RBSE Solutions Class 10 Science Chapter 19 जैवविविधता एवं इसका संरक्षण

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Class 10 Science Chapter 19 जैवविविधता एवं इसका संरक्षण RBSE Solutions PDF

बहुचयनात्मक प्रश्न

 

Question 1. किसी पारिस्थितिकीय तंत्र के संतुलन की मापक इकाई है
(क) प्रजाति
(ख) जैवविविधता
(ग) जन्तु विविधता
(घ) उक्त में से कोई नहीं
Answer: (ख) जैवविविधता
In simple words: किसी भी पारिस्थितिक तंत्र का संतुलन उसकी जैवविविधता से मापा जाता है। जैवविविधता यह सुनिश्चित करती है कि पारिस्थितिक तंत्र स्थिर और स्वस्थ रहे।

🎯 Exam Tip: पारिस्थितिक तंत्र के संतुलन को समझने के लिए, हमेशा विभिन्न जीवन रूपों की विविधता पर विचार करें जो उसमें मौजूद हैं, क्योंकि यह स्थिरता के लिए महत्वपूर्ण है।

 

Question 2. विश्व में कृषि सहयोग के हिसाब से भारत कौन से स्थान पर है?
(क) आठवें
(ख) नौवें
(ग) सातवें
(घ) दसवें
Answer: (ग) सातवें
In simple words: कृषि सहयोग के मामले में, भारत दुनिया में सातवें स्थान पर आता है। भारत वैश्विक खाद्य सुरक्षा में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है।

🎯 Exam Tip: भारत की स्थिति से संबंधित विशिष्ट वैश्विक रैंकिंग को याद रखें, क्योंकि वे अक्सर पूछे जाते हैं।

 

Question 3. विश्व में कुल कितने जैव विविधता तप्त स्थल (Biodiversity hotspot) हैं?
(क) 25
(ख) 20
(ग) 34
(घ) 33
Answer: (ग) 34
In simple words: दुनिया भर में कुल 34 जैवविविधता तप्त स्थल हैं। ये क्षेत्र विभिन्न प्रकार के पौधों और जानवरों की रक्षा के लिए बहुत महत्वपूर्ण हैं।

🎯 Exam Tip: विश्व स्तर पर मान्यता प्राप्त जैवविविधता तप्त स्थलों की वर्तमान संख्या जानना महत्वपूर्ण है।

 

Question 4. भारत का राष्ट्रीय जलीय जीव कौन सा है?
(क) गांगेय डॉल्फिन
(ख) व्हेल
(ग) स्टार फिश
(घ) उपरोक्त में से कोई नहीं
Answer: (क) गांगेय डॉल्फिन
In simple words: भारत का राष्ट्रीय जलीय जीव गांगेय डॉल्फिन है। ये डॉल्फिन गंगा नदी और उसकी सहायक नदियों में रहती हैं।

🎯 Exam Tip: भारत के राष्ट्रीय प्रतीकों, जिसमें राष्ट्रीय जलीय जीव भी शामिल है, के बारे में जानकारी रखें।

 

Question 6. अंतर्राष्ट्रीय जैवविविधता दिवस कब मनाया जाता है?
(क) 21 मई
(ख) 23 मई
(ग) 22 मई
(घ) 24 मई
Answer: (ग) 22 मई
In simple words: अंतर्राष्ट्रीय जैवविविधता दिवस 22 मई को मनाया जाता है। यह दिन जैवविविधता से जुड़े मुद्दों के बारे में जागरूकता बढ़ाता है।

🎯 Exam Tip: पर्यावरण संरक्षण से संबंधित महत्वपूर्ण तिथियाँ अक्सर पूछी जाती हैं।

 

Question 7. अंतर्राष्ट्रीय जैवविविधता वर्ष कब मनाया गया?
(क) 2012
(ख) 2010
(ग) 2011
(घ) 2009
Answer: (ख) 2010
In simple words: अंतर्राष्ट्रीय जैवविविधता वर्ष 2010 में मनाया गया था। इस वर्ष ने प्रकृति की विविधता की रक्षा के बारे में लोगों को अधिक जानने में मदद की।

🎯 Exam Tip: जैवविविधता से संबंधित 'दिवस' और 'वर्ष' के बीच अंतर करें, क्योंकि वे अलग-अलग हैं।

 

Question 8. आज लगभग जन्तु प्रजातियाँ विलुप्त होने के कगार पर हैं?
(क) 8000
(ख) 2000
(ग) 2800
(घ) 4000
Answer: (घ) 4000
In simple words: वर्तमान में लगभग 4000 पशु प्रजातियाँ विलुप्त होने की कगार पर हैं। मानवीय गतिविधियाँ इस नुकसान का एक बड़ा कारण हैं।

🎯 Exam Tip: प्रजातियों के विलुप्त होने की दर को समझना संरक्षण प्रयासों की तात्कालिकता को उजागर करता है।

 

Question 9. निम्न में से कौन-सा जीव भ्रामक धारणाओं के कारण ग्रामीणों के द्वारा मारा जाता रहा है?
(क) गोयरा।
(ख) गोडावण
(ग) मेंढक
(घ) डोडो
Answer: (क) गोयरा
In simple words: गलत धारणाओं के कारण ग्रामीण गोयरा (मॉनिटर छिपकली) को मारते रहे हैं। कुछ का मानना है कि इसकी साँस जहरीली होती है।

🎯 Exam Tip: सामाजिक विश्वास और वन्यजीवों पर उनके प्रभाव संरक्षण चुनौतियों को समझने के लिए महत्वपूर्ण विषय हैं।

 

Question 10. 1992 में पृथ्वी सम्मेलन कहाँ हुआ था?
(घ) रियो-डि-जिनिरियो
Answer: (घ) रियो-डि-जिनिरियो
In simple words: 1992 में पृथ्वी शिखर सम्मेलन रियो-डि-जिनिरियो में हुआ था। यह महत्वपूर्ण सम्मेलन पर्यावरण संरक्षण और सतत विकास पर केंद्रित था।

🎯 Exam Tip: पृथ्वी शिखर सम्मेलन जैसे प्रमुख पर्यावरणीय सम्मेलनों का स्थान जानना पर्यावरणीय अध्ययन के लिए महत्वपूर्ण है।

 

अतिलघूत्तरात्मक प्रश्न

 

Question 11. जैवविविधता के तीन स्तर लिखिए।
Answer: जैवविविधता के तीन स्तर निम्नलिखित हैं:
1. **प्रजाति विविधता:** यह किसी विशिष्ट क्षेत्र में विभिन्न प्रजातियों की कुल संख्या को दर्शाती है। यदि किसी क्षेत्र में पौधों और जानवरों की कई अलग-अलग प्रकार की प्रजातियाँ हैं, तो उसकी प्रजाति विविधता अधिक होती है। 2. **आनुवंशिक विविधता:** यह एक ही प्रजाति के सदस्यों के बीच या एक प्रजाति की विभिन्न आबादी के भीतर जीनों में भिन्नता है। उच्च आनुवंशिक विविधता एक प्रजाति को परिवर्तनों के अनुकूल होने में मदद करती है। 3. **पारिस्थितिक तंत्र विविधता:** इसमें किसी क्षेत्र में मौजूद विभिन्न पारिस्थितिक तंत्रों, जैसे वन, घास के मैदान, नदियाँ और पहाड़ की विविधता शामिल है। प्रत्येक पारिस्थितिक तंत्र में अपने स्वयं के अनूठे जीव और निर्जीव घटक होते हैं।
In simple words: जैवविविधता के तीन भाग होते हैं: कितने अलग-अलग तरह के जीव हैं (प्रजाति), एक ही तरह के जीवों के अंदर कितनी भिन्नता है (आनुवंशिक), और वे सभी अलग-अलग जगहें जहाँ वे रहते हैं (पारिस्थितिक तंत्र)।

🎯 Exam Tip: जैवविविधता के प्रत्येक स्तर को स्पष्ट रूप से परिभाषित करें और पूरे अंक प्राप्त करने के लिए संक्षिप्त उदाहरण दें।

 

Question 12. वैज्ञानिक पृथ्वी पर पाए जाने वाली कितनी प्रतिशत प्रजातियाँ पहचान पाए हैं?
Answer: वैज्ञानिकों ने पृथ्वी पर 1.7 से 2 मिलियन प्रजातियों की पहचान की है। नई प्रजातियों की नियमित खोज के कारण यह संख्या अभी भी बढ़ रही है।
In simple words: वैज्ञानिकों ने पृथ्वी पर लगभग 1.7 से 2 मिलियन प्रकार के जीवों को ढूंढकर उनका नामकरण किया है।

🎯 Exam Tip: एक संख्या के बजाय सीमा (1.7 से 2 मिलियन) का उल्लेख करना अधिक सटीक है।

 

Question 13. जैव विविधता तप्त स्थल (Biodiversity hotspot) क्या होते हैं ?
Answer: जैवविविधता तप्त स्थल पृथ्वी के ऐसे क्षेत्र हैं जहाँ पौधों और जानवरों की विविध जीवन-प्रजातियों की बहुत अधिक सांद्रता होती है, जिनमें से कई स्थानिक (कहीं और नहीं पाई जातीं) होती हैं। ये क्षेत्र मानवीय गतिविधियों से गंभीर रूप से खतरे में हैं, इसलिए इनका संरक्षण बहुत महत्वपूर्ण है।
In simple words: जैवविविधता तप्त स्थल वे खास जगहें हैं जहाँ बहुत सारे अलग-अलग प्रकार के पौधे और जानवर होते हैं, लेकिन वे खतरे में भी हैं।

🎯 Exam Tip: जैवविविधता तप्त स्थलों को समझाते समय 'उच्च जैवविविधता' और 'मानवीय गतिविधियों से खतरा' दोनों को हमेशा परिभाषित करें।

 

Question 15. भारत के जैव विविधता तप्त स्थल (Biodiversity hotspot) के नाम लिखो।
Answer: भारत के जैवविविधता तप्त स्थल निम्नलिखित हैं:
1. **पूर्वी हिमालय:** इस क्षेत्र में असम, अरुणाचल प्रदेश, सिक्किम और पश्चिम बंगाल के कुछ हिस्से शामिल हैं, जो अपनी समृद्ध वनस्पति और जीव-जन्तुओं के लिए जाने जाते हैं। 2. **पश्चिमी घाट:** यह पश्चिमी तट के साथ एक पर्वत श्रृंखला है, जो अपने अद्वितीय पौधों और जानवरों की प्रजातियों के लिए प्रसिद्ध है, जिनमें से कई स्थानिक हैं। 3. **इंडो-बर्मा जैव विविधता तप्त स्थल:** इस क्षेत्र में पूर्वोत्तर भारत और दक्षिणपूर्व एशियाई देशों के कुछ हिस्से शामिल हैं। यह विविध पारिस्थितिक तंत्रों में समृद्ध है।
In simple words: भारत में तीन मुख्य जैवविविधता तप्त स्थल हैं: पूर्वी हिमालय, पश्चिमी घाट और इंडो-बर्मा क्षेत्र।

