RBSE Solutions Class 10 Science Chapter 3 आनुवंशिकी

Get the most accurate RBSE Solutions for Class 10 Science Chapter 3 आनुवंशिकी here. Updated for the 2026-27 academic session, these solutions are based on the latest RBSE textbooks for Class 10 Science. Our expert-created answers for Class 10 Science are available for free download in PDF format.

Detailed Chapter 3 आनुवंशिकी RBSE Solutions for Class 10 Science

For Class 10 students, solving RBSE textbook questions is the most effective way to build a strong conceptual foundation. Our Class 10 Science solutions follow a detailed, step-by-step approach to ensure you understand the logic behind every answer. Practicing these Chapter 3 आनुवंशिकी solutions will improve your exam performance.

Class 10 Science Chapter 3 आनुवंशिकी RBSE Solutions PDF

बहुचयनात्मक प्रश्न

 

Question 1. जेनेटिक्स शब्द किसने दिया?
(क) मेण्डल।
(ख) बेटसन
(ग) मॉर्गन
(घ) पुनेट
Answer: (ख) बेटसन
In simple words: आनुवंशिकी या जेनेटिक्स शब्द बेटसन नाम के वैज्ञानिक ने सबसे पहले इस्तेमाल किया था। यह शब्द जीव विज्ञान के उस हिस्से के लिए है जो विरासत और विभिन्नताओं का अध्ययन करता है।

🎯 Exam Tip: वैज्ञानिक के नाम और उनके योगदान को याद रखना जीव विज्ञान में महत्वपूर्ण है, खासकर जब प्रमुख अवधारणाओं को समझना हो।

 

Question 2. मेण्डल ने अपने प्रयोग किस पर किये?
(क) मीठा मटर
(ख) जंगली मटर
(ग) उद्यान मटर
(घ) उपरोक्त सभी
Answer: (ग) उद्यान मटर
In simple words: मेण्डल ने अपने सारे प्रयोग बगीचे में उगने वाले मटर के पौधे पर किए थे, जिसका वैज्ञानिक नाम पाइसम सेटाइवम है। इस पौधे को चुनना उनके प्रयोगों के लिए बहुत अच्छा साबित हुआ।

🎯 Exam Tip: यह जानना महत्वपूर्ण है कि मेण्डल ने मटर के पौधे को क्यों चुना, जैसे कि इसका छोटा जीवन चक्र और आसानी से पहचानने योग्य लक्षण।

 

Question 3. आनुवंशिकता एवं विभिन्नताओं के अध्ययन की शाखा को कहते हैं
(क) आनुवंशिकी
(ख) जीयोलोजी
(ग) वानिकी
(घ) उपरोक्त में से कोई नहीं
Answer: (क) आनुवंशिकी
In simple words: जीव विज्ञान का वह हिस्सा जो यह पता लगाता है कि माता-पिता से बच्चों में गुण कैसे जाते हैं और बच्चे एक-दूसरे से अलग कैसे होते हैं, उसे आनुवंशिकी कहते हैं। यह जीव विज्ञान की एक विशेष शाखा है।

🎯 Exam Tip: आनुवंशिकी की परिभाषा और इसके मुख्य घटकों, जैसे वंशागति और विभिन्नताओं को समझना महत्वपूर्ण है।

 

Question 4. मटर की फली को हरा रंग कैसा लक्षण है?
(क) प्रभावी
(ख) अप्रभावी
(ग) अपूर्ण प्रभावी
(घ) सहप्रभावी
Answer: (क) प्रभावी
In simple words: मटर की फली का हरा रंग एक प्रभावी गुण है, जिसका मतलब है कि अगर हरे और पीले रंग के गुण एक साथ हों, तो हरा रंग ही दिखेगा। यह मेण्डल के प्रभाविता के नियम का उदाहरण है।

🎯 Exam Tip: मेण्डल के प्रयोगों में प्रभावी और अप्रभावी लक्षणों के उदाहरणों को याद रखना परीक्षार्थियों के लिए बहुत सहायक होता है।

 

Question 5. सामान्यतया किसी जीन के कितने युग्मविकल्पी होते हैं
(क) चार
(ख) तीन
(ग) दो
(घ) एक
Answer: (ग) दो
In simple words: आमतौर पर, एक जीन के दो रूप होते हैं जिन्हें युग्मविकल्पी कहते हैं। ये दो रूप बताते हैं कि कोई गुण कैसे दिखाई देगा, जैसे लंबा या छोटा।

🎯 Exam Tip: युग्मविकल्पी (एलील) की अवधारणा आनुवंशिकी की मूल बातों में से एक है; याद रखें कि प्रत्येक जीव में प्रत्येक जीन की दो प्रतियां होती हैं।

 

Question 7. जब F1 पीढी का संकरण किसी एक जनक से कराया जाता है तो उसे कहते हैं
(क) व्युत्क्रम क्रॉस
(ख) टेस्ट क्रॉस
(ग) संकरपूर्वज क्रॉस
(घ) उपरोक्त सभी
Answer: (ग) संकरपूर्वज क्रॉस
In simple words: जब F1 पीढ़ी के पौधों को उनके माता-पिता में से किसी एक (प्रभावी या अप्रभावी) के साथ मिलाया जाता है, तो उसे संकरपूर्वज क्रॉस कहते हैं। यह क्रॉस यह समझने में मदद करता है कि F1 पीढ़ी के पौधे अपने माता-पिता के गुणों को कैसे धारण करते हैं।

🎯 Exam Tip: संकरपूर्वज क्रॉस और टेस्ट क्रॉस के बीच के अंतर को समझना महत्वपूर्ण है, क्योंकि दोनों का उपयोग आनुवंशिक विश्लेषण में किया जाता है।

 

Question 8. संकरण Tt x tt से प्राप्त सन्तति का अनुपात होगा
(क) 3:1
(ख) 1:1
(ग) 1:2:1
(घ) 2:1
Answer: (ख) 1:1
In simple words: जब Tt (विषमयुग्मजी) और tt (समयुग्मजी अप्रभावी) पौधों का क्रॉस होता है, तो उनकी संतानों में Tt और tt का अनुपात 1:1 होता है। इसका मतलब है कि आधी संतानें विषमयुग्मजी (Tt) होंगी और आधी समयुग्मजी अप्रभावी (tt) होंगी।

🎯 Exam Tip: क्रॉस के परिणामों को समझने के लिए हमेशा एक पुनेट वर्ग का उपयोग करें, जिससे अनुपात सही ढंग से निर्धारित हो सके।

 

Question 9. मेण्डल ने अपने प्रयोग के लिए किस विपर्यासी लक्षण को नहीं चुना
(क) जड़ का रंग
(ख) पुष्प का रंग।
(ग) बीज का रंग
(घ) फली का रंग
Answer: (क) जड़ का रंग
In simple words: मेण्डल ने अपने प्रयोगों के लिए मटर के पौधे के सात अलग-अलग गुणों को चुना था, लेकिन उन्होंने जड़ के रंग को उनमें शामिल नहीं किया था। जड़ का रंग एक ऐसा लक्षण था जिसे उन्होंने अपने अध्ययन में नहीं लिया।

🎯 Exam Tip: मेण्डल द्वारा चुने गए सात विपर्यासी लक्षणों की सूची याद रखना आपको ऐसे प्रश्नों के उत्तर देने में मदद करेगा।

 

Question 10. एकसंकर संकरण की F2 पीढी में कितने प्रकार के जीनोटाइप बनते हैं
(क) 2
(ख) 3
(ग) 4
(घ) 9
Answer: (ख) 3
In simple words: एकसंकर संकरण में, F2 पीढ़ी में तीन अलग-अलग जीनोटाइप बनते हैं, जैसे TT, Tt, और tt। ये जीनोटाइप दिखाते हैं कि आनुवंशिक बनावट में कितनी विविधता है।

🎯 Exam Tip: एकसंकर संकरण के जीनोटाइपिक और फीनोटाइपिक अनुपात को स्पष्ट रूप से याद रखें (उदाहरण के लिए, 1:2:1 जीनोटाइपिक और 3:1 फीनोटाइपिक)।

 

Question 11. आनुवंशिकी का जनक किसे कहते हैं ?
Answer: आनुवंशिकी का जनक ग्रेगर जॉन मेण्डल को कहते हैं। उन्हें मटर के पौधों पर उनके काम के लिए जाना जाता है, जिससे वंशागति के बुनियादी नियम स्थापित हुए।
In simple words: ग्रेगर जॉन मेण्डल को आनुवंशिकी का पिता कहा जाता है क्योंकि उन्होंने वंशागति के नियमों की खोज की थी।

🎯 Exam Tip: जीव विज्ञान में महत्वपूर्ण व्यक्तियों के योगदान को उनके खोजों के साथ जोड़कर याद रखें।

 

Question 12. मेण्डल ने अपने प्रयोग किस पौधे पर किये ?
Answer: मेण्डल ने अपने प्रयोग उद्यान मटर (पाइसम सेटाइवम) पर किये। उन्होंने इस पौधे को इसलिए चुना क्योंकि इसके कई स्पष्ट और आसानी से देखे जा सकने वाले गुण थे।
In simple words: मेण्डल ने अपने सारे प्रयोग मटर के पौधे पर किए।

🎯 Exam Tip: मेण्डल द्वारा मटर के पौधे के चयन के पीछे के कारणों को जानना, जैसे कि इसका छोटा जीवन चक्र और आसानी से पहचानने योग्य लक्षण, महत्वपूर्ण है।

 

Question 13. प्रभावी लक्षण किसे कहते हैं ?
Answer: वह लक्षण जो F1 पीढ़ी में अपनी अभिव्यक्ति दर्शाता है, उसे प्रभावी लक्षण कहते हैं। इसका मतलब है कि यह लक्षण विषमयुग्मजी स्थिति में भी खुद को दिखाता है और अप्रभावी लक्षण को छिपा देता है।
In simple words: जो गुण पहली पीढ़ी में दिखाई देता है, उसे प्रभावी लक्षण कहते हैं।

🎯 Exam Tip: प्रभावी लक्षण हमेशा दूसरे अप्रभावी लक्षण की उपस्थिति में भी खुद को प्रकट करता है; यह मेण्डल के प्रभाविता के नियम का आधार है।

 

Question 14. आनुवंशिक लक्षणों का एक पीढ़ी से दूसरी पीढ़ी में संचरण क्या कहलाता है?
Answer: आनुवंशिक लक्षणों का एक पीढ़ी से दूसरी पीढ़ी में संचरण वंशागति (Heredity) कहलाता है। यह प्रक्रिया माता-पिता से बच्चों में गुणों को पहुंचाती है।
In simple words: गुणों का माता-पिता से बच्चों में जाना वंशागति कहलाता है।

