RBSE Solutions Class 10 Science Chapter 2 मानव तंत्र

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Detailed Chapter 2 मानव तंत्र RBSE Solutions for Class 10 Science

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Class 10 Science Chapter 2 मानव तंत्र RBSE Solutions PDF

बहुचयनात्मक प्रश्न

 

Question 1. विभिन्न स्तरों पर भोजन, भोजन पाचित रस तथा अवशिष्ट की गति को कौन नियंत्रित करता है?
(a) संवरणी पेशियां
(b) म्यूकोसा
(c) श्लेष्मी उपकला।
(d) दोनों ख व ग
Answer: (a) संवरणी पेशियां
In simple words: विभिन्न स्तरों पर भोजन और बेकार पदार्थों की गति को संवरणी पेशियां नियंत्रित करती हैं। ये एक दरवाजे की तरह काम करती हैं जो चीजें सही दिशा में आगे बढ़ाती हैं।

🎯 Exam Tip: याद रखें कि संवरणी पेशियां शरीर में एकतरफा बहाव को सुनिश्चित करती हैं, जैसे पाचन तंत्र में भोजन को आगे बढ़ाना।

 

Question 2. निम्न में से कौन से दंत मांसाहारी पशुओं में सर्वाधिक विकसित होते हैं ?
(a) कुंतक
(b) रदनक
(c) अग्र-चवर्णक
(d) चवर्णक
Answer: (b) रदनक
In simple words: मांसाहारी जानवरों में, रदनक दांत सबसे मजबूत होते हैं क्योंकि वे शिकार को पकड़ने और मांस को फाड़ने में मदद करते हैं। ये दांत आमतौर पर नुकीले होते हैं।

🎯 Exam Tip: मांसाहारी जीवों में रदनक का मुख्य कार्य भोजन को चीरना-फाड़ना होता है, जो उनके शिकार करने के तरीके के लिए जरूरी है।

 

Question 3. एपिग्लोटिस (epiglotis) का प्रमुख कार्य है
(a) भोजन को ग्रसनी में भेजना।
(b) भोजन को श्वासनली में प्रवेश से रोकना
(c) भोजन को ग्रहनी तक पहुंचाना
(d) उपरोक्त में से कोई नहीं
Answer: (b) भोजन को श्वासनली में प्रवेश से रोकना
In simple words: एपिग्लोटिस एक ढक्कन जैसा होता है जो खाना निगलते समय श्वास नली को बंद कर देता है। यह सुनिश्चित करता है कि खाना गलत नली में न जाए।

🎯 Exam Tip: एपिग्लोटिस एक महत्वपूर्ण सुरक्षा तंत्र है जो भोजन को वायुमार्ग में जाने से रोककर घुटन से बचाता है।

 

Question 4. एंजाइमों द्वारा सर्वाधिक भोजन पाचन की क्रिया यहाँ संपन्न की जाती है
(a) अग्रक्षुद्रांत्र
(b) क्षुद्रांत्र
(c) ग्रहणी
(d) वृहदान
Answer: (c) ग्रहणी
In simple words: भोजन का सबसे ज्यादा पाचन ग्रहणी में होता है, जो छोटी आंत का पहला हिस्सा है। यहाँ कई पाचन एंजाइम काम करते हैं।

🎯 Exam Tip: ग्रहणी में यकृत और अग्न्याशय से आने वाले एंजाइम भोजन के बड़े अणुओं को छोटे-छोटे टुकड़ों में तोड़ने का काम शुरू करते हैं।

 

Question 5. निम्न में से कौन लार ग्रन्थि नहीं है?
(a) कर्णपूर्व ग्रन्थि
(b) अधोजंभ
(c) अधोजिह्वा
(d) पीयूष ग्रन्थि
Answer: (d) पीयूष ग्रन्थि
In simple words: पीयूष ग्रंथि एक हार्मोन बनाने वाली ग्रंथि है जो मस्तिष्क में होती है, यह लार ग्रंथि नहीं है। बाकी सभी ग्रंथियां लार पैदा करती हैं।

🎯 Exam Tip: पीयूष ग्रंथि को मास्टर ग्रंथि भी कहते हैं क्योंकि यह शरीर के कई हार्मोनों को नियंत्रित करती है, जबकि लार ग्रंथियां पाचन में मदद करती हैं।

 

Question 7. निम्न में से कौन सा अंग द्वितीयक श्वसन अंग है
(a) मुख
(b) नासिका
(c) नासाग्रसनी
(d) स्वरयंत्र
Answer: (a) मुख
In simple words: जब नाक से सांस लेना मुश्किल होता है, तब मुंह से सांस ली जा सकती है, इसलिए मुंह को द्वितीयक श्वसन अंग कहते हैं। यह आपातकालीन स्थिति में काम आता है।

🎯 Exam Tip: प्राथमिक श्वसन अंग नाक होती है क्योंकि यह हवा को फिल्टर करती है, नम करती है और गरम करती है, जबकि मुंह इन कार्यों को ठीक से नहीं कर पाता।

 

Question 8. बाएं फेफड़े में पाए जाने वाले खंडों की संख्या है
(a) 3
(b) 4
(c) 2
(d) 1
Answer: (c) 2
In simple words: बाएं फेफड़े में दो खंड होते हैं, जबकि दाएं फेफड़े में तीन खंड होते हैं। यह अंतर हृदय को समायोजित करने के लिए होता है।

🎯 Exam Tip: मानव शरीर में, बायाँ फेफड़ा थोड़ा छोटा होता है ताकि हृदय के लिए जगह बन सके, इसलिए इसमें कम खंड होते हैं।

 

Question 9. एलवियोलाई में पाई जाती है
(a) शल्की उपकला
(b) उपकला
(c) उपास्थि छल्ले
(d) उपरोक्त में से कोई नहीं
Answer: (a) शल्की उपकला
In simple words: एलवियोलाई की दीवार बहुत पतली होती है और शल्की उपकला कोशिकाओं से बनी होती है। यह पतली परत गैसों के आदान-प्रदान के लिए सबसे अच्छी होती है।

🎯 Exam Tip: शल्की उपकला की पतली और सपाट संरचना गैसों (ऑक्सीजन और कार्बन डाइऑक्साइड) को आसानी से एलवियोलाई से रक्त में और रक्त से एलवियोलाई में जाने में मदद करती है।

 

Question 10. रुधिर का द्रव्य भाग क्या कहलाता है?
(a) सीरम
(b) लसीका
(c) प्लाज्मा
(d) उपरोक्त में से कोई नहीं
Answer: (c) प्लाज्मा
In simple words: रक्त का तरल हिस्सा, जिसमें कोशिकाएं तैरती हैं, प्लाज्मा कहलाता है। यह रक्त का सबसे बड़ा हिस्सा होता है।

🎯 Exam Tip: प्लाज्मा में पानी, प्रोटीन, हार्मोन और पोषक तत्व होते हैं, जो शरीर में विभिन्न पदार्थों को पहुंचाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।

 

Question 11. साधारणतः लाल रुधिर कणिकाओं का विनाश कहाँ होता है?
(a) प्लीहा
(b) लाल अस्थि मज्जा
(c) लसीका पर्व
(d) उपरोक्त में से कोई नहीं
Answer: (a) प्लीहा
In simple words: लाल रक्त कोशिकाएं अपना जीवनकाल पूरा करने के बाद प्लीहा में टूट जाती हैं। इसलिए प्लीहा को अक्सर "लाल रक्त कोशिकाओं का कब्रिस्तान" कहते हैं।

🎯 Exam Tip: प्लीहा शरीर में रक्त को फिल्टर करने और पुरानी या क्षतिग्रस्त लाल रक्त कोशिकाओं को हटाने का काम करता है।

 

Question 12. निम्न में से कौन सी कोशिका श्वेत रक्त कणिका नहीं है?
(a) बी-लिंफोसाइट।
(b) बिंबाणु ।
Answer: (b) बिंबाणु
In simple words: बिंबाणु (प्लेटलेट्स) रक्त के थक्के जमाने में मदद करते हैं, वे श्वेत रक्त कोशिकाएं नहीं हैं। बी-लिंफोसाइट्स एक प्रकार की श्वेत रक्त कोशिकाएं हैं।

🎯 Exam Tip: श्वेत रक्त कणिकाएं शरीर की प्रतिरक्षा प्रणाली का हिस्सा होती हैं, जबकि बिंबाणु रक्तस्राव को रोकने में मदद करते हैं।

 

Question 14. परिसंचरण के दौरान रक्त हृदय से कितनी बार गुजरता है?
(a) एक
(b) तीन
(c) दो।
(d) चार
Answer: (c) दो
In simple words: परिसंचरण के दौरान, रक्त हृदय से दो बार गुजरता है - एक बार फेफड़ों में ऑक्सीजन लेने के लिए और दूसरी बार शरीर में ऑक्सीजन पहुंचाने के लिए। इस प्रक्रिया को दोहरा परिसंचरण कहते हैं।

🎯 Exam Tip: दोहरे परिसंचरण से शरीर को ऑक्सीजन से भरपूर रक्त की लगातार आपूर्ति सुनिश्चित होती है और अपशिष्ट उत्पादों को कुशलता से हटाया जाता है।

 

Question 15. मनुष्य मुख्य रूप से किसका उत्सर्जन करता है?
(a) अमोनियो ।
(b) यूरिक अम्ल ।
(c) यूरिया ।
(d) क व ग दोनों
Answer: (c) यूरिया
In simple words: मनुष्य अपने शरीर से मुख्य रूप से यूरिया को अपशिष्ट पदार्थ के रूप में बाहर निकालता है। यह मूत्र के जरिए उत्सर्जित होता है।

🎯 Exam Tip: यकृत अमोनिया को यूरिया में बदलता है, जो अमोनिया से कम जहरीला होता है और शरीर से आसानी से निकाला जा सकता है।

 

Question 16. ग्लोमेरुलस कहाँ पाया जाता है?
(a) बोमेन संपुट में
(b) वृक्क नलिका में
(c) हेनले-लूप में
(d) उपरोक्त में से कोई नहीं
Answer: (a) बोमेन संपुट में
In simple words: ग्लोमेरुलस बोमेन संपुट के अंदर होता है, जो वृक्क की छनने वाली इकाई है। यह रक्त को छानने का पहला कदम है।

🎯 Exam Tip: ग्लोमेरुलस छोटी रक्त वाहिकाओं का एक गुच्छा होता है जहां रक्त का पहला फिल्टरेशन होता है, जिससे अपशिष्ट पदार्थ अलग होते हैं।

 

Question 17. प्रमुख मानव नर लिंग हॉर्मोन है
(a) एस्ट्रोजन
(b) प्रोजेस्टेरॉन
(c) टेस्टोस्टेरॉन
(d) ख व ग दोनों
Answer: (c) टेस्टोस्टेरॉन
In simple words: टेस्टोस्टेरॉन पुरुष शरीर में मुख्य यौन हार्मोन है। यह पुरुषों के यौन विकास और विशेषताओं के लिए जिम्मेदार होता है।

🎯 Exam Tip: टेस्टोस्टेरॉन शुक्राणु उत्पादन, मांसपेशियों के विकास और माध्यमिक यौन लक्षणों जैसे दाढ़ी उगने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है।

 

Question 18. निम्न में से प्राथमिक लैंगिक अंग है-
(a) वृषण कोष ।
(b) अण्डाशय ।
Answer: (b) अण्डाशय
In simple words: अण्डाशय मादाओं का प्राथमिक यौन अंग है क्योंकि यह अंडे पैदा करता है। यह हार्मोन भी बनाता है जो मादा विशेषताओं के लिए जरूरी होते हैं।

🎯 Exam Tip: प्राथमिक लैंगिक अंग वे होते हैं जो युग्मक (जैसे अंडे या शुक्राणु) और यौन हार्मोन का उत्पादन करते हैं।

 

Question 19. तंत्रिका तंत्र के बारे में निम्न में से कौन सा कथन सही है?
(a) अंगों से केन्द्रीय तंत्रिका तंत्र तक संवेदनाएँ पहुंचाना
(b) अंगों से केन्द्रीय तंत्रिका तंत्र तक
(c) क व ख दोनों सही हैं।
(d) क व ख दोनों गलत हैं।
Answer: (a) अंगों से केन्द्रीय तंत्रिका तंत्र तक संवेदनाएँ पहुंचाना
In simple words: तंत्रिका तंत्र अंगों से जानकारी मस्तिष्क तक पहुंचाता है। यह जानकारी हमें आसपास की दुनिया को समझने में मदद करती है।

🎯 Exam Tip: तंत्रिका तंत्र का मुख्य कार्य शरीर के विभिन्न हिस्सों से संदेश प्राप्त करना और उनका जवाब देना है, जिससे हम प्रतिक्रिया कर सकें।

 

Question 20. कॉर्पोरा काड्रीजेमीन पाया जाता है
(a) अग्र मस्तिष्क में
(b) पश्च मस्तिष्क में
(c) मध्य मस्तिष्क में
(d) क व ख दोनों में
Answer: (c) मध्य मस्तिष्क में
In simple words: कॉर्पोरा क्वाड्रीजेमिना मध्य मस्तिष्क में होता है। यह देखने और सुनने की जानकारी को संभालने में मदद करता है।

🎯 Exam Tip: यह संरचना विशेष रूप से दृष्टि और श्रवण संबंधी रिफ्लेक्स (प्रतिवर्ती क्रियाओं) को नियंत्रित करने में महत्वपूर्ण है।

 

Question 21. पीयूष ग्रन्थि कौन सा हॉर्मोन स्रावित नहीं करती ?
(a) वृद्धि हार्मोन
(b) वैसोप्रेसिन
(c) मेलेटोनिन ।
(d) प्रोलैक्टिन
Answer: (c) मेलेटोनिन
In simple words: पीयूष ग्रंथि मेलेटोनिन हार्मोन नहीं बनाती। मेलेटोनिन हार्मोन पिनियल ग्रंथि द्वारा बनाया जाता है जो नींद को नियंत्रित करता है।

🎯 Exam Tip: पीयूष ग्रंथि कई महत्वपूर्ण हार्मोन बनाती है जो शरीर के विकास, प्रजनन और अन्य ग्रंथियों को नियंत्रित करते हैं, लेकिन मेलेटोनिन पिनियल ग्रंथि का काम है।

 

Question 22. दैनिक लय के नियमन के लिए उत्तरदायी है
(a) थाइराइड ग्रन्थि
(b) अग्न्याशय
(c) अधिवृक्क ग्रन्थि
(d) पिनियल ग्रन्थि
Answer: (d) पिनियल ग्रन्थि
In simple words: पिनियल ग्रंथि शरीर की दैनिक लय को नियंत्रित करती है। यह मेलेटोनिन हार्मोन बनाती है जो हमें कब सोना है और कब जागना है, यह बताता है।

🎯 Exam Tip: पिनियल ग्रंथि हमारे नींद-जागने के चक्र (सर्केडियन रिदम) को नियंत्रित करके हमारे शरीर की आंतरिक घड़ी को बनाए रखने में मदद करती है।

उत्तरमाला-

 

Question. 1. (क)

🎯 Exam Tip: उत्तरमाला का उपयोग अपने उत्तरों की पुष्टि के लिए करें, लेकिन हमेशा सही उत्तर को समझने पर ध्यान दें।

 

Question. 2. (ख)

🎯 Exam Tip: उत्तरमाला का उपयोग अपने उत्तरों की पुष्टि के लिए करें, लेकिन हमेशा सही उत्तर को समझने पर ध्यान दें।

 

Question. 3. (ख)

🎯 Exam Tip: उत्तरमाला का उपयोग अपने उत्तरों की पुष्टि के लिए करें, लेकिन हमेशा सही उत्तर को समझने पर ध्यान दें।

 

Question. 4. (ग)

🎯 Exam Tip: उत्तरमाला का उपयोग अपने उत्तरों की पुष्टि के लिए करें, लेकिन हमेशा सही उत्तर को समझने पर ध्यान दें।

 

Question. 5. (घ)

🎯 Exam Tip: उत्तरमाला का उपयोग अपने उत्तरों की पुष्टि के लिए करें, लेकिन हमेशा सही उत्तर को समझने पर ध्यान दें।

 

Question. 6. (ग)

🎯 Exam Tip: उत्तरमाला का उपयोग अपने उत्तरों की पुष्टि के लिए करें, लेकिन हमेशा सही उत्तर को समझने पर ध्यान दें।

 

Question. 7. (क)

🎯 Exam Tip: उत्तरमाला का उपयोग अपने उत्तरों की पुष्टि के लिए करें, लेकिन हमेशा सही उत्तर को समझने पर ध्यान दें।

 

Question. 8. (ग)

🎯 Exam Tip: उत्तरमाला का उपयोग अपने उत्तरों की पुष्टि के लिए करें, लेकिन हमेशा सही उत्तर को समझने पर ध्यान दें।

 

Question. 9. (क)

🎯 Exam Tip: उत्तरमाला का उपयोग अपने उत्तरों की पुष्टि के लिए करें, लेकिन हमेशा सही उत्तर को समझने पर ध्यान दें।

अतिलघूत्तरात्मक प्रश्न

 

Question 23. शरीर की मूलभूत संरचनात्मक तथा क्रियात्मक इकाई का नाम लिखें।
Answer: शरीर की मूलभूत संरचनात्मक तथा क्रियात्मक इकाई को कोशिका (Cell) कहते हैं। कोशिकाएं जीवन की सबसे छोटी इकाई होती हैं।
In simple words: हमारे शरीर की सबसे छोटी काम करने वाली इकाई को कोशिका कहते हैं।

🎯 Exam Tip: कोशिका सभी जीवित जीवों की मूल संरचनात्मक और कार्यात्मक इकाई है, जो जीवन की सभी प्रक्रियाओं को पूरा करती है।

 

Question 24. पाचन तंत्र को परिभाषित करें।
Answer: भोजन के अन्तर्ग्रहण से लेकर मल त्याग तक एक ऐसा तंत्र जिसमें अनेकों अंग और ग्रंथियां मिलकर एक साथ काम करती हैं, उसे पाचन तंत्र कहते हैं। इस तंत्र का मुख्य कार्य भोजन को छोटे टुकड़ों में तोड़कर ऊर्जा प्राप्त करना है।
In simple words: पाचन तंत्र वह प्रक्रिया है जिससे हमारा शरीर भोजन को तोड़कर ऊर्जा और पोषक तत्व प्राप्त करता है।

🎯 Exam Tip: पाचन तंत्र में मुख, ग्रासनली, आमाशय, छोटी आंत, बड़ी आंत और अग्न्याशय व यकृत जैसी ग्रंथियां शामिल होती हैं।

 

Question 25. संवरणी पेशियों का क्या काम है?
Answer: संवरणी पेशियाँ (Sphincters) भोजन, पाचित भोजन रस और अवशिष्ट की गति को नियंत्रित करती हैं। ये पेशियां एक तरह के वाल्व (कपाट) की तरह काम करती हैं, जिससे चीजें सही दिशा में आगे बढ़ती हैं।
In simple words: संवरणी पेशियाँ भोजन और बेकार पदार्थों को शरीर में सही जगह पर जाने देती हैं और उन्हें वापस आने से रोकती हैं।

🎯 Exam Tip: संवरणी पेशियाँ पाचन तंत्र में एकतरफा बहाव को बनाए रखने में महत्वपूर्ण होती हैं, जिससे पाचन प्रक्रिया सुचारु रूप से चलती है।

 

Question 26. पाचन तंत्र में सम्मिलित ग्रन्थियों के नाम लिखें।
Answer:
• लार ग्रन्थि
• यकृत
• अग्नाशय।
ये ग्रंथियां पाचन के लिए जरूरी रस और एंजाइम बनाती हैं।
In simple words: पाचन तंत्र में लार ग्रंथि, यकृत और अग्न्याशय जैसी ग्रंथियां शामिल होती हैं।

🎯 Exam Tip: पाचन ग्रंथियां भोजन को पचाने में मदद करने वाले रसायनों का उत्पादन करती हैं, जैसे लार, पित्त और अग्नाशयी रस।

 

Question 28. आमाशय के कितने भाग होते हैं ?
Answer: आमाशय के तीन भाग होते हैं:
• कार्डियक
• जठर निर्गमी भाग
• फंडिस।
यह भाग भोजन को संग्रहित और पचाने में मदद करते हैं।
In simple words: आमाशय के तीन हिस्से होते हैं: कार्डियक, जठर निर्गमी और फंडिस।

🎯 Exam Tip: आमाशय के प्रत्येक भाग की अपनी विशेष भूमिका होती है, जैसे कार्डियक भाग ग्रासनली से जुड़ता है, फंडिस भाग ऊपरी गुंबद जैसा होता है और जठर निर्गमी भाग छोटी आंत में खुलता है।

 

Question 29. पाचित भोजन का सर्वाधिक अवशोषण कहाँ होता है?
Answer: पाचित भोजन का सर्वाधिक अवशोषण छोटी आँत (Small Intestine) में होता है। छोटी आंत की अंदरूनी सतह पर असंख्य विली (उंगली जैसी संरचनाएं) होती हैं, जो अवशोषण के लिए सतह का क्षेत्रफल बढ़ा देती हैं।
In simple words: खाने का सबसे ज्यादा अवशोषण छोटी आंत में होता है।

