RBSE Solutions Class 10 Science Chapter 7 परमाणु सिद्धान्त, तत्वों का आवर्ती वर्गीकरण

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Detailed Chapter 7 परमाणु सिद्धान्त, तत्वों का आवर्ती वर्गीकरण RBSE Solutions for Class 10 Science

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Class 10 Science Chapter 7 परमाणु सिद्धान्त, तत्वों का आवर्ती वर्गीकरण RBSE Solutions PDF

बहुचयनात्मक प्रश्न

 

Question 1. रदरफोर्ड के प्रयोग में किन विकिरणों का प्रयोग किया गया था?
(क) a
(ख) β
(ग) \( \gamma \)
(घ) X
Answer: (क) a
In simple words: रदरफोर्ड ने अपने प्रयोग में अल्फा (a) कणों का इस्तेमाल किया था. ये कण ही सोने की पतली पन्नी से टकराकर उसकी संरचना समझने में मदद करते हैं.

🎯 Exam Tip: रदरफोर्ड के प्रयोग में अल्फा कणों का उपयोग, उनके धन आवेश और उच्च ऊर्जा के कारण होता है, जो परमाणुओं के अंदरूनी हिस्सों की जांच के लिए आदर्श हैं.

 

Question 2. पदार्थ का सबसे छोटा कण होता है-
(क) अणु
(ख) परमाणु
(ग) तत्व
(घ) यौगिक
Answer: (ख) परमाणु
In simple words: पदार्थ का सबसे छोटा कण परमाणु होता है, जिसे और आगे नहीं तोड़ा जा सकता. सभी चीजें परमाणुओं से ही बनी होती हैं.

🎯 Exam Tip: "परमाणु" शब्द अक्सर मूलभूत कणों जैसे इलेक्ट्रॉन, प्रोटॉन और न्यूट्रॉन से मिलकर बने सबसे छोटे स्वतंत्र कण को दर्शाता है.

 

Question 3. तत्वों का प्रथम आवर्ती वर्गीकरण दिया था-
(क) डोबराइनर ने
(ख) मोजले ने
(ग) न्यूलैंड ने
(घ) मैन्डेलीफ ने
Answer: (घ) मैन्डेलीफ ने
In simple words: तत्वों को उनके गुणों के आधार पर पहली बार मैन्डेलीफ ने ही व्यवस्थित किया था. उन्होंने एक आवर्त सारणी बनाई थी.

🎯 Exam Tip: मैन्डेलीफ को आवर्त सारणी का जनक माना जाता है, क्योंकि उन्होंने तत्वों को उनके परमाणु भार के आधार पर व्यवस्थित किया था, जिससे गुणों की पुनरावृत्ति देखी गई.

 

Question 4. आधुनिक आवर्त सारणी पदार्थ के किस गुण पर आधारित है?
(क) परमाणु संरचना
(ख) परमाणु भार
(ग) परमाणु क्रमांक
(घ) संयोजकता
Answer: (ग) परमाणु क्रमांक
In simple words: आज की आवर्त सारणी परमाणु क्रमांक के अनुसार बनी है. यह सबसे सही तरीका है.

🎯 Exam Tip: आधुनिक आवर्त नियम परमाणु क्रमांक पर आधारित है, क्योंकि यह तत्वों के रासायनिक गुणों का बेहतर ढंग से वर्णन करता है, जो प्रोटॉन की संख्या से तय होते हैं.

 

Question 5. आधुनिक आवर्त सारणी में आवर्त तथा वर्गों की संख्या है
(क) 7 एवं 18
Answer: (क) 7 एवं 18
In simple words: आधुनिक आवर्त सारणी में कुल 7 आवर्त (क्षैतिज पंक्तियाँ) और 18 वर्ग (ऊर्ध्वाधर स्तम्भ) होते हैं.

🎯 Exam Tip: आवर्त सारणी में आवर्त क्षैतिज पंक्तियों को दर्शाते हैं जो ऊर्जा स्तरों की संख्या बताते हैं, जबकि वर्ग (समूह) ऊर्ध्वाधर स्तम्भों को दर्शाते हैं जो समान रासायनिक गुणों वाले तत्वों को समूहित करते हैं.

 

Question 6. आवर्त सारणी में परमाणु आकार, वर्ग में ऊपर से नीचे आने पर
(क) घटता है।
(ख) स्थिर रहता है।
(ग) अनियमित रहता है।
(घ) बढ़ता है।
Answer: (घ) बढ़ता है।
In simple words: जब हम आवर्त सारणी में किसी वर्ग में ऊपर से नीचे जाते हैं, तो परमाणुओं का आकार बड़ा होता जाता है. ऐसा इसलिए होता है क्योंकि हर नए तत्व के साथ एक नया ऊर्जा कोश जुड़ता है.

🎯 Exam Tip: वर्ग में नीचे जाने पर परमाणु आकार बढ़ने का मुख्य कारण नए ऊर्जा स्तरों का जुड़ना है, जिससे बाहरी इलेक्ट्रॉन नाभिक से दूर हो जाते हैं.

 

Question 7. वाण्डरवाल त्रिज्या सहसंयोजक त्रिज्या से होती है
(क) छोटी
(ख) बड़ी
(ग) समान
(घ) कोई नहीं
Answer: (ख) बड़ी
In simple words: वाण्डरवाल त्रिज्या हमेशा सहसंयोजक त्रिज्या से ज्यादा बड़ी होती है. इसका कारण है कि वाण्डरवाल त्रिज्या दो अलग-अलग अणुओं के परमाणुओं के बीच की दूरी को मापती है, जबकि सहसंयोजक त्रिज्या एक ही अणु के परमाणुओं के बीच की दूरी को मापती है.

🎯 Exam Tip: वाण्डरवाल त्रिज्या दो अनाबंधित परमाणुओं के बीच की दूरी का आधा होती है, जबकि सहसंयोजक त्रिज्या एक सहसंयोजक बंध से जुड़े दो परमाणुओं के नाभिकों के बीच की दूरी का आधा होती है.

 

Question 8. एक लघु आवर्त में तत्वों की संख्या होती है
(क) 2
(ख) 8
(ग) 18
(घ) 32
Answer: (ख) 8
In simple words: आवर्त सारणी के लघु आवर्त (जैसे दूसरा और तीसरा आवर्त) में 8 तत्व होते हैं.

🎯 Exam Tip: लघु आवर्त में तत्वों की संख्या 8 होती है क्योंकि इनमें 2s और 2p (या 3s और 3p) उपकोशों में इलेक्ट्रॉन भरे जाते हैं, जिससे कुल 8 इलेक्ट्रॉन और 8 तत्व होते हैं.

 

Question 9. उदासीन परमाणु से इलेक्ट्रॉन पृथक् करने के लिए दी जाने वाली ऊर्जा होती है
(क) इलेक्ट्रॉन लब्धि एन्थैल्पी
(ख) विद्युतऋणता
(ग) आयनन एन्थैल्पी
(घ) उत्तेजन ऊर्जा
Answer: (ग) आयनन एन्थैल्पी
In simple words: किसी भी परमाणु से एक इलेक्ट्रॉन को बाहर निकालने के लिए जितनी ऊर्जा देनी पड़ती है, उसे आयनन एन्थैल्पी कहते हैं. यह हमेशा एक धनात्मक मान होता है.

🎯 Exam Tip: आयनन एन्थैल्पी हमेशा ऊर्जा को अवशोषित करती है (धनात्मक मान), क्योंकि इलेक्ट्रॉन को नाभिक के आकर्षण से दूर करने के लिए ऊर्जा की आवश्यकता होती है.

 

Question 10. किस तत्व की विद्युतऋणता सर्वाधिक होती है?
(क) H
(ख) Na
(ग) Ca
(घ) F
Answer: (घ) F
In simple words: फ्लुओरीन (F) की विद्युतऋणता सबसे ज्यादा होती है. यह इलेक्ट्रॉनों को अपनी ओर बहुत तेजी से खींचता है.

🎯 Exam Tip: फ्लुओरीन आवर्त सारणी में सबसे अधिक विद्युतऋणी तत्व है क्योंकि इसका आकार छोटा और प्रभावी नाभिकीय आवेश बहुत अधिक होता है, जिससे यह इलेक्ट्रॉनों को मजबूती से आकर्षित करता है.

 

Question 11. सर्वाधिक धात्विक गुण किस वर्ग के सदस्य रखते हैं ?
(क) 1
(ख) 2
Answer: (क) 1
In simple words: वर्ग 1 के तत्व, जिन्हें क्षार धातु कहते हैं, सबसे ज्यादा धात्विक गुण दिखाते हैं क्योंकि वे आसानी से इलेक्ट्रॉन छोड़ देते हैं.

🎯 Exam Tip: वर्ग 1 के तत्व (क्षार धातुएँ) अत्यधिक धात्विक होते हैं क्योंकि उनके बाहरी कोश में केवल एक इलेक्ट्रॉन होता है, जिसे वे आसानी से खोकर धन आयन बनाते हैं.

अतिलघूत्तरात्मक प्रश्न

 

Question 12. थॉमसन के मॉडल का नाम बताइए।
Answer: थॉमसन के परमाणु मॉडल को प्लम पुडिंग मॉडल कहा जाता है. इस मॉडल में परमाणु को एक तरबूज की तरह माना गया है, जिसमें धन आवेश लाल भाग की तरह फैला होता है और इलेक्ट्रॉन बीज की तरह धंसे होते हैं.
In simple words: थॉमसन के परमाणु मॉडल को प्लम पुडिंग मॉडल कहते हैं.

🎯 Exam Tip: थॉमसन का प्लम पुडिंग मॉडल यह समझाने वाला पहला प्रयास था कि परमाणु में धनात्मक और ऋणात्मक आवेश एक साथ कैसे मौजूद होते हैं.

 

Question 13. बोर की कक्षाओं को क्या कहते हैं ?
Answer: बोर की कक्षाओं को कोश या ऊर्जा स्तर कहते हैं. इन कोशों में इलेक्ट्रॉन नाभिक के चारों ओर निश्चित ऊर्जा के साथ घूमते हैं. प्रत्येक कोश की अपनी एक निश्चित ऊर्जा होती है.
In simple words: बोर की कक्षाओं को कोश या ऊर्जा स्तर कहते हैं.

🎯 Exam Tip: बोर मॉडल में, इलेक्ट्रॉन निश्चित ऊर्जा स्तरों (कोशों) में ही परिक्रमण करते हैं और एक कोश से दूसरे में जाने पर ही ऊर्जा का उत्सर्जन या अवशोषण करते हैं.

 

Question 14. आधुनिक आवर्त नियम क्या है?
Answer: आधुनिक आवर्त नियम-मोजले के अनुसार, "तत्वों के भौतिक और रासायनिक गुण उनके परमाणु क्रमांकों के आवर्ती फलन होते हैं." इसका मतलब है कि जब तत्वों को उनके बढ़ते हुए परमाणु क्रमांक के क्रम में रखा जाता है, तो उनके गुणों में नियमित अंतराल पर समानताएँ दिखाई देती हैं.
In simple words: आधुनिक आवर्त नियम कहता है कि तत्वों के गुण उनके परमाणु क्रमांक पर निर्भर करते हैं.

🎯 Exam Tip: आधुनिक आवर्त नियम, मैन्डेलीफ के नियम का एक महत्वपूर्ण सुधार था, क्योंकि इसने आइसोटोपों (समस्थानिकों) की समस्या को हल किया और तत्वों के गुणों को अधिक सटीक रूप से समझाता है.

 

Question 15. मेण्डेलीफ का आवर्त नियम लिखें।
Answer: मैन्डेलीफ के अनुसार, "तत्वों के भौतिक और रासायनिक गुण उनके परमाणु भारों के आवर्ती फलन होते हैं." इसका मतलब है कि यदि तत्वों को उनके बढ़ते हुए परमाणु भार के क्रम में रखा जाए, तो उनके गुण एक निश्चित समय अंतराल के बाद दोहराए जाते हैं. उन्होंने इस नियम के आधार पर पहली आवर्त सारणी बनाई.
In simple words: मैन्डेलीफ का आवर्त नियम कहता है कि तत्वों के गुण उनके परमाणु भारों पर निर्भर करते हैं.

🎯 Exam Tip: मैन्डेलीफ के नियम ने भविष्य के तत्वों की खोज की भविष्यवाणी की, लेकिन इसमें आइसोटोपों और कुछ तत्वों के अनियमित क्रम जैसी कुछ सीमाएँ भी थीं.

 

Question 17. 18 वें वर्ग के सदस्यों को क्या नाम दिया गया है?
Answer: आवर्त सारणी में 18वें वर्ग के सदस्यों (तत्वों) को उत्कृष्ट गैस या निष्क्रिय गैस कहा जाता है. ये गैसें रासायनिक रूप से बहुत कम अभिक्रियाशील होती हैं क्योंकि इनके बाहरी कोश पूर्ण होते हैं.
In simple words: 18वें वर्ग के तत्वों को उत्कृष्ट गैस या निष्क्रिय गैस कहते हैं.

🎯 Exam Tip: उत्कृष्ट गैसें रासायनिक रूप से अक्रिय होती हैं क्योंकि उनके बाहरी इलेक्ट्रॉन कोश भरे होते हैं, जिससे वे स्थिर होती हैं और आसानी से इलेक्ट्रॉन न तो लेती हैं और न ही देती हैं.

 

Question 18. d-ब्लॉक तथा f-ब्लॉक तत्वों का अन्य नाम क्या है?
Answer: d-ब्लॉक के तत्वों को संक्रमण तत्व तथा f-ब्लॉक के तत्वों को अंतः संक्रमण तत्व कहा जाता है. संक्रमण तत्व रंगीन यौगिक बनाते हैं और इनकी संयोजकताएँ बदलती रहती हैं, जबकि अंतः संक्रमण तत्व रेडियोधर्मी होते हैं.
In simple words: d-ब्लॉक के तत्वों को संक्रमण तत्व और f-ब्लॉक के तत्वों को अंतः संक्रमण तत्व कहते हैं.

🎯 Exam Tip: संक्रमण तत्व अपनी परिवर्ती संयोजकता और रंगीन यौगिक बनाने की क्षमता के लिए जाने जाते हैं, जबकि अंतः संक्रमण तत्व अक्सर रेडियोधर्मी होते हैं और आवर्त सारणी के निचले भाग में अलग से रखे जाते हैं.

लघूत्तरात्मक प्रश्न

 

Question 19. धातु, अधातु एवं उपधातु का आधुनिक आवर्त सारणी में स्थान बताइए।
Answer: आधुनिक आवर्त सारणी में एक टेढ़ी-मेढ़ी रेखा होती है जो तत्वों को दो भागों में बाँटती है: धातु और अधातु. यह रेखा बोरॉन (B), सिलिकॉन (Si), आर्सेनिक (As), टेल्यूरियम (Te) तथा एस्टेटीन (At) के नीचे होती है. इस रेखा के बायीं तरफ धातु तथा दायीं तरफ अधातु होते हैं. इस रेखा के समीप स्थित तत्व उपधातु हैं, जो कि बोरोन, सिलिकन, जर्मेनियम, आर्सेनिक, एन्टिमनी, टेल्यूरियम एवं पोलोनियम हैं. ये उपधातु धातु और अधातु दोनों के गुण दर्शाते हैं.
In simple words: आवर्त सारणी में एक टेढ़ी रेखा धातुओं और अधातुओं को अलग करती है. रेखा के बाईं ओर धातु, दाईं ओर अधातु और रेखा पर उपधातु होते हैं.

🎯 Exam Tip: उपधातुएँ आवर्त सारणी में धातु और अधातु के बीच में स्थित होती हैं और दोनों के कुछ गुणों को प्रदर्शित करती हैं, जैसे कि वे अर्धचालक हो सकते हैं.

 

Question 20. इलेक्ट्रॉन लब्धि एन्थैल्पी की एक वर्ग में आवर्तिता समझाइए।
Answer: आवर्त सारणी के किसी वर्ग में ऊपर से नीचे जाने पर सामान्यतः इलेक्ट्रॉन लब्धि एन्थैल्पी का मान कम होता है. ऐसा इसलिए है क्योंकि परमाणु आकार बढ़ता है, जिससे बाहरी इलेक्ट्रॉनों पर नाभिकीय आकर्षण बल कम होता जाता है. परिणामस्वरूप, इलेक्ट्रॉन ग्रहण करने की प्रवृत्ति कम होती जाती है. हालांकि, इस क्रम में कुछ अनियमितताएँ भी पाई जाती हैं, जिसके कई कारण हो सकते हैं, जैसे कि इलेक्ट्रॉन-इलेक्ट्रॉन प्रतिकर्षण.
In simple words: किसी वर्ग में ऊपर से नीचे जाने पर परमाणु का आकार बढ़ता है, जिससे इलेक्ट्रॉन ग्रहण करने की क्षमता कम हो जाती है और इलेक्ट्रॉन लब्धि एन्थैल्पी घट जाती है.

