Get the most accurate RBSE Solutions for Class 10 Science Chapter 14 पादप एवं जन्तुओं के आर्थिक महत्त्व here. Updated for the 2026-27 academic session, these solutions are based on the latest RBSE textbooks for Class 10 Science. Our expert-created answers for Class 10 Science are available for free download in PDF format.
Detailed Chapter 14 पादप एवं जन्तुओं के आर्थिक महत्त्व RBSE Solutions for Class 10 Science
For Class 10 students, solving RBSE textbook questions is the most effective way to build a strong conceptual foundation. Our Class 10 Science solutions follow a detailed, step-by-step approach to ensure you understand the logic behind every answer. Practicing these Chapter 14 पादप एवं जन्तुओं के आर्थिक महत्त्व solutions will improve your exam performance.
Class 10 Science Chapter 14 पादप एवं जन्तुओं के आर्थिक महत्त्व RBSE Solutions PDF
बहुचयनात्मक प्रश्न
Question 1. निम्न में से कौनसा पादप अनाज नहीं है
(क) गेहूँ।
(ख) चावल
(ग) जौ
(घ) चना
Answer: (घ) चना
In simple words: गेहूँ, चावल और जौ अनाज की फसलें हैं, जबकि चना एक दाल है, जिसे अनाज नहीं माना जाता। दालें प्रोटीन का अच्छा स्रोत होती हैं।
🎯 Exam Tip: अनाज और दालों के मुख्य उदाहरणों को याद रखें, क्योंकि वे अलग-अलग पोषण प्रदान करते हैं और फसलों के रूप में भी भिन्न होते हैं।
Question 2. इमारती लकड़ी (काष्ठ) पादप का कौनसा भाग है
(क) प्राथमिक फ्लोएम
(ख) द्वितीयक फ्लोएम
(ग) प्राथमिक जाइलम
(घ) द्वितीयक जाइलम
Answer: (घ) द्वितीयक जाइलम
In simple words: पेड़ का द्वितीयक जाइलम ही मुख्य रूप से काष्ठ या लकड़ी बनाता है, जिसका उपयोग इमारती कामों में होता है। यह पेड़ को मजबूती देता है।
🎯 Exam Tip: याद रखें कि जाइलम पानी और खनिज को ऊपर ले जाता है, जबकि फ्लोएम भोजन को पेड़ के विभिन्न हिस्सों तक पहुँचाता है। द्वितीयक जाइलम पेड़ की उम्र बढ़ने के साथ बनता है।
Question 3. अफीम का कौनसा भाग औषधीय महत्त्व का है?
(क) जड़
(ख) तना
(ग) पुष्प
(घ) फल
Answer: (घ) फल
In simple words: अफीम के पौधे का फल ही सबसे महत्वपूर्ण हिस्सा होता है जिससे औषधीय पदार्थ निकाले जाते हैं। यह सूखने के बाद एक कैप्सूल जैसा दिखता है।
🎯 Exam Tip: कई औषधीय पौधों में विशिष्ट भाग होते हैं जिनका उपयोग दवा बनाने के लिए किया जाता है; उन विशिष्ट भागों को याद रखना महत्वपूर्ण है।
Question 4. राजस्थान का राज्य वृक्ष है
(क) प्रोसोपिस सिनेरेरिया
(ख) प्रोसोपिस चाइलेन्सिस
(ग) एकेशिया सेनेगल
(घ) टेकोमेला अन्डूलेटा
Answer: (क) प्रोसोपिस सिनेरेरिया
In simple words: प्रोसोपिस सिनेरेरिया, जिसे खेजड़ी भी कहते हैं, राजस्थान का राज्य वृक्ष है। यह पेड़ रेगिस्तानी इलाकों में बहुत महत्वपूर्ण होता है क्योंकि यह पानी की कमी में भी जीवित रह सकता है।
🎯 Exam Tip: राज्य के प्रतीकों (वृक्ष, पुष्प, पक्षी आदि) को याद रखना सामान्य ज्ञान और भूगोल के प्रश्नों के लिए महत्वपूर्ण है।
Question 6. मधुमक्खी पालन कहलाता है
(क) सेरिकल्चर
(ख) सिल्विकल्चर
(ग) एपिकल्चर
(घ) उपरोक्त सभी
Answer: (ग) एपिकल्चर
In simple words: मधुमक्खी पालन को एपिकल्चर कहते हैं, जिसमें शहद और मोम के लिए मधुमक्खियों को पाला जाता है। यह एक लाभदायक व्यवसाय है।
🎯 Exam Tip: विभिन्न प्रकार के पशुपालन या कृषि पद्धतियों के वैज्ञानिक नामों को याद रखें (जैसे मत्स्य पालन को पिसीकल्चर कहते हैं)।
Question 7. मधुमक्खी के छत्ते में कितने प्रकार की मक्खियाँ पाई जाती हैं ?
(क) एक
(ख) दो
(ग) तीन
(घ) चार
Answer: (ग) तीन
In simple words: मधुमक्खी के छत्ते में तीन तरह की मक्खियाँ होती हैं: रानी मधुमक्खी, श्रमिक मधुमक्खी और नर मधुमक्खी (ड्रोन)। हर किसी का अपना खास काम होता है।
🎯 Exam Tip: मधुमक्खी के छत्ते में प्रत्येक प्रकार की मधुमक्खी की भूमिका को समझें, क्योंकि उनके विशिष्ट कार्य छत्ते के सफल संचालन के लिए महत्वपूर्ण हैं।
Question 8. रेशम प्राप्त किया जाता है
(क) वयस्क कीट
(ख) प्यूपा
(ग) कोकून
(घ) अण्डा
Answer: (ग) कोकून
In simple words: रेशम, रेशम कीट के कोकून से मिलता है, जो लार्वा अवस्था के बाद बनता है। कोकून रेशम के धागों से बना एक सुरक्षात्मक आवरण होता है।
🎯 Exam Tip: रेशम के कीट के जीवन चक्र के विभिन्न चरणों को याद रखें और पहचानें कि रेशम किस विशिष्ट चरण से प्राप्त होता है।
Question 9. मुर्गीपालन का प्रमुख उत्पाद है
(क) अण्डा
(ख) ऊन
(ग) दूध
(घ) उपरोक्त सभी
Answer: (क) अण्डा
In simple words: मुर्गीपालन मुख्य रूप से अंडे और मांस (चिकन) के लिए किया जाता है। अंडा एक बहुत ही पौष्टिक खाद्य पदार्थ है।
🎯 Exam Tip: विभिन्न पशुपालन विधियों (जैसे भेड़, गाय, मधुमक्खी, मुर्गी) के मुख्य उत्पादों को स्पष्ट रूप से जानें।
अतिलघूत्तरात्मक प्रश्न
Question 10. रबी फसलों के रूप में बोये जाने वाले एक अनाज का नाम लिखिये।
Answer: गेहूँ। रबी की फसलें आमतौर पर सर्दियों में बोई जाती हैं और वसंत ऋतु में काटी जाती हैं।
In simple words: रबी की फसल के रूप में बोया जाने वाला एक अनाज गेहूँ है।
🎯 Exam Tip: खरीफ और रबी की फसलों के उदाहरणों को याद रखें, साथ ही उन्हें बोने और काटने का समय भी।
Question 11. गेहूँ की दो उन्नत किस्मों के नाम लिखिए।
Answer: सोनालिका एवं कल्याण सोना। ये किस्में उच्च उपज और रोगों के प्रति प्रतिरोध के लिए विकसित की गई हैं।
In simple words: गेहूँ की दो अच्छी किस्में सोनालिका और कल्याण सोना हैं।
🎯 Exam Tip: महत्वपूर्ण फसलों की उन्नत किस्मों को याद रखना फसल सुधार और पैदावार बढ़ाने के महत्व को दर्शाता है।
Question 12. सर्वाधिक प्रोटीन युक्त दाल का नाम लिखिए।
Answer: सोयाबीन। सोयाबीन में अन्य दालों की तुलना में काफी अधिक मात्रा में प्रोटीन होता है।
In simple words: सबसे ज्यादा प्रोटीन वाली दाल सोयाबीन है।
🎯 Exam Tip: प्रोटीन के सबसे अच्छे स्रोतों को याद रखें, खासकर शाकाहारी आहार के लिए।
Question 13. जड़ व तने से प्राप्त दो-दो सब्जियों के नाम लिखिये।
Answer:
जड़ों से प्राप्त-
• गाजर-डॉकस कैरोटा (Daucas Carrota)
• मूली-रेफेनस सेटाइवस (Raphanus sativus)
तने से प्राप्त
• आलू-सोलेनम ट्यूबरोसम (Solanuni tuberoStum)
• अरबी-कोलोकेसिया एस्कलेन्टा (Colocasia esculenta)
जड़ वाली सब्जियाँ मिट्टी के नीचे बढ़ती हैं, जबकि तने वाली सब्जियाँ पौधे के ऊपरी भाग का हिस्सा होती हैं।
In simple words: जड़ वाली सब्जियाँ गाजर और मूली हैं। तने वाली सब्जियाँ आलू और अरबी हैं।
🎯 Exam Tip: विभिन्न सब्जियों के पौधे के किस भाग से प्राप्त होती हैं, यह जानना उपयोगी है, जैसे जड़, तना, पत्ती या फल।
Question 15. दो औषधीय पादपों के वैज्ञानिक नाम लिखिये।
Answer:
• हल्दी-कुरकुमा लौंगा (Curcuma tonga)
• सर्पगन्धा-रॉवल्फिया सर्पेन्टाइना (Rauwolfia Serpentina)
औषधीय पौधे बीमारियों के इलाज और स्वास्थ्य को बनाए रखने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।
In simple words: हल्दी (वैज्ञानिक नाम: कुरकुमा लौंगा) और सर्पगन्धा (वैज्ञानिक नाम: रॉवल्फिया सर्पेन्टाइना) दो औषधीय पौधे हैं।
🎯 Exam Tip: कुछ सामान्य औषधीय पौधों के सामान्य और वैज्ञानिक दोनों नामों को याद रखें।
Question 16. राजस्थान का राज्य पुष्प कौनसा है ?
