RBSE Solutions Class 11 Hindi Chapter 9 नंदलाल जोशी

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Class 11 Hindi Chapter 9 नंदलाल जोशी RBSE Solutions PDF

RBSE Class 11 Hindi अपरा Chapter 9 पाठ्यपुस्तक के प्रश्नोत्तर

RBSE Class 11 Hindi अपरा Chapter 9 वस्तुनिष्ठ प्रश्न

 

Question 1. 'शील' का शाब्दिक अर्थ है -
(क) ज्ञान
(ख) गुण
(ग) स्वभाव
(घ) चरित्र
Answer: (घ) चरित्र
In simple words: 'शील' शब्द का अर्थ है किसी व्यक्ति का स्वभाव या चरित्र। यह बताता है कि कोई व्यक्ति कैसा है।

🎯 Exam Tip: शब्दों के शाब्दिक अर्थ को समझने के लिए हमेशा उनके मूल भाव पर ध्यान दें।

 

Question 2. मर्यादित का विलोम शब्द है -
(क) संयमित
Answer: (विकल्प अनुपलब्ध/अपूर्ण) दिए गए विकल्पों में से कोई स्पष्ट उत्तर नहीं है, क्योंकि केवल एक विकल्प दिया गया है।
In simple words: 'मर्यादित' का उल्टा शब्द ऐसा होगा जो सीमा में न हो, जैसे 'अमर्यादित' या 'असीमित'।

🎯 Exam Tip: विलोम शब्द लिखते समय हमेशा शब्द के अर्थ को समझें और उसका विपरीत अर्थ वाला शब्द चुनें।

RBSE Class 11 Hindi अपरा Chapter 9 अति लघूत्तरात्मक प्रश्न

 

Question 1. किस प्रकार का देश यश प्राप्त नहीं कर सकता ?
Answer: परावलम्बी देश यश प्राप्त नहीं कर सकता।
In simple words: जो देश दूसरों पर निर्भर रहता है, वह सम्मान या प्रसिद्धि नहीं पा सकता।

🎯 Exam Tip: सीधे प्रश्न का उत्तर संक्षिप्त और सटीक शब्दों में दें, जिसमें मुख्य बात शामिल हो।

 

Question 2. हमारा उपभोग किस प्रकार का था?
Answer: हमारा उपभोग मर्यादित था।
In simple words: पहले हम चीजें बहुत हिसाब से और जरूरत के हिसाब से इस्तेमाल करते थे।

🎯 Exam Tip: उत्तर में मुख्य विशेषण (जैसे मर्यादित) का उल्लेख करना महत्वपूर्ण है।

 

Question 3. कवि ने किस प्रकार के लोगों को अपना मानने को कहा है ?
Answer: कवि ने भारत से प्रेम करने वाले लोगों को अपना मानने को कहा है।
In simple words: कवि कहता है कि जो लोग अपने देश भारत से प्यार करते हैं, वे ही हमारे अपने हैं।

🎯 Exam Tip: प्रश्न में पूछे गए 'किस प्रकार के लोगों' का स्पष्ट वर्णन करना चाहिए।

 

Question 4. 'विष पीकर भी नहीं मरा' पंक्ति में किस पौराणिक घटना की ओर संकेत किया गया है ?
Answer: "विष पीकर भी नहीं मरा" पंक्ति में समुद्र मंथन की पौराणिक घटना की ओर संकेत है। मंथन में निकले विष को शिवजी पी गए थे।
In simple words: यह पंक्ति समुद्र मंथन की कहानी की याद दिलाती है, जब भगवान शिव ने दुनिया को बचाने के लिए ज़हर पी लिया था।

🎯 Exam Tip: पौराणिक संदर्भों को स्पष्ट करते समय घटना का नाम और उसमें शामिल मुख्य पात्र का उल्लेख करें।

 

Question 5. गहनतम अनुसंधान के लिए क्या आवश्यक है?
Answer: गहनतम अनुसंधान के लिए ध्यान का एकाग्र होना आवश्यक है।
In simple words: किसी चीज़ की बहुत गहराई से खोज करने के लिए पूरा ध्यान लगाना बहुत जरूरी है।

🎯 Exam Tip: अनुसंधान के लिए एकाग्रता जैसे प्रमुख कारक को उत्तर में शामिल करना महत्वपूर्ण है।

RBSE Class 11 Hindi अपरा Chapter 9 लघूत्तरात्मक प्रश्न

 

Question 1. प्राचीन भारत का निर्माण किस प्रकार के पुरुषार्थ से संभव हुआ ?
Answer: इस सृष्टि का संचालन जिस नियम से होता है, उसकी रचना करने वाला ईश्वर ही है। समस्त संसार उसी ईश्वर के बनाए हुए विधान से संचालित हो रहा है।
In simple words: यह दुनिया भगवान के बनाए नियमों से चलती है। भगवान ही इसके रचयिता हैं और सब कुछ उनके ही नियमों से होता है।

🎯 Exam Tip: दार्शनिक या आध्यात्मिक प्रश्नों के उत्तर में मुख्य अवधारणा (जैसे ईश्वर का विधान) को स्पष्ट करना चाहिए।

 

Question 3. “अपने-अपने मार्ग विशेष”- में भारत की कौनसी परंपरा का बोध होता है?
Answer: 'अपने-अपने मार्ग विशेष' में भारत की विविधता की ओर संकेत है। भारत में अनेक धर्म, मत-मतान्तर आदि प्रचलित रहे हैं तथा ईश्वर को पाने के उसके मार्ग तथा पद्धतियाँ भी अलग-अलग रही हैं।
In simple words: यह वाक्य दिखाता है कि भारत में लोग अलग-अलग धर्मों और तरीकों से भगवान को मानते हैं। यहाँ सभी की अपनी-अपनी राहें हैं।

🎯 Exam Tip: जब परंपराओं की बात हो, तो विविधता और विभिन्न धार्मिक/आध्यात्मिक मार्गों का उल्लेख करें।

 

Question 4. 'कालातीत दर्शन' से क्या आशय है? उदाहरण देकर स्पष्ट कीजिए।
Answer: भारतीय दर्शन अर्थात् आध्यात्मिक विचारधारा शाश्वत और चिरंतन है। हमारे पूर्वजों ने सत्य का साक्षात्कार बहुत पहले ही कर लिया था। उनके द्वारा सत्य का देखा गया स्वरूप समय के परिवर्तन चक्र से अप्रभावित है। यह ज्ञान हमेशा एक जैसा रहता है।
In simple words: 'कालातीत दर्शन' का मतलब है वह ज्ञान जो कभी पुराना नहीं होता और समय बदलने पर भी नहीं बदलता। यह हमेशा सच रहता है, जैसे हमारे पूर्वजों का सत्य का ज्ञान।

🎯 Exam Tip: 'कालातीत' शब्द का अर्थ बताते समय उसकी शाश्वतता और समय से अप्रभावित होने की विशेषता को उजागर करें।

 

Question 5. 'नेत्र तीसरा फिर से खोल' पंक्ति के माध्यम से कवि क्या कहना चाहता है?
Answer: शिवजी के द्वारा अपना तीसरा नेत्र खोलते ही सामने स्थित कामदेव भस्म हो गया था। कवि कहना चाहता है कि भारत को भी अपने शत्रु का विनाश करने के लिए कठोर प्रतिज्ञा तथा प्रयास करना चाहिए।
In simple words: कवि चाहता है कि भारत भगवान शिव की तरह अपने दुश्मनों को खत्म करने के लिए बहुत ताकतवर और दृढ़ संकल्प वाला बने।

🎯 Exam Tip: किसी पौराणिक संदर्भ का उपयोग करते समय, उस संदर्भ से लिए गए संदेश को वर्तमान स्थिति से जोड़कर बताएं।

RBSE Class 11 Hindi अपरा Chapter 9 निबन्धात्मक प्रश्न

 

Question 1. 'अपनी नवरचनाएँ होंगी अपनी ही पहचान से'-के माध्यम से भारत की समृद्धि के रहस्य पर प्रकाश डालिए।
Answer: कवि ने भारत के अतीत सम्बन्धी ज्ञान और सुख-समृद्धि का कारण उसकी आत्मनिर्भरता को माना है। भारत विश्व को देता था, उससे लेता नहीं था। विश्व भर को सभ्यता और संस्कृति का निर्यात भारत ने ही किया था। जब अन्य देशों के लोग असभ्य और जंगली थे तब भारत में ज्ञानोदय हो चुका था। ज्ञान की ज्योति भारत में उदित हुई थी और यहाँ से ही उसकी किरणें समस्त विश्व में फैली थीं। उस समय हमारे पोत विश्व के अनेक नगरों के तटों पर जा रहे थे। यहाँ के व्यापारी दूर-दूर तक आते-जाते थे। उनके उद्योगों का माल विश्वभर में बेचा जाता था। इससे हमारा भारत परम समृद्धिशाली था। भारत की अपनी बनाई चीज़ें ही उसकी पहचान बनती थीं।
In simple words: कवि कहता है कि भारत पहले बहुत अमीर था क्योंकि वह आत्मनिर्भर था। वह दुनिया को ज्ञान और सामान देता था, दूसरों से लेता नहीं था। भारत की अपनी बनाई चीज़ें ही उसकी शान थीं।

🎯 Exam Tip: निबन्धात्मक प्रश्नों में, दिए गए वाक्य को मुख्य विषय बनाकर उसके सभी संबंधित पहलुओं (जैसे आत्मनिर्भरता, ज्ञान का निर्यात, व्यापार) को विस्तार से समझाएँ।

 

