि आभासी प्रतिबिंब प्रकाश किरणों के काल्पनिक प्रतिच्छेदन से बनता है।

 

Question 10. गोलीय दर्पणों से संबंधित निम्न को परिभाषित कीजिये (कोई तीन)
1. ध्रुव
2. मुख्य अक्ष
3. मुख्य फोकस
4. फोकस दूरी।
Answer: गोलीय दर्पणों से संबंधित कुछ महत्वपूर्ण पद निम्नलिखित हैं:
1. ध्रुव (Pole): गोलीय दर्पण के परावर्तक सतह का मध्य बिंदु ध्रुव कहलाता है। इसे \(P\) से दर्शाया जाता है। यह दर्पण का ज्यामितीय केंद्र होता है।
2. मुख्य अक्ष (Principal Axis): गोलीय दर्पण के वक्रता केंद्र (\(C\)) और ध्रुव (\(P\)) को मिलाने वाली काल्पनिक सीधी रेखा को मुख्य अक्ष कहते हैं। यह दर्पण के केंद्र से होकर गुजरती है।
3. मुख्य फोकस (Principal Focus): मुख्य अक्ष पर स्थित वह बिंदु जहाँ मुख्य अक्ष के समानांतर आने वाली प्रकाश किरणें परावर्तन के बाद मिलती हैं (अवतल दर्पण) या मिलती हुई प्रतीत होती हैं (उत्तल दर्पण), उसे मुख्य फोकस कहते हैं। इसे \(F\) से दर्शाया जाता है।
4. फोकस दूरी (Focal Length): गोलीय दर्पण के ध्रुव (\(P\)) और मुख्य फोकस (\(F\)) के बीच की दूरी को फोकस दूरी कहते हैं। इसे \(f\) से दर्शाया जाता है।
In simple words: ध्रुव दर्पण का बीच वाला बिंदु है। मुख्य अक्ष वह सीधी रेखा है जो दर्पण के बीच से गुजरती है। मुख्य फोकस वह बिंदु है जहाँ प्रकाश की किरणें मिलती हैं या मिलती हुई दिखती हैं। फोकस दूरी ध्रुव और फोकस के बीच की दूरी है।

🎯 Exam Tip: इन सभी पदों को सही ढंग से समझना गोलीय दर्पणों द्वारा प्रतिबिंब निर्माण के किरण आरेख और सूत्रों को समझने के लिए आवश्यक है।

 

Question 11. किसी गोलीय दर्पण की वक्रता केन्द्र और वक्रता त्रिज्या तथा द्वारक को परिभाषित कीजिये।
Answer: गोलीय दर्पणों से संबंधित कुछ महत्वपूर्ण पद निम्नलिखित हैं:
1. वक्रता केंद्र (Centre of Curvature): गोलीय दर्पण का परावर्तक सतह एक बड़े खोखले गोले का हिस्सा होता है। इस गोले के केंद्र को ही दर्पण का वक्रता केंद्र कहते हैं। इसे \(C\) से दर्शाया जाता है। यह दर्पण का हिस्सा नहीं होता, बल्कि उसके बाहर स्थित होता है।
2. वक्रता त्रिज्या (Radius of Curvature): गोलीय दर्पण का परावर्तक सतह जिस गोले का हिस्सा होता है, उसकी त्रिज्या को दर्पण की वक्रता त्रिज्या कहते हैं। इसे \(R\) से दर्शाया जाता है। वक्रता त्रिज्या ध्रुव से वक्रता केंद्र तक की दूरी होती है।
3. द्वारक (Aperture): गोलीय दर्पण के परावर्तक सतह के व्यास को उसका द्वारक कहते हैं। यह दर्पण के उस हिस्से का माप है जिससे प्रकाश परावर्तित होता है। बड़े द्वारक वाले दर्पण अधिक प्रकाश इकट्ठा कर सकते हैं।
In simple words: वक्रता केंद्र वह गोले का बीच का बिंदु है जिसका दर्पण एक हिस्सा है। वक्रता त्रिज्या उस गोले की त्रिज्या है। द्वारक दर्पण का चमकदार हिस्सा कितना चौड़ा है, यह बताता है।

🎯 Exam Tip: वक्रता त्रिज्या और फोकस दूरी के बीच संबंध होता है (\(R = 2f\))। द्वारक दर्पण की प्रकाश इकट्ठा करने की क्षमता को प्रभावित करता है।

 

Question 12. अवतल दर्पणों के उपयोग लिखिये।
Answer: अवतल दर्पणों के मुख्य उपयोग इस प्रकार हैं:

  1. यह टॉर्च, सर्चलाइट और वाहनों की हेडलाइट्स में प्रकाश की एक शक्तिशाली समानांतर किरण पुंज बनाने के लिए इस्तेमाल किया जाता है। इससे दूर तक रोशनी फैलती है।
  2. दांतों के डॉक्टर मरीजों के दांतों की बड़ी छवि देखने के लिए इसका उपयोग करते हैं।
  3. सौर भट्टियों में इसका उपयोग सूर्य के प्रकाश को एक बिंदु पर केंद्रित करने के लिए किया जाता है ताकि गर्मी पैदा हो सके।
  4. चेहरे का बड़ा और स्पष्ट प्रतिबिंब देखने के लिए इसे शेविंग दर्पणों के रूप में भी इस्तेमाल किया जाता है।

In simple words: अवतल दर्पण टॉर्च, हेडलाइट्स, डॉक्टर के औजारों, सोलर हीटर और शेविंग मिरर में काम आते हैं क्योंकि ये रोशनी को एक जगह इकट्ठा करते हैं या चीजों को बड़ा दिखाते हैं। ये हमें दूर तक देखने या छोटी चीजों को साफ देखने में मदद करते हैं।

🎯 Exam Tip: जब भी दर्पण के उपयोग के बारे में पूछा जाए, तो आप कम से कम दो मुख्य अनुप्रयोगों का उल्लेख करें और संक्षेप में बताएं कि वे कैसे काम करते हैं।

 

Question 13. लेंस किसे कहते हैं? यह कितने प्रकार के होते हैं?
Answer: लेंस एक पारदर्शी माध्यम होता है जो दो सतहों से घिरा होता है, जिनमें से कम से कम एक सतह गोलीय (घुमावदार) होती है। ये आमतौर पर दो प्रकार के होते हैं:

  1. उत्तल लेंस (अभिसारी लेंस): इस लेंस की दोनों सतहें घुमावदार हो सकती हैं, या एक सतह घुमावदार और दूसरी समतल हो सकती है। यह किनारों पर पतला और बीच में मोटा होता है। उत्तल लेंस प्रकाश की किरणों को एक बिंदु पर इकट्ठा करता है।
  2. अवतल लेंस (अपसारी लेंस): इस लेंस की भी दोनों सतहें घुमावदार हो सकती हैं, या एक सतह घुमावदार और दूसरी समतल हो सकती है। यह किनारों पर मोटा और बीच में पतला होता है। अवतल लेंस प्रकाश की किरणों को फैलाता है।

In simple words: लेंस एक खास तरह का पारदर्शी कांच होता है, जिसके किनारे या बीच का हिस्सा मुड़ा हुआ होता है। ये दो तरह के होते हैं - उत्तल लेंस जो रोशनी को एक जगह जमा करते हैं और अवतल लेंस जो रोशनी को फैलाते हैं।

🎯 Exam Tip: लेंस की परिभाषा में "पारदर्शी माध्यम" और "कम से कम एक गोलीय सतह" जैसे मुख्य शब्द शामिल करना महत्वपूर्ण है। प्रकारों को बताते समय उनकी बनावट (मोटा/पतला) और कार्य (अभिसरण/अपसरण) का उल्लेख करें।

 

Question 14. लेंस से संबंधित निम्न को परिभाषित कीजिये
1. लेंस का वक्रता केन्द्र
2. वक्रता त्रिज्या
3. मुख्य अक्ष
4. मुख्य फोकस
5. फोकस दूरी
6. फोकस तल
Answer: लेंस से संबंधित कुछ महत्वपूर्ण परिभाषाएँ इस प्रकार हैं:

  1. लेंस का वक्रता केंद्र (Centre of Curvature): लेंस के दोनों गोलीय पृष्ठ, जिन खोखले गोलों के भाग होते हैं, उन गोलों के केंद्र को लेंस का वक्रता केंद्र कहते हैं। इसे सामान्यतः 'C' से दर्शाया जाता है। एक लेंस के दो वक्रता केंद्र \(C_1\) और \(C_2\) होते हैं।
  2. वक्रता त्रिज्या (Radius of Curvature): लेंस के गोलीय पृष्ठ जिन खोखले गोलों के भाग होते हैं, उन गोलों की त्रिज्याओं को लेंस की वक्रता त्रिज्या कहते हैं। जिस पृष्ठ पर प्रकाश पहले गिरता है, वह पहला पृष्ठ होता है, और जिससे प्रकाश बाहर निकलता है, वह दूसरा पृष्ठ होता है।
  3. मुख्य अक्ष (Principal Axis): लेंस के दोनों वक्रता केंद्रों \(C_1\) और \(C_2\) को जोड़ने वाली एक काल्पनिक सीधी रेखा को लेंस का मुख्य अक्ष कहते हैं। यह लेंस के बीच से होकर गुजरती है।
  4. मुख्य फोकस (Principal Focus): जब प्रकाश की किरणें मुख्य अक्ष के समानांतर लेंस पर गिरती हैं, तो अपवर्तन (मुड़ने) के बाद वे एक बिंदु पर मिलती हैं या मिलती हुई प्रतीत होती हैं। इस बिंदु को मुख्य फोकस (F) कहते हैं। लेंस के दोनों ओर एक-एक मुख्य फोकस होता है।
  5. फोकस दूरी (Focal Length): लेंस के प्रकाशिक केंद्र (Optical Centre) और मुख्य फोकस (F) के बीच की दूरी को फोकस दूरी कहते हैं। इसे 'f' से व्यक्त किया जाता है। यह दूरी लेंस के गुणों को दर्शाती है।
  6. फोकस तल (Focal Plane): मुख्य अक्ष के लंबवत (सीधा ऊपर-नीचे) वह तल जो फोकस बिंदु से होकर गुजरता है, फोकस तल कहलाता है। इस तल पर समांतर किरणें केंद्रित होती हैं।

In simple words: लेंस के घुमावदार हिस्सों के केंद्र को वक्रता केंद्र कहते हैं, और उनकी त्रिज्या को वक्रता त्रिज्या कहते हैं। लेंस के बीच से गुजरने वाली सीधी रेखा मुख्य अक्ष होती है। जहाँ समानांतर किरणें अपवर्तन के बाद मिलती हैं, वह मुख्य फोकस होता है, और प्रकाशिक केंद्र से फोकस तक की दूरी फोकस दूरी कहलाती है। फोकस तल वह सतह है जो फोकस बिंदु से होकर गुजरती है।

🎯 Exam Tip: परिभाषाएँ स्पष्ट और संक्षिप्त होनी चाहिए। मुख्य शब्दों जैसे 'काल्पनिक रेखा', 'प्रकाशिक केंद्र', 'अपवर्तन', 'समांतर किरणें', 'मिलती/मिलती हुई प्रतीत होती हैं' को शामिल करना सुनिश्चित करें।

 

Question 16. क्या कारण है कि पानी में आंशिक डूबी हुई वस्तु मुड़ी हुई दिखाई देती है?
Answer: पानी में आंशिक रूप से डूबी हुई वस्तु मुड़ी हुई दिखाई देती है, इसका मुख्य कारण प्रकाश का अपवर्तन (refraction) है। जब प्रकाश की किरणें पानी से हवा में या हवा से पानी में जाती हैं, तो वे अपनी दिशा बदल लेती हैं। ऐसा इसलिए होता है क्योंकि पानी और हवा में प्रकाश की गति अलग-अलग होती है। जब वस्तु का पानी में डूबा हुआ हिस्सा प्रकाश भेजता है, तो यह प्रकाश हवा में आते ही मुड़ जाता है। हमारी आँखों को यह मुड़ा हुआ प्रकाश वस्तु के वास्तविक स्थान से थोड़ा ऊपर और किनारे पर दिखाई देता है, जिससे वस्तु मुड़ी हुई लगती है। उदाहरण के लिए, एक पेंसिल पानी में तिरछी दिखाई देती है।

