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Detailed Chapter 12 प्रमुख प्राकृतिक संसाधन RBSE Solutions for Class 10 Science
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Class 10 Science Chapter 12 प्रमुख प्राकृतिक संसाधन RBSE Solutions PDF
बहुचयनात्मक प्रश्न
Question 1. खेजड़ली के बलिदान से सबंधित है
(a) बाबा आमटे
(b) सुन्दरलाल बहुगुणा
(c) अरुन्धती राय
(d) अमृता देवी
Answer: (c) अरुन्धती राय
In simple words: खेजड़ली गाँव में पेड़ों को बचाने के लिए हुए बलिदान का संबंध अरुन्धती राय से है। यह एक महत्वपूर्ण ऐतिहासिक घटना थी जिसमें लोगों ने पर्यावरण की रक्षा के लिए अपना जीवन दिया।
🎯 Exam Tip: चिपको आंदोलन और खेजड़ली बलिदान से जुड़े प्रमुख व्यक्तियों के नाम और उनके योगदान को हमेशा याद रखें।
Question 2. भू-जल संकट के कारण हैं
(a) जल-स्रोतों का प्रदूषण
(b) भू-जल का अतिदोहन
(c) जल की अधिक मांग
(d) उपरोक्त सभी
Answer: (d) उपरोक्त सभी
In simple words: जमीन के नीचे के पानी की कमी होने के कई कारण हैं। इनमें जल स्रोतों का गंदा होना, बहुत ज्यादा पानी निकालना, और पानी की बढ़ती माँग, ये सभी कारण शामिल हैं।
🎯 Exam Tip: भू-जल संकट के कारणों को सूचीबद्ध करते समय, प्रदूषण, अतिदोहन और बढ़ती मांग जैसे प्रमुख बिंदुओं पर ध्यान दें।
Question 3. लाल आंकड़ों की पुस्तक सम्बन्धित है
(a) संकटग्रस्त वन्य जीवों से
(b) दुर्लभ वन्य जीवों से
(c) विलुप्त जातियों से
(d) उपरोक्त सभी
Answer: (d) उपरोक्त सभी
In simple words: लाल आंकड़ों की पुस्तक, जिसे रेड डेटा बुक भी कहते हैं, उन सभी जीव-जंतुओं और पौधों के बारे में जानकारी देती है जो खतरे में हैं। इसमें वे प्रजातियाँ शामिल हैं जिन पर संकट है, जो बहुत कम बची हैं, या जो अब धरती से गायब हो चुकी हैं।
🎯 Exam Tip: रेड डेटा बुक से संबंधित प्रश्नों में, हमेशा याद रखें कि यह सिर्फ विलुप्त प्रजातियों तक सीमित नहीं है, बल्कि संकटग्रस्त और दुर्लभ प्रजातियों को भी शामिल करती है।
Question 4. सरिस्का अभयारण्य स्थित है
(a) अलवर में
(b) जोधपुर में
(c) जयपुर में
(d) अजमेर में
Answer: (a) अलवर में
In simple words: सरिस्का वन्यजीव अभयारण्य राजस्थान के अलवर जिले में है। यह बाघों और अन्य वन्यजीवों के लिए एक संरक्षित जगह है।
🎯 Exam Tip: प्रमुख राष्ट्रीय उद्यानों और वन्यजीव अभयारण्यों के नाम और उनके स्थानों को याद रखना महत्वपूर्ण है, खासकर वे जो आपके राज्य से संबंधित हों।
Question 5. सर्वाधिक कार्बन की मात्रा उपस्थित होती है
(a) पीट में
(b) लिग्नाइट में
(c) एन्थ्रेसाइट में
(d) बिटूमिनस में
Answer: (c) एन्थ्रेसाइट में
In simple words: एन्थ्रेसाइट कोयले का सबसे अच्छी किस्म है क्योंकि इसमें सबसे ज़्यादा कार्बन होता है। ज़्यादा कार्बन का मतलब है कि यह ज़्यादा गर्मी देता है और कम धुआँ करता है।
🎯 Exam Tip: कोयले के विभिन्न प्रकारों को उनकी कार्बन मात्रा के अनुसार याद रखें – एन्थ्रेसाइट में सबसे अधिक, फिर बिटूमिनस, लिग्नाइट और पीट में सबसे कम।
अतिलघूत्तरात्मक प्रश्न
Question 6. संकटापन्न जातियों से क्या तात्पर्य है?
Answer: संकटापन्न जातियाँ उन प्रजातियों को कहते हैं, जिनके संरक्षण के लिए अगर तुरंत उपाय नहीं किए गए, तो वे बहुत जल्दी भविष्य में पूरी तरह से विलुप्त हो सकती हैं। इन प्रजातियों को बचाने के लिए विशेष ध्यान और सुरक्षा की आवश्यकता होती है।
In simple words: संकटापन्न जातियाँ वे जीव-जंतु या पेड़-पौधे हैं जो खत्म होने के कगार पर हैं, अगर उन्हें बचाया नहीं गया तो वे जल्द ही दुनिया से गायब हो जाएँगे।
🎯 Exam Tip: 'संकटापन्न' शब्द का अर्थ बताते समय, 'संरक्षण', 'भविष्य' और 'विलुप्त' जैसे मुख्य शब्दों का प्रयोग करें।
Question 7. राष्ट्रीय उद्यान क्या है?
Answer: राष्ट्रीय उद्यान ऐसे प्राकृतिक क्षेत्र होते हैं जहाँ पर्यावरण, वन्यजीवों और प्राकृतिक अवशेषों को सरकारी तौर पर संरक्षित किया जाता है। इन उद्यानों का मुख्य उद्देश्य जैव विविधता को बनाए रखना और प्राकृतिक विरासत की रक्षा करना होता है।
In simple words: राष्ट्रीय उद्यान सरकार द्वारा बनाए गए ऐसे इलाके हैं जहाँ प्रकृति, जंगली जानवर और पुराने पेड़-पौधे सुरक्षित रखे जाते हैं।
🎯 Exam Tip: राष्ट्रीय उद्यान की परिभाषा में 'प्राकृतिक क्षेत्र', 'वन्यजीव', 'पर्यावरण' और 'संरक्षण' जैसे प्रमुख शब्द शामिल करें।
Question 8. सिंचाई की विधियों के नाम बताइये।
Answer: सिंचाई मुख्य रूप से फव्वारा विधि और टपकन विधि द्वारा की जाती है। ये दोनों विधियाँ पानी बचाने और फसलों को कुशलता से पानी देने में मदद करती हैं, खासकर उन क्षेत्रों में जहाँ पानी की कमी है।
In simple words: सिंचाई की मुख्य विधियाँ फव्वारा विधि और टपकन विधि हैं, जिनसे पौधों को पानी दिया जाता है।
🎯 Exam Tip: आधुनिक सिंचाई विधियों के रूप में फव्वारा और टपकन (ड्रिप) विधियों का उल्लेख करें, क्योंकि ये जल संरक्षण में सहायक हैं।
Question 9. उड़न गिलहरी किस वन्य जीव अभयारण्य में पायी जाती है?
Answer: उड़न गिलहरी मुख्य रूप से सीतामाता वन्य जीव अभयारण्य में पाई जाती है, जो प्रतापगढ़ में स्थित है। यह अभयारण्य अपनी जैव विविधता और विशेष रूप से उड़न गिलहरियों के लिए प्रसिद्ध है।
In simple words: उड़न गिलहरी सीतामाता अभयारण्य में मिलती है, जो प्रतापगढ़ में है।
🎯 Exam Tip: दुर्लभ प्रजातियों के साथ उनके विशिष्ट निवास स्थान या अभयारण्य का उल्लेख करना बहुत प्रभावी होता है।
Question 10. पेट्रोलियम के घटकों के नाम लिखो।
Answer: पेट्रोलियम के मुख्य घटकों में पेट्रोल, डीजल, केरोसीन, प्राकृतिक गैस, वेसलीन और स्नेहक शामिल हैं। इन सभी घटकों को कच्चे पेट्रोलियम से आसवन विधि द्वारा अलग-अलग किया जाता है, क्योंकि उनके उबलने के तापमान अलग-अलग होते हैं।
In simple words: पेट्रोलियम से पेट्रोल, डीजल, केरोसीन, प्राकृतिक गैस और वेसलीन जैसे कई हिस्से निकलते हैं। इन्हें अलग करने के लिए आसवन विधि का उपयोग होता है।
🎯 Exam Tip: पेट्रोलियम के घटकों को सूचीबद्ध करते समय, आसवन विधि का भी उल्लेख करें क्योंकि यह इनके पृथक्करण की मुख्य प्रक्रिया है।
Question 12. सामाजिक वानिकी क्या है?
