RBSE Solutions Class 10 Science Chapter 13 अपशिष्ट एवं इसका प्रबंधन

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बहुचयनात्मक प्रश्न

 

प्रश्न 1. जैव चिकित्सकीय अपशिष्ट के निस्तारण हेतु कौनसी तकनीक उपयुक्त है-
(क) भूमि भराव
(ख) भस्मीकरण
(ग) पुनर्चक्रण
(घ) जल में निस्तारण
Answer: (ख) भस्मीकरण
In simple words: बायोमेडिकल कचरे को खत्म करने के लिए भस्मीकरण सबसे अच्छी विधि है क्योंकि यह इसे जलाकर सुरक्षित रूप से निपटाती है और बीमारियों को फैलने से रोकती है। इस प्रक्रिया में कचरे को उच्च तापमान पर जलाया जाता है।

🎯 Exam Tip: याद रखें कि भस्मीकरण हानिकारक सूक्ष्मजीवों को नष्ट करके जैव-चिकित्सीय कचरे के सुरक्षित निपटान के लिए महत्वपूर्ण है।

 

प्रश्न 2. पुनर्चक्रण किस प्रकार के अपशिष्ट हेतु उत्तम उपचार है
(क) धात्विक अपशिष्ट
(ख) चिकित्सकीय अपशिष्ट
(ग) कृषि अपशिष्ट
(घ) घरेलू अपशिष्ट
Answer: (क) धात्विक अपशिष्ट
In simple words: धातु के कचरे के लिए पुनर्चक्रण सबसे अच्छा है क्योंकि धातुओं को पिघलाकर दोबारा इस्तेमाल किया जा सकता है, जिससे नए उत्पाद बनाने के लिए कम संसाधनों की जरूरत होती है। यह पर्यावरण के लिए बहुत अच्छा होता है।

🎯 Exam Tip: पुनर्चक्रण धातुओं, प्लास्टिक और कागज जैसे अजैव-निम्नीकरणीय कचरे के लिए बहुत प्रभावी है, क्योंकि यह नए उत्पादों के लिए कच्चे माल की जरूरत को कम करता है।

 

प्रश्न 3. निम्न में से प्रमुख ग्रीन हाउस गैस है
(क) हाइड्रोजन
(ख) कार्बन मोनो ऑक्साइड
(ग) कार्बन डाई ऑक्साइड
(घ) सल्फर डाई ऑक्साइड
Answer: (ग) कार्बन डाई ऑक्साइड
In simple words: कार्बन डाइऑक्साइड एक मुख्य ग्रीनहाउस गैस है, जो पृथ्वी के वायुमंडल में गर्मी को रोकती है और वैश्विक तापमान को बढ़ाती है। यह जीवाश्म ईंधन जलाने से वातावरण में बढ़ती है।

🎯 Exam Tip: ग्रीनहाउस गैसें जैसे कार्बन डाइऑक्साइड, मीथेन और नाइट्रस ऑक्साइड पृथ्वी के तापमान को नियंत्रित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती हैं।

 

प्रश्न 4. भारत के बड़े नगरों में प्रति व्यक्ति औसत कूड़ा निकलता है
(क) 1-2 किग्रा
(ख) 1 से 2 किग्रा.
(ग) 2-4 किग्रा.
(घ) 4 से 6 किग्रा.
Answer: (ग) 2-4 किग्रा.
In simple words: भारत के बड़े शहरों में हर व्यक्ति रोज 2-4 किलोग्राम कूड़ा पैदा करता है। यह मात्रा शहरीकरण और उपभोग की आदतों पर निर्भर करती है।

🎯 Exam Tip: शहरीकरण और जनसंख्या वृद्धि के कारण बड़े शहरों में कूड़े का उत्पादन तेजी से बढ़ता है, जिससे अपशिष्ट प्रबंधन एक बड़ी चुनौती बन जाता है।

 

प्रश्न 5. जैविक खाद बनाई जा सकती है
(क) घरेलू कचरे से
(ख) कृषि अपशिष्ट से
Answer: (ग) दोनों (क) और (ख) से
In simple words: जैविक खाद घर के कचरे और खेत के कचरे, दोनों से बनाई जा सकती है। यह कचरा मिट्टी को उपजाऊ बनाने में मदद करता है।

🎯 Exam Tip: जैविक खाद बनाने के लिए जैव-निम्नीकरणीय पदार्थों जैसे सब्जियों के छिलके, पत्तियों और गोबर का उपयोग करें, क्योंकि ये प्राकृतिक रूप से टूटकर मिट्टी के लिए पोषक तत्व बनाते हैं।

अतिलघूत्तरात्मक प्रश्न

 

प्रश्न 6. बायोगैस कैसे बनाई जाती है?
Answer: ग्रामीण इलाकों में घरेलू कचरे, जानवरों के उत्सर्जित पदार्थ जैसे गोबर और इंसानों के मल-मूत्र का इस्तेमाल करके बायोगैस बनाई जाती है। इस प्रक्रिया में बैक्टीरिया इन पदार्थों को तोड़कर गैस बनाते हैं।
In simple words: बायोगैस बनाने के लिए गांवों में गोबर और मल-मूत्र जैसे जैविक कचरे का उपयोग किया जाता है।

🎯 Exam Tip: बायोगैस एक नवीकरणीय ऊर्जा स्रोत है जो जैविक कचरे के अवायवीय पाचन से उत्पन्न होती है, जिससे बिजली और खाद दोनों बनते हैं।