Answer: रोहिड़ा या मारवाड़ सागवान-टेकोमेला अन्डुलेटा (Tecomella undulata)। इसका आकर्षक नारंगी-पीले रंग का फूल रेगिस्तानी क्षेत्र की सुंदरता बढ़ाता है।
In simple words: राजस्थान का राज्य पुष्प रोहिड़ा है, जिसका वैज्ञानिक नाम टेकोमेला अन्डुलेटा है।
🎯 Exam Tip: राज्य के प्रतीकों को याद रखना परीक्षा में सामान्य ज्ञान के प्रश्नों के लिए महत्वपूर्ण है।
Question 17. भैंस की दो देशी अच्छी नस्लों के नाम लिखिये ।
Answer: जाफराबादी, मेहसाना। ये नस्लें दूध उत्पादन के लिए जानी जाती हैं।
In simple words: जाफराबादी और मेहसाना भैंस की दो अच्छी भारतीय नस्लें हैं।
🎯 Exam Tip: पशुओं की विभिन्न नस्लों और उनके मुख्य गुणों (जैसे दूध उत्पादन या मांस) को याद रखें।
Question 18. मधुमक्खी पालन के दो उत्पाद कौन से हैं?
Answer: शहद तथा मधुमोम। शहद मुख्य रूप से भोजन के रूप में उपयोग होता है, जबकि मोम का उपयोग विभिन्न उद्योगों में किया जाता है।
In simple words: मधुमक्खी पालन से शहद और मधुमोम मिलते हैं।
🎯 Exam Tip: एपिकल्चर (मधुमक्खी पालन) के महत्व और उसके उत्पादों को समझें।
Question 19. रेशमकीट किस वृक्ष की पत्तियों पर पाले जाते हैं ?
Answer: शहतूत की पत्तियों पर पाले जाते हैं। शहतूत की पत्तियाँ रेशम कीट का मुख्य भोजन होती हैं।
In simple words: रेशम कीट को शहतूत के पेड़ की पत्तियों पर पाला जाता है।
🎯 Exam Tip: रेशम कीट के लिए भोजन स्रोत का महत्व समझें, क्योंकि यह रेशम की गुणवत्ता को प्रभावित करता है।
Question 20. मछली पालन के लिए कौनसा जल अधिक उपयुक्त माना जाता है?
Answer: मीठा जल। मीठे पानी में मछलियों की कई प्रजातियाँ तेजी से बढ़ती हैं।
In simple words: मछली पालन के लिए मीठा पानी सबसे अच्छा होता है।
🎯 Exam Tip: मछली पालन के लिए आवश्यक पर्यावरणीय कारकों, जैसे पानी का प्रकार और गुणवत्ता, को जानें।
कुक्कुट पालन
Question 22. भेड़ की एक देशी अच्छी नस्ल का नाम लिखिये।
Answer: लोही। यह नस्ल अच्छी गुणवत्ता वाली ऊन और मांस उत्पादन के लिए प्रसिद्ध है।
In simple words: भेड़ की एक अच्छी भारतीय नस्ल का नाम लोही है।
🎯 Exam Tip: भारत में पाई जाने वाली पशुओं की प्रमुख नस्लों और उनकी विशेषताओं को याद रखना चाहिए।
लघूत्तरात्मक प्रश्न
Question 23. अनाज उत्पादक दो पादपों के वानस्पतिक नाम लिखिये।
Answer:
• गेहूँ-ट्रिटिकम एस्टाइवम (Triticum aestivum)
• चावल-ओराइजी सेटाइवा (Oryza sativa)
ये दोनों अनाज दुनिया भर में लोगों के लिए मुख्य भोजन का स्रोत हैं।
In simple words: दो अनाज उगाने वाले पौधों के वैज्ञानिक नाम गेहूँ (ट्रिटिकम एस्टाइवम) और चावल (ओराइजी सेटाइवा) हैं।
🎯 Exam Tip: मुख्य फसलों के वैज्ञानिक नामों को याद रखना जीव विज्ञान और कृषि विज्ञान के लिए महत्वपूर्ण है।
Question 24. चार मसाला उत्पादक पादपों का नाम लिखिये।
Answer:
1. जीरा
2. लाल मिर्च
3. सौंफ
4. धनिया
ये सभी मसाले भोजन को स्वाद और सुगंध देते हैं और कई औषधीय गुणों के लिए भी जाने जाते हैं।
In simple words: जीरा, लाल मिर्च, सौंफ और धनिया चार मसाले उगाने वाले पौधे हैं।
🎯 Exam Tip: मसालों के औषधीय और पाक दोनों उपयोगों को पहचानना उनकी आर्थिक और सांस्कृतिक महत्व को दर्शाता है।
Question 25. काष्ठ किसे कहते हैं? एक इमारती काष्ठ उत्पादक पादप का नाम लिखिये।
Answer: बहुवर्षीय द्विबीजपत्री एवं अनावृत्तबीजी वृक्षों से बनने वाले द्वितीयक जाइलम को काष्ठ कहते हैं। सागवान (Tectona grandis) की काष्ठ का उपयोग इमारती काष्ठ के रूप में किया जाता है। काष्ठ पेड़ के तने का कठोर और रेशेदार हिस्सा होता है।
In simple words: काष्ठ वह लकड़ी है जो पुराने पेड़ों के द्वितीयक जाइलम से बनती है। सागवान एक पेड़ है जिसकी लकड़ी इमारती काम आती है।
🎯 Exam Tip: काष्ठ की परिभाषा और इसके स्रोतों को स्पष्ट रूप से समझें, विशेष रूप से विभिन्न प्रकार के पेड़ों से प्राप्त इमारती लकड़ी के संदर्भ में।
Question 26. औषधीय महत्त्व के दो पादपों के वैज्ञानिक नाम लिखिये।
Answer:
• सर्पगन्धा-रॉवल्फिया सर्पेन्टाइना (Rauwolfia serpentina)
सर्पगन्धा का उपयोग उच्च रक्तचाप और नींद संबंधी समस्याओं के इलाज के लिए किया जाता है।
In simple words: औषधीय महत्व के दो पौधों के वैज्ञानिक नाम सर्पगन्धा (रॉवल्फिया सर्पेन्टाइना) हैं।
🎯 Exam Tip: औषधीय पौधों के नामों के साथ उनके सामान्य उपयोगों को भी याद रखें।
Question 28. पशुपालन क्यों आवश्यक है?
