RBSE Solutions Class 10 Science Chapter 5 दैनिक जीवन में रसायन

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Detailed Chapter 5 दैनिक जीवन में रसायन RBSE Solutions for Class 10 Science

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Class 10 Science Chapter 5 दैनिक जीवन में रसायन RBSE Solutions PDF

बहुचयनात्मक प्रश्न

 

Question 1. क्षार का जलीय विलयन
(क) नीले लिटमस को लाल कर देता है।
(ख) लाल लिटमस को नीला कर देता है।
(ग) लिटमस विलयन को रंगहीन कर देता है।
(घ) लिटमस विलयन पर कोई प्रभाव नहीं डालता है।
Answer: (ख) लाल लिटमस को नीला कर देता है।
In simple words: क्षार एक ऐसा पदार्थ है जो लाल लिटमस पेपर को नीले रंग में बदल देता है। यह उसकी क्षारीय प्रकृति को दिखाता है।

🎯 Exam Tip: अम्ल नीले लिटमस को लाल करते हैं (A to R), जबकि क्षार लाल लिटमस को नीला करते हैं (B to L)।

 

Question 2. अम्ल व क्षार के विलयन होते हैं विद्युत के-
(क) कुचालक
(ख) सुचालक
(ग) अर्द्धचालक
(घ) अप्रभावित
Answer: (ख) सुचालक
In simple words: अम्ल और क्षार के घोल में बिजली आसानी से चल पाती है क्योंकि उनमें आयन होते हैं। ये आयन ही बिजली को आगे बढ़ाते हैं।

🎯 Exam Tip: आयनों की उपस्थिति घोल को विद्युत का सुचालक बनाती है; आयन जितने अधिक होते हैं, चालकता उतनी ही बेहतर होती है।

 

Question 3. pH किन आयनों की सान्द्रता का ऋणात्मक लघुगणक होती है?
(क) \( [H_2O] \)
(ख) \( [OH^-] \)
(ग) \( [H^+] \)
(घ) \( [Na^+] \)
Answer: (ग) \( [H^+] \)
In simple words: pH का मान हाइड्रोजन आयनों की मात्रा पर निर्भर करता है। यह हाइड्रोजन आयन की सांद्रता के उल्टे लॉग को मापता है।

🎯 Exam Tip: pH मान हाइड्रोजन आयन (\( [H^+] \)) की सांद्रता का ऋणात्मक लघुगणक होता है, जिसका उपयोग विलयन की अम्लता या क्षारीयता को मापने के लिए किया जाता है।

 

Question 4. किसी अम्लीय विलयन की pH होगी
(क) 7
(ख) 14
(ग) 11
(घ) 4
Answer: (घ) 4
In simple words: अम्लीय घोलों का pH मान 7 से कम होता है। जैसे-जैसे pH मान घटता है, अम्लता बढ़ती जाती है।

🎯 Exam Tip: अम्लीय विलयन के लिए pH हमेशा 7 से कम होता है, उदासीन विलयन के लिए 7 होता है, और क्षारीय विलयन के लिए 7 से अधिक होता है।

 

Question 5. हमारे उदर में भोजन की पाचन क्रिया किस माध्यम में होती है
(क) अम्लीय
(ख) क्षारीय
(ग) उदासीन
(घ) परिवर्तनशील
Answer: (क) अम्लीय
In simple words: हमारे पेट में भोजन को पचाने के लिए तेजाब जैसा (अम्लीय) माहौल होता है। यह पेट के रसों के कारण होता है।

🎯 Exam Tip: पेट में हाइड्रोक्लोरिक अम्ल भोजन को पचाने में मदद करता है और हानिकारक जीवाणुओं को मारता है, जिससे पाचन के लिए अम्लीय माध्यम आवश्यक हो जाता है।

 

Question 7. धावन सोडा होता है..
(क) \( NaHCO_3 \)
(ख) \( NaCl \)
(ग) \( CaSO_4.\frac{1}{2}H_2O \)
(घ) \( Na_2CO_3.10 H_2O \)
Answer: (घ) \( Na_2CO_3.10 H_2O \)
In simple words: धावन सोडा का रासायनिक सूत्र \( Na_2CO_3.10 H_2O \) होता है। यह एक महत्वपूर्ण रासायनिक यौगिक है जिसका उपयोग कपड़े धोने में होता है।

🎯 Exam Tip: धावन सोडा, जिसे सोडियम कार्बोनेट डेकाहाइड्रेट भी कहते हैं, का उपयोग धुलाई, सफाई और कई औद्योगिक प्रक्रियाओं में होता है।

 

Question 8. विरंजक चूर्ण वायु में खुला रखने पर कौन सी गैस देता है?
(क) \( H_2 \)
(ख) \( O_2 \)
(ग) \( Cl_2 \)
(घ) \( CO_2 \)
Answer: (ग) \( Cl_2 \)
In simple words: जब विरंजक चूर्ण को हवा में खुला छोड़ दिया जाता है, तो यह क्लोरीन गैस छोड़ता है। इसी क्लोरीन गैस के कारण ही विरंजक चूर्ण का उपयोग रंग उड़ाने (ब्लीचिंग) में होता है।

🎯 Exam Tip: विरंजक चूर्ण (\( CaOCl_2 \)) वायु में कार्बन डाइऑक्साइड के साथ अभिक्रिया करके क्लोरीन गैस देता है, जो इसकी विरंजन क्षमता के लिए जिम्मेदार है।

 

Question 9. साबुन कार्य करता है
(क) मृदु जल में
(ख) कठोर जल में
(ग) कठोर व मृद दोनों में
(घ) इनमें से कोई नहीं
Answer: (क) मृदु जल में
In simple words: साबुन केवल नरम पानी में ही अच्छे से काम करता है। कठोर पानी में यह झाग नहीं बनाता और सफाई नहीं कर पाता है।

🎯 Exam Tip: साबुन कठोर जल में मौजूद कैल्शियम और मैग्नीशियम आयनों के साथ अविलेय अवक्षेप बनाता है, जिससे यह ठीक से काम नहीं कर पाता।

 

Question 10. मिसेल निर्माण में में हाइड्रोकार्बन पूंछ होती है
(क) अंदर की तरफ
(ख) बाहर की तरफ
(ग) परिवर्तनशील
(घ) किसी भी तरफ
Answer: (क) अंदर की तरफ
In simple words: मिसेल बनने की प्रक्रिया में, साबुन के अणुओं की हाइड्रोकार्बन पूंछ अंदर की तरफ होती है। यह अंदर की पूंछ चिकनाई को घेर लेती है।

🎯 Exam Tip: मिसेल में, जल-विरोधी हाइड्रोकार्बन पूंछ गंदगी (जैसे तेल या वसा) की ओर अंदर की तरफ होती है, जबकि जल-स्नेही सिर बाहर की ओर पानी में रहते हैं।

 

Question 11. प्रोटॉन \( [H^+] \) ग्रहण करने वाले यौगिक होते हैं
(क) अम्ल
(ख) लवण
(ग) इनमें से कोई नहीं
(घ) क्षार
Answer: (घ) क्षार
In simple words: जो यौगिक प्रोटॉन (हाइड्रोजन आयन) को स्वीकार करते हैं, उन्हें क्षार कहते हैं। यह प्रोटॉन को ग्रहण करने की उनकी क्षमता को बताता है।

🎯 Exam Tip: ब्रांस्टेड-लोरी सिद्धांत के अनुसार, जो पदार्थ प्रोटॉन (\( H^+ \)) ग्रहण करते हैं, वे क्षार कहलाते हैं, जबकि जो प्रोटॉन दान करते हैं, वे अम्ल कहलाते हैं।

 

अतिलघूत्तरात्मक प्रश्न

 

Question 12. लाल चींटी के डंक में कौनसा अम्ल पाया जाता है?
Answer: लाल चींटी के डंक में फार्मिक अम्ल (HCOOH) होता है। यही अम्ल काटने पर खुजली और जलन पैदा करता है।
In simple words: लाल चींटी के डंक में फार्मिक अम्ल होता है।

🎯 Exam Tip: विभिन्न प्राकृतिक स्रोतों में पाए जाने वाले अम्लों को याद रखना महत्वपूर्ण है, जैसे सिरके में एसिटिक अम्ल, संतरे में साइट्रिक अम्ल।

 

Question 13. प्रोटॉन त्यागने वाले यौगिक क्या कहलाते हैं ?
Answer: ऐसे यौगिक जो प्रोटॉन (यानी \( H^+ \) आयन) छोड़ते हैं, उन्हें अम्ल कहते हैं। यह उनकी अम्लीय प्रकृति को दिखाता है।
In simple words: जो यौगिक प्रोटॉन छोड़ते हैं, वे अम्ल कहलाते हैं।

🎯 Exam Tip: ब्रांस्टेड-लोरी सिद्धांत में अम्ल को प्रोटॉन दाता के रूप में परिभाषित किया गया है, जो इस अवधारणा का आधार है।

 

Question 14. उदासीनीकरण से क्या समझते हैं ?
Answer: उदासीनीकरण वह क्रिया है जब अम्ल और क्षार आपस में मिलकर एक-दूसरे के गुणों को खत्म कर देते हैं। इस प्रक्रिया में एक नया पदार्थ (लवण) और पानी बनता है। यह अभिक्रिया अम्ल और क्षार की प्रकृति को संतुलित करती है। उदाहरण के लिए, सोडियम हाइड्रॉक्साइड (\( NaOH \)) और हाइड्रोक्लोरिक अम्ल (\( HCl \)) मिलकर सोडियम क्लोराइड (\( NaCl \)) और पानी (\( H_2O \)) बनाते हैं: \( NaOH + HCl \rightarrow NaCl + H_2O \).
In simple words: जब अम्ल और क्षार मिलते हैं, तो वे एक-दूसरे को बेअसर कर देते हैं और नया लवण तथा पानी बनाते हैं।

🎯 Exam Tip: उदासीनीकरण अभिक्रिया हमेशा ऊष्माक्षेपी होती है, जिसका अर्थ है कि इसमें ऊष्मा उत्पन्न होती है।

 

Question 15. पेयजल को जीवाणुमुक्त कैसे किया जा सकता है?
Answer: पीने के पानी को जीवाणुओं से मुक्त करने के लिए विरंजक चूर्ण (\( CaOCl_2 \)) का उपयोग किया जाता है। यह चूर्ण पानी में मौजूद हानिकारक सूक्ष्मजीवों को नष्ट करके उसे पीने योग्य बनाता है।
In simple words: पीने के पानी को साफ करने के लिए विरंजक चूर्ण का इस्तेमाल किया जाता है।

🎯 Exam Tip: विरंजक चूर्ण कीटाणुनाशक के रूप में कार्य करता है, जो जल उपचार के लिए महत्वपूर्ण है।

 

Question 16. अम्ल से धात्विक ऑक्साइड की अभिक्रिया किस प्रकार होती है? समीकरण दें।
Answer:

🎯 Exam Tip: परीक्षा में, यदि किसी प्रश्न का उत्तर अनुपलब्ध हो, तो यह दर्शाने के लिए कि आपने प्रश्न को देखा है, 'अनुपलब्ध' या खाली उत्तर लिख दें।

 

Question 18. हमारे उदर में उत्पन्न अत्यधिक अम्लता से राहत पाने के लिए क्या उपचार लेंगे?
Answer: पेट में बहुत ज़्यादा तेजाब बनने पर, उसे शांत करने के लिए हल्के क्षार (बेस) का इस्तेमाल किया जाता है। मैग्नीशियम हाइड्रॉक्साइड \( [Mg(OH)_2] \), जिसे मिल्क ऑफ मैग्नीशिया भी कहते हैं, एक ऐसा ही पदार्थ है जो तेजाब को बेअसर करता है। यह एक एन्टएसिड है, जो पेट की अतिरिक्त अम्लता को कम करता है।
In simple words: पेट में ज़्यादा तेजाब होने पर, मिल्क ऑफ मैग्नीशिया जैसे हल्के क्षार का उपयोग करके उसे ठीक किया जाता है।

🎯 Exam Tip: एंटासिड हमेशा दुर्बल क्षारक होते हैं ताकि वे पेट की परत को नुकसान न पहुँचाएँ।

 

Question 19. सोडियम के दो लवणों का नाम लिखें।
Answer: सोडियम के दो मुख्य लवण धावन सोडा (सोडियम कार्बोनेट डेकाहाइड्रेट, \( Na_2CO_3.10H_2O \)), जिसका उपयोग कपड़े धोने में होता है, और साधारण नमक (सोडियम क्लोराइड, \( NaCl \)), जो भोजन में इस्तेमाल होता है, हैं। ये दोनों ही सोडियम के महत्वपूर्ण यौगिक हैं और हमारे दैनिक जीवन में व्यापक रूप से उपयोग किए जाते हैं।
In simple words: सोडियम के दो लवण धावन सोडा और साधारण नमक हैं।

🎯 Exam Tip: सोडियम क्लोराइड (साधारण नमक) एक उदासीन लवण है, जबकि सोडियम कार्बोनेट (धावन सोडा) एक क्षारीय लवण है।

 

Question 20. लुइस के अनुसार क्षार की परिभाषा दीजिए?
Answer: लुइस के अनुसार, क्षार वे पदार्थ होते हैं जिनके पास इलेक्ट्रॉन का एक अतिरिक्त जोड़ा होता है जिसे वे किसी दूसरे पदार्थ को दे सकते हैं। ऐसे यौगिकों को इलेक्ट्रॉन युग्म दाता भी कहते हैं, जैसे अमोनिया (\( NH_3 \)). यह इलेक्ट्रॉन दान करने की क्षमता ही उन्हें क्षार बनाती है।
In simple words: लुइस क्षार वे होते हैं जिनके पास देने के लिए इलेक्ट्रॉन का जोड़ा होता है, जैसे अमोनिया।

🎯 Exam Tip: लुइस अवधारणा अम्ल-क्षार प्रतिक्रियाओं के एक व्यापक वर्ग को कवर करती है, जिसमें वे भी शामिल हैं जिनमें प्रोटॉन स्थानांतरण शामिल नहीं है।

 

Question 21. साबुनीकरण किसे कहते हैं ?
Answer: साबुनीकरण वह प्रक्रिया है जिसमें लंबी चेन वाले वसा अम्लों को सोडियम हाइड्रॉक्साइड या पोटेशियम हाइड्रॉक्साइड के पानी के घोल के साथ गरम करके साबुन बनाया जाता है। इस रासायनिक क्रिया से साबुन का निर्माण होता है, जो सफाई के लिए उपयोग होता है।
In simple words: साबुनीकरण वह तरीका है जिससे वसा अम्लों को सोडियम या पोटेशियम हाइड्रॉक्साइड के साथ मिलाकर साबुन बनाया जाता है।

🎯 Exam Tip: साबुनीकरण एक हाइड्रोलाइसिस प्रक्रिया है जो वसा या तेल को साबुन (एक वसा अम्ल का लवण) और ग्लिसरॉल में बदल देती है।

 

Question 22. अपमार्जक की क्या विशेषता है?
Answer: अपमार्जक की खास बात यह है कि वे कठोर पानी और नरम पानी, दोनों में ही सफाई का काम कर सकते हैं। वे पानी की कठोरता से प्रभावित नहीं होते हैं, जिससे हर तरह के पानी में प्रभावी सफाई होती है। साबुन के विपरीत, अपमार्जक कठोर जल में अवक्षेप नहीं बनाते हैं।
In simple words: अपमार्जक कठोर और नरम दोनों तरह के पानी में कपड़े साफ कर सकते हैं।

🎯 Exam Tip: अपमार्जक कठोर जल में उपस्थित कैल्शियम और मैग्नीशियम आयनों के साथ घुलनशील लवण बनाते हैं, इसलिए वे कठोर जल में प्रभावी होते हैं।

 

लघूत्तरात्मक प्रश्न

 

Question 24. एक विलयन में हाइड्रोजन आयन की सान्द्रता \( 1 \times 10^{-4} \) gm mole L\(^{-1}\) है। विलयन का pH मान ज्ञात करें। बताइए कि यह विलयन अम्लीय होगा या क्षारीय?
Answer: इस विलयन में हाइड्रोजन आयन की सांद्रता \( [H^+] = 1 \times 10^{-4} \) ग्राम मोल प्रति लीटर है। pH का मान निकालने के लिए, हम हाइड्रोजन आयन की सांद्रता के ऋणात्मक लघुगणक का उपयोग करते हैं:
\( pH = -\log [H^+] \)
\( pH = -\log [1 \times 10^{-4}] \)
\( pH = -(\log 1 + \log 10^{-4}) \)
\( pH = -(0 - 4 \times 1) \)
\( pH = 4 \)
गणना करने पर, pH मान 4 आता है। चूंकि 7 से कम pH वाले विलयन अम्लीय होते हैं, इसलिए यह विलयन अम्लीय है। यह दर्शाता है कि इसमें हाइड्रोजन आयनों की अधिकता है।
In simple words: इस विलयन का pH मान 4 है, जिसका मतलब है कि यह विलयन अम्लीय है क्योंकि इसका pH 7 से कम है।

🎯 Exam Tip: pH की गणना करते समय, \( \log 10^x = x \) और \( \log 1 = 0 \) जैसे लघुगणक गुणों का सही उपयोग करें।

 

Question 25. दो प्रबल अम्ल एवं दो प्रबल क्षारों के नाम तथा उपयोग लिखें।
Answer:
(a) प्रबल अम्ल-

  • हाइड्रोक्लोरिक अम्ल (\( HCl \)): यह अम्लराज (एक शक्तिशाली मिश्रण जो सोने को भी घोल सकता है) बनाने में प्रयुक्त होता है, और कई उद्योगों में सफाई के लिए उपयोग किया जाता है।
  • सल्फ्यूरिक अम्ल (\( H_2SO_4 \)): यह कार बैटरी में, उर्वरक बनाने में, और विभिन्न रासायनिक उद्योगों में महत्वपूर्ण है।


(b) प्रबल क्षार-

 

  • सोडियम हाइड्रॉक्साइड (\( NaOH \)): इसे कास्टिक सोडा भी कहते हैं। इसका उपयोग साबुन, कागज, पेट्रोलियम शोधन और बॉक्साइट के धातुकर्म में किया जाता है।
  • पोटैशियम हाइड्रॉक्साइड (\( KOH \)): यह भी एक प्रबल क्षार है, जिसका उपयोग साबुन बनाने, डिटर्जेंट और अन्य औद्योगिक प्रक्रियाओं में होता है।


ये सभी रसायन दैनिक जीवन और उद्योग में महत्वपूर्ण हैं।
In simple words: प्रबल अम्ल हैं हाइड्रोक्लोरिक अम्ल (HCl) और सल्फ्यूरिक अम्ल (H2SO4)। प्रबल क्षार हैं सोडियम हाइड्रॉक्साइड (NaOH) और पोटैशियम हाइड्रॉक्साइड (KOH)। इनके कई औद्योगिक उपयोग हैं।

🎯 Exam Tip: प्रबल अम्ल और क्षार दोनों ही संक्षारक होते हैं और उन्हें सावधानी से संभालना चाहिए।

 

Question 26. साबुन एवं अपमार्जक में अंतर बताइए।
Answer:

साबुनअपमार्जक
1. साबुन लंबी श्रृंखला वाले वसा अम्लों के सोडियम या पोटेशियम लवण होते हैं।1. अपमार्जक लंबी श्रृंखला वाले सल्फोनेटेड ऐल्कोहल या एल्काइल बेंजीन सल्फोनेट के सोडियम लवण होते हैं।
2. साबुन कठोर जल के साथ झाग नहीं बनाते हैं अतः सफाई का कार्य नहीं होता है।2. अपमार्जक कठोर जल में भी प्रभावी बने रहते हैं अर्थात् झाग उत्पन्न करते हैं। अतः ये कठोर जल तथा मृदु जल दोनों में सफाई करते हैं।
3. साबुन को वनस्पति तेल या जंतु वसा से बनाया जाता है।3. संश्लिष्ट अपमार्जक कोयले तथा पेट्रोलियम के हाइड्रोकार्बन से बनते हैं।


In simple words: साबुन प्राकृतिक तेलों से बनते हैं और केवल नरम पानी में काम करते हैं, जबकि अपमार्जक पेट्रोलियम से बनते हैं और कठोर तथा नरम दोनों पानी में सफाई करते हैं।

🎯 Exam Tip: तुलनात्मक प्रश्नों में हमेशा दोनों मदों के बीच स्पष्ट समानताएँ और अंतर लिखें।

 

