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Detailed Chapter 4 प्रतिरक्षा एवं रक्तसमूह RBSE Solutions for Class 10 Science
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Class 10 Science Chapter 4 प्रतिरक्षा एवं रक्तसमूह RBSE Solutions PDF
बहुचयनात्मक प्रश्न-
Question 1. प्रतिरक्षा में प्रयुक्त होने वाली कोशिकाएं नहीं पाई जाती हैं।
(क) अस्थिमज्जा
(ख) यकृत
(ग) आमाशय
(घ) लसीका पर्व
Answer: (ग) आमाशय
In simple words: प्रतिरक्षा प्रणाली में उपयोग होने वाली कोशिकाएं अस्थिमज्जा, यकृत और लसीका पर्व जैसे अंगों में पाई जाती हैं, लेकिन आमाशय में नहीं पाई जातीं। आमाशय मुख्य रूप से पाचन का कार्य करता है।
🎯 Exam Tip: यह याद रखें कि आमाशय का मुख्य कार्य पाचन है, न कि प्रतिरक्षा कोशिकाओं का उत्पादन या भंडारण। प्रतिरक्षा कोशिकाओं के मुख्य स्थान अस्थिमज्जा, लसीका पर्व और यकृत हैं।
Question 2. प्लाविका कोशिका निम्न में से किस कोशिका का रूपांतरित स्वरूप है?
(क) बी लसीका कोशिका
(ख) टी लसीका कोशिका
(ग) न्यूट्रोफिल
(घ) क व ग दोनों
Answer: (क) बी लसीका कोशिका
In simple words: प्लाविका कोशिकाएं वास्तव में बी लसीका कोशिकाओं का बदला हुआ रूप हैं। जब बी कोशिकाएं सक्रिय होती हैं, तो वे बदलकर प्लाविका कोशिकाएं बन जाती हैं।
🎯 Exam Tip: याद रखें कि प्लाविका कोशिकाएं एंटीबॉडी बनाने के लिए महत्वपूर्ण हैं और बी-लिम्फोसाइट्स से विकसित होती हैं।
Question 3. एण्टीजनी निर्धारक निम्न में से किस में पाए जाते हैं ?
(क) प्रतिजन
(ख) IgG प्रतिरक्षी
(ग) IgM प्रतिरक्षी
(घ) प्लाविका कोशिका
Answer: (क) प्रतिजन
In simple words: एंटीजनी निर्धारक, जिन्हें एपिटोप भी कहते हैं, प्रतिजन के ऊपर छोटे हिस्से होते हैं। ये वे हिस्से होते हैं जिनसे एंटीबॉडी जुड़ती हैं और प्रतिरक्षा प्रतिक्रिया शुरू करती हैं।
🎯 Exam Tip: एंटीजनी निर्धारक प्रतिजन की पहचान बिंदु होते हैं, जहाँ प्रतिरक्षा प्रणाली के घटक जुड़ते हैं।
Question 4. प्रथम उत्पादित प्रतिरक्षी है
(क) IgG
(ख) IgM
(ग) IgD
(घ) IgE
Answer: (ख) IgM
In simple words: जब शरीर को पहली बार किसी संक्रमण का सामना करना पड़ता है, तो सबसे पहले IgM प्रकार की एंटीबॉडी बनती है। यह संक्रमण से लड़ने वाली पहली एंटीबॉडी है।
🎯 Exam Tip: याद रखें कि IgM प्राथमिक प्रतिरक्षा प्रतिक्रिया में पहली एंटीबॉडी है, जो तेजी से बड़ी मात्रा में बनती है।
Question 5. माँ के दूध में पाए जाने वाली प्रतिरक्षी कौनसी है?
(क) IgG
(ख) IgM
(ग) IgD
(घ) IgA
Answer: (घ) IgA
In simple words: माँ के दूध में IgA एंटीबॉडी होती है, जो नवजात शिशु को बीमारियों से बचाने में मदद करती है। यह शिशु की शुरुआती प्रतिरक्षा के लिए बहुत जरूरी है।
🎯 Exam Tip: माँ का दूध शिशु के लिए IgA एंटीबॉडी का एक महत्वपूर्ण स्रोत है, जो उसे पाचन तंत्र के संक्रमण से बचाता है।
Question 7. रक्त का विभिन्न समूहों में वर्गीकरण किसने किया?
(क) लुइस पाश्चर
(ख) कार्ल लैण्डस्टीनर
(ग) रार्बट कोच
(घ) एडवर्ड जेनर
Answer: (ख) कार्ल लैण्डस्टीनर
In simple words: वैज्ञानिक कार्ल लैंडस्टीनर ने इंसानी रक्त को अलग-अलग समूहों (जैसे A, B, AB, और O) में बांटा। उनके इस काम से ब्लड ट्रांसफ्यूजन (रक्तदान) सुरक्षित हो सका।
🎯 Exam Tip: कार्ल लैंडस्टीनर का रक्त समूह वर्गीकरण रक्तदान और चिकित्सा विज्ञान के लिए बहुत महत्वपूर्ण है।
Question 8. सर्वदाता रक्त समूह है
(क) A
(ख) AB
(ग) 0
(घ) B
Answer: (ग) 0
In simple words: O रक्त समूह वाले लोग किसी भी रक्त समूह के व्यक्ति को रक्तदान कर सकते हैं। ऐसा इसलिए होता है क्योंकि उनके लाल रक्त कोशिकाओं पर कोई एंटीजन नहीं होता है।
🎯 Exam Tip: रक्त समूह O को सर्वदाता कहा जाता है क्योंकि इसमें A और B एंटीजन नहीं होते हैं, जिससे यह अधिकांश प्राप्तकर्ताओं के साथ संगत होता है।
Question 9. गर्भ रक्ताणुकोरकता (Erythroblastosis fetalis) का प्रमुख कारण है
(क) शिशु में रक्ताधान
(ख) आर एच बेजोड़ता।
(ग) ए बी ओ बेजोड़ता
(घ) क व ग दोनों
Answer: (ख) आर एच बेजोड़ता।
In simple words: गर्भ रक्ताणुकोरकता नाम की बीमारी Rh फैक्टर में बेजोड़ता के कारण होती है। इसमें माँ का Rh फैक्टर बच्चे के Rh फैक्टर से मेल नहीं खाता। इससे माँ का शरीर बच्चे के रक्त पर हमला कर देता है।
🎯 Exam Tip: Erythroblastosis fetalis की रोकथाम Rh-नेगेटिव माँ को Rhogam इंजेक्शन देकर की जा सकती है, जिससे Rh-बेजोड़ता से बचा जा सके।
Question 10. समजीवी आधान में किसका उपयोग होता है?
(क) व्यक्ति के स्वयं के संग्रहित रक्त का
(ख) अन्य व्यक्ति के संग्रहित रक्त का
(ग) भेड़ के संग्रहित रक्त का
(घ) क व ख दोनों
Answer: (क) व्यक्ति के स्वयं के संग्रहित रक्त का
In simple words: समजीवी आधान में व्यक्ति अपना ही रक्त पहले से निकालकर जमा करता है, ताकि जरूरत पड़ने पर उसी रक्त को अपने शरीर में वापस चढ़ाया जा सके। यह तरीका संक्रमण के जोखिम को कम करता है।
🎯 Exam Tip: ऑटोलोगस ट्रांसफ्यूजन (समजीवी आधान) सर्जरी से पहले या कुछ बीमारियों में अपने रक्त का उपयोग करने का एक सुरक्षित तरीका है।
Question 11. रक्ताधान के दौरान बरती गई असावधानियों से कौनसा रोग नहीं होता है?
(क) हेपेटाइटिस बी
(ख) मलेरिया
(ग) रुधिर लवणता
(घ) क्कुएटज्फेल्डट जैकब रोग
Answer: (ग) रुधिर लवणता
In simple words: जब किसी को खून चढ़ाया जाता है और कुछ गलतियां होती हैं, तो हेपेटाइटिस बी, मलेरिया और क्रुत्ज़फेल्ड्ट-जैकब रोग जैसे संक्रमण हो सकते हैं। रुधिर लवणता (ब्लड सैलिनिटी) ऐसा रोग नहीं है जो सीधे रक्ताधान की लापरवाही से होता हो।
🎯 Exam Tip: रक्ताधान से पहले रक्त की पूरी जाँच करना बहुत जरूरी है ताकि बीमारियों के संक्रमण से बचा जा सके।
Question 12. निम्न में से कौनसा रक्त समूह विकल्पियों की समयुग्मजी अप्रभावी क्रिया का परिणाम है?
(क) A-रुधिर वर्ग
Answer: (ग) 0-रुधिर वर्ग
In simple words: O रक्त समूह तब बनता है जब किसी व्यक्ति में अप्रभावी जीन के दोनों समान रूप (ii) होते हैं। यह स्थिति बताती है कि लाल रक्त कोशिकाओं पर कोई A या B एंटीजन मौजूद नहीं है।
🎯 Exam Tip: O रक्त समूह को अप्रभावी समरूपता (homozygous recessive) के कारण पहचाना जाता है, जहाँ दोनों 'i' एलील की उपस्थिति होती है।
Question 13. निम्न में से कौनसा रुधिर वर्ग की आनुवंशिकता का अनुप्रयोग नहीं है?
(क) हीमोफीलिया का इलाज
(ख) मलेरिया का इलाज
(ग) डेंगू का इलाज
(घ) ख व ग दोनों
Answer: (घ) ख व ग दोनों
In simple words: रक्त समूह की आनुवंशिकता का उपयोग पैतृक विवादों को सुलझाने और रक्त आधान को सफल बनाने जैसे मामलों में होता है। हीमोफीलिया का इलाज भी रक्त कारकों पर आधारित है। लेकिन मलेरिया और डेंगू का इलाज सीधे रक्त समूह की आनुवंशिकता से जुड़ा नहीं है।
🎯 Exam Tip: आनुवंशिक रक्त रोगों जैसे हीमोफीलिया के अध्ययन में रक्त समूह की आनुवंशिकता महत्वपूर्ण है, जबकि मलेरिया और डेंगू जैसे संक्रामक रोगों का इलाज अलग चिकित्सा विधियों पर निर्भर करता है।
Question 14. भारत में अंगदान दिवस कब मनाया जाता है?
(क) 13 सितम्बर
(ख) 13 अगस्त
(ग) 13 मई
(घ) 13 जून
Answer: (ख) 13 अगस्त
In simple words: भारत में हर साल 13 अगस्त को अंगदान दिवस मनाया जाता है। यह दिन लोगों को अंगदान के महत्व के बारे में जागरूक करने और जीवन बचाने के लिए प्रेरित करने के लिए है।
🎯 Exam Tip: राष्ट्रीय अंगदान दिवस एक महत्वपूर्ण पहल है जो अंगदान के प्रति जागरूकता बढ़ाती है और अनमोल जीवन बचाने में मदद करती है।
Question 15. भारत में अंगदान करने वाले व्यक्तियों की संख्या है (प्रति दस लाख में)
(क) 0.1
(ख) 2.0
(ग) 0.8
(घ) 1.8
Answer: (ग) 0.8
In simple words: भारत में हर दस लाख लोगों में से लगभग 0.8 लोग अंगदान करते हैं। यह संख्या अन्य देशों की तुलना में कम है, इसलिए अंगदान के बारे में जागरूकता बढ़ाना बहुत जरूरी है।
🎯 Exam Tip: अंगदान दर को बढ़ाने के लिए जागरूकता और सुविधाएँ बढ़ाना महत्वपूर्ण है, क्योंकि इससे कई लोगों को नया जीवन मिल सकता है।
Question 17. प्रतिरक्षी कितने प्रकार के होते हैं ?
Answer: प्रतिरक्षी पाँच प्रकार के होते हैं। यह शरीर की प्रतिरक्षा प्रणाली के महत्वपूर्ण घटक होते हैं जो विभिन्न प्रकार के रोगाणुओं से लड़ने में मदद करते हैं।
In simple words: एंटीबॉडी पाँच तरह की होती हैं। ये शरीर को बीमारियों से बचाती हैं।
🎯 Exam Tip: इन पाँच प्रकारों को IgA, IgD, IgE, IgG, और IgM के रूप में याद रखना चाहिए, क्योंकि प्रत्येक का शरीर में एक विशिष्ट कार्य होता है।
Question 18. प्रतिजन का आण्विक भार कितना होना चाहिए?
Answer: प्रतिजन का आण्विक भार 6000 डाल्टन अथवा उससे ज्यादा होना चाहिए। इतने अधिक आण्विक भार वाले पदार्थ ही शरीर में मजबूत प्रतिरक्षा प्रतिक्रिया उत्पन्न कर पाते हैं।
In simple words: एंटीजन का वजन कम से कम 6000 डाल्टन या उससे ज्यादा होना चाहिए।
🎯 Exam Tip: एक बड़े आण्विक भार का होना एंटीजन के लिए शरीर में प्रतिरक्षा प्रतिक्रिया को प्रभावी ढंग से उत्तेजित करने की एक प्रमुख विशेषता है।
Question 19. प्रतिरक्षी किस प्रकार के प्रोटीन होते हैं ?
Answer: प्रतिरक्षी गामा ग्लोबुलिन प्रकार की प्रोटीन है। ये प्रोटीन शरीर के इम्यून सिस्टम का हिस्सा होते हैं और संक्रमण से लड़ने में मदद करते हैं।
In simple words: एंटीबॉडी गामा ग्लोबुलिन नाम के प्रोटीन होते हैं।
🎯 Exam Tip: गामा ग्लोबुलिन एक प्रकार का सीरम प्रोटीन है जिसमें एंटीबॉडी शामिल होती हैं और यह शरीर की प्रतिरक्षा प्रणाली का एक महत्वपूर्ण भाग है।
Question 20. कौनसा प्रतिरक्षी आवल को पार कर भ्रूण में पहुँच सकता है?