🎯 Exam Tip: वंशागति आनुवंशिकी का एक महत्वपूर्ण हिस्सा है; याद रखें कि यह वह प्रक्रिया है जिसके द्वारा गुण एक पीढ़ी से दूसरी पीढ़ी तक जाते हैं।

 

Question 15. मेण्डल के नियमों की पुनर्खाज किसने की?
Answer: कार्ल कोरेन्स, एरिक वॉन शेरमेक एवं ह्यूगो डी ब्रीज ने मेण्डल के नियमों की पुनर्खाज की। उन्होंने 20वीं सदी की शुरुआत में स्वतंत्र रूप से मेण्डल के काम की पुष्टि की।
In simple words: कार्ल कोरेन्स, एरिक वॉन शेरमेक और ह्यूगो डी ब्रीज ने मेण्डल के नियमों को फिर से खोजा।

🎯 Exam Tip: उन वैज्ञानिकों के नाम याद रखना महत्वपूर्ण है जिन्होंने मेण्डल के काम की पुष्टि की और उसे मान्यता दिलाई, जिससे आनुवंशिकी का आधुनिक युग शुरू हुआ।

 

Question 16. मेण्डल का पूरा नाम क्या है?
Answer: मेण्डल का पूरा नाम ग्रेगर जॉन मेण्डल (Gregor John Mendel) है। उन्हें "आनुवंशिकी का जनक" भी कहा जाता है।
In simple words: मेण्डल का पूरा नाम ग्रेगर जॉन मेण्डल था।

🎯 Exam Tip: आनुवंशिकी जैसे विषयों में प्रमुख हस्तियों का पूरा नाम और उनके योगदान को जानना परीक्षा में अच्छे अंक प्राप्त करने में मदद करता है।

 

Question 17. मेण्डल द्वारा प्रतिपादित नियमों के नाम लिखिये।
Answer: मेण्डल द्वारा प्रतिपादित नियमों के नाम निम्न हैं:
1. प्रभाविता का नियम (Law of Dominance)
2. पृथक्करण का नियम (Law of Segregation)
3. स्वतंत्र अपव्यूहन का नियम (Law of Independent Assortment)
ये नियम वंशागति के बुनियादी सिद्धांतों की व्याख्या करते हैं।
In simple words: मेण्डल ने प्रभाविता, पृथक्करण और स्वतंत्र अपव्यूहन के तीन मुख्य नियम दिए।

🎯 Exam Tip: मेण्डल के तीनों नियमों के नाम और उनका संक्षिप्त विवरण याद रखना महत्वपूर्ण है, क्योंकि ये आनुवंशिकी की नींव हैं।

 

Question 18. परीक्षण संकरण किसे कहते हैं ?
Answer: वह क्रॉस जिसमें F1 पीढ़ी का संकरण अप्रभावी लक्षण प्ररूप वाले जनक के साथ किया जाता है, परीक्षण संकरण कहलाता है। यह क्रॉस यह जानने में मदद करता है कि F1 पीढ़ी का जीव समयुग्मजी प्रभावी है या विषमयुग्मजी।
In simple words: परीक्षण संकरण में, F1 पीढ़ी के पौधे को एक ऐसे जनक से मिलाया जाता है जिसमें अप्रभावी गुण हों।

🎯 Exam Tip: परीक्षण संकरण का मुख्य उद्देश्य अज्ञात जीनोटाइप का निर्धारण करना है, खासकर जब यह पता लगाना हो कि प्रभावी फीनोटाइप वाला जीव समयुग्मजी है या विषमयुग्मजी।

 

Question 19. बाह्य संकरण से क्या समझते हैं ?
Answer: बाह्य संकरण में F1 पीढ़ी के पादप (Tt) का संकरण अपने प्रभावी जनक (TT) से करवाया जाता है। इस संकरण से प्राप्त संतति में सभी पौधे लम्बे प्राप्त होते हैं जिनमें 50% समयुग्मजी लम्बे (TT) तथा 50% विषम युग्मजी लम्बे (Tt) पौधे प्राप्त होते हैं। इस विधि का उपयोग संकर ओज को बनाए रखने और प्रभावी लक्षणों को बढ़ावा देने के लिए किया जाता है।
In simple words: बाह्य संकरण वह है जब F1 पीढ़ी के पौधे को प्रभावी गुणों वाले जनक से मिलाया जाता है।

🎯 Exam Tip: बाह्य संकरण का उपयोग अक्सर प्रजातियों में वांछित प्रभावी लक्षणों को फिर से पेश करने के लिए किया जाता है, जिससे संतति की गुणवत्ता में सुधार होता है।

 

Question 20. मेण्डल के किस नियम को एकसंकर संकरण से नहीं समझाया जा सकता है?
Answer: स्वतंत्र अपव्यूहन का नियम (Law of Independent assortment) को एकसंकर संकरण से नहीं समझाया जा सकता है। इस नियम को समझाने के लिए द्विसंकर संकरण की आवश्यकता होती है, क्योंकि इसमें दो अलग-अलग लक्षणों की वंशागति का अध्ययन किया जाता है।
In simple words: स्वतंत्र अपव्यूहन का नियम एकसंकर क्रॉस से नहीं समझाया जा सकता।

🎯 Exam Tip: याद रखें कि स्वतंत्र अपव्यूहन का नियम दो या दो से अधिक लक्षणों की वंशागति से संबंधित है, इसलिए इसे समझने के लिए द्विसंकर संकरण जैसे जटिल क्रॉस की आवश्यकता होती है।

 

लघूत्तरात्मक प्रश्न

 

Question 21. लक्षणप्ररूप व जीनप्ररूप में अंतर लिखिये।
Answer: लक्षणप्ररूप व जीनप्ररूप में अन्तर निम्न प्रकार से है:

क्र.सं.लक्षणप्ररूपजीनप्ररूप
1.किसी सजीव की बाह्य प्रतीति (External appearance) को लक्षणप्ररूप कहते हैं।सजीव की आनुवंशिकीय रचना (Genetic Constitution) को जीनप्ररूप कहते हैं।
2.उदाहरण-लम्बे पौधे समयुग्मजी (TT) या विषमयुग्मजी (Tt)उदाहरण- शुद्ध या समयुग्मजी लम्बा (TT) व अशुद्ध या विषमयुग्मजी लम्बा (Tt)


In simple words: लक्षणप्ररूप वह है जो हमें बाहर से दिखता है, जैसे पौधे की लंबाई, जबकि जीनप्ररूप जीव की आनुवंशिक बनावट है।

🎯 Exam Tip: फीनोटाइप (लक्षणप्ररूप) और जीनोटाइप (जीनप्ररूप) के बीच के अंतर को उदाहरणों के साथ स्पष्ट रूप से समझना और बताना महत्वपूर्ण है।

 

Question 22. द्विसंकर संकरण को समझाइये।
Answer: द्विसंकर संकरण (Dihybrid Cross) एक ऐसा क्रॉस है जिसमें मेण्डल ने एक साथ दो जोड़ी विपर्यासी लक्षणों की वंशागति का अध्ययन किया। उदाहरण के लिए, उन्होंने पीले और गोल बीज वाले पौधे (YYRR) का क्रॉस हरे और झुर्रीदार बीज वाले पौधे (yyrr) से कराया।
F1 पीढ़ी में सभी पौधे पीले और गोल बीज (YyRr) वाले प्राप्त हुए, क्योंकि पीले और गोल लक्षण प्रभावी हैं।
फिर F1 पीढ़ी में स्वपरागण कराने पर F2 पीढ़ी में चार प्रकार के पौधे प्राप्त होते हैं। ये चार प्रकार के संयोजन थे: गोल-पीले, गोल-हरे, झुर्रीदार-पीले और झुर्रीदार-हरे। F2 पीढ़ी का लक्षणप्ररूप अनुपात 9:3:3:1 होता है, जिसमें 9 गोल व पीले बीज वाले, 3 गोल व हरे बीज वाले, 3 झुर्रीदार व पीले बीज वाले तथा 1 झुर्रीदार व हरे बीज वाला पादप प्राप्त होता है। यह मेण्डल के स्वतंत्र अपव्यूहन के नियम का उदाहरण है।
In simple words: द्विसंकर क्रॉस में मेण्डल ने दो गुणों को एक साथ अध्ययन किया, जैसे बीज का रंग और आकार। इसमें F2 पीढ़ी में 9:3:3:1 का अनुपात मिला।

🎯 Exam Tip: द्विसंकर क्रॉस की प्रक्रिया, F1 और F2 पीढ़ियों के परिणाम, और इसके फीनोटाइपिक अनुपात को समझना स्वतंत्र अपव्यूहन के नियम को समझने के लिए महत्वपूर्ण है।

 

Question 23. मेण्डल की सफलता के कारण लिखिये।
Answer: मेण्डल की सफलता के कारण निम्न हैं:

  • मेण्डल ने एक समय में केवल एक ही लक्षण की वंशागति का अध्ययन किया, जिससे परिणामों को समझना आसान हो गया।
  • उन्होंने अपने संकरण प्रयोगों के सभी आँकड़ों का सावधानीपूर्वक सांख्यिकीय विश्लेषण (Statistical analysis) किया, जिससे उनके निष्कर्षों को विश्वसनीय बनाया जा सका।
  • मेण्डल ने अपने प्रयोग के लिए मटर के पौधे का चुनाव भी बहुत सावधानीपूर्वक किया, जो उनके प्रयोगों के लिए एक आदर्श मॉडल था।

मटर के पौधे में स्पष्ट विपर्यासी लक्षण और कम जीवन चक्र मेण्डल के काम के लिए आदर्श थे।
In simple words: मेण्डल सफल रहे क्योंकि उन्होंने एक समय में एक ही गुण पर ध्यान दिया, अपने डेटा का ध्यान से विश्लेषण किया और अपने प्रयोगों के लिए मटर के पौधे को बुद्धिमानी से चुना।

🎯 Exam Tip: मेण्डल की वैज्ञानिक पद्धति और उनके द्वारा मटर के पौधे का चुनाव उनकी सफलता के प्रमुख कारण थे, जिन्हें परीक्षा में उल्लेख करना चाहिए।

 

Question 24. मेण्डल ने अपने प्रयोग के लिए मटर के पौधे को ही क्यों चुना?
Answer: मेण्डल ने अपने प्रयोग के लिए मटर के पौधे का चयन निम्न कारणों से किया:

  • मटर का पौधा एकवर्षीय होता है, जिससे कम समय में अनेक पीढ़ियों का अध्ययन किया जा सकता है।
  • इसमें द्विलिंगी पुष्प (Bisexual flowers) होते हैं, जिसके कारण स्वपरागण (Self pollination) द्वारा समयुग्मजी (Homozygous) पादप या शुद्ध वंशक्रम (Pure line) सरलता से प्राप्त किया जा सकता है।
  • विपुंसन (Emasculation) विधि द्वारा कृत्रिम परपरागण आसानी से किया जा सकता है, जिससे नियंत्रित क्रॉस संभव हो सके।
  • मटर के पौधे में विभिन्न लक्षणों के वैकल्पिक लक्षण मिलते हैं, जैसे लम्बे व बौने, गोल व झुर्रीदार बीज आदि।