Answer: सामाजिक वानिकी एक कार्यक्रम है जिसके तहत वनों के क्षेत्र को बढ़ाया जाता है ताकि ग्रामीण लोगों को चारा, जलाऊ लकड़ी और अन्य छोटे वन उत्पाद मिल सकें। इसका मतलब है कि समाज की जरूरतों को पूरा करने के लिए वन संसाधनों का उपयोग किया जाता है। सामाजिक वानिकी के तीन मुख्य घटक इस प्रकार हैं:
- कृषि वानिकी (Agro-Forestry)
- वन विभाग द्वारा नहरों, सड़कों, अस्पतालों जैसे सार्वजनिक स्थानों पर वृक्षारोपण करना ताकि सामुदायिक आवश्यकताएँ पूरी हों।
- ग्रामीणों द्वारा सार्वजनिक भूमि पर वृक्षारोपण करना।
यह कार्यक्रम समुदाय की भागीदारी से वनों के प्रबंधन और विकास को बढ़ावा देता है।
In simple words: सामाजिक वानिकी का मतलब है कि जंगलों को ऐसे बढ़ाया जाए जिससे गाँव वालों को लकड़ी, चारा और दूसरे वन उत्पाद मिलें। इसके मुख्य हिस्से हैं खेती के साथ पेड़ लगाना, सरकारी जगहों पर पेड़ लगाना और गाँव की जमीन पर पेड़ लगाना।
🎯 Exam Tip: सामाजिक वानिकी की परिभाषा में 'समुदाय की आवश्यकताएँ' और 'वन क्षेत्र का विस्तार' जैसे शब्द अनिवार्य रूप से शामिल करें। इसके तीनों घटकों का उल्लेख करना न भूलें।
Question 13. कोयले के प्रकारों के नाम लिखिए।
Answer: कोयले को उसमें मौजूद कार्बन की मात्रा के आधार पर मुख्य रूप से चार प्रकारों में बांटा गया है:
1. एन्थ्रेसाइट (94-98% कार्बन)
2. लिग्नाइट (28-30% कार्बन)
3. बिटूमिनस (78-86% कार्बन)
4. पीट (27% कार्बन)
एन्थ्रेसाइट सबसे उच्च गुणवत्ता वाला कोयला है, जबकि पीट सबसे निम्न गुणवत्ता वाला।
In simple words: कोयले के चार मुख्य प्रकार हैं: एन्थ्रेसाइट (सबसे अच्छा), बिटूमिनस, लिग्नाइट और पीट (सबसे साधारण), जो कार्बन की मात्रा के हिसाब से अलग-अलग होते हैं।
🎯 Exam Tip: कोयले के प्रकारों को उनकी कार्बन प्रतिशतता के साथ याद रखें, यह उनकी गुणवत्ता को दर्शाता है।
Question 14. सतत् पोषणीय विकास से क्या तात्पर्य है?
Answer: सतत् पोषणीय विकास का अर्थ है कि किसी भी संसाधन का उपयोग इतनी सावधानी से किया जाए कि उसका उपयोग न केवल हम आज कर सकें, बल्कि आने वाली पीढ़ियाँ भी अपनी जरूरतों को पूरा करने के लिए उसे इस्तेमाल कर सकें। इसका उद्देश्य वर्तमान की ज़रूरतों को पूरा करते हुए भविष्य की पीढ़ी की ज़रूरतों से समझौता न करना है।
In simple words: सतत् पोषणीय विकास का मतलब है कि हम संसाधनों का इस्तेमाल ऐसे करें कि हमारी जरूरतें भी पूरी हों और भविष्य की पीढ़ियों के लिए भी संसाधन बचें रहें।
🎯 Exam Tip: सतत् पोषणीय विकास की परिभाषा में 'वर्तमान आवश्यकताओं' और 'भविष्य की पीढ़ियों' का उल्लेख करना महत्वपूर्ण है।
निबन्धात्मक प्रश्न
Question 16. जल संरक्षण व प्रबंधन के उपाय लिखिए।
Answer: जल एक चक्रीय संसाधन है, और यदि इसका सही ढंग से उपयोग किया जाए, तो इसकी कमी नहीं होगी। जल का संरक्षण ही जीवन का संरक्षण है। जल संरक्षण और प्रबंधन के लिए निम्नलिखित उपाय किए जाने चाहिए:
- जल को एक मूल्यवान राष्ट्रीय संपत्ति मानना और उसकी उचित योजना बनाना चाहिए।
- वर्षा जल संग्रहण की विभिन्न विधियों का उपयोग करके जल को इकट्ठा करना चाहिए।
- घरेलू उपयोग में जल की बर्बादी को पूरी तरह रोकना चाहिए।
- भू-जल का अत्यधिक दोहन नहीं करना चाहिए, जिससे भू-जल स्तर बना रहे।
- जल को प्रदूषित होने से बचाना चाहिए।
- जल को पुनर्चक्रित करके फिर से उपयोग में लाना चाहिए।
- बाढ़ नियंत्रण के लिए नदियों को आपस में जोड़ना चाहिए और जल का उचित उपयोग करना चाहिए।
- खेतों की सिंचाई फव्वारा विधि और टपकन विधि से की जानी चाहिए, क्योंकि ये पानी बचाती हैं।
इसके साथ ही, एकीकृत जलसंभर प्रबंधन द्वारा जल संसाधनों का वैज्ञानिक प्रबंधन करना चाहिए और वर्षा जल का संग्रहण करके भू-जल का स्तर बढ़ाने का प्रयास करना चाहिए।
In simple words: पानी बचाने और संभालने के लिए हमें उसे गंदा होने से रोकना चाहिए, कम इस्तेमाल करना चाहिए, बारिश का पानी इकट्ठा करना चाहिए और खेतों में कम पानी वाली सिंचाई करनी चाहिए।
🎯 Exam Tip: जल संरक्षण के उपायों को लिखते समय, 'प्रदूषण नियंत्रण', 'पुनर्चक्रण', 'वर्षा जल संग्रहण' और 'कम पानी वाली सिंचाई विधियाँ' जैसे मुख्य बिंदुओं को शामिल करें।
Question 17. वन संरक्षण के उपायों पर प्रकाश डालिये।
Answer: वन इस पृथ्वी पर जीवन का आधार हैं। वनों की अंधाधुंध कटाई से पर्यावरण और प्राकृतिक संसाधनों को नुकसान हो रहा है, जैसे मिट्टी का कटाव, वन्य जीवन का विनाश, जलवायु परिवर्तन, मरुस्थलीकरण और प्रदूषण में वृद्धि। इसलिए वनों के संरक्षण के लिए निम्नलिखित उपाय अपनाए जा सकते हैं:
- वनों की कटाई एक निश्चित सीमा तक ही होनी चाहिए, और वन काटने व वृक्षारोपण की दरें समान अनुपात में होनी चाहिए।
- वनों को आग से बचाना चाहिए। इसके लिए निरीक्षण गृह बनाने और आग से बचाव के रास्ते (फायर लाइन) बनाने चाहिए।
- वनों को हानिकारक कीटों से दवा छिड़ककर और रोगग्रस्त पेड़ों को हटाकर रक्षा करनी चाहिए।
- विविधतापूर्ण वनों को प्राथमिकता देनी चाहिए बजाय एक ही तरह के पेड़ों वाले वनों के।
- खेती और आवास के लिए वनों को काटना (वन उन्मूलन) और झूम खेती (स्थानांतरित कृषि) पर रोक लगानी चाहिए।
हमें वनों के महत्व को समझते हुए उनके संरक्षण के लिए सक्रिय कदम उठाने होंगे।
In simple words: जंगल बचाने के लिए पेड़ों की कटाई कम करनी चाहिए, ज्यादा पेड़ लगाने चाहिए, जंगलों को आग और कीड़ों से बचाना चाहिए और झूम खेती बंद करनी चाहिए।
🎯 Exam Tip: वन संरक्षण के उपायों को बताते समय, 'पुनर्वनीकरण', 'अग्नि सुरक्षा', 'कीट नियंत्रण' और 'झूम खेती पर रोक' जैसे महत्वपूर्ण पहलुओं पर जोर दें।
Question 18. वन्य जीवों के विलुप्त होने के कारणों का वर्णन कीजिए।