Answer: IgG प्रतिरक्षी आँवल को पार कर भ्रूण में पहुँच सकता है। यह एंटीबॉडी माँ से बच्चे को प्रतिरक्षा प्रदान करती है।
In simple words: IgG एंटीबॉडी माँ से बच्चे में गर्भनाल (आँवल) के रास्ते जा सकती है।
🎯 Exam Tip: IgG एंटीबॉडी माँ से शिशु में निष्क्रिय प्रतिरक्षा प्रदान करती है, जिससे जन्म के बाद भी शिशु को कुछ समय के लिए बीमारियों से सुरक्षा मिलती है।
Question 21. मास्ट कोशिका पर पाई जाने वाली प्रतिरक्षी का नाम लिखें।
Answer: मास्ट कोशिका पर पाई जाने वाली प्रतिरक्षी का नाम IgE है। यह एंटीबॉडी एलर्जी प्रतिक्रियाओं और परजीवी संक्रमणों में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है।
In simple words: मास्ट कोशिकाओं पर IgE एंटीबॉडी पाई जाती है।
🎯 Exam Tip: IgE एलर्जी प्रतिक्रियाओं से जुड़ी मुख्य एंटीबॉडी है, जो मास्ट कोशिकाओं और बेसोफिल पर रिसेप्टर्स से जुड़ती है।
Question 22. रक्त में उपस्थित कौनसी कोशिका गैसों के विनिमय में संलग्न होती है?
Answer: रक्त में उपस्थित लाल रक्त कणिकाएँ (RBC) गैसों के विनिमय में संलग्न होती हैं। ये कोशिकाएं ऑक्सीजन को फेफड़ों से शरीर के अन्य भागों तक ले जाती हैं और कार्बन डाइऑक्साइड को वापस फेफड़ों तक लाती हैं।
In simple words: लाल रक्त कोशिकाएं (RBC) गैसों के आदान-प्रदान का काम करती हैं।
🎯 Exam Tip: लाल रक्त कोशिकाओं में हीमोग्लोबिन नामक प्रोटीन होता है, जो ऑक्सीजन और कार्बन डाइऑक्साइड के परिवहन के लिए जिम्मेदार है।
Question 24. सर्वदाता रक्त समूह कौनसी है?
Answer: 'O' रक्त समूह वाले व्यक्ति सर्वदाता हैं। वे किसी भी रक्त समूह के व्यक्ति को रक्त दे सकते हैं क्योंकि उनके लाल रक्त कोशिकाओं पर कोई एंटीजन नहीं होता है।
In simple words: 'O' रक्त समूह वाले लोग सबको खून दे सकते हैं।
🎯 Exam Tip: सर्वदाता रक्त समूह O-नेगेटिव है, जो किसी भी आपात स्थिति में सबसे अधिक उपयोगी होता है जब प्राप्तकर्ता का रक्त समूह अज्ञात हो।
Question 25. किस रक्त समूह में 'A' व 'B' दोनों ही प्रतिजन उपस्थित होते हैं?
Answer: AB रक्त समूह में 'A' व 'B' दोनों ही प्रतिजन उपस्थित होते हैं। इस रक्त समूह वाले व्यक्ति को सर्वग्राही कहा जाता है।
In simple words: AB रक्त समूह में A और B दोनों एंटीजन होते हैं।
🎯 Exam Tip: AB रक्त समूह को 'सार्वभौमिक प्राप्तकर्ता' (universal recipient) कहा जाता है क्योंकि इसमें दोनों एंटीजन होते हैं और यह किसी भी रक्त समूह से रक्त प्राप्त कर सकता है।
Question 26. विश्व के लगभग कितने प्रतिशत व्यक्तियों का रक्त आरएच धनात्मक होता है?
Answer: विश्व के लगभग 85% व्यक्तियों का रक्त आरएच धनात्मक होता है। इसका मतलब है कि उनकी लाल रक्त कोशिकाओं की सतह पर Rh फैक्टर प्रोटीन मौजूद होता है।
In simple words: दुनिया के लगभग 85% लोगों का खून Rh पॉजिटिव होता है।
🎯 Exam Tip: Rh फैक्टर का निर्धारण Rh एंटीजन की उपस्थिति या अनुपस्थिति से होता है, जो रक्त आधान और गर्भावस्था में महत्वपूर्ण है।
Question 27. कौनसा आरएच कारक सबसे महत्त्वपूर्ण है?
Answer: Rh.D कारक सबसे महत्त्वपूर्ण है। यह Rh रक्त समूह प्रणाली में मुख्य एंटीजन है और इसकी उपस्थिति या अनुपस्थिति व्यक्ति के Rh पॉजिटिव या Rh नेगेटिव होने का निर्धारण करती है।
In simple words: Rh.D फैक्टर Rh रक्त समूह में सबसे जरूरी कारक है।
🎯 Exam Tip: Rh.D एंटीजन की जांच Rh बेजोड़ता से संबंधित गर्भावस्था की जटिलताओं को रोकने के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण है।
Question 28. प्रथम रक्ताधान किसके द्वारा संपादित किया गया?
Answer: प्रथम रक्ताधान डॉ. जीन बेप्टिस्ट डेनिस द्वारा सम्पादित किया गया। उन्होंने 15 जून, 1667 को एक 15 वर्षीय लड़के को भेड़ का रक्त चढ़ाया था।
In simple words: पहला ब्लड ट्रांसफ्यूजन डॉ. जीन बेप्टिस्ट डेनिस ने किया था।
🎯 Exam Tip: जीन बेप्टिस्ट डेनिस का कार्य रक्ताधान के इतिहास में एक महत्वपूर्ण मील का पत्थर था, हालांकि उस समय जानवरों से मनुष्यों में रक्त चढ़ाना जोखिम भरा था।
Question 29. समजात आधान क्या है?
Answer: ऐसा आधान जिसमें अन्य व्यक्तियों के संग्रहित रक्त का उपयोग किया जाता है, उसे समजात आधान कहते हैं। इसमें किसी और व्यक्ति का रक्त मरीज को दिया जाता है।
In simple words: जब किसी और व्यक्ति का जमा किया हुआ खून मरीज को दिया जाता है, तो उसे समजात आधान कहते हैं।
🎯 Exam Tip: समजात आधान में रक्त की संगतता सुनिश्चित करने के लिए दाता और प्राप्तकर्ता के रक्त समूहों का सावधानीपूर्वक मिलान करना महत्वपूर्ण है।
Question 31. भारत में अंगदान दिवस कब मनाया जाता है?
Answer: भारत में हर वर्ष 13 अगस्त को अंगदान दिवस मनाया जाता है। इस दिन का उद्देश्य अंगदान के महत्व और जीवन बचाने की इसकी क्षमता के बारे में जागरूकता बढ़ाना है।
In simple words: भारत में 13 अगस्त को हर साल अंगदान दिवस मनाया जाता है।
🎯 Exam Tip: यह दिवस लोगों को अंगदान करने और कई जीवन बचाने के लिए प्रेरित करने का एक महत्वपूर्ण अवसर है।
Question 32. हाल ही में देहदान करने वाले दो व्यक्तियों के नाम लिखें।
Answer: हाल ही में देहदान करने वाले दो व्यक्तियों के नाम हैं:
(i) डॉ. विष्णु प्रभाकर
(ii) श्री ज्योति बसु
इन जैसे प्रसिद्ध व्यक्तियों का देहदान दूसरों को भी इस नेक काम के लिए प्रेरित करता है।
In simple words: डॉ. विष्णु प्रभाकर और श्री ज्योति बसु ने हाल ही में अपने शरीर दान किए हैं।
🎯 Exam Tip: प्रसिद्ध व्यक्तियों के देहदान के उदाहरण जन जागरूकता बढ़ाने और दूसरों को अंगदान के लिए प्रेरित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।
लघूत्तरात्मक प्रश्न
Question 33. प्रतिरक्षी को परिभाषित करें।
Answer: शरीर में एंटीजन (बाहरी पदार्थ) के प्रवेश होने पर, उसे एंटीजन के विरुद्ध शरीर की बी-लिम्फोसाइट कोशिकाओं द्वारा एक ग्लाइकोप्रोटीन पदार्थ स्रावित किया जाता है, जिसे प्रतिरक्षी अथवा एंटीबॉडी कहते हैं। प्रतिरक्षी को इम्यूनोग्लोबिन (संक्षिप्त में Ig) भी कहते हैं। ये प्लाज्मा कोशिकाओं द्वारा निर्मित गामा ग्लोबुलिन (Y-globulin) प्रोटीन हैं जो प्राणियों के रक्त तथा अन्य तरल पदार्थों में पाए जाते हैं। ये एंटीबॉडी शरीर को बीमारियों से बचाते हैं।
In simple words: जब शरीर में कोई बाहरी दुश्मन (एंटीजन) आता है, तो शरीर की बी-कोशिकाएं एक खास प्रोटीन बनाती हैं जिसे एंटीबॉडी कहते हैं। यह एंटीबॉडी दुश्मन को पहचानकर उससे लड़ती है।
🎯 Exam Tip: प्रतिरक्षी, बाहरी एंटीजन को निष्क्रिय करके या उन्हें हटाने में मदद करके शरीर की प्रतिरक्षा प्रतिक्रिया में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।
Question 34. एण्टीजनी निर्धारक क्या होते हैं?
Answer: प्रतिजन (एंटीजन) पूरा अणु एक साथ एंटीबॉडी से प्रतिक्रिया नहीं करता है। इसके कुछ खास हिस्से ही एंटीबॉडी से जुड़ते हैं। इन खास हिस्सों को एंटीजनी निर्धारक (Antigenic determinant) या एपिटोप (epitope) कहा जाता है। प्रोटीन में लगभग 6-8 अमीनो एसिड की एक श्रृंखला एंटीजनी निर्धारक के रूप में काम करती है। एक प्रोटीन में कई एंटीजनी निर्धारक हो सकते हैं। इनकी संख्या को एंटीजन की संयोजकता कहा जाता है। अधिकतर जीवाणुओं में एंटीजनी संयोजकता सौ या अधिक होती है। यह एंटीबॉडी के लिए पहचान बिंदु के रूप में कार्य करते हैं।
In simple words: एंटीजनी निर्धारक एंटीजन के वे छोटे हिस्से होते हैं जिनसे एंटीबॉडी जुड़ती है। यह एंटीजन का वह पहचान बिंदु होता है।
🎯 Exam Tip: एंटीजनी निर्धारक एंटीजन की विशिष्टता के लिए जिम्मेदार होते हैं, जिससे शरीर केवल विशिष्ट रोगजनकों के खिलाफ प्रतिरक्षा प्रतिक्रिया उत्पन्न करता है।
Question 36. रक्त क्या है?