 

प्रश्न 7. अपशिष्ट क्या है?
Answer: किसी भी प्रक्रिया के अंत में बनने वाले अनुपयोगी पदार्थ या उत्पाद को अपशिष्ट कहते हैं। ये ऐसे पदार्थ होते हैं जिनका अब कोई इस्तेमाल नहीं होता और जिन्हें फेंक दिया जाता है।
In simple words: अपशिष्ट वे बेकार पदार्थ होते हैं जो किसी काम के अंत में बनते हैं और अनुपयोगी होते हैं।

🎯 Exam Tip: अपशिष्ट में ठोस, तरल और गैसीय पदार्थ शामिल हो सकते हैं, जिनका निपटान ठीक से न होने पर पर्यावरण पर नकारात्मक प्रभाव पड़ता है।

 

प्रश्न 8. ग्रीन हाउस गैसों के नाम लिखिए।
Answer: कार्बन डाइऑक्साइड, जलवाष्प, मीथेन, नाइट्रस ऑक्साइड और क्लोरोफ्लोरोकार्बन मुख्य ग्रीनहाउस गैसें हैं। ये गैसें पृथ्वी के वायुमंडल में गर्मी को रोककर तापमान बढ़ाती हैं।
In simple words: ग्रीनहाउस गैसें हैं कार्बन डाइऑक्साइड, जलवाष्प, मीथेन, नाइट्रस ऑक्साइड और क्लोरोफ्लोरोकार्बन।

🎯 Exam Tip: इन गैसों की बढ़ती मात्रा जलवायु परिवर्तन और ग्लोबल वार्मिंग का मुख्य कारण है।

 

प्रश्न 9. वर्मी कम्पोस्ट किसे कहते हैं ?
Answer: कृषि कचरा, सब्जियों के बचे हुए हिस्से, पशुओं का मल-मूत्र और गोबर जैसे पदार्थों का ढेर लगाकर उन पर केंचुए छोड़ दिए जाते हैं। ये केंचुए इन पदार्थों को खाते हैं और जो मल त्यागते हैं, उसी को जैविक खाद या वर्मी कम्पोस्ट कहते हैं। यह मिट्टी के लिए बहुत पौष्टिक होता है।
In simple words: केंचुओं द्वारा कृषि और जैविक कचरे को खाकर जो खाद बनाई जाती है, उसे वर्मी कम्पोस्ट कहते हैं।

🎯 Exam Tip: वर्मी कम्पोस्ट मिट्टी की उर्वरता को बढ़ाता है और रासायनिक उर्वरकों पर निर्भरता कम करता है, जिससे पर्यावरण को लाभ होता है।

 

प्रश्न 10. नालियों में जल के रुकने से कौन-कौनसे रोग हो सकते हैं ?
Answer: नालियों में पानी रुकने से कई बीमारियां हो सकती हैं। जैसे कि मलेरिया, डेंगू, टाइफाइड, डायरिया, हैजा और अन्य पानी से होने वाली बीमारियां फैल सकती हैं। रुके हुए पानी में मच्छर और अन्य कीड़े पनपते हैं।
In simple words: नालियों में पानी रुकने से मलेरिया, डेंगू, टाइफाइड और डायरिया जैसे रोग हो सकते हैं।

🎯 Exam Tip: रुके हुए पानी में मच्छर पनपते हैं जो बीमारियों के वाहक होते हैं, इसलिए नालियों की सफाई और जल निकासी व्यवस्था बनाए रखना महत्वपूर्ण है।

 

लघूत्तरात्मक प्रश्न

 