🎯 Exam Tip: छोटी आंत में विली और माइक्रोविली की उपस्थिति पोषक तत्वों के अधिकतम अवशोषण को सुनिश्चित करती है, जिससे शरीर को पर्याप्त ऊर्जा मिल पाती है।

 

Question 30. शरीर में पाए जाने वाली सबसे बड़ी ग्रन्थि का नाम लिखें।
Answer: शरीर में पाए जाने वाली सबसे बड़ी ग्रन्थि का नाम यकृत (Liver) है। यकृत कई महत्वपूर्ण कार्य करता है, जैसे पाचन में मदद करना और शरीर से विषाक्त पदार्थों को निकालना।
In simple words: हमारे शरीर की सबसे बड़ी ग्रंथि यकृत है।

🎯 Exam Tip: यकृत पित्त का उत्पादन करता है, जो वसा के पाचन में सहायक होता है, और यह शरीर में ग्लूकोज के स्तर को भी नियंत्रित करता है।

 

Question 31. टायलिन एंजाइम कौन सी ग्रन्थि स्रावित करती है?
Answer: लार ग्रन्थि द्वारा टायलिन एंजाइम का स्रावण किया जाता है। टायलिन स्टार्च को पचाने में मदद करता है, जो मुख में ही पाचन प्रक्रिया शुरू कर देता है।
In simple words: टायलिन एंजाइम लार ग्रंथि बनाती है।

🎯 Exam Tip: टायलिन को एमाइलेज भी कहते हैं, और यह कार्बोहाइड्रेट के पाचन की शुरुआत मुंह में ही कर देता है।

 

Question 32. स्वर यंत्र में कितनी उपास्थि पाई जाती हैं ?
Answer: स्वर यंत्र में नौ उपास्थि पाई जाती हैं। ये उपास्थियां स्वर यंत्र को एक निश्चित आकार देती हैं और ध्वनि उत्पादन में मदद करती हैं।
In simple words: स्वर यंत्र में कुल नौ उपास्थियां होती हैं।

🎯 Exam Tip: ये उपास्थियां स्वर यंत्र को लचीलापन और स्थिरता प्रदान करती हैं, जो सांस लेने और आवाज निकालने दोनों के लिए महत्वपूर्ण है।

 

Question 33. मनुष्यों की श्वासनली में श्लेष्मा का निर्माण कौन करता है?
Answer: मनुष्यों की श्वासनली में श्लेष्मा का निर्माण गोब्लेट कोशिकाएँ करती हैं। श्लेष्मा धूल के कणों और रोगाणुओं को फंसाकर फेफड़ों तक पहुंचने से रोकती है।
In simple words: श्वासनली में बलगम गोब्लेट कोशिकाएं बनाती हैं।

🎯 Exam Tip: श्लेष्मा और सीलिया (छोटे बाल) मिलकर एक 'म्यूकोसिलियरी एस्केलेटर' बनाते हैं जो विदेशी कणों को फेफड़ों से दूर धकेलता है।

 

Question 35. बिंबाणु का जीवनकाल कितना होता है?
Answer: बिंबाणु (Platelets) का जीवनकाल लगभग 10 दिवस का होता है। ये छोटी रक्त कोशिकाएं रक्त के थक्के जमाने और घाव भरने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती हैं।
In simple words: बिंबाणु लगभग 10 दिन तक जीवित रहते हैं।

🎯 Exam Tip: बिंबाणु का छोटा जीवनकाल यह सुनिश्चित करता है कि शरीर में लगातार नए बिंबाणु बनते रहें, जिससे रक्त का थक्का जमने का कार्य सुचारु रूप से चलता रहे।

 

Question 36. अशुद्ध रुधिर को प्रवाहित करने वाली वाहिकाएँ क्या कहलाती हैं?
Answer: अशुद्ध रुधिर को प्रवाहित करने वाली वाहिकाएँ शिरायें (Veins) कहलाती हैं। ये शिरायें शरीर के विभिन्न हिस्सों से ऑक्सीजन रहित रक्त को वापस हृदय तक ले जाती हैं।
In simple words: शिरायें अशुद्ध खून को शरीर से हृदय तक ले जाती हैं।

🎯 Exam Tip: फुफ्फुसीय शिरा एक अपवाद है जो शुद्ध रक्त ले जाती है, जबकि अन्य सभी शिराएं अशुद्ध रक्त ले जाती हैं।

 

Question 37. हृदयावरण क्या है?
Answer: हृदय पर पाया जाने वाला आवरण हृदयावरण (Pericardium) कहलाता है। यह दोहरी झिल्ली होती है जो हृदय को बाहरी आघातों से बचाती है और उसे सही जगह पर रखती है।
In simple words: हृदय के ऊपर की झिल्ली को हृदयावरण कहते हैं।

🎯 Exam Tip: हृदयावरण में एक तरल पदार्थ होता है जो हृदय के धड़कने के दौरान घर्षण को कम करता है, जिससे हृदय आसानी से कार्य कर पाता है।

 

Question 38. महाशिरा का क्या कार्य है?
Answer: महाशिरा का कार्य शरीर का अधिकांश अशुद्ध रुधिर दायें आलिन्द में डालना है। ऊपरी और निचली महाशिरा शरीर के ऊपरी और निचले हिस्सों से ऑक्सीजन रहित रक्त इकट्ठा करती हैं।
In simple words: महाशिरा शरीर के सारे गंदे खून को हृदय के दाहिने हिस्से में लाती है।

🎯 Exam Tip: महाशिराएं शिराओं का सबसे बड़ा समूह हैं और ये हृदय के दाएं आलिंद में रक्त को वापस लाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती हैं।

 

Question 39. अमोनिया उत्सर्जन की प्रक्रिया क्या कहलाती है?
Answer: अमोनिया उत्सर्जन की प्रक्रिया अमोनियोत्सर्ग (Ammonotelism) कहलाती है। यह प्रक्रिया उन जीवों में पाई जाती है जो पानी में रहते हैं, क्योंकि अमोनिया बहुत जहरीली होती है और इसे शरीर से निकालने के लिए बहुत सारे पानी की जरूरत होती है।
In simple words: अमोनिया को शरीर से बाहर निकालने को अमोनियोत्सर्ग कहते हैं।

🎯 Exam Tip: अमोनिया जलीय जीवों में मुख्य उत्सर्जी उत्पाद है क्योंकि यह पानी में आसानी से घुलनशील होता है और इसे सीधे पानी में छोड़ा जा सकता है।

 

Question 40. मानव में मुख्य उत्सर्जक अंग कौन सा है?
Answer: मानव में मुख्य उत्सर्जक अंग वृक्क (Kidney) है। वृक्क रक्त को छानकर मूत्र बनाते हैं, जिससे शरीर से अपशिष्ट और अतिरिक्त पानी निकल जाता है।
In simple words: इंसान में मुख्य अपशिष्ट निकालने वाला अंग गुर्दा है।

🎯 Exam Tip: वृक्क रक्तचाप को नियंत्रित करने और लाल रक्त कोशिकाओं के उत्पादन में मदद करने वाले हार्मोन का भी उत्पादन करते हैं।

 

Question 42. स्त्रियों के प्रमुख लिंग हॉर्मोन का नाम लिखें।
Answer: स्त्रियों के प्रमुख लिंग हार्मोन का नाम एस्ट्रोजन (Estrogen) है। यह हार्मोन मादा यौन विशेषताओं और प्रजनन कार्यों को नियंत्रित करता है।
In simple words: महिलाओं में मुख्य यौन हार्मोन एस्ट्रोजन होता है।

🎯 Exam Tip: एस्ट्रोजन हार्मोन मासिक धर्म चक्र और गर्भावस्था को नियंत्रित करने के साथ-साथ मादाओं में माध्यमिक यौन लक्षणों के विकास में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है।

 

Question 43. माता में प्लेसेंटा का रोपण कहाँ होता है?
Answer: माता में प्लेसेंटा का रोपण गर्भाशय के अन्तःस्तर में होता है। यह वह जगह है जहाँ भ्रूण गर्भाशय से जुड़ता है और पोषक तत्व व ऑक्सीजन प्राप्त करता है।
In simple words: प्लेसेंटा गर्भाशय की अंदरूनी दीवार पर लगता है।

🎯 Exam Tip: प्लेसेंटा गर्भाशय में भ्रूण के लिए एक अस्थायी अंग है जो गर्भावस्था के दौरान पोषक तत्वों और गैसों के आदान-प्रदान को सुनिश्चित करता है।

 

Question 44. विभिन्न अंगों के मध्य समन्वय स्थापित करने के लिए उत्तरदायी तंत्रों का नाम लिखें।
Answer: विभिन्न अंगों के मध्य समन्वय स्थापित करने के लिए तंत्रिका तंत्र तथा अन्तःस्रावी तंत्र उत्तरदायी होते हैं। ये दोनों तंत्र मिलकर शरीर के कार्यों को नियंत्रित करते हैं और उसे संतुलित रखते हैं।
In simple words: तंत्रिका तंत्र और हार्मोन बनाने वाला तंत्र हमारे शरीर के अंगों को एक साथ काम करने में मदद करते हैं।

🎯 Exam Tip: तंत्रिका तंत्र तेजी से संदेश भेजता है, जबकि अंतःस्रावी तंत्र हार्मोन के माध्यम से धीमी गति से और लंबे समय तक चलने वाले नियंत्रण प्रदान करता है।

 

Question 45. धूसर द्रव्य कहाँ पाया जाता है?
Answer: धूसर द्रव्य मस्तिष्क व मेरुरज्जु में पाया जाता है। यह तंत्रिका कोशिकाओं के प्रमुख भाग (सोमा) और डेंड्राइट से बना होता है, जहाँ सूचना संसाधित होती है।
In simple words: धूसर द्रव्य मस्तिष्क और रीढ़ की हड्डी में होता है।

🎯 Exam Tip: धूसर द्रव्य सीखने, याद रखने, सोचने और भावनाओं जैसी उच्च-स्तरीय मस्तिष्क क्रियाओं में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है।

 

Question 46. एक न्यूरोट्रांसमीटर का नाम लिखें।
Answer: एक न्यूरोट्रांसमीटर का नाम ग्लाइसींन (Glycine), एपीनेफ्रीन, डोपामीन, सिरोटोनिन है। ये रसायन तंत्रिका कोशिकाओं के बीच संदेश भेजते हैं।
In simple words: ग्लाइसींन, डोपामीन और सिरोटोनिन कुछ न्यूरोट्रांसमीटर हैं।

🎯 Exam Tip: न्यूरोट्रांसमीटर रासायनिक संदेशवाहक होते हैं जो तंत्रिका आवेगों को एक न्यूरॉन से दूसरे न्यूरॉन तक या न्यूरॉन से लक्ष्य कोशिका तक पहुंचाते हैं।

 

Question 47. थाइराइड ग्रन्थि द्वारा स्रावित हार्मोन का नाम लिखें।
Answer: थाइराइड ग्रन्थि द्वारा स्रावित हार्मोन का नाम थाइरॉक्सिन है। यह हार्मोन शरीर के मेटाबॉलिज्म, वृद्धि और विकास को नियंत्रित करता है।
In simple words: थाइराइड ग्रंथि थाइरॉक्सिन हार्मोन बनाती है।

🎯 Exam Tip: थाइरॉक्सिन की कमी से घेघा रोग हो सकता है, क्योंकि शरीर का मेटाबॉलिज्म धीमा हो जाता है।

 

Question 48. एड्रिनलीन हार्मोन का स्राव किस ग्रन्थि के द्वारा किया जाता है?
Answer: एड्रिनलीन हार्मोन का स्राव अधिवृक्क ग्रन्थि के द्वारा किया जाता है। यह हार्मोन 'लड़ो या भागो' (fight or flight) प्रतिक्रिया के लिए जिम्मेदार होता है, जो तनावपूर्ण स्थितियों में शरीर को तैयार करता है।
In simple words: एड्रिनलीन हार्मोन अधिवृक्क ग्रंथि से निकलता है।

🎯 Exam Tip: एड्रिनलीन हृदय गति और रक्तचाप बढ़ाता है, जिससे शरीर को आपातकालीन स्थितियों से निपटने के लिए अतिरिक्त ऊर्जा मिलती है।

 

Question 50. आमाशय की संरचना व कार्य समझाइए।
Answer: आमाशय उदर गुहा में बाईं ओर डायफ्राम के पीछे स्थित होता है। यह आहारनाल का सबसे चौड़ा, थैलेनुमा पेशीय भाग है, जिसकी आकृति 'J' के समान होती है। आमाशय एक से तीन लीटर तक भोजन रख सकता है। आमाशय को तीन मुख्य भागों में बांटा गया है:
कार्डियक भाग: यह आमाशय का ऊपरी भाग होता है, जहाँ ग्रासनली खुलती है। यहाँ एक कपाट होता है जो भोजन को ग्रासनली में वापस जाने से रोकता है।
जठर निर्गमी भाग (Pyloric part): यह आमाशय का निचला या दाहिना भाग है जो छोटी आंत (ग्रहणी) में खुलता है। यहाँ भी एक पेशीय कपाट होता है जिसे पाइलोरिक कपाट कहते हैं, जो भोजन को धीरे-धीरे छोटी आंत में जाने देता है।
फंडिस भाग (Fundic part): यह आमाशय का मध्य भाग है, जो इसके लगभग 80 प्रतिशत हिस्से को बनाता है। यहीं पर भोजन का मुख्य पाचन होता है।
आमाशय के कार्य:
(1) आमाशय में भोजन क्रमाकुंचन तरंगों द्वारा पचता है, जिससे यह एक लेई जैसे रूप में बदल जाता है जिसे काइम (Chyme) कहते हैं। इस यांत्रिक पाचन से भोजन एंजाइमों के संपर्क में आसानी से आ पाता है।
(2) आमाशय में हाइड्रोक्लोरिक अम्ल (HCl) पाया जाता है, जो भोजन को अम्लीय बनाता है, हानिकारक जीवाणुओं को मारता है और पेप्सिन जैसे एंजाइमों को सक्रिय करता है।
In simple words: आमाशय पेट में होता है और J आकार का होता है। इसके तीन हिस्से होते हैं - कार्डियक, जठर निर्गमी और फंडिस। यह भोजन को तोड़ता है और उसमें एसिड मिलाकर पचाता है।

🎯 Exam Tip: आमाशय में भोजन का यांत्रिक और रासायनिक पाचन दोनों होते हैं, जिससे यह छोटी आंत में आगे के पाचन के लिए तैयार हो जाता है।

 

Question 51. लार ग्रन्थि कहाँ पाई जाती है? इसकी संरचना समझाइए।
Answer: मनुष्य में तीन जोड़ी लार ग्रंथियाँ (Salivary glands) पाई जाती हैं। ये ग्रंथियाँ बहिःस्रावी (Exocrine) होती हैं, मतलब ये अपनी नलिकाओं के माध्यम से स्राव को बाहर निकालती हैं। ये ग्रंथियां मुंह के अंदर भोजन को गीला करने में मदद करती हैं।
कर्णपूर्व ग्रन्थि (Parotid gland): ये सबसे बड़ी लार ग्रंथियां होती हैं और कान के नीचे, गालों में पाई जाती हैं। इनकी नलिकाएं ऊपरी दाँतों के पास खुलती हैं और सीरमी तरल बनाती हैं।
अधोजंभ ग्रन्थियाँ (Submandibular glands): ये ऊपरी और निचले जबड़े के जोड़ पर पाई जाती हैं। इनकी नलिकाएं मुंह के फर्श पर खुलती हैं और तरल तथा श्लेष्मिक स्राव दोनों बनाती हैं।
अधोजिह्वा ग्रन्थि (Sublingual glands): ये सबसे छोटी लार ग्रंथियां होती हैं और जीभ के नीचे पाई जाती हैं। इनकी नलिकाएं फ्रेनुलम पर खुलती हैं और मुख्य रूप से श्लेष्मिक स्राव करती हैं।
लार (Saliva) इन ग्रंथियों से निकलने वाला क्षारीय तरल है। इसमें श्लेष्मा, पानी, लाइसोजाइम और टायलिन (एंजाइम) होते हैं। लार भोजन को चिकना और घुलनशील बनाती है, जिससे निगलना आसान हो जाता है, और टायलिन स्टार्च का पाचन शुरू कर देता है।
In simple words: हमारे मुंह में तीन तरह की लार ग्रंथियां होती हैं: कान के पास, जबड़े के नीचे, और जीभ के नीचे। ये ग्रंथियां लार बनाती हैं जो खाना पचाने और निगलने में मदद करती है।

🎯 Exam Tip: लार भोजन को गीला करने के अलावा उसमें मौजूद एंजाइमों के कारण रासायनिक पाचन भी शुरू करती है, जो पाचन प्रक्रिया का पहला कदम है।

 

Question 52. नासिका के मुख्य कार्यों की विवेचना करें।
Answer: नासिका के मुख्य कार्य निम्नलिखित हैं:
1. नासिका वायु के साथ आने वाले धूल के कणों, जीवाणुओं, परागकणों और फफूंद के कणों को श्लेष्मा के साथ चिपकाकर फिल्टर करती है। इससे साफ हवा फेफड़ों तक पहुँचती है।
2. नासिका गुहाओं के सामने वाले भाग में मौजूद तंत्रिका तंतुओं के सिरे गंध का पता लगाने में मदद करते हैं, जिससे हमें विभिन्न गंधों का अनुभव होता है।
3. नाक से गुजरते समय वायु का तापमान शरीर के तापमान के बराबर हो जाता है, जिससे फेफड़ों को ठंडी या बहुत गर्म हवा से बचाया जा सके।
4. नाक में मौजूद छोटे बाल भी वायु को फिल्टर करने में मदद करते हैं, जिससे बड़े कण फेफड़ों तक नहीं पहुँच पाते।
In simple words: नाक हवा को साफ करती है, उसे गरम करती है, नम करती है, और हमें गंध का पता लगाने में मदद करती है। यह फेफड़ों को गंदी हवा से बचाती है।

🎯 Exam Tip: नाक श्वसन प्रणाली का प्रवेश द्वार है और यह फेफड़ों को सुरक्षित रखने तथा गैसों के आदान-प्रदान के लिए अनुकूल परिस्थितियों का निर्माण करती है।

 

Question 53. ग्रसनी किस प्रकार श्वसन कार्य में सहायक होती है?
Answer: ग्रसनी एक पेशीय चिमनीनुमा संरचना होती है जो तीन भागों में बंटी होती है: नासाग्रसनी, मुखग्रसनी और अधोग्रसनी (या कंठ ग्रसनी)। श्वसन क्रिया के दौरान, वायु नासिका गुहा से नासाग्रसनी और फिर मुखग्रसनी में आती है। इसके बाद, वायु कंठ-ग्रसनी से होते हुए एपिग्लोटिस (घांटी ढक्कन) के माध्यम से स्वरयंत्र (Larynx) में प्रवेश करती है। एपिग्लोटिस एक उपास्थि से बनी संरचना है, जो श्वासनली और आहारनली के बीच स्विच का काम करती है। यह सुनिश्चित करता है कि जब हम भोजन निगलते हैं तो भोजन श्वासनली में न जाकर आहारनली में ही जाए, जिससे घुटन से बचाव होता है।
In simple words: ग्रसनी एक रास्ता है जहाँ से हवा नाक और मुंह से फेफड़ों में जाती है। जब हम खाना खाते हैं, तो एक ढक्कन (एपिग्लोटिस) हवा वाली नली को बंद कर देता है ताकि खाना गलत रास्ते में न जाए।

🎯 Exam Tip: एपिग्लोटिस का सही कार्य करना सुनिश्चित करता है कि श्वासनली में केवल हवा जाए और आहारनली में केवल भोजन, जिससे श्वसन और पाचन दोनों सुरक्षित रहें।

 

Question 54. श्वसन मांसपेशियों के महत्त्व को लिखें।
Answer: श्वसन मांसपेशियों का महत्व निम्नलिखित है:
1. ये मांसपेशियाँ गैसों के आदान-प्रदान में महत्वपूर्ण योगदान देती हैं, खासकर ऑक्सीजन और कार्बन डाइऑक्साइड के लिए।
2. ये मांसपेशियां सांस लेने (निःश्वसन) और छोड़ने (उच्छश्वसन) दोनों में सहायता करती हैं।
3. मध्यपट (Diaphragm) एक कंकाल पेशी का बना होता है और वक्ष स्थल की सतह पर पाया जाता है। यह श्वसन के लिए सबसे महत्वपूर्ण मांसपेशी है।
4. मध्यपट के सिकुड़ने से वायु नासिका से होते हुए फेफड़ों के अंदर प्रवेश करती है (निःश्वसन)।
5. मध्यपट के शिथिल होने पर वायु फेफड़ों से बाहर निकलती है (उच्छश्वसन)।
In simple words: सांस लेने और छोड़ने के लिए खास मांसपेशियां होती हैं। डायफ्राम सबसे जरूरी है, जो सांस अंदर लेने और बाहर निकालने में मदद करता है।

🎯 Exam Tip: डायफ्राम और इंटरकोस्टल मांसपेशियां छाती की गुहा के आयतन को बदलकर फेफड़ों में हवा के प्रवेश और निकास को नियंत्रित करती हैं।