Answer: रक्त एक परिसंचारी तरल ऊतक है जो रक्त वाहिनियों और हृदय में पूरे शरीर में लगातार घूमता रहता है, पदार्थों का एक जगह से दूसरी जगह ले जाने का काम करता है। रक्त का माध्यम क्षारीय होता है और इसका pH लगभग 7.4 होता है। एक सामान्य इंसान में लगभग 5 लीटर रक्त पाया जाता है। रक्त प्लाज्मा और रक्त कणिकाओं से मिलकर बना होता है। रक्त के द्रव भाग को प्लाज्मा कहते हैं जो निर्जीव होता है। प्लाज्मा आंतों से सोखे गए पोषक तत्वों को शरीर के अलग-अलग अंगों तक पहुंचाता है और हानिकारक पदार्थों को उत्सर्जी अंगों तक लाने का काम करता है। प्लाज्मा में तीन प्रकार की कणिकाएँ पाई जाती हैं:
(अ) लाल रक्त कणिकाएँ (Red Blood Corpuscles)- ये कणिकाएँ गैसों, जैसे ऑक्सीजन और कार्बन डाइऑक्साइड, को शरीर में लाने-ले जाने का काम करती हैं।
(ब) श्वेत रक्त कणिकाएँ (White Blood Corpuscles)- श्वेत रक्त कणिकाएँ शरीर को बीमारियों और रोगाणुओं से बचाती हैं।
(स) बिम्बाणु (Platelets)- ये कणिकाएँ रक्त वाहिनियों की सुरक्षा करती हैं और रक्तस्राव को रोकने में मदद करती हैं। रक्त हमारे शरीर में ऑक्सीजन और पोषक तत्वों का परिवहन करता है।
In simple words: रक्त एक तरल ऊतक है जो पूरे शरीर में घूमता है। यह पोषक तत्व और गैसें पहुंचाता है और शरीर को बीमारियों से बचाता है। इसमें प्लाज्मा, लाल और सफेद रक्त कोशिकाएं और प्लेटलेट्स होते हैं।
🎯 Exam Tip: रक्त के इन घटकों और उनके कार्यों को समझना रक्त संबंधी बीमारियों और रक्ताधान के लिए महत्वपूर्ण है।
Question 37. A B O रक्त समूहीकरण को समझाइए।
Answer: लाल रक्त कोशिकाओं (RBC) की सतह पर मुख्य रूप से दो प्रकार के प्रतिजन (Antigen) पाए जाते हैं, जिन्हें प्रतिजन 'A' व प्रतिजन 'B' कहते हैं। इन प्रतिजनों की उपस्थिति के आधार पर रक्त समूह चार प्रकार के होते हैं, जिन्हें क्रमशः A, B, AB तथा O समूह कहते हैं। इस वर्गीकरण को ABO समूहीकरण कहते हैं। यह प्रणाली रक्त आधान में संगतता सुनिश्चित करने के लिए महत्वपूर्ण है।
| क्र.सं. | रुधिर समूह | रक्त कणिकाओं पर उपस्थित प्रतिजन (Antigen) | प्लाज्मा में ऐन्टीबॉडी |
|---|---|---|---|
| 1. | A | A | b |
| 2. | B | B | a |
| 3. | AB | A व B दोनों | ऐन्टीबॉडी अनुपस्थित |
| 4. | O | प्रतिजन अनुपस्थित | a व b दोनों |
A रुधिर समूह की लाल रुधिर कणिकाओं पर A प्रतिजन तथा B रुधिर समूह की लाल रुधिर कणिकाओं पर B प्रतिजन पाया जाता है। AB प्रकार के रुधिर समूह की लाल रुधिर कणिकाओं पर A व B दोनों प्रकार के प्रतिजन पाये जाते हैं। जबकि O रुधिर समूह की RBC पर कोई किसी प्रकार का प्रतिजन नहीं पाया जाता है अर्थात् A तथा B प्रतिजनों का अभाव होता है। यह प्रणाली यह समझने में मदद करती है कि रक्त को सुरक्षित रूप से कैसे चढ़ाया जाए।
In simple words: ABO रक्त समूहीकरण लाल रक्त कोशिकाओं पर मौजूद A और B नामक प्रतिजनों के आधार पर रक्त को चार मुख्य समूहों (A, B, AB, O) में बांटता है। इससे पता चलता है कि कौन किसे खून दे या ले सकता है।
🎯 Exam Tip: रक्त आधान के दौरान ABO समूह और Rh कारक का सही मिलान करना गंभीर प्रतिरक्षा प्रतिक्रियाओं को रोकने के लिए महत्वपूर्ण है।
Question 39. रक्ताधान क्या है? समझाइए।
Answer: रक्ताधान वह विधि है जिसमें एक व्यक्ति से दूसरे व्यक्ति के परिसंचरण तंत्र में रक्त या रक्त आधारित उत्पादों जैसे प्लेटलेट्स, प्लाज्मा आदि को स्थानान्तरित किया जाता है। सबसे पहले फ्रांस के वैज्ञानिक डॉ. जीन बेप्टिस्ट डेनिस द्वारा 15 जून, 1667 में रक्ताधान सम्पादित किया गया था। उन्होंने 15 वर्षीय एक बालक में भेड़ के रक्त से रक्ताधान करवाया था। हालांकि, बाद में पशुओं से मानव में रक्ताधान पर रोक लगा दी गई थी।
निम्न परिस्थितियों में रक्ताधान किया जा सकता है:
• दुर्घटना के तहत लगी चोट तथा अत्यधिक रक्तस्राव होने पर।
• शरीर में गम्भीर रक्तहीनता होने पर।
• रक्त में बिम्बाणु (Platelets) अल्पता की स्थिति में।
• हीमोफीलिया के रोगियों को।
• शल्यक्रिया के दौरान।
• दात्र कोशिका अरक्तता (Sickle Cell anemia) के रोगियों को।
रक्तदान से व्यक्तियों/रोगियों को नया जीवनदान दिया जाता है। अतः रक्तदान हमारे लिए महत्त्वपूर्ण है। रक्ताधान से अनेक जीवन बचाए जा सकते हैं।
In simple words: रक्ताधान वह तरीका है जिसमें एक व्यक्ति से दूसरे व्यक्ति को खून या खून के हिस्से चढ़ाए जाते हैं। यह गंभीर चोट या बीमारी में जान बचाने के लिए किया जाता है।
🎯 Exam Tip: रक्ताधान के लिए दाता और प्राप्तकर्ता के रक्त समूहों का सही मिलान करना और रक्त की जाँच करना संक्रमण से बचने के लिए बहुत महत्वपूर्ण है।
Question 40. रक्तदान के दौरान बरती जाने वाली सावधानियाँ लिखें।
Answer: रक्तदान के दौरान बरती जाने वाली सावधानियाँ निम्नलिखित हैं:
• किसी व्यक्ति (मरीज) के रुधिर चढ़ाने (आधान) से पहले दाता व मरीज के रक्त का मिलान (ABO, Rh आदि) किया जाता है ताकि कोई प्रतिक्रिया न हो।
• आधान से पूर्व संग्रहित रक्त को 30 मिनट पूर्व ही भण्डारण क्षेत्र से बाहर लाया जाता है ताकि यह कमरे के तापमान पर आ जाए।
• रक्त प्रवेशनी (cannula) के माध्यम से मरीज को अंतःशिरात्मक रूप दिया जाता है। इस प्रक्रिया में लगभग चार घण्टे लगते हैं।
• रक्त चढ़ाने (आधान) के दौरान मरीज को ज्वर, ठण्ड लगना, दर्द साइनोसिस (Cyanosis), हृदय गति में अनियमितता को रोकने हेतु चिकित्सक द्वारा औषधियाँ दी जाती हैं। रक्त की सुरक्षा और प्रभावशीलता के लिए इन सावधानियों का पालन करना आवश्यक है।
In simple words: रक्तदान के दौरान खून चढ़ाने वाले और लेने वाले व्यक्ति के रक्त समूह का मिलान करना, खून को सही तापमान पर रखना, और संक्रमण या रिएक्शन को रोकने के लिए डॉक्टर की निगरानी में प्रक्रिया करना बहुत जरूरी है।
🎯 Exam Tip: सुरक्षित रक्ताधान सुनिश्चित करने के लिए सभी प्रोटोकॉल का पालन करना अनिवार्य है, जिसमें रक्त की क्रॉस-मैचिंग और संक्रमणों के लिए परीक्षण शामिल है।
Question 41. अंगदाने की आवश्यकता समझाइए।
Answer: अंगदान का अर्थ है किसी जीवित या मृत व्यक्ति द्वारा किसी अन्य व्यक्ति को कोई ऊतक या अंग दान करना। दाता द्वारा दान किया गया अंग ग्राही के शरीर में प्रत्यारोपित किया जाता है। अंगदान द्वारा न केवल दूसरे व्यक्ति की जिंदगी बचाई जा सकती है, बल्कि उसके जीवन को खुशहाल भी बनाया जा सकता है। एक मृत देह से करीब 50 जरूरतमंद लोगों की मदद की जा सकती है। भारत में हर वर्ष लगभग दो लाख गुर्दे दान करने की आवश्यकता होती है, लेकिन मौजूदा समय में प्रतिवर्ष केवल 7000 से 8000 गुर्दे ही मिल पाते हैं। इसी प्रकार लगभग 50,000 लोग हर वर्ष हृदय प्रत्यारोपण की आस में रहते हैं परन्तु उपलब्धता केवल 10 से 15 की ही है। प्रत्यारोपण के लिए हर वर्ष भारत में लगभग 50,000 यकृत की आवश्यकता है परन्तु केवल 700 व्यक्तियों को ही यह मौका प्राप्त हो पाता है। कमोबेश यही स्थिति सभी अंगों के साथ है। एक अनुमान के हिसाब से भारत में हर वर्ष लगभग पांच लाख लोग अंगों के खराब होने तथा अंग प्रत्यारोपण ना हो पाने के कारण मृत्यु को प्राप्त हो जाते हैं। अतः अंगदान एक महत्त्वपूर्ण आवश्यकता है जो कई जीवन बचा सकता है।
In simple words: अंगदान का मतलब है अपने शरीर के अंग किसी दूसरे को देना। यह बहुत जरूरी है क्योंकि बहुत से लोग अंगों के खराब होने से मर जाते हैं, और अंगदान से उनकी जान बच सकती है।
🎯 Exam Tip: अंगदान न केवल जीवन बचाता है, बल्कि यह चिकित्सा अनुसंधान और शिक्षा में भी महत्वपूर्ण योगदान देता है, जिससे कई लोगों के जीवन में सुधार होता है।
Question 42. ABO रुधिर वर्ग के लिए उत्तरदायी जीन प्रारूपों को समझाइए।
Answer: मनुष्य में रक्त के कई प्रकार पाए जाते हैं, जिन्हें ABO रुधिर तंत्र के नाम से संबोधित किया जाता है। रक्त वर्ग का नियंत्रण तीन विकल्पियों (alleles) के आपसी तालमेल पर निर्भर करता है। ये तीनों विकल्पी एक ही जीन के भाग होते हैं तथा \( I^A \), \( I^B \) तथा \( I \) या \( i \) के द्वारा प्रदर्शित किए जाते हैं। RBC की कोशिकाओं की सतह पर पाए जाने वाले प्रतिजन A (Antigen A) का निर्माण विकल्पी \( I^A \) द्वारा, तथा प्रतिजन B (Antigen B) का निर्माण विकल्पी \( I^B \) द्वारा किया जाता है। विकल्पी \( I \) तथा \( i \) अप्रभावी होते हैं तथा किसी प्रतिजन के निर्माण में संलग्न नहीं होते हैं। किसी मनुष्य में अभिव्यक्त रक्त वर्ग किन्हीं दो विकल्पियों के बीच की पारस्परिक क्रिया पर निर्भर करता है। मनुष्यों में विकल्पी की उपस्थिति के आधार पर रुधिर के कुल छः प्रकार के जीन प्रारूप पाए जाते हैं। ये जीन प्रारूप (genotypes) यह निर्धारित करते हैं कि व्यक्ति का रक्त समूह A, B, AB, या O होगा।
In simple words: ABO रक्त समूह को तीन जीनों (विकल्पियों) \( I^A \), \( I^B \) और \( i \) से नियंत्रित किया जाता है। \( I^A \) और \( I^B \) प्रभावी होते हैं और A व B एंटीजन बनाते हैं, जबकि \( i \) अप्रभावी होता है और कोई एंटीजन नहीं बनाता। इन जीनों के अलग-अलग मेल से व्यक्ति का रक्त समूह तय होता है।
🎯 Exam Tip: रक्त समूहों की आनुवंशिकी का ज्ञान पैतृक विवादों को हल करने और रक्त आधान को सुरक्षित बनाने में महत्वपूर्ण है।
Question 47. रुधिर वर्ग की आनुवंशिकता के महत्त्व की व्याख्या करें।
Answer: मानव में रुधिर वर्ग का आनुवंशिक महत्त्व बहुत अधिक है। मानवों में चार मुख्य रुधिर वर्ग होते हैं: A, B, AB, और O. ये रुधिर वर्ग माता-पिता से बच्चों में मेंडल के नियमों के अनुसार वंशानुगत होते हैं। रुधिर वर्ग की वंशागति जीन्स/एलील पर निर्भर करती है जो जनकों से मिलते हैं। मनुष्य में रुधिर वर्गों को नियंत्रित करने वाले तीन एलील होते हैं, जिन्हें \(I^A\), \(I^B\) और \(I^0\) (या \(i\)) कहते हैं। लाल रक्त कोशिकाओं (RBC) की सतह पर प्रतिजन (Antigen) A का निर्माण एलील \(I^A\) द्वारा और प्रतिजन B का निर्माण एलील \(I^B\) द्वारा होता है। एलील \(I^0\) और \(i\) अप्रभावी होते हैं और किसी प्रतिजन के निर्माण में सहायक नहीं होते। इस तरह, मानव में एलील की उपस्थिति के आधार पर छह प्रकार के जीन प्ररूप (Genotype) पाए जाते हैं।
रुधिर वर्ग की आनुवंशिकता के कई महत्वपूर्ण उपयोग हैं। इसका उपयोग मुख्य रूप से पैतृकता संबंधी विवादों को हल करने में मदद करता है, सफल रक्त आधान सुनिश्चित करने में, नवजात शिशुओं में रुधिर लयनता जैसी समस्याओं का निदान करने में, और हीमोफीलिया जैसे आनुवंशिक रोगों की पहचान करने में भी सहायक होता है। यह ज्ञान डॉक्टरों को सही उपचार देने में मदद करता है। उदाहरण के लिए, यदि एक शिशु का रुधिर वर्ग B है और दो दंपती उस पर अपना हक जता रहे हैं: पहले दंपती में पुरुष का रुधिर वर्ग O (\(ii\)) और स्त्री का रुधिर वर्ग AB (\(I^AI^B\)) है। दूसरे दंपती में पुरुष का रुधिर वर्ग A (\(I^AI^A\)) और स्त्री का रुधिर वर्ग B (\(I^B i\)) है। वंशागति के नियमों के अनुसार, केवल पहला दंपती ही B रुधिर वर्ग का शिशु उत्पन्न कर सकता है। यह वंशागति संबंधी ज्ञान पारिवारिक संबंधों को समझने में भी सहायक है।
In simple words: मानवों के रक्त समूह (A, B, AB, O) माता-पिता से बच्चों में खास नियमों से आते हैं। यह ज्ञान हमें यह जानने में मदद करता है कि बच्चा किसका है, किसी को खून चढ़ाने के लिए सही रक्त समूह चुनने में मदद करता है, और कुछ बीमारियों को समझने में भी सहायक है।
🎯 Exam Tip: वंशागति के नियमों का उपयोग करके रक्त समूह के जीन प्ररूपों को समझना महत्वपूर्ण है, खासकर जब पैतृकता या रक्त आधान से संबंधित प्रश्न हों।
वस्तुनिष्ठ प्रश्न
Question 1. प्रतिरक्षी का आकार होता है
(अ) Z
(ब) H
(स) Y-आकार (विकल्प स्रोत में अनुपस्थित)
Answer: (स) Y-आकार
In simple words: प्रतिरक्षी, जो शरीर की रक्षा करते हैं, अंग्रेजी अक्षर Y के आकार के दिखते हैं।
🎯 Exam Tip: प्रतिरक्षी की Y-आकार की संरचना को याद रखना महत्वपूर्ण है, क्योंकि यह इसके कार्य से सीधा जुड़ा है।
Question 3. निम्न में से प्रतिजन हो सकता है-
(अ) प्रोटीन
(ब) ग्लाइकोप्रोटीन
(स) कार्बोहाइड्रेट
(द) उपरोक्त सभी
Answer: (द) उपरोक्त सभी
In simple words: प्रतिजन कई तरह के अणु हो सकते हैं, जैसे प्रोटीन, ग्लाइकोप्रोटीन या कार्बोहाइड्रेट, जो शरीर में प्रतिक्रिया पैदा करते हैं।
🎯 Exam Tip: प्रतिजन की प्रकृति विभिन्न प्रकार के अणुओं की हो सकती है, जो प्रतिरक्षा प्रतिक्रिया को ट्रिगर करने में सक्षम होते हैं।
Question 4. मानव में कितने प्रकार के आर एच कारक पाये जाते हैं ?