Answer: आज मानव गतिविधियों के कारण वन्य जीवों का अस्तित्व लगातार खतरे में है। मानव के अलावा, कुछ प्राकृतिक कारण भी हैं जिनसे वन्य जीव संकटग्रस्त हो रहे हैं। वन्य जीवों के विलुप्त होने के मुख्य कारण निम्नलिखित हैं:
(अ) प्राकृतिक आवासों का नष्ट होना- वन्य जीवों के प्राकृतिक आवासों के नष्ट होने के कई कारण हैं, जिनमें प्रमुख इस प्रकार हैं:
- जनसंख्या में अत्यधिक वृद्धि के कारण मानव की ज़रूरतें बढ़ गई हैं। मानव ने आवास, कृषि और उद्योगों के लिए वन भूमि का उपयोग किया, जिससे जीवों के प्राकृतिक आवास खतरे में पड़ गए।
- भाखड़ा नांगल, टिहरी बांध जैसी बड़ी जल परियोजनाओं से वन भूमि पानी में डूब गई, जिससे वन्य जीवों के प्राकृतिक आवास नष्ट हो गए।
- जंगलों में खनन कार्य, पर्यावरण प्रदूषण और अम्लीय वर्षा के कारण भी प्राकृतिक आवास नष्ट हुए।
- समुद्रों में तेल टैंकरों से होने वाले तेल के रिसाव से समुद्री जीवों के आवास नष्ट हो रहे हैं।
- ग्रीनहाउस प्रभाव के कारण पृथ्वी का तापमान बढ़ रहा है, जिससे जैव विविधता पर नकारात्मक असर पड़ रहा है।
(ब) वन्य जीवों का अवैध शिकार।
(स) प्रदूषण।
(द) मानव तथा वन्य जीवों में संघर्ष।
इन सभी कारणों के अतिरिक्त, प्राकृतिक, आनुवांशिक और मानव जनित कई अन्य कारण भी वन्य जीवों के विनाश के लिए जिम्मेदार हैं।
In simple words: वन्य जीव इसलिए खत्म हो रहे हैं क्योंकि उनके घर (जंगल) कट रहे हैं, लोग उनका शिकार कर रहे हैं, प्रदूषण बढ़ रहा है, और इंसान व जानवरों के बीच लड़ाई बढ़ गई है।
🎯 Exam Tip: वन्य जीव विलुप्ति के कारणों को लिखते समय, आवास विनाश, अवैध शिकार, प्रदूषण और मानव-वन्यजीव संघर्ष जैसे मुख्य बिंदुओं को विस्तार से समझाएँ।
Question 19. राजस्थान में पारम्परिक जल संग्रहण की विभिन्न पद्धतियों का वर्णन कीजिए।
Answer: राजस्थान में जल संग्रहण की कई पुरानी और पारंपरिक पद्धतियाँ प्रचलन में हैं, जिनमें कुछ प्रमुख पद्धतियाँ इस प्रकार हैं:
1. खडीन- यह एक अस्थायी तालाब होता है जिसे मिट्टी से बनाया जाता है। इसे ढाल वाली भूमि के नीचे बनाते हैं। इसके दोनों ओर मिट्टी की दीवार (धोरा) और तीसरी ओर पत्थर की मजबूत दीवार होती है। जब पानी बहुत ज्यादा होता है, तो खडीन भर जाता है और अतिरिक्त पानी आगे वाली खडीन में चला जाता है। खडीन का पानी सूखने पर, उसमें खेती की जाती है।
2. तालाब- राजस्थान में आमतौर पर वर्षा के पानी को तालाबों में इकट्ठा किया जाता है। इन तालाबों में महिलाओं और पुरुषों के नहाने के लिए अलग-अलग घाट होते हैं।
4. बावड़ी- राजस्थान में बावड़ियों का अपना खास महत्व है। यह जल संग्रहण का एक बहुत पुराना तरीका है। ये गहरी होती हैं और इनमें उतरने के लिए सीढ़ियाँ व तिबारे होते हैं। ये कलाकृतियों से भरपूर होती हैं।
5. टोबा- थार के रेगिस्तान में टोबा वर्षा के जल संग्रहण का मुख्य पारंपरिक स्रोत है। यह नाडी जैसा होता है, लेकिन नाडी से गहरा होता है।
ये सभी पद्धतियाँ जल संरक्षण में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती हैं।
In simple words: राजस्थान में पानी इकट्ठा करने के पुराने तरीके हैं खडीन (अस्थायी तालाब), तालाब, बावड़ी (सीढ़ी वाले कुएँ) और टोबा (गहरे गड्ढे), जो बारिश के पानी को सहेजते हैं।
🎯 Exam Tip: राजस्थान की पारंपरिक जल संग्रहण पद्धतियों को उनके नाम और संक्षिप्त विवरण के साथ याद रखें, जैसे खडीन, तालाब, बावड़ी और टोबा।
Question 20. चिपको आन्दोलन पर लेख लिखिए।
Answer: चिपको आन्दोलन का मुख्य उद्देश्य पेड़ों की कटाई को रोकना था, और यह वनों की सुरक्षा के लिए उठाया गया एक प्रगतिशील कदम था। यह आन्दोलन राजस्थान के जोधपुर जिले के खेजड़ली गाँव से शुरू हुआ था, जहाँ अमृता देवी और 363 बिश्नोई लोगों ने पेड़ों को बचाने के लिए अपना बलिदान दिया था।
सन् 1730 में जोधपुर के तत्कालीन महाराजा को अपने महल के निर्माण के लिए लकड़ी की आवश्यकता थी। उनके सेवक खेजड़ली गाँव के खेजड़ी वृक्षों को काटने लगे। गाँव की अमृता देवी ने इस कटाई का विरोध किया। अमृता देवी और उनकी तीन बेटियों ने पेड़ों से चिपककर उन्हें काटने से रोका। सैनिकों ने अमृता देवी और उनकी बेटियों को पेड़ों के साथ काट दिया। इस घटना को देखकर गाँव के अन्य लोगों ने भी पेड़ों से चिपककर अपना बलिदान दिया। कुल 363 लोगों ने वृक्षों की रक्षा करते हुए अपना जीवन त्याग दिया। महाराजा को इस बलिदान की जानकारी मिलने पर उन्होंने तुरंत वृक्षों की कटाई को रोकने का आदेश दिया। आज भी बिश्नोई समाज पेड़-पौधों और वन्य प्राणियों के संरक्षण के लिए दृढ़ संकल्पित है।
पेड़ों की कटाई के विरोध में पेड़ों से चिपकने के कारण ही इस आन्दोलन का नाम 'चिपको' रखा गया। खेजड़ली का बलिदान आज वनों की सुरक्षा के लिए एक आदर्श है। खेजड़ी के वृक्ष आज भी प्रेरणा देते हैं और राजस्थान में इसे 'सागवान' या 'कल्पवृक्ष' माना जाता है। खेजड़ली बलिदान के बाद, सन् 1973 में उत्तराखण्ड में भी महिलाओं ने पेड़ों की सुरक्षा के लिए 'चिपको आन्दोलन' चलाया, जिसकी बागडोर सुन्दरलाल बहुगुणा के हाथों में थी। यह आन्दोलन 8 वर्षों तक चला और सन् 1981 में सरकार ने 1000 मीटर से ऊँचाई वाले क्षेत्रों में हरे पेड़ों की कटाई पर प्रतिबंध लगा दिया। इसी तरह का एक आन्दोलन कर्नाटक में भी चला, जिसे 'एप्पिको' कहा जाता है, जिसका कन्नड़ भाषा में अर्थ 'चिपकना' होता है।
In simple words: चिपको आन्दोलन पेड़ों को बचाने के लिए शुरू हुआ था। यह राजस्थान के खेजड़ली में अमृता देवी के बलिदान के बाद उत्तराखण्ड और कर्नाटक में भी फैला। इस आन्दोलन में लोग पेड़ों से चिपककर उन्हें कटने से रोकते थे।