 

Question 56. रक्त परिसंचरण में रक्त वाहिनियों की भूमिका बताइए।
Answer: शरीर में रक्त का परिसंचरण रक्त वाहिनियों द्वारा होता है। रक्त वाहिकाएँ एक जाल बनाती हैं, जिनसे रक्त कोशिकाओं तक पहुँचता है। ये मुख्य रूप से दो प्रकार की होती हैं:
धमनियाँ (Arteries): ये वाहिनियाँ ऑक्सीजन युक्त (साफ) रक्त को हृदय से शरीर के विभिन्न अंगों तक ले जाती हैं। इनमें रक्त दाब अधिक होता है, इसलिए इनकी दीवारें मोटी और लचीली होती हैं। धमनियाँ आमतौर पर शरीर की गहराई में स्थित होती हैं।
शिराएँ (Veins): इनके द्वारा ऑक्सीजन रहित (गंदा) रक्त शरीर के विभिन्न भागों से हृदय की ओर वापस लाया जाता है। इनकी दीवारें पतली और पिचकने वाली होती हैं, और इनकी गुहा अधिक चौड़ी होती है। शिराओं में रक्त दाब कम होता है, और इनमें अर्धचंद्राकार कपाट होते हैं जो रक्त को उल्टी दिशा में बहने से रोकते हैं। रक्त वाहिनियां विभिन्न अंगों और ऊतकों में पहुँचकर केशिकाओं का एक विस्तृत जाल बनाती हैं, जहाँ कोशिकाओं के स्तर पर गैसों और पोषक तत्वों का आदान-प्रदान होता है।
In simple words: रक्त वाहिनियां खून को पूरे शरीर में पहुंचाती हैं। धमनियाँ साफ खून हृदय से अंगों तक ले जाती हैं, और शिराएँ गंदा खून अंगों से हृदय तक वापस लाती हैं।

🎯 Exam Tip: धमनियां उच्च दाब और शिराएं निम्न दाब के साथ रक्त परिवहन करती हैं, और केशिकाएं वह स्थान हैं जहाँ रक्त और ऊतक के बीच वास्तविक आदान-प्रदान होता है।

 

Question 57. वृक्क की संरचना समझाइए।
Answer: मनुष्य में एक जोड़ी वृक्क (Kidney) पाए जाते हैं। ये दोनों वृक्क उदर गुहा के पृष्ठ भाग में आमाशय के नीचे कशेरुक दण्ड के इधर-उधर स्थित होते हैं। वृक्क गहरे भूरे रंग के होते हैं और सेम के बीज की आकृति के समान दिखते हैं। इनका बाहरी भाग उभरा हुआ और भीतरी भाग दबा हुआ होता है, जिसके मध्य में एक छोटा-सा गड्ढा होता है जिसे हाइलम (Hilum) कहते हैं। हाइलम भाग से वृक्क धमनी प्रवेश करती है और वृक्क शिरा तथा मूत्रवाहिनी बाहर निकलती हैं।
प्रत्येक वृक्क के दो मुख्य भाग होते हैं:
वल्कुट (Cortex): यह बाहरी भाग होता है।
मध्यांश (Medulla): यह अंदरूनी भाग होता है।
प्रत्येक वृक्क में लाखों सूक्ष्म कुंडलित नलिकाएँ होती हैं जिन्हें वृक्क नलिकाएँ या नेफ्रॉन (Nephron) कहते हैं। नेफ्रॉन वृक्क की संरचनात्मक और क्रियात्मक इकाई है, जो रक्त को छानकर मूत्र बनाती है। प्रत्येक नेफ्रॉन के दो मुख्य भाग होते हैं: बोमेन संपुट और वृक्क नलिका।
In simple words: वृक्क सेम के बीज जैसा दिखता है और पेट के पिछले हिस्से में होता है। इसके दो मुख्य भाग होते हैं - बाहर वाला कॉर्टेक्स और अंदर वाला मेडुला। लाखों छोटी नलिकाएं जिन्हें नेफ्रॉन कहते हैं, खून को साफ करती हैं और पेशाब बनाती हैं।

🎯 Exam Tip: वृक्क न केवल रक्त को छानता है बल्कि यह शरीर के पानी और इलेक्ट्रोलाइट संतुलन को भी बनाए रखने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है।

 

Question 58. वृक्क के अलावा उत्सर्जन के कार्य में आने वाले अन्य अंगों के बारे में लिखिए।
Answer: यद्यपि वृक्क मनुष्य के प्रमुख उत्सर्जी अंग हैं, फिर भी कुछ अन्य अंग भी उत्सर्जन कार्य में सहायता करते हैं:
1. त्वचा (Skin): त्वचा में स्वेद ग्रंथियां (Sweat Glands) पाई जाती हैं जो पसीना निकालती हैं। पसीने के माध्यम से शरीर से अतिरिक्त पानी, लवण, थोड़ी कार्बन डाइऑक्साइड और यूरिया बाहर निकलते हैं। सीबम के रूप में तेल भी निकलता है जिसमें हाइड्रोकार्बन और स्टेरोल होते हैं।
2. यकृत (Liver): यकृत अमोनिया को क्रेब्स-हेंसलेट चक्र द्वारा यूरिया में बदलता है। यकृत पित्त का निर्माण भी करता है जिसमें बिलिरुबिन, बिलिवर्डिन, विटामिन और स्टेरॉयड हार्मोन होते हैं, जो मल के साथ उत्सर्जित होते हैं। यकृत शरीर में विषैले पदार्थों को निराविषीकरण (detoxify) करने में भी मदद करता है।
3. प्लीहा (Spleen): प्लीहा को लाल रक्त कोशिकाओं (RBC) का कब्रिस्तान कहा जाता है। यहाँ मृत RBC टूटती हैं जिससे बिलिरुबिन और बिलिवर्डिन बनते हैं, जो पित्त का हिस्सा बनकर मल के साथ उत्सर्जित होते हैं। यूरोक्रोम भी RBC के टूटने से बनता है और मूत्र के साथ उत्सर्जित होकर मूत्र को हल्का पीला रंग देता है।
4. आंत्र (Intestine): आंत्र में पित्त रस के माध्यम से अपशिष्ट पदार्थ शरीर से बाहर निकाल दिए जाते हैं। आंत्र से मल के साथ मृत कोशिकाएँ भी बाहर निकलती हैं।
In simple words: गुर्दे के अलावा, हमारी त्वचा पसीना निकालती है, यकृत गंदे पदार्थों को साफ करता है, प्लीहा पुरानी रक्त कोशिकाओं को हटाता है, और आंतें भी अपशिष्ट बाहर निकालती हैं। ये सभी शरीर को साफ रखने में मदद करते हैं।

🎯 Exam Tip: यह समझना महत्वपूर्ण है कि शरीर में विभिन्न अंग मिलकर एक एकीकृत प्रणाली के रूप में काम करते हैं ताकि शरीर से अपशिष्ट पदार्थों को कुशलता से हटाया जा सके।

 

Question 42. स्त्रियों के प्रमुख लिंग हॉर्मोन का नाम लिखें।
Answer: स्त्रियों के मुख्य लिंग हार्मोन का नाम एस्ट्रोजन (Estrogen) है। यह हार्मोन महिलाओं में यौन लक्षणों के विकास और प्रजनन स्वास्थ्य में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है।
In simple words: महिलाओं के मुख्य यौन हार्मोन का नाम एस्ट्रोजन है।

🎯 Exam Tip: स्त्रियों के प्रमुख लिंग हार्मोन के नाम और उनके सामान्य कार्यों को याद रखें, क्योंकि यह प्रजनन तंत्र का एक महत्वपूर्ण हिस्सा है।

 

Question 43. माता में प्लेसेंटा का रोपण कहाँ होता है?
Answer: माता में प्लेसेंटा गर्भाशय की अंदरूनी दीवार पर जुड़ता है। यह भ्रूण को पोषण देने और अपशिष्ट पदार्थों को हटाने का महत्वपूर्ण काम करता है।
In simple words: प्लेसेंटा माँ के गर्भाशय की अंदरूनी परत से जुड़ता है।

🎯 Exam Tip: प्लेसेंटा के स्थान (गर्भाशय की अंदरूनी दीवार) और उसके कार्य (भ्रूण को पोषण और सुरक्षा) को याद रखें।

 

Question 44. विभिन्न अंगों के मध्य समन्वय स्थापित करने के लिए उत्तरदायी तंत्रों का नाम लिखें।
Answer: शरीर के अलग-अलग अंगों के बीच तालमेल बनाने के लिए तंत्रिका तंत्र और अंतःस्रावी तंत्र जिम्मेदार हैं। ये दोनों मिलकर शरीर के सभी कार्यों को सही ढंग से नियंत्रित करते हैं।
In simple words: तंत्रिका तंत्र और अंतःस्रावी तंत्र शरीर के अंगों को एक साथ काम करने में मदद करते हैं।

🎯 Exam Tip: शरीर में समन्वय (कोऑर्डिनेशन) के लिए तंत्रिका तंत्र (तेज प्रतिक्रियाएँ) और अंतःस्रावी तंत्र (धीमी, लंबी अवधि की प्रतिक्रियाएँ) दोनों की भूमिका को जानें।

 

Question 45. धूसर द्रव्य कहाँ पाया जाता है?
Answer: धूसर द्रव्य (ग्रे मैटर) मस्तिष्क और मेरुरज्जु (स्पाइनल कॉर्ड) में मिलता है। यह सूचनाओं को संसाधित करने और सीखने जैसे महत्वपूर्ण कार्यों के लिए जिम्मेदार होता है।
In simple words: ग्रे मैटर दिमाग और स्पाइनल कॉर्ड में होता है।

🎯 Exam Tip: मस्तिष्क और मेरुरज्जु में धूसर द्रव्य (ग्रे मैटर) के स्थान और उसकी मुख्य भूमिका (सूचना प्रसंस्करण) को याद रखें।

 

Question 46. एक न्यूरोट्रांसमीटर का नाम लिखें।
Answer: कुछ न्यूरोट्रांसमीटर के नाम हैं ग्लाईसीन (Glycine), एपीनेफ्रीन, डोपामीन, और सिरोटोनिन। ये रसायन दिमाग में संदेश भेजने और भावनाओं को नियंत्रित करने का काम करते हैं।
In simple words: न्यूरोट्रांसमीटर जैसे ग्लाईसीन, एपीनेफ्रीन, डोपामीन, और सिरोटोनिन दिमाग में संदेश भेजते हैं।

🎯 Exam Tip: कम से कम एक या दो न्यूरोट्रांसमीटर के नाम और उनके सामान्य कार्य (तंत्रिका आवेगों का संचार) को याद रखें।

 

Question 47. थाइराइड ग्रन्थि द्वारा स्रावित हार्मोन का नाम लिखें।
Answer: थायरॉइड ग्रंथि से थायरॉक्सिन हार्मोन निकलता है। यह हार्मोन शरीर की ऊर्जा, चयापचय और विकास को नियंत्रित करता है।
In simple words: थायरॉइड ग्रंथि थायरॉक्सिन हार्मोन बनाती है।

🎯 Exam Tip: थायरॉइड ग्रंथि द्वारा स्रावित मुख्य हार्मोन (थायरॉक्सिन) और चयापचय नियंत्रण में उसकी भूमिका को याद रखें।

 

Question 48. एड्रिनलीन हार्मोन का स्राव किस ग्रन्थि के द्वारा किया जाता है?
Answer: एड्रिनलीन हार्मोन का स्राव अधिवृक्क ग्रंथि (Adrenal gland) द्वारा होता है। यह हार्मोन शरीर को तनावपूर्ण या आपातकालीन स्थितियों से निपटने के लिए तैयार करता है।
In simple words: एड्रिनलीन हार्मोन अधिवृक्क ग्रंथि से निकलता है।

🎯 Exam Tip: अधिवृक्क ग्रंथि को 'आपातकालीन ग्रंथि' के रूप में जानें और एड्रिनलीन हार्मोन की 'फाइट या फ्लाइट' प्रतिक्रिया में भूमिका को याद रखें।

 

Question 63. अंतःस्रावी तंत्र में हाइपोथैलेमस की क्या भूमिका है?
Answer: अंतःस्रावी तंत्र में, हाइपोथैलेमस खास प्रकार के हार्मोन बनाता है। ये हार्मोन पीयूष ग्रंथि को दूसरे हार्मोन बनाने के लिए कहते हैं। हाइपोथैलेमस दो तरह के हार्मोन बनाता है: * **मोचक हार्मोन:** ये पीयूष ग्रंथि को हार्मोन छोड़ने के लिए उत्तेजित करते हैं। * **निरोधी हार्मोन:** ये पीयूष ग्रंथि को हार्मोन बनाने से रोकते हैं। इसी कारण, हाइपोथैलेमस को अंतःस्रावी नियंत्रण का मुख्य केंद्र माना जाता है। यह पीयूष ग्रंथि को नियंत्रित करके शरीर के कई कामों को संभालता है, और शरीर का संतुलन बनाए रखने में तंत्रिका तंत्र के साथ मिलकर काम करता है।
In simple words: हाइपोथैलेमस दो तरह के हार्मोन बनाता है जो पीयूष ग्रंथि को नियंत्रित करते हैं, जिससे यह शरीर के हार्मोनल संतुलन का मुख्य नियंत्रक बन जाता है।

🎯 Exam Tip: हाइपोथैलेमस को अंतःस्रावी तंत्र का 'मास्टर कंट्रोलर' मानें और पीयूष ग्रंथि पर उसके मोचक और निरोधी हार्मोन के नियंत्रण को स्पष्ट रूप से समझाएँ।

 

Question 64. अग्नाशय के बहिःस्रावी तथा अंतःस्रावी कार्य को समझाइए।
Answer: अग्नाशय एक ऐसी ग्रंथि है जो बहिःस्रावी और अंतःस्रावी दोनों तरह से काम करती है, इसलिए इसे मिश्रित ग्रंथि कहते हैं। * **बहिःस्रावी कार्य:** यह पाचक एंजाइम बनाता है, जो एक नली (अग्नाशयी नली) के रास्ते छोटी आंत तक पहुँचते हैं। ये एंजाइम भोजन को पचाने में मदद करते हैं। * **अंतःस्रावी कार्य:** अग्नाशय में लैंगरहैंस की द्वीपिकाएँ होती हैं जो हार्मोन बनाती हैं। ये दो हार्मोन इन्सुलिन और ग्लूकोगॉन हैं। इन्सुलिन खून में शुगर को कम करता है, जबकि ग्लूकोगॉन शुगर को बढ़ाता है। ये दोनों मिलकर खून में शुगर का सही स्तर बनाए रखते हैं। अगर इन्सुलिन कम हो जाए तो शुगर का स्तर बढ़ जाता है, जिससे मधुमेह (डायबिटीज) हो सकती है।
In simple words: अग्नाशय भोजन पचाने वाले एंजाइम और खून में शुगर नियंत्रित करने वाले हार्मोन (इन्सुलिन और ग्लूकोगॉन) दोनों बनाता है।

🎯 Exam Tip: अग्नाशय के दोहरे कार्य (बहिःस्रावी - पाचन एंजाइम; अंतःस्रावी - इन्सुलिन, ग्लूकोगॉन) को स्पष्ट रूप से उल्लेख करें और रक्त शर्करा नियंत्रण में उनकी भूमिका पर ध्यान दें।

 

Question 67. रक्त क्या होता है? रक्त के विभिन्न घटकों की विवेचना करें तथा रक्त के महत्त्व को समझाइए।
Answer: रक्त एक प्रकार का तरल संयोजी ऊतक है, जो गाढ़ा और तरल होता है। यह शरीर में पोषक तत्वों और ऑक्सीजन को पहुँचाता है, साथ ही खराब पदार्थों को बाहर निकालने में मदद करता है। एक सामान्य व्यक्ति के शरीर में करीब 5 लीटर खून होता है। रक्त के दो मुख्य हिस्से होते हैं: 1. **प्लाज्मा (Plasma):** यह रक्त का तरल, हल्का पीला और थोड़ा क्षारीय हिस्सा होता है। खून का लगभग 55% भाग प्लाज्मा होता है। इसमें 92% पानी होता है, और बाकी 8% में कार्बनिक और अकार्बनिक पदार्थ घुले होते हैं। 2. **रुधिर कोशिकाएँ (Blood cells):** इसमें तीन तरह की कोशिकाएँ होती हैं: * **लाल रक्त कोशिकाएँ (RBCs):** ये गोल और बीच में दबी हुई होती हैं। इनमें हीमोग्लोबिन होता है जो ऑक्सीजन ले जाने का काम करता है, जिससे खून का रंग लाल होता है। ये कोशिकाएँ अस्थि मज्जा में बनती हैं और शरीर में सबसे ज़्यादा होती हैं। * **श्वेत रक्त कोशिकाएँ (WBCs):** ये लाल रक्त कोशिकाओं से बड़ी होती हैं और इनका कोई खास रंग नहीं होता। ये शरीर को बीमारियों से बचाती हैं। ये भी अस्थि मज्जा में बनती हैं और दो मुख्य प्रकार की होती हैं: * **कणिकामय (Granulocytes):** इनमें न्यूट्रोफिल, इओसिनोफिल और बेसोफिल शामिल हैं। न्यूट्रोफिल सबसे ज्यादा होते हैं और सक्रिय रूप से कीटाणुओं को खाते हैं। * **कणिकाविहीन (Agranulocytes):** इनमें मोनोसाइट और लिम्फोसाइट शामिल हैं। मोनोसाइट कीटाणुओं को निगलते हैं, जबकि लिम्फोसाइट शरीर की रोगों से लड़ने की शक्ति (प्रतिरक्षा) बनाते हैं। * **बिम्बाणु (Platelets):** ये बहुत छोटे होते हैं और अस्थि मज्जा में बनते हैं। ये चोट लगने पर खून को रोकने में मदद करते हैं। इनका जीवनकाल लगभग 10 दिन होता है।
रक्त के काम: 1. ऑक्सीजन और कार्बन डाइऑक्साइड का शरीर में लाना-ले जाना। 2. पोषक तत्वों को शरीर के अलग-अलग हिस्सों तक पहुँचाना। 3. शरीर का तापमान और \( \text{pH} \) (अम्लता-क्षारता) नियंत्रित करना। 4. शरीर में चोट लगने पर खून बहने से रोकना और घावों को भरना। 5. शरीर को बीमारियों से बचाना (रोगों से लड़ने की शक्ति)। 6. हार्मोन और दूसरे ज़रूरी पदार्थों को ज़रूरत वाली जगह तक पहुँचाना। 7. शरीर से बेकार पदार्थों को बाहर निकालने में मदद करना।
In simple words: रक्त, प्लाज्मा और तीन तरह की कोशिकाओं (लाल, सफेद, बिम्बाणु) से बना है। यह शरीर में ऑक्सीजन, पोषक तत्व ले जाता है, और बीमारियों से बचाता है।

🎯 Exam Tip: रक्त के घटकों को उनके मुख्य कार्यों के साथ याद रखना महत्वपूर्ण है, खासकर हीमोग्लोबिन का ऑक्सीजन परिवहन में महत्व और \( \text{WBC} \) का प्रतिरक्षा में कार्य।

 

Question 68. मानव में मूत्र निर्माण की प्रक्रिया की विवेचना करें। वृक्के की संरचना को समझाइये।
Answer: मानव शरीर में मूत्र बनने की प्रक्रिया नेफ्रॉन (वृक्क की छोटी इकाइयाँ) द्वारा होती है। यह प्रक्रिया तीन मुख्य चरणों में पूरी होती है: 1. **छानना (Ultrafiltration):** रक्त ग्लोमेरुलस में आता है, जहाँ दबाव के कारण पानी, नमक, ग्लूकोस और छोटे कण छनकर बोमेन कैप्सूल में आ जाते हैं। बड़े प्रोटीन और रक्त कोशिकाएँ नहीं छनतीं। यह छना हुआ तरल 'नेफ्रिक फिल्ट्रेट' कहलाता है। 2. **ज़रूरी चीज़ों को वापस सोखना (Selective Reabsorption):** यह फिल्ट्रेट वृक्क नलिकाओं से गुजरता है। यहाँ, शरीर के लिए ज़रूरी चीज़ें जैसे ग्लूकोस, विटामिन, हार्मोन, और कुछ नमक फिर से खून में सोख लिए जाते हैं। इस चरण में पानी भी वापस खून में चला जाता है, जिससे फिल्ट्रेट और गाढ़ा हो जाता है। 3. **बचा हुआ बाहर निकालना (Secretion):** जब रक्त वृक्क नलिकाओं के आसपास से गुजरता है, तब खून में बचे हुए कुछ बेकार पदार्थ वापस फिल्ट्रेट में मिला दिए जाते हैं। अंत में, जो तरल बचता है, उसमें सिर्फ बेकार पदार्थ होते हैं, जिसे मूत्र कहते हैं। यह मूत्र मूत्राशय में जमा होता है और फिर शरीर से बाहर निकाल दिया जाता है।
In simple words: मूत्र बनने में तीन चरण होते हैं: पहले खून छनता है, फिर ज़रूरी चीजें वापस सोख ली जाती हैं, और अंत में बेकार पदार्थ मूत्र के रूप में शरीर से बाहर निकल जाते हैं।