प्रश्न 11. अपशिष्ट प्रबन्धन समझाइए।
Answer: किसी भी प्रक्रिया के अंत में बनने वाले अनुपयोगी पदार्थों या उत्पाद को अपशिष्ट कहते हैं। ये ठोस, द्रव और गैसीय अवस्था में हो सकते हैं। आम भाषा में इन्हें कूड़ा कहते हैं। अपशिष्ट की समस्या सिर्फ भारत में ही नहीं, बल्कि यह एक विश्वव्यापी समस्या है। अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर कूड़ा प्रबंधन पर ध्यान देने की जरूरत है। अपशिष्ट पदार्थों से पर्यावरण पर पड़ने वाले बुरे प्रभावों को लेकर चिंता बढ़ रही है। भारत के सभी शहरों, नगरपालिकाओं और गांवों से हर दिन लगभग एक लाख टन अपशिष्ट पदार्थ निकलता है। यह कूड़ा शहरों की सुंदरता को खराब करने में एक बड़ी भूमिका निभाता है। कूड़ा प्रबंधन के प्रति लापरवाही, पैसों की कमी, ठेकेदारों की कमी, और समय पर भुगतान न होना जैसी समस्याएं इस दिक्कत को और भी गंभीर बनाती हैं। स्थानीय लोगों को अपने-अपने क्षेत्रों से निकले कूड़े को अलग करके जैविक खाद, वर्मी कम्पोस्ट बनाने और एक अच्छी प्रबंधन व्यवस्था विकसित करने में मदद करनी चाहिए। कूड़े का प्रबंधन व्यक्तिगत सावधानी से भी संभव है। अपशिष्ट प्रबंधन में परिवहन, संसाधन पुनर्चक्रण और अपशिष्ट के काम में आने वाली सामग्री का संग्रह शामिल है। प्रत्येक अपशिष्ट के प्रबंधन के तरीके अलग-अलग होते हैं। इनका निपटान सही प्रबंधन से ही संभव है। इसमें सरकारी तंत्र, स्वयंसेवी संस्थाओं और नागरिकों का सहयोग बहुत जरूरी है। भारत सरकार ने 1975 में शिवरामन समिति का गठन किया था, जिसने कुछ सुझाव दिए थे। इन सुझावों में बड़े कूड़ेदानों की स्थापना, मानव मल-मूत्र के निपटान की सही व्यवस्था, शहरों में कूड़ा उठाने की उचित प्रणाली, और कूड़े के ढेर को जलाना शामिल था। प्रबंधन के तहत भूमिभराव, भस्मीकरण, पुनर्चक्रण विधि और रासायनिक क्रिया का उपयोग किया जाता है। विकसित देशों में पुनर्चक्रण लोकप्रिय है, जिसमें कचरे का दोबारा उपयोग किया जाता है। एल्युमीनियम के डिब्बे, स्टील, भोजन और एयरोसोल के डिब्बे, प्लास्टिक और कांच की बोतलें, गत्ते के डिब्बे और पत्रिकाएं जैसे उत्पाद अक्सर पुनर्नवीनीकरण किए जाते हैं। जैविक अपशिष्ट जैसे पौधों की सामग्री, बचा हुआ भोजन और कागज का उपयोग खाद और बायोगैस बनाने में किया जा सकता है, जिससे बिजली भी पैदा होती है। यह कचरा प्रबंधन और ऊर्जा उत्पादन दोनों में मदद करता है।
In simple words: अपशिष्ट प्रबंधन में कचरे को इकट्ठा करना, उसका निपटान करना और उसे दोबारा इस्तेमाल करना शामिल है, ताकि पर्यावरण को नुकसान न हो।

🎯 Exam Tip: अपशिष्ट प्रबंधन में 3R (Reduce, Reuse, Recycle) के सिद्धांतों को समझना और लागू करना महत्वपूर्ण है, जो पर्यावरण संरक्षण में मदद करते हैं।

 

प्रश्न 12. ठोस अपशिष्ट से क्या अभिप्राय है?
Answer: अपशिष्ट ठोस, द्रव और गैस के रूप में होते हैं। ठोस अपशिष्ट का मतलब है वे पदार्थ जो पूरी तरह से ठोस होते हैं। उदाहरण के लिए, खदानों से निकला मलबा, जैव-चिकित्सा अपशिष्ट जैसे रूई, पट्टियां, सिरिंज, प्लास्टिक की बोतलें, कांच, इलेक्ट्रॉनिक सामान, सीडी, फ्लॉपी, रबड़, टायर, नट-बोल्ट, एल्यूमीनियम और धातु के टुकड़े, कागज, गत्ता, कपड़ा, लकड़ी, उड़न राख, रेशा, भवन निर्माण का बचा हुआ सामान, उर्वरक उद्योग का कचरा, कूड़ा-करकट, हड्डियां आदि सभी ठोस श्रेणी में आते हैं। यह ठोस कचरा हमारे पर्यावरण के लिए एक बड़ी समस्या पैदा करता है।
In simple words: ठोस अपशिष्ट वे बेकार पदार्थ होते हैं जो ठोस अवस्था में होते हैं, जैसे प्लास्टिक, कागज, धातु, और कांच।

🎯 Exam Tip: ठोस अपशिष्ट के सही निपटान के लिए लैंडफिल, पुनर्चक्रण और ऊर्जा उत्पादन जैसी विधियों का उपयोग किया जाता है।

 

प्रश्न 13. जैव निम्नीकरण व अजैव निम्नीकरण अपशिष्ट में अन्तर लिखिए।
Answer: जैव निम्नीकरणीय और अजैव निम्नीकरणीय अपशिष्टों में मुख्य अंतर निम्नलिखित हैं:

जैव निम्नीकरणीय अपशिष्टअजैव निम्नीकरणीय अपशिष्ट
1. वे पदार्थ जो जैविक प्रक्रियाओं द्वारा आसानी से टूट जाते हैं।1. वे पदार्थ जो जैविक प्रक्रियाओं द्वारा आसानी से नहीं टूटते हैं।
2. इनकी उत्पत्ति जीव-जंतुओं या पौधों से होती है।2. ये आमतौर पर इंसान द्वारा बनाए गए होते हैं।
3. ये संक्रमण या बीमारियों के स्रोत बन सकते हैं।3. इनसे संक्रमण नहीं फैलता है।
4. ये प्रकृति में जमा नहीं होते हैं।4. ये ढेर बन जाते हैं और प्रकृति में लंबे समय तक बने रहते हैं।
5. ये जैव आवर्धन (बायोमैग्निफिकेशन) नहीं दिखाते हैं।5. ये घुलनशील पदार्थ खाद्य श्रृंखला में प्रवेश करके जैव आवर्धन दिखाते हैं।
6. प्रकृति में इनका फिर से चक्रण संभव है।6. प्रकृति में इन पदार्थों का पुनर्चक्रण संभव नहीं है।
7. ये दुर्गंध और ग्रीनहाउस गैसें छोड़ सकते हैं।7. ये आमतौर पर दुर्गंध नहीं छोड़ते हैं।
8. उदाहरण: मल-मूत्र, कागज, सब्जियां, फल, कपड़े।8. उदाहरण: प्लास्टिक, डी.डी.टी., एल्यूमीनियम के डिब्बे।


