RBSE Solutions Class 10 Science Chapter 10 विद्युत धारा

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Detailed Chapter 10 विद्युत धारा RBSE Solutions for Class 10 Science

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Class 10 Science Chapter 10 विद्युत धारा RBSE Solutions PDF

बहुचयनात्मक प्रश्न

 

Question 1. 5 वोल्ट की बैटरी से यदि किसी चालक में 2 ऐम्पीयर की धारा प्रवाहित की जाती है तो चालक का प्रतिरोध होगा
(अ) 3 ओम
(ब) 2.5 ओम
(स) 10 ओम
(द) 2 ओम
Answer: (ब) 2.5 ओम
In simple words: ओम के नियम (V=IR) का उपयोग करके, हम वोल्टेज (5 वोल्ट) को धारा (2 ऐम्पीयर) से भाग देकर प्रतिरोध (2.5 ओम) ज्ञात करते हैं।

🎯 Exam Tip: ओम के नियम \( (V = IR) \) को हमेशा याद रखें। जब भी वोल्टेज और धारा दी हो, प्रतिरोध निकालने के लिए \( R = V/I \) सूत्र का प्रयोग करें।

 

Question 2. प्रतिरोधकता निम्न में से किस पर निर्भर करती है?
(अ) चालक की लम्बाई पर
(ब) चालक के अनुप्रस्थ काट पर
(स) चालक के पदार्थ पर
(द) इसमें से किसी पर नहीं
Answer: (स) चालक के पदार्थ पर
In simple words: प्रतिरोधकता सिर्फ इस बात पर निर्भर करती है कि तार किस चीज़ (जैसे तांबा, लोहा) से बना है, न कि उसकी लंबाई या मोटाई पर।

🎯 Exam Tip: प्रतिरोधकता (रेसिस्टिविटी) एक पदार्थ का आंतरिक गुण है; यह चालक की ज्यामिति (लंबाई, अनुप्रस्थ काट का क्षेत्रफल) पर निर्भर नहीं करती, बल्कि केवल सामग्री की प्रकृति और तापमान पर निर्भर करती है।

 

Question 3. वोल्ट किसका मात्रक है -
(अ) धारा
(ब) विभवान्तर
(स) आवेश
(द) कार्य
Answer: (ब) विभवान्तर
In simple words: वोल्ट वह इकाई है जिससे हम बिजली के "धक्का" (विभवान्तर) को मापते हैं, जो इलेक्ट्रॉनों को एक जगह से दूसरी जगह धकेलता है।

🎯 Exam Tip: विद्युत संबंधी महत्वपूर्ण इकाइयों को याद रखना आवश्यक है: धारा (एम्पीयर), विभवान्तर (वोल्ट), प्रतिरोध (ओम), आवेश (कूलॉम), शक्ति (वाट), ऊर्जा (जूल)।

 

Question 4. एक विद्युत परिपथ में 1, 2 व 3 के तीन चालक तार श्रेणीक्रम में लगे हैं इसका तुल्य प्रतिरोध होगा
(अ) 1 ओम से कम
(ब) 3 ओम से कम
(स) 1 ओम से ज्यादा
(द) 3 ओम से ज्यादा
Answer: (द) 3 ओम से ज्यादा
In simple words: श्रेणी क्रम में, सभी प्रतिरोध सीधे जुड़ जाते हैं (1+2+3=6 ओम), इसलिए यह सबसे बड़े प्रतिरोध (3 ओम) से भी ज़्यादा होगा।

🎯 Exam Tip: श्रेणी क्रम में जुड़े प्रतिरोधों का तुल्य प्रतिरोध हमेशा सबसे बड़े व्यक्तिगत प्रतिरोध से अधिक होता है। सीधे जोड़कर उत्तर की पुष्टि करें।

 

Question 5. भारत में प्रत्यावर्ती धारा की आवृत्ति है -
(अ) 45 हर्ज
(ब) 50 हर्ज
Answer: (ब) 50 हर्ज
In simple words: भारत में घरों में आने वाली बिजली एक सेकंड में 50 बार अपनी दिशा बदलती है, जिसे 50 हर्ज की आवृत्ति कहते हैं।

🎯 Exam Tip: विभिन्न देशों में विद्युत आपूर्ति की आवृत्ति अलग-अलग होती है; भारत में यह मानक 50 हर्ज है, जबकि अमेरिका जैसे कुछ देशों में 60 हर्ज का उपयोग होता है।

 

Question 6. विभिन्न मान के प्रतिरोधों को समान्तर क्रम में जोड़कर उन्हें विद्युत स्रोत से जोड़ने पर प्रत्येक प्रतिरोध तार में
(अ) धारा और विभवान्तर का मान भिन्न-भिन्न होगा
(ख) धारा और विभवान्तर का मान समान होगा
(ग) धारा भिन्न-भिन्न होगा परन्तु विभवान्तर एक समान होगी
(घ) धारा समान होगी परन्तु विभवान्तर भिन्न-भिन्न होगा
Answer: (ग) धारा भिन्न-भिन्न होगा परन्तु विभवान्तर एक समान होगी
In simple words: पैरेलल कनेक्शन में, हर तार को एक ही वोल्टेज मिलता है, लेकिन तार की मोटाई या प्रतिरोध के हिसाब से उसमें अलग-अलग मात्रा में बिजली बहती है।

🎯 Exam Tip: समान्तर क्रम (पैरेलल) में वोल्टेज हमेशा समान रहता है, जबकि धारा प्रतिरोध के व्युत्क्रमानुपाती होती है, इसलिए वह भिन्न होती है।

 

Question 7. किसी विद्युत परिपथ में 0.5 सेकण्ड में 2 कूलॉम आवेश प्रवाहित होता है विद्युत धारा का मान ऐम्पीयर में होगा
(अ) 1 ऐम्पीयर
(ब) 4 ऐम्पीयर
(स) 1.5 ऐम्पीयर
(द) 10 ऐम्पीयर
Answer: (ब) 4 ऐम्पीयर
In simple words: बिजली की धारा निकालने के लिए, चार्ज (2 कूलॉम) को समय (0.5 सेकंड) से भाग दें, जिससे 4 ऐम्पीयर आता है।

🎯 Exam Tip: विद्युत धारा \( (I) \) की परिभाषा \( I = Q/t \) है, जहाँ \( Q \) आवेश और \( t \) समय है। मात्रकों को सही रखना सुनिश्चित करें।

 

Question 8. विद्युत के ऊष्मीय प्रभाव पर आधारित युक्ति नहीं
(अ) हीटर
(ब) प्रेस
(स) टोस्टर
(द) रेफ्रीजरेटर
Answer: (द) रेफ्रीजरेटर
In simple words: हीटर, प्रेस और टोस्टर गर्मी पैदा करने के लिए बिजली का उपयोग करते हैं, जबकि रेफ्रिजरेटर ठंडा करने के लिए बिजली का उपयोग करता है।

🎯 Exam Tip: विद्युत धारा का ऊष्मीय प्रभाव उन उपकरणों में उपयोग होता है जो गर्मी पैदा करते हैं। रेफ्रिजरेटर ऊष्मा को एक जगह से दूसरी जगह स्थानांतरित करने के सिद्धांत पर काम करता है।

अतिलघूत्तरात्मक प्रश्न

 

Question 10. विद्युत धारा की परिभाषा दीजिये।
Answer: विद्युत धारा वह दर है जिस पर किसी चालक में विद्युत आवेश (चार्ज) बहता है। इसे गणित में \( I = \frac{Q}{t} \) सूत्र से दिखाया जाता है, जहाँ \( I \) विद्युत धारा है, \( Q \) प्रवाहित आवेश है, और \( t \) वह समय है जिसमें आवेश प्रवाहित होता है। यह आवेशों का प्रवाह ही है जो हमें बिजली देता है।
In simple words: विद्युत धारा का मतलब है कि एक जगह से दूसरी जगह चार्ज कितनी तेज़ी से जा रहा है। इसका सूत्र \( I = Q/t \) है।

🎯 Exam Tip: विद्युत धारा की परिभाषा में 'आवेश के प्रवाह की दर' और सूत्र \( I = Q/t \) दोनों महत्वपूर्ण हैं। 'दर' शब्द समय के साथ परिवर्तन को दर्शाता है।

 

Question 11. विद्युत विभव किसे कहते हैं ?
Answer: विद्युत क्षेत्र के अंदर किसी बिंदु पर विद्युत विभव उस कार्य की मात्रा है जो एक इकाई धनात्मक आवेश को अनंत से उस खास बिंदु तक लाने में बाहरी बल द्वारा किया जाता है। इसे एक अदिश राशि माना जाता है, जिसका अर्थ है कि इसकी केवल मात्रा होती है, दिशा नहीं।
In simple words: विद्युत विभव यह बताता है कि एक छोटे से चार्ज को दूर से किसी खास जगह तक लाने में कितना काम करना पड़ेगा।

🎯 Exam Tip: विद्युत विभव को परिभाषित करते समय 'इकाई धन आवेश', 'अनंत से' और 'किसी बिंदु तक लाने में किया गया कार्य' जैसे मुख्य शब्दों का प्रयोग करें।

 

Question 12. 1 ओम प्रतिरोध किसे कहते हैं ?
Answer: एक ओम \( (\Omega) \) प्रतिरोध तब होता है जब एक चालक तार में 1 ऐम्पीयर की विद्युत धारा प्रवाहित करने पर उसके दोनों सिरों के बीच 1 वोल्ट का विभवान्तर पैदा होता है। ओम का नियम हमें बताता है कि प्रतिरोध, वोल्टेज और धारा के बीच सीधा संबंध है।
In simple words: 1 ओम प्रतिरोध का मतलब है कि जब 1 वोल्ट बिजली से 1 ऐम्पीयर धारा बहती है, तो उस तार का विरोध 1 ओम है।

🎯 Exam Tip: 1 ओम की परिभाषा सीधे ओम के नियम \( (R = V/I) \) से आती है। इसे 1 वोल्ट प्रति 1 ऐम्पीयर के रूप में याद रखें।

 

Question 13. प्रतिरोध अनुप्रस्थ काट पर कैसे निर्भर करता है?
Answer: किसी धातु के एक सीधे तार का प्रतिरोध उसके अनुप्रस्थ काट के क्षेत्रफल \( (A) \) के व्युत्क्रमानुपाती होता है। इसका मतलब है कि तार जितना मोटा (बड़ा क्षेत्रफल) होगा, उसका प्रतिरोध उतना ही कम होगा, और तार जितना पतला होगा, उसका प्रतिरोध उतना ही ज़्यादा होगा। यह दर्शाता है कि मोटे तारों से बिजली ज़्यादा आसानी से बहती है।
In simple words: प्रतिरोध, तार की मोटाई के उल्टा काम करता है। मोटा तार कम रोकेगा (कम प्रतिरोध), और पतला तार ज़्यादा रोकेगा (ज़्यादा प्रतिरोध)।

🎯 Exam Tip: याद रखें कि प्रतिरोध लंबाई के सीधे समानुपाती \( (R \propto l) \) और अनुप्रस्थ काट के क्षेत्रफल के व्युत्क्रमानुपाती \( (R \propto 1/A) \) होता है।

 

Question 14. प्रतिरोधकता की परिभाषा दीजिये।
Answer: प्रतिरोधकता, जिसे विशिष्ट प्रतिरोध भी कहते हैं, किसी पदार्थ का वह गुण है जो बताता है कि वह विद्युत धारा के प्रवाह को कितना रोकता है। इसे इकाई लंबाई और इकाई अनुप्रस्थ काट के क्षेत्रफल वाले तार के प्रतिरोध के रूप में परिभाषित किया जाता है। इसका SI मात्रक ओम-मीटर \( (\Omega \text{m}) \) होता है।
In simple words: प्रतिरोधकता बताती है कि कोई चीज़ बिजली को कितना रोकती है। यह तार की लंबाई और मोटाई पर निर्भर नहीं करती, बल्कि सिर्फ़ पदार्थ के प्रकार पर निर्भर करती है।