(अ) दो
(ब) तीन
(स) चार
(द) पाँच
Answer: (द) पाँच
In simple words: मानव में पाँच मुख्य आर एच कारक होते हैं, लेकिन Rh.D कारक सबसे महत्वपूर्ण है।
🎯 Exam Tip: Rh कारक की संख्या और Rh.D की विशिष्ट महत्वता को याद रखना रक्त आधान के लिए आवश्यक है।
Question 5. बिलीरुबिन की अधिकता निम्न में से किस अंग को हानि पहुँचाता है
(अ) जिगर (Liver)
(ब) तिल्ली
(स) गुर्दे
(द) उपरोक्त सभी
Answer: (द) उपरोक्त सभी
In simple words: जब शरीर में बहुत अधिक बिलीरुबिन जमा हो जाता है, तो यह जिगर, तिल्ली और गुर्दे जैसे कई अंगों को नुकसान पहुँचा सकता है।
🎯 Exam Tip: बिलीरुबिन के उच्च स्तर का संबंध पीलिया से है और यह कई आंतरिक अंगों को प्रभावित कर सकता है, इसलिए इसके प्रभावों को समझना महत्वपूर्ण है।
Question 6. आर एच कारक कितने अमीनो अम्लों का एक प्रोटीन है ?
(अ) 417
(ब) 317
(स) 217
(द) 117
Answer: (अ) 417
In simple words: Rh कारक प्रोटीन 417 अमीनो अम्लों से बना होता है, जो इसकी खास संरचना बनाता है।
🎯 Exam Tip: Rh कारक के प्रोटीन में अमीनो अम्लों की संख्या को याद रखना इसकी आणविक संरचना को समझने में सहायक है।
Question 7. एक निष्प्राण देह से कितने जरूरतमंद लोगों की मदद की जा सकती है?
(अ) करीब 30.
(ब) करीब 40
(स) करीब 50 (विकल्प स्रोत में अनुपस्थित)
Answer: (स) करीब 50
In simple words: एक मृत शरीर के अंगों को दान करके लगभग 50 जरूरतमंद लोगों की जान बचाई जा सकती है या उनके जीवन को बेहतर बनाया जा सकता है।
🎯 Exam Tip: अंगदान के महत्व पर प्रश्नों के लिए, यह आंकड़ा एक महत्वपूर्ण तथ्य है जिसे याद रखना चाहिए।
Question 9. प्रतिरक्षात्मक अंग है
(अ) अस्थिमज्जा
(ब) थाइमस
(स) यकृत
(द) उपरोक्त सभी
Answer: (द) उपरोक्त सभी
In simple words: अस्थिमज्जा, थाइमस और यकृत जैसे कई अंग शरीर की प्रतिरक्षा प्रणाली में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।
🎯 Exam Tip: शरीर के विभिन्न प्रतिरक्षात्मक अंगों और उनकी भूमिकाओं को जानना शरीर की रोग प्रतिरोधक क्षमता को समझने में मदद करता है।
Question 10. निष्क्रिय प्रतिरक्षा का उदाहरण है
(अ) टिटेनस के टीके
(ब) त्वचा
(स) आमाशय
(द) आंत्र
Answer: (अ) टिटेनस के टीके
In simple words: टिटेनस के टीके निष्क्रिय प्रतिरक्षा का एक अच्छा उदाहरण है, जहाँ शरीर को सीधे तैयार एंटीबॉडी मिलते हैं।
🎯 Exam Tip: निष्क्रिय प्रतिरक्षा और सक्रिय प्रतिरक्षा के बीच अंतर को स्पष्ट रूप से समझें, और प्रत्येक के उदाहरण याद रखें।
Question 11. कैप्टन लक्ष्मी सहगल ने अपने शरीर का कौनसा अंग दान किया?
(अ) आमाशय
(ब) हड्डियों का
(स) कॉर्निया
(द) हृदय का
Answer: (स) कॉर्निया
In simple words: कैप्टन लक्ष्मी सहगल ने मृत्यु के बाद अपनी आँखें (कॉर्निया) दान की थीं, जिससे दो लोगों को दृष्टि मिली।
🎯 Exam Tip: प्रसिद्ध व्यक्तियों के अंगदान के उदाहरणों को याद रखना अंगदान के महत्व को दर्शाने में सहायक होता है।
प्रश्न 2. माँ के दूध में पाये जाने वाली प्रतिरक्षी का नाम IgA है।
Answer: माँ के दूध में मुख्य रूप से IgA नामक प्रतिरक्षी पाई जाती है। यह प्रतिरक्षी नवजात शिशु को कई बीमारियों और संक्रमणों से बचाने में मदद करती है, क्योंकि शिशु की अपनी प्रतिरक्षा प्रणाली अभी पूरी तरह से विकसित नहीं होती है। IgA शिशु की आँतों और श्वसन मार्ग में एक सुरक्षात्मक परत बनाती है, जिससे हानिकारक जीवाणु और वायरस शरीर में प्रवेश नहीं कर पाते। यह एक प्रकार की निष्क्रिय प्रतिरक्षा है जो प्राकृतिक रूप से माँ से बच्चे को मिलती है।
In simple words: माँ के दूध में IgA नाम की एक खास रक्षा करने वाली चीज़ होती है। यह बच्चे को बीमारियों से बचाती है जब तक बच्चा खुद से अपनी सुरक्षा नहीं कर पाता।
🎯 Exam Tip: माँ के दूध में मौजूद IgA प्रतिरक्षी की भूमिका को याद रखना शिशु की प्रारंभिक प्रतिरक्षा के लिए महत्वपूर्ण है।
प्रश्न 3. Rh कारक की खोज किस प्रजाति के बंदर में हुई? (माध्य. शिक्षा बोर्ड, मॉडल पेपर, 2017-18)
Answer: Rh कारक की खोज मकाका रीसस (Macaca rhesus) नामक बंदर की प्रजाति में हुई थी। यह खोज रक्त आधान के विज्ञान में एक महत्वपूर्ण मील का पत्थर साबित हुई, क्योंकि इसने रक्त की अनुकूलता को समझने में मदद की। इस कारक की पहचान ने रक्त समूहों के वर्गीकरण और सुरक्षित रक्त आधान प्रक्रियाओं में क्रांति ला दी।
In simple words: Rh कारक को सबसे पहले मकाका रीसस नाम के बंदर में खोजा गया था।
🎯 Exam Tip: Rh कारक की खोज से जुड़े वैज्ञानिक और प्रजाति का नाम याद रखना महत्वपूर्ण है।
प्रश्न 4. डिप्थीरिया व टिटेनस के टीके किस प्रकार की प्रतिरक्षा के उदाहरण (माध्य. शिक्षा बोर्ड, मॉडल पेपर, 2017-18)
Answer: डिप्थीरिया और टिटेनस के टीके निष्क्रिय प्रतिरक्षा के उदाहरण हैं। इन टीकों में पहले से तैयार प्रतिरक्षी (एंटीबॉडीज) होते हैं, जो सीधे शरीर में डाल दिए जाते हैं। यह शरीर को तुरंत सुरक्षा प्रदान करते हैं, खासकर जब किसी संक्रमण का जोखिम हो या तुरंत रक्षा की आवश्यकता हो। निष्क्रिय प्रतिरक्षा में शरीर खुद एंटीबॉडी नहीं बनाता, बल्कि उन्हें बाहर से प्राप्त करता है।
In simple words: डिप्थीरिया और टिटेनस के टीके निष्क्रिय प्रतिरक्षा के उदाहरण हैं, क्योंकि इनमें शरीर को सीधे बनी-बनाई एंटीबॉडी मिलती हैं।
🎯 Exam Tip: निष्क्रिय और सक्रिय प्रतिरक्षा के अंतर को समझें, और याद रखें कि निष्क्रिय प्रतिरक्षा तुरंत सुरक्षा देती है जबकि सक्रिय प्रतिरक्षा में शरीर खुद एंटीबॉडी बनाता है।
प्रश्न 5. किसी मनुष्य के रुधिर का जीन प्रारूप ii है तो उसका रुधिर वर्ग लिखिए। (माध्य. शिक्षा बोर्ड, मॉडल पेपर, 2017-18)
Answer: यदि किसी मनुष्य के रुधिर का जीन प्रारूप \(ii\) है, तो उसका रुधिर वर्ग O होगा। \(i\) एलील अप्रभावी होता है, जिसका अर्थ है कि यह कोई A या B प्रतिजन उत्पन्न नहीं करता। जब दोनों एलील \(i\) होते हैं, तो व्यक्ति के लाल रक्त कोशिकाओं पर कोई A या B प्रतिजन नहीं होता है, जो O रक्त समूह की विशेषता है। O रक्त समूह सार्वभौमिक दाता होता है, क्योंकि इसमें कोई प्रतिजन नहीं होते जो प्राप्तकर्ता में प्रतिरक्षा प्रतिक्रिया उत्पन्न करें।
In simple words: अगर किसी इंसान का जीन प्रारूप \(ii\) है, तो उसका रक्त समूह O होगा।
🎯 Exam Tip: रक्त समूहों के जीन प्ररूपों और उनसे संबंधित प्रतिजनों को याद रखना महत्वपूर्ण है, खासकर O रक्त समूह के \(ii\) जीन प्ररूप को।
प्रश्न 6. प्रतिरक्षा विज्ञान किसे कहते हैं ?
Answer: प्रतिरक्षा विज्ञान जीव विज्ञान की वह शाखा है जो शरीर की प्रतिरक्षा प्रणाली का अध्ययन करती है। यह रोगाणुओं (जैसे जीवाणु, वायरस) के खिलाफ शरीर की सुरक्षा तंत्र, प्रतिरक्षा प्रतिक्रियाओं, और संबंधित अंगों व कोशिकाओं का अध्ययन करता है। इसका मुख्य उद्देश्य यह समझना है कि शरीर बीमारियों से कैसे लड़ता है और अपनी रक्षा कैसे करता है। प्रतिरक्षा विज्ञान का ज्ञान टीकों और नई दवाओं के विकास में महत्वपूर्ण है।
In simple words: प्रतिरक्षा विज्ञान वह पढ़ाई है जो सिखाती है कि हमारा शरीर बीमारियों से कैसे लड़ता है और अपनी सुरक्षा कैसे करता है।
🎯 Exam Tip: प्रतिरक्षा विज्ञान की परिभाषा और इसके अध्ययन के मुख्य बिंदुओं को स्पष्ट रूप से समझें।
प्रश्न 7. मानव का शरीर आसानी से रोगग्रस्त नहीं होता है। क्यों?
Answer: मानव शरीर आसानी से रोगग्रस्त नहीं होता क्योंकि इसमें एक बहुत ही प्रभावी और जटिल प्रतिरक्षा प्रणाली होती है। यह प्रणाली कई स्तरों पर काम करती है, जिसमें भौतिक अवरोध (जैसे त्वचा), रासायनिक अवरोध (जैसे पेट का अम्ल), और कोशिकाएं (जैसे श्वेत रक्त कोशिकाएं) शामिल हैं जो रोगाणुओं को पहचानती और नष्ट करती हैं। इसके अलावा, शरीर में विशेष प्रतिरक्षी (एंटीबॉडीज) भी बनती हैं जो विशिष्ट रोगाणुओं से लड़ने में मदद करती हैं। यह सब मिलकर शरीर को बीमारियों से बचाता है। मानव शरीर में प्राकृतिक रूप से कई प्रतिरक्षा तंत्र मौजूद होते हैं जो लगातार हमलावर रोगाणुओं से लड़ते रहते हैं।
In simple words: हमारा शरीर आसानी से बीमार नहीं होता क्योंकि इसमें एक मजबूत सुरक्षा प्रणाली है, जिसमें त्वचा, पेट का अम्ल और विशेष कोशिकाएं होती हैं जो बीमारियों से लड़ती हैं।
🎯 Exam Tip: मानव शरीर की प्रतिरक्षा प्रणाली के विभिन्न स्तरों (भौतिक, रासायनिक, कोशिकीय) और उनके कार्यों को याद रखें।
प्रश्न 9. किसी दो भौतिक अवरोधों के नाम लिखिए।
Answer: मानव शरीर में दो मुख्य भौतिक अवरोध हैं: त्वचा और नासिका छिद्रों में पाए जाने वाले पक्ष्माभ (cilia)। त्वचा शरीर की बाहरी परत होती है जो रोगाणुओं को शरीर में प्रवेश करने से रोकती है। नासिका छिद्रों में मौजूद छोटे बाल (पक्ष्माभ) हवा में मौजूद धूल और सूक्ष्मजीवों को फंसाते हैं और उन्हें फेफड़ों तक पहुँचने से रोकते हैं। ये दोनों शरीर को बाहरी खतरों से बचाने में पहली पंक्ति का काम करते हैं।
In simple words: दो शारीरिक सुरक्षा जो हमें बीमारियों से बचाती हैं, वे हैं हमारी त्वचा और नाक के अंदर के छोटे बाल।
🎯 Exam Tip: भौतिक अवरोधों के उदाहरणों को याद रखना महत्वपूर्ण है, क्योंकि ये शरीर की प्रतिरक्षा प्रणाली की पहली पंक्ति होते हैं।
प्रश्न 10. अधिकांश जीवाणुओं में एण्टीजनी संयोजकतो की संख्या कितनी होती है?