🎯 Exam Tip: विशिष्ट तप्त स्थलों का नामकरण करना और संक्षेप में यह बताना कि वे क्यों महत्वपूर्ण हैं, अच्छे अंक प्राप्त करने में मदद करेगा।

 

Question 16. दो स्थानबद्ध प्रजातियों के नाम लिखो।
Answer: दो स्थानिक प्रजातियों के उदाहरण हैं:
1. **लेमूर:** ये प्राइमेट मुख्य रूप से केवल मेडागास्कर में पाए जाते हैं। 2. **डोडो पक्षी:** यह उड़ने में असमर्थ पक्षी मॉरीशस द्वीप का स्थानिक था, लेकिन अब विलुप्त हो चुका है।
In simple words: दो तरह के जानवर जो केवल एक जगह पर पाए जाते हैं, वे हैं लेमूर और डोडो पक्षी।

🎯 Exam Tip: उदाहरण पूछे जाने पर, समझ प्रदर्शित करने के लिए प्रसिद्ध उदाहरण प्रदान करने का प्रयास करें।

 

Question 17. दो संकटग्रस्त प्रजातियों के नाम लिखो।
Answer: दो संकटग्रस्त प्रजातियाँ हैं:
1. **चीता:** यह तेज़ ज़मीनी जानवर जंगली में विलुप्त होने के उच्च जोखिम का सामना कर रहा है। 2. **बघेरा (बाघ):** बाघ जैसे बड़े जंगली बिल्लियाँ आवास के नुकसान और शिकार के कारण संकटग्रस्त हैं।
In simple words: दो जानवर जो विलुप्त होने के खतरे में हैं, वे हैं चीता और बाघ।

🎯 Exam Tip: स्थानिक (केवल एक स्थान पर पाया जाने वाला) और संकटग्रस्त (विलुप्त होने के जोखिम पर) के बीच अंतर करना महत्वपूर्ण है।

 

Question 18. भारत का विश्व में जैव विविधता स्तर पर कौनसा स्थान है?
Answer: जैवविविधता के मामले में, भारत दुनिया के 17 मेगा-विविध देशों में से एक है। ये देश मिलकर पृथ्वी की प्रजातियों का एक बड़ा प्रतिशत रखते हैं।
In simple words: भारत दुनिया के 17 उन देशों में से एक है जहाँ बहुत अधिक जैवविविधता है।

🎯 Exam Tip: जैवविविधता में भारत की वैश्विक स्थिति को जानना इसके पारिस्थितिक महत्व को दर्शाता है।

 

लघूत्तरात्मक प्रश्न

 

Question 19. जैवविविधता का अर्थ समझाइये।
Answer: जैवविविधता पृथ्वी पर जीवन की विविधता को सभी स्तरों पर संदर्भित करती है, जिसमें प्रजातियों के भीतर विविधता (आनुवंशिक विविधता), प्रजातियों के बीच (प्रजाति विविधता), और पारिस्थितिक तंत्रों की विविधता (पारिस्थितिक तंत्र विविधता) शामिल है। यह हमारे ग्रह के स्वास्थ्य के लिए आवश्यक है।
In simple words: जैवविविधता का मतलब पृथ्वी पर जीवन के सभी अलग-अलग प्रकारों से है, जिसमें छोटे कीटाणुओं से लेकर बड़े जानवर तक और वे सभी अलग-अलग जगहें जहाँ वे रहते हैं, शामिल हैं।

🎯 Exam Tip: जैवविविधता की एक व्यापक परिभाषा में हमेशा आनुवंशिक, प्रजाति और पारिस्थितिक तंत्र विविधता शामिल होनी चाहिए।

 

Question 20. पूर्वी हिमालय बायोडाइवर्सिटी हॉटस्पॉट में पाए जाने वाली जैव विविधता पर लघु लेख लिखिए।
Answer: पूर्वी हिमालय जैवविविधता तप्त स्थल में असम, अरुणाचल प्रदेश, सिक्किम और पश्चिम बंगाल जैसे क्षेत्र शामिल हैं। यह क्षेत्र जैवविविधता से अत्यंत समृद्ध है। यहाँ लगभग 1000 पौधों की प्रजातियाँ पाई जाती हैं, जिनमें से 3160 स्थानिक हैं। जानवरों में लगभग 300 स्तनपायी प्रजातियाँ हैं, जिनमें से 12 स्थानिक हैं, और 997 पक्षी प्रजातियाँ हैं। प्रमुख जानवरों में हिमालयन तहर, सुनहरा लंगूर, हुलोक गिब्बन, पिग्मी हॉग, उड़न गिलहरी, हिम तेंदुआ, ताकिन और गांगेय डॉल्फिन शामिल हैं। गांगेय डॉल्फिन को 2002 में भारत का राष्ट्रीय जलीय जीव घोषित किया गया था।
In simple words: पूर्वी हिमालय भारत का एक खास क्षेत्र है जहाँ बहुत सारे अलग-अलग पौधे और जानवर पाए जाते हैं, जिनमें से कई केवल वहीं मिलते हैं। यहाँ कई प्रकार के पौधे, स्तनधारी और पक्षी हैं, जैसे गोल्डन लंगूर और हिम तेंदुआ।

🎯 Exam Tip: एक विशिष्ट तप्त स्थल का वर्णन करते समय, उसके भौगोलिक विस्तार, प्रमुख प्रजातियों और उल्लेखनीय विशेषताओं को शामिल करें।

 

Question 21. इंडो-बर्मा बायोडाइवर्सिटी हॉटस्पॉट में कौन-कौन से देश सम्मिलित हैं?
Answer: इंडो-बर्मा जैवविविधता तप्त स्थल में उष्णकटिबंधीय पूर्वी एशिया के कई देश शामिल हैं, जैसे चीन, भारत, म्यांमार, वियतनाम, थाईलैंड, कंबोडिया और मलेशिया। यह क्षेत्र अपनी विशाल श्रेणी के पौधों और जानवरों की प्रजातियों के लिए जाना जाता है।
In simple words: इंडो-बर्मा जैवविविधता तप्त स्थल में चीन, भारत, म्यांमार, वियतनाम, थाईलैंड, कंबोडिया और मलेशिया के कुछ हिस्से शामिल हैं।

🎯 Exam Tip: देशों को सही ढंग से सूचीबद्ध करना महत्वपूर्ण है, क्योंकि यह तप्त स्थल के भौगोलिक विस्तार के ज्ञान को दर्शाता है।

 

Question 22. विदेशी प्रजातियों के आक्रमण का जैव-विविधता पर क्या प्रभाव होता है?
Answer: विदेशी (आक्रामक) प्रजातियों का आक्रमण स्थानीय जैवविविधता को गंभीर रूप से नुकसान पहुँचाता है और पूरे पारिस्थितिक तंत्र को बाधित कर सकता है। जब गैर-देशी प्रजातियों को पेश किया जाता है, तो वे अक्सर स्थानीय प्रजातियों को प्रतियोगिता में हरा देती हैं या उनका शिकार करती हैं, जिससे उनकी संख्या में कमी या विलुप्तता होती है। उदाहरण के लिए, 1807 में अंग्रेजों द्वारा सजावटी उद्देश्यों के लिए लाई गई लैंटाना पूरे उपमहाद्वीप में फैल गई, जिससे स्थानीय पौधों के विकास में बाधा आई। इसी तरह, ब्राजील से लाई गई जलकुंभी ने कई भारतीय जल निकायों पर कब्जा कर लिया है, जो सूर्य के प्रकाश को रोकती है और अन्य जलीय जीवन के लिए ऑक्सीजन कम करती है। एक और उदाहरण गाजर घास (पार्थेनियम) है, जो 1950 के दशक में आयातित गेहूं के साथ भारत आई थी; यह एक खतरनाक खरपतवार है जो स्थानीय पौधों को नुकसान पहुँचाता है और मनुष्यों में एलर्जी का कारण बन सकता है। ये आक्रामक प्रजातियाँ स्थानीय जैवविविधता के लिए एक गंभीर खतरा पैदा करती हैं।
In simple words: जब नए, विदेशी पौधे या जानवर किसी क्षेत्र में आते हैं, तो वे स्थानीय पौधों और जानवरों को नुकसान पहुँचा सकते हैं। वे उनके स्थान, भोजन को छीन सकते हैं या उन्हें मार भी सकते हैं, जिससे पूरे पारिस्थितिक तंत्र के लिए समस्याएँ पैदा हो सकती हैं। लैंटाना, जलकुंभी और गाजर घास इसके कुछ उदाहरण हैं।

🎯 Exam Tip: आक्रामक प्रजातियों के विशिष्ट उदाहरण प्रदान करें और अवधारणा को स्पष्ट रूप से समझाने के लिए उनके नकारात्मक प्रभावों की व्याख्या करें।

 

Question 24. जैवविविधता संरक्षण हेतु राष्ट्रीय स्तर पर हुए प्रयासों को लिखिये।।
Answer: राष्ट्रीय स्तर पर, भारत ने जैवविविधता संरक्षण के लिए कई प्रयास किए हैं। जैवविविधता पर कन्वेंशन (CBD) के प्रति अपनी प्रतिबद्धता के अनुरूप, केंद्र सरकार ने 2002 में जैवविविधता अधिनियम लागू किया। इसके तीन मुख्य उद्देश्य हैं:
1. जैवविविधता का संरक्षण करना। 2. जैवविविधता संसाधनों का स्थायी उपयोग सुनिश्चित करना। 3. जैविक संसाधनों के उपयोग से होने वाले लाभों को समान रूप से साझा करना, ताकि वे व्यापक आबादी तक पहुँच सकें। इन लक्ष्यों को प्राप्त करने के लिए, 2002 के जैवविविधता अधिनियम ने एक त्रिस्तरीय संरचना स्थापित की: राष्ट्रीय स्तर पर राष्ट्रीय जैवविविधता प्राधिकरण, राज्यों में राज्य जैवविविधता बोर्ड और स्थानीय स्तर पर जैवविविधता प्रबंधन समितियाँ। इसके अतिरिक्त, पर्यावरण, वन, जल, वायु और जैवविविधता कानूनों को एक छत के नीचे लाने के उद्देश्य से, 2 जून 2010 को राष्ट्रीय हरित अधिकरण की स्थापना भोपाल में मुख्यालय के साथ की गई। यह अधिकरण पर्यावरण से संबंधित विवादों को तेजी से सुलझाने में मदद करता है।
In simple words: भारत ने प्रकृति की विविधता की रक्षा, बुद्धिमानी से उपयोग करने और इसके लाभों को समान रूप से साझा करने के लिए 2002 में जैवविविधता अधिनियम पारित किया। उन्होंने राष्ट्रीय, राज्य और स्थानीय स्तर पर समूह बनाए। पर्यावरण से जुड़े मामलों को जल्दी सुलझाने के लिए 2010 में राष्ट्रीय हरित अधिकरण नामक एक विशेष अदालत भी बनाई गई थी।