Question 27. आरेनियस के अनुसार अम्ल एवं क्षार की परिभाषाएं लिखिए।
Answer: आरेनियस के सिद्धांत के अनुसार, अम्ल वे पदार्थ होते हैं जो पानी में घुलने पर हाइड्रोजन आयन \( (H^+) \) या हाइड्रोनियम आयन \( (H_3O^+) \) देते हैं। उदाहरण के लिए, हाइड्रोक्लोरिक अम्ल पानी में \( H_3O^+ \) बनाता है: \( HCl(aq) \implies H_3O^+(aq) + Cl^-(aq) \). इसी तरह, नाइट्रिक अम्ल भी \( H_3O^+ \) आयन देता है: \( HNO_3(aq) \implies H_3O^+(aq) + NO_3^-(aq) \).
वहीं, क्षार वे पदार्थ होते हैं जो पानी में घुलने पर हाइड्रॉक्साइड आयन \( (OH^-) \) देते हैं, जैसे सोडियम हाइड्रॉक्साइड: \( NaOH(aq) \implies Na^+(aq) + OH^-(aq) \). पोटैशियम हाइड्रॉक्साइड भी एक क्षार है: \( KOH(aq) \implies K^+(aq) + OH^-(aq) \). यह परिभाषा पानी में घुलने वाले पदार्थों की अम्लीयता और क्षारीयता को समझने में मदद करती है।
In simple words: आरेनियस के अनुसार, अम्ल पानी में \( H^+ \) आयन देते हैं, और क्षार पानी में \( OH^- \) आयन देते हैं।

🎯 Exam Tip: अम्ल \( H^+ \) आयन देते हैं, जो पानी के साथ मिलकर \( H_3O^+ \) बनाते हैं, और क्षार \( OH^- \) आयन देते हैं।

 

Question 28. pH किसे कहते हैं? अम्लीय एवं क्षारीय विलयनों की pH परास को स्पष्ट करें।
Answer: pH स्केल किसी घोल में हाइड्रोजन आयनों की मात्रा को मापता है, जिससे पता चलता है कि घोल कितना अम्लीय या क्षारीय है। इसे हाइड्रोजन आयन सांद्रता के ऋणात्मक लघुगणक के रूप में परिभाषित किया जाता है: \( pH = -\log_{10} [H^+] \) या \( pH = -\log_{10} [H_3O^+] \).
हाइड्रोजन आयनों की सांद्रता जितनी अधिक होती है, pH का मान उतना ही कम होता है। उदासीन घोल का pH 7 होता है, अम्लीय घोल का pH 7 से कम (0 से 7 तक) और क्षारीय घोल का pH 7 से ज़्यादा (7 से 14 तक) होता है। यह स्केल 0 से 14 तक होता है और हमें पदार्थ की प्रकृति को समझने में मदद करता है।
In simple words: pH स्केल बताता है कि कोई चीज़ कितनी खट्टी (अम्लीय) या कड़वी (क्षारीय) है। 7 का pH मतलब उदासीन, 7 से कम मतलब अम्लीय, और 7 से ज़्यादा मतलब क्षारीय।

🎯 Exam Tip: pH स्केल एक लॉगरिदमिक स्केल है, जिसका अर्थ है कि pH में एक इकाई का परिवर्तन \( H^+ \) सांद्रता में दस गुना परिवर्तन को दर्शाता है।

0 7 14 \( [H^+] \) \( [OH^-] \) अम्लीय \( \leftarrow \) उदासीन \( \rightarrow \) क्षारीय pH स्केल

 

Question 29. क्रिस्टलन जल किसे कहते हैं? उदाहरण दें।
Answer: क्रिस्टलन जल वह पानी है जो कुछ लवणों के रासायनिक सूत्र में निश्चित अणुओं के रूप में मौजूद होता है। यह पानी उस लवण की संरचना का हिस्सा होता है, लेकिन उसे गीला नहीं करता। उदाहरण के लिए, धोने वाले सोडे (\( Na_2CO_3.10H_2O \)) में 10 पानी के अणु क्रिस्टलन जल के रूप में होते हैं, जो उसे एक खास रूप देते हैं। अन्य उदाहरण जिप्सम (\( CaSO_4.2H_2O \)) जिसमें 2 जल के अणु होते हैं, और फिटकरी (\( K_2SO_4.Al_2(SO_4)_3.24H_2O \)) जिसमें 24 जल के अणु होते हैं।
In simple words: क्रिस्टलन जल वह पानी है जो कुछ रसायनों के सूखे पाउडर में छिपा होता है, जैसे धोने वाले सोडे में।

🎯 Exam Tip: क्रिस्टलन जल यौगिक के गुणों को प्रभावित कर सकता है, जैसे उसका रंग और क्रिस्टल संरचना।

 

Question 30. क्या होता है जब
1. दही या खट्टे पदार्थों को धातु के बर्तनों में रखा जाता है?
2. रात्रि में भोजन के पश्चात् दाँतों को साफ नहीं किया जाता है?

Answer:
1. जब दही या कोई और खट्टा पदार्थ पीतल या तांबे के बर्तनों में रखा जाता है, तो उसमें मौजूद अम्ल धातु के साथ प्रतिक्रिया करके ज़हरीले पदार्थ बना सकते हैं। ये पदार्थ हमारे शरीर के लिए नुकसानदायक होते हैं, इसलिए ऐसे बर्तनों में खट्टी चीजें नहीं रखनी चाहिए। धातु के बर्तन अम्लों के प्रति संवेदनशील होते हैं।
2. रात में खाने के बाद दांत साफ न करने पर, मुंह में बचे हुए खाने के टुकड़ों पर बैक्टीरिया काम करना शुरू कर देते हैं। ये बैक्टीरिया अम्ल पैदा करते हैं, जिससे मुंह का pH स्तर कम हो जाता है। जब pH 5.5 से नीचे चला जाता है, तो दांतों का ऊपरी सुरक्षा कवच (इनैमल) गलना शुरू हो जाता है, जिससे दांत खराब हो जाते हैं। दांतों की सुरक्षा के लिए नियमित सफाई महत्वपूर्ण है।
In simple words: 1. खट्टी चीजें धातु के बर्तनों में रखने पर ज़हर बन सकती हैं। 2. रात में दांत साफ न करने पर, मुंह में बैक्टीरिया अम्ल बनाते हैं जिससे दांत खराब हो जाते हैं।

🎯 Exam Tip: धातु-अम्ल प्रतिक्रियाएँ अक्सर हाइड्रोजन गैस छोड़ती हैं, जबकि दंत क्षय मुख्य रूप से अम्लों के कारण होता है जो इनैमल को घोलते हैं।

 

Question 31. एक यौगिक A अम्ल \( H_2SO_4 \) से क्रिया करता है तथा बुदबुदाहट के साथ गैस B निकालता है। गैस B जलाने पर फट-फट ध्वनि के साथ जलती है। A व B का नाम बताइए तथा अभिक्रिया का समीकरण दें।
Answer:

🎯 Exam Tip: हाइड्रोजन गैस 'पॉप' ध्वनि के साथ जलती है, जो प्रयोगशाला में इसकी पहचान के लिए एक विशिष्ट परीक्षण है।

 

Question. ब्रांस्टेड-लोरी तथा लुइस के अनुसार अम्ल एवं क्षार को स्पष्ट करें।
Answer: ब्रांस्टेड-लोरी सिद्धांत के अनुसार, अम्ल वे पदार्थ होते हैं जो प्रोटॉन (\( H^+ \) आयन) देते हैं, जबकि क्षार वे पदार्थ होते हैं जो प्रोटॉन लेते हैं। इस सिद्धांत में संयुग्मी अम्ल-क्षार युग्मों की अवधारणा भी दी गई है। उदाहरण के लिए, पानी अमोनिया के साथ अभिक्रिया करके प्रोटॉन देता है, जिससे हाइड्रॉक्साइड आयन बनता है: \( H_2O + NH_3(aq) \rightleftharpoons NH_4^+(aq) + OH^-(aq) \). इसी तरह, \( HCl \) भी \( H_2O \) को प्रोटॉन देता है: \( HCl(aq) + H_2O \rightleftharpoons Cl^-(aq) + H_3O^+(aq) \).
दूसरी ओर, लुइस सिद्धांत कहता है कि अम्ल इलेक्ट्रॉन जोड़े लेते हैं और क्षार इलेक्ट्रॉन जोड़े देते हैं। इस तरह लुइस क्षार वे पदार्थ होते हैं जिनके पास देने के लिए इलेक्ट्रॉन का एक अतिरिक्त जोड़ा होता है, जैसे अमोनिया (\( :NH_3 \)). लुइस अम्ल इलेक्ट्रॉन युग्म ग्राही होते हैं, जैसे \( BF_3 \). ये अवधारणाएं रासायनिक प्रतिक्रियाओं में अम्लों और क्षारों के व्यवहार को समझने में मदद करती हैं, खासकर उन प्रतिक्रियाओं में जहाँ प्रोटॉन का आदान-प्रदान नहीं होता।
In simple words: ब्रांस्टेड-लोरी के अनुसार, अम्ल प्रोटॉन देते हैं और क्षार प्रोटॉन लेते हैं। लुइस के अनुसार, अम्ल इलेक्ट्रॉन लेते हैं और क्षार इलेक्ट्रॉन देते हैं।

🎯 Exam Tip: ब्रांस्टेड-लोरी और लुइस अवधारणाएँ अम्ल-क्षार व्यवहार को समझने के लिए अलग-अलग लेकिन पूरक दृष्टिकोण प्रदान करती हैं; प्रोटॉन स्थानांतरण और इलेक्ट्रॉन युग्म स्थानांतरण पर ध्यान दें।

 

Question 33. pH के सामान्य जीवन में उपयोग बताइए।
Answer: pH का हमारे रोज़मर्रा के जीवन में बहुत महत्व है। जैसे:
1. उदर में अम्लता: हमारे पेट में भोजन के पाचन के लिए अम्लीय वातावरण (pH लगभग 1.5-3.5) आवश्यक है। जब अत्यधिक अम्ल बनता है, तो एंटासिड (जो क्षारीय होते हैं) का उपयोग किया जाता है, जैसे मैग्नीशियम हाइड्रॉक्साइड, जो अम्ल को बेअसर कर देता है।
2. दंत क्षय: मुंह का pH आमतौर पर 6.5 के आसपास होता है। भोजन के बाद, बैक्टीरिया अम्ल उत्पन्न करते हैं, जिससे pH 5.5 से नीचे गिर जाता है। यह अम्लता दांतों के इनैमल को घोलना शुरू कर देती है, जिससे दंत क्षय होता है। दांतों को साफ रखने के लिए क्षारीय टूथपेस्ट का उपयोग किया जाता है।
3. कीटों का डंक: मधुमक्खी और चींटी जैसे कीट अम्ल स्रावित करते हैं, जिससे त्वचा पर जलन होती है। इस जलन को कम करने के लिए बेकिंग सोडा (\( NaHCO_3 \)) जैसे हल्के क्षार का उपयोग किया जाता है, जो अम्ल के प्रभाव को बेअसर करता है।
4. अम्ल वर्षा: वर्षा जल का pH सामान्यतः 5.6 होता है। जब यह 5.6 से कम हो जाता है, तो इसे अम्ल वर्षा कहते हैं। यह नदियों और खेतों की मिट्टी को प्रभावित करता है, जिससे फसलें और जलीय जीवन को नुकसान होता है। प्रदूषण को नियंत्रित करके अम्ल वर्षा को कम किया जा सकता है।
5. मृदा की pH: पौधों की अच्छी वृद्धि के लिए मिट्टी का एक विशेष pH स्तर होना चाहिए। मिट्टी की pH का पता लगाकर, उसमें बोई जाने वाली फसलों का चयन किया जा सकता है। यदि मिट्टी बहुत अम्लीय है, तो उसमें चूना (\( CaO \)) मिलाया जाता है, और यदि क्षारीय है, तो अम्लीय पदार्थ मिलाकर pH को संतुलित किया जाता है। उचित pH उर्वरक के सही उपयोग में मदद करता है।
In simple words: pH हमारे पेट की अम्लता, दांतों की सुरक्षा, कीटों के डंक के असर, अम्ल वर्षा और खेत की मिट्टी की गुणवत्ता को प्रभावित करता है।

🎯 Exam Tip: प्रत्येक उपयोग को संक्षेप में और स्पष्ट रूप से समझाएं, यह बताते हुए कि pH कैसे शामिल है।

 

Question 34. निम्नलिखित के नाम, बनाने की विधि तथा उपयोग लिखिए
Answer:
(i) सोडियम हाइड्रॉक्साइड (\( NaOH \))
नाम: इसे कास्टिक सोडा भी कहते हैं।
बनाने की विधि: इसे औद्योगिक स्तर पर सोडियम क्लोराइड (\( NaCl \)) के जलीय विलयन के विद्युत अपघटन (क्लोरो-क्षार प्रक्रिया) द्वारा बनाया जाता है। इस प्रक्रिया में, एनोड पर क्लोरीन गैस और कैथोड पर हाइड्रोजन गैस बनती है, जबकि कैथोड पर विलयन के रूप में सोडियम हाइड्रॉक्साइड प्राप्त होता है।
\( 2NaCl(aq) + 2H_2O(l) \rightarrow 2NaOH(aq) + Cl_2(g) + H_2(g) \)
उपयोग:

  • साबुन, कागज और सिल्क जैसे उद्योगों में।
  • बॉक्साइट के धातुकर्म में और पेट्रोलियम के शोधन में।
  • वसा तथा तेलों के निर्माण में।
  • प्रयोगशाला में एक अभिकर्मक के रूप में।


(ii) सोडियम हाइड्रोजन कार्बोनेट (\( NaHCO_3 \))
नाम: इसे बेकिंग सोडा या खाने का सोडा भी कहते हैं।
बनाने की विधि:
(a) इसे सोडियम क्लोराइड, पानी, कार्बन डाइऑक्साइड और अमोनिया की अभिक्रिया द्वारा बनाया जाता है:
\( NaCl + H_2O + CO_2 + NH_3 \rightarrow NH_4Cl + NaHCO_3 \)
(b) इसे सोडियम कार्बोनेट के जलीय विलयन में कार्बन डाइऑक्साइड गैस प्रवाहित करके भी बनाया जा सकता है:
\( Na_2CO_3 + CO_2 + H_2O \rightarrow 2NaHCO_3 \)
उपयोग:

 

  • खाद्य पदार्थों में बेकिंग पाउडर के रूप में।
  • सोडा वाटर और अन्य शीतल पेय बनाने में।
  • पेट की अम्लता को दूर करने में एंटासिड के रूप में।


(iii) धावन सोडा (\( Na_2CO_3.10H_2O \))
नाम: इसे सोडियम कार्बोनेट डेकाहाइड्रेट भी कहते हैं।
बनाने की विधि:
(a) इसे साल्वे विधि से बनाया जाता है, जिसमें सोडियम क्लोराइड का उपयोग होता है।
(b) बेकिंग सोडा को गर्म करने पर सोडियम कार्बोनेट प्राप्त होता है, जिसका पुनः क्रिस्टलीकरण करके धावन सोडा बनाया जाता है:
\( 2NaHCO_3 \rightarrow Na_2CO_3 + H_2O + CO_2 \uparrow \)
\( Na_2CO_3 + 10H_2O \xrightarrow{\text{क्रिस्टलीकरण}} Na_2CO_3.10H_2O \)
उपयोग:

 

 

  • धुलाई एवं सफाई उद्योगों में।
  • कास्टिक सोडा, बेकिंग पाउडर, कांच, साबुन और बोरेक्स के निर्माण में।
  • अपमार्जक के रूप में।
  • कागज, पेंट और वस्त्र उद्योग में।
  • प्रयोगशाला में अभिकर्मक के रूप में।


(iv) विरंजक चूर्ण (\( CaOCl_2 \))
नाम: इसे कैल्शियम ऑक्सीक्लोराइड कहते हैं।
बनाने की विधि: शुष्क बुझे हुए चूने (\( Ca(OH)_2 \)) पर क्लोरीन गैस (\( Cl_2 \)) प्रवाहित करने से विरंजक चूर्ण बनता है:
\( Ca(OH)_2 + Cl_2 \rightarrow CaOCl_2 + H_2O \)
उपयोग:

 

 

  • वस्त्र उद्योग और कागज उद्योग में रंग उड़ाने (विरंजन) के लिए।
  • पीने के पानी को शुद्ध करने में (जीवाणुनाशक के रूप में)।
  • रोगाणुनाशक और ऑक्सीकारक के रूप में।
  • प्रयोगशाला में अभिकर्मक के रूप में।


(v) प्लास्टर ऑफ पेरिस (\( CaSO_4.\frac{1}{2}H_2O \))
नाम: इसे कैल्शियम सल्फेट हेमीहाइड्रेट कहते हैं। इसे पेरिस में जिप्सम को गरम करके पहली बार बनाया गया था, इसलिए इसका नाम प्लास्टर ऑफ पेरिस रखा गया।
उपयोग:

 

 

  • टूटी हुई हड्डियों को सही स्थिति में स्थिर करने और जोड़ने के लिए प्लास्टर चढ़ाने में।
  • अग्निसह पदार्थ बनाने में।
  • भवन निर्माण में (जैसे मूर्तियों और सजावटी सामान बनाने में)।
  • दंत चिकित्सा में।
  • मूर्तियां तथा सजावटी सामान बनाने में।


In simple words: NaOH को कास्टिक सोडा कहते हैं, नमक से बनता है, साबुन बनाने में काम आता है। \( NaHCO_3 \) बेकिंग सोडा है, खाने में, पेट की गैस में काम आता है। धावन सोडा कपड़े धोता है। विरंजक चूर्ण सफाई करता है, पानी शुद्ध करता है। प्लास्टर ऑफ पेरिस टूटी हड्डियाँ जोड़ता है, मूर्तियां बनाता है।

🎯 Exam Tip: प्रत्येक यौगिक के नाम, रासायनिक सूत्र, बनाने की विधि और कम से कम दो उपयोगों को याद रखें।

 

Question 35. मिसेल कैसे बनते हैं? क्रियाविधि भी दें।
Answer: मिसेल साबुन या अपमार्जक के अणु होते हैं जो पानी में मिलकर बनते हैं और सफाई में मदद करते हैं। साबुन के अणु में एक जल-विरोधी लंबी पूंछ (जो चिकनाई को पकड़ती है) और एक जल-स्नेही सिर होता है। जब साबुन को पानी में मिलाते हैं, तो ये अणु खुद को इस तरह से व्यवस्थित करते हैं कि उनकी जल-विरोधी पूंछें गंदगी (तेल या चिकनाई) के अंदर फंस जाती हैं, और जल-स्नेही सिर बाहर पानी की तरफ रहते हैं। इस गोलाकार संरचना को मिसेल कहते हैं। सभी मिसेल पर एक जैसा चार्ज होने के कारण वे एक-दूसरे को दूर रखते हैं और पानी में घुले रहते हैं, जिससे गंदगी कपड़े से आसानी से निकल जाती है। यह सफाई की एक प्रभावी क्रिया है।
In simple words: मिसेल साबुन के छोटे-छोटे गोले होते हैं। ये गोले गंदगी को घेर लेते हैं, जिससे वह पानी में घुल जाती है और कपड़े साफ हो जाते हैं।

🎯 Exam Tip: मिसेल का निर्माण साबुन की सफाई क्रिया का आधार है; जल-विरोधी पूंछों और जल-स्नेही सिरों की भूमिका को स्पष्ट रूप से समझाएं।

जल विरोधी हाइड्रोकार्बन पूंछ मिसेल की संरचना कपड़े पर चिकनाई तेल की बूँद चिकनाई की बूँद के चारों ओर व्यवस्थित साबुन के आयन मिसेल का प्रयोग

अन्य महत्त्वपूर्ण प्रश्नोत्तर

वस्तुनिष्ठ प्रश्न

 

Question 1. दाँत साफ करने के लिए प्रयुक्त टूथपेस्ट की प्रकृति किस प्रकार की होती है?
(अ) क्षारीय
(ब) अम्लीय
(स) उदासीन
(द) संक्षारकीय
Answer: (अ) क्षारीय
In simple words: टूथपेस्ट की प्रकृति क्षारीय होती है, क्योंकि यह मुंह में मौजूद अम्लों को बेअसर करके दांतों को सड़ने से बचाता है।

🎯 Exam Tip: टूथपेस्ट का क्षारीय गुण दांतों के इनैमल को अम्ल के हमले से बचाने में मदद करता है।

 