🎯 Exam Tip: चिपको आंदोलन के बारे में लिखते समय, खेजड़ली की घटना, अमृता देवी, सुन्दरलाल बहुगुणा और 'चिपको' नाम के अर्थ का उल्लेख करें।
Question 21. प्राकृतिक संसाधन किसे कहते हैं? इसके प्रकारों का वर्णन कीजिए।
अथवा
Answer: प्राकृतिक संसाधन वे संसाधन हैं जो प्रकृति से मिलते हैं और जिनका उपयोग बिना किसी बड़े बदलाव के किया जाता है। ये मानव जीवन के लिए बहुत ज़रूरी होते हैं।
प्राकृतिक संसाधनों को मुख्य रूप से चार आधारों पर वर्गीकृत किया जा सकता है, जिनका विस्तृत वर्णन निम्न प्रकार है:
1. विकास एवं प्रयोग के आधार पर- इन्हें भी दो भागों में बांटा जा सकता है:
(अ) वास्तविक संसाधन- ये वे संसाधन हैं जिनकी मात्रा हमें पता है और जिनका उपयोग अभी किया जा रहा है, जैसे पश्चिम एशिया में खनिज तेल या जर्मनी में कोयला।
(ब) सम्भाव्य संसाधन- ये वे संसाधन हैं जिनकी मात्रा का अनुमान नहीं है और जिनका उपयोग अभी नहीं हो रहा है, पर भविष्य में किया जा सकता है, जैसे लद्दाख में यूरेनियम या 20 साल पहले की पवन चक्कियाँ।
2. उद्गम या उत्पत्ति के आधार पर- इसे भी दो भागों में बांटा जा सकता है:
(अ) जैव संसाधन- सजीव या जीवित वस्तुएँ जैव संसाधन हैं, जैसे जीव-जंतु, पेड़-पौधे, मानव आदि।
(ब) अजैव संसाधन- निर्जीव वस्तुएँ अजैव संसाधन हैं, जैसे वायु, मृदा, प्रकाश आदि।
3. भण्डारण या वितरण के आधार पर- इन्हें भी दो भागों में बांटा गया है:
(अ) सर्वव्यापक- वे वस्तुएँ जो सभी जगह मिलती हैं, उन्हें सर्वव्यापक संसाधन कहते हैं, जैसे वायु।
(ब) स्थानिक संसाधन- वे वस्तुएँ जो कुछ ही स्थानों पर उपलब्ध होती हैं, उन्हें स्थानिक संसाधन कहते हैं, जैसे ताँबा, लौह अयस्क आदि।
4. नव्यकरणीयता के आधार पर- इस आधार पर संसाधन दो प्रकार के होते हैं:
(अ) नवीकरणीय संसाधन- ये वे वस्तुएँ हैं जिनका निर्माण और उपयोग बार-बार किया जा सकता है तथा जिनकी पूर्ति आसानी से हो सकती है, जैसे सौर ऊर्जा, पवन ऊर्जा।
(ब) अनवीकरणीय संसाधन- ये वे संसाधन हैं जिनकी मात्रा सीमित है और जिनके बनने में हजारों-लाखों साल लगते हैं, जैसे कोयला, पेट्रोलियम।
In simple words: प्राकृतिक संसाधन वे चीजें हैं जो हमें प्रकृति से मिलती हैं, जैसे हवा, पानी, मिट्टी, खनिज और पेड़-पौधे। इन्हें इस आधार पर बांटा जाता है कि वे कितने विकसित हैं, कहाँ से आए हैं, कहाँ मिलते हैं और क्या वे दोबारा बन सकते हैं या नहीं।
🎯 Exam Tip: प्राकृतिक संसाधनों की परिभाषा स्पष्ट करें और उनके वर्गीकरण के चारों मुख्य आधारों (विकास, उद्गम, वितरण, नव्यकरणीयता) को उप-प्रकारों सहित विस्तार से समझाएँ।
अन्य महत्त्वपूर्ण प्रश्नोत्तर
वस्तुनिष्ठ प्रश्न
Question 1. सर्वव्यापक संसाधन है
(a) जिंक
(b) लोहा
(c) वायु
(d) लौह अयस्क
Answer: (c) वायु
In simple words: वायु एक ऐसा संसाधन है जो धरती पर हर जगह मिलता है, इसलिए इसे सर्वव्यापक संसाधन कहते हैं।
🎯 Exam Tip: सर्वव्यापक संसाधन वह होता है जो हर जगह आसानी से उपलब्ध हो, जैसे हवा या सूर्य का प्रकाश।
Question 2. अनवीकरणीय संसाधन हैं
(a) कोयला
(b) पेट्रोलियम
(c) प्राकृतिक गैस
(d) उपरोक्त सभी
Answer: (d) उपरोक्त सभी
In simple words: अनवीकरणीय संसाधन वे होते हैं जो एक बार इस्तेमाल होने के बाद दोबारा नहीं बन सकते या बनने में बहुत लंबा समय लगता है, जैसे कोयला, पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस।
🎯 Exam Tip: अनवीकरणीय संसाधनों के उदाहरणों को याद रखें, जो सीमित मात्रा में हैं और लाखों वर्षों में बनते हैं।
Question 3. IUCN का गठन हुआ था
(a) 1952 में
(b) 1972 में
(c) 1948 में।
(d) 1986 में
Answer: (c) 1948 में।
In simple words: IUCN, जो प्रकृति के संरक्षण के लिए काम करने वाली एक बड़ी संस्था है, सन् 1948 में बनी थी।
🎯 Exam Tip: IUCN जैसी महत्वपूर्ण अंतर्राष्ट्रीय संस्थाओं की स्थापना का वर्ष याद रखना सामान्य ज्ञान और पर्यावरण से जुड़े प्रश्नों के लिए उपयोगी है।
Question 4. विलुप्त जाति है
(a) विशाल पाण्डा
(b) रायनिया
(c) गोडावन
(d) गैण्डा
Answer: (b) रायनिया
In simple words: रायनिया एक प्रजाति है जो अब धरती से पूरी तरह खत्म हो चुकी है, यानी यह विलुप्त जाति है।
🎯 Exam Tip: 'विलुप्त जाति' का मतलब उन प्रजातियों से है जो पृथ्वी पर अब जीवित नहीं हैं, जैसे डायनासोर।
Question 5. गिर राष्ट्रीय उद्यान स्थित है
(a) असम में
(b) गुजरात में
(c) उत्तराखण्ड में
(d) राजस्थान में
Answer: (b) गुजरात में
In simple words: गिर राष्ट्रीय उद्यान भारत के गुजरात राज्य में स्थित है और यह एशियाई शेरों के लिए प्रसिद्ध है।
🎯 Exam Tip: भारत के प्रमुख राष्ट्रीय उद्यानों और वे किस राज्य में स्थित हैं, उन्हें याद रखें, खासकर जो किसी विशेष जीव के लिए प्रसिद्ध हों।
Question 6. उत्तराखण्ड का राष्ट्रीय उद्यान है
(a) सतपुड़ा
(b) काजीरंगा
(c) कार्केट
(d) सुन्दरबन
Answer: (c) कार्केट
In simple words: कॉर्बेट राष्ट्रीय उद्यान (कार्केट) भारत के उत्तराखण्ड राज्य में स्थित है और यह देश के सबसे पुराने राष्ट्रीय उद्यानों में से एक है।
🎯 Exam Tip: राज्यों के साथ-साथ उनके प्रसिद्ध राष्ट्रीय उद्यानों के नाम याद रखें। कॉर्बेट राष्ट्रीय उद्यान उत्तराखण्ड में है।
Question 7. जवाहर सागर, कोटा अभयारण्य में संरक्षण होता है
(a) रीछ का
(b) गोडावन का
(c) जंगली मुर्गे का
(d) घड़ियाल का
Answer: (d) घड़ियाल का
In simple words: जवाहर सागर अभयारण्य, जो कोटा में है, मुख्य रूप से घड़ियालों को बचाने के लिए जाना जाता है।
🎯 Exam Tip: विभिन्न अभयारण्यों में किन विशिष्ट जीवों का संरक्षण होता है, यह याद रखना प्रतियोगिता परीक्षाओं के लिए महत्वपूर्ण है।
Question 9. एप्पिको' आन्दोलन किस राज्य में हुआ था?