Question 2. 'मायावी संसार चक्र में कदम बढ़ाओ ध्यान से' पंक्ति के माध्यम से कवि का आशय स्पष्ट कीजिए।
Answer: माया भ्रम पैदा करती है। माया के प्रभाव के कारण ही मनुष्य अपने वास्तविक स्वरूप को भुलाकर संसार के मायावी रूप से आकर्षित होता है। इस आध्यात्मिक भाव के अनुसार ही सन्त कबीर ने माया को ठगने वाली कहा है-'माया महाठगनि हम जाने।' इस आध्यात्मिक भाव से हटकर भी देखा जाय तो भ्रम मनुष्य को सच के समझने में बाधक ही होता है। कवि जोशी जी ने संसार में फैले हुए इसी भ्रम से बचकर रहने को कहा है। भ्रम में पड़कर हम अपने देश का उत्थान सही तरीके से नहीं कर पायेंगे। भारतीय भ्रम में पड़े हैं कि वे देश का उत्थान दूसरों के सहारे कर सकेंगे। तभी तो हमारे नेता देश-देश का दौरा करते हैं और विदेशी पूँजी और तकनीक की याचना करते फिरते हैं। स्वदेश की प्रगति और उत्थान के लिए इससे मुक्त होना बहुत जरूरी है। भारत अपने पैरों पर खड़ा तभी होगा जब हम आत्मगौरव के भाव से भर उठेंगे। अपने गौरवशाली स्वरूप का भान होने पर ही देश आत्मनिर्भर होगा। इसके लिए हमको भारतीयों में आपसी प्रेम तथा विश्वास को जगाना होगा। हमको इस भ्रम से बचना होगा कि भारत की उन्नति दूसरों का सहारा लेकर हो सकती है। जो दूसरों का सहारा लेता है, उसकी प्रशंसा कोई नहीं करता। आत्मनिर्भरता ही प्रशंसनीय गुण है। भारतीय आत्मनिर्भर होकर ही देश को आगे बढ़ा सकते हैं तथा समृद्धिशाली बना सकते हैं, दूसरों की अच्छाइयों को गिनने से, उनकी उपलब्धियों का गुणगान करने से भारत उन्नत नहीं होगा। अतः संसार में फैले पराश्रय के भय से बचना जरूरी है।
In simple words: कवि कहता है कि यह संसार एक धोखे जैसा है, जहाँ लोग सच को भूलकर भ्रम में पड़ जाते हैं। हमें इस भ्रम से बचना चाहिए और दूसरों पर निर्भर न रहकर आत्मनिर्भर बनना चाहिए। तभी देश आगे बढ़ेगा और सम्मान पाएगा।

🎯 Exam Tip: इस प्रकार के दार्शनिक प्रश्न में कवि के मूल संदेश को स्पष्ट करें, जिसमें माया का अर्थ, आत्मनिर्भरता का महत्व और दूसरों पर निर्भर न रहने की सलाह शामिल हो।

 

Question 3. अधिकार और कर्तव्यों के समन्वय पर अपने विचार व्यक्त कीजिए।
Answer: अधिकार खोकर बैठ रहना भी महादुष्कर्म है। न्यायार्थ अपने बन्धु को भी दण्ड देना धर्म है। राष्ट्रकवि मैथिलीशरण गुप्त की ये प्रसिद्ध पंक्तियाँ अधिकार पाने की प्रेरणा देने वाली हैं। अधिकार पाने की इच्छा प्रत्येक मनुष्य में स्वाभाविक ही होती है। भारत के संविधान के अनुसार भारतीय नागरिकों को अनेक अधिकार प्राप्त हैं। इनको मौलिक अधिकार कहते हैं। देश के किसी भी भूभाग में रहने-बसने का अधिकार, अभिव्यक्ति का अधिकार, अपनी इच्छानुसार किसी धर्म को मानने का अधिकार समानता का अधिकार, सम्पत्ति के अर्जन करने और रखने का अधिकार इत्यादि। नागरिकों को राज्य की ओर से इसी प्रकार के अन्य अनेक अधिकार प्राप्त होते हैं। अधिकार प्रायः जनतंत्रात्मक शासन में ही नागरिकों को प्राप्त होते हैं। इन अधिकारों का उपयोग करने के साथ ही नागरिकों के कुछ कर्तव्य भी होते हैं। डॉ. वासुदेव शरण अग्रवाल का कहना है कि राज्य की उपलब्धियों में हिस्सा पाने का प्रत्येक मनुष्य को अधिकार है। कर्तव्य के प्रति प्रायः उपेक्षा का भाव देखा जाता है। लोग अधिकार तो प्राप्त करना चाहते हैं किन्तु राष्ट्र और समाज के प्रति कर्तव्य पालन पर ध्यान नहीं देते। कर्त्तव्य और अधिकारों का अन्योन्याश्रित सम्बन्ध होता है उनमें समन्वय का होना आवश्यक होता है। डॉ. सम्पूर्णानन्द ने मनुष्य के कर्तव्यों का उल्लेख करते हुए कहा है कि कर्त्तव्य अनेक होते हैं तथा समाज के अनेक लोगों के प्रति होते हैं। कर्तव्यों की डोर पूर्वजों से लेकर सन्तति तक फैली हुई है। एक ओर हमारे कर्त्तव्य अपनी पूर्व पीढ़ी अर्थात् पूर्वजों के प्रति भी होते हैं।
In simple words: अधिकार और कर्तव्य एक साथ चलते हैं। हमें अपने अधिकारों के लिए लड़ना चाहिए, पर अपने कर्तव्यों को भी पूरा करना चाहिए। सिर्फ अधिकार माँगने से नहीं, कर्तव्य निभाने से ही समाज और देश आगे बढ़ता है।

🎯 Exam Tip: अधिकारों और कर्तव्यों के संबंध पर लिखते समय दोनों के महत्व को समझाएँ और बताएं कि वे कैसे एक-दूसरे से जुड़े हुए हैं। संविधान और महापुरुषों के विचार भी शामिल करें।

RBSE Class 11 Hindi अपरा अपरा Chapter 9 अन्य महत्वपूर्ण प्रश्नोत्तर

RBSE Class 11 Hindi अपरा Chapter 9 वस्तुनिष्ठ प्रश्न

 

Question 1. भारत अपने पैरों पर खड़ा होगा -
(क) अपने अतीत गौरव का भान होने से
(ख) अतीत में हुई भूलों पर विचार करने से
(ग) वर्तमान समस्याओं पर चिन्तन करने से
(घ) पड़ौसी राष्ट्रों की सहायता-सहयोग से
Answer: (क) अपने अतीत गौरव का भान होने से
In simple words: भारत तभी मजबूत होगा जब वह अपने पुराने सम्मान और गौरव को याद करेगा और समझेगा।

🎯 Exam Tip: विकल्पों को ध्यान से पढ़ें और कवि के मूल संदेश के सबसे करीब वाले विकल्प का चयन करें।

 

Question 2. भारत को सावधान रहना है -
(क) छिपे हुए शत्रुओं से
(ख) पड़ौसी राष्ट्रों से
(ग) देश विधातक षडयंत्रों से
Answer: (विकल्प अनुपलब्ध/अपूर्ण) दिए गए विकल्पों में से कोई स्पष्ट उत्तर नहीं है, क्योंकि केवल तीन विकल्प दिए गए हैं।
In simple words: भारत को ऐसे दुश्मनों से सावधान रहना चाहिए जो देश को नुकसान पहुँचाने की साजिशें रचते हैं।

🎯 Exam Tip: बहुविकल्पीय प्रश्नों में, सभी विकल्पों को देखकर सबसे सटीक उत्तर चुनें, भले ही विकल्प कम दिए गए हों।

 

Question 3. वही अपना है, जो -
(क) समस्त विश्व से प्रेम करे
(ख) जो भारत से प्रेम करे
(ग) परिवार से प्रेम करे
(घ) हमको अपना माने.
Answer: (ख) जो भारत से प्रेम करे
In simple words: अपना वही है जो अपने देश भारत से सच्चा प्यार करता है।

🎯 Exam Tip: कविता या पाठ के संदर्भ में 'अपना' शब्द का अर्थ समझते हुए सही विकल्प चुनें।

 

Question 4. अखिल विश्व को जीवन देने वाला है -
(क) चन्द्रमा
(ख) सूर्य
(ग) आकाश
(घ) धरती
Answer: (घ) धरती
In simple words: धरती ही वह है जो पूरी दुनिया को जीवन देती है, क्योंकि सब कुछ इसी पर निर्भर करता है।

🎯 Exam Tip: इस तरह के प्रश्नों में, सबसे व्यापक और सही विकल्प चुनें जो सभी जीवन का आधार हो।

 

Question 5. परमेश्वर के रूप अनेकों माने जाते है -
(क) एकेश्वरवाद में
(ख) बहुदेववाद में
(ग) सर्वदेववाद में
(घ) वेदों में
Answer: (ख) बहुदेववाद में
In simple words: बहुदेववाद में भगवान के कई रूप माने जाते हैं, और हर रूप की पूजा अलग-अलग तरीके से की जाती है।

🎯 Exam Tip: धार्मिक विचारधाराओं से संबंधित शब्दों को सही ढंग से पहचानें और उनका अर्थ समझें।

RBSE Class 11 Hindi अपरा Chapter 9 अतिलघूत्तरात्मक प्रश्न

 

Question 1. सुख और सम्मान से जीने का उपाय क्या है?
Answer: आपस में प्रेम और विश्वास होना सुख और सम्मान से जीने के लिए आवश्यक है।
In simple words: अगर हम खुशी और इज्जत से जीना चाहते हैं, तो हमें एक-दूसरे से प्यार करना और भरोसा करना चाहिए।