Question 2. पीने के पानी को जीवाणुओं से मुक्त करने के लिए निम्न में से किसका उपयोग किया जाता है?
(अ) बेकिंग सोडा
(ब) विरंजक चूर्ण
Answer: (ब) विरंजक चूर्ण
In simple words: पीने के पानी को जीवाणुओं से साफ करने के लिए विरंजक चूर्ण का उपयोग किया जाता है। यह एक अच्छा कीटाणुनाशक है।

🎯 Exam Tip: विरंजक चूर्ण (ब्लीचिंग पाउडर) पानी में मौजूद हानिकारक सूक्ष्मजीवों को नष्ट करके उसे पीने योग्य बनाता है।

 

Question 4. हमारे रुधिर की प्रकृति होती है
(अ) अम्लीय
(ब) क्षारीय
(स) उदासीन
(द) कुछ अम्लीय व कुछ क्षारीय
Answer: (ब) क्षारीय
In simple words: हमारे खून का pH मान 7.35 से 7.45 के बीच होता है, जो इसे थोड़ा क्षारीय बनाता है। यह संतुलन शरीर के ठीक से काम करने के लिए बहुत जरूरी है।

🎯 Exam Tip: याद रखें कि pH 7 उदासीन होता है, 7 से कम अम्लीय और 7 से ज्यादा क्षारीय होता है।

 

Question 5. अधातुओं के ऑक्साइडों की प्रकृति होती है
(अ) क्षारीय
(ब) अम्लीय
(स) उदासीन
(द) अक्रिय
Answer: (ब) अम्लीय
In simple words: अधातुओं के ऑक्साइड, जब पानी में घुलते हैं, तो एसिड बनाते हैं। उदाहरण के लिए, कार्बन डाइऑक्साइड एक अधातु ऑक्साइड है जो पानी के साथ मिलकर कार्बोनिक एसिड बनाता है।

🎯 Exam Tip: इस नियम को याद रखने का सबसे अच्छा तरीका यह है कि धातु ऑक्साइड अक्सर क्षारीय होते हैं, जबकि अधातु ऑक्साइड अम्लीय होते हैं।

 

Question 6. बेकिंग सोडा को गर्म करने पर निम्न में से कौनसा यौगिक बनता है?
(अ) \( \text{NaNO}_3 \)
(ब) \( \text{Na}_2\text{CO}_3 \)
(स) \( \text{NH}_4\text{Cl} \)
(द) \( \text{NaHCO}_3 \)
Answer: (ब) \( \text{Na}_2\text{CO}_3 \)
In simple words: बेकिंग सोडा \( \text{NaHCO}_3 \) को गर्म करने पर सोडियम कार्बोनेट \( \text{Na}_2\text{CO}_3 \), पानी और कार्बन डाइऑक्साइड गैस बनती है। यह प्रतिक्रिया खाना पकाने में काम आती है, जिससे चीजें फूलती हैं।

🎯 Exam Tip: बेकिंग सोडा का रासायनिक नाम सोडियम हाइड्रोजन कार्बोनेट है, और इसे गर्म करने पर यह टूटकर सोडियम कार्बोनेट बनाता है।

 

Question 7. कोई विलयन अंडे के पिसे हुए कवच से अभिक्रिया कर एक गैस उत्पन्न करता है जो चूने के पानी को दूधिया कर देती है तो इस विलयन में निम्नलिखित में से कौनसा यौगिक होगा?
(अ) \( \text{NaCl} \)
(ब) \( \text{HCl} \)
(स) \( \text{LiCl} \)
(द) \( \text{KCl} \)
Answer: (ब) \( \text{HCl} \)
In simple words: अंडे का कवच कैल्शियम कार्बोनेट से बना होता है। जब कोई अम्ल कैल्शियम कार्बोनेट से क्रिया करता है, तो कार्बन डाइऑक्साइड गैस निकलती है। हाइड्रोक्लोरिक अम्ल \( \text{HCl} \) एक प्रबल अम्ल है जो यह क्रिया करता है।

🎯 Exam Tip: कार्बन डाइऑक्साइड गैस की पहचान यह है कि यह चूने के पानी को दूधिया कर देती है, जो कैल्शियम कार्बोनेट बनने के कारण होता है।

 

Question 8. तनु सल्फ्यूरिक अम्ल की क्रिया निम्न में से किससे कराने पर हाइड्रोजन गैस निकलती है?
(अ) \( \text{Zn} \)
(ब) \( \text{Mg} \)
Answer: (ब) \( \text{Mg} \)
In simple words: मैग्नीशियम \( \text{Mg} \) एक सक्रिय धातु है। जब यह तनु सल्फ्यूरिक अम्ल \( \text{H}_2\text{SO}_4 \) से क्रिया करती है, तो हाइड्रोजन गैस \( \text{H}_2 \) निकलती है। जिंक \( \text{Zn} \) भी इसी तरह से अभिक्रिया करके हाइड्रोजन गैस देता है।

🎯 Exam Tip: सक्रिय धातुएँ अम्लों से क्रिया करके हाइड्रोजन गैस देती हैं; यह धातुओं की अम्लों से अभिक्रिया का एक महत्वपूर्ण गुण है।

 

Question 1. बेकिंग पाउडर के निर्माण में प्रयुक्त प्रमुख घटक लिखिए।
Answer: बेकिंग पाउडर कई चीजों से मिलकर बनता है। इसके मुख्य घटक बेकिंग सोडा (सोडियम हाइड्रोजन कार्बोनेट) और एक हल्का खाद्य अम्ल जैसे टार्टरिक अम्ल होते हैं। यह मिश्रण पानी के संपर्क में आने पर कार्बन डाइऑक्साइड गैस छोड़ता है।
In simple words: बेकिंग पाउडर में बेकिंग सोडा और एक खाद्य एसिड होता है। यह खाने को फुलाने में मदद करता है।

🎯 Exam Tip: बेकिंग पाउडर में टार्टरिक अम्ल बेकिंग सोडा के क्षारीय स्वाद को खत्म करने में मदद करता है, जिससे खाने का स्वाद अच्छा रहता है।

 

Question 2. दो अम्लीय ऑक्साइडों के नाम लिखिए जिनके द्वारा अम्ल वर्षा होती है।
Answer: दो अम्लीय ऑक्साइड जिनके कारण अम्ल वर्षा होती है, वे हैं सल्फर डाइऑक्साइड (\( \text{SO}_2 \)) और नाइट्रोजन डाइऑक्साइड (\( \text{NO}_2 \))। ये वायुमंडल में पानी के साथ मिलकर सल्फ्यूरिक अम्ल और नाइट्रिक अम्ल बनाते हैं, जिससे बारिश का पानी अम्लीय हो जाता है।
In simple words: सल्फर डाइऑक्साइड और नाइट्रोजन डाइऑक्साइड ऐसे ऑक्साइड हैं जिनसे अम्लीय वर्षा होती है। ये हवा में पानी से मिलकर एसिड बनाते हैं।

🎯 Exam Tip: अम्ल वर्षा पर्यावरण के लिए हानिकारक होती है, क्योंकि यह इमारतों, पानी के स्रोतों और पौधों को नुकसान पहुँचाती है।

 

Question 4. हाइड्रोजन आयन की सान्द्रता मापने की विधि किस वैज्ञानिक द्वारा दी गई थी?
Answer: हाइड्रोजन आयन की सान्द्रता मापने की विधि डेनिश रसायनज्ञ सोरेन सोरेनसन (Søren Sørensen) द्वारा दी गई थी। उन्होंने 1909 में pH स्केल की अवधारणा पेश की, जिससे अम्लता और क्षारीयता को मापना आसान हो गया।
In simple words: pH स्केल, जो हाइड्रोजन आयनों को मापता है, सोरेनसन नाम के वैज्ञानिक ने बनाया था।

🎯 Exam Tip: सोरेनसन ने pH शब्द का अर्थ "पोटेंशियल ऑफ़ हाइड्रोजन" (हाइड्रोजन की शक्ति) बताया।

 

Question 5. टमाटर के रस का pH कितना होता है?
Answer: टमाटर का रस अम्लीय प्रकृति का होता है। इसके रस का pH मान आमतौर पर 4.0 से 4.4 के बीच होता है। यह अम्लीय pH टमाटर में मौजूद विभिन्न अम्लों जैसे साइट्रिक अम्ल और मैलिक अम्ल के कारण होता है।
In simple words: टमाटर का रस थोड़ा अम्लीय होता है, और इसका pH मान 4.0 से 4.4 के आसपास होता है।

🎯 Exam Tip: फल और सब्जियों में प्राकृतिक रूप से मौजूद अम्ल उनके स्वाद और संरक्षण में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।

 

Question 6. मनुष्य के मूत्र के pH का मान बताइए।
Answer: मनुष्य के मूत्र का pH मान आमतौर पर 5.5 से 7.5 के बीच होता है। यह मान आहार, शरीर के चयापचय और गुर्दे के कार्य पर निर्भर करता है, लेकिन सामान्यतः यह थोड़ा अम्लीय या उदासीन होता है।
In simple words: इंसान के पेशाब का pH मान 5.5 से 7.5 के बीच होता है। यह हल्का एसिडिक या न्यूट्रल हो सकता है।

🎯 Exam Tip: शरीर का pH संतुलन बनाए रखना स्वास्थ्य के लिए बहुत महत्वपूर्ण है, और गुर्दे इसमें अहम भूमिका निभाते हैं।

 

Question 7. \( \text{Zn} \) की \( \text{NaOH} \) विलयन से क्रिया करवाने पर \( \text{H}_2 \) गैस प्राप्त होती है। इस अभिक्रिया का समीकरण लिखिए।
Answer: जब जिंक धातु सोडियम हाइड्रॉक्साइड (\( \text{NaOH} \)) के विलयन से क्रिया करती है, तो हाइड्रोजन गैस (\( \text{H}_2 \)) निकलती है। यह एक महत्वपूर्ण अभिक्रिया है जहाँ एक धातु एक प्रबल क्षार से क्रिया करती है। अभिक्रिया का समीकरण इस प्रकार है:
\( \text{Zn}(\text{s}) + 2\text{NaOH}(\text{aq}) \rightarrow \text{Na}_2\text{ZnO}_2(\text{aq}) + \text{H}_2(\text{g}) \)
यहाँ \( \text{Na}_2\text{ZnO}_2 \) को सोडियम जिंकेट कहते हैं।
In simple words: जिंक जब सोडियम हाइड्रॉक्साइड से मिलता है, तो हाइड्रोजन गैस और सोडियम जिंकेट बनता है।

🎯 Exam Tip: यह अभिक्रिया दर्शाती है कि कुछ धातुएँ, जैसे जिंक और एल्यूमीनियम, अम्लों के साथ-साथ क्षारों से भी क्रिया कर सकती हैं।

 

Question 8. धातुओं के ऑक्साइड की प्रकृति सामान्यतः कैसी होती है? दो उदाहरण दीजिए।
Answer: धातुओं के ऑक्साइड सामान्यतः क्षारीय प्रकृति के होते हैं। जब ये ऑक्साइड पानी में घुलते हैं, तो वे क्षार बनाते हैं। उदाहरण के लिए, कैल्शियम ऑक्साइड (\( \text{CaO} \)) और मैग्नीशियम ऑक्साइड (\( \text{MgO} \)) धातुओं के क्षारीय ऑक्साइड हैं।
In simple words: धातुओं के ऑक्साइड आमतौर पर क्षारीय होते हैं। जैसे कैल्शियम ऑक्साइड और मैग्नीशियम ऑक्साइड।

🎯 Exam Tip: धातु ऑक्साइड क्षारीय होते हैं, जबकि अधातु ऑक्साइड अम्लीय होते हैं; यह एक सामान्य रासायनिक नियम है।

 

Question 9. प्रबल अम्लों तथा प्रबल क्षारों के दो-दो उदाहरण दीजिए।
Answer: प्रबल अम्ल वे होते हैं जो पानी में पूरी तरह से आयनित हो जाते हैं और अधिक हाइड्रोजन आयन (\( \text{H}^+ \)) छोड़ते हैं, जबकि प्रबल क्षार वे होते हैं जो पानी में पूरी तरह से आयनित होकर अधिक हाइड्रॉक्सिल आयन (\( \text{OH}^- \)) छोड़ते हैं।
दो प्रबल अम्ल हैं: हाइड्रोक्लोरिक अम्ल (\( \text{HCl} \)) और सल्फ्यूरिक अम्ल (\( \text{H}_2\text{SO}_4 \))।
दो प्रबल क्षार हैं: सोडियम हाइड्रॉक्साइड (\( \text{NaOH} \)) और पोटैशियम हाइड्रॉक्साइड (\( \text{KOH} \))।
In simple words: प्रबल अम्ल जैसे हाइड्रोक्लोरिक और सल्फ्यूरिक अम्ल होते हैं। प्रबल क्षार जैसे सोडियम हाइड्रॉक्साइड और पोटैशियम हाइड्रॉक्साइड होते हैं।

🎯 Exam Tip: प्रबल अम्ल और प्रबल क्षार बहुत प्रतिक्रियाशील होते हैं और उन्हें सावधानी से संभालना चाहिए।

 

Question 11. निम्न में से किसका pH अधिक होता है
(i) रक्त अथवा आसुत जल
(ii) जठर रस अथवा नींबू का रस?
Answer:
(i) रक्त का pH मान आसुत जल (उदासीन pH 7) की तुलना में अधिक होता है। रक्त का pH लगभग 7.35-7.45 होता है, जो इसे थोड़ा क्षारीय बनाता है।
(ii) नींबू के रस की तुलना में जठर रस का pH मान अधिक होता है। जठर रस का pH लगभग 1.2-2.0 होता है, जबकि नींबू के रस का pH लगभग 2.0-2.5 होता है, यानी जठर रस अधिक अम्लीय होता है (pH मान कम होता है)। इसलिए, नींबू के रस का pH जठर रस से अधिक होता है।
In simple words: रक्त का pH आसुत जल से ज्यादा होता है क्योंकि रक्त थोड़ा क्षारीय होता है। नींबू के रस का pH जठर रस से ज्यादा होता है क्योंकि जठर रस बहुत ज्यादा अम्लीय होता है।

🎯 Exam Tip: याद रखें कि pH स्केल पर, 7 से कम मान अधिक अम्लीयता दिखाते हैं (यानी, हाइड्रोजन आयन की सान्द्रता अधिक होती है), जबकि 7 से अधिक मान अधिक क्षारीयता दिखाते हैं।

 

Question 12. जठर रस की pH कितनी होती है?
Answer: जठर रस की pH लगभग 1.2 होती है। यह pH अत्यधिक अम्लीय होता है, जो पेट में भोजन को पचाने और हानिकारक जीवाणुओं को मारने में मदद करता है।
In simple words: हमारे पेट में मौजूद जठर रस का pH करीब 1.2 होता है, जो इसे बहुत अम्लीय बनाता है।

🎯 Exam Tip: पेट का यह अम्लीय वातावरण पेप्सिन जैसे पाचन एंजाइमों के काम करने के लिए बहुत ज़रूरी है।

 

Question 13. टमाटर में कौनसा अम्ल पाया जाता है?
Answer: टमाटर में मुख्य रूप से ऑक्सैलिक अम्ल पाया जाता है। इसके अलावा, इसमें साइट्रिक अम्ल और मैलिक अम्ल भी थोड़ी मात्रा में होते हैं, जो इसके खट्टे स्वाद में योगदान करते हैं।
In simple words: टमाटर में ऑक्सैलिक एसिड होता है। यह एक प्राकृतिक एसिड है।

🎯 Exam Tip: फलों और सब्जियों में कई तरह के कार्बनिक अम्ल होते हैं जो उनके स्वाद और पोषण मूल्य का हिस्सा होते हैं।

 

Question 14. सोडियम वर्ग के चार लवण बताइए।
Answer: सोडियम वर्ग के चार प्रमुख लवण निम्नलिखित हैं:
1. सोडियम सल्फेट (\( \text{Na}_2\text{SO}_4 \))
2. सोडियम क्लोराइड (\( \text{NaCl} \))
3. सोडियम नाइट्रेट (\( \text{NaNO}_3 \))
4. सोडियम कार्बोनेट (\( \text{Na}_2\text{CO}_3 \))
ये सभी लवण दैनिक जीवन और उद्योगों में बहुत उपयोगी होते हैं।
In simple words: सोडियम सल्फेट, सोडियम क्लोराइड, सोडियम नाइट्रेट और सोडियम कार्बोनेट सोडियम के कुछ लवण हैं।

🎯 Exam Tip: सोडियम क्लोराइड को सामान्य नमक के नाम से भी जाना जाता है और यह हमारे भोजन का एक अनिवार्य हिस्सा है।

 

Question 15. सोडियम एसीटेट का जलीय विलयन क्षारीय होता है, क्यों?
Answer: सोडियम एसीटेट (\( \text{CH}_3\text{COONa} \)) एक लवण है जो दुर्बल अम्ल (एसिटिक अम्ल, \( \text{CH}_3\text{COOH} \)) और प्रबल क्षार (सोडियम हाइड्रॉक्साइड, \( \text{NaOH} \)) से बनता है। जब यह पानी में घुलता है, तो दुर्बल अम्ल का ऋणायन (\( \text{CH}_3\text{COO}^- \)) पानी से \( \text{H}^+ \) आयन लेता है, जिससे \( \text{OH}^- \) आयन की सान्द्रता बढ़ जाती है और विलयन क्षारीय हो जाता है।
In simple words: सोडियम एसीटेट एक कमजोर एसिड और मजबूत बेस से बना नमक है। जब यह पानी में घुलता है, तो यह पानी को थोड़ा क्षारीय बना देता है।

🎯 Exam Tip: दुर्बल अम्ल और प्रबल क्षार से बने लवणों का जलीय विलयन हमेशा क्षारीय होता है क्योंकि प्रबल क्षार का प्रभाव अधिक होता है।

 

Question 17. बेकिंग सोडा के निर्माण में प्रयुक्त समीकरण लिखिए।
Answer: बेकिंग सोडा (सोडियम हाइड्रोजन कार्बोनेट, \( \text{NaHCO}_3 \)) के निर्माण के लिए अमोनिया-सोडा प्रक्रिया (सॉल्वे प्रक्रिया) का उपयोग किया जाता है। इस प्रक्रिया में, सोडियम क्लोराइड के जलीय घोल में अमोनिया और कार्बन डाइऑक्साइड गैस प्रवाहित की जाती है। समीकरण इस प्रकार है:
\( \text{NaCl} + \text{H}_2\text{O} + \text{CO}_2 + \text{NH}_3 \rightarrow \text{NH}_4\text{Cl} + \text{NaHCO}_3 \)
यहां, अमोनियम क्लोराइड (\( \text{NH}_4\text{Cl} \)) और बेकिंग सोडा (\( \text{NaHCO}_3 \)) बनते हैं।
In simple words: बेकिंग सोडा बनाने के लिए नमक, पानी, कार्बन डाइऑक्साइड और अमोनिया को मिलाते हैं। इससे अमोनियम क्लोराइड और बेकिंग सोडा बनता है।

🎯 Exam Tip: यह अभिक्रिया औद्योगिक स्तर पर बेकिंग सोडा के उत्पादन के लिए महत्वपूर्ण है।

 

Question 18. \( \text{CuSO}_4. 5\text{H}_2\text{O} \) का विशिष्ट नाम क्या है?
Answer: \( \text{CuSO}_4. 5\text{H}_2\text{O} \) का विशिष्ट नाम नीला थोथा (Blue Vitriol) है। यह कॉपर सल्फेट का पेंटाहाइड्रेट रूप है, जिसमें प्रति अणु पाँच जल के अणु जुड़े होते हैं।
In simple words: \( \text{CuSO}_4. 5\text{H}_2\text{O} \) को नीला थोथा कहते हैं।

🎯 Exam Tip: यह क्रिस्टल नीले रंग का होता है और इसका उपयोग कीटनाशक, फफूंदनाशक और रंगाई में होता है।

 

Question 19. संतरे में कौनसा अम्ल उपस्थित होता है?
Answer: संतरे में मुख्य रूप से एस्कॉर्बिक अम्ल (Ascorbic acid) उपस्थित होता है, जिसे विटामिन C के नाम से भी जाना जाता है। इसके अलावा, इसमें साइट्रिक अम्ल भी पाया जाता है, जो इसे इसका खट्टा स्वाद देता है।
In simple words: संतरे में एस्कॉर्बिक एसिड (विटामिन सी) होता है।

🎯 Exam Tip: विटामिन C शरीर के लिए एक आवश्यक पोषक तत्व है, जो रोग प्रतिरोधक क्षमता को बढ़ाता है।

 