In simple words: जब प्रकाश पानी से हवा में आता है, तो वह थोड़ा मुड़ जाता है। इसलिए, पानी में आधी डूबी हुई कोई भी चीज हमें थोड़ी टेढ़ी या मुड़ी हुई दिखती है, क्योंकि हमारी आँखें प्रकाश को सीधी रेखा में आते हुए देखती हैं, जबकि वह मुड़ चुका होता है।

🎯 Exam Tip: इस प्रकार के प्रश्नों में "प्रकाश का अपवर्तन" शब्द का उपयोग करना आवश्यक है। यह भी बताएं कि अपवर्तन क्यों होता है (अलग-अलग माध्यमों में प्रकाश की गति में अंतर के कारण)।

 

Question 17. एक बीकर अथवा कटोरीनुमा छोटे बर्तन में एक सिक्का रखें। अब उस बर्तन एवं अपने नेत्रों को इस प्रकार व्यवस्थित करें कि सिक्का दृष्टि से ठीक ओझल हो जाये। जैसे ही आप पानी डालते हैं सिक्का तुरन्त दिखाई देने लग जाता है। इसका क्या कारण है?
Answer: जब बीकर में पानी डाला जाता है, तो सिक्का फिर से दिखाई देने लगता है, इसका कारण भी प्रकाश का अपवर्तन है। जब बीकर खाली होता है, तो सिक्का हमारी आँखों से ओझल होता है क्योंकि उससे आने वाला प्रकाश हमारी आँखों तक नहीं पहुँच पाता। लेकिन जैसे ही पानी डालते हैं, सिक्के से आने वाली प्रकाश की किरणें पानी से हवा में आते समय मुड़ जाती हैं। ये किरणें हमारी आँखों तक पहुँचती हैं, और हमारी आँखें उन्हें एक सीधी रेखा में पीछे की ओर देखती हैं, जिससे हमें सिक्का उसके वास्तविक स्थान से थोड़ा ऊपर उठा हुआ दिखाई देता है, और वह हमें फिर से दिखने लगता है। यह घटना दर्शाती है कि प्रकाश की दिशा माध्यम बदलने पर बदल जाती है।

In simple words: सिक्का इसलिए दिखाई देता है क्योंकि पानी डालने पर प्रकाश की किरणें मुड़ जाती हैं। ये मुड़ी हुई किरणें हमारी आँखों तक पहुँचती हैं, जिससे हमें सिक्का थोड़ा ऊपर उठा हुआ और दिखने लगता है, भले ही वह पहले अदृश्य था।

🎯 Exam Tip: यह एक आम प्रयोग है; इसे अपवर्तन के एक उदाहरण के रूप में स्पष्ट करें। 'प्रकाश का अपवर्तन', 'किरणों का मुड़ना', और 'वास्तविक स्थान से ऊपर उठा हुआ दिखाई देना' जैसे मुख्य बिंदुओं को शामिल करें।

 

Question 18. सामान्य नेत्र 25 cm से निकट रखी वस्तुओं को सुस्पष्ट क्यों नहीं देख पाते?
Answer: एक सामान्य आँख 25 सेमी से निकट रखी वस्तुओं को स्पष्ट रूप से नहीं देख पाती, क्योंकि मानव नेत्र की समंजन क्षमता की एक सीमा होती है। समंजन क्षमता, अभिनेत्र लेंस की फोकस दूरी को समायोजित करने की क्षमता है। 25 सेमी से कम दूरी पर रखी वस्तु से आने वाली प्रकाश किरणों को रेटिना पर केंद्रित करने के लिए लेंस को अपनी फोकस दूरी में अधिक बदलाव करना होगा, जो उसकी क्षमता से बाहर होता है। ऐसे में लेंस रेटिना पर स्पष्ट प्रतिबिंब नहीं बना पाता और वस्तु धुंधली दिखाई देती है। यह आँख की प्राकृतिक सीमा है।

In simple words: हमारी आँखें 25 सेमी से ज़्यादा पास की चीज़ों को ठीक से नहीं देख पातीं। इसका कारण यह है कि आँख का लेंस उतना मुड़ नहीं पाता कि वह इतनी पास की चीज़ों पर सही से फोकस कर सके और साफ तस्वीर बना सके।

🎯 Exam Tip: "समंजन क्षमता" और "अभिनेत्र लेंस की फोकस दूरी को समायोजित करने की सीमा" जैसे शब्दों का उपयोग करें। यह भी स्पष्ट करें कि ऐसे में प्रतिबिंब रेटिना पर नहीं बनता, जिससे वस्तु धुंधली दिखती है।

 

Question 19. पानी में डूबी हुई पेन्सिल मुड़ी हुई क्यों दिखाई देती है?
Answer: पानी में डूबी हुई पेंसिल मुड़ी हुई दिखाई देने का कारण भी प्रकाश का अपवर्तन है। जब पेंसिल का वह हिस्सा जो पानी में डूबा हुआ होता है, उससे प्रकाश हमारी आँखों तक पहुँचता है, तो यह प्रकाश पानी से हवा में आते समय मुड़ जाता है। हमारी आँखें इस मुड़े हुए प्रकाश को सीधी रेखा में पीछे की ओर देखती हैं, जिससे हमें पेंसिल का पानी में डूबा हुआ हिस्सा उसके वास्तविक स्थान से थोड़ा ऊपर और किनारे पर खिसका हुआ दिखाई देता है। इससे पेंसिल हमें मुड़ी हुई या टूटी हुई प्रतीत होती है, जबकि वह वास्तव में सीधी होती है।

In simple words: पेंसिल पानी में मुड़ी हुई दिखती है क्योंकि प्रकाश पानी से हवा में आते समय अपना रास्ता बदल लेता है (अपवर्तन)। हमारी आँखें उसे मुड़े हुए रास्ते की बजाय सीधा समझती हैं, इसलिए पेंसिल तिरछी लगती है।

🎯 Exam Tip: "प्रकाश का अपवर्तन" और "माध्यमों में प्रकाश की चाल में अंतर" को स्पष्ट रूप से बताएं। यह उदाहरण रोज़मर्रा की ज़िंदगी में अपवर्तन को समझने के लिए बहुत अच्छा है।

 

Question 20. गिलास के पानी में डूबी हुई स्ट्रा गिलास के पार्श्व से देखने पर वह कुछ बड़ी क्यों दिखाई देती है? प्रयोग द्वारा समझाइये।
Answer: जब गिलास के पानी में डूबी हुई स्ट्रॉ को किनारे से देखते हैं, तो वह थोड़ी बड़ी और मोटी दिखाई देती है। इसका कारण प्रकाश का अपवर्तन है। जब स्ट्रॉ से आने वाला प्रकाश पानी से हवा में आता है, तो वह मुड़ जाता है। हमारी आँखें इस मुड़े हुए प्रकाश को सीधी रेखा में पीछे की ओर देखती हैं, जिससे हमें स्ट्रॉ का पानी में डूबा हुआ हिस्सा उसके वास्तविक आकार से थोड़ा बड़ा और चौड़ा दिखाई देता है। यह प्रभाव तब और अधिक स्पष्ट होता है जब प्रकाश किरणें पानी की सतह से तिरछे कोण पर बाहर निकलती हैं।

In simple words: पानी में डूबी हुई स्ट्रॉ बड़ी इसलिए दिखती है क्योंकि जब हम उसे किनारे से देखते हैं, तो पानी से हवा में आते समय प्रकाश मुड़ जाता है। हमारी आँखें इस मुड़े हुए प्रकाश को वस्तु के असल आकार से बड़ा समझती हैं।

🎯 Exam Tip: इस प्रयोग में, "अपवर्तन", "आभासी छवि", और "किरणों का मुड़ना" जैसे शब्दों का उपयोग करें। यह भी बताएं कि हमारी आँखें किरणों को सीधी रेखा में देखने के कारण भ्रमित होती हैं।

 

Question 22. व्याख्या कीजिये कि ग्रह क्यों नहीं टिमटिमाते?
Answer: ग्रह तारों की तुलना में पृथ्वी के बहुत करीब होते हैं। इसी वजह से उन्हें एक विस्तृत प्रकाश स्रोत की तरह देखा जा सकता है, न कि एक बिंदु स्रोत की तरह। यदि हम ग्रह को अनेक छोटे-छोटे प्रकाश बिंदुओं का समूह मानें, तो प्रत्येक बिंदु से आने वाले प्रकाश में वायुमंडलीय अपवर्तन के कारण दिशा में छोटे-छोटे बदलाव होते हैं। लेकिन इन सभी बिंदुओं से आने वाले प्रकाश के कुल परिवर्तन का औसत मान शून्य हो जाता है। इसका मतलब है कि एक हिस्से से आने वाला प्रकाश कम होता है, तो दूसरे हिस्से से आने वाला प्रकाश बढ़ जाता है, जिससे कुल चमक में कोई बड़ा बदलाव नहीं आता। इसी कारण ग्रह हमें टिमटिमाते हुए दिखाई नहीं देते हैं।

In simple words: ग्रह तारे से बहुत पास हैं, इसलिए वे बड़े दिखते हैं। जब उनसे रोशनी आती है, तो वह हवा में थोड़ी हिलती है, पर उनका आकार बड़ा होने के कारण यह हिलना-डुलना बराबर हो जाता है। इसलिए वे टिमटिमाते नहीं।

🎯 Exam Tip: इस उत्तर में "विस्तृत प्रकाश स्रोत" और "प्रकाश के कुल परिवर्तन का औसत मान शून्य" जैसे मुख्य वाक्यांशों का उल्लेख करना आवश्यक है। तारों से तुलना करना भी महत्वपूर्ण है।

 

Question 23. सूर्योदय के समय सूर्य रक्ताभ क्यों प्रतीत होता है?
Answer: सूर्योदय के समय सूर्य रक्ताभ (लाल) दिखाई देता है, इसका कारण प्रकाश का प्रकीर्णन (scattering) है। जब सूर्योदय होता है, तो सूर्य क्षितिज के पास होता है। ऐसे में सूर्य का प्रकाश हमारी आँखों तक पहुँचने से पहले वायुमंडल की एक मोटी परत से होकर गुजरता है। इस लंबी यात्रा के दौरान, नीले और कम तरंगदैर्ध्य (छोटे वेवलेंथ) वाले प्रकाश का वायुमंडल के धूल कणों और गैसों द्वारा अधिक प्रकीर्णन हो जाता है और वह चारों ओर फैल जाता है। जबकि लाल और अधिक तरंगदैर्ध्य वाले प्रकाश का प्रकीर्णन कम होता है और वह सीधी हमारी आँखों तक पहुँचता है। यही कारण है कि सूर्योदय और सूर्यास्त के समय सूर्य हमें लाल या नारंगी रंग का दिखाई देता है। यह आसमान में विभिन्न रंगों के फैलाव के कारण होता है।

In simple words: सूरज उगते और डूबते समय लाल दिखता है क्योंकि उसकी रोशनी को हवा में लंबी दूरी तय करनी पड़ती है। इस दौरान नीली रोशनी बिखर जाती है, और लाल रोशनी सीधे हम तक पहुँचती है।

🎯 Exam Tip: "प्रकाश का प्रकीर्णन", "वायुमंडल की मोटी परत", "नीले प्रकाश का अधिक प्रकीर्णन", और "लाल प्रकाश का कम प्रकीर्णन" जैसे मुख्य शब्दों का उपयोग करें।

 

Question 24. किसी अंतरिक्ष यात्री को आकाश नीले की अपेक्षा काला क्यों प्रतीत होता है?
Answer: किसी अंतरिक्ष यात्री को आकाश नीला नहीं, बल्कि काला दिखाई देता है, क्योंकि अंतरिक्ष में वायुमंडल नहीं होता है। पृथ्वी पर हमें आकाश नीला इसलिए दिखाई देता है, क्योंकि सूर्य का प्रकाश वायुमंडल में मौजूद धूल कणों और गैसों से टकराकर प्रकीर्णित होता है। नीले रंग के प्रकाश की तरंगदैर्ध्य कम होने के कारण वह सबसे ज़्यादा बिखरता है और हमारी आँखों तक पहुँचता है, जिससे हमें आकाश नीला दिखाई देता है। लेकिन अंतरिक्ष में यह वायुमंडल और उसके कण नहीं होते, इसलिए प्रकाश का कोई प्रकीर्णन नहीं होता। प्रकाश सीधा निकलता है, और कोई रंग नहीं बिखरता, जिससे आकाश काला दिखाई देता है।

