Official RBSE Solutions for Class 10 Science: Chapter 16 ब्रह्माण्ड एवं जैव विकास
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Chapter-wise Solutions for Science: Chapter 16 ब्रह्माण्ड एवं जैव विकास
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बहुचयनात्मक प्रश्न
Question 1. सृष्टि बनने के पहले क्या उपस्थित था?
(क) जल।
(ख) सत
(ग) असत
(घ) इनमें से कोई नहीं
Answer: (ख) सत
In simple words: ब्रह्माण्ड के बनने से पहले, 'सत' नाम की एक अवस्था थी. यह वह अदृश्य और अव्यक्त स्थिति थी जिससे सब कुछ उत्पन्न हुआ.
🎯 Exam Tip: भारतीय दर्शन में 'सत' का अर्थ 'अस्तित्व' या 'वास्तविकता' होता है, जो सृष्टि के मूल कारण को दर्शाता है।
Question 2. किस वैज्ञानिक ने स्थिर ब्रह्माण्ड के विचार को पुनः जीवित किया था?
(क) डार्विन
(ख) ओपेरिन
(ग) आइंसटीन
(घ) स्टेनले मिलर
Answer: (ग) आइंसटीन
In simple words: अल्बर्ट आइंस्टीन ने स्थिर ब्रह्माण्ड की अवधारणा को फिर से सामने रखा, जहाँ ब्रह्माण्ड न तो फैलता है और न ही सिकुड़ता है. हालांकि, बाद में उन्हें अपने इस विचार को बदलना पड़ा.
🎯 Exam Tip: अल्बर्ट आइंस्टीन ने अपने गुरुत्वाकर्षण के सामान्य सापेक्षता के समीकरणों में 'ब्रह्माण्ड संबंधी स्थिरांक' को शामिल करके एक स्थिर ब्रह्माण्ड की कल्पना की थी।
Question 3. ब्रह्माण्ड की उत्पति के विषय में सर्वाधिक मान्यता प्राप्त अवधारणा कौनसी है?
(क) स्थिर ब्रह्माण्ड
(ख) बिग-बैंग
(ग) जैवकेन्द्रिकता
(घ) भारतीय अवधारणा
Answer: (ख) बिग-बैंग
In simple words: बिग-बैंग थ्योरी (महाविस्फोट सिद्धांत) ब्रह्मांड की उत्पत्ति का सबसे ज्यादा माना जाने वाला वैज्ञानिक सिद्धांत है. यह बताता है कि ब्रह्मांड एक छोटे, गर्म और घने बिंदु से शुरू हुआ और फिर फैलता गया.
🎯 Exam Tip: बिग-बैंग सिद्धांत को ब्रह्मांड के विस्तार, ब्रह्मांडीय माइक्रोवेव पृष्ठभूमि विकिरण और हल्के तत्वों की प्रचुरता जैसे कई प्रमाणों से समर्थन मिलता है।
Question 4. लगभग कितने वर्ष पूर्व पृथ्वी पर प्रकाशसंश्लेषी जीवन उपस्थित था?
(क) 4 अरब
(ख) 3 अरब
(ग) 5 अरब
(घ) अनिश्चित
Answer: (क) 4 अरब
In simple words: पृथ्वी पर प्रकाशसंश्लेषण करने वाले जीव, जो सूर्य के प्रकाश से ऊर्जा बनाते हैं, लगभग 4 अरब साल पहले से मौजूद थे. यह हमारे ग्रह पर जीवन के विकास में एक महत्वपूर्ण कदम था.
🎯 Exam Tip: प्रकाशसंश्लेषी जीवों ने पृथ्वी के वायुमंडल को ऑक्सीजन से भरने में मदद की, जिससे जटिल जीवन रूपों का विकास संभव हो पाया।
Question 5. पीढ़ी दर पीढ़ी अपने स्वरूप को बनाए रखने में सक्षम जीव समूह को क्या कहा जाता है?
(क) वंश
(ख) संघ
(ग) जाति (जातिवृत्त के संदर्भ में)
(घ) उपर्युक्त में से कोई नहीं
Answer: (घ) उपर्युक्त में से कोई नहीं
In simple words: एक जीव समूह जो अपनी पहचान और विशेषताओं को पीढ़ी-दर-पीढ़ी बनाए रखने में सक्षम होता है, उसे 'जाति' कहते हैं. वे आपस में प्रजनन कर सकते हैं और उपजाऊ संतान पैदा कर सकते हैं.
🎯 Exam Tip: जीव विज्ञान में, 'जाति' (Species) जैविक वर्गीकरण की एक मूल इकाई है और यह समूह के सदस्यों की प्रजनन क्षमता से परिभाषित होती है।
अतिलघूत्तरात्मक प्रश्न
Question 6. ऋग्वेद के किस सूक्त में ब्रह्माण्ड की उत्पत्ति के विषय में विस्तार से चर्चा की गई है?
Answer: ऋग्वेद के नासदीय सूक्त में ब्रह्माण्ड की उत्पत्ति के विषय में विस्तार से चर्चा की गई है. यह सूक्त सृष्टि के आरंभ के गहन दार्शनिक प्रश्नों को उठाता है.
In simple words: ऋग्वेद के नासदीय सूक्त में ब्रह्मांड कैसे बना, इस पर बहुत गहराई से बात की गई है.
🎯 Exam Tip: नासदीय सूक्त ब्रह्मांड की उत्पत्ति को लेकर भारतीय दर्शन की प्राचीनतम अवधारणाओं में से एक है, जो अज्ञात और अकथनीय मूल पर केंद्रित है।
Question 7. क्या जीवन को अणुओं का समूह माना जा सकता है?
Answer: जीवन अणुओं का समूह नहीं है. बल्कि, जीवन अणुओं के एक जटिल और व्यवस्थित तंत्र को दर्शाता है जो कार्य करता है, प्रतिक्रिया करता है और प्रजनन करता है.
In simple words: नहीं, जीवन सिर्फ अणुओं का ढेर नहीं है. यह अणुओं का एक खास तरीका है जिसमें वे साथ काम करते हैं.
🎯 Exam Tip: जीवन में अणुओं की सिर्फ उपस्थिति ही नहीं, बल्कि उनकी जटिल अंतःक्रियाएं और संगठन भी महत्वपूर्ण हैं, जो जीवों को अद्वितीय बनाते हैं।
Question 8. वर्तमान जीवन किस अणु पर आधारित माना जाता है?