Question 20. जिप्सम का रासायनिक नाम क्या है?
Answer: जिप्सम (\( \text{CaSO}_4. 2\text{H}_2\text{O} \)) का रासायनिक नाम कैल्शियम सल्फेट डाइहाइड्रेट है। इसमें कैल्शियम सल्फेट के एक अणु के साथ दो जल के अणु जुड़े होते हैं।
In simple words: जिप्सम का रासायनिक नाम कैल्शियम सल्फेट डाइहाइड्रेट है।

🎯 Exam Tip: जिप्सम का उपयोग प्लास्टर ऑफ पेरिस बनाने और सीमेंट उद्योग में होता है।

 

Question 21. कैल्सियम कार्बोनेट (\( \text{CaCO}_3 \)) के विभिन्न रूप कौनसे होते हैं?
Answer: कैल्शियम कार्बोनेट (\( \text{CaCO}_3 \)) प्रकृति में कई रूपों में पाया जाता है। इसके कुछ प्रमुख रूप चूना पत्थर (Lime Stone), खड़िया (Chalk) और संगमरमर (Marble) हैं। ये सभी रासायनिक रूप से कैल्शियम कार्बोनेट ही होते हैं, बस इनकी भौतिक संरचना और निर्माण प्रक्रिया अलग-अलग होती है।
In simple words: कैल्शियम कार्बोनेट के अलग-अलग रूप हैं चूना पत्थर, खड़िया और संगमरमर।

🎯 Exam Tip: ये सभी रूप निर्माण सामग्री, कला और उद्योग में बड़े पैमाने पर उपयोग किए जाते हैं।3

 

Question 22. मिल्क ऑफ मैग्नीशिया \( [\text{Mg}(\text{OH})_2] \) की pH कितनी होती है?
Answer: मिल्क ऑफ मैग्नीशिया \( [\text{Mg}(\text{OH})_2] \) की pH लगभग 10 होती है। यह एक दुर्बल क्षार है और इसका उपयोग पेट की अम्लता को कम करने के लिए एंटासिड के रूप में किया जाता है।
In simple words: मिल्क ऑफ मैग्नीशिया का pH लगभग 10 होता है। यह एक हल्का क्षारीय पदार्थ है।

🎯 Exam Tip: इसका क्षारीय गुण पेट के अतिरिक्त अम्ल को उदासीन करने में मदद करता है, जिससे एसिडिटी में राहत मिलती है।

 

Question 23. विरंजक चूर्ण का रासायनिक सूत्र लिखिए।
Answer: विरंजक चूर्ण का रासायनिक सूत्र \( \text{CaOCl}_2 \) है। इसे कैल्शियम ऑक्सीक्लोराइड भी कहते हैं। इसका उपयोग पानी को शुद्ध करने और कपड़ों को विरंजित करने में किया जाता है।
In simple words: ब्लीचिंग पाउडर का केमिकल फॉर्मूला \( \text{CaOCl}_2 \) है।

🎯 Exam Tip: विरंजक चूर्ण को शुष्क बुझे हुए चूने पर क्लोरीन गैस प्रवाहित करके बनाया जाता है।

 

Question 25. ताजे दूध का pH मान 6 होता है। इससे दही बन जाने पर इसका pH मान घटेगा या बढ़ेगा तथा क्यों ?
Answer: ताजे दूध का pH मान 6 होता है। जब दूध से दही बनता है, तो इसका pH मान घट जाएगा। ऐसा इसलिए होता है क्योंकि दूध में मौजूद लैक्टोज (दूध शर्करा) बैक्टीरिया द्वारा लैक्टिक अम्ल में बदल जाती है। लैक्टिक अम्ल एक अम्लीय पदार्थ है, जिसके बनने से दही का pH मान कम हो जाता है।
In simple words: दूध का pH 6 होता है। दही बनने पर pH कम हो जाता है, क्योंकि दही में लैक्टिक एसिड बनता है।

🎯 Exam Tip: लैक्टिक अम्ल की उपस्थिति ही दही को उसका खट्टा स्वाद देती है।

 

Question 26. यदि आप लिटमस पत्र (लाल एवं नीला) से साबुन की जाँच करें तो आपका प्रेक्षण क्या होगा?
Answer: यदि हम लाल और नीले लिटमस पत्र से साबुन की जाँच करेंगे, तो हमारा प्रेक्षण यह होगा कि साबुन का विलयन लाल लिटमस पत्र को नीला कर देगा। इसका कारण यह है कि साबुन का विलयन क्षारीय होता है। नीले लिटमस पत्र पर इसका कोई प्रभाव नहीं पड़ेगा क्योंकि वह पहले से ही नीला है।
In simple words: साबुन का पानी लाल लिटमस को नीला कर देगा, क्योंकि साबुन क्षारीय होता है। नीले लिटमस पर कोई फर्क नहीं पड़ेगा।

🎯 Exam Tip: अम्लीय विलयन नीले लिटमस को लाल करते हैं, जबकि क्षारीय विलयन लाल लिटमस को नीला करते हैं; यह अम्ल-क्षार पहचान का एक मूलभूत परीक्षण है।

 

Question 27. सोडियम स्टिएरेट का सूत्र क्या होता है ?
Answer: सोडियम स्टिएरेट का सूत्र \( \text{C}_{17}\text{H}_{35}\text{COO}^- \text{Na}^+ \) होता है। यह एक साबुन का मुख्य घटक है, जिसमें एक लंबी हाइड्रोकार्बन श्रृंखला और एक आयनिक सिर होता है। यह पानी में घुलनशील होता है और सफाई के लिए मिसेल बनाता है।
In simple words: सोडियम स्टिएरेट का सूत्र \( \text{C}_{17}\text{H}_{35}\text{COO}^- \text{Na}^+ \) है। यह एक प्रकार का साबुन है।

🎯 Exam Tip: यह लंबी श्रृंखला वाला अणु सफाई क्रिया में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है, क्योंकि यह तेल और गंदगी को घेर लेता है।

 

Question 1. निम्नलिखित को सुमेलित कीजिए
(i) ब्लीचिंग पाउडर (A) \( \text{CaSO}_4. 2\text{H}_2\text{O} \)
(ii) जिप्सम (B) \( (\text{NH}_4)_2\text{CO}_3 \)
(iii) अमोनियम कार्बोनेट (C) \( \text{CaOCl}_2 \)
Answer:
(i) (C) ब्लीचिंग पाउडर का रासायनिक सूत्र \( \text{CaOCl}_2 \) है। यह एक विरंजन एजेंट है।
(ii) (A) जिप्सम का रासायनिक सूत्र \( \text{CaSO}_4. 2\text{H}_2\text{O} \) है। इसका उपयोग प्लास्टर ऑफ पेरिस बनाने में होता है।
(iii) (B) अमोनियम कार्बोनेट का रासायनिक सूत्र \( (\text{NH}_4)_2\text{CO}_3 \) है। इसका उपयोग बेकिंग पाउडर में होता है।
In simple words: ब्लीचिंग पाउडर \( \text{CaOCl}_2 \) है। जिप्सम \( \text{CaSO}_4. 2\text{H}_2\text{O} \) है। अमोनियम कार्बोनेट \( (\text{NH}_4)_2\text{CO}_3 \) है।

🎯 Exam Tip: इन यौगिकों के रासायनिक नाम और सूत्र को याद रखना बहुत महत्वपूर्ण है क्योंकि ये रसायन विज्ञान में अक्सर पूछे जाते हैं।

 

Question 2. निम्नलिखित को सुमेलित कीजिए
(i) लेक्टिक अम्ल (A) संतरा में
(ii) एसीटिक अम्ल (B) दही में
Answer:
(i) (B) लेक्टिक अम्ल दही में पाया जाता है। दूध से दही बनने की प्रक्रिया में लेक्टिक अम्ल बनता है, जिससे दही को उसका खट्टा स्वाद मिलता है।
(ii) (Not available) एसीटिक अम्ल सिरके में पाया जाता है, न कि संतरा में। संतरा में मुख्य रूप से साइट्रिक अम्ल और एस्कॉर्बिक अम्ल (विटामिन सी) होता है।
In simple words: लैक्टिक एसिड दही में होता है। एसिटिक एसिड सिरके में होता है, संतरे में नहीं।

🎯 Exam Tip: विभिन्न खाद्य पदार्थों में पाए जाने वाले अम्लों को जानना सामान्य ज्ञान और वैज्ञानिक समझ के लिए महत्वपूर्ण है।

 

Question 1. (अ) pH पैमाने को चित्र द्वारा समझाइये। (ब) (i) कीटों के डंक मारने पर त्वचा पर जलन क्यों होती है? (ii) उदर में अम्लता बढ़ने पर राहत पाने के लिए दुर्बल क्षारकों का उपयोग क्यों किया जाता है? (माध्य. शिक्षा बोर्ड, मॉडल पेपर, 2017-18)
Answer:
(अ) pH पैमाना: pH पैमाना किसी विलयन की अम्लता या क्षारीयता को मापने का एक तरीका है। यह हाइड्रोजन आयनों की सांद्रता को दिखाता है। pH 7 उदासीन होता है, 7 से कम अम्लीय और 7 से ज्यादा क्षारीय होता है।
0 7 14 अम्लीय उदासीन क्षारीय pH स्केल
(ब) (i) कीटों के डंक मारने पर त्वचा पर जलन इसलिए होती है क्योंकि कीट (जैसे लाल चींटी) के डंक में फार्मिक अम्ल जैसे अम्लीय पदार्थ होते हैं। यह अम्ल त्वचा के संपर्क में आने पर जलन और दर्द पैदा करता है।
(ii) पेट में अत्यधिक अम्लता को कम करने के लिए दुर्बल क्षारों का उपयोग किया जाता है। ऐसा इसलिए किया जाता है क्योंकि दुर्बल क्षार (जैसे मैग्नीशियम हाइड्रॉक्साइड \( [\text{Mg}(\text{OH})_2] \)) पेट में मौजूद अतिरिक्त अम्ल को उदासीन कर देते हैं। इससे पेट में जलन और दर्द से राहत मिलती है, और वे पेट की परत को नुकसान नहीं पहुँचाते।
In simple words: (अ) pH स्केल अम्लता और क्षारीयता को मापता है। 7 उदासीन है, 7 से कम अम्लीय और 7 से ज्यादा क्षारीय है। (ब) (i) कीटों के डंक में एसिड होता है, जिससे जलन होती है। (ii) पेट की एसिडिटी कम करने के लिए हल्के क्षार (जैसे मिल्क ऑफ मैग्नीशिया) का उपयोग करते हैं, क्योंकि वे एसिड को शांत करते हैं।

🎯 Exam Tip: pH स्केल पर हाइड्रोजन आयन (\( \text{H}^+ \)) की सांद्रता जितनी अधिक होती है, pH मान उतना ही कम होता है, और अम्लता उतनी ही अधिक होती है।

 

Question 2. निम्नलिखित में से कौन प्रबल अम्ल एवं प्रबल क्षार है?
(अ) ऐसीटिक अम्ल अथवा हाइड्रोक्लोरिक अम्ल
(ब) सोडियम हाइड्रॉक्साइड अथवा कैल्सियम हाइड्रॉक्साइड।
Answer:
(अ) हाइड्रोक्लोरिक अम्ल (\( \text{HCl} \)) प्रबल अम्ल है, जबकि ऐसीटिक अम्ल (\( \text{CH}_3\text{COOH} \)) दुर्बल अम्ल है।
(ब) सोडियम हाइड्रॉक्साइड (\( \text{NaOH} \)) प्रबल क्षार है, जबकि कैल्सियम हाइड्रॉक्साइड \( [\text{Ca}(\text{OH})_2] \) दुर्बल क्षार है।
In simple words: हाइड्रोक्लोरिक अम्ल एक मजबूत एसिड है। सोडियम हाइड्रॉक्साइड एक मजबूत क्षार है।

🎯 Exam Tip: प्रबल अम्ल और क्षार पानी में पूरी तरह से आयनित होते हैं, जबकि दुर्बल अम्ल और क्षार आंशिक रूप से आयनित होते हैं।

 

Question 3. pH स्केल किसे कहते हैं? स्पष्ट करो कि मुँह का pH परिवर्तन दन्त क्षय का कारण है।
Answer: pH स्केल किसी विलयन में हाइड्रोजन आयनों (\( \text{H}^+ \)) की सांद्रता के ऋणात्मक लघुगणक को दर्शाता है। यह अम्लता या क्षारीयता का माप है। हमारे मुँह का pH आमतौर पर 6.5 के आसपास होता है। जब हम भोजन करते हैं, खासकर मीठी चीजें, तो मुँह में मौजूद बैक्टीरिया भोजन के अवशेषों को तोड़कर अम्ल बनाते हैं। इससे मुँह का pH कम हो जाता है। यदि pH मान 5.5 से कम हो जाता है, तो दाँतों के इनेमल (जो कैल्शियम फॉस्फेट से बना होता है) का क्षय होना शुरू हो जाता है। यही कारण है कि भोजन के बाद दाँतों को साफ करना महत्वपूर्ण है।
In simple words: pH स्केल बताता है कि कोई चीज कितनी अम्लीय या क्षारीय है। जब हम खाना खाते हैं, तो मुँह में एसिड बनता है, जो pH को कम कर देता है। अगर pH बहुत कम हो जाए, तो दाँत खराब होने लगते हैं।

🎯 Exam Tip: दाँतों को स्वस्थ रखने के लिए भोजन के बाद टूथब्रश या क्षारीय माउथवॉश का उपयोग करके मुँह के pH को संतुलित रखना महत्वपूर्ण है।

 

Question 4. (अ) सोडियम हाइड्राक्साइड की जिंक धातु से होने वाली क्रिया से निकलने वाली गैस का नाम लिखिए। अभिक्रिया का समीकरण भी लिखिए। (ब) निम्नलिखित में किसका उपयोग किया जाता है? (i) पीने के जल को जीवाणुओं से मुक्त करने के लिए (ii) रसोईघर में स्वादिष्ट खस्ता पकौड़े बनाने में। (iii) जल की स्थाई कठोरता दूर करने में । (iv) खिलौने तथा सजावट का सामान बनाने में।
Answer:
(अ) जब सोडियम हाइड्रॉक्साइड (\( \text{NaOH} \)) जिंक धातु (\( \text{Zn} \)) से क्रिया करती है, तो हाइड्रोजन गैस (\( \text{H}_2 \)) निकलती है।
अभिक्रिया का समीकरण:
\( 2\text{NaOH}(\text{aq}) + \text{Zn}(\text{s}) \rightarrow \text{Na}_2\text{ZnO}_2(\text{aq}) + \text{H}_2(\text{g}) \uparrow \)
यहां, \( \text{Na}_2\text{ZnO}_2 \) सोडियम जिंकेट है।
(ब) (i) पीने के जल को जीवाणुओं से मुक्त करने के लिए विरंजक चूर्ण (\( \text{CaOCl}_2 \)) का उपयोग किया जाता है।
(ii) रसोईघर में स्वादिष्ट खस्ता पकौड़े बनाने में बेकिंग सोडा (\( \text{NaHCO}_3 \)) का उपयोग होता है।
(iii) जल की स्थाई कठोरता दूर करने में धोने का सोडा (\( \text{Na}_2\text{CO}_3 \cdot 10\text{H}_2\text{O} \)) का उपयोग किया जाता है।
(iv) खिलौने तथा सजावट का सामान बनाने में प्लास्टर ऑफ पेरिस (\( \text{CaSO}_4 \cdot \frac{1}{2}\text{H}_2\text{O} \)) का उपयोग होता है।
In simple words: (अ) जिंक और सोडियम हाइड्रॉक्साइड से हाइड्रोजन गैस निकलती है। (ब) (i) पानी साफ करने के लिए ब्लीचिंग पाउडर। (ii) पकौड़े बनाने के लिए बेकिंग सोडा। (iii) पानी की कठोरता दूर करने के लिए वॉशिंग सोडा। (iv) खिलौने बनाने के लिए प्लास्टर ऑफ पेरिस।

🎯 Exam Tip: इन रसायनों के उपयोगों को याद रखना महत्वपूर्ण है क्योंकि वे दैनिक जीवन और औद्योगिक प्रक्रियाओं में अक्सर उपयोग होते हैं।

 

Question 5. स्तम्भ A से B को सुमेलित कीजिए
A
(i) प्रबल अम्ल
(ii) दुर्बल अम्ल
(iii) प्रति अम्ल
(iv) प्रबल क्षार
(v) दुर्बल क्षार
(vi) उदासीन लवण
(vii) अम्लीय लवण
(viii) क्षारीय लवण
B
(a) \( \text{NaCl} \)
(b) \( \text{NH}_4\text{Cl} \)
(c) \( \text{Na}_2\text{CO}_3 \)
(d) \( \text{NaOH} \)
(e) \( \text{CH}_3\text{COOH} \)
(f) \( \text{H}_2\text{SO}_4 \)
(g) \( \text{NH}_4\text{OH} \)
(h) मिल्क ऑफ मैग्नेशिया
Answer:
(i) (f) प्रबल अम्ल: \( \text{H}_2\text{SO}_4 \) (सल्फ्यूरिक अम्ल)
(ii) (e) दुर्बल अम्ल: \( \text{CH}_3\text{COOH} \) (एसिटिक अम्ल)
(iii) (h) प्रति अम्ल: मिल्क ऑफ मैग्नेशिया (\( \text{Mg}(\text{OH})_2 \))
(iv) (d) प्रबल क्षार: \( \text{NaOH} \) (सोडियम हाइड्रॉक्साइड)
(v) (g) दुर्बल क्षार: \( \text{NH}_4\text{OH} \) (अमोनियम हाइड्रॉक्साइड)
(vi) (a) उदासीन लवण: \( \text{NaCl} \) (सोडियम क्लोराइड)
(vii) (b) अम्लीय लवण: \( \text{NH}_4\text{Cl} \) (अमोनियम क्लोराइड)
(viii) (c) क्षारीय लवण: \( \text{Na}_2\text{CO}_3 \) (सोडियम कार्बोनेट)
In simple words: प्रबल अम्ल सल्फ्यूरिक एसिड है। दुर्बल अम्ल एसिटिक एसिड है। प्रति अम्ल मिल्क ऑफ मैग्नीशिया है। प्रबल क्षार सोडियम हाइड्रॉक्साइड है। दुर्बल क्षार अमोनियम हाइड्रॉक्साइड है। उदासीन लवण सोडियम क्लोराइड है। अम्लीय लवण अमोनियम क्लोराइड है। क्षारीय लवण सोडियम कार्बोनेट है।

🎯 Exam Tip: लवणों की प्रकृति (उदासीन, अम्लीय या क्षारीय) उन अम्ल और क्षारों की शक्ति पर निर्भर करती है जिनसे वे बने होते हैं।

 

Question 6. विज्ञान की प्रयोगशाला में उपस्थित हाइड्रोक्लोरिक अम्ल (\( \text{HCl} \)), सल्फ्यूरिक अम्ल (\( \text{H}_2\text{SO}_4 \)), नाइट्रिक अम्ल (\( \text{HNO}_3 \)), ऐसीटिक अम्ल (\( \text{CH}_3\text{COOH} \)), सोडियम हाइड्रॉक्साइड (\( \text{NaOH} \)), कैल्सियम हाइड्रॉक्साइड \( [\text{Ca}(\text{OH})_2] \)), पोटैशियम हाइड्रॉक्साइड (\( \text{KOH} \)), मैग्नीशियम हाइड्रॉक्साइड \( [\text{Mg}(\text{OH})_2] \) एवं अमोनियम हाइड्रॉक्साइड (\( \text{NH}_4\text{OH} \)) में से अम्ल तथा क्षार छाँटिए।
Answer: सूचीबद्ध यौगिकों में से अम्ल और क्षार इस प्रकार हैं:
**अम्ल:**
1. हाइड्रोक्लोरिक अम्ल (\( \text{HCl} \))
2. सल्फ्यूरिक अम्ल (\( \text{H}_2\text{SO}_4 \))
3. नाइट्रिक अम्ल (\( \text{HNO}_3 \))
4. ऐसीटिक अम्ल (\( \text{CH}_3\text{COOH} \))
**क्षार:**
1. सोडियम हाइड्रॉक्साइड (\( \text{NaOH} \))
2. कैल्सियम हाइड्रॉक्साइड \( [\text{Ca}(\text{OH})_2] \)
3. पोटैशियम हाइड्रॉक्साइड (\( \text{KOH} \))
4. मैग्नीशियम हाइड्रॉक्साइड \( [\text{Mg}(\text{OH})_2] \)
5. अमोनियम हाइड्रॉक्साइड (\( \text{NH}_4\text{OH} \))
In simple words: अम्ल हैं हाइड्रोक्लोरिक, सल्फ्यूरिक, नाइट्रिक और एसिटिक अम्ल। क्षार हैं सोडियम हाइड्रॉक्साइड, कैल्शियम हाइड्रॉक्साइड, पोटैशियम हाइड्रॉक्साइड, मैग्नीशियम हाइड्रॉक्साइड और अमोनियम हाइड्रॉक्साइड।