Answer: पशुपालन का अर्थव्यवस्था में बहुत महत्त्व है। भारत में तो यह और भी अधिक है। पशुओं से हमें अनेक उपयोगी पदार्थ प्राप्त होते हैं। पशुपालन से हमें दूध, अण्डे, मांस, ऊन आदि प्राप्त होते हैं। यह ग्रामीण अर्थव्यवस्था का एक महत्वपूर्ण हिस्सा है।
In simple words: पशुपालन बहुत जरूरी है क्योंकि यह हमारी अर्थव्यवस्था को मजबूत करता है और हमें दूध, अंडे, मांस और ऊन जैसे कई उपयोगी चीजें देता है।
🎯 Exam Tip: पशुपालन के बहुआयामी लाभों पर ध्यान दें, जिनमें खाद्य उत्पादन, आय सृजन और ग्रामीण विकास शामिल हैं।
Question 29. रेशम प्राप्त करने की विधि समझाइये।
Answer: रेशम कीट के अण्डों से लार्वा बाहर आता है, जिसे कैटरपिलर कहते हैं। लार्वा में एक जोड़ी लार ग्रन्थियाँ होती हैं, जिन्हें रेशम ग्रन्थियाँ कहते हैं। जब ये पूर्ण विकसित हो जाते हैं, तब यह रेशम का स्रवण द्रव के रूप में करते हैं जो हवा के सम्पर्क में आने पर कठोर हो जाता है। कुछ समय बाद लार्वा भोजन करना बन्द कर देता है व इससे फिर कोकून बनता है जो चारों ओर रेशम का स्रावण कर स्वयं उसमें पूर्णतः बन्द हो जाता है। इस प्रक्रिया को सेरीकल्चर कहते हैं।
In simple words: रेशम कीट अंडे से कैटरपिलर (लार्वा) बनता है। यह कैटरपिलर अपने चारों ओर एक धागा लपेटकर कोकून बनाता है। इसी कोकून से रेशम मिलता है।
🎯 Exam Tip: रेशम कीट के जीवन चक्र के चरणों (अंडा, लार्वा, प्यूपा, वयस्क) को क्रमबद्ध तरीके से याद करें और समझें कि रेशम कोकून से कैसे प्राप्त होता है।
Question 30. मुर्गियों में होने वाले रोगों के नाम लिखिये।।
Answer: मुर्गियों में एक वायरसजनित रानीखेत नामक प्रमुख रोग हो जाता है। चेचक, हैजा आदि भी मुर्गियों में होता है। इन रोगों से बचाव के लिए उचित टीकाकरण और स्वच्छता बहुत जरूरी है।
In simple words: मुर्गियों को रानीखेत, चेचक और हैजा जैसे कई रोग हो सकते हैं।
🎯 Exam Tip: पोल्ट्री फार्मिंग में रोगों की रोकथाम और नियंत्रण के महत्व को समझें, जिसमें टीकाकरण और स्वच्छ वातावरण शामिल हैं।
Question 31. भैंस एवं गाय की दो-दो देशी नस्लों के नाम लिखिये।
Answer: भैंस-मुर्रा, मेहसाना। गाय-गिर, साहिवाल। ये सभी नस्लें अपनी उच्च दूध उत्पादन क्षमता के लिए जानी जाती हैं।
In simple words: भैंस की मुर्रा और मेहसाना अच्छी नस्लें हैं। गाय की गिर और साहिवाल अच्छी नस्लें हैं।
🎯 Exam Tip: पशुधन की प्रमुख नस्लों और उनके मुख्य उत्पादों (जैसे दूध) के लिए उनकी उपयोगिता को याद रखें।
Question 32. मधुमक्खी के छत्ते में पाई जाने वाली मक्खियों के नाम लिखिये।
Answer: मधुमक्खी के छत्ते में श्रमिक, नर तथा रानी मक्खियाँ मिलती हैं। प्रत्येक प्रकार की मक्खी का छत्ते में एक विशिष्ट कार्य होता है।
In simple words: मधुमक्खी के छत्ते में श्रमिक, नर और रानी मधुमक्खियाँ होती हैं।
🎯 Exam Tip: मधुमक्खी के छत्ते के सामाजिक संगठन को जानें, जिसमें प्रत्येक प्रकार की मधुमक्खी की भूमिका और जिम्मेदारियाँ शामिल हैं।
Question 34. औषधीय पादपों का वर्णन कीजिये।
Answer: औषधीय पादप वे पौधे होते हैं जिनका उपयोग विभिन्न बीमारियों के इलाज या स्वास्थ्य को बनाए रखने के लिए किया जाता है। ये प्रकृति द्वारा दिए गए महत्वपूर्ण संसाधन हैं। इन्हें पौधे के विभिन्न भागों से प्राप्त किया जा सकता है:
• हल्दी-कुरकुमा लौंगा (Curcuma longa)
• अदरक-जिन्जिबर ऑफिसिनेल (Zingiber officinale)
• लहसुन-एलियम सेटाइवम (Allium sativum)
• गूगल-कोमिफोरा वाइटाई (Connnniphora wightii) आदि।
(2) मूल से प्राप्त-
• सर्पगन्धा-रॉवल्फिया सर्पेन्टाइना (Rauwolfia serpentina)
• सफेद मूसली-क्लोरोफाइटम ट्यूबरोसम (Chlorophytum tuberoStum)
• अश्वगंधा-विथानिया सोम्नीफेरा (Withania somnifera) आदि।
(3) छाल से प्राप्त
• कुनैन-सिनकोना ऑफिसिनेलिस (Cinchona officinalis)
• अर्जुन-टर्मिनेलिया अर्जुना (Terminalia arjuna) आदि।
(4) पर्ण से प्राप्त
• ग्वारपाठा-एलोय वेरा (Aloe vera)
• तुलसी-ओसिमम सेन्कटम (Ocimum sanctum)
• ब्राह्मी-सेन्टेला एशियाटिका (Centella asiatica) आदि।
(5) फल से प्राप्त
• अफीम-पेपेवर सोम्निफेरम (Papaver somniferum)
• आँवला-एम्बलिका ऑफिसिनेलिस (Emblica officinalis) आदि।
In simple words: औषधीय पौधे वे होते हैं जिनसे दवाएँ बनाई जाती हैं। इन्हें जड़ों, तनों, छाल, पत्तियों या फलों से प्राप्त किया जा सकता है। हल्दी, सर्पगन्धा, तुलसी और अफीम कुछ उदाहरण हैं।
🎯 Exam Tip: औषधीय पौधों को उनके वानस्पतिक नाम और पौधे के उस भाग के साथ याद करें जिससे औषधीय गुण प्राप्त होते हैं।
Question 35. रेशे उत्पादक व इमारती काष्ठ उत्पादक पादपों का वर्णन कीजिये।
Answer: रेशे उत्पादक पौधे वे होते हैं जिनसे रेशे प्राप्त होते हैं, जिनका उपयोग वस्त्र, रस्सी और अन्य चीजें बनाने में होता है। इमारती काष्ठ उत्पादक पौधे वे होते हैं जिनसे मजबूत लकड़ी मिलती है, जिसका उपयोग फर्नीचर, घर और खिड़कियाँ बनाने में किया जाता है। ये पौधे हमारे दैनिक जीवन में बहुत उपयोगी हैं।
रेशे उत्पादक पादप:
1. कपास या रुई-गोसिपियम जातियाँ (Gossypium spp.)- इसके रेशे बीज के बाहरी आवरण से प्राप्त होते हैं। इसका उपयोग कपड़ा और तकिये बनाने में होता है।
2. सन या सनई-क्रोटोलेरिया जुन्शिया (Crotolaria junced)- इसके रेशे तने से प्राप्त होते हैं। इसका उपयोग रस्से बनाने में किया जाता है।
3. नारियल-कोकोस न्यूसिफेरा (Cocos nucifera)- इसके रेशे फलों के बाहरी आवरण से प्राप्त होते हैं, जिन्हें 'कोयर' कहते हैं। इनसे गद्दे और रस्सियाँ बनाई जाती हैं।
इमारती काष्ठ (Timber)-बहुवर्षीय द्विबीजपत्री एवं अनावृतबीजी वृक्षों में बनने वाले द्वितीयक जाइलम को काष्ठ कहते हैं। वह काष्ठ जिससे फर्नीचर, दरवाजे, खिड़कियाँ आदि बनायी जाती हैं, उसे इमारती काष्ठ कहते हैं। कुछ प्रमुख इमारती काष्ठ उत्पादक वृक्ष निम्न प्रकार से हैं:
1. सागवान-टेक्टोना ग्रेन्डिस (Tectona grandis)
2. साल-सोरिया रोबस्टा (Shorea robusta)