In simple words: जैव निम्नीकरणीय कचरा प्राकृतिक रूप से टूट जाता है, जबकि अजैव निम्नीकरणीय कचरा नहीं टूटता और पर्यावरण में लंबे समय तक रहता है।

🎯 Exam Tip: जैव निम्नीकरणीय और अजैव निम्नीकरणीय कचरे के बीच के अंतर को समझना प्रभावी अपशिष्ट प्रबंधन रणनीतियों के लिए आवश्यक है।

 

प्रश्न 14. भूमिभराव से आप क्या समझते हैं?
Answer: भूमिभराव अपशिष्ट प्रबंधन की एक विधि है। इसमें अक्सर गैर-उपयोगी खानों, खनन से खाली हुई जगहों या ऐसे ही अन्य क्षेत्रों में कचरा भर दिया जाता है। यह कचरे को निपटाने का एक बहुत ही साफ और तुलनात्मक रूप से सस्ता तरीका है, जो अधिकतर देशों में आम है। हालांकि, गलत तरीके से भूमिभराव करने से पर्यावरण पर बुरे प्रभाव पड़ सकते हैं। जैसे हवा से कचरे का उड़ना, कीटों का आकर्षित होना, और तरल पदार्थों का उत्पादन। इसके अलावा, जैविक कचरे के सड़ने से मीथेन गैस बनती है, जो बदबू पैदा करती है, पौधों को नुकसान पहुंचाती है और एक ग्रीनहाउस गैस भी है। आधुनिक भूमिभराव में सुनियोजित तरीकों से कचरे का निपटान किया जाता है, जिसमें गड्ढों को मिट्टी से भर दिया जाता है। भूमिभराव से निकलने वाली गैस को बाहर निकालने के लिए एक प्रणाली भी लगाई जा सकती है। इस गैस को इकट्ठा करके बिजली बनाने में भी इस्तेमाल किया जा सकता है। यह अपशिष्ट प्रबंधन की एक उचित व्यवस्था है और लंबे समय बाद इन क्षेत्रों को पार्क के रूप में विकसित किया जा सकता है।
In simple words: भूमिभराव एक तरीका है जिसमें कचरे को जमीन में दबा दिया जाता है, अक्सर खाली पड़ी जगहों में, ताकि उसका सुरक्षित निपटान हो सके।

🎯 Exam Tip: प्रभावी भूमिभराव से पर्यावरण को नुकसान कम होता है और भूमि का उपयोग भविष्य में अन्य उद्देश्यों के लिए किया जा सकता है, जैसे पार्क या निर्माण।

 

Question 7. डिस्पोजेबल प्लास्टिक कप की अपेक्षा कागज के डिस्पोजेबल कप के इस्तेमाल के क्या लाभ हैं?
Answer: कागज के डिस्पोजेबल कप आसानी से निपटाए जा सकते हैं और उनका पुनर्चक्रण भी संभव है। कागज से बने कप जैव निम्नीकरणीय होते हैं, जिसका मतलब है कि वे प्राकृतिक रूप से टूट सकते हैं। इसलिए, इनके उपयोग से पर्यावरण को कोई खतरा नहीं होता है। कागज पर्यावरण के लिए बहुत सुरक्षित विकल्प है क्योंकि यह प्रकृति में आसानी से घुल-मिल जाता है।
In simple words: कागज के कप फेंकना और दोबारा इस्तेमाल करना आसान होता है. ये प्रकृति को नुकसान नहीं पहुँचाते क्योंकि ये अपने आप गल जाते हैं.

🎯 Exam Tip: अपने उत्तर में "जैव निम्नीकरणीय" शब्द का प्रयोग करें और स्पष्ट करें कि यह कैसे पर्यावरण के लिए फायदेमंद है.

 

Question 8. पॉलीथीन की थैलियों के उपयोग पर प्रतिबंध आवश्यक क्यों है?
Answer: पॉलीथीन की थैलियाँ अजैव निम्नीकरणीय होती हैं, जिसका मतलब है कि वे कभी भी पूरी तरह से टूटती नहीं हैं। ये विभिन्न रासायनिक पदार्थों से बनी होती हैं। उपयोग के बाद जब इन्हें फेंक दिया जाता है, तो ये मिट्टी में मिल जाती हैं और खाद्य श्रृंखला में प्रवेश करती हैं। चूंकि ये पदार्थ प्रकृति में नहीं गलते, इसलिए ये हर पोषण स्तर पर जमा होते रहते हैं, जिससे पर्यावरण और मनुष्यों को कई तरह से नुकसान होता है। ये जानवरों की आहार नली को अवरुद्ध कर देती हैं और नालियों को जाम करके मच्छरों और मक्खियों जैसे रोगों को फैलाने वाले कीड़ों को बढ़ने का मौका देती हैं। पॉलीथीन की थैलियों का बढ़ता उपयोग एक गंभीर समस्या है जिसे तुरंत रोकना चाहिए।
In simple words: पॉलीथीन की थैलियाँ गलती नहीं हैं और पर्यावरण में जमा होती रहती हैं, जिससे जानवर बीमार होते हैं और बीमारियाँ फैलती हैं. इसलिए इन्हें रोकना बहुत जरूरी है.