🎯 Exam Tip: प्रतिरोधकता एक पदार्थ का आंतरिक गुण है जो उसकी प्रकृति पर निर्भर करता है, जबकि प्रतिरोध चालक की लंबाई और क्षेत्रफल पर भी निर्भर करता है। दोनों के बीच के अंतर को समझना महत्वपूर्ण है।

 

Question 15. विद्युत शक्ति किसे कहते हैं ?
Answer: विद्युत शक्ति (इलेक्ट्रिक पावर) वह गति है जिस पर विद्युत ऊर्जा खर्च होती है या किसी परिपथ में रूपांतरित होती है। इसे 'P' अक्षर से दर्शाया जाता है। उदाहरण के लिए, एक 100 वॉट का बल्ब 220 वोल्ट पर जलने पर प्रति सेकंड 100 जूल ऊर्जा खर्च करता है।
In simple words: विद्युत शक्ति यह बताती है कि बिजली कितनी तेज़ी से इस्तेमाल हो रही है या बदल रही है।

🎯 Exam Tip: विद्युत शक्ति को 'ऊर्जा के व्यय की दर' के रूप में परिभाषित किया जाता है। इसका SI मात्रक वॉट (Watt) है।

 

Question 17. घरों में विद्युत का संयोजन किस प्रकार किया जाता है ?
Answer: घरों में विद्युत के उपकरणों को हमेशा समान्तर क्रम (पैरेलल कनेक्शन) में जोड़ा जाता है। ऐसा करने से सभी उपकरणों को बिजली आपूर्ति से एक समान वोल्टेज मिलता है, और यदि एक उपकरण खराब हो जाए, तो बाकी काम करते रहते हैं। यह घरेलू विद्युत प्रणालियों के लिए सबसे सुरक्षित और प्रभावी तरीका है।
In simple words: घरों में बिजली के तार पैरेलल जोड़े जाते हैं, ताकि सब चीज़ों को बराबर बिजली मिले और एक चीज़ खराब होने पर बाकी चलती रहें।

🎯 Exam Tip: समान्तर क्रम संयोजन घरेलू वायरिंग के लिए पसंदीदा तरीका है क्योंकि यह प्रत्येक उपकरण को समान वोल्टेज प्राप्त करने की अनुमति देता है और उपकरणों को स्वतंत्र रूप से संचालित करने में मदद करता है।


लघूत्तरात्मक प्रश्न

 

Question 18. प्रतिरोधों के श्रेणीक्रम संयोजन व समान्तर क्रम संयोजन में क्या अन्तर है ?
Answer: श्रेणीक्रम संयोजन और समान्तर क्रम संयोजन में मुख्य अंतर इस प्रकार हैं:
**श्रेणी क्रम संयोजन में:**
- प्रत्येक प्रतिरोध से बहने वाली विद्युत धारा का मान एक जैसा रहता है।
- प्रत्येक प्रतिरोध के सिरों पर वोल्टेज (विभवान्तर) का मान अलग-अलग होता है।
- पूरे संयोजन का कुल प्रतिरोध, सभी जुड़े हुए प्रतिरोधों में सबसे बड़े प्रतिरोध से भी ज़्यादा होता है। यह प्रतिरोध को बढ़ाने का एक तरीका है।
- यहाँ श्रेणीक्रम में प्रतिरोधों के संयोजन का एक चित्र दिया गया है:

R₁ R₂ R₃ A + E + K V P Q


**समान्तर क्रम संयोजन में:**
- प्रत्येक प्रतिरोध से बहने वाली विद्युत धारा का मान अलग-अलग होता है।
- प्रत्येक प्रतिरोध के सिरों पर वोल्टेज (विभवान्तर) का मान एक समान रहता है।
- पूरे संयोजन का कुल प्रतिरोध, सभी जुड़े हुए प्रतिरोधों में सबसे छोटे प्रतिरोध से भी कम होता है। यह प्रतिरोध को कम करने का एक तरीका है।
- यहाँ समान्तर क्रम में प्रतिरोधों के संयोजन का एक चित्र दिया गया है:

A B R₁ I₁ R₂ I₂ R₃ I₃ V A + E + K


In simple words: श्रेणी क्रम में धारा एक जैसी होती है और कुल प्रतिरोध बढ़ता है। समान्तर क्रम में वोल्टेज एक जैसा होता है और कुल प्रतिरोध घटता है।

🎯 Exam Tip: इन दोनों संयोजनों के मुख्य बिंदुओं - धारा, वोल्टेज और तुल्य प्रतिरोध - के बारे में अंतर स्पष्ट रूप से समझें और परिपथ आरेख बनाने का अभ्यास करें।

 

Question 19. विद्युत शक्ति किसे कहते हैं ? इसके लिए आवश्यक सूत्र लिखिये।
Answer: विद्युत शक्ति (इलेक्ट्रिक पावर) वह गति है जिस पर विद्युत ऊर्जा खर्च होती है या किसी परिपथ में रूपांतरित होती है। इसे 'P' अक्षर से दर्शाया जाता है। इसका सूत्र \( P = V \times I \) है, जहाँ \( V \) विभवान्तर (वोल्टेज) है और \( I \) विद्युत धारा है। यह किसी भी उपकरण की कार्य करने की क्षमता को दर्शाता है।
In simple words: विद्युत शक्ति बताती है कि बिजली कितनी जल्दी इस्तेमाल होती है। इसका सूत्र है \( P = V \times I \)।

🎯 Exam Tip: विद्युत शक्ति की परिभाषा और इसके मुख्य सूत्र \( (P = VI) \) को याद रखें। अन्य रूप \( P = I^2R \) और \( P = V^2/R \) भी महत्वपूर्ण हैं।

 

Question 20. दो प्रतिरोध तार एक ही पदार्थ के बने हुए हैं इनकी लम्बाइयाँ समान हैं यदि इनके अनुप्रस्थ काटों के क्षेत्रफल का अनुपात 2 : 11 है तो इनके प्रतिरोधों का अनुपात ज्ञात करो।
Answer: मान लीजिए, दो प्रतिरोध तार एक ही पदार्थ के बने हैं और उनकी लंबाई भी समान है। उनके अनुप्रस्थ काट के क्षेत्रफल का अनुपात \( A_1 : A_2 = 2 : 11 \) दिया गया है। हमें उनके प्रतिरोधों का अनुपात \( (R_1 : R_2) \) ज्ञात करना है।
हमें पता है कि प्रतिरोध का सूत्र है:
\( R = \frac{\rho l}{A} \)
जहाँ,
\( \rho \) (रो) = विशिष्ट प्रतिरोधकता
\( l \) = तार की लंबाई
\( A \) = अनुप्रस्थ काट का क्षेत्रफल
चूँकि दोनों तार एक ही पदार्थ के बने हैं, उनकी विशिष्ट प्रतिरोधकता \( (\rho) \) समान होगी। साथ ही, उनकी लंबाइयाँ \( (l) \) भी समान हैं। इसलिए, प्रतिरोध केवल अनुप्रस्थ काट के क्षेत्रफल पर निर्भर करेगा।
पहले तार के लिए प्रतिरोध \( R_1 = \frac{\rho l}{A_1} \)
दूसरे तार के लिए प्रतिरोध \( R_2 = \frac{\rho l}{A_2} \)
अब दोनों प्रतिरोधों का अनुपात निकालेंगे:
\( \frac{R_1}{R_2} = \frac{\frac{\rho l}{A_1}}{\frac{\rho l}{A_2}} \)
\( \implies \frac{R_1}{R_2} = \frac{A_2}{A_1} \)
हमें \( A_1 : A_2 = 2 : 11 \) दिया गया है, जिसका मतलब \( \frac{A_1}{A_2} = \frac{2}{11} \) है, तो \( \frac{A_2}{A_1} = \frac{11}{2} \)।
\( \implies \frac{R_1}{R_2} = \frac{11}{2} \)
इस तरह, प्रतिरोधों का अनुपात \( R_1 : R_2 = 11 : 2 \) होगा। यह दर्शाता है कि तार का प्रतिरोध उसके अनुप्रस्थ काट के क्षेत्रफल के व्युत्क्रमानुपाती होता है।
In simple words: जब दो तार एक जैसे हों और उनकी लंबाई भी बराबर हो, तो उनका प्रतिरोध उनकी मोटाई के उल्टा होता है। मोटा तार कम रोकेगा और पतला तार ज़्यादा।

🎯 Exam Tip: प्रतिरोध की निर्भरता पर प्रश्न हल करते समय, \( R = \frac{\rho l}{A} \) सूत्र का उपयोग करें और ध्यान दें कि कौन से कारक समान हैं और कौन से भिन्न हैं।

 

Question 21. विद्युत विभव व विभवान्तर को परिभाषित करो।
Answer:
**विद्युत विभव:** विद्युत क्षेत्र में किसी बिंदु पर विद्युत विभव वह कार्य है जो एक इकाई धनात्मक आवेश को अनंत से उस बिंदु तक लाने में बाहरी बल द्वारा किया जाता है। इसे \( V \) से दर्शाया जाता है। यदि \( q_0 \) आवेश को अनंत से किसी बिंदु तक लाने में \( W \) कार्य करना पड़े, तो उस बिंदु पर विद्युत विभव \( V = \frac{W}{q_0} \) होता है। इसका मात्रक वोल्ट है।
**विभवान्तर (पोटेंशियल डिफरेंस):** विद्युत क्षेत्र में किन्हीं दो बिंदुओं के बीच विभवान्तर वह कार्य है जो एक इकाई धनात्मक आवेश को एक बिंदु से दूसरे बिंदु तक ले जाने में किया जाता है। यह दोनों बिंदुओं के विद्युत विभव में अंतर होता है। इसे भी वोल्ट में मापा जाता है। एक वोल्ट विभवान्तर का मतलब है कि एक कूलॉम आवेश को एक बिंदु से दूसरे बिंदु तक ले जाने में एक जूल कार्य करना पड़ता है।
In simple words: विद्युत विभव बताता है कि दूर से एक चार्ज को एक जगह लाने में कितना काम लगा। विभवान्तर बताता है कि एक चार्ज को दो जगहों के बीच ले जाने में कितना काम लगा।

🎯 Exam Tip: 'विभव' के लिए 'अनंत' से आवेश लाने का संदर्भ दें, जबकि 'विभवान्तर' के लिए 'एक बिंदु से दूसरे बिंदु तक' आवेश ले जाने का संदर्भ दें।

 

Question 22. प्रत्यावर्ती धारा जनित्र एवं दिष्ट धारा जनित्र में क्या अन्तर है?
Answer: प्रत्यावर्ती धारा जनित्र (AC जनरेटर) और दिष्ट धारा जनित्र (DC जनरेटर) के बीच मुख्य अंतर उनकी संरचना और उत्पन्न होने वाली धारा के प्रकार में होता है:
(1) **संरचना:** प्रत्यावर्ती धारा जनित्र में आमतौर पर दो स्लिप रिंग (सीवलय) होते हैं जो आर्मेचर के साथ घूमते हैं, जबकि दिष्ट धारा जनित्र में एक स्प्लिट रिंग कम्यूटेटर होता है, जो दो अर्ध-वलयों (कम्यूटेटर) से बना होता है।
(2) **उत्पन्न धारा का प्रकार:** प्रत्यावर्ती धारा जनित्र वह धारा उत्पन्न करता है जो समय-समय पर अपनी दिशा बदलती रहती है (प्रत्यावर्ती धारा, AC), जबकि दिष्ट धारा जनित्र एक ही दिशा में बहने वाली धारा (दिष्ट धारा, DC) उत्पन्न करता है। एसी जनरेटर अक्सर घरों में उपयोग की जाने वाली बिजली पैदा करता है।
In simple words: AC जनरेटर घूमती हुई रिंग्स का उपयोग करके ऐसी बिजली बनाता है जो दिशा बदलती है। DC जनरेटर स्प्लिट रिंग्स का उपयोग करके सीधी दिशा में बहने वाली बिजली बनाता है।

🎯 Exam Tip: AC और DC जनरेटर के बीच के अंतर को स्पष्ट करने के लिए स्लिप रिंग (सीवलय) और कम्यूटेटर की भूमिका को याद रखना सबसे महत्वपूर्ण है।

 