🎯 Exam Tip: मूत्र निर्माण के तीनों चरणों (छानना, पुनः अवशोषण, और स्रवण) को उनके मुख्य कार्यों के साथ याद रखें, और नेफ्रॉन को वृक्क की कार्यात्मक इकाई के रूप में उल्लेख करें।

 

Question 69. नर जनन तंत्र का चित्र बनाइए। मानव में प्राथमिक जनन अंगों की क्रियाविधि बताइए।
Answer: मानव में प्राथमिक जनन अंग वृषण (Testis) कहलाते हैं। ये दो वृषण अंडकोष (Scrotum) नामक एक थैली में शरीर के बाहर स्थित होते हैं। वृषण अंडकोष के अंदर ही शुक्राणु बनते हैं। वृषण की छोटी-छोटी नलिकाओं को शुक्रजनन नलिकाएँ (Seminiferous Tubules) कहते हैं, जो वृषण की मुख्य इकाई हैं। वृषण में ही नर हार्मोन टेस्टोस्टेरोन भी बनता है। यह हार्मोन लड़कों में युवावस्था के दौरान होने वाले बदलावों को नियंत्रित करता है, जैसे मांसपेशियों का बढ़ना और आवाज़ का भारी होना।
In simple words: नर जनन तंत्र में वृषण मुख्य अंग हैं। वृषण अंडकोष में होते हैं, जहाँ शुक्राणु और नर हार्मोन टेस्टोस्टेरोन बनते हैं, जो लड़कों में युवावस्था के बदलावों को नियंत्रित करते हैं।

🎯 Exam Tip: नर जनन तंत्र के प्राथमिक अंगों (वृषण) के कार्यों को स्पष्ट रूप से लिखें, जैसे शुक्राणु और टेस्टोस्टेरोन हार्मोन का उत्पादन, और यौवनावस्था में उनकी भूमिका। चित्र को स्वच्छ और सही लेबल के साथ बनाने का अभ्यास करें।

 

Question 70. तंत्रिका की संरचना को चित्र के माध्यम से समझाइए। हाइपोथैलेमस तथा पीयूष ग्रन्थि के महत्त्व को समझाइए।
Answer: तंत्रिका तंत्र न्यूरॉन्स (तंत्रिका कोशिकाओं) से बना होता है, जो इसकी बुनियादी इकाई हैं। एक तंत्रिका कोशिका के तीन मुख्य हिस्से होते हैं: 1. **कोशिकाकाय (Soma):** यह न्यूरॉन का मुख्य भाग है, जिसमें केंद्रक और कोशिका द्रव्य होता है। इसमें निसल कणिकाएँ और न्यूरोफाइब्रिल्स होते हैं। 2. **द्रुमाक्ष्य (Dendrites):** ये कोशिकाकाय से निकलने वाली छोटी शाखाएँ होती हैं। इनका काम दूसरे न्यूरॉन से संदेशों को कोशिकाकाय तक लाना है। 3. **तंत्रिकाक्ष (Axon):** यह एक लंबी संरचना है जो कोशिकाकाय से निकलती है और संदेशों को कोशिकाकाय से दूर ले जाती है। इसका अंतिम सिरा शाखित होता है और न्यूरोट्रांसमीटर (रासायनिक संदेशवाहक) छोड़ता है, जो दूसरे न्यूरॉन तक संदेश पहुँचाते हैं। दो न्यूरॉन के मिलने की जगह को सिनैप्स कहते हैं।
हाइपोथैलेमस और पीयूष ग्रंथि का महत्व: हाइपोथैलेमस दिमाग का एक छोटा सा हिस्सा है जो शरीर के कई महत्वपूर्ण कार्यों को नियंत्रित करता है, जैसे भूख, प्यास, नींद, शरीर का तापमान और भावनाओं को नियंत्रित करना। यह पीयूष ग्रंथि के साथ मिलकर काम करता है। पीयूष ग्रंथि एक 'मास्टर ग्रंथि' है, जो कई हार्मोन बनाती है। ये हार्मोन शरीर की वृद्धि, प्रजनन और दूसरे अंतःस्रावी ग्रंथियों के कार्यों को नियंत्रित करते हैं। हाइपोथैलेमस पीयूष ग्रंथि को नियंत्रित करके पूरे शरीर के हार्मोनल संतुलन को बनाए रखता है।
In simple words: तंत्रिका कोशिका (न्यूरॉन) संदेश ले जाती है और इसके तीन भाग होते हैं: कोशिकाकाय, द्रुमाक्ष्य और तंत्रिकाक्ष। हाइपोथैलेमस और पीयूष ग्रंथि मिलकर शरीर के हार्मोन और महत्वपूर्ण कार्यों को नियंत्रित करते हैं।

🎯 Exam Tip: तंत्रिका कोशिका के तीनों भागों (कोशिकाकाय, द्रुमाक्ष्य, तंत्रिकाक्ष) और उनके कार्यों को स्पष्ट रूप से परिभाषित करें। हाइपोथैलेमस और पीयूष ग्रंथि को अंतःस्रावी तंत्र के मुख्य नियंत्रक के रूप में समझाएँ।

 

अन्य महत्त्वपूर्ण प्रश्नोत्तर

वस्तुनिष्ठ प्रश्न

 

Question 1. समान कार्य करने वाली कोशिकाएँ मिलकर बनाती हैं
(अ) कोशिका
(ब) अंग
(स) ऊतक
(द) तंत्र
Answer: (स) ऊतक
In simple words: एक जैसा काम करने वाली कोशिकाएँ मिलकर ऊतक बनाती हैं।

🎯 Exam Tip: कोशिका, ऊतक, अंग और तंत्र के बीच के संबंध को याद रखना महत्वपूर्ण है, क्योंकि यह जीव विज्ञान की बुनियादी अवधारणा है।

 

Question 2. यकृत की संरचनात्मक एवं क्रियात्मक इकाई है
(अ) यकृत पालिकाएँ
(ब) वृक्क नलिका
(स) तंत्रिका कोशिका
(द) शुक्रजनन नलिका
Answer: (अ) यकृत पालिकाएँ
In simple words: यकृत की सबसे छोटी काम करने वाली इकाई यकृत पालिकाएँ होती हैं।

🎯 Exam Tip: विभिन्न अंगों की संरचनात्मक और कार्यात्मक इकाइयों को याद रखना महत्वपूर्ण है, जैसे यकृत की पालिकाएँ, वृक्क की नेफ्रॉन और तंत्रिका तंत्र की न्यूरॉन।

 

Question 3. आमाशय में पाये जाने वाले एन्जाइम हैं
(अ) पेप्सिन
(ब) रेनिन
(स) अ व ब
(द) ऐमिलेज
Answer: (स) अ व ब
In simple words: पेट में पेप्सिन और रेनिन एंजाइम होते हैं।

🎯 Exam Tip: विभिन्न पाचक एंजाइमों और वे किन अंगों में पाए जाते हैं, साथ ही उनके कार्यों को याद रखें, क्योंकि यह पाचन तंत्र का महत्वपूर्ण हिस्सा है।

 

Question 4. मुख श्वसन तंत्र में किस अंग के तौर पर कार्य करता है
(अ) प्राथमिक
(ब) द्वितीयक
(स) तृतीयक
(द) चतुर्थक
Answer: (ब) द्वितीयक
In simple words: साँस लेने के लिए मुँह एक दूसरा (द्वितीयक) रास्ता है, नाक पहला है।

🎯 Exam Tip: श्वसन मार्ग के प्राथमिक और द्वितीयक अंगों को जानें, यह समझने के लिए कि हवा शरीर में कैसे प्रवेश करती है।

 

Question 5. ग्रसनी की आकृति होती है
(अ) चिमनीनुमा
(ब) लालटेननुमा
Answer: (अ) चिमनीनुमा
In simple words: ग्रसनी की आकृति एक चिमनी जैसी होती है।

🎯 Exam Tip: शरीर के विभिन्न अंगों की आकृतियों और वे कैसे उनके कार्यों में मदद करती हैं, इस पर ध्यान दें।

 

Question 6. श्वसन के लिए निम्न में से मुख्य रूप से उत्तरदायी है
(अ) नासिका
(ब) पसलियाँ
(स) फेफड़े
(द) डायफ्राम
Answer: (द) डायफ्राम
In simple words: डायफ्राम साँस लेने और छोड़ने के लिए सबसे ज़रूरी है।

🎯 Exam Tip: श्वसन प्रक्रिया में डायफ्राम की केंद्रीय भूमिका को समझें, क्योंकि यह फेफड़ों को हवा भरने और खाली करने में मदद करता है।

 

Question 7. भ्रूणावस्था तथा नवजात शिशुओं में रक्त का निर्माण होता है
(अ) यकृत में
(ब) प्लीहा में
(स) अस्थिमज्जा में
(द) अग्याशय में
Answer: (ब) प्लीहा में
In simple words: शिशुओं और भ्रूण में खून प्लीहा में बनता है।

🎯 Exam Tip: भ्रूण और वयस्क अवस्था में रक्त निर्माण के स्थानों में अंतर को जानें, यह विकास जीव विज्ञान का एक महत्वपूर्ण पहलू है।

 

Question 8. निम्न में किस कोशिका/कणिका की संख्या रक्त में पाई जाने वाली \( \text{WBC} \) में सबसे अधिक होती है
(अ) इओसिनोफिल
(ब) न्यूट्रोफिल
(स) बेसोफिल
(द) उपरोक्त में कोई नहीं
Answer: (ब) न्यूट्रोफिल
In simple words: न्यूट्रोफिल सफेद रक्त कोशिकाओं में सबसे ज़्यादा होते हैं।

🎯 Exam Tip: विभिन्न प्रकार की श्वेत रक्त कोशिकाओं (\( \text{WBCs} \)) और उनकी सापेक्षिक संख्या को याद रखना महत्वपूर्ण है, क्योंकि प्रत्येक प्रकार की प्रतिरक्षा प्रतिक्रिया में एक विशिष्ट भूमिका होती है।

 

Question 9. प्रतिजन \( \text{A} \) व \( \text{B} \) की उपस्थिति या अनुपस्थिति के आधार पर रक्त कितने समूहों में विभक्त किया गया है
(अ) एक समूह
(ब) दो समूह
(स) तीन समूह
(द) चार समूह
Answer: (द) चार समूह
In simple words: प्रतिजन \( \text{A} \) और \( \text{B} \) के हिसाब से खून को चार ग्रुप में बांटा जाता है।

🎯 Exam Tip: \( \text{ABO} \) रक्त समूह प्रणाली को उसके प्रतिजन और एंटीबॉडी के साथ समझें, क्योंकि यह रक्त आधान के लिए महत्वपूर्ण है।

 

Question 10. हृदय की गतिविधियों की गति निर्धारित करता है
(अ) पेसमेकर
(ब) महाशिरा
(स) माइट्रल कपाट
(द) फुफ्फुस धमनी
Answer: (अ) पेसमेकर
In simple words: पेसमेकर दिल की धड़कन की गति को तय करता है।

🎯 Exam Tip: हृदय के विद्युत चालन प्रणाली में पेसमेकर (\( \text{SA} \) नोड) की भूमिका को समझें, क्योंकि यह हृदय की लयबद्धता को बनाए रखने के लिए महत्वपूर्ण है।

 

Question 11. निम्न में अमोनियोत्सर्ग का उदाहरण है
(अ) उभयचर।
(ब) मछलियाँ
(स) अ व ब दोनों
(द) उपरोक्त सभी
Answer: (द) उपरोक्त सभी
In simple words: अमोनियोत्सर्ग का मतलब अमोनिया को शरीर से बाहर निकालना है, जैसे मछलियों और कुछ उभयचरों में।

🎯 Exam Tip: विभिन्न प्रकार के उत्सर्जन (अमोनियोत्सर्ग, यूरियोत्सर्ग, यूरिकोटेलिज्म) और उनके संबंधित उदाहरणों को समझें, खासकर जलीय और स्थलीय जीवों में अनुकूलन के संदर्भ में।

 

Question 12. निम्न में से कौन सी कोशिका श्वेत रक्त कणिका नहीं है?
(क) बी-लिंफोसाइट।
(ख) बिंबाणु ।
Answer: (ख) बिंबाणु
In simple words: बिम्बाणु सफेद रक्त कोशिका नहीं है, ये खून को जमाने में मदद करती हैं।

🎯 Exam Tip: रक्त के विभिन्न घटकों - लाल रक्त कोशिकाएँ, श्वेत रक्त कोशिकाएँ (उनके प्रकार सहित), और बिम्बाणु - के कार्यों और पहचान को समझें।

 

Question 13. त्वचा निम्न में पसीने के रूप में उत्सर्जित करती है
(अ) नमक
(ब) यूरिया
(स) लैक्टिक अम्ल
(द) उपरोक्त सभी
Answer: (द) उपरोक्त सभी
In simple words: त्वचा पसीने के रूप में नमक, यूरिया और लैक्टिक एसिड जैसे पदार्थ बाहर निकालती है।

🎯 Exam Tip: त्वचा को एक उत्सर्जी अंग के रूप में समझें और पसीने की संरचना में मौजूद विभिन्न पदार्थों को जानें, जो शरीर के तापमान और अपशिष्ट के संतुलन में मदद करते हैं।

 

Question 14. योनि में पाये जाने वाला जीवाणु है
(अ) लैक्टोबैसिलस
(ब) राइजोबियम
(स) अ व ब दोनों
(द) उपरोक्त में से कोई नहीं
Answer: (अ) लैक्टोबैसिलस
In simple words: योनि में लैक्टोबैसिलस बैक्टीरिया होते हैं जो उसे स्वस्थ रखते हैं।

🎯 Exam Tip: शरीर के विभिन्न हिस्सों में पाए जाने वाले सामान्य माइक्रोबायोटा (विशेषकर योनि में लैक्टोबैसिलस की भूमिका) और उनके महत्व को जानें।

 

Question 15. मानव मस्तिष्क का वजन है
(अ) 1 किलो
(ब) 12 किलो
(स) 2 किलो
(द) 24 किलो
Answer: (ब) 12 किलो
In simple words: मानव मस्तिष्क का वजन उत्तर कुंजी के हिसाब से 12 किलो बताया गया है।

🎯 Exam Tip: मानव मस्तिष्क के औसत वजन को हमेशा 1.3-1.4 किलोग्राम के आसपास याद रखें; विकल्पों को ध्यान से देखें और सबसे उचित उत्तर चुनें।

 

Question 16. कॉर्पोरा काड्रीजेमीना पिण्ड पाया जाता है
(अ) अग्र मस्तिष्क में
(ब) मध्य मस्तिष्क में
(स) पश्च मस्तिष्क में
(द) मेरुरज्जु में
Answer: (ब) मध्य मस्तिष्क में
In simple words: कॉर्पोरा क्वाड्रीजेमिना बीच वाले दिमाग (मध्य मस्तिष्क) में होता है।

🎯 Exam Tip: मस्तिष्क के विभिन्न भागों (अग्र, मध्य, पश्च) और उनके विशिष्ट संरचनाओं जैसे कॉर्पोरा क्वाड्रीजेमिना के स्थानों और कार्यों को जानें।

 

Question 17. निसेल कणिकाएँ (Nissl's granules) न्यूरोन के किस भाग में पाई जाती हैं?
(अ) कोशिकाकाय में
(ब) द्रुमाक्ष्य में
Answer: (अ) कोशिकाकाय में
In simple words: निसेल कणिकाएँ न्यूरॉन के मुख्य भाग, कोशिकाकाय में होती हैं।

🎯 Exam Tip: न्यूरॉन की संरचना के विभिन्न घटकों और उनके कार्यों को समझें, विशेष रूप से निसेल कणिकाओं का स्थान और महत्व।

 

Question 19. किस हार्मोन की कमी से टिटेनी रोग होता है?
(अ) पैराथार्मोन
(ब) थाइरोक्सिन
(स) मेलेटोनिन
(द) पीयूष हार्मोन
Answer: (अ) पैराथार्मोन
In simple words: पैराथार्मोन की कमी से टिटेनी नामक बीमारी होती है, जिससे मांसपेशियों में ऐंठन होती है।

🎯 Exam Tip: पैराथायरॉइड हार्मोन और कैल्शियम के चयापचय में इसकी भूमिका को याद रखें, क्योंकि असंतुलन से गंभीर तंत्रिका-मांसपेशीय विकार हो सकते हैं।

 

Question 20. आपातकालीन हार्मोन किस ग्रन्थि से स्रावित किया जाता है ?
(अ) थायराइड ग्रन्थि
(ब) थाइमस ग्रन्थि
(स) अधिवृक्क ग्रन्थि
(द) पीयूष ग्रन्थि।
Answer: (स) अधिवृक्क ग्रन्थि
In simple words: आपातकालीन हार्मोन अधिवृक्क ग्रंथि से निकलते हैं, जो तनाव में शरीर को तैयार करते हैं।

🎯 Exam Tip: अधिवृक्क ग्रंथि को 'आपातकालीन ग्रंथि' के रूप में समझें और 'फाइट या फ्लाइट' प्रतिक्रिया में उसके हार्मोन की भूमिका को जानें।

अतिलघूत्तरात्मक प्रश्न

 

Question 1. लार ग्रन्थि द्वारा स्रावित एन्जाइम का नाम लिखिए।
Answer: लार ग्रंथि से निकलने वाले एंजाइम का नाम टायलिन (एमाइलेज) है। यह एंजाइम भोजन में मौजूद स्टार्च को पचाने में मदद करता है।
In simple words: लार ग्रंथि टायलिन एंजाइम बनाती है।

🎯 Exam Tip: पाचन प्रक्रिया की शुरुआत को समझें और लार में मौजूद एंजाइम टायलिन की भूमिका को याद रखें।

 

Question 2. स्त्रियों के दो लिंग हार्मोनों के नाम लिखिए।
Answer: स्त्रियों के दो मुख्य लिंग हार्मोन एस्ट्रोजन और प्रोजेस्टेरोन हैं। ये हार्मोन महिलाओं के प्रजनन और शारीरिक विकास में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।
In simple words: महिलाओं के दो मुख्य हार्मोन एस्ट्रोजन और प्रोजेस्टेरोन हैं।

🎯 Exam Tip: महिला प्रजनन प्रणाली के मुख्य हार्मोन (एस्ट्रोजन और प्रोजेस्टेरोन) और उनके कार्यों को याद रखें, खासकर मासिक धर्म चक्र और गर्भावस्था में।

 

Question 3. जीभ मुखगुहा के पृष्ठ भाग में आधार तल से किस रचना से जुड़ी होती है?
Answer: जीभ मुखगुहा के नीचे के हिस्से में, आधार से फ्रेनुलम लिंगुअल (lingual frenulum) नामक एक पतली झिल्ली से जुड़ी होती है। यह जीभ को स्थिर रखने में मदद करता है।
In simple words: जीभ मुँह के नीचे फ्रेनुलम लिंगुअल नाम की झिल्ली से जुड़ी होती है।

🎯 Exam Tip: जीभ की शारीरिक रचना और फ्रेनुलम लिंगुअल की भूमिका को जानें, जो जीभ की गतिशीलता को प्रभावित करता है।

 

Question 4. दूध के दाँत बच्चे में कितनी उम्र में निकलते हैं?
Answer: बच्चों में दूध के दाँत आमतौर पर लगभग 6 महीने की उम्र से निकलना शुरू होते हैं। ये दाँत खाने और बोलने में मदद करते हैं।
In simple words: बच्चों के दूध के दाँत लगभग 6 महीने की उम्र में निकलना शुरू होते हैं।

🎯 Exam Tip: बच्चों में दाँतों के निकलने के सामान्य क्रम और समय-सीमा को याद रखें, क्योंकि यह बाल स्वास्थ्य का एक महत्वपूर्ण पहलू है।

 

Question 5. आमाशय कितना लीटर आहार धारित कर सकता है?
Answer: आमाशय (पेट) लगभग एक से तीन लीटर तक भोजन रख सकता है। यह पेट को भोजन को स्टोर करने और पचाने के लिए पर्याप्त जगह देता है।
In simple words: पेट में 1 से 3 लीटर खाना आ सकता है।

🎯 Exam Tip: आमाशय की क्षमता और भोजन भंडारण में इसकी भूमिका को जानें, जो पाचन प्रक्रिया का एक प्रारंभिक चरण है।

 

Question 6. अग्न्याशय की आकृति किस प्रकार की होती है?
Answer: अग्न्याशय की आकृति अंग्रेजी अक्षर 'U' के जैसी होती है, या कुछ हद तक पत्ती के आकार की भी होती है। यह पेट के पीछे स्थित होता है।
In simple words: अग्न्याशय 'U' आकार का होता है।

🎯 Exam Tip: अग्न्याशय के आकार और स्थान को जानें, क्योंकि यह इसके बहिःस्रावी और अंतःस्रावी दोनों कार्यों के लिए महत्वपूर्ण है।

 

अतिलघूत्तरात्मक प्रश्न

 

Question 8. हाइड्रोक्लोरिक अम्ल किन कोशिकाओं द्वारा स्रावित किया जाता है?
Answer: हाइड्रोक्लोरिक अम्ल आक्सिन्टिक कोशिकाओं द्वारा स्रावित किया जाता है। इन कोशिकाओं को पार्श्विका कोशिकाएँ भी कहते हैं और ये पेट में पाई जाती हैं।
In simple words: आक्सिन्टिक कोशिकाएँ हाइड्रोक्लोरिक अम्ल बनाती हैं।

🎯 Exam Tip: Remember that oxyntic cells are also called parietal cells and are found in the stomach lining, playing a key role in digestion.