🎯 Exam Tip: पॉलीथीन के अजैव निम्नीकरणीय होने और इससे होने वाले सभी हानिकारक प्रभावों, जैसे जल निकासी अवरुद्ध होना और खाद्य श्रृंखला में प्रवेश, को शामिल करें.

 

Question 9. हमारे द्वारा उत्पादित अजैव निम्नीकरणीय कचरे से कौन-सी समस्याएँ उत्पन्न होती हैं?
Answer: हमारे द्वारा उत्पन्न अजैव निम्नीकरणीय कचरे से कई समस्याएँ होती हैं:

  • इससे जल प्रदूषण होता है, जिससे पीने का पानी दूषित हो जाता है और अनुपयोगी हो जाता है.
  • यह नदियों और नालों में जमा होकर पानी के बहाव को रोक देता है, जिससे बाढ़ जैसी स्थिति उत्पन्न हो सकती है.
  • जब प्लास्टिक की थैलियों को जानवर खा लेते हैं, तो इससे उनकी मौत हो सकती है क्योंकि यह उनके पाचन तंत्र में फंस जाता है.
  • इससे मिट्टी की उर्वरता भी कम होती है, क्योंकि यह मिट्टी में प्राकृतिक प्रक्रियाओं को बाधित करता है.


In simple words: अजैव निम्नीकरणीय कचरा पानी गंदा करता है, नालियाँ बंद करता है और जानवरों को मार डालता है.

🎯 Exam Tip: अजैव निम्नीकरणीय कचरे के तीन मुख्य प्रभावों- जल प्रदूषण, जल निकासी और वन्यजीवों पर प्रभाव- को स्पष्ट रूप से बताएँ.

 

Question 10. यदि हमारे द्वारा उत्पादित सारा कचरा जैव निम्नीकरणीय हो तो क्या इनका हमारे पर्यावरण पर कोई प्रभाव नहीं पड़ेगा?
Answer: यदि हमारा सारा कचरा जैव निम्नीकरणीय होता, तो उसका निपटान बहुत आसान हो जाता। जैव निम्नीकरणीय पदार्थ सूक्ष्मजीवों द्वारा आसानी से टूट जाते हैं और लंबे समय तक पर्यावरण में नहीं रहते। इस तरह के कचरे का हानिकारक प्रभाव वातावरण पर पड़ता तो है, लेकिन यह थोड़े समय के लिए ही होता है। इन पदार्थों को उपयोगी चीज़ों में बदला जा सकता है और उन्हें सरल पदार्थों में तोड़ा जा सकता है। हालाँकि, इनके टूटने से दुर्गंध और जहरीली गैसें निकलती हैं, इसलिए पर्यावरण पर इसका प्रभाव तो पड़ता है, लेकिन वह केवल कुछ समय तक ही रहता है। जैव निम्नीकरणीय कचरा प्राकृतिक चक्र का हिस्सा बन सकता है, अगर इसका सही तरीके से प्रबंधन किया जाए।
In simple words: अगर सारा कचरा जैव निम्नीकरणीय हो तो यह आसानी से खत्म हो जाएगा. इससे थोड़ी बदबूदार गैसें निकलेंगी, लेकिन पर्यावरण को लंबे समय तक नुकसान नहीं होगा.

🎯 Exam Tip: यह बताएँ कि जैव निम्नीकरणीय कचरा टूटता है और उपयोगी बन सकता है, लेकिन इस प्रक्रिया में थोड़ी बदबू और गैसें निकलती हैं.

 

Question 11. जल में उपस्थित अपद्रव्य पदार्थों को कितनी श्रेणियों में बाँटा गया है? वर्णन कीजिए।
Answer: जल में उपस्थित अपद्रव्य पदार्थों को मुख्य रूप से निम्न तीन श्रेणियों में बाँटा गया है:

  • निलंबित अपद्रव्य: ये ऐसे कण होते हैं जिनका व्यास एक माइक्रोमीटर से अधिक होता है और जिन्हें छानकर अलग किया जा सकता है। इनकी उपस्थिति से पानी मटमैला हो जाता है। उदाहरण के लिए, रेत, मिट्टी, खनिज लवण और शैवाल इस प्रकार के अपद्रव्य पदार्थ हैं. ये कण गुरुत्वाकर्षण के कारण नीचे बैठ भी सकते हैं.
  • कोलाइडी अपद्रव्य: ये कण कोलाइड के रूप में होते हैं, जो बहुत छोटे होते हैं। इन्हें छानकर पानी से अलग करना संभव नहीं होता। पानी का प्राकृतिक रंग इन्हीं कोलाइडी कणों के कारण दिखाई देता है। कोलाइडी कण प्रकाश को बिखेर सकते हैं जिससे पानी धुंधला दिखता है.
  • घुलित अशुद्धियाँ: जब प्राकृतिक जल विभिन्न स्थानों से बहता है, तो उसमें कई ठोस, द्रव और गैसीय पदार्थ घुल जाते हैं। जल में घुले ठोस पदार्थों की सांद्रता को पार्ट्स पर मिलियन (PPM) में मापा जाता है। ये अशुद्धियाँ पानी के स्वाद और गंध को प्रभावित कर सकती हैं.


In simple words: पानी में गंदगी तीन तरह की होती है: निलंबित (जो छानकर अलग हो जाए), कोलाइडी (जो बहुत बारीक हो और अलग न हो) और घुलित (जो पानी में घुली हो).