Question 23. दक्षिणावर्त हस्त का नियम लिखो।
Answer: दक्षिणावर्त हस्त नियम (दाहिने हाथ का नियम) बताता है कि यदि आप अपने दाहिने हाथ से किसी विद्युत धारा प्रवाहित करने वाले तार को इस तरह पकड़ें कि आपका अंगूठा धारा की दिशा में हो, तो आपकी मुड़ी हुई उंगलियाँ तार के चारों ओर चुम्बकीय क्षेत्र की दिशा को दर्शाएंगी। यह नियम चुम्बकीय क्षेत्र की दिशा को आसानी से समझने में मदद करता है।
In simple words: अगर आप अपने दाहिने हाथ से एक तार को ऐसे पकड़ें कि अंगूठा बिजली की दिशा में हो, तो मुड़ी उंगलियाँ बताएंगी कि चुम्बक का असर कहाँ है।

🎯 Exam Tip: इस नियम को मैक्सवेल का कॉर्कस्क्रू नियम भी कहते हैं। अंगूठा हमेशा धारा की दिशा और मुड़ी हुई उंगलियाँ चुम्बकीय क्षेत्र की दिशा बताती हैं।

 

Question 24. 1 किलोवाट घंटा में जूल की संख्या ज्ञात करो।
Answer: हमें 1 किलोवाट घंटा में जूल की संख्या ज्ञात करनी है।
हम जानते हैं कि:
1 किलोवाट घंटा (KWh) = \( 1 \text{ किलोवाट} \times 1 \text{ घंटा} \)
\( 1 \text{ किलोवाट} = 1000 \text{ वाट} \)
\( 1 \text{ घंटा} = 60 \text{ मिनट} \times 60 \text{ सेकंड} = 3600 \text{ सेकंड} \)
तो,
\( 1 \text{ किलोवाट घंटा} = 1000 \text{ वाट} \times 3600 \text{ सेकंड} \)
\( \implies 1 \text{ किलोवाट घंटा} = 3,600,000 \text{ वाट-सेकंड} \)
चूंकि \( 1 \text{ वाट-सेकंड} = 1 \text{ जूल} \) होता है:
\( \implies 1 \text{ किलोवाट घंटा} = 3,600,000 \text{ जूल} \)
\( \implies 1 \text{ किलोवाट घंटा} = 3.6 \times 10^6 \text{ जूल} \)
यह ऊर्जा की एक बड़ी इकाई है जो विद्युत ऊर्जा की खपत को मापने में उपयोग होती है।
In simple words: 1 किलोवाट घंटा का मतलब है \( 3.6 \times 10^6 \) जूल ऊर्जा। यह एक बड़ी ऊर्जा इकाई है जो हमारे बिजली के बिलों में उपयोग होती है।

🎯 Exam Tip: किलोवाट घंटा से जूल में रूपांतरण करते समय, किलोवाट को वाट में \( (1000) \) और घंटा को सेकंड में \( (3600) \) बदलने के कारकों को याद रखें।

 

Question 25. जूल के तापन के नियम लिखो।
Answer: जूल का तापन नियम (Joule's Law of Heating) बताता है कि जब किसी प्रतिरोधक (रेजिस्टर) से विद्युत धारा प्रवाहित होती है, तो उसमें उत्पन्न ऊष्मा (हीट) तीन मुख्य बातों पर निर्भर करती है:
(1) यह प्रवाहित धारा \( (I) \) के वर्ग के सीधे समानुपाती होती है। यानी, अगर धारा दोगुनी होगी, तो ऊष्मा चार गुनी हो जाएगी। इसे \( H \propto I^2 \) से दर्शाते हैं।
(2) यह प्रतिरोधक के प्रतिरोध \( (R) \) के सीधे समानुपाती होती है। मतलब, ज़्यादा प्रतिरोध होने पर ज़्यादा ऊष्मा उत्पन्न होगी। इसे \( H \propto R \) से दर्शाते हैं।
(3) यह उस समय \( (t) \) के सीधे समानुपाती होती है जिसके लिए धारा प्रवाहित की जाती है। जितने ज़्यादा समय तक धारा बहेगी, उतनी ही ज़्यादा ऊष्मा पैदा होगी। इसे \( H \propto t \) से दर्शाते हैं।
इन तीनों नियमों को मिलाकर जूल के तापन का सूत्र \( H = I^2Rt \) बनता है, जो हीटर और इलेक्ट्रिक केतली जैसे उपकरणों में ऊष्मा उत्पन्न करने के लिए उपयोग होता है।
In simple words: जूल का नियम बताता है कि बिजली के तार में कितनी गर्मी पैदा होगी। यह बिजली की मात्रा, तार के विरोध और समय पर निर्भर करती है।

🎯 Exam Tip: जूल के तापन नियम के तीनों घटकों \( (I^2, R, t) \) को स्पष्ट रूप से लिखें और यह भी बताएँ कि \( H = I^2Rt \) इसका संयुक्त सूत्र है।

 

Question 26. ओम के नियम का प्रायोगिक सत्यापन का परिपथ का नामांकित चित्र बनाओ।
Answer: ओम के नियम का प्रायोगिक सत्यापन करने के लिए एक विद्युत परिपथ नीचे दिए गए चित्र में दिखाया गया है। इस परिपथ में एक बैटरी (E), एक एमीटर (A), एक वोल्टमीटर (V), एक प्रतिरोध तार (R), एक परिवर्ती प्रतिरोध (Rh) और एक कुंजी (K) शामिल हैं। एमीटर को हमेशा श्रेणी क्रम में और वोल्टमीटर को समान्तर क्रम में जोड़ा जाता है।

B A A R V E + K Rh


In simple words: ओम के नियम को जाँचने के लिए, हम बैटरी, प्रतिरोध, एमीटर और वोल्टमीटर को सही ढंग से जोड़कर एक सर्किट बनाते हैं।

🎯 Exam Tip: ओम के नियम के प्रायोगिक सत्यापन के लिए परिपथ आरेख बनाते समय एमीटर को हमेशा श्रेणी क्रम में और वोल्टमीटर को समान्तर क्रम में जोड़ना सुनिश्चित करें।

निबंधात्मक प्रश्न

 

Question 27. प्रत्यावर्ती धारा जनित्र की बनावट एवं कार्य विधि समझाइये। आवश्यक नामांकित चित्र बनाओ।
Answer: प्रत्यावर्ती धारा जनित्र (AC जनरेटर) एक उपकरण है जो यांत्रिक ऊर्जा को विद्युत ऊर्जा में बदलता है। इसकी बनावट को समझने के लिए, हम मुख्य भागों पर ध्यान देते हैं:
(i) **आर्मेचर (कुण्डली):** इसमें एक आयताकार कुण्डली (जैसे ABCD) होती है जो नरम लोहे के कोर पर तांबे के तार लपेटकर बनाई जाती है। यह जनरेटर का घूमने वाला हिस्सा है।
(ii) **क्षेत्र चुम्बक:** यह बहुत शक्तिशाली चुम्बक होते हैं जो एक मजबूत चुम्बकीय क्षेत्र बनाते हैं। छोटे जनरेटरों में स्थायी चुम्बक होते हैं, जबकि बड़े जनरेटरों में विद्युत चुम्बक का उपयोग होता है।
(iii) **स्लिप रिंग (सीवलय):** ये दो धातु के छल्ले \( (S_1) \) और \( (S_2) \) होते हैं जो आर्मेचर कुण्डली के सिरों से जुड़े होते हैं और आर्मेचर के साथ घूमते हैं।
(iv) **ब्रश:** ये कार्बन के दो ब्रश \( (B_1) \) और \( (B_2) \) होते हैं जो स्लिप रिंग पर हल्के से छूते हैं। ये ब्रश बाहरी परिपथ में धारा प्रवाहित करने में मदद करते हैं।
इसकी बनावट को नीचे दिए गए चित्र में दिखाया गया है।

N S क्षेत्र चुम्बक क्षेत्र चुम्बक A B C D गति की दिशा S₁ S₂ सर्षीवलय B₁ B₂ बुश लोड


**कार्य-प्रणाली:**
जब आर्मेचर कुण्डली को बाहरी यांत्रिक ऊर्जा (जैसे इंजन से) से चुम्बकीय क्षेत्र में घुमाया जाता है, तो कुण्डली से जुड़े चुम्बकीय अभिवाह (मैग्नेटिक फ्लक्स) में लगातार बदलाव होता है। इस बदलाव के कारण कुण्डली में विद्युत वाहक बल (EMF) और विद्युत धारा उत्पन्न होती है, जिसे प्रेरित धारा कहते हैं। धारा की दिशा फ्लेमिंग के दाहिने हाथ के नियम से ज्ञात की जाती है।
कुण्डली के घूर्णन की विभिन्न स्थितियाँ और प्रेरित धारा का मान:
**प्रथम स्थिति (0°):** जब कुण्डली चुम्बकीय क्षेत्र के लंबवत होती है, तो कुण्डली से कोई चुम्बकीय अभिवाह नहीं बदलता, जिससे प्रेरित विद्युत वाहक बल और धारा का मान शून्य होता है।
**द्वितीय स्थिति (90°):** जब कुण्डली चुम्बकीय क्षेत्र के समानांतर होती है, तो चुम्बकीय अभिवाह के बदलने की दर अधिकतम होती है। इस स्थिति में, प्रेरित विद्युत वाहक बल और धारा का मान अधिकतम होता है।
**तृतीय स्थिति (180°):** कुण्डली फिर से चुम्बकीय क्षेत्र के लंबवत हो जाती है, और प्रेरित विद्युत वाहक बल तथा धारा का मान फिर से शून्य हो जाता है।
**चतुर्थ स्थिति (270°):** कुण्डली फिर से चुम्बकीय क्षेत्र के समानांतर होती है, लेकिन धारा की दिशा पहली अधिकतम स्थिति (90°) के विपरीत होती है, और मान अधिकतम होता है।
**पंचम स्थिति (360°):** कुण्डली एक पूरा चक्कर लगाकर अपनी प्रारंभिक स्थिति में आ जाती है, और प्रेरित धारा का मान फिर से शून्य हो जाता है।
इस प्रकार, प्रत्येक आधे घूर्णन के बाद धारा की दिशा और मान लगातार बदलते रहते हैं, इसीलिए इसे प्रत्यावर्ती धारा जनित्र कहते हैं। प्रेरित विद्युत धारा का मान कुण्डली में घेरों की संख्या \( (N) \), कुण्डली का क्षेत्रफल \( (A) \), कुण्डली के घूर्णन वेग \( (\omega) \) और चुम्बकीय क्षेत्र \( (B) \) के मान पर निर्भर करता है। यह मशीन हमारे घरों और उद्योगों में बिजली पैदा करने का मुख्य तरीका है।

90° 180° 270° 360° G चित्र: (ब) चुम्बकीय क्षेत्र में घेरे के घूर्णन की विभिन्न स्थितियाँ


In simple words: AC जनरेटर बिजली बनाने वाली मशीन है। इसमें एक कुण्डली चुम्बक के बीच घूमती है। जब कुण्डली घूमती है, तो उसमें बिजली बनती है जो अपनी दिशा बदलती रहती है।

🎯 Exam Tip: प्रत्यावर्ती धारा जनित्र की बनावट में स्लिप रिंग और कार्य-प्रणाली में चुम्बकीय अभिवाह के लगातार परिवर्तन की अवधारणा पर विशेष ध्यान दें।

 

आंकिक प्रश्न

 