🎯 Exam Tip: इलेक्ट्रॉन लब्धि एन्थैल्पी का मान वर्ग में नीचे जाने पर घटता है क्योंकि नए कोश जुड़ने से बाहरी इलेक्ट्रॉनों पर नाभिक का प्रभावी आकर्षण कम हो जाता है.

 

Question 21. वाण्डरवाल त्रिज्या एवं सहसंयोजक त्रिज्या से आप क्या समझते हैं?
Answer: वाण्डरवाल त्रिज्या: ठोस अवस्था में एक ही पदार्थ के दो पास-पास स्थित अनाबंधित अणुओं के परमाणुओं के बीच की दूरी का आधा वाण्डरवाल त्रिज्या कहलाती है. यह एक दुर्बल आकर्षण बल के कारण होती है. वाण्डरवाल त्रिज्या हमेशा सहसंयोजक त्रिज्या से अधिक होती है. सहसंयोजक त्रिज्या: एक ही अणु में सहसंयोजक बंध द्वारा जुड़े दो समान परमाणुओं के नाभिकों के बीच की दूरी का आधा सहसंयोजक त्रिज्या कहलाती है. यह त्रिज्या परमाणुओं के बीच मजबूत रासायनिक बंध बनने के कारण होती है. सहसंयोजक त्रिज्या आमतौर पर वाण्डरवाल त्रिज्या से छोटी होती है.
In simple words: वाण्डरवाल त्रिज्या दो अलग-अलग, बिना जुड़े परमाणुओं के बीच की दूरी का आधा है, और सहसंयोजक त्रिज्या एक ही अणु में जुड़े हुए दो परमाणुओं के बीच की दूरी का आधा है. वाण्डरवाल त्रिज्या हमेशा सहसंयोजक त्रिज्या से बड़ी होती है.

🎯 Exam Tip: वाण्डरवाल त्रिज्या अनाबंधित परमाणुओं के लिए होती है, जबकि सहसंयोजक त्रिज्या रासायनिक रूप से बंधित परमाणुओं के लिए होती है, इसलिए वाण्डरवाल त्रिज्या का मान हमेशा बड़ा होता है.

 

Question 22. धनायन उदासीन परमाणु से छोटा तथा ऋणायन उदासीन परमाणु से बड़ा होता है। क्यों?
Answer: • धनायन का आकार हमेशा उसके उदासीन परमाणु से छोटा होता है क्योंकि धनायन बनने पर इलेक्ट्रॉन खो जाते हैं, जिससे शेष इलेक्ट्रॉनों पर नाभिक का प्रभावी आकर्षण बढ़ जाता है. नाभिकीय आकर्षण बल बढ़ने से इलेक्ट्रॉन नाभिक के अधिक पास आ जाते हैं और परमाणु का आकार घट जाता है. • ऋणायन का आकार हमेशा उसके उदासीन परमाणु से बड़ा होता है क्योंकि ऋणायन बनने पर परमाणु में अतिरिक्त इलेक्ट्रॉन जुड़ जाते हैं. ये अतिरिक्त इलेक्ट्रॉन अन्य इलेक्ट्रॉनों के साथ प्रतिकर्षण करते हैं और नाभिकीय आवेश का मान कम हो जाता है, जिससे नाभिकीय आकर्षण बल कम हो जाता है. परिणामस्वरूप, इलेक्ट्रॉन दूर फैल जाते हैं और परमाणु का आकार बढ़ जाता है.
\( Na \rightarrow Na^+ \)
इलेक्ट्रॉन (2, 8, 1)
आकार 186 pm
इलेक्ट्रॉन (2, 8)
95 pm
\( Cl \rightarrow Cl^- \)
इलेक्ट्रॉन (2, 8, 7)
आकार 99 pm
इलेक्ट्रॉन (2, 8, 8)
181 pm
In simple words: जब कोई परमाणु इलेक्ट्रॉन खोकर धन आयन बनता है, तो वह छोटा हो जाता है क्योंकि नाभिक इलेक्ट्रॉनों को कसकर खींचता है. जब कोई परमाणु इलेक्ट्रॉन पाकर ऋण आयन बनता है, तो वह बड़ा हो जाता है क्योंकि इलेक्ट्रॉनों के बीच प्रतिकर्षण बढ़ जाता है.

🎯 Exam Tip: धनायन के छोटे होने का मुख्य कारण प्रभावी नाभिकीय आवेश में वृद्धि और कोशों की संख्या में संभावित कमी है, जबकि ऋणायन के बड़े होने का कारण इलेक्ट्रॉन-इलेक्ट्रॉन प्रतिकर्षण में वृद्धि है.

 

Question 23. प्रभावी नाभिकीय आवेश से क्या समझते हैं? यह वर्ग एवं आवर्त में किस प्रकार परिवर्तित होता है?
Answer: प्रभावी नाभिकीय आवेश- किसी परमाणु में बाहरी कोश के इलेक्ट्रॉनों पर नाभिक के द्वारा लगने वाले आकर्षण बल को प्रभावी नाभिकीय आवेश कहते हैं. यह हमेशा वास्तविक नाभिकीय आवेश से कम होता है क्योंकि बाहरी कोश में उपस्थित इलेक्ट्रॉनों के प्रतिकर्षण से नाभिकीय आकर्षण बल कुछ मात्रा में संतुलित हो जाता है. **परिवर्तन:** • एक आवर्त में बायें से दायें जाने पर परमाणु आकार कम होता है, और कोशों की संख्या वही रहती है. इसलिए प्रभावी नाभिकीय आवेश का मान बढ़ता है, क्योंकि नाभिक में प्रोटॉन की संख्या बढ़ जाती है, जिससे इलेक्ट्रॉनों पर आकर्षण बल बढ़ता है. • एक वर्ग में ऊपर से नीचे जाने पर परमाणु क्रमांक बढ़ता है, लेकिन कोशों की संख्या भी बढ़ती जाती है. इससे बाहरी इलेक्ट्रॉनों पर नाभिक का आकर्षण कम हो जाता है, अर्थात् परमाणु आकार बढ़ता है और प्रभावी नाभिकीय आवेश का मान कम होता है.
In simple words: प्रभावी नाभिकीय आवेश वह बल है जिससे नाभिक बाहरी इलेक्ट्रॉनों को खींचता है. आवर्त में बाईं से दाईं ओर जाने पर यह बढ़ता है, और वर्ग में ऊपर से नीचे जाने पर यह घटता है.

🎯 Exam Tip: प्रभावी नाभिकीय आवेश तत्वों के गुणों को निर्धारित करने में महत्वपूर्ण होता है; यह इलेक्ट्रॉन लब्धि एन्थैल्पी, आयनन एन्थैल्पी और विद्युतऋणता जैसे गुणों को सीधे प्रभावित करता है.

 

Question 25. डाल्टन का परमाणु संरचना सिद्धांत लिखें।
Answer: डाल्टन (1808) ने रासायनिक संयोजन, द्रव्यमान संरक्षण तथा निश्चित अनुपात के नियमों के आधार पर परमाणु सिद्धांत दिया, जिसके मुख्य अभिगृहीत (मुख्य बातें) निम्न हैं: • प्रत्येक पदार्थ छोटे-छोटे कणों से मिलकर बना होता है, जिन्हें परमाणु कहते हैं. • परमाणु अविभाज्य कण होते हैं, जिन्हें किसी रासायनिक अभिक्रिया द्वारा न तो बनाया जा सकता है और न ही नष्ट किया जा सकता है. • एक ही तत्व के सभी परमाणु; भार, आकार तथा रासायनिक गुणों में समान होते हैं. • भिन्न-भिन्न तत्वों के परमाणु; भार, आकार तथा रासायनिक गुणों में भिन्न-भिन्न होते हैं. • एक से अधिक प्रकार के तत्वों के परमाणु सदैव छोटी-छोटी पूर्ण संख्याओं के सरल अनुपात में संयोग कर यौगिक बनाते हैं. • रासायनिक अभिक्रियाओं में परमाणु केवल पुनर्व्यवस्थित होते हैं, लेकिन इन्हें रासायनिक अभिक्रिया के द्वारा न तो बनाया जा सकता है, न ही नष्ट किया जा सकता है.
In simple words: डाल्टन का सिद्धांत कहता है कि पदार्थ छोटे परमाणुओं से बना है, परमाणु अविभाज्य होते हैं, एक ही तत्व के परमाणु समान होते हैं, अलग-अलग तत्वों के परमाणु अलग होते हैं, और परमाणु आपस में मिलकर यौगिक बनाते हैं.

🎯 Exam Tip: डाल्टन के परमाणु सिद्धांत ने रसायन विज्ञान के विकास की नींव रखी, यद्यपि बाद में परमाणुओं के उप-परमाण्विक कणों में विभाजित होने का पता चला.

निबन्धात्मक प्रश्न

 

Question 26. मेण्डेलीफ की आवर्त सारणी के गुण एवं दोषों को सूचीबद्ध करें।
Answer: मैन्डेलीफ ने एक आवर्त नियम दिया, जिसके अनुसार तत्वों के गुणधर्म उनके परमाणु भारों के आवर्ती फलन होते हैं. इसके आधार पर उन्होंने आवर्त सारणी को 8 वर्ग (ऊर्ध्वाधर स्तम्भ) तथा 6 आवर्ती (क्षैतिज पंक्तियाँ) में विभाजित किया. वर्गों को पुनः A तथा B उपवर्गों में विभाजित किया. मैन्डेलीफ के समय तक उत्कृष्ट गैसें ज्ञात नहीं थीं, बाद में इन्हें एक नया वर्ग (शून्य वर्ग) बनाकर सारणी में रखा गया.
मैन्डेलीफ की आवर्त सारणी में निम्न गुण थे: • मैन्डेलीफ ने तत्वों को उनके बढ़ते हुए परमाणु भारों के क्रम में व्यवस्थित किया तथा उन्होंने सुनिश्चित किया कि एक ही प्रकार के भौतिक एवं रासायनिक गुणों वाले तत्व एक ही वर्ग में आएँ ताकि तत्वों की आवर्तिता बनी रहे. • मैन्डेलीफ को कहीं-कहीं परमाणु भार के क्रम को तोड़ना भी पड़ा. जैसे आयोडीन (I) को (परमाणु भार 126.9) टेल्यूरियम (परमाणु भार 127.6) के बाद रखा गया क्योंकि इसके गुण वर्ग VII के तत्वों के समान हैं. यह भविष्य के लिए तत्वों की भविष्यवाणी करने में मदद करता है. • आवर्त सारणी में कुछ तत्वों के लिए रिक्त स्थान छोड़ा तथा उनके गुणधर्मों के बारे में भविष्यवाणी भी की, जिससे नए तत्वों की खोज को प्रोत्साहन मिला.
मैन्डेलीफ की आवर्त सारणी में निम्नलिखित दोष थे: • सारणी में कुछ स्थानों पर परमाणु भार के बढ़ते क्रम का पालन नहीं किया गया. यह नियम का उल्लंघन था. • कुछ समान गुण वाले तत्व अलग-अलग वर्ग में तथा असमान गुण वाले तत्व एक ही वर्ग में रखे गये, जिससे वर्गीकरण में असंगति आई. • सारणी में हाइड्रोजन को निश्चित स्थान नहीं दिया गया, क्योंकि इसके गुण क्षार धातुओं और हैलोजनों दोनों से मिलते-जुलते हैं. • इस सारणी में समस्थानिकों (एक ही तत्व के भिन्न परमाणु भार वाले रूप) को भी कोई स्थान नहीं दिया गया.

ऑक्साइड का सूत्र\( E_2O_3 \)\( Ga_2O_3 \)
क्लोराइड का सूत्र\( ECl_3 \)\( GaCl_3 \)

• बाद में इन तत्वों को क्रमशः स्कैण्डियम, गैलियम तथा जरमेनियम कहा गया. इन तत्वों को मैन्डेलीफ ने एक-बोरॉन, एक-एल्यूमीनियम, एक-सिलिकॉन के रूप में नाम दिया था. • मैन्डेलीफ द्वारा आवर्त सारणी का निर्माण तत्वों के वर्गीकरण तथा अध्ययन में अत्यन्त महत्त्वपूर्ण तथा उपयोगी रहा.
In simple words: मैन्डेलीफ की आवर्त सारणी परमाणु भार पर आधारित थी. इसके गुणों में नए तत्वों की भविष्यवाणी करना और उनका वर्गीकरण करना शामिल था. इसके दोषों में हाइड्रोजन का स्थान तय न होना, परमाणु भार का क्रम टूटना और समस्थानिकों को जगह न मिलना शामिल था.

 

🎯 Exam Tip: मैन्डेलीफ की आवर्त सारणी की सफलताओं और सीमाओं को याद रखना महत्वपूर्ण है, क्योंकि यह आधुनिक आवर्त सारणी की नींव थी.

 

Question 27. तत्वों के निम्रलिखित गुण आवर्त सारणी में किस प्रकार आवर्तिता दर्शाते हैं?
(i) परमाणु त्रिज्या
(ii) आयनन एन्थैल्पी
(iii) विद्युत ऋणात्मकता।
Answer: (i) परमाणु त्रिज्या- किसी परमाणु के नाभिक से बाह्यतम कोश के बीच की दूरी को परमाणु त्रिज्या कहते हैं. • आवर्त सारणी के किसी आवर्त में बायें से दाये जाने पर परमाणु त्रिज्या घटती है क्योंकि नाभिकीय आवेश (प्रोटॉनों की संख्या) बढ़ने के कारण बाह्यतम कोश में उपस्थित इलेक्ट्रॉनों पर नाभिकीय आकर्षण बल बढ़ता है. नाभिक का खिंचाव बढ़ने से इलेक्ट्रॉन नाभिक के करीब आते हैं. • वर्ग में ऊपर से नीचे जाने पर परमाणु त्रिज्या बढ़ती है क्योंकि नया कोश जुड़ता जाता है, जिससे बाहरी इलेक्ट्रॉन नाभिक से दूर होते जाते हैं और प्रभावी नाभिकीय आवेश कम होता जाता है. नाभिक का खिंचाव कम होने से इलेक्ट्रॉन दूर फैलते हैं.

तत्वLiNaKRbCs
त्रिज्या (Pm)152186231244262
तत्वLiBeBCNOF
त्रिज्या (Pm)1521118877746664


(ii) आयनन एन्थैल्पी- किसी तत्व के गैसीय अवस्था में एक उदासीन परमाणु से एक इलेक्ट्रॉन निकालने के लिए आवश्यक ऊर्जा को आयनन एन्थैल्पी कहते हैं. • आवर्त सारणी में किसी आवर्त में बायें से दायें जाने पर कोशों की संख्या वही रहती है, लेकिन नाभिकीय आवेश बढ़ता है और परमाणु आकार घटता है. अतः प्रभावी नाभिकीय आवेश बढ़ने के कारण बाह्यतम इलेक्ट्रॉनों पर नाभिकीय आकर्षण बल बढ़ता है. इसलिए इलेक्ट्रॉन निकालना कठिन हो जाता है और आयनन एन्थैल्पी का मान बढ़ता है. • आवर्त सारणी के किसी वर्ग में ऊपर से नीचे जाने पर कोशों की संख्या बढ़ती है, जिससे परमाणु आकार बढ़ता है तथा प्रभावी नाभिकीय आवेश कम होने के कारण बाह्यतम इलेक्ट्रॉनों पर नाभिकीय आकर्षण बल कम होता जाता है. अतः उदासीन परमाणु से इलेक्ट्रॉन को पृथक् करना सरल होता है. इसी कारण वर्ग में ऊपर से नीचे जाने पर तत्वों की आयनन एन्थैल्पी का मान कम होता है.
(iii) विद्युत ऋणता या विद्युत ऋणात्मकता- सहसंयोजक यौगिकों में दो असमान परमाणुओं के मध्य बने हुए बंध के इलेक्ट्रॉन युग्म को परमाणु द्वारा अपनी ओर आकर्षित करने की प्रवृत्ति को ही विद्युतऋणता कहते हैं. तत्वों का यह एक सापेक्ष गुण है. • किसी आवर्त में बायें से दायें जाने पर परमाणु आकार छोटा होता जाता है और नाभिकीय आवेश बढ़ता है. अतः नाभिकीय आकर्षण बल बढ़ता है इसलिए तत्वों की विद्युत ऋणता भी बढ़ती जाती है. • वर्ग में ऊपर से नीचे जाने पर परमाणु आकार बढ़ने के कारण नाभिकीय आकर्षण बल कम होता है अतः विद्युत ऋणता का मान घटता जाता है.
फ्लुओरीन की विद्युतऋणता आवर्त सारणी में अधिकतम होती है.
In simple words: परमाणु त्रिज्या आवर्त में घटती है और वर्ग में बढ़ती है. आयनन एन्थैल्पी आवर्त में बढ़ती है और वर्ग में घटती है. विद्युतऋणता आवर्त में बढ़ती है और वर्ग में घटती है.