इन विशेषताओं ने मटर को आनुवंशिक प्रयोगों के लिए एक उत्कृष्ट मॉडल बना दिया।
In simple words: मेण्डल ने मटर को इसलिए चुना क्योंकि इसका जीवन छोटा होता है, इसमें स्वपरागण और कृत्रिम परपरागण आसान होता है, और इसमें कई स्पष्ट, अलग-अलग गुण होते हैं।

🎯 Exam Tip: मटर के पौधे की विशेषताओं को समझना जो इसे आनुवंशिक अध्ययन के लिए उपयुक्त बनाती हैं, यह प्रश्न का एक महत्वपूर्ण हिस्सा है।

 

Question 25. मेण्डल का संक्षिप्त जीवन परिचय लिखिये।
Answer: ग्रेगर जॉन मेण्डल का जन्म 22 जुलाई, 1822 को ऑस्ट्रिया के हेन्जनडॉर्फ प्रांत के सिलिसियन गाँव में एक किसान परिवार में हुआ था। स्कूली शिक्षा और दर्शनशास्त्र का अध्ययन करने के बाद, वे 1843 में ब्रून शहर में पादरी बन गए और उन्हें 'ग्रेगर' की उपाधि मिली। उन्होंने वियना विश्वविद्यालय में विज्ञान और गणित का अध्ययन किया और बाद में एक विज्ञान शिक्षक के रूप में काम किया।
सन् 1856 से 1863 तक, मेण्डल ने चर्च के बगीचे में मटर के पौधों पर अपने प्रसिद्ध प्रयोग किए। उन्होंने 1865 में ब्रून सोसाइटी ऑफ नेचुरल हिस्ट्री के सामने अपने निष्कर्ष प्रस्तुत किए और आनुवंशिकी के नियमों को बताया, जिसे आज 'मेण्डलवाद' के नाम से जाना जाता है। उनके प्रयोगों को 1866 में "पादप संकरण का प्रयोग" नामक शीर्षक से प्रकाशित किया गया था। 6 जनवरी 1884 को उनका निधन हो गया। मेण्डल के काम को उनके जीवनकाल में बहुत कम मान्यता मिली।
In simple words: ग्रेगर जॉन मेण्डल का जन्म 1822 में हुआ था और वे एक पादरी थे। उन्होंने मटर के पौधों पर प्रयोग करके आनुवंशिकी के नियम खोजे, जिन्हें आज मेण्डलवाद कहते हैं। उनका निधन 1884 में हुआ।

🎯 Exam Tip: मेण्डल की जीवनी में उनकी जन्मतिथि, प्रमुख योगदान (मटर के पौधों पर प्रयोग) और उनके नियमों की मान्यता से संबंधित महत्वपूर्ण तिथियों को याद रखना चाहिए।

 

Question 26. मेण्डल के प्रभाविता नियम को समझाइये।।
Answer: प्रभाविता का नियम बताता है कि जब दो शुद्ध गुणों (जैसे लम्बा और बौना) वाले जीवों का संकरण कराया जाता है, तो F1 पीढ़ी में केवल प्रभावी गुण (जैसे लम्बापन) ही प्रकट होता है, जबकि अप्रभावी गुण (जैसे बौनापन) अभिव्यक्त नहीं हो पाता है। लम्बापन एक प्रभावी गुण है और बौनापन एक अप्रभावी गुण है। यह नियम बताता है कि कुछ लक्षण दूसरों पर 'हावी' होते हैं।
उदाहरण के लिए:
शुद्ध लम्बे पौधे (TT) \( \times \) शुद्ध बौने पौधे (tt)
\( \downarrow \)
युग्मक: \( \text{T} \) और \( \text{t} \)
\( \downarrow \)
F1 पीढ़ी: सभी विषमयुग्मजी लम्बे पौधे (Tt)
F1 पीढ़ी में सभी पौधे (100%) लम्बे (Tt) प्राप्त होते हैं, जो यह दर्शाता है कि लम्बापन का गुण बौनेपन पर प्रभावी है।
In simple words: प्रभाविता का नियम कहता है कि जब दो अलग-अलग गुणों वाले माता-पिता से बच्चे पैदा होते हैं, तो बच्चों में केवल एक गुण ही दिखाई देता है, जिसे प्रभावी गुण कहते हैं।

🎯 Exam Tip: प्रभाविता के नियम को समझाते समय, एक साधारण क्रॉस (जैसे लम्बे और बौने पौधों का) का उदाहरण देना और F1 पीढ़ी के परिणामों को स्पष्ट करना महत्वपूर्ण है।

 

Question 27. मेण्डल के आनुवंशिकता नियमों का महत्त्व लिखिये,
Answer: मेण्डल के नियमों का महत्त्व निम्नलिखित है:

  • मेण्डल के नियमों की सहायता से उन्नत और संकर प्रजातियों को उत्पन्न किया जाता है, जिससे कृषि उत्पादन में सुधार होता है।
  • इन प्रजातियों में अधिक उत्पादन, अधिक अनुकूलनशीलता और रोगों से लड़ने की क्षमता जैसे गुण पाए जाते हैं।
  • प्रजनन विज्ञान में मेण्डल के नियमों का बड़ा योगदान है, जो पशु और पौधों के प्रजनन कार्यक्रमों में सहायक है।
  • असाध्य रोगों की पहचान करने और उनके उपचार में मेण्डल के नियम सहायक होते हैं, जिससे मानव स्वास्थ्य में सुधार होता है।
  • मेण्डल के कार्यों से जैव तकनीक और जैव अभियांत्रिकी को भी बहुत बल मिला, जिससे आनुवंशिक इंजीनियरिंग के नए रास्ते खुले।
  • सुजननिकी में मानव और अन्य जीवों के जीवन स्तर की गुणवत्ता और श्रेष्ठ जर्मप्लाज्म के संरक्षण को बढ़ावा देने में मेण्डल के नियम उपयोगी हैं।
  • सजीवों में प्रभाविता के लक्षण का पाया जाना अत्यंत महत्वपूर्ण है, क्योंकि अनेक हानिकारक और घातक जीन अप्रभावी होने के कारण प्रभावी जीन की उपस्थिति में अपने आप को अभिव्यक्त नहीं कर पाते हैं, जिससे वे हानिकारक प्रभाव नहीं दिखाते।

इन नियमों ने आनुवंशिकी के क्षेत्र में क्रांति ला दी।
In simple words: मेण्डल के नियम हमें बेहतर पौधे और जानवर बनाने, बीमारियों को समझने और आनुवंशिक विज्ञान को आगे बढ़ाने में मदद करते हैं।

🎯 Exam Tip: मेण्डल के नियमों के अनुप्रयोगों को विभिन्न क्षेत्रों (जैसे कृषि, चिकित्सा और जैव प्रौद्योगिकी) में समझाना और उन्हें सूचीबद्ध करना आवश्यक है।

 

निबन्धात्मक प्रश्न

 

 

Question 28. मेण्डल के पृथक्करण के नियम को उदाहरण सहित समझाइये।
Answer: मेण्डल का पृथक्करण का नियम (Law of Segregation) यह बताता है कि जब युग्मक बनते हैं, तो प्रत्येक गुण के युग्मविकल्पी एक-दूसरे से अलग हो जाते हैं, ताकि प्रत्येक युग्मक में उस गुण का केवल एक ही युग्मविकल्पी हो। इसका मतलब है कि युग्मक हमेशा शुद्ध होते हैं। यह नियम एकसंकर संकरण के परिणामों पर आधारित है।
इस नियम को निम्न प्रकार से समझा जा सकता है: जब दो पौधों का क्रॉस (जैसे TT x tt) कराया जाता है, तो F1 पीढ़ी के लम्बे पौधों में दोनों जीन (T और t) उपस्थित होते हैं, लेकिन F2 पीढ़ी में ये जीन या लक्षण पृथक होकर पुनः लम्बे और बौने पौधे बनाते हैं।
उदाहरण के लिए:
शुद्ध लम्बे पौधे (TT) \( \times \) शुद्ध बौने पौधे (tt)
\( \downarrow \)
F1 पीढ़ी: सभी विषमयुग्मजी लम्बे पौधे (Tt)
\( \downarrow \)
F1 पीढ़ी के पौधों में स्वपरागण (Tt \( \times \) Tt)
\( \downarrow \)
F2 पीढ़ी:
लक्षणप्ररूप अनुपात - 3 लम्बे : 1 बौना
जीनप्ररूप अनुपात - 1 समयुग्मजी लम्बा (TT) : 2 विषमयुग्मजी लम्बे (Tt) : 1 समयुग्मजी बौना (tt)
इस प्रकार, F2 पीढ़ी में लक्षणों का पृथक्करण देखा जाता है, क्योंकि युग्मक बनते समय एलील अलग हो जाते हैं।
In simple words: पृथक्करण का नियम कहता है कि जब बच्चे पैदा होते हैं, तो गुणों के जोड़े अलग हो जाते हैं, ताकि हर बच्चे को हर माता-पिता से एक ही गुण का हिस्सा मिले।

🎯 Exam Tip: पृथक्करण के नियम को समझाते समय, युग्मक शुद्धता की अवधारणा को स्पष्ट करें और F2 पीढ़ी में जीनप्ररूपिक और लक्षणप्ररूपिक अनुपात को उदाहरण के साथ प्रस्तुत करें।

 

Question 29. मेण्डलवाद क्या है? स्वतन्त्र अपव्यूहन के नियम का विस्तार से वर्णन कीजिये।
Answer: मेण्डलवाद: मेण्डल द्वारा उद्यान मटर पर किए गए प्रयोगों के परिणामों के आधार पर आनुवंशिकता के नियमों का प्रतिपादन किया गया, जिन्हें मेण्डलवाद भी कहते हैं। मेण्डलवाद आनुवंशिकी का मूलभूत ढाँचा प्रदान करता है।

स्वतन्त्र अपव्यूहन का नियम (Law of Independent Assortment): मेण्डल का यह नियम द्विसंकर संकरण के परिणामों पर आधारित है। इस नियम के अनुसार, यदि दो या दो से अधिक विपर्यासी लक्षणों युक्त पादपों का संकरण कराया जाता है, तो एक लक्षण की वंशागति का दूसरे लक्षण की वंशागति पर कोई प्रभाव नहीं पड़ता है। इसका अर्थ है कि अलग-अलग लक्षणों के जीन युग्मक निर्माण के समय एक-दूसरे से स्वतंत्र रूप से अलग होते हैं।