🎯 Exam Tip: जैवविविधता अधिनियम (2002) और राष्ट्रीय हरित अधिकरण (2010) दोनों का उनके प्रमुख उद्देश्यों के साथ उल्लेख करना एक व्यापक समझ को दर्शाता है।

 

Question 25. जैवविविधता संरक्षण के प्रकार लिखिए।
Answer: जैवविविधता संरक्षण का उद्देश्य जीनों, प्रजातियों, आवासों और पारिस्थितिक तंत्रों की रक्षा करना है। यह मुख्य रूप से दो विधियों द्वारा किया जाता है:
1. **स्वःस्थाने संरक्षण (In-situ conservation):** इस प्रकार के संरक्षण में प्रजातियों को उनके प्राकृतिक आवासों के भीतर ही संरक्षित करना शामिल है, जिसका रखरखाव मनुष्यों द्वारा किया जाता है। गंभीर रूप से संकटग्रस्त प्रजातियों के लिए, अनुकूल परिस्थितियों और सुरक्षा प्रदान करने के लिए उपयुक्त प्राकृतिक आवासों का चयन किया जाता है। इसके उदाहरणों में जीवमंडल रिजर्व, राष्ट्रीय उद्यान, वन्यजीव अभयारण्य और संरक्षण रिजर्व शामिल हैं। 2. **बहिस्थाने संरक्षण (Ex-situ conservation):** इस विधि में संकटग्रस्त पौधों और जानवरों की प्रजातियों को उनके प्राकृतिक आवासों से बाहर कृत्रिम वातावरण में संरक्षित किया जाता है। पौधों की प्रजातियों के लिए वनस्पति उद्यान, बीज बैंक, ऊतक संवर्धन प्रयोगशालाएँ आदि स्थापित की जाती हैं। जानवरों के संरक्षण के लिए चिड़ियाघर और एक्वेरियम बनाए जाते हैं। संकटग्रस्त पौधों और जानवरों के जर्मप्लाज्म (बीज, फल, पराग, बीजाणु, शुक्राणु, अंडे) को क्रायोप्रिजर्वेशन और धीमी वृद्धि संवर्धन तकनीकों का उपयोग करके संरक्षित किया जाता है। इसके अतिरिक्त, संकटग्रस्त पौधों या जानवरों के जीन (Genes) को जीन बैंकों में सुरक्षित रखा जाता है।
In simple words: जैवविविधता का संरक्षण मतलब विभिन्न प्रकार के जीवों और उनके घरों को बचाना है। यह मुख्य रूप से दो तरीकों से किया जाता है: (1) **स्वःस्थाने संरक्षण** यानी जानवरों और पौधों को उनके प्राकृतिक घरों में ही बचाना, जैसे राष्ट्रीय उद्यानों में। (2) **बहिस्थाने संरक्षण** यानी संकटग्रस्त जीवों को उनके प्राकृतिक घरों से बाहर, कृत्रिम जगहों पर बचाना, जैसे चिड़ियाघरों या बीज बैंकों में।

🎯 Exam Tip: प्रत्येक प्रकार के संरक्षण को स्पष्ट रूप से परिभाषित करें और पूरे अंक प्राप्त करने के लिए प्रासंगिक उदाहरण प्रदान करें।

 

Question 27. जैवविविधता के तप्त स्थलों के बारे में समझाइये।
Answer: जैवविविधता तप्त स्थल वे विशिष्ट क्षेत्र हैं जहाँ पौधों और जानवरों की विविध प्रजातियों की बहुत अधिक संख्या होती है, जिनमें से कई स्थानिक (कहीं और नहीं पाई जातीं) होती हैं। ये क्षेत्र मानवीय गतिविधियों से भी महत्वपूर्ण खतरे में हैं, जिससे इनका संरक्षण अत्यंत महत्वपूर्ण हो जाता है। जैवविविधता तप्त स्थलों की अवधारणा सबसे पहले 1988 में नॉर्मन मेयर्स ने दी थी। इस आधार पर, 1999 में दुनिया भर में 25 ऐसे क्षेत्रों की पहचान की गई थी, जिनकी संख्या बाद में बढ़कर 34 हो गई।
तप्त स्थल के लिए दो मुख्य मानदंड हैं:
1. **उच्च स्थानिकत्व:** उस क्षेत्र में विश्व की कुल स्थानिक प्रजातियों का 0.5 प्रतिशत से अधिक मौजूद होना चाहिए, या संख्यात्मक रूप से कम से कम 1500 स्थानिक प्रजातियाँ होनी चाहिए। 2. **पर्यावास का महत्वपूर्ण नुकसान:** उस क्षेत्र का कम से कम 70 प्रतिशत मूल आवास नष्ट हो चुका हो, जिसका अर्थ है कि मानवीय गतिविधियों के कारण उस क्षेत्र का अस्तित्व गंभीर खतरे में है। ऐसे क्षेत्रों को तत्काल संरक्षण की आवश्यकता होती है, इसीलिए उन्हें जैवविविधता तप्त स्थल घोषित किया जाता है और यहाँ व्यापक स्तर पर संरक्षण कार्यक्रम चलाए जाते हैं। घोषित 34 जैवविविधता तप्त स्थलों का कुल क्षेत्रफल पृथ्वी के कुल क्षेत्रफल का मात्र 2-3 प्रतिशत है। विश्व के कुछ प्रमुख जैवविविधता तप्त स्थलों में अटलांटिक वन, पूर्वी मलेशियाई द्वीप समूह, दक्षिण-पश्चिमी चीन के पर्वत, मेडागास्कर के द्वीप समूह, मध्य अमेरिका, कोलंबिया चोको, मध्य चिली, पूर्वी हिमालय, पश्चिमी घाट, श्रीलंका और इंडो-बर्मा आदि शामिल हैं।
भारत के जैवविविधता तप्त स्थल:
भारत में दो तप्त स्थल, पूर्वी हिमालय और पश्चिमी घाट, पूरी तरह से स्थित हैं। जबकि इंडो-बर्मा तप्त स्थल में कुछ भारतीय भूभाग शामिल हैं।
* **पूर्वी हिमालय जैवविविधता तप्त स्थल:** इस क्षेत्र में असम, अरुणाचल प्रदेश, सिक्किम और पश्चिम बंगाल के क्षेत्र आते हैं। हिमालय पर्वत श्रृंखला जैवविविधता से पूरी तरह समृद्ध है। यहाँ 10,000 पौधों की प्रजातियाँ मिलती हैं, जिनमें से 3,160 प्रजातियाँ स्थानिक हैं। इस क्षेत्र में पाए जाने वाले प्रमुख जीवों में हिमालयन तहर, सुनहरा लंगूर, हुलोक गिब्बन, पिग्मी हॉग, उड़न गिलहरी, हिम तेंदुआ, ताकिन और गांगेय डॉल्फिन शामिल हैं। गांगेय डॉल्फिन को 2002 में भारत का राष्ट्रीय जलीय जीव घोषित किया गया था। * **पश्चिमी घाट जैवविविधता तप्त स्थल:** यह भारत के पश्चिमी तट पर स्थित पश्चिमी घाट विश्व का एक प्रमुख जैवविविधता तप्त स्थल है। इसमें केरल राज्य सम्मिलित है। इस क्षेत्र में 5916 पौधों की प्रजातियाँ पाई जाती हैं, जिनमें से लगभग 50 प्रतिशत स्थानिक हैं। यहाँ पाए जाने वाले मुख्य जीवों में मालाबार गंध बिलाव, एशियाई हाथी, मालाबार ग्रे हॉर्नबिल, नीलगिरी तहर और मैकाक बंदर इत्यादि शामिल हैं। * **इंडो-बर्मा जैवविविधता तप्त स्थल:** यह तप्त स्थल उष्णकटिबंधीय पूर्वी एशिया में चीन, भारत, म्यांमार, वियतनाम, थाईलैंड, कंबोडिया और मलेशिया के क्षेत्र में है। यहाँ असंख्य वनस्पतियाँ, स्तनधारी जीव, उभयचर और मछलियों की प्रजातियाँ मिलती हैं।
In simple words: जैवविविधता तप्त स्थल पृथ्वी के ऐसे खास क्षेत्र हैं जहाँ बहुत सारे अलग-अलग तरह के पौधे और जानवर पाए जाते हैं, लेकिन वे खतरे में भी हैं। इन जगहों को बचाने के लिए तुरंत काम करना होता है। भारत में पूर्वी हिमालय, पश्चिमी घाट और इंडो-बर्मा क्षेत्र जैसे तप्त स्थल हैं।

🎯 Exam Tip: तप्त स्थलों को परिभाषित करें, नॉर्मन मेयर्स का उल्लेख करें, और उच्च जैवविविधता तथा महत्वपूर्ण खतरे के दो प्रमुख मानदंडों को उजागर करें। साथ ही, भारत के प्रमुख तप्त स्थलों का भी उल्लेख करें।

 