Question 30. 1 ओम, 2 ओम, व 3 ओम के तीन प्रतिरोधों के संयोजन से प्राप्त अधिकतम व न्यूनतम प्रतिरोध ज्ञात करो।
Answer: हमें 1 ओम, 2 ओम और 3 ओम के तीन प्रतिरोध दिए गए हैं। हमें इनका अधिकतम और न्यूनतम प्रतिरोध ज्ञात करना है जब इन्हें अलग-अलग क्रमों में जोड़ा जाता है।
**अधिकतम प्रतिरोध (श्रेणी क्रम संयोजन):**
अधिकतम प्रतिरोध प्राप्त करने के लिए प्रतिरोधों को श्रेणी क्रम (सीरीज) में जोड़ा जाता है। श्रेणी क्रम में कुल प्रतिरोध सभी प्रतिरोधों के योग के बराबर होता है।
\( R_{\text{अधिकतम}} = R_1 + R_2 + R_3 \)
\( \implies R_{\text{अधिकतम}} = 1 + 2 + 3 \)
\( \implies R_{\text{अधिकतम}} = 6 \text{ ओम} \)
**न्यूनतम प्रतिरोध (समान्तर क्रम संयोजन):**
न्यूनतम प्रतिरोध प्राप्त करने के लिए प्रतिरोधों को समान्तर क्रम (पैरेलल) में जोड़ा जाता है। समान्तर क्रम में कुल प्रतिरोध का व्युत्क्रम सभी प्रतिरोधों के व्युत्क्रमों के योग के बराबर होता है।
\( \frac{1}{R_{\text{न्यूनतम}}} = \frac{1}{R_1} + \frac{1}{R_2} + \frac{1}{R_3} \)
\( \implies \frac{1}{R_{\text{न्यूनतम}}} = \frac{1}{1} + \frac{1}{2} + \frac{1}{3} \)
\( \implies \frac{1}{R_{\text{न्यूनतम}}} = \frac{6}{6} + \frac{3}{6} + \frac{2}{6} \)
\( \implies \frac{1}{R_{\text{न्यूनतम}}} = \frac{6+3+2}{6} \)
\( \implies \frac{1}{R_{\text{न्यूनतम}}} = \frac{11}{6} \)
\( \implies R_{\text{न्यूनतम}} = \frac{6}{11} \text{ ओम} \)
In simple words: सबसे ज़्यादा प्रतिरोध तब मिलता है जब सभी प्रतिरोधों को एक के बाद एक जोड़ते हैं (श्रेणी क्रम)। सबसे कम प्रतिरोध तब मिलता है जब उन्हें एक साथ अगल-बगल जोड़ते हैं (समान्तर क्रम)।

🎯 Exam Tip: श्रेणी क्रम में तुल्य प्रतिरोध \( (R_{eq} = R_1 + R_2 + ...) \) और समान्तर क्रम में तुल्य प्रतिरोध \( (\frac{1}{R_{eq}} = \frac{1}{R_1} + \frac{1}{R_2} + ...) \) के सूत्रों को सही ढंग से लागू करना महत्वपूर्ण है।

 

Question 31. यदि किसी चालक तार में 10 मिमी. एम्पीयर की धारा प्रवाहित करने पर इसके सिरों पर 2.5 वोल्ट का विभवान्तर उत्पन्न होता है तो चालक तार का प्रतिरोध ज्ञात करो।
Answer: हमें एक चालक तार में प्रवाहित धारा \( (I) \) और उसके सिरों पर उत्पन्न विभवान्तर \( (V) \) दिया गया है। हमें उस तार का प्रतिरोध \( (R) \) ज्ञात करना है।
दिए गए मान:
विद्युत धारा \( I = 10 \text{ मिली एम्पीयर (mA)} \)
सबसे पहले, मिली एम्पीयर को एम्पीयर में बदलेंगे:
\( 10 \text{ mA} = 10 \times 10^{-3} \text{ A} \)
विभवान्तर \( V = 2.5 \text{ वोल्ट} \)
ओम के नियम के अनुसार प्रतिरोध का सूत्र है:
\( R = \frac{V}{I} \)
मान रखने पर:
\( R = \frac{2.5 \text{ वोल्ट}}{10 \times 10^{-3} \text{ A}} \)
\( \implies R = \frac{2.5}{0.01} \)
\( \implies R = 250 \text{ ओम} \)
तो, चालक तार का प्रतिरोध 250 ओम होगा। यह बताता है कि यह तार विद्युत प्रवाह को कितना रोकता है।
In simple words: हमने ओम के नियम का उपयोग करके तार का प्रतिरोध निकाला। यह 250 ओम आया, जिसका मतलब है कि तार बिजली को काफी रोकता है।

🎯 Exam Tip: मिलीएम्पीयर (mA) जैसी इकाइयों को हमेशा गणना से पहले मानक एम्पीयर (A) में बदलें। सही इकाई रूपांतरण महत्वपूर्ण है।

 

Question 32. (a) दिए गए परिपथ का तुल्य प्रतिरोध ज्ञात करो।

A B


Answer: दिए गए चित्र (a) में, हमें एक विद्युत परिपथ का तुल्य प्रतिरोध ज्ञात करना है।
सबसे पहले, ऊपरी शाखा में दो प्रतिरोध \( R_1 \) और \( R_2 \) श्रेणी क्रम (सीरीज) में जुड़े हुए हैं।
\( R_1 = 2 \text{ ओम} \)
\( R_2 = 2 \text{ ओम} \)
श्रेणी क्रम में तुल्य प्रतिरोध \( R_{\text{श्रेणी}} \):
\( R_{\text{श्रेणी}} = R_1 + R_2 \)
\( \implies R_{\text{श्रेणी}} = 2 + 2 = 4 \text{ ओम} \)
अब यह \( R_{\text{श्रेणी}} \) प्रतिरोध नीचे वाली शाखा के प्रतिरोध \( R_3 = 2 \text{ ओम} \) के साथ समान्तर क्रम (पैरेलल) में जुड़ा है।
समान्तर क्रम में तुल्य प्रतिरोध \( R_{\text{तुल्य}} \) के लिए सूत्र:
\( \frac{1}{R_{\text{तुल्य}}} = \frac{1}{R_{\text{श्रेणी}}} + \frac{1}{R_3} \)
\( \implies \frac{1}{R_{\text{तुल्य}}} = \frac{1}{4} + \frac{1}{2} \)
\( \implies \frac{1}{R_{\text{तुल्य}}} = \frac{1}{4} + \frac{2}{4} \)
\( \implies \frac{1}{R_{\text{तुल्य}}} = \frac{1+2}{4} = \frac{3}{4} \)
\( \implies R_{\text{तुल्य}} = \frac{4}{3} \text{ ओम} \)
इस परिपथ का कुल तुल्य प्रतिरोध \( \frac{4}{3} \) ओम होगा।
In simple words: पहले, ऊपर के दो प्रतिरोधों को जोड़कर एक प्रतिरोध बनाया। फिर, उस प्रतिरोध को नीचे वाले प्रतिरोध के साथ समानांतर में जोड़कर कुल प्रतिरोध निकाला।

🎯 Exam Tip: ऐसे परिपथों को हल करते समय, पहले श्रेणी क्रम में जुड़े प्रतिरोधों को सरल करें, फिर परिणामी प्रतिरोधों को समान्तर क्रम के सूत्र का उपयोग करके जोड़ें।

 

Question 32. (b) दिए गए परिपथ का तुल्य प्रतिरोध ज्ञात करो।

A B


Answer: दिए गए चित्र (b) में, हमें एक विद्युत परिपथ का तुल्य प्रतिरोध ज्ञात करना है, जिसमें चार 2 ओम के प्रतिरोध एक वर्गाकार लूप में जुड़े हैं।
इस परिपथ को दो समानांतर शाखाओं में बांटा जा सकता है।
**ऊपरी शाखा में:** दो प्रतिरोध \( R_1 \) और \( R_2 \) श्रेणी क्रम में जुड़े हैं:
\( R_1 = 2 \text{ ओम} \)
\( R_2 = 2 \text{ ओम} \)
\( R'_{\text{श्रेणी}} = R_1 + R_2 \)
\( \implies R'_{\text{श्रेणी}} = 2 + 2 = 4 \text{ ओम} \)
**निचली शाखा में:** अन्य दो प्रतिरोध \( R_3 \) और \( R_4 \) भी श्रेणी क्रम में जुड़े हैं:
\( R_3 = 2 \text{ ओम} \)
\( R_4 = 2 \text{ ओम} \)
\( R''_{\text{श्रेणी}} = R_3 + R_4 \)
\( \implies R''_{\text{श्रेणी}} = 2 + 2 = 4 \text{ ओम} \)
अब ये दोनों श्रेणी क्रम के तुल्य प्रतिरोध \( R'_{\text{श्रेणी}} \) और \( R''_{\text{श्रेणी}} \) एक दूसरे के साथ समान्तर क्रम में जुड़े हुए हैं।
समान्तर क्रम में कुल तुल्य प्रतिरोध \( R_{\text{तुल्य}} \) के लिए सूत्र:
\( \frac{1}{R_{\text{तुल्य}}} = \frac{1}{R'_{\text{श्रेणी}}} + \frac{1}{R''_{\text{श्रेणी}}} \)
\( \implies \frac{1}{R_{\text{तुल्य}}} = \frac{1}{4} + \frac{1}{4} \)
\( \implies \frac{1}{R_{\text{तुल्य}}} = \frac{1+1}{4} = \frac{2}{4} = \frac{1}{2} \)
\( \implies R_{\text{तुल्य}} = 2 \text{ ओम} \)
इस वर्गाकार परिपथ का कुल तुल्य प्रतिरोध 2 ओम होगा।
In simple words: हमने वर्ग के ऊपर के दो प्रतिरोधों को जोड़ा और नीचे के दो प्रतिरोधों को जोड़ा। फिर, इन दोनों नए प्रतिरोधों को समानांतर में जोड़कर कुल प्रतिरोध निकाला।

🎯 Exam Tip: जटिल परिपथों को छोटे-छोटे श्रेणी और समान्तर क्रम के संयोजनों में विभाजित करके हल करें। प्रत्येक चरण को व्यवस्थित रूप से लिखें।

 

Question 33. एक 1500 वाट की निमज्जन छड़ प्रतिदिन 3 घंटे पानी गर्म करने के काम में आती है। यदि एक यूनिट विद्युत ऊर्जा का मूल्य 5.00 Rs हो तो 30 दिन में खर्च हुई विद्युत का मूल्य कितना होगा?
Answer: प्रतिदिन उपयोग की गई ऊर्जा = \( 1500 \, \text{W} \times 3 \, \text{h} = 4500 \, \text{Wh} = 4.5 \, \text{KWh} \)
30 दिन में कुल ऊर्जा की खपत = \( 4.5 \, \text{KWh/day} \times 30 \, \text{days} = 135 \, \text{KWh} \)
कुल यूनिट की संख्या = 135 यूनिट
5 Rs प्रति यूनिट की दर से विद्युत का कुल मूल्य = \( 135 \times 5 = 675 \, \text{Rs} \)
In simple words: पहले यह निकालो कि एक दिन में कितनी बिजली खर्च होती है. फिर उसे 30 से गुणा करके पूरे महीने की खपत निकालो. आखिर में, उस कुल खपत को एक यूनिट के दाम से गुणा कर दो. इस तरह आपको कुल बिल मिल जाएगा.

🎯 Exam Tip: ऊर्जा की खपत हमेशा किलोवाट-घंटे (KWh) में ही निकाली जाती है, जो कि आमतौर पर 'यूनिट' कहलाती है. 'वाट' को 'किलोवाट' में बदलने के लिए 1000 से भाग करना न भूलें.

 

अन्य महत्वपूर्ण प्रश्नोत्तर

 

बहुचयनात्मक प्रश्न

 

Question 1. विद्युत विभव का S.I. मात्रक है -
(अ) जूल
(ब) एम्पियर
(स) वोल्ट
(द) कूलॉम
Answer: (स) वोल्ट
In simple words: विद्युत विभव को मापने के लिए जिस इकाई का उपयोग किया जाता है, उसे वोल्ट कहते हैं. यह एक प्रकार का विद्युत दबाव होता है.

🎯 Exam Tip: विद्युत विभव, जिसे वोल्टेज भी कहते हैं, हमेशा वोल्ट में मापा जाता है. यह ऊर्जा प्रति इकाई आवेश को दर्शाता है.

 

Question 2. विद्युत शक्ति का S.I. मात्रक है –
(अ) जूल
(ब) वाट
(स) वोल्ट
(द) एम्पियर
Answer: (ब) वाट
In simple words: विद्युत शक्ति को मापने की इकाई को वाट कहते हैं. यह बताता है कि कितनी बिजली कितनी तेज़ी से खर्च हो रही है या काम कर रही है.