🎯 Exam Tip: प्रत्येक श्रेणी के अपद्रव्य का नाम, उसकी विशेषताएँ और एक उदाहरण दें. यह भी बताएँ कि उन्हें कैसे अलग किया जा सकता है या नहीं.

 

Question 12. रेडियोधर्मी प्रदूषण के प्रमुख कारण बताइए।
Answer: रेडियोधर्मी प्रदूषण तब होता है जब ठोस, द्रव या गैसीय पदार्थों में अनचाहे या अवांछित रेडियोधर्मी पदार्थ मौजूद होते हैं। इसके कारण जीवों में आनुवंशिक विकृतियाँ हो सकती हैं और यहाँ तक कि मृत्यु भी हो सकती है। रेडियोधर्मी प्रदूषण का मुख्य कारण परमाणु ऊर्जा संयंत्रों के निर्माण के दौरान होने वाली दुर्घटनाएँ, परमाणु हथियार परीक्षण या किसी समस्थानिक के अस्थिर नाभिक से विकिरण का उत्सर्जन है। इससे नाभिक क्षय होना शुरू हो जाता है। परमाणु विस्फोट आमतौर पर इस प्रदूषण का मुख्य कारण होता है। इसके अलावा, रेडियोधर्मी गैसीय, तरल या अन्य रूपों में कोई भी पदार्थ इस प्रदूषण का कारण बन सकता है, जिससे गंभीर स्वास्थ्य समस्याएँ होती हैं।
In simple words: रेडियोधर्मी प्रदूषण तब होता है जब रेडियोधर्मी चीज़ें फैल जाती हैं, जैसे परमाणु विस्फोट या दुर्घटना से. यह जीवों के डीएनए को बदल सकता है और जानलेवा हो सकता है.

🎯 Exam Tip: अपने उत्तर में परमाणु ऊर्जा संयंत्रों की दुर्घटनाएँ, परमाणु हथियार परीक्षण और अस्थिर नाभिकों के क्षय को प्रमुख कारणों के रूप में शामिल करें.

 

Question 14. अपशिष्ट किसे कहते हैं? अपशिष्ट प्रबंधन के दो तरीकों को समझाइए। (माध्य. शिक्षा बोर्ड, 2018)
Answer: किसी भी प्रक्रिया के अंत में बनने वाले अनुपयोगी पदार्थ या उत्पाद को अपशिष्ट कहते हैं। अपशिष्ट प्रबंधन का मतलब है इन अपशिष्ट पदार्थों का सही तरीके से निपटान करना ताकि पर्यावरण को नुकसान न हो। अपशिष्ट प्रबंधन के दो मुख्य तरीके निम्नलिखित हैं:

  • भूमिभराव (Landfill): इस विधि में अपशिष्ट को जमीन में गाड़ दिया जाता है। यह कचरा निपटान का एक सस्ता और साफ तरीका है। आमतौर पर, भूमिभराव का उपयोग उन क्षेत्रों में किया जाता है जिनका पहले खनन या अन्य उपयोग नहीं होता था। यदि इसे गलत तरीके से किया जाए, तो पर्यावरण पर बुरा प्रभाव पड़ सकता है, जैसे कचरे का हवा में उड़ना या कीटों को आकर्षित करना। कार्बनिक अपशिष्ट के टूटने से मीथेन गैस बनती है, जिससे दुर्गंध आती है। आधुनिक भूमिभराव में कचरे को व्यवस्थित तरीके से गड्ढों में मिट्टी डालकर भरा जाता है और गैस निकासी प्रणाली लगाई जाती है, जिससे बिजली भी बनाई जा सकती है।
  • भस्मीकरण (Incineration): इस विधि में अपशिष्ट पदार्थों को जलाकर नष्ट किया जाता है। जलने पर अपशिष्ट भाप, ताप, गैस और राख में बदल जाता है। यह छोटे और बड़े पैमाने पर किया जा सकता है। यह खतरनाक कचरे, जैसे जैव चिकित्सा अपशिष्ट, के निपटान के लिए एक व्यावहारिक तरीका माना जाता है। भस्मीकरण से कम जगह की आवश्यकता होती है, जो जापान जैसे देशों में अधिक प्रचलित है। हालाँकि, इससे गैसीय प्रदूषकों का उत्सर्जन होता है, जिससे वायु प्रदूषण का खतरा रहता है।


In simple words: अपशिष्ट बेकार चीज़ें होती हैं. इनके प्रबंधन के दो तरीके हैं: भूमिभराव (कचरे को जमीन में दबाना) और भस्मीकरण (कचरे को जलाना).

🎯 Exam Tip: अपशिष्ट की परिभाषा स्पष्ट करें और प्रत्येक विधि के लाभ और हानियों को संक्षेप में बताएँ.