Question 28. जैवविविधता के महत्त्व को समझाइये।
Answer: जैवविविधता एक प्राकृतिक संसाधन है, जो जीवों के अस्तित्व के लिए आवश्यक प्राकृतिक और जैविक स्रोत प्रदान करता है। यह मानव की मूलभूत आवश्यकताओं को पूरा करता है। जैवविविधता का महत्व निम्नलिखित प्रकार से है:
(i) **आर्थिक महत्व:** कई पौधे और जानवर सीधे भोजन, दवा, ईंधन, फाइबर और निर्माण सामग्री के रूप में उपयोग किए जाते हैं। खाद्य सुरक्षा के लिए फसल विविधता महत्वपूर्ण है। उदाहरण के लिए, 1963 में उत्तर प्रदेश में पाई गई एक जंगली चावल प्रजाति (Oryza nivara) ने एक बीमारी के खिलाफ प्रतिरोध विकसित करने में मदद की जिसने खेती वाले चावल को नष्ट कर दिया था। वर्तमान में, जंगली धान के रोगरोधी और कीटरोधी 20 मुख्य जीन्स का उपयोग धान सुधार कार्यक्रमों में हो रहा है। जैट्रोपा और करंज जैसे पौधों से बायोडीजल प्राप्त करने का प्रयास किया जा रहा है। (ii) **औषधीय महत्व:** पौधों का उपयोग प्राचीन काल से ही औषधि के क्षेत्र में विशेष महत्व रखता है। अनुमान है कि उपलब्ध औषधियों का लगभग 40% पौधों से प्राप्त होता है। सिनकोना की छाल से कुनैन मलेरिया का इलाज करती है, सदाबहार से विनक्रिस्टीन और विनब्लास्टीन रक्त कैंसर का इलाज करते हैं, टेक्सस बकाटा की छाल कैंसर का इलाज करती है, और सर्पगंधा उच्च रक्तचाप का इलाज करती है। तुलसी, ब्राह्मी, अश्वगंधा, शतावरी, गिन्गो और गिलोय जैसे कई पौधों में एड्स-रोधी गुण पाए गए हैं। (iii) **पर्यावरणीय महत्व:** (a) **खाद्य-श्रृंखला का संरक्षण:** एक पारिस्थितिक तंत्र में, एक जीव दूसरे का भक्षण करता है, जिससे एक खाद्य श्रृंखला बनती है। यदि कोई एक प्रजाति विलुप्त हो जाती है, तो यह पूरी खाद्य श्रृंखला को बाधित कर सकती है। उच्च जैवविविधता कई खाद्य श्रृंखलाओं (खाद्य जाल) को सुनिश्चित करती है, जहाँ अन्य प्रजातियाँ एक के नुकसान की भरपाई कर सकती हैं। (b) **पोषक चक्र नियंत्रण:** जैवविविधता पोषक चक्र को बनाए रखने में मदद करती है। मिट्टी में विविध सूक्ष्मजीव मृत कार्बनिक पदार्थ को विघटित करके पोषक तत्वों को पौधों में वापस कर देते हैं, इस प्रकार चक्र को सक्रिय रखते हैं। (c) **पर्यावरण प्रदूषकों का निस्तारण:** कई पौधे प्रदूषकों को विघटित और अवशोषित करने की क्षमता रखते हैं। जैसे सदाबहार पौधे ट्राइनाइट्रोटोलुइन जैसे विस्फोटक को विघटित कर सकते हैं। स्यूडोमोनॉस प्यूटिडा, आर्थोबेक्टर विस्कोसस और साइट्रोबेक्टर जैसी सूक्ष्मजीव औद्योगिक अपशिष्ट से भारी धातुओं को हटा सकते हैं। राइजोपस ओराइजीस कवक यूरेनियम और थोरियम को, तथा पेनिसीलियम क्राइसोजीनम रेडियम जैसे घातक तत्वों को हटा सकते हैं। (iv) **सामाजिक, सांस्कृतिक और आध्यात्मिक महत्व:** मानव और प्रकृति के बीच संबंध प्राचीन काल से रहा है। कई आदिवासी समुदाय अभी भी अपनी सभी आवश्यकताओं के लिए पौधों पर निर्भर करते हैं। तुलसी, पीपल, बरगद जैसे कुछ पौधे पवित्र माने जाते हैं और इनकी पूजा की जाती है, जो उनके आध्यात्मिक महत्व को दर्शाते हैं।
In simple words: जैवविविधता बहुत महत्वपूर्ण है क्योंकि यह हमें भोजन, दवा और अन्य कई चीजें देती है जिनकी हमें ज़रूरत है। यह प्रकृति को संतुलित रखने में मदद करती है, जैसे पौधों को बढ़ने और हवा को साफ रखने में। कई संस्कृतियों में कुछ पौधों और जानवरों को पवित्र भी माना जाता है।

🎯 Exam Tip: महत्व पर चर्चा करते समय, अपने बिंदुओं को वर्गीकृत करें (आर्थिक, औषधीय, पर्यावरणीय, सामाजिक/सांस्कृतिक) और प्रत्येक के लिए ठोस उदाहरण दें।

 

Question 29. उन विभिन्न कारणों की विवेचना करें जो जैवविविधता के ह्रास के लिए उत्तरदायी हैं?
Answer: जबकि प्रजातियों का विलुप्त होना और नई प्रजातियों का उद्भव प्राकृतिक प्रक्रियाएँ हैं, कई कारक वर्तमान में जैवविविधता में तेजी से गिरावट का कारण बन रहे हैं। आज लगभग 4000 पशु प्रजातियाँ और 60,000 पौधों की प्रजातियाँ विलुप्त होने की कगार पर हैं। हमने अपनी फसलों की 75% आनुवंशिक विविधता खो दी है। एशियाई चीता, जावन राइनो, हिमालयन क्वेल और पिंक-हेडेड डक जैसी उल्लेखनीय प्रजातियाँ भारत में विलुप्त हो चुकी हैं। जैवविविधता के नुकसान के मुख्य कारण निम्नलिखित हैं:
1. **प्राकृतिक आवासों का नष्ट होना:** जीव अपने विशिष्ट आवासों में रहते हैं और प्रजनन करते हैं। बढ़ती मानवीय जनसंख्या की आवश्यकताओं के कारण, प्राकृतिक आवास नष्ट हो रहे हैं। वनों की कटाई, पौधों के रोगों का प्रसार, कृषि भूमि का विस्तार, शहरीकरण, रेल-सड़क नेटवर्क का निर्माण और औद्योगिक विकास लगातार वनों को साफ कर रहे हैं, जिससे जैवविविधता का नुकसान हो रहा है और प्रजातियों का विलुप्त होना बढ़ रहा है। 2. **प्राकृतिक आवास विखण्डन:** पहले, वन्यजीव बड़े, अखंडित क्षेत्रों में रहते थे। हालांकि, रेल-सड़क मार्ग, गैस पाइपलाइन, नहरें, बिजली लाइनें, बांध और खेत जैसे कारणों से उनके प्राकृतिक आवास खंडित हो गए हैं। यह उनकी प्राकृतिक गतिविधियों को बाधित करता है और उन्हें मानवीय दुर्घटनाओं के प्रति संवेदनशील बनाता है। कई जानवर वाहनों की चपेट में आने से मर जाते हैं या मानव बस्तियों में आने पर मारे जाते हैं। 3. **जलवायु परिवर्तन:** मानवीय गतिविधियों और प्रदूषण के कारण पृथ्वी पर ग्रीनहाउस गैसों की मात्रा बढ़ रही है, जिससे वैश्विक तापमान में लगातार वृद्धि हो रही है। बढ़ते तापमान से ध्रुवीय बर्फ पिघल रही है, जिससे समुद्र का स्तर बढ़ रहा है। यह समुद्री जैवविविधता और तटीय पारिस्थितिक तंत्रों को खतरे में डालता है। अनुमान है कि यदि पृथ्वी का तापमान 3.5°C बढ़ जाता है, तो दुनिया की 70% प्रजातियाँ विलुप्त हो सकती हैं। 4. **पर्यावरण प्रदूषण:** प्रदूषण का जानवरों और पौधों दोनों पर हानिकारक प्रभाव पड़ता है। औद्योगिक अपशिष्ट भूमि और जल को दूषित करता है, कई पौधों और जानवरों की प्रजातियों को नष्ट कर देता है। अत्यधिक वायु प्रदूषण से होने वाली अम्लीय वर्षा भी कई सूक्ष्मजीवों और पौधों को नष्ट कर देती है। इसी तरह, कृषि में रासायनिक उर्वरकों और कीटनाशकों का अत्यधिक उपयोग मिट्टी में पाए जाने वाले सूक्ष्मजीवों को नष्ट कर रहा है, जिससे मिट्टी की उर्वरता प्रभावित हो रही है। 5. **कृषि और वानिकी में व्यावसायिक प्रवृत्तियाँ:** हरित क्रांति से पहले, किसान कई प्रकार के अनाज, फल और सब्जियाँ उगाते थे और विभिन्न नस्लों के पशु रखते थे। लेकिन अब, कम समय में अधिक उत्पादन के लक्ष्य के कारण, किसान केवल कुछ उच्च उपज वाली फसलों की किस्में उगाते हैं और केवल संकर पशुओं को रखते हैं। यह अभ्यास आनुवंशिक जैवविविधता को तेजी से नष्ट कर रहा है। उदाहरण के लिए, इंडोनेशिया में 15 वर्षों में, 80% किसान अब केवल कुछ संकर चावल की किस्में उगाते हैं, जिससे लगभग 1500 स्थानीय किस्में विलुप्त हो गई हैं। इसी तरह, कागज, माचिस और औद्योगिक कच्चे माल के लिए प्राकृतिक वनों को साफ करके एक ही प्रजाति (मोनोकल्चर) के वन उगाए जा रहे हैं, जिससे जैवविविधता में लगातार कमी आ रही है। 6. **विदेशी प्रजातियों का आक्रमण:** कभी-कभी, जब विदेशी प्रजातियाँ किसी क्षेत्र में प्रवेश करती हैं, तो देशी प्रजातियों को खतरा होता है, जिससे पारिस्थितिक तंत्र में असंतुलन पैदा होता है। भारत में सौंदर्यकरण के लिए लाए गए लैंटाना और जलकुंभी जैसी कुछ विदेशी प्रजातियाँ तेजी से फैल गईं और स्थानीय प्रजातियों को नष्ट कर दिया। 1950 के दशक में आयातित अमेरिकी गेहूं के साथ आई गाजर घास (पार्थेनियम) भी एक समस्या है। ये आक्रामक प्रजातियाँ स्थानीय जैवविविधता के लिए गंभीर समस्याएँ पैदा करती हैं। 7. **अंधविश्वास और अज्ञानता:** कभी-कभी, अंधविश्वास और अज्ञानता भी जैवविविधता को खतरे में डालती है। उदाहरण के लिए, मनुष्यों द्वारा गागरोनी तोते (गैग्रेनी तोते) की बोली समझने की गलत धारणा के कारण उन्हें बड़ी संख्या में पकड़ा गया, जिससे वे लगभग विलुप्त हो गए। यौनवर्धक गुणों के कारण गोडावण पक्षी का बड़े पैमाने पर शिकार होने से यह प्रजाति अब संकटग्रस्त है। इसी प्रकार, राजस्थान के ग्रामीण क्षेत्रों में यह गलत धारणा है कि गोयरा (मॉनिटर छिपकली) की सांस जहरीली होती है, जिससे ग्रामीण उसे देखते ही मार देते हैं।
In simple words: जैवविविधता के तेजी से खत्म होने के कई कारण हैं। इनमें प्राकृतिक आवासों का खोना (जंगल काटना), बड़े आवासों का छोटे-छोटे टुकड़ों में बटना (सड़कें बनाना), जलवायु परिवर्तन (धरती का गर्म होना) और प्रदूषण (फैक्ट्री और खेती से) शामिल हैं। खेती और वानिकी में केवल कुछ ही तरह के पौधे उगाना, बाहरी प्रजातियों का आना और अंधविश्वास भी जैवविविधता को नुकसान पहुँचाते हैं।