 

Question 9. श्वास नली (Trachea) किस प्रकार की आकृति के उपास्थि छल्लों से निर्मित होती है?
Answer: श्वास नली C-आकार के उपास्थि छल्लों से बनी होती है। ये छल्ले श्वास नली को हमेशा खुला रखने में मदद करते हैं ताकि साँस लेने में कोई रुकावट न हो।
In simple words: श्वास नली में C-आकार के छल्ले होते हैं जो उसे खुला रखते हैं।

🎯 Exam Tip: Visualise the C-shaped rings to understand how they prevent the trachea from collapsing, ensuring continuous airflow.

 

Question 10. एक फेफड़े में कितनी कूपिकाएँ पाई जाती हैं?
Answer: एक फेफड़े में लगभग 30 मिलियन (3 करोड़) कूपिकाएँ पाई जाती हैं। ये बहुत छोटी हवा की थैली होती हैं जहाँ गैसों का आदान-प्रदान होता है।
In simple words: एक फेफड़े में लगभग 3 करोड़ छोटी हवा की थैलियाँ (कूपिकाएँ) होती हैं।

🎯 Exam Tip: Note that the vast number of alveoli provides a huge surface area for efficient gas exchange, which is crucial for breathing.

 

Question 11. उस रक्त समूह का नाम बताइए जिसमें कोई किसी प्रकार की प्रतिजन उपस्थित नहीं होती है।
Answer: 'O' रक्त समूह वाले व्यक्ति में किसी भी प्रकार की प्रतिजन (एंटीजन) उपस्थित नहीं होती है। यही कारण है कि O-नकारात्मक रक्त को 'सार्वभौमिक दाता' माना जाता है।
In simple words: 'O' रक्त समूह में कोई प्रतिजन नहीं होता।

🎯 Exam Tip: Understand that the absence of A and B antigens in O blood group makes it compatible with all other blood groups in emergencies.

 

Question 12. विश्व में कितने प्रतिशत व्यक्तियों का रक्त आरएच धनात्मक है?
Answer: विश्व में लगभग 80 प्रतिशत व्यक्तियों का रक्त आरएच धनात्मक (Rh-positive) होता है। आरएच कारक लाल रक्त कोशिकाओं की सतह पर पाया जाने वाला एक आनुवंशिक प्रोटीन है।
In simple words: दुनिया में 80% लोगों का रक्त Rh-धनात्मक होता है।

🎯 Exam Tip: Remember that Rh factor is crucial in blood transfusions and pregnancy, especially in cases of Rh incompatibility.

 

Question 13. मनुष्य में किस प्रकार का परिसंचरण तन्त्र पाया जाता है?
Answer: मनुष्य में बंद परिसंचरण तंत्र (Closed Circulatory System) पाया जाता है। इसका मतलब है कि रक्त हमेशा रक्त वाहिकाओं (जैसे धमनियों और नसों) के अंदर बहता है और सीधे अंगों को स्नान नहीं कराता है।
In simple words: मनुष्यों में बंद परिसंचरण तंत्र होता है, जहाँ रक्त हमेशा वाहिकाओं में रहता है।

🎯 Exam Tip: Contrast closed circulation with open circulation (found in insects) where blood directly bathes the organs.

 

Question 14. बायें आलिन्द व बायें निलय के बीच पाये जाने वाले कपाट (Valve) को क्या कहते हैं?
Answer: बायें आलिन्द व बायें निलय के बीच पाये जाने वाले कपाट को माइट्रल (Mitral) कपाट कहते हैं। यह कपाट रक्त को केवल एक दिशा में, आलिन्द से निलय की ओर, बहने देता है और वापस जाने से रोकता है।
In simple words: बायें आलिन्द और बायें निलय के बीच वाले वाल्व को माइट्रल वाल्व कहते हैं।

🎯 Exam Tip: Mitral valve is also known as the bicuspid valve, indicating it has two cusps or flaps.

 

Question 16. यकृत द्वारा ऐसे दो पदार्थों के नाम लिखिए जिनका उत्सर्जन मल के द्वारा किया जाता है।
Answer: यकृत द्वारा मल के माध्यम से उत्सर्जित किए जाने वाले दो पदार्थ बिलीरुबिन और बिलीवर्दिन हैं। ये पित्त वर्णक होते हैं जो लाल रक्त कोशिकाओं के टूटने से बनते हैं।
In simple words: यकृत बिलीरुबिन और बिलीवर्दिन को मल के रास्ते बाहर निकालता है।

🎯 Exam Tip: Remember that bilirubin and biliverdin are key components of bile and give feces its characteristic color.

 

Question 17. प्रोस्टेट ग्रन्थि किस प्रकार की ग्रन्थि है एवं इसका आकार किस प्रकार का होता है?
Answer: प्रोस्टेट ग्रन्थि एक बहिःस्रावी ग्रन्थि है, जिसका अर्थ है कि यह अपने स्राव को सीधे एक वाहिनी में छोड़ती है। इसका आकार अखरोट के समान होता है।
In simple words: प्रोस्टेट ग्रन्थि एक बहिःस्रावी ग्रन्थि है और इसका आकार अखरोट जैसा होता है।

🎯 Exam Tip: Note that exocrine glands have ducts, unlike endocrine glands which secrete directly into the bloodstream.

 

Question 18. माता व भ्रूण के मध्य स्थापित कड़ी अथवा संरचना को क्या कहते हैं?
Answer: माता व भ्रूण के मध्य स्थापित कड़ी अथवा संरचना को प्लेसेंटा (Placenta) कहते हैं। प्लेसेंटा भ्रूण को पोषक तत्व और ऑक्सीजन प्रदान करता है और अपशिष्ट उत्पादों को हटाता है।
In simple words: माँ और बच्चे को जोड़ने वाली कड़ी को प्लेसेंटा कहते हैं।

🎯 Exam Tip: Highlight the placenta's dual role in providing nutrients and oxygen while removing waste from the fetus.

 

Question 19. योनि में पाये जाने वाले लैक्टोबैसिलस जीवाणु का कार्य लिखिए।
Answer: योनि में पाये जाने वाले लैक्टोबैसिलस जीवाणु योनि के वातावरण को अम्लीय बनाए रखते हैं। यह अम्लीय वातावरण हानिकारक जीवाणुओं को बढ़ने से रोकता है, जिससे संक्रमण से बचाव होता है।
In simple words: लैक्टोबैसिलस जीवाणु योनि को अम्लीय रखकर संक्रमण से बचाते हैं।

🎯 Exam Tip: Emphasize the role of beneficial bacteria in maintaining a healthy microbial balance in the body.

 

Question 20. कोरक का गर्भाशय के अन्तःस्तर पर जुड़ना क्या कहलाता है?
Answer: कोरक (ब्लास्टोसिस्ट) का गर्भाशय के अन्तःस्तर (एंडोमेट्रियम) पर जुड़ना रोपण (Implantation) कहलाता है। यह गर्भावस्था की शुरुआत के लिए एक महत्वपूर्ण कदम है।
In simple words: जब प्रारंभिक भ्रूण गर्भाशय की दीवार से जुड़ता है, तो इसे रोपण कहते हैं।

🎯 Exam Tip: Understand that successful implantation is critical for the progression of pregnancy and embryonic development.

 

Question 21. शिशु जन्म की प्रक्रिया को क्या कहते हैं?
Answer: शिशु जन्म की प्रक्रिया को प्रसव (Parturition) कहते हैं। इस प्रक्रिया में शिशु माँ के शरीर से बाहर आता है।
In simple words: बच्चे के जन्म की प्रक्रिया को प्रसव कहते हैं।

🎯 Exam Tip: Note that parturition involves a series of coordinated uterine contractions to expel the fetus and placenta.

 

Question 23. प्रमस्तिष्क के दोनों गोलार्द्ध किस पट्टी से जुड़े होते हैं?
Answer: प्रमस्तिष्क के दोनों गोलार्द्ध कार्पस कैलोसम नामक तंत्रिका तंतुओं की एक मोटी पट्टी से जुड़े होते हैं। यह पट्टी दोनों गोलार्द्धों के बीच जानकारी के आदान-प्रदान को संभव बनाती है।
In simple words: मस्तिष्क के दोनों हिस्से कार्पस कैलोसम नाम की एक पट्टी से जुड़े होते हैं।

🎯 Exam Tip: Remember that the corpus callosum allows the left and right brain hemispheres to communicate and coordinate functions.

 

Question 24. आमाशय का आकार किस तरह का होता है?
Answer: आमाशय का आकार 'J' अक्षर के समान होता है। यह आकार भोजन को ग्रहण करने और पाचक रसों के साथ मिलाने में मदद करता है।
In simple words: आमाशय का आकार अंग्रेजी अक्षर 'J' जैसा होता है।

🎯 Exam Tip: Visualise the J-shape of the stomach to understand how it acts as a temporary storage and mixing chamber for food.

 

लघूत्तरात्मक प्रश्न

 

Question 1. भोजन के पाचन में लार की क्या भूमिका है?
Answer: भोजन के पाचन में लार की कई महत्वपूर्ण भूमिकाएँ होती हैं:
(i) लार ग्रन्थियों से स्रावित लार मुँह को नम रखती है, जिससे बोलने और खाना निगलने में आसानी होती है।
(ii) यह भोजन को नरम और चिकना बनाती है, जिससे उसे निगलना आसान हो जाता है।
(iii) लार में टायलिन (एमाइलेज) नामक एंजाइम होता है, जो भोजन में मौजूद स्टार्च का आंशिक पाचन करके उसे माल्टोस शर्करा में बदलता है।
(iv) लार मुँह और दाँतों को साफ रखने में भी मदद करती है।
(v) इसमें लाइसोजाइम नामक जीवाणुनाशक तत्व भी होते हैं जो भोजन के साथ आए हानिकारक जीवाणुओं को नष्ट करते हैं।
ये सभी कार्य भोजन को पेट में आगे के पाचन के लिए तैयार करते हैं।
In simple words: लार मुँह को गीला रखती है, भोजन को नरम करती है ताकि आसानी से निगल सकें, स्टार्च का पाचन शुरू करती है, मुँह को साफ रखती है, और हानिकारक कीटाणुओं को मारती है।

🎯 Exam Tip: Always list all the specific functions of saliva, especially the enzymatic action of amylase on starch and the antimicrobial action of lysozymes.

 

Question 2. हमारे शरीर में वसा का पाचन कैसे होता है? यह प्रक्रम कहाँ होता है?
Answer: हमारे शरीर में वसा का पाचन मुख्य रूप से छोटी आँत में होता है और इसमें लाइपेज नामक एंजाइम मदद करते हैं।
पहले, पित्त रस में मौजूद पित्त लवण वसा की बड़ी बूंदों को छोटी-छोटी बूंदों में तोड़ देते हैं, जिसे पायसीकरण (emulsification) कहते हैं। यह प्रक्रिया लाइपेज एंजाइमों को वसा पर बेहतर ढंग से काम करने के लिए अधिक सतह प्रदान करती है।
इसके बाद, जठर रस, अग्न्याशयी रस और आंत्र रस में उपस्थित लाइपेज एंजाइम इन पायसीकृत वसा को वसीय अम्ल (fatty acids) और ग्लिसरॉल में बदल देते हैं। इस तरह, वसा का पाचन पूरा हो जाता है और वे अवशोषण के लिए तैयार हो जाते हैं।
In simple words: वसा का पाचन छोटी आँत में होता है। पित्त रस वसा को छोटे टुकड़ों में तोड़ता है, फिर लाइपेज एंजाइम उन्हें वसीय अम्ल और ग्लिसरॉल में बदल देते हैं।

🎯 Exam Tip: Remember to mention both the emulsification of fats by bile salts and the enzymatic action of lipase for complete fat digestion, and specify the small intestine as the primary site.

 

Question 4. गैसों के अधिकतम विनिमय के लिए कूपिकाएँ किस प्रकार अभिकल्पित हैं?
Answer: कूपिकाएँ (एल्वियोलाई) फेफड़ों की सबसे छोटी कार्यात्मक इकाई होती हैं और इन्हें गैसों के अधिकतम विनिमय के लिए विशेष रूप से बनाया गया है:
(i) बड़ी सतह क्षेत्र: प्रत्येक मानव फेफड़े में लगभग 30 मिलियन कूपिकाएँ होती हैं। यदि इन सभी कूपिकाओं की सतह को फैला दिया जाए, तो यह लगभग 80 वर्ग मीटर का क्षेत्र घेरेगी, जो गैस विनिमय के लिए एक विशाल सतह प्रदान करता है।
(ii) पतली दीवारें: कूपिकाओं की दीवारें बहुत पतली शल्की उपकला कोशिकाओं से बनी होती हैं, जो केवल एक कोशिका मोटी होती हैं।
(iii) रक्त कोशिकाओं से निकटता: कूपिकाएँ रक्त केशिकाओं के एक घने जाल से घिरी होती हैं। कूपिका की पतली दीवार और रक्त केशिकाओं की पतली दीवार मिलकर एक बहुत पतली श्वसनीय झिल्ली बनाती हैं।
यह विस्तृत सतह और पतली झिल्ली ऑक्सीजन को रक्त में और कार्बन डाइऑक्साइड को रक्त से कूपिकाओं में तेजी और कुशलता से स्थानांतरित करने में मदद करती है।
In simple words: कूपिकाएँ छोटी हवा की थैलियाँ होती हैं जिनकी दीवारें बहुत पतली होती हैं और वे रक्त वाहिकाओं से घिरी होती हैं। इनकी बड़ी संख्या और पतली दीवारें ऑक्सीजन और कार्बन डाइऑक्साइड को आसानी से बदलने में मदद करती हैं।

🎯 Exam Tip: Focus on the three main design features of alveoli for efficient gas exchange: large surface area, thin walls, and rich blood supply.

 

Question 5. रुधिर क्या है और इसका कौनसा घटक गैसीयन परिवहन में सहायक है?
Answer: रुधिर एक तरल संयोजी ऊतक (liquid connective tissue) है जो शरीर में विभिन्न पदार्थों का परिवहन करता है। इसमें एक तरल भाग होता है जिसे प्लाज्मा कहते हैं, और इसमें विभिन्न प्रकार की कोशिकाएँ निलंबित रहती हैं।
रुधिर का वह घटक जो गैसीय परिवहन में सहायक है, वह लाल रुधिर कोशिकाओं (Red Blood Cells) में पाया जाने वाला हीमोग्लोबिन है। हीमोग्लोबिन ऑक्सीजन के साथ जुड़कर उसे फेफड़ों से शरीर के विभिन्न ऊतकों तक पहुँचाता है, और कुछ हद तक कार्बन डाइऑक्साइड को भी वापस फेफड़ों तक लाने में मदद करता है। प्लाज्मा अन्य पदार्थों जैसे पोषक तत्वों, हार्मोन और अपशिष्ट उत्पादों का परिवहन करता है।
In simple words: रक्त एक तरल पदार्थ है जो शरीर में सब कुछ ले जाता है। हीमोग्लोबिन, जो लाल रक्त कोशिकाओं में होता है, ऑक्सीजन और कार्बन डाइऑक्साइड को ले जाने में मदद करता है।

🎯 Exam Tip: Always specify hemoglobin as the primary molecule for oxygen transport, and mention its location within red blood cells.

 

Question 6. शुक्राशय एवं प्रोस्टेट ग्रन्थि की क्या भूमिका है?
Answer: शुक्राशय और प्रोस्टेट ग्रन्थि दोनों ही पुरुष प्रजनन तंत्र में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं:
(i) शुक्राशय (Seminal Vesicles): ये ग्रन्थियाँ एक तरल पदार्थ का स्राव करती हैं जो शुक्राणुओं के लिए एक माध्यम का काम करता है। यह तरल शुक्राणुओं को पोषण प्रदान करता है, उनकी सुरक्षा करता है, और उन्हें सक्रिय बनाए रखता है। यह स्त्री की योनि के अम्लीय वातावरण को निष्क्रिय करके शुक्राणुओं को सुरक्षित रखने में भी मदद करता है।
(ii) प्रोस्टेट ग्रन्थि (Prostate gland): यह ग्रन्थि मूत्र मार्ग में एक क्षारीय स्राव छोड़ती है। यह स्राव शुक्राणुओं को गतिशीलता प्रदान करता है और मूत्र मार्ग में मूत्र की अम्लता को निष्क्रिय कर देता है। शुक्राशय और प्रोस्टेट ग्रन्थि दोनों के स्राव मिलकर वीर्य का एक महत्वपूर्ण हिस्सा बनाते हैं।
In simple words: शुक्राशय एक तरल बनाता है जो शुक्राणुओं को पोषण देता है और उन्हें चलने में मदद करता है। प्रोस्टेट ग्रन्थि भी एक तरल छोड़ती है जो शुक्राणुओं को गति देता है और मूत्र मार्ग को साफ रखता है।

🎯 Exam Tip: Differentiate the specific contributions of each gland to semen composition and sperm viability, focusing on nutrition, motility, and pH regulation.

 

Question 8. वयस्क में शुक्रवाहिनी को हटाकर उसके स्थान पर रबर की नलिका लगा दी जावे तो क्या प्रभाव पड़ेगा? समझाइए।
Answer: यदि किसी वयस्क में शुक्रवाहिनी (vas deferens) को हटाकर उसके स्थान पर रबर की नलिका लगा दी जाए, तो शुक्राणु आगे नहीं बढ़ पाएंगे। शुक्रवाहिनी की कोशिकाएँ एक विशेष तरल पदार्थ का स्राव करती हैं जो शुक्राणुओं के मार्ग को चिकना बनाता है। साथ ही, शुक्रवाहिनी की दीवार में पेशीय संकुचन होते हैं जो शुक्राणुओं को आगे धकेलते हैं। एक रबर की नलिका में ये दोनों कार्य करने की क्षमता नहीं होगी, जिससे शुक्राणुओं का परिवहन रुक जाएगा।
In simple words: अगर शुक्रवाहिनी की जगह रबर की नली लगा दें, तो शुक्राणु आगे नहीं जा पाएंगे क्योंकि रबर की नली न तो चिकना पदार्थ बनाएगी और न ही शुक्राणुओं को आगे धकेलेगी।

🎯 Exam Tip: Explain both the secretory (lubrication) and muscular (peristalsis) functions of the vas deferens, which a passive rubber tube cannot replicate.

 

Question 9. यौवनारम्भ (Puberty) किसे कहते हैं? समझाइए।
Answer: यौवनारम्भ वह प्रक्रिया है जिसमें मानव (पुरुष और महिला दोनों) के अपरिपक्व जनन अंग परिपक्व होते हैं और व्यक्ति जनन क्षमता विकसित करता है। महिलाओं में यौवनारम्भ आमतौर पर पुरुषों की तुलना में पहले शुरू होता है।
पुरुषों में यौवनारम्भ 13-15 वर्ष की आयु में वृषणों के सक्रिय होने और शुक्राणु उत्पादन के साथ शुरू होता है। महिलाओं में यह 12-14 वर्ष की आयु में स्तन ग्रन्थियों की वृद्धि और मासिक धर्म (रजोदर्शन) के साथ शुरू होता है। इस अवधि में शरीर में कई महत्वपूर्ण हार्मोनल परिवर्तन होते हैं।
In simple words: यौवनारम्भ वह समय है जब बच्चे का शरीर बड़ा होकर प्रजनन के लिए तैयार हो जाता है, जिससे जनन अंग विकसित होते हैं और हार्मोन बदलते हैं।

🎯 Exam Tip: Clearly define puberty as the development of reproductive capability and highlight the key differences in its onset and signs between males and females.

 

Question 10. स्त्रियों में फेलोपियन ट्यूब को धागे से बाँध दिया जावे तो कौनसी क्रिया पर प्रभाव पड़ेगा तथा क्यों? समझाइए।
Answer: यदि स्त्रियों में फेलोपियन ट्यूब को धागे से बाँध दिया जाए, तो अण्डाशय से निकला अंडा गर्भाशय तक नहीं पहुँच पाएगा। परिणामस्वरूप, शुक्राणु अंडे से नहीं मिल पाएगा और निषेचन की क्रिया नहीं होगी। यह एक स्थायी गर्भनिरोधक विधि है जिसे ट्यूबैक्टोमी कहते हैं। निषेचन न होने के कारण गर्भावस्था संभव नहीं होगी।
In simple words: फेलोपियन ट्यूब को बाँधने से अंडा गर्भाशय तक नहीं पहुँच पाएगा, जिससे शुक्राणु से मिलन नहीं होगा और बच्चा नहीं बन पाएगा।

🎯 Exam Tip: Emphasize that tying the fallopian tubes prevents both the egg's journey to the uterus and its meeting with sperm, thus blocking fertilization.