🎯 Exam Tip: सुख और सम्मान के लिए आपसी संबंधों में प्रेम और विश्वास के महत्व को रेखांकित करें।

 

Question 3. संसार में ध्यानपूर्वक चलना क्यों जरूरी है ?
Answer: संसार में अनेक मायावी चक्रे फैले हुए हैं, उससे बचने के लिए ध्यानपूर्वक चलना जरूरी है।
In simple words: इस दुनिया में बहुत सारे धोखे और भ्रम हैं, इसलिए इनसे बचने के लिए हमें बहुत सावधानी से काम लेना चाहिए।

🎯 Exam Tip: दुनिया के छल-कपट से बचने के लिए सतर्कता और सावधानी के महत्व पर जोर दें।

 

Question 4. 'अपने साधन नहीं बढ़ेंगे औरों के गुणगान से'-को आशय क्या है ?
Answer: दूसरों की स्तुति, प्रशंसा अर्थात् चापलूसी करने से आपके साधनों का विकास नहीं होता। उन्नति के लिए अपने ऊपर निर्भरता और विश्वास करना ही श्रेष्ठ उपाय है।
In simple words: दूसरों की सिर्फ तारीफ करने से हमारी अपनी तरक्की नहीं होती। आगे बढ़ने के लिए हमें खुद पर भरोसा करना और अपने दम पर काम करना चाहिए।

🎯 Exam Tip: आत्मनिर्भरता के महत्व को समझाते हुए बताएं कि चापलूसी से व्यक्तिगत या राष्ट्रीय विकास संभव नहीं है।

 

Question 5. भारतीय ज्ञान की विशेषता क्या है ?
Answer: भारत ने समस्त विश्व को ज्ञान देकर उसका मार्गदर्शन किया है।
In simple words: भारतीय ज्ञान की खासियत यह है कि इसने पूरी दुनिया को रास्ता दिखाया और ज्ञान दिया है।

🎯 Exam Tip: भारतीय ज्ञान की विशेषता बताते समय 'विश्व गुरु' के रूप में उसकी भूमिका का उल्लेख करें।

 

Question 6. कवि देशवासियों से अधिकारों-कर्तव्यों के बारे में क्या कहता है?
Answer: कवि देशवासियों से कहता है कि उनको अधिकारों की ही बात नहीं करनी चाहिए व देश-समाज के प्रति अपने कर्तव्यों के पालन पर भी ध्यान देना चाहिये।
In simple words: कवि कहता है कि लोगों को सिर्फ अपने अधिकार नहीं माँगने चाहिए, बल्कि देश और समाज के लिए अपने कर्तव्यों को भी पूरा करना चाहिए।

🎯 Exam Tip: अधिकार और कर्तव्य के संतुलन पर जोर दें, बताते हुए कि दोनों ही राष्ट्र निर्माण के लिए महत्वपूर्ण हैं।

 

Question 7. कवि की दृष्टि में अपना कौन है?
Answer: कवि की दृष्टि में भारत भूमि से प्रेम करने वाले ही अपने हैं।
In simple words: कवि के अनुसार, जो लोग भारत देश से प्यार करते हैं, वही सच्चे अपने हैं।

🎯 Exam Tip: इस तरह के प्रश्न में, 'अपनापन' की भावना को देश प्रेम से जोड़कर उत्तर दें।

 

Question 8. 'कोई ऊपर नहीं रहेगा भारत के संविधान से'-पंक्ति में क्या संदेश दिया गया है?
Answer: इस पंक्ति द्वारा संदेश दिया गया है कि भारत संविधान से शासित है। किसी को भी मनमानी करने का अधिकार नहीं है।
In simple words: इस वाक्य का मतलब है कि भारत में कोई भी कानून से ऊपर नहीं है और सभी को संविधान के नियमों का पालन करना होगा।

🎯 Exam Tip: संविधान की सर्वोच्चता और कानून के शासन के महत्व को स्पष्ट करें।

 

Question 9. 'सारा जग परिवार हमारा' में किस भारतीय विचारधारा की अभिव्यक्ति हुई है?
Answer: भारत में ईश्वर की अनेक रूपों में पूजा होती है। इसके लिए अनेक पंथ हैं जो अपनी-अपनी विधि से पूजा करते हैं।
In simple words: यह वाक्य दर्शाता है कि भारतीय संस्कृति सभी को एक परिवार मानती है, चाहे वे किसी भी धर्म या पूजा पद्धति के हों।

🎯 Exam Tip: 'वसुधैव कुटुम्बकम्' की भारतीय विचारधारा को उत्तर में दर्शाना चाहिए।

 

Question 11. 'विष पीकर भी नहीं मरा’-विष पीकर कौन नहीं मरा था ?
Answer: समुद्र मंथन में निकले विष को शिवजी ने पी लिया था परन्तु उनकी मृत्यु नहीं हुई थी।
In simple words: समुद्र मंथन से निकला हलाहल विष पीने के बाद भी भगवान शिव जीवित रहे।

🎯 Exam Tip: पौराणिक कहानियों के पात्रों को उनके कार्यों से जोड़कर उत्तर दें।

 

Question 12. भारतीय वीरों के प्रमुख गुण कौन-से बताये गये हैं?
Answer: शौर्य, पराक्रम, अतुल तेज, वीरता तथा युद्ध भूमि में डटे रहना भारतीय वीरों के प्रमुख गुण हैं।
In simple words: भारतीय वीरों के खास गुण हैं उनकी बहादुरी, ताकत, तेज और लड़ाई के मैदान में डटकर खड़े रहना।

🎯 Exam Tip: प्रमुख गुणों को सूचीबद्ध करते हुए उन्हें संक्षेप में वर्णित करें।

 

Question 13. कवि स्वतंत्र भारत से क्या आशा करता है ?
Answer: कवि आशा करता है नवीन तेज और चेतना लेकर फिर से खड़ा हुआ भारत दुष्टों का दृढ़तापूर्वक दमन करे।
In simple words: कवि चाहता है कि आजाद भारत नई शक्ति और जागरूकता के साथ खड़ा हो और बुरे लोगों को मजबूती से हराए।

🎯 Exam Tip: कवि की आशाओं को भविष्य की सकारात्मक दृष्टि और समस्याओं के समाधान से जोड़कर बताएं।

RBSE Class 11 Hindi अपरा Chapter 9 लघूत्तरात्मक प्रश्न

 

Question 1. पृथ्वी से आदिकाल से समस्त संसार को क्या प्राप्त होता रहा है।
Answer: पृथ्वी जीवनदायिनी है। आदिकाल से ही पूरा विश्व इस पृथ्वी से जीवन प्राप्त करता रहा है। धरती पर सृष्टि के आरम्भ से ही अनेक जीव-जन्तु रहे हैं।
In simple words: पृथ्वी ने हमेशा से पूरी दुनिया को जीवन दिया है। जब से दुनिया बनी है, बहुत सारे जीव-जंतु इसी धरती पर रहते आए हैं।

🎯 Exam Tip: पृथ्वी को जीवनदायिनी बताते हुए उसके महत्व और प्राचीन काल से जीवों के लिए उसके योगदान का वर्णन करें।

 

Question 2. भारतीय धरती तथा उसके निवासियों के साथ किस प्रकार का व्यवहार करते हैं?
Answer: भारतीय धरती को अपनी माता मानते हैं। धरती पर रहने वाले सभी स्त्री-पुरुष उनके बहिन-भाई हैं। यह सम्पूर्ण पृथ्वी एक ही परिवार है और सभी पृथ्वीवासी. उसी परिवार के अंग हैं।
In simple words: भारतीय लोग धरती को अपनी माँ मानते हैं और इस पर रहने वाले सभी इंसानों को अपना भाई-बहन समझते हैं, क्योंकि वे मानते हैं कि पूरी दुनिया एक परिवार है।

🎯 Exam Tip: भारतीय संस्कृति के 'वसुधैव कुटुम्बकम्' जैसे मूल विचारों को उत्तर में प्रमुखता से दर्शाएँ।

 

Question 3. 'परमेश्वर के रूप अनेकों' कहने का क्या तात्पर्य है ?
Answer: कवि ने कहा है कि भारत में अनेक पंथ तथा आध्यात्मिक विचारधारायें प्रचलित हैं। सब अपने-अपने मत का पालन करते हैं। उनमें किसी प्रकार का द्वेष-भाव नहीं है। अपने पंथ के साथ-साथ दूसरे पंथों के प्रति भी इनके मन में सम्मान का भाव रहता है।
In simple words: इसका मतलब है कि भारत में लोग भगवान को कई रूपों में पूजते हैं और अलग-अलग धर्मों को मानते हैं। लेकिन सभी के मन में एक-दूसरे के प्रति सम्मान होता है।

🎯 Exam Tip: 'परमेश्वर के रूप अनेकों' वाक्यांश के पीछे भारत की धार्मिक विविधता और सहिष्णुता के विचार को स्पष्ट करें।

 

Question 5. कवि के अनुसार भारतीय किन सद्गुणों से ओतप्रोत हैं?
Answer: कवि के अनुसार भारतीय शील, सत्य, संयम, मर्यादा, विशुद्ध आचरण, करुणा, प्रेम, सेवा आदि सद्गुणों से ओतप्रोत हैं। तपस्या उनके जीवन को सार है तथा वे अमर आत्मा को मानने वाले हैं।
In simple words: कवि के अनुसार, भारतीयों में अच्छे गुण जैसे विनम्रता, सच्चाई, आत्म-नियंत्रण, दया, प्रेम और सेवा की भावना भरी हुई है। वे आत्मा को अमर मानते हैं।