(a) राजस्थान
(b) उत्तर प्रदेश
(c) केरल
(d) कर्नाटक
Answer: (d) कर्नाटक
In simple words: एप्पिको आन्दोलन पेड़ों को बचाने के लिए कर्नाटक राज्य में शुरू हुआ था, जो चिपको आन्दोलन जैसा ही था।
🎯 Exam Tip: भारत में हुए प्रमुख पर्यावरण आंदोलनों और वे किस राज्य में हुए, इसे याद रखें। एप्पिको आंदोलन कर्नाटक से जुड़ा है।
Question 10. वर्षा जल संग्रहण से सम्बन्धित है
(a) ट्रोला
(b) टोबा
(c) टीबा
(d) टीका
Answer: (b) टोबा
In simple words: टोबा राजस्थान में वर्षा के जल को इकट्ठा करने का एक पारंपरिक तरीका है।
🎯 Exam Tip: वर्षा जल संग्रहण की पारंपरिक विधियों को पहचानना महत्वपूर्ण है, जैसे राजस्थान में टोबा।
अतिलघूत्तरात्मक प्रश्न (Continued)
Question 2. थार का कल्पवृक्ष किसे कहते हैं ?
Answer: खेजड़ी वृक्ष को थार रेगिस्तान का कल्पवृक्ष कहते हैं। यह वृक्ष रेगिस्तान के शुष्क वातावरण में भी जीवित रहने और कई तरह से लोगों के लिए उपयोगी होने के कारण यह नाम प्राप्त किया है।
In simple words: खेजड़ी के पेड़ को थार रेगिस्तान का कल्पवृक्ष कहते हैं, क्योंकि यह वहां के लोगों के लिए बहुत उपयोगी है।
🎯 Exam Tip: खेजड़ी वृक्ष के महत्व और उसे दिए गए नाम 'कल्पवृक्ष' के बारे में जानकारी रखें।
Question 3. संरक्षण से क्या तात्पर्य है?
Answer: संरक्षण का अर्थ है संसाधनों का अधिकतम समय तक अधिकतम मनुष्यों की आवश्यकताओं की पूर्ति हेतु अधिकतम उपयोग करना। इसमें संसाधनों का विवेकपूर्ण प्रबंधन और उपयोग शामिल है ताकि वे भविष्य के लिए भी उपलब्ध रहें।
In simple words: संरक्षण का मतलब है कि संसाधनों का इस्तेमाल इस तरह से किया जाए कि वे लंबे समय तक ज्यादा लोगों के काम आ सकें।
🎯 Exam Tip: संरक्षण की परिभाषा में 'संसाधनों का विवेकपूर्ण उपयोग' और 'दीर्घकालिक उपलब्धता' जैसे तत्व शामिल करें।
Question 4. वन उन्मूलन का एक कारण बताइये।
Answer: वन उन्मूलन का एक प्रमुख कारण झूम खेती है। इस खेती में किसान जंगल के एक हिस्से को साफ करके और जलाकर खेती करते हैं, और कुछ साल बाद दूसरी जगह चले जाते हैं, जिससे जंगल लगातार कम होते जाते हैं।
In simple words: झूम खेती वनों को खत्म करने का एक बड़ा कारण है, क्योंकि इसमें जंगल के पेड़ों को काटकर जला दिया जाता है।
🎯 Exam Tip: वन उन्मूलन के कारणों में झूम खेती, औद्योगिक विकास और शहरीकरण जैसे प्रमुख बिंदुओं को याद रखें।
Question 5. हमारे देश में किन राज्यों में झूम खेती की जाती है?
Answer: हमारे देश में मुख्य रूप से उत्तर-पूर्वी राज्यों जैसे नागालैण्ड, मिजोरम, मेघालय, अरुणाचल प्रदेश, त्रिपुरा और असम में झूम खेती की जाती है। इन राज्यों में यह खेती पारंपरिक रूप से की जाती रही है, जिससे वन क्षेत्रों पर दबाव पड़ता है।
In simple words: झूम खेती भारत के उत्तर-पूर्वी राज्यों जैसे नागालैण्ड, मिजोरम, मेघालय और असम में होती है।
🎯 Exam Tip: भारत में झूम खेती करने वाले प्रमुख राज्यों के नाम याद रखें, जो मुख्य रूप से उत्तर-पूर्वी क्षेत्र में स्थित हैं।
Question 6. वन्य जीवों की सुरक्षा के लिए किस वर्ष में वन्य जीवन सुरक्षा अधिनियम बनाया गया था?
Answer: वन्य जीवों की सुरक्षा के लिए भारत में वन्य जीवन सुरक्षा अधिनियम सन् 1972 में बनाया गया था। यह अधिनियम वन्य जीवों और उनके आवासों को कानूनी सुरक्षा प्रदान करने के लिए एक महत्वपूर्ण कदम था।
In simple words: वन्य जीवन को बचाने के लिए भारत में 1972 में एक कानून बनाया गया, जिसे वन्य जीवन सुरक्षा अधिनियम कहते हैं।
🎯 Exam Tip: वन्य जीवन सुरक्षा अधिनियम की स्थापना का वर्ष (1972) याद रखना महत्वपूर्ण है।
Question 7. IUCN का पूरा नाम लिखिए।
Answer: IUCN का पूरा नाम 'International Union for Conservation of Nature' है। यह एक वैश्विक संगठन है जो प्रकृति और उसकी जैव विविधता के संरक्षण के लिए काम करता है।
In simple words: IUCN का पूरा नाम इंटरनेशनल यूनियन फॉर कंजर्वेशन ऑफ नेचर है, जो प्रकृति को बचाने का काम करती है।
🎯 Exam Tip: IUCN जैसे संगठनों के पूर्ण नाम और उनके उद्देश्य को याद रखना पर्यावरण से संबंधित प्रश्नों के लिए आवश्यक है।
Question 9. भारत में अभी तक कितने जीवमण्डल निचय क्षेत्र घोषित किये जा चुके हैं?
