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Detailed Chapter 6 रासायनिक अभिक्रियाएँ एवं उत्प्रेरक RBSE Solutions for Class 10 Science
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Class 10 Science Chapter 6 रासायनिक अभिक्रियाएँ एवं उत्प्रेरक RBSE Solutions PDF
बहुचयनात्मक प्रश्न
Question 1. FeCl3 का FeCl2 में परिवर्तन कहलाता है
(क) ऑक्सीकरण
(ख) अपचयन
(ग) अपघटन।
(घ) संयुग्मन
Answer: (ख) अपचयन
In simple words: FeCl3 का FeCl2 में बदलना एक अपचयन अभिक्रिया है। इस प्रक्रिया में एक क्लोरीन परमाणु कम हो जाता है।
🎯 Exam Tip: ऑक्सीकरण और अपचयन की पहचान हमेशा इलेक्ट्रॉन, ऑक्सीजन या हाइड्रोजन के संदर्भ में करें, या ऑक्सीकरण संख्या में परिवर्तन के आधार पर।
Question 2. एक पदार्थ दो छोटे सरल अणुओं में टूटता है तो अभिक्रिया होगी।
(क) अपघटनीय
(ख) विस्थापन
(ग) ऑक्सीकरण
(घ) संयुग्मन
Answer: (क) अपघटनीय
In simple words: जब एक बड़ा पदार्थ टूटकर दो या दो से ज़्यादा छोटे पदार्थ बनाता है, तो इस प्रक्रिया को अपघटन अभिक्रिया कहते हैं। यह संयोजन के बिल्कुल उलटा होता है।
🎯 Exam Tip: अपघटन अभिक्रियाओं को अक्सर ऊर्जा (जैसे गर्मी, प्रकाश या बिजली) की ज़रूरत होती है ताकि वे हो सकें।
Question 3. इलेक्ट्रॉन त्यागने वाले पदार्थ कहलाते हैं
(क) ऑक्सीकारक
(ख) उत्प्रेरक
(ग) अपचायक
(घ) कोई नहीं
Answer: (ग) अपचायक
In simple words: जो पदार्थ इलेक्ट्रॉन छोड़ते हैं, वे दूसरे पदार्थ को कम कर देते हैं (उनका अपचयन करते हैं), इसलिए उन्हें अपचायक कहते हैं। वे खुद ऑक्सीकृत होते हैं।
🎯 Exam Tip: अपचायक पदार्थ खुद ऑक्सीकृत होते हैं और दूसरों को अपचयित करते हैं, जबकि ऑक्सीकारक खुद अपचयित होते हैं और दूसरों को ऑक्सीकृत करते हैं।
Question 4. दोनों दिशाओं में होने वाली अभिक्रियाएँ हैं।
(क) ऑक्सीकरण
(ख) अपचयन
(ग) अनुक्रमणीय
(घ) उत्क्रमणीय
Answer: (घ) उत्क्रमणीय
In simple words: ऐसी अभिक्रियाएँ जो आगे और पीछे, दोनों दिशाओं में हो सकती हैं, उन्हें उत्क्रमणीय अभिक्रियाएँ कहते हैं। इनमें अभिकारक उत्पाद में बदलते हैं और उत्पाद वापस अभिकारक में भी बदल सकते हैं।
🎯 Exam Tip: उत्क्रमणीय अभिक्रियाओं को एक दोहरा तीर (\( \rightleftharpoons \)) या दो आधे तीर (\( \leftrightarrow \)) से दिखाया जाता है, जो दोनों दिशाओं को दर्शाते हैं।
Question 5. अभिक्रिया के वेग को बढ़ाने वाले होते हैं
(क) उत्प्रेरक
(ख) ऑक्सीकारक
(ग) अपचायक
Answer: (क) उत्प्रेरक
In simple words: उत्प्रेरक ऐसे पदार्थ होते हैं जो रासायनिक अभिक्रिया की गति को बढ़ा देते हैं, लेकिन वे खुद उस अभिक्रिया में इस्तेमाल नहीं होते हैं। वे सिर्फ़ प्रक्रिया को तेज़ करते हैं।
🎯 Exam Tip: उत्प्रेरक सक्रियण ऊर्जा को कम करके अभिक्रिया की गति बढ़ाते हैं, जिससे ज़्यादा अणु आपस में प्रतिक्रिया कर पाते हैं।
Question 7. \( 2Mg + O_2 \rightarrow 2 MgO \) इस अभिक्रिया में मैग्नीशियम धातु हो रहा है
(क) ऑक्सीकृत।
(ख) अपचयित
(ग) अपघटित
(घ) विस्थापित
Answer: (क) ऑक्सीकृत।
In simple words: इस अभिक्रिया में मैग्नीशियम ऑक्सीजन से जुड़ रहा है, जिसका मतलब है कि यह ऑक्सीकृत हो रहा है। जब कोई पदार्थ ऑक्सीजन से जुड़ता है, तो उसे ऑक्सीकरण कहते हैं।
🎯 Exam Tip: ऑक्सीजन का जुड़ना या हाइड्रोजन का निकलना ऑक्सीकरण कहलाता है, जबकि ऑक्सीजन का निकलना या हाइड्रोजन का जुड़ना अपचयन कहलाता है।
Question 8. उत्क्रमणीय अभिक्रियाओं के लिए किस चिन्ह का प्रयोग किया जाता है
(क) \( \rightarrow \)
(ख) \( \uparrow \)
(ग) \( \downarrow \)
(घ) \( \rightleftharpoons \)
Answer: (घ) \( \rightleftharpoons \)
In simple words: उत्क्रमणीय अभिक्रियाएँ, जो दोनों दिशाओं में होती हैं, उन्हें दर्शाने के लिए डबल-हेडेड तीर ( \( \rightleftharpoons \) ) का इस्तेमाल किया जाता है। यह दिखाता है कि अभिक्रिया आगे और पीछे दोनों तरफ़ चल सकती है।
🎯 Exam Tip: एक तरफ़ा तीर (\( \rightarrow \)) अनुत्क्रमणीय अभिक्रियाओं के लिए उपयोग किया जाता है, जबकि ऊपर का तीर (\( \uparrow \)) गैस बनने को और नीचे का तीर (\( \downarrow \)) अवक्षेप बनने को दर्शाता है।
Question 9. वह अभिक्रिया जो बनने वाले उत्पाद से ही उत्प्रेरित हो जाती है, कहलाती
(क) जैव रासायनिक
(ख) उत्क्रमणीय
(ग) स्वतः उत्प्रेरित
(घ) अनुक्रमणीय
Answer: (ग) स्वतः उत्प्रेरित
In simple words: कुछ अभिक्रियाओं में, जब उत्पाद बनने लगते हैं, तो वे खुद ही उत्प्रेरक का काम करने लगते हैं और अभिक्रिया की गति को बढ़ा देते हैं। ऐसी अभिक्रियाओं को स्वतः उत्प्रेरित अभिक्रिया कहते हैं।
🎯 Exam Tip: स्वतः उत्प्रेरण अक्सर एक धीमे शुरुआती चरण के बाद होता है, जहाँ उत्पाद की पर्याप्त मात्रा बनने तक अभिक्रिया धीमी रहती है।
Question 10. ऊष्माक्षेपी अभिक्रिया में ऊष्मा
(क) निकलती है।
(ख) अवशोषित होती है।
(ग) विलेय होती है।
(घ) इनमें से कोई नहीं
Answer: (क) निकलती है।
In simple words: ऊष्माक्षेपी अभिक्रियाएँ वे रासायनिक प्रक्रियाएँ होती हैं जहाँ ऊर्जा, आमतौर पर गर्मी के रूप में, बाहर निकलती है। इससे आस-पास का तापमान बढ़ जाता है।
🎯 Exam Tip: ऊष्माक्षेपी अभिक्रियाओं में उत्पाद की ऊर्जा अभिकारकों की ऊर्जा से कम होती है, और इस अंतर को ऊष्मा के रूप में मुक्त किया जाता है।
अतिलघूत्तरात्मक प्रश्न
Question 11. रासायनिक परिवर्तन से आप क्या समझते हैं ?
Answer: रासायनिक परिवर्तन वह प्रक्रिया है जिसमें एक पदार्थ के रासायनिक गुण और बनावट पूरी तरह से बदल जाती है, जिससे एक नया पदार्थ बनता है। इस परिवर्तन में पदार्थ की पहचान हमेशा के लिए बदल जाती है।
उदाहरण- कोयले को जलाने पर \( CO_2 \) गैस का बनना।
\( C(s) + O_2(g) \rightarrow CO_2(g) \)
In simple words: रासायनिक परिवर्तन में एक चीज़ पूरी तरह से बदलकर नई चीज़ बन जाती है। उदाहरण के लिए, लकड़ी का जलना रासायनिक परिवर्तन है।
🎯 Exam Tip: रासायनिक परिवर्तन अक्सर अनुत्क्रमणीय होते हैं और इसमें ऊर्जा का अवशोषण या उत्सर्जन शामिल होता है, साथ ही नए रासायनिक बंधन भी बनते या टूटते हैं।
Question 12. वनस्पति तेल को वनस्पति घी में परिवर्तित करने वाले उत्प्रेरक का नाम बताइये।।
Answer: वनस्पति तेल को वनस्पति घी में बदलने के लिए निकेल (Ni) उत्प्रेरक का उपयोग किया जाता है। यह प्रक्रिया हाइड्रोजनीकरण कहलाती है, जिसमें हाइड्रोजन को असंतृप्त तेल में जोड़ा जाता है।
In simple words: वनस्पति तेल को घी बनाने में निकेल धातु का इस्तेमाल होता है।
🎯 Exam Tip: हाइड्रोजनीकरण अभिक्रिया में निकेल (Ni) के अलावा प्लैटिनम (Pt) और पैलेडियम (Pd) जैसे उत्प्रेरक भी उपयोग किए जा सकते हैं, जो अभिक्रिया को तेज करते हैं।
Question 13. उत्प्रेरण कितने प्रकार का होता है? नाम लिखें।
Answer: उत्प्रेरण मुख्य रूप से चार प्रकार का होता है। ये प्रकार अभिक्रिया की गति पर उनके प्रभाव और प्रकृति के आधार पर होते हैं:
- धनात्मक उत्प्रेरण
- ऋणात्मक उत्प्रेरण
- स्वतः उत्प्रेरण
- जैव उत्प्रेरण।
धनात्मक उत्प्रेरण अभिक्रिया को तेज़ करता है, जबकि ऋणात्मक उत्प्रेरण उसे धीमा करता है।
In simple words: उत्प्रेरण चार तरह का होता है - धनात्मक (तेज़ करने वाला), ऋणात्मक (धीमा करने वाला), स्वतः (खुद से होने वाला) और जैव (जीवों में होने वाला)।
🎯 Exam Tip: इन चारों प्रकारों को उदाहरणों के साथ याद रखना महत्वपूर्ण है, क्योंकि इससे आपको उत्प्रेरक की भूमिका को बेहतर ढंग से समझने में मदद मिलेगी।
Question 14. \( Zn + CuSO_4 \rightarrow ZnSO_4 + Cu \) यह किस प्रकार की अभिक्रिया का उदाहरण है?
Answer: यह अभिक्रिया विस्थापन अभिक्रिया का एक उदाहरण है। इसमें अधिक क्रियाशील धातु (जिंक) कम क्रियाशील धातु (कॉपर) को उसके लवण के विलयन से विस्थापित कर देती है।
In simple words: यह एक विस्थापन अभिक्रिया है। जिंक ने कॉपर को उसकी जगह से हटा दिया क्योंकि जिंक कॉपर से ज़्यादा ताकतवर है।
🎯 Exam Tip: विस्थापन अभिक्रियाओं में, हमेशा अधिक सक्रिय धातु कम सक्रिय धातु को विस्थापित करती है; सक्रियता श्रेणी को याद रखना महत्वपूर्ण है।
Question 16. उत्क्रमणीय अभिक्रिया किसे कहते हैं ?
Answer: वह अभिक्रिया जो दोनों दिशाओं में हो सकती है, यानी जिसमें अभिकारक उत्पाद बनाते हैं और उत्पाद फिर से अभिकारक बना सकते हैं, उसे उत्क्रमणीय अभिक्रिया कहते हैं। इस अभिक्रिया में संतुलन की स्थिति प्राप्त होती है।
उदाहरण:
\( N_2(g) + 3H_2(g) \rightleftharpoons 2NH_3(g) \)
In simple words: जो रिएक्शन आगे और पीछे दोनों तरफ़ जा सकती है, उसे उत्क्रमणीय अभिक्रिया कहते हैं। जैसे नाइट्रोजन और हाइड्रोजन मिलकर अमोनिया बनाते हैं, और अमोनिया वापस नाइट्रोजन और हाइड्रोजन में टूट भी सकती है।
🎯 Exam Tip: उत्क्रमणीय अभिक्रियाओं में, अभिकारक कभी भी पूरी तरह से उत्पाद में नहीं बदलते, और प्रतिक्रिया एक बंद प्रणाली में होती है।
Question 17. उत्प्रेरक वर्धक व उत्प्रेरक विष का क्या कार्य है?
Answer: उत्प्रेरक वर्धक ऐसे पदार्थ होते हैं जो किसी उत्प्रेरक की कार्यक्षमता या क्रियाशीलता को बढ़ा देते हैं, जिससे अभिक्रिया की गति और भी तेज हो जाती है। इसके विपरीत, उत्प्रेरक विष ऐसे पदार्थ होते हैं जो उत्प्रेरक की क्रियाशीलता को कम कर देते हैं या उसे पूरी तरह से नष्ट कर देते हैं, जिससे अभिक्रिया धीमी हो जाती है या रुक जाती है। इन दोनों का उपयोग अभिक्रिया की दर को नियंत्रित करने के लिए किया जाता है।
In simple words: उत्प्रेरक वर्धक उत्प्रेरक को और बेहतर काम करने में मदद करते हैं, जबकि उत्प्रेरक विष उत्प्रेरक की शक्ति कम कर देते हैं।
🎯 Exam Tip: उत्प्रेरक वर्धक और विष दोनों ही उत्प्रेरक के साथ जुड़कर काम करते हैं, लेकिन वे खुद उत्प्रेरक नहीं होते और न ही रासायनिक अभिक्रिया में सीधे भाग लेते हैं।
Question 18. अम्ल व क्षार की परस्पर अभिक्रिया कौनसी अभिक्रिया कहलाती है?
Answer: अम्ल और क्षार की आपस में होने वाली अभिक्रिया को उदासीनीकरण अभिक्रिया कहते हैं। इस अभिक्रिया में अम्ल और क्षार मिलकर लवण (नमक) और जल बनाते हैं, जिससे विलयन उदासीन हो जाता है।
In simple words: जब अम्ल और क्षार मिलते हैं, तो उसे उदासीनीकरण अभिक्रिया कहते हैं। इसमें नमक और पानी बनता है।
🎯 Exam Tip: उदासीनीकरण अभिक्रिया में हाइड्रोजन आयन (H+) और हाइड्रॉक्सिल आयन (OH-) मिलकर पानी बनाते हैं, जो इस अभिक्रिया का मुख्य उत्पाद है।
Question 19. वेग के आधार पर अभिक्रिया कितने प्रकार की होती है?
Answer: अभिक्रिया की गति (वेग) के आधार पर उन्हें मुख्य रूप से दो प्रकार में बांटा जाता है:
- तीव्र अभिक्रियाएँ
- मंद अभिक्रियाएँ।
तीव्र अभिक्रियाएँ बहुत कम समय में पूरी हो जाती हैं, जबकि मंद अभिक्रियाएँ पूरी होने में अधिक समय लेती हैं।
In simple words: अभिक्रियाएँ अपनी तेज़ी के हिसाब से दो तरह की होती हैं: बहुत तेज़ और बहुत धीमी।
🎯 Exam Tip: तीव्र अभिक्रियाएँ अक्सर आयनिक होती हैं और मंद अभिक्रियाएँ अक्सर सहसंयोजक बंध बनाने वाली होती हैं।
Question 20. ना उत्प्रेरक रासायनिक अभिक्रिया के वेग में वृद्धि या कमी कर देते हैं। लेकिन स्वयं अपरिवर्तित रहते हैं।
Answer: उत्प्रेरक ऐसे पदार्थ होते हैं जो रासायनिक अभिक्रिया की गति को बढ़ा या घटा सकते हैं, लेकिन वे खुद रासायनिक रूप से अपरिवर्तित रहते हैं। वे अभिक्रिया में भाग लेते हैं लेकिन अंत में जैसे थे, वैसे ही प्राप्त हो जाते हैं। उत्प्रेरक क्रिया की शुरुआत नहीं करते, बल्कि उसके वेग को प्रभावित करते हैं।
In simple words: उत्प्रेरक वे चीज़ें हैं जो अभिक्रिया को तेज़ या धीमा करती हैं, पर खुद नहीं बदलतीं। वे सिर्फ़ मदद करते हैं।
🎯 Exam Tip: उत्प्रेरक की थोड़ी मात्रा भी एक बड़ी अभिक्रिया को प्रभावित करने के लिए पर्याप्त होती है और इसका पुनर्जनन किया जा सकता है।
Question 22. रासायनिक अभिक्रिया के संतुलन का आधारभूत सिद्धांत क्या है?
Answer: रासायनिक अभिक्रिया के संतुलन का आधारभूत सिद्धांत द्रव्यमान संरक्षण का नियम है। इस नियम के अनुसार, किसी भी रासायनिक अभिक्रिया में न तो द्रव्यमान का निर्माण होता है और न ही उसका विनाश होता है। इसका मतलब है कि अभिक्रिया से पहले और अभिक्रिया के बाद अभिकारकों और उत्पादों का कुल द्रव्यमान हमेशा समान रहता है। यह नियम बताता है कि परमाणुओं की संख्या दोनों तरफ़ बराबर होनी चाहिए।
In simple words: रासायनिक अभिक्रिया में द्रव्यमान न तो बनता है और न ही नष्ट होता है। अभिक्रिया से पहले और बाद में चीज़ों का कुल वज़न बराबर रहता है।
🎯 Exam Tip: द्रव्यमान संरक्षण के नियम के कारण ही रासायनिक समीकरणों को संतुलित करना आवश्यक होता है, ताकि दोनों तरफ़ के परमाणुओं की संख्या बराबर रहे।
Question 23. रेडॉक्स अभिक्रिया किसे कहते हैं ?