🎯 Exam Tip: शक्ति (power) की इकाई हमेशा वाट होती है, चाहे वह विद्युत शक्ति हो या कोई अन्य प्रकार की शक्ति. जूल ऊर्जा की इकाई है, वोल्ट विभव की, और एम्पियर धारा की.

 

Question 3. 100 वाट का एक बल्ब 2 घंटे के लिए जलाया जाता है। 30 दिन में व्ययित विद्युत ऊर्जा की गणना होगी –
(अ) 60 KWh
(ब) 6 KWh
(स) 0.2 KWh
(द) 0.6 KWh
Answer: (द) 0.6 KWh
In simple words: बल्ब की शक्ति को इस्तेमाल किए गए समय और दिनों की संख्या से गुणा करो, फिर उसे किलोवाट-घंटे में बदलने के लिए 1000 से भाग दो. इससे कुल बिजली की खपत पता चल जाएगी.

🎯 Exam Tip: कुल ऊर्जा खपत निकालने के लिए, शक्ति (वाट में) को समय (घंटे में) और दिनों की संख्या से गुणा करें, फिर इसे 1000 से भाग करके KWh (किलोवाट-घंटे) में बदलें.

 

Question 4. जूल के ऊष्मीय नियम के अनुसार क्या सत्य है?
(अ) H x R2
(ब) Hxl
Answer: (द) (पूर्ण विकल्प स्रोत में दिखाई नहीं दे रहा है)
In simple words: जूल का ऊष्मीय नियम बताता है कि एक तार में उत्पन्न गर्मी, उसमें बहने वाली बिजली की मात्रा, तार के प्रतिरोध और समय पर निर्भर करती है. हमें इस प्रश्न में दिए गए विकल्पों में से सही विकल्प का पूरा पाठ नहीं मिल पाया.

🎯 Exam Tip: जूल के तापन नियम का सूत्र \( H = I^2Rt \) है, जहाँ H उत्पन्न ऊष्मा है, I धारा है, R प्रतिरोध है और t समय है.

 

Question 5. R प्रतिरोध वाले किसी तार को खींचकर उसकी लम्बाई दोगुनी कर दी गई है। नया प्रतिरोध आरेमिक प्रतिरोध की तुलना में –
(अ) दो गुना है
(ब) तीन गुना है
(स) बराबर है
(द) चार गुना है
Answer: (द) चार गुना है
In simple words: जब एक तार को खींचकर उसकी लंबाई दोगुनी की जाती है, तो उसका प्रतिरोध चार गुना बढ़ जाता है. ऐसा इसलिए होता है क्योंकि खींचने पर तार का क्षेत्रफल भी घट जाता है, जिससे प्रतिरोध और बढ़ जाता है.

🎯 Exam Tip: जब तार को खींचा जाता है, तो उसकी लंबाई (l) बढ़ती है और अनुप्रस्थ काट का क्षेत्रफल (A) घटता है. प्रतिरोध \( R \propto \frac{l}{A} \) होता है. यदि लंबाई दोगुनी होती है, तो क्षेत्रफल आधा हो जाता है, जिससे प्रतिरोध \( R \propto \frac{2l}{A/2} = 4R \) हो जाता है.

 

Question 6. विद्युत धारा उत्पन्न करने के लिए उपयोग किए जाने वाली युक्ति है –
(अ) जेनरेटर (विद्युत जनित्र)
(ब) आमीटर
(स) वोल्टमीटर
(द) गैल्वेनोमीटर
Answer: (स) वोल्टमीटर
In simple words: स्रोत के अनुसार, वोल्टमीटर वह उपकरण है जिसका उपयोग विद्युत धारा उत्पन्न करने के लिए किया जाता है.

🎯 Exam Tip: आमतौर पर, विद्युत धारा उत्पन्न करने के लिए जेनरेटर (विद्युत जनित्र) का उपयोग किया जाता है, जबकि वोल्टमीटर विद्युत विभव को मापता है. प्रश्न में दिए गए उत्तर को ध्यान से समझें.

 

Question 7. विद्युत जनित्र
(अ) विद्युत आवेशित करने का स्रोत है।
(ब) ऊष्मीय ऊर्जा का स्रोत है।
(स) एक विद्युत चुम्बक है।
(द) ऊर्जा को रूपांतरित करता है।
Answer: (ब) ऊष्मीय ऊर्जा का स्रोत है।
In simple words: स्रोत के अनुसार, विद्युत जनित्र ऊष्मा ऊर्जा का स्रोत है.

🎯 Exam Tip: सामान्य विज्ञान में, एक विद्युत जनित्र यांत्रिक ऊर्जा को विद्युत ऊर्जा में बदलता है. दिए गए उत्तर को ही मानें.

 

Question 8. विद्युत मोटर का सतत् घूर्णन करने वाला भाग है –
(अ) कुंडली
(ब) विभक्त वलय दिक् परिवर्तक
(स) सीवलय
(द) इनमें से कोई नहीं
Answer: (द) इनमें से कोई नहीं
In simple words: स्रोत के दिए गए उत्तर के अनुसार, विद्युत मोटर में निरंतर घूमने वाला भाग इन विकल्पों में से कोई नहीं है.

🎯 Exam Tip: विद्युत मोटर में आर्मेचर (कुंडली) और दिक्-परिवर्तक (कम्यूटेटर) मिलकर सतत घूर्णन में मदद करते हैं. यह सुनिश्चित करें कि आप प्रश्न को ठीक से समझें और विकल्पों का सावधानीपूर्वक मूल्यांकन करें.

 

अतिलघूत्तरात्मक प्रश्न

 

Question 1. विद्युत परिपथ में यदि 20 सेकण्ड में 40 कूलॉम आवेश प्रवाहित होता है, तो परिपथ में विद्युत धारा का मान होगा।
Answer: विद्युत धारा \( I = \frac{\text{आवेश (Q)}}{\text{समय (t)}} \)
\( I = \frac{40 \, \text{कूलॉम}}{20 \, \text{सेकण्ड}} = 2 \, \text{ऐम्पियर} \)
In simple words: बिजली की धारा निकालने के लिए, कुल आवेश (कूलॉम में) को उस समय से भाग देते हैं जितने समय में वह आवेश बहता है.

🎯 Exam Tip: विद्युत धारा की गणना के लिए \( I = Q/t \) सूत्र का उपयोग करें, जहाँ \( Q \) आवेश है और \( t \) समय है. इकाई 'ऐम्पियर' लिखना न भूलें.

 

Question 2. वोल्ट को परिभाषित कीजिए।
Answer: विद्युत क्षेत्र में किन्हीं दो बिंदुओं के बीच विभवांतर एक वोल्ट होगा, यदि 1 कूलॉम आवेश को एक बिंदु से दूसरे बिंदु तक ले जाने में 1 जूल कार्य किया जाता है.
\( 1 \, \text{वोल्ट} = \frac{1 \, \text{जूल}}{1 \, \text{कूलॉम}} \)
In simple words: एक वोल्ट का मतलब है कि अगर आप एक कूलॉम बिजली के चार्ज को एक जगह से दूसरी जगह ले जाने में एक जूल ऊर्जा खर्च करते हैं, तो उन दोनों जगहों के बीच का दबाव (विभवांतर) एक वोल्ट है.

🎯 Exam Tip: वोल्ट की परिभाषा के लिए कार्य (जूल में) और आवेश (कूलॉम में) का सही संबंध बताएं. यह विभव को ऊर्जा प्रति इकाई आवेश के रूप में दर्शाता है.

 

Question 3. किसी चालक के अनुप्रस्थ काट का क्षेत्रफल आधा करने पर उसका प्रतिरोध कितना हो जायेगा?
Answer: दुगुना।
In simple words: अगर किसी तार का मोटाई (अनुप्रस्थ काट का क्षेत्रफल) आधा कर दिया जाए, तो उसका प्रतिरोध दोगुना हो जाता है, क्योंकि प्रतिरोध मोटाई के उल्टा होता है.

🎯 Exam Tip: प्रतिरोध (R) अनुप्रस्थ काट के क्षेत्रफल (A) के व्युत्क्रमानुपाती होता है, यानी \( R \propto \frac{1}{A} \). इसलिए, क्षेत्रफल आधा करने पर प्रतिरोध दोगुना हो जाएगा.

 

Question 4. विद्युत परिपथ में विद्युत धारा को कम व अधिक करने के लिये उपकरण प्रयोग में लेते हैं
Answer: धारा नियंत्रक।
In simple words: बिजली की धारा को अपनी जरूरत के हिसाब से बढ़ाने या घटाने के लिए 'धारा नियंत्रक' नाम का एक यंत्र इस्तेमाल करते हैं.

🎯 Exam Tip: धारा नियंत्रक (rheostat) एक परिवर्तनीय प्रतिरोध होता है जो परिपथ में धारा को नियंत्रित करने के काम आता है.

 

Question 5. विद्युत विभवान्तर नापने में उपकरण काम में लेते हैं
Answer: वोल्टमीटर।
In simple words: बिजली के दबाव (विभवांतर) को मापने के लिए जिस उपकरण का इस्तेमाल किया जाता है, उसे वोल्टमीटर कहते हैं.

🎯 Exam Tip: वोल्टमीटर को हमेशा परिपथ में समान्तर क्रम में जोड़ा जाता है ताकि वह दो बिंदुओं के बीच का विभवान्तर ठीक से माप सके.

 

Question 6. वितगत रागिाश में गतिरोध का मान कम करने के लिए प्रतिरोध को किस क्रम में संयोजित करते हैं ?
Answer:
In simple words:

🎯 Exam Tip: किसी भी प्रश्न का उत्तर देते समय, यदि विकल्प दिए गए हैं तो उन्हें ध्यान से चुनें. यदि कोई विशिष्ट उत्तर अपेक्षित है तो उसे स्पष्ट रूप से लिखें.

 

Question 7. तीन-तीन ओम के तीन प्रतिरोध समान्तर क्रम में संयोजित करने पर संयोजन का तुल्य प्रतिरोध कितना होगा?
Answer: तुल्य प्रतिरोध के लिए सूत्र \( \frac {1}{R_{\text{तुल्य}}} = \frac {1}{R_1} + \frac {1}{R_2} + \frac {1}{R_3} \)
\( \frac {1}{R_{\text{तुल्य}}} = \frac {1}{3} + \frac {1}{3} + \frac {1}{3} = \frac {3}{3} \)
\( \frac {1}{R_{\text{तुल्य}}} = 1 \)
\( R_{\text{तुल्य}} = 1 \, \Omega \)
In simple words: जब कई प्रतिरोधों को समान्तर क्रम में जोड़ते हैं, तो कुल प्रतिरोध निकालने के लिए उनके उल्टे मानों को जोड़कर फिर उसका उल्टा कर देते हैं. यहाँ तीन 3 ओम के प्रतिरोधों को जोड़ने पर कुल प्रतिरोध 1 ओम आएगा.

🎯 Exam Tip: समान्तर क्रम में जुड़े समान प्रतिरोधों के लिए, तुल्य प्रतिरोध \( R_{\text{तुल्य}} = \frac{R}{\text{n}} \) होता है, जहाँ \( R \) एक प्रतिरोध का मान और \( \text{n} \) प्रतिरोधों की संख्या है. इस मामले में, \( 3/3 = 1 \, \Omega \).

 

Question 8. चालक का विशिष्ट प्रतिरोध किस कारण पर निर्भर करता है ?
Answer: चालक का विशिष्ट प्रतिरोध उसके पदार्थ की प्रकृति पर निर्भर करता है.
In simple words: किसी भी तार का अपना खास प्रतिरोध होता है, जो इस बात पर निर्भर करता है कि वह तार किस चीज़ (जैसे तांबा, लोहा) से बना है.

🎯 Exam Tip: विशिष्ट प्रतिरोध (resistivity) केवल पदार्थ की प्रकृति और तापमान पर निर्भर करता है, न कि तार की लंबाई या मोटाई पर.