🎯 Exam Tip: सद्गुणों को सूचीबद्ध करते समय उन्हें सरल भाषा में समझाएँ और भारतीयों की आध्यात्मिक मान्यताओं को भी शामिल करें।

 

Question 6. भारतीयों ने किन-किन ज्ञान-विधाओं की खोज की है?
Answer: भारतीयों ने स्वयं को ज्ञान की खोज के प्रति समर्पित कर रखा है। प्राचीनकाल में ही उन्होंने, ज्ञान की अनेक शाखाओं में महत्वपूर्ण खोज की थी। कला, शिक्षा, संगीत, रसायन, गणित, अणु, आयुर्वेद आदि क्षेत्रों में भारतीयों ने महत्वपूर्ण अनुसंधान किए हैं। गणित में शून्य अंक भारतीयों की ही खोज है।
In simple words: भारतीयों ने पुराने समय से ही ज्ञान की कई शाखाओं में बड़ी खोजें की हैं। इसमें कला, विज्ञान, गणित (शून्य सहित), और आयुर्वेद जैसे क्षेत्र शामिल हैं।

🎯 Exam Tip: भारतीयों द्वारा की गई विभिन्न ज्ञान-विधाओं और खोजों को स्पष्ट रूप से सूचीबद्ध करें।

 

Question 7. युद्ध भूमि में भारतीय अपना पराक्रम किस प्रकार प्रदर्शित करते थे?
Answer: भारतीय वीर तथा पराक्रमी हैं। युद्ध भूमि में शत्रु उनकी क्रोधाग्नि में जलकर नष्ट हो जाता था। वे युद्ध भूमि से कभी पलायन नहीं करते थे। सिर कटने पर भी वे युद्ध भूमि में डटे रहते थे।
In simple words: भारतीय वीर युद्ध में बहुत ताकत और बहादुरी दिखाते थे। वे कभी पीछे नहीं हटते थे और अपने दुश्मनों को खत्म कर देते थे।

🎯 Exam Tip: भारतीय वीरों के शौर्य और पराक्रम का वर्णन करते हुए उनकी दृढ़ता और निडरता पर विशेष ध्यान दें।

 

Question 8. 'फिर से भारत राष्ट्र खड़ा' कहने से कवि का क्या आशय है?
Answer: कवि का आशय यह है कि हजारों सालों की पराधीनता के पश्चात् आज भारत स्वतंत्र है और वह एक गणराज्य है। आज वह विकास के पथ पर चल रहा है। उसमें नवीन चेतना और तेज है। वह दुष्टों के दमन के लिए कृत संकल्प है। उसकी शक्ति विराट है। तथा उसके नागरिक कर्तव्य परायण हैं।
In simple words: कवि का मतलब है कि भारत अब आज़ाद हो गया है और नई ऊर्जा के साथ तरक्की कर रहा है। वह बुरे लोगों को हराने के लिए तैयार है और उसके नागरिक भी अपने कर्तव्यों को समझते हैं।

🎯 Exam Tip: 'फिर से भारत राष्ट्र खड़ा' का अर्थ बताते हुए स्वतंत्रता के बाद के भारत की नई ऊर्जा, संकल्प और नागरिकों के कर्तव्यपरायणता को उजागर करें।

 

Question 9. कवि भारत के विकास के लिए किस पथ को अपनाने की सलाह दे रहा है?
Answer: भारत ने प्राचीनकाल से ही विश्व को ज्ञान का दान दिया था। कलाएँ भारत से ही विश्व में फैली थीं। जीवन निर्माण में उन्होंने बहुत श्रम किया है। अपने इस समर्थ स्वरूप को याद करके परिश्रम करने से ही भारत का विकास होगा। देश के विकास के लिए भारतीयों को अपने मतभेद भुलाकर एकता स्थापित करनी होगी। विद्वानों को भटकाव से बचना होगा। स्वार्थ और क्षुद्र भावना का त्याग करना होगा। 'स्वत्व' भाव विकसित करना होगा। देशोत्थान अधिकारों की माँग करने से नहीं होगा। अधिकारों की बातें करना छोड़कर देश के प्रति कर्तव्यों का तथा अपने-अपने कर्तव्यों का पालन करने से ही देश उन्नत होगा। संविधान के शासन को सबको मानना होगा। किसी की मनमानी नहीं चलेगी। देशद्रोहियों को सख्ती से कुचलना होगा तथा देशप्रेमियों को अपना मानना होगा। इस प्रकार सजग रहकर काम करने से ही देश का उत्थान होगा।
In simple words: कवि कहता है कि भारत को अपने पुराने गौरव को याद कर के कड़ी मेहनत करनी चाहिए। सभी भारतीयों को अपने मतभेद भूलकर एकता से काम करना चाहिए। अधिकारों की बजाय कर्तव्यों पर ध्यान देना चाहिए और संविधान का पालन करना चाहिए।

🎯 Exam Tip: कवि द्वारा सुझाए गए विकास के पथ में आत्मनिर्भरता, एकता, कर्तव्यनिष्ठा और संविधान का पालन जैसे मुख्य बिंदुओं को शामिल करें।

 

Question 11. नवभारत के विकास और उत्थान में ईश्वर तथा मानव का क्या योगदान संभव है?
Answer: भारत स्वाधीन हो चुका है। हमको उसका नवनिर्माण करना है। यह सृष्टि ईश्वर के बनाए हुए नियमों से चलती है। इस बात का ध्यान रखते हुए भारत के नवनिर्माण में नागरिकों के श्रम का योजनाबद्ध ढंग से प्रयोग किया जाना आवश्यक है। इसमें भारतीय पूँजी, श्रम तथा प्रबन्धन की योजना बनाकर तथा प्रकृति के अनुकूले चलकर ही भारत का विकास किया जा सकता है। इसके लिए अपनी क्षमताओं की पहचान जरूरी है।
In simple words: नए भारत की तरक्की के लिए भगवान के बनाए नियमों का पालन करते हुए लोगों को अपनी मेहनत, पैसा और अच्छे प्रबंधन का सही तरीके से इस्तेमाल करना होगा। अपनी ताकत को पहचानना भी बहुत जरूरी है।

🎯 Exam Tip: नवभारत के विकास में ईश्वर के नियमों का पालन और मानवीय प्रयासों (श्रम, पूँजी, प्रबंधन) के समन्वय पर जोर दें।

 

Question 12. भारत के उत्थान तथा विकास में क्या बाधा है?
Answer: भारत विकास पथ का पाथेय है। इसको सही मार्ग का दर्शन करने वाले बुद्धिमान लोग भटक गए हैं। उनको अपने ऊपर भरोसा नहीं है। वे दूसरों को ओर ताक रहे हैं। भारतीयों में आपस में टूट-फूट है। क्षुद्रता और स्वार्थ उनको पथभ्रष्ट कर रहे हैं। उनके अच्छे गुण उनसे छूट रहे हैं।
In simple words: भारत की तरक्की में रुकावटें ये हैं कि समझदार लोग रास्ता भटक गए हैं, वे खुद पर भरोसा नहीं करते और दूसरों पर निर्भर रहते हैं। भारतीयों में आपसी फूट और स्वार्थ भी देश को आगे बढ़ने से रोक रहे हैं।

🎯 Exam Tip: विकास की बाधाओं का वर्णन करते समय आंतरिक समस्याओं जैसे आपसी फूट, स्वार्थ और आत्म-विश्वास की कमी को स्पष्ट करें।

 

Question 13. नवभारत के निर्माण के लिए नागरिकों की अधिकार लिप्सा के सम्बन्ध में कवि का क्या कहना है?
Answer: कवि का कहना है कि यह नवीन भारत के निर्माण का काल है। सभी नागरिकों को इस पवित्र कार्य में हाथ बंटाने का अपना-अपना कर्तव्य पूरा करना है। यह अधिकारों के प्रति लिप्सा भाव उनको त्यागना होगा। यह अधिकारों की माँग करने का नहीं कर्तव्यों के पालन करने का समय है।
In simple words: कवि कहता है कि नए भारत के निर्माण के लिए सभी नागरिकों को अपने कर्तव्यों को पूरा करना चाहिए। यह सिर्फ अधिकार माँगने का नहीं, बल्कि कर्तव्य निभाने का समय है।

🎯 Exam Tip: नागरिकों के कर्तव्यपरायण होने के महत्व पर बल दें और बताएं कि अधिकार-लिप्सा को त्यागना क्यों आवश्यक है।

 

Question 14. कवि ने देशवासियों को किसके प्रति सतर्क रहने को कहा है?
Answer: कवि ने भारतीयों से कहा है कि स्वदेश के उत्थान और विकास का पालन और महान् कर्तव्य उनको पूरा करना है। देश को तोड़ने वाली अनेक शक्तियाँ इसके विरुद्ध षडयंत्र करने में लगी हैं। उनको इनसे सावधान रहने की आवश्यकता है।
In simple words: कवि ने देशवासियों को उन ताकतों से सावधान रहने को कहा है जो भारत को तोड़ने और देश के विकास में बाधा डालने की साजिशें कर रही हैं।

🎯 Exam Tip: कवि की सलाह को देश के आंतरिक और बाहरी शत्रुओं के षड्यंत्रों से जोड़कर बताएं, जिनसे सतर्क रहना जरूरी है।