Answer: रेडॉक्स अभिक्रिया वह रासायनिक अभिक्रिया होती है जिसमें ऑक्सीकरण (ऑक्सीजन का जुड़ना या इलेक्ट्रॉन का निकलना) और अपचयन (ऑक्सीजन का निकलना या इलेक्ट्रॉन का जुड़ना) दोनों प्रक्रियाएँ एक साथ होती हैं। इसमें एक पदार्थ ऑक्सीकृत होता है जबकि दूसरा पदार्थ अपचयित होता है, क्योंकि इलेक्ट्रॉन का स्थानांतरण होता है।
In simple words: रेडॉक्स अभिक्रिया वह होती है जहाँ ऑक्सीकरण (इलेक्ट्रॉन खोना) और अपचयन (इलेक्ट्रॉन पाना) एक ही समय में होता है।
🎯 Exam Tip: रेडॉक्स अभिक्रियाओं में ऑक्सीकरण और अपचयन हमेशा एक साथ होते हैं; एक के बिना दूसरा संभव नहीं है।
Question 24. कोयले का दहन कौन सी अभिक्रिया है?
Answer: कोयले का दहन एक संयोजन अभिक्रिया है क्योंकि इसमें कोयला (कार्बन) ऑक्सीजन के साथ मिलकर कार्बन डाइऑक्साइड बनाता है। साथ ही, यह एक ऑक्सीकरण अभिक्रिया भी है क्योंकि कार्बन ऑक्सीजन से जुड़ रहा है। इस प्रक्रिया में ऊर्जा भी मुक्त होती है।
In simple words: कोयले का जलना एक संयोजन अभिक्रिया है क्योंकि इसमें कार्बन और ऑक्सीजन मिलते हैं। यह एक ऑक्सीकरण अभिक्रिया भी है।
🎯 Exam Tip: दहन अभिक्रियाएँ अक्सर संयोजन और ऑक्सीकरण दोनों होती हैं, क्योंकि पदार्थ ऑक्सीजन के साथ मिलकर नए उत्पाद बनाते हैं और गर्मी छोड़ते हैं।
Question 25. प्रबल अम्ल व प्रबल क्षार के मध्य अभिक्रिया कराने पर विलयन की pH कितनी होगी?
Answer: समान सांद्रता के प्रबल अम्ल और प्रबल क्षार के बीच अभिक्रिया होने पर विलयन की pH 7 होगी। ऐसा इसलिए होता है क्योंकि प्रबल अम्ल और प्रबल क्षार एक-दूसरे को पूरी तरह से उदासीन कर देते हैं, जिससे एक तटस्थ विलयन बनता है जिसमें हाइड्रोजन और हाइड्रॉक्सिल आयनों की सांद्रता बराबर होती है।
In simple words: जब एक मज़बूत अम्ल और एक मज़बूत क्षार मिलते हैं, तो घोल की pH 7 हो जाती है क्योंकि वे एक-दूसरे को बेअसर कर देते हैं।
🎯 Exam Tip: प्रबल अम्ल और प्रबल क्षार की अभिक्रिया से हमेशा उदासीन विलयन बनता है, जबकि दुर्बल अम्ल या क्षार शामिल होने पर pH 7 से भिन्न हो सकती है।
लघूत्तरात्मक प्रश्न
Question 26. भौतिक एवं रासायनिक परिवर्तन में अंतर लिखें।
Answer: भौतिक और रासायनिक परिवर्तन के बीच मुख्य अंतर नीचे दी गई तालिका में दर्शाया गया है। भौतिक परिवर्तन में पदार्थ की पहचान नहीं बदलती, जबकि रासायनिक परिवर्तन में एक नया पदार्थ बनता है।
| भौतिक परिवर्तन | रासायनिक परिवर्तन | |
|---|---|---|
| 1. | परिवर्तन का कारण हटाने पर पुनः प्रारम्भिक पदार्थ प्राप्त हो जाता है। | सामान्यतया प्रारम्भिक पदार्थ पुनः प्राप्त नहीं किया जा सकता है। |
| 2. | यह परिवर्तन अस्थाई होता है। | यह परिवर्तन स्थाई होता है। |
| 3. | इसमें नये पदार्थ का निर्माण नहीं होता है। | इसमें नये पदार्थ का निर्माण होता है। |
| 4. | उदाहरण- बर्फ \( \rightarrow \) जल \( \rightarrow \) वाष्प | उदाहरण- लोहे पर जंग लगना। |
In simple words: भौतिक परिवर्तन में चीज़ सिर्फ़ अपना रूप बदलती है, नई चीज़ नहीं बनती (जैसे बर्फ का पानी बनना)। रासायनिक परिवर्तन में नई चीज़ बनती है, और पुरानी चीज़ वापस नहीं मिलती (जैसे लकड़ी का जलना)।
🎯 Exam Tip: भौतिक परिवर्तन में केवल पदार्थ की भौतिक अवस्था (जैसे आकार, रंग, अवस्था) बदलती है, जबकि रासायनिक परिवर्तन में पदार्थ की रासायनिक संरचना ही बदल जाती है।
Question 27. संयुग्मन व अपघटनीय अभिक्रियाओं को एक-एक उदाहरण के साथ लिखें।
Answer:
(i) **संयुग्मन अभिक्रियाएँ:** वे रासायनिक अभिक्रियाएँ जिनमें दो या दो से अधिक अभिकारक मिलकर एक ही नया उत्पाद बनाते हैं, उन्हें संयुग्मन या संयोजन अभिक्रिया कहते हैं। इन अभिक्रियाओं में अभिकारकों के बीच नए रासायनिक बंधन बनते हैं।
उदाहरण- कैल्सियम ऑक्साइड (बिना बुझा चूना) का जल के साथ मिलकर कैल्सियम हाइड्रॉक्साइड (बुझा हुआ चूना) बनाना:
\( CaO(s) + H_2O(l) \rightarrow Ca(OH)_2(aq) \)
(ii) **अपघटनीय अभिक्रियाएँ:** वे रासायनिक अभिक्रियाएँ जिनमें एक अभिकारक टूटकर दो या दो से अधिक सरल उत्पादों में विभाजित हो जाता है, उन्हें अपघटनीय अभिक्रियाएँ कहते हैं। इन अभिक्रियाओं में अभिकारकों के पुराने बंधन टूटते हैं, जिससे छोटे अणु बनते हैं।
उदाहरण- कैल्सियम कार्बोनेट को गर्म करने पर कैल्सियम ऑक्साइड और कार्बन डाइऑक्साइड गैस बनती है:
\( CaCO_3(s) \text{ (चूना पत्थर)} \rightarrow CaO(s) + CO_2(g) \text{ (कैल्सियम ऑक्साइड)} \)
In simple words: संयोजन अभिक्रिया में कई चीज़ें मिलकर एक नई चीज़ बनाती हैं (जैसे चूना और पानी मिलकर बुझा चूना), जबकि अपघटन अभिक्रिया में एक चीज़ टूटकर कई छोटी चीज़ें बनाती है (जैसे चूना पत्थर गर्म करने पर टूटता है)।
🎯 Exam Tip: संयोजन अभिक्रियाएँ अक्सर ऊष्माक्षेपी होती हैं, जबकि अपघटन अभिक्रियाओं को अक्सर ऊष्मा (गर्मी, प्रकाश, बिजली) की आवश्यकता होती है, इसलिए वे ऊष्माशोषी होती हैं।
Question 28. \( AgNO_3 + KCl \rightarrow AgCl + KNO_3 \) उपरोक्त अभिक्रिया किस प्रकार की है? नाम लिखें तथा समझाएँ।
Answer: यह एक द्विविस्थापन अभिक्रिया है। द्विविस्थापन अभिक्रियाओं में दोनों अभिकारकों के आयन आपस में बदल जाते हैं, जिससे दो नए यौगिक बनते हैं। इसमें अभिकारक अपने आयनिक घटकों का आदान-प्रदान करते हैं। इस अभिक्रिया में, सिल्वर नाइट्रेट का सिल्वर आयन (Ag+) पोटेशियम क्लोराइड के क्लोराइड आयन (Cl-) से जुड़कर सिल्वर क्लोराइड (AgCl) का अवक्षेप बनाता है, और पोटेशियम आयन (K+) नाइट्रेट आयन (NO3-) से जुड़कर पोटेशियम नाइट्रेट (KNO3) बनाता है।
In simple words: यह द्विविस्थापन अभिक्रिया है। इसमें दो चीज़ों के हिस्से आपस में बदल जाते हैं, जिससे दो नई चीज़ें बनती हैं।
🎯 Exam Tip: द्विविस्थापन अभिक्रियाओं को अक्सर "प्रेसिपिटेशन रिएक्शन" (अवक्षेपण अभिक्रिया) भी कहते हैं, यदि बनने वाले उत्पादों में से एक पानी में अघुलनशील अवक्षेप हो।
Question 29. ऑक्सीकरण व अपचयन को इलेक्ट्रॉनिक आदान-प्रदान के आधार पर समझाइए।
Answer: **ऑक्सीकरण:** ऐसी अभिक्रिया जिसमें कोई परमाणु, आयन या अणु इलेक्ट्रॉन त्यागता है, उसे ऑक्सीकरण कहते हैं। इलेक्ट्रॉन के त्यागने से उस पदार्थ पर धनात्मक आवेश बढ़ता है या ऋणात्मक आवेश कम होता है। इसमें इलेक्ट्रॉनों की संख्या कम होती है।
उदाहरण:
\( K \rightarrow K^+ + e^- \)
\( Fe^{2+} \rightarrow Fe^{3+} + e^- \)
\( 2Cl^- \rightarrow Cl_2 + 2e^- \)
यहां पोटेशियम परमाणु एक इलेक्ट्रॉन त्याग कर \( K^+ \) धनायन में ऑक्सीकृत होता है, और फेरस \( (Fe^{2+}) \) आयन एक इलेक्ट्रॉन त्याग कर फेरिक \( (Fe^{3+}) \) आयन में ऑक्सीकृत होता है। क्लोराइड \( (Cl^-) \) आयन इलेक्ट्रॉन त्याग कर उदासीन क्लोरीन परमाणु में ऑक्सीकृत होता है।
**अपचयन:** वह अभिक्रिया जिसमें कोई परमाणु, आयन या अणु इलेक्ट्रॉन ग्रहण करता है, उसे अपचयन कहते हैं। इलेक्ट्रॉन के ग्रहण करने से उस पदार्थ पर धनात्मक आवेश कम होता है या ऋणात्मक आवेश बढ़ता है। इसमें इलेक्ट्रॉनों की संख्या में वृद्धि होती है।
उदाहरण:
\( Br + e^- \rightarrow Br^- \)
\( MnO_4^- + e^- \rightarrow MnO_4^{2-} \)
\( Mg^{2+} + 2e^- \rightarrow Mg \)
यहां ब्रोमीन परमाणु एक इलेक्ट्रॉन ग्रहण कर ब्रोमाइड आयन \( (Br^-) \) में अपचयित होता है, और परमैग्नेट आयन \( (MnO_4^-) \) एक इलेक्ट्रॉन ग्रहण कर मैग्नेट आयन \( (MnO_4^{2-}) \) में अपचयित होता है। मैग्नीशियम आयन \( (Mg^{2+}) \) दो इलेक्ट्रॉन ग्रहण कर उदासीन Mg परमाणु में अपचयित हो रहा है।
In simple words: ऑक्सीकरण तब होता है जब कोई पदार्थ इलेक्ट्रॉन छोड़ता है (जैसे धातु जंग लगना), और अपचयन तब होता है जब कोई पदार्थ इलेक्ट्रॉन लेता है (जैसे धातु का बनना)।
🎯 Exam Tip: 'OIL RIG' नियम को याद रखें: 'Oxidation Is Loss' (ऑक्सीकरण इलेक्ट्रॉन का त्याग है), 'Reduction Is Gain' (अपचयन इलेक्ट्रॉन का ग्रहण है)।
Question 30. उत्प्रेरक कितने प्रकार के होते हैं? लिखें।
Answer: उत्प्रेरक मुख्य रूप से क्रिया की प्रकृति और भौतिक अवस्था के आधार पर कई प्रकार के होते हैं। क्रिया के आधार पर उत्प्रेरक चार प्रकार के होते हैं:
(a) **धनात्मक उत्प्रेरक:** ये वे उत्प्रेरक होते हैं जो रासायनिक अभिक्रिया के वेग को बढ़ाते हैं। ये अभिक्रिया के लिए आवश्यक सक्रियण ऊर्जा को कम कर देते हैं।
उदाहरण: सल्फ्यूरिक अम्ल के निर्माण में, नाइट्रिक ऑक्साइड \( (NO) \) सल्फर डाइऑक्साइड के ऑक्सीकरण को तेज करता है।
\( 2SO_2 + O_2 \xrightarrow{NO} 2SO_3 \)
(b) **ऋणात्मक उत्प्रेरक:** ये वे उत्प्रेरक होते हैं जो रासायनिक अभिक्रिया के वेग को कम करते हैं। इनका उपयोग अभिक्रियाओं को धीमा करने के लिए किया जाता है, खासकर जब तेजी से होने वाली अभिक्रियाएं अवांछित हों।
उदाहरण: हाइड्रोजन परॉक्साइड का अपघटन ग्लिसरॉल की उपस्थिति में धीमा हो जाता है, जिससे इसे लंबे समय तक संग्रहीत किया जा सकता है।
\( 2H_2O_2 \xrightarrow{\text{ग्लिसरॉल}} 2H_2O + O_2 \)
(c) **स्वतः उत्प्रेरक:** जब किसी रासायनिक अभिक्रिया में बना हुआ कोई उत्पाद खुद ही उत्प्रेरक का कार्य करने लगता है और अभिक्रिया के वेग को बढ़ा देता है, तो उसे स्वतः उत्प्रेरक कहते हैं।
उदाहरण: एथिल एसीटेट का जल-अपघटन करने पर बनने वाला एसीटिक अम्ल \( (CH_3COOH) \) अभिक्रिया को और तेज कर देता है।
\( CH_3COOC_2H_5 + H_2O \rightarrow CH_3COOH + C_2H_5OH \)
(d) **जैव उत्प्रेरक:** ये विशेष प्रकार के प्रोटीन होते हैं जो जीवित कोशिकाओं में होने वाली जैव रासायनिक अभिक्रियाओं (जैसे पाचन, श्वसन) के वेग को बढ़ाते हैं। इन्हें एंजाइम भी कहते हैं।
उदाहरण: माल्टोज का माल्टेज एंजाइम द्वारा ग्लूकोज में बदलना।
\( \text{माल्टोज} \xrightarrow{\text{माल्टेज}} \text{ग्लूकोज} \)
भौतिक अवस्था के आधार पर उत्प्रेरक दो प्रकार के होते हैं:
(i) **समांगी उत्प्रेरक:** जब उत्प्रेरक, अभिकारक और उत्पाद सभी एक ही भौतिक अवस्था (ठोस, द्रव या गैस) में होते हैं, तो उसे समांगी उत्प्रेरक कहते हैं।
उदाहरण: मेथिल एसीटेट का जल-अपघटन अम्लीय माध्यम में।
\( CH_3COOCH_3(l) \text{ (मेथिल एसीटेट)} + H_2O(l) \xrightarrow{HCl(aq)} CH_3COOH(aq) \text{ (एसीटिक अम्ल)} + CH_3OH(aq) \text{ (मेथिल एल्कोहॉल)} \)
\( 2SO_2(g) + O_2(g) \xrightarrow{NO(g)} 2SO_3(g) \)
(ii) **विषमांगी उत्प्रेरक:** जब उत्प्रेरक अभिकारकों और उत्पादों से भिन्न भौतिक अवस्था में होता है, तो उसे विषमांगी उत्प्रेरक कहते हैं।
उदाहरण: अमोनिया के निर्माण में नाइट्रोजन और हाइड्रोजन गैसीय अवस्था में होते हैं, जबकि आयरन उत्प्रेरक ठोस अवस्था में होता है।
\( N_2(g) + 3H_2(g) \xrightarrow{Fe(s)} 2NH_3(g) \)
वनस्पति तेलों का हाइड्रोजनीकरण करके वनस्पति घी बनाने में, तेल द्रव अवस्था में, हाइड्रोजन गैस अवस्था में, और निकेल उत्प्रेरक ठोस अवस्था में होता है।
\( \text{वनस्पति तेल}(l) + H_2(g) \xrightarrow{Ni(s)} \text{वनस्पति घी}(s) \)
In simple words: उत्प्रेरक चार तरह के होते हैं - गति बढ़ाने वाले, गति घटाने वाले, खुद से गति बढ़ाने वाले और जीवों में काम करने वाले। ये दो मुख्य अवस्थाओं में भी होते हैं - जब उत्प्रेरक और सब कुछ एक ही अवस्था में हों (समांगी), या जब उनकी अवस्था अलग हो (विषमांगी)।
🎯 Exam Tip: उत्प्रेरक की भौतिक अवस्था का ज्ञान, जैसे समांगी या विषमांगी, अभिक्रिया के तंत्र और उसकी दक्षता को समझने में मदद करता है।
Question 31. अपघटनीय अभिक्रियाएँ कितने प्रकार की होती हैं? वर्णन करें।
Answer: अपघटनीय अभिक्रियाएँ, जिनमें एक अभिकारक टूटकर दो या दो से अधिक उत्पाद बनाता है, मुख्य रूप से तीन प्रकार की होती हैं:
(i) **विद्युत अपघटन:** जब किसी यौगिक के पिघले हुए या द्रव रूप में बिजली प्रवाहित की जाती है, तो वह टूटकर कैथोड और एनोड पर अलग-अलग उत्पाद बनाता है। इस प्रक्रिया को विद्युत अपघटन कहते हैं।
उदाहरण: जल का विद्युत अपघटन करने पर हाइड्रोजन और ऑक्सीजन गैसें बनती हैं।
\( 2H_2O(l) \xrightarrow{\text{विद्युत धारा}} 2H_2(g) + O_2(g) \)
(ii) **ऊष्मीय अपघटन:** जब किसी पदार्थ को गर्म करने पर वह टूटकर दो या दो से अधिक सरल पदार्थों में विभाजित हो जाता है, तो उसे ऊष्मीय अपघटन कहते हैं। इसमें ऊर्जा गर्मी के रूप में प्रदान की जाती है।
उदाहरण: कैल्सियम कार्बोनेट का गर्म करने पर कैल्सियम ऑक्साइड और कार्बन डाइऑक्साइड में टूटना।
\( CaCO_3(s) \rightarrow CaO(s) + CO_2(g) \)
(iii) **प्रकाशीय अपघटन:** जब कोई पदार्थ प्रकाश ऊर्जा को अवशोषित करके टूट जाता है, तो उसे प्रकाशीय अपघटन कहते हैं। यह अक्सर सिल्वर हैलाइड्स में देखा जाता है।
उदाहरण: सिल्वर क्लोराइड का प्रकाश की उपस्थिति में सिल्वर और क्लोरीन में टूटना।
\( 2AgCl(s) \xrightarrow{\text{प्रकाश}} 2Ag(s) + Cl_2(g) \)
यहां पर दिए गए उदाहरण में केवल विद्युत अपघटन का उदाहरण दिया गया है।
उदाहरण: \( 2NaCl(aq) \xrightarrow{\text{विद्युत अपघटन}} 2NaOH(aq) + Cl_2(g) \uparrow \)
In simple words: अपघटन अभिक्रियाएँ तीन तरह की होती हैं: बिजली से तोड़ने वाली (विद्युत अपघटन), गर्मी से तोड़ने वाली (ऊष्मीय अपघटन), और प्रकाश से तोड़ने वाली (प्रकाशीय अपघटन)।
🎯 Exam Tip: प्रत्येक प्रकार के अपघटन के लिए एक-एक उदाहरण याद रखें और उन परिस्थितियों पर ध्यान दें जिनके तहत वे होते हैं (जैसे बिजली, गर्मी, या प्रकाश)।
Question 32. क्लोरोफार्म में कुछ मात्रा में एथिल एल्कोहॉल मिलाकर क्यों रखा जाता है?