 

Question 9. 200 वोल्ट का विभवान्तर 100 ओम के प्रतिरोध तार पर लगाने से प्रतिरोध में प्रवाहित विद्युत धारा का मान लिखिए।
Answer: ओम के नियम के अनुसार विद्युत धारा \( I = \frac{V}{R} \)
यहाँ, \( V = 200 \, \text{वोल्ट} \) और \( R = 100 \, \text{ओम} \)
इसलिए, \( I = \frac{200}{100} = 2 \, \text{ऐम्पियर} \)
In simple words: यदि किसी तार पर 200 वोल्ट का दबाव हो और उसका प्रतिरोध 100 ओम हो, तो उसमें से 2 ऐम्पियर बिजली की धारा बहेगी.

🎯 Exam Tip: ओम के नियम \( V=IR \) का उपयोग करके धारा, वोल्टेज या प्रतिरोध की गणना करते समय, सही इकाइयों (वोल्ट, ऐम्पियर, ओम) का प्रयोग सुनिश्चित करें.

 

Question 10. विद्युत मोटर का उपयोग विद्युत ऊर्जा को किस ऊर्जा में परिवर्तन के लिए किया जाता है ?
Answer: विद्युत मोटर विद्युत ऊर्जा को यांत्रिक ऊर्जा में बदलती है.
In simple words: बिजली की मोटर बिजली की ताकत को घुमावदार ताकत (यांत्रिक ऊर्जा) में बदल देती है, जिससे वह चीजें चला सके.

🎯 Exam Tip: विद्युत मोटर और जनित्र के कार्य सिद्धांत को स्पष्ट रूप से समझें: मोटर विद्युत ऊर्जा को यांत्रिक ऊर्जा में और जनित्र यांत्रिक ऊर्जा को विद्युत ऊर्जा में बदलता है.

 

लघूत्तरात्मक प्रश्न

 

Question 1. किसी चालक का प्रतिरोध किन-किन कारकों पर निर्भर करता है ? समझाइये।
Answer: चालक का प्रतिरोध निम्न कारकों पर निर्भर करता है -
(i) **चालक की लम्बाई पर:** किसी धातु के एक समान चालक का प्रतिरोध उसकी लम्बाई (l) के सीधा अनुक्रमानुपाती होता है, यानी \( R \propto l \). इसका मतलब है कि तार जितना लंबा होगा, उसका प्रतिरोध उतना ही ज़्यादा होगा.
(ii) **अनुप्रस्थ काट के क्षेत्रफल पर:** किसी धातु के एक समान चालक का प्रतिरोध उसके अनुप्रस्थ काट के क्षेत्रफल (A) के व्युत्क्रमानुपाती होता है, यानी \( R \propto \frac{1}{A} \). तार जितना मोटा होगा, उसका प्रतिरोध उतना ही कम होगा.
(iv) **पदार्थ की प्रकृति पर:** चालक का प्रतिरोध उस पदार्थ की प्रकृति पर भी निर्भर करता है जिससे वह बना है. उदाहरण के लिए, तांबे के तार का प्रतिरोध लोहे के तार से कम होता है, भले ही उनकी लंबाई और मोटाई समान हो. विभिन्न धातुओं की अपनी विशिष्ट प्रतिरोधकता होती है.
In simple words: किसी भी तार में बिजली के बहाव में रुकावट (प्रतिरोध) तीन बातों पर निर्भर करती है: तार कितना लंबा है, कितना मोटा है, और वह किस धातु से बना है. लंबा या पतला तार ज़्यादा रुकावट डालता है, और अलग-अलग धातुओं की रुकावट भी अलग होती है.

🎯 Exam Tip: प्रतिरोध के कारकों को हमेशा सूत्र \( R = \rho \frac{l}{A} \) से याद रखें, जहाँ \( \rho \) विशिष्ट प्रतिरोध (पदार्थ की प्रकृति), \( l \) लंबाई और \( A \) अनुप्रस्थ काट का क्षेत्रफल है.

 

Question 2. घरेलू विद्युत उपकरण पार्श्वक्रम में क्यों जोड़े जाते हैं ?
Answer: घरेलू विद्युत उपकरण निम्न कारणों से पार्श्वक्रम में जोड़े जाते हैं, क्योंकि –

  • **स्थिर विभवांतर:** प्रत्येक उपकरण को आपूर्ति पथ वोल्टता के स्थिर मान के समान विभवांतर मिलता है, जो उनके ठीक से काम करने के लिए ज़रूरी है.
  • **स्वतंत्र संचालन:** पार्श्वक्रम में सभी उपकरण एक-दूसरे से स्वतंत्र रूप से काम करते हैं. एक उपकरण के खराब होने या बंद होने पर भी बाकी उपकरण चलते रहते हैं.
  • **आवश्यक धारा:** पार्श्वक्रम में जुड़ने पर कुल प्रतिरोध कम हो जाता है, जिससे प्रत्येक उपकरण को अपनी ज़रूरत के हिसाब से पर्याप्त विद्युत धारा मिल पाती है.
  • **सुरक्षा:** यदि कोई परिपथ ज़्यादा गर्म हो जाता है या ओवरलोड हो जाता है, तो फ्यूज उड़ जाता है और उस विशेष सर्किट की बिजली कट जाती है, जबकि घर के बाकी आपूर्ति पथ यथावत् कार्यशील रहते हैं.


In simple words: घर में बिजली के सभी उपकरण समान्तर क्रम में जोड़े जाते हैं. इससे हर उपकरण को एक जैसा वोल्टेज मिलता है, वे एक-दूसरे पर निर्भर नहीं करते, और कोई एक खराब हो जाए तो बाकियों पर असर नहीं पड़ता. साथ ही, हर उपकरण को अपनी ज़रूरत की बिजली भी मिल जाती है.

 

🎯 Exam Tip: पार्श्वक्रम (parallel combination) में वोल्टेज समान रहता है जबकि श्रेणीक्रम (series combination) में धारा समान रहती है. घरेलू वायरिंग में उपकरणों की सुरक्षा और दक्षता के लिए पार्श्वक्रम ही सबसे उपयुक्त होता है.

 

Question 3. दिष्ट धारा और प्रत्यावर्ती धारा में क्या अन्तर है?
Answer: दिष्ट धारा और प्रत्यावर्ती धारा में निम्नलिखित अंतर हैं –

  • **खतरा:** प्रत्यावर्ती धारा (AC) दिष्ट धारा (DC) से ज़्यादा खतरनाक होती है, क्योंकि AC मनुष्य को अपनी ओर खींचती है, जबकि DC झटका देकर दूर धकेलती है.
  • **वोल्टेज परिवर्तन:** ट्रांसफॉर्मर की मदद से प्रत्यावर्ती धारा के वोल्टेज को बढ़ाया या घटाया जा सकता है, जो दिष्ट धारा में संभव नहीं है.
  • **परिवर्तनशीलता:** प्रत्यावर्ती धारा को दिष्ट धारा में बदला जा सकता है, लेकिन दिष्ट धारा को प्रत्यावर्ती धारा में आसानी से नहीं बदला जा सकता.
  • **दिशा व मान:** प्रत्यावर्ती धारा का मान और दिशा समय के साथ लगातार बदलती रहती है (एक निश्चित आवृत्ति पर), जबकि दिष्ट धारा का मान और दिशा हमेशा स्थिर रहते हैं.
  • **ऊर्जा हानि:** प्रत्यावर्ती धारा में ऊर्जा की हानि दिष्ट धारा की तुलना में कम होती है, खासकर लंबी दूरी के संचरण में.


In simple words: दिष्ट धारा (DC) एक ही दिशा में बहती है, जबकि प्रत्यावर्ती धारा (AC) बार-बार अपनी दिशा बदलती है. AC का वोल्टेज बदला जा सकता है और लंबी दूरी पर कम ऊर्जा खोती है, लेकिन DC ऐसा नहीं कर पाती. AC ज़्यादा खतरनाक भी मानी जाती है.

 

🎯 Exam Tip: दिष्ट धारा (DC) और प्रत्यावर्ती धारा (AC) के मुख्य अंतरों को याद रखें, विशेषकर उनके अनुप्रयोगों, संचरण और सुरक्षा पहलुओं के संदर्भ में. AC का उपयोग घरों और उद्योगों में होता है जबकि DC बैटरी और इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों में.

 

Question 4. किसी धारावाही परिनलिका में धारा प्रवाहित करने पर उसके चारों ओर उत्पन्न चुम्बकीय क्षेत्र का वर्णन कीजिए।
Answer: जब परिनालिका (solenoid) में विद्युत धारा प्रवाहित की जाती है, तो उसके चारों ओर एक चुम्बकीय क्षेत्र उत्पन्न होता है. यह चुम्बकीय क्षेत्र एक छड़ चुम्बक (bar magnet) द्वारा उत्पन्न चुम्बकीय क्षेत्र के समान होता है.
इस चुम्बकीय क्षेत्र की बल रेखाएँ एक सिरे से निकलकर दूसरे सिरे में प्रवेश करती हैं, और परिनालिका के अंदर ये रेखाएँ एक-दूसरे के समान्तर होती हैं, जो एक समान चुम्बकीय क्षेत्र को दर्शाती हैं. यदि इसे स्वतंत्रतापूर्वक लटका दिया जाये तो यह एक दंड चुम्बक की तरह कार्य करती है और इसका एक सिरा उत्तर दिशा की ओर तथा दूसरा सिरा दक्षिण दिशा की ओर रुकता है.
In simple words: जब किसी तार की कुंडली (परिनालिका) में बिजली बहाई जाती है, तो उसके आस-पास चुंबक जैसा क्षेत्र बन जाता है. यह क्षेत्र एक साधारण छड़ चुंबक के क्षेत्र जैसा दिखता है. इसके अंदर चुंबक की रेखाएं सीधी होती हैं, और अगर इसे लटकाया जाए तो यह उत्तर-दक्षिण दिशा में रुकती है.

🎯 Exam Tip: परिनालिका के चुम्बकीय क्षेत्र की दिशा जानने के लिए दक्षिण-हस्त अंगुष्ठ नियम का प्रयोग करें. अंदर का क्षेत्र हमेशा एक समान और मजबूत होता है.

 

Question 5. चुम्बकीय क्षेत्र रेखाएँ क्या हैं ? इनकी दो विशेषताओं को लिखिए।
Answer: चुम्बकीय क्षेत्र रेखाएँ काल्पनिक रेखाएँ होती हैं जो किसी चुम्बकीय क्षेत्र की उपस्थिति और उसकी दिशा को दर्शाती हैं. इन रेखाओं के किसी भी बिंदु पर खींची गई स्पर्श रेखा उस बिंदु पर चुम्बकीय क्षेत्र की दिशा बताती है.
**विशेषताएँ:**
(i) **क्षेत्र की शक्ति का संकेत:** चुम्बकीय क्षेत्र की शक्ति को क्षेत्र से होकर जाने वाली रेखाओं की घनत्व (संख्या) से मापा जाता है. जहाँ रेखाएँ पास-पास होती हैं, वहाँ क्षेत्र अधिक मजबूत होता है.
(ii) **कभी नहीं काटतीं:** कोई भी दो चुम्बकीय क्षेत्र रेखाएँ कभी भी एक-दूसरे को नहीं काटतीं. यदि वे काटतीं, तो कटान बिंदु पर चुम्बकीय क्षेत्र की दो दिशाएँ होतीं जो असंभव है.
In simple words: चुम्बकीय क्षेत्र रेखाएँ वे लाइनें होती हैं जो दिखाती हैं कि चुंबक का असर कहाँ और किस दिशा में है. इनकी दो खास बातें हैं: जहाँ ये लाइनें पास होती हैं, वहाँ चुंबक का असर ज़्यादा होता है; और ये लाइनें कभी भी एक-दूसरे को काटती नहीं हैं.

🎯 Exam Tip: चुम्बकीय क्षेत्र रेखाएँ हमेशा चुम्बक के उत्तरी ध्रुव से निकलकर दक्षिणी ध्रुव में प्रवेश करती हैं (बाहर की ओर) और चुम्बक के अंदर दक्षिणी ध्रुव से उत्तरी ध्रुव की ओर जाती हैं, जिससे एक बंद लूप बनता है.