 

Question 11. मानव मस्तिष्क का नामांकित चित्र बनाइए।
Answer: यहाँ मानव मस्तिष्क का एक नामांकित चित्र अपेक्षित है। मस्तिष्क शरीर का नियंत्रण केंद्र है, जो सभी मानसिक और शारीरिक कार्यों का समन्वय करता है। (नोट: विस्तृत anatomical SVG चित्र उपलब्ध नहीं है।)
In simple words: मानव मस्तिष्क का चित्र बनाएँ और उसके सभी हिस्सों के नाम लिखें।

🎯 Exam Tip: When drawing, focus on clearly labeling the main parts: cerebrum, cerebellum, brainstem (pons, medulla oblongata), thalamus, and hypothalamus.

 

Question 12. फुफ्फुस के कूपिकाओं एवं वृक्क के नेफ्रॉन में कोई चार अन्तर लिखिए।
Answer:

क्र.सं.कूपिका (Alveoli)नेफ्रॉन (Nephron)
1.कूपिकाएँ फेफड़ों की संरचनात्मक और कार्यात्मक इकाई हैं, जहाँ गैसों का आदान-प्रदान होता है।नेफ्रॉन वृक्क (गुर्दे) की संरचनात्मक और कार्यात्मक इकाई हैं, जो रक्त को छानते हैं और मूत्र बनाते हैं।
2.कूपिकाओं का आकार गोलाकार होता है।नेफ्रॉन एक लंबी, नलीदार संरचना होती है।
3.प्रत्येक कूपिका एक एकल इकाई होती है और आगे विभाजित नहीं होती है।एक नेफ्रॉन के दो मुख्य भाग होते हैं: मैलपीगीयन कैप्सूल और वृक्क नलिका। वृक्क नलिका के तीन उप-भाग होते हैं: समीपस्थ कुण्डलित भाग, हेनले का लूप, और दूरस्थ कुण्डलित भाग।
4.कूपिकाओं को घेरने वाली रक्त केशिकाएँ एक ही प्रकार की होती हैं।नेफ्रॉन से जुड़ी रक्त केशिकाएँ दो भागों में होती हैं: केशिका गुच्छ (ग्लोमेरुलस) और परिनलिका केशिकाएँ।
5.कूपिकाएँ श्वसनीय गैसों (ऑक्सीजन और कार्बन डाइऑक्साइड) के आदान-प्रदान से संबंधित होती हैं।नेफ्रॉन शरीर के द्रव संतुलन (जल और इलेक्ट्रोलाइट्स) को बनाए रखने से संबंधित होते हैं।

In simple words: कूपिकाएँ फेफड़ों में हवा की थैलियाँ होती हैं जो साँस लेने में मदद करती हैं, जबकि नेफ्रॉन गुर्दे में रक्त को साफ करने वाली नलिकाएँ होती हैं। कूपिकाएँ गोल होती हैं और नेफ्रॉन लंबी नलियाँ।

🎯 Exam Tip: When comparing, ensure you highlight the primary organ association (lungs for alveoli, kidneys for nephrons) and their main physiological function (gas exchange vs. filtration/urine formation).

 

Question 14. यकृत के कार्य लिखिए।
Answer: यकृत (Liver) शरीर में कई महत्वपूर्ण कार्य करता है:
(i) यह पित्त रस का संश्लेषण करता है, जो वसा के पाचन और अवशोषण में मदद करता है।
(ii) यकृत कोशिकाएँ अमोनिया को यूरिया में परिवर्तित करके यूरिया का संश्लेषण करती हैं, जो कम विषाक्त होता है।
(iii) यकृत कोशिकाएँ हिपेरिन नामक एक प्रोटीन का स्राव करती हैं, जो रक्त वाहिकाओं के भीतर रक्त को जमने से रोकता है।
(iv) यह वसा का पायसीकरण करता है, जिससे वसा की बड़ी बूंदें छोटी-छोटी बूंदों में टूट जाती हैं।
(v) यकृत की कोशिकाएँ आवश्यकता से अधिक ग्लूकोज को ग्लाइकोजन में बदलकर संग्रहित करती हैं (ग्लाइकोजिनेसिस), जो शरीर के लिए ऊर्जा का भंडार है।
(vi) यह शरीर में उत्पन्न विभिन्न विषैले पदार्थों को निराविषीकरण (detoxify) करके उन्हें हानिरहित बनाता है।
In simple words: यकृत पित्त बनाता है, अमोनिया को यूरिया में बदलता है, रक्त जमने से रोकता है, वसा को पचाता है, अतिरिक्त चीनी को स्टोर करता है, और शरीर से जहर हटाता है।

🎯 Exam Tip: For liver functions, focus on its roles in digestion (bile), detoxification (urea, poisons), metabolism (glycogenesis), and blood regulation (heparin).

 

Question 15. आहार नाल के प्रमुख कार्य क्या हैं एवं यकृत तथा अग्न्याशय का नामांकित चित्र बनाइए।
Answer: आहार नाल (Alimentary Canal) के तीन प्रमुख कार्य हैं:
(i) यह भोजन को जटिल से सरल पदार्थों में तोड़कर उसका पाचन करता है।
(ii) यह पचे हुए पोषक तत्वों (जैसे ग्लूकोज, अमीनो अम्ल, वसा अम्ल) को अवशोषित करके रक्त में भेजता है।
(iii) यह भोजन को मुँह से गुदा तक गति प्रदान करता है, जिससे पाचन की पूरी प्रक्रिया सुचारु रूप से चलती है।
(यकृत तथा अग्न्याशय का नामांकित चित्र यहाँ अपेक्षित है, लेकिन जटिल anatomical SVG चित्र उपलब्ध नहीं है।)
In simple words: आहार नाल भोजन को पचाती है, पोषक तत्वों को सोखती है, और भोजन को शरीर से बाहर निकालने में मदद करती है।

🎯 Exam Tip: When asked for functions of the alimentary canal, remember the sequence: digestion, absorption, and propulsion (movement) of food.

 

Question 16. मानव हृदय का केवल नामांकित चित्र बनाइए।
Answer: यहाँ मानव हृदय का एक नामांकित चित्र अपेक्षित है। हृदय एक पेशीय अंग है जो पूरे शरीर में रक्त को पंप करता है। (नोट: विस्तृत anatomical SVG चित्र उपलब्ध नहीं है।)
In simple words: मानव हृदय का चित्र बनाएँ और उसके हिस्सों के नाम लिखें।

🎯 Exam Tip: Focus on accurately labeling the four chambers, major blood vessels (aorta, vena cava, pulmonary artery/vein), and the valves in your diagram.

 

Question 17. श्वसन का क्रिया विज्ञान समझाइए।
Answer: श्वसन (Respiration) वह प्रक्रिया है जिसमें गैसों का आदान-प्रदान होता है और यह दो मुख्य चरणों में होता है:
(i) बाह्य श्वसन (External Respiration): इसमें फेफड़ों में हवा और रक्त केशिकाओं के बीच गैसों का विनिमय होता है। ऑक्सीजन फेफड़ों से रक्त में जाती है और कार्बन डाइऑक्साइड रक्त से फेफड़ों में आती है, जो आंशिक दबाव के अंतर के कारण होता है।
(ii) आन्तरिक श्वसन (Internal Respiration): इसमें रक्त केशिकाओं और शरीर के ऊतकों के बीच गैसों का विनिमय होता है। ऑक्सीजन रक्त से ऊतक कोशिकाओं में जाती है और कार्बन डाइऑक्साइड ऊतक कोशिकाओं से रक्त में आती है, जो विसरण (diffusion) के माध्यम से होता है।
यह पूरी प्रक्रिया शरीर की कोशिकाओं को ऑक्सीजन प्रदान करने और अपशिष्ट कार्बन डाइऑक्साइड को हटाने के लिए महत्वपूर्ण है।
In simple words: साँस लेने की क्रिया दो भागों में होती है। पहले, बाहर से हवा फेफड़ों में आती है और रक्त से गैस बदलती है (बाह्य श्वसन)। फिर, रक्त से ऑक्सीजन शरीर की कोशिकाओं में जाती है और कोशिकाओं से कार्बन डाइऑक्साइड रक्त में आती है (आन्तरिक श्वसन)।

🎯 Exam Tip: Clearly distinguish between external and internal respiration by their locations (lungs vs. tissues) and the direction of gas exchange.

 

Question 18. नाइट्रोजनी अपशिष्ट कितने प्रकार के होते हैं? समझाइए।
Answer: नाइट्रोजनी अपशिष्ट मुख्य रूप से तीन प्रकार के होते हैं:
(i) अमोनिया (Ammonia): जो जन्तु अमोनिया का उत्सर्जन करते हैं, उन्हें अमोनोटेलिक कहते हैं। यह अत्यधिक घुलनशील होता है और आमतौर पर जलीय जन्तुओं में पाया जाता है, जहाँ यह सीधे पानी में विसरित हो जाता है। उदाहरण: अमीबा, मछलियाँ।
(ii) यूरिया (Urea): जो जन्तु यूरिया का उत्सर्जन करते हैं, उन्हें यूरियोटेलिक कहते हैं। यह अमोनिया की तुलना में कम विषाक्त होता है और इसे यकृत में अमोनिया से बनाया जाता है, फिर गुर्दों द्वारा उत्सर्जित किया जाता है। उदाहरण: स्तनधारी (मनुष्य सहित), उभयचर।
(iii) यूरिक अम्ल (Uric Acid): जो जन्तु यूरिक अम्ल का उत्सर्जन करते हैं, उन्हें यूरिकोटेलिक कहते हैं। यह सबसे कम विषाक्त होता है और बहुत कम पानी के साथ एक गाढ़े पेस्ट के रूप में उत्सर्जित होता है, जिससे पानी का संरक्षण होता है। उदाहरण: सरीसृप, पक्षी।
प्रत्येक प्रकार का उत्सर्जन जीव के पर्यावास और पानी की उपलब्धता के अनुकूल होता है।
In simple words: नाइट्रोजनी अपशिष्ट तीन प्रकार के होते हैं: अमोनिया (जो पानी में रहने वाले जीव निकालते हैं), यूरिया (जो स्तनधारी और उभयचर निकालते हैं) और यूरिक अम्ल (जो कम पानी का उपयोग करने वाले जीव जैसे पक्षी निकालते हैं)।

🎯 Exam Tip: For each type of nitrogenous waste, remember its toxicity, solubility, typical animal group, and the main organ of excretion.

 

Question 19. तंत्रिका तंत्र को चार्ट द्वारा दर्शाइये।
Answer: तंत्रिका तंत्र को मोटे तौर पर दो मुख्य भागों में बांटा जा सकता है:
(i) केन्द्रीय तंत्रिका तंत्र (Central Nervous System - CNS): इसमें मस्तिष्क और मेरुरज्जु शामिल होते हैं। यह शरीर का नियंत्रण और समन्वय केंद्र होता है।
(ii) परिधीय तंत्रिका तंत्र (Peripheral Nervous System - PNS): इसमें वे सभी तंत्रिकाएँ शामिल होती हैं जो मस्तिष्क और मेरुरज्जु से निकलकर शरीर के बाकी हिस्सों तक जाती हैं। इसे आगे दो भागों में बांटा गया है:
- कायिक तंत्रिका तंत्र (Somatic Nervous System): यह ऐच्छिक क्रियाओं (जैसे मांसपेशियों की गति) को नियंत्रित करता है।
- स्वायत्त तंत्रिका तंत्र (Autonomous Nervous System): यह अनैच्छिक क्रियाओं (जैसे हृदय गति, पाचन) को नियंत्रित करता है। स्वायत्त तंत्रिका तंत्र के भी दो उप-भाग होते हैं: अनुकम्पी तंत्रिका तंत्र (Sympathetic Nervous System) और परानुकम्पी तंत्रिका तंत्र (Parasympathetic Nervous System), जो एक-दूसरे के विपरीत कार्य करते हैं।
In simple words: तंत्रिका तंत्र में दो मुख्य भाग होते हैं: केन्द्रीय तंत्रिका तंत्र (मस्तिष्क और रीढ़ की हड्डी) और परिधीय तंत्रिका तंत्र (बाकी शरीर की नसें) जो ऐच्छिक और अनैच्छिक क्रियाओं को नियंत्रित करती हैं।

🎯 Exam Tip: When illustrating the nervous system, always begin with the two major divisions (CNS and PNS) and then break down the PNS into its further sub-divisions.

 

Question 20. तंत्रिका तंत्र की क्रियाविधि को समझाइए।
Answer: तंत्रिका तंत्र की क्रियाविधि विद्युत-रासायनिक आवेगों (nerve impulses) के माध्यम से काम करती है। कई तंत्रिका कोशिकाएँ (न्यूरॉन्स) मिलकर एक जटिल नेटवर्क बनाती हैं जो शरीर के विभिन्न हिस्सों को मस्तिष्क और मेरुरज्जु से जोड़ता है।
संवेदी तंत्रिकाएँ (sensory nerves) आवाज, रोशनी या स्पर्श जैसे उद्दीपनों (stimuli) का पता लगाती हैं और इन संदेशों को केन्द्रीय तंत्रिका तंत्र तक भेजती हैं। ये संदेश तंत्रिकाक्ष (axon) के माध्यम से यात्रा करते हैं और न्यूरोट्रांसमीटर नामक रसायनों की मदद से एक न्यूरॉन से दूसरे न्यूरॉन तक पहुँचते हैं।
केन्द्रीय तंत्रिका तंत्र से, चालक तंत्रिकाएँ (motor nerves) मांसपेशियों और ग्रन्थियों को संकेत भेजती हैं, जिससे वे कार्य करती हैं। यह तेज संचार शरीर को तुरंत प्रतिक्रिया देने में मदद करता है।
In simple words: तंत्रिका तंत्र संदेशों को बिजली और रसायन के रूप में भेजता है। संवेदी नसें जानकारी मस्तिष्क तक ले जाती हैं, और मोटर नसें मस्तिष्क से मांसपेशियों तक आदेश ले जाती हैं ताकि हम कुछ कर सकें।

🎯 Exam Tip: Highlight the three key steps: reception of stimulus by sensory neurons, processing in the CNS, and response through motor neurons, emphasizing the role of neurotransmitters at synapses.

 

Question 21. रक्त को कितने समूहों में बाँटा गया है? वर्णन कीजिए।
Answer: मनुष्य के रक्त को लाल रक्त कणिकाओं (RBC) की सतह पर पाए जाने वाले विशिष्ट प्रतिजन (Antigen) A और B की उपस्थिति या अनुपस्थिति के आधार पर चार मुख्य समूहों में बांटा गया है:
(i) रक्त समूह-A: इसमें लाल रक्त कोशिकाओं पर A प्रतिजन होता है।
(ii) रक्त समूह-B: इसमें लाल रक्त कोशिकाओं पर B प्रतिजन होता है।
(iii) रक्त समूह-AB: इसमें लाल रक्त कोशिकाओं पर A और B दोनों प्रतिजन होते हैं।
(iv) रक्त समूह-O: इसमें लाल रक्त कोशिकाओं पर न तो A और न ही B प्रतिजन होता है।
इन मुख्य प्रतिजनों के अलावा, आरएच (Rh) प्रतिजन भी होता है। जिन व्यक्तियों में Rh कारक होता है, उनका रक्त Rh-धनात्मक (Rh+) कहलाता है, और जिनमें Rh कारक नहीं होता, उनका रक्त Rh-ऋणात्मक (Rh-) कहलाता है। O-नकारात्मक रक्त समूह को 'सार्वभौमिक दाता' कहते हैं क्योंकि इसमें कोई A, B या Rh प्रतिजन नहीं होता।
In simple words: रक्त को A, B, AB, और O जैसे चार मुख्य समूहों में बांटा जाता है, जो लाल रक्त कोशिकाओं पर मौजूद खास निशानों (प्रतिजनों) पर निर्भर करता है। एक और निशान Rh कारक होता है, जिससे रक्त या तो धनात्मक या ऋणात्मक होता है।

🎯 Exam Tip: Ensure you explain both the ABO blood group system (based on A and B antigens) and the Rh factor (Rh antigen) when describing blood classification.

 

Question 22. मनुष्य में दाँत कितने प्रकार के होते हैं? प्रत्येक का वर्णन कीजिए।
Answer: मनुष्य में दाँत चार प्रकार के होते हैं, और प्रत्येक का अपना विशिष्ट कार्य होता है:
(i) कुंतक (Incisors): ये सामने के दाँत होते हैं जो भोजन को काटने और कुतरने का काम करते हैं। ये लगभग 6 महीने की उम्र में निकलना शुरू होते हैं।
(ii) रदनक (Canines): ये नुकीले दाँत होते हैं जो भोजन को चीरने-फाड़ने में मदद करते हैं। ये आमतौर पर 16-20 महीने की उम्र में निकलते हैं, और प्रत्येक जबड़े में दो होते हैं।
(iii) अग्र-चवर्णक (Premolars): ये दाँत भोजन को चबाने और पीसने में सहायक होते हैं। प्रत्येक जबड़े में चार अग्र-चवर्णक होते हैं, जो लगभग 10-11 वर्ष की उम्र तक पूरी तरह विकसित हो जाते हैं।
(iv) चवर्णक (Molars): ये दाँत सबसे पीछे होते हैं और भोजन को अच्छी तरह से पीसने का मुख्य काम करते हैं। प्रत्येक जबड़े में छह चवर्णक होते हैं, जिनमें से पहले 12-15 महीने की उम्र में निकलना शुरू होते हैं।
इन विभिन्न प्रकार के दाँतों के कारण मनुष्य विभिन्न प्रकार के भोजन को कुशलता से खा पाता है।
In simple words: मनुष्य के चार प्रकार के दाँत होते हैं: कुंतक काटने के लिए, रदनक फाड़ने के लिए, और अग्र-चवर्णक तथा चवर्णक भोजन को चबाने और पीसने के लिए।

🎯 Exam Tip: Clearly state the function and approximate location of each tooth type, and optionally, their eruption timeline.

 

Question 23. मानव के स्वर यंत्र (Larynx) का वर्णन कीजिए।
Answer: मानव का स्वर यंत्र, जिसे लैरिंक्स भी कहते हैं, कंठ ग्रसनी और श्वास नली को जोड़ने वाली एक संरचना है। यह 9 प्रकार की उपास्थियों (cartilages) से मिलकर बना होता है। भोजन निगलते समय, एपिग्लॉटिस नामक एक उपास्थि स्वर यंत्र को ढक लेती है, जिससे भोजन श्वास नली में जाने से रुक जाता है।
स्वर यंत्र के भीतर स्वर रज्जु (vocal cords) पाए जाते हैं। जब वायु इन स्वर रज्जु से गुजरती है, तो वे कंपन करते हैं और विभिन्न प्रकार की ध्वनियाँ उत्पन्न करते हैं, जिससे हम बोल पाते हैं। इस प्रकार, स्वर यंत्र श्वसन और ध्वनि उत्पादन दोनों के लिए महत्वपूर्ण है।
In simple words: लैरिंक्स या स्वर यंत्र, हमारे गले में होता है और 9 हड्डियों से बना होता है। यह भोजन को श्वास नली में जाने से रोकता है और इसमें स्वर रज्जु होते हैं जो बोलने के लिए आवाज बनाते हैं।

🎯 Exam Tip: Remember to include the epiglottis's role in preventing choking and the vocal cords' function in sound production when describing the larynx.

 

Question 25. दोहरा परिसंचरण तंत्र किसे कहते हैं? यह किनमें पाया जाता है?
Answer: दोहरा परिसंचरण तंत्र (Double Circulation System) वह प्रणाली है जिसमें रक्त एक पूर्ण चक्र में हृदय से होकर दो बार गुजरता है।
(i) पहले, शरीर से अशुद्ध (ऑक्सीजन रहित) रक्त हृदय के दाहिने आलिन्द में आता है, फिर दाहिने निलय में जाकर फेफड़ों में पंप किया जाता है। फेफड़ों में रक्त ऑक्सीजन लेता है और कार्बन डाइऑक्साइड छोड़ता है।
(ii) फिर, यह शुद्ध (ऑक्सीजन युक्त) रक्त फेफड़ों से हृदय के बायें आलिन्द में वापस आता है, बायें निलय में जाता है, और फिर महाधमनी द्वारा पूरे शरीर में पंप किया जाता है।
यह प्रणाली सुनिश्चित करती है कि ऑक्सीजन युक्त और ऑक्सीजन रहित रक्त आपस में न मिलें और शरीर के अंगों तक उच्च दबाव पर ऑक्सीजन युक्त रक्त पहुँचे। दोहरा परिसंचरण तंत्र मनुष्यों और अन्य स्तनधारियों में पाया जाता है।
In simple words: दोहरा परिसंचरण तंत्र में रक्त पूरे शरीर में एक चक्कर लगाने के लिए हृदय से दो बार गुजरता है—एक बार फेफड़ों से होकर और एक बार शरीर के बाकी हिस्सों से होकर। यह मनुष्यों में पाया जाता है।

🎯 Exam Tip: Explain both the pulmonary circulation (heart to lungs and back) and systemic circulation (heart to body and back) to fully describe double circulation.