Answer: क्लोरोफार्म को सीधे वायु और प्रकाश के संपर्क में रखने पर, यह ऑक्सीजन के साथ ऑक्सीकृत होकर फॉस्जीन (COCl2) नामक एक अत्यधिक विषैली गैस बनाता है। इस हानिकारक अभिक्रिया को धीमा करने के लिए, क्लोरोफार्म में थोड़ी मात्रा में एथिल एल्कोहॉल (C2H5OH) मिलाया जाता है। एथिल एल्कोहॉल फॉस्जीन के बनने की दर को कम कर देता है और यदि थोड़ी मात्रा में फॉस्जीन बन भी जाती है, तो वह एथिल एल्कोहॉल से क्रिया करके डाइएथिल कार्बोनेट (एक कम विषैला पदार्थ) और HCl बनाती है।
अभिक्रियाएँ:
\( 2CHCl_3 \text{ (क्लोरोफॉर्म)} + O_2 \xrightarrow{\text{प्रकाश}} 2COCl_2 \text{ (फॉस्जीन)} + 2HCl \)
\( 2C_2H_5OH \text{ (एथिल एल्कोहॉल)} + COCl_2 \rightarrow (C_2H_5)_2CO_3 \text{ (डाइएथिल कार्बोनेट)} + 2HCl \)
इस प्रकार एथिल एल्कोहॉल क्लोरोफार्म को सुरक्षित रखने में मदद करता है।
In simple words: क्लोरोफार्म को ज़हर बनने से बचाने के लिए उसमें थोड़ी शराब (एथिल एल्कोहॉल) मिलाई जाती है। यह हवा से होने वाली ज़हरीली गैस बनने की प्रक्रिया को धीमा करता है।
🎯 Exam Tip: क्लोरोफार्म को हमेशा गहरे रंग की बोतलों में, ठंडी और अंधेरी जगह पर रखना चाहिए ताकि ऑक्सीकरण और फॉस्जीन बनने से बचा जा सके।
Question 33. दुर्बल अम्ल व प्रबल क्षार से बने लवण का जलीय विलयन क्षारीय होता है। क्यों?
Answer: दुर्बल अम्ल और प्रबल क्षार से बना लवण जब पानी में घोला जाता है, तो उसका जलीय विलयन क्षारीय होता है। इसका कारण यह है कि दुर्बल अम्ल पानी में पूरी तरह से आयनित नहीं होता, जबकि प्रबल क्षार पूरी तरह से आयनित होता है। इससे विलयन में \( OH^- \) आयनों की सांद्रता \( H^+ \) आयनों की तुलना में अधिक हो जाती है, जिसके परिणामस्वरूप विलयन का pH मान 7 से अधिक हो जाता है और वह क्षारीय प्रकृति का होता है।
उदाहरण: सोडियम एसीटेट \( (CH_3COONa) \) का जल में जल-अपघटन।
\( CH_3COONa + H_2O \rightleftharpoons CH_3COOH \text{ (दुर्बल अम्ल)} + NaOH \text{ (प्रबल क्षार)} \)
In simple words: जब एक कमज़ोर तेज़ाब और एक मज़बूत क्षार मिलते हैं, तो बना हुआ घोल थोड़ा क्षारीय होता है। ऐसा इसलिए होता है क्योंकि मज़बूत क्षार के आयन घोल को ज़्यादा क्षारीय बना देते हैं।
🎯 Exam Tip: लवण के जल-अपघटन की अवधारणा को समझें, जहाँ जल के अणु लवण के आयनों से क्रिया करके अम्ल या क्षार का निर्माण करते हैं, जिससे विलयन का pH बदल जाता है।
Question 34. क्या ये अभिक्रियाएँ संभव हैं? उत्तर कारण सहित लिखें।
(i) \( Cu + ZnSO_4 \rightarrow CuSO_4 + Zn \)
(ii) \( Fe + CuSO_4 \rightarrow FeSO_4 + Cu \)
Answer: ये दोनों अभिक्रियाएँ विस्थापन अभिक्रियाओं के उदाहरण हैं, लेकिन इनकी संभावना धातुओं की सक्रियता श्रेणी पर निर्भर करती है। अधिक क्रियाशील धातु ही कम क्रियाशील धातु को विस्थापित कर सकती है।
(i) \( Cu + ZnSO_4 \rightarrow CuSO_4 + Zn \)
यह अभिक्रिया संभव नहीं है। इसका कारण यह है कि कॉपर (Cu) जिंक (Zn) से कम क्रियाशील धातु है। सक्रियता श्रेणी में जिंक कॉपर से ऊपर आता है। इसलिए, कॉपर जिंक सल्फेट \( (ZnSO_4) \) के विलयन से जिंक को विस्थापित नहीं कर सकता है।
(ii) \( Fe + CuSO_4 \rightarrow FeSO_4 + Cu \)
यह अभिक्रिया संभव है। इसका कारण यह है कि आयरन (Fe) कॉपर (Cu) से अधिक क्रियाशील धातु है। सक्रियता श्रेणी में आयरन कॉपर से ऊपर आता है। इसलिए, आयरन कॉपर सल्फेट \( (CuSO_4) \) के विलयन से कॉपर को विस्थापित कर सकता है, जिससे आयरन सल्फेट \( (FeSO_4) \) और कॉपर \( (Cu) \) बनता है।
In simple words: पहली अभिक्रिया गलत है क्योंकि कॉपर जिंक से कम ताकतवर है, तो उसे हटा नहीं सकता। दूसरी अभिक्रिया सही है क्योंकि लोहा कॉपर से ज़्यादा ताकतवर है, तो उसे हटा सकता है।
🎯 Exam Tip: धातुओं की सक्रियता श्रेणी को याद रखना महत्वपूर्ण है, क्योंकि यह निर्धारित करता है कि कौन सी धातु दूसरी धातु को उसके यौगिक से विस्थापित कर सकती है।
Question 36. रासायनिक अभिक्रियाएँ कितने प्रकार की होती हैं? वर्णन करें।
Answer: रासायनिक अभिक्रियाएँ वे प्रक्रियाएँ होती हैं जिनमें पदार्थ के रासायनिक गुण और संरचना में परिवर्तन होता है, जिससे नए पदार्थ बनते हैं। इस प्रक्रिया में अभिकारकों के परमाणु पुनर्व्यवस्थित होकर उत्पाद बनाते हैं, लेकिन कुल द्रव्यमान संरक्षित रहता है।
उदाहरण: मैग्नीशियम के फीते का जलना, जिससे मैग्नीशियम ऑक्साइड बनता है।
\( 2Mg(s) + O_2(g) \rightarrow 2MgO(s) \text{ (मैग्नीशियम ऑक्साइड)} \)
रासायनिक अभिक्रियाएँ मुख्यतः चार प्रकार की होती हैं:
(i) **संयुग्मन अभिक्रियाएँ (Combination Reactions):** ऐसी अभिक्रियाएँ जिनमें दो या दो से अधिक अभिकारक मिलकर एक एकल उत्पाद बनाते हैं।
उदाहरण: \( C(s) + O_2(g) \rightarrow CO_2(g) \)
(ii) **विस्थापन अभिक्रियाएँ (Displacement Reactions):** ऐसी अभिक्रियाएँ जिनमें एक अधिक क्रियाशील तत्व एक कम क्रियाशील तत्व को उसके यौगिक से विस्थापित कर देता है। इसमें अभिकारक के बंध टूटते हैं और नए बंध बनते हैं।
उदाहरण: \( CuSO_4 \text{ (नीला)} + Zn \text{ (जिंक)} \rightarrow ZnSO_4 \text{ (रंगहीन)} + Cu \)
(iii) **द्विविस्थापन अभिक्रियाएँ (Double Displacement Reactions):** ये अभिक्रियाएँ हैं जिनमें दो अभिकारकों के आयन आपस में बदलकर दो नए उत्पाद बनाते हैं।
उदाहरण: \( CuSO_4 + 2NaOH \rightarrow Cu(OH)_2 + Na_2SO_4 \)
(iv) **अपघटनीय अभिक्रियाएँ (Decomposition Reactions):** ऐसी अभिक्रियाएँ जिनमें एक अभिकारक टूटकर दो या दो से अधिक सरल उत्पाद बनाता है। यह अभिक्रिया ऊर्जा (गर्मी, प्रकाश या बिजली) के प्रभाव में होती है।
उदाहरण: \( 2NaCl(aq) \xrightarrow{\text{विद्युत अपघटन}} 2NaOH(aq) + Cl_2(g) \uparrow \)
In simple words: रासायनिक अभिक्रियाएँ वो प्रक्रियाएँ हैं जहाँ चीज़ें मिलकर नई चीज़ें बनाती हैं। ये मुख्य रूप से चार तरह की होती हैं: जुड़ना (संयोजन), जगह बदलना (विस्थापन), दो बार जगह बदलना (द्विविस्थापन) और टूटना (अपघटन)।
🎯 Exam Tip: प्रत्येक प्रकार की अभिक्रिया के लिए एक-एक स्पष्ट उदाहरण याद रखें और उन स्थितियों को भी समझें जहाँ वे घटित होती हैं।
Question 37. ऑक्सीकरण-अपचयन से क्या समझते हैं? उदाहरणों के साथ व्याख्या करें।
Answer: ऑक्सीकरण और अपचयन रासायनिक अभिक्रियाओं की मूलभूत अवधारणाएँ हैं, जिन्हें विभिन्न आधारों पर परिभाषित किया जा सकता है:
**1. ऑक्सीजन और हाइड्रोजन के आधार पर:**
* **ऑक्सीकरण:** किसी पदार्थ में ऑक्सीजन का जुड़ना या हाइड्रोजन का निकलना ऑक्सीकरण कहलाता है।
उदाहरण: \( 2H_2S + O_2 \rightarrow 2H_2O + 2S \) (यहाँ \( H_2S \) का \( S \) में ऑक्सीकरण हो रहा है)
* **अपचयन:** किसी पदार्थ में ऑक्सीजन का निकलना या हाइड्रोजन का जुड़ना अपचयन कहलाता है।
उदाहरण: \( H_2 + Cl_2 \rightarrow 2HCl \) (यहाँ \( Cl_2 \) का \( HCl \) में अपचयन हो रहा है)
**2. विद्युत धनी/ऋणी तत्वों के आधार पर:**
* **ऑक्सीकरण:** किसी पदार्थ में विद्युत धनी तत्व का निष्कासन या विद्युत ऋणी तत्व का जुड़ना ऑक्सीकरण कहलाता है।
उदाहरण: \( Ca + Cl_2 \rightarrow CaCl_2 \) (यहाँ \( Ca \) का \( CaCl_2 \) में ऑक्सीकरण हो रहा है)
* **अपचयन:** किसी पदार्थ में विद्युत धनी तत्व का जुड़ना या विद्युत ऋणी तत्व का निष्कासन अपचयन कहलाता है।
उदाहरण: \( 2FeCl_3 + H_2 \rightarrow 2FeCl_2 + 2HCl \) (यहाँ \( FeCl_3 \) का \( FeCl_2 \) में अपचयन हो रहा है क्योंकि \( Cl \) (ऋणविद्युती) निकल रहा है)
**3. इलेक्ट्रॉन के आदान-प्रदान के आधार पर:**
* **ऑक्सीकरण:** वह अभिक्रिया जिसमें परमाणु, आयन या अणु इलेक्ट्रॉन त्यागता है। इससे धनात्मक आवेश बढ़ता है।
उदाहरण: \( Fe^{2+} \rightarrow Fe^{3+} + e^- \)
* **अपचयन:** वह अभिक्रिया जिसमें परमाणु, आयन या अणु इलेक्ट्रॉन ग्रहण करता है। इससे धनात्मक आवेश घटता है।
उदाहरण: \( Mg^{2+} + 2e^- \rightarrow Mg \)
ये सभी प्रक्रियाएँ अक्सर साथ-साथ होती हैं, जिन्हें रेडॉक्स अभिक्रियाएँ कहते हैं।
एक उपापचयी अभिक्रिया का उदाहरण:
ऑक्सीकरण
\( Zn + CuSO_4 \rightarrow ZnSO_4 + Cu \)
अपचयन
इस अभिक्रिया में जिंक का जिंक सल्फेट में ऑक्सीकरण हो रहा है \( (Zn \rightarrow Zn^{+2} + 2e^-) \) और कॉपर सल्फेट का कॉपर में अपचयन हो रहा है \( (Cu^{+2} + 2e^- \rightarrow Cu) \)। यह एक इलेक्ट्रॉन स्थानांतरण अभिक्रिया है।
In simple words: ऑक्सीकरण का मतलब है ऑक्सीजन पाना, हाइड्रोजन खोना या इलेक्ट्रॉन छोड़ना। अपचयन का मतलब है ऑक्सीजन खोना, हाइड्रोजन पाना या इलेक्ट्रॉन लेना। ये दोनों प्रक्रियाएँ अक्सर एक साथ होती हैं।
🎯 Exam Tip: ऑक्सीकरण और अपचयन को परिभाषित करते समय, ऑक्सीजन, हाइड्रोजन और इलेक्ट्रॉन के संदर्भ में उनकी परिभाषाओं को अच्छी तरह से याद रखें, क्योंकि यह सबसे सामान्य तरीका है।
Question 38. उत्प्रेरक की विशेषताएँ तथा उत्प्रेरक के प्रकारों के बारे में आप क्या जानते हैं?
Answer: उत्प्रेरक वे पदार्थ होते हैं जो किसी रासायनिक अभिक्रिया के वेग को बदल देते हैं (बढ़ाते या घटाते हैं) लेकिन खुद रासायनिक रूप से अपरिवर्तित रहते हैं। वे अभिक्रिया के अंत में अपनी मूल रासायनिक संरचना और मात्रा में वापस मिल जाते हैं।
**उत्प्रेरक की प्रमुख विशेषताएँ या गुण:**
- उत्प्रेरक केवल अभिक्रिया के वेग को बदलते हैं, लेकिन उनके अपने रासायनिक संघटन और मात्रा में कोई बदलाव नहीं आता। वे सिर्फ़ एक माध्यम प्रदान करते हैं।
- अभिक्रिया मिश्रण में उत्प्रेरक की बहुत कम मात्रा भी प्रभावी होती है। ज़्यादा मात्रा की ज़रूरत नहीं होती है।
- प्रत्येक अभिक्रिया के लिए एक खास उत्प्रेरक की ज़रूरत होती है; एक उत्प्रेरक सभी अभिक्रियाओं को उत्प्रेरित नहीं कर सकता।
- उत्प्रेरक अभिक्रिया को शुरू नहीं करते, वे बस पहले से चल रही अभिक्रिया के वेग को बढ़ाते या घटाते हैं।
- उत्क्रमणीय अभिक्रियाओं में, उत्प्रेरक अग्र (आगे बढ़ने वाली) और प्रतीप (पीछे हटने वाली) दोनों अभिक्रियाओं के वेग को समान रूप से प्रभावित करते हैं, जिससे संतुलन जल्दी प्राप्त हो जाता है।
- उत्प्रेरक एक निश्चित तापमान पर सबसे अधिक क्रियाशील होते हैं, और तापमान में बदलाव से उनकी क्रियाशीलता प्रभावित हो सकती है।
**उत्प्रेरक के प्रकार:**
उत्प्रेरकों को उनकी क्रिया के आधार पर और उनकी भौतिक अवस्था के आधार पर वर्गीकृत किया जा सकता है।
**1. क्रिया के आधार पर:**
(a) **धनात्मक उत्प्रेरक:** जो अभिक्रिया के वेग को बढ़ाते हैं।
(b) **ऋणात्मक उत्प्रेरक:** जो अभिक्रिया के वेग को कम करते हैं।
(c) **स्वतः उत्प्रेरक:** जब अभिक्रिया का उत्पाद ही उत्प्रेरक का काम करता है।
(d) **जैव उत्प्रेरक:** जीवित प्रणालियों में होने वाली अभिक्रियाओं को उत्प्रेरित करने वाले एंजाइम।
**2. भौतिक अवस्था के आधार पर:**
(a) **समांगी उत्प्रेरक:** जब उत्प्रेरक, अभिकारक और उत्पाद एक ही भौतिक अवस्था में होते हैं।
(b) **विषमांगी उत्प्रेरक:** जब उत्प्रेरक अभिकारकों और उत्पादों से भिन्न भौतिक अवस्था में होता है।
In simple words: उत्प्रेरक अभिक्रिया की गति बदलते हैं पर खुद नहीं बदलते। वे बहुत कम मात्रा में ज़रूरी होते हैं और हर अभिक्रिया के लिए अलग होते हैं। ये गति बढ़ाने वाले, घटाने वाले, खुद से काम करने वाले या जीवों में काम करने वाले हो सकते हैं, और ये एक ही अवस्था में या अलग-अलग अवस्था में भी हो सकते हैं।
🎯 Exam Tip: उत्प्रेरक के गुण और प्रकारों को उदाहरणों के साथ स्पष्ट रूप से समझना ज़रूरी है, क्योंकि यह अभिक्रिया रसायन विज्ञान का एक महत्वपूर्ण हिस्सा है।
रासायनिक अभिक्रियाएँ एवं उत्प्रेरक
पाठ्यपुस्तक के प्रश्नोत्तर
बहुचयनात्मक प्रश्न
Question 39. रासायनिक समीकरण को लिखने के चरण व इसकी विशेषताएँ लिखें।
Answer: रासायनिक समीकरण वह तरीका है जिससे रासायनिक अभिक्रिया में शामिल पदार्थों को उनके रासायनिक सूत्रों और प्रतीकों का उपयोग करके दिखाया जाता है। उदाहरण के लिए, जब कार्बन को ऑक्सीजन की मौजूदगी में जलाया जाता है, तो कार्बन डाइऑक्साइड गैस बनती है, जिसे \(C + O_2 \rightarrow CO_2\) लिखा जा सकता है। यह हमें अभिक्रिया में भाग लेने वाले तत्वों को समझने में मदद करता है।
रासायनिक समीकरण को लिखने के चरण:
- रासायनिक अभिक्रिया को लिखते समय, सबसे पहले अभिक्रिया करने वाले पदार्थों (क्रियाकारकों) को बाईं ओर लिखा जाता है। फिर एक तीर (\( \rightarrow \)) का निशान लगाया जाता है, और उसके बाद बनने वाले नए पदार्थों (उत्पादों) को दाईं ओर लिखा जाता है।
- अगर क्रियाकारक या उत्पाद एक से ज़्यादा हों, तो उनके बीच में धन का चिन्ह (\( + \)) लगाया जाता है। जैसे, \(C + O_2 \rightarrow CO_2\).