In simple words: अंतरिक्ष में आसमान काला दिखता है क्योंकि वहाँ हवा नहीं है। हवा न होने से सूरज की रोशनी बिखरती नहीं, इसलिए नीली रोशनी भी नहीं फैलती। बिना फैली रोशनी के, हमें आसमान सिर्फ अंधेरा या काला ही दिखता है।

🎯 Exam Tip: इस उत्तर में "वायुमंडल की अनुपस्थिति", "प्रकाश का प्रकीर्णन नहीं होता", और "नीले प्रकाश का प्रकीर्णन" जैसे मुख्य बिंदुओं को शामिल करें।

 

Question 1. विशिष्ट आपतित किरणों के उपयोग द्वारा गोलीय दर्पण से प्रतिबिम्ब निर्माण का वर्णन कीजिए।
Answer: किसी भी प्रतिबिंब के निर्माण के लिए, कम से कम दो परावर्तित (reflecting) किरणों का मिलना या मिलती हुई प्रतीत होना आवश्यक है। प्रतिबिंब की स्थिति और प्रकृति को समझने के लिए, गोलीय दर्पणों (अवतल और उत्तल) में कुछ विशिष्ट आपतित किरणों का उपयोग किया जाता है। ये किरणें और उनके परावर्तन के नियम इस प्रकार हैं:

  1. मुख्य अक्ष के समानांतर किरण:
    1. अवतल दर्पण: मुख्य अक्ष के समानांतर आने वाली कोई भी प्रकाश किरण दर्पण से परावर्तन के बाद मुख्य फोकस (F) से होकर गुजरती है।
    2. उत्तल दर्पण: मुख्य अक्ष के समानांतर आने वाली कोई भी प्रकाश किरण दर्पण से परावर्तन के बाद इस प्रकार अपसारित होती है कि वह मुख्य फोकस (F) से आती हुई प्रतीत होती है।
    O F C चित्र (a) - अवतल दर्पण O F C चित्र (b) - उत्तल दर्पण

     

    2. फोकस से गुजरने वाली किरण (अवतल दर्पण) या फोकस की ओर निर्देशित किरण (उत्तल दर्पण):
    1. अवतल दर्पण: अवतल दर्पण के मुख्य फोकस (F) से होकर गुजरने वाली किरण दर्पण से परावर्तन के बाद मुख्य अक्ष के समानांतर हो जाती है।
    2. उत्तल दर्पण: उत्तल दर्पण के मुख्य फोकस (F) की ओर जाती हुई प्रतीत होने वाली किरण दर्पण से परावर्तन के बाद मुख्य अक्ष के समानांतर हो जाती है।
    O F C चित्र (a) - अवतल दर्पण O F C चित्र (b) - उत्तल दर्पण

     

    3. वक्रता केंद्र से गुजरने वाली किरण:
    1. अवतल और उत्तल दोनों दर्पण: कोई भी प्रकाश किरण जो वक्रता केंद्र (C) से होकर गुजरती है, वह दर्पण से परावर्तन के बाद उसी रास्ते पर वापस लौट जाती है। ऐसा इसलिए होता है क्योंकि वक्रता केंद्र से दर्पण के किसी भी बिंदु पर खींची गई रेखा उस बिंदु पर अभिलंब होती है, और जब प्रकाश अभिलंब पर गिरता है, तो वह उसी रास्ते पर वापस लौट जाता है।
    O F C चित्र (a) - अवतल दर्पण O F C चित्र (b) - उत्तल दर्पण

     

    4. ध्रुव पर आपतित किरण (तिर्यक किरण):
    1. अवतल और उत्तल दोनों दर्पण: जब कोई प्रकाश किरण दर्पण के ध्रुव (P) पर मुख्य अक्ष से कुछ कोण बनाते हुए आपतित होती है, तो वह उसी कोण पर परावर्तित हो जाती है। इसमें आपतन कोण और परावर्तन कोण बराबर होते हैं, और दोनों मुख्य अक्ष के संदर्भ में मापे जाते हैं।
    O F C चित्र (a) - अवतल दर्पण O F C चित्र (b) - उत्तल दर्पण

    In simple words: प्रतिबिंब बनाने के लिए, हम दर्पण पर कुछ खास किरणें डालते हैं: एक सीधी किरण फोकस से जाती है (या आती दिखती है), एक फोकस से गुजरने वाली किरण सीधी हो जाती है, एक वक्रता केंद्र से गुजरने वाली किरण वापस लौट आती है, और ध्रुव पर पड़ने वाली किरण उसी कोण पर परावर्तित होती है।

    🎯 Exam Tip: किरण चित्रों को बनाते समय तीर (arrows) का उपयोग करके प्रकाश की दिशा को स्पष्ट रूप से दर्शाना महत्वपूर्ण है। प्रत्येक नियम को उसके चित्र के साथ समझाएं।

     

    Question 3. आवर्धनता को परिभाषित कीजिए और इसका मान ज्ञात करने का सूत्र निकालिये।
    Answer: आवर्धनता (Magnification) यह दर्शाती है कि किसी गोलीय दर्पण या लेंस द्वारा बना प्रतिबिंब वस्तु के आकार से कितना गुना बड़ा या छोटा है। इसे प्रतिबिंब की ऊँचाई और वस्तु की ऊँचाई के अनुपात के रूप में परिभाषित किया जाता है। इसे 'm' से दर्शाया जाता है।

    आवर्धनता का सूत्र इस प्रकार है:

    \( m = \frac{\text{प्रतिबिंब की ऊँचाई}}{\text{वस्तु की ऊँचाई}} = \frac{h'}{h} \)

    गोलीय दर्पणों के लिए, आवर्धनता को वस्तु की दूरी (u) और प्रतिबिंब की दूरी (v) के संदर्भ में भी व्यक्त किया जा सकता है। इसका सूत्र है:

    \( m = - \frac{v}{u} \)

    यहाँ,

    • \(h'\) = प्रतिबिंब की ऊँचाई
    • \(h\) = वस्तु की ऊँचाई
    • \(v\) = प्रतिबिंब की दूरी (दर्पण के ध्रुव से)
    • \(u\) = वस्तु की दूरी (दर्पण के ध्रुव से)

    आवर्धनता का मान धनात्मक या ऋणात्मक हो सकता है, जो प्रतिबिंब की प्रकृति बताता है। धनात्मक 'm' आभासी और सीधा प्रतिबिंब दर्शाता है, जबकि ऋणात्मक 'm' वास्तविक और उल्टा प्रतिबिंब दर्शाता है। इसके अलावा, \(|m| > 1\) का मतलब है कि प्रतिबिंब वस्तु से बड़ा है, \(|m| = 1\) का मतलब है कि प्रतिबिंब वस्तु के बराबर है, और \(|m| < 1\) का मतलब है कि प्रतिबिंब वस्तु से छोटा है।

    P F C B A वस्तु B' A' प्रतिबिंब चित्र - रेखीय आवर्धन

    In simple words: आवर्धनता बताती है कि प्रतिबिंब, असली चीज़ से कितना बड़ा या छोटा दिख रहा है। इसे प्रतिबिंब की ऊँचाई को असली चीज़ की ऊँचाई से भाग देकर निकालते हैं, या प्रतिबिंब की दूरी को वस्तु की दूरी से भाग देकर निकालते हैं, साथ में एक ऋणात्मक चिन्ह लगाते हैं। यह हमें बताता है कि तस्वीर सीधी है या उल्टी।

    🎯 Exam Tip: आवर्धनता की परिभाषा, उसके दोनों सूत्र (\(h'/h\) और \(-v/u\)) और चिन्ह परिपाटी (धनात्मक/ऋणात्मक m का अर्थ) को याद रखना बहुत ज़रूरी है। यह अक्सर संख्यात्मक प्रश्नों में भी पूछा जाता है।

     

    Question 4. अपवर्तन के निम्न उदाहरणों को विस्तार से समझाइये
    1. अग्रिम सूर्योदय तथा विलम्बित सूर्यास्त
    2. पूर्ण आन्तरिक परावर्तन
    3. वर्ण विक्षेपण।
    Answer: प्रकाश के अपवर्तन के कुछ महत्वपूर्ण उदाहरण इस प्रकार हैं:

    1. अग्रिम सूर्योदय और विलम्बित सूर्यास्त: हमें सूर्योदय उसके वास्तविक समय से लगभग 2 मिनट पहले और सूर्यास्त उसके वास्तविक समय से लगभग 2 मिनट बाद तक दिखाई देता है। ऐसा वायुमंडलीय अपवर्तन के कारण होता है। जब सूर्य क्षितिज के पास होता है, तो उससे आने वाली प्रकाश किरणें पृथ्वी के वायुमंडल की विभिन्न घनत्व वाली परतों से होकर गुजरती हैं। वायुमंडल की ये परतें सघन माध्यम का काम करती हैं, जिससे प्रकाश किरणें लगातार अभिलंब की ओर मुड़ती हैं। इस अपवर्तन के कारण, हमें सूर्य उसकी वास्तविक स्थिति से थोड़ा ऊपर उठा हुआ दिखाई देता है, भले ही वह अभी क्षितिज से नीचे हो। इसी प्रकार, सूर्यास्त के बाद भी हमें सूर्य कुछ देर तक दिखाई देता रहता है।

    2. पूर्ण आंतरिक परावर्तन (Total Internal Reflection): जब प्रकाश की किरण सघन माध्यम (जैसे पानी या काँच) से विरल माध्यम (जैसे हवा) में जाती है, तो वह अभिलंब से दूर मुड़ती है। यदि हम आपतन कोण (जिस कोण पर प्रकाश गिरता है) को बढ़ाते जाएँ, तो एक विशेष कोण ऐसा आता है, जिस पर अपवर्तन कोण 90° हो जाता है। इस कोण को क्रांतिक कोण (critical angle) कहते हैं। यदि आपतन कोण क्रांतिक कोण से भी अधिक हो जाए, तो प्रकाश विरल माध्यम में प्रवेश करने की बजाय पूरी तरह से उसी सघन माध्यम में वापस परावर्तित हो जाता है। इसी घटना को पूर्ण आंतरिक परावर्तन कहते हैं। इसका उपयोग ऑप्टिकल फाइबर में और हीरे की चमक में होता है।

    सघन माध्यम विरल माध्यम अभिलंब i r (a) अपवर्तन i_c 90° (b) क्रांतिक कोण (c) पूर्ण आंतरिक परावर्तन

     

    3. वर्ण विक्षेपण (Dispersion of Light): जब श्वेत प्रकाश (सूर्य का प्रकाश) किसी प्रिज्म से होकर गुजरता है, तो वह अपने सात रंगों - बैंगनी, जामुनी, नीला, हरा, पीला, नारंगी और लाल (VIBGYOR) में बँट जाता है। इस घटना को वर्ण विक्षेपण कहते हैं। ऐसा इसलिए होता है क्योंकि प्रिज्म के माध्यम से गुजरते समय प्रत्येक रंग का प्रकाश अलग-अलग कोणों पर मुड़ता है। बैंगनी रंग का प्रकाश सबसे ज़्यादा मुड़ता है क्योंकि उसकी तरंगदैर्ध्य कम होती है और माध्यम में उसकी गति सबसे कम होती है, जबकि लाल रंग का प्रकाश सबसे कम मुड़ता है क्योंकि उसकी तरंगदैर्ध्य अधिक होती है और माध्यम में उसकी गति सबसे ज़्यादा होती है। यह न्यूटन द्वारा समझाया गया था।

     

    प्रिज्म श्वेत प्रकाश बैंगनी जामुनी नीला हरा पीला नारंगी लाल

    In simple words: प्रकाश के मुड़ने (अपवर्तन) से कई चीजें होती हैं। सूरज उगने-डूबने से पहले या बाद में दिखता है, क्योंकि हवा रोशनी को मोड़ देती है। पूर्ण आंतरिक परावर्तन तब होता है जब रोशनी एक खास कोण पर मुड़कर अंदर ही रह जाती है, जैसे हीरे में चमक। वर्ण विक्षेपण तब होता है जब सफेद रोशनी प्रिज्म से गुजरकर अपने सभी रंगों में बँट जाती है।

    🎯 Exam Tip: प्रत्येक उदाहरण में "अपवर्तन" या "पूर्ण आंतरिक परावर्तन" या "वर्ण विक्षेपण" के मूल सिद्धांत को स्पष्ट करें। चित्रों का उपयोग करके इन्हें समझना और समझाना आसान हो जाता है।