उदाहरण: यदि मटर के समयुग्मजी पीले गोलाकार (YYRR) बीज वाले पौधे का हरे, झुर्रीदार (yyrr) बीज वाले पौधे से संकरण कराया जाता है, तो F1 पीढ़ी में सभी पौधे पीले गोलाकार (Yellow rounded) बीज (YyRr) वाले प्राप्त होते हैं।

F1 पीढ़ी में परस्पर स्वपरागण कराने पर प्राप्त F2 पीढ़ी में लक्षणप्ररूप चार प्रकार के होते हैं, जिनका अनुपात 9 : 3 : 3 : 1 होता है। तथा जीनप्ररूप नौ प्रकार के होते हैं, जिनका अनुपात 1:2:2:4:1:2:1:2:1 होता है।
 

\( \text{♀/♂} \)YRYryRyr
YRYYRR
पीला गोलाकार
YYRr
पीला गोलाकार
YyRR
पीला गोलाकार
YyRr
पीला गोलाकार
YrYYRr
पीला गोलाकार
YYrr
पीला झुर्रीदार
YyRr
पीला गोलाकार
Yyrr
पीला झुर्रीदार
yRYyRR
पीला गोलाकार
YyRr
पीला गोलाकार
yyRR
हरा गोलाकार
yyRr
हरा गोलाकार
yrYyRr
पीला गोलाकार
Yyrr
पीला झुर्रीदार
yyRr
हरा गोलाकार
yyrr
हरा झुर्रीदार


लक्षणप्ररूप अनुपात (Phenotypic ratio): 9 (पीला गोलाकार) : 3 (पीला झुर्रीदार) : 3 (हरा गोलाकार) : 1 (हरा झुर्रीदार)
जीनप्ररूप अनुपात (Genotypic ratio): 1 (YYRR) : 2 (YyRR) : 2 (YYRr) : 4 (YyRr) : 1 (YYrr) : 2 (Yyrr) : 1 (yyRR) : 2 (yyRr) : 1 (yyrr)
इस प्रयोग से स्पष्ट होता है कि बीजों के रंग और आकृति की वंशागति एक-दूसरे से प्रभावित नहीं होती। ये लक्षण स्वतंत्र रूप से वंशानुगत होते हैं।
In simple words: मेण्डलवाद मेण्डल के आनुवंशिकी नियम हैं। स्वतंत्र अपव्यूहन का नियम कहता है कि एक गुण दूसरे गुण पर निर्भर नहीं करता, और ये गुण युग्मक बनाते समय अलग-अलग हो जाते हैं।

🎯 Exam Tip: स्वतंत्र अपव्यूहन के नियम को समझाने के लिए द्विसंकर क्रॉस का उदाहरण और उसके फीनोटाइपिक व जीनोटाइपिक अनुपातों को सही ढंग से प्रस्तुत करना महत्वपूर्ण है।

 

Question 30. मेण्डल के आनुवंशिकता के नियमों को समझाइये।
Answer: मेण्डल ने उद्यान मटर पर अपने प्रयोगों के आधार पर वंशागति के तीन मुख्य नियम प्रतिपादित किए, जिन्हें सामूहिक रूप से मेण्डल के आनुवंशिकता के नियम कहते हैं। ये नियम निम्नलिखित हैं:

1. प्रभाविता का नियम (Law of Dominance): जब दो विपरीत गुणों वाले शुद्ध जीवों का क्रॉस कराया जाता है, तो F1 पीढ़ी में केवल प्रभावी गुण ही प्रकट होता है, जबकि अप्रभावी गुण छिपा रहता है। उदाहरण के लिए, शुद्ध लंबे (TT) और शुद्ध बौने (tt) पौधों के क्रॉस से F1 पीढ़ी में सभी पौधे लंबे (Tt) होते हैं। यह दिखाता है कि लम्बापन बौनेपन पर प्रभावी है।

2. पृथक्करण का नियम (Law of Segregation): यह नियम बताता है कि युग्मक निर्माण के समय, प्रत्येक गुण के युग्मविकल्पी (एलील) एक-दूसरे से अलग हो जाते हैं, ताकि प्रत्येक युग्मक में उस गुण का केवल एक ही युग्मविकल्पी हो। इसी कारण युग्मक शुद्ध होते हैं। यह नियम एकसंकर संकरण के F2 पीढ़ी के परिणामों पर आधारित है, जहाँ लक्षण 3:1 के अनुपात में पृथक होते हैं (जैसे 3 लंबे: 1 बौना)।

3. स्वतंत्र अपव्यूहन का नियम (Law of Independent Assortment): यह नियम द्विसंकर संकरण पर आधारित है। इसके अनुसार, जब दो या दो से अधिक विपरीत लक्षणों वाले जीवों का क्रॉस कराया जाता है, तो एक लक्षण की वंशागति का दूसरे लक्षण की वंशागति पर कोई प्रभाव नहीं पड़ता है। प्रत्येक लक्षण अपने एलील के लिए स्वतंत्र रूप से युग्मक में वितरित होता है। उदाहरण के लिए, बीज का रंग और बीज का आकार स्वतंत्र रूप से वंशानुगत होते हैं, जिससे F2 पीढ़ी में 9:3:3:1 का अनुपात मिलता है।
ये तीनों नियम आनुवंशिकी के मूलभूत सिद्धांत हैं जो वंशागति की प्रक्रिया को समझाते हैं।
In simple words: मेण्डल के आनुवंशिकता के नियमों में प्रभाविता का नियम (एक गुण दूसरे पर हावी होता है), पृथक्करण का नियम (युग्मक बनाते समय गुण अलग होते हैं) और स्वतंत्र अपव्यूहन का नियम (विभिन्न गुण एक-दूसरे से स्वतंत्र रूप से विरासत में मिलते हैं) शामिल हैं।

🎯 Exam Tip: तीनों नियमों को स्पष्ट, संक्षिप्त और सटीक उदाहरणों के साथ समझाएं। प्रत्येक नियम के पीछे के मूल सिद्धांत को उजागर करना महत्वपूर्ण है।

 

वस्तुनिष्ठ प्रश्न

 

Question 1. निम्न में से किस वैज्ञानिक ने कारक शब्द को जीन का नाम दिया-
(अ) जोहानसेन
(ब) मेण्डल
(ग) बेटसन
(घ) मॉर्गन
Answer: (अ) जोहानसेन
In simple words: जोहानसेन ने 'कारक' शब्द की जगह 'जीन' शब्द का इस्तेमाल किया, जो आनुवंशिकी में एक बड़ा बदलाव था।

🎯 Exam Tip: आनुवंशिकी में शब्दावली के विकास और महत्वपूर्ण शब्दों को गढ़ने वाले वैज्ञानिकों को याद रखें।

 

Question 2. मेण्डल का जन्म हुआ
(अ) 22.7.1822
(ब) 22.7.1823
(स) 22.7.1821
(द) 22.7.1824
Answer: (अ) 22.7.1822
In simple words: ग्रेगर जॉन मेण्डल का जन्म 22 जुलाई 1822 को हुआ था। यह तिथि आनुवंशिकी के इतिहास में महत्वपूर्ण है।

🎯 Exam Tip: जीव विज्ञान में प्रमुख वैज्ञानिकों के जन्म और मृत्यु की तिथियों को याद रखना कभी-कभी परीक्षा में पूछा जा सकता है।

 

Question 3. हेरिडिटी शब्द का प्रतिपादन किया गया
(अ) बेटसन
(ब) स्पेन्सर
(स) मेण्डल
(द) कार्ल कोरेन्स
Answer: (ब) स्पेन्सर
In simple words: हरबर्ट स्पेन्सर ने 'हेरिडिटी' शब्द गढ़ा, जिसका अर्थ है गुणों का माता-पिता से बच्चों में जाना।

🎯 Exam Tip: विभिन्न वैज्ञानिक अवधारणाओं के नामों को गढ़ने वाले वैज्ञानिकों को जानना आपके ज्ञान को बढ़ाता है।

 

Question 4. मेण्डल द्वारा प्रस्तुत किये गये आनुवंशिकता के नियम कितने वर्ष तक उपेक्षित रहे?
(अ) 30 वर्ष
(ब) 35 वर्ष
(स) 40 वर्ष
(द) 25 वर्ष
Answer: (ब) 35 वर्ष
In simple words: मेण्डल के नियम 35 साल तक किसी ने नहीं समझे या माने। बाद में तीन वैज्ञानिकों ने उन्हें फिर से खोजा।

🎯 Exam Tip: यह जानना दिलचस्प है कि मेण्डल के काम को उनके जीवनकाल में क्यों नहीं पहचाना गया और बाद में इसे कैसे फिर से खोजा गया।

 

Question 5. मानव जाति के सुधार से सम्बन्धित विज्ञान की शाखा है
(अ) वनस्पति विज्ञान
(ब) जीवविज्ञान
(स) आनुवंशिकी
(द) सुजननिकी
Answer: (द) सुजननिकी
In simple words: सुजननिकी विज्ञान की वह शाखा है जो मानव जाति को आनुवंशिक रूप से बेहतर बनाने का अध्ययन करती है। यह आनुवंशिकी के सिद्धांतों का उपयोग करती है।

🎯 Exam Tip: सुजननिकी एक विवादास्पद क्षेत्र रहा है, लेकिन इसका महत्व मानव आनुवंशिकी और सामाजिक सुधारों के संदर्भ में समझा जा सकता है।

 

Question 6. मेण्डल के किस नियम की प्रस्तुति से जीन संकल्पना (Gene Concept) की पुष्टि होती है
(अ) प्रभाविता का नियम
(ब) पृथक्करण का नियम
(स) स्वतंत्र अपव्यूहन का नियम
(द) उपरोक्त सभी
Answer: (ब) पृथक्करण का नियम
In simple words: पृथक्करण का नियम बताता है कि गुण (जीन) युग्मक बनने के दौरान अलग होते हैं, जो जीन संकल्पना की पुष्टि करता है।

🎯 Exam Tip: पृथक्करण का नियम युग्मकों की शुद्धता पर जोर देता है, यह दर्शाता है कि प्रत्येक जीन एक असतत इकाई के रूप में व्यवहार करता है।

 

Question 7. मटर का वानस्पतिक नाम है
(अ) एलियम सीपा
(ब) पाइसम सेटाइवम
(ग) सोलेनम ट्यूबरोसम
(द) मैंगिफेरा इंडिका
Answer: (ब) पाइसम सेटाइवम
In simple words: मटर का वैज्ञानिक नाम पाइसम सेटाइवम है, जो उस पौधे का नाम है जिस पर मेण्डल ने अपने प्रयोग किए थे।