🎯 Exam Tip: अम्ल वे पदार्थ होते हैं जो \( \text{H}^+ \) आयन देते हैं, जबकि क्षार वे पदार्थ होते हैं जो \( \text{OH}^- \) आयन देते हैं या \( \text{H}^+ \) आयन स्वीकार करते हैं।

 

Question 7. आपको तीन परखनलियाँ दी गई हैं। इनमें से एक में आसवित जल एवं शेष दो में से एक में अम्लीय विलयन तथा दूसरे में क्षारीय विलयन है। यदि आपको केवल लाल लिटमस पत्र दिया जाता है तो आप प्रत्येक परखनली में रखे गए पदार्थों की पहचान कैसे करेंगे?
Answer: यदि हमें केवल लाल लिटमस पत्र दिया गया है, तो हम तीनों परखनलियों में रखे पदार्थों की पहचान इस प्रकार कर सकते हैं:
1. सबसे पहले, तीनों परखनलियों में से प्रत्येक विलयन में लाल लिटमस पत्र को डालें। जिस परखनली में लाल लिटमस पत्र नीला हो जाएगा, वह विलयन निश्चित रूप से क्षारीय होगा। यह लाल लिटमस पत्र को नीले लिटमस पत्र में बदल देगा।
2. अब इस नीले हुए लिटमस पत्र का उपयोग करें। इसे शेष दो परखनलियों में डालें। जिस परखनली में यह नीला लिटमस पत्र फिर से लाल हो जाएगा, वह विलयन अम्लीय होगा।
3. तीसरी परखनली में बचा हुआ विलयन आसवित जल होगा। आसवित जल उदासीन होता है, इसलिए यह लाल या नीले किसी भी लिटमस पत्र पर कोई प्रभाव नहीं डालेगा।
In simple words: पहले लाल लिटमस से क्षारीय घोल पहचानें (जो इसे नीला कर देगा)। फिर उस नीले लिटमस से अम्लीय घोल पहचानें (जो इसे वापस लाल कर देगा)। बचा हुआ घोल आसवित जल होगा, जो लिटमस पर कोई असर नहीं दिखाएगा।

🎯 Exam Tip: लिटमस पत्र का रंग बदलना अम्लीय और क्षारीय विलयनों को पहचानने का एक सरल और प्रभावी तरीका है।

 

Question 8. कोई धातु यौगिक 'A' तनु हाइड्रोक्लोरिक अम्ल के साथ अभिक्रिया करता है तो बुदबुदाहट उत्पन्न होती है। इससे उत्पन्न गैस जलती हुई मोमबत्ती को बुझा देती है। यदि उत्पन्न यौगिकों में एक कैल्सियम क्लोराइड है तो इस अभिक्रिया के लिए संतुलित रासायनिक समीकरण लिखिए।
Answer: दी गई जानकारी के अनुसार, धातु यौगिक 'A' कैल्शियम कार्बोनेट (\( \text{CaCO}_3 \)) होगा।
- यह तनु हाइड्रोक्लोरिक अम्ल (\( \text{HCl} \)) के साथ क्रिया करके बुदबुदाहट उत्पन्न करता है।
- निकलने वाली गैस कार्बन डाइऑक्साइड (\( \text{CO}_2 \)) है, जो जलती हुई मोमबत्ती को बुझा देती है (कार्बन डाइऑक्साइड आग बुझाने वाली गैस है)।
- उत्पन्न यौगिकों में से एक कैल्शियम क्लोराइड (\( \text{CaCl}_2 \)) है, जो कैल्शियम युक्त यौगिक 'A' से बनता है।
अभिक्रिया का संतुलित रासायनिक समीकरण इस प्रकार है:
\( \text{CaCO}_3(\text{s}) + 2\text{HCl}(\text{aq}) \rightarrow \text{CaCl}_2(\text{aq}) + \text{H}_2\text{O}(\text{l}) + \text{CO}_2(\text{g}) \uparrow \)
In simple words: यौगिक 'A' कैल्शियम कार्बोनेट है। जब यह हाइड्रोक्लोरिक एसिड से मिलता है, तो कार्बन डाइऑक्साइड गैस निकलती है, जो आग बुझा देती है, और कैल्शियम क्लोराइड बनता है।

🎯 Exam Tip: कार्बोनेट और हाइड्रोजनकार्बोनेट अम्लों से अभिक्रिया करके कार्बन डाइऑक्साइड गैस बनाते हैं, जो चूने के पानी को दूधिया कर देती है।

 

Question 10. शुष्क हाइड्रोक्लोरिक गैस शुष्क लिटमस पत्र के रंग को क्यों नहीं बदलती है?
Answer: शुष्क हाइड्रोक्लोरिक गैस शुष्क लिटमस पत्र के रंग को नहीं बदलती है क्योंकि अम्लीय गुण दिखाने के लिए हाइड्रोजन आयनों (\( \text{H}^+ \)) का मुक्त होना आवश्यक है। शुष्क \( \text{HCl} \) गैस में \( \text{H}^+ \) आयन नहीं बन पाते क्योंकि वहाँ पानी मौजूद नहीं होता। पानी की अनुपस्थिति में \( \text{HCl} \) आयनित नहीं होता और इसलिए अम्लीय व्यवहार प्रदर्शित नहीं करता।
In simple words: सूखी हाइड्रोक्लोरिक गैस सूखे लिटमस का रंग नहीं बदलती क्योंकि उसे अम्लीय गुण दिखाने के लिए पानी चाहिए ताकि वह हाइड्रोजन आयन बना सके।

🎯 Exam Tip: किसी भी अम्ल को अम्लीय गुण दिखाने के लिए जल में \( \text{H}^+ \) आयन देना अनिवार्य होता है।

 

Question 11. अम्ल को तनुकृत करते समय यह क्यों अनुशंसित करते हैं कि अम्ल को जल में मिलाना चाहिए, न कि जल को अम्ल में?
Answer: अम्ल को तनुकृत करते समय हमेशा अम्ल को धीरे-धीरे जल में मिलाना चाहिए, न कि जल को अम्ल में। ऐसा इसलिए किया जाता है क्योंकि अम्ल को जल में मिलाने की प्रक्रिया बहुत अधिक ऊष्माक्षेपी (गर्मी पैदा करने वाली) होती है। यदि जल को सीधे अम्ल में मिलाया जाए, तो बहुत अधिक गर्मी अचानक से उत्पन्न होगी। इससे मिश्रण उछलकर बाहर आ सकता है, जिससे त्वचा जल सकती है। साथ ही, स्थानीय तापमान में वृद्धि के कारण काँच का पात्र टूट भी सकता है। इसके विपरीत, अम्ल को धीरे-धीरे जल में मिलाने से उत्पन्न ऊष्मा को जल द्वारा आसानी से अवशोषित कर लिया जाता है।
In simple words: एसिड को पानी में मिलाते समय हमेशा धीरे-धीरे एसिड को पानी में डालना चाहिए। अगर पानी को सीधे एसिड में डाला जाए, तो बहुत गर्मी निकल सकती है जिससे खतरा हो सकता है।

🎯 Exam Tip: तनुकरण की यह प्रक्रिया सुरक्षा कारणों से अत्यंत महत्वपूर्ण है, खासकर सांद्र अम्लों के साथ काम करते समय।

 

Question 12. सोडियम हाइड्रोजन कार्बोनेट के विलयन को गर्म करने पर क्या होगा? इस अभिक्रिया के लिए समीकरण लिखिए।
Answer: जब सोडियम हाइड्रोजन कार्बोनेट (\( \text{NaHCO}_3 \)) के विलयन को गर्म किया जाता है, तो यह टूटकर सोडियम कार्बोनेट (\( \text{Na}_2\text{CO}_3 \)), जल (\( \text{H}_2\text{O} \)) और कार्बन डाइऑक्साइड गैस (\( \text{CO}_2 \)) बनाता है। यह अभिक्रिया बेकिंग सोडा के गुणों में से एक है और खाना पकाने में इसका उपयोग इसी गुण के कारण होता है।
अभिक्रिया का समीकरण इस प्रकार है:
\( 2\text{NaHCO}_3(\text{aq}) \xrightarrow{\text{गरम करने पर}} \text{Na}_2\text{CO}_3(\text{aq}) + \text{H}_2\text{O}(\text{l}) + \text{CO}_2(\text{g}) \uparrow \)
In simple words: सोडियम हाइड्रोजन कार्बोनेट को गर्म करने पर यह सोडियम कार्बोनेट, पानी और कार्बन डाइऑक्साइड गैस में बदल जाता है।

🎯 Exam Tip: निकलने वाली कार्बन डाइऑक्साइड गैस के बुलबुले केक और ब्रेड को फुलाने में मदद करते हैं, जिससे वे नरम और स्पंजी बनते हैं।

 

Question 13. क्या क्षारकीय विलयन में \( \text{H}^+\text{(aq)} \) आयन होते हैं? अगर हाँ, तो यह क्षारकीय क्यों होता है?
Answer: हाँ, क्षारकीय विलयन में \( \text{H}^+\text{(aq)} \) आयन होते हैं। हालांकि, क्षारकीय विलयन में \( \text{H}^+\text{(aq)} \) आयन स्वतंत्र अवस्था में बहुत कम मात्रा में होते हैं। एक विलयन तब क्षारीय होता है जब उसमें हाइड्रॉक्सिल आयनों (\( \text{OH}^-\text{(aq)} \)) की सांद्रता हाइड्रोजन आयनों (\( \text{H}^+\text{(aq)} \)) की सांद्रता से अधिक होती है। जल का स्वतः आयनीकरण (\( \text{H}_2\text{O} \rightleftharpoons \text{H}^+ + \text{OH}^- \)) हमेशा होता रहता है, इसलिए \( \text{H}^+ \) और \( \text{OH}^- \) आयन दोनों हर जलीय विलयन में मौजूद होते हैं।
In simple words: हाँ, क्षारीय घोल में भी थोड़े \( \text{H}^+ \) आयन होते हैं। लेकिन \( \text{OH}^- \) आयन उनसे ज्यादा होते हैं, इसलिए घोल क्षारीय होता है।

🎯 Exam Tip: pH स्केल पर, क्षारीय विलयनों का pH मान 7 से अधिक होता है, जो \( \text{OH}^- \) आयनों की अधिकता को दर्शाता है।

 

Question 15. निम्न अभिक्रियाओं के लिए पहले शब्द-समीकरण तथा संतुलित समीकरण लिखिए (a) तनु सल्फ्यूरिक अम्ल दानेदार जिंक के साथ अभिक्रिया करता है। (b) तनु हाइड्रोक्लोरिक अम्ल मैग्नीशियम के फीते के साथ अभिक्रिया करता है। (c) तनु सल्फ्यूरिक अम्ल ऐलुमिनियम चूर्ण के साथ अभिक्रिया करता है। (d) तनु हाइड्रोक्लोरिक अम्ल लौह चूर्ण के साथ अभिक्रिया करता है।
Answer: यहाँ दी गई अभिक्रियाओं के शब्द-समीकरण और संतुलित समीकरण इस प्रकार हैं:
(a) **शब्द-समीकरण:** जिंक + तनु सल्फ्यूरिक अम्ल \( \rightarrow \) जिंक सल्फेट + हाइड्रोजन गैस
**संतुलित समीकरण:** \( \text{Zn}(\text{s}) + \text{H}_2\text{SO}_4(\text{aq}) \rightarrow \text{ZnSO}_4(\text{aq}) + \text{H}_2(\text{g}) \uparrow \)
(b) **शब्द-समीकरण:** मैग्नीशियम + तनु हाइड्रोक्लोरिक अम्ल \( \rightarrow \) मैग्नीशियम क्लोराइड + हाइड्रोजन गैस
**संतुलित समीकरण:** \( \text{Mg}(\text{s}) + 2\text{HCl}(\text{aq}) \rightarrow \text{MgCl}_2(\text{aq}) + \text{H}_2(\text{g}) \uparrow \)
(c) **शब्द-समीकरण:** ऐलुमिनियम + तनु सल्फ्यूरिक अम्ल \( \rightarrow \) ऐलुमिनियम सल्फेट + हाइड्रोजन गैस
**संतुलित समीकरण:** \( 2\text{Al}(\text{s}) + 3\text{H}_2\text{SO}_4(\text{aq}) \rightarrow \text{Al}_2(\text{SO}_4)_3(\text{aq}) + 3\text{H}_2(\text{g}) \uparrow \)
(d) **शब्द-समीकरण:** लोहा + तनु हाइड्रोक्लोरिक अम्ल \( \rightarrow \) फेरस क्लोराइड + हाइड्रोजन गैस
**संतुलित समीकरण:** \( \text{Fe}(\text{s}) + 2\text{HCl}(\text{aq}) \rightarrow \text{FeCl}_2(\text{aq}) + \text{H}_2(\text{g}) \uparrow \)
In simple words: (a) जिंक और सल्फ्यूरिक अम्ल से जिंक सल्फेट और हाइड्रोजन गैस बनती है। (b) मैग्नीशियम और हाइड्रोक्लोरिक अम्ल से मैग्नीशियम क्लोराइड और हाइड्रोजन गैस बनती है। (c) एल्यूमीनियम और सल्फ्यूरिक अम्ल से एल्यूमीनियम सल्फेट और हाइड्रोजन गैस बनती है। (d) लोहा और हाइड्रोक्लोरिक अम्ल से फेरस क्लोराइड और हाइड्रोजन गैस बनती है।

🎯 Exam Tip: यह अभिक्रियाएँ बताती हैं कि सक्रिय धातुएँ अम्लों के साथ क्रिया करके हाइड्रोजन गैस मुक्त करती हैं, जो एक सामान्य विस्थापन अभिक्रिया है।

 

Question 16. आसवित जल विद्युत का चालक नहीं होता जबकि वर्षा का जल होता है, क्यों?
Answer: आसवित जल विद्युत का चालक नहीं होता क्योंकि यह बहुत शुद्ध होता है और इसमें कोई आयन नहीं होते। विद्युत के चालन के लिए आयनों का होना आवश्यक है। इसके विपरीत, वर्षा का जल विद्युत का चालक होता है क्योंकि इसमें वायुमंडल से घुली हुई अशुद्धियाँ (जैसे कार्बन डाइऑक्साइड और अन्य गैसें) होती हैं। ये अशुद्धियाँ पानी में घुलने पर आयन बनाती हैं, जैसे \( \text{H}^+ \) और \( \text{HCO}_3^- \), जो विद्युत के चालन में मदद करते हैं। इसी कारण वर्षा का जल थोड़ा अम्लीय भी होता है।
In simple words: शुद्ध पानी बिजली नहीं चलाता क्योंकि उसमें कोई आयन नहीं होते। बारिश का पानी बिजली चलाता है क्योंकि उसमें हवा से मिले हुए आयन होते हैं।

🎯 Exam Tip: आयनों की उपस्थिति ही किसी घोल में विद्युत चालकता के लिए जिम्मेदार होती है।

 

Question 17. जल की अनुपस्थिति में अम्ल अपना अम्लीय व्यवहार प्रदर्शित नहीं करता, क्यों?
Answer: जल की अनुपस्थिति में अम्ल अपना अम्लीय व्यवहार प्रदर्शित नहीं करता क्योंकि अम्लीय व्यवहार के लिए हाइड्रोजन आयनों (\( \text{H}^+ \)) का मुक्त होना आवश्यक है। अम्ल केवल जल में घुलने पर ही आयनित होते हैं और \( \text{H}^+ \) आयन (या हाइड्रोनियम आयन \( \text{H}_3\text{O}^+ \)) उत्पन्न करते हैं। यदि जल मौजूद न हो, तो अम्ल आयनित नहीं हो पाएगा और इसलिए उसका अम्लीय गुण भी दिखाई नहीं देगा।
In simple words: एसिड बिना पानी के अम्लीय नहीं होता। इसे अपने अम्लीय गुण दिखाने के लिए पानी में हाइड्रोजन आयन बनाने होते हैं।

🎯 Exam Tip: जल की भूमिका अम्लों और क्षारों की रासायनिक क्रियाओं में मौलिक होती है, क्योंकि यह आयनीकरण के लिए माध्यम प्रदान करता है।

 

Question 18. पाँच विलयनों A, B, C, D तथा E की जब सार्वत्रिक सूचक से जाँच की जाती है तो pH के मान क्रमशः 4,1, 11, 7 एवं 9 प्राप्त होते हैं, तो कौन-सा विलयन- (a) उदासीन है? (b) प्रबल क्षारीय है? (c) प्रबल अम्लीय है? (d) दुर्बल अम्लीय है? (e) दुर्बल क्षारीय है? pH के मानों को हाइड्रोजन आयन की सांद्रता के आरोही क्रम में व्यवस्थित कीजिए।
Answer: दिए गए pH मानों के आधार पर विलयनों की प्रकृति इस प्रकार है:
(a) उदासीन विलयन: pH 7 वाला विलयन D उदासीन है।
(b) प्रबल क्षारीय विलयन: pH 11 वाला विलयन C प्रबल क्षारीय है।
(c) प्रबल अम्लीय विलयन: pH 1 वाला विलयन B प्रबल अम्लीय है।
(d) दुर्बल अम्लीय विलयन: pH 4 वाला विलयन A दुर्बल अम्लीय है।
(e) दुर्बल क्षारीय विलयन: pH 9 वाला विलयन E दुर्बल क्षारीय है।
हाइड्रोजन आयन की सान्द्रता के आरोही क्रम (सबसे कम से सबसे अधिक) में pH मानों को व्यवस्थित करना होगा। चूँकि pH मान हाइड्रोजन आयन की सान्द्रता के व्युत्क्रमानुपाती होता है (कम pH का मतलब अधिक \( \text{H}^+ \) आयन), तो pH के बढ़ते क्रम में \( \text{H}^+ \) आयन की सान्द्रता घटती जाएगी।
pH मानों का आरोही क्रम: 1, 4, 7, 9, 11
हाइड्रोजन आयन सान्द्रता का आरोही क्रम (यानी, pH का घटता क्रम):
विलयन C (pH 11) < विलयन E (pH 9) < विलयन D (pH 7) < विलयन A (pH 4) < विलयन B (pH 1)
In simple words: D उदासीन (pH 7) है। C बहुत क्षारीय (pH 11) है। B बहुत अम्लीय (pH 1) है। A हल्का अम्लीय (pH 4) है। E हल्का क्षारीय (pH 9) है। हाइड्रोजन आयन की मात्रा के हिसाब से, सबसे कम आयन C में और सबसे ज्यादा B में हैं।

🎯 Exam Tip: pH मान जितना कम होता है, हाइड्रोजन आयन की सान्द्रता उतनी ही अधिक होती है और विलयन उतना ही अधिक अम्लीय होता है।

 

Question 19. परखनली 'A' एवं 'B' में समान लंबाई का मैग्नीशियम का फीता लेकर परखनली 'A' में हाइड्रोक्लोरिक अम्ल (\( \text{HCl} \)) तथा परखनली B' में ऐसिटिक अम्ल (\( \text{CH}_3\text{COOH} \)) डालने पर किस परखनली में अधिक तेजी से बुदबुदाहट होगी तथा क्यों?
Answer: परखनली 'A' में अधिक तेजी से बुदबुदाहट होगी। ऐसा इसलिए है क्योंकि हाइड्रोक्लोरिक अम्ल (\( \text{HCl} \)) एक प्रबल अम्ल है, जबकि ऐसीटिक अम्ल (\( \text{CH}_3\text{COOH} \)) एक दुर्बल अम्ल है। दोनों ही अम्ल मैग्नीशियम धातु से क्रिया करके हाइड्रोजन गैस (\( \text{H}_2 \)) उत्पन्न करते हैं, जिससे बुदबुदाहट होती है। लेकिन प्रबल अम्ल होने के कारण \( \text{HCl} \) पानी में पूरी तरह से आयनित होकर अधिक \( \text{H}^+ \) आयन बनाता है, जिससे मैग्नीशियम के साथ अभिक्रिया की दर ऐसीटिक अम्ल की तुलना में बहुत तेज होती है।
In simple words: परखनली 'A' में तेज बुदबुदाहट होगी क्योंकि उसमें हाइड्रोक्लोरिक एसिड है, जो एक मजबूत एसिड है। यह मैग्नीशियम से तेजी से क्रिया करके ज्यादा हाइड्रोजन गैस बनाता है।