 

🎯 Exam Tip: आवर्तिता को याद रखने के लिए, एक बार में एक गुण पर ध्यान दें और समझें कि परमाणु आकार, नाभिकीय आवेश और कोशों की संख्या में परिवर्तन इसे कैसे प्रभावित करते हैं.

 

Question 28. आधुनिक आवर्त सारणी के द्वारा तत्वों के वर्गीकरण को समझाइए।
Answer: आधुनिक आवर्त सारणी- मैन्डेलीफ की आवर्त सारणी के समय उप-परमाण्विक कणों जैसे इलेक्ट्रॉन, न्यूट्रॉन तथा प्रोटॉन की व्यवस्था ज्ञात नहीं थी. अतः उन्होंने तत्वों के परमाणु भार को वर्गीकरण का आधार माना था. लेकिन बीसवीं सदी में इन कणों की खोज के पश्चात् 1913 में हेनरी मोजले ने आवर्त सारणी को पुनः व्यवस्थित किया तथा देखा कि परमाणु भार की तुलना में परमाणु क्रमांक द्वारा तत्वों के गुणों की अच्छी तरह व्याख्या की जा सकती है. इस आधार पर उन्होंने आधुनिक आवर्त नियम दिया जिसके अनुसार तत्वों के भौतिक तथा रासायनिक गुणधर्म उनके परमाणु क्रमांकों के आवर्ती फलन होते हैं.
आधुनिक आवर्त सारणी के आधार पर तत्वों के वर्गीकरण के मुख्य बिन्दु निम्न हैं- • आधुनिक आवर्त सारणी में तत्वों को बढ़ते हुए परमाणु क्रमांक के आधार पर रखा गया है. • उदासीन परमाणु में परमाणु क्रमांक, नाभिक में उपस्थित प्रोटोन की संख्या अथवा उसमें उपस्थित इलेक्ट्रॉनों की संख्या के बराबर होती है. अतः यह आवर्त सारणी स्वतः ही तत्वों के इलेक्ट्रॉनिक विन्यास का प्रतिनिधित्व करती है. • आवर्त सारणी का यह रूप बहुत ही सरल तथा मैन्डेलीफ की आवर्त सारणी की तुलना में अधिक विस्तृत है अतः इसे आवर्त सारणी का विस्तृत रूप कहते हैं. यह तत्वों को समझना आसान बनाता है. • छठे तथा सातवें आवर्त में f-कक्षक भी प्रारंभ हो जाते हैं अतः इनमें 32-32 तत्व होते हैं, इन्हें अतिदीर्घ आवर्त कहते हैं. ये दुर्लभ पृथ्वी तत्व कहलाते हैं. • f-ब्लॉक के एक-एक प्रारूपिक तत्व को मुख्य आवर्त सारणी में रखकर शेष तत्वों को दो क्षैतिज पंक्तियों में अलग से आवर्त सारणी के नीचे 14-14 तत्वों की दो पंक्तियों में दर्शाया जाता है. पहली पंक्ति के तत्व लैंथेनाइड तथा दूसरी पंक्ति के तत्व एक्टिनॉइड कहलाते हैं. • आधुनिक आवर्त सारणी से यह स्पष्ट है कि एक ही वर्ग के सभी तत्वों के बाह्यतम कोश का इलेक्ट्रॉनिक विन्यास समान होता है अर्थात् संयोजकता इलेक्ट्रॉनों की संख्या समान होती है. लेकिन वर्ग में ऊपर से नीचे जाने पर कोशों की संख्या बढ़ती जाती है. • बाह्यतम कोश में भरे गये अंतिम इलेक्ट्रॉन के आधार पर आवर्त सारणी को चार ब्लॉकों में वर्गीकृत किया गया है. वर्ग 1 व 2 के तत्वों को s ब्लॉक तत्व, वर्ग 13 से 18 तक के तत्वों को p ब्लॉक तत्व, वर्ग 3 से 12 तक के तत्व d ब्लॉक तत्व तथा आवर्त सारणी के नीचे स्थित दोनों क्षैतिज पंक्तियों को f ब्लॉक के तत्व कहा जाता है. • क्षैतिज पंक्तियों में पहली पंक्ति के तत्व (4f श्रेणी) लैंथेनम के बाद आते हैं अतः इन्हें लैन्थेनाइड तथा दूसरी पंक्ति के तत्व (5f श्रेणी) एक्टीनियम के बाद आते हैं अतः इन्हें एक्टिनाइड कहा जाता है. • s ब्लॉक के तत्वों को क्षारीय (वर्ग 1) एवं क्षारीय मृदा धातु (वर्ग 2), p ब्लॉक के तत्वों को निरूपक तत्व या मुख्य तत्व, d-ब्लॉक के तत्वों को संक्रमण तत्व तथा f-ब्लॉक के तत्वों को अंतः संक्रमण तत्व कहा जाता है. • आवर्त सारणी में यूरेनियम के बाद आने वाले तत्वों को परायूरेनियम तत्व कहा जाता है.
In simple words: आधुनिक आवर्त सारणी तत्वों को परमाणु क्रमांक के आधार पर व्यवस्थित करती है. इसमें s, p, d, f ब्लॉक होते हैं और यह तत्वों के गुणों को समझने में मदद करती है.

🎯 Exam Tip: आधुनिक आवर्त सारणी को समझते समय, तत्वों के वर्गीकरण के पीछे के तर्क, जैसे कि परमाणु क्रमांक और इलेक्ट्रॉन विन्यास, पर ध्यान दें.

 

Question 29. रदरफोर्ड के स्वर्ण पत्र प्रयोग का वर्णन करें। इस प्रयोग का परिणाम तथा निकाले गये निष्कर्षों का भी उल्लेख करें।
Answer: रदरफोर्ड का स्वर्ण पत्र प्रयोग- रदरफोर्ड के इस प्रयोग को a-प्रकीर्णन प्रयोग भी कहते हैं. रदरफोर्ड ने सोने की बहुत पतली पन्नी (100 nm या 10-7 मीटर मोटी) पर उच्च ऊर्जा युक्त a कणों (He के नाभिक) की बमबारी की. उन्होंने पन्नी (झिल्ली) के चारों तरफ जिंक सल्फाइड से लेपित वृत्ताकार पर्दा रखा जिससे कि बमबारी के बाद a-कण इस पर्दे से टकरा कर फ्लैश (स्फुरदीप्ति) उत्पन्न करते हैं. इससे a-कणों की दिशा ज्ञात हो जाती है. U नाभिक α कणों का प्रकीर्णन
स्वर्ण धातु के नाभिक द्वारा a-कणों का प्रकीर्णन.
रदरफोर्ड के इस प्रयोग के प्रेक्षण निम्न हैं: • अधिकांश a-कण सोने की पन्नी में से सीधे ही निकल गये अर्थात् उनका विक्षेपण नहीं हुआ. इससे पता चला कि परमाणु का अधिकांश भाग खाली है. • बहुत कम a-कण कुछ अंश कोण से विक्षेपित हुए. यह दर्शाता है कि परमाणु में धनावेशित भाग बहुत छोटा होता है और नाभिक के रूप में केंद्रित होता है. • 20,000 a-कणों में से एक a-कण का विक्षेपण 180° के कोण से हुआ. इसका मतलब है कि कुछ कण नाभिक से सीधे टकराकर वापस आ गए.
ये सभी प्रेक्षण अनअपेक्षित थे तथा इनके आधार पर रदरफोर्ड ने कहा कि ये प्रेक्षण उतने ही अविश्वसनीय थे जैसे अगर आप एक 14" मोटे तोप के गोले को टिशू पेपर के टुकड़े पर मारें और वह लौटकर आपको ही चोट पहुँचाये. इन प्रेक्षणों के आधार पर रदरफोर्ड ने परमाणु के बारे में निम्नलिखित निष्कर्ष निकाले: • परमाणु का अधिकांश भाग रिक्त और आवेशहीन होता है इसलिए अधिकांश a-कण स्वर्ण पत्र में से सीधे ही निकल जाते हैं. • कुछ a-कण विक्षेपित हो जाते हैं क्योंकि उन पर प्रबल प्रतिकर्षण बल लगा होता है. अतः समस्त धनावेश परमाणु के अंदर एक ही स्थान पर केन्द्रित होना चाहिए, जिसे नाभिक कहते हैं. • परमाणु में धनावेशित भाग का आयतन उसके कुल आयतन की तुलना में बहुत कम होता है. इस धनावेशित भाग को नाभिक कहा गया. परमाणु का व्यास लगभग \( 10^{-10} \) मीटर तथा नाभिक का व्यास लगभग \( 10^{-15} \) मीटर होता है.
In simple words: रदरफोर्ड ने अल्फा कणों को सोने की पन्नी पर फेंका. ज़्यादातर कण सीधे निकल गए, कुछ मुड़े और कुछ वापस आ गए. इससे उन्होंने निष्कर्ष निकाला कि परमाणु का ज़्यादातर हिस्सा खाली होता है, और बीच में एक छोटा, भारी, धन आवेशित नाभिक होता है.

🎯 Exam Tip: रदरफोर्ड का प्रयोग परमाणु संरचना को समझने में एक महत्वपूर्ण मोड़ था, जिसने थॉमसन के प्लम पुडिंग मॉडल को गलत साबित किया और परमाणु के नाभिकीय मॉडल की नींव रखी.

 

अन्य महत्त्वपूर्ण प्रश्नोत्तर

 

Question 2. M किस ऊर्जा स्तर को दर्शाता है?
(अ) प्रथम
(ब) द्वितीय
(स) तृतीय
(द) चतुर्थ
Answer: (स) तृतीय
In simple words: परमाणु के ऊर्जा स्तरों को K, L, M, N अक्षरों से दर्शाया जाता है, जहाँ M तीसरा ऊर्जा स्तर होता है.

🎯 Exam Tip: ऊर्जा स्तरों को संख्यात्मक रूप से n=1, 2, 3, 4... से भी दर्शाया जाता है, जहाँ K (n=1), L (n=2), M (n=3), और N (n=4) होते हैं.

 

Question 3. परमाणु का धनावेश स्थित होता है
(अ) नाभिक में
(ब) कक्षों में
(स) नाभिक तथा कक्षों के मध्य
(द) सम्पूर्ण परमाणु में
Answer: (अ) नाभिक में
In simple words: परमाणु का सारा धनावेश उसके केंद्र में, जिसे नाभिक कहते हैं, वहीं रहता है.

🎯 Exam Tip: नाभिक में प्रोटॉन होते हैं, जो धनावेशित होते हैं, और न्यूट्रॉन होते हैं, जो उदासीन होते हैं, इसलिए नाभिक धनावेशित होता है.

 

Question 4. सिलिकॉन है
(अ) धातु
(ब) अधातु
(स) उपधातु
(द) उपर्युक्त में से कोई नहीं
Answer: (स) उपधातु
In simple words: सिलिकॉन एक उपधातु है, जिसका मतलब है कि इसमें धातु और अधातु दोनों के गुण होते हैं.

🎯 Exam Tip: सिलिकॉन जैसे उपधातु अर्धचालक होते हैं, जिसका अर्थ है कि वे कुछ शर्तों के तहत बिजली का संचालन करते हैं, जिससे वे इलेक्ट्रॉनिक्स में बहुत उपयोगी होते हैं.

 

Question 5. L कोश में इलेक्ट्रॉनों की संख्या होती है
(अ) 2
(ब) 18
(स) 8
(द) 32
Answer: (स) 8
In simple words: L कोश, जो दूसरा ऊर्जा स्तर है, उसमें अधिकतम 8 इलेक्ट्रॉन हो सकते हैं.

🎯 Exam Tip: किसी भी कोश में इलेक्ट्रॉनों की अधिकतम संख्या \( 2n^2 \) सूत्र से ज्ञात की जाती है, जहाँ n कोश की संख्या है. L कोश के लिए n=2, तो \( 2 \times 2^2 = 8 \).

 

Question 6. आवर्त सारणी में किसी समूह (वर्ग) के सभी तत्वों में समान होते हैं
(अ) परमाणु संख्या
(ब) परमाणु द्रव्यमान
(स) इलेक्ट्रॉनों की संख्या
(द) संयोजी इलेक्ट्रॉनों की संख्या
Answer: (द) संयोजी इलेक्ट्रॉनों की संख्या
In simple words: एक ही वर्ग के सभी तत्वों के बाहरी कोश में इलेक्ट्रॉनों की संख्या समान होती है, जिससे उनके रासायनिक गुण भी समान होते हैं.

🎯 Exam Tip: संयोजी इलेक्ट्रॉनों की संख्या ही तत्वों के रासायनिक व्यवहार को निर्धारित करती है, यही कारण है कि एक ही वर्ग के तत्वों के रासायनिक गुण समान होते हैं.

 

Question 8. धातुओं के ऑक्साइडों की प्रकृति सामान्यतः होती है
(अ) अम्लीय
(ब) उदासीन
(स) उभयधर्मी
(द) क्षारीय
Answer: (द) क्षारीय
In simple words: धातुएँ जब ऑक्सीजन से मिलती हैं तो जो ऑक्साइड बनते हैं, वे आमतौर पर क्षारीय प्रकृति के होते हैं, जिसका मतलब है कि वे अम्लों को उदासीन कर सकते हैं.

🎯 Exam Tip: धातुओं के ऑक्साइड क्षारीय होते हैं क्योंकि वे जल में घुलकर हाइड्रोक्साइड बनाते हैं, जैसे \( Na_2O + H_2O \rightarrow 2NaOH \), जो एक क्षार है.

 

अतिलघूत्तरात्मक प्रश्न

 

Question 1. क्लोरीन के समस्थानिकों के परमाणु भार लिखिए।
Answer: क्लोरीन के समस्थानिकों के परमाणु भार \( Cl^{35} \) और \( Cl^{37} \) होते हैं. समस्थानिक वे तत्व होते हैं जिनकी परमाणु संख्या समान होती है, लेकिन परमाणु भार अलग-अलग होता है.
In simple words: क्लोरीन के समस्थानिकों का परमाणु भार 35 और 37 होता है.

🎯 Exam Tip: समस्थानिकों के परमाणु भार में अंतर उनके नाभिक में न्यूट्रॉनों की संख्या के भिन्न होने के कारण होता है.

 

Question 2. आवर्त सारणी में आवर्त (Periods) तथा वर्ग (Group) किसे कहते हैं?
Answer: आवर्त सारणी में क्षैतिज पंक्तियों को आवर्त (Periods) कहते हैं, जो परमाणु के ऊर्जा कोशों की संख्या दर्शाते हैं. ऊर्ध्वाधर स्तम्भों को वर्ग (Groups) कहते हैं, जिनमें समान संयोजी इलेक्ट्रॉन संख्या वाले तत्व होते हैं, जिससे उनके रासायनिक गुण समान होते हैं.
In simple words: आवर्त सारणी में लेटी हुई लाइनें आवर्त और खड़ी लाइनें वर्ग कहलाती हैं.

🎯 Exam Tip: आवर्त सारणी में आवर्त परमाणु के इलेक्ट्रॉन कोशों की संख्या दर्शाते हैं, जबकि वर्ग संयोजी इलेक्ट्रॉनों की संख्या और रासायनिक समानता दर्शाते हैं.

 

Question 3. सोडियम, क्लोरीन तथा सिलिकॉन में से कौनसी उपधातु है?
Answer: सोडियम एक धातु है, क्लोरीन एक अधातु है, और सिलिकॉन एक उपधातु है. उपधातुएँ धातु और अधातु दोनों के गुण दर्शाती हैं.
In simple words: सोडियम और क्लोरीन में से सिलिकॉन उपधातु है.