3. शीशम-डल्वर्जिया सिस्सू (Dalbergia sissoo)
4. रोहिडा या मारवाड़ सागवान-टेकोमेला अन्ड्रलेटा (Tecomella undulata)
5. खेजड़ी (राज्य वृक्ष)-प्रोसोपिस सिनेरेरिया (Prosopis Cineraria)
6. देवदार-सिडूस देवदारा (Cedrus deodara)
In simple words: रेशे उत्पादक पौधों से कपड़े और रस्सियाँ बनती हैं, जैसे कपास, सन और नारियल। इमारती काष्ठ उत्पादक पौधों से मजबूत लकड़ी मिलती है, जिससे फर्नीचर और घर बनते हैं, जैसे सागवान, साल और खेजड़ी।
🎯 Exam Tip: रेशेदार और इमारती लकड़ी वाले पौधों के नाम, उनसे प्राप्त होने वाले उत्पाद और उन उत्पादों के उपयोग को स्पष्ट रूप से याद रखें।
Question 36. डेयरी उद्योग पर लेख लिखिये।
Answer: भारतीय अर्थव्यवस्था में पशुपालन का विशेष महत्त्व है। कृषि विज्ञान की वह शाखा है जिसके अन्तर्गत पालतू पशुओं के भोजन, आवास, स्वास्थ्य, प्रजनन आदि का अध्ययन किया जाता है, उसे पशुपालन (Animal husbandry) कहते हैं। अर्थव्यवस्था में दुग्ध उत्पादन का विशेष योगदान है। देश के कुल दुग्ध उत्पादन का 53 प्रतिशत भैसों व 43 प्रतिशत गायों से प्राप्त होता है। दुग्ध उत्पादन की दृष्टि से भारत विश्व में प्रथम स्थान पर है। प्राचीन काल से मानव कुछ पशुओं को पालतू कर उनका दूध अपने पोषण हेतु उपयोग करता रहा है। वर्तमान में दुग्ध उत्पादन डेयरी उद्योग का एक प्रमुख व लाभकारी व्यवसाय बन गया है। दुग्ध उत्पादन की दृष्टि से भैंस अधिक महत्त्वपूर्ण मानी जाती है। जाफराबादी, मुर्रा, सूखी, भदावरी व मेहसाना आदि भैंस की अच्छी नस्लें हैं। इसी प्रकार गाय की कुछ अच्छी नस्लें इस प्रकार हैं-गिर, साहिवाल, सिन्ध, देवकी, हरियाणा आदि। कुछ स्थानों पर बकरी का पालन भी दुग्ध उत्पादन के लिए किया जाता है। सिरोही, बारबरी, कश्मीरी पश्मीना, जमनापरी आदि बकरी की अच्छी नस्लें हैं। डेयरी उद्योग रोजगार के अवसर भी पैदा करता है।
In simple words: डेयरी उद्योग पशुपालन का एक बड़ा हिस्सा है, जो दूध उत्पादन पर केंद्रित है। भारत में भैंस और गाय मुख्य दूध उत्पादक पशु हैं। इससे हमें दूध मिलता है और यह किसानों के लिए आय का एक महत्वपूर्ण साधन है।
🎯 Exam Tip: डेयरी उद्योग के आर्थिक महत्व और भारत में दूध उत्पादन के लिए पाली जाने वाली गायों और भैंसों की प्रमुख नस्लों को याद रखें।
Question 37. मधुमक्खी पालन में मक्खियों के श्रम विभाजन को समझाइये तथा इनका महत्त्व लिखिये।
Answer: मधुमक्खी एक सामाजिक कीट है। मधुमक्खी के छत्ते में तीन प्रकार की मक्खियाँ होती हैं: रानी मधुमक्खी, श्रमिक मधुमक्खी और नर मधुमक्खी (ड्रोन)। इनके बीच काम बंटा होता है।
रानी मधुमक्खी: यह छत्ते में केवल एक होती है और इसका मुख्य काम अंडे देना है। यह पूरी कॉलोनी की माँ होती है।
श्रमिक मधुमक्खी: ये सबसे अधिक संख्या में होती हैं और मादा होती हैं, लेकिन अंडे नहीं दे सकतीं। ये छत्ते के सारे काम करती हैं, जैसे पराग और अमृत इकट्ठा करना, शहद बनाना, छत्ता बनाना, छत्ते की सफाई करना और रानी व बच्चों की देखभाल करना। इनके डंक में विष होता है जिसका उपयोग ये शत्रु से बचाव हेतु करती हैं।
नर मधुमक्खी (ड्रोन): ये कम संख्या में होते हैं और इनका एकमात्र काम रानी मधुमक्खी के साथ प्रजनन करना है। ये भोजन इकट्ठा नहीं करते।
मधुमक्खी पालन का महत्त्व:
1. शहद उत्पादन: यह मनुष्यों के लिए एक पौष्टिक भोजन है और दवा के रूप में भी प्रयोग होता है।
2. मधुमोम: इसका उपयोग मोमबत्तियाँ, सौंदर्य प्रसाधन और अन्य उद्योगों में होता है।
3. परागण: मधुमक्खियाँ फूलों के परागण में मदद करती हैं, जिससे फसलों की पैदावार बढ़ती है। यह पर्यावरण के लिए बहुत महत्वपूर्ण है।
In simple words: मधुमक्खी के छत्ते में रानी, श्रमिक और नर मक्खियाँ होती हैं, और हर किसी का अपना खास काम होता है। रानी अंडे देती है, श्रमिक सारा काम करते हैं (शहद बनाना, सफाई), और नर सिर्फ प्रजनन करते हैं। मधुमक्खी पालन से शहद, मोम और पौधों के परागण में मदद मिलती है।
🎯 Exam Tip: मधुमक्खी के छत्ते में प्रत्येक प्रकार की मधुमक्खी के कार्यों को स्पष्ट रूप से समझें और एपिकल्चर (मधुमक्खी पालन) के पर्यावरणीय और आर्थिक लाभों पर ध्यान दें।
Question 1. निम्न में से खरीफ फसल नहीं है-
(अ) गेहूँ।
(ब) चावल
(स) मक्का
(द) बाजरा
Answer: (अ) गेहूँ।
In simple words: गेहूँ खरीफ की फसल नहीं है, बल्कि यह रबी की फसल है जिसे सर्दियों में बोया जाता है। खरीफ की फसलें बारिश के मौसम में बोई जाती हैं जैसे चावल, मक्का और बाजरा।
🎯 Exam Tip: खरीफ की फसलों को 'वर्षा ऋतु की फसलें' भी कहते हैं, जबकि रबी की फसलें 'शीत ऋतु की फसलें' कहलाती हैं।
Question 2. चावल की उन्नत किस्में हैं
(अ) बासमती
(ब) रत्ना
(स) सोना
(द) उपर्युक्त सभी
Answer: (द) उपर्युक्त सभी
In simple words: बासमती, रत्ना और सोना - ये सभी चावल की अच्छी किस्में हैं, जो बेहतर गुणवत्ता और अधिक पैदावार के लिए जानी जाती हैं।
🎯 Exam Tip: उन्नत किस्में वे होती हैं जो बेहतर उपज, रोग प्रतिरोधक क्षमता और अच्छी गुणवत्ता देती हैं।
Question 3. निम्न में से मोटा अनाज है
(अ) गेहूँ।
(ब) जौ
(स) बाजरा
(द) चावल
Answer: (स) बाजरा
In simple words: बाजरा को मोटा अनाज कहा जाता है क्योंकि इसके दाने बड़े और मोटे होते हैं, और यह आमतौर पर कम उपजाऊ मिट्टी में भी उग जाता है।
🎯 Exam Tip: मोटा अनाज अक्सर पोषक तत्वों से भरपूर और स्वास्थ्य के लिए फायदेमंद होता है, विशेषकर फाइबर और खनिजों में।
Question 4. दालों के उत्पादन में विश्व में भारत का प्रथम स्थान है
(अ) चने में।
(ब) अरहर में।
(स) सोयाबीन में।
(द) उपर्युक्त सभी
Answer: (द) उपर्युक्त सभी
In simple words: भारत दालों के उत्पादन में दुनिया में सबसे आगे है, चाहे वह चना हो, अरहर हो या सोयाबीन। दालें प्रोटीन का अच्छा स्रोत होती हैं।
🎯 Exam Tip: भारत में दालों का उत्पादन अधिक होने के कारण यह देश की पोषण सुरक्षा में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है।
Question 5. अरबी व आलू पौधे के किस भाग से प्राप्त होते हैं?