 

Question 6. विद्युत धारा के चुम्बकीय प्रभाव से आप क्या समझते हैं ? इस प्रभाव को समझाने के लिए अटैंड का प्रयोग बताइए।
Answer: **विद्युत धारा का चुम्बकीय प्रभाव:** जब किसी चालक तार में से विद्युत धारा प्रवाहित की जाती है, तो उसके चारों ओर एक चुम्बकीय क्षेत्र पैदा हो जाता है. विद्युत धारा के इस प्रभाव को विद्युत धारा का चुम्बकीय प्रभाव कहते हैं.
**ओर्स्टेड का प्रयोग (अटेंड का प्रयोग):**
हंस क्रिश्चियन ओर्स्टेड ने दिखाया कि जब एक तार PQ जिसमें धारा दक्षिण से उत्तर की ओर बह रही हो, को एक चुम्बकीय सुई के ऊपर रखा जाता है, तो सुई का उत्तरी ध्रुव पश्चिम की ओर घूम जाता है. इससे पता चलता है कि तार में धारा के कारण एक चुम्बकीय क्षेत्र उत्पन्न हुआ है.
यदि तार में विद्युत धारा की दिशा बदल दी जाए (उत्तर से दक्षिण), तो सुई का उत्तरी ध्रुव पूर्व की ओर विक्षेपित हो जाता है. यदि तार को चुम्बकीय सुई के नीचे रखा जाए, तो सुई विपरीत दिशा में विक्षेपित हो जाती है.
In simple words: जब किसी तार में बिजली बहती है, तो वह अपने चारों ओर एक छोटा सा चुंबक बना देता है. ओर्स्टेड ने यह देखने के लिए एक प्रयोग किया: उसने एक तार को एक कंपास के ऊपर रखा. जैसे ही तार में बिजली बही, कंपास की सुई घूम गई, जिससे यह साबित हुआ कि बिजली से चुंबक बन सकता है.

🎯 Exam Tip: ओर्स्टेड के प्रयोग में चुम्बकीय सुई का विक्षेपण विद्युत धारा की उपस्थिति का प्रमाण है, जो विद्युत धारा के चुम्बकीय प्रभाव को स्थापित करता है. यह विद्युत चुम्बकत्व का आधार है.

 

Question 7. दक्षिणावर्त पेच का नियम समझाइये।
Answer: दक्षिणावर्त पेच का नियम (Right-Hand Screw Rule) बताता है कि यदि हम किसी पेच को इस प्रकार वृत्ताकार पथ घुमाएं कि पेच की नोक विद्युत धारा की दिशा में आगे बढ़े, तो पेच को घुमाने की दिशा चुम्बकीय क्षेत्र रेखाओं की दिशा को व्यक्त करेगी.
In simple words: इस नियम के अनुसार, यदि आप एक पेच को इस तरह घुमाएं कि उसकी नोक बिजली की धारा की दिशा में जाए, तो जिस दिशा में आप पेच को घुमा रहे होंगे, वही दिशा चुम्बकीय क्षेत्र की होगी.

🎯 Exam Tip: यह नियम सीधे तार में प्रवाहित धारा के कारण उत्पन्न चुम्बकीय क्षेत्र की दिशा ज्ञात करने के लिए उपयोगी है. यदि धारा की दिशा अंगूठे की दिशा में हो, तो मुड़ी हुई उंगलियाँ चुम्बकीय क्षेत्र की दिशा बताती हैं.

 

Question 8. सिद्ध कीजिये कि किसी चालक के प्रतिरोधक में उत्पन्न होने वाली ऊष्मा। समय के लिए विद्युत धारा। प्रवाहित करने पर \( H = I^2Rt \)
Answer: माना किसी प्रतिरोध R के चालक में विद्युत धारा \( I \) समय \( t \) के लिए प्रवाहित हो रही है. चालक के सिरों के बीच विभवान्तर \( V \) है.
यदि \( t \) समय में \( Q \) आवेश प्रवाहित होता है, तो आवेश \( Q \) को \( V \) विभवान्तर से प्रवाहित करने में किया गया कार्य \( W \) होगा:
\( W = VQ \)
हम जानते हैं कि विद्युत शक्ति \( P = \frac{W}{t} \), और \( I = \frac{Q}{t} \implies Q = It \)
\( P = \frac{VQ}{t} = \frac{V(It)}{t} = VI \)
समय \( t \) में स्रोत द्वारा परिपथ को प्रदान की गई कुल ऊर्जा \( E = P \times t \) होगी.
\( E = (VI) \times t = VIt \)
यह ऊर्जा ऊष्मा के रूप में प्रतिरोधक में क्षयित हो जाती है, इसलिए उत्पन्न ऊष्मा \( H = VIt \).
ओम नियम के अनुसार \( V = IR \).
\( H = (IR)It \)
\( H = I^2Rt \)
इस प्रकार यह सिद्ध होता है कि प्रतिरोधक में उत्पन्न ऊष्मा \( H = I^2Rt \) होती है.
In simple words: जब किसी तार में बिजली बहती है, तो तार गर्म हो जाता है. इस गर्मी की मात्रा (H) को मापने के लिए, हम बिजली की मात्रा (I), तार के प्रतिरोध (R), और जितने समय तक बिजली बही (t), उन्हें गुणा करते हैं. गणित के हिसाब से, गर्मी \( I^2Rt \) के बराबर होती है.

🎯 Exam Tip: यह जूल का तापन नियम (Joule's Law of Heating) है. इसे व्युत्पन्न करते समय ओम का नियम \( V=IR \) और शक्ति का सूत्र \( P=VI \) का सही उपयोग महत्वपूर्ण है. सभी चरणों को स्पष्ट रूप से लिखें.

 

निबन्धात्मक प्रश्न

 

Question 1. ओम का नियम लिखिये। विद्युत परिपथ का चित्र देकर इसे समझाइये।
Answer: **ओम का नियम:** निश्चित ताप पर किसी चालक के सिरों के मध्य उत्पन्न विभवान्तर (V) उसमें प्रवाहित होने वाली विद्युत धारा (I) के अनुक्रमानुपाती होता है.
यानी, \( V \propto I \)
जब हम अनुक्रमानुपाती चिन्ह हटाते हैं, तो एक स्थिरांक (R) आता है:
\( V = RI \)
जहाँ \( R \) एक स्थिरांक है जिसे चालक का प्रतिरोध कहते हैं.

**विद्युत परिपथ द्वारा स्पष्टीकरण:**
ओम के नियम को एक विद्युत परिपथ द्वारा समझा जा सकता है जिसमें एक सेल (बैटरी), एक कुंजी, एक ऐमीटर, एक धारा नियंत्रक और एक चालक तार श्रेणीक्रम में जुड़े होते हैं. चालक तार के समान्तर क्रम में एक वोल्टमीटर जोड़ा जाता है ताकि उसके सिरों के बीच का विभवान्तर मापा जा सके.
जब कुंजी बंद की जाती है, तो परिपथ में धारा प्रवाहित होती है. धारा नियंत्रक का उपयोग करके परिपथ में धारा के मान को बदला जा सकता है. ऐमीटर धारा के मान को मापता है और वोल्टमीटर चालक तार के सिरों पर विभवान्तर मापता है.
विभिन्न मानों की धारा (I) के लिए, संबंधित विभवान्तर (V) के मान नोट किए जाते हैं. जब इन V और I मानों के बीच एक ग्राफ खींचा जाता है, तो यह एक सीधी रेखा प्राप्त होती है जो मूल बिंदु से गुजरती है. यह दर्शाता है कि V, I के सीधा अनुक्रमानुपाती है, और यही ओम का नियम है.
In simple words: ओम का नियम कहता है कि अगर तार का तापमान एक जैसा रहे, तो उसके दोनों सिरों पर बिजली का दबाव (वोल्टेज) उसमें बहने वाली बिजली की मात्रा (धारा) के सीधे अनुपात में होता है. इसे दिखाने के लिए एक सर्किट बनाते हैं जहाँ वोल्टेज और धारा मापते हैं. जब इन मापों का ग्राफ बनाया जाता है, तो वह एक सीधी रेखा बनती है, जो नियम को साबित करती है.

🎯 Exam Tip: ओम के नियम को लिखते समय "निश्चित ताप पर" शब्द का उल्लेख करना अनिवार्य है. परिपथ आरेख को स्पष्ट और नामांकित करें, और V-I ग्राफ को सीधी रेखा के रूप में दिखाएं.

 

Question 2. दिष्ट धारा जनित्र की बनावट एवं कार्यप्रणाली समझाइये। आवश्यक नामांकित चित्र बनाइये। इसके उपयोग भी लिखिए।
Answer: **दिष्ट धारा जनित्र (DC Generator) की बनावट:**
दिष्ट धारा जनित्र की बनावट प्रत्यावर्ती धारा जनित्र (AC Generator) के समान होती है, लेकिन इसमें एक मुख्य अंतर होता है. प्रत्यावर्ती धारा जनित्र में दो सीवलय (slip rings) होते हैं, जबकि दिष्ट धारा जनित्र में उनके स्थान पर दो विभक्त वलय (split rings) या कम्यूटेटर (\( C_1 \), \( C_2 \)) लगे होते हैं. ये विभक्त वलय, आर्मेचर (कुंडली) के साथ ही घूमते हैं. कुंडली का एक सिरा \( C_1 \) से और दूसरा सिरा \( C_2 \) से जुड़ा होता है. बाह्य परिपथ में धारा प्रवाहित करने के लिए कार्बन के ब्रश \( B_1 \) और \( B_2 \) इन विभक्त वलयों के संपर्क में रहते हैं.

**कार्यप्रणाली:**
जब आर्मेचर कुंडली को चुम्बकीय क्षेत्र में घुमाया जाता है, तो फैराडे के विद्युत चुम्बकीय प्रेरण के नियम के अनुसार उसमें विद्युत धारा प्रेरित होती है. पहले आधे घूर्णन में, प्रेरित धारा की दिशा एक ओर होती है और वह ब्रश \( B_1 \) से \( B_2 \) की ओर बाह्य परिपथ में प्रवाहित होती है. शेष आधे घूर्णन में, प्रेरित धारा की दिशा उलट जाती है, लेकिन विभक्त वलयों की स्थिति भी उसी समय बदल जाती है. इस कारण, ब्रश \( B_1 \) और \( B_2 \) के माध्यम से बाह्य परिपथ में हमें धारा हमेशा एक ही दिशा में प्राप्त होती है. इसीलिए इसे दिष्ट धारा जनित्र कहते हैं.

**उपयोग:**
(1) दिष्ट धारा जनित्र का उपयोग दिष्ट विभव या दिष्ट धारा के उत्पादन के लिए किया जाता है.
(2) यह कारों और बसों में बैटरी चार्ज करने, और प्लग स्पार्किंग सिस्टम को चलाने जैसे कामों के लिए उपयोग किया जाता है.
In simple words: दिष्ट धारा जनरेटर एक मशीन है जो घूमकर सीधी बिजली बनाती है. इसकी बनावट AC जनरेटर जैसी होती है, बस इसमें गोल छल्लों की जगह 'स्प्लिट रिंग' लगे होते हैं. जब यह घूमता है, तो बिजली पैदा होती है, और स्प्लिट रिंग की वजह से बिजली हमेशा एक ही दिशा में बाहर आती है. इसका इस्तेमाल बैटरी चार्ज करने और कुछ गाड़ियों में होता है.

🎯 Exam Tip: दिष्ट धारा जनित्र और प्रत्यावर्ती धारा जनित्र के बीच का मुख्य अंतर विभक्त वलय (कम्यूटेटर) और सीवलय (स्लिप रिंग) का उपयोग है. कार्यप्रणाली में फैराडे के प्रेरण नियम को स्पष्ट करें.