Answer: वर्तमान जीवन डीएनए अणु पर आधारित माना जाता है. डीएनए सभी जीवित जीवों में आनुवंशिक जानकारी रखता है और पीढ़ी दर पीढ़ी गुणों को आगे बढ़ाता है.
In simple words: हमारा जीवन डीएनए नाम के एक अणु पर टिका है. यह हमारे शरीर की सभी जानकारी रखता है.
🎯 Exam Tip: डीएनए (डीऑक्सीराइबोन्यूक्लिक एसिड) अनुवांशिक गुणों के हस्तांतरण और प्रोटीन संश्लेषण को नियंत्रित करके जीवन की सभी प्रक्रियाओं का आधार बनता है।
Question 9. पृथ्वी के प्रारम्भिक वायुमण्डल के विषय में वैज्ञानिक सोच में क्या परिवर्तन हुआ है?
Answer: पृथ्वी का प्रारंभिक वायुमंडल मीथेन, अमोनिया, हाइड्रोजन और जलवाष्प से बना था, जो इसे अत्यधिक अपचायक बनाता था. इस माहौल में ऑक्सीजन की कमी थी.
In simple words: पहले पृथ्वी के वायुमंडल में मीथेन, अमोनिया, हाइड्रोजन और पानी की भाप थी, और ऑक्सीजन नहीं थी. यह एक ऐसा माहौल था जो चीजों को 'अपचयित' (reduce) करता था.
🎯 Exam Tip: प्रारंभिक अपचायक वायुमंडल जीवन की उत्पत्ति के लिए आवश्यक रासायनिक प्रतिक्रियाओं का समर्थन करता था, क्योंकि ऑक्सीजन की उपस्थिति कुछ महत्वपूर्ण यौगिकों को नष्ट कर देती।
Question 10. प्रत्येक जाति के विकसित होने के इतिहास को क्या कहते हैं ?
Answer: प्रत्येक जाति के विकसित होने के इतिहास को जाति का जातिवृत्त कहते हैं. यह उसके विकासवादी संबंधों और पूर्वजों का अध्ययन है.
In simple words: हर जीव की प्रजाति का जो विकास का इतिहास होता है, उसे 'जातिवृत्त' कहते हैं.
🎯 Exam Tip: जातिवृत्त (Phylogeny) जीवों के बीच विकासवादी संबंधों को समझने और उन्हें एक वृक्ष जैसी संरचना में दर्शाने में मदद करता है।
Question 11. लुप्त हो चुके जीवों के विषय में जानकारी कैसे मिलती है?
Answer: लुप्त हो चुके जीवों के विषय में जानकारी उनकी निशानियों से मिलती है, जिन्हें जीवाश्म कहते हैं. लाखों साल पहले जीव मिट्टी या अन्य पदार्थों में दब गए, जिससे वे जीवाश्म बन गए. उदाहरण के लिए, हाथी जैसे जीव बर्फ में इतने सुरक्षित मिले हैं कि वे हाल ही में मरे हुए लगते हैं. जीवाश्म अतीत के जीवन के बारे में अमूल्य सुराग प्रदान करते हैं.
In simple words: जो जीव खत्म हो गए हैं, उनकी जानकारी हमें उनके जीवाश्मों (पत्थरों में जमे हुए अवशेषों) से मिलती है.
🎯 Exam Tip: जीवाश्म विज्ञान, जीवाश्मों का अध्ययन करके पृथ्वी पर जीवन के इतिहास और विकासवादी परिवर्तनों को समझने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है।
Question 12. आर्कियोप्टेरिस का जीवाश्म किस रूप में मिला था?
Answer: आर्कियोप्टेरिस का जीवाश्म चित्र के रूप में मिला था. इस चित्र को देखकर पता चला कि पक्षियों की उत्पत्ति रेंगने वाले जीवों से हुई है. आर्कियोप्टेरिस आधुनिक पक्षियों और डायनासोर के बीच एक महत्वपूर्ण कड़ी के रूप में जाना जाता है.
In simple words: आर्कियोप्टेरिस का जीवाश्म एक चित्र जैसा मिला था, जिससे पता चला कि पक्षी रेंगने वाले जीवों से आए हैं.
🎯 Exam Tip: आर्कियोप्टेरिस में पक्षियों (पंख) और सरीसृपों (दांत, लंबी पूंछ, पंजे वाले पंख) दोनों की विशेषताएं थीं, जो विकासवादी कड़ी का एक प्रमुख उदाहरण है।
Question 13. अवशेषांग किसे कहते हैं? मानव शरीर के एक अवशेषांग का नाम लिखो।
Answer: जीवों के शरीर में कुछ ऐसे अंग पाए जाते हैं जिनका कोई उपयोग नहीं होता, इन्हें अवशेषांग कहते हैं. ये अंग पहले उपयोगी थे लेकिन विकास के दौरान अपना कार्य खो चुके हैं. उदाहरण के लिए, मानव में अक्कल दाढ़ और आंत्र पर पाई जाने वाली ऐपिन्डिक्स अवशेषांग हैं.
In simple words: शरीर में कुछ ऐसे अंग होते हैं जिनका अब कोई काम नहीं होता, उन्हें अवशेषांग कहते हैं. जैसे मनुष्य की अक्कल दाढ़ या ऐपिन्डिक्स.
🎯 Exam Tip: अवशेषांग विकास के प्रमाण होते हैं, क्योंकि वे दर्शाते हैं कि जीव के पूर्वजों में उन अंगों का कार्यात्मक उपयोग था।
Question 14. क्या पृथ्वी के बाहर से पृथ्वी पर जीवन आ सकता है?
Answer: हाँ, पृथ्वी के बाहर से पृथ्वी पर जीवन आ सकता है. पृथ्वी पर वातावरण जीवन के लिए बहुत अनुकूल सिद्ध हुआ है. पृथ्वी पर कई जातियों की उत्पत्ति हुई है और कई जातियाँ नष्ट भी हुई हैं. यह माना जाता है कि पहला जीव भी पृथ्वी पर उत्पन्न नहीं हुआ था, बल्कि अंतरिक्ष के किसी पिंड से आया था. इस अवधारणा को 'पैनस्पर्मिया' कहते हैं.
In simple words: हाँ, जीवन पृथ्वी के बाहर से भी आ सकता है. ऐसा माना जाता है कि पृथ्वी पर पहला जीवन भी बाहर से ही आया था.