 

Question 26. पीयूष ग्रन्थि कहाँ पाई जाती है? यह कितने भागों में विभक्त होती है? इनसे निकलने वाले हार्मोन के नाम लिखिए।
Answer: पीयूष ग्रन्थि मस्तिष्क में, हाइपोथैलेमस के ठीक नीचे स्थित होती है। यह ग्रन्थि दो मुख्य भागों में विभक्त होती है: अग्र पीयूष (anterior pituitary) और पश्च पीयूष (posterior pituitary)।
पीयूष ग्रन्थि से निकलने वाले कुछ महत्वपूर्ण हार्मोन निम्न हैं:
(i) वृद्धि हार्मोन (सोमेटोट्रोपिन): यह शरीर की वृद्धि को नियंत्रित करता है।
(ii) प्रोलैक्टिन: यह स्तनपान के दौरान दूध उत्पादन को उत्तेजित करता है।
(iii) थायराइड प्रेरक हार्मोन (TSH): यह थायराइड ग्रन्थि को हार्मोन स्रावित करने के लिए उत्तेजित करता है।
(iv) ऑक्सीटोसिन: यह प्रसव के दौरान गर्भाशय के संकुचन और स्तनपान में दूध निष्कासन में मदद करता है।
(v) वैसोप्रेसिन (एंटीड्यूरेटिक हार्मोन - ADH): यह गुर्दों द्वारा पानी के अवशोषण को नियंत्रित करके शरीर में जल संतुलन बनाए रखता है।
(vi) गोनेडोट्रोपिन (FSH और LH): ये प्रजनन अंगों के कार्यों को नियंत्रित करते हैं।
In simple words: पीयूष ग्रन्थि मस्तिष्क में होती है और इसके दो भाग होते हैं। यह वृद्धि, दूध उत्पादन, थायराइड को उत्तेजित करने वाले हार्मोन, प्रसव में मदद करने वाले हार्मोन, पानी का संतुलन बनाए रखने वाले हार्मोन और प्रजनन के लिए हार्मोन जैसे कई महत्वपूर्ण हार्मोन बनाती है।

🎯 Exam Tip: Remember to mention the location (below hypothalamus), the two main lobes (anterior and posterior pituitary), and list a few key hormones with their primary functions.

 

Question 27. अधिवृक्क ग्रन्थि कहाँ पाई जाती है? इससे निकलने वाले हार्मोन्स के कार्य लिखिए।
Answer: अधिवृक्क ग्रन्थियाँ प्रत्येक वृक्क (गुर्दे) के ऊपरी भाग पर एक जोड़ी में पाई जाती हैं। ये ग्रन्थियाँ दो मुख्य प्रकार के हार्मोन स्रावित करती हैं:
(i) एड्रेनालाईन (एपिनेफ्रीन)
(ii) नॉरएड्रेनालाईन (नॉरएपिनेफ्रीन)
ये हार्मोन शरीर में आपातकालीन स्थितियों (जैसे तनाव, भय या उत्तेजना) में तेजी से स्रावित होते हैं, इसलिए इन्हें 'आपातकालीन हार्मोन' भी कहा जाता है। इनके कार्य में हृदय की धड़कन और संकुचन को बढ़ाना, श्वसन दर में वृद्धि करना, और पुतलियों का फैलाव शामिल है, जिससे शरीर 'लड़ो या भागो' (fight or flight) प्रतिक्रिया के लिए तैयार होता है।
In simple words: अधिवृक्क ग्रन्थियाँ गुर्दों के ऊपर होती हैं और एड्रेनालाईन जैसे हार्मोन बनाती हैं। ये हार्मोन शरीर को आपातकालीन स्थितियों के लिए तैयार करते हैं, जैसे दिल की धड़कन बढ़ाना और साँस तेज करना।

🎯 Exam Tip: Associate adrenal glands with their location on kidneys and their "fight or flight" hormones (adrenaline/epinephrine) crucial for stress response.

 

Question 28. पिनियल ग्रन्थि एवं पैराथाइराइड ग्रन्थि का संक्षिप्त में वर्णन कीजिए।
Answer:
(i) पिनियल ग्रन्थि: यह अग्र मस्तिष्क के ऊपरी भाग में पाई जाती है। यह मेलोटोनिन हार्मोन का स्राव करती है, जो शरीर की दैनिक लय (circadian rhythm) या नींद-जागने के चक्र को नियंत्रित करने के लिए जिम्मेदार है। यह हार्मोन हमें यह बताने में मदद करता है कि कब सोना है और कब जागना है।
(ii) पैराथाइराइड ग्रन्थि: ये ग्रन्थियाँ थायराइड ग्रन्थि के पीछे पाई जाती हैं। ये पैराथॉर्मोन नामक हार्मोन का स्राव करती हैं, जो रक्त में कैल्शियम और फास्फोरस के स्तर को नियंत्रित करता है। इस हार्मोन की कमी से टिटेनी नामक रोग हो सकता है, जिसमें मांसपेशियों में अनैच्छिक ऐंठन होती है।
In simple words: पिनियल ग्रन्थि मस्तिष्क में होती है और नींद-जागने का चक्र नियंत्रित करती है। पैराथाइराइड ग्रन्थि थायराइड के पीछे होती है और रक्त में कैल्शियम-फास्फोरस को नियंत्रित करती है।

🎯 Exam Tip: For pineal gland, remember melatonin and circadian rhythm. For parathyroid gland, focus on parathormone and calcium/phosphorus regulation.

 

Question 29. वृषण व अण्डाशय से स्रावित हार्मोन का नाम एवं इसके कार्य लिखिए।
Answer: वृषण और अण्डाशय से स्रावित हार्मोन और उनके कार्य इस प्रकार हैं:
(i) वृषण (Testes): वृषण टेस्टोस्टेरॉन नामक हार्मोन का स्राव करते हैं, जिसे 'नर हार्मोन' भी कहते हैं। यह हार्मोन पुरुषों में लैंगिक अंगों के विकास, द्वितीयक लैंगिक लक्षणों (जैसे आवाज का भारी होना, शरीर के बालों का विकास) और शुक्राणुओं के निर्माण की प्रक्रिया में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है।
(ii) अण्डाशय (Ovaries): अण्डाशय दो मुख्य हार्मोन, एस्ट्रोजन और प्रोजेस्टेरॉन, का स्राव करते हैं। एस्ट्रोजन महिलाओं में द्वितीयक लैंगिक लक्षणों के विकास और मासिक धर्म चक्र को नियंत्रित करता है। प्रोजेस्टेरॉन गर्भाशय को गर्भावस्था के लिए तैयार करने और गर्भावस्था के दौरान इसे बनाए रखने के लिए आवश्यक है।
ये हार्मोन प्रजनन और नर व मादा में समग्र यौन विकास के लिए महत्वपूर्ण हैं।
In simple words: वृषण टेस्टोस्टेरॉन बनाते हैं जो पुरुषों को विकसित करता है और शुक्राणु बनाता है। अण्डाशय एस्ट्रोजन और प्रोजेस्टेरॉन बनाते हैं जो महिलाओं को विकसित करता है और गर्भावस्था में मदद करता है।

🎯 Exam Tip: Clearly state the hormone(s) from each gland and their distinct roles in male and female sexual development and reproduction.

 

Question 2. (अ) मादाओं में प्राथमिक लैंगिक अंग का नाम लिखिए।
Answer: मादाओं में प्राथमिक लैंगिक अंग अण्डाशय (ovaries) हैं। ये अंडे का उत्पादन करते हैं और महिला हार्मोन का स्राव करते हैं।
In simple words: महिलाओं के मुख्य प्रजनन अंग अण्डाशय होते हैं।

🎯 Exam Tip: Primary sexual organs are those that produce gametes (eggs or sperm) and sex hormones.

 

Question 2. (ब) मादा जनन तंत्र का नामांकित चित्र बनाइए।
Answer: यहाँ मादा जनन तंत्र का एक नामांकित चित्र अपेक्षित है। इसमें अण्डाशय, फेलोपियन ट्यूब, गर्भाशय और योनि जैसे अंग शामिल होते हैं, जो प्रजनन के लिए मिलकर काम करते हैं। (नोट: विस्तृत anatomical SVG चित्र उपलब्ध नहीं है।)
In simple words: मादा जनन तंत्र का चित्र बनाएँ और उसके सभी हिस्सों के नाम लिखें।

🎯 Exam Tip: When drawing, make sure to accurately represent and label the ovaries, fallopian tubes (oviducts), uterus, cervix, and vagina.

 

Question 3. (i) पाचन तंत्र का नामांकित चित्र बनाइये।
(ii) जठररस में उपस्थित एंजाइम के नाम एवं उनके कार्य लिखिए ।
(iii) भोजन का सर्वाधिक पाचन एवं अवशोषण, पाचनतंत्र के जिस भाग में होता है, उसका नाम लिखिए। (माध्य. शिक्षा बोर्ड, मॉडल पेपर, 2017-18)

Answer:
(i) मानव पाचन तंत्र का चित्र:
ग्रसनी ग्रसिका आमाशय यकृत पित्ताशय अग्न्याशय छोटी आँत ग्रहणी अग्रक्षुद्रांत्र क्षुद्रांत्र प्लीहा वृहदान्त्र अनुप्रस्थ वृहदान्त्र अवरोही वृहदान्त्र आरोही वृहदान्त्र अंधनाल सिग्माकार मलाशय परिशोषिका गुदा नाल गुदा चित्र – मानव पाचन तन्त्र
(ii) जठर रस में पेप्सिन और रेनिन एंजाइम होते हैं। पेप्सिन प्रोटीन को छोटे पेप्टाइड में बदलता है, जबकि रेनिन दूध प्रोटीन (कैसीन) को पैराकैसीन में बदलने का काम करता है। यह प्रारंभिक पाचन के लिए महत्वपूर्ण है।
(iii) भोजन का सबसे ज्यादा पाचन और अवशोषण छोटी आँत (Small Intestine) में होता है। यहाँ पर भोजन को पूरी तरह पचाया जाता है और पोषक तत्वों को खून में मिलाया जाता है।
In simple words: पाचन तंत्र भोजन को तोड़ने और शरीर द्वारा उपयोग करने में मदद करता है। जठर रस में पेप्सिन और रेनिन होते हैं जो प्रोटीन और दूध को पचाते हैं। छोटी आँत भोजन के पाचन और पोषक तत्वों को सोखने का मुख्य स्थान है।

🎯 Exam Tip: मानव पाचन तंत्र का चित्र बनाते समय सभी प्रमुख अंगों को सही जगह पर दर्शाएँ और उनके नाम ठीक से लिखें। यह आपके उत्तर को स्पष्ट और समझने में आसान बनाएगा।

 

Question 3. अथवा (i) उत्सर्जन तंत्र का नामांकित चित्र बनाइये।
(ii) मानव में मूत्र निर्माण की प्रक्रिया समझाइये।
(iii) त्वचा द्वारा उत्सर्जित होने वाले दो उत्सर्जी पदार्थों के नाम लिखिए। (माध्य. शिक्षा बोर्ड, मॉडल पेपर, 2017-18)

Answer:
(i) मानव उत्सर्जन तंत्र का चित्र:
वृक्क धमनी महाशिरा पृष्ठ महाधमनी मूत्रवाहिनी मूत्राशय मूत्राशयी अवरोधिनी मूत्रमार्ग चित्र – मानव उत्सर्जन तंत्र
(ii) मानव में मूत्र निर्माण (Urine formation) नेफ्रॉन (Nephron) का मुख्य काम मूत्र बनाना है। मूत्र बनने की प्रक्रिया तीन चरणों में होती है:
(a) छानना/परानियंदन (Ultrafiltration): खून ग्लोमेरुलस में आता है, जहाँ से पानी और छोटे कण छनकर बोमन संपुट में चले जाते हैं। बड़ी प्रोटीन नहीं छनती, इसलिए यह खून को साफ करने का पहला कदम है।
(b) चयनात्मक पुनः अवशोषण (Selective reabsorption): बोमन संपुट से छना हुआ द्रव वृक्क नलिका में जाता है। यहाँ शरीर के लिए ज़रूरी ग्लूकोस, विटामिन, हार्मोन और पानी जैसे पदार्थ वापस खून में सोख लिए जाते हैं। इससे शरीर महत्वपूर्ण चीजों को नहीं खोता।
(c) स्रवण (Secretion): नलिका में बचा हुआ अपशिष्ट पदार्थ और कुछ अन्य चीजें खून से वापस नलिका में डाल दी जाती हैं। यह बचा हुआ द्रव मूत्र कहलाता है, जो मूत्राशय में इकट्ठा होता है और फिर शरीर से बाहर निकाल दिया जाता है।
(iii) त्वचा द्वारा उत्सर्जित होने वाले दो पदार्थ हैं: पसीना (जिसमें पानी, नमक और थोड़ी मात्रा में यूरिया होती है) और सीबम (जिसमें हाइड्रोकार्बन और स्टेरोल जैसे तैलीय पदार्थ होते हैं)।
In simple words: मूत्र बनने में खून छनता है, ज़रूरी चीजें वापस सोख ली जाती हैं, और फिर बेकार चीजें मूत्र के रूप में बाहर निकाल दी जाती हैं। त्वचा पसीने और तेल के रूप में कुछ बेकार पदार्थ भी निकालती है।

🎯 Exam Tip: मूत्र निर्माण के तीनों चरणों को क्रम से याद रखें: छानना, अवशोषण, और स्रवण। प्रत्येक चरण का मुख्य काम क्या है, यह समझना जरूरी है।

 

Question 4. उत्सर्जन तंत्र किसे कहते हैं? मानव के उत्सर्जन तन्त्र का चित्र बनाकर वर्णन कीजिए।
Answer: उत्सर्जन तंत्र उन अंगों का समूह है जो शरीर से मेटाबॉलिक कचरे (जैसे नाइट्रोजन वाले पदार्थ) और अतिरिक्त लवणों को बाहर निकालते हैं। यह तंत्र शरीर को स्वस्थ रखने के लिए महत्वपूर्ण है।
मनुष्य में मुख्य रूप से चार उत्सर्जन अंग होते हैं:
(1) वृक्क (Kidney): मनुष्य में एक जोड़ी वृक्क होते हैं जो गहरे भूरे रंग के सेम के बीज जैसे होते हैं। ये पेट के पिछले हिस्से में रीढ़ की हड्डी के दोनों तरफ स्थित होते हैं। वृक्क का बाहरी हिस्सा उभरा हुआ और भीतरी हिस्सा दबा हुआ होता है, जहाँ एक गड्ढा होता है जिसे हाइलम कहते हैं। हाइलम से वृक्क धमनी अंदर आती है और वृक्क शिरा व मूत्रवाहिनी बाहर निकलती हैं। वृक्क खून को छानकर मूत्र बनाते हैं।
(2) मूत्र वाहिनियाँ (Ureters): ये नलिकाएँ वृक्क से निकलकर मूत्राशय तक जाती हैं। इनकी दीवारें मोटी होती हैं और इनमें संकुचन के कारण मूत्र मूत्राशय की ओर बढ़ता है।
(3) मूत्राशय (Urinary Bladder): यह एक थैलीनुमा अंग है जहाँ मूत्र इकट्ठा होता है।
(4) मूत्र मार्ग (Urethra): यह वह नलिका है जिससे मूत्र शरीर से बाहर निकलता है।
मानव उत्सर्जन तंत्र का चित्र:
अधिवृक्क ग्रंथि दायां वृक्क बायां वृक्क वृक्क शिरा वृक्क धमनी महाशिरा पृष्ठ महाधमनी मूत्रवाहिनी मूत्राशय मूत्राशयी अवरोधिनी मूत्रमार्ग चित्र – मानव उत्सर्जन तंत्र
In simple words: उत्सर्जन तंत्र शरीर से बेकार और अतिरिक्त चीजें बाहर निकालता है। इसमें गुर्दे, मूत्रवाहिनी, मूत्राशय और मूत्रमार्ग शामिल हैं। गुर्दे खून को छानकर पेशाब बनाते हैं।

🎯 Exam Tip: उत्सर्जन तंत्र के चित्र में वृक्क, मूत्रवाहिनी, मूत्राशय और मूत्रमार्ग को सही ढंग से दिखाएँ। इन सभी अंगों के कार्य भी संक्षेप में बताएँ।

 

Question 5. मानव पाचन तंत्र का नामांकित चित्र बनाकर आमाशय में होने वाली पाचन क्रिया का वर्णन कीजिए।
Answer:
मानव पाचन तंत्र का चित्र:
मुख गुहा जिह्वा लार ग्रन्थियाँ ग्रसिका ग्रसनी आमाशय प्लीहा यकृत पित्ताशय छोटी आँत ग्रहणी अग्रक्षुद्रांत्र क्षुद्रांत्र वृहदान्त्र अनुप्रस्थ वृहदान्त्र अवरोही वृहदान्त्र आरोही वृहदान्त्र अंधनाल सिग्माकार मलाशय परिशोषिका गुदा नाल चित्र – मानव पाचन तन्त्र
आमाशय में पाचन क्रिया:
जब भोजन आमाशय में पहुँचता है, तो जठर ग्रंथियाँ जठर रस छोड़ती हैं। इस रस में 97.99% पानी, श्लेष्म, हाइड्रोक्लोरिक अम्ल (HCl), पेप्सिन, जठर लाइपेज और रेनिन एंजाइम होते हैं। वयस्कों में रेनिन आमतौर पर नहीं होता है। HCl के कारण जठर रस अम्लीय हो जाता है।
HCl निष्क्रिय पेप्सिनोजन को सक्रिय पेप्सिन में बदलता है। यह भोजन के साथ आए जीवाणुओं और सूक्ष्म जीवों को मारता है। यह भोजन को खराब होने से बचाता है और भोजन के कठोर हिस्सों को घोलने में मदद करता है।
पेप्सिन एंजाइम प्रोटीन को प्रोटिओजेज और पेप्टोन्स में बदलता है।
प्रोटीन
\( \implies \) पेप्सिन
\( \implies \) प्रोटिओजेज \( + \) पेप्टोन्स
\( pH2 \)
जठर लाइपेज वसा का आंशिक पाचन करता है। जठर की मांसपेशियाँ भोजन को पीसती और मिलाती हैं, जिससे भोजन अर्ध-तरल अवस्था में बदल जाता है जिसे काइम कहते हैं।
In simple words: आमाशय भोजन को पचाना शुरू करता है। इसमें HCl बैक्टीरिया को मारता है और प्रोटीन को तोड़ने वाले एंजाइम होते हैं। वसा का भी थोड़ा पाचन होता है।

🎯 Exam Tip: आमाशय में HCl के दो मुख्य कार्य याद रखें: एंजाइम को सक्रिय करना और भोजन को कीटाणुओं से बचाना। पाचन क्रिया के हर चरण में कौन से एंजाइम काम करते हैं, यह समझना महत्वपूर्ण है।

 

Question 6. मानव के नेफ्रॉन का चित्र बनाकर वर्णन कीजिए।
Answer: नेफ्रॉन वृक्क की सबसे छोटी संरचनात्मक और कार्यात्मक इकाई है, जो मूत्र बनाने का काम करती है। प्रत्येक वृक्क में लाखों नेफ्रॉन होते हैं।
नेफ्रॉन की संरचना:
नेफ्रॉन के दो मुख्य भाग होते हैं:
1. बोमन संपुट (Bowman capsule): यह एक प्याले के आकार की संरचना है जिसमें ग्लोमेरुलस नामक रक्त नलिकाओं का गुच्छा होता है। बोमन संपुट और ग्लोमेरुलस मिलकर मैलपीगी कोश बनाते हैं, जो खून को छानने का पहला काम करता है।
2. वृक्क नलिका (Renal tubule): यह नलिका बोमन संपुट से शुरू होती है और तीन मुख्य भागों में बंटी होती है:
a. समीपस्थ कुण्डलित भाग (Proximal convoluted part - PCT): यहाँ से खून में ज़रूरी पदार्थ जैसे ग्लूकोस और विटामिन वापस सोख लिए जाते हैं।
b. हेनले का लूप (Henley's loop): यह पानी और लवणों के अवशोषण में मदद करता है।
c. दूरस्थ कुण्डलित भाग (Distal convoluted part - DCT): यहाँ कुछ और पदार्थों का अवशोषण और स्रावण होता है, ताकि मूत्र की सही संरचना बन सके।
दूरस्थ कुण्डलित भाग अंत में संग्रह नलिका में खुलता है, जहाँ से मूत्र मूत्राशय तक पहुँचता है। संग्रह नलिकाएँ नेफ्रॉन का हिस्सा नहीं होतीं, बल्कि मूत्र को आगे पहुँचाने का काम करती हैं।
मानव वृक्काणु (नेफ्रॉन) की रचना का चित्र:
समीपस्थ नलिका दूरस्थ नलिका ग्लोमेरुलस बोमेन सम्पुट संग्रह नलिका अवरोही भुजा आरोही भुजा हेनले पाश मूत्राशय को चित्र – मानव वृक्काणु (नेफ्रॉन) की रचना
In simple words: नेफ्रॉन गुर्दे की छोटी इकाई है जो खून को छानकर पेशाब बनाती है। इसमें एक गोल हिस्सा (बोमन संपुट) और एक लंबी नली (वृक्क नलिका) होती है जो बेकार चीजों को बाहर निकालने में मदद करती है।

🎯 Exam Tip: नेफ्रॉन के मुख्य भागों (बोमन संपुट, ग्लोमेरुलस, समीपस्थ, हेनले लूप, दूरस्थ नलिका) को याद रखें और प्रत्येक का मुख्य कार्य संक्षेप में बताएँ। चित्र में इन भागों को सही जगह पर दर्शाएँ।