🎯 Exam Tip: प्रत्येक प्रमुख कारण को स्पष्ट रूप से सूचीबद्ध और समझाएँ, प्रत्येक के लिए संक्षिप्त उदाहरण या परिणाम प्रदान करें।

 

Question 30. जैवविविधता के संरक्षण हेतु हुए प्रयासों पर एक लेख लिखिये।
Answer: जैवविविधता संरक्षण के लिए वैश्विक प्रयास निम्नलिखित हैं:
* **IUCN और रेड डेटा बुक:** 1968 में, अंतर्राष्ट्रीय प्रकृति संरक्षण संघ (IUCN) ने अध्ययन किया और 1972 में 'रेड डेटा बुक' प्रकाशित की। इस पुस्तक में संकटग्रस्त प्रजातियों, उनके आवासों और वर्तमान जनसंख्या संख्याओं को सूचीबद्ध किया गया है। * **CITES कन्वेंशन:** 1973 में, IUCN ने CITES (संकटग्रस्त प्रजातियों के अंतर्राष्ट्रीय व्यापार पर कन्वेंशन) कन्वेंशन का आयोजन किया, जिसका उद्देश्य संकटग्रस्त प्रजातियों के अंतर्राष्ट्रीय व्यापार को नियंत्रित करना था। * **पृथ्वी शिखर सम्मेलन (रियो डी जनेरियो):** 1992 में ब्राजील के रियो डी जनेरियो में पृथ्वी शिखर सम्मेलन आयोजित किया गया था। इस शिखर सम्मेलन के दौरान जैवविविधता पर कन्वेंशन (CBD) अस्तित्व में आया, जिसमें सभी देशों ने जैवविविधता संरक्षण के प्रयासों को बढ़ावा देने पर सहमति व्यक्त की।
In simple words: जैवविविधता को बचाने के लिए किए गए महत्वपूर्ण कामों में IUCN द्वारा 1972 में 'रेड डेटा बुक' बनाना शामिल है, जिसमें संकटग्रस्त प्रजातियों को सूचीबद्ध किया गया। 1973 में CITES समझौते ने इन प्रजातियों के व्यापार को नियंत्रित किया। साथ ही, 1992 में ब्राजील में हुए पृथ्वी शिखर सम्मेलन में सभी देशों ने जैवविविधता को बचाने के लिए मिलकर काम करने पर सहमति जताई।

🎯 Exam Tip: प्रमुख अंतर्राष्ट्रीय संगठनों (IUCN) और सम्मेलनों (CITES, पृथ्वी शिखर सम्मेलन) का उनके वर्षों और उद्देश्यों के साथ उल्लेख करना महत्वपूर्ण है।

 

अन्य महत्त्वपूर्ण प्रश्नोत्तर

वस्तुनिष्ठ प्रश्न

 

Question 1. ऐसे क्षेत्र जहाँ बहुत अधिक जैवविविधता पाई जाती है, कहलाते हैं
(अ) तृप्त स्थल
(ब) तरस स्थल
(स) तप्त स्थल
(द) तृण स्थल
Answer: (स) तप्त स्थल
In simple words: जिन क्षेत्रों में बहुत अधिक जैवविविधता होती है, उन्हें जैवविविधता तप्त स्थल कहा जाता है। ये स्थान कई अद्वितीय प्रजातियों के लिए महत्वपूर्ण हैं।

🎯 Exam Tip: जैवविविधता के संदर्भ में 'तप्त स्थल' शब्द को समझना मौलिक है।

 

Question 2. किस वर्ष में विश्व प्राकृतिक संरक्षण संघ का गठन हुआ था?
(अ) 1958
(ब) 1968
(स) 1999
(द) 2002
Answer: (ब) 1968
In simple words: अंतर्राष्ट्रीय प्रकृति संरक्षण संघ (IUCN) का गठन 1968 में हुआ था। यह संगठन वैश्विक संरक्षण प्रयासों में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है।

🎯 Exam Tip: IUCN जैसे प्रमुख पर्यावरण संगठनों का स्थापना वर्ष जानना सहायक होता है।

 

Question 4. केरल राज्य किस जैवविविधता तप्त स्थल का क्षेत्र है?
(अ) पूर्वी हिमालय
(ब) पश्चिमी घाट
(स) इंडो-बर्मा
(द) उपर्युक्त में से कोई नहीं
Answer: (ब) पश्चिमी घाट
In simple words: केरल राज्य पश्चिमी घाट जैवविविधता तप्त स्थल का हिस्सा है। यह क्षेत्र अपनी बड़ी संख्या में अद्वितीय प्रजातियों के लिए जाना जाता है।

🎯 Exam Tip: भारतीय राज्यों को उन जैवविविधता तप्त स्थलों से जोड़ें जिनके अंतर्गत वे आते हैं।

 

Question 5. रक्त कैंसर के उपचार में उपयोगी पादप है-
(अ) सर्पगंधा
(ब) अश्वगंधा
(स) सदाबहार
(द) शतावरी
Answer: (स) सदाबहार
In simple words: सदाबहार का पौधा रक्त कैंसर के इलाज में उपयोगी है। इसके विनक्रिस्टीन और विनब्लास्टीन जैसे यौगिकों का उपयोग कीमोथेरेपी में किया जाता है।

🎯 Exam Tip: सामान्य पौधों के औषधीय उपयोगों को याद रखें, खासकर जैवविविधता के संदर्भ में उल्लिखित।

 

Question 6. जीवाणु जो औद्योगिक अपशिष्ट से भारी धातुओं को हटाने की क्षमता रखते हैं, वे हैं
(अ) स्यूडोमोनॉस प्यूटिडा
(ब) आर्थोबेक्टर विस्कोसस
(स) साइट्रोबेक्टर
(द) उपर्युक्त सभी
Answer: (द) उपर्युक्त सभी
In simple words: स्यूडोमोनॉस प्यूटिडा, आर्थोबेक्टर विस्कोसस और साइट्रोबेक्टर जैसे जीवाणु औद्योगिक अपशिष्ट से भारी धातुओं को हटाने में सक्षम हैं। ये बायोरेमेडिएशन में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।

🎯 Exam Tip: भारी धातु हटाने के लिए पर्यावरण सुधार में विशिष्ट सूक्ष्मजीवों की भूमिका को जानें।

 

Question 7. किस वर्ष पृथ्वी सम्मेलन का आयोजन हुआ था?
(अ) 1968
(ब) 1999
(स) 2000
(द) 2002
Answer: (द) 2002
In simple words: पृथ्वी सम्मेलन 2002 में आयोजित किया गया था। यह शिखर सम्मेलन सतत विकास और उसके कार्यान्वयन पर केंद्रित था।

🎯 Exam Tip: प्रमुख पर्यावरणीय सम्मेलनों के वर्षों और स्थानों के साथ सटीक रहें, क्योंकि विभिन्न शिखर सम्मेलन विभिन्न वर्षों में हुए थे।

 

अतिलघूत्तरात्मक प्रश्न

 

Question 1. प्रजाति किसे कहते हैं ?
Answer: किसी प्रजाति के विभिन्न सदस्यों के बीच जीन में अंतर को आनुवंशिक जैवविविधता कहते हैं. यह भिन्नता एक ही प्रजाति के अलग-अलग समूह या एक ही समूह के सदस्यों के बीच पाई जाती है. इस तरह, आनुवंशिक विविधता एक प्रजाति के भीतर पाई जाने वाली विभिन्नता को दर्शाती है.
In simple words: आनुवंशिक जैवविविधता वह है जब एक ही तरह के जीवों में जीन के कारण छोटे-छोटे अंतर होते हैं.

🎯 Exam Tip: जब भी जैवविविधता के स्तरों के बारे में पूछा जाए, तो प्रजाति, आनुवंशिक और पारिस्थितिक विविधता को स्पष्ट रूप से परिभाषित करें.

 

Question 3. IUCN द्वारा जीव प्रजातियों को संरक्षण की दृष्टि से कौन-कौनसे संवर्गों में विभक्त किया गया?
Answer: IUCN ने जीव प्रजातियों को संरक्षण के लिए पाँच मुख्य श्रेणियों में बांटा है. ये श्रेणियाँ हमें बताती हैं कि कौन सी प्रजातियाँ कितनी खतरे में हैं. ये श्रेणियाँ हैं:
1. विलुप्त प्रजातियाँ (Extinct Species)
2. संकटग्रस्त प्रजातियाँ (Endangered Species)
3. अतिसंवेदनशील प्रजातियाँ (Vulnerable Species)
4. दुर्लभ प्रजातियाँ (Rare Species)
5. अपर्याप्त रूप से ज्ञात प्रजातियाँ (Data Deficient Species)
In simple words: IUCN ने जीवों को पाँच अलग-अलग समूहों में बांटा है ताकि हम जान सकें कि कौन से जीव कितने खतरे में हैं और उन्हें बचाने के लिए क्या करना है.

🎯 Exam Tip: IUCN की विभिन्न श्रेणियों को याद रखना महत्वपूर्ण है क्योंकि यह हमें प्रजातियों की संरक्षण स्थिति को समझने में मदद करता है.

 

Question 4. मानव हेतु जैवविविधता का क्या महत्त्व है?
Answer: मनुष्य के लिए जैवविविधता बहुत महत्वपूर्ण है. यह न केवल हमें आर्थिक लाभ देती है, बल्कि पर्यावरण, सामाजिक और औषधीय कारणों से भी बहुत जरूरी है. यह हमें जीवन जीने के लिए आवश्यक सभी चीजें प्रदान करती है. जैवविविधता प्रकृति का संतुलन बनाए रखने में मदद करती है.
In simple words: जैवविविधता इंसानों के लिए बहुत खास है क्योंकि इससे हमें पैसे, दवाएं और अच्छा पर्यावरण मिलता है.

🎯 Exam Tip: मानव जीवन में जैवविविधता के महत्व को स्पष्ट करते समय हमेशा आर्थिक, पर्यावरणीय और औषधीय लाभों का उल्लेख करें.