🎯 Exam Tip: पैनस्पर्मिया सिद्धांत के अनुसार, जीवन के बीज अंतरिक्ष में फैलते हैं और उपयुक्त ग्रहों पर जीवन की शुरुआत कर सकते हैं।
निबन्धात्मक प्रश्न
Question 15. सृष्टि की उत्पत्ति के विषय में भारतीय सोच को समझाइए।
Answer: भारतीय संस्कृति में ब्रह्मांड की उत्पत्ति के विषय में वैदिककाल से ही विचार होता रहा है. ऋग्वेद के नासदीय सूक्त में ब्रह्मांड की उत्पत्ति पर विस्तार से चर्चा की गई है. स्वामी विवेकानंद ने वैदिक ज्ञान को समझाते हुए कहा कि चेतना ने एक से अनेक होते हुए ब्रह्मांड का निर्माण किया. संसार में विभिन्न प्रकार के जीव व वस्तुएँ दिखाई देती हैं, लेकिन वे मूल रूप से उसी चेतना के रूप हैं. इस विश्वास को अद्वैत कहते हैं. अद्वैत दर्शन यह बताता है कि सभी कुछ अंततः एक ही वास्तविकता का हिस्सा है.
In simple words: भारतीय सोच कहती है कि ब्रह्मांड एक ही चेतना से बना है. अलग-अलग दिखते हुए भी सब कुछ एक ही मूल स्रोत का हिस्सा है, जिसे अद्वैत कहते हैं.
🎯 Exam Tip: भारतीय दर्शन में ब्रह्मांड की उत्पत्ति केवल भौतिक प्रक्रिया नहीं है, बल्कि एक गहरी आध्यात्मिक और चेतना-आधारित प्रक्रिया है।
Question 16. सृष्टि की उत्पत्ति की जैवकेन्द्रिकता की अवधारणा समझाइए। भौतिक अवधारणा तथा इसमें प्रमुख अन्तर क्या है?
Answer: जैवकेन्द्रिकता का सिद्धांत मानता है कि विश्व की सभी वस्तुएँ अलग-अलग दिखती हैं, लेकिन वास्तव में एक दूसरे से जुड़ी हुई हैं. सभी का अस्तित्व महासागर रूपी परमब्रह्म की बूंद की तरह है. नोबेल पुरस्कार विजेता चिकित्साशास्त्री रॉबर्ट लांजा ने खगोलशास्त्री बॉब बर्मन के साथ 2007 में जैवकेन्द्रिकता का सिद्धांत प्रतिपादित किया. इस सिद्धांत के अनुसार इस विश्व का अस्तित्व जीवन के कारण ही है. सरल शब्दों में कहें तो जीवन के सृजन व विकास हेतु ही विश्व की रचना हुई है. अतः चेतना ही सृष्टि के स्वरूप को समझने का सच्चा मार्ग हो सकती है. चेतना के बिना विश्व की कल्पना नहीं की जा सकती. जैवकेन्द्रिकता के सिद्धांत में दर्शनशास्त्र से लेकर भौतिकशास्त्र के सिद्धांतों को शामिल किया गया है. मानव की स्वतंत्र इच्छा शक्ति को निश्चितता व अनिश्चितता दोनों तरह से नहीं समझा जा सकता है. विश्व के भौतिक स्वरूप को निश्चित मानने पर इसकी प्रत्येक घटना की पूर्व घोषणा संभव होगी और अनिश्चित मानने पर पूर्व में कुछ भी नहीं कहा जा सकेगा. संसार में जीव निश्चित व अनिश्चित इच्छा का प्रदर्शन स्वतंत्र रूप से करता रहता है. इसे जैवकेन्द्रिकता द्वारा ही समझा जा सकता है. लांजा के विचार को प्राचीन रहस्यवादी विचारों से प्रभावित मानकर अधिकांश भौतिकविदों ने उस पर कोई ध्यान नहीं दिया. लेकिन कुछ समय बाद में कई अन्य वैज्ञानिकों ने आधुनिक वैज्ञानिक तथ्यों के संदर्भ में जैवकेन्द्रिकता को समझाने का प्रयास किया. संबंधात्मक क्वांटम यांत्रिकी को आधार बनाकर दृढ़ भाषा में प्रस्तुत किया गया.
भौतिक अवधारणा से प्रमुख अंतर-जैवकेन्द्रिकता सिद्धांत के अनुसार आइंस्टीन की स्थान व समय की अवधारणा का कोई भौतिक अस्तित्व नहीं है, बल्कि ये सब मानव चेतना की अनुभूतियाँ मात्र हैं. लांजा का मानना है कि चेतना को केंद्र में रखकर ही भौतिकी की कई अबूझ पहेलियों जैसे हाइजेनबर्ग का अनिश्चितता का सिद्धांत, दोहरी झिरी प्रयोग तथा बलों के सूक्ष्म संतुलन विभिन्न स्थिरांक व नियम का सजीव दृष्टि के अनुरूप होना आदि को समझा जा सकता है. वैज्ञानिक आइंस्टीन भी समय से ही यूनिफाइड फील्ड थ्योरी के रूप में संपूर्ण भौतिकी को एक साथ लाने के लिए प्रयास करते रहे हैं, लेकिन सफलता अभी तक नहीं मिली है. रॉबर्ट लांजा का कहना है कि जीवन को केंद्र में रखने पर ही समस्या हल हो सकती है. जैवकेन्द्रिकता जीवन को ब्रह्मांड का केंद्र बिंदु मानती है.
In simple words: जैवकेन्द्रिकता कहती है कि ब्रह्मांड जीवन के कारण है, और चेतना इसे समझने की कुंजी है. यह भौतिकी से अलग है जो सिर्फ भौतिक चीजों पर जोर देती है, जबकि जैवकेन्द्रिकता में जीवन ही सब कुछ है.
🎯 Exam Tip: जैवकेन्द्रिकता एक दार्शनिक और वैज्ञानिक दृष्टिकोण है जो ब्रह्मांड में जीवन की केंद्रीय भूमिका पर जोर देता है, जो पारंपरिक भौतिकी से अलग है।
Question 17. सृष्टि की उत्पति की बिगबैंग अवधारणा क्या है? भारतीय अवधारणा तथा इसमें प्रमुख अन्तर क्या है?