     

    Question 5. मानव के नेत्र का नामांकित चित्र बनाकर इसके विभिन्न भागों को समझाओ।
    Answer: मानव नेत्र एक जटिल और अद्भुत अंग है जो हमें देखने में मदद करता है। इसके मुख्य भाग और उनके कार्य इस प्रकार हैं:

    1. श्वेत पटल (Sclera): यह आँख की बाहरी, मोटी और सफेद परत होती है। यह आँख के गोले को आकार देती है और उसे बाहरी चोटों से बचाती है।
    2. कॉर्निया (Cornea): यह श्वेत पटल का सामने का उभरा हुआ, पारदर्शी हिस्सा होता है। प्रकाश सबसे पहले इसी से होकर आँख में प्रवेश करता है।
    3. परितारिका या आइरिस (Iris): यह कॉर्निया के पीछे एक रंगीन पर्दा होता है। इसका काम पुतली के आकार को नियंत्रित करना है, जिससे आँख में जाने वाले प्रकाश की मात्रा नियंत्रित होती है।
    4. तारा या पुतली (Pupil): आइरिस के बीच में एक छोटा काला छेद होता है। यह आँख में प्रवेश करने वाले प्रकाश की मात्रा को नियंत्रित करता है- ज़्यादा रोशनी में यह सिकुड़ जाता है और कम रोशनी में फैल जाता है।
    5. जलीय द्रव (Aqueous humour): यह कॉर्निया और लेंस के बीच भरा हुआ एक पारदर्शी द्रव है, जो नेत्र को पोषण देता है।
    6. नेत्र लेंस (Eye Lens): यह एक उत्तल लेंस होता है जो आइरिस के पीछे होता है। यह अपनी फोकस दूरी को बदल सकता है (समंजन क्षमता), जिससे विभिन्न दूरियों पर रखी वस्तुओं का स्पष्ट प्रतिबिंब रेटिना पर बनता है।
    7. काचाभ द्रव (Vitreous humour): यह नेत्र लेंस और रेटिना के बीच भरा हुआ पारदर्शी, जेली जैसा पदार्थ है जो आँख के आकार को बनाए रखता है।
    8. रक्तक पटल (Choroid): यह श्वेत पटल के नीचे की परत है, जिसमें रक्त वाहिकाएँ होती हैं जो नेत्र के भागों को पोषण देती हैं। यह आँख के अंदर प्रकाश के परावर्तन को भी रोकता है।
    9. दृष्टि पटल या रेटिना (Retina): यह आँख के पीछे की प्रकाश-संवेदी परत है, जिस पर प्रकाश पड़ने पर प्रतिबिंब बनता है। इसमें लाखों प्रकाश-संवेदी कोशिकाएँ (शंकु और छड़) होती हैं जो प्रकाश को विद्युत संकेतों में बदलती हैं।
    10. प्रकाशिक तंत्रिका (Optic Nerve): ये नसें रेटिना से उत्पन्न विद्युत संकेतों को मस्तिष्क तक पहुँचाती हैं, जहाँ इन संकेतों को चित्र के रूप में समझा जाता है।

    In simple words: हमारी आँख एक कैमरे जैसी है। कॉर्निया और लेंस रोशनी को अंदर लेते हैं। पुतली रोशनी की मात्रा को कंट्रोल करती है। लेंस चीज़ों पर फोकस करता है, और रेटिना पर तस्वीर बनती है, जिसे दिमाग समझता है।

    🎯 Exam Tip: मानव नेत्र के चित्र को स्पष्ट रूप से नामांकित करें। प्रत्येक भाग का नाम और उसके मुख्य कार्य को संक्षिप्त वाक्यों में समझाएं।

     

    Question 6. मानव नेत्र की संरचना का नामांकित चित्र बनाइये और निकट दृष्टि, दूरदृष्टि एवं जरादृष्टि दोष के कारण लिखिए एवं इन दोषों को दूर करने के उपाय लिखिए।
    Answer:

    मानव नेत्र की संरचना: मानव नेत्र की संरचना का चित्र और उसके विभिन्न भागों का वर्णन प्रश्न 5 के उत्तर में दिया गया है।

    दृष्टि दोष और उनके निवारण: मानव नेत्र में कई सामान्य दृष्टि दोष हो सकते हैं, जिन्हें उपयुक्त लेंसों द्वारा ठीक किया जा सकता है:

    1. निकट दृष्टि दोष (Myopia or Nearsightedness):

    • क्या होता है: इस दोष में व्यक्ति पास की वस्तुओं को स्पष्ट देख पाता है, लेकिन दूर की वस्तुएँ धुँधली दिखाई देती हैं।
    • कारण: अभिनेत्र लेंस की वक्रता का अत्यधिक बढ़ जाना (जिससे फोकस दूरी कम हो जाती है) या नेत्रगोलक का लंबा हो जाना। इन कारणों से दूर रखी वस्तुओं का प्रतिबिंब रेटिना के सामने बन जाता है।
    • निवारण: इस दोष को ठीक करने के लिए उचित क्षमता वाले अवतल लेंस का उपयोग किया जाता है। अवतल लेंस प्रकाश किरणों को फैलाकर रेटिना पर सही प्रतिबिंब बनाने में मदद करता है।
    नेत्र लेंस रेटिना (a) निकट-दृष्टि दोषयुक्त नेत्र प्रतिबिंब (रेटिना के सामने) (b) निकट-दृष्टि दोषयुक्त नेत्र का दूर-बिंदु दूर स्थित वस्तु रेटिना अवतल लेंस (c) निकट-दृष्टि दोष का संशोधन रेटिना पर प्रतिबिंब

     

    2. दूर दृष्टि दोष (Hypermetropia or Farsightedness):
    • क्या होता है: इस दोष में व्यक्ति दूर की वस्तुओं को स्पष्ट देख पाता है, लेकिन पास की वस्तुएँ धुँधली दिखाई देती हैं। व्यक्ति का निकट बिंदु 25 cm से दूर हट जाता है।
    • कारण: अभिनेत्र लेंस की फोकस दूरी का अत्यधिक बढ़ जाना (जिससे अभिसारी क्षमता कम हो जाती है) या नेत्रगोलक का छोटा हो जाना। इन कारणों से पास रखी वस्तुओं का प्रतिबिंब रेटिना के पीछे बन जाता है।
    • निवारण: इस दोष को ठीक करने के लिए उचित क्षमता वाले उत्तल लेंस का उपयोग किया जाता है। उत्तल लेंस प्रकाश किरणों को अधिक अभिसारित करके रेटिना पर सही प्रतिबिंब बनाने में मदद करता है।
    नेत्र लेंस रेटिना (a) दीर्घ-दृष्टि दोषयुक्त नेत्र निकट स्थित वस्तु प्रतिबिंब (रेटिना के पीछे) उत्तल लेंस (c) दीर्घ-दृष्टि दोष का संशोधन रेटिना पर प्रतिबिंब

     

    3. जरा-दृष्टि दोष (Presbyopia):
    • क्या होता है: यह दोष आमतौर पर उम्र बढ़ने के साथ होता है, जिसमें व्यक्ति को निकट और दूर दोनों वस्तुओं को स्पष्ट देखने में कठिनाई होती है।
    • कारण: आँख के लेंस का लचीलापन कम हो जाता है और समंजन क्षमता घट जाती है, जिससे लेंस अपनी फोकस दूरी को ठीक से समायोजित नहीं कर पाता।
    • निवारण: इस दोष को दूर करने के लिए द्विफोकसी (Bifocal) लेंस का उपयोग किया जाता है। इन लेंसों में ऊपरी भाग अवतल होता है (दूर देखने के लिए) और निचला भाग उत्तल होता है (पास देखने के लिए)।

    4. दृष्टि वैषम्य दोष (Astigmatism) या अबिन्दुकता:

    • क्या होता है: इस दोष में व्यक्ति को समान दूरी पर रखी ऊर्ध्वाधर (vertical) और क्षैतिज (horizontal) रेखाएँ एक साथ स्पष्ट दिखाई नहीं देतीं।
    • कारण: कॉर्निया की गोलाई में अनियमितता या असमान वक्रता के कारण होता है।
    • निवारण: इस दोष को ठीक करने के लिए बेलनाकार लेंस (Cylindrical lens) का उपयोग किया जाता है, जो कॉर्निया की अनियमित वक्रता को सुधारने में मदद करता है।

    5. मोतियाबिंद (Cataract):

    • क्या होता है: यह एक स्थिति है जिसमें उम्र बढ़ने के साथ आँख का प्राकृतिक लेंस धुंधला और अपारदर्शी हो जाता है, जिससे दृष्टि कम हो जाती है। प्रकाश लेंस से परावर्तित होने लगता है, जिससे वस्तुएँ स्पष्ट दिखाई नहीं देतीं।
    • कारण: उम्र बढ़ना, मधुमेह, आँख में चोट लगना आदि।
    • निवारण: इसका इलाज सर्जरी से किया जाता है, जिसमें प्राकृतिक लेंस को हटाकर एक कृत्रिम लेंस (Intraocular lens) लगाया जाता है। इससे दृष्टि वापस सामान्य हो जाती है।

    In simple words: निकट दृष्टि दोष में दूर की चीजें धुंधली दिखती हैं, इसे अवतल लेंस से ठीक करते हैं। दूर दृष्टि दोष में पास की चीजें धुंधली दिखती हैं, इसे उत्तल लेंस से ठीक करते हैं। जरा-दृष्टि दोष में पास और दूर दोनों की चीजें धुंधली दिखती हैं, इसके लिए द्विफोकसी लेंस चाहिए। दृष्टि वैषम्य दोष में रेखाएं साफ नहीं दिखतीं, इसे बेलनाकार लेंस से ठीक करते हैं। मोतियाबिंद में लेंस धुंधला हो जाता है, इसे सर्जरी से बदलते हैं।

    🎯 Exam Tip: प्रत्येक दृष्टि दोष के लिए उसका कारण, लक्षण और निवारण का उल्लेख करें। लेंस के प्रकारों को याद रखना महत्वपूर्ण है जो प्रत्येक दोष को ठीक करते हैं।

     

    Question 7.
    (1) जब एक बिम्ब अवतल दर्पण की वक्रता केन्द्र एवं फोकस के बीच में रखा जाता है तो किरण चित्र द्वारा प्रतिबिम्ब की स्थिति दर्शाइये।
    (2) प्रकाश के अपवर्तन की परिभाषा लिखिए।
    (3) अपवर्तन के नियम लिखिए।
    Answer:

    1. जब बिंब अवतल दर्पण की वक्रता केंद्र (C) और फोकस (F) के बीच में रखा जाता है:
    इस स्थिति में, प्रतिबिंब वक्रता केंद्र (C) से परे (अनंत और वक्रता केंद्र के बीच) बनता है। प्रतिबिंब वास्तविक, उल्टा और वस्तु से बड़ा होता है।
    P F C A B बिंब A' B' प्रतिबिंब

    2. प्रकाश का अपवर्तन (Refraction of Light): जब प्रकाश की किरण एक पारदर्शी माध्यम से दूसरे पारदर्शी माध्यम में प्रवेश करती है, तो वह अपनी मूल दिशा से मुड़ जाती है। इस घटना को प्रकाश का अपवर्तन कहते हैं। यह माध्यमों में प्रकाश की चाल में अंतर के कारण होता है।

     

    3. अपवर्तन के नियम:

    • प्रथम नियम: आपतित किरण (incident ray), अपवर्तित किरण (refracted ray) और दोनों माध्यमों को अलग करने वाली सतह के आपतन बिंदु (point of incidence) पर खींचा गया अभिलंब (normal), ये तीनों एक ही तल (plane) में होते हैं।

    • द्वितीय नियम (स्नेल का नियम): प्रकाश के किसी निश्चित रंग और निश्चित माध्यमों के युग्म के लिए, आपतन कोण की ज्या (\(\sin i\)) और अपवर्तन कोण की ज्या (\(\sin r\)) का अनुपात हमेशा स्थिर रहता है। इसे अपवर्तनांक (\(\mu\)) कहते हैं।
      \(\frac{\sin i}{\sin r} = \text{नियतांक}\)
      \(\implies \frac{\sin i}{\sin r} = \mu\)