🎯 Exam Tip: अभिक्रिया की दर अम्लों की शक्ति पर निर्भर करती है; प्रबल अम्ल अधिक तेजी से अभिक्रिया करते हैं क्योंकि वे अधिक \( \text{H}^+ \) आयन प्रदान करते हैं।

 

Question 20. ताजे दूध के pH का मान 6 होता है। दही बन जाने पर इसके pH के मान में क्या परिवर्तन होगा?
Answer: ताजे दूध का pH मान 6 होता है, जो इसे हल्का अम्लीय बनाता है। जब दूध से दही बनता है, तो इसका pH मान 6 से कम हो जाएगा। दही बनने की प्रक्रिया में दूध में मौजूद लैक्टोज शर्करा, लैक्टिक अम्ल में बदल जाती है। लैक्टिक अम्ल एक अम्लीय पदार्थ है, जिसके कारण दही का pH मान कम होकर लगभग 4-5 के बीच आ जाता है। pH मान में यह कमी दही की बढ़ती अम्लीयता को दर्शाती है।
In simple words: दूध का pH 6 होता है। जब वह दही बन जाता है, तो उसका pH कम हो जाएगा क्योंकि लैक्टिक एसिड बनने से वह और अम्लीय हो जाता है।

🎯 Exam Tip: लैक्टिक एसिड की मात्रा जितनी अधिक होगी, दही उतना ही अधिक खट्टा होगा और उसका pH मान उतना ही कम होगा।

 

Question 22. प्लास्टर ऑफ पेरिस को नमी-रोधी बर्तन में क्यों रखा जाना चाहिए?
Answer: प्लास्टर ऑफ पेरिस (\( \text{CaSO}_4 \cdot \frac{1}{2}\text{H}_2\text{O} \)) को नमी-रोधी बर्तन में रखना चाहिए क्योंकि यह नमी (जल) के संपर्क में आने पर तेजी से जल के अणुओं से क्रिया करता है। यह क्रिया करके कठोर ठोस पदार्थ जिप्सम (\( \text{CaSO}_4 \cdot 2\text{H}_2\text{O} \)) में बदल जाता है। एक बार जिप्सम बनने के बाद, यह अपनी प्लास्टिसिटी खो देता है, जिससे इसका उपयोग नहीं किया जा सकता।
अभिक्रिया का समीकरण:
\( \text{CaSO}_4 \cdot \frac{1}{2}\text{H}_2\text{O} \text{ (प्लास्टर ऑफ पेरिस)} + 1\frac{1}{2}\text{H}_2\text{O} \rightarrow \text{CaSO}_4 \cdot 2\text{H}_2\text{O} \text{ (जिप्सम)} \)
In simple words: प्लास्टर ऑफ पेरिस को नमी से दूर रखना चाहिए। अगर इसमें पानी मिल जाए, तो यह कठोर जिप्सम बन जाता है और किसी काम का नहीं रहता।

🎯 Exam Tip: यह जलयोजन अभिक्रिया (Hydration Reaction) प्लास्टर ऑफ पेरिस के जमने का कारण है, जो मूर्तियों और टूटी हड्डियों को जोड़ने में इसके उपयोग के लिए महत्वपूर्ण है।

 

Question 23. धातुओं की अम्ल तथा क्षार से अभिक्रिया कैसे होती है? क्या यह सभी अम्लों से होती है? उदाहरण सहित समझाइए।
Answer:
**अम्लों से धातुओं की अभिक्रिया:** धातुएँ अम्लों से क्रिया करके लवण और हाइड्रोजन गैस (\( \text{H}_2 \)) बनाती हैं। इस अभिक्रिया को विस्थापन अभिक्रिया कहते हैं, जहाँ धातु अम्ल से हाइड्रोजन को विस्थापित करती है।
शब्द-समीकरण: अम्ल + धातु \( \rightarrow \) लवण + हाइड्रोजन गैस
उदाहरण: जब मैग्नीशियम तनु सल्फ्यूरिक अम्ल से क्रिया करता है:
\( \text{Mg}(\text{s}) + \text{H}_2\text{SO}_4(\text{aq}) \rightarrow \text{MgSO}_4(\text{aq}) + \text{H}_2(\text{g}) \uparrow \)
सभी धातुएँ अम्लों से क्रिया नहीं करती हैं। केवल सक्रिय धातुएँ (जो हाइड्रोजन से अधिक अभिक्रियाशील होती हैं) ही अम्लों से हाइड्रोजन गैस देती हैं। कम अभिक्रियाशील धातुएँ जैसे ताँबा, चाँदी और सोना अम्लों से क्रिया नहीं करतीं।
**क्षारों से धातुओं की अभिक्रिया:** कुछ सक्रिय धातुएँ, जैसे जिंक (\( \text{Zn} \)) और एल्यूमीनियम (\( \text{Al} \)), क्षारों से भी क्रिया करके हाइड्रोजन गैस और लवण बनाती हैं।
उदाहरण: जब जिंक सोडियम हाइड्रॉक्साइड से क्रिया करता है:
\( \text{Zn}(\text{s}) + 2\text{NaOH}(\text{aq}) \rightarrow \text{Na}_2\text{ZnO}_2(\text{aq}) + \text{H}_2(\text{g}) \uparrow \)
सभी धातुएँ क्षारों से क्रिया नहीं करती हैं, केवल उभयधर्मी धातुएँ ही ऐसा करती हैं।
In simple words: धातुएँ अम्लों से क्रिया करके हाइड्रोजन गैस और नमक बनाती हैं, लेकिन केवल सक्रिय धातुएँ ही ऐसा करती हैं। कुछ धातुएँ क्षारों से भी क्रिया करके हाइड्रोजन गैस और नमक बनाती हैं, जैसे जिंक।

🎯 Exam Tip: धातुओं की अभिक्रियाशीलता श्रृंखला यह निर्धारित करती है कि कौन सी धातुएँ अम्लों से हाइड्रोजन विस्थापित कर सकती हैं।

 

Question 24. धातु कार्बोनेट (\( \text{Na}_2\text{CO}_3 \)) तथा धातु हाइड्रोजन कार्बोनेट (\( \text{NaHCO}_3 \)) की तनु \( \text{HCl} \) से क्रिया करवाने पर कौनसी गैस बनती है तथा इसे चूने के पानी में प्रवाहित करने पर क्या होता है? समीकरण सहित समझाइए।
Answer: जब धातु कार्बोनेट (\( \text{Na}_2\text{CO}_3 \)) या धातु हाइड्रोजन कार्बोनेट (\( \text{NaHCO}_3 \)) तनु हाइड्रोक्लोरिक अम्ल (\( \text{HCl} \)) से क्रिया करते हैं, तो कार्बन डाइऑक्साइड गैस (\( \text{CO}_2 \)) बनती है। इसके साथ ही लवण और जल भी बनते हैं।
**अभिक्रियाएँ:**
1. सोडियम कार्बोनेट के साथ:
\( \text{Na}_2\text{CO}_3(\text{s}) + 2\text{HCl}(\text{aq}) \rightarrow 2\text{NaCl}(\text{aq}) + \text{H}_2\text{O}(\text{l}) + \text{CO}_2(\text{g}) \uparrow \)
2. सोडियम हाइड्रोजन कार्बोनेट के साथ:
\( \text{NaHCO}_3(\text{s}) + \text{HCl}(\text{aq}) \rightarrow \text{NaCl}(\text{aq}) + \text{H}_2\text{O}(\text{l}) + \text{CO}_2(\text{g}) \uparrow \)
जब इस उत्पन्न \( \text{CO}_2 \) गैस को चूने के पानी (\( \text{Ca}(\text{OH})_2 \)) में प्रवाहित किया जाता है, तो चूने का पानी दूधिया हो जाता है। ऐसा कैल्शियम कार्बोनेट (\( \text{CaCO}_3 \)) के बनने के कारण होता है।
\( \text{Ca}(\text{OH})_2(\text{aq}) + \text{CO}_2(\text{g}) \rightarrow \text{CaCO}_3(\text{s}) \downarrow + \text{H}_2\text{O}(\text{l}) \)
यदि अधिक \( \text{CO}_2 \) गैस प्रवाहित की जाती है, तो दूधियापन गायब हो जाता है क्योंकि कैल्शियम हाइड्रोजन कार्बोनेट (\( \text{Ca}(\text{HCO}_3)_2 \)) बनता है, जो पानी में घुलनशील होता है।
\( \text{CaCO}_3(\text{s}) + \text{H}_2\text{O}(\text{l}) + \text{CO}_2(\text{g}) \rightarrow \text{Ca}(\text{HCO}_3)_2(\text{aq}) \)
In simple words: धातु कार्बोनेट या हाइड्रोजन कार्बोनेट जब एसिड से मिलते हैं, तो कार्बन डाइऑक्साइड गैस निकलती है। यह गैस चूने के पानी को दूधिया कर देती है।

🎯 Exam Tip: कार्बन डाइऑक्साइड गैस की पहचान के लिए चूने के पानी का परीक्षण एक मानक प्रयोगशाला विधि है।

 

Question 25. धात्विक ऑक्साइड की प्रकृति अम्लीय होती है या क्षारीय? इनकी अम्ल से क्रिया कराने पर क्या होगा? उदाहरण सहित समझाइए।
Answer: धात्विक ऑक्साइड सामान्यतः क्षारीय प्रकृति के होते हैं। ऐसा इसलिए है क्योंकि वे अम्लों से क्रिया करके लवण और जल बनाते हैं, ठीक वैसे ही जैसे क्षार अम्लों से क्रिया करते हैं।
जब धात्विक ऑक्साइड को अम्ल से क्रिया कराई जाती है, तो वे उदासीन हो जाते हैं और लवण तथा जल बनाते हैं।
शब्द-समीकरण: धातु ऑक्साइड + अम्ल \( \rightarrow \) लवण + जल
उदाहरण: जब कॉपर ऑक्साइड (\( \text{CuO} \)) हाइड्रोक्लोरिक अम्ल (\( \text{HCl} \)) से क्रिया करता है:
\( \text{CuO}(\text{s}) + 2\text{HCl}(\text{aq}) \rightarrow \text{CuCl}_2(\text{aq}) \text{ (नील हरित रंग)} + \text{H}_2\text{O}(\text{l}) \)
यहाँ कॉपर ऑक्साइड क्षारीय प्रकृति का होने के कारण हाइड्रोक्लोरिक अम्ल के साथ अभिक्रिया करके कॉपर (II) क्लोराइड (लवण) और जल बनाता है।
In simple words: धातु ऑक्साइड आमतौर पर क्षारीय होते हैं। जब वे एसिड से मिलते हैं, तो नमक और पानी बनाते हैं। जैसे, कॉपर ऑक्साइड एसिड से मिलकर कॉपर क्लोराइड और पानी बनाता है।

🎯 Exam Tip: इस अभिक्रिया का उपयोग धातु ऑक्साइडों की क्षारीय प्रकृति को सिद्ध करने के लिए किया जाता है।

 

Question 26. \( \text{CO}_2 \) जो कि कार्बन (अधातु) को ऑक्साइड है, क्षार \( \text{Ca}(\text{OH})_2 \) से क्रिया करके लवण व जल बनाता है। इससे क्या सिद्ध होता है?
Answer: जब कार्बन डाइऑक्साइड (\( \text{CO}_2 \)), जो कि कार्बन (एक अधातु) का ऑक्साइड है, कैल्शियम हाइड्रॉक्साइड (\( \text{Ca}(\text{OH})_2 \)) (एक क्षार) से क्रिया करके कैल्शियम कार्बोनेट (\( \text{CaCO}_3 \)) (लवण) और जल (\( \text{H}_2\text{O} \)) बनाता है, तो यह सिद्ध होता है कि अधातुओं के ऑक्साइड अम्लीय प्रकृति के होते हैं।
यह अभिक्रिया अम्ल और क्षार के बीच होने वाली अभिक्रिया के समान है (अम्लीय ऑक्साइड + क्षार \( \rightarrow \) लवण + जल)।
अभिक्रिया का समीकरण:
\( \text{CO}_2(\text{g}) + \text{Ca}(\text{OH})_2(\text{aq}) \rightarrow \text{CaCO}_3(\text{s}) \downarrow + \text{H}_2\text{O}(\text{l}) \)
In simple words: कार्बन डाइऑक्साइड एक अधातु का ऑक्साइड है। जब यह क्षार से मिलता है और नमक व पानी बनाता है, तो इससे पता चलता है कि अधातु ऑक्साइड अम्लीय होते हैं।

🎯 Exam Tip: यह अभिक्रिया चूने के पानी के दूधिया होने का कारण भी है, जिसका उपयोग \( \text{CO}_2 \) की पहचान के लिए किया जाता है।

 

Question 27. अम्ल एवं क्षार की शक्ति किस पर निर्भर करती है? प्रबल एवं दुर्बल अम्ल तथा प्रबल एवं दुर्बल क्षार से क्या अभिप्राय है?
Answer: अम्ल एवं क्षार की शक्ति उनके जलीय विलयन में क्रमशः हाइड्रोजन आयनों (\( \text{H}^+ \)) और हाइड्रॉक्सिल आयनों (\( \text{OH}^- \)) की सांद्रता पर निर्भर करती है।
**प्रबल अम्ल:** वे अम्ल जो जलीय विलयन में पूरी तरह से आयनित होकर अधिक मात्रा में \( \text{H}^+ \) आयन उत्पन्न करते हैं, प्रबल अम्ल कहलाते हैं। उदाहरण: हाइड्रोक्लोरिक अम्ल (\( \text{HCl} \)), सल्फ्यूरिक अम्ल (\( \text{H}_2\text{SO}_4 \))।
**दुर्बल अम्ल:** वे अम्ल जो जलीय विलयन में आंशिक रूप से आयनित होकर कम मात्रा में \( \text{H}^+ \) आयन उत्पन्न करते हैं, दुर्बल अम्ल कहलाते हैं। उदाहरण: ऐसीटिक अम्ल (\( \text{CH}_3\text{COOH} \)), कार्बोनिक अम्ल (\( \text{H}_2\text{CO}_3 \))।
**प्रबल क्षार:** वे क्षार जो जलीय विलयन में पूरी तरह से आयनित होकर अधिक मात्रा में \( \text{OH}^- \) आयन उत्पन्न करते हैं, प्रबल क्षार कहलाते हैं। उदाहरण: सोडियम हाइड्रॉक्साइड (\( \text{NaOH} \)), पोटैशियम हाइड्रॉक्साइड (\( \text{KOH} \))।
**दुर्बल क्षार:** वे क्षार जो जलीय विलयन में आंशिक रूप से आयनित होकर कम मात्रा में \( \text{OH}^- \) आयन उत्पन्न करते हैं, दुर्बल क्षार कहलाते हैं। उदाहरण: अमोनियम हाइड्रॉक्साइड (\( \text{NH}_4\text{OH} \)), मैग्नीशियम हाइड्रॉक्साइड (\( \text{Mg}(\text{OH})_2 \))।
In simple words: अम्ल और क्षार कितने मजबूत हैं, यह इस बात पर निर्भर करता है कि वे पानी में कितने \( \text{H}^+ \) या \( \text{OH}^- \) आयन छोड़ते हैं। जो ज्यादा आयन छोड़ते हैं, वे प्रबल होते हैं; जो कम छोड़ते हैं, वे दुर्बल होते हैं।

🎯 Exam Tip: pH स्केल भी अम्ल और क्षार की शक्ति को दर्शाता है; कम pH प्रबल अम्ल और अधिक pH प्रबल क्षार को इंगित करता है।

 

Question 29. (a) हाइड्रोजन आयन की सान्द्रता ज्ञात करने में प्रयुक्त स्केल का नाम लिखिए।
(b) अम्ल वर्षा का कारण तथा इसके दो कुप्रभावों को लिखिए।
Answer:
(a) हाइड्रोजन आयन की सान्द्रता मापने के लिए pH स्केल का उपयोग किया जाता है। यह स्केल किसी घोल में हाइड्रोजन आयनों की मात्रा बताता है, जिससे हमें पता चलता है कि घोल कितना अम्लीय या क्षारीय है।
(b) अम्ल वर्षा तब होती है जब वर्षा के पानी का pH मान 5.6 से कम हो जाता है। यह आमतौर पर हवा में मौजूद प्रदूषकों, जैसे सल्फर डाइऑक्साइड और नाइट्रोजन ऑक्साइड के कारण होती है, जो बारिश के पानी के साथ मिलकर अम्ल बनाते हैं।
अम्ल वर्षा के दो मुख्य कुप्रभाव हैं:
(i) जब अम्ल वर्षा का पानी नदियों में जाता है, तो नदियों का pH मान कम हो जाता है। इससे पानी में रहने वाले जीव-जन्तुओं को नुकसान पहुँचता है और उनका जीवन मुश्किल हो जाता है।
(ii) अम्ल वर्षा के संपर्क में आने से हमारी त्वचा पर खुजली या जलन जैसे रोग हो सकते हैं। यह इमारतों और मूर्तियों को भी नुकसान पहुँचाती है, क्योंकि अम्ल धातुओं और पत्थरों से क्रिया करते हैं।
In simple words: pH स्केल हाइड्रोजन आयनों को मापता है। अम्ल वर्षा तब होती है जब बारिश का पानी अम्लीय हो जाता है, जिससे नदियों के जीव-जन्तुओं को और हमारी त्वचा को नुकसान होता है।

🎯 Exam Tip: pH स्केल की परिभाषा और अम्ल वर्षा के कारणों व प्रभावों को याद रखना महत्वपूर्ण है, क्योंकि ये अक्सर पूछे जाते हैं। उदाहरणों के साथ स्पष्टीकरण दें।

 

Question 30. Zn धातु की तनु H2SO4, से होने वाली रासायनिक अभिक्रिया का नामांकित चित्र बनाइए। (माध्य. शिक्षा बोर्ड, 2018)
Answer:

गैस के बुलबुले साबुन का विलयन दानेदार जिंक के टुकड़े तनु सल्फ्यूरिक अम्ल- (H2SO4) हाइड्रोजन गैस से भरे साबुन के बुलबुले \( \text{Zn} + \text{H}_2\text{SO}_4 \rightarrow \text{ZnSO}_4 + \text{H}_2\uparrow \)
इस चित्र में दिखाया गया है कि जब जिंक धातु (दानेदार) पर तनु सल्फ्यूरिक अम्ल डाला जाता है, तो एक रासायनिक अभिक्रिया होती है। इस अभिक्रिया से हाइड्रोजन गैस निकलती है। यह गैस साबुन के विलयन से गुज़रकर बुलबुले बनाती है। जब इन बुलबुलों को आग के पास लाया जाता है, तो 'फट-फट' की ध्वनि के साथ गैस जलती है, जिससे हाइड्रोजन की पुष्टि होती है।
In simple words: जिंक और सल्फ्यूरिक अम्ल मिलाने पर हाइड्रोजन गैस बनती है। यह गैस बुलबुले बनाती है और आग के पास 'फट-फट' आवाज़ करके जलती है।

🎯 Exam Tip: इस प्रयोग का नामांकित चित्र बनाना और हाइड्रोजन गैस की पहचान को 'पॉप' ध्वनि के साथ जोड़ना महत्वपूर्ण है। रासायनिक समीकरण को संतुलित रूप में लिखना भी याद रखें।

 

Question 31. अम्ल-क्षार की ब्रांस्टेड-लोरी संकल्पना की कमी बताइए।
Answer: ब्रांस्टेड-लोरी की अम्ल-क्षार संकल्पना की मुख्य कमी यह है कि यह उन अम्लों और क्षारों के बारे में ठीक से नहीं बताती है जिनमें प्रोटॉन (H+) शामिल नहीं होते। यह CO2, SO2, BF3, Cl- जैसे यौगिकों के अम्लीय या क्षारीय गुणों को समझा नहीं पाती। इन यौगिकों में प्रोटॉन देने या लेने की क्षमता नहीं होती, इसलिए ब्रांस्टेड-लोरी सिद्धांत इन पर लागू नहीं होता। इसी वजह से बाद में अम्ल-क्षार के लिए एक नई इलेक्ट्रॉनिक संकल्पना (लुइस सिद्धांत) दी गई।
In simple words: ब्रांस्टेड-लोरी का सिद्धांत उन अम्लों और क्षारों को नहीं समझा पाता जिनमें प्रोटॉन नहीं होते। इसलिए एक नया सिद्धांत देना पड़ा।