🎯 Exam Tip: पौधों के वानस्पतिक नामों को याद रखना महत्वपूर्ण है, खासकर उन पौधों के जिन्हें वैज्ञानिक अध्ययनों में प्रमुखता से उपयोग किया गया है।

 

Question 9. मेण्डल निम्न पर कार्य करने के लिए प्रसिद्ध हैं-
(अ) ड्रोसोफिला
(ब) ओइनोपेरा
(स) न्यूरोस्पोरा
(द) पाइसमें
Answer: (द) पाइसमें
In simple words: मेण्डल अपने मटर के पौधों पर किए गए काम के लिए बहुत प्रसिद्ध हैं, जिसका वैज्ञानिक नाम पाइसम सेटाइवम है।

🎯 Exam Tip: वैज्ञानिक के अध्ययन वस्तु को याद रखना महत्वपूर्ण है क्योंकि यह उनके योगदान का आधार होता है।

 

Question 10. निम्न में से कौनसा टेस्ट क्रॉस है-
(अ) TT x tt
(ब) Tt x tt
(स) Tt x TT
(द) tt x tt
Answer: (ब) Tt x tt
In simple words: टेस्ट क्रॉस में विषमयुग्मजी (Tt) को अप्रभावी समयुग्मजी (tt) से मिलाया जाता है, ताकि अज्ञात जीनोटाइप का पता लगाया जा सके।

🎯 Exam Tip: टेस्ट क्रॉस हमेशा अज्ञात प्रभावी जीनोटाइप का निर्धारण करने के लिए एक समयुग्मजी अप्रभावी व्यक्ति के साथ किया जाता है।

 

Question 11. द्विसंकर क्रॉस में F2 में समलक्षणी अनुपात होता है
(अ) 3:1
(ब) 1:2:1
(स) 9:3:3:1
(द) 9:2:2:2
Answer: (स) 9:3:3:1
In simple words: द्विसंकर क्रॉस में F2 पीढ़ी में दिखने वाले गुणों का अनुपात हमेशा 9:3:3:1 होता है, जो चार अलग-अलग गुणों के संयोजन को दर्शाता है।

🎯 Exam Tip: द्विसंकर क्रॉस के फीनोटाइपिक अनुपात को याद रखना स्वतंत्र अपव्यूहन के नियम को समझने के लिए महत्वपूर्ण है।

 

Question 12. मेण्डल द्वारा कितने जोड़ी विपर्यासी गुणों का अध्ययन किया गया
(अ) 4
(ब) 7
(स) 10
(द) 14
Answer: (ब) 7
In simple words: मेण्डल ने मटर के पौधे के सात जोड़ी अलग-अलग गुणों का अध्ययन किया, जैसे लंबाई, बीज का रंग और आकार।

🎯 Exam Tip: मेण्डल द्वारा अध्ययन किए गए सात जोड़ी विपर्यासी लक्षणों को याद रखना महत्वपूर्ण है, क्योंकि ये उनके प्रयोगों का आधार थे।

 

अतिलघूत्तरात्मक प्रश्न

 

Question 1. आनुवांशिकी किसे कहते हैं?
Answer: जीवविज्ञान की वह शाखा जहाँ हम सजीवों के गुणों का एक पीढ़ी से दूसरी पीढ़ी में जाना (वंशागति) और उनमें आने वाले अलग-अलग बदलावों (विभिन्नताओं) का अध्ययन करते हैं, उसे आनुवांशिकी कहते हैं। यह विज्ञान हमें समझाता है कि जीव अपने माता-पिता के गुणों को कैसे पाते हैं और उनमें विविधता क्यों आती है।
In simple words: आनुवंशिकी विज्ञान की वह शाखा है जो यह पता लगाती है कि जीव एक पीढ़ी से दूसरी पीढ़ी में गुण कैसे प्राप्त करते हैं और उनमें क्या अंतर होते हैं।

🎯 Exam Tip: परिभाषा में 'वंशागति' (Heredity) और 'विभिन्नताओं' (Variations) दोनों शब्दों को शामिल करना महत्वपूर्ण है, क्योंकि ये आनुवंशिकी के मुख्य पहलू हैं।

 

Question 2. सजीवों में लैंगिक जनन की क्रिया के समय युग्मकों द्वारा होना क्या कहलाता है?
Answer: सजीवों में जब लैंगिक जनन होता है, उस समय युग्मकों द्वारा अलग-अलग लक्षणों का एक पीढ़ी से दूसरी पीढ़ी में जाना 'आनुवंशिक लक्षण' कहलाता है। यह प्रक्रिया सुनिश्चित करती है कि नई पीढ़ी में माता-पिता दोनों के कुछ गुण आ सकें।
In simple words: जब लैंगिक जनन होता है, तो युग्मक माता-पिता से बच्चों में गुण ले जाते हैं, इसे आनुवंशिक लक्षण कहते हैं।

🎯 Exam Tip: आनुवंशिक लक्षण वंशागति का आधार होते हैं; इनके संचरण से ही नई संतति में माता-पिता के गुणों का मिश्रण होता है।

 

Question 3. जीन को परिभावि कीजिए।
Answer: वह छोटी इकाई जो किसी एक खास गुण या लक्षण को नियंत्रित करती है, उसे जीन (Gene) कहते हैं। जीन ही यह तय करते हैं कि किसी जीव के बाल कैसे होंगे या उसकी आँखों का रंग क्या होगा।
In simple words: जीन एक ऐसा कारक है जो किसी जीव के खास गुणों को कंट्रोल करता है।

🎯 Exam Tip: जीन DNA के छोटे-छोटे खंड होते हैं जो प्रोटीन बनाने के लिए निर्देश देते हैं, जिससे विशिष्ट लक्षण प्रकट होते हैं।

 

Question 4. प्रभावी लक्षण को परिभाषित कीजिए।
Answer: वह गुण या विशेषता जो पहली पीढ़ी (F1) में खुद को पूरी तरह से दिखा पाता है, उसे प्रभावी लक्षण कहते हैं। उदाहरण के लिए, मटर के पौधों में लंबा कद का गुण प्रभावी होता है, इसलिए F1 पीढ़ी में सभी पौधे लंबे दिखते हैं।
In simple words: प्रभावी लक्षण वह होता है जो पहली पीढ़ी में हमेशा दिखाई देता है।

🎯 Exam Tip: प्रभावी लक्षण हमेशा दूसरे लक्षण (अप्रभावी) को छुपा देता है और खुद को प्रकट करता है, खासकर हाइब्रिड क्रॉस की पहली पीढ़ी में।

 

Question 5. समयुग्मजी किसे कहते हैं?
Answer: जब किसी गुण को नियंत्रित करने वाले जीन के दोनों विकल्प (युग्मविकल्पी) एक जैसे होते हैं, तो उसे समयुग्मजी कहते हैं। उदाहरण के लिए, TT या tt। ऐसे जीव अपने उस खास लक्षण के लिए 'शुद्ध' माने जाते हैं।
In simple words: समयुग्मजी का मतलब है जब किसी गुण के लिए जीन की दोनों प्रतियां एक जैसी हों, जैसे TT या tt.

🎯 Exam Tip: समयुग्मजी जीव अपने शुद्ध गुणों को अगली पीढ़ी में बिना बदलाव के भेजते हैं, जो आनुवंशिकी में महत्वपूर्ण है।

 

Question 6. जीनप्ररूप किसे कहते हैं?
Answer: किसी जीव की अंदरूनी आनुवंशिक बनावट को 'जीनप्ररूप' (Genotype) कहते हैं। यह जीव के अंदर मौजूद जीनों का एक अदृश्य सेट होता है जो उसके बाहरी गुणों को निर्धारित करता है।
In simple words: जीनप्ररूप जीव के जीनों की अंदरूनी बनावट होती है।

🎯 Exam Tip: जीनप्ररूप को हमेशा अक्षरों (जैसे TT, Tt, tt) से दर्शाया जाता है, जबकि लक्षणप्ररूप जीव के दिखने वाले गुण होते हैं।

 

Question 7. संकरपूर्वज लक्षण से आप क्या समझते हैं?
Answer: 'संकरपूर्वज संकरण' (Backcross) वह क्रॉस है जिसमें पहली पीढ़ी (F1) के जीव का संकरण उसके माता-पिता में से किसी एक जनक के साथ कराया जाता है। यह क्रॉस खास तौर पर यह पता लगाने के लिए किया जाता है कि F1 पीढ़ी का जीव अपने जीनों के मामले में शुद्ध है या संकर।
In simple words: संकरपूर्वज क्रॉस वह है जहाँ F1 पीढ़ी के जीव का मिलान उसके किसी जनक से कराते हैं।

🎯 Exam Tip: संकरपूर्वज क्रॉस का मुख्य उद्देश्य F1 पीढ़ी के जीव के जीनप्ररूप (Genotype) को निर्धारित करना है।

 

Question 8. मेण्डल के वंशागति के कोई दो नियम लिखिए।
Answer: मेण्डल के वंशागति के मुख्य दो नियम इस प्रकार हैं:
(i) प्रभाविता का नियम
(ii) स्वतंत्र अपव्यूहन का नियम।
मेण्डल के ये नियम बताते हैं कि जीव के गुण एक पीढ़ी से अगली पीढ़ी में कैसे जाते हैं।
In simple words: मेण्डल के दो नियम हैं: प्रभाविता का नियम और स्वतंत्र अपव्यूहन का नियम।

🎯 Exam Tip: वंशागति के तीनों नियम (प्रभाविता, पृथक्करण और स्वतंत्र अपव्यूहन) आनुवंशिकी की आधारशिला हैं; इन्हें ठीक से समझना ज़रूरी है।

 

Question 9. लक्षणप्ररूप किसे कहते हैं?
Answer: किसी जीव का बाहरी रूप या दिखने वाले गुण को 'लक्षणप्ररूप' (Phenotype) कहते हैं। ये वे गुण हैं जिन्हें हम देख या माप सकते हैं, जैसे पौधे का लंबा या बौना होना या फूल का रंग।
In simple words: लक्षणप्ररूप वह है जो हमें जीव का बाहरी रूप या दिखने वाले गुण बताता है।

🎯 Exam Tip: लक्षणप्ररूप हमेशा जीनप्ररूप (Genotype) और पर्यावरण के बीच की बातचीत का नतीजा होता है।

 

Question 10. मेण्डल के प्रयोगों में F1 से क्या तात्पर्य है?
Answer: मेण्डल के प्रयोगों में F1 का मतलब 'फर्स्ट फिलियल पीढ़ी' या 'प्रथम संतति पीढ़ी' होता है। यह वह पहली पीढ़ी है जो माता-पिता (जनकों) के बीच क्रॉस (संकरण) कराने से पैदा होती है। इस पीढ़ी में अक्सर केवल प्रभावी लक्षण ही दिखाई देते हैं।
In simple words: F1 मेण्डल के प्रयोगों में माता-पिता को मिलाने से बनी पहली पीढ़ी है।