    In simple words: 1. अवतल दर्पण में जब चीज वक्रता केंद्र और फोकस के बीच होती है, तो उसकी उल्टी और बड़ी तस्वीर वक्रता केंद्र से दूर बनती है। 2. अपवर्तन का मतलब है जब रोशनी एक चीज से दूसरी चीज में जाते हुए मुड़ जाती है। 3. अपवर्तन के दो नियम हैं: पहला, आने वाली रोशनी, मुड़ी हुई रोशनी और बीच की सीधी रेखा एक ही जगह होती है; दूसरा, रोशनी के मुड़ने का हिसाब हमेशा बराबर रहता है।

    🎯 Exam Tip: किरण चित्र बनाते समय वस्तुओं और प्रतिबिंबों की स्थिति और आकार को स्पष्ट रूप से दर्शाएं। अपवर्तन की परिभाषा और दोनों नियमों को सही ढंग से याद रखना महत्वपूर्ण है।

     

    Question 8.
    (अ) सूर्योदय से कुछ समय पहले एवं सूर्यास्त के कुछ समय पश्चात् तक सूर्य दिखाई देता है, कारण स्पष्ट कीजिए।
    (ब) श्वेत प्रकाश के वर्ण विक्षेपण से क्या अभिप्राय है?
    (स) प्रकाश के पूर्ण आन्तरिक परावर्तन से क्या तात्पर्य है?
    (द) एक अवतल लेंस से प्रतिबिम्ब का बनना, दर्शाने का किरण चित्र बनाइये, जबकि बिम्ब अनन्त एवं इसके प्रकाशिक केन्द्र 'O' के मध्य स्थित हो?
    Answer:

    (अ) सूर्योदय से पहले और सूर्यास्त के बाद सूर्य क्यों दिखाई देता है:
    हमें सूर्योदय उसके वास्तविक समय से लगभग 2 मिनट पहले और सूर्यास्त उसके वास्तविक समय से लगभग 2 मिनट बाद तक दिखाई देता है। इसका कारण वायुमंडलीय अपवर्तन है। जब सूर्य क्षितिज के पास होता है, तो सूर्य से आने वाली प्रकाश किरणें पृथ्वी के वायुमंडल की विभिन्न घनत्व वाली परतों से होकर गुजरती हैं। ये परतें सघन माध्यम का काम करती हैं, जिससे प्रकाश किरणें लगातार अभिलंब की ओर मुड़ती हैं। इस अपवर्तन के कारण, हमें सूर्य उसकी वास्तविक स्थिति से थोड़ा ऊपर उठा हुआ दिखाई देता है, भले ही वह अभी क्षितिज से नीचे हो। यह घटना हमारी धरती के वातावरण में प्रकाश के मुड़ने के कारण होती है।

    (ब) श्वेत प्रकाश के वर्ण विक्षेपण से क्या अभिप्राय है:
    श्वेत प्रकाश का वर्ण विक्षेपण वह घटना है जिसमें श्वेत प्रकाश (जैसे सूर्य का प्रकाश) किसी प्रिज्म से गुजरने पर अपने सात घटक रंगों (बैंगनी, जामुनी, नीला, हरा, पीला, नारंगी और लाल) में बँट जाता है। ऐसा इसलिए होता है क्योंकि प्रत्येक रंग का प्रकाश प्रिज्म में अलग-अलग गति से चलता है और इसलिए अलग-अलग कोणों पर मुड़ता है। बैंगनी रंग सबसे ज़्यादा मुड़ता है और लाल रंग सबसे कम। इस प्रकार, श्वेत प्रकाश का अपने घटकों में बँटना ही वर्ण विक्षेपण कहलाता है।

    (स) प्रकाश के पूर्ण आंतरिक परावर्तन से क्या तात्पर्य है:
    पूर्ण आंतरिक परावर्तन वह घटना है जिसमें प्रकाश की किरण सघन माध्यम (जैसे पानी) से विरल माध्यम (जैसे हवा) में जाने की कोशिश करती है, लेकिन एक निश्चित आपतन कोण (क्रांतिक कोण) से अधिक कोण पर गिरने पर वह विरल माध्यम में प्रवेश करने की बजाय पूरी तरह से उसी सघन माध्यम में वापस परावर्तित हो जाती है। इस घटना में प्रकाश का कोई भी हिस्सा दूसरे माध्यम में नहीं जाता है। यह ऑप्टिकल फाइबर और हीरे की चमक में देखा जाता है, जहाँ प्रकाश पूरी तरह से अंदर ही परावर्तित होता रहता है।

    (द) अवतल लेंस से प्रतिबिंब का बनना, जब बिंब अनंत और प्रकाशिक केंद्र 'O' के मध्य स्थित हो:
    जब एक बिंब अवतल लेंस के सामने अनंत और प्रकाशिक केंद्र 'O' के बीच किसी भी दूरी पर रखा जाता है, तो प्रतिबिंब हमेशा लेंस के प्रकाशिक केंद्र 'O' और फोकस 'F1' के बीच बनता है। प्रतिबिंब आभासी, सीधा और बिंब से छोटा होता है। जैसे-जैसे बिंब को लेंस के पास लाया जाता है, प्रतिबिंब लेंस से दूर हटता जाता है लेकिन हमेशा प्रकाशिक केंद्र 'O' और फोकस 'F1' के बीच ही रहता है, और उसका आकार भी बढ़ता जाता है, लेकिन हमेशा बिंब से छोटा ही रहता है।

    O F1 F2 2F1 2F2 A B बिंब A' B' प्रतिबिंब

    In simple words: सूर्योदय से पहले और सूर्यास्त के बाद सूरज अपवर्तन के कारण दिखता है। वर्ण विक्षेपण में सफेद रोशनी सात रंगों में बँट जाती है। पूर्ण आंतरिक परावर्तन में रोशनी अंदर ही परावर्तित होती है। अवतल लेंस में, बिंब कहीं भी हो, प्रतिबिंब हमेशा आभासी, सीधा और छोटा बनता है।

    🎯 Exam Tip: यह एक बहु-भाग प्रश्न है, इसलिए प्रत्येक भाग का उत्तर स्पष्ट और संक्षिप्त रखें। किरण चित्र में बिंब और प्रतिबिंब की सही स्थिति और प्रकृति को दर्शाना महत्वपूर्ण है।

     

    Question 9.
    (अ) पानी से भरे काँच के पात्र में आंशिक डूबी हुई कोई पेंसिल तिरछी दिखाई देती है, क्यों?
    (ब) लेंस की क्षमता से क्या अभिप्राय है?
    (स) मानव नेत्र में दृष्टि वैषम्य दोष क्या है?
    (द) एक अवतल दर्पण से प्रतिबिम्ब का बनना, दर्शाने का किरण चित्र बनाइये, जबकि बिम्ब इसके वक्रता केन्द्र 'C' व फोकस 'F' के मध्य स्थित हो।
    Answer:

    (अ) पानी से भरे काँच के पात्र में आंशिक डूबी हुई पेंसिल तिरछी क्यों दिखाई देती है:
    पानी में आंशिक रूप से डूबी हुई पेंसिल का तिरछा दिखाई देना प्रकाश के अपवर्तन का एक उदाहरण है। जब प्रकाश की किरणें पेंसिल के पानी में डूबे हुए हिस्से से हमारी आँखों तक पहुँचती हैं, तो वे पानी (सघन माध्यम) से हवा (विरल माध्यम) में आते समय अपनी दिशा बदल लेती हैं। हमारी आँखें इन मुड़ी हुई किरणों को सीधी रेखा में पीछे की ओर देखती हैं, जिससे पेंसिल का डूबा हुआ हिस्सा उसके वास्तविक स्थान से थोड़ा ऊपर और किनारे पर खिसका हुआ दिखाई देता है। इसी भ्रम के कारण पेंसिल मुड़ी हुई या टूटी हुई प्रतीत होती है।

    (ब) लेंस की क्षमता से क्या अभिप्राय है:
    लेंस की क्षमता (Power of a Lens) उसकी प्रकाश किरणों को अभिसारित (एकत्रित) करने या अपसारित (फैलाने) करने की मात्रा को दर्शाती है। इसे 'P' से व्यक्त किया जाता है। लेंस की क्षमता उसकी फोकस दूरी (f) के व्युत्क्रम के बराबर होती है, बशर्ते फोकस दूरी मीटर में हो।
    सूत्र: \( P = \frac{1}{f} \)
    लेंस की क्षमता का SI मात्रक 'डायोप्टर' (Dioptre, D) है। यदि फोकस दूरी मीटर में है, तो क्षमता डायोप्टर में होती है। उत्तल लेंस की क्षमता धनात्मक होती है जबकि अवतल लेंस की क्षमता ऋणात्मक होती है।

    (स) मानव नेत्र में दृष्टि वैषम्य दोष क्या है:
    दृष्टि वैषम्य दोष (Astigmatism) या अबिन्दुकता एक दृष्टि दोष है जो कॉर्निया (आँख के सामने का पारदर्शी हिस्सा) की गोलाई में अनियमितता के कारण होता है। इस दोष में कॉर्निया की वक्रता सभी दिशाओं में एक समान नहीं होती। परिणामस्वरूप, व्यक्ति को एक ही समय में समान दूरी पर रखी ऊर्ध्वाधर और क्षैतिज रेखाएँ स्पष्ट दिखाई नहीं देतीं। कुछ रेखाएँ स्पष्ट दिख सकती हैं जबकि अन्य धुँधली। इस दोष को दूर करने के लिए बेलनाकार लेंस (Cylindrical lens) का उपयोग किया जाता है।

    (द) अवतल दर्पण से प्रतिबिंब का बनना, जब बिंब वक्रता केंद्र 'C' व फोकस 'F' के मध्य स्थित हो:
    जब एक बिंब अवतल दर्पण के वक्रता केंद्र (C) और फोकस (F) के बीच रखा जाता है, तो प्रतिबिंब वक्रता केंद्र (C) से परे (अनंत और वक्रता केंद्र के बीच) बनता है। इस प्रतिबिंब की प्रकृति वास्तविक (Real), उल्टा (Inverted) और बिंब से बड़ा (Magnified) होती है।

    P F C A B बिंब A' B' प्रतिबिंब

    In simple words: (अ) पेंसिल पानी में मुड़ी दिखती है क्योंकि प्रकाश मुड़ता है। (ब) लेंस की क्षमता बताती है कि वह रोशनी को कितना मोड़ सकता है। (स) दृष्टि वैषम्य दोष में रेखाएं धुंधली दिखती हैं, जो कॉर्निया के कारण होता है। (द) जब चीज अवतल दर्पण के C और F के बीच हो, तो उसकी बड़ी, उल्टी और असली तस्वीर C से दूर बनती है।

    🎯 Exam Tip: यह एक बहु-भाग प्रश्न है, इसलिए प्रत्येक भाग का उत्तर स्पष्ट और संक्षिप्त रखें। किरण चित्र में बिंब और प्रतिबिंब की सही स्थिति और प्रकृति को दर्शाना महत्वपूर्ण है। लेंस की क्षमता के सूत्र और इकाई को याद करें।

    आंकिक प्रश्न

     

    Question 1. 5 cm लंबा कोई बिंब 10 cm फोकस दूरी के किसी अभिसारी लेंस से 25 cm दूरी पर रखा जाता है। प्रकाश किरण-आरेख खींचकर बनने वाले प्रतिबिंब की स्थिति, साइज तथा प्रकृति ज्ञात कीजिए।
    Answer:
    प्रश्न के अनुसार, दिए गए मान इस प्रकार हैं:
    बिंब की दूरी \( u = -25 \) cm (हमेशा नकारात्मक क्योंकि बिंब लेंस के सामने रखा होता है)
    फोकस दूरी \( f = +10 \) cm (अभिसारी लेंस, यानी उत्तल लेंस, के लिए फोकस दूरी धनात्मक होती है)
    बिंब की ऊँचाई \( h = 5 \) cm
    हमें प्रतिबिंब की दूरी \( v \) और प्रतिबिंब की ऊँचाई \( h' \) ज्ञात करनी है।
    लेंस सूत्र का उपयोग करते हुए:
    \( \frac{1}{v} - \frac{1}{u} = \frac{1}{f} \)
    अब, ज्ञात मानों को सूत्र में रखेंगे:
    \( \frac{1}{v} - \frac{1}{-25} = \frac{1}{10} \)
    \( \frac{1}{v} + \frac{1}{25} = \frac{1}{10} \)
    \( \frac{1}{v} = \frac{1}{10} - \frac{1}{25} \)
    \( \frac{1}{v} = \frac{5 - 2}{50} \)
    \( \frac{1}{v} = \frac{3}{50} \)
    \( v = \frac{50}{3} \) cm
    आवर्धन \( m = \frac{h'}{h} = \frac{v}{u} \)
    \( \frac{h'}{5} = \frac{50/3}{-25} \)
    \( \frac{h'}{5} = \frac{50}{3 \times (-25)} \)
    \( \frac{h'}{5} = \frac{2}{-3} \)
    \( h' = \frac{2 \times 5}{-3} \)
    \( h' = \frac{10}{-3} \) cm
    \( h' = -3.33 \) cm
    अतः प्रतिबिंब लेंस से \( \frac{50}{3} \) cm दूर दायीं ओर बनेगा, जिसका आकार \( \frac{10}{3} \) cm होगा। प्रतिबिंब वास्तविक, उल्टा और बिंब से छोटा होगा। उत्तल लेंस द्वारा एक वस्तु का वास्तविक और उलटा प्रतिबिंब बनता है जब वस्तु फोकस से दूर रखी जाती है।
    In simple words: लेंस से 25 cm दूर रखी 5 cm ऊंची वस्तु का प्रतिबिंब लेंस के दूसरी तरफ 16.67 cm की दूरी पर बनेगा. यह प्रतिबिंब 3.33 cm ऊंचा, उल्टा और वास्तविक होगा.