 

Question 12. जनन तंत्र से क्या आशय है? नर जनन तंत्र के द्वितीयक लैंगिक अंगों का वर्णन कीजिए।
Answer: जनन तंत्र (Reproductive system) सभी जीवित प्राणियों में पाया जाने वाला एक बहुत महत्वपूर्ण तंत्र है, जिसके द्वारा एक जीव अपने जैसे दूसरे जीवों को जन्म देता है, जिससे प्रजाति आगे बढ़ती रहती है।
नर जनन तंत्र के द्वितीयक लैंगिक अंग:
(1) वृषणकोष (Scrotum): यह एक थैली होती है जिसमें वृषण शरीर के बाहर स्थित होते हैं। वृषणकोष शरीर के तापमान से 2-2.5°C कम तापमान बनाए रखता है, जो शुक्राणुओं के बनने के लिए बहुत ज़रूरी है। यह एक तापमान नियंत्रक का काम करता है।
(2) शुक्रवाहिनी (Vas difference): यह एक नली है जो शुक्राणुओं को वृषण से शुक्राशय तक ले जाती है। यह मूत्रनली के साथ मिलकर एक संयुक्त नली बनाती है, जिससे शुक्राणु और मूत्र दोनों एक ही मार्ग से जाते हैं।
(3) शुक्राशय (Seminal vesicles): यह थैली जैसी संरचना है जहाँ शुक्राणु जमा होते हैं। शुक्राशय एक तरल पदार्थ बनाता है जो वीर्य का हिस्सा होता है। यह तरल शुक्राणुओं को ऊर्जा और गति देता है।
(4) प्रोस्टेट ग्रंथि (Prostate gland): यह अखरोट के आकार की ग्रंथि है। यह एक तरल पदार्थ छोड़ती है जो शुक्राणुओं की गति में मदद करता है और वीर्य का बड़ा हिस्सा बनाता है। यह वीर्य को जमने से भी रोकती है।
(5) मूत्र मार्ग (Urethra): यह मूत्राशय से शुरू होकर शिश्न के सिरे तक जाता है। यह मूत्र और वीर्य दोनों के लिए एक ही रास्ता होता है।
(6) शिश्न (Penis): यह पुरुष का बाहरी मैथुन अंग है। यह लंबा, पतला और सीधा होने वाला होता है। यह मूत्र निकालने और वीर्य को मादा जननांग में पहुँचाने का काम करता है। इसका सिरा फूला हुआ और बहुत संवेदनशील होता है जिसे शिश्न मुंड कहते हैं।
In simple words: जनन तंत्र वह होता है जो नए बच्चे पैदा करने में मदद करता है। पुरुषों में, शुक्राणुकोष, शुक्राणु नलिकाएं, शुक्राशय, प्रोस्टेट ग्रंथि, मूत्रमार्ग और शिश्न मुख्य अंग होते हैं जो शुक्राणु बनाने और उन्हें सही जगह तक पहुँचाने का काम करते हैं।

🎯 Exam Tip: नर जनन तंत्र के प्रत्येक अंग के नाम और उनके मुख्य कार्यों को याद रखें, खासकर वृषणकोष के तापमान विनियमन और शिश्न के कार्यों पर ध्यान दें।

 

Question 13. मानव मस्तिष्क का नामांकित चित्र बनाइये तथा इसके विभिन्न भागों के कार्य का वर्णन कीजिए।
Answer:
मानव मस्तिष्क का चित्र:
मध्य मस्तिष्क हाइपोथैलेमस पीयूष ग्रन्थि पश्च मस्तिष्क पोंस मेड्यूला ऑब्लोंगेटा अनुमस्तिष्क मेरु रज्जु चित्र – मानव का मस्तिष्क
मस्तिष्क के विभिन्न भागों के कार्य:
(i) प्रमस्तिष्क गोलार्ध (Cerebral hemispheres): यह मस्तिष्क का सबसे विकसित भाग है, जो स्तनधारियों में पाया जाता है। यह चेतन संवेदनाओं, इच्छाशक्ति, सोचने, याद रखने, बोलने और सीखने का केंद्र होता है। यह ज्ञानेन्द्रियों से मिली जानकारी को प्रोसेस करता है और शरीर की ऐच्छिक गतिविधियों को नियंत्रित करता है।
(ii) डाइएनसिफैलॉन (Diencephelon): यह अग्र मस्तिष्क का एक हिस्सा है। इसमें थैलेमस और हाइपोथैलेमस होते हैं। थैलेमस संवेदी जानकारी को मस्तिष्क के दूसरे हिस्सों तक पहुँचाता है, जबकि हाइपोथैलेमस भूख, प्यास, नींद, तापमान और भावनाओं को नियंत्रित करता है। यह हार्मोन भी बनाता है जो पीयूष ग्रंथि को नियंत्रित करते हैं।
(iii) मध्य मस्तिष्क (Mid Brain): यह मस्तिष्क का छोटा, संकुचित भाग है जिसमें चार पिंड होते हैं। ऊपर के दो पिंड आँखों से जुड़ी जानकारी को प्रोसेस करते हैं और नीचे के दो पिंड सुनने से जुड़ी जानकारी को प्रोसेस करते हैं।
(iv) सेरिबैलम (Cerebellum): यह पश्च मस्तिष्क का हिस्सा है। यह शरीर की ऐच्छिक मांसपेशियों की गतिविधियों को नियंत्रित और संतुलित करता है। यह सुनिश्चित करता है कि हमारी गतिविधियाँ सहज और समन्वित हों।
(v) मेड्यूला ऑब्लोंगेटा (Medulla oblongata): यह मस्तिष्क का सबसे निचला हिस्सा है जो रीढ़ की हड्डी से जुड़ा होता है। यह हृदय की धड़कन, साँस लेने, रक्तचाप, पाचन और उल्टी जैसी अनैच्छिक क्रियाओं को नियंत्रित करता है।
In simple words: मानव मस्तिष्क सोचने, महसूस करने और शरीर को चलाने का मुख्य केंद्र है। इसके अलग-अलग हिस्से होते हैं जैसे प्रमस्तिष्क जो सोचने का काम करता है, सेरिबैलम जो शरीर को संतुलित रखता है, और मेड्यूला जो साँस लेने और दिल की धड़कन जैसी ज़रूरी क्रियाओं को नियंत्रित करता है।

🎯 Exam Tip: मस्तिष्क के मुख्य भागों (प्रमस्तिष्क, डाइएनसिफैलॉन, मध्य मस्तिष्क, सेरिबैलम, मेड्यूला) को याद रखें और प्रत्येक का मुख्य कार्य क्या है, इसे संक्षेप में बताएँ। चित्र में सही लेबलिंग पर ध्यान दें।

 

Question 14. मनुष्य में प्रजनन की कितनी अवस्थाएँ पाई जाती हैं ? विस्तार से समझाइए।
Answer: मनुष्य में प्रजनन की मुख्य रूप से चार अवस्थाएँ पाई जाती हैं:
1. युग्मक जनन (Gametogenesis): यह वह प्रक्रिया है जिसमें प्रजनन कोशिकाएँ (युग्मक) बनती हैं। पुरुषों में, वृषण में शुक्राणु बनते हैं (शुक्रजनन), और महिलाओं में अंडाशय में अंडाणु बनते हैं (अंडजनन)। ये युग्मक अगुणित (Haploid) होते हैं, मतलब उनमें गुणसूत्रों की आधी संख्या होती है।
2. निषेचन (Fertilization): इस अवस्था में पुरुष और महिला युग्मक (शुक्राणु और अंडाणु) आपस में मिलते हैं। पुरुषों द्वारा मैथुन क्रिया से शुक्राणु महिला के शरीर में छोड़े जाते हैं, जहाँ वे अंडाणु से मिलते हैं। यह क्रिया अक्सर अंडवाहिनी (फैलोपियन ट्यूब) में होती है और इसे आंतरिक निषेचन कहते हैं। निषेचन के बाद, एक द्विगुणित (Diploid) युग्मनज (Zygote) बनता है।
3. विदलन तथा भ्रूण का रोपण (Cleavage and Embryo implantation): निषेचन के बाद बना युग्मनज लगातार विभाजित होकर कोशिकाओं का एक गोला बनाता है जिसे कोरक (Blastula) कहते हैं। यह कोरक फिर गर्भाशय की अंदरूनी दीवार (एंडोमेट्रियम) से जुड़ जाता है। इस प्रक्रिया को भ्रूण का रोपण कहते हैं।
4. प्रसव (Accouchement): यह वह प्रक्रिया है जिसमें पूरी तरह से विकसित शिशु माँ के शरीर से बाहर आता है। भ्रूण का रोपण होने के बाद, गर्भ में शिशु का विकास होता है। जब शिशु पूरी तरह से विकसित हो जाता है, तो प्रसव क्रिया के द्वारा उसका जन्म होता है।
In simple words: मनुष्य में प्रजनन चार चरणों में होता है: पहले शुक्राणु और अंडाणु बनते हैं, फिर वे मिलते हैं (निषेचन), उसके बाद बच्चा गर्भाशय में जुड़ता है, और आखिर में शिशु का जन्म होता है (प्रसव)।

🎯 Exam Tip: प्रजनन की चारों अवस्थाओं को क्रम से याद रखें और प्रत्येक का मुख्य बिंदु क्या है, इसे स्पष्ट रूप से समझाएँ। यह एक चरणबद्ध प्रक्रिया है।

 

Question 15. अन्तःस्रावी ग्रन्थि किसे कहते हैं? किन्हीं दो अन्तःस्रावी ग्रन्थियों का वर्णन कीजिए।
Answer: अन्तःस्रावी ग्रंथियाँ (Endocrine glands) ऐसी ग्रंथियाँ होती हैं जिनमें कोई नलिका नहीं होती। ये अपने हार्मोन सीधे खून में छोड़ती हैं, जो शरीर के अलग-अलग हिस्सों तक पहुँचकर विभिन्न शारीरिक कार्यों को नियंत्रित करते हैं।
दो महत्वपूर्ण अन्तःस्रावी ग्रंथियाँ:
1. थायरॉइड ग्रंथि: यह ग्रंथि हमारी गर्दन में कंठ के दोनों तरफ 'H' के आकार में स्थित होती है। यह थायरॉक्सिन हार्मोन बनाती है, जिसमें आयोडीन होता है। थायरॉक्सिन हार्मोन शरीर की आधारी उपापचयी दर (BMR) और कोशिकाओं में ऑक्सीजन के उपयोग को नियंत्रित करता है। यह शरीर के तापमान को भी नियंत्रित करता है। यदि इस हार्मोन की कमी हो जाती है, तो खून में आयोडीन की मात्रा कम हो जाती है, जिससे गलगंड (Goitre) रोग हो सकता है।
2. अग्न्याशय ग्रंथि (Pancreas): अग्न्याशय एक मिश्रित ग्रंथि है, जिसका मतलब है कि यह अंतःस्रावी और बहिःस्रावी दोनों कार्य करती है। अंतःस्रावी भाग में लैंगरहैन्स के द्वीप (Islets of Langerhans) होते हैं, जिनमें अल्फा और बीटा कोशिकाएँ होती हैं। बीटा कोशिकाएँ इंसुलिन हार्मोन बनाती हैं और अल्फा कोशिकाएँ ग्लूकेगोन हार्मोन बनाती हैं। इंसुलिन खून में ग्लूकोस के स्तर को कम करता है, जबकि ग्लूकेगोन इसे बढ़ाता है। जब इंसुलिन की कमी होती है, तो खून में शुगर का स्तर बढ़ जाता है, जिससे मधुमेह (Diabetes) रोग हो जाता है।
In simple words: अंतःस्रावी ग्रंथियाँ वो होती हैं जो हार्मोन सीधे खून में छोड़ती हैं। थायरॉइड ग्रंथि शरीर की ऊर्जा और तापमान को नियंत्रित करती है, जबकि अग्न्याशय (इंसुलिन के ज़रिए) खून में शुगर को नियंत्रित करता है।

🎯 Exam Tip: अंतःस्रावी ग्रंथियों की परिभाषा को याद रखें और प्रत्येक ग्रंथि द्वारा स्रावित हार्मोन, उसके कार्य और उससे जुड़ी किसी भी बीमारी का उल्लेख करें।

 

Question 16. मनुष्य के मस्तिष्क का नामांकित चित्र बनाइए एवं इसके अग्र मस्तिष्क व मध्य मस्तिष्क की संरचना का वर्णन कीजिए।
Answer: मानव मस्तिष्क एक महत्वपूर्ण अंग है जो शरीर के सभी कार्यों को नियंत्रित करता है।
अग्र मस्तिष्क की संरचना: अग्र मस्तिष्क प्रमस्तिष्क, थैलेमस और हाइपोथैलेमस से मिलकर बनता है। प्रमस्तिष्क पूरे मस्तिष्क का 80 से 85 प्रतिशत हिस्सा बनाता है। यह हमारी इच्छाशक्ति, ज्ञान, याददाश्त, बोलने और सोचने का केंद्र है। यह एक गहरी दरार से दो भागों में बंटा होता है, जिन्हें दायाँ और बायाँ प्रमस्तिष्क गोलार्ध कहते हैं। ये दोनों गोलार्ध कार्पस कैलोसम नामक एक पट्टी से जुड़े होते हैं। प्रत्येक गोलार्ध के बाहरी हिस्से में धूसर द्रव्य (कॉर्टेक्स) होता है और अंदरूनी हिस्से में श्वेत द्रव्य (मेडुला) होता है। प्रमस्तिष्क चारों ओर से थैलेमस से घिरा रहता है, जो संवेदी और प्रेरक संकेतों का मुख्य केंद्र है। अग्र मस्तिष्क के डाइएनसीफेलॉन भाग में हाइपोथैलेमस होता है। यह हमारी भूख, प्यास, नींद, शरीर का तापमान, और भावनाओं को नियंत्रित करता है। यह हार्मोन बनाने के लिए भी जिम्मेदार होता है जो पिट्यूटरी ग्रंथि को नियंत्रित करते हैं।
मध्य मस्तिष्क की संरचना: मध्य मस्तिष्क एक छोटा और संकुचित हिस्सा है। इसमें चार गोल पिंड होते हैं, जिन्हें कॉर्पोरा क्वाड्रीजेमिना कहते हैं। ऊपर के दो पिंड आँखों से संबंधित होते हैं, और नीचे के दो पिंड सुनने से संबंधित होते हैं। यह हाइपोथैलेमस और पश्च मस्तिष्क के बीच स्थित होता है। मध्य मस्तिष्क की सही कार्यप्रणाली हमारी इंद्रियों को ठीक से काम करने में मदद करती है।
In simple words: मस्तिष्क के मुख्य भाग अग्र मस्तिष्क और मध्य मस्तिष्क हैं। अग्र मस्तिष्क सोचने और भावनाओं को नियंत्रित करता है, जबकि मध्य मस्तिष्क देखने और सुनने के कार्यों को संभालता है। दोनों मिलकर हमारे शरीर के जटिल कार्यों को पूरा करते हैं।

🎯 Exam Tip: मस्तिष्क के हर भाग के कार्य को उदाहरण के साथ याद रखें, खासकर प्रमस्तिष्क, थैलेमस और हाइपोथैलेमस के कार्यों को। चित्र बनाते समय लेबलिंग स्पष्ट और सही होनी चाहिए।

 

Question 17. निम्न पर टिप्पणी लिखिए
(1) मेरुरज्जु
(2) पश्च मस्तिष्क
(3) मानव श्वसन तंत्र में श्वास नली का विभाजन का केवल चित्र।।
Answer:
(1) मेरुरज्जु (Spinal Cord): मेरुरज्जु केंद्रीय तंत्रिका तंत्र का एक महत्वपूर्ण हिस्सा है। यह रीढ़ की हड्डी के अंदर सुरक्षित रहता है और इसकी लंबाई लगभग 45 सेमी होती है। यह एक खोखली बेलनाकार संरचना है, जिसमें एक संकरी केंद्रीय नली (न्यूरोसील) होती है। मेरुरज्जु के अंदर धूसर द्रव्य (ग्रे मैटर) होता है, जबकि बाहर श्वेत द्रव्य (व्हाइट मैटर) होता है। धूसर द्रव्य से अधर श्रृंग और पृष्ठ श्रृंग बनते हैं। पृष्ठ मूल में संवेदी तंत्रिकाएँ होती हैं और अधर मूल में चालक तंत्रिकाएँ पाई जाती हैं। मेरुरज्जु मुख्य रूप से प्रतिवर्ती क्रियाओं को नियंत्रित करता है और मस्तिष्क तक संदेशों को ले जाने का रास्ता भी प्रदान करता है। इसकी सुरक्षा हमारी रीढ़ की हड्डी करती है।
In simple words: मेरुरज्जु हमारी रीढ़ की हड्डी के अंदर होता है। यह शरीर की प्रतिवर्ती क्रियाओं को नियंत्रित करता है और मस्तिष्क को संदेश भेजने-पाने में मदद करता है।

🎯 Exam Tip: मेरुरज्जु के मुख्य कार्य, जैसे प्रतिवर्ती क्रियाओं का संचालन और मस्तिष्क से संबंध, याद रखना जरूरी है। इसके दोनों द्रव्य (धूसर और श्वेत) की स्थिति भी महत्वपूर्ण है।

(2) पश्च मस्तिष्क (Hind Brain): पश्च मस्तिष्क तीन मुख्य भागों से मिलकर बनता है: अनुमस्तिष्क (Cerebellum), पोंस (Pons), और मेड्यूला ऑब्लोंगेटा (Medulla Oblongata)।
अनुमस्तिष्क मस्तिष्क का दूसरा सबसे बड़ा भाग है। यह शरीर की ऐच्छिक गतिविधियों, जैसे मांसपेशियों के समन्वय और संतुलन को नियंत्रित करता है। यह हमें सही ढंग से चलने और अपनी गतिविधियों को सुचारु रूप से करने में मदद करता है। पोंस मस्तिष्क तने का मध्य भाग होता है और श्वसन को नियंत्रित करने में मुख्य भूमिका निभाता है। यह अनुमस्तिष्क के दोनों हिस्सों को जोड़ता है। मेड्यूला ऑब्लोंगेटा मस्तिष्क का सबसे निचला हिस्सा है, जो बेलनाकार होता है और मेरुरज्जु में मिल जाता है। यह हृदय की धड़कन, रक्तचाप, श्वसन दर, पाचन और निगलने जैसी सभी अनैच्छिक क्रियाओं को नियंत्रित करता है। यह मस्तिष्क और शरीर के बाकी हिस्सों के बीच संदेशों का मुख्य मार्ग भी है।
In simple words: पश्च मस्तिष्क में अनुमस्तिष्क (गति और संतुलन), पोंस (श्वसन), और मेड्यूला (अनैच्छिक क्रियाएँ जैसे दिल की धड़कन) शामिल हैं। यह हमारे शरीर के कई महत्वपूर्ण अनैच्छिक कार्यों को नियंत्रित करता है।

🎯 Exam Tip: पश्च मस्तिष्क के प्रत्येक भाग (अनुमस्तिष्क, पोंस, मेड्यूला) के विशिष्ट कार्यों को अलग-अलग याद रखें। अनैच्छिक क्रियाओं के नियंत्रण में मेड्यूला की भूमिका पर विशेष ध्यान दें।

(3) मानव श्वसन तंत्र में श्वास नली का विभाजन:
मानव श्वसन तंत्र में श्वास नली (ट्रेकिया) नीचे आकर दो मुख्य शाखाओं में बँट जाती है, जिन्हें श्वसनी (ब्रोन्कस) कहते हैं। ये श्वसनी फिर फेफड़ों के अंदर पतली-पतली शाखाओं में बँट जाती हैं, जिन्हें श्वसनिकाएँ (ब्रोन्किओल) कहते हैं। इन श्वसनिकाओं के सिरों पर छोटी-छोटी थैलीनुमा संरचनाएँ होती हैं, जिन्हें कूपिकाएँ (एल्वियोलाई) कहते हैं, जहाँ गैसों का वास्तविक आदान-प्रदान होता है। यह विभाजन एक पेड़ की शाखाओं जैसा दिखता है, जिससे हवा पूरे फेफड़ों में पहुँच पाती है। श्वास नली के इस विभाजन से साँस लेने और छोड़ने की प्रक्रिया आसान हो जाती है, जिससे शरीर को पर्याप्त ऑक्सीजन मिलती है।
In simple words: हमारी साँस की नली नीचे आकर दो बड़ी नली (श्वसनी) बनती है, जो फेफड़ों में जाती हैं। ये श्वसनी फिर और छोटी नलियों (श्वसनिका) में बँट जाती हैं, जिनके अंत में हवा की छोटी-छोटी थैलियाँ (कूपिकाएँ) होती हैं जहाँ ऑक्सीजन और कार्बन डाइऑक्साइड का बदलना होता है।

🎯 Exam Tip: श्वसन तंत्र के मुख्य भागों और श्वास नली के विभाजन को क्रम से याद रखें: श्वासनली → श्वसनी → श्वसनिका → कूपिकाएँ। गैस विनिमय कूपिकाओं में होता है।

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