Answer: बिगबैंग अवधारणा- बिगबैंग अवधारणा मानती है कि ब्रह्मांड की उत्पत्ति एक अत्यंत सघन व अत्यंत गर्म पिंड से, 13.8 अरब वर्ष पूर्व महाविस्फोट के कारण हुई है. किसी वस्तु में विस्फोट होने के बाद उसके टुकड़े दूर-दूर तक फैल जाते हैं. बिगबैंग अवधारणा के पक्ष में कई प्रमाण भी प्राप्त हुए हैं. ब्रह्मांड में हल्के तत्वों की अधिकता, अंतरिक्ष में सूक्ष्म विकिरणों की उपस्थिति, महाकाय संरचनाओं की उपस्थिति व हब्बल के नियम को समझाने में सफलता ऐसे ही प्रमाण हैं. इस सिद्धांत के अनुसार, ब्रह्मांड का निरंतर विस्तार हो रहा है.
भारतीय अवधारणा के अनुसार स्वामी विवेकानंद ने वैदिक ज्ञान को समझाते हुए कहा कि चेतना ने एक से अनेक होते हुए ब्रह्मांड का निर्माण किया. जैन धर्म में सृष्टि को कभी नष्ट नहीं होने वाला माना गया है. जैन दर्शन के अनुसार, यौगिक हमेशा से अस्तित्व में है और हमेशा रहेगा. जैन दर्शन के अनुसार यौगिक शाश्वत है. ईश्वर या किसी अन्य व्यक्ति ने इन्हें नहीं बनाया.
प्रमुख अंतर यह है कि बिगबैंग एक भौतिक घटना है जो एक शुरुआत मानती है, जबकि भारतीय अवधारणा (जैसे अद्वैत और जैन दर्शन) ब्रह्मांड को चेतना का विस्तार या शाश्वत मानती है, बिना किसी विशिष्ट शुरुआत के.
In simple words: बिगबैंग कहता है कि ब्रह्मांड एक बड़े धमाके से शुरू हुआ और फैल रहा है. भारतीय सोच कहती है कि ब्रह्मांड चेतना से बना है और हमेशा से रहा है या हमेशा रहेगा, इसका कोई खास शुरुआती बिंदु नहीं है.
🎯 Exam Tip: बिगबैंग एक वैज्ञानिक मॉडल है, जबकि भारतीय अवधारणाएँ अक्सर दार्शनिक और आध्यात्मिक सिद्धांतों पर आधारित होती हैं।
Question 18. जैव विकास से आप क्या समझते हैं? आपके अनुसार जैव विकास कैसे हुआ होगा? समझाइये।
Answer: सभी वैज्ञानिक जीवों के क्रमिक और निरंतर परिवर्तनशील विकास को जैव विकास कहते हैं. जीवों के वर्गीकरण का अध्ययन करने पर पता चलता है कि एककोशीय जीवों से बहुकोशीय जीवों का क्रमिक विकास हुआ है. मनुष्य के हाथ, चीते की अगली टाँग, मछली के फिन्स तथा चमगादड़ के पंख के कंकाल की मूलभूत रचना एक समान होती है. यह इस बात का प्रमाण है कि इन सभी जीवों का उद्गम एक ही पूर्वज से हुआ होगा. सभी बहुकोशीय जीवों का शरीर यूकैरियोटिक कोशिकाओं से बना होता है. प्रोटीन का पाचन करने वाला एंजाइम ट्रिप्सिन एककोशीय जीव से लेकर मनुष्य तक क्रियाशील होता है. जीवों के गुणों को नियंत्रित करने वाला डीएनए सभी जीवों में समान प्रकार से कार्य करता है. ये सभी बातें जैव विकास को प्रमाणित करती हैं. जैव विकास वह प्रक्रिया है जिसके द्वारा पृथ्वी पर जीवन समय के साथ बदलता गया है, सरल रूपों से अधिक जटिल रूपों में परिवर्तित होता गया.
In simple words: जैव विकास का मतलब है कि जीव समय के साथ बदलते और विकसित होते गए हैं, सरल से जटिल बनते गए हैं. सभी जीवों में कुछ समानताएँ हैं जो दिखाती हैं कि वे एक ही पूर्वज से आए हैं.
🎯 Exam Tip: जैव विकास एक सतत प्रक्रिया है जो प्राकृतिक चयन, आनुवंशिक बहाव और उत्परिवर्तन जैसे कारकों द्वारा संचालित होती है, जिससे नई प्रजातियों का निर्माण होता है।
अन्य महत्त्वपूर्ण प्रश्नोत्तर
वस्तुनिष्ठ प्रश्न
Question 1. 'दी ओरिजन ऑफ स्पेशीज' पुस्तक किसने लिखी?
(अ) लैमार्क
(ब) डार्विन
(स) ओपेरिन
(द) अरस्तू
Answer: (ब) डार्विन
In simple words: 'दी ओरिजन ऑफ स्पेशीज' किताब चार्ल्स डार्विन ने लिखी थी, जिसमें उन्होंने बताया कि जीव कैसे धीरे-धीरे बदलते हैं.
🎯 Exam Tip: यह पुस्तक विकासवादी जीव विज्ञान में एक मील का पत्थर है, जिसमें प्राकृतिक चयन के माध्यम से प्रजातियों की उत्पत्ति के सिद्धांत को प्रस्तुत किया गया है।
Question 2. निम्न में से कौन-सा मानव शरीर में एक अवशेषांग है?
(अ) कर्ण पल्लव
(ब) पुच्छीय कशेरुक
(स) अक्ल दाढ़
(द) ये सभी
Answer: (स) अक्ल दाढ़
In simple words: मनुष्य के शरीर में अक्ल दाढ़ एक ऐसा अंग है जिसका अब कोई खास काम नहीं रहा है, यह एक अवशेषांग है.
🎯 Exam Tip: अवशेषांग विकासवादी इतिहास के प्रमाण होते हैं, जो दर्शाते हैं कि पूर्वजों में उन अंगों का कार्यात्मक उपयोग था।
Question 3. ओपेरिन के सिद्धान्त द्वारा जीव की उत्पत्ति को कितने चरणों में विभाजित किया गया है?
(अ) 5
(ब) 6
(स) 7
(द) 8
Answer: (स) 7
In simple words: ओपेरिन के सिद्धांत के अनुसार, जीवन की उत्पत्ति सात मुख्य चरणों में हुई थी.
🎯 Exam Tip: ओपेरिन-हाल्डेन सिद्धांत ने प्रारंभिक पृथ्वी की रासायनिक स्थितियों में जीवन की उत्पत्ति को समझाया, जिसमें सरल यौगिकों से जटिल कार्बनिक अणुओं का निर्माण शामिल था।
Question 4. 'डिस्कवरी ऑफ इण्डिया' पुस्तक किसने लिखी?