 

आंकिक प्रश्न

 

Question 1. दो प्रतिरोध 20 ओम एवं 30 ओम को श्रेणीक्रम में जोड़कर उन्हें 100 वोल्ट के विद्युत स्रोत से जोड़ दिया जाता है। गणना कीजिए (1) परिपथ में प्रवाहित धारा का मान (2) 20 ओम प्रतिरोध के सिरों पर विभवान्तर
Answer: दिया गया है:
प्रतिरोध \( R_1 = 20 \, \Omega \)
प्रतिरोध \( R_2 = 30 \, \Omega \)
विद्युत स्रोत का विभवान्तर \( V = 100 \, \text{वोल्ट} \)

प्रतिरोध श्रेणीक्रम में जुड़े हैं, तो तुल्य प्रतिरोध \( R_{\text{तुल्य}} = R_1 + R_2 \)
\( R_{\text{तुल्य}} = 20 \, \Omega + 30 \, \Omega = 50 \, \Omega \)

(1) **परिपथ में प्रवाहित धारा का मान:**
ओम के नियम के अनुसार \( I = \frac{V}{R_{\text{तुल्य}}} \)
\( I = \frac{100 \, \text{वोल्ट}}{50 \, \Omega} = 2 \, \text{ऐम्पियर} \)

(2) **20 ओम प्रतिरोध के सिरों पर विभवान्तर:**
श्रेणीक्रम में धारा समान रहती है, इसलिए \( R_1 \) में प्रवाहित धारा भी \( 2 \, \text{ऐम्पियर} \) होगी.
\( V_1 = IR_1 \)
\( V_1 = 2 \, \text{ऐम्पियर} \times 20 \, \Omega = 40 \, \text{वोल्ट} \)
In simple words: पहले, दोनों प्रतिरोधों को जोड़कर कुल प्रतिरोध निकालो. फिर, कुल वोल्टेज को कुल प्रतिरोध से भाग देकर कुल बिजली की धारा निकालो. आखिर में, उसी धारा को पहले प्रतिरोध से गुणा करके उस पर वोल्टेज का पता लगाओ.

🎯 Exam Tip: श्रेणीक्रम संयोजन में तुल्य प्रतिरोध सभी प्रतिरोधों का योग होता है और परिपथ में धारा प्रत्येक प्रतिरोध में समान रहती है. विभवान्तर \( V = IR \) का उपयोग करके किसी भी प्रतिरोध के सिरों पर वोल्टेज ज्ञात किया जा सकता है.

 

Question 2. एक परिपथ में 2 ओम और 2 ओम के दो प्रतिरोध श्रेणीक्रम में जुड़े हैं। इस संयोजन के समानांतर 4 ओम का एक और प्रतिरोध जुड़ा है। इस पूरे संयोजन को 8 वोल्ट के स्रोत से जोड़ा गया है।
(i) परिपथ का कुल प्रतिरोध
(ii) परिपथ में प्रवाहित कुल विद्युत धारा का मान।
Answer: दिए गए परिपथ के अनुसार:
श्रेणीक्रम में जुड़े प्रतिरोध: \( R_1 = 2 \, \Omega \) और \( R_2 = 2 \, \Omega \)
समान्तर क्रम में जुड़ा प्रतिरोध: \( R_3 = 4 \, \Omega \)
विद्युत स्रोत का विभवान्तर \( V = 8 \, \text{वोल्ट} \)

(i) **परिपथ का कुल प्रतिरोध:**
सबसे पहले, \( R_1 \) और \( R_2 \) श्रेणीक्रम में हैं, तो उनका तुल्य प्रतिरोध \( R_{\text{series}} \):
\( R_{\text{series}} = R_1 + R_2 = 2 \, \Omega + 2 \, \Omega = 4 \, \Omega \)
अब, \( R_{\text{series}} \) (4 ओम) और \( R_3 \) (4 ओम) समान्तर क्रम में हैं. उनका तुल्य प्रतिरोध \( R_{\text{तुल्य}} \):
\( \frac{1}{R_{\text{तुल्य}}} = \frac{1}{R_{\text{series}}} + \frac{1}{R_3} \)
\( \frac{1}{R_{\text{तुल्य}}} = \frac{1}{4} + \frac{1}{4} = \frac{2}{4} = \frac{1}{2} \)
\( R_{\text{तुल्य}} = 2 \, \Omega \)

(ii) **परिपथ में प्रवाहित कुल विद्युत धारा का मान:**
ओम के नियम के अनुसार \( I = \frac{V}{R_{\text{तुल्य}}} \)
\( I = \frac{8 \, \text{वोल्ट}}{2 \, \Omega} = 4 \, \text{ऐम्पियर} \)
In simple words: पहले उन प्रतिरोधों को जोड़ो जो एक लाइन में हैं. फिर उस जोड़ को, जो प्रतिरोध उसके समान्तर में है, उसके साथ हल करो. इससे तुम्हें पूरे सर्किट का कुल प्रतिरोध मिल जाएगा. आखिर में, कुल वोल्टेज को कुल प्रतिरोध से भाग देकर कुल बिजली निकालो.

🎯 Exam Tip: मिश्रित परिपथों को हल करते समय, पहले श्रेणीक्रम और समान्तर क्रम के भागों को अलग-अलग हल करके सरल करें, फिर पूरे परिपथ का तुल्य प्रतिरोध ज्ञात करें. आरेख को ध्यान से देखें.

 

Question 3. 10 प्रतिरोध वाले चार प्रतिरोध समांतर क्रम में संयोजित हैं। कुल प्रतिरोध कितना होगा?
Answer: R4 = 1
In simple words: स्रोत से मिली जानकारी के अनुसार, इस प्रश्न का उत्तर R4 = 1 दिया गया है.

🎯 Exam Tip: समान्तर क्रम में जुड़े समान प्रतिरोधों के लिए, तुल्य प्रतिरोध \( R_{\text{eq}} = R/n \) होता है. यदि चार 10 ओम के प्रतिरोध होते, तो उत्तर \( 10/4 = 2.5 \, \Omega \) होता.

 

Question 4. एक विद्युत हीटर को 220 वोल्ट के विद्युत स्रोत से जोड़ने पर 5 एम्पीयर धारा प्रवाहित होती है। (i) उसी शक्ति की गणना करें। (2) हीटर को प्रति घंटा चलाने पर होने वाला खर्च बताएँ यदि 1 KWh विद्युत ऊर्जा का मूल्य 1 रु. 50 पैसे हो।
Answer: दिया गया है:
विभवान्तर \( V = 220 \, \text{वोल्ट} \)
धारा \( I = 5 \, \text{ऐम्पियर} \)

(i) **हीटर की शक्ति (P) की गणना:**
शक्ति \( P = V \times I \)
\( P = 220 \, \text{वोल्ट} \times 5 \, \text{ऐम्पियर} = 1100 \, \text{वाट} \)

(ii) **हीटर को एक घंटा चलाने में व्यय हुई ऊर्जा और उसका मूल्य:**
1 घंटे में व्यय हुई ऊर्जा \( E = P \times t \)
\( E = 1100 \, \text{वाट} \times 1 \, \text{घंटा} = 1100 \, \text{Wh} \)
किलोवाट-घंटे में ऊर्जा \( E = \frac{1100}{1000} \, \text{KWh} = 1.1 \, \text{KWh} \)
विद्युत ऊर्जा का मूल्य = 1 Rs. 50 पैसे प्रति KWh
कुल व्यय = \( 1.1 \, \text{KWh} \times 1.50 \, \text{Rs/KWh} = 1.65 \, \text{Rs} \)
In simple words: पहले हीटर की बिजली की ताकत (वाट) निकालो. फिर, एक घंटे में कितनी बिजली खर्च होती है (किलोवाट-घंटे में) वह पता करो. आखिर में, उस खर्च हुई बिजली को प्रति यूनिट दाम से गुणा करके कुल बिल निकाल लो.

🎯 Exam Tip: शक्ति (P) को \( P = VI \) सूत्र से ज्ञात करें. ऊर्जा (E) के लिए \( E = P \times t \) का उपयोग करें और सुनिश्चित करें कि सभी इकाइयाँ (वाट, घंटा, KWh) सही हों. मूल्य गणना में KWh को रुपये से गुणा करें.

 

Question 5. एक ताँबे के तार का व्यास 0.7 mm तथा प्रतिरोधकता \( \rho = 1.6 \times 10^{-8} \, \Omega m \) है। 0.8 ओम प्रतिरोध बनाने के लिए कितने लम्बे तार की आवश्यकता होगी? \( \pi = \frac{22}{7} \)
Answer: दिया गया है:
प्रतिरोध \( R = 0.8 \, \Omega \)
व्यास \( d = 0.7 \, \text{mm} = 0.7 \times 10^{-3} \, \text{m} \)
प्रतिरोधकता \( \rho = 1.6 \times 10^{-8} \, \Omega m \)
ज्ञात करना है: लम्बाई \( l \)

तार का अनुप्रस्थ काट का क्षेत्रफल \( A = \pi \left(\frac{d}{2}\right)^2 \)
\( A = \frac{22}{7} \times \left(\frac{0.7 \times 10^{-3}}{2}\right)^2 \)
\( A = \frac{22}{7} \times \frac{0.49 \times 10^{-6}}{4} = \frac{22 \times 0.07 \times 10^{-6}}{4} \)
\( A = 0.385 \times 10^{-6} \, \text{m}^2 \)

प्रतिरोध का सूत्र है \( R = \rho \frac{l}{A} \)
इसलिए, लम्बाई \( l = \frac{RA}{\rho} \)
\( l = \frac{0.8 \, \Omega \times 0.385 \times 10^{-6} \, \text{m}^2}{1.6 \times 10^{-8} \, \Omega m} \)
\( l = \frac{0.8 \times 0.385}{1.6} \times \frac{10^{-6}}{10^{-8}} \, \text{m} \)
\( l = 0.5 \times 0.385 \times 10^2 \, \text{m} \)
\( l = 0.1925 \times 100 \, \text{m} \)
\( l = 19.25 \, \text{m} \)
अतः, 0.8 ओम प्रतिरोध बनाने के लिए तार की आवश्यक लम्बाई 19.25 मीटर होगी.
In simple words: तार की लंबाई निकालने के लिए, पहले उसके व्यास से उसका क्षेत्रफल निकालो. फिर प्रतिरोध, क्षेत्रफल और प्रतिरोधकता के सूत्र का इस्तेमाल करके तार की लंबाई पता करो.

🎯 Exam Tip: प्रतिरोध, प्रतिरोधकता, लंबाई और क्षेत्रफल के बीच का संबंध \( R = \rho \frac{l}{A} \) सूत्र से याद रखें. गणना करते समय सभी इकाइयों को SI मात्रकों (जैसे mm को m में) में बदलना सुनिश्चित करें.

 

Question 6. एक घर में 60 W के 10 बल्बों का उपयोग महीने के 30 दिन प्रतिदिन 5 घण्टे करने पर कितनी यूनिट बिजली की खपत होगी?
Answer: दिए गए बल्बों की संख्या = 10
एक बल्ब की शक्ति = 60 W
प्रतिदिन उपयोग के घंटे = 5 घंटे
महीने के दिन = 30 दिन

सभी बल्बों द्वारा एक दिन में खपत की गई ऊर्जा:
\( \text{एक दिन की ऊर्जा} = \text{बल्बों की संख्या} \times \text{एक बल्ब की शक्ति} \times \text{घंटे} \)
\( = 10 \times 60 \, \text{W} \times 5 \, \text{h} = 3000 \, \text{Wh} \)

30 दिनों में कुल खपत की गई ऊर्जा:
\( \text{कुल ऊर्जा} = 3000 \, \text{Wh/day} \times 30 \, \text{days} = 90000 \, \text{Wh} \)

इसे किलोवाट-घंटे (KWh) या यूनिट में बदलें:
\( \text{कुल ऊर्जा} = \frac{90000 \, \text{Wh}}{1000} = 90 \, \text{KWh} \)
अतः, कुल 90 यूनिट बिजली की खपत होगी.
In simple words: पहले पता करो कि एक बल्ब एक घंटे में कितनी बिजली खाता है, फिर उसे सभी बल्बों, इस्तेमाल के घंटों और दिनों से गुणा करो. इस कुल खपत को 1000 से भाग देकर यूनिट में बदल दो.

🎯 Exam Tip: ऊर्जा की खपत की गणना करते समय, सुनिश्चित करें कि शक्ति (P) वाट में और समय (t) घंटे में हो. KWh में बदलने के लिए \( P \times t \) को 1000 से भाग देना न भूलें.

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