Answer: अधिकांश जीवाणुओं में एण्टीजनी संयोजकता की संख्या 100 या उससे अधिक होती है। एण्टीजनी संयोजकता का अर्थ है कि एक प्रतिजन अणु पर कितने विभिन्न स्थानों पर प्रतिरक्षी जुड़ सकते हैं। जितनी अधिक संयोजकता होती है, उतनी ही मजबूत प्रतिरक्षा प्रतिक्रिया उत्पन्न होने की संभावना होती है। यह रोगाणुओं की प्रतिरक्षा प्रणाली से बचने की क्षमता को भी प्रभावित करता है।
In simple words: ज्यादातर जीवाणुओं में प्रतिजन पर 100 या उससे ज्यादा जगह होती है जहाँ शरीर की रक्षा करने वाली चीज़ें (एंटीबॉडी) जुड़ सकती हैं।
🎯 Exam Tip: एण्टीजनी संयोजकता की अवधारणा को समझें और इसके संख्यात्मक मूल्य को याद रखें, जो प्रतिरक्षा प्रतिक्रिया की तीव्रता को प्रभावित करता है।
प्रश्न 11. प्रतिरक्षी का वह भाग जो प्रतिजन से क्रिया करता है, वह क्या कहलाता है?
Answer: प्रतिरक्षी का वह भाग जो सीधे प्रतिजन से क्रिया करता है, उसे पैराटोप (Paratope) कहते हैं। पैराटोप प्रतिरक्षी की वाई (Y) आकार की संरचना के सिरों पर मौजूद विशिष्ट क्षेत्र होता है, जो प्रतिजन के एपीटॉप (Antigenic determinant) से जुड़ता है। यह जुड़ना एक ताले और चाबी की तरह होता है, जहाँ प्रत्येक पैराटोप एक विशिष्ट एपीटॉप के लिए होता है। यह विशेष जुड़ाव प्रतिरक्षा प्रतिक्रिया को शुरू करने में महत्वपूर्ण है।
In simple words: प्रतिरक्षी का वह हिस्सा जो प्रतिजन से जुड़ता है, उसे पैराटोप कहते हैं।
🎯 Exam Tip: पैराटोप और एपीटॉप की अवधारणाओं को स्पष्ट रूप से समझें और उनके कार्यों को याद रखें, क्योंकि यह प्रतिरक्षी-प्रतिजन बंधन का आधार है।
प्रश्न 12. कब्जे या हिन्ज (Hinge) किसे कहते हैं ?
Answer: प्रतिरक्षी के Y-स्वरूप में दोनों भुजाओं के उद्गम स्थल पर एक लचीला क्षेत्र होता है जिसे कब्ज़ा या हिन्ज (Hinge) क्षेत्र कहते हैं। यह क्षेत्र प्रतिरक्षी को गतिशीलता प्रदान करता है, जिससे वह प्रतिजन से बेहतर तरीके से जुड़ पाता है। हिन्ज क्षेत्र की लचीलापन प्रतिरक्षी को विभिन्न कोणों पर खुलने और बंद होने की अनुमति देता है, जिससे यह कई प्रतिजन स्थलों तक पहुंच सकता है। इस लचीलेपन के कारण प्रतिरक्षी अधिक प्रभावी ढंग से कार्य कर पाता है।
In simple words: प्रतिरक्षी के Y-आकार के बीच में एक लचीला हिस्सा होता है, जिसे हिन्ज कहते हैं। यह इसे मुड़ने और घूमने में मदद करता है।
🎯 Exam Tip: हिन्ज क्षेत्र की भूमिका और उसके लचीलेपन के महत्व को समझना प्रतिरक्षी की कार्यप्रणाली के लिए आवश्यक है।
प्रश्न 13. वह कौनसा अकेला प्रतिरक्षी है जो माँ के दूध में पाया जाता है?
Answer: माँ के दूध में पाया जाने वाला अकेला प्रतिरक्षी IgA है। IgA नवजात शिशु को संक्रमण से बचाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है, खासकर पाचन तंत्र और श्वसन प्रणाली में। यह प्रतिरक्षी शिशु की अभी-विकसित प्रतिरक्षा प्रणाली को सहारा देता है, जिससे उसे जीवन के शुरुआती महीनों में बीमारियों से लड़ने में मदद मिलती है। यह माँ से बच्चे को एक प्राकृतिक और महत्वपूर्ण निष्क्रिय प्रतिरक्षा प्रदान करता है।
In simple words: माँ के दूध में जो खास रक्षा करने वाली चीज़ (एंटीबॉडी) होती है, वह IgA है।
🎯 Exam Tip: IgA की विशिष्ट भूमिका और माँ के दूध में इसकी उपस्थिति को याद रखना शिशु प्रतिरक्षा के संदर्भ में महत्वपूर्ण है।
प्रश्न 14. प्लाज्मा का कोई एक कार्य लिखिए।
Answer: प्लाज्मा का एक महत्वपूर्ण कार्य आँतों से शोषित पोषक तत्वों को शरीर के विभिन्न अंगों तक पहुँचाना है। यह ग्लूकोज, अमीनो एसिड, विटामिन और खनिज जैसे आवश्यक पोषक तत्वों को रक्तप्रवाह के माध्यम से पूरे शरीर में वितरित करता है। प्लाज्मा रक्त का तरल भाग है, जो इन पोषक तत्वों के परिवहन के लिए माध्यम प्रदान करता है, जिससे कोशिकाएं ऊर्जा और वृद्धि के लिए उनका उपयोग कर सकें।
In simple words: प्लाज्मा का एक काम है कि यह खाने से मिलने वाले पोषक तत्वों को शरीर के हर हिस्से तक पहुँचाता है।
🎯 Exam Tip: प्लाज्मा के विभिन्न कार्यों में से एक को स्पष्ट रूप से समझाएं, जैसे पोषक तत्व परिवहन, अपशिष्ट निष्कासन, या हार्मोन वितरण।
प्रश्न 16. रक्त के स्रोत के आधार पर रक्ताधान कितने प्रकार का होता है? नाम लिखिए।
Answer: रक्त के स्रोत के आधार पर रक्ताधान (blood transfusion) दो प्रकार का होता है। पहला है समजात आधान (Allogenic transfusion), जिसमें किसी अन्य व्यक्ति के संग्रहित रक्त का उपयोग किया जाता है। दूसरा है समजीवी आधान (Autogenic transfusion), जिसमें व्यक्ति के स्वयं के संग्रहित रक्त का उपयोग किया जाता है। समजीवी आधान तब किया जाता है जब कोई व्यक्ति अपनी सर्जरी से पहले अपना खून खुद के लिए ही जमा कराता है, जिससे संक्रमण का खतरा कम हो जाता है।
In simple words: खून देने वाले के आधार पर दो तरह का रक्त चढ़ाना होता है: दूसरों का खून लेना (समजात आधान) या खुद का ही खून लेना (समजीवी आधान)।
🎯 Exam Tip: रक्ताधान के दोनों प्रकारों के नाम और उनके बीच के मुख्य अंतर को याद रखें।
प्रश्न 17. जीवित या मृत व्यक्ति द्वारा किसी अन्य व्यक्ति को कोई ऊतक या अंग का दान करना क्या कहलाता है?
Answer: जीवित या मृत व्यक्ति द्वारा किसी अन्य व्यक्ति को कोई ऊतक या अंग दान करना अंगदान (Organ Donation) कहलाता है। अंगदान एक महत्वपूर्ण प्रक्रिया है जो दूसरे व्यक्ति की जिंदगी बचा सकती है या उसकी गुणवत्ता में सुधार कर सकती है। यह दान मृत व्यक्ति के शरीर से या जीवित दाता से किया जा सकता है। अंगदान में हृदय, गुर्दे, यकृत, फेफड़े और आँखें जैसे अंग शामिल होते हैं।
In simple words: किसी जीवित या मृत व्यक्ति द्वारा अपने अंग या ऊतक किसी दूसरे को देना अंगदान कहलाता है।
🎯 Exam Tip: अंगदान की परिभाषा को स्पष्ट रूप से जानें और इसके महत्व को भी समझें।
प्रश्न 18. सर्वग्राही रक्त समूह कौनसा है ?
Answer: सर्वग्राही रक्त समूह AB है। AB रक्त समूह वाले व्यक्ति किसी भी रक्त समूह (A, B, AB, या O) से रक्त प्राप्त कर सकते हैं, क्योंकि उनकी लाल रक्त कोशिकाओं की सतह पर A और B दोनों प्रतिजन मौजूद होते हैं, और उनके प्लाज्मा में कोई एंटी-A या एंटी-B प्रतिरक्षी नहीं होती है। इस वजह से, उनका शरीर किसी भी रक्त समूह के खिलाफ प्रतिरक्षा प्रतिक्रिया नहीं करता।
In simple words: AB रक्त समूह वाला व्यक्ति किसी भी दूसरे रक्त समूह से खून ले सकता है, इसलिए इसे सर्वग्राही कहते हैं।
🎯 Exam Tip: सर्वग्राही और सर्वदाता रक्त समूहों के बीच अंतर को समझना महत्वपूर्ण है, जिसमें AB सर्वग्राही है और O सर्वदाता।
प्रश्न 19. लाल रक्त कणिकाओं की सतह पर मुख्य रूप से कितने प्रकार के प्रतिजन पाये जाते हैं ?
Answer: लाल रक्त कणिकाओं (RBC) की सतह पर मुख्य रूप से दो प्रकार के प्रतिजन पाए जाते हैं: प्रतिजन 'A' और प्रतिजन 'B'। इन प्रतिजनों की उपस्थिति या अनुपस्थिति के आधार पर रक्त समूहों का वर्गीकरण किया जाता है (जैसे A, B, AB, और O)। ये प्रतिजन शरीर की प्रतिरक्षा प्रतिक्रिया में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं, खासकर रक्त आधान के दौरान।
In simple words: लाल रक्त कोशिकाओं की सतह पर मुख्य रूप से दो तरह के प्रतिजन होते हैं: A और B।
🎯 Exam Tip: A और B प्रतिजनों की उपस्थिति और अनुपस्थिति रक्त समूह वर्गीकरण का आधार है, इसे याद रखना चाहिए।
प्रश्न 20. प्लाज्मा का कार्य लिखिए।
Answer: प्लाज्मा का एक मुख्य कार्य आँतों से अवशोषित पोषक तत्वों को शरीर के विभिन्न अंगों तक पहुँचाना है। साथ ही, यह विभिन्न अंगों से हानिकारक पदार्थों को उत्सर्जी अंगों तक लाने का कार्य भी करता है ताकि उन्हें शरीर से बाहर निकाला जा सके। प्लाज्मा रक्त का तरल भाग है, जो इन पदार्थों के परिवहन के लिए माध्यम प्रदान करता है और शरीर के संतुलन को बनाए रखने में मदद करता है।
In simple words: प्लाज्मा शरीर में पोषक तत्वों को पहुँचाता है और बेकार चीजों को बाहर निकालने में मदद करता है।
🎯 Exam Tip: प्लाज्मा के पोषक तत्व परिवहन और अपशिष्ट निष्कासन के कार्यों को स्पष्ट रूप से जानें।
प्रश्न 21. सफल रक्ताधान तथा आनुवांशिक रोगों से निदान हेतु किसकी आनुवांशिकता का ज्ञान परम आवश्यक है?