 

निबन्धात्मक प्रश्न

 

Question 1. पर्यावरण को बचाने के लिए तीन प्रकार के R के विषय में आप क्या जानते हैं? संक्षिप्त में समझाइए। अथवा पर्यावरण को बचाने के लिए तीन प्रकार के 'R' को स्पष्ट कीजिए।
Answer: पर्यावरण को प्रभावी ढंग से सुरक्षित रखने के लिए '3R' सिद्धांत को लागू किया जा सकता है। ये तीन 'R' हैं- कम उपयोग (Reduce), पुनः चक्रण (Recycle) और पुनः उपयोग (Reuse). यह एक सरल और प्रभावी तरीका है जिससे हम कचरे की समस्या को कम कर सकते हैं।

  • कम उपयोग (Reduce): इसका मतलब है कि हमें वस्तुओं का कम से कम उपयोग करना चाहिए। उदाहरण के लिए, जब बिजली के पंखे, बल्ब या टेलीविजन की आवश्यकता न हो, तो स्विच बंद कर दें। टपकते नल की मरम्मत करके पानी की बर्बादी रोकें। इससे हम संसाधनों की खपत को कम करते हैं और कचरा भी कम उत्पन्न होता है.
  • पुनः चक्रण (Recycle): इस विधि में कचरे को नई वस्तुओं में बदलने के लिए संसाधित किया जाता है। जैसे, एल्यूमीनियम के डिब्बे, इस्पात, प्लास्टिक की बोतलें और कागज़ जैसी चीज़ों को इकट्ठा करके उन्हें कारखानों में भेजते हैं ताकि उनसे नए उत्पाद बनाए जा सकें। पुनर्चक्रण से कच्चे माल की आवश्यकता कम होती है और ऊर्जा की बचत भी होती है.
  • पुनः उपयोग (Reuse): यह पुनर्चक्रण से भी बेहतर तरीका है, क्योंकि इसमें ऊर्जा कम खर्च होती है। इसका मतलब है किसी वस्तु का बार-बार उपयोग करना। उदाहरण के लिए, लिफाफों को फेंकने की बजाय उन्हें फिर से इस्तेमाल किया जा सकता है। विभिन्न खाद्य पदार्थों के साथ आई प्लास्टिक की बोतलें या डिब्बे रसोईघर में सामान रखने के लिए इस्तेमाल किए जा सकते हैं। इस तरीके से हम कचरा बनने से रोकते हैं और वस्तुओं का जीवनकाल बढ़ाते हैं।


In simple words: पर्यावरण बचाने के तीन तरीके हैं- कम इस्तेमाल करना (Reduce), दोबारा बनाना (Recycle) और बार-बार इस्तेमाल करना (Reuse).

🎯 Exam Tip: तीनों 'R' को सही क्रम में समझाएँ और प्रत्येक के लिए एक सरल और स्पष्ट उदाहरण दें.

 

Question 2. अपशिष्ट के प्रकार व इससे होने वाले दुष्प्रभावों को लिखिए।
Answer: अपशिष्ट का मतलब किसी भी प्रक्रिया के अंत में बनने वाले अनुपयोगी पदार्थ या उत्पाद से है। अपशिष्ट को मुख्य रूप से दो श्रेणियों में बांटा गया है- जैव निम्नीकरणीय और अजैव निम्नीकरणीय। इन दोनों प्रकार के अपशिष्टों से पर्यावरण पर कई बुरे प्रभाव पड़ते हैं।

  • जैव निम्नीकरणीय अपशिष्ट (Biodegradable waste): ये वे अपशिष्ट पदार्थ होते हैं जिनका जैविक कारकों (जैसे बैक्टीरिया) द्वारा अपघटन हो जाता है। उदाहरण के लिए, घरेलू जैविक कचरा (फल, सब्जी के छिलके), कृषि अपशिष्ट, पादप और जंतु उत्पत्ति के अपशिष्ट (जैसे रुई, पट्टियां, रक्त, मांस के टुकड़े)। यह अपशिष्ट प्रकृति में आसानी से मिल जाता है, लेकिन इसके अपघटन से हानिकारक गैसें निकल सकती हैं.
  • अजैव निम्नीकरणीय अपशिष्ट (Non-biodegradable waste): ये वे अपशिष्ट पदार्थ होते हैं जिनका जैविक कारकों द्वारा अपघटन नहीं हो पाता है। उदाहरण के लिए, प्लास्टिक की बोतलें, पॉलिथीन की थैलियाँ, काँच, सीरिंज, धातु के टुकड़े और कुछ संश्लेषित कार्बनिक रसायन (जैसे कीटनाशक)। ये अपशिष्ट लंबे समय तक पर्यावरण में बने रहते हैं और गंभीर समस्याएँ पैदा करते हैं.

अपशिष्टों के दुष्प्रभाव: अपशिष्ट आज केवल भारत ही नहीं, बल्कि एक वैश्विक समस्या है। रोज़ाना शहरों, कस्बों और गाँवों से बहुत अधिक मात्रा में कचरा निकलता है, जो कई बीमारियों को फैलाता है और नगरों की सुंदरता को बिगाड़ता है।