Answer: भारत में अभी तक कुल 18 जीवमण्डल निचय क्षेत्र (बायोस्फीयर रिजर्व) घोषित किए जा चुके हैं। ये क्षेत्र जैव विविधता के संरक्षण और सतत विकास को बढ़ावा देने के लिए स्थापित किए गए हैं।
In simple words: भारत में अब तक 18 बायोस्फीयर रिजर्व बनाए जा चुके हैं ताकि प्रकृति और जीवों को बचाया जा सके।
🎯 Exam Tip: भारत में बायोस्फीयर रिजर्व की वर्तमान संख्या (18) को याद रखें।
Question 10. राजस्थान में पाये जाने वाले किन्हीं दो वन्य जीव अभयारण्य के नाम लिखिए।
Answer: राजस्थान में पाए जाने वाले किन्हीं दो वन्य जीव अभयारण्य के नाम हैं:
- सरिस्का, अलवर
- कैलादेवी, करौली
ये दोनों अभयारण्य राजस्थान की समृद्ध वन्यजीव विरासत का हिस्सा हैं और विभिन्न प्रकार के जीवों का घर हैं।
In simple words: राजस्थान में सरिस्का (अलवर) और कैलादेवी (करौली) दो मुख्य वन्यजीव अभयारण्य हैं।
🎯 Exam Tip: अपने राज्य के प्रमुख वन्यजीव अभयारण्यों और उनके स्थानों को याद रखें।
Question 11. दो नवीकरणीय संसाधनों के नाम लिखिए। (माध्य. शिक्षा बोर्ड, मॉडल पेपर, 2017-18)
Answer: दो नवीकरणीय संसाधनों के नाम इस प्रकार हैं:
- सौर ऊर्जा
- पवन ऊर्जा
ये संसाधन प्राकृतिक रूप से लगातार बनते रहते हैं और इनके उपयोग से खत्म नहीं होते।
In simple words: सौर ऊर्जा और पवन ऊर्जा दो ऐसे संसाधन हैं जो कभी खत्म नहीं होते, क्योंकि ये प्रकृति में हमेशा उपलब्ध रहते हैं।
🎯 Exam Tip: नवीकरणीय संसाधनों को उन संसाधनों के रूप में पहचानें जो प्रकृति में असीमित मात्रा में उपलब्ध हैं या प्राकृतिक प्रक्रियाओं द्वारा पुनः उत्पन्न हो सकते हैं।
Question 12. मनाली अभयारण्य किस राज्य में स्थित है? (माध्य. शिक्षा बोर्ड, 2018)
Answer: मनाली अभयारण्य हिमाचल प्रदेश राज्य में स्थित है। यह अभयारण्य अपने प्राकृतिक सौंदर्य और विभिन्न वन्यजीव प्रजातियों के लिए जाना जाता है।
In simple words: मनाली अभयारण्य हिमाचल प्रदेश राज्य में है।
🎯 Exam Tip: प्रमुख अभयारण्यों और राष्ट्रीय उद्यानों के नाम और उनके संबंधित राज्यों को याद रखना महत्वपूर्ण है।
लघूत्तरात्मक प्रश्न
Question 1. संसाधनों के संरक्षण से क्या आशय है? समझाइए।
Answer: संसाधनों का संरक्षण का मतलब है संपदाओं या संसाधनों का योजनाबद्ध, सही और समझदारी भरा उपयोग करना। इसका उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि संसाधनों का उपयोग वर्तमान की जरूरतों को पूरा करने के साथ-साथ भविष्य की पीढ़ियों के लिए भी किया जा सके। संरक्षण का यह अर्थ बिल्कुल नहीं है कि:
- प्राकृतिक संसाधनों का प्रयोग न करके उनकी रक्षा की जाए, अथवा
बल्कि इसका अर्थ है उनका सतत और कुशल उपयोग करना ताकि वे लंबे समय तक उपलब्ध रहें।
In simple words: संसाधनों का संरक्षण मतलब है उन्हें समझदारी से इस्तेमाल करना, ताकि आज भी हम उनका फायदा उठा सकें और भविष्य के लिए भी वे बचे रहें।
🎯 Exam Tip: संसाधनों के संरक्षण की परिभाषा देते समय 'सतत उपयोग', 'भविष्य की पीढ़ी' और 'विवेकपूर्ण प्रबंधन' जैसे शब्दों का प्रयोग करें।
Question 2. प्राकृतिक संसाधनों को कितने भागों में बाँटा जा सकता है?
Answer: प्राकृतिक संसाधनों को मुख्य रूप से चार भागों में बाँटा जा सकता है:
1. विकास एवं प्रयोग के आधार पर-
(a) वास्तविक संसाधन: जिनकी मात्रा ज्ञात है और उपयोग हो रहा है।
(b) संभाव्य संसाधन: जिनकी मात्रा ज्ञात नहीं है, पर भविष्य में उपयोग हो सकता है।
2. उद्गम या उत्पत्ति के आधार पर-
(a) जैव संसाधन: सजीव वस्तुएँ, जैसे जीव-जंतु, पेड़-पौधे।
(b) अजैव संसाधन: निर्जीव वस्तुएँ, जैसे वायु, मृदा, प्रकाश।
3. भण्डारण या वितरण के आधार पर-
(a) सर्वव्यापक संसाधन: जो सभी जगह उपलब्ध हों, जैसे वायु।
(b) स्थानिक संसाधन: जो कुछ ही स्थानों पर उपलब्ध हों, जैसे ताँबा, लौह अयस्क।
4. नव्यकरणीयता के आधार पर-
(a) नवीकरणीय संसाधन: जो दोबारा बन सकते हैं, जैसे सौर ऊर्जा, पवन ऊर्जा।
(b) अनवीकरणीय संसाधन: जिनकी मात्रा सीमित है और बनने में बहुत समय लगता है, जैसे कोयला, पेट्रोलियम।
यह वर्गीकरण हमें संसाधनों को समझने और उनके प्रबंधन में मदद करता है।
In simple words: प्राकृतिक संसाधनों को चार तरीकों से बांटा जाता है: वे कितने विकसित हैं, कहाँ से आते हैं, कहाँ मिलते हैं और क्या वे दोबारा बन सकते हैं।
🎯 Exam Tip: प्राकृतिक संसाधनों के वर्गीकरण के चारों मुख्य आधारों (विकास, उद्गम, भण्डारण, नव्यकरणीयता) को उनके उप-प्रकारों सहित याद रखें।
Question 3. खेजड़ली के चिपको आन्दोलन से प्रेरणा लेकर हमारे देश में और कहाँ पर इस प्रकार का आन्दोलन चला?
Answer: खेजड़ली आन्दोलन की प्रेरणा से सन् 1973 में उत्तराखण्ड में महिलाओं ने पेड़ों की सुरक्षा के लिए 'चिपको आन्दोलन' चलाया। यह आन्दोलन 8 वर्षों तक चला और इसके कारण सन् 1981 में सरकार ने 1000 मीटर से ऊँचाई वाले क्षेत्रों में हरे पेड़ों की कटाई पर प्रतिबंध लगा दिया। इस आन्दोलन की बागडोर सुन्दरलाल बहुगुणा के हाथों में थी। इसी प्रकार का एक और आन्दोलन कर्नाटक में भी चला जिसका नाम 'एप्पिको' था। 'एप्पिको' कन्नड़ भाषा का शब्द है जिसका अर्थ 'चिपकना' होता है, जो पेड़ों से चिपकने की भावना को दर्शाता है।
In simple words: खेजड़ली के आन्दोलन से प्रेरणा लेकर उत्तराखण्ड में 'चिपको आन्दोलन' और कर्नाटक में 'एप्पिको आन्दोलन' चलाए गए थे, जो सभी पेड़ों को बचाने के लिए थे।
🎯 Exam Tip: पर्यावरण संरक्षण से जुड़े प्रमुख आंदोलनों (जैसे चिपको और एप्पिको) के नाम, उनके नेता और संबंधित राज्यों को याद रखना उपयोगी है।
Question 4. संसाधनों के संरक्षण की क्या आवश्यकता है? स्पष्ट कीजिए।
Answer: मानव अपनी ज़रूरतों को पूरा करने के लिए विभिन्न संसाधनों का लगातार उपयोग करता आ रहा है। खाद्यान्न और अन्य पदार्थों को पाने के लिए उसने भूमि को जोता है, सिंचाई और शक्ति के विकास के लिए उसने वन्य पदार्थों तथा खनिजों का बहुत ज़्यादा उपयोग किया है। पिछले दो सौ सालों में जनसंख्या और औद्योगिक उत्पादन में बहुत तेज़ी से वृद्धि हुई है। हमारी भोजन, कपड़े, घर, यातायात के साधन, विभिन्न प्रकार के यंत्र और औद्योगिक कच्चे माल की खपत कई गुना बढ़ गई है। इस कारण हम प्राकृतिक संसाधनों का तेजी से उपयोग कर रहे हैं। यदि संसाधनों का विवेकपूर्ण तरीके से उपयोग न किया गया तो वे शीघ्र ही समाप्त हो जाएंगे, जिससे भविष्य की पीढ़ियों की आवश्यकताओं को पूरा करना असंभव हो जाएगा।
In simple words: हमें संसाधनों को बचाने की ज़रूरत है क्योंकि जनसंख्या और उद्योगों के बढ़ने से हम उनका बहुत ज़्यादा इस्तेमाल कर रहे हैं। अगर इन्हें नहीं बचाया गया, तो ये खत्म हो जाएंगे और भविष्य की पीढ़ियों के लिए कुछ नहीं बचेगा।
🎯 Exam Tip: संसाधनों के संरक्षण की आवश्यकता को समझाते समय, जनसंख्या वृद्धि, औद्योगिक विकास और भविष्य की पीढ़ियों की आवश्यकताओं जैसे मुख्य बिंदुओं पर ध्यान दें।
Question 5. झूम खेती किसे कहते हैं वे यह कहाँ पर की जाती है?