- अभिकारकों और उत्पादों की भौतिक अवस्था को बताने के लिए उनके रासायनिक सूत्र के साथ कोष्ठक में संकेत दिए जाते हैं; ठोस के लिए (s), द्रव के लिए (l), गैस के लिए (g), और जलीय घोल के लिए (aq) का उपयोग करते हैं।
- ऊष्माक्षेपी अभिक्रियाओं (जिनमें ऊष्मा निकलती है) के लिए उत्पाद के साथ धन का चिन्ह (\( + \)) लगाकर ऊष्मा की मात्रा लिखी जाती है, और ऊष्माशोषी अभिक्रियाओं (जिनमें ऊष्मा अवशोषित होती है) के लिए ऋण का चिन्ह (\( - \)) लगाकर ऊष्मा की मात्रा लिखते हैं। ऊष्मा को चिन्ह \( \triangle \) से भी दर्शाया जा सकता है। उदाहरण के लिए, \(N_2 + 3H_2 \rightarrow 2NH_3 + 10.5 \ kcal/mole\) (ऊष्माक्षेपी) या \(N_2 + O_2 \rightarrow 2NO - 21.6 \ kcal/mole\) (ऊष्माशोषी)।
- अभिक्रिया में उपयोग होने वाले उत्प्रेरक को तीर के निशान के ऊपर लिखा जाता है। जैसे, एथीन से एथेन बनाने में निकेल उत्प्रेरक का उपयोग: \[CH_2=CH_2(g) + H_2(g) \xrightarrow{Ni} CH_3-CH_3(g)\]
रासायनिक समीकरण की विशेषताएँ:
रासायनिक समीकरण हमें किसी भी रासायनिक अभिक्रिया के बारे में बहुत सी संक्षिप्त जानकारी देता है। इसकी मुख्य विशेषताएँ ये हैं:
- यह हमें क्रियाकारक और उत्पादों के अणुओं की संख्या, उनके द्रव्यमान और रासायनिक गुणों के बारे में पूरी जानकारी देता है।
- यह बताता है कि अभिक्रिया में शामिल पदार्थ किस भौतिक अवस्था (ठोस, द्रव, गैस) में हैं।
- इससे हमें अभिक्रिया के लिए ज़रूरी परिस्थितियों, जैसे तापमान, दबाव और कौन सा उत्प्रेरक चाहिए, के बारे में पता चलता है।
- यह स्पष्ट करता है कि अभिक्रिया ऊष्माक्षेपी (ऊष्मा निकलती है) है या ऊष्माशोषी (ऊष्मा अवशोषित होती है)।
- रासायनिक समीकरण से हमें यह भी पता चलता है कि अभिक्रिया उत्क्रमणीय है या अनुत्क्रमणीय।
In simple words: रासायनिक समीकरण एक छोटा तरीका है जिससे हम रासायनिक क्रियाओं को उनके नाम और संकेतों से लिखते हैं। यह हमें बताता है कि कौन से पदार्थ मिल रहे हैं, क्या बन रहा है, और कैसे बन रहा है।
🎯 Exam Tip: समीकरण लिखते समय हमेशा संतुलित रासायनिक समीकरण का उपयोग करें, क्योंकि यह द्रव्यमान संरक्षण के नियम का पालन करता है।
Question 40. निम्नलिखित में अंतर बताइए
(a) उत्क्रमणीय-अनुत्क्रमणीय अभिक्रिया
Answer:
| उत्क्रमणीय अभिक्रिया (Reversible Reaction) | अनुत्क्रमणीय अभिक्रिया (Irreversible Reaction) |
|---|---|
| वे अभिक्रियाएँ जो दोनों दिशाओं में होती हैं, यानी क्रियाकारक से उत्पाद और उत्पाद से वापस क्रियाकारक बन सकते हैं। | वे अभिक्रियाएँ जो केवल एक ही दिशा में होती हैं, यानी क्रियाकारक से उत्पाद बनते हैं लेकिन उत्पाद से वापस क्रियाकारक नहीं बन सकते। |
| इन अभिक्रियाओं को दर्शाने के लिए दोनों ओर तीर (\( \rightleftharpoons \)) का चिन्ह लगाया जाता है। | इन अभिक्रियाओं को दर्शाने के लिए साधारण तीर (\( \rightarrow \)) का चिन्ह लगाया जाता है। |
| उदाहरण: \(N_2 + 3H_2 \rightleftharpoons 2NH_3\) | उदाहरण: \(CH_4 + 2O_2 \rightarrow CO_2 + 2H_2O\) (मेथेन का जलना) |
| इन अभिक्रियाओं में क्रियाकारकों की मात्रा कभी भी पूरी तरह से खत्म नहीं होती है, यानी अभिक्रिया कभी भी पूरी नहीं होती। | इन अभिक्रियाओं में क्रियाकारकों की सांद्रता धीरे-धीरे कम होती जाती है और उत्पादों की सांद्रता बढ़ती जाती है, यानी अभिक्रिया लगभग पूरी हो जाती है। |
In simple words: उत्क्रमणीय अभिक्रियाएँ दोनों तरफ चलती हैं, मतलब चीज़ें आगे-पीछे दोनों तरफ बदल सकती हैं। वहीं, अनुत्क्रमणीय अभिक्रियाएँ सिर्फ एक तरफ चलती हैं, चीज़ें एक बार बदल गईं तो वापस पहले जैसी नहीं होतीं।
🎯 Exam Tip: उत्क्रमणीय अभिक्रियाओं में संतुलन अवस्था प्राप्त होती है, जहाँ अग्र और प्रतीप अभिक्रियाओं की दर समान हो जाती है।
Question 40. निम्नलिखित में अंतर बताइए
(b) उत्प्रेरक वर्धक-उत्प्रेरक विष
Answer:
| क्र.सं. | उत्प्रेरक वर्धक (Catalyst Promoter) | उत्प्रेरक विष (Catalyst Poison) |
|---|---|---|
| 1. | वे पदार्थ जिन्हें अभिक्रिया मिश्रण में उत्प्रेरक के साथ मिलाने पर उत्प्रेरक की क्रियाशीलता बढ़ जाती है, उन्हें उत्प्रेरक वर्धक कहते हैं। ये पदार्थ उत्प्रेरक के काम करने की क्षमता को बढ़ाते हैं। | वे पदार्थ जिन्हें अभिक्रिया मिश्रण में मिलाने पर उत्प्रेरक की क्रियाशीलता कम हो जाती है, उन्हें उत्प्रेरक विष कहते हैं। ये उत्प्रेरक के काम करने की क्षमता को घटाते हैं या रोक देते हैं। |
| 2. | उदाहरण: हैबर विधि में \(N_2 + 3H_2 \xrightarrow{Fe/Mo} 2NH_3\) में Mo (मोलिब्डेनम) उत्प्रेरक वर्धक है। | उदाहरण: हैबर विधि में \(N_2 + 3H_2 \xrightarrow{Fe/CO} 2NH_3\) में CO (कार्बन मोनोऑक्साइड) उत्प्रेरक विष है। |
| 3. | ये उत्प्रेरक की क्रियाशीलता को बढ़ाते हैं, लेकिन ये खुद उत्प्रेरक नहीं होते हैं। | ये भी उत्प्रेरक नहीं होते हैं, लेकिन उत्प्रेरक की क्रियाशीलता को कम करते हैं। |
In simple words: उत्प्रेरक वर्धक वो होते हैं जो किसी उत्प्रेरक को और बेहतर काम करने में मदद करते हैं, जबकि उत्प्रेरक विष वो होते हैं जो उत्प्रेरक को ठीक से काम करने से रोकते हैं।
🎯 Exam Tip: उत्प्रेरक वर्धक और विष का उपयोग उद्योगों में अभिक्रियाओं की गति को नियंत्रित करने के लिए महत्वपूर्ण है।
Question 40. निम्नलिखित में अंतर बताइए
(c) समांगी-विषमांगी उत्प्रेरण
Answer:
| क्र.सं. | समांगी उत्प्रेरण (Homogeneous Catalysis) | विषमांगी उत्प्रेरण (Heterogeneous Catalysis) |
|---|---|---|
| 1. | इस प्रकार के उत्प्रेरण में उत्प्रेरक, क्रियाकारक और उत्पाद सभी एक ही भौतिक अवस्था (जैसे सभी गैस या सभी द्रव) में होते हैं। | इस प्रकार के उत्प्रेरण में उत्प्रेरक, क्रियाकारक और उत्पाद अलग-अलग भौतिक अवस्थाओं में होते हैं। |
| 2. | उदाहरण: मेथिल एसीटेट का जल-अपघटन: \[CH_3COOCH_3(l) + H_2O(l) \xrightarrow{HCl(aq)} CH_3COOH(aq) + CH_3OH(aq)\] यहां सभी पदार्थ द्रव अवस्था में हैं। | उदाहरण: वनस्पति तेल का हाइड्रोजनीकरण: \[वनस्पति\ तेल(l) + H_2(g) \xrightarrow{Ni(s)} वनस्पति\ घी(s)\] यहां उत्प्रेरक (Ni) ठोस है जबकि क्रियाकारक द्रव और गैस हैं। |
In simple words: समांगी उत्प्रेरण में सब कुछ (उत्प्रेरक, चीजें जो मिल रही हैं, और जो बन रही हैं) एक जैसी अवस्था (जैसे सब तरल या सब गैस) में होता है। विषमांगी उत्प्रेरण में, उत्प्रेरक और बाकी चीजें अलग-अलग अवस्थाओं में होती हैं (जैसे उत्प्रेरक ठोस हो और बाकी तरल या गैस)।
🎯 Exam Tip: समांगी उत्प्रेरण में अभिक्रिया मिश्रण एक चरण में होता है, जबकि विषमांगी उत्प्रेरण में कई चरण होते हैं, अक्सर ठोस उत्प्रेरक की सतह पर।
Question 40. निम्नलिखित में अंतर बताइए
(d) ऑक्सीकरण-अपचयन
Answer:
| क्र.सं. | ऑक्सीकरण (Oxidation) | अपचयन (Reduction) |
|---|---|---|
| 1. | वह अभिक्रिया जिसमें कोई परमाणु, आयन या अणु इलेक्ट्रॉन त्यागता है, उसे ऑक्सीकरण कहते हैं। इसमें इलेक्ट्रॉन खोए जाते हैं। | वह अभिक्रिया जिसमें कोई परमाणु, आयन या अणु इलेक्ट्रॉन ग्रहण करता है, उसे अपचयन कहते हैं। इसमें इलेक्ट्रॉन प्राप्त किए जाते हैं। |
| 2. | उदाहरण: \[Na \rightarrow Na^+ + e^-\] \[Fe^{2+} \rightarrow Fe^{3+} + e^-\] \[2Br^- \rightarrow Br_2 + 2e^-\] | उदाहरण: \[Cl + e^- \rightarrow Cl^-\] \[Mg^{2+} + 2e^- \rightarrow Mg\] \[MnO_4^- + e^- \rightarrow MnO_4^{2-}\] |
| 3. | इस अभिक्रिया में उदासीन परमाणु से धनायन बनता है या धनायन पर आवेश बढ़ता है या ऋणायन से उदासीन परमाणु बनता है। | इस अभिक्रिया में उदासीन परमाणु से ऋणायन बनता है या ऋणायन पर आवेश बढ़ता है या धनायन से उदासीन परमाणु बनता है। |
ऑक्सीकरण-अपचयन अभिक्रियाएँ अक्सर साथ-साथ चलती हैं और इन्हें रेडॉक्स अभिक्रियाएँ कहते हैं। उदाहरण के लिए, \(Zn + CuSO_4 \rightarrow ZnSO_4 + Cu\) अभिक्रिया में \(Zn\) का \(ZnSO_4\) में ऑक्सीकरण (\(Zn \rightarrow Zn^{2+} + 2e^-\)) होता है, और कॉपर सल्फेट (\(Cu^{2+}\)) का \(Cu\) में अपचयन (\(Cu^{2+} + 2e^- \rightarrow Cu\)) हो रहा है।
In simple words: ऑक्सीकरण मतलब जब कोई चीज़ इलेक्ट्रॉन छोड़ती है, तो उस पर धन आवेश बढ़ जाता है या धन आयन बन जाता है। अपचयन मतलब जब कोई चीज़ इलेक्ट्रॉन लेती है, तो उस पर ऋण आवेश बढ़ जाता है या ऋण आयन बन जाता है।
🎯 Exam Tip: याद रखें, ऑक्सीकरण और अपचयन हमेशा साथ-साथ होते हैं; एक पदार्थ इलेक्ट्रॉन त्यागता है तो दूसरा उसे ग्रहण करता है।
वस्तुनिष्ठ प्रश्न
(अन्य महत्त्वपूर्ण प्रश्नोत्तर)
Question 1. जब पोटेशियम धातु की जल से क्रिया करवाते हैं तो इसका
(अ) ऑक्सीकरण होता है
(ब) अपचयन होता है।
(स) अप्रभावित रहता है।
(द) जल अपघटन होता है।
Answer: (अ) ऑक्सीकरण होता है
In simple words: जब पोटेशियम पानी से मिलता है, तो वह इलेक्ट्रॉन खोकर ऑक्सीकृत हो जाता है, क्योंकि पोटेशियम बहुत सक्रिय धातु है।
🎯 Exam Tip: सक्रिय धातुएँ जल से क्रिया करके हाइड्रोजन गैस मुक्त करती हैं और स्वयं ऑक्सीकृत हो जाती हैं।
Question 3. H2 का ऑक्सीकरण हो रहा है, Cl2 का अपचयन हो रहा है, तो कौन सा कथन सही है?
(अ) \(H_2\) का अपचयन हो रहा है
(ब) \(H_2\) का ऑक्सीकरण हो रहा है।
(स) \(Cl_2\) का ऑक्सीकरण हो रहा है।
(द) उपरोक्त सभी
Answer: (ब) H2 का ऑक्सीकरण हो रहा है।
In simple words: इस अभिक्रिया में, \(H_2\) इलेक्ट्रॉन त्यागकर ऑक्सीकृत हो रहा है, जबकि \(Cl_2\) इलेक्ट्रॉन ग्रहण करके अपचयित हो रहा है।
🎯 Exam Tip: ऑक्सीकरण में हाइड्रोजन का हटना या ऑक्सीजन का जुड़ना होता है, जबकि अपचयन में हाइड्रोजन का जुड़ना या ऑक्सीजन का हटना होता है।
Question 4. नीचे दी गयी अभिक्रिया के संबंध में कौनसा कथन असत्य है?
\(2PbO(s) + C(s) \rightarrow 2Pb(s) + CO_2(g)\)
(i) सीसा अपचयित हो रहा है।
(ii) कार्बन डाइऑक्साइड ऑक्सीकृत हो रही है।
(iii) कार्बन ऑक्सीकृत हो रहा है।
(iv) लेड ऑक्साइड अपचयित हो रहा है।
(अ) (i) एवं (ii)
(ब) (i) एवं (iii)
(स) (i), (ii) एवं (iii)
(द) उपरोक्त सभी
Answer: (अ) (i) एवं (ii)
In simple words: अभिक्रिया में \(PbO\) से ऑक्सीजन हटकर \(Pb\) बन रहा है, यानी \(PbO\) अपचयित हो रहा है और \(Pb\) बन रहा है। कार्बन (\(C\)) में ऑक्सीजन जुड़कर \(CO_2\) बन रही है, यानी \(C\) ऑक्सीकृत हो रहा है। इसलिए, कथन (i) और (ii) असत्य हैं।
🎯 Exam Tip: ऑक्सीकरण वह प्रक्रिया है जिसमें ऑक्सीजन जुड़ती है या हाइड्रोजन हटती है, जबकि अपचयन वह प्रक्रिया है जिसमें ऑक्सीजन हटती है या हाइड्रोजन जुड़ती है।
Question 5. अभिक्रिया \(Fe_2O_3 + 2Al \rightarrow Al_2O_3 + 2Fe\) किस प्रकार की है?
(अ) संयोजन अभिक्रिया
(ब) द्विविस्थापन अभिक्रिया
(स) वियोजन अभिक्रिया
(द) विस्थापन अभिक्रिया
Answer: (द) विस्थापन अभिक्रिया
In simple words: इस अभिक्रिया में एल्युमिनियम (Al) आयरन (\(Fe\)) को उसके ऑक्साइड से हटा रहा है, क्योंकि एल्युमिनियम आयरन से ज्यादा सक्रिय है।
🎯 Exam Tip: विस्थापन अभिक्रियाएँ तब होती हैं जब एक अधिक सक्रिय तत्व एक कम सक्रिय तत्व को उसके यौगिक से विस्थापित करता है।
Question 6. लौह-चूर्ण पर तनु हाइड्रोक्लोरिक अम्ल डालने से क्या होता है?