Answer: सफल रक्ताधान और आनुवंशिक रोगों से निदान हेतु रुधिर वर्गों की आनुवंशिकता का ज्ञान परम आवश्यक है। रुधिर वर्ग का सही मिलान रक्त आधान की सफलता के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण है, क्योंकि गलत रक्त समूह का आधान गंभीर प्रतिरक्षा प्रतिक्रियाएँ उत्पन्न कर सकता है। इसी तरह, कुछ आनुवंशिक रोग रक्त समूहों से जुड़े होते हैं, और उनके पैटर्न को समझने से निदान और उपचार में मदद मिलती है। रक्त समूह की वंशागति की जानकारी डॉक्टरों को सुरक्षित चिकित्सा निर्णय लेने में सहायता करती है।
In simple words: सही खून चढ़ाने और कुछ बीमारियों को समझने के लिए रक्त समूहों के आनुवंशिक ज्ञान का होना बहुत जरूरी है।
🎯 Exam Tip: रक्त समूह की आनुवंशिकता का ज्ञान रक्ताधान सुरक्षा और आनुवंशिक रोगों की पहचान के लिए आधारभूत है।
लघूत्तरात्मक प्रश्न–
Question 1. प्रतिरक्षा विज्ञान किसे कहते हैं? विशिष्ट प्रतिरक्षा में प्रतिजन के विनाश की कार्यविधि के चरण लिखिए।
Answer: प्रतिरक्षा विज्ञान (Immunology) जीव विज्ञान की वह शाखा है जो शरीर की प्रतिरक्षा प्रणाली के अध्ययन से संबंधित है। यह शरीर की रोग पैदा करने वाले सूक्ष्मजीवों (रोगाणुओं) के खिलाफ सुरक्षा प्रतिक्रियाओं, प्रतिरक्षात्मक अंगों और कोशिकाओं का अध्ययन करता है। इसका मुख्य लक्ष्य यह समझना है कि शरीर बीमारियों को कैसे पहचानता है और उनसे कैसे लड़ता है।
विशिष्ट प्रतिरक्षा में प्रतिजन के विनाश की कार्यविधि के चरण निम्नलिखित हैं:
(i) अन्तर्निहित प्रतिजन तथा बाह्य प्रतिजन में विभेद करना: प्रतिरक्षा प्रणाली पहले यह पहचानती है कि कौन से प्रतिजन शरीर के अपने हैं और कौन से बाहरी हैं।
(ii) बाह्य प्रतिजन के ऊपर व्याप्त एण्टीजनी निर्धारकों की संरचना के अनुसार बी-लसिका कोशिकाओं द्वारा प्लाविक कोशिकाओं का निर्माण: जब बाहरी प्रतिजन पहचाना जाता है, तो बी-लसिका कोशिकाएं सक्रिय होती हैं और प्लाज्मा कोशिकाओं में बदल जाती हैं, जो विशिष्ट प्रतिरक्षी (एंटीबॉडी) का उत्पादन करती हैं।
(iii) प्लाज्मा कोशिकाओं द्वारा विशिष्ट प्रतिरक्षियों का निर्माण: प्लाज्मा कोशिकाएं बड़ी मात्रा में एंटीबॉडीज का उत्पादन करती हैं जो विशिष्ट प्रतिजन को निशाना बनाती हैं। ये एंटीबॉडीज प्रतिजन को निष्क्रिय करने में मदद करती हैं।
(iv) प्रतिजन-प्रतिरक्षी प्रतिक्रिया तथा कोशिका-माध्यित प्रतिरक्षा द्वारा प्रतिजन का विनाश: एंटीबॉडीज प्रतिजन से जुड़कर उन्हें निष्क्रिय करती हैं या उन्हें नष्ट करने के लिए अन्य प्रतिरक्षा कोशिकाओं को संकेत देती हैं। इसके साथ ही, टी-लसिका कोशिकाएं सीधे संक्रमित कोशिकाओं या कैंसर कोशिकाओं को नष्ट करती हैं, जिसे कोशिका-माध्यित प्रतिरक्षा कहते हैं। यह प्रणाली शरीर को प्रभावी ढंग से बीमारियों से बचाती है।
In simple words: प्रतिरक्षा विज्ञान शरीर की बीमारियों से लड़ने की पढ़ाई है। शरीर पहले बाहर के कीटाणुओं को पहचानता है। फिर खास कोशिकाएं एंटीबॉडी बनाती हैं जो कीटाणुओं से जुड़कर उन्हें मार देती हैं या अन्य कोशिकाओं को उन्हें खत्म करने का आदेश देती हैं।
🎯 Exam Tip: प्रतिरक्षा विज्ञान की परिभाषा, और विशिष्ट प्रतिरक्षा के चरणों को क्रमबद्ध तरीके से याद रखना महत्वपूर्ण है, जिसमें एंटीजन पहचान, एंटीबॉडी उत्पादन और विनाश शामिल हैं।
Question 2. स्वाभाविक प्रतिरक्षा व उपार्जित प्रतिरक्षा में विभेद कीजिए।
Answer: स्वाभाविक प्रतिरक्षा (Innate Immunity) और उपार्जित प्रतिरक्षा (Acquired Immunity) में मुख्य अंतर नीचे दिए गए हैं:
| विशेषता | स्वाभाविक प्रतिरक्षा (Innate Immunity) | उपार्जित प्रतिरक्षा (Acquired Immunity) |
|---|---|---|
| उपस्थिति | यह जन्मजात होती है। | यह जन्म के बाद व्यक्ति द्वारा अर्जित की जाती है। |
| विशिष्टता | यह अविशिष्ट होती है, सभी प्रकार के रोगाणुओं के खिलाफ काम करती है। | यह विशिष्ट होती है, एक खास रोगाणु के खिलाफ काम करती है। |
| स्मृति | इसमें कोई प्रतिरक्षात्मक स्मृति नहीं होती है। | इसमें स्मृति होती है, पिछले संक्रमणों को याद रखती है। |
| प्रतिक्रिया की गति | यह बहुत तेजी से काम करती है। | यह प्रतिक्रिया देने में समय लेती है। |
| उदाहरण | त्वचा, बलगम झिल्ली, पेट का अम्ल, मैक्रोफेज, न्यूट्रोफिल। | एंटीबॉडी, B-कोशिकाएं, T-कोशिकाएं। |
स्वाभाविक प्रतिरक्षा शरीर की रक्षा की पहली पंक्ति है, जो रोगाणुओं को शरीर में प्रवेश करने से रोकती है और उन्हें तुरंत नष्ट करने का प्रयास करती है। जबकि उपार्जित प्रतिरक्षा, जो दूसरी पंक्ति का काम करती है, विशिष्ट रोगाणुओं के खिलाफ अधिक प्रभावी और दीर्घकालिक सुरक्षा प्रदान करती है और शरीर को भविष्य में होने वाले संक्रमणों के लिए तैयार करती है। दोनों प्रतिरक्षा प्रणालियाँ मिलकर शरीर को बीमारियों से बचाती हैं।
In simple words: स्वाभाविक प्रतिरक्षा वह है जो हमें जन्म से मिलती है और तुरंत काम करती है, जैसे त्वचा। उपार्जित प्रतिरक्षा वह है जो हम जीवन में सीखते हैं, जैसे जब हम बीमार होते हैं या टीका लगवाते हैं, और यह खास बीमारियों से लड़ती है।
🎯 Exam Tip: स्वाभाविक और उपार्जित प्रतिरक्षा के बीच मुख्य अंतरों को एक तालिका के रूप में याद रखना तुलनात्मक प्रश्नों के लिए बहुत प्रभावी होता है।
Question 3. निम्न को परिभाषित कीजिए
1. प्रतिरक्षा
2. एन्टीजन
3. एन्टीबॉडी
4. प्रतिरक्षा तंत्र।
Answer:
1. प्रतिरक्षा (Immunity): प्रतिरक्षा शरीर की वह क्षमता है जिससे वह बीमारियों और रोगाणुओं (जैसे जीवाणु, वायरस) से लड़कर अपनी रक्षा करता है। यह शरीर को स्वस्थ बनाए रखने और संक्रमणों से बचाने की ताकत है। प्रतिरक्षा प्रणाली लगातार काम करती रहती है ताकि शरीर बाहरी हमलावरों से सुरक्षित रहे।
2. एन्टीजन (Antigen): प्रतिजन वे पदार्थ होते हैं जो शरीर में प्रवेश करने पर एक प्रतिरक्षा प्रतिक्रिया (immune response) उत्पन्न करते हैं। ये जीवाणु, वायरस, या विषैले पदार्थ हो सकते हैं। प्रतिजन शरीर की प्रतिरक्षा कोशिकाओं को एंटीबॉडी बनाने के लिए प्रेरित करते हैं ताकि उनसे लड़ा जा सके।
3. एन्टीबॉडी (Antibody): एंटीबॉडीज (इम्यूनोग्लोबुलिन) विशेष प्रोटीन होते हैं जो शरीर की B-लिम्फोसाइट कोशिकाओं द्वारा बनाए जाते हैं। ये प्रतिजन से जुड़कर उन्हें निष्क्रिय करते हैं और शरीर को संक्रमण से बचाने में मदद करते हैं। एंटीबॉडीज को 'Y' आकार के प्रोटीन के रूप में भी जाना जाता है।
4. प्रतिरक्षा तंत्र (Immune System): प्रतिरक्षा तंत्र शरीर के अंगों, कोशिकाओं और रसायनों का एक जटिल नेटवर्क है जो मिलकर शरीर को बीमारियों और संक्रमणों से बचाता है। इसमें त्वचा, श्वेत रक्त कोशिकाएं, लिम्फ नोड्स, और प्लीहा जैसे अंग शामिल हैं। यह तंत्र बाहरी हमलावरों को पहचानता है और उन्हें नष्ट करता है।
In simple words: 1. प्रतिरक्षा मतलब शरीर की बीमारी से लड़ने की ताकत। 2. प्रतिजन वो चीज़ है जो शरीर में घुसकर बीमारी से लड़ने के लिए शरीर को जगाती है। 3. एंटीबॉडी वो खास प्रोटीन हैं जो शरीर कीटाणुओं से लड़ने के लिए बनाता है। 4. प्रतिरक्षा तंत्र शरीर के वो सभी हिस्से हैं जो मिलकर हमें बीमारियों से बचाते हैं।
🎯 Exam Tip: इन चारों महत्वपूर्ण शब्दों की परिभाषाओं को स्पष्ट और संक्षिप्त रूप से याद रखें, क्योंकि ये प्रतिरक्षा विज्ञान की मूल अवधारणाएँ हैं।
Question 5. सक्रिय एवं निष्क्रिय प्रतिरक्षा को समझाइए।
Answer:
सक्रिय प्रतिरक्षा (Active Immunity): इस प्रकार की प्रतिरक्षा तब उत्पन्न होती है जब शरीर स्वयं किसी प्रतिजन (रोगाणु) के संपर्क में आने के बाद अपनी प्रतिरक्षा प्रतिक्रिया विकसित करता है। इसमें शरीर की प्रतिरक्षा कोशिकाएं प्रतिजन को पहचानती हैं और उसके खिलाफ अपनी एंटीबॉडी और स्मृति कोशिकाएं बनाती हैं। यह प्रक्रिया धीमी होती है लेकिन दीर्घकालिक सुरक्षा प्रदान करती है। उदाहरण: प्राकृतिक संक्रमण (जब कोई बीमारी होती है) या टीकाकरण (टीके द्वारा)।
निष्क्रिय प्रतिरक्षा (Passive Immunity): इसमें शरीर को सीधे तैयार एंटीबॉडी मिलती हैं, जिन्हें किसी अन्य स्रोत से प्राप्त किया जाता है। शरीर खुद एंटीबॉडी नहीं बनाता। यह प्रतिरक्षा त्वरित होती है लेकिन इसका प्रभाव अल्पकालिक होता है, क्योंकि प्राप्त एंटीबॉडी समय के साथ नष्ट हो जाती हैं। उदाहरण: माँ के दूध से शिशु को मिली एंटीबॉडी (IgA), या सांप के जहर के खिलाफ एंटीटॉक्सिन का इंजेक्शन।
इस प्रकार, सक्रिय प्रतिरक्षा दीर्घकालिक होती है और शरीर को स्वयं सुरक्षा विकसित करने देती है, जबकि निष्क्रिय प्रतिरक्षा त्वरित और अल्पकालिक सुरक्षा प्रदान करती है।
In simple words: सक्रिय प्रतिरक्षा में शरीर खुद बीमारियों से लड़ने के लिए तैयार होता है, जैसे टीका लगने पर। निष्क्रिय प्रतिरक्षा में शरीर को बनी-बनाई रक्षा मिलती है, जैसे माँ के दूध से बच्चे को या इंजेक्शन से।
🎯 Exam Tip: सक्रिय और निष्क्रिय प्रतिरक्षा के बीच के अंतर, उनके उदाहरण, और प्रभाव की अवधि को अच्छी तरह से समझें।
Question 6. प्रतिरक्षी कितने प्रकार के होते हैं? इनमें उपस्थित भारी श्रृंखला को यूनानी भाषा में किन अक्षरों से दर्शाया जाता है?