 

Question 5. स्थानबद्ध प्रजातियाँ किसे कहते हैं?
Answer: ऐसी प्रजातियाँ जो सिर्फ एक खास इलाके में मिलती हैं और जिनका फैलाव बहुत सीमित होता है, उन्हें स्थानबद्ध (endemic) प्रजातियाँ कहते हैं. ये प्रजातियाँ उसी जगह के मौसम और वातावरण के हिसाब से ढल जाती हैं.
In simple words: स्थानबद्ध प्रजातियाँ वे होती हैं जो दुनिया में केवल एक ही जगह पर पाई जाती हैं.

🎯 Exam Tip: स्थानबद्ध प्रजातियों की परिभाषा देते समय 'सीमित क्षेत्र' और 'एक क्षेत्र विशेष में पाई जाने वाली' जैसे शब्दों का प्रयोग करें.

 

Question 6. संयुक्त राष्ट्र द्वारा किस तिथि को अन्तर्राष्ट्रीय जैवविविधता दिवस घोषित किया गया है?
Answer: संयुक्त राष्ट्र ने 22 मई को अंतर्राष्ट्रीय जैवविविधता दिवस घोषित किया है. इस दिन जैवविविधता के महत्व और उसके संरक्षण के लिए जागरूकता फैलाई जाती है. यह लोगों को प्रकृति को बचाने के लिए प्रेरित करता है.
In simple words: संयुक्त राष्ट्र ने 22 मई को अंतर्राष्ट्रीय जैवविविधता दिवस घोषित किया है.

🎯 Exam Tip: अंतर्राष्ट्रीय दिवसों की तिथियाँ याद रखना सामान्य ज्ञान और पर्यावरण से संबंधित प्रश्नों के लिए महत्वपूर्ण है.

 

Question 8. जैवविविधता एक्ट, 2002 में क्या प्रावधान किया गया है?
Answer: भारत में साल 2002 में जैवविविधता एक्ट बनाया गया था. इस कानून से तीन स्तरों पर संगठन बनाए गए: राष्ट्रीय जैवविविधता प्राधिकरण, राज्य जैवविविधता बोर्ड और स्थानीय जैव विविधता प्रबंधन समितियाँ. इनका काम जैवविविधता को बचाना और उसका सही तरीके से इस्तेमाल करना है. इस कानून का मुख्य लक्ष्य जैव संसाधनों के उपयोग से होने वाले लाभों को सबको समान रूप से बांटना भी है.
In simple words: 2002 में जैवविविधता एक्ट बना था, जिसने जैवविविधता को बचाने के लिए तीन स्तरों पर संगठन बनाए थे.

🎯 Exam Tip: जैवविविधता एक्ट 2002 के मुख्य प्रावधानों में त्रिस्तरीय संगठन (राष्ट्रीय, राज्य, स्थानीय) का उल्लेख करना आवश्यक है.

 

Question 9. पारिस्थितिकीय तंत्र विविधता से क्या आशय है?
Answer: भौगोलिक और पर्यावरणीय अंतरों के कारण विभिन्न पारिस्थितिक तंत्रों में जो जीव-जंतुओं की भिन्नता पाई जाती है, उसे पारिस्थितिकीय तंत्र विविधता कहते हैं. यह विविधता बताती है कि अलग-अलग जगहों पर कैसे अलग-अलग तरह के जीव और पेड़-पौधे होते हैं. जैसे कि रेगिस्तान, जंगल, पहाड़ और समुद्र में अलग-अलग तरह की विविधता पाई जाती है.
In simple words: पारिस्थितिकीय तंत्र विविधता का मतलब है कि अलग-अलग पर्यावरण में अलग-अलग तरह के जीव-जंतु और पेड़-पौधे पाए जाते हैं.

🎯 Exam Tip: पारिस्थितिकीय तंत्र विविधता की परिभाषा में भौगोलिक और पर्यावरणीय भिन्नताओं के कारण होने वाली जीव-जंतुओं की भिन्नता को शामिल करें.

 

Question 10. जैवविविधता के संरक्षण से क्या तात्पर्य है?
Answer: जैवविविधता के संरक्षण का मतलब उन प्रयासों से है, जिनसे जीवों के जीन्स, प्रजातियों, उनके रहने की जगहों (आवास) और पूरे पारिस्थितिक तंत्र को बचाया जा सके. इसका उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि सभी जीव-जंतु और पेड़-पौधे धरती पर सुरक्षित रहें. यह एक ऐसा तरीका है जिससे हम प्रकृति के संतुलन को बनाए रखते हैं.
In simple words: जैवविविधता संरक्षण का मतलब है जीवों के जीन्स, प्रजातियों, आवास और पारिस्थितिक तंत्र को बचाना.

🎯 Exam Tip: जैवविविधता संरक्षण की परिभाषा में जीन्स, प्रजातियों, आवास और ईको-सिस्टम सभी के संरक्षण को शामिल करें.

 

Question 11. NBA का पूर्ण नाम लिखिए।
Answer: NBA का पूरा नाम National Biodiversity Authority (राष्ट्रीय जैवविविधता प्राधिकरण) है. यह भारत में जैवविविधता के संरक्षण और उसके सही इस्तेमाल के लिए काम करने वाली एक सरकारी संस्था है. इसका मुख्य काम भारत के जैव संसाधनों की रक्षा करना और उनसे मिलने वाले लाभों को लोगों तक पहुंचाना है.
In simple words: NBA का पूरा नाम National Biodiversity Authority है.

🎯 Exam Tip: पूर्ण रूप (Full Form) वाले प्रश्नों में सही स्पेलिंग और हिंदी अर्थ दोनों लिखें.

 

Question 12. CBD का पूरा नाम क्या है?
Answer: CBD का पूरा नाम Convention on Biodiversity (जैवविविधता संधि) है. यह एक अंतर्राष्ट्रीय समझौता है, जिसका उद्देश्य जैवविविधता का संरक्षण करना, उसके घटकों का सतत उपयोग करना और आनुवंशिक संसाधनों के उपयोग से होने वाले लाभों को समान रूप से बांटना है. यह दुनिया भर के देशों को जैवविविधता बचाने के लिए साथ लाता है.
In simple words: CBD का पूरा नाम Convention on Biodiversity है.

🎯 Exam Tip: अंतर्राष्ट्रीय संधियों और संगठनों के पूर्ण रूपों को याद रखना महत्वपूर्ण है.

 

Question 13. CITES का पूरा नाम लिखिए।
Answer: CITES का पूरा नाम Convention on International Trade of Endangered Species (स्थानबद्ध जातियों के अन्तर्राष्ट्रीय व्यापार की संधि) है. यह एक अंतर्राष्ट्रीय समझौता है जो जंगली जानवरों और पौधों के अंतर्राष्ट्रीय व्यापार को नियंत्रित करता है, ताकि उनकी प्रजातियों को कोई खतरा न हो. इसका उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि जंगली प्रजातियों के व्यापार से उनके अस्तित्व को खतरा न हो.
In simple words: CITES का पूरा नाम Convention on International Trade of Endangered Species है.

🎯 Exam Tip: CITES का पूर्ण रूप लिखते समय 'Endangered Species' पर विशेष ध्यान दें, क्योंकि यह इसके मुख्य उद्देश्य को बताता है.

 

Question 15. किस पक्षी का यौनवर्द्धक माने जाने पर अधिक शिकार किया गया?
Answer: गोडावण पक्षी का शिकार यौनवर्द्धक गुणों के कारण अधिक किया गया. इस गलत धारणा के कारण इनकी संख्या बहुत कम हो गई है. यह पक्षी अब संकटग्रस्त प्रजातियों की श्रेणी में आ गया है, जिसे बचाना बहुत जरूरी है.
In simple words: गोडावण पक्षी का शिकार इसलिए ज्यादा हुआ क्योंकि लोगों को लगता था कि यह यौनवर्द्धक है.

🎯 Exam Tip: अंधविश्वासों के कारण endangered प्रजातियों पर पड़ने वाले नकारात्मक प्रभावों को याद रखें.

 

Question 16. जैवविविधता' की परिभाषा लिखिए। (माध्य. शिक्षा बोर्ड, मॉडल पेपर, 2017-18)
Answer: जैवविविधता का अर्थ है जीव-जंतुओं में पाई जाने वाली अलग-अलग तरह की विभिन्नता, विषमता और पारिस्थितिकीय जटिलता. यह पृथ्वी पर जीवन के सभी रूपों और उनके बीच के संबंधों को दर्शाता है. इसमें पेड़-पौधे, जानवर और सूक्ष्मजीव सभी शामिल हैं. यह हमें यह समझने में मदद करता है कि प्रकृति में सब कुछ एक दूसरे से कैसे जुड़ा हुआ है.
In simple words: जैवविविधता का मतलब है पृथ्वी पर अलग-अलग तरह के जीव-जंतुओं और पेड़-पौधों का होना.

🎯 Exam Tip: जैवविविधता की परिभाषा में 'विभिन्नता', 'विषमता' और 'पारिस्थितिकीय जटिलता' जैसे मुख्य शब्दों को शामिल करें.

 

Question 17. विश्व में जैव-विविधता के कुल कितने तप्त स्थल हैं? (माध्य. शिक्षा बोर्ड, 2018)
Answer: विश्व में कुल 34 जैव-विविधता तप्त स्थल हैं. ये ऐसे क्षेत्र हैं जहाँ बहुत अधिक जैवविविधता पाई जाती है और जहाँ की प्रजातियाँ खतरे में हैं. इन स्थलों को बचाने के लिए विशेष प्रयास किए जाते हैं. ये स्थल हमारी पृथ्वी के महत्वपूर्ण प्राकृतिक भंडार हैं.
In simple words: पूरी दुनिया में 34 ऐसे खास इलाके हैं जहाँ बहुत सारे अलग-अलग जीव-जंतु और पेड़-पौधे पाए जाते हैं, और वे खतरे में हैं.

🎯 Exam Tip: जैव-विविधता तप्त स्थलों की संख्या एक महत्वपूर्ण तथ्य है जिसे याद रखना चाहिए.

 

लघूत्तरात्मक प्रश्न

 

Question 1. अंधविश्वास व अज्ञानतावश भी जाति संकट बढ़ा है, किन्हीं उदाहरणों से इसकी पुष्टि कीजिए।
Answer: अंधविश्वास और अज्ञानता के कारण भी कई जीव-जंतु खतरे में पड़ गए हैं. उदाहरण के लिए, लोगों को लगता था कि गागरोनी तोते मनुष्यों की बोली समझते हैं, इसलिए उन्हें बड़ी संख्या में पकड़कर बेचा गया, जिससे वे अब लगभग विलुप्त हो गए हैं. इसी तरह, गोडावण पक्षी को यौनवर्द्धक गुणों वाला मानकर बहुत शिकार किया गया, जिससे यह जाति आज खतरे में है. राजस्थान के ग्रामीण इलाकों में यह भी माना जाता है कि गोयरा (monitor lizard) की साँस जहरीली होती है, इसलिए ग्रामीण उसे देखते ही मार देते हैं. ये सभी अंधविश्वास जीवों के लिए बड़ा खतरा बन गए हैं.
In simple words: गलत सोच और जानकारी की कमी के कारण कई जीव जैसे गागरोनी तोते, गोडावण और गोयरा खतरे में पड़ गए हैं, क्योंकि लोग उन्हें मार देते हैं या पकड़ लेते हैं.