(अ) हाइड्रोजन गैस एवं आयरन क्लोराइड बनता है।
(ब) क्लोरीन गैस एवं आयरन हाइड्रॉक्साइड बनता है।
(स) कोई अभिक्रिया नहीं होती है।
(द) आयरन लवण एवं जल बनता है।
Answer: (अ) हाइड्रोजन गैस एवं आयरन क्लोराइड बनता है।
In simple words: जब आयरन हाइड्रोक्लोरिक अम्ल से मिलता है, तो हाइड्रोजन गैस निकलती है और आयरन क्लोराइड बनता है।
🎯 Exam Tip: धातुएँ अम्लों से अभिक्रिया करके हाइड्रोजन गैस और धातु लवण बनाती हैं।
Question 7. अभिक्रिया-वनस्पति तेल \(+ H_2 \xrightarrow{Ni}\) वनस्पति घी, में उत्प्रेरक वर्धक है
(अ) Fe
(ब) Mo
(स) Zn
(द) उपरोक्त में से कोई नहीं
Answer: (स) Zn
In simple words: वनस्पति तेल को वनस्पति घी में बदलने के लिए निकल उत्प्रेरक का उपयोग होता है, और कभी-कभी जिंक (Zn) जैसे पदार्थ इस उत्प्रेरक की काम करने की क्षमता को बढ़ा देते हैं।
🎯 Exam Tip: उत्प्रेरक वर्धक खुद उत्प्रेरक नहीं होते, बल्कि उत्प्रेरक की गतिविधि को बढ़ाते हैं, जिससे अभिक्रिया तेजी से होती है।
Question 8. \(NH_4Cl\) के विलयन की pH होगी
(अ) 7
(ब) 7 से कम
(स) 7 से अधिक
(द) कुछ नहीं कहा जा सकता।
Answer: (ब) 7 से कम
In simple words: अमोनियम क्लोराइड (\(NH_4Cl\)) एक दुर्बल क्षार और प्रबल अम्ल से बना लवण है, इसलिए इसका विलयन अम्लीय होता है और इसकी pH 7 से कम होती है।
🎯 Exam Tip: प्रबल अम्ल और दुर्बल क्षार से बने लवण का विलयन अम्लीय होता है, जबकि दुर्बल अम्ल और प्रबल क्षार से बने लवण का विलयन क्षारीय होता है।
Question 9. निम्न में से कौनसा भौतिक परिवर्तन नहीं है?
(अ) लोहे का चुम्बक बनना
(ब) कार्बन के जलने पर \(CO_2\) का बनना
(स) नौसादर (\(NH_4Cl\)) का उर्ध्वपातन
(द) शक्कर का जल में विलेय होना ।
Answer: (ब) कार्बन के जलने पर \(CO_2\) का बनना
In simple words: कार्बन का जलना एक रासायनिक परिवर्तन है क्योंकि इसमें एक नया पदार्थ (\(CO_2\)) बनता है और कार्बन के रासायनिक गुण बदल जाते हैं।
🎯 Exam Tip: भौतिक परिवर्तन में पदार्थ की रासायनिक पहचान नहीं बदलती, जबकि रासायनिक परिवर्तन में पदार्थ की रासायनिक पहचान पूरी तरह से बदल जाती है।
अतिलघूत्तरात्मक प्रश्न
Question 3. अपघटनीय अभिक्रिया के लिए उत्तरदायी कारक बताइए।
Answer: अपघटनीय अभिक्रियाएँ मुख्यतः ताप, विद्युत तथा प्रकाश जैसे कारकों के कारण होती हैं। ये कारक किसी यौगिक को छोटे-छोटे अणुओं में तोड़ने का काम करते हैं।
In simple words: गर्मी, बिजली और रोशनी वो चीजें हैं जो किसी एक पदार्थ को तोड़कर कई छोटे पदार्थ बनाने में मदद करती हैं।
🎯 Exam Tip: विभिन्न प्रकार की अपघटनीय अभिक्रियाओं को उनके प्रेरित करने वाले कारक के आधार पर वर्गीकृत किया जाता है।
Question 4. पोटेशियम क्लोरेट को गर्म करने पर कौनसी गैस निकलती है?
Answer: पोटेशियम क्लोरेट (\(KClO_3\)) को गर्म करने पर ऑक्सीजन (\(O_2\)) गैस निकलती है। इस अभिक्रिया को इस प्रकार दर्शाया जाता है: \[2KClO_3(s) \xrightarrow{heat} 2KCl(s) + 3O_2(g)\uparrow\] ऑक्सीजन गैस जलने में मदद करती है, इसलिए इसे प्रयोगशाला में ऑक्सीजन बनाने के लिए इस्तेमाल किया जाता है।
In simple words: पोटेशियम क्लोरेट को गरम करने पर ऑक्सीजन गैस निकलती है।
🎯 Exam Tip: यह अभिक्रिया प्रयोगशाला में ऑक्सीजन गैस बनाने का एक सामान्य तरीका है, अक्सर मैंगनीज डाइऑक्साइड उत्प्रेरक की उपस्थिति में।
Question 5. \(Pb(s) + CuCl_2(aq) \rightarrow PbCl_2(aq) + Cu(s)\) किस प्रकार की अभिक्रिया है?
Answer: यह एक विस्थापन अभिक्रिया और एक रेडॉक्स (उपापचयी) अभिक्रिया है। लेड (Pb) कॉपर (Cu) से अधिक क्रियाशील होता है, इसलिए यह कॉपर क्लोराइड (\(CuCl_2\)) से कॉपर को विस्थापित कर देता है।
In simple words: यह एक ऐसी अभिक्रिया है जहाँ एक तत्व दूसरे को हटा देता है, और इसमें इलेक्ट्रॉन का लेन-देन भी होता है।
🎯 Exam Tip: विस्थापन अभिक्रियाओं में, अधिक सक्रिय धातुएँ कम सक्रिय धातुओं को उनके लवण विलयनों से विस्थापित करती हैं।
Question 6. मैग्नीशियम रिबन को वायु में जलाने पर क्या बनता है?
Answer: मैग्नीशियम रिबन को वायु में जलाने पर श्वेत मैग्नीशियम ऑक्साइड (\(MgO\)) का चूर्ण बनता है। यह अभिक्रिया अत्यधिक ऊष्माक्षेपी होती है, यानी इसमें बहुत गर्मी निकलती है और तेज चमकदार रोशनी भी पैदा होती है।
In simple words: मैग्नीशियम को हवा में जलाने पर सफेद राख बनती है जिसे मैग्नीशियम ऑक्साइड कहते हैं।
🎯 Exam Tip: मैग्नीशियम रिबन को जलाने से पहले उसे साफ करना चाहिए ताकि उस पर जमी ऑक्साइड की परत हट जाए और अभिक्रिया आसानी से हो सके।
Question 7. मैग्नीशियम रिबन को वायु में जलाने पर मैग्नीशियम ऑक्सीकृत होता है या अपचयित? (\(2Mg + O_2 \rightarrow 2MgO\))
Answer: मैग्नीशियम रिबन को वायु में जलाने पर मैग्नीशियम ऑक्सीकृत होता है। ऑक्सीकरण में ऑक्सीजन का जुड़ना होता है, और मैग्नीशियम ऑक्सीजन के साथ मिलकर मैग्नीशियम ऑक्साइड बनाता है।
In simple words: मैग्नीशियम को हवा में जलाने पर वह ऑक्सीजन से मिल जाता है, जिसे ऑक्सीकरण कहते हैं।
🎯 Exam Tip: ऑक्सीकरण की पहचान ऑक्सीजन के जुड़ने या इलेक्ट्रॉन के त्यागने से की जाती है।
Question 8. \(CH_4(g) + O_2 \rightarrow CO_2(g) + H_2O\) का संतुलित रासायनिक समीकरण क्या होगा?
Answer: मीथेन के जलने का संतुलित रासायनिक समीकरण है: \[CH_4(g) + 2O_2(g) \rightarrow CO_2(g) + 2H_2O(g)\] इस समीकरण में, कार्बन, हाइड्रोजन और ऑक्सीजन परमाणुओं की संख्या दोनों तरफ बराबर है, जो द्रव्यमान संरक्षण के नियम का पालन करता है।
In simple words: मीथेन और ऑक्सीजन मिलकर कार्बन डाइऑक्साइड और पानी बनाते हैं, और समीकरण को सही करने के लिए ऑक्सीजन और पानी के आगे 2 लगाना पड़ता है।
🎯 Exam Tip: रासायनिक समीकरणों को संतुलित करते समय, सबसे पहले धातु परमाणुओं को, फिर अधातु परमाणुओं (ऑक्सीजन और हाइड्रोजन को छोड़कर), और अंत में ऑक्सीजन और हाइड्रोजन परमाणुओं को संतुलित करें।
Question 10. कैल्सियम ऑक्साइड को जल में घोलने पर ऊष्मा में क्या परिवर्तन होता है?
Answer: कैल्सियम ऑक्साइड (\(CaO\)) को जल में घोलने पर ऊष्मा उत्सर्जित होती है। यह एक ऊष्माक्षेपी अभिक्रिया है, जिसमें बहुत अधिक मात्रा में ऊष्मा निकलती है, जिससे विलयन गर्म हो जाता है।
In simple words: जब कैल्शियम ऑक्साइड को पानी में मिलाते हैं, तो बहुत गर्मी निकलती है।
🎯 Exam Tip: इस अभिक्रिया का उपयोग चूने के पानी (कैल्शियम हाइड्रॉक्साइड) के उत्पादन में होता है, जो सफेदी करने में काम आता है।
Question 11. कॉपर से अधिक सक्रिय तीन धातुओं के नाम लिखिए।
Answer: कॉपर से अधिक सक्रिय तीन धातुएँ आयरन (Fe), जिंक (Zn) तथा मैग्नीशियम (Mg) हैं। ये धातुएँ सक्रियता श्रेणी में कॉपर से ऊपर आती हैं, जिसका मतलब है कि ये कॉपर को उसके लवण विलयन से विस्थापित कर सकती हैं।
In simple words: आयरन, जिंक और मैग्नीशियम जैसी धातुएँ कॉपर से ज्यादा ताकतवर (सक्रिय) होती हैं।
🎯 Exam Tip: सक्रियता श्रेणी धातुओं की क्रियाशीलता का क्रम बताती है, जो विस्थापन अभिक्रियाओं की भविष्यवाणी करने में मदद करती है।
Question 12. अभिक्रिया \(H_2S + Br_2 \rightarrow 2HBr + S\) में किस पदार्थ का अपचयन हो रहा है?
Answer: अभिक्रिया \(H_2S + Br_2 \rightarrow 2HBr + S\) में ब्रोमीन (\(Br_2\)) का अपचयन हो रहा है। ब्रोमीन हाइड्रोजन के साथ जुड़कर हाइड्रोजन ब्रोमाइड (\(HBr\)) बना रही है, जो अपचयन की पहचान है।
In simple words: इस अभिक्रिया में ब्रोमीन को हाइड्रोजन मिल रही है, इसलिए ब्रोमीन का अपचयन हो रहा है।
🎯 Exam Tip: हाइड्रोजन का जुड़ना या ऑक्सीजन का हटना अपचयन कहलाता है।
Question 13. संगमरमर (Marble) का रासायनिक सूत्र क्या है?
Answer: संगमरमर (Marble) का रासायनिक सूत्र \(CaCO_3\) (कैल्सियम कार्बोनेट) है। यह चूना पत्थर का एक प्राकृतिक रूप है और इसका उपयोग भवन निर्माण और मूर्तिकला में होता है।
In simple words: संगमरमर का रासायनिक नाम कैल्सियम कार्बोनेट है, जिसे \(CaCO_3\) लिखते हैं।
🎯 Exam Tip: कैल्सियम कार्बोनेट चूना, चाक और संगमरमर जैसे विभिन्न रूपों में पाया जाता है।
Question 14. Zn, Pb तथा Cu की क्रियाशीलता का क्रम लिखिए।
Answer: Zn, Pb तथा Cu की क्रियाशीलता का क्रम है: \(Zn > Pb > Cu\)। इस क्रम का अर्थ है कि जिंक (Zn) सबसे अधिक सक्रिय है, उसके बाद लेड (Pb) और फिर कॉपर (Cu) सबसे कम सक्रिय है।
In simple words: जिंक सबसे ज्यादा सक्रिय है, फिर लेड और आखिर में कॉपर सबसे कम सक्रिय है।
🎯 Exam Tip: सक्रियता श्रेणी में ऊपर वाली धातुएँ नीचे वाली धातुओं को उनके लवण विलयनों से विस्थापित कर सकती हैं।
Question 15. एन्जाइमों का संघटन तथा विशेषता बताइए।
Answer: एन्जाइम मुख्यतः प्रोटीन से बने होते हैं। ये ऐसे जैव-उत्प्रेरक होते हैं जो जीवित प्राणियों में होने वाली विभिन्न जैव रासायनिक अभिक्रियाओं की गति को बढ़ाते हैं। एन्जाइमों की मुख्य विशेषताएँ ये हैं कि वे बहुत विशिष्ट होते हैं, यानी एक एन्जाइम आमतौर पर केवल एक या कुछ संबंधित अभिक्रियाओं को ही उत्प्रेरित करता है। ये बहुत कम मात्रा में आवश्यक होते हैं और तापमान व pH के प्रति संवेदनशील होते हैं।
In simple words: एन्जाइम प्रोटीन के बने होते हैं और शरीर की रासायनिक क्रियाओं को तेज करते हैं। हर एन्जाइम किसी खास काम को ही करता है।
🎯 Exam Tip: एन्जाइमों की विशिष्टता और अनुकूलतम pH व तापमान पर उनकी क्रियाशीलता बोर्ड परीक्षाओं में महत्वपूर्ण विषय हैं।
Question 17. एक जैव रासायनिक उत्क्रमणीय अभिक्रिया का उदाहरण बताइए।
Answer: रक्त में हीमोग्लोबिन द्वारा ऑक्सीजन (\(O_2\)) और कार्बन डाईऑक्साइड (\(CO_2\)) का वहन एक जैव रासायनिक उत्क्रमणीय अभिक्रिया का अच्छा उदाहरण है। फेफड़ों में हीमोग्लोबिन ऑक्सीजन से जुड़ता है और ऊतकों में उसे छोड़ता है, जबकि \(CO_2\) के साथ विपरीत क्रिया होती है।
In simple words: हमारे खून में हीमोग्लोबिन ऑक्सीजन और कार्बन डाइऑक्साइड को ले जाने और छोड़ने का काम करता है, यह एक उलट-पुलट होने वाली क्रिया है।
🎯 Exam Tip: श्वसन और प्रकाश संश्लेषण जैसी जैविक प्रक्रियाएँ भी उत्क्रमणीय अभिक्रियाओं के सिद्धांत पर आधारित होती हैं।
Question 18. उत्प्रेरक वर्धक का एक उदाहरण दीजिए।
Answer: वनस्पति तेल से वनस्पति घी बनाने की अभिक्रिया, जिसे हाइड्रोजनीकरण कहते हैं, में निकेल (Ni) उत्प्रेरक का उपयोग किया जाता है। इस अभिक्रिया में कॉपर (Cu) उत्प्रेरक वर्धक के रूप में कार्य करता है, जो निकेल उत्प्रेरक की क्रियाशीलता को बढ़ाता है: \[वनस्पति\ तेल(l) + H_2(g) \xrightarrow{Ni/Cu} वनस्पति\ घी(s)\] कॉपर की उपस्थिति से निकेल की सतह पर हाइड्रोजन के सोखने की क्षमता बढ़ती है।
In simple words: जब वनस्पति तेल से घी बनाते हैं, तो निकेल उत्प्रेरक होता है, और कॉपर (Cu) उस उत्प्रेरक को और बेहतर काम करने में मदद करता है।
🎯 Exam Tip: उत्प्रेरक वर्धक स्वयं उत्प्रेरक नहीं होते, बल्कि उत्प्रेरक की कार्यक्षमता को बढ़ाते हैं, जो औद्योगिक प्रक्रियाओं के लिए महत्वपूर्ण है।
Question 19. सक्रियता श्रेणी किसे कहते हैं ?
Answer: सक्रियता श्रेणी एक सूची है जिसमें धातुओं को उनकी क्रियाशीलता के घटते क्रम में व्यवस्थित किया जाता है। इस श्रेणी का उपयोग यह जानने के लिए किया जाता है कि कौन सी धातु दूसरी धातु को उसके यौगिक से विस्थापित कर सकती है।
In simple words: सक्रियता श्रेणी धातुओं की एक लिस्ट है, जिसमें सबसे ज्यादा ताकतवर धातु ऊपर और सबसे कम ताकतवर धातु नीचे होती है।
🎯 Exam Tip: सक्रियता श्रेणी में ऊपर स्थित धातुएँ अपने से नीचे स्थित धातुओं को उनके लवण विलयनों से विस्थापित कर सकती हैं।
Question 20. भौतिक परिवर्तन किसे कहते हैं?
Answer: भौतिक परिवर्तन वह प्रक्रिया है जिसमें किसी पदार्थ के भौतिक गुणों, जैसे अवस्था, रंग, गंध, या आकार में बदलाव होता है, लेकिन उसके रासायनिक गुणों और रासायनिक संघटन में कोई परिवर्तन नहीं होता। इस प्रकार के परिवर्तन में कोई नया पदार्थ नहीं बनता है, और परिवर्तन के कारण को हटाने पर पदार्थ को उसकी मूल अवस्था में वापस प्राप्त किया जा सकता है।
In simple words: भौतिक परिवर्तन तब होता है जब कोई चीज़ अपना रूप या आकार बदलती है, लेकिन वह असल में वही चीज़ रहती है, जैसे पानी का बर्फ बनना।
🎯 Exam Tip: भौतिक परिवर्तन आमतौर पर उत्क्रमणीय (उलटनीय) होते हैं और इसमें ऊर्जा का थोड़ा आदान-प्रदान होता है।
Question 21. दूध से दही बनना तथा तैयार सब्जी का कुछ घण्टों बाद खराब होना किस प्रकार के परिवर्तन हैं ?