    🎯 Exam Tip: किरण आरेख बनाते समय, हमेशा सुनिश्चित करें कि वस्तु, फोकस बिंदु और वक्रता केंद्र को सही पैमाने पर दर्शाया गया हो ताकि प्रतिबिंब की स्थिति और प्रकृति सटीक दिखे.

     

    Question 2. 5D क्षमता के अभिसारी लेंस को 3D क्षमता के अपसारी लेंस से सटाकर रखा गया है। संयुक्त लेंस की फोकस दूरी का मान ज्ञात कीजिये।
    Answer:
    अभिसारी लेंस की क्षमता \( P_1 = +5 \) D (अभिसारी लेंस की क्षमता धनात्मक होती है)
    अपसारी लेंस की क्षमता \( P_2 = -3 \) D (अपसारी लेंस की क्षमता ऋणात्मक होती है)
    संयुक्त लेंस की कुल क्षमता \( P = P_1 + P_2 \)
    \( P = +5 \) D \( - 3 \) D
    \( P = +2 \) D
    संयुक्त लेंस की फोकस दूरी \( f = \frac{1}{P} \)
    \( f = \frac{1}{2} \) मीटर
    \( f = 0.5 \) मीटर
    \( f = 0.5 \times 100 \) cm
    \( f = 50 \) cm
    चूंकि संयुक्त क्षमता धनात्मक है, संयुक्त लेंस उत्तल लेंस की तरह काम करेगा और उसकी फोकस दूरी 50 cm होगी।
    In simple words: जब एक शक्तिशाली जोड़ने वाले लेंस और एक कमजोर फैलाने वाले लेंस को एक साथ रखा जाता है, तो वे मिलकर एक मध्यम शक्ति वाला जोड़ने वाला लेंस बनाते हैं, जिसकी फोकस दूरी 50 cm होती है.

    🎯 Exam Tip: लेंस की क्षमता की गणना करते समय, हमेशा अभिसारी लेंस के लिए धनात्मक क्षमता और अपसारी लेंस के लिए ऋणात्मक क्षमता का उपयोग करें. यह चिन्ह परिपाटी बहुत महत्वपूर्ण है.

     

    Question 3. किसी चश्मे को लेंस दूर से आने वाले प्रकाश को 25 cm. दूरी पर स्थित दीवार पर प्रक्षेपित करता है तो लेंस की क्षमता ज्ञात कीजिए।
    Answer:
    चूंकि लेंस दूर से आने वाले प्रकाश को 25 cm की दूरी पर स्थित दीवार पर प्रक्षेपित करता है, इसका अर्थ है कि प्रतिबिंब दीवार पर बन रहा है।
    अतः, प्रतिबिंब की दूरी \( v = +25 \) cm (दीवार पर वास्तविक प्रतिबिंब बन रहा है, इसलिए धनात्मक)
    दूर से आने वाले प्रकाश के लिए, वस्तु अनंत पर होती है।
    अतः, वस्तु की दूरी \( u = -\infty \)
    लेंस सूत्र का उपयोग करते हुए:
    \( \frac{1}{f} = \frac{1}{v} - \frac{1}{u} \)
    मानों को सूत्र में रखने पर:
    \( \frac{1}{f} = \frac{1}{25} - \frac{1}{-\infty} \)
    \( \frac{1}{f} = \frac{1}{25} - 0 \)
    \( \frac{1}{f} = \frac{1}{25} \)
    \( f = 25 \) cm
    लेंस की क्षमता \( P = \frac{1}{f \text{ (मीटर में)}} \)
    पहले फोकस दूरी को मीटर में बदलें: \( f = 25 \) cm \( = 0.25 \) m
    \( P = \frac{1}{0.25} \)
    \( P = +4 \) डाइऑप्टर
    चूंकि क्षमता धनात्मक है, यह एक उत्तल लेंस है। यह लेंस प्रकाश को एक बिंदु पर केंद्रित करने में मदद करता है।
    In simple words: चश्मे का लेंस दूर से आने वाली रोशनी को 25 cm दूर दीवार पर फोकस करता है. इसका मतलब लेंस की फोकस दूरी 25 cm है, और उसकी क्षमता +4 डाइऑप्टर है, जिसका अर्थ है यह एक उत्तल लेंस है.

    🎯 Exam Tip: जब प्रकाश अनंत से आता है, तो वस्तु की दूरी को हमेशा अनंत मानें. यदि प्रतिबिंब किसी स्क्रीन पर बनता है, तो वह वास्तविक होता है और उसकी दूरी धनात्मक होती है.

     

    Question 4. काँच के सापेक्ष अपवर्तनांक \( \frac{3}{2} \) है तथा वायु के सापेक्ष जल का अपवर्तनांक \( \frac{4}{3} \) है। यदि वायु में प्रकाश की चाल \( 3 \times 10^8 \) m/s है, तो (a) काँच में (b) जल में, प्रकाश की चाल ज्ञात कीजिए।
    Answer:
    दिया गया है:
    काँच का वायु के सापेक्ष अपवर्तनांक \( \mu_g = \frac{3}{2} \)
    जल का वायु के सापेक्ष अपवर्तनांक \( \mu_w = \frac{4}{3} \)
    वायु में प्रकाश की चाल \( c = 3 \times 10^8 \) m/s

    हम जानते हैं कि अपवर्तनांक \( \mu = \frac{\text{वायु में प्रकाश की चाल}}{\text{माध्यम में प्रकाश की चाल}} \)
    \( \mu = \frac{c}{v} \), जहाँ \( v \) माध्यम में प्रकाश की चाल है।

    (a) काँच में प्रकाश की चाल ज्ञात करने के लिए:
    \( \mu_g = \frac{c}{v_g} \)
    \( \frac{3}{2} = \frac{3 \times 10^8}{v_g} \)
    \( v_g = \frac{2 \times (3 \times 10^8)}{3} \)
    \( v_g = 2 \times 10^8 \) m/s

    (b) जल में प्रकाश की चाल ज्ञात करने के लिए:
    \( \mu_w = \frac{c}{v_w} \)
    \( \frac{4}{3} = \frac{3 \times 10^8}{v_w} \)
    \( v_w = \frac{3 \times (3 \times 10^8)}{4} \)
    \( v_w = \frac{9 \times 10^8}{4} \)
    \( v_w = 2.25 \times 10^8 \) m/s
    काँच और जल दोनों में प्रकाश की चाल वायु की तुलना में कम होती है।
    In simple words: हमें हवा में रोशनी की गति और कांच व पानी के अपवर्तनांक दिए गए हैं. अपवर्तनांक का उपयोग करके हम गणना कर सकते हैं कि रोशनी कांच में \( 2 \times 10^8 \) m/s और पानी में \( 2.25 \times 10^8 \) m/s की गति से चलती है.

    🎯 Exam Tip: प्रकाश की चाल हमेशा विरल माध्यम (जैसे वायु) में सबसे अधिक होती है और सघन माध्यम (जैसे कांच या जल) में कम होती है. अपवर्तनांक जितना अधिक होगा, प्रकाश की चाल उतनी ही कम होगी.

     

    Question 5. सिद्ध कीजिये कि दर्पण में प्रतिबिम्ब दर्पण के पीछे उतनी ही दूरी पर बनता है जितनी दूरी पर बिम्ब दर्पण के सामने है।
    Answer:
    समतल दर्पण में प्रतिबिंब निर्माण की ज्यामिति को समझने के लिए, हम एक बिंब P लेते हैं और एक परावर्तक तल MM' पर दो किरणें PO और PO' आपतित करते हैं। ये किरणें क्रमशः OQ और O'Q' दिशा में परावर्तित होती हैं। जब इन परावर्तित किरणों को पीछे की ओर बढ़ाया जाता है, तो वे एक बिंदु P' पर मिलती हुई प्रतीत होती हैं, जो बिंब P का आभासी प्रतिबिंब होता है। ON और O'N' दर्पण पर अभिलंब हैं।

    परावर्तन के नियम के अनुसार, आपतन कोण हमेशा परावर्तन कोण के बराबर होता है: \( \angle i = \angle r \).
    चित्र के अनुसार, त्रिभुज POO' और P'OO' पर विचार करें।
    भुजा OO' दोनों त्रिभुजों में उभयनिष्ठ है।
    परावर्तन के नियम से: \( \angle1 = \angle3 \).
    इसके अलावा, \( \angle1 = \angle2 \) (एकांतर कोण) और \( \angle3 = \angle4 \) (संगत कोण)।
    इसलिए, \( \angle2 = \angle4 = \angle9 \).
    हम देख सकते हैं कि \( \angle POO' = \angle P'OO' \) (क्योंकि परावर्तक किरण और अभिलंब के बीच का कोण बराबर होता है, और अभिलंब दर्पण के लंबवत होता है)।
    इसी प्रकार, \( \angle PO'O = \angle P'O'O \).
    अतः, त्रिभुज POO' और त्रिभुज P'OO' सर्वांगसम हैं (कोण-भुजा-कोण नियम से)।
    इसलिए, corresponding parts of congruent triangles (CPCTC) के अनुसार, PO = P'O. इसका मतलब है कि बिंब P दर्पण से जितनी दूरी पर सामने है, उसका प्रतिबिंब P' दर्पण के पीछे उतनी ही दूरी पर बनता है। इससे यह भी सिद्ध होता है कि सरल रेखा PP' दर्पण के समतल के अभिलंब है।
    In simple words: जब कोई वस्तु समतल दर्पण के सामने रखी जाती है, तो उसका प्रतिबिंब दर्पण के ठीक पीछे उतनी ही दूरी पर बनता है, जितनी दूरी पर वस्तु सामने होती है. यह इसलिए होता है क्योंकि प्रकाश की किरणें जिस कोण से दर्पण पर पड़ती हैं, उसी कोण से वापस परावर्तित होती हैं.

    🎯 Exam Tip: समतल दर्पण में प्रतिबिंब हमेशा आभासी, सीधा और वस्तु के बराबर आकार का बनता है. किरण आरेख बनाते समय परावर्तन के नियमों का पालन करना महत्वपूर्ण है.