🎯 Exam Tip: F1 पीढ़ी के सभी सदस्य अक्सर समान जीनप्ररूप और लक्षणप्ररूप दिखाते हैं, खासकर एकसंकर क्रॉस में।

 

Question 11. मेण्डल ने अपने संकरण प्रयोगों को किस शीर्षक से और किस पत्रिका में प्रकाशित किया?
Answer: मेण्डल ने अपने संकरण प्रयोगों को 'पादप संकरण पर प्रयोग' नामक शीर्षक से प्रकाशित किया था। यह कार्य 'ब्रुन सोसाइटी ऑफ नेचुरल हिस्ट्री वार्षिकी' नामक पत्रिका में छपा था।
In simple words: मेण्डल ने अपने प्रयोग 'पादप संकरण पर प्रयोग' शीर्षक से 'ब्रुन सोसाइटी ऑफ नेचुरल हिस्ट्री वार्षिकी' पत्रिका में छापे थे।

🎯 Exam Tip: मेण्डल के काम का शीर्षक और पत्रिका का नाम अक्सर सीधे प्रश्न के रूप में पूछा जाता है, इसलिए इन्हें याद रखना महत्वपूर्ण है।

 

Question 12. युग्म विकल्पी का क्या अर्थ है?
Answer: 'युग्म विकल्पी' या 'अलील' का अर्थ है किसी एक जीन के दो अलग-अलग या विपरीत रूप। उदाहरण के लिए, एक जीन जो पौधे की ऊँचाई को नियंत्रित करता है, उसके दो युग्म विकल्पी हो सकते हैं: लंबा और बौना।
In simple words: युग्म विकल्पी एक ही जीन के अलग-अलग रूप होते हैं जो एक ही गुण को अलग तरह से दिखाते हैं।

🎯 Exam Tip: युग्म विकल्पी हमेशा जोड़े में होते हैं और एक जीव में एक गुण के लिए केवल दो युग्म विकल्पी हो सकते हैं, भले ही उस गुण के कई रूप मौजूद हों।

 

Question 14. विपुंसन किसे कहते हैं?
Answer: 'विपुंसन' (Emasculation) कृत्रिम परागण की एक प्रक्रिया है। इसमें ऐसे फूलों से, जिनमें नर और मादा दोनों अंग होते हैं, उनके नर अंगों (पुंकेसरों) को कली की अवस्था में ही हटा दिया जाता है। ऐसा इसलिए करते हैं ताकि उसमें खुद से परागण (स्वपरागण) न हो और वैज्ञानिक अपनी मर्जी से परागण करा सकें।
In simple words: विपुंसन में फूल से उसके नर हिस्से को हटा देते हैं, ताकि अपनी पसंद से परागण करा सकें।

🎯 Exam Tip: विपुंसन का मुख्य उद्देश्य स्वपरागण को रोकना और वांछित परपरागण को सुनिश्चित करना है, जो संकरण प्रयोगों के लिए आवश्यक है।

 

Question 15. मेण्डल द्वारा चयनित किन्हीं दो अप्रभावी लक्षणों के नाम लिखिए।
Answer: मेण्डल ने अपने प्रयोगों के लिए मटर के पौधों में कई अप्रभावी लक्षण चुने थे। उनमें से दो मुख्य लक्षण इस प्रकार हैं:
(i) पौधों की लम्बाई के गुण में बौनापन
(ii) बीजों के रंग में हरा रंग।
ये लक्षण तभी दिखाई देते हैं जब पौधे में प्रभावी गुण मौजूद नहीं होता है।
In simple words: मेण्डल के चुने हुए दो अप्रभावी लक्षण थे: बौनापन (पौधे की ऊँचाई) और हरा रंग (बीज का रंग)।

🎯 Exam Tip: अप्रभावी लक्षण केवल समयुग्मजी (homozygous recessive) अवस्था में ही प्रकट होते हैं, यानी जब दोनों युग्म विकल्पी अप्रभावी हों।

 

लघूत्तरात्मक प्रश्न

 

Question 1. संकरपूर्वज संकरण क्या है? समझाइए।
Answer: 'संकरपूर्वज संकरण' (Backcross) एक प्रक्रिया है जिसमें F1 पीढ़ी के विषमयुग्मजी (Heterozygous) पौधे (जैसे Tt) का क्रॉस उसके किसी भी जनक (प्रभावी या अप्रभावी) के साथ करवाया जाता है। जब F1 पीढ़ी के विषमयुग्मजी संकर पादप (Tt) को प्रभावी जनक (TT) से क्रॉस करवाते हैं, तो इस क्रॉस के परिणामस्वरूप सभी पौधे लम्बे होते हैं। इनमें 50 प्रतिशत समयुग्मजी (TT) और 50 प्रतिशत विषमयुग्मजी लम्बे (Tt) पौधे प्राप्त होते हैं। इस प्रकार यह क्रॉस F1 के जीनप्ररूप को समझने में मदद करता है।
इसे नीचे दिए गए आरेख से समझा जा सकता है:
(युग्मक)

♀ \ ♂T
TTT (लम्बे)
tTt (लम्बे)

लक्षणप्ररूप अनुपात - 100% लम्बे पौधे
जीनप्ररूप अनुपात - 1 : 1 (50% TT (समयुग्मजी) : 50% Tt (विषमयुग्मजी))
In simple words: संकरपूर्वज संकरण में F1 पीढ़ी के पौधे का क्रॉस उसके जनक से कराया जाता है। यदि प्रभावी जनक से क्रॉस हो, तो सभी पौधे लंबे दिखते हैं (50% शुद्ध लंबे, 50% संकर लंबे)।

🎯 Exam Tip: संकरपूर्वज संकरण का मुख्य उद्देश्य F1 पीढ़ी के जीव के जीनप्ररूप (Genotype) को निर्धारित करना है, खासकर जब उसका बाहरी रूप (Phenotype) प्रभावी हो।

 

Question 2. समयुग्मजी और विषमयुग्मजी में विभेद कीजिए।
Answer: समयुग्मजी और विषमयुग्मजी के बीच अंतर नीचे दी गई तालिका में बताया गया है:

क्र.सं.समयुग्मजी (Homozygous)विषमयुग्मजी (Heterozygous)
1.यह किसी लक्षण के लिए शुद्ध होते हैं।विषमयुग्मजी किसी लक्षण के लिए शुद्ध नहीं होते, बल्कि संकर होते हैं।
2.इसके युग्मविकल्पी (अलील) समान होते हैं, जैसे-TT, ttइनके अलील असमान होते हैं।
3.यह केवल एक ही प्रकार का युग्मक बनाते हैं।एक जीन की वंशागति में दो प्रकार के युग्मक बनाते हैं।
4.अतिरिक्त ओज का अभाव होता है।विषमयुग्मजी जीवों में संकर ओज पाया जाता है।

ये दोनों स्थितियाँ जीव में गुणों की विविधता और आनुवंशिक भिन्नताओं के लिए महत्वपूर्ण हैं।
In simple words: समयुग्मजी में एक गुण के लिए दोनों जीन एक जैसे होते हैं (जैसे TT), जबकि विषमयुग्मजी में दोनों जीन अलग होते हैं (जैसे Tt).

🎯 Exam Tip: इन दोनों शब्दों को उदाहरणों (TT, tt, Tt) के साथ समझना और इनकी तुलनात्मक विशेषताओं को याद रखना महत्वपूर्ण है।

 

Question 3. शुद्ध गुण वाला पौधा किसे कहेंगे? समझाइए।
Answer: शुद्ध गुण वाला पौधा वह होता है जो जब खुद से परागण करता है (स्वपरागण), तो कई पीढ़ियों तक लगातार अपने जैसे ही गुण दिखाता है। इसका मतलब है कि उसके जीन एक खास लक्षण के लिए हमेशा समयुग्मजी (Homozygous) होते हैं, जैसे शुद्ध लम्बे (TT) या शुद्ध बौने (tt) पौधे। ऐसे पौधों का उपयोग अक्सर आनुवंशिक प्रयोगों में शुरुआती जनक के रूप में किया जाता है।
In simple words: शुद्ध गुण वाला पौधा वह है जो हमेशा अपने जैसे ही पौधे पैदा करता है, जब वह खुद से परागण करता है।

🎯 Exam Tip: शुद्ध गुण वाले पौधे आनुवंशिकी में महत्वपूर्ण हैं क्योंकि वे एक विशिष्ट लक्षण के लिए शुद्ध जीनप्ररूप (Homozygous genotype) को दर्शाते हैं।

 

Question 4. मेण्डल ने मटर के कौन-कौनसे लक्षणों के बारे में संकरण प्रयोग किए? लक्षणों को सूचीबद्ध कीजिए।
Answer: मेण्डल ने अपने संकरण प्रयोगों के लिए मटर के पौधों के सात अलग-अलग गुणों (लक्षणों) का अध्ययन किया, जिनमें से हर गुण के दो विपरीत रूप थे। यह सूची नीचे दी गई तालिका में है:

क्र.सं.पादप का लक्षणप्रभावी लक्षणअप्रभावी लक्षण
1.पादप की लम्बाईलम्बा (T)बौना (t)
2.पुष्प की स्थितिअक्षीय (A)शीर्ष (a)
3.परिपक्व फली की आकृतिफूली हुई (I)सिकुड़ी हुई (i)
4.अपरिपक्व फली का रंगहरा (G)पीला (g)
5.बीज की आकृतिगोल (R)झुर्रीदार (r)
6.बीजपत्र का रंगपीला (Y)हरा (y)
7.पुष्प का रंगबैंगनी (W)सफेद (w)

इन अलग-अलग और स्पष्ट दिखने वाले लक्षणों ने मेण्डल को वंशागति के पैटर्न को आसानी से समझने में मदद की।
In simple words: मेण्डल ने मटर के पौधों के सात अलग-अलग गुणों (जैसे लंबाई, फूल का रंग, बीज का आकार) पर प्रयोग किए, जिनके प्रभावी और अप्रभावी रूप थे।

🎯 Exam Tip: इन सात लक्षणों और उनके प्रभावी/अप्रभावी रूपों को याद रखना मेण्डल के नियमों को समझने और आनुवंशिकी के प्रश्नों को हल करने के लिए महत्वपूर्ण है।

 

Question 5. प्रभाविता व अप्रभाविता में अन्तर कीजिए।
Answer: प्रभाविता और अप्रभाविता के बीच मुख्य अंतर नीचे दी गई तालिका में समझाया गया है:

क्र.सं.प्रभाविताअप्रभाविता
1.वह युग्म विकल्पी जीन जो खुद को दिखाता है, प्रभावी कहलाता है।वह जीन जिसके लक्षण प्रभावी जीन की मौजूदगी में छिप जाते हैं, अप्रभावी कहलाते हैं।
2.प्रथम संतति पीढ़ी (F1) में दिखने वाले लक्षण प्रभावी कहलाते हैं।ये लक्षण अक्सर दूसरी संतति पीढ़ी (F2) में प्रकट होते हैं, इन्हें अप्रभावी कहते हैं।

ये दोनों अवधारणाएँ आनुवंशिकी में लक्षणों की वंशागति के पैटर्न को समझने के लिए बहुत महत्वपूर्ण हैं।
In simple words: प्रभावी लक्षण वह है जो हमेशा दिखता है, जबकि अप्रभावी लक्षण वह है जो प्रभावी की मौजूदगी में छिपा रहता है और केवल दूसरी पीढ़ी में दिख सकता है।

🎯 Exam Tip: प्रभावी और अप्रभावी लक्षणों की पहचान F1 और F2 पीढ़ियों में उनके प्रकट होने के तरीके से की जाती है। F1 में सिर्फ प्रभावी लक्षण दिखते हैं, जबकि F2 में अप्रभावी लक्षण भी दिखते हैं।

 

Question 6. परीक्षण संकरण को परिभाषित कीजिए एवं इसे आरेख द्वारा समझाइए।
Answer: 'परीक्षण संकरण' (Test Cross) एक विशेष प्रकार का क्रॉस है जिसमें F1 पीढ़ी के उस जीव का संकरण कराया जाता है जिसका लक्षणप्ररूप प्रभावी होता है, लेकिन जीनप्ररूप अज्ञात होता है। इस जीव का क्रॉस हमेशा अप्रभावी लक्षण प्ररूप वाले जनक (जैसे tt) के साथ कराया जाता है। इस संकरण से प्राप्त नई पीढ़ी (संतति) में लक्षणप्ररूप और जीनप्ररूप दोनों समान अनुपात में होते हैं: 50 प्रतिशत विषमयुग्मजी लम्बे (Tt) तथा 50 प्रतिशत समयुग्मजी बौने (tt) पौधे प्राप्त होते हैं, जो 1:1 का अनुपात दिखाते हैं। यह क्रॉस किसी जीव के जीनप्ररूप को पहचानने में बहुत उपयोगी है।
इसे नीचे दिए गए आरेख से समझा जा सकता है:
(युग्मक)

♀ \ ♂t
TTt (लम्बे)
ttt (बौने)

लक्षणप्ररूप अनुपात - 50% लम्बे : 50% बौने
जीनप्ररूप अनुपात - 50% विषमयुग्मजी लम्बे (Tt) : 50% समयुग्मजी बौने (tt)
In simple words: परीक्षण संकरण में F1 पीढ़ी के एक प्रभावी दिखने वाले जीव का क्रॉस एक अप्रभावी जनक से कराते हैं, ताकि उसके अंदर के जीन (जीनप्ररूप) का पता चल सके। परिणाम 1:1 के अनुपात में मिलते हैं।

🎯 Exam Tip: परीक्षण संकरण अज्ञात जीनप्ररूप वाले प्रभावी लक्षण वाले जीवों की शुद्धता (समयुग्मजी या विषमयुग्मजी) का पता लगाने का सबसे सीधा तरीका है।

 

Question 7. निम्न को परिभाषित कीजिए
Answer:
1. व्युत्क्रम क्रॉस (Reciprocal Cross): यह एक प्रकार का संकरण है जहाँ पहले क्रॉस में नर और मादा जनक की भूमिकाएँ बदल दी जाती हैं। उदाहरण के लिए, यदि पहले क्रॉस में 'A' पादप (TT) को नर और 'B' पादप (tt) को मादा जनक के रूप में उपयोग किया गया, तो दूसरे क्रॉस में 'A' पादप (TT) को मादा और 'B' पादप (tt) को नर जनक के रूप में उपयोग किया जाता है। यह क्रॉस इस बात की पुष्टि करने के लिए किया जाता है कि वंशानुक्रम में जनक का लिंग कोई भूमिका नहीं निभाता।
2. त्रिसंकर क्रॉस (Trihybrid Cross): यह एक ऐसा संकरण है जिसमें तीन अलग-अलग लक्षणों की वंशागति का एक साथ अध्ययन किया जाता है। जैसे, पौधे की लंबाई, बीज का रंग और फली की आकृति।
3. बहुसंकर क्रॉस (Polyhybrid Cross): यह वह संकरण है जिसमें दो से अधिक (कई) लक्षणों की वंशागति का एक साथ अध्ययन किया जाता है। यह त्रिसंकर क्रॉस का ही एक विस्तृत रूप है, जिसमें एक ही समय में और भी अधिक लक्षणों पर ध्यान दिया जाता है।
4. F1 पीढ़ी व F2 पीढ़ी (First and Second filial generation):
    • F1 पीढ़ी: यह वह पहली पीढ़ी है जो माता-पिता (जनकों) के बीच क्रॉस कराने से प्राप्त होती है। इस पीढ़ी में अक्सर प्रभावी लक्षण ही दिखाई देते हैं।
    • F2 पीढ़ी: यह वह दूसरी पीढ़ी है जो F1 पीढ़ी के सदस्यों के बीच क्रॉस (स्वपरागण या आपस में संकरण) कराने से प्राप्त होती है। इस पीढ़ी में प्रभावी और अप्रभावी दोनों लक्षण प्रकट हो सकते हैं।
In simple words: व्युत्क्रम क्रॉस में माता-पिता का लिंग बदल देते हैं; त्रिसंकर क्रॉस में तीन गुणों का अध्ययन करते हैं; बहुसंकर क्रॉस में कई गुणों का अध्ययन करते हैं; F1 पहली पीढ़ी है और F2 दूसरी पीढ़ी है जो F1 से आती है।

🎯 Exam Tip: इन सभी शब्दों की परिभाषाएँ और उनके उद्देश्यों को याद रखना मेण्डल के प्रयोगों और वंशानुक्रम के सिद्धांतों को समझने में मदद करेगा।

 

निबन्धात्मक प्रश्न

 

Question 1. 1. मैण्डल ने अपने प्रयोग के लिए मटर का पौधा ही क्यों चुना? व्याख्या कीजिए। 2. समयुग्मजी लम्बे (TT) एवं समयुग्मजी बौने (tt) में एक संकर संकरण कराने पर प्राप्त परिणामों पर आधारित आनुवंशिकता के नियमों में से किसी एक नियम को समझाइये। (माध्य. शिक्षा बोर्ड, मॉडल पेपर, 2017-18)
Answer:
1. मैण्डल ने अपने प्रयोग के लिए मटर का पौधा क्यों चुना? मैण्डल ने अपने आनुवंशिक प्रयोगों के लिए मटर का पौधा (Pisum sativum) चुनने के कई मुख्य कारण थे, जो इस प्रकार हैं:
    • मटर का पौधा एकवर्षीय होता है, जिससे कम समय में उसकी कई पीढ़ियों का अध्ययन करना आसान हो जाता है।
    • इसमें द्विलिंगी फूल होते हैं, जिससे प्राकृतिक रूप से स्वपरागण (Self-pollination) होता है और शुद्ध वंशक्रम (Pure line) प्राप्त करना सरल हो जाता है।
    • विपुंसन (Emasculation) की प्रक्रिया द्वारा कृत्रिम परपरागण (Cross-pollination) आसानी से कराया जा सकता है।
    • मटर के पौधे में कई स्पष्ट और विपरीत दिखने वाले गुण (जैसे लम्बे या बौने पौधे, गोल या झुर्रीदार बीज) आसानी से उपलब्ध थे, जिससे परिणामों का विश्लेषण करना आसान हो गया।
इन कारणों से मटर का पौधा आनुवंशिकी के प्रयोगों के लिए एक आदर्श विकल्प बन गया।

2. प्रभाविता का नियम: मैण्डल के एकसंकर संकरण प्रयोगों पर आधारित प्रभाविता का नियम बताता है कि जब दो अलग-अलग शुद्ध गुणों वाले जीवों (जैसे समयुग्मजी लम्बे पौधे \( \text{TT} \) और समयुग्मजी बौने पौधे \( \text{tt} \)) के बीच संकरण कराया जाता है, तो पहली पीढ़ी (F1) में केवल प्रभावी गुण (जैसे लम्बापन) ही दिखाई देता है। अप्रभावी गुण (जैसे बौनापन) इस पीढ़ी में प्रकट नहीं हो पाता है। इस नियम के अनुसार, लम्बापन एक प्रभावी गुण है और बौनापन एक अप्रभावी गुण है। यह नियम बताता है कि एक गुण का प्रभाव दूसरे गुण पर कैसे हावी हो जाता है।
इसे नीचे दिए गए चित्र से समझा जा सकता है:
लम्बे पौधे (शुद्ध) \( \text{TT} \quad \times \quad \) बौने पौधे (शुद्ध) \( \text{tt} \)
      \( \downarrow \)
      T (युग्मक)     t (युग्मक)
      \( \downarrow \)
      F1 पीढ़ी: \( \text{Tt} \) (लम्बे)
F1 पीढ़ी में सभी पौधे (100%) लम्बे (\( \text{Tt} \)) प्राप्त होते हैं।
In simple words: मैण्डल ने मटर का पौधा इसलिए चुना क्योंकि यह आसानी से बढ़ता है, इसके गुण स्पष्ट होते हैं, और इसमें आसानी से क्रॉस करा सकते हैं। प्रभाविता का नियम कहता है कि जब दो अलग गुण वाले शुद्ध पौधे मिलते हैं, तो पहली पीढ़ी में सिर्फ एक गुण दिखता है (प्रभावी गुण)।

🎯 Exam Tip: मैण्डल के मटर के पौधे चुनने के कारणों को बिंदुवार याद रखें, और प्रभाविता के नियम को उदाहरण के साथ स्पष्ट करें, खासकर F1 पीढ़ी के परिणामों पर ध्यान दें।

 

Question 2. निम्न पारिभाषिक शब्दों को स्पष्ट कीजिए:
Answer:
(अ) जीनप्ररूप (Genotype) तथा लक्षणप्ररूप (Phenotype):
    • जीनप्ररूप (Genotype): यह किसी जीव की अंदरूनी आनुवंशिक बनावट को कहते हैं। जीनप्ररूप से जीव में किसी खास गुण के लिए मौजूद जीनों को प्रतीकात्मक रूप से दिखाया जाता है। यह जीव के जीनों की पूरी संरचना बताता है। उदाहरण के लिए, मटर के पौधे की लम्बाई के लिए जीनप्ररूप \( \text{TT, Tt, tt} \) हो सकते हैं।
    • लक्षणप्ररूप (Phenotype): यह किसी जीव के खास गुण के बाहरी या दिखने वाले रूप को कहते हैं। यह जीव के उन गुणों को बताता है जिन्हें हम देख या माप सकते हैं, जैसे पौधे का लम्बा, बौना होना या फूल का रंग। इसमें जीव के अंदर के जीनों पर सीधे ध्यान नहीं दिया जाता है।
इन दोनों को समझना आनुवंशिकी में लक्षणों की अभिव्यक्ति के लिए महत्वपूर्ण है।