🎯 Exam Tip: अंधविश्वास के कारण जीवों पर पड़ने वाले नकारात्मक प्रभावों को समझाने के लिए विशिष्ट उदाहरणों (जैसे तोते, गोडावण, गोयरा) का प्रयोग करें.

 

Question 2. भारत देश जैवविविधता से समृद्ध देश है, स्पष्ट कीजिए।
Answer: भारत अपनी खास भौगोलिक स्थिति के कारण जैवविविधता में बहुत अमीर देश है. दुनिया की कुल भूमि का केवल 2.4 प्रतिशत भारत में है, लेकिन यहाँ दुनिया की लगभग 7 से 8 प्रतिशत जैवविविधता पाई जाती है. भारत में लगभग सभी प्रकार के पारिस्थितिक तंत्र मौजूद हैं, जैसे घास के मैदान, गर्म और ठंडे वर्षावन, मैंग्रोव, प्रवाल भित्तियाँ (Coral reefs), नदी-घाटियाँ, द्वीप और रेगिस्तान. यही वजह है कि भारत विश्व के 17 सबसे बड़े जैवविविधता वाले देशों में शामिल है. यह सभी प्रकार के जीवों और पौधों के लिए एक अच्छा घर प्रदान करता है.
In simple words: भारत एक बहुत ही जैवविविध देश है क्योंकि यहाँ कम जमीन पर भी दुनिया की 7-8% जैवविविधता मिलती है और यहाँ हर तरह के प्राकृतिक आवास हैं.

🎯 Exam Tip: भारत की जैवविविधता संपन्नता को स्पष्ट करने के लिए भूमि प्रतिशत, विश्व जैवविविधता में हिस्सेदारी और विभिन्न प्रकार के पारिस्थितिक तंत्रों का उल्लेख करें.

 

Question 4. स्थानबद्ध प्रजातियाँ किसे कहते हैं? उदाहरण सहित बताइए।
Answer: ऐसी प्रजातियाँ जो किसी एक खास क्षेत्र में ही पाई जाती हैं और जिनका फैलाव बहुत सीमित होता है, उन्हें स्थानबद्ध (Endemic) प्रजातियाँ कहते हैं. ये प्रजातियाँ उस क्षेत्र के मौसम और पर्यावरण के अनुसार विकसित होती हैं. उदाहरण के लिए, लेमूर प्राणी केवल मेडागास्कर द्वीप तक ही सीमित है. मेटासीकोया पादप चीन की एक घाटी में मिलता है. नीलगिरी थार (Nilgiri Thar) और मैकाक बंदर (Lion-tailed macaque) भारत के पश्चिमी घाट में ही पाए जाते हैं. इसका मतलब है कि जहाँ ये प्रजातियाँ पाई जाती हैं, दुनिया में और कहीं नहीं मिलतीं. इस तरह की प्रजातियाँ आमतौर पर एक विशिष्ट भौगोलिक क्षेत्र में ही विकसित होती हैं.
In simple words: स्थानबद्ध प्रजातियाँ वे जीव होते हैं जो दुनिया में केवल एक ही जगह पर पाए जाते हैं, जैसे लेमूर मेडागास्कर में या नीलगिरी थार पश्चिमी घाट में.

🎯 Exam Tip: स्थानबद्ध प्रजातियों की परिभाषा के साथ लेमूर, नीलगिरी थार या मेटासीकोया जैसे विशिष्ट उदाहरणों को शामिल करना आवश्यक है.

 

Question 5. किसी प्रजाति के स्थानबद्ध होने का क्या कारण है? समझाइए।
Answer: किसी प्रजाति के स्थानबद्ध होने का मुख्य कारण उस क्षेत्र का मौसम, भौगोलिक स्थिति और अन्य प्रजातियों के साथ उसका संबंध होता है. इन खास परिस्थितियों में ही वह प्रजाति पनपती है. स्थानबद्ध प्रजातियों का सीमित फैलाव उन्हें विलुप्त होने या संकटग्रस्त होने के ज्यादा करीब लाता है. इसलिए उनके संरक्षण पर खास ध्यान देना जरूरी है. उदाहरण के लिए, मॉरिशस के एक द्वीप पर पाई जाने वाली डोडो पक्षी की खोज 1658 में हुई थी. लेकिन मानव गतिविधियों और शिकार के कारण यह पक्षी केवल 23 साल में ही विलुप्त हो गया. इसे आखिरी बार 1681 में देखा गया था. यह दर्शाता है कि स्थानबद्ध प्रजातियाँ बाहरी बदलावों के प्रति बहुत संवेदनशील होती हैं.
In simple words: प्रजातियों के स्थानबद्ध होने का कारण उस जगह का मौसम और भूगोल है. ये प्रजातियाँ आसानी से खतरे में आ सकती हैं, जैसे डोडो पक्षी इंसानी दखल से विलुप्त हो गया.

🎯 Exam Tip: स्थानबद्ध प्रजातियों के विलुप्त होने के जोखिम को समझाने के लिए डोडो पक्षी का उदाहरण एक प्रभावी तरीका है.

 

Question 6. जैवविविधता संरक्षण के राष्ट्रीय प्रयासों का वर्णन कीजिये।
Answer: भारत में जैवविविधता संरक्षण के लिए कई राष्ट्रीय प्रयास किए गए हैं. भारत ने अंतर्राष्ट्रीय जैवविविधता संधि (CBD) के प्रति अपनी प्रतिबद्धता को देखते हुए 2002 में जैवविविधता एक्ट बनाया. इस एक्ट के तीन मुख्य उद्देश्य थे:
1. जैवविविधता को बचाना.
2. जैवविविधता का ऐसा उपयोग करना जिससे यह लंबे समय तक उपलब्ध रहे.
3. देश के जैविक संसाधनों के उपयोग से होने वाले लाभों को लोगों तक समान रूप से पहुँचाना.
इन उद्देश्यों को पूरा करने के लिए जैवविविधता एक्ट 2002 में तीन स्तरों पर संगठन बनाए गए: राष्ट्रीय जैवविविधता प्राधिकरण, राज्यों में जैवविविधता बोर्ड और स्थानीय स्तर पर जैवविविधता प्रबंधन समितियाँ. इसके साथ ही, भारत में पर्यावरण, वन, जल और वायु से जुड़े कानूनों को एक साथ लाने के लिए 2 जून, 2010 को राष्ट्रीय हरित अधिकरण का गठन किया गया, जिसका मुख्यालय भोपाल में है. यह अधिकरण पर्यावरण से जुड़े विवादों को तेजी से निपटाता है.
In simple words: भारत ने जैवविविधता बचाने के लिए 2002 में एक कानून बनाया और तीन स्तरों पर संस्थाएं बनाईं. 2010 में राष्ट्रीय हरित अधिकरण भी बनाया ताकि पर्यावरण के मामले जल्दी हल हों.

🎯 Exam Tip: राष्ट्रीय प्रयासों का वर्णन करते समय जैवविविधता एक्ट 2002 और राष्ट्रीय हरित अधिकरण (National Green Tribunal) का उल्लेख करना महत्वपूर्ण है.

 

Question 7. जैव-विविधता किसे कहते हैं ? स्वःस्थाने व बहिःस्थाने संरक्षण को समझाइए। (माध्य. शिक्षा बोर्ड, 2018)
Answer: जीव-जंतुओं में पाई जाने वाली विभिन्नता, विषमता और पारिस्थितिकीय जटिलता को जैव-विविधता कहते हैं. जैवविविधता को दो मुख्य तरीकों से संरक्षित किया जा सकता है:
1. स्वःस्थाने संरक्षण (In-situ conservation): इसमें जीवों को उनके प्राकृतिक आवास में ही संरक्षित किया जाता है. जैसे जीवमंडल रिजर्व, राष्ट्रीय उद्यान और वन्यजीव अभयारण्य. यह तरीका उन प्रजातियों के लिए बहुत अच्छा है जो अपने प्राकृतिक वातावरण में सबसे अच्छे से जीवित रहती हैं.
2. बहिःस्थाने संरक्षण (Ex-situ conservation): इसमें जीवों को उनके प्राकृतिक आवास से बाहर निकालकर किसी कृत्रिम आवास में संरक्षित किया जाता है. जैसे चिड़ियाघर, वनस्पति उद्यान, बीज बैंक और ऊतक संवर्धन प्रयोगशालाएं. यह तरीका उन प्रजातियों के लिए उपयोगी है जो अपने प्राकृतिक आवास में बहुत अधिक खतरे में हैं.
In simple words: जैव-विविधता का मतलब है जीवों में विविधता. इसे बचाने के लिए जीवों को उनके घर में (स्वःस्थाने) या बाहर कृत्रिम घर में (बहिःस्थाने) संरक्षित किया जाता है.

🎯 Exam Tip: स्वःस्थाने और बहिःस्थाने संरक्षण की परिभाषा देते समय उनके उदाहरणों (जैसे राष्ट्रीय उद्यान, चिड़ियाघर) को अवश्य शामिल करें.

 

Question 8. आनुवंशिक विविधता क्या है? जैव-विविधता संकट के दो कारणों को समझाइए। (माध्य. शिक्षा बोर्ड, 2018)
Answer: आनुवंशिक विविधता का मतलब है कि एक ही प्रजाति के अलग-अलग सदस्यों के बीच जीन के कारण जो भिन्नता पाई जाती है. यह भिन्नता एक प्रजाति के भीतर विभिन्न जनसंख्या समूहों या एक ही जनसंख्या के सदस्यों के बीच पाई जाती है. जैव-विविधता के संकट के दो मुख्य कारण हैं:
1. प्राकृतिक आवासों का नष्ट होना: बढ़ती आबादी और विकास के कारण जंगल काटे जा रहे हैं, खेत बन रहे हैं और शहर बढ़ रहे हैं, जिससे जीवों के रहने की जगहें खत्म हो रही हैं.
2. जलवायु परिवर्तन: ग्रीनहाउस गैसों के बढ़ने से पृथ्वी का तापमान बढ़ रहा है, जिससे ग्लेशियर पिघल रहे हैं और समुद्र का स्तर बढ़ रहा है. इससे कई समुद्री जीव और तटीय इलाकों की विविधता खतरे में है.
In simple words: आनुवंशिक विविधता मतलब एक ही जीव में जीन का अंतर. जैवविविधता खतरे में है क्योंकि इंसानों द्वारा जीवों के घर नष्ट हो रहे हैं और मौसम बदल रहा है.