Answer: प्रतिरक्षी (Antibodies) पाँच प्रकार के होते हैं, जिन्हें इम्यूनोग्लोबुलिन (Ig) भी कहते हैं। ये हैं: IgG, IgM, IgA, IgD और IgE। प्रत्येक प्रकार की प्रतिरक्षी की एक विशिष्ट संरचना और कार्य होता है।
इन प्रतिरक्षियों में उपस्थित भारी पॉलिपेप्टाइड श्रृंखला को यूनानी भाषा के अक्षरों से दर्शाया जाता है:
(i) IgG में गामा \((\gamma)\) श्रृंखला
(ii) IgM में म्यू \((\mu)\) श्रृंखला
(iii) IgA में अल्फा \((\alpha)\) श्रृंखला
(iv) IgD में डेल्टा \((\delta)\) श्रृंखला
(v) IgE में एप्सिलॉन \((\varepsilon)\) श्रृंखला
ये भारी श्रृंखलाएं प्रत्येक प्रतिरक्षी की विशिष्टता और कार्यप्रणाली को निर्धारित करती हैं।
In simple words: प्रतिरक्षी पाँच तरह के होते हैं: IgG, IgM, IgA, IgD, IgE। इनकी मोटी लड़ियों (heavy chains) को यूनानी अक्षरों \( \alpha \), \( \gamma \), \( \delta \), \( \varepsilon \), \( \mu \) से दिखाते हैं।
🎯 Exam Tip: पाँचों प्रकार के प्रतिरक्षी और उनकी भारी श्रृंखलाओं के संबंधित यूनानी अक्षरों को याद रखना महत्वपूर्ण है।
Question 7. रक्त क्या है? प्लाज्मा के कार्य लिखिए। इसमें पाई जाने वाली कणिकाओं का कार्य लिखें।
Answer: रक्त (Blood) एक तरल जीवित संयोजी ऊतक है जो गाढ़ा, चिपचिपा और लाल रंग का होता है। यह रक्त वाहिकाओं के माध्यम से पूरे शरीर में लगातार बहता रहता है। रक्त प्लाज्मा और रक्त कणिकाओं से मिलकर बना होता है। एक सामान्य वयस्क मानव शरीर में लगभग 5 लीटर रक्त होता है।
प्लाज्मा के कार्य:
(i) प्लाज्मा आँतों से शोषित पोषक तत्वों (जैसे ग्लूकोज, अमीनो एसिड) को शरीर के विभिन्न अंगों तक पहुँचाने का कार्य करता है।
(ii) यह शरीर के विभिन्न अंगों से हानिकारक पदार्थों (जैसे यूरिया) को उत्सर्जी अंगों (जैसे गुर्दे) तक लाता है ताकि उन्हें शरीर से बाहर निकाला जा सके।
प्लाज्मा में तीन प्रकार की कणिकाएँ पाई जाती हैं और उनके कार्य:
1. लाल रक्त कणिकाएँ (RBC): इनका मुख्य कार्य ऑक्सीजन और कार्बन डाइऑक्साइड जैसी गैसों का परिवहन और विनिमय करना है। ये फेफड़ों से ऑक्सीजन को शरीर के ऊतकों तक ले जाती हैं और ऊतकों से कार्बन डाइऑक्साइड को फेफड़ों तक वापस लाती हैं।
2. श्वेत रक्त कणिकाएँ (WBC): ये शरीर की प्रतिरक्षा प्रणाली का हिस्सा होती हैं और रोगाणुओं (जैसे जीवाणु, वायरस) से रक्षा करने का कार्य करती हैं। ये संक्रमण से लड़ने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती हैं।
3. बिम्बाणु (Platelets): इनका मुख्य कार्य रक्तस्राव को रोकना है। ये रक्त का थक्का बनने में सहायक होते हैं और रक्त वाहिकाओं की मरम्मत में मदद करते हैं ताकि चोट लगने पर अधिक खून न बहे।
In simple words: रक्त एक लाल, गाढ़ा तरल है जो पोषक तत्वों और बेकार चीजों को ले जाता है। इसमें प्लाज्मा, लाल कोशिकाएं (ऑक्सीजन ले जाती हैं), सफेद कोशिकाएं (बीमारियों से लड़ती हैं) और प्लेटलेट्स (खून रोकने में मदद करती हैं) होती हैं।
🎯 Exam Tip: रक्त के घटकों (प्लाज्मा, RBC, WBC, प्लेटलेट्स) और उनके विशिष्ट कार्यों को याद रखना शारीरिक क्रिया विज्ञान के लिए महत्वपूर्ण है।
Question 8. प्रतिरक्षी की संरचना का केवल नामांकित चित्र बनाइए।
Answer: प्रतिरक्षी की संरचना एक Y-आकार की ग्लाइकोप्रोटीन अणु होती है, जिसमें चार पॉलिपेप्टाइड श्रृंखलाएं होती हैं: दो भारी (Heavy) और दो हल्की (Light) श्रृंखलाएं। ये श्रृंखलाएं डाइसल्फाइड बंधों द्वारा एक साथ जुड़ी होती हैं। प्रत्येक श्रृंखला में एक अस्थिर (Variable) भाग और एक स्थिर (Constant) भाग होता है। अस्थिर भाग प्रतिजन से जुड़ता है, जबकि स्थिर भाग अन्य प्रतिरक्षा कोशिकाओं से क्रिया करता है। केंद्रीय भाग में एक हिन्ज (Hinge) क्षेत्र होता है जो प्रतिरक्षी को लचीलापन प्रदान करता है। यह संरचना प्रतिरक्षी को विशिष्ट प्रतिजनों को प्रभावी ढंग से पहचानने और बांधने में सक्षम बनाती है।
In simple words: प्रतिरक्षी एक Y-आकार का होता है। इसमें दो लंबी और दो छोटी लड़ियाँ होती हैं जो आपस में जुड़ी होती हैं। इसका ऊपरी हिस्सा कीटाणुओं से जुड़ता है और निचला हिस्सा शरीर के अन्य भागों से जुड़ता है।
🎯 Exam Tip: प्रतिरक्षी की Y-आकार की संरचना और उसके मुख्य भागों (भारी व हल्की श्रृंखला, अस्थिर व स्थिर भाग, हिन्ज क्षेत्र) को ध्यान में रखना चाहिए।
Question 9. एक दम्पती में पुरुष A तथा स्त्री B रुधिर वर्ग की है तो उनकी संतानों के रुधिर वर्ग की क्यो सम्भावना होगी?
Answer: यदि एक दंपती में पुरुष का रक्त समूह A है और स्त्री का रक्त समूह B है, तो उनकी संतानों के रक्त समूह की संभावना उनके विशिष्ट जीन प्रारूप पर निर्भर करती है।
यदि पुरुष का जीन प्रारूप \(I^AI^A\) (शुद्ध A) और स्त्री का \(I^BI^B\) (शुद्ध B) है, तो सभी संतानें AB रक्त समूह (\(I^AI^B\)) की होंगी।
यदि पुरुष का जीन प्रारूप \(I^Ai\) (अशुद्ध A) और स्त्री का \(I^Bi\) (अशुद्ध B) है, तो संतानों में A (\(I^Ai\)), B (\(I^Bi\)), AB (\(I^AI^B\)) और O (\(ii\)) रक्त समूह होने की 25% संभावना होगी।
अन्य संभावित संयोजनों के लिए भी विभिन्न परिणाम हो सकते हैं। इस प्रकार, A और B रक्त समूह वाले माता-पिता की संतानों में A, B, AB, और O रक्त समूह होने की संभावना हो सकती है, जो उनके जीन प्रारूपों पर निर्भर करता है। एक आनुवंशिक क्रॉस डायग्राम (Punnett Square) इसे स्पष्ट रूप से दर्शाता है।
In simple words: अगर पिता का रक्त समूह A और माँ का रक्त समूह B है, तो उनके बच्चों में A, B, AB या O रक्त समूह हो सकता है। यह इस बात पर निर्भर करेगा कि उनके अपने रक्त समूह के जीन कैसे हैं।
🎯 Exam Tip: रक्त समूहों के जीन प्ररूपों (\(I^A, I^B, i\)) को समझें और Punnett Square का उपयोग करके विभिन्न संयोजनों के परिणामों की गणना करना सीखें।
Question 10. आर एच कारक (Rh factor) क्या है? मानव में कितने प्रकार के आरं एच कारक पाये जाते हैं तथा इन कारकों की आवृत्ति बताइए।
Answer: Rh कारक (Rhesus factor) लाल रक्त कोशिकाओं की सतह पर पाया जाने वाला एक प्रतिजन (प्रोटीन) है। इसकी खोज मकाका रीसस बंदर में हुई थी। जिन व्यक्तियों में यह कारक होता है, उन्हें Rh धनात्मक (Rh+) और जिनमें यह नहीं होता, उन्हें Rh ऋणात्मक (Rh-) कहते हैं। Rh कारक रक्त आधान और गर्भावस्था में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है।
मानव में पाँच प्रमुख प्रकार के Rh कारक पाए जाते हैं: Rh.D, Rh.E, Rh.e, Rh.C और Rh.c। इनमें से Rh.D कारक सबसे महत्वपूर्ण है क्योंकि यह सबसे अधिक प्रतिरक्षाजनक (Immunogenic) होता है, जिसका अर्थ है कि यह सबसे आसानी से प्रतिरक्षा प्रतिक्रिया उत्पन्न करता है।
इन कारकों की आवृत्ति मानव जाति में निम्नानुसार है:
(i) Rh.D: लगभग 85% लोगों में पाया जाता है।
(ii) Rh.e: लगभग 78% लोगों में पाया जाता है।
(iii) Rh.C: लगभग 80% लोगों में पाया जाता है।
(iv) Rh.E: लगभग 30% लोगों में पाया जाता है।
(v) Rh.c: लगभग 80% लोगों में पाया जाता है।
Rh.D कारक की उच्च आवृत्ति और प्रतिरक्षाजनकता के कारण यह रक्त आधान और गर्भ रक्ताणुकोरकता में विशेष महत्व रखता है।
In simple words: Rh कारक लाल रक्त कोशिकाओं पर पाया जाने वाला एक प्रोटीन है। मानव में पाँच मुख्य Rh कारक होते हैं (Rh.D, Rh.E, Rh.e, Rh.C, Rh.c), जिनमें Rh.D सबसे खास है और 85% लोगों में पाया जाता है।
🎯 Exam Tip: Rh कारक की परिभाषा, पाँच मुख्य प्रकार, और Rh.D की विशिष्ट महत्वता को याद रखना रक्त आधान और गर्भावस्था से संबंधित प्रश्नों के लिए महत्वपूर्ण है।
Question 11. अंगदान किसे कहते हैं? अंगदान व देहदान कौन कर सकता है? समझाइए।
Answer: अंगदान (Organ Donation) किसी जीवित या मृत व्यक्ति द्वारा अपने ऊतक या अंगों को किसी अन्य व्यक्ति को दान करना कहलाता है। यह दान प्राप्तकर्ता के जीवन को बचा सकता है या उसकी गुणवत्ता में सुधार कर सकता है। अंगों को ग्राही के शरीर में प्रत्यारोपित किया जाता है।
अंगदान और देहदान कोई भी व्यक्ति कर सकता है, चाहे उसकी कोई भी धर्म, जाति या लिंग हो, बशर्ते वह कानूनी मानदंडों को पूरा करता हो।
कौन कर सकता है अंगदान/देहदान:
(i) 18 वर्ष या उससे अधिक आयु का कोई भी व्यक्ति अंगदान या देहदान करने का निर्णय ले सकता है।
(ii) यदि व्यक्ति 18 वर्ष से कम आयु का है, तो उसके माता-पिता या कानूनी अभिभावक की सहमति आवश्यक है।
(iii) अंगदान करने वाले व्यक्ति को दो गवाहों की लिखित सहमति लेनी होती है।
(iv) मृत्यु से पहले, यदि किसी व्यक्ति ने अंगदान या देहदान की इच्छा व्यक्त नहीं की है, तो मृत्यु के बाद परिवार की सहमति से भी यह संभव हो सकता है।
भारत में अंगदान और देहदान कानूनी रूप से मान्य हैं, और यह एक महत्वपूर्ण सामाजिक कार्य है जो कई लोगों को नया जीवन प्रदान करता है।
In simple words: अंगदान मतलब अपने शरीर के अंग किसी और को देना। 18 साल या उससे बड़े कोई भी व्यक्ति अंगदान कर सकते हैं, या उनके माता-पिता/अभिभावक उनकी ओर से सहमति दे सकते हैं।
🎯 Exam Tip: अंगदान की परिभाषा, और इसे करने वाले व्यक्तियों के लिए आयु और सहमति संबंधी कानूनी प्रावधानों को याद रखें।
Question 12. प्रतिरक्षी संरचना के आधार पर अस्थिर भाग व स्थिर भाग में क्या अन्तर है?
Answer: प्रतिरक्षी (एंटीबॉडी) की संरचना में अस्थिर भाग (Variable portion) और स्थिर भाग (Constant portion) दोनों महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं:
| अस्थिर भाग (Variable Region) | स्थिर भाग (Constant Region) |
|---|---|
| यह प्रतिरक्षी श्रृंखला का वह भाग है जो प्रतिजन (Antigen) से सीधा क्रिया करता है। | यह प्रतिरक्षी श्रृंखला का वह भाग है जो अन्य प्रतिरक्षा कोशिकाओं और पूरक प्रोटीन से क्रिया करता है। |
| यह श्रृंखला के \(NH_2\) अंश की तरफ पाया जाता है। | यह श्रृंखला के \(COOH\) अंश की तरफ पाया जाता है। |
| इसे Fab (Fragment antigen binding) भाग भी कहते हैं। | इसे Fc (Fragment crystallizable) भाग भी कहते हैं। |
| यह भाग प्रत्येक प्रतिरक्षी के लिए विशिष्ट होता है और प्रतिजन की पहचान के लिए जिम्मेदार है। | यह भाग विभिन्न प्रकार के प्रतिरक्षी अणुओं (IgG, IgM, आदि) में अपेक्षाकृत स्थिर होता है। |
अस्थिर भाग प्रतिरक्षी को विशिष्ट प्रतिजन को पहचानने की क्षमता प्रदान करता है, जबकि स्थिर भाग प्रतिरक्षी को शरीर की अन्य प्रतिरक्षा प्रक्रियाओं (जैसे पूरक सक्रियण या फैगोसाइटोसिस) के साथ बातचीत करने में मदद करता है। दोनों भाग मिलकर प्रतिरक्षी को उसकी पूरी कार्यप्रणाली के लिए सक्षम बनाते हैं।
In simple words: प्रतिरक्षी में दो मुख्य हिस्से होते हैं: अस्थिर हिस्सा (वेरिएबल) जो कीटाणुओं से जुड़ता है और स्थिर हिस्सा (कांस्टेंट) जो शरीर की दूसरी रक्षा कोशिकाओं से बात करता है।
🎯 Exam Tip: प्रतिरक्षी के अस्थिर और स्थिर भागों के बीच अंतर, उनके कार्यों और संबंधित नामों (Fab, Fc) को याद रखें।
Question 14. प्रतिजन व प्रतिरक्षी में कोई चार अन्तर लिखिए।
Answer: प्रतिजन (Antigen) और प्रतिरक्षी (Antibody) में मुख्य अंतर निम्नलिखित हैं:
| क्र.सं. | प्रतिजन (Antigen) | प्रतिरक्षी (Antibody) |
|---|---|---|
| 1. | प्रतिजन वे बाह्य पदार्थ हैं जो शरीर में प्रवेश करने पर प्रतिरक्षियों के निर्माण को प्रेरित करते हैं। | प्रतिरक्षी वे अणु हैं जो मनुष्य के शरीर में निर्मित होते हैं और प्रतिजन के विरुद्ध कार्य करते हैं। |
| 2. | ये प्रोटीन या पॉलीसैकेराइड के बने होते हैं। | ये प्रोटीन (गामा ग्लोबुलिन) के अणु होते हैं। |
| 3. | ये सूक्ष्म जीवों के शरीर की सतह पर या स्वतंत्र अवस्था में पाए जाते हैं। | ये रुधिर प्लाज्मा कोशिकाओं की सतह पर या शरीर के ऊतक द्रव्य में पाए जाते हैं। |
| 4. | ये आमतौर पर बाहर से शरीर में प्रवेश करते हैं। | ये शरीर के अंदर निर्मित होते हैं। |
| 5. | ये रोग उत्पन्न कर सकते हैं। | ये रोग उत्पन्न नहीं होने देते और रोगाणुओं को नष्ट करते हैं। |
| 6. | ये अनेक प्रकार के होते हैं- जीवाणु, वायरस, प्रोटोजोआ, परागकण, विष, दवाएँ आदि। | ये पाँच प्रकार के होते हैं- IgM, IgG, IgA, IgE, IgD. |
यह अंतर समझना प्रतिरक्षा प्रणाली की कार्यप्रणाली को समझने के लिए महत्वपूर्ण है। प्रतिजन "खतरा" होते हैं, जबकि प्रतिरक्षी "रक्षात्मक हथियार" होते हैं।
In simple words: प्रतिजन वो बाहरी चीज़ें हैं जो हमें बीमार कर सकती हैं और शरीर को लड़ने के लिए तैयार करती हैं। प्रतिरक्षी वो खास प्रोटीन हैं जिन्हें शरीर खुद बनाता है ताकि उन प्रतिजनों से लड़कर हमें बीमार होने से बचा सके।
🎯 Exam Tip: प्रतिजन और प्रतिरक्षी के बीच के अंतरों को एक तालिका के रूप में याद रखना तुलनात्मक प्रश्नों के लिए बहुत प्रभावी होता है।
Question 15. किन परिस्थितियों में रक्ताधान की परम आवश्यकता होती है?