🎯 Exam Tip: उपधातुएँ आवर्त सारणी में धातुओं और अधातुओं के बीच की सीमा पर पाई जाती हैं और इनमें अर्धचालकता का गुण होता है, जैसे सिलिकॉन और जर्मेनियम.

 

Question 5. किसी कोश में इलेक्ट्रॉनों की अधिकतम संख्या किस सूत्र से ज्ञात की जाती है?
Answer: किसी कोश में इलेक्ट्रॉनों की अधिकतम संख्या \( 2n^2 \) सूत्र से ज्ञात की जाती है, जहाँ 'n' कोश की संख्या है (जैसे K कोश के लिए n=1, L कोश के लिए n=2, आदि). यह सूत्र बोर के परमाणु मॉडल के अनुसार इलेक्ट्रॉनों के वितरण को समझने में मदद करता है.
In simple words: किसी भी कोश में सबसे ज़्यादा कितने इलेक्ट्रॉन आ सकते हैं, यह \( 2n^2 \) सूत्र से पता चलता है, जहाँ n कोश का नंबर होता है.

🎯 Exam Tip: इस सूत्र का उपयोग करके आप K, L, M, N आदि कोशों में अधिकतम इलेक्ट्रॉनों की संख्या आसानी से ज्ञात कर सकते हैं: K(n=1) में 2, L(n=2) में 8, M(n=3) में 18, N(n=4) में 32.

 

Question 6. तीसरे आवर्त में स्थित तत्वों में धातु कौनसे हैं?
Answer: तीसरे आवर्त में सोडियम (Na), मैग्नीशियम (Mg) तथा एल्युमिनियम (Al) धातु हैं. ये तत्व इलेक्ट्रॉन त्यागने की प्रवृत्ति रखते हैं और धनायन बनाते हैं.
In simple words: तीसरे आवर्त में Na, Mg और Al धातु हैं.

🎯 Exam Tip: तीसरे आवर्त में, बाईं ओर के तत्व धातु होते हैं और दाईं ओर के तत्व अधातु या उपधातु होते हैं, जैसे सोडियम एक अत्यधिक प्रतिक्रियाशील धातु है.

 

Question 7. आवर्त सारणी के तीसरे समूह में एक तत्व Y है तो इसके ऑक्साइड का सूत्र क्या होगा?
Answer: तत्व Y तीसरे समूह का है, अतः इसकी संयोजकता 3 है. ऑक्सीजन की संयोजकता 2 होती है. इसलिए, जब तत्व Y ऑक्सीजन के साथ मिलकर ऑक्साइड बनाता है, तो उनके संयोजकता का क्रॉस-गुणा करने पर ऑक्साइड का सूत्र \( Y_2O_3 \) होगा. इस तरह यह यौगिक स्थिर बनता है.
In simple words: यदि तत्व Y तीसरे समूह में है, तो उसकी संयोजकता 3 है. ऑक्सीजन की संयोजकता 2 होती है, इसलिए इसके ऑक्साइड का सूत्र \( Y_2O_3 \) होगा.

🎯 Exam Tip: ऑक्साइड का सूत्र लिखने के लिए, तत्वों की संयोजकता को क्रॉस-गुणा विधि से जोड़ें और उन्हें सरलतम अनुपात में लिखें.

 

Question 8. किसी समूह में उपस्थित तत्वों को संयोजकता क्या होगी?
Answer: किसी समूह (वर्ग) में उपस्थित तत्वों की संयोजकता समूह संख्या के बराबर होती है, या 8 - समूह संख्या होती है (विशेषकर जब बाहरी कोश में 4 से अधिक इलेक्ट्रॉन हों). ऐसा इसलिए है क्योंकि एक ही समूह के सभी तत्वों के संयोजी इलेक्ट्रॉनों की संख्या समान होती है, जिससे उनके रासायनिक गुण भी समान होते हैं.
In simple words: किसी समूह के तत्वों की संयोजकता उस समूह की संख्या के बराबर होती है, या 8 में से समूह संख्या को घटाकर निकलती है.

🎯 Exam Tip: संयोजकता बाहरी कोश में इलेक्ट्रॉनों की संख्या या 8 से बाहरी इलेक्ट्रॉनों की संख्या को घटाने पर प्राप्त संख्या होती है, जो रासायनिक बंध बनाने की क्षमता को दर्शाती है.

 

Question 9. क्लोरीन, ब्रोमीन तथा आयोडीन में से किसकी क्रियाशीलता हाइड्रोजन के प्रति न्यूनतम है?
Answer: हैलोजन वर्ग में ऊपर से नीचे जाने पर क्रियाशीलता कम होती है. फ्लुओरीन (F2) सबसे ज्यादा क्रियाशील होता है, फिर क्लोरीन (Cl2), ब्रोमीन (Br2) और अंत में आयोडीन (I2) सबसे कम क्रियाशील होता है. अतः हाइड्रोजन के प्रति आयोडीन की क्रियाशीलता न्यूनतम है. यह प्रवृत्ति परमाणु आकार बढ़ने के कारण होती है.
In simple words: क्लोरीन, ब्रोमीन और आयोडीन में से आयोडीन की क्रियाशीलता हाइड्रोजन के प्रति सबसे कम है.

🎯 Exam Tip: हैलोजन समूह में नीचे जाने पर परमाणु आकार बढ़ता है, जिससे बाहरी इलेक्ट्रॉनों को आकर्षित करने की क्षमता कम हो जाती है, परिणामस्वरूप रासायनिक क्रियाशीलता घट जाती है.

 

Question 10. समूह 1 के तत्वों का नाम क्या है?
Answer: समूह 1 के तत्वों को क्षार धातु (Alkali Metals) कहते हैं. ये तत्व अत्यधिक क्रियाशील होते हैं और आसानी से एक इलेक्ट्रॉन त्यागकर धनायन बनाते हैं. लिथियम, सोडियम, पोटैशियम इसके उदाहरण हैं.
In simple words: समूह 1 के तत्वों को क्षार धातु कहते हैं.

🎯 Exam Tip: क्षार धातुएँ अत्यधिक प्रतिक्रियाशील होती हैं और आसानी से एक इलेक्ट्रॉन खोकर \( +1 \) आयन बनाती हैं, जिससे वे जल के साथ तेजी से अभिक्रिया करती हैं.

 

प्रश्न 12. डॉबेराइनर के त्रिक् का एक उदाहरण लिखिए।
Answer: क्लोरीन (Cl), ब्रोमीन (Br) तथा आयोडीन (I) डोबेराइनर के त्रिक के उदाहरण हैं। यह तीनों तत्व समान रासायनिक गुणों वाले होते हैं।
In simple words: डोबेराइनर के त्रिक का एक उदाहरण क्लोरीन, ब्रोमीन और आयोडीन हैं।

🎯 Exam Tip: जब भी डोबेराइनर के त्रिक का उदाहरण पूछा जाए, तो Cl, Br, I समूह को याद रखें क्योंकि यह एक प्रमुख उदाहरण है।

 

प्रश्न 13. आवर्त में बाईं से दाईं ओर जाने पर तत्वों में इलेक्ट्रॉन त्यागने की प्रवृत्ति कम होती है। क्यों?
Answer: आवर्त सारणी में बाएं से दाएं जाने पर, परमाणु के संयोजकता कोश के इलेक्ट्रॉनों पर नाभिक का प्रभावी आकर्षण बल बढ़ता जाता है। इस वजह से इलेक्ट्रॉनों को त्यागने की प्रवृत्ति कम होती जाती है। यह परमाणु के नाभिकीय आवेश में वृद्धि के कारण होता है।
In simple words: आवर्त में बाएं से दाएं जाने पर इलेक्ट्रॉन छोड़ना मुश्किल हो जाता है, क्योंकि नाभिक इलेक्ट्रॉनों को अधिक मजबूती से खींचता है।

🎯 Exam Tip: आवर्त में नाभिकीय आवेश और परमाणु त्रिज्या में बदलाव को हमेशा इलेक्ट्रॉन त्यागने की प्रवृत्ति से जोड़कर बताएं।

 

प्रश्न 14. धातु, विद्युत धनात्मक होती हैं, क्यों?
Answer: धातुएँ आबंध (बॉन्ड) बनाते समय इलेक्ट्रॉन त्यागने की प्रवृत्ति रखती हैं। इलेक्ट्रॉन त्यागने से वे धनात्मक आयन बनाती हैं, इसलिए धातुओं को विद्युत धनात्मक कहा जाता है। इलेक्ट्रॉन त्यागने की यह क्षमता ही उनके धात्विक गुण का आधार है।
In simple words: धातुएँ इलेक्ट्रॉन आसानी से छोड़ देती हैं और सकारात्मक बन जाती हैं, इसलिए वे विद्युत धनात्मक होती हैं।

🎯 Exam Tip: विद्युत धनात्मकता को हमेशा इलेक्ट्रॉन त्यागने की प्रवृत्ति और धनात्मक आयन बनने की क्षमता से जोड़कर समझाएं।

 

प्रश्न 15. किसी समूह के कौनसे भाग में तत्वों में धात्विक गुण तथा परमाणु आकार अधिक होगा?
Answer: किसी समूह में ऊपर से नीचे की तरफ जाने पर तत्वों में धात्विक गुण और परमाणु आकार दोनों बढ़ते हैं। ऐसा इसलिए होता है क्योंकि नीचे जाने पर नए कोश जुड़ते जाते हैं, जिससे नाभिक का बाहरी इलेक्ट्रॉनों पर आकर्षण कम हो जाता है।
In simple words: समूह में नीचे की ओर जाने पर तत्व ज्यादा धात्विक और बड़े आकार के होते हैं।

🎯 Exam Tip: समूह में नीचे जाने पर परमाणु आकार और धात्विक गुण दोनों का सीधा संबंध याद रखें।

 

प्रश्न 16. प्रथम परमाणु सिद्धान्त किस वैज्ञानिक ने दिया था?
Answer: प्रथम परमाणु सिद्धांत जॉन डाल्टन ने दिया था। यह सिद्धांत रासायनिक प्रतिक्रियाओं में पदार्थ के व्यवहार को समझने के लिए एक महत्वपूर्ण कदम था।
In simple words: सबसे पहला परमाणु सिद्धांत डाल्टन ने दिया था।

🎯 Exam Tip: डाल्टन का नाम परमाणु सिद्धांत के इतिहास में एक मूलभूत खोजकर्ता के रूप में याद रखें।

 

प्रश्न 17. परमाणु में ऊर्जा स्तरों को दर्शाने के लिए क्या संकेत दिए गए हैं?
Answer: परमाणु में ऊर्जा स्तरों (या कोशों) को दर्शाने के लिए K, L, M, N, O... अक्षरों का उपयोग किया जाता है। इन कोशों को मुख्य क्वांटम संख्या (n) से भी दर्शाया जाता है, जहाँ n = 1, 2, 3, 4, 5... होता है।
In simple words: परमाणु के ऊर्जा स्तरों को K, L, M, N, O... अक्षरों या 1, 2, 3, 4, 5... संख्याओं से दिखाते हैं।

🎯 Exam Tip: ऊर्जा स्तरों के लिए K, L, M अक्षरों को उनके संगत संख्यात्मक मान (1, 2, 3) के साथ याद रखें।

 

प्रश्न 19. बोर के परमाणु मॉडल की एक कमी बताइए।
Answer: बोर के परमाणु मॉडल की एक मुख्य कमी यह थी कि यह एक से अधिक इलेक्ट्रॉन वाले परमाणुओं के स्पेक्ट्रम की व्याख्या ठीक से नहीं कर सका। यह केवल हाइड्रोजन जैसे एकल-इलेक्ट्रॉन वाले परमाणुओं के लिए ही सही था।
In simple words: बोर का मॉडल एक से ज्यादा इलेक्ट्रॉन वाले परमाणुओं को समझा नहीं पाया।

🎯 Exam Tip: बोर मॉडल की सीमा को स्पष्ट रूप से बताएं कि यह जटिल परमाणुओं के स्पेक्ट्रम के लिए काम नहीं करता था।

 

प्रश्न 20. आवर्त सारणी के द्वितीय वर्ग के तत्वों को क्या कहा जाता है?
Answer: आवर्त सारणी के द्वितीय वर्ग के तत्वों को क्षारीय मृदा धातुएँ कहा जाता है। इन धातुओं में मैग्नीशियम (Mg) और कैल्शियम (Ca) जैसे तत्व शामिल हैं, जो पृथ्वी की परत में पाए जाते हैं।
In simple words: दूसरे वर्ग के तत्वों को क्षारीय मृदा धातुएँ कहते हैं।

🎯 Exam Tip: क्षारीय मृदा धातुओं को हमेशा वर्ग 2 से जोड़कर याद रखें और यह भी याद रखें कि ये पृथ्वी में पाई जाती हैं।

 

प्रश्न 21. परमाणु त्रिज्या किसे कहते हैं?
Answer: परमाणु त्रिज्या किसी परमाणु के सबसे बाहरी कोश में उपस्थित अंतिम इलेक्ट्रॉन की नाभिक से औसत दूरी को कहते हैं। यह परमाणु के आकार का निर्धारण करती है।
In simple words: परमाणु त्रिज्या नाभिक से सबसे बाहरी इलेक्ट्रॉन तक की दूरी होती है।

🎯 Exam Tip: परमाणु त्रिज्या को हमेशा नाभिक और सबसे बाहरी इलेक्ट्रॉन के बीच की दूरी के रूप में परिभाषित करें।

 

प्रश्न 22. आवर्त सारणी में अधिकतम विद्युतऋणता वाला तत्व कौनसा है?
Answer: आवर्त सारणी में सबसे अधिक विद्युतऋणता वाला तत्व फ्लुओरीन (F) है। इसकी उच्च विद्युतऋणता इसे अन्य परमाणुओं से इलेक्ट्रॉन खींचने की प्रबल क्षमता देती है।
In simple words: फ्लुओरीन आवर्त सारणी में सबसे ज्यादा विद्युतऋणात्मक तत्व है।

🎯 Exam Tip: फ्लुओरीन को आवर्त सारणी के सबसे विद्युतऋणात्मक तत्व के रूप में याद रखें।

 

प्रश्न 23. Li+, Na+, K+ आयनों को त्रिज्या के घटते क्रम में लिखिए।
Answer: इन आयनों की त्रिज्या का घटता क्रम इस प्रकार है: \( \text{K}^+ > \text{Na}^+ > \text{Li}^+ \)। ऐसा इसलिए है क्योंकि समूह में नीचे जाने पर परमाणु आकार बढ़ता है, और जब ये आयन बनते हैं तो उनके बाहरी कोश में इलेक्ट्रॉन की संख्या भी बढ़ती जाती है।
In simple words: पोटेशियम आयन सबसे बड़ा है, फिर सोडियम आयन और सबसे छोटा लिथियम आयन है।

🎯 Exam Tip: आयनिक त्रिज्या की तुलना करते समय, समूह में नीचे जाने पर कोशों की संख्या बढ़ने के कारण त्रिज्या बढ़ने के सिद्धांत को याद रखें।

 

प्रश्न 24. किस वर्ग के तत्वों की आयनन एन्थैल्पी उच्चतम होती है ?
Answer: उत्कृष्ट गैसों (वर्ग 18) के तत्वों की आयनन एन्थैल्पी उच्चतम होती है। ऐसा इसलिए है क्योंकि उनके बाहरी कोश पूरी तरह से भरे होते हैं, जिससे वे बहुत स्थिर होते हैं और उनसे इलेक्ट्रॉन निकालना बहुत मुश्किल होता है।
In simple words: उत्कृष्ट गैसों से इलेक्ट्रॉन निकालना सबसे मुश्किल होता है, इसलिए उनकी आयनन एन्थैल्पी सबसे ज्यादा होती है।

🎯 Exam Tip: उत्कृष्ट गैसों की स्थिरता और पूर्ण भरे कोशों को उनकी उच्च आयनन एन्थैल्पी का मुख्य कारण बताएं।

 

प्रश्न 25. क्षारीय धातु किसे कहा जाता है, क्यों?
Answer: समूह 1 के तत्वों को क्षारीय धातुएँ कहा जाता है। ये धातुएँ पानी के साथ तीव्र अभिक्रिया करके क्षार (बेस) बनाती हैं। इनका बाहरी कोश में एक इलेक्ट्रॉन होता है जिसे ये आसानी से त्याग कर स्थिर विन्यास प्राप्त करती हैं।
In simple words: समूह 1 के तत्वों को क्षारीय धातु कहते हैं क्योंकि वे पानी से मिलकर क्षार बनाते हैं।