Answer: दूध से दही बनना और तैयार सब्जी का कुछ घण्टों बाद खराब होना, दोनों ही रासायनिक परिवर्तन के उदाहरण हैं। इन परिवर्तनों में नए पदार्थ बनते हैं जिनके रासायनिक गुण मूल पदार्थों से पूरी तरह भिन्न होते हैं। जैसे दूध में मौजूद प्रोटीन और शर्करा लैक्टिक अम्ल में बदल जाते हैं, और सब्जी में बैक्टीरिया के कारण जटिल अणु सरल अणुओं में टूट जाते हैं, जिससे उसका स्वाद और गंध बदल जाती है।
In simple words: दूध का दही बनना और सब्जी का खराब होना, दोनों ही रासायनिक बदलाव हैं, क्योंकि इनमें नई चीजें बन जाती हैं और पुरानी चीजें वापस नहीं आतीं।
🎯 Exam Tip: रासायनिक परिवर्तनों को अक्सर ऊष्मा, प्रकाश, या गैस के निकलने जैसे संकेतों से पहचाना जा सकता है।
Question 22. कॉपर सल्फेट नीले रंग के विलयन में जिंक के टुकड़े डालने पर नीला रंग विलुप्त हो जाता है, क्यों ?
Answer: कॉपर सल्फेट (\(CuSO_4\)) के नीले रंग के विलयन में जिंक (Zn) के टुकड़े डालने पर नीला रंग विलुप्त हो जाता है क्योंकि जिंक, कॉपर से अधिक सक्रिय होता है। जिंक कॉपर को उसके सल्फेट विलयन से विस्थापित कर देता है, जिससे रंगहीन जिंक सल्फेट (\(ZnSO_4\)) का विलयन बनता है और भूरे रंग का कॉपर (\(Cu\)) धातु बनती है: \[Zn(s) + CuSO_4(aq) \rightarrow ZnSO_4(aq) + Cu(s)\] इस अभिक्रिया के कारण नीला रंग खत्म हो जाता है।
In simple words: जिंक कॉपर से ज्यादा ताकतवर है, इसलिए वह कॉपर सल्फेट के नीले घोल से कॉपर को हटा देता है, जिससे घोल का नीला रंग चला जाता है और जिंक सल्फेट बनता है।
🎯 Exam Tip: यह एक विस्थापन अभिक्रिया का उत्कृष्ट उदाहरण है, जो धातुओं की सक्रियता श्रेणी के महत्व को दर्शाता है।
Question 24. अपचायक किसे कहते हैं ?
Answer: अपचायक वे पदार्थ होते हैं जिनका स्वयं ऑक्सीकरण होता है और जो इलेक्ट्रॉन त्यागते हैं। ये दूसरे पदार्थ को अपचयित करने में मदद करते हैं। अपचायक को इलेक्ट्रॉन दाता भी कहा जाता है।
In simple words: अपचायक वो पदार्थ है जो खुद तो इलेक्ट्रॉन छोड़ता है, लेकिन दूसरे को इलेक्ट्रॉन दिलवाकर उसका अपचयन करता है।
🎯 Exam Tip: याद रखें, अपचायक हमेशा ऑक्सीकृत होता है जबकि ऑक्सीकारक हमेशा अपचयित होता है।
Question 25. ऑक्सीकारक किसे कहते हैं ?
Answer: ऑक्सीकारक वे पदार्थ होते हैं जिनका स्वयं अपचयन होता है और जो इलेक्ट्रॉन ग्रहण करते हैं। ये दूसरे पदार्थ को ऑक्सीकृत करने में मदद करते हैं। ऑक्सीकारक को इलेक्ट्रॉन ग्राही भी कहा जाता है।
In simple words: ऑक्सीकारक वो पदार्थ है जो खुद तो इलेक्ट्रॉन लेता है, लेकिन दूसरे को इलेक्ट्रॉन छुड़वाकर उसका ऑक्सीकरण करता है।
🎯 Exam Tip: रेडॉक्स अभिक्रियाओं में ऑक्सीकारक और अपचायक दोनों एक साथ कार्य करते हैं।
सुमेलन सम्बन्धी प्रश्न
Question 1. निम्नलिखित को सुमेलित कीजिए
(i) बर्फ का पिघलना (A) एन्जाइम
(ii) उपापचयी (रेडॉक्स) अभिक्रिया (B) भौतिक परिवर्तन
(iii) जैव उत्प्रेरक (C) \(CuO(s) + H_2(g) \rightarrow Cu(s) + H_2O(l)\)
Answer:
(i) (B)
(ii) (C)
(iii) (A)
In simple words: बर्फ का पिघलना एक भौतिक बदलाव है। रेडॉक्स अभिक्रिया में ऑक्सीकरण-अपचयन साथ होता है। जैव उत्प्रेरक शरीर के एन्जाइम होते हैं।
🎯 Exam Tip: सुमेलन वाले प्रश्नों में, सबसे पहले उन युग्मों का मिलान करें जिनके बारे में आप निश्चित हैं, फिर शेष विकल्पों को हल करें।
Question 2. निम्नलिखित को सुमेलित कीजिए
(i) संयुग्मन अभिक्रिया (A) इलेक्ट्रॉन दाता पदार्थ N;
(ii) अपचायक (B) वनस्पति तेल(l) \(+ H_2(g) \xrightarrow{Ni(s)}\) वनस्पति घी(s)
(iii) विषमांगी उत्प्रेरण (C) \(2Mg(s) + O_2(g) \rightarrow 2MgO(s)\)
Answer:
(i) (C)
(ii) (A)
(iii) (B)
In simple words: संयुग्मन में दो चीज़ें मिलकर एक बनती हैं। अपचायक वो होता है जो इलेक्ट्रॉन देता है। विषमांगी उत्प्रेरण तब होता है जब उत्प्रेरक और बाकी चीजें अलग-अलग अवस्था में हों।
🎯 Exam Tip: रासायनिक अभिक्रियाओं के प्रकार और उनकी परिभाषाओं को उदाहरणों के साथ याद रखना महत्वपूर्ण है।
लघूत्तरात्मक प्रश्न
Question 2. संयुग्मन, विस्थापन एवं अपघटनीय अभिक्रियाओं को दर्शाने वाली एक-एक रासायनिक समीकरण लिखिए। (माध्य. शिक्षा बोर्ड, मॉडल पेपर, 2017-18)
Answer:
1. संयुग्मन अभिक्रिया (Combination Reaction): इस अभिक्रिया में दो या दो से अधिक पदार्थ मिलकर एक नया, एकल उत्पाद बनाते हैं। उदाहरण: कोयले का जलना (कार्बन और ऑक्सीजन मिलकर कार्बन डाइऑक्साइड बनाते हैं)। \[C(s) + O_2(g) \rightarrow CO_2(g)\] 2. विस्थापन अभिक्रिया (Displacement Reaction): इस अभिक्रिया में एक अधिक क्रियाशील तत्व एक कम क्रियाशील तत्व को उसके यौगिक से विस्थापित कर देता है। उदाहरण: कॉपर सल्फेट विलयन में जिंक डालना। \[CuSO_4(aq) + Zn(s) \rightarrow ZnSO_4(aq) + Cu(s)\] 3. अपघटनीय अभिक्रिया (Decomposition Reaction): इस अभिक्रिया में एक एकल क्रियाकारक टूटकर दो या दो से अधिक सरल उत्पाद बनाता है, जो ऊर्जा के माध्यम से होता है। उदाहरण: जल का विद्युत अपघटन (जल टूटकर हाइड्रोजन और ऑक्सीजन गैस बनाता है)। \[2H_2O(l) \xrightarrow{विद्युत\ धारा} 2H_2(g) + O_2(g)\] ये अभिक्रियाएँ रासायनिक विज्ञान के मूल आधारों को दर्शाती हैं।
In simple words: संयुग्मन में चीजें जुड़ती हैं, विस्थापन में एक चीज दूसरी को हटाती है, और अपघटन में एक चीज टूटकर कई बनती है।
🎯 Exam Tip: प्रत्येक अभिक्रिया प्रकार के लिए कम से कम एक उदाहरण समीकरण को याद रखना बहुत उपयोगी होता है।
Question 3. रेडॉक्स अभिक्रियाएँ किसे कहते हैं? अभिक्रिया \(ZnO + C \rightarrow Zn + CO\) में किस पदार्थ का ऑक्सीकरण एवं किसका अपचयन हो रहा है?
Answer: रेडॉक्स अभिक्रियाएँ (Redox Reactions): ऐसी रासायनिक अभिक्रियाएँ जिनमें ऑक्सीकरण और अपचयन दोनों प्रक्रियाएँ एक साथ होती हैं, उन्हें रेडॉक्स अभिक्रियाएँ कहते हैं। ऑक्सीकरण में इलेक्ट्रॉन का त्याग या ऑक्सीजन का जुड़ना होता है, जबकि अपचयन में इलेक्ट्रॉन का ग्रहण या ऑक्सीजन का हटना होता है। ये दोनों प्रक्रियाएँ एक दूसरे के बिना नहीं हो सकतीं। उपरोक्त अभिक्रिया \(ZnO + C \rightarrow Zn + CO\) में: 1. \(ZnO\) का अपचयन हो रहा है: \(ZnO\) से ऑक्सीजन हटकर \(Zn\) बन रहा है। ऑक्सीजन का हटना अपचयन कहलाता है। 2. \(C\) (कार्बन) का ऑक्सीकरण हो रहा है: \(C\) में ऑक्सीजन जुड़कर \(CO\) बन रहा है। ऑक्सीजन का जुड़ना ऑक्सीकरण कहलाता है। इस अभिक्रिया में \(ZnO\) एक ऑक्सीकारक के रूप में कार्य करता है क्योंकि यह स्वयं अपचयित होता है और कार्बन को ऑक्सीकृत करता है। वहीं, \(C\) एक अपचायक के रूप में कार्य करता है क्योंकि यह स्वयं ऑक्सीकृत होता है और \(ZnO\) को अपचयित करता है।
In simple words: रेडॉक्स अभिक्रिया वह होती है जहाँ एक पदार्थ से ऑक्सीजन हटती है और दूसरे में ऑक्सीजन जुड़ती है। इस अभिक्रिया में \(ZnO\) से ऑक्सीजन हट रही है (अपचयन) और \(C\) में ऑक्सीजन जुड़ रही है (ऑक्सीकरण)।
🎯 Exam Tip: रेडॉक्स अभिक्रियाओं को पहचानने के लिए ऑक्सीजन, हाइड्रोजन, या इलेक्ट्रॉन के आदान-प्रदान पर ध्यान दें; ऑक्सीकारक हमेशा अपचयित होता है और अपचायक हमेशा ऑक्सीकृत होता है।
Question 5. (अ) रेडॉक्स अभिक्रिया का एक उदाहरण दीजिए। (ब) निम्न अभिक्रियाओं में A को पहचानिए (i) \(Zn + CuSO_4 \rightarrow A + Cu\) (ii) \(Na_2SO_4 + BaCl_2 \rightarrow A + 2NaCl\)
Answer:
(अ) रेडॉक्स अभिक्रिया का उदाहरण: कॉपर ऑक्साइड को हाइड्रोजन के साथ गर्म करने पर कॉपर और जल बनता है। \[CuO(s) + H_2(g) \xrightarrow{\triangle} Cu(s) + H_2O(l)\] इस अभिक्रिया में \(CuO\) का अपचयन (\(CuO \rightarrow Cu\)) हो रहा है और \(H_2\) का ऑक्सीकरण (\(H_2 \rightarrow H_2O\)) हो रहा है। (ब) निम्न अभिक्रियाओं में A को पहचानिए: (i) \[Zn + CuSO_4 \rightarrow ZnSO_4 + Cu\] (ii) \[Na_2SO_4 + BaCl_2 \rightarrow BaSO_4 + 2NaCl\] अतः, अभिक्रिया (i) में 'A' \(ZnSO_4\) (जिंक सल्फेट) है, और अभिक्रिया (ii) में 'A' \(BaSO_4\) (बेरियम सल्फेट) है।
In simple words: \(CuO\) और \(H_2\) की अभिक्रिया रेडॉक्स का उदाहरण है। पहली अभिक्रिया में \(ZnSO_4\) बनता है और दूसरी में \(BaSO_4\) बनता है।
🎯 Exam Tip: विस्थापन अभिक्रियाएँ अक्सर रेडॉक्स अभिक्रियाएँ होती हैं। अज्ञात उत्पादों को पहचानने के लिए रासायनिक सूत्र और संतुलित समीकरणों के ज्ञान का उपयोग करें।
Question 6. निम्न समीकरणों में X, Y व Z को पहचानिए
(i) \(Cu + CO_2 \xrightarrow{नमी}\) हरा पदार्थ (X)
(ii) \(Ag + Y \xrightarrow{हवा}\) काला पदार्थ (\(Ag_2S\))
(iii) \(FeSO_4 \xrightarrow{ऊष्मा} Fe_2O_3 + SO_3 + Z\)
Answer:
(i) हरा पदार्थ (X) \(CuCO_3\) (कॉपर कार्बोनेट) है। जब कॉपर नमी और कार्बन डाइऑक्साइड के संपर्क में आता है, तो हरे रंग का कॉपर कार्बोनेट बनता है, जो कॉपर पर जंग लगने का कारण है। (ii) काला पदार्थ (\(Ag_2S\)) के लिए Y \(H_2S\) (हाइड्रोजन सल्फाइड) है। चांदी हवा में मौजूद हाइड्रोजन सल्फाइड गैस से अभिक्रिया करके काले रंग का सिल्वर सल्फाइड बनाती है, जिससे चांदी काली पड़ जाती है। (iii) \(FeSO_4 \xrightarrow{ऊष्मा} Fe_2O_3 + SO_3 + SO_2\) इसलिए, Z \(SO_2\) (सल्फर डाइऑक्साइड) है। फेरस सल्फेट को गर्म करने पर फेरिक ऑक्साइड, सल्फर डाइऑक्साइड और सल्फर ट्राइऑक्साइड गैसें निकलती हैं।
In simple words: पहला हरा पदार्थ कॉपर कार्बोनेट है, दूसरा काला पदार्थ तब बनता है जब चांदी हाइड्रोजन सल्फाइड से मिलती है, और तीसरा पदार्थ सल्फर डाइऑक्साइड है जो आयरन सल्फेट को गरम करने पर निकलता है।
🎯 Exam Tip: यौगिकों के रंग और विशिष्ट गैसों के निकलने जैसे रासायनिक गुणों को याद रखना अज्ञात पदार्थों को पहचानने में मदद करता है।
Question 7. निम्नलिखित अभिक्रियाओं के उत्पाद लिखिए
(i) \(CuSO_4 (aq) + Fe (S) \rightarrow \)
(ii) \(Zn (s) + H_2SO_4 (I) \rightarrow \)
(iii) \(4Na (s) + O_2 (g) \rightarrow \)
Answer:
(i) जब कॉपर सल्फेट विलयन में आयरन धातु डाली जाती है, तो आयरन कॉपर से अधिक सक्रिय होने के कारण उसे विस्थापित कर देता है। \[CuSO_4 (aq) + Fe (s) \rightarrow FeSO_4 (aq) + Cu (s)\] उत्पाद: फेरस सल्फेट (आयरन सल्फेट) और कॉपर। (ii) जब जिंक धातु तनु सल्फ्यूरिक अम्ल से अभिक्रिया करती है, तो जिंक हाइड्रोजन से अधिक सक्रिय होने के कारण उसे विस्थापित कर देता है। \[Zn (s) + H_2SO_4 (l) \rightarrow ZnSO_4 (aq) + H_2 (g)\] उत्पाद: जिंक सल्फेट और हाइड्रोजन गैस। (iii) जब सोडियम धातु ऑक्सीजन गैस से अभिक्रिया करती है, तो सोडियम ऑक्साइड बनता है। \[4Na (s) + O_2 (g) \rightarrow 2Na_2O (s)\] उत्पाद: सोडियम ऑक्साइड। ये अभिक्रियाएँ सक्रियता श्रेणी और रासायनिक संयोजन के मूल सिद्धांतों को दर्शाती हैं।
In simple words: आयरन कॉपर सल्फेट से कॉपर को हटाकर आयरन सल्फेट बनाता है। जिंक सल्फ्यूरिक अम्ल से हाइड्रोजन को हटाकर जिंक सल्फेट बनाता है। सोडियम ऑक्सीजन से मिलकर सोडियम ऑक्साइड बनाता है।
🎯 Exam Tip: विस्थापन अभिक्रियाओं में, हमेशा सक्रियता श्रेणी को ध्यान में रखें। धातु-अम्ल अभिक्रियाओं में हाइड्रोजन गैस निकलती है।
Question 9. निम्नलिखित अभिक्रियाओं के लिए उनकी अवस्था के संकेतों के साथ संतुलित रासायनिक समीकरण लिखिए
(i) जेल में बेरियम क्लोराइड तथा सोडियम सल्फेट के विलयन अभिक्रिया करके सोडियम क्लोराइड का विलयन तथा अघुलनशील बेरियम सल्फेट का अवक्षेप बनाते हैं।
(ii) सोडियम हाइड्रोक्साइड का विलयन (जल में) हाइड्रोक्लोरिक अम्ल के विलयन (जल में) से अभिक्रिया करके सोडियम क्लोराइड का विलयन तथा जल बनाते हैं।
Answer:
(i) जब बेरियम क्लोराइड और सोडियम सल्फेट के जलीय विलयन आपस में अभिक्रिया करते हैं, तो सोडियम क्लोराइड का जलीय विलयन और बेरियम सल्फेट का ठोस अवक्षेप बनता है। बेरियम सल्फेट पानी में नहीं घुलता है। \[BaCl_2(aq) + Na_2SO_4(aq) \rightarrow 2NaCl(aq) + BaSO_4(s)\] यह एक द्विविस्थापन अभिक्रिया और अवक्षेपण अभिक्रिया का उदाहरण है। (ii) जब सोडियम हाइड्रोक्साइड का जलीय विलयन हाइड्रोक्लोरिक अम्ल के जलीय विलयन से अभिक्रिया करता है, तो सोडियम क्लोराइड का जलीय विलयन और जल बनता है। यह एक उदासीनीकरण अभिक्रिया है। \[NaOH(aq) + HCl(aq) \rightarrow NaCl(aq) + H_2O(l)\] ये समीकरण हमें अभिक्रिया में शामिल पदार्थों की अवस्थाओं को भी दर्शाते हैं।
In simple words: बेरियम क्लोराइड और सोडियम सल्फेट मिलकर सोडियम क्लोराइड और बेरियम सल्फेट का अवक्षेप बनाते हैं। सोडियम हाइड्रोक्साइड और हाइड्रोक्लोरिक अम्ल मिलकर सोडियम क्लोराइड और पानी बनाते हैं।
🎯 Exam Tip: रासायनिक समीकरण लिखते समय, हमेशा यह सुनिश्चित करें कि यह संतुलित हो और सभी पदार्थों की भौतिक अवस्थाएँ (s, l, g, aq) सही ढंग से दर्शाई गई हों।
Question 10. किसी पदार्थ 'x' के विलयन का उपयोग सफेदी करने के लिए होता है। (i) पदार्थ 'X' का नाम तथा रासायनिक सूत्र लिखिए। (ii) पदार्थ 'X' की जल के साथ अभिक्रिया लिखिए।
Answer:
(i) पदार्थ 'X' का नाम कैल्सियम ऑक्साइड है, जिसे आम भाषा में बिना बुझा हुआ चूना भी कहते हैं। इसका उपयोग घरों और दीवारों पर सफेदी करने के लिए किया जाता है। इसका रासायनिक सूत्र \(CaO\) है। (ii) पदार्थ 'X' (\(CaO\)) की जल के साथ अभिक्रिया: जब कैल्सियम ऑक्साइड जल से अभिक्रिया करता है, तो कैल्सियम हाइड्रॉक्साइड (\(Ca(OH)_2\)) बनता है। इस अभिक्रिया में बहुत अधिक ऊष्मा निकलती है, और इसे 'बुझा हुआ चूना' कहते हैं। \[CaO(s) + H_2O(l) \rightarrow Ca(OH)_2(aq)\] यह अभिक्रिया एक ऊष्माक्षेपी संयोजन अभिक्रिया है।
In simple words: जिस पदार्थ 'X' से सफेदी की जाती है, वह कैल्शियम ऑक्साइड है (\(CaO\))। जब इसे पानी में मिलाते हैं, तो यह कैल्शियम हाइड्रॉक्साइड (\(Ca(OH)_2\)) बन जाता है, जिससे गर्मी निकलती है।
🎯 Exam Tip: बिना बुझा चूना (कैल्सियम ऑक्साइड) का उपयोग सीमेंट बनाने और मृदा की अम्लता को कम करने में भी होता है।
Question 11. जब लोहे की कील को कॉपर सल्फेट के विलयन में डुबोया जाता है तो विलयन का रंग क्यों बदल जाता है?