     

    Question 6. सिद्ध कीजिये कि छोटे द्वारक के अवतल दर्पण की वक्रता त्रिज्या फोकस दूरी से दो गुनी होती है।
    Answer:
    एक अवतल दर्पण में प्रकाश के परावर्तन को समझने के लिए, एक किरण RP को मुख्य अक्ष के समानांतर दर्पण पर आपतित करते हैं। यह किरण दर्पण से परावर्तन के बाद PQ दिशा में गमन करती है और मुख्य अक्ष को बिंदु F पर काटती है, जो कि दर्पण का फोकस बिंदु है। CP रेखा बिंदु P पर अभिलंब है, और CP अवतल दर्पण की वक्रता त्रिज्या है।

    परावर्तन के नियम के अनुसार, आपतन कोण (∠RPC) परावर्तन कोण (∠CPF) के बराबर होता है।
    अतः, ∠RPC = ∠CPF (1)
    चूंकि RP मुख्य अक्ष के समानांतर है, इसलिए ∠RPC = ∠PCF (एकांतर कोण)। (2)
    समीकरण (1) और (2) से, ∠PCF = ∠CPF. (3)
    अब, त्रिभुज CPF में, चूंकि ∠PCF = ∠CPF, यह एक समद्विबाहु त्रिभुज है।
    इसलिए, PF = FC (समान कोणों के सामने की भुजाएँ बराबर होती हैं)।

    यदि दर्पण का द्वारक छोटा हो, तो बिंदु P दर्पण के ध्रुव O के बहुत करीब होगा। इस स्थिति में, PF लगभग OF के बराबर होगा।
    अतः, OF = FC.
    हम जानते हैं कि मुख्य अक्ष पर O से C तक की दूरी OC = OF + FC.
    चूंकि OF = FC, हम लिख सकते हैं, OC = OF + OF = 2OF.
    वक्रता त्रिज्या R = OC और फोकस दूरी f = OF.
    इसलिए, R = 2f.
    यह सिद्ध करता है कि अवतल दर्पण की वक्रता त्रिज्या उसकी फोकस दूरी की दोगुनी होती है, और फोकस बिंदु वक्रता केंद्र और ध्रुव के ठीक बीच में स्थित होता है।
    In simple words: अवतल दर्पण के लिए, फोकस दूरी वक्रता त्रिज्या की आधी होती है. इसका मतलब है कि वक्रता केंद्र से ध्रुव तक की दूरी (वक्रता त्रिज्या) फोकस बिंदु से ध्रुव तक की दूरी (फोकस दूरी) से दोगुनी होती है.

    🎯 Exam Tip: यह संबंध (R = 2f) केवल छोटे द्वारक वाले गोलीय दर्पणों के लिए मान्य है. बड़े द्वारक वाले दर्पणों में यह संबंध थोड़ा भिन्न होता है, जिसके परिणामस्वरूप गोलाकार विपथन होता है.

     

    Question 7. एक व्यक्ति का चेहरा शेविंग दर्पण से 20 cm. दूर है, यदि शेविंग दर्पण की फोकस दूरी 80 cm. है तो बनने वाले प्रतिबिम्ब की दर्पण से दूरी एवं आवर्धनता ज्ञात कीजिये।
    Answer:
    दिया गया है:
    शेविंग दर्पण अवतल दर्पण होता है, इसलिए इसकी फोकस दूरी ऋणात्मक ली जाती है।
    फोकस दूरी \( f = -80 \) cm
    बिंब की दूरी \( u = -20 \) cm (बिंब दर्पण के सामने होता है, इसलिए हमेशा ऋणात्मक)
    हमें प्रतिबिंब की दूरी \( v \) और आवर्धन \( m \) ज्ञात करना है।

    दर्पण सूत्र का उपयोग करते हुए:
    \( \frac{1}{v} + \frac{1}{u} = \frac{1}{f} \)
    मानों को सूत्र में रखने पर:
    \( \frac{1}{v} + \frac{1}{-20} = \frac{1}{-80} \)
    \( \frac{1}{v} - \frac{1}{20} = -\frac{1}{80} \)
    \( \frac{1}{v} = \frac{1}{20} - \frac{1}{80} \)
    \( \frac{1}{v} = \frac{4 - 1}{80} \)
    \( \frac{1}{v} = \frac{3}{80} \)
    \( v = \frac{80}{3} \) cm
    \( v = +26.67 \) cm

    चूंकि \( v \) धनात्मक है, प्रतिबिंब दर्पण के पीछे 26.67 cm की दूरी पर बनेगा। यह आभासी होगा।
    आवर्धन \( m = -\frac{v}{u} \)
    \( m = -\frac{80/3}{-20} \)
    \( m = -\frac{80}{3 \times (-20)} \)
    \( m = -\frac{4}{-3} \)
    \( m = +\frac{4}{3} \)
    \( m = +1.33 \)
    आवर्धन धनात्मक है, इसलिए प्रतिबिंब आभासी और सीधा होगा। आवर्धन 1.33 है, जिसका अर्थ है कि प्रतिबिंब बिंब से 1.33 गुना बड़ा होगा। शेविंग दर्पण में चेहरे का बड़ा और सीधा प्रतिबिंब देखने के लिए ऐसा होता है।
    In simple words: एक शेविंग दर्पण में, जब चेहरा 20 cm दूर होता है और दर्पण की फोकस दूरी 80 cm होती है, तो चेहरा दर्पण के पीछे 26.67 cm पर 1.33 गुना बड़ा और सीधा दिखाई देगा.

    🎯 Exam Tip: अवतल दर्पण में, जब वस्तु फोकस और ध्रुव के बीच रखी जाती है, तो प्रतिबिंब आभासी, सीधा और बड़ा बनता है. शेविंग दर्पण इसी सिद्धांत पर काम करते हैं.

     

    Question 8. एक उत्तल दर्पण की फोकस दूरी 30 cm. है। यदि एक बिम्ब का आभासी प्रतिबिम्ब दर्पण से 20 cm. दूरी पर बनता है तो दर्पण से बिम्ब की दूरी ज्ञात कीजिए।
    Answer:
    दिया गया है:
    उत्तल दर्पण की फोकस दूरी \( f = +30 \) cm (उत्तल दर्पण की फोकस दूरी हमेशा धनात्मक होती है)
    आभासी प्रतिबिंब की दूरी \( v = +20 \) cm (उत्तल दर्पण में आभासी प्रतिबिंब हमेशा दर्पण के पीछे बनता है, इसलिए धनात्मक)
    हमें बिंब की दूरी \( u \) ज्ञात करनी है।

    दर्पण सूत्र का उपयोग करते हुए:
    \( \frac{1}{v} + \frac{1}{u} = \frac{1}{f} \)
    मानों को सूत्र में रखने पर:
    \( \frac{1}{20} + \frac{1}{u} = \frac{1}{30} \)
    \( \frac{1}{u} = \frac{1}{30} - \frac{1}{20} \)
    \( \frac{1}{u} = \frac{2 - 3}{60} \)
    \( \frac{1}{u} = -\frac{1}{60} \)
    \( u = -60 \) cm
    चूंकि \( u \) ऋणात्मक है, बिंब दर्पण से 60 cm की दूरी पर बाईं ओर रखा गया है। उत्तल दर्पण हमेशा आभासी, सीधा और छोटा प्रतिबिंब बनाता है, भले ही वस्तु कहीं भी रखी हो।
    In simple words: एक उत्तल दर्पण जिसकी फोकस दूरी 30 cm है, एक आभासी प्रतिबिंब 20 cm दूर बनाता है. इसका मतलब है कि वस्तु दर्पण से 60 cm दूर रखी गई थी.

    🎯 Exam Tip: उत्तल दर्पण के लिए, फोकस दूरी \( f \) और प्रतिबिंब दूरी \( v \) हमेशा धनात्मक होती है, जबकि वस्तु दूरी \( u \) हमेशा ऋणात्मक होती है, क्योंकि वस्तु हमेशा दर्पण के सामने (बाईं ओर) रखी जाती है.

     

    Question 9. एक मोटर साइकिल के पार्श्व में लगे दर्पण से एक कार 4 मीटर की दूरी पर है। यदि दर्पण की फोकस दूरी 1 मीटर हो तो दर्पण में बिम्ब की स्थिति एवं प्रकृति ज्ञात कीजिये।
    Answer:
    मोटर साइकिल में पार्श्व दृश्य के लिए उत्तल दर्पण का उपयोग किया जाता है।
    इसलिए, फोकस दूरी \( f = +1 \) मीटर (उत्तल दर्पण की फोकस दूरी धनात्मक होती है)
    कार (बिंब) की दूरी \( u = -4 \) मीटर (बिंब हमेशा दर्पण के सामने होता है, इसलिए ऋणात्मक)
    हमें प्रतिबिंब की स्थिति \( v \) और आवर्धन \( m \) ज्ञात करना है।

    दर्पण सूत्र का उपयोग करते हुए:
    \( \frac{1}{v} + \frac{1}{u} = \frac{1}{f} \)
    मानों को सूत्र में रखने पर:
    \( \frac{1}{v} + \frac{1}{-4} = \frac{1}{1} \)
    \( \frac{1}{v} - \frac{1}{4} = 1 \)
    \( \frac{1}{v} = 1 + \frac{1}{4} \)
    \( \frac{1}{v} = \frac{4+1}{4} \)
    \( \frac{1}{v} = \frac{5}{4} \)
    \( v = \frac{4}{5} \) मीटर
    \( v = +0.8 \) मीटर
    चूंकि \( v \) धनात्मक है, प्रतिबिंब दर्पण के पीछे 0.8 मीटर की दूरी पर बनेगा।

    आवर्धन \( m = -\frac{v}{u} \)
    \( m = -\frac{0.8}{-4} \)
    \( m = +0.2 \)
    आवर्धन धनात्मक है, इसलिए प्रतिबिंब आभासी और सीधा होगा। आवर्धन 0.2 है, जिसका अर्थ है कि प्रतिबिंब बिंब का पाँचवाँ हिस्सा (या 0.2 गुना) होगा। यह छोटा प्रतिबिंब चालक को पीछे का व्यापक दृश्य देखने में मदद करता है।
    In simple words: मोटर साइकिल के साइड मिरर में, पीछे 4 मीटर दूर कार का प्रतिबिंब दर्पण के पीछे 0.8 मीटर पर दिखाई देगा. यह प्रतिबिंब सीधा, आभासी और कार के आकार का 0.2 गुना (बहुत छोटा) होगा.

    🎯 Exam Tip: उत्तल दर्पण हमेशा आभासी, सीधा और छोटा प्रतिबिंब बनाता है. यही कारण है कि इनका उपयोग वाहनों में पार्श्व-दृश्य दर्पणों के रूप में किया जाता है, क्योंकि ये चालक को पीछे का एक बड़ा क्षेत्र देखने में मदद करते हैं.

     

    Question 10. एक उत्तल दर्पण से 25 सेमी. दूर रखी वस्तु का प्रतिबिम्ब वस्तु की लम्बाई का आधा बनता है। दर्पण की फोकस दूरी ज्ञात कीजिए।
    Answer:
    दिया गया है:
    उत्तल दर्पण में बिंब की दूरी \( u = -25 \) cm (बिंब हमेशा दर्पण के सामने होता है, इसलिए ऋणात्मक)
    प्रतिबिंब वस्तु की लम्बाई का आधा बनता है, इसलिए आवर्धन \( m = +\frac{1}{2} \) (उत्तल दर्पण हमेशा सीधा प्रतिबिंब बनाता है, इसलिए आवर्धन धनात्मक होता है)।
    हमें दर्पण की फोकस दूरी \( f \) ज्ञात करनी है।

    आवर्धन सूत्र का उपयोग करते हुए:
    \( m = -\frac{v}{u} \)
    \( +\frac{1}{2} = -\frac{v}{-25} \)
    \( \frac{1}{2} = \frac{v}{25} \)
    \( v = \frac{25}{2} \) cm
    \( v = +12.5 \) cm

    अब, दर्पण सूत्र का उपयोग करते हुए:
    \( \frac{1}{f} = \frac{1}{v} + \frac{1}{u} \)
    मानों को सूत्र में रखने पर:
    \( \frac{1}{f} = \frac{1}{12.5} + \frac{1}{-25} \)
    \( \frac{1}{f} = \frac{1}{12.5} - \frac{1}{25} \)
    \( \frac{1}{f} = \frac{2}{25} - \frac{1}{25} \)
    \( \frac{1}{f} = \frac{1}{25} \)
    \( f = +25 \) cm
    उत्तल दर्पण की फोकस दूरी 25 cm है। यह धनात्मक फोकस दूरी उत्तल दर्पण की प्रकृति के अनुरूप है।
    In simple words: जब एक वस्तु को उत्तल दर्पण से 25 cm दूर रखा जाता है और उसका प्रतिबिंब वस्तु का आधा बनता है, तो दर्पण की फोकस दूरी 25 cm होगी. उत्तल दर्पण हमेशा वस्तु से छोटा, सीधा और आभासी प्रतिबिंब बनाता है.

    🎯 Exam Tip: उत्तल दर्पण के लिए आवर्धन हमेशा 0 से +1 के बीच होता है, जो यह दर्शाता है कि प्रतिबिंब सीधा, आभासी और वस्तु से छोटा है.