🎯 Exam Tip: क्षारीय धातुओं को वर्ग 1 से जोड़ें और उनके जल के साथ क्षार बनाने के गुण को मुख्य कारण बताएं।

निम्नलिखित को सुमेलित कीजिए

 

Question 1. निम्नलिखित को सुमेलित कीजिए
(i) शून्य समूह के तत्व। (A) बोरॉन समूह (13वाँ वर्ग)
(ii) यूरेनियम (B) उत्कृष्ट गैस
(iii) एल्युमिनियम (C) रेडियोएक्टिव तत्व
Answer:
(i) (B) शून्य समूह के तत्व उत्कृष्ट गैसें हैं।
(ii) (C) यूरेनियम एक रेडियोएक्टिव तत्व है।
(iii) (A) एल्युमिनियम बोरॉन समूह (13वाँ वर्ग) का सदस्य है।
In simple words: शून्य समूह में उत्कृष्ट गैसें आती हैं। यूरेनियम रेडियोएक्टिव है। एल्युमिनियम बोरॉन वाले समूह में आता है।

🎯 Exam Tip: सुमेलन वाले प्रश्नों में, प्रत्येक विकल्प को सावधानी से पढ़ें और सही जोड़े बनाने के लिए उनके गुणों या समूह को याद रखें।

 

Question 2. निम्नलिखित को सुमेलित कीजिए
(i) सोना (A) न्यूलैण्ड
(ii) ऑक्सीजन (B) सिक्का धातु
(iii) अष्टक नियम (C) 16वाँ वर्ग
Answer:
(i) (B) सोना एक सिक्का धातु है।
(ii) (C) ऑक्सीजन 16वें वर्ग का सदस्य है।
(iii) (A) अष्टक नियम न्यूलैण्ड द्वारा दिया गया था।
In simple words: सोना सिक्का बनाने वाली धातु है। ऑक्सीजन 16वें समूह में आता है। न्यूलैण्ड ने अष्टक नियम दिया था।

🎯 Exam Tip: तत्वों के विशेष गुणों और नियमों के खोजकर्ताओं को याद रखना सुमेलन प्रश्नों में मदद करता है।

लघूत्तरात्मक प्रश्न

 

प्रश्न 1. न्यूलैंड के अष्टक नियम को लिखिए तथा निम्नलिखित से समान गुणधर्म रखने वाले तत्त्व को नाम लिखिए
1. नाइट्रोजन
2. लिथियम।।
Answer: न्यूलैंड का अष्टक नियम के अनुसार, जब तत्वों को उनके परमाणु द्रव्यमान (परमाणु भार) के बढ़ते क्रम में व्यवस्थित किया जाता है, तो हर आठवें तत्व के गुण पहले तत्व के गुणों के समान होते हैं। न्यूलैंड ने इसकी तुलना संगीत के अष्टक से की, जहाँ सात स्वरों के बाद आठवाँ स्वर पहले जैसा ही आता है।
1. नाइट्रोजन (N) के गुणधर्म फॉस्फोरस (P) के समान होते हैं।
2. लिथियम (Li) के गुणधर्म सोडियम (Na) के समान होते हैं।
In simple words: न्यूलैंड का अष्टक नियम कहता है कि हर आठवें तत्व के गुण पहले तत्व जैसे होते हैं। नाइट्रोजन के गुण फॉस्फोरस जैसे होते हैं, और लिथियम के गुण सोडियम जैसे होते हैं।

🎯 Exam Tip: न्यूलैंड के अष्टक नियम की तुलना संगीत के अष्टक से करना याद रखें, और नाइट्रोजन-फॉस्फोरस, लिथियम-सोडियम के समान गुणों को भी उल्लेख करें।

 

प्रश्न 2. आवर्त सारणी में किसी आवर्त में बायें से दाये जाने पर निम्नलिखित में क्या परिवर्तन होता है?
1. धात्विक गुण
2. संयोजकता इलेक्ट्रॉनों की संख्या।
Answer:
1. धात्विक गुण: आवर्त में बाएं से दाएं जाने पर, संयोजकता कोश के इलेक्ट्रॉनों पर प्रभावी नाभिकीय आवेश बढ़ता है, जिससे इलेक्ट्रॉनों को त्यागने की प्रवृत्ति कम होती जाती है। इसलिए, धात्विक गुण कम होता जाता है।
2. संयोजकता इलेक्ट्रॉनों की संख्या: आवर्त में बाएं से दाएं जाने पर संयोजकता इलेक्ट्रॉनों की संख्या पहले बढ़ती है (जैसे 1 से 7 तक) और फिर वर्ग 18 में स्थिर हो जाती है (शून्य संयोजकता)। यह परिवर्तन तत्वों के रासायनिक व्यवहार को प्रभावित करता है।
In simple words: आवर्त में बाएं से दाएं जाने पर, तत्व कम धात्विक होते जाते हैं क्योंकि इलेक्ट्रॉन त्यागना मुश्किल होता है। संयोजकता इलेक्ट्रॉनों की संख्या पहले बढ़ती है फिर स्थिर हो जाती है।

🎯 Exam Tip: आवर्त में धात्विक गुण और संयोजकता इलेक्ट्रॉनों की संख्या के रुझानों को नाभिकीय आवेश और इलेक्ट्रॉन त्यागने की प्रवृत्ति से जोड़कर समझाएं।

 

प्रश्न 3. डोबराइनर के त्रिक क्या हैं? उदाहरण सहित समझाइए।
Answer: डोबेराइनर ने 1829 में समान गुणधर्मों वाले तत्वों को तीन-तीन के समूहों में व्यवस्थित करने का प्रयास किया। इन समूहों को 'त्रिक' कहा गया। डोबेराइनर के अनुसार, जब त्रिक के तीनों तत्वों को उनके परमाणु भार के बढ़ते क्रम में रखा जाता है, तो बीच वाले तत्व का परमाणु भार, अन्य दो तत्वों के परमाणु भार का लगभग औसत होता है। साथ ही, बीच वाले तत्व के गुणधर्म भी पहले और तीसरे तत्व के गुणधर्मों के बीच के होते हैं। डोबेराइनर केवल ऐसे तीन त्रिक ही खोज पाए थे।
उदाहरण के लिए, लिथियम (Li), सोडियम (Na) और पोटेशियम (K) एक त्रिक बनाते हैं। (7+39)/2 = 23 (Na का परमाणु भार)।
लिथियम, सोडियम और पोटेशियम त्रिक:

तत्वपरमाणु-भारतत्वपरमाणु-भारतत्वपरमाणु-भार
Li7Ca40Cl35
Na23Sr88Br80
K39Ba137I127


In simple words: डोबेराइनर के त्रिक में तीन तत्वों का समूह होता है, जहाँ बीच वाले तत्व का भार बाकी दो के औसत के बराबर होता है और उसके गुण भी बीच के होते हैं।

 

🎯 Exam Tip: डोबेराइनर के त्रिक की परिभाषा में परमाणु भार का औसत और गुणधर्मों की मध्यस्थता दोनों बिंदुओं को शामिल करें, साथ ही एक स्पष्ट उदाहरण भी दें।

 

प्रश्न 5. गैलियम के अतिरिक्त अब तक कौन-कौनसे तत्वों का पता चला है जिनके लिए मैन्डेलीफ ने अपनी आवर्त सारणी में खाली स्थान छोड़ दिया था? दो उदाहरण दीजिए।
Answer: गैलियम के अलावा, मैन्डेलीफ ने अपनी आवर्त सारणी में स्कैण्डियम (Sc) और जर्मेनियम (Ge) तत्वों के लिए खाली स्थान छोड़े थे। इन तत्वों की खोज बाद में हुई, और उनके गुणधर्म मैन्डेलीफ द्वारा अनुमानित 'एका-बोरॉन', 'एका-एल्युमिनियम' तथा 'एका-सिलिकॉन' के समान थे।
In simple words: मैन्डेलीफ ने गैलियम के साथ-साथ स्कैण्डियम और जर्मेनियम के लिए भी जगह छोड़ी थी, जिनकी खोज बाद में हुई।

🎯 Exam Tip: मैन्डेलीफ द्वारा छोड़े गए रिक्त स्थानों के लिए गैलियम (एका-एल्युमिनियम), स्कैण्डियम (एका-बोरॉन), और जर्मेनियम (एका-सिलिकॉन) के नामों को याद रखें।

 

प्रश्न 6. आपके मतानुसार उत्कृष्ट गैसों को अलग समूह में क्यों रखा गया?
Answer: उत्कृष्ट गैसों को अलग समूह (शून्य वर्ग) में रखा गया क्योंकि वे रासायनिक रूप से बहुत अक्रिय (कम क्रियाशील) होती हैं। ये गैसें जैसे हीलियम (He), नियॉन (Ne), आर्गन (Ar), क्रिप्टॉन (Kr) और जीनॉन (Xe) आसानी से अन्य तत्वों के साथ अभिक्रिया नहीं करतीं, क्योंकि इनके बाहरी कोश पूरी तरह से भरे होते हैं। इनकी अक्रियता और वायुमंडल में बहुत कम मात्रा में पाए जाने के कारण, जब इनकी खोज हुई तो उन्हें मैन्डेलीफ की व्यवस्था में बिना छेड़छाड़ किए एक नए समूह में रखा गया।
In simple words: उत्कृष्ट गैसें किसी से क्रिया नहीं करतीं, इसलिए उन्हें एक अलग समूह में रखा गया ताकि वे आवर्त सारणी की पुरानी व्यवस्था को न बदलें।

🎯 Exam Tip: उत्कृष्ट गैसों को उनकी अक्रियता, भरे हुए बाहरी कोश, और कम उपलब्धता के कारण अलग समूह में रखने के मुख्य कारण बताएं।

 

प्रश्न 7. निम्न के नाम बताइए
(a) तीन तत्व जिनके बाह्यतम कोश में एक इलेक्ट्रॉन उपस्थित हो।
(b) दो तत्व जिनके बाह्यतम कोश में दो इलेक्ट्रॉन उपस्थित हों।
(c) तीन तत्व जिनका बाह्यतम कोश पूर्ण भरा हो।
Answer:
(a) लिथियम (Li), सोडियम (Na), तथा पोटेशियम (K) ऐसे तत्व हैं जिनके बाहरी कोश में एक इलेक्ट्रॉन होता है।
(b) मैग्नीशियम (Mg) तथा कैल्शियम (Ca) ऐसे तत्व हैं जिनके बाहरी कोश में दो इलेक्ट्रॉन होते हैं।
(c) नियॉन (Ne), आर्गन (Ar) तथा क्रिप्टॉन (Kr) ऐसे तत्व हैं जिनके बाहरी कोश पूरी तरह से भरे होते हैं।
In simple words: (a) लिथियम, सोडियम, पोटेशियम के बाहरी कोश में एक इलेक्ट्रॉन होता है। (b) मैग्नीशियम, कैल्शियम के बाहरी कोश में दो इलेक्ट्रॉन होते हैं। (c) नियॉन, आर्गन, क्रिप्टॉन के बाहरी कोश भरे होते हैं।

🎯 Exam Tip: तत्वों की संयोजकता इलेक्ट्रॉनों की संख्या के आधार पर उन्हें वर्गीकृत करने के लिए उनके समूह संख्या को याद रखें।

 

प्रश्न 8. किस तत्व में इलेक्ट्रॉनों से पूर्ण पूरित हैं?
(a) Ne (2, 8) में दो कोश हैं तथा दोनों ही इलेक्ट्रॉन से पूर्ण पूरित हैं।
(b) इलेक्ट्रॉनिक विन्यास 2, 8, 2 वाला तत्व मैग्नीशियम (Mg) है तथा इसका परमाणु क्रमांक 12 है।
(c) कुल तीन कोश तथा संयोजकता कोश में चार इलेक्ट्रॉन वाला तत्व सिलिकॉन (Si) है। Si = 2, 8, 4
(d) कुल दो कोश तथा संयोजकता कोश में तीन इलेक्ट्रॉन वाला तत्व बोरॉन (B) है। B = 2, 3
(e) कार्बन (C) में दूसरे कोश में इलेक्ट्रॉनों की संख्या पहले कोश में इलेक्ट्रॉनों की संख्या की दोगुनी है। C = 2, 4
Answer: यह प्रश्न सामान्यतः उन तत्वों को पहचानने के लिए पूछा जाता है जिनके कोश पूर्ण रूप से भरे होते हैं। दिए गए विकल्पों में से
(a) नियॉन (Ne) में दो कोश हैं (2, 8) और दोनों ही इलेक्ट्रॉनों से पूरी तरह भरे हुए हैं। नियॉन एक उत्कृष्ट गैस है और इसका स्थायी इलेक्ट्रॉनिक विन्यास होता है।
In simple words: नियॉन (Ne) में दो कोश होते हैं, और दोनों ही इलेक्ट्रॉनों से भरे हुए होते हैं, जिससे यह बहुत स्थिर होता है।

🎯 Exam Tip: पूर्ण रूप से भरे हुए कोशों वाले तत्वों को पहचानें, खासकर उत्कृष्ट गैसों को, क्योंकि वे रासायनिक रूप से स्थिर होती हैं।

 

प्रश्न 9.
(a) आवर्त सारणी में बोरॉन के स्तम्भ के सभी तत्वों के कौनसे गुणधर्म समान हैं?
(b) आवर्त सारणी में फ्लुओरीन के स्तम्भ के सभी तत्वों के कौनसे गुणधर्म समान हैं?
Answer:
(a) (i) बोरॉन के स्तंभ के सभी तत्वों का बाहरी इलेक्ट्रॉनिक विन्यास समान होता है, यानी उनके बाहरी कोश में तीन इलेक्ट्रॉन होते हैं।
(ii) बोरॉन के स्तंभ के सभी तत्व +3 संयोजकता (ऑक्सीकरण अवस्था) दर्शाते हैं।
(b) (i) फ्लुओरीन के स्तंभ के सभी तत्वों का बाहरी इलेक्ट्रॉनिक विन्यास समान होता है, यानी उनके बाहरी कोश में सात इलेक्ट्रॉन होते हैं, जिससे उनकी संयोजकता 1 होती है।
(ii) ये सभी तत्व अधातु हैं तथा द्विपरमाणुक अणु बनाते हैं।
In simple words: (a) बोरॉन वाले समूह के सभी तत्वों के बाहरी कोश में तीन इलेक्ट्रॉन होते हैं और उनकी संयोजकता +3 होती है। (b) फ्लुओरीन वाले समूह के सभी तत्वों के बाहरी कोश में सात इलेक्ट्रॉन होते हैं, उनकी संयोजकता 1 होती है और वे अधातु होकर दो परमाणुओं वाले अणु बनाते हैं।

🎯 Exam Tip: किसी भी वर्ग या स्तंभ के तत्वों के समान रासायनिक गुणधर्मों का मुख्य कारण उनके बाहरी कोश में इलेक्ट्रॉनों की संख्या का समान होना होता है।

 

प्रश्न 10. एक परमाणु का इलेक्ट्रॉनिक विन्यास 2, 8, 7 है।
(a) इस तत्व की परमाणु-संख्या क्या है?
(b) निम्न में किस तत्व के साथ इसकी रासायनिक समानता होगी? (परमाणु-संख्या कोष्ठक में दी गई है)।
N(7) F(9) P(15) Ar(18)
Answer:
(a) इलेक्ट्रॉनिक विन्यास 2, 8, 7 का अर्थ है कि परमाणु में कुल \( 2 + 8 + 7 = 17 \) इलेक्ट्रॉन हैं। एक उदासीन परमाणु में इलेक्ट्रॉनों की संख्या ही उसकी परमाणु संख्या होती है। इसलिए, इस तत्व की परमाणु संख्या 17 है, और यह तत्व क्लोरीन (Cl) है।
(b) इस तत्व (क्लोरीन) की रासायनिक समानता फ्लुओरीन (F) (परमाणु संख्या 9) के साथ होगी। ऐसा इसलिए है क्योंकि फ्लुओरीन का इलेक्ट्रॉनिक विन्यास 2, 7 है, और यह भी क्लोरीन की तरह वर्ग 17 (हैलोजन समूह) का सदस्य है। समान बाहरी इलेक्ट्रॉनिक विन्यास वाले तत्वों के रासायनिक गुण समान होते हैं।
In simple words: (a) इलेक्ट्रॉनिक विन्यास 2, 8, 7 वाले तत्व की परमाणु संख्या 17 है, जो क्लोरीन है। (b) यह फ्लुओरीन (F) से रासायनिक रूप से मिलता-जुलता है क्योंकि दोनों एक ही समूह में हैं और उनके बाहरी कोश में समान इलेक्ट्रॉन हैं।