Answer: जब लोहे की कील को कॉपर सल्फेट (\(CuSO_4\)) के नीले रंग के विलयन में डुबोया जाता है, तो विलयन का नीला रंग हल्का पड़ जाता है या गायब हो जाता है, और कील पर भूरे रंग की परत जमा हो जाती है। ऐसा इसलिए होता है क्योंकि लोहा (Fe) कॉपर (Cu) से अधिक क्रियाशील धातु है। लोहा, कॉपर सल्फेट के विलयन में से कॉपर को विस्थापित कर देता है और आयरन सल्फेट (\(FeSO_4\)) बनाता है, जो हरे रंग का होता है। अभिक्रिया इस प्रकार होती है: \[Fe(s) + CuSO_4(aq) \rightarrow FeSO_4(aq) + Cu(s)\] इसलिए, कॉपर सल्फेट का नीला रंग आयरन सल्फेट के हरे रंग में बदल जाता है, जिससे विलयन का नीला रंग विलुप्त हो जाता है। यह एक विस्थापन अभिक्रिया है।
In simple words: लोहे की कील को कॉपर सल्फेट के नीले घोल में डालने पर लोहा कॉपर से ज्यादा ताकतवर होने के कारण उसे हटा देता है। इससे नया हरा घोल बनता है और कील पर भूरा कॉपर जमा हो जाता है, इसलिए रंग बदल जाता है।
🎯 Exam Tip: यह अभिक्रिया धातुओं की सक्रियता श्रेणी को समझाने के लिए एक उत्कृष्ट प्रदर्शन है; जो धातु जितनी अधिक सक्रिय होगी, वह अपने से कम सक्रिय धातु को उसके यौगिक से उतनी ही आसानी से विस्थापित कर देगी।
लघूत्तरात्मक प्रश्न
Question 13. प्रमुख तत्त्वों की सक्रियता श्रेणी लिखिए।
Answer: प्रमुख तत्त्वों की सक्रियता श्रेणी उनकी रासायनिक क्रियाशीलता के घटते क्रम में व्यवस्थित की जाती है। यह श्रेणी हमें यह समझने में मदद करती है कि कौन सी धातु कितनी अधिक क्रियाशील है और कौन सी धातु दूसरी धातु को उसके यौगिक से विस्थापित कर सकती है। धातुओं की क्रियाशीलता ऊपर से नीचे की ओर घटती है।
| धातु | प्रतीक | क्रियाशीलता |
|---|---|---|
| पोटेशियम | K | सबसे अधिक क्रियाशील तत्व |
| सोडियम | Na | |
| कैल्शियम | Ca | |
| मैग्नीशियम | Mg | |
| जिंक | Zn | |
| आयरन | Fe | क्रियाशीलता का घटता क्रम |
| लेड | Pb | |
| हाइड्रोजन | H | |
| कॉपर | Cu | सबसे कम क्रियाशील तत्व |
| मरकरी | Hg | |
| सिल्वर | Ag | |
| गोल्ड | Au |
इस श्रेणी में हाइड्रोजन को एक संदर्भ बिंदु के रूप में लिया जाता है, क्योंकि धातुएँ जो हाइड्रोजन से अधिक सक्रिय होती हैं, वे अम्लों से हाइड्रोजन को विस्थापित कर सकती हैं।
In simple words: सक्रियता श्रेणी धातुओं की एक लिस्ट है, जो बताती है कि कौन सी धातु कितनी ज्यादा प्रतिक्रियाशील है। लिस्ट में ऊपर वाली धातुएँ ज्यादा सक्रिय होती हैं, और नीचे वाली कम।
🎯 Exam Tip: सक्रियता श्रेणी को याद रखने से धातुओं के विस्थापन अभिक्रियाओं में व्यवहार को समझने और भविष्यवाणी करने में मदद मिलती है।
Question 14. रासायनिक समीकरण किसे कहते हैं? समझाइए।
Answer: रासायनिक समीकरण किसी रासायनिक अभिक्रिया का एक सांकेतिक प्रतिनिधित्व है, जिसमें अभिकारकों (अभिक्रिया करने वाले पदार्थ) और उत्पादों (बनने वाले पदार्थ) को उनके रासायनिक सूत्रों या प्रतीकों द्वारा दर्शाया जाता है। यह अभिक्रिया की दिशा, पदार्थों की भौतिक अवस्था, और कभी-कभी अभिक्रिया की शर्तें (जैसे ताप, दाब, उत्प्रेरक) भी बताता है। रासायनिक समीकरण द्रव्यमान संरक्षण के नियम का पालन करता है, जिसका अर्थ है कि अभिक्रिया के पहले और बाद में परमाणुओं की संख्या समान रहती है। उदाहरण के लिए, हाइड्रोजन और ऑक्सीजन मिलकर जल बनाते हैं, जिसे \(2H_2 + O_2 \rightarrow 2H_2O\) लिखा जाता है।
In simple words: रासायनिक समीकरण एक छोटा तरीका है जिससे हम रासायनिक क्रियाओं को उनके नाम और संकेतों से लिखते हैं। यह बताता है कि कौन सी चीजें मिल रही हैं, क्या बन रहा है और कैसे बन रहा है।
🎯 Exam Tip: एक संतुलित रासायनिक समीकरण केवल अभिकारकों और उत्पादों को ही नहीं दर्शाता, बल्कि अभिक्रिया में भाग लेने वाले प्रत्येक परमाणु की संख्या का भी सटीक विवरण देता है।
Question 15. संतुलित रासायनिक समीकरण क्या है? रासायनिक समीकरण को संतुलित करना क्यों आवश्यक है?
Answer: एक संतुलित रासायनिक समीकरण वह होता है, जिसमें अभिक्रिया में भाग लेने वाले पदार्थों (अभिकारक) और अभिक्रिया के बाद बनने वाले पदार्थों (उत्पाद) दोनों तरफ हर तत्व के परमाणुओं की संख्या बराबर होती है। रासायनिक समीकरण को संतुलित करना इसलिए ज़रूरी है क्योंकि द्रव्यमान संरक्षण का नियम कहता है कि किसी भी रासायनिक अभिक्रिया में द्रव्यमान न तो बनाया जा सकता है और न ही नष्ट किया जा सकता है। इसका मतलब है कि अभिक्रिया से पहले और बाद में हर तत्व के परमाणुओं की कुल संख्या हमेशा बराबर रहनी चाहिए। इस नियम का पालन करने के लिए समीकरण को संतुलित किया जाता है ताकि यह दिखा सके कि कोई भी परमाणु खोया या नया नहीं बना है, बस उनका पुनर्गठन हुआ है।
In simple words: संतुलित समीकरण में अभिक्रिया के दोनों तरफ हर तत्व के परमाणुओं की गिनती एक जैसी होती है। यह द्रव्यमान संरक्षण के नियम को मानता है, जिसका मतलब है कि कोई भी पदार्थ अभिक्रिया में खत्म नहीं होता या नया बनता नहीं है।
🎯 Exam Tip: द्रव्यमान संरक्षण का नियम रासायनिक समीकरण को संतुलित करने का मुख्य आधार है; इसे हमेशा याद रखें।
Question 16. अपचायक तथा ऑक्सीकारक क्या होते हैं? समझाइए।
Answer: अपचायक वे पदार्थ होते हैं जिनका ऑक्सीकरण होता है और जो इलेक्ट्रॉन त्यागकर दूसरे पदार्थ को अपचयित करते हैं। ऑक्सीकारक वे पदार्थ होते हैं जिनका स्वयं अपचयन होता है और जो इलेक्ट्रॉन ग्रहण कर दूसरे पदार्थ को ऑक्सीकृत करते हैं। इसलिए, अपचायक इलेक्ट्रॉन दाता होते हैं और ऑक्सीकारक इलेक्ट्रॉन ग्राही होते हैं। यह प्रक्रिया हमेशा एक साथ चलती है, जिसे रेडॉक्स अभिक्रिया कहते हैं।
In simple words: अपचायक वह पदार्थ है जो इलेक्ट्रॉन देता है और दूसरे को अपचयित करता है, जबकि ऑक्सीकारक वह पदार्थ है जो इलेक्ट्रॉन लेता है और दूसरे को ऑक्सीकृत करता है।
🎯 Exam Tip: याद रखें, अपचायक ऑक्सीकरण से गुजरता है, जबकि ऑक्सीकारक अपचयन से गुजरता है। यह उलटा संबंध समझना महत्वपूर्ण है।
Question 17. क्या होता है जब? (केवल रासायनिक समीकरण दीजिए)
(i) चूने के पानी में कार्बन डाइऑक्साइड गैस प्रवाहित की जाती है।
(ii) जिंक धातु की सोडियम हाइड्रॉक्साइड से क्रिया की जाती है।
(iii) बुझे हुए चूने के साथ क्लोरीन की क्रिया करवाई जाती है।
Answer:
(i) जब चूने के पानी (कैल्सियम हाइड्रॉक्साइड) में कार्बन डाइऑक्साइड गैस प्रवाहित की जाती है, तो कैल्सियम कार्बोनेट और पानी बनते हैं। कैल्सियम कार्बोनेट सफेद अवक्षेप होता है।
\( \text{Ca(OH)}_2\text{(aq)} + \text{CO}_2\text{(g)} \rightarrow \text{CaCO}_3\text{(s)} + \text{H}_2\text{O(l)} \)
(ii) जब जिंक धातु की सोडियम हाइड्रॉक्साइड से क्रिया की जाती है, तो सोडियम जिंकेट और हाइड्रोजन गैस बनती है। यह एक विस्थापन अभिक्रिया का उदाहरण है।
\( \text{Zn(s)} + \text{2NaOH(aq)} \rightarrow \text{Na}_2\text{ZnO}_2\text{(aq)} + \text{H}_2\text{(g)} \)
(iii) जब बुझे हुए चूने (कैल्सियम हाइड्रॉक्साइड) के साथ क्लोरीन की क्रिया करवाई जाती है, तो ब्लीचिंग पाउडर (कैल्सियम ऑक्सीक्लोराइड) और पानी बनते हैं। ब्लीचिंग पाउडर का उपयोग सफेदी और कीटाणुनाशक के रूप में होता है।
\( \text{Ca(OH)}_2\text{(aq)} + \text{Cl}_2\text{(g)} \rightarrow \text{CaOCl}_2\text{(s)} + \text{H}_2\text{O(l)} \)
In simple words: रासायनिक समीकरण दिखाते हैं कि जब अलग-अलग पदार्थ एक साथ मिलते हैं तो क्या बनता है। इन उदाहरणों में, चूना, जिंक और बुझा चूना रासायनिक रूप से बदलकर नए उत्पाद बनाते हैं।
🎯 Exam Tip: ऐसे प्रश्नों में केवल रासायनिक समीकरणों को संतुलित रूप में लिखना और उत्पादों को सही ढंग से पहचानना महत्वपूर्ण है।
Question 19. वियोजन (अपघटनीय) अभिक्रिया को संयोजन (संयुग्मन) अभिक्रिया के विपरीत माना जाता है, क्यों? उदाहरण सहित समझाइए।
Answer: वियोजन अभिक्रिया को संयोजन अभिक्रिया का विपरीत माना जाता है क्योंकि वियोजन अभिक्रिया में एक अकेला अभिकारक टूटकर दो या दो से अधिक सरल उत्पाद बनाता है। इसके उलट, संयोजन अभिक्रिया में दो या दो से अधिक अभिकारक मिलकर एक नया, एकल उत्पाद बनाते हैं। संयोजन अभिक्रिया में पदार्थ आपस में जुड़ते हैं, जबकि वियोजन अभिक्रिया में एक पदार्थ टूटता है। यह ठीक एक सिक्के के दो पहलुओं की तरह है।
संयोजन अभिक्रिया का उदाहरण:
\( \text{2H}_2\text{(g)} + \text{O}_2\text{(g)} \rightarrow \text{2H}_2\text{O(l)} \)
वियोजन अभिक्रिया का उदाहरण:
\( \text{2FeSO}_4\text{(s) (फेरस सल्फेट)} \rightarrow \text{Fe}_2\text{O}_3\text{(s) (फेरिक ऑक्साइड)} + \text{SO}_2\text{(g)} + \text{SO}_3\text{(g)} \)
In simple words: वियोजन अभिक्रिया में एक चीज़ टूटकर कई चीज़ें बनती हैं, जबकि संयोजन अभिक्रिया में कई चीज़ें मिलकर एक चीज़ बनाती हैं। वे एक-दूसरे के उल्टे हैं।
🎯 Exam Tip: संयोजन और वियोजन अभिक्रियाओं के बीच मुख्य अंतर को याद रखें: संयोजन 'मिलना' है और वियोजन 'टूटना' है। प्रत्येक के लिए एक सरल उदाहरण तैयार रखें।
Question 20. ऑक्सीजन के संयोग तथा विलोपन के आधार पर निम्न पदों की व्याख्या कीजिए। प्रत्येक के लिए दो उदाहरण भी दीजिए
(a) ऑक्सीकरण
(b) अपचयन।
Answer:
(a) ऑक्सीकरण: वह अभिक्रिया जिसमें किसी पदार्थ के साथ ऑक्सीजन का संयोग होता है, यानी ऑक्सीजन की वृद्धि होती है, उसे ऑक्सीकरण कहते हैं। यह किसी पदार्थ का ऑक्सीजन के साथ जुड़ना होता है।
उदाहरण:
1. कार्बन का ऑक्सीजन से जुड़ना:
\( \text{C(s)} + \text{O}_2\text{(g)} \rightarrow \text{CO}_2\text{(g)} \)
2. मैग्नीशियम का ऑक्सीजन से जुड़ना:
\( \text{2Mg(s)} + \text{O}_2\text{(g)} \rightarrow \text{2MgO(s)} \)
(b) अपचयन: वह अभिक्रिया जिसमें किसी पदार्थ से ऑक्सीजन का विलोपन होता है, यानी ऑक्सीजन की कमी होती है, उसे अपचयन कहते हैं। यह किसी पदार्थ से ऑक्सीजन का हटना होता है।
उदाहरण:
1. कॉपर ऑक्साइड से ऑक्सीजन का हटना:
\( \text{CuO(s)} + \text{H}_2\text{(g)} \xrightarrow{\text{ताप}} \text{Cu(s)} + \text{H}_2\text{O(l)} \)
2. जिंक ऑक्साइड से ऑक्सीजन का हटना:
\( \text{ZnO(s)} + \text{C(s)} \rightarrow \text{Zn(S)} + \text{CO(g)} \)
In simple words: ऑक्सीकरण तब होता है जब कोई चीज़ ऑक्सीजन से जुड़ती है, और अपचयन तब होता है जब कोई चीज़ ऑक्सीजन छोड़ती है।
🎯 Exam Tip: ऑक्सीकरण और अपचयन की परिभाषाओं को ऑक्सीजन के जुड़ने और हटने के संदर्भ में स्पष्ट रूप से याद रखें, और प्रत्येक के लिए कम से कम दो उदाहरण तैयार रखें।
Question 21. विस्थापन एवं द्विविस्थापन अभिक्रियाओं में क्या अंतर है? इन अभिक्रियाओं के उदाहरण भी दीजिए।
Answer: विस्थापन और द्विविस्थापन अभिक्रियाओं में मुख्य अंतर यह है कि विस्थापन अभिक्रिया में एक अधिक क्रियाशील तत्व किसी यौगिक में से कम क्रियाशील तत्व को विस्थापित कर देता है। वहीं, द्विविस्थापन अभिक्रिया में दो यौगिकों के आयनों का आदान-प्रदान होता है, जिससे दो नए यौगिक बनते हैं। विस्थापन में सिर्फ एक तत्व की अदला-बदली होती है, जबकि द्विविस्थापन में आयनों की पूरी जोड़ी बदल जाती है।
विस्थापन अभिक्रिया:
1. इन अभिक्रियाओं में किसी यौगिक से उसका एक तत्व किसी अपेक्षाकृत अधिक क्रियाशील तत्व द्वारा विस्थापित हो जाता है।
उदाहरण:
(i) \( \text{CuSO}_4 + \text{Zn} \rightarrow \text{ZnSO}_4 + \text{Cu} \) (इस अभिक्रिया में जिंक कॉपर से अधिक क्रियाशील होने के कारण \( \text{CuSO}_4 \) से कॉपर को विस्थापित कर देता है।)
(ii) \( \text{Fe} + \text{CuSO}_4 \rightarrow \text{FeSO}_4 + \text{Cu} \)
द्विविस्थापन अभिक्रिया:
1. इन अभिक्रियाओं में नए उत्पादों के निर्माण के लिए दो अभिकारकों के बीच आयनों का आदान-प्रदान होता है।
उदाहरण:
(i) \( \text{Na}_2\text{SO}_4 + \text{BaCl}_2 \rightarrow \text{BaSO}_4 + \text{2NaCl} \)
(ii) \( \text{AgNO}_3 + \text{NaCl} \rightarrow \text{AgCl} + \text{NaNO}_3 \)
In simple words: विस्थापन में एक मजबूत तत्व कमजोर तत्व को हटाता है। द्विविस्थापन में, दो अलग-अलग यौगिक अपने आयनों को बदल लेते हैं, जिससे दो नए यौगिक बनते हैं।
🎯 Exam Tip: विस्थापन अभिक्रियाओं में क्रियाशीलता श्रेणी के नियम को याद रखें, जबकि द्विविस्थापन में आयनों के आदान-प्रदान पर ध्यान दें।