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Question 1. भारत स्वाधीनता प्राप्त होने के पश्चात् नवनिर्माण के पथ पर अग्रसर है। कवि के अनुसार इस सम्बन्ध में देश के सामने कुछ बाधाएँ हैं। देश के बुद्धिमान लोग अपने पथ से भटक रहे हैं। नवनिर्माण के लिए अपनी शक्ति और क्षमता को पहचानना जरूरी है। वे यह भूलकर कि अपनी शक्ति के प्रयोग से ही देश उठेगी, दूसरों की ओर देख रहे हैं। भारतवासियों में आपस में एकता के स्थान पर टूट-फूट है। लोगों में क्षुद्रता की तथा स्वार्थ की भावनाएँ उत्पन्न हो रही हैं। उनके अनेक श्रेष्ठ गुण नष्ट होते जा रहे हैं। उनके स्वत्व की धारा कमजोर हो रही है। आज भारतवासियों में अधिकार पाने की प्रबल इच्छा जाग उठी है। उनकी यह दृष्टि आपसी संघर्ष को जन्म देती है। कर्तव्यपरायणता जो देश के उत्थान के लिए आवश्यक है, धीरे-धीरे लोगों के मन से गायब होती जा रही है। नागरिकों को अपनी उन्नति के लिए समान अवसर उपलब्ध नहीं हो रहे हैं। उनको धर्म-जाति आदि के आधार पर बाँटा जा रहा है। इससे देश दुःखी है। देशद्रोही तरह-तरह के षडयंत्र करके देश को पीछे धकेल रहे हैं। देश की स्वतंत्रता के लिए पड़ौसी राष्ट्र भी खतरा बने हुए हैं तथा तरह-तरह के षड्यंत्र कर रहे हैं। इस प्रकार भारत के विकास में भीतर तथा बाहर-दोनों ही ओर से बाधाएँ उत्पन्न की जा रही हैं। "कवि ने देशवासियों को इन सभी के प्रति सतर्क और सावधान रहने को कहा है।
Answer: भारत आज़ाद होने के बाद आगे बढ़ रहा है, पर उसे कुछ मुश्किलों का सामना करना पड़ रहा है। देश के समझदार लोग रास्ता भूल गए हैं और अपनी ताकत को नहीं पहचान रहे, बल्कि दूसरों पर निर्भर हैं। लोगों में एकता की कमी है और स्वार्थ बढ़ रहा है। लोग सिर्फ अपने अधिकार माँग रहे हैं, कर्तव्य भूल रहे हैं। धर्म और जाति के नाम पर भी लोग बँट रहे हैं, जिससे देश कमजोर हो रहा है। इसके साथ ही, देशद्रोही और पड़ोसी देश भी भारत के खिलाफ साजिशें कर रहे हैं। इन सभी अंदरूनी और बाहरी रुकावटों से देशवासियों को सावधान रहना चाहिए।
In simple words: आज़ादी के बाद भारत की तरक्की में कई दिक्कतें आ रही हैं, जैसे लोगों का स्वार्थी होना, आपस में लड़ना और बाहरी दुश्मनों की साजिशें। कवि कहता है कि हमें इन सभी मुश्किलों से सावधान रहना चाहिए और अपनी ताकत पहचाननी चाहिए।

🎯 Exam Tip: भारत के सामने आने वाली आंतरिक और बाहरी चुनौतियों को स्पष्ट रूप से समझाएं और बताएं कि उनसे कैसे निपटना चाहिए।

 

Question 2. 'गौरवशाली परम्परा' कविता के अनुसार भारत के अतीत गौरव का चित्रण कीजिए।
Answer: 'गौरवशाली परम्परा' कविता में कवि ने भारत के गौरवशाली अतीत का वर्णन किया है। भारत की दार्शनिक विचारधारा पूर्ण तथा परिपक्क रही है तथा उस पर देश-काल का प्रभाव नहीं होता। भारत में सभी प्राणियों में एक ही अमर आत्मा के दर्शन किए जाते हैं। भारतीय पूरे विश्व को एक ही परिवार मानते हैं तथा सभी मनुष्य उस एक परिवार के ही सदस्य हैं। भारतीय विचारधारा में पृथ्वी को माता तथा सभी मनुष्यों को उसकी सन्तान माना जाता है। भारत में अनेक पथ तथा मत-मतांतर हैं। उनके अनुसार अनेक देवी-देवता हैं। ये सभी देवी-देवता ईश्वर के ही हैं। सबके केन्द्र में एक ही सत्य विद्यमान है अर्थात् सबमें एक ही ईश्वर विविध स्वरूपों में स्थित है। इसको भारतीय दर्शन में 'बहुदेववाद' कहा जाता है। भारतीय शील, सत्य, संयम, मर्यादा, शुद्धाचरण, करुणा, प्रेम, सेवा, तप आदि गुणों से युक्त रहे हैं। वे अमरता के पूजक हैं तथा प्रत्येक प्राणी में अमर आत्मा के दर्शन करते हैं। भारत में अनेक कलाओं, शिल्पों, संगीत, रसायन, अणु, आयुर्वेद आदि का विकास हुआ तथा समस्त विश्व को इनकी शिक्षा भारत से प्राप्त हुई। शौर्य, पराक्रम और तेजस्विता भारतीयों को परम्परा से ही प्राप्त रहे हैं। उनकी वीरता के सामने भूमण्डल भी प्रकम्पित होता है। शत्रु उनसे भय खाते हैं। वे युद्ध में कभी पीठ नहीं दिखाते। इस प्रकार भारत का अतीतकालीन गौरव देश-विदेश में ज्ञात और विख्यात रहा है।
In simple words: कविता बताती है कि भारत का पुराना समय बहुत गौरवशाली था। यहाँ का ज्ञान, नैतिकता और दर्शन बहुत ऊँचा था। भारतीय लोग दुनिया को एक परिवार मानते थे, सभी प्राणियों में एक आत्मा देखते थे। कला, विज्ञान और बहादुरी में भी भारत बहुत आगे था और पूरी दुनिया में मशहूर था।

🎯 Exam Tip: अतीत के गौरव का चित्रण करते समय भारत के दार्शनिक विचारों, नैतिक मूल्यों, वैज्ञानिक उपलब्धियों और शौर्य को क्रमबद्ध तरीके से प्रस्तुत करें।

 

Question 3. 'देश उठेगा' गीत में कवि ने भारत के उत्थान के लिए क्या उपाय करने का आह्वान किया है?
Answer: भारत लम्बी पराधीनता के पश्चात् स्वतंत्र हुआ है। वह अपने पिछड़ेपन, अशिक्षा, गरीबी आदि समस्याओं से मुक्त होने के लिए प्रयासरत हैं। कवि ने भारतीयों से इस सम्बन्ध में प्रयास करने का आह्वान किया है। कवि का स्पष्ट विचार है कि देश का उत्थान तभी हो जब हम अपनी पूरी शक्ति और क्षमता को पहचानेंगे। खुद पर भरोसा करेंगे और दूसरों पर निर्भरता छोड़ देंगे। हमें अपने मतभेदों को भुलाकर एकता से काम करना होगा, स्वार्थ और छोटी सोच को त्यागना होगा। अधिकारों की बजाय अपने कर्तव्यों पर ध्यान देना होगा। संविधान का पालन करना और देशद्रोहियों का सख्ती से सामना करना भी जरूरी है। देशप्रेमियों को अपना मानना और हर पल सजग रहना भी आवश्यक है।
In simple words: कवि चाहता है कि भारत अपनी पुरानी गुलामी से उबरने के लिए अपनी ताकत पहचाने, आत्मनिर्भर बने, एकता से रहे और स्वार्थ त्यागे। वह कहता है कि नागरिकों को अपने कर्तव्यों का पालन करना चाहिए, संविधान का सम्मान करना चाहिए और देशद्रोहियों से सावधान रहना चाहिए ताकि देश का विकास हो सके।

🎯 Exam Tip: कवि द्वारा बताए गए उपायों को स्पष्ट रूप से लिखें, जैसे आत्मनिर्भरता, एकता, कर्तव्यनिष्ठा और संविधान का सम्मान, ताकि देश का सही विकास हो सके।

नंदलाल जोशी कवि परिचय

जीवन-परिचय-

साहित्यिक परिचय-

विज्ञान के विद्यार्थी होने पर भी आपकी साहित्य में गहरी रुचि है, अपनी पूज्य माताजी से कृष्ण लीला के पद सुनकर आपके मन में काव्य प्रतिभा जाग्रत हो उठीं। आपने अब तक 211 राष्ट्रप्रेम के गीतों तथा 161 देशभक्ति के भजनों की रचना की है तथा उनको अपना स्वर भी दिया है। उनमें ईश्वर की भक्ति तथा राष्ट्रप्रेम के भावों का ज्वार है। कृतियाँ-प्रेरणा पुष्पांजलि, भक्ति हिलौरें 'मन मस्त फकीरी धारी है, अब एक ही धुन जय जय भारत' आपकी रचना है।