(अ) मूल
(ब) स्तम्भ
(स) पर्ण
(द) फल
Answer: (ब) स्तम्भ
In simple words: अरबी और आलू दोनों ही पौधे के तने का संशोधित रूप होते हैं, जिन्हें भूमिगत तना कहा जाता है। ये भोजन जमा करते हैं।
🎯 Exam Tip: आलू एक संशोधित तना (कंद) है, जबकि गाजर एक जड़ है। दोनों भूमिगत होते हैं, लेकिन उनका वानस्पतिक भाग अलग होता है।
Question 7. रेशे जो बीजों के चोल से प्राप्त होते हैं
(अ) जूट
(ब) कपास
(स) सनई।
(द) नारियल
Answer: (ब) कपास
In simple words: कपास के रेशे उसके बीज के बाहरी आवरण से निकलते हैं। इन रेशों का उपयोग कपड़े बनाने के लिए किया जाता है।
🎯 Exam Tip: कपास को 'श्वेत सोना' भी कहा जाता है क्योंकि यह भारत की अर्थव्यवस्था में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है।
Question 8. सामान्यतः किस जाति की मधुमक्खी को मधुपालन में उपयोग किया जाता है
(अ) एपिस इन्डिका
(ब) एपिस फ्लोरी
(स) एपिस डोरसेटा
(द) एपिस मैलिफेरा
Answer: (द) एपिस मैलिफेरा
In simple words: एपिस मैलिफेरा एक खास तरह की मधुमक्खी है जिसे आमतौर पर शहद निकालने के लिए पाला जाता है क्योंकि यह ज़्यादा शहद बनाती है।
🎯 Exam Tip: मधुमक्खी पालन को 'एपिकल्चर' कहते हैं, और यह शहद तथा मोम उत्पादन के लिए किया जाता है।
Question 9. मछली पालन उद्योग में प्रायः किन देशी मछलियों का उत्पादन किया जाता
(अ) रोहू
(ब) कतला
(स) मृगल
(द) उपर्युक्त सभी
Answer: (द) उपर्युक्त सभी
In simple words: रोहू, कतला और मृगल ये सभी भारत में पाई जाने वाली मछलियाँ हैं, जिन्हें आमतौर पर मछली पालन में उगाया जाता है।
🎯 Exam Tip: मछली पालन को 'पिसीकल्चर' भी कहा जाता है, और यह प्रोटीन युक्त भोजन का एक अच्छा स्रोत है।
Question 10. खुरपका रोग किनमें होता है ?
(अ) मुर्गियों में
(ब) मछलियों में
(स) पशुओं में
(द) रेशमकीट में
Answer: (स) पशुओं में
In simple words: खुरपका रोग मुख्य रूप से पशुओं जैसे गाय, भैंस और बकरी में होता है, जो उनके खुरों और मुंह पर असर डालता है।
🎯 Exam Tip: खुरपका रोग एक संक्रामक बीमारी है जो पशुओं में तेज़ी से फैलती है, इसलिए इसकी रोकथाम के लिए टीकाकरण बहुत ज़रूरी है।
अतिलघूत्तरात्मक प्रश्न
Question 1. खरीफ की एक फसल का नाम लिखिए। (माध्य. शिक्षा बोर्ड, 2018)
Answer: खरीफ की कुछ प्रमुख फसलें हैं चावल, बाजरा और मक्का। ये फसलें मानसून के मौसम में बोई जाती हैं, जब बारिश अच्छी होती है।
In simple words: चावल, बाजरा और मक्का खरीफ की फसलें हैं।
🎯 Exam Tip: खरीफ फसलें आमतौर पर जून-जुलाई में बोई जाती हैं और सितंबर-अक्टूबर में काटी जाती हैं।
Question 2. मधुमक्खी पालन के दो उत्पादों के नाम लिखिए। (माध्य. शिक्षा बोर्ड, मॉडल पेपर, 2017-18)
Answer: मधुमक्खी पालन से हमें दो मुख्य उत्पाद मिलते हैं: शहद और मधुमोम। शहद खाने और दवाइयों में उपयोग होता है, जबकि मधुमोम का इस्तेमाल मोमबत्ती और सौंदर्य प्रसाधन में होता है।
In simple words: मधुमक्खी पालन से शहद और मधुमोम मिलते हैं।
🎯 Exam Tip: शहद एक प्राकृतिक मीठा पदार्थ है, जिसमें कई पोषक तत्व और औषधीय गुण होते हैं।
Question 3. भैंस की अच्छी नस्लें कौन-कौनसी हैं?
Answer: भैंस की कुछ अच्छी देशी नस्लें जाफराबादी, मुर्रा, सूखी, भदावरी और मेहसाना हैं। ये नस्लें दूध उत्पादन के लिए बहुत प्रसिद्ध हैं।
In simple words: जाफराबादी, मुर्रा और मेहसाना भैंस की कुछ अच्छी नस्लें हैं।
🎯 Exam Tip: मुर्रा नस्ल की भैंसें भारत में सबसे अधिक दूध देने वाली नस्लों में से एक मानी जाती हैं।
Question 4. गाय की कुछ अच्छी नस्लें बताइए।
Answer: गाय की कुछ अच्छी नस्लें साहिवाल, गिर, सिन्ध, देवकी और हरियाणा हैं। इन नस्लों की गायें भी अच्छी मात्रा में दूध देती हैं।
In simple words: साहिवाल, गिर और हरियाणा गाय की कुछ अच्छी नस्लें हैं।
🎯 Exam Tip: गिर नस्ल की गायें अपनी दूध उत्पादन क्षमता और रोग प्रतिरोधक क्षमता के लिए प्रसिद्ध हैं।
Question 6. मुर्गीपालन में किन विदेशी नस्लों का उपयोग होता है?