  • वायु प्रदूषण: कचरा जलाने से कार्बन डाइऑक्साइड (CO2), कार्बन मोनोऑक्साइड (CO) और सल्फर डाइऑक्साइड (SO2) जैसी गैसें निकलती हैं, जो वायु प्रदूषण का कारण बनती हैं। इससे साँस लेने में दिक्कत, आँखों में जलन और श्वसन तंत्र संबंधी बीमारियाँ हो सकती हैं।
  • जल प्रदूषण: औद्योगिक कचरा, कृषि में इस्तेमाल होने वाले कीटनाशक और उर्वरक नदियों और झीलों को प्रदूषित करते हैं। प्रदूषित जल से हैजा, टाइफाइड, पीलिया और अन्य जल-जनित बीमारियाँ फैलती हैं। यह जलीय जीवों के जीवन को भी खतरे में डालता है।
  • भूमि प्रदूषण: ठोस कचरा, जैसे प्लास्टिक और धातु, मिट्टी में मिल जाता है और उसे बंजर बना देता है। यह मिट्टी की उर्वरता को कम करता है और भूमिगत जल को भी प्रदूषित कर सकता है।
  • मानव स्वास्थ्य पर प्रभाव: अपशिष्ट से उत्पन्न प्रदूषण के कारण कान का पर्दा फटना, सिरदर्द, रक्तचाप में वृद्धि और हृदय गति में बदलाव जैसी समस्याएँ हो सकती हैं। रेडियोधर्मी अपशिष्ट का प्रभाव अत्यधिक हानिकारक होता है, जिससे आनुवंशिक विकार और कैंसर जैसी गंभीर बीमारियाँ हो सकती हैं।
  • जलवायु परिवर्तन: जैविक कचरे के सड़ने से मीथेन जैसी ग्रीनहाउस गैसें निकलती हैं, जो ग्लोबल वार्मिंग में योगदान करती हैं।


In simple words: अपशिष्ट दो तरह के होते हैं- जैव निम्नीकरणीय (जो गल जाते हैं) और अजैव निम्नीकरणीय (जो नहीं गलते). यह कचरा हवा, पानी और जमीन को गंदा करता है, बीमारियाँ फैलाता है और हमारी सेहत के लिए खतरनाक है.

🎯 Exam Tip: अपशिष्ट के दोनों प्रकारों को स्पष्ट रूप से परिभाषित करें और प्रत्येक प्रकार के कम से कम दो दुष्प्रभावों का उल्लेख करें।

 

Question 3. अपशिष्ट प्रबंधन से क्या तात्पर्य है? इसके विभिन्न प्रकारों का वर्णन कीजिए।
Answer: अपशिष्ट प्रबंधन का मतलब है अनुपयोगी पदार्थों या उत्पादों (अपशिष्ट) का सही तरीके से निपटान करना। इसका उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि अपशिष्ट से पर्यावरण या मानव स्वास्थ्य को कोई नुकसान न हो। अपशिष्ट के प्रकार के आधार पर उसे निपटाने के कई तरीके हैं। सामान्यतः अपशिष्ट प्रबंधन के मुख्य तरीके निम्नलिखित हैं:

  • भूमिभराव (Landfill): इस विधि में कचरे को जमीन में गाड़ दिया जाता है, अक्सर पुरानी खदानों या खाली जगहों में। यह एक सस्ता और साफ तरीका है। अगर इसे ठीक से प्रबंधित किया जाए, तो कचरे से मीथेन गैस भी निकाली जा सकती है, जिसे बिजली बनाने के लिए इस्तेमाल किया जा सकता है। आधुनिक भूमिभराव स्थल कचरे को व्यवस्थित रूप से जमा करते हैं और गैस निकासी के लिए विशेष प्रणालियाँ लगाते हैं।
  • भस्मीकरण (Incineration): इस विधि में अपशिष्ट को उच्च तापमान पर जलाया जाता है। जलने पर अपशिष्ट भाप, गर्मी (ऊर्जा), गैस और राख में बदल जाता है। यह खतरनाक कचरे, जैसे अस्पताल के अपशिष्ट, के निपटान के लिए प्रभावी है। यह कम जगह लेता है, इसलिए जापान जैसे घनी आबादी वाले देशों में यह तरीका लोकप्रिय है। हालांकि, इससे वायु प्रदूषक निकल सकते हैं, जिन्हें फिल्टर करना आवश्यक है।
  • पुनर्चक्रण (Recycling): इस प्रक्रिया में कचरे को इकट्ठा करके उसे नए उत्पादों में बदलने के लिए संसाधित किया जाता है। जैसे, एल्यूमीनियम के डिब्बे, प्लास्टिक की बोतलें, कागज़ और गत्ते को पिघलाकर या तोड़कर नया सामान बनाया जा सकता है। पुनर्चक्रण से नए कच्चे माल की आवश्यकता कम होती है, ऊर्जा बचती है और कचरे की मात्रा भी कम होती है। यह पर्यावरण के लिए बहुत फायदेमंद है।
  • पुनः उपयोग (Reuse): यह पुनर्चक्रण से भी बेहतर तरीका है क्योंकि इसमें किसी भी वस्तु को दोबारा बनाने की ज़रूरत नहीं पड़ती। इसमें वस्तुओं को उनके मूल रूप में ही बार-बार इस्तेमाल किया जाता है। जैसे, पुराने कपड़ों को पोंछे के रूप में इस्तेमाल करना या प्लास्टिक के डिब्बों में सामान रखना। यह कचरा कम करने का सबसे सीधा तरीका है।


In simple words: अपशिष्ट प्रबंधन का मतलब है कचरे को ठीक से संभालना ताकि वह पर्यावरण को नुकसान न पहुँचाए. इसके मुख्य तरीके हैं कचरे को जमीन में दबाना (भूमिभराव), जलाना (भस्मीकरण), दोबारा उपयोग करना (पुनर्चक्रण) और बार-बार इस्तेमाल करना (पुनः उपयोग).

🎯 Exam Tip: अपशिष्ट प्रबंधन की परिभाषा स्पष्ट करें और प्रत्येक विधि का संक्षिप्त विवरण, साथ में उसके लाभ या प्रमुख विशेषताएँ बताएँ.

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