Question 22. उत्क्रमणीय अभिक्रिया की व्याख्या कीजिए।
Answer: उत्क्रमणीय अभिक्रियाएँ वे रासायनिक अभिक्रियाएँ होती हैं जो एक ही समय में दोनों दिशाओं में आगे (अभिकारक से उत्पाद) और पीछे (उत्पाद से अभिकारक) चलती हैं। शुरुआत में, अभिकारक मिलकर उत्पाद बनाते हैं, और जैसे ही पर्याप्त उत्पाद बन जाते हैं, वे वापस अभिकारकों में बदलने लगते हैं। ऐसी अभिक्रियाएँ कभी भी पूरी तरह से खत्म नहीं होतीं, और अभिक्रिया मिश्रण में हमेशा अभिकारक और उत्पाद दोनों मौजूद रहते हैं। उत्क्रमणीय अभिक्रियाएँ आमतौर पर बंद पात्र में होती हैं, जहाँ पदार्थ बाहर नहीं जा सकते।
उदाहरण:
\( \text{N}_2\text{(g)} + \text{3H}_2\text{(g)} \rightleftharpoons \text{2NH}_3\text{(g)} \)
In simple words: उत्क्रमणीय अभिक्रिया वह होती है जो आगे और पीछे दोनों तरफ चलती रहती है, कभी पूरी तरह से खत्म नहीं होती। इसमें अभिकारक और उत्पाद दोनों हमेशा मौजूद रहते हैं।
🎯 Exam Tip: उत्क्रमणीय अभिक्रियाओं को दो तरफा तीर \( (\rightleftharpoons) \) से दर्शाया जाता है, जो अभिक्रिया के दोनों दिशाओं में होने का संकेत देता है।
Question 23. भौतिक परिवर्तन की प्रमुख विशेषताएँ अथवा गुण बताइए।
Answer: भौतिक परिवर्तन वे परिवर्तन होते हैं जिनमें पदार्थ के रासायनिक गुणों और संघटन में कोई बदलाव नहीं होता, बल्कि केवल उसकी भौतिक अवस्था, आकार, रंग या गंध जैसे भौतिक गुणों में परिवर्तन होता है। इन परिवर्तनों की मुख्य विशेषताएँ निम्नलिखित हैं:
1. इस परिवर्तन में पदार्थ के केवल भौतिक गुणों जैसे अवस्था, रंग, गंध आदि में परिवर्तन होता है।
2. इसमें परिवर्तन का कारण हटाने पर पुनः प्रारम्भिक पदार्थ प्राप्त हो जाता है, जिसका अर्थ है कि यह परिवर्तन अस्थायी होता है।
3. इस परिवर्तन में कोई नया पदार्थ नहीं बनता है।
उदाहरण: बर्फ का पिघलकर पानी बनना, चीनी का पानी में घुलना, या पानी का वाष्पीकरण होना भौतिक परिवर्तन के उदाहरण हैं।
In simple words: भौतिक परिवर्तन में कोई नई चीज़ नहीं बनती, बस चीज़ का रूप बदल जाता है। यह अक्सर उल्टा किया जा सकता है।
🎯 Exam Tip: भौतिक परिवर्तनों में पदार्थों की पहचान बनी रहती है, केवल उनके बाहरी रूप में बदलाव आता है। यह रासायनिक परिवर्तनों से अलग होता है।
Question 24. रासायनिक अभिक्रिया से क्या आशय है? उदाहरण सहित समझाइए।
Answer: रासायनिक अभिक्रिया एक ऐसी प्रक्रिया है जिसमें एक या एक से अधिक पदार्थ (अभिकारक) आपस में क्रिया करके नए पदार्थों (उत्पाद) में बदल जाते हैं, जिनके रासायनिक गुण और संघटन मूल पदार्थों से पूरी तरह भिन्न होते हैं। इस प्रक्रिया में परमाणुओं का पुनर्गठन होता है, लेकिन कुल द्रव्यमान संरक्षित रहता है। रासायनिक अभिक्रियाओं को रासायनिक समीकरणों द्वारा दर्शाया जाता है। इस प्रक्रिया में पुराने बंध टूटते हैं और नए बंध बनते हैं।
उदाहरण:
मैग्नीशियम के फीते का दहन:
जब मैग्नीशियम के फीते को ऑक्सीजन में जलाया जाता है, तो सफेद रंग का मैग्नीशियम ऑक्साइड बनता है।
\( \text{2Mg(s)} + \text{O}_2\text{(g)} \rightarrow \text{2MgO(s)} \)
कार्बन का दहन:
\( \text{C(s)} + \text{O}_2\text{(g)} \rightarrow \text{CO}_2\text{(g)} \)
In simple words: रासायनिक अभिक्रिया तब होती है जब एक पदार्थ बदलकर पूरी तरह से नया पदार्थ बन जाता है। इस प्रक्रिया में कुल पदार्थ का वजन वही रहता है।
🎯 Exam Tip: रासायनिक अभिक्रिया में हमेशा नए उत्पाद बनते हैं जिनके गुण अभिकारकों से भिन्न होते हैं। यह रासायनिक परिवर्तनों का मूल आधार है।
Question 25. रासायनिक समीकरण को किस प्रकार संतुलित किया जाता है, समझाइए।
Answer: रासायनिक समीकरण को संतुलित करने का मुख्य तरीका 'अनुमान विधि' (Hit and Trial Method) है। इस विधि में, अभिक्रिया के दोनों पक्षों (अभिकारक और उत्पाद) में प्रत्येक तत्व के परमाणुओं की संख्या को बराबर किया जाता है। संतुलन की शुरुआत उन परमाणुओं से करते हैं जो ऑक्सीजन और हाइड्रोजन नहीं होते। फिर, हाइड्रोजन को संतुलित किया जाता है, और अंत में, ऑक्सीजन परमाणुओं को संतुलित किया जाता है। गुणांक (coefficients) को बदलकर परमाणुओं की संख्या को बराबर किया जाता है, न कि सूत्रों को बदलकर।
उदाहरण के लिए, प्रोपेन का दहन:
असंतुलित समीकरण: \( \text{C}_3\text{H}_8\text{(g)} + \text{O}_2\text{(g)} \rightarrow \text{CO}_2\text{(g)} + \text{H}_2\text{O(g)} \)
1. कार्बन (C) को संतुलित करें: बाईं ओर 3 C हैं, इसलिए दाईं ओर \( \text{CO}_2 \) को 3 से गुणा करें।
\( \text{C}_3\text{H}_8\text{(g)} + \text{O}_2\text{(g)} \rightarrow \text{3CO}_2\text{(g)} + \text{H}_2\text{O(g)} \)
2. हाइड्रोजन (H) को संतुलित करें: बाईं ओर 8 H हैं, इसलिए दाईं ओर \( \text{H}_2\text{O} \) को 4 से गुणा करें।
\( \text{C}_3\text{H}_8\text{(g)} + \text{O}_2\text{(g)} \rightarrow \text{3CO}_2\text{(g)} + \text{4H}_2\text{O(g)} \)
3. ऑक्सीजन (O) को संतुलित करें: दाईं ओर कुल ऑक्सीजन \( (3 \times 2) + (4 \times 1) = 6 + 4 = 10 \) हैं, इसलिए बाईं ओर \( \text{O}_2 \) को 5 से गुणा करें।
संतुलित समीकरण: \( \text{C}_3\text{H}_8\text{(g)} + \text{5O}_2\text{(g)} \rightarrow \text{3CO}_2\text{(g)} + \text{4H}_2\text{O(g)} \)
In simple words: समीकरण को संतुलित करने के लिए हम हर तत्व के परमाणुओं की गिनती को अभिक्रिया के दोनों तरफ बराबर करते हैं। हम ऑक्सीजन और हाइड्रोजन को आखिर में संतुलित करते हुए, 'अनुमान विधि' का उपयोग करते हैं।
🎯 Exam Tip: समीकरणों को संतुलित करते समय हमेशा पहले धातु, फिर अधातु (ऑक्सीजन और हाइड्रोजन को छोड़कर), फिर हाइड्रोजन और अंत में ऑक्सीजन को संतुलित करें।
Question 26. अभिक्रियाओं के वेग के आधार पर रासायनिक अभिक्रियाओं के वर्गीकरण को समझाइए।
Answer: रासायनिक अभिक्रियाओं को उनके वेग (होने की गति) के आधार पर दो मुख्य प्रकारों में वर्गीकृत किया जा सकता है: तीव्र अभिक्रियाएँ और मंद अभिक्रियाएँ। यह वर्गीकरण अभिक्रिया पूरी होने में लगने वाले समय पर आधारित होता है।
(a) तीव्र अभिक्रियाएँ: ये वे अभिक्रियाएँ होती हैं जो बहुत तेज़ी से होती हैं और लगभग तुरंत ही पूरी हो जाती हैं। ये अभिक्रियाएँ आमतौर पर आयनिक होती हैं और अक्सर प्रबल अम्ल और प्रबल क्षार के बीच होती हैं।
उदाहरण:
1. प्रबल अम्ल और प्रबल क्षार के बीच की अभिक्रिया, जो 10-10 सेकंड में पूरी हो जाती है:
\( \text{NaOH (प्रबल क्षार)} + \text{HCl (प्रबल अम्ल)} \rightarrow \text{NaCl} + \text{H}_2\text{O (10}^{-10}\text{sec)} \)
2. सिल्वर नाइट्रेट विलयन में हाइड्रोक्लोरिक अम्ल मिलाने पर सिल्वर क्लोराइड का सफेद अवक्षेप तुरंत बन जाता है:
\( \text{AgNO}_3 + \text{HCl} \rightarrow \text{AgCl (श्वेत अवक्षेप)} + \text{HNO}_3 \)
(b) मंद अभिक्रियाएँ: ये वे अभिक्रियाएँ होती हैं जिनको पूरा होने में कई घंटे, दिन या यहाँ तक कि साल भी लग जाते हैं। ये अभिक्रियाएँ बहुत धीमी गति से होती हैं। यह अक्सर तब होता है जब अणुओं को नए बंध बनाने या पुराने बंध तोड़ने के लिए बहुत अधिक ऊर्जा की आवश्यकता होती है।
उदाहरण:
1. लोहे पर जंग लगने की क्रिया, जिसमें वर्षों लग जाते हैं:
\( \text{4Fe} + \text{3O}_2 + \text{6H}_2\text{O} \rightarrow \text{2Fe}_2\text{O}_3\text{.3H}_2\text{O} \)
2. हाइड्रोजन परॉक्साइड का अपघटन, जो ग्लिसरॉल की उपस्थिति में धीमा हो जाता है:
\( \text{2H}_2\text{O}_2 \xrightarrow{\text{ग्लिसरॉल}} \text{2H}_2\text{O} + \text{O}_2 \)
In simple words: रासायनिक अभिक्रियाएँ तेज़ी से या धीरे-धीरे हो सकती हैं। तेज़ी से होने वाली अभिक्रियाएँ तुरंत पूरी हो जाती हैं, जबकि धीरे-धीरे होने वाली अभिक्रियाओं को पूरा होने में बहुत समय लगता है।
🎯 Exam Tip: तीव्र अभिक्रियाएँ अक्सर आयनिक होती हैं और मंद अभिक्रियाएँ आमतौर पर सहसंयोजक बंध वाले अणुओं के बीच होती हैं।
Question 2. सिद्ध कीजिए कि किसी अभिक्रिया में उत्पादों तथा अभिकारकों का द्रव्यमान हमेशा समान रहता है।
Answer: किसी भी रासायनिक अभिक्रिया में उत्पादों तथा अभिकारकों का द्रव्यमान हमेशा समान रहता है। यह द्रव्यमान संरक्षण के नियम का सीधा परिणाम है, जो कहता है कि रासायनिक अभिक्रिया में द्रव्यमान न तो बनाया जा सकता है और न ही नष्ट किया जा सकता है। इसका मतलब है कि अभिक्रिया में भाग लेने वाले पदार्थों (अभिकारकों) का कुल द्रव्यमान अभिक्रिया के बाद बनने वाले पदार्थों (उत्पादों) के कुल द्रव्यमान के बराबर होता है। परमाणु केवल पुनर्व्यवस्थित होते हैं, उनकी संख्या या कुल द्रव्यमान में कोई परिवर्तन नहीं होता।
उदाहरण:
मैग्नीशियम के फीते का दहन:
\( \text{2Mg(s)} + \text{O}_2\text{(g)} \xrightarrow{\triangle} \text{2MgO(s)} \)
इस अभिक्रिया में, 2 मैग्नीशियम परमाणु और 2 ऑक्सीजन परमाणु आपस में क्रिया करते हैं, जिससे 2 मैग्नीशियम ऑक्साइड के अणु बनते हैं। अभिक्रिया से पहले मैग्नीशियम और ऑक्सीजन के परमाणुओं की कुल संख्या और अभिक्रिया के बाद मैग्नीशियम और ऑक्सीजन के परमाणुओं की कुल संख्या बराबर रहती है। इससे सिद्ध होता है कि अभिक्रिया से पहले और बाद में मैग्नीशियम और ऑक्सीजन का कुल द्रव्यमान समान रहता है। इस प्रकार, अभिक्रिया में कोई द्रव्यमान न तो खोता है और न ही नया बनता है।
In simple words: द्रव्यमान संरक्षण के नियम के अनुसार, किसी भी रासायनिक अभिक्रिया में पदार्थ का कुल वजन न तो बदलता है और न ही खत्म होता है। अभिकारक जितने वजन के होते हैं, उत्पाद भी उतने ही वजन के बनते हैं।
🎯 Exam Tip: द्रव्यमान संरक्षण का नियम रासायनिक समीकरण को संतुलित करने का मुख्य कारण है; इस सिद्धांत को हमेशा स्पष्ट रखें।
Question 3. अम्ल तथा क्षार के मध्य अभिक्रिया को क्या कहते हैं? विभिन्न प्रकार के अम्लों एवं क्षारों के मध्य अभिक्रिया का वर्णन करते हुए विलयन की pH बताइए। अथवा उदासीनीकरण अभिक्रिया किसे कहते हैं? उदाहरण सहित विस्तार से समझाइए।
Answer: अम्ल तथा क्षार के मध्य होने वाली अभिक्रिया को उदासीनीकरण अभिक्रिया कहते हैं। इस अभिक्रिया में अम्ल और क्षार मिलकर लवण तथा जल का निर्माण करते हैं। यह अभिक्रिया तब होती है जब अम्ल के हाइड्रोजन आयन (H+) और क्षार के हाइड्रॉक्सिल आयन (OH-) मिलकर जल बनाते हैं।
सामान्य अभिक्रिया: \( \text{अम्ल} + \text{क्षार} \rightarrow \text{लवण} + \text{जल} \)
(a) प्रबल अम्ल तथा प्रबल क्षार के मध्य अभिक्रिया: जब समान सांद्रता के प्रबल अम्ल और प्रबल क्षार अभिक्रिया करते हैं, तो बनने वाले विलयन की pH 7 होती है। ऐसा इसलिए होता है क्योंकि प्रबल अम्ल और प्रबल क्षार पूरी तरह से आयनित होते हैं, और अम्ल से प्राप्त H+ आयन क्षार से प्राप्त OH- आयनों के साथ मिलकर जल बनाते हैं, जिससे विलयन उदासीन हो जाता है।
उदाहरण: \( \text{HCl} + \text{NaOH} \rightarrow \text{NaCl} + \text{H}_2\text{O} \)
आयनिक रूप में: \( \text{H}^+ + \text{Cl}^- + \text{Na}^+ + \text{OH}^- \rightarrow \text{Na}^+ + \text{Cl}^- + \text{H}_2\text{O} \)
कुल आयनिक अभिक्रिया: \( \text{H}^+ + \text{OH}^- \rightarrow \text{H}_2\text{O} \)
(b) दुर्बल अम्ल तथा प्रबल क्षार के मध्य अभिक्रिया: दुर्बल अम्ल और प्रबल क्षार के बीच होने वाली उदासीनीकरण अभिक्रिया में, बनने वाले विलयन की pH 7 से अधिक होती है। ऐसा इसलिए होता है क्योंकि दुर्बल अम्ल पूरी तरह से आयनित नहीं होता है, जबकि प्रबल क्षार पूरी तरह से आयनित होता है। नतीजतन, अभिक्रिया के बाद भी विलयन में कुछ मुक्त OH- आयन बचे रहते हैं, जिससे विलयन क्षारीय हो जाता है।
उदाहरण: \( \text{CH}_3\text{COOH (दुर्बल अम्ल)} + \text{NaOH (प्रबल क्षार)} \rightleftharpoons \text{CH}_3\text{COONa} + \text{H}_2\text{O} \)
In simple words: अम्ल और क्षार मिलकर लवण और पानी बनाते हैं, जिसे उदासीनीकरण अभिक्रिया कहते हैं। यदि दोनों प्रबल हों तो pH 7 होती है, और यदि दुर्बल अम्ल और प्रबल क्षार हो तो pH 7 से ज़्यादा होती है।
🎯 Exam Tip: उदासीनीकरण अभिक्रिया में बनने वाले जल के कारण विलयन के आयनिक संतुलन में बदलाव आता है, जिससे pH पर सीधा असर पड़ता है।
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