🎯 Exam Tip: ब्रांस्टेड-लोरी सिद्धांत की सीमाओं को याद रखें, विशेषकर उन यौगिकों के उदाहरण जो इस सिद्धांत से स्पष्ट नहीं होते, जैसे CO2 और BF3. इससे आप लुइस सिद्धांत की आवश्यकता को समझ सकते हैं।

 

Question 32. बेकिंग सोडा (NaHCO3) के गुण बताइए।
Answer: बेकिंग सोडा (सोडियम हाइड्रोजन कार्बोनेट) के मुख्य गुणधर्म इस प्रकार हैं:
(i) बेकिंग सोडा एक सफेद क्रिस्टल जैसा ठोस पदार्थ होता है। यह इसका भौतिक रूप है।
(ii) यह पानी में बहुत कम घुलता है। यानी, यह पानी में पूरी तरह से नहीं घुलता, बल्कि आंशिक रूप से घुलता है।
(iii) इसका पानी में घोल क्षारीय होता है। इसका मतलब है कि जब इसे पानी में घोला जाता है, तो घोल का pH मान 7 से अधिक होता है।
(iv) बेकिंग सोडा को गर्म करने पर कार्बन डाइऑक्साइड गैस निकलती है और सोडियम कार्बोनेट (Na2CO3) बनता है।
रासायनिक अभिक्रिया: \( \text{2NaHCO}_3 \xrightarrow{\text{गर्म करने पर}} \text{Na}_2\text{CO}_3 + \text{H}_2\text{O} + \text{CO}_2\uparrow \)
In simple words: बेकिंग सोडा सफेद पाउडर जैसा होता है, पानी में कम घुलता है और इसका घोल क्षारीय होता है। इसे गर्म करने पर कार्बन डाइऑक्साइड गैस निकलती है।

🎯 Exam Tip: बेकिंग सोडा के गुणों को उसके उपयोगों से जोड़कर याद रखें, जैसे गर्म करने पर गैस निकलना इसे बेकिंग में उपयोगी बनाता है। इसके रासायनिक सूत्र और अभिक्रिया को भी ध्यान में रखें।

 

Question 33. (a) विरंजक चूर्ण की तनु अम्लों से क्रिया के समीकरण लिखिए।
(b) विरंजक चूर्ण का सूत्र लिखिए। इसकी विरंजन क्रिया को समझाइए। (माध्य. शिक्षा बोर्ड, 2018)
Answer:
(a) जब विरंजक चूर्ण तनु अम्लों से अभिक्रिया करता है, तो क्लोरीन गैस निकलती है। इसकी अभिक्रियाएँ इस प्रकार हैं:
(i) तनु सल्फ्यूरिक अम्ल के साथ:
\( \text{CaOCl}_2 + \text{H}_2\text{SO}_4 \rightarrow \text{CaSO}_4 + \text{H}_2\text{O} + \text{Cl}_2\uparrow \)
(ii) तनु हाइड्रोक्लोरिक अम्ल के साथ:
\( \text{CaOCl}_2 + \text{2HCl} \rightarrow \text{CaCl}_2 + \text{H}_2\text{O} + \text{Cl}_2\uparrow \)
(b) विरंजक चूर्ण का रासायनिक सूत्र \( \text{CaOCl}_2 \) है। इसका रासायनिक नाम कैल्शियम ऑक्सीक्लोराइड है।
विरंजन क्रिया: विरंजक चूर्ण की विरंजन क्रिया उसमें मौजूद क्लोरीन गैस के कारण होती है। जब विरंजक चूर्ण को पानी में घोला जाता है, तो यह क्लोरीन गैस छोड़ता है। यह क्लोरीन रंगीन पदार्थों के साथ क्रिया करके उन्हें रंगहीन बना देती है। असल में, क्लोरीन ऑक्सीकरण के माध्यम से रंगीन पदार्थों का रंग हटा देती है, जिससे वे विरंजित हो जाते हैं।
In simple words: विरंजक चूर्ण का सूत्र \( \text{CaOCl}_2 \) है। यह तनु अम्लों से मिलकर क्लोरीन गैस छोड़ता है। यह क्लोरीन रंगीन चीज़ों को रंगहीन बना देती है, जिससे वे सफेद हो जाती हैं।

🎯 Exam Tip: विरंजक चूर्ण का सूत्र, तनु अम्लों के साथ इसकी अभिक्रियाएँ, और इसकी विरंजन क्रिया का कारण (क्लोरिन गैस) स्पष्ट रूप से याद रखें।

 

Question 34. धावन सोडा के गुण बताइए।
Answer: धावन सोडा (सोडियम कार्बोनेट डेकाहाइड्रेट, \( \text{Na}_2\text{CO}_3 \cdot 10\text{H}_2\text{O} \)) के मुख्य गुणधर्म इस प्रकार हैं:
(i) धावन सोडा एक सफेद, क्रिस्टल जैसा ठोस पदार्थ होता है। इसके क्रिस्टलों में पानी के 10 अणु जुड़े होते हैं।
(ii) यह पानी में आसानी से घुल जाता है, जिसका मतलब है कि यह पानी में एक साफ घोल बनाता है।
(iii) इसका पानी में घोल क्षारीय होता है। इसका मतलब है कि जब इसे पानी में घोला जाता है, तो घोल का pH मान 7 से अधिक होता है।
(iv) धावन सोडा को गर्म करने पर यह अपना क्रिस्टलन जल खो देता है और सोडा एश (निर्जल सोडियम कार्बोनेट) बनाता है। यह एक महत्वपूर्ण रासायनिक परिवर्तन है।
रासायनिक अभिक्रिया: \( \text{Na}_2\text{CO}_3 \cdot 10\text{H}_2\text{O} \xrightarrow{\text{373K}} \text{Na}_2\text{CO}_3 + 10\text{H}_2\text{O} \)
In simple words: धावन सोडा सफेद क्रिस्टल जैसा ठोस है जो पानी में घुलता है और क्षारीय घोल बनाता है। इसे गर्म करने पर यह अपना पानी खो देता है।

🎯 Exam Tip: धावन सोडा का रासायनिक सूत्र, क्रिस्टलन जल के अणुओं की संख्या, और गर्म करने पर होने वाले परिवर्तन को याद रखें। इसके क्षारीय गुण भी महत्वपूर्ण हैं।

 

Question 35. बेकिंग सोडा को खाद्य पदार्थों में मिलाकर गर्म करने पर ये फूलकर हल्के हो जाते हैं, क्यों?
Answer: बेकिंग सोडा को खाद्य पदार्थों में मिलाकर गर्म करने पर वे फूलकर हल्के हो जाते हैं क्योंकि बेकिंग सोडा गर्म होने पर कार्बन डाइऑक्साइड गैस छोड़ता है। यह गैस बुलबुलों के रूप में खाद्य पदार्थ से बाहर निकलती है। ये गैस के बुलबुले खाद्य पदार्थ के अंदर छोटे-छोटे छिद्र बना देते हैं, जिससे खाद्य पदार्थ (जैसे केक या ब्रेड) फूल जाते हैं और हल्के और मुलायम हो जाते हैं। यह प्रक्रिया बेकिंग में बहुत उपयोगी होती है।
In simple words: बेकिंग सोडा को गर्म करने पर कार्बन डाइऑक्साइड गैस बनती है। यह गैस खाद्य पदार्थ को फुलाकर हल्का और मुलायम बना देती है।

🎯 Exam Tip: बेकिंग सोडा की रासायनिक अभिक्रिया को याद रखें जो गर्म करने पर कार्बन डाइऑक्साइड बनाती है। यह गैस ही खाद्य पदार्थों को फुलाने का मुख्य कारण है।

 

Question 36. क्या आप डिटरजेंट का उपयोग कर बता सकते हैं कि कोई जल कठोर है अथवा नहीं?
Answer: नहीं, हम डिटरजेंट (अपमार्जक) का उपयोग करके यह नहीं बता सकते कि कोई जल कठोर है या नहीं। ऐसा इसलिए है क्योंकि डिटरजेंट कठोर जल के साथ भी आसानी से झाग बनाते हैं और कोई अवक्षेप (मैला पदार्थ) नहीं बनाते। साबुन के विपरीत, जो कठोर जल में झाग नहीं बनाता और मैल बनाता है, डिटरजेंट कठोर जल में मौजूद कैल्शियम और मैग्नीशियम आयनों के साथ घुलनशील यौगिक बनाते हैं। इसलिए, डिटरजेंट दोनों प्रकार के जल (कठोर और मृदु) में सफाई का कार्य करते हैं।
In simple words: हम डिटरजेंट से पानी की कठोरता नहीं बता सकते। डिटरजेंट कठोर पानी में भी झाग बनाता है, जबकि साबुन नहीं बनाता।

🎯 Exam Tip: साबुन और डिटरजेंट के बीच का मुख्य अंतर याद रखें, खासकर कठोर जल में उनके व्यवहार के संबंध में। यह अंतर आपको यह समझने में मदद करेगा कि डिटरजेंट पानी की कठोरता का पता क्यों नहीं लगा सकते।

 

Question 37. लोग विभिन्न प्रकार से कपड़े धोते हैं। सामान्यतः साबुन लगाने के बाद लोग कपड़े को पत्थर पर पटकते हैं, डंडे से पीटते हैं, ब्रश से रगड़ते हैं या वाशिंग मशीन में कपड़े रगड़े जाते हैं। कपड़ा साफ करने के लिए उसे रगड़ने की आवश्यकता क्यों होती है?
Answer: कपड़े साफ करने के लिए उन्हें रगड़ने की आवश्यकता इसलिए होती है ताकि साबुन के अणु मैल और तेल के धब्बों को आसानी से हटा सकें। जब साबुन के अणु मिसेल बनाते हैं, तो ये मिसेल गंदे मैल या तेल के धब्बों को अपने अंदर घेर लेते हैं। कपड़े को रगड़ने से मिसेल के ये गुच्छे कपड़ों से गंदगी के कणों को निकालने में मदद करते हैं। यह यांत्रिक क्रिया, साबुन की रासायनिक क्रिया के साथ मिलकर, गंदगी को कपड़ों की सतह से ढीला करती है और उसे पानी में निलंबित कर देती है, जिससे कपड़े साफ हो जाते हैं।
In simple words: कपड़े रगड़ने से साबुन के मिसेल गंदगी और तेल को कपड़ों से हटा पाते हैं। यह रगड़ना साबुन को अच्छे से काम करने में मदद करता है।

🎯 Exam Tip: साबुन की सफाई क्रिया में मिसेल के निर्माण और यांत्रिक बल (रगड़ने) की भूमिका को स्पष्ट करें। मिसेल की संरचना और उसका कार्य महत्वपूर्ण है।

 

Question 38. कास्टिक सोडा के गुण बताइए।
Answer: कास्टिक सोडा (सोडियम हाइड्रॉक्साइड, NaOH) के मुख्य गुणधर्म इस प्रकार हैं:
(i) यह एक सफेद, ठोस पदार्थ होता है जो पानी में बहुत घुलनशील होता है। जब यह पानी में घुलता है, तो बहुत गर्मी पैदा करता है।
(ii) यह एक बहुत प्रबल क्षार है। इसका मतलब है कि यह पानी में पूरी तरह से आयनित होकर हाइड्रॉक्सिल आयन (\( \text{OH}^- \)) छोड़ता है, जिससे इसका घोल अत्यधिक क्षारीय हो जाता है।
(iii) यह नमीग्राही होता है, यानी यह हवा से नमी सोख लेता है। साथ ही, यह प्रस्वेद्य भी होता है, यानी हवा की नमी सोखकर यह खुद ही पानी में घुल जाता है।
(iv) कास्टिक सोडा प्रोटीन और वसा को घोल सकता है, इसलिए यह हमारी त्वचा को नुकसान पहुँचा सकता है और फिसलन भरा महसूस होता है।
(v) यह विद्युत का सुचालक है, क्योंकि इसके जलीय विलयन में आयन होते हैं।
In simple words: कास्टिक सोडा एक सफेद, ठोस और बहुत तेज़ क्षार है जो पानी में घुलता है, हवा से नमी सोखता है और त्वचा के लिए हानिकारक है।

🎯 Exam Tip: कास्टिक सोडा की प्रबल क्षारीय प्रकृति और उसके नमीग्राही गुण को याद रखें। इसके रासायनिक नाम (सोडियम हाइड्रॉक्साइड) और सूत्र (NaOH) को भी ध्यान में रखें।

 

Question 39. (i) क्या साबुन एथेनॉल में मिसेल का निर्माण करता है, यदि नहीं तो क्यों?
(ii) अपमार्जक का प्रयोग कठोर जल में भी किया जा सकता है, क्यों?
Answer:
(i) नहीं, साबुन एथेनॉल (एथिल ऐल्कोहॉल) में मिसेल का निर्माण नहीं करता है। ऐसा इसलिए होता है क्योंकि साबुन के अणु एथेनॉल में पूरी तरह से घुल जाते हैं। मिसेल के निर्माण के लिए साबुन के अणुओं को इस तरह से व्यवस्थित होना पड़ता है कि उनके जल-विरोधी सिरे एक साथ अंदर की ओर हों और जल-प्रेमी सिरे बाहर की ओर हों। एथेनॉल एक कार्बनिक विलायक है, जिसमें साबुन के अणु बिना मिसेल बनाए घुल जाते हैं।
(ii) हाँ, अपमार्जकों का प्रयोग कठोर जल में भी किया जा सकता है। अपमार्जक लंबी कार्बन श्रृंखला वाले सोडियम ऐल्किल सल्फेट या सोडियम ऐल्किल बेंजीन सल्फोनेट होते हैं। कठोर जल में मौजूद कैल्शियम (\( \text{Ca}^{2+} \)) और मैग्नीशियम (\( \text{Mg}^{2+} \)) आयन, अपमार्जक के सोडियम आयनों को हटाकर कैल्शियम या मैग्नीशियम सल्फोनेट बनाते हैं। ये सल्फोनेट पानी में घुलनशील होते हैं और अवक्षेप नहीं बनाते। इसलिए, अपमार्जक कठोर जल में भी झाग बनाते हैं और सफाई का काम बिना किसी बाधा के करते हैं।
In simple words: साबुन एथेनॉल में मिसेल नहीं बनाता क्योंकि वह उसमें घुल जाता है। अपमार्जक कठोर पानी में भी काम करते हैं क्योंकि वे घुलनशील यौगिक बनाते हैं।

🎯 Exam Tip: मिसेल बनने के लिए एक विशेष विलायक की आवश्यकता होती है। साबुन के एथेनॉल में घुलने और अपमार्जक के कठोर जल में प्रभावी होने का कारण उनके रासायनिक गुणों से जुड़ा है।

 

Question 40. साबुन कठोर जल में सफाई का कार्य नहीं करते हैं, क्यों?
Answer: साबुन कठोर जल में सफाई का कार्य ठीक से नहीं कर पाते हैं। कठोर जल में कैल्शियम (\( \text{Ca}^{2+} \)) और मैग्नीशियम (\( \text{Mg}^{2+} \)) जैसे खनिज आयन होते हैं। जब साबुन को कठोर जल में मिलाया जाता है, तो साबुन में मौजूद सोडियम आयन (\( \text{Na}^+ \)) इन कैल्शियम और मैग्नीशियम आयनों से बदल जाते हैं। इससे कैल्शियम और मैग्नीशियम के अघुलनशील लवण (साबुन का मैल) बनते हैं। ये अघुलनशील लवण पानी में अवक्षेप के रूप में जमा हो जाते हैं, जिससे झाग नहीं बन पाता और सफाई की क्रिया बाधित होती है। इसलिए, कठोर जल में सफाई के लिए अधिक साबुन की आवश्यकता होती है और फिर भी वह प्रभावी नहीं होता।
In simple words: कठोर पानी में मौजूद खनिज साबुन के साथ मिलकर मैल बनाते हैं। यह मैल झाग बनने से रोकता है और साबुन को सफाई करने से रोकता है।

🎯 Exam Tip: कठोर जल में मौजूद कैल्शियम और मैग्नीशियम आयनों और साबुन के साथ उनके अघुलनशील लवण बनाने की प्रक्रिया को याद रखें। यही साबुन के अप्रभावी होने का कारण है।

 

Question 41. जीवन के विभिन्न क्षेत्रों में रसायनों के उपयोग का वर्णन कीजिए।
Answer: रसायन हमारे जीवन के लगभग हर क्षेत्र में बहुत महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। हमारे शरीर में होने वाली सभी जैविक क्रियाएँ भी रसायनों द्वारा ही नियंत्रित होती हैं।
दैनिक जीवन में उपयोग: साबुन, अपमार्जक, कपड़े, और घर में इस्तेमाल होने वाली कई चीजें रासायनिक पदार्थ ही हैं।
निर्माण क्षेत्र: भवन निर्माण में सीमेंट एक महत्वपूर्ण रसायन है।
उद्योग: बिजली के उपकरण, उपग्रह, और मोटर वाहन बनाने में भी रसायनों का उपयोग होता है।
कृषि: कृषि क्षेत्र में उर्वरक, कीटनाशक, और खरपतवारनाशक जैसे रसायन पौधों की वृद्धि और सुरक्षा के लिए आवश्यक हैं।
चिकित्सा: विभिन्न बीमारियों के इलाज के लिए इस्तेमाल की जाने वाली दवाएँ भी रसायन ही हैं।
खाद्य उद्योग: खाद्य पदार्थों को सुरक्षित रखने और उनमें स्वाद बढ़ाने के लिए कई रसायनों का मिश्रण किया जाता है, जैसे परिरक्षक।
संक्षेप में, रसायनों के बिना आधुनिक दैनिक जीवन की कल्पना भी नहीं की जा सकती है।
In simple words: रसायन हमारे जीवन के हर हिस्से में हैं, जैसे साबुन, दवाएँ, खेती और इमारतें। इनके बिना हमारा आधुनिक जीवन संभव नहीं।

🎯 Exam Tip: रसायनों के उपयोगों को विभिन्न क्षेत्रों (दैनिक जीवन, कृषि, चिकित्सा, उद्योग) में वर्गीकृत करके याद रखें। प्रत्येक क्षेत्र से कम से कम दो उदाहरण दें।

 

Question 42. (a) तनु तथा सान्द्र अम्ल या क्षार क्या होते हैं?
Answer:
(a) **तनु अम्ल या क्षार (Dilute Acid or Base):** तनु अम्ल या क्षार वे होते हैं जिनमें अम्ल या क्षार की मात्रा कम होती है और पानी (विलायक) की मात्रा बहुत अधिक होती है। इनमें प्रति इकाई आयतन में H+ (अम्ल के लिए) या OH- (क्षार के लिए) आयनों की सान्द्रता कम होती है। उदाहरण के लिए, तनु हाइड्रोक्लोरिक अम्ल या तनु सोडियम हाइड्रॉक्साइड।
**सान्द्र अम्ल या क्षार (Concentrated Acid or Base):** सान्द्र अम्ल या क्षार वे होते हैं जिनमें अम्ल या क्षार की मात्रा अधिक होती है और पानी की मात्रा बहुत कम होती है। इनमें प्रति इकाई आयतन में H+ या OH- आयनों की सान्द्रता बहुत अधिक होती है। उदाहरण के लिए, सान्द्र सल्फ्यूरिक अम्ल या सान्द्र सोडियम हाइड्रॉक्साइड। सान्द्र अम्ल और क्षार बहुत प्रतिक्रियाशील होते हैं और त्वचा के संपर्क में आने पर गंभीर क्षति पहुँचा सकते हैं।
In simple words: तनु अम्ल/क्षार में अम्ल/क्षार कम और पानी ज़्यादा होता है। सान्द्र अम्ल/क्षार में अम्ल/क्षार ज़्यादा और पानी कम होता है, और वे बहुत शक्तिशाली होते हैं।

🎯 Exam Tip: तनु और सान्द्र शब्दों का अर्थ घोल में विलेय (अम्ल/क्षार) की सापेक्ष मात्रा से जोड़कर याद रखें। सुरक्षा सावधानियों पर भी ध्यान दें, खासकर सान्द्र रसायनों के साथ।

 