🎯 Exam Tip: आनुवंशिक विविधता की परिभाषा में 'जीन' और 'भिन्नता' जैसे शब्दों का प्रयोग करें. संकट के कारणों में आवास विनाश और जलवायु परिवर्तन को प्रमुखता से बताएं.

 

निबन्धात्मक प्रश्न

 

Question 1. IUCN ने विश्व की जीव प्रजातियों को संरक्षण की दृष्टि से कितने संवर्गों में विभाजित किया है? वर्णन कीजिए।
Answer: IUCN (International Union for Conservation of Nature) विश्व प्राकृतिक संरक्षण संघ ने 1972 में 'रेड डाटा बुक' नाम की एक किताब प्रकाशित की थी. इस किताब में उन सभी प्रजातियों को सूचीबद्ध किया गया है जो लुप्त हो रही हैं, उनके आवास और उनकी मौजूदा संख्या के बारे में जानकारी दी गई है. IUCN ने विश्व की जीव प्रजातियों को संरक्षण के लिए पाँच मुख्य श्रेणियों में बांटा है:
1. विलुप्त प्रजातियाँ (Extinct Species): ऐसी जातियाँ जो अब दुनिया में कहीं भी जीवित नहीं हैं, उन्हें विलुप्त प्रजातियाँ कहते हैं. उदाहरण के लिए, डोडो पक्षी, डायनासोर और रायनिया पादप.
2. संकटग्रस्त प्रजातियाँ (Endangered Species): ऐसी प्रजातियाँ जो विलुप्त होने के बहुत करीब हैं और अगर उन्हें बचाया नहीं गया, तो वे जल्दी ही खत्म हो जाएंगी. उदाहरण के लिए, चीता, बाघ, बघेरा, जिन्गो बाइलोबा, सर्पगंधा और गैंडा.
3. अतिसंवेदनशील प्रजातियाँ (Vulnerable Species): ऐसी जातियाँ जिनकी संख्या तेजी से घट रही है और जिनके जल्द ही संकटग्रस्त होने की आशंका है. उदाहरण के लिए, याक, नीलगिरी लंगूर, लाल पांडा, कोबरा और ब्लैक बग.
4. दुर्लभ प्रजातियाँ (Rare Species): ये वे प्रजातियाँ हैं जिनकी संख्या कम है और जो बड़े भौगोलिक क्षेत्र में बिखरी हुई हैं, जिससे इन्हें आसानी से नहीं देखा जा सकता. ये प्रजातियाँ भी खतरे में पड़ सकती हैं. (यह श्रेणी स्रोत में विस्तार से नहीं दी गई है).
5. अपर्याप्त रूप से ज्ञात प्रजातियाँ (Data Deficient Species): ये वे प्रजातियाँ हैं जिनके बारे में पर्याप्त जानकारी उपलब्ध नहीं है, जिससे उनकी संरक्षण स्थिति का सही अनुमान नहीं लगाया जा सकता. (यह श्रेणी भी स्रोत में विस्तार से नहीं दी गई है).
In simple words: IUCN ने जीवों को बचाने के लिए उन्हें पाँच समूहों में बांटा है - विलुप्त, संकटग्रस्त, अतिसंवेदनशील, दुर्लभ और जिनके बारे में जानकारी कम है. इससे हमें पता चलता है कि कौन से जीव कितने खतरे में हैं.

🎯 Exam Tip: IUCN की विभिन्न श्रेणियों को उनके उदाहरणों सहित याद रखें. रेड डाटा बुक का उल्लेख करना भी महत्वपूर्ण है.

 

Question 2. जैवविविधता का औषधीय तथा पर्यावरणीय महत्त्व पर लेख लिखिए।
Answer: जैवविविधता का औषधीय और पर्यावरणीय दोनों तरह से बहुत महत्व है.
**औषधीय महत्त्व (Medicinal Value):** पुराने समय से ही जड़ी-बूटियों का इस्तेमाल बीमारियों के इलाज के लिए किया जाता रहा है. अनुमान है कि लगभग 40 प्रतिशत दवाएँ पेड़-पौधों से ही मिलती हैं. पृथ्वी पर कई बीमारियों का इलाज जैवविविधता में ही खोजा गया है. जैसे, मलेरिया का इलाज सिनकोना पेड़ की छाल से मिला. विनक्रिस्टीन (Vincristine) और विनब्लास्टीन (Vinblastine) जैसे पौधों का उपयोग रक्त कैंसर के इलाज में होता है. टैक्सस बकाटा वृक्ष की छाल और सर्पगंधा (Rauvolfia serpentina) का उपयोग कैंसर और उच्च रक्तचाप के इलाज में होता है. एड्स (AIDS) जैसी महामारियों का इलाज भी जैवविविधता से संभव हो सकता है, क्योंकि तुलसी, ब्राह्मी, अश्वगंधा, शतावरी, गिन्गो और गिलोय जैसी वनस्पतियों में एड्स रोधी गुण पाए गए हैं.
**पर्यावरणीय महत्त्व (Environmental Value):**
(अ) खाद्य-श्रृंखला का संरक्षण (Conservation of food chain): पारिस्थितिक तंत्र में एक जीव दूसरे जीव को खाते हैं, इसलिए एक प्रजाति दूसरी पर निर्भर करती है. अगर कोई एक प्रजाति खत्म हो जाए, तो पूरी खाद्य-श्रृंखला खतरे में आ जाती है. लेकिन जहाँ जैवविविधता ज्यादा होती है, वहाँ कई खाद्य-श्रृंखलाएँ होती हैं जो एक जटिल खाद्य जाल बनाती हैं. इससे अगर एक प्रजाति कम हो भी जाए, तो दूसरी प्रजाति उसकी कमी पूरी कर सकती है और खाद्य-श्रृंखला सुरक्षित रहती है.
(ब) पोषक चक्र नियंत्रण (Protection of nutrient cycle): जैवविविधता पोषक चक्र को चालू रखने में मदद करती है. मिट्टी में मौजूद अलग-अलग तरह के सूक्ष्मजीव, जीवों के मरे हुए हिस्सों को तोड़कर पौधों के लिए जरूरी पोषक तत्वों को फिर से मिट्टी में मिला देते हैं. इस तरह यह चक्र लगातार चलता रहता है.
(स) पर्यावरण प्रदूषण का निस्तारण (Expedition of environmental pollutants): कई पौधे प्रदूषकों को तोड़ने और सोखने की क्षमता रखते हैं. उदाहरण के लिए, सदाबहार (Catharanthus roseks) जैसे पौधे खतरनाक विस्फोटक ट्राइनाइट्रोटोलुईन (Trinitrotoluene) को तोड़ सकते हैं. स्यूडोमोनास प्यूटिडा (Pseudomonas putida), आर्थोबेक्टर विस्कोसस (Arthrobacter viscosus) और साइट्रोबेक्टर (Citrobacter) जैसे सूक्ष्मजीव औद्योगिक कचरे से भारी धातुओं को हटाने में सक्षम हैं. इससे पर्यावरण साफ रहता है.
In simple words: जैवविविधता से हमें दवाएँ मिलती हैं और यह पर्यावरण को साफ रखने, खाद्य श्रृंखला को बचाने और पोषक तत्वों को धरती में वापस लाने में मदद करती है.

🎯 Exam Tip: जैवविविधता के औषधीय और पर्यावरणीय महत्व को बताते हुए विशिष्ट पौधों और जीवों के उदाहरणों का प्रयोग करें.

 

Question. संकटग्रस्त प्रजातियों को बचाने के लिये अन्तर्राष्ट्रीय एवं राष्ट्रीय स्तर पर किये गये दो-दो प्रयासों को समझाइए।
Answer: संकटग्रस्त प्रजातियों को बचाने के लिए अंतर्राष्ट्रीय और राष्ट्रीय दोनों स्तरों पर प्रयास किए गए हैं:
**अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर किए गए प्रयास:**
1. विश्व प्राकृतिक संरक्षण संघ (IUCN) ने 1968 में 'रेड डाटा बुक' प्रकाशित की. इस किताब में उन सभी प्रजातियों को सूचीबद्ध किया गया जो लुप्त हो रही हैं. इससे दुनिया भर में लोगों को इन प्रजातियों के बारे में जानकारी मिली और उन्हें बचाने की जरूरत महसूस हुई.
2. 1973 में IUCN ने CITES (Convention on International Trade in Endangered Species) समझौता किया. यह समझौता संकटग्रस्त प्रजातियों के अंतर्राष्ट्रीय व्यापार पर रोक लगाता है ताकि उनका अवैध शिकार और व्यापार बंद हो सके.
**राष्ट्रीय स्तर पर किए गए प्रयास:**
1. भारत सरकार ने 2002 में जैवविविधता एक्ट बनाया. इस एक्ट का मुख्य उद्देश्य जैवविविधता का संरक्षण करना, उसके घटकों का सतत उपयोग सुनिश्चित करना और जैविक संसाधनों से होने वाले लाभों को समान रूप से बांटना था.
2. भारत में जीवमंडल रिजर्व, राष्ट्रीय उद्यान और वन्यजीव अभयारण्य बनाए गए हैं. ये संरक्षित क्षेत्र जीवों को उनके प्राकृतिक आवास में सुरक्षित रखते हैं. वर्तमान में भारत में 14 जीवमंडल रिजर्व, 99 राष्ट्रीय उद्यान और 523 वन्यजीव अभयारण्य हैं, जो देश के कुल भौगोलिक क्षेत्रफल का लगभग 4.83 प्रतिशत कवर करते हैं. इन क्षेत्रों में जीवों को बिना किसी बाहरी खतरे के पनपने का अवसर मिलता है.
In simple words: जीवों को बचाने के लिए अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर रेड डाटा बुक और CITES जैसे समझौते हुए हैं, और राष्ट्रीय स्तर पर भारत में जैवविविधता कानून बना और संरक्षित क्षेत्र बनाए गए हैं.

🎯 Exam Tip: अंतर्राष्ट्रीय प्रयासों में IUCN और CITES का उल्लेख करें, जबकि राष्ट्रीय प्रयासों में जैवविविधता एक्ट और संरक्षित क्षेत्रों (राष्ट्रीय उद्यान, अभयारण्य) का वर्णन करें.

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