पाठ-परिचय

देश उठेगा-यह नंदलाल जोशी का प्रथम गीत है, जो इस पाठ में संकलित है। इस गीत में गीतकार ने स्वदेश को प्रगति तथा उत्थान के बारे में बताया है। अपने पुराने गौरव का पहचानने से ही स्वदेश अपने पैरों पर खड़ा होगा। इसके लिए लोगों में स्नेहपूर्ण आत्म-विश्वास का भावना जगानी होगी। स्वावलम्बन ही स्वदेश को यशस्वी बनायेगा। परायों की स्तुति करने से अपने साधन नहीं बढ़ेंगे। प्राचीनकाल में भारत विश्व गुरु था और संसार को ज्ञान का दान देता था। भारत ने ही पूरे विश्व को विविध विद्याएँ सिखाई थीं। आज हम अपना स्वरूप भूल गए हैं। हम स्वार्थी हो गए हैं तथा हमने अपने श्रेष्ठ गुण भुला दिए हैं। हमें उनको पुनः स्मरण करना होगा। हमें दृढ़ निश्चय करके स्वदेश को दुःखों से और अपमान से मुक्त करना होगा। इसके लिए अधिकारों की बातें न करके हमें अपने कर्तव्य निभाने होंगे। हमें राष्ट्र को विघटित करने वाले तत्वों से सतर्क रहना होगा। भारत की मिट्टी से प्रेम करने वाला हर व्यक्ति भारतीय है। भारत में संविधान के ऊपर कोई नहीं होगा। हम देशद्रोहियों को सख्ती के साथ नष्ट कर देंगे और स्वदेश को सशक्त और आत्मनिर्भर बनायेंगे। गौरवशाली परम्परा-'गौरवशाली परम्परा' जोशी जी का दूसरा गीत है। इसमें गीतकार ने भारत के अतीत गौरव का गायन किया है। भारत की यह गौरवशाली परम्परा है कि उसने प्राचीनकाल से ही समस्त संसार को नवजीवन दिया है। भारतीय चिन्तन आदर्श जीवन का है। हमारे विचार परिपूर्ण और परिपक्व हैं। सारा संसार हमारा परिवार है, हमें किसी से राग-द्वेष नहीं है। ईश्वर के अनेक रूप हैं। अपने-अपने पंथ के अनुसार सब उसमें श्रद्धा रखते हैं किन्तु सभी एक सत्य की भावना से भरे हैं। भारत शील सत्य, मर्यादा और प्रेम का पुजारी है। भारतीय अमर तत्व के उपासक हैं। भारतीयों ने ज्ञान की विभिन्न विधाओं की खोज की है। तथा विश्व को उन्हें सिखाया है। भारतीय शूरवीर और पराक्रमी हैं। वे शस्त्रों से सुसज्जित होकर जब रणभूमि में उतरते हैं तो काल भी भयभीत हो जाता है। अनाचार देखते ही उनका तीसरा नेत्र खुल जाता है। आज भारत आत्मचेतना की नई आशा लेकर पुनः खड़ा हुआ है। वह दुष्टों के दलन के लिए गर्जना करता हुआ अपनी विराट शक्ति को प्रदर्शित कर रहा है। कवि चाहता है सभी भारतीय अपने-अपने धर्म का पालन दृढ़ता से करें। भारत की यह गौरवशाली परम्परा सदा बनी रहेगी।

पद्यांशों की सप्रसंग व्याख्याएँ देश उठेगा

देश उठेगा

 

Question 1. अपने पैरों निज गौरव के भान से।
स्नेह भरा विश्वास जगाकर जीयें सुख सम्मान से॥
देश उठेगा ॥

कठिन शब्दार्थ-भान = ज्ञान होना। परावलम्बी = दूसरों पर आश्रित। मृगतृष्णा = भ्रम (प्यासे हिरण को रेगिस्तान में रेत पर बनी लहरें पानी जैसी प्रतीत होती हैं)। मायावी = छली, धोखे से भरा हुआ। साधन = उपाय॥
प्रसंग तथा संदर्भ-प्रस्तुत पद्यांश हमारी पाठ्यपुस्तक में संकलित 'देश उठेगा' शीर्षक गीत से लिया गया है। इसकी रचना गीतकार नंदलाल जोशी ने की है। कविवर जोशी जी ने बताया है कि स्वदेश की प्रगति नागरिकों के सजग रहकर अपना कर्तव्य पालन करने से होगी। स्वयं कार्य करने तथा आत्मविश्वास से ही वह ऊपर उठेगा।
Answer: कवि कहता है कि हमें अपने देश भारत को आगे बढ़ाना है। इसके लिए हमें आत्मनिर्भर बनना होगा और अपने पुराने गौरव को याद करना होगा। हमें अपने देशवासियों में प्रेम और विश्वास की भावना जगानी होगी ताकि हम सब खुशी और सम्मान से जी सकें। जो देश दूसरों पर निर्भर रहता है, वह दुनिया में कभी इज्जत नहीं पाता। हमें भ्रम से बाहर निकलकर अपनी शक्ति को पहचानना होगा। हम अपनी ताकत का इस्तेमाल करके अपने शत्रुओं से अपनी चीजें वापस ले सकते हैं। यह संसार बहुत धोखेबाज है, इसलिए हमें इसमें सावधानी से आगे बढ़ना चाहिए। हमें यह ध्यान रखना चाहिए कि दूसरों की तारीफ करने से हमारी तरक्की नहीं होगी।
विशेष-
(i) कवि ने भ्रम मुक्त होकर अपने अतीत, गौरव तथा शक्ति को पहचानने का आह्वान किया है।
(ii) आत्मज्ञान और कर्तव्यपालन से ही देश की प्रगति होगी।
(iii) भाषा सरल और प्रवाहपूर्ण है।
(iv) गीत शैली है।
In simple words: कवि कहता है कि भारत तभी आगे बढ़ेगा जब हम खुद पर भरोसा करेंगे, अपने पुराने सम्मान को याद करेंगे और एकता से रहेंगे। हमें दूसरों पर निर्भर नहीं रहना चाहिए और दुनिया के धोखों से बचकर रहना चाहिए।

🎯 Exam Tip: पद्यांश की व्याख्या करते समय कवि के मूल भाव, संदेश और उसकी भाषा शैली को स्पष्ट करें।

 

Question 2. इसी देश में आदिकाल से अन्न, रत्न, भण्डार रहा।
सारे जग को दृष्टि देता, परम ज्ञान आगार रहा॥
आलोकित अपने वैभव से, अपने ही विज्ञान से।
विविध विधाएँ फैली भू पर अपने हिन्दुस्तान से................

कठिन शब्दार्थ-आदिकाल = प्राचीनकाल। अपार = भण्डार। आलोकित = प्रकाशित। वैभव = ऐश्वर्य। विविध = अनेक। विद्या = ज्ञान की शाखायें।
संदर्भ तथा प्रसंग-प्रस्तुत पद्यांश हमारी पाठ्य-पुस्तक अपरा में संकलित गीत 'देश उठेगा' से लिया गया है। इसके गीतकार नंदलाल जोशी हैं।
Answer: कवि बताता है कि भारत एक बहुत पुराना देश है और प्राचीन समय से ही यह अन्न, रत्नों और धन का एक बड़ा भंडार रहा है। इसने पूरी दुनिया को ज्ञान का प्रकाश दिया है, क्योंकि यहाँ सर्वोच्च ज्ञान का भंडार रहा है। भारत ने अपनी समृद्धि और अपने ही विज्ञान से पूरे विश्व को रोशन किया है। यहाँ से ही ज्ञान की अलग-अलग शाखाएँ (विद्याएँ) पूरी दुनिया में फैलीं।
विशेष-
(i) भाषा सरल और विषयानुकूल है।
(ii) गीत शैली है।
(ii) अनुप्रास अलंकार है। ओजगुण है।
(iv) भारत के अतीतकालीन ज्ञान और ऐश्वर्य का वर्णन है।
In simple words: कवि कहता है कि भारत बहुत पहले से ही अन्न और धन से भरपूर रहा है। इसने पूरी दुनिया को ज्ञान दिया है और अपनी समृद्धि और विज्ञान से सबको राह दिखाई है। भारत से ही कई तरह की विद्याएँ पूरी दुनिया में फैलीं।

🎯 Exam Tip: पद्यांश की व्याख्या करते समय भारत के प्राचीन गौरव, ज्ञान और समृद्धि के बिन्दुओं पर विशेष ध्यान दें।

 

Question 3. अथक किया था श्रम अनगिन जीवन अर्पित निर्माण में।
मर्यादित उपभोग हमारा, पवित्रता हर प्राण में।
परिपूरक परिपूरण सृष्टि, चलती ईश विधान से।
अपनी नव रचनाएँ होंगी, अपनी ही पहचान से.................

कठिन शब्दार्थ-अथक= निरन्तर, बिना थके। मर्यादित = संयमपूर्ण। प्राण = प्राणी, जीवन। विधान = नियम।
संदभ तथा प्रसंग-उपर्युक्त पद्यांश हमारी पाठ्य-पुस्तक अपरा में संकलित 'देश उठेगा' शीर्षक गीत से अवतरित है। इसके रचयिता नंदलाल जोशी हैं। कवि ने बताया है कि हमारा देश भारत अत्यन्त पुरातन है तथा इसके निर्माण में हमने अथक परिश्रम किया है।
Answer: कवि कहता है कि हमने भारत देश को बनाने के लिए लगातार और बिना थके बहुत से जीवन कुर्बान किए हैं। हम हमेशा अपनी चीजों का इस्तेमाल संयम से करते थे और हमारे जीवन में पवित्रता भरी रहती थी। यह पूरी दुनिया ईश्वर के बनाए नियमों से चलती है। इस देश में जो भी नई चीज़ें बनेंगी, वे सब भारतीयों की सोच और तरीके से ही होंगी।
विशेष-
(i) भाषा सरल, प्रवाहपूर्ण तथा सजीव है।
(ii) शैली वर्णनात्मक है।
(iii) गीतछंद है।
(iv) ओजगुण है।
(v) अनुप्रास अलंकार है।
In simple words: कवि कहता है कि भारत को बनाने के लिए हमने बहुत मेहनत की है और जीवन समर्पित किए हैं। हम अपनी चीज़ों का इस्तेमाल संयम से करते थे। यह दुनिया भगवान के नियमों से चलती है, और भारत की नई रचनाएँ अपनी पहचान बनाएँगी।

🎯 Exam Tip: व्याख्या में भारत के निर्माण में किए गए अथक प्रयासों, मर्यादित उपभोग और ईश्वर के विधान का उल्लेख करें।