(ब) युग्मविकल्पी (Allele or Allelomorph): किसी जीन के दो अलग-अलग या विपरीत रूपों को युग्मविकल्पी या अलील कहते हैं। आमतौर पर, हर जीन के दो रूप होते हैं - एक प्रभावी और एक अप्रभावी। प्रभावी रूप को बड़े अक्षर से (जैसे 'T' लम्बेपन के लिए) और अप्रभावी रूप को छोटे अक्षर से (जैसे 't' बौनेपन के लिए) दिखाते हैं। ये युग्मविकल्पी ही किसी खास गुण के अलग-अलग रूप (जैसे लम्बा या बौना) तय करते हैं।

(स) संकरण (Hybridization) तथा संकर (Hybrid):
    • संकरण (Hybridization): यह वह प्रक्रिया है जिसमें दो अलग-अलग गुणों वाले जीवों (प्रजातियों) के बीच क्रॉस कराया जाता है, ताकि नई पीढ़ी में दोनों के गुण आ सकें।
    • संकर (Hybrid): संकरण की प्रक्रिया से पैदा होने वाले जीव को संकर कहते हैं। संकर में उसके दोनों जनक (माता-पिता) के गुण होते हैं। संकरण नई किस्मों और गुणों के विकास में सहायक होता है।

(द) व्युत्क्रम क्रॉस (Reciprocal Cross): यह एक विशेष प्रकार का संकरण है जिसमें नर और मादा जनक की भूमिकाओं को बदल दिया जाता है। उदाहरण के लिए, पहले क्रॉस में 'A' पादप को नर और 'B' पादप को मादा के रूप में इस्तेमाल किया जाता है, फिर दूसरे क्रॉस में 'A' पादप को मादा और 'B' पादप को नर के रूप में इस्तेमाल किया जाता है। यह क्रॉस इस बात की पुष्टि करने में मदद करता है कि वंशानुक्रम में माता-पिता का लिंग कोई भूमिका नहीं निभाता।
In simple words: जीनप्ररूप जीव की अंदरूनी आनुवंशिक बनावट है, जबकि लक्षणप्ररूप उसका बाहरी रूप है। युग्मविकल्पी एक जीन के अलग-अलग रूप होते हैं। संकरण दो जीवों को मिलाकर नया जीव बनाना है, और उस नए जीव को संकर कहते हैं। व्युत्क्रम क्रॉस में माता-पिता की लिंग भूमिकाओं को बदलकर क्रॉस किया जाता है।

🎯 Exam Tip: इन सभी शब्दों की परिभाषाओं को स्पष्ट उदाहरणों के साथ याद रखें, खासकर जीनप्ररूप और लक्षणप्ररूप के बीच के अंतर को समझना महत्वपूर्ण है।

 

Question 3. एकसंकर संकरण तथा द्विसंकर संकरण को स्पष्ट कीजिये।
Answer:
एकसंकर संकरण (Monohybrid Cross): एकसंकर संकरण वह क्रॉस है जिसमें केवल एक ही गुण के दो विपरीत रूपों का अध्ययन किया जाता है। मेण्डल ने मटर के लम्बे (\( \text{TT} \)) और बौने (\( \text{tt} \)) पौधों के बीच क्रॉस करवाया। F1 पीढ़ी में सभी पौधे लम्बे (\( \text{Tt} \)) उत्पन्न हुए। जब F1 पीढ़ी के पौधों (\( \text{Tt} \)) का स्वपरागण कराया गया, तो F2 पीढ़ी में 75% लम्बे और 25% बौने पौधे प्राप्त हुए। इस 3:1 के अनुपात को एकसंकर अनुपात कहते हैं। इस पीढ़ी में समलक्षणी अनुपात 3:1 (लम्बे:बौने) और समजीनी अनुपात 1:2:1 (\( \text{TT:Tt:tt} \)) होता है।
एकसंकर संकरण को समझने के लिए F1 से F2 पीढ़ी तक का आरेख नीचे दिया गया है:
\( \text{(शुद्ध लम्बा) TT} \quad \times \quad \text{(शुद्ध बौना) tt} \)
      \( \downarrow \)
      \( \text{F1 पीढ़ी: Tt (अशुद्ध लम्बा)} \)
फिर, \( \text{F1 (Tt)} \quad \times \quad \text{F1 (Tt)} \) से F2 पीढ़ी के परिणाम:

♀ \ ♂Tt
TTT (शुद्ध लम्बा)Tt (अशुद्ध लम्बा)
tTt (अशुद्ध लम्बा)tt (शुद्ध बौना)


द्विसंकर संकरण (Dihybrid Cross): द्विसंकर संकरण वह क्रॉस है जिसमें दो अलग-अलग गुणों (जैसे बीज का रंग और बीज की आकृति) की वंशागति का एक साथ अध्ययन किया जाता है। मेण्डल ने शुद्ध पीले गोलाकार (\( \text{YYRR} \)) बीज वाले पौधों का शुद्ध हरे झुर्रीदार (\( \text{yyrr} \)) बीज वाले पौधों के साथ क्रॉस करवाया। F1 पीढ़ी में सभी पौधे पीले गोलाकार (\( \text{YyRr} \)) बीज वाले प्राप्त हुए। जब F1 पीढ़ी के पौधों का स्वपरागण कराया गया, तो F2 पीढ़ी में चार अलग-अलग प्रकार के पौधे प्राप्त हुए। ये संयोजन थे: गोल-पीले, झुर्रीदार-पीले, गोल-हरे और झुर्रीदार-हरे। F2 पीढ़ी में लक्षणप्ररूप अनुपात 9:3:3:1 था, जिसका मतलब 9 पीले गोलाकार, 3 पीले झुर्रीदार, 3 हरे गोलाकार और 1 हरे झुर्रीदार बीज वाला पौधा बना। इस प्रकार इस प्रयोग से स्पष्ट होता है कि बीजों के रंग एवं आकृति की वंशानुगत पीढ़ी एक-दूसरे से प्रभावित नहीं होती। ये लक्षण स्वतंत्र रूप से वंशानुगत होते हैं। इसलिए इसे मेण्डल का 'स्वतन्त्र अपव्यूहन का नियम' कहते हैं।
द्विसंकर संकरण को समझने के लिए F1 से F2 पीढ़ी तक का आरेख नीचे दिया गया है:
\( \text{YyRr} \)
पीले गोलाकार (विषमयुग्मजी)
      \( \downarrow \)
      स्वपरागण (Self-pollination)
युग्मक: \( \text{YR, Yr, yR, yr} \)

 

♀ \ ♂YRYryRyr
YRYYRR
पीला गोलाकार
YYRr
पीला गोलाकार
YyRR
पीला गोलाकार
YyRr
पीला गोलाकार
YrYYRr
पीला गोलाकार
YYrr
पीला झुर्रीदार
YyRr
पीला गोलाकार
Yyrr
पीला झुर्रीदार
yRYyRR
पीला गोलाकार
YyRr
पीला गोलाकार
yyRR
हरा गोलाकार
yyRr
हरा गोलाकार
yrYyRr
पीला गोलाकार
Yyrr
पीला झुर्रीदार
yyRr
हरा गोलाकार
yyrr
हरा झुर्रीदार


In simple words: एकसंकर संकरण में एक गुण का अध्ययन होता है, जबकि द्विसंकर संकरण में दो गुणों का अध्ययन होता है। एकसंकर में F2 का अनुपात 3:1 (लक्षणप्ररूप) और 1:2:1 (जीनप्ररूप) होता है। द्विसंकर में F2 का अनुपात 9:3:3:1 (लक्षणप्ररूप) होता है।

🎯 Exam Tip: एकसंकर और द्विसंकर संकरण के लक्षणों और जीनप्ररूप अनुपातों को याद रखें। चेकरबोर्ड (पुनेट स्क्वायर) बनाकर परिणामों को स्पष्ट रूप से दर्शाना महत्वपूर्ण है।

Free study material for Science

RBSE Solutions Class 10 Science Chapter 3 आनुवंशिकी

Students can now access the RBSE Solutions for Chapter 3 आनुवंशिकी prepared by teachers on our website. These solutions cover all questions in exercise in your Class 10 Science textbook. Each answer is updated based on the current academic session as per the latest RBSE syllabus.

Detailed Explanations for Chapter 3 आनुवंशिकी

Our expert teachers have provided step-by-step explanations for all the difficult questions in the Class 10 Science chapter. Along with the final answers, we have also explained the concept behind it to help you build stronger understanding of each topic. This will be really helpful for Class 10 students who want to understand both theoretical and practical questions. By studying these RBSE Questions and Answers your basic concepts will improve a lot.

Benefits of using Science Class 10 Solved Papers

Using our Science solutions regularly students will be able to improve their logical thinking and problem-solving speed. These Class 10 solutions are a guide for self-study and homework assistance. Along with the chapter-wise solutions, you should also refer to our Revision Notes and Sample Papers for Chapter 3 आनुवंशिकी to get a complete preparation experience.

FAQs

Where can I find the latest RBSE Solutions Class 10 Science Chapter 3 आनुवंशिकी for the 2026-27 session?

The complete and updated RBSE Solutions Class 10 Science Chapter 3 आनुवंशिकी is available for free on StudiesToday.com. These solutions for Class 10 Science are as per latest RBSE curriculum.

Are the Science RBSE solutions for Class 10 updated for the new 50% competency-based exam pattern?

Yes, our experts have revised the RBSE Solutions Class 10 Science Chapter 3 आनुवंशिकी as per 2026 exam pattern. All textbook exercises have been solved and have added explanation about how the Science concepts are applied in case-study and assertion-reasoning questions.

How do these Class 10 RBSE solutions help in scoring 90% plus marks?

Toppers recommend using RBSE language because RBSE marking schemes are strictly based on textbook definitions. Our RBSE Solutions Class 10 Science Chapter 3 आनुवंशिकी will help students to get full marks in the theory paper.

Do you offer RBSE Solutions Class 10 Science Chapter 3 आनुवंशिकी in multiple languages like Hindi and English?

Yes, we provide bilingual support for Class 10 Science. You can access RBSE Solutions Class 10 Science Chapter 3 आनुवंशिकी in both English and Hindi medium.

Is it possible to download the Science RBSE solutions for Class 10 as a PDF?

Yes, you can download the entire RBSE Solutions Class 10 Science Chapter 3 आनुवंशिकी in printable PDF format for offline study on any device.