Answer: रक्ताधान (blood transfusion) की परम आवश्यकता निम्नलिखित परिस्थितियों में होती है:
(i) दुर्घटना के कारण गंभीर चोट लगने और अत्यधिक रक्तस्राव होने पर, जिससे शरीर में खून की कमी हो जाती है।
(ii) शरीर में गंभीर रक्तहीनता (एनीमिया) होने पर, जब शरीर पर्याप्त लाल रक्त कोशिकाएं नहीं बना पाता है।
(iii) रक्त में बिम्बाणु (Platelets) की कमी होने की स्थिति में, जो रक्तस्राव को नियंत्रित करने के लिए आवश्यक होते हैं।
(iv) हीमोफीलिया जैसे रक्तस्राव विकारों से पीड़ित रोगियों को, जिनमें रक्त का थक्का बनने की क्षमता कम होती है।
(v) बड़ी सर्जरी या शल्यक्रिया के दौरान, जहाँ खून का नुकसान होने की संभावना होती है।
(vi) दात्र कोशिका अरक्तता (Sickle Cell Anemia) जैसे रोगों से ग्रसित रोगियों को, जिनमें लाल रक्त कोशिकाएं असामान्य होती हैं।
(vii) कुछ कैंसर के उपचार जैसे कीमोथेरेपी के बाद, जहाँ रक्त कोशिकाएं क्षतिग्रस्त हो जाती हैं।
इन सभी स्थितियों में, रक्ताधान जीवन रक्षक होता है क्योंकि यह रोगियों को नया जीवन प्रदान करता है और उन्हें सामान्य जीवन जीने में मदद करता है।
In simple words: खून चढ़ाने की बहुत जरूरत तब पड़ती है जब किसी को गंभीर चोट लगे, खून की बहुत कमी हो जाए, प्लेटलेट्स कम हों, हीमोफीलिया जैसी बीमारी हो, या बड़ी सर्जरी हो।
🎯 Exam Tip: रक्ताधान की आवश्यकता वाली विभिन्न परिस्थितियों को याद रखें, क्योंकि यह चिकित्सा आपात स्थितियों में रक्त के महत्व को दर्शाता है।
Question 1. व्युत्क्रम संकरण क्या है? जब F1 पीढ़ी का संकरण प्रभावी समयुग्मजी जनक से कराया जाता है, तो प्राप्त संतति में लक्षण-प्ररूप व जीनीप्ररूप अनुपात को समझाइए।
Answer: व्युत्क्रम संकरण वह क्रॉस है जिसमें माता और पिता के लिंगों को एक दूसरे से बदल दिया जाता है। पहले क्रॉस में, यदि एक पौधे (जैसे TT) को नर जनक और दूसरे पौधे (जैसे tt) को मादा जनक के रूप में इस्तेमाल किया जाता है, तो दूसरे क्रॉस में, TT को मादा जनक और tt को नर जनक के रूप में इस्तेमाल किया जाता है। इसे व्युत्क्रम संकरण (Reciprocal Cross) कहते हैं। यह संकरण हमें यह समझने में मदद करता है कि गुणों का असर लिंग पर कैसे पड़ता है।
लक्षणप्ररूप (Phenotype) अनुपात: 100% लम्बे पौधे प्राप्त होते हैं।
जीनीप्ररूप (Genotype) अनुपात: 1:1, यानी 50% TT और 50% Tt पौधे मिलते हैं।
In simple words: व्युत्क्रम संकरण में, हम माता-पिता के गुणों को बदलकर क्रॉस करते हैं ताकि यह पता चल सके कि बच्चे में गुणों का असर लिंग से जुड़ा है या नहीं।
🎯 Exam Tip: व्युत्क्रम संकरण को परिभाषित करते समय दोनों क्रॉस (प्रत्यक्ष और उलटा) को स्पष्ट रूप से बताना महत्वपूर्ण है।
Question 2. प्रतिरक्षा किसे कहते हैं? यह कितने प्रकार की होती है एवं प्रत्येक का वर्णन कीजिए।
Answer:
प्रतिरक्षा (Immunity): शरीर की वह क्षमता जो रोगों या रोगाणुओं से लड़कर खुद को बीमारियों से बचाती है, उसे प्रतिरक्षा कहते हैं। यह हमें स्वस्थ रखने में मदद करती है।
प्रतिरक्षा मुख्य रूप से दो प्रकार की होती है:
(1) स्वाभाविक प्रतिरक्षा विधि (Innate Immunity): यह जन्म से ही शरीर में मौजूद होती है। यह रोगाणुओं को शरीर में घुसने नहीं देती, और अगर वे घुस भी जाएं तो उन्हें नष्ट कर देती है। यह चार प्रकार के अवरोधकों से बनी है:
(i) भौतिक अवरोधक: हमारी त्वचा, नाक के बाल (पक्ष्माभ) और अन्य अंगों में पाए जाने वाले रोगाणुओं को रोकने वाले बाल जैसे संरचनाएँ (कशाभ) भौतिक अवरोधक का काम करते हैं। ये रोगाणुओं को शरीर में प्रवेश करने से रोकते हैं।
(ii) रासायनिक अवरोधक: हमारे पेट में मौजूद एंजाइम, पेट और योनि का अम्लीय वातावरण, और त्वचा पर मौजूद रासायनिक पदार्थ (जैसे सीवम) और कान का मोम (सेरुमन) रोगाणुओं को नष्ट करते हैं।
(iii) कोशिकीय अवरोधक: हमारे रक्त में मौजूद कुछ श्वेत रक्त कोशिकाएँ (जैसे न्यूट्रोफिल, एककेंद्रकाणु, मारक लिम्फोसाइट और मैक्रोफेज) रोगाणुओं को खाकर नष्ट करती हैं।
(iv) ज्वर, सूजन: शरीर में बुखार आना या सूजन होना भी एक प्राकृतिक सुरक्षा प्रक्रिया है जो संक्रमण से लड़ने में मदद करती है।
(2) उपार्जित प्रतिरक्षा विधि (Acquired Defence Mechanism): इसे विशिष्ट प्रतिरक्षा भी कहते हैं। यह प्रतिरक्षा जन्म के बाद हासिल की जाती है। इसमें शरीर किसी भी रोगाणु को पहचानकर उसे नष्ट करने के लिए खास तरीके अपनाता है। उपार्जित प्रतिरक्षा दो प्रकार की होती है:
(i) सक्रिय प्रतिरक्षा (Active Immunity): इस प्रकार की प्रतिरक्षा में शरीर खुद ही रोगाणुओं के खिलाफ एंटीबॉडी बनाता है। यह प्रतिरक्षा किसी खास रोगाणु के लिए होती है जिसके खिलाफ शरीर ने एंटीबॉडी बनाए हैं।
(ii) निष्क्रिय प्रतिरक्षा (Passive Immunity): इसमें शरीर की रक्षा के लिए बनी-बनाई एंटीबॉडी सीधे शरीर में डाल दी जाती हैं। यह प्रतिरक्षा तेज होती है और तुरंत काम करती है। माँ का दूध (कोलोस्ट्रम) और गर्भावस्था के दौरान माँ से बच्चे को मिलने वाली एंटीबॉडी इसके उदाहरण हैं।
In simple words: प्रतिरक्षा शरीर की बीमारियों से लड़ने की ताकत है। यह जन्म से मिली (स्वाभाविक) और जीवन में सीखी गई (उपार्जित) दो तरह की होती है। स्वाभाविक प्रतिरक्षा शरीर को बाहरी हमलावरों से बचाने के लिए तुरंत काम करती है, जबकि उपार्जित प्रतिरक्षा खास हमलावरों को पहचान कर उनसे लड़ती है।
🎯 Exam Tip: प्रतिरक्षा की परिभाषा के साथ उसके दोनों मुख्य प्रकारों (स्वाभाविक और उपार्जित) और उनके उप-प्रकारों का सही वर्णन करना पूर्ण अंक प्राप्त करने के लिए महत्वपूर्ण है।
Question 3. देहदान किसे कहते हैं? उन दो प्रमुख कारणों का वर्णन कीजिए जिनसे देहदान आवश्यक है?
Answer:
देहदान: किसी जीवित या मृत व्यक्ति द्वारा अपने अंगों या ऊतकों को दूसरे व्यक्ति में प्रत्यारोपण (ट्रांसप्लांट) के लिए दान करना देहदान कहलाता है। यह मानवीयता का एक बड़ा कार्य है।
देहदान मुख्य रूप से दो कारणों से आवश्यक है:
- जरूरतमंदों के लिए अंग प्रत्यारोपण: मृत शरीर से अंग निकालकर उन जरूरतमंद लोगों को दिए जा सकते हैं जिनकी दिमागी मौत हो चुकी है, लेकिन उनके अन्य अंग अभी भी काम कर रहे हैं। इन अंगों को प्रत्यारोपित करके कई लोगों की जान बचाई जा सकती है और उनके जीवन को बेहतर बनाया जा सकता है।
- चिकित्सीय प्रशिक्षण और अनुसंधान: मेडिकल के छात्र मृत शरीर पर अभ्यास करके मानव शरीर की संरचना और कार्यप्रणाली को गहराई से समझ पाते हैं। इससे वे बेहतर डॉक्टर बन पाते हैं। यह चिकित्सा विज्ञान के विकास और बीमारियों के इलाज में नई खोजों के लिए बहुत महत्वपूर्ण है।
In simple words: देहदान मतलब अपनी मौत के बाद अपने अंगों को किसी जरूरतमंद को देना या मेडिकल पढ़ाई के लिए दान करना। यह दूसरों की जान बचाने और डॉक्टरों को सिखाने के लिए बहुत जरूरी है।
🎯 Exam Tip: देहदान की परिभाषा के साथ उसके दो प्रमुख उद्देश्यों (अंग प्रत्यारोपण और चिकित्सा शिक्षा) को स्पष्ट रूप से समझाएँ।
Question 4. विभिन्न रक्त समूह (एबीओ तथा आरएच समूहीकरण) को सारणी द्वारा समझाइए।
Answer:
मनुष्य में कई रक्त समूह पाए जाते हैं, जिन्हें ABO और Rh रक्त तंत्र के नाम से जाना जाता है। रक्त समूह का निर्धारण लाल रक्त कणिकाओं (RBCs) की सतह पर मौजूद खास प्रतिजन (Antigens) और प्लाज्मा में मौजूद एंटीबॉडी पर निर्भर करता है। ये प्रतिजन 'A' और 'B' होते हैं। इन प्रतिजनों की उपस्थिति या अनुपस्थिति के आधार पर रक्त समूह A, B, AB और O में वर्गीकृत किए जाते हैं। Rh कारक भी रक्त को Rh धनात्मक (Rh+) या Rh ऋणात्मक (Rh-) में बांटता है। Rh.D कारक सबसे महत्वपूर्ण है और लगभग 85% लोगों में पाया जाता है।
यह तालिका ABO रक्त समूहीकरण को दर्शाती है:
| क्र.सं. | रुधिर समूह | रक्त कणिकाओं पर उपस्थित प्रतिजन (Antigen) | प्लाज्मा में ऐन्टीबॉडी |
|---|---|---|---|
| 1. | A | A | b |
| 2. | B | B | a |
| 3. | AB | A व B दोनों | ऐन्टीबॉडी अनुपस्थित |
| 4. | O | प्रतिजन अनुपस्थित | a व b दोनों |
Rh कारक के लिए भी रक्त समूह होते हैं, जैसे \( \text{Rh.D, Rh.E, Rh.e, Rh.C} \) और \( \text{Rh.c} \)। इनमें से Rh.D कारक सबसे मजबूत होता है और 85% लोगों में मौजूद होता है, जिससे वे Rh+ कहलाते हैं। जिन लोगों में यह कारक नहीं होता, वे Rh- होते हैं। रक्त आधान (ब्लड ट्रांसफ्यूजन) के दौरान ABO और Rh दोनों कारकों का मिलान करना बहुत जरूरी है ताकि कोई खतरनाक प्रतिक्रिया न हो।
In simple words: रक्त समूह लाल रक्त कणिकाओं पर मौजूद खास चीजों (प्रतिजन) और खून में मौजूद उनसे लड़ने वाली चीजों (एंटीबॉडी) पर निर्भर करते हैं। ABO समूह A, B, AB, O होते हैं, और Rh कारक रक्त को धनात्मक या ऋणात्मक बनाता है। ये सब जानना खून चढ़ाने के लिए बहुत जरूरी है।
🎯 Exam Tip: ABO रक्त समूह के लिए प्रतिजन और एंटीबॉडी की सही पहचान और Rh कारक के महत्व को समझना रक्त आधान की सुरक्षा के लिए महत्वपूर्ण है।
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