Answer: झूम खेती एक प्रकार की कृषि है जिसे आदिवासी लोग करते हैं। इसमें किसी खास जगह के पेड़ों और पौधों को जलाकर राख कर दिया जाता है। इस राख से ज़मीन की उपजाऊ शक्ति बढ़ जाती है, जिससे किसान दो-तीन साल तक अच्छी फसल उगा पाते हैं। जब ज़मीन की उपजाऊ शक्ति कम हो जाती है, तो वे उस जगह को छोड़कर किसी नई जगह पर यही तरीका अपनाते हैं। यह एक पारंपरिक खेती का तरीका है। भारत में यह खेती नागालैण्ड, मिजोरम, मेघालय, अरुणाचल, त्रिपुरा और असम जैसे राज्यों में की जाती है।
In simple words: झूम खेती में आदिवासी एक जगह के पौधों को जलाकर ज़मीन उपजाऊ बनाते हैं और कुछ साल खेती करने के बाद दूसरी जगह चले जाते हैं। यह खेती मुख्य रूप से उत्तर-पूर्वी राज्यों में होती है।
🎯 Exam Tip: झूम खेती के बारे में बताते समय उसके तरीके, फायदे (जैसे उपजाऊपन) और नुकसान (जैसे वन-विनाश) दोनों का उल्लेख करें, साथ ही उन क्षेत्रों के नाम ज़रूर लिखें जहाँ यह प्रचलित है।
Question 6. समाकलित जल संभर प्रबंधन को समझाइए।
Answer: समाकलित जल संभर प्रबंधन एक ऐसा तरीका है जिसमें किसी खास क्षेत्र की ज़मीन और जल संसाधनों का प्रबंधन कृषि, वानिकी और अन्य तकनीकों का इस्तेमाल करके किया जाता है। जल संभर एक भौगोलिक इकाई है जहाँ सारा पानी एक ही बिंदु की ओर बहता है, जैसे किसी नदी बेसिन का सहायक क्षेत्र। इस प्रबंधन का मुख्य लक्ष्य छोटे प्राकृतिक क्षेत्रों को एक साथ विकसित करना है, जिससे मिट्टी और नमी का संरक्षण हो, बाढ़ को नियंत्रित किया जा सके, पानी को इकट्ठा किया जा सके, और पेड़-पौधे लगाए जा सकें। इसमें चरागाह और सामाजिक वानिकी जैसे कार्यक्रम भी शामिल हैं। भारत में कृषि, ग्रामीण विकास और पर्यावरण वन मंत्रालय मिलकर जल संभर विकास कार्यक्रम चलाते हैं।
In simple words: समाकलित जल संभर प्रबंधन का मतलब है किसी खास इलाके की ज़मीन और पानी को एक साथ सही तरीके से इस्तेमाल करना, जिससे पानी बचे, मिट्टी खराब न हो और पर्यावरण को फायदा हो।
🎯 Exam Tip: इस प्रश्न का उत्तर देते समय 'जल संभर' की परिभाषा और इसके प्रबंधन के उद्देश्यों (जैसे मिट्टी और नमी का संरक्षण, बाढ़ नियंत्रण) को ज़रूर स्पष्ट करें।
Question 7. बायोडीजल पर टिप्पणी लिखिए।
Answer: बायोडीजल एक प्रकार का ईंधन है जो जैविक स्रोतों से मिलता है और डीजल के जैसा ही होता है। यह एक नवीकरणीय ऊर्जा स्रोत है, जिसका मतलब है कि इसे दोबारा बनाया जा सकता है। बायोडीजल को पारंपरिक डीजल इंजनों में बिना किसी बदलाव के इस्तेमाल किया जा सकता है। इसे भविष्य के लिए एक साफ-सुथरा विकल्प माना जाता है क्योंकि यह कम ज़हरीला होता है और प्राकृतिक रूप से अपघटित हो जाता है। यह दूसरे जीवाश्म ईंधनों की तरह पर्यावरण के लिए हानिकारक नहीं है। राजस्थान सरकार ने बायोडीजल की खेती को बढ़ावा देने के लिए बायोफ्यूल मिशन और बायोफ्यूल अथॉरिटी बनाई है।
In simple words: बायोडीजल एक साफ ईंधन है जो पौधों और जानवरों से बनता है, यह नवीकरणीय है और पर्यावरण के लिए अच्छा है, इसलिए इसे भविष्य का ईंधन माना जाता है।
🎯 Exam Tip: बायोडीजल के बारे में लिखते समय उसके नवीकरणीय स्रोत, पर्यावरण-अनुकूल गुण और पारंपरिक डीजल के विकल्प के रूप में उसकी भूमिका पर ज़ोर दें।
Question 8.
1. झूम-खेती किस प्रकार वन उन्मूलन को बढ़ावा देती है? समझाइये।
2. विलुप्ति के कगार पर पहुँच गई जातियों का संकलन जिस पुस्तक में किया गया है, उसका नाम क्या है? (माध्य. शिक्षा बोर्ड, मॉडल पेपर, 2017-18)
Answer:
1. झूम खेती में किसान पहले जंगलों को काटते और जलाते हैं ताकि ज़मीन साफ हो सके और खेती की जा सके। यह तरीका हर कुछ साल में नई जगहों पर दोहराया जाता है, जिससे लगातार जंगल काटे जाते हैं और वन उन्मूलन बढ़ता है। यह वनों की कटाई का एक बड़ा कारण है।
2. विलुप्ति के कगार पर पहुँच गई जातियों का संकलन जिस पुस्तक में किया गया है, उसका नाम 'लाल आँकड़ा पुस्तक' (Red Data Book) है। यह पुस्तक लुप्तप्राय प्रजातियों को सूचीबद्ध करती है।
In simple words: झूम खेती में जंगल काट और जलाकर खेत बनाए जाते हैं, जिससे पेड़ कम होते जाते हैं। लुप्त होने वाली प्रजातियों की जानकारी 'लाल आँकड़ा पुस्तक' में मिलती है।
🎯 Exam Tip: झूम खेती के प्रभाव को स्पष्ट रूप से समझाएँ कि कैसे यह वनों की कटाई से जुड़ा है। 'लाल आँकड़ा पुस्तक' का नाम याद रखना महत्वपूर्ण है क्योंकि यह जीवों के संरक्षण से संबंधित है।
Question 9. झूम खेती से क्या तात्पर्य है? सामाजिक वानिकी के दो प्रमुख घटकों के नाम लिखिए। (माध्य. शिक्षा बोर्ड, 2018)
Answer:
झूम खेती एक कृषि पद्धति है जिसमें किसी विशेष क्षेत्र की वनस्पति को जलाकर राख कर दिया जाता है। इससे भूमि की उर्वरता बढ़ जाती है और दो-तीन वर्षों तक अच्छी फसल मिलती है। जब उर्वरता कम होती है, तो किसान इसी विधि को किसी अन्य क्षेत्र में अपनाते हैं।
सामाजिक वानिकी के दो प्रमुख घटक हैं:
1. कृषि वानिकी (Agro-Forestry)
2. वन विभाग द्वारा नहरों, सड़कों, अस्पतालों जैसी सार्वजनिक जगहों पर पेड़ लगाना, ताकि सामुदायिक ज़रूरतों को पूरा किया जा सके।
In simple words: झूम खेती में जंगल जलाकर ज़मीन उपजाऊ बनाई जाती है, फिर कुछ समय बाद दूसरी जगह की जाती है। सामाजिक वानिकी में खेत और सार्वजनिक जगहों पर पेड़ लगाना शामिल है।