पद्यांशों की सप्रसंग व्याख्याएँ देश उठेगा

 

Question 3. अथक किया था श्रम अनगिन जीवन अर्पित निर्माण में। मर्यादित उपभोग हमारा, पवित्रता हर प्राण में। परिपूरक परिपूरण सृष्टि, चलती ईश विधान से। अपनी नव रचनाएँ होंगी, अपनी ही पहचान से................
कठिन शब्दार्थ-अथक= निरन्तर, बिना थके। मर्यादित = संयमपूर्ण। प्राण = प्राणी, जीवन। विधान = नियम।
संदभ तथा प्रसंग-उपर्युक्त पद्यांश हमारी पाठ्य-पुस्तक अपरा में संकलित 'देश उठेगा' शीर्षक गीत से अवतरित है। इसके रचयिता नंदलाल जोशी हैं। कवि ने बताया है कि हमारा देश भारत अत्यन्त पुरातन है तथा इसके निर्माण में हमने अथक परिश्रम किया है।
Answer: कवि कहते हैं कि हमने अपने देश भारत को बनाने में बहुत मेहनत की है। कई देशवासियों ने इसके लिए अपना जीवन दिया है। हमारा हर देशवासी शुद्ध जीवन जीता है। हम चीजों का इस्तेमाल सही तरीके से करते हैं। यह पूरी दुनिया भगवान के बनाए नियमों से चलती है। इस देश में जो भी नई चीजें बनेंगी, वे सब भारतीयों के सोचने के तरीके के अनुसार ही होंगी। हमारा लक्ष्य है कि भारत आत्मनिर्भर बने और अपनी पहचान खुद बनाए।
विशेष-
(i) भाषा बहुत सरल, स्पष्ट और सजीव है।
(ii) शैली कहानी जैसी है।
(iii) यह एक गीत-छंद है।
(iv) इसमें उत्साह बढ़ाने वाला गुण है।
(v) इसमें अनुप्रास अलंकार का प्रयोग हुआ है।
In simple words: भारत के निर्माण में बहुत परिश्रम हुआ है, और हम संयमित जीवन जीते हैं। पूरी सृष्टि ईश्वर के नियमों से चलती है, और भारत अपनी नई पहचान खुद बनाएगा।

🎯 Exam Tip: जब किसी पद्यांश की व्याख्या करें, तो पहले उसके कठिन शब्दों का अर्थ बताएं, फिर उसका संदर्भ और प्रसंग स्पष्ट करें। अंत में भावार्थ को सरल भाषा में समझाएं और उसकी विशेषताओं का उल्लेख करें।

 

Question 5. केवल सुविधा अधिकारों की भाषा अब हम नहीं कहें। हों कर्तव्य परायण सारे, अवसर सबको सुलभ रहें। माँ धरती को मुक्त करेंगे, दुःख दुविधा अपमान से। जय जय अम्बर में गूंजेगा सभी दिशा उत्थान से......॥
कठिन शब्दार्थ-सुलभ = सरलता से प्राप्त। अम्बर = आकाश। उत्थान = प्रगति।
संदर्भ तथा प्रसंग-प्रस्तुत गद्यांश हमारी पाठ्य-पुस्तक अपरा में संकलित 'देश उठेगा' शीर्षक गीत से लिया गया है। इसके रचयिता नंदलाल जोशी हैं।
Answer: कवि का कहना है कि हमें सिर्फ अपनी सुख-सुविधाओं और अधिकारों की मांग नहीं करनी चाहिए। सभी देशवासियों को अपने कर्तव्यों का ईमानदारी से पालन करना चाहिए। देश में सभी को आगे बढ़ने और तरक्की करने के समान मौके मिलने चाहिए। हमें अपनी धरती माता को दुख, परेशानी और अपमान से आजाद कराना होगा। तभी हमारे देश की जय-जयकार पूरे आकाश में गूंजेगी और हर दिशा में तरक्की की बातें फैलेंगी। हमें मिलकर देश को नई ऊंचाइयों पर ले जाना है।
In simple words: हमें सिर्फ अधिकारों की बात न करके कर्तव्य निभाने चाहिए। सभी को समान अवसर मिलें और हम धरती को हर दुख से आजाद करें, तभी देश की जय-जयकार होगी।

🎯 Exam Tip: इस तरह के काव्यांशों में कवि के संदेश को स्पष्ट रूप से लिखें, जिसमें कर्तव्यपरायणता और समानता जैसे मूल्यों पर जोर दिया गया हो।

 

Question 6. देश विघातक षड्यन्त्रों के जाल बिछे हैं सावधान। इस माटी को प्रेम करे जो, बस उनको ही अपना मान॥ कोई ऊपर नहीं रहेगा, भारत के संविधान से। देशद्रोहियों को कुचलेंगे, देशभक्त की शान से ............. देश उठेगा अपने पैरों निज गौरव के भान से। स्नेह भरा विश्वास जगाकर जीयें सुख सम्मान से॥
कठिन शब्दार्थ-विघातक = विघटन करने वाले; एकता नष्ट करने वाले। षडयंत्र = छल, धोखा। माटी = मिट्टी। द्रोही = विरोधी।
संदर्भ तथा प्रसंग-प्रस्तुत पद्यांश हमारी पाठ्य-पुस्तक अपरा में संकलित 'देश उठेगा' शीर्षक गीत से लिया गया है। इसके रचयिता नंदलाल जोशी हैं। कवि सावधान करता है कि देश के विरुद्ध गुप्त रूप से छलपूर्ण आचरण करने वाले उसकी एकता भंग करना चाहते हैं। उनसे बचना जरूरी है।
Answer: कवि कहते हैं कि आज भारत के सामने अपनी एकता को बचाने की चुनौती है। बहुत से बुरे लोग देश की एकता को तोड़ने की कोशिश कर रहे हैं। हमें उनसे सतर्क रहना होगा। जो लोग अपने देश से प्यार करते हैं, हमें उन्हें ही अपना मानना चाहिए। इस देश में संविधान के अनुसार शासन चलता है। किसी को भी संविधान का उल्लंघन करने का अधिकार नहीं है। हम देशभक्ति की भावना के साथ देश-विरोधी लोगों को हराएंगे और उन्हें खत्म कर देंगे। जब भारत को अपने गौरव का अहसास होगा, तो हमारा प्यारा देश गर्व से अपने पैरों पर खड़ा होगा। प्रेम और विश्वास की भावना होने पर सभी भारतीय सम्मान से जीवन जी पाएंगे। यह एक मजबूत और एकजुट भारत की नींव रखेगा।
In simple words: कवि सावधान करते हैं कि देश को तोड़ने वाले षडयंत्र फैले हुए हैं। जो देश से प्रेम करे वही अपना है, संविधान सबसे ऊपर है, और देशद्रोहियों को पराजित करके हम गर्व और एकता से जिएंगे।

🎯 Exam Tip: देशभक्ति पर आधारित काव्यांशों में देश की एकता, संविधान की महत्ता और देशद्रोहियों के प्रति दृढ़ संकल्प जैसे मुख्य बिंदुओं को स्पष्टता से उजागर करें।

 

Question 7. आदिकाल से अखिल विश्व को, देती जीवन यही धरा।
कठिन शब्दार्थ-आदिकाल = प्राचीनकाल। अखिल = सम्पूर्ण। धरा = पृथ्वी। परम्परा = उत्तराधिकार। चिन्तन = विचार। परिपक्व = पका हुआ, पुष्ट। कालातीत = समय से अप्रभावित। दर्शन = चिन्तन। वसुन्धरा = धरती॥
संदर्भ तथा प्रसंग-प्रस्तुत पद्यांश हमारी पाठ्य-पुस्तक अपरा में संकलित 'गौरवशाली परम्परा' शीर्षक कविता से उद्धृत है। इसके रचयिता नंदलाल जोशी हैं। कवि भारतीय विचारधारा को विश्व का मार्गदर्शन करने वाली बता रहा है। समस्त विश्व को एक परिवार मानने वाली यह विचारधारा अत्यन्त गौरवपूर्ण है।
Answer: कवि कहते हैं कि यह धरती बहुत पुराने समय से पूरे संसार को जीवन देती आई है। इसकी यह परंपरा बहुत गर्व करने लायक है। यह जीवन के बारे में एक आदर्श विचार है, जो पूरी तरह से विकसित और मजबूत है। हमारा मतलब भारत की दार्शनिक सोच हमेशा रहने वाली है। यह समय के बदलाव से प्रभावित नहीं होती। इसके अनुसार हम पूरी दुनिया को अपने समान मानते हैं और उनके साथ वैसा ही व्यवहार करते हैं। भारतीय दर्शन में 'सभी प्राणियों को अपनी आत्मा जैसा मानो' का विचार है। यह पूरी दुनिया एक परिवार है। यह धरती हमारी पूजनीय और आदरणीय माता है। भारतीय दर्शन की यह परंपरा बहुत गौरवशाली और हमेशा रहने वाली है, हमें इस पर गर्व करना चाहिए।
विशेष-
(i) भाषा सरल है और विषय के अनुसार संस्कृत शब्दों का प्रयोग हुआ है।
(ii) यह एक गीत की शैली में है।
(iii) इसमें अनुप्रास अलंकार है और ओज गुण है।
(iv) भारत के पूरी दुनिया को एक परिवार (वसुधैव कुटुम्बकम्) मानने वाले जीवन दर्शन के गौरव का वर्णन हुआ है।
In simple words: हमारी धरती आदिकाल से पूरे विश्व को जीवन देती आई है। भारतीय दर्शन की यह परंपरा बहुत गौरवशाली है, जो सबको एक परिवार मानती है और समय से परे है।