🎯 Exam Tip: इलेक्ट्रॉनिक विन्यास से परमाणु संख्या निकालने और समान रासायनिक गुणों वाले तत्वों को पहचानने के लिए बाहरी कोश में इलेक्ट्रॉनों की संख्या पर ध्यान दें।

 

प्रश्न 11. आवर्त सारणी में तीन तत्व A, B तथा C की स्थिति निम्न प्रकार है
अब बताइए कि

(a) A धातु है या अधातु।
(b) A की अपेक्षा C अधिक अभिक्रियाशील है या कम?
(c) C का आकार B से बड़ा होगा या छोटा?
(d) तत्व A, किस प्रकार का आयन (धनायन या ऋणायन) बनाएगा?
Answer: आवर्त सारणी में वर्ग 16 तथा 17 को देखने पर यह ज्ञात होता है:
(a) A एक अधातु है। यह इसलिए है क्योंकि आवर्त सारणी में बाएं से दाएं जाने पर धात्विक गुण कम होते जाते हैं। वर्ग 16 और 17 के तत्व उच्च विद्युतऋणात्मकता वाले अधातु होते हैं।
(b) C की अभिक्रियाशीलता A की अपेक्षा कम होगी। वर्ग 17 में नीचे जाने पर अभिक्रियाशीलता कम होती जाती है।
(c) C का आकार B से छोटा होगा। आवर्त में बाएं से दाएं जाने पर परमाणु आकार कम होता जाता है, क्योंकि नाभिकीय आवेश बढ़ता है।
(d) तत्व A मुख्य रूप से ऋणायन बनाएगा क्योंकि यह एक अधातु है। अधातुएँ इलेक्ट्रॉन ग्रहण करके ऋणायन बनाती हैं।
In simple words: (a) A अधातु है क्योंकि वह आवर्त सारणी के दाईं ओर है। (b) C, A से कम क्रियाशील होगा क्योंकि वर्ग में नीचे जाने पर क्रियाशीलता घटती है। (c) C, B से छोटा होगा क्योंकि आवर्त में दाएं जाने पर आकार घटता है। (d) A इलेक्ट्रॉन लेकर ऋणायन बनाएगा।

🎯 Exam Tip: आवर्त सारणी में तत्वों की स्थिति से उनके धात्विक/अधात्विक गुण, अभिक्रियाशीलता और परमाणु आकार में रुझानों को याद रखें।

 

प्रश्न 12. तत्वों के इलेक्ट्रॉनिक विन्यास का आधुनिक आवर्त सारणी में तत्व की स्थिति से क्या सम्बन्ध है?
Answer: आधुनिक आवर्त सारणी परमाणु क्रमांक के आधार पर बनाई गई है, और तत्वों का इलेक्ट्रॉनिक विन्यास भी परमाणु क्रमांक पर आधारित होता है। तत्वों के रासायनिक गुण उनके इलेक्ट्रॉनिक विन्यास पर निर्भर करते हैं। जिन तत्वों के बाहरी कोश में इलेक्ट्रॉनों की संख्या समान होती है, उन्हें एक ही समूह (वर्ग) में रखा जाता है। किसी आवर्त में बाएं से दाएं जाने पर संयोजकता कोश में इलेक्ट्रॉनों की संख्या 1 इकाई बढ़ जाती है, क्योंकि परमाणु क्रमांक भी 1 इकाई बढ़ता है। इससे तत्वों के रासायनिक गुणों की आवर्तिता स्पष्ट होती है।
In simple words: आधुनिक आवर्त सारणी में तत्व की जगह उसके इलेक्ट्रॉनिक विन्यास से तय होती है। समान बाहरी इलेक्ट्रॉन वाले तत्व एक ही समूह में होते हैं, और आवर्त में इलेक्ट्रॉन बढ़ते जाते हैं।

🎯 Exam Tip: आधुनिक आवर्त सारणी में तत्व की स्थिति को समझने के लिए इलेक्ट्रॉनिक विन्यास और परमाणु क्रमांक के सीधे संबंध को समझाएं।

 

प्रश्न 13. आधुनिक आवर्त सारणी में कैल्सियम (परमाणु संख्या 20) के चारों ओर परमाणु संख्या 12, 19, 21 तथा 38 वाले तत्व स्थित हैं। इनमें से किन तत्वों के रासायनिक गुणधर्म कैल्सियम के समान हैं?
Answer: कैल्सियम (परमाणु संख्या 20) के रासायनिक गुणधर्म उन तत्वों के समान होंगे जिनके बाहरी कोश में इलेक्ट्रॉनों की संख्या समान हो। कैल्सियम का इलेक्ट्रॉनिक विन्यास 2, 8, 8, 2 है। इसलिए, हमें दिए गए तत्वों के इलेक्ट्रॉनिक विन्यास देखने होंगे:

परमाणु संख्यातत्वइलेक्ट्रॉनिक विन्यास
12Mg2, 8, 2
19K2, 8, 8, 1
20Ca2, 8, 8, 2
21Sc2, 8, 9, 2
38Sr2, 8, 18, 8, 2

मैग्नीशियम (Mg) और स्ट्रॉन्शियम (Sr) के बाहरी कोश में 2 इलेक्ट्रॉन हैं, जो कैल्सियम के समान हैं। इसलिए, मैग्नीशियम और स्ट्रॉन्शियम के रासायनिक गुणधर्म कैल्सियम के समान होंगे।
In simple words: कैल्सियम के रासायनिक गुण मैग्नीशियम और स्ट्रॉन्शियम के समान होंगे, क्योंकि तीनों के बाहरी कोश में 2 इलेक्ट्रॉन होते हैं।

🎯 Exam Tip: समान रासायनिक गुणधर्मों वाले तत्वों को पहचानने के लिए उनके बाहरी कोश में इलेक्ट्रॉनों की संख्या की तुलना करें, क्योंकि यह उनकी संयोजकता और अभिक्रियाशीलता को निर्धारित करता है।

 

प्रश्न 15.
1. संयोजकता क्या होती है?
2. s तथा p ब्लॉक के तत्वों की संयोजकता कैसे ज्ञात होती है?
3. किसी समूह (वर्ग) में संयोजकता में क्या परिवर्तन होता है?
Answer:
1. संयोजकता: किसी तत्व की संयोजकता उसके परमाणु के बाहरी कोश में उपस्थित संयोजकता इलेक्ट्रॉनों की संख्या द्वारा निर्धारित होती है। इसे किसी तत्व के एक परमाणु द्वारा अन्य परमाणुओं के साथ संयोग करने की क्षमता भी कहते हैं, खासकर हाइड्रोजन परमाणुओं की संख्या या ऑक्सीजन परमाणुओं की आधी संख्या के संदर्भ में।
2. s तथा p ब्लॉक के तत्वों की संयोजकता:
- s ब्लॉक (वर्ग 1 और वर्ग 2) के तत्वों के बाहरी कोश में क्रमशः 1 और 2 इलेक्ट्रॉन होते हैं, इसलिए इनकी संयोजकता भी क्रमशः 1 और 2 ही होती है।
- p ब्लॉक (वर्ग 13 से 17) के तत्वों की संयोजकता उनके बाहरी कोश में इलेक्ट्रॉनों की संख्या से, या 8 में से बाहरी कोश में इलेक्ट्रॉनों की संख्या को घटाकर प्राप्त होती है। उदाहरण के लिए, वर्ग 17 के तत्वों के बाहरी कोश में 7 इलेक्ट्रॉन होते हैं, तो उनकी संयोजकता \( 8 - 7 = 1 \) होती है।
3. समूह में संयोजकता में परिवर्तन: एक ही वर्ग के सभी सदस्यों की संयोजकता समान होती है क्योंकि उनके बाहरी कोश का इलेक्ट्रॉनिक विन्यास समान होता है। इसका मतलब है कि वर्ग में ऊपर से नीचे जाने पर संयोजकता नहीं बदलती है।
In simple words: 1. संयोजकता बताती है कि कोई तत्व कितने इलेक्ट्रॉन दे या ले सकता है। 2. s ब्लॉक में बाहरी इलेक्ट्रॉन ही संयोजकता होते हैं, जबकि p ब्लॉक में 8 से बाहरी इलेक्ट्रॉन घटाकर संयोजकता निकालते हैं। 3. एक समूह में सभी तत्वों की संयोजकता समान रहती है।

🎯 Exam Tip: संयोजकता की परिभाषा, s और p ब्लॉक के लिए संयोजकता ज्ञात करने के तरीके, और समूह में संयोजकता की स्थिरता को स्पष्ट रूप से समझाएं।

 

प्रश्न 16. दो तत्व X तथा Y जिनके परमाणु क्रमांक क्रमशः 11 तथा 17
(a) किस वर्ग में हैं?
(b) किस आवर्त में हैं?
(c) दोनों तत्व (X व Y) आवर्त सारणी के तीसरे आवर्त में हैं।

Answer:
तत्व X का परमाणु क्रमांक 11 है, जो सोडियम (Na) है। इसका इलेक्ट्रॉनिक विन्यास 2, 8, 1 है।
तत्व Y का परमाणु क्रमांक 17 है, जो क्लोरीन (Cl) है। इसका इलेक्ट्रॉनिक विन्यास 2, 8, 7 है।
(a) तत्व X (Na) वर्ग 1 में है, और तत्व Y (Cl) वर्ग 17 में है।
(b) तत्व X (Na) आवर्त 3 में है, और तत्व Y (Cl) आवर्त 3 में है।
(c) यह कथन कि दोनों तत्व (X व Y) आवर्त सारणी के तीसरे आवर्त में हैं, सही है।
In simple words: तत्व X (सोडियम) वर्ग 1 और आवर्त 3 में है। तत्व Y (क्लोरीन) वर्ग 17 और आवर्त 3 में है। हाँ, दोनों ही तीसरे आवर्त में हैं।

🎯 Exam Tip: तत्वों के परमाणु क्रमांक से उनके इलेक्ट्रॉनिक विन्यास, वर्ग और आवर्त की पहचान करना सीखें, क्योंकि यह उनकी स्थिति और गुणों को समझने में मदद करता है।

 

प्रश्न 17. एक तत्व Y आवर्त सारणी के दूसरे आवर्त और वर्ग 16 में है
(a) क्या वह धातु है या अधातु?
(b) उसकी संयोजकता कितनी है?
Answer:
(a) तत्व Y आवर्त सारणी के दूसरे आवर्त और वर्ग 16 में स्थित है। वर्ग 16 के तत्व आवर्त सारणी के दाईं ओर स्थित होते हैं और वे अधातु होते हैं। इसलिए, तत्व Y एक अधातु है।
(b) तत्व Y ऑक्सीजन (O) है, जिसका परमाणु क्रमांक 8 है और इलेक्ट्रॉनिक विन्यास 2, 6 है। इसके बाहरी कोश में 6 इलेक्ट्रॉन हैं। इसकी संयोजकता 2 है (क्योंकि 8-6 = 2)।
In simple words: (a) तत्व Y एक अधातु है। (b) तत्व Y ऑक्सीजन है और इसकी संयोजकता 2 है।

🎯 Exam Tip: आवर्त सारणी में तत्वों की स्थिति (आवर्त और वर्ग) से उनके धात्विक/अधात्विक गुण और संयोजकता को आसानी से ज्ञात किया जा सकता है।

 

प्रश्न 18.
(अ) समस्थानिक किसे कहते हैं?
(ब) किन्हीं दो उत्कृष्ट गैसों के नाम लिखिए।
(स) एक तत्व का इलेक्ट्रॉनिक विन्यास 2, 8, 2 है। इसकी वर्ग संख्या तथा संयोजकता क्या होगी?
Answer:
(अ) समस्थानिक: एक ही तत्व के वे परमाणु जिनकी परमाणु संख्या (प्रोटॉन की संख्या) समान होती है, लेकिन द्रव्यमान संख्या (न्यूट्रॉन की संख्या में अंतर के कारण) भिन्न-भिन्न होती है, उन्हें समस्थानिक कहते हैं। उदाहरण के लिए, क्लोरीन के दो समस्थानिक \( \text{Cl}^{35} \) और \( \text{Cl}^{37} \) हैं।
(ब) दो उत्कृष्ट गैसों के नाम: (i) हीलियम (He) और (ii) नियॉन (Ne)। आर्गन, क्रिप्टॉन और जीनॉन भी उत्कृष्ट गैसें हैं।
(स) इलेक्ट्रॉनिक विन्यास 2, 8, 2 वाले तत्व का परमाणु क्रमांक \( 2+8+2 = 12 \) है, जो मैग्नीशियम (Mg) है। इसके बाहरी कोश में 2 इलेक्ट्रॉन हैं, इसलिए इसकी वर्ग संख्या 2 है और संयोजकता भी 2 है।
In simple words: (अ) समस्थानिक एक ही तत्व के परमाणु होते हैं जिनकी परमाणु संख्या समान लेकिन द्रव्यमान संख्या अलग होती है। (ब) हीलियम और नियॉन दो उत्कृष्ट गैसें हैं। (स) इलेक्ट्रॉनिक विन्यास 2, 8, 2 वाला तत्व मैग्नीशियम है, यह वर्ग 2 में आता है और इसकी संयोजकता भी 2 है।

🎯 Exam Tip: समस्थानिकों की परिभाषा में परमाणु संख्या की समानता और द्रव्यमान संख्या के अंतर को स्पष्ट करें। उत्कृष्ट गैसों और इलेक्ट्रॉनिक विन्यास से तत्व की पहचान करना भी महत्वपूर्ण है।

 

प्रश्न 19. परमाणु के बारे में विभिन्न दार्शनिकों के क्या मत थे?
Answer: परमाणु के बारे में विभिन्न दार्शनिकों के अलग-अलग मत थे:
- प्राचीन भारतीय दार्शनिक महर्षि कणाद: उन्होंने बताया कि पदार्थ को छोटे-छोटे टुकड़ों में बांटने पर अंत में सबसे सूक्ष्मतम कण प्राप्त होते हैं, जिन्हें 'परमाणु' कहते हैं। उनके अनुसार, परमाणु को और अधिक विभाजित नहीं किया जा सकता।
- भारतीय दार्शनिक पकुधा कात्यायन: उन्होंने कहा कि पदार्थों के भिन्न-भिन्न रूप इन कणों के संयुक्त होने से बनते हैं।
- ग्रीक दार्शनिक डेमोक्रिट्स एवं ल्यूसीपस: इन्होंने सबसे सूक्ष्मतम अविभाज्य कणों को 'एटम्स' (atoms) कहा। यह ग्रीक शब्द 'एटॉमियो' से लिया गया है, जिसका अर्थ है 'न काटा जा सकने वाला' या 'अविभाज्य'। यह आधुनिक परमाणु सिद्धांत की नींव थी।
In simple words: महर्षि कणाद ने सबसे छोटे कण को परमाणु कहा। पकुधा कात्यायन ने कहा कि ये कण मिलकर चीजें बनाते हैं। ग्रीक दार्शनिकों ने इन्हें 'एटम्स' कहा, जिसका मतलब है अविभाज्य।

🎯 Exam Tip: विभिन्न दार्शनिकों के प्रमुख विचारों को उनके नाम के साथ संक्षेप में प्रस्तुत करें, खासकर 'परमाणु' और 'एटम्स' शब्दों की उत्पत्ति को।

 

प्रश्न 20. थॉमसन का परमाणु मॉडल क्या था? समझाइए।
Answer: थॉमसन का परमाणु मॉडल (प्लम पुडिंग मॉडल) के अनुसार, परमाणु एक धनावेशित गोले की तरह होता है, जिसमें इलेक्ट्रॉन ठीक वैसे ही धंसे होते हैं जैसे तरबूज में बीज। इस मॉडल में, धनावेशित और ऋणावेशित कणों की मात्रा समान होती है, जिससे परमाणु विद्युत रूप से उदासीन होता है। यह मॉडल परमाणु की स्थिरता को समझाता है, लेकिन बाद के प्रयोगों, जैसे रदरफोर्ड के स्वर्ण पत्र प्रयोग, की व्याख्या नहीं कर सका।
थॉमसन का परमाणु प्रतिरूप:
धनात्मक गोलाe-e-e-e-e-इलेक्ट्रॉन
In simple words: थॉमसन का मॉडल कहता है कि परमाणु एक पॉजिटिव तरबूज जैसा है, जिसमें नेगेटिव इलेक्ट्रॉन बीज की तरह फैले होते हैं, जिससे परमाणु उदासीन रहता है।