Answer: मुर्गीपालन में उपयोग होने वाली कुछ प्रमुख विदेशी नस्लें व्हाइट लेग हॉर्न, रोडे आइलैण्ड रेड और प्लाईमाउथ रॉक हैं। ये नस्लें अंडे और मांस उत्पादन के लिए बहुत अच्छी मानी जाती हैं।
In simple words: व्हाइट लेग हॉर्न और रोडे आइलैण्ड रेड मुर्गी की विदेशी नस्लें हैं।
🎯 Exam Tip: विदेशी नस्लें अक्सर देशी नस्लों की तुलना में कम समय में अधिक अंडे और मांस देती हैं।
Question 7. किस अनाज के उत्पादन में भारत का विश्व में प्रथम स्थान है?
Answer: चावल के उत्पादन में भारत का विश्व में दूसरा स्थान है। चीन पहले स्थान पर है। भारत में चावल सबसे ज्यादा खाया जाने वाला अनाज है।
In simple words: चावल के उत्पादन में भारत विश्व में दूसरे नंबर पर है।
🎯 Exam Tip: चावल भारत की प्रमुख खाद्य फसल है और इसकी खेती मुख्य रूप से मानसूनी क्षेत्रों में की जाती है।
Question 8. मक्का की उन्नत किस्मों के नाम लिखिए।
Answer: मक्का की कुछ उन्नत किस्में विजय, शक्ति और रतन हैं। ये किस्में अधिक पैदावार और बेहतर गुणवत्ता के लिए विकसित की गई हैं।
In simple words: विजय, शक्ति और रतन मक्का की अच्छी किस्में हैं।
🎯 Exam Tip: मक्का का उपयोग केवल भोजन के लिए ही नहीं, बल्कि पशु आहार और औद्योगिक उत्पादों में भी होता है।
Question 9. सोयाबीन का वानस्पतिक नाम लिखिए।
Answer: सोयाबीन का वानस्पतिक नाम ग्लाइसीन मैक्स (Glycine max) है। यह प्रोटीन और तेल का एक बहुत ही अच्छा स्रोत है।
In simple words: सोयाबीन का वैज्ञानिक नाम ग्लाइसीन मैक्स है।
🎯 Exam Tip: सोयाबीन को 'चमत्कारी फसल' भी कहा जाता है क्योंकि यह मिट्टी की उर्वरता को बढ़ाती है और पोषण मूल्य भी अधिक होता है।
Question 10. खाने योग्य तेल कौन-कौनसे हैं ?
Answer: खाने योग्य तेलों में मूंगफली का तेल, तिल का तेल, नारियल का तेल, सोयाबीन का तेल, अलसी का तेल और सूरजमुखी का तेल शामिल हैं। इन तेलों का उपयोग खाना बनाने में होता है और ये शरीर को ऊर्जा देते हैं।
In simple words: मूंगफली, तिल और सोयाबीन से खाने का तेल निकलता है।
🎯 Exam Tip: विभिन्न प्रकार के तेलों में अलग-अलग पोषक तत्व होते हैं, जो स्वास्थ्य के लिए फायदेमंद होते हैं।
Question 11. फल से प्राप्त की जाने वाली कौन-कौनसी सब्जियाँ हैं?
Answer: कुछ सब्जियाँ वास्तव में फल होती हैं क्योंकि वे फूल के अंडाशय से विकसित होती हैं और उनमें बीज होते हैं। इनमें टमाटर, बैंगन, भिंडी और ग्वारफली शामिल हैं।
In simple words: टमाटर, बैंगन और भिंडी ऐसी सब्जियाँ हैं जो वानस्पतिक रूप से फल मानी जाती हैं।
🎯 Exam Tip: वनस्पति विज्ञान में फल वह होता है जिसमें पौधे के बीज होते हैं, जैसे टमाटर, ककड़ी या मटर की फली।
Question 12. मूल से प्राप्त होने वाली औषध के दो पौधों के नाम लिखिए।
Answer: मूल (जड़) से प्राप्त होने वाले औषधीय पौधों में सर्पगंधा (रॉवल्फिया सर्पेन्टाइना) और सफेद मूसली (क्लोरोफाइटम ट्यूबरोसम) प्रमुख हैं। इनकी जड़ों का उपयोग विभिन्न औषधियाँ बनाने में होता है।
In simple words: सर्पगंधा और सफेद मूसली ऐसे पौधे हैं जिनकी जड़ों से दवाइयाँ बनती हैं।
🎯 Exam Tip: औषधीय पौधों की जड़ों में अक्सर सक्रिय यौगिक होते हैं जो चिकित्सा गुणों के लिए जिम्मेदार होते हैं।
Question 14. कुछ प्रमुख इमारती काष्ठ उत्पादक वृक्षों के नाम बताइए।
Answer: कुछ प्रमुख पेड़ जिनसे अच्छी इमारती लकड़ी मिलती है, वे हैं सागवान, साल, शीशम, रोहिड़ा और खेजड़ी। इन लकड़ियों का उपयोग फर्नीचर और भवन निर्माण में किया जाता है।
In simple words: सागवान, साल और शीशम इमारती लकड़ी देने वाले मुख्य पेड़ हैं।
🎯 Exam Tip: इमारती लकड़ी उन वृक्षों से प्राप्त होती है जिनकी लकड़ी मजबूत और टिकाऊ होती है, जिससे वे लंबे समय तक उपयोग की जा सकती हैं।
Question 15. मारवाड़ सागवान किसे कहा जाता है?
Answer: रोहिड़ा नामक वृक्ष को मारवाड़ सागवान भी कहते हैं, जिसका वानस्पतिक नाम टेकोमेला अन्डुलेटा (Tecomella undulata) है। यह राजस्थान का राज्य पुष्प भी है।
In simple words: रोहिड़ा पेड़ को मारवाड़ सागवान कहते हैं।
🎯 Exam Tip: रोहिड़ा काष्ठ मरुस्थलीय क्षेत्रों में फर्नीचर और सजावटी सामान बनाने के लिए बहुत मूल्यवान है।
Question 16. राजस्थान का राज्य वृक्ष क्या है ?
Answer: राजस्थान का राज्य वृक्ष खेजड़ी है, जिसका वानस्पतिक नाम प्रोसोपिस सिनेरेरिया (Prosopis cineraria) है। यह वृक्ष मरुस्थलीय पर्यावरण के लिए बहुत महत्वपूर्ण है।
In simple words: खेजड़ी राजस्थान का राज्य वृक्ष है।
🎯 Exam Tip: खेजड़ी को 'रेगिस्तान का कल्पवृक्ष' भी कहा जाता है क्योंकि यह पानी की कमी वाले क्षेत्रों में भी जीवित रहता है और अनेक उपयोग प्रदान करता है।
Question 17. चाय का वानस्पतिक नाम बताइए।
Answer: चाय का वानस्पतिक नाम कैमेलिया साइनेन्सिस (Camellia sinensis) है। चाय की पत्तियां एक लोकप्रिय पेय बनाने के लिए उपयोग की जाती हैं।
In simple words: चाय का वैज्ञानिक नाम कैमेलिया साइनेन्सिस है।
🎯 Exam Tip: चाय दुनिया में पानी के बाद सबसे ज्यादा पिया जाने वाला पेय है, और इसके कई स्वास्थ्य लाभ भी होते हैं।
लघूत्तरात्मक प्रश्न
Question 1. किन्हीं चार औषधीय पादपों के सामान्य एवं वानस्पतिक नाम लिखिए। (माध्य. शिक्षा बोर्ड, मॉडल पेपर, 2017-18)
Answer: औषधीय पौधों के सामान्य और वानस्पतिक नाम इस प्रकार हैं:
| औषधीय पादप का सामान्य नाम | वानस्पतिक नाम |
|---|---|
| 1. हल्दी | कुरकुमा लौंगा (Curcuma longa) |
| 2. अदरक | जिन्जिबर ऑफिसिनेल (Zingiber officinale) |
| 3. लहसुन | एलियम सेटाइवम (Allium sativum) |
| 4. सर्पगंधा | रॉवल्फिया सर्पेन्टाइना (Rauwolfia serpentina) |
कुछ औषधीय पौधे अपने औषधीय गुणों के कारण प्राचीन काल से उपयोग किए जाते रहे हैं।
In simple words: हल्दी, अदरक, लहसुन और सर्पगंधा कुछ औषधीय पौधे हैं, जिनके अपने-अपने वैज्ञानिक नाम हैं।
🎯 Exam Tip: औषधीय पौधों के नाम याद करते समय, सामान्य नाम के साथ-साथ उनके वैज्ञानिक नाम भी याद करना महत्वपूर्ण है।
Question 2. काष्ठ व इमारती काष्ठ क्या होती है?