🎯 Exam Tip: 'वसुधैव कुटुम्बकम्' जैसे भारतीय दर्शन के मूल सिद्धांतों को अपनी व्याख्या में अवश्य शामिल करें, और उनके महत्व को स्पष्ट करें।

 

Question 8. परमेश्वर के रूप अनेकों, अपने अपने मार्ग विशेष श्रद्धा भक्ति अक्षय निष्ठा, नहीं किसी से राग न द्वेष विविध पंथ वैशिष्ट्ये सुवासित, एक सत्य का भाव भरा गौरवशाली परम्परा शील सत्य संयम मर्यादा, शुद्ध विशुद्ध रहा व्यवहार करुणा प्रेम सहज सा छलका, सेवा तप ही जीवन सार अमर तत्व के अमर पुजारी, विष पीकर भी नहीं मरा। गौरवशाली परम्परा
कठिन शब्दार्थ-मार्ग = पंथ। अक्षय = कभी नष्ट न होने वाला। द्वेष = द्रोह। पंथ = धार्मिक पूजा-पद्धति। वैशिष्ट्य = विशेषता। सुवासित = सुगंधित। संयम = आत्मनियंत्रण। करुणा = दया। सहज = स्वाभाविक। आत्मतत्व = आत्मा। छलका = बिखरा।
Answer: कवि कहते हैं कि भारत में बहुत सारे देवताओं को माना जाता है। भारतीय लोग ईश्वर को कई रूपों में देखते हैं और उनकी पूजा करते हैं। हर रूप के लिए अलग-अलग रास्ते हैं। सभी में ईश्वर के प्रति गहरी भक्ति और अटूट विश्वास होता है। इनमें किसी के प्रति कोई गुस्सा या नफरत नहीं होती। ये सभी पंथ अपनी खासियतों से भरे हैं, लेकिन उन सब में एक ही सच का भाव है। यह भारतीय सोच की एक गौरवशाली परंपरा है। भारतीय दर्शन हमें अच्छे व्यवहार, सच्चाई, आत्म-नियंत्रण और मर्यादा का पालन करना सिखाता है। भारतीयों का व्यवहार हमेशा शुद्ध रहा है। उनके व्यवहार में दया और प्रेम स्वाभाविक रूप से दिखते हैं। सेवा और त्याग ही जीवन का सबसे महत्वपूर्ण हिस्सा हैं। भारतीय लोग आत्मा को अमर मानते हैं और मानते हैं कि आत्मा को विष भी नहीं मार सकता। हम भारतीय इस गौरवशाली परंपरा का सम्मान करते हैं।
विशेष-
(i) भाषा संस्कृत के शब्दों से भरी हुई, सुंदर और प्रवाहपूर्ण है।
(ii) यह एक गीत की शैली में है।
(iii) इसमें अनुप्रास अलंकार है।
(iv) भारतीय दर्शन के अनादि और गौरवशाली होने का वर्णन है।
In simple words: भारत में ईश्वर के अनेक रूप और पूजा के तरीके हैं, पर सभी में एक ही सत्य है। भारतीय लोग अच्छे गुणों वाले, दयालु और प्रेम से भरे हैं, जो आत्मा को अमर मानते हैं, यह हमारी गौरवशाली परंपरा है।

🎯 Exam Tip: बहुदेववाद और एकता में विविधता जैसे भारतीय दर्शन के महत्वपूर्ण पहलुओं को उजागर करें, साथ ही शील, सत्य, और करुणा जैसे सद्गुणों पर जोर दें।

 

Question 9. सघन ध्यान एकाग्र ज्योति से, किये गहनतम अनुसंधान कला शिल्प संगीत रसायन, गणित अणु आयुर्विज्ञान सभी विधाएँ आलोकित गौरवशाली परम्परा
कठिन शब्दार्थ-सघन = गहरा। ज्योति = परम प्रकाश, परमात्मा। गहनतम = गम्भीरतापूर्ण। अनुसंधान = खोज। शिल्प = हस्त कौशल। अणु = पदार्थ का लघुतम रूप। युर्विज्ञान = आयुर्वेद; वैद्यकशास्त्र। आलोकित = प्रकाशित। भूलोक = पृथ्वी लोक। वरा = वरण किया। शौर्य = वीरता। अतुल = अनुपम। वीरोचित = वीर पुरुषों के योग्य आचरण। आयुध = अस्त्र-शस्त्र, हथियार। सज्जित = सुशोभित। तीसरा नेत्र खुलना = महाविनाश होना। काल = मृत्यु।
सन्दर्भ एवं प्रसंग-प्रस्तुत पद्यांश हमारी पाठ्य-पुस्तक अपरा में संकलित 'गौरवशाली परंपरा' शीर्षक पाठ से लिया गया है। इसके रचयिता नंदलाल जोशी हैं। कवि ने बताया है कि भारत में ईश्वर का ध्यान करने के साथ अनेक कलाओं को विकसित करने में भी भारतीयों ने सतत श्रम किया।
Answer: भारत की संस्कृति की परंपरा बहुत गौरवशाली है। भारतीयों ने गहन ध्यान और एकाग्रता से गहराई से खोज की। उन्होंने कला, हस्तशिल्प, संगीत, रसायन विज्ञान, गणित, परमाणु विज्ञान और आयुर्वेद जैसी सभी विधाओं को विकसित किया। इन क्षेत्रों में उनका ज्ञान पूरे विश्व में फैला। भारतीयों की शूरवीरता, पराक्रम और अद्भुत वीरता को देखकर पूरी दुनिया कांप उठती है। वे हथियारों से लैस अनेक भारतीय वीर हैं, और जब शत्रु को देखते हैं तो उनका तीसरा नेत्र खुल जाता है। इसका मतलब है कि शत्रु उनकी वीरता की आग में जलकर राख हो जाता है। भारतीय योद्धा सिर कटने पर भी युद्ध के मैदान से पीछे नहीं हटते। उनके इस बहादुर रूप को देखकर मृत्यु भी डर जाती है।
विशेष-
(i) भाषा सरल, सुंदर और प्रवाहपूर्ण है।
(ii) यह एक गीत की शैली में है।
(iii) इसमें वीर रस का प्रयोग हुआ है। ओजगुण है।
(iv) भारतीय वीरों के पराक्रम और वीरता का वर्णन किया गया है।
In simple words: भारतीयों ने ध्यान से गहन खोज करके कला, विज्ञान और आयुर्वेद जैसी सभी विधाओं को प्रकाशित किया। वे शूरवीर और पराक्रमी हैं, जो युद्ध में कभी पीछे नहीं हटते और उनकी वीरता से शत्रु भी डरते हैं।

🎯 Exam Tip: जब वीरता और पराक्रम पर आधारित काव्यांशों की व्याख्या करें, तो भारतीय योद्धाओं के साहस, निडरता और उनके योगदान को स्पष्ट रूप से दर्शाएं।

 

Question 10. आत्मचेतना नव-आभा ले, फिर से भारत राष्ट्र खड़ा विराट शक्ति प्रगटे, गरजे दुष्ट दलन हो कदम कड़ा तुमुल घोष जयनाद करेगा, अपनाओ स्वधर्म जरा गौरवशाली परम्परा
कठिन शब्दार्थ-आत्मचेतना = आत्मज्ञान, मन की सजगता। आभा = तेज। विराट = विशाल। दुष्ट दलन = दुष्ट लोगों का दमन करना। तुमुल = ऊँची आवाज़। घोष = स्वर, ललकार। जयकार = विजय की घोषणा, विजय घोष। स्वधर्म = अपना कर्तव्य।
सन्दर्भ एवं प्रसंग-प्रस्तुत गद्यांश हमारी पाठ्य पुस्तक अपरा में संकलित "गौरवशाली परम्परा' शीर्षक कविता से अवतरित है। इसके रचयिता नंदलाल जोशी हैं। कवि बता रहा है कि भारतीय संस्कृति अत्यन्त पुरातन है तथा उसकी परम्परा गौरव से परिपूर्ण है।
Answer: कवि कहते हैं कि आज भारत जाग उठा है। उसे अपने गौरव और महत्व का फिर से अहसास हो गया है। उसमें नई चेतना और नया जोश आ गया है। वह अपने इस नए रूप के साथ उठ खड़ा हुआ है। वह अपनी विशाल शक्ति दिखाते हुए गरज रहा है। अब वह बुरे लोगों को खत्म करने और उन्हें दबाने के लिए मजबूत कदम उठाएगा। वह तेज आवाज में अपनी जीत की घोषणा करेगा। कवि भारतीयों से कहते हैं कि अब उन्हें अपने कर्तव्यों को निभाने की जरूरत है। भारत की सांस्कृतिक परंपरा बहुत गौरवशाली है। हमें इस गौरव को बनाए रखना है।
विशेष-
(i) भारत के नए जागरण का वर्णन किया गया है।
(ii) कवि ने भारतीयों से आग्रह किया है कि नए जागरण के समय में वे अपने कर्तव्यों को सावधानी से निभाएं।
(iii) भाषा सरल, सुंदर और प्रवाहपूर्ण है।
In simple words: भारत फिर से अपनी आत्मचेतना और नई ऊर्जा के साथ खड़ा है। यह अपनी महान शक्ति दिखाएगा, दुष्टों को खत्म करेगा, और अपनी जीत का उद्घोष करेगा। अब भारतीयों को अपने कर्तव्य निभाने चाहिए।

🎯 Exam Tip: राष्ट्र के नवजागरण और कर्तव्य बोध से संबंधित काव्यांशों में कवि की प्रेरणा और आह्वान को प्रभावी ढंग से व्यक्त करें।

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