(अ) डार्विन
(ब) लैमार्क
(स) स्वामी विवेकानन्द
(द) जवाहर लाल नेहरू
Answer: (द) जवाहर लाल नेहरू
In simple words: 'डिस्कवरी ऑफ इण्डिया' किताब भारत के पहले प्रधानमंत्री जवाहर लाल नेहरू ने लिखी थी, जिसमें उन्होंने भारत के इतिहास और संस्कृति पर बात की है.
🎯 Exam Tip: यह पुस्तक नेहरू ने जेल में रहते हुए लिखी थी और यह भारत के प्राचीन अतीत से लेकर स्वतंत्रता संग्राम तक का एक विस्तृत अवलोकन प्रदान करती है।
Question 5. उत्परिवर्तन का सिद्धांत किसने दिया?
(अ) डार्विन
(ब) वीजमैन
(स) ह्यूगो डी ब्रीज
(द) लैमार्क
Answer: (स) ह्यूगो डी ब्रीज
In simple words: ह्यूगो डी ब्रीज ने उत्परिवर्तन का सिद्धांत दिया, जिसमें कहा गया है कि जीव अचानक बड़े बदलावों (उत्परिवर्तन) के कारण विकसित होते हैं, न कि सिर्फ छोटे-छोटे बदलावों से.
🎯 Exam Tip: उत्परिवर्तन सिद्धांत ने विकासवादी जीव विज्ञान में एक नई दिशा दी, जिसमें आनुवंशिक भिन्नता के महत्व पर जोर दिया गया जो प्राकृतिक चयन के लिए कच्चा माल प्रदान करती है।
Question 1. ब्रह्माण्ड विज्ञान किसे कहते हैं?
Answer: ब्रह्मांड से संबंधित अध्ययन को ब्रह्मांड विज्ञान कहते हैं. यह विज्ञान ब्रह्मांड की उत्पत्ति, विकास, संरचना और उसके भविष्य को समझने का प्रयास करता है.
In simple words: ब्रह्मांड के बारे में पढ़ाई करने को ब्रह्मांड विज्ञान कहते हैं.
🎯 Exam Tip: ब्रह्मांड विज्ञान में भौतिकी, खगोल विज्ञान और दर्शनशास्त्र के सिद्धांत शामिल होते हैं।
Question 2. जैवकेन्द्रिकता के सिद्धान्त में किसको सम्मिलित किया गया ?
Answer: जैवकेन्द्रिकता के सिद्धांत में दर्शनशास्त्र से लेकर भौतिकशास्त्र के सिद्धांतों को सम्मिलित किया गया है. यह दृष्टिकोण जीवन को ब्रह्मांड के केंद्र में रखता है और इसके द्वारा सभी घटनाओं को समझने की कोशिश करता है.
In simple words: जैवकेन्द्रिकता के सिद्धांत में सोचने के तरीके (दर्शनशास्त्र) और विज्ञान (भौतिकशास्त्र) दोनों को मिलाया गया है.
🎯 Exam Tip: यह सिद्धांत मानता है कि वास्तविकता और ब्रह्मांड की संरचना को जीवन और चेतना के संदर्भ में ही समझा जा सकता है।
Question 3. एक्सापायरोटिक मॉडल के बारे में लिखिए।
Answer: प्रिंसटन विश्वविद्यालय के पॉल स्टेइंहार्ट ने एक्सापायरोटिक मॉडल प्रस्तुत कर कहा है कि ब्रह्मांड की उत्पत्ति दो त्रिविमीय ब्रह्मांडों के चौथी विमा में टकराने से हुई है. यह मॉडल बिगबैंग के कुछ पहलुओं को चुनौती देता है.
In simple words: एक्सापायरोटिक मॉडल कहता है कि हमारा ब्रह्मांड दो और ब्रह्मांडों के आपस में टकराने से बना है.
🎯 Exam Tip: यह मॉडल ब्रह्मांड के विस्तार और अन्य ब्रह्मांडीय घटनाओं को समझाने के लिए एक वैकल्पिक दृष्टिकोण प्रदान करता है।
Question 4. मिलर ने अपने प्रयोग के लिए कौनसा उपकरण निर्मित किया?
Answer: मिलर ने अपने प्रयोग के लिए एक विद्युत विसर्जन उपकरण बनाया, जिसे मिलर-युरे उपकरण के नाम से जाना जाता है. इस उपकरण का उपयोग प्रारंभिक पृथ्वी की परिस्थितियों को दोहराने के लिए किया गया था.
In simple words: मिलर ने अपने प्रयोग के लिए एक खास बिजली वाला यंत्र बनाया था.
🎯 Exam Tip: मिलर-युरे प्रयोग ने यह दर्शाया कि प्रारंभिक पृथ्वी पर अकार्बनिक पदार्थों से कार्बनिक अणु स्वाभाविक रूप से बन सकते हैं, जो जीवन की उत्पत्ति के लिए महत्वपूर्ण थे।
Question 5. मानव शरीर में पाए जाने वाले दो अवशेषांगों के नाम लिखिए।
Answer:
(i) निमेषक पटल
(ii) बाह्य कर्णपेशियाँ
ये दोनों अंग मानव शरीर में मौजूद हैं लेकिन अब उनका कोई महत्वपूर्ण कार्य नहीं है, जो विकासवादी परिवर्तनों को दर्शाता है.
In simple words: मानव शरीर में निमेषक पटल (आँख के कोने में छोटी परत) और कान की बाहरी मांसपेशियां दो ऐसे अंग हैं जिनका अब कोई काम नहीं है.
🎯 Exam Tip: अवशेषांगों का अध्ययन विकास के प्रमाण के रूप में किया जाता है, जो यह बताते हैं कि हमारे पूर्वजों में इन अंगों का कार्य होता था।
लघूत्तरात्मक प्रश्न
Question 1. आधुनिक पृथ्वी के वायुमण्डल में CO2 व N2 गैस कैसे बनी?
Answer: आधुनिक पृथ्वी के वायुमंडल में CO2 (कार्बन डाइऑक्साइड) व N2 (नाइट्रोजन) गैसें प्रकाशसंश्लेषी सूक्ष्म जीवों द्वारा मुक्त ऑक्सीजन के मीथेन व अमोनिया के साथ क्रिया करने से बनीं. ऑक्सीजन के बढ़ने से अन्य गैसों की रासायनिक क्रियाओं में बदलाव आया, जिससे ये गैसें स्थिर रूप से बनीं.