🎯 Exam Tip: थॉमसन के परमाणु मॉडल को 'प्लम पुडिंग' या 'तरबूज' मॉडल के रूप में याद रखें और उसकी मुख्य विशेषता (धनावेशित गोला और धंसे हुए इलेक्ट्रॉन) को समझाएं।

 

प्रश्न 21. रदरफोर्ड के परमाणु मॉडल के निष्कर्ष बताइए।
Answer: रदरफोर्ड ने अपने स्वर्ण पत्र प्रयोग के आधार पर परमाणु के बारे में निम्नलिखित निष्कर्ष दिए:
- परमाणु का अधिकांश भाग रिक्त होता है, और धनावेशित द्रव्यमान (नाभिक) परमाणु के केंद्र में एक बहुत छोटे आयतन में स्थित होता है।
- इलेक्ट्रॉन नाभिक के चारों ओर निश्चित वृत्ताकार पथों में बहुत तेजी से घूमते हैं, जिन्हें 'कक्षा' या 'कोश' कहते हैं।
- परमाणु विद्युत रूप से उदासीन होता है, क्योंकि इसमें जितने इलेक्ट्रॉन होते हैं, उतने ही प्रोटॉन नाभिक में उपस्थित होते हैं।
Uनाभिकα कणसीधे निकलने वाले α कण
In simple words: रदरफोर्ड ने कहा कि परमाणु में ज्यादातर खाली जगह होती है, बीच में एक छोटा पॉजिटिव नाभिक होता है, और इलेक्ट्रॉन उसके चारों ओर घूमते हैं। परमाणु कुल मिलाकर उदासीन होता है।

🎯 Exam Tip: रदरफोर्ड के मॉडल के मुख्य निष्कर्षों में नाभिक की उपस्थिति, परमाणु का अधिकांश खाली स्थान, और इलेक्ट्रॉनों का वृत्ताकार पथ याद रखें।

 

प्रश्न 22.
(a) रदरफोर्ड के परमाणु मॉडल की सौर मॉडल से तुलना कीजिए।
(b) रदरफोर्ड के परमाणु मॉडल की कमियाँ बताइए।
Answer:
(a) रदरफोर्ड के परमाणु मॉडल की सौर मॉडल से तुलना: रदरफोर्ड के परमाणु मॉडल को सौर मंडल के प्रतिरूप के समान माना जाता है। इस मॉडल में नाभिक को सूर्य के समान माना जाता है, और इलेक्ट्रॉन विभिन्न कक्षाओं में नाभिक के चारों ओर ठीक वैसे ही घूमते हैं जैसे ग्रह सूर्य के चारों ओर घूमते हैं। यह मॉडल परमाणु संरचना की व्याख्या करता है जिसमें एक केंद्रीय नाभिक और उसके चारों ओर इलेक्ट्रॉन होते हैं।
(b) रदरफोर्ड के परमाणु मॉडल की कमियाँ:
1. यह मॉडल परमाणु के स्थायित्व की व्याख्या नहीं कर सका। मैक्सवेल के सिद्धांत के अनुसार, वृत्ताकार कक्ष में गति करता हुआ इलेक्ट्रॉन विकिरण उत्सर्जित करेगा, जिससे उसकी ऊर्जा कम होती जाएगी और अंततः वह नाभिक में गिर जाएगा, लेकिन वास्तव में ऐसा नहीं होता।
2. यह मॉडल परमाणु के स्पेक्ट्रम और एक कक्षा में उपस्थित इलेक्ट्रॉनों की संख्या तथा उनकी व्यवस्था को स्पष्ट नहीं कर पाया।
In simple words: (a) रदरफोर्ड का परमाणु मॉडल सौर मंडल जैसा है, जहाँ नाभिक सूर्य है और इलेक्ट्रॉन ग्रहों की तरह घूमते हैं। (b) इसकी कमियाँ थीं कि यह परमाणु की स्थिरता और स्पेक्ट्रम को समझा नहीं पाया।

🎯 Exam Tip: रदरफोर्ड के मॉडल की सौर मंडल से तुलना करते समय नाभिक को सूर्य और इलेक्ट्रॉनों को ग्रहों से जोड़कर समझाएं। मॉडल की मुख्य कमी (परमाणु का स्थायित्व) को स्पष्ट रूप से बताएं।

 

प्रश्न 23. तत्वों के वर्गीकरण की आवश्यकता क्यों हुई?
Answer: तत्वों के वर्गीकरण की आवश्यकता इसलिए पड़ी क्योंकि प्रकृति में बहुत सारे तत्व मौजूद हैं (अभी तक 114 से अधिक तत्व ज्ञात हैं), और उनमें से कुछ मानव निर्मित भी हैं। इन सभी तत्वों को अलग-अलग याद रखना, उनके रासायनिक और भौतिक गुणों को समझना, और उनसे बनने वाले यौगिकों का अध्ययन करना बहुत मुश्किल कार्य था। इसलिए, वैज्ञानिकों ने तत्वों को उनके गुणों के आधार पर एक क्रम में व्यवस्थित करने का प्रयास किया, ताकि उनका अध्ययन सरल और तर्कसंगत तरीके से किया जा सके। इस वर्गीकरण से भविष्य में खोजे जाने वाले नए तत्वों का अध्ययन भी सुव्यवस्थित तरीके से हो सकेगा।
In simple words: बहुत सारे तत्व होने के कारण, उनके गुणों को आसानी से समझने के लिए तत्वों को बांटने (वर्गीकृत करने) की जरूरत पड़ी।

🎯 Exam Tip: तत्वों के वर्गीकरण की आवश्यकता के मुख्य कारणों में तत्वों की अधिक संख्या, उनके गुणों का अध्ययन करने में कठिनाई, और अध्ययन को सरल व व्यवस्थित बनाने की आवश्यकता को शामिल करें।

 

प्रश्न 24. तत्वों के गुणों में आवर्तिता क्या होती है? समझाइए।
Answer: तत्वों के गुणों में आवर्तिता का अर्थ है कि आवर्त सारणी में वर्ग में ऊपर से नीचे जाने पर या आवर्त में बाएं से दाएं जाने पर तत्वों के भौतिक और रासायनिक गुणों में एक निश्चित क्रम में बदलाव (बढ़ना या घटना) दिखाई देता है। तत्वों के गुणों में यह नियमित परिवर्तन उनके इलेक्ट्रॉनिक विन्यास पर निर्भर करता है। आवर्त सारणी में इलेक्ट्रॉनिक विन्यास में क्रमिक परिवर्तन होता है, और इसी कारण तत्वों के गुणों में भी क्रमिक परिवर्तन होता है। तत्वों के गुणों में इस क्रमिक परिवर्तन को ही गुणों में आवर्तिता कहते हैं। आवर्ती गुणधर्मों के कुछ उदाहरण परमाणु त्रिज्या, गलनांक, क्वथनांक, आयनन एन्थैल्पी और संयोजकता आदि हैं।
In simple words: तत्वों के गुणों में आवर्तिता का मतलब है कि आवर्त सारणी में ऊपर से नीचे या बाएं से दाएं जाने पर गुणों में एक खास क्रम में बदलाव आता है, जैसे आकार या गलनांक।

🎯 Exam Tip: आवर्तिता की परिभाषा में आवर्त सारणी में गुणों के नियमित बदलाव और इलेक्ट्रॉनिक विन्यास के साथ उसके संबंध को स्पष्ट करें, साथ ही कुछ उदाहरण भी दें।

 

प्रश्न 25.
1. धनायन तथा ऋणायन कैसे बनते हैं तथा इनकी त्रिज्या परमाणु से कम होती है या अधिक?
2. s खण्ड के तत्वों के धनायनों का आकार संगत परमाणु से बहुत छोटा होता है, क्यों?
Answer:
1. धनायन तथा ऋणायन का बनना और उनकी त्रिज्या:
- धनायन: जब कोई परमाणु इलेक्ट्रॉन त्यागता है तो धनावेशित आयन (धनायन) बनता है। धनायन की त्रिज्या अपने मूल उदासीन परमाणु की त्रिज्या से हमेशा कम होती है, क्योंकि इलेक्ट्रॉन त्यागने से बाहरी कोश या तो हट जाता है या नाभिक का शेष इलेक्ट्रॉनों पर प्रभावी आकर्षण बढ़ जाता है।
- ऋणायन: जब कोई परमाणु इलेक्ट्रॉन ग्रहण करता है तो ऋणावेशित आयन (ऋणायन) बनता है। ऋणायन की त्रिज्या अपने मूल उदासीन परमाणु की त्रिज्या से हमेशा अधिक होती है, क्योंकि अतिरिक्त इलेक्ट्रॉन आने से इलेक्ट्रॉनों के बीच प्रतिकर्षण बढ़ जाता है और प्रभावी नाभिकीय आवेश कम हो जाता है।
2. s-खंड के तत्वों के धनायनों का आकार: s-खंड के तत्वों के धनायनों का आकार उनके संगत उदासीन परमाणुओं से बहुत छोटा होता है। ऐसा इसलिए है क्योंकि s-खंड के तत्व (वर्ग 1 और 2) एक या दो इलेक्ट्रॉन त्यागते हैं, जिससे उनका बाहरी ऊर्जा कोश हट जाता है। साथ ही, नाभिक का प्रभावी आवेश शेष इलेक्ट्रॉनों पर बढ़ जाता है, जिससे आयन का आकार सिकुड़ जाता है।
In simple words: 1. परमाणु इलेक्ट्रॉन खोकर धनायन (छोटे) और इलेक्ट्रॉन पाकर ऋणायन (बड़े) बनते हैं। 2. s-ब्लॉक के धनायन अपने मूल परमाणुओं से बहुत छोटे होते हैं क्योंकि वे बाहरी कोश खो देते हैं और नाभिक इलेक्ट्रॉनों को ज्यादा खींचता है।

🎯 Exam Tip: धनायन और ऋणायन के बनने की प्रक्रिया और उनकी त्रिज्या पर पड़ने वाले प्रभाव को इलेक्ट्रॉन त्यागने या ग्रहण करने और प्रभावी नाभिकीय आवेश में बदलाव से जोड़कर समझाएं। s-ब्लॉक के धनायनों के छोटे आकार का कारण विशेष रूप से उल्लेख करें।

 

प्रश्न 26.
1. किसी एकल परमाणु की त्रिज्या ज्ञात नहीं की जा सकती, क्यों?
2. धात्विक त्रिज्या किसे कहते हैं?
Answer:
1. एकल परमाणु की त्रिज्या: किसी एकल परमाणु की त्रिज्या सीधे ज्ञात करना संभव नहीं है। ऐसा इसलिए है क्योंकि परमाणु अत्यंत छोटे होते हैं और प्रायः स्वतंत्र रूप से नहीं पाए जाते, बल्कि अणुओं या परमाणुओं के समूहों के रूप में होते हैं। एक विलगित परमाणु को प्राप्त करना बहुत मुश्किल है।
2. धात्विक त्रिज्या: धात्विक त्रिज्या को एक धातु क्रिस्टल जालक में पास-पास स्थित दो आसन्न परमाणुओं के नाभिकों के बीच की दूरी के आधे के रूप में परिभाषित किया जाता है। यह धात्विक आबंध में जुड़े परमाणुओं के आकार को दर्शाती है।
In simple words: 1. अकेले परमाणु का आकार मापना मुश्किल है क्योंकि वे आमतौर पर अकेले नहीं मिलते। 2. धात्विक त्रिज्या एक धातु में दो पड़ोसी परमाणुओं के केंद्रों के बीच की दूरी का आधा होती है।

🎯 Exam Tip: एकल परमाणु की त्रिज्या मापने की कठिनाई का कारण उसके स्वतंत्र अस्तित्व का अभाव बताएं, और धात्विक त्रिज्या को क्रिस्टल जालक में परिभाषित करें।

 

प्रश्न 27.
1. निम्न को परिभाषित कीजिए
(a) परिवर्ती संयोजकता
(b) ऑक्सीकरण अवस्था।
2. संयोजी कोश में उपस्थित इलेक्ट्रॉनों की संख्या के आधार पर विभिन्न तत्वों के हाइड्रोजन तथा ऑक्सीजन के साथ बने यौगिकों की सारणी बनाइए।
Answer:
1. परिभाषाएँ:
(a) परिवर्ती संयोजकता: d-ब्लॉक, लैंथेनॉइड और एक्टिनॉइड जैसे तत्व एक से अधिक संयोजकता प्रदर्शित करते हैं। इसे परिवर्ती संयोजकता कहते हैं। यह इन तत्वों का एक विशेष गुण है क्योंकि वे विभिन्न ऑक्सीकरण अवस्थाओं में मौजूद हो सकते हैं।
(b) ऑक्सीकरण अवस्था: किसी तत्व का एक परमाणु दूसरे तत्व के परमाणु से जितनी संख्या में आवेश ग्रहण करता है या देता है, उसे उसकी ऑक्सीकरण अवस्था कहते हैं। यह एक तत्व के इलेक्ट्रॉनों को त्यागने या ग्रहण करने की क्षमता को दर्शाता है।
2. संयोजी कोश में उपस्थित इलेक्ट्रॉनों की संख्या के आधार पर हाइड्रोजन तथा ऑक्सीजन के साथ बने यौगिकों की सारणी:

वर्ग संख्यासंयोजी इलेक्ट्रॉनसंयोजकताहाइड्रोजन के साथ यौगिकऑक्सीजन के साथ यौगिक
1333\( \text{AlH}_3 \)\( \text{Al}_2\text{O}_3 \)
1444\( \text{SiH}_4 \)\( \text{SiO}_2 \)
1553, 5\( \text{PH}_3 \)\( \text{P}_2\text{O}_5 \)
1662, 6\( \text{H}_2\text{S} \)\( \text{SO}_3 \)
1771, 7\( \text{HCl} \)\( \text{Cl}_2\text{O}_7 \)


In simple words: 1. परिवर्ती संयोजकता मतलब तत्व कई तरह की संयोजकता दिखा सकते हैं। ऑक्सीकरण अवस्था बताती है कि कोई तत्व कितना आवेश ले या दे सकता है। 2. सारणी बताती है कि विभिन्न तत्वों के बाहरी इलेक्ट्रॉन कितने हैं और वे हाइड्रोजन और ऑक्सीजन के साथ कैसे यौगिक बनाते हैं।

🎯 Exam Tip: परिवर्ती संयोजकता और ऑक्सीकरण अवस्था की परिभाषा स्पष्ट रूप से दें, और तत्वों की संयोजकता के आधार पर बने यौगिकों के उदाहरणों को सारणी में सही ढंग से दर्शाएं।

 

प्रश्न 28. इलेक्ट्रॉन लब्धि एन्थैल्पी किसे कहते हैं? आवर्त सारणी के किसी आवर्त तथा वर्ग में इसकी आवर्तिता भी समझाइए।
Answer:
इलेक्ट्रॉन लब्धि एन्थैल्पी: गैसीय अवस्था में किसी उदासीन परमाणु द्वारा एक इलेक्ट्रॉन ग्रहण करके ऋणात्मक आयन बनाने पर जो ऊर्जा मुक्त होती है, उसे इलेक्ट्रॉन लब्धि एन्थैल्पी या इलेक्ट्रॉन बंधुता कहते हैं। इसका मान धनात्मक या ऋणात्मक हो सकता है, जो तत्व की प्रकृति पर निर्भर करता है।
उदाहरण: उदासीन परमाणु(g) + \( \text{e}^- \longrightarrow \) ऋणायन(g) + मुक्त ऊर्जा (इलेक्ट्रॉन लब्धि एन्थैल्पी)
आवर्त में आवर्तिता: आवर्त सारणी में बाएं से दाएं जाने पर परमाणु का आकार छोटा होता जाता है, और प्रभावी नाभिकीय आवेश बढ़ता जाता है। इस वजह से बाहरी इलेक्ट्रॉनों के प्रति आकर्षण बढ़ता है, जिससे इलेक्ट्रॉन लब्धि एन्थैल्पी का मान बढ़ता है (यानी अधिक ऊर्जा मुक्त होती है)।
वर्ग में आवर्तिता: वर्ग में ऊपर से नीचे जाने पर परमाणु आकार बढ़ता है, जिससे प्रभावी नाभिकीय आवेश कम हो जाता है। इस कारण बाहरी इलेक्ट्रॉनों के प्रति आकर्षण घटता है और इलेक्ट्रॉन लब्धि एन्थैल्पी का मान कम होता है (यानी कम ऊर्जा मुक्त होती है)।
In simple words: इलेक्ट्रॉन लब्धि एन्थैल्पी वह ऊर्जा है जो परमाणु में इलेक्ट्रॉन जोड़ने पर निकलती है। आवर्त में यह बढ़ती है क्योंकि परमाणु छोटा होता है, और वर्ग में यह घटती है क्योंकि परमाणु बड़ा होता है।