Answer: काष्ठ (Wood) वह द्वितीयक जाइलम होता है जो बहुवर्षीय द्विबीजपत्री और अनावृतबीजी वृक्षों में बनता है। जो काष्ठ फर्नीचर, दरवाजे और खिड़कियाँ बनाने में उपयोग होती है, उसे इमारती काष्ठ (Timber) कहते हैं। इमारती काष्ठ अपनी मजबूती और टिकाऊपन के लिए जानी जाती है।
In simple words: पेड़ों का भीतरी कठोर भाग काष्ठ कहलाता है, और मजबूत काष्ठ जिससे घर का सामान बनता है, इमारती काष्ठ है।
🎯 Exam Tip: काष्ठ पौधे को सहारा देती है और पानी व पोषक तत्वों को ऊपर तक पहुंचाती है।
Question 3. मधुमक्खी के एक छत्ते में कितनी प्रकार की मक्खियाँ होती हैं? उनका कार्य बताइए।
Answer: मधुमक्खी के एक छत्ते में तीन प्रकार की मक्खियाँ पाई जाती हैं: श्रमिक, नर (ड्रोन) और रानी मक्खी। श्रमिक मक्खियाँ हजारों की संख्या में होती हैं और छत्ते के सभी काम करती हैं जैसे शहद इकट्ठा करना, छत्ता बनाना और उसकी सुरक्षा करना। नर मक्खियाँ कुछ संख्या में होती हैं और रानी मक्खी के साथ प्रजनन में मदद करती हैं। रानी मक्खी केवल एक होती है और उसका मुख्य काम अंडे देना होता है।
In simple words: मधुमक्खी के छत्ते में श्रमिक, नर और रानी - तीन तरह की मक्खियाँ होती हैं। सबका अपना-अपना काम होता है, जैसे रानी अंडे देती है और श्रमिक काम करती हैं।
🎯 Exam Tip: रानी मक्खी छत्ते की अकेली प्रजनन करने वाली सदस्य होती है और उसकी अनुपस्थिति में छत्ता कमजोर पड़ जाता है।
Question 4. ऊन उद्योग पर टिप्पणी लिखिए।
Answer: ऊन उद्योग भारत की अर्थव्यवस्था में बहुत महत्वपूर्ण है, खासकर उत्तरी भारत में जहाँ बड़ी संख्या में भेड़ें पाली जाती हैं। भेड़ के बालों से ऊन बनाई जाती है, जिसका रंग भेड़ की प्रजाति और जलवायु पर निर्भर करता है। भारत में ऊन की कुछ अच्छी नस्लें लोही, नली, मारवाड़ी और पाटनवाड़ी हैं। राजस्थान ऊन उत्पादन में एक महत्वपूर्ण राज्य है।
In simple words: ऊन उद्योग में भेड़ के बालों से ऊन बनाई जाती है, और यह भारत में एक बड़ा व्यवसाय है।
🎯 Exam Tip: ऊन एक प्राकृतिक फाइबर है जो सर्दियों में गर्म रखने वाले कपड़े बनाने के लिए उपयोग होता है, और यह भेड़ के शरीर को ठंड से बचाता है।
Question 5. आर्थिक वनस्पति विज्ञान क्या है? आर्थिक रूप से महत्त्वपूर्ण पादपों को कितने वर्गों में बाँटा जा सकता है?
Answer: आर्थिक वनस्पति विज्ञान (Economic Botany) विज्ञान की वह शाखा है जिसमें आर्थिक रूप से महत्वपूर्ण पौधों और उनके उत्पादों का अध्ययन किया जाता है। आर्थिक रूप से महत्वपूर्ण पौधों को मुख्य रूप से निम्न वर्गों में बाँटा जा सकता है:
1. खाद्य पादप: इनमें अनाज (जैसे गेहूँ, चावल), दालें (जैसे चना, अरहर), तेल (जैसे सरसों, मूंगफली), मसाले, पेय पदार्थ, सब्ज़ियाँ और फल शामिल हैं।
2. औषधीय पादप: इसमें अश्वगंधा, अफीम, सर्पगंधा, गुग्गल और सफेद मूसली जैसे पौधे आते हैं, जिनका उपयोग दवा बनाने में होता है।
3. इमारती काष्ठ एवं रेशे सम्बन्धी पादप: सागवान, शीशम, रोहिड़ा, खेजड़ी, कपास और जूट जैसे पौधे इस वर्ग में शामिल हैं, जिनसे लकड़ी और रेशे मिलते हैं।
यह विज्ञान हमें पौधों के विभिन्न उपयोगों को समझने में मदद करता है।
In simple words: आर्थिक वनस्पति विज्ञान पौधों और उनके उत्पादों के व्यापारिक उपयोगों का अध्ययन है। इन्हें खाने वाले, दवा वाले और लकड़ी-रेशे वाले पौधों में बाँटा जाता है।
🎯 Exam Tip: आर्थिक वनस्पति विज्ञान मानव जीवन के लिए पौधों के महत्व को समझने में मदद करता है, खासकर भोजन, दवा और आश्रय के लिए।
Question 7. फल किसे कहते हैं? प्रमुख फलों के नाम लिखिए।
Answer: फल वह मीठी, माँसल और रसीली संरचना होती है जो फूल के अंडाशय के निषेचन के बाद बनती है और जिसमें बीज होते हैं। यह पौधे का वह भाग होता है जो बीज को सुरक्षित रखता है और उनके फैलाव में मदद करता है। कुछ प्रमुख फल आम (मैंजीफेरा इण्डिका), केला (म्युजा पेराडिसियेका), संतरा (सिट्रस रेटिकुलेटा), अमरूद (सीडियम गुआजावा), पपीता (केरिका पपाया) और सीताफल (अन्नोना स्क्वामोसा) हैं।
In simple words: फल पौधे का वह मीठा और गूदेदार हिस्सा है जो फूल से बनता है और जिसमें बीज होते हैं। जैसे आम, केला और संतरा।
🎯 Exam Tip: वनस्पति विज्ञान की दृष्टि से, टमाटर और बैंगन जैसे कुछ 'सब्जियों' को भी फल माना जाता है क्योंकि उनमें बीज होते हैं।
Question 8. जड़ों से प्राप्त होने वाली सब्जियों के नाम बताइए।
Answer: जड़ों से प्राप्त होने वाली कुछ प्रमुख सब्जियाँ इस प्रकार हैं: गाजर (डॉकस कैरोटा), मूली (रेफेनस सेटाइवस), शलजम (ब्रेसिका रापा) और शकरकंद (आइपोमिया बटाटासे)। ये सभी सब्जियां पौधे की जड़ों का संशोधित रूप होती हैं जो भोजन का भंडारण करती हैं।
In simple words: गाजर, मूली, शलजम और शकरकंद ऐसी सब्जियाँ हैं जो पौधों की जड़ों से मिलती हैं।
🎯 Exam Tip: जड़ वाली सब्जियां अक्सर मिट्टी के नीचे बढ़ती हैं और पोषक तत्वों से भरपूर होती हैं।
Question 9. स्तम्भ व पर्ण से प्राप्त होने वाले औषधीय पौधों के नाम लिखिए।
Answer: स्तम्भ (तना) से प्राप्त होने वाले औषधीय पौधों में सफेद मूसली (क्लोरोफाइटम ट्यूबरोसम) और अश्वगंधा (विथानिया सोम्नीफेरा) शामिल हैं। पर्ण (पत्ती) से प्राप्त होने वाले औषधीय पौधों में ग्वारपाठा (एलोय वेरा), तुलसी (ओसिमम सेन्कटम) और ब्राह्मी (सेन्टेला एशियाटिका) प्रमुख हैं। इन पौधों के तने और पत्तियों का उपयोग विभिन्न औषधीय प्रयोजनों के लिए होता है।
In simple words: सफेद मूसली तने से मिलती है, जबकि ग्वारपाठा और तुलसी पत्तियों से मिलने वाले औषधीय पौधे हैं।
🎯 Exam Tip: पौधों के विभिन्न भागों जैसे जड़, तना, पत्ती, फूल और फल का उपयोग उनके औषधीय गुणों के आधार पर किया जाता है।
Question 10. सर्पगन्धा, सफेद मूसली व अफीम किन औषध पौधों के किस भाग से प्राप्त किये जाते हैं ?