In simple words: ऑक्सीजन बनाने वाले छोटे-छोटे जीवों ने मीथेन और अमोनिया जैसी गैसों से मिलकर CO2 और N2 गैसें बनाईं.
🎯 Exam Tip: प्रकाशसंश्लेषण ने पृथ्वी के वायुमंडल को मूल अपचायक से ऑक्सीकारक में बदल दिया, जिससे आधुनिक वायुमंडल का निर्माण हुआ।
Question 3. पृथ्वी की उत्पत्ति के संदर्भ में हाल्डेन के विचार स्पष्ट कीजिये।
Answer: हाल्डेन के विचार- हाल्डेन ने पृथ्वी की उत्पत्ति से लेकर संकेन्द्रकीय कोशिका की उत्पत्ति तक की घटनाओं को आठ चरणों में विभाजित कर समझाया. हाल्डेन ने कहा कि सूर्य से अलग होकर पृथ्वी धीरे-धीरे ठंडी हुई तो उस पर कई प्रकार के तत्व बन गए. भारी तत्व पृथ्वी के केंद्र की ओर गए तथा हाइड्रोजन, नाइट्रोजन, ऑक्सीजन तथा ऑर्गन से प्रारंभिक वायुमंडल निर्मित हुआ. वायुमंडल के इन तत्वों के आपसी संयोग से अमोनिया व जलवाष्प बने. इस क्रिया में पूरी ऑक्सीजन काम आ जाने के कारण वायुमंडल अपचायक हो गया था. सूर्य के प्रकाश व विद्युत विसर्जन के प्रभाव से रासायनिक क्रियाओं का दौर चलता रहा और कालान्तर में अमीनो अम्ल, शर्करा, ग्लिसरॉल आदि अनेकानेक प्रकार के यौगिक बनते गए. इन यौगिकों के जल में विलेय होने से पृथ्वी पर पूर्वजैविक गर्म सूप बना जिसके ठंडे होने पर पृथ्वी का निर्माण हुआ. इस सिद्धांत को ओपेरिन-हाल्डेन सिद्धांत के रूप में भी जाना जाता है.
In simple words: हाल्डेन ने बताया कि पृथ्वी कैसे बनी, सूर्य से अलग हुई, ठंडी हुई, और फिर पानी व गैसों से पहला जीवन बनाने वाले पदार्थ बने.
🎯 Exam Tip: हाल्डेन का सिद्धांत जीवन की उत्पत्ति के लिए रासायनिक विकास के महत्व पर जोर देता है, जहां अजैविक स्रोतों से जटिल जैविक अणु बनते हैं।
Question 4. समजात व समवृत्ति अंग किसे कहते हैं?
Answer:
समजात अंग: विभिन्न वर्गों के जीवों के वे अंग जो संरचना और विकास में समान हों, लेकिन भिन्न-भिन्न कार्य करते हैं, समजात अंग कहलाते हैं. उदाहरण के लिए मेंढ़क के अग्रपाद, पक्षियों के पंख और मनुष्य के हाथ. ये अंग एक सामान्य पूर्वज से विकसित हुए हैं.
समवृत्ति अंग: विभिन्न वर्गों के जीवों में पाए जाने वाले वे अंग हैं जो समान क्रियाएँ करते हैं, लेकिन संरचना एवं विकास में भिन्न होते हैं, समवृत्ति अंग कहलाते हैं. उदाहरण के लिए पक्षी और कीट के पंख, चमगादड़ और पक्षी के पंख. ये अंग अभिसारी विकास का परिणाम होते हैं, जहाँ अलग-अलग पूर्वजों से विकसित जीवों में समान कार्य के लिए समान संरचनाएँ विकसित होती हैं.
In simple words: समजात अंग वे होते हैं जो देखने में एक जैसे होते हैं पर काम अलग करते हैं (जैसे मनुष्य का हाथ और चमगादड़ का पंख). समवृत्ति अंग वे होते हैं जो काम एक जैसा करते हैं पर देखने में अलग होते हैं (जैसे पक्षी और कीट के पंख).
🎯 Exam Tip: समजात अंग अपसारी विकास (Divergent Evolution) के प्रमाण हैं, जबकि समवृत्ति अंग अभिसारी विकास (Convergent Evolution) के प्रमाण हैं।
Question 5. जीवाश्म किसे कहते हैं? एक जीवाश्म पक्षी का नाम बताइये।
Answer: करोड़ों वर्षों पूर्व के जीवों के अवशेष या उनकी छाप पृथ्वी की चट्टानों में परिरक्षित रूप में पाई जाती है, इन्हें जीवाश्म कहते हैं. यह हमें प्राचीन जीवन और पृथ्वी के भूवैज्ञानिक इतिहास के बारे में जानकारी देते हैं. एक जीवाश्म पक्षी का नाम आर्कियोप्टेरिस है.
In simple words: बहुत पुराने जीवों के बचे हुए निशान जो पत्थरों में मिलते हैं, उन्हें जीवाश्म कहते हैं. आर्कियोप्टेरिस एक जीवाश्म पक्षी है.
🎯 Exam Tip: जीवाश्म केवल हड्डियों तक सीमित नहीं होते; वे पत्तियों, पैरों के निशान और अन्य जैविक संकेतों के रूप में भी हो सकते हैं जो अतीत के जीवन को दर्शाते हैं।
निबन्धात्मक प्रश्न
Question 1. मिलर के प्रयोग को चित्र द्वारा समझाइए।
Answer: मिलर के प्रयोग का आरेखीय निरूपण दर्शाता है कि उन्होंने एक गैसीय कक्ष में काँच की नलिकाओं द्वारा जुड़े दूसरे कक्ष में संघनित द्रव को एकत्रित किया. इस गैसीय कक्ष में प्रारंभिक पृथ्वी के वायुमंडल को दर्शाने वाली गैसें (मीथेन, अमोनिया, हाइड्रोजन और जलवाष्प) भरी थीं, जिसमें इलेक्ट्रोडों का उपयोग करके बिजली के डिस्चार्ज (जैसे बिजली) उत्पन्न किए गए. एक सप्ताह बाद इस द्रव का विश्लेषण करने पर पता चला कि इसमें एलानिन, ग्लाइसीन, ग्लिसरॉल व अन्य कार्बनिक पदार्थ थे. इस प्रयोग से यह निष्कर्ष निकला कि आज से 3-4 अरब वर्ष पूर्व पृथ्वी पर जीवन का उद्भव इसी प्रकार रासायनिक विकास की प्रक्रिया द्वारा हुआ होगा, जहाँ सरल अकार्बनिक अणुओं से जटिल जैविक अणु बने.