     

    Question 11. एक मोमबत्ती तथा पर्दे के बीच की दूरी 90 सेमी. है। इसके मध्य 20 सेमी. फोकस दूरी वाला उत्तल लेंस कहाँ रखा जाये कि मोमबत्ती का वास्तविक, उल्टा प्रतिबिम्ब पर्दे पर बने?
    Answer:
    दिया गया है:
    मोमबत्ती (बिंब) और पर्दे (प्रतिबिंब) के बीच की कुल दूरी \( D = 90 \) cm
    लेंस की फोकस दूरी \( f = +20 \) cm (उत्तल लेंस की फोकस दूरी धनात्मक होती है)
    हमें लेंस की स्थिति ज्ञात करनी है ताकि वास्तविक और उल्टा प्रतिबिंब बने।

    माना बिंब को लेंस से \( x \) दूरी पर रखा गया है, अर्थात \( u = -x \).
    चूंकि प्रतिबिंब पर्दे पर बन रहा है, यह वास्तविक है, इसलिए लेंस से प्रतिबिंब की दूरी \( v = +(90-x) \).
    (मोमबत्ती और पर्दे के बीच की दूरी से लेंस की दूरी को घटाकर प्रतिबिंब की दूरी प्राप्त होती है)।

    लेंस सूत्र का उपयोग करते हुए:
    \( \frac{1}{v} - \frac{1}{u} = \frac{1}{f} \)
    मानों को सूत्र में रखने पर:
    \( \frac{1}{90-x} - \frac{1}{-x} = \frac{1}{20} \)
    \( \frac{1}{90-x} + \frac{1}{x} = \frac{1}{20} \)
    \( \frac{x + (90-x)}{x(90-x)} = \frac{1}{20} \)
    \( \frac{90}{90x - x^2} = \frac{1}{20} \)
    \( 90 \times 20 = 90x - x^2 \)
    \( 1800 = 90x - x^2 \)
    \( x^2 - 90x + 1800 = 0 \)

    यह एक द्विघात समीकरण है। इसे हल करने के लिए मध्य पद को तोड़ेंगे:
    \( x^2 - 60x - 30x + 1800 = 0 \)
    \( x(x - 60) - 30(x - 60) = 0 \)
    \( (x - 30)(x - 60) = 0 \)
    इसलिए, \( x = 30 \) cm या \( x = 60 \) cm.
    लेंस को मोमबत्ती से 30 cm या 60 cm की दूरी पर रखा जा सकता है। ये दोनों स्थितियां वास्तविक और उल्टा प्रतिबिंब देंगी।
    In simple words: मोमबत्ती और पर्दे के बीच 90 cm की दूरी पर 20 cm फोकस दूरी वाले उत्तल लेंस को दो जगहों पर रखा जा सकता है: या तो मोमबत्ती से 30 cm दूर, या 60 cm दूर. दोनों ही स्थितियों में पर्दे पर मोमबत्ती का उल्टा और वास्तविक प्रतिबिंब बनेगा.

    🎯 Exam Tip: जब वास्तविक प्रतिबिंब बनता है और बिंब व प्रतिबिंब के बीच की दूरी दी जाती है, तो लेंस को दो अलग-अलग स्थितियों में रखा जा सकता है. यह 'लेंस विस्थापन विधि' का सिद्धांत है.

     

    Question 13. एक 3.0 cm, लम्बा बिम्ब 20 cm. फोकस दूरी के उत्तल लेंस के मुख्य अक्ष पर लम्बवत् रखा है। यदि वास्तविक प्रतिबिम्ब लेंस से 60 cm. दूरी पर बनता है तो बिम्ब की लेंस से दूरी व आवर्धन ज्ञात कीजिये।
    Answer:
    दिया गया है:
    बिंब की ऊँचाई \( h = +3.0 \) cm
    फोकस दूरी \( f = +20 \) cm (उत्तल लेंस की फोकस दूरी धनात्मक होती है)
    वास्तविक प्रतिबिंब की दूरी \( v = +60 \) cm (वास्तविक प्रतिबिंब लेंस के दूसरी ओर बनता है, इसलिए धनात्मक)
    हमें बिंब की दूरी \( u \) और आवर्धन \( m \) ज्ञात करना है।

    लेंस सूत्र का उपयोग करते हुए:
    \( \frac{1}{v} - \frac{1}{u} = \frac{1}{f} \)
    मानों को सूत्र में रखने पर:
    \( \frac{1}{60} - \frac{1}{u} = \frac{1}{20} \)
    \( -\frac{1}{u} = \frac{1}{20} - \frac{1}{60} \)
    \( -\frac{1}{u} = \frac{3 - 1}{60} \)
    \( -\frac{1}{u} = \frac{2}{60} \)
    \( -\frac{1}{u} = \frac{1}{30} \)
    \( u = -30 \) cm
    चूंकि \( u \) ऋणात्मक है, बिंब लेंस से 30 cm की दूरी पर बाईं ओर रखा गया है।

    आवर्धन \( m = \frac{h'}{h} = \frac{v}{u} \)
    \( m = \frac{60}{-30} \)
    \( m = -2 \)
    आवर्धन ऋणात्मक है, इसलिए प्रतिबिंब वास्तविक और उल्टा होगा। आवर्धन का मान 2 है, जिसका अर्थ है कि प्रतिबिंब बिंब से 2 गुना बड़ा है।
    अब, प्रतिबिंब की ऊँचाई \( h' \) ज्ञात करेंगे:
    \( \frac{h'}{3.0} = -2 \)
    \( h' = -2 \times 3.0 \)
    \( h' = -6.0 \) cm
    प्रतिबिंब की ऊँचाई -6.0 cm है, जो दर्शाता है कि यह उल्टा है और बिंब से बड़ा है।
    In simple words: एक उत्तल लेंस से 3.0 cm ऊँची वस्तु का वास्तविक प्रतिबिंब 60 cm दूर बनने पर पता चलता है कि वस्तु लेंस से 30 cm दूर रखी गई थी. यह प्रतिबिंब 6.0 cm ऊँचा और उल्टा बनेगा.

    🎯 Exam Tip: उत्तल लेंस के लिए, जब वस्तु \( 2F \) पर रखी जाती है, तो वास्तविक, उल्टा और समान आकार का प्रतिबिंब \( 2F \) पर ही बनता है. यहाँ वस्तु \( F \) और \( 2F \) के बीच है, इसलिए प्रतिबिंब \( 2F \) से परे बड़ा बनता है.

     

    Question 14. किसी अवतल लेंस की फोकस दूरी 30 cm. है। यदि बिम्ब लेंस से 15cm. दूरी पर हो तो प्रतिबिम्ब की स्थिति एवं लेंस द्वारा उत्पन्न आवर्धन ज्ञात कीजिये।
    Answer:
    दिया गया है:
    अवतल लेंस की फोकस दूरी \( f = -30 \) cm (अवतल लेंस की फोकस दूरी ऋणात्मक होती है)
    बिंब की दूरी \( u = -15 \) cm (बिंब हमेशा लेंस के सामने होता है, इसलिए ऋणात्मक)
    हमें प्रतिबिंब की स्थिति \( v \) और आवर्धन \( m \) ज्ञात करना है।

    लेंस सूत्र का उपयोग करते हुए:
    \( \frac{1}{v} - \frac{1}{u} = \frac{1}{f} \)
    मानों को सूत्र में रखने पर:
    \( \frac{1}{v} - \frac{1}{-15} = \frac{1}{-30} \)
    \( \frac{1}{v} + \frac{1}{15} = -\frac{1}{30} \)
    \( \frac{1}{v} = -\frac{1}{30} - \frac{1}{15} \)
    \( \frac{1}{v} = \frac{-1 - 2}{30} \)
    \( \frac{1}{v} = \frac{-3}{30} \)
    \( \frac{1}{v} = -\frac{1}{10} \)
    \( v = -10 \) cm
    चूंकि \( v \) ऋणात्मक है, प्रतिबिंब लेंस से 10 cm की दूरी पर बाईं ओर बनेगा, यानी उसी तरफ जहाँ बिंब रखा है।

    आवर्धन \( m = \frac{v}{u} \)
    \( m = \frac{-10}{-15} \)
    \( m = +\frac{2}{3} \)
    \( m = +0.66 \)
    आवर्धन धनात्मक है, इसलिए प्रतिबिंब आभासी और सीधा होगा। आवर्धन का मान 0.66 है, जिसका अर्थ है कि प्रतिबिंब बिंब का दो-तिहाई आकार का है, यानी बिंब से छोटा है। अवतल लेंस हमेशा आभासी, सीधा और छोटा प्रतिबिंब बनाता है।
    In simple words: एक अवतल लेंस जिसकी फोकस दूरी 30 cm है, उससे 15 cm दूर रखी वस्तु का प्रतिबिंब लेंस के उसी तरफ 10 cm दूर बनेगा. यह प्रतिबिंब आभासी, सीधा और वस्तु से छोटा होगा.

    🎯 Exam Tip: अवतल लेंस हमेशा आभासी, सीधा और छोटा प्रतिबिंब बनाता है, चाहे वस्तु कहीं भी रखी हो. आवर्धन हमेशा 0 और +1 के बीच होता है, और प्रतिबिंब हमेशा फोकस बिंदु और प्रकाशिक केंद्र के बीच बनता है.

     

    Question 16. एक विद्यार्थी 100 सेमी से अधिक दूरी की वस्तु को नहीं देख सकता है। गणना करके बताइए कि सही दृष्टि पाने के लिए वह विद्यार्थी किस फोकस दूरी वाले चश्मे का प्रयोग करेगा?
    Answer:
    विद्यार्थी 100 cm से अधिक दूरी की वस्तु को स्पष्ट नहीं देख सकता है, जिसका अर्थ है कि उसे निकट दृष्टि दोष (Myopia) है।
    इस दोष को दूर करने के लिए अवतल लेंस का उपयोग किया जाता है।
    निकट दृष्टि दोष में, दूर बिंदु अनंत से खिसककर रोगी के 100 cm तक आ जाता है।
    अतः, इस विद्यार्थी के लिए दूर बिंदु \( v = -100 \) cm (प्रतिबिंब उसी तरफ बनता है जहाँ वस्तु है, इसलिए ऋणात्मक)
    सही दृष्टि पाने के लिए, अनंत पर रखी वस्तु (दूर स्थित वस्तु) का प्रतिबिंब रोगी के दूर बिंदु पर बनना चाहिए।
    अतः, वस्तु की दूरी \( u = -\infty \)
    हमें लेंस की फोकस दूरी \( f \) ज्ञात करनी है।

    लेंस सूत्र का उपयोग करते हुए:
    \( \frac{1}{v} - \frac{1}{u} = \frac{1}{f} \)
    मानों को सूत्र में रखने पर:
    \( \frac{1}{-100} - \frac{1}{-\infty} = \frac{1}{f} \)
    \( -\frac{1}{100} - 0 = \frac{1}{f} \)
    \( \frac{1}{f} = -\frac{1}{100} \)
    \( f = -100 \) cm
    चूंकि फोकस दूरी ऋणात्मक है, यह एक अवतल लेंस है।
    अब, लेंस की क्षमता \( P = \frac{1}{f \text{ (मीटर में)}} \)
    \( f = -100 \) cm \( = -1 \) मीटर
    \( P = \frac{1}{-1} \)
    \( P = -1 \) D
    विद्यार्थी को सही दृष्टि पाने के लिए -100 cm फोकस दूरी वाले अवतल लेंस का उपयोग करना चाहिए, जिसकी क्षमता -1D होगी। यह लेंस दूर की वस्तुओं से आने वाली किरणों को अपसारित करके उन्हें 100 cm पर केंद्रित करेगा।
    In simple words: एक विद्यार्थी 100 cm से ज्यादा दूर की चीजें नहीं देख सकता, जिसका मतलब उसे निकट दृष्टि दोष है. उसे अपनी दृष्टि ठीक करने के लिए -100 cm फोकस दूरी वाले अवतल लेंस का चश्मे की जरूरत होगी.

    🎯 Exam Tip: निकट दृष्टि दोष को दूर करने के लिए हमेशा अवतल लेंस का उपयोग किया जाता है, जबकि दूर दृष्टि दोष को दूर करने के लिए उत्तल लेंस का उपयोग किया जाता है. फोकस दूरी का चिन्ह लेंस के प्रकार को दर्शाता है.

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