Answer: सर्पगंधा (रॉवल्फिया सर्पेन्टाइना) पौधे की जड़ों (मूल) से प्राप्त की जाती है। सफेद मूसली (क्लोरोफाइटम ट्यूबरोसम) पौधे की जड़ों (मूल) से प्राप्त होती है। अफीम (पेपेवर सोम्निफेरम) पौधे के फल से प्राप्त किया जाता है। ये सभी पौधे अपने औषधीय गुणों के लिए जाने जाते हैं।
In simple words: सर्पगंधा और सफेद मूसली जड़ों से मिलती हैं, जबकि अफीम पौधे के फल से प्राप्त होती है।
🎯 Exam Tip: प्रत्येक औषधीय पौधे का विशेष भाग होता है जिसमें औषधीय गुण अधिक होते हैं, जैसे कुछ की जड़ें, कुछ की पत्तियां या कुछ के फल।
Question 11. डेयरी उद्योग की भैंस, गाय व बकरी की अच्छी नस्लों के नाम बताइए।
Answer: डेयरी उद्योग में दूध उत्पादन के लिए पाली जाने वाली भैंस, गाय और बकरी की कुछ अच्छी नस्लें इस प्रकार हैं:
भैंस: जाफराबादी, मुर्रा, सूखी, भदावरी, मेहसाना।
गाय: गिर, साहिवाल, सिन्ध, देवकी, हरियाणा।
बकरी: सिरोही, बारबरी, कश्मीरी पश्मीना, जमनापरी।
ये सभी नस्लें अपनी उच्च दूध उत्पादन क्षमता और अनुकूलनशीलता के लिए जानी जाती हैं।
In simple words: डेयरी में पाली जाने वाली भैंसों में मुर्रा, गायों में गिर और बकरियों में सिरोही जैसी अच्छी नस्लें होती हैं।
🎯 Exam Tip: अच्छी नस्लों का चुनाव दूध उत्पादन की मात्रा और गुणवत्ता को बढ़ाने में महत्वपूर्ण होता है, जिससे डेयरी किसानों को अधिक लाभ होता है।
निबन्धात्मक प्रश्न
Question 1. (अ) रेशम कीट के लार्वा का नाम लिखिए।
(ब) मधुमक्खी-पालन से प्राप्त दो उत्पादों को लिखिए।
(स) रेशम कीट द्वारा रेशम का धागा कैसे बनाया जाता है? (माध्य. शिक्षा बोर्ड, 2018)
Answer:
(अ) रेशम कीट के लार्वा का नाम कैटरपिलर लार्वा है।
(ब) मधुमक्खी पालन से प्राप्त दो मुख्य उत्पाद हैं: (i) शहद और (ii) मधुमोम।
(स) रेशम कीट द्वारा रेशम का धागा बनाने की प्रक्रिया इस प्रकार है: रेशम कीट के अंडे से कैटरपिलर लार्वा निकलता है। यह लार्वा शहतूत की पत्तियाँ खाता है और बड़ा होता है। पूरी तरह विकसित होने पर, लार्वा अपने मुंह से तरल रेशम स्रावित करना शुरू कर देता है। यह तरल हवा के संपर्क में आने पर कठोर होकर धागे में बदल जाता है। लार्वा अपने चारों ओर इस धागे को लपेटकर एक कोकून बनाता है, जिसके अंदर वह प्यूपा में बदल जाता है। इस कोकून से ही रेशम का धागा प्राप्त किया जाता है। फिर कोकून को गर्म पानी में डालकर रेशम के धागों को अलग कर लिया जाता है।
In simple words: रेशम कीट के लार्वा को कैटरपिलर कहते हैं। मधुमक्खी पालन से शहद और मोम मिलता है। रेशम कीट अपने शरीर से एक धागा निकाल कर अपने चारों ओर लपेट लेता है, जिससे कोकून बनता है, और इसी कोकून से रेशम का धागा प्राप्त होता है।
🎯 Exam Tip: रेशम उत्पादन की प्रक्रिया को 'सेरीकल्चर' कहते हैं, और यह एक महत्वपूर्ण कृषि-आधारित उद्योग है।
Free study material for Science
RBSE Solutions Class 10 Science Chapter 14 पादप एवं जन्तुओं के आर्थिक महत्त्व
Students can now access the RBSE Solutions for Chapter 14 पादप एवं जन्तुओं के आर्थिक महत्त्व prepared by teachers on our website. These solutions cover all questions in exercise in your Class 10 Science textbook. Each answer is updated based on the current academic session as per the latest RBSE syllabus.
Detailed Explanations for Chapter 14 पादप एवं जन्तुओं के आर्थिक महत्त्व
Our expert teachers have provided step-by-step explanations for all the difficult questions in the Class 10 Science chapter. Along with the final answers, we have also explained the concept behind it to help you build stronger understanding of each topic. This will be really helpful for Class 10 students who want to understand both theoretical and practical questions. By studying these RBSE Questions and Answers your basic concepts will improve a lot.
Benefits of using Science Class 10 Solved Papers
Using our Science solutions regularly students will be able to improve their logical thinking and problem-solving speed. These Class 10 solutions are a guide for self-study and homework assistance. Along with the chapter-wise solutions, you should also refer to our Revision Notes and Sample Papers for Chapter 14 पादप एवं जन्तुओं के आर्थिक महत्त्व to get a complete preparation experience.
FAQs
The complete and updated RBSE Solutions Class 10 Science Chapter 14 पादप एवं जन्तुओं के आर्थिक महत्त्व is available for free on StudiesToday.com. These solutions for Class 10 Science are as per latest RBSE curriculum.
Yes, our experts have revised the RBSE Solutions Class 10 Science Chapter 14 पादप एवं जन्तुओं के आर्थिक महत्त्व as per 2026 exam pattern. All textbook exercises have been solved and have added explanation about how the Science concepts are applied in case-study and assertion-reasoning questions.
Toppers recommend using RBSE language because RBSE marking schemes are strictly based on textbook definitions. Our RBSE Solutions Class 10 Science Chapter 14 पादप एवं जन्तुओं के आर्थिक महत्त्व will help students to get full marks in the theory paper.
Yes, we provide bilingual support for Class 10 Science. You can access RBSE Solutions Class 10 Science Chapter 14 पादप एवं जन्तुओं के आर्थिक महत्त्व in both English and Hindi medium.
Yes, you can download the entire RBSE Solutions Class 10 Science Chapter 14 पादप एवं जन्तुओं के आर्थिक महत्त्व in printable PDF format for offline study on any device.