In simple words: मिलर ने एक प्रयोग किया जिसमें उन्होंने प्रारंभिक पृथ्वी जैसा माहौल बनाया. उन्होंने गैसों और बिजली का इस्तेमाल किया, और एक हफ्ते बाद उन्हें जीवन बनाने वाले कुछ जरूरी रसायन (जैसे अमीनो एसिड) मिले.
🎯 Exam Tip: मिलर-युरे प्रयोग ने अजैविक संश्लेषण (abiotic synthesis) की अवधारणा को मजबूती प्रदान की, जिसमें यह बताया गया कि जीवन के मूलभूत घटक अजैविक रूप से उत्पन्न हो सकते हैं।
Question 2. निम्न पर संक्षिप्त टिप्पणी लिखिए
(i) उपार्जित लक्षणों की वंशागति
(ii) प्राकृतिक वरण का सिद्धान्त
(iii) उत्परिवर्तनवाद।
Answer:
(i) उपार्जित लक्षणों की वंशागति- उपार्जित लक्षणों की वंशागति का सिद्धांत लैमार्क ने प्रतिपादित किया. इस सिद्धांत के अनुसार जीव के जीवन काल में वातावरण के परिवर्तन के कारण या अंगों के उपयोग तथा अनुपयोग से नए लक्षण बन जाते हैं, उन्हें उपार्जित लक्षण कहते हैं. ये लक्षण एक पीढ़ी से आगामी पीढ़ी में वंशागत होते रहते हैं. कई पीढ़ियों तक इन उपार्जित लक्षणों की वंशागति से नई पीढ़ियाँ उत्पन्न हो जाती हैं जो अपने पूर्वजों से भिन्न होती हैं. इस प्रकार एक नई जाति बन जाती है. लैमार्क ने अपने सिद्धांत की पुष्टि के लिए जिराफ के उदाहरण का इस्तेमाल किया, जिसमें उन्होंने बताया कि जिराफ की गर्दन लंबी क्यों हुई.
(ii) प्राकृतिक वरण का सिद्धांत – चार्ल्स डार्विन ने प्राकृतिक वरण का सिद्धांत प्रतिपादित किया. डार्विन ने प्राकृतिक वरण के माध्यम से जातियों की उत्पत्ति को समझाया. डार्विन ने कहा कि प्रत्येक जाति के जीव बड़ी संख्या में उत्पन्न होते हैं. कोई भी दो जीव एक समान नहीं होते. जीवों के अधिक होने पर उनमें भोजन, स्थान व अन्य साधनों के लिए संघर्ष होता है. संघर्ष होने पर प्रकृति के अनुसार जो सर्वश्रेष्ठ होता है उसकी संतानों की संख्या अधिक होती जाती है और एक नई जाति बन जाती है. यह सिद्धांत विकास का सबसे व्यापक रूप से स्वीकृत स्पष्टीकरण है.
(iii) उत्परिवर्तनवाद- ह्यूगो डी ब्रीज ने आइनोभे (Oenothera lamarckiana) पौधे की अनेक पीढ़ियों का अध्ययन कर पाया कि इनमें कुछ पौधों में परिवर्तन अकस्मात् हुए जिसे उन्होंने उत्परिवर्तन की संज्ञा दी. इनके अनुसार जीवों में नए एवं स्पष्ट लक्षणों की अचानक उत्पत्ति को उत्परिवर्तन कहा जाता है. इस सिद्धांत को 'उत्परिवर्तनवाद' कहते हैं. ह्यूगो डी ब्रीज के उत्परिवर्तन सिद्धांत (Mutation theory) के अनुसार नई जातियों की उत्पत्ति छोटे-छोटे क्रमिक भिन्नताओं के कारण नहीं होती बल्कि उत्परिवर्तन के फलस्वरूप नई जातियों की उत्पत्ति होती है. जैव विकास का मूल आधार विभिन्नताएँ (Variations) होती हैं. विभिन्नताएँ पर्यावरण के प्रभाव से या जीन ढाँचों में परिवर्तन के फलस्वरूप उत्पन्न होती हैं. ह्यूगो डी ब्रीज ने वंशागत विभिन्नताओं की उत्पत्ति का मूल कारण उत्परिवर्तन को बताया. अतः उत्परिवर्तन जैव विकास में सहायक होता है. उत्परिवर्तन से अचानक आनुवंशिक बदलाव आते हैं.
In simple words: (i) उपार्जित लक्षण वह हैं जो जीव अपने जीवन में सीखते हैं और फिर अगली पीढ़ी को देते हैं (जैसे लैमार्क ने बताया). (ii) प्राकृतिक वरण कहता है कि सबसे मजबूत जीव बचते हैं और उनकी अगली पीढ़ियां बनती हैं (जैसे डार्विन ने समझाया). (iii) उत्परिवर्तनवाद कहता है कि जीव में अचानक बड़े बदलाव आते हैं, जिससे नई प्रजातियां बनती हैं (जैसे ह्यूगो डी ब्रीज ने कहा).
🎯 Exam Tip: लैमार्क का सिद्धांत अब व्यापक रूप से स्वीकार्य नहीं है क्योंकि उपार्जित लक्षणों की वंशागति का कोई तंत्र नहीं मिला है, जबकि डार्विन और ह्यूगो डी ब्रीज के सिद्धांत आधुनिक विकासवादी जीव विज्ञान की नींव हैं।
Question 3. उदाहरण देकर समझाइए कि प्रकृति में जाति उद्भव कैसे होता है?