🎯 Exam Tip: इलेक्ट्रॉन लब्धि एन्थैल्पी की परिभाषा में गैसीय अवस्था और उदासीन परमाणु को शामिल करें, और आवर्त तथा वर्ग में इसके रुझानों को परमाणु आकार और प्रभावी नाभिकीय आवेश से जोड़कर समझाएं।

 

प्रश्न 29. आयनन एन्थैल्पी क्या होती है? समझाइए।
Answer:
आयनन एन्थैल्पी: गैसीय अवस्था में किसी उदासीन परमाणु से सबसे बाहरी कोश से एक इलेक्ट्रॉन निकालने के लिए आवश्यक न्यूनतम ऊर्जा को आयनन एन्थैल्पी कहते हैं। इसे किलो कैलोरी/मोल, किलो जूल/मोल या इलेक्ट्रॉन वोल्ट/मोल में मापा जाता है। इस प्रक्रिया में ऊर्जा हमेशा देनी पड़ती है, इसलिए आयनन एन्थैल्पी का मान हमेशा धनात्मक होता है।
उदाहरण: उदासीन परमाणु(g) + आयनन एन्थैल्पी \( \longrightarrow \) धनायन(g) + \( \text{e}^- \)
पहले इलेक्ट्रॉन को निकालने के लिए आवश्यक ऊर्जा को प्रथम आयनन एन्थैल्पी कहते हैं। धनायन से दूसरा इलेक्ट्रॉन निकालने के लिए द्वितीय आयनन एन्थैल्पी, और इसी तरह तीसरा इलेक्ट्रॉन निकालने के लिए तृतीय आयनन एन्थैल्पी कहलाती है। सामान्यतः, \( \text{IE}_1 < \text{IE}_2 < \text{IE}_3 \) होती है।
In simple words: आयनन एन्थैल्पी वह ऊर्जा है जो किसी परमाणु से इलेक्ट्रॉन निकालने के लिए चाहिए होती है। यह हमेशा सकारात्मक होती है।

🎯 Exam Tip: आयनन एन्थैल्पी की परिभाषा में 'न्यूनतम ऊर्जा' और 'गैसीय अवस्था' शब्दों पर जोर दें, और यह भी बताएं कि यह हमेशा धनात्मक होती है।

निबन्धात्मक प्रश्न

 

प्रश्न 1.
(अ) आवर्त सारणी में किस ब्लॉक के तत्त्व परिवर्ती संयोजकता प्रदर्शित करते हैं?
(ब) ऋणायन का आकार अपने संगत परमाणु से बड़ा होता है, क्यों?
(स) CaH2, NaH, SiH4, AlH3 उपरोक्त यौगिकों में Ca, Na, Si तथा Al की संयोजकता बताइए। (माध्य. शिक्षा बोर्ड, 2018)
अथवा
(अ) किन्हीं दो उपधातुओं के नाम लिखिए।
(ब) किसी आवर्त में बायें से दायें जाने पर परमाणु आकार किस प्रकार परिवर्तित होता है? कारण सहित समझाइए।
(स) निम्नलिखित तत्त्वों को उनके बढ़ते हुए परमाणु आकार के क्रम में व्यवस्थित कीजिए Na, Cs, Li, K (माध्य. शिक्षा बोर्ड, 2018)
Answer:
(अ) आवर्त सारणी में मुख्य रूप से d-ब्लॉक के तत्व परिवर्ती संयोजकता प्रदर्शित करते हैं। इनमें संक्रमण तत्व शामिल होते हैं।
(ब) ऋणायन का आकार हमेशा अपने संगत उदासीन परमाणु से बड़ा होता है। इसका कारण यह है कि जब परमाणु इलेक्ट्रॉन ग्रहण करता है, तो इलेक्ट्रॉनों की संख्या बढ़ जाती है। हालाँकि प्रोटॉनों की संख्या उतनी ही रहती है। इस वजह से इलेक्ट्रॉनों के बीच प्रतिकर्षण बढ़ जाता है और नाभिक का बाहरी इलेक्ट्रॉनों पर प्रभावी आकर्षण कम हो जाता है, जिससे आयन का आकार बढ़ जाता है।
(स) दिए गए यौगिकों CaH2, NaH, SiH4, AlH3 में तत्वों की संयोजकताएँ इस प्रकार हैं:
- कैल्शियम (Ca) की संयोजकता 2 है।
- सोडियम (Na) की संयोजकता 1 है।
- सिलिकॉन (Si) की संयोजकता 4 है।
- एल्युमिनियम (Al) की संयोजकता 3 है।
अथवा
(अ) दो उपधातुओं के नाम: सिलिकॉन (Si) और आर्सेनिक (As)। अन्य उपधातुएँ बोरॉन, जर्मेनियम, एंटीमनी, टेल्यूरियम और पोलोनियम हैं।
(ब) किसी आवर्त में बाएं से दाएं जाने पर परमाणु आकार कम होता जाता है। इसका मुख्य कारण यह है कि आवर्त में बाएं से दाएं जाने पर परमाणु क्रमांक बढ़ता है, जिससे नाभिक में प्रोटॉनों की संख्या बढ़ती है। नाभिक का प्रभावी आवेश बाहरी इलेक्ट्रॉनों पर अधिक मात्रा में लगता है, जिससे इलेक्ट्रॉन नाभिक की ओर अधिक आकर्षित होते हैं और परमाणु का आकार घट जाता है।
(स) Na, Cs, Li, K के परमाणु आकार का बढ़ता क्रम इस प्रकार है:
\( \text{Li} < \text{Na} < \text{K} < \text{Cs} \)
यह क्रम इसलिए है क्योंकि समूह में ऊपर से नीचे जाने पर परमाणु त्रिज्या बढ़ती है।
In simple words: (अ) d-ब्लॉक के तत्व अपनी संयोजकता बदलते रहते हैं। (ब) ऋणायन अपने परमाणु से बड़ा होता है क्योंकि इसमें ज्यादा इलेक्ट्रॉन होते हैं और नाभिक कम खींचता है। (स) Ca की संयोजकता 2, Na की 1, Si की 4, Al की 3 है। अथवा (अ) सिलिकॉन और आर्सेनिक दो उपधातु हैं। (ब) आवर्त में बाएं से दाएं जाने पर परमाणु छोटे होते जाते हैं क्योंकि नाभिक इलेक्ट्रॉनों को ज्यादा खींचता है। (स) Li सबसे छोटा है, फिर Na, K, और Cs सबसे बड़ा है।

🎯 Exam Tip: आवर्त सारणी के ब्लॉक, आयनों के आकार पर इलेक्ट्रॉन के प्रभाव, और आवर्त तथा वर्ग में परमाणु आकार के रुझानों को उनके कारणों सहित समझाएं। उपधातुओं के उदाहरणों को भी याद रखें।

 

प्रश्न 2. मेण्डेलीफ की आवर्त सारणी के तीन गुण एवं तीन दोष लिखिए।
Answer:
मेण्डेलीफ की आवर्त सारणी के गुण:
1. मेण्डेलीफ ने तत्वों को उनके परमाणु भारों के बढ़ते क्रम में व्यवस्थित किया और सुनिश्चित किया कि समान भौतिक और रासायनिक गुणों वाले तत्व एक ही वर्ग में आएं।
2. उन्होंने कुछ तत्वों के लिए खाली स्थान छोड़े और उनके गुणधर्मों की भविष्यवाणी की, जो बाद में सही साबित हुई (जैसे एका-बोरॉन, एका-एल्युमिनियम, एका-सिलिकॉन)।
3. यह सारणी तत्वों के वर्गीकरण और उनके अध्ययन के लिए एक बहुत ही महत्वपूर्ण और उपयोगी कदम साबित हुई।
मेण्डेलीफ की आवर्त सारणी के दोष:
1. सारणी में कुछ स्थानों पर परमाणु भार के बढ़ते क्रम का पालन नहीं किया गया (जैसे कोबाल्ट पहले और निकेल बाद में)।
2. कुछ समान गुणधर्मों वाले तत्वों को अलग-अलग वर्गों में रखा गया, और असमान गुणधर्मों वाले तत्वों को एक ही वर्ग में रख दिया गया।
3. हाइड्रोजन को आवर्त सारणी में कोई निश्चित स्थान नहीं दिया जा सका, क्योंकि इसके गुण क्षार धातुओं और हैलोजनों दोनों से मिलते-जुलते थे। समस्थानिकों को भी कोई निश्चित स्थान नहीं मिला।
In simple words: मेण्डेलीफ की सारणी के अच्छे गुण थे कि इसने तत्वों को व्यवस्थित किया, खाली जगहें छोड़ीं और भविष्यवाणी की। इसके दोष थे कि इसने परमाणु भार का क्रम तोड़ा, समान-असमान तत्वों को गलत जगह रखा, और हाइड्रोजन व समस्थानिकों को ठीक से नहीं समझाया।

🎯 Exam Tip: मेण्डेलीफ की आवर्त सारणी के गुणों और दोषों को याद करते समय, भविष्यवाणी और क्रमभंग जैसे मुख्य बिंदुओं पर ध्यान केंद्रित करें।

 

प्रश्न 3. बोर के परमाणु मॉडल की परिकल्पनाएँ क्या हैं? वर्णन कीजिए। अथवा नील्स बोर का परमाणु मॉडल किन परिकल्पनाओं पर आधारित है?
Answer: बोर के परमाणु मॉडल की मुख्य परिकल्पनाएँ निम्नलिखित हैं:
1. परमाणु के केंद्र में एक छोटा और धनावेशित नाभिक होता है, जिसमें प्रोटॉन मौजूद होते हैं।
2. इलेक्ट्रॉन नाभिक के चारों ओर निश्चित वृत्ताकार कक्षाओं में घूमते हैं। इन कक्षाओं को ऊर्जा स्तर या कोश भी कहते हैं, और इनकी ऊर्जा तय होती है।
3. इन कक्षाओं को \( n \) से दर्शाया जाता है, जैसे \( n = 1, 2, 3, 4, 5, \dots \) और उन्हें K, L, M, N, O... कोश भी कहते हैं।
4. नाभिक से दूरी बढ़ने के साथ-साथ कक्षाओं की ऊर्जा भी बढ़ती है। सबसे अंदर की कक्षा (K-कोश या \( n=1 \)) की ऊर्जा सबसे कम होती है।
5. इन कक्षाओं में घूमते इलेक्ट्रॉन का कोणीय संवेग (\( mvr \)) हमेशा \( \frac{h}{2\pi} \) का पूर्णांक गुणक होता है, जहाँ \( h \) प्लांक स्थिरांक है। इसका मतलब है कि इलेक्ट्रॉन केवल उन्हीं कक्षाओं में रह सकते हैं जहाँ उनका कोणीय संवेग \( \frac{nh}{2\pi} \) के बराबर हो।
6. जब तक इलेक्ट्रॉन अपनी निश्चित कक्षा में घूमता है, वह ऊर्जा न तो छोड़ता है और न ही लेता है। उसकी ऊर्जा स्थिर रहती है।
7. इलेक्ट्रॉन ऊर्जा का अवशोषण करके निम्न ऊर्जा स्तर से उच्च ऊर्जा स्तर में जा सकता है, और ऊर्जा का उत्सर्जन करके उच्च ऊर्जा स्तर से निम्न ऊर्जा स्तर में आ सकता है। इसी ऊर्जा के आदान-प्रदान से परमाणुओं का विशिष्ट स्पेक्ट्रम बनता है। यह मॉडल परमाणुओं की स्थिरता और उनके स्पेक्ट्रम को समझने में बहुत मददगार था।
In simple words: बोर के मॉडल के अनुसार, इलेक्ट्रॉन नाभिक के चारों ओर खास रास्तों में घूमते हैं, और हर रास्ते की अपनी एक तय ऊर्जा होती है। इलेक्ट्रॉन तभी ऊर्जा लेते या छोड़ते हैं जब वे एक रास्ते से दूसरे रास्ते में जाते हैं।

🎯 Exam Tip: बोर के परमाणु मॉडल की मुख्य परिकल्पनाओं को क्रम से याद रखें, विशेषकर ऊर्जा स्तरों और कोणीय संवेग के क्वांटमीकरण के सिद्धांत को.

 

प्रश्न 4. तत्वों के धात्विक तथा अधात्विक गुण क्या होते हैं? इनकी आवर्त सारणी में आवर्तिता की व्याख्या भी कीजिए।
Answer:
धात्विक गुण (Metallic Properties): धात्विक गुण किसी तत्व के परमाणुओं की वह क्षमता है जिससे वे आसानी से इलेक्ट्रॉन त्यागकर धनावेशित आयन (धनायन) बनाते हैं। जो तत्व अधिक आसानी से इलेक्ट्रॉन छोड़ते हैं, वे अधिक धात्विक कहलाते हैं और विद्युत धनी होते हैं। उदाहरण के लिए, आवर्त सारणी के पहले वर्ग (क्षार धातु) के तत्व सबसे अधिक धात्विक होते हैं।

अधात्विक गुण (Non-metallic Properties): अधात्विक गुण किसी तत्व के परमाणुओं की वह क्षमता है जिससे वे इलेक्ट्रॉन ग्रहण करके ऋणावेशित आयन (ऋणायन) बनाते हैं। अधातुएँ आमतौर पर विद्युत ऋणात्मक होती हैं, जिसका अर्थ है कि वे इलेक्ट्रॉनों को अपनी ओर खींचने की प्रवृत्ति रखती हैं।

आवर्त सारणी में आवर्तिता (Periodicity in the Periodic Table):
1. आवर्त में (बाएँ से दाएँ जाने पर):
* परमाणु का आकार धीरे-धीरे घटता जाता है क्योंकि नाभिक में प्रोटॉन की संख्या बढ़ने से इलेक्ट्रॉनों पर नाभिकीय आकर्षण बल बढ़ जाता है।
* इस कारण, इलेक्ट्रॉन त्यागने की प्रवृत्ति कम हो जाती है, जिससे धात्विक गुण घटते जाते हैं।
* वहीं, इलेक्ट्रॉन ग्रहण करने की प्रवृत्ति बढ़ती है, जिससे अधात्विक गुण बढ़ते जाते हैं।
* आयनन एन्थैल्पी (इलेक्ट्रॉन निकालने के लिए आवश्यक ऊर्जा) बढ़ती जाती है, जिससे धनायन बनाना अधिक कठिन हो जाता है।
2. वर्ग में (ऊपर से नीचे जाने पर):
* परमाणु का आकार बढ़ता जाता है क्योंकि हर नए आवर्त में एक नया ऊर्जा कोश जुड़ता है। नाभिक का खिंचाव भी कम प्रभावी होता है।
* इस कारण, सबसे बाहरी इलेक्ट्रॉन पर नाभिकीय आकर्षण कम होता है, और इलेक्ट्रॉन त्यागने की प्रवृत्ति बढ़ जाती है, जिससे धात्विक गुण बढ़ते जाते हैं।
* वहीं, इलेक्ट्रॉन ग्रहण करने की प्रवृत्ति कम हो जाती है, जिससे अधात्विक गुण घटते जाते हैं।

आवर्त सारणी में बाईं ओर धातुएँ होती हैं और दाईं ओर अधातुएँ। धातुओं और अधातुओं के बीच एक टेढ़ी-मेढ़ी रेखा होती है, जिसके पास उपधातुएँ स्थित होती हैं जिनमें धातु और अधातु दोनों के गुण पाए जाते हैं। यह आवर्तिता रासायनिक अभिक्रियाओं में तत्वों के व्यवहार को समझने में मदद करती है।
In simple words: धात्विक गुण इलेक्ट्रॉन छोड़ने की क्षमता है, जबकि अधात्विक गुण इलेक्ट्रॉन लेने की क्षमता है। आवर्त सारणी में बाएं से दाएं जाने पर धात्विक गुण घटते हैं और अधात्विक गुण बढ़ते हैं, जबकि ऊपर से नीचे आने पर धात्विक गुण बढ़ते हैं और अधात्विक गुण घटते हैं।

🎯 Exam Tip: धात्विक और अधात्विक गुणों की आवर्तिता को परमाणु आकार, आयनन एन्थैल्पी और विद्युत ऋणात्मकता जैसे गुणों से जोड़कर समझाएँ ताकि पूरा उत्तर स्पष्ट और प्रभावी लगे।

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