🎯 Exam Tip: झूम खेती की परिभाषा के साथ उसके दो प्रमुख घटकों का उल्लेख करना न भूलें, खासकर जब प्रश्न में विशिष्ट रूप से पूछा गया हो।
निबन्धात्मक प्रश्न
Question 1. वन्य जीव संरक्षण हेतु क्या-क्या उपाय किये गये हैं? समझाइए।
Answer: मानव गतिविधियों के कारण कई वन्य जीवों का अस्तित्व खतरे में है, इसलिए उनके संरक्षण के लिए कई उपाय किए गए हैं। भारत में वन्य जीवन की सुरक्षा के लिए 1972 में 'वन्य जीवन सुरक्षा अधिनियम' बनाया गया। इसका मुख्य उद्देश्य जीवों को पूर्ण सुरक्षा देना और विलुप्त होने वाले जीवों को बचाना है। वन्य जीवों के संरक्षण के लिए कुछ सुरक्षित क्षेत्र स्थापित किए गए हैं, जिनमें राष्ट्रीय पार्क, वन्य जीव अभयारण्य और बायोस्फियर रिजर्व शामिल हैं। ये प्राकृतिक क्षेत्र हैं जहाँ पर्यावरण के साथ-साथ वन्य जीवों और प्राकृतिक अवशेषों को भी संरक्षित किया जाता है। यहाँ पालतू पशुओं को चराने पर पूरी तरह प्रतिबंध होता है, और निजी संस्थाओं को खास कार्यों के लिए ही प्रवेश की अनुमति मिलती है। इन क्षेत्रों का कुछ हिस्सा पर्यटन के लिए विकसित किया जा सकता है। इनका प्रबंधन केंद्र सरकार के अधीन होता है। भारत में अब तक 166 राष्ट्रीय उद्यान और 515 वन्य जीव अभयारण्य स्थापित किए जा चुके हैं।
जीवमण्डल निचय या बायोस्फियर रिजर्व भी प्राकृतिक क्षेत्र होते हैं जिन्हें वैज्ञानिक अध्ययन के लिए शांत क्षेत्र घोषित किया गया है। इनमें जीवों और उनके प्राकृतिक आवासों की रक्षा की जाती है। भारत में 18 बायोस्फियर रिजर्व हैं, जिनमें पहला 1986 में नीलगिरी में स्थापित किया गया था।
भारत के प्रमुख राष्ट्रीय उद्यान
| नाम | राज्य |
|---|---|
| 1. काजीरंगा राष्ट्रीय उद्यान | असम |
| 5. सतपुड़ा राष्ट्रीय उद्यान | मध्यप्रदेश |
| 6. सुन्दरबन राष्ट्रीय उद्यान | पश्चिम बंगाल |
| 7. रणथम्भौर राष्ट्रीय उद्यान | राजस्थान |
| 8. केवला देवी राष्ट्रीय उद्यान | राजस्थान |
| 9. कार्बेट राष्ट्रीय उद्यान | उत्तरांचल |
राजस्थान के वन्य जीव अभयारण्य एवं प्रमुख वन्य जीव
| वन्य जीव अभयारण्य | प्रमुख वन्य जीव |
|---|---|
| 1. सरिस्का, अलवर | हिरण, गोडावन |
| 2. दर्रा, कोटा | बघेरा |
| 3. माउंट आबू, सिरोही | जंगली मुर्गे |
| 4. तालछापर, चूरू | काला हिरण |
| 5. जवाहर सागर, कोटा | घड़ियाल |
| 6. सीता माता, प्रतापगढ़ | उड़न गिलहरी |
In simple words: वन्य जीवों को बचाने के लिए 1972 में एक कानून बना, और राष्ट्रीय पार्क, अभयारण्य व बायोस्फियर रिजर्व बनाए गए हैं। इन जगहों पर जानवरों और उनके घर को सुरक्षित रखा जाता है ताकि वे विलुप्त न हों।
🎯 Exam Tip: वन्य जीव संरक्षण के उपायों का वर्णन करते समय 'वन्य जीवन सुरक्षा अधिनियम' की स्थापना वर्ष और राष्ट्रीय पार्क, अभयारण्य व बायोस्फियर रिजर्व जैसे प्रमुख संरक्षित क्षेत्रों का उल्लेख ज़रूर करें।
Question 2. जीवाश्म ईंधन का वर्णन कीजिए।
Answer: जीवाश्म ईंधन ऐसे ईंधन हैं जो लाखों साल पहले ज़मीन के नीचे दबे पौधों और जानवरों के अवशेषों से बनते हैं। कोयला और पेट्रोलियम दोनों ही जीवाश्म ईंधन के मुख्य उदाहरण हैं।
(अ) कोयला- यह एक ठोस कार्बनिक पदार्थ है जो ऊर्जा का एक बड़ा स्रोत है। दुनिया की कुल ऊर्जा का लगभग 35-40 प्रतिशत कोयले से आता है। कोयले में कार्बन की मात्रा अलग-अलग होती है और यह अन्य दहनशील पदार्थों के साथ मिलता है। यह हज़ारों-लाखों साल पहले वनस्पतियों के ज़मीन के नीचे दब जाने और उच्च ताप व दबाव के कारण बना था। कोयले में कार्बन के अलावा हाइड्रोजन, नाइट्रोजन, ऑक्सीजन, फॉस्फोरस और गंधक भी होते हैं। नमी-रहित कार्बन की मात्रा के आधार पर कोयले को चार मुख्य प्रकारों में बांटा गया है: एन्थ्रेसाइट (94-98% कार्बन), बिटूमिनस (78-86% कार्बन), लिग्नाइट (28-30% कार्बन) और पीट (27% कार्बन)। हवा की अनुपस्थिति में कोयले को 1000-1400 डिग्री सेल्सियस पर गर्म करने पर कोलतार, कोल गैस और अमोनिया जैसे पदार्थ मिलते हैं। भारत में मुख्य रूप से झारखंड, मध्यप्रदेश, पश्चिम बंगाल और आंध्रप्रदेश में कोयला मिलता है।
(ब) पेट्रोलियम- पेट्रोलियम भी कोयले की तरह ही वनस्पतियों और जीव-जंतुओं के पृथ्वी के नीचे दबने और उच्च दाब व ताप के कारण बनता है। प्राकृतिक रूप से मिलने वाले पेट्रोलियम को 'कच्चा तेल' या 'चट्टानों का तेल' कहते हैं। यह गहरे रंग का गाढ़ा तरल पदार्थ होता है, जिसमें कई घटक होते हैं। इन घटकों को प्रभाजी आसवन विधि द्वारा अलग किया जाता है, जिससे पेट्रोल, डीजल, केरोसीन, प्राकृतिक गैस, वैसलीन और स्नेहक जैसे उत्पाद मिलते हैं।
ये दोनों ही जीवाश्म ईंधन अनवीकरणीय संसाधन हैं, मतलब इन्हें बनने में करोड़ों साल लगते हैं और इनकी मात्रा सीमित है। इसलिए इनका उपयोग बहुत सावधानी से करना चाहिए।
In simple words: जीवाश्म ईंधन लाखों साल पुराने दबे हुए पौधों और जानवरों से बनते हैं, जैसे कोयला और पेट्रोलियम। ये सीमित होते हैं और इन्हें ध्यान से इस्तेमाल करना चाहिए।
🎯 Exam Tip: जीवाश्म ईंधन का वर्णन करते समय कोयला और पेट्रोलियम दोनों के निर्माण, घटकों और उपयोग के साथ-साथ यह भी स्पष्ट करें कि ये अनवीकरणीय संसाधन क्यों हैं।
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