Answer: यदि झाड़ी पर पाए जाने वाले भृंग (बीटल) एक पर्वत श्रृंखला के वृहद् क्षेत्र में फैल जाएँ, तो समष्टि का आकार भी विशाल हो जाता है. परंतु व्यष्टि भृंग अपने भोजन के लिए जीवन भर अपने आस-पास की कुछ झाड़ियों पर निर्भर करते हैं. वे बहुत दूर नहीं जा सकते. अतः भृंगों की इस विशाल समष्टि के आस-पास उप-समष्टि होगी क्योंकि नर एवं मादा भृंग जनन के लिए आवश्यक है. अतः जनन प्रायः इन उप-समष्टियों के सदस्यों के मध्य ही होगा. हाँ, कुछ साहसी भृंग एक स्थान से दूसरे स्थान पर जा सकते हैं अथवा कौआ एक भृंग को एक स्थान से उठाकर बिना हानि पहुँचाए दूसरे स्थान पर छोड़ देता है. दोनों ही स्थितियों में आप्रवासी भृंग स्थानीय समष्टि के साथ ही जनन करेगा. समष्टियों में प्राकृतिक चयन का तरीका भी भिन्न होगा. भृंगों की इन पृथक् उप-समष्टियों में आनुवांशिक विचलन एवं प्राकृतिक-वरण (चयन) के संयुक्त प्रभाव के कारण प्रत्येक समष्टि एक-दूसरे से अधिक भिन्न होती जाती है. यह भी संभव है कि अंततः इन समष्टियों के सदस्य आपस में एक-दूसरे से मिलने के बाद भी अंतरप्रजनन में असमर्थ हों. इस प्रकार भृंग की नई जाति (स्पीशीज) बन जाती है. एक भौगोलिक बाधा, जैसे पहाड़ या नदी, विभिन्न समूहों को अलग कर सकती है, जिससे वे अलग-अलग विकासवादी पथों पर चलते हैं.
In simple words: जाति उद्भव तब होता है जब एक ही प्रजाति के जीव अलग-अलग जगहों पर रहने लगते हैं और समय के साथ इतने बदल जाते हैं कि वे आपस में प्रजनन नहीं कर पाते. जैसे, कुछ भृंगों का समूह पहाड़ों में अलग होने से धीरे-धीरे नई प्रजाति बन गया.
🎯 Exam Tip: जाति उद्भव (Speciation) के लिए भौगोलिक अलगाव (Geographical Isolation) एक महत्वपूर्ण कारक है, क्योंकि यह जीन प्रवाह को रोकता है और उप-समष्टियों को स्वतंत्र रूप से विकसित होने देता है।
Question 4. जैव विकास के सिद्धान्त डार्विनवाद को समझाइए।
Answer: डार्विनवाद के कुछ मुख्य तथ्य एवं आधार:
(1) प्रत्येक प्राणी में संतानोत्पत्ति की प्रचुर शक्ति: संसार के प्रत्येक प्राणी में अधिक से अधिक संतान उत्पन्न कर परिवार वृद्धि करने की भावना एवं शक्ति होती है. इससे संसाधनों पर दबाव बढ़ता है.
(2) जीवन संघर्ष: सभी प्राणियों को पैदा होते ही जल, भोजन, प्रकाश एवं सुरक्षित स्थान आदि की आवश्यकता होती है. जब अधिक संख्या में प्राणी पैदा हो जाते हैं तो अपनी इन आवश्यकताओं की पूर्ति के लिए सभी प्राणियों में संघर्ष छिड़ जाता है. यह संघर्ष निम्न तीन प्रकार का हो सकता है –
(i) अन्तर्जातीय संघर्ष (Inter-specific struggle): यह केवल एक ही जाति के प्राणियों के बीच होता है.
(ii) अंतरा-जातीय संघर्ष (Intra-specific struggle): यह संघर्ष भिन्न-भिन्न जातियों के प्राणियों के बीच होता है.
(iii) जीवों तथा वातावरण कारकों के बीच संघर्ष: यह संघर्ष जीवों तथा वातावरण के अनेक कारकों (जैसे ताप, वायु, जल आदि) के बीच चलता रहता है. इस संघर्ष में अधिकतर प्राणी मर जाते हैं. डार्विन के मतानुसार वातावरण के अनुकूलन (adaptability) जीवन संघर्ष में सफलता के लिए अधिक महत्वपूर्ण है. अनुकूलन की क्रिया में सबल तथा उपयुक्त जीव ही सफल हो पाते हैं. कमजोर, निकम्मे तथा असमर्थ जीव इसमें नष्ट हो जाते हैं. जो जीव अपने पर्यावरण के लिए सबसे उपयुक्त होते हैं, वे जीवित रहने में सफल होते हैं.
(3) विभिन्नताएँ एवं आनुवांशिकता: संसार में मिलने वाले एक ही जाति के प्राणियों में कुछ-न-कुछ भिन्नता अवश्य होती है, जैसे मानव जाति में मोहन और डेविड को, हरि और कृष्ण को तथा प्रीति और प्रियंका को उनकी भिन्नताओं के आधार पर पहचाना जा सकता है. इन भिन्नताओं में जीवों के लिए कुछ तो बेकार होती हैं, कुछ हानिकारक तथा कुछ लाभदायक होती हैं. प्रकृति में जीव लाभदायक, उपयोगी भिन्नताओं के कारण ही जीवित रहते हैं. धीरे-धीरे ये लाभदायक विभिन्नताएँ स्थायी हो जाती हैं और संतानों में चली जाती हैं. इसी कारण नई जातियाँ उत्पन्न होती रहती हैं.
(4) योग्यतम की उत्तरजीविता: डार्विन के अनुसार जीवन संघर्ष में केवल वही प्राणी सफलता प्राप्त करते हैं जिनमें उस वातावरण के प्रति लाभदायक विभिन्नताएँ उत्पन्न हो जाती हैं अर्थात् वातावरण में रहने के लिए सबसे योग्य होते हैं. जिन प्राणियों में वातावरण के अनुकूल विभिन्नताएँ नहीं होती हैं, कुछ समय बाद नष्ट हो जाते हैं. वातावरण में योग्य जीवों का जीवित रहना ही योग्यतम की उत्तरजीविता कहलाती है. जो विभिन्नताएँ लाभदायक होती हैं वे एक पीढ़ी से दूसरी पीढ़ी में पहुँचती रहती हैं. ये विभिन्नताएँ एकत्र होती जाती हैं, जिससे नई प्रजातियाँ बनती हैं.
In simple words: डार्विनवाद कहता है कि जीव बहुत बच्चे पैदा करते हैं, फिर वे खाने-पीने और जगह के लिए आपस में लड़ते हैं. जो जीव माहौल के हिसाब से सबसे अच्छे होते हैं, वही बच पाते हैं और उनकी संतानें आगे बढ़ती हैं, जिससे नई प्रजातियां बनती हैं.
🎯 Exam Tip: डार्विन का प्राकृतिक चयन का सिद्धांत जैव विकास को समझने के लिए केंद्रीय है, जो जीवों में भिन्नता, अधिक प्रजनन और पर्यावरण के साथ अनुकूलन पर आधारित है।
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