Question 43. (i) अम्ल-क्षार की आरेनियस संकल्पना की कमियाँ बताइए।
(ii) संयुग्मी अम्ल-क्षार युग्म किसे कहते हैं? उदाहरण सहित समझाइए।
Answer:
(i) आरेनियस की अम्ल-क्षार संकल्पना की मुख्य कमियाँ:
(a) यह केवल उन अम्लों और क्षारों के लिए सही है जो पानी में घुलते हैं और H+ या OH- आयन बनाते हैं।
(b) यह उन पदार्थों के अम्लीय या क्षारीय गुणों को नहीं समझा पाती जिनमें H+ आयन (जैसे CO2, SO2) या OH- आयन (जैसे NH3, CaO) नहीं होते, लेकिन फिर भी वे अम्लीय या क्षारीय व्यवहार दिखाते हैं।
(c) यह उन अभिक्रियाओं को नहीं समझा पाती जो पानी के अलावा किसी और विलायक में होती हैं।
(ii) **संयुग्मी अम्ल-क्षार युग्म (Conjugate Acid-Base Pair):** एक संयुग्मी अम्ल-क्षार युग्म ऐसे पदार्थों का एक जोड़ा होता है जिसमें केवल एक प्रोटॉन (H+) का अंतर होता है। जब एक अम्ल प्रोटॉन छोड़ता है, तो वह एक संयुग्मी क्षार में बदल जाता है, और जब एक क्षार प्रोटॉन लेता है, तो वह एक संयुग्मी अम्ल में बदल जाता है।
उदाहरण:
\( \text{HCl}_{ (aq)} + \text{H}_2\text{O} \rightleftharpoons \text{Cl}^-_{ (aq)} + \text{H}_3\text{O}^+_{ (aq)} \)
यहां, \( \text{HCl} \) एक अम्ल है जो प्रोटॉन छोड़कर \( \text{Cl}^- \) (संयुग्मी क्षार) बनाता है। \( \text{H}_2\text{O} \) एक क्षार है जो प्रोटॉन लेकर \( \text{H}_3\text{O}^+ \) (संयुग्मी अम्ल) बनाता है। इसलिए, \( \text{HCl/Cl}^- \) एक संयुग्मी अम्ल-क्षार युग्म है और \( \text{H}_2\text{O/H}_3\text{O}^+ \) दूसरा संयुग्मी अम्ल-क्षार युग्म है। इस सिद्धांत को ब्रांस्टेड-लोरी संकल्पना भी कहते हैं।
In simple words: आरेनियस सिद्धांत पानी के बिना काम नहीं करता। संयुग्मी अम्ल-क्षार युग्म में एक अम्ल और एक क्षार होते हैं जिनके बीच सिर्फ एक प्रोटॉन का अंतर होता है।

🎯 Exam Tip: आरेनियस सिद्धांत की सीमाओं को उदाहरणों के साथ याद रखें। संयुग्मी अम्ल-क्षार युग्म की परिभाषा और उदाहरण रासायनिक समीकरण के साथ स्पष्ट करें।

 

Question 44. कुछ प्रमुख विलयनों की pH परास बताइए।
Answer: विभिन्न विलयनों की pH परास नीचे दी गई तालिका में दर्शायी गई है। pH स्केल 0 से 14 तक होता है, जहाँ 7 उदासीन होता है, 7 से कम अम्लीय और 7 से अधिक क्षारीय।

pH मानअम्लीय pH युक्त पदार्थशुद्ध जलक्षारीय pH युक्त पदार्थ
0-6\( \text{HCl} \), जठर रस, दूध, नींबू का रस, दही, टमाटर, संतरा--
7-शुद्ध जल-
8-14--\( \text{NaOH} \) (सोडियम हाइड्रॉक्साइड), रक्त, साबुन का पानी, सोडा युक्त शीतल पेय, मिल्क ऑफ मैग्नीशिया \( [\text{Mg(OH)}_2] \)


इस तालिका में विभिन्न पदार्थों के pH मान दिखाए गए हैं। उदाहरण के लिए, नींबू का रस अम्लीय होता है, शुद्ध पानी उदासीन होता है, और साबुन का पानी क्षारीय होता है। यह pH मानों का वितरण दर्शाता है।
In simple words: pH स्केल दिखाता है कि कोई चीज़ कितनी खट्टी (अम्लीय) या कड़वी (क्षारीय) है। 7 का मतलब है उदासीन, 7 से कम खट्टा और 7 से ज़्यादा कड़वा।

🎯 Exam Tip: pH स्केल के विभिन्न मानों के साथ कुछ सामान्य पदार्थों के उदाहरण याद रखें। यह आपको अम्लीय, क्षारीय और उदासीन पदार्थों को पहचानने में मदद करेगा।

 

Question 45. प्लास्टर ऑफ पेरिस के गुण बताइए।
Answer: प्लास्टर ऑफ पेरिस (POP) का रासायनिक नाम कैल्शियम सल्फेट हेमीहाइड्रेट (\( \text{CaSO}_4 \cdot \frac{1}{2}\text{H}_2\text{O} \)) है। इसके मुख्य गुणधर्म इस प्रकार हैं:
(i) यह एक सफेद, ठोस और चिकना पदार्थ होता है।
(ii) जब प्लास्टर ऑफ पेरिस को पानी के साथ मिलाया जाता है, तो यह 15 से 20 मिनट के अंदर जमकर ठोस और कठोर हो जाता है। यह अभिक्रिया जिप्सम बनाती है, जो एक हाइड्रेटेड कैल्शियम सल्फेट है।
रासायनिक अभिक्रिया: \( \text{2CaSO}_4 \cdot \frac{1}{2}\text{H}_2\text{O} \text{ (प्लास्टर ऑफ पेरिस)} + \text{3H}_2\text{O} \rightarrow \text{2CaSO}_4 \cdot 2\text{H}_2\text{O} \text{ (जिप्सम)} \)
(iii) यह नमीग्राही होता है, यानी यह हवा से नमी सोखकर धीरे-धीरे जमना शुरू कर देता है। इसलिए इसे नमी-रोधी बर्तनों में रखना चाहिए।
In simple words: प्लास्टर ऑफ पेरिस एक सफेद, चिकना पाउडर है। यह पानी मिलाने पर 15-20 मिनट में जमकर कठोर हो जाता है और जिप्सम बन जाता है।

🎯 Exam Tip: प्लास्टर ऑफ पेरिस का रासायनिक सूत्र, पानी मिलाने पर जमने की प्रक्रिया, और बनने वाले उत्पाद (जिप्सम) को याद रखें। इसका उपयोग टूटी हड्डियों को जोड़ने में किया जाता है।

 

Question 2. सोडियम क्लोराइड के बनाने की विधि, गुण तथा उपयोग लिखिए।
Answer: सोडियम क्लोराइड (NaCl) जिसे साधारण नमक भी कहते हैं, एक बहुत महत्वपूर्ण यौगिक है।
**बनाने की विधि:** सोडियम क्लोराइड आमतौर पर समुद्र के पानी या खारे पानी को सुखाकर प्राप्त किया जाता है।
व्यापारिक विधि: समुद्र के पानी को बड़े-बड़े तालाबों में जमा करके सूर्य के प्रकाश से वाष्पीकृत किया जाता है। जब पानी सूख जाता है, तो नमक के क्रिस्टल बच जाते हैं।
शुद्धिकरण: इस कच्चे नमक में अक्सर मैग्नीशियम क्लोराइड (\( \text{MgCl}_2 \)) और कैल्शियम क्लोराइड (\( \text{CaCl}_2 \)) जैसी अशुद्धियाँ होती हैं। इसे शुद्ध करने के लिए, नमक के संतृप्त घोल में हाइड्रोजन क्लोराइड गैस (\( \text{HCl} \)) प्रवाहित की जाती है। इससे शुद्ध सोडियम क्लोराइड अवक्षेपित हो जाता है, जिसे छानकर अलग कर लिया जाता है।
**गुणधर्म:**
(i) सोडियम क्लोराइड एक प्रबल अम्ल (HCl) और एक प्रबल क्षार (NaOH) से बना लवण है, इसलिए इसका जलीय विलयन उदासीन होता है और इसका pH मान 7 होता है।
(ii) यह सफेद क्रिस्टल जैसा ठोस होता है।
(iii) यह पानी में आसानी से घुल जाता है।
**उपयोग:**
(i) भोजन में: यह भोजन का स्वाद बढ़ाने के लिए सबसे अधिक उपयोग किया जाने वाला मसाला है।
(ii) खाद्य परिरक्षण: अचार, मछली और मांस जैसे खाद्य पदार्थों को खराब होने से बचाने के लिए इसका उपयोग किया जाता है।
(iii) हिमीकरण मिश्रण: बर्फ के गलनांक को कम करने के लिए बर्फ के साथ मिलाकर हिमीकरण मिश्रण बनाने में।
(iv) अन्य रसायनों के निर्माण में: सोडियम हाइड्रॉक्साइड (NaOH), सोडियम कार्बोनेट (\( \text{Na}_2\text{CO}_3 \)), सोडियम हाइड्रोजन कार्बोनेट (\( \text{NaHCO}_3 \)) और विरंजक चूर्ण (\( \text{CaOCl}_2 \)) जैसे कई महत्वपूर्ण रसायनों के निर्माण में यह एक कच्चा माल है।
In simple words: सोडियम क्लोराइड (साधारण नमक) समुद्र के पानी से बनता है। यह उदासीन होता है, सफेद क्रिस्टल जैसा दिखता है, पानी में घुलता है। इसका उपयोग खाने में, खाना बचाने में और दूसरे रसायन बनाने में होता है।

🎯 Exam Tip: सोडियम क्लोराइड की बनाने की विधि (समुद्री जल से), इसके गुण (उदासीन pH, घुलनशीलता) और विभिन्न उपयोगों (खाद्य, रसायन उद्योग) को याद रखें।

 

Question 3. दैनिक जीवन में विभिन्न अम्लों, क्षारों तथा लवणों के उपयोगों पर टिप्पणी लिखिए।
Answer: हमारे दैनिक जीवन में अम्ल, क्षार और लवण बहुत व्यापक रूप से उपयोग होते हैं, और इनके बिना कई कार्य असंभव हैं।
**(a) अम्लों के उपयोग:**
(i) **खनिज अम्ल (Mineral Acids):** हाइड्रोक्लोरिक अम्ल (\( \text{HCl} \)), सल्फ्यूरिक अम्ल (\( \text{H}_2\text{SO}_4 \)) और नाइट्रिक अम्ल (\( \text{HNO}_3 \)) जैसे खनिज अम्ल विभिन्न उद्योगों में उपयोग होते हैं, जैसे दवा, पेंट, उर्वरक आदि बनाने में। सल्फ्यूरिक अम्ल को "रसायनों का राजा" कहा जाता है और यह सेल, कार बैटरी में भी उपयोग होता है। हाइड्रोक्लोरिक अम्ल का उपयोग बॉयलरों को साफ करने और सिंक व सैनिटरी वस्तुओं की सफाई में होता है। नाइट्रिक अम्ल उर्वरक, चांदी व सोने के गहनों की सफाई और विस्फोटक बनाने में काम आता है। अम्लराज (Aqua regia), जो \( \text{HNO}_3 \) और \( \text{HCl} \) का मिश्रण है, सोने जैसी धातुओं को भी घोल सकता है।
(ii) **कार्बनिक अम्ल (Organic Acids):** एसिटिक अम्ल (सिरके में), सिट्रिक अम्ल (नींबू में), टार्टरिक अम्ल (इमली में), लैक्टिक अम्ल (दही में) जैसे कार्बनिक अम्ल खाद्य पदार्थों के परिरक्षण (जैसे अचार) और स्वाद बढ़ाने में उपयोग होते हैं। एसिटिक अम्ल लकड़ी के फर्नीचर को साफ करने में भी काम आता है।
**(b) क्षारों के उपयोग:**
(i) सोडियम हाइड्रॉक्साइड (NaOH) साबुन, अपमार्जक, कागज और कपड़ा उद्योगों में बहुत महत्वपूर्ण है।
(ii) कैल्शियम हाइड्रॉक्साइड (\( \text{Ca(OH)}_2 \)) या चूने का उपयोग मिट्टी की अम्लता को कम करने और कीटनाशक के रूप में होता है। यह सफेदी (पुताई) में भी एक घटक है।
**(c) लवणों के उपयोग:**
(i) कैल्शियम कार्बोनेट (\( \text{CaCO}_3 \)) संगमरमर, फर्श बनाने और सीमेंट उद्योग में उपयोग होता है।
(ii) सिल्वर नाइट्रेट (\( \text{AgNO}_3 \)) फोटोग्राफी में और अमोनियम नाइट्रेट उर्वरक व विस्फोटक बनाने में उपयोग होता है। फिटकरी (\( \text{K}_2\text{SO}_4 \cdot \text{Al}_2(\text{SO}_4)_3 \cdot 24\text{H}_2\text{O} \)) का उपयोग जल शोधन में होता है।
In simple words: अम्ल (जैसे सिरका), क्षार (जैसे साबुन) और लवण (जैसे नमक) हमारे खाने, सफाई, दवाइयाँ और उद्योगों में हर जगह काम आते हैं।

🎯 Exam Tip: विभिन्न अम्लों, क्षारों और लवणों के कम से कम दो-दो विशिष्ट उदाहरण और उनके दैनिक या औद्योगिक उपयोगों को याद रखें। यह आपको उत्तर को व्यापक बनाने में मदद करेगा।

 

Question 4. साबुन एवं अपमार्जक क्या होते हैं तथा इन्हें किस प्रकार बनाया जाता है?
Answer: साबुन और अपमार्जक दोनों सफाई करने वाले पदार्थ हैं, लेकिन उनकी रासायनिक संरचना और कार्यप्रणाली में अंतर होता है।
**साबुन (Soap):** साबुन सबसे पुराने सफाई एजेंटों में से एक हैं।
**बनाने की विधि:** साबुन उच्च वसीय अम्लों (जैसे स्टीयरिक अम्ल \( \text{C}_{17}\text{H}_{35}\text{COOH} \), पामिटिक अम्ल, या ओलिक अम्ल) के सोडियम या पोटैशियम लवण होते हैं। इन्हें वसा (तेल) या जंतु वसा अम्लों को सोडियम हाइड्रॉक्साइड (NaOH) या पोटैशियम हाइड्रॉक्साइड (KOH) के जलीय विलयन के साथ गर्म करके बनाया जाता है। इस प्रक्रिया को साबुनीकरण (Saponification) कहते हैं। ग्लिसरॉल इस प्रक्रिया का एक सह-उत्पाद है।
रासायनिक समीकरण (उदाहरण):
\( \text{CH}_2\text{COOR} \)
\( | \)
\( \text{CHCOOR} + \text{3NaOH} \rightarrow \text{3 RCOONa} + \text{CH}_2\text{OH} \)
\( | \)
\( \text{CH}_2\text{COOR} \)
(उच्च वसीय अम्ल)
\( \text{CH}_2\text{OH} \)
(ग्लिसरॉल)
नमक (NaCl) मिलाने पर साबुन अवक्षेपित होकर अलग हो जाता है। पोटैशियम साबुन, सोडियम साबुन की तुलना में अधिक मृदु होते हैं, इसलिए शेविंग साबुन और शैम्पू बनाने में उपयोग होते हैं।
**अपमार्जक (Detergent):** अपमार्जक साबुन के समान ही सफाई करते हैं, लेकिन कठोर जल में भी प्रभावी होते हैं। अपमार्जक एक लैटिन शब्द है जिसका अर्थ 'साफ करने वाला' है।
**बनाने की विधि:** अपमार्जक लंबी श्रृंखला वाले सोडियम ऐल्किल सल्फेट (जैसे \( \text{R-O-SO}_3^-\text{Na}^+ \)) या सोडियम ऐल्किल बेंजीन सल्फोनेट (जैसे \( \text{R-C}_6\text{H}_4-\text{SO}_3^-\text{Na}^+ \)) होते हैं। इन्हें कोयले और पेट्रोलियम से प्राप्त हाइड्रोकार्बन से संश्लेषित किया जाता है। इनके सोडियम आयन कठोर जल में मौजूद कैल्शियम और मैग्नीशियम आयनों से बदल जाते हैं, लेकिन जो यौगिक बनते हैं वे पानी में घुलनशील होते हैं और अवक्षेप नहीं बनाते, इसलिए ये कठोर जल में भी प्रभावी होते हैं।
In simple words: साबुन वसीय अम्लों को क्षार से गर्म करके बनाते हैं। अपमार्जक भी सफाई करते हैं, पर वे कठोर पानी में भी काम आते हैं और पेट्रोलियम से बनते हैं।

🎯 Exam Tip: साबुन और अपमार्जक की रासायनिक संरचना (वसीय अम्ल लवण बनाम सल्फोनेट), बनाने की प्रक्रिया और कठोर जल में उनके व्यवहार के बीच के अंतर पर ध्यान दें। साबुनीकरण अभिक्रिया को याद रखें।

 

Question 5. अम्लों एवं क्षारों के सामान्य गुणों का वर्णन कीजिए।
Answer: अम्लों और क्षारों के सामान्य गुण इस प्रकार हैं:
**(A) अम्लों के गुण:**
(i) **स्वाद:** अम्ल स्वाद में खट्टे होते हैं (जैसे नींबू)।
(ii) **लिटमस पेपर पर प्रभाव:** अम्ल नीले लिटमस पेपर को लाल कर देते हैं।
(iii) **धातुओं से अभिक्रिया:** अम्ल सक्रिय धातुओं (जैसे जिंक, मैग्नीशियम) से क्रिया करके हाइड्रोजन गैस (\( \text{H}_2 \)) छोड़ते हैं।
उदाहरण: \( \text{Zn (धातु)} + \text{H}_2\text{SO}_4 \text{ (अम्ल)} \rightarrow \text{ZnSO}_4 \text{ (लवण)} + \text{H}_2\uparrow \text{ (हाइड्रोजन गैस)} \)
इसी कारण खट्टे अम्लीय पदार्थों को धातु के बर्तनों में नहीं रखा जाता है, क्योंकि वे धातु से क्रिया कर लेते हैं।
(iv) **धात्विक ऑक्साइडों से अभिक्रिया:** अम्ल धात्विक ऑक्साइडों से क्रिया करके लवण और जल बनाते हैं। धात्विक ऑक्साइड आमतौर पर क्षारीय प्रकृति के होते हैं।
उदाहरण: \( \text{CuO (धातु ऑक्साइड)} + \text{2HCl (अम्ल)} \rightarrow \text{CuCl}_2 \text{ (लवण)} + \text{H}_2\text{O (जल)} \)
**(B) क्षारों के गुण:**
(i) **स्वाद:** क्षार स्वाद में कड़वे होते हैं और छूने पर साबुन जैसे चिकने महसूस होते हैं।
(ii) **लिटमस पेपर पर प्रभाव:** क्षार लाल लिटमस पेपर को नीला कर देते हैं।
(iii) **कुछ धातुओं से अभिक्रिया:** कुछ क्षार (जैसे \( \text{NaOH} \)) कुछ धातुओं (जैसे जिंक) से क्रिया करके हाइड्रोजन गैस और लवण बनाते हैं।
उदाहरण: \( \text{Zn (धातु)} + \text{2NaOH (क्षार)} \rightarrow \text{Na}_2\text{ZnO}_2 \text{ (सोडियम ज़िंकेट)} + \text{H}_2\uparrow \)
हालांकि, सभी धातुएँ क्षारों से क्रिया करके हाइड्रोजन गैस नहीं छोड़ती हैं।
(iv) **अधात्विक ऑक्साइडों से अभिक्रिया:** क्षार अधात्विक ऑक्साइडों से क्रिया करके लवण और जल बनाते हैं। अधात्विक ऑक्साइड आमतौर पर अम्लीय प्रकृति के होते हैं।
उदाहरण: \( \text{CO}_2 \text{ (अधातु ऑक्साइड)} + \text{Ca(OH)}_2 \text{ (क्षार)} \rightarrow \text{CaCO}_3 \text{ (लवण)} + \text{H}_2\text{O (जल)} \)
(v) **अम्लों से अभिक्रिया (उदासीनीकरण):** अम्ल और क्षार एक दूसरे से क्रिया करके लवण और जल बनाते हैं। इसे उदासीनीकरण अभिक्रिया कहते हैं।
उदाहरण: \( \text{HCl (अम्ल)} + \text{NaOH (क्षार)} \rightarrow \text{NaCl (लवण)} + \text{H}_2\text{O (जल)} \)
In simple words: अम्ल खट्टे होते हैं, नीले लिटमस को लाल करते हैं और धातुओं से मिलकर गैस बनाते हैं। क्षार कड़वे होते हैं, लाल लिटमस को नीला करते हैं और अम्लों को बेअसर करते हैं।

🎯 Exam Tip: अम्लों और क्षारों के प्रत्येक गुणधर्म को याद रखने के लिए, लिटमस टेस्ट, धातुओं के साथ अभिक्रिया, और उदासीनीकरण अभिक्रिया जैसे प्रमुख बिंदुओं पर ध्यान दें। प्रत्येक गुण के लिए एक-एक उदाहरण समीकरण के साथ देना बहुत प्रभावी होता है।

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